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खाड़ी क्षेत्र में बढ़ा तनाव: यमन तट के पास जहाज पर गोलीबारी, ओमान के पास टैंकर में लगी आग

मध्य पूर्व एशिया में तनाव फिर बढ़ गया है। खाड़ी क्षेत्र और आसपास के समुद्री मार्गों में संघर्ष एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है।

देशबन्धु 10 Jun 2026 7:15 pm

आज का एक्सप्लेनर:क्या ममता की राजनीति अब कांग्रेस के सहारे, वापसी क्यों मुश्किल; कैसे बागी हुए 58 विधायक और 20 सांसद

TMC के 58 विधायकों की टूट और अब 20 सांसदों के बागी होने का दावा। ममता बनर्जी के पास अब सिर्फ 22 विधायकों और 8 सांसदों का समर्थन बाकी है। खेमे के सांसदों से लेकर पार्टी नेताओं तक पर हमले हो रहे। इस बीच ममता लगातार दो दिन सोनिया गांधी से मिलीं। INDIA ब्लॉक की अगुवाई करने की भी इच्छा जताई। ये तक कहा जा रहा कि ममता ‘अपनी वाली TMC’ का कांग्रेस में विलय कर सकती हैं। क्या ममता के पास यही अकेला चारा बाकी, TMC के बागी सांसदों से बीजेपी को क्या फायदा और क्या ममता की राजनीतिक वापसी हो पाएगी, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: क्या 58 विधायकों के बाद TMC के 20 सांसद भी टूट जाएंगे? जवाब: TMC में टूट की शुरुआत 6 मई की शाम ममता के घर पर हुई एक बैठक से हुई थी। करीब एक महीने में ममता अपने 58 विधायक गंवा चुकी हैं। अब खबरें हैं कि 20 सांसद भी बगावत कर रहे हैं। पूरी टाइमलाइन समझिए… कीर्ति आजाद ने दावा किया, ‘काकोली का 20 सांसदों वाला दावा झूठा है। उनके पास सिर्फ 12-13 सांसद हैं। उन्होंने बताया नहीं कि नंबर कितने हैं। दो तिहाई हुए या नहीं। वर्ना अब तक आपने नंबर जारी कर दिया होता। स्पीकर को चिट्ठी में क्या लिखा, ये भी बता दिया होता।’ सवाल-2: काकोली के साथ 20 सांसदों वाले दावे के क्या मायने हैं? जवाब: दरअसल, 1985 में केंद्र की राजीव गांधी सरकार ने संविधान में 10वीं अनुसूची जोड़ी थी। इसे ही दल-बदल विरोधी कानून कहा जाता है। इसके मुताबिक, विधायक या सांसद पार्टी की सदस्यता छोड़ें, पार्टी व्हिप को न मानें, तो पार्टी की शिकायत पर लोकसभा या विधानसभा अध्यक्ष उसकी सदस्यता रद्द कर सकते हैं। हालांकि इसमें अपवाद ये है कि अगर किसी पार्टी के दो-तिहाई विधायक या सांसद दूसरी पार्टी में जाना चाहे, तो वो अयोग्य नहीं ठहराए जा सकते। यानी अगर कम से कम दो-तिहाई सदस्य एक साथ अलग हों, तो इसे दल-बदल नहीं, बल्कि विलय माना जाता है। ऐसे में उनकी सदस्यता बरकरार रहती है। फिलहाल लोकसभा में TMC के 28 सांसद हैं। यानी दो तिहाई का आंकड़ा पूरा करने के लिए काकोली को कम से कम 19 सांसदों का समर्थन जुटाना होगा। काकोली के 20 बागी सांसदों के समर्थन वाले दावे में 2 पेच भी हैं… पहला: अब तक वो चिट्ठी सामने नहीं आई है, जिसमें काकोली ने 20 सांसदों के समर्थन की बात कही है। दूसरा: दल-बदल कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए बागी सांसदों के लिए एकजुट होना या फिर दूसरी पार्टी में शामिल होना जरूरी माना जाता है। अब तक ये साफ नहीं है कि ये सभी सांसद बीजेपी जॉइन कर सकते हैं। कल्याण बनर्जी ने 9 जून को कहा, 'मुझे नहीं पता कौन क्या दावा कर रहा है, लेकिन जिस चिट्ठी का जिक्र काकोली घोष ने किया है, वह अब तक सार्वजनिक नहीं है। सोमवार को ओम बिड़ला के ऑफिस में सांसदों की कोई चिट्ठी नहीं दी गई है। ' कल्याण बनर्जी ने ये भी कहा कि बागी सांसद दल-बदल विरोधी कानून के तहत पार्टी नहीं छोड़ सकते। कीर्ति आजाद ने भी कहा, ‘अगर इस झूठ को मान भी लें कि उनके (काकोली के) साथ 20, 21 या 22 सांसद हैं, तो उन्हें बीजेपी में विलय करना होगा।' 10वीं अनुसूची के पैराग्राफ 6 के मुताबिक, स्पीकर या सदन के चेयरपर्सन ही दल-बदल पर आखिरी फैसला लेंगे। हालांकि 1991 में सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा था कि स्पीकर के फैसले की कानूनी समीक्षा हो सकती है। सवाल-3: तो अब ममता बनर्जी के पास आगे के क्या रास्ते हैं? जवाब: अभी 3 सिनैरियो बन रहे हैं… 1. बचे हुए नेताओं के साथ दोबारा पार्टी खड़ी करें 2. सांसदों को पार्टी छोड़कर जाने से रोक लें सीनियर जर्नलिस्ट शिखा मुखर्जी कहती हैं, ‘ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी के घर पर एजेंसियां छापे मार रही हैं। सांसदों पर हमले हो रहे हैं। विधायकों से लेकर मेयर और पार्षदों तक पर दबाव बनाया जा रहा है।’ 3. कांग्रेस से नजदीकी, केंद्र की राजनीति पर फोकस शिखा मुखर्जी बताती हैं, ‘कांग्रेस और INDIA गठबंधन SIR के खिलाफ अभियान खड़ा करने की प्लानिंग कर रहा है, ममता देशभर में इसका प्रचार करने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं, क्योंकि बंगाल SIR से BJP को फायदा मिलने का सबसे ताजा उदाहरण है।’ ये भी अटकलें लगाई गईं कि ममता अपनी वाली TMC का कांग्रेस में विलय कर सकती हैं। सवाल-4: क्या ममता कांग्रेस में विलय भी कर सकती हैं? जवाब: फिलहाल इसकी संभावना कम है। कांग्रेस के सीनियर नेता अधीर रंजन चौधरी ने ममता के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलों को खारिज किया है। अधीर ने कहा, ‘ममता ने मेघालय, त्रिपुरा और गोवा जैसे राज्यों में कांग्रेस को कमजोर करने के लिए उम्मीदवार उतारे थे। तो अब विलय या करीबी की बात कैसी? अभी भी लड़ते जाओ, किसने रोका है।’ ममता की INDIA ब्लॉक के नेतृत्व की इच्छा पर अधीर ने कहा, ‘अगर आप फ्री हैं, तो अपनी पार्टी को सारे हिंदुस्तान में फैलाइए। किसने मना किया है? हमने ममता को नहीं बुलाया, वो मजबूरी में कांग्रेस के पास आई हैं।’ शिखा मुखर्जी कहती हैं, ‘ममता के कांग्रेस में विलय की संभावना कम हैं, क्योंकि उन्होंने 1998 में कांग्रेस से अलग होकर बड़े जतन से अपनी पार्टी TMC खड़ी की थी। फिर वे 3 बार सीएम बनीं। अब एक झटके के चलते अगर ममता TMC को खत्म करके फिर से कांग्रेस में चली जाएंगी, तो इससे उनकी छवि को नुकसान पहुंचेगा। वो ये बात जानती हैं।’ सवाल-5: ममता की TMC के कमजोर होने से BJP को क्या फायदा होगा? जवाब: इससे केंद्र में BJP को 2 बड़े फायदे हैं… 1. INDIA गठबंधन के सांसद घटेंगे 2. NDA के सहयोगी दलों पर BJP की निर्भरता घटेगी अधीर रंजन चौधरी कहते हैं, ‘TMC के बागी सांसद बीजेपी और नरेंद्र मोदी के अधूरे सपनों को पूरा करेंगे। बीजेपी अब अपने बचे हुए एजेंडे परिसीमन बिल और वन नेशन-वन इलेक्शन बिल को संसद में पारित करा लेगी।’ *****रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास-----------------------------------------------------------ये खबर भी पढ़ें… TMC के बागी विधायक बीजेपी में क्यों नहीं गए; कौन हैं बंगाल के नए नेता विपक्ष ऋतब्रत बनर्जी, क्या वही TMC चलाएंगे 6 मई की शाम। बंगाल चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी ने घर पर TMC विधायकों की बैठक बुलाई। इसमें अभिषेक बनर्जी की चुनावी भूमिका की तारीफ करते हुए खड़े होकर तालियां बजाने को कहा। कुछ विधायक खड़े हुए। कुछ चुपचाप बैठे रहे। बैठे रहने वालों में एक थे ऋतब्रत बनर्जी। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 10 Jun 2026 6:21 pm

पाकिस्तान: खाई में गिरी टूरिस्ट वैन, एक ही परिवार के 10 लोगों की मौत

पाकिस्तान के इस्लामाबाद-मरी एक्सप्रेसवे पर बुधवार को एक भीषण सड़क हादसे में 10 लोगों की मौत हो गई, जबकि 13 अन्य घायल हो गए। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि सभी एक ही परिवार के सदस्य थे।

देशबन्धु 10 Jun 2026 5:17 pm

सेंटकॉम का दावा: ईरान के वायु रक्षा ठिकाने, ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन और निगरानी रडार साइट तबाह

संयुक्त राज्य अमेरिका ने ईरान के ठिकानों पर सैन्य हमले किए हैं। यह कार्रवाई उस घटना के बाद की गई जिसमें कथित तौर पर अमेरिकी सेना के एक अपाचे हेलीकॉप्टर को होर्मुज स्‍ट्रेट के पास मार गिराया गया था। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने कहा कि यह हमला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर आत्मरक्षा में जवाबी कार्रवाई के तौर पर किया गया।

देशबन्धु 10 Jun 2026 12:14 pm

24 साल पुराने नेपाल के शाही परिवार हत्याकांड की फिर होगी जांच, मामले की फाइलें दोबारा खुलेंगी

नेपाल के गृह मंत्री सूदन गुरुंग ने पदभार संभालने के बाद इस मामले को फिर से खोलने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि पहले की गई जांच से जुड़े सभी दस्तावेजों और रिपोर्टों का पुनः अध्ययन किया जाएगा। इसके अलावा उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा कर यह देखा जाएगा कि क्या मामले की गहराई से दोबारा जांच की आवश्यकता है।

देशबन्धु 10 Jun 2026 11:12 am

अमेरिकी हमले के बाद ईरान का पलटवार, बहरीन, कुवैत और जॉर्डन स्थित अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले

ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमले किए हैं। ईरानी दावे के अनुसार, कम से कम चार बैलिस्टिक मिसाइलें और कई ड्रोन अमेरिकी ठिकानों की ओर दागे गए।

देशबन्धु 10 Jun 2026 10:14 am

ईरानी हमले का जवाब देंगे : ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान ने अमेरिकी सेना के एक अत्याधुनिक अपाचे हेलिकॉप्टर को मार गिराया है और इस हमले का जवाब देना उसके लिए जरूरी हो गया है

देशबन्धु 10 Jun 2026 7:00 am

कोचिंग मालिक स्टूडेंट्स से बोला-भगवान ने सपने में सवाल बताए:बेटे के 720 में 704 नंबर के सवाल सही, NEET पेपर लीक के 5 किरदार

NEET एग्जाम से चार दिन पहले 29 अप्रैल की बात है। महाराष्ट्र के लातूर में शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर रोज की तरह अपनी कोचिंग पहुंचे। बच्चों से एग्जाम की तैयारी के बारे में पूछा। फिर आंखें बंद कर थोड़ी देर खड़े रहे और बोले- ‘कल रात मेरे सपने में भगवान विट्ठल आए। बोले- बच्चे मेहनत से पढ़ रहे हैं, इसलिए एक सवाल बताऊंगा, जो NEET एग्जाम में जरूर आएगा।’ फिर मोटेगांवकर ने एक सवाल लिखवाया और कहा कि इसे जरूर याद कर लेना। 3 मई को NEET एग्जाम हुआ। पेपर में मोटेगांवकर का बताया सवाल भी आया। अगले दिन पेपर लीक की बात सामने आने लगी। 8 मई को जांच CBI को सौंपी गई। मामले में शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर समेत 13 लोग गिरफ्तार किए गए। मोटेगांवकर पर केमिस्ट्री का पेपर लीक करने का आरोप है। हालांकि एग्जाम कराने वाली एजेंसी NTA दावा कर रही है कि पेपर लीक हुआ ही नहीं। वो 10 जून यानी आज संसदीय कमेटी के सामने लिखित जवाब भी पेश करेगी। 13 गिरफ्तार आरोपियों में 9 महाराष्ट्र के हैं। दैनिक भास्कर की टीम इनमें से 5 प्रमुख किरदारों के घर और संस्थानों तक पहुंची। बेटे को NEET टॉपर बनाने और मेडिकल कॉलेज खोलने का सपना लातूर से अरेस्ट शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर का RCC (रेणुकाई करियर सेंटर) नाम से कोचिंग सेंटर है। ये NEET, JEE और MHT-CET एग्जाम की तैयारी कराता है। महाराष्ट्र के 8 और शहरों में इसके सेंटर हैं। कोचिंग के पास उनके कुछ जानने वाले मिले। वे पहचान बताए बिना कहते हैं कि पेपर लीक कराने के पीछे मोटेगांवकर की मंशा बेटे को टॉप कराना था। वे 23 साल से कोचिंग चला रहे हैं। सैकड़ों बच्चों को डॉक्टर-इंजीनियर बनाया। इस बार NEET में उनका बेटा बैठ रहा था। चाहते थे कि टॉप करे या अच्छी रैंक लाए। कोचिंग में पढ़ने वाले तेजस सहारे और एक पूर्व टीचर की बातें भी यही इशारा करती हैं। तेजस कहते हैं, ‘सर का बेटा स्पेशल बैच में पढ़ता था। उसके साथ मेरे कुछ दोस्त भी थे। एग्जाम के बाद नंबर जोड़े गए, तो सर के बेटे के 720 में से 704 नंबर आए। इस बार वो टॉप करता।’ कोचिंग में पहले पढ़ा चुके टीचर कहते हैं, ‘मोटेगांवकर मेडिकल कॉलेज खोलना चाहते थे। कॉलेज बन रहा था। बस बेटे को डॉक्टर बनाना था।’ कोचिंग के दो बैच को मिला था NEET का पूरा पेपर कोचिंग में पढ़ने वाले संजय मोरे बताते हैं, ‘यहां NEET की तैयारी करने वाले कई बैच हैं। दो बैच सबसे टॉप के माने जाते हैं। पूरा पेपर सिर्फ इन्हीं दोनों बैच को मिला था। 1. एम्स बैच: इसमें सभी क्लासेज के सबसे अच्छे स्टूडेंट्स चुने जाते हैं। यही रैंक लाते हैं और इन्हीं से कोचिंग का प्रचार होता है। 2. प्रीमियम बैच: इसमें वे स्टूडेंट्स होते हैं, जो पढ़ाई में ज्यादा अच्छे नहीं, लेकिन किसी भी कीमत पर सिलेक्शन चाहते हैं। मोटेगांवकर की करोड़ों की प्रॉपर्टी, लेकिन सामान्य लाइफस्टाइल RCC कोचिंग का टर्नओवर 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का बताया जाता है। हालांकि, हम लातूर के शिवनगर की ओंकार रेजिडेंसी में मोटेगांवकर के फ्लैट पर पहुंचे, तो ऐसा कुछ नहीं दिखा। मोटेगांवकर इस फ्लैट में पिछले 10 साल से माता-पिता, पत्नी और दो बेटों के साथ रह रहे थे। बड़ा बेटा 12वीं और छोटा छठवीं में पढ़ता है। सोसायटी के एक मेंबर बताते हैं, ‘परिवार का रहन-सहन बहुत साधारण है। घर में एक कार और स्कूटी है। मोटेगांवकर को ज्यादातर स्कूटी से ही कोचिंग जाते देखा है।’ खुला घर, बिखरा सामान और अकेले कुत्ता बचापेपर लीक मामले में गिरफ्तार प्रह्लाद विठ्ठलराव कुलकर्णी उर्फ ​​पीवी कुलकर्णी को CBI ने मास्टरमाइंड बताया है। वे NTA के पेपर तैयार करने वाले पैनल में थे। आरोप है कि उन्होंने क्लास लगाकर स्टूडेंट्स को एग्जाम में आने वाले सवाल-जवाब बताए। कुलकर्णी ने 24 साल तक लातूर के दयानंद साइंस कॉलेज में केमिस्ट्री पढ़ाई। चार साल पहले रिटायर हुए। कॉलेज के वाइस प्रिंसिपल युवराज पी. सरनाईकर कहते हैं, ‘पेपर लीक में कुलकर्णी सर का नाम कैसे आ गया, हम सब हैरान हैं।‘ कॉलेज के टीचर भी इससे अनजान हैं कि वे NTA से जुड़े थे और पेपर सेट करने वाली टीम में थे। कॉलेज के बाद हम लातूर में कुलकर्णी के घर पहुंचे। घर के सामने की दीवार पर लिखा है- ‘कुलकर्णी परिवार आपका स्वागत करता है।’ परिवार में पत्नी, दो बेटे और एक बेटी है। बड़ा बेटा और बेटी इंजीनियर हैं। छोटा बेटा 10वीं में है। घर का दरवाजा खुला मिला, लाइट जल रही थीं, सामान अस्त-व्यस्त पड़ा था और एक कुत्ता बैठा मिला। काफी देर दरवाजा खटखटाने के बाद ऊपर से तीन लड़के आए। बताया कि यहां किराए से रहते हैं। कुलकर्णी और उनके परिवार के बारे में पूछने पर बोले, ‘CBI जबसे सर को ले गई, तब से परिवार का कोई नहीं आया। अकेला कुत्ता बचा है। सर पिछले डेढ़ महीने से छोटे बेटे के साथ रह रहे थे। पत्नी पुणे में बेटी के यहां गई थीं।‘ अब बेटा कहां है? जवाब मिला- ‘पता नहीं।‘ कोचिंग के बारे में पूछने पर उन्होंने बताया, ‘सर कोई कोचिंग नहीं चलाते। रिटायरमेंट के बाद घर में पढ़ते-लिखते रहते थे। हमें नहीं लगता कि सर ने ऐसा किया होगा। घरवाले हमें यहां से निकलने के लिए कह रहे हैं, लेकिन हम नहीं जाएंगे। अगर हम भी चले गए, तो उनका कुत्ता भूखा मर जाएगा।‘ पड़ोस में रहने वाले प्रदीप लोखंडे कहते हैं, ‘घर पर कभी कोचिंग चलते नहीं देखी। न किसी को ये पता था कि कुलकर्णी सर पेपर सेट करने का काम करते हैं। हम तो बस यही जानते थे कि वे दयानंद कॉलेज के रिटायर्ड टीचर हैं।‘ कोचिंग में पेपर लीक का आरोप, लेकिन कोचिंग चलते नहीं देखी पुणे से गिरफ्तार मनीषा मांढरे NTA से जुड़ी थीं। NEET में बायोलॉजी का पेपर तैयार करने वाले पैनल में थीं। पुणे के कात्रज इलाके की गंगा ओसियन पार्क सोसायटी में उनका फ्लैट है। आरोप है कि इसी फ्लैट में उन्होंने स्टूडेंट्स को कोचिंग देकर NEET एग्जाम में आने वाले सवाल-जवाब बताए थे। सोसायटी के मेंबर बताते हैं कि मनीषा तलाकशुदा हैं और पिछले चार साल से अकेले रह रही थीं। एक बेटी है, लेकिन साथ नहीं रहती। कोचिंग चलाने के बारे में पूछने पर वे कहते हैं, ‘कभी कोई कोचिंग चलते नहीं देखी, न कोई स्टूडेंट आता दिखा। यहां कोचिंग चलाने की परमिशन भी नहीं है।‘ सोसायटी के सेक्रेटरी राज बिराजदार भी यही दोहराते हैं। वे कहते हैं, ’अगर कोचिंग चलती तो किसी को तो पता चलता। पीवी कुलकर्णी का भी यहां आना-जाना नहीं था।’ मनीषा की लाइफस्टाइल के बारे में पूछने पर यहां रहने वाली एक महिला कहती हैं, ’हम लोगों की तरह वो मिडिल क्लास ही हैं। ज्यादा पैसा नहीं है।’ हमने पूछा क्या कभी अपने कामकाज के बारे में बताया। वे कहती हैं, ’नहीं, इस बारे में नहीं सुना।’ ‘NTA से पेपर लीक कराना मनीषा के बस की बात नहीं’मनीषा पुणे के मॉडर्न कॉलेज में पिछले 24 साल से बॉटनी पढ़ा रही थीं। छह महीने बाद रिटायर होने वाली थीं, लेकिन लीक में नाम आने के बाद कॉलेज ने सस्पेंड कर दिया। कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. निवेदिता एकबोटे कहती हैं, ‘मुझे नहीं लगता कि NTA से पेपर लीक कराना इतना आसान है। मैं जितना मनीषा को जानती हूं, वो अपने दम पर ये नहीं कर सकतीं।‘ NTA से जुड़े होने के सवाल पर वे कहती हैं, ‘हां ये जानते थे कि पिछले 6-7 साल से वो NTA से जुड़ी थीं, लेकिन उनकी भूमिका के बारे में कुछ नहीं पता था।‘ कॉलेज की एक टीचर कहती हैं कि मनीषा मांढरे महाराष्ट्र बोर्ड एग्जाम के पेपर भी सेट करती थीं। हम सब कई साल से साथ पढ़ा रहे हैं। हमें नहीं लगता कि वे ऐसा कर सकती हैं। क्लिनिक बंद पड़ा, पार्लर मिला ही नहींपेपर लीक केस में आरोपी मनीषा वाघमारे का फ्लैट भी पुणे की गंगा ओसियन पार्क सोसायटी में ही है। पति संजय वाघमारे और दो बच्चों के साथ रहती थीं। मनीषा ब्यूटीशियन हैं। पति की डेंटल क्लिनिक के अंदर ही पार्लर का बोर्ड लगा है। आरोप है कि मनीषा ने स्टूडेंट्स को मनीषा मांढरे और पीवी कुलकर्णी की कोचिंग तक पहुंचाया और बदले में मोटी रकम ली। सोसायटी के सेक्रेटरी राज बिराजदार कहते हैं, ‘वाघमारे फैमिली लंबे समय से रह रही है। सबसे अच्छे से बातचीत होती है। सोसायटी के फंक्शन में परिवार बढ़-चढ़कर शामिल होता था।‘ पड़ोसी कहते हैं, ‘पिछले 10 साल से इन्हें देख रहे हैं। घर और रहन-सहन में भी कोई बड़ा बदलाव नहीं दिखता।‘ इसके बाद हम बिबवेवाड़ी इलाके के कपिल उपवन प्लाजा में उनके पति संजय वाघमारे की क्लिनिक ‘डेंटल डिजाइंस’ पहुंचे। क्लिनिक बंद मिला। पास के दुकानदार ने बताया, ‘मनीषा को गिरफ्तार किए जाने के बाद से ये बंद है।’ मनीषा के ब्यूटी पार्लर के बारे पूछने पर वे कहते हैं, ‘क्लिनिक के अंदर ही ब्यूटी पार्लर का बोर्ड लगा है, लेकिन वहां किसी को आते-जाते नहीं देखा। डॉक्टर के मरीज जरूर आते थे। मनीषा कभी-कभार ही दिखती थीं।‘ शॉपिंग कॉम्प्लेक्स के सेक्रेटरी प्रवीण निजामपुरकर कहते हैं, ‘CBI की टीम क्लिनिक पर भी जांच करने आई थी। वे CCTV फुटेज में देखना चाहते थे कि कौन आता-जाता है। हमने पूरा फुटेज दिखाया। इन लोगों के गलत काम से बच्चों का बहुत नुकसान हुआ।’ रिटायरमेंट से एक महीने पहले लीक केस में गिरफ्तार पुणे से गिरफ्तार मनीषा हवलदार पर NEET पेपर में आए फिजिक्स के सवाल लीक करने का आरोप हैै। वे सेठ हीरालाल सराफ कॉलेज परिसर में चलने वाले स्कूल की प्रिंसिपल थीं। अगले महीने उनका रिटायरमेंट था। वे NTA के पेपर सेट करने वाले पैनल में भी थीं। हम कॉलेज पहुंचे तो स्टूडेंट बाहर खड़े थे और गेट पर ताला लटका मिला। उन्हें किसी ने नहीं बताया कि कॉलेज क्यों बंद है और कब खुलेगा। स्कूल चलाने वाली संस्था विद्या प्रसारिणी सभा के सचिव सतीश गवली कहते हैं, ‘हम नहीं जानते थे कि वो NTA से जुड़ी हैं। पेपर लीक में उनका नाम आना हमारे लिए हैरान करने वाला है, क्योंकि स्कूल में आज तक उनके खिलाफ एक भी शिकायत नहीं आई। उनका काम और व्यवहार दोनों अच्छा था। लीक का मामला सामने आने के बाद भी वो रेगुलर स्कूल आती रहीं।’ कॉलेज के पास दुकान चलाने वाले मुकुंद शिंदे बताते हैं, ‘22 मई को सुबह करीब 10 बजे CBI की टीम आई थी। वे दिनभर कॉलेज में जांच करते रहे। शाम करीब 6 बजे कम्प्यूटर और दस्तावेज साथ लेकर गए।’ पुणे के सदाशिव पेठ इलाके की लक्ष्मी निवास सोसायटी में मनीषा का दो कमरे का फ्लैट है। परिवार में रिटायर्ड पति और 95 साल के पिता रहते हैं। बेटी और बेटा दोनों अमेरिका में नौकरी करते हैं। चार-पांच साल में एक बार घर आते हैं। CBI ने मनीषा को इसी फ्लैट से गिरफ्तार किया। सोसायटी में रहने वाले कहते हैं, ‘CBI की टीम के साथ जब मैडम जा रही थीं, तो हमें लगा कि शायद उनके रिश्तेदार हैं। बाद में टीवी से गिरफ्तारी का पता चला। उसके बाद से पति भी फ्लैट छोड़कर चले गए। घर में पिता अकेले बचे। उन्हें काफी दिनों बाद पता चला कि उनकी बेटी गिरफ्तार हो चुकी है। पेपर लीक के पीछे क्या ऑर्गनाइज्ड नेटवर्क, CBI जांच में जुटी ----------------------ये खबर भी पढ़ें… 2024 NEET केस बताता है, 2026 पेपर लीक तय था 5 मई 2024, NEET-UG का एग्जाम था। पेपर शुरू होने से पहले ही पता चला कि पेपर लीक हो गया है। मुख्य सेंटर पटना बताया गया, जहां सॉल्वर गैंग ने एक रात पहले कुछ स्टूडेंट्स को एग्जाम में आने वाले सवाल-जवाब रटवाए। इसके अलावा भी कई गड़बड़ियां सामने आईं। एग्जाम कैंसिल नहीं हुआ। आगे ऐसा न हो, इसके लिए NTA ने फुल-प्रूफ सिस्टम बनाने का दावा किया। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 10 Jun 2026 5:06 am

मोदी ने नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ा:लगातार सबसे ज्यादा दिनों से इलेक्टेड पीएम; मोदी के 12 सालों के काम के 12 चैप्टर

नरेंद्र मोदी बतौर इलेक्टेड प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू को क्रॉस कर चुके हैं। नेहरू चुनाव जीतकर 4398 दिन प्रधानमंत्री रहे थे। मोदी का बतौर पीएम आज उससे एक ज्यादा, यानी 4399वां दिन है। हालांकि नेहरू 1947 से 1952 तक, यानी 1733 दिन बिना चुनाव के प्रधानमंत्री भी थे। उसे भी जोड़ दें, तो नेहरू कुल 6131 दिन तक लगातार पीएम रहे। देश में सबसे ज्यादा लगातार 9000 से ज्यादा दिनों तक सत्ता प्रमुख रहने का रिकॉर्ड भी नरेंद्र मोदी के नाम है। पहले गुजरात के सीएम और फिर देश के पीएम के तौर पर। बतौर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 सालों की 12 बड़ी छाप का पूरा एनालिसिस… ****** ग्राफिक्स- दृगचंद्र भुर्जी और अंकलेश विश्वकर्मा ------------- पीएम मोदी से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… पीएम मोदी की रैलियां आधी हुईं, भाषण लंबे; सूट पहनकर विदेश जाते थे, अब कुर्ता- जैकेट; कितने अलग हैं मोदी 3.0 8 जून 2025 को पीएम नरेंद्र मोदी ने 11 साल पूरे किए। इन 11 सालों में प्रधानमंत्री के लुक, स्टाइल, पहनावे और बोलने के तौर-तरीके काफी बदल गए हैं। उनकी रैलियां घट गई हैं और भाषण लंबे हो गए। अब वो तेजी से बोलने की बजाय ठहरकर बोलने लगे। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 10 Jun 2026 5:05 am

शी चिनफिंग ने कनाडा की नई गवर्नर जनरल को बधाई संदेश भेजा

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने 8 जून को कनाडा की नई गवर्नर जनरल लुईस आर्बर को बधाई संदेश भेजा।

देशबन्धु 10 Jun 2026 4:40 am

रूस पर दबाव बढ़ाने की तैयारी, ईयू ने 21वें प्रतिबंध पैकेज का किया ऐलान

यूरोपीय आयोग ने रूस के खिलाफ प्रतिबंधों का 21वें पैकेज प्रस्तावित किया है। इसका लक्ष्य ऊर्जा, वित्तीय सेवाएं और क्रिप्टो, व्यापार और पहली बार मत्स्य पालन जैसे अहम सेक्टर हैं

देशबन्धु 9 Jun 2026 11:42 pm

बालेंद्र शाह ने मंत्रिमंडल का किया विस्तार, सुधन गुरुंग फिर बने गृह मंत्री

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने मंगलवार को अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया। उन्होंने सुधन गुरुंग को फिर से गृह मंत्री नियुक्त किया और महावीर पुन को विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार मंत्री बनाया।

देशबन्धु 9 Jun 2026 11:20 pm

आज का एक्सप्लेनर:भारत ने अचानक 12 परमाणु बम क्यों तैनात किए; 3 साल से जखीरा बढ़ा रहा, चीन-पाक से एकसाथ निपटने को तैयार?

भारत ने पिछले 3 साल में 26 परमाणु हथियार बढ़ाए। अब परमाणु जखीरा 190 तक पहुंच गया है। भारत ने पहली बार 12 न्यूक्लियर बम मिसाइल्स पर लोड करके तैनात कर दिए हैं। ये खुलासा स्वीडिश थिंकटैंक SIPRI की लेटेस्ट रिपोर्ट में हुआ है। आखिर इस तैनाती के मायने क्या हैं और भारत लगाातर अपना न्यूक्लियर जखीरा क्यों बढ़ा रहा; आज के एक्सप्लेनर में 6 जरूरी सवालों के जवाब… सवाल-1: पिछले दिनों भारत के परमाणु जखीरे में क्या-क्या बदला?जवाबः स्वीडन का थिंकटैंक है- स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी SIPRI। ये दुनियाभर के परमाणु हथियारों पर नजर रखता है और हर साल एक रिपोर्ट जारी करता है। 8 जून को जारी ‘SIPRI ईयरबुक 2026’ के मुताबिक… सवाल-2: भारत के परमाणु हथियार ‘तैनात’ करने का मतलब क्या है? जवाबः परमाणु बम में मौजूद यूरेनियम और प्लूटोनियम जैसे एनरिच्ड रेडियोऐक्टिव मटेरियल आपस में रिएक्ट करके भारी मात्रा में एनर्जी रिलीज करते हैं, जिससे भयंकर विस्फोट होता है। परमाणु बम अकेले काम नहीं करता। इसे दुश्मन के ठिकाने तक पहुंचाने के लिए एक डिलीवरी सिस्टम की भी जरूरत होती है। ये डिलीवरी सिस्टम 3 तरह के हो सकते हैं… अब सवाल आता है कि परमाणु बम को मिसाइल से जोड़कर रखें या अलग-अलग। इसके 2 तरीके होते हैं- 1. डी-मेटेड: इसमें वॉरहेड यानी परमाणु बम और मिसाइल अलग-अलग रखे जाते हैं। अगर दुश्मन अटैक करता है या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा खतरा हो, तो दोनों को जोड़कर फायर कर दिया जाता है। 2. मेटेड: वॉरहेड पहले से मिसाइल पर फिट होते हैं, ताकि खतरे की स्थिति में फौरन सीधे फायर किया जा सके। भारत अब तक पहला तरीका अपनाता था। लेकिन SIPRI की रिपोर्ट कहती है कि पहली बार भारत ने शांतिकाल में 12 परमाणु हथियार मिसाइलों पर तैनात कर दिए हैं। शांतिकाल, यानी वो स्थिति, जब एक देश किसी दूसरे देश के साथ सीधे तौर पर जंग में शामिल नहीं होता। यह बड़ा बदलाव इसलिए है, क्योंकि अब तक यह काम सिर्फ अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस और चीन ही करते थे। भारत इस क्लब में शामिल होने वाला छठा देश बन गया है। मौजूदा समय में दुनियाभर की ऑपरेशनल सेनाओं के पास मौजूद 4,012 परमाणु हथियारों में से करीब 2,200 परमाणु हथियार मिसाइलों और विमानों पर तैनात हैं। ये डिप्लॉयड हथियार हाई अलर्ट पर रखे गए हैं। सवाल-3: भारत ने अचानक 12 परमाणु बम क्यों तैनात कर दिए? जवाबः एक्सपर्ट्स इसके पीछे 3 बड़ी वजहें बताते हैं… 1. न्यूक्लियर ट्रायड के लिए पनडुब्बियों पर न्यूक्लियर बम की तैनाती ऑबर्जवर रिसर्च फाउंडेशन यानी ORF में फेलो और डिफेंस एक्सपर्ट मनोज जोशी के मुताबिक, ‘12 परमाणु बमों की तैनाती पूरी तरह से स्ट्रैटेजिक फैसला है। भारत अब तक सुरक्षा कारणों से न्यूक्लियर वॉरहेड्स को मिसाइल से अलग कहीं दूर लोकेशंस पर रखता आया है, लेकिन अब हमारे पास न्यूक्लियर हमले करने में सक्षम सबमरीन्स मौजूद हैं। ये पेट्रोलिंग या गश्त के लिए जाती हैं, तो वहां परमाणु बमों को मिसाइलों से अलग रखना संभव नहीं है।’ 2. पाकिस्तान के टैक्टिकल न्यूक्लियर हथियारों का जवाब भारत ने 2003 में अपना न्यूक्लियर डॉक्ट्रिन जारी किया था। इसके मुताबिक, भारत न्यूक्लियर अटैक के लिए 'नो फर्स्ट यूज' पॉलिसी अपनाता है। यानी भारत पहला वार नहीं करेगा, लेकिन न्यूक्लियर अटैक का जवाब न्यूक्लियर अटैक से देगा। जबकि पाकिस्तान ‘नो फर्स्ट यूज’ की पॉलिसी नहीं मानता। इसके उलट वो भारत पर परमाणु हमला करने की धमकी देता आया है। पाकिस्तान ने हमेशा अपने जखीरे में भारत से ज्यादा परमाणु बम बनाए रखने की कोशिश की है। 2024 तक पाकिस्तान के पास भारत से 2 परमाणु बम ज्यादा थे। साथ ही पाकिस्तान के पास NASR (HAtf-9) जैसी लैंड बेस्ड न्यूक्लियर वॉरहेड ले जा सकने वाली बैलिस्टिक मिसाइल हैं, जिसकी रेंज 60-70 किलोमीटर है। इसे पाकिस्तान का ‘टैक्टिकल न्यूक्लियर वेपन’ भी कहा जाता है। भारत के पास 5 हजार किमी से ज्यादा दूरी यानी चीन तक अटैक करने की क्षमता वाली मिसाइल है, लेकिन 100 से कम रेंज में वार करने वाली मिसाइलें नहीं हैं। एक संभावना है कि भारत ने पाकिस्तान के टैक्टिकल हथियारों के काउंटर के लिए 12 परमाणु बम तैनात किए। ऑपरेशन सिंदूर के बाद दोनों देशों में तनाव बढ़ा है। ऐसे में भारत किसी संभावित टकराव का जवाब देने के लिए अपनी तैयारियां बढ़ा रहा है। 3. भारत की उत्तरी सीमाओं पर चीन के बढ़ते दबदबे का काउंटर सवाल-4: भारत ने 2023 तक पाकिस्तान से कम परमाणु बम क्यों रखे थे? जवाबः भारत के कम हथियार रखने की 3 बड़ी वजहें हो सकती हैं… 1. भारत ने ‘नो फर्स्ट यूज’ स्ट्रैटजी अपनाई 2. पाकिस्तान से सीधी दुश्मनी, लेकिन उसका इलाका छोटा 3. भारत के पास संसाधन कम, लेकिन तकनीक बेहतर की सवाल-5: भारत ने 3 साल में 26 परमाणु बम क्यों बढ़ाए? जवाबः चीन को ध्यान में रखते हुए भारत अपने परमाणु बम बढ़ा रहा है। चीन के सैन्य ठिकाने बिखरे हुए हैं और उसका एरिया भारत से करीब 3 गुना है। इसीलिए उसे ज्यादा परमाणु बमों और लॉन्ग रेंज मिसाइल्स की जरूरत है। अब भारत 6 से 8 हजार किमी रेंज वाली अग्नि-6 जैसी लॉन्ग रेंज मिसाइलों पर काम कर रहा है। ये चीन के किसी भी हिस्से को निशाना बना सकती हैं। ऑबर्जवर रिसर्च फाउंडेशन यानी ORF में फेलो और डिफेंस एक्सपर्ट मनोज जोशी कहते हैं, ‘चीन ने बहुत तेजी से परमाणु हथियार बढ़ाए हैं, क्योंकि अमेरिका के मुकाबले उसकी परमाणु क्षमता कम है। चीन के बढ़ते हथियारों के चलते भारत भी सतर्क है, क्योंकि चीन उस पर भी इनका इस्तेमाल कर सकता है। इसीलिए भारत भी अपने परमाणु हथियार बढ़ा रहा है।' ORF में सीनियर फेलो सुशांत सरीन कहते हैं, ‘बीते कुछ सालों में पाकिस्तान और चीन नजदीक आए हैं। इसीलिए कूटनीतिक तौर पर भारत, दोनों देशों को ये संदेश ही देना चाहता है कि अगर वे एकसाथ दो मोर्चों से भारत पर हमला करें, तो भी भारत दोनों पर मजबूत पलटवार करने में सक्षम होगा। सवाल-6: तो क्या अब पाकिस्तान और चीन से एकसाथ निपट सकता है भारत? जवाबः चीन परमाणु हथियारों के मामले में हमसे कहीं आगे हैं… उसके पास भारत से करीब 3 गुना यानी 620 परमाणु हथियार हैं। SIPRI के मुताबिक, 2023 से चीन हर साल 100 न्यूक्लियर हथियार बढ़ा रहा है। जबकि भारत ने 2023 से 2025 तक सिर्फ 16 न्यूक्लियर हथियार बढ़ाए हैं। पाकिस्तान और चीन दोनों के परमाणु हथियार जोड़कर भारत से चार गुना ज्यादा होते हैं। SIPRI के मुताबिक, चीन रेगिस्तानों और पहाड़ों पर करीब 350 इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल भी तैनात कर रहा है। चीन ने भी पहली बार अपने 24 परमाणु हथियारों को मिसाइलों और ऑपरेशन बेसों पर तैनात किया है। हालांकि मनोज जोशी कहते हैं, ‘परमाणु युद्ध परमाणु हथियारों की संख्या पर बहुत निर्भर नहीं करती। 5-10 परमाणु बम भी एक पूरा देश तबाह कर सकते हैं। अगर पाकिस्तान के इस्लामाबाद, लाहौर और कराची पर कुल 5 बम ही गिरा दिए जाएं, तो फिर पाकिस्तान में बाकी क्या रहेगा। भारत में मुंबई, दिल्ली और कोई दो बड़े शहरों पर परमाणु हथियार गिरा दिए जाएं, तो बहुत बड़ा नुकसान हो जाएगा।’ मनोज कहते हैं कि इसी तरह अगर चीन हमारे 150 परमाणु हथियार भी खत्म कर दे, तो भी जवाबी हमले के लिए हमारे पास 30 हथियार होंगे। इनसे भारत, चीन के 15 बड़े शहर खत्म कर सकता है। सुशांत भी कहते हैं कि हथियारों का जखीरा सिर्फ न्यूक्लियर डिटरेंस दिखाने के लिए होता है। अगर कभी परमाणु हमले की नौबत आई, तो पाकिस्तान के महत्वपूर्ण तीन-चार इलाकों पर बम गिराना ही भारत के लिए काफी होगा।‘ *****रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास-----------------------------------------------------------ये खबर भी पढ़ें…क्या नेपाल ने भी भारतीय जमीन पर कब्जा किया; पीएम बालेन शाह का बड़बोलापन, उनका ही नुकसान क्यों करेगा पीएम बालेन शाह ने रविवार को दावा किया- नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर कब्जा किया है। मामले ने तूल पकड़ा, तो नेपाल के विदेश मंत्रालय को सफाई देनी पड़ी। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 9 Jun 2026 6:21 pm

दक्षिणी लेबनान के शहर टायर में इजरायली एयरस्ट्राइक, 8 की मौत

इजरायली एयरस्ट्राइक में दक्षिणी लेबनान के प्रमुख तटीय शहर टायर में 8 लोगों की मौत हो गई। आईडीएफ (इजरायल डिफेंस फोर्सेस) ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए शहर के निवासियों को क्षेत्र खाली करने का आदेश जारी किया था।

देशबन्धु 9 Jun 2026 5:50 pm

एच-1बी वीजा शुल्क पर व्हाइट हाउस ने किया ट्रंप का बचाव, अमेरिकी अदालत के फैसले को चुनौती देने की तैयारी

अमेरिकी अदालत से 1 लाख डॉलर का एच-1बी वीजा शुल्क रद्द होने के बाद व्हाइट हाउस ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बचाव किया है। अमेरिकी संघीय अदालत ने वीजा शुल्क को यह करते हुए रद्द कर दिया कि प्रशासन ने अपनी अधिकार सीमा से बाहर जाकर काम किया और एक गैर-कानूनी टैक्स लगाया।

देशबन्धु 9 Jun 2026 12:15 pm

ईरान पर बड़े हमलों को लेकर ट्रंप की नेतन्याहू को चेतावनी, बोले- 'ऐसे चला तो इजराइल पड़ सकता है अकेला'

अमेरिकी मीडिया आउटलेट की एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने नेतन्याहू से साफ कहा कि अगर इजराइल लगातार बड़े हमले करता रहा तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वह अलग-थलग पड़ सकता है।

देशबन्धु 9 Jun 2026 11:44 am

ओमान तट के पास व्यापारी तेल टैंकर पर मिसाइल हमला, 24 भारतीयों को किया गया रेस्क्यू

भारतीय तटरक्षक बल के समुद्री बचाव समन्वय केंद्र (एमआरसीसी) मुंबई ने ओमान के अधिकारियों के साथ मिलकर एक त्वरित और सफल बचाव अभियान को अंजाम दिया है

देशबन्धु 9 Jun 2026 9:36 am

भारतीय दूतावास ने एमटी मैरीवेक्स पर सवार 24 भारतीय क्रू सदस्यों के रेस्क्यू के लिए ओमान का किया धन्यवाद

मस्कट में भारतीय दूतावास ने होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिण में आग लगने की घटना के बाद एमटी मैरीवेक्स पर सवार 24 भारतीय क्रू को बचाए जाने की पुष्टि की है

देशबन्धु 9 Jun 2026 8:55 am

ट्रंप का दावा- ईरान परमाणु समझौते के लिए तैयार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश छोड़ने और अमेरिका के साथ समझौते पर हस्ताक्षर करने को तैयार है

देशबन्धु 9 Jun 2026 7:52 am

मिसाइल गिरी जहाज तबाह, होर्मुज में 30 दिन फंसे अशोक:एक हफ्ते का खाना पूरे महीने चलाया, 300 जहाज अब भी जंग के बीच

11 सेकेंड का एक वीडियो है। इसमें एक जहाज है, जिसके आगे वाले हिस्से से धुंआ उठ रहा है। वीडियो बना रहा शख्स कैमरा घुमाकर दूर एक और जहाज दिखाता है, जो शायद नेवी का है। भारतीय नाविकों के संगठन फॉरवर्ड सीमैन्स यूनियन ऑफ इंडिया का दावा है कि ये जहाज भारत का है और इस पर 8 जून को होर्मुज स्ट्रेट में ओमान तट के पास हमला हुआ है। जहाज पर 24 भारतीय नाविक सवार थे, जिनका इंडियन नेवी ने रेस्क्यू कर लिया। अमेरिका और ईरान जंग के बीच बीते 101 दिनों से होर्मुज की यही हालत है। करीब 167 किमी लंबे होर्मुज स्ट्रेट का सबसे संकरा हिस्सा 33 किमी चौड़ा है। जंग से पहले हर रोज दुनिया में तेल ट्रांसपोर्ट करने वाला 5वां शिप यहीं से गुजरता था। ओडिशा के मरीन ऑफिसर अशोक दीक्षित 27 फरवरी को कतर से LPG का जहाज लेकर निकले थे। 28 फरवरी को अमेरिका और ईरान के बीच जंग छिड़ गई। अशोक का जहाज होर्मुज में फंस गया। 30 दिन वहीं फंसा रहा। दैनिक भास्कर ने उनके जरिए जाना कि होर्मुज से निकलना कितना खतरनाक है और उनका क्या अनुभव रहा। अशोक का दावा है कि अब भी वहां 300 से ज्यादा जहाज फंसे हैं। इनमें 20 से 22 भारत के हैं। पूरी बातचीत… सवाल: अचानक जंग शुरू होने से होर्मुज पार करने में क्या परेशानी आई? जवाब: जंंग शुरू होते ही हम लोग फंस गए। बाहर निकलने का सवाल ही नहीं था। एक जगह एंकर डालकर खड़े हो गए। कोई मूवमेंट नहीं। 30 दिन ऐसे ही खड़े रहे। हॉर्मुज पार करने की परमिशन नहीं थी। बाकी तो ये इंटरनेशनल बॉर्डर है। आम दिनों में कोई दिक्कत नहीं होती। आराम से एंट्री-एग्जिट होता है। सवाल: होर्मुज पार करते वक्त सबसे बड़ा खतरा क्या था, ईरानी सेना, समंदर में बिछी सुरंग या आसमान से आते ड्रोन?जवाब: पूरा पर्शियन गल्फ जल रहा है। हम बीच में खड़े थे और कुछ भी हो सकता था। चाहे मिसाइल हो, ड्रोन हो या सिंगल फायरिंग, डर तो रहता ही है। मेरे 15-17 साल के करियर में मैंने कभी ऐसी स्थिति नहीं देखी। कभी नहीं सोचा था कि इस तरह फंसना पड़ेगा। अब तो काफी बेहतर स्थिति है। मार्च में तो इतनी फायरिंग हो रही थी कि एक दिन में 6 देशों पर अटैक हो रहा था। वहां फंसे लोग जैसा बता रहे हैं, उस हिसाब से अब खतरा कम है। बस आना-जाना बंद है। सवाल: वहां फंसे थे, तो आपकी मेंटल सिचुएशन कैसी थी, खाने-पीने का इंतजाम कैसे होता था? जवाब: सीनियर अफसरों की जिम्मेदारी होती है कि बहुत पैनिक न हो। हम पैनिक होंगे, तो जूनियर ज्यादा डरेंगे। उनसे बार-बार बोलते थे कि सब ठीक हो जाएगा। मर्जी से काम करो। सब अपने को बिजी रखो। कोई प्रेशर मत लो। सबसे ज्यादा प्रेशर फैमिली का होता है। वे न्यूज देख रहे हाेते हैं, तो डरकर सवाल करते हैं। मैं गल्फ इंडिया के लिए काम करता हूं। गल्फ में लोड करते हैं, इंडिया में डिस्चार्ज करते हैं। अगर आप इंडिया आएंगे तो 4 से 5 दिन गुजरात, मुंबई, मैंगलोर के लिए मिलेंगे। ईस्ट काेस्ट जाएंगे तो 8 से 10 दिन लेंगे। मतलब 4 से 10 दिन के बीच सफर होता है। हम इतने दिन के अलावा एक्स्ट्रा खाना-पानी भी रखते हैं। हमें गल्फ से लोड करके इंडिया में ईस्ट कोस्ट में डिस्चार्ज करना था। हमने 7-8 दिन का खाना ले लिया। फिर होर्मुज में फंस गए। दिन बीतने लगे तो हमने राशनिंग शुरू कर दी। खाने-पीने की चीजों पर कंट्रोल किया। खाना सभी को मिले, लेकिन बर्बाद न हो। रोज सामान चेक करते थे। वॉशिंग मशीन दो दिन में एक बार चलाते हैं, उसे हफ्ते में एक बार कर दिया। ऐसे ही पूरा टाइम निकाला। हमारा खाना खत्म होने वाला था। किस्मत अच्छी थी कि उससे पहले ही हम वहां से निकल गए। सवाल: होर्मुज में जिस जगह जहाज फंसे, वो एरिया कैसा है? इसे पार करने में कितना टाइम लगा? जवाब: एक तरफ ईरान कोस्ट और दूसरी तरफ ओमान कोस्ट है। ओमान की तरफ पहाड़ हैं। ईरान का तट सीधा है। ये करीब 32 से 36 किमी का एरिया है। यहां आप कहीं से भी नहीं जा सकते। इसके लिए एक ट्रैफिक सेपरेशन स्कीम, यानी TSS है। ये एक तरह का ट्रैक है। इसे इंटरनेशनल मेरिटाइम ऑर्गेनाइजेशन रिकमंड करता है। अगर आप ट्रैक से बाहर जाते हैं और कुछ हो जाता है, तो इंश्योरेंस नहीं मिलेगा। TSS पार करने में करीब 3 घंटे लगते हैं। जंग चल रही थी, इसलिए डेंजर जोन पार करने में करीब 22 घंटे लग गए। 5 से 6 घंटे तो बहुत खतरनाक थे। कहीं जहाज जल रहे थे। मिसाइलें गिरी थीं। कहीं टूटे जहाज खड़े हैं। गल्फ ऑफ ओमान पहुंचने के बाद हम सेफ हो गए। सवाल: क्या सफर के दौरान ईरानी या अमेरिकी सेना की तरफ से रेडियो पर वॉर्निंग आई? जवाब: हां, सफर के दौरान रेडियो पर चेतावनी आती थीं। जिस इलाके से हमें होर्मुज पार करना था, उसके आसपास हालात बहुत खराब थे। एक जहाज पर हमला हुआ। इसके बाद रेडियो पर ऐलान किया गया कि ‘Hormuz is currently closed, no ships are allowed to transit. 28 फरवरी को भी ईरान की तरफ से रेडियो पर चेतावनी दी गई थी कि कोई भी जहाज इस रूट से आगे न बढ़े। उनका लहजा काफी सख्त होता था। सवाल: क्या कभी आपके आसपास अटैक हुआ था? जवाब: 19 फरवरी को कतर के LNG टर्मिनल पर अटैक हुआ था। मैं और मेरा एक जूनियर बातें कर रहे थे, तभी हमारे करीब ही मिसाइल गिरी। कतर ने 2-3 मिसाइल इंटरसेप्ट की थीं। उनके टुकड़े हमारे आसपास के कुछ शिप पर गिरे थे। कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन जहाजों को नुकसान हुआ। कतर नेवी ने सभी को फोन करके पूछा भी कि आपका नुकसान हुआ है क्या? सवाल: होर्मुज पार करते वक्त किन कानूनों का पालन करना पड़ता है? जवाब: बहुत से इंटरनेशनल नियम और नेविगेशन प्रोसेस का पालन करना पड़ता है। होर्मुज नेविगेशन के लिहाज से काफी संवेदनशील माना जाता है। जहाजों को तय नेविगेशन चैनल का ही इस्तेमाल करना पड़ता है। आने और जाने वाले जहाजों के लिए अलग-अलग ट्रैक होते हैं। होर्मुज में एंट्री से पहले हर शिपिंग कंपनी के अपने सुरक्षा नियम भी होते हैं। ये कंपनी के मुताबिक, अलग-अलग हो सकते हैं। सफर के दौरान जहाज के सभी अधिकारियों और क्रू को अलर्ट रहना पड़ता है। इंजन को हमेशा रेडी पोजीशन में रखा जाता है ताकि जरूरत पड़ने पर जहाज को तुरंत कंट्रोल किया जा सके। सवाल: भारत सरकार या इंडियन नेवी की तरफ से कोई मदद मिली? जवाब: हां, इंडियन नेवी की वजह से ही हम बाहर निकल पाए। उन्होंने 28 मार्च को हमसे बात की। 29 मार्च की सुबह हम वहां से निकल पाए। 30 दिन फंसे रहने के बाद हमने इंडियन नेवी को देखा, तो सब बहुत खुश हुए। ईरान ने इजराइल पर हमले रोके, अमेरिका सीजफायर की कोशिश में जुटाअमेरिका और ईरान के बीच 39 दिन की जंग के बाद 7-8 अप्रैल को पहले अस्थायी सीजफायर पर सहमति बनी थी। दो महीने बाद ईरान ने 7 जून की रात इजराइल पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। यह हमला लेबनान में इजराइली हमले के जवाब में किया गया। इजराइल के मुताबिक, अप्रैल में सीजफायर के बाद यह पहली बार है, जब ईरान ने उस पर मिसाइल हमला किया है। 8 जून को ईरान ने कहा कि उसने फिलहाल इजराइल के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोक दी है। हालांकि चेतावनी भी दी कि इजराइल ने फिर से लेबनान पर हमला किया तो पहले से ज्यादा सख्त जवाब दिया जाएगा। दूसरी ओर अमेरिका युद्धविराम और शांति समझौते की कोशिशों में जुटा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने दावा किया कि इजराइल और ईरान दोनों संघर्ष रोकना चाहते हैं और अंतिम समझौते को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है। ……………………………..ईरान-अमेरिका जंग पर ये खबर भी पढ़ेंहोर्मुज में जलते जहाज से 24 भारतीयों का रेस्क्यू, भारत ने नागरिकों को ईरान छोड़ने को कहा होर्मुज स्ट्रेट के पास एक तेल टैंकर में आग लगने के बाद उस पर सवार 24 भारतीय नाविकों को इंडियन नेवी ने बचा लिया। शुरुआती रिपोर्टों में जहाज पर हमले की आशंका जताई गई, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई। ईरान और इजराइल के बीच बिगड़ते हालात को देखते हुए भारत सरकार ने ईरान में मौजूद भारतीय नागरिकों को जल्द से जल्द वहां से निकलने की सलाह दी है। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 9 Jun 2026 5:15 am

पीओके के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी को लेकर चिंता, हालात पर उठे सवाल

पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के रावलकोट क्षेत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा की गई कथित गोलीबारी को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं

देशबन्धु 9 Jun 2026 12:01 am

फिलीपींस में भूकंप के बाद 32 लोगों की मौत, कई इमारतें क्षतिग्रस्त, स्कूल बंद करने की घोषणा

दक्षिणी फिलीपींस के सारंगनी प्रांत में सोमवार सुबह 7.8 तीव्रता का भूकंप आया, जिसमें जानमाल का भारी नुकसान हुआ है। भूकंप में कम से कम 32 लोगों की मौत हो गई, कई इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं और स्कूलों और विमानों का संचालन रोक दिया गया। कई देशों ने सुनामी की चेतावनी जारी की थी, जिसे बाद में हटा लिया गया।

देशबन्धु 8 Jun 2026 11:41 pm

दक्षिणी फिलीपींस में शक्तिशाली भूकंप से भारी तबाही: कई इमारतें जमींदोज, 5 लोगों की मौत और दर्जनों घायल

एक स्थानीय आपदा अधिकारी के अनुसार, फिलीपींस के दक्षिणी हिस्से में आए 7.8 तीव्रता के ऑफशोर (समुद्र के पास) भूकंप में कम से कम पांच लोगों की मौत हो गई है।

देशबन्धु 8 Jun 2026 12:48 pm

ईरान पर इजरायली पलटवार: पश्चिमी और मध्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक

यरूशलम, 8 जून (आईएएनएस)। ईरान की मिसाइल बौछारों के बाद इजरायल ने भी जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी है। इजरायल डिफेंस फोर्स (आईडीएफ) ने दावा किया कि इजरायली वायु सेना ने पश्चिमी और मध्य ईरान में सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं।

देशबन्धु 8 Jun 2026 9:31 am

इजरायल-ईरान तनाव के बीच ट्रंप ने की शांति की अपील, बातचीत की मेज पर लौटने को कहा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से कहा है कि वह इजरायल पर मिसाइलें दागना बंद करे और फिर से बातचीत की मेज पर लौट आए। यह बयान तब आया जब ईरान ने इजरायल की ओर बैलिस्टिक मिसाइलों की एक नई खेप दागी।

देशबन्धु 8 Jun 2026 8:43 am

पीएम नेतन्याहू ने लेबनान में जारी हमलों के बीच किया दावा, 'पीछे हट रहा है हिज्बुल्लाह'

इजरायल में हर हफ्ते होने वाली कैबिनेट मीटिंग की शुरुआत करते हुए, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि इजरायली सेना दक्षिणी लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ हमले जारी रखे हुए है

देशबन्धु 8 Jun 2026 8:40 am

पाकिस्तानी सेना आंतरिक सुरक्षा को ठीक करने में रही नाकाम

पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज (पीआईसीएसएस) के अनुसार, मई में पाकिस्तान में हुई मिलिटेंट हिंसा में 27 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।

देशबन्धु 8 Jun 2026 8:20 am

बांग्लादेश में एआई रेगुलेशन की जरूरत पर जोर, तकनीक-आधारित अपराधों में हुई खतरनाक बढ़ोतरी

आज के दौर में एआई पर लोगों की निर्भरता बढ़ती जा रही है। हालांकि, एआई से जुड़े अपराधों में भी तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है

देशबन्धु 8 Jun 2026 5:50 am

जब एक आम ने 18 साल पुराना अमेरिकी बैन हटवाया:भारत में जन्मा, काजू-पिस्ता का करीबी रिश्तेदार; कहानी, जो फलों का राजा बनाती है

साल 2006। अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश न्यूक्लियर डील के लिए भारत आए थे। राजकीय डिनर में उन्हें हापुस आम परोसा गया। बुश ने चखा और मनमोहन सिंह की तरफ मुड़कर बोले- ‘यह तो कमाल का फल है।’ अगले साल अमेरिका ने भारतीय आमों पर 18 साल से लगा प्रतिबंध हटा लिया। एक फल ने वह कर दिखाया, जो सालों की कूटनीति नहीं कर सकी थी। आम की हजारों किस्में हैं- कोई 3 लाख रुपए किलो, कोई तरबूज जितना बड़ा। एक पेड़ पर तो 300 अलग-अलग किस्म के आम फलते हैं। एक आम का पेड़, तो 300 सालों से खड़ा है। मंडे मेगा स्टोरी में फलों के इस राजा की दिलचस्प कहानी… **** ग्राफिक्स: अंकुर बंसल और अंकलेश विश्वकर्मा ------------- ये खबर भी पढ़िएबिना संबंध बनाए भी बच्चे पैदा कर लेती है कॉकरोच:सिर कटने पर भी कैसे जिंदा रहते हैं, डायनासोर से भी सीनियर; कॉकरोच के किस्से कॉकरोच जनता पार्टी की वेबसाइट, X अकाउंट और इंस्टाग्राम अकाउंट सभी हैक और डाउन हो गए, तो फाउंडर अभिजीत दीपके ने लिखा- ‘कॉकरोच कभी मरते नहीं।’ बात सच भी है। कॉकरोच इस दुनिया में डायनासोर से भी पहले आए। सिर कट जाए, हफ्तों खाना न मिले फिर भी जिंदा रहते हैं। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 8 Jun 2026 5:15 am

ईरान पर कार्रवाई कोई नया युद्ध नहीं: ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा है कि यह कोई नया युद्ध नहीं है, बल्कि अमेरिका और उसके सहयोगियों की सुरक्षा के लिए उठाया गया आवश्यक कदम था

देशबन्धु 8 Jun 2026 5:00 am

जर्मनी फिर करेगा संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सीट के लिए दावेदारी

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट का चुनाव हारने के बाद जर्मनी ने 2035-36 और 2043-44 कार्यकाल के लिए फिर से दावेदारी करने का ऐलान किया है. जर्मनी के चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने शुक्रवार को घोषणा की कि देश संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 2035-36 कार्यकाल के लिए फिर से चुनाव लड़ेगा. यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब दो दिन पहले ही जर्मनी को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट के चुनाव में हार का सामना करना पड़ा था. मैर्त्स ने यह ऐलान मोंटेनेग्रो में यूरोपीय संघ और पश्चिमी बाल्कन देशों के शिखर सम्मेलन में किया. संयुक्त राष्ट्र महासभा में 3 जून को हुए मतदान में जर्मनी को ऑस्ट्रिया और पुर्तगाल के मुकाबले हार मिली थी. सुरक्षा परिषद की अस्थायी सीट के लिए जर्मनी को 104 वोट मिले, जबकि जीत के लिए 127 वोटों के दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी. पुर्तगाल को 134 और ऑस्ट्रिया को 131 वोट मिले. संयुक्त राष्ट्र के कुल 193 सदस्य देश हैं. यह पहली बार था जब जर्मनी सुरक्षा परिषद की अस्थायी सदस्यता हासिल करने में असफल रहा. इससे पहले जर्मनी छह बार सुरक्षा परिषद का सदस्य रह चुका है और सबसे हाल में उसने 2019-20 कार्यकाल में सीट संभाली थी. हार के कारणों की जांच विदेश मंत्री योहान वाडेफुल ने इस हार के कारणों की विस्तृत समीक्षा के आदेश दिए हैं. चांसलर मैर्त्स ने वाडेफुल को अपना पूरा समर्थन देते हुए कहा कि इस बार जर्मनी शुरुआत से ही लंबी अवधि की तैयारी करेगा. उन्होंने 2035-36 और 2043-44 दोनों कार्यकालों के लिए जर्मनी की नई उम्मीदवारी की घोषणा की. जर्मननी बहुत समय से स्थायी सीट की मांग करता रहा है. मैर्त्स ने कहा कि स्वीडन की दावेदारी को देखते हुए वह यूरोपीय संघ के भीतर यह सुनिश्चित करने की कोशिश करेंगे कि यूरोप से केवल सीमित संख्या में उम्मीदवार मैदान में हो और खासकर यूरोपीय संघ के भीतर से अतिरिक्त प्रतिस्पर्धी दावेदारी न आए. चांसलर ने वाडेफुल के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने पिछले एक वर्ष में इस अभियान के लिए कड़ी मेहनत की. मैर्त्स ने यह भी कहा कि जर्मनी की मौजूदा दावेदारी कई साल पहले घोषित हुई थी, लेकिन बहुत देर से सक्रिय तैयारी शुरू हुई. वाडेफुल ने भी माना कि संयुक्त राष्ट्र में मिला परिणाम संतोषजनक नहीं था. न्यूयॉर्क से मेक्सिको पहुंचे वाडेफुल ने कहा कि अब अगली चुनौती की तैयारी शुरू हो चुकी है. उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रिया और पुर्तगाल को शुरुआत से ही बढ़त हासिल थी और जर्मनी ने अपेक्षाकृत देर से अपनी सक्रिय दावेदारी शुरू की. उन्होंने कहा कि जर्मन सरकार ने इस हार से पहला निष्कर्ष निकालते हुए भविष्य के कार्यकालों के लिए अभी से उम्मीदवारी की घोषणा कर दी है. वाडेफुल ने कहा कि जर्मनी दुनियाभर में शांति और सुरक्षा को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाता रहेगा, खासकर यूरोप में. समर्थन कम नहीं करेगा जर्मनी इस बीच मेक्सिको सिटी में पत्रकारों से बातचीत के दौरान वाडेफुल ने उन मांगों को खारिज कर दिया, जिनमें सुरक्षा परिषद चुनाव हारने के बाद संयुक्त राष्ट्र को दी जाने वाली जर्मनी की आर्थिक सहायता घटाने की बात कही गई थी. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र शांति, मानवाधिकार और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ावा देने वाली सबसे महत्वपूर्ण वैश्विक संस्था बनी हुई है और जर्मनी इसमें पूरी तरह सक्रिय रहेगा. वाडेफुल ने कहा कि संकट और संघर्षों के समाधान के मामले में संयुक्त राष्ट्र से अधिक वैधता रखने वाली कोई दूसरी संस्था नहीं है. उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय आई जब जर्मनी के हेसे राज्य के अंतरराष्ट्रीय मामलों के मंत्री मानफ्रेड पेंट्स ने सुझाव दिया था कि सुरक्षा परिषद सीट नहीं मिलने के बाद जर्मनी संयुक्त राष्ट्र को अपनी वित्तीय सहायता कम करने पर विचार कर सकता है. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं. इनमें अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस स्थायी सदस्य हैं और उनके पास वीटो शक्ति है. बाकी 10 अस्थायी सदस्य दो वर्ष के कार्यकाल के लिए चुने जाते हैं. जर्मनी की हालिया हार को उसकी कूटनीतिक रणनीति के लिए एक झटका माना जा रहा है, लेकिन बर्लिन ने साफ कर दिया है कि वह संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में अपनी सक्रिय भूमिका जारी रखेगा और भविष्य में फिर से सुरक्षा परिषद की सीट हासिल करने का प्रयास करेगा. विवेक कुमार (डीपीए, रॉयटर्स)

देशबन्धु 8 Jun 2026 12:50 am

एएफडी की जीत को लेकर जर्मनी में चिंता बढ़ी

पूर्वी जर्मनी में स्थानीय चुनावों से पहले दक्षिणपंथी एएफडी की मजबूत स्थिति और बढ़ते जनसमर्थन ने मुख्यधारा की पार्टियों की चिंता बढ़ा दी है

देशबन्धु 8 Jun 2026 12:43 am

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने फेडरल रिजर्व के चेयरमैन वार्श का किया समर्थन, रेट कम करने पर दिया जोर

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नए बने फेडरल रिजर्व चेयरमैन केविन वार्श पर भरोसा जताया और कहा कि वह शानदार हैं और उन्हें मॉनेटरी पॉलिसी पर अपने फैसले खुद लेने चाहिए।

देशबन्धु 7 Jun 2026 11:36 pm

इजरायल में गोलीबारी से हड़कंप: एक की मौत और कई घायल, पीएम नेतन्याहू ने सुरक्षा स्थिति का लिया जायजा

इजरायल के केंद्रीय इलाके कोचाव याइर के पास हुई गोलीबारी की घटना ने पूरे देश में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इस हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि पांच लोग घायल बताए जा रहे हैं, जिनमें एक की हालत गंभीर है।

देशबन्धु 7 Jun 2026 9:03 pm

आज का एक्सप्लेनर:अन्नामलाई वो करना चाहते थे, जो विजय थलापति ने किया; बीजेपी छोड़ने की असली वजह क्या, अब कौन-सा आंदोलन खड़ा कर रहे

2 जून को तमिलनाडु बीजेपी के नेता के. अन्नामलाई ने पार्टी से इस्तीफा दिया। 3 दिन मान-मनौव्वल के बाद जब इस्तीफा मंजूर हुआ, तो अन्नामलाई ने अपने नए ‘पॉलिटिकल मूवमेंट’ का ऐलान कर दिया। ये पार्टी 2031 में विधानसभा चुनाव लड़ेगी। कहा जा रहा है कि अन्नामलाई बीजेपी में रहते वो हासिल कर सकते थे, जो सीएम विजय थलापति ने किया। जबकि कांग्रेस का कहना है कि अन्नामलाई बीजेपी की ही B टीम बना रहे हैं। आखिर अन्नामलाई के बीजेपी से किनारा करने की इनसाइड स्टोरी क्या है, क्या अन्नामलाई विजय थालापति की तरह बीजेपी को बड़ी जीत दिला सकते थे, आगे के प्लान की क्या सच्चाई, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: अन्नामलाई के बीजेपी से इस्तीफा देने की इनसाइड स्टोरी क्या है? जवाब: अन्नामलाई ने अगस्त 2020 को BJP जॉइन की औरे 11 महीने बाद 16 जुलाई 2021 को उन्हें BJP प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। दरअसल, तमिलनाडु में पिछले 60 सालों से एक अलग तरह की राजनीति होती आई है, जिसे ‘द्रविड़ पॉलिटिक्स’ कहते हैं। इसी द्रविड़ पॉलिटिक्स के सहारे पार्टियां DMK और AIADMK 60 सालों तक लगातार सत्ता में रहीं। अन्नामलाई ने बीजेपी में रहते द्रविड़ पॉलिटिक्स का काट निकालने की कोशिश की, लेकिन उनका ये मिशन सफल नहीं हो पाया। सवाल-2: आखिर तमिलनाडु की द्रविड़ पॉलिटिक्स है क्या? जवाब: इसकी शुरुआत होती है- आर्य बनाम द्रविड़ की बहस से। जर्मन भाषाविद मैक्स मूलर जैसे कई विद्वानों ने दावा किया कि 1500 ईसापूर्व आर्य नाम की एक जाति ने भारतीय उपमहाद्वीप पर हमला किया। इनकी भाषा संस्कृत थी। वहीं दक्षिण भारत में बोली जाने वाली भाषाओं- तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम को द्रविड़ भाषा कहा गया। ब्रिटिश शासन के दौरान ये सोच बनी कि द्रविड़ भाषाएं आर्यों की भाषा से कमतर हैं। इसी भाषाई आधार पर देश के लोगों में एक बंटवारा हुआ- आर्य बनाम द्रविड़। फिर 20वीं सदी की शुरुआत में मद्रास में द्रविड़ सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन खड़ा हुआ। शुरुआती द्रविड़ नेता ब्राह्मणों के भी विरोधी थे। उसकी वजह थी कि मद्रास प्रेसिडेंसी में सिर्फ 3% ब्राह्मण सरकारी विभागों में करीब 70% प्रमुख पदों पर काबिज थे। गैर-ब्राह्मण नेताओं का मानना था कि ब्राह्मण दक्षिण के मूल निवासी नहीं हैं, बल्कि आर्य हैं और बाहरी हैं। द्रविड़ आंदोलन मूलतः 3 बातों पर टिका था- इन्हीं तीन बातों पर दो बड़ी द्रविड़ राजनीतिक पार्टियां बनीं… 1. DMK: अन्नादुरई पहले गैर कांग्रेसी CM बने 2. AIADMK, एक्टर MG रामचंद्रन सीएम बने 2016 में जयललिता की मृत्यु के बाद से AIADMK कमजोर पड़ती गई। EPS अभी इसके नेता हैं। इधर DMK की कमान एम.के. स्टालिन के हाथों में है। 2021 से 2026 तक उनकी सरकार रही। DMK और AIADMK आज भी द्रविड़ पॉलिटिक्स को सबसे ऊपर रखती हैं। तमिल प्राइड, सेकुलरिज्म और एंटी-हिंदी कल्चर के अपने स्टैंड के लिए जानी जाती हैं। हालांकि दोनों में मूल अंतर ये है कि DMK पेरियार की सोच, एंटी-ब्राह्मण रेशनलिज्म जैसे मुद्दों पर ज्यादा सख्त है। जबकि AIADMK उतना कट्टर नहीं है। इसीलिए AIADMK और BJP का गठबंधन भी हुआ। हालांकि अन्नामलाई द्रविड़ पॉलिटिक्स के बजाय नए तरीके से बीजेपी को सत्ता में लाना चाहते थे। अन्ना से विवाद के चलते बीजेपी इसमें सफल नहीं हुई, लेकिन सिर्फ 2 साल पहले TVK को लॉन्च करने वाले विजय थलापति इसमें सफल हो गए। सवाल-3: तमिलनाडु में ऐसा क्या करना चाहते थे अन्नामलाई, जिस पर बीजेपी से विवाद हुआ? जवाब: तमिलनाडु बीजेपी अध्यक्ष बनने के बाद अन्नामलाई ने बीजेपी की पॉलिटिक्स और द्रविड़ पॉलिटिक्स के अलावा एक तीसरी तरह की पॉलिटिक्स की… इस्तीफे के बाद अन्ना का तमिलनाडु में तीसरे तरह की पॉलिटिक्स का एक्सपेरिमेंट रुक गया। हालांकि अन्ना की पॉलिटिकल वैक्यूम वाली बात सही साबित हुई। उन्होंने द्रविड़ राजनीति को जितना कमजोर किया, उसका फायदा विजय को हुआ। अन्ना द्रविड़ राजनीति को राष्ट्रवाद से हराना चाहते थे, वहीं विजय ने यही काम अपने ‘नए द्रविड़वाद’ से किया। विजय ने 2 फरवरी 2024 को जब तमिलगा वेत्री कझगम, TVK बनाई तब कहा था, ‘हम द्रविड़ राष्ट्रवाद को तमिल राष्ट्रवाद से अलग नहीं करेंगे। ये दोनों इस धरती की दो आंखें हैं।’ यानी विजय ने भी द्रविड़ राजनीति को ऊपर रखा, लेकिन थोड़ा अलग तरह से। पॉलिटिकल एनालिस्ट आर. राजगोपालन कहते हैं कि ये विजय की नई द्रविड़ विचारधारा है। DMK के आइकॉन पेरियार और करुणानिधि हैं और AIADMK के आइकॉन MGR और जयललिता। जबकि विजय ने 5 बड़ी शख्सियत- कांग्रेस के दिग्गज नेता के. कामराज, पेरियार, महिला स्वतंत्रता सेनानी वेलु नाच्चियार और अंजलाई अम्माल और भीमराव आंबेडकर को अपना आदर्श बताया। TVK का आधिकारिक नारा है, 'पिरप्पोक्कुम एल्ला उयिर्क्कुम' यानी 'जन्म से सभी जीव समान हैं।' ये DMK और AIADMK की आर्यन बनाम द्रविड़ पॉलिटिक्स की लाइन से अलग है। TVK के नाम में द्रविड़ शब्द तक नहीं है। विजय ने चुनाव में ज्यादा कट्टर द्रविड़वादी मानी जाने वाली DMK का पुरजोर विरोध किया। जबकि AIADMK और उसके नेता EPS को लेकर अपना रुख रखा। सवाल-4: अन्नामलाई का आगे का प्लान क्या, क्या इसमें सफल होंगे? जवाब: अन्नामलाई ने कहा, 'पहले मैं लोगों को आंदोलन से जोडूंगा, फिर उन्हें ट्रेनिंग देकर इसे पॉलिटिकल पार्टी बनाऊंगा।' अन्नामलाई ने WetheLeaders.org नाम का एक पोर्टल बनाया है। 5 जून को पोर्टल शुरू होने के सिर्फ 10 घंटे के भीतर 10 लाख लोगों ने इस पर रजिस्ट्रेशन करा लिया। अन्नामलाई ने कोयंबटूर में ‘एपीजे अब्दुल कलाम सेंटर फॉर एथिक्स एंड पॉलिटिक्स’ बनाकर युवाओं को राजनीति की ट्रेनिंग देने का ऐलान भी किया है। उन्होंने कहा, ‘इस सेंटर में मॉडर्न टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके उन लोगों को ट्रेन किया जाएगा, जो राजनीति में आना चाहते हैं, लेकिन उन्हें मंच नहीं मिलता। मैं कुछ सबसे प्रतिभाशाली लोगों को राजनीति में लाकर प्रदेश की राजनीतिक भाषा बदलना चाहता हूं।’ अन्नामलाई का कहना है कि 2031 के विधानसभा चुनाव से पहले स्थानीय निकाय चुनावों में भी अपने उम्मीदवार उतारेंगे। पार्टी BJP को भी उसी नजरिए से देखेगी जैसे DMK, AIADMK या दूसरी पार्टियों को।’ तमिलनाडु BJP प्रदेश उपाध्यक्ष करु नागराजन सहित कई बीजेपी नेता भी इस्तीफा देकर अन्नामलाई से जुड़ गए हैं। नागराजन ने कहा है, ‘मेरे साथ कई और BJP नेता भी हैं, जिन्होंने अन्नामलाई के प्रति समर्थन जताया है।' पॉलिटिकल एनालिस्ट आर. राजगोपालन कहते हैं, ‘10-15 सालों तक तमिलनाडु में TVK की प्रासंगिकता बनी रह सकती है। लेकिन अगर अन्नामलाई अलग पार्टी बनाते हैं, तो DMK नेता उदयनिधि के अलावा यह TVK के लिए बड़ा खतरा बनकर उभर सकती है।’ हालांकि तमिलनाडु के सीनियर जर्नलिस्ट आर. रंगराज कहते हैं कि अन्नामलाई के आंदोलन का असर सीमित ही रहेगा, क्योंकि TVK पहले ही युवाओं को अपने साथ जोड़ चुकी है। अभी हम ये भी नहीं जानते कि ये पार्टी पूरी तरह से अन्नामलाई की है या इसमें BJP का समर्थन भी है।' तमिलनाडु के कांग्रेस नेता और सांसद मणिकम टैगोर ने भी X पर लिखा, 'तमिलनाडु के लिए प्लान-बी तैयार है और इसके पीछे RSS का भी हाथ है।' सवाल-5: तो क्या अन्नामलाई के इस प्लान के पीछे बीजेपी है? जवाब: पॉलिटिकल एनालिस्ट निहार नलिनी सारंगी कहती हैं, ‘अन्नामलाई BJP से इस्तीफा देते हैं, फिर गृहमंत्री के घर पर उनसे मिलते हैं और उसी दिन नई पार्टी का ऐलान कर देते हैं। वो भी उस राज्य में जहां BJP अभी-अभी बुरी तरह हारी है। अन्नमलाई की ये विदाई बड़ी कंट्रोल्ड दिखती है।’ सारंगी के मुताबिक, ‘कोई आदमी गृहमंत्री से पार्टी छोड़ने के बाद नहीं मिलता, बल्कि तब मिलता है, जब उसे नई चाबियां सौंपी जाती हैं। इसका संकेत ये है कि अन्नामलाई ने इस्तीफे में BJP के लिए कोई कड़वी बात नहीं लिखी। PM मोदी की तारीफ की और पार्टी को धन्यवाद भी दिया।’ सारंगी कहती हैं, ‘अन्नामलाई की नई पार्टी BJP के लिए कोई चैलेंज नहीं, बल्कि TVK की प्रतिद्वंद्वी है। इसका टारगेट TVK की तरह OBC समुदाय, शहरी मिडिल क्लास और उन युवा वोटर्स को जोड़ना होगा, जो द्रविड़ियन राजनीति से थक चुके हैं। इसी वोटबैंक ने TVK को 108 सीटें दिलाईं और BJP इस ट्रेंड से अनजान नहीं है।’ आर. रंगराज भी कहते हैं, ‘तमिलनाडु में BJP ने ही अन्नामलाई को नई पार्टी बनाने के लिए बढ़ावा दिया है, क्योंकि अभी बीजेपी AIADMK के साथ मिलकर जैसी राजनीति कर रही है, उसमें अन्नामलाई के लिए कोई स्पेस नहीं बचता।' आर. राजगोपालन के मुताबिक, 'अन्नामलाई उन युवा वोटर्स को खींच सकते हैं, जिन तक BJP अपनी मौजूदा पहचान के साथ नहीं पहुंच सकती। उन्हें RSS का साइलेंट सपोर्ट भी मिल सकता है। ऐसे में बीजेपी, AIADMK गठबंधन में रह सकते हैं, जबकि अन्नामलाई अपने पुराने रवैये से DMK और AIADMK दोनों के वोट काट सकते हैं।' हालांकि, तमिलनाडु BJP अध्यक्ष नैनार नागेंद्रन ने कहा है कि बीजेपी नेतृत्व ने अन्नामलाई के आंदोलन को कोई समर्थन नहीं दिया है। BJP नेताओं से अपील है कि वे किसी भी बहकावे में आकर इस मूवमेंट में शामिल न हों।’ *****रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास-----------------------------------------------------------तमिलनाडु से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… शराब दुकानें बंद, 200 यूनिट बिजली फ्री, गोल्ड चेन भी देंगे; फिल्मी हीरो जैसे फैसले ले रहे CM विजय, कितना महंगा पड़ेगा CM बनते ही थलापति विजय किसी फिल्मी नायक की तरह फैसले ले रहे हैं। 48 घंटे में ही 700 से ज्यादा शराब की दुकानें बंद कराने का आदेश दिया। शपथ के मंच से ही 200 यूनिट फ्री बिजली का ऐलान कर दिया था। सोने की चेन, अंगूठी और कैश देने का भी वादा किया है। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 7 Jun 2026 7:06 pm

पाकिस्तान में बढ़ा गृहयुद्ध जैसा संकट: सिंध में गहराया भारी जल संकट, पंजाब प्रांत पर लगाया तय हिस्से से अधिक पानी चोरी करने का आरोप

पाकिस्तान के दो प्रांत पानी बंटवारे को लेकर आपस में भिड़े हुए हैं। हालात बेकाबू होते जा रहे हैं, लेकिन हुक्मरान बेफिक्र हैं। स्थानीय मीडिया का दावा है कि सिंध प्रांत में खरीफ सीजन के दौरान गंभीर जल संकट पैदा हो गया है। यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पाकिस्तान पहले ही जलवायु परिवर्तन, घटते जल संसाधनों और कृषि चुनौतियों से जूझ रहा है।

देशबन्धु 7 Jun 2026 7:05 pm

कुवैत और बहरीन ने ईरान के हालिया हमलों की कड़ी निंदा की, कहा- यह संप्रभुता का खुला उल्लंघन है

कुवैत और बहरीन दोनों ने शनिवार को अपने देशों पर ईरान के नए हमलों की कड़ी आलोचना की और इसे संप्रभुता का खुला उल्लंघन और इलाके की स्थिरता के लिए खतरनाक बताया।

देशबन्धु 7 Jun 2026 7:40 am