डिजिटल समाचार स्रोत

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जनवरी से मई तक, चीनी रेलवे ने 1.67 अरब टन माल का परिवहन किया

चाइना रेलवे ग्रु के अनुसार, इस वर्ष जनवरी से मई तक, चाइना रेलवे ने कुल 1.67 अरब टन माल का परिवहन किया, जो साल दर साल 1.8 प्रतिशत अधिक है

देशबन्धु 15 Jun 2026 3:04 am

पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने नीस में विला केर्लियोस का किया दौरा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने फ्रांस के नीस में विला केर्लियोस का दौरा किया। दोनों नेता विला केर्लियोस में घूमते हुए हल्की-फुल्की बातचीत करते नजर आए।

देशबन्धु 14 Jun 2026 11:09 pm

बेरूत पर इजरायली हमला: ट्रंप का गुस्सा फूटा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार सुबह लेबनान की राजधानी बेरूत पर हुए इजरायली हवाई हमले पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है

देशबन्धु 14 Jun 2026 10:01 pm

आज का एक्सप्लेनर:भारतीय नाविकों के मारे जाने का अमेरिका को पछतावा नहीं, उल्टा ‘चेतावनी’ दे रहा; क्या भारत ने मजबूती से बात नहीं रखी

पिछले हफ्ते अमेरिकी हमलों में 3 भारतीय नाविकों की मौत हो गई। विदेश मंत्री जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से फोन पर बात की और कड़ा विरोध दर्ज कराया। लेकिन इसी बातचीत का जो ब्यौरा रूबियो ने दिया, उस पर भारत में हंगामा मचा है। इसी से जुड़े 5 जरूरी सवालों के जवाब; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: अमेरिकी हमले में भारतीय नाविकों की मौत का पूरा मामला क्या है?जवाबः 8 जून 2026 की दोपहर करीब सवा दो बजे। ओमान की खाड़ी में डूबते जहाज से एक आवाज गूंजी- सर, ये मोटर टैंकर मैरिवेक्स है। जहाज डूब रहा है। थोड़ी देर बाद एक और आवाज आई- ‘सभी 24 क्रू सदस्य भारतीय हैं। प्लीज जल्दी मदद करो।’ इसके बाद ओमान के मिलिट्री हेलीकॉप्टरों और इंडियन कोस्ट गार्ड की मदद से सभी को सुरक्षित निकाल लिया गया। दो दिन बाद ही ‘MT सेटेबेलो’ नाम के जहाज पर भी हमला हुआ। इसमें सवार 28 में से 24 क्रू मेंबर्स भारतीय थे। इनमें 3 की मौत हो गई। तीसरा हमला 11 जून को ओमान तट के पास 20 भारतीय नाविकों वाले एमटी जलवीर पर हुआ। जहाज के इंजन वाले हिस्से पर दो हेलफायर मिसाइल दागी गईं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने खुद इन तीनों हमलों की जिम्मेदारी ली। सेटेबेलो और जलवीर पर हमले का वीडियो भी शेयर किया, जिसमें भारतीयों की मौत हुई थी। शिपिंग मिनिस्टर सर्बानंद सोनोवाल के मुताबिक, 10 जून को मारे गए तीनों भारतीय नागरिक आदित्य शर्मा, शिवानंद चौरसिया और पटनाला सुरेश के शव फिलहाल ओमान में हैं। विदेश मंत्रालय के सहयोग से जल्द भारत लाकर परिवारों को सौंपा जाएगा। सवाल-2: भारत ने अब तक इस मामले पर क्या रुख अपनाया है?जवाबः भारत ने 10 जून को सेटेबेलो पर हुए हमले के विरोध में अमेरिका के कार्यवाहक राजदूत जेसन मीक्स को तलब किया और चिंता जताई। जलवीर पर हमले के बाद एक बार फिर मीक्स को तलब किया गया। विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी कर हमलों की निंदा की। बयान में कहा, 'इस क्षेत्र में शिपिंग पर लगातार हमले की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं और इसकी सीधी वजह इस इलाके में चल रहा संघर्ष है। जल्द से जल्द अंतर्राष्ट्रीय समुद्री रास्तों से बिना रुकावट के दोबारा व्यापार शुरू होना चाहिए।' हालांकि इसमें अमेरिका का कहीं जिक्र नहीं था। हालांकि देश में बढ़ते आक्रोश के बीच 12 जून को भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से फोन पर बात कर हमलों पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने एक्स पर बताया, ‘आज शाम अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात हुई। मैंने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना के हमलों के खिलाफ़ भारत का कड़ा विरोध दोहराया, जिनमें तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई। कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाने वाली ऐसी घातक कार्रवाई किसी भी तरह से उचित नहीं है।’ सवाल-3: क्या अमेरिका को भारतीय नाविकों के मारे जाने का पछतावा है?जवाबः अमेरिका की हालिया प्रतिक्रियाओं से नहीं लगता कि अमेरिका को इसका कोई पछतावा है… भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिबल के मुताबिक मार्को रूबियो का बयान बहुत ज्यादा कठोर था। उन्होंने भारतीय नाविकों की मौत को सही ठहराने की कोशिश की। एक मित्र देश के निहत्थे नागरिकों की मौत पर उन्होंने कोई दुख नहीं जताया। कांग्रेस नेता और लोकसभा सांसद शशि थरूर ने भी X पर लिखा, ‘रूबियो का बयान पढ़कर झटका लगा। इसमें भारतीय नागरिकों की मौत पर न तो दुख जताया गया है और न ही संवेदना। भारत का कोई 'मित्र' और रणनीतिक साझेदार इतना असंवेदनशील कैसे हो सकता है?’ कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि अमेरिका ने न तो लोगों की मौत को स्वीकार किया, न ही जिम्मेदारी ली और न कोई पछतावा जाहिर किया। इसके बजाय, विदेश मंत्री रुबियो ने कथित तौर पर चेतावनी जारी कर दी। कहा अमेरिकी मिलिट्री के आदेशों का पालन न करना 'बर्दाश्त नहीं' किया जाएगा। यह आदेश की भाषा है, पछतावे की नहीं।’ सवाल-4: क्या भारत ने अपने नाविकों की मौत का मुद्दा मजबूती से नहीं उठाया?जवाबः जियो-पॉलिटिक्स, डिप्लोमेसी और डिफेंस एक्सपर्ट्स भारत सरकार के रुख पर सवाल उठा रहे हैं। सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च में स्ट्रैटेजिक स्टडीज के प्रोफेसर डॉ. ब्रह्म चेल्लानी के मुताबिक, ‘भारतीय नाविकों की मौत पर विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया कमजोर ही है। इसे 'उचित नहीं' बताया गया है, मानो निहत्थे नाविकों की हत्या कोई ऐसी बात हो जिस पर बस बहस की जा सकती है। अभी भी अमेरिका से माफी मांगने या पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा देने की कोई मांग नहीं की गई है। ऐसा कोई संकेत नहीं है कि नई दिल्ली इस मामले को सामान्य डिप्लोमैटिक औपचारिकताओं से आगे ले जाने का इरादा रखती है।’ भारतीय सेना से रिटायर्ड मेजर जनरल जी. डी. बख्शी के मुताबिक, ‘अब तक 100 से ज्यादा चीनी जहाज अमेरिकी नाकेबंदी पार कर चुके हैं, लेकिन न तो किसी चीनी जहाज पर हमला हुआ है और न ही रूसी जहाज पर। इसके उलट भारत, जिसने अमेरिका के साथ अच्छे संबंध बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, उसके जहाजों को निशाना बनाया गया। जब भारत में लोगों का गुस्सा बढ़ा, तब जाकर विदेश मंत्रालय ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।’ द हिन्दू अखबार के अंतरराष्ट्रीय संपादक स्टैनली जॉनी ने एक्स पर लिखा है, 'भारत यूक्रेन पर रूसी हमले की निंदा में किसी का नाम नहीं लेता समझ आता है, कतर पर इजराइली बमबारी की निंदा में नाम लेने से बचना भी समझ आता है। लेकिन भारत उस देश का नाम क्यों नहीं लेता, जिसने भारतीय नागरिकों को ले जा रहे जहाजों पर मिसाइलें दागीं और उनमें से तीन भारतीयों की जान ले ली। वह भी भारत के पड़ोस के समुद्री क्षेत्र में।’ पवन खेड़ा के मुताबिक, ‘भारत को मांग करनी चाहिए थी कि अमेरिका अपने हमले में तीन युवा भारतीय नाविकों की हत्या के लिए बिना शर्त माफी मांगे।’ हालांकि यूनाइटेड स्टेट्स इंडिया पॉलिटिकल एक्शन कमेटी के डायरेक्टर और विदेश मामलों के जानकार रोबिंदर सचदेव का मानना है, 'कूटनीतिक तरीके से भारत सरकार का रुख सबसे मजबूत है। ऐसे मामलों में सरकार बैलेंस रुख ही रखती है, लेकिन आम लोग न्यूयॉर्क में केस फाइल कर सकते हैं। पीड़ित परिवार अमेरिका से मुआवजा भी मांग सकता है।' सवाल-5: इससे पहले अमेरिका के साथ ऐसी क्राइसिस हुई, तब क्या हुआ?जवाबः भारत पहले कई बार अमेरिका के सामने कड़ा डिप्लोमैटिक प्रतिरोध दर्ज करा चुका है - 1. 2009: भारतीय डिप्लोमैट देवयानी खोब्रागड़े की गिरफ्तारी 2. 2009-2011: अमेरिकी एयलाइंस का दो बार पूर्व राष्ट्रपति कलाम की तलाशी लेना 3. 2010: साड़ी पहने होने के चलते भारतीय राजदूत की तलाशी *****रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास-----------------------------------------------------------ये खबर भी पढ़ें…पापा के कहने पर 'किलर' बने:5 बच्चे पैदा करने की जिद में 3 शादियां; ट्रम्प सनकी हैं या साइकोपैथ, 80वें जन्मदिन पर पूरा एनालिसिस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कमोबेश हर रोज दुनिया को अपनी बातों और हरकतों से हैरान करते हैं। वो खुद भी कहते हैं कि मेरा अनुमान लगाना नामुमकिन है। हालांकि जब उनके बर्ताव, हरकतों और बयानों को साथ जोड़कर देखते हैं, तो एक पैटर्न नजर आता है कि आखिर ट्रम्प क्या और क्यों सोचते हैं? पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 14 Jun 2026 6:36 pm

ट्रंप ने कहा 'ईरान संग समझौता ओबामा के जेसीपीओए से बेहतर', आखिर क्या थी वो डील?

अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए जेसीपीओए समझौते से बेहतर डील करने का ऐलान किया। 2015 में ईरान और छह विश्व शक्तियों के बीच एक ऐतिहासिक परमाणु समझौता हुआ था, जिसे ज्वाइंट कंप्रेहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (जेसीपीओए), यानी 'संयुक्त व्यापक कार्ययोजना' (आसान भाषा में ईरान परमाणु समझौता) कहा जाता है। इसका उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना और बदले में उस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में राहत देना था।

देशबन्धु 14 Jun 2026 6:13 pm

भूकंप से काँपा फिलीपींस, 61 मौतें, 75 हजार से ज्यादा घर मलबे में तब्दील

फिलीपींस के दक्षिणी द्वीप मिंडानाओ के तट के पास 8 जून को आए 7.8 तीव्रता के भीषण भूकंप में कम से कम 61 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 40 लोग अब भी लापता हैं। इस आपदा में 1,403 लोग घायल हुए हैं। यह जानकारी रविवार को फिलीपींस की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन परिषद (एनडीआरआरएमसी) ने दी।

देशबन्धु 14 Jun 2026 1:44 pm

पापा के कहने पर 'किलर' बने:5 बच्चे पैदा करने की जिद में 3 शादियां; ट्रम्प सनकी हैं या साइकोपैथ, 80वें जन्मदिन पर पूरा एनालिसिस

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कमोबेश हर रोज दुनिया को अपनी बातों और हरकतों से हैरान करते हैं। वो खुद भी कहते हैं कि मेरा अनुमान लगाना नामुमकिन है। हालांकि जब उनके बर्ताव, हरकतों और बयानों को साथ जोड़कर देखते हैं, तो एक पैटर्न नजर आता है कि आखिर ट्रम्प क्या और क्यों सोचते हैं? आज ट्रम्प का 80वां जन्मदिन है। बचपन से अब तक के किस्सों में छुपी उनकी साइकोलॉजी, जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… ------------ ये खबर भी पढ़िए… भारतीय क्रू वाले जहाजों पर लगातार मिसाइल क्यों मार रहा अमेरिका; क्या ईरान से गुपचुप तेल खरीद रहा है भारत सेटेबेलो नाम के इस जहाज पर सवार 24 क्रू मेंबर्स भारतीय थे। इनमें से 3 की मौत हो चुकी है। 8 जून और 11 जून को भी अमेरिका ने भारतीय क्रू मेंबर्स वाले जहाजों पर हमले किए हैं। आखिर भारतीय क्रू वाले जहाजों पर मिसाइल क्यों मार रहा है अमेरिका? पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 14 Jun 2026 5:29 am

22 मिनट ओले गिरे, कश्मीर का 30% सेब बर्बाद:किसानों के 400 करोड़ डूबे, बोले- इतने बेबस हैं, बेटी की शादी टालनी पड़ेगी

अनंतनाग की रहने वाली गुलशन बानो जमीन पर गिरे सेब नहर में फेंक रही थीं। अचाबल में उनका चार कनाल (आधा एकड़) का बाग है। 5 और 9 जून को हुई तूफानी बारिश और ओलों ने लगभग 90% फसल बर्बाद कर दी। सेब टूटकर गिर गए और बेचने लायक भी नहीं बचे। गुलशन कहती हैं, ‘यही रोजी-रोटी का अकेला जरिया है। इस साल लगा था कि अच्छी फसल होगी, लेकिन 22 मिनट के तूफान ने सारे सपने तोड़ दिए। अक्टूबर-नवंबर में बेटी की शादी करने वाले थे, लेकिन अब लगता है कि टालनी ही पड़ेगी।‘ कश्मीर में इस दर्द से गुजरने वाली गुलशन अकेली नहीं है। यहां एक महीने में 7 बार ओले गिरे, जिससे सेब कारोबार से जुड़े 12 लाख लोगों की रोजी-रोटी मुश्किल में आ गई है। हर साल कश्मीर से करीब 20 लाख मीट्रिक टन सेब देशभर में जाता है, लेकिन इस साल 7 लाख मीट्रिक टन बर्बाद हो गया। इससे सेब कारोबारियों को 300 से 400 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। ‘ऐसी बेबसी पहले नहीं देखी, सुसाइड का ख्याल आ रहा’ कश्मीर देश में सेब का सबसे बड़ा उत्पादक है। कुल सेब का 70% हिस्सा यहीं होता है। हर साल इससे करीब 8 से 10 हजार करोड़ रुपए का रेवेन्यू मिलता है। पिछले दो महीनों में बारिश और ओले गिरने से बारामूला, शोपियां, अनंतनाग और कुलगाम समेत कई जिलों में सेब की 80-85% फसल बर्बाद हो गई। अनंतनाग के अचाबल में गुलशन का परिवार इसी बर्बादी से परेशान है। वे कहती हैं, ‘किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए बैंक से 2 लाख रुपए का लोन लिया था। खाद भी उधार में खरीदी। 50 हजार रुपए का बिजली बिल बकाया है। अब सेब की फसल बर्बाद होने के बाद हम टूट चुके हैं। पहली बार इतने बेबस हैं कि खुदकुशी का ख्याल आ रहा है।’ ‘22 मिनट ओले गिरे और साल भर की मेहनत बर्बाद’ हम शोपियां पहुंचे तो फैयाज अहमद भट्ट अपने बगीचे में गिरे सेब इकट्ठा कर रहे थे। यहां एक दिन पहले ही ओले गिरे थे। फैयाज का 8 कनाल, यानी 1 एकड़ का बाग है। वे कहते हैं, ‘सीजन में 5-6 बार ओले गिरे हैं। अब ये सेब B और C कैटेगरी में भी बिकने लायक नहीं है। पेड़ों पर बचे फल भी किसी काम के नहीं हैं।’ वे नीचे गिरे फलों को दिखाते हुए कहते हैं, ‘देखिए, हर सेब पर निशान है। ऐसे सेब बाजार में नहीं बिकते। जून में फल आकार लेना शुरू करते हैं, लेकिन सिर्फ 22 मिनट ओले गिरने ने सब बर्बाद हो गया।’ फैयाज को लगातार दूसरी साल नुकसान उठाना पड़ा है। वे बताते हैं, ‘पिछले साल अच्छी फसल हुई थी, लेकिन हम उसे बाजार तक नहीं पहुंचा सके। रामबन के पास जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे करीब डेढ़ महीने बंद रहा था। सेब बागानों में रखे-रखे ही खराब हो गए और उन्हें नालों में फेंकना पड़ा। इस साल बहुत उम्मीद थी, लेकिन मौसम ने सब तबाह कर दिया।‘ ‘घर-परिवार का हर छोटा-बड़ा खर्च इसी बाग से चलता है। तीन बच्चे हैं। उनकी पढ़ाई का खर्च भी इसी से निकलता है। फल ही बर्बाद हो गए, तो ये सब काम कैसे होंगे। खाद और कीटनाशकों के लिए पहले ही 50 हजार रुपए उधार ले रखा है। अब समझ नहीं आ रहा कि दुकानदारों का कर्ज चुकाएं या परिवार का पेट भरें।‘ ‘3 से 4 लाख रुपए कमाते थे, इस बार 30 हजार भी नहीं मिलेंगे’ फैयाज को इस साल करीब 3 लाख रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है। वे बताते हैं, ‘हर साल बाग से 3 से 4 लाख रुपए कमा लेता था, लेकिन इस बार 30 हजार रुपए भी नहीं मिल पाएंगे। बाग में हुई तबाही देखकर दिल इतना टूट जाता है कि बाग तक जाने का मन नहीं करता।‘ केंद्र सरकार से कश्मीर के सेब उद्योग के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग करते हुए वो कहते हैं, ‘हमें कर्ज माफी, मुआवजा और आर्थिक मदद चाहिए, ताकि बच्चों की पढ़ाई जारी रहे और हम गुजर-बसर कर सकें।‘ ’बच्चों का पेट भरें या पढ़ाई का इंतजाम करें’ कुलगाम के रहने वाले अब्दुल रशीद नजर के पास करीब 6 कनाल का बाग है। चार बेटियों और एक बेटे वाला परिवार इसी से चलता है। वे बताते हैं, ‘आमतौर पर सीजन में सेब के 400 से 500 बॉक्स तैयार हो जाते हैं, लेकिन इस बार लगातार दूसरे साल नुकसान उठाना पड़ रहा है।’ ‘पेड़ों पर सिर्फ 10% फल ही बचे हैं, लेकिन वो भी खराब हो चुके हैं। इस साल आमदनी की कोई उम्मीद नहीं है। बच्चों की पढ़ाई खतरे में पड़ गई है। फीस, किताबें, यूनिफॉर्म और स्कूल आने-जाने का खर्च कैसे उठाएंगे।‘ रशीद ने भी किसान क्रेडिट कार्ड से करीब 2 लाख का कर्ज लिया है, जो अगस्त तक चुकाना है। वे कहते हैं, ‘समझ नहीं आ रहा कि अब बच्चों का पेट भरें, पढ़ाई का इंतजाम करें या कर्ज चुकाएं।’ जम्मू-कश्मीर में पिछले साल करीब 21 लाख मीट्रिक टन सेब की पैदावार हुई थी। 2024 में ये आंकड़ा करीब 20 लाख मीट्रिक टन था। इस इंडस्ट्री से 12 लाख लोगों की रोजी-रोटी चलती है। जम्मू-कश्मीर की GDP में इसका योगदान 8-10% है। बाढ़ और हाई-वे बंद रहने के कारण 2025 में कश्मीर की एप्पल इंडस्ट्री को लगभग 600 से 700 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। इस साल भी ओले और बारिश की वजह से 300 से 400 करोड़ रुपए नुकसान होने का अनुमान है। कश्मीर फ्रूट ग्रोअर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष फैयाज अहमद मलिक कहते हैं कि ये साल खेती और किसानों के लिए सिर्फ आपदा लेकर आया। सेब की बागवानी से जुड़े 12 लाख से ज्यादा लोग इससे प्रभावित हुए हैं। अप्रैल में कुलगाम, नेहामा और शोपियां में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। 12 मई को बारामूला जिले के क्रीरी, वगोरा, कुंजर, अंडरगाम और लोलीपोरा इलाकों में ओला गिरने से बाग तबाह हुए हैं। फैयाज कहते हैं, ‘हम लंबे समय से फसल बीमा योजना लागू करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अगर मार्च में ही योजना लागू कर दी गई होती, तो प्रभावित किसानों को अब तक मुआवजा मिल चुका होता।‘ …………….. ये खबर भी पढ़ें… वंदे भारत से 5 घंटे में जम्मू से श्रीनगर अब जम्मू ट्रेन के जरिए सीधे कश्मीर घाटी से जुड़ गया है। उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना के तहत जम्मू से श्रीनगर तक वंदे भारत एक्सप्रेस चलने से घाटी में बदलाव दिख रहा है। जम्मू-श्रीनगर के बीच 270 किमी की दूरी है। यहां रोड कनेक्टिविटी हमेशा बड़ी चुनौती रही है। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 14 Jun 2026 5:26 am

“अमेरिका-ईरान डील पर ट्रंप का दावा” : होर्मुज जलमार्ग खुलेगा सभी के लिए

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच एक अहम समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर होंगे

देशबन्धु 14 Jun 2026 4:44 am

फ्रांस में पीएम मोदी से मुलाकात करेंगे राष्ट्रपति ट्रंप, प्रस्तावित व्यापार समझौते पर चर्चा की उम्मीद: व्हाइट हाउस

फ्रांस में अगले हफ्ते जी7 शिखर सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी फ्रांस पहुंचने वाले हैं।

देशबन्धु 14 Jun 2026 3:30 am

चीन ने अमेरिका द्वारा कुछ चीनी कंपनियों को 'चीनी सैन्य उद्यम सूची' में शामिल करने का जवाब दिया

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में कई चीनी कंपनियों को चीनी सैन्य उद्यम सूची में शामिल किया, चीनी वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने शनिवार को इस बारे में कहा कि चीन इस पर तीव्र असंतोष और दृढ़ विरोध करता है।

देशबन्धु 14 Jun 2026 3:20 am

आज का एक्सप्लेनर:148 साल पुराने सुपर अल नीनो जैसे हालात, तब 55 लाख मौतें हुईं; समुद्र का पानी 2°C खौलने से कैसे तबाही मच जाती है

1876-78 का दौर। भारत में 55 लाख से ज्यादा लोग अकाल मौत मारे गए। उस तबाही की जड़ में था- सुपर अल नीनो। प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से 3 डिग्री सेल्सियस ज्यादा उबला और पूरी दुनिया का मौसम पलट गया। अब 148 साल बाद वैसी ही दस्तक फिर सुनाई दे रही है। 11 जून 2026 को अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA ने आधिकारिक ऐलान किया कि अल नीनो शुरू हो चुका है। जल्द ही ये 'सुपर अल नीनो' में तब्दील हो सकता है। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक इस मानसून सामान्य से 10% कम बारिश होगी। सूखे की आशंका 60% पहुंच गई है। पीएम मोदी ने भी राज्यों से कहा- अल नीनो के खतरे के लिए तैयार रहें। आखिर ये अल नीनो और सुपर अल नीनो क्या है, दूर समुद्र का पानी गर्म होने से भारत का मौसम कैसे बदलता है और इससे आपके खाना-पानी और बिजली पर कितना असर पड़ेगा; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… ****** ग्राफिक्स- दृगचंद्र भुर्जी और अंकलेश विश्वकर्मा ------------- मौसम से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… 6 घंटे में मार सकती है बांदा की गर्मी; 117 डिग्री बुखार जितना तापमान; रेगिस्तान से भी गर्म क्यों है ये इलाका यूपी का बांदा अप्रैल के आखिरी 10 में से 5 दिनों में दुनिया का सबसे गर्म शहर रहा है। 27 अप्रैल को तापमान रिकॉर्ड 47.6 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। ये इस गर्मी का सबसे ज्यादा पारा था। अगर इसमें कोई इंसान खुले आसमान में रहे, तो 30 मिनट से 6 घंटों के बीच उसकी मौत हो सकती है। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 13 Jun 2026 4:50 pm

जर्मन राष्ट्रपति के आवास में सेक्स डॉल आर्ट पर छिड़ी बहस

जर्मनी के राष्ट्रपति भवन ‘बेलव्यू पैलेस’ को मरम्मत के लिए बंद करने से पहले, वहां एक कला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है. इस प्रदर्शनी में सुर्खियां बटोरने वाली कांसे की मूर्ति के अलावा भी कई आधुनिक कलाकृतियां हैं

देशबन्धु 13 Jun 2026 10:59 am

फ्रांस में G7 शिखर सम्मेलन में हो सकती है मोदी-ट्रंप की मुलाकात; क्या है एजेंडा?

15 जून को दुनिया की सात सबसे बड़ी विकसित अर्थव्यवस्थाओं के समूह यानी जी7 नेताओं का शिखर सम्मेलन होने जा रहा है

देशबन्धु 13 Jun 2026 10:31 am

भारत ने अमेरिका-ईरान बातचीत में शुरुआती सफलता का किया समर्थन: विदेश मंत्री जयशंकर

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने उम्मीद जताई है कि अमेरिका-ईरान बातचीत से जल्द ही कोई कामयाबी मिलेगी

देशबन्धु 13 Jun 2026 8:30 am

ट्रंप का दावा: अमेरिकी सेना ने 'ट्रेन डी अरागुआ' के कुख्यात सरगना को मार गिराया

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के अपराधी गिरोह 'ट्रेन डी अरागुआ' के नेता के मारे जाने का दावा किया है

देशबन्धु 13 Jun 2026 8:19 am

अमेरिका-ईरान डील को लेकर 'फेक मीडिया रिपोर्ट' पर भड़के वेंस, बोले- लोग झूठे पोस्ट पर कर रहे भरोसा

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने पुष्टि की है कि इस्लामाबाद एमओयू अपने आखिरी चरण में पहुंच चुका है

देशबन्धु 13 Jun 2026 8:10 am

हिंदू बनकर दोस्ती, फिर जन्नत जाने के लिए गैंगरेप:साहिल निकला फहीम, पीड़ित से बोला- गोमांस खाओ, ये मुस्लिम बनने की शर्त

14 मई 2026, दिल्ली के जामिया नगर थाने में 23 साल की लड़की ने 6 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई। उसने मेरठ के रहने वाले फहीम, उसके मां-बाप और दो भाई के खिलाफ अगवा करने, बंधक बनाने, गैंगरेप, ब्लैकमेलिंग और धर्मांतरण का दबाव बनाने का आरोप लगाया। लड़की हिंदू है। उसने बताया कि 32 साल के फहीम ने साहिल बनकर पहले दोस्ती की। फिर मेरठ में अपने घर ले गया। वहां फहीम, उसके पिता, भाई और मौलवी ने रेप किया। वे कहते थे कि हिंदू लड़की के साथ ऐसा करने से जन्नत मिलती है। पूरा परिवार बुर्का पहनने और गोमांस खाने के लिए दबाव बनाता था। उनके चंगुल से निकलने में पांच साल लग गए। इंस्टाग्राम पर दोस्ती, फिर नशा देकर अश्लील वीडियो बनाए पीड़ित ने बताया, ‘नवंबर 2021 में इंस्टाग्राम पर साहिल की रिक्वेस्ट आई थी। कुछ ही महीनों में दोस्ती गहरी हो गई। मार्च 2022 में साहिल ने मुझे दिल्ली के बाटला हाउस (जाकिर नगर) बुलाया।’ ‘उससे मिलने पहुंची, तो बातों में फंसाकर दोस्त अली के फ्लैट पर ले गया। अली से मेरे लिए जूस मंगाया। उसे पीते ही नशा होने लगा। इसके बाद साहिल और अली ने मेरा रेप किया। वीडियो भी बना लिया।’ ’होश आया, तो साहिल ने कहा, तुम्हारे लिए सरप्राइज है। उसने सारे वीडियो और फोटो दिखाईं। बोला- किसी को बताना नहीं। जब बुलाऊं, तो आ जाना, वरना तुम्हारे मां-बाप को सारी रिकॉर्डिंग भेज दूंगा। इन्हें वायरल भी कर दूंगा।’ पिस्टल दिखाकर किडनैपिंग, साहिल के घर पहुंचकर पता चला वो मुस्लिम है पीड़ित ने आगे बताया, ‘साहिल ने मुझे एक बार फिर बाटला हाउस बुलाया। पिस्टल दिखाकर धमकाया और दोस्त गोविंदा के साथ मेरठ के साठला गांव ले गया। यहां साहिल का घर है। वहां पहुंचने पर पता चला कि वो मुसलमान है। उसका असली नाम फहीम है। अभी मेरे साथ जितना बुरा हुआ, उससे ज्यादा बुरा होना बाकी था।’ 'उसी रात साहिल और फिर उसके अब्बू ने मेरे साथ संबंध बनाए। साहिल से कुछ कह पाती, उससे पहले ही वो बिना बताए सहारनपुर चला गया। मैंने साहिल की मां तस्लीमा और बहन इकरा से रोते हुए घर भेजने की गुजारिश की, लेकिन वे नहीं मानीं। दोनों ने मिलकर मारा-पीटा और कहा- अब तुम्हें यहीं रहना है।’ ’एक दिन साहिल के परिवारवालों ने मां को जबरदस्ती फोन कराया। कहा कि मैं उनसे बोलूं कि मैंने कोर्ट मैरिज कर ली है और अब मुझे न तलाशें। मैंने उनके दबाव में आकर यही सब कह दिया। इसके बाद मेरी मां ने मुझे खोजना भी बंद कर दिया। उन्हें लगा सब मेरी मर्जी से हो रहा है।’ साहिल से निकाह पढ़वाया, मौलवी बोला- खुशनसीब है, मुसलमान के घर आ गई पीड़ित ने आगे बताया, ‘करीब 7 दिन बाद साहिल की मां और बहन मुझे अगवानपुर के एक मदरसे ले गईं। साहिल के मामा हाफिज मंजूर वहां मौलवी थे। उसने मुझसे मिलते ही कहा, ‘तू खुशनसीब है कि मुसलमान घर में आ गई। अब तुझे जन्नत मिलेगी। मैं अपने घर जाने के लिए रोने लगी, तो बोले- तेरा निकाह फहीम (साहिल) से ही होगा। फिर उससे मेरा निकाह पढ़वा दिया।’ 'साहिल के घरवाले मुझे वापस घर ले आए। मुझे पर गोमांस खिलाने के लिए दबाव बनाते थे। कहते कि ये नहीं खाओगी, तो मुस्लिम कैसे बनोगी। मुझसे मांस धुलवाते और पकाने के लिए कहते। एक दिन मेरे सामने ही मुर्गा काटा और उसका खून मेरे ऊपर डाल दिया।’ कितने लोग मेरे कमरे में आए, गिनती भी याद नहीं पीड़ित ने बताया- ‘निकाह के बाद साहिल के परिवार वाले मुझे एक मौलवी के पास ले गए। उसने मेरे साथ गलत हरकत की। फिर वो आए दिन घर आने लगा। परिवार वाले उसे मेरे कमरे में भेज देते। वो जोर-जबरदस्ती करता, लेकिन कोई मदद करने नहीं आता। फिर वो अपने साथ और लोगों को भी लाने लगा।‘ ‘मैंने विरोध किया तो मौलवी ने कहा, ये सब फ्री में नहीं करते, तेरी सास को पैसा देते हैं। तब मुझे समझ आया कि मेरी सास मुझसे धंधा करा रही है। वो कहती थी कि हमारे यहां हिंदू लड़की लाने का मतलब जन्नत जाने का रास्ता साफ करना है। वो अपने दूसरे दोनों बेटों से भी हिंदू लड़की लाने को कहती थी।' ‘गांव में और भी हिंदू लड़कियां, जिन्हें लड़के फंसाकर लाए’ गांव में किसी को पता नहीं चला कि आपको जबरदस्ती घर में रखा गया है? पीड़ित कहती हैं, ‘सब जानते थे, लेकिन किसी को ऐतराज नहीं था। मुस्लिमों के गांव में और भी हिंदू लड़कियां हैं, जो मेरी तरह फंसाकर लाई गई हैं। गांव के लोग मुझे परिवार के मुताबिक रहने की सलाह देते।‘ ‘3 महीने बाद प्रेग्नेंट हो गई, तो बच्चा रखने का दबाव डाला गया। बोला- अगर इसे कुछ हुआ, तो तू भुगतेगी। गांव के प्रधान फिरोज के जरिए मेरे आधार कार्ड पर पिता का नाम हटवाकर साहिल का नाम लिखवा दिया। मार्च 2023 में मेरे बेटी हुई। अब वो 3 साल की है।‘ ‘बेटी को लेकर ट्रेन से कटने गई तो अजनबी ने बचाया’ दिल्ली वापस कैसे लौटीं? पीड़ित ने बताया, ‘नवंबर 2024 की बात है। साहिल की परिवार के साथ कुछ खटपट हो गई। वो मुझे और बेटी को लेकर बाटला हाउस आ गया। दो ही महीने बाद जनवरी में हथियारों की तस्करी के मामले में उसे जेल हो गई।‘ साहिल के जेल जाने के बाद कहां रहीं? वो बताती हैं, ‘साहिल का परिवार डराता-धमकाता, इसलिए काफी दिनों तक बाटला हाउस में रही। एक दिन हिम्मत करके अपने घर चली गई। वहां भी माता-पिता से सहारा नहीं मिला। पिता शराब पीते हैं। मां अकेले क्या करतीं। साहिल और उसके परिवार से मैं अकेले लड़ते-लड़ते थक गई थी।‘ 'इसी साल 10 मई को बेटी को लेकर ट्रेन से कटने जा रही थी, तभी एक भाई ने रोक लिया। उन्होंने समझाया और मदद का भरोसा दिलाया। तब मैंने साहिल और उसके परिवारवालों के खिलाफ FIR कराई।' फहीम पर कई केस, हिंदू लड़की से निकाह पर गांववाले चुप इसके बाद हम साहिल उर्फ फहीम का बैकग्राउंड जानने के लिए उसके गांव साठला पहुंचे। पांच साल पहले उसका परिवार गांव का घर छोड़ चुका है। कस्बे में एक घर है, वहां ताला लगा है। आसपास रहने वाले फहीम (साहिल) का नाम सुनकर बात करने को तैयार नहीं हुए। ऑफ द रिकॉर्ड ये जरूर बताया कि उसका परिवार क्रिमिनल है। फहीम पर कई केस चल रहे हैं। पिता खुर्शीद पर डबल मर्डर का आरोप है। गांव में रहने वाले माजिद ने ही बात की। वे बताते हैं, 'फहीम पर मवाना थाने से गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई हो चुकी है। लूट के भी केस हैं। रंगदारी मांगने के आरोप लगते रहे हैं। वो सोशल मीडिया पर हथियारों के वीडियो और फोटो डालता है। ' हिंदू लड़की से जबरदस्ती शादी की बात पर माजिद कहते हैं, ‘कोई लड़की किसी के साथ उसके घर आ गई। परिवारवाले उसे बहू बता रहे, तो कोई क्या शक करेगा। हमें जबरदस्ती शादी करने का पता मीडिया से चला।’ गलत तरीके से पीड़ित का आधार कार्ड अपडेट कराने के आरोप में जेल भेजे गए गांव के प्रधान फिरोज जमानत पर बाहर आए हैं। वो कैमरे पर आए बिना कहते हैं, 'फहीम से मेरा कोई संबंध नहीं है। मुझ पर गलत आरोप लगे हैं। इससे ज्यादा कुछ नहीं बता सकता, पुलिस ने केस पर बात करने से मना किया है।' हिंदू लड़की को धोखे में रखकर शादी करने के सवाल पर वो कहते हैं, 'गांव में किसके घर में क्या हो रहा है, प्रधान को नहीं पता चलता। लड़की भी मेरे पास नहीं आई। मुझे खबरों से ही पता चला।’ हमने फहीम के मामा मंजूर हुसैन से भी कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो सकी। पुलिस बोली- 5 आरोपी अरेस्ट, फहीम की बहन और भाई फरार पुलिस ने इस मामले में फहीम समेत 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें अब्बू खुर्शीद, अम्मी तस्लीम, भाई जैद और मौलवी शामिल हैं। एक बहन और भाई फरार हैं। केस की जांच SI शरण्या कर रही हैं। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ चल रही है। मेरठ के गांव में हिंदू लड़कियों को जबरदस्ती लाने के लड़की के आरोप पर कहा कि हर एंगल से छानबीन चल रही है। अभी ज्यादा कुछ नहीं बता सकते। स्टोरी में सहयोग: प्रवेश कुमार, भास्कर सहयोगी ……………………… ये खबर भी पढ़ें… मंत्री के बेटे पर पॉक्सो, RSS-BJP में दरार 17 साल की लड़की और उसके दोस्तों ने मिलकर नए साल की पार्टी रखी। 31 दिसंबर 2025 की रात एक फॉर्मफाउस पर जश्न शुरू हुआ। नाबालिग के साथ एक लड़की और 5 लड़के थे। इनमें एक केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार का 25 साल का बेटा साई भागीरथ भी था। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 13 Jun 2026 5:05 am

ईरान-अमेरिका एमओयू फाइनल होने के बेहद करीब: ईरानी विदेश मंत्री अराघची

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान, अमेरिका के साथ चल रही बातचीत के बीच एक एमओयू को फाइनल करने के बहुत करीब है।

देशबन्धु 13 Jun 2026 3:50 am

झांग क्वोछिंग ने 'विकास के लिए वैश्विक अभिसरण शिखर सम्मेलन' में भाषण दिया

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के केंद्रीय पोलित ब्यूरो के सदस्य, चीनी उप प्रधान मंत्री झांग क्वोछिंग ने वीडियो लिंक के माध्यम से विकास के लिए वैश्विक अभिसरण शिखर सम्मेलन में भाग लिया और भाषण भी दिया।

देशबन्धु 12 Jun 2026 10:56 pm

आज का एक्सप्लेनर:इलॉन मस्क की नेटवर्थ $1 ट्रिलियन पार, अब 174 देशों की GDP से अमीर; 2 बार पाकिस्तान खरीदकर भी छुट्टे बच जाएंगे

अगर आप रोज एक करोड़ रुपए खर्च करें- बिना रुके, बिना छुट्टी लिए। तो इलॉन मस्क की मौजूदा संपत्ति खर्च करने में आपको करीब 26 हजार साल से ज्यादा लगेंगे। 11 जून 2026 को स्पेसएक्स के IPO ने मस्क को वो मुकाम दे दिया, जहां इंसानी इतिहास में कोई नहीं पहुंचा है, यानी पहला ट्रिलियनेयर। आखिर मस्क दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर कैसे बने, ये कितनी बड़ी रकम है और स्पेसएक्स आगे क्या करने वाली है; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: इलॉन मस्क की नेटवर्थ 1 ट्रिलियन डॉलर के पार कैसे पहुंची? जवाब: इलॉन मस्क की स्पेस इंजीनियरिंग कंपनी है स्पेसएक्स। ये रॉकेट, स्पेसक्राफ्ट वगैरह बनाती है। साथ ही ‘स्टारलिंक’ नाम से सैटेलाइट इंटरनेट सर्विसेज भी देती है। फरवरी 2026 में मस्क ने अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी ‘xAI’ को भी इसी में शामिल कर लिया था। AI प्लेटफॉर्म Grok इसी xAI का बनाया हुआ है। स्पेसएक्स अब तक प्राइवेट कंपनी थी, यानी इसके शेयर आम लोग शेयर मार्केट से नहीं खरीद सकते थे। 11 जून 2026 को इसने अमेरिकी शेयर बाजार ‘NASDAQ’ पर अपना IPO लॉन्च किया है। जब कोई कंपनी पहली बार शेयर बाजार में लिस्टेड होने के लिए शेयर जारी करती है, तो उसे IPO यानी ‘इनीशियल पब्लिक ऑफरिंग’ कहते हैं। रॉयटर्स ने कंपनी के दस्तावेजों और फोर्ब्स के अनुमानों के आधार पर हिसाब लगाया है कि जैसे ही स्पेसएक्स शेयर बाजार में ट्रेडिंग शुरू करेगी, मस्क की कुल संपत्ति 1.1 ट्रिलियन डॉलर पार कर जाएगी। ऐसा कैसे होगा, इसे आसान भाषा में समझते हैं… चूंकि IPO लॉन्च होने के बाद लोगों के शेयर खरीदने के चलते उसका प्राइस भी बढ़ता है। फोर्ब्स के मुताबिक, स्पेसएक्स का शेयर शुरुआती प्राइस, यानी 135 डॉलर से 3.5 डॉलर बढ़कर 138.5 डॉलर पहुंच जाए या फिर टेस्ला का शेयर 399 डॉलर से बढ़कर 424 डॉलर का हो जाए, तो मस्क की नेटवर्थ 1 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगी। रुपए में करीब 95.35 लाख करोड़। सवाल-2: एक ट्रिलियन डॉलर से क्या-क्या खरीद सकते हैं मस्क? जवाब: किसी की कमाई कितनी ज्यादा है, इसे समझने का एक तरीका ये है कि उस रकम से क्या-क्या खरीदा जा सकता है। मस्क 1 ट्रिलियन डॉलर की नेटवर्थ से सैद्धांतिक रूप से कई देश खरीदने से लेकर मंगल ग्रह पर कॉलोनी तक बसा सकते हैं… दुनिया के कई देश खरीद सकते हैं मस्क (थ्योरिटिकली) मंगल ग्रह पर 10 लाख लोगों का शहर बसा सकते हैं एक खुद की न्यूक्लियर पावर्ड नेवी बना सकते हैं सभी रईस स्पोर्ट्स लीग और सैकड़ों टीमें खरीद सकते हैं हॉलीवुड के सबसे अमीर 5 फिल्म स्टूडियो खरीद सकते हैं दुनिया की सबसे अमीर 10 एयरलाइंस खरीद सकते हैं मुंबई शहर का हर घर खरीद सकते हैं सवाल-3: स्पेसएक्स इतनी रकम जुटाकर आगे क्या-क्या करने वाली है? जवाब: स्पेसएक्स इस रकम को 3 बड़े कामों में लगाएगी… 1. स्टारलिंक के लिए नए V3 सैटेलाइट खरीदेगी 2. अंतरिक्ष में AI डेटा सेंटर्स बनाएगी 3. रॉकेट सिस्टम पर इन्वेस्टमेंट बढ़ाएगी सवाल-4: मस्क के बाद सबसे ज्यादा नेटवर्थ वाले लोग कौन हैं? जवाब: इलॉन मस्क की नेटवर्थ न सिर्फ सबसे ज्यादा है, बल्कि लिस्ट में दूसरे स्थान पर मौजूद गूगल के CEO लैरी पेज की नेटवर्थ से 3.36 गुना ज्यादा है। सवाल-5: आम आदमी के नजरिए से 1 ट्रिलियन डॉलर कितनी बड़ी रकम है? जवाब: अगर आपकी एक महीने की सैलरी 1 लाख रुपए हो, तो इस हिसाब से आपकी सालाना सैलरी 12 लाख रुपए होगी। अगर आपके परिवार के 4 अन्य सदस्यों की सैलरी भी इतनी ही हो, तो परिवार की कुल सालाना कमाई हुई 60 लाख रुपए। अगर साल-दर साल इस 60 लाख रुपए से कोई खर्च न किया जाए, तो भी आपके पूरे परिवार को इलॉन मस्क की नेटवर्थ के बराबर पैसा जमा करने में 158 लाख साल लगेंगे। मस्क ने अपनी आधी संपत्ति दान करने का फैसला किया है। अभी दुनिया की आबादी करीब 8.29 अरब है। अगर मस्क दुनिया के हर व्यक्ति को अपनी नेटवर्थ से बराबर रकम बांट दें, तो सबको 121 डॉलर यानी करीब 11,500 रुपए मिलेंगे। वहीं वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, दुनियाभर में 70 करोड़ लोग भयंकर गरीबी में जी रहे हैं। मस्क चाहें तो इनमें से हर व्यक्ति को 1,430 डॉलर दे सकते हैं। ---------- रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास-----------------------------------------------------------ये खबर भी पढ़ें…चुटकी में हैक कर लेता है बैंक, दुनियाभर की सरकारों को Mythos AI का डर; क्या खातों में जमा आपका पैसा भी खतरे में है एंथ्रोपिक का नया AI मॉडल 'क्लॉड मिथोस' इतना खतरनाक है कि इसे आम लोगों के लिए रिलीज ही नहीं किया गया। हालांकि ये किसी तरह लीक हो गया है। एंथ्रोपिक के मुखिया डेरियो अमोदेई ने खुद इसके खतरे की चेतावनी दी है। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 12 Jun 2026 6:47 pm

बांग्लादेश में भगवान राम की प्रतिमा के निर्माण पर प्रशासन ने लगाई रोक, इलाके में तनाव बढ़ा

बांग्लादेश के गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी उपजिला में स्थित श्रीश्री राधागोविंद और काली मंदिर परिसर में भगवान राम की दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा के निर्माण पर रोक लगा दी गई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह आदेश वहां के अध‍िकार‍ियों ने द‍िया है। मंदिर के सलाहकार श्यामल कुमार महंत ने गुरुवार शाम मंदिर के सभागार में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह घोषणा की।

देशबन्धु 12 Jun 2026 3:51 pm

ईरान के विदेश मंत्री अराघची बोले- अमेरिकी कार्रवाई से अप्रैल का सीजफायर निष्प्रभावी हो गया

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने गुरुवार को कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका के नए हमलों ने दोनों पक्षों के बीच अप्रैल में हुए सीजफायर को बेअसर कर दिया है।

देशबन्धु 12 Jun 2026 8:30 am

श्रीलंका की महिला सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने भारत दौरे से मिली सीख साझा की

श्रीलंका की महिला सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने कोलंबो में भारत के उच्चायुक्त से मुलाकात की और पिछले महीने भारत दौरे से मिली सीख और अनुभव साझा किए।

देशबन्धु 12 Jun 2026 8:23 am

वैश्विक तेल बाजार को स्‍थि‍र बनाए रखने के ल‍िए अमेरिका ने गुप्त रूप से होर्मुज स्‍ट्रेट में सैन्य अभियान चलाया : ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका पिछले कई हफ्तों से गुप्त रूप से होर्मुज स्‍ट्रेट और उसके आसपास सैन्य अभियान चला रहा था। यही वजह है कि वैश्विक तेल बाजार अपेक्षाकृत स्थिर बना रहा।

देशबन्धु 12 Jun 2026 8:21 am

13 महीने की बेटी को 2 बार हार्ट अटैक, मौत:दूसरी बेटी को भी यही बीमारी, जिंदा रहने के लिए हर साल चाहिए 72 लाख रुपए

9 बरस की लड़की दीवार के सहारे खड़ी है। नाम है आद्या। शरीर ऐसा मानो हड्डी के ऊपर सिर्फ चमड़ी चढ़ी हो। वजन 17 किलो, यानी 4 साल के बच्चे जितना। खेलने-कूदने की उम्र में आद्या को मौत कब आ जाए, कह नहीं सकते। इसका दिल महज 60% ही काम कर रहा है, यानी कभी भी हार्ट अटैक आ सकता है। आद्या दुर्लभ बीमारी से जूझ रही है। जिसमें जिंदा रहने की एक ही शर्त है- पैसा। साल भर में 72 लाख रुपए, यानी हर महीने 6 लाख। जैसे-जैसे शरीर का वजन बढ़ेगा, खर्च भी बढ़ता जाएगा। जिस दिन पैसे खत्म, उसी दिन आद्या की सांसें भी थम सकती हैं। आद्या की बहन को भी यही बीमारी थी। 13 महीने की उम्र में उसे दो बार हार्ट अटैक आया और उसकी मौत हो गई। हालांकि आद्या फिलहाल ठीक है। फ्रांस की एक कंपनी उसका इलाज करा रही है। दरअसल, इस बीमारी के चलते शरीर में मांसपेशियों की सफाई करने वाला एक खास एंजाइम सामान्य से बहुत कम बन पाता है। इस वजह से मांसपेशियों में अतिरिक्त शुगर जमा होती है। इससे हार्ट और बाकी मांसपेशियां बहुत कमजोर होती जाती हैं। आद्या के शरीर में यही एंजाइम सिर्फ 4% बन रहा है। दुर्लभ बीमारियों की सीरीज- ऐ जिंदगी में मैं नीरज झा पहुंचा हूं, हैदराबाद से 30 किलोमीटर दूर हिम्मत नगर। आज कहानी यहीं से… शाम के 5 बज रहे हैं। हल्की बूंदाबांदी हो रही है। इतने में, आद्या के पिता राज बोधुना आते हैं। वे कहते हैं- जिस बेटी के बारे में मैंने आपसे फोन पर बात की थी, यह वही है। इसे देखते ही आपको अंदाजा लग गया होगा कि यह कितनी कमजोर है। राज बताते हैं- 4 साल पहले यही बीमारी मेरी दूसरी बेटी आयरा को निगल गई। वो सिर्फ 13 महीने ही जी पाई। और अब… कहते-कहते राज आद्या का हाथ कसकर पकड़ लेते हैं। जैसे कोई उनकी बेटी को छीनने वाला हो। फिर कहते हैं- जब से इस बीमारी के बारे में पता चला है, तबसे हमने कल के बारे में सोचना ही छोड़ दिया। रोज सुबह भगवान से प्रार्थना करते हैं कि आज का दिन आद्या जी भरके जी ले, क्योंकि अगली सुबह क्या होगा, पता नहीं। आद्या जब 4 साल की थी, तब इस बीमारी का पता चला। अब आद्या की जिंदगी का एक ही नियम है-हर 15 दिन में अस्पताल जाना और 'एंजाइम थेरेपी' करवाना। जब थेरेपी रुकेगी, सांसें भी रुक जाएंगी। अभी एक थेरेपी में 4 घंटे का वक्त लगता है और 3 लाख रुपए खर्च होते हैं। मैं ठहरा एक पुलिस कॉन्स्टेबल। मेरी तनख्वाह इतनी भी नहीं कि मैं अपनी बेटी की सांसों की कीमत चुका सकूं, इसी बेबसी में एक बेटी को खो चुका हूं। शुरुआत में तो आद्या इंजेक्शन देखकर डर जाती थी, रोने लगती थी, लेकिन अब उसे फर्क नहीं पड़ता। इतना कहते ही राज की आंखें भर आती हैं। वे कहते हैं- आज छोटी बेटी आयरा होती, तो 5 साल की होती। मेरे मोबाइल में उसकी कई तस्वीरें हैं, लेकिन कभी देखने की हिम्मत नहीं होती। जब वह इस दुनिया में आई थी, तो ठीक थी। उसका वजन 7 किलो तक बढ़ गया था, लेकिन इस बीमारी की ऐसी नजर लगी कि कुछ ही दिनों में वह सूखकर 4 किलो की रह गई। बगल में ही बैठी राज की पत्नी निरोसा भी रोने लगती हैं। मोबाइल में आयरा के फोटो दिखाते हुए कहती हैं- आद्या 2017 में पैदा हुई थी। 2020 तक हमें पता नहीं था कि इसे कोई बीमारी है। बाकी बच्चों की तरह खेलती-कूदती, लेकिन जल्दी थक जाती थी। नवंबर 2020 में जब दूसरी बेटी आयरा का जन्म हुआ और वह बीमार हुई, तब इस बीमारी के बारे में पता चला। राज बताते हैं- ‘अगस्त 2021 की बात है। आयरा 7 महीने की थी। उसने दूध पीना कम कर दिया था। उसे लगातार दस्त लग रहे थे। शरीर कमजोर होता जा रहा था। हम उसे लेकर शहर पहुंचे। डॉक्टरों की सलाह पर कई टेस्ट कराए, लेकिन कुछ पता नहीं चला।’ तभी, एक बाल रोग विशेषज्ञ ने जेनेटिक टेस्ट कराने की सलाह दी। सैंपल मुंबई भेजे। करीब 15 दिन बाद रिपोर्ट आई। डॉक्टरों ने बताया कि आपकी बेटी को पॉम्पे डिजीज है। यह 6 महीने से ज्यादा जिंदा नहीं रहेगी। उन्होंने बताया- यह जेनेटिक बीमारी है। लाखों बच्चों में से किसी एक को होती है। तब पहली बार हमें इस बीमारी के बारे में पता चला। राज कहते हैं- तब मैंने अपनी पत्नी निरोसा को बीमारी के बारे में कुछ नहीं बताया था। जब भी पूछती, मैं हंसकर टाल देता। कहता– अरे, कुछ नहीं हुआ है, बस हार्ट में मामूली दिक्कत है। दवा से सब ठीक हो जाएगा। लेकिन अंदर ही अंदर मैं रोज मर रहा था। उस वक्त आयरा का हार्ट सिर्फ 30-40% ही चल रहा था। वह 13 महीने की हो गई थी, लेकिन उसमें इतनी भी जान नहीं थी कि वह खड़ी हो सके। 9 जनवरी 2022 की बात है। आयरा की सांसें अचानक उखड़ने लगी। हम उसे लेकर अस्पताल भागे। डॉक्टरों ने उसे वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा। कुछ देर बाद जब डॉक्टर बाहर आए, तो उन्होंने कहा- इसे नहीं बचा पाएंगे, पैसा और समय बर्बाद न करें, इसे घर ले जाएं। बच्ची कुछ ही दिनों की मेहमान है। मैं और मेरी पत्नी ने बिलखते हुए डॉक्टर से कहा- एक बार देख लीजिए, शायद चमत्कार हो जाए। हमारे कहने पर डॉक्टरों ने उसे भर्ती तो रखा, लेकिन 2 दिन बाद फिर कहा- घर ले जाइए, कुछ नहीं हो सकता। हम अपनी बच्ची को लेकर पुराने घर मनचेरियल आ गए। यह शहर हैदराबाद से 250 किलोमीटर दूर है। तीन-चार दिन ही बीते थे कि एक दिन अचानक आयरा की तबीयत बिगड़ने लगी। उसे लगातार दो बार दिल का दौरा पड़ा। वो मेरी गोद में ही थी। देखते ही देखते उसकी सांसें थम गई। उस वक्त उसकी नन्ही-सी उंगली मेरी हथेली में फंसी हुई थी, जैसे वह जीने की कोशिश कर रही हो। मैं बार-बार उसे सीपीआर देता रहा, ऑक्सीजन लगाने की कोशिश करता रहा। लेकिन मेरी बच्ची इस दुनिया से जा चुकी थी। यह कहते-कहते राज और पास बैठी निरोसा फूटफूटकर रोने लगती हैं। मोबाइल में एक तस्वीर दिखाते हुए निरोसा कहती हैं- जब भी इस तस्वीर को देखती हूं, तो गला भर आता है। खाना-पीना भी छूट जाता है। मुझे याद है- मैं उस दिन किचन में डोसा बना रही थी। अब जब कभी डोसा बनाती हूं, तो उसकी खिलखिलाहट कानों में गूंजने लगती है और हाथ थम जाते हैं। बहुत प्यारी थी मेरी बच्ची। अब दोनों की नजरें आद्या पर आकर टिक जाती हैं। राज कहते हैं- जब आयरा की बीमारी के बारे में पता चला, तब डॉक्टर ने पूछा- आपके और भी बच्चे हैं? मैंने कहा- हां, एक और बेटी है। डॉक्टर ने हिदायत दी कि 'बड़ी बेटी आद्या का भी जेनेटिक टेस्ट करवाओ। मुमकिन है कि उसे भी यह बीमारी हो।' आद्या का सैंपल लिया। रिपोर्ट में पता चला ‘पॉम्पे डिजीज’ है। डॉक्टर ने बताया कि आद्या का हार्ट सिर्फ 60% काम कर रहा है। डॉक्टर से पूछा- क्या इसका कोई इलाज नहीं है? तब उन्होंने समझाया कि इसके लिए एक थेरेपी होती है- एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी (ERT)। अगर आद्या को यह थेरेपी ताउम्र दी जाए, तभी उसकी जान बच सकती है। ये थेरेपी इतनी महंगी थी कि पैसे का इंतजाम कहां से होगा, हम समझ ही नहीं पा रहे थे। जैसे-जैसे आद्या का वजन बढ़ेगा, खुराक बढ़ेगी, वैसे-वैसे थेरेपी का खर्च भी बढ़ेगा। सबकुछ पता होने के बाद भी तीन साल तक हम कुछ नहीं कर पाए। हर दिन आद्या को अपनी आंखों के सामने कमजोर होते देखते रहे। आखिरकार, साल 2024 में एक उम्मीद जागी। केंद्र सरकार ने रेयर डिजीज फंड से 50 लाख रुपए की सहायता मंजूर की। तब जाकर आद्या की एंजाइम थेरेपी शुरू हो सकी। एक साल बाद, एंजाइम बनाने वाली फ्रांस की कंपनी ने भी आद्या को छह महीने तक मुफ्त दवा देने की मंजूरी दी है। आज मेरी बेटी की हर सांस उसी दवा के सहारे चल रही है। लेकिन डर लगता है, जिस दिन यह दवा बंद हो जाएगी, मैं अपनी बच्ची से हाथ धो बैठूंगा। डॉक्टरों ने आद्या के खेलने-कूदने और दौड़ने-भागने के लिए मना किया है। स्कूल में जब बाकी बच्चे खेलते हैं, तो यह सिर्फ दूर से उन्हें देखती है। जब वह मुझसे पूछती है- पापा, मेरे बाकी दोस्त तो इतना खेलते-कूदते हैं, मैं क्यों नहीं खेल सकती तो मैं कोई जवाब नहीं दे पाता। आप ही बताइए, मैं उस 9 साल की बच्ची को कैसे समझाऊं कि उसका दिल बहुत कमजोर है। कभी भी, कुछ भी हो सकता है। इतने में आद्या, राज की गोद में आकर बैठ जाती है। वह बेटी को कसकर गले लगा लेते हैं। इसके बाद आद्या की एक-एक रिपोर्ट, एक-एक प्रिस्क्रिप्शन दिखाने लगते हैं। अचानक उनकी नजर 2021 के एक प्रिस्क्रिप्शन पर जाकर ठहर जाती है। तब आद्या का वजन 13 किलोग्राम था। डॉक्टरों ने इलाज के लिए जिस थेरेपी की सलाह दी थी। उसका सालाना खर्च लगभग 65 लाख रुपए बताया था। सबकुछ देखने, सुनने के बाद भी इस बीमारी को लेकर मेरे मन में कई सवाल उठ रहे हैं। किसी बच्ची को इतनी कम उम्र में हार्ट अटैक कैसे आ सकता है? भारत में इस बीमारी के 50 केस, महंगा इलाज बड़ी चुनौती इस बीमारी को गहराई से समझने के लिए हैदराबाद के निजाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (NIMS) के जेनेटिक विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. प्रजन्या रंगनाथ से मुलाकात की। उन्होंने आयरा और आद्या की बीमारी के बारे में बताया कि ‘यह रेयर डिजीज है। भारत में अब तक इसके करीब 50 मामले सामने आए हैं। हालांकि कोई सटीक रिकॉर्ड नहीं है। 2020 से पहले तो ऐसी दुर्लभ बीमारियों पर चर्चा ही नहीं होती थी।’ डॉ. रंगनाथ बताती हैं– ऐसी बीमारियों से जूझ रहे परिवारों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ बीमारी नहीं, बल्कि समय पर पहचान और महंगा इलाज। पॉम्पे डिजीज भी ऐसी ही एक जेनेटिक बीमारी है। इसे समझने के लिए पहले शरीर के एनर्जी सिस्टम को जानना होगा। हम जो भी खाना खाते हैं, हमारा शरीर उसे ग्लूकोज में बदल देता है। यही ग्लूकोज हमारे शरीर का असली 'ईंधन' है, जिससे हमारे अंगों और मांसपेशियों को काम करने के लिए ऊर्जा मिलती है। जब शरीर में जरूरत से ज्यादा ग्लूकोज बन जाता है, तो हमारा सिस्टम उसे भविष्य के लिए सुरक्षित रख लेता है। इस स्टोर किए गए ग्लूकोज को 'ग्लाइकोजन' कहते हैं। जब हम कोई काम करते हैं या दौड़ते हैं, तब शरीर को तुरंत ऊर्जा देने के लिए इस स्टोर किए गए 'ग्लाइकोजन' को वापस ग्लूकोज में तोड़ना पड़ता है। इस काम को अंजाम देने के लिए हमारे शरीर में GAA यानी एसिड अल्फा-ग्लूकोसिडेस नाम का एक खास एंजाइम होता है। लेकिन पॉम्पे डिजीज के मरीजों में खेल यहीं बिगड़ जाता है। इस बीमारी में मरीज के शरीर में यह बेहद जरूरी GAA एंजाइम या तो बनना बंद हो जाता है या बहुत कम हो जाता है। नतीजा यह होता है कि जब यह एंजाइम ही नहीं रहता, तो ग्लाइकोजन टूट नहीं पाता और कचरे की तरह शरीर के अंगों व मांसपेशियों में जमा होने लगता है, जिससे मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर और बेजान होने लगती हैं। शरीर का विकास रुक जाता है। सबसे ज्यादा असर फेफड़ों और हार्ट पर पड़ता है। खासकर बच्चों में यह दिल को कमजोर कर देता है। अगर समय रहते इस बीमारी की पहचान कर थेरेपी शुरू न की जाए, तो मरीज का दिल किसी भी वक्त धड़कना बंद कर सकता है। डॉ. रंगनाथ कहती हैं– 'कुछ समय पहले फ्रांसीसी दवा कंपनी ने एक एंजाइम मायोजाइम तैयार किया था। इसे 'एंजाइम रिप्लेसमेंट थेरेपी' के जरिए ड्रिप से मरीज के शरीर में पहुंचाया जाता है, जो ग्लाइकोजन को तोड़कर ग्लूकोज बनाने में मदद करता है। मरीज के वजन के हिसाब से दी जाती है थेरेपी डॉ. रंगनाथ कहती हैं- इस थेरेपी का पूरा गणित मरीज के वजन पर टिका होता है। इस थेरेपी को हर 15 दिन में एक बार दिया जाता है। मरीज के प्रति 1 किलोग्राम वजन पर 20 मिलीग्राम दवा की जरूरत होती है। आद्या का वजन 17 किलो है। नियमानुसार प्रति किलो 20 मिलीग्राम दवा चाहिए, यानी हर 15 दिन में 340 मिलीग्राम (करीब 7 वायल) का डोज लगेगा। एक वायल 35 से 45 हजार के बीच में आती है। इस तरह एक बार का खर्च करीब 3 लाख रुपए आता है। यह थेरेपी 15 दिन में ही क्यों होती है? डॉ. रंगनाथ कहती हैं- मरीज का शरीर खुद एंजाइम नहीं बना पाता। नस के जरिए दी गई दवा का असर शरीर में केवल 7 से 10 दिनों तक ही रहता है। इसके बाद मांसपेशियों में जहरीला ग्लाइकोजन फिर जमा होने लगता है। इस चक्र को रोकने और दिल-फेफड़ों को सुरक्षित रखने के लिए हर 15 दिन में थेरेपी जरूरी है। डॉ. रंगनाथ कहती हैं- पॉम्पे डिजीज किसी भी उम्र में हो सकती है। लक्षणों के आधार पर इसके दो रूप हैं। बच्चे को पॉम्पे डिजीज है या नहीं, गर्भ में पता लग सकता है? डॉ. रंगनाथ कहती हैं- गर्भ के दौरान पॉम्पे डिजीज का पता दो मुख्य टेस्ट से लगाया जाता है। प्रेग्नेंसी के बाद 10 से 13 हफ्ते में कोरियोनिक विलस सैंपलिंग (CVS) के जरिए गर्भनाल का सैंपल लिया जाता है। इसके अलावा, 15 से 20 हफ्ते में एम्नियोसेंटेसिस टेस्ट के जरिए इस बीमारी का पता लगाया जा सकता है। ------------------------------------- ऐ जिंदगी सीरीज की यह खबर भी पड़ें… 1- 14 की उम्र में शरीर बना 'पेड़ की छाल’: उठो या बैठो फटने लगती है चमड़ी, मन करता है छीलकर फेंक दूं; देश का अकेला केस दोपहर के 1 बजे हैं। जंगल के ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर कार हिचकोले खा रही है। तेज गर्मी से गला लगातार सूख रहा है। करीब 2 घंटे बाद जंगलों में कुछ झोपड़ियां नजर आती हैं। इन्हीं झोपड़ियों में से एक के सामने हमारी कार रुकी। झोपड़ी के बाहर एक लड़की बेजान सी खड़ी नजर आई। उसकी मटमैली शर्ट और हाफ पैंट के बाहर जितना भी शरीर दिख रहा है, वह बेहद डरावना है। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें… 2. 17 की उम्र में हो गई 70 साल की बूढ़ी:झुर्रियों से खाल लटकी, भूत कहते हैं लोग; कहानी दो बहनों की 19 साल की राजकुमारी और 17 साल की रोशनी घर की चौखट पर बैठी हैं। यूं तो यह उम्र अपने लंबे बाल संवारने और चेहरा निखारने की है। दोस्तों के साथ खिलखिलाने और अपनी सतरंगी दुनिया बुनने की है, लेकिन ये दोनों बहनें 70 साल की किसी बूढ़ी जैसी हो चली हैं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें…

दैनिक भास्कर 12 Jun 2026 5:15 am

क्यों नसबंदी की रिवर्स सर्जरी करा रहे पूर्व नक्सली:56 ने सर्जरी कराई, 26 पिता बने; सरकार फ्री में ऑपरेशन करा रही

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से करीब 400 किलोमीटर दूर दंतेवाड़ा का जबेली गांव। कभी नक्सली रहे प्रदीप कुंजम का घर यहां है। उन्होंने मुस्कुराते हुए दरवाजा खोला। गोद में 8 महीने की बेटी करिश्मा थी। प्रदीप 2008 में नक्सली बन गए थे। संगठन का नियम था, शादी करनी है तो नसबंदी करानी होगी। 2016 में प्रदीप ने शादी से पहले नसबंदी करा ली। 2022 में उन्होंने सरेंडर कर दिया। 2023 में नसबंदी खुलवाने के लिए सर्जरी कराई और अब एक बेटी के पिता हैं। प्रदीप अकेले नहीं है। बीते 10 साल में 56 पूर्व नक्सली ऐसी सर्जरी करा चुके हैं। 26 लोग पिता भी बन गए। बस्तर रेंज के IG सुंदर राज पी. के मुताबिक, 120 पूर्व नक्सलियों की सर्जरी अभी होनी है। ये सरेंडर पॉलिसी का हिस्सा है और फ्री में की जाती है। पहली कहानी प्रदीप कुंजम की जख्मी पत्नी को इलाज नहीं मिला, तो संगठन छोड़ा; दूसरी सर्जरी के बाद पिता बने 2008 में प्रदीप के गांव में नक्सली आए थे। उनकी बातों के असर में आकर प्रदीप संगठन से जुड़ गए। वे बताते हैं, ‘संगठन में काम करते हुए मैं गंगू से मिला। हम अक्सर साथ रहते थे। जंगल में राशन ढोना, पानी लाना, खाना बनाना, पहरा देना, सब काम मिलकर करते थे। इसी दौरान एक-दूसरे के करीब आ गए।’ ‘कैडर के लोगों ने हमें बात करते देख लिया। खबर बड़े लीडर तक पहुंच गई। उन्होंने मुझसे पूछा, क्या तुम इससे शादी करना चाहते हो? मैंने हां कह दिया। उन्होंने रिश्ता मंजूर कर लिया। शादी की बात आगे बढ़ी, तो कामरेडों ने कहा कि पहले नसबंदी करानी होगी। कैडर की महिलाओं ने गंगू को समझाया कि जंगल की जिंदगी में बच्चे के साथ रहना मुश्किल होगा। अगर किसी मुठभेड़ में फंस गए, तो बच्चे को लेकर भाग नहीं पाओगी। पूरे परिवार की जान खतरे में पड़ जाएगी।’ ‘धीरे-धीरे गंगू भी यही बात कहने लगी। आखिरकार मैंने नसबंदी के लिए हामी भर दी। संगठन में कोई डॉक्टर नहीं था। कुछ लोग थे, जो बुखार की दवा देते थे, चोट लगने पर मरहम-पट्टी कर देते थे। उन्होंने ही नसबंदी करना सीख लिया और जंगल में मेरा ऑपरेशन किया।’ ‘मई 2016 में मैंने गंगू से शादी कर ली। करीब एक महीने बाद मुठभेड़ में गंगू जख्मी हो गई। तीन साथी मारे गए। घायल होने के बाद भी गंगू सामान उठाकर पहाड़ चढ़ती थी। उसकी हालत बिगड़ने लगी। मैंने कई बार अपने नेताओं से कहा कि किसी डॉक्टर को बुला लें, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।’ प्रदीप ये किस्सा सुना ही रहे थे कि बगल में बैठीं गंगू स्थानीय भाषा में कुछ कहने लगीं। हमने प्रदीप से पूछा कि वे क्या कह रही हैं? प्रदीप ने उनकी बात का मतलब बताया, ‘ये कह रही है कि घायल होने के बाद भी तैरकर नदियां पार करनी पड़ती थीं। भीगे कपड़े शरीर पर ही सूख जाते, जिससे घाव और गहरा हो जाता था। रात में दवाइयां दी जाती थीं, लेकिन उनका असर नहीं होता था।’ हमने गंगू से बात करने की कोशिश की, लेकिन वे उठकर चली गईं। प्रदीप ने पहले ही कहा था कि पत्नी के वीडियो न बनाएं। इसलिए हमने जोर नहीं दिया। प्रदीप आगे कहते हैं, ‘उसी वक्त मैंने सोचा कि जिस संगठन के लिए हमने सब छोड़ दिया, वह अपने लोगों का इलाज तक नहीं करा सकता। तय कर लिया कि अब यहां नहीं रहना है।’ पहली सर्जरी रायपुर में, दूसरी तेलंगाना में प्रदीप बताते हैं, ‘मैंने 2022 में दंतेवाड़ा में सरेंडर कर दिया। तब एसपी अभिषेक पल्लव थे। मैंने उन्हें नसबंदी के बारे में बताया। उन्होंने मुझे रायपुर के रामकृष्ण अस्पताल भेजा। वहां ऑपरेशन हुआ, लेकिन कामयाब नहीं हुआ। मुझे पता चला कि तेलंगाना के वारंगल में भी नसबंदी रिवर्स करने के लिए ऑपरेशन होता है। मैं वारंगल गया और दूसरी बार ऑपरेशन कराया। इस बार सर्जरी कामयाब रही। मैं 2025 में पिता बन गया।’ दूसरी कहानी दिनेश कड़ती की सोचा था जंगल में ही मरेंगे, गांव में बच्चों को देखकर पिता बनने की इच्छा हुई दिनेश दंतेवाड़ा के मुंगेर गांव में रहते थे। 2005 में उन्होंने नक्सल संगठन जॉइन कर लिया। 2012 में सरेंडर किया, तब डिप्टी कमांडर बन चुके थे। 3 लाख रुपए के इनामी थे। दिनेश बताते हैं, ‘मैं संगठन में नया था। तभी एक लड़की भी आई। उसका नाम मीना था। वो मुझे पसंद थी। मैंने उसे प्यार के इजहार वाला लेटर भेजा। मीना की तरह से जवाब नहीं आया। फिर दूसरा लेटर लिखा और पूछा क्या आप नाराज हो? इस बार उसने जवाब दिया और मेरा प्रपोजल मान लिया।’ 2007 में हमने शादी के बारे में सोचा। हमें नहीं पता था कि शादी से पहले नसबंदी कराना पड़ता है। मैंने यह बात मीना को बताई, तो उसने कहा कि हम यहीं मिले हैं, यहीं रहेंगे और शायद यहीं मरेंगे, इसलिए नसबंदी करा लो। मैंने 2008 में नसबंदी करा ली। दिनेश आगे बताते हैं, ‘समय के साथ मेरे भीतर पिता बनने की इच्छा जागने लगी। मैं किसी गांव में जाता और छोटे बच्चों को खेलते देखता, तो सोचता था कि मैं कभी बाप नहीं बन पाऊंगा। मीना भी मां बनना चाहती थी, लेकिन संगठन छोड़ने से डरती थी। मैं उससे पूछता था कि अगर परिवार ही नहीं होगा, तो यह लड़ाई किसके लिए लड़ रहे हैं।’ ‘हमने 2012 में दंतेवाड़ा में सरेंडर कर दिया। मैंने अफसरों को नसबंदी के बारे में बताया। कहा कि मैं परिवार बढ़ाना चाहता हूं। उन्होंने मेरी मदद की। अभी मेरा पांच साल का बेटा है।’ तीसरी कहानी योगेश माड़वी की एक थप्पड़ ने नक्सली बनाया, बेटे को देखकर लगता है जिंदगी ने दूसरा मौका दे दिया सुकमा के चिंतलनार गांव के योगेश माड़वी के नक्सली बनने की कहानी एक थप्पड़ से शुरू हुई थी। 1996 में उनके मामा जंगल में जमीन जोत रहे थे। तभी फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के अधिकारी आए और उन्हें रोकने लगे। एक अधिकारी ने मामा को थप्पड़ मार दिया। यह बात नक्सलियों तक पहुंची, तो उन्होंने अधिकारी को धमकाया। योगेश कहते हैं कि इसके बाद वह अधिकारी दोबारा हमारे इलाके में नहीं आया। तभी मुझे लगा कि नक्सली ही आदिवासियों के साथ हैं। 1998 में मैं उनसे जुड़ गया। शुरुआत स्टूडेंट विंग से हुई। धीरे-धीरे रीजनल कमेटी का मेंबर बन गया। हिडमा जैसे बड़े नक्सली नेताओं के साथ काम करने लगा। योगेश आगे बताते हैं, ‘संगठन में शामिल होने के कुछ समय बाद मुझे कैडर में शामिल अनीता पसंद आ गई। मैंने उसे चिट्ठी लिखी कि मैं तुमसे शादी करना चाहता हूं। उसने हां कह दिया, लेकिन पूछा कि क्या नसबंदी कराओगे? पहले मैं इसके लिए तैयार नहीं था, लेकिन कामरेड दबाव बनाने लगे। आखिरकार मैं मान गया। 2007 में पश्चिम बंगाल से आए एक डॉक्टर ने मेरी नसबंदी कर दी।’ ‘समय के साथ संगठन से मेरा भरोसा उठने लगा। गुटबाजी बढ़ रही थी। कई लोगों को सिर्फ शक के आधार पर पुलिस का मुखबिर बताकर मार दिया गया। तब पहली बार लगा कि हम जिस लड़ाई का हिस्सा हैं, उसमें कहीं न कहीं बड़ी गलती हो रही है।’ ‘2011 में मैंने तय किया कि अब संगठन के साथ नहीं रहूंगा। मुझे डर था कि अगर पुलिस के पास गया तो वे नक्सली समझकर मार देंगे। संगठन को पता चल गया तो वे भी नहीं छोड़ेंगे। मैंने पत्नी के इलाज का बहाना बनाया। मेरी सुरक्षा में पांच गनमैन थे। उनके साथ तेलंगाना बॉर्डर तक गया। फिर उन्हें यह कहकर वापस भेज दिया कि इलाज कराकर लौट आऊंगा।’ ‘तेलंगाना में एक सरपंच मुझे पहचानता था। उसकी मदद से मैं करीमनगर पहुंचा और सरेंडर कर दिया। नसबंदी खुलवाने के लिए सर्जरी करवाई। मेरा एक बेटा है। उसे देखकर लगता है कि जिंदगी ने मुझे दूसरा मौका दिया है।’ नसबंदी की रिवर्स सर्जरी कामयाब होने के चांस 30 से 70% पूर्व नक्सली सर्जरी के लिए जगदलपुर के महारानी अस्पताल पहुंच रहे हैं। अस्पताल के मुख्य अधीक्षक डॉ. संजय कुमार प्रसाद बताते हैं, ‘कई पूर्व नक्सलियों की नसबंदी प्रशिक्षित डॉक्टरों ने नहीं की थी। कुछ मामलों में ऑपरेशन के दौरान ऐसी नसें भी कट गईं, जिन्हें दोबारा जोड़ना मुमकिन नहीं है।’ सरेंडर पॉलिसी में नसबंदी की रिवर्स सर्जरी कराने का वादा बस्तर डिवीजन के IG सुंदरराज पी. कहते हैं, ‘हाल के कुछ साल में 1 हजार से ज्यादा नक्सलियों ने सरेंडर किया है। उसमें से ज्यादातर ने यही कहा कि संगठन में उनकी नसबंदी हो गई है, लेकिन वे परिवार बढ़ाना चाहते हैं। हमने फैसला लिया कि सभी का टेस्ट कर नसबंदी खुलवाई जाएगी।’ भारत में नक्सलवाद की स्थिति इस ग्राफिक से समझिए… ……………………. ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ेंआर्मी के साथ आतंकियों से लड़े, सरकार ने घर उजाड़ा, मंत्री बोले- पता नहीं किसने आदेश दिया 80 साल के अब्दुल रज्जाक अपने टूटे घर के मलबे के पास उदास बैठे रहते हैं। 2001 में वे कश्मीर से भागकर जम्मू आए थे। सिधरा एरिया में घर बनाया। 25 साल हो गए रहते हुए। 19 मई को वन विभाग वाले बुलडोजर लेकर आए और अब्दुल समेत करीब 25 घर तोड़ दिए। ये दूसरी बार है, जब अब्दुल बेघर हुए हैं। इससे पहले आतंकियों के डर से घर छोड़ा था। हालांकि मंत्री जावेद राणा ने हैरानी जताई है कि ये कार्रवाई सरकार की जानकारी के बिना की गई। पढ़ें पूरी खबर...

दैनिक भास्कर 12 Jun 2026 5:09 am

चीनी प्रतिनिधि ने मध्य पूर्व में शांति को आगे बढ़ाने के लिए चार प्रस्ताव रखे

संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू थ्सोंग ने सुरक्षा परिषद की 'मध्य पूर्व में शांति को बढ़ावा देना: स्थायी शांति के लिए मध्यस्थता और संवाद' विषय पर खुली बहस को संबोधित करते हुए मध्य पूर्व में शांति को आगे बढ़ाने के लिए चार सूत्रीय प्रस्ताव किए।

देशबन्धु 12 Jun 2026 2:21 am

मेघालय से एनपीपी के जेम्स संगमा निर्विरोध राज्यसभा सदस्य निर्वाचित

नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के जेम्स संगमा मेघालय से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित हो गए। राज्य की एकमात्र राज्यसभा सीट के लिए किसी अन्य उम्मीदवार ने नामांकन दाखिल नहीं किया।

देशबन्धु 11 Jun 2026 11:25 pm

अदन मिलिट्री कैंप में धमाका: 12 सैनिकों की मौत, कई घायल

यमन के दक्षिणी बंदरगाह शहर अदन में गुरुवार सुबह सरकार समर्थित सेना के मिलिट्री कैंप में जोरदार धमाका हुआ। इस धमाके में 12 सैनिक मारे गए और कई अन्य घायल हो गए

देशबन्धु 11 Jun 2026 11:00 pm

मिडिल ईस्ट में महायुद्ध की आहट: ईरान ने बंद की दुनिया की सबसे बड़ी तेल लाइफलाइन 'होर्मुज स्ट्रेट', कतर ने जॉर्डन-बहरीन-कुवैत पर हमलों की निंदा की

अमेर‍िका और ईरान के बीच फिर शुरू हुए युद्ध के शोर ने एक बार फ‍िर से क्षेत्र में अशांत‍ि का माहौल बना द‍िया है। कतर विदेश मंत्रालय ने ईरान की ओर से जॉर्डन, बहरीन और कुवैत पर किए गए म‍िसाइल हमलों की कड़ी निंदा की है।

देशबन्धु 11 Jun 2026 6:06 pm

खुलासा: अमेरिका में AI बहस को प्रभावित करने के लिए चीन कर रहा 'ChatGPT' का इस्तेमाल, खुफिया रिपोर्ट में दावा

अमेरिकी कांग्रेस के दोनों प्रमुख दलों के एक वरिष्ठ नेता की ओर से चीन पर अमेरिका की खुली राजनीतिक व्यवस्था का फायदा उठाने की कोशिश करने का आरोप लगाया गया है।

देशबन्धु 11 Jun 2026 1:53 pm

लेबनान पर इजरायल का बड़ा हमला: दक्षिणी लेबनान में हवाई हमलों से मची तबाही, 18 लोगों की मौत, कई घायल

इजरायल और लेबनान के बीच जारी सीमा पर संघर्ष में दक्षिणी लेबनान में कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई है और कई अन्य घायल हुए हैं। यह जानकारी नागरिक सुरक्षा और स्वास्थ्य अधिकारियों ने दी है।

देशबन्धु 11 Jun 2026 12:15 pm

अमेरिका ने ईरान पर फिर बरसाए मिसाइलें

संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर एक बार फिर से हमले शुरू कर द‍िए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने चेतावनी दी है कि अगर तेहरान वॉशिंगटन के साथ परमाणु समझौते पर सहमत नहीं होता, तो उस पर सैन्य दबाव और बढ़ाया जाएगा।

देशबन्धु 11 Jun 2026 8:54 am

ईरान से तनाव के बीच इजरायल के प्रमुख एयरबेस को मामूली नुकसान, मिसाइल के टुकड़े गिरे

ईरान के साथ हालिया तनाव के बीच उत्तरी इजरायल में स्थित रामत डेविड एयर बेस पर मिसाइल के कुछ टुकड़े गिरे। इसकी पुष्टि इजरायली सेना ने की है।

देशबन्धु 11 Jun 2026 8:31 am

ब्लैकबोर्ड-चाय पिलाकर मेरे बेटे के सीने में 3 गोलियां मारीं:हत्यारों की बेटी लाश से शादी कर बोली- आज से आपकी बहू; अब छोड़कर भागी

महाराष्ट्र के नांदेड़ का इतवारा बाजार इलाका। सुबह के करीब 9 बजे हैं। एक घर के बाहर कुछ लोग अर्थी तैयार कर रहे हैं। पास में एक लाश रखी है। ये 18 साल के सक्षम की है। लाश के पास मां छाती पीट-पीटकर रो रही है। तभी घर से एक बदहवास लड़की निकल कर आई और लाश से लिपटकर रोने लगी। नाम है आंचल। रोते-रोते बोली, ‘सक्षम और मैंने साथ जीने-मरने की कसमें खाई थीं। अब मेरा क्या होगा? इस अर्थी में बांधकर मेरा भी अंतिम संस्कार कर दो।’ लोग समझा रहे थे, लेकिन वो नहीं मान रही थी। कुछ देर बाद उसने कहा- ‘सिंदूर और अगरबत्ती लाओ! मैं सक्षम की लाश से शादी करूंगी और इसे इंसाफ दिलाऊंगी।’ सिंदूर लाया गया। उसने कांपते हाथों से सक्षम का बेजान चेहरा छुआ और अपनी मांग में सिंदूर भर लिया। मंगलसूत्र की जगह गले में लाल धागा बांधा। रोते हुए बोली- ‘अब से सक्षम की विधवा हूं। उसकी जगह घर में रहूंगी। उसके मां-बाप अब मेरे मां-बाप हैं।’ लाश से शादी की चर्चा दुनियाभर में हुई। अमर प्रेम की मिसाल दी गई। लेकिन वो लड़की सक्षम का घर छोड़कर जा चुकी है। इस बार ब्लैकबोर्ड में नांदेड़ की संगीता ताटे की स्याह कहानी, जिनके बेटे को प्रेमिका के घरवालों ने मार डाला। फिर प्रेमिका ने बेटे की लाश से शादी की और अब घर छोड़कर चली गई… मैं नीरज झा महाराष्ट्र के नांदेड़ के इतवारा बाजार में घनी आबादी, संकरी गलियों से होते हुए संगीता ताटे से मिलने पहुंचा। एक पतली-सी सीढ़ी के सहारे दूसरे माले पर बने उनके घर में दाखिल हुआ। 40 साल की संगीता से बातचीत शुरू हुई। बेटे को गोली मारने की बात बताते हुए रो पड़ती हैं। सिसकते हुए कहती हैं- ‘मुझे नहीं पता था कि लड़की का परिवार इतनी बेरहमी से मेरे बेटे को मार देगा, नहीं तो कभी उसे वहां जाने नहीं देती। मेरा अब क्या ही बचा। न बेटा बचा, न पति। वो लड़की भी अब जा चुकी है।’ वह बताती हैं- 27 नवंबर 2025 की बात है। दोपहर करीब 1 बजे थे। मेरा बेटा सक्षम घर पर था। तभी उसके कुछ दोस्त उसे बुलाने आए। उन्होंने कहा- ‘चलो, तुम्हारी गर्लफ्रेंड के घरवाले बुला रहे हैं।' सक्षम ने हैरानी से पूछा- 'वे मुझे क्यों बुलाएंगे?' उसका एक दोस्त बोला- 'वे शादी की बात करना चाहते हैं।' सक्षम दोस्तों के साथ चला गया। दोस्त उसे लड़की के घर छोड़कर चले गए। घर में उसका दामाद की तरह स्वागत हुआ। उसे चाय-पानी दिया गया। माहौल ऐसा था मानो किसी रिश्ते की बात होने वाली हो। कुछ देर बाद अचानक सब बदल गया। लड़की के बाप ने पिस्टल निकाली और सक्षम की कनपटी पर तान दी। कहने लगे- ‘तू मेरी बेटी से शादी करेगा? सा%$’ सक्षम जान बचाने के लिए भागा, लेकिन लड़की के बाप ने उस पर गोली चला दी। पहली गोली उसके सीने में लगी। वह जमीन पर गिर पड़ा। इसके बाद दो गोलियां और उसके सीने में दाग दीं। वह जमीन पर पड़ा तड़प रहा था। तभी एक बड़ा पत्थर उठाकर लाए और सिर पर दे मारा। मेरे बेटे का सिर बुरी तरह से कुचल दिया। सक्षम की मौत का सदमा मेरे पति बर्दाश्त नहीं कर सके। 3 महीने बाद उनकी भी मौत हो गई। ये बताते हुए संगीता फिर रोने लगीं। ‘घर में कोई और है या आप अकेली रहती हैं?, मैंने पूछा संगीता ताटे धीरे से बोलीं- ‘छोटा बेटा नासिक में रहकर पढ़ाई कर रहा है। अब घर में अकेली बची हूं। बेटे की प्रेमिका मेरे ही घर रह रही थी, लेकिन कुछ महीने में वापस मायके चली गई। उसने कहा था- ‘मम्मी, सक्षम की जगह अब मैं आपका बेटा हूं। आपके साथ ही रहूंगी। आपकी देखभाल करूंगी।’ वह साढ़े 3 महीने साथ रही। एक दिन अचानक बोली- ‘दादी की तबीयत बहुत खराब हो गई है। मुझे उनसे मिलने जाना है’। यहां से कुछ ही दूर उसका घर है। मैं उसे पहुंचाकर आ गई। उसके बाद से वह कभी लौटकर नहीं आई। अब मेरी क्या ही जिंदगी बची है? रोज बेटे को याद करती हूं। सोचती हूं, उस दिन मुझे भी मार दिया गया होता तो इस तरह बेटे की याद में घुट-घुटकर न जीती। लेकिन फिर सोचती हूं- मैं नहीं रहूंगी तो बेटे को इंसाफ कौन दिलाएगा? घर में अब कोई कमाने वाला नहीं बचा। सरकार ने वादा किया था कि वह 3 महीने में घर के किसी सदस्य को नौकरी देगी, लेकिन 6 महीने बीत चुके हैं, कुछ नहीं हुआ।’ लड़की को आप पहले से जानती थीं? उसकी कोई तस्वीर? संगीता मोबाइल का स्क्रीन ऑन करती हैं। एक तस्वीर दिखाती हैं, जिसमें लड़का-लड़की एक-दूसरे के कंधे पर हाथ रखे हुए खड़े हैं। वह बताती हैं- ‘लड़की का नाम आंचल है। साथ में मेरा बेटा सक्षम। लड़की इसी बस्ती में रहती थी। दोनों की इंस्टाग्राम पर बातचीत शुरू हुई। धीरे-धीरे वे मिलने-जुलने लगे। प्यार हो गया। हम SC यानी शेड्यूल कास्ट से हैं और लड़की पिछड़ी जाति यानी OBC से है। मेरा बेटा 12वीं में पढ़ता था और लड़की 11वीं में। कुछ समय बाद सक्षम आंचल के घर जाने लगा। नवरात्रि में दोनों गरबा करने जाते थे। लड़की के घर वालों को शक हुआ। उन्हें दोनों के रिश्ते की बात पता चल गई। वह रिश्ते के खिलाफ हो गए, लेकिन आंचल मेरे बेटे के साथ ही शादी करना चाहती थी। एक दिन उसके घर वाले मारते-पीटते हुए आंचल को थाने लेकर गए। वहां कहा कि सक्षम और उसके परिवार के खिलाफ केस दर्ज कराओ, नहीं तो तुम्हें जान से मार देंगे। लड़की बोली- वह मुकदमा नहीं दर्ज कराएगी। वह सक्षम से ही शादी करेगी। संगीता ताटे आगे बताती हैं- पता नहीं, अचानक उन लोगों के मन में क्या आया। वे सक्षम को अपनाने की बात कहने लगे। मेरे बेटे को घर बुलाने लगे। ये सारी बातें मुझे बेटे की मौत से दो महीने पहले पता चली थीं। मैंने उससे कहा था कि वो परिवार ठीक नहीं है। गांजा-चरस का धंधा करते हैं। वे अपराधी लोग हैं। गोली-बंदूक भी रखते हैं। उनसे दूर रहो। लेकिन मेरे बेटे ने कहा- मम्मी वे अच्छे लोग हैं। मेरी आंचल के पापा से बात हुई है। उसका भाई तो अब मेरा दोस्त बन चुका है। वह हमारी शादी करवाने की बात कहते हैं। पहले चाचा की शादी हो जाए तब आंचल से शादी करूंगा।’ इस दौरान बार-बार संगीता की नजर बेटे सक्षम की तस्वीर पर जाकर टिक रही है। ऐसा लग रहा जैसे वो बेटे की तस्वीर को गले लगाना चाह रही हों। फिर से फूट-फूटकर रोने लगीं। फफकते हुए बोलीं- ‘सक्षम इतना समझदार था कि पापा के साथ धंधे में हाथ बंटाता था। इसी इतवारा बाजार में एक सब्जी मंडी है। वहां हमारी फल की दुकान थी। वह स्कूल और कोचिंग से जब आता तो दुकान पर पापा का हाथ बंटाता था। 27 नवंबर को बस्ती के कुछ लोगों ने बताया कि 10 मिनट पहले सक्षम को आंचल के घरवालों ने मार डाला। लाश उनके घर के बाहर सड़क पर पड़ी है। जब तक हम पहुंचते, पुलिस वहां से लाश को थाने ले जा चुकी थी। लड़की के घर वाले हत्या के बाद आसपास ही छिपे थे। पुलिस ने सभी को दबोच लिया था। मैं तो बेहोश पड़ी थी। होश आने पर जब थाने पहुंची, तो बेटे की लाश थाने के बरामदे में पड़ी थी। पुलिस ने हत्यारों को हवालात में बंद कर रखा था।’ इस बीच संगीता की चचेरी सास रेखा बाई आती हैं। वह कहती हैं- ‘उन हत्यारों की फांसी होनी चाहिए। हमारे सक्षम को मार दिया।' घटना के थोड़ी देर बाद ही हम थाने पहुंचे। आंचल सक्षम की लाश से लिपटकर रो रही थी। कह रही थी- मेरे सामने ही मेरे होने वाले पति को पापा, भाई ने मिलकर मार दिया। सक्षम को मारने से पहले उन्होंने आंचल को एक कमरे में बंद कर दिया था। उस दिन थाने से हम जब सक्षम की लाश घर लेकर आए, तो साथ में आंचल भी आई। तब तक रात हो चुकी थी। अगले दिन सुबह जब अर्थी बनाई जा रही थी, तभी आंचल ने बेटे की लाश के साथ शादी कर ली। फिर हमारे घर में ही रहने लगी। कुछ महीने बाद अपने मायके चली गई। यह कहते हुए वह रोने लगती हैं। ‘पति की कब और कैसे मौत हुई?’, मैंने संगीता ताटे से पूछा वह बताती हैं- ‘आंचल जब मेरे घर रहने लगी तो हम उसका बेटी की तरह ख्याल रखते थे। किसी भी चीज की कमी नहीं होने देते थे। जो कहती थी, लाकर देते थे। उधर, पुलिस ने उसके मां, भाई और पिता तीनों को जेल भेज दिया था। हमें लगा कि अब सक्षम की जगह आंचल ही हमारा बेटा है और ताउम्र हमारे साथ रहेगी। मार्च महीने की बात है। शायद इंस्टाग्राम पर उसके चाचा से उसकी बात होनी शुरू हुई। हम लोग कोई पूछताछ नहीं करते थे कि वह किससे बात कर रही है। चाचा ने क्या कहा, नहीं पता। फिर दादी की तबीयत का बताकर वो घर से चली गई। उसके जाने पर मेरे पति की तबीयत और बिगड़ गई। सक्षम के जाने के सदमे में वह काम-धंधा छोड़कर पहले ही घर बैठ गए थे। उनका रह-रहकर बीपी कम हो रहा था। हमने आंचल को फोन किया और ये बातें बताई, लेकिन वह वापस लौटकर नहीं आई। 21 मार्च को अचानक पति की भी मौत हो गई। मेरी जिंदगी एकदम से उजड़ गई।’, यह कहते हुए संगीता फिर से रोने लगीं। संगीता रोते हुए उठीं और सक्षम की तस्वीर को सीने से लगा लिया। उसे चूमने लगीं। इस दौरान टेबल पर जल रहा दीया बुझ जाता है। वह उसे फिर से जलाती हैं। संगीता आगे बताती हैं- ‘अब तो केवल बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए जिंदा हूं। लड़की का परिवार तो जेल में है, लेकिन पता नहीं कब वे जमानत पर छूटकर बाहर आ जाएं। डर लगता है कि मुझे भी न मार दें। डरती हूं कि बेटे का केस अकेले कैसे लड़ूं? प्राइवेट वकील करना पड़ेगा। उसके लिए पैसे कहां से लाऊंगी?’ सक्षम की मां से बात करने के बाद मैंने लाश से शादी करने वाली आंचल से कई बार बातचीत करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। -------------------------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड- भाई का अपहरण किया, जिससे जिंदा साबित हो जाऊं:सिंदूर लगाने वाली पत्नी विधवा पेंशन मांगने पहुंची, लेकिन मुझे जिंदा नहीं माना साल 1975। लाल बिहारी 20 साल के थे। शादी के 10 साल बाद अभी-अभी गौना हुआ था और पत्नी घर आई थी। मां ने कहा- गांव की जमीन गिरवी रखकर बैंक से कुछ लोन ले लो। अपना काम-धंधा शुरू करो, वर्ना आगे बाल-बच्चों को कैसे पालोगे? पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड-पत्नी के घरवालों ने नंगा करके पीटा, नस काटकर सुसाइड:पत्नी ने कॉलर पकड़कर मांगे 20 लाख तो फांसी लगाई; तंग पतियों की स्याह कहानियां ‘20 जनवरी 2025 की बात है। शाम के 4 बजे थे। मैं अपने दोनों पोतों को स्कूल से लेकर घर लौट रही थी। रास्ते में मेरा छोटा बेटा नितिन बाइक से आ रहा था। उसने कहा- मम्मी, बाइक पर बैठ जाओ। फिर हम उसके साथ घर आए। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 11 Jun 2026 6:22 am