डिजिटल समाचार स्रोत

...

ट्रंप का बड़ा बयान: कम्युनिज्म अमेरिका का सबसे बड़ा खतरा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नॉर्थ डकोटा में आयोजित थियोडोर रूजवेल्ट प्रेसिडेंशियल लाइब्रेरी के उद्घाटन समारोह में पूर्व राष्ट्रपति थियोडोर रूजवेल्ट को याद करते हुए साम्यवाद (कम्युनिज्म) पर निशाना साधा। ट्रंप ने संबोधन में कहा कि आज के समय में कम्युनिज्म अमेरिका के सामने सबसे बड़ा खतरा बनकर उभर रहा है और इससे समय रहते निपटना बेहद जरूरी है।

देशबन्धु 2 Jul 2026 9:49 am

350 किमी/घंटा की रफ्तार और 90% रास्ता सुरंगों में: चीन ने किनलिंग पहाड़ों को चीरकर दौड़ाई नई बुलेट ट्रेन

दुनिया के सबसे बड़े और एडवांस रेलवे नेटवर्क वाले देश चीन ने इंजीनियरिंग की दुनिया में एक और हैरतअंगेज कारनामा कर दिखाया है. चीन ने अपने देश के सेंट्रल (मध्य) और वेस्टर्न (पश्चिमी) हिस्सों को आपस में जोड़ने के लिए 350 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ने वाली एक बेहद आधुनिक हाई-स्पीड बुलेट ट्रेन सर्विस की शुरुआत कर दी है. मंगलवार सुबह जैसे ही चमचमाती नई G3966 बुलेट ट्रेन शिआन ईस्ट रेलवे स्टेशन से हरी झंडी दिखाकर रवाना की गई, वैसे ही शिआन-शियान हाई-स्पीड रेलवे ट्रैक पर आधिकारिक तौर पर परिचालन शुरू हो गया. इस नए रूट के शुरू होने से चीन के दो बड़े औद्योगिक और सांस्कृतिक हब के बीच की दूरी अब चंद घंटों में सिमट गई है.6 घंटे का सफर अब सिर्फ मिनटों में, वुहान तक का रास्ता हुआ बेहद आसान257 किलोमीटर लंबी इस नई हाई-स्पीड रेल लाइन ने शिआन (Shaanxi प्रांत) और शियान (Hubei प्रांत) के बीच यात्रा करने के समय में 6 घंटे से अधिक की भारी कटौती कर दी है. यानी जो सफर पहले पूरा दिन खा जाता था, वह अब मिनटों में पूरा हो रहा है. सबसे खास बात यह है कि यह नई रेल लाइन पहले से चल रही वुहान-शियान हाई-स्पीड रेलवे से भी जाकर कनेक्ट होती है. इस बेहतरीन कनेक्टिविटी का नतीजा यह हुआ है कि अब शिआन से लेकर वुहान तक का एक बहुत लंबा सफर यात्री केवल 2 घंटे 41 मिनट में बेहद आराम से पूरा कर सकेंगे.'प्राकृतिक भूवैज्ञानिक संग्रहालय' को चीरकर बनी रेल लाइन, 90% रास्ता पुल और सुरंगों मेंयह प्रोजेक्ट चीन के रेल इतिहास के सबसे कठिन और चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट्स में से एक माना जा रहा है. यह रेलवे लाइन सीधे 'किनलिंग पर्वतों' (Qinling Mountains) के सीने को चीरकर गुजरती है, जिन्हें उत्तरी और दक्षिणी चीन के बीच की एक बेहद दुर्गम प्राकृतिक सीमा माना जाता है. इसके साथ ही यह ट्रेन हानजियांग नदी को भी पार करती है, जो चीन की मशहूर यांग्त्ज़ी नदी की सबसे प्रमुख सहायक नदी है.इस ऐतिहासिक परियोजना के मुख्य डिजाइनर माओ लेई के मुताबिक, यह रेलवे जिस इलाके से गुजरती है, उसे अपनी बेहद जटिल बनावट के कारण 'प्राकृतिक भूवैज्ञानिक संग्रहालय' (Natural Geological Museum) कहा जाता है. इस खतरनाक और ऊंचे पहाड़ी क्षेत्र के कारण पूरी रेल लाइन का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा जमीन पर नहीं, बल्कि हवा में तैरते पुलों और पहाड़ों के पेट को काटकर बनाई गई बेहद लंबी सुरंगों (Tunnels) के अंदर बनाया गया है.47 अरब युआन का भारी-भरकम खर्च और 2021 से चल रही थी मेहनतइस पूरे इलाके की कठिन भौगोलिक और पथरीली परिस्थितियों के कारण यहां लंबे समय से हैवी ट्रांसपोर्टेशन और बड़ी आर्थिक गतिविधियां लगभग ठप या बेहद सीमित थीं. इसी बड़ी चुनौती को मात देने के लिए चीन सरकार ने साल 2021 में इस महत्वाकांक्षी परियोजना का निर्माण कार्य युद्धस्तर पर शुरू किया था. इस बेहद आधुनिक और सुरक्षित ट्रैक को तैयार करने में चीन ने कुल 47.68 अरब युआन (यानी करीब 7 अरब अमेरिकी डॉलर) का भारी-भरकम बजट पानी की तरह बहाया है, जिसका असर अब साफ दिखने लगा है.5G और BeiDou सैटेलाइट से लैस है नया शिआन ईस्ट रेलवे स्टेशनइस नई बुलेट ट्रेन सेवा के स्वागत के लिए चीन ने शिआन ईस्ट रेलवे स्टेशन को एक नए जमाने के डिजिटल हब के रूप में तैयार किया है. उत्तर-पश्चिम चीन का यह सबसे बड़ा परिवहन केंद्र (Transport Hub) 1 लाख वर्ग मीटर से भी अधिक के विशालकाय क्षेत्र में फैला हुआ है. इस स्टेशन के निर्माण में अत्याधुनिक 5G कनेक्टिविटी, चीन के अपने 'BeiDou नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम' पर आधारित हाई-प्रिसिजन पोजिशनिंग और इंटेलिजेंट रोबोटिक कंस्ट्रक्शन तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है.ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए स्टेशन की विशाल छत पर 30,000 वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में हाई-एफिशिएंसी सोलर पैनल लगाए गए हैं. इन सोलर पैनल्स से हर साल लगभग 70 लाख kWh स्वच्छ और हरित बिजली (Green Electricity) पैदा होगी, जिससे पूरे स्टेशन की बिजली की जरूरतें खुद-ब-खुद पूरी हो जाएंगी.15वीं पंचवर्षीय योजना: चीन का महा-विस्तार प्लानचीन ने अपनी नई 15वीं पंचवर्षीय योजना (2026-2030) के तहत देशभर के परिवहन इन्फ्रास्ट्रक्चर को और ज्यादा हाईटेक करने तथा आधुनिक हाई-स्पीड रेल नेटवर्क को देश के आखिरी कोने तक ले जाने का एक बहुत बड़ा लक्ष्य रखा है. रक्षा और आर्थिक मामलों के जानकारों का मानना है कि यह नई शिआन-शियान हाई-स्पीड रेलवे चीन की इसी दूरगामी रणनीतिक और आर्थिक मजबूती का एक बेहद अहम हिस्सा है.

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Jul 2026 9:09 am

इंसान की तरह इमोशन समझेगा ये रोबोट: चीन ने लॉन्च किया पहला फीलिंग वाला ह्यूमनॉइड 'UWORLD U1', कीमत करोड़ों में

क्या आपने कभी सोचा है कि लोहे और प्लास्टिक से बनी कोई मशीन आपके सुख-दुख को एक सच्चे साथी की तरह समझ सकती है? चीन की दिग्गज रोबोटिक्स कंपनी यूबीटेक (UBTech) ने इस साइंस-फिक्शन कल्पना को पूरी तरह हकीकत में बदल दिया है. कंपनी ने दुनिया का पहला ऐसा शानदार ह्यूमनॉइड (इंसानों जैसा) रोबोट लॉन्च किया है, जो फैक्ट्रियों में भारी काम करने के लिए नहीं, बल्कि इंसानों का अकेलापन दूर करने के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया है. इसका नाम UWORLD U1 है, जो न सिर्फ हूबहू इंसानों जैसा दिखता है बल्कि उनके बदलते इमोशंस और हाव-भाव को भी गहराई से महसूस कर सकता है.असली त्वचा का अहसास और 88 जॉइंट्स का कमालचीन के टेक हब शेंझेन में 30 जून को इस अनोखे रोबोट UWORLD U1 को पहली बार दुनिया के सामने पेश किया गया, जिसने आते ही टेक इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया है. इस रोबोट की सबसे बड़ी यूएसपी यह है कि इसके पूरे ढांचे पर एडवांस सिलिकॉन की परत चढ़ाई गई है, जिससे छूने पर इसकी त्वचा बिल्कुल असली इंसान जैसी ही फील होती है.यह रोबोट दो अलग-अलग वर्शन्स में मार्केट में उतारा गया है, जिसमें पुरुष रोबोट की लंबाई 183 सेंटीमीटर और महिला रोबोट की लंबाई 168 सेंटीमीटर है. इसके पूरे शरीर में 88 सर्वो जॉइंट्स (Servo Joints) यानी कृत्रिम जोड़ दिए गए हैं, जिसकी मदद से यह इंसानों की तरह ही बेहद लचीले और नेचुरल तरीके से अपने हाथ-पैर हिला सकता है और चल-फिर सकता है.दिल की बात समझेगा इमोशनल AI, बिना 'वेक वर्ड' के करेगा कामUWORLD U1 को सिर्फ एक निर्जीव मशीन समझना बहुत बड़ी भूल होगी क्योंकि इसके भीतर बेहद एडवांस 'इमोशनल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (Emotional AI) सिस्टम फिट किया गया है. कंपनी का आधिकारिक दावा है कि यह रोबोट इंसानों के 20 से ज्यादा अलग-अलग इमोशनल स्टेट्स (जैसे गुस्सा, दुख, खुशी, तनाव) को पल भर में पहचान सकता है.जब आप इससे कोई बात शेयर करेंगे, तो यह रोबोट आई-कॉन्टैक्ट (आँखों में आँखें डालकर) बनाकर बात करेगा. इतना ही नहीं, इसमें लॉन्ग-टर्म मेमोरी और डीप लर्निंग की क्षमता है, जिससे यह पुरानी बातें याद रखता है और समय के साथ आपके स्वभाव को समझकर एक सच्चे दोस्त की तरह रिस्पॉन्ड करता है. इसके साथ बात करने के लिए आपको 'अलेक्सा' या 'हे सिरी' जैसे किसी वेक वर्ड को बोलने की जरूरत नहीं है, यह आपके मूड को देखकर खुद ही बातचीत शुरू कर देता है.वेरिएंट्स और कीमत: ₹14 लाख से शुरू होकर ₹1.15 करोड़ तकमेटावर्स और एआई के इस दौर में इस रोबोट को ग्राहकों की जरूरत के हिसाब से तीन अलग-अलग वेरिएंट्स में पेश किया गया है, जिनके नाम लाइट (Light), प्रो (Pro) और अल्ट्रा (Ultra) रखे गए हैं. अगर इसकी कीमत की बात करें तो इसकी शुरुआती वेरिएंट की कीमत 1,19,800 युआन यानी करीब 14 लाख रुपये है, जबकि इसके सबसे एडवांस टॉप-एंड मॉडल (Ultra) की कीमत 9,90,000 युआन यानी करीब 1.15 करोड़ रुपये तक जाती है. इस रोबोट को लेकर ग्लोबल मार्केट में इस कदर दीवानगी देखी जा रही है कि लॉन्चिंग के पहले ही दिन कंपनी को इसके 13,361 यूनिट्स के बंपर प्री-ऑर्डर मिल चुके थे.डेटा लीक का नो टेंशन, लोकल प्रोसेसर पर रहेगा आपका सीक्रेटअक्सर किसी भी एडवांस एआई डिवाइस या रोबोट के साथ पर्सनल डेटा लीक होने और बातचीत रिकॉर्ड होने का बड़ा खतरा बना रहता है, लेकिन यूबीटेक ने सुरक्षा के मोर्चे पर अभेद्य दीवार खड़ी की है. UWORLD U1 का पूरा इमोशनल एआई मॉडल रॉकचिप के सुपरफास्ट RK3588 प्रोसेसर पर पूरी तरह लोकल लेवल (On-Device AI) पर काम करता है.इसका सीधा मतलब यह है कि आपकी जो भी बातचीत या भावनाएं रोबोट के साथ शेयर होंगी, उसका डेटा किसी भी क्लाउड सर्वर पर अपलोड नहीं होगा, बल्कि रोबोट की इंटरनल मेमोरी में ही एनक्रिप्टेड रहेगा. कंपनी ने इसमें 'थ्री-लेयर प्राइवेसी आर्किटेक्चर' दिया है, जिससे यूजर की प्राइवेसी 100% सुरक्षित रहती है और डेटा चोरी होने का कोई डर नहीं रहता.बुजुर्गों की देखभाल से लेकर होटलों के रिसेप्शन तक संभालेगा कमानUBTech के सीईओ जेम्स झोउ ने लॉन्चिंग इवेंट के दौरान कहा, रोबोटिक्स की दुनिया अब एक बिल्कुल नए और क्रांतिकारी दौर में कदम रख चुकी है. पहले रोबोट सिर्फ फैक्ट्रियों में इंसानों के थका देने वाले या खतरनाक काम करते थे, लेकिन अब वे हमारे घरों में हमारे सच्चे हमसफर बन रहे हैं.इस रोबोट का इस्तेमाल अकेले रह रहे बुजुर्गों की देखभाल, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई, बड़े कॉर्पोरेट होटलों, रिसेप्शन एरिया और प्रीमियम होम सर्विसेज में बखूबी किया जा सकेगा. सुरक्षा और संवेदनशीलता को देखते हुए कंपनी ने साफ किया है कि यह रोबोट अभी सिर्फ वयस्कों (Adult Buyers) के लिए ही बिक्री के लिए उपलब्ध कराया जाएगा.

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Jul 2026 9:08 am

अरब सागर में अमेरिकी नौसेना के खतरनाक लड़ाकू हेलीकॉप्टर की इमरजेंसी लैंडिंग, 1 क्रू मेंबर लापता, रेस्क्यू ऑपरेशन तेज

मिडिल ईस्ट में जारी भारी सैन्य तनाव के बीच अरब सागर (Arabian Sea) से एक बहुत बड़ी और चिंताजनक खबर सामने आ रही है. अमेरिकी नौसेना (US Navy) के एक बेहद आधुनिक और आक्रामक लड़ाकू हेलीकॉप्टर MH-60S सी हॉक (Sea Hawk) को बुधवार सुबह अचानक आई गंभीर तकनीकी खराबी के चलते गहरे समंदर में आपातकालीन लैंडिंग (Emergency Water Landing) करनी पड़ी है. इस हाई-प्रोफाइल हादसे के तुरंत बाद युद्धस्तर पर चलाए गए बचाव अभियान में हेलीकॉप्टर में सवार चार क्रू मेंबर्स में से तीन को तो सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, लेकिन एक क्रू मेंबर अब भी लापता बताया जा रहा है, जिसकी तलाश में अमेरिकी नौसेना ने समंदर में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है.किसी हमले का संकेत नहीं, कमान ने जारी किया आधिकारिक बयानयूएस नेवल फोर्सेज सेंट्रल कमांड (US Naval Forces Central Command) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक आधिकारिक पोस्ट साझा करते हुए इस गंभीर घटना की पुष्टि की है. नेवल कमान के मुताबिक, यह हादसा ईस्टर्न टाइम के अनुसार सुबह करीब 3:30 बजे के आसपास हुआ. शुरुआती जांच और उपलब्ध डेटा के आधार पर अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया है कि इस इमरजेंसी लैंडिंग के पीछे किसी दुश्मन देश की कार्रवाई या मिसाइल हमले का कोई संकेत नहीं मिला है, बल्कि यह पूरी तरह से एक तकनीकी विफलता का मामला लग रहा है.एयरक्राफ्ट कैरियर 'जॉर्ज बुश' पर चल रहा है इलाज, समंदर में महा-सर्च ऑपरेशननौसेना ने बताया कि जिन तीन क्रू मेंबर्स को समंदर की लहरों से सुरक्षित निकाला गया है, उन्हें तुरंत अमेरिकी नौसेना के विशालकाय और परमाणु ऊर्जा से चलने वाले एयरक्राफ्ट कैरियर 'यूएसएस जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश (USS George H.W. Bush) पर ले जाया गया है. वहां मौजूद मिलिट्री डॉक्टर्स की टीम उनका सघन इलाज कर रही है और फिलहाल तीनों की हालत पूरी तरह स्थिर बताई जा रही है.दूसरी ओर, लापता चौथे जांबाज एयरक्रूमैन को ढूंढने के लिए अरब सागर के उस खास रणनीतिक इलाके में अमेरिकी नौसेना के कई अत्याधुनिक युद्धपोत, टोही विमान (Reconnaissance Aircraft) और हंटर हेलीकॉप्टर लगातार रात-दिन सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं. इसके साथ ही क्रैश के सटीक कारणों को डिकोड करने के लिए एक हाई-लेवल इन्वेस्टिगेशन कमेटी भी बना दी गई है.होर्मुज स्ट्रेट के पास क्यों तैनात है अमेरिकी नौसेना का यह घातक दस्ता?हादसे का शिकार हुआ ट्विन-इंजन MH-60S सी हॉक हेलीकॉप्टर अमेरिकी नौसेना का मुख्य हथियार माना जाता है, जिसका इस्तेमाल एंटी-सबमरीन वॉरफेयर, सर्च एंड रेस्क्यू, स्पेशल ऑपरेशन्स और युद्ध के मैदान में रसद पहुंचाने जैसे बेहद खतरनाक मिशनों के लिए किया जाता है. यह हेलीकॉप्टर 'यूएसएस जॉर्ज एच. डब्ल्यू. बुश' पर ही तैनात था, जो अप्रैल के आखिर से मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) के समंदर में लगातार गश्त कर रहा है.दरअसल, इस अशांत इलाके में अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए तैनात दो परमाणु एयरक्राफ्ट कैरियर्स में से यह एक है. हालांकि अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले कमर्शियल तेल टैंकरों और जहाजों पर लगाई गई अपनी नाकाबंदी को हाल ही में अस्थाई रूप से हटा लिया है, लेकिन ईरान के साथ चल रही तनातनी और क्षेत्रीय संकट को देखते हुए वहां अभी भी अमेरिकी सेना का भारी जमावड़ा लगा हुआ है.'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' में अमेरिका को लग रहे हैं तगड़े झटकेयह ताजा हादसा ऐसे नाजुक समय में हुआ है जब मिडिल ईस्ट में अमेरिकी ऑपरेशन्स काफी जोखिम भरे और चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं. मई के मध्य में अमेरिकी कांग्रेस को सौंपी गई एक सीक्रेट मिलिट्री रिपोर्ट के मुताबिक, 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' (Operation Epic Fury) के शुरू होने से लेकर अब तक यूनाइटेड स्टेट्स इस क्षेत्र में अपने 42 फिक्स्ड-विंग विमान और रोटरी एयरक्राफ्ट (हेलीकॉप्टर) गंवा चुका है.वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस भारी नुकसान की सूची में जून की शुरुआत में हुई वह सनसनीखेज घटना शामिल नहीं है, जहां एक ईरानी आत्मघाती ड्रोन ने अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराया था. हालांकि, उस अपाचे हादसे में दोनों अमेरिकी पायलट चमत्कारिक रूप से सुरक्षित बच गए थे, जिसके बाद भड़के अमेरिका को ईरान समर्थित ठिकानों के खिलाफ 'सेल्फ-डीफेंस एयरस्ट्राइक' करने के लिए मजबूर होना पड़ा था. इस ताजा हादसे ने एक बार फिर अरब सागर में अमेरिकी उड़ानों की सुरक्षा और उनकी मेंटेनेंस पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं.

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Jul 2026 8:59 am

मलबे का ढेर क्यों नहीं बनता जापान? हर साल 1500 भूकंप झेलने वाले देश की जादुई तकनीक

सोचिए अगर किसी देश में हर साल 1500 से ज्यादा बार धरती हिले, तो वहां का नजारा कैसा होगा? दुनिया के किसी भी दूसरे कोने में अगर इतना बड़ा प्राकृतिक संकट आ जाए, तो आलीशान शहर के शहर पल भर में मलबे के ढेर में तब्दील हो जाएंगे. लेकिन जापान एक ऐसा अनोखा देश है जो इस भयानक चुनौती को रोज हंसते-हंसते झेलता है और फिर भी पूरी दुनिया के सामने सीना ताने शान से खड़ा रहता है. चार सबसे खतरनाक टेक्टोनिक प्लेटों के मिलन बिंदु (जंक्शन) पर बसे होने के बाद भी यहां की गगनचुंबी इमारतें ताश के पत्तों की तरह नहीं बिखरतीं. इसके पीछे कोई कुदरती चमत्कार नहीं है, बल्कि जापानी वैज्ञानिकों की दशकों की कड़ी रिसर्च, बेहतरीन एंटी-अर्थक्वेक इंजीनियरिंग और आपदा से लड़ने की उनकी कमाल की तैयारी है.चार टेक्टोनिक प्लेटों का वो जानलेवा जाल, जिसने जापान को घेराजापान की भौगोलिक स्थिति (Geographical Location) ही उसकी सबसे बड़ी दुश्मन है. यह देश पैसिफिक, फिलीपीन सी, यूरेशियन और नॉर्थ अमेरिकन नामक चार बड़ी और बेहद सक्रिय टेक्टोनिक प्लेटों के ठीक ऊपर स्थित है. ये प्लेटें जमीन के अंदर लगातार आपस में टकराती हैं और एक-दूसरे के नीचे खिसकती रहती हैं. इसी भूगर्भीय उथल-पुथल के कारण दुनिया भर में आने वाले कुल खतरनाक भूकंपों का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा अकेले जापान और उसके आसपास के समुद्री इलाकों में दर्ज किया जाता है. प्रशांत महासागर के 'रिंग ऑफ फायर' (Ring of Fire) पर स्थित होना इसे दुनिया का सबसे संवेदनशील डेंजर जोन बनाता है.भूकंप से लड़ती नहीं, बल्कि पानी की तरह हिलती हैं यहां की इमारतेंजापान ने प्रकृति से लड़ने के बजाय उसके साथ तालमेल बिठाना सीखा है. यहां के आधुनिक गगनचुंबी भवनों में 'बेस आइसोलेशन' (Base Isolation Technology) तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. इस तकनीक में इमारत की मुख्य नींव और ऊपरी ढांचे के बीच रबर, लीड और स्टील के बेहद मोटे और लचीले बेयरिंग लगाए जाते हैं. जब भी कोई तगड़ा भूकंप आता है, तो ये बेयरिंग जमीन के खतरनाक झटके को सोख (Absorb) लेते हैं, जिससे नींव तो हिलती है लेकिन ऊपरी इमारत पूरी तरह स्थिर और सुरक्षित रहती है. इसके अलावा, जिस तरह कारों में शॉक एब्जॉर्बर होते हैं, ठीक वैसे ही इमारतों में भी भारी-भरकम डैम्पर्स (Tuned Mass Dampers) लगाए जाते हैं, जो भूकंप के कंपन की ऊर्जा को हवा में ही खत्म कर देते हैं.सख्त कानून की जिद: दुनिया के सबसे बड़े सिम्युलेटर 'E-Defense' पर टेस्टजापान ने अपने इतिहास में कई ऐसे जख्म झेले हैं जिन्होंने पूरे देश को तबाह कर दिया था, जैसे 1923 का 'ग्रेट कांतो भूकंप' और 1995 का 'कोबे भूकंप'. इन महा-हादसों से सीख लेकर जापान ने अपने 'बिल्डिंग कोड' (Building Safety Laws) को दुनिया में सबसे सख्त और कड़ा बना दिया है. यहां कानूनन ऐसी इमारतें बनाना अनिवार्य है जो रिक्टर स्केल पर 8 या 9 की तीव्रता वाले भीषण झटके भी बिना गिरे आसानी से झेल सकें. जापानी वैज्ञानिक 'E-Defense' नामक दुनिया के सबसे बड़े शेकिंग टेबल (भूकंप सिम्युलेटर) पर असली बहुमंजिला इमारतों का लाइव टेस्ट करते हैं ताकि निर्माण की छोटी से छोटी कमी को भी समय रहते सुधारा जा सके.पलक झपकते ही अलर्ट: बुलेट ट्रेन में लग जाते हैं ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेकजापान के पास दुनिया का सबसे तेज और सटीक 'अर्थक्वेक अर्ली वार्निंग सिस्टम' (EEW) है. जैसे ही जमीन के सैकड़ों किलोमीटर अंदर प्राथमिक तरंगें (P-waves) उठती हैं, देश भर में फैले सेंसर्स उन्हें मिलीसेकंड में पकड़ लेते हैं. विनाशकारी तरंगों (S-waves) के धरातल पर पहुंचने से कुछ सेकंड पहले ही पूरे देश के नागरिकों के मोबाइल पर एक खास इमरजेंसी अलार्म और अलर्ट चला जाता है. इतने कम समय में देश की बड़ी फैक्ट्रियों की मशीनें अपने आप रुक जाती हैं, बिल्डिंग्स की लिफ्ट नजदीकी सुरक्षित फ्लोर पर ठहर कर खुल जाती हैं और लोगों को संभलने का कीमती मौका मिल जाता है.इतना ही नहीं, जापान की मशहूर 'शिंकानसेन' (Shinkansen Bullet Train) सीधे इस राष्ट्रीय भूकंप डिटेक्शन नेटवर्क से जुड़ी हुई है. जैसे ही सेंसर्स को हल्के से झटके का भी आभास होता है, 300 किमी/घंटा की रफ्तार से दौड़ रही बुलेट ट्रेनों में ऑटोमैटिक तरीके से इमरजेंसी ब्रेक एक्टिव हो जाते हैं. विनाशकारी लहरों के आने से पहले ही ट्रेनें सुरक्षित रूप से ट्रैक पर रुक जाती हैं, यही वजह है कि दशकों से इतने भूकंप आने के बावजूद जापान में आज तक कोई बड़ा बुलेट ट्रेन हादसा नहीं हुआ है.सदियों पुरानी लकड़ी की मीनारों (Pagodas) से चुराई आधुनिक तकनीकदिलचस्प बात यह है कि भूकंप से बचने की यह जापानी समझ सिर्फ आधुनिक विज्ञान की देन नहीं है. सदियों पुरानी लकड़ी से बनी जापानी मीनारें (Pagodas) बड़े से बड़े भूकंप में भी हमेशा सुरक्षित खड़ी रही हैं. प्राचीन इंजीनियरों ने उनके बीच में एक मुख्य और भारी लकड़ी का खंभा लगाया था, जिसे 'शिनबाशिरा' (Shinbashira) कहा जाता है. भूकंप के समय यह खंभा पूरी मीनार को एक सांप की तरह लचीलापन देता है, जिससे इमारत के अलग-अलग हिस्से विपरीत दिशाओं में हिलकर ऊर्जा को संतुलित कर लेते हैं. आज के आधुनिक जापानी इंजीनियर इसी प्राचीन कला और आर्किटेक्चर का गहराई से अध्ययन करके दुनिया की सबसे सुरक्षित गगनचुंबी इमारतें तैयार कर रहे हैं.

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Jul 2026 8:55 am

अमेरिका-ईरान में बनी सीक्रेट डील? दोहा की बंद कमरों वाली बातचीत से आए चौंकाने वाले संकेत

मिडिल ईस्ट में लंबे समय से जारी भारी तनाव के बीच एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है. कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और ईरान के बीच बेहद गोपनीय और अप्रत्यक्ष (Indirect) बातचीत हुई है, जिसने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है. इस ताजा बैठक से कुछ ऐसे सकारात्मक संकेत मिले हैं जो आने वाले दिनों में खाड़ी देशों की सूरत बदल सकते हैं. दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने पहले से तय समझौता ज्ञापन (MoU) को अमलीजामा पहनाने के रास्तों पर घंटों माथापच्ची की. इस हाई-प्रोफाइल चर्चा में ईरान की अरबों डॉलर की फ्रीज संपत्तियों को अनलॉक करने, समझौते के उल्लंघन पर नजर रखने के लिए एक एकदम नया और कड़ा सिस्टम बनाने और दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' की सुरक्षा जैसे बेहद संवेदनशील मुद्दों को टेबल पर रखा गया. हालांकि कई मोर्चों पर दोनों महाशक्तियों के बीच मतभेद अब भी बरकरार हैं, लेकिन इस बातचीत को पटरी पर लाने में जुटे मध्यस्थ देशों ने जो फीडबैक दिया है, वह वाकई उत्साहजनक है.आमने-सामने नहीं बैठे प्रतिनिधि, कतर और पाकिस्तान ने संभाली कमानईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के हवाले से एक बड़ा अपडेट देते हुए उप विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबादी ने पुष्टि की है कि MoU को लागू करने को लेकर चल रहा यह महत्वपूर्ण चरण अब पूरा हो चुका है. दिलचस्प बात यह है कि दोहा के आलीशान होटलों में दोनों धुर विरोधी देशों के राजनयिक एक बार भी आमने-सामने नहीं बैठे. पूरी बातचीत को कतर और पाकिस्तान के मध्यस्थों ने अलग-अलग कमरों में बैठकर अंजाम दिया. इस दौरान दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई को पाटने के लिए एक ऐतिहासिक सहमति बनी है. दोनों पक्ष अब इस बात पर राजी हो गए हैं कि समझौते के किसी भी संभावित उल्लंघन को रोकने, उसकी तुरंत जानकारी साझा करने और एक-एक चीज का पुख्ता रिकॉर्ड रखने के लिए बहुत जल्द एक 'विशेष संचार चैनल' (Special Communication Channel) यानी हॉटलाइन स्थापित की जाएगी. गरीबाबादी का मानना है कि यह नया ढांचा भविष्य में किसी भी अचानक पैदा होने वाले बड़े विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने में लाइफलाइन साबित होगा.3 अरब डॉलर के फंड पर फंसा पेंच, अमेरिका ने रखी कड़क शर्तइस सीक्रेट मीटिंग के बाद अरब मीडिया की गलियों से एक और सनसनीखेज दावा सामने आया. रिपोर्ट्स में कहा गया कि दोहा वार्ता में ईरान की फ्रीज पड़ी संपत्ति में से लगभग 3 अरब डॉलर की भारी-भरकम राशि जारी करने पर एक शुरुआती सहमति बन गई है, जिसे किश्तों में ईरान को सौंपने का प्लान है. लेकिन जैसे ही यह खबर फैली, अमेरिकी खेमे ने इस पर तुरंत ब्रेक लगा दिया. एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने साफ लहजे में स्पष्ट किया कि फिलहाल वॉशिंगटन ने ईरान का एक भी डॉलर रिलीज नहीं किया है. अमेरिका ने अपनी शर्त साफ कर दी है कि तेहरान को फंड तभी मिलेगा जब वह MoU की हर एक शर्त को पूरी तरह मानेगा. इतना ही नहीं, अगर भविष्य में यह रकम जारी भी होती है, तो ईरान अपनी मर्जी से इसे खर्च नहीं कर पाएगा. अमेरिका की अंतिम मंजूरी के बाद इस धन का उपयोग सिर्फ मानवीय जरूरतों, खासकर अमेरिकी किसानों से कृषि उत्पाद खरीदकर ईरान की आम जनता तक खाना और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए ही किया जा सकेगा.स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लेबनान विवाद पर आर-पार की बहसत्रिपक्षीय बैठक में सिर्फ पैसों की बात नहीं हुई, बल्कि मिडिल ईस्ट के सबसे सुलगते क्षेत्र लेबनान और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' के रणनीतिक रूट पर भी तीखी बहस हुई. ईरान ने सीधे तौर पर आरोप लगाया कि लेबनान के भीतर इजरायल की सैन्य मौजूदगी इस शांति समझौते को जमीन पर उतारने में सबसे बड़ी रुकावट बनी हुई है. इसके साथ ही तेहरान ने वैश्विक मंच पर एक बार फिर हुंकार भरते हुए कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान और ओमान की संप्रभुता का हर हाल में सम्मान होना चाहिए. ईरान ने साफ किया है कि किसी भी बड़ी और व्यापक डील से पहले उसकी 5 प्रमुख शर्तों को मानना होगा. दूसरी ओर, ओमान की तरफ से भी टेबल पर एक नया शांति प्रस्ताव रखा गया है, जिस पर दोनों देशों के प्रतिनिधि अपने-अपने मुख्यालयों में शीर्ष नेतृत्व से सलाह-मशविरा करने के बाद ही अगला कदम उठाएंगे.ट्रंप के करीबियों ने तैयार की थी स्क्रिप्ट, 60 दिनों का मिला है अल्टीमेटमकतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजिद अल-अंसारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर इस पूरी बातचीत को 'सकारात्मक प्रगति' करार दिया है. उन्होंने बताया कि इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन से जुड़े कई पेचीदा मुद्दों पर दोनों पक्ष आगे बढ़ने को तैयार हैं. हालांकि, अगली बैठक ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार के कार्यक्रमों के संपन्न होने के बाद ही बुलाई जाएगी. अंदरूनी सूत्रों की मानें तो इस पूरी वार्ता की पटकथा बेहद सधे हुए अंदाज में लिखी गई थी. मंगलवार रात से शुरू होकर बुधवार तक चली इस मैराथन बैठक से ठीक पहले अमेरिकी प्रतिनिधि स्टीव विटकॉफ और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेहद करीबी सलाहकार व दामाद जारेड कुशनर ने कतर के प्रधानमंत्री के साथ एक क्लोज-डोर मीटिंग की थी, जहां इस बातचीत का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार किया गया.अमेरिका का सीधा गणित है कि यदि ईरान एक व्यापक परमाणु समझौते को मान लेता है, तो उसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली कमाई की तुलना में कहीं ज्यादा बड़ा वैश्विक आर्थिक फायदा मिल सकता है. दोनों देशों ने पहले समझौता ज्ञापन पर साइन करते समय 60 दिनों के भीतर इस महा-परमाणु समझौते को पूरा करने का टारगेट रखा था, और दोहा की यह बैठक उसी दिशा में सबसे बड़ा और निर्णायक कदम मानी जा रही है.

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Jul 2026 8:42 am

पाकिस्तानी सुरक्षा बलों पर तीन बलूच नागरिकों को जबरन गायब करने का आरोप, मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता

मानवाधिकार संगठनों ने आरोप लगाया क‍ि बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने तीन और आम नागरिकों को कथित रूप से जबरन लापता कर दिया गया।

देशबन्धु 2 Jul 2026 6:30 am

'लोकायन-26' के तहत न्यूयॉर्क रवाना हुआ आईएनएस सुदर्शिनी, भारत की विरासत का देगा संदेश

भारतीय नौसेना का जहाज आईएनएस सुदर्शिनी न्यूयॉर्क के लिए रवाना हो गया। यह वहां सेल-फोर्थ टू-हंड्रेड-फिफ्टी न्यूयॉर्क और सेल बोस्‍टन कार्यक्रमों में हिस्सा लेगा

देशबन्धु 2 Jul 2026 3:30 am

चीन में सेवानिवृत्त सैनिकों के रोजगार और उद्यमिता बढ़ाने पर नियम लागू होगा

चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने हाल में राज्य परिषद का आदेश दिया। सेवानिवृत्त सैनिकों के रोजगार और उद्यमिता बढ़ाने पर नियम इस साल 1 अगस्त को लागू होगा।

देशबन्धु 1 Jul 2026 11:24 pm

अमेरिका में तीन क्यूबाई नागरिक हिरासत में, रुबियो ने रद्द किया कानूनी दर्जा

स्टेट डिपार्टमेंट ने बताया कि क्यूबा के तीन नागरिकों को फेडरल कस्टडी में ले लिया गया है। इनमें क्यूबा सरकार से जुड़ी एक ऐसी संस्था का पूर्व कर्मचारी भी शामिल है, जिस पर इस महीने की शुरुआत में अमेरिका ने प्रतिबंध लगाया था। सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो की ओर से उनका कानूनी दर्जा खत्म किए जाने के बाद यह कार्रवाई की गई।

देशबन्धु 1 Jul 2026 11:20 pm

आज का एक्सप्लेनर:मलबे में दबे लोग कितने दिन जिंदा रह सकते हैं; वेनेजुएला में 6 दिन बाद निकला मासूम, अब भी 50 हजार लापता

वेनेजुएला में आए भूकंप के 6 दिन बाद, मलबे में फंसे 3 साल के एक बच्चे को जीवित निकाल लिया गया। 50 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। हर गुजरते घंटे के साथ उनके जिंदा बचने की उम्मीद भी घटती जा रही है। आखिर मलबे में दबे लोग कितने दिन जिंदा रह सकते हैं, मलबे से निकालने के बाद भी कैसे मौत हो जाती है और भूकंप आने पर बचने की संभावना कैसे बढ़ा सकते हैं; आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: मलबे में दबे लोग कितने दिन तक जिंदा रह सकते हैं?जवाबः भूकंप जैसी आपदा के बाद बचाव के लिए शुरुआती 72 घंटे ‘गोल्डेन पीरियड’ होते हैं। ऑस्ट्रेलिया की रॉयल मेलबर्न इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की रिसर्च के मुताबिक, जिंदा बचने की संभावना समय के साथ ऐसे गिरती जाती है… हालांकि मलबे में कितनी देर जिंदा रहेंगे, ये कई फैक्टर पर निर्भर करता है। मसलन- कोई गंभीर चोट तो नहीं लगी। WHO में इमरजेंसी प्रोग्राम की अधिकारी डॉ. जेत्री रेग्मी का कहना है कि अगर रीढ़, सिर या छाती में चोट लगी हो और शरीर से ज्यादा खून बह जाए, तो मौत कुछ घंटे में ही हो सकती है। इसके अलावा हवा, पानी और खाना मिलना भी जरूरी फैक्टर्स हैं। अमेरिका के मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल में इमरजेंसी और डिजास्टर मेडिसिन के एक्सपर्ट डॉ. जैरोन ली के मुताबिक, ‘5-7 दिन बाद मलबे में मिले लोगों का जिंदा बचना बहुत दुर्लभ होता है।' सवाल-2: वेनेजुएला भूकंप के बाद अभी कितने लोगों के दबे होने की आशंका है?जवाबः वेनेजुएला में 24 जून को 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो भूकंप के झटके आए थे। 30 जून तक 1,943 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। 10 हजार से ज्यादा घायल हैं और 50 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। लापता लोगों में कई मलबे में दबे हो सकते हैं। वेनेजुएला की आपदा प्रबंधन एजेंसी सिविल प्रोटेक्शन और सेना रेसक्यू ऑपरेशन चला रही है। शुरुआती ऑपरेशन्स के दौरान कई जगहों पर मलबा हटाने वाली बैकहो लोडर मशीनें देर से पहुंची। लेकिन बाद में अंतरराष्ट्रीय सहयोग से बचाव कार्य ने तेजी पकड़ी। दुनिया भर के 30 देशों से 2,600 से ज्यादा रेसक्यू वर्कर्स वेनेजुएला पहुंचे हैं। इनके साथ 160 से ज्यादा खोजी कुत्ते भी हैं। भारत से भी 41 सदस्य का दल रेसक्यू के लिए पहुंचा है। अमेरिका ने 73 विशेषज्ञों की टीम भेजी है। इनके साथ 38 हजार किलो की मशीनें हैं, जो बड़ी-बड़ी इमारतों के मलबे को तोड़कर लोगों को निकाल रही है। अमेरिका ने 5 MQ-9 ड्रोन्स भी तैनात किए हैं, जो रेसक्यू ऑपरेशन के लिए इंटेलिजेंस दे रहे हैं। थर्मल डिटेक्टर, खोजी कुत्तों और साउंड सेंसर के जरिए भी फंसे लोगों का पता लगाया जा रहा है। सवाल-3: मलबे में दबे लोगों का बचाव अभियान कब तक जारी रहेगा?जवाबः वेनेजुएला में भूकंप आए 8 दिन हो चुके हैं। 7वें दिन सिर्फ 3 साल के एक बच्चे को ही जीवित निकाला जा सका। मलबों से अब ज्यादातर शव मिल रहे हैं। दरअसल, ऐसी आपदा के बाद कम से कम 72 घंटे तो रेसक्यू ऑपरेशन चलाया ही जाता है। इसके बाद जारी रखना है या नहीं, ये मौसम की स्थिति, लोगों के जिंदा बचे होने के वैज्ञानिक अनुमान पर निर्भर करता है। आज कल थर्मल कैमरों और साउंड सेंसर की मदद से मलबे के नीचे दबे लोगों के जिंदा होने या न होने का पता लगाया जा सकता है। खोजी कुत्ते भी इसमें मदद करते हैं। अगर 1-2 दिन और जीवित लोग नहीं निकलते, तो वेनेजुएला में रेसक्यू ऑपरेशन बंद किया जा सकता है।सवाल-4: मलबे से निकलने के बाद मौत क्यों हो जाती है?जवाबः कई बार लोग मलबे में कई दिन जीवित रहते हैं, लेकिन बाहर निकालने के बाद उनकी मौत हो जाती है। इसकी वजह है- क्रश सिंड्रोम। इसके 4 स्टेप हैं… क्रश सिंड्रोम के कारण ही रेस्क्यू टीमें अक्सर मलबे से निकालने से पहले ही पीड़ित को खास तरह की IV फ्लूइड देती हैं, उसकी निगरानी करती हैं और धीरे-धीरे बाहर निकालती हैं, ताकि शरीर इस टॉक्सिन-फ्लो को झेल सके। सवाल-5: भूकंप से बचने के लिए आप क्या तैयारी कर सकते हैं?जवाबः मोटेतौर पर 3 हिस्सों में तैयारी करनी चाहिए… 1. घर में सुरक्षा के इंतजाम: अलमारी, रैक, फ्रिज जैसे भारी फर्नीचर को दीवार में ऐसे फिक्स करें कि वो झटकों में गिरें नहीं। बेड और सोफे के ऊपर भारी फ्रेम या शीशा न लगाएं। गैस पाइप और बिजली की वायरिंग चेक करवाते रहें। 2. इमरजेंसी किट: कम से कम 3 दिन के लिए पीने का पानी और सूखा खाना जैसे- बिस्किट, ड्राई फ्रूट्स, चने वगैरह जुटाएं। टॉर्च, पावर बैंक, बैटरी साथ रखें। फर्स्ट-एड बॉक्स और जरूरी दवाइयां जमा करें। जरूरी डॉक्यूमेंट्स जैसे- आधार, बीमा कागजात वगैरह की कॉपी और कुछ कैश एक वाटरप्रूफ बैग में रखें। 3. रेस्क्यू प्लान: घर में 'ड्रॉप, कवर, होल्ड ऑन' प्रैक्टिस करें। यानी, झटका महसूस होते ही तुरंत नीचे बैठें, किसी मजबूत टेबल के नीचे सिर छुपाएं और उसे पकड़कर रखें। सवाल-6: भूकंप आने के बाद आपको क्या करना चाहिए?जवाबः भूकंप आने के बाद खुद को सुरक्षित रखने के लिए UNESCO ने 4 नियम बताए हैं... 1. शांत रहो और इंतजार करो: बड़े भूकंप के दौरान, लोगों के पास अक्सर भागने का समय नहीं होता, इसलिए बेहतर है कि पास के किसी सुरक्षित कोने में जाकर बैठ जाएं या शरीर को जितना हो सके मोड़ लें, ताकि शरीर का भार कम हो सके। सिर और रीढ़ की हड्डी की सुरक्षा का ध्यान रखें। 2. परिस्थिति के हिसाब से बचाव करो: अगर किसी बड़े बंगले में हैं, तो पलंग के नीचे छिप जाएं। अगर शहरी इमारत में हैं, तो हीटिंग पाइप के पास जाए। इसके वेंटिलेशन से सांस आती रहती है। पाइपलाइन में मौजूद पानी से जीवित रहा जा सकता है। 3. त्रिकोणीय जगह खोजो: झटके रुकने के बाद छत और सामान गिरने से बने प्राकृतिक त्रिकोणीय स्थान को खोजें। यहां से हवा मिलेगी। 4. पानी के पास, आग से दूर रहो: आग, गैस रिसाव और बिजली के शॉर्ट सर्किट के सीधे खतरे से बचने के लिए चूल्हे, गैस लाइन और घरेलू उपकरणों के पास रहने से बचें। पानी के पास रहें, जिससे मदद आने में देर भी हो तो जिंदा रह सकें। ---------- ये खबर भी पढ़िए… ‘भारत के खिलाफ जंग छेड़ देंगे’, ऐसा क्यों बोले पाकिस्तानी रक्षामंत्री; उनकी नहरों में 82% तक पानी घटा, भारत क्या कर रहा पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने सीधे शब्दों में कहा- जिस पल हमारे पानी पर खतरा महसूस हुआ, हम बिना शक भारत के खिलाफ जंग छेड़ देंगे। इस खुली धमकी के पीछे है सिंधु जल समझौता, जिसे भारत ने अप्रैल 2025 में निलंबित कर दिया था। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 1 Jul 2026 6:53 pm

1500 साल पुराना रिश्ता रचने जा रहा है नया इतिहास, जानें महाशक्तियों का क्या है महाप्लान

भारत और जापान के बीच के संबंध सिर्फ कूटनीतिक या व्यापारिक नहीं हैं, बल्कि इनकी जड़ें 1500 साल पुराने गहरे ऐतिहासिक और आध्यात्मिक सांस्कृतिक बंधनों से जुड़ी हुई हैं। छठी शताब्दी में जब बौद्ध धर्म भारत से चीन और कोरिया होते हुए जापान पहुंचा, तभी से दोनों देशों के बीच एक अटूट सांस्कृतिक सेतु का निर्माण हो गया था। अब यही प्राचीन और मजबूत ऐतिहासिक रिश्ता एक नई उड़ान भरने के लिए पूरी तरह तैयार है, जो आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था के भविष्य की एक नई इबारत लिखेगा।सांस्कृतिक विरासत से लेकर आधुनिक साझेदारी तक का सफरसदियों पुराने इस जुड़ाव को आधुनिक युग में एक नई दिशा मिली है। आज भारत और जापान सिर्फ दो मित्र देश नहीं हैं, बल्कि एशिया-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र में स्थिरता, शांति और समृद्धि के सबसे बड़े स्तंभ बनकर उभरे हैं। बौद्ध धर्म की साझी विरासत से शुरू हुआ यह सफर अब बुलेट ट्रेन, हाई-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर, डिफेंस डील और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन तक पहुंच चुका है। दोनों देशों का यह बढ़ता तालमेल न केवल द्विपक्षीय हितों को साध रहा है, बल्कि वैश्विक मंच पर एक नया शक्ति संतुलन भी पैदा कर रहा है।रणनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर भविष्य की नई इबारतमौजूदा वैश्विक परिदृश्य में भारत और जापान की यह रणनीतिक साझेदारी बेहद अहम हो चुकी है। रक्षा, सुरक्षित तकनीक, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन जैसे क्षेत्रों में दोनों देश मिलकर काम कर रहे हैं। जापान का निवेश और भारत का विशाल बाजार तथा कुशल कार्यबल मिलकर आने वाले कल की तस्वीर बदल रहे हैं। दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व ने यह साफ कर दिया है कि यह दोस्ती आने वाले समय में और अधिक मजबूत होगी, जो न केवल एशिया बल्कि पूरी दुनिया के आर्थिक और रणनीतिक भविष्य को तय करने में बड़ी भूमिका निभाएगी।

न्यूज़ इंडिया लाइव 1 Jul 2026 2:21 pm

एच-1बी वीजा पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले से ट्रंप को झटका, अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता बरकरार

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट फैसले से इमिग्रेशन से जुड़ी मुश्किलों में फंसे एच-1बी वर्क वीजा पर रह रहे करीब तीन लाख भारतीयों को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट के फैसले में अमेरिका में जन्म लेने वाले सभी बच्चों की नागरिकता के अधिकार को बरकरार रखा गया है।

देशबन्धु 1 Jul 2026 1:14 pm

नेतन्याहू का बड़ा बयान: अब अमेरिका की आर्थिक मदद की जरूरत नहीं, ईरान पर तीसरी कार्रवाई की भी दी चेतावनी

नेतन्याहू ने कहा कि इजराइल अब आर्थिक रूप से इतना सक्षम हो चुका है कि उसे अमेरिकी आर्थिक सहायता की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी दोहराया कि यदि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरत पड़ी तो इजराइल ईरान के खिलाफ फिर से सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।

देशबन्धु 1 Jul 2026 12:49 pm

सुप्रीम कोर्ट से झटका मिलने के बाद डोनाल्ड ट्रंप का तंज: शी जिनपिंग और चीन को दी 'बर्थराइट सिटिजनशिप' की जीत पर बधाई

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर 'बर्थराइट सिटिजनशिप' (जन्मजात नागरिकता) के मुद्दे पर मुखर हो गए हैं। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा जन्म के आधार पर नागरिकता देने के अधिकार को बरकरार रखने के बाद ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर तंज कसते हुए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को इस फैसले के लिए 'बधाई' दी है। ट्रंप ने इसे अमेरिका के लिए एक दुर्भाग्यपूर्ण दिन बताते हुए कहा कि यह देश के लिए बेहद महंगा और अनुचित कदम है। उन्होंने साफ कर दिया है कि वे हार मानने वाले नहीं हैं और इस व्यवस्था को बदलने के लिए कांग्रेस के जरिए नए कानून लाने की पुरजोर कोशिश करेंगे।कांग्रेस से लगाई कानून बनाने की गुहारट्रंप ने अमेरिकी कांग्रेस से अपील की है कि वे बिना किसी देरी के 'बर्थराइट सिटिजनशिप' को खत्म करने के लिए कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू करें। ट्रंप के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि संविधान में बड़े बदलाव के बजाय कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाए, तो इसे बदला जा सकता है। उन्होंने कांग्रेस को अपना पूर्ण समर्थन देने का भरोसा दिलाया है। राष्ट्रपति का मानना है कि एक ठोस कानून के माध्यम से इस दशकों पुरानी व्यवस्था को समाप्त कर अमेरिका की सीमाओं की सुरक्षा और प्रवासियों के नियमों को सख्त किया जा सकता है।सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के 14वें संशोधन पर लगाई मुहरअमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपने बहुमत के फैसले में संविधान के 14वें संशोधन की व्याख्या करते हुए ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश को खारिज कर दिया, जो अवैध या अस्थायी प्रवासियों के बच्चों को नागरिकता देने से रोकता था। चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में कहा, नागरिकता, तब भी और अब भी अमेरिकी राजनीतिक व्यवस्था में शामिल होने का अधिकार है। 14वें संशोधन को बनाने वालों ने इस देश में पैदा हुए हर व्यक्ति से यह वादा किया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जन्मजात नागरिकता का सिद्धांत अमेरिकी लोकतंत्र की नींव का एक हिस्सा है और इसे कानूनी व्याख्याओं के माध्यम से पलटा नहीं जा सकता।क्या था ट्रंप प्रशासन का तर्क?ट्रंप प्रशासन लंबे समय से यह दलील देता रहा है कि 14वें संशोधन का मूल उद्देश्य गृहयुद्ध के बाद पूर्व दासों और उनके वंशजों को अधिकार देना था, न कि अवैध प्रवासियों या अल्पकालिक पर्यटकों और विदेशी छात्रों के बच्चों को नागरिकता प्रदान करना। प्रशासन का कहना था कि यह व्यवस्था गलत इस्तेमाल की जा रही है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को नकारते हुए संवैधानिक वादे को निभाने पर जोर दिया। अब देखना यह होगा कि क्या ट्रंप की अपील पर अमेरिकी कांग्रेस कोई नया विधेयक पेश करती है या यह मामला एक बार फिर लंबी कानूनी और राजनीतिक खींचतान का केंद्र बनता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 1 Jul 2026 11:20 am

सिंधु जल संधि पर पाकिस्तान का 'रोता' हुआ नया नाटक: भारत के खौफ से नाम लेने की भी नहीं हुई हिम्मत

पाकिस्तान सिंधु जल समझौते के निलंबन के बाद से पूरी तरह बेदम हो चुका है। वैश्विक मंचों पर बार-बार गुहार लगाने के बावजूद जब उसकी एक न चली, तो अब पाकिस्तान ने इसे लेकर एक 'इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस' का ड्रामा शुरू किया है। इस कॉन्फ्रेंस में पाकिस्तानी नेताओं का रोना-धोना तो जारी रहा, लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि पाकिस्तान का खौफ इतना गहरा है कि उसके नेता मंच से 'भारत' का नाम तक लेने की हिम्मत नहीं जुटा पाए। भारत की सैन्य ताकत और कड़े फैसलों के डर से पाकिस्तानी नेताओं ने सीधे तौर पर नाम लेने के बजाय 'ताकतवर देश' कहकर अपनी बौखलाहट जाहिर की।भारत के डर से 'ताकतवर देश' का जपा नामपाकिस्तानी सांसद मुसादिक मलिक ने कॉन्फ्रेंस में कहा कि कोई ताकतवर देश अपनी मर्जी से किसी समझौते को रद्द नहीं कर सकता। गौरतलब है कि भारत ने बीते साल जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए उस आतंकी हमले के बाद यह समझौता स्थगित कर दिया था, जिसमें आतंकियों ने पर्यटकों को चुन-चुनकर निशाना बनाया था। उस बर्बर हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' चलाकर पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों की कमर तोड़ दी थी। भारत का स्पष्ट रुख रहा है कि 'खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते।'उपप्रधानमंत्री इशाक डार और बिलावल भुट्टो का बेतुका रागकॉन्फ्रेंस में पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इशाक डार ने बेतुकी बातें करते हुए कहा कि वे भारत के फैसले को खारिज करते हैं और समझौता अभी भी वैध है। वहीं, बिलावल भुट्टो जरदारी ने सिंधु नदी की तुलना 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' और 'स्वेज नहर' जैसे वैश्विक जलमार्गों से कर दी। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस मुद्दे को उठाने की कोशिश की, ताकि भारत पर दबाव बनाया जा सके। बिलावल ने इसे 'हथियार के रूप में इस्तेमाल' होने से बचाने का राग अलापा, लेकिन वे यह भूल गए कि यह कदम पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित आतंकवाद का ही सीधा परिणाम है।क्यों दाने-दाने को मोहताज हो रहा पाकिस्तान?पाकिस्तान की बौखलाहट के पीछे की असली वजह उसकी अर्थव्यवस्था और कृषि का पूरी तरह सिंधु नदी पर निर्भर होना है। भारत द्वारा हाइड्रोलॉजिकल डेटा साझा न करने के कारण पाकिस्तान अब पूरी तरह अंधेरे में है। उसे यह नहीं पता चल पाता कि भारतीय नदियों से कितना पानी आ रहा है, जिससे वह बाढ़ या सूखे की स्थिति में समय रहते बचाव नहीं कर पा रहा है। अपनी खुद की गलतियों और आतंक को पालने के कारण आज पाकिस्तान न केवल आर्थिक तंगी से जूझ रहा है, बल्कि भारत के इस कड़े कदम से वह दाने-दाने के लिए भी मोहताज होने की कगार पर आ खड़ा हुआ है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 1 Jul 2026 11:19 am

तालिबान का 'सर्जिकल स्ट्राइक': पाकिस्तान के घर में घुसकर तालिबानी वायुसेना ने किए ISIS-K के ठिकाने तबाह

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच चल रहा सीमा विवाद अब युद्ध जैसी स्थिति में बदल गया है। जून के अंत में पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान की सीमा में घुसकर किए गए हवाई हमलों का तालिबान ने बेहद आक्रामक जवाब दिया है। अफगान वायुसेना ने पाकिस्तानी सीमा के अंदर बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों में ड्रोन और हवाई हमलों को अंजाम दिया है। तालिबान का दावा है कि ये हमले उन आतंकी ठिकानों पर किए गए हैं, जहाँ से इस्लामिक स्टेट खुरासान (ISIS-K) के आतंकी अफगानिस्तान में अस्थिरता फैलाने की साजिश रच रहे थे।तालिबान का बड़ा दावा: आतंकी ठिकाने ध्वस्त, आम नागरिक सुरक्षितअफगान समाचार एजेंसी 'टोलो न्यूज' के अनुसार, इस्लामिक अमीरात के रक्षा मंत्रालय ने इन एयरस्ट्राइक्स की आधिकारिक पुष्टि की है। मंत्रालय के प्रवक्ता ने साफ शब्दों में कहा कि जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया, वहाँ से अफगानिस्तान के भीतर बेगुनाह नागरिकों की हत्या और बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ की योजनाएँ बनाई जा रही थीं। तालिबान ने यह स्पष्ट किया है कि यह ऑपरेशन पूरी सटीकता (Precision) के साथ किया गया है, जिसमें आतंकियों को भारी नुकसान पहुँचा है, जबकि इस जवाबी कार्रवाई में किसी भी आम नागरिक के हताहत होने की कोई खबर नहीं है।क्यों भड़का है अफगानिस्तानयह जवाबी हमला पाकिस्तान द्वारा हाल ही में अफगानिस्तान के भीतर किए गए उन हवाई हमलों का नतीजा है, जिनमें तालिबान सरकार के अनुसार, कम से कम 38 अफगान नागरिक मारे गए थे और 163 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएँ और बच्चे शामिल थे। संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन (UNAMA) ने भी इन हमलों की भयावहता की पुष्टि की थी। इसके विपरीत, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने दावा किया था कि उन्होंने उन हमलों में 29 आतंकियों को मार गिराया है, लेकिन अफगानिस्तान ने इस दावे को पूरी तरह नकार दिया है।भारत की सख्त चेतावनी: संप्रभुता पर हमला बर्दाश्त नहींइस पूरे घटनाक्रम पर भारत ने भी तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने पाकिस्तानी एयरस्ट्राइक्स को अफगानिस्तान की संप्रभुता का उल्लंघन और क्षेत्रीय शांति के लिए सीधा खतरा करार दिया है। भारत का स्पष्ट मानना है कि पाकिस्तान अपनी आंतरिक विफलताओं और आर्थिक तंगी से ध्यान भटकाने के लिए इस तरह के लापरवाह कदम उठा रहा है। तालिबान ने भी विश्व को चेतावनी दी है कि वे भविष्य में अफगानिस्तान की सुरक्षा को अस्थिर करने वाले किसी भी ठिकाने या आतंकी को बख्शने वाले नहीं हैं, चाहे वह सीमा के उस पार ही क्यों न स्थित हो।

न्यूज़ इंडिया लाइव 1 Jul 2026 11:07 am

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने जन्मजात नागरिकता को बरकरार रखा, ट्रंप का कार्यकारी आदेश असंवैधानिक

अदालत ने 6-3 के बहुमत से दिए गए फैसले में स्पष्ट किया कि अमेरिका में जन्म लेने वाला लगभग हर व्यक्ति संविधान के तहत जन्म से ही अमेरिकी नागरिक है।

देशबन्धु 1 Jul 2026 10:56 am

आज का एक्सप्लेनर:खामेनेई के जनाजे में न पीएम मोदी जाएंगे, न विदेश मंत्री; राज्यपाल और राज्यमंत्री क्यों भेज रहे, भारत की स्ट्रैटेजी क्या

अयातुल्लाह अली खामेनेई को हत्या के 131 दिन बाद सुपुर्द-ए-खाक किया जाना है। 6 दिन के राजकीय जनाजे में ईरान दुनियाभर से नेताओं को बुला रहा है। 23 जून को राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने पीएम मोदी को भी न्योता दिया। ईरानी और भारतीय सूत्रों के मुताबिक भारत सरकार ने एक डेलीगेशन भेजने का फैसला किया, जिसमें न पीएम शामिल हैं और न विदेश मंत्री। आखिर न्योता मिलने के बावजूद पीएम मोदी खुद क्यों नहीं जा रहे, अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच भारत किस दुविधा में है और क्या संतुलन साध पाएगा; आज के एक्सप्लेनर में... सवाल-1: पीएम मोदी नहीं, तो ईरान कौन जा रहा है? जवाबः खामेनेई के जनाजे में शामिल होने के लिए भारतीय डेलीगेशन में दो प्रमुख शख्सियतें हैं… 1. ले. ज. (रि.) सैयद अता हसनैन, बिहार के राज्यपाल डेलिगेशन में क्यों चुना गया: ईरान शिया बहुल इस्लामिक देश है और अयातुल्ला खामेनेई शियाओं के सर्वोच्च धार्मिक और राजनीतिक नेता थे। सैयद अता हसनैन भी शिया हैं। रिटायर्ड आर्मी अफसर और राज्यपाल जैसा संवैधानिक ओहदा भी रखते हैं। 2. पबित्र मार्गरिटा, केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री डेलिगेशन में क्यों चुना गया: सीधे विदेश मंत्रालय का हिस्सा हैं। हाई प्रोफाइल भी नहीं हैं और न ज्यादा लो-प्रोफाइल। ईरान को लेकर भारत के मौजूदा स्टैंड पर फिट बैठते हैं। सवाल-2: पीएम मोदी का बुलावा था, फिर वो खुद क्यों नहीं गए? जवाबः पहले जाहिर वजहों की बात। पीएम मोदी का शेड्यूल पहले से तय है। 1 से 3 जुलाई तक जापान की पीएम सनाए ताकाइची भारत दौरे पर रहेंगी, जिनसे पीएम मोदी मुलाकात करेंगे। 4 जुलाई को पीएम मोदी राजस्थान के जोधपुर जाएंगे। फिर 6 से 11 जुलाई तक वे इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की यात्रा करेंगे। हालांकि एक्सपर्ट्स पीएम मोदी के ईरान न जाने के पीछे 3 छिपी वजहें भी बताते हैं। JNU में मिडिल-ईस्ट स्टडीज के प्रोफेसर पीआर कुमारस्वामी और इंटरनेशनल स्टडीज के एसोसिएट प्रोफेसर राजन कुमार के मुताबिक… 1. खामेनेई का जनाजा बेहद उग्र हो सकता हैः खामेनेई की मौत एक हमले में हुई है। शिया परंपरा के मुताबिक उनका जनाजा सिर्फ एक शोक सभा नहीं, बल्कि न्याय और प्रतिरोध का धार्मिक और राजनीतिक रूप ले लेगा। 6 दिन के अंतिम संस्कार में लोग मुहर्रम की तरह विलाप करेंगे और खुद को पीटेंगे। ये बहुत ज्यादा उग्र होगा। इसमें शामिल होने का मतलब होता कि पीएम मोदी भी खुलकर ईरान के प्रतिरोध के साथ खड़े हैं। भारत इससे बचना चाहता है। 2. अचानक स्टैंड बदलने से आलोचना का खतरा: खामेनेई की मौत पर भारत ने चुप्पी साध रखी थी। 5 दिन बाद पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी, जब विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने ईरानी दूतावास जाकर शोक जताया। अब 4 महीने बाद अचानक पीएम मोदी का खामेनेई के जनाजे में जाना पूरी तरह स्टैंड बदलना होगा। 3. साझेदार देशों को गलत मैसेज जाने की चिंता: खामेनेई के जनाजे में पीएम मोदी की मौजूदगी भारत के साझेदार और ईरान के विरोधी देशों को नाराज कर सकती है। इनमें अमेरिका, इजराइल के अलावा सऊदी अरब, यूएई जैसे सुन्नी बहुल देश भी हैं। सवाल-3: ईरान को लेकर भारत के सामने दुविधा क्या है? जवाबः ईरान से जुड़ा हर फैसला भारत के लिए तीन मोर्चों पर एक साथ संतुलन मांगता है... 1. आर्थिक दुविधा: ईरान की तरफ झुका, अमेरिका से खतरा होर्मुज स्ट्रेट पर अब भी ईरान का कब्जा है। भारत का 40% कच्चा तेल, 50% LNG और 90% LPG इसी रूट से आता है। यहां जरा सी रुकावट भारत में तेल संकट खड़ा कर सकती है। दूसरी तरफ अमेरिका भारत का बड़ा ट्रेड पार्टनर है, और जल्द ही दोनों देशों के बीच बड़ी ट्रेड डील होने वाली है। यानी, ईरान से नाता टूटा तो ऊर्जा संकट, अमेरिका से दूरी बढ़ी तो व्यापार को नुकसान। 2. सांस्कृतिक दुविधा: भारतीय लोगों की हमदर्दी ईरान के साथभारत और ईरान के रिश्ते सदियों पुराने हैं। भाषा, व्यापार और सभ्यता के स्तर पर गहरे जुड़े हैं। यही वजह है कि जंग के दौरान भी भारत ने ईरान की खुलकर निंदा नहीं की। खामेनेई की मौत पर भी भारत ने सीधी चुप्पी नहीं, बल्कि शालीन शोक जताया। 3. रक्षा दुविधा: इजराइल बड़ा डिफेंस पार्टनर, खाड़ी देशों में भारतीयइजराइल भारत का भरोसेमंद रक्षा साझेदार है, जो हर मुश्किल वक्त में खुलकर साथ खड़ा रहा है। वहीं खाड़ी देशों में रह रहे 1 करोड़ से ज्यादा भारतीयों की सुरक्षा भी उतनी ही अहम है। जंग के दौरान भारत ने इजराइल या अमेरिका की आलोचना नहीं की, लेकिन खाड़ी देशों पर हुए हमलों की निंदा जरूर की। पाकिस्तान के ईरान के प्रति सहानुभूति दिखाने के बाद UAE ने कई पाकिस्तानी वर्कर्स को डिपोर्ट कर दिया था। भारत ऐसी कोई गलती दोहराना नहीं चाहता। सवाल-4: क्या भारत अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच संतुलन बना पाएगा? जवाबः 1989 में जब ईरान के सुप्रीम लीडर अली खुमैनी की मृत्यु हुई थी, तो उनके अंतिम संस्कार में भारत ने विदेश मंत्री पी. वी. नरसिंहा राव को भेजा था। 2024 में जब ईरान के राष्ट्रपति अब्राहिम रइसी की हेलिकॉप्टर क्रैश में मौत हुई थी, तो भारत के उप-राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे। लेकिन इस बार ईरान के सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार में किसी मंत्री स्तर के नेता को नहीं भेजा जा रहा है। सवाल-5: खामेनेई के अंतिम संस्कार में क्या-क्या होना है? जवाबः 28 फरवरी को खामेनेई की मौत के बाद, 4 मार्च को उनका अंतिम संस्कार होना था लेकिन लगातार होते हमलों की वजह से यह टल गया। अब 4 जुलाई को अंतिम संस्कार कार्यक्रम की शुरूआत होगी… --------- ये खबर भी पढ़िए… आज का एक्सप्लेनर: CM विजय, गृहमंत्री शाह से मुलाकात, सैन्य कमांड का दौरा; ट्रम्प के दूत सर्जियो गोर आखिर भारत में कर क्या रहे हैं अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर 22 जून को तमिलनाडु के सीएम विजय थलापति से मिलने चेन्नई पहुंच गए। उससे 4 दिन पहले, 18 जून को गृहमंत्री अमित शाह से दिल्ली में मुलाकात की। 6 महीने में 6 मुख्यमंत्रियों से मिले। दिल्ली के उपराज्यपाल और राजस्थान की डिप्टी सीएम तक से मीटिंग की। भारतीय सेना के पश्चिमी कमान हेडक्वार्टर के दौरे पर तो हंगामा भी हुआ था। पूरी खबर पढ़िए

दैनिक भास्कर 30 Jun 2026 5:56 pm

भारत ने एफएटीएफ का किया समर्थन, टेरर फंडिंग रोकने वाली संस्था पर पाक के हमलों को किया खारिज

भारत ने अंतरराष्ट्रीय आतंक-वित्तपोषण निगरानी संस्था पर पाकिस्तान द्वारा किए गए हमलों का बचाव करते हुए कहा है कि ये आलोचनाएं “जांच के डर” से प्रेरित हैं।

देशबन्धु 30 Jun 2026 2:45 pm

अफगानिस्तान पर अटैक कर बुरी तरह घिरा पाकिस्तान! वैश्विक मंच पर हो रही भारी थू-थू, संकट के बीच पक्के दोस्त के साथ ढाल बनकर खड़ा हुआ भारत

पड़ोसी देश पाकिस्तान की ओर से अफगानिस्तान की सीमा के भीतर किए गए औचक हमले के बाद दक्षिण एशिया में भू-राजनीतिक (Geopolitical) तनाव चरम पर पहुंच गया है। बिना किसी ठोस उकसावे के किए गए इस सैन्य एक्शन के बाद पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के निशाने पर आ गया है और हर तरफ उसकी इस आक्रामक नीति की थू-थू हो रही है। इस नाजुक मोड़ पर भारत ने एक बार फिर अपनी मजबूत कूटनीति का परिचय देते हुए अपने पुराने और भरोसेमंद दोस्त अफगानिस्तान के प्रति अटूट समर्थन जताया है। नई दिल्ली की ओर से आए इस रणनीतिक रुख ने अंतरराष्ट्रीय गलियारों में हलचल तेज कर दी है।हवाई और जमीनी हमले के बाद पाकिस्तान की चौतरफा घेराबंदी शुरूस्थानीय और अंतरराष्ट्रीय खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी सेना द्वारा सीमा पार किए गए हवाई और जमीनी हमलों में बड़े पैमाने पर नुकसान की खबरें हैं। पाकिस्तान ने इस कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ कदम बताया है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र (UN) सहित दुनिया के कई बड़े देशों ने इसे संप्रभुता का खुला उल्लंघन माना है। इस सैन्य दुस्साहस के बाद अफगानिस्तान ने भी कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है, जिससे डूरंड लाइन (Durand Line) पर युद्ध जैसे हालात बन गए हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से पाकिस्तान खुद अपने ही बुने जाल में फंस गया है और वह वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़ता जा रहा है।ऐतिहासिक दोस्ती का फर्ज: संकट की इस घड़ी में क्यों अफगानिस्तान के साथ आया भारतभारत और अफगानिस्तान के संबंध सदियों पुराने और बेहद मजबूत सांस्कृतिक व रणनीतिक बुनियाद पर टिके हैं। भारत ने हमेशा संकट के समय अफगान नागरिकों की मदद की है, चाहे वह बुनियादी ढांचे का विकास हो या मानवीय सहायता। इस सैन्य तनाव के बीच भारतीय विदेश मंत्रालय ने साफ संकेत दिए हैं कि वह क्षेत्र में किसी भी तरह की एकतरफा सैन्य आक्रामकता के खिलाफ है और शांतिपूर्ण संवाद का पक्षधर है। नई दिल्ली का अफगानिस्तान के साथ खड़े होना यह साफ संदेश देता है कि भारत अपने रणनीतिक साझेदारों को किसी भी विपरीत परिस्थिति में अकेला नहीं छोड़ता, जिसने काबुल में भारत के प्रति सम्मान को और बढ़ा दिया है।एआई सर्च और आधुनिक कूटनीति में इस तनाव के दूरगामी परिणामआधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और वैश्विक विश्लेषकों के मुताबिक, पाकिस्तान की इस हरकत का असर उसके पहले से ही बदहाल आर्थिक और राजनीतिक हालातों पर बेहद बुरा पड़ने वाला है। अमेरिका, मध्य पूर्व और मध्य एशियाई देशों की नजरें इस पूरे विवाद पर टिकी हुई हैं। भारत की सक्रिय कूटनीति और अफगानिस्तान के प्रति उसके खुले समर्थन ने इस्लामाबाद के रणनीतिक थिंक-टैंक को बैकफुट पर ला दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुककर पाकिस्तान अपने कदम पीछे खींचता है या फिर यह सीमाई विवाद किसी बड़े क्षेत्रीय टकराव का रूप ले लेता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jun 2026 2:43 pm

दिसंबर में अमेरिका जाएंगे पीएम मोदी! डोनाल्ड ट्रंप के बेहद करीबी सर्जियो गोर का बड़ा दावा, जानें बार-बार क्यों आ रहा है वॉशिंगटन से बुलावा

भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक और कूटनीतिक रिश्ते एक नए और बेहद मजबूत दौर में प्रवेश कर रहे हैं। इसी बीच वैश्विक राजनीतिक गलियारों से एक बेहद बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सबसे खास और भरोसेमंद सिपहसालार सर्जियो गोर ने दावा किया है कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आगामी दिसंबर महीने में अमेरिका की हाई-प्रोफाइल यात्रा पर जा सकते हैं। इस दावे के बाद से ही नई दिल्ली से लेकर वॉशिंगटन तक राजनीतिक हलचल तेज हो गई है और हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि आखिर अमेरिकी प्रशासन की तरफ से पीएम मोदी को बार-बार यह खास न्यौता क्यों भेजा जा रहा है।आखिर क्यों पीएम मोदी को बार-बार न्यौता भेज रहे हैं डोनाल्ड ट्रंपअंतरराष्ट्रीय मामलों के विश्लेषकों का मानना है कि वॉशिंगटन की तरफ से भारत को मिल रही यह असाधारण प्राथमिकता दोनों देशों के बीच के गहरे आपसी भरोसे को दर्शाती है। डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी की निजी केमिस्ट्री जगजाहिर है, लेकिन इस बार का बुलावा सिर्फ दोस्ती तक सीमित नहीं है। अमेरिका इस समय वैश्विक मंच पर कई बड़े भू-राजनीतिक (Geopolitical) बदलावों से गुजर रहा है, जहां उसे एशिया-प्रशांत क्षेत्र और वैश्विक आर्थिक मोर्चे पर भारत के मजबूत साथ की बेहद जरूरत है। यही वजह है कि ट्रंप प्रशासन साल के अंत तक पीएम मोदी के साथ एक बेहद अहम और निर्णायक बैठक करना चाहता है।रक्षा सौदों से लेकर व्यापार तक इन बड़े मुद्दों पर टिकी हैं दुनिया की नजरेंअगर पीएम मोदी की यह दिसंबर यात्रा फाइनल होती है, तो यह कई मायनों में ऐतिहासिक साबित होने वाली है। इस संभावित दौरे के दौरान दोनों महाशक्तियों के बीच कई अरब डॉलर के अत्याधुनिक रक्षा सौदों, क्रिटिकल टेक्नोलॉजी (iCET) की साझेदारी और इंडो-पैसिफिक रीजन में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने जैसे गंभीर मुद्दों पर अंतिम मुहर लग सकती है। इसके साथ ही, अमेरिकी बाजार में भारतीय कंपनियों की पहुंच और दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाओं को दूर करने के लिए भी इस बैठक को बेहद मील का पत्थर माना जा रहा है, जिसका सीधा असर ग्लोबल मार्केट पर पड़ेगा।नई दिल्ली और वॉशिंगटन की जुगलबंदी से बढ़ी ड्रैगन की बेचैनीसर्जियो गोर के इस बड़े खुलासे और भारत-अमेरिका की इस बढ़ती नजदीकी ने पड़ोसी देश चीन की चिंताएं बढ़ा दी हैं। एआई सर्च और आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) के दौर में कूटनीतिक जानकार मान रहे हैं कि दिसंबर का यह संभावित दौरा वैश्विक राजनीति का नया रुख तय करेगा। भारत जिस तरह से वैश्विक सप्लाई चेन का नया केंद्र बनकर उभर रहा है, उसे देखते हुए अमेरिका भारत को अपने सबसे मजबूत और स्थायी साझेदार के रूप में स्थापित करना चाहता है। अब पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पीएमओ (PMO) की तरफ से इस यात्रा को लेकर आधिकारिक तौर पर क्या तारीखें सामने आती हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jun 2026 2:41 pm

डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा दावा: क्या ईरान घुटनों पर आ गया, जानिए दोहा वार्ता को लेकर क्यों आमने-सामने हैं दोनों देश

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में इन दिनों अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा शह और मात का खेल है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को सोशल मीडिया पर एक सनसनीखेज दावा किया कि ईरान ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ बैठक का अनुरोध किया है। ट्रंप के इस बयान ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है, लेकिन दूसरी ओर से मिला जवाब इसे एक बड़ी कूटनीतिक गुत्थी बना रहा है। ईरानी अधिकारियों ने ऐसी किसी भी बैठक की योजना से साफ इनकार कर दिया है, जिससे साफ हो गया है कि दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी अपने चरम पर है।दोहा वार्ता पर ट्रंप बनाम ईरान: सच क्या है?ट्रंप ने दावा किया था कि ईरान के साथ बातचीत मंगलवार को कतर के दोहा में आयोजित होगी। वहीं, ईरान के वरिष्ठ वार्ताकार काजिम गरीबाबादी ने इसे सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीकी स्तर पर बातचीत की कोई पुष्टि नहीं हुई है, हालांकि कतर के साथ अन्य मामलों पर संवाद जारी है। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप का यह दावा घरेलू राजनीति से भी प्रेरित हो सकता है, जहां वे यह दिखाना चाहते हैं कि उनका 'मैक्सिमम प्रेशर' काम कर रहा है और ईरान बातचीत के लिए मजबूर है।6 अरब डॉलर की संपत्ति और पेजेश्कियान का दांवईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने हाल ही में जब्त की गई 6 अरब डॉलर की ईरानी संपत्ति के कतर के माध्यम से जारी होने का जिक्र किया है। यह कदम ईरानी जनता को अंतरिम समझौते के लिए राजी करने की एक कोशिश मानी जा रही है। दिलचस्प यह है कि अमेरिकी अधिकारी लगातार यह दोहरा रहे हैं कि ईरान की किसी भी संपत्ति से रोक अभी नहीं हटाई गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच यह वित्तीय मुद्दा दोनों देशों के बीच समझौते की मुख्य कड़ी बना हुआ है।होर्मुज जलडमरूमध्य: दुनिया के लिए क्यों खतरनाक है यह तनाव?होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल गलियारा है, जहां से वैश्विक व्यापार का करीब 20% तेल और गैस गुजरती है। हाल के दिनों में वहां जहाजों पर हुए हमलों और अमेरिकी सैन्य प्रतिक्रिया ने क्षेत्र को युद्ध के मुहाने पर ला खड़ा किया है। यदि ईरान और अमेरिका के बीच वार्ता विफल रहती है, तो वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा सकता है और तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं। ट्रंप के लिए यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे अमेरिकी नागरिकों को यह भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि अमेरिका में महंगाई घट रही है, लेकिन होर्मुज का तनाव उनके इस दावे को सीधे चुनौती दे रहा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jun 2026 2:17 pm

यूरोप में प्रलयकारी गर्मी: सड़कें और ट्रैफिक लाइटें पिघलीं, हाईवे टूटे, 1300 से ज्यादा लोगों की मौत

यूरोप इस समय एक अभूतपूर्व और जानलेवा लू (Heatwave) की चपेट में है, जिसने पूरे महाद्वीप को दहका दिया है। तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचने के कारण स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि वहां का बुनियादी ढांचा (Infrastructure) जवाब देने लगा है। बर्लिन से लेकर इटली तक, सड़कों के डामर पिघल रहे हैं और ट्रैफिक लाइटें प्लास्टिक की तरह पिघलकर झुक रही हैं। लू के कारण अब तक 1300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जिसने यूरोपीय देशों की चिंता बढ़ा दी है।जर्मनी में हाईवे टूटे, थम गए परिवहन के पहिएजर्मनी में गर्मी का असर सबसे ज्यादा परिवहन नेटवर्क पर पड़ा है। बर्लिन को पश्चिमी जर्मनी से जोड़ने वाला A2 मोटरवे भीषण गर्मी के कारण टूटकर बिखर गया, जिससे कई इंटरचेंज बंद करने पड़े। ब्रैंडनबर्ग के जीसार में हाईवे की हालत इतनी खराब हो गई है कि वहां गाड़ियों का चलना असुरक्षित हो गया है। इसके अलावा, लीपजिग शहर में तापमान इतना अधिक हो गया कि सड़क की डामर सतह पिघलने लगी, जिसके चलते ट्राम सेवाओं को बीच में ही रोकना पड़ा। बर्लिन की सड़कों पर तापमान कम करने के लिए पुलिस को वाटर कैनन का सहारा लेना पड़ रहा है।फ्रांस-इटली में पिघल रही ट्रैफिक लाइटेंफ्रांस और इटली में भी स्थिति विकट है। सोशल मीडिया पर इटली और जर्मनी के कई ऐसे वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिनमें चौराहों पर लगी ट्रैफिक लाइटें तेज धूप और उमस की वजह से पिघलती हुई दिखाई दे रही हैं। ट्रेनें देरी से चल रही हैं और बड़े पैमाने पर बिजली कटौती हो रही है। गर्मी से राहत पाने के लिए जलाशयों की ओर रुख कर रहे लोगों के साथ हादसे भी बढ़ गए हैं। फ्रांस में 18 जून से अब तक डूबने के 74 मामले सामने आए हैं, जबकि पोलैंड में एक ही दिन में 17 लोगों की जान चली गई।युद्धग्रस्त यूक्रेन और डेनमार्क पर दोहरी मारविचित्र बात यह है कि बिजली ग्रिडों के लिए प्रसिद्ध डेनमार्क में भी मांग आपूर्ति से कहीं ज्यादा हो गई है, जिससे वहां के ऊर्जा मंत्रालय को ग्रिड विस्तार पर सोचना पड़ रहा है। उधर, रूस के साथ युद्ध झेल रहे यूक्रेन के लिए यह भीषण गर्मी दोहरी मुसीबत बनकर आई है। इवानो-फ्रैंकिवस्क से लेकर फ्रंटलाइन पर स्थित जापोरीझझिया तक बिजली की खपत पर पाबंदियां लगा दी गई हैं। बिजली कंपनी 'यास्नो' के सीईओ सर्गी कोवलेंको के अनुसार, युद्ध से जर्जर हो चुके बिजली ग्रिडों के लिए यह गर्मी एक बड़ी परीक्षा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोपीय देशों का बुनियादी ढांचा इतनी भीषण गर्मी सहने के लिए नहीं बनाया गया था, और अब यह जलवायु परिवर्तन के खतरों को बयां कर रहा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jun 2026 2:13 pm

ट्रंप को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका: फेडरल गवर्नर लिसा कुक को नहीं हटा पाएंगे राष्ट्रपति, जानें क्या है पूरा विवाद

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए एक बड़ा कानूनी अवरोध पैदा हो गया है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति ट्रंप के फेडरल रिजर्व गवर्नर लिसा कुक को बर्खास्त करने के प्रयास पर रोक लगा दी है। 5-4 के बहुमत से आए इस फैसले ने ट्रंप प्रशासन की कार्यकारी शक्तियों को एक बड़ा झटका दिया है। यह पहली बार है जब 1913 में फेडरल रिजर्व की स्थापना के बाद किसी राष्ट्रपति द्वारा केंद्रीय बैंक के किसी उच्च अधिकारी को हटाने की कोशिश को सर्वोच्च अदालत ने सिरे से खारिज किया है।सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की ट्रंप प्रशासन की अपीलसुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय पीठ ने ट्रंप प्रशासन की उस याचिका को ठुकरा दिया, जिसमें कुक को बर्खास्त करने से रोकने वाले निचली अदालत के आदेश को चुनौती दी गई थी। जिला न्यायाधीश जिया कॉब ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि बिना उचित नोटिस और सुनवाई के लिसा कुक को हटाना 'उचित प्रक्रिया' (Due Process) का सीधा उल्लंघन है। इसके बाद कोलंबिया सर्किट अपील अदालत ने भी इस निर्णय को बरकरार रखा था, जिसे अब सुप्रीम कोर्ट ने अपनी मुहर लगाकर अंतिम रूप दे दिया है।क्या है विवाद की जड़?अगस्त 2025 में राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए कुक को बर्खास्त करने का पत्र जारी किया था। उन्होंने लिसा कुक पर धोखाधड़ी के आरोप लगाए थे, जिसे कुक और उनके समर्थकों ने पूरी तरह खारिज किया है। लिसा कुक, जो फेडरल रिजर्व की पहली अश्वेत महिला गवर्नर हैं, का कहना है कि यह कार्रवाई वास्तव में मौद्रिक नीति को लेकर चल रहे वैचारिक मतभेदों के कारण की जा रही है। उनका कार्यकाल 2038 तक निर्धारित है और उन्हें 2022 में नियुक्त किया गया था। इस फैसले के बाद ट्रंप ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए अदालत की कार्यवाही को 'पूरी तरह प्रक्रियात्मक' करार दिया है।फेडरल रिजर्व की स्वतंत्रता और ट्रंप का रुखदुनिया के सबसे प्रभावशाली केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व की स्वायत्तता अमेरिकी अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी मानी जाती है। ट्रंप की सत्ता में वापसी के बाद से ही फेडरल रिजर्व उनके निशाने पर रहा है। इससे पहले वे फेड चेयरमैन जेरोम पॉवेल के कार्यकाल के दौरान भी अपनी नाराजगी जता चुके हैं। केविन वॉर्श के नए चेयरमैन बनने के बाद भी ट्रंप प्रशासन और फेडरल रिजर्व के बीच खींचतान जारी है। लिसा कुक के मामले में आए इस फैसले ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि राष्ट्रपति अपनी मर्जी से केंद्रीय बैंक के अधिकारियों को पद से नहीं हटा सकते, जो अमेरिकी संस्थागत लोकतंत्र के लिए एक बड़ी जीत मानी जा रही है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 30 Jun 2026 2:11 pm

शी चिनफिंग ने लुकाशेंको से भेंट की

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने सोमवार सुबह राजधानी पेइचिंग में बेलारूस के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर लुकाशेंको से मुलाकात की।

देशबन्धु 29 Jun 2026 11:45 pm

आज का एक्सप्लेनर:सड़कें पिघली, पटरियां उखड़ीं, 1300 मौतें; यूरोप में गर्मी ने सारे रिकॉर्ड क्यों तोड़ दिए, भारत से ज्यादा खतरनाक कैसे

स्विट्जरलैंड, फ्रांस, जर्मनी… ये नाम सुनते ही दिमाग में एक तस्वीर बनती है। उस तस्वीर में अकसर साफ-सुथरी सड़कें, बर्फीले पहाड़ और मौसम का लुत्फ उठाते लोग होते हैं। लेकिन इस वक्त हकीकत कुछ और है। यूरोप के ये देश रिकॉर्ड गर्मी में जल रहे हैं। सड़कें पिघल रहीं, पटरियां उखड़ रहीं। पिछले 7 दिनों में हीटवेव ने 1300 से ज्यादा लोगों की जान ले ली। गर्मी से बचने को लोग नदियों-तालाबों में कूद रहे, जिससे फ्रांस में 55 लोग डूब गए। आखिर यूरोप में ऐसा क्यों हो रहा और ये गर्मी भारत से अलग कैसे है, आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: यूरोप के देशों में कैसी गर्मी पड़ रही है? जवाबः पहले 3 तस्वीरों में हीटवेव का मंजर… यूरोप की कुल आबादी करीब 74 करोड़ है। इनमें से 19 करोड़ लोग 35 डिग्री से ज्यादा तापमान झेल रहे हैं। देखिए यूरोप के शहरों में गर्मी का हाल… सवाल-2: भारत में इतना तापमान सामान्य गर्मी माना जाता है, फिर यूरोप में हाहाकार क्यों? जवाबः यूरोप दुनिया के ठंडे रिहायशी महाद्वीप में से एक हैं। यहां पूरा सिस्टम ठंड के हिसाब से बना है, न कि जानलेवा गर्मी के लिए। यूरोप का मौजूदा ढांचा इतनी गर्मी झेलने के लिए तैयार नहीं है… 1. पुराने घर गर्मी अंदर सोख लेते हैं 2. एयर कंडीशनर की कमी 3. ज्यादा बुजुर्ग आबादी एनर्जी एंड क्लाइमेट पॉलिसी एक्सपर्ट सिद्धांत सिंह बताते हैं कि भारत की तुलना में यूरोप में सूरज की रोशनी ज्यादा देर तक रहती है। इससे गर्मी की तीव्रता बढ़ जाती है। इस वक्त यूरोप में 16 घंटे सूरज रहता है, जबकि भारत में 12-13 घंटे। यूरोप की मौजूदा गर्मी ज्यादा सूखी है और हवाएं भी नहीं चल रही। लोगों को ऐसी गर्मी की आदत भी नहीं है। इसलिए लोग ज्यादा घुटन महसूस कर रहे हैं। सवाल-3: यूरोप में इस रिकॉर्ड गर्मी की वजह क्या है? जवाबः 3 बड़ी वजहें हैं… 1. ओमेगा ब्लॉक से रुकी मौसमी हवाएं 2. हीट डोम से यूरोप में गर्मी का गुबार बना 3. ग्लोबल वॉर्मिंग से हालात और ज्यादा खराब सवाल-4: इस गर्मी से यूरोप को कब तक राहत मिलेगी? जवाब: मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक हीट डोम धीरे-धीरे पश्चिम यूरोप से पूर्व की तरफ खिसकेगा। अंटार्कटिक की तरफ से सर्द हवाएं आएंगी, जो राहत देंगी। फ्रांस के पश्चिमी हिस्से में इस हफ्ते से राहत मिलनी शुरू होगी। बाकी हिस्सों में 1 जुलाई तक मौसम गर्म ही रहेगा। जर्मनी, इटली और ब्रिटेन में भी 30 जून तक तापमान कम होगा। हालांकि यह राहत कुछ दिनों की ही रहेगी। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक जुलाई में यूरोप के ऊपर एक और हीट डोम एक्टिव हो सकता है। इसका असर पश्चिम और मध्य यूरोप में रहेगा। स्पेन, पुर्तगाल, फ्रांस, जर्मनी, दक्षिण इंग्लैंड, उत्तर इटली में 6 से 9 दिन ज्यादा गर्मी और हीटवेव पड़ेगी। 7 से 10 जुलाई के बीच यह हीट डोम एक्टिव हो सकता है। यह अभी की गर्मी से ज्यादा खतरनाक हो सकता है। पहली हीटवेव ने मिट्टी को सुखा दिया है। सड़कों और इमारतों को गर्म कर दिया है। शहरों में नमी वैसे ही कम हो गई है। ऐसे में लगातार दूसरी हीटवेव शहरों को और ज्यादा गर्म करेगी। अमेरिका की क्लाइमेट इम्पैक्ट कंपनी के मुताबिक अगस्त तक यूरोप में गर्म मौसम बना रहेगा। उस पर इस साल एल-नीनो की वजह से यूरोप में सूखा पड़ने की भी आशंका है। -------- ये खबर भी पढ़िए… आज का एक्सप्लेनर: 194 साल के ‘जोनाथन’ की कहानी, पीएम मोदी के दौरे से सुर्खियों में; 39 अमेरिकी राष्ट्रपति देख चुका, 140 साल छोटी गर्लफ्रेंड पीएम मोदी 27 जून को सेशेल्स दौरे पर गए। दर्जनों खबरें चलीं- ‘मोदी यहां दुनिया के सबसे बुजुर्ग जानवर जोनाथन से मिलेंगे।’ पीएम मोदी कछुओं से मिले भी, लेकिन उनमें जोनाथन नहीं था। दरअसल, जोनाथन सेशेल्स में है ही नहीं। वो तो 7 हजार किमी दूर एक ब्रिटिश टापू सेंट हेलेना में है। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 29 Jun 2026 6:13 pm

प्रधानमंत्री को 'झूठा' कहने पर महिला सांसद तुरंत सस्पेंड! ब्रिटिश संसद के इस कड़े नियम पर भारत में क्यों छिड़ गई नई बहस?

वैश्विक राजनीति के मंच पर भारत का मान लगातार बढ़ रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अब तक दुनिया के 34 देश अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान से नवाज चुके हैं. लेकिन देश के भीतर अक्सर घरेलू राजनीति में प्रधानमंत्री पद की गरिमा और मर्यादा को तार-तार करने वाले बयान सामने आते रहते हैं. इस बीच, भारत के संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी नेताओं के इस आचरण को लेकर ब्रिटेन (UK) के वेस्टमिंस्टर संसदीय मॉडल का एक ऐसा उदाहरण पेश किया है, जिसने देश के राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर एक नई कानूनी बहस छेड़ दी है. किरेन रिजिजू ने ब्रिटिश संसद का एक वीडियो साझा करते हुए सवाल उठाया है कि क्या भारत को भी पीएम पद की संवैधानिक मर्यादा बनाए रखने के लिए अंग्रेजों के कड़े नियमों को अपनाना चाहिए?ब्रिटिश संसद में क्या हुआ था? जानिए पाकिस्तानी मूल की सांसद के सस्पेंशन की इनसाइड स्टोरीयह पूरा मामला इसी साल अप्रैल महीने का है, जब ब्रिटेन की संसद (House of Commons) में अमेरिका के राजदूत के रूप में पीटर मैंडेलसन की नियुक्ति को लेकर गरमागरम बहस चल रही थी. इसी दौरान लेबर पार्टी की सांसद और पाकिस्तानी मूल की ब्रिटिश नागरिक जारा सुल्ताना (Zarah Sultana) ने तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर पर तीखा व्यक्तिगत हमला बोल दिया. उन्होंने पीएम कीर स्टार्मर को 'बेयर-फेस्ड लायर' यानी सीधे तौर पर 'निर्लज्ज झूठा' कह दिया. जारा सुल्ताना ने सदन में कहा था कि प्रधानमंत्री पीटर मैंडेलसन का बचाव इसलिए कर रहे हैं क्योंकि वे उनके निजी हितों के लिए काम करते हैं और ऐसा करके प्रधानमंत्री पूरे देश को धोखा दे रहे हैं.जैसे ही जारा सुल्ताना के मुंह से 'झूठा' शब्द निकला, ब्रिटिश संसद के स्पीकर सर लिंडसे हॉयल ने तुरंत दखल दिया. उन्होंने जारा सुल्ताना को आदेश दिया कि वे अपने इस असंसदीय शब्द को तुरंत वापस लें और मर्यादा में रहें. लेकिन जब जारा सुल्ताना ने अपना बयान वापस लेने से साफ इनकार कर दिया, तो स्पीकर ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा—'बैठ जाओ और तुरंत सदन से बाहर जाओ.' नियमों की अवहेलना करने पर जारा सुल्ताना को तत्काल प्रभाव से 5 दिनों के लिए संसद से निलंबित (Suspend) कर दिया गया. इसी दिन रिफॉर्म यूके के एक अन्य सांसद ली एंडरसन को भी प्रधानमंत्री को 'झूठा' कहने के कारण सदन से बाहर का रास्ता दिखाया गया था.आखिर क्यों ब्रिटेन में पीएम के अपमान पर तुरंत होती है जेल और सस्पेंशन जैसी कार्रवाई?ब्रिटेन का वेस्टमिंस्टर मॉडल अपनी संसदीय परंपराओं और भाषा की शुचिता के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. वहां की रूलबुक के अनुसार, संसद के भीतर कुछ खास शब्दों के इस्तेमाल पर पूरी तरह से कानूनी पाबंदी है. ब्रिटिश संसदीय नियमों के तहत:प्रतिबंधित शब्द: सदन के अंदर किसी भी सदस्य को 'लायर' (झूठा) या 'डिसऑनेस्ट' (बेईमान) कहना पूरी तरह वर्जित है.नीतियों बनाम व्यक्तिगत टिप्पणी: कोई भी सांसद सरकार की नीतियों, फैसलों और बजट की कितनी भी कड़ी आलोचना कर सकता है, लेकिन वह देश के प्रधानमंत्री पर किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत या अमर्यादित टिप्पणी नहीं कर सकता.स्पीकर के असीमित अधिकार: यदि कोई सांसद इन नियमों को तोड़ता है, तो स्पीकर के पास उसे बिना किसी देरी के तुरंत सदन से निष्कासित करने का पूर्ण अधिकार होता है.भारत के नियम क्या कहते हैं और यहाँ कार्रवाई क्यों नहीं होती?ब्रिटेन के इस कड़े एक्शन की तुलना अगर भारतीय संसद से की जाए, तो तस्वीर बिल्कुल अलग नजर आती है. भारत में भी लोकसभा और राज्यसभा की रूलबुक के नियम 380 और 381 के तहत सदन में असंसदीय भाषा (Unparliamentary Language) के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध है. इसके अलावा नियम 222 के तहत विशेषाधिकार हनन (Breach of Privilege) की कार्रवाई का भी प्रावधान है. भारत में राहुल गांधी से लेकर मल्लिकार्जुन खरगे और अधीर रंजन चौधरी जैसे कई बड़े नेता समय-समय पर प्रधानमंत्री के खिलाफ 'चोर' या 'कायर' जैसे शब्दों का प्रयोग कर चुके हैं.लेकिन भारत में राजनीतिक और दलीय दबाव के कारण अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल होने पर सदन में सिर्फ भारी हंगामा और नारेबाजी होती है, मगर सांसदों के खिलाफ वैसी त्वरित और कड़ी निलंबन की कार्रवाई देखने को नहीं मिलती जैसी ब्रिटेन में हुई. भारतीय संसद में ज्यादा से ज्यादा यह होता है कि स्पीकर के आदेश पर उन विवादित शब्दों को सदन की आधिकारिक कार्यवाही के रिकॉर्ड (Expunged from Records) से हटा दिया जाता है, लेकिन अपराधी सांसद पर कोई बड़ा एक्शन नहीं हो पाता. यही वजह है कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू अब भारत में एक ऐसा मजबूत स्वदेशी संसदीय ढांचा बनाने की वकालत कर रहे हैं, जो प्रधानमंत्री के संवैधानिक पद की गरिमा की रक्षा करे और नेताओं को जनता के प्रति अधिक जिम्मेदार बनाए.

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jun 2026 5:21 pm

'जिंदा हैं तो लौटा दो, मर गए तो डेथ सर्टिफिकेट दे दो': पाकिस्तानी सेना के जुल्मों के खिलाफ बलोच एक्टिविस्ट सम्मी दीन का खुला पत्र, बयां किया 17 साल का दर्द!

बलोचिस्तान में पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसी ISI के खिलाफ बलोच नागरिकों का गुस्सा एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. बलोच विद्रोह और आजादी की आवाज को दबाने के लिए पाकिस्तानी सेना द्वारा निर्दयता के साथ किए जा रहे अपहरण, जबरन गुमशुदगी (Enforced Disappearances) और 'किल एंड डंप' नीति के खिलाफ प्रमुख बलोच मानवाधिकार कार्यकर्ता सम्मी दीन बलोच (Sammi Deen Baloch) ने एक दिल दहला देने वाला खुला पत्र लिखा है.अपने इस पत्र के जरिए उन्होंने सीधे तौर पर पाकिस्तान सरकार और सेना से अपने लापता पिता को लेकर कड़े सवाल पूछे हैं. सम्मी दीन बलोच ने अपनी भावुक और रोंगटे खड़े कर देने वाली अपील में लिखा है, अगर मेरे अब्बा जिंदा हैं तो उन्हें वापस लौटा दो और अगर आपने उन्हें मार दिया है, तो हमें और तड़पाने के बजाय उनका डेथ सर्टिफिकेट दे दो. इस खुले पत्र ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान में हो रहे मानवाधिकारों के हनन और बलोच नरसंहार को बेनकाब कर दिया है.17 साल का अंतहीन इंतजार: डॉ. दीन मोहम्मद बलोच की गुमशुदगी की दर्दनाक कहानीबलोच एक्टिविस्ट सम्मी दीन बलोच ने अपने पिता डॉ. दीन मोहम्मद बलोच के जबरन अपहरण और लापता होने की 17वीं बरसी पर रविवार (28 जून 2026) को यह खुला पत्र जारी किया. अपनी मार्मिक अपील में सम्मी दीन ने लिखा कि पिछले दो दशकों से चल रही इस अनिश्चितता के बाद अब उनके परिवार को यह जानने का पूरा कानूनी और मानवीय हक है कि उनके पिता किस हाल में हैं.पेशा से सरकारी चिकित्सक डॉ. दीन मोहम्मद बलोच को 28 जून 2009 की रात बलोचिस्तान के खुजदार जिले से पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों और सेना के अधिकारियों ने जबरन हिरासत में लिया था. उस काली रात के बाद से आज तक, यानी पिछले 17 सालों में डॉ. दीन मोहम्मद का कोई अता-पता नहीं है. उनका परिवार आज भी उनकी सुरक्षित वापसी की आस में जी रहा है.'याचिकाएं, लाठियां और आंसू गैस ही मेरी विरासत बन गईं'अपने पिता के लापता होने के गहरे दुख और दर्द को बयां करते हुए सम्मी दीन बताती हैं कि वह अपने पिता के जीवित या मृत होने के सच से अनजान रहते हुए ही बड़ी हुईं. उन्होंने अपने पत्र में लिखा, बचपन में मुझे सिर्फ गुमशुदगी दी गई. जब भी मैंने स्कूल या समाज में अपने पिता के बारे में पूछा, तो मुझे सिर्फ इनकार, दुत्कार और अपमान मिला. मेरे पिता को यह जालिम राज्य उठा ले गया और उनका अंतहीन इंतजार करने की सजा मुझे आजीवन कारावास की तरह दे दी गई.उन्होंने आगे लिखा, दुनिया के बाकी बच्चे अपने पिता की उंगली थामकर और उनकी खूबसूरत यादों के साथ बड़े होते हैं. लेकिन मुझे बचपन से ही अदालतों की याचिकाएं, पुलिस की लाठियां, आंसू गैस के गोले और हाथों में पिता के पोस्टर्स लेकर सड़कों पर घूमने की विरासत मिली है. मेरे अब्बा कोई सरकारी फाइल या कोई कोरी अफवाह नहीं थे. वे डॉ. दीन मोहम्मद थे—एक डॉक्टर, एक जिम्मेदार पति और एक बेहद प्यारे पिता, जिन्हें हमसे हमेशा के लिए छीन लिया गया.अंतरराष्ट्रीय मंच पर गूंजी आवाज: जर्मनी के संगठन ने पाकिस्तान को घेरासम्मी दीन बलोच आज बलोचिस्तान में पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों के खिलाफ लड़ने वाली प्रमुख संस्था 'वॉयस फॉर बलोच मिसिंग पर्सन्स' (VBMP) की महासचिव हैं. वह बलोचिस्तान में जबरन गायब किए गए हजारों युवाओं और नागरिकों के इंसाफ की लड़ाई का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय चेहरा बन चुकी हैं. उनके इस शांतिपूर्ण आंदोलन और अदालतों में दायर की जा रही याचिकाओं से बौखलाई पाकिस्तानी सेना और पुलिस कई बार उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है और उन पर हिंसक हमले भी करवा चुकी है.सम्मी दीन के इस खुले पत्र के बाद अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भी पाकिस्तान सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. जर्मनी के डबलिन में स्थित प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन 'फ्रंट लाइन डिफेंडर्स' (Front Line Defenders) ने सम्मी दीन बलोच के प्रति अपना पूर्ण समर्थन दोहराया है. संगठन ने पाकिस्तानी हुक्मरानों से मांग की है कि वे डॉ. दीन मोहम्मद बलोच के ठिकाने का तुरंत और आधिकारिक तौर पर खुलासा करें और बलोचिस्तान में चल रहे जबरन गुमशुदगी के सभी मामलों की स्वतंत्र निष्पक्ष जांच कराएं.पाकिस्तानी सेना का ढिठाई भरा रुख: आरोपों को सिरे से किया खारिजहमेशा की तरह, इस बार भी पाकिस्तानी सरकार और उसकी सेना ने राजनीतिक उत्पीड़न और बलोच नागरिकों को गायब करने के इन गंभीर आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. पाकिस्तानी सेना का दावा है कि बलोच कार्यकर्ताओं के खिलाफ की जा रही कार्रवाई पूरी तरह से देश के कानून के दायरे में है.सेना ने ढिठाई से बयान जारी करते हुए कहा कि आम नागरिकों को गायब करने की उनकी कोई आधिकारिक नीति नहीं है. पाकिस्तानी अधिकारियों का दावा है कि जो लोग लापता बताए जा रहे हैं, उनमें से अधिकांश लोग या तो प्रतिबंधित उग्रवादी और आतंकवादी संगठनों में शामिल हो गए हैं, या वे कानून से बचने के लिए भूमिगत (Underground) हो गए हैं या फिर अपनी मर्जी से देश छोड़कर विदेश चले गए हैं. लेकिन बलोच मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि सेना का यह बयान सिर्फ उनके खूनी गुनाहों को छिपाने का एक भद्दा बहाना है.

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jun 2026 5:20 pm

अंतरिक्ष से लैंडिंग: उदयपुर रनवे पर इंडिगो के बड़े जेट ने रचा इतिहास, जानें भारत स्वदेशी 'गगन' नेविगेशन सिस्टम कैसे करता है कमाल!

27 जून 2026 की दोपहर को राजस्थान के उदयपुर रनवे पर इंडिगो (IndiGo) के एयरबस A320 विमान ने जब अपने कदम रखे, तो खिड़की से बाहर खूबसूरत अरावली की पहाड़ियों को देख रहे यात्रियों को सब कुछ बिल्कुल सामान्य लगा. लेकिन बैकस्टेज भारतीय उड्डयन और विज्ञान के इतिहास में एक बहुत बड़ा कीर्तिमान रचा जा चुका था. इस विशाल पैसेंजर जेट को रनवे पर मौजूद पारंपरिक ग्राउंड रेडियो सिग्नल की मदद से नहीं, बल्कि भारत के ऊपर हजारों किलोमीटर दूर अंतरिक्ष में चौबीसों घंटे तैनात स्वदेशी सैटेलाइट्स की मदद से सुरक्षित उतारा गया था.डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविऐशन (DGCA) की कड़ी निगरानी और गाइडलाइंस के तहत, भारत के अपने स्वदेशी सैटेलाइट आधारित नेविगेशन सिस्टम 'गगन' (GAGAN) का इस्तेमाल करके कॉमर्शियल लैंडिंग करने वाला यह देश का पहला बड़ा पैसेंजर जेट बन गया है. आइए एक एक्सपर्ट रिपोर्टर की नजर से इस पूरी तकनीक को आसान भाषा में समझते हैं कि यह कैसे काम करती है और भारत के लिए यह ऐतिहासिक मील का पत्थर क्यों बेहद खास है.क्या है 'गगन' (GAGAN) सिस्टम और अंतरिक्ष से कैसे मिलती है पायलट को मदद?गगन (GAGAN) का पूरा नाम 'जीपीएस एडेड जियो ऑगमेंटेड नेविगेशन' (GPS Aided GEO Augmented Navigation) है. इस बेहद आधुनिक और जटिल सिस्टम को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और भारतीय विमानन प्राधिकरण (AAI) ने सालों की रिसर्च के बाद संयुक्त रूप से मिलकर तैयार किया है. गगन का शक्तिशाली सिग्नल अंतरिक्ष में मौजूद इसरो के GSAT-8 और GSAT-10 कम्युनिकेशन सैटेलाइट्स के जरिए सीधे विमानों के कॉकपिट तक पहुंचता है.इसे आप बेहद आसान शब्दों में एक ऐसे 'सुपर क्लास टीचर' या 'गाइड' की तरह समझ सकते हैं जो आसमान में बैठकर अमेरिकी जीपीएस (GPS) के काम को हर सेकंड चेक करता है. जीपीएस के सिग्नलों में आने वाली मामूली से मामूली खराबी या दूरी की गलतियों को तुरंत सुधारकर यह पायलट के रिसीवर तक बिल्कुल सटीक और एरर-फ्री जानकारी पहुंचाता है. जब कोई विमान घने कोहरे या खराब मौसम में लैंड कर रहा होता है, तो गगन उसे रनवे का बिल्कुल सुई की नोंक जैसा सटीक रास्ता दिखाता है.पारंपरिक रेडियो नेटवर्क बनाम गगन: छोटे शहरों के हवाई अड्डों के लिए वरदानआमतौर पर दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर विमानों को सुरक्षित उतारने के लिए जमीन पर आधारित 'इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम' (ILS) यानी ग्राउंड रेडियो बीम नेटवर्क का इस्तेमाल किया जाता है. यह सिस्टम जमीन से अदृश्य तरंगें (रेडियो सिग्नल) भेजकर पायलट को सीधा आने और रनवे पर टचडाउन करने का रास्ता बताता है. लेकिन यह पारंपरिक ग्राउंड सिस्टम बेहद महंगा होता है और हर छोटे या पहाड़ी इलाकों के रीजनल एयरपोर्ट (जैसे शिमला, कुल्लू या पूर्वोत्तर के राज्य) पर इसे लगाना और मेंटेन करना मुमकिन नहीं है.इसके विपरीत, गगन सिस्टम के लिए जमीन पर किसी करोड़ो रुपये के महंगे तामझाम या टावरों की बिल्कुल जरूरत नहीं होती. यह सीधे अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट्स की मदद से पायलट को बाएं-दाएं (Horizontal) और ऊपर-नीचे (Vertical) दोनों तरह की सटीक गाइडेंस दे देता है, जिससे छोटे शहरों के एयरपोर्ट्स पर भी बड़े विमानों की नाइट लैंडिंग और खराब मौसम में लैंडिंग बेहद आसान हो जाएगी.GAGAN और NavIC में क्या अंतर है? अक्सर लोग हो जाते हैं कंफ्यूजअक्सर लोग गगन (GAGAN) और नाविक (NavIC) को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन विज्ञान के नजरिए से ये दोनों एक-दूसरे से बिल्कुल अलग और अलग उद्देश्यों के लिए काम करते हैं. नाविक (Navigation with Indian Constellation) भारत का एक पूरी तरह स्वतंत्र और स्वदेशी पोजीशनिंग नेटवर्क है, जो खुद रास्ता ढूंढता है—ठीक वैसे ही जैसे अमेरिका का GPS या रूस का ग्लोनास काम करता है.वहीं दूसरी तरफ, गगन खुद कोई नया नेविगेशन नेटवर्क नहीं है और न ही नया रास्ता बनाता है. गगन का मुख्य काम केवल और केवल जीपीएस (GPS) से मिलने वाले सिग्नलों की बारीकी से जांच करना, उनकी तकनीकी कमियों को दूर करना और नागरिक उड्डयन (Civil Aviation) की सुरक्षा के लिए उन्हें ज्यादा से ज्यादा विश्वसनीय और अचूक बनाना है.70 टन के हवाई जहाज के लिए जीपीएस की कमियों को कैसे दूर करता है गगन?हमारे स्मार्टफोन में मौजूद सामान्य जीपीएस कुछ मीटर (5 से 10 मीटर) तक की चूक या एरर कर सकता है, जो सड़क पर गाड़ी चलाने या कोई रेस्टोरेंट ढूंढने के लिए तो ठीक है; लेकिन 70 टन के भारी-भरकम हवाई जहाज को जीरो विजिबिलिटी और घने बादलों के बीच से रनवे पर उतारने के लिए यह बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं है. भारत के ऊपर मौजूद पृथ्वी की ऊपरी वायुमंडलीय परत (Ionosphere) के कारण जीपीएस के सिग्नल अक्सर सुस्त पड़ जाते हैं या मुड़ जाते हैं, जिससे गलत लोकेशन दिखने का खतरा रहता है.इसे पूरी तरह फिक्स करने के लिए इसरो ने भारतभर में 15 अत्यधिक संवेदनशील ग्राउंड रेफरेंस स्टेशन (INRES) बनाए हैं, जिनकी भौगोलिक लोकेशन सेंटीमीटर तक फिक्स है. ये स्टेशन जीपीएस की त्रुटि को रियल-टाइम में पकड़ते हैं, इंडियन मास्टर कंट्रोल सेंटर (INMCC) उसे ठीक करने का गणितीय फॉर्मूला बनाता है और सैटेलाइट्स के जरिए तुरंत प्लेन के रिसीवर को भेज देता है. सबसे खास बात यह है कि अगर किसी तकनीकी खराबी के कारण सिग्नल पर भरोसा नहीं किया जा सकता, तो यह सिस्टम पायलट को महज 6 सेकंड के भीतर वॉर्निंग अलर्ट (Time-to-Alert) भी दे देता है.अमेरिका-यूरोप के क्लब में शामिल हुआ भारत: क्यों दुनिया का सबसे एडवांस सिस्टम है 'गगन'?उदयपुर की इस ऐतिहासिक सफल लैंडिंग के साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा और गिने-चुने देशों के एलीट क्लब में शामिल हो गया है, जिसके पास अपना खुद का सैटेलाइट आधारित ऑगमेंटेशन सिस्टम (SBAS) मौजूद है. वर्तमान में अमेरिका इसके लिए WAAS (Wide Area Augmentation System) का इस्तेमाल करता है, यूरोप के पास अपना EGNOS है और जापान MSAS तकनीक का उपयोग करता है.लेकिन इन सबके बीच भारत का गगन सिस्टम इसलिए दुनिया में सबसे अनोखा और एडवांस माना जा रहा है क्योंकि यह भूमध्यरेखीय (Equatorial Zone) क्षेत्र के बेहद कठिन, अशांत और तेजी से बदलते आसमान में भी सौ फीसदी सटीक काम करने वाला दुनिया का इकलौता प्रमाणित सिस्टम बन गया है. गगन के आने से भारतीय नागरिक उड्डयन सेक्टर में सुरक्षा के मायने पूरी तरह बदल गए हैं.

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jun 2026 5:06 pm

शेख हसीना ने किया बांग्लादेश लौटने का ऐलान

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने मौत की सजा के बावजूद इस साल देश लौटने का ऐलान किया है. वह करीब दो साल से भारत में रह रही हैं.

देशबन्धु 29 Jun 2026 10:58 am

आधी रात को थर्राया चीन! भारत के पड़ोसी देश में आया भयंकर भूकंप, रिक्टर स्केल पर मची तबाही; जानें ताजा हालात

एशियाई महाद्वीप के इस हिस्से में कुदरत का भयंकर कहर देखने को मिला है। भारत के पड़ोसी देश चीन में आधी रात को उस वक्त भारी हड़कंप मच गया, जब लोग अपने घरों में गहरी नींद सो रहे थे। अचानक आए बेहद शक्तिशाली भूकंप के झटकों से धरती बुरी तरह कांप उठी और बहुमंजिला इमारतें ताश के पत्तों की तरह हिलने लगीं। भूकंप का यह झटका इतना जोरदार था कि लोग डर के मारे अपने मासूम बच्चों के साथ घरों से बाहर निकलकर सड़कों और खुले मैदानों की तरफ भागने लगे। स्थानीय समयानुसार देर रात आए इस जलजले ने चीन के कई रिहायशी इलाकों को हिलाकर रख दिया है, जिसके बाद प्रभावित प्रांतों में आपातकाल (Emergency Services) लागू कर दिया गया है।रिक्टर स्केल पर कितनी थी भूकंप की तीव्रता और कहां था इसका केंद्र?सीस्मोलॉजी विभाग (भूकंप विज्ञान केंद्र) से मिली शुरुआती जानकारी के अनुसार, चीन के सुदूर और पहाड़ी क्षेत्र में आए इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर बेहद खतरनाक श्रेणी में मापी गई है। जमीन के अंदर कम गहराई पर इसका केंद्र (Epicenter) होने के कारण झटके बहुत ज्यादा महसूस किए गए और इसकी गूंज आसपास के कई किलोमीटर के दायरे तक फैल गई। भूकंपीय लहरों के चलते केंद्र के नजदीक स्थित कई पुराने मकानों और सरकारी इमारतों में दरारें आने की खबरें हैं। चीनी सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग (China Earthquake Networks Center) ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।भारत के सीमावर्ती इलाकों में भी अलर्ट? भौगोलिक दृष्टि से क्यों बढ़ा खतराचूंकि यह भूकंप भारत के पड़ोसी देश चीन के सीमाई और पहाड़ी हिस्से में आया है, इसलिए भौगोलिक रूप से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख व जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में भी भूवैज्ञानिक हलचल पर पैनी नजर रखी जा रही है। हिमालयन फॉल्ट लाइन (Himalayan Fault Line) पर लगातार बढ़ रहे इस दबाव के कारण टेक्टोनिक प्लेट्स में मची उथल-पुथल से भारतीय मौसम विभाग और भूकंप विशेषज्ञों की चिंताएं बढ़ गई हैं। हालांकि, भारतीय सीमा के भीतर अभी तक किसी भी तरह के नुकसान की कोई खबर सामने नहीं आई है, लेकिन स्थानीय प्रशासन को पूरी तरह सतर्क रहने को कहा गया है।तबाही और नुकसान का आकलन जारी: रात के अंधेरे में रेस्क्यू ऑपरेशन शुरूआधी रात को आए इस भयंकर भूकंप के बाद प्रभावित शहरों की बिजली और संचार व्यवस्था पूरी तरह से ठप हो गई है, जिससे रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। मलबे में दबे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए चीनी सेना और स्थानीय आपदा राहत बलों (NDRF जैसी टीमों) को तैनात किया गया है। आने वाले कुछ घंटों में हल्के झटके (Aftershocks) आने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से पक्के और जर्जर मकानों के अंदर न जाने की अपील की है। पूरी दुनिया की नजरें इस वक्त चीन से आने वाली पल-पल की तस्वीरों और आधिकारिक बयानों पर टिकी हुई हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jun 2026 8:53 am

समंदर में टला महायुद्ध का खतरा! अमेरिका-ईरान के बीच कतर में सीजफायर डील पर सहमति, अब बेखौफ दौड़ेंगे पानी के जहाज

पूरी दुनिया को बड़ी राहत देते हुए मिडल ईस्ट के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते— स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में जारी भीषण सैन्य तनाव पर फिलहाल पूरी तरह से ब्रेक लग गया है। पिछले कई दिनों से युद्ध की कगार पर खड़े अमेरिका और ईरान आखिरकार बातचीत की मेज पर आने के लिए राजी हो गए हैं। दोनों महाशक्तियों के बीच कूटनीतिक गतिरोध को सुलझाने के लिए अब कतर (Qatar Peace Talks) की मध्यस्थता में एक हाई-लेवल बैठक होने जा रही है। इस बड़ी और सकारात्मक खबर के सामने आते ही अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक गलियारों और ग्लोबल मार्केट ने राहत की सांस ली है, क्योंकि अब इस रूट से दुनिया भर के मालवाहक और तेल टैंकर जहाज बिना किसी डर के सुरक्षित गुजर सकेंगे।कतर बना संकटमोचक: जानिए कैसे बनी अमेरिका और ईरान के बीच बात?रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण खाड़ी देश कतर ने एक बार फिर वैश्विक शांति के लिए संकटमोचक की भूमिका निभाई है। सूत्रों के मुताबिक, कतर के अमीर और शीर्ष राजनयिकों ने पर्दे के पीछे से दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा था। पिछले दिनों शांति समझौते के मसौदे में शामिल 'आर्टिकल-5' की एक लाइन के लीक होने के बाद जो बात पूरी तरह बिगड़ गई थी, उसे कतर ने एक नए न्यूट्रल ड्राफ्ट के जरिए फिर से पटरी पर ला दिया है। अमेरिका और ईरान दोनों ने ही इस बात पर सहमति जताई है कि वे कतर की राजधानी दोहा में बैठकर विवादित मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान निकालेंगे और तब तक कोई भी देश होर्मुज में कोई आक्रामक सैन्य कार्रवाई नहीं करेगा।वैश्विक बाजार में आई रौनक: कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट की उम्मीदइस ऐतिहासिक शांति वार्ता की खबर जैसे ही दलाल स्ट्रीट (Dalal Street) और वैश्विक वायदा बाजारों (Wall Street) तक पहुंची, वैसे ही चौतरफा राहत देखने को मिली। पिछले कई दिनों से कच्चे तेल (Crude Oil) की सप्लाई चेन बाधित होने के डर से जो पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छूने की आशंका बनी हुई थी, वह अब काफी हद तक टल गई है। कमोडिटी एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस सीजफायर के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में गिरावट दर्ज की जाएगी। इसका सीधा और सबसे बड़ा फायदा भारत जैसी तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था को मिलेगा, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी समुद्री मार्ग पर सबसे ज्यादा निर्भर है।जहाजों के लिए खुला सुरक्षित रास्ता: भारतीय शिपिंग कंपनियों ने ली राहत की सांसहोर्मुज जलडमरूमध्य से हर दिन गुजरने वाले दर्जनों भारतीय कमर्शियल जहाजों और वैश्विक कार्गो शिपिंग कंपनियों के लिए यह खबर किसी वरदान से कम नहीं है। पिछले कुछ दिनों से इस रूट पर ईरानी नौसेना और अमेरिकी युद्धपोतों के आमने-सामने होने की वजह से जहाजों का इंश्योरेंस प्रीमियम काफी बढ़ गया था और कई रूट डायवर्ट करने पड़ रहे थे। अब कतर में बातचीत शुरू होने की आधिकारिक घोषणा के बाद इस समुद्री क्षेत्र में अलर्ट लेवल को घटा दिया गया है। स्थानीय बंदरगाहों और अंतरराष्ट्रीय मैरीटाइम सिक्योरिटी एजेंसियों ने भी पुष्टि की है कि जहाजों का आवागमन अब पूरी तरह सामान्य और बेखौफ तरीके से शुरू हो गया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jun 2026 8:50 am

आधी रात को लाशों से पटा अफगानिस्तान! पाकिस्तान के खूनी एयरस्ट्राइक में 35 नागरिकों की मौत, 1 महीने में चौथा बड़ा हमला

मिडल ईस्ट और दक्षिण एशिया के इस हिस्से में तनाव अब अपने सबसे खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमाई इलाकों में लंबे समय से जारी तनातनी ने बीती रात एक बेहद खौफनाक रूप अख्तियार कर लिया। पाकिस्तानी वायुसेना और सुरक्षाबलों ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में आधी रात को अचानक चौतरफा हवाई हमले (Air Strikes) शुरू कर दिए। इस भीषण बमबारी में महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 35 बेकसूर लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच बढ़ा यह सैन्य गतिरोध पिछले एक महीने के भीतर चौथा बड़ा हमला है, जिसने पूरे क्षेत्र को बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया है।रात के अंधेरे में पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों का कहर: आखिर क्यों हुआ यह हमला?प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब लोग अपने घरों में सो रहे थे, तभी पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान के खोस्त और कुनार प्रांतों के रिहायशी इलाकों को निशाना बनाकर मिसाइलें दागनी शुरू कर दीं। पाकिस्तान सरकार और सैन्य कमांडरों का दावा है कि यह हमला सीमा पार से सक्रिय प्रतिबंधित आतंकी संगठनों (TTP - तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) के सुरक्षित ठिकानों को तबाह करने के लिए किया गया था। हालांकि, अफगान अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि मारे गए सभी लोग आम नागरिक थे, जिनका किसी भी उग्रवादी गुट से कोई लेना-देना नहीं था।काबुल और इस्लामाबाद में भारी तनाव: अफगान सीमा पर अलर्ट जारीइस भीषण खूनखराबे के बाद अफगानिस्तान की कार्यवाहक तालिबान सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है। काबुल से जारी एक आधिकारिक बयान में पाकिस्तान को इस कायरतापूर्ण हरकत के गंभीर परिणाम भुगतने की सीधी चेतावनी दी गई है। सीमावर्ती इलाकों जैसे डूरंड लाइन (Durand Line) के आसपास अफगान सेना की टुकड़ियों को भारी हथियारों के साथ हाई अलर्ट पर रख दिया गया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों परमाणु और सैन्य ताकत संपन्न पड़ोसियों के बीच लगातार होते ये हमले किसी बड़े क्षेत्रीय युद्ध की चिंगारी बन सकते हैं, जिससे दक्षिण एशिया की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी।भारत और वैश्विक समुदाय की नजर: क्या संयुक्त राष्ट्र करेगा हस्तक्षेप?एक महीने के भीतर चौथे बड़े हमले ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिज्ञों को भी चिंता में डाल दिया है। भारत समेत दुनिया भर की खुफिया एजेंसियां और विदेश मंत्रालय इस नाजुक स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) और वैश्विक मानवाधिकार संगठनों से इस मामले में तुरंत दखल देने और दोनों देशों को बातचीत की मेज पर लाने की मांग की जा रही है। अगर यह सीमाई विवाद जल्द नहीं थमा, तो शरणार्थियों का एक नया संकट खड़ा हो सकता है, जिसका सीधा असर भारत और आसपास के पड़ोसी देशों की आंतरिक सुरक्षा और भौगोलिक स्थिरता पर पड़ना लाजिमी है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jun 2026 8:48 am

सिर्फ 1 लाइन से भड़क उठी जंग! जानें अमेरिका-ईरान डील का वो गुप्त 'आर्टिकल-5', जिसने सुलगते होर्मुज में लगा दी आग

मिडल ईस्ट (Middle East) से इस वक्त बेहद चौंकाने वाली और डराने वाली खबर सामने आ रही है। पूरी दुनिया को लग रहा था कि अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद अब एक शांति समझौते (MoU) के जरिए सुलझने की कगार पर है, लेकिन ऐन वक्त पर सिर्फ एक सिंगल लाइन ने पूरे खेल को पूरी तरह से बिगाड़ कर रख दिया है। इस शांति समझौते के मसौदे में शामिल 'आर्टिकल-5' (Article 5 of MoU) अब दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री व्यापारिक मार्ग— स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) में युद्ध की नई चिंगारी भड़काने की सबसे बड़ी वजह बन चुका है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था में एक बार फिर भारी हड़कंप मच गया है।क्या है समझौता ज्ञापन (MoU) का वो रहस्यमयी आर्टिकल-5?अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों और शीर्ष राजनयिकों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने के लिए जो खुफिया बातचीत चल रही थी, उसकी बुनियाद इस 'आर्टिकल-5' पर आकर टिक गई थी। इस आर्टिकल में साफ तौर पर लिखा था कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय तेल टैंकरों और मालवाहक जहाजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ ईरानी नौसेना की होगी, जबकि पश्चिमी देशों की सेनाओं को वहां से तुरंत हटना होगा। अमेरिका ने इस लाइन को अपने और अपने मित्र देशों के हितों के खिलाफ मानते हुए इस पर हस्ताक्षर करने से साफ मना कर दिया, जिसके बाद शांति की उम्मीदें पल भर में स्वाहा हो गईं।होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) क्यों बन गया है बारूद का ढेर?भौगोलिक और आर्थिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण लाइफलाइन है। दुनिया के कुल कच्चे तेल (Crude Oil) का लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे समुद्री रास्ते से होकर भारत, चीन, जापान और यूरोपीय देशों तक पहुंचता है। समझौते की यह लाइन लीक होते ही इस पूरे समुद्री इलाके में दोनों देशों की नौसेनाएं (US Navy and Iranian Navy) पूरी तरह से आमने-सामने आ गई हैं। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास अपनी मिसाइल डिफेंस प्रणालियों को तैनात करना शुरू कर दिया है, जिसके चलते इस पूरे क्षेत्र में युद्ध के बादल मंडराने लगे हैं।भारत और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इस कूटनीतिक विफलता का क्या होगा असर?इस एक लाइन की वजह से बिगड़ी बात का सीधा खामियाजा भारत समेत पूरी दुनिया को भुगतना पड़ सकता है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही थोड़ी देर के लिए भी प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अचानक आसमान छू सकती हैं। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा इसी रूट से आयात करता है, जिससे घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ने और महंगाई अनियंत्रित होने का खतरा बढ़ गया है। दुनिया भर की खुफिया एजेंसियां अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए हैं कि क्या अमेरिका और ईरान बातचीत की मेज पर वापस लौटेंगे या यह विवाद किसी बड़े युद्ध में तब्दील हो जाएगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jun 2026 8:46 am

ईरान पर भरोसा नहीं: अमेरिकी सीनेटर टिलिस का बड़ा बयान

अमेरिकी रिपब्लिकन सीनेटर थॉम टिलिस ने रविवार को कहा कि उन्हें इस बात पर संदेह है कि ईरान अमेरिका के साथ हुए युद्धविराम समझौते का पालन करेगा

देशबन्धु 29 Jun 2026 8:40 am

हैती और सीरिया के नागरिकों का टीपीएस खत्म करने के ट्रंप के फैसले से रिपब्लिकन पार्टी में मतभेद

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हैती और सीरिया के हजारों प्रवासियों का टेम्परेरी प्रोटेक्टेड स्टेटस (टीपीएस) समाप्त करने के फैसले को लेकर रिपब्लिकन पार्टी में मतभेद उभरकर सामने आए हैं

देशबन्धु 29 Jun 2026 7:10 am

किम जोंग उन की मां का राज: क्यों नॉर्थ कोरिया में नहीं लिया जाता उनका नाम,जानें कैसे बनी तानाशाह की सत्ता की राह

'पवित्र रक्त' और मां के अतीत का विरोधाभास उत्तर कोरिया की सत्ता 'माउंट पेक्टू रक्तसमूह' (Mount Paektu Bloodline) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे देश पर शासन करने के लिए सबसे शुद्ध और वीर माना जाता है। लेकिन किम जोंग उन की मां, को योंग-ही का इतिहास इस सरकारी दावे के बिल्कुल उलट है। रिपोर्ट्स के अनुसार, को योंग-ही का जन्म 1952 में जापान के ओसाका में हुआ था। उनका परिवार एक पुनर्वास कार्यक्रम के तहत उत्तर कोरिया आया था, लेकिन उस समय वहां के समाज में जापान से आए लोगों को हेय दृष्टि से देखा जाता था। यही कारण है कि किम जोंग उन की मां की सामाजिक पृष्ठभूमि को उनके 'पवित्र' परिवारिक इतिहास के लिए एक बड़ी बाधा माना जाता है, जिसे प्योंगयांग का प्रोपेगेंडा हमेशा छिपाने की कोशिश करता है।डांस, खूबसूरती और प्रेम कहानी का सफर को योंग-ही एक प्रतिभाशाली डांसर थीं और सरकारी आर्ट ट्रूप से जुड़ी हुई थीं। उनकी खूबसूरती और नृत्य ने तत्कालीन तानाशाह किम जोंग इल को अपनी ओर आकर्षित किया। उस समय किम जोंग इल पहले से ही विवाहित थे, लेकिन को योंग-ही के साथ उनके संबंधों ने एक नया मोड़ लिया। चूंकि उनकी शादी आधिकारिक नहीं थी, इसलिए को योंग-ही और उनके बच्चे राजधानी प्योंगयांग से दूर वोनसान शहर में रहने लगे। 2004 में स्तन कैंसर से उनकी मौत के बाद भी उत्तर कोरियाई मीडिया ने इसे कोई तवज्जो नहीं दी, क्योंकि उनका जापानी जन्म किम परिवार की 'शुद्धता' की छवि को कमजोर कर सकता था।सत्ता का खेल: कैसे बनीं किंगमेकर? किम जोंग उन के सत्ता तक पहुँचने के पीछे उनकी मां को योंग-ही का सबसे बड़ा हाथ माना जाता है। तानाशाह बनने की दौड़ में कई नाम थे—किम जोंग इल के बड़े बेटे किम जोंग नम, जो सुधारों की वकालत के कारण पिता का भरोसा खो चुके थे और बाद में जिनकी मलेशिया में हत्या कर दी गई; और दूसरे भाई किम जोंग चुल, जो कथित रूप से निजी जीवन में व्यस्त थे। विशेषज्ञ मानते हैं कि को योंग-ही ने ही पर्दे के पीछे से यह सुनिश्चित किया कि उनका बेटा किम जोंग उन ही अगला उत्तराधिकारी बने। अन्य दावेदारों के बाहर होने के बाद, मां की इस राजनीतिक बिसात ने किम जोंग उन को दुनिया के सबसे रहस्यमय और क्रूर तानाशाह की कुर्सी तक पहुँचा दिया। आज भी को योंग-ही का नाम उत्तर कोरिया की आधिकारिक गाथाओं में एक बड़ा 'ब्लैकआउट' है, क्योंकि उनका सच शासन की नींव पर उठने वाले सवालों को जन्म देता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jun 2026 6:55 am

गैस के लिए ईरान की ओर ताक रहा पाकिस्तान: क्या अमेरिका से मिली छूट के बाद खत्म होगा ऊर्जा संकट

ऊर्जा संकट की मार: बेहाल है पाकिस्तान का पंजाब पाकिस्तान इन दिनों एक गंभीर ऊर्जा संकट के दौर से गुजर रहा है। अर्थशास्त्री महमूद रसूल के अनुसार, देश के अधिकांश हिस्सों, विशेषकर पंजाब प्रांत में गैस की भीषण कमी है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि उपभोक्ताओं को दिन भर में केवल कुछ घंटों के लिए ही गैस मिल पा रही है, जिससे घरेलू और औद्योगिक कामकाज पूरी तरह ठप पड़ गया है। आम जनता इस महंगाई और आपूर्ति की कमी से त्रस्त है, जिसके चलते सरकार पर दबाव बढ़ता जा रहा है।ईरान-अमेरिका शांति समझौता: पाकिस्तान के लिए नई उम्मीद पाकिस्तान की नजरें अब ईरान के साथ होने वाले संभावित ऊर्जा सौदों पर टिकी हैं। अमेरिका द्वारा ईरान पर लगे प्रतिबंधों में दी गई अस्थायी (60 दिन की) ढील ने पाकिस्तान को एक उम्मीद की किरण दिखाई है। चूँकि अमेरिका ने ईरान को विशिष्ट शर्तों के साथ तेल और गैस निर्यात की छूट दी है, इसलिए पाकिस्तान अब इस कूटनीतिक अवसर का फायदा उठाने की फिराक में है। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने स्पष्ट किया है कि खाड़ी क्षेत्र में शांति बहाल होने से वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम कीमतों में आई गिरावट का लाभ सीधे जनता तक पहुँचाने की कोशिश की जा रही है।कीमतों में राहत की उम्मीद और सरकार की चुनौती पिछले दिनों जब अमेरिका-ईरान के बीच संघर्ष चरम पर था, तब पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमतें रिकॉर्ड 414 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थीं। वर्तमान में यह 300 रुपये प्रति लीटर पर है, लेकिन जनता अभी भी और राहत की उम्मीद लगाए बैठी है। पेट्रोलियम मंत्री ने दावा किया है कि सरकार अंतरराष्ट्रीय समझौतों और नियमों के दायरे में रहकर ईरान से सस्ते तेल और गैस आयात के विकल्पों को तलाश रही है। हालांकि, यह छूट अस्थायी है और अमेरिका-ईरान वार्ताओं के भविष्य पर निर्भर करेगी। अब देखने वाली बात यह होगी कि शाहबाज शरीफ सरकार इस अल्पकालिक अवसर का लाभ उठाकर आम जनता को महंगाई से कितनी राहत दिला पाती है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 29 Jun 2026 6:51 am

महरंग बलोच को उम्रकैद पर उठा विवाद, रिपोर्ट में पाकिस्तान की मानवाधिकार स्थिति पर सवाल

बलोच अधिकार कार्यकर्ता महरंग बलोच को सुनाई गई उम्रकैद की सजा पाकिस्तान सरकार और बलोच अधिकार आंदोलन के बीच बढ़ती दूरी को दर्शाती है

देशबन्धु 29 Jun 2026 5:00 am

मोदी कैबिनेट से बाहर हो सकते हैं ये 6 मंत्री:9 नए चेहरों के शामिल होने की सुगबुगाहट; इस बड़े फेरबदल के पीछे की पूरी कहानी

धर्मेंद्र प्रधान और हरदीप सिंह पुरी की मोदी कैबिनेट से छुट्टी हो सकती है। वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण का मंत्रालय बदले जाने और RBI के पूर्व गवर्नर शक्तिकांत दास को नया वित्तमंत्री बनाए जाने की सुगबुगाहट है। सूत्रों के मुताबिक, मोदी मंत्रिमंडल में ये बड़ा फेरबदल अगले कुछ हफ्ते में हो सकता है। 1. धर्मेंद्र प्रधान, शिक्षा मंत्री ये हैं कौनः संघ और विद्यार्थी परिषद के बैकग्राउंड वाले धर्मेंद्र प्रधान 2 बार राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। अभी ओडिशा के संबलपुर से लोकसभा सांसद और पिछले 12 साल से मोदी सरकार में मंत्री। जुलाई 2021 से शिक्षा मंत्री हैं। क्यों हटाए जा सकते हैं: धर्मेंद्र प्रधान के शिक्षामंत्री रहते 5 बड़ी लापरवाहियां हुईं- 2026 में NEET पेपर लीक, CBSE बोर्ड की कॉपी चेकिंग में गड़बड़ी, UGC इक्विटी गाइडलाइन्स, 2024 में UGC-NET पेपर लीक और 2020 में आई नई शिक्षा नीति के लागू होने में देरी। इसके चलते केंद्र सरकार बार-बार बैकफुट पर दिखी। 2. हरदीप सिंह पुरी, पेट्रोलियम मंत्री ये हैं कौनः 1974 बैच के रिटायर्ड IFS अफसर हरदीप सिंह पुरी 2014 में बीजेपी से जुड़े। 2 बार राज्यसभा सांसद बने। सितंबर 2017 से केंद्रीय मंत्री हैं। अभी इनके पास पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय है। क्यों हटाए जा सकते हैं: सेक्स स्कैंडल 'एपस्टीन फाइल्स' में पुरी का नाम जुड़ा। फरवरी में कांग्रेस ने दावा किया कि 2014-17 के बीच पुरी ने जेफरी एपस्टीन से 62 ईमेल एक्सचेंज किए और 14 मीटिंग्स कीं। उन्हें हटाने की एक वजह उनकी उम्र भी हो सकती है। 74 साल के पुरी पिछले 9 साल से मंत्री हैं। 3. रवनीत सिंह बिट्टू, रेल राज्यमंत्री ये हैं कौनः पंजाब के पूर्व सीएम बेअंत सिंह के पोते रवनीत सिंह बिट्टू कांग्रेस में 3 बार लोकसभा सांसद बने। मार्च 2024 में बीजेपी से जुड़े। फिर राज्यमंत्री बने। अगस्त 2024 में राजस्थान से राज्यसभा पहुंचे। क्यों हटाए जा सकते हैं: 3 जून को बिट्टू ने अगले साल होने वाले पंजाब विधानसभा चुनाव में उतरने की इच्छा जाहिर की। उन्होंने कहा, 'मैंने लोकसभा और राज्यसभा में 17 साल पूरे कर लिए हैं। मैंने अपना सामान पैक कर लिया है और पंजाब जाने के लिए पूरी तरह तैयार हूं।' 4 जून को बीजेपी ने राज्यसभा के लिए 11 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की। इसमें बिट्टू का नाम नहीं था। 21 जून 2026 को उनका राज्यसभा कार्यकाल खत्म हो गया। बिट्टू बीजेपी को पंजाब की सत्ता तक पहुंचने में मदद कर सकते हैं। लुधियाना की किसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकते हैं। 4. पंकज चौधरी, वित्त राज्यमंत्री ये हैं कौनः उत्तर प्रदेश की महाराजगंज सीट से 7 बार के लोकसभा सांसद पंकज चौधरी जुलाई 2021 से वित्त राज्यमंत्री हैं। दिसंबर 2025 में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। क्यों हटाए जा सकते हैं: बीजेपी की इंटरनल पॉलिसी ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के चलते चौधरी को मोदी कैबिनेट से मुक्त किया जा सकता है, ताकि 2027 यूपी विधानसभा और 2029 लोकसभा चुनाव के लिए उनका पूरा फोकस संगठन और इलेक्शन मैनेजमेंट पर रहे। 5. हर्ष मल्होत्रा, सहकारिता राज्यमंत्री ये हैं कौनः 2015-16 में पूर्वी दिल्ली नगर निगम के महापौर बने। 2024 में पूर्वी दिल्ली से सांसद और मोदी कैबिनेट में राज्यमंत्री बने। मई 2026 में दिल्ली बीजेपी के अध्यक्ष बने। क्यों हटाए जा सकते हैंः बीजेपी की 'एक व्यक्ति, एक पद' की नीति के तहत 62 साल के मल्होत्रा को कैबिनेट से हटाया जा सकता है। 6. जॉर्ज कुरियन, अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री ये हैं कौनः सुप्रीम कोर्ट में वकील रहे। जून 2024 में मोदी सरकार में राज्य मंत्री बने। अल्पसंख्यक कार्य और मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय का जिम्मा संभाला। अगस्त 2024 में मध्यप्रदेश से राज्यसभा पहुंचे। क्यों इस्तीफा दिया: 23 जून को मोदी कैबिनेट के इकलौते ईसाई मंत्री कुरियन ने इस्तीफा दे दिया। इसकी एक वजह अप्रैल-मई में हुआ केरलम विधानसभा चुनाव भी है। बीजेपी को उम्मीद से कमतर नतीजे मिले। 65 साल के कुरियन ने भी चुनाव लड़ा, लेकिन ‘कंजिराप्पल्ली’ सीट पर वे तीसरे नंबर पर रहे। 1. शक्तिकांत दास ये हैं कौनः तमिलनाडु कैडर के 1980 बैच के रिटायर्ड IAS अफसर शक्तिकांत दास पीएम मोदी के प्रधान सचिव-2 हैं। आर्थिक मामलों के सचिव, राजस्व सचिव, 15वें वित्त आयोग के सदस्य, G20 शेरपा और 2018 से 2024 तक RBI के गवर्नर रह चुके हैं। एंट्री क्यों हो सकती है: मोदी सरकार के बड़े आर्थिक फैसले- नोटबंदी और GST लागू करने में दास की अहम भूमिका रही। बतौर RBI गवर्नर 3 बार कार्यकाल विस्तार मिलना उन पर मोदी सरकार के भरोसे का सबूत है। इस दौरान दास ने भारतीय अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखा, डिजिटल पेमेंट्स को बढ़ावा दिया और बैंकिंग रेगुलेशन मजबूत किया। सरकार को उम्मीद है कि प्रशासनिक और आर्थिक समझ रखने वाले दास वित्तीय स्थिति को मजबूत करेंगे। 2. अनुराग ठाकुर ये हैं कौनः हिमाचल प्रदेश के पूर्व सीएम प्रेम कुमार धूमल के बेटे हैं। BCCI के अध्यक्ष रहे। हमीरपुर लोकसभा सीट से लगातार 5वीं बार सांसद बने। एंट्री क्यों हो सकती है: मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में अनुराग राज्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। तब बतौर सूचना एवं प्रसारण मंत्री उनका रिपोर्ट कार्ड अच्छा था। अगले साल हिमाचल में विधानसभा चुनाव है। बीजेपी चाहती है कि अनुराग के बूते युवा वोटर्स को लामबंद करके मौजूदा कांग्रेस सरकार हटाए और सत्ता में आए। 3. वीडी शर्मा ये हैं कौनः मध्यप्रदेश से आने वाले वीडी शर्मा पुराने स्वयंसेवक माने जाते हैं। 3 दशकों तक RSS और ABVP में काम किया। 2013 में बीजेपी में एक्टिव हुए। 2020 से 2025 तक बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रहे। अभी खजुराहो से लगातार दूसरी बार सांसद हैं। एंट्री क्यों हो सकती है: मध्यप्रदेश के ज्यादातर राष्ट्रीय नेताओं को राज्य की राजनीति तक सीमित कर दिया गया है। जैसे- नरेंद्र सिंह तोमर, कैलाश विजयवर्गीय, प्रह्लाद सिंह पटेल। 55 साल के वीडी शर्मा को केंद्र में मंत्री पद देकर बीजेपी मध्यप्रदेश से अगली पीढ़ी के राष्ट्रीय नेता तैयार करना चाहती है। पार्टी में वीडी की छवि मजबूत संगठनकारी नेता की है। उनके अध्यक्ष रहते बीजेपी ने 2024 में मध्यप्रदेश की सभी 29 लोकसभा सीटें जीतीं। 4. तरुण चुग ये हैं कौनः पंजाब के अमृतसर से आते हैं। RSS का बैकग्राउंड है। 2 बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन जीते नहीं। 2018 से वे बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव हैं। एंट्री क्यों हो सकती है: हाल ही में हुए राज्यसभा चुनाव में बीजेपी ने पंजाब के कोटे से चुग को मध्यप्रदेश से उतारा और वे जीते भी। चुग को रवनीत सिंह बिट्टू की जगह राज्यसभा सीट मिली और अब मंत्री पद भी मिल सकता है। 5. राघव चड्ढा ये हैं कौनः चार्टर्ड अकाउंटेंट से नेता बने। अरविंद केजरीवाल के करीबी रहे। 2020 में दिल्ली के राजेंद्र नगर से विधायक और दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष बने। 2022 में पंजाब से राज्यसभा पहुंचे। एंट्री क्यों हो सकती है: अप्रैल में राघव ने AAP के 6 अन्य राज्यसभा सांसदों के साथ बीजेपी जॉइन कर ली। बीजेपी की कोशिश है- अगले साल पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनाव में राघव के बूते AAP को हराना। दरअसल, पंजाब के पिछले विधानसभा चुनाव में राघव ने AAP के लिए ग्राउंड वर्किंग और इलेक्शन मैनेजमेंट किया था। उन्हें AAP की अंदरूनी बातें पता हैं। राघव बीजेपी के लिए पंजाब में एग्रेसिव कैम्पेन कर सकते हैं। शहरी इलाकों और जेन-G वोटर्स में बीजेपी के लिए पैठ बना सकते हैं। 6. श्रीकांत शिंदे ये हैं कौनः महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के बेटे हैं। कल्याण सीट से लगातार तीसरी बार सांसद। एंट्री क्यों हो सकती है: शिवसेना (उद्धव गुट) के 6 लोकसभा सांसदों तोड़ने के लिए हुए ‘ऑपरेशन टाइगर’ में श्रीकांत ने अहम भूमिका निभाई। इनाम के तौर पर मंत्री पद मिल सकता है। 7. संजय दीना पाटिल ये हैं कौनः NCP से राजनीति शुरू की। मुंबई की भांडुप से विधायक रहे। 2009 में उत्तर-पूर्वी मुंबई से लोकसभा सांसद बने। 2022 में शिवसेना (उद्धव) से जुड़े और 2024 में दोबारा लोकसभा सांसद बने। एंट्री क्यों हो सकती है: ‘ऑपरेशन टाइगर’ के चलते पाटिल शिवसेना (शिंदे) में आए हैं। बागी होने के इनाम के तौर पर संजय को भी मंत्री पद मिल सकता है। इसके पीछे स्ट्रैटजी है- शिवसेना (उद्धव) को और कमजोर करना, बीजेपी वाले ‘महायुति गठबंधन’ को मजबूत करना। 8. काकोली घोष दस्तीदार ये हैं कौनः डॉक्टर से नेता बनीं काकोली पश्चिम बंगाल की बारासात सीट से लगातार चौथी बार सांसद हैं। TMC की संस्थापक सदस्य और पूर्व सीएम ममता बनर्जी की करीबी रहीं। एंट्री क्यों हो सकती है: काकोली नेतृत्व में 20 TMC सांसद बागी हो गए। बाद में NCPI से जुड़े और बीजेपी को सपोर्ट दिया। इस टूट के इनाम के तौर पर काकोली को मंत्री बनाया जा सकता है। 9. अरुण गोविल ये हैं कौनः 'रामायण' सीरियल में भगवान राम का किरदार निभाने वाले अरुण गोविल। 2021 में वे बीजेपी से जुड़े। 2024 में उत्तर प्रदेश की मेरठ लोकसभा सीट से सांसद बने। एंट्री क्यों हो सकती है: अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव हैं। सोशल इंजीनियरिंग के तहत गोविल को मंत्री बनाया जा सकता है। गोविल पश्चिमी यूपी के वैश्य समाज से आते हैं। उनके बूते बीजेपी हिंदुत्व और सांस्कृतिक मुद्दे को भुना सकती है। 1. निर्मला सीतारमण, वित्त मंत्री ये हैं कौनः कर्नाटक से आने वाली निर्मला सीतारमण 2014 से राज्यसभा सांसद हैं। 2017 में वे रक्षा मंत्री बनीं। 2019 से वित्त और कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री हैं। मंत्रालय क्यों बदल सकता है: सरकार और भारत की माली हालात कुछ महीनों से ठीक नहीं है। महंगाई पिछले 16 महीने के ऊंचे स्तर पर 3.9% पर पहुंच गई है। जबकि पीएम मोदी का लक्ष्य है- भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी और ग्लोबल मैन्युफेक्चरिंग हब बनाना। सरकार को लग रहा है कि किसी टेक्नोक्रेट को वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी दी जाए। ऐसे में निर्मला की जगह RBI गवर्नर रहे शक्तिकांत दास को लाया जा सकता है। निर्मला को शिक्षा मंत्रालय मिल सकता है। 2. ज्योतिरादित्य सिंधिया, पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ये हैं कौनः मध्यप्रदेश के कद्दावर नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया 2020 में कांग्रेस से बीजेपी में आए। जुलाई 2021 में मोदी सरकार में मंत्री बने। नागरिक उड्डयन और दूरसंचार जैसे मंत्रालय संभाले। अभी उनके पास पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास और संचार मंत्रालय का जिम्मा है। मंत्रालय क्यों बदल सकता है: सिंधिया 'हाई-परफॉर्मिंग' और डिलीवर करने वाले नेता माने जाते हैं। उनकी क्षमता और प्रभाव को देखते हुए उन्हें प्रमोट करने की तैयारी है। उन्हें रेल, वाणिज्य, उद्योग जैसा कोई अहम मंत्रालय मिल सकता है। 3. प्रह्लाद जोशी, नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री ये हैं कौनः कर्नाटक बीजेपी के अध्यक्ष रहे प्रहलाद जोशी धारवाड़ से लगातार 5वीं बार सांसद हैं। मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में संसदीय कार्य, कोयला और खनन मंत्री रहे। अभी वे नवीकरणीय ऊर्जा और उपभोक्ता मामलों के मंत्री हैं। मंत्रालय क्यों बदल सकता है: जोशी के सांगठनिक और संसदीय अनुभव के मद्देनजर उन्हें किसी बड़े या ज्यादा राजनीतिक प्रभाव वाले मंत्रालय का जिम्मा मिल सकता है। 2028 में जोशी के गृह राज्य कर्नाटक में विधानसभा चुनाव हैं, जहां बीजेपी को उम्मीदें हैं। 2014 से केंद्र में काबिज बीजेपी की मोदी सरकार में अब तक 4 बड़े फेरबदल हो चुके हैं। मोदी कैबिनेट में हुए फेरबदल में कुछ ट्रेंड नजर आते हैं… 1. परफॉर्मेंस नहीं तो छुट्टी तय कॉर्पोरेट कंपनियों की तरह मोदी सरकार में भी अगर कोई मंत्री उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता या उसके मंत्रालय से जुड़ा कोई विवाद खड़ा हुआ, तो बिना किसी हिचकिचाहट के उसकी छुट्टी कर दी जाती है। #MeToo मामले में घिरे विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर ने 2018 में इस्तीफा दिया था। 2021 में कोरोना महामारी के मिस-मैनेजमेंट के बाद तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन को हटाया गया था। बतौर आईटी मिनिस्टर रविशंकर प्रसाद, शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक और पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर को अच्छा प्रदर्शन न होने के कारण कैबिनेट से बाहर कर दिया गया था। 2. नौकरशाहों और एक्सपर्ट्स पर भरोसा मोदी सरकार में सिर्फ पारंपरिक नेता ही मंत्री नहीं बनते, बल्कि जटिल और अहम मंत्रालयों का जिम्मा पूर्व IAS, IFS अफसर या डोमेन एक्सपर्ट्स (टेक्नोक्रेट्स) को देने का चलन भी है। जैसे- पूर्व विदेश सचिव एस. जयशंकर को विदेश मंत्री बनाना, पूर्व IAS अफसर अश्विनी वैष्णव को रेल और आईटी मंत्रालय सौंपना, पूर्व IAS अफसर अर्जुन राम मेघवाल और रिटायर्ड IFS अफसर हरदीप सिंह पुरी को केंद्रीय मंत्री बनाना। 3. चुनावी राज्यों की इंजीनियरिंग मोदी सरकार में ये पैटर्न रहा है कि हर कैबिनेट फेरबदल में अगले विधानसभा चुनावों की सोशल और इलेक्टोरल इंजीनियरिंग को सेट किया जाता है। जुलाई 2021 में मोदी कैबिनेट का सबसे बड़ा फेरबदल हुआ। तब उत्तर प्रदेश के पंकज चौधरी, अजय मिश्रा टेनी, अनुप्रिया सिंह पटेल, एसपी सिंह बघेल, भानु प्रताप सिंह वर्मा, कौशल किशोर; गुजरात के महेंद्र मुंजापारा, दर्शना जरदोश, देवूसिंह चौहान जैसे नेताओं को मंत्री बनाया गया था। इसके पीछे 2022 में होने वाले विधानसभा चुनाव थे। 4. ‘एक व्यक्ति, एक पद’ की पॉलिसी बीजेपी बार-बार ये बात दोहराती है कि वे ‘एक व्यक्ति, एक पद’ की नीति अपनाती है। यानी कोई नेता सरकार और संगठन दोनों में एक साथ बड़े पद नहीं पा सकता। जैसे- 2014 में राजनाथ सिंह गृहमंत्री बने, तो 2 महीने बाद बीजेपी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। 2019 में जब अमित शाह गृहमंत्री बने, तो अगले ही महीने जगत प्रकाश नड्डा को कार्यकारी अध्यक्ष बना दिया गया और 8 महीने बाद शाह ने अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। जनवरी 2026 में जब नितिन नबीन पार्टी अध्यक्ष बने, तो उन्हें बिहार सरकार में मंत्री पद छोड़ना पड़ा। --------------------- ये भी खबर पढ़िए… मोदी सरकार को क्यों चाहिए 362 सांसद; TMC के 20, शिवसेना UBT के 6 सांसद टूटे; बाकी 44 कहां से जुटाएंगे 14 जून को TMC के 28 में से 20 लोकसभा सांसदों ने गुमनाम सी पार्टी NCPI में विलय कर लिया। आज शिवसेना (उद्धव गुट) के 9 से 6 लोकसभा सांसदों ने भी बगावत कर दी। इससे पहले 24 अप्रैल को आम आदमी पार्टी के 10 में से 7 राज्यसभा सांसदों ने भी बगावत कर दी थी। ये सभी बागी BJP या NDA में शामिल हुए हैं। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 29 Jun 2026 5:00 am

गलती से गोल हुआ और खिलाड़ी को जान गंवानी पड़ी:500 करोड़ दर्शकों वाले फुटबॉल की कहानी; 14 ग्राफिक्स में ओरिजिन से अब तक

चल रहे फीफा वर्ल्ड कप के 18 दिन हो चुके हैं। 48 टीमों के 72 मैच में 215 गोल हो चुके हैं। ईनाम की रकम है 8 हजार करोड़ रुपए। पर ये फुटबॉल बला है क्या जो इंसानी हाथों से ज्यादा कदमों को तरजीह देता है। कब पैदा हुआ, क्यों पैदा हुआ, कायदे-कानून कैसे और किसने बनाए, साथ में कुछ खास किस्से। 4 चैप्टर और 14 ग्राफिक्स में यही बातें हैं… ----------- **** ग्राफिक्स: द्रगचंद्र भुर्जी, अंकलेश विश्वकर्मा और अंकुर बंसल ---------- यह खबर भी पढ़िए… क्या IPL का डाउनफॉल शुरू:टीवी दर्शक 26% घटे, विदेशी खिलाड़ी आधा सीजन ही खेल रहे; टॉप एक्सपर्ट्स ने बताईं वजहें और समाधान इस साल IPL के फर्स्ट हाफ में टीवी व्यूअरशिप 26% गिरी है। स्पॉन्सर 65 से 45 रह गए हैं। ईडन गार्डन जैसे स्टेडियम भी कुछ मैचों में आधे ही भर पाए। कई विदेशी खिलाड़ियों ने भी आधे सीजन बाद टीम को जॉइन किया। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 29 Jun 2026 5:00 am

कतर में बनी सहमति: अमेरिका-ईरान अब नहीं करेंगे हमले

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पास हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े सैन्य तनाव के बाद अब दोनों देशों ने हमले रोकने पर सहमति जताई है

देशबन्धु 29 Jun 2026 4:04 am

आज का एक्सप्लेनर:बांग्लादेश ने भारत से छीनकर चीन को क्यों दिया मोंगला पोर्ट, सिर्फ 80 किमी दूर बैठेगा चीन, ये कितनी बड़ी चिंता

22 से 26 जून 2026 तक बांग्लादेशी पीएम तारिक रहमान चीन में थे। इसी दौरान बांग्लादेश ने अपने मोंगला पोर्ट का प्रोजेक्ट भारत से छीनकर चीन को दे दिया। यानी हमारे तट से महज 80 किमी दूर मोंगला पोर्ट पर चीन बैठेगा। भारत की ‘चिकन नेक’ से 100 किमी दूर तीस्ता नदी को भी चीन मैनेज करेगा। आखिर चीन इन इलाकों में क्या करने वाला है और ये भारत की सुरक्षा के लिए कितना बड़ा खतरा; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: बांग्लादेश ने भारत से मोंगला प्रोजेक्ट छीनकर चीन को क्यों दिया? जवाब: 2015 में बांग्लादेश ने भारत से दो इकॉनमिक जोन बनाने के लिए समझौता किया था। इनमें एक मोंगला पोर्ट और दूसरा चटगांव का इलाका था। बांग्लादेशी अखबार द बिजनेस स्टैंडर्ड के मुताबिक, मोंगला प्रोजेक्ट की शुरुआत में भारत के पैसे से मोंगला पोर्ट से खुलना के बीच एक नई रेलवे लाइन बनी। 2018 में भारत सरकार ने मोंगला प्रोजेक्ट का थका हीरानंदानी ग्रुप को दिया। मार्च 2022 में बांग्लादेश इकॉनोमिक जोन अथॉरिटी यानी BEZA और हीरानंदानी ग्रुप की कंपनी एविटा कंस्ट्रक्शंस प्राइवेट लिमिटेड के साथ समझौता किया। हालांकि अगस्त 2024 में बांग्लादेश में शेख हसीना का तख्तापलट होने के चलते ये प्रोजेक्ट रुक गया। शेख हसीना भारत आ गईं। शेख हसीना तब भारत आ गई थीं और बांग्लादेश के अंतरिम राष्ट्रपति बने मुहम्मद यूनुस के दौर में इस प्रोजेक्ट पर बात आगे नहीं बढ़ी। हसीना के बाद एंटी इंडियन मानी जाने वाली खालिदा जिया की पार्टी BNP सत्ता में आई और फरवरी 2026 में उनके बेटे तारिक रहमान पीएम बने। BEZA के मुताबिक, भारतीय कंपनी तय शर्त के मुताबिक दो साल के भीतर काम शुरू नहीं कर पाई। इसी बीच जून 2025 में बांग्लादेश में तैनात चीनी दूतावास के ऑफिसर्स ने मोंगला पोर्ट पर एक चीनी इकॉनमिक जोन बनाने का प्रस्ताव दिया था। इसके बाद अक्टूबर 2025 में बांग्लादेश सरकार ने भारत के साथ प्रोजेक्ट रद्द कर दिया। 25 जून 2026 को तारिक रहमान के चीन दौरे के बीच BEZA और चीन की सरकारी कंपनी चाइना सिविल इंजीनियरिंग कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन (CCECC) के बीच पोर्ट के डेवेलपमेंट के अलावा आसपास की 110 एकड़ जमीन पर इकनोमिक जोन बनाने का समझौता हुआ है। इसके अलावा 25 मार्च 2025 को मोंगला पोर्ट अथॉरिटी (MPA) और CCECC के बीच मोंगला पोर्ट के डेवेलपमेंट के लिए 370 मिलियन डॉलर के एक अलग प्रोजेक्ट पर भी समझौता हुआ था। हालांकि इस पर अब तक काम नहीं शुरू हुआ है। सवाल-2: अब चीन मोंगला पोर्ट पर क्या करने जा रहा है? जवाब: चीन मोंगला पोर्ट पर 2 काम करेगा... 1. पोर्ट का डेवेलपमेंट 2. पोर्ट के पास इकॉनोमिक जोन 26 जून को बांग्लादेश-चीन के जॉइंट स्टेटमेंट में 2 और प्रोजेक्ट चीन को देने की बात कही गई है। इसमें लिखा है कि दोनों देश चटगांव में चीन के इकॉनोमिक एंड इंडस्ट्रियल जोन को डेवेलपमेंट करेंगे। साथ ही चीन तीस्ता नदी के प्रबंधन में हर संभव मदद करेगा। सवाल-3: ये प्रोजेक्ट चीन को मिलना भारत के लिए चिंता की बात क्यों?जवाब: भारत के लिए 4 बड़ी दिक्कतें हैं... 1. चीन के मुकाबले में कूटनीतिक हार 2. बंगाल की खाड़ी में भारत के लिए नया खतरा 3. तीस्ता नदी प्रोजेक्ट से 'चिकन नेक' पर खतरा 4. भारत की बिजनेस कनेक्टिविटी को नुकसान सवाल-4: चीन के बढ़ते दबदबे से कैसे निपटेगा भारत?जवाब: हिंद महासागर को भारत का 'आंगन' कहा जाता है, लेकिन यहां चीन अपनी ‘स्ट्रिंग ऑफ पर्ल’ कही जाने वाली स्ट्रैटजी के तहत बंदरगाह, हवाई पट्टी और नेवल बेस बना रहा है। चीनी कंपनियां हिंद महासागर में 17 बंदरगाहों में से 13 का डेवेलपमेंट कर रही हैं, जबकि बाकी प्रोजेक्ट्स में उनकी हिस्सेदारी हैं। हिंद महासागर में चीन की हरकतें भारत के लिए बड़ी चुनौती हैं। इसके जवाब में भारत भी उल्टा जाल बुन रहा है। भारत की स्ट्रैटजी का नाम है- ‘नेकलेस ऑफ डायमंड’। हालांकि ये भारत सरकार का कोई घोषित प्रोजेक्ट या डॉक्ट्रिन नहीं है। ‘नेकलेस ऑफ डायमंड’ के तहत 4 बड़े काम हो रहे हैं… ---- ये खबर भी पढ़ें… भास्कर एक्सप्लेनर- शेख हसीना भारत से कहां जाएंगी:बांग्लादेश की सत्ता अब कौन संभालेगा; 8 सवालों में आगे की कहानी पड़ोसी देश बांग्लादेश की कहानी हर गुजरते घंटे के साथ बदल रही है। करीब 2 महीने से चल रहे आरक्षण विरोधी आंदोलन हिंसक होने के बाद प्रधानमंत्री शेख हसीना को बांग्लादेश छोड़ना पड़ा है। वो सेना के हेलिकॉप्टर से पहले अगरतला पहुंचीं और वहां से C-130J मिलिट्री विमान से गाजियाबाद के हिंडन मिलिट्री एयरबेस पर लैंड हुईं। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 28 Jun 2026 7:34 pm

फ्रांस में बड़ा विमान हादसा: पैराशूट प्रशिक्षण विमान क्रैश, 11 लोगों की दर्दनाक मौत

फ्रांस के उत्तर-पूर्वी शहर टॉम्बलेन में रविवार को एक नागरिक विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार 11 लोगों की मौत हो गई। स्थानीय अधिकारियों ने इसकी पुष्टि की है। वहीं सऊदी अरब में भी एक हेलिकॉप्टर हादसे की खबर है। इसमें 14 लोगों की मौत हो गई है।

देशबन्धु 28 Jun 2026 7:26 pm

'बलूचिस्तान की शेरनी' पर गिरी गाज: लापता अपनों के लिए लड़ने वाली डॉ. महरंग बलोच को उम्रकैद, पाकिस्तान में बढ़ा सियासी उबाल

कौन हैं डॉ. महरंग बलोच और क्यों बनीं 'बलूचिस्तान की शेरनी'? बलूचिस्तान की आवाज बनकर उभरीं डॉ. महरंग बलोच को पाकिस्तान की एक आतंकवाद-रोधी अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। 33 वर्षीय महरंग का संघर्ष तब शुरू हुआ था, जब वे महज 16 साल की थीं और उनके पिता अब्दुल गफ्फार लैंगोव लापता हो गए थे। बाद में उनके पिता का शव बरामद हुआ, जो प्रताड़ना के गहरे निशान लिए हुए था। इस घटना ने एक साधारण डॉक्टर को बलूचिस्तान के सबसे बड़े मानवाधिकार आंदोलन का चेहरा बना दिया। उन्हें अब 'बलूचिस्तान की शेरनी' के नाम से जाना जाता है, जो जबरन गायब किए गए (Enforced Disappearances) हजारों लोगों के हक के लिए आवाज उठाती रही हैं।उम्रकैद के पीछे का विवाद: क्या है आरोप? अदालत ने महरंग और उनके सहयोगी सिबगतुल्लाह शाह को 2024 में ग्वादर में हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान एक पैरामिलिट्री सैनिक की मौत के मामले में दोषी ठहराया है। उन पर आतंकवाद, देशद्रोह और हत्या जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, महरंग का परिवार और उनके समर्थक इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हैं। उनका कहना है कि यह बलूचिस्तान में असहमति की आवाज को दबाने और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को प्रताड़ित करने की एक सोची-समझी साजिश है। महरंग की कानूनी टीम ने घोषणा की है कि वे इस फैसले को ऊपरी अदालत में चुनौती देंगे।लापता लोगों का दर्द और पाकिस्तान का 'सौतेला' रुख बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा और प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध प्रांत है, लेकिन लंबे समय से उपेक्षा और हिंसा का दंश झेल रहा है। मानवाधिकार समूहों का आरोप है कि पिछले दो दशकों में हजारों बलूच लोग सुरक्षा बलों द्वारा बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के हिरासत में ले लिए गए। सरकार इन दावों को खारिज करती है और लापता लोगों को उग्रवादी गुटों से जोड़ने की कोशिश करती है। बलूच कार्यकर्ताओं का मानना है कि 'जबरन गायब करना' इस्लामाबाद की वह रणनीति है, जिसका उद्देश्य विद्रोह को कुचलना और स्वतंत्र बलूचिस्तान की मांग को कमजोर करना है।अदम्य साहस: धमकियों और पाबंदियों के बावजूद जारी संघर्ष महरंग बलोच का एक्टिविज्म केवल बयानों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने 2023 के अंत में सैकड़ों महिलाओं के साथ 1,600 किलोमीटर की लंबी पदयात्रा (Long March) का नेतृत्व किया ताकि लापता लोगों के ठिकाने का पता चल सके। जान से मारने की धमकियों और बार-बार गिरफ्तारी के बावजूद वे पीछे नहीं हटीं। मार्च 2025 में क्वेटा में विरोध प्रदर्शन के दौरान उनकी गिरफ्तारी हुई थी। अब उम्रकैद की यह सजा उनके दशकों पुराने संघर्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती है। महरंग का परिवार और मानवाधिकार संगठन इस मुकदमे को निष्पक्ष मानने से इनकार कर रहे हैं और इसे असहमति को कुचलने का माध्यम बता रहे हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jun 2026 6:20 pm

फ्रांस में भीषण गर्मी का तांडव: हीटवेव से 1000 से ज्यादा लोगों की मौत, बुजुर्गों पर सबसे भारी पड़ा पारा

रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से फ्रांस में हाहाकार पश्चिमी यूरोप इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है, जिसका सबसे बुरा असर फ्रांस पर पड़ा है। पब्लिक हेल्थ फ्रांस के ताजा आंकड़ों के अनुसार, रिकॉर्ड तोड़ हीटवेव के कारण देश में लगभग 1,000 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गई हैं। यह गर्मी न केवल इंसानी सहनशक्ति की परीक्षा ले रही है, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए भी बड़ी चुनौती बन गई है। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि ये आंकड़े अभी शुरुआती हैं और जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, यह संख्या और अधिक बढ़ सकती है।बुजुर्गों और अकेले रहने वालों के लिए बनी काल इस हीटवेव की सबसे दुखद बात यह है कि इसका 85 प्रतिशत शिकार 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के बुजुर्ग हुए हैं। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, पेरिस और उसके आसपास के 'इले-डी-फ्रांस' (le-de-France) इलाके में घरों के अंदर मरने वालों की संख्या में चिंताजनक बढ़ोतरी देखी गई है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि जो बुजुर्ग अकेले रहते हैं, वे गर्मी का मुकाबला करने में सबसे ज्यादा कमजोर साबित हो रहे हैं। यह स्थिति समाज में अकेलेपन की समस्या और हीटवेव के दौरान बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत को रेखांकित करती है।रेड अलर्ट और राहत की उम्मीद फ्रांस के कई इलाकों में पिछले कई दिनों से तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया था, जिसके चलते प्रशासन को 'रेड अलर्ट' जारी करना पड़ा। हालांकि, रविवार को तापमान में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे आम जनता को भीषण गर्मी से हल्की राहत मिली है। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे अकेले रहने वाले पड़ोसियों, विशेषकर बुजुर्गों का ध्यान रखें और हीटवेव के दौरान सावधानी बरतें। फिलहाल फ्रांस का स्वास्थ्य विभाग प्रभावित इलाकों में स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए है ताकि मौतों के इन बढ़ते आंकड़ों को नियंत्रित किया जा सके।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jun 2026 6:12 pm

अमेरिका ने छत्तीसगढ़ की कंपनी और उसके CEO पर लगाया प्रतिबंध, जानें क्‍या है मामला

अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि इन संस्थाओं और व्यक्तियों ने सूडानी सशस्त्र बलों (SAF) और रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF) को हथियार, विस्फोटक सामग्री और अन्य सहायता उपलब्ध कराई, जिससे देश में जारी संघर्ष और अधिक गंभीर हो गया।

देशबन्धु 28 Jun 2026 2:25 pm

ईरान और अमेरिका में फिर शुरू हुआ तनाव, ताजा हमलों के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने दी चेतावनी

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरानी सैन्य ठिकानों पर नए एयर स्ट्राइक किए हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने तेहरान पर होर्मुज स्ट्रेट के पास एक कमर्शियल तेल टैंकर पर हमला करके सीजफायर समझौते को फिर से तोड़ने का आरोप लगाया है

देशबन्धु 28 Jun 2026 10:19 am

ईरान का पलटवार: कुवैत और बहरीन पर मिसाइल-ड्रोन हमला

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) की नौसेना और एयरोस्पेस फोर्स ने अमेरिका के हमलों के जवाब में कुवैत और बहरीन में मिसाइल और ड्रोन ऑपरेशन शुरू किए

देशबन्धु 28 Jun 2026 9:37 am

होर्मुज़ जलडमरूमध्य में धमाका: अमेरिका ने ईरान के 10 सैन्य ठिकाने उड़ाए

अमेरिका की सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम ) ने कहा कि अमेरिका की सेना ने शनिवार रात होर्मुज़ जलडमरूमध्य और उसके आस-पास ईरान के 10 सैन्य ठिकानों पर हमला किया

देशबन्धु 28 Jun 2026 9:33 am

ट्रंप का संभावित भारत दौरा: रिश्ते सुधारने का सुनहरा मौका!

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के इस बयान के बाद कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले साल की शुरुआत में भारत आ सकते हैं

देशबन्धु 28 Jun 2026 8:40 am

ख्वाजा आसिफ के 'असली कश्मीरी नहीं' वाले बयान पर बवाल, मानवाधिकार परिषद ने जताई नाराजगी

पाकिस्तान के मानवाधिकार परिषद (एचआरसी) ने पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के उस बयान की कड़ी आलोचना की

देशबन्धु 28 Jun 2026 6:50 am