28 मई 2026, 77 साल के सिद्धारमैया ने कर्नाटक के CM पद से इस्तीफा दिया, अब 64 साल के डीके शिवकुमार 3 जून को राज्य के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे। ये फैसला अचानक नहीं लिया गया। 4 मई को दिल्ली में राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल के साथ सिद्धारमैया की बैठक हुई। इसमें उन्हें नेतृत्व परिवर्तन के लिए कहा गया। सिद्धारमैया ने 48 घंटे का वक्त मांगा और वादा पूरा करते हुए इस्तीफा दे दिया। CM पद छोड़ने के लिए आखिर कैसे माने सिद्धारमैया? कर्नाटक के सीनियर जर्नलिस्ट गौतम शंकर कहते हैं, ‘कांग्रेस सत्ता परिवर्तन को भले सहजता से पेश कर रही, लेकिन सिद्धारमैया का करियर देखने के बाद मैं कह सकता हूं कि इतनी आसानी से पद छोड़ देना, उनके स्वभाव के विपरीत है। उन्होंने 1996 में जेएच पटेल और 2004 में धर्म सिंह को कर्नाटक का CM बनाए जाने को खुली चुनौती दी थी। इसी अड़ियल रुख के कारण 2005 में पूर्व PM देवगौड़ा ने उन्हें JDS से निकाल दिया था।’ इस बार क्या बदला? गौतम जवाब में कहते हैं, ‘अहिंदा गुट के कुछ नेताओं से जानकारी मिली है कि सिद्धारमैया ने 4 प्रमुख मांगें रखीं।’ 1. तीन डिप्टी CM का पद। 2. कैबिनेट में वफादारों के लिए अहम विभाग। 3. MLC बेटे यतींद्र को कैबिनेट में जगह और बड़ी जिम्मेदारी। 4. कांग्रेस का नया प्रदेश अध्यक्ष चुनने में उनकी सलाह जरूरी। इसकी ज्यादा संभावना है कि सतीश जारकीहोली को नया अध्यक्ष बनाया जाए।वे एक शक्तिशाली ST नेता हैं और खुद को अगले अहिंदा नेता के रूप में भी स्थापित कर रहे हैं। गौतम आगे कहते हैं, ‘सीट छोड़ने के बाद सिद्धारमैया सबसे पहले बेटे यतींद्र के साथ दिल्ली गए। 29 मई को उन्होंने बेटे की मुलाकात सोनिया गांधी और राहुल गांधी से कराई। इससे लगभग तय है कि अबकी यतींद्र को कैबिनेट में शामिल किया जाए।’ कर्नाटक की पॉलिटिक्स पर करीब से नजर रख रहे पॉलिटिकल एनालिस्ट केए शाजी कहते हैं, ‘पार्टी के भरोसेमंद सूत्रों से पता चला है कि सिद्धारमैया बेटे यतींद्र के लिए डिप्टी CM का पद या फिर पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग, उद्योग और जल संसाधन विभाग और मेडिकल एजुकेशन जैसे विभाग चाहते हैं।‘ सिद्धारमैया गुट खुश नहीं, लेकिन फैसला माना सिद्धारमैया के करीबी माने जाने वाले विधायक अशोक एम.पट्टन बताते हैं, ‘ये पहले से तय था कि हाईकमान से जो भी निर्देश होगा, दोनों नेता (सिद्धारमैया और शिवकुमार) मानेंगे। अब जब डीके शिवकुमार अगले मुख्यमंत्री होंगे, तो सभी उनके साथ हैं।‘ ‘पिछड़ा वर्ग, दलित और अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले विधायकों ने आलाकमान तक संदेश पहुंचाया है कि अगर हमारे (अहिंदा) इतने बड़े नेता को पद से हटाया जा रहा है, तो भविष्य में भी इस वर्ग के हितों और प्रतिनिधित्व का पूरा ख्याल रखा जाना चाहिए।‘ केरल चुनाव की वजह से टाली गई CM बदलने की कवायद कर्नाटक में 2023 के विधानसभा चुनाव में सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार मुख्यमंत्री पद के दावेदार बनकर उभरे। इसे देखते हुए फॉर्मूला निकाला गया कि दोनों ढाई-ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री बनेंगे। नवंबर 2025 में सिद्धारमैया के ढाई साल पूरे हो गए, लेकिन वो तब भी CM बने रहने पर अड़े रहे। कर्नाटक कांग्रेस से जुड़े सोर्स के मुताबिक, तय फॉर्मूले के हिसाब से दिसंबर 2025 से शिवकुमार को CM पद संभालना था, लेकिन राहुल गांधी समेत पार्टी के सभी सीनियर लीडर केरल में चुनावों की तैयारियों में व्यस्त थे, इसलिए तब ये बदलाव नहीं हो सका। नए CM के लिए क्या चैलेंज…वोक्कालिगा को एक रखना डीके के सामने चुनौती कांग्रेस सोर्सेज के मुताबिक, नई सरकार में 4 डिप्टी CM और 6 मंत्रियों को शपथ दिलाई जा सकती है। शिवकुमार प्रभावशाली वोक्कालिगा कम्युनिटी से हैं। राज्य में इनकी हिस्सेदारी करीब 15% है। CM बनते शिवकुमार का सबसे बड़ा टारगेट पूरे वोक्कालिगा वोटबैंक को कांग्रेस के पक्ष में करना होगा। ऐसे में BJP की सहयोगी पार्टी JD(S) के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री कुमारस्वामी के लिए वोक्कालिगा वोटरों का समर्थन हासिल कर पाना मुश्किल हो सकता है। BJP की भी टेंशन बढ़ीBJP के एक सोर्स बताते हैं कि शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद JD(S) के अंदर टूट-फूट की आशंका भी बढ़ जाएगी। सोर्स के मुताबिक, शिवकुमार ये तय करेंगे कि JD(S) के नेताओं और कार्यकर्ताओं का एक हिस्सा कांग्रेस में आए। JD(S) के लिए अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी। इसके अलावा राज्य की सबसे बड़ी कम्युनिटी लिंगायत को साधना भी चुनौती है। ये BJP के सपोर्टर रहे हैं। पार्टी लीडर और कर्नाटक के पूर्व CM बीएस येदियुरप्पा की बढ़ती उम्र के चलते पार्टी का इन पर कंट्रोल कम हो रहा है। ऐसे में BJP के नेतृत्व वाली NDA अगले चुनाव में सिर्फ एंटी-इनकंबेंसी के भरोसे नहीं रह सकती। उसे कांग्रेस को चुनौती देने के लिए नई रणनीति और मुद्दे तलाशने होंगे। डीके का कर्नाटक के लिए रोडमैप शिवकुमार की पहचान मनी और पावर के दम पर काम करने वाले लीडर की रही है। अब CM बनकर उन्हें अपनी प्रशासनिक क्षमता साबित करनी है। सीनियर जर्नलिस्ट गौतम शंकर के मुताबिक, CM बनने के बाद शिवकुमार को सबसे पहले ये तय करना होगा कि राज्य कर्ज में न डूबे और टैक्सपेयर्स पर ज्यादा बोझ न बढ़े। उपमुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने कई मेगा इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट शुरू किए थे, लेकिन सभी फंड की कमी से जूझ रहे हैं। इनमें बेंगलुरु में 40 किलोमीटर की टनल परियोजना शामिल है, जिसे 40,000 करोड़ से ज्यादा की लागत से शहर को जाम मुक्त करने के लिए बनाया जाना है। इस प्रोजेक्ट से लोगों को काफी उम्मीदें हैं, लिहाजा इसपर काम जल्द पूरा करना चाहिए। गौतम कहते हैं, ‘राज्य के सिंचाई मंत्री के रूप में डीके ने कावेरी नदी पर मेकेदातु संतुलन जलाशय और पेयजल परियोजना के लिए केंद्र से मंजूरी लेने में कड़ी मेहनत की है। इसकी लागत करीब 14,000 करोड़ है। वे CM बनते ही ये प्रोजेक्ट शुरू करेंगे। इसके अलावा परिवहन और लॉ एंड ऑर्डर कंट्रोल की दिशा में सरकार बड़े फैसले ले सकती है।’ ………………….. ये खबर भी पढ़ें… 5 दिन मीटिंग, प्रियंका एक्टिव, तब सतीशन बने केरलम CM 10 दिन की माथापच्ची के बाद आखिर कांग्रेस ने केरलम का CM तय कर लिया। राज्य में पार्टी के सबसे बड़े लीडर वीडी सतीशन नए CM होंगे। राहुल के भरोसेमंद केसी वेणुगोपाल और सबसे अनुभवी रमेश चेन्नीथला भी दावेदार थे। पढ़िए पूरी खबर…
पीएम बालेन शाह ने रविवार को दावा किया- नेपाल ने भी कई जगहों पर भारत की जमीन पर कब्जा किया है। मामले ने तूल पकड़ा, तो नेपाल के विदेश मंत्रालय को सफाई देनी पड़ी। क्या वाकई नेपाल ने भारत की जमीन कब्जा की है और बालेन का दावा उनका ही नुकसान कैसे कर सकता है; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: बालेन शाह ने क्या दावे किए, जिसपर हंगामा मच गया? जवाबः नेपाल में जेन-जी आंदोलन के बाद मार्च 2026 में चुनाव हुए। पुरानी पार्टियां और नेता बुरी तरह हार गए। बालेन शाह की अगुवाई में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को दो-तिहाई बहुमत मिला। 35 साल के बालेन शाह नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने। पीएम बनने के 65 दिन बाद 31 मई को बालेन संसद में पहला भाषण देने पहुंचे थे। इसी दौरान कुछ सांसदों ने उनसे भारत-नेपाल सीमा विवाद पर सवाल पूछा। जवाब में बालेन ने 2 बड़ी बातें कहीं… इन बयानों के बाद नेपाल की संसद में हंगामा मचा। विपक्षी दलों ने उनसे सबूत मांगे। बयान को संसद की कार्रवाई से हटाने की मांग की गई। प्रधानमंत्री को माफी मांगने के लिए कहा जाने लगा। नेपाल के पूर्व उप प्रधानमंत्री कमल थापा ने X पर लिखा ‘उन्हें जनता को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि वह कौन-सी जगह है और उसके क्या सबूत हैं। उन्हें तुरंत उस गलती को सुधारना चाहिए और सम्मानपूर्वक वह जमीन भारत को वापस कर देनी चाहिए।’ विपक्षी पार्टी नेपाली कांग्रेस के नेता वासना थापा ने कहा, ‘हमें जल्द सूचित किया जाना चाहिए था कि किस भूमि पर अतिक्रमण हुआ है। यह एक गंभीर और आपत्तिजनक मुद्दा है। इस बयान को संसद के रिकॉर्ड से भी हटाना चाहिए।’ हालांकि नेपाल में पत्रकारों और राजनयिकों के एक धड़े ने पीएम बालेन की साफगोई और सीमा विवाद को इतनी मजबूती से उठाने की तारीफ भी की है। सवाल-2: क्या वाकई नेपाल ने भारत की जमीन पर कब्जा कर रखा है? जवाबः नेपाल के विदेश मंत्रालय ने पीएम के बयान पर खुद स्पष्टीकरण जारी किया। लिखा- ‘प्रधानमंत्री भारत के इलाकों पर कब्जे की नहीं, 'क्रॉस-बॉर्डर ऑक्यूपेशन' की बात कर रहे थे।’ क्रॉस-बॉर्डर ऑक्यूपेशन यानी एक देश की जमीन को दूसरे देश के नागरिक खेती-बाड़ी, रहने के लिए और दूसरे कामों में इस्तेमाल करते हैं। दरअसल, भारत और नेपाल के बीच करीब 1,751 किमी लंबी सीमा है। इसमें पहाड़ी इलाके, नदियां और समतल जमीन है। ज्यादातर ओपेन बॉर्डर है, यानी दोनों देशों के बीच में कोई फेंसिंग नहीं है। जिन इलाकों में जमीन समतल है, वहां दोनों तरफ कुछ जमीन ‘नो-मेंस लैंड’ रखी जाती है। बॉर्डर पिलर के दोनों तरफ 10-10 गज की पट्टी होती है, इसलिए इसे दसगजा भी कहते हैं। इस जमीन पर दोनों देशों के नागरिकों को स्थायी निर्माण, मकान, दुकान या खेती करने की अनुमति नहीं होती। बिहार के सीमावर्ती इलाकों से भास्कर रिपोर्टर बताते हैं कि सीमा के कई इलाकों में 500 मीटर तक कोई पिलर नहीं है। यहां लोग अपना कब्जा बढ़ा लेते हैं। दोनों तरफ के किसान अपनी जमीन के साथ नो-मेंस लैंड की जमीन पर भी खेत जोतकर बुआई कर लेते हैं। कई जगहों पर लोगों ने टीन शेड लगाकर भैंसें और बकरियां भी बांधी हुई हैं। भारत की सशस्त्र सीमा बल और नेपाल सशस्त्र पुलिस मिलकर इस क्षेत्र में कब्जे हटाने के अभियान चलाते रहते हैं। इसके अलावा भी पिछले सालों में क्रॉस बॉर्डर अतिक्रमण की कुछ रिपोर्ट मिलती हैं… सवाल-3: बालेन शाह का दावा उनका ही नुकसान कैसे करेगा? जवाबः उनके दावे से 3 मुश्किलें पैदा होंगी… 1. नेपाल की कूटनीतिक स्थिति कमजोर होगी 2. ब्रिटेन शामिल हुआ, तो मामला और उलझ जाएगा 3. बालेन शाह की विश्वसनीयता पर सवाल उठे सवाल-4: भारत के लिए इस बयान के मायने क्या हैं? जवाबः बालेन शाह के ताजा बयान पर फिलहाल भारत ने कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है। हालांकि पिछले दिनों सीमा विवाद के सवाल पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नेपाल के ये क्षेत्रीय दावे न तो सही हैं और न ही किसी ऐतिहासिक तथ्य या सबूत पर आधारित हैं। पीएम बनने के बाद पिछले 65 दिनों में बालेन शाह ने कई ऐसे काम किए, जिससे भारत के डिप्लोमैटिक गलियारों में हलचल है… भारतीय राजदूत को विशेष दर्जा नहीं दिया: परंपरा के मुताबिक, नेपाल में नए पीएम भारतीय राजदूत से अलग से शिष्टाचार मुलाकात करते हैं। बालेन शाह ने भारतीय राजदूत से अलग से मिलने के बजाय सभी देशों के राजदूतों से सामूहिक मुलाकात की। इससे यह संदेश गया कि उनकी सरकार भारत को कोई विशेष तरजीह नहीं देना चाहती। मानसरोवर यात्रा पर आपत्ति जताई: 4 जुलाई से मानसरोवर यात्रा शुरू होनी है। इसके लिए श्रद्धालु भारत से लिपुलेख पास होते हुए चीन के तिब्बत जाते हैं। नेपाली विदेश मंत्रालय ने इस पर आपत्ति जताई है और कहा है कि लिपुलेख उनका इलाका है। उन्होंने भारत और चीन को भी चिट्ठी लिखकर अपना स्टैंड साफ किया है। भारतीय विदेश सचिव से नहीं मिले: मई 2026 में भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री नेपाल जाकर बालेन शाह को भारत आने का आधिकारिक न्योता देने वाले थे। लेकिन, बालेन ने उन्हें मुलाकात का समय नहीं दिया और दौरा रद्द हो गया। पीएम बनने के बाद भारत नहीं आए: ये परंपरा रही है कि पद संभलाने के बाद नेपाली प्रधानमंत्री भारत का दौरा करते हैं। लेकिन बालेन ने कार्यभार संभालते ही यह घोषणा कर दी कि वे कार्यकाल के पहले साल किसी भी देश के आधिकारिक दौरे पर नहीं जाएंगे। राजन कुमार के मुताबिक, नेपाल के विदेश मंत्रालय ने पीएम बालेन शाह के बयान पर सफाई दे दी है। इसलिए भारत अभी इस पर कड़ा रुख नहीं अपनाएगा। भारत-नेपाल का सीमा विवाद उतना जटिल भी नहीं है, क्योंकि दोनों देशों के बीच खुली सीमा है। इस बीच बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रबी लामिछाने 5 दिन के भारत दौरे पर आए हैं। वे बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात करेंगे। इस दौरान हुई बातचीत से नेपाल की नई सरकार का रुख और साफ हो सकता है। सवाल-5: भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद क्या है? जवाबः भारत के पांच राज्यों से नेपाल की सीमा लगती है- उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल और सिक्किम। इनमें उत्तराखंड में भारत-नेपाल सीमा की लंबाई 173 किलोमीटर है। उत्तराखंड की सीमा चीन से भी लगती है। इसी सीमा से जुड़े तीन इलाके- लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी विवाद की वजह हैं। नेपाल इन्हें अपना हिस्सा बताता है, जबकि भारत इस दावे को खारिज करता आया है। ये पूरा इलाका लगभग 338 वर्ग किलोमीटर में फैला है। यानी रायपुर शहर जितना बड़ा। भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद करीब 210 साल पुराना है… उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में मौजूद कालापानी भारत के लिए रणनीतिक तौर पर बेहद जरूरी है। मानसरोवर जाने वाले तीर्थयात्री इसी इलाके के लिपुलेख दर्रे से होकर गुजरते हैं। यहां से चीनी सेना पर नजर रखना आसान है। इसीलिए चीन इसे लेकर नेपाल को उकसाता रहता है। 1962 के युद्ध के बाद लिपुलेख दर्रा बंद भी हुआ। हालांकि 2015 में हुए भारत-चीन समझौते के बाद इसे दोबारा खोला गया। मई 2020 में भारत ने कैलाश मानसरोवर यात्रा को आसान बनाने के लिए पिथौरागढ़ से लेकर लिपुलेख दर्रे तक 80 किमी की सड़क बनाई, जिस पर नेपाल ने नाराजगी जताई थी। 15 मई 2020 को तत्कालीन थल सेना अध्यक्ष एम.एम नरवणे ने कहा था कि नेपाल ऐसा किसी और के बहकावे में कर रहा है। नरवणे का इशारा चीन की ओर था। इसके बाद जून 2020 में नेपाल की संसद ने एक नया नक्शा मंजूर किया था, जिसमें इन इलाकों को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था। इस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा था कि नेपाल का दावा ऐतिहासिक तथ्यों और सबूतों पर आधारित नहीं है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता। ---------- पुरी खबर पढ़िए… 15 दिन में सैलरी, अफसरों के बच्चे सरकारी स्कूल में: पीएम बालेन शाह के 30 दिनों की कहानी; नेपाल को बदलेंगे या तानाशाह बनेंगे 27 मार्च 2026 को 35 साल के बालेन शाह ने नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। पीएम बनते ही पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार करवा दिया गया। सरकारी दफ्तरों से नेताओं की तस्वीरें उतरवा दी गईं। छात्र राजनीति पर रोक लगा दी गई। अब अफसरों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ना होगा, जबकि कर्मचारियों को हर 15 दिन में सैलरी मिलेगी। पूरी खबर पढ़िए…
दुबई बेस्ड भारतीय बैंकर श्रद्धा गुप्ता ने विश्व की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई की
भारतीय पर्वतारोही श्रद्धा गुप्ता ने सफलतापूर्वक माउंट एवरेस्ट (8,849 मीटर) पर चढ़ाई पूरी कर ली है, जो पृथ्वी का सबसे ऊंची चोटी है। उन्होंने पर्वतारोहण की सबसे चुनौतीपूर्ण उपलब्धियों में से एक को हासिल किया है। यह चढ़ाई उन्होंने एलीट एक्सपेडिशन्स के साथ की, जिसकी स्थापना रिकॉर्ड तोड़ने वाले पर्वतारोही निर्मल पुरजा ने की थी।
भारतीय मूल के एक 26 वर्षीय पायलट की शादी के कुछ ही घंटों बाद हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी गंभीर रूप से घायल हो गईं और कई घंटों तक मलबे में फंसी रहीं। यह घटना न केवल परिवार के लिए, बल्कि शादी समारोह में शामिल सैकड़ों मेहमानों के लिए भी अविश्वसनीय सदमे जैसी रही।
पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव, अमेरिका ने ईरान पर किए हवाई हमले; कुवैत पर भी हुआ अटैक
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई उस घटना के जवाब में की गई, जिसमें ईरान ने अमेरिकी MQ-1 प्रीडेटर ड्रोन को निशाना बनाकर मार गिराया था। अमेरिका का कहना है कि यह ड्रोन अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र के ऊपर उड़ान भर रहा था।
ईरान इंटरनेशनल और कुछ अन्य विदेशी मीडिया संस्थानों की रिपोर्टों में कहा गया कि राष्ट्रपति पेजेशकियान ने एक पत्र के माध्यम से सर्वोच्च नेता को अपना इस्तीफा भेजा है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि उन्होंने लिखा है कि हाल के महीनों में सरकार की भूमिका कमजोर हुई है।
29 मई की शाम। फोन पर नोटिफिकेशन आया- राजस्थान रॉयल्स के वैभव सूर्यवंशी सेंचुरी के करीब हैं। मैंने जियो हॉटस्टार खोला, लाइव मैच चला लिया। तभी ध्यान आया कि इस पूरे सीजन में पहला मैच लाइव देख रही हूं। बाकी दो महीने? बस हाइलाइट्स, स्कोर अपडेट्स और कभी-कभी रील्स। न्यूजरूम में पूछा तो कई और क्रिकेट के दीवानों का यही हाल था। थोड़ी रिसर्च की तो और परतें खुलती गईं। इस साल IPL के फर्स्ट हाफ में टीवी व्यूअरशिप 26% गिरी है। स्पॉन्सर 65 से 45 रह गए हैं। ईडन गार्डन जैसे स्टेडियम भी कुछ मैचों में आधे ही भर पाए। कई विदेशी खिलाड़ियों ने भी आधे सीजन बाद टीम को जॉइन किया। तो क्या IPL का डाउनफॉल शुरू हो गया है? या यह सिर्फ एक स्पीड ब्रेकर है जिसे आसानी से पार किया जा सकता है; इस मंडे मेगा इसी की कहानी… **** ग्राफिक्स: द्रगचंद्र भुर्जी और अंकलेश विश्वकर्मा ------------ ये खबर भी पढ़िए आज का एक्सप्लेनर: हार्दिक, पंत, रहाणे...आखिर IPL 2026 कप्तानों पर भारी क्यों पड़ गया, क्या अगले सीजन 50% कप्तान बदलेंगे; किन नए चेहरों को मौका IPL का ये सीजन कई कप्तानों के लिए अच्छा नहीं गुजरा। पहले हार्दिक पांड्या और ऋतुराज गायकवाड़ की कप्तानी खत्म होने की खबरें आईं, फिर ऋषभ पंत का इस्तीफा आ गया...लिस्ट में और भी कई नाम शामिल हैं। पूरी खबर पढ़िए…
चीन में अवैध खनन के दौरान खदान धंसी, 5 लोगों की मौत
चीन के युनान प्रांत में रविवार तड़के अवैध खनन गतिविधियों के दौरान खदान धंसने से पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया।
IPL का ये सीजन कई कप्तानों के लिए अच्छा नहीं गुजरा। पहले हार्दिक पांड्या और ऋतुराज गायकवाड़ की कप्तानी खत्म होने की खबरें आईं, फिर ऋषभ पंत का इस्तीफा आ गया...लिस्ट में और भी कई नाम शामिल हैं। आखिर इन कप्तानों के साथ ऐसा क्यों हुआ, परफॉरमेंस आड़े आई या टीमों को नए चेहरों की तलाश, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… ऋषभ पंत: 27 करोड़ में बिके, LSG आखिरी पायदान पर, दिया इस्तीफा IPL 2026 में लखनऊ सुपर जायंट्स, यानी LSG पॉइंट्स टेबल में सबसे निचले पायदान पर रही। 30 मई को LSG ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा कि फ्रेंचाइजी ने ऋषभ के कप्तानी छोड़ने के अनुरोध को स्वीकार कर लिया है। LSG के क्रिकेट डायरेक्टर टॉम मूडी के मुताबिक, ‘पंत ने खुद कप्तानी से हटने की इच्छा जताई थी और फ्रेंचाइजी ने उनके फैसले को सम्मानपूर्वक स्वीकार कर लिया। ऐसा फैसला लेना कभी आसान नहीं होता।' पंत के इस्तीफा देने के पीछे 3 बड़े फैक्टर हो सकते हैं… 1. टीम का खराब प्रदर्शन, पंत प्रेशर मैनेज नहीं कर पाए 2. IPL के सबसे महंगे खिलाड़ी, लेकिन परफॉरमेंस उम्मीद से कम 3. LSG के मालिक संजीव से अनबन की खबर हार्दिक पांड्या: कोचों की बात नहीं मानी, मुंबई इंडियंस 9वें पायदान पर रही 28 मई को इंडियन एक्सप्रेस ने रिपोर्ट किया कि मुंबई इंडियंस, यानी MI के कप्तान के बतौर हार्दिक पांड्या का टेन्योर खत्म होने वाला है। टीम में बड़े बदलाव होने जा रहे हैं। इसकी शुरुआत कप्तान से होगी। अखबार ने टीम से जुड़े 3 सोर्सेज के हवाले से बताया, ‘टीम का मैनेजमेंट हार्दिक को आगे कप्तान बनाए रखना नहीं चाहता। आने वाले दिनों में इंट्रोस्पेक्शन होगा। कई सवालों के जवाब देने होंगे। उसके बाद तय होगा कि क्या हार्दिक कप्तान बने रहेंगे या सिर्फ प्लेयर की तरह टीम में रहेंगे?’ हार्दिक की कप्तानी जाने के पीछे 3 बड़े फैक्टर हो सकते हैं.. 1. MI की खराब परफॉरमेंस, सीनियर खिलाड़ी भी नाकाम रहे 2. मिड-ऑर्डर में हार्दिक का परफॉरमेंस अच्छा नहीं रहा 3. कोचों से अंदरूनी विवाद ऋतुराज गायकवाड़: 3 सीजन से कप्तान, CSK 8वें पायदान पर रही पूर्व भारतीय क्रिकेटर मनोज तिवारी ने 19 मई को क्रिकबज से कहा, 'IPL 2027 में ऋतुराज ही चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान होंगे, ये कहा नहीं जा सकता। CSK के लिए खेल चुके ऑफ-स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने भी मौजूदा सीजन में गायकवाड़ की परफॉर्मेंस पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'कप्तानी के प्रेशर के चलते वे बल्लेबाजी में भी कुछ खास नहीं कर पा रहे हैं।’ ऋतुराज की कप्तानी जाने के 3 बड़े फैक्टर हो सकते हैं… 1. CSK की कमजोर परफॉर्मेंस, गायकवाड़ प्लेयर्स को मैनेज नहीं कर पाए 2. ओपनर के तौर पर ऋतुरात का प्रदर्शन खराब रहा 3. तीन सीजन से कप्तान, एक बार भी प्लेऑफ तक नहीं ले जा पाए अजिंक्य रहाणे: KKR दूसरी बार प्लेऑफ तक नहीं पहुंची, 7वें पायदान पर फिनिश 15 मई 2026 को आउटलुक इंडिया मैगजीन ने सोर्सेज के हवाले से तीन IPL कप्तानों के नाम दिए, जिनसे कप्तानी छीनी जा सकती है। इस रिपोर्ट में ऋतुराज गायकवाड़, अक्षर पटेल और अजिंक्य रहाणे का नाम था। आउटलुक के मुताबिक, ‘रहाणे को KKR की कप्तानी मिलना 'फोर्स्ड कॉल' यानी मजबूरी में लिया फैसला था, क्योंकि टीम के पास कोई दूसरा ऑप्शन नहीं था।’ KKR ने 2024 में श्रेयस अय्यर की कप्तानी में 10 साल के इंतजार के बाद IPL खिताब जीता। हालांकि, 2025 में अय्यर पंजाब किंग्स में शामिल हो गए थे। 3 फैक्टर जिनके चलते रहाणे की कप्तानी छिन सकती है… 1. KKR का निराशाजनक सीजन, लगातार दूसरी बार प्लेऑफ से बाहर 2. एज फैक्टर और इंटरनेशनल क्रिकेट से दूरी 3. स्लो-बैटिंग और स्ट्राइक रेट पर सवाल इन 4 कप्तानों के अलावा दिल्ली कैपिटल्स (DC) के कप्तान अक्षर पटेल की कप्तानी पर भी सवाल हैं। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक, ‘अक्षर बतौर कप्तान पूरी तरह नाकाम रहे। फैसले लेने के लिए वे ज्यादातर कोच हेमांग बदानी और वेणुगोपाल राव पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में अगर अगले साल उनकी कप्तानी बरकरार रहना एक चमत्कार ही होगा।’ सवाल-1: इन टीमों के नए कप्तान कौन हो सकते हैं? जवाब: 5 टीमों के नए कप्तान के लिए सबसे बड़े दावेदार हैं… LSG : मिशेल मार्श ESPN के मुताबिक LSG अगले कप्तान की दौड़ में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज मिचेल मार्श का नाम सबसे आगे है, मार्श पिछले दो सीजन से टीम के टॉप स्कोरर भी रहे हैं। इसके अलावा भारतीय युवा खिलाड़ी आयुष बडोनी के नाम की भी चर्चा है। MI: तिलक वर्मा MI के पास जसप्रीत बुमराह और सूर्यकुमार यादव का विकल्प है, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक, मैनेजमेंट युवा बैटर तिलक वर्मा पर दांव खेल सकता है। CSK: संजू सैमसन पूर्व भारतीय क्रिकेटर मनोज तिवारी के मुताबिक, 'CSK IPL 2027 के लिए संजू सैमसन को चुनेगी। उनके पास RR की कप्तानी का अनुभव है और वे ऋतुराज से बेहतर फॉर्म में हैं।’ KKR: रिंकू सिंह क्रिकट्रैकर की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘KKR मैनेजमेंट 2027 में टीम की कप्तानी रिंकू सिंह को सौंप सकता है। टीम के CEO वेंकी मैसूर ने IPL 2026 से पहले उन्हें वाइस-कैप्टन बनाकर इसका संकेत दे दिया था।’ DC: ट्रिस्टन स्टब्स DC के पास मौजूदा वाइस-कैप्टन केएल राहुल का विकल्प है। हालांकि, जब वे पहले ही कप्तान बनने से मना कर चुके हैं। IPL 2026 में अक्षर की गैर-मौजूदगी में डेविड मिलर और ट्रिस्टन स्टब्स ने कप्तानी संभाली। स्टब्स युवा हैं, टीम उन्हें कप्तान बना सकती है।***** रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास----------------------------------------------------------- IPL से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… IPL 2026 ने दिए भारत को 10 फ्यूचर स्टार्स:सूर्यवंशी ने 776 रन बनाए, प्रिंस ने कोहली को बोल्ड किया; रसिख खेलेंगे फाइनल IPL का फाइनल आज अहमदाबाद में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु और गुजरात टाइटंस के बीच खेला जाएगा। इस सीजन में कई अनकैप्ड खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से टीमों की जीत में अहम भूमिका निभाई। वैभव सूर्यवंशी, प्रिंस यादव, प्रफुल हिंगे और आयुष म्हात्रे जैसे युवा सितारे चर्चा में रहे। स्टोरी में ऐसे ही 10 अनकैप्ड भारतीय प्लेयर्स, जो आने वाले समय में टीम इंडिया के लिए डेब्यू कर सकते हैं। पढ़ें पूरी खबर…
ईरान परमाणु हथियार पर सहमत: ट्रंप बोले– न बनाएंगे, न खरीदेंगे
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न करे
ट्रंप के नाकाबंदी हटाए जाने के दावे के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य पर प्रतिबंध अभी भी लागूः ईरान
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर लगाए गए नौसैनिक प्रतिबंध हटाने के दावे के बावजूद ईरानी जहाजों को अभी भी होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है
ईरान की चेतावनी: होर्मुज स्ट्रेट से आवाजाही केवल उसकी अनुमति से होगी, अमेरिकी दखल पर होगी कार्रवाई
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) नेवी ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के 'प्रबंधन' में किसी भी तरह का दखल देता है, तो उसे कड़ी सैन्य कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा।
ईरान-अमेरिका तनाव: आईआरजीसी ने अमेरिकी ड्रोन गिराने का दावा
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने रविवार को एक बयान में कहा कि उसने अमेरिका के एमक्यू-1 ड्रोन को मार गिराया है। यह जानकारी इस्लामिक रिपब्लिक न्यूज एजेंसी ने दी।
रूस की सरकारी परमाणु ऊर्जा कंपनी रोसाटॉम के डायरेक्टर जनरल एलेक्सी लिखाचेव ने बताया कि शनिवार दोपहर को एक यूक्रेनी लड़ाकू ड्रोन ने जापोरिज्जिया न्यूक्लियर पावर प्लांट (एनपीपी) की यूनिट 6 के टर्बाइन हॉल पर हमला किया।
अफगान प्रवासियों को ले जा रहा ट्रक पलटा, 18 लोगों की मौत और 35 घायल
पाकिस्तान से लौटे अफगानी प्रवासियों को ले जा रहे ट्रक के साथ एक बड़ा हादसा हो गया। स्थानीय मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, शनिवार सुबह पाकिस्तान से लौटे अफगानी प्रवासियों को ले जा रहे एक ट्रक के पलट जाने से कम से कम 18 लोगों की मौत हो गई। इनमें 10 बच्चे और पांच महिलाएं शामिल हैं। घटना में दर्जनों लोग घायल हो गए।
सीरिया के लिए अमेरिका के विशेष दूत टॉम बैरक औपचारिक कार्यकाल खत्म होने के बाद अपने पद से हट जाएंगे
कनाडा के प्रधानमंत्री और वांग यी की मुलाकात हुई
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने ओटावा में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के केंद्रीय पोलित ब्यूरो के सदस्य, विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। कार्नी ने वांग यी से चीनी नेताओं को उनकी हार्दिक शुभकामनाएं देने का अनुरोध किया।
वियतनाम के साथ ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल डील पहले ही हो चुकी है साइन: रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह
मिसाइल बनाने में भारत की बढ़ती विशेषज्ञता और बढ़ती पहुंच पर जोर देते हुए, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने शनिवार को बताया कि वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइल डील पर हस्ताक्षर हो चुका है
बांग्लादेश: खसरे से मरने वालों की संख्या 580 के पार, 24 घंटे में 8 बच्चों ने तोड़ा दम
खसरे के प्रकोप के कारण बांग्लादेश में मौतों की संख्या बढ़कर 583 हो गई है। पिछले 24 घंटों में (शुक्रवार से शनिवार सुबह 8 बजे तक) खसरे और इससे मिलते-जुलते लक्षणों के कारण आठ और बच्चों की मौत दर्ज की गई है।
एक मशहूर कहावत है- नमाज बख्शवाने गए थे, रोजे गले पड़ गए। ट्रम्प के साथ कुछ ऐसा ही हो रहा। तीन महीने पहले ईरान को घुटनों पर लाने निकले थे, आज खुद 300 अरब डॉलर का इन्वेस्टमेंट फंड लेकर उसके दरवाजे पर खड़े हैं। रिपोर्ट्स हैं कि जंग रोकने का मसौदा तैयार हो चुका है। सिर्फ ट्रम्प और खामेनेई के दस्तखत होने बाकी हैं। अमेरिका-ईरान के समझौते की शर्तें क्या हैं, इसमें ईरान कैसे फायदे में और आखिर ट्रम्प को ऐसी डील क्यों करनी पड़ रही; आज के एक्सप्लेनर में समझिए… सवाल-1: अमेरिका और ईरान के बीच किन शर्तों पर डील हो रही है?जवाबः अमेरिकी मीडिया आउटलेट Axios ने 28 मई को रिपोर्ट किया कि अमेरिका और ईरान ६० दिन के लिए सीजफायर बढ़ाने को तैयार हैं। दोनों देशों के बीच एक MoU यानी समझौता ज्ञापन पर सहमति बनी। इस पर प्रेसिडेंट ट्रम्प की फाइनल मंजूरी बाकी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस मसौदे में 5 प्रमुख शर्तें हैं… 1. होर्मुज स्ट्रेट खुलेगाः होर्मुज स्ट्रेट से जहाजों के निकलने पर कोई रोक नहीं होगी। ईरान किसी जहाज से कोई टोल या ट्रांजिट फीस नहीं वसूलेगा। ईरान को 30 दिनों के अंदर होर्मुज स्ट्रेट से सभी बारूदी सुरंगें हटानी होंगी। अमेरिका भी होर्मुज के बाहर ओमान की खाड़ी से अपनी नाकाबंदी हटाएगा। 2. ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगाः सीजफायर के दौरान ईरान के पास मौजूद एनरिच्ड यूरेनियम के निपटारे पर ही बात की जाएगी। अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, एक ईरानी ऑफिसर ने बताया कि ईरान अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम को रोक देगा। बदले में अमेरिका ये वादा करेगा कि जब तक दोनों देशों में समझौते पर आखिरी बातचीत न हो जाए, तब तक ईरान पर प्रतिबंध नहीं बढ़ाए जाएंगे। 3. ईरान के जब्त पैसे मिलेंगे: विदेशी बैंकों में ईरान के करीब 24 अरब डॉलर फ्रीज हैं। अब समझौते के तहत उसके ये पुराने फंड रिलीज किए जा सकते हैं। अमेरिकी ऑफिसर ने कहा कि अब ईरान के पास अपनी इकॉनमी को बंधन से आजाद करने का मौका है। ईरानी न्यूज एजेंसी तसनीम के मुताबिक, ईरान के 24 अरब डॉलर में से 12 अरब डॉलर देने पर बातचीत आगे बढ़ी है। 4. इजराइल हिजबुल्लाह पर हमले रोकेगा: ईरानी अधिकारियों और एक राजनयिक के अनुसार लेबनान में लड़ाई रोकना भी समझौते में शामिल है। ट्रम्प प्रशासन को उम्मीद है कि ईरान हिजबुल्लाह और हूती जैसे मिलिटेंट ऑर्गेनाइजेशन की मदद पर बात करेगा। 5. 29 लाख करोड़ लगाकर ईरान का रीकन्स्ट्रक्शनः न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, समझौते में सबसे हैरान करने वाला संशोधन ईरान के लिए एक इन्वेस्टमेंट फंड का जिक्र है। ये फंड 300 अरब डॉलर यानी करीब 28.5 लाख करोड़ रुपए का है। एक ईरानी अधिकारी ने इसे ईरान में रीकंस्ट्रक्शन प्रोग्राम बताया। सवाल-2: अगर डील हुई, तो कौन ज्यादा फायदे में होगा?जवाबः मौजूदा समझौते में जितनी शर्तें सामने आई हैं, उनसे ईरान को ज्यादा फायदा है… ट्रम्प सिर्फ एक बात को भुना सकते हैं कि अब ईरान परमाणु बम नहीं बना सकेगा। लेकिन उसमें भी झोल है… पॉलिटिकल रिस्क कंसल्टेंसी फर्म यूरेशिया ग्रुप के सीनियर ईरान एनालिस्ट ग्रेगरी ब्रू कहते हैं, 'ये कुल मिलाकर ईरान की जीत है। उसने एक महीने से ज्यादा समय तक बमबारी झेली। होर्मुज को बंद रखा और अमेरिका के साथ अपनी शर्तों पर समझौता करके ही इसे दोबारा खोलने पर राजी हुआ। ट्रम्प ने जंग के पीछे जो टारगेट बताए थे, उनमें से कुछ भी हासिल नहीं हुआ। न ईरान में शासन बदला, न वेनेजुएला जैसी सफलता मिली, न होर्मुज खुलवा सके और न कोई बड़ा परमाणु समझौता कर पाए।' सवाल-3: आखिर अमेरिका को ऐसी डील क्यों करनी पड़ रही है?जवाबः ईरान से घाटे की डील करने के पीछे ट्रम्प और अमेरिका की 3 बड़ी मजबूरियां हैं… 1. ईरान जंग में फायदे की बजाय नुकसान हुआ 2. ट्रम्प की ईरान पर जीत दिखाने की जल्दी 3. मिड-टर्म चुनाव गंवाना नहीं चाहते ट्रम्प सवाल-4: अमेरिका-ईरान की इस डील में अभी क्या बड़ी अड़चने हैं? जवाबः दोनों देशों ने मसौदा भले तैयार कर लिया है, लेकिन दस्तखत होने से पहले कई अड़चने हैं। सबसे बड़ी अड़चन एनरिच्ड यूरेनियम को लेकर है। ईरान के पास 440 किलो एनरिच्ड यूरेनियम और 10 टन कच्चा यूरेनियम है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघई के मुताबिक, 'मौजूदा बातचीत युद्ध खत्म करने तक सीमित है, इसमें यूरेनियम का मुद्दा शामिल नहीं है। ट्रम्प ईरान के इसे किसी तीसरे देश में ले जाने पर सहमत हैं, लेकिन इसे रूस या चीन भेजने पर राजी नहीं हैं। जबकि 2015 में परमाणु समझौते के बाद ईरान ने अपने यूरेनियम का 97% रूस ही भेजा था। ईरानी मामलों के एक्सपर्ट अली वायज के मुताबिक, '10 साल पहले अमेरिका को ईरान से न्यूक्लियर डील करने में ढाई साल लग गए थे। आज के हालात कहीं ज्यादा पेचीदा हैं। अगले 60 दिनों में कोई हल निकलना मुश्किल है। होर्मुज पर भी बात बिगड़ सकती है। ईरान चाहता है कि पहले अमेरिकी नाकेबंदी हटे, फिर होर्मुज पर बात हो। वह बाद में भी ओमान के साथ मिलकर होर्मुज में टोल वसूलना चाहता है, जो ट्रम्प को मंजूर नहीं है। ईरान के भीतर कई कट्टरपंथी संगठन भी डील का विरोध कर रहे हैं। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 29 मई को तेहरान में बड़ी रौलियां निकलीं, जिनमें अमेरिका के खिलाफ नारेबाजी हुई। ईरान किसी भविष्य में संभावित आंतरिक संघर्ष से बचना चाहता है, इसीलिए वह किसी समझौते तक पहुंचने में समय ले रहा है। सवाल-5: अगर ये डील हो गई, तो सबकुछ पहले जैसा सामान्य होने में कितना वक्त लगेगा? जवाबः ईरान की बिछाई बारूदी सुरंगें हटाने में कई हफ्ते लग सकते हैं। अमेरिकी नाकाबंदी भी ईरान से बातचीत के आधार पर धीरे-धीरे कम होगी। प्रोफेसर राजन कुमार के मुताबिक, ‘मौजूदा हालात में सीजफायर संभव है। युद्ध रुकने के बाद तेल के दाम पहले जैसे होने में 6-9 महीने लग सकते हैं, क्योंकि बड़ी तेल कंपनियां अक्सर पहले से तय कॉन्ट्रैक्ट पर तेल खरीदती-बेचती हैं। कई बार 3-6 महीने पहले ही यह तय हो चुका होता है कि कितना तेल खरीदना है और किस कीमत पर खरीदना है।’ दिल्ली बेस्ड थिंक टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के एक्सपर्ट विवेक मिश्र बताते हैं, ‘होर्मुज में 18-20 हजार जहाज फंसे हुए हैं। इन्हें निकालने में 3 हफ्ते लग सकते हैं। इसके बाद अगले डेढ़ महीने में दोनों तरफ से जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से शुरू हो पाएगी।’ विवेक मिश्र कहते हैं, ‘UAE पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन OPEC से बाहर हो गया है। OPEC के सदस्य देश मिलकर तेल के प्रोडक्शन की मात्रा और तेल की कीमतें तय करते थे। अब UAE जितना चाहे उतना तेल बाजार में उतार सकता है। ऐसे में कीमत पर कंट्रोल रखना आसान नहीं होगा।’ ईरानी मामलों के एक्सपर्ट यासिर अली मिर्जा मानते हैं, ‘फिलहाल दोनों देशों को किसी डील पर पहुंचने में कम से कम 6 महीने और लग सकते हैं। ईरान की स्ट्रैटजी होर्मुज बंद करके वर्ल्ड इकॉनोमी पर दबाव बढ़ाने की है, जिसमें वो काफी हद तक सफल रहा है। ऐसे में वह आसानी से अमेरिका की शर्तें मानने वाला नहीं है।’ ***** रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास----------------------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें…ट्रम्प ने क्या मांग लिया, जिससे पाकिस्तान का सीधा इनकार:अमेरिका का गुस्सा मंजूर, इजराइल से दोस्ती क्यों नहीं कर सकता पाकिस्तान अमेरिकी थिंकटैंक अटलांटिक काउंसिल के एक्सपर्ट माइकल कुगेलमैन कहते हैं- ट्रम्प के जितना करीब जाओगे, उतना ही जोखिम बढ़ेगा। वह कुछ ऐसा मांग बैठेंगे, जो देना संभव न हो। पाकिस्तान इस वक्त उसी ‘कुआं और खाई’ की सिचुएशन में आ गिरा है। पढ़ें पूरी खबर…
ट्रंप ने ईरान के साथ ड्राफ्ट डील पर 'अंतिम फैसला' टाला
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित समझौते पर अंतिम फैसला फिलहाल टाल दिया है। उन्होंने व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ करीब दो घंटे तक बैठक की
ईरान हॉर्मुज स्ट्रेट के प्रबंधन पर अड़ा, कहा- अमेरिका के साथ अभी तक कोई समझौता तय नहीं
ईरान हॉर्मुज स्ट्रेट के प्रबंधन को लेकर अड़ा हुआ है। इसी बीच ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका के साथ अभी तक किसी भी समझौते को अंतिम रूप नहीं दिया गया है
न्यूयॉर्क में 'वैश्विक शासन मित्र समूह' की बैठक आयोजित, वांग यी ने लिया हिस्सा
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 28 मई को 'वैश्विक शासन मित्र समूह' की बैठक आयोजित की गई, जिसमें चीन, पाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, किर्गिस्तान, क्यूबा और जिम्बाब्वे के विदेश मंत्रियों सहित 60 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
पेपर लीक के चलते रद्द हुआ NEET-UG का एग्जाम 21 जून को दोबारा होगा। इस बार पेपर पहुंचाने से लेकर बाकी प्रोसेस में एयरफोर्स और आर्मी की मदद ली जाएगी। इधर CBSE ने 12th एग्जाम की कॉपी पहली बार डिजिटल तरीके से चेक करवाईं। बच्चों ने इसमें कई तरीके की खामियां बता दीं। मार्किंग का काम प्राइवेट कंपनी के जिम्मे था। आखिर देश के बड़े एग्जाम बिना गड़बड़ के क्यों नहीं हो पा रहे, सरकार, सिस्टम कहां फेल और इसका इलाज क्या, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: NEET का रीएग्जाम करवाने में सेना क्यों लगानी पड़ रही? जवाब: 3 मई 2026 को देशभर के 22.79 लाख छात्रों ने NEET-UG 2026 का एग्जाम दिया। 7 मई को खबर आई कि क्वेश्चन-पेपर सोशल मीडिया पर एग्जाम से पहले ही लीक हो चुका था। 12 मई को NTA ने मामले की जांच CBI को सौंपी। अब तक इसमें 13 गिरफ्तारियां हुई हैं। अब एग्जाम 21 जून को दोबारा होगा। 28 मई को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर एक हाई-लेवल मीटिंग हुई, जिसमें केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, NTA के निदेशक अभिषेक सिंह के अलावा एयरफोर्स के कई सीनियर अफसर भी मौजूद थे। अंग्रेजी अखबार हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस बैठक में फैसला हुआ कि क्वेश्चन पेपर की सेटिंग से लेकर छपाई, ट्रांसपोर्टेशन और डिलीवरी की प्रक्रिया में सेना को शामिल किया जाएगा।धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि पहले ये जिम्मेदारी अकेले डाक विभाग की थी, लेकिन इस बार सभी सेंटर पर पेपर पहुंचाने में एयरफोर्स की मदद ली जाएगी। हालांकि, NTA के अधिकारियों का कहना है कि सेना की भूमिका केवल लॉजिस्टिक्स, ट्रांसपोर्टेशन या मौसम से जुड़ी किसी इमरजेंसी के दौरान ही होगी। परीक्षा की निगरानी में कोई भूमिका नहीं होगी। सवाल-2: CBSE 12th के रिजल्ट में गड़बड़ी कैसे हुई? जवाब: देशभर के कुल 17.68 लाख छात्रों ने 17 फरवरी से 10 अप्रैल के बीच 2026 की CBSE 12th बोर्ड के एग्जाम दिए। रिजल्ट आया तो, पिछली बार के 88.39% मुकाबले इस बार 85.2% स्टूडेंट्स ही पास हुए। बोर्ड एग्जाम देने वाले 22% यानी 4 लाख से ज्यादा छात्रों ने अपनी कॉपी दोबारा जांचने यानी री-इवैल्यूएशन के लिए अप्लाई किया है। कई स्टूडेंट्स ने सोशल मीडिया पर फिजिक्स और मैथ्स में कम नंबर आने की शिकायत की। इनमें JEE क्वालिफाई कर चुके स्टूडेंट्स भी हैं। स्टूडेंट्स की आंसर शीट्स में स्कैन कॉपी ब्लर होने पर भी नंबर काटे गए। दिल्ली के एक स्टूडेंट वेदांत श्रीवास्तव ने बताया कि जो फिजिक्स की आंसर शीट भेजी गई, उसमें किसी और की हैंडराइटिंग है। 28 मई को धर्मेंद्र प्रधान ने री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया में गड़बड़ियों की बात मानी और कहा कि हर शिकायत का समाधान किया जाएगा। सवाल-3: आखिर देश के बड़े एग्जाम ठीक से क्यों नहीं हो पा रहे? जवाब: अभ्यर्थियों की संख्या के आधार पर सबसे बड़े 3 एग्जाम हैं- मेडिकल कॉलेजेज में एंट्रेंस के लिए NEET-UG, इंजीनियरिंग कॉलेजेज में एडमिशन के लिए IIT-JEE मेन्स और यूनिवर्सिटीज में एंट्रेंस के लिए CUET-UG। इस साल NEET एग्जाम में 22.8 लाख, JEE में 16 लाख और CUET में 18.68 लाख स्टूडेंट्स बैठे थे। संसद की स्थायी समिति की दिसंबर 2025 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में NTA के जरिए हुए 14 एग्जाम में से कम से कम 5 में पेपर लीक, पेपर में गलतियां, रिजल्ट में देरी जैसी दिक्कतें हुईं। UGC-NET, CSIR-NET और NEET-PG के एग्जाम रोकने पड़े और CUET-UG और PG का रिजल्ट आने में देरी हुई। इन बड़े एग्जाम में गड़बड़ के पीछे 3 बड़ी वजहें है… 1. एग्जाम एजेंसी से सेंटर तक पेपर लीक माफिया का मजबूत नेक्सस 2. पेपर की प्रिंटिंग से डिलीवरी तक का काम प्राइवेट फर्म्स पर निर्भर 3. NTA की जवाबदेही नहीं, पेपर लीक का कानून कमजोर सवाल-4: IIT-JEE, UPSC के एग्जाम में NEET जैसी गड़बड़ क्यों नहीं होती? जवाब: NEET-UG एग्जाम एक ही शिफ्ट में पूरे देश में एक साथ होता है। ये अकेला एग्जाम है, जिसे NTA ने ऑफलाइन मोड में करवाता है। इसके पीछे ये तर्क है कि आधे सवाल बायोलॉजी के होते हैं, जो न्यूमेरिक वैल्यू के बजाय सब्जेक्टिव नॉलेज के ज्यादा होते हैं। इसलिए अलग-अलग शिफ्ट में सवालों की कठिनता का स्तर बदलने से कुछ स्टूडेंट्स के साथ भेदभाव हो सकता है। ऋषिकेश शर्मा कहते हैं, ‘720 मार्क्स के NEET में एक-एक नंबर पर हजारों रैंक आती हैं। पेपर आसान होने के चलते स्कोरिंग हाई हो जाती है। सिलेक्शन 85% मार्क्स के ऊपर होता है, इसलिए विंडो बहुत छोटी है। अगर कुछ सवाल भी लीक हो जाएं, तो पूरा पेपर कॉम्प्रोमाइज हो जाता है। इसीलिए इसमें पैसे और कमाई का खेल बहुत ज्यादा होता है।’ वहीं IIT-JEE कई शिफ्ट में होता है। इसके दो एग्जाम होते हैं- मेन्स और एडवांस्ड। इसके अलावा हर शिफ्ट में एग्जाम पेपर अलग होता है। ऋषिकेश शर्मा कहते हैं कि ये पेपर मुश्किल बनाया जाता है। 25% मार्क्स लाने पर भी सिलेक्शन हो जाता है। बच्चों को सिलेक्शन के लिए बड़ी विंडो मिलती है। इसलिए नकल और पेपर लीक के गिरोहों के लिए ये एग्जाम मुफीद नहीं है। अगर किसी शिफ्ट में कोई गड़बड़ हुई भी है, तो पूरे देश में JEE के रिजल्ट पर असर नहीं पड़ता। इसी तरह UPSC के CSE के एग्जाम में बीते 5 सालों में पेपर लीक की कोई रिपोर्ट नहीं है। इसमें 3 फेज यानी प्री, मेन्स और इंटरव्यू के जरिए सिलेक्शन होता है। मेन्स एग्जाम सब्जेक्टिव होता है, यानी जवाब लिखकर देना होता है। ऐसे में नकल के जरिए किसी को पास करवाना मुश्किल होता है। शशि प्रकाश कहते हैं कि UPSC एक सेंट्रल स्ट्रक्चर के तहत एग्जाम करवाता है। साथ ही पूरे प्रोसेस में प्राइवेट वेंडर्स को काम की आउटसोर्सिंग बहुत कम होती है। इसलिए पेपर लीक की गुंजाइश कम हो जाती है। सवाल-5: बड़े एग्जाम में पेपर लीक का इलाज क्या है? जवाब: UPSC ट्यूटर प्रभात रंजन और एलन सेंटर हेड ऋषिकेश शर्मा 5 बातें कहते हैं… ***** रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास----------------------------------------------------------- नीट पेपर लीक से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… NEET पेपर लीक का ब्यूटीशियन कनेक्शन:जहां पेन ले जाना भी मना, वहां से बाहर आया पेपर, क्या कोई अफसर मास्टरमाइंड NEET पेपर लीक की कड़ियां अब जुड़ने लगी हैं। इस मामले में पहले केमिस्ट्री प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी और फिर बॉटनी लेक्चरर मनीषा मांधरे अरेस्ट हुईं। अब NEET एग्जाम कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अफसर के भी शामिल होने की बात सामने आ रही है। पढ़ें पूरी खबर…
यूक्रेन युद्ध के बीच रूस की तेल अर्थव्यवस्था पर अमेरिकी प्रतिबंध कितने असरदार, नई रणनीति पर बहस तेज
यूक्रेन युद्ध को लेकर अमेरिका की नीति की आलोचना के बीच अमेरिका के ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि ट्रंप प्रशासन ने रूस के तेल क्षेत्र पर किसी भी पूर्व अमेरिकी प्रशासन की तुलना में अधिक कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। उन्होंने व्हाइट हाउस में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा कि प्रशासन ने रूस की ऊर्जा इंडस्ट्री के खिलाफ अभूतपूर्व कदम उठाए हैं, जिनमें देश की दो सबसे बड़ी तेल कंपनियों पर प्रतिबंध भी शामिल हैं।
मेयर ममदानी ने इस युद्ध की मानवीय त्रासदी पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जंग की सबसे भयावह कीमत उन लोगों को चुकानी पड़ रही है, जिनकी निर्णय लेने की प्रक्रिया में कोई आवाज ही नहीं थी।
ईरान के साथ ‘खराब समझौते’ को स्वीकार नहीं करेंगे ट्रंप: अमेरिकी वित्त मंत्री
अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ किसी भी 'खराब समझौते' को स्वीकार नहीं करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि किसी भी समझौते में ईरान के परमाणु कार्यक्रम का समाधान होना चाहिए और होर्मुज जलडमरूमध्य में खुली शिपिंग की गारंटी होनी चाहिए।

