गाजियाबाद के एक हाईराइस टावर में 29 अप्रैल को आग लग गई। देखते ही देखते 7 मंजिलों में आग फैल गई। आग लगने का कारण एक फ्लैट में AC ब्लास्ट होना बताया जा रहा है। इससे पहले 28 अप्रैल को नोएडा में भी एक घर में AC का मेन स्विच ऑफ नहीं था, जिससे ब्लास्ट हो गया। आखिर गर्मी बढ़ने से AC ब्लास्ट क्यों होने लगते हैं और इससे कैसे बचा जा सकता है; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में... सवाल-1: गाजियाबाद में AC फटने का मामला क्या है? जवाब: गाजियाबाद की गौड़ ग्रीन एवेन्यू सोसाइटी में 29 अप्रैल को आग लगी, देखते ही देखते 12वीं मंजिल तक पहुंच गई… सवाल-2: आखिर ज्यादा गर्मी में AC फट क्यों जाता है? जवाब: सबसे पहले समझिए कि AC काम कैसे करता है… अब समझते हैं कि गर्मी में AC के सिस्टम में क्या गड़बड़ी होती है, जिससे यह ब्लास्ट हो जाता है… 1. कंप्रेसर का ओवरहीट होना गर्मियों में बाहर का तापमान 45C+ होता है। AC का कंप्रेसर आउटडोर यूनिट में होने के कारण पहले से ही गर्म हवा में काम करता है। लगातार बिना रुके चलने से कंप्रेसर ज्यादा गर्म हो जाता है। दबाव इतना बढ़ जाता है कि वह फट जाता है। 2. रेफ्रिजरेंट गैस का रिसाव AC में R-22 या R-410A जैसी गैस होती है। यह कमरे की गर्मी को बाहर ले जाने का काम करती है, जिससे कमरा ठंडा हो जाए। यह गैस ज्वलनशील होती है, यानी हल्की सी चिंगारी से भी आग पकड़ सकती है। अगर पाइप या वॉल्व में लीकेज हो जिससे गैस बाहर आ रही है, तो आग लग सकती है। 3. शॉर्ट सर्किट और खराब वायरिंग खराब वायरिंग और एक ही ओवरलोडेड सॉकेट का इस्तेमाल शॉर्ट सर्किट की सबसे बड़ी वजह है। गर्मियों में घर के सभी AC, पंखे, फ्रिज एक साथ चलते हैं, जिससे बिजली का बोझ बढ़ जाता है। ऐसे में शॉर्ट सर्किट हो सकता है। 4. पुराने AC का समय पर मैनटेनेंस न होना बिना सर्विसिंग के AC के फिल्टर बंद हो जाते हैं। AC के अंदर एक ब्लोअर फैन होता है, जो फिल्टर के जरिए हवा खींचता है। धूल के कारण अगर यह बंद हो जाए, तो फैन को हवा खींचने में ज्यादा मशक्कत करनी पड़ती है। इससे मोटर गर्म हो जाती है और लाग लग सकती है। जब हवा फैन तक आती ही नहीं तो रेफ्रिजरेंट गैस उसे ठंडी नहीं कर पाती। कंप्रेसर को लगता है कि कमरा अभी भी गर्म है और वह भी ज्यादा ताकत से काम करने लगता है। इससे भी कंप्रेसर फटने का खतरा होता है। 5. हाईराइज बिल्डिंग में आग का तेजी से फैलना हाईराइज बिल्डिंग में आग नीचे से ऊपर तेजी से जाती है क्योंकि गर्म हवा हमेशा ऊपर उठती है। इसे स्टैक इफेक्ट कहा जाता है। अगर बिल्डिंग में लिफ्ट शाफ्ट खुला हो, AC डक्ट्स जुड़े हों, वेंटिलेशन सिस्टम कमजोर हो या फायर डोर सही से बंद न हों, तो पूरा ढांचा चिमनी की तरह काम करने लगता है। सवाल-3: क्या इस तरह की घटनाएं पहले भी हो चुकी है? जवाब: पिछले कुछ महीनों में AC ब्लास्ट के कई मामले सामने आ चुके हैं। फरीदाबाद, 8 सितंबर 2025: AC ब्लास्ट से परिवार के 3 लोग, पालतू कुत्ते की मौत तेलंगाना, 25 जनवरी: हॉस्टल में AC ब्लास्ट, 6 लड़कियां बेहोश हुई विजयवाड़ा, 25 अप्रैल: शॉर्ट सर्किट से AC का कंप्रेसर फटा नोएडा, 28 अप्रैल: मेन स्विच बंद न करने से AC ब्लास्ट हुआ सवाल-4: गर्मी बढ़ने पर अचानक AC में ब्लास्ट न हो, इसके लिए क्या सावधानी जरूरी? जवाब: गर्मी में अचानक AC ब्लास्ट न हो इसके लिए कुछ सावधानियां रखी जा सकती हैं… ***** रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास ---------------------------------ये खबर भी पढ़ें… पंखे आग उगलते हैं, रात में भी राहत क्यों नहीं:भारत की गर्म रातें कैसे बन रहीं साइलेंट किलर; इससे कैसे बचें भारत में गर्मी का मतलब अब सिर्फ दोपहर की झुलसाने वाली धूप नहीं रह गया है। अब सूरज ढलने के बाद भी राहत नहीं मिलती। रात 11 बजे भी दीवारें गर्म रहती हैं, पंखे गर्म हवा फेंकते हैं और कूलर-एसी भी कई बार बेअसर लगते हैं। वैज्ञानिक इसे ‘वार्म नाइट्स’ कहते हैं। पढ़ें पूरी खबर…
सारा जैकब्स के इस सवाल पर रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने इसे राष्ट्रपति का अपमान बताते हुए कहा कि इस तरह के सवाल न केवल अनुचित हैं, बल्कि देश के सर्वोच्च पद की गरिमा के खिलाफ भी हैं। हेगसेथ ने पलटवार करते हुए जैकब्स से पूछा कि क्या उन्होंने यही सवाल पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन से उनके कार्यकाल के दौरान कभी पूछा था।
अदालत ने लुइसियाना बनाम कैलाइस मामले में 6-3 के बहुमत से ऐसा निर्णय दिया है, जिससे वोटिंग राइट्स एक्ट (VRA) की धारा 2 का प्रभाव काफी हद तक सीमित हो गया है। इस फैसले के बाद अब चुनावी क्षेत्रों के नक्शों को नस्लीय आधार पर चुनौती देना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो जाएगा।
Pakistan Economic Crisis : शहबाज शरीफ ने मानी हार अमेरिका-ईरान जंग ने तोड़ी पाकिस्तान की कमर
पाकिस्तान को लगा तगड़ा झटका नहीं जाएंगे इस्लामाबाद, ईरान के साथ फोन पर शुरू हुई सीक्रेट बात
अमेरिकी संसद में रणनीतिक संतुलन को लेकर बहस, इंडो-पैसिफिक में चीन की बढ़ती सैन्य ताकत पर चेतावनी
अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर अमेरिकी सांसदों ने चिंता जाहिर की है कि वर्तमान हालातों में कहीं अमेरिका का ध्यान चीन पर से न हट जाए
अमेरिका-ईरान जंग ने तोड़ी इकोनॉमी की कमर: 25 अरब डॉलर स्वाहा, क्या ट्रंप को ले डूबेगी महंगाई?
मध्य प्रदेश का शिवपुरी जिला। पथरीले खेतों और अलसाई सड़क से होते हुए 40 किलोमीटर दूर एक तहसील है- पोहरी। गर्मी की धूप में डामर की सड़कें ऐसी तप रही हैं कि गलती से पैर पड़े तो छाले पड़ जाएं। दूर से ही कुछ घर नजर आने लगे। एक घर के सामने भीड़ लगी है। दो हट्टे-कट्टे मर्द जोर-जोर से चिल्ला रहे हैं- ‘हमने इस मौड़ी को 20 हजार रुपए में खरीदकर अपनी बहू बनाया था। अब ये तेरे साथ रहने लगी। अगर तू इसे अपने घर में रखेगा तो झगड़ा देना पड़ेगा। पैसा देना पड़ेगा। इसकी दूसरी शादी है, इसलिए कीमत और बढ़ जाएगी।’ फिर बोली लगनी शुरू हुई। आखिरकार 40 हजार कीमत तय हुई। एक शख्स ने हाथ जोड़कर कहा- ‘इतना पैसा तो नहीं है, साहूकार से उधार लेकर आता हूं।’ पूछने पर पता चला कि इस इलाके में शादी के लिए लड़कियां खरीद कर ही लाई जाती हैं। वो भी बकायदा स्टाम्प पेपर के साथ। स्याह कहानियों की सीरीज ब्लैकबोर्ड में आज कहानी मध्य प्रदेश के इसी इलाके से, जहां स्टाम्प पर तय हो रही शादी के लिए लड़कियों की कीमत… मैंने पास खड़े शख्स से पूछा- ‘झगड़ा देना पड़ेगा का क्या मतलब होता है?’ वो बोले- ‘यहां झगड़ा का मतलब लड़की की खरीददारी करना होता है। आदिवासी समुदाय में पहली शादी के बाद दूसरी या तीसरी शादी होने पर झगड़ा देना पड़ता है, यानी एक तय रकम देनी होती है। यह रिवाज है। पहली, दूसरी, तीसरी… शादी को इनके समुदाय में हाथ से गुजरना कहते हैं। जितनी शादियां होंगी, लड़की की कीमत उतनी बढ़ती जाएगी। जैसे- कोई 50 हजार में लड़की खरीद कर लाया, फिर वो लड़की कुछ दिन रही और दूसरे घर चली गई तो पहली शादी वाली फैमिली 50 हजार से ज्यादा लेगी, तब उस लड़की को दूसरे पति के साथ रहने देगी। ऐसे रेट बढ़ता रहता है। अब तक यहां खड़ी भीड़ घर की तरफ लौट गई थी। घर के सामने पेड़ के नीचे चेहरे पर मासूमियत लिए एक लड़की बैठी है, जिसकी कीमत 40 हजार तय हुई है। नाम- बबीता। कुछ देर बात करने के बाद वो सहज हुईं। शादी के बारे में पूछते ही बोलीं- कुछ दिन पहले मेरी दूसरी शादी सोनवीर से हुई है। वो मुझसे दो साल छोटा है। ‘पहली शादी कहां हुई थी’ ‘पहली शादी जिससे हुई थी, वो खूब-मारता पीटता था। शराब पीकर रात-रातभर मुझे मोटर साइकिल पर बिठाकर अपने दूसरे-तीसरे रिश्तेदारों के यहां घुमाता रहता था। मना करती थी, तो वह और मारता था। बीवी उसकी थी, लेकिन अपने रिश्तेदारों के यहां मुझे रात में सुला देता था। नींद में मेरे साथ क्या होता होगा, क्या नहीं, मुझे नहीं पता। इसलिए मैं एक दिन मायके भाग आई। कुछ दिन बाद ही सोनवीर से शादी कर ली। डेढ़ साल से हम दोनों एक-दूसरे को जानते थे।’ अब तक सोनवीर भी साहूकार से पैसे उधार लेकर लौट आए थे। वो भी बबीता के पास ही बैठ गए। कितनी उम्र होगी आपकी? मैंने बबीता से पूछा ‘मुझे नहीं पता कि मेरी कितनी उमर होगी।’ सोनवीर धीरे से बोलते हैं, ‘21, 22 साल होगी। 40 हजार रुपए साहूकारों से ब्याज लेकर इसके पहले ससुराल वालों को दे रहा हूं। अब क्या कर सकता हूं। मुझसे शादी नहीं होती, तो कोई इसका गलत फायदा उठाता।’ सोनवीर के एक रिश्तेदार भी यहीं पर बैठे हुए हैं। कहते हैं, ‘पहली शादी के बाद, दूसरी-तीसरी शादी के लिए सब पैसा देकर ही लड़की लाते हैं। अब ये लड़की यदि दूसरे-तीसरे घर में जाएगी, तो इसका रेट बढ़ता जाएगा। जैसे ये लड़की अब हमारे घर में 40 हजार रुपए में आई है। अब ये किसी तीसरे घर में गई, तो हम लोग कम-से-कम 80 हजार रुपए तो लेंगे ही।’ ऐसे लड़की खरीदकर लाने में डर नहीं लगता? ‘किस बात का डर। यहां बड़े-बड़े लोगों के घर में लड़कियां दूसरे जगह से ज्यादा-ज्यादा कीमत पर खरीदकर लाई जाती हैं। लोग डरते हैं इसलिए बताते नहीं हैं। हमारा एक पड़ोसी है राकेश- उसकी बीवी कुछ दिन पहले भाग गई। साथ में तीन साल के बेटे को भी लेकर चली गई।’ कुछ देर बाद राकेश से मेरी मुलाकात हुई। वह परेशान हैं, लेकिन कैमरे पर एक शब्द नहीं बोलना चाहते। कहते हैं, ‘4 साल पहले शादी हुई थी। उससे एक बेटा भी है और दोबारा पेट से है। शादी का कागज-पत्तर सब बनवाया था। कुछ दिन पहले ही बेटे को लेकर पता नहीं कहां भाग गई। 30 हजार रुपए में शहडोल से खरीदकर लाया था। मंदिर में शादी हुई थी। अब वह लड़का मुझे वापस कर दे, तो जान में जान आए। इसी चिंता में 10 दिन से खाना नहीं खाया है। दिनभर बेटे की याद आती है, लेकिन उसकी मां कसाई निकली। पूरी रकम चुकाई थी। तीन साल से अच्छे से रह भी रहे थे हम दोनों, तब भी भाग गई। मेरा 6-7 महीने का बच्चा उसके पेट में पल रहा है। पता नहीं, अब किसके हाथ चली गई। मिल जाए, तो इसकी खाल उधेड़ लूंगा,’ बीवी को गाली देते हुए राकेश चले जाते हैं। इसके बाद मेरी मुलाकात मुकेश नाम के शख्स से हुई। वो बताते हैं, ‘यहां इतनी गरीबी है कि अच्छे-अच्छे लोगों की शादी नहीं हो पाती है। इसलिए कई लोग ओडिशा, झारखंड, बिहार से लड़की लेकर आते हैं। ये ऐसी लड़कियां होती हैं, जिनके परिवार में अमूमन कोई नहीं होता। दलाल लड़के के परिवार से पैसे लेकर शादी करवाता है। शादी के बाद जब लड़कियों को दो वक्त का खाना नसीब होने लगता है, तो यहीं की होकर रह जाती हैं। हालांकि, कुछ लड़कियां पैसों की लालच में फिर से भाग जाती हैं। लड़कियों की कीमत 10-20 हजार रुपए से लेकर 2-2 लाख तक होती है।’ यहां से निकलकर मैं गांव के बाहर एक ढाबे पर पहुंचा। सामने अधेड़ उम्र का आदमी भट्ठी में रोटियां सेंक रहा था। मैंने उससे रास्ता पूछने के बहाने बातचीत शुरू की। जब वो सहज होने लगा तो धीरे से पूछा- ‘यहां दूसरे राज्यों से लड़कियां लाई जाती है?’ वो दबी जुबान में बोला, ‘यहां ज्यादातर घरों की बहुएं ऐसे ही लाई गई हैं, लेकिन कोई बात नहीं करेगा। कोई 30 साल पहले ओडिशा से लड़की लेकर आया, तो कोई बिहार से। बहुतों का घर बस गया और कईयों का उजड़ भी गया। पैसा भी चला गया और लड़की भी।’ ‘तो जो लड़कियां भाग जाती हैं, उनकी कोई खोज खबर नहीं मिलती?’, मैंने पूछा ‘इतनी दूर से लाते हैं। ज्यादातर के तो रिश्तेदारों का भी पता नहीं होता, कहां ही खोज पाएंगे। इसलिए अब जो लड़कियां यहां आ चुकी हैं, वही अपने रिश्तेदारी में शादी करा देती हैं। सामने ही चाय वाला है। उसकी भाभी ओडिशा से हैं। अब अपने देवर की शादी भी ओडिशा में ही करवा रही है। आप गांव में घूम जाएंगे, लेकिन कोई बात नहीं करेगा। सब डरते हैं कि उसका बसा-बसाया घर उजड़ जाएगा। कौन जाएगा मुसीबत मोल लेने।’ यहां लड़कियां कम हैं या बेरोजगारी की वजह से कोई अपनी लड़की नहीं देता? ‘शिवपुरी में लड़कियों की आबादी बहुत कम है न! हजार मर्दों पर 800 के करीब लड़कियां हैं। इसलिए बरसों से दूसरे राज्यों से, मध्य प्रदेश के ही अलग-अलग शहरों से लड़कियों को खरीदकर लाते रहे हैं। यह कोई नया नहीं है।’ तभी एक लंगड़ाता हुआ आदमी आ जाता है। बात सुनकर माथा पीटते हुए कहता है, ‘कुछ ही दिन पहले छतरपुर से लड़की खरीदकर लाया था। लाखों रुपए दिए थे। अब न लुगाई रही, न पैसा। सब लुट गया, बर्बाद हो गया। लड़की शादी के 4 दिन बाद ही भाग गई। गहना-जेवर सब ले गई।’ ‘नाम क्या है आपका, कितनी उम्र है?' ‘भरत नाम है, 30 साल का हूं।’ ‘कैसे शादी हुई थी आपकी?’, पूछते हुए मैं कैमरा लगाने लगता हूं। भरत घबराकर उठ खड़े होते हैं। ‘मैं नहीं बात करूंगा। इज्जत लुट गई, अब क्या बात करूं। वीडियो बनाओगे। समाज में बदनामी होगी। मामा ने शादी कराकर सब बर्बाद कर दिया,’ कहते हुए जाने लगते हैं। काफी देर बातचीत के बाद भरत चेहरा ढंककर बात करने को राजी होते हैं। कहते हैं, ‘चार साल पहले की बात है। बाइक से एक्सिडेंट हो गया था। दायां पैर 8 हिस्से में टूट गया। ऑपरेशन हुआ तो लोहे की रॉड डल गई। पैर घुटने से मुड़ता ही नहीं है। ढाई महीने बिस्तर पर रहा। शरीर पूरा गल गया। जब ठीक होकर थोड़ा-बहुत चलने लगा, तब रिश्तेदारी में सब मां से कहने लगे- बेटे की शादी कर लो। लड़की दिलवा देंगे। बुढ़ापे का सहारा हो जाएगा। कब तक अकेले चूल्हे में जलती रहोगी। मैंने मां से कहा- लड़की खरीदने में बहुत फ्रॉड होता है। लड़की कैसी है, क्या पता। नहीं करेंगे शादी। फिर एक दिन मेरे मामा घर आए। बोले- लड़की की गारंटी मैं लूंगा। तुम पैसे खर्च करो। अच्छी लड़की ढूंढ़कर लाऊंगा।’ कितने रुपए पर बात हुई थी? ‘डेढ़ लाख रुपए में सौदा पक्का हुआ। मामा ने एक जानने वाले से बात करके लड़की का फोटो मंगवाया। गोरा चेहरा, नैन-नक्श भी ठीक थे। मैं हां कर दी। लगा कि मेरा वंश आगे बढ़ेगा। फरवरी महीने की बात है। हल्की-हल्की ठंड थी। लड़की को छतरपुर से यहां लाने के लिए 10 हजार रुपए गाड़ी का भाड़ा दिया। लड़की के साथ उसका एक भाई, बुआ और दलाल भी था। सभी लोग यहां के मंदिर में आए। मामा ने मुझसे पैसे लेकर लड़की वालों को दे दिए। एक कमरे में हम दोनों ने एक-दूसरे को माला पहनाया, मिठाई खिलाई। स्टाम्प पेपर पर राजीनामा लिखवाकर शादी पक्की हो गई। लड़की को लेकर हम लोग गांव लौट आए। जैसे एक पति-पत्नी एक कमरे में रहते हैं, हम भी रहने लगे। मां उसे खाना बनाकर खिलाती थी कि नई-नई बहू है। शादी की पहली रात जब मैंने उससे पहले पति के बारे में पूछा तो बोली एक बच्चा था उससे, लेकिन वह मर गया। चौथे दिन की बात है। वह कहने लगी- शहर जाकर माता के मंदिर में माथा टेकना है। हम दोनों सुबह-सुबह बस से मंदिर के लिए निकल गए। मैं तो पैर की वजह से सीढ़ी चढ़ नहीं पाता। इसलिए वो बोली- तुम यहीं पर रुको। मैं पूजा करके आती हूं। वो जो मंदिर की सीढ़ियां चढ़ी कि दोबारा लौटी ही नहीं। शादी में सोने का मंगलसूत्र चढ़ाया था, वह भी लेकर चली गई।’ आप मंदिर के नीचे ही इंतजार कर रहे थे? ‘हां, शाम तक राह ताकता रहा। जब नहीं आई, तब घर वालों को फोनकर बताया कि भाग गई है। एक रोज उसका फोन आया। पीछे से बच्चों के रोने की आवाज आ रही थी। पूछने पर बोली कि ये मेरे ही बच्चे हैं। तीन बच्चों की मां हूं। गाली देते हुए फोन काट दिया। लड़की भी गई, महाजन से कर्ज लेकर जो पैसे दिए थे डेढ़-दो लाख रुपए वो भी गए। सब पानी में चला गया। मामा ने कमीशन खाकर हमें कहीं का नहीं छोड़ा। अब कहां से इतने पैसे चुकाऊंगा,’ कहते-कहते भरत फिर से सामने बैठे मामा से लड़ने लगते हैं। बार-बार वह मामा को कह रहे हैं, ‘तुमने लड़की की गारंटी ली थी। अब बताओ, कहां गई लड़की।’ मामा कुर्सी पर सिर झुकाए बैठे हुए हैं। पूछने पर कहते हैं, ‘मेरे जानने वाले की बीज की दुकान थी। मैंने कहा था कि कोई लड़की हो तो बताना, भांजे को शादी करानी है। उसी ने रिश्ता करवाया था। वह तो 2 लाख रुपए मांग रहा था। मैंने कम करके डेढ़ लाख में पक्का किया था। नहीं पता था कि मौड़ी चार दिन में ही भाग जाएगी। अब पुलिस में मामला दर्ज कराने जाऊं, तो लाज लगती है। डर भी लगता है कि पुलिस कहीं हमें ही न टांग दे। इधर रिश्तेदार दिन-रात मेरी छाती पर चढ़े रहते हैं कि पैसे लौटाओ। मैं क्या करूं। मैंने थोड़े न पैसा लिया है।’ नोट- पहचान छिपाने के लिए लोगों के नाम बदले गए हैं। -------------------------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड-पत्नी के घरवालों ने नंगा करके पीटा, नस काटकर सुसाइड:पत्नी ने कॉलर पकड़कर मांगे 20 लाख तो फांसी लगाई; तंग पतियों की स्याह कहानियां ‘20 जनवरी 2025 की बात है। शाम के 4 बजे थे। मैं अपने दोनों पोतों को स्कूल से लेकर घर लौट रही थी। रास्ते में मेरा छोटा बेटा नितिन बाइक से आ रहा था। उसने कहा- मम्मी, बाइक पर बैठ जाओ। फिर हम उसके साथ घर आए। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें2- ब्लैकबोर्ड-जान बचानी थी, तो सिर पर बांध ली भगवा पट्टी:दंगे की तस्वीर ने मेरी जिंदगी बर्बाद की- हिंदुत्व का चेहरा बना, लेकिन मिला कुछ नहीं 2002 गुजरात दंगे के दो पोस्टर बॉय की कहानी, जिनमें हिंदुत्व का चेहरा बने मोची अशोक परमार आज दो वक्त की रोटी को मोहताज हैं। सर्दी, गर्मी, बरसात सड़क पर सोते हैं। वे उस वक्त 27 साल के थे। आज 51 साल के हैं। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
14 मार्च 2026, यूपी पुलिस SI भर्ती परीक्षा में सवाल पूछा गया- ‘अवसर के अनुसार बदल जाने वाला’ वाक्यांश के लिए एक शब्द का चयन कीजिए। पहला विकल्प था- पंडित। दूसरा- अवसरवादी, तीसरा- निष्कपट और चौथा- सदाचारी। सही जवाब- अवसरवादी। विकल्प में ब्राह्मण लिखने से ये समुदाय भड़क गया। ब्राह्मण विधायकों और नेताओं ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को नाराजगी भरी चिट्ठियां लिखीं। डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने फौरन जांच का आदेश दिया। CM ने भी कहा कि ऐसे सवाल बनाने वालों को खोजकर ब्लैकलिस्ट करो। 46 दिन हो गए। विधायकों को चिट्ठियों के जवाब नहीं मिले। ये तक नहीं पता कि जांच टीम बनी भी है या नहीं। दैनिक भास्कर ने विरोध दर्ज कराने वाले BJP के तीन विधायक, एक बड़े नेता, एक सपा विधायक और यूपी पुलिस भर्ती बोर्ड के अफसरों से बात की। BJP नेता और विधायकों ने पहचान उजागर न करने की शर्त पर बात की क्योंकि हाईकमान से चुप रहने का मैसेज मिला है। पढ़िए इनके जवाब… 1.यूपी में BJP के प्रदेश स्तर के नेता सवाल: आपने CM को लेटर लिखा था, उसका फॉलोअप लिया?जवाब: हां, पूछा था। गोलमोल जवाब मिला। हमें बताया गया है कि बोर्ड की टीम इस मामले की जांच कर रही है। टीम में कौन-कौन हैं, हमें नहीं बताया गया। डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने जांच के आदेश दिए थे। उनसे पूछ सकते हैं। सवाल: क्या जांच की स्थिति जानने के लिए दोबारा लेटर लिख सकते हैं? जवाब: हां, ये कर सकते हैं। करेंगे भी। सवाल: बोर्ड लखनऊ में ही है, क्या आपकी अधिकारियों तक पहुंच नहीं है? जवाब: पहुंच तो सब तक है, लेकिन अधिकारियों की मजबूरी है कि उन्हें ऊपर के लोगों के आदेश पर चलना पड़ता है। वे हमें औपचारिक तौर पर कुछ क्यों बताएंगे। अनौपचारिक तौर पर पता लगा है कि जांच टीम बनी ही नहीं। मौखिक जवाब दे दिया गया। लिखित में कुछ नहीं हुआ। 2. BJP विधायक 1 सवाल: जांच रिपोर्ट कब तक आएगी, आपने कुछ फॉलाेअप लिया?जवाब: हां, लेटर लिखा था। मुख्यमंत्री जी ने भरोसा दिया था कि जांच होगी। टीम में कौन-कौन है, ये गोपनीय विषय है। जांच गुप्त रूप से चल रही है। हमें नहीं बता सकते। मामला गंभीर है। रिपोर्ट आने में वक्त लगेगा। हम फिर से फॉलोअप ले लेंगे। आपको स्टेटस पूछकर बता देंगे। हमने नाराजगी जताने के लिए लेटर लिखा था। नाराजगी दर्ज हो गई। अब जांच सरकार का विषय है। 3. BJP विधायक 2 सवाल: अवसरवादी पंडित वाला मामला कहां तक पहुंचा?जवाब: अब निपट गया है। बोर्ड ने मौखिक जवाब दिया है कि मामले को गलत ढंग से प्रचारित किया गया। पेपर में विकल्प के तौर पर पंडित दिया गया था। ये नहीं कहा गया कि पंडित ही सही विकल्प है। अगर कोई पंडित टिक करता, तो वो गलत जवाब होता। विकल्प हमेशा स्टूडेंट्स को भ्रमित करते हुए होते हैं। ये विकल्प भी स्टूडेंट को भ्रमित करने वाला था। बोर्ड या पेपर सेटर की मंशा न तो शरारत की थी और न साजिश की। फिर भी जरूरी है कि एक जाति के नेताओं को टारगेट करने की आदत वाले शरारती तत्वों की पहचान हो। इस विषय को किसी एक मुद्दे की बजाय कई घटनाओं को जोड़कर देखना चाहिए। सवाल: आप लोग जांच का दबाव क्यों नहीं बना रहे? जवाब: लेटर लिखने वाले विधायकों को पार्टी ने मैसेज दे दिया है कि शांति बनाए रखें। कुछ और लिखने या पूछने की जरूरत नहीं। राजनीति में मैसेजिंग होती है, लिखत-पढ़त में या किसी कानूनी तरह से नहीं। बस मैसेज मिल जाता है। और लोग समझ जाते हैं। 4. BJP विधायक 3 सवाल: अवसरवादी पंडित वाले मामले की जांच कहां तक पहुंची?जवाब: CM ऑफिस से हमें बताया गया कि जांच चल रही है। हम भी इंतजार कर रहे हैं। अब रिमाइंडर डालेंगे। लखनऊ जाएंगे तो स्टेटस पता करेंगे। जांच टीम में बोर्ड के अंदर के लोग हैं या सरकार के भी लोग हैं, हमें नहीं बताया गया। 5. अमिताभ बाजपेयी, सपा विधायक सवाल: आपने CM को शिकायती लेटर भेजा था, क्या जवाब आया?जवाब: आपको लगता है वहां से कोई जवाब मिलता है! अपने विधायकों की तो सुनते नहीं, हमारी क्या सुनेंगे। उन्हें लेटर तो कई मुद्दों पर लिखे हैं। आज तक किसी का जवाब नहीं मिला। RTI लगाने का भी फायदा नहीं। वे भी अटक जाती हैं। हमने पता लगाया, तो कहा गया टीम जांच कर रही है। टीम में कौन-कौन है, बोर्ड के कौन से अधिकारी जांच के दायरे में हैं, इसकी खबर किसी को नहीं। आप BJP विधायकों से भी पता लगाइए। वे अंदर के लोग हैं, शायद उन्हें कुछ पता चला हो। 6. यूपी पुलिस रिक्रूटमेंट एंड प्रमोशन बोर्ड के सोर्स सवाल: क्या जांच टीम बनी है, पेपर सेट करने वाली टीम में कौन-कौन था?जवाब: हमारी नॉलेज में ऐसी कोई टीम नहीं बनी है। बोर्ड में बैठक जरूर हुई है। डायरेक्टर साहब ने बोर्ड के सभी अधिकारियों को हिदायत दी थी कि इस बारे में किसी से बात न करें। तब भी इसे किसी की साजिश या शरारत नहीं बताया गया, बल्कि गलतफहमी से उपजा विवाद बताया गया था। पेपर सेट करने वाली टीम बाहर की थी। पता लगा था कि कर्नाटक की कोई फर्म थी। कंपनी के मालिक हाई प्रोफाइल हैं। नाम के बारे में 100% श्योर नहीं हूं। कंपनी का कनेक्शन कर्नाटक और महाराष्ट्र से भी था। मालिक यूपी से है। बहुत सेंसेटिव जोन से है, इसीलिए अभी नाम नहीं ले रहा हूं। बोर्ड के चेयरमैन को कई बार फोन किया, हर बार मीटिंग का हवाला यूपी पुलिस भर्ती बोर्ड के चेयरमैन एस. बी. शिरोडकर को हमने कई बार फोन किया। ऑफिस के नंबर पर हर बार फोन उठा। साहब की व्यस्तता और बैठकों का हवाला देकर कुछ देर बाद फोन करने को कहा गया। कुछ देर बाद फोन करने पर फिर वही जवाब मिला। उनके मोबाइल नंबर पर भी कई बार फोन किया, लेकिन बात नहीं हुई। चेयरमैन के पीए अशोक वर्मा से दो बार बात हुई। पहली बार उन्होंने सीयूजी नंबर और ऑफिस के नंबर पर बात करने की सलाह दी। बात नहीं हुई तो कहा, मैं ऑफिस जाऊंगा, तो बात करवा दूंगा। अगली बार बात की, तो जवाब झल्लाहट के साथ मिला। मैं छुट्टी पर हूं। मुझे बार-बार फोन न करें। यूपी में 52 ब्राह्मण विधायक, सबसे ज्यादा 41 BJP के यूपी विधानसभा में कुल 52 ब्राह्मण विधायक हैं। इनमें BJP के 41, BJP के साथ गठबंधन में शामिल निषाद पार्टी के 4, अपना दल (S) के 1, विपक्षी समाजवादी पार्टी के 5 और कांग्रेस के 1 विधायक ब्राह्मण कम्युनिटी से आते हैं। CSDS-लोकनीति के अनुमानित आंकड़े के मुताबिक, यूपी में ब्राह्मणों की आबादी 9% से 11% के बीच मानी जाती है। OBC 45% से 50%, अनुसूचित जाति 21% से 22%, अनुसूचित जाति 19% से 20%, राजपूत 7% से 8%, वैश्य 3% से 4% और अन्य 2% से 3% हैं। ……………………………… ये रिपोर्ट भी पढ़ेंपंजाब में क्या 38% दलित दिलाएंगे BJP को जीत, RSS के प्लान में दलित संत-राम कनेक्शन पंजाब में विधानसभा चुनाव को करीब एक साल बाकी है, लेकिन RSS ने पंजाब जीतने का प्लान लॉक कर लिया है। गृह मंत्री अमित शाह भी साफ कर चुके हैं कि BJP पंजाब की सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। RSS के प्लान के केंद्र में पंजाब की 38% दलित आबादी है। इसे साधने के लिए 5 पॉइंटर रणनीति बनी है। टारगेट पर AAP की 92 सीटें हैं। पढ़ें पूरी खबर...
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के बाद हुए ज्यादातर एग्जिट पोल में BJP की सरकार बनती दिख रही है। 7 में से 5 बड़ी एजेंसियों के सर्वे बीजेपी को बहुमत से ज्यादा सीटें दे रहे हैं। नतीजे 4 मई को आएंगे। भास्कर एक्सप्लेनर में जानिए वो 5 बड़े फैक्टर, जिनकी वजह से बंगाल में बीजेपी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनती दिख रही है… बंगाल चुनाव में बीजेपी को हिंदू वोटर्स से सबसे बड़ी उम्मीद है। इसी वोट बैंक के दम पर बीजेपी 2016 में 3 सीटों से 2021 में 77 सीटों तक पहुंची थी। 2026 चुनाव में भी हिंदुओं को अपने पाले में करने के लिए बीजेपी ने कई बड़े कदम उठाए, जिनमें से ज्यादातर कामयाब होते दिख रहे हैं… ‘फिश पॉलिटिक्स’ को ही चुनावी हथियार बना लिया ‘काबा’ बनाम ‘मां काली’ का नैरेटिव बनाया ममता बनर्जी लगातार 15 सालों से बंगाल की सीएम हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि उन्हें सत्ता में बनाए रखने में महिला वोट-बैंक की बड़ी भूमिका रही, जिससे ममता ने लगातार मजबूत किया था। बीजेपी ने ममता के इस बडे़ वोट-बैंक में सेंध लगाने के लिए पूरा जोर लगा दिया… महिला वोटर्स के लिए दोगुना कैश चुनाव से पहले महिला आरक्षण का दांव आजादी बनाम पाबंदी का नैरेटिव 2021 की हार से सबक लेते हुए बीजेपी ने 2026 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने 'बूथ जीतने' पर फोकस बढ़ाया। बंगाल में बीजेपी की नई रणनीति के 5 हाइलाइट्स हैं… ----------------- चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… बंगाल- 6 एग्जिट पोल में से 5 में भाजपा सरकार: असम में BJP, तमिलनाडु में DMK की वापसी; केरल में 10 साल बाद UDF सरकार बनने का अनुमान पश्चिम बंगाल में 6 एग्जिट पोल के नतीजे आ चुके हैं। 5 में भाजपा और एक में TMC सरकार बनने का अनुमान जताया गया है। मैट्रिज के एग्जिट पोल में TMC को 125 से 140 और भाजपा को 146 से 161 सीटें मिलने का अनुमान है। पूरी खबर पढ़िए…
होर्मुज बंद रहने से भी भारत पर नहीं पड़ेगा असर, तेल सौदागरों की आपसी फूट का ऐसे मिल सकता है फायदा
ईरान से जुड़े तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से भारत की तेल आपूर्ति पर असर पड़ा है। अनुमान के मुताबिक, भारत को करीब 4,80,000 बैरल प्रतिदिन की कमी का सामना करना पड़ रहा है। खासकर इराक से आने वाली सप्लाई लगभग पूरी तरह ठप हो गई है।
'हम ना होते तो अमेरिकन फ्रेंच बोल रहे होते...', ट्रंप के मुंह पर किंग चार्ल्स का ऐसा जवाब
अमेरिका और ब्रिटेन के रिश्तों की गर्मजोशी एक बार फिर व्हाइट हाउस में आयोजित स्टेट डिनर के दौरान देखने को मिली, जब किंग चार्ल्स तृतीय ने अपने संबोधन में हास्य और इतिहास का दिलचस्प मेल पेश किया।
बंगाल में आखिरी फेज की वोटिंग जारी है और पीएम मोदी काशी पहुंच गए हैं। वहां उन्होंने बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए और त्रिशूल लहराया। 23 अप्रैल को पहले फेज के मतदान में मोदी बंगाल के ही बेलूर मठ पहुंचे थे। 2021 के बंगाल चुनाव में पीएम मोदी बांग्लादेश की यशोश्वरी शक्ति पीठ पहुंचे थे और मां काली की पूजा-अर्चना की थी। 12 साल पहले प्रधानमंत्री बने मोदी अब तक 9 चुनाव में 14 बार वोटिंग के दिन तीर्थ जा चुके हैं। इनमें 7 बार यानी 80% मौकों पर BJP सत्ता में आई है। मोदी कब-कब चुनाव के दिन तीर्थ पर गए और नतीजे क्या रहे, सिलसिलेवार तरीके से जानते हैं... 1. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव, 29 अप्रैल 2026: काशी में शिव आराधना पश्चिम बंगाल में दूसरे फेज की 142 सीटों पर वोटिंग चल रही है। इस दौरान मोदी वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर गए। 20 मिनट तक मंदिर के गर्भगृह में ज्योतिर्लिंग का पूजन-अभिषेक किया। मंदिर से बाहर निकले तो मोदी के गले में भगवा गमछा और हाथों में डमरू-त्रिशूल था। मोदी ने त्रिशूल उठाकर लहराया भी। नतीजे: 4 मई को चुनावी नतीजे आएंगे। 2. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव, 23 अप्रैल 2026: बेलूर मठ में स्वामी विवेकानंद के कक्ष का दर्शन किया पश्चिम बंगाल में पहले फेज की 152 सीटों पर वोटिंग चल रही थी। तब मोदी बंगाल के हावड़ा जिले में मौजूद बेलूर मठ पहुंचे थे। यहां उन्होंने स्वामी विवेकानंद के ध्यान कक्ष का दर्शन किया। साथ ही रामकृष्ण मिशन के अध्यक्ष स्वामी गौतमानंद जी महाराज का आशीर्वाद लिया। नतीजे: 4 मई को चुनावी नतीजे आएंगे। 3. दिल्ली विधानसभा चुनाव, 05 फरवरी 2025 : प्रयागराज महाकुंभ में स्नान दिल्ली में सभी 70 सीटों पर वोटिंग हो रही थी। तब मोदी ने प्रयागराज में संगम में डुबकी लगाई। उन्होंने भगवा रंग के वस्त्र पहन रखे थे। हाथ और गले में रुद्राक्ष की मालाएं थीं। स्नान के बाद पीएम ने सूर्य को अर्घ्य दिया। नतीजे : बीजेपी ने 70 में से 48 सीटें जीतीं और 27 साल बाद सरकार बनाई। 4. हरियाणा विधानसभा चुनाव, 05 अक्टूबर 2024: महाराष्ट्र के जगदंबा माता मंदिर में पूजा हरियाणा में 90 सीटों पर सिंगल फेज में वोटिंग होनी थी। इसी दिन प्रधानमंत्री मोदी ने महाराष्ट्र के वाशिम जिले में जगदंबा माता मंदिर में पूजा-अर्चना की। मोदी ने मंदिर में नगाड़ा भी बजाया। नतीजे : 90 में से 48 सीटें जीतकर BJP ने लगातार तीसरी बार हरियाणा में सरकार बनाई। 5. लोकसभा चुनाव, 1 जून 2024 : विवेकानंद रॉक मेमोरियल में साधना लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण में 8 राज्यों की 57 सीटों पर वोटिंग होनी थी। मोदी 30 मई की शाम कन्याकुमारी पहुंचे। करीब 45 घंटों तक उन्होंने विवेकानंद रॉक मेमोरियल में साधना की। इस दौरान उन्होंने तमिल कवि तिरुवल्लुवर की 133 फीट ऊंची प्रतिमा के दर्शन किए। PM अलग-अलग तस्वीरों में रुद्राक्ष की माला जपते, ध्यान मंडपम के कॉरिडोर में बैठे और स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा को नमन करते दिखाई दिए। नतीजे : इन 57 सीटों में से 18 BJP को मिलीं। कुल 240 सीटें जीतकर BJP ने NDA की साथी पार्टियों के साथ लगातार तीसरी बार सरकार बनाई। 6. लोकसभा चुनाव, 20 मई 2024 : पुरी के जगन्नाथ मंदिर में पूजा लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण की वोटिंग का दिन था। 8 राज्यों की 49 लोकसभा सीटों पर वोट डाले जाने थे। इसमें ओडिशा की 5 लोकसभा सीटें शामिल थीं। इसी दिन प्रधानमंत्री मोदी पुरी पहुंचे और जगन्नाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। नतीजे : इन 49 सीटों में से 16 सीटें ही BJP जीत सकीं। 7. लोकसभा चुनाव, 13 मई 2024 : पटना साहिब गुरुद्वारा में लंगर सेवा लोकसभा चुनाव के चौथे फेज में 10 राज्यों की 96 सीटों पर वोटिंग थी। इसी दिन PM मोदी बिहार के पटना साहिब गुरुद्वारा पहुंचे। उन्होंने गुरुद्वारे में सेवा कार्य किया, रोटियां बेलीं, श्रद्धालुओं को खाना परोसा और वहां आने वाले लोगों से मुलाकात भी की। नतीजे : इन 96 सीटों में से 39 पर BJP को जीत मिली। 8. लोकसभा चुनाव, 05 मई 2024 : अयोध्या राम मंदिर में पूजा लोकसभा चुनाव के तीसरे फेज में 12 राज्यों की 94 सीटों पर वोट डाले गए। इसमें UP की 10 सीटें शामिल थीं। इससे ठीक दो दिन पहले PM मोदी अयोध्या पहुंचे और हाल ही में बने राम मंदिर में पूजा-अर्चना की। PM ने अयोध्या में रोड शो भी किया। नतीजे : इन 94 सीटों में से 57 पर BJP ने जीत दर्ज की। 9. कर्नाटक विधानसभा चुनाव, 10 मई 2023 : राजस्थान के श्रीनाथजी मंदिर में पूजा कर्नाटक में सभी 224 विधानसभा सीटों पर वोट डाले गए। इस दिन PM मोदी राजस्थान में थे। उन्होंने उदयपुर के श्रीनाथजी मंदिर पूजा-अर्चना की। इस मंदिर में कृष्ण बालरूप में पूजे जाते हैं। नतीजे : 135 सीटें जीतकर कांग्रेस ने सत्ता हासिल की। BJP को महज 66 सीटें मिलीं। पिछले चुनाव के मुकाबले 38 सीटें कम। 10. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव, 27 मार्च 2021 : बांग्लादेश के मतुआ मंदिर में पूजा पश्चिम बंगाल में विधानसभा की 30 और असम में 47 सीटों पर पहले चरण की वोटिंग होनी थी। इस दिन PM मोदी, बांग्लादेश के ढाका में यशोश्वरी मंदिर शक्ति पीठ पहुंचे और मां काली की पूजा-अर्चना की। वे ओराकांडी में मतुआ समुदाय के मंदिर भी गए। पश्चिम बंगाल की 70 सीटों पर मतुआ समुदाय का प्रभाव माना जाता है। नतीजे : पश्चिम बंगाल में BJP को 77 सीटें मिलीं। पहली बार BJP राज्य में मुख्य विपक्षी पार्टी बनी। असम में BJP ने 60 सीटें जीतकर लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल की। 11. लोकसभा चुनाव, 19 मई 2019 : केदारनाथ में ध्यान लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण में 8 राज्यों की 59 सीटों पर वोट डाले जाने थे। इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक तस्वीर सामने आई। 11 हजार फीट की ऊंचाई पर बने केदारनाथ मंदिर में भगवा कपड़े पहने मोदी ध्यान लगाए हुए थे। मोदी ने उस गुफा में करीब 17 घंटे बिताए। गुफा से बाहर निकलने के बाद मोदी बोले- मैं जब भी भगवान के चरणों में आता हूं, तो कुछ मांगता नहीं। क्योंकि, उसने आपको मांगने नहीं, देने योग्य बनाया है। नतीजे : 59 में से 36 सीटें BJP ने जीतीं। कुल 303 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत के साथ BJP ने लगातार दूसरी बार सरकार बनाई और नरेंद्र मोदी PM बने। 12. गुजरात विधानसभा चुनाव, 12 दिसंबर 2017 : अंबाजी मंदिर में पूजा गुजरात विधानसभा चुनाव में 9 दिसंबर और 14 दिसंबर को वोटिंग होनी थी। इसी बीच 12 दिसंबर को PM मोदी मेहसाणा के प्रसिद्ध अम्बाजी मंदिर पहुंचे। यहां करीब 12 मिनट तक उन्होंने मां अम्बा की पूजा और आरती की। नतीजे : 18 दिसंबर 2017 को जब रिजल्ट आया तो BJP ने 182 में से 99 सीटों पर जीत हासिल की। BJP को 49.1% वोट मिले। लगातार 8वीं बार BJP की सरकार बनी और विजय रुपाणी दूसरी बार CM बने। 13.यूपी विधानसभा चुनाव, 08 मार्च 2017 : सोमनाथ मंदिर में पूजा उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव के आखिरी चरण में 40 सीटों पर वोटिंग होनी थी। उसी दिन PM मोदी ने सोमनाथ मंदिर में खास पूजा की। उनके साथ तब के BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी थे। रुद्राक्ष की माला और सुनहरा अंगवस्त्र पहने अभिषेक और आरती करते हुए हुए मोदी की तस्वीरें सियासी गलियारों में चर्चा में रहीं। नतीजे : 11 मार्च को UP चुनाव के नतीजे आए। 15 साल बाद BJP की वापसी हुई। 403 में से 312 सीटें BJP ने जीत लीं। योगी आदित्यनाथ CM बने। 14. असम विधानसभा चुनाव, 11 अप्रैल 2016 : केरल के पारावुर पुत्तिंगल मंदिर पहुंचे असम विधानसभा चुनाव के आखिरी चरण में 61 सीटों पर वोटिंग होनी थी। इसके एक दिन पहले यानी 10 अप्रैल 2016 की सुबह केरल के कोल्लम जिले के पारावुर पुत्तिंगल मंदिर में एक कार्यक्रम के दौरान आग लग गई। इसमें करीब 111 लोगों की मौत हो गई और 200 से ज्यादा घायल हो गए। शाम होते तक PM मोदी भी पहुंच गए। उन्होंने इलाके और अस्पताल का दौरा किया। घायलों से मिले। नतीजे : असम में BJP ने 126 में से 86 सीटें जीतीं। BJP को 41.9% वोट मिले। पहली बार असम में BJP की सरकार बनी। चुनाव के दिन मोदी के तीर्थ यात्राओं पर जाने का असर दोनों लोकसभा चुनाव में वापसी, 6 में से 4 राज्यों में बीजेपी की सरकार एक्सपर्ट कॉमेंट : BJP वोटर्स होंगे मोटिवेट, बढ़ेगा वोटर-टर्नआउट ---------------- बंगाल चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड 93% वोटिंग क्यों हुई: ममता या बीजेपी किसे मिलेगा फायदा; पिछले चुनावों के एनालिसिस और एक्सपर्ट्स से समझिए पश्चिम बंगाल में पहले फेज की 152 सीटों पर 93% वोटिंग हुई। अगर यही पैटर्न दूसरे और आखिरी फेज की 142 सीटों पर रहा, तो यह बंगाल में अब तक का सबसे ज्यादा वोटर टर्नआउट होगा। 2021 विधानसभा चुनाव में 82% वोट पड़े थे। आजादी के बाद बंगाल में 4 बार सत्ता परिवर्तन हुआ है। इनमें 3 चुनावों में जब वोटिंग 4.5% से ज्यादा घटी-बढ़ी, तो सत्ता बदल गई। चौथी बार 2011 में, जब ममता ने लेफ्ट के 34 साल के शासन को खत्म किया, तब वोटिंग 2.4% बढ़ी थी। पूरी खबर पढ़िए…
सिक्के के बाद पासपोर्ट पर ट्रंप की फोटो, स्पेशल तरीके से 250वीं सालगिरह मनाने जा रहा अमेरिका
इन नए पासपोर्ट में केवल तस्वीर ही नहीं, बल्कि विशेष कलाकृतियां और ऐतिहासिक प्रतीक भी शामिल किए जाएंगे। अधिकारी के अनुसार, इन पासपोर्ट में उच्च गुणवत्ता वाली इमेजरी के साथ वही अत्याधुनिक सुरक्षा फीचर्स भी मौजूद रहेंगे, जो अमेरिकी पासपोर्ट को दुनिया के सबसे सुरक्षित दस्तावेजों में शामिल करते हैं।
किंग चार्ल्स तृतीय ने अमेरिका और ब्रिटेन के बीच नए सिरे से गठबंधन का किया आग्रह
ब्रिटेन के किंग चार्ल्स तृतीय ने अमेरिका और ब्रिटेन के बीच की दोस्ती को और मज़बूत करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया में जो अशांति और झगड़े चल रहे हैं
एफबीआई के पूर्व निदेशक जेम्स कोमी पर ट्रंप को कथित धमकी देने के आरोप में केस दर्ज
अमेरिका में एक फेडरल ग्रैंड जूरी ने पूर्व एफबीआई निदेशक जेम्स कोमी के खिलाफ आरोप तय किए हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को नुकसान पहुंचाने की धमकी दी।
नेतन्याहू की गवाही दो महीने बाद फिर शुरू, भ्रष्टाचार के तीन मामले में सुनवाई जारी
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने तेल अवीव की एक अदालत में अपने आपराधिक मुकदमे में फिर से गवाही देना शुरू किया। ईरान के साथ युद्ध की वजह से यह गवाही दो महीने के बाद शुरू हुई है
शुरुआत दो फोटो से, अलग तारीखें, अलग मौके, लेकिन मैसेज एक- ममता की स्ट्रीट फाइटर वाली इमेज पहली फोटो दूसरी फोटो 2021 में ममता नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ रही थीं। प्रचार के दौरान पैर में चोट लगी। इसके बाद व्हीलचेयर पर नजर आईं। उसी पर बैठकर 5 किलोमीटर लंबा रोड शो किया। तब ममता ने कहा था- A wounded tiger is more dangerous, यानी घायल शेर ज्यादा खतरनाक होता है। चुनाव में TMC ने 215 सीटें जीतकर बहुमत से सरकार बनाई, लेकिन ममता नंदीग्राम से BJP कैंडिडेट सुवेंदु अधिकारी से हार गईं। फिर भवानीपुर सीट से उपचुनाव उड़ा और जीतकर तीसरी बार CM बनीं।। अब फिर चुनाव है। आज, यानी 29 अप्रैल को दूसरे फेज में 142 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं। नजर भवानीपुर सीट पर भी है। मुकाबले में वही दोनों हैं, ममता और सुवेंदु। भवानीपुर ममता का घर है। यहां से सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड उनके खाते में है। सुवेंदु अधिकारी नंदीग्राम के अलावा भवानीपुर से भी चुनाव लड़ रहे हैं। वे ममता को फिर हराएंगे या दीदी पिछली हार का बदला लेंगीं, ये 4 मई को पता चलेगा। भवानीपुर में ममता से ज्यादा एक्टिव रहे सुवेंदु, एक-एक वार्ड में गएभवानीपुर में ममता ने सुवेंदु के मुकाबले कम सभाएं की हैं। वे प्रचार के लिए पूरे बंगाल में एक्टिव रहीं। 8 अप्रैल को नामांकन के बाद भवानीपुर में 4 बड़ी सभाएं और 3 पदयात्रा कीं। जोर पदयात्रा और नुक्कड़ सभाओं पर ही रहा। डोर टू डोर कैंपेन की जिम्मेदारी कार्यकर्ताओं ने संभाली। वहीं, सुवेंदु ने ममता के मुकाबले तीन गुना ज्यादा समय दिया। 6 बड़ी सभाएं और 8 रोड शो किए। भवानीपुर में 8 वार्ड हैं और उन्होंने हर वार्ड में कम से कम एक छोटी सभा या पदयात्रा जरूर की। डोर टू डोर कैंपेन समेत कुल 30 से 40 चुनावी कार्यक्रम किए। इसका असर जानने हम भवानीपुर के अलग-अलग एरिया में गए। जगह: एल्गिन रोडनंदीग्राम में ममता की हार पर लोग बोले- पहलवान भी कभी-कभी हारता है25 अप्रैल को ममता अपने गढ़ में पैदल प्रचार पर निकलीं। वही पुराना अंदाज, सफेद साड़ी और हवाई चप्पल। रास्ते में जो मिलता, उससे हाथ मिलातीं। लोगों को देखकर हाथ हिलातीं। महिलाओं से जाकर मिलतीं। ये रैली एल्गिन रोड इलाके में थी। हम पहुंचे तब इसकी तैयारी चल रही थी। पोस्टर लेकर महिलाएं आगे खड़ी थीं, जबकि पुरुष कार्यकर्ता पीछे थे। वजह पूछने पर एक महिला बोलीं, ‘मां दुर्गा महिला शक्ति का प्रतीक हैं। दीदी भी हमेशा आगे रहना पसंद करती हैं।’ आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर से रेप और मर्डर का जिक्र करने पर बोलीं, ‘हमने उस केस में विरोध प्रदर्शन किया था। पीड़ित डॉक्टर की मां चुनाव लड़ रही हैं, भले ही वे दूसरी पार्टी से हों, लेकिन वे चुनाव जीतें। उन्हें न्याय मिलना चाहिए।’ कुछ देर में ममता बनर्जी की पदयात्रा गुजरने वाली थी। जय बांग्ला के नारे लग रहे थे। भीड़ में खड़ी एक लड़की बोली- ‘यहां दादा के लिए कोई जगह नहीं है। बांग्ला हमारी पहचान है। जो बंगाली नहीं जानते, वे यहां नहीं टिक सकते।’ हालांकि, उसी सड़क पर कुछ कदम पीछे खड़े एक बुजुर्ग कहते हैं, ममता अब नहीं चलेगी। पेशे से टीचर मधुश्री कौर कहती हैं कि अभी बता पाना मुश्किल है कि बदलाव होगा या नहीं। चुनाव आयोग ने अच्छा काम किया है। फिर भी लोगों में डर का माहौल है। वहीं, सविता कर्मकार जोर देकर कहती हैं कि कोई बदलाव नहीं होगा। लोगों को दीदी की योजनाओं का फायदा मिल रहा है। किसी को भूखा नहीं रहना पड़ता। युवाओं को काम मिला है। इलाके के एक बुजुर्ग नंदीग्राम में ममता की हार पर हंसते हुए बोले, ‘पहलवान भी कभी-कभी हारता है। वहां मिसमैनेजमेंट की वजह से हारे थे। इस बार रिजल्ट अच्छा होगा। विपक्ष के लिए यहां ज्यादा जगह नहीं है।’ जगह: कालीघाटकाली मां दरबार में दादा-दीदी की दस्तक, पुजारी बोले- दीदी ही जीतेगीभवानीपुर में मशहूर शक्तिपीठ कालीघाट हैं। मां काली के दरबार में दादा सुवेंदु अधिकारी और दीदी बराबर आशीर्वाद के लिए आते रहते हैं। पिछली बार दोनों एक ही दिन पहला बैसाख, यानी बंगाली न्यू ईयर पर पहुंचे थे। कालीघाट मंदिर के पुजारी राजा कहते हैं, ‘इस बार ममता बनर्जी ही जीतेंगी। वे हमेशा लोगों के साथ खड़ी रहती हैं। सुवेंदु अधिकारी सिर्फ चुनाव में नजर आते हैं।’ मंदिर के पास मिले भवानी ट्रांसजेंडर हैं। मंदिर के आसपास मांगकर गुजारा करते हैं। भवानी कहते हैं, ‘लॉकडाउन के दौरान सरकार से चावल, दाल और बाकी जरूरी सामान मिला था। इसलिए मैं ममता बनर्जी के साथ हूं।’ यहीं रहने वाले दीप नारायण विश्वास मानते हैं कि इलाके में शिक्षा का स्तर अच्छा नहीं है। इसलिए लोगों को बदलाव का एहसास कम होता है। कई लोग खुलकर नहीं बोलते। डर रहता है कि उनकी बातें ऊपर तक पहुंच सकती हैं। थोड़ा आगे स्कूटी से जा रहे मनोज पांडा मिले। उनका मानना है कि इस बार बदलाव हो सकता है। पिछले 5 साल में ममता बनर्जी ने कुछ काम किए हैं, लेकिन पार्टी के दूसरे नेताओं के काम का असर उनकी जीत के अंतर पर पड़ सकता है। प्रसेनजीत भवानीपुर में मिठाई की दुकान में काम करते हैं। प्रसेनजीत कहते हैं कि यहां BJP और TMC दोनों के झंडे नजर आ रहे हैं, लेकिन माहौल ममता बनर्जी के पक्ष में है। जगह: हरीश मुखर्जी स्ट्रीटममता के घर वाले इलाके में कड़ी सुरक्षा, लोग बोले- मुकाबला दिलचस्प हैममता का घर कालीघाट की हरीश मुखर्जी स्ट्रीट पर है। घर के आसपास पुलिस तैनात है। हमने आसपास के लोगों से बात की, लेकिन ज्यादातर लोग खुलकर नहीं बोले। यहीं मिले तापस घोष बताते हैं, ‘आमतौर पर यहां लोग अपनी राजनीतिक पसंद नहीं बताते।’ इस बार कौन जीत रहा है? तापस जवाब देते हैं, ‘ममता का पिछला रिकॉर्ड अच्छा है। उनके पास बढ़त है। हालांकि, सुवेंदु अधिकारी को भी अच्छा समर्थन मिल रहा है। मुकाबला दिलचस्प है। मैं दोस्तों से इस पर बात करता हूं, तो समझ आता है कि 4 तारीख को नतीजे आने से पहले कोई भी नहीं कह सकता कि कौन जीतेगा।’ तापस घोष दावा करते हैं कि SIR की वजह से वोटर लिस्ट से करीब 40 हजार नाम कटे हैं। कई परिवार ऐसे हैं, जिनमें कुछ लोगों के नाम लिस्ट में हैं और कुछ के नहीं। रिजल्ट पर इसका असर दिखेगा। तभी तापस के बगल में बैठे शख्स बोल पड़ते हैं, ‘प्रधानमंत्री मोदी की रैलियों में बहुत भीड़ आई है। हम लोग तो टीवी पर ही ऐसी भीड़ देखते हैं। मीडिया वाले समझ सकते हैं कि इतने लोग कहां से आ रहे हैं। लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आया है। इस बार जीत-हार का अंतर बहुत ज्यादा नहीं होगा।’ यहीं आगे लॉटरी की दुकान पर कुछ लोग टिकट खरीदते मिले। दुकान चलाने वाले तपोन सुवेंदु की जीत का दावा करते हैं। कहते हैं, ‘इस बार भवानीपुर में सुवेंदु की लॉटरी लगेगी।’ दीदी से क्या नाराजगी है? तपोन जवाब देते हैं, ‘क्योंकि आरजी कर मामले में अब तक इंसाफ नहीं मिला है।’ एक्सपर्ट बोले- 25% मुस्लिम वोटर अहम, मिडिल क्लास वोटर से BJP को फायदारवींद्र भारती यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बिस्वनाथ चक्रवर्ती कहते हैं, ‘भवानीपुर ममता बनर्जी का होम ग्राउंड है। यहां के ज्यादातर काउंसलर TMC से जुड़े हैं। करीब 25% मुस्लिम वोटर अहम भूमिका निभाते हैं, इसलिए शुरुआती बढ़त ममता बनर्जी के पास है।' 'अगर मिडिल क्लास और पढ़ा-लिखा वर्ग बड़ी संख्या में वोट डालने निकलता है, तो मुकाबला कड़ा होगा। इससे BJP को फायदा मिल सकता है। अगर पारंपरिक वोटिंग पैटर्न बना रहा, तो स्थिति पहले जैसी ही रहने की संभावना ज्यादा है।’ ………………………….. पश्चिम बंगाल से ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ें… 1. बंगाल चुनाव यानी डर, ममता के मोहल्ले में पुलिस की दादागिरी, बाहर TMC की ‘ये बंगाल है, वेस्ट बंगाल, बंगाली में बात करो… जो बोला जाए, उसका जवाब बंगाली में दो।‘ हमसे ये बात खुद को पुलिसवाला बता रहे एक शख्स ने कही। जगह- कोलकाता का भवानीपुर। ये ममता का मोहल्ला है। हां, ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के घर के बाहर। ये महज एक घटना नहीं है। पश्चिम बंगाल में चुनावी रिपोर्टिंग के दौरान हमें डर का ये माहौल जगह-जगह नजर आया। पढ़िए पूरी खबर… 2. आरजी कर रेप-मर्डर केस की पीड़ित की मां BJP कैंडिडेट, सभा में कुर्सियां खाली पानीहाटी सीट से आरजीकर रेप केस की पीड़ित की मां रतना देबनाथ BJP के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। 12 अप्रैल को सभा करने गईं तो कुर्सियां खाली पड़ी थीं। रतना देबनाथ अपने चुनाव लड़ने को बेटी को इंसाफ दिलाने की लड़ाई बता रही हैं। महिलाएं उनकी सभा के सामने से गुजरते हुए रुकती हैं। पूछने पर कहती हैं, ‘हम साथ हैं, लेकिन दिखा नहीं सकते। TMC वाले घूम रहे हैं। साथ देख लिया, तो मुश्किल होगी।’ पढ़िए पूरी खबर…
पाकिस्तान पस्त : मध्य पूर्व तनाव और होर्मुज स्ट्रेट संकट से खाद की किल्लत से सरकार परेशान
मध्य पूर्व में चल रहे तनाव के बीच पाकिस्तान खाद संकट का सामना कर रहा है, जिससे उसकी कृषि अर्थव्यवस्था की बड़ी कमजोरियां सामने आ रही हैं
ईरान ढहने की कगार पर, हमसे होर्मुज खोलने को कह रहा: ट्रंप
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान बर्बादी के कगार पर है और कथित तौर पर उसने होर्मुज से नाकेबंदी हटाने की गुहार लगाई है
स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, कुनार की राजधानी असदाबाद में कई रिहायशी इलाकों के साथ-साथ सैयद जमालुद्दीन अफगानी यूनिवर्सिटी को भी निशाना बनाया गया। यह यूनिवर्सिटी क्षेत्र की प्रमुख शैक्षणिक संस्थाओं में से एक है, जहां बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई करते हैं। हमले में यूनिवर्सिटी परिसर को नुकसान पहुंचा है और कई छात्र घायल हुए हैं।
अमेरिका के एयर डिफेंस पर सवाल, रूस और चीन की हाइपरसोनिक और क्रूज मिसाइलों के सामने प्रभावी नहीं
सोमवार को अमेरिकी संसद के सामने पेश हुए रक्षा अधिकारियों ने 2027 के बजट पर चर्चा के दौरान साफ कहा कि वर्तमान मिसाइल डिफेंस सिस्टम बड़े और जटिल हमलों से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है।
दाऊद का करीबी सलीम डोला तुर्की से भारत लाया गया, डी-कंपनी के ड्रग सिंडिकेट का खुलेगा राज
सीमा पार से सक्रिय मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले नेटवर्क पर लगाम लगाने के क्रम में भारतीय कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों को एक बड़ी सफलता मिली है। फरार गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम का करीबी सहयोगी और अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का अहम सदस्य सलीम डोला मंगलवार को तुर्की से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया।
संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की एक नहीं चली, 121 देशों के समर्थन से ईरान को मिला ये बड़ा पद
अमेरिका ने आखिरी समय तक ईरान को उपाध्यक्ष बनने से रोकने की कोशिश की, लेकिन वह सफल नहीं हो सका। ईरान को 121 देशों का समर्थन मिला, जिसके चलते उसे यह पद हासिल हुआ।
वाइट हाउस डिनर शूटिंग: ट्रंप और शीर्ष अधिकारियों को मारने की थी साजिश, बड़ा खुलासा
सप्ताहांत में व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर के दौरान हुई गोलीबारी के संदिग्ध हमलावर ने घटना से पहले एक घोषणापत्र भेजा था। जांचकर्ताओं के मुताबिक, इस दस्तावेज में उसने अमेरिकी राष्ट्रपति और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को निशाना बनाने की अपनी मंशा साफ लिखी थी।
ट्रंप के आगे नहीं झुकेंगे ईरान ने होर्मुज खोलने के लिए रखीं 3 बड़ी शर्तें, क्या मान जाएगी अमेरिका?
दुनिया में बजा भारत का डंका सेना पर खर्च में बना 5वां सबसे बड़ा देश, चीन-पाकिस्तान रह गए दंग
सीक्रेट सर्विस एजेंट्स की तेज कार्रवाई ने एक बड़े हमले को रोक दिया: अमेरिकी अधिकारी
अमेरिका के शीर्ष अधिकारियों ने बताया कि यूएस सीक्रेट सर्विस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की तेजी से की गई कार्रवाई के कारण व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर में एक बड़ा हमला होने से बच गया
48 घंटे में तीसरी बार पाकिस्तान पहुंचे अरागची, क्या अमेरिका से होने वाली है डील?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची मंगलवार को रूस की अपनी महत्वपूर्ण यात्रा पूरी करने के बाद पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंचे। खास बात यह है कि पिछले 48 घंटों में यह उनका तीसरा पाकिस्तान दौरा है, जो क्षेत्र में बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता को दर्शाता है।
ईरान के अंदरूनी मतभेद अमेरिका से समझौते की सबसे बड़ी बाधा: विदेश मंत्री रुबियो
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार को कहा कि ईरान के अंदरूनी मतभेद ही वॉशिंगटन के साथ किसी भी समझौते में सबसे बड़ी रुकावट हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी संकेत दिया कि तेहरान पर समझौता करने का दबाव बढ़ रहा है।
रात के 8 बज रहे हैं। कई पुरुष सिर पर सफेद कपड़ा बांधे एक घर की ओर बढ़ रहे हैं। साथ में चलती हुई महिलाएं गीत गा रही हैं। मानो कोई उत्सव हो, लेकिन कहानी कुछ और है। सभी एक घर के पास पहुंचते हैं, जहां आंगन में एक बुजुर्ग महिला का शव रखा है। शव के पास एक तरफ पुरुष और दूसरी ओर महिलाएं बैठ जाती हैं। उसके बाद रातभर गीतों का सिलसिला चलता है। सूरज की पहली किरण के साथ महिलाएं तैयारियों में जुट जाती हैं। उन्हीं में से एक महिला पत्तों में खाना और बांसुरी लेकर आती हैं और शव के पास रख देती हैं। तभी एक लड़का आया, उसके हाथ में जिंदा मुर्गी है। उसने फड़फड़ाती मुर्गी को शव के सामने रखा और फरसे से उसकी गर्दन उड़ा दी। ठीक उसके बाद एक दूसरा लड़का चूजा लेकर आया। उसने शव की दाहिनी हथेली पर रखा और चाकू से काट दिया। ये काम इतने सधे तरीके से किया गया, ताकि शव की हथेली न कटे। इसके बाद सभी ने वहां फैला खून साफ किया। दरअसल, यहां अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही है। मुर्गे की बलि दी जा रही है और मरने वाले का पसंदीदा खाना भी बनाया गया है। दैनिक भास्कर की सीरीज ‘हम लोग’ में मैं मनीषा भल्ला इस बार लाई हूं कहानी- मरिंग समुदाय की। मणिपुर के इंफाल और इसके आस-पास बसे इस समुदाय की आबादी करीब 25 हजार है। यह अंतिम संस्कार सांगडांग शेनबा मरिंग नाम के गांव में हो रहा है, जो मणिपुर की राजधानी इंफाल से 50 किमी दूर पहाड़ी पर है। यहां रहने वाले काएसंग अंग्गुन की मां कैसनकैसल की मौत हो गई है। इस तरह मुर्गे की बलि देने के बाद अब उनके शव को एक सुनसान जगह ले जाया जा रहा है। भीड़ भी पीछे-पीछे चल रही है, लेकिन गीत लगातार जारी है। थोड़ी दूर पहुंचते ही कुछ लोग गड्ढा खोदना शुरू करते हैं। यह जगह मरिंग लोगों का कब्रिस्तान है। काफी मशक्कत के बाद एक संकरा गाेलाकार गड्ढा खोदा गया। मेरे मन में सवाल उठ रहा था, इसे संकरे गड्ढे में शव को कैसे दफनाएंगे? तभी कुछ लोग शव को उठाते हैं और उसे लिटाने के बजाय गड्ढे में खड़ा रख देते हैं। साथ में बांसुरी भी। फिर गड्ढे को मिट्टी से पाट देते हैं। उसके बाद कब्र के चारों ओर बांस का घेरा बनाया गया, ताकि कोई जानवर शव को नुकसान न पहुंचा सके। यह सब करते-करते शाम हो गई। उसके बाद सभी घर लौट गए। अगले दिन, मैं फिर अंग्गुन के घर पहुंची। यहां केवल उन्हें ही हिंदी आती है। वह घर के बाहर किसी जानवर के कंकाल को उलट-पलट रहे हैं। मैंने पूछा- यह किसका कंकाल है? वो कहते हैं- यह मिथुन का सिर है। मिथुन, पहाड़ी बैल जैसा जानवर है, जिसके मोटे सींग पीछे की तरफ मुड़े होते हैं। शिकार के बाद इसका सिर घर के सामने टांगना जरूरी होता है। यह जानवर हमारे लिए शुभ होता है, जिसकी हम पूजा करते हैं। यह बताते हुए अंग्गुन मुझे घर के अंदर चलने को कहते हैं। अंदर पहुंचने पर देखा तो घर की छत टीन की और दीवारें बांस की बनी हुई हैं। अंदर पूरा घर बांस से बने सामानों से सजा है। अंग्गुन के चेहरे पर मां के जाने का गम और थकान थी, लेकिन फिर भी मरिंग लोगों के बारे में बातचीत करने के लिए राजी हो गए। मैंने पूछा- आपके यहां मौत पर गीत क्यों गाए जाते हैं? वे बताते हैं- मरिंग मानते हैं कि मौत शरीर की होती है, जबकि जाने वाले से प्यार हमेशा बना रहता है, इसलिए हम गम नहीं मनाते, गीत गाते हैं। शव को खड़ा करके क्यों दफनाया और साथ में बांसुरी भी रखी? हां, मरिंग मानते हैं कि शव को खड़ा दफनाने से मरने वाला दोबारा जन्म ले सकता है। इसलिए खड़ा दफनाते हैं। मरने वाला जो भी वाद्य यंत्र बजाता हो, उसे भी साथ दफनाते हैं। मेरी मां बांसुरी बजाती थीं। इसलिए उसे भी साथ रखा। इस बीच, तेज बारिश होने लगती है। टीन की चादर पर बूंदों की आवाज इतनी तेज कि हम एक-दूसरे की बात नहीं सुन पा रहे। तभी एक बच्चा चाय लेकर आया। शराब तय करती है, रिश्ता आगे बढ़ेगा या नहीं चाय की चुस्की लेते हुए अंग्गुन बताते हैं- हमारे यहां शादी की तीन रस्में होती हैं। पहली- जब लड़के वाले रिश्ता लेकर लड़की के घर जाते हैं। ऐसे में वे अपने साथ चावल से बनी शराब भी लेकर जाते हैं। अगर लड़की वालों को रिश्ता मंजूर न हो तो वे इस शराब की बोतल को अपने दरवाजे के बाहर रख देते हैं। अगर रिश्ता मंजूर हो तो लड़की की मां उस बोतल को अपनी चारपाई के पाये पर बांस की घास से बांध देती है। यह चारपाई वही होनी चाहिए, जिस पर लड़की के माता-पिता सोते हों। इस रस्म को तुलिग्लियांसंग कहते हैं। दूसरी- ये रस्म लड़की की मंजूरी से जुड़ी है। एक खास दिन लड़की के घर वाले उससे पूछते हैं- क्या लड़का तुम्हें पसंद है? अगर लड़की हां कर देती है, तो लड़की के घर वाले चारपाई से बंधी शराब की बोतल लाकर एक खास बर्तन में पीते हैं। यह बर्तन सूखे कद्दू से बना होता है। इसे तुलबोनवा कहते हैं, इसलिए इस रस्म का नाम भी तुलबोनवा है। तीसरी रस्म- इसमें लड़की, लड़के को कपड़े देती है और लड़का, लड़की को अंगूठी। इस रस्म को तुलखम कहते हैं। इसके बाद दोनों शादी से इनकार नहीं कर सकते। इनकार करने पर जुर्माना देना होता है। लेकिन जुर्माना भी खास है। अगर लड़की शादी से इनकार करके किसी और लड़के से शादी करती है, तो लड़की जिस लड़के से शादी करेगी जुर्माना उसे देना होगा। यानी अगली ससुराल वाले को। यह जुर्माना पहले वाले लड़के को मिलता है। इसी तरह, अगर लड़के वाले रिश्ता तोड़कर किसी और लड़की से शादी करें, तो उस लड़की के घर वालों को यह जुर्माना देना होता है। जो कि पहली वाली लड़की को मिलता है। जुर्माना नकद या मिथुन के रूप में दिया जाता है। जब शादी तय हो जाती है तब लड़के के परिवार की कुछ महिलाएं लड़की के घर आती हैं, उसे सजा-धजाकर अपने साथ लेकर जाती हैं। इन महिलाओं का सुहागन होना और उनके माता-पिता का जिंदा होना जरूरी है। यहीं शादी की रस्म पूरी हो जाती है। पहले बेटे का नाम ‘मो’, दूसरे का ‘को’ अक्षर से अंग्गुन बताते हैं- हमारे यहां नाम रखने का भी अलग रिवाज है। पहले बेटे का नाम ‘मो’ से शुरू होगा। जैसे- मोदार, मोरम, मोसिल। दूसरे का ‘को’ और तीसरे का नाम ‘अंग’ से शुरू होता है। ऐसे ही पहली बेटी का नाम ‘टे’, दूसरी का ‘टो’ और तीसरी का ‘तुंग’ से शुरू होता है। बाकी चौथे, पांचवे बच्चे के नाम भी इसी तरह रखे जाते हैं। मैंने पूछा- ऐसा क्यों? वे बताते हैं- इससे पता चलता है कि कौन सा बच्चा बड़ा है और कौन सा छोटा। मरिंग समुदाय में सात गोत्र हैं, सभी में यही परंपरा है। अंग्गुन दावा करते हैं कि उनके पूर्वजों ने ही आग की खोज की थी। इसलिए मरिंग खुद को अग्नि का रक्षक या आग पैदा करने वाला मानते हैं। इसलिए हमारे यहां सिर्फ भाप में बना खाना ही खाया जाता है। हम चावल और सब्जियों की खेती करते हैं। वह बताते हैं कि मरिंग समुदाय में बच्चे के जन्म पर नाल काटने की रस्म भी अनोखी है। बेटे के जन्म पर बांस के पतले टुकड़े सालदा से नाल काटी जाती है। बेटी पैदान होने पर बांस के मोटे टुकड़े पुई से नाल काटी जाती है। यह रस्म गांव की अनुभवी दाई निभाती है। जन्म के पांचवें दिन भोज दिया जाता है। गांव की सुरक्षा के लिए रोज रात में देते हैं बलि इसके बाद मैं और मेरी साथी थांगशा टेसिल गांव की तरफ निकल पड़े। थोड़ा चलने के बाद हम एक घर के पास पहुंचे। घर के अंदर बीचों-बीच एक डंडा गड़ा है। पूछने पर थांगशा बताते हैं कि- यह हमारे पूर्वजों का प्रतीक है। हम इस डंडे पर शराब की एक बूंद रोज चढ़ाते हैं। इसके बाद, हम गांव के बिलकुल बीच पहुंचे, जहां मरिंग लोगों का मंदिर है। इसके दरवाजे पर पक्षियों के कंकाल टंगे हुए हैं। मंदिर के पुराेहित बताते हैं कि शिकार किए गए पक्षियों के सिर मंदिर में टांगना जरूरी है। मंदिर के अंदर एक पेड़ की टहनी है, जिसे हम वाओहाएहिंग कहते हैं। इसी के सामने पूजा करते हैं और मंत्र पढ़ते हैं। वह बताते हैं कि हमारे गांव में आने के लिए दो गेट हैं। पहला- पूर्व और दूसरा- दक्षिण में है। गांव में कोई आपदा न आए, इसलिए हम रोज आधी रात को दोनों गेट पर सफेद रंग का कपड़ा बांधते हैं। साथ ही कौवे, मोर, उल्लू और मुर्गी में से किसी एक पक्षी की बलि देते हैं। हालांकि, मरिंग समुदाय में अब ईसाई धर्म का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। गांव में एक चर्च भी बनकर तैयार हो चुका है, जो इस बदलाव की साफ झलक देता है। सड़क और तालाबों की सफाई के लिए लमलाई त्योहार अब हम वापस अंग्गुन के घर आते हैं। वे बताते हैं- हमारा सबसे बड़ा त्योहार लमलाई है। इस दिन गांव की सड़कें और तालाब की सफाई की जाती है। उस दिन सभी नाचते हुए तालाब तक जाते हैं और साफ-सफाई करते हैं। तालाब साफ करने में महिलाओं को शामिल नहीं किया जाता। वे बताते हैं- यहां दो तरह के पुरोहित होते हैं। एक खुलपु और दूसरा खुल्लक। खुल्लक, खुलपु से छोटा पुरोहित होता है। तालाबों को सफाई में दोनों शामिल होते हैं। उस दिन वे अच्छी बारिश और फसल के लिए मंत्र पढ़ते हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 294 सीटों पर दो चरणों में चुनाव हो रहे हैं। 29 अप्रैल को दूसरे चरण की वोटिंग है। सरकार बनाने के लिए 148 सीटें चाहिए। मुकाबला TMC और BJP के बीच है। अबकी जीत-हार का पूरा समीकरण SIR के इर्द-गिर्द है। SIR का गणित चला तो BJP और SIR का डर चला तो TMC आगे नजर आ रही है। चुनावी कवरेज के दौरान दैनिक भास्कर की टीम मुर्शिदाबाद, कोलकाता, मालदा, दार्जिलिंग, नादिया, झारग्राम, संदेशखाली समेत नॉर्थ और साउथ बंगाल के कई जिलों में पहुंची। आम लोगों से लेकर सीनियर जर्नलिस्ट और पॉलिटिकल एक्सपर्ट से बात की। इस दौरान 3 बातें समझ आईं… 1. BJP के लिए: SIR में कुल 91 लाख नाम कटे हैं। इसमें 47 लाख मृत लोगों के हैं। अगर इन्हें आधार बनाकर सीटों का गणित समझें तो इस बार BJP को बहुमत मिलता नजर आ रहा है। उसे 150 से 170 सीटें मिल सकती हैं। वहीं TMC 110-140 सीटों पर सिमट सकती है। इसी गणित के आधार पर BJP के नेता बंगाल में सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं। 2. TMC के लिए: पश्चिम बंगाल के वोटर्स में SIR का डर TMC के पक्ष में जा सकता है। असल में ग्राउंड पर ऐसी अफवाह फैली है कि वोटर लिस्ट से नाम कटने के बाद नागरिकता भी जा सकती है। जिनके नाम वोटर लिस्ट में बच गए, उन्होंने इसी डर से हर कीमत पर 100% वोट डालने की कोशिश की। इस बंपर वोटिंग का फायदा TMC को मिल सकता है। पार्टी 160 से 190 सीटें जीत सकती है। 3. कांग्रेस के लिए: एक फैक्टर ऐसा भी है, जिससे कांग्रेस फायदे में नजर आ रही है। TMC सरकार से लोग नाराज हैं। भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी के साथ एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर मजबूत है। ये नाराजगी मुस्लिम बहुल इलाकों में भी है, लेकिन ये वोटर BJP के साथ नहीं जाएगा। ऐसे में मुर्शिदाबाद और मालदा की सीटों पर इसका फायदा कांग्रेस को मिल सकता है। कांग्रेस 1-3 सीटों पर मजबूत हो रही है। साउथ बंगाल में इंडियन सेकुलर फ्रंट यानी ISF 1 या दो सीटों पर मजबूत हो सकती है। वहीं, CPI(M) 2 से 3 सीटों पर दूसरी पोजीशन पर हो सकती है या फिर ज्यादा से ज्यादा 1 सीट जीत सकती है। वहीं, TMC से बाहर हुए हुमायूं कबीर की पार्टी AJUP का कोई असर नहीं दिख रहा है। BJP की जीत के लिए बड़े फैक्टर…SIR में 47 लाख वोटर्स डिलीट होने का फायदा BJP को पॉलिटिकल एनालिस्ट देबांजन बनर्जी ने BJP की जीत का गणित समझाया। उनके मुताबिक, पिछले दो चुनावों में TMC को करीब 2.86 करोड़ और BJP को 2.26 करोड़ वोट मिले थे, यानी TMC लगभग 60 लाख वोट से आगे थी। अब SIR में करीब 47 लाख मृत लोगों के नाम लिस्ट से हट गए हैं। माना जा रहा है कि इनमें से ज्यादातर TMC के समर्थक थे। अगर ऐसा है, तो TMC का वोट बैंक घटेगा और BJP को सीधा फायदा होगा।’ असली खेल उन सीटों पर है, जहां बहुत कम अंतर से जीत-हार होती है। 2021 विधानसभा चुनाव के लिहाज से देखें, तो करीब 30 सीटों पर 1000 से कम वोटों से जीत-हार तय हुई थी, जबकि करीब 50 सीटों पर दो से पांच हजार वोटों का अंतर था। 100 सीटों पर वोट का अंतर करीब 5 हजार से 10 हजार के बीच था। 47 लाख वोट कम होने पर ऐसी सीटों के नतीजे पलट सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो BJP 150 से 170 सीट जीत सकती है। डर से आजादी और दूसरे राज्यों के नेता बूथ पर सक्रिय चुनाव में डर का माहौल है। मालदा, मुर्शिदाबाद और संदेशखाली में पैरा मिलिट्री फोर्सेज पोलिंग बूथ के साथ-साथ घरों के बाहर गलियों में भी तैनात हैं। लोग बिना डरे पोलिंग बूथ जा रहे हैं। ये फैक्टर BJP के पक्ष में है। वहीं, हर बूथ पर यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश और असम समेत BJP सरकार वाले राज्यों के मंत्री, विधायक और सांसदों की टीम काम कर रही है, ताकि जीत उनके पक्ष में हो। BJP के पक्ष में ये फैक्टर भी… 1. BJP ने TMC के भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी का मुद्दा बढ़ा-चढ़ाकर उठाया। 2. TMC की लक्ष्मी भंडार योजना के तहत 1500 रुपए की जगह 3000 रुपए देने का वादा किया है। पश्चिम बंगाल में बंपर वोटिंग यानी सत्ता बदलाव TMC की जीत के लिए बड़े फैक्टर…SIR में नाम कटने से नागरिकता छिनने का डर, TMC को फायदा राज्य में SIR में ज्यादा नाम ग्रामीण इलाकों में कटे। इसे लेकर पॉलिटिकल एनालिस्ट डॉ. सिबाजी प्रतीम बसु कहते हैं, ‘वोटर लिस्ट से नाम कटने पर चुनाव आयोग ने सिर्फ इतना कहा था कि मामला सिर्फ SIR से जुड़ा है। BJP ने इसे घुसपैठिया शब्द से जोड़ दिया। इससे लोगों में मन में नागरिकता जाने का डर है। बांग्लादेशी बताकर देश से बाहर कर दिया जाएगा।‘ ‘ये खौफ भी है कि उनका ड्राइविंग लाइसेंस और राशन कार्ड छिन जाएगा। फिर वो बंगाल से बाहर जाकर कैसे काम करेंगे।‘ ‘TMC के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी के साथ भ्रष्टाचार नेगेटिव पॉइंट हैं, लेकिन अब अस्मिता के सामने ये मुद्दे दूसरे और तीसरे नंबर पर चले गए हैं। ऐसे में लगता है कि TMC को 160 से 190 सीटें और BJP को ज्यादा से ज्यादा 80 से 110 सीटें मिल सकती हैं। कांग्रेस महज 1 से 3 सीटें ही जीत सकेगी।‘ सीनियर जर्नलिस्ट सुमन भट्टाचार्य भी मानते हैं, SIR की वजह से वोट प्रतिशत पिछली बार से बढ़ा है। अबकी BJP 85 सीटों से ज्यादा जीतेगी, लेकिन बहुमत नहीं मिल पाएगा। TMC को 180 से ज्यादा सीटें मिल सकती हैं, लेकिन ये 2021 से कम होंगी।‘ ……………………. पश्चिम बंगाल चुनाव पर ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ें… 1. आरजी कर रेप-मर्डर केस की पीड़ित की मां BJP कैंडिडेट, सभा में कुर्सियां खाली पानीहाटी सीट से आरजीकर रेप केस की पीड़ित की मां रतना देबनाथ BJP के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। 12 अप्रैल को सभा करने गईं तो कुर्सियां खाली पड़ी थीं। रतना देबनाथ अपने चुनाव लड़ने को बेटी को इंसाफ दिलाने की लड़ाई बता रही हैं। महिलाएं उनकी सभा के सामने से गुजरते हुए रुकती हैं। पूछने पर कहती हैं, ‘हम साथ हैं, लेकिन दिखा नहीं सकते। TMC वाले घूम रहे हैं। साथ देख लिया, तो मुश्किल होगी।’ पढ़िए पूरी खबर…
ईरान के मिसाइल हमलों से दहला UAE तो ढाल बना इजरायल, आयरन डोम ने आसमान में ही ढेर किए दुश्मन के ड्रोन
US Deal : होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नया पैंतरा अमेरिका के सामने रखी एक शर्त, क्या थमेगा युद्ध?
इसी मैनिफेस्टो को लेकर पत्रकार नोरा ओ’डोनल ने ट्रम्प से सवाल किया कि क्या आरोपी के ये आरोप उनकी ओर इशारा करते हैं। इस सवाल पर ट्रम्प ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने साफ कहा कि उनका इन आरोपों से कोई संबंध नहीं है और वे पूरी तरह निर्दोष हैं।
जापान में 6.2 तीव्रता का भूकंप, पीएम ताकाइची ने लोगों को अलर्ट रहने की दी चेतावनी
सोमवार सुबह उत्तरी जापान के एक हिस्से में 6.2 तीव्रता के भूकंप के झटके महसूस हुए। हालांकि, किसी नुकसान या किसी के हताहत होने की खबर नहीं है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन डिनर के दौरान गोलीबारी के बाद अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि जब ये घटना हुई, वे चिंतित नहीं थे
ट्रंप ने की 30 दिनों के भीतर फिर से व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स डिनर आयोजित करने की अपील
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर को 30 दिनों के भीतर फिर से आयोजित किया जाना चाहिए
PM मोदी आज सिक्किम विलय की सालगिरह पर राजधानी गंगटोक जा रहे हैं। 1947 में आजादी मिलने के 28 साल बाद तक सिक्किम भारत का पूर्ण राज्य नहीं, सिर्फ प्रोटेक्टर स्टेट था। 1975 तक वहां नामग्याल राजवंश का शासन था और भारत सिर्फ विदेश नीति और सुरक्षा से जुड़े मामले देखता था। 1970 के दशक में सिक्किम के राजा की अमेरिकी पत्नी ने भारत से दार्जिलिंग लेने की ख्वाहिश जताई। इंदिरा गांधी इसके खतरे समझ गईं। उन्होंने RAW चीफ से पूछा- कुछ हो सकता है? आइए, जानते हैं सिक्किम के भारत में विलय की रोचक कहानी… अंग्रेजों ने सिक्किम को नेपाल से बचाया, तो राजा ने दार्जिलिंग दे दिया 1642 में सिक्किम में बौद्ध राजतंत्र की स्थापना हुई। पहले चोग्याल बने फुंटसोग नामग्याल। सिक्किम में चोग्याल का मतलब ‘धर्म से शासन करने वाला राजा’ होता है। 19वीं सदी में भारत से तिब्बत में व्यापार करने के लिए अंग्रेजों को सिक्किम रूट की जरूरत थी। इधर सिक्किम के दाईं तरफ नेपाल की गोरखा आर्मी लगातार अपना विस्तार कर रही थी। 1814 से 1816 के बीच ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल की गोरखा आर्मी के बीच एंग्लो-गोरखा युद्ध हुआ। सिक्किम ने सोचा कि गोरखाओं के हमले बंद करवाने के लिए लड़ाई में अंग्रेजों का साथ देना चाहिए। जंग में गोरखा हार गए, तो सिक्किम में कब्जाई सारी जमीन अंग्रेजों को लौटा दी। अंग्रेजों ने यह जमीन सिक्किम को लौटा दी और सुरक्षा की गारंटी भी दी। बदले में सिक्किम के रास्ते तिब्बत से व्यापार करने का अधिकार ले लिया। धीरे-धीरे सिक्किम के अंदरूनी मामलों में भी अंग्रेजों का दखल होने लगा। 1828 में ब्रिटिश ऑफिसर कैप्टन लॉयड दार्जिलिंग गए थे। उस समय दार्जिलिंग पश्चिम बंगाल का नहीं बल्कि सिक्किम का हिस्सा था। उन्हें यह जगह गर्मियों में सैनिकों के आराम और तिब्बत के ट्रेड रूट पर नजर रखने के लिए जरूरी लगी। इधर सिक्किम को भी नेपाल से सुरक्षा के लिए अंग्रेजों की जरूरत थी। इसलिए 1835 में चोग्याल ने अंग्रेजों को दार्जिलिंग तोहफे में दे दिया। बदले में उन्हें हथियार और कई तरह के तोहफे मिले। 1841 से अंग्रेजों ने सिक्किम को हर साल 3,000 रुपए का मुआवजा देना शुरू किया, जो बाद में बढ़कर 6,000 रुपए हो गया। 1889 में अंग्रेजों ने सिक्किम में नेपाली मजदूरों को आने की इजाजत दे दी। 1941 तक इनकी आबादी 75% तक पहुंच गई। सिक्किम में पहले से रह रहा भूटिया समुदाय 11% और लेपचा समुदाय सिर्फ 14% तक सीमित हो गया था। अंग्रेज गए तो नेहरू ने कहा- ‘हम सिक्किम की सुरक्षा के लिए तैनात रहेंगे’ भारत की आजादी के समय 600 प्रिंसली स्टेट में से एक सिक्किम भी था लेकिन चोग्याल भारत में विलय के लिए तैयार नहीं थे। ‘सिक्किम: डॉन ऑफ डेमोक्रेसी’ किताब में जी. बी. एस. सिद्धु लिखते हैं, ‘सरदार पटेल सिक्किम के साथ बाकी भारतीय रियासतों की तरह ही व्यवहार करना चाहते थे। लेकिन नेहरू के विचार सिक्किम के साथ अलग व्यवहार करने के थे।’ नेहरू चाहते थे कि जैसे भूटान के साथ भारत ने मित्रता की संधि की है, वैसे ही सिक्किम के साथ भी हो जाए। 1950 में भारत-सिक्किम शांति समझौता हुआ। इसके तहत सिक्किम भारत का प्रोटेक्टर स्टेट यानी संरक्षित राज्य बना। अब सिक्किम की सुरक्षा और विदेश नीति की जिम्मेदारी भारत की थी। भारत वहां सेना तो तैनात कर सकता था, लेकिन सिक्किम के आंतरिक मामलों में दखल नहीं कर सकता था। जवाहरलाल नेहरू ने कहा था, ‘अगर सिक्किम या भूटान पर कोई दूसरा देश हमला करता है, तो हम उनकी सुरक्षा के लिए तैनात रहेंगे।’ इधर भारत की आजादी के समय सिक्किम की अंदरूनी राजनीति में उथल-पुथल मची थी। जो लोग सिक्किम का भारत में विलय चाहते थे, उन्होंने सिक्किम स्टेट कांग्रेस पार्टी बनाई। काजी लेहेंडप दोरजी इसके अध्यक्ष बने। आगे चलकर उन्होंने सिक्किम नेशनल कांग्रेस बनाई। वहीं सिक्किम की आजादी चाहने वालों ने सिक्किम नेशनल पार्टी बनाई। सिक्किम की रानी दार्जिलिंग वापस चाहती थी, राजा ने आजाद राज्य की मांग की सिक्किम की सीमा भारत के साथ-साथ चीन से भी लगती है। 1962 में चीन से युद्ध हारने के बाद भारत ने सिक्किम में भी अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा दी, ताकि चीन को भारत में घुसने से रोका जा सके। 5 साल बाद 1 अक्टूबर, 1967 को चीनी सेना ने नाथू-ला के रास्ते सिक्किम में घुसपैठ की कोशिश की। भारतीय आर्मी इस हमले को रोकने में सफल रही, लेकिन अभी इस सीमा को और मजबूत करने की जरूरत थी। दूसरी तरफ सिक्किम के चोग्याल पाल्डेन थोंडुप नामग्याल 1950 की संधि को बदलकर, सिक्किम को भूटान जैसा दर्जा देने की मांग करने लगे। वह सिक्किम को भारत से अलग पहचान दिलाना चाहते थे और लगातार विदेश यात्राएं कर रहे थे। चोग्याल की पत्नी होप कूक अमेरिकी नागरिक थीं, कई लोग उन्हें अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA का एजेंट भी मानते थे। उन्होंने एक आर्टिकल में लिखा, '1835 में सिक्किम के राजपरिवार ने अंग्रेजों को दार्जिलिंग लीज पर दिया था। राजपरिवार दार्जिलिंग को वापस मांग सकता है।' चोग्याल भारत से आजादी चाहते थे, लेकिन सिक्किम की जनता चोग्याल से। 1960 और 70 के दशक में सिक्किम में राजशाही का विरोध बढ़ने लगा। देश की 75% से ज्यादा नेपाली आबादी चोग्याल पर भेदभाव के आरोप लगा रही थी। चुनाव में गड़बड़ी के आरोप भी लग रहे थे। ये सिक्किम को भारत में शामिल करने का सबसे सही मौका था। तीन फेज में सिक्किम का भारत में विलय हुआ पहला फेज: सिक्किम में हो रहे विरोध को समर्थन, विपक्षी पार्टियों से हाथ मिलाया इंदिरा गांधी सिक्किम की समस्या का हल चाहती थीं। उन्होंने मुख्य सचिव पी. एन. धर से कहा, ‘मेरे पिता ने सिक्किम के लोगों की भारत में शामिल होने की इच्छा न मानकर गलती की।’ इंदिरा ने खुफिया एजेंसी RAW के चीफ आर. एन. काओ से पूछा- 'क्या आप सिक्किम के मामले में कुछ कर सकते हैं?' काओ ने कलकत्ता में RAW और IB के रीजनल ऑफिस के इंचार्ज पी. एन. बनर्जी और गंगटोक में क्रॉस बॉर्डर इंफॉर्मेशन जुटाने के लिए तैनात ऑफिसर अजीत सिंह स्याली से बात की। सिक्किम को भारत में मिलाने के लिए 5 काम तय हुए… बनर्जी और स्याली ने 1973 में सिक्किम में ऑपरेशन - 'जनमत' और 'ट्विलाइट' शुरु किया। यह सिक्किम नेशनल कांग्रेस के काजी और जनता कांग्रेस के के. सी. प्रधान के कोडनेम थे। इन दोनों ने चोग्याल के खिलाफ लड़ाई में साथ आकर जॉइंट एक्शन कमेटी बनाई थी। दूसरा फेज: भारत ने चोग्याल के गार्ड्स हटाए, सिक्किम में चुनाव कराए आखिरी फेज: सिक्किम के लोगों ने भारत में शामिल होने पर किया वोट, चोग्याल की सत्ता खत्म --------ये खबर भी पढ़िए… एक गलती से हर घंटे दो परमाणु बम ‘फूटने’ लगे: आग बुझाने वालों को खून की उल्टियां, स्किन में फफोले; 40 साल बाद भी जानलेवा है चर्नोबिल 26 अप्रैल 1986 यानी आज से ठीक 40 साल पहले। तब के सोवियत रूस का हिस्सा रहे यूक्रेन का प्रिपयत शहर। रात के 1 बजकर 28 मिनट पर 25 साल के फायरफाइटर वसिली इग्नातेंको की नींद एक फोन से टूटी। आवाज आई- कहीं आग लगी है, तुरंत आओ। पूरी खबर पढ़िए…
27 मार्च 2026 यानी आज से ठीक १ महीने पहले। 35 साल के बालेन शाह ने नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। पीएम बनते ही पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार करवा दिया गया। सरकारी दफ्तरों से नेताओं की तस्वीरें उतरवा दी गईं। छात्र राजनीति पर रोक लगा दी गई। अब अफसरों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ना होगा, जबकि कर्मचारियों को हर 15 दिन में सैलरी मिलेगी। इसके साथ ही भारत से 100 रुपए से ज्यादा का सामान लाने पर टैक्स भी लगा दिया गया। इन फैसलों के बीच महज एक महीने में बालेन के 2 मंत्री इस्तीफा दे चुके हैं। बॉर्डर के लोग धरने पर हैं और बालेन का गीत गाने वाले जेन-Z और छात्र भी अब सवाल पूछने लगे हैं। बालेन शाह की पिछली जिंदगी, बतौर पीएम 30 दिनों के काम का एनालिसिस और आगे की पूरी कहानी; जानेंगे मंडे मेगा स्टोरी में… ***** ग्राफिक्स: दृगचंद्र भुर्जी और अंकलेश विश्वकर्मा -------- ये खबर भी पढ़िए… ट्रम्प सनकी हैं या साइकोपैथ:पापा के कहने पर 'किलर' बने, दोस्त को छत से फेंकने पर अड़े; अब ईरान को बास्टर्ड कहा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 5 अप्रैल की शाम गालियों से भरा एक पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, ‘मंगलवार को ईरान ऐसा नजारा देखेगा, जो उसने पहले कभी नहीं देखा होगा! ओ पागल, बास्टर्ड! होर्मुज स्ट्रेट खोल दो, वरना तुम नर्क के लिए तैयार रहो।’ उनके बर्ताव, हरकतों और बयानों को साथ जोड़कर देखते हैं, तो एक पैटर्न नजर आता है कि आखिर ट्रम्प क्या और क्यों सोचते हैं? पूरी खबर पढ़िए…
‘ये बंगाल है, वेस्ट बंगाल, बंगाली में बात करो… जो बोला जाए उसका जवाब बंगाली में दो।‘ ये खुद को पुलिसवाला कह रहे। जगह- कोलकाता का भवानीपुर। मोहल्ला ममता का। हां ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के घर के बाहर। हमने एतराज जताया, कहा क्या बंगाली आनी जरूरी है, हिंदी में बात नहीं कर सकते? इस बीच पुलिस वाले के साथ और पुलिस वाले आ जाते हैं। सब सादे कपड़ों में हैं। बहस के बीच उनमें से कुछ तल्ख होते हैं और कुछ नरम भी, लेकिन हमारे कैमरे की रिकॉर्डिंग डिलीट कराने के पीछे पड़ जाते हैं। फिर हमें वहां से जाने को कहते हैं। ये महज एक घटना नहीं है। पश्चिम बंगाल में चुनावी रिपोर्टिंग के दौरान हमें डर का ये माहौल जगह-जगह नजर आया। भवानीपुर मुंह खोला तो रोजी-रोटी चली जाएगी, परिवार होता तो मैं भी नहीं बोलता पश्चिम बंगाल में पिछले एक महीने की रिपोर्टिंग के दौरान जब हमने चुनाव पर सवाल किए, तो लोग कैमरे पर बोलने से बचते दिखे। पहले लगा कि शायद सहज नहीं हैं, लेकिन बाद में कई लोगों ने ऑफ कैमरा बात करने की इच्छा जताई। तब समझ आया कि ये झिझक नहीं, डर है। लोगों ने TMC का दबाव होने और डर की आशंका जताई। भवानीपुर में हमें कैटरिंग का काम करने वाले चंदन दास मिले। उन्होंने बताया, लोग यहां खुलकर नहीं बोलते, क्योंकि चुनाव के बाद हिंसा का डर रहता है। मुझे कोई डर नहीं, क्योंकि मेरा परिवार नहीं है। अगर होता तो मैं भी आपसे कभी बात नहीं करता। रंगाई-पुताई का काम करने वाले बबला कहते हैं, ‘यहां लोग उसी पार्टी के साथ चलना सुरक्षित समझते हैं, जो सरकार में होती है।‘ अर्जुन दास फुटपाथ की ढलाई का काम करते हैं। वे कहते हैं, ‘मैं किसी के बारे में कुछ नहीं बोलूंगा, वरना रोजी-रोटी छिन जाएगी। पहले भवानीपुर में वोट देता था। अब नाम कटवाकर झारखंड में अपने गांव पर ट्रांसफर करा लिया है।‘ वहीं, मधुश्री कौर महिलाओं की सुरक्षा और भ्रष्टाचार को बड़ा मुद्दा बताती हैं। उनका कहना है कि कोलकाता में लोग खुलकर राय रखने में हिचकते हैं। पश्चिमी मेदिनीपुर हर बार पोलिंग बूथ से लौटाया, 40 साल में पहली बार वोट डाला बंगाल में पहले चरण की वोटिंग के दौरान हम पश्चिमी मेदिनीपुर में थे। यहां 40 साल के महादेव मांडी बताते हैं, ‘अबकी पहली बार वोट डाला। पहले जब भी वोटिंग सेंटर गया, ये कहकर लौटा दिया गया कि तुम्हारा वोट डल चुका है।‘ वो हैरानी जताते हुए कहते हैं, ’वोटर आईडी कार्ड मेरा पास है, लेकिन मेरा वोट कोई और डाल रहा था। मुझे कभी मौका ही नहीं मिला।‘ यहां मिले एक स्थानीय बताते हैं कि 280 नंबर अयोध्याबार बूथ को पहले चरण की वोटिंग में TMC कार्यकर्ताओं ने जाम कर दिया था। वो BJP के वोटर बूथ तक पहुंचने नहीं दे रहे थे। जब दैनिक भास्कर की टीम वहां पहुंची, तब बूथ के बाहर 7 से 8 महिला एजेंट्स और एक पुरुष एजेंट मिले। ये बिना किसी रोक-टोक बैठे रहे। इन पर बूथ से 200 मीटर का फासला मेंटेन करने का दबाव भी नहीं था। इस पर TMC कार्यकर्ता अभिजीत कहते हैं, ‘BJP कार्यकर्ताओं के लगाए आरोप महज अफवाह हैं। बूथ पर सुरक्षा के लिए ममता बनर्जी की पुलिस नहीं, सेंट्रल फोर्स तैनात है। उनसे घटना की पुष्टि की जा सकती है।‘ पानीहाटी पीड़ित डॉक्टर की मां की सभा खाली, TMC वाले निगरानी कर रहे आरजी कर अस्पताल में रेप-मर्डर की पीड़ित की मां रतना देबनाथ यहां से BJP उम्मीदवार हैं। लोग उनका समर्थन करने या सभा में शामिल होने तक से डर रहे हैं। सभा के दौरान हमें एक महिला मिलीं। वो रतना का समर्थन करते हुए कहती हैं, ‘हम सब उनके साथ हैं, लेकिन साथ खड़े नहीं हो सकते। TMC के लोग यहीं घूम रहे हैं। अगर देख लिया, तो हमें कोई मदद नहीं मिलेगी।‘ जब हम महिला से बात कर रहे थे, तभी एक बाइक सवार वहां से तीन-चार बार चक्कर काटता दिखा। मैं बाइक वाले को रोककर पूछती हूं, आप किसी पार्टी से हैं क्या ? वो अपना नाम पार्थो दास बताता है। ठेकेदारी का काम करता है। फिर उसने कहा- आप यहां पहली बार आई हैं, इसलिए फॉलो कर रहा था और कोई वजह नहीं है। राजरहाट गोपालपुर पाड़ा क्लबों से TMC का प्रचार, इसलिए बोलने से कतरा रहे कोलकाता में रहने वाले सुदर्शन मिश्रा अक्सर लोकल क्लब जाते हैं। क्लब का नाम केष्टोपुर है। सुदर्शन कहते हैं, ‘क्लब के बारे में बहुत कुछ जानकर भी कुछ नहीं कह सकता। बगल में रहकर उनके खिलाफ कैसे बोलूं। जिसे जहां अपना स्वार्थ लगता है, वहां काम करता है। यहां सब लोग साथ रहते हैं, इसलिए कुछ कहने से डर लगता है।’ सुदर्शन इतना बताते हैं, लेकिन बाकी लोग कुछ भी कहने को तैयार नहीं होते। वे कहते हैं, ’आगे चले जाइए, यहां आपसे कोई बात नहीं करेगा।’ संदेशखाली चुनाव से पहले हिरासत में लिया, अबकी पता नहीं क्या करेंगे संदेशखाली में स्थानीय लोग बताते हैं कि 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान वोटिंग से ठीक दो दिन पहले संदेशखाली पुलिस ने उन्हें उठा लिया और जेल में डाल दिया था। 2024 के लोकसभा चुनाव में भी यही घटना हुई। उन्हें वोटिंग से दो दिन पहले फिर हिरासत में ले लिया गया। 2026 के चुनाव को लेकर वे डरे हुए हैं। उन्हें अंदाजा नहीं कि दूसरे चरण की वोटिंग से पहले उनके साथ क्या होगा। शाहजहां के गुंडे आज भी धमका रहे, पुलिस भी उनकी सुनती यहीं मिली एक महिला ने बताया कि गांव में महिलाओं और लड़कियों का उत्पीड़न आम बात थी। शाहजहां के डर से कई परिवार उजड़ गए। उन्होंने पुलिस पर भी मिलीभगत का आरोप लगाते हुए कहा कि वो ग्रामीणों की सुनने के बजाय शाहजहां के इशारों पर काम करती थी। वे ममता बनर्जी के दौरे पर निराशा जताते हुए कहती हैं, ‘दीदी ने लोकल लोगों की समस्याएं सुनने के बजाय सिर्फ बाहरी लोगों से बात की। अब भी शाहजहां के आदमी हमें धमका रहे हैं, इसलिए अब चुप नहीं रहेंगे और बदलाव के लिए संघर्ष करेंगे।‘ एक्सपर्ट बोले- पश्चिम बंगाल चुनाव में डर का फैक्टर 30% बंगाल चुनाव में डर के माहौल को लेकर हमने रविंद्र भारती यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बिस्वनाथ चक्रवर्ती से बात की। वे कहते हैं, ‘पश्चिम बंगाल के चुनावों में डर बड़ा फैक्टर है। पिछले तीन-चार चुनावों में TMC की जीत में डर की भूमिका लगभग 30% रही है।‘ ‘वोटरों और BJP कार्यकर्ताओं को डराकर TMC चुनाव प्रचार करने और वोटिंग करने से रोकती है। लोगों को धमकाया जाता है कि अगर BJP को वोट दिया, तो 'लक्ष्मी भंडार' जैसी सरकारी योजनाओं का फायदा मिलना बंद हो जाएगा।‘ वे आगे कहते हैं कि सुरक्षा बलों की तैनाती के बावजूद BJP कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की जा रही है। TMC का राजनीतिक कल्चर ही हिंसा और डर के आधार पर चुनाव जीतना रहा है। मालदा की एक घटना का उदाहरण देते हुए वे कहते हैं, ‘जब सत्ताधारी पार्टी के समर्थक जजों को डरा सकते हैं, तो आम जनता को डराना उनके लिए कोई बड़ी बात नहीं है।‘ TMC बोली- ये डर TMC से नहीं, BJP से TMC में आईटी सेल और सोशल मीडिया सेल के प्रमुख देवांशु भट्टाचार्य इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हैं। वे कहते हैं, 'ये डर TMC से नहीं, BJP से है। बंगाल में एग्जिट पोल इसलिए कई बार गलत साबित होते हैं क्योंकि लोग सार्वजनिक तौर पर BJP का समर्थन करते हैं, लेकिन वोट TMC को देते हैं।' भवानीपुर की घटना को लेकर वे कहते हैं कि ये व्यक्ति विशेष का व्यवहार हो सकता है। पार्टी ऐसी किसी भी घटना का समर्थन नहीं करती है। ………………….. पश्चिम बंगाल चुनाव पर ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ें… 1. आरजी कर रेप-मर्डर केस की पीड़ित की मां BJP कैंडिडेट, सभा में कुर्सियां खाली पानीहाटी सीट से आरजीकर रेप केस की पीड़ित की मां रतना देबनाथ BJP के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। 12 अप्रैल को सभा करने गईं तो कुर्सियां खाली पड़ी थीं। रतना देबनाथ अपने चुनाव लड़ने को बेटी को इंसाफ दिलाने की लड़ाई बता रही हैं। महिलाएं उनकी सभा के सामने से गुजरते हुए रुकती हैं। पूछने पर कहती हैं, ‘हम साथ हैं, लेकिन दिखा नहीं सकते। TMC वाले घूम रहे हैं। साथ देख लिया, तो मुश्किल होगी।’ पढ़िए पूरी खबर…

