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विश्व जनसंख्या दिवस 2026: दुनिया में नंबर-1 बना भारत, विशाल आबादी हमारे लिए गर्व की बात है या बढ़ती चिंता की? जानें असली हकीकत

हर साल 11 जुलाई की तारीख को दुनिया भर में 'विश्व जनसंख्या दिवस' (World Population Day) के रूप में मनाया जाता है. इस खास दिन की शुरुआत साल 1987 में तब हुई थी, जब वैश्विक आबादी ने 5 अरब का आंकड़ा छुआ था. आज 2026 में दुनिया की कुल आबादी करीब 8.2 अरब तक पहुंचने का अनुमान है. लेकिन इस बार का जनसंख्या दिवस भारत के लिए बेहद खास और मंथन करने वाला है, क्योंकि आबादी के मामले में हम अपने पड़ोसी देश चीन को पछाड़कर अब दुनिया के पहले पायदान पर काबिज हो चुके हैं.140 करोड़ से अधिक की इस विशाल जनसंख्या के साथ दुनिया का नेतृत्व करना हमारे लिए गर्व का विषय है या आने वाले संकट की चेतावनी? आइए देश की इस सबसे बड़ी पूंजी और इससे जुड़ी चुनौतियों का पूरा विश्लेषण समझते हैं.क्यों गर्व का कारण बन सकती है भारत की भारी आबादी?1. दुनिया का सबसे बड़ा और आकर्षक घरेलू बाजार140 करोड़ से ज्यादा उपभोक्ताओं की मौजूदगी भारत को दुनिया का सबसे आकर्षक और विशाल घरेलू बाजार (Domestic Market) बनाती है. हमारे यहां मोबाइल, कपड़े, डिजिटल सेवाएं, गाड़ियां, घर और शिक्षा का उपभोग करने वाले करोड़ों लोग हैं. जब किसी देश में खरीदार अधिक होते हैं, तो वहां प्रोडक्शन बढ़ता है, नई कंपनियां आती हैं और विदेशी निवेश (FDI) खिंचा चला आता है. भारत का तेजी से बढ़ता डिजिटल मार्केट और गांवों तक पहुंचा ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम इसका सबसे बड़ा और जीता-जागता उदाहरण है.2. 'जनसांख्यिकीय लाभांश' (Demographic Dividend) यानी युवाओं की शक्तिजहां एक तरफ जापान, दक्षिण कोरिया, चीन और कई यूरोपीय देश बुजुर्ग होती आबादी और घटते कामगारों की समस्या से जूझ रहे हैं, वहीं भारत इस मामले में बेहद भाग्यशाली है.65% युवा आबादी: भारत में लगभग 65 फीसदी आबादी युवाओं की है, जो कामकाजी उम्र में हैं.जब किसी देश में आश्रितों (बुजुर्गों और बच्चों) के मुकाबले कमाने वाले और टैक्स देने वाले हाथ ज्यादा होते हैं, तो वह देश आर्थिक मोर्चे पर दोगुनी रफ्तार से दौड़ सकता है. भारत के पास लंबे समय तक काम करने वाली यह सबसे बड़ी पूंजी है.चुनौतियां जो बढ़ा रही हैं चिंता की लकीरेंलेकिन यह 'डेमोग्राफिक डिविडेंड' यानी युवा शक्ति हमें अपने आप लाभ नहीं देगी. इसके लिए देश को कई मोर्चों पर युद्ध स्तर पर काम करना होगा, क्योंकि बड़ी आबादी अपने साथ कुछ गंभीर चिंताएं भी लेकर आती है:1. रोजगार और स्किल गैप की बड़ी खाईहर साल भारत में करोड़ों युवा नौकरी की उम्र में कदम रखते हैं. लेकिन सिर्फ डिग्री थमा देने से रोजगार नहीं मिलता. आज के कॉर्पोरेट और तकनीकी बाजार को जिस एडवांस स्किल की जरूरत है, कॉलेज की पढ़ाई और उसके बीच एक बड़ा अंतर (Skill Gap) है. भारत को कंस्ट्रक्शन, एआई (AI), रोबोटिक्स, लॉजिस्टिक्स और ग्रीन एनर्जी जैसे सेक्टर्स में नए अवसर पैदा करने होंगे. साथ ही, युवाओं को सिर्फ नौकरी मांगने वाला नहीं बल्कि 'स्टार्टअप' के जरिए नौकरी देने वाला (Job Creator) बनाना होगा.2. महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े डरावने आंकड़ेराष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 15 से 49 वर्ष की आयु वर्ग की 57 फीसदी महिलाएं एनीमिया (खून की कमी) से पीड़ित हैं, जो पिछले सर्वे (53%) के मुकाबले और बढ़ गया है. यदि देश की आधी आबादी यानी महिलाएं ही स्वस्थ नहीं रहेंगी, तो आने वाली पीढ़ी भी शारीरिक रूप से कमजोर होगी. स्वास्थ्य सेवाओं को चुनावी वादों से अलग हटकर बुनियादी स्तर पर मजबूत करना ही होगा.3. प्राकृतिक संसाधनों और पर्यावरण पर भारी दबावबढ़ती आबादी का सीधा प्रहार हमारे सीमित प्राकृतिक संसाधनों पर हो रहा है:जल संकट: देश के कई बड़े शहरों में भूजल (Groundwater) का स्तर लगातार नीचे जा रहा है और पीने के पानी की किल्लत बढ़ रही है.शहरीकरण की मार: शहरों में बढ़ती भीड़ के कारण ट्रैफिक, वायु प्रदूषण और कचरा प्रबंधन (Waste Management) बेकाबू होता जा रहा है. खेती योग्य जमीनें सिकुड़ रही हैं और जंगलों का सफाया हो रहा है.4. महिलाओं की शिक्षा और श्रम में भागीदारीजनसंख्या नियंत्रण और देश के विकास का सबसे सीधा रास्ता महिलाओं की शिक्षा और उनके अधिकारों से जुड़ा है. जब लड़कियां शिक्षित होकर कार्यबल (Workforce) का हिस्सा बनती हैं, तो परिवार नियोजन (Family Planning) किसी दबाव का नहीं बल्कि जागरूकता का विषय बन जाता है. आधी आबादी को घरों में कैद रखकर या पीछे छोड़कर कोई भी देश महाशक्ति बनने का सपना पूरा नहीं कर सकता.चीन की घटती आबादी से क्या है सीख?चीन ने लंबे समय तक सख्त जनसंख्या नीतियां अपनाईं, जिसके दुष्परिणाम आज उसके सामने हैं. वहां की आबादी अब धीरे-धीरे घटने लगी है और बुजुर्गों की संख्या काम करने वाले युवाओं से ज्यादा हो रही है, जिससे उनकी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ रहा है. भारत के लिए यह सबक है कि आज का जो युवा वर्कफोर्स है, वह हमेशा युवा नहीं रहेगा. हमें इसी दशक में उन्हें सही शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार देकर भविष्य के लिए तैयार करना होगा.निष्कर्ष: बोझ नहीं, ताकत बनेगी यह आबादीभारत का दुनिया में सबसे अधिक आबादी वाला देश बनना केवल जश्न मनाने या डरने का विषय नहीं है, बल्कि यह एक बहुत बड़ी राष्ट्रीय जिम्मेदारी है. यह विशाल आबादी हमारी सबसे बड़ी ताकत तभी बन पाएगी जब हर नागरिक को सम्मानजनक जीवन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं और साफ पानी मिलेगा. तभी हम इस जनसांख्यिकीय अवसर का सही लाभ उठा पाएंगे और भारत वैश्विक पटल पर एक आत्मनिर्भर महाशक्ति बनकर उभरेगा.

न्यूज़ इंडिया लाइव 11 Jul 2026 3:54 pm

ट्रंप बोले- ईरान के साथ युद्धविराम खत्म, लेकिन बातचीत जारी; तेहरान ने वार्ता की अटकलों से किया इनकार

ट्रंप के बयान से यह संकेत मिलता है कि पिछले महीने जिस युद्धविराम व्यवस्था के तहत दोनों देशों के बीच तनाव कम हुआ था, वह अब प्रभावी नहीं रही। इसके बावजूद कूटनीतिक प्रयास जारी हैं और दोनों पक्ष प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संवाद के विकल्प खुले रखना चाहते हैं।

देशबन्धु 11 Jul 2026 1:40 pm

बहामास में स्वतंत्रता दिवस के जश्न के बीच मातम! समंदर में गिरा छोटा विमान, 10 लोगों की मौत के बाद एयरलाइन की सभी उड़ानें सस्पेंड

बहामास से एक बेहद दुखद और दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है. देश के 53वें स्वतंत्रता दिवस के राष्ट्रव्यापी जश्न के बीच एक छोटा विमान समुद्र में क्रैश हो गया, जिससे 10 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई. यह भीषण हादसा शुक्रवार को बहामास की राजधानी नासाउ के पश्चिम में स्थित नॉर्थ एंड्रोस के पास समंदर में हुआ. प्रधानमंत्री फिलिप ब्रेव डेविस ने इस भयानक दुर्घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे पूरे देश के लिए एक बड़ा और दुखद दिन बताया है. इस हादसे के तुरंत बाद सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए फ्लेमिंगो एयर (Flamingo Air) की सभी उड़ानों को अस्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया है.बचा था सिर्फ एक शख्स, अस्पताल में उसने भी तोड़ा दम'एसोसिएटेड प्रेस' (AP) की रिपोर्ट के मुताबिक, जिस समय पूरा देश आजादी की खुशियां मना रहा था, उसी वक्त इस विमान हादसे ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया. प्रधानमंत्री डेविस ने बताया कि रेस्क्यू के दौरान शुरुआत में एक व्यक्ति के जिंदा बचने की उम्मीद जागी थी, जिसे तुरंत मेडिकल इमरजेंसी के लिए ले जाया गया, लेकिन अस्पताल में इलाज के दौरान उसने भी दम तोड़ दिया. इस तरह प्लेन में सवार सभी 10 लोगों की जान चली गई. प्रशासन ने सुरक्षा और प्रोटोकॉल के कारण अभी तक मारे गए यात्रियों की पहचान सार्वजनिक नहीं की है.लिंडेन पिंडलिंग एयरपोर्ट से उड़ान भरते ही समंदर में समाया सेसना विमानबहामास की 'एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इंवेस्टिगेशन अथॉरिटी' ने हादसे की शुरुआती जानकारी साझा की है. रिपोर्ट के मुताबिक:रूट: यह विमान नासाउ के मुख्य लिंडेन पिंडलिंग इंटरनेशनल एयरपोर्ट से सैन एंड्रोस के लिए रवाना हुआ था.विमान का मॉडल: क्रैश होने वाला विमान सेसना 402 (Cessna 402) था, जो बहामास में ही रजिस्टर्ड था.जांच: उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद नॉर्थ एंड्रोस के पास प्लेन का नियंत्रण खो गया और वह सीधे पानी में जा गिरा. विमानन अधिकारी अब इस बात की बारीकी से जांच कर रहे हैं कि क्रैश के पीछे कोई तकनीकी खराबी थी या मौसम की वजह से यह हादसा हुआ.एक ही दिन में दो बड़ी घटनाएं, बाल-बाल बचे थे मायागुआना जा रहे यात्रीहैरानी की बात यह है कि शुक्रवार को फ्लेमिंगो एयरलाइन के साथ एक नहीं बल्कि दो बड़ी सुरक्षा चूक की घटनाएं सामने आईं. बहामास की विमानन मंत्री जोबेथ कोलबी-डेविस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में खुलासा किया कि इस भयानक क्रैश से ठीक पहले एयरलाइन का एक अन्य विमान मायागुआना के लिए उड़ान भर रहा था. तभी पायलट को विमान में किसी गंभीर तकनीकी खराबी का अहसास हुआ.पायलट ने सूझबूझ दिखाते हुए विमान को तुरंत वापस नासाउ एयरपोर्ट पर इमरजेंसी लैंड कराया. राहत की बात यह रही कि जैसे ही सभी यात्रियों को सुरक्षित नीचे उतारा गया, उस विमान में अचानक भीषण आग लग गई. एक ही दिन में हुई इन दोनों गंभीर घटनाओं के बाद विमानन मंत्रालय ने यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए फ्लेमिंगो एयर का 'एयर ऑपरेटर सर्टिफिकेट' तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है.

न्यूज़ इंडिया लाइव 11 Jul 2026 9:56 am

US-Iran Conflict Updates: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम खत्म, ट्रंप ने दिए बातचीत के संकेत; इजरायल की दो टूक- जंग अभी खत्म नहीं हुई

मिडिल ईस्ट (Middle East) में भू-राजनीतिक समीकरण एक बार फिर बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गए हैं। अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा के बीच अमेरिका द्वारा ईरान के अहम सैन्य ठिकानों पर किए गए ड्रोन व मिसाइल हमलों और जवाब में ईरान द्वारा कतर, बहरीन व यूएई (UAE) में अमेरिकी ठिकानों को टारगेट किए जाने के बाद युद्ध की स्थिति बनी हुई है।पिछले दो दिनों से ईरान को भीषण हमले की धमकी दे रहे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के सुर शुक्रवार (10 जुलाई 2026) को अचानक बदलते नजर आए। ट्रंप अब सैन्य हमले की बात छोड़कर फिर से कूटनीतिक बातचीत को आगे बढ़ाना चाहते हैं, हालांकि उन्होंने इसका श्रेय ईरान के पाले में डाल दिया है।डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान: सीजफायर खत्म, लेकिन बातचीत को तैयारअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' (Truth Social) पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान ने दोबारा बातचीत की टेबल पर लौटने की इच्छा जताई है। ईरान की इस पहल के बाद अमेरिका भी राजनयिक वार्ता के लिए तैयार है। हालांकि, ट्रंप ने यह पूरी तरह साफ कर दिया कि दोनों देशों के बीच पूर्व में हुआ अंतरिम सीजफायर (युद्ध विराम) अब आधिकारिक रूप से खत्म हो चुका है, लेकिन भविष्य में बड़े युद्ध को टालने के लिए बातचीत का सिलसिला जारी रहेगा।दूसरी तरफ, संयुक्त राष्ट्र (UN) में अमेरिका की उप राजदूत टैमी ब्रूस ने भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रंप क्षेत्र में स्थायी शांति चाहते हैं, लेकिन उन्होंने एक कड़ी शर्त भी रखी। ब्रूस ने कहा कि यदि ईरान समर्थित ताकतों द्वारा नागरिक ठिकानों या अंतरराष्ट्रीय कारोबारी जहाजों (Commercial Ships) पर कोई भी हमला किया गया, तो अमेरिका उसका माकूल और आक्रामक जवाब देगा।इजरायल के पीएम नेतन्याहू की दो टूक: ईरान से जंग अभी खत्म नहीं हुईजहां एक तरफ अमेरिका बातचीत की वकालत कर रहा है, वहीं उसके सबसे करीबी सहयोगी इजरायल का रुख बेहद आक्रामक बना हुआ है। इजरायल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने इजराइली एयर फोर्स के एक कार्यक्रम में दो टूक कहा कि ईरान के साथ जारी यह महाजंग अभी खत्म नहीं हुई है।नेतन्याहू ने कड़ी चेतावनी देते हुए कहा, इजरायल किसी भी कीमत पर ईरान को न्यूक्लियर (परमाणु) हथियार हासिल नहीं करने देगा, चाहे कोई अंतरराष्ट्रीय समझौता हो या नहीं। उन्होंने दावा किया कि यदि इजरायल ने पहले सर्जिकल स्ट्राइक न की होती, तो ईरान अब तक परमाणु बम बना चुका होता और देश हर आगामी चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।ईरान का पलटवार: हमला हुआ तो इजरायल का अस्तित्व मिट जाएगाबेंजामिन नेतन्याहू की सीधी सैन्य धमकी के बाद ईरान ने भी बेहद आक्रामक तेवर दिखाए हैं। ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना (IRNA) के मुताबिक, ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघेर जोलगदर ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान के किसी भी परमाणु या रणनीतिक ठिकाने पर हमला हुआ, तो उसका ऐसा घातक जवाब दिया जाएगा जिसके बाद इजरायल को दुनिया की कोई ताकत नहीं बचा पाएगी।अमेरिका-ईरान सैन्य टकराव से जुड़े 5 बड़े अंतरराष्ट्रीय अपडेट्स:अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें: अलजजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, शुक्रवार को ईरान ने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाते हुए कई मिसाइलें दागीं। हालांकि, इन मित्र देशों की एयर डिफेंस प्रणालियों ने अधिकांश मिसाइलों और सुसाइड ड्रोनों को हवा में ही मार गिराने का दावा किया है।रणनीतिक रेलवे ब्रिज पर हमला: ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिकी वायुसेना ने उत्तरी ईरान में चीन और रूस की साझेदारी से बने एक बेहद महत्वपूर्ण रणनीतिक रेलवे पुल को क्रूज मिसाइल से उड़ा दिया है। ईरान ने इसे सीधा 'युद्ध अपराध' बताया है, जबकि पेंटागन ने इसे ईरान द्वारा अंतरिम शर्तों के उल्लंघन का नतीजा करार दिया।होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही ठप: रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों महाशक्तियों के बीच तनाव बढ़ने के कारण दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री तेल मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) में व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही शुक्रवार को भी पूरी तरह ठप रही। वैश्विक सप्लाई चेन बाधित होने की आशंका से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में करीब 1% का उछाल दर्ज किया गया है।ईरान का 1 करोड़ बैरल तेल का इमरजेंसी एक्सपोर्ट: अमेरिका द्वारा दोबारा पूर्ण नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade) लागू किए जाने के डर से ईरान ने एक ही रात के भीतर आनन-फानन में कम से कम 1 करोड़ बैरल कच्चा तेल और फ्यूल ऑयल निर्यात के लिए विभिन्न गुप्त जहाजों के जरिए अंतरराष्ट्रीय रूट पर रवाना कर दिया है।लेबनान पर इजराइली ड्रोन स्ट्राइक: लेबनान की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी (NNA) के मुताबिक, इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने दक्षिणी लेबनान के नबातियेह प्रांत में दो बड़े ड्रोन हमले किए हैं। ये हमले कफर रेमान और नबातियेह अल-फौका कस्बों में हिजबुल्लाह के ठिकानों को देखकर किए गए, हालांकि इसमें किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।वैश्विक मध्यस्थता की कोशिशें तेजबीबीसी (BBC) की रिपोर्ट के मुताबिक, फिलहाल दो दिनों की सीधी सैन्य कार्रवाई के बाद दोनों पक्षों की ओर से गोलाबारी थमी हुई है। इस वैश्विक संकट को टालने और दोनों देशों को दोबारा 18 जून को हुए अंतरिम समझौते (MoU) के रास्ते पर लाने के लिए मध्यस्थ देश— कतर, मिस्र (Egypt) और पाकिस्तान पर्दे के पीछे से सक्रिय कूटनीतिक प्रयास कर रहे हैं। कतर के प्रधानमंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी ने मिस्र के विदेश मंत्री बद्र अब्देलाती से फोन पर वार्ता कर होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के सेफ कॉरिडोर को तुरंत बहाल करने पर जोर दिया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 11 Jul 2026 9:10 am

आइवरी कोस्ट के साथ भारत बढ़ाएगा डिजिटल और कृषि सहयोग, कई अहम मुद्दों पर चर्चा

विदेश मंत्रालय में केंद्रीय और पश्चिम अफ्रीका के अतिरिक्त सचिव सेवला नाइक मुडे ने शुक्रवार को आबिदजान में आइवरी कोस्ट के डिजिटल ट्रांजिशन और टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन मंत्री जिब्रिल औटारा से मुलाकात की।

देशबन्धु 11 Jul 2026 7:10 am

पाक में हाहाकार! सरकार को ठेंगा दिखा व्यापारियों ने ₹170 किलो पहुंचाया आटे का भाव, कराची में सप्लाई ठप होने का संकट

गंभीर आर्थिक तंगहाली से जूझ रहे पड़ोसी देश पाकिस्तान में बुनियादी खाद्य पदार्थों की किल्लत और आसमान छूती कीमतों ने आम जनता की कमर तोड़ दी है। सिंध प्रांत की राजधानी और पाकिस्तान की आर्थिक धड़कन कहे जाने वाले कराची शहर में इन दिनों आटे की कीमतों को नियंत्रित करने को लेकर प्रांतीय सरकार और आटा मिल उद्योग के बीच एक बड़ा और हिंसक प्रशासनिक गतिरोध पैदा हो गया है। स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी सख्त चेतावनियों और नए आधिकारिक नोटिफिकेशन के बावजूद, बाजार के बड़े व्यापारियों और मिल मालिकों ने सरकारी आदेशों को पूरी तरह से ठेंगा दिखा दिया है। इस टकराव के कारण आने वाले दिनों में पूरे कराची महानगर में आटे की सप्लाई चेन पूरी तरह से ठप होने और भुखमरी जैसी स्थिति पैदा होने की गंभीर आशंका बढ़ गई है।कागजों पर सिमटीं सरकारी दरें: नोटिफिकेशन के बाद भी ऊंचे दामों पर बिक रहा है अनाज'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' द्वारा जारी एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, कराची के स्थानीय प्रशासन ने बेलगाम हो रही महंगाई पर लगाम लगाने के लिए आनन-फानन में एक नया प्राइस-कंट्रोल नोटिफिकेशन जारी किया था। इस नए सरकारी आदेश के तहत सामान्य श्रेणी के आटे की खुदरा कीमत 125 पाकिस्तानी रुपये (PKR) प्रति किलोग्राम, महीन (फाइन) आटे की कीमत 135 PKR प्रति किलोग्राम और शुद्ध चक्की के आटे की दर 145 PKR प्रति किलोग्राम तय की गई थी। इसके साथ ही थोक बाजार के लिए भी कीमतें क्रमशः 122 और 132 रुपये निर्धारित की गई थीं। परंतु, धरातल पर सरकार का यह आदेश पूरी तरह से बेअसर साबित हुआ है। शहर के खुदरा बाजारों में आज भी सामान्य आटा 145 से 150 रुपये और बारीक तथा महीन आटा 160 से 170 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलोग्राम की रिकॉर्ड ऊंचाई पर खुलेआम बेचा जा रहा है।मिल मालिकों की खुली बगावत: गेहूं की बढ़ती इनपुट लागत का हवाला देकर फैसले को मानने से इनकारसरकारी नियंत्रण के खिलाफ पाकिस्तान के आटा मिल संघ (Flour Mills Association) और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने खुलकर बगावत का बिगुल फूंक दिया है। उद्योगपतियों का साफ तर्क है कि सरकार द्वारा एकतरफा तरीके से तय की गई ये कागजी दरें व्यावहारिक नहीं हैं और वे इसे किसी भी कीमत पर लागू नहीं करेंगे। व्यापारियों का कहना है कि ओपन मार्केट में गेहूं की इनपुट लागत (Wheat Procurement Cost) और बिजली-ईंधन के दामों में जो बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है, सरकार ने इस नए नोटिफिकेशन में उसकी पूरी तरह अनदेखी की है। घाटे में धंधा करने से साफ मना करते हुए मिल मालिकों ने चेतावनी दी है कि अगर उन पर जबरन सरकारी रेट थोपने की कोशिश की गई या प्रशासनिक कार्रवाई की गई, तो वे अपनी मिलों में ताला लगा देंगे, जिससे पूरे देश में गेहूं का अकाल पड़ सकता है।सप्लाई चेन टूटने की कगार पर: आम जनता के बीच जमाखोरी और भुखमरी का बढ़ा खौफइस बड़े प्रशासनिक और व्यापारिक गतिरोध का सीधा खामियाजा कराची की गरीब और मध्यमवर्गीय जनता को भुगतना पड़ रहा है। बाजार में भारी अनिश्चितता के चलते खुदरा दुकानदारों ने आटे की जमाखोरी शुरू कर दी है, जिससे कई इलाकों में राशन की किल्लत पैदा हो गई है। भू-राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि सरकार और मिल मालिकों के बीच जल्द ही कोई व्यावहारिक समझौता नहीं हुआ, तो आने वाले 48 घंटों में कराची की आटा मंडियां पूरी तरह से बंद हो सकती हैं। यह संकट ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान पहले से ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की कठिन शर्तों और भारी विदेशी कर्ज के नीचे दबा हुआ है, जिससे शहबाज शरीफ सरकार की प्रशासनिक क्षमता पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 11 Jul 2026 7:07 am

राजनीतिक आतंकवाद पर जो बाइडन प्रशासन ने बुलाई ग्लोबल समिट, भारत समेत 60 देशों को भेजा सीक्रेट इनविटेशन

दुनिया भर में तेजी से पैर पसार रहे एक नए सुरक्षा संकट से निपटने के लिए संयुक्त राज्य अमेरिका अगले सप्ताह एक बेहद महत्वपूर्ण और हाई-प्रोफाइल अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहे हैं। अमेरिकी विदेश विभाग (US State Department) के तत्वावधान में आयोजित होने जा रही इस विशेष बैठक का मुख्य एजेंडा वैश्विक स्तर पर 'राजनीतिक आतंकवाद' (Political Terrorism) के खतरनाक ढंग से फिर से उभरने पर लगाम लगाना है। वाशिंगटन ने इस रणनीतिक विमर्श का हिस्सा बनने के लिए भारत सहित दुनिया भर के 60 प्रमुख देशों को आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया है। इस बैठक को लेकर वैश्विक कूटनीतिक गलियारों में हलचल काफी ज्यादा तेज हो गई है क्योंकि इसे वैश्विक सुरक्षा ढांचे को नए सिरे से परिभाषित करने वाले एक बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।16 जुलाई को वाशिंगटन में जुटेगी दुनिया: एशिया, यूरोप और लैटिन अमेरिका के मंत्रियों का लगेगा जमावड़ाप्रतिष्ठित अमेरिकी अखबार 'वाशिंगटन पोस्ट' (The Washington Post) द्वारा ब्रेक की गई एक विशेष खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह वैश्विक सम्मेलन आगामी 16 जुलाई 2026 को अमेरिकी विदेश विभाग के मुख्यालय में आयोजित किया जाएगा। इस हाई-वोल्टेज बैठक में यूरोप, लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और एशिया महाद्वीप के दर्जनों शक्तिशाली देशों के विदेश मंत्रियों और गृह मंत्रियों (Foreign and Home Ministers) के सीधे तौर पर शामिल होने की पूरी उम्मीद है। अमेरिका इस समय दुनिया भर में बढ़ रहे वैचारिक और राजनीतिक रूप से प्रेरित हिंसक आंदोलनों को अपनी आंतरिक और वैश्विक संप्रभुता के लिए एक अत्यंत उभरता हुआ और गंभीर खतरा मान रहा है, जिसे रोकने के लिए वह एक मजबूत बहुपक्षीय अंतरराष्ट्रीय सहयोग और खुफिया नेटवर्क तैयार करना चाहता है।हिंसक अति-वामपंथी नेटवर्क से खतरा: अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता ने एक्स पर किया बड़ा दावाइस महा-सम्मेलन की संवेदनशीलता को रेखांकित करते हुए अमेरिकी विदेश विभाग के आधिकारिक प्रवक्ता टामी पिगाट (Tommy Pigott) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक बेहद महत्वपूर्ण बयान जारी किया है। पिगाट ने स्पष्ट तौर पर कहा, 'वैश्विक पटल पर हिंसक अति-वामपंथी राजनीतिक आतंकवाद (Violent Far-Left Political Terrorism) का यह खतरनाक पुनरुत्थान कोई नई या अचानक उत्पन्न हुई बात नहीं है। यह एक बेहद पुराना और शातिर खतरा है, जो अब डिजिटल युग में मजबूत अंतरराष्ट्रीय संपर्कों, सीमा पार वित्तीय कड़ियों और नए खतरनाक गठजोड़ों के साथ एक बार फिर से दुनिया के सामने आ रहा है।' उनके इस बयान से साफ है कि वाशिंगटन इस बार वैचारिक रूप से प्रेरित उग्रवाद के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को पूरी तरह से ध्वस्त करने के मूड में है।भारत के शामिल होने पर सस्पेंस: नई दिल्ली के कूटनीतिक रुख पर टिकी पूरी दुनिया की नजरेंइस पूरी अंतरराष्ट्रीय कवायद के बीच कूटनीतिक मोर्चे पर एक बेहद दिलचस्प और सस्पेंस से भरा मोड़ सामने आया है। कुछ वरिष्ठ स्वतंत्र विश्लेषकों और यूरोपीय कूटनीतिक सूत्रों से मिली अंदरूनी जानकारी के अनुसार, ऐसी प्रबल संभावनाएं जताई जा रही हैं कि भारत शायद इस विशिष्ट बैठक में अपना कोई आधिकारिक प्रतिनिधि या उच्च स्तरीय कूटनीतिक शिष्टमंडल न भेजे। हालांकि नई दिल्ली ने अभी तक इस आमंत्रण को लेकर अपनी किसी आधिकारिक नीति या फैसले की सार्वजनिक घोषणा नहीं की है, लेकिन भू-राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि भारत आतंकवाद की परिभाषा और पश्चिमी देशों द्वारा वैचारिक उग्रवाद को देखने के चश्मे को लेकर बेहद सतर्क रुख अपनाता रहा है, जिसके चलते इस समिट में भारत की भागीदारी पर सस्पेंस गहरा गया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 11 Jul 2026 7:05 am

ईरान ने होर्मुज में बनाया समानांतर 'सी-कॉरिडोर', भड़के डोनाल्ड ट्रंप ने दिया 24 घंटे का विनाशकारी अल्टीमेटम

वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की लाइफलाइन कहे जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा गतिरोध अब तक के सबसे खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। दो सप्ताह पूर्व हुआ सीजफायर पूरी तरह से खटाई में पड़ चुका है और ईरान की प्रमुख तटीय पोर्ट सिटीज—बंदर अब्बास, केश्म, मूसा और रणनीतिक चाबहार में पिछले चार दिनों से भीषण धमाकों की आवाजें गूंज रही हैं। तनाव की मुख्य वजह ईरान द्वारा होर्मुज के भीतर एक दूसरा 'समानांतर समुद्री रास्ता' तैयार करना है, जिस पर वह अपना पूर्ण संप्रभु नियंत्रण का दावा कर रहा है। ईरान के इस आक्रामक कदम के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 24 घंटे का सख्त अल्टीमेटम जारी करते हुए चेतावनी दी है कि यदि जलडमरूमध्य के सभी रास्तों को सार्वजनिक रूप से नहीं खोला गया, तो ईरान को बेहद गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।होर्मुज में 'कॉरिडोर' की जंग: वैश्विक तेल सप्लाई चेन ठप होने से दुनिया पर ऊर्जा संकट का सायाइस समय खाड़ी क्षेत्र में चल रहा सैन्य टकराव किसी कूटनीतिक मतभेद का परिणाम नहीं, बल्कि सीधे तौर पर होर्मुज के भीतर समुद्री व्यापारिक मार्गों पर नियंत्रण स्थापित करने की जंग है। अमेरिका जहां अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही के लिए एक स्वतंत्र वैश्विक कॉरिडोर चलाने की कोशिश कर रहा है, वहीं ईरान अपने सुझाए समानांतर रास्ते से न गुजरने वाले अमेरिकी सहयोगी खाड़ी देशों के कमर्शियल शिप्स पर लगातार मिसाइल और आत्मघाती ड्रोन हमले कर रहा है। आपको बता दें कि पूरी दुनिया के कुल तेल परिवहन का पांचवां हिस्सा (20%) इसी होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। इससे पहले 28 फरवरी को भड़के युद्ध के कारण इस संकीर्ण समुद्री रास्ते में हजारों कमर्शियल जहाज फंस गए थे, जिससे वैश्विक स्तर पर हाहाकार मच गया था।ट्रंप प्रशासन की सख्त शर्त: बिना किसी शुल्क के खुलेगा रूट, वरना अमेरिकी सेना करेगी बड़ी कार्रवाईएक्सियोस (Axios) की ताजा खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने क्षेत्रीय मध्यस्थों (ओमान और कतर) के जरिए तेहरान को एक बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश भिजवाया है। वाशिंगटन चाहता है कि ईरान बिना किसी देरी के सार्वजनिक रूप से यह घोषणा करे कि होर्मुज जलडमरूमध्य का पूरा शिपिंग रूट हर देश के लिए खुला है और वह किसी भी कमर्शियल वेसल (व्यापारिक जहाज) को निशाना नहीं बनाएगा। अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ट्रंप की सबसे बड़ी शर्त यह है कि ईरान इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों से किसी भी प्रकार का अवैध टैक्स या टोल शुल्क वसूलना बंद करे। इस बड़े गतिरोध को सुलझाने के लिए शनिवार को मस्कट में ओमान, ईरान और अमेरिकी अधिकारियों के बीच एक आपातकालीन त्रिपक्षीय बैठक होने की संभावना है।अमेरिकी वायुसेना की भीषण बमबारी के बाद ईरान पंगु: तटीय बुनियादी ढांचे पर दागी गईं मिसाइलेंडोनाल्ड ट्रंप का यह बेहद आक्रामक अल्टीमेटम अमेरिकी वायुसेना (US Air Force) द्वारा हाल ही में ईरानी धरती पर की गई सबसे बड़ी और विनाशकारी बमबारी के ठीक बाद आया है। अमेरिकी लड़ाकू विमानों और लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों ने पश्चिमी ईरान में स्थित महत्वपूर्ण बिजली उपकरण निर्माण संयंत्रों, बड़े पावर ग्रिडों और समुद्र के खारे पानी को मीठा बनाने वाले (Desalination Plants) तटीय बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से तहस-नहस कर दिया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) ने इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि करते हुए दावा किया था कि इस भीषण अटैक का उद्देश्य ईरान की उस आर्थिक और तकनीकी रीढ़ को तोड़ना है, जिसका उपयोग वह खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य आक्रामकता और ड्रोन ऑपरेशन्स को बढ़ावा देने के लिए कर रहा है। हालांकि, इस भारी तबाही के बावजूद ईरान ने अमेरिकी सहयोगियों पर ड्रोन हमले जारी रखे हैं, जिससे युद्ध की आग भड़कने की पूरी आशंका बनी हुई है

न्यूज़ इंडिया लाइव 11 Jul 2026 7:02 am

'शी चिनफिंग के नए युग में चीनी विशेषता वाले समाजवाद पर विचार और दुनिया' विषय पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित

'शी चिनफिंग के नए युग में चीनी विशेषता वाले समाजवाद पर विचार और दुनिया' विषय पर अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी चीन के निंगश्या हुई जाति स्वायत्त प्रदेश के यिनछुआन में आयोजन हुई

देशबन्धु 11 Jul 2026 5:40 am

फिलीपींस में तबाही – भूस्खलन से 15 की मौत, ‘बावी’ का कहर

ताइवान और पूर्वी चीन की ओर बढ़ रहे विनाशकारी तूफान बावी के असर से फिलीपींस में भूस्खलन से कम से कम 15 लोगों की मौत हो गयी है

देशबन्धु 11 Jul 2026 4:19 am

चीनी राज्य परिषद ने '15वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान कार्बन पीकिंग कार्य योजना' जारी की

हाल ही में, चीनी राज्य परिषद ने '15वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान कार्बन पीकिंग कार्य योजना' जारी की, जिसमें 15वीं पंचवर्षीय योजना अवधि के दौरान कार्बन उत्सर्जन को चरम पर पहुंचाने के लिए कार्य योजना की रूपरेखा दी गई है।

देशबन्धु 11 Jul 2026 4:10 am

मस्कट में जयशंकर-अलबुसैदी की मुलाकात, व्यापार से लेकर रक्षा और समुद्री सुरक्षा पर बनी सहमति

विदेश मंत्री (ईएएम) एस. जयशंकर ने शुक्रवार को मस्कट में अपने ओमानी समकक्ष सैयद बद्र बिन हमद बिन हमूद अलबुसैदी से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और ओमान के बीच रिश्तों और खाड़ी क्षेत्र के हालिया घटनाक्रमों पर चर्चा की।

देशबन्धु 10 Jul 2026 11:26 pm

शी चिनफिंग ने चिनच्यांग शहर के एक जूते कारखाने में हुए अग्निकांड पर अहम निर्देश दिया

9 जुलाई को 12 बजे दक्षिण पूर्वी चीन के फुच्येन प्रांत के चिनच्यांग शहर के एक जूते कारखाने में गंभीर आग लगी, जिसमें 28 व्यक्तियों की मौत की पुष्टि हुई।

देशबन्धु 10 Jul 2026 11:11 pm

शेख हसीना का सबसे बड़ा ऐलान: दिसंबर में लौटेंगी बांग्लादेश, मौत की सजा और हत्या के डर के बीच करेंगी सरेंडर

भारत में शरण ले चुकीं बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने अपने भविष्य को लेकर एक ऐसा सनसनीखेज ऐलान किया है, जिसने पूरे दक्षिण एशिया की राजनीति में हलचल मचा दी है। रॉयटर्स को दिए एक विशेष इंटरव्यू में शेख हसीना ने खुलासा किया है कि वह और उनके सहयोगी इसी साल दिसंबर में बांग्लादेश वापस लौटेंगे। उन्होंने बेहद भावुक लहजे में कहा, अगर मौत आती है, तो मैं चाहती हूं कि वह मेरी अपनी मातृभूमि पर आए, जहां मेरे माता-पिता दफन हैं। हसीना ने साफ तौर पर स्वीकार किया कि वहां कदम रखते ही उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है या उनकी हत्या भी हो सकती है, लेकिन वे प्रत्यर्पण का इंतजार करने के बजाय खुद स्वेच्छा से जाकर सरेंडर करेंगी।एंट्री करते ही गिरफ्तारी: जेल या फांसी का फंदा?शेख हसीना जैसे ही हवाई, जमीनी या समुद्री मार्ग से बांग्लादेश की धरती पर कदम रखेंगी, इमिग्रेशन और सीमा अधिकारी उन्हें तुरंत हिरासत में ले लेंगे। साल 2024 के ऐतिहासिक छात्र आंदोलन के बाद देश छोड़ने वाली हसीना को वहां की युद्ध अपराध अदालत पिछले साल नवंबर में ही मौत की सजा सुना चुकी है। चूंकि गैर-मौजूदगी में दी गई इस सजा के खिलाफ अपील करने की 30 दिनों की कानूनी समयसीमा खत्म हो चुकी है, इसलिए उनकी मुश्किलें बेहद बढ़ गई हैं। अब कोर्ट का फैसला बरकरार रहने पर उन्हें लंबी जेल या सीधे फांसी की सजा हो सकती है।'अदालत के तमाशे को बेनकाब करना मेरा मकसद'अवामी लीग की नेता ने स्पष्ट किया कि वे देश से भागकर निर्वासन में जीने के बजाय बांग्लादेश में कानूनी मुकदमों का सामना करना चाहती हैं। उन्होंने कहा, मैं न्याय में विश्वास करती हूं। मैं वहां जाकर कोर्ट की कार्यवाही के जरिए यह साबित करना चाहती हूं कि यह अदालत कितनी बकवास और एक तमाशा है। हालांकि, ढाका का वर्तमान प्रशासन लगातार भारत से उनके प्रत्यर्पण (Extradition) की मांग कर रहा है, जिस पर नई दिल्ली कानूनी विचार कर रही है। लेकिन हसीना के इस नए फैसले ने अब पूरी पटकथा को बदल कर रख दिया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 10 Jul 2026 8:51 pm

शेख हसीना ने दिसंबर में बांग्लादेश लौटने की जताई इच्छा, अदालत में आत्मसमर्पण करने का किया दावा

शेख हसीना ने आरोप लगाया कि अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ लगातार कानूनी कार्रवाई की जा रही है। उनके अनुसार, पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं पर विभिन्न मामले दर्ज किए गए हैं, जिसके कारण अनेक लोग सार्वजनिक जीवन से दूर रहने या छिपकर रहने को मजबूर हैं।

देशबन्धु 10 Jul 2026 3:09 pm

यही मैं भारत के साथ कर रहा हूं, इजरायल-अमेरिका तनाव के बीच नेतन्याहू ने क्यों लिया भारत का नाम

हाल ही में इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का एक बयान वैश्विक कूटनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। अमेरिका के साथ चल रही अनबन और बढ़ते तनाव के बीच नेतन्याहू का 'भारत का नाम लेना' कई गंभीर संकेत दे रहा है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि 'जो मैं भारत के साथ कर रहा हूं, वही इजरायल के लिए भी अपनाऊंगा।' इस बयान ने न केवल विशेषज्ञों को चौंकाया है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या इजरायल अब अपने रणनीतिक संबंधों के लिए भारत को एक 'मॉडल' के रूप में देख रहा है? आइए समझते हैं इजरायल का यह नया कूटनीतिक गेम प्लान।क्या भारत को 'रोल मॉडल' मान रहे नेतन्याहू?नेतन्याहू के इस बयान के गहरे अर्थ निकाले जा रहे हैं। भारत और इजरायल के बीच पिछले एक दशक में रक्षा, तकनीक और कूटनीति के क्षेत्र में जो मजबूत साझेदारी बनी है, वह दुनिया के लिए एक उदाहरण है। भारत अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) के लिए जाना जाता है, यानी किसी एक महाशक्ति के दबाव में आए बिना अपने राष्ट्रीय हितों के फैसले लेना। नेतन्याहू का यह इशारा संभवतः इसी ओर है कि इजरायल अब अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम कर भारत की तरह खुद को स्वतंत्र और आत्मनिर्भर विदेश नीति के साथ ढालना चाहता है।इजरायल का नया प्लान: स्वायत्तता और आत्मनिर्भरताइजरायल का नया प्लान केवल सैन्य ताकत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक और तकनीकी आत्मनिर्भरता की ओर भी एक बड़ा कदम है। नेतन्याहू का मानना है कि जिस तरह भारत ने अपनी शर्तों पर वैश्विक शक्तियों के साथ संबंध बनाए हैं, उसी तरह इजरायल भी अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए अब किसी एक देश के भरोसे नहीं रहना चाहता। इस कूटनीति का सीधा मतलब है कि इजरायल अब अपने पड़ोसियों और अन्य वैश्विक मंचों पर अपनी शर्तों को प्राथमिकता देगा। यह बदलाव निश्चित रूप से मिडिल ईस्ट के समीकरणों को बदल सकता है और आने वाले समय में भारत-इजरायल के रिश्तों को और अधिक प्रगाढ़ कर सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 10 Jul 2026 1:39 pm

ट्रंप की सुरक्षा पर इजरायल का नया दावा, सैन्य कार्रवाई और नई चेतावनियों से पश्चिम एशिया में बढ़ी चिंता

सूत्रों के हवाले से कहा गया कि इजरायल ने अमेरिका को हाल ही में ऐसी खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई है जिसमें ट्रंप की सुरक्षा से जुड़े संभावित खतरे का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, यह जानकारी ऐसे समय सामने आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पहले से ही ऊंचे स्तर पर है।

देशबन्धु 10 Jul 2026 12:19 pm

भारत में पहली बार होगा बिग बैश लीग का मुकाबला, चेपॉक में भिड़ेंगे मेलबर्न रेनेगेड्स और पर्थ स्कॉर्चर्स

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ऑस्ट्रेलिया दौरे के तीसरे और अंतिम दिन मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड (MCG) में इस ऐतिहासिक पहल की घोषणा की। इस अवसर पर ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व कप्तान स्टीव वॉ भी मौजूद रहे।

देशबन्धु 10 Jul 2026 11:19 am

पाकिस्तान की इकोनॉमी को मिली नई 'लाइफलाइन': एक्सपोर्ट से भी ज्यादा पहुंचाई रेमिटेंस की रकम; वित्त वर्ष 2026 में बना डाला ऐतिहासिक रिकॉर्ड

कंगाली और भारी कर्ज के बोझ से दबे पड़ोसी देश पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था (Pakistan Economy) को सुधारने के लिए जब से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने कड़े आर्थिक रिफॉर्म्स लागू कराए हैं, तब से आंकड़ों के लिहाज से वहां की स्थिति में मामूली सुधार देखा जा रहा है। इस बीच पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक से एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया के आर्थिक विशेषज्ञों को हैरान कर दिया है।पाकिस्तान को इस समय अपने किसी उद्योग या प्रोडक्शन से नहीं, बल्कि विदेशों में मजदूरी और नौकरियां कर रहे अपने नागरिकों (Overseas Pakistanis) से इतनी मोटी कमाई हो रही है कि वह देश की अर्थव्यवस्था की असली लाइफलाइन बन गई है। यह रकम इस समय पाकिस्तान द्वारा दुनिया भर में किए जाने वाले कुल नेट एक्सपोर्ट (Total Export) से भी कहीं ज्यादा हो चुकी है।वित्त वर्ष 2026 में रेमिटेंस का बना अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्डपाकिस्तान के केंद्रीय बैंक, स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) द्वारा सोशल मीडिया पर जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक:ऐतिहासिक रिकॉर्ड: 30 जून 2026 को समाप्त हुए पिछले पूरे वित्त वर्ष (FY26) में पाकिस्तान को विदेशों से रिकॉर्ड 41.6 अरब अमेरिकी डॉलर ($41.6 Billion$) की रेमिटेंस (प्रवासियों द्वारा भेजी गई रकम) प्राप्त हुई है।सालाना बढ़ोतरी: यह ऐतिहासिक रकम वित्त वर्ष 2025 में मिली 38.3 अरब अमेरिकी डॉलर की राशि से 8.6 प्रतिशत ज्यादा है।पाकिस्तान के वित्त मंत्री के मुख्य सलाहकार खुर्रम शहजाद ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर इस उपलब्धि को साझा करते हुए इसे देश के इतिहास की “अब तक की सबसे बड़ी सालाना रेमिटेंस आमद” करार दिया। उन्होंने दावा किया कि यह आंकड़ा विदेशों में रहने वाले पाकिस्तानियों के देश की नीतियों पर अटूट भरोसे को दर्शाता है, जिससे देश का विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Buffer) मजबूत हुआ है।किन अमीर मुल्कों से आया सबसे ज्यादा पैसा?स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के डेटा विश्लेषण से पता चलता है कि पाकिस्तान की झोली में सबसे ज्यादा विदेशी मुद्रा डालने वाले शीर्ष देश खाड़ी क्षेत्र (Gulf Region) के हैं। केवल जून के महीने के आंकड़ों को देखें तो:सऊदी अरब (Saudi Arabia): रेमिटेंस का सबसे बड़ा स्रोत रहा, जहां से 829.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर भेजे गए।संयुक्त अरब अमीरात (UAE): दूसरे नंबर पर रहा, जहां से पाकिस्तानियों ने 792.3 मिलियन अमेरिकी डॉलर घर भेजे।यूनाइटेड किंगडम (UK): ब्रिटेन से पाकिस्तान को 514.9 मिलियन अमेरिकी डॉलर मिले।अमेरिका (USA): संयुक्त राज्य अमेरिका से 296.8 मिलियन अमेरिकी डॉलर की आमद दर्ज की गई।इसके अलावा 100 मिलियन डॉलर से अधिक की सूची में यूरोपीय देश इटली (121.1 मिलियन डॉलर) और खाड़ी देश ओमान (110.8 मिलियन डॉलर) भी प्रमुख योगदानकर्ता रहे। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही इस साल रेमिटेंस में 8.6% की ग्रोथ हुई हो, लेकिन यह रफ्तार वित्त वर्ष 2025 की 26.6% और वित्त वर्ष 2024 की 10.7% की ग्रोथ दर के मुकाबले काफी धीमी पड़ी है।पाकिस्तान का ट्रेड डेफिसिट: कुल एक्सपोर्ट से 11.5 अरब डॉलर ज्यादा है रेमिटेंसपाकिस्तान की अर्थव्यवस्था का सबसे स्याह और कड़वा पहलू यह है कि देश का अपना खुद का उत्पादन और निर्यात (Exports) पूरी तरह धराशायी हो चुका है।आर्थिक संकेतक (FY26)कुल रकम (अमेरिकी डॉलर में)वर्कर्स रेमिटेंस (विदेशों से आई रकम)41.6 अरब डॉलरनेट एक्सपोर्ट (कुल निर्यात कमाई)30.1 अरब डॉलरट्रेड डेफिसिट (कुल व्यापार घाटा)लगभग 40 अरब डॉलरआंकड़ों की तुलना करें तो पाकिस्तान ने दुनिया भर में अपना सामान बेचकर जितना कमाया (30.1 अरब डॉलर), उससे 11.5 अरब डॉलर ज्यादा रकम उसके प्रवासी मजदूरों ने खैरात और पसीने की कमाई के रूप में सीधे देश भेज दी। वर्तमान में पाकिस्तान का कुल व्यापार घाटा (Trade Deficit) लगभग 40 अरब डॉलर के ऊंचे स्तर पर है। ऐसे में यदि प्रवासी पाकिस्तानी यह पैसा भेजना बंद कर दें, तो पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार शून्य हो जाएगा और देश तुरंत डिफॉल्ट (दिवालिया) घोषित हो जाएगा। यही कारण है कि इस रेमिटेंस को पाक इकोनॉमी की वेंटिलेटर या लाइफलाइन कहा जा रहा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 10 Jul 2026 8:01 am

मिडिल ईस्ट में फिर शुरू हुआ महायुद्ध! ईरान के न्यूक्लियर प्लांट के पास अमेरिका की भीषण एयरस्ट्राइक; ट्रंप बोले- 'वार्ताकार समय बर्बाद कर रहे हैं'

मिडिल ईस्ट (Middle East) में शांति और युद्धविराम की कोशिशों को एक बार फिर बहुत बड़ा झटका लगा है। गुरुवार को अमेरिकी वायुसेना ने ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे भीषण और रणनीतिक हवाई हमले (Airstrikes) किए हैं। इन हमलों से ईरान का सरकारी मीडिया और कई शहर थर्रा उठे हैं।सबसे ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि अमेरिका ने इस बार ईरान के एकमात्र बुशहर न्यूक्लियर पावर प्लांट कॉम्प्लेक्स (Bushehr Nuclear Power Plant) के बेहद नजदीकी इलाके को निशाना बनाया है, जिससे परमाणु हादसे का खतरा भी पैदा हो गया था। इस भीषण सैन्य गोलाबारी ने कुछ ही समय पहले हुए उस नाजुक अंतरिम समझौते को पूरी तरह वेंटिलेटर पर ला दिया है, जिसका मकसद क्षेत्र में शांति स्थापित करना था।खामेनेई को दफनाने के तुरंत बाद बुशहर पर गिराए बमईरान के लिए गुरुवार का दिन बेहद भावुक और तनावपूर्ण था। कई दिनों के राष्ट्रीय शोक के बाद, ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (जिनकी मौत 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआती गोलाबारी में हो गई थी) को उनके गृहनगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया गया था। ठीक इसी अंतिम संस्कार के दौरान अमेरिका ने ईरान की रीढ़ तोड़ने के लिए ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए।बुशहर के स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी एहसान जहानियन के हवाले से सरकारी समाचार एजेंसी 'इरना' ($IRNA$) ने पुष्टि की है कि अमेरिकी विमानों ने दोपहर के समय सीधे न्यूक्लियर प्लांट के पास बमबारी की। हालांकि, अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने इसे ईरान की उस सैन्य क्षमता को नष्ट करने की कार्रवाई बताया है, जो होर्मुज जलमार्ग (Strait of Hormuz) में अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खतरा बनी हुई थी।अमेरिका के 90 ठिकानों पर हमले, ईरान का पलटवार: 14 की मौतअमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड ने इन हमलों के ब्लैक-एंड-व्हाइट फुटेज जारी किए हैं, जिनमें ईरानी एयरपोर्ट के रनवे, मिसाइल लॉन्चर और उत्तर-पूर्वी गोलिस्तान प्रांत में स्थित रेलवे के बड़े पुलों को नष्ट होते हुए देखा जा सकता है।नुकसान का आंकड़ा: ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, पिछले दो दिनों में हुए इन अमेरिकी हमलों में कम से कम 14 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से अधिकांश सुरक्षा बलों के सदस्य थे, जबकि 78 अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हैं।ईरान का जवाबी हमला: ईरान ने भी इस कार्रवाई का तुरंत बदला लेते हुए खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और उसके सहयोगी देशों को निशाना बनाया। जॉर्डन, कुवैत और कतर की तरफ ईरान की ओर से कई बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलें दागी गईं।सहयोगियों का हाल: बहरीन में, जहां अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े का मुख्यालय है, हमलों के डर से तीन बार सायरन गूंजे। कुवैती सेना ने दावा किया कि उसने 3 बैलिस्टिक मिसाइलों और 10 ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया, हालांकि इसके मलबे से एक नागरिक घायल हो गया। जॉर्डन सरकार ने भी ईरान के हमलों को रोकने का दावा किया है।'ईरान को दादागिरी की कीमत चुकानी होगी' - डोनाल्ड ट्रंप की दोटूकतुर्की में नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन से बाहर निकलने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ईरान में हुए धमाकों के वीडियो पोस्ट करते हुए इस्लामिक गणराज्य को बेहद सख्त चेतावनी दी।ट्रंप ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में तीन अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकरों पर ईरान द्वारा किए गए बम हमलों का यह सीधा बदला है। ट्रंप ने चेतावनी देते हुए कहा:अगर ईरान ने दोबारा ऐसी हिमाकत की, तो हालात और भी बदतर हो जाएंगे। यह नाजुक अंतरिम युद्धविराम अब पूरी तरह खत्म माना जा सकता है। मुझे लगता है कि शांति वार्ता करने वाले अधिकारी केवल अपना समय बर्बाद कर रहे हैं।इसके साथ ही ट्रंप ने ईरान के नागरिक बुनियादी ढांचे, जैसे कि बिजली ग्रिड, वाटर डिसेलिनेशन प्लांट को उड़ाने और खार्ग द्वीप (जहां से ईरान का 90% तेल एक्सपोर्ट होता है) पर कब्जा करने की अपनी पुरानी धमकियों को फिर से दोहराया।'हमला करोगे तो भुगतोगे' - ईरान का कड़ा रुखअमेरिका के इस आक्रामक रुख पर ईरान के शीर्ष अधिकारियों ने भी झुकने से साफ इनकार कर दिया है। युद्धविराम वार्ता में मुख्य भूमिका निभाने वाले ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गलीबाफ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका ने अभी तक यह नहीं सीखा है कि वादे तोड़ने की क्या कीमत होती है। अगर आप हम पर हमला करेंगे, तो हम भी चुप नहीं बैठेंगे और पलटवार करेंगे।वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संकट: होर्मुज स्ट्रेट बंद होने का डरइस ताजा सैन्य टकराव ने वैश्विक आर्थिक जगत की रातों की नींद उड़ा दी है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का वह सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ता है, जहां से वैश्विक व्यापार का लगभग पांचवां (20%) हिस्सा तेल और प्राकृतिक गैस गुजरता है।मई के महीने में जहां इस रास्ते से केवल 233 जहाज गुजरे थे, वहीं जून में अंतरिम समझौते के बाद यह संख्या बढ़कर 576 हुई थी (हालांकि यह जून 2025 के 3,100 जहाजों के मुकाबले बेहद कम है)। अगर यह रास्ता पूरी तरह युद्ध की चपेट में आकर बंद हो जाता है, तो दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, जिससे हर देश में भयंकर मंदी और महंगाई का नया दौर शुरू हो सकता है। फिलहाल, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची सऊदी अरब, तुर्की, ओमान और पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर से फोन पर बात कर तनाव कम करने की कोशिशों में जुटे हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 10 Jul 2026 7:54 am

PoK में फिर भड़की हिंसा की आग: शुबाज़ाबाद में फायरिंग से 2 युवकों की मौत, मुज़फ़्फ़राबाद सरकार के खिलाफ फूटा जनता का आक्रोश

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) एक बार फिर हिंसा, तनाव और गंभीर राजनीतिक अस्थिरता के मुहाने पर आकर खड़ा हो गया है। ताजा इनपुट्स के अनुसार, PoK के शुबाज़ाबाद क्षेत्र में सुरक्षा बलों द्वारा की गई कथित फायरिंग में दो स्थानीय कश्मीरी युवकों की दर्दनाक मौत हो गई है। इस घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव चरम पर पहुंच गया है और मुज़फ़्फ़राबाद से लेकर कई प्रमुख शहरों में हिंसक विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान की दमनकारी सुरक्षा एजेंसियों और मुज़फ़्फ़राबाद की कठपुतली सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।हत्या के लिए मुज़फ़्फ़राबाद सरकार और पाक एजेंसियां जिम्मेदारघटना के तुरंत बाद प्रदर्शनकारियों और स्थानीय नागरिक अधिकारों के लिए लड़ रहे संगठनों की ओर से एक संयुक्त आक्रोश बयान जारी किया गया है।सीधा आरोप: बयान में साफ तौर पर कहा गया है कि निर्दोष युवकों पर गोलीबारी करने और उनकी जान लेने के लिए सीधे तौर पर पाकिस्तान की बर्बर सुरक्षा एजेंसियां और स्थानीय प्रशासन जिम्मेदार है।असंवेदनशीलता का आरोप: प्रदर्शनकारियों ने दुख जताते हुए कहा कि ठीक एक महीने पहले PoK में हुई हिंसक झड़पों के दौरान मारे गए लोगों के शवों के अवशेष आज तक उनके पीड़ित परिजनों को नहीं सौंपे गए हैं। सरकार और सुरक्षा बल मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन कर रहे हैं।चुनावी तैयारियों में व्यस्त सत्ताधीश, जनता में भयंकर उबालनागरिकों का सबसे बड़ा गुस्सा इस बात को लेकर है कि जब पूरा PoK बुनियादी सुविधाओं की कमी, महंगाई और सुरक्षा बलों के अत्याचार से कराह रहा है, तब वहां की सरकार जनता के घावों पर मरहम लगाने के बजाय राजनीतिक रोटियां सेकने में व्यस्त है।प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि मुज़फ़्फ़राबाद में बैठी सरकार पूरे घटनाक्रम और जनता की चीख-पुकार को पूरी तरह नजरअंदाज कर आगामी स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी तैयारियों की जोड़-तोड़ में व्यस्त है, जिससे साफ पता चलता है कि उन्हें स्थानीय आवाम की जान की कोई कीमत नहीं है।शहीदों के खून का हिसाब होगा, अल्टीमेटम हुआ खत्मआंदोलनकारियों ने मुज़फ़्फ़राबाद सरकार और पाकिस्तानी हुक्मरानों को खुली चेतावनी देते हुए आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है:हिसाब लिया जाएगा: प्रदर्शनकारियों ने दोटूक शब्दों में कहा कि मारे गए बेकसूर शहीदों के खून की एक-एक बूंद का हिसाब लिया जाएगा और इस दमन को कश्मीरी आवाम कभी नहीं भुलाएगी।अल्टीमेटम समाप्त: नेताओं ने जनता को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार को अपनी नीतियां सुधारने के लिए दिया गया अल्टीमेटम अब पूरी तरह समाप्त हो चुका है। अब बातचीत का समय खत्म है और जल्द ही एक विशाल जन-आंदोलन के अगले चरण की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।थमने नहीं देंगे संघर्ष: आंदोलनकारी नेताओं का आह्वानPoK में चल रहे इस नागरिक अधिकार आंदोलन से जुड़े शीर्ष नेताओं ने अपने समर्थकों और आम जनता से लगातार सड़कों पर बने रहने और संघर्ष को जारी रखने की भावुक अपील की है। नेताओं ने कहा, पाकिस्तानी हुकूमत और उनकी एजेंसियां हमारे ऊपर चाहे जितने जुल्म ढा लें या रास्ते में कितनी भी बाधाएं खड़ी करें, यह आंदोलन अब अपने मुकाम तक पहुंचे बिना रुकने वाला नहीं है। विरोध प्रदर्शन अपने निर्धारित लक्ष्य (अधिकारों की प्राप्ति) तक लगातार जारी रहेंगे।पाक सरकार की चुप्पी: फिलहाल इस पूरे संवेदनशील मामले और दो युवकों की मौत पर न तो पाकिस्तान की मुख्य केंद्र सरकार और न ही मुज़फ़्फ़राबाद प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या प्रतिक्रिया सामने आई है। पूरे शुबाज़ाबाद और आस-पास के क्षेत्रों को सुरक्षा बलों ने छावनी में तब्दील कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद जनता का गुस्सा उफान पर है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 10 Jul 2026 7:52 am

कुवैत दौरा पूरा कर ओमान पहुंचे विदेश मंत्री एस जयशंकर, रक्षा-व्यापार समेत कई मुद्दों पर हुई अहम चर्चा

कुवैत में रक्षा, व्यापार और ऊर्जा पर अहम चर्चा बैठकें पूरी करने के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर गुरुवार को ओमान पहुंचे।

देशबन्धु 10 Jul 2026 7:40 am

डिजिटल अरेस्ट कर 10 करोड़ ठगे, 95 लाख कमीशन:एजेंट ने बताया नकली पुलिस बनकर डराने का तरीका, स्कैम कंपाउंड पहुंचा रिपोर्टर...पार्ट-2

‘अमेरिका में जो इंडियन हैं, उनके पास बहुत पैसा है। पाकिस्तानी लड़के ने एक महीने में 95 लाख रुपए से ज्यादा कमीशन उठाया। उसने इंडियन कस्टमर को डिजिटल अरेस्ट कर 9.5 करोड़ की पेमेंट करवाई थी।’ सायबर स्कैम करने वाली इंडस्ट्री में लड़कों की भर्ती करने वाले एजेंट विक्की से हमारी मुलाकात कंबोडिया में हुई। सायबर स्कैम के जरिए भारत में हर दिन करीब 61 करोड़ रुपए और हर महीने 2 हजार करोड़ रुपए ठगे जा रहे हैं। कंबोडिया–मलेशिया जैसे देश इसका हब बन चुके हैं। कंबोडिया में किसी इंडस्ट्री की तरह सायबर स्कैम कंपनियां चल रही हैं, इसलिए हम पड़ताल करने वहां पहुंचे। ऑपरेशन स्कैम वर्ल्ड के पहले पार्ट में हमने बताया था कि कैसे भारत में लड़कों को सायबर स्कैम के लिए भर्ती किया जा रहा है। अब दूसरे और आखिरी पार्ट में पढ़िए और देखिए कंबोडिया पहुंचने के बाद लड़कों के साथ क्या होता है। स्टेप 1: पाकिस्तानी एजेंट से मुलाकात हम 15 जून को कंबोडिया की राजधानी नोम पेन्ह पहुंचे। विक्की से कॉन्टैक्ट कराने वाले पाकिस्तानी एजेंट लफी ने बताया था कि एयरपोर्ट पर पूछताछ होती है, लेकिन हमारी सेटिंग है। 200 से 250 डॉलर में हमारा बंदा इमिग्रेशन क्लियर करवा देता है। हालांकि, हम टूरिस्ट वीजा पर नोम पेन्ह पहुंचे थे। इमिग्रेशन में हमसे सिर्फ कंबोडिया आने की वजह पूछी गई। हमने बताया कि घूमने आए हैं। एयरपोर्ट से निकलते ही एजेंट विक्की को कॉल किया। उसने शाम 5 बजे मिलने को कहा। जिस जगह की लोकेशन भेजी, वो नोम पेन्ह इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पास ट्रापेआंग रूमचेक एरिया की थी। यहां कई वेयरहाउस, लॉजिस्टिक कंपनियां, रेस्टोरेंट्स और अपार्टमेंट्स हैं। लोकेशन पर पहुंचने के बाद हमने विक्की को कॉल किया। कहा कि भाई कहां हो, नजर नहीं आ रहे। उसने कहा- ‘तुम जहां हों, वहां से आगे बढ़ो। मैं मेन रोड की तरफ आ रहा हूं।’ थोड़ा आगे बढ़ने पर ब्लैक शर्ट और कैप में एक लड़का दिखा। यही विक्की था। वो हमें अपने घर ले गया। अंदर जाते ही विक्की के साथ मौजूद लड़के ने गेट बंद कर दिया। फिर बातचीत शुरू हुई। पता चला कि विक्की पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर का रहने वाला है। उसने बताया ‘ये मेरा घर और ऑफिस दोनों है। स्कैम के लिए आने वाले लड़कों को पहले यहीं रुकवाते हैं। कुछ दिन लड़कों को यहां रखने के बाद स्कैम कंपाउंड भेजते हैं। अब भर्ती का तरीका बदल गया है। आजकल एजेंट सीधे अपनी लोकेशन पर नहीं बुलाते। आपको लफी भाई ने भेजा है, इसलिए बुला लिया।’ भारतीयों को फंसाने में ज्यादा पैसा, पाकिस्तानी लड़के ने एक महीने में 95 लाख कमाएविक्की को शक न हो, इसलिए हमने सीधे सवाल-जवाब नहीं किए। हमने कहा कि यहां रेस्टोरेंट खोलना चाहते हैं। आप बताओ कहां खोल सकते हैं। रेस्टोरेंट के ऊपर ही कमरे बना देंगे, भारत से आने वाले लड़कों को उसी में रुकवाएंगे। इससे किसी को शक भी नहीं होगा। विक्की बोला, ‘जमीन मिल जाएगी, कोई दिक्कत नहीं। मैं वीजा के साथ कानूनी मदद भी करता हूं। अगर किसी लड़के को जेल हो जाए, तो मेरे पास वकीलों का ग्रुप है। मुझे पुलिस रेड की खबर पहले मिल जाती है। कई बार लड़कों को ऐसे निकाला कि एक दरवाजे से पुलिस आ रही है और दूसरे से उन्हें बाहर कर दिया। विक्की ने आगे बताया, ‘अगर कोई खुद स्कैम ऑपरेशन चलाना चाहे, तो उसके लिए भी जगह दिलवा सकते हैं। सिक्योरिटी भी प्रोवाइड कराता हूं। पुलिस नंबर वाली गाड़ियां भी दी हैं।’ सैलरी के बारे में पूछने पर बोला, ‘लड़कों की शुरुआती सैलरी 75 हजार से 1 लाख रुपए तक जाती है। काम के हिसाब से कमीशन मिलता है। रहने के लिए एसी रूम और तीन वक्त का खाना मिलता है। लड़के को आने के बाद पूरा काम समझाते हैं’ बातचीत के आखिर में उसने कहा, ‘‘कंबोडिया में भारत के सिम कार्ड की बहुत डिमांड है। अगर कोई कंबोडिया पहुंचा दे, तो बहुत मुनाफा है। भारत से आने वाले लोग हजारों सिम लेकर आते हैं। इंडियन कॉलिंग में भी कमाई है। अगर अरेंज हो सकें, तो भेजना। खूब कमाओगे।’ स्टेप 2: स्कैम कंपाउंड में ट्रांसफरविक्की से मुलाकात के बाद हम सायबर स्कैम कंपाउंड तक पहुंचना चाहते थे। इन स्कैम कंपाउंड में फंस चुके रोहित ने बताया था कि नोम पेन्ह से 60 किमी दूरी पर चेरिथॉम नाम की जगह है, जहां कई कंपाउंड बने हुए हैं। कंबोडिया के कंदाल प्रांत में बसी इस जगह पर पहुंचे तो सैकड़ों सफेद रंग की बहुमंजिला इमारतें नजर आईं। ये जगह वियतनाम बॉर्डर से महज 3 किमी दूर है। सभी बिल्डिंगों के बाहर ऊंची-ऊंची दीवारें थीं। दीवारों के ऊपर कंटीले तार थे। सीसीटीवी लगे थे। बड़े-बड़े लोहे के गेट थे। कुछ कंपाउंड में ताला लगा था, कुछ के बाहर सिक्योरिटी गार्ड खड़े थे। मैं नोम पेन्ह के अपने साथी पोंग वांथा के साथ यहां पहुंचा था। उसने कहा कि, गाड़ी से बाहर मत निकलना, यहां सब स्कैमर घूमते रहते हैं। पोंग ने बताया कि, यहां कुल कितने कंपाउंड है, इसका आंकड़ा तो किसी को नहीं पता, लेकिन ज्यादातर बिल्डिंगों में सायबर स्कैम कंपनियां ही चल रहीं थीं। कुछ अब भी चोरी-छिपे चल रही हैं, कुछ ने लोकेशन बदली है। पूरा एरिया सूना था। छिपते-छिपाते हमने बिल्डिंगों के शॉट लिए। फिर एक बिल्डिंग के पीछे बनी झुग्गी के पास पहुंचे। वहां मिले लोगों ने बताया कि थोड़े दिन पहले तक स्कैम कंपाउंड में रहने वाले लड़के यहां चाय-पानी के लिए आते थे, लेकिन पुलिस की रेड हुई तो अब बहुत सारे भाग गए। भीड़ आना कम हो गई। मैंने पूछा, ये इमारतें कब बनीं हैं? जवाब मिला-सब पिछले चार-पांच साल में खड़ी हुई हैं। चाइनीज लोगों ने बनाई हैं। पहले कुछ भी नहीं था। अब खेतों के बीच में कंपाउंड, सड़कें, बिजली सब हो गया। कंपाउंड में आने के बाद बाहर जाना मुश्किल, यहीं ऑफिस, मेस और हॉस्टल स्कैम कंपाउंड तक पहुंचाने का जरिया बने रोहित को इन्हीं में से एक कंपाउंड में रखा गया था। जिन लड़कों को सायबर स्कैम के लिए कंबोडिया लाया जाता है, उन्हें एयरपोर्ट से सीधे गाड़ियों में कंपाउंड के अंदर लाते हैं। फिर जांच–पड़ताल होती है। पासपोर्ट छीन लिए जाते हैं। घरवालों से बात करने के लिए सिर्फ एक बार मोबाइल मिलता है, लेकिन वीडियो कॉल नहीं कर सकते। एक कमरे में 6 से 10 लड़कों को रखते हैं। किसी हॉस्टल की तरह यहां बंक बैड बने होते हैं। सभी लड़कों को 24 घंटे सीसीटीवी की निगरानी में रखा जाता है। जिन लड़कों पर भरोसा हो जाता है, उन्हें कंपनी कुछ देर के लिए कंपाउंड के बाहर जाने की परमिशन भी देती है। रोहित से हमें इसी एरिया में रेस्टोरेंट चलाने वाले जाहिद का नंबर मिला। कॉल किया तो उसने बताया- ‘भाईजान अब सख्ती के चलते वहां सब बंद हो गया है। मैं भी नोम पेन्ह में हूं। लड़कों को दूसरे देश भेज रहे। जैसे सख्ती कम होगी, फिर सब शुरू हो जाएगा।’ स्टेप 3: स्कैम कंपाउंड का वर्क कल्चर, सैलरी और कमीशन इन स्कैम कंपाउंड में पहुंचने के बाद एक हफ्ते तक काम सिखाया जाता है। रोहित और उसके साथियों को कंप्यूटर पर काम, मैसेजिंग ऐप का इस्तेमाल, अंग्रेजी में बातचीत और पहले से तैयार स्क्रिप्ट के मुताबिक लोगों से बात करने की ट्रेनिंग दी गई। चेरिथॉम में स्कैम कंपाउंड को देखने के बाद मैं नोम पेन्ह में रिवर साइड एरिया पहुंचा। इस इलाके को स्कैमर्स का अड्‌डा कहा जाता है। भारत, बांग्लादेश, नेपाल, वियतनाम सहित तमाम देशों के लड़के यहां मिले। इन्हीं में से एक बांग्लादेशी लड़के ने बंद कैमरे पर बात की। बोला– ‘कंपनी ने कंबोडिया के शहर सीएम रीप बुलाया था क्योंकि यहां के एयरपोर्ट पर उनकी सेटिंग थी। वहां से नोम पेन्ह आ गए। 20 दिन होटल में फंसे रहे क्योंकि कंपनी ने नौकरी के बदले 6 लाख मांगे थे। मैंने सिर्फ डेढ़ लाख दिए थे। एजेंट ने कहा- बाकी साढ़े चार लाख रुपए मिलने पर ही कंपनी आ सकोगे। फिर रकम बढ़ाकर 8 लाख कर दी। परिवार ने कर्ज लेकर पैसे भेजे।‘ ‘तब एजेंट ने गोल्डन कैसीनो कंपनी में भेजा। पहले 7 दिन ट्रेनिंग हुई। रोज 12 घंटे बैठाए रखते और कस्टमर से बात करना सिखाते। दोपहर में ज्यादातर चाइनीज खाना मिलता, जो खाया नहीं जाता। अच्छे से काम ना करने वाले से 20 घंटे तक काम करवाया जाता। कई बार 12 घंटे खड़े रहकर काम करना पड़ता।‘ टारगेट पूरा न होने पर कैद किया, करंट दिया और मारपीट कीलड़का आगे बोला, ‘मुझे बहुत टॉर्चर किया। टारगेट पूरा न होने पर पहले खाना बंद किया। फिर छोटे से कमरे में बंद कर दिया। न वॉशरूम जा सकता था, न कुछ खाने को मिलता। एक दिन मैनेजर के सामने बहुत रोया, तो टीम लीडर ने मुझे करंट लगाया और बहुत मारा। एक हफ्ते बाद मैनेजर ने मेरे एजेंट को बुलाकर मुझे बाहर निकलवा दिया।‘ ‘कर्ज ज्यादा था और वापस आने का पैसा नहीं था, इसलिए दूसरी कंपनी में चला गया। वहां महीने का दो से तीन हजार डॉलर तक कमा रहा था, लेकिन 24 अप्रैल को कंपनी बंद हो गई। हमारे चाइनीज बॉस को अरेस्ट कर लिया। सब लड़के भाग गए। हमें म्यांमार-मलेशिया जाने का कहा गया। कुछ अफ्रीकन देशों में भी गए हैं। कुछ पर कंपनी ने इतना प्रेशर डाला कि उन्होंने सुसाइड कर लिया। उनमें से दो की लाशें समुद्र में फेंक दीं। एजेंट भी भाग गए।‘ सख्ती के बाद कंबोडिया से म्यांमार-मलेशिया जा रहीं स्कैम कंपनियां पाकिस्तानी एजेंट लफी, स्कैम कंपनी के HR डिपार्टमेंट में काम करने वाले मैनुअल, कंबोडिया में मिले एजेंट विक्की और स्कैम कंपनी में काम कर चुके लड़कों से बातचीत से पता चला कि, कंपनियां कंबोडिया से मलेशिया, म्यांमार, तुर्कमेनिस्तान और श्रीलंका जैसे देशों में जा रही हैं। इन्हीं लड़कों के जरिए हमें कुआलालंपुर में भर्ती करने वाले एजेंट की लिंक मिली। जिस लड़के से नंबर मिला था, उसी के रेफरेंस से एजेंट से बात की। उसे बताया कि मैं एजेंट हूं, इंडिया से लड़कों को स्कैम कंपाउंड भेजना चाहता हूं। उसने पहले कुआलालंपुर में मिलने की बात कही लेकिन वहां पहुंचने पर मिलने से इनकार कर दिया। बोला- ‘बिना मिले ही सारा काम हो जाएगा। कुआलालंपुर के लिए ओपनिंग है। आप लड़कों के वीडियो भेजो, मैं इंटरव्यू करवाता हूं। जिन लड़कों की इंग्लिश अच्छी है, उन्हें प्रिफरेंस मिलेगा।‘ फिर एजेंट ने वॉट्सएप पर एक स्क्रिप्ट भेजी। इसमें लिखा था- ‘कॉल करके कैसे किसी व्यक्ति को झांसे में लेना है। पुलिस, ईडी या सीबीआई अधिकारी बनकर बात करनी है।’ एजेंट ने कहा कि जिन लड़कों को भेजना है, उनके वीडियो इस स्क्रिप्ट के हिसाब से रिकॉर्ड करके भेज दो। हमने एक लड़के का वीडियो भेजा, तो जवाब मिला- वीडियो ठीक है। लड़के का पासपोर्ट भेजो, इंटरव्यू करवाता हूं। एक हफ्ते में कुआलालंपुर बुला लेंगे। हमने कंपनी का एड्रेस मांगा और कहा एक बार देखना चाहते हैं। जवाब मिला- ‘चाइनीज कंपनी है, ऑफिस मेन सिटी में है, लेकिन एड्रेस नहीं दे सकता। मैं भी नहीं गया। लड़के के सिलेक्ट होने के बाद कंपनी के लोग सीधे एयरपोर्ट से ले जाएंगे।‘ अगले दिन उसने यूरोपियन और अमेरिकन मार्केट की ओपनिंग का मैसेज भेजा। बताया कि 800 डॉलर सैलरी मिलेगी। कुआलालंपुर से काम करना है, लेकिन जो स्कैम करना चाहते हैं, उन्हें ही लेकर आना। ये स्टोरी लिखे जाने तक लफी और मैनुअल हमारे कॉन्टैक्ट में हैं। मैनुअल लड़कों के पासपोर्ट मांग रहा है, लफी ने इंटरव्यू के लिए थोड़ा रुकने को कहा है। किराए के बंगले और अपार्टमेंट्स में चल रहीं स्कैम कंपनियां मलेशिया में जिन लोकेशन पर पुलिस की रेड में स्कैम कंपनियां पकड़ी गई हैं, हम वहां भी पहुंचे लेकिन ये नहीं पता चल सका कि कौन सी इमारतों में स्कैम कंपाउंड चलाए जा रहे हैं। पड़ताल में पता चला कि कुआलालंपुर के ओल्ड क्लांग रोड, कुचाई लामा और बंगसर इलाकों में कमर्शियल बिल्डिंग्स, किराए के बंगलों या अपार्टमेंट्स में सायबर स्कैम कंपनियां चल रही हैं। बाहर से देखने पर सब सामान्य लगता है, लेकिन हकीकत अलग है। श्रीलंका, फिलीपींस, म्यांमार, युगांडा जैसे देश नए ठिकाने बन रहेकंबोडिया के कई स्कैम कंपाउंड की जमीनी पड़ताल कर चुके ‘द आई विटनेस’ प्रोजेक्ट के ऑपरेशंस डायरेक्टर नाथन पॉल सदर्न कहते हैं, ‘इन कंपाउंड्स को इंटरनेशनल चाइनीज सिंडिकेट चला रहे हैं। उनके लोकल गवर्नमेंट से अच्छे रिलेशन होते हैं। पहले टेलीकॉलिंग या कस्टमर सर्विस की जॉब बताते हैं और 1200 डॉलर महीना मिलने की बात करते हैं। लोग लालच में फंस जाते हैं।‘ ‘स्कैम कंपाउंड में आने के बाद काम करना ही पड़ता है। न करने पर डार्क रूम में बंद कर मारपीट करते हैं। कंपाउंड के बाहर हथियारबंद सिक्योरिटी गार्ड होते हैं, इसलिए भाग पाना आसान नहीं होता। कंपनियां पासपोर्ट भी ले लेती हैं। लोगों के पास पैसे नहीं होते, ऐसे में कंपाउंड में ही काम करने लगते हैं।‘ वे कहते हैं, ‘इन स्कैम कंपाउंड्स की ऑपरेशनल कैपेसिटी और जिस स्केल पर ये काम कर रहे हैं, वो सब हैरान करने वाला है। एक देश में क्रैकडाउन होने पर दूसरे देश भाग जाते हैं। यही इनके काम का तरीका है।‘ कंबोडिया में ह्यूमन ट्रैफिकिंग पर सालों से काम कर रहे मार्क टेलर कहते हैं, ‘कंबोडिया सायबर क्राइम का डेस्टिनेशन बन चुका है। यहां गेम्बलिंग इंडस्ट्री से जुड़कर सायबर स्कैम करने वाली कंपनियां आई हैं। कई देशों के लोग यहां फंसे हैं।‘ ‘सख्ती के बाद ये श्रीलंका, फिलीपींस, म्यांमार, युगांडा और केन्या जैसे देशों में मूव कर रही हैं, लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि कंबोडिया में पूरी तरह से काम बंद हो चुका है। ये ऑर्गनाइज्ड नेटवर्क है। इस इंडस्ट्री को पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं है।‘ साउथ-ईस्ट एशिया ही क्यों बना साइबर स्कैम का अड्डा? ……………………ऑपरेशन स्कैम वर्ल्ड का पहला पार्ट भी पढ़ें… एक लड़के पर 95 हजार कमीशन, काम भारतीयों को लूटना ‘लड़के भेज दो... एक लड़के पर 95 हजार रुपए तक कमीशन मिलेगा।’ ये ऑफर कंबोडिया में बैठे एक पाकिस्तानी एजेंट ने भास्कर रिपोर्टर को दिया। शर्त थी कि लड़के इंग्लिश बोलना जानते हो, बाकी काम कंपनी सिखा देगी। कंपनी का नाम नहीं है। वेबसाइट नहीं है। ऑफर लेटर नहीं है। इंटरव्यू टेलीग्राम पर होगा। जॉब दुनियाभर में लोगों को डिजिटल अरेस्ट करके ठगने की है। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 10 Jul 2026 5:06 am

चेहरे पर मांस के लोथड़े देख लोग कहते हैं भूत:शक्ल देखकर 5 लोग गड्ढे में जा गिरे, मां बोली-मरेगा तभी बला टलेगी

ऊपर आपने जो तस्वीर देखी, उनका नाम है मिथुन चौहान। उम्र 29 साल। जो भी इन्हें पहली बार देखता है, डर जाता है। भूत कहता है या जानवर। दुर्लभ बीमारियों की सीरीज ‘ऐ जिंदगी’ के लिए इस बार इन्हीं की तलाश है। मैं नीरज झा इसी तलाश में पहुंचा पटना से करीब 150 किलोमीटर दूर नवादा जिले के नारदीगंज ब्लॉक। गांव का रास्ता पता नहीं है, सो मैं मोबाइल में मिथुन की तस्वीर दिखाकर लोगों से पूछता हूं- इस लड़के का गांव तिलकचक कहां है? जो मिथुन को नहीं जानता वो तस्वीर देखते ही डर जाता। कहता- ‘अरे भाई ये क्या है। इंसान तो नहीं लगता।’ जैसे-जैसे मैं गांव के करीब पहुंचता गया, लोग गांव से ज्यादा उसे पहचानने लगे। फोटो देखकर एक शख्स बोला- ‘अरे ये तो मिथुन है। दूर-दूर से लोग इसका वीडियो बनाने आते हैं।’ फिर हाथ से इशारा करते हुए कहते हैं-‘इसी रोड पर 5 किलोमीटर आगे चले जाइए, फिर किसी से भी पूछ लीजिएगा सब मिथुन का घर बता देंगे।’ इस तरह पूछते-पूछते मैं करीब आधे घंटे बाद मिथुन के गांव पहुंचा और फिर उसके घर। बाहर ही कुछ लोग बैठे हैं। इनमें से एक बजुर्ग महिला को तस्वीर दिखाकर पूछा- क्या यही है मिथुन का घर? वो देखते ही बोलीं- ‘अरे, ये मेरा बेटा मिथुन है।’ पूछने पर वो अपना नाम बचिया देवी बताती हैं। मैंने जैसे ही उन्हें अपने बारे में बताया, वो बोलीं- ‘पहले भी आप जैसे कई लोग आ चुके हैं। आप भी क्या ही करिएगा। बैठ जाइए यहीं, मिथुन थोड़ी देर में आता होगा।’ थोड़ी देर बाद, एक शख्स आता दिखा। वो मिथुन थे। करीब पहुंचते ही हंसते हुए बोला- ‘मुझे देखकर डर तो नहीं गए।’ मैंने पूछा- ‘फोटो में तो आपकी शक्ल काफी अलग है।’ वो बोले- ‘एकबार सर्जरी हुई थी, उसके बाद से चेहरा थोड़ा बदल गया है।’ मैंने जैसे ही कैमरा निकाला, मिथुन की मां बोलीं- 'अब ई सबसे कुछ होने वाला नहीं है। केतना लोग वीडियो बनाकर ले गए। हमें फूटी कौड़ी नहीं दी। अब आप भी वीडियो बनाइएगा। ये तो अपनी बीमारी को कफन की तरह ओढ़कर जैसे-तैसे जी रहा है। मरेगा तभी ये बला टलेगी।' उन्होंने आगे कहा, 'यह भी भला कोई जिंदगी है इसकी। 5 लाख रुपये दिलवा दो, तो यह कुछ कर लेगा। कम से कम अपनी एक छोटी-मोटी दुकान ही खोल लेगा। चेहरा देख रहे हैं इसका, शादी-ब्याह की बात सोचना भी गुनाह है। पता नहीं कौन-सा पाप किया था, जो ऐसा अजूबा मेरे घर में पैदा हुआ है। सब किस्मत का दोष है।' इतना सुनते ही वहां बैठा एक शख्स बोला- ‘मिथुनमा, अब मिथुन चक्रवर्ती बन जाएगा। अबकी वीडियो बनेगा तो दिल्ली से पैसा आएगा।’ ये सुनते ही मिथुन झल्लाते हुए घर के अंदर चले गए और सिर पकड़कर सीढ़ी पर बैठ गए। मिथुन का चेहरा जगह-जगह कटा हुआ है। सर्जरी के बाद भी चेहरा आम लोगों जैसा नहीं है। शरीर पर गड्‌ढे भी हैं। कुछ देर बाद मिथुन कहते हैं- 'मैं इसीलिए आपको बुलाना नहीं चाहता था। जब भी कोई आता है तो ये लोग ऐसे ही मेरा मजाक उड़ाते हैं। कहने लगते हैं- ‘इतने सारे लोग वीडियो बनाने के लिए आते हैं। पैसा तो मिलता ही होगा। तुमको पैसे की क्या कमी है। फालतू में मजदूरी करने जाते हो। देखिए पैर में सीमेंट लगी है। लेबर का काम कर रहा था। आपका फोन आया, तो खाने का बहाना बनाकर घर आया हूं। मोबाइल है, लेकिन लोकेशन भेजना नहीं आता है। किसी को बोलता तो ये लोग फिर मजाक उड़ाते। इसीलिए आपसे कहा था- इस इलाके में किसी को भी मेरी फोटो दिखाइएगा, वो पता बता देगा। सर, मेरा चेहरा देखकर तो लोगों को घिन आती है। मेरे मुंह से लगातार लार टपकती रहती है, क्योंकि मुंह पूरी तरह बंद नहीं होता। शायद, डॉक्टर ने चेहरे का मांस ज्यादा काट दिया, इसलिए मुंह खिंचा-खिंचा रहता है। लोग कहते हैं कि तुम मनहूस हो, तभी तो ऐसी शक्ल भगवान ने दी है। आप ही बताइए, मेरा क्या दोष है। बचपन में मेरे साथ क्या हुआ, किसे पता। 10-12 साल का था, आईने में खुद का चेहरा देखकर डर जाता था। भाइयों को देखता, वो हट्टे-कट्टे, सुंदर दिखते थे। मैं न तो अपने चेहरे को ठीक से धो सकता था और न ही हाथ फेर सकता था। पूरे शरीर पर मांस के बड़े-बड़े लोथड़े थे। चेहरे पर न आंख का पता चलता था, न मुंह का। सांस भी नहीं ले पाता था। नजर भी कमजोर हो गई थी। रात में सोता था, तो 10 घर तक मेरे खर्राटे की आवाज जाती थी। जो भी रात में इस रास्ते से गुजरता, वह डर जाता था।' 'एक बार की बात है। सुबह के 5 बज रहे होंगे। मैं भाइयों के साथ आम तोड़ने के लिए खेत गया था। वहां जैसे ही कुछ लोगों की नजर मुझ पर पड़ी तो वे भूत, भूत कहकर चिल्लाने लगे। डर के मारे तेजी से भागे और एक बड़े गड्ढे में जा गिरे। उस दिन से आजतक मैं सुबह-सुबह घर से नहीं निकलता। बच्चे तो मेरे पास आते ही नहीं हैं। कोई भूत-प्रेत तो कोई शैतान का बच्चा कहता है। पड़ोसी कहते हैं- घर में ही रहा करो। बच्चे तुम्हें देखकर डर जाते हैं। दिनभर खाना नहीं खाते। मैं भी स्कूल जाता था। लेकिन जब बीमारी की वजह से मेरा चेहरा बिगड़ने लगा, तो एक दिन मैडम ने मुझे बहुत मारा। दरअसल, क्लास के बच्चों ने शिकायत की थी कि वे मुझे देखकर डरते हैं। यहां तक कि उनके घरवालों ने भी हेडमास्टर से कह दिया था- इसे स्कूल से निकाल दो, हमारे बच्चे इसे देखकर रात-रातभर सो नहीं पाते। मैडम ने कहा- तुम्हारी वजह से बाकी बच्चे स्कूल आना छोड़ देंगे। तुम अपना चेहरा आईने में देखते हो, जाकर देखो। कैसा डरावना है। अब स्कूल मत आना। तब से ही स्कूल जाना छोड़ दिया। सिर्फ 5वीं तक ही पढ़ पाया। घर में ही बंद रहता था। पापा के साथ कहीं जाता तो लोग मुझे देखकर रास्ता बदल लेते थे। अब घर वाले भी मुझे कहीं नहीं ले जाते। शाम को बाहर कहीं खेलने के लिए जाता, तो बच्चे भाग जाते। मेरे घर आकर कहते- इसे बाहर मत भेजा करो। धीरे-धीरे जब चेहरे पर मांस के लोथड़े बड़े होने लगे, तो दर्द बढ़ने लगा। ठीक से खाना भी नहीं खा पाता था। दिनभर कराहता रहता। 15-16 साल का हुआ, तो घरवालों ने पैसा देना बंद कर दिया। बीमारी में भला कौन किसका होता है। सोचा काम-धंधा करूंगा, तभी दो रोटी मिलेगी। हमारे आसपास के लोग घर बनाने का काम करते हैं। उनसे काम मांगने गया, तो वे बोले- तुम्हारी शक्ल देखने लायक नहीं है। घर पर ही बैठो। 2016-17 की बात है। तब यहां झोपड़ी थी। भाइयों ने कहा- घर बनवा लेते हैं। इसके हिस्से का खाली खेत छोड़ देते हैं। घर बनना शुरू हुआ तो कुछ मिस्त्री बाहर से काम के लिए आए। जब उन्होंने मुझे देखा तो दूसरे शहरों में मेरे बारे में बताया। कहा- वहां भूत जैसा लड़का रहता है। धीरे-धीरे ये बात सब जगह फैल गई। एक दिन शहर से एक शख्स आया। उसने मेरा फोटो खींचा और चला गया। कुछ दिन बाद वह फिर आया और पापा से कहा- इसे बड़ी बीमारी है। इस बीमारी का कोई इलाज नहीं है, लेकिन सर्जरी से थोड़ी राहत मिल सकती है। वह शख्स किसी संस्था के जरिए मेरी मदद के लिए आया था।' मिथुन अस्पताल का एक पर्चा दिखाते हुए कहते हैं, इसमें पढ़ लीजिए। मेरी बीमारी का नाम लिखा है। मुझसे तो पढ़ते भी नहीं बनता। पर्चे में बीमारी का नाम लिखा है न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस। मिथुन आगे बताते हैं कि पहले तो पापा इलाज के लिए नहीं माने। कहने लगे- ‘जब इलाज नहीं है, तो सर्जरी कराकर क्या करेंगे। कहीं इसे कुछ हो गया तो।’ उस शख्स के लाख कहने के बाद पापा माने। तब वो शख्स मुझे और पापा को हवाई जहाज से बेंगलुरु ले गया। वहां मुझे एक अस्पताल में भर्ती कराया। उसके बाद क्या हुआ, कुछ पता नहीं। बाद में पापा ने बताया कि डॉक्टरों ने खून की जांच कराई और फिर ऑपरेशन के लिए ले गए। करीब 10 घंटे बाद मैं बाहर आया तो पूरे शरीर पर पटि्टयां लिपटी हुई थीं। कई दिनों तक बेहोश रहा। डॉक्टर आकर रोज पटि्टयां बदलते थे। ये सिलसिला एक-दो महीने तक चला। इसके बाद हम ट्रेन से गांव लौट आए। वो शख्स कौन था, इलाज में कितने पैसे लगे, हमें कुछ भी नहीं पता। अगले छह-आठ महीनों में सारे घाव सूख गए। डॉक्टरों ने चेहरे से मांस के लोथड़े काटकर हटा दिए थे। लेकिन मेरा चेहरा पूरी तरह बदरंग हो चुका था। शरीर पर जगह-जगह गड्ढे हो गए थे। इसी वजह से मेरी शादी नहीं हो पाई। घरवाले भी नहीं चाहते कि मेरा घर बसे। वे बस मेरे मरने का इंतजार कर रहे हैं, ताकि मेरे हिस्से की जमीन बाकी के भाइयों में बंट जाए। कपड़ों के नाम पर मेरे पास एक जींस, एक हाफ-पैंट, टी-शर्ट और एक शर्ट है। इस घर में मेरा कोई हिस्सा नहीं है। घर भी पापा और भाइयों ने मिलकर बनाया है। भाइयों की शादी हुई तो मुझे कोई नहीं ले गया। बस कोई खाना दे देता तो मैं खा लेता था। सर! क्या कोई मेरी प्लास्टिक सर्जरी नहीं करवा सकता। कहते हैं, उससे चेहरा ठीक हो जाता है। अब मुझे घुटनों में भी गांठें हो रही हैं। इतने में मिथुन का फोन बजा। बात करके फोन रखते ही वो बोले- राजमिस्त्री का फोन था। उसके साथ ही काम कर रहा हूं। मुझे जाना पड़ेगा। हो सके तो मेरे लिए कुछ पैसे देते जाइएगा। मिथुन के जाने के बाद मैंने बचिया देवी से बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। कहने लगीं- सब वीडियो, फोटो खींचकर चले जाते हैं, कोई एक रुपए की मदद नहीं करता। काफी कोशिशों और पैसे की मदद का भरोसा देने के बाद बचिया देवी बात करने को राजी हुईं। कहती हैं- साल 1996 में इसका जन्म हुआ। महीना, तारीख याद नहीं। जब 4-5 साल का हुआ तो आंगन में पूरे दिन खेलता रहता था। दिखने में भी सुंदर था। उस दौरान, मिथुन के पिता रामजी चौहान कलकत्ता में रहते थे। अब भी वहीं हैं। वहां खाली तेल के कनस्तर बेचते हैं। मेरे 5 बच्चों में मिथुन चौथे नंबर का है। गर्मी का महीना था। अचानक इसे बुखार आया। उस समय तो फोन नहीं था। घर में कोई पढ़ा-लिखा भी नहीं था। एक पड़ोसी से चिट्ठी लिखवाकर पति को भेजी कि मिथुन को तेज बुखार है। ब्लॉक के डॉक्टर ने दवा दी है, लेकिन ठीक नहीं हो रहा। 15 दिन बाद इसके पिता का जवाब आया। नारदीगंज में एक डॉक्टर बैठता है। उसे जाकर दिखा दो, ठीक हो जाएगा। मिथुन को उस डॉक्टर के पास ले गई। उसने कुछ दवाई दी। दो-तीन दिन पानी में गोली को घोलकर पिलाया, तो इसके गाल पर एक छोटा सा घाव हो गया। कुछ दिन में यह घाव गांठ जैसा हो गया। डॉक्टर ने देखा तो एक इंजेक्शन लगा दिया। इंजेक्शन लगाने के एक-दो दिन बाद ही मिथुन के पूरे शरीर में जगह-जगह लाल चकत्ते नजर आने लगे। उस समय तो इसके चेहरे पर कुछ नहीं था। सिर्फ गाल पर एक घाव था। घरवालों ने कहा- सिंदूर को केरोसिन में मिलाकर शरीर पर लगा दो। शाम तक ठीक हो जाएगा। एक हफ्ते बीतने के बाद भी चकत्ते ठीक नहीं हुए, बढ़ते ही गए। फिर डॉक्टर के पास लेकर गई तो उसने कुछ दवाई दे दी। बोला- ‘दो-तीन दिन में ठीक हो जाएगा।’ पास में एक ओझा रहता था। उसके पास भी लेकर गई। उसने कहा- ‘तुम्हारे बेटे पर बुरी आत्मा का साया था, उसे हटा दिया है। जल्द ठीक हो जाएगा।’ हालांकि उससे भी कुछ नहीं हुआ। हाथ-पैर, कोहनी, घुटना… शरीर में सब जगह, गाठें बढ़ने लगीं। कुछ ही महीने में इसके पूरे चेहरे पर बड़े-बड़े घाव होने लगे। मांस के लोथड़े लटकने लगे। हम तो डर गए कि ये क्या हो गया। फिर डॉक्टर के पास गए तो उसने दवा देने से मना कर दिया। कहा- ‘पता नहीं, कौन-सी बीमारी है। किसी बड़े शहर लेकर जाओ।’ पूरे गांव में हल्ला हो गया था कि डॉक्टर की दवाई के रिएक्शन से मिथुन को ऐसा हुआ। दूसरे डॉक्टरों के पास गए तो डर के मारे उन्होंने भी दवाई नहीं दी। मैंने दोबारा पति को खबर भिजवाई। 3 दिन बाद वो कलकत्ता से घर आए। मिथुन को लेकर नवादा जिले के सरकारी अस्पताल गए। डॉक्टर देखते ही बोला- ‘ये कौन सी बीमारी है। हमने ऐसी बीमारी कभी नहीं देखी, इसे कहीं और ले जाओ।’ हम गरीब आदमी, दिन में खाएं तो रात के लिए सोचें। रात में खाएं तो दिन के लिए। खेती-बाड़ी कुछ नहीं, मेहनत मजदूरी करते हैं। पांच बच्चे थे। इसी को लेकर इधर-उधर भागते रहते तो बाकी का क्या होता, इसलिए ठीक से ध्यान नहीं दे पाए। एक बार एक भले मानुष ने इलाज करवा दिया। अब न तो हमारे पास पैसे हैं और न ही हिम्मत। डॉक्टर भी कह चुके हैं कि कोई इलाज ही नहीं तो क्या करें। सरकारी मदद के नाम पर एक पैसा नहीं मिला। मिथुन का दर्द करीब से देखने के बाद बतौर रिपोर्टर मैंने डॉक्टर से मिलकर बीमारी के बारे में जानने का सोचा। मैं पहुंचा दिल्ली के सर गंगा राम हॉस्पिटल के जेनेटिक डिपार्टमेंट। जहां मेरी मुलाकात डिपार्टमेंट की हेड रतना पुरी शाह से हुई। मैंने उन्हें मिथुन की रिपोर्ट्स और फोटो दिखाई। वे बताती हैं- मिथुन को जो बीमारी है, उसका नाम- न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस(NF) है। इसका दुनिया में कोई स्थाई इलाज नहीं है। NF जीन में खराबी से यह बीमारी होती है। माता-पिता दोनों से बच्चे में जीन की 20-20 हजार कॉपियां आती हैं। इसमें से किसी एक के भी NF जीन में खराबी आती है, तो बच्चे को यह बीमारी हो सकती है। कुछ केस में जन्म के बाद ही बच्चे के शरीर पर दाने जैसी छोटी गांठ नजर आती है। उम्र के साथ यह बढ़ती जाती है। दरअसल, इस जीन का काम सेल्स को बेतहाशा बढ़ने से रोकना है। जब इसमें खराबी आती है, तो नसों के आसपास की कोशिकाएं बढ़ने लगती हैं। बढ़ते-बढ़ते ये ट्यूमर जैसी हो जाती है। हालांकि इन ट्यूमर से कैंसर का खतरा बहुत कम होता है। कुछ मामलों में चार-पांच साल की उम्र के बाद बच्चों में इस बीमारी के लक्षण नजर आते हैं। जैसा मिथुन का केस है। सबसे पहले पूरे शरीर पर लाल, भूरे रंग के चकत्ते और फिर छोटी-छोटी गांठ नजर आती है। गांठ के बढ़ने से मरीज की आंख, मुंह, नाक सब ढंक जाता है। इससे मरीज को देखने, बोलने, खाने-पीने में दिक्कत होती है। सांस की तकलीफ भी होती है। दिमाग कमजोर होने लगता है। वह जल्दी किसी चीज को सीख नहीं पाता। नर्वस सिस्टम कमजोर हो जाता है। कई केस में जैसे-जैसे मरीज की उम्र बढ़ती है, गांठों में तेज दर्द होने लगता है। शरीर जल्दी थक जाता है। इन गांठों को सर्जरी करके हटाया जाता है। रतना पुरी कहती हैं- इस बीमारी का इलाज किसी एक डॉक्टर के बस की बात नहीं है। इसमें जेनेटिक, न्यूरो जैसे कई विभागों के डॉक्टरों को मिलकर काम करना पड़ता है। जब शरीर की गांठें बड़ी होकर अंदरूनी नसों तक पहुंच जाती हैं, तो ऑपरेशन बहुत सावधानी से करना पड़ता है। हर जगह इसका इलाज या ऑपरेशन मुमकिन नहीं होता। असल में, कुछ ट्यूमर नसों के इतने करीब या उनके अंदर तक धंसे होते हैं कि अगर डॉक्टर उन्हें पूरा बाहर निकालने की कोशिश करें, तो नसें डैमेज होने का खतरा बढ़ जाता है। यही वजह है कि सर्जरी से पहले MRI, CT स्कैन और एंजियोग्राफी जैसी जांचें जरूरी हैं। ताकि यह सटीक रूप से देखा जा सके कि ट्यूमर का जाल कहां तक फैला हुआ है। इसके बाद, ट्यूमर को परत-दर-परत हटाया जाता है। जब प्लास्टिक सर्जन इस सर्जरी को करते हैं, तब न्यूरोसर्जन लगातार मॉनिटरिंग करते रहते हैं कि कोई नस न कट जाए। यदि ट्यूमर नसों की जड़ तक फैला हो, तो डॉक्टर केवल उसके उतने ही हिस्से को काटते हैं जिससे मरीज को दर्द से राहत मिल सके। ताकि नसें पूरी तरह सुरक्षित रहें। इस जटिल सर्जरी के बाद कई मामलों में नसों की कमजोरी के कारण मरीज को हंसने, बोलने या चेहरे के हाव-भाव बदलने में दिक्कत आ सकती है। इसके अलावा, जब ये गांठें निकलती हैं तो, अंगों को दोबारा सामान्य रूप से काम करने के लायक बनाने के लिए फिजियोथेरेपी की भी जरूरत होती है। यह पूरी तरह से एक जेनेटिक बीमारी है, इसलिए सर्जरी के बाद भी शरीर के उसी हिस्से या किसी अन्य जगह से गांठें दोबारा उभर सकती हैं। दरअसल, जीन में मौजूद इस गड़बड़ी को ठीक करना फिलहाल मेडिकल साइंस के लिए संभव नहीं है। यही वजह है कि इस बीमारी का कोई स्थाई इलाज नहीं है। इस बारे में IGIMS पटना के न्यूरो सर्जरी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. समरेंद्र कुमार सिंह इस बीमारी के बारे में बताते हैं कि न्यूरोफाइब्रोमैटोसिस नसों से जुड़ी एक दुर्लभ बीमारी है, जो 1 लाख में से किसी 1 व्यक्ति को होती है। यह ज्यादातर शरीर के संवेदनशील हिस्सों में होती है जैसे- पीठ, हाथ और चेहरा। जहां नसें ज्यादा होती हैं। यदि गांठ त्वचा के ऊपर हो तो दर्द नहीं होता, लेकिन नसों के अंदर विकसित हो जाए तो दर्द बहुत ज्यादा होता है। रीढ़ की हड्डी या दिमाग के पिछले हिस्से (CP एंगल) में गांठ होने पर पूरा शरीर और दिमाग पैरालाइज्ड हो सकता है। कान की नस में ट्यूमर से सुनने की क्षमता जा सकती है। सीपी एंगल में गांठ होने से खाना सांस की नली में फंस सकता है, जो जानलेवा है। इसकी सर्जरी का खर्च 3 से 5 लाख रुपये तक आता है। ऑपरेशन के दौरान नसों को बचाने के लिए माइक्रोस्कोप और 'इंट्राऑपरेटिव नर्व मॉनिटरी मशीन' का उपयोग किया जाता है। सर्जरी के बाद प्रभावित जगह की नसें थोड़ी कमजोर हो जाती हैं। -------------------------------- ऐ जिंदगी सीरीज की यह खबर भी पढ़ें… 1- बेटे की सभी हड्डियां टेढ़ी, 4 करोड़ में होगा इलाज:बिस्तर से उठ नहीं पाता, 3 डॉक्टर बोले- आपसी रिश्तों में शादी का असर 8 साल का जावेद स्कूल के मैदान में क्रिकेट खेलते-खेलते अचानक गिर पड़ा। दोस्तों ने उसे उठाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं उठा। जमीन पर पड़ा कराहने लगा। टीचर भागते हुए आए, उन्होंने भी उठाने की कोशिश की। वो बार-बार कहता रहा- मेरे घुटने और कोहनियों में बहुत दर्द है। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- 14 की उम्र में शरीर बना 'पेड़ की छाल’: उठो या बैठो फटने लगती है चमड़ी, मन करता है छीलकर फेंक दूं; देश का अकेला केस दोपहर के 1 बजे हैं। जंगल के ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर कार हिचकोले खा रही है। तेज गर्मी से गला लगातार सूख रहा है। करीब 2 घंटे बाद जंगलों में कुछ झोपड़ियां नजर आती हैं। इन्हीं झोपड़ियों में से एक के सामने हमारी कार रुकी। झोपड़ी के बाहर एक लड़की बेजान सी खड़ी नजर आई। उसकी मटमैली शर्ट और हाफ पैंट के बाहर जितना भी शरीर दिख रहा है, वह बेहद डरावना है। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें…

दैनिक भास्कर 10 Jul 2026 5:05 am

'पिघल रहा है यूरोप': सिर्फ जर्मनी में गर्मी से 5,000 से ज्यादा मौतें; WHO की रिपोर्ट में दुनिया भर के आंकड़े बेहद डरावने

ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन (Climate Change) का सबसे खतरनाक और वीभत्स रूप इस समय उस यूरोप में देखने को मिल रहा है, जो अपनी ठंडी वादियों, बर्फ से ढके पहाड़ों और सुहावने मौसम के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। यूरोप के 23 देशों में इस समय रिकॉर्ड-तोड़ हीटवेव (भीषण लू) चल रही है, जिसके कारण वहां का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है।हालत यह है कि भीषण गर्मी के कारण डामर की सड़कें पिघल रही हैं, रेलवे ट्रैक टेढ़े हो रहे हैं और शहरों की ट्रैफिक लाइट तक पिघलकर लटक गई हैं। विभिन्न अंतरराष्ट्रीय अनुमानों के मुताबिक, इस साल यूरोप में अब तक 20,000 से ज्यादा लोगों की जान सिर्फ गर्मी के कारण जा चुकी है। इसमें सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा जर्मनी का है, जहां पिछले 6 महीनों में ही 5 हजार से अधिक लोगों की मौत हीटवेव से हुई है।यूरोप के किस देश में कितनी पड़ रही है गर्मी?'द अर्थ.कॉम' ($TheEarth.com$) की एक रिपोर्ट के अनुसार, यूरोप के कई देशों में पारा 40 से 44 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जो वहां के इतिहास में अभूतपूर्व है:फ्रांस: राजधानी पेरिस में पारा 40C को पार कर गया है, जबकि फ्रांस का पीसोस (Pisos) शहर 44.3C तापमान के साथ इस समय पूरे यूरोप का सबसे गर्म शहर बन चुका है।जर्मनी: जर्मनी के कोचेम (Cochem) में 8 जुलाई को सर्वकालिक उच्च 41.7C तापमान दर्ज किया गया।पोलैंड: पोलैंड में गर्मी ने 105 साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। यहाँ के स्लुबिस शहर में तापमान 40.5C रिकॉर्ड हुआ।स्पेन और अन्य देश: स्पेन के बिलबाओ में पारा 42C के पार है, डेनमार्क के ओडिन्से में 36.6C और अमूमन ठंडे रहने वाले ब्रिटेन (UK) में भी तापमान 36.1C तक पहुंच गया है।जर्मनी में क्यों हुई इतनी मौतें? रॉबर्ट कोच इंस्टीट्यूट का खुलासारॉयटर्स (Reuters) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जर्मनी में इस साल अब तक गर्मी से संबंधित 5,120 मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें से अधिकांश मौतें जून के आखिरी हफ्ते में हुईं, जब साप्ताहिक औसत तापमान सामान्य से काफी ज्यादा था।जर्मनी के नेशनल पब्लिक हेल्थ इंस्टीट्यूट, रॉबर्ट कोच इंस्टीट्यूट (RKI) ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि मरने वालों में सबसे ज्यादा संख्या बुजुर्गों और महिलाओं की थी। कुल मौतों में से लगभग 4,270 लोग 75 वर्ष या उससे अधिक उम्र के थे। वैज्ञानिकों का कहना है कि यूरोप के लोग सदियों से अत्यधिक ठंड में रहने के आदी हैं, इसलिए उनका शरीर लगातार 40 से 45C की इस भीषण गर्मी और हीटस्ट्रोक को सहन नहीं कर पा रहा है।WHO की रिपोर्ट: दुनिया भर में हर साल करीब 5 लाख मौतेंविश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा 28 अप्रैल 2026 को प्रकाशित की गई नई 'क्लाइमेट रिपोर्ट' के वैश्विक आंकड़े रोंगटे खड़े करने वाले हैं:सालाना मौतें: साल 2000 से 2019 के बीच दुनिया भर में हर साल औसतन 4 लाख 89 हजार (4.89 लाख) लोग सिर्फ अत्यधिक गर्मी और लू लगने (Heatstroke) के कारण अपनी जान गंवाते हैं।65+ उम्र के लोगों पर खतरा: साल 2000-2004 और 2017-2021 के बीच के डेटा की तुलना करें तो बुजुर्गों (65 साल से अधिक) में गर्मी के कारण मरने की दर में 85% का भयानक इजाफा हुआ है।महाद्वीपों का हाल: दुनिया भर में गर्मी से होने वाली कुल मौतों का 45% हिस्सा अकेले एशिया में और 36% हिस्सा यूरोप में दर्ज किया जाता है। इससे पहले साल 2022 में भी यूरोप में गर्मी ने 61,672 लोगों की जान ली थी।अर्थव्यवस्था को 11 लाख करोड़ का झटका और भीषण जल संकटएलियांज रिसर्च ($Allianz Research$) के आर्थिक मॉडल के आधार पर किए गए कैलकुलेशन के मुताबिक, यह भीषण हीटवेव सिर्फ इंसानी जान ही नहीं ले रही, बल्कि यूरोपीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी तोड़ रही है।जीडीपी (GDP) पर असर: इस साल की गर्मी से यूरोपीय देशों को 11 लाख करोड़ रुपये तक का तात्कालिक आर्थिक नुकसान हो सकता है। वहीं, साल 2030 तक यह आंकड़ा बढ़कर 61 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की आशंका है।जल संकट का खतरा: यूरोपीय पर्यावरण एजेंसी का अनुमान है कि बढ़ती गर्मी और सूखते जलस्रोतों के कारण अगले साल तक यूरोप की करीब 34% आबादी भीषण जल संकट (Water Scarcity) की चपेट में आ जाएगी।यूरोप के इस बदतर हालात से भारत के लिए क्या है सीख?यूरोप की यह मौजूदा स्थिति भारत के लिए एक बहुत बड़ी और गंभीर चेतावनी है। भारत पहले से ही दुनिया के सबसे गर्म और घनी आबादी वाले देशों में से एक है। यूरोप के इस संकट से भारत को निम्नलिखित रणनीतिक सीख लेनी होगी:व्यापक 'हीट एक्शन प्लान' ($Heat Action Plan$): वर्तमान में भारत के केवल कुछ चुनिंदा शहरों (जैसे अहमदाबाद) में ही व्यवस्थित हीट एक्शन प्लान लागू है। अब समय आ गया है कि देश के हर राज्य और जिले में इसे अनिवार्य किया जाए।अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव: शहरों में कंक्रीट के जंगलों के कारण बनने वाले 'हीट आइलैंड' को रोकने के लिए कूल रूफ्स (Cool Roofs) तकनीक और गर्मी को सोखने वाले 'हीट-रेजिलिएंट' मकानों के निर्माण को कानूनी रूप से बढ़ावा देना होगा।इमरजेंसी मेडिकल तैयारी: हर जिले में अत्यधिक गर्मी के महीनों के दौरान आपातकालीन कूलिंग सेंटर, ओआरएस (ORS) काउंटर और अस्पतालों में हीटस्ट्रोक से निपटने के लिए विशेष वार्ड्स की एडवांस व्यवस्था करनी होगी, ताकि समय रहते नागरिकों की जान बचाई जा सके।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 11:18 pm

पीएम मोदी और अल्बनीज की बैठक में चीन के आईसीबीएम मिसाइल परीक्षण और क्षेत्रीय सुरक्षा पर हुई बात

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने गुरुवार को मेलबर्न में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई मुलाकात के दौरान चीन की ओर से हाल ही में दक्षिण प्रशांत क्षेत्र में किए गए इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) के परीक्षण का मुद्दा उठाया

देशबन्धु 9 Jul 2026 11:10 pm

अमेर‍िका का उल्लंघन जारी रहा तो ईरान देगा निर्णायक जवाब : मोसयेब मोतलाघ

ईरान-अमेरिका के बीच एक बार फ‍िर से जारी तनातनी पर ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका की ओर से उल्लंघन जारी रहे, तो इसका मजबूती से जवाब द‍िया जाएगा

देशबन्धु 9 Jul 2026 10:57 pm

चीन-पाक के स्टील्थ फाइटर J-35 का काल बनेगा 'विरूपाक्ष': स्वदेशी AESA रडार से लैस होकर 'सुपर सुखोई' रचेगा नया इतिहास

चीन के नए स्टील्थ फाइटर जेट J-35 के दम पर भारत को आंख दिखाने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान को काउंटर करने के लिए भारतीय वायुसेना (IAF) ने एक बेहद रणनीतिक और बड़ा कदम उठा लिया है। भारतीय वायुसेना की रीढ़ और सबसे ताकतवर लड़ाकू विमानों में शामिल सुखोई (Su-30MKI) अब पहले से कहीं ज्यादा घातक और अचूक बनने जा रहा है।इस महा-अपग्रेड की मुख्य वजह है भारत में ही पूरी तरह स्वदेशी रूप से विकसित किया जा रहा 'विरूपाक्ष' (Virupaksha AESA Radar)। इसे 'सुपर सुखोई' अपग्रेड प्रोग्राम का सबसे महत्वपूर्ण और क्रांतिकारी हिस्सा माना जा रहा है। इस स्वदेशी रडार के सुखोई में फिट होने के बाद, दुश्मन के विमानों को खोजने, उन्हें ट्रैक करने और अत्यंत लंबी दूरी से सटीक निशाना साधने की भारत की क्षमता में कई गुना इजाफा हो जाएगा।क्या है Virupaksha AESA रडार और इसकी तकनीक?विरूपाक्ष एक अत्याधुनिक गैलियम नाइट्राइड (Gallium Nitride - GaN) आधारित एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड आरे (AESA) रडार है।किसने बनाया: इसे रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करने वाले रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की बेंगलुरु स्थित मशहूर लैब LRDE (Electronics and Radar Development Establishment) द्वारा तैयार किया जा रहा है।किसकी जगह लेगा: यह नया स्वदेशी रडार सुखोई में वर्तमान में लगे पुराने रूसी मूल के N011M Bars (पैसिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड आरे) रडार की जगह लेगा।कार्यप्रणाली: इसमें एडवांस डिजिटल इलेक्ट्रॉनिक स्कैनिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिसकी बदौलत यह पुराने रडार के मुकाबले पलक झपकते ही और बेहद सटीक तरीके से मल्टीपल टारगेट्स का पता लगा सकता है।मिनी-AWACS बनेगा सुखोई: 400 KM तक दुश्मन पर नजरन्यूज एजेंसी ANI की रिपोर्ट के अनुसार, विरूपाक्ष रडार में इस्तेमाल की गई GaN-आधारित एडवांस टेक्नोलॉजी और इसकी हाई ट्रांसमिट-रिसीव मॉड्यूल (TRM) कैलकुलेशन क्षमता इसे दुनिया के सर्वश्रेष्ठ रडार प्रणालियों की कतार में खड़ा करती है।स्टील्थ विमानों को पकड़ेगा: इस तकनीक के कारण यह रडार चीन के J-35A जैसे सोफिस्टिकेटेड सेमी-स्टील्थ (रडार से बचने वाले) फाइटर जेट्स को भी काफी लंबी BVR (बियॉन्ड विजुअल रेंज - आंखों की पहुंच से दूर) दूरी पर ही आसानी से डिटेक्ट कर लेगा।विशाल रेंज: यह करीब 300 से 400 किलोमीटर के एक बड़े हवाई दायरे में आने वाले किसी भी दुश्मन फाइटर जेट, क्रूज मिसाइल या ड्रोन को आसानी से पकड़ सकता है।एंटी-जामिंग: रडार की एडवांस इलेक्ट्रॉनिक स्कैनिंग, लंबी रेंज और बेहतरीन एंटी-जैमिंग क्षमताएं (इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में दुश्मन के सिग्नल ब्लॉक करना) अकेले सुखोई फाइटर जेट को एक 'मिनी-AWACS' (हवाई चेतावनी और नियंत्रण प्रणाली) के रूप में स्थापित कर देती हैं।जानिए क्यों खास है गैलियम नाइट्राइड (GaN) तकनीक?Virupaksha रडार में इस्तेमाल होने वाली Gallium Nitride (GaN) तकनीक पुरानी पीढ़ी के Gallium Arsenide (GaAs) सिस्टम से कहीं ज्यादा शक्तिशाली और कुशल मानी जाती है।अधिक पावर, कम हीटिंग: GaN तकनीक की मदद से रडार बहुत अधिक रेडियो एनर्जी (तरंगें) पैदा कर सकता है, लेकिन इसके बावजूद यह सिस्टम बहुत कम गर्म होता है।लंबी परफॉर्मेंस: कम गर्म होने के कारण रडार बिना किसी तकनीकी खराबी या रुकावट के युद्ध के मैदान में बहुत लंबे समय तक लगातार सर्वश्रेष्ठ परफॉर्म कर सकता है। यही वजह है कि अमेरिका और यूरोप की नई पीढ़ी के 5th जनरेशन फाइटर जेट्स में भी अब GaN बेस्ड AESA रडार को ही अपनाया जा रहा है।सुखोई (Su-30MKI) की मौजूदा ताकत पर एक नजरसुखोई भारतीय वायुसेना का सबसे भरोसेमंद और भारी-भरकम मल्टी-रोल लड़ाकू विमान है:क्रू और इंजन: यह दो सीटों वाला (ट्विन-सीटर) फाइटर जेट है, जिसमें दो शक्तिशाली AL-31FP इंजन लगे हैं। ये इंजन Thrust Vectoring तकनीक से लैस हैं, जो सुखोई को हवा में असंभव कलाबाजियां खाने की ताकत देती है।रफ्तार और रेंज: यह अधिकतम 2,120 किमी/घंटा (Mach 2) की रफ्तार से उड़ सकता है। एक बार में फुल फ्यूल के साथ इसकी रेंज करीब 3,000 किमी है, जिसे हवा में रीफ्यूलिंग (Mid-air Refueling) के जरिए कई गुना बढ़ाया जा सकता है।हथियार ढोने की क्षमता: सुखोई अपने साथ 8,000 किलोग्राम (8 टन) तक के परमाणु हथियार, गाइडेड बम और घातक मिसाइलें ले जा सकता है, जिसमें ब्रह्मोस (BrahMos) सुपरसोनिक मिसाइल भी शामिल है।विरूपाक्ष रडार से 'सुपर सुखोई' को क्या-क्या फायदे मिलेंगे?लंबी दूरी से प्रहार: विरूपाक्ष रडार लगने के बाद सुखोई दुश्मन के फाइटर जेट और आक्रामक मिसाइलों को उनके हमले की रेंज से बहुत पहले ही देख लेगा।मल्टी-टारगेटिंग क्षमता: विरुपाक्ष के जरिए पायलट एक साथ हवा में तैर रहे कई अलग-अलग टारगेट्स को एक साथ ट्रैक (Lock) करके उन पर एक साथ मिसाइलें दाग सकेगा।इलेक्ट्रॉनिक युद्ध में बादशाहत: दुश्मन देशों की ओर से की जाने वाली तीव्र इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के बीच भी यह रडार बिना विचलित हुए शत-प्रतिशत सटीक काम करेगा।स्वदेशी मिसाइलों का सटीक उपयोग: भारत की अपनी लंबी दूरी की हवा-से-हवा में मार करने वाली 'अस्त्र' (Astra Series) मिसाइलों के साथ विरूपाक्ष रडार का कॉम्बिनेशन बेहद घातक और अचूक साबित होगा।'सुपर सुखोई' मेगा अपग्रेड प्रोग्राम और ड्रैगन-पाक को झटकायह अपग्रेड भारतीय वायुसेना के अरबों डॉलर के 'सुपर सुखोई' प्रोग्राम का मुख्य केंद्रबिंदु है।चरणबद्ध अपग्रेड: शुरुआती फेज में वायुसेना के कुछ चुनिंदा स्क्वाड्रनों को अपग्रेड किया जाएगा। हालांकि, भविष्य के मुख्य प्लान के तहत वायुसेना अपने बेड़े में शामिल 200 से अधिक Su-30MKI विमानों को इस स्वदेशी रडार, नए इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (EW) सूट और एडवांस कंप्यूटर एवियोनिक्स से लैस करेगी।रणनीतिक बढ़त: चीन ने हाल ही में भारत के खिलाफ 'टू-फ्रंट वॉर' (दोतरफा युद्ध) की रणनीति के तहत पाकिस्तान को अपना J-35 फाइटर जेट बेचने का सौदा किया है। कंगाल पाकिस्तान ने भारत के डर से करोड़ों डॉलर का नया कर्ज लेकर इस जेट को खरीदा है। ऐसे में 'विरूपाक्ष' रडार से लैस हमारा 'सुपर सुखोई' चीन और पाकिस्तान दोनों की संयुक्त हवाई चुनौती को पूरी तरह ध्वस्त कर भारत को आसमान में एकतरफा रणनीतिक बढ़त दिलाएगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 10:48 pm

बंदर अब्बास में धमाके: ईरान-अमेरिका टकराव चरम पर!

ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट सिटी के तटीय इलाकों में गुरुवार दोपहर कई धमाकों की आवाजें सुनी गईं

देशबन्धु 9 Jul 2026 10:47 pm

आज का एक्सप्लेनर:तो इस वजह से फिर भिड़े ईरान-अमेरिका; क्या शांति समझौता सिर्फ दिखावा था, पर्दे के पीछे कुछ और खेल चल रहा

6 जुलाई को ईरान ने होर्मुज से गुजर रहे 3 जहाजों पर हमला कर दिया। अगले ही दिन अमेरिका ने ईरान में 80 से ज्यादा ठिकानों पर बमबारी कर दी। ट्रम्प बोले- मेरे हिसाब से अब शांति समझौता खत्म हो गया है। ईरान ने भी पलटवार किया है। समझौते के बावजूद ईरान ने जहाजों पर हमला क्यों किया और क्या ये दांव महंगा पड़ेगा; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: ईरान और अमेरिका के शांति समझौते में क्या तय हुआ था?जवाबः करीब 4 महीने की जंग के बाद 17 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति पजेशकियान ने 14 पॉइंट्स का MoU साइन किया। इस पर अगले 60 दिनों में फाइनल डील होनी थी। समझौते में 3 पॉइंट्स सबसे अहम थे- 1. होर्मुज स्ट्रेट से निर्बाध आवाजाहीः ईरान बिना कोई शुल्क लिए 60 दिनों तक होर्मुज स्ट्रेट से व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही का इंतजाम करेगा। ईरान और ओमान साथ मिलकर इस मुद्दे पर काम करेंगे। साथ ही 30 दिनों के अंदर स्ट्रेट के मुख्य रास्ते में बिछी माइन्स और दूसरी तकनीकी रुकावटों को हटाया जाएगा। 2. ईरान को 300 बिलियन डॉलर का आर्थिक पैकेज: अमेरिका खाड़ी देशों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निमाण के लिए 300 बिलियन डॉलर, यानी करीब 28 लाख करोड़ का फंड देगा। अगले 60 दिनों की बातचीत में इसका फ्रेमवर्क तय किया जाएगा। 3. परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत: ईरान नए परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। संवर्धित यूरेनियम का क्या करना है, इस पर दोनों देश अगले 60 दिनों में बातचीत करके सहमति पर पहुंचेंगे। सवाल-2: समझौते के बावजूद ईरान ने होर्मुज से गुजर रहे तेल टैंकरों पर हमला क्यों किया?जवाबः ईरान की बेसब्री के पीछे एक्सपर्ट्स 3 प्रमुख वजह मानते हैं… 1. ईरान को लगा होर्मुज उसके हाथ से निकल रहा है 2. लेबनान में ईरान का प्रभाव कम होने की आशंका 3. ईरान को फंड न मिलने की बेचैनी, रकम भी घट रही सवाल-3: क्या ईरान ने इस बार जरूरत से ज्यादा जोखिम वाला दांव खेल दिया है?जवाबः 6 जुलाई को होर्मुज से गुजर रहे जहाजों पर ईरान का हमला आक्रामक दांव माना जा रहा है… ट्रम्प ने ईरान को धमकी दी है कि उनके एक हमले के बदले अमेरिका 20 गुना ज्यादा ताकत से हमला करेगा। उन्होंने ईरान की लीडरशिप को नीच और पागल बताया। यह भी कहा कि उनकी नजर में सीजफायर खत्म हो चुका है। अमेरिका ने लगातार 2 दिन तक ईरान पर करीब 170 हमले किए। 3 लोगों की मौत हुई। सवाल-4: जहाजों पर ईरान के हमले से अमेरिका इतना आक्रामक क्यों हो गया?जवाबः होर्मुज स्ट्रेट एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है, यानी किसी एक देश का इस पर कंट्रोल नहीं है। लेकिन ईरान इस रास्ते पर अपना नियंत्रण बनाना चाहता है। अमेरिका इसके खिलाफ है। अमेरिका ने समुद्र में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की जिम्मेदारी ली है। इसके लिए 1979 में फ्रीडम ऑफ नेविगेशन प्रोग्राम की भी शुरुआत की, जिसके तहत क्रिटिकल चोकपॉइंट्स पर अमेरिका अपने नौसैनिक जहाज भेजकर सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करता है। होर्मुज स्ट्रेट के अलावा दुनिया में तेल व्यापार के रास्तों पर 7 और चोकपॉइंट्स हैं। यहां से दुनिया के करीब 52% कच्चे तेल का व्यापार होता है। इनमें पनामा कैनाल, स्वेज कैनाल, मलक्का स्ट्रेट जैसे पॉइंट शामिल हैं। अगर ईरान होर्मुज में फीस वसूलने लगे, तो बाकी चोकपॉइंट्स पर भी क्षेत्रीय ताकतें ऐसा ही करने लगेंगी। इससे पूरी दुनिया के कारोबार पर असर पड़ेगा। अप्रैल 2026 में इंडोनेशिया के वित्त मंत्री पुरबाया युधि सदेवा मलक्का स्ट्रेट से गुजरने वाले जहजों से टोल लेने का सुझाव भी दे चुके हैं। सवाल-5: अब शांति समझौते का क्या होगा, क्या ये सिर्फ दिखावा था?जवाबः अमेरिका-ईरान के बीच हुआ शांति समझौता कभी पूरी तरह से शांति के लिए था ही नहीं। सीनियर जर्नलिस्ट और विदेश मामलों के जानकार मार्क चैंपियन के मुताबिक, इस समझौते की भाषा जानबूझकर अस्पष्ट रखी गई, ताकि दोनों ही पक्षों को अपने मकसद पूरे करने के लिए दूसरे तरीकों की गुंजाइश बनी रहे। शांति समझौते में साफ-साफ शर्तें होती हैं। जैसे- कौन कब क्या करेगा, कोई उल्लंघन कैसे तय होगा, निगरानी कौन करेगा। अमेरिका-ईरान समझौते में में साफ नहीं था कि हॉर्मुज में 'मुक्त आवाजाही' का मतलब क्या है? क्या ईरान वहां टोल वसूल सकता है? गश्त कर सकता है? किन शर्तों पर जंग पूरी तरह खत्म होगी? तेल प्रतिबंधों में छूट कितनी पक्की है? अमेरिका ने ईरानी तेल पर 60 दिन के लिए प्रतिबंध हटाए थे, लेकिन महज 20 दिन बाद ही अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ये अस्थायी छूट वापस ले ली और अगस्त तक तेल बिक्री की इजाजत देने वाला लाइसेंस रद्द कर दिया। CSIS के जियोस्ट्रैटजी एक्सपर्ट जॉन बी. अल्टरमैन मानते हैं कि दोनों पक्षों ने जंग की मूल जड़- परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमता, प्रतिबंध, होर्मुज पर नियंत्रण वगैहर को सुलझाए बिना सिर्फ हथियार डालने का समय तय किया, इसीलिए यह इतनी जल्दी टूट गया। सवाल-6: क्या वाकई जंग दोबारा शुरू हो चुकी है, आगे क्या होगा?जवाबः ईरान ने होर्मुज से गुजर रहे 3 जहाजों पर हमला किया। अगली रात अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने ईरान में 80 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया। IRGC ने भी पलटवार करते हुए बहरीन और कुवैत में 85 अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइल दागीं। कुल मिलाकर आंख के बदले आंख का खेल चल रहा है। हालांकि अभी ये लिमिटेड स्ट्राइक हैं, पूरी तरह जंग में नहीं बदलीं। अब आगे 2 सिनैरियो बन सकते हैं… 1. लिमिटेड स्ट्राइक बढ़ते-बढ़ते पूर्ण यूद्ध में बदल जाएं 2. हमले रुकें और समझौते पर दोबारा बात शुरू हो हालांकि ईरानी जर्नलिस्ट सैयद मुस्तफा खोशचेश्म मानते हैं कि बातचीत चलने के बावजूद ईरान की तरफ से दुश्मनी और अविश्वास कभी खत्म नहीं हुआ है, यानी बातचीत की मेज पर बैठना अपने आप में भरोसे की गारंटी नहीं। ----------- ये खबर भी पढ़िए… भारत को तेल बेचने वाला रूस, अब तेल खरीदने पर क्यों मजबूर; क्या यूक्रेन ने सभी रिफाइनरी तबाह कीं दुनिया भर के देशों को कच्चा तेल बेचने वाला रूस अब दूसरे देशों से पेट्रोल मंगवाने को मजबूर है। भारत से भी पेट्रोल के कई टैंकर भेजे जाने की खबरें हैं। रूसी पेट्रोल पंपों पर पहली बार लंबी-लंबी कतारें लगी हैं। पेट्रोल खरीदने पर पाबंदियां लागू हैं। इसकी वजह है- यूक्रेन के हमले। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 9 Jul 2026 6:04 pm

महंगाई और AI के बीच घिरी अमेरिकी अर्थव्यवस्था, IMF की रिपोर्ट में भारत के लिए आई राहत की खबर

अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ताजा 'मिनट्स' (बैठक का ब्योरा) ने ग्लोबल मार्केट में हलचल मचा दी है। फेड ने अपनी हालिया चर्चाओं में दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के सामने खड़े तीन बड़े खतरों का जिक्र किया है, जो आने वाले समय में वैश्विक बाजार की दिशा तय करेंगे। फेड की रिपोर्ट में महंगाई (Inflation), आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव और मिडिल ईस्ट (Middle East) में जारी भू-राजनीतिक तनाव को सबसे बड़ी चिंता बताया गया है। इन चिंताओं के कारण ब्याज दरों में कटौती को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है, जिसका सीधा असर शेयर बाजार और निवेशकों के सेंटीमेंट पर पड़ रहा है।फेड की तीन बड़ी चिंताएं: क्या है अर्थव्यवस्था का हाल?फेडरल रिजर्व के अधिकारियों ने अपनी बैठक में साफ किया है कि महंगाई अभी भी उनके लक्ष्य से ऊपर है, जिससे नीतिगत दरों में राहत देने में देरी हो सकती है। दूसरी ओर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेजी को लेकर फेड ने दोधारी तलवार वाली स्थिति का जिक्र किया है—जहां एक तरफ यह उत्पादकता बढ़ा रही है, वहीं दूसरी तरफ बाजार में अस्थिरता और श्रम बाजार में बदलाव का डर भी बना हुआ है। इसके अलावा, मिडिल ईस्ट के तनाव ने ग्लोबल सप्लाई चेन और ऊर्जा कीमतों को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिससे आने वाले महीनों में महंगाई पर दबाव और बढ़ने की आशंका है। इन तीनों मोर्चों पर फेड की सतर्कता यह संकेत दे रही है कि अमेरिका में ब्याज दरों पर फैसला अभी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।IMF ने भारत को लेकर दी बड़ी राहत की खबरएक तरफ जहां दुनिया के प्रमुख देश अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं, वहीं अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भारत के लिए सकारात्मक संकेत दिए हैं। आईएमएफ ने भारत की विकास दर को लेकर भरोसा जताया है और कहा है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है। आईएमएफ के अनुसार, भारत का घरेलू उपभोग और नीतिगत सुधार इसे दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में बनाए रखने में मदद कर रहे हैं। फेड की चिंताओं के बीच आईएमएफ का यह बयान विदेशी निवेशकों के लिए राहत की बात है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक बाजार में अस्थिरता बनी भी रहती है, तो भारत के फंडामेंटल्स इसे बड़े झटकों से बचाने में सक्षम हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 1:53 pm

पश्चिम एशिया में गहराता संकट: भारतीयों की सुरक्षा और तेल सप्लाई को लेकर भारत की क्या है रणनीति

पश्चिम एशिया में जारी मौजूदा तनाव के बीच भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक चुनौतियां बढ़ गई हैं। यह क्षेत्र न केवल भारत की ऊर्जा जरूरतों का केंद्र है, बल्कि लाखों भारतीयों का कार्यस्थल भी है। ऐसे में भारत सरकार एक संतुलित और सतर्क कूटनीतिक रुख अपना रही है। इस संकट के बीच भारत की सबसे पहली प्राथमिकता अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही, तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही और अपनी ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को निर्बाध बनाए रखना भी भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है। सरकार न केवल अंतरराष्ट्रीय मंचों पर शांति की अपील कर रही है, बल्कि अपनी समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नौसेना की तैनाती पर भी पूरा जोर दे रही है।ऊर्जा सुरक्षा और तेल टैंकरों का संकटभारत अपनी कच्चा तेल (Crude Oil) की जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आयात करता है। लाल सागर और ओमान की खाड़ी जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर बढ़ते तनाव का सीधा असर तेल टैंकरों की आवाजाही पर पड़ रहा है। यदि इन मार्गों पर जोखिम बढ़ता है, तो समुद्री बीमा प्रीमियम में वृद्धि होगी और अंततः इसका असर भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर पड़ेगा। भारत सरकार इस स्थिति पर बारीकी से नजर रख रही है और वैकल्पिक समुद्री मार्गों और आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए तेल उत्पादक देशों के साथ लगातार संपर्क में है। भारत की कोशिश यह है कि किसी भी प्रकार की वैश्विक अस्थिरता का असर घरेलू बाजार की कीमतों पर न पड़े।लाखों भारतीयों की सुरक्षा और कूटनीतिक सक्रियतापश्चिम एशिया में लाखों भारतीय कामगार रहते हैं, जो वहां की अर्थव्यवस्था और भारत की अर्थव्यवस्था (रेमिटेंस के जरिए) में अहम योगदान देते हैं। उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना भारत की विदेश नीति की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। संकट की आहट मिलते ही भारत सरकार ने वहां मौजूद अपने दूतावासों को अलर्ट मोड पर रखा है और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षित निकास योजना (Evacuation Plan) तैयार रखी है। पीएम मोदी और विदेश मंत्रालय का ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि तनाव को कूटनीति और संवाद के माध्यम से कम किया जाए। भारत का अब तक का रुख स्पष्ट रहा है कि पश्चिम एशिया में शांति भारत के आर्थिक हितों और सामरिक सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 1:47 pm

कोई रिश्ता नहीं रखना, सब बंद कर दो! नाटो समिट में अपने ही साथी देश पर क्यों बुरी तरह भड़क गए डोनाल्ड ट्रंप

तुर्की में चल रहे नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन से एक बहुत बड़ी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल मचाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ही पुराने सहयोगी देश स्पेन के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। ट्रंप ने सम्मेलन के दौरान बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए अपने अधिकारियों को आदेश दिया है कि अमेरिका को स्पेन के साथ अपने सभी व्यापारिक और व्यावसायिक संबंधों को तत्काल प्रभाव से पूरी तरह खत्म कर देना चाहिए। ट्रंप का दावा है कि इस कड़े फैसले के बाद स्पेन खुद-ब-खुद भागता हुआ और गिड़गिड़ाता हुआ अमेरिका के पास वापस आएगा।स्पेन एक बेकार की वजह और घटिया पार्टनर: नाटो चीफ के सामने ही सुना दी खरी-खरीअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह कड़ा रुख नाटो के नए महासचिव मार्क रुट्टे (Mark Rutte) की मौजूदगी में अपनाया। ट्रंप ने खुले मंच से स्पेन को एक बेहद खराब साझेदार और 'बेकार की वजह' (Useless Cause) करार दिया। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब स्पेन के साथ किसी भी प्रकार का बिजनेस नहीं करना चाहता।अपने अधिकारियों को कड़ा निर्देश देते हुए ट्रंप ने कहा, इस आदेश को तुरंत लागू करें। उनसे बात तक मत करो। वे हमारे दम पर बहुत पैसा कमाते हैं, अब देखते हैं कि वे कैसे कमाते हैं। आप देखते रहना, वे खुद भागते हुए हमारे पास वापस आएंगे और कहेंगे— प्लीज सर, हमें आपके साथ व्यापार करना है। दरअसल, ट्रंप लंबे समय से इस बात को लेकर नाराज हैं कि अमेरिका नाटो के सदस्य देशों की सुरक्षा पर अपनी जेब से जरूरत से ज्यादा खर्च कर रहा है, जबकि बाकी देश अपना रक्षा बजट बढ़ाने में आनाकानी करते हैं।रक्षा बजट पर 'विशेष छूट' लेना स्पेन को पड़ा भारी, यही है गुस्से की असली वजहडोनाल्ड ट्रंप के इस भयंकर गुस्से के पीछे एक बहुत बड़ा रणनीतिक कारण है। दरअसल, स्पेन नाटो का एकमात्र ऐसा सदस्य देश है जिसने साल 2035 तक अपने रक्षा बजट को जीडीपी (GDP) के 5 प्रतिशत तक ले जाने के नाटो के नए कड़े लक्ष्य को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया है। स्पेन ने इसके उलट एक विशेष छूट (Waiver) हासिल की है, जिसके तहत वह अपने सैन्य खर्च को जीडीपी के केवल 2.1 प्रतिशत तक ही सीमित रखेगा।स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के आंकड़ों के मुताबिक, स्पेन ने भले ही अपना सैन्य खर्च 2021 के 1.4% से बढ़ाकर 2025 में 2.1% कर लिया हो, लेकिन इसके बावजूद वह पूरी नाटो फौजी टुकड़ी में अपनी रक्षा पर सबसे कम खर्च करने वाले देशों की सूची में शामिल है। ट्रंप को स्पेन का यह रवैया बिल्कुल रास नहीं आ रहा है।ईरान युद्ध में अमेरिका को नहीं दिया भाव, हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने से भी रोकास्पेन और अमेरिका के बीच चल रही इस तल्खी की स्क्रिप्ट कुछ समय पहले ही लिख दी गई थी। जब हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य संघर्ष चरम पर था, तब स्पेन ने एक बेहद चौंकाने वाला कदम उठाते हुए अमेरिकी सेना को अपने सैन्य अड्डों (Military Bases) का उपयोग करने से पूरी तरह रोक दिया था। इतना ही नहीं, स्पेन ने ईरान पर हमला करने जा रहे अमेरिकी लड़ाकू विमानों को अपने हवाई क्षेत्र (Airspace) से गुजरने की इजाजत भी नहीं दी थी। इसके साथ ही स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज ने ईरान पर अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हमलों की अंतरराष्ट्रीय मंच पर सार्वजनिक आलोचना करते हुए इसे एकतरफा सैन्य कार्रवाई बताया था, जिसे ट्रंप ने अपनी व्यक्तिगत खुन्नस बना लिया है।स्पेन का पलटवार: हम यूरोपीय संघ का हिस्सा हैं, एकतरफा प्रतिबंध लगाना नामुमकिनडोनाल्ड ट्रंप के इस तीखे और अपमानजनक बयान पर स्पेन के प्रधानमंत्री पेड्रो सांचेज के कार्यालय ने भी बेहद सधा हुआ और करारा पलटवार किया है। स्पेन सरकार ने कहा कि वे ट्रंप के बयानों को हमेशा की तरह एक सामान्य राजनीतिक बयानबाजी मान रहे हैं और उनका अमेरिका के साथ संबंध तोड़ने का कोई इरादा नहीं है।स्पेन ने वाशिंगटन को याद दिलाया कि व्यापार के मामले में अमेरिका खुद स्पेन के साथ 'ट्रेड सरप्लस' (फायदे की स्थिति) में है। इसके अलावा, स्पेन ने स्पष्ट कानूनी पेच फंसाते हुए कहा कि चूंकि वे यूरोपीय संघ (EU) के सीमा शुल्क और व्यापार संघ के आधिकारिक सदस्य हैं, इसलिए अमेरिका अकेले स्पेन को निशाना बनाकर कोई भी एकतरफा व्यापारिक प्रतिबंध (Trade Sanctions) लागू नहीं कर सकता। इस पूरे विवाद के बीच नाटो प्रमुख मार्क रुट्टे ने भी ट्रंप के सामने स्पेन का बचाव करते हुए कहा कि स्पेन ने पिछले साल अपना सैन्य खर्च बढ़ाकर 2 फीसदी की सीमा को पार किया है, जो कि एक सराहनीय कदम है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 1:47 pm

ऑस्ट्रेलियाई कंपनियों के लिए भारत में अवसर: PM मोदी ने दिया निवेश का न्योता, CECA समझौते को जल्द पूरा करने पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर भारत में निवेश की संभावनाओं को नई ऊंचाइयां देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलिया की प्रमुख कंपनियों के लीडर्स को भारत में आने और विस्तार करने का खुला निमंत्रण दिया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाना है। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (CECA) को जल्द से जल्द पूरा करने पर जोर दिया है, जो भविष्य में दोनों देशों के बीच व्यापार की बाधाओं को कम करने और द्विपक्षीय निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक ऐतिहासिक पड़ाव साबित होगा। इस न्योते को भारत के 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान के साथ जोड़कर देखा जा रहा है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों के लिए एक आकर्षक मंच तैयार हो रहा है।CECA समझौता: आर्थिक विकास के नए रास्तेCECA यानी कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक कोऑपरेशन एग्रीमेंट को दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों की रीढ़ माना जा रहा है। पीएम मोदी ने बातचीत के दौरान इस बात पर स्पष्ट रूप से प्रकाश डाला कि यह समझौता केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह दोनों देशों के उद्योगों के लिए अवसरों का एक नया द्वार खोलेगा। इस एग्रीमेंट के पूरा होने से भारत में मैन्युफैक्चरिंग, टेक्नोलॉजी और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में ऑस्ट्रेलियाई निवेश को गति मिलेगी। साथ ही, भारतीय कंपनियों को भी ऑस्ट्रेलिया के बाजार तक सीधी और आसान पहुंच प्राप्त होगी। व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री की यह सक्रियता भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का एक प्रमुख केंद्र बनाने की रणनीति का अहम हिस्सा है।भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी का बढ़ता दायराऑस्ट्रेलियाई कंपनियों को भारत आमंत्रित करना और उनके साथ उच्च-स्तरीय संवाद स्थापित करना, भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने का संकेत है। पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत का बढ़ता स्टार्टअप इकोसिस्टम और बुनियादी ढांचे में हो रहा सुधार ऑस्ट्रेलियाई निवेशकों के लिए बेहतरीन मौके पेश कर रहा है। तकनीक और ऊर्जा के क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया की विशेषज्ञता भारत के औद्योगिक विकास में मील का पत्थर साबित हो सकती है। इस दिशा में चल रहे प्रयासों से आने वाले समय में रोजगार के नए अवसर पैदा होने और दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं में तालमेल बढ़ने की पूरी संभावना है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 1:45 pm

ईरान का खौफ या सीक्रेट सर्विस का अलर्ट? ट्रंप ने बीच रास्ते में बदला विमान, कतर का आलीशान जेट छोड़ पुराने 'एयरफोर्स वन' में बैठे

अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सुरक्षा को लेकर एक बेहद सनसनीखेज और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। तुर्की के अंकारा में आयोजित नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन से वाशिंगटन वापस लौटते समय राष्ट्रपति ट्रंप ने बीच रास्ते में ही अपना विमान बदल दिया। ट्रंप कतर द्वारा हाल ही में तोहफे में दिए गए अत्याधुनिक बोइंग 747-8 वीआईपी जेट को छोड़कर अचानक अपने पुराने और भरोसेमंद 'एयरफोर्स वन' विमान में सवार हो गए। ब्रिटेन के आरएएफ मिल्डेनहॉल (RAF Mildenhall) मिलिट्री बेस पर हुए इस अचानक सुरक्षा बदलाव ने वैश्विक स्तर पर कई तरह की चर्चाओं और कयासों को जन्म दे दिया है।सीक्रेट सर्विस की खुफिया सलाह और वाइट हाउस की बड़ी सफाई'द न्यूयॉर्क टाइम्स' की एक खोजी रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच मिसाइल हमलों के बाद पैदा हुए गंभीर हालातों को देखते हुए यूएस सीक्रेट सर्विस (US Secret Service) ने राष्ट्रपति ट्रंप को तुरंत विमान बदलने की गोपनीय सलाह दी थी। सुरक्षा अधिकारियों का मानना है कि यह कदम किसी विशिष्ट खुफिया इनपुट के बजाय अत्यधिक सावधानी और एहतियात के तौर पर उठाया गया था। दरअसल, कतर की ओर से मिले नए बोइंग विमान में अभी तक वे सभी मिलिट्री-ग्रेड एडवांस डिफेंस फीचर्स, मिसाइल इवेडिंग सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-मेजर पूरी तरह इंस्टॉल नहीं हो पाए हैं, जो दशकों से राष्ट्रपति की सुरक्षा कर रहे 'एयरफोर्स वन' के मूल बेड़े में मौजूद रहते हैं।हालांकि, वाइट हाउस ने उन खबरों और दावों को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें नए विमान को असुरक्षित बताया जा रहा था। वाइट हाउस के संचार निदेशक स्टीवन चेउंग ने आधिकारिक बयान जारी कर स्पष्ट किया कि कतर से मिला नया जेट भी उच्च-स्तरीय सुरक्षा प्रोटोकॉल से पूरी तरह लैस है। उन्होंने सुरक्षा रणनीति का खुलासा करते हुए कहा कि प्रशासन राष्ट्रपति की अभेद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'दुश्मन का ध्यान भटकाने और उन्हें गुमराह करने' (Decoy and Diversion) समेत अपने हर उपलब्ध खुफिया टूल का इस्तेमाल करता है।ट्रंप बोले- 'मैं ईरान की हिट लिस्ट में नंबर वन हूं, पुरानी यादों के लिए बदला प्लेन'बीच रास्ते में विमान बदलने और सुरक्षा चिंताओं की बात को खुद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया के सामने अपने ही अंदाज में खारिज किया। ब्रिटेन से वाशिंगटन के लिए उड़ान भरने के बाद विमान में मौजूद पत्रकारों से बातचीत करते हुए ट्रंप ने बेबाकी से कहा, मुझ पर हमेशा से ही जान का खतरा मंडराता रहता है। मैं उनकी (ईरान की) हिट लिस्ट में नंबर वन पर हूं।ट्रंप ने आगे खुलासा किया कि ब्रिटेन के सैन्य अड्डे पर रुकने का मुख्य उद्देश्य वहां तैनात अमेरिकी फौजियों को कतर से मिला यह बिल्कुल नया और शानदार विमान दिखाना था। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सैनिक इसे देखकर बेहद उत्साहित थे और उन्होंने वहां तस्वीरें भी खिंचवाईं। वहीं, पुराने 'एयरफोर्स वन' में दोबारा शिफ्ट होने के पीछे की वजह बताते हुए ट्रंप ने मजाकिया लहजे में कहा कि उन्होंने केवल अपनी पुरानी यादों को ताजा करने के लिए इस विमान से सफर करने का फैसला किया।खिड़कियों के पर्दे रखने पड़े बंद; स्लीजबैग्स की वजह से सख्त पाबंदीइस बेहद संवेदनशील यात्रा के दौरान पुरानी एयरफोर्स वन में सफर कर रहे व्हाइट हाउस के प्रेस पूल और पत्रकारों को फ्लाइट क्रू द्वारा खिड़कियों के ब्लाइंड्स (पर्दे) पूरी तरह से बंद रखने का बेहद सख्त निर्देश दिया गया था। पत्रकारों को बाहर देखने या किसी भी तरह की लोकेशन की रिकॉर्डिंग करने की मनाही थी। ट्रंप ने बाद में स्पष्ट किया कि यह पाबंदी केवल सुरक्षा कारणों से सह-यात्रियों पर लागू थी, उनके अपने निजी केबिन पर नहीं। उन्होंने अमेरिका के दुश्मनों और ईरान की ओर सीधा इशारा करते हुए तीखे शब्दों में कहा कि शायद बाहर सक्रिय कुछ स्लीजबैग्स (संदिग्ध तत्वों) की वजह से सीक्रेट सर्विस को इतनी सख्त पाबंदी लगानी पड़ी है।अमेरिका और ईरान के बीच अचानक क्यों भड़की युद्ध की चिंगारी?राष्ट्रपति के विमान बदलने का यह पूरा हाई-प्रोफाइल घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच सीधी सैन्य भिड़ंत शुरू हो चुकी है। अमेरिका ने तेहरान पर अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Strait of Hormuz) में कमर्शियल जहाजों और तेल टैंकरों पर हमला करने का गंभीर आरोप लगाते हुए ईरानी ठिकानों पर लगातार भारी हवाई हमले और बमबारी की है।इस अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान ने भी बहरीन और कुवैत में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर कई बैलिस्टिक मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन दागे हैं। खाड़ी देशों में हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि बहरीन, कुवैत और कतर में अमेरिकी मिलिट्री बेस के ऊपर लगातार मिसाइल हमले के चेतावनी सायरन गूंज रहे हैं। इसी बीच कुवैत की सेना ने आधिकारिक दावा किया है कि उसने अपनी सीमा की तरफ आ रही कई ईरानी मिसाइलों और ड्रोन्स को पैट्रियट डिफेंस सिस्टम के जरिए बीच हवा में ही मार गिराया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 1:44 pm

ईरान पर हमले के बाद ट्रंप का बड़ा बयान, बोले- भरोसा नहीं कि तेहरान डील मानेगा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के नए जवाबी हमलों के बाद ईरान बातचीत करना चाहता है

देशबन्धु 9 Jul 2026 10:17 am

ऑस्ट्रेलिया में पीएम मोदी को मिला 'गार्ड ऑफ ऑनर', गूंजा जन गण मन...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मेलबर्न में औपचारिक स्वागत हुआ। ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर पीएम मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित भी किया गया।

देशबन्धु 9 Jul 2026 10:07 am

ट्रंप की चेतावनी के बाद हमला, होर्मुज बंद करने की धमकी पर भड़का अमेरिका

अमेरिकी सेना ने लगातार दूसरे दिन ईरान पर हमले किए हैं। इन हमलों का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता को खतरे में डालने की ईरान की क्षमता को कमजोर करना है।

देशबन्धु 9 Jul 2026 9:59 am

सुपरपॉवर की 'कमजोरी': अमेरिकी युद्धपोतों पर लगातार क्यों लग रही है आग? चीनी मैगजीन के सनसनीखेज खुलासे से दुनिया हैरान

युद्धपोत किसी भी देश की समुद्री सीमा की रक्षा करने वाले अभेद्य किले होते हैं, जिनका काम दुश्मनों की पनडुब्बियों को खोजना, मिसाइलें दागना और तटीय सुरक्षा अभेद्य बनाना होता है। लेकिन सोचिए, अगर दुनिया की सबसे ताकतवर सेना के सबसे आधुनिक युद्धपोत ही रहस्यमयी तरीके से आग और तकनीकी खराबियों का शिकार होने लगें, तो क्या होगा? चीन की मशहूर मिलिट्री मैगजीन ‘नेवल एंड मर्चेंट शिप्स’ ने अमेरिकी नौसेना (US Navy) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया है, जिसने पेंटागन की रातों की नींद उड़ा दी है।अमेरिकी जंगी जहाजों पर हादसों की बाढ़चीनी मिलिट्री रिपोर्ट के अनुसार, हाल के महीनों में अमेरिका के सबसे एडवांस और घातक जंगी जहाजों पर आग लगने, अचानक बिजली गुल होने (ब्लैकआउट) और प्रोपल्शन (आगे बढ़ाने वाले सिस्टम) फेल होने की कई बड़ी घटनाएं दर्ज की गई हैं। इस लिस्ट में दुनिया का सबसे बड़ा न्यूक्लियर एयरक्राफ्ट कैरियर USS गेराल्ड आर. फोर्ड, सबसे आधुनिक स्टील्थ डिस्ट्रॉयर USS ज़ुमवाल्ट, निमित्ज़-क्लास कैरियर USS ड्वाइट डी. आइजनहावर और अर्ले बर्क-क्लास डिस्ट्रॉयर USS हिगिंस शामिल हैं।नाविक पड़ रहे बीमार, लॉन्ड्री से लेकर शिपयार्ड तक लगी आगहादसों की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मार्च में USS फोर्ड के लॉन्ड्री रूम में भीषण आग लग गई। अप्रैल में USS आइजनहावर पर मेंटेनेंस के दौरान और USS ज़ुमवाल्ट पर शिपयार्ड में अपग्रेडेशन के वक्त आग भड़क उठी। इतना ही नहीं, ओहायो-क्लास की परमाणु ऊर्जा से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल सबमरीन USS नेब्रास्का के जनरेटर में खराबी आ गई, जिससे जहरीले डीजल के धुएं के संपर्क में आने से 64 अमेरिकी नाविक एक साथ बीमार पड़ गए।आखिर अमेरिकी युद्धपोतों में क्यों लग रही है आग? जानें 5 मुख्य वजहेंचीनी रक्षा विशेषज्ञों ने अमेरिकी नौसेना की इस दुर्दशा के पीछे कई गंभीर और ढांचागत (Structural) कारणों का विश्लेषण किया है:लगातार ऑपरेशन का भारी दबाव: अमेरिकी युद्धपोत दुनिया के लगभग हर रणनीतिक समुद्री क्षेत्र (जैसे ताइवान स्ट्रेट, रेड सी और हिंद महासागर) में चौबीसों घंटे तैनात रहते हैं। लंबे समय तक लगातार समुद्र में रहने से इनके भारी-भरकम इंजन और इलेक्ट्रिकल सिस्टम पर क्षमता से अधिक लोड पड़ रहा है।रखरखाव और मेंटेनेंस में भारी देरी: अमेरिकी नौसेना इस समय शिपयार्ड की सीमित क्षमता और मेंटेनेंस बैकलॉग से बुरी तरह जूझ रही है। कई युद्धपोत समय पर मरम्मत के लिए शिपयार्ड नहीं पहुंच पाते, जिससे छोटी खराबियां बाद में बड़ी आग का रूप ले लेती हैं।हद से ज्यादा हाई-टेक और डिजिटल सिस्टम: आधुनिक अमेरिकी जहाज अत्यधिक डिजिटल और ऑटोमेटेड हैं। इनमें हाई-वोल्टेज इलेक्ट्रिकल ग्रिड, रडार और सुपरकंप्यूटर नेटवर्क लगे हैं। जटिल इलेक्ट्रॉनिक्स के कारण एक छोटा सा शॉर्ट सर्किट या इलेक्ट्रिकल फॉल्ट पूरे जहाज को पंगु बना देता है।शिपयार्ड में कुशल कारीगरों और पार्ट्स की कमी: एडवांस्ड युद्धपोतों की मरम्मत के लिए बेहद अनुभवी और विशेषज्ञ इंजीनियरों की जरूरत होती है। रिपोर्ट का दावा है कि अमेरिकी शिपयार्डों में अनुभवहीन और कम कुशल कारीगरों की एक छोटी सी मानवीय गलती पूरे अरबों डॉलर के जहाज को स्वाहा कर रही है।शॉर्ट सर्किट और ऑयल लीकेज: मेंटेनेंस के दौरान इंजन रूम में ईंधन या ट्रांसमिशन तेल का रिसाव होना और ओवरलोडेड इलेक्ट्रिकल सिस्टम का आपस में टकराना आग लगने के तात्कालिक कारण बन रहे हैं।सुपर-टेक्नोलॉजी ही बन गई सबसे बड़ा खतरा!चीनी मैगजीन ने साफ तौर पर चेतावनी दी है कि टेक्नोलॉजी जहाजों के परफॉर्मेंस को तो बढ़ा सकती है, लेकिन बिजली की एक छोटी सी खराबी पूरे युद्धपोत को युद्ध के बीच में लाचार कर सकती है, जैसा कि हाल ही में USS हिगिंस पर हुए टोटल ब्लैकआउट के दौरान देखा गया। अमेरिकी नौसेना के लिए आज सबसे बड़ी चुनौती नए और घातक जहाज बनाना नहीं है, बल्कि जो पहले से मौजूद हैं, उनका सही तरीके से मेंटेनेंस करना है। अगर इंडस्ट्रियल सिस्टम ने समय रहते इस बोझ को नहीं संभाला, तो अमेरिका को अपनी ऑपरेशनल उपलब्धता में भारी कमी और अरबों डॉलर का सैन्य नुकसान झेलना पड़ेगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 9 Jul 2026 8:18 am

H-1B वीजा पर ट्रंप का बड़ा एक्शन, बड़ी कंपनियां जांच के घेरे में

ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी और 'पर्म' रोजगार वीजा से जुड़े कथित धोखाधड़ी के मामलों की जांच शुरू कर दी है

देशबन्धु 9 Jul 2026 8:10 am

एर्दोगन पर ट्रंप मेहरबान, F-35 में तुर्की की वापसी के दिए संकेत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि उनका प्रशासन तुर्की को फिर से एफ-35 स्टील्थ फाइटर जेट कार्यक्रम में शामिल करने पर विचार कर रहा है

देशबन्धु 9 Jul 2026 7:50 am

'आज रात होगा जोरदार हमला'... ईरान को ट्रंप की खुली चेतावनी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान कहा कि अमेरिका बुधवार रात ईरान पर जोरदार हमला कर सकता है

देशबन्धु 9 Jul 2026 6:30 am

कैसे स्कैम करने भारत से कंबोडिया पहुंच रहे लोग, एक्सपोज:एजेंट बनकर गिरोह में घुसा रिपोर्टर, पाकिस्तानी एजेंट से 10 लड़कों की डील...पार्ट-1

‘लड़के भेज दो... एक लड़के पर 95 हजार रुपए तक कमीशन मिलेगा।’ ये ऑफर कंबोडिया में बैठे एक पाकिस्तानी एजेंट ने भास्कर रिपोर्टर को दिया। शर्त थी कि लड़के इंग्लिश बोलना जानते हों, बाकी काम कंपनी सिखा देगी। कंपनी का नाम नहीं है। वेबसाइट नहीं है। ऑफर लेटर नहीं है। इंटरव्यू टेलीग्राम पर होगा। जॉब दुनियाभर में लोगों को डिजिटल अरेस्ट करके ठगने की है। इस स्कैम के जरिए भारत में ही हर दिन करीब 61 करोड़ रुपए और हर महीने करीब 2 हजार करोड़ रुपए ठगे जा रहे हैं। हमारी पड़ताल 55 दिन चली। भास्कर रिपोर्टर एजेंट बना। स्कैम कंपनी के पूरे नेटवर्क को उजागर करने के लिए रैकेट में शामिल हुआ। विक्टिम, रिक्रूटमेंट करने वाले HR, ट्रेनिंग देने वाले सीनियर इम्प्लाई और कंबोडिया-मलेशिया में काम संभालने वाले एजेंट तक पहुंचा। उनका भरोसा जीता, दोस्ती बढ़ाई और यकीन दिलाया कि मैं एजेंट हूं और भारत से लड़कों को स्कैम के लिए कंबोडिया भेजना चाहता हूं। इस इन्वेस्टिगेशन में 45 दिन भारत, 7 दिन कंबोडिया और 3 दिन मलेशिया में बीते। स्कैम कंपनियों के रिक्रूटमेंट, ट्रेनिंग, ऑपरेशन मॉड्यूल को जाना। सैलरी और इंसेंटिव तक का गणित समझा। लड़कों को फंसाने से लेकर जबरदस्ती काम करवाने तक के तरीके पता किए। 'ऑपरेशन वर्ल्ड स्कैम' सीरीज के पहले पार्ट में आज पढ़िए और देखिए, कैसे भारत से युवाओं को कंबोडिया-मलेशिया जैसे देशों में भेजकर सायबर फ्रॉड इंडस्ट्री का हिस्सा बनाया जा रहा है। स्टेप 1: पाकिस्तानी एजेंट से मुलाकात हमारी इन्वेस्टिगेशन सायबर स्कैम सिंडिकेट में फंस चुके यूपी के रोहित (बदला हुआ नाम) से शुरू हुई। राेहित नौकरी के लिए कंबोडिया गए थे। वहां उनका पासपोर्ट छीनकर सायबर फ्रॉड करने के लिए मजबूर किया गया। भारत सरकार के दखल के बाद 22 नवंबर, 2025 को लोकल पुलिस ने रोहित और उनके साथियों को बाहर निकाला। कंबोडिया में रोहित की दोस्ती पाकिस्तान के लफी से हुई थी। लफी रोहित से सीनियर था। सायबर स्कैम के नेटवर्क तक पहुंचने के लिए हमने रोहित की मदद ली। एजेंट बनकर गिरोह में शामिल होने का प्लान बनाया और रोहित से लफी का नंबर लेकर उससे कॉन्टैक्ट किया। लफी से हमारी बात बीती 6 मई को हुई। वॉट्सएप पर हुई बातचीत में हमने उसे बताया कि आपका नंबर रोहित ने दिया है। मैं एजेंट हूं और 10 लड़कों को सायबर स्कैम के लिए कंबोडिया भेजना चाहता हूं। इसके बाद लफी ने कई दफा हमसे बातचीत की। लफी ने बताया, ‘अमेरिका और चीन का प्रेशर है। इसलिए ज्यादातर कंपनियां थाइलैंड-म्यांमार बॉर्डर पर शिफ्ट हो गई हैं। मैं जिस कंपनी में काम करता हूं, उसमें 300 बंदे हैं। 40 से 60 इंडिया के हैं। HR भी मुंबई का है।’ स्टेप 2: रिक्रूटमेंट रिक्रूटमेंट के बारे में पूछने पर लफी ने कहा कि दो लड़कों के एक-एक मिनट के इंट्रोडक्शन वीडियो भेजो। उन्हें इंग्लिश में अपने बारे में बताना है। वीडियो सिलेक्ट होने के बाद पासपोर्ट का पहला और आखिरी पेज का फोटो भेजना। फिर कंपनी का HR टेलीग्राम पर लड़कों का इंटरव्यू लेगा। इंटरव्यू क्लियर होते ही टिकट बुकिंग और वीजा प्रोसेस शुरू हो जाएगी।’ लफी ने बताया, अभी कंपनियां भारतीयों को ज्यादा हायर कर रही हैं। यहां पाकिस्तान के बहुत लोग पहले से हैं। एक मुल्क से ज्यादा लोग होने पर बवाल हो सकता है। इसलिए सभी देशों से थोड़े–थोड़े रखते हैं। भारत से अभी तमिल–तेलुगु बोलने वालों की डिमांड ज्यादा है। ऑफर लेटर कैसे मिलेगा? लफी ने जवाब दिया, ‘कंपनी ऑफर लेटर नहीं देती। कोई ऑफिशियल वेबसाइट नहीं है। कोई कानूनी दस्तावेज नहीं। सिर्फ पासपोर्ट, वीडियो और टेलीग्राम से काम होता है।’ स्टेप 3: HR इंटरव्यू लफी के कहने पर हमने अपनी टीम के दो साथियों के वीडियो उसे भेज दिए। वीडियो देखकर उसने कहा, ‘दोनों ठीक हैं, लेकिन अभी कुछ दिन इंतजार करना पड़ेगा। म्यांमार बॉर्डर पर सख्ती बढ़ गई है।’ ‘हमारे कुछ बंदे कंबोडिया में फंसे हैं। कुछ लड़के गिरफ्तार भी हो गए हैं। पुलिस एक लड़के को छोड़ने के बदले 10 हजार डॉलर मांग रही है। बॉस ने कहा है कि पहले इन लड़कों को निकालना पड़ेगा क्योंकि इनके वीजा और टिकट पर पैसे खर्च हो चुके हैं। इनके निकलते ही नई रिक्रूटमेंट शुरू करेंगे। तब तक माहौल थोड़ा ठीक हो जाएगा।’ रोहित के जरिए हम मैनुअल जोसेफ तक पहुंचे। मैनुअल कंबोडिया और लाओस में सायबर स्कैम कर चुका है। रोहित का रेफरेंस देते हुए हमने मैनुअल से कहा कि 10 लड़के बाहर भेजना है। रोहित का नाम सुनकर उसने भरोसा कर लिया और बातचीत शुरू कर दी। मैनुअल ने भी लड़कों के इंट्रोडक्शन वाले वीडियो मांगे। बोला कि लड़के इंग्लिश पढ़कर बोलेंगे, तब भी चलेगा, लेकिन टाइपिंग आना चाहिए। उसने आगे बताया, ‘कंबोडिया में सख्ती चल रही है, इसलिए लड़कों को मलेशिया भेजेंगे। 10 लड़के हैं, तो 5–5 के स्लॉट में भेजेंगे। टिकट तुम्हें करनी होगी। वीजा कंपनी करवाएगी। लड़के पहुंच जाएंगे तब तुम्हें एक बंदे पर 1000 डॉलर या करीब 95 हजार रुपए कमीशन मिलेगा। 300 डॉलर मेरे होंगे, 700 डॉलर तुम्हारे। इसके अलावा तुम्हें हर एक बंदे पर मुझे 5 हजार रुपए अलग से देना होगा।’ ‘एयरपोर्ट से कंपनी के लोग बंदों को लोकेशन पर ले जाएंगे। वहां रुकने, खाने–पीने का इंतजाम है। लड़कों के वहां पहुंचने के बाद 10 से 15 दिन में तुम्हें पैसा मिल जाएगा। लड़कों को सिर्फ कपड़े लेकर जाना है। लैपटॉप कंपनी में मिलेगा। अमेरिका के लोगों को फंसाना है। नाइट शिफ्ट रहेगी। रात में 10 बजे से सुबह के 10 बजे तक। एक साल का कॉन्ट्रैक्ट साइन होगा। तीन महीने के पहले कोई बाहर नहीं आ सकता। बाद में कोई आएगा, तो उसे टिकट खुद करना होगा।’ सब तय होने के बाद हमने मैनुअल को टेलीग्राम पर तीन लड़कों के वीडियो भेजे। वीडियो देखने के बाद उसने इंटरव्यू के लिए वक्त दिया। कहा कि इंटरव्यू टेलीग्राम पर होगा। लड़कों को कैमरा ऑन रखना है, मेरा कैमरा ऑफ रहेगा।’ मैनुअल ने तीनों लड़कों का एक-एक मिनट का इंटरव्यू लिया। लड़कों से नॉर्मल सवाल पूछे, जैसे कहां से पढ़े हो, कहां जॉब की है। एक लड़के से पूछा कि अमेरिका के बंदे से बात होगी तो सबसे पहले क्या पूछोगे। इंटरव्यू के अगले दिन मैनुअल ने बताया कि तीनों लड़के सिलेक्ट हो गए हैं। उनके पासपोर्ट की फोटो भेज दो, ताकि वीजा प्रोसेस शुरू हो जाए। अगले 15 दिन में वीजा हो जाएगा। जून के फर्स्ट वीक में सभी को रवाना कर देंगे। स्टेप 4: कंबोडिया का सफर लड़कों के सिलेक्शन के बाद हमने मैनुअल और लफी से कहा कि लड़के बाहर जाने में डर रहे हैं। उनके घरवाले कह रहे हैं कि बिना किसी लेटर कैसे बाहर भेज दें। इसलिए एक बार मैं वहां जाकर सब देखना चाहता हूं, ताकि उन्हें यकीन हो जाए। लफी ने हमें फिनोम पेन्ह में कंपनी का काम संभालने वाले एजेंट विक्की का नंबर दिया। विक्की से हमारी वॉट्सएप पर बात हुई। उसने कहा कि मैं 16 से 19 जून तक कंपनी के काम से फिनोम पेन्ह में नहीं रहूंगा। 15 जून को मिल सकता हूं। इसके बाद हमने 14 जून का मुंबई से बैंकॉक होते हुए फिनोम पेन्ह का टिकट बुक करवाया। लफी ने हमें बताया था कि भारत और थाईलैंड दोनों एयरपोर्ट पर हमारे लोग रहते हैं। इमिग्रेशन पर ज्यादा पूछताछ हो, तो मैनेज कर लेंगे। एयरपोर्ट पर 200 से 250 डॉलर में सेटिंग होती है। कई बार एयरपोर्ट से लोगों को डिपोर्ट कर दिया जाता है। इसी लफड़े से बचने के लिए पहले ही सेटिंग कर लेते हैं।’ लफी ने कहा कि आप टूरिस्ट वीजा पर कंबोडिया जाना क्योंकि अभी एयरपोर्ट पर बहुत सख्ती चल रही है। शक हुआ तो आपको डिपोर्ट कर देंगे। लफी की बात मानकर हमने टूरिस्ट वीजा पर कंबोडिया जाना तय किया। उसी दिन फिनोम पेन्ह में भारतीय दूतावास की वेबसाइट पर एक एडवाइजरी पढ़ी। इसमें लिखा था, ‘कंबोडिया में अच्छी सैलरी और नौकरी के झूठे वादे देकर भारतीय नागरिकों को मानव तस्करों के जाल में फंसाया जा रहा है। उन्हें डराकर ऑनलाइन फाइनेंशियल धोखाधड़ी और गैरकानूनी काम के लिए मजबूर किया जाता है।’ ‘कंबोडिया में जॉब के लिए आने वाले भारतीयों को सलाह दी जाती है कि वे ऑथराइज्ड रिक्रूटमेंट एजेंट्स के जरिए ही जॉब ऑफर एक्सेप्ट करें। नौकरी देने वाली कंपनी का बैकग्राउंड भी चेक करें। मेजबान देश की ओर से जारी वीजा की शर्तों का पालन करें और टूरिस्ट वीजा पर जॉब करने न आएं। जिन भारतीय नागरिकों के पास कंबोडिया में रहने और जॉब का वैलिड वीजा नहीं है, उन्हें तुरंत देश छोड़ने की सलाह दी जाती है।’ हम 14 जून को मुंबई से बैंकॉक के लिए निकले। 15 जून को बैंकॉक से कंबोडिया की राजधानी फिनोम पेन्ह पहुंच गए। कंबोडिया पहुंचने के बाद क्या हुआ, पढ़िए और देखिए कल यानी 10 जुलाई को। ग्राफिक से समझिए सायबर फ्रॉड इंडस्ट्री का दायरा कितना बड़ा है…

दैनिक भास्कर 9 Jul 2026 5:13 am

ब्लैकबोर्ड-पति ने सिर मुंडवाया, पेशाब पिलाया फिर कालिख पोत दी:शहर में उसने दूसरी पत्नी रख ली, मैंने घर छोड़ा तो निर्वस्त्र करके पीटा

सुबह करीब 11 बजे का वक्त। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर का करंजी गांव। मिट्टी और गोबर से लिपे कच्चे मकान का आंगन। एक कोने में उपले और सूखी लकड़ियों का ढेर। आंगन के किनारे घूंघट में मुंह छिपाए एक औरत बैठी हैं। उम्र लगभग 35-38 साल। नाम है ताराबाई। मुझे देखते ही पास आने का इशारा करती हैं। मैं पास जाकर जमीन पर ही बैठ जाती हूं। वह उंगलियों में दुपट्टे का किनारा फंसा कर बार-बार खींच रही हैं। अपने सूखे नाखूनों को नोच रही हैं। अचानक हवा चली और महिला के सिर से दुपट्टा खिसक गया। सिर पर नए-नए बाल आने शुरू हुए हैं, जैसे मुंडन के 10-15 दिन बाद आते हैं। वो तुरंत दुपट्टा खींचकर अपने सिर और चेहरे पर बांध लेती हैं। मेरे कुछ पूछने से पहले ही नजरें झुकाकर बोल पड़ती हैं- ‘पति ने सबके सामने मुझे गंजा कर दिया था।’ ब्लैकबोर्ड में एक ऐसी महिला की कहानी, जिसे पति ने पूरे गांव के सामने बेरहमी से पीटा, गंजा किया। अपना और बच्चों का पेशाब पिलाया… खुद को संभालते हुए ताराबाई ने कहानी बतानी शुरू की- तीन हफ्ते पुरानी बात है। इसी 14 जून की । भाभी के साथ उनके मायके, पांडूपारा गांव गई थी। जाना नहीं चाहती थी, लेकिन भाभी जबरदस्ती ले गईं। वहां पहुंचे कुछ घंटे बीते थे, तभी मेरा पति जितेंद्र वहां पहुंच गया। घर के बाहर खड़े होकर जोर-जोर से चीखने लगा। कहां है ताराबाई? मा@#$%। बताता हूं आज उसे। उसे देखकर मैं घबरा गई। वो अंदर घुसा और गाली देते हुए बोला-‘आज देख तू मैं तेरे साथ क्या करता हूं मा@#$%’। बाल पकड़कर सीधे मुझे बाहर लेकर आया। पहले थप्पड़ मारे फिर जमीन पर पटक दिया। लात-घूसे से मारा। सामने एक दीवार पर मेरा सिर दे मारा। मैं हाथ जोड़कर कह रही थी, छोड़ दे मुझे। लेकिन उसने एक न सुनी। गांवभर के लोग जमा हो गए। कुछ लोगों ने बीच-बचाव करने की कोशिश भी की, लेकिन वो सबको धमकाने लगा। कहने लगा- ‘जो भी बीच में आएगा, उसे जान से मार दूंगा। कोई मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकता। मैं पुलिस को भी सब कुछ बताकर आया हूं।’ फिर उसने दुपट्टे से दोनों हाथ पीछे की तरफ बांध दिए। छाती, पेट और चेहरे पर लात मारी। चारों बच्चों को भी साथ लाया था। बड़ी बेटी से बोला- ‘तू क्या देख रही है, मार @#$ को।’ बेटी ने भी एक के बाद एक कई थप्पड़ मारे। फिर खुद पीटने लगा। जब वो मारते-मारते थक गया तो मेरे एक पैर पर दुपट्टा बांधा और जोर से खींच दिया। मैं खड़े-खड़े जमीन पर गिर गई। भीड़ में खड़े एक शख्स से बोला- ‘ये ले मेरा मोबाइल, इस @#% का वीडियो बना।’ फिर छोटे बेटे से मुझे थप्पड़ मरवाए। कुछ देर बाद कहीं से कैंची लेकर आया और मेरे लंबे बाल काट दिए। डिस्पोजल में अपना पेशाब भरकर मेरे सिर पर उड़ेल दिया। दूसरे डिस्पेजल में फिर पेशाब भरकर लाया और जबरन मेरा मुंह पकड़कर पिला दिया। मैं बेजान सी वहीं पड़ी थी। उबकाई आ रही थी। मैं वहां से भाग जाना चाहती थी, लेकिन उस वक्त कुछ समझ ही नहीं आ रहा था। फिर बड़े बेटे से रेजर मंगवाया और मुझे गंजा कर दिया। तब तक मेरे एक कान में आवाज आनी बंद हो गई थी। सबके सामने मेरे कपड़े फाड़ दिए। छोटे बेटे से बोला- ‘मा@#$% के मुंह पर पेशाब कर।’ फिर जबरन मेरा मुंह के अंदर बेटे से पेशाब करवाया। आखिर में मेरे ऊपर काला मोबिल ऑयल उड़ेल दिया। चेहरे काला कर दिया। फिर वो कहने लगा- ‘अब वीडियो वायरल करके पूरी दुनिया को दिखाऊंगा। तुझे बहुत शौक है न दूसरी शादी करने का। अब तू देख @#$%। पूरी दुनिया थूकेगी तेरे ऊपर।’ उस वक्त तो मुझे लगा था कि जिंदा भी नहीं बचूंगी। बेहोश हो गई थी। तब से ही सुनाई देना बंद हो गया। वो साल भर से मुझसे कोई मतलब नहीं रखता था। खाने-पीने का खर्च तक नहीं उठाता था। कई साल पहले कमाने के लिए शहर चला गया था। धीरे-धीरे मतबल रखना भी बंद कर दिया। किसी दूसरी औरत के साथ रहने लगा था।आंसू भरी आंखों से वो मेरी तरफ देखती हैं और पूछती हैं- ‘मैडम, आप ही बताइए, क्या मैं घर में बंद होकर रहती? मैं अपने ही रिश्तेदारों के घर भी न जाती? जब उसने मुझे छोड़ दिया था, तो उसके बाद मैं कहीं भी जाऊं, उसका तो मेरे ऊपर कोई हक नहीं है न।’ ‘वो तो ऊपर वाले ने मेरी उम्र लिखी थी, इसलिए बच गई। लेकिन सच कहूं तो उस दिन के बाद से जिंदा लाश की तरह जिंदगी जी रही हूं। अब जब घर से बाहर किसी को देखती हूं तो लगता इसने भी मुझे पिटते देखा होगा। इसलिए किसी से नजरें नहीं मिला पाती। जिस पति ने मेरा ये हाल किया, उससे मैंने पसंद की शादी की थी। मेरे घरवाले नहीं चाहते थे। हर कोई शादी के खिलाफ था, इसलिए मैंने घर से भागकर शादी की थी। अब देखिए, उस पति ने कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा।’ ‘20 साल पहले की बात है। तब मैं 9वीं में पढ़ती थी, 16 साल की थी। जितेंद्र मेरे चाचा के लड़के का साला है। रिश्तेदारी में अक्सर आना-जाना होता था। वहीं हमारी बातें शुरू हुईं और धीरे-धीरे एक-दूसरे को पसंद करने लगे। जब घरवालों को पता चला, तो लड़ाई-झगड़े होने लगे। मां-बाप कहने लगे कि इस तरह रिश्तेदारी में शादी नहीं हो सकती। अगर उससे शादी की तो जान से मार देंगे। तब जितेंद्र ने बोला- ‘चलो, भागकर शादी कर लेते हैं। एकबार शादी हो गई तो कोई क्या ही कर लेगा।’ आखिर हम दोनों घर छोड़कर भाग गए और शादी कर ली।’ ताराबाई बात कर ही रही थीं, तभी बीच में उनके चाचा के बेटे बबलू सारथी बोल पड़े, ‘हां, पहले हम इस शादी के खिलाफ थे, लेकिन दोनों नहीं माने। भागकर शादी कर ली। फिर हमने सोचा कि लड़का अपनी ही जात-बिरादरी का है। परिवार भी जाना-पहचाना है। बात बढ़ाने से क्या ही फायदा। दोनों को बुलाया और शादी की मंजूरी दे दी। शुरुआत में सबकुछ ठीक भी था। दोनों साथ थे, घर बस गया और धीरे-धीरे परिवार भी बढ़ने लगा। उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं। धीरे-धीरे बात बिगड़ने लगी दरअसल, जितेंद्र की बहन से मेरी शादी नहीं चली। आए दिन हमारे झगड़े होते थे। वो कभी जान देने की धमकी देती, तो कभी अपनी नस काट लेती। उसकी इन हरकतों से हम डर गए। आखिरकार, पंचायत बुलाई और हमारा तलाक हो गया। यहीं से दोनों परिवारों के रिश्तों में दरार पड़ गई। इसके बाद ताराबाई और जितेंद्र के रिश्ते लगातार बिगड़ते चले गए। जितेंद्र ने अपनी बहन का बदला लेना शुरू कर दिया। वह आए दिन ताराबाई पर गुस्सा उतारने लगा।’ ताराबाई फिर बोल पड़ती हैं, ‘भाई का तलाक क्या हुआ, उसके बाद से तो मेरी जिंदगी नरक बन गई। दोनों परिवार के रिश्ते दुश्मनी में बदल गए। जितेंद्र कभी शहर में दिहाड़ी मजदूरी करता, तो कभी गांव में गाड़ी चलाता था। इसी से घर का खर्च चलता था। धीरे-धीरे उसने मेरी तरफ ध्यान देना बंद कर दिया। कुछ साल बाद शहर में उसके दूसरी महिला से संबंध हो गए। आधी रात को शराब पीकर घर आता फिर मुझे पीटता। कई-कई दिन तो घर भी नहीं आता था। मुझे खर्च के पैसे देना भी बंद कर दिए। कई बार तो राशन तक के पैसे नहीं होते थे। जब मैं जितेंद्र से उसके दूसरी औरत से संबंध के बारे में बात करती, तो ये कहकर टाल देता कि तू पागल है,ऐसा कुछ नहीं है। चारों बच्चों की जिम्मेदारी पूरी तरह मेरे कंधों पर आ गई थी। मैं उससे कहती, अगर तुम उसे दूसरी पत्नी बनाना चाहते हो, तो बना लो, लेकिन बच्चों की देखभाल भी करो। इसी बात पर अक्सर झगड़ा हो जाता और वो मुझे मारने लगता था। एकबार तो चार दिन तक घर में राशन नहीं था और जितेंद्र एक हफ्ते से घर नहीं लौटा था। जब वो शराब पीकर घर आया तो मैंने कहा- दूसरी औरत के लिए अपने बच्चों को परेशान कर रहे हो, कुछ तो हमारे बारे में भी सोचो। इसपर वो नाराज हो गया और कमरे का दरवाजा भीतर से बंद कर लिया। मेरे कपड़े उतरवा दिए और मुझे बुरी तरह पीटा। उस दिन मुझे समझ आ गया था कि जितेंद्र के लिए अब मैं सिर्फ गुस्सा निकालने का जरिया बन गई हूं। इस तरह हमारे बीच झगड़ा बढ़ता ही जा रहा था। मुझे बच्चों की ज्यादा चिंता होने लगी थी। फिर एक दिन झगड़ा हुआ तो उसने मेरा सिंदूर पोंछ दिया और मंगलसूत्र भी तोड़ दिया। कहने लगा- अब से तू मेरी पत्नी नहीं। निकल जा मेरे घर से। अगले दिन मैं अपनी बुआ सास के घर चली गई। जितेंद्र ने फोन किया और कहने लगा- तू वहां क्यों गई है? किससे मिलने गई है? गोद में छोटी बेटी को लेकर, बुआ सास के घर किससे मिलने जाती?’ जबरदस्ती कहता था कि तेरे और तेरे जीजा के बीच में कुछ चल रहा है। एक दिन फिर उस औरत को लेकर हमारा झगड़ा हुआ। मैंने जितेंद्र से कहा- जरूरत पड़े, तो मैं दूसरी औरत के साथ भी रह लूंगी। लेकिन तुम बच्चों को दूर मत करो। उनका ध्यान रखो मैडम आप ही बताइए, आखिर कौन-सी औरत अपनी सौतन के साथ रहने की बात करती है? लेकिन मैंने अपने बच्चों के लिए यह भी मंजूर कर लिया था। जितेंद्र का व्यवहार तब भी नहीं बदला। न तो हमारे झगड़े खत्म हुए और न ही उसका मारना पीटना। आखिर, एक दिन मैं घर छोड़कर निकल गई। रास्ते में मुझे जीजा मिल गए। उनको देखते ही मैं रोने लगी। वो मुझे मोटरसाइकिल में बैठाकर मायके छोड़ आए। अगले दिन जितेंद्र को पता चला, तो वह मुझे लेने आया। बहुत शांति से मुझे घर वापस ले गया। लगा कि शायद अब सब ठीक हो जाएगा, लेकिन घर पहुंचते ही मेरे साथ मारपीट शुरू कर दी। कहने लगा कि मैं अपने जीजा के साथ रहती हूं। मेरा उनसे चक्कर है। मुझे जिसके साथ भी देख लेता, उसी से मेरा रिश्ता जोड़ देता। उसे मारने-पीटने का कोई न कोई बहाना चाहिए होता था। गांव की दुकानों में उधारी लेकर बच्चों का पेट पाल रही थी। धीरे-धीरे उधार इतना बढ़ गया कि दुकान वालों ने देहरी चढ़ने से भी मना कर दिया। ससुराल वाले भी जितेंद्र को कुछ नहीं कहते थे। उल्टा सास तो मुझे ही तंग करती थीं। यहां तक कि जितेंद्र को उकसाती थीं। कहती थीं- इसने घर से भागकर तुमसे शादी की है। यह सही औरत नहीं है। इसे छोड़ दो।’ उस घटना को हुए 20 दिन से ज्यादा हो गए हैं। आज भी सिर में दर्द रहता है। ठीक से सुनाई नहीं देता। कभी-कभी अचानक कान में तेज दर्द शुरू हो जाता है। भूख नहीं लगती। घर से बाहर निकलने का मन ही नहीं करता। डर लगता है। लोगों से बात करने की हिम्मत नहीं होती। मैंने पूछा- इतना सब होने के बाद भी उस घर में क्यों लौटती रही? ताराबाई बिना ज्यादा सोचे बोलीं- ‘क्योंकि मुझे अपने बच्चों के साथ रहना था। लेकिन जब बार-बार कोशिश के बाद भी कुछ नहीं बदला तो एक साल पहले मैंने उसका घर छोड़ दिया था।' ताराबाई का कहना है कि- घटना के बाद मेरा परिवार पुलिस के पास शिकायत लेकर पहुंचा। शुरुआत में पुलिस ने मामले को हल्के में लिया। उसके बाद परिवार लोकल सामाजिक कार्यकर्ता पंकज तिवारी के पास पहुंचा, तब कड़ी धाराएं जोड़ीं। पंकज तिवारी बताते हैं- उस दिन शाम करीब 5 बजे ये लोग मेरे पास आए। उन्होंने पूरी घटना बताई और वीडियो दिखाया। वीडियो देखते ही मैं सन्न रह गया। मुझे लगा कि यह सिर्फ मारपीट का मामला नहीं, बल्कि इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना है। अगले ही दिन मैंने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मामले को सार्वजनिक किया। हमारी मांग है कि घटना की गंभीरता को देखते हुए आरोपी पर गैर-जमानती और कड़ी धाराएं लगाई जाएं। जिस तरह से ताराबाई के साथ सार्वजनिक रूप से अपमान और हिंसा की गई, उसे सामान्य अपराध मानकर नहीं देखा जा सकता। एक इंसान को शारीरिक रूप से घायल होने के बाद भी इलाज मिल सकता है, लेकिन जिस तरह की सार्वजनिक बेइज्जती की गई है, उसके निशान शायद जिंदगी भर नहीं मिटेंगे।’ कोरिया जिला थाना प्रभारी प्रमोद पांडे बताते हैं कि 15 जून को ताराबाई आई थीं। उनकी शिकायत थी कि 14 जून सुबह 7 बजे उसके पति जितेंद्र घसिया अपने बच्चों के साथ गांव पांडुपुरा पहुंचा और उनके हाथ-पैर बांधकर सिर मुंडवाया। बुरी तरीके से मारा। जिसके आधार पर हमने एफआईआर दर्ज कर ली थी। जितेंद्र को गिरफ्तार भी कर लिया था। उसपर लगी धाराएं जमानती थी। लेकिन फिर पता लगा कि आरोपी ने तारा का चेहरा काला किया। बच्चों का और अपना पेशाब भी पिलाया। फिर एफआईआर में हमने बीएनएस की धारा 123 जोड़ी जो गैर जमानती धारा है। थाना प्रभारी प्रमोद पांडे के अनुसार तारा के पति का आरोप था कि वह 11 महीने से घर और बच्चों को छोड़कर किसी और के साथ रह रही थी। पांडे यह भी बताते हैं कि उन्होंने अपने कार्यकाल में ऐसी वीभत्स और अमानवीय घटना कभी नहीं देखी है। इसी के आधार पर एफआईआर में सख्त धाराएं जोड़ी गई हैं। ----------------------------------- ब्लैकबोर्ड की ये कहानियां भी पढ़ें… 1- ब्लैकबोर्ड-दूसरे के बच्चे धोखे से मेरी कोख में डाल दिए:शक्ल-सूरत नहीं मिली तो DNA करवाया, आखिर कहां गए मेरे बच्चे आज ब्लैकबोर्ड में कहानी ऐसे पति-पत्नी की जिनकी दो बेटियां हैं। इन्होंने एकबार फिर मां-बाप बनने का फैसला किया, लेकिन उम्र आड़े आ गई। डॉक्टर ने सलाह दी- ‘IVF आजमाइए।’ पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड- तानों से परेशान होकर ब्रेस्ट इम्प्लांट करवाया:ऑडिशन वाले कहते थे- तुम्हारा फिगर ठीक नहीं, अब आधी कमाई सर्जरी की EMI में जा रही एकबार मैं ऑडिशन के लिए गई थी। वहां मुझे ट्रायल के लिए एक बिकिनी दी गई। 10-15 मर्दों के सामने जैसे ही बिकिनी पहनकर बाहर आई, तो सब हंसने लगे। कहने लगे- 'अरे मैडम, ये सब आपके लिए नहीं है। आप तो एकदम फ्लैट हैं।' पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 9 Jul 2026 5:11 am

ट्रंप का बड़ा दावा, अमेरिका इतिहास की सबसे बड़ी आर्थिक उड़ान पर

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस समय अपने इतिहास की सबसे मजबूत आर्थिक बढ़त के दौर से गुजर रहा है

देशबन्धु 9 Jul 2026 5:10 am

कुवैत में जयशंकर की अहम बैठकें, ऊर्जा, रक्षा और व्यापार सहयोग बढ़ाने पर बनी सहमति

विदेश मंत्री (ईएएम) एस. जयशंकर ने बुधवार को कुवैत के प्रधानमंत्री शेख अहमद अब्दुल्ला अल-अहमद अल-सबाह से मुलाकात की। उन्होंने भारतीय समुदाय के कल्याण और सुरक्षा का ध्यान रखने के लिए कुवैत सरकार का धन्यवाद किया। साथ ही, उन्होंने भारत-कुवैत संबंधों को और मजबूत बनाने की उनकी सोच का स्वागत किया।

देशबन्धु 9 Jul 2026 4:20 am

शी चिनफिंग ने उच्च स्तरीय वैज्ञानिक व तकनीकी स्वावलंबन बढ़ाने में तेजी लाने पर बल दिया

चीन में राजकीय विज्ञान व तकनीक पुरस्कार वितरण महासभा, चीनी वैज्ञानिक अकादमी के सदस्यों की 22वीं सभा तथा चीनी इंजीनियरिंग अकादमी के सदस्यों की 18वीं सभा और चीनी विज्ञान व तकनीक संघ की 11वीं राष्ट्रीय प्रतिनिधि सभा 8 जुलाई की सुबह पेइचिंग जन वृहद भवन में आयोजित हुई।

देशबन्धु 9 Jul 2026 12:42 am

ईरान पर ट्रंप का फूटा गुस्सा, नाटो सहयोगियों पर लगाए बड़े आरोप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कई बड़े नाटो सहयोगी देशों पर आरोप लगाया कि उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिका की सैन्य कार्रवाई में उसका साथ देने से इनकार कर दिया

देशबन्धु 9 Jul 2026 12:38 am

आज का एक्सप्लेनर:टीम इंडिया वर्ल्ड चैम्पियन से ‘लूजर’ कैसे बनी; 76 रन पर ऑलआउट, आयरलैंड से सीरीज हारी, आखिर जीत का फॉर्मूला क्यों बदला

इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे टी-20 मैच में टीम इंडिया 125 रन से हार गई। टी-20 में ये भारत की सबसे बड़ी हार है। पिछले महीने आयरलैंड भी भारत को 2-0 से सीरीज हरा चुकी है। मार्च में टी-20 वर्ल्ड चैम्पियन बनने के बाद टीम इंडिया ने 5 मैच खेले, कोई नहीं जीता। आखिर जीत के ट्रैक पर दौड़ लगाती टीम इंडिया की गाड़ी 110 दिनों में बेपटरी कैसे हो गई; 5 बड़े फैक्टर्स… ------------------------ ये खबर भी पढ़िए… कप्तान श्रेयस बोले- खराब प्रदर्शन, ऐसी हार स्वीकार्य नहीं: गंभीर ने सैमसन की वापसी के संकेत दिए; जानिए भारत की हार पर किसने क्या कहा टीम इंडिया को टी-20 क्रिकेट में अपनी सबसे बड़ी हार झेलनी पड़ी। उसे इंग्लैंड ने तीसरे मैच में 125 रन से हराया। ट्रेंट ब्रिज स्टेडियम में 202 रन चेज कर रही टीम इंडिया सिर्फ 76 रन पर ऑलआउट हो गई। मैच के बाद भारतीय कप्तान श्रेयस अय्यर ने टीम के प्रदर्शन को बेहद खराब बताया। वहीं, हेड कोच गंभीर बचाव करते नजर आए। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 8 Jul 2026 6:29 pm

ट्रंप का बड़ा दावा: ‘ईरान के साथ समझौता खत्म’, 80 से अधिक ठिकानों पर अमेरिकी हमलों के बाद बढ़ा तनाव

ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करना है। उनके अनुसार, यदि ईरान परमाणु क्षमता बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ता है तो यह केवल अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा होगा।

देशबन्धु 8 Jul 2026 3:03 pm

डिजिटल अरेस्ट करने वाली इंडस्ट्री एक्सपोज, कंबोडिया-मलेशिया पहुंचा भास्कर:भर्ती से ट्रेनिंग तक कंपनी जैसा नेटवर्क; 55 दिनों की पड़ताल, पढ़िए कल से

बीते 11 महीनों में मुंबई के बिजनेसमैन से 58 करोड़, दिल्ली की बुजुर्ग महिला से 20 करोड़ और गांधीनगर की डॉक्टर से 19 करोड़ रुपए डिजिटल अरेस्ट करके ठगे गए। डिजिटल अरेस्ट का ये काम किसी कॉर्पोरेट कंपनी की तरह चल रहा है। कंपनी में बकायदा HR हैं, हायरिंग और ट्रेनिंग होती है। टारगेट मिलता है। सैलरी के साथ इंसेंटिव भी दिया जाता है। भारत, अमेरिका, चीन समेत दुनियाभर के देशों के लोगों को ठगा जा रहा है। इस स्कैम का हब कंबोडिया और मलेशिया जैसे देश बन चुके हैं। इस स्कैम इंडस्ट्री को एक्सपोज करने के लिए भास्कर रिपोर्टर अक्षय बाजपेयी एजेंट बनकर नेटवर्क में शामिल हुए। 55 दिनों तक पड़ताल की। मुंबई से कंबोडिया और मलेशिया तक पहुंचे। उन एजेंट्स को कैमरे में कैद किया, जो इस नेटवर्क के पीछे हैं। पाकिस्तानी एजेंटों से डील की। एयरपोर्ट पर सेटिंग से लेकर स्कैम कंपाउंड्स का सच जाना। ‘ऑपरेशन स्कैम वर्ल्ड’ सीरीज के दो पार्ट में 9 और 10 जुलाई को पढ़िए और देखिए पूरा इन्वेस्टिगेशन।

दैनिक भास्कर 8 Jul 2026 1:28 pm

चीन की उड़ी नींद! समंदर के 3 चोक-पॉइंट्स पर भारत-इंडोनेशिया का कड़ा पहरा, ड्रैगन का तेल-राशन होगा कंट्रोल

हिंद महासागर (Indian Ocean) में चीन की बढ़ती दखलअंदाजी और विस्तारवादी नीतियों पर लगाम कसने के लिए भारत ने एक बड़ा और रणनीतिक मास्टरस्ट्रोक चला है। अब भारत और इंडोनेशिया ने मिलकर समंदर के उन तीन सबसे अहम 'चोक-पॉइंट्स' (Choke Points) पर अपना नियंत्रण मजबूत करने की तैयारी कर ली है, जहां से होकर चीन का ज्यादातर व्यापार और कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई होती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों की यह संयुक्त साझेदारी ड्रैगन के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं है, क्योंकि भविष्य में किसी भी विवाद की स्थिति में इससे सीधे तौर पर चीन की सप्लाई चेन भारत की मुट्ठी में आ जाएगी।समंदर के 3 अहम चोक-पॉइंट्स पर रहेगी पैनी नजर समुद्री सुरक्षा और वैश्विक व्यापार के लिहाज से हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर (South China Sea) को जोड़ने वाले रास्ते बेहद संवेदनशील माने जाते हैं। नई रणनीतिक रूपरेखा के तहत भारत और इंडोनेशिया अब मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca), सुंडा (Sunda Strait) और लोम्बोक जलडमरूमध्य (Lombok Strait) पर अपनी नौसैनिक गश्त और रणनीतिक मौजूदगी बढ़ा रहे हैं। मलक्का स्ट्रेट को दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में गिना जाता है। इन तीनों अहम चोक-पॉइंट्स पर दोनों देशों की मजबूत पकड़ का सीधा मतलब है कि संकट के समय में इस रूट को पूरी तरह से मॉनिटर या ब्लॉक किया जा सकता है, जो भारत को भारी रणनीतिक बढ़त दिलाएगा।चीन के लिए क्यों है यह सबसे बड़ा झटका? रक्षा और भू-राजनीति के विशेषज्ञ इसे कूटनीतिक भाषा में 'मलक्का डिलेमा' (Malacca Dilemma) कहते हैं। दरअसल, चीन अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 70 से 80 फीसदी कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खाड़ी देशों से इन्हीं समुद्री रास्तों के जरिए आयात करता है। अगर भारत और इंडोनेशिया मिलकर इन रास्तों पर कड़ी निगरानी रखते हैं या किसी सैन्य संघर्ष के दौरान आवाजाही रोक देते हैं, तो चीन में रातों-रात तेल और राशन का भारी संकट पैदा हो जाएगा। ईंधन के अभाव में उसकी पूरी अर्थव्यवस्था और सैन्य मशीनरी ठप पड़ सकती है। यही वजह है कि भारत और इंडोनेशिया का यह साझा कदम बीजिंग के नीति-निर्माताओं की चिंताएं बढ़ा रहा है।भारत-इंडोनेशिया की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' (Act East Policy) के तहत इंडोनेशिया के साथ रक्षा, व्यापार और नौसैनिक संबंध पहले से कहीं अधिक मजबूत हुए हैं। इंडोनेशिया के सबांग पोर्ट (Sabang Port) के विकास में भारत की भागीदारी ने इस रणनीति को और धार दे दी है। यह पोर्ट रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण अंडमान और निकोबार द्वीप समूह से बेहद करीब है, जो भारतीय नौसेना को इस पूरे इलाके में एक मजबूत बेस प्रदान करता है। दोनों देशों की नौसेनाएं लगातार संयुक्त पेट्रोलिंग और युद्धाभ्यास कर रही हैं। यह आधुनिक जियो-पॉलिटिक्स (Geo-Politics) में भारत की उस आक्रामक कूटनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह अब रक्षात्मक रुख अपनाने के बजाय चीन को उसी की भाषा में जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 8 Jul 2026 1:21 pm

कराची के आसमान से रहस्यमयी तरीके से गायब हुआ विमान, समुद्र में मची खलबली, बड़े सर्च ऑपरेशन का ऐलान

पाकिस्तान में एक बड़ी विमानन त्रासदी की आशंका ने हलचल मचा दी है। कराची के आसमान में उड़ान भर रहा एक विमान अचानक रडार से गायब हो गया है, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। विमान के लापता होते ही कराची और उसके आसपास के तटीय इलाकों में हड़कंप मच गया। प्राथमिक सूचनाओं के अनुसार, विमान से संपर्क टूटने के बाद से ही बचाव दल और सुरक्षा एजेंसियों ने युद्धस्तर पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। फिलहाल यह विमान समुद्र के ऊपर उड़ान भर रहा था, जिसके चलते सर्च ऑपरेशन का दायरा अरब सागर के तटों तक फैला दिया गया है।रडार से संपर्क टूटने के बाद बढ़ी चिंताविमान के रडार से ओझल होने की सूचना मिलते ही एविएशन अथॉरिटी ने 'इमरजेंसी प्रोटोकॉल' लागू कर दिया है। बताया जा रहा है कि विमान ने कराची एयरस्पेस में प्रवेश करते ही संपर्क खो दिया था, जिसके बाद से एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के साथ उसका कोई डेटा साझा नहीं हो पाया है। शुरुआती जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या यह कोई तकनीकी खराबी थी या मौसम के कारण विमान को अचानक नीचे आना पड़ा। हालांकि, विमान का मलबा या कोई ठोस सुराग अभी तक नहीं मिल सका है, जिससे परिवार वालों और प्रशासन की चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं।समुद्र में जारी है व्यापक सर्च ऑपरेशनपाकिस्तान की नौसेना (Pakistan Navy) और कोस्ट गार्ड ने विमान की तलाश में अपने जहाजों और हेलीकॉप्टरों को समुद्र में उतार दिया है। सर्च ऑपरेशन का मुख्य केंद्र कराची का तटीय इलाका है, जहां विमान के अंतिम बार देखे जाने की सूचना मिली थी। खराब मौसम और समुद्र की ऊंची लहरें बचाव दल के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने समुद्र के पास कुछ असामान्य हलचल देखी थी, जिसे देखते हुए सर्च टीम अब उन विशिष्ट पॉइंट्स पर फोकस कर रही है जहां विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने की सबसे अधिक संभावना है।क्या हो सकती है घटना की वजह?इस विमान के लापता होने के पीछे के सटीक कारणों का अभी आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है। एविएशन एक्सपर्ट्स का मानना है कि उड़ान के दौरान अचानक संपर्क टूटना किसी बड़े टेक्निकल फेल्योर या हाइड्रोलिक समस्या का संकेत हो सकता है। फिलहाल प्रशासन ने पूरे घटनाक्रम पर चुप्पी साधे रखी है और किसी भी अनहोनी की पुष्टि करने से बच रहा है। जैसे-जैसे सर्च ऑपरेशन आगे बढ़ रहा है, पूरे पाकिस्तान की नजरें कराची के समुद्र तट पर टिकी हैं। फिलहाल, बचाव दल विमान का सिग्नल पकड़ने के लिए अत्याधुनिक तकनीक का सहारा ले रहे हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 8 Jul 2026 1:19 pm

पाकिस्तान में BLA का खूनी तांडव: पुलिस स्टेशन पर किया बड़ा हमला, 17 पुलिसकर्मियों की निर्मम हत्या से दहला इलाका

पाकिस्तान में अशांति का दौर थमने का नाम नहीं ले रहा है। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) ने एक बार फिर सुरक्षा बलों को निशाना बनाते हुए खौफनाक हमले को अंजाम दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बलूचिस्तान के एक पुलिस थाने पर BLA के आतंकियों ने अचानक धावा बोल दिया। इस हमले में 17 पुलिसकर्मियों के शहीद होने की पुष्टि हुई है, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। इस घटना ने एक बार फिर पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था और बलूचिस्तान में जारी अलगाववादी संघर्ष की गंभीरता को उजागर कर दिया है।कैसे दिया हमले को अंजाम?प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, हमलावरों ने अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल करते हुए पुलिस थाने को पूरी तरह घेर लिया था। हमला इतना अचानक और भीषण था कि सुरक्षाकर्मियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। BLA के आतंकियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिसमें मौके पर ही पुलिसकर्मियों की जान चली गई। हमले के बाद आतंकी हथियार लूटकर और पुलिस स्टेशन में भारी तबाही मचाकर आसानी से फरार होने में कामयाब रहे। घटना के बाद इलाके में भारी सुरक्षाबलों की तैनाती कर दी गई है और सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।पाकिस्तान के लिए क्यों है यह बड़ा सिरदर्द?बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी द्वारा किए गए इस हमले को सुरक्षा विशेषज्ञ पाकिस्तान सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती मान रहे हैं। बलूचिस्तान में लंबे समय से चल रहा विद्रोह अब और अधिक हिंसक होता जा रहा है। विशेष रूप से पुलिस और सेना के जवानों को निशाना बनाना यह दर्शाता है कि विद्रोही गुट अब सरकारी तंत्र को सीधे चुनौती दे रहे हैं। इस हमले के बाद स्थानीय लोगों में भी डर का माहौल है और पाकिस्तान सरकार की विफलता पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।क्षेत्र में तनाव और भविष्य के हालातइस हमले के बाद बलूचिस्तान के हालात और भी नाजुक हो गए हैं। सुरक्षा एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि इतनी बड़ी संख्या में हथियारबंद आतंकी बिना किसी खुफिया जानकारी के कैसे थाने तक पहुंच गए। BLA ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है, जिससे साफ है कि वे सुरक्षा बलों के खिलाफ अपनी आक्रामक रणनीति को और तेज करने वाले हैं। आने वाले दिनों में बलूचिस्तान में सुरक्षा कड़ी की जा सकती है, लेकिन यह घटना साबित करती है कि पाकिस्तान के इस इलाके में शांति अभी काफी दूर है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 8 Jul 2026 1:18 pm

गैंगस्टर गोल्डी बराड़ पर अमेरिकी एजेंसी FBI का बड़ा एक्शन, घोषित किया 50 हजार डॉलर का इनाम

अमेरिका की संघीय जांच एजेंसी (एफबीआई) ने सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ को वांटेड घोषित करते हुए उसकी गिरफ्तारी में मदद करने वाली सूचना पर 50,000 अमेरिकी डॉलर (करीब 47 लाख रुपये) तक के इनाम की घोषणा की है।

देशबन्धु 8 Jul 2026 12:59 pm

खामेनेई के जनाजे के बीच अमेरिका का बड़ा हमला, ईरान के 80 से अधिक ठिकानों पर बरसाए बम!

ईरान की ओर से व्यापारिक जहाजों के निशाना बनाए जाने के बाद अमेरिका ने भी ईरान के 80 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से कहा गया कि ये हमले सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों से किए गए।

देशबन्धु 8 Jul 2026 11:37 am

ईरान पर अमेरिका का डबल अटैक! एयरस्ट्राइक के साथ तेल पर भी वार

संयुक्त राज्य अमेरिका ने मंगलवार को 80 से अधिक ईरानी सैन्य ठिकानों पर सेंटकॉम के नए हवाई हमले शुरू किए। साथ ही, उसने अमेरिकी ट्रेजरी का वह महत्वपूर्ण लाइसेंस भी रद्द कर दिया

देशबन्धु 8 Jul 2026 10:18 am

ट्रंप का बड़ा ऐलान! सीरिया से हटेंगे अमेरिकी प्रतिबंध

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार सीरिया पर लगे प्रतिबंध हटा देगी। उन्होंने सीरिया को एक दोस्त देश बताया और कहा कि तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने सीरिया की नई सरकार के साथ रिश्ते बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई है।

देशबन्धु 8 Jul 2026 8:30 am

होर्मुज स्‍ट्रेट में तीन टैंकरों पर हमले, सऊदी और कतर के जहाजों को नुकसान

यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) ने मंगलवार को बताया कि होर्मुज स्‍ट्रेट से गुजरने वाले तेल टैंकरों पर तीन अलग-अलग हमले हुए हैं। इन तीनों घटनाओं में किसी के घायल होने की खबर नहीं है

देशबन्धु 8 Jul 2026 7:50 am

नाटो शिखर सम्मेलन में ट्रंप ने एकजुटता पर उठाए सवाल, बोले- जरूरत पड़ने पर किसी ने साथ नहीं दिया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को आरोप लगाया कि ⁠उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के कई सहयोगी देशों ने ईरान में अमेरिका के सैन्य अभियान के दौरान साथ देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि नाटो में जिम्मेदारियों का बोझ बराबर नहीं बंटता।

देशबन्धु 8 Jul 2026 7:30 am