पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की बच्चियों के जबरन धर्म परिवर्तन पर यूरोपीय संसद ने जताई चिंता
एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, यूरोपीय संसद ने एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमें पाकिस्तान के अधिकारियों से धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों की लड़कियों के अपहरण और जबरन इस्लाम धर्म अपनाने की घटनाओं को रोकने की मांग की गई है।
संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा सैन्य एवं कूटनीतिक गतिरोध एक अत्यंत संवेदनशील और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक बेहद सनसनीखेज दावा करते हुए पूरी दुनिया को चौंका दिया है। ट्रंप के मुताबिक, उन्होंने अमेरिकी सशस्त्र बलों को 'स्टैंडिंग ऑर्डर्स' (स्थायी आदेश) दे रखे हैं कि यदि ईरान उनकी हत्या करने या उन्हें किसी भी प्रकार का नुकसान पहुंचाने की कोशिश करता है, तो तेहरान पर अब तक का सबसे विनाशकारी सैन्य पलटवार किया जाए। ट्रंप ने चेतावनी दी है कि 1,000 मिसाइलें इस वक्त पूरी तरह से तैयार हैं और उनका निशाना सीधे ईरान की ओर लॉक है।क्या वाकई काम करेगा 'डेड मैन्स स्विच'? अमेरिकी संविधान और विशेषज्ञों ने खोला राजडोनाल्ड ट्रंप के इस दावे ने अंतरराष्ट्रीय रक्षा विशेषज्ञों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या वाकई अमेरिकी राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में कोई स्वचालित मिसाइल हमला शुरू हो सकता है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञों और अमेरिकी संवैधानिक ढांचे के अनुसार, इस प्रकार का कोई भी डेड मैन्स स्विच (स्वचालित प्रतिशोध प्रणाली) व्यावहारिक या कानूनी तौर पर अस्तित्व में नहीं है। अमेरिकी कानून सेना को राष्ट्रपति की मृत्यु होते ही कंप्यूटर आधारित या स्वचालित रूप से युद्ध शुरू करने का अधिकार बिल्कुल नहीं देता है।राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में जेडी वेंस संभालेंगे कमान: ग्रैफ ने समझाया निरंतरता का नियमप्रसिद्ध इतिहासकार और सुरक्षा मामलों के लेखक गैरेट एम. ग्रैफ के अनुसार, अमेरिका के पास आपातकालीन स्थितियों और परमाणु खतरों से निपटने के लिए 'कंटिन्यूटी-ऑफ-गवर्नमेंट' (सरकार चलाने की निरंतरता) की बेहद विस्तृत नियमावली जरूर है, लेकिन वे योजनाएं भी किसी तकनीकी कंप्यूटर को मिसाइल दागने की स्वायत्तता नहीं देतीं। अमेरिकी संविधान के 25वें संशोधन और 'प्रेसिडेंशियल सक्सेशन एक्ट 1947' के तहत, यदि राष्ट्रपति ट्रंप के साथ कोई अनहोनी होती है, तो कमांडर-इन-चीफ की शक्तियां तत्काल प्रभाव से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पास स्थानांतरित हो जाएंगी। इसके बाद यह पूरी तरह से जेडी वेंस के विवेक पर निर्भर करेगा कि वे ट्रंप के पूर्व-घोषित रणनीतिक फैसलों को लागू करते हैं या उन्हें पूरी तरह से खारिज कर देते हैं।मोजतबा खामेनेई का पलटवार: तेहरान में गूंजे प्रतिशोध के नारेट्रंप के इस आक्रामक बयान के कुछ ही घंटों के भीतर तेहरान से भी बेहद सख्त प्रतिक्रिया सामने आई है। फरवरी के आखिर में अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमलों में मारे गए अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे और ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने सरकारी टेलीविजन पर आकर अपने पिता की मौत का बदला लेने का संकल्प दोहराया। मोजतबा ने कहा कि देश के सभी शहीदों के पवित्र खून का बदला लेना पूरे ईरानी राष्ट्र की सामूहिक इच्छा है और इसे निश्चित रूप से पूरा किया जाएगा। तेहरान में हुए हालिया आधिकारिक कार्यक्रमों के दौरान प्रदर्शनकारियों के हाथों में डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ नारे लिखे बैनर भी देखे गए, जिससे साफ है कि दोनों पक्षों के बीच कड़वाहट चरम पर है।एयरफोर्स वन में अचानक बदलाव: तुर्की नाटो शिखर सम्मेलन के बाद सुरक्षा अलर्टइस बीच, सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी वाशिंगटन में कई बड़े फेरबदल देखे जा रहे हैं। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' की एक रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली खुफिया एजेंसियों ने अमेरिकी सुरक्षा बलों को ट्रंप के खिलाफ ईरान की एक नई और बेहद गंभीर साजिश के बारे में इनपुट दिए हैं। इसी खतरे के मद्देनजर, तुर्की में आयोजित नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन से लौटते समय राष्ट्रपति ट्रंप कतर द्वारा उपहार में मिले अत्याधुनिक 400 मिलियन डॉलर के नए विमान के बजाय एक पुराने 'एयर फोर्स वन' (Air Force One) विमान से यात्रा करते हुए देखे गए। विशेषज्ञों के अनुसार, नए विमान में वह उन्नत मिसाइल डिटेक्शन और काउंटर-मेजर (मिसाइल रोधी प्रणाली) मौजूद नहीं थी जो सुरक्षा के लिहाज से पुराने सैन्य विमानों में होती है। यह सुरक्षात्मक समझौता ऐसे समय में किया गया है जब दोनों देशों के बीच पिछले महीने हुआ युद्धविराम पूरी तरह से टूटने की कगार पर है।
ईरानी अखबार ने जारी की 13 बड़े नेताओं की 'रिवेंज लिस्ट', ट्रंप, नेतन्याहू और स्टार्मर के नाम शामिल
अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भीषण सैन्य गतिरोध के बीच ईरान के एक प्रमुख कट्टरपंथी अखबार द्वारा ऑनलाइन साझा किए गए एक सनसनीखेज इन्फोग्राफिक ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मचा दिया है। इस इन्फोग्राफिक में दुनिया के 13 सबसे प्रभावशाली राजनीतिक और सैन्य नेताओं की तस्वीरें और नाम प्रकाशित करते हुए दावा किया गया है कि ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का प्रतिशोध लेने के लिए इन्हें निशाना बनाया जाना चाहिए। हालांकि, तेहरान प्रशासन या ईरानी सरकार द्वारा इस सूची को किसी भी प्रकार की आधिकारिक मान्यता दिए जाने का कोई प्रत्यक्ष प्रमाण अब तक सामने नहीं आया है।मोजतबा खामेनेई की सख्त चेतावनी: 'हमले के जिम्मेदार लोग शांतिपूर्ण मौत को तरसेंगे'यह विवाद तब शुरू हुआ जब 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में मारे गए अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद उनके बेटे और संभावित उत्तराधिकारी मोजतबा खामेनेई ने अपना पहला सार्वजनिक संदेश जारी किया। मोजतबा, जो खुद भी उस घातक हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए थे और लंबे समय बाद जनता के सामने आए हैं, उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पिता की मौत का बदला लेना पूरे ईरानी राष्ट्र का सामूहिक संकल्प है। उन्होंने एक बेहद आक्रामक बयान में कहा कि इस सूची में शामिल लोग अपनी स्वाभाविक और शांतिपूर्ण मौत का सपना केवल अपने दिल में लेकर ही कब्र में जाएंगे। इस बयान के ठीक बाद तेहरान प्रशासन से जुड़े 'हमशहरी' अखबार ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर यह सूची साझा कर दी, हालांकि रविवार को प्रकाशित हुए प्रिंट संस्करण से इस विवादित ग्राफिक को हटा दिया गया था।रिवेंज लिस्ट में शामिल हुए वैश्विक चेहरे: अमेरिका से लेकर यूरोप तक हड़कंपमोजतबा खामेनेई ने भले ही अपने भाषण में किसी भी वैश्विक राजनेता का नाम स्पष्ट तौर पर न लिया हो, लेकिन 'हमशहरी' अखबार द्वारा तैयार किए गए डिजिटल इन्फोग्राफिक ने सीधे तौर पर कई देशों के प्रमुखों को इस प्रतिशोध का केंद्र बना दिया है। इस हिट लिस्ट में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर को मुख्य रूप से दर्शाया गया है। इनके अलावा अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज जैसे पश्चिमी दुनिया के सबसे शक्तिशाली चेहरों को इस सूची में जगह दी गई है।पश्चिमी देशों के प्रति बढ़ता आक्रोश: हवाई क्षेत्र देने और मौन रहने पर नाराजगीईरान द्वारा इन विशिष्ट यूरोपीय और अमेरिकी नेताओं को लक्षित करने के पीछे एक गहरी रणनीतिक और कूटनीतिक नाराजगी है। युद्ध की शुरुआत से ही ईरान लगातार यूरोपीय संघ और नाटो (NATO) के सदस्य देशों पर यह आरोप लगाता रहा है कि उन्होंने न केवल ईरान की संप्रभुता पर हुए हमलों की अंतरराष्ट्रीय मंचों पर निंदा करने से इनकार किया, बल्कि अमेरिकी लड़ाकू विमानों और रीफ्यूलिंग टैंकर्स को अपने हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की खुली अनुमति भी दी। ईरान का मानना है कि यह मौन सहमति और सैन्य सहयोग सीधे तौर पर उसके खिलाफ युद्ध अपराधों में शामिल होने जैसा है। वर्तमान में दोनों परमाणु और सैन्य शक्तियों के बीच चल रही यह बयानबाजी किसी भी प्रकार के शांति समझौते की उम्मीदों को पूरी तरह समाप्त कर रही है।
पीएम मोदी 6 जुलाई की सुबह नई दिल्ली से इंडोनेशिया के लिए निकले थे। फिर ऑस्ट्रेलिया होते हुए न्यूजीलैंड पहुंचे। वे 6 दिनों में 3 देशों का दौरा करके 12 जुलाई की सुबह दिल्ली लौट आए। करीब 144 घंटे के इस मैराथन दौरे से क्या-क्या लेकर लौटे पीएम मोदी और भारत के लिए उसके मायने क्या हैं; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… पहला पड़ाव था- इंडोनेशिया का जकार्ता। ये पीएम मोदी की चौथी इंडोनेशियाई यात्रा थी। उन्होंने राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो से मुलाकात की। दो दिन के टूर में उन्होंने इंडोनेशियाई संसद में भाषण दिया। दोनों देशों के बीच 14 समझौतों पर साइन हुए। इनमें 2 डील सबसे अहम हैं- 1. सबांग पोर्ट डीलभारत और इंडोनेशिया मिलकर सुमात्रा के उत्तर में सबांग पोर्ट डेवलप करेंगे। इंडोनेशिया ने मई 2018 में ही भारत को इसका न्योता दिया था। तब पीएम मोदी की इंडोनेशिया यात्रा के दौरान इसके लिए ज्वॉइंट टास्क फोर्स बनाने का फैसला हुआ था। 2023 तक प्रोजेक्ट को लेकर एक स्टडी भी हुई। अब समझौते पर साइन होने से काम आगे बढ़ पाएगा। सबांग समुद्र में गहरे पानी वाला पोर्ट है। ये 50 हजार टन के जहाजों, पनडुब्बियों और युद्धपोतों को भी संभाल सकता है। पोर्ट में भारत कितना इन्वेस्टमेंट करेगा और ये कब तक पूरा होगा, अभी ये जानकारी सामने नहीं आई है। दोनों देशों ने अंडमान-निकोबार और इंडोनेशिया के आचे व सुमात्रा द्वीपों के बाकी हिस्सों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करने पर भी सहमति जताई है। भारत के लिए डील के मायने 2. ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम की सप्लाईDRDO के तहत आने वाले ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड और इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय के बीच ये एग्रीमेंट हुआ है। इसके तहत भारत इंडोनेशिया को ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल सिस्टम देगा। इंडोनेशिया ने पहले 10 करोड़ डॉलर में ब्रह्मोस की 12 मिसाइल्स की एक बैटरी लेने का प्रपोजल दिया था। अब इसे दोगुना कर दिया गया है। अनुमान हैं कि पूरी डील करीब 63 करोड़ डॉलर की हो सकती है। इसमें मिसाइल सिस्टम के अलावा ट्रेनिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट भी शामिल है। इस पैकेज में सरफेस-टू-सरफेस और एयर-लॉन्च्ड, यानी मिसाइल के दोनों सुपरसोनिक वैरिएंट शामिल हैं, जिनकी रेंज 300 किलोमीटर है। ब्रह्मोस भारत के सुखोई-30 MKI जैसे लड़ाकू विमानों पर तैनात है। इंडोनेशिया भी अपने सुखोई-30 बेड़े में इसे इंटीग्रेट करेगा। इस डील के साथ फिलीपींस और वियतनाम के बाद इंडोनेशिया ब्रह्मोस खरीदने वाला तीसरा देश बन जाएगा। भारत डायनेमिक्स लिमिटेड, BDL और इंडोनेशियाई कंपनी 'रिपब्लिकॉर्प' के बीच भारत की एस्ट्रा Mk-1 एयर-टू-एयर मिसाइल को लेकर भी समझौता हुआ है। भारत के लिए डील के मायने बाकी अहम डील पीएम मोदी का दूसरा पड़ाव था- ऑस्ट्रेलिया का मेलबर्न। वे यहां 8 और 9 जुलाई को रहे। पीएम मोदी और ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथनी अल्बानीज के बीच तीसरी सालाना भारत-ऑस्ट्रेलिया समिट हुई। दोनों देशों के बीच 18 समझौते और घोषणाएं हुईं। इनमें दो डील सबसे अहम हैं- 1. यूरेनियम सप्लाई डीलभारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच 2014 में ‘सिविल न्यूक्लियर कोऑपरेशन एग्रीमेंट’ हुआ था। इसके तहत ऑस्ट्रेलिया से भारत को यूरेनियम की सप्लाई होनी थी, लेकिन ऑस्ट्रेलिया ने सप्लाई बेहद सीमित रखी। उसको चिंता थी कि यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में हो सकता है। अब दोनों देशों ने उसी एग्रीमेंट को अमल में लाने के लिए 'एडमिनिस्ट्रेटिव अरेंजमेंट' पर साइन किए हैं। यानी अब ऑस्ट्रेलिया भारत को जरूरत भर का यूरेनियम एक्सपोर्ट करेगा। संयुक्त बयान में कहा गया है कि ये सप्लाई सिर्फ यूरेनियम के शांतिपूर्ण इस्तेमाल, यानी बिजली वगैरह बनाने के लिए होगी। सप्लाई की निगरानी इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी, यानी IAEA करेगी। ऑस्ट्रेलिया किस कीमत पर और कितना यूरेनियम देगा, सप्लाई कब होगी, अभी ये डिटेल्स सामने नहीं आए हैं। भारत के लिए डील के मायने 2. क्रिटिकल मिनरल्स प्रोडक्शन भारत और ऑस्ट्रेलिया ने लीथियम, कोबाल्ट और रेयर अर्थ एलिमेंट्स की सप्लाई चेन मजबूत करने के लिए समझौता किया है। इसे ‘क्रिटिकल मिनरल्स पार्टनरशिप’ कहा जा रहा है। इसके तहत सरकारी एजेंसियों और प्राइवेट कंपनियों के बीच लॉन्ग-टर्म ऑफटेक, रिफाइनिंग और वैल्यू-एडिशन के लिए निवेश की व्यवस्था तय हुई है। यानी दोनों देशों की कंपनियां मिलकर मिनरल्स की सप्लाई में लंबे समय के लिए इन्वेस्टमेंट करेंगी। कच्चे माल की खरीद के अलावा प्रोसेसिंग और रिफाइनिंग भी मिलकर होगी। भारत के लिए डील के मायने बाकी अहम डील पीएम मोदी का आखिरी पड़ाव था- न्यूजीलैंड का ऑकलैंड। वे 10 और 11 जुलाई को यहां रहे। ये पिछले 40 सालों में किसी भारतीय पीएम की पहली न्यूजीलैंड यात्रा थी। इससे पहले 1986 में तब के पीएम राजीव गांधी न्यूजीलैंड गए थे। पीएम मोदी और न्यूजीलैंड के पीएम क्रिस्टोफर लक्सन के बीच बातचीत हुई। इसके बाद 10 समझौते और 8 इनिशिएटिव की घोषणा हुई। इनमें 2 चीजें सबसे अहम थीं- 1. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट और रोडमैप टू 2030मार्च 2025 में भारत और न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर बातचीत शुरू हुई और दिसंबर 2025 में पूरी हुई। 27 अप्रैल 2026 को इस पर औपचारिक साइन हुए। यानी ये डील मोदी की मौजूदा यात्रा से पहले ही हो चुकी थी। अब इस यात्रा में इसे 'स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप' के लेवल पर अपग्रेड किया गया। यानी तय हुआ कि FTA जल्द ही लागू करने ट्रेड बढ़ाया जाएगा। साथ ही 'इंडिया-न्यूजीलैंड रोडमैप टू 2030' नाम का एक दस्तावेज जारी किया गया। इसके तहत दोनों देश ट्रेड, डिफेंस, समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद, खेती, एजुकेशन और टेक्नोलॉजी के सेक्टर में पार्टनरशिप बढ़ाएंगे। 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना करके करीब 7 बिलियन न्यूजीलैंड डॉलर, यानी 35 हजार करोड़ रुपए तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। FTA के तहत भारत न्यूजीलैंड को केमिकल्स, प्रोसेसिंग फूड, एग्रीकल्चर प्रोडक्ट्स वगैरह की सप्लाई करेगा। इस सामान पर जीरो टैरिफ लगेगा। वही न्यूजीलैंड से कीवी सहित दूसरे फल, लकड़ी और क्रिटिकल्स मिनरल्स वगैरह आएंगे। एग्रीमेंट के तहत पहले दिन से ही न्यूजीलैंड के 57 % सामान पर जीरो टैरिफ लागू हो जाएगा। इस पर भी सहमति बनी है कि न्यूजीलैंड भारत में अगले 15 सालों में 20 अरब डॉलर, यानी करीब 1.72 लाख करोड़ रुपए का निवेश करेगा। भारत के लिए डील के मायने 2. डिफेंस और मैरिटाइम पार्टनरशिपदोनों देशों ने डिफेंस में आपसी साझेदारी, लॉजिस्टिक सपोर्ट और जॉइंट नेवी एक्सरसाइज बढ़ाने पर सहमति जताई है।इसका मतलब है कि दोनों देशों की नेवी एक-दूसरे के पोर्ट और मैरीटाइम फैसिलिटीज का इस्तेमाल कर सकेंगे। भारत के लिए डील के मायने बाकी अहम डील ----- ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर:5 देशों से क्या लेकर लौटे पीएम मोदी; UAE तेल रिजर्व भरेगा, नीदरलैंड्स क्रिटिकल मिनरल देगा, मेलोनी से भी डील PM मोदी 15 मई 2026 की सुबह नई दिल्ली से UAE के लिए निकले। फिर नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे होते हुए इटली पहुंचे। वे 6 दिनों के भीतर 5 देशों का दौरा कर 21 की सुबह दिल्ली लौट आए। करीब 140 घंटे के इस मैराथन दौरे से क्या-क्या लेकर लौटे पीएम मोदी और भारत के लिए उसके मायने क्या हैं, पूरी खबर में पढ़िए…
अमेरिकी हमले के बाद ईरान का पलटवार, 5 देशों में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल-ड्रोन हमले; बढ़ा तनाव
ईरान की IRGC ने दावा किया कि उसने जॉर्डन के प्रिंस हसन एयरबेस को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाया। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में एयरबेस के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर और MQ-9 ड्रोन रखने वाले हैंगर को नुकसान पहुंचा।
ओमान के पास कंटेनर जहाज में टक्कर के बाद लगी भीषण आग, UKMTO ने जारी किया अलर्ट
यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) ने कहा कि ओमान के तट पर एक घटना के बाद एक कंटेनर जहाज को नुकसान पहुंचा और उसमें आग लग गई।
ईरान ने बंद किया होर्मुज जलमार्ग, भड़के ट्रंप ने सीजफायर खत्म कर ईरानी शहरों पर बरसाए बम
मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने पूरी दुनिया को युद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। ईरान द्वारा वैश्विक तेल व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते यानी होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा बंद किए जाने के बाद अमेरिका ने अब तक की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दोनों देशों के बीच चल रहे सीजफायर (युद्धविराम) को तत्काल प्रभाव से खत्म करने का एलान करते हुए ईरान के कई रणनीतिक शहरों पर भीषण बमबारी के आदेश दे दिए हैं। अमेरिकी वायुसेना और मिसाइलों ने ईरान के कई ठिकानों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है।होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करना बना इस भीषण टकराव की मुख्य वजहइस पूरे विवाद की जड़ होर्मुज जलमार्ग है, जिसे वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा माना जाता है। दुनिया का करीब एक-तिहाई समुद्री तेल परिवहन इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान ने वैश्विक प्रतिबंधों और अमेरिकी दबाव के विरोध में अचानक इस जलमार्ग को ब्लॉक कर दिया और अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगा दी। ईरान के इस कदम को वैश्विक व्यापार पर सीधे हमले के रूप में देखते हुए वाशिंगटन में हड़कंप मच गया, जिसके बाद अमेरिकी प्रशासन ने बिना कोई वक्त गंवाए सीधे सैन्य एक्शन लेने का फैसला किया।राष्ट्रपति ट्रंप का बड़ा फैसला और सीजफायर का अचानक अंतअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस तनाव पर बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। उन्होंने साफ कर दिया कि वैश्विक व्यापार और अमेरिकी हितों को चुनौती देने वाले किसी भी कदम को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ट्रंप ने पूर्व में हुए सीजफायर समझौतों को पूरी तरह से रद्द घोषित कर दिया। इसके तुरंत बाद अमेरिकी कमांड ने ईरान के प्रमुख सैन्य ठिकानों, परमाणु केंद्रों के नजदीकी इलाकों और तटीय शहरों पर हवाई हमले और मिसाइलें बरसानी शुरू कर दीं। इस अप्रत्याशित हमले से पूरे ईरान में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।वैश्विक बाजार और भारत सहित दुनिया भर के देशों पर पड़ेगा इसका असरअमेरिका और ईरान के बीच छिड़े इस सीधे युद्ध का असर पूरी दुनिया पर देखने को मिलने लगा है। होर्मुज जलमार्ग बंद होने और अमेरिकी बमबारी के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छू सकती हैं। भारत जैसे विकासशील देशों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है, क्योंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों से आने वाले इसी तेल मार्ग पर निर्भर है। संयुक्त राष्ट्र और दुनिया के अन्य बड़े देश इस वक्त दोनों देशों से संयम बरतने की अपील कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल हालात पूरी तरह बेकाबू नजर आ रहे हैं।
कतर की किस्मत बदलने वाले पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा का निधन, तख्तापलट कर ली थी सत्ता की कमान
वैश्विक राजनीति और मिडिल ईस्ट से एक बेहद बड़ी खबर सामने आ रही है। कतर को एक छोटे से गुमनाम देश से दुनिया का सबसे अमीर और आधुनिक देश बनाने वाले पूर्व अमीर (शासक) शेख हमद बिन खलीफा अल थानी का निधन हो गया है। उनके निधन की खबर से पूरे खाड़ी देशों (Gulf Countries) सहित वैश्विक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। शेख हमद को आधुनिक कतर का निर्माता माना जाता है, जिन्होंने अपने विजन और फैसलों से न सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया, बल्कि कतर को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का एक बड़ा केंद्र भी बना दिया।साल 1995 का वो ऐतिहासिक तख्तापलट जिसने बदल दिया कतर का इतिहासशेख हमद बिन खलीफा अल थानी के सत्ता में आने की कहानी बेहद नाटकीय और ऐतिहासिक रही है। साल 1995 में जब उनके पिता देश से बाहर स्विट्जरलैंड की यात्रा पर थे, तब शेख हमद ने एक रक्तहीन तख्तापलट (Bloodless Coup) के जरिए कतर की सत्ता अपने हाथों में ले ली थी। उस समय कतर की आर्थिक स्थिति आज जैसी मजबूत नहीं थी। सत्ता संभालने के बाद उन्होंने देश के प्राकृतिक संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर एक नई और आक्रामक नीति अपनाई, जिसने आने वाले दशकों में देश की पूरी तस्वीर को बदलकर रख दिया।लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के दम पर कतर को बनाया दुनिया का सबसे अमीर देशशेख हमद की सबसे बड़ी कामयाबी कतर के विशाल प्राकृतिक गैस भंडार (Natural Gas Reserves) को पहचानना और उसका सही इस्तेमाल करना था। उनके नेतृत्व में कतर ने लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) के उत्पादन और निर्यात में भारी निवेश किया। देखते ही देखते कतर दुनिया का सबसे बड़ा LNG निर्यातक देश बन गया। इस गैस क्रांति ने कतर के नागरिकों की प्रति व्यक्ति आय को दुनिया में सबसे ऊंचा बना दिया और एक छोटे से मरुस्थलीय देश को दुनिया के सबसे अमीर और शक्तिशाली देशों की कतार में ला खड़ा किया।ग्लोबल मीडिया नेटवर्क अल जजीरा की शुरुआत और कूटनीति में दबदबाशेख हमद सिर्फ आर्थिक सुधारों तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने कतर को वैश्विक मंच पर एक बड़ी पहचान दिलाई। साल 1996 में उन्होंने प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय न्यूज चैनल 'अल जजीरा' (Al Jazeera) की स्थापना की, जिसने मिडिल ईस्ट और दुनिया भर की पत्रकारिता का रुख बदल दिया। इसके साथ ही उन्होंने कतर की एयरलाइंस 'कतर एयरवेज' को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ एयरलाइंस में शुमार कराया और खेल जगत में निवेश कर फीफा वर्ल्ड कप जैसे बड़े आयोजनों की नींव भी रखी। साल 2013 में उन्होंने स्वेच्छा से सत्ता अपने बेटे और वर्तमान अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी को सौंप दी थी। उनके निधन के साथ ही मध्य पूर्व के इतिहास का एक बड़ा अध्याय समाप्त हो गया है।
नेपाल में युवाओं का गुस्सा बढ़ा, बालेन शाह सरकार पर उठे सवाल; रोजगार और नीतियों को लेकर विरोध तेज
युवा संगठन जेन-जी नेपाल ने प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि बजट और नीतियों में युवाओं के रोजगार, आय बढ़ाने और भविष्य सुरक्षित करने के लिए पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए हैं। संगठन का आरोप है कि सरकार ने युवाओं की समस्याओं को प्राथमिकता नहीं दी, जिसके कारण असंतोष बढ़ रहा है।
कनाडा के स्ट्रीट फेस्टिवल में मास शूटिंग की घटना आई सामने, दो लोगों की मौत और तीन घायल
कनाडा के टोरंटो में एक स्ट्रीट फेस्टिवल के पास हुई गोलीबारी में दो लोगों की मौत हो गई और तीन अन्य घायल हो गए। अधिकारियों की ओर से साझा जानकारी के अनुसार, घटना के बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की और इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी।
वेस्ट बैंक दौरे पर भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना का दावा, हथियारबंद इजरायली सेटलरों ने घेरा
रो खन्ना के अनुसार, उनका दल वेस्ट बैंक के एक फलस्तीनी गांव का दौरा कर रहा था। इस यात्रा का उद्देश्य स्थानीय निवासियों से मिलना और क्षेत्र में उनकी सुरक्षा तथा जीवन-स्थितियों के बारे में जानकारी लेना था।
ट्रंप की धमकी: ईरान पर 1000 मिसाइलें तैयार
अमेरिका और ईरान के बीच हालिया टकराव के बाद हालात और बिगड़ते दिख रहे हैं। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने एक‑दूसरे को कड़े संदेश दिए हैं
भास्कर सीरीज ‘स्पाई फाइल्स’ में आप पढ़ रहे हैं- ‘ऑपरेशन गंगा।’ पार्ट-1 में आपने पढ़ा- 30 जनवरी 1971 को दो कश्मीरी लड़कों ने पिस्तौल और हैंडग्रेनेड दिखाकर भारत के यात्री विमान ‘गंगा’ को हाईजैक कर लिया। वे विमान को लाहौर ले गए और भीड़ के सामने पेट्रोल डालकर आग लगा दी। हाईजैकर्स की मांग थी कि हिंदुस्तान अपने जेलों में बंद उनके 36 साथियों को रिहा करे, लेकिन भारत तैयार नहीं हुआ। दुनियाभर में हड़कंप मच गया। भारत के लोग गुस्से में थे, लेकिन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और RAW प्रमुख मुस्कुरा रहे थे… क्या थी पूरी कहानी जानते हैं ‘ऑपरेशन गंगा’ पार्ट-2 में… इस कहानी की शुरुआत होती है साल 1956 से। पूर्वी पाकिस्तान यानी आज के बांग्लादेश के चटगांव की पहाड़ियों में बना एक सीक्रेट मिलिट्री कैंप। कंट्रोल रूम में कुछ फौजी नक्शों पर उंगलियां फेर रहे थे। ये पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के अफसर थे। इन्हीं में से एक ने सिगार का धुआं उड़ाते हुए कहा- ‘फिजो साहब, असम और नगालैंड में ऐसी आग लगाओ कि दिल्ली की हुकूमत बुझा न पाए।’ फिजो ने मुस्कुराते हुए राइफल उठाई और कहा- ‘दिल्ली बहुत दूर है और हमारे जंगल बहुत घने। हमें तबाही मचाने से कोई रोक नहीं पाएगा।’ फिजो का पूरा नाम अंगामी जापु फिजो था। वह नगा उग्रवादी था और अलग नगालैंड बनाना चाहता था। ISI ने उसे ना सिर्फ पनाह दी थी, बल्कि हथियारों, गुरिल्ला वॉर की ट्रेनिंग और पैसों से पाट दिया था। 1960 तक पाकिस्तान यही खेल मिजोरम में भी शुरू कर चुका था। वह मिजो नेशनल फ्रंट को मोहरा बनाकर मिजोरम को भी भारत से तोड़ना चाहता था। इस खेल में चीन भी कूद चुका था, जो चटगांव के रास्ते चरमपंथियों को हथियार सप्लाई कर रहा था। भारत के सामने सबसे बड़ा खतरा था- 'सिलिगुड़ी कॉरिडोर' यानी 'चिकन नेक'।’ पश्चिम बंगाल में 22 किमी. चौड़ा ये हिस्सा पूरे पूर्वोतर को भारत से जोड़ने का अकेला जमीनी रास्ता है। अगर पाकिस्तान इस पर कब्जा कर लेता, तो पूर्वोत्तर के सातों राज्य भारत से कट जाते। RAW के पूर्व अफसर आरके यादव अपनी किताब ‘मिशन आर एंड ए डब्ल्यू’ में लिखते हैं- ‘प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने RAW प्रमुख आरएन काव से कहा- ‘अगर पाकिस्तान हमारे नॉर्थ-ईस्ट को तोड़ने के लिए पूर्वी पाकिस्तान की जमीन का इस्तेमाल कर रहा है, तो क्यों न हम उस जमीन को ही अलग कर दें?’ काव साहब कुछ देर सोचते रहे, फिर बोले- ‘ठीक है मैडम। कुछ करते हैं।’ दिसंबर 1970 में पाकिस्तान में पहला आम चुनाव हुआ। कुल 300 सीटों में से बहुमत के लिए 151 सीट चाहिए थीं। पूर्वी पाकिस्तान के शेख मुजीब-उर-रहमान की 'आवामी लीग' ने 160 सीटें जीत लीं, जबकि पश्चिमी पाकिस्तान के जुल्फिकार अली भुट्टो को सिर्फ 81 सीट मिलीं। मुजीब का प्रधानमंत्री बनना तय था, लेकिन रावलपिंडी में बैठे तानाशाह राष्ट्रपति याह्या खान को एक बंगाली का हुकूमत चलाना बर्दाश्त नहीं था। दिन बीतते गए, पर उन्होंने मुजीब को सत्ता नहीं सौंपी। नतीजा यह हुआ कि पूर्वी पाकिस्तान की सड़कों पर 'जॉय बांग्ला' के नारे गूंजने लगे। इसी बीच लंदन में बैठे एक सोर्स ने RAW को खबर भेजी कि पाकिस्तान अपने पूर्वी हिस्से में बड़े मिलिट्री एक्शन की तैयारी में है। वह वहां गुपचुप तरीके से हथियार, रसद और सैनिक भेज रहा है। ऐसे में RAW चीफ काव ने PM इंदिरा को सुझाव दिया- ‘हम पाकिस्तान के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर देते हैं। फिर उसे श्रीलंका होकर पूर्वी पाकिस्तान जाना पड़ेगा, जो काफी लंबा रास्ता है। पूर्वी हिस्से में उसकी पकड़ ढीली पड़ जाएगी।’ PM ने जवाब दिया- ‘सुझाव तो ठीक है, लेकिन इसके लिए कोई ठोस वजह चाहिए होगी। अंतरराष्ट्रीय नियमों के चलते हम अचानक ऐसा कदम नहीं उठा सकते। काव मुस्कुराए और बोले- ‘हम कोई न कोई रास्ता निकाल लेंगे।’ यहीं से RAW ने अपने सीक्रेट मिशन की बिसात बिछानी शुरू कर दी… अब एक साल पीछे चलते हैं… साल 1969, पाकिस्तान के पेशावर में एक आलीशान बंगला। यह घर था कश्मीरी अलगाववादी नेता डॉ. फारूख हैदर का। उस शाम डायनिंग टेबल पर लजीज कश्मीरी पुलाव और कबाब परोसे गए थे। दस्तरखान के एक तरफ अलगाववादी नेता मकबूल भट्ट बैठा था और दूसरी तरफ 19 साल का हाशिम कुरैशी। मकबूल, कश्मीर की कथित आजादी के लिए नेशनल लिब्रेशन फ्रंट चला रहा था। उस पर हत्या के कई मुकदमे थे। भारत में उसे फांसी की सजा सुनाई जा चुकी थी। वहीं, कश्मीर का रहने वाला हाशिम एक रिश्तेदार की शादी में पाकिस्तान गया था। उसके भीतर कश्मीर को लेकर कुछ करने की छटपटाहट थी। मकबूल इस बात को ताड़ चुका था और कई दिनों से उसका ब्रेनवॉश करने में जुटा था। अचानक, रेडियो पर आवाज गूंजी- ‘आज कराची हवाई अड्डे पर इरिट्रिया के दो चरमपंथियों ने इथियोपिया के एक जहाज पर फायरिंग की है। जहाज को भारी नुकसान पहुंचा है।’ मकबूल कुर्सी से छलांग मारकर उठ खड़ा हुआ। उसने टेबल पर मुक्का मारते हुए कहा- ‘देखा तुम लोगों ने? दुनिया हमारी चीखें नहीं सुनती, लेकिन जब जहाज हवा में हिचकोले खाता है, तो पूरी दुनिया के कान खड़े हो जाते हैं। हमें ऐसा ही कुछ करना होगा।’ मकबूल ने हाशिम के कंधे पर हाथ रखा। ‘हाशिम... अगर हम तुम्हें एक हिंदुस्तानी जहाज को अगवा करने की ट्रेनिंग दें, तो क्या तुम कौम के लिए इसे अंजाम दे पाओगे?’ हाशिम जोश में था। उसने तुरंत जवाब दिया- ‘आप हुक्म कीजिए। मैं तैयार हूं।’ मकबूल ने उसकी आंखों में देखते हुए कहा- ‘तो फिर जुबान समझें?’ हाशिम ने बिना सोचे कहा- ‘जी बिल्कुल।’ हाशिम की ट्रेनिंग शुरू हो गई। भाग-दौड़ से लेकर हथियार चलाने तक। कुछ महीने बाद मकबूल ने उसे फिर से मिलने बुलाया। मकबुल ने कहा- ‘सुनो हाशिम, अब तुम्हें कश्मीर वापस जाना है। श्रीनगर से उड़ने वाले एक जहाज को अगवा करके रावलपिंडी लाना है। बदले में हम हिंदुस्तान की जेलों में बंद अपने 36 साथियों को छुड़ाएंगे। दुनिया को भी पता चलना चाहिए कि कश्मीरी अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं।’ हाशिम ने मुस्कुराते हुए कहा- ‘ठीक है जनाब। तैयारी करता हूं।’ मकबूल ने उसे एक पर्ची थमाते हुए कहा- ‘वहां पहुंचकर इस पते पर चले जाना। हथियार और बाकी का जरूरी सामान वहीं मिल जाएगा।’ ‘जी…खुदा हाफिज’ कहकर हाशिम वहां से निकल पड़ा। साल 1970 की एक सर्द शाम। भारत-पाकिस्तान बॉर्डर के पास श्रीनगर सेक्टर में सीमा सुरक्षा बल यानी BSF की एक टुकड़ी गश्त पर थी। तभी अंधेरे में एक साया रेंगता हुआ दिखा। 'कौन है वहां? हाथ ऊपर करो।' जवान ने राइफल तानते हुए आवाज लगाई। 19-20 साल के एक लड़के ने अपने हाथ ऊपर उठा लिए- 'गोली मत चलाना भाई, मैं सरेंडर कर रहा हूं।' BSF के जवानों ने उसे घेरकर दबोच लिया। तलाशी ली गई, तो उसके पास से पाकिस्तानी दस्तावेज, नक्शे और विदेशी करेंसी बरामद हुई। BSF के अफसर ने उसकी छाती पर राइफल तानते हुए पूछा- ‘कौन हो तुम? किसने भेजा है?’ लड़के ने चुप्पी साध ली, तो अफसर ने एक थप्पड़ जड़ दिया, 'बोलता क्यों नहीं?' लड़के ने गिड़गिड़ाते हुए कहा, 'साहब, मैं तो कश्मीरी हूं। पास के गांव का रहने वाला। रास्ता भटक गया था।' अफसर ने जवानों से कहा- ‘ये ऐसे नहीं खुलेगा। हेडक्वार्टर ले चलो।’ BSF के जवान उसे लेकर हेडक्वार्टर की तरफ चल पड़े। अगली सुबह…. एक बंद कमरे में वो लड़का पसीने से तरबतर बैठा था। सामने BSF के दो अफसर बैठे थे। एक घंटे की सख्त पूछताछ और 'थर्ड डिग्री' टॉर्चर के बाद लड़का टूट गया। उसने हांफते हुए कहा, ‘साहब, मत मारो। सब सच-सच बताता हूं।’ लड़के ने राज खोल दिया- ‘मेरा नाम हाशिम है। मकबूल भट्ट ने भेजा है। मैं हिंदुस्तान का एक हवाई जहाज हाईजैक करने आया हूं।’ किताब ‘द वॉर दैट मेड आर एंड ए डब्ल्यू’ के मुताबिक- ‘अफसर ने मुस्कुराते हुए तंज कसा- ‘अच्छा… एक जहाज अगवा कर लेने से कश्मीर आजाद हो जाएगा?’ हाशिम ने झट से जवाब दिया- 'मेरा निशाना वो जहाज था, जिसे इंदिरा गांधी का बेटा राजीव उड़ाता है।' कमरे में सन्नाटा छा गया। दोनों अफसर एक-दूसरे को देखते रह गए। मामला देश की प्रधानमंत्री के बेटे और सुरक्षा से जुड़ा था। अफसरों ने फौरन यह खबर BSF के डीजी केएफ रुस्तमजी तक पहुंचाई। रुस्तमजी ने फौरन फोन घुमाया और पूरी कहानी RAW चीफ को बता दी। जल्द ही दिल्ली में एक गोपनीय बैठक बुलाई गई। बंद कमरे में सिर्फ तीन लोग थे- PM इंदिरा गांधी, RAW चीफ आरएन काव और BSF के डीजी केएफ रुस्तमजी। RAW प्रमुख ने सुझाव दिया- ‘हम हाशिम से सौदा करेंगे।’ ‘कैसा सौदा?’ इंदिरा ने पूछा। ‘डबल एजेंट बनने का सौदा। हम हाशिम के सामने दो विकल्प रखेंगे- या तो वो हमारे लिए काम करे या फिर पूरी जिंदगी जेल में सड़े।' काव ने जवाब दिया। प्रधानमंत्री ने उनकी तरफ देखा- ‘आपको लगता है वह इस बात के लिए तैयार होगा?’ RAW प्रमुख बोले- ‘कोशिश करके देखते हैं।’ अगली सुबह, श्रीनगर के इंटरोगेशन रूम का दरवाजा खुला। इस बार अफसरों के हाथों में डंडा नहीं, चाय की प्याली थी। एक अफसर ने आगे बढ़कर हाशिम के कंधे पर हाथ रखा और कहा- 'देखो, तुम्हारी उम्र अभी बहुत कम है। जेल गए तो जिंदगी बर्बाद हो जाएगी। हम तुम्हें एक मौका दे सकते हैं। तुम जहाज हाईजैक करो, हम नहीं रोकेंगे। बदले में तुम्हें वो करना होगा, जो हम कहेंगे।’ हाशिम असमंजस में पड़ गया- ‘लेकिन... इसमें मेरा क्या फायदा?’ ‘तुम पाकिस्तान की नजर में हीरो बन जाओगे। तुम्हारी जान भी बचेगी और दुनिया को लगेगा कि तुमने हिंदुस्तानी एजेंसियों को चकमा दे दिया।' अफसर ने उसे समझाया। हाशिम ने कहा- ‘मैं कुछ समझा नहीं।’ अफसर ने चाय की प्याली उसकी तरफ बढ़ाते हुए कहा- 'पहले चाय पियो।’ हाशिम ने चुपचाप कप ले लिया। अफसर ने बताया- ‘घबराओ मत, हम तुम्हें फंसा नहीं रहे हैं। तुम अपने प्लान के मुताबिक जहाज हाईजैक करके पाकिस्तान ले जाओ। इस काम में हम तुम्हारी मदद करेंगे। बस हमारी एक ही शर्त है।' ‘क्या शर्त है?’ हाशिम ने पूछा। अफसर बोला, ‘तुम यह बात किसी को नहीं बताओगे।’ हाशिम ने कुछ देर सोचा, फिर सिर हिलाकर कहा- ‘मैं तैयार हूं। क्या करना होगा मुझे?’ अफसर ने दोबारा उसके कंधे को थपथपाया- 'अभी आराम से यहीं रहो, खाओ-पियो। वक्त आने पर हम तुम्हें सब समझा देंगे।’ हाशिम को बेंगलुरु के एक सेफ हाउस में भेज दिया गया। पूरे मामले को इतना सीक्रेट रखा गया कि किसी दूसरी एजेंसी को तो दूर, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री तक को भनक नहीं लगी। पाकिस्तान में बैठे हाशिम के आका भी इससे बेखबर थे। कुछ दिनों बाद हाशिम को BSF में भर्ती कर लिया गया। उसे जॉइनिंग लेटर भी दे दिया गया। उसकी ड्यूटी श्रीनगर हवाई अड्डे पर लगाई गई। हाशिम ने हफ्तों तक रेकी की। लोग किस गेट से आते हैं, कहां से जाते हैं और दस्तावेजों की जांच कहां-कहां होती है, उसकी नजर हर कोने पर थी। रेकी करते हुए हाशिम को अहसास हुआ कि अकेले दम पर किसी जहाज को अगवा करना मुमकिन नहीं होगा। उसने यह बात RAW अफसर को बताई। अफसर ने कहा- ‘तुम अपने हिसाब से कोई साथी ढूंढ लो, बस ध्यान रखना कि उसे प्लान की भनक नहीं लगनी चाहिए।’ हाशिम ने चचेरे भाई अशरफ कुरैशी को चुना। अशरफ सीधा-साधा और जज्बाती लड़का था। हाशिम ने धीरे-धीरे उसका ब्रेनवॉश कर दिया। वह मिशन के लिए तैयार भी हो गया। अब बारी थी हथियारों के इंतजाम की। एक रोज हाशिम की नजर उर्दू अखबार के कोने में छपे विज्ञापन पर पड़ी, जिसमें लिखा था- 'असली जैसी दिखने वाली खिलौना बंदूकें घर बैठे मंगाएं।' हाशिम ने बंदूक का ऑर्डर दे दिया। उधर, अशरफ ने घर के पिछले हिस्से में बैठकर लकड़ी से एक हथगोला बनाया और बाजार से पेंट लाकर उसे पोत दिया। देखने में वह असली ग्रेनेड जैसा लगने लगा। अब हाईजैक के लिए जहाज की व्यवस्था करनी थी। RAW ने इंडियन एयरलाइंस के कबाड़ हो चुके विमान गंगा को चुना। इस फोकर फ्रेंडशिप विमान को भारतीय सेना पहले ही डिकमीशन कर चुकी थी। अब स्क्रिप्ट तैयार थी। तारीख तय की गई- 30 जनवरी 1971… श्रीनगर एयरपोर्ट पर धुंध छाई हुई थी। रनवे पर 'गंगा' उड़ान भरने के लिए तैयार था। कैप्टन एम.के. कचरू कॉकपिट में बैठकर कंट्रोल पैनल की जांच कर रहे थे। यात्रियों की कतार में हाशिम और अशरफ भी शामिल हो गए। हाशिम की जेब में वह खिलौना बंदूक थी और अशरफ के पास लकड़ी का ग्रेनेड। RAW के गुप्त निर्देशों के चलते एयरपोर्ट पर उनकी गंभीर चेकिंग नहीं हुई। विमान में 28 यात्री और 4 क्रू मेंबर्स सवार हुए। ठीक 11:30 बजे 'गंगा' ने जम्मू के लिए उड़ान भरी। करीब 20 मिनट बाद, जब विमान पूरी ऊंचाई पर था, अचानक हाशिम अपनी सीट से उठा। उसने जेब से नकली पिस्तौल निकाली और हवा में लहराते हुए चिल्लाया- ‘कोई अपनी जगह से नहीं हिलेगा। जहाज हाईजैक हो चुका है।’ उधर, अशरफ ने लकड़ी का ग्रेनेड निकाला और उसकी पिन खींचने का नाटक करते कहा- ‘किसी ने चालाकी दिखाई, तो मैं जहाज को उड़ा दूंगा।’ विमान के भीतर चीख-पुकार मच गई। हाशिम कॉकपिट का दरवाजा धक्का देकर अंदर घुसा। कैप्टन ने मुड़कर देखा तो पिस्तौल उनकी कनपटी पर तनी थी। ‘जहाज का रुख बदलो। इसे सीधे रावलपिंडी ले चलो।' हाशिम ने चिल्लाते हुए कहा। कैप्टन ने बिना घबराए जवाब दिया- ‘इसमें फ्यूल बहुत कम है। हम रावलपिंडी नहीं जा पाएंगे। तुम कहो तो इसे लाहौर ले जा सकते हैं।’ कुछ देर आनाकानी करने के बाद हाशिम विमान को लाहौर ले जाने पर राजी हो गया। दोपहर 1 बजकर 30 मिनट पर 'गंगा' लाहौर के रनवे पर उतरा। पाकिस्तानी फौज और पुलिस ने उसे चारों तरफ से घेर लिया। हाशिम और अशरफ का जोरदार स्वागत किया गया। पाकिस्तान के कद्दावर नेता जुल्फिकार अली भुट्टो ने रनवे पर आकर उन्हें गले लगाया। पाकिस्तान दोनों को हीरो मान चुका था। 2 फरवरी की शाम हाशिम ने पाकिस्तानी अफसरों से पेट्रोल और माचिस की मांग की। अफसरों ने बिना सोचे-समझे यह सामान उन्हें मुहैया करा दिया। हाशिम ने विमान के भीतर पेट्रोल छिड़का और आग लगा दी। ‘गंगा’ धू-धू कर जलने लगा। पाकिस्तानी टीवी चैनल इसे लाइव दिखा रहे थे। भीड़ तालियां बजा रही थी। अगली सुबह, 3 फरवरी 1971 को भारत ने अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन के नियमों का हवाला देते हुए पाकिस्तान के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर दिया। इस पाबंदी के बाद पश्चिमी पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान जाने का सीधा रास्ता कट गया। पाकिस्तान को कोई फ्लाइट, फौज या रसद ढाका भेजनी होती, तो उन्हें अरब सागर से होते हुए, श्रीलंका का चक्कर लगाकर जाना पड़ता था। यह बेहद लंबा सफर था। उधर, पूर्वी पाकिस्तान में बंगाली विद्रोहियों ने बगावत कर दी थी। वे पाकिस्तानी फौज से खुली जंग लड़ रहे थे। RAW ने इसके लिए उन्हें ट्रेनिंग दी थी। हथियार मुहैया कराए थे। आखिरकार बौखलाए पाकिस्तान ने 3 दिसंबर 1971 की शाम अमृतसर, पठानकोट, श्रीनगर सहित भारत के कई हवाई ठिकानों पर बमबारी शुरू कर दी। इन हमलों के तुरंत बाद भारत ने भी जंग का ऐलान कर दिया। पाकिस्तान फंस चुका था। भारत का एयरस्पेस तो उसके लिए बंद था ही, रही-सही कसर भारत ने श्रीलंका पर कूटनीतिक दबाव बनाकर पूरी कर दी। श्रीलंका ने भी पाकिस्तान को रीफ्यूलिंग की सहूलियत नहीं दी। नतीजा ये हुआ कि पाकिस्तानी फौज कमजोर पड़ गई। महज 13 दिनों के भीतर घुटने टेक दिए। 16 दिसंबर 1971 को ढाका के रेसकोर्स मैदान में पाकिस्तानी जनरल एएके नियाजी ने अपने 93,000 सैनिकों के साथ सरेंडर कर दिया। पाकिस्तान के दो टुकड़े हुए। एक नए मुल्क का जन्म हुआ- बांग्लादेश। जब जंग खत्म हुई, तब पाकिस्तान को समझ आया कि उसके साथ खेल हो चुका है। हाशिम और अशरफ, जिन्हें वो हीरो मानकर पलकों पर बिठा रखा था, उन्हें फौरन गिरफ्तार कर लिया गया। हाशिम को कई साल पाकिस्तान की जेल में काटने पड़े। जेल से छूटने के बाद वह नीदरलैंड्स चला गया। साल 2000 में भारत लौटा, लेकिन दिल्ली एयरपोर्ट पर ही वो गिरफ्तार कर लिया गया। उस पर देशद्रोह और विमान अपहरण के मामले दर्ज किए गए। 2001 में उसे जमानत मिल गई। तब से वह जेल से बाहर है और श्रीनगर में रहता है। यह सबकुछ RAW के इसी सीक्रेट मिशन की बदौलत हुआ। हालांकि, भारत सरकार और RAW ने कभी आधिकारिक रूप से इसे स्वीकार नहीं किया। RAW के काम करने का तरीका भी यही है। अब ऑपरेशन गंगा की पहली कड़ी भी पढ़िए : कश्मीरी आतंकी भारत का विमान हाईजैक करके पाकिस्तान ले गए:पेट्रोल डालकर जला दिया, देश गुस्से में था, लेकिन प्रधानमंत्री मुस्कुराने लगीं; ऑपरेशन गंगा पार्ट-1 रेफरेंस : 1. Mission RAW : By R.K. Yadav 2. The Kaoboys of RAW : By B. Raman 3. The War that Made RAW : By Anusha Nandakumar and Sandeep Saket 4. India, Pakistan and the Secret Jihad : By Praveen Swami
‘सिया गोयल ने बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के साथ मिलकर मंगेतर केतन अग्रवाल को लोहगढ़ किले से धक्का देकर मार डाला। क्योंकि वो केतन से शादी नहीं करना चाहती थी।’ पुणे पुलिस की ये थ्योरी पूरे देश को याद हो चुकी है। लेकिन ये बात कहने में जितनी आसान है, कोर्ट में साबित करना उतना ही मुश्किल। तो क्या केतन अग्रवाल की हत्या मामले में सिया बच जाएगी, पुलिस कैसे साबित करेगी सिया ने ही धक्का दिया; समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: पुलिस ने सिया को किस आधार पर केतन की हत्या का आरोपी बनाया है? जवाब: पुलिस के मुताबिक, 18 जून 2026 की सुबह करीब 10 बजे लोहगढ़ किले की चोटी पर मौजूद सिया चीखी। गार्ड्स पहुंचे, तो सिया ने बताया- मेरा मंगेतर केतन फिसलकर खाई में गिर गया है।' सिया ने ही घरवालों को भी फोन किया। अगले दिन इंस्टाग्राम पर लिखा- ‘केतन तुम मुझे मेरे जन्मदिन पर अकेला छोड़ गए। वापस आ जाओ।’ केतन अग्रवाल के माता-पिता ने लोनावला ग्रामीण पुलिस स्टेशन के ऑफिसर्स से कहा कि उन्हें केतन की मौत में किसी गलत इरादे का शक नहीं है। पुलिस भी इसे एक्सीडेंट मान रही थी। लेकिन इसके बाद जांच में 5 ऐसी बातें सामने आईं, जिसके आधार पर सिया और चेतन को हत्या का आरोपी बनाया गया… 1. केतन के घर वालों को सिया पर शक हुआ 2. सिया ने पुलिस के सामने अपने बयान बदले 3. किले के CCTV फुटेज में गर्मी में हुडी पहने दिखा शख्स 4. हत्या वाले दिन चेतन का इंटरनेट पूरे दिन बंद 4. सिया की चेतन के नंबर पर 2000 से ज्यादा कॉल्स सवाल-2: क्या सिया को दोषी साबित करने के लिए ये 5 आधार काफी नहीं, और क्या जरूरी? जवाब: हत्या के मामले में आरोपी को 2 तरीके से दोषी साबित किया जा सकता है… 1. हत्या का कोई पुख्ता सबूत मौजूद हो भारतीय कानून में हत्या का आरोप साबित करने के लिए तीन चीजें बेहद जरूरी होती हैं- हत्या का मोटिव, यानी इरादा, हत्या में इस्तेमाल हथियार, आरोपी का मौके पर मौजूद होना और हत्या का चश्मदीद गवाह। सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता कहते हैं, ‘मान लीजिए किसी की हत्या हो और मौके पर ही आरोपी और हत्या में इस्तेमाल हुआ हथियार बरामद हो जाएं, जिसकी पोर्टमार्टम रिपोर्ट से भी पुष्टि हो जाए, तो हत्या का मामला चलेगा। अभियोजन पक्ष या पुलिस घटना के CCTV फुटेज, वीडियो, ऑडियो रिकॉर्डिंग, वारदात के गवाह या किसी दूसरे सबूत के जरिए यह साबित करेंगे कि आरोपी ने ही हत्या की है। इसके बाद कोर्ट आरोपी को दोषी करार दे देगा।’ केतन के मामले में पुलिस का मानना है कि उसे चेतन या सिया ने खाई में धक्का दिया था, जिससे उनकी मौत हो गई। विराग गुप्ता के मुताबिक, कोर्ट सिया और केतन को तभी दोषी मानेगा, जब सबूतों से ये साबित हो जाए कि केतन न ही खुद फिसला, न उसका संतुलन बिगड़ा, बल्कि उसे जानबूझकर चेतन या सिया ने या दोनों ने मिलकर धक्का दिया था। हालांकि अभी तक पुलिस के पास इसका कोई सबूत नहीं है। एक पुलिस ऑफिसर ने कहा है, ‘केतन की हत्या के समय किले पर 208 लोग मौजूद थे। हमें उम्मीद है कि किसी न किसी ने कोई आपत्तिजनक फोटोग्राफिक सबूत कैद किया होगा।' पुलिस ने कोर्ट से चेतन और सिया के लाई-डिटेक्टर टेस्ट की परमिशन मांगते हुए कहा था कि उसके पास घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है और न ही कोई ऐसा सबूत है, जिससे साबित हो सके कि केतन को धक्का देकर किसने मारा। पुलिस ने ये अर्जी वापस भी ले ली है। 2. हत्या की परिस्थिति से जुड़े सबूत मौजूद हों हत्या का वीडियो न हो, तो भी हत्या साबित की जा सकती है और आरोपी को दोषी ठहराया जा सकता है। अदालतें परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर भी हत्या के मामलों में सजा सुनाती हैं। परिस्थितिजन्य सबूतों का मतलब है कि किसी व्यक्ति की हत्या के पीछे की वजह या मोटिव, हत्या के समय आरोपियों की लोकेशन, हत्या के तरीके से जुड़े सबूत सभी आपस में अच्छे से जुड़े हों। किसी भी तरह कोई एक भी कड़ी ऐसी न हो, जिससे ये गुंजाइश बने कि आरोपी बेकसूर भी हो सकता है। विराग गुप्ता कहते हैं कि केतन की हत्या के समय का कोई मटेरियल एविडेंस नहीं मिल पाता, तो पुलिस ने केतन की हत्या के पीछे जो कहानी, सुराग और हत्या का जो मोटिव बताया है, अभियोजन पक्ष को उसे कोर्ट में सबूतों के साथ साबित करना होगा। पुलिस को इस पूरे मामले से जुड़े लोगों के फोन रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, केतन की मौत की लोकेशन से जुड़े सबूत जुटाने होंगे। इन सबके आधार पर यह साबित करना होगा कि सिया और चेतन के पास केतन को मारने की पर्याप्त वजह थी और उन दोनों ने ही केतन की हत्या की है। पुलिस का एक दावा ये भी है कि उसके पास चेतन और सिया के कबूलनामे हैं, जिनमें उन्होंने केतन की हत्या की बात स्वीकार की है। हालांकि पुलिस को दिए बयान में कोई आरोपी अपना जुर्म कबूल ले, तो भी CRPC या BNS कानून के तहत इसकी कोर्ट में कोई अहमियत नहीं होती। सवाल-3: तो क्या हत्या के आरोप से बच भी सकते हैं सिया-चेतन? जवाब: अक्सर परिस्थितिजन्य सबूतों के आधार पर हत्या के मामले में आरोपी बरी भी हो जाते हैं। आपने कई फैसलों में कोर्ट की ये टिप्पणी सुनी होगी- सबूतों की कमी के चलते आरोप साबित नहीं किया जा सका। दरअसल, इसके पीछे सुप्रीम कोर्ट के बनाए हुए नियम हैं। 1952 में एक फैसले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अदालतों को आगाह किया था कि किसी शक को सबूत न समझा जाए। फिर 1984 में सुप्रीम कोर्ट ने एक और मामले में 5 सिद्धांत बताए… सिया के वकील तनवीर अहमद मीर कहते हैं कि अभियोजन पक्ष केवल ये दिखाकर केस नहीं जीत सकता कि कई चीजें संदिग्ध लग रही हैं। घटना की हर परिस्थिति खुद में साबित हो, और फिर वो अगली कड़ी से भी जुड़ती हो, ये भी साबित हो कि केतन की मौत की दूसरी कोई संभव वजह नहीं है। अगर एक भी कड़ी टूटती है, तो आरोपियों को संदेह का फायदा मिलेगा। केतन के मामले में पुलिस को हर दावा, सबूत में बदलना होगा। साबित करना होगा कि सिया शादी से नाखुश थी और यही हत्या का मोटिव था। चेतन के साथ उसका रिश्ता, कैफे में हुई दोनों की मुलाकात और दोनों के प्लान को रिहर्सल से साबित करना होगा। सिर्फ ये साबित करना काफी नहीं होगा कि दोनों का व्यवहार संदिग्ध है, बल्कि ये फोन, चैट रिकॉर्ड, CCTV फुटेज से ये साबित करना होगा कि वो हत्या की साजिश कर रहे थे। मीर कहते हैं कि इसके अलावा सबसे जरूरी ये साबित करना होगा कि केतन गिरा कैसे? उस पॉइंट की ढलान, कहां पर गिरा, केतन के जूते, गिरने की दिशा, उनकी चोटें, फिसलने की संभावना, ये सभी चीजें मायने रखेंगी। कई संभावनाएं हो सकती हैं- केतन खद फिसले, या कोई बहस हुई, उस दौरान गिर गए, किसी एक ने धक्का दिया, या दोनों ने उकसाया, या हाथापाई में ऐसा हुआ। पुलिस को बाकी सभी संभावनाओं को खारिज करके ये साबित करना होगा कि केतन को धक्का दिया गया। सवाल-4: क्या पहले भी कोर्ट ने ऐसे फैसले दिए हैं? जवाब: हां, आरुषि-हेमराज हत्याकांड इसकी लैंडमार्क मिसाल है। 13 साल की आरुषि तलवार और तलवार दंपति के नौकर हेमराज की 2008 में नोएडा में हत्या कर दी गई थी। आरुषि की लाश उसके बेडरूम में, जबकि हेमराज की लाश छत पर मिली थी। केतन के मामले की तरह ही ये दोहरा हत्याकांड नेशनल लेवल पर सनसनी बन चुका था। आरुषि के माता-पिता- राजेश और नूपुर तलवार के बारे में कहा जा रहा था कि दोनों ने ऑनर-किलिंग की है। 2013 में CBI कोर्ट ने दोनों को दोषी भी करार दे दिया, लेकिन 4 साल बाद इलाहाबाद हाई-कोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। सिया के वकील मीर ने ही उनका भी केस लड़ा था। इस मामले में भी हाई कोर्ट ने परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को लेकर 5 सिद्धांतों के आधार पर निचली अदालत का फैसला पलट दिया था। अभियोजन पक्ष ये साबित करने में नाकाम रहा था कि घटना की रात तलवार के घर में कोई बाहरी व्यक्ति नहीं आ सकता था। मीर ने कोर्ट में ये कल्पना दी कि राजेश तलवार का कंपाउंडर, कृष्णा थडाराई को भी पहले संदिग्ध माना गया था। हो सकता है कि उसने हत्याएं की हों। तलवार दंपति को बचाने के लिए मीर को ये साबित करने की जरूरत नहीं थी कि कृष्णा ने असल में हत्याएं की थीं। बस उन्हें अपनी कल्पना को इतना भरोसेमंद बनाना था कि तलवार के दोषी होने पर संदेह पैदा हो जाए। ------- ये खबर भी पढ़िए… शादी से बचने के लिए सीधे मंगेतर की हत्या, मना क्यों नहीं कर सकी; रोमांटिक पोस्ट डाले, चार सुराग से सुलझी गुत्थी पुणे शहर से 64 किमी दूर लोहगढ़ किला। 18 जून 2026 की सुबह करीब 10 बजे किले की चोटी से एक चीख गूंजी। गार्ड्स पहुंचे, तो वहां मौजूद 20 साल की सिया ने बताया- मेरा मंगेतर केतन फिसलकर खाई में गिर गया है। सिया ने ही घरवालों को भी फोन किया। अगले दिन इंस्टाग्राम पर लिखा- ‘केतन तुम मुझे मेरे जन्मदिन पर अकेला छोड़ गए। वापस आ जाओ।’ पूरी खबर पढ़िए…
ट्रंप बोले- ईरान के साथ युद्धविराम खत्म, लेकिन बातचीत जारी; तेहरान ने वार्ता की अटकलों से किया इनकार
ट्रंप के बयान से यह संकेत मिलता है कि पिछले महीने जिस युद्धविराम व्यवस्था के तहत दोनों देशों के बीच तनाव कम हुआ था, वह अब प्रभावी नहीं रही। इसके बावजूद कूटनीतिक प्रयास जारी हैं और दोनों पक्ष प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संवाद के विकल्प खुले रखना चाहते हैं।
बहामास से एक बेहद दुखद और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है. देश के 53वें स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रव्यापी जश्न के बीच एक छोटा विमान समुद्र में क्रैश हो गया, जिससे 10 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई. यह भीषण हादसा शुक्रवार को बहामास की राजधानी नासाउ के पश्चिम में स्थित नॉर्थ एंड्रोस के पास समंदर में हुआ. प्रधानमंत्री फिलिप ब्रेव डेविस ने इस भयानक दुर्घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे पूरे देश के लिए एक बड़ा और दुखद दिन बताया है. इस हादसे के तुरंत बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए फ्लेमिंगो एयर (Flamingo Air) की सभी उड़ानों को अस्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया है.बचा था सिर्फ एक शख्स, अस्पताल में उसने भी तोड़ा दम'एसोसिएटेड प्रेस' (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, जिस समय पूरा देश आजादी की खुशियां मना रहा था, उसी वक्त इस विमान हादसे ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया. प्रधानमंत्री डेविस ने बताया कि रेस्क्यू के दौरान शुरुआत में एक व्यक्ति के जिंदा बचने की उम्मीद जागी थी, जिसे तुरंत मेडिकल इमरजेंसी के लिए ले जाया गया, लेकिन अस्पताल में इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया. इस तरह प्लेन में सवार सभी 10 लोगों की जान चली गई. प्रशासन ने सुरक्षा और प्रोटोकॉल के कारण अभी तक मारे गए यात्रियों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है.लिंडेन पिंडलिंग एयरपोर्ट से उड़ान भरते ही समंदर में समाया सेसना विमानबहामास की 'एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इंवेस्टिगेशन अथॉरिटी' ने हादसे की शुरुआती जानकारी साझा की है. रिपोर्ट के मुताबिक:रूट: यह विमान नासाउ के मुख्य लिंडेन पिंडलिंग इंटरनेशनल एयरपोर्ट से सैन एंड्रोस के लिए रवाना हुआ था.विमान का मॉडल: क्रैश होने वाला विमान सेसना 402 (Cessna 402) था, जो बहामास में ही रजिस्टर्ड था.जांच: उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद नॉर्थ एंड्रोस के पास प्लेन का नियंत्रण खो गया और वह सीधे पानी में जा गिरा. विमानन अधिकारी अब इस बात की बारीकी से जांच कर रहे हैं कि क्रैश के पीछे कोई तकनीकी खराबी थी या मौसम की वजह से यह हादसा हुआ.एक ही दिन में दो बड़ी घटनाएं, बाल-बाल बचे थे मायागुआना जा रहे यात्रीहैरानी की बात यह है कि शुक्रवार को फ्लेमिंगो एयरलाइन के साथ एक नहीं बल्कि दो बड़ी सुरक्षा चूक की घटनाएं सामने आईं. बहामास की विमानन मंत्री जोबेथ कोलबी-डेविस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया कि इस भयानक क्रैश से ठीक पहले एयरलाइन का एक अन्य विमान मायागुआना के लिए उड़ान भर रहा था. तभी पायलट को विमान में किसी गंभीर तकनीकी खराबी का अहसास हुआ.पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए विमान को तुरंत वापस नासाउ एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंड कराया. राहत की बात यह रही कि जैसे ही सभी यात्रियों को सुरक्षित नीचे उतारा गया, उस विमान में अचानक भीषण आग लग गई. एक ही दिन में हुई इन दोनों गंभीर घटनाओं के बाद विमानन मंत्रालय ने यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए फ्लेमिंगो एयर का 'एयर ऑपरेटर सर्टिफिकेट' तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है.
मिडिल ईस्ट (Middle East) में भू-राजनीतिक समीकरण एक बार फिर बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गए हैं। अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा के बीच अमेरिका द्वारा ईरान के अहम सैन्य ठिकानों पर किए गए ड्रोन व मिसाइल हमलों और जवाब में ईरान द्वारा कतर, बहरीन व यूएई (UAE) में अमेरिकी ठिकानों को टारगेट किए जाने के बाद युद्ध की स्थिति बनी हुई है।पिछले दो दिनों से ईरान को भीषण हमले की धमकी दे रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के सुर शुक्रवार (10 जुलाई 2026) को अचानक बदलते नजर आए। ट्रंप अब सैन्य हमले की बात छोड़कर फिर से कूटनीतिक बातचीत को आगे बढ़ाना चाहते हैं, हालांकि उन्होंने इसका श्रेय ईरान के पाले में डाल दिया है।डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान: सीजफायर खत्म, लेकिन बातचीत को तैयारअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान ने दोबारा बातचीत की टेबल पर लौटने की इच्छा जताई है। ईरान की इस पहल के बाद अमेरिका भी राजनयिक वार्ता के लिए तैयार है। हालांकि, ट्रंप ने यह पूरी तरह साफ कर दिया कि दोनों देशों के बीच पूर्व में हुआ अंतरिम सीजफायर (युद्ध विराम) अब आधिकारिक रूप से खत्म हो चुका है, लेकिन भविष्य में बड़े युद्ध को टालने के लिए बातचीत का सिलसिला जारी रहेगा।दूसरी तरफ, संयुक्त राष्ट्र (UN) में अमेरिका की उप राजदूत टैमी ब्रूस ने भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप क्षेत्र में स्थायी शांति चाहते हैं, लेकिन उन्होंने एक कड़ी शर्त भी रखी। ब्रूस ने कहा कि यदि ईरान समर्थित ताकतों द्वारा नागरिक ठिकानों या अंतरराष्ट्रीय कारोबारी जहाजों (Commercial Ships) पर कोई भी हमला किया गया, तो अमेरिका उसका माकूल और आक्रामक जवाब देगा।इजरायल के पीएम नेतन्याहू की दो टूक: ईरान से जंग अभी खत्म नहीं हुईजहां एक तरफ अमेरिका बातचीत की वकालत कर रहा है, वहीं उसके सबसे करीबी सहयोगी इजरायल का रुख बेहद आक्रामक बना हुआ है। इजरायल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने इजराइली एयर फोर्स के एक कार्यक्रम में दो टूक कहा कि ईरान के साथ जारी यह महाजंग अभी खत्म नहीं हुई है।नेतन्याहू ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, इजरायल किसी भी कीमत पर ईरान को न्यूक्लियर (परमाणु) हथियार हासिल नहीं करने देगा, चाहे कोई अंतरराष्ट्रीय समझौता हो या नहीं। उन्होंने दावा किया कि यदि इजरायल ने पहले सर्जिकल स्ट्राइक न की होती, तो ईरान अब तक परमाणु बम बना चुका होता और देश हर आगामी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।ईरान का पलटवार: हमला हुआ तो इजरायल का अस्तित्व मिट जाएगाबेंजामिन नेतन्याहू की सीधी सैन्य धमकी के बाद ईरान ने भी बेहद आक्रामक तेवर दिखाए हैं। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना (IRNA) के मुताबिक, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघेर जोलगदर ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान के किसी भी परमाणु या रणनीतिक ठिकाने पर हमला हुआ, तो उसका ऐसा घातक जवाब दिया जाएगा जिसके बाद इजरायल को दुनिया की कोई ताकत नहीं बचा पाएगी।अमेरिका-ईरान सैन्य टकराव से जुड़े 5 बड़े अंतरराष्ट्रीय अपडेट्स:अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें: अलजजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाते हुए कई मिसाइलें दागीं। हालांकि, इन मित्र देशों की एयर डिफेंस प्रणालियों ने अधिकांश मिसाइलों और सुसाइड ड्रोनों को हवा में ही मार गिराने का दावा किया है।रणनीतिक रेलवे ब्रिज पर हमला: ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी वायुसेना ने उत्तरी ईरान में चीन और रूस की साझेदारी से बने एक बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक रेलवे पुल को क्रूज मिसाइल से उड़ा दिया है। ईरान ने इसे सीधा 'युद्ध अपराध' बताया है, जबकि पेंटागन ने इसे ईरान द्वारा अंतरिम शर्तों के उल्लंघन का नतीजा करार दिया।होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही ठप: रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों महाशक्तियों के बीच तनाव बढ़ने के कारण दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री तेल मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही शुक्रवार को भी पूरी तरह ठप रही। वैश्विक सप्लाई चेन बाधित होने की आशंका से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में करीब 1% का उछाल दर्ज किया गया है।ईरान का 1 करोड़ बैरल तेल का इमरजेंसी एक्सपोर्ट: अमेरिका द्वारा दोबारा पूर्ण नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) लागू किए जाने के डर से ईरान ने एक ही रात के भीतर आनन-फानन में कम से कम 1 करोड़ बैरल कच्चा तेल और फ्यूल ऑयल निर्यात के लिए विभिन्न गुप्त जहाजों के जरिए अंतरराष्ट्रीय रूट पर रवाना कर दिया है।लेबनान पर इजराइली ड्रोन स्ट्राइक: लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी (NNA) के मुताबिक, इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने दक्षिणी लेबनान के नबातियेह प्रांत में दो बड़े ड्रोन हमले किए हैं। ये हमले कफर रेमान और नबातियेह अल-फौका कस्बों में हिजबुल्लाह के ठिकानों को देखकर किए गए, हालांकि इसमें किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।वैश्विक मध्यस्थता की कोशिशें तेजबीबीसी (BBC) की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल दो दिनों की सीधी सैन्य कार्रवाई के बाद दोनों पक्षों की ओर से गोलाबारी थमी हुई है। इस वैश्विक संकट को टालने और दोनों देशों को दोबारा 18 जून को हुए अंतरिम समझौते (MoU) के रास्ते पर लाने के लिए मध्यस्थ देश— कतर, मिस्र (Egypt) और पाकिस्तान पर्दे के पीछे से सक्रिय कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं। कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलाती से फोन पर वार्ता कर होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के सेफ कॉरिडोर को तुरंत बहाल करने पर जोर दिया है।
आइवरी कोस्ट के साथ भारत बढ़ाएगा डिजिटल और कृषि सहयोग, कई अहम मुद्दों पर चर्चा
विदेश मंत्रालय में केंद्रीय और पश्चिम अफ्रीका के अतिरिक्त सचिव सेवला नाइक मुडे ने शुक्रवार को आबिदजान में आइवरी कोस्ट के डिजिटल ट्रांजिशन और टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन मंत्री जिब्रिल औटारा से मुलाकात की।
गंभीर आर्थिक तंगहाली से जूझ रहे पड़ोसी देश पाकिस्तान में बुनियादी खाद्य पदार्थों की किल्लत और आसमान छूती कीमतों ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। सिंध प्रांत की राजधानी और पाकिस्तान की आर्थिक धड़कन कहे जाने वाले कराची शहर में इन दिनों आटे की कीमतों को नियंत्रित करने को लेकर प्रांतीय सरकार और आटा मिल उद्योग के बीच एक बड़ा और हिंसक प्रशासनिक गतिरोध पैदा हो गया है। स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी सख्त चेतावनियों और नए आधिकारिक नोटिफिकेशन के बावजूद, बाजार के बड़े व्यापारियों और मिल मालिकों ने सरकारी आदेशों को पूरी तरह से ठेंगा दिखा दिया है। इस टकराव के कारण आने वाले दिनों में पूरे कराची महानगर में आटे की सप्लाई चेन पूरी तरह से ठप होने और भुखमरी जैसी स्थिति पैदा होने की गंभीर आशंका बढ़ गई है।कागजों पर सिमटीं सरकारी दरें: नोटिफिकेशन के बाद भी ऊंचे दामों पर बिक रहा है अनाज'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' द्वारा जारी एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, कराची के स्थानीय प्रशासन ने बेलगाम हो रही महंगाई पर लगाम लगाने के लिए आनन-फानन में एक नया प्राइस-कंट्रोल नोटिफिकेशन जारी किया था। इस नए सरकारी आदेश के तहत सामान्य श्रेणी के आटे की खुदरा कीमत 125 पाकिस्तानी रुपये (PKR) प्रति किलोग्राम, महीन (फाइन) आटे की कीमत 135 PKR प्रति किलोग्राम और शुद्ध चक्की के आटे की दर 145 PKR प्रति किलोग्राम तय की गई थी। इसके साथ ही थोक बाजार के लिए भी कीमतें क्रमशः 122 और 132 रुपये निर्धारित की गई थीं। परंतु, धरातल पर सरकार का यह आदेश पूरी तरह से बेअसर साबित हुआ है। शहर के खुदरा बाजारों में आज भी सामान्य आटा 145 से 150 रुपये और बारीक तथा महीन आटा 160 से 170 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलोग्राम की रिकॉर्ड ऊंचाई पर खुलेआम बेचा जा रहा है।मिल मालिकों की खुली बगावत: गेहूं की बढ़ती इनपुट लागत का हवाला देकर फैसले को मानने से इनकारसरकारी नियंत्रण के खिलाफ पाकिस्तान के आटा मिल संघ (Flour Mills Association) और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने खुलकर बगावत का बिगुल फूंक दिया है। उद्योगपतियों का साफ तर्क है कि सरकार द्वारा एकतरफा तरीके से तय की गई ये कागजी दरें व्यावहारिक नहीं हैं और वे इसे किसी भी कीमत पर लागू नहीं करेंगे। व्यापारियों का कहना है कि ओपन मार्केट में गेहूं की इनपुट लागत (Wheat Procurement Cost) और बिजली-ईंधन के दामों में जो बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है, सरकार ने इस नए नोटिफिकेशन में उसकी पूरी तरह अनदेखी की है। घाटे में धंधा करने से साफ मना करते हुए मिल मालिकों ने चेतावनी दी है कि अगर उन पर जबरन सरकारी रेट थोपने की कोशिश की गई या प्रशासनिक कार्रवाई की गई, तो वे अपनी मिलों में ताला लगा देंगे, जिससे पूरे देश में गेहूं का अकाल पड़ सकता है।सप्लाई चेन टूटने की कगार पर: आम जनता के बीच जमाखोरी और भुखमरी का बढ़ा खौफइस बड़े प्रशासनिक और व्यापारिक गतिरोध का सीधा खामियाजा कराची की गरीब और मध्यमवर्गीय जनता को भुगतना पड़ रहा है। बाजार में भारी अनिश्चितता के चलते खुदरा दुकानदारों ने आटे की जमाखोरी शुरू कर दी है, जिससे कई इलाकों में राशन की किल्लत पैदा हो गई है। भू-राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार और मिल मालिकों के बीच जल्द ही कोई व्यावहारिक समझौता नहीं हुआ, तो आने वाले 48 घंटों में कराची की आटा मंडियां पूरी तरह से बंद हो सकती हैं। यह संकट ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की कठिन शर्तों और भारी विदेशी कर्ज के नीचे दबा हुआ है, जिससे शहबाज शरीफ सरकार की प्रशासनिक क्षमता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
बहामास में विमान त्रासदी, 10 लोगों की मौत से मातम
बहामास में शुक्रवार को एक छोटा विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई। हादसे के बाद सरकार ने 'फ्लेमिंगो एयर' की उड़ानों को अस्थायी रूप से रोक दिया है
दुनिया भर में तेजी से पैर पसार रहे एक नए सुरक्षा संकट से निपटने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका अगले सप्ताह एक बेहद महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहे हैं। अमेरिकी विदेश विभाग (US State Department) के तत्वावधान में आयोजित होने जा रही इस विशेष बैठक का मुख्य एजेंडा वैश्विक स्तर पर 'राजनीतिक आतंकवाद' (Political Terrorism) के खतरनाक ढंग से फिर से उभरने पर लगाम लगाना है। वाशिंगटन ने इस रणनीतिक विमर्श का हिस्सा बनने के लिए भारत सहित दुनिया भर के 60 प्रमुख देशों को आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया है। इस बैठक को लेकर वैश्विक कूटनीतिक गलियारों में हलचल काफी ज्यादा तेज हो गई है क्योंकि इसे वैश्विक सुरक्षा ढांचे को नए सिरे से परिभाषित करने वाले एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।16 जुलाई को वाशिंगटन में जुटेगी दुनिया: एशिया, यूरोप और लैटिन अमेरिका के मंत्रियों का लगेगा जमावड़ाप्रतिष्ठित अमेरिकी अखबार 'वाशिंगटन पोस्ट' (The Washington Post) द्वारा ब्रेक की गई एक विशेष खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह वैश्विक सम्मेलन आगामी 16 जुलाई 2026 को अमेरिकी विदेश विभाग के मुख्यालय में आयोजित किया जाएगा। इस हाई-वोल्टेज बैठक में यूरोप, लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और एशिया महाद्वीप के दर्जनों शक्तिशाली देशों के विदेश मंत्रियों और गृह मंत्रियों (Foreign and Home Ministers) के सीधे तौर पर शामिल होने की पूरी उम्मीद है। अमेरिका इस समय दुनिया भर में बढ़ रहे वैचारिक और राजनीतिक रूप से प्रेरित हिंसक आंदोलनों को अपनी आंतरिक और वैश्विक संप्रभुता के लिए एक अत्यंत उभरता हुआ और गंभीर खतरा मान रहा है, जिसे रोकने के लिए वह एक मजबूत बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय सहयोग और खुफिया नेटवर्क तैयार करना चाहता है।हिंसक अति-वामपंथी नेटवर्क से खतरा: अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने एक्स पर किया बड़ा दावाइस महा-सम्मेलन की संवेदनशीलता को रेखांकित करते हुए अमेरिकी विदेश विभाग के आधिकारिक प्रवक्ता टामी पिगाट (Tommy Pigott) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक बेहद महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। पिगाट ने स्पष्ट तौर पर कहा, 'वैश्विक पटल पर हिंसक अति-वामपंथी राजनीतिक आतंकवाद (Violent Far-Left Political Terrorism) का यह खतरनाक पुनरुत्थान कोई नई या अचानक उत्पन्न हुई बात नहीं है। यह एक बेहद पुराना और शातिर खतरा है, जो अब डिजिटल युग में मजबूत अंतरराष्ट्रीय संपर्कों, सीमा पार वित्तीय कड़ियों और नए खतरनाक गठजोड़ों के साथ एक बार फिर से दुनिया के सामने आ रहा है।' उनके इस बयान से साफ है कि वाशिंगटन इस बार वैचारिक रूप से प्रेरित उग्रवाद के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त करने के मूड में है।भारत के शामिल होने पर सस्पेंस: नई दिल्ली के कूटनीतिक रुख पर टिकी पूरी दुनिया की नजरेंइस पूरी अंतरराष्ट्रीय कवायद के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर एक बेहद दिलचस्प और सस्पेंस से भरा मोड़ सामने आया है। कुछ वरिष्ठ स्वतंत्र विश्लेषकों और यूरोपीय कूटनीतिक सूत्रों से मिली अंदरूनी जानकारी के अनुसार, ऐसी प्रबल संभावनाएं जताई जा रही हैं कि भारत शायद इस विशिष्ट बैठक में अपना कोई आधिकारिक प्रतिनिधि या उच्च स्तरीय कूटनीतिक शिष्टमंडल न भेजे। हालांकि नई दिल्ली ने अभी तक इस आमंत्रण को लेकर अपनी किसी आधिकारिक नीति या फैसले की सार्वजनिक घोषणा नहीं की है, लेकिन भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत आतंकवाद की परिभाषा और पश्चिमी देशों द्वारा वैचारिक उग्रवाद को देखने के चश्मे को लेकर बेहद सतर्क रुख अपनाता रहा है, जिसके चलते इस समिट में भारत की भागीदारी पर सस्पेंस गहरा गया है।
वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की लाइफलाइन कहे जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा गतिरोध अब तक के सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। दो सप्ताह पूर्व हुआ सीजफायर पूरी तरह से खटाई में पड़ चुका है और ईरान की प्रमुख तटीय पोर्ट सिटीज—बंदर अब्बास, केश्म, मूसा और रणनीतिक चाबहार में पिछले चार दिनों से भीषण धमाकों की आवाजें गूंज रही हैं। तनाव की मुख्य वजह ईरान द्वारा होर्मुज के भीतर एक दूसरा 'समानांतर समुद्री रास्ता' तैयार करना है, जिस पर वह अपना पूर्ण संप्रभु नियंत्रण का दावा कर रहा है। ईरान के इस आक्रामक कदम के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 24 घंटे का सख्त अल्टीमेटम जारी करते हुए चेतावनी दी है कि यदि जलडमरूमध्य के सभी रास्तों को सार्वजनिक रूप से नहीं खोला गया, तो ईरान को बेहद गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।होर्मुज में 'कॉरिडोर' की जंग: वैश्विक तेल सप्लाई चेन ठप होने से दुनिया पर ऊर्जा संकट का सायाइस समय खाड़ी क्षेत्र में चल रहा सैन्य टकराव किसी कूटनीतिक मतभेद का परिणाम नहीं, बल्कि सीधे तौर पर होर्मुज के भीतर समुद्री व्यापारिक मार्गों पर नियंत्रण स्थापित करने की जंग है। अमेरिका जहां अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही के लिए एक स्वतंत्र वैश्विक कॉरिडोर चलाने की कोशिश कर रहा है, वहीं ईरान अपने सुझाए समानांतर रास्ते से न गुजरने वाले अमेरिकी सहयोगी खाड़ी देशों के कमर्शियल शिप्स पर लगातार मिसाइल और आत्मघाती ड्रोन हमले कर रहा है। आपको बता दें कि पूरी दुनिया के कुल तेल परिवहन का पांचवां हिस्सा (20%) इसी होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इससे पहले 28 फरवरी को भड़के युद्ध के कारण इस संकीर्ण समुद्री रास्ते में हजारों कमर्शियल जहाज फंस गए थे, जिससे वैश्विक स्तर पर हाहाकार मच गया था।ट्रंप प्रशासन की सख्त शर्त: बिना किसी शुल्क के खुलेगा रूट, वरना अमेरिकी सेना करेगी बड़ी कार्रवाईएक्सियोस (Axios) की ताजा खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्षेत्रीय मध्यस्थों (ओमान और कतर) के जरिए तेहरान को एक बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश भिजवाया है। वाशिंगटन चाहता है कि ईरान बिना किसी देरी के सार्वजनिक रूप से यह घोषणा करे कि होर्मुज जलडमरूमध्य का पूरा शिपिंग रूट हर देश के लिए खुला है और वह किसी भी कमर्शियल वेसल (व्यापारिक जहाज) को निशाना नहीं बनाएगा। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ट्रंप की सबसे बड़ी शर्त यह है कि ईरान इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों से किसी भी प्रकार का अवैध टैक्स या टोल शुल्क वसूलना बंद करे। इस बड़े गतिरोध को सुलझाने के लिए शनिवार को मस्कट में ओमान, ईरान और अमेरिकी अधिकारियों के बीच एक आपातकालीन त्रिपक्षीय बैठक होने की संभावना है।अमेरिकी वायुसेना की भीषण बमबारी के बाद ईरान पंगु: तटीय बुनियादी ढांचे पर दागी गईं मिसाइलेंडोनाल्ड ट्रंप का यह बेहद आक्रामक अल्टीमेटम अमेरिकी वायुसेना (US Air Force) द्वारा हाल ही में ईरानी धरती पर की गई सबसे बड़ी और विनाशकारी बमबारी के ठीक बाद आया है। अमेरिकी लड़ाकू विमानों और लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों ने पश्चिमी ईरान में स्थित महत्वपूर्ण बिजली उपकरण निर्माण संयंत्रों, बड़े पावर ग्रिडों और समुद्र के खारे पानी को मीठा बनाने वाले (Desalination Plants) तटीय बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) ने इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि करते हुए दावा किया था कि इस भीषण अटैक का उद्देश्य ईरान की उस आर्थिक और तकनीकी रीढ़ को तोड़ना है, जिसका उपयोग वह खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य आक्रामकता और ड्रोन ऑपरेशन्स को बढ़ावा देने के लिए कर रहा है। हालांकि, इस भारी तबाही के बावजूद ईरान ने अमेरिकी सहयोगियों पर ड्रोन हमले जारी रखे हैं, जिससे युद्ध की आग भड़कने की पूरी आशंका बनी हुई है
फिलीपींस में तबाही – भूस्खलन से 15 की मौत, ‘बावी’ का कहर
ताइवान और पूर्वी चीन की ओर बढ़ रहे विनाशकारी तूफान बावी के असर से फिलीपींस में भूस्खलन से कम से कम 15 लोगों की मौत हो गयी है
चीनी राज्य परिषद ने '15वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान कार्बन पीकिंग कार्य योजना' जारी की
हाल ही में, चीनी राज्य परिषद ने '15वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान कार्बन पीकिंग कार्य योजना' जारी की, जिसमें 15वीं पंचवर्षीय योजना अवधि के दौरान कार्बन उत्सर्जन को चरम पर पहुंचाने के लिए कार्य योजना की रूपरेखा दी गई है।
मस्कट में जयशंकर-अलबुसैदी की मुलाकात, व्यापार से लेकर रक्षा और समुद्री सुरक्षा पर बनी सहमति
विदेश मंत्री (ईएएम) एस. जयशंकर ने शुक्रवार को मस्कट में अपने ओमानी समकक्ष सैयद बद्र बिन हमद बिन हमूद अलबुसैदी से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और ओमान के बीच रिश्तों और खाड़ी क्षेत्र के हालिया घटनाक्रमों पर चर्चा की।
शी चिनफिंग ने चिनच्यांग शहर के एक जूते कारखाने में हुए अग्निकांड पर अहम निर्देश दिया
9 जुलाई को 12 बजे दक्षिण पूर्वी चीन के फुच्येन प्रांत के चिनच्यांग शहर के एक जूते कारखाने में गंभीर आग लगी, जिसमें 28 व्यक्तियों की मौत की पुष्टि हुई।
भारत में शरण ले चुकीं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने भविष्य को लेकर एक ऐसा सनसनीखेज ऐलान किया है, जिसने पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति में हलचल मचा दी है। रॉयटर्स को दिए एक विशेष इंटरव्यू में शेख हसीना ने खुलासा किया है कि वह और उनके सहयोगी इसी साल दिसंबर में बांग्लादेश वापस लौटेंगे। उन्होंने बेहद भावुक लहजे में कहा, अगर मौत आती है, तो मैं चाहती हूं कि वह मेरी अपनी मातृभूमि पर आए, जहां मेरे माता-पिता दफन हैं। हसीना ने साफ तौर पर स्वीकार किया कि वहां कदम रखते ही उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है या उनकी हत्या भी हो सकती है, लेकिन वे प्रत्यर्पण का इंतजार करने के बजाय खुद स्वेच्छा से जाकर सरेंडर करेंगी।एंट्री करते ही गिरफ्तारी: जेल या फांसी का फंदा?शेख हसीना जैसे ही हवाई, जमीनी या समुद्री मार्ग से बांग्लादेश की धरती पर कदम रखेंगी, इमिग्रेशन और सीमा अधिकारी उन्हें तुरंत हिरासत में ले लेंगे। साल 2024 के ऐतिहासिक छात्र आंदोलन के बाद देश छोड़ने वाली हसीना को वहां की युद्ध अपराध अदालत पिछले साल नवंबर में ही मौत की सजा सुना चुकी है। चूंकि गैर-मौजूदगी में दी गई इस सजा के खिलाफ अपील करने की 30 दिनों की कानूनी समयसीमा खत्म हो चुकी है, इसलिए उनकी मुश्किलें बेहद बढ़ गई हैं। अब कोर्ट का फैसला बरकरार रहने पर उन्हें लंबी जेल या सीधे फांसी की सजा हो सकती है।'अदालत के तमाशे को बेनकाब करना मेरा मकसद'अवामी लीग की नेता ने स्पष्ट किया कि वे देश से भागकर निर्वासन में जीने के बजाय बांग्लादेश में कानूनी मुकदमों का सामना करना चाहती हैं। उन्होंने कहा, मैं न्याय में विश्वास करती हूं। मैं वहां जाकर कोर्ट की कार्यवाही के जरिए यह साबित करना चाहती हूं कि यह अदालत कितनी बकवास और एक तमाशा है। हालांकि, ढाका का वर्तमान प्रशासन लगातार भारत से उनके प्रत्यर्पण (Extradition) की मांग कर रहा है, जिस पर नई दिल्ली कानूनी विचार कर रही है। लेकिन हसीना के इस नए फैसले ने अब पूरी पटकथा को बदल कर रख दिया है।
‘ईरान ने ट्रम्प की हत्या के लिए एक नया प्लान तैयार किया है।’ ये खुफिया इनपुट इजराइल ने अमेरिका को दिया है। इसके बाद ईरान को लेकर ट्रम्प के तेवर वापस सख्त हो गए। वो ईरानी नेताओं को ‘गंदा’ और ‘शैतान’ बताने लगे। अमेरिका ने 7-8 जुलाई की रात ईरान के 80 ठिकानों पर एयरस्ट्राइक कर दी। क्या ईरान वाकई ट्रम्प की हत्या का प्लान बना रहा या सिर्फ इजराइल की चाल है, क्या इसी उकसावे में अमेरिका ने ईरान पर फिर हमला किया; समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: इजराइल ने ट्रम्प की हत्या की साजिश से जुड़े क्या खुफिया इनपुट दिए? जवाबः 9 जुलाई को सबसे पहले अमेरिकी अखबार ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ में एक रिपोर्ट छपी। इसमें कहा गया कि इजराइल ने अमेरिका को इनपुट दिया है कि ईरान ने ट्रम्प की हत्या की साजिश रची है। इसके बाद अमेरिकी मीडिया चैनल CNN ने बताया कि ये इनपुट इसी हफ्ते दिया गया। रिपोर्ट में दो सोर्सेज के हवाले से कहा गया… सवाल-2: क्या इसी खुफिया इनपुट से भड़के ट्रम्प ने ईरान पर दोबारा धावा बोला? जवाबः सीधे तौर पर नहीं कहा जा सकता। लेकिन इसके 3 संकेत मिलते हैं… 1. ईरानी नेताओं को लेकर ट्रम्प के तेवर बदले 2. ट्रम्प ने खुद कहा- ‘उनकी ‘किल लिस्ट में सबसे ऊपर’, जहाज बदला 3. नेतन्याहू से नाराजगी के बीच फोन पर बात सवाल-3: क्या इजराइल जानबूझकर ट्रम्प को भड़काने की कोशिश कर रहा? जवाबः पिछले 2 साल में अमेरिका ने ईरान पर तीन हमले किए। हर हमले से पहले इजराइल ने अमेरिका को कोई-न-कोई खुफिया इनपुट दिया, जिसने ट्रम्प भड़क गए… जून 2025, ईरानी परमाणु ठिकानों पर अमेरिका की स्ट्राइक इजराइली खुफिया विभाग ने ट्रम्प को इनपुट दिया था कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की तैयारी में है। अमेरिकी अखबार 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' के मुताबिक ‘इजराइलियों ने ट्रम्प को यकीन दिलाया कि सैन्य विकल्प खोलने से ईरान के साथ न्यूक्लियर डील आसान हो जाएगी। ट्रम्प प्रशासन भी नेतन्याहू को रोकने में सक्षम नहीं था। ऐसे में ट्रम्प को उनका समर्थन करना पड़ा।' फरवरी 2026, ईरान के खिलाफ जंग छेड़ना 28 फरवरी 2026 के हमले से पहले 11 फरवरी को नेतन्याहू, ट्रम्प से मिलने व्हाइट हाउस गए थे। उन्होंने ट्रम्प को 1 घंटे का प्रेंजेंटेशन देकर बताया कि कैसे ईरान पर उनका हमला सफल होगा। लेकिन ट्रम्प हमले के लिए तैयार नहीं थे। इसके बाद नेतन्याहू ने ट्रम्प से कहा था कि खामेनेई को मारकर 2024 में उन पर हुए हमले का बदला लेने का सबसे अच्छा मौका है। दरअसल राष्ट्रपति चुनाव प्रचार के दौरान एक हमलावर ने ट्रम्प पर गोली चलाई थी। अमेरिकी खुफिया विभाग के मुताबिक, इसमें ईरान का हाथ था। जुलाई 2026, समझौते के बावजूद ईरान पर हमला इसबार भी इजराइल ने ट्रम्प की हत्या की साजिश का खुफिया इनपुट दिया। दरअसल, अमेरिका ने ईरान के साथ समझौते की घोषणा की, तो इजराइल इससे खुश नहीं था। नेतन्याहू ने तो ये तक कहा था कि वे इस डील को मानने के लिए बाध्य नहीं है। CNN के मुताबिक, जिन सोर्सेज ने ये बताया कि इजराइल ने अमेरिका को ट्रम्प पर हमले का अलर्ट दिया है, उन्हीं में से एक सोर्स ने ये भी कहा कि ये रिपोर्ट ट्रम्प के फैसले को प्रभावित करने की कोशिश हो सकती है। क्योंकि ट्रम्प इस समय सोच रहे हैं कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज की जाए या नहीं। इस इजराइली रिपोर्ट के डिटेल्स भी स्पष्ट नहीं हैं। साथ ही अमेरिका ने न ही ऐसी किसी साजिश की खुद कोई जांच की है और न ही वह इस पर नजर रख रहा है। इसलिए ये इजराइल का उकसावा ज्यादा लग रहा है। इजराइली अखबार ‘टाइम्स ऑफ इजराइल’ में ये भी दावा किया गया है कि इजराइल दोबारा ईरान पर हमले में अमेरिका के साथ शामिल होना चाहता है। नेतन्याहू सिर्फ अमेरिका और ट्रम्प से हरी झंडी मिलने का इंतजार कर रहे हैं। सवाल-4: इजराइल की बातों में आकर अमेरिका को क्या कीमत चुकानी पड़ी? जवाबः इजराइल पर भरोसा कर ईरान पर हमले करने से अमेरिका को आर्थिक और सैन्य नुकसान हुआ है, ट्रम्प को घरेलू आलोचना झेलनी पड़ रही है… 10 लाख करोड़ रुपए तबाह हो गए: अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के मुताबिक, जंग के पहले 6 दिनों में ही अमेरिका ने 11.3 बिलियन डॉलर, यानी करीब 1 लाख करोड़ रुपए खर्च किए। जंग के दौरान अमेरिका में पेट्रोल के दाम 40% तक बढ़ गए थे।ईरान के साथ जंग में अमेरिका अबतक 10 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च कर चुका है। 42 जेट गंवाए, करोड़ों के रडार सिस्टम को नुकसान: पेंटागन की रिपोर्ट के मुताबिक, जंग के दौरान अमेरिका ने 42 जेट गंवाए हैं। इनमें करीब 282 करोड़ रुपए के चार F-15E फाइटर जेट और करीब 534 करोड़ रुपए के तीस MQ-9 रीपर ड्रोन भी शामिल हैं। कतर के अमेरिकी बेस पर तैनात FP132 रडार सिस्टम नुकसान पहुंचा है। ईरानी सेना ने अमेरिका के एडवांस डिफेंस सिस्टम THAAD और पैट्रियट को भी डैमेज किया है। ट्रम्प की अप्रूवल रेटिंग 25% घटी: ईरान के साथ जंग छेड़ने से अमेरिकी जनता खुश नहीं है। जनवरी में जब ट्रम्प को दूसरी बार राष्ट्रपति बने 1 साल पूरे हुए थे, उनकी अप्रूवल रेटिंग 52% थी। अप्रूवल रेटिंग, यानी एक सर्वे के जरिए पता करना कि कितने प्रतिशत लोग किसी नेता, सरकार या नीति से खुश हैं। 10 जुलाई को ट्रम्प की अप्रूवल रेटिंग सिर्फ 39% रह गई है। अमेरिका के कई शहरों में उनके खिलाफ ‘नो किंग्स’ प्रोटेस्ट हो रहे हैं। इसके अलावा ईरान जंग को लेकर अमेरिका के टारगेट भी पूरे नहीं हुए। ट्रम्प ने जंग के 3 मुख्य टारगेट बताए थे- ईरान में सत्ता परिवर्तन, उसके न्यूक्लियर और बैलेस्टिक मिसाइल प्रोग्राम पर रोक, ईरानी नेवी का खात्मा। 4 महीने बाद भी इनमें से कोई टारगेट पूरा नहीं हो पाया है। सवाल-5: क्या वाकई अभी ईरान ट्रम्प को मारने की कोई साजिश कर रहा है? जवाबः कुछ अमेरिकी रिपोर्ट्स के अलावा अभी कोई पुख्ता जानकारी नहीं है कि ईरान ने ट्रम्प को मारने के लिए कोई नया प्लान बनाया है। हालांकि 2020 में अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरानी टॉप जनरल कासिम सुलेमानी की मौत के बाद कई बार ट्रम्प को मारने की धमकी दी गई, कुछ साजिशें हुईं और एक बार ट्रम्प पर हमला भी हुआ… --------- ये खबर भी पढ़िए… ‘हमारे पास भारत है’, नेतन्याहू ने जेडी वेंस को क्यों दिया ऐसा जवाब; भारत-इजराइल की ‘पक्की दोस्ती’ के पीछे की कहानी 5 जुलाई को इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा- अमेरिका ही नहीं, बल्कि हमारे कुछ और दोस्त भी हैं। जैसे- 1.4 अरब आबादी वाला भारत। नेतन्याहू का ये बयान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस को जवाब था। वेंस ने पिछले महीने कहा था कि ट्रम्प दुनिया के इकलौते ताकतवर देश के नेता हैं, जो इजराइल से सहानुभूति रखते हैं। पूरी खबर पढ़िए…
शेख हसीना ने दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की जताई इच्छा, अदालत में आत्मसमर्पण करने का किया दावा
शेख हसीना ने आरोप लगाया कि अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ लगातार कानूनी कार्रवाई की जा रही है। उनके अनुसार, पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं पर विभिन्न मामले दर्ज किए गए हैं, जिसके कारण अनेक लोग सार्वजनिक जीवन से दूर रहने या छिपकर रहने को मजबूर हैं।
यही मैं भारत के साथ कर रहा हूं, इजरायल-अमेरिका तनाव के बीच नेतन्याहू ने क्यों लिया भारत का नाम
हाल ही में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का एक बयान वैश्विक कूटनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। अमेरिका के साथ चल रही अनबन और बढ़ते तनाव के बीच नेतन्याहू का 'भारत का नाम लेना' कई गंभीर संकेत दे रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि 'जो मैं भारत के साथ कर रहा हूं, वही इजरायल के लिए भी अपनाऊंगा।' इस बयान ने न केवल विशेषज्ञों को चौंकाया है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या इजरायल अब अपने रणनीतिक संबंधों के लिए भारत को एक 'मॉडल' के रूप में देख रहा है? आइए समझते हैं इजरायल का यह नया कूटनीतिक गेम प्लान।क्या भारत को 'रोल मॉडल' मान रहे नेतन्याहू?नेतन्याहू के इस बयान के गहरे अर्थ निकाले जा रहे हैं। भारत और इजरायल के बीच पिछले एक दशक में रक्षा, तकनीक और कूटनीति के क्षेत्र में जो मजबूत साझेदारी बनी है, वह दुनिया के लिए एक उदाहरण है। भारत अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) के लिए जाना जाता है, यानी किसी एक महाशक्ति के दबाव में आए बिना अपने राष्ट्रीय हितों के फैसले लेना। नेतन्याहू का यह इशारा संभवतः इसी ओर है कि इजरायल अब अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम कर भारत की तरह खुद को स्वतंत्र और आत्मनिर्भर विदेश नीति के साथ ढालना चाहता है।इजरायल का नया प्लान: स्वायत्तता और आत्मनिर्भरताइजरायल का नया प्लान केवल सैन्य ताकत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक और तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर भी एक बड़ा कदम है। नेतन्याहू का मानना है कि जिस तरह भारत ने अपनी शर्तों पर वैश्विक शक्तियों के साथ संबंध बनाए हैं, उसी तरह इजरायल भी अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए अब किसी एक देश के भरोसे नहीं रहना चाहता। इस कूटनीति का सीधा मतलब है कि इजरायल अब अपने पड़ोसियों और अन्य वैश्विक मंचों पर अपनी शर्तों को प्राथमिकता देगा। यह बदलाव निश्चित रूप से मिडिल ईस्ट के समीकरणों को बदल सकता है और आने वाले समय में भारत-इजरायल के रिश्तों को और अधिक प्रगाढ़ कर सकता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ऑस्ट्रेलिया दौरे के तीसरे और अंतिम दिन मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) में इस ऐतिहासिक पहल की घोषणा की। इस अवसर पर ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव वॉ भी मौजूद रहे।
कंगाली और भारी कर्ज के बोझ से दबे पड़ोसी देश पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था (Pakistan Economy) को सुधारने के लिए जब से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने कड़े आर्थिक रिफॉर्म्स लागू कराए हैं, तब से आंकड़ों के लिहाज से वहां की स्थिति में मामूली सुधार देखा जा रहा है। इस बीच पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक से एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया के आर्थिक विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है।पाकिस्तान को इस समय अपने किसी उद्योग या प्रोडक्शन से नहीं, बल्कि विदेशों में मजदूरी और नौकरियां कर रहे अपने नागरिकों (Overseas Pakistanis) से इतनी मोटी कमाई हो रही है कि वह देश की अर्थव्यवस्था की असली लाइफलाइन बन गई है। यह रकम इस समय पाकिस्तान द्वारा दुनिया भर में किए जाने वाले कुल नेट एक्सपोर्ट (Total Export) से भी कहीं ज्यादा हो चुकी है।वित्त वर्ष 2026 में रेमिटेंस का बना अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्डपाकिस्तान के केंद्रीय बैंक, स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) द्वारा सोशल मीडिया पर जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक:ऐतिहासिक रिकॉर्ड: 30 जून 2026 को समाप्त हुए पिछले पूरे वित्त वर्ष (FY26) में पाकिस्तान को विदेशों से रिकॉर्ड 41.6 अरब अमेरिकी डॉलर ($41.6 Billion$) की रेमिटेंस (प्रवासियों द्वारा भेजी गई रकम) प्राप्त हुई है।सालाना बढ़ोतरी: यह ऐतिहासिक रकम वित्त वर्ष 2025 में मिली 38.3 अरब अमेरिकी डॉलर की राशि से 8.6 प्रतिशत ज्यादा है।पाकिस्तान के वित्त मंत्री के मुख्य सलाहकार खुर्रम शहजाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस उपलब्धि को साझा करते हुए इसे देश के इतिहास की “अब तक की सबसे बड़ी सालाना रेमिटेंस आमद” करार दिया। उन्होंने दावा किया कि यह आंकड़ा विदेशों में रहने वाले पाकिस्तानियों के देश की नीतियों पर अटूट भरोसे को दर्शाता है, जिससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Buffer) मजबूत हुआ है।किन अमीर मुल्कों से आया सबसे ज्यादा पैसा?स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के डेटा विश्लेषण से पता चलता है कि पाकिस्तान की झोली में सबसे ज्यादा विदेशी मुद्रा डालने वाले शीर्ष देश खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) के हैं। केवल जून के महीने के आंकड़ों को देखें तो:सऊदी अरब (Saudi Arabia): रेमिटेंस का सबसे बड़ा स्रोत रहा, जहां से 829.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर भेजे गए।संयुक्त अरब अमीरात (UAE): दूसरे नंबर पर रहा, जहां से पाकिस्तानियों ने 792.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर घर भेजे।यूनाइटेड किंगडम (UK): ब्रिटेन से पाकिस्तान को 514.9 मिलियन अमेरिकी डॉलर मिले।अमेरिका (USA): संयुक्त राज्य अमेरिका से 296.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर की आमद दर्ज की गई।इसके अलावा 100 मिलियन डॉलर से अधिक की सूची में यूरोपीय देश इटली (121.1 मिलियन डॉलर) और खाड़ी देश ओमान (110.8 मिलियन डॉलर) भी प्रमुख योगदानकर्ता रहे। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही इस साल रेमिटेंस में 8.6% की ग्रोथ हुई हो, लेकिन यह रफ्तार वित्त वर्ष 2025 की 26.6% और वित्त वर्ष 2024 की 10.7% की ग्रोथ दर के मुकाबले काफी धीमी पड़ी है।पाकिस्तान का ट्रेड डेफिसिट: कुल एक्सपोर्ट से 11.5 अरब डॉलर ज्यादा है रेमिटेंसपाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का सबसे स्याह और कड़वा पहलू यह है कि देश का अपना खुद का उत्पादन और निर्यात (Exports) पूरी तरह धराशायी हो चुका है।आर्थिक संकेतक (FY26)कुल रकम (अमेरिकी डॉलर में)वर्कर्स रेमिटेंस (विदेशों से आई रकम)41.6 अरब डॉलरनेट एक्सपोर्ट (कुल निर्यात कमाई)30.1 अरब डॉलरट्रेड डेफिसिट (कुल व्यापार घाटा)लगभग 40 अरब डॉलरआंकड़ों की तुलना करें तो पाकिस्तान ने दुनिया भर में अपना सामान बेचकर जितना कमाया (30.1 अरब डॉलर), उससे 11.5 अरब डॉलर ज्यादा रकम उसके प्रवासी मजदूरों ने खैरात और पसीने की कमाई के रूप में सीधे देश भेज दी। वर्तमान में पाकिस्तान का कुल व्यापार घाटा (Trade Deficit) लगभग 40 अरब डॉलर के ऊंचे स्तर पर है। ऐसे में यदि प्रवासी पाकिस्तानी यह पैसा भेजना बंद कर दें, तो पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार शून्य हो जाएगा और देश तुरंत डिफॉल्ट (दिवालिया) घोषित हो जाएगा। यही कारण है कि इस रेमिटेंस को पाक इकोनॉमी की वेंटिलेटर या लाइफलाइन कहा जा रहा है।
मिडिल ईस्ट (Middle East) में शांति और युद्धविराम की कोशिशों को एक बार फिर बहुत बड़ा झटका लगा है। गुरुवार को अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे भीषण और रणनीतिक हवाई हमले (Airstrikes) किए हैं। इन हमलों से ईरान का सरकारी मीडिया और कई शहर थर्रा उठे हैं।सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि अमेरिका ने इस बार ईरान के एकमात्र बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट कॉम्प्लेक्स (Bushehr Nuclear Power Plant) के बेहद नजदीकी इलाके को निशाना बनाया है, जिससे परमाणु हादसे का खतरा भी पैदा हो गया था। इस भीषण सैन्य गोलाबारी ने कुछ ही समय पहले हुए उस नाजुक अंतरिम समझौते को पूरी तरह वेंटिलेटर पर ला दिया है, जिसका मकसद क्षेत्र में शांति स्थापित करना था।खामेनेई को दफनाने के तुरंत बाद बुशहर पर गिराए बमईरान के लिए गुरुवार का दिन बेहद भावुक और तनावपूर्ण था। कई दिनों के राष्ट्रीय शोक के बाद, ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (जिनकी मौत 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआती गोलाबारी में हो गई थी) को उनके गृहनगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया गया था। ठीक इसी अंतिम संस्कार के दौरान अमेरिका ने ईरान की रीढ़ तोड़ने के लिए ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए।बुशहर के स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी एहसान जहानियन के हवाले से सरकारी समाचार एजेंसी 'इरना' ($IRNA$) ने पुष्टि की है कि अमेरिकी विमानों ने दोपहर के समय सीधे न्यूक्लियर प्लांट के पास बमबारी की। हालांकि, अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने इसे ईरान की उस सैन्य क्षमता को नष्ट करने की कार्रवाई बताया है, जो होर्मुज जलमार्ग (Strait of Hormuz) में अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खतरा बनी हुई थी।अमेरिका के 90 ठिकानों पर हमले, ईरान का पलटवार: 14 की मौतअमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने इन हमलों के ब्लैक-एंड-व्हाइट फुटेज जारी किए हैं, जिनमें ईरानी एयरपोर्ट के रनवे, मिसाइल लॉन्चर और उत्तर-पूर्वी गोलिस्तान प्रांत में स्थित रेलवे के बड़े पुलों को नष्ट होते हुए देखा जा सकता है।नुकसान का आंकड़ा: ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले दो दिनों में हुए इन अमेरिकी हमलों में कम से कम 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से अधिकांश सुरक्षा बलों के सदस्य थे, जबकि 78 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं।ईरान का जवाबी हमला: ईरान ने भी इस कार्रवाई का तुरंत बदला लेते हुए खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और उसके सहयोगी देशों को निशाना बनाया। जॉर्डन, कुवैत और कतर की तरफ ईरान की ओर से कई बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें दागी गईं।सहयोगियों का हाल: बहरीन में, जहां अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े का मुख्यालय है, हमलों के डर से तीन बार सायरन गूंजे। कुवैती सेना ने दावा किया कि उसने 3 बैलिस्टिक मिसाइलों और 10 ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया, हालांकि इसके मलबे से एक नागरिक घायल हो गया। जॉर्डन सरकार ने भी ईरान के हमलों को रोकने का दावा किया है।'ईरान को दादागिरी की कीमत चुकानी होगी' - डोनाल्ड ट्रंप की दोटूकतुर्की में नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन से बाहर निकलने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ईरान में हुए धमाकों के वीडियो पोस्ट करते हुए इस्लामिक गणराज्य को बेहद सख्त चेतावनी दी।ट्रंप ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में तीन अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकरों पर ईरान द्वारा किए गए बम हमलों का यह सीधा बदला है। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा:अगर ईरान ने दोबारा ऐसी हिमाकत की, तो हालात और भी बदतर हो जाएंगे। यह नाजुक अंतरिम युद्धविराम अब पूरी तरह खत्म माना जा सकता है। मुझे लगता है कि शांति वार्ता करने वाले अधिकारी केवल अपना समय बर्बाद कर रहे हैं।इसके साथ ही ट्रंप ने ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे, जैसे कि बिजली ग्रिड, वाटर डिसेलिनेशन प्लांट को उड़ाने और खार्ग द्वीप (जहां से ईरान का 90% तेल एक्सपोर्ट होता है) पर कब्जा करने की अपनी पुरानी धमकियों को फिर से दोहराया।'हमला करोगे तो भुगतोगे' - ईरान का कड़ा रुखअमेरिका के इस आक्रामक रुख पर ईरान के शीर्ष अधिकारियों ने भी झुकने से साफ इनकार कर दिया है। युद्धविराम वार्ता में मुख्य भूमिका निभाने वाले ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गलीबाफ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका ने अभी तक यह नहीं सीखा है कि वादे तोड़ने की क्या कीमत होती है। अगर आप हम पर हमला करेंगे, तो हम भी चुप नहीं बैठेंगे और पलटवार करेंगे।वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट: होर्मुज स्ट्रेट बंद होने का डरइस ताजा सैन्य टकराव ने वैश्विक आर्थिक जगत की रातों की नींद उड़ा दी है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का वह सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ता है, जहां से वैश्विक व्यापार का लगभग पांचवां (20%) हिस्सा तेल और प्राकृतिक गैस गुजरता है।मई के महीने में जहां इस रास्ते से केवल 233 जहाज गुजरे थे, वहीं जून में अंतरिम समझौते के बाद यह संख्या बढ़कर 576 हुई थी (हालांकि यह जून 2025 के 3,100 जहाजों के मुकाबले बेहद कम है)। अगर यह रास्ता पूरी तरह युद्ध की चपेट में आकर बंद हो जाता है, तो दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, जिससे हर देश में भयंकर मंदी और महंगाई का नया दौर शुरू हो सकता है। फिलहाल, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची सऊदी अरब, तुर्की, ओमान और पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से फोन पर बात कर तनाव कम करने की कोशिशों में जुटे हैं।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) एक बार फिर हिंसा, तनाव और गंभीर राजनीतिक अस्थिरता के मुहाने पर आकर खड़ा हो गया है। ताजा इनपुट्स के अनुसार, PoK के शुबाज़ाबाद क्षेत्र में सुरक्षा बलों द्वारा की गई कथित फायरिंग में दो स्थानीय कश्मीरी युवकों की दर्दनाक मौत हो गई है। इस घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव चरम पर पहुंच गया है और मुज़फ़्फ़राबाद से लेकर कई प्रमुख शहरों में हिंसक विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान की दमनकारी सुरक्षा एजेंसियों और मुज़फ़्फ़राबाद की कठपुतली सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।हत्या के लिए मुज़फ़्फ़राबाद सरकार और पाक एजेंसियां जिम्मेदारघटना के तुरंत बाद प्रदर्शनकारियों और स्थानीय नागरिक अधिकारों के लिए लड़ रहे संगठनों की ओर से एक संयुक्त आक्रोश बयान जारी किया गया है।सीधा आरोप: बयान में साफ तौर पर कहा गया है कि निर्दोष युवकों पर गोलीबारी करने और उनकी जान लेने के लिए सीधे तौर पर पाकिस्तान की बर्बर सुरक्षा एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन जिम्मेदार है।असंवेदनशीलता का आरोप: प्रदर्शनकारियों ने दुख जताते हुए कहा कि ठीक एक महीने पहले PoK में हुई हिंसक झड़पों के दौरान मारे गए लोगों के शवों के अवशेष आज तक उनके पीड़ित परिजनों को नहीं सौंपे गए हैं। सरकार और सुरक्षा बल मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन कर रहे हैं।चुनावी तैयारियों में व्यस्त सत्ताधीश, जनता में भयंकर उबालनागरिकों का सबसे बड़ा गुस्सा इस बात को लेकर है कि जब पूरा PoK बुनियादी सुविधाओं की कमी, महंगाई और सुरक्षा बलों के अत्याचार से कराह रहा है, तब वहां की सरकार जनता के घावों पर मरहम लगाने के बजाय राजनीतिक रोटियां सेकने में व्यस्त है।प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मुज़फ़्फ़राबाद में बैठी सरकार पूरे घटनाक्रम और जनता की चीख-पुकार को पूरी तरह नजरअंदाज कर आगामी स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी तैयारियों की जोड़-तोड़ में व्यस्त है, जिससे साफ पता चलता है कि उन्हें स्थानीय आवाम की जान की कोई कीमत नहीं है।शहीदों के खून का हिसाब होगा, अल्टीमेटम हुआ खत्मआंदोलनकारियों ने मुज़फ़्फ़राबाद सरकार और पाकिस्तानी हुक्मरानों को खुली चेतावनी देते हुए आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है:हिसाब लिया जाएगा: प्रदर्शनकारियों ने दोटूक शब्दों में कहा कि मारे गए बेकसूर शहीदों के खून की एक-एक बूंद का हिसाब लिया जाएगा और इस दमन को कश्मीरी आवाम कभी नहीं भुलाएगी।अल्टीमेटम समाप्त: नेताओं ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार को अपनी नीतियां सुधारने के लिए दिया गया अल्टीमेटम अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है। अब बातचीत का समय खत्म है और जल्द ही एक विशाल जन-आंदोलन के अगले चरण की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।थमने नहीं देंगे संघर्ष: आंदोलनकारी नेताओं का आह्वानPoK में चल रहे इस नागरिक अधिकार आंदोलन से जुड़े शीर्ष नेताओं ने अपने समर्थकों और आम जनता से लगातार सड़कों पर बने रहने और संघर्ष को जारी रखने की भावुक अपील की है। नेताओं ने कहा, पाकिस्तानी हुकूमत और उनकी एजेंसियां हमारे ऊपर चाहे जितने जुल्म ढा लें या रास्ते में कितनी भी बाधाएं खड़ी करें, यह आंदोलन अब अपने मुकाम तक पहुंचे बिना रुकने वाला नहीं है। विरोध प्रदर्शन अपने निर्धारित लक्ष्य (अधिकारों की प्राप्ति) तक लगातार जारी रहेंगे।पाक सरकार की चुप्पी: फिलहाल इस पूरे संवेदनशील मामले और दो युवकों की मौत पर न तो पाकिस्तान की मुख्य केंद्र सरकार और न ही मुज़फ़्फ़राबाद प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या प्रतिक्रिया सामने आई है। पूरे शुबाज़ाबाद और आस-पास के क्षेत्रों को सुरक्षा बलों ने छावनी में तब्दील कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद जनता का गुस्सा उफान पर है।
कुवैत में रक्षा, व्यापार और ऊर्जा पर अहम चर्चा बैठकें पूरी करने के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर गुरुवार को ओमान पहुंचे।
समझौता हो या न हो, ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देंगे – नेतन्याहू का धमाकेदार ऐलान
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल किसी भी हाल में ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उन्होंने कहा कि देश विदेशी खरीद पर निर्भरता कम करने के लिए अपने यहां हथियारों का उत्पादन बढ़ाएगा।
‘अमेरिका में जो इंडियन हैं, उनके पास बहुत पैसा है। पाकिस्तानी लड़के ने एक महीने में 95 लाख रुपए से ज्यादा कमीशन उठाया। उसने इंडियन कस्टमर को डिजिटल अरेस्ट कर 9.5 करोड़ की पेमेंट करवाई थी।’ सायबर स्कैम करने वाली इंडस्ट्री में लड़कों की भर्ती करने वाले एजेंट विक्की से हमारी मुलाकात कंबोडिया में हुई। सायबर स्कैम के जरिए भारत में हर दिन करीब 61 करोड़ रुपए और हर महीने 2 हजार करोड़ रुपए ठगे जा रहे हैं। कंबोडिया–मलेशिया जैसे देश इसका हब बन चुके हैं। कंबोडिया में किसी इंडस्ट्री की तरह सायबर स्कैम कंपनियां चल रही हैं, इसलिए हम पड़ताल करने वहां पहुंचे। ऑपरेशन स्कैम वर्ल्ड के पहले पार्ट में हमने बताया था कि कैसे भारत में लड़कों को सायबर स्कैम के लिए भर्ती किया जा रहा है। अब दूसरे और आखिरी पार्ट में पढ़िए और देखिए कंबोडिया पहुंचने के बाद लड़कों के साथ क्या होता है। स्टेप 1: पाकिस्तानी एजेंट से मुलाकात हम 15 जून को कंबोडिया की राजधानी नोम पेन्ह पहुंचे। विक्की से कॉन्टैक्ट कराने वाले पाकिस्तानी एजेंट लफी ने बताया था कि एयरपोर्ट पर पूछताछ होती है, लेकिन हमारी सेटिंग है। 200 से 250 डॉलर में हमारा बंदा इमिग्रेशन क्लियर करवा देता है। हालांकि, हम टूरिस्ट वीजा पर नोम पेन्ह पहुंचे थे। इमिग्रेशन में हमसे सिर्फ कंबोडिया आने की वजह पूछी गई। हमने बताया कि घूमने आए हैं। एयरपोर्ट से निकलते ही एजेंट विक्की को कॉल किया। उसने शाम 5 बजे मिलने को कहा। जिस जगह की लोकेशन भेजी, वो नोम पेन्ह इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास ट्रापेआंग रूमचेक एरिया की थी। यहां कई वेयरहाउस, लॉजिस्टिक कंपनियां, रेस्टोरेंट्स और अपार्टमेंट्स हैं। लोकेशन पर पहुंचने के बाद हमने विक्की को कॉल किया। कहा कि भाई कहां हो, नजर नहीं आ रहे। उसने कहा- ‘तुम जहां हों, वहां से आगे बढ़ो। मैं मेन रोड की तरफ आ रहा हूं।’ थोड़ा आगे बढ़ने पर ब्लैक शर्ट और कैप में एक लड़का दिखा। यही विक्की था। वो हमें अपने घर ले गया। अंदर जाते ही विक्की के साथ मौजूद लड़के ने गेट बंद कर दिया। फिर बातचीत शुरू हुई। पता चला कि विक्की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का रहने वाला है। उसने बताया ‘ये मेरा घर और ऑफिस दोनों है। स्कैम के लिए आने वाले लड़कों को पहले यहीं रुकवाते हैं। कुछ दिन लड़कों को यहां रखने के बाद स्कैम कंपाउंड भेजते हैं। अब भर्ती का तरीका बदल गया है। आजकल एजेंट सीधे अपनी लोकेशन पर नहीं बुलाते। आपको लफी भाई ने भेजा है, इसलिए बुला लिया।’ भारतीयों को फंसाने में ज्यादा पैसा, पाकिस्तानी लड़के ने एक महीने में 95 लाख कमाएविक्की को शक न हो, इसलिए हमने सीधे सवाल-जवाब नहीं किए। हमने कहा कि यहां रेस्टोरेंट खोलना चाहते हैं। आप बताओ कहां खोल सकते हैं। रेस्टोरेंट के ऊपर ही कमरे बना देंगे, भारत से आने वाले लड़कों को उसी में रुकवाएंगे। इससे किसी को शक भी नहीं होगा। विक्की बोला, ‘जमीन मिल जाएगी, कोई दिक्कत नहीं। मैं वीजा के साथ कानूनी मदद भी करता हूं। अगर किसी लड़के को जेल हो जाए, तो मेरे पास वकीलों का ग्रुप है। मुझे पुलिस रेड की खबर पहले मिल जाती है। कई बार लड़कों को ऐसे निकाला कि एक दरवाजे से पुलिस आ रही है और दूसरे से उन्हें बाहर कर दिया। विक्की ने आगे बताया, ‘अगर कोई खुद स्कैम ऑपरेशन चलाना चाहे, तो उसके लिए भी जगह दिलवा सकते हैं। सिक्योरिटी भी प्रोवाइड कराता हूं। पुलिस नंबर वाली गाड़ियां भी दी हैं।’ सैलरी के बारे में पूछने पर बोला, ‘लड़कों की शुरुआती सैलरी 75 हजार से 1 लाख रुपए तक जाती है। काम के हिसाब से कमीशन मिलता है। रहने के लिए एसी रूम और तीन वक्त का खाना मिलता है। लड़के को आने के बाद पूरा काम समझाते हैं’ बातचीत के आखिर में उसने कहा, ‘‘कंबोडिया में भारत के सिम कार्ड की बहुत डिमांड है। अगर कोई कंबोडिया पहुंचा दे, तो बहुत मुनाफा है। भारत से आने वाले लोग हजारों सिम लेकर आते हैं। इंडियन कॉलिंग में भी कमाई है। अगर अरेंज हो सकें, तो भेजना। खूब कमाओगे।’ स्टेप 2: स्कैम कंपाउंड में ट्रांसफरविक्की से मुलाकात के बाद हम सायबर स्कैम कंपाउंड तक पहुंचना चाहते थे। इन स्कैम कंपाउंड में फंस चुके रोहित ने बताया था कि नोम पेन्ह से 60 किमी दूरी पर चेरिथॉम नाम की जगह है, जहां कई कंपाउंड बने हुए हैं। कंबोडिया के कंदाल प्रांत में बसी इस जगह पर पहुंचे तो सैकड़ों सफेद रंग की बहुमंजिला इमारतें नजर आईं। ये जगह वियतनाम बॉर्डर से महज 3 किमी दूर है। सभी बिल्डिंगों के बाहर ऊंची-ऊंची दीवारें थीं। दीवारों के ऊपर कंटीले तार थे। सीसीटीवी लगे थे। बड़े-बड़े लोहे के गेट थे। कुछ कंपाउंड में ताला लगा था, कुछ के बाहर सिक्योरिटी गार्ड खड़े थे। मैं नोम पेन्ह के अपने साथी पोंग वांथा के साथ यहां पहुंचा था। उसने कहा कि, गाड़ी से बाहर मत निकलना, यहां सब स्कैमर घूमते रहते हैं। पोंग ने बताया कि, यहां कुल कितने कंपाउंड है, इसका आंकड़ा तो किसी को नहीं पता, लेकिन ज्यादातर बिल्डिंगों में सायबर स्कैम कंपनियां ही चल रहीं थीं। कुछ अब भी चोरी-छिपे चल रही हैं, कुछ ने लोकेशन बदली है। पूरा एरिया सूना था। छिपते-छिपाते हमने बिल्डिंगों के शॉट लिए। फिर एक बिल्डिंग के पीछे बनी झुग्गी के पास पहुंचे। वहां मिले लोगों ने बताया कि थोड़े दिन पहले तक स्कैम कंपाउंड में रहने वाले लड़के यहां चाय-पानी के लिए आते थे, लेकिन पुलिस की रेड हुई तो अब बहुत सारे भाग गए। भीड़ आना कम हो गई। मैंने पूछा, ये इमारतें कब बनीं हैं? जवाब मिला-सब पिछले चार-पांच साल में खड़ी हुई हैं। चाइनीज लोगों ने बनाई हैं। पहले कुछ भी नहीं था। अब खेतों के बीच में कंपाउंड, सड़कें, बिजली सब हो गया। कंपाउंड में आने के बाद बाहर जाना मुश्किल, यहीं ऑफिस, मेस और हॉस्टल स्कैम कंपाउंड तक पहुंचाने का जरिया बने रोहित को इन्हीं में से एक कंपाउंड में रखा गया था। जिन लड़कों को सायबर स्कैम के लिए कंबोडिया लाया जाता है, उन्हें एयरपोर्ट से सीधे गाड़ियों में कंपाउंड के अंदर लाते हैं। फिर जांच–पड़ताल होती है। पासपोर्ट छीन लिए जाते हैं। घरवालों से बात करने के लिए सिर्फ एक बार मोबाइल मिलता है, लेकिन वीडियो कॉल नहीं कर सकते। एक कमरे में 6 से 10 लड़कों को रखते हैं। किसी हॉस्टल की तरह यहां बंक बैड बने होते हैं। सभी लड़कों को 24 घंटे सीसीटीवी की निगरानी में रखा जाता है। जिन लड़कों पर भरोसा हो जाता है, उन्हें कंपनी कुछ देर के लिए कंपाउंड के बाहर जाने की परमिशन भी देती है। रोहित से हमें इसी एरिया में रेस्टोरेंट चलाने वाले जाहिद का नंबर मिला। कॉल किया तो उसने बताया- ‘भाईजान अब सख्ती के चलते वहां सब बंद हो गया है। मैं भी नोम पेन्ह में हूं। लड़कों को दूसरे देश भेज रहे। जैसे सख्ती कम होगी, फिर सब शुरू हो जाएगा।’ स्टेप 3: स्कैम कंपाउंड का वर्क कल्चर, सैलरी और कमीशन इन स्कैम कंपाउंड में पहुंचने के बाद एक हफ्ते तक काम सिखाया जाता है। रोहित और उसके साथियों को कंप्यूटर पर काम, मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल, अंग्रेजी में बातचीत और पहले से तैयार स्क्रिप्ट के मुताबिक लोगों से बात करने की ट्रेनिंग दी गई। चेरिथॉम में स्कैम कंपाउंड को देखने के बाद मैं नोम पेन्ह में रिवर साइड एरिया पहुंचा। इस इलाके को स्कैमर्स का अड्डा कहा जाता है। भारत, बांग्लादेश, नेपाल, वियतनाम सहित तमाम देशों के लड़के यहां मिले। इन्हीं में से एक बांग्लादेशी लड़के ने बंद कैमरे पर बात की। बोला– ‘कंपनी ने कंबोडिया के शहर सीएम रीप बुलाया था क्योंकि यहां के एयरपोर्ट पर उनकी सेटिंग थी। वहां से नोम पेन्ह आ गए। 20 दिन होटल में फंसे रहे क्योंकि कंपनी ने नौकरी के बदले 6 लाख मांगे थे। मैंने सिर्फ डेढ़ लाख दिए थे। एजेंट ने कहा- बाकी साढ़े चार लाख रुपए मिलने पर ही कंपनी आ सकोगे। फिर रकम बढ़ाकर 8 लाख कर दी। परिवार ने कर्ज लेकर पैसे भेजे।‘ ‘तब एजेंट ने गोल्डन कैसीनो कंपनी में भेजा। पहले 7 दिन ट्रेनिंग हुई। रोज 12 घंटे बैठाए रखते और कस्टमर से बात करना सिखाते। दोपहर में ज्यादातर चाइनीज खाना मिलता, जो खाया नहीं जाता। अच्छे से काम ना करने वाले से 20 घंटे तक काम करवाया जाता। कई बार 12 घंटे खड़े रहकर काम करना पड़ता।‘ टारगेट पूरा न होने पर कैद किया, करंट दिया और मारपीट कीलड़का आगे बोला, ‘मुझे बहुत टॉर्चर किया। टारगेट पूरा न होने पर पहले खाना बंद किया। फिर छोटे से कमरे में बंद कर दिया। न वॉशरूम जा सकता था, न कुछ खाने को मिलता। एक दिन मैनेजर के सामने बहुत रोया, तो टीम लीडर ने मुझे करंट लगाया और बहुत मारा। एक हफ्ते बाद मैनेजर ने मेरे एजेंट को बुलाकर मुझे बाहर निकलवा दिया।‘ ‘कर्ज ज्यादा था और वापस आने का पैसा नहीं था, इसलिए दूसरी कंपनी में चला गया। वहां महीने का दो से तीन हजार डॉलर तक कमा रहा था, लेकिन 24 अप्रैल को कंपनी बंद हो गई। हमारे चाइनीज बॉस को अरेस्ट कर लिया। सब लड़के भाग गए। हमें म्यांमार-मलेशिया जाने का कहा गया। कुछ अफ्रीकन देशों में भी गए हैं। कुछ पर कंपनी ने इतना प्रेशर डाला कि उन्होंने सुसाइड कर लिया। उनमें से दो की लाशें समुद्र में फेंक दीं। एजेंट भी भाग गए।‘ सख्ती के बाद कंबोडिया से म्यांमार-मलेशिया जा रहीं स्कैम कंपनियां पाकिस्तानी एजेंट लफी, स्कैम कंपनी के HR डिपार्टमेंट में काम करने वाले मैनुअल, कंबोडिया में मिले एजेंट विक्की और स्कैम कंपनी में काम कर चुके लड़कों से बातचीत से पता चला कि, कंपनियां कंबोडिया से मलेशिया, म्यांमार, तुर्कमेनिस्तान और श्रीलंका जैसे देशों में जा रही हैं। इन्हीं लड़कों के जरिए हमें कुआलालंपुर में भर्ती करने वाले एजेंट की लिंक मिली। जिस लड़के से नंबर मिला था, उसी के रेफरेंस से एजेंट से बात की। उसे बताया कि मैं एजेंट हूं, इंडिया से लड़कों को स्कैम कंपाउंड भेजना चाहता हूं। उसने पहले कुआलालंपुर में मिलने की बात कही लेकिन वहां पहुंचने पर मिलने से इनकार कर दिया। बोला- ‘बिना मिले ही सारा काम हो जाएगा। कुआलालंपुर के लिए ओपनिंग है। आप लड़कों के वीडियो भेजो, मैं इंटरव्यू करवाता हूं। जिन लड़कों की इंग्लिश अच्छी है, उन्हें प्रिफरेंस मिलेगा।‘ फिर एजेंट ने वॉट्सएप पर एक स्क्रिप्ट भेजी। इसमें लिखा था- ‘कॉल करके कैसे किसी व्यक्ति को झांसे में लेना है। पुलिस, ईडी या सीबीआई अधिकारी बनकर बात करनी है।’ एजेंट ने कहा कि जिन लड़कों को भेजना है, उनके वीडियो इस स्क्रिप्ट के हिसाब से रिकॉर्ड करके भेज दो। हमने एक लड़के का वीडियो भेजा, तो जवाब मिला- वीडियो ठीक है। लड़के का पासपोर्ट भेजो, इंटरव्यू करवाता हूं। एक हफ्ते में कुआलालंपुर बुला लेंगे। हमने कंपनी का एड्रेस मांगा और कहा एक बार देखना चाहते हैं। जवाब मिला- ‘चाइनीज कंपनी है, ऑफिस मेन सिटी में है, लेकिन एड्रेस नहीं दे सकता। मैं भी नहीं गया। लड़के के सिलेक्ट होने के बाद कंपनी के लोग सीधे एयरपोर्ट से ले जाएंगे।‘ अगले दिन उसने यूरोपियन और अमेरिकन मार्केट की ओपनिंग का मैसेज भेजा। बताया कि 800 डॉलर सैलरी मिलेगी। कुआलालंपुर से काम करना है, लेकिन जो स्कैम करना चाहते हैं, उन्हें ही लेकर आना। ये स्टोरी लिखे जाने तक लफी और मैनुअल हमारे कॉन्टैक्ट में हैं। मैनुअल लड़कों के पासपोर्ट मांग रहा है, लफी ने इंटरव्यू के लिए थोड़ा रुकने को कहा है। किराए के बंगले और अपार्टमेंट्स में चल रहीं स्कैम कंपनियां मलेशिया में जिन लोकेशन पर पुलिस की रेड में स्कैम कंपनियां पकड़ी गई हैं, हम वहां भी पहुंचे लेकिन ये नहीं पता चल सका कि कौन सी इमारतों में स्कैम कंपाउंड चलाए जा रहे हैं। पड़ताल में पता चला कि कुआलालंपुर के ओल्ड क्लांग रोड, कुचाई लामा और बंगसर इलाकों में कमर्शियल बिल्डिंग्स, किराए के बंगलों या अपार्टमेंट्स में सायबर स्कैम कंपनियां चल रही हैं। बाहर से देखने पर सब सामान्य लगता है, लेकिन हकीकत अलग है। श्रीलंका, फिलीपींस, म्यांमार, युगांडा जैसे देश नए ठिकाने बन रहेकंबोडिया के कई स्कैम कंपाउंड की जमीनी पड़ताल कर चुके ‘द आई विटनेस’ प्रोजेक्ट के ऑपरेशंस डायरेक्टर नाथन पॉल सदर्न कहते हैं, ‘इन कंपाउंड्स को इंटरनेशनल चाइनीज सिंडिकेट चला रहे हैं। उनके लोकल गवर्नमेंट से अच्छे रिलेशन होते हैं। पहले टेलीकॉलिंग या कस्टमर सर्विस की जॉब बताते हैं और 1200 डॉलर महीना मिलने की बात करते हैं। लोग लालच में फंस जाते हैं।‘ ‘स्कैम कंपाउंड में आने के बाद काम करना ही पड़ता है। न करने पर डार्क रूम में बंद कर मारपीट करते हैं। कंपाउंड के बाहर हथियारबंद सिक्योरिटी गार्ड होते हैं, इसलिए भाग पाना आसान नहीं होता। कंपनियां पासपोर्ट भी ले लेती हैं। लोगों के पास पैसे नहीं होते, ऐसे में कंपाउंड में ही काम करने लगते हैं।‘ वे कहते हैं, ‘इन स्कैम कंपाउंड्स की ऑपरेशनल कैपेसिटी और जिस स्केल पर ये काम कर रहे हैं, वो सब हैरान करने वाला है। एक देश में क्रैकडाउन होने पर दूसरे देश भाग जाते हैं। यही इनके काम का तरीका है।‘ कंबोडिया में ह्यूमन ट्रैफिकिंग पर सालों से काम कर रहे मार्क टेलर कहते हैं, ‘कंबोडिया सायबर क्राइम का डेस्टिनेशन बन चुका है। यहां गेम्बलिंग इंडस्ट्री से जुड़कर सायबर स्कैम करने वाली कंपनियां आई हैं। कई देशों के लोग यहां फंसे हैं।‘ ‘सख्ती के बाद ये श्रीलंका, फिलीपींस, म्यांमार, युगांडा और केन्या जैसे देशों में मूव कर रही हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि कंबोडिया में पूरी तरह से काम बंद हो चुका है। ये ऑर्गनाइज्ड नेटवर्क है। इस इंडस्ट्री को पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं है।‘ साउथ-ईस्ट एशिया ही क्यों बना साइबर स्कैम का अड्डा? ……………………ऑपरेशन स्कैम वर्ल्ड का पहला पार्ट भी पढ़ें… एक लड़के पर 95 हजार कमीशन, काम भारतीयों को लूटना ‘लड़के भेज दो... एक लड़के पर 95 हजार रुपए तक कमीशन मिलेगा।’ ये ऑफर कंबोडिया में बैठे एक पाकिस्तानी एजेंट ने भास्कर रिपोर्टर को दिया। शर्त थी कि लड़के इंग्लिश बोलना जानते हो, बाकी काम कंपनी सिखा देगी। कंपनी का नाम नहीं है। वेबसाइट नहीं है। ऑफर लेटर नहीं है। इंटरव्यू टेलीग्राम पर होगा। जॉब दुनियाभर में लोगों को डिजिटल अरेस्ट करके ठगने की है। पढ़िए पूरी खबर…
ऊपर आपने जो तस्वीर देखी, उनका नाम है मिथुन चौहान। उम्र 29 साल। जो भी इन्हें पहली बार देखता है, डर जाता है। भूत कहता है या जानवर। दुर्लभ बीमारियों की सीरीज ‘ऐ जिंदगी’ के लिए इस बार इन्हीं की तलाश है। मैं नीरज झा इसी तलाश में पहुंचा पटना से करीब 150 किलोमीटर दूर नवादा जिले के नारदीगंज ब्लॉक। गांव का रास्ता पता नहीं है, सो मैं मोबाइल में मिथुन की तस्वीर दिखाकर लोगों से पूछता हूं- इस लड़के का गांव तिलकचक कहां है? जो मिथुन को नहीं जानता वो तस्वीर देखते ही डर जाता। कहता- ‘अरे भाई ये क्या है। इंसान तो नहीं लगता।’ जैसे-जैसे मैं गांव के करीब पहुंचता गया, लोग गांव से ज्यादा उसे पहचानने लगे। फोटो देखकर एक शख्स बोला- ‘अरे ये तो मिथुन है। दूर-दूर से लोग इसका वीडियो बनाने आते हैं।’ फिर हाथ से इशारा करते हुए कहते हैं-‘इसी रोड पर 5 किलोमीटर आगे चले जाइए, फिर किसी से भी पूछ लीजिएगा सब मिथुन का घर बता देंगे।’ इस तरह पूछते-पूछते मैं करीब आधे घंटे बाद मिथुन के गांव पहुंचा और फिर उसके घर। बाहर ही कुछ लोग बैठे हैं। इनमें से एक बजुर्ग महिला को तस्वीर दिखाकर पूछा- क्या यही है मिथुन का घर? वो देखते ही बोलीं- ‘अरे, ये मेरा बेटा मिथुन है।’ पूछने पर वो अपना नाम बचिया देवी बताती हैं। मैंने जैसे ही उन्हें अपने बारे में बताया, वो बोलीं- ‘पहले भी आप जैसे कई लोग आ चुके हैं। आप भी क्या ही करिएगा। बैठ जाइए यहीं, मिथुन थोड़ी देर में आता होगा।’ थोड़ी देर बाद, एक शख्स आता दिखा। वो मिथुन थे। करीब पहुंचते ही हंसते हुए बोला- ‘मुझे देखकर डर तो नहीं गए।’ मैंने पूछा- ‘फोटो में तो आपकी शक्ल काफी अलग है।’ वो बोले- ‘एकबार सर्जरी हुई थी, उसके बाद से चेहरा थोड़ा बदल गया है।’ मैंने जैसे ही कैमरा निकाला, मिथुन की मां बोलीं- 'अब ई सबसे कुछ होने वाला नहीं है। केतना लोग वीडियो बनाकर ले गए। हमें फूटी कौड़ी नहीं दी। अब आप भी वीडियो बनाइएगा। ये तो अपनी बीमारी को कफन की तरह ओढ़कर जैसे-तैसे जी रहा है। मरेगा तभी ये बला टलेगी।' उन्होंने आगे कहा, 'यह भी भला कोई जिंदगी है इसकी। 5 लाख रुपये दिलवा दो, तो यह कुछ कर लेगा। कम से कम अपनी एक छोटी-मोटी दुकान ही खोल लेगा। चेहरा देख रहे हैं इसका, शादी-ब्याह की बात सोचना भी गुनाह है। पता नहीं कौन-सा पाप किया था, जो ऐसा अजूबा मेरे घर में पैदा हुआ है। सब किस्मत का दोष है।' इतना सुनते ही वहां बैठा एक शख्स बोला- ‘मिथुनमा, अब मिथुन चक्रवर्ती बन जाएगा। अबकी वीडियो बनेगा तो दिल्ली से पैसा आएगा।’ ये सुनते ही मिथुन झल्लाते हुए घर के अंदर चले गए और सिर पकड़कर सीढ़ी पर बैठ गए। मिथुन का चेहरा जगह-जगह कटा हुआ है। सर्जरी के बाद भी चेहरा आम लोगों जैसा नहीं है। शरीर पर गड्ढे भी हैं। कुछ देर बाद मिथुन कहते हैं- 'मैं इसीलिए आपको बुलाना नहीं चाहता था। जब भी कोई आता है तो ये लोग ऐसे ही मेरा मजाक उड़ाते हैं। कहने लगते हैं- ‘इतने सारे लोग वीडियो बनाने के लिए आते हैं। पैसा तो मिलता ही होगा। तुमको पैसे की क्या कमी है। फालतू में मजदूरी करने जाते हो। देखिए पैर में सीमेंट लगी है। लेबर का काम कर रहा था। आपका फोन आया, तो खाने का बहाना बनाकर घर आया हूं। मोबाइल है, लेकिन लोकेशन भेजना नहीं आता है। किसी को बोलता तो ये लोग फिर मजाक उड़ाते। इसीलिए आपसे कहा था- इस इलाके में किसी को भी मेरी फोटो दिखाइएगा, वो पता बता देगा। सर, मेरा चेहरा देखकर तो लोगों को घिन आती है। मेरे मुंह से लगातार लार टपकती रहती है, क्योंकि मुंह पूरी तरह बंद नहीं होता। शायद, डॉक्टर ने चेहरे का मांस ज्यादा काट दिया, इसलिए मुंह खिंचा-खिंचा रहता है। लोग कहते हैं कि तुम मनहूस हो, तभी तो ऐसी शक्ल भगवान ने दी है। आप ही बताइए, मेरा क्या दोष है। बचपन में मेरे साथ क्या हुआ, किसे पता। 10-12 साल का था, आईने में खुद का चेहरा देखकर डर जाता था। भाइयों को देखता, वो हट्टे-कट्टे, सुंदर दिखते थे। मैं न तो अपने चेहरे को ठीक से धो सकता था और न ही हाथ फेर सकता था। पूरे शरीर पर मांस के बड़े-बड़े लोथड़े थे। चेहरे पर न आंख का पता चलता था, न मुंह का। सांस भी नहीं ले पाता था। नजर भी कमजोर हो गई थी। रात में सोता था, तो 10 घर तक मेरे खर्राटे की आवाज जाती थी। जो भी रात में इस रास्ते से गुजरता, वह डर जाता था।' 'एक बार की बात है। सुबह के 5 बज रहे होंगे। मैं भाइयों के साथ आम तोड़ने के लिए खेत गया था। वहां जैसे ही कुछ लोगों की नजर मुझ पर पड़ी तो वे भूत, भूत कहकर चिल्लाने लगे। डर के मारे तेजी से भागे और एक बड़े गड्ढे में जा गिरे। उस दिन से आजतक मैं सुबह-सुबह घर से नहीं निकलता। बच्चे तो मेरे पास आते ही नहीं हैं। कोई भूत-प्रेत तो कोई शैतान का बच्चा कहता है। पड़ोसी कहते हैं- घर में ही रहा करो। बच्चे तुम्हें देखकर डर जाते हैं। दिनभर खाना नहीं खाते। मैं भी स्कूल जाता था। लेकिन जब बीमारी की वजह से मेरा चेहरा बिगड़ने लगा, तो एक दिन मैडम ने मुझे बहुत मारा। दरअसल, क्लास के बच्चों ने शिकायत की थी कि वे मुझे देखकर डरते हैं। यहां तक कि उनके घरवालों ने भी हेडमास्टर से कह दिया था- इसे स्कूल से निकाल दो, हमारे बच्चे इसे देखकर रात-रातभर सो नहीं पाते। मैडम ने कहा- तुम्हारी वजह से बाकी बच्चे स्कूल आना छोड़ देंगे। तुम अपना चेहरा आईने में देखते हो, जाकर देखो। कैसा डरावना है। अब स्कूल मत आना। तब से ही स्कूल जाना छोड़ दिया। सिर्फ 5वीं तक ही पढ़ पाया। घर में ही बंद रहता था। पापा के साथ कहीं जाता तो लोग मुझे देखकर रास्ता बदल लेते थे। अब घर वाले भी मुझे कहीं नहीं ले जाते। शाम को बाहर कहीं खेलने के लिए जाता, तो बच्चे भाग जाते। मेरे घर आकर कहते- इसे बाहर मत भेजा करो। धीरे-धीरे जब चेहरे पर मांस के लोथड़े बड़े होने लगे, तो दर्द बढ़ने लगा। ठीक से खाना भी नहीं खा पाता था। दिनभर कराहता रहता। 15-16 साल का हुआ, तो घरवालों ने पैसा देना बंद कर दिया। बीमारी में भला कौन किसका होता है। सोचा काम-धंधा करूंगा, तभी दो रोटी मिलेगी। हमारे आसपास के लोग घर बनाने का काम करते हैं। उनसे काम मांगने गया, तो वे बोले- तुम्हारी शक्ल देखने लायक नहीं है। घर पर ही बैठो। 2016-17 की बात है। तब यहां झोपड़ी थी। भाइयों ने कहा- घर बनवा लेते हैं। इसके हिस्से का खाली खेत छोड़ देते हैं। घर बनना शुरू हुआ तो कुछ मिस्त्री बाहर से काम के लिए आए। जब उन्होंने मुझे देखा तो दूसरे शहरों में मेरे बारे में बताया। कहा- वहां भूत जैसा लड़का रहता है। धीरे-धीरे ये बात सब जगह फैल गई। एक दिन शहर से एक शख्स आया। उसने मेरा फोटो खींचा और चला गया। कुछ दिन बाद वह फिर आया और पापा से कहा- इसे बड़ी बीमारी है। इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है, लेकिन सर्जरी से थोड़ी राहत मिल सकती है। वह शख्स किसी संस्था के जरिए मेरी मदद के लिए आया था।' मिथुन अस्पताल का एक पर्चा दिखाते हुए कहते हैं, इसमें पढ़ लीजिए। मेरी बीमारी का नाम लिखा है। मुझसे तो पढ़ते भी नहीं बनता। पर्चे में बीमारी का नाम लिखा है न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस। मिथुन आगे बताते हैं कि पहले तो पापा इलाज के लिए नहीं माने। कहने लगे- ‘जब इलाज नहीं है, तो सर्जरी कराकर क्या करेंगे। कहीं इसे कुछ हो गया तो।’ उस शख्स के लाख कहने के बाद पापा माने। तब वो शख्स मुझे और पापा को हवाई जहाज से बेंगलुरु ले गया। वहां मुझे एक अस्पताल में भर्ती कराया। उसके बाद क्या हुआ, कुछ पता नहीं। बाद में पापा ने बताया कि डॉक्टरों ने खून की जांच कराई और फिर ऑपरेशन के लिए ले गए। करीब 10 घंटे बाद मैं बाहर आया तो पूरे शरीर पर पटि्टयां लिपटी हुई थीं। कई दिनों तक बेहोश रहा। डॉक्टर आकर रोज पटि्टयां बदलते थे। ये सिलसिला एक-दो महीने तक चला। इसके बाद हम ट्रेन से गांव लौट आए। वो शख्स कौन था, इलाज में कितने पैसे लगे, हमें कुछ भी नहीं पता। अगले छह-आठ महीनों में सारे घाव सूख गए। डॉक्टरों ने चेहरे से मांस के लोथड़े काटकर हटा दिए थे। लेकिन मेरा चेहरा पूरी तरह बदरंग हो चुका था। शरीर पर जगह-जगह गड्ढे हो गए थे। इसी वजह से मेरी शादी नहीं हो पाई। घरवाले भी नहीं चाहते कि मेरा घर बसे। वे बस मेरे मरने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि मेरे हिस्से की जमीन बाकी के भाइयों में बंट जाए। कपड़ों के नाम पर मेरे पास एक जींस, एक हाफ-पैंट, टी-शर्ट और एक शर्ट है। इस घर में मेरा कोई हिस्सा नहीं है। घर भी पापा और भाइयों ने मिलकर बनाया है। भाइयों की शादी हुई तो मुझे कोई नहीं ले गया। बस कोई खाना दे देता तो मैं खा लेता था। सर! क्या कोई मेरी प्लास्टिक सर्जरी नहीं करवा सकता। कहते हैं, उससे चेहरा ठीक हो जाता है। अब मुझे घुटनों में भी गांठें हो रही हैं। इतने में मिथुन का फोन बजा। बात करके फोन रखते ही वो बोले- राजमिस्त्री का फोन था। उसके साथ ही काम कर रहा हूं। मुझे जाना पड़ेगा। हो सके तो मेरे लिए कुछ पैसे देते जाइएगा। मिथुन के जाने के बाद मैंने बचिया देवी से बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। कहने लगीं- सब वीडियो, फोटो खींचकर चले जाते हैं, कोई एक रुपए की मदद नहीं करता। काफी कोशिशों और पैसे की मदद का भरोसा देने के बाद बचिया देवी बात करने को राजी हुईं। कहती हैं- साल 1996 में इसका जन्म हुआ। महीना, तारीख याद नहीं। जब 4-5 साल का हुआ तो आंगन में पूरे दिन खेलता रहता था। दिखने में भी सुंदर था। उस दौरान, मिथुन के पिता रामजी चौहान कलकत्ता में रहते थे। अब भी वहीं हैं। वहां खाली तेल के कनस्तर बेचते हैं। मेरे 5 बच्चों में मिथुन चौथे नंबर का है। गर्मी का महीना था। अचानक इसे बुखार आया। उस समय तो फोन नहीं था। घर में कोई पढ़ा-लिखा भी नहीं था। एक पड़ोसी से चिट्ठी लिखवाकर पति को भेजी कि मिथुन को तेज बुखार है। ब्लॉक के डॉक्टर ने दवा दी है, लेकिन ठीक नहीं हो रहा। 15 दिन बाद इसके पिता का जवाब आया। नारदीगंज में एक डॉक्टर बैठता है। उसे जाकर दिखा दो, ठीक हो जाएगा। मिथुन को उस डॉक्टर के पास ले गई। उसने कुछ दवाई दी। दो-तीन दिन पानी में गोली को घोलकर पिलाया, तो इसके गाल पर एक छोटा सा घाव हो गया। कुछ दिन में यह घाव गांठ जैसा हो गया। डॉक्टर ने देखा तो एक इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन लगाने के एक-दो दिन बाद ही मिथुन के पूरे शरीर में जगह-जगह लाल चकत्ते नजर आने लगे। उस समय तो इसके चेहरे पर कुछ नहीं था। सिर्फ गाल पर एक घाव था। घरवालों ने कहा- सिंदूर को केरोसिन में मिलाकर शरीर पर लगा दो। शाम तक ठीक हो जाएगा। एक हफ्ते बीतने के बाद भी चकत्ते ठीक नहीं हुए, बढ़ते ही गए। फिर डॉक्टर के पास लेकर गई तो उसने कुछ दवाई दे दी। बोला- ‘दो-तीन दिन में ठीक हो जाएगा।’ पास में एक ओझा रहता था। उसके पास भी लेकर गई। उसने कहा- ‘तुम्हारे बेटे पर बुरी आत्मा का साया था, उसे हटा दिया है। जल्द ठीक हो जाएगा।’ हालांकि उससे भी कुछ नहीं हुआ। हाथ-पैर, कोहनी, घुटना… शरीर में सब जगह, गाठें बढ़ने लगीं। कुछ ही महीने में इसके पूरे चेहरे पर बड़े-बड़े घाव होने लगे। मांस के लोथड़े लटकने लगे। हम तो डर गए कि ये क्या हो गया। फिर डॉक्टर के पास गए तो उसने दवा देने से मना कर दिया। कहा- ‘पता नहीं, कौन-सी बीमारी है। किसी बड़े शहर लेकर जाओ।’ पूरे गांव में हल्ला हो गया था कि डॉक्टर की दवाई के रिएक्शन से मिथुन को ऐसा हुआ। दूसरे डॉक्टरों के पास गए तो डर के मारे उन्होंने भी दवाई नहीं दी। मैंने दोबारा पति को खबर भिजवाई। 3 दिन बाद वो कलकत्ता से घर आए। मिथुन को लेकर नवादा जिले के सरकारी अस्पताल गए। डॉक्टर देखते ही बोला- ‘ये कौन सी बीमारी है। हमने ऐसी बीमारी कभी नहीं देखी, इसे कहीं और ले जाओ।’ हम गरीब आदमी, दिन में खाएं तो रात के लिए सोचें। रात में खाएं तो दिन के लिए। खेती-बाड़ी कुछ नहीं, मेहनत मजदूरी करते हैं। पांच बच्चे थे। इसी को लेकर इधर-उधर भागते रहते तो बाकी का क्या होता, इसलिए ठीक से ध्यान नहीं दे पाए। एक बार एक भले मानुष ने इलाज करवा दिया। अब न तो हमारे पास पैसे हैं और न ही हिम्मत। डॉक्टर भी कह चुके हैं कि कोई इलाज ही नहीं तो क्या करें। सरकारी मदद के नाम पर एक पैसा नहीं मिला। मिथुन का दर्द करीब से देखने के बाद बतौर रिपोर्टर मैंने डॉक्टर से मिलकर बीमारी के बारे में जानने का सोचा। मैं पहुंचा दिल्ली के सर गंगा राम हॉस्पिटल के जेनेटिक डिपार्टमेंट। जहां मेरी मुलाकात डिपार्टमेंट की हेड रतना पुरी शाह से हुई। मैंने उन्हें मिथुन की रिपोर्ट्स और फोटो दिखाई। वे बताती हैं- मिथुन को जो बीमारी है, उसका नाम- न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस(NF) है। इसका दुनिया में कोई स्थाई इलाज नहीं है। NF जीन में खराबी से यह बीमारी होती है। माता-पिता दोनों से बच्चे में जीन की 20-20 हजार कॉपियां आती हैं। इसमें से किसी एक के भी NF जीन में खराबी आती है, तो बच्चे को यह बीमारी हो सकती है। कुछ केस में जन्म के बाद ही बच्चे के शरीर पर दाने जैसी छोटी गांठ नजर आती है। उम्र के साथ यह बढ़ती जाती है। दरअसल, इस जीन का काम सेल्स को बेतहाशा बढ़ने से रोकना है। जब इसमें खराबी आती है, तो नसों के आसपास की कोशिकाएं बढ़ने लगती हैं। बढ़ते-बढ़ते ये ट्यूमर जैसी हो जाती है। हालांकि इन ट्यूमर से कैंसर का खतरा बहुत कम होता है। कुछ मामलों में चार-पांच साल की उम्र के बाद बच्चों में इस बीमारी के लक्षण नजर आते हैं। जैसा मिथुन का केस है। सबसे पहले पूरे शरीर पर लाल, भूरे रंग के चकत्ते और फिर छोटी-छोटी गांठ नजर आती है। गांठ के बढ़ने से मरीज की आंख, मुंह, नाक सब ढंक जाता है। इससे मरीज को देखने, बोलने, खाने-पीने में दिक्कत होती है। सांस की तकलीफ भी होती है। दिमाग कमजोर होने लगता है। वह जल्दी किसी चीज को सीख नहीं पाता। नर्वस सिस्टम कमजोर हो जाता है। कई केस में जैसे-जैसे मरीज की उम्र बढ़ती है, गांठों में तेज दर्द होने लगता है। शरीर जल्दी थक जाता है। इन गांठों को सर्जरी करके हटाया जाता है। रतना पुरी कहती हैं- इस बीमारी का इलाज किसी एक डॉक्टर के बस की बात नहीं है। इसमें जेनेटिक, न्यूरो जैसे कई विभागों के डॉक्टरों को मिलकर काम करना पड़ता है। जब शरीर की गांठें बड़ी होकर अंदरूनी नसों तक पहुंच जाती हैं, तो ऑपरेशन बहुत सावधानी से करना पड़ता है। हर जगह इसका इलाज या ऑपरेशन मुमकिन नहीं होता। असल में, कुछ ट्यूमर नसों के इतने करीब या उनके अंदर तक धंसे होते हैं कि अगर डॉक्टर उन्हें पूरा बाहर निकालने की कोशिश करें, तो नसें डैमेज होने का खतरा बढ़ जाता है। यही वजह है कि सर्जरी से पहले MRI, CT स्कैन और एंजियोग्राफी जैसी जांचें जरूरी हैं। ताकि यह सटीक रूप से देखा जा सके कि ट्यूमर का जाल कहां तक फैला हुआ है। इसके बाद, ट्यूमर को परत-दर-परत हटाया जाता है। जब प्लास्टिक सर्जन इस सर्जरी को करते हैं, तब न्यूरोसर्जन लगातार मॉनिटरिंग करते रहते हैं कि कोई नस न कट जाए। यदि ट्यूमर नसों की जड़ तक फैला हो, तो डॉक्टर केवल उसके उतने ही हिस्से को काटते हैं जिससे मरीज को दर्द से राहत मिल सके। ताकि नसें पूरी तरह सुरक्षित रहें। इस जटिल सर्जरी के बाद कई मामलों में नसों की कमजोरी के कारण मरीज को हंसने, बोलने या चेहरे के हाव-भाव बदलने में दिक्कत आ सकती है। इसके अलावा, जब ये गांठें निकलती हैं तो, अंगों को दोबारा सामान्य रूप से काम करने के लायक बनाने के लिए फिजियोथेरेपी की भी जरूरत होती है। यह पूरी तरह से एक जेनेटिक बीमारी है, इसलिए सर्जरी के बाद भी शरीर के उसी हिस्से या किसी अन्य जगह से गांठें दोबारा उभर सकती हैं। दरअसल, जीन में मौजूद इस गड़बड़ी को ठीक करना फिलहाल मेडिकल साइंस के लिए संभव नहीं है। यही वजह है कि इस बीमारी का कोई स्थाई इलाज नहीं है। इस बारे में IGIMS पटना के न्यूरो सर्जरी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. समरेंद्र कुमार सिंह इस बीमारी के बारे में बताते हैं कि न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस नसों से जुड़ी एक दुर्लभ बीमारी है, जो 1 लाख में से किसी 1 व्यक्ति को होती है। यह ज्यादातर शरीर के संवेदनशील हिस्सों में होती है जैसे- पीठ, हाथ और चेहरा। जहां नसें ज्यादा होती हैं। यदि गांठ त्वचा के ऊपर हो तो दर्द नहीं होता, लेकिन नसों के अंदर विकसित हो जाए तो दर्द बहुत ज्यादा होता है। रीढ़ की हड्डी या दिमाग के पिछले हिस्से (CP एंगल) में गांठ होने पर पूरा शरीर और दिमाग पैरालाइज्ड हो सकता है। कान की नस में ट्यूमर से सुनने की क्षमता जा सकती है। सीपी एंगल में गांठ होने से खाना सांस की नली में फंस सकता है, जो जानलेवा है। इसकी सर्जरी का खर्च 3 से 5 लाख रुपये तक आता है। ऑपरेशन के दौरान नसों को बचाने के लिए माइक्रोस्कोप और 'इंट्राऑपरेटिव नर्व मॉनिटरी मशीन' का उपयोग किया जाता है। सर्जरी के बाद प्रभावित जगह की नसें थोड़ी कमजोर हो जाती हैं। -------------------------------- ऐ जिंदगी सीरीज की यह खबर भी पढ़ें… 1- बेटे की सभी हड्डियां टेढ़ी, 4 करोड़ में होगा इलाज:बिस्तर से उठ नहीं पाता, 3 डॉक्टर बोले- आपसी रिश्तों में शादी का असर 8 साल का जावेद स्कूल के मैदान में क्रिकेट खेलते-खेलते अचानक गिर पड़ा। दोस्तों ने उसे उठाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं उठा। जमीन पर पड़ा कराहने लगा। टीचर भागते हुए आए, उन्होंने भी उठाने की कोशिश की। वो बार-बार कहता रहा- मेरे घुटने और कोहनियों में बहुत दर्द है। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- 14 की उम्र में शरीर बना 'पेड़ की छाल’: उठो या बैठो फटने लगती है चमड़ी, मन करता है छीलकर फेंक दूं; देश का अकेला केस दोपहर के 1 बजे हैं। जंगल के ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर कार हिचकोले खा रही है। तेज गर्मी से गला लगातार सूख रहा है। करीब 2 घंटे बाद जंगलों में कुछ झोपड़ियां नजर आती हैं। इन्हीं झोपड़ियों में से एक के सामने हमारी कार रुकी। झोपड़ी के बाहर एक लड़की बेजान सी खड़ी नजर आई। उसकी मटमैली शर्ट और हाफ पैंट के बाहर जितना भी शरीर दिख रहा है, वह बेहद डरावना है। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें…
पीएम मोदी और अल्बनीज की बैठक में चीन के आईसीबीएम मिसाइल परीक्षण और क्षेत्रीय सुरक्षा पर हुई बात
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने गुरुवार को मेलबर्न में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई मुलाकात के दौरान चीन की ओर से हाल ही में दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में किए गए इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) के परीक्षण का मुद्दा उठाया
अमेरिका का उल्लंघन जारी रहा तो ईरान देगा निर्णायक जवाब : मोसयेब मोतलाघ
ईरान-अमेरिका के बीच एक बार फिर से जारी तनातनी पर ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका की ओर से उल्लंघन जारी रहे, तो इसका मजबूती से जवाब दिया जाएगा
चीन के नए स्टील्थ फाइटर जेट J-35 के दम पर भारत को आंख दिखाने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान को काउंटर करने के लिए भारतीय वायुसेना (IAF) ने एक बेहद रणनीतिक और बड़ा कदम उठा लिया है। भारतीय वायुसेना की रीढ़ और सबसे ताकतवर लड़ाकू विमानों में शामिल सुखोई (Su-30MKI) अब पहले से कहीं ज्यादा घातक और अचूक बनने जा रहा है।इस महा-अपग्रेड की मुख्य वजह है भारत में ही पूरी तरह स्वदेशी रूप से विकसित किया जा रहा 'विरूपाक्ष' (Virupaksha AESA Radar)। इसे 'सुपर सुखोई' अपग्रेड प्रोग्राम का सबसे महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी हिस्सा माना जा रहा है। इस स्वदेशी रडार के सुखोई में फिट होने के बाद, दुश्मन के विमानों को खोजने, उन्हें ट्रैक करने और अत्यंत लंबी दूरी से सटीक निशाना साधने की भारत की क्षमता में कई गुना इजाफा हो जाएगा।क्या है Virupaksha AESA रडार और इसकी तकनीक?विरूपाक्ष एक अत्याधुनिक गैलियम नाइट्राइड (Gallium Nitride - GaN) आधारित एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड आरे (AESA) रडार है।किसने बनाया: इसे रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करने वाले रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की बेंगलुरु स्थित मशहूर लैब LRDE (Electronics and Radar Development Establishment) द्वारा तैयार किया जा रहा है।किसकी जगह लेगा: यह नया स्वदेशी रडार सुखोई में वर्तमान में लगे पुराने रूसी मूल के N011M Bars (पैसिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड आरे) रडार की जगह लेगा।कार्यप्रणाली: इसमें एडवांस डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक स्कैनिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसकी बदौलत यह पुराने रडार के मुकाबले पलक झपकते ही और बेहद सटीक तरीके से मल्टीपल टारगेट्स का पता लगा सकता है।मिनी-AWACS बनेगा सुखोई: 400 KM तक दुश्मन पर नजरन्यूज एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार, विरूपाक्ष रडार में इस्तेमाल की गई GaN-आधारित एडवांस टेक्नोलॉजी और इसकी हाई ट्रांसमिट-रिसीव मॉड्यूल (TRM) कैलकुलेशन क्षमता इसे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ रडार प्रणालियों की कतार में खड़ा करती है।स्टील्थ विमानों को पकड़ेगा: इस तकनीक के कारण यह रडार चीन के J-35A जैसे सोफिस्टिकेटेड सेमी-स्टील्थ (रडार से बचने वाले) फाइटर जेट्स को भी काफी लंबी BVR (बियॉन्ड विजुअल रेंज - आंखों की पहुंच से दूर) दूरी पर ही आसानी से डिटेक्ट कर लेगा।विशाल रेंज: यह करीब 300 से 400 किलोमीटर के एक बड़े हवाई दायरे में आने वाले किसी भी दुश्मन फाइटर जेट, क्रूज मिसाइल या ड्रोन को आसानी से पकड़ सकता है।एंटी-जामिंग: रडार की एडवांस इलेक्ट्रॉनिक स्कैनिंग, लंबी रेंज और बेहतरीन एंटी-जैमिंग क्षमताएं (इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में दुश्मन के सिग्नल ब्लॉक करना) अकेले सुखोई फाइटर जेट को एक 'मिनी-AWACS' (हवाई चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली) के रूप में स्थापित कर देती हैं।जानिए क्यों खास है गैलियम नाइट्राइड (GaN) तकनीक?Virupaksha रडार में इस्तेमाल होने वाली Gallium Nitride (GaN) तकनीक पुरानी पीढ़ी के Gallium Arsenide (GaAs) सिस्टम से कहीं ज्यादा शक्तिशाली और कुशल मानी जाती है।अधिक पावर, कम हीटिंग: GaN तकनीक की मदद से रडार बहुत अधिक रेडियो एनर्जी (तरंगें) पैदा कर सकता है, लेकिन इसके बावजूद यह सिस्टम बहुत कम गर्म होता है।लंबी परफॉर्मेंस: कम गर्म होने के कारण रडार बिना किसी तकनीकी खराबी या रुकावट के युद्ध के मैदान में बहुत लंबे समय तक लगातार सर्वश्रेष्ठ परफॉर्म कर सकता है। यही वजह है कि अमेरिका और यूरोप की नई पीढ़ी के 5th जनरेशन फाइटर जेट्स में भी अब GaN बेस्ड AESA रडार को ही अपनाया जा रहा है।सुखोई (Su-30MKI) की मौजूदा ताकत पर एक नजरसुखोई भारतीय वायुसेना का सबसे भरोसेमंद और भारी-भरकम मल्टी-रोल लड़ाकू विमान है:क्रू और इंजन: यह दो सीटों वाला (ट्विन-सीटर) फाइटर जेट है, जिसमें दो शक्तिशाली AL-31FP इंजन लगे हैं। ये इंजन Thrust Vectoring तकनीक से लैस हैं, जो सुखोई को हवा में असंभव कलाबाजियां खाने की ताकत देती है।रफ्तार और रेंज: यह अधिकतम 2,120 किमी/घंटा (Mach 2) की रफ्तार से उड़ सकता है। एक बार में फुल फ्यूल के साथ इसकी रेंज करीब 3,000 किमी है, जिसे हवा में रीफ्यूलिंग (Mid-air Refueling) के जरिए कई गुना बढ़ाया जा सकता है।हथियार ढोने की क्षमता: सुखोई अपने साथ 8,000 किलोग्राम (8 टन) तक के परमाणु हथियार, गाइडेड बम और घातक मिसाइलें ले जा सकता है, जिसमें ब्रह्मोस (BrahMos) सुपरसोनिक मिसाइल भी शामिल है।विरूपाक्ष रडार से 'सुपर सुखोई' को क्या-क्या फायदे मिलेंगे?लंबी दूरी से प्रहार: विरूपाक्ष रडार लगने के बाद सुखोई दुश्मन के फाइटर जेट और आक्रामक मिसाइलों को उनके हमले की रेंज से बहुत पहले ही देख लेगा।मल्टी-टारगेटिंग क्षमता: विरुपाक्ष के जरिए पायलट एक साथ हवा में तैर रहे कई अलग-अलग टारगेट्स को एक साथ ट्रैक (Lock) करके उन पर एक साथ मिसाइलें दाग सकेगा।इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में बादशाहत: दुश्मन देशों की ओर से की जाने वाली तीव्र इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के बीच भी यह रडार बिना विचलित हुए शत-प्रतिशत सटीक काम करेगा।स्वदेशी मिसाइलों का सटीक उपयोग: भारत की अपनी लंबी दूरी की हवा-से-हवा में मार करने वाली 'अस्त्र' (Astra Series) मिसाइलों के साथ विरूपाक्ष रडार का कॉम्बिनेशन बेहद घातक और अचूक साबित होगा।'सुपर सुखोई' मेगा अपग्रेड प्रोग्राम और ड्रैगन-पाक को झटकायह अपग्रेड भारतीय वायुसेना के अरबों डॉलर के 'सुपर सुखोई' प्रोग्राम का मुख्य केंद्रबिंदु है।चरणबद्ध अपग्रेड: शुरुआती फेज में वायुसेना के कुछ चुनिंदा स्क्वाड्रनों को अपग्रेड किया जाएगा। हालांकि, भविष्य के मुख्य प्लान के तहत वायुसेना अपने बेड़े में शामिल 200 से अधिक Su-30MKI विमानों को इस स्वदेशी रडार, नए इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) सूट और एडवांस कंप्यूटर एवियोनिक्स से लैस करेगी।रणनीतिक बढ़त: चीन ने हाल ही में भारत के खिलाफ 'टू-फ्रंट वॉर' (दोतरफा युद्ध) की रणनीति के तहत पाकिस्तान को अपना J-35 फाइटर जेट बेचने का सौदा किया है। कंगाल पाकिस्तान ने भारत के डर से करोड़ों डॉलर का नया कर्ज लेकर इस जेट को खरीदा है। ऐसे में 'विरूपाक्ष' रडार से लैस हमारा 'सुपर सुखोई' चीन और पाकिस्तान दोनों की संयुक्त हवाई चुनौती को पूरी तरह ध्वस्त कर भारत को आसमान में एकतरफा रणनीतिक बढ़त दिलाएगा।
बंदर अब्बास में धमाके: ईरान-अमेरिका टकराव चरम पर!
ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट सिटी के तटीय इलाकों में गुरुवार दोपहर कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं
6 जुलाई को ईरान ने होर्मुज से गुजर रहे 3 जहाजों पर हमला कर दिया। अगले ही दिन अमेरिका ने ईरान में 80 से ज्यादा ठिकानों पर बमबारी कर दी। ट्रम्प बोले- मेरे हिसाब से अब शांति समझौता खत्म हो गया है। ईरान ने भी पलटवार किया है। समझौते के बावजूद ईरान ने जहाजों पर हमला क्यों किया और क्या ये दांव महंगा पड़ेगा; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: ईरान और अमेरिका के शांति समझौते में क्या तय हुआ था?जवाबः करीब 4 महीने की जंग के बाद 17 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति पजेशकियान ने 14 पॉइंट्स का MoU साइन किया। इस पर अगले 60 दिनों में फाइनल डील होनी थी। समझौते में 3 पॉइंट्स सबसे अहम थे- 1. होर्मुज स्ट्रेट से निर्बाध आवाजाहीः ईरान बिना कोई शुल्क लिए 60 दिनों तक होर्मुज स्ट्रेट से व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही का इंतजाम करेगा। ईरान और ओमान साथ मिलकर इस मुद्दे पर काम करेंगे। साथ ही 30 दिनों के अंदर स्ट्रेट के मुख्य रास्ते में बिछी माइन्स और दूसरी तकनीकी रुकावटों को हटाया जाएगा। 2. ईरान को 300 बिलियन डॉलर का आर्थिक पैकेज: अमेरिका खाड़ी देशों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निमाण के लिए 300 बिलियन डॉलर, यानी करीब 28 लाख करोड़ का फंड देगा। अगले 60 दिनों की बातचीत में इसका फ्रेमवर्क तय किया जाएगा। 3. परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत: ईरान नए परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। संवर्धित यूरेनियम का क्या करना है, इस पर दोनों देश अगले 60 दिनों में बातचीत करके सहमति पर पहुंचेंगे। सवाल-2: समझौते के बावजूद ईरान ने होर्मुज से गुजर रहे तेल टैंकरों पर हमला क्यों किया?जवाबः ईरान की बेसब्री के पीछे एक्सपर्ट्स 3 प्रमुख वजह मानते हैं… 1. ईरान को लगा होर्मुज उसके हाथ से निकल रहा है 2. लेबनान में ईरान का प्रभाव कम होने की आशंका 3. ईरान को फंड न मिलने की बेचैनी, रकम भी घट रही सवाल-3: क्या ईरान ने इस बार जरूरत से ज्यादा जोखिम वाला दांव खेल दिया है?जवाबः 6 जुलाई को होर्मुज से गुजर रहे जहाजों पर ईरान का हमला आक्रामक दांव माना जा रहा है… ट्रम्प ने ईरान को धमकी दी है कि उनके एक हमले के बदले अमेरिका 20 गुना ज्यादा ताकत से हमला करेगा। उन्होंने ईरान की लीडरशिप को नीच और पागल बताया। यह भी कहा कि उनकी नजर में सीजफायर खत्म हो चुका है। अमेरिका ने लगातार 2 दिन तक ईरान पर करीब 170 हमले किए। 3 लोगों की मौत हुई। सवाल-4: जहाजों पर ईरान के हमले से अमेरिका इतना आक्रामक क्यों हो गया?जवाबः होर्मुज स्ट्रेट एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है, यानी किसी एक देश का इस पर कंट्रोल नहीं है। लेकिन ईरान इस रास्ते पर अपना नियंत्रण बनाना चाहता है। अमेरिका इसके खिलाफ है। अमेरिका ने समुद्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की जिम्मेदारी ली है। इसके लिए 1979 में फ्रीडम ऑफ नेविगेशन प्रोग्राम की भी शुरुआत की, जिसके तहत क्रिटिकल चोकपॉइंट्स पर अमेरिका अपने नौसैनिक जहाज भेजकर सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करता है। होर्मुज स्ट्रेट के अलावा दुनिया में तेल व्यापार के रास्तों पर 7 और चोकपॉइंट्स हैं। यहां से दुनिया के करीब 52% कच्चे तेल का व्यापार होता है। इनमें पनामा कैनाल, स्वेज कैनाल, मलक्का स्ट्रेट जैसे पॉइंट शामिल हैं। अगर ईरान होर्मुज में फीस वसूलने लगे, तो बाकी चोकपॉइंट्स पर भी क्षेत्रीय ताकतें ऐसा ही करने लगेंगी। इससे पूरी दुनिया के कारोबार पर असर पड़ेगा। अप्रैल 2026 में इंडोनेशिया के वित्त मंत्री पुरबाया युधि सदेवा मलक्का स्ट्रेट से गुजरने वाले जहजों से टोल लेने का सुझाव भी दे चुके हैं। सवाल-5: अब शांति समझौते का क्या होगा, क्या ये सिर्फ दिखावा था?जवाबः अमेरिका-ईरान के बीच हुआ शांति समझौता कभी पूरी तरह से शांति के लिए था ही नहीं। सीनियर जर्नलिस्ट और विदेश मामलों के जानकार मार्क चैंपियन के मुताबिक, इस समझौते की भाषा जानबूझकर अस्पष्ट रखी गई, ताकि दोनों ही पक्षों को अपने मकसद पूरे करने के लिए दूसरे तरीकों की गुंजाइश बनी रहे। शांति समझौते में साफ-साफ शर्तें होती हैं। जैसे- कौन कब क्या करेगा, कोई उल्लंघन कैसे तय होगा, निगरानी कौन करेगा। अमेरिका-ईरान समझौते में में साफ नहीं था कि हॉर्मुज में 'मुक्त आवाजाही' का मतलब क्या है? क्या ईरान वहां टोल वसूल सकता है? गश्त कर सकता है? किन शर्तों पर जंग पूरी तरह खत्म होगी? तेल प्रतिबंधों में छूट कितनी पक्की है? अमेरिका ने ईरानी तेल पर 60 दिन के लिए प्रतिबंध हटाए थे, लेकिन महज 20 दिन बाद ही अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ये अस्थायी छूट वापस ले ली और अगस्त तक तेल बिक्री की इजाजत देने वाला लाइसेंस रद्द कर दिया। CSIS के जियोस्ट्रैटजी एक्सपर्ट जॉन बी. अल्टरमैन मानते हैं कि दोनों पक्षों ने जंग की मूल जड़- परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमता, प्रतिबंध, होर्मुज पर नियंत्रण वगैहर को सुलझाए बिना सिर्फ हथियार डालने का समय तय किया, इसीलिए यह इतनी जल्दी टूट गया। सवाल-6: क्या वाकई जंग दोबारा शुरू हो चुकी है, आगे क्या होगा?जवाबः ईरान ने होर्मुज से गुजर रहे 3 जहाजों पर हमला किया। अगली रात अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान में 80 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया। IRGC ने भी पलटवार करते हुए बहरीन और कुवैत में 85 अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइल दागीं। कुल मिलाकर आंख के बदले आंख का खेल चल रहा है। हालांकि अभी ये लिमिटेड स्ट्राइक हैं, पूरी तरह जंग में नहीं बदलीं। अब आगे 2 सिनैरियो बन सकते हैं… 1. लिमिटेड स्ट्राइक बढ़ते-बढ़ते पूर्ण यूद्ध में बदल जाएं 2. हमले रुकें और समझौते पर दोबारा बात शुरू हो हालांकि ईरानी जर्नलिस्ट सैयद मुस्तफा खोशचेश्म मानते हैं कि बातचीत चलने के बावजूद ईरान की तरफ से दुश्मनी और अविश्वास कभी खत्म नहीं हुआ है, यानी बातचीत की मेज पर बैठना अपने आप में भरोसे की गारंटी नहीं। ----------- ये खबर भी पढ़िए… भारत को तेल बेचने वाला रूस, अब तेल खरीदने पर क्यों मजबूर; क्या यूक्रेन ने सभी रिफाइनरी तबाह कीं दुनिया भर के देशों को कच्चा तेल बेचने वाला रूस अब दूसरे देशों से पेट्रोल मंगवाने को मजबूर है। भारत से भी पेट्रोल के कई टैंकर भेजे जाने की खबरें हैं। रूसी पेट्रोल पंपों पर पहली बार लंबी-लंबी कतारें लगी हैं। पेट्रोल खरीदने पर पाबंदियां लागू हैं। इसकी वजह है- यूक्रेन के हमले। पूरी खबर पढ़िए…
हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर: US-ईरान के बीच बढ़ती तनातनी से थमी जहाजों की रफ्तार
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव अब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग यानी हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) तक पहुंच चुका है। ताजा रिपोर्ट्स के अनुसार, इस क्षेत्र में तनाव की वजह से बड़े मालवाहक जहाजों और तेल टैंकरों की आवाजाही लगभग थम गई है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वह प्रमुख समुद्री गलियारा है जिससे होकर वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा गुजरता है। जहाजों की आवाजाही रुकने से न केवल समुद्री व्यापार में बाधा उत्पन्न हो रही है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आने का खतरा पैदा हो गया है। समुद्री सुरक्षा के लिहाज से यह स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है और दुनिया भर की नजरें इस तनावपूर्ण घटनाक्रम पर टिकी हैं।क्यों अहम है हॉर्मुज और क्यों थम गए हैं जहाज?हॉर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला एक संकरा समुद्री रास्ता है। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि दुनिया का लगभग 20 से 30 फीसदी कच्चा तेल इसी मार्ग से होकर गुजरता है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही सैन्य गतिविधियों और बढ़ते सैन्य टकराव की आशंका के कारण शिपिंग कंपनियों ने सुरक्षा कारणों से अपने जहाजों को वहां रोकने या रास्ता बदलने का फैसला लिया है। जहाजों की इस आवाजाही में कमी से अंतरराष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स पर गहरा असर पड़ रहा है। यदि यह गतिरोध अधिक समय तक जारी रहता है, तो इसका सीधा असर भारत जैसे देशों पर पड़ेगा जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी मार्ग पर अत्यधिक निर्भर हैं।भारत के लिए चिंता: ऊर्जा कीमतों और सप्लाई पर असरभारत के लिए हॉर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना या वहां अशांति सीधे तौर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतों को प्रभावित कर सकती है। भारत अपने कच्चे तेल का एक बहुत बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से ही आयात करता है। समुद्री मार्ग बाधित होने से न केवल तेल के दाम बढ़ेंगे, बल्कि जहाजों के इंश्योरेंस प्रीमियम में भारी वृद्धि होने से माल ढुलाई भी महंगी हो जाएगी। भारत सरकार और नौसेना इस पूरी स्थिति पर पैनी नजर रखे हुए है ताकि समुद्री सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके और भारतीय व्यापारिक जहाजों को किसी भी प्रकार की क्षति से बचाया जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कूटनीतिक स्तर पर बातचीत से इस तनाव को जल्द कम नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए यह एक बड़ी चुनौती साबित हो सकती है।
महंगाई और AI के बीच घिरी अमेरिकी अर्थव्यवस्था, IMF की रिपोर्ट में भारत के लिए आई राहत की खबर
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ताजा 'मिनट्स' (बैठक का ब्योरा) ने ग्लोबल मार्केट में हलचल मचा दी है। फेड ने अपनी हालिया चर्चाओं में दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के सामने खड़े तीन बड़े खतरों का जिक्र किया है, जो आने वाले समय में वैश्विक बाजार की दिशा तय करेंगे। फेड की रिपोर्ट में महंगाई (Inflation), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव और मिडिल ईस्ट (Middle East) में जारी भू-राजनीतिक तनाव को सबसे बड़ी चिंता बताया गया है। इन चिंताओं के कारण ब्याज दरों में कटौती को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार और निवेशकों के सेंटीमेंट पर पड़ रहा है।फेड की तीन बड़ी चिंताएं: क्या है अर्थव्यवस्था का हाल?फेडरल रिजर्व के अधिकारियों ने अपनी बैठक में साफ किया है कि महंगाई अभी भी उनके लक्ष्य से ऊपर है, जिससे नीतिगत दरों में राहत देने में देरी हो सकती है। दूसरी ओर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेजी को लेकर फेड ने दोधारी तलवार वाली स्थिति का जिक्र किया है—जहां एक तरफ यह उत्पादकता बढ़ा रही है, वहीं दूसरी तरफ बाजार में अस्थिरता और श्रम बाजार में बदलाव का डर भी बना हुआ है। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट के तनाव ने ग्लोबल सप्लाई चेन और ऊर्जा कीमतों को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिससे आने वाले महीनों में महंगाई पर दबाव और बढ़ने की आशंका है। इन तीनों मोर्चों पर फेड की सतर्कता यह संकेत दे रही है कि अमेरिका में ब्याज दरों पर फैसला अभी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।IMF ने भारत को लेकर दी बड़ी राहत की खबरएक तरफ जहां दुनिया के प्रमुख देश अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं, वहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं। आईएमएफ ने भारत की विकास दर को लेकर भरोसा जताया है और कहा है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। आईएमएफ के अनुसार, भारत का घरेलू उपभोग और नीतिगत सुधार इसे दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में बनाए रखने में मदद कर रहे हैं। फेड की चिंताओं के बीच आईएमएफ का यह बयान विदेशी निवेशकों के लिए राहत की बात है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में अस्थिरता बनी भी रहती है, तो भारत के फंडामेंटल्स इसे बड़े झटकों से बचाने में सक्षम हैं।
पश्चिम एशिया में गहराता संकट: भारतीयों की सुरक्षा और तेल सप्लाई को लेकर भारत की क्या है रणनीति
पश्चिम एशिया में जारी मौजूदा तनाव के बीच भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक चुनौतियां बढ़ गई हैं। यह क्षेत्र न केवल भारत की ऊर्जा जरूरतों का केंद्र है, बल्कि लाखों भारतीयों का कार्यस्थल भी है। ऐसे में भारत सरकार एक संतुलित और सतर्क कूटनीतिक रुख अपना रही है। इस संकट के बीच भारत की सबसे पहली प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही, तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही और अपनी ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को निर्बाध बनाए रखना भी भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है। सरकार न केवल अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति की अपील कर रही है, बल्कि अपनी समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नौसेना की तैनाती पर भी पूरा जोर दे रही है।ऊर्जा सुरक्षा और तेल टैंकरों का संकटभारत अपनी कच्चा तेल (Crude Oil) की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। लाल सागर और ओमान की खाड़ी जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर बढ़ते तनाव का सीधा असर तेल टैंकरों की आवाजाही पर पड़ रहा है। यदि इन मार्गों पर जोखिम बढ़ता है, तो समुद्री बीमा प्रीमियम में वृद्धि होगी और अंततः इसका असर भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ेगा। भारत सरकार इस स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है और वैकल्पिक समुद्री मार्गों और आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तेल उत्पादक देशों के साथ लगातार संपर्क में है। भारत की कोशिश यह है कि किसी भी प्रकार की वैश्विक अस्थिरता का असर घरेलू बाजार की कीमतों पर न पड़े।लाखों भारतीयों की सुरक्षा और कूटनीतिक सक्रियतापश्चिम एशिया में लाखों भारतीय कामगार रहते हैं, जो वहां की अर्थव्यवस्था और भारत की अर्थव्यवस्था (रेमिटेंस के जरिए) में अहम योगदान देते हैं। उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत की विदेश नीति की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। संकट की आहट मिलते ही भारत सरकार ने वहां मौजूद अपने दूतावासों को अलर्ट मोड पर रखा है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षित निकास योजना (Evacuation Plan) तैयार रखी है। पीएम मोदी और विदेश मंत्रालय का ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि तनाव को कूटनीति और संवाद के माध्यम से कम किया जाए। भारत का अब तक का रुख स्पष्ट रहा है कि पश्चिम एशिया में शांति भारत के आर्थिक हितों और सामरिक सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर भारत में निवेश की संभावनाओं को नई ऊंचाइयां देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलिया की प्रमुख कंपनियों के लीडर्स को भारत में आने और विस्तार करने का खुला निमंत्रण दिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाना है। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) को जल्द से जल्द पूरा करने पर जोर दिया है, जो भविष्य में दोनों देशों के बीच व्यापार की बाधाओं को कम करने और द्विपक्षीय निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक पड़ाव साबित होगा। इस न्योते को भारत के 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के साथ जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों के लिए एक आकर्षक मंच तैयार हो रहा है।CECA समझौता: आर्थिक विकास के नए रास्तेCECA यानी कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक कोऑपरेशन एग्रीमेंट को दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों की रीढ़ माना जा रहा है। पीएम मोदी ने बातचीत के दौरान इस बात पर स्पष्ट रूप से प्रकाश डाला कि यह समझौता केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह दोनों देशों के उद्योगों के लिए अवसरों का एक नया द्वार खोलेगा। इस एग्रीमेंट के पूरा होने से भारत में मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में ऑस्ट्रेलियाई निवेश को गति मिलेगी। साथ ही, भारतीय कंपनियों को भी ऑस्ट्रेलिया के बाजार तक सीधी और आसान पहुंच प्राप्त होगी। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री की यह सक्रियता भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का एक प्रमुख केंद्र बनाने की रणनीति का अहम हिस्सा है।भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी का बढ़ता दायराऑस्ट्रेलियाई कंपनियों को भारत आमंत्रित करना और उनके साथ उच्च-स्तरीय संवाद स्थापित करना, भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने का संकेत है। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत का बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम और बुनियादी ढांचे में हो रहा सुधार ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों के लिए बेहतरीन मौके पेश कर रहा है। तकनीक और ऊर्जा के क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया की विशेषज्ञता भारत के औद्योगिक विकास में मील का पत्थर साबित हो सकती है। इस दिशा में चल रहे प्रयासों से आने वाले समय में रोजगार के नए अवसर पैदा होने और दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं में तालमेल बढ़ने की पूरी संभावना है।
अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा को लेकर एक बेहद सनसनीखेज और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। तुर्की के अंकारा में आयोजित नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन से वाशिंगटन वापस लौटते समय राष्ट्रपति ट्रंप ने बीच रास्ते में ही अपना विमान बदल दिया। ट्रंप कतर द्वारा हाल ही में तोहफे में दिए गए अत्याधुनिक बोइंग 747-8 वीआईपी जेट को छोड़कर अचानक अपने पुराने और भरोसेमंद 'एयरफोर्स वन' विमान में सवार हो गए। ब्रिटेन के आरएएफ मिल्डेनहॉल (RAF Mildenhall) मिलिट्री बेस पर हुए इस अचानक सुरक्षा बदलाव ने वैश्विक स्तर पर कई तरह की चर्चाओं और कयासों को जन्म दे दिया है।सीक्रेट सर्विस की खुफिया सलाह और वाइट हाउस की बड़ी सफाई'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच मिसाइल हमलों के बाद पैदा हुए गंभीर हालातों को देखते हुए यूएस सीक्रेट सर्विस (US Secret Service) ने राष्ट्रपति ट्रंप को तुरंत विमान बदलने की गोपनीय सलाह दी थी। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि यह कदम किसी विशिष्ट खुफिया इनपुट के बजाय अत्यधिक सावधानी और एहतियात के तौर पर उठाया गया था। दरअसल, कतर की ओर से मिले नए बोइंग विमान में अभी तक वे सभी मिलिट्री-ग्रेड एडवांस डिफेंस फीचर्स, मिसाइल इवेडिंग सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-मेजर पूरी तरह इंस्टॉल नहीं हो पाए हैं, जो दशकों से राष्ट्रपति की सुरक्षा कर रहे 'एयरफोर्स वन' के मूल बेड़े में मौजूद रहते हैं।हालांकि, वाइट हाउस ने उन खबरों और दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें नए विमान को असुरक्षित बताया जा रहा था। वाइट हाउस के संचार निदेशक स्टीवन चेउंग ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि कतर से मिला नया जेट भी उच्च-स्तरीय सुरक्षा प्रोटोकॉल से पूरी तरह लैस है। उन्होंने सुरक्षा रणनीति का खुलासा करते हुए कहा कि प्रशासन राष्ट्रपति की अभेद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'दुश्मन का ध्यान भटकाने और उन्हें गुमराह करने' (Decoy and Diversion) समेत अपने हर उपलब्ध खुफिया टूल का इस्तेमाल करता है।ट्रंप बोले- 'मैं ईरान की हिट लिस्ट में नंबर वन हूं, पुरानी यादों के लिए बदला प्लेन'बीच रास्ते में विमान बदलने और सुरक्षा चिंताओं की बात को खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया के सामने अपने ही अंदाज में खारिज किया। ब्रिटेन से वाशिंगटन के लिए उड़ान भरने के बाद विमान में मौजूद पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने बेबाकी से कहा, मुझ पर हमेशा से ही जान का खतरा मंडराता रहता है। मैं उनकी (ईरान की) हिट लिस्ट में नंबर वन पर हूं।ट्रंप ने आगे खुलासा किया कि ब्रिटेन के सैन्य अड्डे पर रुकने का मुख्य उद्देश्य वहां तैनात अमेरिकी फौजियों को कतर से मिला यह बिल्कुल नया और शानदार विमान दिखाना था। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सैनिक इसे देखकर बेहद उत्साहित थे और उन्होंने वहां तस्वीरें भी खिंचवाईं। वहीं, पुराने 'एयरफोर्स वन' में दोबारा शिफ्ट होने के पीछे की वजह बताते हुए ट्रंप ने मजाकिया लहजे में कहा कि उन्होंने केवल अपनी पुरानी यादों को ताजा करने के लिए इस विमान से सफर करने का फैसला किया।खिड़कियों के पर्दे रखने पड़े बंद; स्लीजबैग्स की वजह से सख्त पाबंदीइस बेहद संवेदनशील यात्रा के दौरान पुरानी एयरफोर्स वन में सफर कर रहे व्हाइट हाउस के प्रेस पूल और पत्रकारों को फ्लाइट क्रू द्वारा खिड़कियों के ब्लाइंड्स (पर्दे) पूरी तरह से बंद रखने का बेहद सख्त निर्देश दिया गया था। पत्रकारों को बाहर देखने या किसी भी तरह की लोकेशन की रिकॉर्डिंग करने की मनाही थी। ट्रंप ने बाद में स्पष्ट किया कि यह पाबंदी केवल सुरक्षा कारणों से सह-यात्रियों पर लागू थी, उनके अपने निजी केबिन पर नहीं। उन्होंने अमेरिका के दुश्मनों और ईरान की ओर सीधा इशारा करते हुए तीखे शब्दों में कहा कि शायद बाहर सक्रिय कुछ स्लीजबैग्स (संदिग्ध तत्वों) की वजह से सीक्रेट सर्विस को इतनी सख्त पाबंदी लगानी पड़ी है।अमेरिका और ईरान के बीच अचानक क्यों भड़की युद्ध की चिंगारी?राष्ट्रपति के विमान बदलने का यह पूरा हाई-प्रोफाइल घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच सीधी सैन्य भिड़ंत शुरू हो चुकी है। अमेरिका ने तेहरान पर अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) में कमर्शियल जहाजों और तेल टैंकरों पर हमला करने का गंभीर आरोप लगाते हुए ईरानी ठिकानों पर लगातार भारी हवाई हमले और बमबारी की है।इस अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान ने भी बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर कई बैलिस्टिक मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन दागे हैं। खाड़ी देशों में हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि बहरीन, कुवैत और कतर में अमेरिकी मिलिट्री बेस के ऊपर लगातार मिसाइल हमले के चेतावनी सायरन गूंज रहे हैं। इसी बीच कुवैत की सेना ने आधिकारिक दावा किया है कि उसने अपनी सीमा की तरफ आ रही कई ईरानी मिसाइलों और ड्रोन्स को पैट्रियट डिफेंस सिस्टम के जरिए बीच हवा में ही मार गिराया है।
ईरान पर हमले के बाद ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- भरोसा नहीं कि तेहरान डील मानेगा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के नए जवाबी हमलों के बाद ईरान बातचीत करना चाहता है
ऑस्ट्रेलिया में पीएम मोदी को मिला 'गार्ड ऑफ ऑनर', गूंजा जन गण मन...
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मेलबर्न में औपचारिक स्वागत हुआ। ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर पीएम मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित भी किया गया।
ट्रंप की चेतावनी के बाद हमला, होर्मुज बंद करने की धमकी पर भड़का अमेरिका
अमेरिकी सेना ने लगातार दूसरे दिन ईरान पर हमले किए हैं। इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता को खतरे में डालने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना है।
'हमले जारी रहे तो और बड़े सैन्य कदम उठाएंगे', ट्रंप की ईरान को चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को ईरान को चेतावनी दी कि अगर तेहरान ने हमले जारी रखे तो अमेरिका आगे भी सैन्य कार्रवाई कर सकता है और यहां तक कि ईरान पर फिर से नौसैनिक नाकाबंदी भी लगा सकता है।
युद्धपोत किसी भी देश की समुद्री सीमा की रक्षा करने वाले अभेद्य किले होते हैं, जिनका काम दुश्मनों की पनडुब्बियों को खोजना, मिसाइलें दागना और तटीय सुरक्षा अभेद्य बनाना होता है। लेकिन सोचिए, अगर दुनिया की सबसे ताकतवर सेना के सबसे आधुनिक युद्धपोत ही रहस्यमयी तरीके से आग और तकनीकी खराबियों का शिकार होने लगें, तो क्या होगा? चीन की मशहूर मिलिट्री मैगजीन ‘नेवल एंड मर्चेंट शिप्स’ ने अमेरिकी नौसेना (US Navy) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया है, जिसने पेंटागन की रातों की नींद उड़ा दी है।अमेरिकी जंगी जहाजों पर हादसों की बाढ़चीनी मिलिट्री रिपोर्ट के अनुसार, हाल के महीनों में अमेरिका के सबसे एडवांस और घातक जंगी जहाजों पर आग लगने, अचानक बिजली गुल होने (ब्लैकआउट) और प्रोपल्शन (आगे बढ़ाने वाले सिस्टम) फेल होने की कई बड़ी घटनाएं दर्ज की गई हैं। इस लिस्ट में दुनिया का सबसे बड़ा न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर USS गेराल्ड आर. फोर्ड, सबसे आधुनिक स्टील्थ डिस्ट्रॉयर USS ज़ुमवाल्ट, निमित्ज़-क्लास कैरियर USS ड्वाइट डी. आइजनहावर और अर्ले बर्क-क्लास डिस्ट्रॉयर USS हिगिंस शामिल हैं।नाविक पड़ रहे बीमार, लॉन्ड्री से लेकर शिपयार्ड तक लगी आगहादसों की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मार्च में USS फोर्ड के लॉन्ड्री रूम में भीषण आग लग गई। अप्रैल में USS आइजनहावर पर मेंटेनेंस के दौरान और USS ज़ुमवाल्ट पर शिपयार्ड में अपग्रेडेशन के वक्त आग भड़क उठी। इतना ही नहीं, ओहायो-क्लास की परमाणु ऊर्जा से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन USS नेब्रास्का के जनरेटर में खराबी आ गई, जिससे जहरीले डीजल के धुएं के संपर्क में आने से 64 अमेरिकी नाविक एक साथ बीमार पड़ गए।आखिर अमेरिकी युद्धपोतों में क्यों लग रही है आग? जानें 5 मुख्य वजहेंचीनी रक्षा विशेषज्ञों ने अमेरिकी नौसेना की इस दुर्दशा के पीछे कई गंभीर और ढांचागत (Structural) कारणों का विश्लेषण किया है:लगातार ऑपरेशन का भारी दबाव: अमेरिकी युद्धपोत दुनिया के लगभग हर रणनीतिक समुद्री क्षेत्र (जैसे ताइवान स्ट्रेट, रेड सी और हिंद महासागर) में चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं। लंबे समय तक लगातार समुद्र में रहने से इनके भारी-भरकम इंजन और इलेक्ट्रिकल सिस्टम पर क्षमता से अधिक लोड पड़ रहा है।रखरखाव और मेंटेनेंस में भारी देरी: अमेरिकी नौसेना इस समय शिपयार्ड की सीमित क्षमता और मेंटेनेंस बैकलॉग से बुरी तरह जूझ रही है। कई युद्धपोत समय पर मरम्मत के लिए शिपयार्ड नहीं पहुंच पाते, जिससे छोटी खराबियां बाद में बड़ी आग का रूप ले लेती हैं।हद से ज्यादा हाई-टेक और डिजिटल सिस्टम: आधुनिक अमेरिकी जहाज अत्यधिक डिजिटल और ऑटोमेटेड हैं। इनमें हाई-वोल्टेज इलेक्ट्रिकल ग्रिड, रडार और सुपरकंप्यूटर नेटवर्क लगे हैं। जटिल इलेक्ट्रॉनिक्स के कारण एक छोटा सा शॉर्ट सर्किट या इलेक्ट्रिकल फॉल्ट पूरे जहाज को पंगु बना देता है।शिपयार्ड में कुशल कारीगरों और पार्ट्स की कमी: एडवांस्ड युद्धपोतों की मरम्मत के लिए बेहद अनुभवी और विशेषज्ञ इंजीनियरों की जरूरत होती है। रिपोर्ट का दावा है कि अमेरिकी शिपयार्डों में अनुभवहीन और कम कुशल कारीगरों की एक छोटी सी मानवीय गलती पूरे अरबों डॉलर के जहाज को स्वाहा कर रही है।शॉर्ट सर्किट और ऑयल लीकेज: मेंटेनेंस के दौरान इंजन रूम में ईंधन या ट्रांसमिशन तेल का रिसाव होना और ओवरलोडेड इलेक्ट्रिकल सिस्टम का आपस में टकराना आग लगने के तात्कालिक कारण बन रहे हैं।सुपर-टेक्नोलॉजी ही बन गई सबसे बड़ा खतरा!चीनी मैगजीन ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि टेक्नोलॉजी जहाजों के परफॉर्मेंस को तो बढ़ा सकती है, लेकिन बिजली की एक छोटी सी खराबी पूरे युद्धपोत को युद्ध के बीच में लाचार कर सकती है, जैसा कि हाल ही में USS हिगिंस पर हुए टोटल ब्लैकआउट के दौरान देखा गया। अमेरिकी नौसेना के लिए आज सबसे बड़ी चुनौती नए और घातक जहाज बनाना नहीं है, बल्कि जो पहले से मौजूद हैं, उनका सही तरीके से मेंटेनेंस करना है। अगर इंडस्ट्रियल सिस्टम ने समय रहते इस बोझ को नहीं संभाला, तो अमेरिका को अपनी ऑपरेशनल उपलब्धता में भारी कमी और अरबों डॉलर का सैन्य नुकसान झेलना पड़ेगा।
H-1B वीजा पर ट्रंप का बड़ा एक्शन, बड़ी कंपनियां जांच के घेरे में
ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी और 'पर्म' रोजगार वीजा से जुड़े कथित धोखाधड़ी के मामलों की जांच शुरू कर दी है

