ग्रीन कार्ड नीति पर बेरा का हमला – ट्रंप प्रशासन को बताया हानिकारक
भारतीय-अमेरिकी सांसद अमी बेरा ने ट्रंप प्रशासन की नई ग्रीन कार्ड (आव्रजन) नीति की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे परिवारों, श्रमिकों और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए विघटनकारी और हानिकारक बताया है।
व्हाइट हाउस के पास गोलीबारी – सीक्रेट सर्विस ने हमलावर को किया ढेर
व्हाइट हाउस के पास शनिवार शाम गोलीबारी करने वाले एक हमलावर को सीक्रेट सर्विस के अधिकारियों ने जवाबी फायरिंग में मार गिराया।
असीम मुनीर ने पेजेश्कियन और गालिबाफ से की मुलाकात, ईरान के राष्ट्रपति ने इस्लामिक एकता पर दिया जोर
पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर अमेरिका और ईरान के बीच स्थायी सीजफायर से संबंधित बातचीत के सिलसिले में तेहरान पहुंचे
व्हाइट हाउस नॉर्थ लॉन खाली – गोलियों की आवाज से मचा हड़कंप
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार शाम व्हाइट हाउस परिसर के पास कथित तौर पर गोलियों की आवाज सुनाई देने के बाद अमेरिकी सीक्रेट सर्विस ने व्हाइट हाउस के उत्तरी लॉन को खाली करा लिया।
बात 2020 की है। ओडिशा के झारसुगुड़ा की रहने वाली श्रिया लेंका म्यूजिक इंडस्ट्री में करियर तलाश रही थीं। कई रियलिटी शो के ऑडिशन दिए, शुरुआती राउंड में सेलेक्ट हुईं, लेकिन आखिर में रिजेक्शन मिला। नवंबर 2020 में कोरियन पॉप बैंड ब्लैकस्वान ने एक नए मेंबर की तलाश शुरू की। कोरोना का दौर था, इसलिए वर्चुअल ऑडिशन हुए। श्रिया को इसके बारे में एक दोस्त से पता चला। घर में प्रैक्टिस शुरू की। 40 हजार दावेदारों के बीच ऑडिशन के 4 राउंड पास किए और ब्लैकस्वान बैंड में सिलेक्ट होकर सबको चौंका दिया। 26 मई 2022 को वो भारत की पहली के-पॉप स्टार बन गईं। कोरिया में पिछले 3 साल से इसी बैंड का हिस्सा हैं। एक शो की 6 लाख रुपए फीस लेती हैं। 19 अप्रैल को जब साउथ कोरिया के प्रेसिडेंट ली जे-म्युंग भारत दौरे पर आए, तो वो भी श्रिया का जिक्र करना नहीं भूले। हालांकि, श्रिया का के-पॉप बैंड तक पहुंचने का ये सफर आसान नहीं था। ट्रेनिंग के लिए हर हफ्ते राउरकेला जाना और टिकट के पैसे नहीं राउरकेला में जन्मीं श्रिया की पढ़ाई-लिखाई झारसुगुड़ा में हुई। यहीं ओडिशी डांस सीखा। फ्रीस्टाइल डांस के लिए कोई टीचर नहीं मिला, तो पापा के साथ वीकेंड पर दो दिन राउरकेला जाकर ट्रेनिंग ली। श्रिया मिडिल क्लास फैमिली से हैं, इसलिए पैसों की तंगी हमेशा साए की तरह साथ रही। वे बताती हैं, ‘कई बार सफर के लिए टिकट के पैसे नहीं होते थे। ट्रेन की जनरल बोगी में भी सफर करना मुश्किल था। तब पापा मुझे गोद लेकर खड़े-खड़े सफर करते, ताकि प्रैक्टिस न छूटे।’ 40 रियालिटी शोज से रिजेक्ट हुईं, तब पापा ने बढ़ाया हौसला श्रिया ने डांस सीखते हुए ‘डांस इंडिया डांस’ जैसे कई बड़े रियलिटी शोज में ऑडिशन दिए। शुरुआती राउंड पास कर लेतीं, लेकिन आखिर में रिजेक्ट कर दिया जाता। श्रिया करीब 40 रियलिटी शोज से बाहर हुईं। वे बताती हैं, ‘जहां भी ऑडिशन दिए, रिजेक्शन ही मिला। इन शोज में कई बार भेदभाव भी देखा, क्योंकि यहां टैलेंट से ज्यादा कंटेस्टेंट्स की ‘स्ट्रगल स्टोरी’ और रोने-धोने वाली कहानियों को अहमियत दी जाती थी। डांस कितना भी अच्छा हो, लेकिन अगर आपके पास रोने वाली कोई कहानी नहीं है, तो आप पीछे रह जाते हैं।’ ’हम जब भी किसी रियलिटी शो के लिए फॉर्म भरते, तो पापा ‘फैमिली स्ट्रगल’ जैसे कॉलम खाली छोड़ देते। मैंने एक बार पूछा भी कि हम अपनी परेशानियां क्यों नहीं लिख रहे, तब पापा कहते कि मैं नहीं चाहता कि कोई तुम पर दया करके या हमदर्दी दिखाकर आगे बढ़ाए। तुम अपने डांस और टैलेंट के दम पर आगे बढ़ो।’ कोरोना में डांस क्लास बंद हुई, लेकिन श्रिया का सफर शुरूरियलिटी शोज में रिजेक्शन से श्रिया निराश थी। कोरोना के चलते 2020 में लॉकडाउन लगा और उसकी डांस क्लासेज भी बंद हो गईं। पिता प्राइवेट नौकरी करते थे, वो भी छूट गई। तब श्रिया ने डांस छोड़ने का मन बना लिया था, लेकिन पापा ने हिम्मत बढ़ाई।’ पिता अबिनाश लेंका ने श्रिया से कहा, ‘अगर तुम सही हो, तो किसी की बातों पर गौर मत करो, बस मेहनत करती जाओ। मैं तुम्हारे चेहरे पर अपनी जीत देखता हूं। अब तुम तय करो कि मुझे जिताना है या हराना?‘ ’इसी बीच दोस्तों से के-पॉप के ऑडिशन का पता चला। उन्होंने बताया कि साउथ कोरिया की कंपनी डीआर म्यूजिक अपने ग्लोबल गर्ल ग्रुप ‘ब्लैकस्वान’ के लिए नया मेंबर तलाश रही है। तब तक मैं के-पॉप के बारे में ज्यादा कुछ नहीं जानती थी। दोस्तों और बहनों के साथ मिलकर इसकी जानकारी जुटाई और इसे जिंदगी का आखिरी मौका मान लिया।’ 6 घंटे डांस मूव्स, 8 घंटे वोकल की प्रैक्टिस, तब हुआ सेलेक्शनऑडिशन की तैयारी के लिए श्रिया ने अपने कमरे को ट्रेनिंग सेंटर बनाया और घर की छत को स्टेज। तपती गर्मी में छत पर 13-14 घंटे स्टंट्स और डांस की प्रैक्टिस करतीं। हालांकि के-पॉप का हिस्सा बनने के लिए सिर्फ डांस आना काफी नहीं था। कोरियन भाषा, उसका एक्सेंट सीखना और वोकल्स बेहतर करना भी जरूरी था। वो देर रात तक कोरियन गाने सुनकर उनकी लिरिक्स लिखती, फिर इंटरनेट पर कोरियन बोलना सीखती। श्रिया बताती हैं, ’के-पॉप में ऑडिशन देने का मतलब था कि कोरियोग्राफ्ड डांस के साथ लाइव सिंगिंग भी करना। सेलेक्शन से पहले मैं रोज दिन में 8 घंटे सिर्फ वोकल की प्रैक्टिस करती। फिर 6 घंटे अपने डांस मूव्स परफेक्ट करती। एक सीट के लिए दुनिया भर से 40 हजार लड़कियां मुकाबला कर रही थीं, इसलिए मेरे पास चूकने का कोई मौका नहीं था।’ ’करीब 4 राउंड वर्चुअल ऑडिशन हुए। एक के बाद एक सब पास किए। आखिरी राउंड में मुकाबला ब्राजील की गैब्रिएला डाल्सिन से था, वो भी जीत लिया। मई 2022 में जब फाइनल सेलेक्शन का कॉल आया, तो घर में खुशी का ठिकाना नहीं था।’ अकेले कोरिया भेजने के लिए तैयार नहीं थी मांश्रिया आगे बताती हैं, ‘अब ट्रेनिंग के लिए मुझे अकेले साउथ कोरिया जाना था। तब मेरी उम्र सिर्फ 18 साल थी। मां अकेले भेजने के लिए तैयार ही नहीं थीं। वो साफ कहतीं कि जो करना है, भारत में करो, अकेले बाहर नहीं जाओगी।‘ ‘तब पापा ने परिवार के साथ मिलकर मां से झूठ बोला। उन्हें बताया गया कि पापा भी मेरे साथ कोरिया जा रहे हैं। वो दिल्ली तक साथ गए, लेकिन वहां से आगे का सफर मैंने अकेले तय किया। मां को जब सच पता चला, तो पहले नाराज हुईं, लेकिन मुझे सेफ देखकर गुस्सा शांत हो गया।‘ वे आगे बताती हैं, ’असली इम्तिहान कोरिया पहुंचने के बाद शुरू हुआ। यहां मुश्किल ट्रेनिंग से गुजरना था, जिसके लिए पूरी लाइफस्टाइल बदलनी थी। मुझे सख्त डाइट चार्ट दिया गया। सुबह 4 बजे उठना और बॉडी स्ट्रेचिंग करनी। फिर कोरियन लैंग्वेज की एडवांस क्लासेस, वोकल ट्रेनिंग और रात 11-12 बजे तक डांस सिंक्रोनाइजेशन की प्रैक्टिस चलती।’ एक साल की ट्रेनिंग के बाद 19 मई 2023 को श्रिया की बैंड के साथ ऑफिशियल लॉन्चिंग हुई। वो अब भी साउथ कोरिया में हैं और डीआर म्यूजिक के ब्लैकस्वान बैंड के साथ लगातार शोज कर रही हैं। डीआर म्यूजिक की तरफ से उन्हें एक शो की 6 लाख रुपए फीस मिलती है। तीन साल में श्रिया की नेट वर्थ करीब 7 करोड़ हो गई है। उनकी कामयाबी पर पिता अबिनाश कहते हैं, ‘अच्छा हुआ श्रिया उन रियलिटी शोज में सिलेक्ट नहीं हुई, अगर सिलेक्ट हो जाती, तो भारत की पहली के-पॉप आइडल बनकर इतिहास नहीं बना पाती। उसकी किस्मत में कुछ बड़ा करना लिखा था।‘ ………………. ओडिशा की ये खबर भी पढ़ें… 19 हजार के लिए कंकाल निकाला, अब मिले 15 लाख जीतू मुंडा, उम्र 52 साल। बदन पर सिर्फ एक कपड़ा। कंधे पर बड़ी बहन कलरा का कंकाल। कलरा के बैंक अकाउंट में 19,400 रुपए जमा थे। उनकी मौत के बाद जीतू 27 अप्रैल को पैसे निकालने बैंक पहुंचे। आरोप है कि बैंक मैनेजर ने कहा कि बहन को लाओ, तभी पैसे मिलेंगे। जीतू ने कब्र से बहन का कंकाल निकाला और तीन किमी दूर बैंक लेकर आ गए। मामला ओडिशा के क्योंझर जिले के दियानाली गांव का है। पढ़िए पूरी खबर…
ओस्लो समिट में भारत को “महाशक्ति” बताने पर चर्चा, यूरोप की सोच में बदलाव के संकेत
हाल ही में नॉर्वे में हुए तीसरे भारत-नॉर्डिक समिट में इस बात पर जोर दिया गया कि 2026 में भारत एक बड़ी ताकत के तौर पर उभरेगा और यह देश कैसे सक्रिय रूप से गठबंधन बना रहा है और अंतरराष्ट्रीय एजेंडा तय कर रहा है।
शी चिनफिंग ने गैस विस्फोट दुर्घटना पर आदेश दिया
चीन के शानशी प्रांत के छांगची शहर की छिनयुआन काउटी स्थित एक कोयला खदान में 22 मई की शाम को गैस विस्फोट हुआ। इससे जान-माल का भारी नुकसान हुआ।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज ने हांगचो पहुंचकर चीन की यात्रा शुरू की
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ 23 मई को चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर चीन के चच्यांग प्रांत के हांगचो शहर में पहुंचे।
चीन 26 मई को यूएन सुरक्षा परिषद की उच्च स्तरीय बैठक की मेजबानी करेगा
इस महीने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष देश के रूप में, चीन 26 मई को सुरक्षा परिषद की एक उच्च स्तरीय बैठक की मेजबानी करेगा
भारत इंडो-पैसिफिक नीति में अहम साझेदार, जल्द होंगी कई नई घोषणाएं: मार्को रुबियो
अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो ने कहा कि नई दिल्ली के साथ संबंध हिंद-प्रशांत के लिए वाशिंगटन के नजरिए का आधार बना हुआ है
धरती के 50 सबसे तपते शहर इस वक्त भारत में ही हैं। 22 मई को सबसे ज्यादा यूपी के बांदा में 47.6C, एमपी के खजुराहो में 47.4C, महाराष्ट्र के वर्धा में 47.1C तापमान दर्ज हुआ। पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, यूपी, एमपी, गुजरात और राजस्थान में लगातार हीटवेव जारी है। जब मई इतना खौल रहा तो जून में क्या होगा, इस बार क्यों पड़ रही इतनी गर्मी और कब तक आएगा मानसून; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: देश में अभी हीटवेव का असर कहां-कहां और कितना है? जवाब: बीते 2 दिनों से हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, विदर्भ, पश्चिमी व पूर्वी उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्सों में 42 से 47C तापमान वाली भीषण गर्मी के साथ हीटवेव की स्थिति बनी हुई है। IMD के मौसम वैज्ञानिक आरके जेनामनी के मुताबिक, किसी इलाके में तापमान सामान्य से ज्यादा हो और दो या ज्यादा दिनों तक तेज लू चलने लगे, तो उसे हीटवेव माना जाता है। IMD ने पैरामीटर बनाया है कि किसी इलाके में तापमान सामान्य से 4.5C ज्यादा होने पर हीटवेव और 6.4C ज्यादा होने पर सीवियर हीटवेव होगी। सवाल-2: इस बार इतनी भीषण गर्मी क्यों पड़ रही? जवाब: भूमध्य रेखा एक ऐसी काल्पनिक लाइन है, जो धरती को दो हिस्सों में बांटती है। इस पर सूरज की सीधी किरणें पड़ती हैं, वहीं भारत भूमध्य रेखा के उत्तर में कर्क रेखा पर है। आम तौर पर भारत में मार्च से अप्रैल के पहले हफ्ते में गर्मी की शुरुआत होती है। फिर मई से आधे जून तक सूरज भूमध्य रेखा से कर्क रेखा की तरफ बढ़ता है। ऐसे में इस इलाके में गर्मी अपने पीक पर पहुंच जाती है। फिर जून के आखिरी हफ्ते में मानसूनी हवाओं से गर्मी थोड़ी कम होने लगती है। इस बार अप्रैल-मई में ही रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ी। इसके पीछे की वजहें समझने के लिए दो चीजों का मतलब जानना जरूरी है- वेस्टर्न डिस्टर्बेंस: भारत के पश्चिम में भूमध्य सागर से तूफानी हवा नमी लेकर भूमध्य सागर, काला सागर से ईरान, अफगानिस्तान होते हुए भारत तक आती है, जिसे 'वेस्टर्न डिस्टर्बेंस' कहते हैं। ये हवा भारत में आकर यहां के वेदर पैटर्न को डिस्टर्ब करती है, इसलिए डिस्टर्बेंस शब्द जुड़ा। जेट स्ट्रीम: जमीन से करीब 8 से 15 किमी ऊपर क्षोभमंडल या ट्रोपोस्फेयर की ऊपरी लेयर में बहने वाली हवा की तेज धारा को 'जेट स्ट्रीम' कहते हैं। अब इस बार भारत में इतनी गर्मी पड़ने के पीछे 3 वजहें जानिए- 1. वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के चलते अप्रैल की शुरुआत में बारिश हुई 2. जेट स्ट्रीम ने गर्म हवा लॉक कर दी, जिससे गर्मी बढ़ गई 3. लंबे समय तक गर्मी से 'हीट डोम' बन गया ये स्थिति लू चलने के उलट है। लू में गर्मी बढ़ने पर आंधी या गरज के साथ बारिश की स्थिति बन जाती है, जिससे गर्मी ऊपर निकल जाती है और लोगों को राहत मिलती है। वहीं हीट डोम में एक एंटी-साइक्लोन यानी उलटे चक्रवात जैसी स्थिति बनती है, जो हवाओं को नीचे की तरफ भेजता है और हवाएं और गर्म होती हैं। जमीन के पास जितनी ज्यादा गर्मी होगी, ऊपर उतना ही मजबूत हाई प्रेशर सिस्टम मजबूत होता है। इसीलिए हीट डोम एक बार बनने के बाद हफ्तों तक बना रहता है, जब तक कोई नया वेस्टर्न डिस्टर्बेंस या मानसून इस साइकिल को न तोड़ दे। सवाल-3: अगले कुछ दिन मौसम कैसा रहने वाला है, क्या कुछ राहत मिलेगी? जवाब: भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक- अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर के इलाके में दक्षिण-पश्चिमी मानसून आगे बढ़ रहा है। भारत की 70-80% सालाना बारिश इसी मानसून से होती है। गुजरात, केरल और कर्नाटक जैसे कुछ राज्यों में 23 मई से प्री-मानसून एक्टिविटी शुरू हो सकती है। इन राज्यों के कुछ इलाकों में भारी बारिश और तेज हवाओं की आशंका जताई गई है। IMD के मुताबिक… उत्तर भारत के इलाके हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में 22 से 27 मई तक बारिश की संभावना नहीं है। भयंकर हीटवेव जारी रह सकती है। पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार, ओडिशा, तेलंगाना और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी यही हालात रहेंगे। सवाल-4: भारत के बाकी हिस्सों में कब तक आएगी राहत की फुहार? जवाब: गर्मी से राहत मानसूनी बारिश से ही मिल सकती है। मानसून जैसे-जैसे आगे बढ़ता है, हीटवेव खत्म होती जाती है। IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र के मुताबिक, केरल के बाद उत्तर भारत तक पहुंचने में मानसून को 4 से 6 हफ्ते और लगते हैं। यानी राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों, जहां हीटवेव का असर सबसे ज्यादा है, उन्हें बारिश के लिए 15 जून से 31 जून तक का इंतजार करना होगा। जून 2026 के तीसरे सप्ताह तक पूर्वी, मध्य और उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य से अधिक हीटवेव वाले दिन रह सकते हैं। इसके बाद धीरे-धीरे गर्मी से राहत मिलना शुरू होगी। सवाल-5: इस बार जोरदार गर्मी पड़ी, तो क्या बारिश भी उतनी ही अच्छी होगी? जवाबः मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 2026 के मानसून की शुरुआत पिछले 26 साल में सबसे कमजोर हो सकती है। इस बार सामान्य से 8% कम बारिश का अनुमान है। इसकी वजह है- एल नीनो। एल नीनो उस कंडीशन को कहते हैं, जब प्रशांत महासागर की सतह का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इसकी वजह से प्रशांत महासागर की सतह पर बहने वाली हवा और पानी के पैटर्न में बदलाव हो जाता है। भारत में हिंद महासागर और अरब सागर की ओर से आने वाली मानसूनी हवाएं कमजोर होती हैं। इससे भयानक सूखा या तेज गर्मी पड़ती है। अमेरिकी मौसम एजेंसी नेशनल ओशेनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन, यानी NOAA के मुताबिक, जुलाई-सितंबर 2026 तक एल नीनो बनने की संभावना 70% से ऊपर है। इसके बाद 'सुपर एल नीनो' आ सकता है। दरअसल, प्रशांत महासागर की सतह का पानी अगर 2 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा बढ़ता है, तो 'सुपर एल नीनो' के हालात बनते हैं। ये सामान्य एल नीनो से चार गुना ज्यादा असरदार माना जाता है। पिछली बार 2015-16 में जब सुपर एल नीनो आया था, तो सामान्य से 14% कम बारिश हुई, दक्षिण एशिया में सूखा पड़ा, फसलें बर्बाद हुईं और खाने की महंगाई आसमान छू गई थी। अब 2026 में वैज्ञानिक कह रहे हैं- यह उससे भी बड़ा हो सकता है। ***** रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास----------------------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… पंखे आग उगलते हैं, रात में भी राहत क्यों नहीं:भारत की गर्म रातें कैसे बन रहीं साइलेंट किलर; इससे कैसे बचें भारत में गर्मी का मतलब अब सिर्फ दोपहर की झुलसाने वाली धूप नहीं रह गया है। अब सूरज ढलने के बाद भी राहत नहीं मिलती। रात 11 बजे भी दीवारें गर्म रहती हैं, पंखे गर्म हवा फेंकते हैं और कूलर-एसी भी कई बार बेअसर लगते हैं। पढ़ें पूरी खबर…
रिहा हुईं 15 महिला कार्यकर्ताओं ने हिरासत के दौरान यौन दुर्व्यवहार और दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इन महिलाओं का कहना है कि उन्हें बंद कमरों में रखा गया और मानसिक तथा शारीरिक प्रताड़ना दी गई।
तुलसी गबार्ड ने राष्ट्रीय खुफिया निदेशक पद से दिया इस्तीफा, पति की बीमारी को बताया वजह
तुलसी गबार्ड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने इस्तीफे की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि सार्वजनिक जीवन और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों के बीच परिवार को प्राथमिकता देना उनके लिए जरूरी हो गया है।
अमेरिकी कार्रवाई के बाद समझौता चाहता है ईरान : ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि हाल में हुई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान बातचीत करना चाहता है। ट्रंप ने कहा कि ईरान की सैन्य ताकत को भारी नुकसान पहुंचा है और अमेरिका किसी भी हालत में उसे परमाणु हथियार बनाने नहीं देगा।
NEET पेपर लीक करने वाले सवाल रट लाए थे:न किताबें बाहर आईं, न अंदर डिवाइस जाने दी; फिर भी हुए लीक
‘नीट पेपर लीक ने हमारा भरोसा तोड़ा है। सालों से जो लोग हमारे साथ काम कर रहे थे, उन्होंने ही पेपर लीक कर दिए। लीक किस–किस ने किया, कैसे किया ये जांच के बाद पता चल जाएगा। लेकिन ऐसा लग रहा है कि, सवाल रटकर लीक किए गए हैं।’ ‘क्योंकि क्वेश्चन पेपर तैयार करने के लिए एक्सपर्ट्स को तय प्रोटोकॉल के साथ रखा जाता है। जिन किताबों से सवाल तैयार होते हैं, वो बाहर नहीं जातीं। कोई डिवाइस पास नहीं होती।’ ‘इसका मतलब है कि, क्वेश्चन पेपर तैयार करने वालों ने कमरे पर जाकर पहले किताब लिखी होगी और फिर उससे सवाल बनाए होंगे और फिर उन्हें लीक किया। लेकिन अब ऐसा सिस्टम बना रहे हैं, जिससे कोई एक व्यक्ति सब चौपट नहीं कर पाएगा। क्या कर रहे हैं, वो अभी नहीं बता सकता।’ ये बात नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA की टॉप अथॉरिटी ने भास्कर से एक्सक्लूसिव बातचीत में कही है। हालांकि, उन्होंने नाम नहीं लिखने को कहा है। सवाल–जवाब में पढ़िए उनका पूरा इंटरव्यू… सवाल: 22 लाख छात्रों और उनके पैरेंट्स का भरोसा फिर से कायम करने के लिए NTA इस बार क्या मेजर्स लेने जा रही है? कौन से स्टेप आप पहली बार इम्प्लीमेंट करने वाले हैं? जवाब: जो हुआ वो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। नहीं होना चाहिए था। हमारी नीति जीरो टॉलरेंस, जीरो एरर की थी। जांच में पता चलेगा कि दोषी कौन है। बहुत से लोग गिरफ्तार हुए हैं। फिलहाल कैंडिडेट्स के हित में कई फैसले लिए हैं। उन्हें फीस जमा नहीं करनी होगी। पुरानी फीस वापस होगी। राज्यों से रिक्वेस्ट की है कि वे बच्चों को एग्जाम सेंटर तक ट्रांसपोर्टेशन फ्री दें। फर्स्ट च्वॉइस वाला सेंटर देने की कोशिश कर रहे हैं। 3 लाख बच्चों ने सेंटर बदलने की मांग की है, सभी को उनकी पसंद का सेंटर देने की कोशिश है। सेफ्टी और सिक्योरिटी के प्रोटोकॉल को दोबारा रिव्यू किया है। हर ऐसे स्टेप पर जहां कोई माफिया इंटरवीन कर सकता है, उसको खत्म किया है। जिन्होंने अभी गड़बड़ी की, वो सालों से हमारे साथ काम कर रहे थे। उन्होंने विश्वासघात किया है। दिक्कत यही होती है कि आपके विश्वासीय लोगों में से ही कोई गड़बड़ कर दे, तो उससे बुरी बात नहीं हो सकती। अब हर चीज को तीन-चार बार चेक कर रहे हैं। कुछ व्यवस्थाएं ऐसी हैं जिन्हें सिक्योरिटी रीजन से डिस्क्लोज नहीं कर सकता, लेकिन ये सुनिश्चित कर रहे हैं कि ये चीज न हो। 21 जून को परीक्षा होने के बाद इस बारे में डिटेल में सब कुछ बताऊंगा। अभी बोलना कम, करना ज्यादा है। पेपर सेट करने का एक्सेस किसी एक के पास नहीं जाएगा। काफी कुछ किया है, ताकी गड़बड़ी को मिनिमाइज किया जा सके। सवाल: NTA जैसी देश की सबसे बड़ी परीक्षा एजेंसी में केवल 22 अधिकारी डेप्यूटेशन पर हैं, 39 कॉन्ट्रैक्चुअल कर्मचारी हैं और 132 आउटसोर्स इम्पलॉई हैं। ऐसे में 22 लाख स्टूडेंट्स की परीक्षा करवाना कितनी बड़ी चुनौती है? जवाब: भारत सरकार ने दो ज्वॉइंट सेक्रेटरी पोस्ट किए हैं। दो डायरेक्टर पोस्ट किए हैं। हमने कुछ पोजिशन भी निकाली हैं, लेकिन 21 जून तक इसका लिमिटेड रोल होगा। हां, NTA को अपनी कोर स्ट्रेंथ बढ़ाने की जरूरत है। लॉन्ग टर्म में बहुत कुछ करना है। क्या करना है, वो पता है। उस पर काम शुरू कर दिया है। सवाल: पेपर लीक में महाराष्ट्र, बिहार और राजस्थान का नाम मुख्य रूप से सामने आया है। हरियाणा, उत्तराखंड, केरल और झारखंड में भी CBI की जांच चल रही है। इन राज्यों को लेकर इस बार क्या तैयारी है? जवाब: सब जगह सतर्कता रखेंगे। हम चोर-पुलिस नहीं खेल सकते। हम ऑर्गनाइज्ड क्राइम से डील कर रहे हैं। ये मानकर चलना पड़ेगा। सवाल: NTA ने प्रिंटिंग से डिस्ट्रिब्यूशन और CCTV मॉनिटरिंग तक के लिए अलग कंपनियों को जिम्मा दे रखा है। ऐसी कितनी कंपनियां अभी NTA के साथ काम कर रही हैं? जवाब: इस मामले में कोई चूक नहीं हुई। मूवमेंट, स्टोरेज, परीक्षा सेंटर पर 3 मई तक कहीं से कोई घटना का क्लू नहीं था। 4, 5, 6 मई तक भी कोई शिकायत नहीं थी। हमारे पास मार्कशीट वापस आ गई थीं। वैल्यूएशन का काम शुरू हो गया था। हम तो बस यही कहेंगे कि गड़बड़ी को दबाएं नहीं, उसकी जड़ तक जाएं। कोई माफिया और पैसे वाला व्यक्ति ईमानदार बच्चों की सीट न ले पाए, इसलिए इतना बड़ा निर्णय लिया, एग्जाम रद्द कर दिया। 3 मई के पहले खबर मिल जाती तो हम इस सिचुएशन में जाते ही नहीं। हमने सोशल मीडिया की टीम बढ़ाई है। टेलीग्राम चैनल के साथ भी मंत्रीजी की मीटिंग करवाई। उनको भी निर्देश दिए कि आप सतर्कता बढ़ाइए। क्यों वो चैनल चलाते हैं जिसमें NEET पेपर लीक के नाम पर ग्रुप चलते हैं। चौतरफा प्रयास करेंगे। मुख्य दायित्व तो NTA और सरकार का है। मैं पूरी जिम्मेदारी लेता हूं। जो भी मीडिया ये चला रही है कि, NTA अपने सिस्टम को पूरा पुख्ता बता रहा है, ऐसा नहीं है। गड़बड़ी हुई है तो फिर हमारा सिस्टम भी पुख्ता कहां रहा। सवाल: क्वेश्चन पेपर सेट करने वाले सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स के पास भी सिस्टम का एक्सेस होता है, सवाल भी मालूम होते हैं। फिर ये कैसे इंश्योर होगा कि सवाल लीक न हों? आने वाली एग्जाम्स में भी ऐसा हो सकता है? जवाब: ये लोग टीचर हैं। इनको अगर याद हो जाए, कमरे में जाकर लिख लें, तो वो भी एक समस्या है। किताब से ही प्रश्न बनता है। इनको हम किताब ले जाने नहीं देते। कमरे में जाकर उसी किताब को लिखकर उसी चीज को लिख दें, जो इन्होंने यहां लिखा था और उसको आउट कर दें। फिजिक्स का कुछ नहीं हुआ है। केमेस्ट्री का ज्यादा हुआ है। बायोलॉजी का कम हुआ है। पूरा खुलासा इन्वेस्टिगेशन में होगा। लेकिन एक भी प्रश्न लीक हुआ तो दिक्कत है। ट्रांसलेटर ने गड़बड़ी की है तो मैं ये नहीं कहूंगा कि ये NTA की गड़बड़ी नहीं है। ये कह सकता हूं कि, परीक्षा केंद्र और मूवमेंट के तंत्र से लीक नहीं हुआ है, उसके पहले हुआ है। ट्रांसलेटर से हो रहा है, लेकिन उसको लाने की जिम्मेदारी भी NTA की है। गड़बड़ी नहीं है तो हम कैंसिल क्यों करेंगे। इतना बड़ा निर्णय आसान नहीं होता। बीमारी को जड़ से हटाना है तो सर्जरी करना पड़ती है। अभी जो इन्वेस्टिगेशन चल रहा है, उसमें मेरा एक्सपर्टाइजेशन नहीं है, मेंडेट भी नहीं है। अभी मेरा लक्ष्य 21 जून को सही तरीके से परीक्षा करवाना है। अर्जुन की तरह लक्ष्य पर नजर है। मैंने CBI को कहा कि जो भी दोषी है, NTA के अंदर का हो, उसको पकड़कर बाहर करेंगे। चार बच्चों ने सुसाइड कर लिया है। ये कैसे हो सकता है। ग्लानि होती है। ये नॉर्मल नहीं है। हमें सुनिश्चित करना है कि दोबारा कोई चूक न हो। अब सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स को भी रेस्ट्रिक्ट किया जाएगा। एक व्यक्ति के ऊपर निर्भरता कम करनी पड़ेगी, ताकि अगर एक व्यक्ति गड़बड़ करे तो पूरा प्रोग्राम चौपट न हो जाए। मल्टीपल लोग रहें और मल्टी-लेयर में काम हो। 21 जून को दोबारा परीक्षा – 3 मई को हुई एग्जाम में पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों के बाद नीट यूजी 2026 की री–एग्जाम 21 जून 2026 को होगी। वक्त दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक रहेगा। इस बार भी एग्जाम पेन-एंड-पेपर मोड में होगी। इसमें 22 लाख से ज्यादा कैंडिडेट्स शामिल हो सकते हैं। जिन स्टूडेंट्स ने एग्जाम सेंटर चेंज करने के लिए आवेदन किया है, उनके सेंटर बदलने पर काम जारी है। NTA कैसे सेट करता है क्वेश्चन पेपर, प्रॉसेस जानिए स्टेप 1 : NTA फिजिक्स, केमेस्ट्री और बायोलॉजी के क्वेश्चन पेपर तैयार करने के लिए सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स को बुलाता है। इनकी पहचान गोपनीय रखी जाती है। इन्हें सीक्रेट जगह पर रखा जाता है, जहां कोई बाहरी व्यक्ति नहीं जा सकता। स्टेप 2 : प्रश्ननपत्र तैयार होने के बाद उसकी फाइल NTA परिसर में एक ऐसे टर्मिनल पर रखी जाती है जो इंटरनेट से नहीं जुड़ा होता। कितने लोगों ने फाइल खोली और कितनी बार खोली, यह सब रिकॉर्ड किया जाता है। स्टेप 3: पेपर तैयार होने के बाद प्रश्नपत्र को सुरक्षित कंप्यूटर से प्रिंटिंग प्रेस भेजा जाता है ताकि उसकी कॉपियां छापी जा सकें। एक से ज्याद प्रेस हैं तो NTA हर प्रेस पर एक पर्यवेक्षक तैनात करता है। छपाई के दौरान पर्यवेक्षक का मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ होता है। प्रिंटिंग प्रक्रिया की निगरानी CCTV कैमरों से की जाती है। स्टेप 4: छपे हुए प्रश्नपत्रों को परीक्षा से पहले बैंक के सिक्योर लॉकर में रखा जाता है, ताकि वे लीक या चोरी न हों। फिर उन्हें एग्जाम सेंटर तक पहुंचाया जाता है। ट्रांसपोर्ट के दौरान डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन के लोग भी शामिल होते हैं। स्टेप 5: प्रश्नपत्रों को पुलिस सुरक्षा में GPS निगरानी वाले वाहनों से एग्जाम सेंटर तक ले जाया जाता है। ………………………….. आप ये एक्सक्लूसिव रिपोर्ट भी पढ़ सकते हैं NEET पेपर लीक का ब्यूटीशियन कनेक्शन:जहां पेन ले जाना भी मना, वहां से बाहर आया पेपर, क्या कोई अफसर मास्टरमाइंड NEET पेपर लीक की कड़ियां अब जुड़ने लगी हैं। इस मामले में पहले केमिस्ट्री प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी और फिर बॉटनी लेक्चरर मनीषा मांधरे अरेस्ट हुईं। अब NEET एग्जाम कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अफसर के भी शामिल होने की बात सामने आ रही है। पूरी खबर पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें…।
इंडोनेशिया ने मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच सभी कर्मचारियों के लिए बढ़ाया वर्क-फ्रॉम-होम नीति
इंडोनेशिया के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि मिडिल ईस्ट में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के बीच, सिविल सेवकों, सरकारी कंपनियों के कर्मचारियों और प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए अपनी वर्क-फ्रॉम-होम नीति को दो महीने के लिए बढ़ाएगा।
चीनी प्रतिनिधि ने गाजा में वास्तविक और स्थायी युद्धविराम की अपील की
संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू थ्सोंग ने 21 मई को इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष पर सुरक्षा परिषद की खुली बैठक को संबोधित करते हुए सभी पक्षों से गाजा युद्धविराम समझौते का पूर्णतः पालन करने और गाजा में वास्तविक और स्थायी युद्धविराम हासिल करने का आह्वान किया।
चीनी विदेश मंत्रालय ने पुतिन की चीन यात्रा के बारे में जानकारी दी
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता क्वो च्याखुन ने 21 मई को नियमित संवाददाता सम्मेलन की अध्यक्षता की और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की चीन यात्रा से जुड़ी जानकारी दी।
वर्ष 2026 एपेक व्यापार मंत्रियों की बैठक उद्घाटित
वर्ष 2026 एपेक व्यापार मंत्रियों की बैठक चीन के च्यांगसू प्रांत के सूचो शहर में उद्घाटित हुई। यह तीसरी बार है कि चीन एपेक का मेजबान बना।
कॉकरोच जनता पार्टी के इंस्टाग्राम पर 2 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके हैं। अकाउंट बनने के बाद करीब 90 घंटे में बीजेपी को पीछे छोड़ा, फिर कांग्रेस को। कुछ घंटे की बात है, दोनों पार्टियों के टोटल फॉलोअर्स से भी ज्यादा इसके हो जाएंगे। अब बड़ा सवाल है कि आगे क्या? क्या ये सिर्फ एक बुलबुला है, जो कुछ दिनों में फूट जाएगा? सरकार इसे किसी साजिश का हिस्सा बताकर दबा देगी या फिर कटाक्ष से शुरू हुआ ये ऑनलाइन कैम्पेन किसी असली राजनीतिक ताकत में बदलेगा; आज के एक्सप्लेनर में तीनों सिनैरियो का एनालिसिस… सिनैरियो-1: क्या कॉकरोच जनता पार्टी सिर्फ एक बुलबुला है, जो फूट जाएगा? भारत दुनिया के सबसे सस्ता इंटरनेट देने वाले टॉप-3 देशों में है। यहां कभी आंख मारना वायरल हो जाता है, कभी ‘कच्चा बादाम’। हर 1-2 हफ्ते में कुछ नया वायरल होता है। ऐसे में सवाल लाजिमी है कि क्या कॉकरोच जनता पार्टी भी एक वायरल बुलबुला है, जो कुछ दिनों में फूट जाएगा। शायद नहीं, क्योंकि इस बार कुछ चीजें अलग हैं… कांग्रेस सांसद शशि थरूर कहते हैं, युवा निराश है और इसीलिए इससे जुड़ रहा है। मुझे उम्मीद है कि इसके पीछे जो युवा हैं, वो इस एनर्जी को मेनस्ट्रीम पॉलिटिक्स में लाने का रास्ता निकाल लेंगे या फिर अपने वोट के जरिए बदलाव की आवाज बनेंगे। निष्कर्षः कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत कटाक्ष के तौर पर हुई थी, लेकिन अब ये सिर्फ बुलबुला नहीं रह गया है। हालांकि इसके फाउंडर अभिजीत कहते हैं- ‘मैं भ्रम में नहीं हूं, मुझे पता है कि ये कैम्पेन कुछ ही दिनों में खत्म हो सकता है।' सिनैरियो-2: क्या कॉकरोच जनता पार्टी के पीछे विदेशी हाथ, सरकार दबा देगी? पहले इसके फाउंडर अभिजीत के बारे में जान लीजिए। 30 साल के अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई के बाद उन्होंने अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशन से मास्टर्स किया। वो अभी अमेरिका में ही रहते हैं। अभिजीत 2020 से 2022 तक AAP के सोशल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट रहे हैं। 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में AAP के लिए वायरल मीम बेस्ड ऑनलाइन प्रचार का मटेरियल बनाते थे। अभिजीत पहले भी किसान आंदोलन से लेकर महंगाई जैसे राजनीतिक मुद्दों पर केंद्र सरकार और पीएम पर निशाना साधते रहे हैं। अभिजीत और उनकी CJP पर सबसे बड़ा आरोप लग रहा है कि उनके पीछे एंटी नेशनल ताकतें और विदेशी फंडिंग है… फाउंडर अभिजीत दीपके ने इंस्टाग्राम फॉलोअर्स का डेटा शेयर करते हुए पूछा- 94% भारतीय युवाओं को पाकिस्तानी क्यों बता रहे हो? अभिजीत किसी फंडिंग से भी इनकार कर रहे हैं। नेपाल और बांग्लादेश जैसा जेन-जी आंदोलन भारत में होगा क्या, इस सवाल पर अभिजीत ने एक इंटरव्यू में कहा, ‘नेपाल और बांग्लादेश से तुलना करके भारत के जेन-जी को कम न आंकें और न ही उनका अपमान करें। इस देश के युवा कहीं ज्यादा मैच्योर, जागरूक और राजनीतिक तौर पर सजग हैं। वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज करवाएंगे।' कॉकरोच जनता पार्टी का X अकाउंट ब्लॉक होने के बाद शशि थरूर ने कहा, 'लोकतंत्र में असहमति, हास्य, व्यंग्य और यहां तक कि हताशा व्यक्त करने के लिए भी मंचों की जरूरत होती है। अकाउंट को रोका जाना बेहद नुकसानदेह और समझदारी से परे है।’ तृणमूल कांग्रेस की नेता महुआ मोइत्रा ने कहा, ‘ये फासीवाद है, लोकतंत्र नहीं। सरकार देश के युवाओं से इतनी डरी हुई है कि वह एक वर्चुअल ऑनलाइन मूवमेंट तक को बर्दाश्त नहीं कर पा रही।’ निष्कर्ष: फिलहाल सरकार के पास अभिजीत दीपके की विदेशी फंडिंग के कोई सबूत नहीं हैं। अगर मिलते हैं, तो इस पूरे मूवमेंट को फौरन खत्म किया जा सकता है। बिना किसी ठोस वजह के ऐसे अकाउंट बंद किए, तो प्रतिरोध झेलना पड़ेगा। सिनैरियो-3: क्या कॉकरोच जनता पार्टी राजनीतिक बदलाव ला पाएगी? NEET पेपर लीक, पेट्रोल-डीजल के दाम, महंगाई, बेरोजगारी और SIR में धांधली जैसे मुद्दों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत हुई। इसलिए बड़ा सवाल है कि क्या ये ऑनलाइन मूवमेंट कोई बड़ा राजनीतिक बदलाव ला पाएगा… ऑनलाइन फॉलोइंग का जमीनी सपोर्ट में बदलना काफी मुश्किल होता है। 2020 दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी की टिकट पर लड़े तेजिंदर बग्गा को सिर्फ 38 हजार वोट मिले थे, जबकि फेसबुक पर तब उनके 6.5 लाख फॉलोवर थे। यूट्यूबर मेघनाद 2025 में दिल्ली की मालवीय सीट से चुनाव लड़े थे। उन्हें कुल 192 वोट मिले थे जबकि 500 से ज्यादा वोट NOTA के थे। अक्सर विवादित बयान देने वाले एक्टर एजाज खान बिग बॉस में आए थे। उनके 5.6 मिलियन फॉलोअर हैं। 2024 के मुंबई विधानसभा चुनाव में आजाद समाज पार्टी की टिकट पर वर्सोवा से चुनाव लड़े थे, उन्हें कुल 155 वोट मिले थे। पॉलिटिकल एक्सपर्ट हर्षवर्धन त्रिपाठी के मुताबिक, 'CJP सोशल मीडिया पर माहौल बना सकती है, पॉलिटिकल पार्टी नहीं बन सकती। कॉकरोच पार्टी भारत में अल्पमृत्यु को प्राप्त होगी।’ हालांकि कई राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कॉकरोच जनता पार्टी एक तरह के अनरेस्ट का नतीजा है। इसके दूरगामी असर होंगे…. पॉलिटिक एनालिस्ट योगेंद्र यादव के मुताबिक, 'देश के भीतर एक सुगबुगाहट और छटपटाहट है। जब भी कोई सरकार संस्थाओं पर कब्जा कर लेती है और पूर्णसत्ता स्थापित करती है, तब विद्रोह अनपेक्षित जगहों से पैदा होता है। जैसे- 1971 में इंदिरा गांधी की भारी जीत के बाद 1974 में जयप्रकाश आंदोलन शुरू हुआ। 2009 में कांग्रेस की जीत के बाद 2011 में अन्ना आंदोलन और 2019 में पीएम मोदी के दूसरी बार सत्ता में आने के 2 साल बाद किसान आंदोलन शुरू हुआ।’ पॉलिटिकल एनालिस्ट राशिद किदवई के मुताबिक, विपक्ष को यह सोचने की गलती नहीं करनी चाहिए कि कॉकरोच मूवमेंट सिर्फ बीजेपी के खिलाफ है। यह विपक्ष की भी नाकामी दिखाता है। युवाओं की नाराजगी सत्ताधारी दल के लिए है। इसका यह मतलब नहीं है कि विपक्ष में उनका विश्वास है। निष्कर्षः कॉकरोच जनता पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक बदलाव लाना अभी दूर की बात है। फिलहाल ये मूवमेंट कोई राजनीतिक पार्टी में बदल पाएगा, इसमें भी संशय है। इसने युवाओं के बीच फैले असंतोष को जरूर उघाड़ दिया है, जिसे किसी न किसी को तो एड्रेस करना ही पड़ेगा। ----- रिसर्च सहयोग- श्रेया नाकाड़े ----- ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर: कॉकरोच जनता पार्टी ने 5 दिन में बीजेपी-कांग्रेस को पछाड़ा, इंस्टा पर डेढ़ करोड़+ फॉलोअर्स; ये सिर्फ मजाक है या बदलाव की आहट BJP और कांग्रेस ने 2014 में इंस्टाग्राम अकाउंट बनाए। 12 साल में बीजेपी के 88 लाख और कांग्रेस के 1.3 करोड़ फॉलोअर्स हुए हैं। लेकिन महज 5 दिन पहले बनी कॉकरोच जनता पार्टी, यानी CJP ने इन दोनों आंकड़ों को छोटा साबित कर दिया। पूरी खबर पढ़ें…
ईरान से बातचीत को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री ने जताए सकारात्मक संकेत
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने गुरुवार को कहा कि ईरान के साथ चल रही बातचीत में “अच्छे संकेत” हैं। हालांकि, उन्होंने बहुत ज्यादा उम्मीद न रखने की चेतावनी दी और कहा कि अगर कूटनीति विफल हो जाती है तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास अभी भी दूसरे विकल्प हैं।
ईरान के पास परमाणु हथियार का मतलब मध्य पूर्व में बड़ा युद्ध, नहीं दे सकते इजाजत: ट्रंप
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान को लेकर ताजा बयान जारी किया, जिसमें चेतावनी और बातचीत के जरिए चीजों को सुलझाना, दोनों शामिल रहे
नॉर्वे की आबादी सिर्फ 56 लाख है। दिल्ली की एक चौथाई भी नहीं। लेकिन इस छोटे से देश के पास ऐसा सरकारी फंड है, जो भारत की पूरी GDP का आधा है। 2.1 ट्रिलियन डॉलर। अगर बांटा जाए, तो नॉर्वे के हर नागरिक को करीब ₹3.5 करोड़ मिलेंगे। लेकिन अपने देश पर खर्च करने की बजाए नॉर्वे ने इस फंड से दुनिया के 68 देशों की 7200 कंपनियों में हिस्सेदारी खरीद रखी है। 18 मई को नॉर्वे पहुंचे पीएम मोदी ने भारत की क्लीन एनर्जी में इसी फंड से निवेश का न्योता दिया। आखिर नॉर्वे ने इतना बड़ा फंड कैसे बनाया, ये चलता कैसे है, भारत में कितना निवेश किया और नॉर्वे अपने नागरिकों को यह पैसा बांट क्यों नहीं देता; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… नॉर्वे आमदनी के लिहाज से छठा और खुशहाली के मामले में 7वां सबसे सम्पन्न देश है। यहां की आबादी 56 लाख है। हर शख्स औसतन एक लाख डॉलर, यानी 96 लाख रुपए सालाना कमाता है। लेकिन 60 साल पहले तक ऐसा नहीं था। उत्तरी यूरोप में बसे नॉर्वे की जियोग्राफी काफी दुर्गम रही है- चारों तरफ बर्फ से ढके पहाड़, गहरे समुद्री रास्ते। 1960 के दशक तक ज्यादातर आबादी कमाई के लिए मछली पकड़ती, लकड़ी काटती या जहाजों पर काम करती। तब न कोई बड़ा उद्योग था और न कोई कार या टेक कंपनी। नौकरी के लिए युवा दूसरे देश चले जाते। नॉर्वे के अर्थशास्त्रियों को लग रहा था कि उनके पास संसाधन ही नहीं हैं। किसी चमत्कार के दम पर ही विकासशील देश बना जा सकता है। तभी एक चमत्कार हो गया। 1959 में नॉर्वे के पड़ोसी देश नीदरलैंड्स को तटीय इलाके 'ग्रोनिंगन' में नेचुरल गैस का एक बहुत बड़ा भंडार मिला। पूरे यूरोप में तेल और गैस की खोज की होड़ मच गई। नॉर्वे के भूवैज्ञानिकों ने भी समुद्र में खोज शुरू करने का मन बनाया। इस बीच 1962 में अमेरिकी कंपनी फिलिप्स पेट्रोलियम ने नॉर्वे सरकार को एक ऑफर दिया- ‘हमें उत्तरी समुद्र में तेल खोजने का इजाजत दीजिए। बदले में हर महीने 1.6 लाख डॉलर देंगे।’ 1965 में नॉर्वे सरकार ने फिलिप्स पेट्रोलियम, शेल और एस्सो जैसी बड़ी तेल कंपनियों को 22 लाइसेंस जारी किए। इन कंपनियों को समुद्र में ड्रिल करने, तेल-गैस खोजने और निकालने का अधिकार था। 1966 की गर्मियों में पहला तेल कुआं खोदा गया, लेकिन वह सूखा निकला। अगले साल बाल्डर के इलाके में तेल मिला, लेकिन सरकार और कंपनियों को लगा यहां से तेल काफी चुनौती भरा और खर्चीला है। कुल 36 कुएं खोदे गए, लेकिन किसी में भी तेल नहीं मिला। कंपनियों ने अपना डेरा समेटने का फैसला किया। लेकिन फिलिप्स पेट्रोलियम को अभी एक और कुंआ खोदना बाकी था। 23 दिसंबर 1969, यानी क्रिसमस से 2 दिन पहले। फिलिप्स पेट्रोलियम के आखिरी कुएं से अचानक काला, गाढ़ा और चिपचिपा तरल फूट पड़ा। इंजीनियर समझ गए थे कि उन्हें कामयाबी हाथ लग गई। जिस इलाके में तेल निकला, उसे ‘एकोफिस्क फील्ड’ नाम दिया गया। नॉर्वे के तट से करीब 300 किमी दूर ये फील्ड दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस भंडारों में से एक बना। 1971 से नॉर्वे ने तेल कारोबार शुरू किया। विदेशी कंपनियों ने डेरा डाला। इन्हें खुदाई करने के लिए सरकार से कड़ी शर्तों पर लाइसेंस लेना पड़ता था। सरकार तय करती कि कितना और कब तक तेल निकालेंगे, ताकि पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे। फिर 1972 में नॉर्वे की संसद ने राष्ट्रीय तेल कंपनी बनाई, जिसका नाम रखा- स्टेटऑयल (अब इक्विनोर)। नियम बना कि उत्तरी सागर के किसी भी तेल प्रोजेक्ट में कम से कम 50% की हिस्सेदारी इस सरकारी कंपनी की होगी। नॉर्वे की किस्मत बदल चुकी थी, लेकिन तभी 2 बड़े झटके लगे… पहला झटका: 78% टैक्स लगाकर खजाना भरा, लेकिन महंगाई बढ़ गई दूसरा झटका: तेल की कीमतें गिरीं, तो बैंक बर्बाद हो गए अचानक मिला बहुत सारा पैसा किसी देश के लिए वरदान नहीं, बल्कि अभिशाप बन जाता है। अर्थशास्त्र में इसे 'रिसोर्स कर्स' कहा जाता है। इसी रिसोर्स कर्स को बेअसर करने के लिए नॉर्वे ने कई कदम उठाए। सरकार ने देश के 4 सबसे बड़े बैंकों में से 3 का राष्ट्रीयकरण किया। टैक्स ढांचा बदला। कई सब्सिडी, मुफ्त की सुविधाएं वगैरह बंद कीं। अपना बजट ठीक किया। मई 1990 में नॉर्वे की संसद में एक बिल पास हुआ- गवर्नमेंट पेट्रोलियम फंड एक्ट। इस कानून के मुताबिक, ‘तेल से होने वाली अतिरिक्त कमाई एक अलग फंड में जाएगी, जिसे सरकार खर्च नहीं कर सकती।’ यहीं से जन्म हुआ दुनिया के सबसे बड़े सॉवरेन वेल्थ फंड का, जिसे आज 'गवर्नमेंट पेंशन फंड ग्लोबल' कहा जाता है। हर्मोड स्कैनलैंड, जॉन एम. हार्टविक जैसे अर्थशास्त्रियों की सोच इस कानून का आधार बनी- ‘जो तेल हमें समुद्र के नीचे मिला है, यह हमारी जागीर नहीं है। यह हमारे पूर्वजों की मेहनत और आने वाली पीढ़ियों की अमानत है। तेल आज है, कल खत्म हो जाएगा। इसलिए हमें इस 'काले सोने' (तेल) को 'अमर धन' (फंड) में बदल देना चाहिए। ताकि जब तेल खत्म हो, तब भी हमारी नई पीढ़ियां इसी अमीरी और सुरक्षा के साथ जी सकें।’ 1996 में 400 मिलियन डॉलर फंड में जमा हुए। आज इसमें 2.1 ट्रिलियन डॉलर जमा हैं। इसे संभालने की जिम्मेदारी नॉर्वे की फाइनेंस मिनिस्ट्री के पास है, जो नॉर्वे की संसद के प्रति जवाबदेह है। 1 जनवरी 1998 से इस फंड के ऑपरेशनल काम ‘नॉर्जेस बैंक इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट’ संभाल रहा है, जो नॉर्वे के सेंट्रल बैंक ‘नॉर्जेस बैंक’ का एक डिपार्टमेंट है। इसके दफ्तर ओस्लो, न्यूयॉर्क, लंदन और सिंगापुर जैसे बड़े कारोबारी शहरों में हैं। करीब 700 प्रोफेशनल्स, इकोनॉमिस्ट्स, इंजीनियर्स, फाइनेंस एक्सपर्ट्स वगैरह इस फंड को मैनेज करते हैं। 1. पैसे को देश से बाहर रखो 2. वैल्यू का सिर्फ 3% खर्च करो 3. गड़बड़ जगहों में पैसा मत फंसाओ नॉर्वे के फंड का पैसा निवेश करने के बेहद कड़े नैतिक नियम हैं। सिर्फ मुनाफे के लिए ऐसी कंपनियों में पैसा नहीं लगाया जाता, जो… इन्हीं नियमों का हवाला देते हुए फंड ने भारत के अडाणी समूह की कुछ कंपनियों में पैसा लगाने पर रोक लगाई है… जानकारों को उम्मीद है कि पीएम मोदी के न्योते के बाद नॉर्वे की सरकार भारत की ग्रीन एनर्जी कंपनियों में अपना निवेश बढ़ाएगी। ------------ ये भी खबर पढ़िए…5 देशों से क्या लेकर लौटे पीएम मोदी; UAE तेल रिजर्व भरेगा, नीदरलैंड्स क्रिटिकल मिनरल देगा, मेलोनी से भी डील PM मोदी 15 मई की सुबह नई दिल्ली से UAE के लिए निकले थे। फिर नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे होते हुए इटली पहुंचे। वे 6 दिनों के भीतर 5 देशों का दौरा कर 21 की सुबह दिल्ली लौट आएं। पूरी खबर पढ़िए…
13 अप्रैल, 2026 को यूपी के नोएडा में मजदूरों का हिंसक प्रदर्शन हुआ। इस केस में लखनऊ के जर्नलिस्ट सत्यम वर्मा और नोएडा से एक्टिविस्ट आकृति चौधरी पर NSA लगाया गया है। इन पर सोशल मीडिया पर मजदूरों को भड़काने और विदेशी फंडिंग जैसे आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, यूपी पुलिस ने इस पूरे मामले में जो कहानी बताई है, उसमें कई कमियां भी नजर आ रही हैं। पुलिस की इस थ्योरी में हमें 4 बातें खटक रहीं: 1. आकृति को 11 अप्रैल को ही मेट्रो स्टेशन से गिरफ्तार किया गया, तो उसने 13 अप्रैल को हिंसा कैसे भड़का दी? 2. सत्यम वर्मा को पुलिस लखनऊ से 17 अप्रैल को ले गई, लेकिन गिरफ्तारी 19 अप्रैल को दिखाई गई। सत्यम नोएडा में नहीं थे। पुलिस के संपर्क में थे और उनके कहने पर आर्टिकल भी हटा लिया था। 3. पुलिस ने प्रेस नोट जारी कर दावा किया है कि सत्यम को विदेशों से 1 करोड़ रुपए की फंडिंग मिली है, इससे जुड़े सबूत पुलिस ने कोर्ट में पेश क्यों नहीं किए। 4. FIR में देरी क्यों हुई, एक ही केस में कई FIR क्यों दर्ज की गईं। अब पढ़ें ये गिरफ्तारियां कैसे हुईं और सवाल क्यों उठे…सीन-1तारीख- 10 अप्रैलजगह- जनचेतना पब्लिकेशन हाउस, लखनऊ 65 साल के सत्यम वर्मा दफ्तर में काम कर रहे थे। तभी हसनगंज पुलिस वहां पहुंची और उनसे एक आर्टिकल डिलीट करने को कहा। सत्यम जर्नलिस्ट और एक्टिविस्ट हैं। मजदूरों के अधिकारों के लिए काम करते हैं। उनका ये आर्टिकल मजदूर बिगुल अखबार में छपा था। नोएडा में 9 अप्रैल से मजदूरों का प्रदर्शन चल रहा था। पुलिस को डर था कि इस आर्टिकल से हालात बिगड़ सकते हैं। सत्यम ने पुलिस की बात मान ली और आर्टिकल हटा दिया। करीब 7 दिन बाद हसनगंज पुलिस दोबारा पब्लिकेशन हाउस पहुंची। सत्यम वर्मा और उनकी सहयोगी कात्यायनी सिन्हा को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई। फिर 19 मई को दोनों को अरेस्ट कर लिया। 1 करोड़ के ट्रांजेक्शन के सबूत कोर्ट में क्यों नहीं दिए सत्यम वर्मा के वकील अली जिया कबीर चौधरी का दावा है कि उन्हें अभी तक सिर्फ पुलिस की मीडिया सेल से पता चला है कि NSA लगाया गया है। वे कहते हैं, ‘हमें इससे जुड़े कोई डॉक्यूमेंट नहीं मिले हैं। जबकि कानूनी तौर पर पुलिस को कोर्ट में कागजात पेश कर डिफेंस के वकील को बताना होता है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया।’ विदेशी फंडिंग के आरोप पर कबीर कहते हैं, ‘सत्यम के परिवार ने विदेशी अकाउंट्स से 1 करोड़ रिसीव होने की बात खारिज की है। वो ट्रांसलेटर के तौर पर काम करते हैं, इसलिए मुमकिन है कि विदेशी पब्लिकेशन से पेमेंट आया हो।‘ परिवार ने बताया है कि वो सिर्फ 30 हजार रुपए तक के ट्रांजेक्शन के बारे में जानते हैं। पुलिस ने एक करोड़ रुपए विदेशी फंडिंग को लेकर भी अब तक कोई सबूत कोर्ट में पेश नहीं किया है। वे आगे कहते हैं, ‘पुलिस ने कोर्ट में जो चैट सबूत के तौर पर पेश की है, वो बिगुल ग्रुप की है। इसमें उसी पब्लिकेशन में काम करने वाले कुछ दूसरे जर्नलिस्ट शामिल हैं। इसमें वर्मा अपने सहयोगियों से नोएडा मजदूर प्रोटेस्ट पर बात कर रहे थे। क्या इस बारे में पत्रकार एक-दूसरे से बात नहीं कर सकते, क्या बात करने का मतलब हिंसा भड़काना है।’ 12 मई को यूपी पुलिस ने सत्यम वर्मा और आकृति के खिलाफ NSA लगाया है। गौतमबुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया कि जिन पर NSA लगाया गया है, वो दोनों ना ही मजदूर हैं, ना ही नोएडा में रहते हैं। ये बाहरी हैं, जिन्होंने हिंसा भड़काने की कोशिश की।’ इसके बाद गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट ने 15 मई को बयान जारी कर कहा कि सत्यम के बैंक खाते में 1 करोड़ जमा किए गए। ये रकम डॉलर, पाउंड और यूरो जैसी करेंसी में अन्य देशों से जमा की गईं। दोस्त ने बताया- बिना सर्च वारंट आई थी पुलिस सत्यम वर्मा के साथ काम करने वाली उनकी दोस्त पुलिस पर गलत तरह से कार्रवाई करने का आरोप लगाती हैं। नाम ना लिखने की शर्त पर उन्होंने बताया, ‘पुलिस के पास सिर्फ दफ्तर की एक फ्लोर का सर्च वॉरंट था, लेकिन उन्होंने पूरे दफ्तर की तलाशी ली। उन्होंने सत्यम को गिरफ्तार करने के साथ सभी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी सीज कर लिए। पुलिस ने ना कोई वॉरंट दिखाया, ना डिवाइस के लिए सीजर मेमो दिखाया।’ आकृति की गिरफ्तारी पर क्यों सवाल… सीन-2तारीख- 11 अप्रैलजगह- बोटैनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन, नोएडा 11 अप्रैल को भी एक गिरफ्तारी हुई। ये गिरफ्तारी पुलिस ने नोएडा प्रोटेस्ट के हिंसक होने से दो दिन पहले की थी। यहां से दिल्ली यूनिवर्सिटी में की पूर्व स्टूडेंट आकृति चौधरी को अरेस्ट किया गया। पुलिस ने आरोप लगाया कि वे ‘मजदूर बिगुल दस्ता’ संगठन से जुड़ी हैं। नोएडा पुलिस कथित तौर पर सादी वर्दी में मेट्रो स्टेशन पहुंची। आकृति उस वक्त एक फैक्ट्री मजदूर मनीषा और सॉफ्टवेयर इंजीनियर अदित आनंद के साथ थीं। आकृति की दोस्त प्रियंवदा कहती हैं, ‘पूरे प्रदर्शन के दौरान आकृति मजदूरों से शांतिपूर्ण और अहिंसक प्रदर्शन करने की अपील करती रहीं। इसका वीडियो भी है। उस पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया जा रहा है। आकृति ना सिर्फ पढ़ाई में अच्छी थी, वो देश-दुनिया में चल रहे मुद्दों पर मुखरता से बोलती रही हैं। वो भगत सिंह को आदर्श मानती हैं।’ वहीं उसके साथी चिरांशु ने बताया, ‘हम सब आकृति को 12 अप्रैल से लगातार कॉल करते रहे, लेकिन फोन स्विच ऑफ बताता रहा। फिर पता चला कि उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।’ हिंसा से दो दिन पहले अरेस्ट, फिर कैसे भड़काया वकील कबीर भी कहते हैं कि अगर पुलिस ने आकृति को 11 अप्रैल को ही गिरफ्तार कर लिया था, तो वो 13 अप्रैल को हिंसा कैसे भड़का सकती है। उनका कहना है कि वो जैसे बेल एप्लीकेशन डालते हैं, वैसे पुलिस केस में कुछ नए सेक्शन जोड़ देती है, जिससे केस की सुनवाई में देरी हो रही है। पुलिस ने NSA भी इसलिए लगाया है, ताकि दोनों को जमानत ना मिल सके। उन्हें ज्यादा से ज्यादा दिन जेल में रखा जा सके। डिफेंस वकील कबीर के आरोपों पर बात करने और केस की जांच की डीटेल के लिए हमने नोएडा के एडिशनल सीपी लॉ एंड ऑर्डर राजीव नारायण मिश्रा से संपर्क किया, लेकिन बात नहीं हो सकी। उन्होंने कॉल और वॉट्सएप पर हमारे मैजेस का भी जवाब नहीं दिया। जवाब मिलने पर स्टोरी में शामिल करेंगे। …………………… ये खबर भी पढ़िए… नोएडा में हिंसक प्रदर्शन, 350 फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ नोएडा में 9 अप्रैल से सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे 42 हजार कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। कर्मचारियों ने अलग-अलग इलाकों में फैक्ट्रियों में पथराव, तोड़फोड़ की। कर्मचारियों ने कई गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए और करीब 50 से ज्यादा फूंक दीं। पुलिस की गाड़ियां भी पलट दी। हालात बिगड़े तो कई थानों की फोर्स मौके पर पहुंची। पढ़िए पूरी खबर…
शी चिनफिंग ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ चाय पर चर्चा की
20 मई की शाम को चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने पेइचिंग के जन वृहद भवन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ चाय पर एक चर्चा का आयोजन किया।
चीन और रूस ने मैत्रीपूर्ण सहयोग पर संयुक्त घोषणा जारी की
चीन और रूस ने 20 मई को सर्वांगीण रणनीतिक समंव्य और मजबूत कर अच्छे पड़ोसियों के मैत्रीपूर्ण सहयोग पर संयुक्त घोषणा जारी की।
चीन के खनिज संसाधन कानून के कार्यान्वयन के लिए नियमावली लागू होगा
चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने हाल में राज्य परिषद के आदेश पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत चीन के खनिज संसाधन कानून के कार्यान्वयन के लिए नियमावली 15 जून को लागू होगी।
चीनी वाणिज्य मंत्रालय द्वारा आयोजित एक नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में, प्रवक्ता हे याडोंग ने चीन द्वारा अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद के बारे में सवालों का जवाब देते हुए कहा कि कृषि व्यापार चीन-अमेरिका आर्थिक और व्यापारिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण भाग है।
सर्बिया : चीनी वृत्तचित्रों की स्क्रीनिंग का शुभारंभ बेलग्रेड में हुआ
सर्बियाई राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक की चीन की राजकीय यात्रा से पहले, बेलग्रेड में सर्बिया में चीनी वृत्तचित्रों की स्क्रीनिंग का आयोजन किया गया।
BJP और कांग्रेस ने 2014 में इंस्टाग्राम अकाउंट बनाए। 12 साल में बीजेपी के 88 लाख और कांग्रेस के 1.3 करोड़ फॉलोअर्स हुए हैं। लेकिन महज 5 दिन पहले बनी कॉकरोच जनता पार्टी, यानी CJP ने इन दोनों आंकड़ों को छोटा साबित कर दिया। CJP ने अब तक डेढ़ करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स जुटा लिए हैं। हर घंटे करीब 5 लाख फॉलोअर्स बढ़ रहे हैं। ये प्लेटफॉर्म चीफ जस्टिस सूर्यकांत के उस बयान के बाद खड़ा हुआ, जिसमें उन्होंने बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की थी। क्या है कॉकरोच जनता पार्टी, इसके पीछे किन लोगों का हाथ और क्या वाकई ये पार्टी कोई बड़ा बदलाव ला पाएगी; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: कॉकरोच जनता पार्टी है क्या?जवाबः ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ एक व्यंगात्मक ऑनलाइन कैंपेन है… 21 मई की शाम तक यानी महज 5 दिनों में कॉकरोच जनता पार्टी के इंस्टा फॉलोअर्स ने बीजेपी और कांग्रेस को भी पीछे छोड़ दिया है। CJP के इंस्टाग्राम पर गुरुवार शाम 5 बजे तक 1.49 करोड़ फॉलोअर्स हो गए। जबकि कांग्रेस के करीब 1.33 करोड़, बीजेपी के 88 लाख और AAP के 19 लाख फॉलोअर्स हैं। CJP औपचारिक रूप से चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड राजनीतिक दल नहीं है। इसकी वेबसाइट पर व्यंग्य में लिखा गया है कि ये कॉकरोचिस्तान के नो इलेक्शन कमीशन पर कॉकरोच एक्ट के तहत एक नॉन-रजिस्टर्ड पार्टी है। 30 साल के अभिजीत दीपके ने खुद को इसका फाउंडर बताया है। सवाल-2: अभिजीत दीपके कौन हैं और क्या उनका कोई पॉलिटिकल कनेक्शन है?जवाबः 30 साल के अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के संभाजी नगर के रहने वाले डिजिटल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिजीत ने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। फिलहाल वो अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशन से मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे हैं। अभिजीत 2020 से 2022 तक केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट रहे हैं। 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में अभिजीत AAP के लिए वायरल मीम बेस्ड ऑनलाइन प्रचार का मटेरियल बनाते थे। अभिजीत AAP के IT सेल के चीफ अंकित लाल को रिपोर्ट करते थे। एक इंटरव्यू में अभिजीत ने बताया कि उन्होंने निजी जिंदगी और आर्थिक स्थिरता के लिए AAP छोड़कर बोस्टन यूनिवर्सिटी में अप्लाई किया था। एडमिशन मिल गया, तो वे अमेरिका शिफ्ट हो गए। किसान आंदोलन से लेकर महंगाई जैसे राजनीतिक मुद्दों पर अभिजीत X अकाउंट पर केंद्र सरकार और पीएम पर निशाना साधते रहे हैं। सवाल-3: आखिर इंटरनेट पर लोग कॉकरोच जनता पार्टी को पसंद क्यों कर रहे हैं?जवाबः 3 बड़ी वजहें हैं- 1. सोशल मीडिया पर यूथ से जुड़ी कंटेंट स्ट्रैटेजी 2. CJP के लॉन्च की परफेक्ट टाइमिंग 3. बेरोजगारी के चलते युवाओं में फ्रस्ट्रेशन अभिजीत कहते हैं, मैं ये नहीं कहूंगा कि ये सब मैंने हासिल किया है। यूथ के अंदर कई सालों से जो निराशा और गुस्सा पल रहा है, वही इतने बड़े रिएक्शन की वजह है। सरकार की नाकामियों की वजह से युवा बेरोजगार है। उन्हें एक मंच मिला, जहां पर वो अपनी निराशा और गुस्सा निकाल सकते हैं। सवाल-4: कॉकरोच जनता पार्टी का एजेंडा क्या है?जवाबः CJP का फिलहाल कोई सीरियस घोषित एजेंडा नहीं है। उसने अपने मैनिफेस्टो में 5 वादे किए हैं- सवाल-5: क्या इससे पहले भी ऑनलाइन कैंपेन से पार्टियां बनी हैं, उनका क्या हुआ?जवाबः भारत में अभी तक किसी ऑनलाइन कैंपेन या मूवमेंट से भारत में कोई राजनीतिक पार्टी उभर कर नहीं आई है। हालांकि दुनिया में इसके 3 बड़े उदाहरण हैं… 1. फाइव स्टार मूवमेंट, इटली 2. पोलिश बीयर लवर्स पार्टी, पोलैंड 3. बेस्ट पार्टी, आइसलैंड सवाल-6: क्या वाकई CJP असली पार्टी बनकर कोई बड़ा बदलाव ला पाएगी?जवाबः CJP फिलहाल कोई ऑफिशियली रजिस्टर्ड पॉलिटिकल पार्टी या ऑर्गेनाइजेशन नहीं है। औपचारिक चुनावी राजनीति के लिए CJP को चुनाव आयोग में रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। अभिजीत के बयानों से ऐसा लगता है कि फिलहाल उनका इरादा औपचारिक राजनीतिक दल बनाने का नहीं, बल्कि सरकारी नीतियों को लेकर सरकार के खिलाफ एक्टिविज्म जारी रखने का है। अभिजीत के ये बयान पढ़िए- इधर 21 मई की दोपहर करीब 12 बजे CJP के X अकाउंट पर रोक लगाई गई है। अभिजीत ने कहा है कि जैसी आशंका थी, वैसा ही हुआ। X स्थानीय कानून, कोर्ट के आदेश या कानूनी शिकायत के आधार पर Withhold करने यानी रोक लगाने की कार्रवाई करता है। **** रिसर्च सहयोग- उत्कर्ष राज **** ये खबर भी पढ़ें… CJI सूर्यकांत ने कॅाकरोच वाले बयान पर सफाई दी:कहा- इसे गलत तरीके से पेश किया गया, मैंने फर्जी डिग्रीधारियों की आलोचना की थी चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने शनिवार को अपनी पैरासाइट और कॅाकरोच वाली टिप्पणी पर सफाई दी। उन्होनें कहा कि मीडिया के एक वर्ग ने मेरी टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया। पूरी खबर पढ़ें…
फ्रांस में फिर आमने-सामने हो सकते हैं मोदी और ट्रंप, जी-7 सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय बैठक की तैयारी
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की आखिरी मुलाकात फरवरी 2025 में वॉशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस में हुई थी। उसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले। व्यापारिक मुद्दों, आयात शुल्क और रूस से तेल खरीद जैसे मामलों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद भी सामने आए।
ईरान को कड़ा जवाब: ट्रंप बोले– जरूरत पड़ी तो और सख्ती
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूएस कोस्ट गार्ड अकादमी के दीक्षांत समारोह में छात्रों की तारीफ की
अमेरिका को क्यूबा के राष्ट्रपति ने दिया जवाब, कहा- 'राउल कास्त्रो पर आरोपों का कोई कानूनी आधार नहीं'
क्यूबा के राष्ट्रपति मिगुएल डियाज कैनेल ने अमेरिका के आरोपों के बाद क्यूबा क्रांति के नेता राउल कास्त्रो का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि राउल कास्त्रो के खिलाफ अमेरिकी सरकार की ओर से लगाए गए आरोप एक 'राजनीतिक स्टंट' हैं
साल 2009 के बाद पहली बार रियल मैड्रिड के अध्यक्ष पद के चुनाव में एक से ज्यादा उम्मीदवार हो सकते हैं

