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'पिघल रहा है यूरोप': सिर्फ जर्मनी में गर्मी से 5,000 से ज्यादा मौतें; WHO की रिपोर्ट में दुनिया भर के आंकड़े बेहद डरावने

ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का सबसे खतरनाक और वीभत्स रूप इस समय उस यूरोप में देखने को मिल रहा है, जो अपनी ठंडी वादियों, बर्फ से ढके पहाड़ों और सुहावने मौसम के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। यूरोप के 23 देशों में इस समय रिकॉर्ड-तोड़ हीटवेव (भीषण लू) चल रही है, जिसके कारण वहां का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है।हालत यह है कि भीषण गर्मी के कारण डामर की सड़कें पिघल रही हैं, रेलवे ट्रैक टेढ़े हो रहे हैं और शहरों की ट्रैफिक लाइट तक पिघलकर लटक गई हैं। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय अनुमानों के मुताबिक, इस साल यूरोप में अब तक 20,000 से ज्यादा लोगों की जान सिर्फ गर्मी के कारण जा चुकी है। इसमें सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा जर्मनी का है, जहां पिछले 6 महीनों में ही 5 हजार से अधिक लोगों की मौत हीटवेव से हुई है।यूरोप के किस देश में कितनी पड़ रही है गर्मी?'द अर्थ.कॉम' ($TheEarth.com$) की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप के कई देशों में पारा 40 से 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जो वहां के इतिहास में अभूतपूर्व है:फ्रांस: राजधानी पेरिस में पारा 40C को पार कर गया है, जबकि फ्रांस का पीसोस (Pisos) शहर 44.3C तापमान के साथ इस समय पूरे यूरोप का सबसे गर्म शहर बन चुका है।जर्मनी: जर्मनी के कोचेम (Cochem) में 8 जुलाई को सर्वकालिक उच्च 41.7C तापमान दर्ज किया गया।पोलैंड: पोलैंड में गर्मी ने 105 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। यहाँ के स्लुबिस शहर में तापमान 40.5C रिकॉर्ड हुआ।स्पेन और अन्य देश: स्पेन के बिलबाओ में पारा 42C के पार है, डेनमार्क के ओडिन्से में 36.6C और अमूमन ठंडे रहने वाले ब्रिटेन (UK) में भी तापमान 36.1C तक पहुंच गया है।जर्मनी में क्यों हुई इतनी मौतें? रॉबर्ट कोच इंस्टीट्यूट का खुलासारॉयटर्स (Reuters) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जर्मनी में इस साल अब तक गर्मी से संबंधित 5,120 मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें से अधिकांश मौतें जून के आखिरी हफ्ते में हुईं, जब साप्ताहिक औसत तापमान सामान्य से काफी ज्यादा था।जर्मनी के नेशनल पब्लिक हेल्थ इंस्टीट्यूट, रॉबर्ट कोच इंस्टीट्यूट (RKI) ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि मरने वालों में सबसे ज्यादा संख्या बुजुर्गों और महिलाओं की थी। कुल मौतों में से लगभग 4,270 लोग 75 वर्ष या उससे अधिक उम्र के थे। वैज्ञानिकों का कहना है कि यूरोप के लोग सदियों से अत्यधिक ठंड में रहने के आदी हैं, इसलिए उनका शरीर लगातार 40 से 45C की इस भीषण गर्मी और हीटस्ट्रोक को सहन नहीं कर पा रहा है।WHO की रिपोर्ट: दुनिया भर में हर साल करीब 5 लाख मौतेंविश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा 28 अप्रैल 2026 को प्रकाशित की गई नई 'क्लाइमेट रिपोर्ट' के वैश्विक आंकड़े रोंगटे खड़े करने वाले हैं:सालाना मौतें: साल 2000 से 2019 के बीच दुनिया भर में हर साल औसतन 4 लाख 89 हजार (4.89 लाख) लोग सिर्फ अत्यधिक गर्मी और लू लगने (Heatstroke) के कारण अपनी जान गंवाते हैं।65+ उम्र के लोगों पर खतरा: साल 2000-2004 और 2017-2021 के बीच के डेटा की तुलना करें तो बुजुर्गों (65 साल से अधिक) में गर्मी के कारण मरने की दर में 85% का भयानक इजाफा हुआ है।महाद्वीपों का हाल: दुनिया भर में गर्मी से होने वाली कुल मौतों का 45% हिस्सा अकेले एशिया में और 36% हिस्सा यूरोप में दर्ज किया जाता है। इससे पहले साल 2022 में भी यूरोप में गर्मी ने 61,672 लोगों की जान ली थी।अर्थव्यवस्था को 11 लाख करोड़ का झटका और भीषण जल संकटएलियांज रिसर्च ($Allianz Research$) के आर्थिक मॉडल के आधार पर किए गए कैलकुलेशन के मुताबिक, यह भीषण हीटवेव सिर्फ इंसानी जान ही नहीं ले रही, बल्कि यूरोपीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी तोड़ रही है।जीडीपी (GDP) पर असर: इस साल की गर्मी से यूरोपीय देशों को 11 लाख करोड़ रुपये तक का तात्कालिक आर्थिक नुकसान हो सकता है। वहीं, साल 2030 तक यह आंकड़ा बढ़कर 61 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की आशंका है।जल संकट का खतरा: यूरोपीय पर्यावरण एजेंसी का अनुमान है कि बढ़ती गर्मी और सूखते जलस्रोतों के कारण अगले साल तक यूरोप की करीब 34% आबादी भीषण जल संकट (Water Scarcity) की चपेट में आ जाएगी।यूरोप के इस बदतर हालात से भारत के लिए क्या है सीख?यूरोप की यह मौजूदा स्थिति भारत के लिए एक बहुत बड़ी और गंभीर चेतावनी है। भारत पहले से ही दुनिया के सबसे गर्म और घनी आबादी वाले देशों में से एक है। यूरोप के इस संकट से भारत को निम्नलिखित रणनीतिक सीख लेनी होगी:व्यापक 'हीट एक्शन प्लान' ($Heat Action Plan$): वर्तमान में भारत के केवल कुछ चुनिंदा शहरों (जैसे अहमदाबाद) में ही व्यवस्थित हीट एक्शन प्लान लागू है। अब समय आ गया है कि देश के हर राज्य और जिले में इसे अनिवार्य किया जाए।अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव: शहरों में कंक्रीट के जंगलों के कारण बनने वाले 'हीट आइलैंड' को रोकने के लिए कूल रूफ्स (Cool Roofs) तकनीक और गर्मी को सोखने वाले 'हीट-रेजिलिएंट' मकानों के निर्माण को कानूनी रूप से बढ़ावा देना होगा।इमरजेंसी मेडिकल तैयारी: हर जिले में अत्यधिक गर्मी के महीनों के दौरान आपातकालीन कूलिंग सेंटर, ओआरएस (ORS) काउंटर और अस्पतालों में हीटस्ट्रोक से निपटने के लिए विशेष वार्ड्स की एडवांस व्यवस्था करनी होगी, ताकि समय रहते नागरिकों की जान बचाई जा सके।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 11:18 pm

पीएम मोदी और अल्बनीज की बैठक में चीन के आईसीबीएम मिसाइल परीक्षण और क्षेत्रीय सुरक्षा पर हुई बात

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने गुरुवार को मेलबर्न में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई मुलाकात के दौरान चीन की ओर से हाल ही में दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में किए गए इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) के परीक्षण का मुद्दा उठाया

देशबन्धु 9 Jul 2026 11:10 pm

अमेर‍िका का उल्लंघन जारी रहा तो ईरान देगा निर्णायक जवाब : मोसयेब मोतलाघ

ईरान-अमेरिका के बीच एक बार फ‍िर से जारी तनातनी पर ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका की ओर से उल्लंघन जारी रहे, तो इसका मजबूती से जवाब द‍िया जाएगा

देशबन्धु 9 Jul 2026 10:57 pm

चीन-पाक के स्टील्थ फाइटर J-35 का काल बनेगा 'विरूपाक्ष': स्वदेशी AESA रडार से लैस होकर 'सुपर सुखोई' रचेगा नया इतिहास

चीन के नए स्टील्थ फाइटर जेट J-35 के दम पर भारत को आंख दिखाने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान को काउंटर करने के लिए भारतीय वायुसेना (IAF) ने एक बेहद रणनीतिक और बड़ा कदम उठा लिया है। भारतीय वायुसेना की रीढ़ और सबसे ताकतवर लड़ाकू विमानों में शामिल सुखोई (Su-30MKI) अब पहले से कहीं ज्यादा घातक और अचूक बनने जा रहा है।इस महा-अपग्रेड की मुख्य वजह है भारत में ही पूरी तरह स्वदेशी रूप से विकसित किया जा रहा 'विरूपाक्ष' (Virupaksha AESA Radar)। इसे 'सुपर सुखोई' अपग्रेड प्रोग्राम का सबसे महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी हिस्सा माना जा रहा है। इस स्वदेशी रडार के सुखोई में फिट होने के बाद, दुश्मन के विमानों को खोजने, उन्हें ट्रैक करने और अत्यंत लंबी दूरी से सटीक निशाना साधने की भारत की क्षमता में कई गुना इजाफा हो जाएगा।क्या है Virupaksha AESA रडार और इसकी तकनीक?विरूपाक्ष एक अत्याधुनिक गैलियम नाइट्राइड (Gallium Nitride - GaN) आधारित एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड आरे (AESA) रडार है।किसने बनाया: इसे रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करने वाले रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की बेंगलुरु स्थित मशहूर लैब LRDE (Electronics and Radar Development Establishment) द्वारा तैयार किया जा रहा है।किसकी जगह लेगा: यह नया स्वदेशी रडार सुखोई में वर्तमान में लगे पुराने रूसी मूल के N011M Bars (पैसिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड आरे) रडार की जगह लेगा।कार्यप्रणाली: इसमें एडवांस डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक स्कैनिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसकी बदौलत यह पुराने रडार के मुकाबले पलक झपकते ही और बेहद सटीक तरीके से मल्टीपल टारगेट्स का पता लगा सकता है।मिनी-AWACS बनेगा सुखोई: 400 KM तक दुश्मन पर नजरन्यूज एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार, विरूपाक्ष रडार में इस्तेमाल की गई GaN-आधारित एडवांस टेक्नोलॉजी और इसकी हाई ट्रांसमिट-रिसीव मॉड्यूल (TRM) कैलकुलेशन क्षमता इसे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ रडार प्रणालियों की कतार में खड़ा करती है।स्टील्थ विमानों को पकड़ेगा: इस तकनीक के कारण यह रडार चीन के J-35A जैसे सोफिस्टिकेटेड सेमी-स्टील्थ (रडार से बचने वाले) फाइटर जेट्स को भी काफी लंबी BVR (बियॉन्ड विजुअल रेंज - आंखों की पहुंच से दूर) दूरी पर ही आसानी से डिटेक्ट कर लेगा।विशाल रेंज: यह करीब 300 से 400 किलोमीटर के एक बड़े हवाई दायरे में आने वाले किसी भी दुश्मन फाइटर जेट, क्रूज मिसाइल या ड्रोन को आसानी से पकड़ सकता है।एंटी-जामिंग: रडार की एडवांस इलेक्ट्रॉनिक स्कैनिंग, लंबी रेंज और बेहतरीन एंटी-जैमिंग क्षमताएं (इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में दुश्मन के सिग्नल ब्लॉक करना) अकेले सुखोई फाइटर जेट को एक 'मिनी-AWACS' (हवाई चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली) के रूप में स्थापित कर देती हैं।जानिए क्यों खास है गैलियम नाइट्राइड (GaN) तकनीक?Virupaksha रडार में इस्तेमाल होने वाली Gallium Nitride (GaN) तकनीक पुरानी पीढ़ी के Gallium Arsenide (GaAs) सिस्टम से कहीं ज्यादा शक्तिशाली और कुशल मानी जाती है।अधिक पावर, कम हीटिंग: GaN तकनीक की मदद से रडार बहुत अधिक रेडियो एनर्जी (तरंगें) पैदा कर सकता है, लेकिन इसके बावजूद यह सिस्टम बहुत कम गर्म होता है।लंबी परफॉर्मेंस: कम गर्म होने के कारण रडार बिना किसी तकनीकी खराबी या रुकावट के युद्ध के मैदान में बहुत लंबे समय तक लगातार सर्वश्रेष्ठ परफॉर्म कर सकता है। यही वजह है कि अमेरिका और यूरोप की नई पीढ़ी के 5th जनरेशन फाइटर जेट्स में भी अब GaN बेस्ड AESA रडार को ही अपनाया जा रहा है।सुखोई (Su-30MKI) की मौजूदा ताकत पर एक नजरसुखोई भारतीय वायुसेना का सबसे भरोसेमंद और भारी-भरकम मल्टी-रोल लड़ाकू विमान है:क्रू और इंजन: यह दो सीटों वाला (ट्विन-सीटर) फाइटर जेट है, जिसमें दो शक्तिशाली AL-31FP इंजन लगे हैं। ये इंजन Thrust Vectoring तकनीक से लैस हैं, जो सुखोई को हवा में असंभव कलाबाजियां खाने की ताकत देती है।रफ्तार और रेंज: यह अधिकतम 2,120 किमी/घंटा (Mach 2) की रफ्तार से उड़ सकता है। एक बार में फुल फ्यूल के साथ इसकी रेंज करीब 3,000 किमी है, जिसे हवा में रीफ्यूलिंग (Mid-air Refueling) के जरिए कई गुना बढ़ाया जा सकता है।हथियार ढोने की क्षमता: सुखोई अपने साथ 8,000 किलोग्राम (8 टन) तक के परमाणु हथियार, गाइडेड बम और घातक मिसाइलें ले जा सकता है, जिसमें ब्रह्मोस (BrahMos) सुपरसोनिक मिसाइल भी शामिल है।विरूपाक्ष रडार से 'सुपर सुखोई' को क्या-क्या फायदे मिलेंगे?लंबी दूरी से प्रहार: विरूपाक्ष रडार लगने के बाद सुखोई दुश्मन के फाइटर जेट और आक्रामक मिसाइलों को उनके हमले की रेंज से बहुत पहले ही देख लेगा।मल्टी-टारगेटिंग क्षमता: विरुपाक्ष के जरिए पायलट एक साथ हवा में तैर रहे कई अलग-अलग टारगेट्स को एक साथ ट्रैक (Lock) करके उन पर एक साथ मिसाइलें दाग सकेगा।इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में बादशाहत: दुश्मन देशों की ओर से की जाने वाली तीव्र इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के बीच भी यह रडार बिना विचलित हुए शत-प्रतिशत सटीक काम करेगा।स्वदेशी मिसाइलों का सटीक उपयोग: भारत की अपनी लंबी दूरी की हवा-से-हवा में मार करने वाली 'अस्त्र' (Astra Series) मिसाइलों के साथ विरूपाक्ष रडार का कॉम्बिनेशन बेहद घातक और अचूक साबित होगा।'सुपर सुखोई' मेगा अपग्रेड प्रोग्राम और ड्रैगन-पाक को झटकायह अपग्रेड भारतीय वायुसेना के अरबों डॉलर के 'सुपर सुखोई' प्रोग्राम का मुख्य केंद्रबिंदु है।चरणबद्ध अपग्रेड: शुरुआती फेज में वायुसेना के कुछ चुनिंदा स्क्वाड्रनों को अपग्रेड किया जाएगा। हालांकि, भविष्य के मुख्य प्लान के तहत वायुसेना अपने बेड़े में शामिल 200 से अधिक Su-30MKI विमानों को इस स्वदेशी रडार, नए इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) सूट और एडवांस कंप्यूटर एवियोनिक्स से लैस करेगी।रणनीतिक बढ़त: चीन ने हाल ही में भारत के खिलाफ 'टू-फ्रंट वॉर' (दोतरफा युद्ध) की रणनीति के तहत पाकिस्तान को अपना J-35 फाइटर जेट बेचने का सौदा किया है। कंगाल पाकिस्तान ने भारत के डर से करोड़ों डॉलर का नया कर्ज लेकर इस जेट को खरीदा है। ऐसे में 'विरूपाक्ष' रडार से लैस हमारा 'सुपर सुखोई' चीन और पाकिस्तान दोनों की संयुक्त हवाई चुनौती को पूरी तरह ध्वस्त कर भारत को आसमान में एकतरफा रणनीतिक बढ़त दिलाएगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 10:48 pm

बंदर अब्बास में धमाके: ईरान-अमेरिका टकराव चरम पर!

ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट सिटी के तटीय इलाकों में गुरुवार दोपहर कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं

देशबन्धु 9 Jul 2026 10:47 pm

आज का एक्सप्लेनर:तो इस वजह से फिर भिड़े ईरान-अमेरिका; क्या शांति समझौता सिर्फ दिखावा था, पर्दे के पीछे कुछ और खेल चल रहा

6 जुलाई को ईरान ने होर्मुज से गुजर रहे 3 जहाजों पर हमला कर दिया। अगले ही दिन अमेरिका ने ईरान में 80 से ज्यादा ठिकानों पर बमबारी कर दी। ट्रम्प बोले- मेरे हिसाब से अब शांति समझौता खत्म हो गया है। ईरान ने भी पलटवार किया है। समझौते के बावजूद ईरान ने जहाजों पर हमला क्यों किया और क्या ये दांव महंगा पड़ेगा; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: ईरान और अमेरिका के शांति समझौते में क्या तय हुआ था?जवाबः करीब 4 महीने की जंग के बाद 17 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति पजेशकियान ने 14 पॉइंट्स का MoU साइन किया। इस पर अगले 60 दिनों में फाइनल डील होनी थी। समझौते में 3 पॉइंट्स सबसे अहम थे- 1. होर्मुज स्ट्रेट से निर्बाध आवाजाहीः ईरान बिना कोई शुल्क लिए 60 दिनों तक होर्मुज स्ट्रेट से व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही का इंतजाम करेगा। ईरान और ओमान साथ मिलकर इस मुद्दे पर काम करेंगे। साथ ही 30 दिनों के अंदर स्ट्रेट के मुख्य रास्ते में बिछी माइन्स और दूसरी तकनीकी रुकावटों को हटाया जाएगा। 2. ईरान को 300 बिलियन डॉलर का आर्थिक पैकेज: अमेरिका खाड़ी देशों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निमाण के लिए 300 बिलियन डॉलर, यानी करीब 28 लाख करोड़ का फंड देगा। अगले 60 दिनों की बातचीत में इसका फ्रेमवर्क तय किया जाएगा। 3. परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत: ईरान नए परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। संवर्धित यूरेनियम का क्या करना है, इस पर दोनों देश अगले 60 दिनों में बातचीत करके सहमति पर पहुंचेंगे। सवाल-2: समझौते के बावजूद ईरान ने होर्मुज से गुजर रहे तेल टैंकरों पर हमला क्यों किया?जवाबः ईरान की बेसब्री के पीछे एक्सपर्ट्स 3 प्रमुख वजह मानते हैं… 1. ईरान को लगा होर्मुज उसके हाथ से निकल रहा है 2. लेबनान में ईरान का प्रभाव कम होने की आशंका 3. ईरान को फंड न मिलने की बेचैनी, रकम भी घट रही सवाल-3: क्या ईरान ने इस बार जरूरत से ज्यादा जोखिम वाला दांव खेल दिया है?जवाबः 6 जुलाई को होर्मुज से गुजर रहे जहाजों पर ईरान का हमला आक्रामक दांव माना जा रहा है… ट्रम्प ने ईरान को धमकी दी है कि उनके एक हमले के बदले अमेरिका 20 गुना ज्यादा ताकत से हमला करेगा। उन्होंने ईरान की लीडरशिप को नीच और पागल बताया। यह भी कहा कि उनकी नजर में सीजफायर खत्म हो चुका है। अमेरिका ने लगातार 2 दिन तक ईरान पर करीब 170 हमले किए। 3 लोगों की मौत हुई। सवाल-4: जहाजों पर ईरान के हमले से अमेरिका इतना आक्रामक क्यों हो गया?जवाबः होर्मुज स्ट्रेट एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है, यानी किसी एक देश का इस पर कंट्रोल नहीं है। लेकिन ईरान इस रास्ते पर अपना नियंत्रण बनाना चाहता है। अमेरिका इसके खिलाफ है। अमेरिका ने समुद्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की जिम्मेदारी ली है। इसके लिए 1979 में फ्रीडम ऑफ नेविगेशन प्रोग्राम की भी शुरुआत की, जिसके तहत क्रिटिकल चोकपॉइंट्स पर अमेरिका अपने नौसैनिक जहाज भेजकर सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करता है। होर्मुज स्ट्रेट के अलावा दुनिया में तेल व्यापार के रास्तों पर 7 और चोकपॉइंट्स हैं। यहां से दुनिया के करीब 52% कच्चे तेल का व्यापार होता है। इनमें पनामा कैनाल, स्वेज कैनाल, मलक्का स्ट्रेट जैसे पॉइंट शामिल हैं। अगर ईरान होर्मुज में फीस वसूलने लगे, तो बाकी चोकपॉइंट्स पर भी क्षेत्रीय ताकतें ऐसा ही करने लगेंगी। इससे पूरी दुनिया के कारोबार पर असर पड़ेगा। अप्रैल 2026 में इंडोनेशिया के वित्त मंत्री पुरबाया युधि सदेवा मलक्का स्ट्रेट से गुजरने वाले जहजों से टोल लेने का सुझाव भी दे चुके हैं। सवाल-5: अब शांति समझौते का क्या होगा, क्या ये सिर्फ दिखावा था?जवाबः अमेरिका-ईरान के बीच हुआ शांति समझौता कभी पूरी तरह से शांति के लिए था ही नहीं। सीनियर जर्नलिस्ट और विदेश मामलों के जानकार मार्क चैंपियन के मुताबिक, इस समझौते की भाषा जानबूझकर अस्पष्ट रखी गई, ताकि दोनों ही पक्षों को अपने मकसद पूरे करने के लिए दूसरे तरीकों की गुंजाइश बनी रहे। शांति समझौते में साफ-साफ शर्तें होती हैं। जैसे- कौन कब क्या करेगा, कोई उल्लंघन कैसे तय होगा, निगरानी कौन करेगा। अमेरिका-ईरान समझौते में में साफ नहीं था कि हॉर्मुज में 'मुक्त आवाजाही' का मतलब क्या है? क्या ईरान वहां टोल वसूल सकता है? गश्त कर सकता है? किन शर्तों पर जंग पूरी तरह खत्म होगी? तेल प्रतिबंधों में छूट कितनी पक्की है? अमेरिका ने ईरानी तेल पर 60 दिन के लिए प्रतिबंध हटाए थे, लेकिन महज 20 दिन बाद ही अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ये अस्थायी छूट वापस ले ली और अगस्त तक तेल बिक्री की इजाजत देने वाला लाइसेंस रद्द कर दिया। CSIS के जियोस्ट्रैटजी एक्सपर्ट जॉन बी. अल्टरमैन मानते हैं कि दोनों पक्षों ने जंग की मूल जड़- परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमता, प्रतिबंध, होर्मुज पर नियंत्रण वगैहर को सुलझाए बिना सिर्फ हथियार डालने का समय तय किया, इसीलिए यह इतनी जल्दी टूट गया। सवाल-6: क्या वाकई जंग दोबारा शुरू हो चुकी है, आगे क्या होगा?जवाबः ईरान ने होर्मुज से गुजर रहे 3 जहाजों पर हमला किया। अगली रात अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान में 80 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया। IRGC ने भी पलटवार करते हुए बहरीन और कुवैत में 85 अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइल दागीं। कुल मिलाकर आंख के बदले आंख का खेल चल रहा है। हालांकि अभी ये लिमिटेड स्ट्राइक हैं, पूरी तरह जंग में नहीं बदलीं। अब आगे 2 सिनैरियो बन सकते हैं… 1. लिमिटेड स्ट्राइक बढ़ते-बढ़ते पूर्ण यूद्ध में बदल जाएं 2. हमले रुकें और समझौते पर दोबारा बात शुरू हो हालांकि ईरानी जर्नलिस्ट सैयद मुस्तफा खोशचेश्म मानते हैं कि बातचीत चलने के बावजूद ईरान की तरफ से दुश्मनी और अविश्वास कभी खत्म नहीं हुआ है, यानी बातचीत की मेज पर बैठना अपने आप में भरोसे की गारंटी नहीं। ----------- ये खबर भी पढ़िए… भारत को तेल बेचने वाला रूस, अब तेल खरीदने पर क्यों मजबूर; क्या यूक्रेन ने सभी रिफाइनरी तबाह कीं दुनिया भर के देशों को कच्चा तेल बेचने वाला रूस अब दूसरे देशों से पेट्रोल मंगवाने को मजबूर है। भारत से भी पेट्रोल के कई टैंकर भेजे जाने की खबरें हैं। रूसी पेट्रोल पंपों पर पहली बार लंबी-लंबी कतारें लगी हैं। पेट्रोल खरीदने पर पाबंदियां लागू हैं। इसकी वजह है- यूक्रेन के हमले। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 9 Jul 2026 6:04 pm

महंगाई और AI के बीच घिरी अमेरिकी अर्थव्यवस्था, IMF की रिपोर्ट में भारत के लिए आई राहत की खबर

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ताजा 'मिनट्स' (बैठक का ब्योरा) ने ग्लोबल मार्केट में हलचल मचा दी है। फेड ने अपनी हालिया चर्चाओं में दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के सामने खड़े तीन बड़े खतरों का जिक्र किया है, जो आने वाले समय में वैश्विक बाजार की दिशा तय करेंगे। फेड की रिपोर्ट में महंगाई (Inflation), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव और मिडिल ईस्ट (Middle East) में जारी भू-राजनीतिक तनाव को सबसे बड़ी चिंता बताया गया है। इन चिंताओं के कारण ब्याज दरों में कटौती को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार और निवेशकों के सेंटीमेंट पर पड़ रहा है।फेड की तीन बड़ी चिंताएं: क्या है अर्थव्यवस्था का हाल?फेडरल रिजर्व के अधिकारियों ने अपनी बैठक में साफ किया है कि महंगाई अभी भी उनके लक्ष्य से ऊपर है, जिससे नीतिगत दरों में राहत देने में देरी हो सकती है। दूसरी ओर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेजी को लेकर फेड ने दोधारी तलवार वाली स्थिति का जिक्र किया है—जहां एक तरफ यह उत्पादकता बढ़ा रही है, वहीं दूसरी तरफ बाजार में अस्थिरता और श्रम बाजार में बदलाव का डर भी बना हुआ है। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट के तनाव ने ग्लोबल सप्लाई चेन और ऊर्जा कीमतों को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिससे आने वाले महीनों में महंगाई पर दबाव और बढ़ने की आशंका है। इन तीनों मोर्चों पर फेड की सतर्कता यह संकेत दे रही है कि अमेरिका में ब्याज दरों पर फैसला अभी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।IMF ने भारत को लेकर दी बड़ी राहत की खबरएक तरफ जहां दुनिया के प्रमुख देश अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं, वहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं। आईएमएफ ने भारत की विकास दर को लेकर भरोसा जताया है और कहा है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। आईएमएफ के अनुसार, भारत का घरेलू उपभोग और नीतिगत सुधार इसे दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में बनाए रखने में मदद कर रहे हैं। फेड की चिंताओं के बीच आईएमएफ का यह बयान विदेशी निवेशकों के लिए राहत की बात है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में अस्थिरता बनी भी रहती है, तो भारत के फंडामेंटल्स इसे बड़े झटकों से बचाने में सक्षम हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 1:53 pm

पश्चिम एशिया में गहराता संकट: भारतीयों की सुरक्षा और तेल सप्लाई को लेकर भारत की क्या है रणनीति

पश्चिम एशिया में जारी मौजूदा तनाव के बीच भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक चुनौतियां बढ़ गई हैं। यह क्षेत्र न केवल भारत की ऊर्जा जरूरतों का केंद्र है, बल्कि लाखों भारतीयों का कार्यस्थल भी है। ऐसे में भारत सरकार एक संतुलित और सतर्क कूटनीतिक रुख अपना रही है। इस संकट के बीच भारत की सबसे पहली प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही, तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही और अपनी ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को निर्बाध बनाए रखना भी भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है। सरकार न केवल अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति की अपील कर रही है, बल्कि अपनी समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नौसेना की तैनाती पर भी पूरा जोर दे रही है।ऊर्जा सुरक्षा और तेल टैंकरों का संकटभारत अपनी कच्चा तेल (Crude Oil) की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। लाल सागर और ओमान की खाड़ी जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर बढ़ते तनाव का सीधा असर तेल टैंकरों की आवाजाही पर पड़ रहा है। यदि इन मार्गों पर जोखिम बढ़ता है, तो समुद्री बीमा प्रीमियम में वृद्धि होगी और अंततः इसका असर भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ेगा। भारत सरकार इस स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है और वैकल्पिक समुद्री मार्गों और आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तेल उत्पादक देशों के साथ लगातार संपर्क में है। भारत की कोशिश यह है कि किसी भी प्रकार की वैश्विक अस्थिरता का असर घरेलू बाजार की कीमतों पर न पड़े।लाखों भारतीयों की सुरक्षा और कूटनीतिक सक्रियतापश्चिम एशिया में लाखों भारतीय कामगार रहते हैं, जो वहां की अर्थव्यवस्था और भारत की अर्थव्यवस्था (रेमिटेंस के जरिए) में अहम योगदान देते हैं। उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत की विदेश नीति की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। संकट की आहट मिलते ही भारत सरकार ने वहां मौजूद अपने दूतावासों को अलर्ट मोड पर रखा है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षित निकास योजना (Evacuation Plan) तैयार रखी है। पीएम मोदी और विदेश मंत्रालय का ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि तनाव को कूटनीति और संवाद के माध्यम से कम किया जाए। भारत का अब तक का रुख स्पष्ट रहा है कि पश्चिम एशिया में शांति भारत के आर्थिक हितों और सामरिक सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 1:47 pm

कोई रिश्ता नहीं रखना, सब बंद कर दो! नाटो समिट में अपने ही साथी देश पर क्यों बुरी तरह भड़क गए डोनाल्ड ट्रंप

तुर्की में चल रहे नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन से एक बहुत बड़ी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ही पुराने सहयोगी देश स्पेन के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। ट्रंप ने सम्मेलन के दौरान बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए अपने अधिकारियों को आदेश दिया है कि अमेरिका को स्पेन के साथ अपने सभी व्यापारिक और व्यावसायिक संबंधों को तत्काल प्रभाव से पूरी तरह खत्म कर देना चाहिए। ट्रंप का दावा है कि इस कड़े फैसले के बाद स्पेन खुद-ब-खुद भागता हुआ और गिड़गिड़ाता हुआ अमेरिका के पास वापस आएगा।स्पेन एक बेकार की वजह और घटिया पार्टनर: नाटो चीफ के सामने ही सुना दी खरी-खरीअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह कड़ा रुख नाटो के नए महासचिव मार्क रुट्टे (Mark Rutte) की मौजूदगी में अपनाया। ट्रंप ने खुले मंच से स्पेन को एक बेहद खराब साझेदार और 'बेकार की वजह' (Useless Cause) करार दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब स्पेन के साथ किसी भी प्रकार का बिजनेस नहीं करना चाहता।अपने अधिकारियों को कड़ा निर्देश देते हुए ट्रंप ने कहा, इस आदेश को तुरंत लागू करें। उनसे बात तक मत करो। वे हमारे दम पर बहुत पैसा कमाते हैं, अब देखते हैं कि वे कैसे कमाते हैं। आप देखते रहना, वे खुद भागते हुए हमारे पास वापस आएंगे और कहेंगे— प्लीज सर, हमें आपके साथ व्यापार करना है। दरअसल, ट्रंप लंबे समय से इस बात को लेकर नाराज हैं कि अमेरिका नाटो के सदस्य देशों की सुरक्षा पर अपनी जेब से जरूरत से ज्यादा खर्च कर रहा है, जबकि बाकी देश अपना रक्षा बजट बढ़ाने में आनाकानी करते हैं।रक्षा बजट पर 'विशेष छूट' लेना स्पेन को पड़ा भारी, यही है गुस्से की असली वजहडोनाल्ड ट्रंप के इस भयंकर गुस्से के पीछे एक बहुत बड़ा रणनीतिक कारण है। दरअसल, स्पेन नाटो का एकमात्र ऐसा सदस्य देश है जिसने साल 2035 तक अपने रक्षा बजट को जीडीपी (GDP) के 5 प्रतिशत तक ले जाने के नाटो के नए कड़े लक्ष्य को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया है। स्पेन ने इसके उलट एक विशेष छूट (Waiver) हासिल की है, जिसके तहत वह अपने सैन्य खर्च को जीडीपी के केवल 2.1 प्रतिशत तक ही सीमित रखेगा।स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के आंकड़ों के मुताबिक, स्पेन ने भले ही अपना सैन्य खर्च 2021 के 1.4% से बढ़ाकर 2025 में 2.1% कर लिया हो, लेकिन इसके बावजूद वह पूरी नाटो फौजी टुकड़ी में अपनी रक्षा पर सबसे कम खर्च करने वाले देशों की सूची में शामिल है। ट्रंप को स्पेन का यह रवैया बिल्कुल रास नहीं आ रहा है।ईरान युद्ध में अमेरिका को नहीं दिया भाव, हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने से भी रोकास्पेन और अमेरिका के बीच चल रही इस तल्खी की स्क्रिप्ट कुछ समय पहले ही लिख दी गई थी। जब हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष चरम पर था, तब स्पेन ने एक बेहद चौंकाने वाला कदम उठाते हुए अमेरिकी सेना को अपने सैन्य अड्डों (Military Bases) का उपयोग करने से पूरी तरह रोक दिया था। इतना ही नहीं, स्पेन ने ईरान पर हमला करने जा रहे अमेरिकी लड़ाकू विमानों को अपने हवाई क्षेत्र (Airspace) से गुजरने की इजाजत भी नहीं दी थी। इसके साथ ही स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने ईरान पर अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों की अंतरराष्ट्रीय मंच पर सार्वजनिक आलोचना करते हुए इसे एकतरफा सैन्य कार्रवाई बताया था, जिसे ट्रंप ने अपनी व्यक्तिगत खुन्नस बना लिया है।स्पेन का पलटवार: हम यूरोपीय संघ का हिस्सा हैं, एकतरफा प्रतिबंध लगाना नामुमकिनडोनाल्ड ट्रंप के इस तीखे और अपमानजनक बयान पर स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज के कार्यालय ने भी बेहद सधा हुआ और करारा पलटवार किया है। स्पेन सरकार ने कहा कि वे ट्रंप के बयानों को हमेशा की तरह एक सामान्य राजनीतिक बयानबाजी मान रहे हैं और उनका अमेरिका के साथ संबंध तोड़ने का कोई इरादा नहीं है।स्पेन ने वाशिंगटन को याद दिलाया कि व्यापार के मामले में अमेरिका खुद स्पेन के साथ 'ट्रेड सरप्लस' (फायदे की स्थिति) में है। इसके अलावा, स्पेन ने स्पष्ट कानूनी पेच फंसाते हुए कहा कि चूंकि वे यूरोपीय संघ (EU) के सीमा शुल्क और व्यापार संघ के आधिकारिक सदस्य हैं, इसलिए अमेरिका अकेले स्पेन को निशाना बनाकर कोई भी एकतरफा व्यापारिक प्रतिबंध (Trade Sanctions) लागू नहीं कर सकता। इस पूरे विवाद के बीच नाटो प्रमुख मार्क रुट्टे ने भी ट्रंप के सामने स्पेन का बचाव करते हुए कहा कि स्पेन ने पिछले साल अपना सैन्य खर्च बढ़ाकर 2 फीसदी की सीमा को पार किया है, जो कि एक सराहनीय कदम है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 1:47 pm

ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों के लिए भारत में अवसर: PM मोदी ने दिया निवेश का न्योता, CECA समझौते को जल्द पूरा करने पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर भारत में निवेश की संभावनाओं को नई ऊंचाइयां देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलिया की प्रमुख कंपनियों के लीडर्स को भारत में आने और विस्तार करने का खुला निमंत्रण दिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाना है। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) को जल्द से जल्द पूरा करने पर जोर दिया है, जो भविष्य में दोनों देशों के बीच व्यापार की बाधाओं को कम करने और द्विपक्षीय निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक पड़ाव साबित होगा। इस न्योते को भारत के 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के साथ जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों के लिए एक आकर्षक मंच तैयार हो रहा है।CECA समझौता: आर्थिक विकास के नए रास्तेCECA यानी कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक कोऑपरेशन एग्रीमेंट को दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों की रीढ़ माना जा रहा है। पीएम मोदी ने बातचीत के दौरान इस बात पर स्पष्ट रूप से प्रकाश डाला कि यह समझौता केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह दोनों देशों के उद्योगों के लिए अवसरों का एक नया द्वार खोलेगा। इस एग्रीमेंट के पूरा होने से भारत में मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में ऑस्ट्रेलियाई निवेश को गति मिलेगी। साथ ही, भारतीय कंपनियों को भी ऑस्ट्रेलिया के बाजार तक सीधी और आसान पहुंच प्राप्त होगी। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री की यह सक्रियता भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का एक प्रमुख केंद्र बनाने की रणनीति का अहम हिस्सा है।भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी का बढ़ता दायराऑस्ट्रेलियाई कंपनियों को भारत आमंत्रित करना और उनके साथ उच्च-स्तरीय संवाद स्थापित करना, भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने का संकेत है। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत का बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम और बुनियादी ढांचे में हो रहा सुधार ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों के लिए बेहतरीन मौके पेश कर रहा है। तकनीक और ऊर्जा के क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया की विशेषज्ञता भारत के औद्योगिक विकास में मील का पत्थर साबित हो सकती है। इस दिशा में चल रहे प्रयासों से आने वाले समय में रोजगार के नए अवसर पैदा होने और दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं में तालमेल बढ़ने की पूरी संभावना है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 1:45 pm

ईरान का खौफ या सीक्रेट सर्विस का अलर्ट? ट्रंप ने बीच रास्ते में बदला विमान, कतर का आलीशान जेट छोड़ पुराने 'एयरफोर्स वन' में बैठे

अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा को लेकर एक बेहद सनसनीखेज और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। तुर्की के अंकारा में आयोजित नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन से वाशिंगटन वापस लौटते समय राष्ट्रपति ट्रंप ने बीच रास्ते में ही अपना विमान बदल दिया। ट्रंप कतर द्वारा हाल ही में तोहफे में दिए गए अत्याधुनिक बोइंग 747-8 वीआईपी जेट को छोड़कर अचानक अपने पुराने और भरोसेमंद 'एयरफोर्स वन' विमान में सवार हो गए। ब्रिटेन के आरएएफ मिल्डेनहॉल (RAF Mildenhall) मिलिट्री बेस पर हुए इस अचानक सुरक्षा बदलाव ने वैश्विक स्तर पर कई तरह की चर्चाओं और कयासों को जन्म दे दिया है।सीक्रेट सर्विस की खुफिया सलाह और वाइट हाउस की बड़ी सफाई'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच मिसाइल हमलों के बाद पैदा हुए गंभीर हालातों को देखते हुए यूएस सीक्रेट सर्विस (US Secret Service) ने राष्ट्रपति ट्रंप को तुरंत विमान बदलने की गोपनीय सलाह दी थी। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि यह कदम किसी विशिष्ट खुफिया इनपुट के बजाय अत्यधिक सावधानी और एहतियात के तौर पर उठाया गया था। दरअसल, कतर की ओर से मिले नए बोइंग विमान में अभी तक वे सभी मिलिट्री-ग्रेड एडवांस डिफेंस फीचर्स, मिसाइल इवेडिंग सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-मेजर पूरी तरह इंस्टॉल नहीं हो पाए हैं, जो दशकों से राष्ट्रपति की सुरक्षा कर रहे 'एयरफोर्स वन' के मूल बेड़े में मौजूद रहते हैं।हालांकि, वाइट हाउस ने उन खबरों और दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें नए विमान को असुरक्षित बताया जा रहा था। वाइट हाउस के संचार निदेशक स्टीवन चेउंग ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि कतर से मिला नया जेट भी उच्च-स्तरीय सुरक्षा प्रोटोकॉल से पूरी तरह लैस है। उन्होंने सुरक्षा रणनीति का खुलासा करते हुए कहा कि प्रशासन राष्ट्रपति की अभेद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'दुश्मन का ध्यान भटकाने और उन्हें गुमराह करने' (Decoy and Diversion) समेत अपने हर उपलब्ध खुफिया टूल का इस्तेमाल करता है।ट्रंप बोले- 'मैं ईरान की हिट लिस्ट में नंबर वन हूं, पुरानी यादों के लिए बदला प्लेन'बीच रास्ते में विमान बदलने और सुरक्षा चिंताओं की बात को खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया के सामने अपने ही अंदाज में खारिज किया। ब्रिटेन से वाशिंगटन के लिए उड़ान भरने के बाद विमान में मौजूद पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने बेबाकी से कहा, मुझ पर हमेशा से ही जान का खतरा मंडराता रहता है। मैं उनकी (ईरान की) हिट लिस्ट में नंबर वन पर हूं।ट्रंप ने आगे खुलासा किया कि ब्रिटेन के सैन्य अड्डे पर रुकने का मुख्य उद्देश्य वहां तैनात अमेरिकी फौजियों को कतर से मिला यह बिल्कुल नया और शानदार विमान दिखाना था। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सैनिक इसे देखकर बेहद उत्साहित थे और उन्होंने वहां तस्वीरें भी खिंचवाईं। वहीं, पुराने 'एयरफोर्स वन' में दोबारा शिफ्ट होने के पीछे की वजह बताते हुए ट्रंप ने मजाकिया लहजे में कहा कि उन्होंने केवल अपनी पुरानी यादों को ताजा करने के लिए इस विमान से सफर करने का फैसला किया।खिड़कियों के पर्दे रखने पड़े बंद; स्लीजबैग्स की वजह से सख्त पाबंदीइस बेहद संवेदनशील यात्रा के दौरान पुरानी एयरफोर्स वन में सफर कर रहे व्हाइट हाउस के प्रेस पूल और पत्रकारों को फ्लाइट क्रू द्वारा खिड़कियों के ब्लाइंड्स (पर्दे) पूरी तरह से बंद रखने का बेहद सख्त निर्देश दिया गया था। पत्रकारों को बाहर देखने या किसी भी तरह की लोकेशन की रिकॉर्डिंग करने की मनाही थी। ट्रंप ने बाद में स्पष्ट किया कि यह पाबंदी केवल सुरक्षा कारणों से सह-यात्रियों पर लागू थी, उनके अपने निजी केबिन पर नहीं। उन्होंने अमेरिका के दुश्मनों और ईरान की ओर सीधा इशारा करते हुए तीखे शब्दों में कहा कि शायद बाहर सक्रिय कुछ स्लीजबैग्स (संदिग्ध तत्वों) की वजह से सीक्रेट सर्विस को इतनी सख्त पाबंदी लगानी पड़ी है।अमेरिका और ईरान के बीच अचानक क्यों भड़की युद्ध की चिंगारी?राष्ट्रपति के विमान बदलने का यह पूरा हाई-प्रोफाइल घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच सीधी सैन्य भिड़ंत शुरू हो चुकी है। अमेरिका ने तेहरान पर अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) में कमर्शियल जहाजों और तेल टैंकरों पर हमला करने का गंभीर आरोप लगाते हुए ईरानी ठिकानों पर लगातार भारी हवाई हमले और बमबारी की है।इस अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान ने भी बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर कई बैलिस्टिक मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन दागे हैं। खाड़ी देशों में हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि बहरीन, कुवैत और कतर में अमेरिकी मिलिट्री बेस के ऊपर लगातार मिसाइल हमले के चेतावनी सायरन गूंज रहे हैं। इसी बीच कुवैत की सेना ने आधिकारिक दावा किया है कि उसने अपनी सीमा की तरफ आ रही कई ईरानी मिसाइलों और ड्रोन्स को पैट्रियट डिफेंस सिस्टम के जरिए बीच हवा में ही मार गिराया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 1:44 pm

ईरान पर हमले के बाद ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- भरोसा नहीं कि तेहरान डील मानेगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के नए जवाबी हमलों के बाद ईरान बातचीत करना चाहता है

देशबन्धु 9 Jul 2026 10:17 am

ऑस्ट्रेलिया में पीएम मोदी को मिला 'गार्ड ऑफ ऑनर', गूंजा जन गण मन...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मेलबर्न में औपचारिक स्वागत हुआ। ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर पीएम मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित भी किया गया।

देशबन्धु 9 Jul 2026 10:07 am

ट्रंप की चेतावनी के बाद हमला, होर्मुज बंद करने की धमकी पर भड़का अमेरिका

अमेरिकी सेना ने लगातार दूसरे दिन ईरान पर हमले किए हैं। इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता को खतरे में डालने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना है।

देशबन्धु 9 Jul 2026 9:59 am

सुपरपॉवर की 'कमजोरी': अमेरिकी युद्धपोतों पर लगातार क्यों लग रही है आग? चीनी मैगजीन के सनसनीखेज खुलासे से दुनिया हैरान

युद्धपोत किसी भी देश की समुद्री सीमा की रक्षा करने वाले अभेद्य किले होते हैं, जिनका काम दुश्मनों की पनडुब्बियों को खोजना, मिसाइलें दागना और तटीय सुरक्षा अभेद्य बनाना होता है। लेकिन सोचिए, अगर दुनिया की सबसे ताकतवर सेना के सबसे आधुनिक युद्धपोत ही रहस्यमयी तरीके से आग और तकनीकी खराबियों का शिकार होने लगें, तो क्या होगा? चीन की मशहूर मिलिट्री मैगजीन ‘नेवल एंड मर्चेंट शिप्स’ ने अमेरिकी नौसेना (US Navy) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया है, जिसने पेंटागन की रातों की नींद उड़ा दी है।अमेरिकी जंगी जहाजों पर हादसों की बाढ़चीनी मिलिट्री रिपोर्ट के अनुसार, हाल के महीनों में अमेरिका के सबसे एडवांस और घातक जंगी जहाजों पर आग लगने, अचानक बिजली गुल होने (ब्लैकआउट) और प्रोपल्शन (आगे बढ़ाने वाले सिस्टम) फेल होने की कई बड़ी घटनाएं दर्ज की गई हैं। इस लिस्ट में दुनिया का सबसे बड़ा न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर USS गेराल्ड आर. फोर्ड, सबसे आधुनिक स्टील्थ डिस्ट्रॉयर USS ज़ुमवाल्ट, निमित्ज़-क्लास कैरियर USS ड्वाइट डी. आइजनहावर और अर्ले बर्क-क्लास डिस्ट्रॉयर USS हिगिंस शामिल हैं।नाविक पड़ रहे बीमार, लॉन्ड्री से लेकर शिपयार्ड तक लगी आगहादसों की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मार्च में USS फोर्ड के लॉन्ड्री रूम में भीषण आग लग गई। अप्रैल में USS आइजनहावर पर मेंटेनेंस के दौरान और USS ज़ुमवाल्ट पर शिपयार्ड में अपग्रेडेशन के वक्त आग भड़क उठी। इतना ही नहीं, ओहायो-क्लास की परमाणु ऊर्जा से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन USS नेब्रास्का के जनरेटर में खराबी आ गई, जिससे जहरीले डीजल के धुएं के संपर्क में आने से 64 अमेरिकी नाविक एक साथ बीमार पड़ गए।आखिर अमेरिकी युद्धपोतों में क्यों लग रही है आग? जानें 5 मुख्य वजहेंचीनी रक्षा विशेषज्ञों ने अमेरिकी नौसेना की इस दुर्दशा के पीछे कई गंभीर और ढांचागत (Structural) कारणों का विश्लेषण किया है:लगातार ऑपरेशन का भारी दबाव: अमेरिकी युद्धपोत दुनिया के लगभग हर रणनीतिक समुद्री क्षेत्र (जैसे ताइवान स्ट्रेट, रेड सी और हिंद महासागर) में चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं। लंबे समय तक लगातार समुद्र में रहने से इनके भारी-भरकम इंजन और इलेक्ट्रिकल सिस्टम पर क्षमता से अधिक लोड पड़ रहा है।रखरखाव और मेंटेनेंस में भारी देरी: अमेरिकी नौसेना इस समय शिपयार्ड की सीमित क्षमता और मेंटेनेंस बैकलॉग से बुरी तरह जूझ रही है। कई युद्धपोत समय पर मरम्मत के लिए शिपयार्ड नहीं पहुंच पाते, जिससे छोटी खराबियां बाद में बड़ी आग का रूप ले लेती हैं।हद से ज्यादा हाई-टेक और डिजिटल सिस्टम: आधुनिक अमेरिकी जहाज अत्यधिक डिजिटल और ऑटोमेटेड हैं। इनमें हाई-वोल्टेज इलेक्ट्रिकल ग्रिड, रडार और सुपरकंप्यूटर नेटवर्क लगे हैं। जटिल इलेक्ट्रॉनिक्स के कारण एक छोटा सा शॉर्ट सर्किट या इलेक्ट्रिकल फॉल्ट पूरे जहाज को पंगु बना देता है।शिपयार्ड में कुशल कारीगरों और पार्ट्स की कमी: एडवांस्ड युद्धपोतों की मरम्मत के लिए बेहद अनुभवी और विशेषज्ञ इंजीनियरों की जरूरत होती है। रिपोर्ट का दावा है कि अमेरिकी शिपयार्डों में अनुभवहीन और कम कुशल कारीगरों की एक छोटी सी मानवीय गलती पूरे अरबों डॉलर के जहाज को स्वाहा कर रही है।शॉर्ट सर्किट और ऑयल लीकेज: मेंटेनेंस के दौरान इंजन रूम में ईंधन या ट्रांसमिशन तेल का रिसाव होना और ओवरलोडेड इलेक्ट्रिकल सिस्टम का आपस में टकराना आग लगने के तात्कालिक कारण बन रहे हैं।सुपर-टेक्नोलॉजी ही बन गई सबसे बड़ा खतरा!चीनी मैगजीन ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि टेक्नोलॉजी जहाजों के परफॉर्मेंस को तो बढ़ा सकती है, लेकिन बिजली की एक छोटी सी खराबी पूरे युद्धपोत को युद्ध के बीच में लाचार कर सकती है, जैसा कि हाल ही में USS हिगिंस पर हुए टोटल ब्लैकआउट के दौरान देखा गया। अमेरिकी नौसेना के लिए आज सबसे बड़ी चुनौती नए और घातक जहाज बनाना नहीं है, बल्कि जो पहले से मौजूद हैं, उनका सही तरीके से मेंटेनेंस करना है। अगर इंडस्ट्रियल सिस्टम ने समय रहते इस बोझ को नहीं संभाला, तो अमेरिका को अपनी ऑपरेशनल उपलब्धता में भारी कमी और अरबों डॉलर का सैन्य नुकसान झेलना पड़ेगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 8:18 am

H-1B वीजा पर ट्रंप का बड़ा एक्शन, बड़ी कंपनियां जांच के घेरे में

ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी और 'पर्म' रोजगार वीजा से जुड़े कथित धोखाधड़ी के मामलों की जांच शुरू कर दी है

देशबन्धु 9 Jul 2026 8:10 am

एर्दोगन पर ट्रंप मेहरबान, F-35 में तुर्की की वापसी के दिए संकेत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि उनका प्रशासन तुर्की को फिर से एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट कार्यक्रम में शामिल करने पर विचार कर रहा है

देशबन्धु 9 Jul 2026 7:50 am

'आज रात होगा जोरदार हमला'... ईरान को ट्रंप की खुली चेतावनी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान कहा कि अमेरिका बुधवार रात ईरान पर जोरदार हमला कर सकता है

देशबन्धु 9 Jul 2026 6:30 am

कैसे स्कैम करने भारत से कंबोडिया पहुंच रहे लोग, एक्सपोज:एजेंट बनकर गिरोह में घुसा रिपोर्टर, पाकिस्तानी एजेंट से 10 लड़कों की डील...पार्ट-1

‘लड़के भेज दो... एक लड़के पर 95 हजार रुपए तक कमीशन मिलेगा।’ ये ऑफर कंबोडिया में बैठे एक पाकिस्तानी एजेंट ने भास्कर रिपोर्टर को दिया। शर्त थी कि लड़के इंग्लिश बोलना जानते हों, बाकी काम कंपनी सिखा देगी। कंपनी का नाम नहीं है। वेबसाइट नहीं है। ऑफर लेटर नहीं है। इंटरव्यू टेलीग्राम पर होगा। जॉब दुनियाभर में लोगों को डिजिटल अरेस्ट करके ठगने की है। इस स्कैम के जरिए भारत में ही हर दिन करीब 61 करोड़ रुपए और हर महीने करीब 2 हजार करोड़ रुपए ठगे जा रहे हैं। हमारी पड़ताल 55 दिन चली। भास्कर रिपोर्टर एजेंट बना। स्कैम कंपनी के पूरे नेटवर्क को उजागर करने के लिए रैकेट में शामिल हुआ। विक्टिम, रिक्रूटमेंट करने वाले HR, ट्रेनिंग देने वाले सीनियर इम्प्लाई और कंबोडिया-मलेशिया में काम संभालने वाले एजेंट तक पहुंचा। उनका भरोसा जीता, दोस्ती बढ़ाई और यकीन दिलाया कि मैं एजेंट हूं और भारत से लड़कों को स्कैम के लिए कंबोडिया भेजना चाहता हूं। इस इन्वेस्टिगेशन में 45 दिन भारत, 7 दिन कंबोडिया और 3 दिन मलेशिया में बीते। स्कैम कंपनियों के रिक्रूटमेंट, ट्रेनिंग, ऑपरेशन मॉड्यूल को जाना। सैलरी और इंसेंटिव तक का गणित समझा। लड़कों को फंसाने से लेकर जबरदस्ती काम करवाने तक के तरीके पता किए। 'ऑपरेशन वर्ल्ड स्कैम' सीरीज के पहले पार्ट में आज पढ़िए और देखिए, कैसे भारत से युवाओं को कंबोडिया-मलेशिया जैसे देशों में भेजकर सायबर फ्रॉड इंडस्ट्री का हिस्सा बनाया जा रहा है। स्टेप 1: पाकिस्तानी एजेंट से मुलाकात हमारी इन्वेस्टिगेशन सायबर स्कैम सिंडिकेट में फंस चुके यूपी के रोहित (बदला हुआ नाम) से शुरू हुई। राेहित नौकरी के लिए कंबोडिया गए थे। वहां उनका पासपोर्ट छीनकर सायबर फ्रॉड करने के लिए मजबूर किया गया। भारत सरकार के दखल के बाद 22 नवंबर, 2025 को लोकल पुलिस ने रोहित और उनके साथियों को बाहर निकाला। कंबोडिया में रोहित की दोस्ती पाकिस्तान के लफी से हुई थी। लफी रोहित से सीनियर था। सायबर स्कैम के नेटवर्क तक पहुंचने के लिए हमने रोहित की मदद ली। एजेंट बनकर गिरोह में शामिल होने का प्लान बनाया और रोहित से लफी का नंबर लेकर उससे कॉन्टैक्ट किया। लफी से हमारी बात बीती 6 मई को हुई। वॉट्सएप पर हुई बातचीत में हमने उसे बताया कि आपका नंबर रोहित ने दिया है। मैं एजेंट हूं और 10 लड़कों को सायबर स्कैम के लिए कंबोडिया भेजना चाहता हूं। इसके बाद लफी ने कई दफा हमसे बातचीत की। लफी ने बताया, ‘अमेरिका और चीन का प्रेशर है। इसलिए ज्यादातर कंपनियां थाइलैंड-म्यांमार बॉर्डर पर शिफ्ट हो गई हैं। मैं जिस कंपनी में काम करता हूं, उसमें 300 बंदे हैं। 40 से 60 इंडिया के हैं। HR भी मुंबई का है।’ स्टेप 2: रिक्रूटमेंट रिक्रूटमेंट के बारे में पूछने पर लफी ने कहा कि दो लड़कों के एक-एक मिनट के इंट्रोडक्शन वीडियो भेजो। उन्हें इंग्लिश में अपने बारे में बताना है। वीडियो सिलेक्ट होने के बाद पासपोर्ट का पहला और आखिरी पेज का फोटो भेजना। फिर कंपनी का HR टेलीग्राम पर लड़कों का इंटरव्यू लेगा। इंटरव्यू क्लियर होते ही टिकट बुकिंग और वीजा प्रोसेस शुरू हो जाएगी।’ लफी ने बताया, अभी कंपनियां भारतीयों को ज्यादा हायर कर रही हैं। यहां पाकिस्तान के बहुत लोग पहले से हैं। एक मुल्क से ज्यादा लोग होने पर बवाल हो सकता है। इसलिए सभी देशों से थोड़े–थोड़े रखते हैं। भारत से अभी तमिल–तेलुगु बोलने वालों की डिमांड ज्यादा है। ऑफर लेटर कैसे मिलेगा? लफी ने जवाब दिया, ‘कंपनी ऑफर लेटर नहीं देती। कोई ऑफिशियल वेबसाइट नहीं है। कोई कानूनी दस्तावेज नहीं। सिर्फ पासपोर्ट, वीडियो और टेलीग्राम से काम होता है।’ स्टेप 3: HR इंटरव्यू लफी के कहने पर हमने अपनी टीम के दो साथियों के वीडियो उसे भेज दिए। वीडियो देखकर उसने कहा, ‘दोनों ठीक हैं, लेकिन अभी कुछ दिन इंतजार करना पड़ेगा। म्यांमार बॉर्डर पर सख्ती बढ़ गई है।’ ‘हमारे कुछ बंदे कंबोडिया में फंसे हैं। कुछ लड़के गिरफ्तार भी हो गए हैं। पुलिस एक लड़के को छोड़ने के बदले 10 हजार डॉलर मांग रही है। बॉस ने कहा है कि पहले इन लड़कों को निकालना पड़ेगा क्योंकि इनके वीजा और टिकट पर पैसे खर्च हो चुके हैं। इनके निकलते ही नई रिक्रूटमेंट शुरू करेंगे। तब तक माहौल थोड़ा ठीक हो जाएगा।’ रोहित के जरिए हम मैनुअल जोसेफ तक पहुंचे। मैनुअल कंबोडिया और लाओस में सायबर स्कैम कर चुका है। रोहित का रेफरेंस देते हुए हमने मैनुअल से कहा कि 10 लड़के बाहर भेजना है। रोहित का नाम सुनकर उसने भरोसा कर लिया और बातचीत शुरू कर दी। मैनुअल ने भी लड़कों के इंट्रोडक्शन वाले वीडियो मांगे। बोला कि लड़के इंग्लिश पढ़कर बोलेंगे, तब भी चलेगा, लेकिन टाइपिंग आना चाहिए। उसने आगे बताया, ‘कंबोडिया में सख्ती चल रही है, इसलिए लड़कों को मलेशिया भेजेंगे। 10 लड़के हैं, तो 5–5 के स्लॉट में भेजेंगे। टिकट तुम्हें करनी होगी। वीजा कंपनी करवाएगी। लड़के पहुंच जाएंगे तब तुम्हें एक बंदे पर 1000 डॉलर या करीब 95 हजार रुपए कमीशन मिलेगा। 300 डॉलर मेरे होंगे, 700 डॉलर तुम्हारे। इसके अलावा तुम्हें हर एक बंदे पर मुझे 5 हजार रुपए अलग से देना होगा।’ ‘एयरपोर्ट से कंपनी के लोग बंदों को लोकेशन पर ले जाएंगे। वहां रुकने, खाने–पीने का इंतजाम है। लड़कों के वहां पहुंचने के बाद 10 से 15 दिन में तुम्हें पैसा मिल जाएगा। लड़कों को सिर्फ कपड़े लेकर जाना है। लैपटॉप कंपनी में मिलेगा। अमेरिका के लोगों को फंसाना है। नाइट शिफ्ट रहेगी। रात में 10 बजे से सुबह के 10 बजे तक। एक साल का कॉन्ट्रैक्ट साइन होगा। तीन महीने के पहले कोई बाहर नहीं आ सकता। बाद में कोई आएगा, तो उसे टिकट खुद करना होगा।’ सब तय होने के बाद हमने मैनुअल को टेलीग्राम पर तीन लड़कों के वीडियो भेजे। वीडियो देखने के बाद उसने इंटरव्यू के लिए वक्त दिया। कहा कि इंटरव्यू टेलीग्राम पर होगा। लड़कों को कैमरा ऑन रखना है, मेरा कैमरा ऑफ रहेगा।’ मैनुअल ने तीनों लड़कों का एक-एक मिनट का इंटरव्यू लिया। लड़कों से नॉर्मल सवाल पूछे, जैसे कहां से पढ़े हो, कहां जॉब की है। एक लड़के से पूछा कि अमेरिका के बंदे से बात होगी तो सबसे पहले क्या पूछोगे। इंटरव्यू के अगले दिन मैनुअल ने बताया कि तीनों लड़के सिलेक्ट हो गए हैं। उनके पासपोर्ट की फोटो भेज दो, ताकि वीजा प्रोसेस शुरू हो जाए। अगले 15 दिन में वीजा हो जाएगा। जून के फर्स्ट वीक में सभी को रवाना कर देंगे। स्टेप 4: कंबोडिया का सफर लड़कों के सिलेक्शन के बाद हमने मैनुअल और लफी से कहा कि लड़के बाहर जाने में डर रहे हैं। उनके घरवाले कह रहे हैं कि बिना किसी लेटर कैसे बाहर भेज दें। इसलिए एक बार मैं वहां जाकर सब देखना चाहता हूं, ताकि उन्हें यकीन हो जाए। लफी ने हमें फिनोम पेन्ह में कंपनी का काम संभालने वाले एजेंट विक्की का नंबर दिया। विक्की से हमारी वॉट्सएप पर बात हुई। उसने कहा कि मैं 16 से 19 जून तक कंपनी के काम से फिनोम पेन्ह में नहीं रहूंगा। 15 जून को मिल सकता हूं। इसके बाद हमने 14 जून का मुंबई से बैंकॉक होते हुए फिनोम पेन्ह का टिकट बुक करवाया। लफी ने हमें बताया था कि भारत और थाईलैंड दोनों एयरपोर्ट पर हमारे लोग रहते हैं। इमिग्रेशन पर ज्यादा पूछताछ हो, तो मैनेज कर लेंगे। एयरपोर्ट पर 200 से 250 डॉलर में सेटिंग होती है। कई बार एयरपोर्ट से लोगों को डिपोर्ट कर दिया जाता है। इसी लफड़े से बचने के लिए पहले ही सेटिंग कर लेते हैं।’ लफी ने कहा कि आप टूरिस्ट वीजा पर कंबोडिया जाना क्योंकि अभी एयरपोर्ट पर बहुत सख्ती चल रही है। शक हुआ तो आपको डिपोर्ट कर देंगे। लफी की बात मानकर हमने टूरिस्ट वीजा पर कंबोडिया जाना तय किया। उसी दिन फिनोम पेन्ह में भारतीय दूतावास की वेबसाइट पर एक एडवाइजरी पढ़ी। इसमें लिखा था, ‘कंबोडिया में अच्छी सैलरी और नौकरी के झूठे वादे देकर भारतीय नागरिकों को मानव तस्करों के जाल में फंसाया जा रहा है। उन्हें डराकर ऑनलाइन फाइनेंशियल धोखाधड़ी और गैरकानूनी काम के लिए मजबूर किया जाता है।’ ‘कंबोडिया में जॉब के लिए आने वाले भारतीयों को सलाह दी जाती है कि वे ऑथराइज्ड रिक्रूटमेंट एजेंट्स के जरिए ही जॉब ऑफर एक्सेप्ट करें। नौकरी देने वाली कंपनी का बैकग्राउंड भी चेक करें। मेजबान देश की ओर से जारी वीजा की शर्तों का पालन करें और टूरिस्ट वीजा पर जॉब करने न आएं। जिन भारतीय नागरिकों के पास कंबोडिया में रहने और जॉब का वैलिड वीजा नहीं है, उन्हें तुरंत देश छोड़ने की सलाह दी जाती है।’ हम 14 जून को मुंबई से बैंकॉक के लिए निकले। 15 जून को बैंकॉक से कंबोडिया की राजधानी फिनोम पेन्ह पहुंच गए। कंबोडिया पहुंचने के बाद क्या हुआ, पढ़िए और देखिए कल यानी 10 जुलाई को। ग्राफिक से समझिए सायबर फ्रॉड इंडस्ट्री का दायरा कितना बड़ा है…

दैनिक भास्कर 9 Jul 2026 5:13 am

ब्लैकबोर्ड-पति ने सिर मुंडवाया, पेशाब पिलाया फिर कालिख पोत दी:शहर में उसने दूसरी पत्नी रख ली, मैंने घर छोड़ा तो निर्वस्त्र करके पीटा

सुबह करीब 11 बजे का वक्त। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर का करंजी गांव। मिट्टी और गोबर से लिपे कच्चे मकान का आंगन। एक कोने में उपले और सूखी लकड़ियों का ढेर। आंगन के किनारे घूंघट में मुंह छिपाए एक औरत बैठी हैं। उम्र लगभग 35-38 साल। नाम है ताराबाई। मुझे देखते ही पास आने का इशारा करती हैं। मैं पास जाकर जमीन पर ही बैठ जाती हूं। वह उंगलियों में दुपट्टे का किनारा फंसा कर बार-बार खींच रही हैं। अपने सूखे नाखूनों को नोच रही हैं। अचानक हवा चली और महिला के सिर से दुपट्टा खिसक गया। सिर पर नए-नए बाल आने शुरू हुए हैं, जैसे मुंडन के 10-15 दिन बाद आते हैं। वो तुरंत दुपट्टा खींचकर अपने सिर और चेहरे पर बांध लेती हैं। मेरे कुछ पूछने से पहले ही नजरें झुकाकर बोल पड़ती हैं- ‘पति ने सबके सामने मुझे गंजा कर दिया था।’ ब्लैकबोर्ड में एक ऐसी महिला की कहानी, जिसे पति ने पूरे गांव के सामने बेरहमी से पीटा, गंजा किया। अपना और बच्चों का पेशाब पिलाया… खुद को संभालते हुए ताराबाई ने कहानी बतानी शुरू की- तीन हफ्ते पुरानी बात है। इसी 14 जून की । भाभी के साथ उनके मायके, पांडूपारा गांव गई थी। जाना नहीं चाहती थी, लेकिन भाभी जबरदस्ती ले गईं। वहां पहुंचे कुछ घंटे बीते थे, तभी मेरा पति जितेंद्र वहां पहुंच गया। घर के बाहर खड़े होकर जोर-जोर से चीखने लगा। कहां है ताराबाई? मा@#$%। बताता हूं आज उसे। उसे देखकर मैं घबरा गई। वो अंदर घुसा और गाली देते हुए बोला-‘आज देख तू मैं तेरे साथ क्या करता हूं मा@#$%’। बाल पकड़कर सीधे मुझे बाहर लेकर आया। पहले थप्पड़ मारे फिर जमीन पर पटक दिया। लात-घूसे से मारा। सामने एक दीवार पर मेरा सिर दे मारा। मैं हाथ जोड़कर कह रही थी, छोड़ दे मुझे। लेकिन उसने एक न सुनी। गांवभर के लोग जमा हो गए। कुछ लोगों ने बीच-बचाव करने की कोशिश भी की, लेकिन वो सबको धमकाने लगा। कहने लगा- ‘जो भी बीच में आएगा, उसे जान से मार दूंगा। कोई मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। मैं पुलिस को भी सब कुछ बताकर आया हूं।’ फिर उसने दुपट्टे से दोनों हाथ पीछे की तरफ बांध दिए। छाती, पेट और चेहरे पर लात मारी। चारों बच्चों को भी साथ लाया था। बड़ी बेटी से बोला- ‘तू क्या देख रही है, मार @#$ को।’ बेटी ने भी एक के बाद एक कई थप्पड़ मारे। फिर खुद पीटने लगा। जब वो मारते-मारते थक गया तो मेरे एक पैर पर दुपट्टा बांधा और जोर से खींच दिया। मैं खड़े-खड़े जमीन पर गिर गई। भीड़ में खड़े एक शख्स से बोला- ‘ये ले मेरा मोबाइल, इस @#% का वीडियो बना।’ फिर छोटे बेटे से मुझे थप्पड़ मरवाए। कुछ देर बाद कहीं से कैंची लेकर आया और मेरे लंबे बाल काट दिए। डिस्पोजल में अपना पेशाब भरकर मेरे सिर पर उड़ेल दिया। दूसरे डिस्पेजल में फिर पेशाब भरकर लाया और जबरन मेरा मुंह पकड़कर पिला दिया। मैं बेजान सी वहीं पड़ी थी। उबकाई आ रही थी। मैं वहां से भाग जाना चाहती थी, लेकिन उस वक्त कुछ समझ ही नहीं आ रहा था। फिर बड़े बेटे से रेजर मंगवाया और मुझे गंजा कर दिया। तब तक मेरे एक कान में आवाज आनी बंद हो गई थी। सबके सामने मेरे कपड़े फाड़ दिए। छोटे बेटे से बोला- ‘मा@#$% के मुंह पर पेशाब कर।’ फिर जबरन मेरा मुंह के अंदर बेटे से पेशाब करवाया। आखिर में मेरे ऊपर काला मोबिल ऑयल उड़ेल दिया। चेहरे काला कर दिया। फिर वो कहने लगा- ‘अब वीडियो वायरल करके पूरी दुनिया को दिखाऊंगा। तुझे बहुत शौक है न दूसरी शादी करने का। अब तू देख @#$%। पूरी दुनिया थूकेगी तेरे ऊपर।’ उस वक्त तो मुझे लगा था कि जिंदा भी नहीं बचूंगी। बेहोश हो गई थी। तब से ही सुनाई देना बंद हो गया। वो साल भर से मुझसे कोई मतलब नहीं रखता था। खाने-पीने का खर्च तक नहीं उठाता था। कई साल पहले कमाने के लिए शहर चला गया था। धीरे-धीरे मतबल रखना भी बंद कर दिया। किसी दूसरी औरत के साथ रहने लगा था।आंसू भरी आंखों से वो मेरी तरफ देखती हैं और पूछती हैं- ‘मैडम, आप ही बताइए, क्या मैं घर में बंद होकर रहती? मैं अपने ही रिश्तेदारों के घर भी न जाती? जब उसने मुझे छोड़ दिया था, तो उसके बाद मैं कहीं भी जाऊं, उसका तो मेरे ऊपर कोई हक नहीं है न।’ ‘वो तो ऊपर वाले ने मेरी उम्र लिखी थी, इसलिए बच गई। लेकिन सच कहूं तो उस दिन के बाद से जिंदा लाश की तरह जिंदगी जी रही हूं। अब जब घर से बाहर किसी को देखती हूं तो लगता इसने भी मुझे पिटते देखा होगा। इसलिए किसी से नजरें नहीं मिला पाती। जिस पति ने मेरा ये हाल किया, उससे मैंने पसंद की शादी की थी। मेरे घरवाले नहीं चाहते थे। हर कोई शादी के खिलाफ था, इसलिए मैंने घर से भागकर शादी की थी। अब देखिए, उस पति ने कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा।’ ‘20 साल पहले की बात है। तब मैं 9वीं में पढ़ती थी, 16 साल की थी। जितेंद्र मेरे चाचा के लड़के का साला है। रिश्तेदारी में अक्सर आना-जाना होता था। वहीं हमारी बातें शुरू हुईं और धीरे-धीरे एक-दूसरे को पसंद करने लगे। जब घरवालों को पता चला, तो लड़ाई-झगड़े होने लगे। मां-बाप कहने लगे कि इस तरह रिश्तेदारी में शादी नहीं हो सकती। अगर उससे शादी की तो जान से मार देंगे। तब जितेंद्र ने बोला- ‘चलो, भागकर शादी कर लेते हैं। एकबार शादी हो गई तो कोई क्या ही कर लेगा।’ आखिर हम दोनों घर छोड़कर भाग गए और शादी कर ली।’ ताराबाई बात कर ही रही थीं, तभी बीच में उनके चाचा के बेटे बबलू सारथी बोल पड़े, ‘हां, पहले हम इस शादी के खिलाफ थे, लेकिन दोनों नहीं माने। भागकर शादी कर ली। फिर हमने सोचा कि लड़का अपनी ही जात-बिरादरी का है। परिवार भी जाना-पहचाना है। बात बढ़ाने से क्या ही फायदा। दोनों को बुलाया और शादी की मंजूरी दे दी। शुरुआत में सबकुछ ठीक भी था। दोनों साथ थे, घर बस गया और धीरे-धीरे परिवार भी बढ़ने लगा। उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं। धीरे-धीरे बात बिगड़ने लगी दरअसल, जितेंद्र की बहन से मेरी शादी नहीं चली। आए दिन हमारे झगड़े होते थे। वो कभी जान देने की धमकी देती, तो कभी अपनी नस काट लेती। उसकी इन हरकतों से हम डर गए। आखिरकार, पंचायत बुलाई और हमारा तलाक हो गया। यहीं से दोनों परिवारों के रिश्तों में दरार पड़ गई। इसके बाद ताराबाई और जितेंद्र के रिश्ते लगातार बिगड़ते चले गए। जितेंद्र ने अपनी बहन का बदला लेना शुरू कर दिया। वह आए दिन ताराबाई पर गुस्सा उतारने लगा।’ ताराबाई फिर बोल पड़ती हैं, ‘भाई का तलाक क्या हुआ, उसके बाद से तो मेरी जिंदगी नरक बन गई। दोनों परिवार के रिश्ते दुश्मनी में बदल गए। जितेंद्र कभी शहर में दिहाड़ी मजदूरी करता, तो कभी गांव में गाड़ी चलाता था। इसी से घर का खर्च चलता था। धीरे-धीरे उसने मेरी तरफ ध्यान देना बंद कर दिया। कुछ साल बाद शहर में उसके दूसरी महिला से संबंध हो गए। आधी रात को शराब पीकर घर आता फिर मुझे पीटता। कई-कई दिन तो घर भी नहीं आता था। मुझे खर्च के पैसे देना भी बंद कर दिए। कई बार तो राशन तक के पैसे नहीं होते थे। जब मैं जितेंद्र से उसके दूसरी औरत से संबंध के बारे में बात करती, तो ये कहकर टाल देता कि तू पागल है,ऐसा कुछ नहीं है। चारों बच्चों की जिम्मेदारी पूरी तरह मेरे कंधों पर आ गई थी। मैं उससे कहती, अगर तुम उसे दूसरी पत्नी बनाना चाहते हो, तो बना लो, लेकिन बच्चों की देखभाल भी करो। इसी बात पर अक्सर झगड़ा हो जाता और वो मुझे मारने लगता था। एकबार तो चार दिन तक घर में राशन नहीं था और जितेंद्र एक हफ्ते से घर नहीं लौटा था। जब वो शराब पीकर घर आया तो मैंने कहा- दूसरी औरत के लिए अपने बच्चों को परेशान कर रहे हो, कुछ तो हमारे बारे में भी सोचो। इसपर वो नाराज हो गया और कमरे का दरवाजा भीतर से बंद कर लिया। मेरे कपड़े उतरवा दिए और मुझे बुरी तरह पीटा। उस दिन मुझे समझ आ गया था कि जितेंद्र के लिए अब मैं सिर्फ गुस्सा निकालने का जरिया बन गई हूं। इस तरह हमारे बीच झगड़ा बढ़ता ही जा रहा था। मुझे बच्चों की ज्यादा चिंता होने लगी थी। फिर एक दिन झगड़ा हुआ तो उसने मेरा सिंदूर पोंछ दिया और मंगलसूत्र भी तोड़ दिया। कहने लगा- अब से तू मेरी पत्नी नहीं। निकल जा मेरे घर से। अगले दिन मैं अपनी बुआ सास के घर चली गई। जितेंद्र ने फोन किया और कहने लगा- तू वहां क्यों गई है? किससे मिलने गई है? गोद में छोटी बेटी को लेकर, बुआ सास के घर किससे मिलने जाती?’ जबरदस्ती कहता था कि तेरे और तेरे जीजा के बीच में कुछ चल रहा है। एक दिन फिर उस औरत को लेकर हमारा झगड़ा हुआ। मैंने जितेंद्र से कहा- जरूरत पड़े, तो मैं दूसरी औरत के साथ भी रह लूंगी। लेकिन तुम बच्चों को दूर मत करो। उनका ध्यान रखो मैडम आप ही बताइए, आखिर कौन-सी औरत अपनी सौतन के साथ रहने की बात करती है? लेकिन मैंने अपने बच्चों के लिए यह भी मंजूर कर लिया था। जितेंद्र का व्यवहार तब भी नहीं बदला। न तो हमारे झगड़े खत्म हुए और न ही उसका मारना पीटना। आखिर, एक दिन मैं घर छोड़कर निकल गई। रास्ते में मुझे जीजा मिल गए। उनको देखते ही मैं रोने लगी। वो मुझे मोटरसाइकिल में बैठाकर मायके छोड़ आए। अगले दिन जितेंद्र को पता चला, तो वह मुझे लेने आया। बहुत शांति से मुझे घर वापस ले गया। लगा कि शायद अब सब ठीक हो जाएगा, लेकिन घर पहुंचते ही मेरे साथ मारपीट शुरू कर दी। कहने लगा कि मैं अपने जीजा के साथ रहती हूं। मेरा उनसे चक्कर है। मुझे जिसके साथ भी देख लेता, उसी से मेरा रिश्ता जोड़ देता। उसे मारने-पीटने का कोई न कोई बहाना चाहिए होता था। गांव की दुकानों में उधारी लेकर बच्चों का पेट पाल रही थी। धीरे-धीरे उधार इतना बढ़ गया कि दुकान वालों ने देहरी चढ़ने से भी मना कर दिया। ससुराल वाले भी जितेंद्र को कुछ नहीं कहते थे। उल्टा सास तो मुझे ही तंग करती थीं। यहां तक कि जितेंद्र को उकसाती थीं। कहती थीं- इसने घर से भागकर तुमसे शादी की है। यह सही औरत नहीं है। इसे छोड़ दो।’ उस घटना को हुए 20 दिन से ज्यादा हो गए हैं। आज भी सिर में दर्द रहता है। ठीक से सुनाई नहीं देता। कभी-कभी अचानक कान में तेज दर्द शुरू हो जाता है। भूख नहीं लगती। घर से बाहर निकलने का मन ही नहीं करता। डर लगता है। लोगों से बात करने की हिम्मत नहीं होती। मैंने पूछा- इतना सब होने के बाद भी उस घर में क्यों लौटती रही? ताराबाई बिना ज्यादा सोचे बोलीं- ‘क्योंकि मुझे अपने बच्चों के साथ रहना था। लेकिन जब बार-बार कोशिश के बाद भी कुछ नहीं बदला तो एक साल पहले मैंने उसका घर छोड़ दिया था।' ताराबाई का कहना है कि- घटना के बाद मेरा परिवार पुलिस के पास शिकायत लेकर पहुंचा। शुरुआत में पुलिस ने मामले को हल्के में लिया। उसके बाद परिवार लोकल सामाजिक कार्यकर्ता पंकज तिवारी के पास पहुंचा, तब कड़ी धाराएं जोड़ीं। पंकज तिवारी बताते हैं- उस दिन शाम करीब 5 बजे ये लोग मेरे पास आए। उन्होंने पूरी घटना बताई और वीडियो दिखाया। वीडियो देखते ही मैं सन्न रह गया। मुझे लगा कि यह सिर्फ मारपीट का मामला नहीं, बल्कि इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना है। अगले ही दिन मैंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले को सार्वजनिक किया। हमारी मांग है कि घटना की गंभीरता को देखते हुए आरोपी पर गैर-जमानती और कड़ी धाराएं लगाई जाएं। जिस तरह से ताराबाई के साथ सार्वजनिक रूप से अपमान और हिंसा की गई, उसे सामान्य अपराध मानकर नहीं देखा जा सकता। एक इंसान को शारीरिक रूप से घायल होने के बाद भी इलाज मिल सकता है, लेकिन जिस तरह की सार्वजनिक बेइज्जती की गई है, उसके निशान शायद जिंदगी भर नहीं मिटेंगे।’ कोरिया जिला थाना प्रभारी प्रमोद पांडे बताते हैं कि 15 जून को ताराबाई आई थीं। उनकी शिकायत थी कि 14 जून सुबह 7 बजे उसके पति जितेंद्र घसिया अपने बच्चों के साथ गांव पांडुपुरा पहुंचा और उनके हाथ-पैर बांधकर सिर मुंडवाया। बुरी तरीके से मारा। जिसके आधार पर हमने एफआईआर दर्ज कर ली थी। जितेंद्र को गिरफ्तार भी कर लिया था। उसपर लगी धाराएं जमानती थी। लेकिन फिर पता लगा कि आरोपी ने तारा का चेहरा काला किया। बच्चों का और अपना पेशाब भी पिलाया। फिर एफआईआर में हमने बीएनएस की धारा 123 जोड़ी जो गैर जमानती धारा है। थाना प्रभारी प्रमोद पांडे के अनुसार तारा के पति का आरोप था कि वह 11 महीने से घर और बच्चों को छोड़कर किसी और के साथ रह रही थी। पांडे यह भी बताते हैं कि उन्होंने अपने कार्यकाल में ऐसी वीभत्स और अमानवीय घटना कभी नहीं देखी है। इसी के आधार पर एफआईआर में सख्त धाराएं जोड़ी गई हैं। ----------------------------------- ब्लैकबोर्ड की ये कहानियां भी पढ़ें… 1- ब्लैकबोर्ड-दूसरे के बच्चे धोखे से मेरी कोख में डाल दिए:शक्ल-सूरत नहीं मिली तो DNA करवाया, आखिर कहां गए मेरे बच्चे आज ब्लैकबोर्ड में कहानी ऐसे पति-पत्नी की जिनकी दो बेटियां हैं। इन्होंने एकबार फिर मां-बाप बनने का फैसला किया, लेकिन उम्र आड़े आ गई। डॉक्टर ने सलाह दी- ‘IVF आजमाइए।’ पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड- तानों से परेशान होकर ब्रेस्ट इम्प्लांट करवाया:ऑडिशन वाले कहते थे- तुम्हारा फिगर ठीक नहीं, अब आधी कमाई सर्जरी की EMI में जा रही एकबार मैं ऑडिशन के लिए गई थी। वहां मुझे ट्रायल के लिए एक बिकिनी दी गई। 10-15 मर्दों के सामने जैसे ही बिकिनी पहनकर बाहर आई, तो सब हंसने लगे। कहने लगे- 'अरे मैडम, ये सब आपके लिए नहीं है। आप तो एकदम फ्लैट हैं।' पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 9 Jul 2026 5:11 am

ट्रंप का बड़ा दावा, अमेरिका इतिहास की सबसे बड़ी आर्थिक उड़ान पर

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस समय अपने इतिहास की सबसे मजबूत आर्थिक बढ़त के दौर से गुजर रहा है

देशबन्धु 9 Jul 2026 5:10 am

कुवैत में जयशंकर की अहम बैठकें, ऊर्जा, रक्षा और व्यापार सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति

विदेश मंत्री (ईएएम) एस. जयशंकर ने बुधवार को कुवैत के प्रधानमंत्री शेख अहमद अब्दुल्ला अल-अहमद अल-सबाह से मुलाकात की। उन्होंने भारतीय समुदाय के कल्याण और सुरक्षा का ध्यान रखने के लिए कुवैत सरकार का धन्यवाद किया। साथ ही, उन्होंने भारत-कुवैत संबंधों को और मजबूत बनाने की उनकी सोच का स्वागत किया।

देशबन्धु 9 Jul 2026 4:20 am

शी चिनफिंग ने उच्च स्तरीय वैज्ञानिक व तकनीकी स्वावलंबन बढ़ाने में तेजी लाने पर बल दिया

चीन में राजकीय विज्ञान व तकनीक पुरस्कार वितरण महासभा, चीनी वैज्ञानिक अकादमी के सदस्यों की 22वीं सभा तथा चीनी इंजीनियरिंग अकादमी के सदस्यों की 18वीं सभा और चीनी विज्ञान व तकनीक संघ की 11वीं राष्ट्रीय प्रतिनिधि सभा 8 जुलाई की सुबह पेइचिंग जन वृहद भवन में आयोजित हुई।

देशबन्धु 9 Jul 2026 12:42 am

ईरान पर ट्रंप का फूटा गुस्सा, नाटो सहयोगियों पर लगाए बड़े आरोप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बड़े नाटो सहयोगी देशों पर आरोप लगाया कि उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिका की सैन्य कार्रवाई में उसका साथ देने से इनकार कर दिया

देशबन्धु 9 Jul 2026 12:38 am

आज का एक्सप्लेनर:टीम इंडिया वर्ल्ड चैम्पियन से ‘लूजर’ कैसे बनी; 76 रन पर ऑलआउट, आयरलैंड से सीरीज हारी, आखिर जीत का फॉर्मूला क्यों बदला

इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टी-20 मैच में टीम इंडिया 125 रन से हार गई। टी-20 में ये भारत की सबसे बड़ी हार है। पिछले महीने आयरलैंड भी भारत को 2-0 से सीरीज हरा चुकी है। मार्च में टी-20 वर्ल्ड चैम्पियन बनने के बाद टीम इंडिया ने 5 मैच खेले, कोई नहीं जीता। आखिर जीत के ट्रैक पर दौड़ लगाती टीम इंडिया की गाड़ी 110 दिनों में बेपटरी कैसे हो गई; 5 बड़े फैक्टर्स… ------------------------ ये खबर भी पढ़िए… कप्तान श्रेयस बोले- खराब प्रदर्शन, ऐसी हार स्वीकार्य नहीं: गंभीर ने सैमसन की वापसी के संकेत दिए; जानिए भारत की हार पर किसने क्या कहा टीम इंडिया को टी-20 क्रिकेट में अपनी सबसे बड़ी हार झेलनी पड़ी। उसे इंग्लैंड ने तीसरे मैच में 125 रन से हराया। ट्रेंट ब्रिज स्टेडियम में 202 रन चेज कर रही टीम इंडिया सिर्फ 76 रन पर ऑलआउट हो गई। मैच के बाद भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने टीम के प्रदर्शन को बेहद खराब बताया। वहीं, हेड कोच गंभीर बचाव करते नजर आए। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 8 Jul 2026 6:29 pm

ट्रंप का बड़ा दावा: ‘ईरान के साथ समझौता खत्म’, 80 से अधिक ठिकानों पर अमेरिकी हमलों के बाद बढ़ा तनाव

ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करना है। उनके अनुसार, यदि ईरान परमाणु क्षमता बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ता है तो यह केवल अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा होगा।

देशबन्धु 8 Jul 2026 3:03 pm

डिजिटल अरेस्ट करने वाली इंडस्ट्री एक्सपोज, कंबोडिया-मलेशिया पहुंचा भास्कर:भर्ती से ट्रेनिंग तक कंपनी जैसा नेटवर्क; 55 दिनों की पड़ताल, पढ़िए कल से

बीते 11 महीनों में मुंबई के बिजनेसमैन से 58 करोड़, दिल्ली की बुजुर्ग महिला से 20 करोड़ और गांधीनगर की डॉक्टर से 19 करोड़ रुपए डिजिटल अरेस्ट करके ठगे गए। डिजिटल अरेस्ट का ये काम किसी कॉर्पोरेट कंपनी की तरह चल रहा है। कंपनी में बकायदा HR हैं, हायरिंग और ट्रेनिंग होती है। टारगेट मिलता है। सैलरी के साथ इंसेंटिव भी दिया जाता है। भारत, अमेरिका, चीन समेत दुनियाभर के देशों के लोगों को ठगा जा रहा है। इस स्कैम का हब कंबोडिया और मलेशिया जैसे देश बन चुके हैं। इस स्कैम इंडस्ट्री को एक्सपोज करने के लिए भास्कर रिपोर्टर अक्षय बाजपेयी एजेंट बनकर नेटवर्क में शामिल हुए। 55 दिनों तक पड़ताल की। मुंबई से कंबोडिया और मलेशिया तक पहुंचे। उन एजेंट्स को कैमरे में कैद किया, जो इस नेटवर्क के पीछे हैं। पाकिस्तानी एजेंटों से डील की। एयरपोर्ट पर सेटिंग से लेकर स्कैम कंपाउंड्स का सच जाना। ‘ऑपरेशन स्कैम वर्ल्ड’ सीरीज के दो पार्ट में 9 और 10 जुलाई को पढ़िए और देखिए पूरा इन्वेस्टिगेशन।

दैनिक भास्कर 8 Jul 2026 1:28 pm

चीन की उड़ी नींद! समंदर के 3 चोक-पॉइंट्स पर भारत-इंडोनेशिया का कड़ा पहरा, ड्रैगन का तेल-राशन होगा कंट्रोल

हिंद महासागर (Indian Ocean) में चीन की बढ़ती दखलअंदाजी और विस्तारवादी नीतियों पर लगाम कसने के लिए भारत ने एक बड़ा और रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक चला है। अब भारत और इंडोनेशिया ने मिलकर समंदर के उन तीन सबसे अहम 'चोक-पॉइंट्स' (Choke Points) पर अपना नियंत्रण मजबूत करने की तैयारी कर ली है, जहां से होकर चीन का ज्यादातर व्यापार और कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई होती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों की यह संयुक्त साझेदारी ड्रैगन के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है, क्योंकि भविष्य में किसी भी विवाद की स्थिति में इससे सीधे तौर पर चीन की सप्लाई चेन भारत की मुट्ठी में आ जाएगी।समंदर के 3 अहम चोक-पॉइंट्स पर रहेगी पैनी नजर समुद्री सुरक्षा और वैश्विक व्यापार के लिहाज से हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर (South China Sea) को जोड़ने वाले रास्ते बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। नई रणनीतिक रूपरेखा के तहत भारत और इंडोनेशिया अब मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca), सुंडा (Sunda Strait) और लोम्बोक जलडमरूमध्य (Lombok Strait) पर अपनी नौसैनिक गश्त और रणनीतिक मौजूदगी बढ़ा रहे हैं। मलक्का स्ट्रेट को दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में गिना जाता है। इन तीनों अहम चोक-पॉइंट्स पर दोनों देशों की मजबूत पकड़ का सीधा मतलब है कि संकट के समय में इस रूट को पूरी तरह से मॉनिटर या ब्लॉक किया जा सकता है, जो भारत को भारी रणनीतिक बढ़त दिलाएगा।चीन के लिए क्यों है यह सबसे बड़ा झटका? रक्षा और भू-राजनीति के विशेषज्ञ इसे कूटनीतिक भाषा में 'मलक्का डिलेमा' (Malacca Dilemma) कहते हैं। दरअसल, चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 70 से 80 फीसदी कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खाड़ी देशों से इन्हीं समुद्री रास्तों के जरिए आयात करता है। अगर भारत और इंडोनेशिया मिलकर इन रास्तों पर कड़ी निगरानी रखते हैं या किसी सैन्य संघर्ष के दौरान आवाजाही रोक देते हैं, तो चीन में रातों-रात तेल और राशन का भारी संकट पैदा हो जाएगा। ईंधन के अभाव में उसकी पूरी अर्थव्यवस्था और सैन्य मशीनरी ठप पड़ सकती है। यही वजह है कि भारत और इंडोनेशिया का यह साझा कदम बीजिंग के नीति-निर्माताओं की चिंताएं बढ़ा रहा है।भारत-इंडोनेशिया की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' (Act East Policy) के तहत इंडोनेशिया के साथ रक्षा, व्यापार और नौसैनिक संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत हुए हैं। इंडोनेशिया के सबांग पोर्ट (Sabang Port) के विकास में भारत की भागीदारी ने इस रणनीति को और धार दे दी है। यह पोर्ट रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से बेहद करीब है, जो भारतीय नौसेना को इस पूरे इलाके में एक मजबूत बेस प्रदान करता है। दोनों देशों की नौसेनाएं लगातार संयुक्त पेट्रोलिंग और युद्धाभ्यास कर रही हैं। यह आधुनिक जियो-पॉलिटिक्स (Geo-Politics) में भारत की उस आक्रामक कूटनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह अब रक्षात्मक रुख अपनाने के बजाय चीन को उसी की भाषा में जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 8 Jul 2026 1:21 pm

कराची के आसमान से रहस्यमयी तरीके से गायब हुआ विमान, समुद्र में मची खलबली, बड़े सर्च ऑपरेशन का ऐलान

पाकिस्तान में एक बड़ी विमानन त्रासदी की आशंका ने हलचल मचा दी है। कराची के आसमान में उड़ान भर रहा एक विमान अचानक रडार से गायब हो गया है, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। विमान के लापता होते ही कराची और उसके आसपास के तटीय इलाकों में हड़कंप मच गया। प्राथमिक सूचनाओं के अनुसार, विमान से संपर्क टूटने के बाद से ही बचाव दल और सुरक्षा एजेंसियों ने युद्धस्तर पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। फिलहाल यह विमान समुद्र के ऊपर उड़ान भर रहा था, जिसके चलते सर्च ऑपरेशन का दायरा अरब सागर के तटों तक फैला दिया गया है।रडार से संपर्क टूटने के बाद बढ़ी चिंताविमान के रडार से ओझल होने की सूचना मिलते ही एविएशन अथॉरिटी ने 'इमरजेंसी प्रोटोकॉल' लागू कर दिया है। बताया जा रहा है कि विमान ने कराची एयरस्पेस में प्रवेश करते ही संपर्क खो दिया था, जिसके बाद से एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के साथ उसका कोई डेटा साझा नहीं हो पाया है। शुरुआती जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या यह कोई तकनीकी खराबी थी या मौसम के कारण विमान को अचानक नीचे आना पड़ा। हालांकि, विमान का मलबा या कोई ठोस सुराग अभी तक नहीं मिल सका है, जिससे परिवार वालों और प्रशासन की चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं।समुद्र में जारी है व्यापक सर्च ऑपरेशनपाकिस्तान की नौसेना (Pakistan Navy) और कोस्ट गार्ड ने विमान की तलाश में अपने जहाजों और हेलीकॉप्टरों को समुद्र में उतार दिया है। सर्च ऑपरेशन का मुख्य केंद्र कराची का तटीय इलाका है, जहां विमान के अंतिम बार देखे जाने की सूचना मिली थी। खराब मौसम और समुद्र की ऊंची लहरें बचाव दल के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने समुद्र के पास कुछ असामान्य हलचल देखी थी, जिसे देखते हुए सर्च टीम अब उन विशिष्ट पॉइंट्स पर फोकस कर रही है जहां विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की सबसे अधिक संभावना है।क्या हो सकती है घटना की वजह?इस विमान के लापता होने के पीछे के सटीक कारणों का अभी आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है। एविएशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि उड़ान के दौरान अचानक संपर्क टूटना किसी बड़े टेक्निकल फेल्योर या हाइड्रोलिक समस्या का संकेत हो सकता है। फिलहाल प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी साधे रखी है और किसी भी अनहोनी की पुष्टि करने से बच रहा है। जैसे-जैसे सर्च ऑपरेशन आगे बढ़ रहा है, पूरे पाकिस्तान की नजरें कराची के समुद्र तट पर टिकी हैं। फिलहाल, बचाव दल विमान का सिग्नल पकड़ने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का सहारा ले रहे हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 8 Jul 2026 1:19 pm

पाकिस्तान में BLA का खूनी तांडव: पुलिस स्टेशन पर किया बड़ा हमला, 17 पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या से दहला इलाका

पाकिस्तान में अशांति का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने एक बार फिर सुरक्षा बलों को निशाना बनाते हुए खौफनाक हमले को अंजाम दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बलूचिस्तान के एक पुलिस थाने पर BLA के आतंकियों ने अचानक धावा बोल दिया। इस हमले में 17 पुलिसकर्मियों के शहीद होने की पुष्टि हुई है, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। इस घटना ने एक बार फिर पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था और बलूचिस्तान में जारी अलगाववादी संघर्ष की गंभीरता को उजागर कर दिया है।कैसे दिया हमले को अंजाम?प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, हमलावरों ने अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल करते हुए पुलिस थाने को पूरी तरह घेर लिया था। हमला इतना अचानक और भीषण था कि सुरक्षाकर्मियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। BLA के आतंकियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिसमें मौके पर ही पुलिसकर्मियों की जान चली गई। हमले के बाद आतंकी हथियार लूटकर और पुलिस स्टेशन में भारी तबाही मचाकर आसानी से फरार होने में कामयाब रहे। घटना के बाद इलाके में भारी सुरक्षाबलों की तैनाती कर दी गई है और सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।पाकिस्तान के लिए क्यों है यह बड़ा सिरदर्द?बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी द्वारा किए गए इस हमले को सुरक्षा विशेषज्ञ पाकिस्तान सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती मान रहे हैं। बलूचिस्तान में लंबे समय से चल रहा विद्रोह अब और अधिक हिंसक होता जा रहा है। विशेष रूप से पुलिस और सेना के जवानों को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि विद्रोही गुट अब सरकारी तंत्र को सीधे चुनौती दे रहे हैं। इस हमले के बाद स्थानीय लोगों में भी डर का माहौल है और पाकिस्तान सरकार की विफलता पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।क्षेत्र में तनाव और भविष्य के हालातइस हमले के बाद बलूचिस्तान के हालात और भी नाजुक हो गए हैं। सुरक्षा एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि इतनी बड़ी संख्या में हथियारबंद आतंकी बिना किसी खुफिया जानकारी के कैसे थाने तक पहुंच गए। BLA ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है, जिससे साफ है कि वे सुरक्षा बलों के खिलाफ अपनी आक्रामक रणनीति को और तेज करने वाले हैं। आने वाले दिनों में बलूचिस्तान में सुरक्षा कड़ी की जा सकती है, लेकिन यह घटना साबित करती है कि पाकिस्तान के इस इलाके में शांति अभी काफी दूर है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 8 Jul 2026 1:18 pm

गैंगस्टर गोल्डी बराड़ पर अमेरिकी एजेंसी FBI का बड़ा एक्शन, घोषित किया 50 हजार डॉलर का इनाम

अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी (एफबीआई) ने सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ को वांटेड घोषित करते हुए उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना पर 50,000 अमेरिकी डॉलर (करीब 47 लाख रुपये) तक के इनाम की घोषणा की है।

देशबन्धु 8 Jul 2026 12:59 pm

खामेनेई के जनाजे के बीच अमेरिका का बड़ा हमला, ईरान के 80 से अधिक ठिकानों पर बरसाए बम!

ईरान की ओर से व्यापारिक जहाजों के निशाना बनाए जाने के बाद अमेरिका ने भी ईरान के 80 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से कहा गया कि ये हमले सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों से किए गए।

देशबन्धु 8 Jul 2026 11:37 am

ईरान पर अमेरिका का डबल अटैक! एयरस्ट्राइक के साथ तेल पर भी वार

संयुक्त राज्य अमेरिका ने मंगलवार को 80 से अधिक ईरानी सैन्य ठिकानों पर सेंटकॉम के नए हवाई हमले शुरू किए। साथ ही, उसने अमेरिकी ट्रेजरी का वह महत्वपूर्ण लाइसेंस भी रद्द कर दिया

देशबन्धु 8 Jul 2026 10:18 am

ट्रंप का बड़ा ऐलान! सीरिया से हटेंगे अमेरिकी प्रतिबंध

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार सीरिया पर लगे प्रतिबंध हटा देगी। उन्होंने सीरिया को एक दोस्त देश बताया और कहा कि तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने सीरिया की नई सरकार के साथ रिश्ते बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

देशबन्धु 8 Jul 2026 8:30 am

होर्मुज स्‍ट्रेट में तीन टैंकरों पर हमले, सऊदी और कतर के जहाजों को नुकसान

यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) ने मंगलवार को बताया कि होर्मुज स्‍ट्रेट से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर तीन अलग-अलग हमले हुए हैं। इन तीनों घटनाओं में किसी के घायल होने की खबर नहीं है

देशबन्धु 8 Jul 2026 7:50 am

नाटो शिखर सम्मेलन में ट्रंप ने एकजुटता पर उठाए सवाल, बोले- जरूरत पड़ने पर किसी ने साथ नहीं दिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को आरोप लगाया कि ⁠उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के कई सहयोगी देशों ने ईरान में अमेरिका के सैन्य अभियान के दौरान साथ देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि नाटो में जिम्मेदारियों का बोझ बराबर नहीं बंटता।

देशबन्धु 8 Jul 2026 7:30 am

पश्चिम बंगाल: राज्यसभा उपचुनाव में तृणमूल को झटका लगने के आसार, भाजपा कर सकती है क्लीन स्वीप

तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख और पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए राज्य से राज्यसभा की तीन सीटों पर होने वाला आगामी उपचुनाव एक बड़ी राजनीतिक परीक्षा साबित हो सकता है

देशबन्धु 8 Jul 2026 6:50 am

नाटो ने नए रक्षा प्रोजेक्ट किए घोषित, एयर टैंकर बेड़े और एंटी-ड्रोन सिस्टम पर जोर

उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के सेक्रेटरी जनरल मार्क रूटे ने तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित रक्षा उद्योग फोरम में रक्षा क्षेत्र से जुड़े 'नए बड़े प्रोजेक्ट्स' की घोषणा की है।

देशबन्धु 8 Jul 2026 6:30 am

भारत की विकास यात्रा मतलब 1.4 अरब लोगों की आगे बढ़ती उम्मीदें : पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि वैश्विक स्तर पर कई संकटों के बावजूद भारत लगातार एक के बाद एक सुधार कर रहा है, बेहतर प्रदर्शन कर रहा है और तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

देशबन्धु 8 Jul 2026 3:50 am

'मेलोनी अच्छी हैं, लेकिन गलती कर बैठीं'- ट्रंप का बड़ा हमला

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने ईरान से जुड़े सैन्य अभियान में अमेरिका का साथ न देकर 'गलती' की। इस फैसले की वजह से दोनों देशों के रिश्तों में खटास आ गई।

देशबन्धु 8 Jul 2026 3:37 am

चीन में बाढ़ का तांडव! 6 की मौत, 11 लापता, लाखों लोग संकट में

दक्षिण चीन के गुआंग्शी जुआंग स्वायत्त क्षेत्र में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण आई बाढ़ में मंगलवार शाम तक छह लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 11 लोग अब भी लापता हैं।

देशबन्धु 8 Jul 2026 12:00 am

आज का एक्सप्लेनर:सतलुज फिल्म में ऐसा क्या, जो रिलीज होते ही भारत से गायब; जसवंत सिंह खालड़ा कौन हैं, पंजाब में उनके साथ हुआ क्या था

साल 1995, पंजाब का अमृतसर। ह्यूमन-राइट एक्टिविस्ट जसवंत सिंह खालड़ा ने दावा किया कि पुलिस ने 25 हजार से ज्यादा लोगों की हत्या करके लावारिस की तरह उनकी लाशें जला दीं। इस दावे के 7 महीने बाद जसवंत को भी घर से अगवा करके बेरहमी से मार दिया गया था। आज तक उनकी लाश बरामद नहीं हुई है। पंजाब की इसी कहानी पर बनी फिल्म 4 साल से थिएटर में रिलीज नहीं हो पाई है। 3 जुलाई को इसे चुपचाप OTT प्लेटफॉर्म ZEE5 पर रिलीज किया गया, लेकिन 48 घंटे के अंदर वहां से भी हटाना पड़ा। फिल्म के लीड एक्टर दिलजीत दोसांझ ने सोशल मीडिया पर ‘सतलुज’ नाम की इस फिल्म का एक वीडियो शेयर करके लिखा, ‘सतलुज के साथ जो हुआ, वही जसवंत सिंह खालड़ा के साथ हुआ था।’ आखिर कौन थे जसवंत सिंह, उनके खुलासे और उनकी हत्या की पूरी कहानी क्या है, फिल्म में ऐसा क्या है, जिसका देश-विरोधी एक्टिविटीज में इस्तेमाल होने का डर है; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में... सवाल-1: कौन हैं जसवंत सिंह खालड़ा और उनके साथ पंजाब में क्या हुआ था? जवाब: 1990 के दशक के पंजाब के कई इलाकों में खालिस्तान की मांग जोर पकड़ रही थी। ऑपरेशन ‘ब्लू स्टार' में 6 जून 1984 को खालिस्तान समर्थक जरनैल सिंह ‘भिंडरांवाले’ की मौत हो गई। जवाब में 31 अक्टूबर, 1984 को पीएम इंदिरा गांधी की उनके ही 2 सिख बॉडीगार्ड्स ने हत्या कर दी। इसके बाद खालिस्तान मूवमेंट को कुचलने का दौर शुरू हुआ। 1992 में बेअंत सिंह सीएम बने। तब के पंजाब पुलिस के DGP कंवर पाल सिंह गिल (केपीएस गिल) ने एंटी-टेररिज्म अभियान चलाया। पुलिस को खुली छूट थी। पंजाब के कई इलाकों से हजारों नौजवान रातोंरात गायब हो रहे थे। पुलिस पर निहत्थे लोगों को हिरासत में लेने और फर्जी एनकाउंटर के आरोप लग रहे थे। 1952 में अमृतसर जिले के खालड़ा गांव में जन्मे जसवंत सिंह, तब अमृतसर के एक बैंक में काम करते थे। जनवरी 1995 में वे शिरोमणि अकाली दल की मानवाधिकार यूनिट के महासचिव भी थे। लापता लोगों के डेथ सर्टिफिकेट न होने के चलते उनके परिवार वाले न उनकी संपत्ति पर दावा कर सकते थे और न ही बैंक में उनके खातों से पैसा निकाल पा रहे थे। ऐसे में जसवंत ने लापता लोगों, पुलिस हिरासत में हुई मौतों और श्मशानों में जलाई जा रही लावारिस लाशों के बीच कनेक्शन खोजना शुरू किया। उन्होंने अमृतसर और तरनतारन के श्मशान घाटों में जली लाशों के डिटेल्स इकट्ठा किए। 16 जनवरी 1995 को जसवंत ने चंडीगढ़ में प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी और 4 बड़े दावे किए.. प्रोफेसर मल्लिका कौर की किताब, 'फेथ, जेंडर, एंड एक्टिविज्म इन द पंजाब कॉन्फ्लिक्ट के मुताबिक, इस अपराध में साथ न देने वाले 2000 पुलिस वालों को भी मार दिया गया। जसवंत का कहना था कि पुलिस अधिनियम 1861 के तहत पंजाब पुलिस रूल्स, 1934 के चैप्टर 25 में नियम है कि किसी लाश का अंतिम संस्कार तभी हो सकता है, जब उसकी पहचान तय हो, लेकिन यहां तो सिस्टम खुद ही पहचान मिटा रहा था। दो दिन बाद DGP केपीएस गिल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जवाब दिया, 'हजारों सिख युवा फर्जी दस्तावेजों से विदेश चले गए हैं। उन्हीं की गुमशुदगी को खालड़ा पुलिस पर थोप रहे हैं।' इसके बाद खालड़ा ने गिल को ओपन डिबेट की चुनौती दी। उनके दावों के आधार पर पंजाब के लोकल अखबार खबरें छाप रहे थे। प्रशासन पर दबाव बढ़ा, तो उसने उल्टा खालड़ा से पूछताछ शुरू कर दी। इसी बीच 31 अगस्त को सीएम बेअंत सिंह की खालिस्तानी आतंकी संगठन ‘बब्बर खालसा इंटरनेशनल’, BKI ने बम धमाके में हत्या कर दी। इसके बाद 6 सितंबर 1995 का दिन आया। जसवंत सिंह अमृतसर के कबीर पार्क स्थित अपने घर के बाहर कार धो रहे थे। तभी एक सफेद गाड़ी आई। इसमें मौजूद हथियारबंद लोग उन्हें अगवा कर ले गए। पुलिस का कहना था कि जसवंत कैसे गायब हुए, इसकी जानकारी नहीं है। शायद वो गैंगवॉर का शिकार हुए। खालड़ा के मामले में जांच के बाद CBI ने अपनी रिपोर्ट में लिखा, 'जसवंत सिंह ने लावारिस लाशों के मामले में आवाज उठाई। स्थानीय पुलिस को ये पसंद नहीं आया और उन्हें घर से अगवा कर लिया। उन्हें गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखने के बाद उनकी हत्या करके लाश हरीके इलाके में नहर में फेंक दी गई।' सवाल-2: जसवंत सिंह की हत्या का खुलासा कैसे हुआ, पत्नी ने कैसे दिलाई सजा? जवाब: 6 सितंबर को ही जसवंत की पत्नी परमजीत कौर ने शिकायत दर्ज करवाई कि उनके पति को पुलिस की वर्दी में कुछ लोगों ने अगवा किया है। किडनैपिंग का मामला दर्ज किया गया। जसवंत का सुराग देने पर एक लाख रुपए का इनाम भी रखा गया। हालांकि पुलिस ने जांच आगे नहीं बढ़ाई, तो परमजीत ने कोर्ट का रुख किया और नवंबर 1995 में कोर्ट ने CBI को जांच का आदेश दिया। CBI की रिपोर्ट के मुताबिक, जसवंत के पड़ोसी किरपाल सिंह रंधावा ने बताया कि जिस गाड़ी से जसवंत का अपहरण हुआ, उसमें 5 पुलिस अधिकारी- DSP जसपाल सिंह, सुरिंदर पाल सिंह, SHO जसबीर सिंह, प्रिथीपाल सिंह और अमृतसर के झबाल थाने के SHO सतनाम सिंह थे। इन्हीं ने जसवंत को अगवा किया। दो दिन पहले, यानी 4 सितंबर को अवैध ड्रग्स के मामले में एक आरोपी कुलवंत सिंह झबाल थाने लाया गया था। उसने भी CBI को बताया कि DSP जसपाल सिंह और SHO सतनाम सिंह ही खालड़ा को थाने लाए थे। इस मामले में सबसे अहम गवाह बने स्पेशल पुलिस अफसर कुलदीप सिंह। उनकी तैनाती झबाल थाने में सतनाम सिंह के साथ ही थी। कुलदीप ने खालड़ा की हत्या तक के पूरे ब्योरे दिए… कुलदीप सिंह की गवाही इस केस के लिए बहुत अहम साबित हुई। नवंबर 2005 में पटियाला की एक कोर्ट ने 4 आरोपी- सतनाम सिंह , सुरिंदर पाल, जसबीर और प्रिथीपाल को किडनैपिंग के आरोप में 7 साल जेल की सजा सुनाई। जबकी DSP जसपाल सिंह और अमरजीत सिंह को हत्या के आरोप में उम्रकैद की सजा मिली। जबकि संधू ने मामले में फैसला होने से पहले ही 23 मई 1997 को खुदकुशी कर ली थी। जसवंत की पत्नी परमजीत कौर ने हाईकोर्ट में 4 आरोपियों की सजा बढ़ाने की अपील की। 2007 में पंजाब हाईकोर्ट ने अमरजीत सिंह को बरी कर दिया, जबकि 7 साल की सजा पाने वाले चारों आरोपियों की सजा बढ़ाकर उम्रकैद कर दी। आरोपी पुलिस अधिकारी हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट गए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने 11 अप्रैल 2011 को उनकी अपील खारिज कर दी और हाईकोर्ट का फैसला बरकरार रखा। CBI ने अंतरिम रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट को बताया, ‘2097 लाशों का लावारिस की तरह अंतिम संस्कार किया गया था। अकेले तरनतारन में 984 लाशों को 'लावारिस' के बतौर जलाया गया। पुलिस ने बड़ी संख्या में बेकसूर लोगों की हत्या की थी।’ जसवंत की कहानी को फिल्म सतलुज के लिए लिखने वाले नीरेन भट्ट का कहना है, ‘इसमें एंटी-नेशनल जैसा कुछ नहीं है, ये एक बैंकर की कहानी है, जो गैर-कानूनी तरीके से मारे गए लोगों के परिवारों के लिए लड़े। फिर भी इसे रिलीज के बाद महज 48 घंटे में हटा दिया गया। सवाल-3: सतलुज को रिलीज के 48 घंटे के भीतर हटाना क्यों पड़ा? जवाब: 'सतलुज' फिल्म का मूल नाम 'घल्लूघारा' था, इसका मतलब होता है- नरसंहार। पंजाब में सिखों के कथित नरसंहार को लेकर ये शब्द प्रचलित है। फिल्म के घल्लूघारा से पंजाब 95 और सतलुज तक 3 बार नाम बदलने और रिलीज को लेकर 4 साल से विवाद चल रहा है… रिलीज के एक ही दिन बाद फिल्म में लीड एक्टर दिलजीत दोसांझ ने सोशल मीडिया पर कहा, ‘अबतक सतलुज नहीं देखी, तो जल्द देख लें। सोमवार, 6 जुलाई तक इसे हटाया जा सकता है।’ इससे पहले ही रविवार शाम को सतलुज ZEE5 पर भारत में स्ट्रीम होना बंद हो गई। ZEE5 ने बयान में कहा, 'मौजूदा घटनाक्रम को देखते हुए, सतलुज भारत में अगली इन्फॉर्मेशन तक अवेलेबल नहीं होगी। हम इसको जल्दी वापस लाने के लिए कानूनी प्रक्रिया के तहत हरसंभव कोशिश करेंगे।' नीरेन भट्ट कहते हैं, 'ZEE5 से किसी ने फिल्म रोकने के लिए कहा। साफ है कि CBFC या सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय में किसी अधिकारी ने इसमें दखल दिया। CBFC वाले नहीं बताते कि उन्हें फिल्म में क्या आपत्तिजनक लगा या ये फैसले कौन ले रहा है। RSVP मूवीज के एक प्रवक्ता के मुताबिक, ‘फिल्म को सरकार ने हटाया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, ’ये फैसला इसलिए हुआ, क्योंकि फिल्म के कुछ हिस्सों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ हो सकता है।' एक सरकारी ऑफिसर ने कहा, 'CBFC के सर्टिफिकेट के बिना फिल्म चुपचाप OTT पर रिलीज हुई। OTT CBFC के अधिकार क्षेत्र में नहीं है। इसलिए सरकार के संज्ञान में आने के बाद ZEE5 से फिल्म हटाने को कहा गया।' सवाल-4: आखिर कैसे तय होता है कि कोई फिल्म देश-विरोधी है? जवाब: सिनेमाघरों में किसी फिल्म को रिलीज करने के लिए सर्टिफिकेट मिलेगा या नहीं, यह सिनेमैटोग्राफ एक्ट, 1952 के प्रावधानों से तय होता है। इस कानून में ‘एंटी-इंडिया फिल्म’ जैसा कोई शब्द नहीं है। हालांकि इसकी धारा 5B के मुताबिक, CBFC किसी फिल्म की रिलीज पर तभी रोक लगा सकता है, जब वह- वहीं OTT पर रिलीज होने वाले कॉन्टेंट की निगरानी IT एक्ट के जरिए होती है। धारा 69A से केंद्र सरकार को देश की संप्रभुता, सुरक्षा वगैरह के आधार पर कॉन्टेंट का ब्रॉडकास्ट रोकने की ताकत मिलती है। OTT प्लेटफॉर्म खुद भी कंटेंट हटा सकते हैं। कोर्ट में जसवंत सिंह खालड़ा का केस लड़ चुके सीनियर एडवोकेट राजविंदर सिंह बेंस कहते हैं, ‘अगर फिल्म की कोई बात पसंद न आए, तो उसे दबा देना समाधान नहीं है। यह फिल्म कहानी का दूसरा पहलू दिखाती है। केपीएस गिल कई लोगों के लिए हीरो हैं, जबकि पंजाब में सबसे बड़े विलेन हैं। फिल्म को दबाने से साफ है कि सच बाहर आने का डर है।’ वहीं सुप्रीम कोर्ट में सीनियर एडवोकेट विनीत जिंदल के मुताबिक, 'फिल्म में अलगाववादी या आतंकवादी विचारधारा के लिए सहानुभूति वाले सीन हो, तो सवाल उठना भी जरूरी है। अभिव्यक्ति की आजादी के साथ नेशनल सिक्योरिटी और संवेदनशील ऐतिहासिक घटनाओं के लिए भी जिम्मेदार होना चाहिए।' सवाल-5: क्या ये फिल्म दोबारा रिलीज हो सकती है? जवाब: हां, इसके दो तरीके हैं- या तो CBFC के मुताबिक, फिल्म में कट्स लगा दिए जाएं या हाईकोर्ट में अपील की जाए। नीरेन भट्ट का कहना है कि वे लोग हाईकोर्ट जाने की तैयारी में है। जी-5 का भी कहना है कि वे फिल्म को वापिस अपने प्लेटफॉर्म पर लाने की हर संभव कोशिश कर रहे हैं। पहले भी ऐसे मामले हुए हैं, जब CBFC के सर्टिफिकेट न देने पर फिल्म मेकर्स कोर्ट गए और केस जीते। 2016 में आई फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ में CBFC ने 94 कट्स लगाने के निर्देश दिए थे। हालांकि कोर्ट ने सिर्फ 1 कट और 3 डिस्क्लेमर के साथ रिलीज की इजाजत दे दी थी। ---------- ये खबर भी पढ़िए… आज का एक्सप्लेनर:गुलाबी पेट्रोल, टैंक में चींटी के वीडियो वायरल; सरकार पेट्रोल में जबरन एथेनॉल मिलाने पर क्यों तुली है, पीछे की पूरी कहानी कहीं गुलाबी रंग का पेट्रोल, कहीं टैंक से चिपकी चीटियां, कहीं पेट्रोल के साथ दिखता पानी। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियोज वायरल हैं और सभी के साथ एक ही नाम जुड़ा है- एथेनॉल। इन वीडियोज की असलियत संदिग्ध हो सकती है, लेकिन देश में एथेनॉल पर बहस बिल्कुल असली है। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 7 Jul 2026 6:40 pm

शुक्र है पीएम मोदी पर कोई कॉपीराइट नहीं! जब इंडोनेशियन राष्ट्रपति ने सरेआम खोला यह बड़ा राज, ठहाकों से गूंज उठा पूरा हॉल

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों से एक बेहद दिलचस्प और दिल छू लेने वाला वाकया सामने आया है, जिसने वैश्विक मंच पर भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बढ़ती लोकप्रियता को एक बार फिर साबित कर दिया है। एक हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय समिट के दौरान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने खुले मंच से यह स्वीकार किया कि वह अपनी नीतियों और शासन व्यवस्था में पीएम मोदी को फॉलो यानी कॉपी करते हैं। उन्होंने बेहद मजाकिया लहजे में कहा कि यह भगवान का शुक्र है कि प्रधानमंत्री मोदी पर कोई कॉपीराइट नहीं है, वरना हम बड़ी मुश्किल में पड़ जाते। इस अनूठे खुलासे के बाद कार्यक्रम में मौजूद तमाम वैश्विक नेताओं और मेहमानों के ठहाकों से पूरा हॉल गूंज उठा।वैश्विक मंच पर जब इंडोनेशियाई राष्ट्रपति ने बांधे तारीफों के पुलयह ऐतिहासिक वाकया दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों और आपसी तालमेल को मजबूत करने के लिए आयोजित एक समिट के दौरान हुआ। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में भारत की डिजिटल क्रांति, जन कल्याणकारी योजनाओं और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में पीएम मोदी के नेतृत्व में जो मुकाम हासिल किया है, वह दुनिया के विकासशील देशों के लिए एक बेहतरीन रोल मॉडल (Role Model) है। इसी विकास मॉडल से प्रभावित होकर इंडोनेशिया भी अपनी कई राष्ट्रीय योजनाओं को भारत की तर्ज पर ही तैयार कर रहा है।'कॉपीराइट' वाले बयान पर क्यों ठहाके लगाने लगे वैश्विक नेता?संबोधन के दौरान जब इंडोनेशियाई राष्ट्रपति ने हल्के-फुल्के अंदाज में पीएम मोदी की नकल करने की बात कही, तो हॉल का माहौल बेहद खुशनुमा हो गया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की काम करने की गति, जनता से जुड़ने का अनूठा अंदाज और उनकी दूरदर्शी सोच इतनी प्रभावी है कि कोई भी राष्ट्रप्रमुख उनसे प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकता। उन्होंने मुस्कुराते हुए पीएम मोदी की तरफ देखा और कहा कि हम आपकी अच्छी नीतियों को अपने देश में लागू कर रहे हैं, और हमें खुशी है कि इसके लिए हमें किसी 'बौद्धिक संपदा अधिकार' या कॉपीराइट (Copyright) के उल्लंघन का नोटिस नहीं मिलेगा। इस मजेदार टिप्पणी पर खुद पीएम मोदी भी अपनी हंसी नहीं रोक पाए।भारत के 'डिजिटल इंडिया' और 'यूपीआई' मॉडल के दीवाने हैं कई देशयह कोई पहला मौका नहीं है जब किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष ने पीएम मोदी या भारत की नीतियों की इस तरह सराहना की हो। इंडोनेशिया विशेष रूप से भारत के डिजिटल पेमेंट सिस्टम (UPI), वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) के लिए चलाई जा रही जनधन योजना और कोविड प्रबंधन के दौरान अपनाई गई तकनीकी रणनीतियों का बहुत बड़ा प्रशंसक रहा है। इंडोनेशियाई राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि वे अपने देश के आर्थिक और सामाजिक ढांचे को मजबूत करने के लिए भारत के साथ मिलकर कई अन्य घरेलू तकनीकी परियोजनाओं (Geographical & Digital Joint Ventures) पर भी काम कर रहे हैं।बढ़ता वैश्विक कद और भारत की 'सॉफ्ट पावर' का नया प्रदर्शनअंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकारों (Global Dynamic Analysts) का मानना है कि विदेशी मंचों पर भारत के प्रधानमंत्री को मिलने वाला यह सम्मान और उनकी नीतियों को अपनाने की अन्य देशों की यह इच्छा, असल में भारत की मजबूत होती 'सॉफ्ट पावर' (Soft Power) का सीधा प्रमाण है। आज दुनिया के बड़े-बड़े देश भारत की विकास यात्रा को न केवल करीब से देख रहे हैं, बल्कि अपने यहां भी उसे दोहराने की कोशिश कर रहे हैं। इंडोनेशियाई राष्ट्रपति का यह बयान दिखाता है कि भारत अब केवल वैश्विक एजेंडा का हिस्सा नहीं है, बल्कि वह दुनिया के सामने विकास की नई परिभाषा तय कर रहा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 7 Jul 2026 5:06 pm

बांग्लादेश में फिर फूटा बारूद, 'जुलाई क्रांति' के छात्रों की रैली में जोरदार बम धमाका, दहल उठा इलाका

पड़ोसी देश बांग्लादेश में तख्तापलट और राजनीतिक बदलाव के बाद भी हिंसक घटनाओं का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। देश में अमन-चैन बहाली की कोशिशों के बीच एक बार फिर से बम धमाके की गूंज सुनाई दी है, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। ताजा मामला 'जुलाई क्रांति' (July Revolution) के छात्र आंदोलनकारियों से जुड़ा हुआ है। अपनी ऐतिहासिक जीत और संघर्ष की याद में छात्रों द्वारा निकाली जा रही एक शांतिपूर्ण रैली को निशाना बनाकर अज्ञात हमलावरों ने बम से हमला कर दिया, जिससे चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई।छात्रों की रैली को बनाया निशाना, अचानक हुआ जोरदार धमाकास्थानीय मीडिया और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली जानकारी के अनुसार, बांग्लादेश के एक प्रमुख शहर में छात्र संगठन के बैनर तले सैकड़ों युवा 'जुलाई क्रांति' के शहीदों को याद करने और अपनी लोकतांत्रिक मांगों को लेकर मार्च निकाल रहे थे। रैली जैसे ही एक व्यस्त चौराहे के पास पहुंची, तभी अचानक एक के बाद एक जोरदार धमाके हुए। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यह हमला बेहद योजनाबद्ध तरीके से किया गया था ताकि छात्रों के बीच खौफ का माहौल पैदा किया जा सके।बम विस्फोट में 3 छात्र गंभीर रूप से घायल, अस्पताल में भर्तीइस अचानक हुए कायरतापूर्ण बम विस्फोट की चपेट में आने से रैली में शामिल कम से कम तीन छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। धमाका इतना जबरदस्त था कि छर्रे लगने के कारण घायल छात्र खून से लथपथ होकर जमीन पर गिर पड़े। घटना के तुरंत बाद सहमे हुए साथियों और स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को नजदीकी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों की टीम उनका इलाज कर रही है। अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, दो छात्रों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।घटनास्थल पर भारी पुलिस बल तैनात, सुरक्षा एजेंसियां अलर्टधमाके की सूचना मिलते ही बांग्लादेश की सुरक्षा एजेंसियां, दंगा नियंत्रण पुलिस और सेना के जवान बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुंच गए। सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को चारों तरफ से घेरकर (Cordoned Off) सील कर दिया है और चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। बम निरोधक दस्ते (Bomb Disposal Squad) ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि किस तरह के विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया था। इस घटना के बाद से पूरे देश के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को हाई-टेंशन मोड पर डाल दिया गया है।छात्रों में भारी आक्रोश, देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की चेतावनीइस कायरतापूर्ण हमले के बाद बांग्लादेश के छात्र समुदाय और आम नागरिकों में बेहद भारी गुस्सा और आक्रोश देखा जा रहा है। छात्र नेताओं ने कार्यवाहक सरकार और कानून व्यवस्था संभालने वाली एजेंसियों को आड़े हाथों लेते हुए दोषियों को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार करने का अल्टीमेटम दिया है। छात्रों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर हमलावरों को तुरंत सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो वे एक बार फिर देशव्यापी आंदोलन और सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करने के लिए मजबूर होंगे, जिससे देश की कानून व्यवस्था एक बार फिर चरमरा सकती है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 7 Jul 2026 5:00 pm

His elder brother Yonatan was even more formidable than Benjamin Netanyahu: Here is how he snatched 102 Jews from the clutches of Uganda's cannibalistic dictator Amin.

इज़राइल के नेशनल हीरो: भाई की याद में बदला गया ऑपरेशन का नामयोनातन नेतन्याहू इस ऐतिहासिक मिशन में शहीद होने वाले एकमात्र इज़राइली सैनिक थे। उनकी इस शहादत और अदम्य साहस के सम्मान में इज़राइल सरकार ने इस मिशन का नाम बदलकर 'ऑपरेशन योनातन' रख दिया था। आज भी इज़राइल में उन्हें एक महान राष्ट्रीय नायक (National Hero) के रूप में पूजा जाता है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक जीवन और उनकी सख्त रणनीतियों पर उनके बड़े भाई योनातन की इस जांबाज विरासत का बहुत गहरा असर माना जाता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 7 Jul 2026 2:19 pm

चीन में कुदरत का रौद्र रूप: 'बावी' और 'मेसक' तूफान का भीषण कहर

चीन इस समय प्रकृति के सबसे विनाशकारी रूप का सामना कर रहा है। देश के कई हिस्सों में मानसूनी बारिश, चक्रवाती बवंडर और 'बावी' व 'मेसक' तूफानों ने ऐसा हाहाकार मचाया है कि हंसते-खेलते इलाके मलबे और पानी के समंदर में तब्दील हो चुके हैं। उत्तर-पश्चिमी चीन से लेकर दक्षिणी हिस्सों तक हर तरफ सिर्फ तबाही का मंजर दिखाई दे रहा है। हालात की गंभीरता को देखते हुए चीनी सरकार ने रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए सेना और हाई-टेक ड्रोनों को मैदान में उतारा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 7 Jul 2026 1:59 pm

खामेनेई की अंतिम विदाई में दिखे वे चेहरे जिन्हें मृत बताया गया था, अहमदीनेजाद समेत तीन नेताओं की मौजूदगी से उठे सवाल

पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद अंतिम यात्रा में शामिल होते हुए दिखाई दिए। हालिया संघर्ष के दौरान कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया था कि वह इजराइली हमले में मारे गए हैं। उस समय इन दावों पर ईरान की ओर से विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।

देशबन्धु 7 Jul 2026 1:47 pm

भारत-जापान के बीच हुई पहली रक्षा सह-विकास डील, अब भारत में बनेंगे यूनिकॉर्न नौसैनिक कम्युनिकेशन मास्ट

भारत और जापान ने रक्षा क्षेत्र में संयुक्त रूप से उपकरण विकसित करने के लिए अपना पहला द्विपक्षीय समझौता किया है, जिसे दोनों देशों के बीच तेजी से मजबूत हो रही रणनीतिक और सुरक्षा साझेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

देशबन्धु 7 Jul 2026 1:21 pm

ट्रंप के दखल से अमेरिकी खिलाड़ी का रेड कार्ड रद्द? फीफा के फैसले पर उठे निष्पक्षता के सवाल

25 वर्षीय फोलारिन बालोगुन को पिछले नॉकआउट मुकाबले में बोस्निया के खिलाफ रेड कार्ड दिखाया गया था। सामान्य परिस्थितियों में उन्हें अगले मैच से निलंबित रहना चाहिए था, लेकिन अनुशासनात्मक समीक्षा के बाद फीफा ने उन्हें बेल्जियम के खिलाफ खेलने की मंजूरी दे दी।

देशबन्धु 7 Jul 2026 1:11 pm

30 अरब रुपये की रिश्वत लेने वाले पूर्व अधिकारी को मौत की सजा, 30 साल तक पद का किया दुरुपयोग

चीन के जियांग्सू प्रांत के चांगझोउ इंटरमीडिएट पीपुल्स कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि यांग यौलिन ने वर्ष 1993 से 2023 के बीच करीब 2.21 अरब युआन (लगभग 325 मिलियन अमेरिकी डॉलर या करीब 30 अरब रुपये) की रिश्वत और अवैध लाभ हासिल किए।

देशबन्धु 7 Jul 2026 12:57 pm

मिस्र के रेगिस्तान में मिला बाइजेन्टाइन युग का एक शहर

मिस्र के पुरातत्विदों ने दो बेहद अहम खोज की हैं. इसमें पूरा का पूरा प्राचीन शहर और एक जगह कई कब्रें मिली हैं. मिस्र को उम्मीद है कि इन नई खोजों से उसके पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा

देशबन्धु 7 Jul 2026 10:31 am

इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी से बढ़ी यूक्रेन की मुश्किलें, कीव पर रूसी बैलिस्टिक हमले में 28 की मौत

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने बताया कि रूस ने इस हमले के दौरान कुल 68 मिसाइलें और 351 अटैक ड्रोन लॉन्च किए। यूक्रेनी वायुसेना ने 37 मिसाइलों और 326 ड्रोन को मार गिराने या उनके रास्ते से भटकाने का दावा किया, लेकिन बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने में सफलता नहीं मिली।

देशबन्धु 7 Jul 2026 10:08 am

जकार्ता में पीएम मोदी का भव्य तरीके से हुआ औपचारिक स्वागत, राष्ट्रपति सुबियांतो के साथ करेंगे द्विपक्षीय बैठक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दौरे के पहले चरण में जकार्ता पहुंच चुके हैं। जकार्ता में पीएम मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया गया

देशबन्धु 7 Jul 2026 9:51 am

Crude Oil Price Today: अमेरिका-ईरान में फिर बढ़ा तनाव, होर्मुज में टैंकरों पर मिसाइल हमले के बाद उछले कच्चे तेल के दाम; जानें आज का ताजा रेट

ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों को लेकर एक बार फिर बड़ी हलचल शुरू हो गई है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी अस्थायी युद्धविराम और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बनी सहमति के बाद तेल की कीमतें $115 से गिरकर $70 प्रति बैरल के नीचे आ गई थीं। लेकिन आज यानी 07 जुलाई 2026 को बाजार का रुख एक बार फिर बदल गया है और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में अचानक तेजी लौट आई है। भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) दोबारा बढ़ने से कच्चे तेल के दाम फिर से चढ़ने लगे हैं।ब्रेंट क्रूड और WTI क्रूड के दामों में आई तेजीआज सुबह के कारोबारी सत्र में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़त दर्ज की गई है:ब्रेंट क्रूड (Brent Crude): ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड का भाव 0.76 फीसदी की तेजी के साथ $72.77 प्रति बैरल पर पहुंच गया है।WTI क्रूड (WTI Crude): अमेरिकी क्रूड यानी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट के दाम में आज $0.71 का उछाल आया है, जिससे एक बैरल तेल की कीमत $69.28 पर पहुंच गई है।होर्मुज स्ट्रेट में कमर्शियल जहाजों पर मिसाइल हमला बनी वजहकच्चे तेल की कीमतों में आज आई इस अचानक तेजी की मुख्य वजह होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे दो कमर्शियल तेल टैंकरों पर हुए मिसाइल हमले हैं। इस घटना के बाद ओमान तट के पास सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। दरअसल, ईरान की ओर से लगातार यह चेतावनी दी जा रही थी कि विदेशी जहाज केवल उनके द्वारा तय किए गए समुद्री रास्तों का ही इस्तेमाल करें और ओमान तट के पास के उन रास्तों से गुजरना बंद कर दें जिन्हें अमेरिका ने सुरक्षित घोषित किया है। इस नए हमले के बाद होर्मुज में तनाव चरम पर पहुंच गया है, जिसका सीधा असर तेल की कीमतों पर दिख रहा है।डोनाल्ड ट्रंप की नई धमकी से भड़का युद्ध का खतराइस तनाव को और हवा तब मिली जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के प्रति एक बार फिर बेहद कड़ा और आक्रामक रुख अपनाया। ट्रंप ने खुले तौर पर चेतावनी दी है कि या तो ईरान तय शर्तों पर अमेरिका के साथ समझौता करे, अन्यथा अमेरिका ईरान को पूरी तरह तबाह कर देगा। अमेरिकी राष्ट्रपति की इस सीधी धमकी के बाद खाड़ी देशों में एक बार फिर से पूर्ण युद्ध भड़कने का खतरा मंडराने लगा है, क्योंकि ईरान भी किसी भी कीमत पर पीछे हटने या झुकने को तैयार नहीं दिख रहा है।UAE और ओपेक प्लस (OPEC+) की बढ़ी सप्लाई भी पड़ सकती है फीकीबाजार के विशेषज्ञों और कमोडिटी जानकारों का कहना है कि वर्तमान में ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की आपूर्ति (Supply) काफी बेहतर स्थिति में है, जिसने कीमतों को एक सीमित दायरे में बांध रखा था। ओपेक प्लस देशों के साथ मिलकर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने जून महीने में अपना कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाकर 38 लाख बैरल प्रतिदिन करने का बड़ा फैसला लिया था।बाजार में इस अतिरिक्त सप्लाई के आने से तेल के दाम कुछ हद तक नियंत्रित थे और आम उपभोक्ताओं को राहत मिल रही थी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच यह तल्खी और बढ़ती है और होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा ब्लॉक किया जाता है, तो ओपेक की यह सप्लाई भी कीमतों को बढ़ने से नहीं रोक पाएगी। आने वाले दिनों में कच्चे तेल का ग्राफ एक बार फिर $80 के पार जा सकता है, जिसके संकेत आज के बाजार से मिलने शुरू हो गए हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 7 Jul 2026 8:52 am

होर्मुज स्ट्रेट में फिर भड़का तनाव, ईरानी मिसाइलों ने दो कारोबारी जहाजों को बनाया निशाना

अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि दोनों कारोबारी जहाजों पर ईरानी मिसाइलों से हमला किया गया, जिससे उन्हें गंभीर नुकसान पहुंचा। हालांकि शुरुआती जानकारी के अनुसार, दोनों जहाजों पर सवार चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।

देशबन्धु 7 Jul 2026 8:50 am

NATO बैठक से पहले ट्रंप का बड़ा दावा! बोले- पुतिन और जेलेंस्की दोनों चाहते हैं युद्ध का अंत

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनका मानना है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की, दोनों ही यूक्रेन युद्ध खत्म करना चाहते हैं

देशबन्धु 7 Jul 2026 8:10 am

क्रिप्टो भविष्य की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा: ट्रंप

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को अपनी सरकार के क्रिप्टोकरेंसी को समर्थन देने के फैसले का जोरदार बचाव किया। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका इस क्षेत्र में दुनिया का नेता नहीं बना तो चीन इस तेजी से बढ़ते उद्योग पर कब्जा कर सकता है।

देशबन्धु 7 Jul 2026 6:50 am

हमास ने गाजा की इमरजेंसी सरकार भंग की, प्रशासन नेशनल कमेटी को सौंपने का ऐलान

हमास ने गाजा में बनी इमरजेंसी गवर्नमेंट कमेटी को भंग कर दिया है और गाजा पट्टी का एडमिनिस्ट्रेशन नेशनल कमेटी को ट्रांसफर करने की घोषणा की।

देशबन्धु 7 Jul 2026 6:30 am

कतर से मिले 'बोइंग 747-8' को मियामी में सजाना चाहते हैं ट्रंप, लेकिन एयर फोर्स वन के इस प्रोजेक्ट में हैं बड़ी अड़चनें

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं को लेकर सुर्खियों में हैं। हाल ही में उन्होंने कतर (Qatar) द्वारा अमेरिका को उपहार में दिए गए अत्याधुनिक बोइंग 747-8 (Boeing 747-8) विमान से अपनी आधिकारिक यात्राएं शुरू कर दी हैं। जरूरी बदलावों और कड़ी टेस्टिंग के बाद इस विशाल विमान को अमेरिकी राष्ट्रपति के 'एयर फोर्स वन' बेड़े में शामिल कर लिया गया है। लेकिन, ट्रंप की योजना सिर्फ इस विमान में सफर करने तक सीमित नहीं है; वह इसे अपने एक खास ड्रीम प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाना चाहते हैं।मियामी की प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी में विमान प्रदर्शित करने का प्लानप्रसिद्ध अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की एक ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रंप की दिली ख्वाहिश है कि कतर से मिले इस बोइंग विमान को रिटायरमेंट के बाद मियामी (Miami) में बनने वाली उनकी अपकमिंग 'प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी' में प्रदर्शित किया जाए। ट्रंप चाहते हैं कि यह विमान उनकी विरासत के एक शानदार प्रतीक के तौर पर मियामी में रखा जाए, जिसे लोग करीब से देख सकें।राह में खड़ी हैं राजनीतिक और सैन्य चुनौतियांहालांकि, ट्रंप का यह सपना जितना भव्य है, इसे हकीकत में बदलना उतना ही जटिल है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट बताती है कि एक विशालकाय बोइंग विमान को मियामी के किसी सिविलियन या लाइब्रेरी एरिया में शिफ्ट करना और उसे स्थायी तौर पर प्रदर्शित करना आसान नहीं है। इस योजना के रास्ते में कई गंभीर राजनीतिक (Political), सैन्य (Military) और लॉजिस्टिकल (Logistical) चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं। फिलहाल, यह विमान अमेरिका के अस्थायी 'एयर फोर्स वन' के रूप में अपनी सेवाएं दे रहा है और सुरक्षा कारणों से सेना इसे इतनी आसानी से किसी सार्वजनिक प्रदर्शनी के लिए नहीं सौंप सकती।नए बोइंग प्रोजेक्ट में क्यों हो रही है देरी?यह पूरा मामला इसलिए भी पेचीदा हो गया है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति के लिए तैयार हो रहे नए विमानों के प्रोजेक्ट में भारी देरी चल रही है। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान ही, साल 2017 में पुराने एयर फोर्स वन बेड़े को बदलने की कवायद शुरू कर दी थी। उन्होंने इसके लिए बोइंग को अगली पीढ़ी के दो नए प्रेसिडेंशियल विमानों का ऑर्डर दिया था।कार्यकाल के अंत तक ही मिल पाएंगे नए विमानशुरुआती योजना के विपरीत, बोइंग के इस अति-सुरक्षित प्रोजेक्ट में काफी विलंब हो चुका है। अब इन दोनों नए विमानों के मध्य 2028 तक ही अमेरिकी वायुसेना को सौंपे जाने की उम्मीद है। तकनीकी और लॉजिस्टिक दिक्कतों के चलते ट्रंप को मजबूरी में कतर से मिले इसी बोइंग 747-8 का इस्तेमाल एक अस्थायी एयर फोर्स वन के रूप में करना पड़ रहा है। विडंबना यह है कि जब 2028 में नए विमान बनकर पूरी तरह तैयार होंगे, तब तक राष्ट्रपति ट्रंप का मौजूदा कार्यकाल अपने अंतिम चरण में होगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 7 Jul 2026 6:12 am

ट्रंप का बड़ा ऐलान: सितंबर में अमेरिका आएंगे शी चिनफिंग, व्हाइट हाउस में बनेगा दुनिया का सबसे सुरक्षित 'महाल'

वैश्विक राजनीति के लिहाज से एक बेहद अहम खबर सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने घोषणा की है कि चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग इस साल सितंबर के आखिर में अमेरिका का दौरा करेंगे। ट्रंप ने सिर्फ इस हाई-प्रोफाइल दौरे का ऐलान ही नहीं किया, बल्कि व्हाइट हाउस के कायाकल्प का एक बड़ा 'मास्टरप्लान' भी दुनिया के सामने रखा। उन्होंने बताया कि विदेशी मेहमानों की मेजबानी के लिए व्हाइट हाउस में एक बेहद भव्य और अभेद्य नया 'स्टेट बॉलरूम' (State Ballroom) बनाया जाएगा।24 सितंबर को वाशिंगटन पहुंच सकते हैं चिनफिंगरोज गार्डन में आयोजित एक लंच कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने दुनिया के दो सबसे ताकतवर नेताओं की मुलाकात का एजेंडा साफ किया। ट्रंप ने बताया कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग 24 सितंबर के आसपास वाशिंगटन पहुंच रहे हैं। उन्होंने कहा कि चिनफिंग जैसे बड़े वैश्विक नेता को देखने के लिए हजारों लोगों की भीड़ उमड़ेगी। ऐसे बड़े आयोजनों को सुरक्षित और शानदार तरीके से होस्ट करने के लिए ही हमें एक विशाल और अत्याधुनिक बॉलरूम की सख्त जरूरत है।150 साल पुरानी मांग होगी पूरी, अमेरिका दिखाएगा अपनी शानव्हाइट हाउस में जगह की कमी का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका पिछले कई दशकों से बड़े राजकीय आयोजनों (State Dinners) की मेजबानी के लिए संघर्ष कर रहा है। उन्होंने हैरानी जताते हुए कहा कि पिछले 150 सालों से व्हाइट हाउस में एक डेडिकेटेड बॉलरूम बनाने की मांग हो रही थी, जो अब तक पूरी नहीं हुई। किंग चार्ल्स से लेकर दुनिया के तमाम राष्ट्राध्यक्ष यहां आते हैं, ऐसे में अमेरिका के पास एक ऐसी जगह होनी चाहिए जो दुनिया के किसी भी अन्य देश के पास न हो।चीन और ब्रिटेन से भी शानदार होगा व्हाइट हाउस का नया 'बॉलरूम'राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने अंदाज में इस नए प्रोजेक्ट की तुलना चीन और ब्रिटेन की ऐतिहासिक इमारतों से की। चीन के अपने हालिया दौरे का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा, मैं हाल ही में चीन के 'ग्रेट हॉल' में था। उनका बॉलरूम बेहद विशाल और खूबसूरत है। हमारे पास अभी वैसा कुछ नहीं है, लेकिन अब हम जो बॉलरूम बनाने जा रहे हैं, वह दुनिया के बाकी सभी स्थानों पर भारी पड़ेगा। उन्होंने ब्रिटेन के विंडसर कैसल की भव्यता का भी जिक्र किया और कहा कि अमेरिका का नया बॉलरूम इन सबसे कहीं ज्यादा आधुनिक होगा।मिसाइल और ड्रोन से भी रहेगा सुरक्षित, 2028 में होगा तैयारसुरक्षा के मोर्चे पर यह नया बॉलरूम एक अभेद्य किले की तरह होगा। ट्रंप ने इसे वाशिंगटन की सबसे खूबसूरत और ऐतिहासिक इमारत करार दिया। उन्होंने दावा किया कि यह नया स्ट्रक्चर पूरी तरह से मिसाइल-प्रूफ, बुलेटप्रूफ और ड्रोन-प्रूफ होगा। राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए इस प्रोजेक्ट की डिजाइनिंग में शीर्ष सैन्य अधिकारियों और जनरलों की सलाह ली जा रही है।इस मेगा-प्रोजेक्ट के साल 2028 के मध्य तक पूरा होने की उम्मीद है। अपने आलोचकों को करारा जवाब देते हुए ट्रंप ने स्पष्ट किया, कुछ लोग कह रहे हैं कि मैं यह अपने लिए बना रहा हूं, लेकिन असलियत यह है कि मैं इसे अमेरिका के भविष्य के राष्ट्रपतियों के लिए तैयार करवा रहा हूं, ताकि वे शपथ ग्रहण और राजकीय समारोहों को एक सुरक्षित माहौल में आयोजित कर सकें।

न्यूज़ इंडिया लाइव 7 Jul 2026 6:11 am

जयशंकर का बहरीन दौरा: राजा हमद से खास मुलाकात, भारत-बहरीन संबंधों को मिलेगी नई उड़ान

भारत की कूटनीतिक पहुंच को मध्य पूर्व में और अधिक मजबूत करने की दिशा में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर इस समय खाड़ी देशों के एक बेहद महत्वपूर्ण दौरे पर हैं। इसी कड़ी में सोमवार को उन्होंने बहरीन की राजधानी मनामा में बहरीन के राजा हमद बिन ईसा अल खलीफा से एक खास मुलाकात की। इस उच्च स्तरीय बैठक का मुख्य एजेंडा दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और द्विपक्षीय साझेदारी को नई ऊंचाइयों पर ले जाना था।क्राउन प्रिंस को दिए राष्ट्रपति और पीएम के संदेशबहरीन के राजा से चर्चा के अलावा, भारतीय विदेश मंत्री ने क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री सलमान बिन हमद अल खलीफा से भी शिष्टाचार भेंट की। इस दौरान जयशंकर ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरफ से बहरीन के नेतृत्व को शुभकामनाएं प्रेषित कीं। दोनों नेताओं के बीच बातचीत में व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग को और अधिक गहरा करने पर जोर दिया गया।भारतीय समुदाय को बताया 'जीवंत सेतु'बहरीन में एक बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं जो वहां की अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान दे रहे हैं। जयशंकर ने बहरीन के नेतृत्व और राजा हमद का विशेष रूप से आभार जताया कि उन्होंने भारतीय समुदाय की सुरक्षा, कल्याण और हितों का हमेशा ध्यान रखा है। जयशंकर ने कहा कि बहरीन के राजा का कुशल मार्गदर्शन भारत और बहरीन के रिश्तों को लगातार आगे बढ़ा रहा है। अपने दौरे में विदेश मंत्री ने प्रवासी भारतीयों के प्रतिनिधियों से भी सीधा संवाद किया और उन्हें दोनों देशों को जोड़ने वाला एक 'जीवंत सेतु' करार दिया।क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापार पर विदेश मंत्री से मंथनशीर्ष नेतृत्व से मुलाकात से ठीक पहले, डॉ. जयशंकर ने अपने बहरीन के समकक्ष, विदेश मंत्री अब्दुल्लातिफ बिन राशिद अल जायदानी के साथ एक विस्तृत और अहम बैठक की। इस दौरान दोनों नेताओं ने केवल द्विपक्षीय सहयोग पर ही नहीं, बल्कि तेजी से बदलते क्षेत्रीय घटनाक्रमों (Regional Developments) और आपसी हितों से जुड़े कई वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया।चार खाड़ी देशों की अहम रणनीतिक यात्राआपको बता दें कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर 5 से 10 जुलाई 2026 तक चार प्रमुख खाड़ी देशों—कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान—की अहम रणनीतिक यात्रा पर हैं। भारत के लिए ऊर्जा सुरक्षा, विदेशी निवेश और व्यापार के लिहाज से यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण है। जयशंकर अपने इस बहुआयामी दौरे में क्षेत्रीय नेताओं से मिलकर ऊर्जा आपूर्ति, व्यापारिक साझेदारी और क्षेत्रीय सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम कर रहे हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 7 Jul 2026 6:09 am

वेनेजुएला भूकंप: मौत का आंकड़ा 3500 के पार, मलबे में दबी हैं 50 हज़ार जिंदगियां! खौफनाक है तबाही का मंज़र

दक्षिण अमेरिकी देश वेनेजुएला (Venezuela) में आए भयंकर भूकंप ने जो गहरे जख्म दिए हैं, वे हर गुजरते दिन के साथ और दर्दनाक होते जा रहे हैं। 24 जून को आई इस प्राकृतिक आपदा ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। सोमवार को जारी किए गए ताजा सरकारी आंकड़ों ने दुनिया को सन्न कर दिया है—इस विनाशकारी जलजले में अब तक 3,535 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 16,740 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल अस्पतालों में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं।ला गुएरा में मलबे का ढेर बने पूरे मोहल्लेइस भीषण तबाही का सबसे ज्यादा असर राजधानी काराकास (Caracas) के उत्तर में स्थित ला गुएरा (La Guaira) राज्य में देखने को मिला है। बैक-टू-बैक आए शक्तिशाली झटकों ने गगनचुंबी इमारतों को ताश के पत्तों की तरह ढहा दिया। ग्राउंड जीरो से आ रही तस्वीरें बेहद विचलित करने वाली हैं, जहां कल तक आबाद रहने वाले पूरे के पूरे मोहल्ले आज कंक्रीट और सरियों के मलबे में तब्दील हो चुके हैं।50 हजार लोग लापता, मलबे में अपनों की तलाशइस त्रासदी का सबसे डरावना पहलू वे लोग हैं जिनका अब तक कोई सुराग नहीं मिल सका है। वेनेजुएला सरकार ने अभी तक मलबे में फंसे लोगों का कोई सटीक आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के अनुमान ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है। यूएन के मुताबिक, ला गुएरा और आसपास के प्रभावित इलाकों में मलबे के विशाल पहाड़ों के नीचे अभी भी करीब 50,000 लोग दबे या लापता हो सकते हैं। रेस्क्यू टीमें दिन-रात भारी मशीनों और खोजी कुत्तों की मदद से मलबे में जिंदगियां तलाशने में जुटी हुई हैं।सड़कों और पार्किंग एरिया में रहने को मजबूर 17 हजार सर्वाइवर्सइस प्रलयकारी भूकंप ने 17,000 से अधिक लोगों के सिर से छत छीनकर उन्हें रातों-रात सड़क पर ला दिया है। जिन सर्वाइवर्स की जान बच गई, उनका संघर्ष भी कम नहीं हुआ है। अपना सबकुछ गंवा चुके हजारों परिवार अब खुले आसमान के नीचे, सार्वजनिक पार्कों, सड़कों के किनारे और कार पार्किंग एरिया में बनाए गए अस्थायी कैंपों में शरण लेने को मजबूर हैं।बुनियादी सुविधाओं—जैसे पीने का साफ पानी, खाना और दवाइयों—की भारी कमी के चलते इन कैंपों में जीवन बेहद अमानवीय और कठिन हो गया है। हालांकि स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय राहत एजेंसियां लगातार प्रभावित इलाकों में सहायता पहुंचाने का प्रयास कर रही हैं, लेकिन तबाही का दायरा इतना विशाल है कि स्थिति को काबू में आने में अभी लंबा वक्त लगेगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 7 Jul 2026 6:06 am

सूडान में हिंसा की कीमत चुका रहे मासूम, छह महीने में 330 बच्‍चे ड्रोन हमले का हुए श‍िकार: यूनिसेफ

साल 2026 के पहले छह महीनों में सूडान में कम से कम 330 बच्चे या तो मारे गए या घायल हुए। यूनाइटेड नेशंस चिल्ड्रन्स फंड (यूनिसेफ) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दारफुर और कोर्डोफान राज्यों में बच्चों के हताहत होने की सबसे ज्‍यादा घटनाएं सामने आई हैं।

देशबन्धु 7 Jul 2026 4:20 am

ईरान को ट्रंप की खुली धमकी! बोले- 'या समझौता करो, वरना काम तमाम कर देंगे'

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की अपनी धमकी को फिर से दोहराया और कहा कि अमेरिका या तो ईरान के साथ कोई समझौता करेगा या फिर 'काम तमाम' कर देगा

देशबन्धु 7 Jul 2026 4:16 am

टोक्यो में भारत-जापान मित्रता पर जोर, भारतीय दूतावास ने जापानी संसद सदस्‍यों का जताया आभार

जापान में भारतीय दूतावास ने सोमवार को जापान की संसद (डाइट) के सदस्यों का भारत-जापान साझेदारी को मजबूत करने में दिए गए समर्थन के लिए धन्यवाद किया।

देशबन्धु 7 Jul 2026 3:40 am

चीन के मिसाइल परीक्षण से बढ़ी क्षेत्रीय चिंता, जापान और ताइवान समेत कई देशों ने जताई आपत्ति

चीन की सेना ने सोमवार को परमाणु ऊर्जा से चलने वाली एक पनडुब्बी से सफलतापूर्वक प्रशांत महासागर की ओर एक मिसाइल का परीक्षण किया

देशबन्धु 7 Jul 2026 2:13 am

आज का एक्सप्लेनर:‘हमारे पास भारत है’, नेतन्याहू ने जेडी वेंस को क्यों दिया ऐसा जवाब; भारत-इजराइल की ‘पक्की दोस्ती’ के पीछे की कहानी

5 जुलाई को इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा- अमेरिका ही नहीं, बल्कि हमारे कुछ और दोस्त भी हैं। जैसे- 1.4 अरब आबादी वाला भारत। नेतन्याहू का ये बयान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को जवाब था। वेंस ने पिछले महीने कहा था कि ट्रम्प दुनिया के इकलौते ताकतवर देश के नेता हैं, जो इजराइल से सहानुभूति रखते हैं। आखिर नेतन्याहू ने इकलौते भारत का ही जिक्र क्यों किया, दोनों देशों की ‘पक्की दोस्ती’ के पीछे की कहानी, 4 चैप्टर्स में… भारत-इजराइल में औपचारिक राजनयिक संबंध 1992 में बने, लेकिन उससे काफी पहले से इजराइल मुसीबत में भारत की गुपचुप तरीके से मदद करने लगा था… 1962: जब इजराइली झंडे लगे जहाज हथियार लेकर भारत पहुंचे 1965 और 1971: पाकिस्तान के खिलाफ मोर्टारों की खेप भेजी 1999: कारगिल में इजराइली तकनीक से उड़ाए पाकिस्तानी बंकर इजराइल को 14 मई 1948 को आजादी मिली। संयुक्त राष्ट्र में इजराइल और फिलिस्तीन को बांटकर दो देश बनाने का प्रस्ताव पेश हुआ, तो भारत ने इसके खिलाफ वोट किया था। हालांकि, अगले ही साल 17 सितंबर, 1950 को भारत ने आधिकारिक रूप से इजराइल को एक संप्रभु राष्ट्र के बतौर मान्यता दी। 'इंडिया इजराइल पॉलिसी' नाम की किताब लिखने वाले भारत के फॉरेन एक्सपर्ट पी.आर. कुमारस्वामी कहते हैं कि भारत और इजराइल के बीच 1950 से 1992 तक बिना रिश्तों के मान्यता वाला संबंध रहा।' 1971 की जंग में इजराइल ने विदेशी मंचों पर भी भारत का समर्थन किया और पाकिस्तानी सेना के पूर्वी पाकिस्तान (आज का बांग्लादेश) में नरसंहार की आलोचना की थी। इजराइली पीएम गोल्डा मीर चाहती थीं कि इसके बदले इंदिरा गांधी इजराइल को पूर्ण राजनयिक मान्यता दें और औपचारिक राजनयिक संबंध कायम हों। हालांकि तब भारत ने मान्यता नहीं दी। उलटा 1988 में जब फिलिस्तीन देश की घोषणा हुई, तो भारत इसे मान्यता देने वाला पहला गैर-अरब देश था। हालांकि 4 साल बाद स्थिति तब बदलनी शुरू हुई, जब पीएम नरसिम्हा राव ने इजराइल से राजनयिक संबंध बनाए और दोनों देशों में पहली बार दूतावास खोले गए। पीएम मोदी के सत्ता में आने के बाद भारत-इजराइल रिश्तों का एक नया दौर शुरू हुआ। 2015 में इतिहास में पहली बार संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार आयोग में भारत ने फिलिस्तीन में इजराइली हमलों की निंदा करने वाले एक प्रस्ताव पर वोटिंग से परहेज किया। जबकि इसे 45 देशों ने पारित किया था। पीएम मोदी के दौर में इजराइल को खुला समर्थन दिया इजराइली हथियारों की खरीद में भारत की एक-तिहाई हिस्सेदारी भारत-इजराइल के बीच 1 लाख करोड़ का कारोबार 1992 में भारत और इजराइल के बीच द्विपक्षीय रिश्तों की शुरुआत हुई, तब दोनों देशों का व्यापार 202 मिलियन डॉलर का था। 2022-23 तक बढ़कर यह 10.77 बिलियन डॉलर, यानी १ लाख करोड़ पहुंच गया। हालांकि बीते 2 सालों में द्विपक्षीय व्यापार में कमी आई है। इसकी वजह इजराइल-हमास जंग और इसकी वजह से समुद्री रास्ते में आई अड़चने हैं। टाटा, अडाणी जैसी कंपनियों के इजराइल में निवेश नेतन्याहू के बयान के 3 मायने हैं… 1. अकेला पड़ गया है इजराइल: स्ट्रैटजिक एक्सपर्ट ब्रह्म चेलानी के मुताबिक युद्ध के समय नेतन्याहू सरकार के तौर-तरीकों के चलते इजराइल दुनिया में अलग-थलग पड़ गया है। यह लंबे समय में इजराइल के लिए खतरनाक है। वो दूसरे देशों का समर्थन जुटाना चाहता है, इसीलिए भारत का जिक्र किया। भारत और इजराइल के संबंध अहम हैं, लेकिन भारत में इजराइल के लोगों के प्रति सद्भावना है, न कि नेतन्याहू की सरकार के लिए। 2. नेतन्याहू घरेलू राजनीति साध रहे: भारतीय थिंकटैंक ORF में नॉन-रेसिडेंट फेलो और मिडिल ईस्ट मामलों के जानकार कबीर तनेजा कहते हैं, ‘नेतन्याहू के भारत को दोस्त बताने वाले बयान को उनकी घरेलू राजनीति से जोड़कर देखा जाना चाहिए। उन पर मुकदमे चल रहे हैं और चुनाव आने हैं। घरेलू समर्थन कम न हो, इसलिए वे दिखा रहे हैं कि इजराइल अलग-थलग नहीं पड़ा है।' कबीर तनेजा कहते हैं कि इजराइल-भारत की स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप खास तौर पर डिफेंस सेक्टर में है। इजराइल भारत को एडवांस हथियार देता है। ये साझेदारी नेतन्याहू के पहले भी थी और उनके बाद भी रहेगी। 3. भारत की संतुलन की पॉलिसी के लिए मुश्किल: जॉर्डन, लीबिया और रूस में भारत के राजदूत रहे अनिल त्रिगुणायत बताते हैं, ‘नेतन्याहू का का यह बयान भारत को गलत ब्रैकेट में डाल रहा है। भारत ने कभी भी इजराइल को बिना शर्त समर्थन नहीं दिया है। इस बयान के बाद भारत, इजराइल के साथ अपने संबंधों का पुनर्मूल्यांकन कर सकता है।’ दरअसल, भारत बाकी देशों से भी अपने रिश्ते संतुलित रखने की कोशिश करता है। मिसाल के लिए जून 2025 में SCO समिट के दौरान भारत ने ईरान पर इजराइल और अमेरिका के हमलों की निंदा वाले प्रस्ताव से दूरी बनाई। हालांकि सितंबर में दोबारा इसी प्रस्ताव की घोषणा पर भारत ने साइन कर दिए थे। -------- ये खबर भी पढ़िए… आज का एक्सप्लेनर:दर्जनभर लोगों से गुजरकर मुजतबा तक पहुंचती है कोई चिट्ठी; पिता को कंधा देने पर सस्पेंस, क्या इजराइल वाकई मार देगा रान के सुप्रीम लीडर रहे आयतुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की रस्में जारी हैं। 100 से ज्यादा देशों के नेता पहुंच रहे हैं। काले कपड़ों में रोते-बिलखते लाखों ईरानी अपने ‘रहबर’ का आखिरी दीदार करना चाहते हैं। इन सबके बीच ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई गायब हैं। पिता के जनाजे को कंधा देंगे या नहीं, इस पर भी सस्पेंस है। क्या वो जिंदा भी हैं, अगर हां तो किस हाल में, पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 6 Jul 2026 6:23 pm

चीन में तख्तापलट का डर? शी चिनफिंग ने अचानक हटाए 101 टॉप सैन्य कमांडर, सेना में लागू किया 'माओ मॉडल'

चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के भीतर इस समय इतिहास की सबसे बड़ी राजनीतिक उथल-पुथल मची है। राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने अपनी सत्ता और सेना पर पकड़ मजबूत करने के लिए एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए 101 शीर्ष सैन्य अधिकारियों को पद से बर्खास्त या गायब कर दिया है। चीन की सबसे शक्तिशाली सैन्य संस्था 'केंद्रीय सैन्य आयोग' (CMC) के लगभग खाली होने के बाद, चिनफिंग ने सेना की कमान पूरी तरह अपने दो सबसे भरोसेमंद वफादारों— झांग शुगुआंग और वांग गैंग को सौंप दी है।क्या है खतरनाक 'माओ मॉडल' और बंदूक पर चिनफिंग का कब्जा?शी चिनफिंग के इस आक्रामक कदम को चीन के संस्थापक माओ जेदोंग के ऐतिहासिक 'माओ मॉडल' से जोड़कर देखा जा रहा है। इस रणनीति का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि देश की कम्युनिस्ट पार्टी और 20 लाख सैनिकों वाली दुनिया की सबसे बड़ी सेना का हर बड़ा अधिकारी सिर्फ और सिर्फ राष्ट्रपति के प्रति वफादार रहे। साल 2024 में खुद चिनफिंग ने खुलेआम कहा था कि बंदूक सिर्फ वफादार हाथों में ही रहनी चाहिए। सात सदस्यीय टॉप कमांड सेंटर (CMC) में अब प्रभावी रूप से केवल चिनफिंग और उपाध्यक्ष झांग शेंगमिन ही बचे हैं, बाकी सभी सीटें भ्रष्टाचार जांच और अचानक गायब होने के कारण खाली हो चुकी हैं।भारत और ताइवान सीमा पर नई नियुक्तियों का क्या होगा असर?चिनफिंग द्वारा प्रमोट किए गए दोनों जनरलों की भूमिका बेहद संवेदनशील है:वायुसेना प्रमुख वांग गैंग: 61 वर्षीय वांग गैंग एक पूर्व स्टंट पायलट रहे हैं। भारत के साथ लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और ताइवान मोर्चे पर चीनी हवाई तैनाती, लड़ाकू विमानों, ड्रोन, मिसाइल सपोर्ट और हाई-एल्टीट्यूड सैन्य ऑपरेशन्स के सभी बड़े फैसले अब सीधे वांग गैंग के हाथों में होंगे।भ्रष्टाचार जांच प्रमुख झांग शुगुआंग: 67 वर्षीय झांग शुगुआंग को CMC की भ्रष्टाचार निरोधक इकाई का नया बॉस बनाया गया है। इसका सीधा मतलब है कि चिनफिंग की 'सेना-सफाई' मुहिम के तहत अगले दौर की गिरफ्तारियां और जांच अब शुगुआंग के इशारे पर ही होंगी।सेना में खालीपन से कमजोर पड़ा चीन का युद्ध तंत्रथिंक टैंक सीएसआईएस (CSIS) की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी सेना के शीर्ष 176 अहम पदों में से 101 अधिकारियों के हटने से सेना का आंतरिक तालमेल बेहद कमजोर हुआ है। इसका असर चीन की युद्ध तैयारियों पर भी दिखने लगा है। साल 2024 में जहां चीन ताइवान के खिलाफ महज 3 से 4 दिनों में बड़े सैन्य अभ्यास शुरू कर देता था, वहीं साल 2025 और 2026 में शीर्ष कमान में खालीपन के कारण चीन को प्रतिक्रिया देने और युद्धाभ्यास शुरू करने में 12 से 19 दिनों का लंबा वक्त लग गया। अमेरिका के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा रक्षा बजट खर्च करने वाले चीन में इस आंतरिक कलह से उसकी लड़ाकू क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 6 Jul 2026 6:21 pm

भगोड़ा नीरव मोदी हारा आखिरी कानूनी जंग, लंदन से भारत प्रत्यर्पण का रास्ता साफ, किसी भी वक्त होगी वतन वापसी

पंजाब नेशनल बैंक (PNB) को अरबों रुपये का चूना लगाकर देश से भागे हीरा कारोबारी नीरव मोदी की मुश्किलें अब अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई हैं। नीरव मोदी यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स (ECHR) में अपनी आखिरी कानूनी लड़ाई भी पूरी तरह हार गया है। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद अब ब्रिटेन से उसकी भारत वापसी और प्रत्यर्पण का रास्ता पूरी तरह साफ हो चुका है। कानूनी दस्तावेजों के अनुसार, नीरव मोदी के पास मौजूद सभी अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय कानूनी विकल्प अब पूरी तरह खत्म हो गए हैं और ब्रिटिश सरकार उसे किसी भी वक्त भारत को सौंप सकती है।अप्रैल में गुपचुप लगाई थी गुहार, मानवाधिकार अदालत से भी लगा बड़ा झटकाब्रिटेन की निचली अदालतों और हाई कोर्ट से तगड़ा झटका लगने के बाद नीरव मोदी ने अप्रैल 2026 में यूरोपियन कोर्ट ऑफ ह्यूमन राइट्स (ECHR) का दरवाजा खटखटाया था। इस याचिका को अदालत ने शुरुआत में पूरी तरह गुप्त रखा था। नीरव मोदी ने ब्रिटेन की अदालतों में खुद को बचाने के लिए मशहूर 'भंडारी जजमेंट' का हवाला दिया था, जिसमें रक्षा दलाल संजय भंडारी के मामले में भारत की जेलों में प्रताड़ना के डर को आधार मानकर प्रत्यर्पण से इनकार किया गया था। नीरव ने भी यही दलील दी कि भारत की जेलों में उसकी जान को खतरा हो सकता है और उसे प्रताड़ित किया जा सकता है। हालांकि, भारतीय जांच एजेंसी सीबीआई (CBI) के अधिकारियों ने कोर्ट में जेल की स्थितियों को लेकर पुख्ता सबूत और सरकारी आश्वासन पेश किए, जिसके बाद ब्रिटेन के हाई कोर्ट और अब ECHR ने नीरव मोदी के इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया।मार्च 2019 से लंदन की वैंड्सवर्थ जेल में बंद है पीएनबी घोटाले का मास्टरमाइंडनीरव मोदी मार्च 2019 में लंदन में हुई अपनी गिरफ्तारी के बाद से लगातार वहां की कुख्यात 'वैंड्सवर्थ जेल' (Wandsworth Prison) में बंद है। भारत में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) को पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के महाघोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में उसकी लंबे समय से तलाश है। ब्रिटेन की अदालत ने अपनी अंतिम टिप्पणी में साफ कहा कि नीरव मोदी का मामला कोई असाधारण या मानवाधिकार उल्लंघन का मामला नहीं है और इस केस को दोबारा खोलने का कोई ठोस आधार नहीं बचता है।कूटनीतिक औपचारिकताएं शुरू, भारतीय जांच एजेंसियां लाने को तैयारराजनयिक और कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय अदालत से हरी झंडी मिलने के बाद ब्रिटेन के गृह मंत्रालय और प्रशासनिक अधिकारियों ने नीरव मोदी को भारतीय अधिकारियों को सौंपने की अंतिम प्रक्रिया तेज कर दी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में अब सिर्फ कुछ कागजी और प्रशासनिक औपचारिकताएं ही शेष रह गई हैं। भारतीय सुरक्षा और जांच एजेंसियां किसी भी समय लंदन के लिए उड़ान भर सकती हैं और नीरव मोदी को मुंबई या दिल्ली लाकर कानून के शिकंजे में खड़ा किया जा सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 6 Jul 2026 6:17 pm

PoK में गदर की आग पहुंची लंदन: ब्रिटिश सड़कों पर उतरे कश्मीरी, पाकिस्तानी फौज और हुकूमत के खिलाफ खोला मोर्चा

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आटे, बिजली और बुनियादी अधिकारों के लिए लगी गदर की आग अब सात समंदर पार ब्रिटेन की राजधानी लंदन तक पहुंच गई है। पीओके में पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों और मानवाधिकारों के हनन के विरोध में लंदन की सड़कों पर भारी संख्या में कश्मीरी समुदाय के लोग उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी दूतावास के बाहर और मध्य लंदन के प्रमुख इलाकों में पाकिस्तानी फौज के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस गंभीर संकट में दखल देने की अपील की।लंदन में पाकिस्तानी दूतावास के बाहर भारी आक्रोश, सेना को पीछे हटने की मांगब्रिटेन में रह रहे मूल रूप से पीओके के निवासियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में बैनर और तख्तियां थीं, जिन पर पाकिस्तानी सेना द्वारा निर्दोष नागरिकों पर किए जा रहे बल प्रयोग को रोकने की मांग की गई थी। प्रदर्शन के दौरान पाकिस्तानी फौज पीओके खाली करो और कश्मीरियों को इंसाफ दो जैसे नारे गूंजते रहे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस्लामाबाद की सरकार पीओके के प्राकृतिक संसाधनों को लूट रही है और वहां के स्थानीय लोगों को बुनियादी सहूलियतें भी नहीं मिल पा रही हैं।क्यों भड़की है पीओके में गदर की आग?दरअसल, पीओके में पिछले लंबे समय से महंगाई, भारी बिजली बिल, आटे की किल्लत और बेरोजगारी को लेकर आम जनता सड़कों पर है। जब स्थानीय लोगों ने शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन शुरू किया, तो पाकिस्तानी रेंजरों और पुलिस ने उन पर बर्बरतापूर्वक लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े, जिसमें कई नागरिकों की जान चली गई। इसी दमनकारी नीति के विरोध में अब दुनिया भर में रह रहे कश्मीरी एकजुट हो रहे हैं और पाकिस्तानी हुकूमत के दोहरे रवैये को वैश्विक मंच पर बेनकाब कर रहे हैं।वैश्विक मंच पर पाकिस्तान को घेरने की बड़ी तैयारीलंदन में हुए इस बड़े प्रदर्शन को राजनीतिक विश्लेषक पाकिस्तान के लिए एक बड़ा राजनयिक झटका मान रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने ब्रिटिश सरकार और संयुक्त राष्ट्र (UN) को एक ज्ञापन भी सौंपा है, जिसमें पीओके में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की गई है। कश्मीरियों का कहना है कि वे चुप नहीं बैठेंगे और पाकिस्तान के इस दमन चक्र के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे ताकि वहां रह रहे उनके भाई-बहनों को पाकिस्तानी सेना के खौफ से आजादी मिल सके।

न्यूज़ इंडिया लाइव 6 Jul 2026 4:40 pm

सुपर टाइफून का रौद्र रूप: 290 किमी की रफ्तार से टकराई तबाही, समंदर की लहरों ने मचाया हाहाकार

समुद्र में उठे सुपर टाइफून ने भीषण रूप धारण कर लिया है। 290 किलोमीटर प्रति घंटे की तूफानी रफ्तार से तटों से टकराई इस प्राकृतिक आपदा ने हर तरफ तबाही के निशान छोड़ दिए हैं। तेज हवाओं और ऊंची उठती लहरों ने जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है, जिससे तटीय इलाकों के लोग दहशत में हैं।प्रशासन अलर्ट और बचाव कार्य जारीखतरनाक तूफानी हवाओं के कारण घरों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है। स्थानीय प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी कर बचाव अभियान तेज कर दिए हैं। समंदर की उफनती लहरें अभी भी संकट का संकेत दे रही हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 6 Jul 2026 1:13 pm

नाटो समिट से पहले ट्रंप का मेलोनी पर बड़ा पोस्ट, पुरानी फोटो वायरल होने से मचा सियासी घमासान

नाटो शिखर सम्मेलन शुरू होने से ठीक पहले डोनाल्ड ट्रंप ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ अपनी एक पुरानी तस्वीर साझा कर हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप के इस पोस्ट ने सोशल मीडिया पर भारी हंगामा खड़ा कर दिया है। राजनीतिक गलियारों में इस अचानक आई पोस्ट के मायने तलाशे जा रहे हैं, जिसे कुछ लोग नाटो की एकजुटता के लिए एक संदेश के रूप में देख रहे हैं।क्यों हो रही है चर्चा?यह पोस्ट ऐसे समय पर आई है जब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीतिक तनाव गहराया हुआ है। ट्रंप और मेलोनी के बीच के रिश्तों को लेकर दुनिया भर के मीडिया में नई बहस छिड़ गई है, जिससे नाटो समिट की गंभीरता और भी बढ़ गई है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 6 Jul 2026 12:52 pm

ट्रंप से 90 मिनट की बातचीत के बाद पुतिन का घातक हमला, नाटो बैठक से पहले यूक्रेन में मचा कोहराम

डोनाल्ड ट्रंप के साथ करीब 90 मिनट की टेलीफोनिक बातचीत के तुरंत बाद व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन पर मिसाइलों की बौछार कर दी है। नाटो की आगामी हाई-लेवल बैठक से ठीक पहले हुए इस भीषण हमले ने कीव समेत कई शहरों को दहला दिया है। यह सैन्य कार्रवाई वैश्विक कूटनीति के लिए एक बड़े संदेश के रूप में देखी जा रही है।युद्ध का बढ़ता दायराइस अचानक हुए हमले से यूक्रेन में भारी तबाही की खबर है और क्षेत्रीय तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पुतिन की इस आक्रामकता ने सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि नाटो की बैठक से ठीक पहले हुई यह गोलाबारी पूरे यूरोप के लिए बड़ा खतरा बन गई है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 6 Jul 2026 12:50 pm

इंडोनेशिया में पीएम मोदी: 90% मुस्लिम आबादी के बीच कैसे जीवित हैं राम-महाभारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इंडोनेशिया यात्रा भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' को नई ऊंचाई देने के लिए अहम है। इंडोनेशिया दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम बहुल देश है, लेकिन यहाँ की संस्कृति में भारतीय जड़ों की गहरी छाप है। रामायण और महाभारत यहाँ के लोगों के लिए सिर्फ धर्मग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने का दर्शन हैं, जो कला और लोक-परंपराओं में आज भी रचे-बसे हैं।सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासतइंडोनेशियाई संस्कृति में राम और कृष्ण की गाथाओं का इतना गहरा प्रभाव है कि वे इस्लाम के साथ पूरी तरह से एकीकृत हो चुकी हैं। राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ पीएम मोदी का प्रंबनन मंदिर दौरा दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को नई मजबूती प्रदान करेगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 6 Jul 2026 12:48 pm

इजरायल को 'अकेला' समझने की भूल कर बैठा अमेरिका, जेडी वेंस की हेकड़ी निकाल पीएम नेतन्याहू ने भारत का नाम लेकर दिया ऐसा करारा जवाब!

अमेरिका और इजरायल के बीच ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंध जगजाहिर हैं, लेकिन अमेरिकी प्रशासन अक्सर यह जताने से बाज नहीं आता कि इजरायल का अस्तित्व केवल उसकी बदौलत है. हाल ही में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने एक इंटरव्यू के दौरान इजरायल पर तंज कसते हुए कहा था कि इस वक्त दुनिया में डोनाल्ड ट्रंप ही इजरायल के प्रति सहानुभूति रखने वाले एकमात्र राष्ट्राध्यक्ष हैं और अमेरिका की मदद के बिना इजरायल दुश्मनों से नहीं बच सकता. इस पर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी दावे की हवा निकालते हुए भारत का नाम लेकर ऐसा करारा जवाब दिया है कि वाशिंगटन में हड़कंप मच गया है.जेडी वेंस ने इजरायल को दी नसीहत, सैन्य सहायता की दिलाई याददरअसल, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में इजरायली नेताओं से अमेरिका-ईरान शांति समझौते की सार्वजनिक आलोचना बंद करने को कहा था. वेंस ने इजरायल को चेतावनी भरे लहजे में कहा, आप केवल 90 लाख की आबादी वाला देश हैं और हर राष्ट्रीय सुरक्षा समस्या को सिर्फ जंग से हल नहीं कर सकते. उन्होंने याद दिलाया कि इजरायल के दो-तिहाई सुरक्षात्मक हथियार अमेरिकी करदाताओं के पैसे से बने हैं. वेंस ने हिजबुल्लाह पर हुए हमलों की भी आलोचना की थी, जिससे अमेरिका-तेहरान वार्ताओं पर बुरा असर पड़ रहा था.140 करोड़ आबादी वाले भारत से मिलता है अगाध प्रेम: नेतन्याहूफॉक्स न्यूज (Fox News) को दिए एक तीखे इंटरव्यू में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने जेडी वेंस के 'अकेले दोस्त' वाले दावे को सिरे से खारिज कर दिया. नेतन्याहू ने कहा, मैं जेडी वेंस का सम्मान करता हूं, लेकिन मैं उनकी हर बात से सहमत नहीं हूं. डोनाल्ड ट्रंप जरूर हमारे सबसे अच्छे दोस्त हैं, लेकिन दुनिया में हमारे कई और मित्र भी हैं. उदाहरण के लिए 'भारत' नाम का एक महान देश है, जिसकी आबादी 1.4 अरब है और वहां से हमें जो जबरदस्त और अटूट समर्थन मिलता है, उसे कोई नकार नहीं सकता.मेरा फेसबुक अकाउंट भारतीयों के प्यार से भरा पड़ा है: इजरायली पीएमनेतन्याहू ने सोशल मीडिया पर मिल रहे जनसमर्थन का जिक्र करते हुए गर्व से कहा, मेरा फेसबुक अकाउंट (Facebook) देखें, वह भारतीय यूजर्स के अपार और भावनात्मक समर्थन से पूरी तरह से भरा रहता है. उन्होंने आगे कहा कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया और कुछ चुनिंदा वर्गों में इजरायल की चाहे जितनी आलोचना हो, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है. दुनिया के कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष मुझे व्यक्तिगत तौर पर फोन करते हैं और कहते हैं कि भले ही उनके यहां पब्लिक ओपिनियन की दिक्कत हो, लेकिन वे इजरायल का पूरा सम्मान करते हैं.एआई (AI) और साइबर सुरक्षा में इजरायल का लोहा मानती है दुनियापीएम नेतन्याहू ने साफ किया कि आज पूरी दुनिया इज़राइल के साथ रणनीतिक और तकनीकी साझेदारी करना चाहती है. उन्होंने कहा, वैश्विक नेता हमसे सैन्य रणनीतियों को सीखने की इच्छा जताते हैं. वे हमारी उन्नत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर विशेषज्ञता का लाभ उठाना चाहते हैं. इजरायल साइबर सुरक्षा के मामले में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है और हमारी तकनीक बेहद एडवांस है। इस बीच, सूत्रों के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति के नाटो शिखर सम्मेलन से लौटने के बाद अगले हफ्ते डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू के बीच एक बड़ी बैठक प्रस्तावित है, जिसमें दोनों देशों के बीच उपजे हालिया मतभेदों को सुलझाया जाएगा.

न्यूज़ इंडिया लाइव 6 Jul 2026 8:01 am

ताइवान ने चीन की समुद्री गश्त को बताया अवैध, क्षेत्रीय शांति पर जताई चिंता

ताइवान ने चीन के कोस्ट गार्ड (सीसीजी) के पूर्वी समुद्री क्षेत्र में गश्त करने की आलोचना की है। ताइवान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ अधिकार का अवैध विस्तार बताया है और कहा है कि इससे क्षेत्रीय स्थिरता को खतरा पैदा हो रहा है।

देशबन्धु 6 Jul 2026 7:40 am