होर्मुज जलडमरूमध्य में नेपाली नागरिक हिरासत में
नेपाल सरकार ने पुष्टि की कि होर्मुज जलडमरूमध्य के समुद्री मार्ग में चल रहे एक जहाज पर कार्यरत एक नेपाली नागरिक को ईरानी अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया है
ईरान की सैन्य क्षमता पूरी तरह खत्म : ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सेना “पूरी तरह खत्म” हो चुकी है, जबकि जमीनी स्तर पर लड़ाई जारी है और तेल आपूर्ति मार्गों व क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर दुनिया भर में चिंता बनी हुई है
‘हमारे मुख्यमंत्री हमें पहचानते तक नहीं, हमें गालियां देते हैं। बांग्लादेश जाने को कहते हैं। हम बांग्लादेश के नहीं, असम के हैं। हमारे पास सारे कागज हैं, लेकिन क्या कर सकते हैं। वे मुख्यमंत्री हैं, बड़े आदमी हैं। हम तो कुछ भी नहीं’ ये बेबसी असम के कामरूप जिले के सोंताली गांव में रहने वाले मोफिज अली की है। वे परिवार के साथ ब्रह्मपुत्र नदी के बीचों-बीच एक टापू पर रहते हैं। इस जगह को चर इलाका कहते हैं। यहां की लगभग पूरी आबादी बांग्ला बोलने वाले मुस्लिमों की है, जिन्हें असम में मियां मुस्लिम कहते हैं। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा अपने भाषणों में मियां मुस्लिमों को निशाने पर रखते हैं। पिछले कुछ भाषण और सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने मियां मुस्लिमों पर ऐसे बयान दिए, जिससे मुख्यमंत्री और मियां मुस्लिम दोनों विवादों में आ गए। असम की 126 सीटों पर 9 अप्रैल को वोटिंग होगी। हिमंता जलुकबाड़ी सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने 20 मार्च को नामांकन दाखिल कर दिया है। BJP जीती तो वे दोबारा मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। CM पद की शपथ लेते हुए उन्होंने कहा था, ‘मैं भारत के संविधान के प्रति सच्ची श्रद्धा और निष्ठा रखूंगा, भारत की संप्रभुता और अखंडता अक्षुण्ण रखूंगा, भय या पक्षपात, अनुराग या द्वेष के बिना, संविधान और विधि के अनुसार सभी लोगों के प्रति न्याय करूंगा’ हालांकि उनके बयान इस शपथ से मेल नहीं खाते। कभी वे कहते हैं कि मियां मुस्लिमों को इतना परेशान करो कि असम छोड़कर चले जाएं। कभी कहते हैं, मियां मुस्लिम किडनी दे देंगे, पर वोट नहीं देंगे। आखिर क्या हो गया कि हिमंता एक समुदाय के बारे में आक्रामक बयान दे रहे हैं। यही समझने दैनिक भास्कर की टीम दूसरे पक्ष यानी मियां मुस्लिमों के पास पहुंची। कामरूप का सोंताली गांवयहां 95% आबादी मियां मुस्लिमसबसे पहले हम गुवाहाटी से करीब 75 किलोमीटर दूर कामरूप जिले के सोंताली गांव पहुंचे। सोंताली समारिया विधानसभा सीट में है। समारिया विधानसभा क्षेत्र में करीब 1.3 लाख लोग रहते हैं, इनमें करीब 95% मियां मुस्लिम हैं। सोंताली के बाजार में अशरफ से मिले। उम्र करीब 35 साल। अशरफ कहते हैं, ‘यहां माहौल अच्छा नहीं है। हमारे मुख्यमंत्री हिटलर और डोनाल्ड ट्रम्प की तरह शासन चला रहे हैं। सीधे बोलते हैं कि मुसलमानों को हटाओ और बांग्लादेश भेजो।’ साेंताली से करीब 5 किमी दूर ब्रह्मपुत्र नदी का किनारा है। मियां मुस्लिमों की कहानी इसी जगह से जुड़ी है। यहां के ज्यादातर मर्द लुंगी पहने नजर आएंगे। कुछ महिलाएं नथुनों के निचले हिस्से में नथ पहनती हैं। इनका मुख्य पेशा खेती, मछली पकड़ना और बेचना है। हम नाव से एक आईलैंड पर पहुंचे। इसे बोको गांव कहते हैं। मियां मुस्लिम यहां रहकर खेती करते हैं। बाढ़ आती है, तब उसी बाजार की तरफ चले जाते हैं, जहां से हम यहां आए थे। ये मिट्टी वाला एरिया है। कुछ-कुछ दूरी पर झोपड़ियां बनी हैं। दोपहर हो चुकी थी। खेतों में काम करके थक चुकी कुछ महिलाएं और पुरुष ऊंचे चबूतरे पर बैठकर आराम कर रहे थे। हमने इन लोगों से पूछा कि मुख्यमंत्री आपके बारे में बयान देते हैं, क्या आपने सुने हैं? जवाब कुद्दुस अली देते हैं। कहते हैं, ‘मुख्यमंत्री हमारे बारे में बहुत खराब बोलते हैं। वे पहले कांग्रेस में थे, तब यहां आते थे। तब हम भी उन्हें पसंद करते थे, लेकिन अब नहीं करते। BJP में जाने के बाद उन्होंने हिंदू-मुस्लिम की राजनीति शुरू कर दी है।’ ‘असम में 60% हिंदू और 40% मुस्लिम आबादी है। हिंदू-मुस्लिम की राजनीति करने से उन्हें ज्यादा हिंदू वोट मिलेंगे और वे जीत सकते हैं। इसीलिए बांग्लादेश का मुद्दा उठा रहे हैं। हमारे पास आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी सब है। फिर भी हमें बांग्लादेशी बता रहे हैं। वे बोलते हैं कि मियां हटाओ, देश बचाओ।’ महिलाएं बोलीं- CM ने पैसे दिए, लेकिन घर तोड़ दियाअसम सरकार अरुणोदय योजना के तहत महिलाओं को हर महीने 1,450 रुपए देती है। मुफ्त राशन भी मिलता है। हमने योजना का फायदा लेने वाली मुस्लिम महिलाओं से बात की। वे अरुणोदय योजना के अलावा सेल्फ हेल्प ग्रुप को मिलने वाले 10 हजार रुपए से खुश हैं। वे कहती हैं कि मुख्यमंत्री अच्छे हैं। हालांकि, एक महिला शिकायती लहजे में बोलीं, ‘मुझे कुछ नहीं दिया, तो मैं उन्हें क्यों अच्छा कहूं। हमारा तो घर तोड़ दिया। वो मुझे बिल्कुल पसंद नहीं हैं।’ हिमंता कब और कैसे मियां मुस्लिमों के खिलाफ होते गए1979 से 1985 के बीच असम में बांग्लादेश से आए घुसपैठियों के खिलाफ अखिल असम छात्र संघ के नेतृत्व में आंदोलन हुआ था। इस पर ‘इन्फिल्ट्रेशन-जेनेसिस ऑफ असम मूवमेंट’ किताब लिखने वाले प्रो. अब्दुल मन्नान बताते हैं कि पहले हिमंता इस तरह नहीं बोलते थे। वे कांग्रेस में थे, तब उन्होंने कहा था कि गुजरात में पानी के पाइप में मुस्लिमों का खून बहता है। और अब कहते हैं कि मुस्लिमों ने असम को बर्बाद कर दिया। वे सिर्फ सत्ता पाने के लिए ये सब कर रहे हैं। 1. मुस्लिम विवाह कानून रद्द कियाअसम सरकार ने 23 फरवरी, 2024 को करीब 89 साल पुराने असम मुस्लिम विवाह और तलाक पंजीकरण अधिनियम 1935 को रद्द कर दिया। तब हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा था कि इस कानून में निकाह को रजिस्टर्ड करने की परमिशन देने वाले प्रावधान शामिल थे, भले ही दूल्हा और दुल्हन 18 और 21 साल की कानूनी उम्र तक न पहुंचे हों। इससे सरकार को बाल विवाह रोकने में मदद मिलेगी।2. एक से ज्यादा शादी करने पर रोकअसम विधानसभा ने बहुविवाह पर रोक लगाने के लिए 27 नवंबर, 2025 को विधेयक पारित किया। इस कानून के तहत एक पत्नी के रहते हुए दूसरी शादी करने पर 7 साल तक की सजा हो सकती है। असम में हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 लागू है। इसके तहत हिंदू दो शादी नहीं कर सकते। 3. 1,281 मदरसे बंद किएहिमंता सरकार ने 27 जनवरी 2021 को असम मदरसा शिक्षा (प्रांतीयकरण) अधिनियम, 1995 और असम मदरसा शिक्षा (शिक्षकों की सेवाओं का प्रांतीयकरण और शैक्षणिक संस्थानों का पुनर्गठन) अधिनियम, 2018 को निरस्त कर दिया। इससे 1,281 मदरसों को मिडिल इंग्लिश यानी ME स्कूल में बदल दिया गया। इसका असर अहमद की कहानी से समझिए। अहमद 8वीं में पढ़ता है। सरकारी मदरसा बंद होने के बाद उसे कुरान सीखने के लिए 150 किमी दूर दूसरे जिले होजाई जाता है। अहमद का मदरसा अब मिडिल स्कूल है। उसमें कुरान नहीं पढ़ाई जाती। इसलिए वह निजी मदरसे में जाता है। इस मसले पर असमिया परिषद के जनरल सेक्रेटरी मुक्तार मंडल कहते हैं, ‘देश का कानून समान है, लेकिन हिमंता सरकार ने मुसलमानों को टारगेट करके कानून लागू किया है, ताकि मुस्लिम कोर्ट- कचहरी में दौड़ते रह जाएं।’ 4. 5 समुदायों को असमिया मुस्लिम का दर्जा, मियां मुस्लिम इससे बाहरहिमंता 5 मुस्लिम समुदायों को खिलंजिया, यानी भूमि पुत्र बताते हैं। इसमें गोरिया, मोरिया, जोलहा, देशी और सैयद शामिल हैं। ये सभी असमिया भाषा बोलते हैं। गोरिया, मोरिया, जोलहा चाय बागानों के आसपास बसे हैं। देशी मुसलमान निचले असम में रहते हैं। सैयद को असमिया मुसलमान कहा जाता है। एक फैसला चुनाव आयोग काबाकी राज्यों में SIR, लेकिन असम में SRदेशभर में वोटर की पहचान के लिए स्पेशल इंसेंटिव रिवीजन, यानी SIR की प्रोसेस चल रही है। असम को इससे बाहर रखा गया। चुनाव आयोग ने कहा कि राज्य में चल रही NRC, यानी नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटीजन की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है। इसके बाद सिर्फ 10 दिन के अंदर 17 नवंबर 2025 को चुनाव आयोग ने असम में स्पेशल रिवीजन यानी SR कराने का आदेश जारी कर दिया। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने असम की बेदखली पर जारी रिपोर्ट में बताया था कि दरांग में 1,300, लखीमपुर में 500 और नगांव में 1 हजार से ज्यादा परिवार बेघर हुए। प्रभावितों में 90% से ज्यादा मियां मुस्लिम हैं। कांग्रेस लीडर और गुवाहाटी हाईकोर्ट के सीनियर वकील हाफिज रशीद अहमद चौधरी इस पर सवाल उठाते हैं। वे कहते हैं, ‘राज्य में जहां-जहां सरकार ने अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान चलाया है, वहां अब लोग नहीं रहते। घर टूटने की वजह से वे दूसरी जगह शिफ्ट हो गए। बीएलओ उनके वेरिफिकेशन के लिए जाएंगे, लेकिन वहां कोई नहीं मिलेगा। इससे सैकड़ों नाम कट सकते हैं।’ असमिया मुस्लिम बोले- मियां मुस्लिम हमारी जमीन हड़प रहेकामरूप जिले के सोयगांव में रहने वाले अबुल कासिम असमिया मुस्लिम हैं। वे कहते हैं, ‘हमारे गांव में बांग्लादेशी घुसपैठिए (मियां मुस्लिम) रहते हैं। उन लोगों ने हमारी जमीन हड़प ली। कोर्ट में केस चल रहा है। जमीनों का टैक्स हम भरते हैं, लेकिन रहते वे हैं। हम सब हिंदू-मुस्लिम गोरिया- मोरिया भाई-भाई हैं, लेकिन मियां मुस्लिम के साथ नहीं हैं।’ मंजू बीबी गोरिया मुस्लिम समुदाय से हैं। वे कहती हैं, कुछ मियां लोगों की वजह से हमें परेशानी होती है। चोरी-डकैती की घटनाओं से डर का माहौल रहता है। खासकर लड़कियां असुरक्षित महसूस करती हैं। हालांकि, मोहम्मद तमीज अली अबुल और मंजू बीबी से अलग राय रखते हैं। वे कहते हैं ‘मुख्यमंत्री सिर्फ दिखावा करते हैं। हमारे लिए कुछ नहीं करते। ये कई साल से चल रहा है। मुख्यमंत्री गोरिया मुस्लिम के साथ नहीं हैं। वे मियां के साथ हैं। हिमंता असमिया मुस्लिम के नाम पर राजनीति कर रहे हैं।’ ‘मियां मुस्लिमों को सभी योजनाओं का फायदा क्यों मिलता है। वे बांग्लादेशी हैं तो उन्हें हमसे ज्यादा फायदा क्यों मिल रहा है। मुख्यमंत्री के बोलने से नहीं होगा, करना पड़ेगा। हम खिलंजिया (स्वदेशी) मुस्लिम, मियां मुस्लिम से अलग हैं। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री हमारी जमीन लौटाएं और हमें बसाएं।’ ‘मुस्लिमों को आपस में लड़ाने की कोशिश’वहीं, प्रो. अब्दुल मन्नान कहते हैं, ‘मुस्लिमों को आपस में लड़ाने की कोशिश की जा रही है। गोरिया, मोरिया को कितना खिलंजिया माना गया है, इसका जवाब मुख्यमंत्री को देना होगा। हजारों खिलंजिया का नाम वोटर लिस्ट से काटा गया। ये BJP की स्ट्रैटजी है कि मियां मुस्लिम के खिलाफ दूसरे ग्रुप को खड़ा करे।’ ‘हिमंता बिस्वा सरमा स्ट्रैटजी बनाने में माहिर हैं। उन्होंने पहले एजेंडा चलाया कि झारखंड में घुसपैठिए हैं। अगर BJP की सरकार आई, तो सबको भगा देंगे। दो महीने वहां खूंटा गाड़कर बैठे रहे, लेकिन क्या हुआ। वे कुछ समय तक कुछ लोगों को मूर्ख बना सकते हैं, लेकिन हमेशा नहीं बना सकते।’ कांग्रेस से BJP में आए हिमंता, असम में सरकार बनवाई …………………….. असम से ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ेंक्या महिलाएं खोलेंगी BJP की जीत का रास्ता, स्कीम से मुस्लिम भी खुश कामरूप जिले में एक महिला साइकिल पर बेटी को लेकर जा रही थी। हमने पूछा- सरकारी योजनाओं के पैसे मिले क्या? जवाब मिला- ‘हां, मिले हैं।’ हमने पूछा, अबकी बार किसकी सरकार? वे मुस्कुराकर बोलीं- ‘BJP की।’ असम में करीब हर चौक-चौराहे पर सरकारी योजनाओं और उनका फायदा लेने वालों की तस्वीरें हैं, जिनमें CM हिमंता बिस्वा सरमा महिलाओं को चेक देते दिख रहे हैं। इन योजनाओं से मुस्लिम महिलाएं भी खुश हैं। पढ़िए पूरी खबर...
Cuba Crisis: क्यूबा पर मंडराते संकट के बादल, ट्रंप की 'आसन्न कार्रवाई' की चेतावनी से हड़कंप
ट्रंप प्रशासन ने क्यूबा की घेराबंदी तेज कर दी है। आम जनता बुनियादी संसाधनों की कमी से जूझ रही है। अमेरिकी प्रतिबंधों, तेल की किल्लत के कारण पूरे क्यूबा में ब्लैकआउट (बिजली कटौती) की स्थिति है।
US Iran War: अमेरिकी F-35 लाइटनिंग विमान पर हमले का दावा, आपात लैंडिंग की पुष्टि
अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के हवाले से सामने आई रिपोर्ट्स में कहा गया है कि मिसाइल हमले के बाद संबंधित एफ-35 को आपात स्थिति में लैंडिंग करनी पड़ी, लेकिन विमान और पायलट दोनों सुरक्षित हैं।
नेतन्याहू बोले- US को युद्ध में हमने नहीं घसीटा, दावा- ईरान की परमाणु-मिसाइल क्षमता लगभग खत्म
पत्रकारों से बातचीत में नेतन्याहू ने कहा, “हम जीत रहे हैं और ईरान तबाह हो रहा है।” उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के मिसाइल और ड्रोन भंडार को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है और इन्हें पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा।
अमेरिकी कांग्रेस में 200 बिलियन डॉलर युद्ध फंडिंग पर तीखी बहस
ईरान युद्ध की बढ़ती लागत और इसके वैश्विक बाजारों पर प्रभाव ने अमेरिकी कांग्रेस में विभाजन को और गहरा कर दिया है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और जापान की प्रधानमंत्री सनाए ताकाइची के बीच व्हाइट हाउस में हुई बैठक ने वैश्विक राजनीति में एक अहम संदेश दिया
2026 में अधिक सक्रिय राजकोषीय नीति का कार्यान्वयन जारी रहेगा : चीनी वित्त मंत्रालय
चीनी वित्त मंत्रालय ने '2025 में चीन की राजकोषीय नीति के कार्यान्वयन पर रिपोर्ट' जारी की है, जिसमें बताया गया है कि वर्ष 2025 में चीन की अर्थव्यवस्था ने समग्र रूप से स्थिर और सुचारू प्रगति बनाए रखी तथा राजकोषीय संचालन व्यवस्थित और संतुलित रहा
आईएमओ बैठक: ईरान को होर्मुज पर कड़ा संदेश
अबू धाबी में अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) की परिषद के 36वें असाधारण सत्र में एक अहम निर्णय लिया गया
हालात ठीक नहीं, युद्ध को रोकने की जरूरत: तेहरान यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर
मिडिल ईस्ट तनाव का असर पूरी दुनिया पर पड़ने लगा है। पहले यूएस-इजरायल की ईरान पर एयर स्ट्राइक फिर जवाबी कार्रवाई इसके बाद स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर तनातनी, खार्ग पर अमेरिका के हमले से होते हुए अब बात ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले तक पहुंच गई है
चीन-यूरोप रेलवे एक्सप्रेस खुली विश्व अर्थव्यवस्था को गति दे रही है : सीजीटीएन सर्वे
इस वर्ष के पहले दो महीनों में चीन-यूरोप रेलवे एक्सप्रेस ने कुल 3,501 रेलगाड़ियों का संचालन किया और 3 लाख 52 हजार टीईयू (टीईयू) माल का परिवहन किया
चीन-यूएई संबंधों को नई मजबूती देने पर जोर, तिंग श्वेएश्यांग ने यूएई दूत से की मुलाकात
चीन की राजधानी पेइचिंग में सीपीसी केंद्रीय समिति के पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य और चीनी राज्य परिषद के उप प्रधानमंत्री तिंग श्वेएश्यांग ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति के चीन मामलों के विशेष दूत खालदून खलीफा अल मुबारक से मुलाकात की
शी चिनफिंग ने तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रीय नेता से मुलाकात की
चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने राजधानी पेइचिंग स्थित त्याओयुथाई स्टेट गेस्टहाउस में तुर्कमेनिस्तान के राष्ट्रीय नेता और पीपुल्स काउंसिल के अध्यक्ष गुरबांगुली बर्दिमुहामेदोव से मुलाकात की
चीन-अमेरिका व्यापार परामर्श तंत्र की भूमिका का लाभ उठाना जारी रखें : चीनी वाणिज्य मंत्रालय
चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने आयोजित नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पेरिस में हुई चीन-अमेरिका व्यापार वार्ता पर जानकारी दी
बेटी के घर जाना बना अली लारीजानी की मौत का कारण, कैसे ईरानी सुरक्षा प्रमुख को इजरायली सेना ने खोजा
खामेनेई के मारे जाने के बाद इजरायल के लिए लारीजानी सबसे बड़ा लक्ष्य बन गए थे। इजरायली खुफिया एजेंसियां लगातार उनकी लोकेशन ट्रैक करने की कोशिश कर रही थीं। हालांकि, लारीजानी को भी इस खतरे का पूरा अंदाजा था। इसी वजह से उन्होंने अपनी सुरक्षा बढ़ा दी थी और लगातार ठिकाना बदल रहे थे।
हमलों से ईरान हुआ कमजोर, लेकिन खतरा अभी खत्म नहीं: अमेरिकी इंटेलिजेंस
अमेरिकी इंटेलिजेंस अधिकारियों ने सीनेटरों को बताया कि हाल के अमेरिकी अभियानों से ईरान की सैन्य और रणनीतिक क्षमताएं काफी कम हो गई हैं
कतर हमले पर ट्रंप का गुस्सा: ईरान को तबाह करने की चेतावनी
इजरायल ने ईरान के सबसे बड़े पार्स गैस फील्ड पर भीषण हमला किया है। साउथ पार्स दुनिया की सबसे बड़ी प्राकृतिक गैस फील्ड मानी जाती है
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री ने ईंधन आपूर्ति के लिए की टास्क फोर्स की घोषणा
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बेनेस ने गुरुवार को घोषणा की कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच संघीय सरकार ने ईंधन सुरक्षा टास्क फोर्स का गठन किया है
अमेरिका में इमिग्रेशन पर सख्त रुख, मार्कवेन मुलिन बोले-कानून तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई
अमेरिका के गृह सुरक्षा सचिव पद के नामित मार्कवेन मुलिन ने कहा कि वे कानूनी आव्रजन का समर्थन करते हैं
पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने ईद के अवसर पर की युद्धविराम की घोषणा
पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने ईद-उल-फ़ितर के अवसर पर शत्रुता में “अस्थायी विराम” की घोषणा की। यह कदम सऊदी अरब, तुर्की और क़तर की अपीलों के बाद उठाया गया
पेंटागन की चेतावनी: रूस-चीन को एक साथ रोकना ‘अभूतपूर्व चुनौती’
वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों ने विधायकों को बताया कि संयुक्त राज्य अमेरिका को एक ही समय में दो परमाणु शक्तियों को रोकने की “अभूतपूर्व चुनौती” का सामना करना पड़ रहा है
यूपी के जेवर में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट आपके सफर के लिए तैयार है। फर्स्ट फेज में 3300 एकड़ में बने एक टर्मिनल और रनवे का काम पूरा हो चुका है। बस फिनिशिंग बाकी है। एक रनवे के साथ इस टर्मिनल की सालाना क्षमता 3 करोड़ पैसेंजर संभालने की होगी। एयरपोर्ट के फर्स्ट फेज की लागत करीब 11 हजार करोड़ है। 28 मार्च को PM मोदी इसका उद्घाटन करेंगे। सभी 4 फेज का काम पूरा हो जाने के बाद ये एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का छठा बड़ा एयरपोर्ट होगा। हालांकि पूरा बनने की डेडलाइन 2040 है। भास्कर सबसे पहले इस एयरपोर्ट के अंदर पहुंचा है। पढ़िए आपके काम की सारी बातें… 1. टर्मिनल बिल्डिंग 2. एंट्री गेट 3. डिपार्चर एरिया 4. सेल्फ बैगेज ड्रॉप फैसिलिटी 5. सिक्योरिटी चेक 6. बोर्डिंग एरिया 7. लाउंज एरिया 8. टेंपल ऑफ बेल्स 9. एयरोब्रिज 10. सुरक्षा नोएडा एयरपोर्ट की खास बातें 1. रनवे के लिहाज से एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर 5 रनवे बनाए जाने हैं। यहां छठवां रनवे भी बनाया जा सकता है। इसके बाद ये एशिया का सबसे बड़ा और दुनिया का छठवें नंबर का एयरपोर्ट होगा। रनवे के लिहाज से एशिया में चीन का शंघाई पुडोंग इंटरनेशनल एयरपोर्ट सबसे बड़ा है। 2. एरिया के लिहाज से भी एशिया में सबसे बड़ानोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कुल 52 स्क्वायर किमी में बनना प्रस्तावित है। अगर ऐसा हुआ तो एरिया वाइज भी ये एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बन जाएगा। अभी एशिया का सबसे बड़ा एयरपोर्ट चीन का बीजिंग डेक्सिंग इंटरनेशनल एयरपोर्ट है। इसका एरिया 47 स्क्वायर किमी है। 3. पूरा बनने के बाद देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगानोएडा एयरपोर्ट के पहले स्टेज के लिए यमुना डेवलपमेंट अथॉरिटी ने 3300 एकड़ जमीन अलॉट की है। ये एरिया करीब 13.35 स्क्वायर किमी है। दूसरे स्टेज में एयरपोर्ट का कुल एरिया बढ़कर करीब 7200 एकड़ या 29 स्क्वायर किमी हो जाएगा। अभी देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट हैदराबाद का राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जो करीब 5500 एकड़ यानी 22.25 स्क्वायर किमी में बना है। 28 मार्च को उद्घाटन, अप्रैल में पहली उड़ाननोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन PM मोदी 28 मार्च को करेंगे। हालांकि फ्लाइट अप्रैल से शुरू होंगी। नोएडा एयरपोर्ट अथॉरिटी से जुड़े अफसरों ने बताया कि किराया अभी तय नहीं है, लेकिन ये दिल्ली एयरपोर्ट मुकाबले कम हो सकता है क्योंकि यहां एयरलाइंस के लिए डेवलपमेंट चार्ज कम रखा गया है।
ट्रंप का बड़ा बयान: ईरान का बचा-कुचा नेतृत्व भी खत्म करेंगे!
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका ईरान की मौजूदा शासन व्यवस्था के बचे-कुचे हिस्से को 'खत्म' कर सकता है
इजराइल-ईरान तनाव में बड़ा दावा, ईरान के खुफिया मंत्री इस्माइल खातिब मारे गए
इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज के मुताबिक, रात में किए गए एयरस्ट्राइक में ईरान के शीर्ष खुफिया अधिकारी इस्माइल खातिब को निशाना बनाया गया। उन्होंने इसे ईरान की सुरक्षा संरचना पर बड़ा प्रहार बताया है।
मोजतबा खामेनेई ने ठुकराए युद्धविराम के प्रस्ताव, कहा- अमेरिका-इजरायल पहले हार मानें
एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, दो मध्यस्थ देशों के जरिए अमेरिका की ओर से तनाव कम करने और संभावित युद्धविराम के प्रस्ताव तेहरान भेजे गए थे। हालांकि, सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने इन्हें स्पष्ट रूप से ठुकरा दिया।
ईरान में मोसाद के लिए जासूसी के आरोप में व्यक्ति को फांसी, युद्ध के बीच सख्त संदेश
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपी को पिछले साल जून में सवजबलाघ शहर से गिरफ्तार किया गया था। उस समय ईरान और इजरायल के बीच 12 दिन तक चला संघर्ष जारी था, जिससे पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ था।
US Iran War: खाड़ी देशों ने अमेरिका को चेताया, ईरान को 'घायल' छोड़ना होगी बड़ी भूल
खाड़ी देशों ने अमेरिका से कहा है कि यदि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की जा रही है, तो उसे निर्णायक स्तर तक ले जाना जरूरी है। उनका तर्क है कि आधे-अधूरे कदम ईरान को दोबारा ताकत हासिल करने का मौका देंगे, जिससे वह क्षेत्रीय ऊर्जा ढांचे को फिर निशाना बना सकता है।
जोसेफ केंट ने अपने इस्तीफे पत्र और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखे संदेश में आरोप लगाया कि अमेरिका ने यह युद्ध स्वतंत्र निर्णय के तहत नहीं, बल्कि बाहरी दबाव में शुरू किया।
परमाणु ऊर्जा की ओर लौटने के खिलाफ हैं जर्मन चांसलर
यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेय लाएन यूरोपीय संघ में नए परमाणु ऊर्जा संयंत्र बनाने के प्रस्ताव के पक्ष में हैं, लेकिन जर्मन चांसलर मैर्त्स ने इसे नामुमकिन बताया है, आखिर क्यों
रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स के बीच अमेरिकी मतदान विधेयक को लेकर टकराव
अमेरिकी सीनेट में तीखी राजनीतिक लड़ाई शुरू हो गई, जब रिपब्लिकन ने सेव एक्ट को चुनावों की सुरक्षा के लिए एक उपाय के रूप में आगे बढ़ाया जबकि डेमोक्रेट्स ने इसे मतदाता दमन का कदम बताते हुए कहा कि इससे लाखों पात्र अमेरिकी नागरिकों को मतदान करने से रोका जा सकता है।
ट्रंप का बड़ा दावा: ईरान अब परमाणु हथियार नहीं बना सकता
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई इसलिए की, ताकि वह परमाणु हथियार हासिल न कर सके। उनका दावा है कि इस कार्रवाई से ईरान की सैन्य ताकत को काफी नुकसान पहुंचा है।
क्यूबा में ब्लैकआउट पर अमेरिका का सख्त बयान, ट्रंप ने दिए कार्रवाई के संकेत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने क्यूबा में हुए देशव्यापी बिजली संकट के बाद वहां की सरकार पर तीखा हमला बोला है
अमेरिका ने 330 अरब डॉलर के हथियार बेचे, तेज प्रणाली के लिए बनाया दबाव
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले वित्त वर्ष में संयुक्त राज्य अमेरिका ने 330 अरब डॉलर से अधिक के हथियार निर्यात को मंजूरी दी
होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी हमला, ईरानी मिसाइल ठिकाने ध्वस्त
अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट के पास ईरान के मिसाइल ठिकानों पर नए हमले किए हैं। सेना के अधिकारियों का कहना है कि ये ठिकाने अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खतरा बन रहे थे। यह कार्रवाई “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी” के तहत की जा रही है, जो अब और तेज हो गया है।
23 फरवरी 2026, तमिलनाडु के वेल्लोर से सटे नेशनल हाईवे-48 पर हजारों लोगों की भीड़ इकट्ठा हुई। इतना ट्रैफिक की 4 घंटे तक गाड़ियां अपनी जगह से हिल नहीं पाईं। भगदड़ या किसी तरह की अनहोनी के डर से प्रशासन को 900 पुलिसवालों को मौके पर लगाना पड़ा। ये दीवानगी साउथ फिल्मों के सुपरस्टार थलापति विजय की पब्लिक रैली के लिए थी। वेल्लोर रैली में थलापति विजय ने पहली बार ऐलान किया कि 2026 का विधानसभा चुनाव 'विजय बनाम स्टालिन' की लड़ाई है। तमिलनाडु CM और DMK प्रमुख एमके स्टालिन पर आरोप लगाते हुए विजय ने कहा- राज्य में अभी एक स्टैंड-अप कॉमेडी वाली सरकार राज कर रही है। मुख्यमंत्री के असली दोस्त रिश्वत-भ्रष्टाचार हैं। अगर दम है तो वे चुनाव से पहले अपनी संपत्ति का खुलासा करें। तमिलनाडु की 234 सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी। उससे पहले विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम यानी TVK को सत्ताधारी DMK-कांग्रेस के गठबंधन के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है। दूसरी तरफ BJP, स्टालिन और विजय की तकरार को चुनाव में भुनाना चाहती है। सोर्स बताते हैं कि TVK को NDA में लाने लिए BJP लीडरशिप पूरा जोर लगा रही है। यहां तक कि एक दूसरे राज्य के उपमुख्यमंत्री के जरिए विजय को मनाने की कोशिशें चल रही हैं। तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले क्या विजय BJP से हाथ मिलाने वाले हैं? NDA अलांयस में शामिल होने से TVK को कितना फायदा होगा? सत्तारूढ़ DMK और कांग्रेस का गठबंधन विजय के खिलाफ क्या रणनीति बना रहा है? ये सवाल हमने तमिलनाडु की पॉलिटिकल पार्टियों और एक्सपर्ट्स से पूछे। विजय को NDA में लाने के लिए इतनी खलबली क्यों? दो साल पहले तक तमिलनाडु में मेन मुकाबला DMK-कांग्रेस के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव अलायंस (SPA) और AIADMK-BJP के NDA गठबंधन के बीच माना जा रहा था। 2 फरवरी 2024 को साउथ फिल्मों के सुपरस्टार विजय ने अपनी पॉलिटिकल पार्टी TVK की ऑफिशियल घोषणा कर दी। अब 2026 विधानसभा चुनाव में TVK थर्ड फ्रंट के तौर पर उभरी है। विजय का इम्पैक्ट कम करने के लिए DMK ने कांग्रेस और वामपंथी दलों सहित 23 पार्टियों को अपने अलायंस में शामिल किया है। मुख्यमंत्री स्टालिन की अगुआई वाले SPA का रुख साफ है कि वो विजय के साथ किसी भी सूरत में हाथ नहीं मिलाएंगे। दूसरी तरफ, NDA ब्लॉक में AIADMK, BJP, पट्टाली मक्कल काची (PMK) और AMMK जैसी दूसरी पार्टियां शामिल हैं। 2021 के विधानसभा चुनाव में DMK ने 234 सीटों में से 133 सीटें जीती थीं और सहयोगियों की मदद के बिना ही सरकार बनाई थी। वहीं, NDA गठबंधन महज 75 सीटों पर ही सिमट गया था। इसमें AIADMK 66 और BJP महज 4 सीट ही जीत पाई थी। BJP चुनाव से पहले इस नुकसान की भरपाई के लिए विजय से लगातार संपर्क कर रही है। तमिलनाडु के चेन्नई, कांचीपुरम, कोयंबटूर, मदुरै और तंजावुर में विजय की अच्छी फैन फॉलोइंग है। करूर में 18 से 35 साल के वोटर्स सबसे ज्यादा हैं। विजय यहां आकर फिल्म रिलीज और सोशल मीडिया कैंपेन जैसे इवेंट में शामिल हो चुके हैं। 27 सितंबर 2025 को करूर में ही विजय की रैली में भगदड़ के दौरान 41 लोगों की मौत हुई थी। इसकी जांच CBI कर रही है। BJP को लगता है कि अगर उसके 2-3% वोट भी TVK के साथ जुड़ते हैं, तो ये NDA के लिए निर्णायक हो सकता है। एक इंटरनल रिपोर्ट ने तमिलनाडु BJP को एक्टिव कियातमिलनाडु और केरल विधानसभा चुनाव पर करीब से नजर रख रहे सीनियर जर्नलिस्ट केए शाजी कहते हैं, ‘इलेक्शन से पहले वोटर्स का मूड जानने के लिए कई सर्वे किए गए, जिनमें NDA गठबंधन के लिए बहुत पॉजिटिव तस्वीर पेश नहीं की गई। यही वजह है कि BJP विजय को साथ लाने के लिए हर मुमकिन कोशिश कर रही है।’ कुछ दिनों पहले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पास भी इलेक्शन से जुड़े कई प्री-सर्वे मिलाकर एक इंटरनल रिपोर्ट भेजी गई। इसमें चुनाव से पहले AIADMK और BJP की हालत पतली बताई गई।रिपोर्ट में बताया गया कि तमिलनाडु की कई सीटों पर NDA गठबंधन तीसरे नंबर पर भी रह सकता है। इन आकलनों के बाद से ही पार्टी की लीडरशिप नाराज है। ’विजय को मनाने के लिए साउथ फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े बड़े चेहरों के साथ-साथ उनके दोस्तों और दूसरे राज्य के एक उपमुख्यमंत्री से दबाव बनाया जा रहा है।’ तमिलनाडु BJP से जुड़े सोर्स के मुताबिक, BJP ने TVK के सामने पेशकश की है कि अगर NDA गठबंधन चुनाव जीतता है कि वो विजय को तमिलनाडु के डिप्टी CM का पद और पार्टी के प्रस्तावित सीट-बंटवारे में लगभग 55 सीटें देने को तैयार है। फिलहाल इस बात को लेकर दोनों पार्टियों की तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया है। विजय की पर्सनल लाइफ और तलाक DMK के लिए चुनावी मुद्दातमिलनाडु विधानसभा चुनाव से पहले थलापति विजय से जुड़ा तलाक का विवाद भी राजनीतिक समीकरणों का मुद्दा बना हुआ है। विजय से अलग रह रही उनकी पत्नी संगीता सोरनलिंगम ने दिसंबर 2025 में चेंगलपट्टू कोर्ट में तलाक की याचिका दायर कर गुजारे भत्ते की मांग की थी। संगीता ने अंतरिम राहत के लिए एक और याचिका दायर की, जिसमें उन्होंने कोर्ट से पनयूर वाले घर में रहने की इजाजत मांगी। ये मामला अब भी चल रहा है। सीनियर जर्नलिस्ट डॉ. बसवराज इटनाल कहते हैं, ‘विजय की निजी जिंदगी के उतार-चढ़ाव और उनके तलाक को DMK चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही है। मेरा मानना है कि इससे DMK को राजनीतिक तौर पर कोई फायदा होने की संभावना नहीं है।’ ‘हालांकि, कुछ हद तक पत्नी को घर से बेदखल करने का मामला विजय की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है क्योंकि इससे लोगों (खासकर महिला वोटर्स) के मन में संगीता के प्रति सहानुभूति पैदा होगी। DMK विजय को कट्टर विरोधी के तौर पर देखती है। करूर भगदड़ के मुद्दे पर स्टालिन थलापति को घेरते रहे हैं।‘ TVK-NDA गठबंधन के चांसेज की 3 बड़ी वजहें1. कानूनी और सेंट्रल एजेंसियों का दबाव विजय पहले से ही इनकम टैक्स केस, तलाक और करूर भगदड़ मामले में घिरे हुए हैं। तमिलनाडु की राजनीति में ये एक पुराना पैटर्न रहा है कि जब भी कोई नया नेता उभरता है, तो केंद्र की एजेंसियां एक्टिव हो जाती हैं। पॉलिटिकल एनालिस्ट इसे 'दबाव की राजनीति' मानते हैं, जिससे नई पार्टियों को गठबंधन के लिए मनाया जाता है। लिहाजा, खुद पर प्रेशर कम करने के लिए विजय गठबंधन में शामिल हो सकते हैं। 2. TVK और NDA का एक समान विरोधी विजय का सीधा मुकाबला सत्ताधारी DMK से है। तमिलनाडु में स्टालिन को चुनौती देने के लिए TVK को एक ऐसे साथी की जरूरत है, जो DMK को सीधी चुनौती दे सकता हो। मौजूदा वक्त में NDA गठबंधन ही DMK-कांग्रेस अलायंस की सबसे बड़ी विरोधी है। 3. पहला चुनाव,TVK को स्टेबिलिटी की उम्मीद 2026 विधानसभा चुनाव TVK के लिए पहली परीक्षा है। अपने दम पर 234 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने से पार्टी पर फाइनेंशियल प्रेशर बढ़ सकता है। ऐसे में BJP और AIADMK जैसी पार्टियों का साथ विजय को वो स्टेबिलिटी दे सकता है, जो एक नई पार्टी के पास नहीं होती। एक्सपर्ट बोले- BJP और विजय की दोस्ती से AIADMK को नुकसानतमिलनाडु और साउथ की पॉलिटिक्स पर 25 साल से नजर रख रहे पॉलिटिकल एनालिस्ट टीएस सुधीर कहते हैं, 'विजय महज 10 या 20 सीटों के लिए NDA में नहीं आएंगे, क्योंकि वे खुद को CM पद का दावेदार मानते हैं। इसलिए वे ज्यादा सीटें मांगेंगे। NDA अगर विजय को अपने साथ लाता है, तो उसे AIADMK के खाते से सीटें देनी पड़ेंगी। सोचने लायक बात है कि क्या एडप्पाडी पलानीस्वामी इस बात के लिए तैयार होंगे? अभी ये बड़ा सवाल होगा।' 'इस चुनाव में AIADMK की सीधी लड़ाई DMK से है। DMK तकरीबन 175-180 सीटों पर लड़ेगी। अगर NDA अलायंस TVK को 70 सीटें देता है, तो क्या AIADMK सिर्फ 120 या 130 सीटों पर ही लड़ेगी? अगर ऐसा हुआ तो ये तमिलनाडु की 60 साल पुरानी AIADMK पार्टी के लिए बड़ा साइकोलॉजिकल नुकसान होगा।' उनकी पर्सनल लाइफ को लेकर सुधीर कहते हैं, '20 अप्रैल को विजय को तलाक के मामले में कोर्ट में पेश होना है। 3 दिन बाद यानी 23 अप्रैल को वोटिंग होगी।' पॉलिटिकल पार्टियां क्या कह रहीं…BJP: स्टालिन के खिलाफ एंटी-इनकम्बेंसी, TVK पर कुछ बोलना जल्दबाजी तमिलनाडु BJP के स्टेट स्पोक्सपर्सन नरायणन तिरुपाठी कहते हैं, ‘बीते 5 साल में DMK और कांग्रेस ने तमिलनाडु के लोगों को धोखे में रखा है। DMK अलायंस को लेकर तमिलनाडु में जबरदस्त एंटी-इनकम्बेंसी है। BJP पिछले चुनाव से ज्यादा सीटें लाएगी।’ क्या चुनाव से पहले NDA-TVK के साथ एलायंस कर सकती है? इस सवाल के जवाब में नरायणन कहते हैं, ‘तमिलनाडु का विकास ही NDA गठबंधन का मकसद है। BJP ऐसी विचारधारा रखने वाली हर पार्टी के साथ खड़ी है। थलापति विजय की TVK के साथ अलायंस होगा या नहीं? इस पर कुछ भी बोलना अभी जल्दबाजी होगी।’ TVK: हमारा किसी से अलायंस नहीं, DMK भ्रम फैला रही TVK के संयुक्त महासचिव निर्मल कुमार कहते हैं, ’DMK लोगों के बीच भ्रम पैदा करके चुनावी फायदा लेना चाहती है। सोशल मीडिया पर जानबूझकर गलत जानकारी फैलाई जा रही है कि हमारी पार्टी BJP-AIADMK के नेताओं के साथ बातचीत कर रही है। ये महज अफवाहें हैं, जनता को इन पर ध्यान नहीं देना चाहिए।’ TVK के साथ जोड़कर किसी भी पार्टी के गठबंधन की बातचीत पूरी तरह निराधार है। DMK: TVK की रैलियों में आने वाले लोग फैन हैं, वोटर नहींDMK के सीनियर लीडर और स्टेट स्पोक्सपर्सन सलेम धरणीधरन कहते हैं, 'भीड़ का मतलब वोट नहीं होता। TVK की रैलियों में आने वाले लोग सिर्फ उनके फैन हैं, वोटर नहीं। DMK का 2019, 2021, 2024 चुनावों में जीत का ट्रैक रिकॉर्ड ये साबित करता है कि जनता को हमारे प्रशासन पर भरोसा है, न कि किसी फिल्मस्टार के भाषणों पर। एक राजनेता के तौर पर हम सभी जनता के सेवक हैं, लेकिन TVK पार्टी में शामिल लोग विजय के सेवक हैं।' ………….ये खबर भी पढ़ें… क्या साउथ बंगाल से निकलेगा BJP की जीत का रास्ता 7 मार्च को पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में BJP की परिवर्तन यात्रा पहुंची। यहां रघुनाथपुर इंडस्ट्रियल एरिया है इसलिए हिंदी भाषी और आदिवासी आबादी ज्यादा है। यहां से BJP के ही विधायक हैं, फिर भी रैली में भीड़ कम पहुंची। यहीं रास्ते में अवधेश राम मिले। वो रैली में नहीं आए लेकिन चाहते हैं कि राज्य में सरकार जरुर बदले। पढ़िए पूरी खबर…
क्या एआई दिग्गज एंथ्रोपिक को अपना सकता है जर्मनी?
अमेरिकी सरकार ने एआई कंपनी एंथ्रोपिक को अपनी सप्लाई चेन से बाहर कर दिया है. जर्मन चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स की गठबंधन सरकार एसपीडी के एक नेता ने इसे जर्मनी और यूरोप के लिए जीवन में एक बार मिलने वाला सुनहरा अवसर बताया
लड़का पैदा होने से क्यों परेशान हैं कुछ माता-पिता?
जर्मनी में कई माता-पिता अब एक लड़की को जन्म देना चाहते हैं. कई तय धारणाएं इसकी वजह हो सकती हैं, जैसे कि यह मानना कि लड़कियां शांत और लड़के शरारती होते हैं. क्या ऐसी सोच लैंगिक बराबरी की बहस में हमें पीछे नहीं खींच रही है
ईरान के सुरक्षा प्रमुख लारीजानी पर हमला, इस्राइली सेना ने हताहत होने को लेकर दिया बयान
इजराइल ने दावा किया है कि इस ऑपरेशन में बसीज पैरामिलिट्री फोर्स के कमांडर घोलामरेजा सुलेमानी भी निशाने पर थे। बसीज फोर्स ईरान में आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने और सरकार विरोधी प्रदर्शनों को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है।
पाकिस्तान का अफगानिस्तान के काबुल में बड़ा हमला, एयर स्ट्राइक में 400 लोगों की मौत, 250 घायल
हमले के एक प्रत्यक्षदर्शी 31 वर्षीय ओमिद स्तानिकज़ई जो अस्पताल में सुरक्षा गार्ड के रूप में काम करते हैं ने बताया कि हमले से पहले इलाके में असामान्य हलचल देखी गई थी।
बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और सख्त करेगा ईरान के खिलाफ एनर्जी बैन
अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने ईरान के ऊर्जा क्षेत्र पर बैन को और कड़ा करने के लिए बड़ा कानून पास किया है। तेहरान के साथ चल रहे तनाव के बीच दोनों पार्टियों के प्रतिनिधियों ने और कड़े कदम उठाने पर जोर दिया।
ईरान संघर्ष को लेकर ट्रंप पर बरसे डेमोक्रेट हकीम जेफ्रीज, बोले- अमेरिका को बेवजह युद्ध में धकेल दिया
अमेरिका में ईरान के साथ बढ़ते सैन्य तनाव और घरेलू आर्थिक मुद्दों को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है
जेडी वेंस ने ईरान के खिलाफ हमलों को लेकर राष्ट्रपति ट्रंप के फैसले का किया समर्थन
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के खिलाफ सरकार की सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर भरोसा है कि वह इस लड़ाई को संभाल लेंगे और पिछली गलतियों को रोक देंगे।
पाकिस्तान सरकार इमरान खान से उनके बेटों सुलेमान और कासिम की मुलाकात रोक रही: जेमिमा गोल्डस्मिथ
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री और पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के प्रमुख इमरान की पूर्व पत्नी जेमिमा गोल्डस्मिथ ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से दखल देने की अपील की है
बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर हमला, धमाकों के बाद परिसर में लगी आग
इराक की राजधानी बगदाद में स्थित अमेरिकी दूतावास पर मंगलवार को बड़ा हमला हुआ, जिसके बाद परिसर के अंदर आग लग गई। यह हमला उस समय हुआ जब दो विस्फोटक से लैस ड्रोन दूतावास के परिसर के भीतर गिर गए और उनके विस्फोट से आग भड़क उठी।
अमेरिकी फ्लाइट स्कूलों का चीनी पायलटों को ट्रेनिंग देना चिंताजनक: सीनेटर बैंक्स
अमेरिका में एक वरिष्ठ रिपब्लिकन सीनेटर ने विमानन सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियों को चेतावनी दी है कि अमेरिकी फ्लाइट स्कूलों में चीनी नागरिकों को ऐसी ट्रेनिंग दी जा रही है, जो अप्रत्यक्ष रूप से चीन की सैन्य महत्वाकांक्षाओं को मदद पहुंचा सकती है।
ईरान संघर्ष के बीच ट्रंप ने बीजिंग यात्रा टाली
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान से जुड़ा युद्ध जल्द खत्म हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस संघर्ष के कारण उन्होंने चीन की अपनी तय यात्रा को फिलहाल टाल दिया है, क्योंकि इस समय उन्हें वॉशिंगटन में रहना जरूरी लग रहा है।
16 जनवरी 2026 को पश्चिम बंगाल की CM ममता बनर्जी ने सिलीगुड़ी में महाकाल महातीर्थ मंदिर का शिलान्यास किया। 17 एकड़ में बनने वाला ये दुनिया के सबसे भव्य शिव मंदिरों में से एक होगा। करीब एक महीने पहले दिसंबर 2025 में ममता ने कोलकाता में दुर्गा आंगन का शिलान्यास किया था। इससे करीब 6 महीने पहले दीघा में पुरी की तर्ज पर जगन्नाथ धाम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की थी। पश्चिम बंगाल के इतिहास में ये पहला मंदिर है, जिसकी प्राण प्रतिष्ठा किसी मुख्यमंत्री ने की हो। सरकार का दावा है कि मंदिर बनने से इन इलाकों में लोकल बिजनेस बढ़ा है। सरकार को भी 100 करोड़ रुपए का फायदा हुआ है। हालांकि BJP इसे चुनावी तुष्टिकरण बता रही है। उसका कहना है कि ममता को कुर्सी जाने का डर है इसलिए मंदिर बना रही हैं। पश्चिम बंगाल में दो चरणों में 23 और 29 अप्रैल को चुनाव होने हैं। चुनाव में ममता की मंदिर पॉलिटिक्स से क्या बदलेगा, आखिर ममता को सॉफ्ट हिंदुत्व की जरूरत क्यों पड़ी? दैनिक भास्कर की टीम ने दीघा में ग्राउंड पर पहुंचकर इसे समझने की कोशिश की। लोग बोले- मंदिर भी मिला और रोजगार भीहम दीघा में मंदिर की बाहर सामान बेचने वाली कुछ महिलाओं से मिले। वे कैमरे पर बात करने से हिचक रही थीं, लेकिन कैमरा हटते ही बातचीत के लिए तैयार हो गईं। इनमें से एक सुमित्रा शंख बेचती हैं। वे कहती हैं, ‘ये मंदिर टूरिस्ट प्लेस पर बना है। दीघा में पूरे साल लोग घूमने आते हैं। इसके बनने से मेरे जैसी महिलाओं को रोजगार मिल गया। सुबह-शाम दो वक्त आती हूं और सामान बेचकर घर चली जाती हूं।’ यहीं मिले पारस रुइदास कहते हैं, ‘ममता बनर्जी ने आम लोगों के लिए मंदिर बनवाया है। लोग दीघा घूमने आते हैं, तो मंदिर भी घूम लेते हैं।‘ चुनाव पर इसके असर के बारे में पूछने पर वो कहते हैं, ‘सरकार तो TMC की ही बनेगी।‘ हालांकि मंदिर पॉलिटिक्स पर संजय शर्मा की राय अलग है। वे कहते हैं- राज्य में लोगों के पास रोजगार नहीं है। फिर मंदिर-मस्जिद बनाने से क्या होगा। लोगों को रोटी, कपड़ा और मकान चाहिए। सामान और रुपए बांटने से कुछ नहीं होने वाला है। यहां काम मिलना बंद हो गया है, कोई इस पर ध्यान नहीं दे रहा है। संजय गुस्से में कहते हैं, ‘BJP और TMC दोनों एक जैसे हैं। इनकी मंदिर-मस्जिद की राजनीति से कुछ नहीं होने वाला है।‘ वहीं, सुगतो मंडल कहते हैं ‘मंदिर बनने से बिजनेस बढ़ा है। लोकल लोगों ने कई छोटे-मोटे काम शुरू किए हैं।’ ममता के प्राण प्रतिष्ठा करने पर BJP के विरोध को लेकर सुगतो कहते हैं, ’ये BJP का उत्तर प्रदेश नहीं है, जहां महिलाओं को घर की चारदीवारी में रखा जाता है। यहां की महिलाएं मजबूत हैं। अगर दीदी पूजा कर रही हैं, तो इसका विरोध क्यों।’ ममता की एंटी-हिंदू छवि तोड़ने की कोशिशपश्चिम बंगाल में मंदिर पॉलिटिक्स ज्यादा पुरानी नहीं है। ये अभी हाल के कुछ साल में शुरू हुई है। इसे लेकर सीनियर जर्नलिस्ट विश्वभंर नेगर कहते हैं, ‘ममता बनर्जी पर हमेशा प्रो-मुस्लिम होने का इल्जाम लगता रहा है। इस छवि से बाहर आने के लिए उन्होंने सॉफ्ट हिंदुत्व का सहारा लिया है। मुस्लिम बहुल इलाकों के छोड़ दें, तो हिंदुओं का वोट ही तय करता है कि सत्ता किसे मिलने वाली है।’ ’ममता बनर्जी ने सिर्फ तीन मंदिरों का ही शिलान्यास नहीं किया, बल्कि गंगासागर में स्नान करने वालों को भी नदी पर पुल का तोहफा दिया है। उन्होंने ही पहली बार दुर्गापूजा कर्निवाल कराया।’ पश्चिम बंगाल में मंदिर पॉलिटिक्स की एंट्री के बारे में पूछने पर वे कहते हैं, ‘ममता बनर्जी की छवि एंटी-हिंदू की रही है। इसके अलावा सरकार के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी है। इसे कम करने के लिए भी मंदिर पॉलिटिक्स की जा रही है। पश्चिम बंगाल में एक नए तरह की राजनीति शुरू हो रही है। ममता से पहले बंगाल में लेफ्ट की सरकार थी और उनके मुद्दों में धर्म कभी नहीं था।‘ इसके असर के बारे में नेगर कहते हैं, ‘दीघा में ओडिया भाषी के अलावा, बांग्ला और हिंदी बोलने वाले रहते हैं। पहले लोग भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए पुरी जाते थे, लेकिन अब यहां घूमने के साथ-साथ धार्मिक यात्रा भी होती है। दूसरी ओर गंगासागर में बड़ी संख्या में हिंदी भाषी स्नान करने आते हैं। इसके लिए फेरी घाट से होकर जाना पड़ता है। पुल बन जाने से लोकल लोगों और श्रद्धालुओं को जो फायदा होगा, उसका असर वोट में जरूर दिखेगा।‘ ‘मंदिर बनाने से ज्यादा जरूरी हिंदुओं की सुरक्षा’बंगाल की मंदिर पॉलिटिक्स को लेकर हमने कोलकाता में RSS प्रचारक डॉ. जीशानु बसु से भी बात की। वे कहते हैं, ‘पश्चिम बंगाल में मंदिर बनाने के ज्यादा जरूरी हिंदुओं की सुरक्षा है। ये तय करना जरूरी है कि यहां हिंदू सुरक्षित रह भी पाएंगे या नहीं क्योंकि उन पर लगातार अत्याचार हो रहा है।’ ममता के मंदिर के शिलान्यास और प्राण प्रतिष्ठा करने पर जीशानु सवाल उठाते हैं। वे कहते हैं, ‘संवैधानिक पद पर बैठा व्यक्ति मंदिर का शिलान्यास नहीं कर सकता है।‘ हमने पूछा फिर राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा प्रधानमंत्री ने कैसे की? इसके जवाब में वे कहते हैं, ‘राम मंदिर किसी सरकार ने नहीं बल्कि ट्रस्ट ने बनवाया है। सरकार का मंदिर या मस्जिद कुछ भी बनवाना सही नहीं है। ये समाज का काम है।‘ ‘पुरी का जगन्नाथ मंदिर चार धामों में से एक है। ऐसे में पश्चिम बंगाल में उसी के नाम से एक और मंदिर बनवाना सही नहीं है। ये देश की एकता और अखंडता के लिए भी ठीक नहीं। यही वजह है कि शंकराचार्य ने भी इसका विरोध किया। आप ही सोचिए अगर कोलकाता के कालीघाट मंदिर के नाम पर कहीं और मंदिर बना दिया जाए, तो क्या वो सही होगा।‘ वे आगे कहते हैं, ‘पहली बात मंदिर के नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए। ये इतिहास और श्रद्धा का विषय है, न की राजनीति का। ममता बनर्जी ने मंदिर का निर्माण और शिलान्यास अगर सियासी फायदे के लिए किया है, तो ये देश और राज्य के लिए बहुत ही गलत है।‘ ‘बंगाल की स्थिति ये है कि नॉर्थ बंगाल के डेवलपमेंट के लिए जो बजट पास किया गया है, उससे ज्यादा बजट मदरसों के लिए है। हिंदू बेवकूफ नहीं है, जो मंदिर निर्माण के झांसे में आ जाएंगे।‘ ममता को हिंदू वोट बैंक के पोलराइजेशन का डर बंगाल के सियासी माहौल को लेकर पॉलिटिकल एक्सपर्ट प्रभाकर मणि तिवारी कहते हैं कि BJP के हिंदुत्व की काट के लिए ममता पिछले कुछ साल से सॉफ्ट हिंदुत्व पर तरफ गई हैं। वे लगातार कई मंदिरों में गई। सबसे बड़ा बदलाव रामनवमी के दौरान देखने को मिला, जब TMC के लोगों ने जोर-शोर से जुलूस निकाला। वो आगे कहते हैं, ‘पश्चिम बंगाल की राजनीति में BJP ने ममता को सिर्फ एंटी हिंदू नहीं बनाया बल्कि लगातार मुस्लिम समर्थक के नाम से प्रचार कर रही है। इसीलिए ममता बनर्जी ने लोकसभा चुनाव के कुछ वक्त पहले ही सॉफ्ट हिंदुत्व का रुख किया है। जहां मंच से उन्होंने दुर्गा चालीसा का पाठ किया है।‘ आखिर ममता बनर्जी को सॉफ्ट हिंदुत्व की जरूरत क्यों पड़ी? इसके जवाब में प्रभाकर कहते हैं, ‘राज्य में ममता बनर्जी का अपना वोट बैंक है, लेकिन इसके अलावा कुछ वोट ऐसा भी है, जिसके बिना सरकार बननी मुश्किल है। जिस तरह अल्पसंख्यक वोट ममता बनर्जी के साथ है, उसी तरह अगर हिंदू वोट BJP के लिए एकजुट हो गया तो TMC के लिए परेशानी का सबब बन जाएगा।‘ ‘इसी हिंदू वोट बैंक को अपनी ओर लाने के लिए पश्चिम बंगाल में TMC भी मंदिर राजनीति पर उतर आई। इसका चुनावों पर कितना असर होगा, फिलहाल कहना मुश्किल है। ममता बनर्जी पहले भी ऐसा कर चुकी हैं, लेकिन उसका कोई खास असर नहीं हुआ।‘ बंगाल की राजनीति में क्या पहले कभी मंदिर-मस्जिद की चर्चा हुई है? इस पर प्रभाकर कहते हैं ‘बंगाल में कांग्रेस और लेफ्ट की सरकार के दौरान कभी ऐसा कुछ नहीं दिखा।‘ पॉलिटिकल पार्टियां क्या कह रहीं…BJP बोली- ममता को कुर्सी जाने का डर, इसलिए मंदिर बना रहींममता बनर्जी के मंदिर का शिलान्यास करने का BJP विरोध करती रही है। राज्य में विधानसभा चुनाव से पहले 3 मंदिरों के शिलान्यास पर BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता देवजीत सरकार कहते हैं, ‘इन सब मंदिरों में सबसे पहले ममता ने काली मंदिर में अपनी फाइल लगाई, लेकिन वहां फेल हो गईं। उसके बाद बाकी मंदिरों का रुख किया। राज्य में लोगों तक पानी और शौचालय नहीं पहुंच सका है। जनता को सुविधाएं देने के बजाय तुष्टिकरण की राजनीति हो रही है।‘ ‘राज्य में मंदिर की जगह अगर स्कूल और अस्पताल खोला जाता तो जनता को इसका फायदा मिलता। मंदिर बनवाना सरकार का काम नहीं है, ये काम ट्रस्ट के जरिए जनता के पैसे से होना चाहिए। इससे साफ समझ आ रहा है कि ममता बनर्जी के मन में सत्ता जाने की घबराहट है।‘ TMC ने कहा- राजनीति करने में नारायण का अपमान कर रही BJPTMC के राष्ट्रीय प्रवक्ता रिजु दत्ता BJP पर पलटवार करते हुए कहते हैं, ‘अगर दीदी मंदिर का निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा नहीं करा सकती हैं, तो PM मोदी ने अयोध्या में अधूरे राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कैसे की। वजह साफ थी लोकसभा चुनाव। जगन्नाथ धाम की प्राण प्रतिष्ठा अप्रैल 2025 में हुई, उस वक्त बंगाल में कोई चुनाव भी नहीं था।‘ ‘हम धर्म को लेकर राजनीति नहीं करते और न ही इसे अपने मेनिफेस्टो में रखते हैं। हमारा नारा मां, माटी और मानुष है। बल्कि हिंदुत्व की पॉलिटिक्स करने वाली BJP ने भगवान जगन्नाथ की निंदा की। उनके धाम को एम्यूजमेंट पार्क कहा और उनके महा प्रसाद को हलवा। खुद को धर्म का ठेकेदार बताने वाली पार्टी के लीडर राजनीति के चक्कर में भगवान नारायण का अपमान कर रहे हैं।' …………………ये खबर भी पढ़ें… क्या साउथ बंगाल से निकलेगा BJP की जीत का रास्ता 7 मार्च को पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में BJP की परिवर्तन यात्रा पहुंची। यहां रघुनाथपुर इंडस्ट्रियल एरिया है इसलिए हिंदी भाषी और आदिवासी आबादी ज्यादा है। यहां से BJP के ही विधायक हैं, फिर भी रैली में भीड़ कम पहुंची। यहीं रास्ते में अवधेश राम मिले। वो रैली में नहीं आए लेकिन चाहते हैं कि राज्य में सरकार जरुर बदले। पढ़िए पूरी खबर…

