धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होते ही कॉकरोच जनता पार्टी ने आंदोलन खत्म कर दिया, लेकिन विपक्ष ने अपनी रणनीति बदल दी। अब निशाने पर गृहमंत्री अमित शाह हैं। 26 जुलाई को राहुल गांधी ने शाह को चिट्ठी लिखकर दो सवाल पूछे। 27 जुलाई को विपक्षी पार्टियों ने तय किया है कि संसद की कार्यवाही बाधित करेंगे और अमित शाह से जवाब मांगेंगे। आखिर विपक्ष की गृहमंत्री को टारगेट करने की नई स्ट्रैटेजी क्या है, ये कारगर होगी या दांव उल्टा पड़ जाएगा; समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: राहुल गांधी ने गृहमंत्री अमित शाह से क्या सवाल पूछे हैं? जवाब: 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्ट्रैटेजी शिफ्ट का पहला संकेत मिला। राहुल ने धर्मेंद्र प्रधान की बजाए अमित शाह को घेरते हुए कहा- 'याद रहे, प्रदर्शन में किसी छात्र का हाथ टूटा, किसी का पैर, तो किसी की पसली। पेलेट गन जैसे जानलेवा हथियार का इस्तेमाल किया गया, तो कई चोट खाकर क्रिटिकल हो गए। इन सबके सीधे जिम्मेदार गृह मंत्री अमित शाह हैं।' राहुल गांधी ने अमित शाह को चिट्ठी लिखकर 2 सवाल पूछे- लंबे वक्त से कांग्रेस कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार आदेश रावल के मुताबिक, ' राहुल गांधी गृहमंत्री अमित शाह से मांग रहे हैं। यानी वे बोल रहे हैं कि गृहमंत्री के निर्देश पर छात्रों पर लाठी और पैलेट गन चलाई गई। सवाल-2: संसद के लिए विपक्ष ने क्या रणनीति बनाई है? जवाब: गृहमंत्री अमित शाह को घेरना विपक्ष की एक साझा रणनीति है, सोमवार यानी 27 जुलाई को इसके 6 साफ संकेत मिले… 1. सदन शुरू होते ही हंगामा: सुबह 11 बजे सदन शुरू होते ही विपक्ष छात्रों से मारपीट के मुद्दे पर चर्चा के लिए अड़ गया। लोकसभा स्पीकर ने 4 बार सदन की कार्रवाई स्थगित की। सिवाए एक बिल पेश होने के अलावा लोकसभा में और कोई चर्चा नहीं हुई। 2. दोनों सदनों में स्थगन प्रस्ताव: लोकसभा में कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल और हिबी ईडन ने स्थगन प्रस्ताव के लिए नोटिस दिया। राज्यसभा में रेणुका चौधरी ने भी चर्चा के लिए नोटिस दिया। 3. सदन के बाहर प्रदर्शन: सदन के बाहर कांग्रेस सांसदों न मार्च निकाला और नारे लगाए, 'अमित शाह जवाब दो, जवाब दो।' 4. सोशल मीडिया पर पोस्ट: विपक्षी नेता सोशल मीडिया पर भी अमित शाह से जवाब मांग रहे हैं। ऑल इंडिया महिला कांग्रेस ने X पर ट्वीट किया 'अमित शाह जवाब दो - लाठी का हिसाब दो' 5. मीडिया में बयानबाजी: TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, 'CRPF की रैपिड एक्शन फोर्स और दिल्ली पुलिस दोनों अमित शाह को रिपोर्ट करते हैं। या तो अमित शाह ने खुद ऑर्डर दिए हैं। या उनके विभाग से किसने ऑर्डर दिए हैं, इसका भी वे जवाब दें।' 6. खड़गे के कमरे में बैठक : यह सब सुबह सदन शुरु होने से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कमरे में विपक्षी दलों की बैठक के बाद शुरू हुआ। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें संसद की कार्रवाई को बाधित करने और अमित शाह से जवाब मांगने की रणनीति तय हुई है। दरअसल, देश की राजधानी होने के नाते दिल्ली पुलिस और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी एजेंसी होने के नाते रैपिड एक्शन फोर्स यानी RAF केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है। 20 जुलाई का संसद मार्च संभालने यही दोनों बल तैनात थे। पॉलिटिकल एक्सपर्ट रशीद किदवाई कहते हैं, 'नीट पेपर लीक के मामले में कांग्रेस के लिए अब ज्यादा राजनीतिक लाभ बचा नहीं, लेकिन आंदोलन के दौरान लाठीचार्ज और बल प्रयोग से युवाओं में एक सेंटिमेंट है। कांग्रेस अब युवाओं का आक्रोश अमित शाह की तरफ डायवर्ट करने की कोशिश हो रही है, क्योंकि वे बीजेपी में अघोषित तौर पर नंबर-2 हैं।' सीनियर जर्नलिस्ट नीरज चौधरी बताती हैं, ‘अभी सरकार पर प्रेशर का एक मोमेंटम बना हुआ है। विपक्ष चाहता है कि इस सेंटिमेंट को और भुनाया जाए और सरकार को घेरा जाए। जवाबदेही तय की जाए।’ सवाल-3: मोदी सरकार की काउंटर स्ट्रैटेजी क्या है? जवाब: सरकार की काउंटर स्ट्रैटेजी इन तीन कदमों से समझिए… रशीद किदवाई बताते हैं कि सरकार चाहती है कि किसी भी तरह से संसद में चर्चा शुरू हो और इसमें सरकार का फायदा ही है। क्योंकि उसके पास दर्जनों अच्छे वक्ता हैं, जो विपक्ष पर भारी पड़ सकते हैं। ऐसे में विपक्ष केवल हल्ला-हंगामा करके वॉकआउट कर सकता है। सीनियर जर्नलिस्ट हर्षवर्धन त्रिपाठी मनाते हैं कि सरकार कतई नहीं चाहेगी कि ऐसा ऑप्टिक्स बने कि वो विपक्ष या कांग्रेस के सामने झुक गई। मानसून सत्र के पहले हफ्ते में कुछ खास नहीं हुआ है। ऐसे में सरकार पूरी कोशिश करेगी कि गतिरोध टूटे और संसद में चर्चा हो। सरकार दिखाना चाहती है कि प्रदर्शनकारी छात्र पीएम मोदी के फैसलों के बाद खुश हैं। बीजेपी सांसद राहुल सिन्हा ने कहा, ‘जो छात्र प्रदर्शन कर रहे थे, वे प्रधानमंत्री को आशीर्वाद देते हुए खुशी-खुशी वहां से चले गए। लेकिन कांग्रेस इस मुद्दे को जिंदा रखने की कोशिश कर रही है। उन्हें संसद में आने वाले विधेयक पर बोलना चाहिए। कांग्रेस बोलने से डरती है, क्योंकि इससे उनका पर्दाफाश हो जाएगा।’ सवाल-4: क्या विपक्ष का शाह को घेरने वाला दांव उल्टा भी पड़ सकता है?जवाबः इस स्ट्रैटेजी के दो पहलू हैं और दोनों तरफ के तर्क मजबूत हैं। ये किस करवट बैठेगी, ये जनता के परसेप्शन से तय होगा… यानी विपक्ष की बाजी इस बात पर टिकी है कि जनता के बीच छात्रों पर हुए एक्शन का गुस्सा अभी ठंडा हुआ है या नहीं। अगर सेंटिमेंट अभी भी गर्म है, तो अमित शाह को घेरना कारगर हो सकता है। अगर सरकार का ‘मसला सुलझ गया’ वाला नैरेटिव हावी हो गया, तो विपक्ष की रणनीति खुद उसके लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है। सवाल-5: इन सबके बीच कॉकरोच जनता पार्टी का रुख क्या है? जवाब: फिलहाल CJP ने छात्रों पर कार्रवाई को लेकर गृहमंत्री अमित शाह से कोई सवाल नहीं पूछे हैं। विपक्ष की स्ट्रैटेजी पर भी CJP की तरफ से कोई समर्थन या विरोध सामने नहीं आया है। CJP ने बार-बार अपने प्रदर्शन को गैर-राजनीतिक बताया और कहा कि हम सभी से अपील करते हैं कि वो हमारा साथ दें, भले ही आप बीजेपी से जुड़े हों। राहुल गांधी ने भी इस पूरे वाकये में एक भी बार CJP और अभिजीत दीपके का नाम नहीं लिया। 26 जुलाई को CJP प्रवक्ता सौरव दास ने बयान जारी किया कि सरकार अपने वादे पूरे करे कि प्रदर्शन की वजह से किसी छात्र पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। जिनके खिलाफ केस दर्ज हुए हैं, उन्हें वापस लिया जाएगा। 27 जुलाई को सौरव दास ने सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि देश भर में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज केसों को ट्रैक कर रहे हैं और उन्हें मदद पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। ----------- ये खबर भी पढ़िए… क्या पॉलिटिकल पार्टी बनाएंगे 'कॉकरोच' या मूवमेंट जारी रखेंगे; अभिजीत दीपके का आगे का प्लान क्या, फ्यूचर के 3 सिनैरियो 6 जून 2026, अभिजीत दिपके पहली बार लंदन से दिल्ली एयरपोर्ट उतरे और सीधे जंतर-मंतर प्रोटेस्ट साइट पहुंचे। 20 जून को दोबारा प्रोटेस्ट पर बैठे, तो 36 दिन के बाद 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर उठे। जंतर-मंतर से जाते-जाते कॉकरोच पार्टी ने प्रोटेस्टर्स से कहा- ‘जल्दी दोबारा मिलेंगे।’ पूरी खबर पढ़िए
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के रणक्षेत्र से इस वक्त की सबसे बड़ी और संवेदनशील भू-राजनीतिक खबर सामने आ रही है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समुद्री व्यापारिक मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को बंद करने की धमकी देने वाले ईरान के कड़े तेवर अब पूरी तरह ढीले पड़ते नजर आ रहे हैं। वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई चेन को बंधक बनाकर दुनिया को डराने की कोशिश कर रहा तेहरान खुद अपने ही बुने चक्रव्यूह में बुरी तरह फंस गया है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और वैश्विक ताकतों की सख्त सैन्य घेराबंदी के बाद अब ईरान कूटनीतिक मोर्चे पर बैकफुट पर आ गया है और दुनिया भर में अलग-थलग पड़ने के बाद उसकी छटपटाहट साफ देखी जा सकती है।क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और क्यों इस पर अड़ा था ईरान?भौगोलिक और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को आपस में जोड़ता है। दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी संकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान लंबे समय से इस रास्ते पर अपना नियंत्रण होने का दावा करता रहा है और जब भी उस पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता है, वह इसे बंद करने की धमकी देने लगता है। इस बार भी ईरान ने अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करते हुए इस रूट को ब्लॉक करने की कोशिश की थी, ताकि भारत, चीन और यूरोपीय देशों समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को घुटनों पर लाया जा सके।वैश्विक ताकतों की जवाबी कार्रवाई से कैसे पस्त हुआ तेहरान?ईरान की इस आक्रामक रणनीति का मुकाबला करने के लिए इस बार अमेरिका, ब्रिटेन और उनके सहयोगी देशों ने बिना कोई वक्त गंवाए एक साझा नौसैनिक टास्क फोर्स को ओमान की खाड़ी में तैनात कर दिया। अंतरराष्ट्रीय नौसेना की इस भारी मौजूदगी और अत्याधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम की तैनाती ने ईरान की नौसैनिक घेराबंदी को पूरी तरह नाकाम कर दिया। इसके साथ ही, ईरान पर लगे नए आर्थिक और तकनीकी प्रतिबंधों ने उसकी घरेलू अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। अपनी ही धमकियों के जाल में घिरने और चौतरफा मार झेलने के बाद अब ईरानी प्रशासन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर राहत की गुहार लगाता हुआ दिख रहा है।भारतीय बाजार और कच्चे तेल की कीमतों पर क्या होगा इसका असर?स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव कम होने और ईरान के बैकफुट पर आने की खबर से भारतीय तेल कंपनियों और घरेलू बाजार ने बड़ी राहत की सांस ली है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा इसी रूट के जरिए आयात करता है। रक्षा और बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान इस रास्ते को बंद करने में कामयाब हो जाता, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती थीं, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छूने लगते। ईरान के शांत होने से अब सप्लाई चेन सुचारू रूप से चलने की उम्मीद जगी है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौटेगी।
हिज्बुल्लाह का साथ देना ईरान की रणनीतिक नीति का हिस्सा: मोजतबा खामेनेई
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह सैयद मोजतबा हुसैनी खामेनेई ने हिज्बुल्लाह के महासचिव शेख नईम कासिम को लिखे एक पत्र में कहा कि हिज्बुल्लाह के लिए ईरान का समर्थन एक 'रणनीतिक जिम्मेदारी' है।
जर्मनी की राजधानी बर्लिन में आयोजित 'बर्लिन प्राइड' परेड के दौरान एक भीषण और जानलेवा हमला हुआ, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। शनिवार रात प्राइड के समापन संगीत कार्यक्रम के पास एक तेज रफ्तार सफेद रंग की वैन अचानक भीड़ में जा घुसी, जिससे एक महिला की दर्दनाक मौत हो गई और 29 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। वैन से टक्कर मारने के बाद आरोपी ने धारदार हथियार से भी कई लोगों पर ताबड़तोड़ हमले किए। इस सनसनीखेज घटना के बाद करीब 24 घंटे तक चले बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान के बाद, रविवार को शहर के बाहरी इलाके में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में मुख्य संदिग्ध मारा गया।इस्लामिक स्टेट (IS) से जुड़े तार और लेबनीज मूल का हमलावरअधिकारियों ने खुलासा किया है कि बर्लिन प्राइड हमले का मुख्य संदिग्ध अब्दुल बल्लूट था, जो लेबनानी मूल का जर्मन नागरिक था। जांच में यह बात सामने आई है कि यह संदिग्ध पहले भी इस्लामिक स्टेट (आईएस) आतंकवादी समूह में शामिल होने की कोशिश कर चुका था। घटना के तुरंत बाद जर्मन अभियोजकों ने उसका 'वॉन्टेड' नोटिस जारी किया था और जनता के लिए चेतावनी जारी की थी कि आरोपी अत्यधिक खतरनाक और हथियारबंद है, इसलिए उसके करीब न जाएं। जर्मनी के गृह मंत्री अलेक्जेंडर डोब्रिंट ने इस पूरे घटनाक्रम को एक सुनियोजित 'इस्लामी आतंकी हमला' करार दिया है। उन्होंने बताया कि संदिग्ध पहले भी कई आपराधिक मामलों में शामिल रहा है और राजधानी में सक्रिय कट्टरपंथी व इस्लामी चरमपंथी समूहों के संपर्क में होने के कारण सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर था।टियरगार्टन पार्क के पास मचा कोहराम, चांसलर और मेयर ने की घटना की निंदायह खूनी खेल शनिवार रात करीब 10 बजे टियरगार्टन पार्क के पास हुआ, जो उस मार्ग के नजदीक है जहां से कुछ समय पहले ही यूरोप के सबसे बड़े LGBTQ+ आयोजनों में शुमार 'क्रिस्टोफर स्ट्रीट डे' यानी बर्लिन प्राइड मार्च गुजरा था। बेकाबू वैन कई लोगों को कुचलते हुए अंत में एक पेड़ से जा टकराई। इस दर्दनाक हादसे के बाद पुलिस ने तुरंत सोशल मीडिया के जरिए घटनास्थल को खाली करने की अपील की ताकि राहत और बचाव कार्य तेजी से चलाए जा सकें। बर्लिन के मेयर काई वेगनर ने इस घटना को जर्मनी के स्वतंत्र और उदार समाज पर सीधा हमला बताया है। वहीं, जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे समय में संयम बनाए रखें और समाज में डर व आपसी फूट पैदा करने वाली ताकतों के खिलाफ एकजुट रहें।
पश्चिम एशिया में सुलग रहे महासंग्राम के बीच ईरान की तरफ से एक बेहद कड़ा और बड़ा बयान सामने आया है। ईरान के सर्वोच्च नेता (सुप्रीम लीडर) मोजतबा खामेनेई ने लेबनान के सक्रिय संगठन हिजबुल्लाह की खुलकर सराहना की है और उसे इजरायल के खिलाफ मोर्चे पर डटी हुई एक मजबूत चट्टान करार दिया है। मोजतबा खामेनेई ने साफ शब्दों में अमेरिका और इजरायल को चेतावनी देते हुए कहा है कि जब तक लेबनान के खिलाफ इजरायली हमले पूरी तरह नहीं रुकते, तब तक क्षेत्र में किसी भी प्रकार का युद्धविराम समझौता मुमकिन नहीं है। खामेनेई का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब वैश्विक कूटनीति के स्तर पर लेबनान में शांति स्थापित करने और हिजबुल्लाह के भविष्य को लेकर बैठकों का दौर जारी है।एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस और हिजबुल्लाह की रीढ़ बना ईरानअंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकारों के मुताबिक, हिजबुल्लाह ईरान के 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' (प्रतिरोध की धुरी) का सबसे मजबूत और अहम हिस्सा है। यह ईरान समर्थित उन सशस्त्र समूहों का नेटवर्क है, जिसे पश्चिम एशिया में अमेरिका और इजरायल के प्रभाव को चुनौती देने के लिए तैयार किया गया है। ईरान की तरफ से इन संगठनों को भारी मात्रा में आर्थिक मदद, आधुनिक हथियार और रणनीतिक ट्रेनिंग दी जाती है। लेबनान के हिजबुल्लाह के अलावा यमन के हुती विद्रोही और इराक के कई लड़ाका समूह इसी नेटवर्क का हिस्सा हैं, जो ईरान के साए में पश्चिम एशिया की भू-राजनीति को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहे हैं।'अब सिर्फ जिहाद और प्रतिरोध ही बचा है रास्ता'हिजबुल्लाह प्रमुख शेख नइम कासिम द्वारा भेजे गए वफादारी पत्र का जवाब देते हुए ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक के बाद एक कई संदेश साझा किए। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में इजरायल के खिलाफ मुकाबले के लिए 'जिहाद और प्रतिरोध' के अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। खामेनेई ने हिजबुल्लाह के दिवंगत पूर्व प्रमुख सैयद हसन नसरल्लाह और जंग में मारे गए अन्य कमांडरों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि इन बहादुर लड़ाकों के बलिदान ने ही इस संगठन को एक छोटे से पौधे से बदलकर आज एक विशाल पेड़ के रूप में खड़ा किया है। उन्होंने दक्षिणी लेबनान की आम जनता के धैर्य और साहस की भी जमकर प्रशंसा की।अमेरिका और ट्रंप प्रशासन के सामने रखी गई ईरान की कड़ी शर्तमोजतबा खामेनेई की यह आक्रामक टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन के बीच हुई हाई-प्रोफाइल मुलाकात के तुरंत बाद आई है। व्हाइट हाउस में हुई इस बैठक के दौरान लेबनानी क्षेत्र से इजरायली सेना की पूर्ण वापसी, हिजबुल्लाह को हथियार मुक्त करने और लेबनानी सेना को अमेरिकी मदद देने जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा हुई थी। इसके जवाब में ईरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका के साथ किसी भी संभावित समझौते की सबसे बड़ी शर्त लेबनान पर इजरायली हमलों पर तत्काल रोक लगाना होगी। ईरान के इस रुख से साफ है कि पश्चिम एशिया का यह संकट आने वाले दिनों में और अधिक गहरा सकता है, जिससे वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगियों पर मानवाधिकार विभाग सख्त, पाकिस्तान से जवाब मांगा
एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने चार बलूच लोगों के जबरन गायब किए जाने की निंदा की। संगठन ने आरोप लगाया कि ये लोग पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों की कार्रवाई के बाद लापता हुए।
रूस ने सुपरमार्केट पर ड्रोन हमला कर आम नागरिकों को बनाया निशाना, बच्चे समेत दो की मौत: जेलेंस्की
यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि रूस लगातार आम नागरिकों को निशाना बनाकर खुद को जीता हुआ महसूस करता है। उन्होंने इन हमलों को जानबूझकर किया गया आतंक करार दिया।
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को ईरानी व्यापारिक जहाज पर हमले का दोषी ठहराते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी।
बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप जारी, चार और बच्चों की मौत; मृतकों की संख्या बढ़कर 820 हुई
बांग्लादेश में खसरे (मीजल्स) का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। रविवार सुबह 8 बजे (स्थानीय समय) तक पिछले 24 घंटों में खसरे जैसे लक्षणों वाले चार और बच्चों की मौत हो गई। इसके साथ ही देश में खसरे से जुड़ी पुष्टि और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या बढ़कर 820 हो गई है।
दिल्ली का जंतर-मंतर। सुरक्षाकर्मियों से एक लड़की कहती है- पुलिस अंकल, पुलिस अंकल वास्तेगुना हुइंया! इसके बाद वहां मौजूद पूरा ग्रुप जोर-जोर से हंसने लगता है। पुलिस भी ठिठक जाती है कि ये कोई गाली थी या देशविरोधी नारा? आखिर इस पर एक्शन क्या ले? ये वायरल रील जंतर-मंतर समेत देशभर में फैले जेन-जी आंदोलन का लिटमस टेस्ट है। ‘वास्तेगुना हुइंया’ की तरह ये आंदोलन भी मोदी सरकार की समझ से परे था। न ‘हिंदू-मुस्लिम’ चला, न एंटी-नेशनल एंगल। न विदेशी फंडिंग के आरोप कारगर हुए, न ही कोई ऐसा चेहरा, जिसे दबाने से आंदोलन खत्म हो जाए। आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना ही पड़ा। अनोखा क्यों था ये जेन-जी आंदोलन और इन पर क्यों नहीं चला कोई तिकड़म; मंडे मेगा स्टोरी में पूरी कहानी… आखिर जेन-जी आंदोलन के सामने सरकार को क्यों झुकना पड़ा… **** ग्राफिक्स: द्रगचंद्र भुर्जी ---------------------------- ये खबर भी पढ़िए… बिना संबंध बनाए भी बच्चे पैदा कर लेती है कॉकरोच:सिर कटने पर भी कैसे जिंदा रहते हैं, डायनासोर से भी सीनियर; कॉकरोच के किस्से कॉकरोच जनता पार्टी की वेबसाइट, X अकाउंट और इंस्टाग्राम अकाउंट सभी हैक और डाउन हो गए, तो फाउंडर अभिजीत दीपके ने लिखा- ‘कॉकरोच कभी मरते नहीं।’बात सच भी है। कॉकरोच इस दुनिया में डायनासोर से भी पहले आए। सिर कट जाए, हफ्तों खाना न मिले फिर भी जिंदा रहते हैं। बिना नर के भी बच्चा पैदा कर सकते हैं। पूरी खबर पढ़िए…
रामजन्मभूमि पर नवंबर 2019 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से दो रास्ते निकले थे। विवादित 2.77 एकड़ जमीन रामलला को मिली और बाबरी की जगह नई मस्जिद के लिए अयोध्या से 25 किलोमीटर दूर धन्नीपुर में 5 एकड़ जमीन दी गई। राम मंदिर का निर्माण लगभग पूरा हो गया है। धन्नीपुर में मस्जिद की ईंट तक नहीं रखी गई। मस्जिद के लिए मिली जमीन पर घास उग आई है, चारों ओर तारबंदी है और बच्चे क्रिकेट खेल रहे हैं। यहां मस्जिद के साथ अस्पताल और म्यूजियम बनना था। 300 करोड़ रुपए की जरूरत थी, लेकिन सिर्फ डेढ़ करोड़ रुपए चंदा मिल पाया। जरूरी सरकारी मंजूरियां न मिलने से काम शुरू ही नहीं हो पाया। अब ट्रस्ट छोटी मस्जिद बनाने की तैयारी में है। धन्नीपुर के लोग मस्जिद बनने की उम्मीद छोड़ चुके हैं। वे कहते हैं- अल्लाह की मर्जी होगी, तो बन जाएगी। जमीन पर सिर्फ बोर्ड, कब्जा न हो जाए इसलिए तारबंदी अयोध्या-लखनऊ हाईवे छोड़ते ही धन्नीपुर गांव की सड़क शुरू होती है। कुछ मिनट बाद बाईं तरफ लोहे की फेंसिंग से घिरी मस्जिद की जमीन दिखती है। अंदर कोई मशीन नहीं, कोई मजदूर नहीं। सिर्फ खाली मैदान। करीब तीन हजार की आबादी वाले धन्नीपुर में 60% मुस्लिम आबादी है। ज्यादातर लोग मस्जिद पर बात करने से बचते हैं। महिलाएं तो बिल्कुल नहीं बोलतीं। मस्जिद की जमीन से सटी चाय की दुकान पर कुछ लोग अखबार पढ़ रहे थे। मस्जिद के बारे में पूछने पर एक-दूसरे को देखने लगे। एक बुजुर्ग मुस्कुराते हुए बोले, ‘हम खेती-किसानी वाले लोग हैं। यहां जानवर चराने आते हैं। मस्जिद कब बनेगी, कौन बनाएगा, ये तो लखनऊ और दिल्ली वाले जानें।’ नाम पूछने पर बुजुर्ग ने जवाब दिया- रहने दीजिए, हम इस मसले से दूर ही रहना चाहते हैं। खाली पड़ी जमीन के ठीक सामने माजिद खान का घर है। वे बात करने के लिए तैयार हो गए। बोले, ‘सुप्रीम कोर्ट के फैसले से धन्नीपुर के लोग खुश थे। न्यूज से पता चला कि मस्जिद के साथ मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भी बनेगा।' 'गांव के आसपास 30 किमी तक अच्छा अस्पताल नहीं है। सीरियस केस में इलाज के लिए 150 किमी दूर लखनऊ जाना पड़ता है। मस्जिद बन जाती तो गांव में इलाज मिलता। बच्चे पढ़ पाते और काम मिलता, लेकिन कुछ नहीं हुआ।’ आखिर सात साल में मस्जिद क्यों नहीं बन पाई पहली वजह: फंड नहीं है नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर फैसला सुनाते हुए सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को अयोध्या में नई मस्जिद बनाने का आदेश दिया था। अयोध्या की विवादित 2.77 एकड़ जमीन हिंदू पक्ष को मिली। मस्जिद बनाने के लिए अयोध्या से 25 किमी दूर जमीन धन्नीपुर गांव में दी गई। 3 अगस्त, 2020 को फैजाबाद DM अनुज कुमार झा ने जमीन वक्फ बोर्ड को सौंप दी। मस्जिद बनाने के लिए इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन बनाया गया। अगस्त 2021 में फाउंडेशन ने लोगों से मदद की अपील की। बैंक अकाउंट की डिटेल पब्लिक की। नवंबर, 2022 तक ट्रस्ट को देशभर से करीब 40 लाख रुपए डोनेशन मिला। इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन के चेयरमैन जुफर अहमद फारूकी कहते हैं, ‘5 साल में हम बमुश्किल 1.5 करोड़ रुपए ही जुटा पाए हैं। इतने में बड़ी मस्जिद बना पाना मुमकिन नहीं है। हमने सोचा है कि पब्लिक के पास न जाकर अपने लोगों से 5 करोड़ रुपए जुटाएं और कम से कम छोटी मस्जिद का काम शुरू कर दें।’ पेशे से जर्नलिस्ट अरशद खान मस्जिद के काम से शुरुआत से जुड़े हैं। वे कहते हैं, ‘पहले लोगों में मस्जिद को लेकर जोश था। 21 हजार रुपए का पहला चंदा लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रोहित श्रीवास्तव ने दिया। फैजाबाद के DM रहे अनुज कुमार झा ने जमीन दिलवाने में मदद की। इसके बाद जैसे-जैसे वक्त बीता, काम रुक गया।’ हमने पहला दान देने वाले लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रोहित श्रीवास्तव से बात की। वे मस्जिद न बनने से नाराज हैं। कहते हैं, ‘अफसोस होता है कि मैंने जिस चीज के लिए चंदा दिया, उस पर आज तक काम शुरू नहीं हो पाया। मैं अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन के लिए जाता हूं, तो धन्नीपुर गांव जरूर जाता हूं। हर बार मुझे वहां खाली जमीन ही नजर आती है।’ दूसरी वजह: लोगों का जुड़ाव नहींधन्नीपुर की शाहगदा शाह मजार पर 'मोहम्मद-बिन-अब्दुल्लाह' मस्जिद की फोटो वाले पोस्टर चिपकाए गए थे। इनमें अंग्रेजी में लिखा गया- A MASTERPIECE IN MAKING यानी एक नायाब मस्जिद तैयार हो रही है। धन्नीपुर के लोग खुश थे कि गांव में देश की सबसे चर्चित मस्जिद बनेगी। धीरे-धीरे वक्त बीतता गया, लेकिन काम शुरू नहीं हो पाया। मजार पर चिपके पोस्टर हटा दिए गए। इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन के चेयरमैन जुफर अहमद फारूकी कहते हैं, 'अफसोस है कि अयोध्या में बनने वाली मस्जिद अब वैसी नहीं बन पाएगी, जैसा हमने सोचा था। फैजाबाद और अयोध्या के लोगों, खासकर मुस्लिम समुदाय ने भी इसमें इंट्रेस्ट नहीं दिखाया।’ जर्नलिस्ट अरशद खान बताते हैं, ‘नई इबादतगाह अयोध्या से दूर है। इसलिए मुसलमान खुद को इससे कनेक्ट नहीं कर पाए। अगर इसके लिए अयोध्या में जमीन मिलती तो सूरत कुछ और होती।' 'सुप्रीम कोर्ट के फैसले में भी साफ कहा गया था कि मस्जिद की जमीन अयोध्या के मुख्य स्थान पर होगी। (MOSQUE WILL BE CONSTRUCTED AT PROMINENT PLACE OF AYODHYA) हमें शहर से 25 किलोमीटर दूर जमीन मिली। वहां जाने का रास्ता बहुत संकरा है। इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। लोग इतनी दूर क्यों नमाज पढ़ने जाएंगे।’ तीसरी वजह: अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी की मंजूरी नहींअरशद खान आगे कहते हैं, ‘ट्रस्ट बना, तब टीम अच्छी थी। अतहर हुसैन सेक्रेटरी थे। लखनऊ के सीनियर एडवोकेट इमरान अहमद शिबली मेंबर थे। मैं था, राशिद मोहम्मद साहब थे। हम लोगों ने मस्जिद बनवाने के लिए बहुत मेहनत की। नया नक्शा बनाया। उस वक्त अयोध्या जिला प्रशासन ने काफी सपोर्ट किया। हमें मस्जिद के लिए जरूरी NOC नहीं मिली।’ ‘ट्रस्ट के चेयरमैन जुफर अहमद फारुकी ने बताया था कि मुंबई के बड़े बिजनेसमैन हाजी अराफात शेख धन्नीपुर आएंगे और मस्जिद-अस्पताल का काम शुरू होगा। हाजी साहब ने बताया कि मस्जिद बनने से पहले मक्का-मदीना से ईंटें आएंगी, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं हुआ। हमने चेयरमैन से भी कॉन्टैक्ट किया, लेकिन उनका फोन नहीं उठता। वे कई साल से आउट ऑफ कॉन्टैक्ट हैं। हमने अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी में नक्शा जमा किया था, वो भी निरस्त हो गया।’ नक्शा क्यों रिजेक्ट हो गया, इस पर हमने ट्रस्ट और अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी में बात की। पता चला कि इसके पीछे सियासी रुकावट नहीं, बल्कि कागजी पेचीदगियां हैं। कोई संस्था नॉर्मल बिल्डिंग के बजाय बड़ा पब्लिक कॉम्प्लेक्स बनाती है, तो इसके लिए नियम बहुत सख्त हो जाते हैं। इसकी प्रोसेस को तीन पॉइंट्स में समझिए… 1. लैंड यूज के कागजों में बार-बार बदलाव किसी भी बड़े निर्माण के लिए लोकल डेवलपमेंट अथॉरिटी (इस मामले में ADA) से ऑनलाइन और ऑफलाइन मंजूरी लेनी होती है। सबसे पहले जमीन का लैंड यूज देखा जाता है। इससे पता चलता है कि जमीन किस काम के लिए है। खेती की जमीन पर कॉमर्शियल या संस्थागत निर्माण नहीं हो सकता। सरकार ने कृषि भूमि दी, तो पहले उसका लैंड यूज बदलकर उसे संस्थागत करना पड़ा। इससे प्रोजेक्ट बनने में देरी हुई। 2. अथॉरिटी की तरफ से NOC न मिलना नक्शा पास होने से पहले PWD, प्रदूषण नियंत्रण विभाग, अग्निशमन विभाग, सिंचाई, नगर निगम जैसे विभागों से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना होता है। अब तक मस्जिद कमेटी को इन विभागों से NOC नहीं मिली है। अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी के सेक्रेटरी आरके मिश्रा बताते हैं कि किसी भी बड़े निर्माण से पहले जमीन के मालिक को अलग-अलग विभाग की NOC लेनी पड़ती है। इसमें ये होता है कि बिल्डिंग कितनी ऊंची होगी। फायर सिस्टम कैसा होगा। इंफ्रास्ट्रक्टर कैसा है। ये सब मानक के हिसाब से होता है, तो अथॉरिटी NOC देती है। मस्जिद कमेटी ने NOC क्लीयर करने के लिए भी एप्लीकेशन नहीं दी है।' 3. ले-आउट और डेवलपमेंट चार्ज का पेमेंट न होना NOC मिलने के बाद अथॉरिटी के इंजीनियर नक्शे की जांच करते हैं कि सड़क कितनी चौड़ी है, भूकंप झेलने की क्षमता क्या है। इसके बाद डेवलपमेंट चार्ज जमा करना पड़ता है और नक्शा पास हो जाता है। ADA के मुताबिक, मस्जिद कमेटी को अभी 1.22 करोड़ रुपए डेवलपमेंट चार्ज जमा करना है। सभी जरूरी डॉक्यूमेंट पूरे होने पर ही कंस्ट्रक्शन शुरू हो सकेगा। 23 जून, 2021 को मस्जिद ट्रस्ट ने नक्शे की मंजूरी के लिए आवेदन किया था। बाद में नक्शा वापस ले लिया। 2023 में नक्शे में छोटी मस्जिद के साथ कुछ बदलाव कर फिर से अप्लाई किया। सितंबर 2025 तक ट्रस्ट ने NOC नहीं ली और जरूरी डॉक्यूमेंट पोर्टल पर अपलोड नहीं करवाए। इससे उनकी एप्लिकेशन रिजेक्ट हो गई है। हमने मस्जिद कमेटी के जनरल सेक्रेटरी अतहर हुसैन से पूछा कि 2024 के बाद नक्शे के लिए क्यों अप्लाई नहीं किया गया? उन्होंने जवाब दिया- प्रोजेक्ट के हिसाब से जितने फंड की उम्मीद की थी, उसे जुटा नहीं पाए। यही वजह है कि हम नए नक्शे पर आगे बढ़ने से पहले फंड इकट्ठा कर लेना चाहते हैं। छोटी मस्जिद बनाने लायक रकम जुट जाएगी तो हमारे चैयरमैन नक्शे के लिए एप्लीकेशन फाइल करेंगे। बाबरी केस के पक्षकार बोले- ट्रस्ट ही नहीं चाहता कि मस्जिद बने राम जन्मभूमि मंदिर के गेट नंबर 11 के सामने बाबरी मस्जिद का केस लड़ने वाले इकबाल अंसारी का घर है। मस्जिद का काम बार-बार अटकने पर इकबाल कहते हैं, ‘देखिए, मस्जिद की जमीन सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को मिली है। उसके चेयरमैन ने अपना प्राइवेट ट्रस्ट बनाया है।’ इकबाल अंसारी के अलावा जर्नलिस्ट अरशद खान ने भी ट्रस्ट पर सवाल उठाए थे। इसके जवाब में मस्जिद कमेटी के जनरल सेक्रेटरी अतहर हुसैन कहते हैं, ‘इकबाल अंसारी इस प्रोजेक्ट पर क्या सोचते हैं और क्या कह रहे हैं, इस पर कोई कमेंट नहीं करना है। अरशद खान हमारी टीम के सबसे पुराने सदस्यों में से एक रहे हैं। उन्होंने शुरुआती दौर में फंड कलेक्शन से लेकर मस्जिद में म्यूजियम बनाने का प्लान तैयार किया।’ ‘ये सच है कि वक्त बीतने के साथ हमारी टीम के सामने कई रुकावटें आईं, इससे सदस्यों के बीच बातचीत भी कम हो गई। मैं आपको यकीन दिलाता हूं कि हम जल्द ही नए प्लान के साथ जमीन पर उतरने वाले हैं।’ ……………. ये खबर भी पढ़ें… 10 मंदिर उड़ाने की धमकी, कौन है खालिस्तान नेशनल आर्मी ‘तुम्हारे हिंदू मंदिर निशाने पर हैं। दिल्ली और हरियाणा के लोगों, तुमने 6 जून, 1984 को भिंडरांवाले की मौत पर मिठाइयां बांटी थीं। अब हम इसका बदला तुम्हारे मंदिरों में ब्लास्ट करके लेंगे। इसलिए अपने बच्चों को बचाओ और 5-6 जून को कोई सफर न करो।’ 4 जून की सुबह 9:54 बजे पंचकूला के मेयर श्यामलाल बंसल को धमकी भरा ये ई-मेल मिला। इसमें दिल्ली-हरियाणा के 6 बड़े मंदिरों में ब्लास्ट करने की धमकी थी। पढ़िए पूरी खबर…
सेनेगल के राष्ट्रपति फेय ने बनाई नई राजनीतिक पार्टी
सेनेगल के राष्ट्रपति बसिरू डियोमाये फेय ने डकार में आयोजित एक स्थापना सभा में अपनी नई राजनीतिक पार्टी 'किराए, लेस पैट्रियट्स रिपब्लिकन्स' की आधिकारिक शुरुआत की।
होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकर धमाके से बढ़ा तनाव, नौसैनिक सुरंग से टकराने का दावा
होर्मुज स्ट्रेट में एक तेल टैंकर के फटने का मामला सामने आया। स्थानीय मीडिया की खबरों के मुताबिक टैंकर नौसैनिक बारूदी सुरंग से टकराने के बाद फट गया
भारत से पड़ोसी देश नेपाल जाने वाले पर्यटकों, व्यापारियों और आम लोगों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। करीब एक दशक से चले आ रहे एक अहम प्रतिबंध को नेपाल सरकार ने अब खत्म कर दिया है। नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) ने नए नियमों के तहत भारतीय यात्रियों और नेपाली नागरिकों को 200 रुपये और नए डिजाइन वाले 500 रुपये के भारतीय नोट नेपाल लाने और ले जाने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। साल 2016 की नोटबंदी के बाद से लागू सख्त नियमों में इसे एक बहुत बड़ा और सकारात्मक बदलाव माना जा रहा है।नए नियमों के तहत कितनी नकदी ले जा सकेंगे यात्री?नेपाल राष्ट्र बैंक द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, भले ही बड़े नोटों के इस्तेमाल की छूट दे दी गई है, लेकिन अधिकतम नकदी की सीमा में कोई बदलाव नहीं हुआ है। भारत और नेपाल के नागरिक पहले की तरह ही अधिकतम 25,000 रुपये तक की भारतीय मुद्रा अपने साथ ले जा सकते हैं। इस 25,000 रुपये की सीमा में अब 200 रुपये और नए डिजाइन वाले 500 रुपये के नोट शामिल किए जा सकेंगे। हालांकि, यह छूट केवल 9 नवंबर 2016 (नोटबंदी) के बाद जारी किए गए नए नोटों पर ही लागू होगी। नोटबंदी से पहले वाले पुराने 500 और 1,000 रुपये के नोट नेपाल में अब भी पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं।2016 की नोटबंदी के बाद क्यों लगा था यह प्रतिबंध?वर्ष 2016 में भारत में हुई नोटबंदी के बाद सुरक्षा और प्रामाणिकता के मद्देनजर नेपाल ने 100 रुपये से बड़े सभी भारतीय नोटों के इस्तेमाल और देश में प्रवेश पर रोक लगा दी थी। हालांकि भारत ने बाद में 200 और 500 रुपये के नए नोट जारी कर दिए थे, लेकिन नेपाल ने लंबे समय तक पुराने प्रतिबंध को ही जारी रखा। इस वजह से नेपाल यात्रा के दौरान व्यावहारिक रूप से लोग केवल 100 रुपये के नोट ही ले जा पाते थे, जिससे भारी नकदी ले जाने में काफी दिक्कत होती थी। अब इस फैसले के बाद नकद भुगतान और सीमा पार छोटे-मोटे लेनदेन बहुत आसान हो जाएंगे।इन लोगों को मिलेगा सीधा फायदा और तीसरे देश का नियमइस फैसले से नेपाल जाने वाले भारतीय पर्यटकों, भारत आने-जाने वाले नेपाली नागरिकों और सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापार करने वाले कारोबारियों को सबसे बड़ा लाभ मिलेगा। हालांकि, नेपाल राष्ट्र बैंक ने यह साफ कर दिया है कि किसी भी नेपाली नागरिक को भारत के अलावा किसी तीसरे देश के रास्ते भारतीय मुद्रा नेपाल लाने या नेपाल से किसी तीसरे देश ले जाने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा, बिना कस्टम डिक्लेरेशन के अधिकतम 5,000 अमेरिकी डॉलर के बराबर विदेशी मुद्रा ले जाने का नियम पहले की तरह ही लागू रहेगा।
पाकिस्तान की सरकार भले ही भारत के खिलाफ कितना भी प्रोपेगेंडा चलाए और पाबंदियां लगाए, लेकिन वहां की आवाम और बड़े अधिकारियों पर भारतीय संस्कृति का गहरा असर है। हाल ही में पाकिस्तान की एक सीनियर महिला पुलिस अधिकारी, डॉ. अनूश मसूद चौधरी का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियां बटोर रहा है। वह लगातार पंजाबी और हरियाणवी गानों पर रील्स बनाकर इंटरनेट पर छा गई हैं। इसे देखकर साफ लगता है कि सरहद पार भी भारतीय संगीत का जादू वहां के सिस्टम के सिर चढ़कर बोल रहा है।कौन हैं पाकिस्तान की 'लेडी सिंघम' डॉ. अनूश मसूद?मूल रूप से पेशावर की रहने वाली डॉ. अनूश मसूद चौधरी वर्तमान में पाकिस्तान की पंजाब एलीट पुलिस में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, खासकर फेसबुक पर उनके ढाई लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। दिलचस्प बात यह है कि अनूश अपनी सख्त पुलिसिंग के साथ-साथ अब हरियाणवी गानों पर अपने शानदार अंदाज और 'टोरे' के लिए चर्चा का मुख्य केंद्र बन गई हैं।MBBS में गोल्ड मेडल से लेकर पुलिस सर्विस तक का सफरडॉ. अनूश का करियर बेहद प्रेरणादायक रहा है। एक वायरल वीडियो में वह खुद बताती हैं कि उन्होंने मेडिसिन (MBBS) की पढ़ाई की है और उसमें गोल्ड मेडल हासिल किया।2011: सिविल सेवा (CSS) परीक्षा पास करके अपनी पहली पसंद के तौर पर पाकिस्तान पुलिस सर्विस को चुना।2014: वह खैबर पख्तूनख्वा (KPK) में तैनात होने वाली पहली महिला एएसपी (ASP) बनीं।2018: अपनी काबिलियत के दम पर उन्हें लाहौर की पहली महिला एसएसपी (इन्वेस्टिगेशन) बनने का गौरव प्राप्त हुआ।2020: बेहतरीन कार्यशैली के लिए उन्हें 'इंटरनेशनल वूमेन ऑफ करेज अवॉर्ड' से भी नवाजा जा चुका है।पाकिस्तानी हुक्मरानों की पाबंदियों पर भारी भारतीय संस्कृतिएक तरफ पाकिस्तान सरकार कट्टरपंथी एजेंडे के तहत भारतीय फिल्मों और कंटेंट पर प्रतिबंध लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ती है। हाल ही में जब ब्लॉकबस्टर फिल्म 'धुरंधर' में पाकिस्तान की आतंकी साजिशों का पर्दाफाश हुआ, तो अपनी पोल खुलने के डर से उन्होंने फिल्म को ही बैन कर दिया। लेकिन दूसरी तरफ, डॉ. अनूश जैसे शीर्ष अधिकारी यह साबित कर रहे हैं कि कला और संगीत की कोई सरहद नहीं होती। पाकिस्तान की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था के बीच उनकी अपनी लेडी अफसर का भारतीय गानों पर थिरकना इंटरनेट यूजर्स को काफी पसंद आ रहा है।
ईरान पर अमेरिकी हमलों पर लगी रोक: कूटनीतिक बातचीत और मिसाइल भंडार की कमी के चलते ट्रंप ने थामे कदम
मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान पर अपने लगातार हमले फिलहाल रोक दिए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस आदेश के पीछे कूटनीतिक प्रयासों को बढ़ावा देना, अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम के घटते भंडार और युद्ध के और अधिक फैलने का डर मुख्य वजहें बताई जा रही हैं। ओमान की मध्यस्थता से तेहरान और वाशिंगटन के बीच बातचीत की संभावनाएं मजबूत हुई हैं, जिसके चलते ओमान का प्रतिनिधिमंडल भी तेहरान पहुंचा है। हालांकि, अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी अभी भी जारी है और पेंटागन ने स्पष्ट किया है कि यदि बातचीत विफल होती है, तो सैन्य विकल्प दोबारा खोले जा सकते हैं।क्यों रोके गए ईरान पर अमेरिकी हमलेअमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले 13 दिनों की भारी बमबारी के बाद ट्रंप प्रशासन ने नए हमलों पर अस्थायी विराम लगाया है। सीमित सैन्य अभियानों की अपनी एक सीमा तय होने और बड़े पैमाने पर युद्ध छिड़ने के खतरे को भांपते हुए यह कदम उठाया गया है। व्हाइट हाउस का मानना है कि इस समय सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ कूटनीतिक समझौते की कोशिश करना अधिक समझदारी होगी, हालांकि ईरान के रुख को देखते हुए सेना को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।पैट्रियट मिसाइलों का घटता भंडार बना बड़ी चिंताइस सैन्य विराम के पीछे एक बड़ा कारण अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन के पास हथियारों की कमी भी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में अमेरिकी सेना 1200 से ज्यादा पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल कर चुकी है। सैन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान जारी रखा गया, तो एयर डिफेंस सिस्टम और मिसाइलों के स्टॉक पर भारी दबाव पड़ सकता है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने भी क्षेत्र में व्यापक युद्ध की आशंका जताते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी थी।स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और कूटनीति पर टिकी निगाहेंमौजूदा संघर्ष का मुख्य केंद्र दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' की आवाजाही को फिर से शुरू करना है। ओमान की पहल पर चल रही बातचीत के जरिए इस जलमार्ग को सुरक्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र में हूती विद्रोहियों की गतिविधियों और क्षेत्रीय मोर्चों पर तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच यह विराम एक स्थायी शांति समझौता लाएगा या यह केवल अगली बड़ी सैन्य कार्रवाई से पहले का ठहराव है, यह आने वाले दिनों की कूटनीतिक बैठकों पर निर्भर करेगा।
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पिछले 24 घंटों के दौरान भारी बारिश से जुड़े हादसों में 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 घायल हुए हैं। मृतकों में दो बच्चे भी शामिल हैं। स्थानीय मीडिया के अनुसार, बारिश के कारण कई मकान क्षतिग्रस्त हुए और बड़ी संख्या में पशुओं की भी मौत हुई है।
6 जून 2026, अभिजीत दिपके पहली बार लंदन से पहली बार दिल्ली एयरपोर्ट उतरे और सीधे जंतर-मंतर प्रोटेस्ट साइट पहुंचे। 20 जून को दोबारा प्रोटेस्ट पर बैठे, तो 36 दिन प्रोटेस्ट के बाद 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर उठे। जंतर-मंतर से जाते-जाते कॉकरोच पार्टी ने प्रोटेस्टर्स से कहा- ‘जल्दी दोबारा मिलेंगे।’ सवाल है कि आखिर कॉकरोच जनता पार्टी आगे करने क्या वाली है, फ्यूचर के कौन से 3 सिनैरियो, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में... इसके संकेत क्या हैं कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत में फाउंडर अभिजीत दिपके ने कहा था कि उनका राजनीति में उतरने का कोई इरादा नहीं है। वे किसी राजनीतिक दल के साथ भी नहीं आएंगे। हालांकि जंतर-मंतर पर 36 दिनों के प्रोटेस्ट के बाद 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कई संकेत मिले कि कॉकरोच पार्टी राजनीति में उतर सकती है… ताकत क्या है चैलेंज क्या है इसके संकेत क्या हैं आशुतोष रांका ने जंतर-मंतर पर कहा कि ये प्रोटेस्ट यहीं खत्म होता है, लेकिन उसके साथ एक और बात कही- ‘हम जल्दी मिलेंगे।’ CJP के फाउंडर अभिजीत दिपके ने भी कहा, 'हम ऐसे ही नहीं जाएंगे। कॉकरोच हैं, एक बार घुसते हैं, तो निकलते नहीं। लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। अगला फेज एजुकेशन रिफॉर्म्स को लेकर होगा।’ जब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा हुई, तो केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ मौजूद सौरव दास ने कहा था, ‘हमने सरकार को एजुकेशन रिफॉर्म का जो चार्टर दिया है, उस पर अगले 4 हफ्ते में चर्चा होगी।’ CJP का कहना है कि सरकार पर पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून, परीक्षाओं को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए दबाव बनाए रखेंगे। अब हमारी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि ये वादे पूरे हों। यानी फिलहाल CJP इन मुद्दों को लेकर आगे अपनी कोशिशें जारी रखेगी। कॉकरोच जनता पार्टी दिल्ली के बाद देश के दूसरे शहरों में लोकल मुद्दों को लेकर भी एक्टिव हो सकती है… ताकत क्या है चैलेंज क्या है इसके संकेत क्या हैं आशुतोष रांका ने संकेत दिया है कि एक प्रेशर ग्रुप की तरह काम करना भी एक विकल्प है। उन्होंने कहा, ‘ये जरूरी नहीं कि आप पॉलिटिकल पार्टी बनकर 5 साल में वोट मांगने जाओ। सिविल सोसाइटी, प्रेशर ग्रुप और मूवमेंट भी लोकतंत्र का हिस्सा हैं। हमारे लिए अभी मुद्दा जरूरी है और जवाबदेही तय करना लक्ष्य है। ये मुद्दा हमें जिस तरफ ले जाएगा, हम वहां जाएंगे।’ पूरे प्रोटेस्ट में मुख्य विपक्षी नेता राहुल गांधी ने छात्रों के मुद्दों पर सरकार को तो घेरा, लेकिन CJP से एक दूरी भी बनाए रखी, इससे भी कॉकरोच जनता पार्टी की भूमिका मजबूत हुई है… ताकत क्या है चैलेंज क्या है कांग्रेस कवर करने वाले आदेश रावल कहते हैं, एक प्रोटेस्ट से कॉकरोच जनता पार्टी विपक्ष की भूमिका में नहीं खड़ी हो सकती। सरकार पर प्रेशर तब बढ़ा, जब 20 जुलाई के ‘पुलिस एक्शन’ के बाद कांग्रेस इस पर तेजी से एक्टिव हुई। इसके बाद पीएम मोदी 5 बार झुके। पेपर लीक पर फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का फैसला, NTA के ऑफिसर्स को बर्खास्त करना हो, इंस्टाग्राम पर वीडियो डालना हो या आखिर में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। ---------- ये खबर भी पढ़िए… इन 5 वजहों से घबराई सरकार, तब हुआ धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा; नहीं झुकते तो क्या हो जाता, आखिरकार आंदोलन खत्म शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार इस्तीफा दे ही दिया। जंतर-मंतर पर 35 दिन से कॉकरोच जनता पार्टी का अनशन, पीएम आवास के बाहर राहुल गांधी का धरना, संसद में रोज गूंजता हंगामा और देश-दुनिया के कई शहरों में हो रहे प्रदर्शन से सरकार दबाव में थी। पूरी खबर पढ़िए…
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने ईरान में युद्ध बढ़ने को लेकर चिंता जताई। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (स्थानीय समय) को व्हाइट हाउस मीटिंग के दौरान इस संभावना पर विचार किया। इसके साथ ही अमेरिका ने ईरान पर जारी हमलों को रोक दिया।
पाकिस्तान: सिंध में नए प्रांत की मांग लेकर सड़क पर उतरा सियासी दल, भेदभाव का लगाया आरोप
पाकिस्तान की मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट-पाकिस्तान (एमक्यूएम-पी) ने सिंध समेत देश में नए प्रांतों के गठन की मांग को लेकर अपना अभियान तेज कर दिया है। शनिवार को पार्टी अध्यक्ष खालिद मकबूल सिद्दीकी ने हैदराबाद में रैली का नेतृत्व किया, जबकि वरिष्ठ नेता और संघीय स्वास्थ्य मंत्री मुस्तफा कमाल ने कराची में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रशासनिक आधार पर नए प्रांत बनाए जाने की मांग दोहराई। हैदराबाद में हजारों की तादाद में लोग जुटे।
खाड़ी देशों में फिर मंडराया युद्ध का खतरा, हूती विद्रोहियों ने सऊदी के तेल ठिकानों पर बोला हमला
मध्य पूर्व यानी खाड़ी के देशों में एक बार फिर से तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है, जिससे पूरे इलाके में बड़े पैमाने पर युद्ध छिड़ने का खतरा मंडराने लगा है। शनिवार को घटी दो बड़ी और अहम घटनाओं ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। एक तरफ जहां ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के बेहद अहम तेल ठिकानों को निशाना बनाया है, वहीं दूसरी तरफ कैस्पियन सागर में एक ईरानी कमर्शियल जहाज पर हुए हमले को लेकर ईरान और यूक्रेन आमने-सामने आ गए हैं। इस स्थिति के चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी गंभीर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हूती विद्रोहियों का बड़ा हमलाशनिवार को यमन के ईरान समर्थित हूती गुट ने सऊदी अरब की धरती पर स्थित दो प्रमुख तेल ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए। हूती संगठन के प्रवक्ता की ओर से जारी किए गए बयानों के अनुसार, सऊदी अरब के जिजान और यानबू शहरों में स्थित अरामको कंपनी की रिफाइनरियों और तेल भंडारण केंद्रों को इस हमले में खासतौर पर निशाना बनाया गया। सोशल मीडिया और सामने आए वीडियो फुटेज में जिजान रिफाइनरी से आसमान में काले धुएं का भारी गुबार उठता हुआ साफ तौर पर देखा गया।ग्रीक सुरक्षा से जुड़े सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यानबू शहर की तरफ दागी गई दो खतरनाक बैलिस्टिक मिसाइलों को अमेरिकी पैट्रियट डिफेंस सिस्टम की मदद से हवा में ही सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया गया। आपको बता दें कि यानबू सऊदी अरब का लाल सागर के तट पर स्थित सबसे महत्वपूर्ण तेल बंदरगाह है। मौजूदा समय में जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, तब सऊदी अरब के लिए तेल निर्यात करने का यह सबसे मुख्य और सुरक्षित रास्ता माना जाता है। इसके अलावा, जिजान रिफाइनरी की कुल क्षमता प्रतिदिन चार लाख बैरल तेल के उत्पादन की है, ऐसे में इस पर हुआ यह हमला आर्थिक और रणनीतिक दोनों लिहाज से बहुत बड़ा झटका है।यमन में फिर से सुलग उठा गृह युद्ध का संकटहूती विद्रोहियों के इन हमलों के तुरंत बाद सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए कड़ा जवाब दिया है। गठबंधन सेना ने यमन के मारिब, अल-जौफ और होदेदाह इलाकों में स्थित हूती विद्रोहियों के कई प्रमुख ठिकानों पर भीषण बमबारी की है। यमन के स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि इस सैन्य कार्रवाई के बाद दोनों ही पक्षों ने एक बार फिर से युद्ध के मोर्चों पर भारी संख्या में सेना जुटाना शुरू कर दिया है।गौरतलब है कि साल 2022 से काफी हद तक थमा हुआ यमन का गृह युद्ध इस महीने एक बार फिर से भड़कता हुआ नजर आ रहा है। हूती विद्रोहियों ने पिछले ही हफ्ते सऊदी अरब की नौसैनिक नाकेबंदी की आधिकारिक घोषणा की थी और इसके ठीक बाद गुरुवार को लाल सागर के रास्ते से गुजर रहे सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर भी हमला कर दिया था। इन लगातार बढ़ती घटनाओं से इस बात की पूरी आशंका जताई जा रही है कि यमन का यह पुराना संघर्ष एक बार फिर से बड़े युद्ध का रूप ले सकता है।ईरान और यूक्रेन के बीच बढ़ा तनाव, कैस्पियन सागर में जहाज पर हमलासऊदी अरब पर हुए हमलों के साथ-साथ खाड़ी क्षेत्र में एक और बड़े भू-राजनीतिक विवाद ने जन्म ले लिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने यूक्रेन पर कैस्पियन सागर के भीतर एक ईरानी कमर्शियल जहाज को टारगेट करने और उस पर हमला करने का गंभीर आरोप लगाया है। ईरानी मंत्रालय के आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस खतरनाक हमले के दौरान हुए जोरदार विस्फोट में जहाज पर सवार एक नाविक की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गया है।इस घटना के विरोध में ईरान ने तेहरान स्थित यूक्रेन के शीर्ष राजनयिक को तलब किया और इस पूरी कार्रवाई को एक खुला दुश्मनी भरा और आपराधिक कृत्य करार दिया। दूसरी ओर, इस विवाद को हवा तब और मिल गई जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कैस्पियन सागर में हुए लंबी दूरी के हमलों की खुली तारीफ की थी। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अपने बयान में यह भी आरोप लगाया था कि रूस मध्य पूर्व क्षेत्र से जुड़ी सामरिक और सैटेलाइट की खुफिया जानकारियां लगातार ईरान के साथ साझा कर रहा है।अमेरिका की सक्रियता और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर मंडराता खतराइस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी सेना भी खाड़ी के समंदर में पूरी तरह से सक्रिय हो गई है। हाल ही में अमेरिकी नौसेना ने ओमान की खाड़ी में एक ऐसे संदिग्ध जहाज को रोका है, जिसने हूती विद्रोहियों द्वारा घोषित की गई नाकेबंदी को तोड़ने का दुस्साहस किया था। अंतरराष्ट्रीय रक्षा और ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य के बाद लाल सागर का यह व्यापारिक और नौवहन मार्ग भी इसी तरह बाधित होता रहा, तो आने वाले दिनों में इसका सीधा और बहुत बुरा असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति तथा कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा।
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में इस समय हालात बेहद विस्फोटक और बेकाबू हो चुके हैं। महंगाई, बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी और रोजमर्रा की जरूरी चीजों के लिए त्राहि-त्राहि कर रही स्थानीय जनता का गुस्सा आखिरकार सड़कों पर फूट पड़ा है। PoK के इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा और उग्र जनआंदोलन माना जा रहा है, जहां आम कश्मीरी रोटी और दाल जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष करने को मजबूर हैं। आम जनता का आरोप है कि इस्लामाबाद में बैठी शहबाज शरीफ सरकार और सेना के शीर्ष कमांडर इस मानवीय संकट से पूरी तरह आंखें मूंदे हुए हैं और जनता की चीख-पुकार उन तक नहीं पहुंच रही है।महंगाई और बदहाली से त्रस्त कश्मीरी जनता का फूटा आक्रोशPoK के विभिन्न शहरों और कस्बों में पिछले कुछ दिनों से लगातार बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए हैं कि बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें भारी भरकम टैक्स, आसमान छूती महंगाई और बिजली-पानी की भारी किल्लत के बीच जीने के लिए मजबूर किया जा रहा है। खाने-पीने की मूलभूत चीजों के दाम इतने बढ़ चुके हैं कि आम आदमी की थाली से दाल और रोटी तक गायब होने की कगार पर आ गई है, जिससे स्थानीय नागरिकों में पाकिस्तान के शासन के प्रति भारी नफरत पैदा हो गई है।शहबाज-मुनीर की बेरुखी और कुप्रबंधन पर उठे बड़े सवालस्थानीय लोगों और राजनीतिक विश्लेषकों का साफ तौर पर कहना है कि पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार और सेना प्रमुख असीम मुनीर इस गंभीर संकट पर पूरी तरह संवेदनहीन बने हुए हैं। जनता के बुनियादी अधिकारों और कल्याण की अनदेखी कर केवल अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने वाले हुक्मरानों को इस जनआंदोलन की गूंज सुनाई नहीं दे रही है। क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन पाकिस्तान द्वारा बेर्हमी से किए जाने के बावजूद यहां के स्थानीय नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं तक मयस्सर नहीं हैं, जिसके कारण पाकिस्तान के खिलाफ यह बगावत अब एक बड़े जनसैलाब का रूप ले चुकी है।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उजागर हुआ पाकिस्तान का असली चेहराPoK में चल रहे इस अभूतपूर्व आंदोलन ने एक बार फिर पाकिस्तान के कुशासन और मानवाधिकारों के हनन की पोल खोलकर रख दी है। जबरन कब्जाए गए इस क्षेत्र में दशकों से हो रहे आर्थिक शोषण और भेदभाव के खिलाफ जनता का यह खुला विद्रोह पाकिस्तान की नींव हिला रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर के फर्जी आंसू बहाने वाले पाकिस्तानी हुक्मरा अब अपने ही घर में सुलग रही इस आग को बुझाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं, और आने वाले दिनों में यह संकट पाकिस्तान की सत्ता के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन सकता है।
तनाव का नया केंद्र सऊदी अरब और ईरान समर्थित हाउती विद्रोही बन गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, हाउती लड़ाकों ने लाल सागर क्षेत्र में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों को निशाना बनाने के बाद जिजान और यानबू स्थित अरामको की तेल रिफाइनरियों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया।
मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दी गई नई चेतावनियों ने वैश्विक कूटनीति में हलचल तेज कर दी है। अगर अमेरिका और ईरान के बीच जारी ओमान डिप्लोमैटिक चैनल वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंचती है, तो अमेरिकी सेना ईरान के परमाणु कार्यक्रमों के बचे हुए ढांचों को पूरी तरह ध्वस्त कर सकती है।अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन केवल ईरान के चर्चित 'पिकैक्स माउंटेन' (Pickaxe Mountain) तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिकी सेना की न्यूक्लियर टारगेट लिस्ट में ईरान के 5 बेहद संवेदनशील और गुप्त ठिकाने शामिल हैं।डोनाल्ड ट्रंप की 'न्यूक्लियर टारगेट लिस्ट' में शामिल 5 प्रमुख ठिकानेपिकैक्स माउंटेन (नतांज के पास): नतांज के पास ठोस ग्रेनाइट की पहाड़ियों के 300 से 450 फीट नीचे स्थित यह बेहद सुरक्षित अंडरग्राउंड साइट है। इजराइली खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान ने पिछले साल हजारों आधुनिक सेंट्रीफ्यूज यहां छिपाए थे। यह जगह अमेरिका के सबसे बड़े बंकर-बस्टर बमों की पहुंच से भी काफी गहरी है, इसलिए अमेरिकी रणनीति इसके मुख्य द्वारों और सुरंगों को सील कर इसे निष्क्रिय करने की होगी।तालेघन 2 (पारचिन कॉम्प्लेक्स): ईरान के पारचिन सैन्य परिसर में स्थित 'तालेघन 2' वह जगह है, जहां ईरान परमाणु विस्फोट से जुड़े हाई-एक्सप्लोसिव परीक्षणों का काम फिर से शुरू कर रहा है। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले हमलों के बाद भी यहां एक मुख्य टेस्ट चैंबर पूरी तरह सुरक्षित बच गया है।फोर्डो (Fordow) की सपोर्ट साइट: फोर्डो की जमीन पर स्थित सपोर्ट फैसिलिटी में ऐसे खास सेंट्रीफ्यूज और आइसोटोप मौजूद हैं, जिन्हें जरूरत पड़ने पर यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) के लिए फिर से तुरंत इस्तेमाल में लाया जा सकता है।इस्फहान की सील की गई सुरंगें: इस्फहान स्थित परमाणु केंद्र की सील की गई गुप्त सुरंगों में भारी वाहनों की संदिग्ध गतिविधियां देखी गई हैं, जिससे अंदेशा है कि ईरान यहां नए सिरे से परमाणु उपकरणों को इकट्ठा कर रहा है।नतांज की बची हुई इमारतें: पूर्व में हुए हमलों के बावजूद नतांज परिसर की कई बची हुई इमारतें और रिसर्च फैसिलिटी अभी भी अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) के निशाने पर बनी हुई हैं।ईरान के पास समय कम: विशेषज्ञों की चेतावनीपरमाणु मामलों के पूर्व अंतरराष्ट्रीय निरीक्षक डेविड अलब्राइट के अनुसार, हालांकि ईरान की अधिकांश प्राथमिक परमाणु साइटों को पहले ही नुकसान पहुंचाया जा चुका है, लेकिन जिस तरह से ईरान दोबारा निर्माण कर रहा है और नए इंटेलिजेंस इनपुट्स सामने आ रहे हैं, वे अमेरिका को फिर से हमलों के लिए मजबूर कर सकते हैं। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि जैसे-जैसे समय बीत रहा है, अपने परमाणु कार्यक्रम को जीवित रखने के लिए ईरान के लिए पिकैक्स पहाड़ की उपयोगिता और अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।ओमान वार्ता पर टिकी हैं दुनिया की नजरेंअमेरिका ने ईरान के कोर न्यूक्लियर टियर पर सीधे हमलों से परहेज किया है, लेकिन ओमान के माध्यम से अमेरिका और ईरान के बीच बैकचैनल बातचीत जारी है। यदि यह कूटनीतिक प्रयास नाकाम होता है, तो तेहरान को अच्छे से पता है कि युद्ध के अगले चरण में उसकी कौन-कौन सी साइट्स अमेरिकी मिसाइलों और बमवर्षकों के सीधे निशाने पर होंगी।
इराक : एरबिल में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के पास विस्फोटक से लदा ड्रोन नष्ट
इराक के अर्ध-स्वायत्त कुर्दिस्तान क्षेत्र की राजधानी एरबिल के ऊपर शनिवार को एक ड्रोन को मार गिराया गया
चीन के दक्षिणी प्रांत ग्वांगडोंग में चक्रवात 'नौल' के तट से टकराने से पहले एहतियातन 3.4 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। प्रांतीय बाढ़, सूखा और चक्रवात नियंत्रण प्राधिकरण ने शनिवार को यह जानकारी दी
पाकिस्तान: गिलगित-बाल्टिस्तान में बाढ़ से हालात बदतर, कई इलाके चौथे दिन भी देश से कटे
पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान (पीओजीबी) में अचानक आई बाढ़ और ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड के कारण कई इलाकों का सड़क संपर्क लगातार चौथे दिन भी बहाल नहीं हो सका है
वांग यी ने एससीओ के विदेश मंत्रियों की परिषद के सम्मेलन में हिस्सा लिया
चीनी विदेश मंत्री वांग यी 24 जुलाई को किर्गिजस्तान में शांगहाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की परिषद के सम्मेलन में उपस्थित हुए
दैनिक भास्कर की ‘स्पाई फाइल्स’ सीरीज में आप पढ़ रहे हैं- ‘ऑपरेशन थंडरबोल्ट।’ पार्ट-1 में आपने पढ़ा- 27 जून 1976 को डेनिम स्कर्ट पहनी लड़की ने बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर एक विमान को हाईजैक कर लिया। विमान इजराइल के तेल अवीव एयरपोर्ट से पेरिस जा रहा था। हाईजैकर 245 यात्रियों को बंधक बनाकर युगांडा ले गए। इनमें ज्यादातर इजराइली थे। हाईजैकरों ने अल्टीमेटम दे रखा था- 1 जुलाई को दोपहर 2 बजे तक उनकी मांगे नहीं मानी गईं, तो सभी यात्री मार दिए जाएंगे। सिर्फ 8 घंटे बाद 100 से ज्यादा इजराइली मारे जाने वाले थे। प्रधानमंत्री हाईजैकरों के आगे झुकने को तैयार थे, लेकिन रक्षा मंत्री के दिमाग में कुछ ऐसा चल रहा था, जो नामुमकिन सा था। पूरी कहानी पार्ट-2 में पढ़िए… तारीख 1 जुलाई 1976, सुबह के 6 बज रहे थे। यरुशलम के कमांड रूम में इजराइली पीएम यित्जाक राबिन, रक्षा मंत्री शिमोन पेरेस और सेना प्रमुख जनरल मोटा गुर परेशान बैठे थे। पीएम ने सिगरेट का कश भरते हुए रक्षा मंत्री से कहा- ‘कल रात हाईजैकरों ने फ्रांस और दूसरे देशों के 148 यात्रियों को छोड़ दिया है। हमारे लोग अभी भी बंधक हैं। मैं उन्हें मरने के लिए नहीं छोड़ सकता।’ रक्षा मंत्री पेरेस कुछ देर चुप रहे। फिर गहरी सांस लेते हुए कहा- ‘हम मिलिट्री एक्शन लेंगे।’ ‘मिलिट्री एक्शन? फिर वही बात। आज तक ऐसा हुआ है।’ पीएम ने लगभग चीखते हुए कहा। पेरेस ने भी तल्खी से जवाब दिया- ‘इजराइल भी तो आज तक झुका नहीं है। जो कभी नहीं हुआ, वो अब होगा।’ पेरेस ने सेना प्रमुख से पूछा- ‘जनरल साहब, आपकी क्या राय है?’ जनरल मोटा गुर ने कहा- ‘मिलिट्री एक्शन ले सकते हैं, लेकिन तैयारी के लिए कम से कम दो दिन चाहिए।’ तभी पीएम ने टोका- ‘क्या ये मुमकिन है?’ जनरल गुर ने कहा- ‘मेरी टीम एंटेबे जाकर आतंकियों को ढेर कर सकती है, लेकिन बंधक जिंदा बचेंगे या नहीं, इसकी गारंटी नहीं दे सकता।’ रक्षा मंत्री ने पूछा- ‘किस बात का डर है?’ सेना प्रमुख ने कहा- ‘हमें नहीं मालूम बंधक कहां हैं? आतंकी किस जगह तैनात हैं? हमारे पास कोई तस्वीर या नक्शा भी नहीं है।’ रक्षा मंत्री- ‘ये सारी जानकारी मिल जाए तो?’ ‘तो भी गारंटी नहीं दे सकता।’ सेना प्रमुख ने जवाब दिया। रक्षा मंत्री ने गुस्से में कहा- ‘गारंटी क्यों नहीं दे सकते?’ सेना प्रमुख- ‘डेडलाइन में कुछ ही घंटे बचे हैं। मुझे कम से कम 2 दिन चाहिए।’ पेरेस ने झुंझलाकर कहा- ‘वक्त ही तो नहीं है।’ प्रधानमंत्री ने हाथ उठाकर दोनों को शांत कराया। फिर सिगरेट का कश भरते हुए कहा- ‘हम फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा करने के लिए तैयार हैं। यह मैसेज तुरंत युगांडा भिजवाइए।’ पेरेस हक्के-बक्के रह गए, ‘लेकिन सर...!’ ‘कोई लेकिन-वेकिन नहीं, पेरेस। आप आंतकियों से कहिए कि वो हमें थोड़ा वक्त दें।’ इतना कहकर राबिन अपनी कुर्सी से उठ खड़े हुए। पेरेस चुपचाप कमरे से बाहर निकल गए। राबिन मुड़े और सेना प्रमुख की आंखों में देखते हुए कहा- ‘मिलिट्री एक्शन की तैयारी कीजिए।’ ‘लेकिन, सर अभी तो आप…’ सेना प्रमुख इतना ही बोल पाए थे कि राबिन ने उन्हें टोक दिया- ‘तैयारी कीजिए…वक्त आपको मिल जाएगा।’ एक तरफ हाईजैकरों से डील और दूसरी तरफ सेना प्रमुख को कार्रवाई का आदेश… आखिर पीएम के दिमाग में चल क्या रहा था…? करीब 2 घंटे बाद, प्रधानमंत्री का फोन बजा। उधर से आवाज आई- ‘हाईजैकरों ने वक्त दे दिया है। अब डेडलाइन है 4 जुलाई दोपहर 12 बजे तक।' राबिन ने जोर से मेज पर घूंसा मारा- ‘इतना वक्त बहुत है।’ उन्होंने फौरन अपनी खुफिया एजेंसी ‘मोसाद’ के चीफ यित्जाक होफी को फोन लगाया- ‘बंधक कहां बंद हैं? अंदर आने-जाने के कितने दरवाजे हैं? मुझे एक-एक डिटेल चाहिए, होफी।’ दूसरी तरफ से आवाज आई- ‘मुझे 24 घंटे दीजिए।’ फोन कट गया। अब शाम ढल चुकी थी। पेरिस का ओरली एयरपोर्ट पुलिस की गाड़ियों के सायरन से गूंज रहा था। एंटेबे से रिहा हुए गैर-इजराइली अभी-अभी यहां पहुंचे थे। एयरपोर्ट पर एक कैफे में बैठकर 50 साल का बुजुर्ग कॉफी पी रहा था। तभी 30-35 साल का एक शख्स उसके पास पहुंचा। उसने अपना आईकार्ड दिखाते हुए कहा- ‘सर, घबराइए नहीं। मुझे कुछ जानकारी चाहिए।’ बुजुर्ग ने अपनी आंखें रगड़ते हुए कहा- ‘कैसी जानकारी?’ शख्स ने कहा- ‘एंटेबे में बंधकों को कहां रखा गया है?’ बुजुर्ग ने कुछ सोचते हुए कहा- ‘ओल्ड टर्मिनल के मुख्य हॉल में।’ ‘माहौल कैसा है? कुल कितने लोग हैं अंदर?’ शख्स ने फिर पूछा। ‘100 से ज्यादा बंधक हैं। हॉल में कांच के दो बड़े दरवाजे हैं, जो बाहर रनवे की तरफ खुलते हैं।’ अब शख्स, बुजुर्ग के करीब सरकते हुए पूछा- ‘सिक्योरिटी कैसी है? ‘मेन गेट पर चार आतंकवादी तैनात हैं। इसमें एक महिला भी है।’ बुजुर्ग ने बताया। ‘और बाकी आतंकी?’ बुजुर्ग ने थोड़ा सोचते हुए कहा- ‘बाकी आतंकी हॉल के ठीक बगल वाले VVIP रूम में आराम करते हैं। इसके अलावा दर्जनभर युगांडा के सैनिक भी राइफल लिए तैनात हैं।’ बुजुर्ग को लगा शायद पत्रकार है। उसने सारी बातें बता दीं, लेकिन असल में वो शख्स मोसाद का एजेंट था। रात करीब 2 बजे मोसाद चीफ का फिर से फोन बजा। उधर से आवाज आई- ‘सर, एक इजराइली कंपनी ने एंटेबे के ओल्ड टर्मिनल का नक्शा बनाया था। हमें नक्शा मिल गया है।’ मोसाद चीफ ने कहा- ‘हम्म…सिर्फ नक्शे के भरोसे 100 से ज्यादा जिंदगियों को दांव पर नहीं लगाया जा सकता। ओरिजिनल तस्वीर चाहिए।' फोन कट गया। अब तक 2 जुलाई हो चुकी थी। सुबह के 10 बज रहे थे। केन्या की राजधानी नैरोबी से एक विमान ने उड़ान भरी। विमान में सिर्फ पायलट और को-पायलट थे। कुछ ही देर बाद विमान युगांडा की तरफ मुड़ गया। घंटेभर का सफर था। जैसे ही विमान युगांडा के एंटेबे हवाई अड्डे के ऊपर पहुंचा, पायलट ने उसकी ऊंचाई बढ़ा दी। को-पायलट ने हाई-टेक कैमरा निकाला और एयरपोर्ट की दर्जनों तस्वीरें खींच लीं। ये दोनों मोसाद के एजेंट थे। इजराइल ने इसके लिए केन्या सरकार से चुपचाप डील कर ली थी। 3 जुलाई 1976, सुबह के 4 बजे थे। इजराइल डिफेंस फोर्स की स्पेशल यूनिट के कमांडर योनी नेतन्याहू मिलिट्री एक्सरसाइज से घर लौटे। उनका शरीर धूल, मिट्टी और पसीने से सना था। योनी, इजराइल के मौजूदा पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के बड़े भाई थे। बेंजामिन के पीएम बनने में इस मिशन का बहुत बड़ा रोल था। अब कहानी में लौटते हैं… उस वक्त योनी की प्रेमिका ब्रूरिया कपड़े धो रही थी। योनी को देखते ही वह बोल पड़ी- ‘तुमने कल से कुछ खाया नहीं है। मैंने तुम्हारी पसंदीदा लेमन मेरिंग पाई बनाई है। खा लो।’ योनी ने फ्रिज से निकालकर पाई का आधा कौर मुंह में रख लिया। फिर धीरे से कहा- ‘बहुत टेस्टी है। नहाकर आता हूं, फिर खाकर सो जाऊंगा।’ योनी बाथरूम में चले गए। 20 मिनट बाद जब कपड़े धोकर ब्रूरिया लौटी, तो देखा कि बाथरूम का दरवाजा अब भी बंद है। उसने आवाज लगाई- ‘योनी…इतनी देर से क्या कर रहे हो?’ अंदर से कोई आवाज नहीं आई। ब्रूरिया ने धीरे से धक्का दिया। दरवाजा खुल गया। योनी का सिर दीवार से टिका हुआ था। आंखें बंद थीं। ऊपर से शॉवर का पानी गिर रहा था। ब्रूरिया बुदबुदाई- ‘ओह योनी… तुम तो सो गए।’ उसने शॉवर बंद किया। योनी को बेडरूम तक ले गई और चादर ओढ़ाकर सुला दिया। इधर, प्रधानमंत्री दफ्तर में बैठे राबिन सिगरेट पर सिगरेट पिए जा रहे थे। टेबल पर रखी ऐशट्रे जली हुई सिगरेट के टुकड़ों से भरी थी। तभी विदेश मंत्री आलोन पहुंच गए। विदेश मंत्री को देखते ही राबिन ने कहा- ‘मैं मिलिट्री एक्शन लेने जा रहा हूं। एक ड्राफ्ट तैयार करो। कैबिनेट के सामने ब्रीफिंग देनी है।’ आलोन ने सहमति में सिर हिलाया और वहां से निकल गए। राबिन उन्हें छोड़ने के लिए लिफ्ट तक साथ आए। चलते-चलते राबिन ने कहा- ‘एक बात और... अगर यह मिशन नाकाम हुआ, तो मेरे इस्तीफे का ड्राफ्ट भी तैयार कर देना।’ आलोन ने हैरान होकर पूछा- ‘सर... आपकी नजर में नाकामी की परिभाषा क्या होगी?’ राबिन ने कहा- ‘अगर 25 लोग मारे जाते हैं, तो मैं इसे नाकाम मानूंगा। आंकड़ा इससे कम रहा, तो मैं इसे सफल मानूंगा।’ ‘कामयाबी के कितने चांस हैं?’ आलोन ने झिझकते हुए पूछा। राबिन ने गहरी सांस भरते हुए कहा- ‘मेरे हिसाब से 50-50.’ अब तक सुबह के 7 बज चुके थे। यानी हाईजैकर्स की डेडलाइन खत्म होने में अभी भी 24 घंटे से ज्यादा का वक्त बचा था। इधर, योनी की प्रेमिका ब्रूरिया हड़बड़ाकर नींद से जागी। शायद उसने कोई बुरा सपना देख लिया था। योनी उठ चुके थे और जैतूनी-हरे रंग की वर्दी पहन रहे थे। योनी ने शर्ट का बटन बंद करते हुए कहा- ‘अगर मैं रात तक वापस न लौटूं, तो समझ लेना कोई बड़ा मिशन शुरू हो चुका है।’ ब्रूरिया ने रुंधे गले से कहा- ‘यह एंटेबे वाले मामले से जुड़ा है न?’ योनी ने गहरी सांस ली और कहा- ‘हां।’ ब्रूरिया कुछ कहती, इससे पहले ही योनी ने उसे गले लगा लिया। धीमें से उसके कानों में कहा- ‘मैं लौटकर आऊंगा, इंतजार करना।’ योनी ने बैग उठाया और तेजी से बाहर निकल गए। पीछे-पीछे दौड़ती हुई ब्रूरिया चिल्लाई- ‘योनी रुको, तुम मोर को बाय कहना भूल गए।’ लेकिन योनी कार में बैठकर निकल चुके थे। दरअसल, मोर योनी का जर्मन शेफर्ड डॉग था। ब्रूरिया ने मोर को पुचकारते हुए कहा- ‘कोई नहीं बेटा… योनी लौटकर आएंगे तो तुम नाराजगी जता देना।’ ब्रूरिया को पता नहीं था कि योनी लौटेंगे तो जरूर, लेकिन मोर को मना नहीं पाएंगे… 3 जुलाई दोपहर 1 बजकर 40 मिनट का वक्त। इजराइल का बेन गुरियन एयरपोर्ट भट्टी की तरह धधक रहा था। पारा 40C के पार पहुंच चुका था। चार हरक्यूलिस C-130 विमान और करीब 190 इजराइली कमांडो रनवे पर खड़े थे। तभी एक चमचमाती हुई काली मर्सिडीज और पीछे-पीछे 2 लैंड रोवर गाड़ियां रनवे पर पहुंचीं। उसमें से 5-7 सैनिक उतरे और फौरन तीनों गाड़ियां एक विमान में लोड कर दी गईं। रनवे पर खड़े एक कमांडो ने दूसरे से पूछा- ‘ये गाड़ियां क्यों लोड की जा रही हैं? इनका क्या काम है?’ दूसरे ने कहा- ‘सब मोसाद का खेल है। देखो तो आगे होता क्या है।’ अब दुनिया का सबसे खतरनाक कमांडो मिशन शुरू हो चुका था। नाम- ‘ऑपरेशन थंडरबोल्ट।’ ये नाम इसलिए क्योंकि सबकुछ बिजली की रफ्तार से होना था। पूरे ऑपरेशन को लीड कर रहे थे जनरल डैन शैमरोन और ग्राउंड कमांडर थे योनी नेतन्याहू। योनी की टीम को ही सबसे पहले बंधकों तक पहुंचना था। दोपहर 1 बजकर 55 मिनट पर पहले विमान ने उड़ान भरी। पांच-पांच मिनट के फासले पर बाकी तीन विमान भी आसमान में थे। चारों विमानों ने शुरुआत में अलग-अलग दिशाएं पकड़ीं, फिर सब दक्षिण की ओर निकल गए। एक घंटे के बाद विमान दक्षिणी सिनाई के ओफिरा एयरबेस पर लैंड हुए। वहां फ्यूल भरा और ठीक साढ़े तीन बजे फिर से विमान आसामान में थे। अब मंजिल थी- एंटेबे एयरपोर्ट। इन चार विमानों के साथ दो बोइंग 707 विमान भी आसमान में गश्त लगा रहे थे। उनमें से एक उड़ता हुआ हाईटेक कमांड सेंटर था और दूसरा आधुनिक सुविधाओं से लैस मेडिकल हॉस्पिटल। करीब एक घंटे बाद योनी नेतन्याहू को थकान महसूस होने लगी। उन्होंने शैमरोन से कहा- ‘मुझे नींद आ रही है। सो जाऊं?’ शैमरोन ने मुस्कुराते हुए कॉकपिट के पिछले हिस्से की तरफ इशारा कर दिया- ‘तुम जाते वक्त सुस्ता लो, वापसी में मैं सो जाऊंगा।’ योनी बंक पर चढ़े, सिर के नीचे तकिया टिकाया और लेट गए। आंखें मूंदने से पहले उन्होंने नेविगेटर से कहा- ‘एंटेबे पहुंचने से आधे घंटे पहले मुझे जगा देना।’ रात के ठीक 10:30 बजे। नेविगेटर ने योनी का कंधा पकड़कर जोर से हिलाया- ‘योनी, उठ जाओ, हम विक्टोरिया झील के करीब पहुंच रहे हैं।’ योनी ने आंखें खोलीं और पूछा- ‘कितना वक्त बचा है?’ नेविगेटर ने कहा- ‘30 मिनट।’ योनी तुरंत बंक से नीचे उतरे। झटपट वर्दी ठीक की। साइलेंसर गन लोड किया और विमान में खड़ी मर्सिडीज की फ्रंट सीट पर जाकर बैठ गए। उन्होंने ड्राइवर से कहा- ‘फौरन इंजन स्टार्ट करो।’ मर्सिडीज की हेडलाइट्स जल उठीं। ठीक उसी पल पीछे खड़ी दो लैंड रोवर्स की बत्तियां भी जगमगा उठीं। रात ठीक 11 बजकर 1 मिनट पर पहले विमान के पहिए ने रनवे को छुआ। कोई आवाज नहीं हुई। होती भी कैसे, पहियों में हवा ही बहुत कम भरी गई थी। विमान के रुकने से पहले ही इजराइली कमांडो कूद पड़े। उन्होंने फौरन रनवे के दोनों किनारों पर जलती हुई लैंप रख दीं, ताकि युगांडा वाले एयरपोर्ट की लाइटें बंद कर दें, तो भी बाकी विमानों को उतरने में दिक्कत न हो। अगले ही पल, विमान से चमचमाती हुई काली मर्सिडीज निकली। ठीक इसी तरह की मर्सिडीज से तानाशाह ईदी अमीन चलता था। उसके पीछे दो लैंड रोवर गाड़ियां भी फर्राटा भरते हुए निकल पड़ीं। गाड़ियों की स्पीड बिल्कुल नाप-तोलकर उतनी ही रखी गई थी, जितनी ईदी अमीन के काफिले की हुआ करती थी- न ज्यादा तेज, न बहुत धीमी। काफिला चल पड़ा। ये मोसाद की चाल थी, ताकि युगांडा के सैनिकों को लगे कि उनके राष्ट्रपति का काफिला है, पर क्या युगांडा के सैनिक क्या इतने भोले थे? कहानी में आगे बढ़ते हैं… अभी काफिला कुछ ही कदम आगे बढ़ा था कि कंट्रोल टावर पर तैनात दो संतरियों की नजर मर्सिडीज पर पड़ी। एक ने कहा- ‘दादा ने तो सफेद मर्सिडीज ले ली है। इतनी रात को काली गाड़ी में कौन आ रहा है?’ दूसरे ने कहा- ‘टेंशन ना लो भाई… ये दादा की ही पुरानी गाड़ी है।’ तभी गाड़ियों की हेडलाइट उन पर चमकी। एक संतरी भागकर अंधेरे में छिप गया, लेकिन दूसरे ने राइफल तान दी और चिल्लाया- ‘आगे आओ’ फ्रंट सीट पर बैठे योनी ने ड्राइवर से कहा- ‘इसे शूट करो फौरन।’ बगल में बैठे डिप्टी कमांडर मुकी झट से बोल पड़े- ‘नहीं योनी फायर नहीं करना। यह उनकी रूटीन चेकिंग है।’ योनी ने डांटते हुए कहा- ‘इसे शक हो गया है।’ उन्होंने अपनी साइलेंसर गन निकाली और फायर कर दिया। गोली लगते ही संतरी जमीन पर गिर पड़ा। मर्सिडीज जैसे ही आगे बढ़ी पीछे से गोलियों की आवाज आने लगी। जख्मी संतरी फर्श पर पड़े-पड़े फायरिंग कर रहा था, तभी पीछे आ रही लैंड रोवर के कमांडो ने उसे वहीं ढेर कर दिया। अब ओल्ड टर्मिनल महज 50 गज की दूरी पर था। इसी टर्मिनल में बंधक थे। तीनों गाड़ियां आकर रुक गईं। सबकुछ सामान्य था। अब तक हाईजैकरों को भनक नहीं लगी थी। योनी ने कहा- ‘हेडलाइट बंद करो और सीधे टर्मिनल में घुस जाओ।’ हेडलाइट बंद कर दी गई। इजराइली सैनिक फायरिंग करते हुए टर्मिनल की तरफ दौड़ पड़े। तभी हाईजैकरों ने भी फायरिंग खोल दी। दोनों तरफ से गोलियां चलने लगीं। इजराइली डिप्टी कमांडर मुकी ने भागते-भागते एके-47 का ट्रिगर दबा दिया। 2 हाईजैकर वहीं ढेर हो गए। अब इजराइली कमांडो ओल्ड टर्मिनल के बिल्कुल करीब पहुंच चुके थे। योनी लगातार चिल्ला रहे थे- ‘आगे बढ़ो। आगे बढ़ो।’ डिप्टी कमांडर आगे बढ़े। टर्मिनल का पहला दरवाजा लॉक था। वो दौड़कर दूसरे गेट की तरफ भागे। इधर, योनी एंट्री गेट पर पहुंचकर फायरिंग के लिए मुड़े ही थे कि कंट्रोल टावर पर तैनात युगांडा के सैनिकों ने फायरिंग शुरू कर दी एक गोली सीधे योनी के सीने को चीरती हुई निकल गई। वे जमीन पर गिर पड़े। तभी बैकअप कर रहे इजराइली कमांडो ने कंट्रोल टावर पर खड़े गनमैन को मार गिराया। इसी बीच दो कमांडो योनी को उठाकर ले गए। डॉक्टर ने खून से लथपथ योनी की शर्ट काटकर पट्टियां बांधी, पर गोली अंदरूनी अंगों को छलनी कर चुकी थी। इधर, डिप्टी कमांडर और उनकी टीम टर्मिनल का दरवाजा तोड़ते हुए अंदर दाखिल हो चुकी थी। हॉल में चारों तरफ दहशत पसरी हुई थी। बंधक गद्दों से मुंह ढंककर दुबके पड़े थे। तभी एक हाईजैकर ने खंभे के पीछे से ग्रेनेड फेंक दिया। उसके ब्लास्ट होते ही हॉल में आग लग गई। आग की लपटों के बीच हाईजैकर ने फायरिंग शुरू कर दी, लेकिन इजराइली कमांडो ने उसे मार गिराया। इजराइली कमांडो को लगा कि अब सारे हाईजैकर मारे जा चुके हैं, लेकिन गद्दों के बीच दुबकी डेनिम स्कर्ट वाली लड़की अभी भी मौत का सामान थामे बैठी थी। कमांडो ने मेगाफोन पर आवाज लगाई- ‘नीचे लेटे रहो! हम इजराइली सैनिक हैं।’ तभी एक शख्स खड़ा होकर चिल्लाने लगा। कमांडो को लगा कि ये हाईजैकर है और ट्रिगर दबा दिया। वहा वहीं गिर पड़ा। तभी उसकी मां चिल्ला उठी- तुम लोगों ने ये क्या किया। ये इजराइली है। बेटा है मेरा। कमांडो ने कहा- ‘सॉरी, लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता। फटाफट सब बाहर निकलो, विमान तुम लोगों के इंतजार में खड़े हैं। जल्दी करो।’ लोग उठकर बाहर की तरफ भागने लगे। तभी डेनिम स्कर्ट वाली लड़की भीड़ से निकली और एक कमांडो पर झपट पड़ी। उसकी गन छीन ली और फायरिंग करने लगी। तभी पीछे से डिप्टी कमांडर ने उसे जोर से धक्का दिया और अपनी एके-47 की पूरी गोलियां उसके सीने में उतार दी। अब यात्री जैसे ही टर्मिनल से बाहर निकले, युगांडा के दर्जनभर सैनिकों ने फायरिंग शुरू कर दी। बंधकों और डिप्टी कमांडर की सांसें अटक गईं। एक पल के लिए लगा कि सबकुछ खत्म हो गया। तभी पीछे से इजराइली कमांडोज की एक दूसरी टुकड़ी आ गई। दोनों तरफ से करीब 10 मिनट तक फायरिंग होती रही। इसमें युगांडा के सभी सैनिक मारे गए। अब बंधकों को एक-एक करके विमान में बैठाया जाने लगा। कुछ ही देर में सभी बंधक विमान में सवार हो चुके थे। रनवे पर खड़े पहले विमान के पायलट ने चिल्लाते हुए पूछा- ‘क्या सभी बंधक आ गए हैं?’ लोडमास्टर ने जवाब दिया- ‘हां सब आ गए हैं।’ पायलट ने पूछा- ‘मुझे सटीक नंबर चाहिए। कितने लोग हैं। लिखकर दो।’ लोडमास्टर ने पर्ची थमाई- ‘102 जीवित और 3 मृत।’ इधर, योनी को बचाने की कोशिश जारी थी। सीपीआर दिया गया, खून चढ़ाया गया... लेकिन अब ये कमांडर गहरी नींद में सो चुका था। कभी ना जगने वाली नींद में। रात के ठीक 11 बजकर 40 मिनट पर, बंधकों और घायलों को लेकर पहला विमान उड़ चला, लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं हुई थी। आसामान में गश्त लगा रहे बोइंग 707 में बैठे जनरल कुटी एडम तक जैसे ही यह मैसेज पहुंचा, उन्होंने फौरन ऑर्डर दिया- ‘रनवे पर खड़े युगांडा के विमानों को तबाह कर दो।’ एयरपोर्ट पर 11 मिग लड़ाकू विमान खड़े थे। इजराइली कमांडो ने बम से सभी विमानों को उड़ा दिया। ताकि युगांडा की सेना उनका पीछा नहीं कर सके। इसके बाद बाकी के विमानों ने भी उड़ान भरनी शुरू की। रात 12:40 बजे अंतिम इजराइली विमान ने एंटेबे को अलविदा कह दिया। 1 घंटा 39 मिनट में ऑपरेशन थंडरबोल्ट पूरा हो चुका था। 4 जुलाई की सुबह करीब 10 बजे सभी विमान तेल अवीव एयरपोर्ट पहुंचे। रनवे पर पीएम राबिन और उनके मंत्रियों के साथ हजारों इजराइली मौजूद थे। एयरपोर्ट तालियों और नारों से गूंज रहा था। जैसे ही विमानों के दरवाजे खुले और अपनों ने अपनों को देखा, लोग एक-दूसरे से लिपटकर रोने लगे। एयरपोर्ट पर बंधकों के स्वागत के बाद प्रधानमंत्री ने जश्न मनाने के लिए विपक्ष के नेता मेनाखेम बेगिन को अपने दफ्तर बुलाया। बेगिन जैसे ही अंदर दाखिल हुए, राबिन ने मुस्कुराते हुए विस्की की बोतल उठा ली। बेगिन ने हाथ जोड़ते हुए कहा, ‘राबिन, मैं शराब नहीं पीता।’ राबिन ने ठहाका लगाया। उन्होंने एक ग्लास में विस्की उड़ेली और बेगिन की तरफ बढ़ा दी। बोले, ‘बेगिन साहब, समझ लो कि आप रंगीन चाय पी रहे हैं।’ इस तरह इजराइल और मोसाद का ऑपरेशन थंडरबोल्ट कामयाब हुआ। इसमें जान गंवाने वाले योनी नेतन्याहू के नाम पर उनके छोटे भाई बेंजामिन नेतन्याहू राजनीति में उतरे। 1996 में पहली बार इजराइल के पीएम बने। अभी भी वे उस पद पर कायम हैं। ऑपरेशन थंडरबोल्ट का पार्ट-1 भी पढ़िए : डेनिम स्कर्ट, हाथ में पिस्तौल, बॉयफ्रेंड के साथ प्लेन हाईजैक : पीरियड का खून दिखाकर एक महिला भाग निकली, फिर क्या हुआ; ऑपरेशन थंडरबोल्ट पार्ट-1 रेफरेंस : 1. Operation Thunderbolt: Flight 139 and the Raid on Entebbe Airport : By Saul David. 2. A State of Blood: The Inside Story of Idi Amin : By Henry Kyemba
22 जुलाई रात 10.30 तक तय था कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे। गृहमंत्री अमित शाह और PM मोदी का सपोर्ट उन्हें कुर्सी पर टिकाए हुए था। फिर RSS और BJP की एक मीटिंग हुई और कुर्सी डगमगाने लगी। शाह अब भी साथ थे, लेकिन प्रधानमंत्री का सपोर्ट हट चुका था। RSS के 5 पदाधिकारियों की मोदी-शाह से मीटिंग RSS की तरफ से सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, सह सरकार्यवाह अरुण कुमार और कृष्ण गोपाल के साथ दो और पदाधिकारी मौजूद थे। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और जेपी नड्डा मौजूद थे। ये मीटिंग न BJP दफ्तर में हुई और न ही संघ कार्यालय में। वजह थी, इस मीटिंग और उसमें हुई बातों को सीक्रेट रखना। इस मीटिंग के बारे में किसी को खबर नहीं थी। तय हुआ PM मोदी तुरंत रात में ही जेन जी के अंदाज में बात करें सोर्स ने बताया इसी मीटिंग में तय हुआ कि PM मोदी तुरंत यानी रात में ही जेन जी के सबसे फेवरेट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए बात करेंगे। भाषा भी ऐसी हो जो जेन जी तक पहुंचे। ये तक तय हुआ कि PM निश्चिंत न दिखें। चेहरे पर चिंता और आंखों में नींद दिखे, ताकि मैसेज जाए कि वे स्टूडेंट्स की फिक्र में सोए नहीं। ऐसा इंस्टाग्राम की पोस्ट में झलका भी। इस्तीफे की स्क्रिप्ट भी तभी लिखी गई... संघ के प्रतिनिधियों ने सधी शैली में कहा कि धर्मेंद्र के इस्तीफे पर विचार करना चाहिए। आंदोलन भड़क रहा है। यूपी-पंजाब में चुनाव है। बिहार में सरकार अभी स्थिर नहीं हो पाई है। ऐसे में अगर ये आंदोलन वाकई नेपाल के जेन जी जैसा हुआ, तो सरकार कठिनाई से घिर जाएगी। आखिर में कहा गया कि ये संघ का स्पष्ट विचार है। इसके लिए 5 दिन यानी 27 जुलाई तक हमें देखना चाहिए कि पूरे देश से रिपोर्ट क्या आती है। अगर आंदोलन दब गया तो ठीक नहीं तो सोमवार को इस्तीफा दिलाना चाहिए। इन 5 दिनों में हमें पहले हर संभव कोशिश करनी चाहिए। जैसे- 1. सरकार और PM के पक्ष में नरेटिव तैयार करें। 2. ABVP के छात्रों को प्रोटेस्ट में शामिल करना ताकि वे आंदोलन में शामिल स्टूडेंट्स को समझाएं या अंदर ही अंदर आंदोलन के भीतर मतभेद पैदा करें। 3. आंदोलन में टूट डालें, जैसे विपक्ष अलग हो जाए, वांगचुक अलग और दीपके अलग। प्लान पर शुरू हुआ काम 1. दूसरे दिन रात में वांगचुक का अनशन तुड़वा दिया गया। ये मुश्किल नहीं था क्योंकि वांगचुक तैयार थे। 2. नरेटिव बनने लगा। ABVP के छात्रों तक मैसेज भेजना शुरू हुआ। 3. 25 जुलाई को ABVP से जुड़े करीब 150 स्टूडेंट्स प्रयागराज से दिल्ली पहुंचे। सुबह से जंतर-मंतर के प्रदर्शन में शामिल हो गए। जिला स्तर पर तो 23 जुलाई से ही छात्र एक्टिव हो गए थे। BJP प्लान में फेल भी पास भी सोर्स बताते हैं, ‘वांगचुक और दीपके के बीच दरार पड़ गई। वांगचुक पर डील करने के आरोप लगे। BJP इसमें कामयाब रही, लेकिन आंदोलन को बढ़ने से नहीं रोक पाई। दूसरी तरफ, ABVP की तरह समाजवादी पार्टी की यूथ विंग एक्टिव हो गई। मैसेजिंग हुई कि हर जिले में 500 युवा इकट्ठे हों। दिल्ली में जंतर-मंतर के साथ बिहार, यूपी में भी प्रदर्शन की आग बढ़ने लगी। डेडलाइन से 2 दिन पहले हो गया इस्तीफा... आंदोलन भड़का तो RSS ने और स्पष्ट मैसेज भेजा। सरसंघचालक मोहन भागवत ने भी संदेश दिया कि जेन जी से संवाद करना चाहिए। हमारी पीढ़ी अलग थी। हम आदेश मानते थे। ये पीढ़ी संवाद चाहती है। जेन जी को उनके तरीके से समझाकर हम रास्ते में ला सकते हैं। भागवत ने मीडिया में ये बोलने से पहले ही संदेश PM और गृहमंत्री को भेज दिया था। RSS ने साफ कहा कि अब अगर ये आंदोलन बढ़ा तो सरकार संकट में आ जाएगी। सिर्फ मोदी, शाह और RSS को पता था कब इस्तीफा होगा 22 जुलाई की मीटिंग में BJP की तरफ से जितेंद्र सिंह और जेपी नड्डा भी थे। हालांकि, प्रधान का इस्तीफा हुआ तो इसकी जानकारी सिर्फ अमित शाह, नरेंद्र मोदी और RSS को थी। BJP दफ्तर के अंदर तो किसी को खबर तक नहीं थी। नड्डा और जितेंद्र सिंह को भी तुरंत हुए इस इस्तीफे की खबर बाद में पता चली। इससे पहले किसान आंदोलन से बैकफुट में आई थी सरकार इससे पहले किसान आंदोलन के हिंसक होने के बाद सरकार ने बिल वापस लिए थे। आंदोलनकारियों के सामने झुकने का ये दूसरा मौका है। सूत्र ने कहा, आप इसे झुकना कह रही हैं, मैं रणनीति कह रहा हूं। किसान आंदोलन की वजह से बिल वापस लिए गए। उसके बाद फिर कोई किसान आंदोलन दिखा क्या। अभी शांति जरूरी थी, सो इस्तीफा ले लिया। हालांकि कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।
12 साल पुरानी केंद्र की मोदी सरकार- सख्त, अडिग और किसी भी दबाव में न झुकने वाली। मामला चाहे CAA-NRC प्रोटेस्ट का हो या संसद में बीच सत्र से 146 विपक्षी सांसदों का सस्पेंशन या फिर राहुल गांधी की सदस्यता खत्म कर दी गई हो। सरकार किसी विरोध के आगे कमजोर पड़ते नहीं दिखी। किसी मंत्री पर इस्तीफे का दबाव बना, तो कहा गया- ‘भैया यहां इस्तीफे नहीं होते।’ लेकिन 12 साल में पहली बार कॉकरोच पार्टी ने मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ले लिया। इस पूरे घटनाक्रम से कौन-से 5 बड़े डेंट लगे और क्या सरकार इससे उबर पाएगी; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… सवाल-1: क्या इस डेंट का असर आने वाले चुनावों पर पड़ेगा? जवाब: उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड की विधानसभाओं का कार्यकाल 2027 में खत्म हो रहा है। यहां फरवरी-मार्च 2027 में चुनाव हो सकते हैं। VoteVibe के फाउंडर और इलेक्शन एनालिस्ट अमिताभ तिवारी कहते हैं, ‘प्रोटेस्ट के दौरान सरकार ने राहुल गांधी या विपक्षी से कोई बातचीत नहीं की। उसने CJP के युवा नेताओं के साथ डील करके उनकी मांगें मान लीं, ताकि विपक्ष इसे अपनी जीत न दिखा सके। जबकि कॉकरोच पार्टी कोई चुनावी मंच नहीं, बल्कि यूथ प्लेटफॉर्म है। इसलिए सीधे तौर पर बीजेपी को कोई चुनावी नुकसान होता नहीं दिखता। विपक्ष को तब फायदा हो सकता था, जब उसने मांगें न मानी होतीं।' अमिताभ के मुताबिक, ‘राम मंदिर चंदाचोरी और फिर इस मामले में युवाओं के एकजुट प्रोटेस्ट से बीजेपी के सामने हिंदुत्व, हिंदू-मुस्लिम बाइनरी और राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों को लेकर एक नई चुनौती है, लेकिन बीजेपी को कोई चुनावी घाटा नहीं होगा। हर राज्य के चुनावी फैक्टर अलग हैं। पंजाब में सिख बनाम अन्य की राजनीति है। उत्तराखंड में मुस्लिम सिर्फ 15% है। वहां हिंदुत्व का मुद्दा नहीं हैं। उत्तर प्रदेश में भी जातीय फैक्टर ज्यादा रोल निभाता है।’ कांग्रेस को कवर करने वाले सीनियर जर्नलिस्ट आदेश रावल कहते हैं, ‘आने वाले विधानसभा चुनावों में इसका कोई असर नहीं दिखता है। पीएम मोदी के चेहरे या केंद्र सरकार के कामकाज के बजाय राज्यों में लोकल मुद्दे ज्यादा प्रभावी होते हैं।’ हालांकि आदेश ये भी कहते हैं कि युवाओं में जिस तरह का रोष है और वो जारी रहता है, तो उसका इलेक्टोरल टेस्ट 2029 के लोकसभा चुनाव में होगा। सवाल-2: क्या धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सरकार डैमेज कंट्रोल कर लेगी? जवाब: धर्मेंद्र के इस्तीफे के अलावा सरकार ने कॉकरोच पार्टी की बाकी दोनों मांगें भी मान ली हैं- प्रोटेस्टर्स पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी और NEET पेपर लीक के चलते जान गंवाने वाले बच्चों के परिवारों को एक करोड़ का मुआवजा मिलेगा। आदेश रावल कहते हैं, ‘बीजेपी हिंदुत्व, राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों से जुड़ा विरोध होता, तो बिना किसी डैमेज के मैनेज कर लेती, लेकिन इस बार मुद्दा उनके सिलेबस से बाहर का था। इस्तीफा दिया नहीं गया, बल्कि छात्रों ने इस्तीफा लिया है। पीएम मोदी को 2 दिन में बार-बार झुकना पड़ा। सारी मांगें माननी पड़ीं। वैचारिक तौर पर कुछ डैमेज ऐसा जरूर हुआ है, सरकार का मनोबल भी टूटा है, लेकिन ये डैमेज कंट्रोल हो जाएगा। आदेश जोड़ते हैं कि बीजेपी अपनी भूल में तुरंत सुधार करना भी जानती है। देश के लोगों की याद्दाश्त बहुत लंबी नहीं है। सरकार संसद सत्र में परिसीमन बिल आदि ला सकती है, इससे पूरा ध्यान उस पर चला जाएगा। ------------------ ये खबर भी पढ़िए… इन 5 वजहों से घबराई सरकार, तब हुआ धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा; नहीं झुकते तो क्या हो जाता, आखिरकार आंदोलन खत्म शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार इस्तीफा दे ही दिया। जंतर-मंतर पर 35 दिन से कॉकरोच जनता पार्टी का अनशन, पीएम आवास के बाहर राहुल गांधी का धरना, संसद में रोज गूंजता हंगामा और देश-दुनिया के कई शहरों में हो रहे प्रदर्शन से सरकार दबाव में थी। पूरी खबर पढ़िए…
22 जुलाई रात 10.30 तक तय था कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे। गृहमंत्री अमित शाह की जिद और PM मोदी का सपोर्ट उन्हें कुर्सी पर टिकाए हुए था। 22 जुलाई की रात 10.30 बजे एक मीटिंग हुई और ये कुर्सी डगमगाने लगी। मीटिंग RSS और BJP के बीच थी। शाह अब भी जिद पर अड़े थे, लेकिन प्रधानमंत्री का सपोर्ट अब हट चुका था। RSS के 5 पदाधिकारियों की मोदी-शाह से मीटिंग RSS की तरफ से सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, सह सरकार्यवाह अरुण कुमार और कृष्ण गोपाल के साथ दो और पदाधिकारी मौजूद थे। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और जेपी नड्डा मौजूद थे। ये मीटिंग न BJP दफ्तर में हुई और न ही संघ कार्यालय में। वजह थी, इस मीटिंग और उसमें हुई बातों को सीक्रेट रखना। इस मीटिंग के बारे में किसी को खबर नहीं थी। सोर्स ने बस इतना कहा कि मीटिंग शामिल लोगों में से किसी एक के घर पर हुई थी। तय हुआ PM मोदी तुरंत रात में ही जेन जी के अंदाज में बात करें सोर्स ने बताया इसी मीटिंग में तय हुआ कि PM मोदी तुरंत यानी रात में ही जेन जी के सबसे फेवरेट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए बात करेंगे। भाषा भी ऐसी हो जो जेन जी तक पहुंचे। ये तक तय हुआ कि PM डेकोरेट या निश्चिंत न दिखें। चेहरे पर चिंता और आंखों में नींद दिखे, ताकि मैसेज जाए कि वे स्टूडेंट्स की फिक्र में सोए नहीं। ऐसा इंस्टाग्राम की पोस्ट में झलका भी। इस्तीफे की स्क्रिप्ट भी तभी लिखी गई... संघ के प्रतिनिधियों ने अपनी सधी शैली में कहा कि धर्मेंद्र के इस्तीफे पर विचार करना चाहिए। आंदोलन भड़क रहा है। यूपी-पंजाब में चुनाव है। बिहार में सरकार अभी स्थिर नहीं हो पाई है। ऐसे में अगर ये आंदोलन वाकई नेपाल के जेन जी जैसा हुआ, तो सरकार कठिनाई से घिर जाएगी। आखिर में कहा गया कि ये संघ का स्पष्ट विचार है। इसके लिए 5 दिन यानी 27 जुलाई तक हमें देखना चाहिए कि पूरे देश से रिपोर्ट क्या आती है। अगर आंदोलन दब गया तो ठीक नहीं तो सोमवार को इस्तीफा दिलाना चाहिए। इन 5 दिनों में हमें पहले हर संभव कोशिश करनी चाहिए। जैसे- 1. सरकार और PM के पक्ष में नरेटिव तैयार करें। 2. ABVP के छात्रों को प्रोटेस्ट में शामिल करना ताकि वे आंदोलन में शामिल स्टूडेंट्स को समझाएं या अंदर ही अंदर आंदोलन के भीतर मतभेद पैदा करें। 3. आंदोलन में टूट डालें, जैसे विपक्ष अलग हो जाए, वांगचुक अलग और दीपके अलग। प्लान पर शुरू हुआ काम 1. दूसरे दिन रात में वांगचुक का अनशन तुड़वा दिया गया। ये मुश्किल नहीं था क्योंकि वांगचुक तैयार थे। 2. नरेटिव बनने लगा। ABVP के छात्रों तक मैसेज भेजना शुरू हुआ। 3. 25 जुलाई को ABVP से जुड़े करीब 150 स्टूडेंट्स प्रयागराज से दिल्ली पहुंचे। सुबह से जंतर-मंतर के प्रदर्शन में शामिल हो गए। जिला स्तर पर तो 23 जुलाई से ही छात्र एक्टिव हो गए थे। BJP प्लान में फेल भी पास भी सोर्स बताते हैं, ‘वांगचुक और दीपके के बीच दरार पड़ गई। वांगचुक पर डील करने के आरोप लगे। BJP इसमें कामयाब रही, लेकिन आंदोलन को बढ़ने से नहीं रोक पाई। दूसरी तरफ, ABVP की तरह समाजवादी पार्टी की यूथ विंग एक्टिव हो गई। मैसेजिंग हुई कि हर जिले में 500 युवा इकट्ठे हों। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की आग बुझ रही थी, लेकिन बिहार, यूपी में आग बढ़ने लगी। डेडलाइन से 2 दिन पहले हो गया इस्तीफा... आंदोलन भड़का तो RSS ने और स्पष्ट मैसेज भेजा। सरसंघचालक मोहन भागवत ने संदेश दिया कि जेन जी से संवाद करना चाहिए। हमारी पीढ़ी अलग थी। हम आदेश मानते थे। ये पीढ़ी संवाद चाहती है। जेन जी को उनके तरीके से समझाकर हम रास्ते में ला सकते हैं। ये संदेश सरकार और प्रधानमंत्री के नाम था। भागवत ने मीडिया में ये बोलने से पहले ही ये संदेश PM और गृहमंत्री को भेज दिया था। RSS ने साफ कहा कि अब अगर ये आंदोलन बढ़ा तो सरकार संकट में आ जाएगी। सिर्फ मोदी, शाह और RSS को पता था कि आज इस्तीफा होगा 22 जुलाई की मीटिंग में BJP की तरफ से जितेंद्र सिंह और जेपी नड्डा भी थे। हालांकि, प्रधान का इस्तीफा हुआ तो इसकी जानकारी सिर्फ अमित शाह, नरेंद्र मोदी और RSS को थी। BJP दफ्तर के अंदर तो किसी को खबर तक नहीं थी। नड्डा और जितेंद्र सिंह को भी तुरंत हुए इस इस्तीफे की खबर बाद में पता चली। अब कौन/ होगा शिक्षा मंत्री सूत्र के हिसाब से फिलहाल आंदोलन में विपक्ष, स्टूडेंट्स और सरकार के बीच की कड़ी बने जितेंद्र सिंह और जेपी नड्डा का नाम लिस्ट में सबसे आगे है। दोनों मंत्री विनम्र और बेदाग माने जाते हैं। पूरे आंदोलन में भी इन्होंने जिस तरह से मध्यस्थता का काम किया, उसकी सरहाना RSS और BJP के शीर्ष नेतृत्व ने की। इनके अलावा भी दावेदार हैं… इससे पहले किसान आंदोलन से बैकफुट में आई थी सरकार इससे पहले किसान आंदोलन के हिंसक होने के बाद सरकार ने बिल वापस लिए थे। आंदोलनकारियों के सामने झुकने का ये दूसरा मौका है। सूत्र ने कहा, आप इसे झुकना कह रही हैं, मैं रणनीति कह रहा हूं। किसान आंदोलन की वजह से बिल वापस लिए गए। उसके बाद फिर कोई किसान आंदोलन दिखा क्या। अभी शांति जरूरी थी, सो इस्तीफा ले लिया। हालांकि कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।
फ्रांस-स्पेन में कुदरत का तांडव, जंगल की भीषण आग से 2 लाख लोग बेघर; बोर्डो शहर पर मंडराया बड़ा खतरा
दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस और मध्य स्पेन इस समय इतिहास की सबसे भयानक प्राकृतिक आपदाओं में से एक का सामना कर रहे हैं। जंगलों में लगी बेकाबू आग ने ऐसा हाहाकार मचाया है कि दोनों देशों के प्रभावित इलाकों से लगभग 2 लाख लोगों को आनन-फानन में सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करना पड़ा है। मैड्रिड से लेकर बोर्डो के पास बसे तमाम कस्बों तक दहशत का माहौल है और लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों को छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की तरफ भागने को मजबूर हो गए हैं। आग की रफ्तार और उसकी विनाशकारी क्षमता ने दमकल विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है, क्योंकि इस भयंकर लपटों का सीधे तौर पर सामना करना किसी के लिए भी मुमकिन नहीं हो पा रहा है।फ्रांस के अटलांटिक तट पर अफरा-तफरी, नावों के जरिए भागे लोगस्पेन में आग बुझाने वाले कर्मचारियों ने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि हवा के रुख और प्रचंड गर्मी के कारण आग की लपटें इतनी तेज थीं कि उस पर काबू पाना बेहद मुश्किल साबित हुआ। फ्रांस के लोकप्रिय अटलांटिक तटीय टूरिस्ट इलाकों में जब आग तेजी से फैलने लगी, तो स्थिति इतनी विकट हो गई कि कई लोगों को अपनी जान बचाने के लिए समंदर में नावों का सहारा लेकर भागना पड़ा। फ्रांसीसी गृह मंत्रालय से मिले आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, केवल फ्रांस के गिरोंडे और लैंड्स इलाकों से ही 1,41,000 से अधिक नागरिकों को अपने पुश्तैनी और आधुनिक घर छोड़कर सुरक्षित ठिकानों पर शरण लेनी पड़ी है।स्पेन के मध्य इलाकों में भी तबाही, घरों को खाली कराने के लिए उतरी पुलिसदूसरी तरफ स्पेन के गृह मंत्रालय के मुताबिक, मध्य स्पेन के जंगलों से उठी आग की लपटों ने रिहायशी इलाकों को अपनी आगोश में ले लिया, जिसके चलते 60,000 लोगों को मजबूरन अपने घर खाली करने पड़े। प्रशासनिक मुस्तैदी के चलते पुलिस की टीमें घर-घर जाकर सायरन बजाते हुए लोगों को तुरंत इलाका खाली करने की चेतावनी दे रही थीं। जंगलों से उठ रहे काले धुएं के विशाल गुबारों ने आसमान को पूरी तरह ढक लिया है। सड़कों पर सिर्फ गाड़ियों का रेला दिखाई दे रहा है, जिससे हर तरफ भगदड़ और अफरा-तफरी जैसा माहौल बना हुआ है।राहत की खबर: किसी की मौत नहीं, लेकिन दर्जनों फायरफाइटर झुलसेइस भयावह आपदा के बीच सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि अभी तक फ्रांस या स्पेन में इस भीषण आग की चपेट में आने से किसी भी नागरिक या पर्यटक की मौत की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, आग पर काबू पाने की दिन-रात कोशिश कर रहे दर्जनों फ्रांसीसी दमकलकर्मी (फायरफाइटर) इस दौरान घायल या झुलस जरूर गए हैं, जिनका इलाज जारी है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब इस अनियंत्रित आग को बोर्डो शहर की तरफ बढ़ने से रोकने की है, जिसके लिए पड़ोसी क्षेत्रों से भी अतिरिक्त फायर ब्रिगेड और रेस्क्यू टीमों को तुरंत मौके पर रवाना कर दिया गया है।
काला सागर में मालवाहक पोत पर बड़ा हमला, एक भारतीय नागरिक की दर्दनाक मौत; MEA ने जताई कड़ी आपत्ति
काला सागर से एक बेहद दहला देने वाली खबर सामने आ रही है, जहां 18 जुलाई को रूसी समुद्री सीमा क्षेत्र से गुजर रहे एक मालवाहक पोत पर हुए खौफनाक हमले में एक भारतीय नागरिक की जान चली गई है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को इस बात की आधिकारिक पुष्टि करते हुए घटना पर गहरा शोक और कड़ी आपत्ति जताई है। जिस कमर्शियल शिप यानी ‘एमवी ओमोर्फी’ को इस हमले में निशाना बनाया गया, उस पर कुल 10 क्रू मेंबर सवार थे जिनमें 3 भारतीय नागरिक भी शामिल थे। इस दुखद हादसे में एक भारतीय की मौत हो गई, जबकि राहत की बात यह है कि बाकी के दो भारतीय सुरक्षित बताए जा रहे हैं।रूसी अधिकारियों के संपर्क में भारत, पीड़ित परिवार को दी जाएगी हरसंभव मददइस घटना के सामने आने के बाद रूस स्थित भारतीय दूतावास और मिशन के अधिकारी लगातार स्थानीय रूसी प्रशासन के संपर्क में हैं ताकि मृत भारतीय नाविक के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द स्वदेश लाया जा सके और पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता प्रदान की जा सके। भारत सरकार ने दो टूक शब्दों में कहा है कि इस तरह से मालवाहक और कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना तथा निर्दोष नागरिकों की जान को खतरे में डालना बेहद निंदनीय है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से अपील की है कि वे अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का सख्ती से पालन करें और वैश्विक समुद्री मार्गों की सुरक्षा को हर हाल में सुनिश्चित करें।ओडेसा बंदरगाह हमले पर मॉस्को का दावा खारिज, जहाज में लदा था अनाजविदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक नियमित मीडिया ब्रीफिंग के दौरान यूक्रेन के तट पर ओडेसा बंदरगाह के पास हुए एक अन्य हमले का भी जिक्र किया, जिसमें गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले कमर्शियल जहाज ‘एमवी गोल्डन लियो’ को निशाना बनाया गया था। इस हमले में चार भारतीयों समेत कुल 10 लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में भारत ने रूस के उस दावे को लगभग खारिज कर दिया है जिसमें पोत पर सैन्य साजोसामान होने की बात कही जा रही थी। डीजी शिपिंग (नौवहन महानिदेशालय) से मिले पुख्ता आंकड़ों का हवाला देते हुए भारत ने स्पष्ट किया है कि ‘एमवी गोल्डन लियो’ ने 19 जुलाई को रवाना होने से पहले केवल अनाज का कार्गो लोड किया था।वाणिज्यिक जहाजों को निशाना न बनाए जाने की दोहरी अपीलविदेश मंत्रालय ने कड़े शब्दों में यह संदेश दिया है कि मौजूदा क्षेत्रीय तनाव या युद्ध की स्थितियों के बीच किसी भी परिस्थिति में कमर्शियल जहाजों और निर्दोष नाविकों को मोहरा नहीं बनाया जाना चाहिए। भारत का यह रुख साफ करता है कि वह अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह से गंभीर है। पिछले कुछ दिनों में ब्लैक सी और उसके आस-पास के समुद्री इलाकों में जहाजों पर बढ़ते हमलों ने वैश्विक शिपिंग और सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है, जिससे समुद्री मार्गों पर सफर कर रहे नाविकों के परिवारों में लगातार चिंता का माहौल बना हुआ है।
शुरू हो गया है महायुद्ध? ईरान पर टूट पड़े बहरीन और कुवैत; पहली बार किया सीधा हमला
मध्य पूर्व यानी पश्चिम एशिया का सुलगता संघर्ष अब एक बेहद खतरनाक और नए मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां तनाव की आंच ने खाड़ी के देशों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। वैश्विक राजनीति और रक्षा गलियारों से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक, पहली बार बहरीन और कुवैत खुलकर सीधे युद्ध के मैदान में उतर आए हैं और उन्होंने ईरान के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की सनसनीखेज रिपोर्ट के अनुसार, इन दोनों खाड़ी देशों ने सऊदी अरब की रणनीतिक मदद से ईरान के भीतर मौजूद मिसाइल स्टोरेज और प्रमुख सैन्य ठिकानों को करारा जवाब देना शुरू कर दिया है, जिससे वैश्विक कूटनीति में खलबली मच गई है।सऊदी अरब की खुफिया और डिफेंस मदद से ईरान पर पलटवारअब तक खाड़ी के देश अपने ऊपर आने वाले खतरों से निपटने के लिए केवल रक्षात्मक रुख अपनाते थे और ईरान समर्थित ड्रोन्स या मिसाइलों को हवा में ही नाकाम करने तक सीमित रहते थे। क्षेत्रीय तनाव और युद्ध के बड़े दायरे में फैलने के डर से इन देशों ने कभी सीधे तौर पर आक्रामक रुख नहीं अपनाया था, लेकिन ईरान की तरफ से लगातार बढ़ रहे हमलों और उकसावे ने इन देशों को अपनी नीति बदलने पर मजबूर कर दिया है। ताजा सैन्य अभियानों में सऊदी अरब इन्हें खुफिया जानकारी यानी इंटेलिजेंस और डिफेंसिव एयर कवर उपलब्ध करा रहा है, जिससे बहरीन और कुवैत की ताकत में और इजाफा हुआ है। हालांकि इस मोर्चे पर अभी ओमान और कतर जैसे अन्य देशों ने सीधी सैन्य कार्रवाई शुरू नहीं की है, लेकिन जिस तरह से खाड़ी देशों का रुख बदला है, उससे आने वाले दिनों में समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बना रहा है ईरानईरान लगातार उन देशों को अपना निशाना बना रहा है जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने और आधुनिक सैन्य उपकरण मौजूद हैं, जिसमें मुख्य रूप से बहरीन, कुवैत और जॉर्डन शामिल हैं। हालिया रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि यूएई के कई शहरों में भी तबाही मचाने की कोशिशें की गई हैं और इन देशों में आए दिन सायरन बजने की आवाज़ें सुनाई देती हैं। कुवैत के भीतर कैंप उडैरी, कैंप दोहा, कैंप आरिफजान और अली अल सलेम एयरबेस जैसे महत्वपूर्ण अमेरिकी ठिकानों को ईरानी हमलों का सामना करना पड़ा है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बहरीन के गृह विभाग को नागरिकों की सुरक्षा के लिए लगातार अलर्ट जारी करना पड़ रहा है और सायरन बजाकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सख्त हिदायत दी जा रही है।होर्मुज जलडमरूमध्य पर कब्जे की जंग और गहराता वैश्विक ऊर्जा संकटयह पूरा घटनाक्रम अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के खिलाफ लगातार 13वीं रात भी हवाई हमले जारी रखने के कुछ ही घंटों बाद सामने आया है, जिससे दोनों पक्षों के बीच टकराव चरम पर पहुंच चुका है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही यह तानशाही दुनियाभर के लिए एक बड़े आर्थिक संकट की घंटी बन गई है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए दुनिया की सबसे अहम धमनियों में से एक है और ताजा सैन्य भिड़ंत का मुख्य केंद्र भी यही इलाका है। यदि यह सामरिक जलमार्ग पूरी तरह बंद होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ईंधन की कीमतों में भयंकर उछाल आ सकता है, जिससे पूरी दुनिया में भारी आर्थिक मंदी और उथल-पुथल मचने का खतरा मंडराने लगा है।
शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार इस्तीफा दे ही दिया। जंतर-मंतर पर ३५ दिन से कॉकरोच जनता पार्टी का अनशन, पीएम आवास के बाहर राहुल गांधी का धरना, संसद में रोज गूंजता हंगामा और देश-दुनिया के कई शहरों में हो रहे प्रदर्शन। सभी की एक यही मांग थी। आखिर इतने दिनों से अड़े धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा क्यों दिया और अब आगे क्या होगा; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… i. जंतर-मंतर पर कॉकरोच पार्टी का प्रोटेस्ट: कॉकरोच जनता पार्टी 34 दिनों से जंतर-मंतर पर अनशन कर रही थी। 20-30 हजार युवा हर वक्त वहां मौजूद थे। 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान ‘पुलिस एक्शन’ के बाद भीड़ और बढ़ने लगी। ii. राहुल गांधी की अगुवाई में आक्रामक विपक्ष: 21 जुलाई को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेता पीएम आवास के पास धरने पर बैठे। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह मनाने पहुंचे ,तो राहुल ने कहा कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होता, तब तक कोई चर्चा नहीं होगी। राहुल पीएम मोदी के माफीनामे पर भी अड़ गए। इसके बाद रोजाना राहुल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। पूरा विपक्ष इस मामले में एकट्ठा रहा। एक हफ्ते से संसद नहीं चलने दी। iii. पार्टी के भीतर नेताओं और सेलिब्रिटीज की उठती आवाजेंः बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने भी छात्रों की मांगों और चिंता का समर्थन किया। क्रिकेटर्स, बॉलीवुड सेलिब्रिटी, साउथ फिल्मों के स्टार्स, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर भी युवाओं के विरोध प्रदर्शन से जुड़ने लगे थे। पेपर लीक को गंभीर मुद्दा बता रहे थे। क्या अब आंदोलन खत्म हो जाएगा? CJP प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि जब तक बाकी मांगो पर लिखित आश्वासन नहीं मिल जाती, हम हटने वाले नहीं हैं। दरअसल, कॉकरोच जनता पार्टी की जो 3 प्रमुख मांगे थी- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, NEET पेपर लीक के कारण सुसाइड करने वाले छात्रों के परिवारवालों को मुआवजा और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न हो। धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा होने के बाद जंतर-मंतर पर अभिजीत दीपके ने कहा- मंत्री का इस्तीफा तो हो गया है, लेकिन हमारी 2 और मांगे हैं। हम ऐसे नहीं जाएंगे। कॉकरोच एक बार घुसता है, तो निकलता नहीं है। जिन बच्चों ने सुसाइड किया उनके परिवार को एक करोड़ मुआवजा मिले। पुलिस वालों पर एक्शन होना चाहिए। ---------------- ये खबर भी पढ़िए… शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा: दीपके बोले- वे कहते थे इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते; लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। NEET पेपर लीक केस में उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 36 दिन से जंतर-मंतर पर धरना दे रही है। पूरी खबर पढ़िए…
अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा भीषण सैन्य संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। युद्ध की 13वीं रात दोनों ओर से हुए जबर्दस्त हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में हालात और अधिक बेकाबू हो गए हैं। अमेरिकी सेना ने ओमान की खाड़ी में ईरानी नाकेबंदी (Blockade) तोड़ने की कोशिश कर रहे एक और कमर्शियल जहाज पर सीधी गोलीबारी कर उसे बेकार कर दिया। वहीं, जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने फारस की खाड़ी और पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर विनाशकारी हमले बोले हैं।दुनिया के सबसे बड़े तेल आपूर्ति मार्ग होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के प्रभावी रूप से बंद होने के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। आइए एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और जियोपॉलिटिक्स रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं इस भीषण संघर्ष के 5 बड़े अपडेट्स।1. ओमान की खाड़ी में M/T लैविन जहाज पर अमेरिकी सेना की गोलीबारीअमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने पुष्टि की है कि ओमान की खाड़ी में व्यावसायिक जहाज M/T लैविन (M/T Lavine) ने अमेरिकी सेना द्वारा लागू की गई नाकेबंदी को कम से कम चार बार तोड़ने का प्रयास किया।इंजन रूम पर हमला: चेतावनी के बावजूद आदेश न मानने पर अमेरिकी सेना ने जहाज के इंजन रूम पर सीधी गोलीबारी कर उसे पूरी तरह बेकार (Incapacitated) कर दिया।12 जहाजों का रास्ता बदला: अमेरिकी सेना ने अब तक दो कमर्शियल जहाजों को बेकार किया है और 12 अन्य जहाजों के रास्तों को जबरन डाइवर्ट किया है।2. कुवैत, बहरीन और इराक में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान का पलटवारईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भीषण हमले किए:कुवैत और बहरीन में तबाही: ईरान ने कुवैत के उदैरी स्थित अमेरिकी ठिकाने पर हमला कर गोला-बारूद के 3 बड़े शेड नष्ट कर दिए। इसके अलावा, बहरीन में तैनात अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (Fifth Fleet) के एक वॉचटावर को भारी नुकसान पहुंचाया गया।इरबिल में 5 ड्रोन ढहाए: उत्तरी इराक के इरबिल एयरपोर्ट के पास स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमला करने आए 5 आत्मघाती ड्रोनों को अमेरिकी वायु रक्षा प्रणाली ने मार गिराया।ईरान के नौसैनिक अड्डे पर अमेरिकी बमबारी: जवाब में अमेरिका ने उत्तरी ईरान, केशम द्वीप (Qeshm Island) स्थित रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के नौसैनिक अड्डों और परमाणु केंद्र वाले शहर इस्फ़हान (Isfahan) पर भारी बमबारी की।3. होर्मुज और बाब अल-मंडेब बंद: 96 डॉलर पहुंचा क्रूड ऑयलइस युद्ध की सबसे बड़ी मार वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रही है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रैंड क्रूड ऑयल की कीमतें उछलकर $96 प्रति बैरल तक पहुंच चुकी हैं, जो युद्ध से पहले $72 के आसपास थीं।वहीं, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमला कर बाब अल-मंडेब स्ट्रेट (Bab al-Mandeb Strait) को भी बाधित कर दिया है। इस रास्ते से दुनिया का 12% व्यापार और 25% कंटेनर ट्रैफिक गुजरता है।4. 400 जहाजों पर फंसे 6,000 नाविक: मानवाधिकार संकट गहरायाइंसानी नुकसान का आंकड़ा बेहद डरावना होता जा रहा है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, युद्ध शुरू होने से अब तक 3,434 लोग मारे जा चुके हैं।इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) और संयुक्त राष्ट्र (UN) के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट के आसपास फंसे 400 से अधिक कमर्शियल जहाजों पर लगभग 6,000 नाविक (Seafarers) जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। इनमें से कई जहाजों को उनके मालिकों ने छोड़ दिया है, जिससे नाविक बिना भोजन, पानी, ईंधन और चिकित्सा के समुद्र के बीच फंसे हुए हैं।5. ट्रंप का 'ऑल आउट' रुख और कूटनीति की नाकामीअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन वे ईरान से बातचीत भी कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि उन्हें 'युद्ध खत्म करने की कोई जल्दी नहीं है'।दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि ईरान किसी भी धमकी या दादागिरी के आगे नहीं झुकेगा। पाकिस्तान और ओमान की मध्यस्थता की कोशिशों के बावजूद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक सफलता के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। इस बीच, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी अगले हफ्ते अमेरिका पहुंचकर ट्रंप से मुलाकात करने वाले हैं, जिससे युद्ध के और भड़कने की आशंका जताई जा रही है।
व्हाइट हाउस ने शुक्रवार (स्थानीय समय) को फिर से कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उम्मीद है कि सऊदी अरब, इजरायल के साथ संबंध सामान्य करेगा। इसके साथ ही व्हाइट हाउस ने उम्मीद जताई कि सऊदी अरब प्रस्तावित नागरिक परमाणु समझौता को लेकर बड़ी समझ के हिस्से के तौर पर अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिकी सरकार इस मुद्दे को अपनी मध्य-पूर्व रणनीति का केंद्र मानता है।
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब एक भीषण और बहुआयामी युद्ध का रूप ले चुका है। वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की एक हालिया एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, बहरीन और कुवैत की वायुसेना ने पहली बार संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए ईरान के अंदर मौजूद सैन्य ठिकानों, मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज डिपो पर गुप्त हवाई हमले (Secret Airstrikes) किए हैं।इस सीक्रेट ऑपरेशन में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने खुफिया जानकारी साझा करने के साथ-साथ बहरीन और कुवैत के लड़ाकू विमानों को एयर कवर प्रदान किया। हालांकि बहरीन और कुवैत के पास सीमित वायुसेना है, लेकिन अपने क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर लगातार हो रहे ईरानी हमलों के जवाब में उन्हें यह बड़ा कदम उठाना पड़ा है।अमेरिकी ठिकानों पर ईरान का भीषण पलटवारबहरीन और कुवैत के इस कदम के बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने अपने हमले और तेज कर दिए हैं। ईरान ने कुवैत में मौजूद कैंप उदैरी (Camp Buehring), कैंप आरिफजान और अली अल सालेम एयर बेस के साथ-साथ बहरीन में ईसा एयर बेस और अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े (US Fifth Fleet) के ठिकानों पर कमिकेज़ (Kamikaze) ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से ताबड़तोड़ हमले किए हैं।ईरान की ओर से आम नागरिकों को चेतावनी दी गई है कि वे अमेरिकी सैन्य परिसरों से कम से कम 500 मीटर की दूरी बनाए रखें, क्योंकि अमेरिकी मौजूदगी वाले सभी बेस उसके निशाने पर रहेंगे।समुद्र में नाकेबंदी और हॉर्मुज स्ट्रैट पूरी तरह ठपफारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना ने ईरान की समुद्री नाकेबंदी को कड़ा कर दिया है। अमेरिका ने नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहे व्यापारिक जहाजों पर फायरिंग कर उन्हें बेकार कर दिया है।हॉर्मुज स्ट्रैट बंद: लगातार हो रही गोलाबारी और ड्रोन हमलों के कारण दुनिया का सबसे प्रमुख तेल मार्ग 'हॉर्मुज स्ट्रैट' (Strait of Hormuz) पूरी तरह ठप हो चुका है।समुद्र में मानवीय संकट: समुद्र में लगभग 400 व्यापारिक जहाज और 6,000 से अधिक नाविक बीच रास्ते में फंसे हुए हैं, जिनके पास भोजन, पानी और आवश्यक ईंधन का गहरा संकट पैदा हो गया है।कच्चे तेल में उबाल: हॉर्मुज स्ट्रैट और लाल सागर में जहाजों पर हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गई हैं।यमन में हुथी ठिकानों पर सऊदी का हमलालाल सागर के मुहाने (बाब अल-मंदेब) पर ईरान समर्थित हुथी विद्रोहियों ने सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर हमले बढ़ा दिए थे। इसके जवाब में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन के होदेइदा इलाके में हुथी विद्रोहियों के सैन्य अड्डों पर भारी बमबारी की है।फिलहाल ओमान, पाकिस्तान और चीन की ओर से शांति वार्ता कराने के प्रयास जारी हैं, लेकिन अमेरिका और ईरान दोनों ही एक-दूसरे के खिलाफ पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर पड़ रहा है।
चीन और रूस ने ईरान को हथियार नहीं देने का भरोसा दिया : ट्रंप
ईरान के साथ जारी जंग के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हथियारों की सप्लाई को लेकर चीन और रूस पर भरोसे की बात को दोहराया
बाब-अल-मंदेब विवाद : भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जहाजों की आवाजाही पर दिया जोर
विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही का अधिकार बहुत महत्वपूर्ण है
शिक्षा नहीं पूछती जन्मस्थान, सिर्फ मेहनत और सपनों की उड़ान देखती है : राष्ट्रपति मुर्मु
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रोमानिया की बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज से मानद डॉक्टरेट की उपाधि मिलने के बाद कहा कि शिक्षा उनके जीवन में बदलाव लाने वाली सबसे बड़ी ताकत रही है
आईआरजीसी का दावा, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों को किया तबाह
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने कहा कि उसकी सेनाओं ने कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और संसाधनों पर जवाबी हमले किए हैं।
तारीख: 20 जुलाई जगह: दिल्ली का जंतर-मंतर कॉकरोच जनता पार्टी ने चलो संसद मार्च निकाला। वे NEET पेपर लीक को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांग रहे थे। प्रदर्शनकारियों ने अभी बैरिकेड्स पार भी नहीं किए थे और पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। 100 से ज्यादा प्रदर्शनकारी घायल हुए। कुछ अब भी अस्पताल में हैं, बाकी डिस्चार्ज होकर फिर से जंतर-मंतर पर डट गए हैं। अब ये घायल प्रदर्शनकारी क्या चाहते हैं, पढ़िए ये रिपोर्ट… अहेली, दिल्ली 20 साल की अहेली दिल्ली यूनिवर्सिटी से इंग्लिश ऑनर्स कर रही हैं। 20 जुलाई को यहां आईं। अहेली बताती हैं, ‘मार्च शुरू होने से पहले हमसे कहा गया था कि अगर पुलिस मारने भी आए, तो शांत रहते हुए उन्हें फूल देना है। हम लोग फूल लेकर खड़े थे। तभी भीड़ के बीच एक एम्बुलेंस घुस आई। शायद पुलिस-प्रशासन भगदड़ के हालात बनाना चाहता था, क्योंकि एम्बुलेंस के अंदर कोई नहीं था।‘ ‘जब एम्बुलेंस के साथ ही हमारे कुछ लोगों ने आगे बढ़ने की कोशिश की, तो पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस ने न लड़की देखी, न लड़का। सबको बुरी तरह पीटा। लड़कियों के कपड़े फाड़े, हमारी आंख के सामने 10-12 साल के बच्चों के सिर फोड़ दिए।‘ वे कहती हैं, ‘मेरे कई दोस्तों ने 2024 में भी NEET का पेपर दिया था, लेकिन लीक हो गया। मेरे साथियों का सपना टूट गया और उन्हें दूसरी जगहों पर एडमिशन लेना पड़ा। मैं भी दिल्ली UPSC पास करने का सपना लेकर आई हूं, लेकिन लगता नहीं कि इस सरकार के राज में वो पूरा हो पाएगा।‘ विशाल, यूपी के झांसी से 18 साल के विशाल ने अभी 12वीं पास की है। प्रोटेस्ट में शामिल होने के लिए झांसी से उनके साथ और भी 50 लोग आए थे। विशाल बताते हैं, ‘हम एक साथ सोनम वांगचुक का पोस्टर लेकर जनपथ मेट्रो स्टेशन पहुंचे थे। वहां पुलिस ने हमें ये कहकर रोका कि एक जगह इकट्ठा होकर बैठ जाओ, तब बैरिकेड हटाकर अंदर दाखिल कराएंगे। हम जैसे ही बैठे, तो पुलिस ने पीटना शुरू कर दिया।‘ ‘पुलिस के साथ सिविल ड्रेस में कुछ गुंडे भी थे, जिन्होंने हमें जानवरों की तरह पीटा। उन्होंने लड़कियों के साथ जानबूझकर बदसलूकी की और उनके कपड़े फाड़े। हमारे साथ इतनी ज्यादती की गई कि जैसे हम किसी दूसरे देश से आए हों। हम यहां इंसाफ की लड़ाई लड़ने आए थे, लेकिन पुलिस एकदम जानवर और हैवान बन गई।‘ पिटाई के दौरान विशाल का पैर टूट गया है। सामान गायब हो गया। वे अपना टूटा पैर दिखाकर कहते हैं, ‘अब बताइए इसके भरोसे क्या कोई फिजिकल टेस्ट पास कर पाएंगे। ये देश अब रहने लायक नहीं बचा।‘ इस हाल में भी विशाल जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं। वे कहते हैं, ‘जब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होता, तब तक हम यहां से नहीं हटेंगे। चाहे जान क्यों न चली जाए।‘ अनिल सिंह, मध्यप्रदेश के किसान अनिल सिंह ने चलो संसद मार्च के दौरान लाठियां खाईं, घायल हुए लेकिन पीछे नहीं हटे। माथे और हाथ पर पट्टी बांधे वो धरनास्थल पर जमे हुए हैं। अनिल कहते हैं, ‘हमारी आखिरी मंजिल जीत होगी और व्यवस्थाओं में बदलाव होगा। देश हमारा है, सिर्फ उनका नहीं है। हम जैसे चाहेंगे, इसे चलाएंगे। इस देश के लिए हमने कुर्बानी दी है, उन्होंने क्या किया।’ हमने पूछा यहां आने के लिए किसने प्रेरित किया। वे जवाब में कहते हैं, 'जब भी इतिहास पढ़ते हैं, इसकी जरूरत महसूस होती है। फिर बिहार में भरत तिवारी का मामला हो या RTI एक्टविस्टों के मारे जाने का मामला। ये सरकार खुद क्रांतिकारी खड़े कर रही है।' स्वरा खान, दिल्ली जामिया की रहने वाली 23 साल की स्वरा खान भी मार्च के दौरान घायल हुईं। उनके हाथों पर पट्टी बंधी है। चोट की वजह से आंखें सूजी हैं। वे बताती हैं कि पुलिस ने उन्हें डिटेन करने के बाद जेल में मारा। तबीयत सही नहीं, इसलिए आवाज बैठ गई है। लिहाजा ज्यादा बात नहीं कर सकीं। हर्ष, यूपी के कानपुर से कानपुर से आए हर्ष NEET की तैयारी कर रहे हैं। वे कहते हैं, ‘जवानों ने मुझे रोककर लात-घूसे और लाठियां मारी। हम पर आंसू गैस के गोले बरसाए। पुलिस वालों ने लड़कियों के प्राइवेट पार्ट में डंडे डालने की कोशिश की। छोटे बच्चों को मारा। हमें प्रताड़ित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी और सरकार हमें ही गुंडा बता रही है।‘ हर्ष अभी धरना स्थल पर जमे हुए हैं। वे कहते हैं, ‘धर्मेंद्र प्रधान को हमारा शुक्रगुजार होना चाहिए, क्योंकि आज से एक साल पहले उन्हें कोई जानता भी नहीं था। हमने जब प्रोटेस्ट किया, तो देश को पता चला कि शिक्षा मंत्री कौन है। धर्मेंद्र प्रधान में अगर शर्म बची हो, तो इस्तीफा दें।‘ वैभव, यूपी के आगरा से 10 साल के वैभव आगरा से अपनी मां के साथ जंतर-मंतर आए हैं। मां फलों का ठेला लगाती हैं। वैभव कहते हैं कि धमेंद्र प्रधान जब तक इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक वे यहीं रहेंगे। अभिषेक सिंह, यूपी के प्रयागराज से दिल्ली में UPSC की तैयारी कर रहे अभिषेक सिंह बताते हैं, 'उस दिन बाकी साथियों के साथ हम शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे थे। केरलम हाउस तक ही पहुंचे थे कि तभी पुलिस ने बैरिकेड्स लगा दिए। भीड़ ज्यादा थी, इसलिए संभालना मुश्किल हो गया। दिल्ली पुलिस ने अचानक टियर गैस और लाठीचार्ज शुरू कर दिया।' 'पुलिस की कार्रवाई बहुत बर्बर थी। सैकड़ों युवाओं को चोटें आईं। सबसे बुरा सलूक प्रदर्शनकारी लड़कियों के साथ किया गया। पुलिस कर्मियों ने उनके साथ बदसलूकी की। मुझे पुलिस ने स्टेज से नीचे फेंक दिया। मेरे पैर काम नहीं कर रहे थे। लाठीचार्ज के बीच मैं एक साथी की मदद से वहां से भाग सका। …………………. ये खबर भी पढ़ें… कॉकरोच आंदोलन से BJP में चिंता, लेकिन प्रधान नहीं हटेंगे 22 जुलाई, वक्त करीब 12 बजे। दिल्ली में BJP हेडक्वॉर्टर के 5वें फ्लोर पर पार्टी के महामंत्री जुटने शुरू हुए। 15-20 मिनट के अंदर आठों महामंत्री एक साथ थे। उनके अलावा भी कई पदाधिकारी भी पहुंच गए। मसला कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट से बना माहौल था। BJP में हमारे सूत्र बताते हैं कि पहली बार BJP ऑफिस में बैठक हुई। 3 घंटे तक चली इस मीटिंग में प्रोटेस्ट के असर को खत्म करने की स्ट्रैटजी पर बात हुई। पूरी खबर पढ़िए…
दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल की पांचवी मंजिल। यहीं 21 साल की साक्षी भर्ती है। साक्षी 20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में शामिल होने जंतर-मंतर गई थी। तभी पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। भगदड़ मची और साक्षी भीड़ के नीचे दब गई। इसके बाद से साक्षी अस्पताल में है। कहानी बस इतनी नहीं है। मैं साक्षी से मिलने अस्पताल गई तो एक अजीब बात महसूस हुई। गेट पर, लिफ्ट के बाहर और साक्षी के वार्ड के बाहर हर जगह पुलिस है। क्यों समझ नहीं आया। साक्षी तक पहुंचने की कोशिश की तो पुलिसवालों ने रोक दिया। क्यों का जवाब मिल गया। ये सब सिर्फ इसलिए कि कोई साक्षी तक न पहुंच पाए। अंदर साक्षी के भाई, मां और बुआ-फूफा हैं। मैंने तीन दिन तक साक्षी से मिलने की कोशिश की। पहला दिन तीन लेयर में पुलिस सिक्योरिटी, ICU के बाहर पहरा अस्पताल की इमरजेंसी बिल्डिंग के कॉरिडोर में 5 पुलिसवाले बैठे थे। यहां एक गार्ड ने पूछा-कहां जाना है। मैंने कहा- तीसरे प्लोर पर है। उसने कहा- यहां से एंट्री बंद है, दूसरी तरफ से जाइए। वहां लिफ्ट भी है। मैं लिफ्ट के पास पहुंची। यहां पुलिसवालों की दूसरी लेयर थी। लिफ्ट में मिले दो पुलिसवालों से पूछा- साक्षी से मिलवा सकते हैं। जवाब मिला- नहीं मिलवा सकते। कल या परसों आइए, मिलवा देंगे। इसके बाद मैं पांचवीं मंजिल पर पहुंची। यहां भी 5 से 6 पुलिसवाले बैठे थे। जिस ICU में साक्षी का इलाज चल रहा है, उसके बाहर भी पहरा है। यानी आप अस्पताल में बेरोकटोक आ-जा सकते हैं, लेकिन साक्षी के बारे में पूछते ही सबके कान खड़े हो जाते हैं। परिवार के अलावा किसी को साक्षी के पास तक नहीं पहुंचने दिया जा रहा। पता चला कि पॉलिटिकल लीडर भी साक्षी से मिलना चाहते थे, लेकिन परिवार ने मना कर दिया। डॉक्टरों ने बताया- हालत स्थिर, खतरे से बाहर सुबह से शाम हो गई, लेकिन मैं साक्षी तक नहीं पहुंच पाई। अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों से उसकी तबीयत के बारे में पूछती रही। दो डॉक्टरों ने बताया कि साक्षी की हालत फिलहाल स्थिर है। वह खतरे से बाहर है। इसके बावजूद उसे इमरजेंसी ICU में ही रखा गया है। हालत स्थिर है तो ICU में क्यों रखा है? डॉक्टरों ने इस सवाल का जवाब नहीं दिया। परिवार भी मिलने को तैयार नहीं मैंने खुद को साक्षी का दोस्त बताकर उसके परिवार से बात करने की कोशिश की। वे भी असहज लगे। थोड़े घबराए से। उन्होंने बात करने से इनकार कर दिया। बुआ-फूफा बोले- क्या जानना है, हमारे पीछे मत आओ। इसके बाद वे चले गए। दूसरा दिन फिर अस्पताल पहुंचे, लेकिन अंदर जाने से रोक दिया अगले दिन मैं एक बार फिर RML अस्पताल पहुंची। सिक्योरिटी उतनी ही सख्त। इस बार ICU तक भी नहीं जाने दिया। परिवार से मिलने की कोशिश भी पूरी नहीं हो पाई। तीसरा दिन अस्पताल से घर तक पहुंची पड़ताल 24 जुलाई को मुझे साक्षी के घर का पता चला। उनका घर RML अस्पताल से लगभग 20 किमी दूर छतरपुर में है। घर पहुंचकर आसपास के लोगों से बात की। ज्यादातर पड़ोसियों को साक्षी के साथ हुई घटना के बारे में पता नहीं है। उन्होंने बताया कि साक्षी के पिता सुभाष मिश्रा रिटायर्ड शिक्षक हैं। उनका परिवार ज्यादा मेलजोल नहीं रखता। इलाके में शांत और सभ्य परिवार के तौर पर जाना जाता है। दादी और बहन ने सुनाई पूरी कहानी मैं साक्षी के घर पहुंची। घर में उसकी दादी और बहन वर्तिका थीं। मैंने उन्हें बताया कि मैं साक्षी की दोस्त हूं। वर्तिका घटना वाले दिन उसके साथ थी। उसने बताया कि भगदड़ के दौरान मैं भी गिर गई थी। मेरे दोनों घुटनों में चोट लगी थी। हालांकि, साक्षी को ज्यादा चोट लगी। वो वहीं बेहोश हो गई। तभी साक्षी की दादी बोल पड़ी। बोलीं- वह गलती से वहां चली गई थी। मैंने पूछा- उसकी हालत कैसी है? दादी बोलीं- अब ठीक है फिर ICU में क्यों रखा हुआ है? वो बेहोश हो गई थी। ICU में तो बहुत सीरियस होने पर रखते हैं? अब ICU में नहीं है। वार्ड में है। बात कर रही है? हां। बात कर रही है। हाथ-पैर हिला रही है। वहां उसकी मम्मी, भाई और बुआ हैं। कॉकरोच जनता पार्टी वाले नहीं आए? नहीं आए। वे कहां आएंगे, उन्हें कोई मतलब नहीं है। इसी दौरान साक्षी की मां से हमारी फोन पर बात हुई। वे बोलीं- आप हमारे घर कभी मत जाना। अगर हमारे बारे में कहीं भी आपके जरिए कुछ भी छपा, तो बहुत गलत होगा। बस, इतना ही मुझे बताना है। अभी साक्षी की हालत कैसी है 24 जुलाई को अस्पताल से जारी मेडिकल बुलेटिन में बताया है कि साक्षी को गंभीर हालत में लाया गया था। उसका इलाज चल रहा है। उन्हें करीब 48 घंटे पहले वेंटिलेटर से हटा दिया गया था। वह पूरी तरह होश में हैं। हालत स्थिर है। हालांकि, उन्हें डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया है। साक्षी के बारे में हमने कॉकरोच जनता पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष से बात की। उन्होंने बताया कि हमारी टीम लगातार उनके संपर्क में है। सौरभ उनके भाई से बात कर रहे हैं। अच्छी बात है कि उनकी हालत स्थिर है। उन्हें जो भी मेडिकल या लीगल हेल्प चाहिए होगी, हम देंगे। ……………………………….. प्रदर्शन में घायल इरशाद की कहानी भी पढ़िए जवान ने बंदूक तानी, लोग कहते रहे हम आतंकवादी नहीं हैं, फिर फायर 25 साल के इरशाद शेख दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में एडमिट हैं। चेहरे और आंख पर जख्म के निशान हैं। गुरुग्राम में नौकरी करने वाले इरशाद 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर चल रहे प्रोटेस्ट में गए थे। तभी पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। इरशाद ने महसूस किया कि उनकी पीठ जल रही है। सीने, गले और चेहरे पर घाव हैं। उनसे खून टपक रहा था। पढ़ें पूरी खबर…
‘स्पाई फाइल्स’ सीरीज में आज कहानी दुनिया के सबसे खतरनाक कमांडो मिशन ‘ऑपरेशन थंडरबोल्ट’ की… तारीख थी 27 जून 1976, इजराइल के तेल अवीव का बेन गुरियन एयरपोर्ट सुबह की गुनगुनी धूप से चमक रहा था। रनवे पर एयर फ्रांस की फ्लाइट-139 खड़ी थी। यह एयरबस कंपनी का विमान था, किसी उड़ते हुए आलीशान महल जैसा। प्लेन में 228 यात्री और 12 क्रू मेंबर्स थे। पायलट थे सेकेंड वर्ल्ड वॉर में लड़ चुके कैप्टन माइकल बैकोस। सुबह के ठीक 8 बजकर 59 मिनट पर विमान ने उड़ान भरी। इसे ग्रीस के एथेंस में रुकते हुए पेरिस जाना था। दोपहर 12 बजे विमान एथेंस में लैंड हुआ। यहां 45 मिनट का ठहराव था। इस दौरान 38 यात्री प्लेन से उतरे। अब नए यात्रियों को सवार होना था। तब एथेंस एयरपोर्ट पर कड़ी चेकिंग नहीं होती थी। ऊपर से उस रोज एयरपोर्ट अथॉरिटी के कई लोग हड़ताल पर थे। इसी बीच चार लोग बड़े-बड़े बैग टांगे विमान की तरफ बढ़े। इनमें 30-32 साल की एक लड़की थी, जिसने ब्लू डेनिम स्कर्ट और टॉप पहन रखा था। जैसे ही सिक्योरिटी अफसर तलाशी के लिए आगे बढ़ा, लड़की ने झुंझलाकर कहा- ‘अरे फिर से जांच? हद है! जहां से आए हैं, वहां पहले ही चेकिंग हो चुकी है।’ लड़की की बात सुनकर अफसर झेंप गया। उसने बिना जांच किए सिर्फ टिकट देखकर जाने का इशारा कर दिया। 4 में से 2 के पास फर्स्ट क्लास का टिकट था और 2 के पास इकोनॉमी क्लास का। चारों अपनी सीट पर जाकर बैठ गए। एथेंस से 56 नए यात्री विमान में चढ़े, यानी अब कुल यात्रियों की संख्या 246 हो चुकी थी। दोपहर ठीक साढ़े 12 बजे, विमान ने पेरिस के लिए उड़ान भरी। अंदर हंसी-ठिठोली और बच्चों की किलकारियां गूंज रही थी। विमान बादलों को चीरता हुआ आगे बढ़ रहा था। तभी फर्स्ट क्लास की सीट पर बैठे एक शख्स ने डेनिम स्कर्ट पहनी लड़की का हाथ थाम लिया। उसने धीमी आवाज में मुस्कुराते हुए पूछा- ‘डर तो नहीं लग रहा?’ लड़की ने कहा- ‘मुझे डर है कि इस मिशन में तुम्हें ना खो दूं।’ उस शख्स ने उसका माथा चूमा और फुसफुसाया- ‘हम इतिहास लिखने जा रहे हैं डार्लिंग। तैयार हो?' लड़की ने मुस्कुराते हुए कहा- ‘मैं कुछ भी कर गुजरने को तैयार हूं।’ ठीक 8 मिनट बाद, दोनों अपनी सीट से उठ खड़े हुए। गले लगे। एक दूसरे को चूमा और फिर फुर्ती से अपने बैग की चेन खोल ली। अगले ही पल दोनों के एक हाथ में पिस्टल और दूसरे हाथ में हैंड ग्रेनेड था। पिस्टल ताने वह शख्स सीधे कॉकपिट की तरफ भागा और लड़की गलियारे में पोजीशन लेकर बैठ गई। ये सब देखकर कुछ यात्री चीखने लगे। पायलट ने हड़बड़ाकर फ्लाइट इंजीनियर से कहा- ‘जल्दी बाहर जाओ। शायद आग लग गई है। तुरंत काबू करो।’ फ्लाइट इंजीनियर ने जैसे ही कॉकपिट का दरवाजा खोला, उस शख्स ने इंजीनियर की कनपट्टी पर पिस्टल सटा दी। अंदर बैठा पायलट चिल्ला उठा- ‘प्लीज, उसे मत मारो।’ उसने झपटकर पायलट का ऑक्सीजन मास्क और माइक्रोफोन छीन लिया। फिर ऐलान किया- ‘सब लोग ध्यान से सुनो… यह प्लेन हाईजैक हो चुका है। अब प्लेन का नया नाम 'हाइफा' है।’ उसने पायलट की कनपट्टी पर पिस्टल सटाते हुए कहा- ‘फौरन प्लेन का रुख मोड़ो... इसे लीबिया ले चलो।’ पायलट ने कुछ कहना चाहा, लेकिन उसने पिस्टल की नोक उसकी कनपट्टी पर और जोर से गड़ा दी। पायलट ने प्लेन का रूख मोड़ दिया। यात्री सन्न थे। आगे क्या होने वाला था किसी को पता नहीं… इसी बीच इकोनॉमी क्लास में बैठे उनके दो और साथी खड़े हो गए। उनमें से एक लंबे बालों वाला लड़का था, जिसने लाल शर्ट और भूरे रंग का पैंट पहना था। दूसरे की घनी मूछें थीं, उसने लंबा पैंट और पीली शर्ट पहन रखी थी। दोनों ने पिस्टल तान ली और दौड़ते हुए फर्स्ट-क्लास कंपार्टमेंट की तरफ बढ़े। गलियारे में डरी-सहमी एयरहोस्टेस खड़ी थी। उसके हाथ-पैर कांप रहे थे, लेकिन वो यात्रियों से कह रही थी- ‘प्लीज... प्लीज सब शांत हो जाओ।’ लेकिन लोगों का रोना-चीखना बंद नहीं हो रहा था। 5-7 मिनट बाद, महिला हाईजैकर और उसके दो साथी कुछ यात्रियों घसीटते हुए फर्स्ट क्लास से इकोनॉमी क्लास की तरफ लाने लगे। हाईजैकर अंग्रेजी में चिल्ला रही थी- ‘सिट ऑन फ्लोर!’ तभी एक इजराइली खड़ा होकर विरोध करने लगा। हाईजैकर तमतमा गई। उसने अपने साथी से कहा- ‘इसका इलाज करना जरूरी है।’ उसके साथी ने इजराइली को धक्का देकर फर्श पर गिरा दिया। महिला हाईजैकर उछलकर उसकी छाती पर बैठ गई और मुक्के मारने लगी। कुछ देर बाद जब महिला के हाथ दुखने लगे, तो उसने पिस्टल के बट से मारना शुरू कर दिया। इजराइली लगातार चीखता रहा, फिर शांत पड़ गया। इसी बीच कुछ यात्री चुपके से गले की चेन तोड़कर फेंकने लगे। असल में इन लोगों ने 'डेविड का सितारा' पहन रखा था, जो यहूदियों की पहचान का प्रतीक है। ठीक वैसे ही जैसे ईसाइयों के लिए 'क्रॉस' या इस्लाम में 'चांद-तारा' होता है। इधर, तेल अवीव के एयर ट्रैफिक कंट्रोल, यानी एटीसी में खलबली मची थी। रडार स्क्रीन पर दिख रहा एयर फ्रांस 139 अचानक गायब हो गया था। किसी को समझ नहीं आ रहा था कि विमान के साथ क्या हुआ है। उस वक्त इजराइली प्रधानमंत्री यित्झाक राबिन मंत्रियों के साथ मीटिंग कर रहे थे। तभी उनके सैन्य सहायक ब्रिगेडियर पोरान दौड़ते हुए कमरे में दाखिल हुए। उन्होंने पीएम को एक पर्ची दी। उस पर लिखा था- 'तेल अवीव से पेरिस जा रहा एयर फ्रांस 139 अगवा कर लिया गया है।’ छोटे कद के राबिन, इजराइली सेना के प्रमुख रह चुके थे। वे पर्ची को एकटक देखते रहे। फिर उन्होंने पर्ची के पीछे कुछ लिखा और पोरन को दे दिया। पीएम ने सिगरेट जलाई और लंबा कश भरते हुए विदेश मंत्री आलोन से कहा- ‘हमारा एक विमान हाईजैक हो चुका है। फौरन स्पेशल टास्क फोर्स बनाओ। उसमें मुझे भी रखना।’ एक घंटे बाद… यरुशलम का कमांड सेंटर। दीवारों पर लगे नक्शे और स्क्रीन पर जलती-बुझती लाइटें। पीएम बेहद परेशान थे। वे सिगरटे पीते हुए कमरे में इधर-उधर टहल रहे थे। पीछे कैबिनेट मंत्री चुपचाप बैठे थे। पीएम ने कानून मंत्री की तरफ देखते हुए पूछा- ‘कानूनी तौर पर इन यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है?' कानून मंत्री ने फौरन जवाब दिया- ‘सर, फ्रांस सरकार की।’ ‘तो फौरन फ्रांस सरकार से संपर्क कीजिए। उनसे कहिए कि वे अपना आधिकारिक बयान जारी करें।’ पीएम ने कहा। तभी सैन्य सहायक पोरान कमरे में दाखिल हुए। उनके हाथ में फिर से एक छोटी सी पर्ची थी। उन्होंने पर्ची पीएम की तरफ बढ़ा दी। अब सबकी निगाहें राबिन पर टिक गई। राबिन ने पर्ची खोली। तेज आवाज में पढ़ना शुरू किया- ‘विमान में 230 यात्री सवार हैं, जिनमें से 83 इजराइली हैं। लीबियाई सरकार ने विमान को बेनगाजी में उतरने की इजाजत दे दी है।’ राबिन ने सिगरेट का लंबा कश खींचते कहा- ‘कम से कम हमें यह तो पता है कि यात्री कहां हैं, लेकिन आगे उनके साथ क्या होगा, नहीं पता। ये भी नहीं मालूम कि हाईजैकर कौन हैं, उनका मकसद क्या है?’ अगले आधे घंटे तक कमांड सेंटर में मीटिंग चलती रही, लेकिन कोई रास्ता नहीं सूझा। दोपहर 2 बजे विमान लीबिया के बेनगाजी एयरपोर्ट के रनवे पर जाकर खड़ा हो गया। हाईजैकरों ने विमान की खिड़कियां बंद कर दीं। एसी भी बंद कर दिए। गर्मी, उमस और भूख से यात्री बेहाल थे, लेकिन कोई किसी से कुछ कह नहीं रहा था। कई यात्री मान चुके थे कि किसी भी वक्त विमान को धमाके से उड़ाया जा सकता है। तभी एक ब्रिटिश महिला चीखने लगी। उसका चेहरा पीला पड़ चुका था, बदन पसीने से लथपथ था। उसने रोते हुए कहा- ‘मैं प्रेग्नेंट हूं। बहुत तेज दर्द हो रहा है। मुझे कुछ हो जाएगा।’ हाईजैकर ने डांटते हुए कहा- ‘चीखो मत, मैं डॉक्टर को बुलाती हूं।’ यात्रियों के बीच से एक डॉक्टर को लाया गया। डॉक्टर ने उसे देखने के लिए हाथ आगे बढ़ाया, तभी महिला ने धीमे से कहा, ‘मुझे हर हाल में यहां से निकलना है... तुम संभाल लेना।’ डॉक्टर ने भी धीरे से कहा- ‘लीबिया में उतरने से बेहतर है तुम हमारे साथ रहो।’ महिला बुदबुदाई- ‘मुझे उतरना ही है।’ अब डॉक्टर खड़ा हुआ और हाईजैकर से कहा- ‘इसे मेडिकल इमरजेंसी की जरूरत है।’ महिला हाईजैकर को लगा कि डॉक्टर झूठ बोल रहा है। उसने रनवे पर तैनात एक लीबियाई डॉक्टर को अंदर बुला लिया। नया डॉक्टर क्या करने वाला था…सबकी निगाहें उस पर टिक गईं। डॉक्टर ने महिला की जांच की। फिर कहा- ‘इसे कोई बीमारी नहीं है, नाटक कर रही है।’ अब ब्रिटिश महिला ने अपने कपड़ों का एक हिस्सा हटाया और प्राइवेट पार्ट से निकलता हुआ खून दिखा दिया। वह रोते हुए चिल्लाई, ‘अगर मैं जल्दी अस्पताल नहीं पहुंची, तो गर्भपात हो जाएगा। मेरा बच्चा भी मर जाएगा।’ खून देखकर हाईजैकर घबरा गई। उसने अपने साथियों से कहा, ‘इसे नीचे उतार दो। वैसे भी यह हमारे काम की नहीं है।’ महिला गिरते-संभलते सीढ़ियों से उतरने लगी। उसके कपड़ों पर खून के धब्बे थे। हाईजैकर को यकीन हो चुका था कि यह सच बोल रही है। महिला विमान से उतरकर एग्जिट गेट की तरफ बढ़ गई। आगे चलकर ये महिला कुछ बड़ा करने वाली थी, बहुत बड़ा… इधर, विमान रनवे पर घंटों खड़ा रहा। हाईजैकर अंदर-बाहर आते-जाते रहे। खुद भर-भर पेट खाना खाया, लेकिन यात्रियों को कुछ नहीं दिया। आखिरकार, रात 9 बजकर 50 मिनट पर विमान के इंजनों में फिर से गड़गड़ाहट हुई। लोग सोचने लगे- ‘दमिश्क, बगदाद, बेरुत या वापस तेल अवीव? आखिर ये विमान को कहां ले जा रहे हैं?’ दहशत चरम पर थी। डेनिम स्कर्ट वाली लड़की खिड़की से बाहर अंधेरे को निहार रही थी। तभी उसका साथी पीछे आकर खड़ा हो गया। उसने लड़की के बिखरे बालों सहलाते हुए कहा, ‘अगर इस जंग से हम जिंदा निकले, तो एक सुंदर सा घर बनाएंगे। जहां सिर्फ मैं, तुम और समुद्र की लहरें होंगी, लेकिन तब तक... हमें बेदर्द बनना होगा।’ लड़की पिस्टल का बट कसकर पकड़ते हुए बोली- ‘उस सपने को थोड़ा इंतजार करने दो।’ रात करीब 10 बजे। जगह- लंदन का हीथ्रो एयरपोर्ट। लीबिया में गर्भपात की बात कहकर उतरी ब्रिटिश महिला एग्जिट गेट से निकलने ही वाली थी कि दो लड़कों ने उसका रास्ता रोक लिया। महिला चौंककर पीछे हटी। ‘आप लोग कौन हैं? मुझे जाने दीजिए।’ एक लड़के ने कहा- ‘मैडम, हम आपकी सुरक्षा के लिए हैं। आप एयर फ्रांस की फ्लाइट से आई हैं। कृपया हमारे साथ चलिए।’ वे महिला को लेकर वीआईपी कॉरिडोर की तरफ चल पड़े। कुछ ही मिनटों में तीनों एक बंद कमरे में थे। कुर्सी पर बैठी महिला घबराई हुई थी। उसके हाथ-पैर कांप रहे थे। लड़के ने कहा- ‘डरिए नहीं। हम कोई आतंकी नहीं हैं। उस प्लेन में हमारे कई लोग बंद हैं। आपकी मदद चाहिए।’ महिला रोने लगी- ‘वह नरक जैसा था। मैं अंदर होती तो अब तक मर गई होती। मैंने बस बाहर निकलने के लिए वो सब किया।’ लड़का- ‘क्या किया आपने?’ ‘मुझे पीरियड्स आए थे। मैंने उस खून को हाईजैकर को दिखाकर कहा मिसकैरेज होने वाला है। इमरजेंसी मेडिकल सपोर्ट चाहिए। उन लोगों ने मुझे नीचे उतार दिया।’ कांपते हुए महिला ने बताया। तभी दूसरे लड़के ने कहा- 'बहादुर हो आप। वेल डन। ये बताइए कि कुल कितने हाईजैकर थे? उनके पास हथियार कौन से थे? महिला बोली- ‘चार... कुल चार लोग हैं। उनके पास ऑटोमैटिक पिस्टल और हैंडग्रेनेड है।’ ‘क्या वे अरबी बोल रहे थे? उनका हुलिया कैसा था?’ लड़के ने पूछा। महिला ने कुछ सोचते हुए कहा- ‘दो तो पक्के तौर पर फिलिस्तीनी लग रहे थे... लेकिन बाकी के दो बहुत साफ अंग्रेजी बोल रहे थे, उनका लहजा जर्मन था। उनमें एक औरत भी थी।’ अब लड़के ने एक भारी-भरकम एलबम महिला की तरफ सरकाते हुए कहा- ‘मैं पन्ने पलट रहा हूं, आप ध्यान से देखिए। क्या इनमें से कोई चेहरा उस विमान में था?’ उसने पहला पन्ना पलटा। कई ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरें दिखीं। महिला ने सिर हिलाया- ‘नहीं।’ उसने दूसरा पन्ना पलटा। महिला ठिठक गई। उसने उंगली दो तस्वीरों पर रख दी। चीखते हुए कहा- ‘यह वही औरत है। इसके साथ यह आदमी है। यही दोनों पूरे प्लेन को कंट्रोल कर रहे थे। प्रेमी-प्रेमिका मालूम पड़ रहे थे।’ दोनों लड़कों ने डायरी पर सबकुछ नोट किया। फिर कार में बिठाकर महिला को सुरक्षित घर छोड़ दिया। असल में ये दोनों लड़के इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद के एजेंट थे। उधर, विमान को लीबिया से उड़ान भरे पांच घंटे बीत चुके थे। पायलट थकान से चूर था, लेकिन हाईजैकर की पिस्टल अभी भी उसकी गर्दन पर टिकी हुई थी। तभी केबिन में महिला हाईजैकर ने अनाउंस किया- ‘हम कंपाला में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। खिड़कियां बंद कर लें और सीट बेल्ट बांध लें।’ ‘कंपाला?’ यात्री हैरान थे। ज्यादातर लोगों को पता ही नहीं था कि यह युगांडा की राजधानी है। तड़के ठीक 3:20 पर, घुप अंधेरे में विमान युगांडा के एंटेबे एयरपोर्ट पर उतरा। पलक झपकते युगांडा के 100 से ज्यादा सैनिकों ने विमान को घेर लिया। यात्रियों को लगा शायद सेना उन्हें बचाने आ गई है, लेकिन असल में वे कसाई नाम से मशहूर तानाशाह ईदी अमीन के जाल में फंस चुके थे। थोड़ी देर बाद एग्जिट गेट खुला। तीन और हथियारबंद अंदर घुसे। दरवाजा बंद हो गया। आगे क्या होगा किसी को कुछ नहीं पता था… खौफ के साये में और 5 घंटे गुजर गए। सुबह 8 बजे विमान का अगला दरवाजा खुला। एक काली मर्सिडीज गेट के ठीक सामने आकर रुकी। उसमें से दो शख्स उतरे। एक लंबा और नीली वर्दी वाला और दूसरा- भारी-भरकम शरीर वाला, जिसकी वर्दी मेडलों से सजी थी। विमान के भीतर बैठे एक यात्री ने फुसफुसाते हुए बगल में बैठे मुसाफिर से पूछा- ‘तुम जानते हो यह कौन है?’ ‘नहीं, कौन है?’ ‘यह युगांडा का राष्ट्रपति ईदी अमीन है। यह कसाई है। इसने अपने ही हजारों लोगों को मरवा दिया है। मैंने तो सुना है इंसानों का भी मांस खा जाता है।’ तभी पीछे से एक बुजुर्ग यहूदी बोल पड़ा- ‘तुम ठीक कह रहे हो। इसके फ्रीज से कई इंसानी खोपड़ियां मिली थीं। हर सुबह उन खोपड़ियों से बातें करता है कि देखो, कहा था ना मुझसे पंगा मत लेना।’ फर्स्ट क्लास की खिड़की से अमीन को देखकर एक महिला हंस पड़ी। दूसरी ने पूछा- ‘इस हालत में तुम्हें हंसी आ रही है?’ उसने धीरे से कहा- ‘तुम्हें पता है, बाहर जो सनकी खड़ा है, ब्रिटेन की महारानी से शादी करना चाहता है।’ ‘प्लीज मजाक मत करो, मेरी जान निकली जा रही है।’ महिला ने उसका हाथ कसकर दबाते हुए कहा। उस महिला ने कहा- ‘सच कह रही हूं। इसने महारानी को चिट्ठी भी लिखी थी।’ ‘क्या लिखा था?’ महिला बोली- ‘इसने लिखा था- प्यारी एलिजा, अगर एक असली मर्द को देखना चाहती हो, तो कंपाला आ जाओ।’ दूसरी महिला ने उसे घूरते हुए कहा- ‘यह हैवान तो हम यहूदियों को जिंदा चबा जाएगा।’ पहली महिला- 'हां ये लोग उसी की तैयारी कर रहे हैं।' दोपहर 12 बजे यात्रियों को विमान से उतारकर एयरपोर्ट के बगल में बने 'ओल्ड टर्मिनल' हॉल में ले जाकर बंद कर दिया गया। हाईजैकरों के साथ-साथ युगांडा के सैनिकों ने पूरे टर्मिनल को घेर रखा था। पूरी रात यात्री कमरे में बंद रहे। अगले दिन यानी 29 जून को हाईजैकरों ने दुनिया के सामने अपनी 2 मांगे रखीं। पहली- इजराइल, केन्या, पश्चिम जर्मनी और स्विट्जरलैंड की जेलों में बंद 53 फिलिस्तीनी कैदियों की रिहाई। दूसरी- 50 मिलियन अमेरिकी डॉलर नकद। डेडलाइन थी- ‘1 जुलाई 1976, दोपहर 2:00 बजे तक मांगें पूरी नहीं हुईं, तो सभी बंधक मार दिए जाएंगे।’ उसी शाम 5 बजे की बात है। इजराइली पीएम राबिन अपने दफ्तर में अकेले बैठे थे। एक हाथ में व्हिस्की का ग्लास और दूसरे हाथ में सिगरेट। तभी रक्षा मंत्री पेरेस पहुंचे। राबिन ने उन्हें देखते ही कहा- ‘मैं इन हत्यारों के आगे झुक जाऊंगा। कैदियों को रिहा कर दूंगा।’ रक्षा मंत्री ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा- ‘हम हार नहीं मानेंगे। मिलिट्री एक्शन लेंगे।’ पीएम राबिन ने चिल्लाते हुए कहा- 'एंटेबे यहां से 4 हजार किलोमीटर दूर है। बीच में दुश्मन देशों का एयरस्पेस। हमारे विमान वहां कैसे पहुंचेंगे?’ रक्षा मंत्री ने कुछ कहा नहीं। थोड़ी देर बाद चुपचाप वहां से निकल गए, लेकिन उनकी खामोशी के पीछे एक ऐसा प्लान चल रहा था, जिसके बारे में हाईजैकरों ने सपने में भी नहीं सोचा था। अब रात के करीब 2 बज चुके थे। ओल्ड टर्मिनल हॉल के मेन गेट पर पहरा दे रही डेनिम स्कर्ट वाली हाईजैकर चश्मा उतारकर आंखें मल रही थी। तभी उसका साथी वहां पहुंच गया। उसने कॉफी का कप उसकी तरफ बढ़ाते हुए कहा- ‘हमारी खूंखार शेरनी थक गई है क्या?’ लड़की ने उसके कंधे पर अपना सिर टिकाते हुए कहा- 'हां, शेरनी भी थकती है। हम हैवान नहीं हैं। बस अपने मकसद के लिए लड़ रहे हैं।’ उस शख्स ने उसके हाथों को चूमते हुए कहा- ‘ थोड़ा आराम कर लो। 1 जुलाई को दुनिया हमारी मुट्ठी में होगी।’ 30 जून की सुबह करीब 10 बजे का वक्त। महिला हाईजैकर बंधकों के पास पहुंची। उसके हाथ में एक लिस्ट थी। उसने कहा- ‘सभी अपने-अपने पासपोर्ट हाथों में ले लें। जैसे ही आपका नाम पुकारा जाए, बाईं तरफ के कमरे में चले जाएं।’ उसने नाम पुकारने शुरू किए। सारे के सारे इजराइली नाम। इस तरह इजराइली अलग कमरे में और गैर-इजराइली अलग कमरे में शिफ्ट कर दिए गए। यह हूबहू वैसा ही नजारा था, जैसा दूसरे विश्व युद्ध के दौरान नाजी जर्मनी के कैंपों में था। अब उल्टी गिनती शुरू हो चुकी थी। दीवारों पर टंगी घड़ियों की हर टिक-टिक के साथ 100 से ज्यादा जिंदगियों पर मौत का खौफ गहराता जा रहा था... इजराइल के पास बचे थे सिर्फ 24 घंटे। तभी मोसाद के दफ्तर में फोन बजा। एक अफसर ने दौड़कर फोन उठाया। दूसरी तरफ से आई आवाज को सुनते ही वह खुशी से उछल पड़ा। आगे क्या होगा…पूरी कहानी कल यानी रविवार को पढ़िए आपरेशन थंडरबोल्ट पार्ट-2 रेफरेंस :
चीन नए युग में सामाजिक कार्य मजबूत करेगा
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीसी) की केंद्रीय समिति और राज्य परिषद ने हाल में नए युग में सामाजिक कार्य मजबूत करने पर राय जारी की।
होर्मुज स्ट्रेट के पास 30 क्रू वाले जहाज ने भेजा आपात संदेश, मिसाइल हमले का दावा कर मांगी मदद
होर्मुज स्ट्रेट के पास एक 30 क्रू मेंबर एक जहाज ने आपातकालीन संदेश भेजा, जिसमें हमले के बारे में जानकारी दी गई
चीन ने सफलतापूर्वक थ्येनल्येन 2-06 उपग्रह प्रक्षेपित किया
चीन ने 23 जुलाई की रात 8 बजे दक्षिण चीन में स्थित शीछांग उपग्रह प्रक्षेपण केंद्र में लांगमार्च-3बी वाहक रॉकेट से सफलता पूर्वक थ्येनल्येन2-06 उपग्रह प्रक्षेपित किया। उपग्रह सुचारू रूप से निर्धारित कक्षा में पहुंचाया गया
स्विस बैंक की पोल पट्टी खोलने वाले जर्मन वकील पर स्विटजरलैंड में मुकदमा
टैक्स चुकाए बिना ही उसका रिटर्न डकार लिया गया. यूरोप में इसी तरह से करीब 140 अरब यूरो की धांधली हुई. इस पर्दाफाश करने वाले जर्मन वकील पर अब स्विट्जरलैंड मुकदमा बहाल कर रहा है. जर्मन वकील टेंशन फ्री हैं
ट्रंप ने अमेरिका और सऊदी अरब के बीच न्यूक्लियर डील के साथ जोड़ी है ये खास शर्त भी
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ नागरिक परमाणु समझौते का एलान किया है. लेकिन ट्रंप ने शर्त रखी है कि रियाद को अब्राहम समझौता मानना होगा
जंगल की आग के सामने लाचार होते फ्रांस और स्पेन
फ्रांस और स्पेन इस समय भीषण जंगल की आग की चपेट में हैं. लगातार पड़ रही गर्मी, सूखे और तेज हवाओं ने हालात को और गंभीर बना दिया है. दोनों देशों में हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है
जर्मन चांसलर मैर्त्स की कैबिनेट में बड़े बदलाव शुरू
जर्मनी का चांसलर फ्रीडरिष मैर्त्स ने अपनी कैबिनेट के शीर्ष पदों में बदलाव किया है. कुछ प्रांतों में होने वाले चुनावों से पहले इन बदलावों को सरकार की छवि सुधार की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है
संसद के मानसून सत्र के पांचवें दिन भी पेपर लीक का मुद्दा दोनों सदनों पर हावी रहा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए, लेकिन पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने उन्हें तुरंत बोलने की अनुमति नहीं दी। उन्होंने कहा कि पहले सदन के पटल पर जरूरी पत्र रखे जाएंगे, उसके बाद उन्हें अवसर दिया जाएगा। हालांकि, लगातार हंगामे के कारण वह मौका नहीं आ सका और लोकसभा की कार्यवाही 27 जुलाई सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। सुबह 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने पेपर लीक और छात्रों पर कथित लाठीचार्ज का मुद्दा उठाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने और सदन चलने देने की अपील की, लेकिन शोर-शराबा नहीं थमा। इसके बाद कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। दोपहर 12 बजे सदन की बैठक दोबारा शुरू हुई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन को बताया कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना आमरण अनशन खत्म कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और इस संबंध में दोपहर 1 बजे होने वाली कैबिनेट बैठक में कड़े कानून पर भी विचार होगा। इस पर विपक्ष का हंगामा फिर तेज हो गया। राहुल गांधी अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए, लेकिन पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने कहा कि सदन की कार्यसूची के अनुसार पहले पटल पर पत्र रखे जाएंगे, उसके बाद उन्हें बोलने का अवसर दिया जाएगा। पत्र रखे जाने की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही नारेबाजी और बढ़ गई। कार्यवाही सुचारु नहीं हो सकी और राहुल गांधी अपनी बात नहीं रख पाए। अंततः लोकसभा की बैठक 27 जुलाई सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। उधर, राज्यसभा में भी सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू हुई। करीब पांच मिनट बाद सभापति ने सदन के पटल पर दस्तावेज रखने की प्रक्रिया शुरू कराई। इसी दौरान नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और पेपर लीक का मुद्दा उठाने के लिए खड़े हुए। हंगामे के बीच कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। दोपहर 12 बजे राज्यसभा की बैठक फिर शुरू हुई। मल्लिकार्जुन खड़गे ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई और कहा कि प्रधानमंत्री को स्वयं सदन में आकर इस पूरे मामले पर बयान देना चाहिए। सत्ता पक्ष की ओर से इसका विरोध हुआ और सदन में शोर-शराबा बढ़ गया। इसके बाद कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। दोपहर 2 बजे राज्यसभा की बैठक फिर शुरू हुई, लेकिन विपक्ष का हंगामा जारी रहा। उपसभापति हरिवंश ने बार-बार व्यवस्था बनाए रखने की अपील की, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हुई। करीब सात मिनट बाद राज्यसभा की कार्यवाही भी 27 जुलाई सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। इस तरह संसद का एक और दिन पेपर लीक के मुद्दे पर गतिरोध की भेंट चढ़ गया। सरकार चर्चा और कड़े कानून की बात करती रही, जबकि विपक्ष शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और प्रधानमंत्री के बयान की मांग पर कायम रहा। सदन के भीतर बहस शुरू होने से पहले ही हंगामा इतना बढ़ गया कि दोनों सदनों में कोई सार्थक चर्चा नहीं हो सकी। वीडियो देखने के लिए ऊपर थंबनेल पर क्लिक करें…
OpenAI ने खुलासा किया है कि उसके एक उन्नत AI मॉडल ने साइबर सुरक्षा परीक्षण के दौरान अपेक्षा से आगे बढ़कर एक स्टार्टअप कंपनी के सर्वर तक पहुंचने के लिए चोरी किए गए लॉगइन क्रेडेंशियल्स का उपयोग किया।
दक्षिण एशिया की राजनीति और कूटनीतिक गलियारों से इस वक्त एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। भारत ने अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी पहले) नीति को और मजबूत करते हुए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। भारत सरकार ने बांग्लादेश के नवनियुक्त प्रधानमंत्री तारिक रहमान को आगामी ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया है। नई दिल्ली की तरफ से भेजे गए इस बेहद महत्वपूर्ण कूटनीतिक निमंत्रण के बाद अब पूरी दुनिया की नजरें ढाका की तरफ टिक गई हैं कि बांग्लादेश इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है। इस कदम को दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को एक नए युग में ले जाने की बड़ी कवायद के रूप में देखा जा रहा है।बदलते कूटनीतिक समीकरणों के बीच नई दिल्ली का बड़ा संदेशबांग्लादेश में हाल ही में हुए बड़े राजनीतिक बदलावों के बाद यह पहला मौका है जब भारत ने इतने उच्च स्तर पर बांग्लादेश के नए नेतृत्व के साथ सीधा संपर्क साधा है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान को ब्रिक्स समिट का न्योता भेजना यह साफ तौर पर दर्शाता है कि भारत अपने इस रणनीतिक पड़ोसी देश के साथ संबंधों में किसी भी तरह की दूरी नहीं चाहता है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नई दिल्ली का यह कदम बांग्लादेश की नई सरकार के साथ विश्वास बहाली (Trust Building) की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक संदेश है, जिससे दोनों देशों के साझा हितों को सुरक्षा और स्थिरता मिल सके।ब्रिक्स मंच पर बांग्लादेश की भागीदारी के मायनेब्रिक्स (BRICS) संगठन वैश्विक अर्थव्यवस्था और कूटनीति का एक अत्यंत शक्तिशाली मंच बन चुका है, जिसमें भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ कई अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। भारत द्वारा बांग्लादेश को इस प्रतिष्ठित मंच पर आमंत्रित करने का मतलब है कि नई दिल्ली वैश्विक स्तर पर ढाका की आवाज को मजबूत करना चाहती है। यदि प्रधानमंत्री तारिक रहमान इस निमंत्रण को स्वीकार कर समिट में हिस्सा लेते हैं, तो व्यापार, कनेक्टिविटी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता के नए रास्ते खुलेंगे।साझा व्यापार और सीमा सुरक्षा पर टिकेंगी नजरेंभारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी जल बंटवारा, सीमा पार व्यापार, और घुसपैठ जैसी कई संवेदनशील चुनौतियां रही हैं। जानकारों के मुताबिक, इस नई शुरुआत से न केवल व्यापारिक गलियारों को गति मिलेगी बल्कि पूर्वोत्तर भारत (North-East India) की सुरक्षा और स्थिरता के लिहाज से भी यह बातचीत बेहद अहम साबित होगी। अब देखना यह होगा कि ढाका भारत के इस बड़े कूटनीतिक हाथ को कितनी गर्मजोशी से थामता है और आने वाले दिनों में दोनों देशों के रिश्तों की दिशा क्या मोड़ लेती है।
कंगाल पाकिस्तान के लिए मसीहा बना ड्रैगन! डॉलर संकट के बीच चीन ने थमाई संजीवनी बूटी
गंभीर आर्थिक तंगहाली और विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserve) की भारी किल्लत से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। डॉलर-डॉलर के लिए तड़प रहे और डिफॉल्ट होने की कगार पर पहुंचे अपने सदाबहार दोस्त (All-Weather Ally) पाकिस्तान को बचाने के लिए चीन एक बार फिर आगे आया है। अंतरराष्ट्रीय भुगतानों और डूबती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए चीन ने पाकिस्तान को एक बड़ा वित्तीय लाइफलाइन पैकेज जारी किया है। इस वित्तीय संजीवनी के मिलने से पाकिस्तानी हुक्मरानों ने बड़ी राहत की सांस ली है, क्योंकि इससे देश पर मंडरा रहा तात्कालिक आर्थिक संकट कुछ समय के लिए टल गया है।बीजिंग से इस्लामाबाद पहुंची मदद और सऊदी-यूएई का रुखइस्लामाबाद के उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, चीन ने इस वित्तीय सहायता के तहत अपने पुराने कर्जों के रोलओवर (Rollover) को मंजूरी दे दी है और साथ ही नए विदेशी मुद्रा फंड की व्यवस्था की है। पाकिस्तान पिछले काफी समय से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की कड़ी शर्तों और मित्र देशों जैसे सऊदी अरब और यूएई से मिलने वाली किश्तों में हो रही देरी के कारण बेहद दबाव में था। ऐसे नाजुक वक्त में चीन द्वारा दिए गए इस बड़े डिपॉजिट से पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक (State Bank of Pakistan) को अपने विदेशी मुद्रा भंडार को दोबारा एक सुरक्षित स्तर पर लाने में मदद मिलेगी।कर्ज के जाल (Debt Trap) में और उलझा पाकिस्तानभले ही चीन की इस वित्तीय मदद को पाकिस्तान में एक बड़ी कामयाबी और संजीवनी बूटी की तरह देखा जा रहा हो, लेकिन वैश्विक आर्थिक विशेषज्ञ इसे एक अलग नजरिए से देख रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यह मदद पाकिस्तान को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के बजाय उसे चीन के और गहरे 'कर्ज जाल' में धकेल देगी। पाकिस्तान पर पहले से ही चीन का अरबों डॉलर का कर्ज बकाया है, जिसमें सीपीईसी (CPEC) परियोजनाओं से जुड़े वाणिज्यिक लोन भी शामिल हैं। इस नए वित्तीय तालमेल के बाद पाकिस्तान की बीजिंग पर रणनीतिक और आर्थिक निर्भरता पूरी तरह बढ़ जाएगी।पाकिस्तानी आवाम को महंगाई से राहत या सिर्फ दिखावाइस चीनी मदद का पाकिस्तान के स्थानीय बाजारों और आम जनता पर क्या असर होगा, इसे लेकर भी कयासों का दौर शुरू हो गया है। आर्थिक जानकारों के मुताबिक, इस डॉलर इन्फ्यूजन से पाकिस्तानी रुपये (PKR) में आ रही रिकॉर्ड गिरावट पर कुछ समय के लिए ब्रेक जरूर लगेगा, जिससे आयातित वस्तुओं (Imported Goods) जैसे पेट्रोल, डीजल और खाद्य पदार्थों की कीमतों को स्थिर रखने में थोड़ी मदद मिल सकती है। हालांकि, जब तक पाकिस्तान अपने आंतरिक कर ढांचे और बुनियादी आर्थिक नीतियों में कड़े सुधार नहीं करता, तब तक आम जनता को महंगाई की मार से स्थायी मुक्ति मिलना नामुमकिन नजर आता है।
खौफनाक वारदात! इजरायल में भारतीय युवक की दर्दनाक मौत, खून से लथपथ मिला शव; इजरायली नागरिक गिरफ्तार
रोजी-रोटी की तलाश में भारत से इजरायल गए एक भारतीय युवक के साथ वहां दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। इजरायल के एक स्थानीय इलाके में भारतीय नागरिक का शव बेहद संदिग्ध और खून से लथपथ हालत में बरामद किया गया है। इस सनसनीखेज घटना के बाद स्थानीय पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। प्राथमिक जांच के आधार पर स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों ने हत्या के शक में एक इजरायली नागरिक को हिरासत में ले लिया है, जिससे इस वक्त कड़ी पूछताछ की जा रही है। इस घटना ने इजरायल में रह रहे भारतीय प्रवासियों और कामगारों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।इजरायली पुलिस की मुस्तैदी और संदिग्ध की गिरफ्तारीस्थानीय मीडिया और पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, घटना की सूचना मिलते ही फॉरेंसिक टीम और जासूसों के दस्ते ने मौके पर पहुंचकर तफ्तीश शुरू कर दी थी। क्राइम सीन से मिले पुख्ता सबूतों और तकनीकी इनपुट के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक इजरायली संदिग्ध को दबोच लिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी और मृतक के बीच किसी पुरानी रंजिश या तात्कालिक विवाद को लेकर झगड़ा हुआ था, जो बाद में जानलेवा हमले में बदल गया। हालांकि, हत्या के असली इरादे का खुलासा पूरी जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।भारतीय दूतावास हुआ सक्रिय, परिजनों को मदद का भरोसाइस दुखद घटना की खबर मिलते ही तेल अवीव स्थित भारतीय दूतावास तुरंत एक्शन मोड में आ गया है। दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी लगातार इजरायली पुलिस और विदेश मंत्रालय के संपर्क में बने हुए हैं ताकि मामले की निष्पक्ष और तेज जांच सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही भारतीय दूतावास मृतक के कानूनी वारिसों और भारत में रह रहे उनके परिजनों से संपर्क साधने की कोशिश कर रहा है, जिससे कानूनी प्रक्रिया को पूरा कर पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द सम्मानपूर्वक भारत भेजा जा सके।इजरायल में भारतीय प्रवासियों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंताहाल के महीनों में रोजगार के सिलसिले में बड़ी संख्या में भारतीय निर्माण और अन्य क्षेत्रों में काम करने के लिए इजरायल गए हैं। ऐसे में एक भारतीय नागरिक की स्थानीय स्तर पर हुई इस हिंसक मौत ने वहां रह रहे भारतीय समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। प्रवासी संगठनों ने इजरायल सरकार से मांग की है कि कार्यस्थलों और रिहायशी इलाकों में भारतीय कामगारों की सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी किसी अनहोनी को टाला जा सके।
वैश्विक व्यापार युद्ध भड़का! ट्रंप ने इजरायल-EU समेत 60 देशों पर लगाया नया टैरिफ, भारत भी लपेटे में
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बड़े फैसले ने पूरी दुनिया के व्यापारिक गलियारों में भूचाल ला दिया है। ट्रंप प्रशासन ने भारत, यूरोपीय संघ (EU), इजरायल और न्यूजीलैंड समेत दुनिया के 60 प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों से आने वाले सामानों पर 10% से लेकर 12.5% तक का भारी-भरकम नया टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। शुक्रवार से लागू हुए इस ऐतिहासिक और सख्त फैसले के बाद वैश्विक बाजारों में हाहाकार मच गया है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि ट्रंप ने अपने सबसे करीबी रणनीतिक मित्र इजरायल को भी इस आर्थिक कार्रवाई से बाहर नहीं रखा है, जिसके बाद वैश्विक स्तर पर एक नया ट्रेड वॉर छिड़ने की आशंका गहरा गई है।जबरन मजदूरी (Forced Labor) का गंभीर आरोप और ट्रेड एक्ट की धारा 301वाशिंगटन से जारी आधिकारिक आदेश के मुताबिक, अमेरिका ने इन 60 देशों पर आरोप लगाया है कि वे अपने यहां जबरन मजदूरी (Forced Labor) से बनने वाले सामानों के आयात और व्यापार पर प्रभावी प्रतिबंध लगाने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं। अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 (Section 301) के तहत यह सख्त कार्रवाई की है, जो अमेरिकी वाणिज्य को प्रभावित करने वाली अनुचित व्यापार नीतियों के खिलाफ राष्ट्रपति को ऐसे कड़े कदम उठाने का विशेषाधिकार देती है। यह नई दरें उस अस्थायी वैश्विक टैरिफ की जगह लेंगी जो हाल ही में समाप्त हुआ है।इजरायल से लेकर न्यूजीलैंड तक मचा बवाल, किस देश पर कितना लगा टैक्सअमेरिकी प्रशासन ने इन 60 देशों को उनकी मौजूदा नीतियों के आधार पर दो अलग-अलग स्लैब में बांटा है।10% का टैरिफ स्लैब: इस श्रेणी में भारत, यूरोपीय संघ (EU), ब्रिटेन, कनाडा, मैक्सिको और पाकिस्तान समेत 17 देशों को रखा गया है। इन देशों को थोड़ी राहत इसलिए मिली क्योंकि इन्होंने जबरन मजदूरी रोकने के लिए कुछ आंशिक कानून या प्रतिबद्धताएं दिखाई हैं।12.5% का टैरिफ स्लैब: चीन, इजरायल, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, जापान, दक्षिण कोरिया और ब्राजील जैसे बाकी 43 से अधिक देशों पर 12.5% का सीधा अतिरिक्त आयात शुल्क थोप दिया गया है।इस फैसले से अमेरिकी बाजारों में आने वाले कुल आयात का करीब 99.4% हिस्सा सीधे प्रभावित होने जा रहा है, जिसने वैश्विक सप्लाई चेन की कमर तोड़ दी है।भारतीय निर्यातकों को तगड़ा झटका, कच्चे तेल और गैस को मिली राहतइस फैसले से भारत के कपड़ा, हस्तशिल्प, इंजीनियरिंग सामान और कृषि आधारित निर्यात क्षेत्रों को सीधी चोट पहुंचने की आशंका है, क्योंकि अमेरिका भारतीय उत्पादों के लिए सबसे बड़े बाजारों में से एक है। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने रणनीतिक चतुराई दिखाते हुए कुछ चुनिंदा जरूरी सामानों जैसे कच्चा तेल (Crude Oil), प्राकृतिक गैस (Natural Gas), चुनिंदा उर्वरक (Fertilizers) और आवश्यक कृषि उत्पादों को इस टैरिफ के दायरे से बाहर (Exempted) रखा है ताकि अमेरिकी घरेलू बाजार में महंगाई बेलगाम न हो जाए।वैश्विक प्रतिक्रिया: सहयोगियों ने अमेरिकी कदम को किया खारिजयूरोपीय संघ (EU) और न्यूजीलैंड समेत कई प्रमुख अमेरिकी सहयोगियों ने वाशिंगटन के इस फैसले पर सख्त नाराजगी जाहिर की है। व्यापार विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि जबरन मजदूरी की समस्या वैश्विक है और अमेरिका खुद भी इससे पूरी तरह अछूता नहीं है, ऐसे में केवल व्यापारिक वॉल्यूम के आधार पर मित्र देशों को निशाना बनाना अनुचित और जवाबी आर्थिक कार्रवाइयों को न्यौता देने जैसा है।
मेहमत फतिह सिसेकली ने अपने बचाव में कहा कि उन्होंने कोई असामान्य कपड़े नहीं पहने थे। वह केवल साइकिलिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले सामान्य स्पोर्ट्सवियर में थे।
भारत समेत 60 देशों पर अमेरिका का नया टैरिफ लागू, भारतीय निर्यात पर 10% अतिरिक्त शुल्क
USTR की अधिसूचना के अनुसार कुल 60 देशों को इस कार्रवाई के दायरे में रखा गया है। इनमें 17 देशों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया है, जबकि शेष 43 देशों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लागू किया गया है। भारत उन देशों में शामिल है जिन्हें अपेक्षाकृत कम दर वाले समूह में रखा गया है।
अमेरिका ने जबरन मजदूरी (फोर्स्ड लेबर) से जुड़ी चिंताओं को वजह बताते हुए भारत समेत दुनिया के 60 व्यापारिक साझेदारों (ट्रेडिंग पार्टनर्स) पर नए टैरिफ लगाने का बड़ा ऐलान किया है। यह नया टैरिफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इस साल की शुरुआत में लागू की गई उन ग्लोबल ड्यूटीज की जगह लेगा जो अब खत्म होने जा रही हैं।US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) जेमिसन ग्रीर ने नए टैरिफ स्ट्रक्चर की घोषणा करते हुए साफ किया कि ये नियम शुक्रवार को ईस्टर्न टाइम के मुताबिक रात 12:01 बजे से प्रभावी हो जाएंगे। USTR की फैक्ट शीट के मुताबिक, ये नए टैरिफ 10% से लेकर 12.5% के बीच होंगे, जिसके दायरे में अमेरिका के कुल व्यापार का करीब 99.4% हिस्सा आ जाएगा।भारत पर 10% टैरिफ, व्यापार पर कितना होगा असर?अमेरिका के इस कदम से भारत, चीन और यूरोपीय संघ (EU) जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर सीधा असर पड़ने वाला है। अमेरिका ने भारत और 16 अन्य देशों से आयात किए जाने वाले सामान पर नए टैरिफ की दर 10% तय की है।गौरतलब है कि अमेरिका, भारत का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर होने के साथ-साथ भारतीय निर्यात के लिए सबसे बड़ा बाजार भी है। वाणिज्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2025 में दोनों देशों के बीच करीब 141 अरब अमेरिकी डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ था, जिसमें भारत का निर्यात 87.3 अरब डॉलर रहा था।जबरन मजदूरी पर USTR का कड़ा रुखAFP की रिपोर्ट के अनुसार, USTR जेमिसन ग्रीर ने कहा, अमेरिका में करीब एक सदी से जबरन मजदूरी से बने या जुड़े आयात पर बैन लागू है और इसका कड़ाई से पालन कराया जाता है। अब वक्त आ गया है कि हमारे बाकी व्यापारिक साझेदार भी ऐसा ही कदम उठाएं।फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किए थे पुराने टैरिफदरअसल, इस साल फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप के कई पुराने टैरिफ फैसलों को रद्द कर दिया था। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने आयात पर 10% टैरिफ को फिर से लागू करने के लिए विशेष अधिकारों का इस्तेमाल किया था। हालांकि, वह व्यवस्था सिर्फ 150 दिनों के लिए ही मान्य थी, जिसकी म्याद इस शुक्रवार को खत्म हो रही थी। अब नए घोषित टैरिफ उसकी जगह ले लेंगे।चीन और जापान पर 12.5% का भारी टैरिफ, किन्हें मिली राहत?हालिया घोषणा के तहत जिन देशों ने जबरन मजदूरी पर रोक लगाई है या ऐसा करने का वादा किया है, उन पर 10% का कम टैरिफ लगेगा। इस श्रेणी में भारत के साथ कनाडा, बांग्लादेश, पाकिस्तान और ब्रिटेन शामिल हैं।दूसरी ओर, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया समेत दर्जनों देशों पर 12.5% का भारी टैरिफ थोपा गया है। हालांकि, ताइवान, जापान, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड और EU को कुछ राहत मिलेगी क्योंकि उनके अमेरिका के साथ पहले से व्यापार समझौते (Trade Agreements) मौजूद हैं। इसके अलावा, जिन सेक्टरों पर पहले से अलग टैरिफ लागू हैं (जैसे स्टील और एल्युमीनियम), उन पर इस फैसले का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
दुनिया के सबसे संवेदनशील क्षेत्र मिडिल ईस्ट से इस वक्त की बेहद डरावनी और बड़ी खबर सामने आ रही है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग रूट्स और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा तनाव अब एक बड़े महायुद्ध के मुहाने पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए लगातार 13वीं रात भी भीषण हवाई हमले जारी रखे हैं। इस भयंकर सैन्य संघर्ष और सप्लाई चेन ठप होने के खतरे के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छूने लगी हैं और क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गया है।क्यों हो रहे हैं ईरान पर ताबड़तोड़ अमेरिकी हमले?अमेरिकी सेंट्रल कमांड और सैन्य अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, गुरुवार शाम को अमेरिकी वायुसेना ने एक बार फिर ईरान के अंदरूनी सैन्य बुनियादी ढांचे और रणनीतिक ठिकानों को अपना निशाना बनाया। अमेरिकी सेना का साफ कहना है कि यह सैन्य कार्रवाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में कमर्शियल जहाजों को लगातार दी जा रही धमकियों और हमलों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए की जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की कड़ी चेतावनियों के बीच यह लगातार 13वां दिन है जब अमेरिकी सेना ने तेहरान के खिलाफ इस तरह के घातक प्रहार किए हैं।हॉर्मुज जलडमरूमध्य में थम गया जहाजों का आवागमनयह पूरा विवाद दुनिया के सबसे अहम चोकपॉइंट यानी हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के नियंत्रण और वहां से गुजरने वाले शिपिंग रूट्स को लेकर खड़ा हुआ है। वैश्विक स्तर पर होने वाले कुल तेल निर्यात का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान पर लगातार यह आरोप लग रहे हैं कि उसके रिवोल्यूशनरी गार्ड्स इस क्षेत्र में लगातार अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को निशाना बना रहे हैं और आवाजाही में बाधा डाल रहे हैं। अमेरिका और उसके सहयोगियों की ओर से ईरान को जिम्मेदार ठहराने के बाद से इस समुद्री मार्ग पर हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।क्रूड ऑयल की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल, 100 डॉलर के पार पहुंचा तेलमिडिल ईस्ट के इस महासंकट का सीधा असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। हॉर्मुज के साथ-साथ बाब अल-मंदेब (Bab el-Mandeb) जलडमरूमध्य से भी जहाजों के आवागमन के गंभीर रूप से बाधित होने के बाद वैश्विक बाजार में खलबली मच गई है। कच्चे तेल की कीमतें अचानक सात प्रतिशत तक उछल गई हैं और ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। इससे पहले आखिरी बार मई के महीने में तेल इस उच्च स्तर पर पहुंचा था। वहीं अमेरिकी क्रूड भी 90 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर चुका है। आर्थिक विशेषज्ञों और जानकारों का अनुमान है कि अगर यह टकराव जल्द नहीं थमा, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक भी जा सकती हैं, जिससे दुनियाभर में महंगाई का एक बड़ा दौर आ सकता है।
पड़ोसी देश बांग्लादेश से इस वक्त की सबसे बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है। बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही आज यानी शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा देने जा रहे हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि सत्ता से बेदखल की जा चुकी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ उनके पुराने और करीबी रिश्तों के चलते सरकार की तरफ से उन पर त्यागपत्र देने का भारी दबाव बनाया गया था। रॉयटर की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने आधिकारिक तौर पर इस्तीफे की कोई ठोस वजह नहीं बताई है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यह फैसला देश के मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर लिया गया है।शेख हसीना की वापसी की चर्चा के बीच बड़ा फैसलायह पूरा राजनीतिक घटनाक्रम ठीक उस समय सामने आया है जब कुछ दिन पहले ही पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने यह बयान दिया था कि वह अदालत के फैसलों का सामना करने और स्वदेश लौटने की तैयारी कर रही हैं। राष्ट्रपति शहाबुद्दीन को शेख हसीना का पुराना सहयोगी माना जाता रहा है। यही वजह है कि सरकार के शीर्ष हलकों में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी थी कि शहाबुद्दीन ने कथित तौर पर हाल ही में फिर से शेख हसीना से संपर्क साधने की कोशिश की थी। देश के प्रमुख अखबार 'प्रथम आलो' ने भी उच्च-स्तरीय सूत्रों के हवाले से इस बात की पुष्टि की है कि राष्ट्रपति के इन संपर्कों और पुरानी नजदीकियों ने मौजूदा प्रशासन को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।अवामी लीग पर प्रतिबंध और शीर्ष पदों से हटे हसीना के सभी करीबीमोहम्मद शहाबुद्दीन के इस इस्तीफे के बाद बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। अब देश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर शेख हसीना का कोई भी पुराना सहयोगी या समर्थक नहीं बचेगा। आपको बता दें कि देश में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही शेख हसीना की पार्टी 'अवामी लीग' पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। पार्टी के तमाम दिग्गज नेता और कार्यकर्ता या तो सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं या फिर पुलिस और जांच एजेंसियों के डर से भूमिगत हो गए हैं। ऐसे नाजुक वक्त में राष्ट्रपति का पद छोड़ना देश की राजनीति में एक नए और बड़े दौर की शुरुआत का संकेत दे रहा है।बांग्लादेश सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनेगी शेख हसीना की वापसीविशेषज्ञों का मानना है कि शेख हसीना की संभावित स्वदेश वापसी मौजूदा बांग्लादेश सरकार के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती साबित हो सकती है, जो इस वक्त देश में राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता बहाल करने के लिए संघर्ष कर रही है। हालांकि हसीना की वापसी की योजनाओं में अभी करीब पांच महीने का वक्त बाकी है, लेकिन देश के सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो चुकी है। राष्ट्रपति शहाबुद्दीन का यह इस्तीफा यह साफ कर देता है कि देश की हुकूमत अब शेख हसीना के किसी भी प्रभाव या उनके पुराने सहयोगियों को प्रशासनिक तंत्र में रखने के बिल्कुल पक्ष में नहीं है।
होर्मुज पर ईरान का दावा: रुबियो बोले– इंडो‑पैसिफिक तक बढ़ेगा खतरा
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने चेतावनी दी कि अगर ईरान को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर नियंत्रण करने दिया गया तो यह एक खतरनाक मिसाल बन जाएगी
ट्रंप की चेतावनी: सऊदी जहाजों पर हमले तो ईरान भी जिम्मेदार
लाल सागर में जहाजों पर हूती विद्रोहियों के हमलों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी चेतावनी की है
अफ्रीकी संघ (एयू) ने यमन के हूती समूह की ओर से लाल सागर में कमर्शियल तेल टैंकरों पर किए गए हमलों की कड़ी निंदा की

