श्रीलंका में उत्साह के साथ मनाया गया ड्रैगन बोट फेस्टिवल
2026 ड्रैगन बोट सांस्कृतिक महोत्सव और चीन-श्रीलंका मैत्री कप ड्रैगन बोट दौड़ का आयोजन रविवार को कोलंबो में बड़े उत्साह और धूमधाम के साथ किया गया
अमेरिका-ईरान जंग पर ब्रेकथ्रू, MoU साइन लेकिन ट्रंप के बयान से बढ़ा सस्पेंस
अमेरिका और ईरान के बीच पिछले चार महीनों से जारी जंग को रोकने के लिए दोनों देशों ने एक अहम समझौते पर दस्तखत कर दिए हैं
107 दिनों की तबाही के बाद आखिरकार अमेरिका और ईरान जंग खत्म करने को राजी हैं। रविवार को ट्रम्प ने लिखा- समझौता हो गया। ईरान ने भी बयान जारी किया। अब 19 जून को स्विट्जरलैंड में दोनों देश MoU पर साइन करेंगे। अंदरखाने कैसे हुई ये डील, इसमें क्या-क्या शर्तें हैं, आखिर कौन जीता ये जंग और अब आगे क्या होगा; ऐसे 7 जरूरी सवालों के जवाब… सवाल-1: क्या अमेरिका और ईरान में वाकई जंग खत्म हो गई है? जवाबः 14 जून की देर रात पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहजाब शरीफ ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए ऐलान किया, 'अमेरिका और ईरान में शांति समझौता हो गया है। दोनों देश लेबनान सहित सभी मोर्चों पर तुरंत मिलिट्री ऑपरेशन बंद करने के लिए तैयार हो गए हैं।' थोड़ी देर बाद ट्रम्प ने भी एक पोस्ट से जरिए कंफर्म किया, 'ईरान के साथ डील अब पूरी हो गई है। दुनिया के जहाजों, अपने इंजन चालू कर लो। तेल को बहने दो।’ ईरान की तरफ से भी पुष्टि की गई कि दोनों पक्षों ने एक मेमोरैंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग यानी MoU फाइनल कर लिया है। इससे ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटेगी और मौजूदा सीजफायर आगे बढ़ेगा। हालांकि इस घोषणा को ‘जंग का अंत’ कहना थोड़ी जल्दबाजी होगी। इसकी तीन बड़ी वजहें हैं… पहली- खुद ट्रंप का बयान: ट्रम्प का कहना है कि ईरान के साथ युद्ध रोकने का समझौता हो गया है, लेकिन असली परीक्षा अभी बाकी है। अगर परमाणु कार्यक्रम पर समझौते से अमेरिका संतुष्ट नहीं हुआ तो सख्त कदम उठाएगा। दूसरी- इजराइल का रवैयाः समझौते की घोषणा से कुछ घंटे पहले इजराइल ने लेबनान पर बमबारी की। इजराइल ने दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना नहीं हटाने के संकेत दिए हैं। इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतमार बेन ग्वीर ने अमेरिका-ईरान पीस डील पर कड़ी नाराजगी जताई है। तीसरी- ईरान की शर्तेंः ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा है कि ये डील कायम रखने के लिए अमेरिका को तीन कदम उठाने होंगे- 1. नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करना, 2. युद्ध और सभी सैन्य कार्रवाइयों को रोकना, 3. ईरान के फ्रीज्ड फंड जारी करना। जेनेवा में 19 जून को MoU पर साइन होंगे। अमेरिकी अखबार द वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक राष्ट्रपति ट्रम्प या उप राष्ट्रपति जेडी वांस, समझौते पर डिजिटल साइन करेंगे। इसके बाद अगले 60 दिनों तक कई दौर की बातचीत होगी और फाइनल एग्रीमेंट तय किया जाएगा। सवाल-2: पाकिस्तान या कतर, अंदरखाने ये डील किसने कराई? जवाबः जंग शुरू होने के बाद सुलह कराने की कमान सबसे पहले पाकिस्तान ने संभाली, लेकिन आखिरी दौर में बाजी कतर के हाथ आ गई… दिल्ली स्थित थिंक टैंक ऑब्जर्वर्स रिसर्च फाउंडेशन यानी ORF में मिडिल ईस्ट से जुड़े मामलों के एक्सपर्ट कबीर तनेजा बताते हैं, ‘इस समझौते में कतर की एंट्री आर्थिक वजहों से हुई। मसलन- आने वाले दिनों में ईरान फंड्स की मांग करता है, तो ये कतर से ही ट्रांसफर किए जाएंगे। क्योंकि ईरान के फ्रीज फंड का बड़ा हिस्सा कतर के बैंकों में बंद है। अगर ट्रम्प खुद अमेरिका के हवाले से फंड्स भेजेंगे, तो अमेरिका की स्थिति कमजोर दिखेगी।’ डिफेंस एनालिस्ट नितिन ए. गोखले का आकलन है कि पाकिस्तान के पास इतना दम या भरोसा नहीं था कि वह दोनों पक्षों को समझौते के करीब ला सके। आखिरकार कतर की दखल से ही डील मुमकिन हुई। हालांकि, जामिया मिल्लिया इस्लामिया के एसोसिएट रिसर्चर डॉ. यासिर अली मिर्जा इसे किसी एक देश की जीत मानने से इनकार करते हैं। उनके मुताबिक यह डील पाकिस्तान, कतर, मिस्र, सऊदी अरब और ओमान के साझा प्रयासों का नतीजा है। सवाल-3: इस समझौते में दोनों देश किन-किन बातों पर राजी हुए हैं?जवाबः आधिकारिक तौर से अभी शांति समझौते की शर्तें जारी नहीं की गई है। लेकिन ईरानी न्यूज एजेंसी मेहर और ब्रिटिश न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक शांति के लिए 14 पॉइंट का लेखा तैयार किया गया हैं- सवाल-4: आखिरकार इस जंग में कौन जीता? जवाबः समझौते की शर्तों और बयानों से तो इस जंग में ईरान का पलड़ा भारी दिख रहा है… ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने डील की घोषणा के बाद कहा, 'दुश्मन ने अपने नापाक इरादों को पूरा करने के लिए हम पर हमला किया था, लेकिन वह कामयाब नहीं हो पाया और हमने जंग में बड़ी जीत हासिल की।' दूसरी तरफ ट्रम्प ने डील का ऐलान करते हुए जंग में जीत का कोई जिक्र नहीं किया। जबकि कुछ हफ्तों पहले तक वो ईरान को नेस्तनाबूद करने का दावा कर रहे थे। सवाल-5: इजराइल इस डील से खुश है या नाराज? जवाबः शुरुआती प्रतिक्रियाओं में इजराइल इस डील से नाखुश दिख रहा है। इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर ने कहा है कि अमेरिका-ईरान समझौते से इजराइल बंधा हुआ नहीं है। कबीर तनेजा मानते हैं कि इजराइल के लिए ये डील बुरी खबर है। उसने ट्रम्प के बार–बार कहने के बाद भी लेबनान पर हमले नहीं रोके थे। 14 और 15 जून को भी इजराइल ने दक्षिणी लेबनान में कई मिसाइलें दागीं। हालांकि इजराइल को एक बड़ी बढ़त भी मिल रही है। लेबनान की करीब 2,000 वर्ग किमी जमीन पर अब इजराइल का कब्जा है। पहले इजराइल कहता था कि उसका टारगेट सिर्फ लितानी नदी तक हिजबुल्ला लड़ाकों को खत्म करना है। लेकिन अब वो नदी पार कर लेबनान के दक्षिणी शहर नबातीह तक पहुंच गया है। इजराइल ने साफ कर दिया है कि इस जंग के दौरान उसने जो भी जमीन कब्जाई है, वह नहीं लौटाएगा। इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा है कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और उनकी सरकार की नीति स्पष्ट है। सेना इन इलाकों में बनी रहेगी ताकि इजराइल की सीमाओं और वहां रहने वाले लोगों को जिहादी गुटों से सुरक्षित रखा जा सके। उन्होंने कहा कि इन सुरक्षा क्षेत्रों से स्थानीय निवासियों को हटाया जाएगा और जमीन के ऊपर तथा नीचे मौजूद सभी आतंकी ढांचों को नष्ट किया जाएगा। सीमा से सटे गांवों में जिन घरों का इस्तेमाल आतंकी ठिकानों के रूप में हुआ, उन्हें भी ध्वस्त किया जाएगा। काट्स ने कहा कि नेतन्याहू ने यह बात अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प को भी साफ कर दी है। उन्होंने खुद अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ से इस मुद्दे पर बात की है। सवाल-6: इस डील का भारत समेत दुनिया पर क्या असर पड़ेगा? जवाबः होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से दुनिया भर में ईंधन का जो संकट पैदा हुआ था, उससे निजाद मिलेगी… हालांकि JNU में फॉरेन अफेयर्स के प्रोफेसर राजन कुमार कहते हैं, ‘जंग रुकती है, तो तेल के दाम पहले जैसे होने में 6-9 महीने लग सकते हैं। बड़ी तेल कंपनियां अक्सर पहले से तय कॉन्ट्रैक्ट पर तेल खरीदती-बेचती हैं। कई बार 3-6 महीने पहले ही यह तय हो जाता है कि कितना तेल खरीदना है और किस कीमत पर खरीदना है।’ यासिर अली मिर्जा बताते हैं, ‘जंग रुकने से ईरान को अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील मिलेगी और भारत और ईरान के बनाए चाबहार बंदरगाह पर व्यापार बढ़ेगा। इससे भारतीय सामान सीधे ईरान, अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच सकेगा। हालांकि, इसका असर दिखने में अभी समय लगेगा।’ सवाल-7: क्या यह डील टिकेगी? टूटने का सबसे बड़ा खतरा क्या है? जवाबः डील टूटने के 3 बड़े खतरे हैं- हालांकि यासिर अली मिर्जा मानते हैं कि मौजूदा डील फाइनल एग्रीमेंट में बदलेगी और जंग खत्म होगी, क्योंकि दोनों देश इस समय जंग आगे बढ़ाने की स्थिति में नहीं हैं। ईरान को जंग से इंफ्रास्ट्रक्चर के स्तर पर भारी नुकसान हुआ है। वो चाहेगा कि उसके फंड्स रिलीज हों और नुकसान की भरपाई हो। ---------- ये खबर भी पढ़िए… पापा के कहने पर 'किलर' बने:5 बच्चे पैदा करने की जिद में 3 शादियां; ट्रम्प सनकी हैं या साइकोपैथ, 80वें जन्मदिन पर पूरा एनालिसिस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कमोबेश हर रोज दुनिया को अपनी बातों और हरकतों से हैरान करते हैं। वो खुद भी कहते हैं कि मेरा अनुमान लगाना नामुमकिन है। हालांकि जब उनके बर्ताव, हरकतों और बयानों को साथ जोड़कर देखते हैं, तो एक पैटर्न नजर आता है कि आखिर ट्रम्प क्या और क्यों सोचते हैं? पूरी खबर पढ़िए…
“डील पूरी!” ट्रंप ने ईरान समझौते का किया धमाकेदार ऐलान
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐलान किया कि यूएस और ईरान ने एक डील पूरी कर ली है। इस डील के तहत होर्मुज स्ट्रेट फिर से खुल जाएगा और अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी खत्म हो जाएगी।
ईरान के सर्वोच्च नेता दिवंगत अयातुल्ला खामेनेई का अंतिम संस्कार जुलाई में होगा
ईरानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सर्वोच्च नेता दिवंगत अयातुल्ला सैयद अली खामेनेई के अंतिम विदाई समारोह, जुलूस और दफ़नाने की व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दे दिया गया है।
“रोटी-नमक से स्वागत!” स्लोवाकिया में पीएम मोदी का ऐतिहासिक आगाज़
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार (स्थानीय समयानुसार) को स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा पहुंचे। स्लोवाक के विदेश मंत्री जुराज ब्लानार ने ग्रैंड होटल रिवर पार्क में उनका स्वागत किया
‘तुम्हारे हिंदू मंदिर निशाने पर हैं। दिल्ली और हरियाणा के लोगों, तुमने 6 जून, 1984 को भिंडरांवाले की मौत पर मिठाइयां बांटी थीं। अब हम इसका बदला तुम्हारे मंदिरों में ब्लास्ट करके लेंगे। इसलिए अपने बच्चों को बचाओ और 5-6 जून को कोई सफर न करो।’ 4 जून की सुबह 9:54 बजे पंचकूचा के मेयर श्यामलाल बंसल को धमकी भरा ये ई-मेल मिला। इसमें दिल्ली-हरियाणा के 6 बड़े मंदिरों में ब्लास्ट करने की धमकी थी। मेल मिलते ही लोकल पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हो गईं। डॉग स्क्वाड और एंटी-बम स्क्वाड बुलाई गईं। मंदिर खाली कराए गए, लेकिन कुछ नहीं मिला। जांच आगे बढ़ी, तो पता चला कि धमकी के पीछे पाकिस्तान में एक्टिव खालिस्तान नेशनल आर्मी है। इसके बाद दिल्ली और हरियाणा पुलिस की लोकल इंटेलिजेंस यूनिट को एक्टिव कर दिया गया। पाकिस्तान से सटे बॉर्डर के 50 किलोमीटर के दायरे में गांवों और धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई। अजरबैजान में भारत विरोधी सम्मेलन, तीन देशों से खालिस्तान समर्थक पहुंचे क्या खालिस्तान के नए टेरर मॉड्यूल में हिंदू मंदिर टारगेट पर हैं? खालिस्तान नेशनल आर्मी के काम करने का तरीका क्या है? दैनिक भास्कर ने NIA के अफसरों और डिफेंस एक्सपर्ट्स से ये सवाल पूछे। जवाब मिला कि धार्मिक स्थलों पर दहशत फैलाने की साजिश 16 जनवरी को अजरबैजान में हुए भारत विरोधी सम्मेलन का हिस्सा हो सकती है। इसमें कनाडा, अमेरिका और पाकिस्तान में रहने वाले खालिस्तानी संगठनों के बड़े नेता शामिल हुए थे। बीते 2 साल में खालिस्तानी टेरर मॉड्यूल देश के 10 बड़े मंदिरों को लेकर धमकी दे चुका है। उसके टारगेट पर नागपुर का RSS हेडक्वार्टर भी है। अलग-अलग संगठनों को मिलाकर बनी खालिस्तान नेशनल आर्मी 28 जनवरी से 10 जून 2026 तक दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, गुजरात और महाराष्ट्र में धमकी भरे ई-मेल मिले हैं। इसमें हिंदू मंदिर, सरकारी इमारतें, स्कूलों और रेल नेटवर्क को बम से उड़ाने की धमकी दी गई। सभी की जिम्मेदारी खालिस्तान के नए मॉड्यूल KNA, यानी खालिस्तान नेशनल आर्मी ने ली है। खालिस्तानी टेरर फोर्सेस पर स्टडी कर चुके भारतीय सेना के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल संजय कुलकर्णी कहते हैं, ‘भारत में बब्बर खालसा इंटरनेशनल, खालिस्तान लिबरेशन फोर्स और सिख फॉर जस्टिस जैसे आतंकी संगठन दशहत फैला रहे हैं। इसमें खालिस्तान नेशनल आर्मी का नाम भी जुड़ गया है। ये कोई संगठन नहीं, बल्कि नया आतंकी मॉड्यूल है।’ ‘भारत के राजनीतिक दबाव के बाद कनाडा और अमेरिका में खुलकर ऑपरेट करना खालिस्तानी संगठनों के लिए मुश्किल हो गया है। इसलिए ये गुट नए नाम से पाकिस्तान और अजरबैजान जैसे इस्लामिक देशों में ऑपरेट कर रहे हैं। वहां ये बगैर रोक-टोक के भारत के खिलाफ रणनीति बना सकते हैं।’ पुराने संगठनों ने नया मॉड्यूल बनाया, पाकिस्तान-अजरबैजान में बेस केंद्रीय जांच एजेंसी NIA के मुताबिक, खालिस्तान नेशनल आर्मी की गतिविधियों में एक कॉमन पैटर्न दिखता है। 28 जनवरी को पहली बार इससे जुड़े ई-मेल में दिल्ली के द्वारका कोर्ट में ब्लास्ट की धमकी मिली। 30 जनवरी को पंजाब-हरियाणा सचिवालय को ई-मेल भेजा गया। फरवरी में संसद में ब्लास्ट की धमकी मिली। जांच एजेंसी से जुडे़ एक अधिकारी बताते हैं, ‘18 जून 2023 को खालिस्तान टाइगर फोर्स के चीफ हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद पाकिस्तान में एक्टिव खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स और बब्बर खालसा इंटरनेशनल जैसे आतंकी संगठन नए मॉड्यूल तैयार कर रहे हैं। खालिस्तान नेशनल आर्मी इसी का हिस्सा है।’ ‘ISI के समर्थन से पाकिस्तान में बैठे खालिस्तान जिंदाबाद फोर्स प्रमुख रंजीत नीटा और बब्बर खालसा इंटरनेशनल का सरगना बावधा सिंह तुर्किए और अजरबैजान में नेटवर्क फैला रहे हैं। 16 जनवरी, 2026 को अजरबैजान की राजधानी बाकू में एक सम्मेलन हुआ था। इसमें अमेरिका, कनाडा और पाकिस्तान के चरमपंथी नेता शामिल हुए।’ अधिकारी के मुताबिक, अजरबैजान सम्मेलन के 11 दिन बाद ही 28 जनवरी को गुजरात के स्कूलों, फिर फरवरी, मार्च और जून में मंदिरों-सरकारी इमारतों में ब्लास्ट की धमकियां मिलीं। धमकी भरे ई-मेल खालिस्तान नेशनल आर्मी ने भेजे थे। ये साबित करता है कि भारत में दहशत फैलाने का ये पैटर्न अजरबैजान बैठक में तैयार साजिश का हिस्सा है। डिफेंस एक्सपर्ट्स का मानना है कि खालिस्तानी नेटवर्क को अजरबैजान के समर्थन की 2 अहम वजह हो सकती हैं- पहली: भारत अजरबैजान के दुश्मन आर्मेनिया के साथ सैन्य सहयोग बढ़ा रहा है। भारत आर्मेनिया को हथियार बेचता है। इसमें पिनाका रॉकेट लॉन्चर और आकाश-1S मिसाइल शामिल हैं। 2023 में अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच संघर्ष हुआ था। 2024 में अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव ने भारत से आर्मेनिया को हथियार न देने की गुजारिश की थी। दूसरी: अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच संघर्ष की वजह नागोर्नो-काराबाख एरिया है। इस पर दोनों दावा करते हैं। पाकिस्तान इस मसले पर अजरबैजान के साथ है। इसके बदले अजरबैजान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान का पक्ष लेता रहा है। पहलगाम हमले के बाद भारत के पाकिस्तान पर हवाई हमलों की अजरबैजान ने निंदा की थी। पूर्व DGP बोले- ई-मेल के जरिए धमकियां देना नया पैटर्न 1986 से 1988 के बीच पीलीभीत में खालिस्तानी संगठनों पर कार्रवाई कर चुके यूपी के पूर्व DGP बृजलाल ने खालिस्तानी आतंकियों के खिलाफ अपने ऑपरेशन से जुड़ा एक किस्सा सुनाया। 1987 में सितंबर में आतंकियों ने पीलीभीत के उदासीन मठ में दो संतों की हत्या कर दी थी। वे डेरे से साधुओं की जीप लेकर भाग रहे थे। गश्त पर निकले दो सिपाहियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की। आतंकियों ने उन्हें भी गोली मार दी। पीलीभीत में एक ही दिन में 4 मर्डर खालिस्तान सपोर्टर ग्रुप की पहली घटना थी। इसी दौरान यूपी में पहली बार भिंडरावाले टाइगर फोर्स के पोस्टर चिपकाए गए। उस वक्त बृजलाल पीलीभीत के SP थे। वे 13 पुलिसवालों की टीम लेकर आतंकियों को दबोचने पंजाब चले गए। उनकी टीम तरन तारन से 2 आतंकियों को पकड़कर यूपी लाई थी। ये खालिस्तान मूवमेंट के खिलाफ उस वक्त की बड़ी कार्रवाई थी। क्या अब खालिस्तान ने भारत में ऑपरेट करने का पैटर्न बदला है? जवाब में बृजलाल कहते हैं, ‘ई-मेल के जरिए धमकियां देना नया पैटर्न है। अब तक ये संगठन मौजूदगी दर्ज कराने के लिए गुरुद्वारों पर पर्चे लगाते या ऑडियो-वीडियो टेप रिलीज करते थे। अब ई-मेल भेजकर डिजिटल टेरर फैला रहे हैं।’ गुजरात का CM ऑफिस और नगर निगम कार्यालय भी टारगेट पर ई-मेल के जरिए धमकी भेजने का सबसे नया मामला गुजरात का है। 10 जून को खालिस्तान नेशनल आर्मी के नाम से सरकारी आईडी पर भेजे गए ईमेल में गांधीनगर में CM ऑफिस, अहमदाबाद नगर निगम और RSS के ऑफिस को बम से उड़ाने की धमकी दी गई। यहां तलाशी अभियान भी चलाया गया, लेकिन कुछ नहीं मिला। गुजरात के DGP जीएस मलिक कहते हैं, ‘धमकी भरे ई-मेल्स को गुजरात पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां गंभीरता से ले रही हैं। हर धमकी के बाद लोकल पुलिस, बम निरोधक दस्ते, खुफिया इकाइयों और साइबर विशेषज्ञों को एक्टिव किया जाता है।’ खालिस्तान का दावा- पूरे पंजाब, हरियाणा और दिल्ली में फैला नेटवर्क अगस्त, 2024 में खालिस्तानी संगठन सिख फॉर जस्टिस ने मैप जारी कर 7 राज्यों में नेटवर्क होने का दावा किया था। इनमें दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पंजाब और राजस्थान शामिल हैं। NIA के मुताबिक, इस नेटवर्क के जरिए 2 साल में पंजाब के 6 पुलिस स्टेशनों पर ग्रेनेड हमले किए गए। इसी साल 27 अप्रैल को पटियाला के राजपुरा में रेलवे ट्रैक पर बम लगाने की कोशिश के दौरान धमाका हुआ, जिसमें आरोपी की मौत हो गई थी। …………………………… ये खबर भी पढ़ेंकश्मीर में हिज्बुल्लाह जैसे ड्रोन अटैक का खतरा, पाकिस्तान से 4 आतंकी घुसे जम्मू कश्मीर में आतंकी हिजबुल्लाह की तर्ज पर हमले की साजिश रच रहे हैं। 26 अप्रैल को खुफिया एजेंसियों को इनपुट मिला कि साउथ लेबनान का रहने वाले आतंकी शादाब बाजी पाकिस्तान के रास्ते भारत में दाखिल हुआ। उसके साथ 3 पाकिस्तानी आतंकियों ने भी घुसपैठ की है। लेबनानी आतंकी हिजबुल्लाह ड्रोन हमलों में माहिर होते हैं। खुफिया एजेंसी को शक है कि संदिग्ध आतंकी कश्मीर में ड्रोन हमलों की तैयारी कर रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर...
जनवरी से मई तक, चीनी रेलवे ने 1.67 अरब टन माल का परिवहन किया
चाइना रेलवे ग्रु के अनुसार, इस वर्ष जनवरी से मई तक, चाइना रेलवे ने कुल 1.67 अरब टन माल का परिवहन किया, जो साल दर साल 1.8 प्रतिशत अधिक है
पीएम मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने नीस में विला केर्लियोस का किया दौरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने फ्रांस के नीस में विला केर्लियोस का दौरा किया। दोनों नेता विला केर्लियोस में घूमते हुए हल्की-फुल्की बातचीत करते नजर आए।
बेरूत पर इजरायली हमला: ट्रंप का गुस्सा फूटा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार सुबह लेबनान की राजधानी बेरूत पर हुए इजरायली हवाई हमले पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है
पिछले हफ्ते अमेरिकी हमलों में 3 भारतीय नाविकों की मौत हो गई। विदेश मंत्री जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से फोन पर बात की और कड़ा विरोध दर्ज कराया। लेकिन इसी बातचीत का जो ब्यौरा रूबियो ने दिया, उस पर भारत में हंगामा मचा है। इसी से जुड़े 5 जरूरी सवालों के जवाब; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: अमेरिकी हमले में भारतीय नाविकों की मौत का पूरा मामला क्या है?जवाबः 8 जून 2026 की दोपहर करीब सवा दो बजे। ओमान की खाड़ी में डूबते जहाज से एक आवाज गूंजी- सर, ये मोटर टैंकर मैरिवेक्स है। जहाज डूब रहा है। थोड़ी देर बाद एक और आवाज आई- ‘सभी 24 क्रू सदस्य भारतीय हैं। प्लीज जल्दी मदद करो।’ इसके बाद ओमान के मिलिट्री हेलीकॉप्टरों और इंडियन कोस्ट गार्ड की मदद से सभी को सुरक्षित निकाल लिया गया। दो दिन बाद ही ‘MT सेटेबेलो’ नाम के जहाज पर भी हमला हुआ। इसमें सवार 28 में से 24 क्रू मेंबर्स भारतीय थे। इनमें 3 की मौत हो गई। तीसरा हमला 11 जून को ओमान तट के पास 20 भारतीय नाविकों वाले एमटी जलवीर पर हुआ। जहाज के इंजन वाले हिस्से पर दो हेलफायर मिसाइल दागी गईं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने खुद इन तीनों हमलों की जिम्मेदारी ली। सेटेबेलो और जलवीर पर हमले का वीडियो भी शेयर किया, जिसमें भारतीयों की मौत हुई थी। शिपिंग मिनिस्टर सर्बानंद सोनोवाल के मुताबिक, 10 जून को मारे गए तीनों भारतीय नागरिक आदित्य शर्मा, शिवानंद चौरसिया और पटनाला सुरेश के शव फिलहाल ओमान में हैं। विदेश मंत्रालय के सहयोग से जल्द भारत लाकर परिवारों को सौंपा जाएगा। सवाल-2: भारत ने अब तक इस मामले पर क्या रुख अपनाया है?जवाबः भारत ने 10 जून को सेटेबेलो पर हुए हमले के विरोध में अमेरिका के कार्यवाहक राजदूत जेसन मीक्स को तलब किया और चिंता जताई। जलवीर पर हमले के बाद एक बार फिर मीक्स को तलब किया गया। विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी कर हमलों की निंदा की। बयान में कहा, 'इस क्षेत्र में शिपिंग पर लगातार हमले की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं और इसकी सीधी वजह इस इलाके में चल रहा संघर्ष है। जल्द से जल्द अंतर्राष्ट्रीय समुद्री रास्तों से बिना रुकावट के दोबारा व्यापार शुरू होना चाहिए।' हालांकि इसमें अमेरिका का कहीं जिक्र नहीं था। हालांकि देश में बढ़ते आक्रोश के बीच 12 जून को भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो से फोन पर बात कर हमलों पर कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने एक्स पर बताया, ‘आज शाम अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बात हुई। मैंने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना के हमलों के खिलाफ़ भारत का कड़ा विरोध दोहराया, जिनमें तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई। कमर्शियल शिपिंग को निशाना बनाने वाली ऐसी घातक कार्रवाई किसी भी तरह से उचित नहीं है।’ सवाल-3: क्या अमेरिका को भारतीय नाविकों के मारे जाने का पछतावा है?जवाबः अमेरिका की हालिया प्रतिक्रियाओं से नहीं लगता कि अमेरिका को इसका कोई पछतावा है… भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिबल के मुताबिक मार्को रूबियो का बयान बहुत ज्यादा कठोर था। उन्होंने भारतीय नाविकों की मौत को सही ठहराने की कोशिश की। एक मित्र देश के निहत्थे नागरिकों की मौत पर उन्होंने कोई दुख नहीं जताया। कांग्रेस नेता और लोकसभा सांसद शशि थरूर ने भी X पर लिखा, ‘रूबियो का बयान पढ़कर झटका लगा। इसमें भारतीय नागरिकों की मौत पर न तो दुख जताया गया है और न ही संवेदना। भारत का कोई 'मित्र' और रणनीतिक साझेदार इतना असंवेदनशील कैसे हो सकता है?’ कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि अमेरिका ने न तो लोगों की मौत को स्वीकार किया, न ही जिम्मेदारी ली और न कोई पछतावा जाहिर किया। इसके बजाय, विदेश मंत्री रुबियो ने कथित तौर पर चेतावनी जारी कर दी। कहा अमेरिकी मिलिट्री के आदेशों का पालन न करना 'बर्दाश्त नहीं' किया जाएगा। यह आदेश की भाषा है, पछतावे की नहीं।’ सवाल-4: क्या भारत ने अपने नाविकों की मौत का मुद्दा मजबूती से नहीं उठाया?जवाबः जियो-पॉलिटिक्स, डिप्लोमेसी और डिफेंस एक्सपर्ट्स भारत सरकार के रुख पर सवाल उठा रहे हैं। सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च में स्ट्रैटेजिक स्टडीज के प्रोफेसर डॉ. ब्रह्म चेल्लानी के मुताबिक, ‘भारतीय नाविकों की मौत पर विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया कमजोर ही है। इसे 'उचित नहीं' बताया गया है, मानो निहत्थे नाविकों की हत्या कोई ऐसी बात हो जिस पर बस बहस की जा सकती है। अभी भी अमेरिका से माफी मांगने या पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा देने की कोई मांग नहीं की गई है। ऐसा कोई संकेत नहीं है कि नई दिल्ली इस मामले को सामान्य डिप्लोमैटिक औपचारिकताओं से आगे ले जाने का इरादा रखती है।’ भारतीय सेना से रिटायर्ड मेजर जनरल जी. डी. बख्शी के मुताबिक, ‘अब तक 100 से ज्यादा चीनी जहाज अमेरिकी नाकेबंदी पार कर चुके हैं, लेकिन न तो किसी चीनी जहाज पर हमला हुआ है और न ही रूसी जहाज पर। इसके उलट भारत, जिसने अमेरिका के साथ अच्छे संबंध बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, उसके जहाजों को निशाना बनाया गया। जब भारत में लोगों का गुस्सा बढ़ा, तब जाकर विदेश मंत्रालय ने कड़ा विरोध दर्ज कराया।’ द हिन्दू अखबार के अंतरराष्ट्रीय संपादक स्टैनली जॉनी ने एक्स पर लिखा है, 'भारत यूक्रेन पर रूसी हमले की निंदा में किसी का नाम नहीं लेता समझ आता है, कतर पर इजराइली बमबारी की निंदा में नाम लेने से बचना भी समझ आता है। लेकिन भारत उस देश का नाम क्यों नहीं लेता, जिसने भारतीय नागरिकों को ले जा रहे जहाजों पर मिसाइलें दागीं और उनमें से तीन भारतीयों की जान ले ली। वह भी भारत के पड़ोस के समुद्री क्षेत्र में।’ पवन खेड़ा के मुताबिक, ‘भारत को मांग करनी चाहिए थी कि अमेरिका अपने हमले में तीन युवा भारतीय नाविकों की हत्या के लिए बिना शर्त माफी मांगे।’ हालांकि यूनाइटेड स्टेट्स इंडिया पॉलिटिकल एक्शन कमेटी के डायरेक्टर और विदेश मामलों के जानकार रोबिंदर सचदेव का मानना है, 'कूटनीतिक तरीके से भारत सरकार का रुख सबसे मजबूत है। ऐसे मामलों में सरकार बैलेंस रुख ही रखती है, लेकिन आम लोग न्यूयॉर्क में केस फाइल कर सकते हैं। पीड़ित परिवार अमेरिका से मुआवजा भी मांग सकता है।' सवाल-5: इससे पहले अमेरिका के साथ ऐसी क्राइसिस हुई, तब क्या हुआ?जवाबः भारत पहले कई बार अमेरिका के सामने कड़ा डिप्लोमैटिक प्रतिरोध दर्ज करा चुका है - 1. 2009: भारतीय डिप्लोमैट देवयानी खोब्रागड़े की गिरफ्तारी 2. 2009-2011: अमेरिकी एयलाइंस का दो बार पूर्व राष्ट्रपति कलाम की तलाशी लेना 3. 2010: साड़ी पहने होने के चलते भारतीय राजदूत की तलाशी *****रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास-----------------------------------------------------------ये खबर भी पढ़ें…पापा के कहने पर 'किलर' बने:5 बच्चे पैदा करने की जिद में 3 शादियां; ट्रम्प सनकी हैं या साइकोपैथ, 80वें जन्मदिन पर पूरा एनालिसिस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कमोबेश हर रोज दुनिया को अपनी बातों और हरकतों से हैरान करते हैं। वो खुद भी कहते हैं कि मेरा अनुमान लगाना नामुमकिन है। हालांकि जब उनके बर्ताव, हरकतों और बयानों को साथ जोड़कर देखते हैं, तो एक पैटर्न नजर आता है कि आखिर ट्रम्प क्या और क्यों सोचते हैं? पढ़ें पूरी खबर…
ट्रंप ने कहा 'ईरान संग समझौता ओबामा के जेसीपीओए से बेहतर', आखिर क्या थी वो डील?
अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए जेसीपीओए समझौते से बेहतर डील करने का ऐलान किया। 2015 में ईरान और छह विश्व शक्तियों के बीच एक ऐतिहासिक परमाणु समझौता हुआ था, जिसे ज्वाइंट कंप्रेहेंसिव प्लान ऑफ एक्शन (जेसीपीओए), यानी 'संयुक्त व्यापक कार्ययोजना' (आसान भाषा में ईरान परमाणु समझौता) कहा जाता है। इसका उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करना और बदले में उस पर लगे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों में राहत देना था।
भूकंप से काँपा फिलीपींस, 61 मौतें, 75 हजार से ज्यादा घर मलबे में तब्दील
फिलीपींस के दक्षिणी द्वीप मिंडानाओ के तट के पास 8 जून को आए 7.8 तीव्रता के भीषण भूकंप में कम से कम 61 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 40 लोग अब भी लापता हैं। इस आपदा में 1,403 लोग घायल हुए हैं। यह जानकारी रविवार को फिलीपींस की राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन परिषद (एनडीआरआरएमसी) ने दी।
फ्रांस के नीस शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भारतीय समुदाय ने जोरदार स्वागत किया। इंतजार में खड़े लोगों ने पीएम के पहुंचते ही 'मोदी मोदी' और 'भारत माता की जय' के नारे लगाए
अनंतनाग की रहने वाली गुलशन बानो जमीन पर गिरे सेब नहर में फेंक रही थीं। अचाबल में उनका चार कनाल (आधा एकड़) का बाग है। 5 और 9 जून को हुई तूफानी बारिश और ओलों ने लगभग 90% फसल बर्बाद कर दी। सेब टूटकर गिर गए और बेचने लायक भी नहीं बचे। गुलशन कहती हैं, ‘यही रोजी-रोटी का अकेला जरिया है। इस साल लगा था कि अच्छी फसल होगी, लेकिन 22 मिनट के तूफान ने सारे सपने तोड़ दिए। अक्टूबर-नवंबर में बेटी की शादी करने वाले थे, लेकिन अब लगता है कि टालनी ही पड़ेगी।‘ कश्मीर में इस दर्द से गुजरने वाली गुलशन अकेली नहीं है। यहां एक महीने में 7 बार ओले गिरे, जिससे सेब कारोबार से जुड़े 12 लाख लोगों की रोजी-रोटी मुश्किल में आ गई है। हर साल कश्मीर से करीब 20 लाख मीट्रिक टन सेब देशभर में जाता है, लेकिन इस साल 7 लाख मीट्रिक टन बर्बाद हो गया। इससे सेब कारोबारियों को 300 से 400 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। ‘ऐसी बेबसी पहले नहीं देखी, सुसाइड का ख्याल आ रहा’ कश्मीर देश में सेब का सबसे बड़ा उत्पादक है। कुल सेब का 70% हिस्सा यहीं होता है। हर साल इससे करीब 8 से 10 हजार करोड़ रुपए का रेवेन्यू मिलता है। पिछले दो महीनों में बारिश और ओले गिरने से बारामूला, शोपियां, अनंतनाग और कुलगाम समेत कई जिलों में सेब की 80-85% फसल बर्बाद हो गई। अनंतनाग के अचाबल में गुलशन का परिवार इसी बर्बादी से परेशान है। वे कहती हैं, ‘किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए बैंक से 2 लाख रुपए का लोन लिया था। खाद भी उधार में खरीदी। 50 हजार रुपए का बिजली बिल बकाया है। अब सेब की फसल बर्बाद होने के बाद हम टूट चुके हैं। पहली बार इतने बेबस हैं कि खुदकुशी का ख्याल आ रहा है।’ ‘22 मिनट ओले गिरे और साल भर की मेहनत बर्बाद’ हम शोपियां पहुंचे तो फैयाज अहमद भट्ट अपने बगीचे में गिरे सेब इकट्ठा कर रहे थे। यहां एक दिन पहले ही ओले गिरे थे। फैयाज का 8 कनाल, यानी 1 एकड़ का बाग है। वे कहते हैं, ‘सीजन में 5-6 बार ओले गिरे हैं। अब ये सेब B और C कैटेगरी में भी बिकने लायक नहीं है। पेड़ों पर बचे फल भी किसी काम के नहीं हैं।’ वे नीचे गिरे फलों को दिखाते हुए कहते हैं, ‘देखिए, हर सेब पर निशान है। ऐसे सेब बाजार में नहीं बिकते। जून में फल आकार लेना शुरू करते हैं, लेकिन सिर्फ 22 मिनट ओले गिरने ने सब बर्बाद हो गया।’ फैयाज को लगातार दूसरी साल नुकसान उठाना पड़ा है। वे बताते हैं, ‘पिछले साल अच्छी फसल हुई थी, लेकिन हम उसे बाजार तक नहीं पहुंचा सके। रामबन के पास जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे करीब डेढ़ महीने बंद रहा था। सेब बागानों में रखे-रखे ही खराब हो गए और उन्हें नालों में फेंकना पड़ा। इस साल बहुत उम्मीद थी, लेकिन मौसम ने सब तबाह कर दिया।‘ ‘घर-परिवार का हर छोटा-बड़ा खर्च इसी बाग से चलता है। तीन बच्चे हैं। उनकी पढ़ाई का खर्च भी इसी से निकलता है। फल ही बर्बाद हो गए, तो ये सब काम कैसे होंगे। खाद और कीटनाशकों के लिए पहले ही 50 हजार रुपए उधार ले रखा है। अब समझ नहीं आ रहा कि दुकानदारों का कर्ज चुकाएं या परिवार का पेट भरें।‘ ‘3 से 4 लाख रुपए कमाते थे, इस बार 30 हजार भी नहीं मिलेंगे’ फैयाज को इस साल करीब 3 लाख रुपए का नुकसान उठाना पड़ा है। वे बताते हैं, ‘हर साल बाग से 3 से 4 लाख रुपए कमा लेता था, लेकिन इस बार 30 हजार रुपए भी नहीं मिल पाएंगे। बाग में हुई तबाही देखकर दिल इतना टूट जाता है कि बाग तक जाने का मन नहीं करता।‘ केंद्र सरकार से कश्मीर के सेब उद्योग के लिए विशेष राहत पैकेज की मांग करते हुए वो कहते हैं, ‘हमें कर्ज माफी, मुआवजा और आर्थिक मदद चाहिए, ताकि बच्चों की पढ़ाई जारी रहे और हम गुजर-बसर कर सकें।‘ ’बच्चों का पेट भरें या पढ़ाई का इंतजाम करें’ कुलगाम के रहने वाले अब्दुल रशीद नजर के पास करीब 6 कनाल का बाग है। चार बेटियों और एक बेटे वाला परिवार इसी से चलता है। वे बताते हैं, ‘आमतौर पर सीजन में सेब के 400 से 500 बॉक्स तैयार हो जाते हैं, लेकिन इस बार लगातार दूसरे साल नुकसान उठाना पड़ रहा है।’ ‘पेड़ों पर सिर्फ 10% फल ही बचे हैं, लेकिन वो भी खराब हो चुके हैं। इस साल आमदनी की कोई उम्मीद नहीं है। बच्चों की पढ़ाई खतरे में पड़ गई है। फीस, किताबें, यूनिफॉर्म और स्कूल आने-जाने का खर्च कैसे उठाएंगे।‘ रशीद ने भी किसान क्रेडिट कार्ड से करीब 2 लाख का कर्ज लिया है, जो अगस्त तक चुकाना है। वे कहते हैं, ‘समझ नहीं आ रहा कि अब बच्चों का पेट भरें, पढ़ाई का इंतजाम करें या कर्ज चुकाएं।’ जम्मू-कश्मीर में पिछले साल करीब 21 लाख मीट्रिक टन सेब की पैदावार हुई थी। 2024 में ये आंकड़ा करीब 20 लाख मीट्रिक टन था। इस इंडस्ट्री से 12 लाख लोगों की रोजी-रोटी चलती है। जम्मू-कश्मीर की GDP में इसका योगदान 8-10% है। बाढ़ और हाई-वे बंद रहने के कारण 2025 में कश्मीर की एप्पल इंडस्ट्री को लगभग 600 से 700 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ था। इस साल भी ओले और बारिश की वजह से 300 से 400 करोड़ रुपए नुकसान होने का अनुमान है। कश्मीर फ्रूट ग्रोअर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष फैयाज अहमद मलिक कहते हैं कि ये साल खेती और किसानों के लिए सिर्फ आपदा लेकर आया। सेब की बागवानी से जुड़े 12 लाख से ज्यादा लोग इससे प्रभावित हुए हैं। अप्रैल में कुलगाम, नेहामा और शोपियां में सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। 12 मई को बारामूला जिले के क्रीरी, वगोरा, कुंजर, अंडरगाम और लोलीपोरा इलाकों में ओला गिरने से बाग तबाह हुए हैं। फैयाज कहते हैं, ‘हम लंबे समय से फसल बीमा योजना लागू करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अगर मार्च में ही योजना लागू कर दी गई होती, तो प्रभावित किसानों को अब तक मुआवजा मिल चुका होता।‘ …………….. ये खबर भी पढ़ें… वंदे भारत से 5 घंटे में जम्मू से श्रीनगर अब जम्मू ट्रेन के जरिए सीधे कश्मीर घाटी से जुड़ गया है। उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना के तहत जम्मू से श्रीनगर तक वंदे भारत एक्सप्रेस चलने से घाटी में बदलाव दिख रहा है। जम्मू-श्रीनगर के बीच 270 किमी की दूरी है। यहां रोड कनेक्टिविटी हमेशा बड़ी चुनौती रही है। पढ़िए पूरी खबर…
“अमेरिका-ईरान डील पर ट्रंप का दावा” : होर्मुज जलमार्ग खुलेगा सभी के लिए
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर दावा किया कि अमेरिका और ईरान के बीच एक अहम समझौते पर रविवार को हस्ताक्षर होंगे
फ्रांस में अगले हफ्ते जी7 शिखर सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है। इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी फ्रांस पहुंचने वाले हैं।
चीन ने अमेरिका द्वारा कुछ चीनी कंपनियों को 'चीनी सैन्य उद्यम सूची' में शामिल करने का जवाब दिया
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में कई चीनी कंपनियों को चीनी सैन्य उद्यम सूची में शामिल किया, चीनी वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने शनिवार को इस बारे में कहा कि चीन इस पर तीव्र असंतोष और दृढ़ विरोध करता है।
1876-78 का दौर। भारत में 55 लाख से ज्यादा लोग अकाल मौत मारे गए। उस तबाही की जड़ में था- सुपर अल नीनो। प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से 3 डिग्री सेल्सियस ज्यादा उबला और पूरी दुनिया का मौसम पलट गया। अब 148 साल बाद वैसी ही दस्तक फिर सुनाई दे रही है। 11 जून 2026 को अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA ने आधिकारिक ऐलान किया कि अल नीनो शुरू हो चुका है। जल्द ही ये 'सुपर अल नीनो' में तब्दील हो सकता है। भारतीय मौसम विभाग के मुताबिक इस मानसून सामान्य से 10% कम बारिश होगी। सूखे की आशंका 60% पहुंच गई है। पीएम मोदी ने भी राज्यों से कहा- अल नीनो के खतरे के लिए तैयार रहें। आखिर ये अल नीनो और सुपर अल नीनो क्या है, दूर समुद्र का पानी गर्म होने से भारत का मौसम कैसे बदलता है और इससे आपके खाना-पानी और बिजली पर कितना असर पड़ेगा; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… ****** ग्राफिक्स- दृगचंद्र भुर्जी और अंकलेश विश्वकर्मा ------------- मौसम से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… 6 घंटे में मार सकती है बांदा की गर्मी; 117 डिग्री बुखार जितना तापमान; रेगिस्तान से भी गर्म क्यों है ये इलाका यूपी का बांदा अप्रैल के आखिरी 10 में से 5 दिनों में दुनिया का सबसे गर्म शहर रहा है। 27 अप्रैल को तापमान रिकॉर्ड 47.6 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। ये इस गर्मी का सबसे ज्यादा पारा था। अगर इसमें कोई इंसान खुले आसमान में रहे, तो 30 मिनट से 6 घंटों के बीच उसकी मौत हो सकती है। पूरी खबर पढ़िए…
जर्मन राष्ट्रपति के आवास में सेक्स डॉल आर्ट पर छिड़ी बहस
जर्मनी के राष्ट्रपति भवन ‘बेलव्यू पैलेस’ को मरम्मत के लिए बंद करने से पहले, वहां एक कला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया है. इस प्रदर्शनी में सुर्खियां बटोरने वाली कांसे की मूर्ति के अलावा भी कई आधुनिक कलाकृतियां हैं
फ्रांस में G7 शिखर सम्मेलन में हो सकती है मोदी-ट्रंप की मुलाकात; क्या है एजेंडा?
15 जून को दुनिया की सात सबसे बड़ी विकसित अर्थव्यवस्थाओं के समूह यानी जी7 नेताओं का शिखर सम्मेलन होने जा रहा है
भारत और केन्या ने अलग-अलग क्षेत्रों में साझेदारी और निवेश पर की चर्चा
केन्या में भारत के उच्चायुक्त डॉ. आदर्श स्वैका ने केन्या के एल्डोरेट शहर (उवासिन गिशु प्रांत) का दौरा किया
ट्रंप का दावा: अमेरिकी सेना ने 'ट्रेन डी अरागुआ' के कुख्यात सरगना को मार गिराया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के अपराधी गिरोह 'ट्रेन डी अरागुआ' के नेता के मारे जाने का दावा किया है
अमेरिका-ईरान डील को लेकर 'फेक मीडिया रिपोर्ट' पर भड़के वेंस, बोले- लोग झूठे पोस्ट पर कर रहे भरोसा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने पुष्टि की है कि इस्लामाबाद एमओयू अपने आखिरी चरण में पहुंच चुका है
14 मई 2026, दिल्ली के जामिया नगर थाने में 23 साल की लड़की ने 6 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई। उसने मेरठ के रहने वाले फहीम, उसके मां-बाप और दो भाई के खिलाफ अगवा करने, बंधक बनाने, गैंगरेप, ब्लैकमेलिंग और धर्मांतरण का दबाव बनाने का आरोप लगाया। लड़की हिंदू है। उसने बताया कि 32 साल के फहीम ने साहिल बनकर पहले दोस्ती की। फिर मेरठ में अपने घर ले गया। वहां फहीम, उसके पिता, भाई और मौलवी ने रेप किया। वे कहते थे कि हिंदू लड़की के साथ ऐसा करने से जन्नत मिलती है। पूरा परिवार बुर्का पहनने और गोमांस खाने के लिए दबाव बनाता था। उनके चंगुल से निकलने में पांच साल लग गए। इंस्टाग्राम पर दोस्ती, फिर नशा देकर अश्लील वीडियो बनाए पीड़ित ने बताया, ‘नवंबर 2021 में इंस्टाग्राम पर साहिल की रिक्वेस्ट आई थी। कुछ ही महीनों में दोस्ती गहरी हो गई। मार्च 2022 में साहिल ने मुझे दिल्ली के बाटला हाउस (जाकिर नगर) बुलाया।’ ‘उससे मिलने पहुंची, तो बातों में फंसाकर दोस्त अली के फ्लैट पर ले गया। अली से मेरे लिए जूस मंगाया। उसे पीते ही नशा होने लगा। इसके बाद साहिल और अली ने मेरा रेप किया। वीडियो भी बना लिया।’ ’होश आया, तो साहिल ने कहा, तुम्हारे लिए सरप्राइज है। उसने सारे वीडियो और फोटो दिखाईं। बोला- किसी को बताना नहीं। जब बुलाऊं, तो आ जाना, वरना तुम्हारे मां-बाप को सारी रिकॉर्डिंग भेज दूंगा। इन्हें वायरल भी कर दूंगा।’ पिस्टल दिखाकर किडनैपिंग, साहिल के घर पहुंचकर पता चला वो मुस्लिम है पीड़ित ने आगे बताया, ‘साहिल ने मुझे एक बार फिर बाटला हाउस बुलाया। पिस्टल दिखाकर धमकाया और दोस्त गोविंदा के साथ मेरठ के साठला गांव ले गया। यहां साहिल का घर है। वहां पहुंचने पर पता चला कि वो मुसलमान है। उसका असली नाम फहीम है। अभी मेरे साथ जितना बुरा हुआ, उससे ज्यादा बुरा होना बाकी था।’ 'उसी रात साहिल और फिर उसके अब्बू ने मेरे साथ संबंध बनाए। साहिल से कुछ कह पाती, उससे पहले ही वो बिना बताए सहारनपुर चला गया। मैंने साहिल की मां तस्लीमा और बहन इकरा से रोते हुए घर भेजने की गुजारिश की, लेकिन वे नहीं मानीं। दोनों ने मिलकर मारा-पीटा और कहा- अब तुम्हें यहीं रहना है।’ ’एक दिन साहिल के परिवारवालों ने मां को जबरदस्ती फोन कराया। कहा कि मैं उनसे बोलूं कि मैंने कोर्ट मैरिज कर ली है और अब मुझे न तलाशें। मैंने उनके दबाव में आकर यही सब कह दिया। इसके बाद मेरी मां ने मुझे खोजना भी बंद कर दिया। उन्हें लगा सब मेरी मर्जी से हो रहा है।’ साहिल से निकाह पढ़वाया, मौलवी बोला- खुशनसीब है, मुसलमान के घर आ गई पीड़ित ने आगे बताया, ‘करीब 7 दिन बाद साहिल की मां और बहन मुझे अगवानपुर के एक मदरसे ले गईं। साहिल के मामा हाफिज मंजूर वहां मौलवी थे। उसने मुझसे मिलते ही कहा, ‘तू खुशनसीब है कि मुसलमान घर में आ गई। अब तुझे जन्नत मिलेगी। मैं अपने घर जाने के लिए रोने लगी, तो बोले- तेरा निकाह फहीम (साहिल) से ही होगा। फिर उससे मेरा निकाह पढ़वा दिया।’ 'साहिल के घरवाले मुझे वापस घर ले आए। मुझे पर गोमांस खिलाने के लिए दबाव बनाते थे। कहते कि ये नहीं खाओगी, तो मुस्लिम कैसे बनोगी। मुझसे मांस धुलवाते और पकाने के लिए कहते। एक दिन मेरे सामने ही मुर्गा काटा और उसका खून मेरे ऊपर डाल दिया।’ कितने लोग मेरे कमरे में आए, गिनती भी याद नहीं पीड़ित ने बताया- ‘निकाह के बाद साहिल के परिवार वाले मुझे एक मौलवी के पास ले गए। उसने मेरे साथ गलत हरकत की। फिर वो आए दिन घर आने लगा। परिवार वाले उसे मेरे कमरे में भेज देते। वो जोर-जबरदस्ती करता, लेकिन कोई मदद करने नहीं आता। फिर वो अपने साथ और लोगों को भी लाने लगा।‘ ‘मैंने विरोध किया तो मौलवी ने कहा, ये सब फ्री में नहीं करते, तेरी सास को पैसा देते हैं। तब मुझे समझ आया कि मेरी सास मुझसे धंधा करा रही है। वो कहती थी कि हमारे यहां हिंदू लड़की लाने का मतलब जन्नत जाने का रास्ता साफ करना है। वो अपने दूसरे दोनों बेटों से भी हिंदू लड़की लाने को कहती थी।' ‘गांव में और भी हिंदू लड़कियां, जिन्हें लड़के फंसाकर लाए’ गांव में किसी को पता नहीं चला कि आपको जबरदस्ती घर में रखा गया है? पीड़ित कहती हैं, ‘सब जानते थे, लेकिन किसी को ऐतराज नहीं था। मुस्लिमों के गांव में और भी हिंदू लड़कियां हैं, जो मेरी तरह फंसाकर लाई गई हैं। गांव के लोग मुझे परिवार के मुताबिक रहने की सलाह देते।‘ ‘3 महीने बाद प्रेग्नेंट हो गई, तो बच्चा रखने का दबाव डाला गया। बोला- अगर इसे कुछ हुआ, तो तू भुगतेगी। गांव के प्रधान फिरोज के जरिए मेरे आधार कार्ड पर पिता का नाम हटवाकर साहिल का नाम लिखवा दिया। मार्च 2023 में मेरे बेटी हुई। अब वो 3 साल की है।‘ ‘बेटी को लेकर ट्रेन से कटने गई तो अजनबी ने बचाया’ दिल्ली वापस कैसे लौटीं? पीड़ित ने बताया, ‘नवंबर 2024 की बात है। साहिल की परिवार के साथ कुछ खटपट हो गई। वो मुझे और बेटी को लेकर बाटला हाउस आ गया। दो ही महीने बाद जनवरी में हथियारों की तस्करी के मामले में उसे जेल हो गई।‘ साहिल के जेल जाने के बाद कहां रहीं? वो बताती हैं, ‘साहिल का परिवार डराता-धमकाता, इसलिए काफी दिनों तक बाटला हाउस में रही। एक दिन हिम्मत करके अपने घर चली गई। वहां भी माता-पिता से सहारा नहीं मिला। पिता शराब पीते हैं। मां अकेले क्या करतीं। साहिल और उसके परिवार से मैं अकेले लड़ते-लड़ते थक गई थी।‘ 'इसी साल 10 मई को बेटी को लेकर ट्रेन से कटने जा रही थी, तभी एक भाई ने रोक लिया। उन्होंने समझाया और मदद का भरोसा दिलाया। तब मैंने साहिल और उसके परिवारवालों के खिलाफ FIR कराई।' फहीम पर कई केस, हिंदू लड़की से निकाह पर गांववाले चुप इसके बाद हम साहिल उर्फ फहीम का बैकग्राउंड जानने के लिए उसके गांव साठला पहुंचे। पांच साल पहले उसका परिवार गांव का घर छोड़ चुका है। कस्बे में एक घर है, वहां ताला लगा है। आसपास रहने वाले फहीम (साहिल) का नाम सुनकर बात करने को तैयार नहीं हुए। ऑफ द रिकॉर्ड ये जरूर बताया कि उसका परिवार क्रिमिनल है। फहीम पर कई केस चल रहे हैं। पिता खुर्शीद पर डबल मर्डर का आरोप है। गांव में रहने वाले माजिद ने ही बात की। वे बताते हैं, 'फहीम पर मवाना थाने से गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई हो चुकी है। लूट के भी केस हैं। रंगदारी मांगने के आरोप लगते रहे हैं। वो सोशल मीडिया पर हथियारों के वीडियो और फोटो डालता है। ' हिंदू लड़की से जबरदस्ती शादी की बात पर माजिद कहते हैं, ‘कोई लड़की किसी के साथ उसके घर आ गई। परिवारवाले उसे बहू बता रहे, तो कोई क्या शक करेगा। हमें जबरदस्ती शादी करने का पता मीडिया से चला।’ गलत तरीके से पीड़ित का आधार कार्ड अपडेट कराने के आरोप में जेल भेजे गए गांव के प्रधान फिरोज जमानत पर बाहर आए हैं। वो कैमरे पर आए बिना कहते हैं, 'फहीम से मेरा कोई संबंध नहीं है। मुझ पर गलत आरोप लगे हैं। इससे ज्यादा कुछ नहीं बता सकता, पुलिस ने केस पर बात करने से मना किया है।' हिंदू लड़की को धोखे में रखकर शादी करने के सवाल पर वो कहते हैं, 'गांव में किसके घर में क्या हो रहा है, प्रधान को नहीं पता चलता। लड़की भी मेरे पास नहीं आई। मुझे खबरों से ही पता चला।’ हमने फहीम के मामा मंजूर हुसैन से भी कॉन्टैक्ट करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो सकी। पुलिस बोली- 5 आरोपी अरेस्ट, फहीम की बहन और भाई फरार पुलिस ने इस मामले में फहीम समेत 5 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें अब्बू खुर्शीद, अम्मी तस्लीम, भाई जैद और मौलवी शामिल हैं। एक बहन और भाई फरार हैं। केस की जांच SI शरण्या कर रही हैं। उन्होंने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ चल रही है। मेरठ के गांव में हिंदू लड़कियों को जबरदस्ती लाने के लड़की के आरोप पर कहा कि हर एंगल से छानबीन चल रही है। अभी ज्यादा कुछ नहीं बता सकते। स्टोरी में सहयोग: प्रवेश कुमार, भास्कर सहयोगी ……………………… ये खबर भी पढ़ें… मंत्री के बेटे पर पॉक्सो, RSS-BJP में दरार 17 साल की लड़की और उसके दोस्तों ने मिलकर नए साल की पार्टी रखी। 31 दिसंबर 2025 की रात एक फॉर्मफाउस पर जश्न शुरू हुआ। नाबालिग के साथ एक लड़की और 5 लड़के थे। इनमें एक केंद्रीय गृह राज्य मंत्री बंडी संजय कुमार का 25 साल का बेटा साई भागीरथ भी था। पढ़िए पूरी खबर…
ईरान-अमेरिका एमओयू फाइनल होने के बेहद करीब: ईरानी विदेश मंत्री अराघची
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान, अमेरिका के साथ चल रही बातचीत के बीच एक एमओयू को फाइनल करने के बहुत करीब है।
झांग क्वोछिंग ने 'विकास के लिए वैश्विक अभिसरण शिखर सम्मेलन' में भाषण दिया
चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के केंद्रीय पोलित ब्यूरो के सदस्य, चीनी उप प्रधान मंत्री झांग क्वोछिंग ने वीडियो लिंक के माध्यम से विकास के लिए वैश्विक अभिसरण शिखर सम्मेलन में भाग लिया और भाषण भी दिया।
अगर आप रोज एक करोड़ रुपए खर्च करें- बिना रुके, बिना छुट्टी लिए। तो इलॉन मस्क की मौजूदा संपत्ति खर्च करने में आपको करीब 26 हजार साल से ज्यादा लगेंगे। 11 जून 2026 को स्पेसएक्स के IPO ने मस्क को वो मुकाम दे दिया, जहां इंसानी इतिहास में कोई नहीं पहुंचा है, यानी पहला ट्रिलियनेयर। आखिर मस्क दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर कैसे बने, ये कितनी बड़ी रकम है और स्पेसएक्स आगे क्या करने वाली है; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: इलॉन मस्क की नेटवर्थ 1 ट्रिलियन डॉलर के पार कैसे पहुंची? जवाब: इलॉन मस्क की स्पेस इंजीनियरिंग कंपनी है स्पेसएक्स। ये रॉकेट, स्पेसक्राफ्ट वगैरह बनाती है। साथ ही ‘स्टारलिंक’ नाम से सैटेलाइट इंटरनेट सर्विसेज भी देती है। फरवरी 2026 में मस्क ने अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी ‘xAI’ को भी इसी में शामिल कर लिया था। AI प्लेटफॉर्म Grok इसी xAI का बनाया हुआ है। स्पेसएक्स अब तक प्राइवेट कंपनी थी, यानी इसके शेयर आम लोग शेयर मार्केट से नहीं खरीद सकते थे। 11 जून 2026 को इसने अमेरिकी शेयर बाजार ‘NASDAQ’ पर अपना IPO लॉन्च किया है। जब कोई कंपनी पहली बार शेयर बाजार में लिस्टेड होने के लिए शेयर जारी करती है, तो उसे IPO यानी ‘इनीशियल पब्लिक ऑफरिंग’ कहते हैं। रॉयटर्स ने कंपनी के दस्तावेजों और फोर्ब्स के अनुमानों के आधार पर हिसाब लगाया है कि जैसे ही स्पेसएक्स शेयर बाजार में ट्रेडिंग शुरू करेगी, मस्क की कुल संपत्ति 1.1 ट्रिलियन डॉलर पार कर जाएगी। ऐसा कैसे होगा, इसे आसान भाषा में समझते हैं… चूंकि IPO लॉन्च होने के बाद लोगों के शेयर खरीदने के चलते उसका प्राइस भी बढ़ता है। फोर्ब्स के मुताबिक, स्पेसएक्स का शेयर शुरुआती प्राइस, यानी 135 डॉलर से 3.5 डॉलर बढ़कर 138.5 डॉलर पहुंच जाए या फिर टेस्ला का शेयर 399 डॉलर से बढ़कर 424 डॉलर का हो जाए, तो मस्क की नेटवर्थ 1 ट्रिलियन डॉलर हो जाएगी। रुपए में करीब 95.35 लाख करोड़। सवाल-2: एक ट्रिलियन डॉलर से क्या-क्या खरीद सकते हैं मस्क? जवाब: किसी की कमाई कितनी ज्यादा है, इसे समझने का एक तरीका ये है कि उस रकम से क्या-क्या खरीदा जा सकता है। मस्क 1 ट्रिलियन डॉलर की नेटवर्थ से सैद्धांतिक रूप से कई देश खरीदने से लेकर मंगल ग्रह पर कॉलोनी तक बसा सकते हैं… दुनिया के कई देश खरीद सकते हैं मस्क (थ्योरिटिकली) मंगल ग्रह पर 10 लाख लोगों का शहर बसा सकते हैं एक खुद की न्यूक्लियर पावर्ड नेवी बना सकते हैं सभी रईस स्पोर्ट्स लीग और सैकड़ों टीमें खरीद सकते हैं हॉलीवुड के सबसे अमीर 5 फिल्म स्टूडियो खरीद सकते हैं दुनिया की सबसे अमीर 10 एयरलाइंस खरीद सकते हैं मुंबई शहर का हर घर खरीद सकते हैं सवाल-3: स्पेसएक्स इतनी रकम जुटाकर आगे क्या-क्या करने वाली है? जवाब: स्पेसएक्स इस रकम को 3 बड़े कामों में लगाएगी… 1. स्टारलिंक के लिए नए V3 सैटेलाइट खरीदेगी 2. अंतरिक्ष में AI डेटा सेंटर्स बनाएगी 3. रॉकेट सिस्टम पर इन्वेस्टमेंट बढ़ाएगी सवाल-4: मस्क के बाद सबसे ज्यादा नेटवर्थ वाले लोग कौन हैं? जवाब: इलॉन मस्क की नेटवर्थ न सिर्फ सबसे ज्यादा है, बल्कि लिस्ट में दूसरे स्थान पर मौजूद गूगल के CEO लैरी पेज की नेटवर्थ से 3.36 गुना ज्यादा है। सवाल-5: आम आदमी के नजरिए से 1 ट्रिलियन डॉलर कितनी बड़ी रकम है? जवाब: अगर आपकी एक महीने की सैलरी 1 लाख रुपए हो, तो इस हिसाब से आपकी सालाना सैलरी 12 लाख रुपए होगी। अगर आपके परिवार के 4 अन्य सदस्यों की सैलरी भी इतनी ही हो, तो परिवार की कुल सालाना कमाई हुई 60 लाख रुपए। अगर साल-दर साल इस 60 लाख रुपए से कोई खर्च न किया जाए, तो भी आपके पूरे परिवार को इलॉन मस्क की नेटवर्थ के बराबर पैसा जमा करने में 158 लाख साल लगेंगे। मस्क ने अपनी आधी संपत्ति दान करने का फैसला किया है। अभी दुनिया की आबादी करीब 8.29 अरब है। अगर मस्क दुनिया के हर व्यक्ति को अपनी नेटवर्थ से बराबर रकम बांट दें, तो सबको 121 डॉलर यानी करीब 11,500 रुपए मिलेंगे। वहीं वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, दुनियाभर में 70 करोड़ लोग भयंकर गरीबी में जी रहे हैं। मस्क चाहें तो इनमें से हर व्यक्ति को 1,430 डॉलर दे सकते हैं। ---------- रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास-----------------------------------------------------------ये खबर भी पढ़ें…चुटकी में हैक कर लेता है बैंक, दुनियाभर की सरकारों को Mythos AI का डर; क्या खातों में जमा आपका पैसा भी खतरे में है एंथ्रोपिक का नया AI मॉडल 'क्लॉड मिथोस' इतना खतरनाक है कि इसे आम लोगों के लिए रिलीज ही नहीं किया गया। हालांकि ये किसी तरह लीक हो गया है। एंथ्रोपिक के मुखिया डेरियो अमोदेई ने खुद इसके खतरे की चेतावनी दी है। पढ़ें पूरी खबर…
बांग्लादेश में भगवान राम की प्रतिमा के निर्माण पर प्रशासन ने लगाई रोक, इलाके में तनाव बढ़ा
बांग्लादेश के गाइबांधा जिले के पलाशबाड़ी उपजिला में स्थित श्रीश्री राधागोविंद और काली मंदिर परिसर में भगवान राम की दुनिया की सबसे बड़ी प्रतिमा के निर्माण पर रोक लगा दी गई है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह आदेश वहां के अधिकारियों ने दिया है। मंदिर के सलाहकार श्यामल कुमार महंत ने गुरुवार शाम मंदिर के सभागार में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह घोषणा की।
अफगानिस्तान में महिलाओं पर लगाए गए सख्त ड्रेस कोड को लेकर हो रहे प्रदर्शनों पर बल प्रयोग को लेकर संयुक्त राष्ट्र के विशेषज्ञों ने चिंता जताई। इन प्रदर्शनों में एक लड़के समेत दो लोगों की मौत हो गई और बीस से ज़्यादा लोग घायल हो गए।
श्रीलंका की महिला सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने भारत दौरे से मिली सीख साझा की
श्रीलंका की महिला सांसदों के प्रतिनिधिमंडल ने कोलंबो में भारत के उच्चायुक्त से मुलाकात की और पिछले महीने भारत दौरे से मिली सीख और अनुभव साझा किए।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका पिछले कई हफ्तों से गुप्त रूप से होर्मुज स्ट्रेट और उसके आसपास सैन्य अभियान चला रहा था। यही वजह है कि वैश्विक तेल बाजार अपेक्षाकृत स्थिर बना रहा।

