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कैसा है देश का सबसे बड़ा डिटेंशन सेंटर:दलाल को 6-6 हजार देकर बॉर्डर पार किया, 34 हजार में बिकी बांग्लादेश की सूफी

सूफी बांग्लादेश की रहने वाली हैं। उम्र करीब 25 साल। मार्च 2024 की एक रात पहली बार भारत में कदम रखा था। एक दोस्त भी साथ थी। दोनों बेहतर जिंदगी के लिए छिपते-छिपाते भारत आई थीं। दलाल ने उन्हें 34 हजार में बेच दिया, 18 महीने जेल में कटे। बीते 4 महीने से सूफी का नया पता असम के गोलपाड़ा में बना मटिया डिटेंशन सेंटर है। हिमंता सरकार इसे ट्रांजिट कैंप कहती है। सूफी के साथ मुख्तार, फूल मियां, मानिकजन बेगम भी हैं, जो अपराधी नहीं हैं, लेकिन आजाद भी नहीं हैं। असम में मार्च-अप्रैल में चुनाव हैं। बांग्लादेशी घुसपैठिए मुद्दा हैं। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा दावा कर चुके हैं कि असम की मुस्लिम आबादी में 36% बांग्लादेशी हैं। 20 फरवरी को गृह मंत्री अमित शाह असम में थे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के राज में, जो भी अवैध रूप से देश में घुसा है, उसे वापस भेजा जाएगा। ऊंची-ऊंची दीवारों और लोहे के भारी-भरकम गेट वाला डिटेंशन सेंटर असम की राजधानी गुवाहाटी से करीब 120 किमी दूर है। इसमें कैद 133 विदेशी ‘घुसपैठियों’ में सिर्फ 11 बांग्लादेशी हैं। दैनिक भास्कर पहला मीडिया हाउस है, जो इस डिटेंशन सेंटर के अंदर पहुंचा। कैसा है भारत का सबसे बड़ा डिटेंशन सेंटरकरीब 20 बीघा जमीन में बना ये सेंटर ऊंची दीवारों से घिरा है। लोहे के बड़े गेट से एंट्री होती है। अंदर घुसते ही पहले खाली मैदान है। थोड़ा आगे चलने पर एक और बड़ा गेट है। इससे अंदर घुसते ही अफसरों के ऑफिस हैं। फिर एक मैदान है, जिसमें फुटबॉल खेलने की जगह और सब्जियां उगाने के लिए क्यारियां बनी हैं। यहीं चार-चार मंजिला करीब 15 बिल्डिंग हैं। इनमें से सिर्फ 5 इस्तेमाल में हैं। दो बिल्डिंग महिलाओं के लिए और तीन पुरुषों के लिए। यहां 3 हजार लोग रह सकते हैं। कैंपस में स्कूल, हॉस्पिटल, किचन, टॉयलेट और रहने के अलग-अलग ब्लॉक हैं। यह जगह किसी जेल जैसी नहीं, बल्कि स्कूल या हॉस्टल जैसी दिखती है। यहां मैं कुछ किरदारों से मिली। ज्यादातर पैसे देकर बॉर्डर पार आए, पकड़े गए और कभी अपने देश लौट नहीं पाए। पहचान उजागर न हो, इसलिए इन किरदारों के नाम बदले गए हैं। पहली कहानी सूफी की डिटेंशन सेंटर के अंदर कदम रखते ही लगता है, जैसे यहां वक्त थोड़ा धीमा चलता है। न ज्यादा शोर, न पूरी खामोशी। यहां एक कमरे में महिलाएं सिलाई कर रही थीं। एक तरफ सिलाई सिखाने वाली मास्टर खड़ी थीं। पास ही एक महिला पुलिसकर्मी निगरानी कर रही थीं। कमरे में सूट पहने छोटे बालों वाली एक दुबली लड़की पर नजर पड़ी। बहुत शांत और आंखों में गहरी उदासी। यही थी सूफी। कुछ देर की चुप्पी के बाद सूफी ने बोलना शुरू किया। उसकी आवाज में निराशा और बेबाकी दोनों थी। सूफी बताती है, ‘मैं बांग्लादेश की रहने वाली हूं। मार्च, 2024 में पहली बार भारत आई थी। मैं अकेली नहीं थी। मेरी दोस्त रिफत भी साथ थी। अनजान देश में हम दोनों एक-दूसरे के हमदर्द बन गए।’ ‘एक दलाल हमारी मदद कर रहा था। हमें बस से बॉर्डर के पास लाया गया। वहां से सामान ढोने वाली गाड़ियों में छिपाकर बॉर्डर तक पहुंचाया। ऊंचे कंटीले तार पार करना आसान नहीं था। दूसरी तरफ भारतीय दलाल मौजूद था। सुरक्षाबलों की निगरानी के बावजूद फेंसिंग के बीच लकड़ी का पटरा फंसाकर मुझे और रिफत को भारत में दाखिल करा दिया गया।’ ‘मेरे पास स्मार्टफोन था। उसी पर दलाल हमें रास्ते के बारे में बताता रहा। उसकी मदद से हम गुवाहाटी पहुंच गए। उसने फोन पर दिल्ली की ट्रेन के दो टिकट भेज दिए। गुवाहाटी रेलवे स्टेशन पर हमें बंगाली बोल रहा एक शख्स दिखा। उसका नाम रफीक इस्लाम था। रफीक ने सीट ढूंढने में हमारी मदद की। अनजान देश में मदद करने वाला रफीक हमें भरोसेमंद लगा। हमने उसे बता दिया कि हम बांग्लादेश से आए हैं। रफीक ने कहा कि कभी जरूरत पड़े, तो मुझे फोन कर लेना।’ ‘दो दिन के सफर के बाद हम दिल्ली पहुंच गए। स्टेशन पर एक औरत हमें लेने आई। उसका नाम सुमैया था। वो हमें अपने घर ले गई। एक हफ्ते तक सुमैया हमें ब्यूटी पार्लर ले जाती रही। बाल स्ट्रेट करवाए, आइब्रो बनवाई और मॉल से नए कपड़े दिलवाए। सब बहुत अच्छा लग रहा था। एक दिन सुमैया हमें होटल ले गई।’ यहां सूफी की आवाज टूटने लगी। कुछ पल चुप रही, फिर फूट-फूटकर रोने लगी। बोली- ‘होटल में सब नंगे थे। गलत काम कर रहे थे। सुमैया चाहती थी कि हम भी वही काम करें। हमने इनकार कर दिया। फिर वो हमें घर ले आई। हमें पता चला कि जो दलाल हमारी मदद कर रहा था, उसने मेरा और रिफत का सौदा कर दिया। हमारे बदले में उसे 34 हजार रुपए मिले।’ ‘उस रात खाना खाने के बाद सुमैया और उसका पति सो गए। आधी रात को मैं और रिफत घर से भाग निकले। हमने रेलवे स्टेशन पर मिले रफीक को फोन किया और उसके कहने पर गुवाहाटी आ गए। यहां रफीक हमें बस से कहीं ले जा रहा था। रास्ते में बाइक से आए दो लोग बस के सामने खड़े हो गए। दोनों अंदर आए और 30 हजार रुपए मांगने लगे। इसी दौरान पुलिस आ गई और बाइकवालों को गिरफ्तार कर लिया।’ ‘पुलिसवालों ने मुझसे पूछा- तुम कहां की रहने वाली हो? मैंने जवाब दिया- बांग्लादेश। इसके बाद मेरी जिंदगी अदालतों और जेल के बीच उलझ गई। कोर्ट में केस चला। जज ने 18 महीने की सजा सुनाई। उन्होंने कहा था कि सजा काटने के बाद हम घर जा सकते है। सजा पूरी हुई, तो 28 अक्टूबर 2025 को हमें डिटेंशन सेंटर भेज दिया।’ इतना कहकर सूफी चुप हो गई। उसकी उंगलियां दोबारा सिलाई मशीन पर चलने लगीं, लेकिन आंखों से आंसू नहीं थमे। सूफी की शादी सिर्फ 15 साल की उम्र में हो गई थी। पति सलमान की उम्र 18 साल थी। दोनों ने लव मैरिज की थी। शादी के बाद ससुराल में मारपीट शुरू हो गई। एक दिन सूफी घर छोड़कर भाग निकली। पीछे एक साल का बच्चा छूट गया। यही दर्द आज भी उसे सबसे ज्यादा सताता है। सूफी आगे कहती है, ‘मैं घर जाना चाहती हूं। यहां अच्छा नहीं लगता। बच्चे की बहुत याद आती है। यहां अच्छा खाना नहीं मिलता। जेल में ज्यादा अच्छा था। वहां तो हमें क्लिप, काजल, समोसा, बिस्किट सब मिलता था। महिला सिपाही ही लाकर देती थीं।’ सूफी ये बातें बोल रही थी, तब डिटेंशन सेंटर के अफसर भी मौजूद थे। मतलब साफ था, यहां रहने वाले लोगों पर कोई जोर-जबरदस्ती नहीं होती। वे अपनी बात कह सकते हैं। सूफी के घर लौटने के सवाल पर एक अधिकारी ने बताया कि बांग्लादेश के असिस्टेंट हाई कमिश्नर जनवरी में आने वाले थे। वहां हालात ठीक नहीं होने की वजह से उनका आना कैंसिल हो गया। अब तक नहीं आए, इसलिए बात नहीं बनी। दूसरी कहानी लाल सेर पार और इयांग की डिटेंशन सेंटर में महिलाओं के लिए एक NGO ‘डेवलपमेंट एंड जस्टिस’ काम करता है। NGO के लोग महिलाओं को सिलाई-बुनाई सिखाते हैं। उनके बनाए कपड़े बेचते भी हैं। सूफी के अलावा और भी लड़कियों ने हमें अपने बनाए कपड़े दिखाए। इनमें दो बहनें थीं, इयांग और लाल सेर पार। दोनों बताती हैं, ‘हम म्यांमार से भारत आए थे। साथ में 30 और लोगों ने बॉर्डर पार किया था। हमारे देश में लंबे वक्त से गृह युद्ध चल रहा है।’ म्यांमार से आए लोगों में चार साल का एक बच्चा भी है। वह पेरेंट्स के साथ भारत आया था। ये लोग अपने देश लौटना भी नहीं चाहते, क्योंकि वहां हालात ठीक नहीं है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (UNHRC) इन्हें ऑस्ट्रेलिया भेजना चाहता है। प्रोसेस पूरी होने तक सभी इसी सेंटर में रहेंगे। तीसरी कहानी मुख्तार कीअब शाम के करीब 6 बज रहे थे। सिलाई की क्लास खत्म हो चुकी थी। खाने का वक्त होने वाला था। अब हमें सेंटर के बाकी लोगों से मिलना था। उनसे मिलने के लिए आगे एक दरवाजे से अंदर जाना था। दरवाजे के बायीं ओर एक बोर्ड पर लिखा था- ‘अंदर रहने वालों की संख्या कुल 133 है।’ इन लोगों में अलग-अलग देशों के और कुछ असम के डी-वोटर्स भी शामिल हैं। डी-वोटर्स, यानी डाउटफुल वोटर्स, वे लोग हैं जिनकी नागरिकता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। यहां से आगे कैमरा ले जाना मना है। कैमरा बाहर रखकर हम अंदर दाखिल हुए। सामने ग्राउंड दिखा। कुछ लोग फुटबॉल खेल रहे थे। यहीं तीन युवक बैठे मिले। इनमें से एक असम का रहने वाला है। भारत की नागरिकता साबित नहीं कर पाने की वजह से उसे डी-वोटर माना गया। इसके बाद से वह डिटेंशन सेंटर में रह रहा है। बाकी दो बांग्लादेश से अवैध तरीके से भारत में आए थे। इनमें से एक 34 साल के मुख्तार हैं। मुख्तार पढ़े-लिखे नहीं हैं। वे ढाई साल से यहां हैं। मुख्तार बताते हैं, ‘भारत के एक दलाल ने 6 हजार रुपए लेकर बॉर्डर पार करवाया। मैं गुवाहाटी से कोलकाता जाना चाहता था। सोचा था कि पैसे कमाऊंगा, लेकिन स्टेशन पर पुलिस ने पकड़ लिया। 2 साल जेल में रहा, फिर डिटेंशन सेंटर भेज दिया गया।’ चौथी कहानी फूल मियां कीबांग्लादेश से आए दूसरे शख्स फूल मियां हैं। 5वीं तक पढ़े हैं। बॉर्डर पार करने के लिए भारत के एक दलाल को 25 हजार रुपए दिए थे। फूल मियां के साथ उनके गांव के 2 और लोग आए थे। इनमें एक नाबालिग था। 2 साल बाद नाबालिग बांग्लादेश लौट गया। फूल मियां और उनके दोस्त की रिहाई नहीं हो पाई। फूल मियां से मिलकर हम आगे बढ़े। ग्राउंड के किनारे करीब 15 बिल्डिंग हैं। पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग बिल्डिंग हैं। पहले हम महिलाओं से मिलने पहुंचे। ग्राउंड फ्लोर बिल्कुल खाली था। साथ चल रहे एक अफसर ने हमें ऊपर चलने के लिए कहा। हम लोहे की चौड़ी सीढ़ियों से ऊपर पहुंचे। यहां एक बच्चा साइकिल चलाता मिला। अफसर ने बताया ये बच्चा म्यांमार से आया है और मां के साथ रहता है। पांचवी कहानी बियाखनचमपरमां कीहम बच्चे की मां से मिलने ऊपर चले गए। हमने उनसे बच्चे से मिलवाने की बात कही। पता चला वो पिता के पास गया है। पिता पुरुषों की बिल्डिंग में रहते हैं। उसे माता-पिता दोनों के साथ रहने की इजाजत है। मां बियाखनचमपरमां की उम्र 22 साल है, पिता 32 साल के है। हमने पूछा- बच्चे को लेकर बॉर्डर क्रॉस करने की क्या मजबूरी थी? बिना रुके हल्की मुस्कुराहट के साथ बियाखनचमपरमां ने जवाब दिया- ‘जान बचाने के लिए। और हमें इसका कोई अफसोस नहीं। बच्चा और पति दोनों आंखों के सामने रहते है। पति से भी ग्राउंड में मुलाकात हो जाती है। मै यहां खुश हूं।’ एक कमरे में 4 से 5 लोग, टीचर के जाने से पढ़ाई रुकीहम लड़कियों के कमरे में भीतर गए। एक कमरे में 4 से 5 लोग रहते हैं। रूम से सटा एक छोटा किचन है। एक कमरे में कुछ किताबें रखी दिखीं। पूछने पर पता चला कि पहले यहां पढ़ाई होती थी। कुछ महीनों से मास्टर नहीं आ रही हैं। उनकी नौकरी कहीं और लग गई है। एक लड़की बोली, ‘हमें हिंदी और अंग्रेजी भाषा सीखनी है। इसके लिए मास्टर चाहिए। हम पहले से अच्छी हिंदी और अंग्रेजी बोलने लगे थे, लेकिन अब कोई सिखाने नहीं आता।’ छठवीं कहानी सिंगतावागसियाम कीएक और कमरे में हमें गिटार दिखा। अब तक दिमाग में डिटेंशन सेंटर की तस्वीर किसी उबाऊ जगह जैसी थी। गिटार देखकर लगा कि यहां संगीत भी है। ये गिटार सिंगतावागसियाम का है। वे कहती हैं, ‘बाहर की दुनिया बहुत याद आती है। मां की याद आती है या बहुत खुश होती हूं, तब गिटार बजाती हूं। हमारी बातचीत चल रही थी, तभी लाइट चली गई। साथ मौजूद महिला पुलिसकर्मी और अधिकारी ने फोन का फ्लैश जलाया। उन्होने कहा, ‘बहुत देर हो रही है। ताला बंद करने का टाइम हो चुका है।’ सातवीं कहानी मानिकजन बेगम कीहम महिलाओं की दूसरी बिल्डिंग की तरफ चल पड़े। यहां सबसे ज्यादा असम की डी वोटर महिलाएं थीं। इनमें से एक मानिकजन बेगम की गोद में 17 महीने की बच्ची थी। उन्होंने कहा कि पिछले कई महीनों से हमें घर से दूर रहना पड़ रहा है। मानिकजन बेगम के बारे में शक है कि वे 1971 के बाद बांग्लादेश से भारत आई हैं। पहले असम के कोकराझार 7 बटालियन में बंद थीं। उन जैसी और भी महिलाएं यहां हैं। सब कहती हैं कि हम बांग्लादेशी नहीं हैं। इनके अलावा नाइजीरियन महिला मिशेल जैंडी भी हैं। पहली बार विजिटर वीजा पर 22 सितंबर, 2017 को दिल्ली आई थीं। 9 अगस्त, 2023 को उन्हें गुवाहाटी एयरपोर्ट पर चेकिंग के दौरान रोक लिया गया। उनका वीजा फर्जी था। मिशेल ने जेल में 2 साल की सजा पूरी कर ली है। आगे की प्रोसेस पूरी करके उन्हें वापस भेज दिया जाएगा। सेंटर में तीन वक्त का खानाहम बाहर निकले, तब तक ताला बंद हो चुका था। कुछ दूर पुरुषों के रहने वाली बिल्डिंग थी। इसमें रहने वाले ज्यादातर लोग बांग्लादेश से बॉर्डर पार करके आए थे, लेकिन पकड़ लिए गए। सभी ने रात का खाना खा लिया था। खाने में दाल, चावल, रोटी, सब्जी मिली। लोगों ने बताया कि तीन वक्त खाना मिलता है। पसंद के हिसाब से मछली, मटन, अंडा भी दिया जाता है। डिटेंशन सेंटर जाने से पहले हमने IG जेल पुलक महंत से बात की थी। उन्होंने कहा था कि डिटेंशन सेंटर कोई जेल नहीं, बल्कि होल्डिंग प्लेस है। विदेशियों को वापस भेजने की कार्रवाई पूरी करने से पहले यहां होल्ड किया जाता है। इस जगह उन्हें कोई दिक्कत नहीं होती। …………………… ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ें...असम में क्या महिलाएं खोलेंगी BJP की जीत का रास्ता, स्कीम से मुस्लिम भी खुश असम में करीब दो महीने बाद चुनाव होने हैं। हर चौक-चौराहे पर सरकारी योजनाओं और उनका फायदा लेने वालों की तस्वीरें हैं, जिनमें CM हिमंता बिस्वा सरमा महिलाओं को चेक देते दिख रहे हैं। ये चेक महिलाओं के खाते में डायरेक्ट कैश ट्रांसफर के हैं। सीएम हिमंता ने वही दांव खेला है, जो बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान BJP गठबंधन ने खेला था। मध्यप्रदेश, ओडिशा, दिल्ली जैसे 6 राज्यों में BJP के लिए ये जीत का फॉर्मूला रहा है। पढ़ें पूरी खबर...

दैनिक भास्कर 25 Feb 2026 5:05 am

बांग्लादेश में नई सरकार के बाद सेना में बड़ा फेरबदल, शीर्ष पदों पर नियुक्तियां बदलीं, खुफिया एजेंसी और विदेश तैनाती में भी बदलाव

सेना मुख्यालय की ओर से जारी आदेशों के तहत कई महत्वपूर्ण पदों पर नई नियुक्तियां की गई हैं। इस कदम को नई सरकार की प्रशासनिक प्राथमिकताओं और सैन्य ढांचे में संतुलन स्थापित करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

देशबन्धु 24 Feb 2026 10:25 am

अमेरिका में भारतीय निर्यात पर आज से 10% टैरिफ, 15% शुल्क को लेकर अब भी संशय

ट्रंप द्वारा 10 प्रतिशत शुल्क को बढ़ाकर 15 प्रतिशत करने की सार्वजनिक घोषणा के बावजूद इस संबंध में अब तक कोई औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। इससे व्यापारिक समुदाय में अनिश्चितता और असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

देशबन्धु 24 Feb 2026 9:27 am

व्हाइट हाउस ने माना – भारत है टेक्नोलॉजी का पावरहाउस

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रमुख विज्ञान सलाहकार ने कहा है कि भारत एक “तकनीकी महाशक्ति” है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई को आगे बढ़ाने की व्हाइट हाउस की योजना में उसकी अहम भूमिका है

देशबन्धु 24 Feb 2026 8:51 am

नेपाल : नदी में गिरी बस, एक चीनी नागरिक की मौत

सेंट्रल नेपाल के ताडिंग जिले में एक बस नदी में गिर गई। 23 तारीख की सुबह 8:00 बजे तक, इस दुर्घटना में कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई थी और 20 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे

देशबन्धु 24 Feb 2026 6:30 am

सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ट्रंप का हमला – ‘मेरी शक्तियां और बढ़ीं’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैर‍िफ को लेकर हाल ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी

देशबन्धु 24 Feb 2026 6:20 am

अतीक मारा गया, गुड्डू बमबाज-शाइस्ता का खौफ कायम:उमेश हत्याकांड के 36 महीने, परिवार को धमकी- ऐसा बदला लेंगे कि लोग याद रखें

‘अतीक अब जिंदा नहीं है। प्रयागराज में उसका खौफ भी खत्म हो चुका, लेकिन मैं आज भी डर में जी रही हूं। मेरे पति को बीच बाजार में घेरकर मारने वाला गुड्डू बमबाज और अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन आज तक नहीं पकड़े गए। उनके लोग हमें धमकियां देते हैं। वीडियो भेजते हैं, जिसमें लिखा होता है- बदला ऐसा लो, जिसे चार लोग याद करें। ये लोग जब तक फरार रहेंगे, मेरे परिवार पर खतरा बना रहेगा।‘ 24 फरवरी जया पाल की जिंदगी की सबसे बुरी तारीख है। तीन साल पहले इसी दिन उनके पति और पेशे से वकील उमेश पाल की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड का मास्टरमाइंड माफिया डॉन अतीक अहमद था। उमेश की मौत के बाद जया पाल ने अतीक समेत 10 लोगों के खिलाफ मर्डर का केस दर्ज करवाया। 36 महीने बाद भी केस की सुनवाई पूरी नहीं हो सकी है। उमेश की हत्या में शामिल 10 में 6 आरोपी मारे जा चुके हैं। अतीक की पत्नी शाइस्ता, गुड्डू मुस्लिम के अलावा शूटर अरमान और साबिर पकड़े नहीं गए। अतीक अहमद की मौत के बाद उसकी 'IS-227 गैंग' खत्म हो चुकी है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। यही वजह है कि 24 फरवरी, 2023 से लेकर अब तक उमेश के घर के मेन गेट और कमरों के बाहर 24 घंटे पुलिस तैनात रहती है। यूपी का सबसे चर्चित उमेश पाल मर्डर केस 3 साल बाद भी आखिर कहां अटका है, हत्यारों को सजा मिलने में कितना वक्त और लग सकता है? इन सवालों के जवाब जानने दैनिक भास्कर की टीम प्रयागराज पहुंची। अतीक मरा, फिर 'IS-227 गैंग' का डर क्यों कायम अतीक की मौत के बाद भी पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज 'IS-227 गैंग' का नाम पूरी तरह खत्म नहीं माना गया है। गैंग पर हत्या, लूट, रंगदारी, जमीन कब्जाने और किडनैपिंग जैसे कई केस दर्ज हैं। पुलिस के मुताबिक, अतीक के मारे जाने के बाद उसका नेटवर्क कमजोर पड़ा है। फिर भी कानूनी रिकॉर्ड में गैंग तब तक खत्म नहीं मानी जाती, जब तक उससे जुड़े सभी मामलों का निपटारा न हो जाए। अतीक की गैंग पर चल रहा सबसे बड़ा मुकदमा उमेश पाल हत्याकांड का है। प्रयागराज के धूमनगंज थाने से महज 200 मीटर दूर सुलेम सराय इलाके में उमेश पाल का घर है। यहां 24 घंटे PAC और प्रयागराज पुलिस के 20 जवान तैनात रहते हैं। ये फोर्स 24 फरवरी के दिन डबल कर दी जाती है। बिना सिक्योरिटी जांच और प्रशासन की इजाजत के बगैर कोई मकान के अंदर नहीं जा सकता। अतीक मारा गया, फिर इतनी कड़ी सुरक्षा क्यों? इसके जवाब में उमेश की पत्नी जया कहती हैं, ‘अतीक बेशक मर चुका है, लेकिन उसके गिरोह के लोग आज भी फरार हैं। वो हमसे बदला लेना चाहते हैं। मेरे सामने गुड्डू मुस्लिम ने इसी घर में बम फेंका, जिससे मेरे पति उमेश पाल और उनके गनर राघवेंद्र की मौत हो गई। मैं गुड्डू मुस्लिम का चेहरा भला कैसे भूल सकती हूं।‘ ‘हमारी सुरक्षा में तो कोई कमी नहीं है, लेकिन फिर भी मन में हर वक्त घबराहट रहती है कि कहीं कोई अनहोनी न हो जाए। अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन, शूटर साबिर और अरमान अब भी हमारे लिए खतरा हैं। इन अपराधियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।‘ एक मिनट के वायरल वीडियो में हुआ उमेश हत्याकांड का खुलासा उमेश पाल की मौत के बाद घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस वीडियो क्लिप में 24 फरवरी 2023 की शाम 4 बजकर 30 मिनट पर उमेश पाल कोर्ट से घर लौटते दिख रहे थे। उमेश जैसे ही घर के पास पहुंचे, बदमाशों ने उनकी कार पर फायरिंग शुरू कर दी। उमेश अपने गनर राघवेंद्र सिंह के साथ घर की तरफ भागे। तभी बदमाशों ने उन पर दो बम फेंकें। एक गनर संदीप निषाद कार में थे। बदमाशों ने उन्हें भी गोली मार दी। तीनों को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां उमेश पाल और संदीप निषाद ने दम तोड़ दिया। दूसरे गनर राघवेंद्र सिंह को लखनऊ रेफर किया गया, लेकिन उनकी जान भी नहीं बच पाई। हत्याकांड के बाद विपक्ष ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाया। इसके जवाब में CM योगी ने विधानसभा में कहा- जिस अतीक अहमद के खिलाफ पीड़ित परिवार ने मामला दर्ज कराया है, वो समाजवादी पार्टी का पोषित माफिया है। उसकी कमर तोड़ने का काम हमारी सरकार ने किया है। मैं फिर इसी हाउस में कह रहा हूं कि इस माफिया को मिट्टी को मिला देंगे। 15 अप्रैल 2023 को अतीक और उसके भाई अशरफ की पुलिस सुरक्षा के बीच हत्या कर दी गई। फोन पर धमकी मिली- ‘ऐसा बदला लेंगे कि 4 लोग याद करेंगे’बातचीत के दौरान जया ने धमकी भरे मैसेज भी दिखाए, जो अनजान नंबरों से भेजे गए थे। जया का आरोप है कि अतीक की मौत के बाद उसकी गैंग के लोग हर महीने धमकी भरे मैसेज भेजते हैं। जया कहती हैं, ‘हमें 3 साल से धमकियां मिल रही हैं। घर पर बूढ़ी सास और दो बच्चे हैं। धमकियों की वजह से बच्चों को अकेले स्कूल नहीं भेजती। पुलिस साथ हो, तभी पढ़ाई के लिए घर से बाहर जाते हैं।‘ उमेश के घर के पास से नकाबपोश महिलाएं पकड़ी गईंउमेश पाल की 81 साल की मां शांति पाल कहती हैं, ‘हमें डराने के लिए अतीक के रिश्तेदार धमकियां दे रहे हैं। हम घर पर क्या करते हैं, कौन हमसे मिलने आ रहा है, बच्चे कब बाहर जाते हैं, इनकी जानकारी अतीक की गैंग तक बराबर पहुंचाई जा रही है।‘ पिछले साल अगस्त में बुर्का पहने चार महिलाओं को पुलिस ने हमारे घर के पास से पकड़ा था। उन्होंने पूछताछ में बताया कि वे अतीक के ड्राइवर के कहने पर हमारे बारे में जांच-पड़ताल कर रही थीं। ‘उन्होंने गली के अंदर आकर हमारे घर में भी घुसने की कोशिश की, लेकिन पुलिसवालों ने पकड़ लिया। इस घटना के बाद से हमारी सुरक्षा बढ़ा दी गई है।‘ बेटे को याद कर शांति आगे कहती हैं, ‘मेरे बेटे ने एक माफिया से 18 साल तक कानूनी लड़ाई लड़ी। उनकी तीसरी पुण्यतिथि है। उमेश की याद तो शायद कभी कम नहीं होगी, लेकिन अब उनके पीछे परिवार को संभालने वाला कोई नहीं है।‘ गुड्डू-शाइस्ता की गिरफ्तारी न होना केस अटकने की बड़ी वजह उमेश पाल की हत्या के बाद यूपी पुलिस ने सबसे पहले असद के ड्राइवर अरबाज को धूमनगंज के नेहरू पार्क में 27 फरवरी को मुठभेड़ में ढेर किया। इसके बाद दूसरे एनकाउंटर में 6 मार्च को उमेश पाल पर पहली गोली चलाने वाला विजय चौधरी उर्फ उस्मान मारा गया। 13 अप्रैल को झांसी में UP-STF ने माफिया अतीक के बेटे असद और शूटर गुलाम का एनकाउंटर कर दिया। मामले में शामिल 3 अपराधियों के एनकाउंटर के बाद 15 अप्रैल को पुलिस कस्टडी में अतीक अहमद और अशरफ की हत्या कर दी गई। फिलहाल, उमेश पाल हत्याकांड में शामिल 5-5 लाख के इनामी 3 शूटर्स गुड्डू मुस्लिम, साबिर और अरमान फरार हैं। अतीक अहमद की पत्नी शाइस्ता परवीन भी फरार है। उस पर 50 हजार रुपए का इनाम है। शाइस्ता के साथ अशरफ की पत्नी जैनब फातिमा और बहन आयशा नूरी भी मोस्टवांटेड लिस्ट में हैं। उमेश पाल हत्याकांड में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई में देरी पर हमने इलाहाबाद हाईकोर्ट के सीनियर एडवोकेट विक्रम सिंह से बात की। वे कहते हैं, ‘जब तक पुलिस इस हत्याकांड के सभी आरोपियों को पकड़कर कोर्ट में हाजिर नहीं करती। मामले की सुनवाई का आगे बढ़ना मुश्किल होगा। गुड्डू मुस्लिम, अरमान और साबिर के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। फिलहाल ट्रायल कोर्ट में आरोप तय होना बाकी है।’ ’जया पाल ने 10 लोगों के खिलाफ शुरुआती FIR दर्ज करवाई थी। तीन साल के अंदर आरोपी बढ़कर 17 हो गए हैं। आरोपियों में अतीक का बहनोई डॉक्टर अखलाक अहमद, सदाकत खान, अतीक के वकील खान सौलत हनीफ, विजय मिश्रा और अतीक के बेटे मोहम्मद उमर और अली अहमद भी शामिल हैं। इनकी गिरफ्तारी के बाद केस एविडेंस स्टेज पर आ चुका है।’ महाकुंभ तक प्रयागराज में छिपी थी शाइस्ता, गुड्डू भारत में नहींगुड्डू मुस्लिम और शाइस्ता परवीन की आखिरी लोकेशन क्या थी? उनके बारे में हमने प्रयागराज पुलिस के सीनियर अफसर से बात की। वे बताते हैं, ‘यूपी पुलिस और STF की टीमें गुड्डू मुस्लिम, शाइस्ता, साबिर और अरमान को पकड़ने के लिए अब तक 14 राज्यों में दबिश दे चुकी हैं। उनकी खोजबीन के दौरान हमें अतीक की IS-227 गैंग के कुल 121 बदमाशों और 74 सहयोगियों का पता चला है। इनमें कुछ बड़े व्यापारी भी शामिल हैं। उनसे पूछताछ की जा रही है।' ‘नवंबर 2025 को हमें इनपुट मिला कि गुड्डू मुस्लिम फर्जी पासपोर्ट के सहारे दुबई भागा है। कोलकाता एयरपोर्ट के इमीग्रेशन रिकॉर्ड की जांच में ये सामने आया है कि 6 दिसंबर 2024 को सैयद वसीमुद्दीन नाम के एक शख्स ने एतिहाद एयरलाइंस की फ्लाइट पकड़ी थी। उसके पासपोर्ट पर लगी तस्वीर गुड्डू मुस्लिम से काफी मिल रही थी। हालांकि अभी इसकी जांच चल रही है।' पुलिस के मुताबिक, फरवरी 2025 तक शाइस्ता परवीन की लास्ट लोकेशन प्रयागराज में मिली थी। बाद में पुलिस को इनपुट मिला कि वो महाकुंभ मेले के दौरान प्रयागराज से फरार होकर पश्चिम बंगाल चली गई है। अब तक उसकी लोकेशन ट्रेस नहीं हो सकी है। शाइस्ता के अलावा, गिरोह की दो महिला सदस्य रूबी उर्फ ​​जैनब (​​अशरफ की पत्नी) और आयशा नूरी (अतीक की बहन) भी फरार हैं। दोनों पर 25 हजार का इनाम रखा गया है। विधायकी का चुनाव लड़ना चाहते थे उमेश पाल साल 2004 की बात है, अतीक उस वक्त इलाहाबाद पश्चिमी विधानसभा सीट से विधायक था। उसने 1989 के बाद लगातार 5 चुनाव जीते थे। अतीक के सांसद बनने से ये सीट खाली हो गई। 2004 में अतीक ने अपने भाई अशरफ को चुनाव मैदान में उतारा, लेकिन BSP कैंडिडेट राजू पाल ने अशरफ को 4 हजार वोट से हरा दिया। अशरफ के चुनाव हारने पर अतीक बौखला गया। 25 जनवरी, 2005 को राजू पाल के काफिले पर हमला हो गया। राजू पाल को कई गोलियां लगीं, तब उमेश पाल ने ही उन्हें हॉस्पिटल पहुंचाया था। डॉक्टर राजू पाल को नहीं बचा पाए। पोस्टमॉर्टम में उनके सीने से 19 गोलियां निकाली गई थीं। राजू पाल की हत्या के बाद उमेश पाल का नाम चर्चा में आया। उन्हें इस केस में मुख्य गवाह बनाया गया। बताया जाता है कि अतीक ने उमेश को कई बार फोन कर केस से हटने के लिए कहा। जान से मारने की धमकी दी। उमेश नहीं माने तो 28 फरवरी 2006 को उनका अपहरण करा लिया। उन्हें रातभर पीटा। बिजली के शॉक दिए। मनमाफिक गवाही देने के लिए टॉर्चर किया गया। इसके बाद छोड़ दिया गया। 2007 में अतीक और अशरफ के खिलाफ अपहरण की रिपोर्ट लिखी गई। इसके बाद उमेश पाल पॉलिटिक्स में चले गए। 2006 से 2012 तक BSP में रहे। फिर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। 2022 में विधानसभा चुनाव के समय BJP जॉइन कर ली। उनकी पत्नी जया पाल के मुताबिक, उमेश प्रयागराज की फाफामऊ सीट से विधायक का चुनाव लड़ना चाहते थे। राजू पाल हत्याकांड में गवाह होने की वजह से उमेश पहले से अतीक गैंग के निशाने पर थे। 24 फरवरी, 2023 को उनकी हत्या कर दी गई। उमेश की मौत के बाद अतीक का साम्राज्य खत्मउमेश पाल के मर्डर से पहले अतीक पर हत्या, हत्या की साजिश, रंगदारी और किडनैपिंग के करीब 60 केस दर्ज थे। अतीक पॉलिटिक्स में भी तेजी से आगे बढ़ा। 2012 में उसका सियासी रसूख इतना बढ़ गया था कि उसने विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में जमानत के लिए अर्जी दी, तो हाईकोर्ट के 10 जजों ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया। 11वें जज ने सुनवाई की और अतीक अहमद को जमानत मिल गई। अतीक ने एक बार लोकसभा और 5 बार विधानसभा का चुनाव जीता। 2004 में उसने फूलपुर सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ा। इस दौरान दिए हलफनामे में अतीक ने अपनी संपत्ति 3.36 करोड़ रुपए बताई थी। 2012 में अतीक ने इलाहाबाद पश्चिम सीट से विधानसभा चुनाव लड़ा, तो संपत्ति 20.79 करोड़ रुपए हो गई। 2018 में फूलपुर सीट पर उपचुनाव हुआ। इसमें अतीक ने अपनी संपत्ति 25.50 करोड़ बताई। 2019 में अतीक ने PM मोदी के खिलाफ वाराणसी सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा। ये उसका आखिरी इलेक्शन था। उमेश पाल की हत्या में नाम आने के बाद अतीक का साम्राज्य ढहना शुरू हो गया। सरकार के मुताबिक, बीते 3 साल में अतीक की करीब 3000 करोड़ रुपए की अवैध संपत्तियों पर कार्रवाई हुई है। …………………ये खबर भी पढ़ें… जैश की महिला जिहादी ब्रिगेड, भारत के लिए नया खतरा जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मसूद अजहर ने 8 अक्टूबर 2025 को पहली बार आतंकियों की महिला विंग जमात-उल-मोमिनात का ऐलान किया था। इसके ठीक 31 दिन बाद 10 नवंबर, 2025 को दिल्ली में लाल किले के पास एक कार में ब्लास्ट हुआ। 15 लोग मारे गए। NIA ने ब्लास्ट को जैश-ए-मोहम्मद के 'वॉइट कॉलर टेरर मॉड्यूल' का हिस्सा बताया। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 24 Feb 2026 5:08 am

कल से ट्रंप की टैरिफ वसूली पर लग जाएगा 'ब्रेक', सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद US कस्टम का एक्शन; भारत पर भी होगा असर

डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से दुनिया भर के देशों पर लगाए गए टैरिफ को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने गैरकानूनी करार दिया था. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तीन दिन बाद USCBP ने अहम फैसला लिया. अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा एजेंसी ने कहा कि 24 फरवरी से IEEPA के तहत लिए जा रहे टैरिफ को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया जाएगा.

ज़ी न्यूज़ 23 Feb 2026 4:36 pm

'तुरंत ईरान छोड़ दो', ईरान में रहने वाले अपने नागरिकों के लिए भारत की एडवाइजरी, अमेरिका से युद्ध की आहट तेज!

US-Iran Tension: ईरान में रहने वाले भारतीय नागरिकों के लिए भारत ने एडवाइजरी जारी की है, जिसमें वहां रहने वाले नागरिकों को जल्द से जल्द ईरान छोड़ने की सलाह दी गई है. नागरिकों की मदद के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है.

ज़ी न्यूज़ 23 Feb 2026 3:37 pm

सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ट्रंप के वैश्विक टैरिफ कार्यक्रम को झटका, गोपनीय बैठक के दौरान मिली जानकारी

बताया जाता है कि व्हाइट हाउस के स्टेट डाइनिंग रूम में चल रही बैठक के बीच उनके व्यापार सलाहकार ने एक नोट राष्ट्रपति को थमाया। नोट पढ़ते ही ट्रंप ने कथित तौर पर पूछा, “तब तो नुकसान हो गया?” सलाहकार ने पुष्टि की कि सुप्रीम कोर्ट ने प्रशासन के वैश्विक टैरिफ कार्यक्रम को अवैध घोषित कर दिया है।

देशबन्धु 23 Feb 2026 1:39 pm

खामनेई के खौफ से परेशान ईरान! रमजान के पाक महीने में दिखाई ऐसी रहमदिली; मुस्लिम जगत बोला- 'मरहबा'

मिडिल ईस्ट में अमेरिका-ईरान के बीच टकराव अपने चरम पर है. इसीईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई नेरमजान के पवित्र महीने में जरूरतमंद कैदियों की रिहाई के लिए अपना खजाना खोल दिया है. जिससेसैकड़ों परिवारों में नई उम्मीद जगी है और इसे इंसानियत व दया का बड़ा संदेश माना जा रहा है. जानें पूरी रिपोर्ट.

ज़ी न्यूज़ 23 Feb 2026 11:21 am

सिंगापुर दौरे पर सीएम योगी: वैश्विक निवेशकों से मुलाकात, यूपी में दीर्घकालिक साझेदारी पर जोर

सीएम ने निवेशकों के समक्ष प्रदेश की बेहतर कानून-व्यवस्था, विश्वस्तरीय कनेक्टिविटी, विकसित हो रहे एक्सप्रेसवे नेटवर्क, डिफेंस कॉरिडोर, डेटा सेंटर नीति, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स हब के बारे में विस्तार से जानकारी दी। कहा कि यूपी आज भारत की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है।

देशबन्धु 23 Feb 2026 11:16 am

ईरान के विश्वविद्यालयों में दूसरे दिन भी सरकार विरोधी प्रदर्शन जारी, अमेरिका से तनाव के बीच बिगड़े हालात

ईरान के दो बड़े शहरों तेहरान और मशहद में विश्वविद्यालय परिसरों में लगातार दूसरे दिन सरकार विरोधी प्रदर्शन हुए। छात्र समूहों और मानवाधिकार संगठनों के अनुसार कम से कम सात विश्वविद्यालयों में छात्र इकट्ठा हुए और नारेबाजी की। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी होने के बावजूद छात्रों ने परिसर में प्रदर्शन जारी रखा।

देशबन्धु 23 Feb 2026 10:50 am

नेपाल में बस हाईवे से नदी में गिरी, 18 की मौत:25 घायल, मरने वालों में 2 विदेशी नागरिक

दुर्घटना आधी रात को होने के कारण राहत और बचाव कार्य में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। अंधेरा, नदी का तेज बहाव और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां बचाव दल के लिए चुनौती बनी रहीं।

देशबन्धु 23 Feb 2026 10:38 am

नेपाल में भीषण सड़क हादसा, यात्री बस के नदी में गिरने से लहरों ने निगलीं 18 जिंदगियां; राहत और बचाव कार्य जारी

Nepal dhading bus accident: नेपाल के धादिंग में सोमवार को एक यात्री बस नदी में गिर गई, जिसमें 18 लोगों की मौत हो गई और कई घायल हैं. बचाव कार्य तेजी से चल रहा है और प्रशासन हादसे के कारणों का पता लगाने में जुटा है.

ज़ी न्यूज़ 23 Feb 2026 9:41 am

चापो से मेंचो तक, कोई गलत काम इनसे बचा नहीं... कैसे 'धंधे' के लिए बदनाम हो गया पूरा मुल्क?

वहीं पर प्राचीन माया सभ्यता फली-फूली. 3000 साल पहले खेती होती थी लेकिन आज जिस चीज की खेती होती है उसने पूरे देश को बदनाम कर दिया है. एक माफिया के मारे जाने पर पूरे देश में आग लगा दी गई है. ये कहानी है अमेरिका के दक्षिणी छोर पर बसे मुल्क मैक्सिको की.

ज़ी न्यूज़ 23 Feb 2026 9:30 am

'हमारे यहां इलाज शानदार, आपका ‘हॉस्पिटल जहाज’ नहीं चाहिए', ग्रीनलैंड ने ट्रंप की मदद को ठुकराया, आर्कटिक पर कब्जे का अमेरिकी प्लान फेल?

Greenland says no thanks to Trump’s US hospital boat:ट्रंप की ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की जो बुरी नजर है, उसमें हर तरफ से निराशा ही मिल रही है, ट्रंप ने मदद के नाम पर ग्रीनलैंड को‘हॉस्पिटल बोट' भेजने की पेशकश की थी, जिसे ग्रीनलैंड सरकार ने ठुकरा दिया है. जिसके बादअमेरिका-डेनमार्क रिश्तों में तनाव बढ़ा दिया है और आर्कटिक क्षेत्र की राजनीति फिर चर्चा में आ गई है.

ज़ी न्यूज़ 23 Feb 2026 8:40 am

क्या अब अमेरिका सीक्रेट एलियंस दिखाएगा:ट्रम्प ‘एरिया-51’ का राज क्यों खोलना चाहते; कोई दूसरी दुनिया है भी या नहीं

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा से एक पॉडकास्ट में पूछा गया- क्या एलियंस सच में होते हैं? उन्होंने जवाब दिया- एलियंस होते हैं लेकिन मैंने उन्हें नहीं देखा। राष्ट्रपति बनने के बाद मेरा सबसे पहला सवाल यही था कि एलियंस कहां है? ये वीडियो वायरल होने के बाद मौजूदा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ओबामा ने गुप्त जानकारी साझा की है। उन्हें ऐसा नहीं करना चाहिए था। उन्होंने बड़ी गलती कर दी। इसके बाद ट्रम्प ने एजेंसियों को एलियंस से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करने को कहा है। क्या अमेरिका ने वाकई एलियंस छिपा रखे हैं, एलियंस का कॉन्सेप्ट कहां से आया? क्या पृथ्वी के अलावा कहीं और भी जीव बसते हैं; मंडे मेगा स्टोरी में पूरी कहानी... **** ग्राफिक्स: द्रगचंद्र भुर्जी और अजीत सिंह ---------- ये खबर भी पढ़िए…ट्रम्प दुनिया का $6.7 लाख करोड़ जब्त कर सकते हैं:क्या इसलिए अंधाधुंध सोना खरीद रहे देश, दुनिया में अंदरखाने क्यों मची इतनी उथल-पुथल सोना रोज 10 हजार-20 हजार रुपए गिर-चढ़ रहा है। ऐसा नॉर्मल तो नहीं है। फिर ऐसा क्यों हो रहा है? पूरी दुनिया में सोना खरीदने की होड़ मची है। निवेशक और ग्राहक तेजी से खरीददारी कर रहे हैं। कई देश भी इसमें जुटे हैं। चीन ने 2303 और भारत ने 880 टन सोना जमा कर लिया है। ये आंकड़े अपने रिकॉर्ड स्तर पर है। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 23 Feb 2026 5:20 am

नेपाल में पत्नी की मौत, पति ने मांगे 100 करोड़:बोले- होटल स्टाफ भागा, एंबेसी ने फोन नहीं उठाया; फिर कौन जिम्मेदार

8 सितंबर 2025, नेपाल में सरकार के खिलाफ जेन जी प्रोटेस्ट शुरू हुआ। अगले ही दिन प्रोटेस्ट हिंसक हो गया। सरकारी इमारतें, होटल और दुकानें प्रदर्शनकारियों के निशाने पर आ गए। राजधानी काठमांडू में होटल हयात रीजेंसी को भी निशाना बनाया गया। चारों तरफ गोलियों की आवाज और आग की लपटें थीं। इसी होटल में भारत के गाजियाबाद से आए रामबीर सिंह गोला और उनकी पत्नी राजेश देवी रुके थे। दोनों चौथी बार नेपाल तीर्थ करने पहुंचे थे। हर बार दोनों साथ आते और साथ लौटते थे लेकिन इस बार रामबीर सिंह को पत्नी की शव के साथ लौटना पड़ा। क्योंकि हिंसा के दौरान उनकी मौत हो गई। इन सबके करीब 5 महीने बाद अब 27 जनवरी 2026 को रामबीर सिंह ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की। उन्होंने नेपाल में पत्नी की मौत के लिए इंडियन एंबेसी, भारतीय विदेश मंत्रालय और होटल हयात रीजेंसी को जिम्मेदार बताया है और 100 करोड़ जुर्माने की मांग की है। रामबीर कहते हैं, 'स्टाफ ने हमसे कहा था कि हम होटल में पूरी तरह सेफ हैं, लेकिन जब आग लगी तो स्टाफ सबसे पहले भाग गया। इंडियन एंबेसी को घंटों कॉल किया लेकिन किसी ने फोन नहीं उठाया। मेरी पत्नी की मौत नेचुरल नहीं, होटल, इंडियन एंबेसी और भारतीय विदेश मंत्रालय की लापरवाही से हुई है।' दैनिक भास्कर की टीम ने रामबीर सिंह गोला से बात कर 9 से 12 सितंबर के बीच उनके साथ बीता घटनाक्रम जाना। साथ ही उनके वकील अभिषेक चौधरी से पूरा केस समझा। सबसे पहले 18 घंटे होटल में फंसे रहने की कहानी…पत्नी कहती रहीं- चौथी मंजिल से नहीं उतर पाऊंगी, मैंने बोला- साथ घर चलेंगेगाजियाबाद के रहने वाले रामबीर सिंह गोला की कहानी किसी ट्रेजिडी फिल्म से कम नहीं है। वे पूरा घटनाक्रम बताते हुए कहते हैं, ‘7 सितंबर को हम काठमांडू पहुंचे थे। अगले ही दिन 8 सितंबर को नेपाल सरकार के खिलाफ यहां बड़ा जेन जी आंदोलन होने लगा।‘ ‘9 सितंबर को हमें काठमांडू से मिथिला के लिए निकलना था। सुबह निकलने की तैयारी भी हो गई थी। तभी पता चला कि प्रदर्शन हिंसक हो गया है। होटल के नीचे प्रदर्शनकारियों ने आग लगानी शुरू कर दी है। होटल स्टाफ ने हमें दूसरी से चौथी फ्लोर पर शिफ्ट कर दिया और भरोसा दिलाया कि यहां हम सेफ हैं। हमें भी लगा था कि 5 स्टार होटल है तो ये बात जिम्मेदारी से कह रहे होंगे।‘ रामबीर आगे बताते हैं, 'जब हिंसा ज्यादा भड़क गई तो हमने जनरल मैनेजर और दूसरे स्टाफ को ऊपर से आवाज लगाई लेकिन सब गायब थे। होटल का सारा स्टाफ जा चुका था। मैं और मेरी पत्नी दोनों सुबह 9 बजे से होटल के कमरे में बंद थे। हमने मदद के लिए नेपाल में इंडियन एंबेसी को भी 30 से 40 कॉल किए लेकिन फोन नहीं उठा। हम इंतजार कर रहे थे कि शायद कोई बचाने आएगा लेकिन कोई नहीं आया।’ ‘हम दोनों पूरे दिन कमरे में ही बंद रहे। क्योंकि चारों तरफ गोलियों की आवाज थी और जगह-जगह आगजनी हो रही थी। शाम करीब 7 बजे हमारे कमरे में दरवाजे के नीचे से धुआं आने लगा और हमारा दम घुटने लगा। अब आग के चलते सीढ़ियों के रास्ते उतरना मुमकिन नहीं था। हमने खिड़की के पर्दे निकाले और रस्सी बनाई। तय किया कि चौथी मंजिल से रस्सी के सहारे नीचे उतर जाएंगे।' 'हालांकि पत्नी राजी नहीं थी। वे कहती रहीं कि मैं नहीं उतर पाऊंगी। आप चले जाओ, कम से आपकी जान बच जाएगी। हालांकि मैं नहीं माना और कहा- दोनों साथ जाएंगे। रात करीब 8.45 से 9 बजे हम दोनों नीचे भी उतर आए लेकिन पत्नी उतरते वक्त कुछ ऊंचाई से नीचे गिर पड़ी थी। उन्हें पसलियों और सिर पर चोट आई थी लेकिन उस वक्त उन्होंने मुझे कुछ नहीं बताया। ‘अभी सबसे बुरा होना बाकी था, पत्नी भी मुझसे बिछड़ गईं’रामबीर बताते हैं, 'जब हम नीचे उतरे तो चारों तरफ आगजनी हो रही थी, गोलियां चल रही थीं। हमें बचाने वाला कोई नहीं था। कई और लोग भी फंसे हुए थे। मिलिट्री की गाड़ियां आते-जाते देखकर हमने उनसे मदद की गुजारिश की लेकिन वो नहीं माने।' ‘बड़ी मुश्किल के बाद मैंने पत्नी को एक गाड़ी पर चढ़ाया लेकिन मैं नहीं चढ़ सका और गाड़ी वहां से निकल गई। अब मैं पत्नी से भी बिछड़ गया था। पूरी रात हिंसा और गोलियों की आवाज के बीच यहां-वहां भटकता रहा। रात करीब 9.30 बजे से लेकर दूसरे दिन दोपहर तक मुझे पता नहीं चल सका कि मेरी पत्नी कहां हैं।’ '10 सितंबर को काफी पूछताछ और खोजबीन के बाद दोपहर करीब 1.45 बजे मुझे पत्नी का क्लू मिला। मिलिट्री के एक अधिकारी ने बताया कि वो काठमांडू के टीचर्स अस्पताल में भर्ती है। उसका इलाज चल रहा है। जब मैं अस्पताल पहुंचा तो उसकी मौत की खबर मिली। मैं भागा-भागा मोर्चरी पहुंचा तो उसकी लाश रखी थी।' इंडियन एंबेसी से मदद नहीं मिली, मोटी रकम देकर डेडबॉडी मिली रामबीर कहते हैं, 'हम 5 स्टार होटल में रुके थे। उम्मीद थी कि यहां सबसे ज्यादा सेफ रहेंगे लेकिन हमारी सेफ्टी की फिक्र किए बिना होटल स्टाफ गायब हो गया। हमने एंबेसी में घंटों कॉल किया लेकिन न फोन उठा और न कॉलबैक आया। क्योंकि एंबेसी से भी सब गायब थे।' 'अगर इंडियन एंबेसी में हमारा फोन उठा लिया जाता तो पत्नी जिंदा होतीं। हमने यूपी CMO ऑफिस में भी फोन किया था लेकिन वहां से भी मदद नहीं मिली। उसके बाद मुझसे पत्नी के कफन और डेडबॉडी फ्रीजर बॉक्स में रखने के नाम पर भी अनाप-शनाप पैसे वसूले गए। मैंने डेडबॉडी रखने के लिए 25 हजार रु. और पोस्टमार्टम के लिए करीब डेढ़ लाख रु. चुकाए।' 'फिर 12 सितंबर को मैंने करीब डेढ़-पौने दो लाख रुपए में एंबुलेंस बुक की और अकेले पत्नी का शव लेकर भारत लौटा। लेकिन मेरा सवाल यही है कि आखिर दूसरे देश में हमारी एंबेसी क्यों होती है? क्या हिंसा के वक्त एंबेसी का ऐसे गायब होना भारी लापरवाही नहीं है?' केस के बारे में पूछने पर वे कहते हैं, ‘हजार करोड़ भी मिल जाएं तो मेरी पत्नी वापस नहीं आ सकती है। इसलिए बात कंपन्सेशन की नहीं है, बात जिम्मेदारी तय करने की है। हमारी सरकार कहती है कि हम यूक्रेन से अपने लोग निकाल लाए तो फिर नेपाल में वही काम क्यों नहीं किया?’ वकील बोले- बुजुर्ग महिला की मौत सिर्फ लापरवाही का नतीजा केस को लेकर हमने रामबीर सिंह के वकील अभिषेक चौधरी से भी बात की। वे कहते हैं, 'दुर्भाग्य है कि बुजुर्ग महिला की जान एक ऐसे देश में गई, जहां आप सिर्फ आधार कार्ड लेकर भी जा सकते हैं। वहां वीजा और पासपोर्ट की भी जरूरत नहीं होती। यहां यूपी के गोरखपुर जिले से कुछ घंटों में पहुंचा जा सकता है। फिर भी हमारी सरकार अपने लोगों को नहीं बचा सकी। ये पूरी तरह से लापरवाही का मामला है।' हमने पूछा कि लापरवाही किसने की? जवाब मिला, 'काठमांडू में मौजूद इंडियन एंबेसी के एंबेस्डर और को-एंबेस्डर ने की। जिस होटल हयात रीजेंसी में ये लोग ठहरे थे, वो तो जिम्मेदार है ही। बाकी लापरवाही एंबेसी को निर्देश देने वाले विदेश मंत्रालय के संचालक यानी विदेश मंत्री की भी है।' एडवोकेट चौधरी कहते हैं, 'हमारी सरकार ने युद्ध के हालात में उन देशों से भी भारतीय स्टूडेंट्स निकाल लिए, जहां पासपोर्ट और वीजा की जरूरत थी। फिर नेपाल तो पड़ोस में था। वहां फ्लाइट भेजने की भी जरूरत नहीं थी।' हिंसा के बीच एंबेसी का फोन न उठाना, कानून की भाषा में लापरवाहीएडवोकेट चौधरी इसे डिटेल में समझाते हुए कहते हैं, ‘मेनका गांधी बनाम यूनियन गवर्नमेंट का एक केस है। इसमें भी वही सवाल था, जो इस केस में है। क्या दूसरे देश में जाने के बाद भी किसी भारतीय नागरिक के राइट टू लाइफ की रक्षा भारत सरकार करेगी? तो उस केस में तय हुआ था कि हां, भारत सरकार का ये कर्तव्य है कि अपने नागरिकों की सुरक्षा सिर्फ देश के अंदर ही नहीं, दूसरे देश में भी करे।’ ’केस के फैसले में साफ लिखा है कि दूसरे देशों में एंबेसी बनाई ही इसलिए जाती है कि अपने देश के नागरिकों के हितों और उनकी जान की सुरक्षा कर सकें। एंबेसी को बाकायदा एक जमीन का टुकड़ा दिया जाता है। इस जमीन के टुकड़े पर बनी भारतीय एंबेसी, भारत का ही हिस्सा मानी जाती है, ये भारत का ही प्रतिनिधित्व करती है।’ ’इसका काम ही है कि उस देश में पढ़ने, नौकरी करने, घूमने या तीर्थयात्रा करने आए अपने लोगों के अधिकारों और जीवन जीने के अधिकार को सुरक्षित करना।‘ एंबेसी के अफसर बोले- केस के बारे में जानकारी नहींइस केस को लेकर हमने नेपाल में मौजूद इंडियन एंबेसी का पक्ष जानने के लिए उनरके अफसर बशिष्ठ नंदन से बात की। लापरवाही के आरोप पर उन्होंने कहा कि अभी इस केस के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। मीडिया से ही पता चल रहा है। उस वक्त एंबेसी से जो मदद मुमकिन हो सकती थी, वो एंबेसी की तरफ से की गई थी। किसी एक केस के बारे में हम कुछ नहीं कह सकते। इसके बाद हमने काठमांडू में मौजूद होटल हयात रीजेंसी से भी कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की। हमने होटल की वेबसाइट पर दिए सभी मोबाइल और फोन नंबरों पर कॉल किया लेकिन सभी बंद मिले। ……………………ये खबर भी पढ़ें… उत्तराखंड के तीर्थों में मुस्लिम-ईसाइयों के लिए 'नो एंट्री' 16 जनवरी 2026, हरिद्वार में गंगा घाट पर जगह-जगह बोर्ड लगा दिए गए। लिखा था- ‘हर की पैड़ी पर गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित है।’ बोर्ड पर किसी संस्था का नाम नहीं है। नीचे सिर्फ इतना लिखा है कि आज्ञा से म्युनिसिपल एक्ट हरिद्वार। इसके बाद से उत्तराखंड में केदारनाथ, बद्रीनाथ समेत 47 तीर्थस्थलों पर गैर हिंदुओं की एंट्री बैन करने की मांग ने जोर पकड़ लिया। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 23 Feb 2026 5:15 am

El Mencho: मैक्सिको की सेना ने किसे मार गिराया कि सुलग उठा पूरा देश? ट्रंप ने रखा था ₹12500000000 का इनाम

Who is Al Mencho: मैक्सिको की सेना ने रविवार को सबसे बड़े ड्रग माफिया Nemesio Oseguera Cervantes उर्फ अल मेन्चो को ढेर कर दिया है. हालांकि उसकी मौत से पहले और बाद में कई जगहों पर आगजनी जैसी घटनाएं देखने को मिली हैं.

ज़ी न्यूज़ 23 Feb 2026 1:31 am

Gold News: इस देश के रेगिस्तान में दबा मिला 221 टन सोना, सर्वे रिपोर्ट के बाद मुल्क में जश्न, क्या अब सस्ता होगा सोना?

Latest Study on Gold: अगर आप सोने की खरीद के लिए बेहतर समय का इंतजार कर रहे थे तो समझ लीजिए कि अब आपका वक्त आ गया है. एशिया के एक बड़े देश में हुई स्टडी में रेत के नीचे 221 टन गोल्ड का पता चला है. इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद पूरे देश में जश्न का माहौल बना हुआ है.

ज़ी न्यूज़ 22 Feb 2026 11:54 pm

ट्रंप के रिसॉर्ट में आधी रात को घुसपैठ की कोशिश, सुरक्षाबलों ने हथियारबंद युवक को उतारा मौत के घाट

Donald Trump News: हथियारों के साथ एक युवक ने डोनाल्ड ट्रंप के रिसॉर्ट में घुसपैठ की कोशिश की. हालांकि सीक्रेट सर्विस ने जवाबी कार्रवाई में उसे ढेर कर दिया. इस घटना ने ट्रंप की सुरक्षा व्यवस्था पर एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है.

ज़ी न्यूज़ 22 Feb 2026 11:16 pm

Explainer: मसाज सर्विस, नाबालिगों की किडनैपिंग, दुष्कर्म और हत्या... सालों तक कैसे छिपा रहा एपस्टीन के यौन शोषण का जाल? अरबपतियों के गंदे राज से हिली दुनिया

Epstein Files: दुनियाभर में इन दिनों एपस्टीन फाइल्स की चर्चा हो रही है. इन फाइल्स के सामने आने पर एपस्टीन की रईसी और उसके द्वारा खड़े किए गए भव्य साम्राज्य के पीछे शोषण के एक बड़े जाल का खुलासा हुआ, जिसमें बिल क्लिंटन से लेकर एलन मस्क और एंड्रयू माउंटबेटन विंडसर जैसे बड़े नाम छिपे हुए थे.

ज़ी न्यूज़ 22 Feb 2026 7:18 pm

भारत के अलावा किन देशों में खेली जाती है होली? यहां देखें पूरी लिस्ट

Holi 2026: 4 मार्च को पूरे देश में होली का त्योहार मनाया जाएगा.ऐसा नहीं है कि होली का त्योहार सिर्फ भारत में ही मनाया जाता है. दुनिया में ऐसे कई देश हैं जहां होली खेली जाती है. आइए जानते हैं वो कौन से देश हैं.

ज़ी न्यूज़ 22 Feb 2026 7:11 pm

अमेरिका में 'Super Bomb' तूफान का अलर्ट, खतरे में 3 करोड़ जिंदगियां! एयर इंडिया ने रद्द की न्यूयॉर्क की सभी उड़ानें

Air India Flight Canceled: अमेरिका में वेदर एक्सपर्ट ने बर्फीले तूफान को लेकर चेतावनी दी है, जिसके बाद एयर इंडिया ने 23 फरवरी को न्यूयॉर्क जाने वाली और वहां से आने वाली फ्लाइटें रद्द कर दी है.

ज़ी न्यूज़ 22 Feb 2026 7:11 pm

'Everybody, Somebody, Anybody और Nobody...' कौन हैं गुरिंदर बरार? समझाया जिंदगी का फलसफा, सुनकर आप भी करेंगे वाह-वाह

Gurinder Brar Video:लोकतंत्र में अपेक्षा की जाती है कि हर शख्स जिम्मेदारियों का ईमानदारी से पालन करे. जिंदगी का ये फलसफा कनाडा की अल्बर्टा विधानसभा के एक विधायक गुरिंदर बरार ने 'चार लाइनों' में समझाया, तो उनके सधे शब्दों, शानदार भाषा शैली और बेबाक अंदाज ने सात समंदर पार के लोगों का दिल कैसे जीत लिया आइए बताते हैं.

ज़ी न्यूज़ 22 Feb 2026 6:54 pm

'जरूरत है तो कांग्रेस से लो मंजूरी...,' ट्रंप के 15% ग्लोबल टैरिफ की टूटेगी कमर? कोर्ट से झटके के बाद इस भारतवंशी वकील ने खोला मोर्चा

Trump Hikes Tariffs After Court Hearing: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 15 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ बढ़ाने का ऐलान किया है, जिसको लेकर इंडियन-अमेरिकन वकील ने कई महत्वपूर्ण कानूनी सवाल उठाए हैं.

ज़ी न्यूज़ 22 Feb 2026 6:06 pm

ट्रेड टैरिफ मामले में US SC के फैसले के बाद घटी ट्रंप की लोकप्रियता, महज इतने फीसदी लोग ही समर्थन में

Trump Approval Rating: हाल ही में आई एक ओपिनियन पोल ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चिंताएं बढ़ा दी हैं. सर्वे के अनुसार, ज्यादातर अमेरिकी नागरिक ट्रंप के देश चलाने के तरीके से खुश नहीं है.

ज़ी न्यूज़ 22 Feb 2026 5:49 pm

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर लगी रोक, ट्रंप के नए टैरिफ विवाद के बीच अहम बैठक टली

सूत्रों के अनुसार, हाल के घटनाक्रम विशेषकर अमेरिका में टैरिफ को लेकर हुए कानूनी और राजनीतिक फैसलों के मद्देनजर दोनों पक्षों ने स्थिति का समुचित आकलन करने के लिए अतिरिक्त समय लेने का निर्णय किया है। नई तारीख पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

देशबन्धु 22 Feb 2026 1:58 pm

समुद्र के रास्ते ग्रीनलैंड पहुंचा अमेरिकी अस्पताल, राहत मिशन या फिर इलाके पर पकड़ मजबूत कर रहे ट्रंप?

Greenland Medical Vessel: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड में मेडिकल हेल्प के लिए यूएस नेवी की शिप USNS Mercy को भेजने की घोषणा की है. अमेरिका इसे ट्रंप का मानवीय कदम बता रहा है लेकिन ट्रंप के इस कदम को आर्कटिक क्षेत्र में यूएसए की मौजूदगी बढ़ाने का प्रयास माना जा रहा है.

ज़ी न्यूज़ 22 Feb 2026 12:54 pm

अमेरिका के पूर्वी तट पर बर्फीले तूफान की चेतावनी, 1500 से अधिक उड़ानें रद्द

अमेरिका के पूर्वी तट पर बर्फीले तूफान की चेतावनी जारी की गई है। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट और मौसम विभाग की माने तो तीव्र हो रहे शीतकालीन तूफान के कारण मध्य अटलांटिक और उत्तरपूर्वी अमेरिका में भारी बर्फबारी, तेज हवाएं और तटीय क्षेत्रों में बाढ़ आने की आशंका है।

देशबन्धु 22 Feb 2026 10:00 am

सीवेज रिसाव जारी रहने पर ट्रंप ने वाशिंगटन के लिए इमरजेंसी की घोषणा को मंजूरी दी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वॉशिंगटन डी.सी. में आपातकाल की घोषणा को मंजूरी दे दी है। यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि सीवर लाइन टूटने के बाद गंदा पानी लगातार पोटोमैक नदी में बह रहा है और स्थिति गंभीर बनी हुई है।

देशबन्धु 22 Feb 2026 9:57 am

ट्रंप ने ग्लोबल टैरिफ 10% से बढ़ाकर 15% किया:24 घंटे में दो बार नए टैरिफ लगाए, सुप्रीम कोर्ट ने पुराने टैरिफ रद्द किए थे

ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट और प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए इसे “बेहद खराब तरीके से लिखा गया” और अमेरिका के हितों के खिलाफ बताया। उन्होंने कहा कि उनका नया कदम पूरी तरह कानूनी और परखा हुआ है।

देशबन्धु 22 Feb 2026 8:25 am

मां ने ठुकराया, खिलौने से लिपटकर जी रहा:वायरल पंच-कुन की भावुक कहानी; क्या बंदर भी इंसानों जैसी फीलिंग रखते हैं

एक वीडियो में मकाक प्रजाति का बेबी बंदर कुछ खाता दिख रहा है। तभी एक बड़ा बंदर उसे पकड़कर जमीन में लथेड़ते हुए गोल-गोल घुमा देता है। बड़े बंदर की पकड़ से छूटते ही बेबी दौड़ लगाता है और कुछ दूरी पर पड़े एक ऑरेंज Orangutan खिलौने से चिपक जाता है। जापान के इस वायरल बेबी बंदर का नाम 'पंच-कुन' है। इसे देखने के लिए इचिकावा सिटी के चिड़ियाघर में भीड़ उमड़ रही है। आपने भी सोशल मीडिया पर इसे जरूर देखा होगा। आखिर बंदर एक खिलौने को अपनी मां क्यों समझ रहा और क्या बंदरों में ऐसा व्यवहार नॉर्मल है; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… सवाल-1: बेबी ‘पंच-कुन’ की कहानी क्या है?जवाब: 26 जुलाई 2025 को जापान के इचिकावा सिटी जू में करीब 6 महीने की गर्भवती मादा मकाक ने पहली बार एक बंदर को जन्म दिया। नाम रखा गया- ‘पंच-कुन’। जन्म के समय पंच-कुन का वजन केवल 500 ग्राम था। उसकी मां भीषण गर्मी में प्रसव की थकान से इतनी कमजोर हो गई कि उसने बच्चे पर ध्यान नहीं दिया।जापानी मकाक बंदर ग्रुप्स में रहते हैं, लेकिन समूह की किसी दूसरी मादा ने भी पंच-कुन को अपनाने की कोशिश नहीं की। इसलिए अगले दिन से चिड़ियाघर के कर्मचारियों ने उसे बोतल से दूध पिलाना शुरू किया।बंदरों के एक्सपर्ट डारियो मेस्ट्रिपिएरी और केली ए कैरोल की साइंस डायरेक्ट पत्रिका में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, मकाक मांएं आम तौर पर बच्चों को जन्म के शुरुआती कुछ घंटों या दिनों में ही छोड़ सकती हैं, ये कोई दुर्लभ बात नहीं है। मकाक मादाएं कई वजहों से ऐसा कर सकती हैं… जू में काम करने वाले लोगों ने पंच-कुन के सामने कंबल और खिलौने रखे। उनमें से पंच-कुन ने स्टफ्ड खिलौने ‘ओरांगुटान’ को चुना। सोशल मीडिया पर लोग इस खिलौने को ‘ओरा-मां’ कह रहे हैं। सवाल-2: बंदर खिलौने को ही अपनी मां क्यों समझने लगा? जवाब: वैज्ञानिक मानते हैं कि बंदरों को अपनी मां से सिर्फ इसलिए लगाव नहीं होता, क्योंकि वह उन्हें खाना देती है। असली लगाव 'टच कम्फर्ट' यानी छूने और गले लगने से बनता है। 1958 में अमेरिकी साइंटिस्ट हैरी हार्लो ने अपने मशहूर 'मंकी एक्सपेरिमेंट' से ये बात साबित की थी। हार्लों के मुताबिक, स्पर्श ही मां और बच्चे के बीच कम्युनिकेशन का पहला तरीका होता है और ये गर्भ से ही शुरू हो जाता है… ऐसी चीजें जो बच्चे को कम्फर्ट देती हैं, जैसे मनपसंद तकिया या कंबल उन्हें मनोवैज्ञानिक 'कम्फर्ट ऑब्जेक्ट्स' कहते हैं। बच्चे हर समय इनके पास रहना चाहते हैं। मनोवैज्ञानिक रिचर्ड पासमैन तो कहते हैं, 'कभी-कभी कंबल बच्चे के लिए मां से भी ज्यादा मायने रखता है, क्योंकि मां के उलट, इस पर बच्चो का पूरा कंट्रोल रहता है।’ हार्लो की इस रिसर्च के नतीजों को ब्रिटिश मनोचिकित्सक जॉन बॉल्बी की 'अटैचमेंट थ्योरी' ने और मजबूत किया। इस थ्योरी के मुताबिक, बच्चे जिंदा रहने के लिए अपनी देखभाल करने वाले के पास रहना चाहते हैं। वह जन्म से ही इसी तरह प्रोग्राम किए गए होते हैं। बॉल्बी के अनुसार, जो बच्चे अपनी मां के करीब रहते हैं, उनके बड़े होने तक जिंदा रहने की संभावना ज्यादा होती है। उम्र के शुरुआती कुछ सालों में मां या बच्चे की देखभाल करने वाला बच्चे के लिए एक ऐसा 'सिक्योर बेस' होता है, जहां बच्चा सुरक्षित महसूस करता है। सवाल-3: तो क्या बंदर वाकई इंसानों की तरह भावनाओं को महसूस करते हैं? जवाब: लाखों साल पहले बंदर और इंसानों के पूर्वज यानी प्राइमेट्स एक ही थे। मशहूर प्राइमेटोलॉजिस्ट फ्रांस डी वाल कहते हैं, 'ऐसा नहीं है कि इंसानों की भावनाएं सिर्फ इंसानों में ही होती हैं। हमारी फीलिंग्स ज्यादा विस्तृत और परिष्कृत हो चुकी हैं, लेकिन मूल रूप से वह बंदरों से अलग नहीं हैं। मैंने दोनों की फीलिंग्स में कोई बुनियादी फर्क नहीं देखा।' दिमाग की न्यूरोइमेजिंग की स्टडीज में भी पाया गया है कि बंदरों के दिमाग में भी वही हिस्से हैं, जो हम इंसानों में अलग-अलग तरह की फीलिंग्स पैदा करने के लिए जिम्मेदार हैं। हमारे दिमाग का प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स नाम का हिस्सा फीलिंग्स पर कंट्रोल के लिए जिम्मेदार है। वहीं एंटीरियर सिंगुलेट कॉर्टेक्स, सहानुभूति पैदा करता है। इसके अलावा एमिग्डाला हिस्सा डर जैसी नकारात्मक भावनाओं के लिए जिम्मेदार है। बंदरों में भी दिमाग के ऐसे ही हिस्सों से उनकी अलग-अलग भावनाएं कंट्रोल होती हैं। इसीलिए बंदर भी हमारी तरह ही अलग-अलग भावनाओं को प्रोसेस करते हैं। तनाव की स्थिति में बंदरों में भी कोर्टिसोल का स्तर बढ़ता है, जो इंसानों जैसा ही जैविक रिस्पॉन्स है। किसी दुःख के चलते बंदरों में शारीरिक बदलाव तक देखे गए हैं। जैसे- दिमाग में खून का फ्लो कम होना या वजन घटना आदि। बंदर, चिंपाजी जैसी एप्स प्रजातियां हमारी तरह ही दुःख, चिंता, डर, खुशी, प्यार, संतोष और यहां तक कि हास्य और सहानुभूति की भावनाएं दिखाते हैं... हालांकि फीलिंग्स को लेकर कई मामलों में बंदर इंसानों से अलग या कम विकसित भी हैं। बंदर इंसानों के लेवल तक सहानुभूति महसूस नहीं करते। बंदरों में शर्म, गर्व या गहराई से सोचने की फीलिंग्स इंसानों जितनी डेवेलप नहीं हुई हैं। भाषा के जरिए अपनी फीलिंग्स जाहिर करने की बंदरों की क्षमता भी इंसानों जितनी विकसित नहीं है। सवाल-4: साथी बंदरों ने पंच-कुन को क्यों घायल किया?जवाब: 19 जनवरी 2026 को पंच-कुन को जू में बने बाड़े में लगभग 60 मकाक बंदरों के झुंड में शामिल किया गया। वहां देखा गया कि समूह के दूसरे बंदर पंच-कुन को परेशान कर रहे हैं। 20 फरवरी 2026 में जू ने कर्मचारियों ने कहा कि एक वयस्क मादा बंदर ने पंच-कुन को कई मीटर तक खींचा। दरअसल, पंच-कुन दूसरे बेबी मकाक के पास जाने की कोशिश कर रहा था। इसलिए मादा मकाक ने अपने बच्चे को बचाने की कोशिश में पंच कुन को घसीटा। नेचर वेबसाइट में छपी एक रिसर्च के अनुसार दूसरे बंदरों में ऐसा व्यवहार पंच-कुन को खुद से अलग-थलग मानने की सोच के चलते हो सकता है। मकाक बंदरों में सामाजिक तनाव के चलते झगड़े होते हैं। ऐसे में बड़े बंदर ज्यादा आक्रामक हो जाते हैं। खिलौने को अपनी मां समझने के चलते पंच कुल अलग-थलग दिखता था। उसका अपने खिलौने से लगाव बाकी बंदरों को असहज करने वाला था। छोटा होने के चलते वह दूसरे बंदरों के इशारे भी ठीक से समझ नहीं पा रहा था। ऐसे में वो आसान निशाना बन गया था। सवाल-5: अभी पंच-कुन किस हाल में है, क्या वो सामान्य जीवन जी पाएगा? जवाब: इचिकावा सिटी जू ने कर्मचारियों की दिनचर्या को इस तरह तैयार किया है कि वे पंच-कुन से समय-समय पर मिलते हैं। जब भी कोई कर्मचारी बाड़े के अंदर खाना खिलाने जाता है तो बेबी पंच-कुन तुरंत कर्मचारी के पैर से चिपक जाता है। वहीं दूसरे मकाक बंदर कर्मचारियों से एक दूरी बनाकर रखते हैं। पंच-कुन के इस व्यवहार पर जू के अधिकारी कहते हैं कि पंच धीरे-धीरे बंदरों के झुंड के साथ अपनी बातचीत बढ़ा रहा है। उसे समूह में रहने के लिए तैयार करने की कोशिश जारी है। अब वह दूसरे बंदरों के साथ सामान्य सामाजिक व्यवहार करने की कोशिश कर रहा है, जिसमें हल्की नोकझोंक भी शामिल है। हर दिन उसे कई तरह के अनुभव मिल रहे हैं। उम्मीद है वह जल्दी ही सामान्य बंदर की तरह झुंड में रहना सीख जाएगा। सवाल-6: मकाक बंदरों के बारे में और क्या खास है?जवाब: मकाक दुनिया के सबसे बुद्धिमान और अनुकूलनशील यानी किसी माहौल में ढल जाने वाले बंदरों में से एक हैं। ये सोशल ग्रुप्स में रहते हैं। इनके समूह में एक हायरार्की यानी पदक्रम होता है। एक बंदर ग्रुप का लीडर होता है, उसके बाद मादाएं और फिर बच्चे अपने से बड़े बंदर से सीखते हैं और उसके निर्देश मानते हैं। मकाक इंसानों के साथ रहने में भी माहिर हैं। ये बंदर एक-दूसरे के बाल साफ करते हैं, ये इनका सामाजिक रिश्ते बनाने का तरीका है। भारत में आम तौर पर हम जो बंदर देखते हैं, वो मकाक बंदर की ही रीसस प्रजाति है। ---- रिसर्च सहयोग- सोमेश शर्मा ---- ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर: साथियों को छोड़ अकेले बर्फीले पहाड़ की तरफ क्यों गया पेंग्विन; क्या ये सुसाइड की कोशिश, वायरल 'डेथ वॉक' की असली कहानी आपने वो वायरल वीडियो तो देख लिया होगा, जिसमें एक पेंग्विन सबकुछ छोड़कर अकेला बर्फीले पहाड़ों की तरफ चल पड़ता है। जहां एक ही चीज निश्चित है- मौत। इस पेंग्विन से लोग खुद को रिलेट करके भावुक हो रहे हैं, मीम्स बना रहे हैं। इस वायरल ट्रेंड में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प तक शामिल हैं। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 22 Feb 2026 5:41 am

संडे जज्बात- लड़का समझकर महिला टॉयलेट से खींचकर बाहर किया:पहलवान हूं, टूटे कान; कद-काठी देखकर लोग कहते हैं- 'लड़का लगती हूं, शादी नहीं होगी'

मैं पहलवान अंशिका बालियान हूं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कस्बे सिसौली, मुजफ्फरनगर की रहने वाली हूं। पहलवानी में अभी बहुत नाम तो नहीं कमा पाई हूं, लेकिन कोशिश यही है कि अपने गांव और परिवार का नाम रोशन कर सकूं। इस शौक की कहानी अद्भुत है, लेकिन बिल्कुल आसान नहीं। जब मैंने पहलवानी को अपना रास्ता बनाने का फैसला किया, तभी लोगों ने कहना शुरू कर दिया- ‘अब इसकी शादी नहीं होगी।’ कुछ ने ताना मारा कि मैं लड़कों जैसी लगने लगी हूं। रिश्तेदार कहते थे, ‘अखाड़ों में लड़कों से कुश्ती लड़ती है, इससे कौन शादी करेगा?’ लेकिन मैंने ठान लिया था कि लोगों की सोच से बड़ा मेरा सपना है। सोचिए, पहलवानी चुनते ही पहला फैसला मेरे शरीर और भविष्य पर सुना दिया गया था। पहलवानी करने से अब टूटे कान, खुरदरे हाथ, कद-काठी के कारण मुझे अधूरी लड़की समझा जाता है। लड़का समझकर महिला टॉयलेट से अक्सर मेरा हाथ खींचकर बाहर कर दिया जाता है। कुश्ती सिखाने वाले गुरुजी ने एक बार पानी की पाइप से पिटाई की और बेहोश होने तक प्रैक्टिस करवाई। एक बार एक पहलवान लड़के ने छेड़ा तो मैंने उसे दंगल में टंगड़ी मार-मारकर खूब पटका। दरअसल, हुआ यूं कि मेरी बड़ी बहन को छोटे बाल रखने का शौक था। पापा ने कोविड महामारी के दौरान उसके बाल कटवा दिए। मुझसे भी कहने लगे कि तुम भी कटवा लो, तुमसे संभलते तो हैं नहीं। लेकिन मैं इनकार कर रही थी। लेकिन पापा मेरे बालों के पीछे ही पड़ गए। मेरे बाल बहुत लंबे और घने थे। बहुत पसंद थे मुझे। दिनभर तरह तरह के हेयर स्टाइल बनाती थी, लेकिन पापा ने एक दिन जबरदस्ती कटवा दिए। मैं बहुत परेशान थी। मैंने तीन दिन तक उनसे बात नहीं की। दिनभर रोती रही। खाना छोड़ दिया था। उसके बाद पापा ने समझाया- बालों में रखा ही क्या है? घर की खेती है, फिर आ जाएंगे। उसके बाद शांत हुई। अब जब घर से बाहर निकलती तो आस-पास के लोग कहते- अरे तुम तो गीता, विनेश फोगाट लगने लगी हो। एकदम लड़का हो गई हो। उस दिन पहली बार मेरे मन में ख्याल आया। अच्छा, मैं पहलवान भी बन सकती हूं। कोविड के दौरान मैं घर बैठी थी। पहलवानी करने के बारे में सोच रही थी। एक दिन घर के पास गांव गढ़ी में मैंने स्टेयर्स अकादमी का एक पैम्फलेट देखा। उसमें कुश्ती सिखाने की बात छपी थी। मैंने दो-तीन दिन तक सोच-विचार किया। हिम्मत जुटाई और पापा से कहा- मुझे पहलवानी करनी है। वे कुछ देर चुप रहे। कहने लगे: तुम सजने-धजने की शौकीन हो, तुमसे कुश्ती नहीं हो पाएगी। कुश्ती में बहुत मेहनत करनी पड़ती है। लेकिन मैं नहीं मानी। मैंने फिर कहा। वह बोले- आखिर पैसे ही खराब करोगी। घूम फिर कर वापस लौट आओगी। रहने दो। लेकिन मैं पीछे पड़ गई। पापा मान गए। मुझे स्टेयर्स अकादमी ले गए। वहां गुरुजी मले, जो कि हमारे कोच बनने वाले थे। उन्होंने कहा कि यहां पर हॉस्टल सिर्फ लड़कों के लिए है। तुम्हें रोज घर से आना-जाना पड़ेगा। कैसे करोगी? मैंने कहां- कर लूंगी। उसके बाद मेरा एडमिशन करा दिया गया। उस दिन एडमिशन कराके मैं वापस घर आई। जब आस-पास के लोगों को पता चला। वे पापा से कहने लगे, ये सब क्या कर रहे हो? छोरी का ब्याह नहीं होगा? समाज में बड़ी बदनामी होगी? लेकिन उन सब बातों के बावजूद पापा ने मेरा साथ दिया। अकादमी में शुरुआती 10-15 दिन ठीक बीते। उसके बाद घबराने लगी। मुझे लगा कि नहीं कर पाऊंगी। गुरुजी से कहा, मुझसे नहीं हो पाएगा। लेकिन अब गुरुजी ने भी ठान लिया था। उन्होंने कहा अब वापस नहीं लौटना है। बस प्रैक्टिस में लग जाओ। वो मुझसे और ज्यादा प्रैक्टिस करवाने लगे। इतना ज्यादा कि कई बार बेहोश हो गई। होश आता तो फिर से प्रैक्टिस करवाते। घर आकर बहुत रोती। लेकिन सोचती थी- मैंने ही जिद की थी। अब कैसे घर वालों से कुश्ती छोड़ने की बात कहूं? खैर, मैंने भी ठान लिया कि अब वापस नहीं लौटूंगी। शुरुआत में तेज नहीं भाग पाती थी। थोड़ी दूर भागते ही सांस फूलने लगती, लेकिन धीरे-धीरे स्टैमिना मजबूत होने लगा। स्पीड से भागने लगी। अब तक दो महीने बीत चुके थे। कुछ समय बाद दिवाली आई। मैंने अकादमी के दोस्तों से पूछा- दिवाली पर भी अकादमी आना है? उन्होंने कहा- हम तो नहीं आ रहे। उस दिन मैं भी नहीं गई। घर पर थी। घर पर भी अखाड़े वाले टी-शर्ट और निक्कर पहनकर बैठी थी। उस दिन कुछ लोग पापा से कहने लगे- यह आखिर छोटे-छोटे कपड़े पहनती है। लड़कों के साथ कुश्ती लड़ती है, लोग क्या सोचेंगे? इसका यह सब बंद कराइए। लेकिन पापा ने कहा- कोई नहीं, अभी बच्ची है, बड़ी होने पर देख लेंगे। अगले दिन जब वापस अखाड़े में गई तो गुरुजी बहुत गुस्सा हुए। सजा के तौर पर 10 एक्स्ट्रा राउंड लगाने को कहा। किसी तरह मैंने लगा लिए। मैं थक चुकी थी, लेट गई। उसके बाद उन्होंने मुझे पानी की पाइप से पीटा। कहने लगे, कुश्ती के लिए मजबूत होना पड़ेगा। यहां होली, दिवाली सभी भूलना पड़ेगा। जब कहा था कि प्रैक्टिस पर आना है तो क्यों नहीं आई? गुरुजी से माफी मांगी और प्रैक्टिस में जुट गई। उसके बाद अपनी फिक्र करनी बंद कर दी। सारा दिन मिट्‌टी में प्रैक्टिस करती। अब मिट्‌टी ही मेरे लिए सनस्क्रीन बन गई थी। मेकअप, लिप्स्टिक लगाना सब बंद हो गया था। शक्ल लड़कों जैसी दिखने लगी। कान टूटने लगे थे और गंदे लगने लगे थे। हाथ खुरदरे हो गए थे। त्वचा लड़कों की तरह दिखने लगी थी। अब मुलायम नहीं रह गई थी। लेकिन सोचती थी- अब जो भी हो, सफल इसी में होना है। कान टूटने की वजह कुश्ती लड़ते वक्त उन पर बहुत रगड़ पड़ती थी। मुझे कानों को शीशे में देखकर बहुत खराब लगता। दर्द होता था, सोने में भी तकलीफ होने लगी थी। मेरे कान से खून आने लगा। वे सूजकर उभरे दिखने लगे थे। एक दिन दर्द से बहुत रोने लगी। उस दिन गुरु जी ने कह दिया- ‘पहलवानी तेरे बस की नहीं, वापस घर चली जा।’ जब गुरुजी ने कहा- पहलवानी मेरे बस की नहीं, तो अंदर से आवाज आई। अब तो हार नहीं मानूंगी। इस तरह दर्द में भी प्रैक्टिस करती रही। धीरे-धीरे शरीर और मन दोनों मजबूत होता गया। अखाड़े में कोई और लड़की नहीं थी। मेरी प्रैक्टिस लड़कों के साथ ही होती थी। अब तक मैं कुश्ती लड़ना सीख गई थी। लड़के मेरे साथ प्रैक्टिस करने से कतराते थे। उन्हें लगता था अगर वे लड़की से हार गए तो उनकी बेइज्जती हो जाएगी। लड़कों के गुरूर का एक किस्सा बताती हूं। एक बार मेरठ में कुश्ती प्रतियोगिता थी। वहां हरियाणा का एक पहलवान आया था। उसने मेरे ऊपर तंज कसा- ‘छोरियों गैल भी जोर हुआ करै क्या।' मतलब कि - 'छोरियों में भी दम होता है क्या।' मैंने सुन लिया। उस वक्त कुछ नहीं बोली। फिर जब दंगल शुरू हुआ तो मेरी कुश्ती उसी से तय हुई। अखाड़े में हम दोनों उतरे। मैं उसके कमेंट कारण गुस्से में भरी थी। सोच रही थी, आज दिखाऊंगी कि लड़कियों में भी जोर होता है। मैंने जोर से उसे लंगड़ी मारी और गिरा दिया। कई बार पटका। इतना कि उसकी हालत खराब कर दी। सोच रही थी अब इसे पता चला होगा कि लड़कियों में भी दमखम होता है। वह सोच रहा था- लड़कियां तो कोमल, कमजोर होती हैं। इस तरह मैं मैच खेलने अक्सर बाहर जाती हूं। कई बार तो महिला टॉयलेट में मेरी बांह पकड़कर बाहर निकाल दिया जाता है। वहां महिलाएं समझ ही नहीं पाती कि मैं लड़की हूं। कद-काठी की वजह से वे मुझे लड़का समझ लेती हैं। अक्सर कोच को बुलाना पड़ता है, तब जाकर बाथरूम जा पाती हूं। इसी तरह जब कहीं आती-जाती हूं तो लोग मेरी कद-काठी देखकर पूछते हैं- लौंडा है या लौंडी..। उन्हें बताना पड़ता है, ‘लड़की हूं।’ उस पर वहां औरतें सीधा मुंह पर बोल देती हैं- बाल नहीं बढ़ाने तुझे? छोटे बाल में तुमसे ब्याह कौन करेगा? उनकी बातों पर गुस्सा तो बहुत आता है, लेकिन कुछ कह नहीं पाती। सच कहूं तो शुरुआत में मुझे जरूर थोड़ा अजीब लगा, लेकिन अब नहीं लगता- अब तो छोटे, टाइट कपड़े पहनना आदत बन चुकी है। दंगल में सभी के सामने कपड़े बदलती हूं। लड़कों के साथ कुश्ती करती हूं। अब सब नॉर्मल लगता है। अब तक तो मैं मेकअप और लड़कियों वाला रंग-ढंग पूरी तरह छोड़ चुकी थी। टी-शर्ट और निक्कर ही पहनती थी। रिश्तेदार घर आते तो कहते- ये तो एकदम ही लड़का हो गई है। रात-रात पता नहीं कहां जाती थी। अखाड़े में लड़कों के साथ प्रैक्टिस करती थी। क्या ही लड़की बची होगी अब। वे पापा से कहते, लड़की से क्यों करवा रहे हो यह सब? शरीर बिगड़ गया तो इससे कौन ब्याह करेगा। घर बैठी रह जाएगी। पापा सब सुनकर चुप रहते थे। उनकी बातों पर सोचती थी, आखिर फिर लोग लड़का-लड़की बराबरी की बात क्यों करते हैं। लेकिन मैं कुछ कर नहीं सकती थी। बस यही सोचती हूं कि जिसे जैसा सोचना है सोचे। एक दिन जब लोग मेरी सफलता देखेंगे, तब मुझे समझेंगे। सफल होने पर शादी के रिश्तों की लाइन लग जाएगी। और शादी नहीं भी हुई तो क्या हो जाएगा, शादी ही कोई भविष्य नहीं होती। बिना शादी के भी जी लूंगी। हां, जब मेरी शादी को लेकर मेरे मम्मी-पापा को नीचा दिखाया जाता है, तो बहुत गुस्सा आता है। तब सोचती हूं कि जो लड़का मेरे लंबे बालों, गोरे रंग से शादी करना चाहता है, तो फिर उससे शादी करना ही क्यों? जिसे मेरी काबिलियत और तरक्की पसंद हो, वही मुझसे शादी करे। अब तो मुझे टी-शर्ट जीन्स में देखकर सहेलियां भी कहती हैं- थोड़ा सा तो लड़कियों की तरह रह लिया करो। गाउन पहनो, ऊंची हील की सैंडल पहना करो। लेकिन ये सब मुझसे अब नहीं होता। समय की बर्बादी लगती है। सोचती हूं- जींस पहनूं, बालों में हाथ फेरूं और जहां चाहे निकल जाऊं। आखिर कितना समय बच जाता है इससे। नहीं तो बाल संभालने, मेकअप में ही उलझी रहती थी। यह सब करने पर समाज को जो कहना था, कहा ही.. पैसे के लिहाज से सोचें तो भी यह आसान नहीं है। हर दिन 250 ग्राम बादाम, 300 ग्राम मुनक्का, काजू, दो किलो दूध, 250 ग्राम घी हर दिन चाहिए होता है। पापा बहुत पैसे वाले नहीं हैं, लेकिन खर्च कर रहे हैं। हर महीने 30,000 खर्च आता है, पापा से पूछती हूं कैसे कर लेते हो, तो कहते हैं- यह जानना तुम्हारा काम नहीं है, बस तुम जी-जान से पहलवानी करो। अब पापा का सपना है कि मैं अच्छी पहलवान बनूं। देश का नाम रोशन करूं। मेरी बड़ी बहन ने भी मेरे लिए कुश्ती छोड़ी है। दरअसल, वह भी पहलवान बनना चाहती थी। लेकिन पापा ने कहा- किसी एक की ही पहलवान बनाने का खर्च उठा सकता हूं। तुम दोनों तय कर लो कि किसे पहलवान बनना है। उस पर बड़ी बहन ने कहा था- कोई नहीं, इसे ही पहलवान बनाओ, मैं पढ़ाई कर लूंगी। आखिर मेरी बहन ने भी मेरी वजह से अपना सपना छोड़ दिया। अब मैं नाम रोशन करके उसका भी सपना पूरा करना चाहती हूं। इन सबके बीच पापा की मुश्किल बताना चाहती हूं। जब भी बाहर कुश्ती लड़ने जाती हूं तो पापा साथ होते हैं। घर से जाते समय ट्रेन में रिजर्वेशन मिल जाता है, लेकिन आते वक्त जनरल डिब्बे में घुसकर आना पड़ता है। बलिया जिले में नेशनल लेवल की कुश्ती का कंपिटिशन था। वहां मैंने ब्रॉन्ज जीता था। उस दिन वापस आते वक्त मैं पापा के साथ जनरल डिब्बे में घुसकर आई थी। पापा ट्रेन में खड़े होकर आए थे। पापा को इस तरह परेशान देखकर दुख होता है। मेरी वजह से वह भी कितना कुछ झेलते हैं। जरा सोचिए, कोई राज्य सरकार अपनी राष्ट्रीय खिलाड़ी के साथ ऐसा करती है क्या? उसे तो ऐसी खिलाड़ियों का खर्च उठाना चाहिए। खैर, मैं बहुत खुश हूं अपने कान तुड़वाकर। लड़कों जैसी दिखने वाली शरीर से भी। अब बस ओलंपिक में मेडल लाने की सोच रही हूं। तब लोग नहीं, मेरा खेल बोलेगा। (अंशिका बालियान ने अपने जज्बात भास्कर रिपोर्टर मनीषा भल्ला से साझा किए हैं) --------------------------------------------------- 1- संडे जज्बात-लोग भैंस, बुलडोजर आंटी कहते थे:30 की उम्र में 92 किलो वजन था- किडनी खराब होने लगी तो 100 दिन में 20 किलो घटाया मैं कानपुर की रहने वाली आभा शुक्ला हूं। भैंस, मोटी, 45 साल की आंटी, चलती-फिरती बुलडोजर, किसी के ऊपर गिर जाए, तो वो दबकर ही मर ही जाए… कभी ये सारे नाम मेरे ही थे। लोग मुझे इन्हीं नामों से बुलाते थे। मेरे असली नाम ‘आभा शुक्ला’ से नहीं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-दोस्त की प्रेमिका प्रेग्नेंट हुई, रेप केस मुझपर चला:पंचायत ने 6 लाख में सौदा किया, 5 साल जेल में रहा, अब बाइज्जत बरी बिहार के दरभंगा जिले का रहने वाला मैं मुकेश कुशवाहा। मुझ पर 17 साल की लड़की के रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा चला। वो लड़की मेरे दोस्त की प्रेमिका थी। दोस्त ने उसे प्रेग्नेंट किया था, लेकिन मुकदमा मुझ पर चला। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 22 Feb 2026 5:39 am

जैश की महिला जिहादी ब्रिगेड, भारत के लिए नया खतरा:ऑपरेशन सिंदूर के बाद मसूद अजहर ने नियम बदले, दिल्ली ब्लास्ट पहला असाइनमेंट

‘हमारा दुश्मन हिंदू महिलाओं को फौज में भर्ती कर रहा है। मैं भी उनके खिलाफ लड़ने के लिए महिला जिहादियों को तैयार कर रहा हूं। जमात-उल-मोमिनात की हर जिहादी को मौत के बाद सीधे जन्नत में जगह मिलेगी। उम्मीद है कि जैश-ए-मोहम्मद के मर्द लड़ाके इस नई यूनिट के साथ खड़े होंगे।’ जैश-ए-मोहम्मद के चीफ मसूद अजहर ने 8 अक्टूबर 2025 को पहली बार आतंकियों की महिला विंग जमात-उल-मोमिनात का ऐलान किया था। इसके ठीक 31 दिन बाद 10 नवंबर, 2025 को दिल्ली में लाल किले के पास एक कार में ब्लास्ट हुआ। 15 लोग मारे गए। NIA ने ब्लास्ट को जैश-ए-मोहम्मद के 'वॉइट कॉलर टेरर मॉड्यूल' का हिस्सा बताया। अब संयुक्त राष्ट्र की UNSC 1267 सैंक्शंस कमेटी ने भी अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि ब्लास्ट की साजिश जैश ने ही रची थी। इसकी साजिश में जमात-उल-मोमिनात को भी शामिल किया गया था। UNSC की 10 पेज की रिपोर्ट, 95वें पॉइंट में दिल्ली ब्लास्ट का जिक्रदैनिक भास्कर के पास UNSC की रिपोर्ट है। 4 फरवरी को जारी इस रिपोर्ट में 22 अप्रैल, 2025 को कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का भी जिक्र है। रिपोर्ट जारी करने वाली कमेटी जैश, ISIS और अल-कायदा जैसे आतंकी संगठनों पर नजर रखती है। 95वें पॉइंट में लिखा है कि 10 नवंबर, 2025 को दिल्ली में लाल किले के पास एक कार में ब्लास्ट हुआ। पहलगाम में आतंकी हमले के जवाब में जैश कमांडर मसूद अजहर भारत में ऐसे कई हमलों की प्लानिंग कर रहा है। इसमें जैश की महिला ब्रिगेड जमात-उल-मोमिनात को भी शामिल किया गया है। रिपोर्ट में ये भी लिखा है कि पहलगाम हमले में शामिल तीनों आतंकी मारे जा चुके हैं। आगे पढ़िए, कैसे बनी महिला आतंकियों की नई यूनिट पहलगाम से करीब 5 किमी दूर बायसरन घाटी में आतंकियों ने 26 लोगों को मार डाला था। इसके जवाब में भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाया, जिसमें जैश कमांडर मसूद अजहर के परिवार के यूसुफ अजहर, जमील अहमद, हमजा जमील और हुजैफा अजहर समेत 14 लोग मारे गए। इसके बाद मसूद अजहर की एक ऑडियो क्लिप सामने आई थी, जिसमें उसने कहा था कि मेरी बड़ी बहन अबबा बीबी भी हमले में मारी गईं। मैं उनके साथ मिलकर एक महिला ब्रिगेड बनाना चाहता था। ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत से बदला लेने के लिए आतंकी संगठन जैश का चीफ मसूद अजहर और उसके भाई तल्हा अल सैफ ने महिला आतंकियों की भर्ती शुरू की है। इन लड़कियों में ज्यादातर बहावलपुर, कराची, मुजफ्फराबाद, कोटली, हरिपुर और मंसेहरा के मदसरों में पढ़ती हैं। भारत में जमात-उल-मोमिनात का नेटवर्क बढ़ाने और स्लीपर सेल को मजबूत करने का काम सादिया अजहर और अफीरा बीबी को सौंपा गया। सादिया अजहर मसूद अजहर की बहन है। वही जमात-उल-मोमिनात की सबसे बड़ी लीडर है। सादिया का पति यूसुफ अजहर ऑपरेशन सिंदूर में मारा गया था। संगठन में कमांडर की हैसियत रखने वाली अफीरा बीबी मसूद अजहर के भतीजे उमर फारुख की पत्नी है। ऑपरेशन सिंदूर के बाद जैश ने बदले नियमNIA से जुड़े एक सीनियर अधिकारी कहते हैं, ‘भारत ने पाकिस्तान के अंदर घुसकर जैश-ए-मोहम्मद का हेडक्वार्टर और आतंकी ढांचे बर्बाद कर दिए थे। ये कार्रवाई ऑपरेशन सिंदूर का हिस्सा थी, जिसकी ब्रीफिंग कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह ने की थी।’ ऑपरेशन सिंदूर के बाद बौखलाया मसूद अजहर लगातार भारत के खिलाफ आतंकी साजिशें रच रहा है। भारत की फौज में महिला ऑफिसर्स को देखकर उसने जैश की महिला ब्रिगेड शुरू करने का फैसला लिया। ‘जमात-उल-मोमिनात बनने के बाद लाल किले के पास ब्लास्ट हुआ। NIA ने इस मामले में लखनऊ की डॉ. शाहीन सईद को गिरफ्तार किया। पूछताछ में पता चला है कि वह जमात-उल-मोमिनात की कमांडर अफीरा बीबी के कॉन्टैक्ट में थी। उसी ने शाहीन को भारत में महिलाओं को आतंकी ब्रिगेड में शामिल कर फिदायीन बनाने का काम सौंपा था।’ NIA को दिल्ली कार ब्लास्ट केस में जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवात-उल-हिंद के शामिल होने लिंक मिले हैं। इस मामले में 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें फरीदाबाद की अल-फलाह यूनिवर्सिटी की डॉक्टर शाहीन सईद सहित डॉ. आदिल और डॉ. मुजम्मिल शकील शामिल हैं। ये भी जैश के नेटवर्क से लगातार संपर्क में थे। यूनाइटेड स्टेट इंडिया पॉलिटिकल एक्शन कमेटी के फाउंडर रॉबिन सचदेवा कहते हैं, ‘जैश का इतिहास देखें, तो ये संगठन अब तक महिलाओं को सीक्रेट ऑपरेशन और फिदायीन हमलों में शामिल नहीं करता था। इसकी बजाय उन्हें लोकल सपोर्ट सिस्टम, मैसेज-इंफॉर्मेशन कैरियर और लॉजिस्टिक मैनेजमैंट का काम दिया जाता था।' 'पहलगाम आतंकी हमले और ऑपरेशन सिंदूर के बाद संगठन ने रुख बदला है। बीते एक साल में ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिनमें महिला फिदायीन के नाम सामने आए हैं।’ ‘महिलाओं की आतंकी यूनिट, भारत के लिए खतरे की घंटी’ रॉबिन सचदेवा आगे कहते हैं, ‘आतंकी मसूद अजहर ने हाल के दिनों में न सिर्फ खुले तौर पर महिलाओं का आतंकी नेटवर्क बनाया, बल्कि इसका ऐलान भी किया। जमात-उल-मोमिनात ग्रुप भी इसी का हिस्सा है। इसमें बकायदा महिला आतंकियों को कमांडर और कैप्टन जैसी पोस्ट दी गई हैं। इनका मकसद पाकिस्तान सहित भारत की पढ़ी-लिखी भारतीय महिलाओं को कट्टरपंथी बनाकर आतंकी संगठन में भर्ती करना है। ये भारत के लिए खतरे की घंटी है।’ रॉबिन कहते हैें, ‘दुनियाभर में देखें तो अब तक श्रीलंका में लिट्टे को ही एक्टिव वुमेन टेरर ग्रुप्स बनाने के लिए जाना जाता रहा है। लिट्टे ने सबसे पहले महिलाओं को संगठन में शामिल किया और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या जैसी खौफनाक घटना की। धीरे-धीरे उनकी आइडियोलॉजी को बोको-हराम और ISIS जैसे आतंकी संगठनों ने फॉलो किया। इसी लिस्ट में अब जैश की आतंकी यूनिट जमात-उल-मोमिनात का नाम जुड़ गया है।’ दिल्ली ब्लास्ट का जमात-उल-मोमिनात से लिंक कितना खतरनाक जम्मू-कश्मीर के पूर्व DGP एसपी वैद्य बताते हैं, ‘दिल्ली ब्लास्ट की जांच में NIA ने जिस सच से पर्दा उठाया है, वो होश उड़ाने के लिए काफी है। अब हमारा सामना सिर्फ मदरसों या गांवों से कट्टरपंथी बनकर आए युवाओं से नहीं है। जैश-ए-मोहम्मद ने अपनी स्ट्रैटेजी को ISIS के लेवल पर अपग्रेड कर लिया है। ये अब वॉइट कॉलर टेररिज्म बन चुका है।’ ‘जैश का नया डॉक्टर मॉड्यूल, हमारी नाक के नीचे कश्मीर से निकलकर लखनऊ और हरियाणा तक फैल गया। ये इस बात का सबूत है कि अब टारगेट पर पढ़े-लिखे और अच्छा सैलरी पैकेज उठाने वाले लोग हैं। उन्हें इंक्रिपटेड ऑनलाइन चैनल्स के जरिए ब्रेनवॉश कर आतंकी बनाया जा रहा है।’ एसपी वैद्य के मुताबिक, दिल्ली ब्लास्ट में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम डॉ. शाहीन सईद का है। वह मास्टरमाइंड डॉ. आदिल और मुजम्मिल शकील के साथ मिलकर साजिश रच रही थी। इससे जाहिर होता है कि पढ़ी-लिखी महिलाओं में कट्टरपंथ का जहर कितनी गहराई तक जा चुका है। जमात-ए-मोमिनात जम्मू-कश्मीर, यूपी और साउथ के राज्यों में एक्टिव भारतीय सेना के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी कहते हैं, ‘2019 में हुए पुलवामा अटैक के बाद सुरक्षाबलों ने जैश के आधे से ज्यादा कमांडरों को मार गिराया। ऑपरेशन सिंदूर में भी सेना ने जैश के हेडक्वार्टर समेत बहावलपुर में एक मदरसे को निशाना बनाया, जहां कई आतंकी पनाह लिए हुए थे। ये सब देखकर मसूद अजहर को महिलाओं को मोर्चे पर लाने के लिए मजबूर होना पड़ा।’ ‘जमात-उल-मोमिनात जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और दक्षिण भारत के कुछ इलाकों में ऑनलाइन नेटवर्क के जरिए एक्टिव हो रहा है। टेलीग्राम, स्नैपचैट जैसे प्लेटफॉर्म, VPN और वॉट्सएप ग्रुप्स नेटवर्क के जरिए इस ग्रुप की गतिविधियां फैल रही हैं।’ बड़े मंदिर लश्कर की हिट लिस्ट में, सिक्योरिटी बढ़ाई10 नवंबर को हुए कार धमाके के बाद दिल्ली एक बार फिर हाई अलर्ट पर है। खुफिया एजेंसियों से मिले आतंकी हमले के इनपुट के बाद सिक्योरिटी बढ़ा दी गई है। लाल किले के आसपास ब्लास्ट के खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया है। इनपुट के मुताबिक, पाकिस्तान के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने भारत के बड़े धार्मिक स्थलों को हिट लिस्ट में रखा है। सोर्स बताते हैं कि दिल्ली में चांदनी चौक का मंदिर भी आतंकियों के टारगेट पर है। खुफिया एजेंसियों ने इनपुट दिया है कि लश्कर-ए-तैयबा IED ब्लास्ट की कोशिश कर सकता है। आतंकी पाकिस्तान के इस्लामाबाद में एक मस्जिद में 6 फरवरी को हुए विस्फोट का बदला लेने की कोशिश कर रहे हैं। …………………………….ये खबर भी पढ़िए घाटी में कौन बना रहा कश्मीरी पंडितों की ‘डेथ लिस्ट’, पंडित बोले- हमें भी हथियार दो कश्मीरी पंडितों को आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के प्रॉक्सी ग्रुप द रेजिस्टेंस फोर्स यानी TRF ने टारगेट किलिंग की धमकी दी है। लिखा है कि कश्मीरी पंडितों थोड़े फायदे के लिए बलि का बकरा मत बनो। पहले ही देख चुके हो कि इस रास्ते पर चलने का अंजाम जान गंवाना होता है, जैसा राहुल पंडित, माखन लाल बिंद्रू, मोहन लाल और बाकी के साथ हुआ था। इसके बाद कश्मीरी पंडित हथियार और ट्रेनिंग देने की मांग कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें...

दैनिक भास्कर 22 Feb 2026 5:36 am

अपनी मर्जी से टीवी नहीं देख सकते इस देश के लोग, रिमोट पर भी है सरकारी पहरा!

North Korea TV Restriction: जैसे आप भारत में अपनी मर्जी से टीवी पर पसंदीदा कार्यक्रम देख सकते हैं. उस तरह इस देश में आप बिना सरकार की मर्जी के नहीं देख सकते हैं. यहां टीवी के रिमोट पर भी सरकार का पहरा है.

ज़ी न्यूज़ 22 Feb 2026 1:03 am

DNA: ट्रंप के 'अपने' अदालत में कैसे 'बेगाने' हो गए, जिन्हें राष्ट्रपति ने 'जज' बनाया उन्होंने कैसे झुकाया?

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ के मामले पर ट्रंप को बड़ा झटका दिया है. इस फैसले पर ट्रंप को बड़ा झटका लगा है, जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति का गुस्सा उन जजों पर भी फूटा, जिन्होंने ये फैसला लिखा था.

ज़ी न्यूज़ 22 Feb 2026 12:02 am

US सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी नहीं रुक रहे ट्रंप, फिर फोड़ा टैरिफ बम; दुनिया भर के देशों पर 15% टैरिफ लगाने का ऐलान

Donald Trump: अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने टैरिफ के मसले पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कल (शुक्रवार) को बड़ा झटका दिया था. ट्रंप की ओर से दुनिया भर देशों पर लगाए गए टैरिफ को गैरकानूनी करार देते हुए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राष्ट्रपति के पास टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है. इसके अगले दिन ट्रंप ने टैरिफ पर एक नया ऐलान कर दिया है.

ज़ी न्यूज़ 21 Feb 2026 10:19 pm

कुत्ते से करवाता था ये शर्मनाक काम... पुलिस ने सीसीटीवी देख पकड़ी मालिक की चालाकी; लगेगा जुर्माना?

Italy man fined training dog to dump illegal waste: इटली के सिसिली में एक व्यक्ति को अपने कुत्ते को अवैध रूप से कचरा फेंकने की ट्रेनिंग देने के लिए भारी जुर्माने का सामना करना पड़ा है.

ज़ी न्यूज़ 21 Feb 2026 2:57 pm

लकड़ी की छत, कच्ची और टेढ़ी दीवारें... MBS ने छोटे गांव में क्यों बनवाई मस्जिद, क्या है खास?

सऊदी अरब प्रशासन ने हाल ही में एक मस्जिद का पुनर्निमाण कराया है. इस मस्जिद की दीवारों को कच्चा और बेढंगा सा बनाया गया है, जो अपने आप में कई सवाल खड़े कर रही है, हालांकि इसके पीछे एक बेहद खास वजह भी है. चलिए जानते हैं.

ज़ी न्यूज़ 21 Feb 2026 2:17 pm

गर्लफ्रेंड को पहाड़ पर ही छोड़कर भागा प्रेमी, ठंड में तड़पकर हो गई मौत; कोर्ट ने ब्‍वॉयफ्रेंड को सुनाई सजा

Austria grossglockner mountain death: ऑस्ट्रिया की एक अदालत ने पर्वतारोही थॉमस प्लाम्बरगर को उसकी गर्लफ्रेंड की ठंड से हुई मौत के मामले में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए सजा सुनाई है.

ज़ी न्यूज़ 21 Feb 2026 1:57 pm

ट्रंप के टैरिफ को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाला ‘भारतीय दिमाग’ कौन? नील कत्याल की पूरी कहानी, जिसने व्हाइट हाउस की ताकत को ललकारा

Who is Neal Katyal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने ग्लोबल टैरिफ को रद्द कर दिया है. इस टैरिफ को रद्द करवाने में जिसने अहम भूमिका निभाई उसका ताल्लुक भारत से रहा है.

ज़ी न्यूज़ 21 Feb 2026 12:23 pm

वे देश जहां रोजा नहीं रखना है 'गुनाह', कोड़े मारने से लेकर देश निकाला तक की है सजा

Ramadan 2026: रमजान का पवित्र महीना चल रहा है. इस महीने में लोग रोजा रखते हैं, मुस्लिमों का ये पवित्र महीना है. कई ऐसे देश हैं जहां पर रोजा न रखने की वजह से सजा मिलती है.

ज़ी न्यूज़ 21 Feb 2026 11:07 am

US Tariffs: 18% से घटकर सिर्फ 10% रह गया भारत पर टैरिफ, अमेरिकी कोर्ट के आदेश के बाद आया बड़ा अपडेट

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अपने ऐतिहासिक निर्णय में कहा था कि राष्ट्रपति को IEEPA के तहत व्यापक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है। अदालत के इस फैसले के बाद ट्रंप प्रशासन को नए कानूनी आधार की तलाश करनी पड़ी। इसी क्रम में राष्ट्रपति ट्रंप ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत एक नया वैश्विक टैरिफ आदेश जारी किया।

देशबन्धु 21 Feb 2026 10:05 am

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से झटके के बाद ट्रंप का बड़ा एक्शन... सभी देशों पर लगाया 10% ग्लोबल टैरिफ

ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को “निराशाजनक और गलत” बताते हुए कहा कि वह तुरंत एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करेंगे। उनका कहना था कि यह कदम अमेरिका के व्यापारिक हितों और आर्थिक सुरक्षा की रक्षा के लिए जरूरी है।

देशबन्धु 21 Feb 2026 9:44 am

US सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: ट्रंप के ‘आपातकालीन टैरिफ’ रद्द, 6-3 बहुमत से निर्णय

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को मध्यावधि चुनावों से पहले बड़ा झटका देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उनके द्वारा राष्ट्रीय आपातकालीन शक्तियों के तहत लगाए गए व्यापक टैरिफ को खारिज कर दिया है। 6-3 के बहुमत से दिए गए फैसले में अदालत ने कहा कि 1977 के अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्ति अधिनियम (IEEPA) के तहत राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार प्राप्त नहीं है।

देशबन्धु 21 Feb 2026 8:24 am

भारत-US ट्रेड डील कब होगी लागू? मार्च में साइन होने की संभावना, पीयूष गोयल ने समझौते पर दिया बड़ा संकेत

Donald Trump: टैरिफ विवाद के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील पटरी पर है और रिश्ते शानदार हैं. उन्होंने कहा कि अंतरिम समझौते में 18% टैरिफ लागू रहेगा, जबकि कुछ सेक्टरों पर 50% तक शुल्क जारी रहेगा.

ज़ी न्यूज़ 21 Feb 2026 7:36 am

टैरिफ के बाद अब ईरान पर भी मुंह की खाएंगे ट्रंप! अमेरिकी संसद में होने वाली बड़ी वोटिंग का क्या है मतलब?

America Iran Tension: अमेरिका और ईरान के बीच लगातार तनाव बढ़ता जा रहा है. इसी बीच अमेरिका के कांग्रेसी संसद ट्रंप को रोकने की योजना बना रहे हैं. वो मतदान करने वाले हैं.

ज़ी न्यूज़ 21 Feb 2026 7:14 am

सुप्रीम कोर्ट vs ट्रंप: किस कानून ने रोका ग्लोबल टैरिफ? समझिए सबसे बड़े आर्थिक हथियार टूटने की पूरी कहानी

Trump Tariffs Quashed: अमेरिका की सर्वोच्च अदालत संयुक्त राज्य अमेरिका का सर्वोच्च न्यायालय ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ को उनके अधिकार से बाहर बताते हुए रद्द कर दिया है. अदालत ने कहा कि टैरिफ लगाने का अधिकार संसद का है और अब पहले वसूली गई बड़ी रकम की वापसी पर भी सवाल खड़े हो गए हैं.

ज़ी न्यूज़ 21 Feb 2026 7:05 am

‘भारत के प्रधानमंत्री के साथ रिश्ते फैंटास्टिक…’ लेकिन 18% टैरिफ अभी भी रहेगा जारी- बोले ट्रंप

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि भारत के साथ ट्रेड डील सही दिशा में आगे बढ़ रही है. दोनों देशों के रिश्ते शानदार हैं. फिलहाल 18% टैरिफ लागू रहेगा और समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है.

ज़ी न्यूज़ 21 Feb 2026 6:52 am

सुप्रीम कोर्ट के झटके के बाद ट्रंप का काउंटर-अटैक! पूरी दुनिया पर 10% ग्लोबल टैरिफ, क्या ये ट्रेड वॉर 2.0 का ट्रेलर?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नया कदम उठाया है. उन्होंने दुनिया भर पर 10% का नया टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. जो करीब 5 महीने तक लागू रहेगा. इस दौरान आगे और सख्त टैक्स लगाने की तैयारी भी की जाएगी.

ज़ी न्यूज़ 21 Feb 2026 6:06 am

'18 करोड़ लोगों को बर्बाद किया, हसीना को लौटाए भारत':PM रहमान के करीबी सांसद बोले- दिल्ली गलती सुधारे, तभी रिश्ते सुधरेंगे

बांग्लादेश में अब BNP की सरकार है। बीते 18 साल लंदन में रहे तारिक रहमान प्रधानमंत्री हैं। बहुमत से चुनी गई नई सरकार के सामने देश की इकोनॉमी को दोबारा पटरी पर लाने, भारत से रिश्ते सुधारने, अल्पसंख्यकों की हिफाजत करने के साथ ही कट्टरपंथ से निपटने की चुनौतियां हैं। दैनिक भास्कर ने BNP के सेंट्रल कमेटी मेंबर और सांसद डॉ. अब्दुल मोईन खान से बात की। पार्टी और सरकार की पॉलिसी बनाने में उनका अहम योगदान होता है। मोईन खान PM रहमान के करीबी सलाहकार माने जाते हैं। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल: तारिक रहमान सरकार के सामने सबसे बड़ी तीन चुनौतियां क्या हैं?जवाब: सरकार के सामने पहली चुनौती इकोनॉमी को सुधारना है। बांग्लादेश से लाखों डॉलर बाहर ले जाए गए। इंडस्ट्री खत्म कर दी गई हैं। कारोबारी सरकार का हिस्सा बन गए। दूसरी चुनौती लोकतांत्रिक ढांचे को बेहतर बनाना है। तीसरी चुनौती संस्थाओं की बहाली करने की है। ब्यूरोक्रेसी से लेकर ज्यूडिशियरी और बैंकिंग सिस्टम तक, सब बहाल करना है। सवाल: बांग्लादेश और भारत ने बीते डेढ़ साल में रिश्तों का खराब दौर देखा है। नई सरकार इस पर क्या करने वाली है?जवाब: अवामी लीग की तानाशाही और गलत नीतियों की वजह से ये हालात बने हैं। बांग्लादेश की विदेश नीति का मूलमंत्र है- दोस्ती सभी के साथ, दुश्मनी किसी से नहीं। BNP इसी पर यकीन करती है। हम आगे भी इसी पॉलिसी को फॉलो करेंगे। विदेश नीति की ताली एक हाथ से नहीं बजती। इसमें दोनों तरफ से गर्मजोशी होनी चाहिए। भारत जैसे पड़ोसी मुल्क के साथ रिश्ते इस बात पर निर्भर करते हैं कि भारत ने अपनी पॉलिसी में कैसे बदलाव किए हैं। भारत के नेताओं, फॉरेन और डिफेंस पॉलिसी बनाने वालों को साथ मिलकर बांग्लादेश के लिए पॉलिसी बनानी चाहिए। मुझे लगता है कि भारत को बांग्लादेश के लिए विदेश नीति में बदलाव करना होगा। उसे समझना होगा कि पिछले डेढ़ दशक में क्या गड़बड़ी हुई है। सवाल: शेख हसीना अब भी दिल्ली में हैं। क्या ये बांग्लादेश-भारत के बीच टकराव की वजह बनेगा?जवाब: निश्चित तौर पर यह मुद्दा है। अगर आप किसी से पूछेंगे कि आपके देश को जिसने बर्बाद किया और वो दूसरे देश में पनाह लिए हुए है, तो ये भावना आनी स्वाभाविक है। सवाल: क्या आप शेख हसीना की वापसी चाहते हैं?जवाब: बिल्कुल। भारत पर निर्भर करता है कि वो क्या करना चाहते हैं। अगर किसी ने 18 करोड़ लोगों के साथ नाइंसाफी की है, तो इंसाफ होना चाहिए। मुझे लगता है कि भारत बांग्लादेश के बारे में अपनी समझ बढ़ाएगा। अगर वे अपनी विदेश नीति की खामियों पर सोचेंगे, तो निश्चित तौर पर कोशिश करेंगे। सवाल: क्या रहमान सरकार हसीना को वापस बांग्लादेश भेजने की मांग करेगी?जवाब: हमारे नेता तारिक रहमान ने कहा है कि हम नफरत की राजनीति नहीं करते हैं। हम ये तय करना चाहते हैं कि इंसाफ हो। बांग्लादेश के लोगों ने इस पर खुद राय बनाई है। इस मामले में कानूनी रास्ते और प्रक्रिया को देखा जाएगा। सवाल: अल्पसंख्यकों पर हाल में बार-बार हमले हुए हैं, क्या कानून व्यवस्था नई सरकार के सामने बड़ी चुनौती रहेगी?जवाब: बांग्लादेश के लोग धार्मिक प्रवृत्ति के हैं। वे धार्मिक तौर पर कट्टर हैं, ये कहना सही नहीं होगा। बांग्लादेश में इस्लाम को मानने वाले ज्यादा हैं, लेकिन उनकी सोच हिंदू, क्रिश्चियन, बौद्ध सभी को लेकर खुली हुई है। कुछ लोग धर्म को राजनीति का टूल बनाने की कोशिश करते हैं। सवाल: बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम का विरोध करने वाली जमात चुनाव हार गई। क्या उनकी राजनीति लोगों को पसंद नहीं आई?जवाब: बांग्लादेश का जन्म लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ हुआ था। हम पाकिस्तान से अलग इसलिए हुए थे क्योंकि तब ईस्ट पाकिस्तान के लोगों को लगा कि पाकिस्तान के लोकतंत्र में उनके लिए जगह नहीं है। हमने आजादी की लड़ाई में हजारों लोगों का खून दिया है। बांग्लादेश के लोगों ने हमेशा सही का साथ दिया है। बांग्लादेश के लोगों ने लोकतंत्र के लिए लंबी लड़ाई लड़ी है। इसलिए लोकतंत्र की सुरक्षा करना बहुत जरूरी है। सवाल: बांग्लादेश में चुनाव के साथ रेफरेंडम भी हुआ है। संविधान में बदलाव के पक्ष में वोट डाले गए। नई सरकार इसे कैसे आगे ले जाएगी?जवाब: BNP ने रेफरेंडम पर साइन किए हैं। हम धीरे-धीरे इसे लागू करेंगे। विचार ये था कि ऐसे बदलाव किए जाएं कि बांग्लादेश में फिर कभी तानाशाही न आए। सवाल: चुनाव में अल्पसंख्यक समुदाय से सिर्फ 3 सांसद चुनकर आए हैं। 10% आबादी के लिए सिर्फ 3 सीटें?जवाब: बांग्लादेश में रिजर्व सीटें सिर्फ महिलाओं के लिए हैं। अल्पसंख्यकों के लिए ऐसी व्यवस्था नहीं है। हम बांग्लादेश में अल्पसंख्यक शब्द का इस्तेमाल नहीं करते। हमारी पहचान धर्म नहीं बल्कि बांग्लादेश की नागरिकता है। मैं माइनॉरिटी शब्द को गरीब लोगों के लिए इस्तेमाल करना पसंद करूंगा। सवाल: आप नए प्रधानमंत्री तारिक रहमान के काफी करीब हैं, उनकी खूबियां क्या हैं?जवाब: वे काफी खुले विचारों के हैं। दूसरे लोगों को सुनना पसंद करते हैं। नए विचारों के लिए खुली सोच रखते हैं। उनकी उम्र करीब 60 साल है, लेकिन उन्हें देखकर नहीं लगता। कई लोग उन्हें युवाओं का लीडर भी कहते हैं। सवाल: तारिक रहमान के बारे में कोई वाकया बताइए, जिससे उनकी शख्सियत के बारे में पता चले?जवाब: तारिक रहमान का तरीका ट्रेडिशनल नहीं है। उसमें नयापन है। एक बार वे रैली में बोल रहे थे, तभी भीड़ में से एक शख्स को बुलाया और सभी के सामने उससे बात की। ये उनकी स्टाइल है। लोगों को ये पसंद आ रही है। सवाल: लोग बांग्लादेश की नई सरकार से क्या चाहते हैं?जवाब: सरकार गरीबों को सपोर्ट करने के लिए होती है। अमीर लोग सरकार से कुछ नहीं चाहते। वे खुद अपना ख्याल रख सकते हैं। ये सिर्फ हमारे देश की बात नहीं है, बल्कि आपके देश में भी यही होता है। लोग सरकार से अच्छा हेल्थ और एजुकेशन सिस्टम चाहते हैं। सवाल: अमेरिका में ट्रम्प सरकार आने के बाद पूरी दुनिया की राजनीति तेजी से बदल रही है। अमेरिका, चीन, यूरोप, पाकिस्तान, भारत के बीच बांग्लादेश कैसे तालमेल बिठाएगा?जवाब: बांग्लादेश सभी के साथ दोस्ती चाहता है। ट्रम्प ने ट्रेड को बहुत तवज्जो दी है। भारत-बांग्लादेश के बीच भी ट्रेड अहम मुद्दा है। ट्रेड छोटे देश को दबाने का टूल बन जाता है, तो दिक्कत होती है। अमीर देशों को इससे फर्क नहीं पड़ता, लेकिन गरीब देशों को परेशानी होती है। अमीर देशों को खुद को प्रायोरिटी पर नहीं रखना चाहिए, बल्कि दुनिया के बारे में सोचना चाहिए। हम सिर्फ किसी एक देश के नागरिक नहीं हैं, बल्कि ग्लोबल सिटीजन हैं। सवाल: सार्क बहुत वक्त से काम नहीं कर रहा है। क्या आप सार्क को फिर से एक्टिव करने की कोशिश करेंगे?जवाब: हमने साउथ एशिया के लिए ही सार्क बनाया था। इसे एक्टिव करेंगे। हम क्षेत्रीय तौर पर एकजुट रहेंगे, तो दुनिया पर ज्यादा असर डाल पाएंगे। क्षेत्रीय एकजुटता से दुनिया के कई देशों ने मजबूत मंच तैयार किए हैं और दूसरे देशों को चुनौती दी है। अगर सार्क अच्छे से काम करता, तो ये दिक्कत शुरू ही नहीं होती। ……………………………बांग्लादेश से ये रिपोर्ट भी पढ़िएअवामी लीग-हिंदुओं के वोट BNP को मिले, हसीना की सरकार गिराने वाले हारे बांग्लादेश में 12 फरवरी को हुए चुनाव में BNP यानी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के गठबंधन ने 299 में से 212 सीटें जीती हैं। सरकार बनाने के लिए 150 सीटों की जरूरत थी। कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के गठबंधन को सिर्फ 77 सीटें मिलीं हैं। शेख हसीना की सरकार गिराने वाले स्टूडेंट्स की पार्टी नेशनल सिटीजन पार्टी यानी NCP को भी बांग्लादेशियों ने नकार दिया। पार्टी सिर्फ 6 सीटें जीत पाई है। पढ़िए पूरी खबर...

दैनिक भास्कर 21 Feb 2026 5:06 am