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राहुल बोलने उठे तो रोक दिया, फिर नहीं आया मौका:खड़गे ने कहा- प्रधानमंत्री सदन में आकर जवाब दें, 3 दिन के लिए टली संसद की कार्यवाही

संसद के मानसून सत्र के पांचवें दिन भी पेपर लीक का मुद्दा दोनों सदनों पर हावी रहा। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए, लेकिन पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने उन्हें तुरंत बोलने की अनुमति नहीं दी। उन्होंने कहा कि पहले सदन के पटल पर जरूरी पत्र रखे जाएंगे, उसके बाद उन्हें अवसर दिया जाएगा। हालांकि, लगातार हंगामे के कारण वह मौका नहीं आ सका और लोकसभा की कार्यवाही 27 जुलाई सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। सुबह 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने पेपर लीक और छात्रों पर कथित लाठीचार्ज का मुद्दा उठाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी। अध्यक्ष ओम बिरला ने सदस्यों से अपनी-अपनी सीटों पर लौटने और सदन चलने देने की अपील की, लेकिन शोर-शराबा नहीं थमा। इसके बाद कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। दोपहर 12 बजे सदन की बैठक दोबारा शुरू हुई। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन को बताया कि सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना आमरण अनशन खत्म कर दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार है और इस संबंध में दोपहर 1 बजे होने वाली कैबिनेट बैठक में कड़े कानून पर भी विचार होगा। इस पर विपक्ष का हंगामा फिर तेज हो गया। राहुल गांधी अपनी बात रखने के लिए खड़े हुए, लेकिन पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने कहा कि सदन की कार्यसूची के अनुसार पहले पटल पर पत्र रखे जाएंगे, उसके बाद उन्हें बोलने का अवसर दिया जाएगा। पत्र रखे जाने की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही नारेबाजी और बढ़ गई। कार्यवाही सुचारु नहीं हो सकी और राहुल गांधी अपनी बात नहीं रख पाए। अंततः लोकसभा की बैठक 27 जुलाई सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। उधर, राज्यसभा में भी सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू हुई। करीब पांच मिनट बाद सभापति ने सदन के पटल पर दस्तावेज रखने की प्रक्रिया शुरू कराई। इसी दौरान नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे दिल्ली में प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई और पेपर लीक का मुद्दा उठाने के लिए खड़े हुए। हंगामे के बीच कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। दोपहर 12 बजे राज्यसभा की बैठक फिर शुरू हुई। मल्लिकार्जुन खड़गे ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग दोहराई और कहा कि प्रधानमंत्री को स्वयं सदन में आकर इस पूरे मामले पर बयान देना चाहिए। सत्ता पक्ष की ओर से इसका विरोध हुआ और सदन में शोर-शराबा बढ़ गया। इसके बाद कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। दोपहर 2 बजे राज्यसभा की बैठक फिर शुरू हुई, लेकिन विपक्ष का हंगामा जारी रहा। उपसभापति हरिवंश ने बार-बार व्यवस्था बनाए रखने की अपील की, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हुई। करीब सात मिनट बाद राज्यसभा की कार्यवाही भी 27 जुलाई सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। इस तरह संसद का एक और दिन पेपर लीक के मुद्दे पर गतिरोध की भेंट चढ़ गया। सरकार चर्चा और कड़े कानून की बात करती रही, जबकि विपक्ष शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और प्रधानमंत्री के बयान की मांग पर कायम रहा। सदन के भीतर बहस शुरू होने से पहले ही हंगामा इतना बढ़ गया कि दोनों सदनों में कोई सार्थक चर्चा नहीं हो सकी। वीडियो देखने के लिए ऊपर थंबनेल पर क्लिक करें…

दैनिक भास्कर 24 Jul 2026 6:42 pm

आज का एक्सप्लेनर:अचानक बैकफुट पर क्यों दिखने लगी सरकार, 24 घंटे में 5 बड़े फैसले; क्या धर्मेंद्र प्रधान को हटाना ही पड़ेगा

कॉकरोच जनता पार्टी का प्रोटेस्ट, विपक्ष का हंगामा और बीते 24 घंटे में सरकार के 5 बड़े फैसले। दिल्ली का माहौल तेजी से बदल रहा है। पीएम मोदी ने NEET पेपर लीक मुद्दे पर पहली बार ‘फ्रेंड्स’ कहकर सेल्फी मोड में वीडियो मैसेज दिया। सरकार ने कॉकरोच पार्टी से 24 घंटे का समय मांगा है। सरकार के 5 बड़े फैसले क्या-क्या हैं, इससे क्या होगा, क्या शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा बड़े आंदोलन की वजह बनेगा, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: बीते 24 घंटे में सरकार ने कौन से 5 बड़े फैसले लिए? जवाब: ये 5 फैसले हैं… 1. पीएम मोदी पहली बार बोले, पेपर लीक पर फास्ट-ट्रैक कोर्ट बनाएंगे 2. CJP से उनकी शर्त पर मुलाकात, मांगों के लिए समय मांगा 3. लिखित आश्वासन देकर सोनम वांगचुक का अनशन तुड़वाया 4. पेपर लीक मामलों के लिए 3 फास्ट-ट्रैक कोर्ट बने 5. शिक्षा विभाग के सचिव बदले सवाल-2: तो क्या सरकार वाकई बैकफुट पर है? जवाब: पिछले 24 घंटे के पीएम मोदी और सरकार के एक्शन और मीटिंग के बाद आए CJP और नड्डा के बयानों से साफ है कि सरकार दबाव में है। हालांकि ये कहना भी ठीक नहीं है, कि सरकार पूरी तरह बैकफुट पर आ गई है। इसके पीछे 2 तर्क हैं… 1. सोनम के अनशन का दबाव सरकार ने कम कर लिया 2. CJP के साथ आया विपक्ष, झुकना राजनीतिक हार जैसा सवाल-3: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होगा या नहीं? जवाब: धर्मेंद्र प्रधान हटाए जा सकते हैं, लेकिन अलग तरह से। विजय त्रिवेदी के मुताबिक, ‘ये तय है कि धर्मेंद्र प्रधान की फाइल शिक्षा मंत्रालय से शिफ्ट हो गई है। अभी संसद में कोई न कोई बिल आएगा, जिस पर चर्चा शुरू होगी। ये मुद्दे थोड़े दब जाएंगे, इस बीच धर्मेंद्र प्रधान को कोई और मंत्रालय दे दिया जाएगा या फिर बीजेपी संगठन में भी कोई अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है। सवाल-4: तो फिर CJP के प्रोटेस्ट का आगे क्या होगा? जवाब: CJP ने जंतर-मंतर के मंच से ऐलान किया है, ‘25 जुलाई दोपहर 3.30 बजे सरकार ने दोबारा मिलने बुलाया है। अगले 2-3 दिन में इस्तीफा नहीं हुआ, तो CJP 20 जुलाई की तरह दोबारा रैली बुलाएगी। अब कॉल नेशनल लेवल पर होगा।’ हालांकि विजय त्रिवेदी कहते हैं कि अब आंदोलन और बड़ा हो, इसकी उम्मीद कम है। अब तक सरकार और CJP में दो मुलाकातें हो चुकी हैं। जब आप बातचीत की मेज पर आ जाते हैं, तो फिर विरोध बढ़ने की वजह कम हो जाती है। CJP की दो मांगें सरकार मान लेगी, ये हो सकता है कि मुआवजा एक करोड़ की बजाय कुछ कम दे, लेकिन फिर भी इन पर सहमति बन जाएगी। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के मामले पर भी कोई न कोई समझौता होने की उम्मीद ज्यादा है। ------------------------ ये खबर भी पढ़िए… धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा अब तक क्यों नहीं हुआ, 5 पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स से समझिए; क्या आगे भी नहीं हटाए जाएंगे जंतर-मंतर पर 33 दिन से कॉकरोच जनता पार्टी का अनशन, सोनम वांगचुक की 25 दिनों की भूख हड़ताल, पीएम आवास के बाहर राहुल गांधी का धरना, संसद में रोज गूंजता हंगामा और अब देश के सभी जिलों में प्रदर्शन का आह्वान। सभी की एक ही मांग है- शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 24 Jul 2026 6:38 pm

AI ने पार की तय सीमा? सुरक्षा परीक्षण के दौरान OpenAI मॉडल ने खुद किया साइबर हमला, विशेषज्ञों ने जताई चिंता

OpenAI ने खुलासा किया है कि उसके एक उन्नत AI मॉडल ने साइबर सुरक्षा परीक्षण के दौरान अपेक्षा से आगे बढ़कर एक स्टार्टअप कंपनी के सर्वर तक पहुंचने के लिए चोरी किए गए लॉगइन क्रेडेंशियल्स का उपयोग किया।

देशबन्धु 24 Jul 2026 3:42 pm

पड़ोसी पहले! भारत ने बढ़ाया दोस्ती का हाथ, बांग्लादेशी PM तारिक रहमान को ब्रिक्स समिट का न्योता, अब ढाका की बारी

दक्षिण एशिया की राजनीति और कूटनीतिक गलियारों से इस वक्त एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। भारत ने अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' (पड़ोसी पहले) नीति को और मजबूत करते हुए एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। भारत सरकार ने बांग्लादेश के नवनियुक्त प्रधानमंत्री तारिक रहमान को आगामी ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए आधिकारिक तौर पर आमंत्रित किया है। नई दिल्ली की तरफ से भेजे गए इस बेहद महत्वपूर्ण कूटनीतिक निमंत्रण के बाद अब पूरी दुनिया की नजरें ढाका की तरफ टिक गई हैं कि बांग्लादेश इस पर क्या प्रतिक्रिया देता है। इस कदम को दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को एक नए युग में ले जाने की बड़ी कवायद के रूप में देखा जा रहा है।बदलते कूटनीतिक समीकरणों के बीच नई दिल्ली का बड़ा संदेशबांग्लादेश में हाल ही में हुए बड़े राजनीतिक बदलावों के बाद यह पहला मौका है जब भारत ने इतने उच्च स्तर पर बांग्लादेश के नए नेतृत्व के साथ सीधा संपर्क साधा है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान को ब्रिक्स समिट का न्योता भेजना यह साफ तौर पर दर्शाता है कि भारत अपने इस रणनीतिक पड़ोसी देश के साथ संबंधों में किसी भी तरह की दूरी नहीं चाहता है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नई दिल्ली का यह कदम बांग्लादेश की नई सरकार के साथ विश्वास बहाली (Trust Building) की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक संदेश है, जिससे दोनों देशों के साझा हितों को सुरक्षा और स्थिरता मिल सके।ब्रिक्स मंच पर बांग्लादेश की भागीदारी के मायनेब्रिक्स (BRICS) संगठन वैश्विक अर्थव्यवस्था और कूटनीति का एक अत्यंत शक्तिशाली मंच बन चुका है, जिसमें भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ कई अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाएं शामिल हैं। भारत द्वारा बांग्लादेश को इस प्रतिष्ठित मंच पर आमंत्रित करने का मतलब है कि नई दिल्ली वैश्विक स्तर पर ढाका की आवाज को मजबूत करना चाहती है। यदि प्रधानमंत्री तारिक रहमान इस निमंत्रण को स्वीकार कर समिट में हिस्सा लेते हैं, तो व्यापार, कनेक्टिविटी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय वार्ता के नए रास्ते खुलेंगे।साझा व्यापार और सीमा सुरक्षा पर टिकेंगी नजरेंभारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी जल बंटवारा, सीमा पार व्यापार, और घुसपैठ जैसी कई संवेदनशील चुनौतियां रही हैं। जानकारों के मुताबिक, इस नई शुरुआत से न केवल व्यापारिक गलियारों को गति मिलेगी बल्कि पूर्वोत्तर भारत (North-East India) की सुरक्षा और स्थिरता के लिहाज से भी यह बातचीत बेहद अहम साबित होगी। अब देखना यह होगा कि ढाका भारत के इस बड़े कूटनीतिक हाथ को कितनी गर्मजोशी से थामता है और आने वाले दिनों में दोनों देशों के रिश्तों की दिशा क्या मोड़ लेती है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 24 Jul 2026 2:47 pm

कंगाल पाकिस्तान के लिए मसीहा बना ड्रैगन! डॉलर संकट के बीच चीन ने थमाई संजीवनी बूटी

गंभीर आर्थिक तंगहाली और विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserve) की भारी किल्लत से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है। डॉलर-डॉलर के लिए तड़प रहे और डिफॉल्ट होने की कगार पर पहुंचे अपने सदाबहार दोस्त (All-Weather Ally) पाकिस्तान को बचाने के लिए चीन एक बार फिर आगे आया है। अंतरराष्ट्रीय भुगतानों और डूबती अर्थव्यवस्था को संभालने के लिए चीन ने पाकिस्तान को एक बड़ा वित्तीय लाइफलाइन पैकेज जारी किया है। इस वित्तीय संजीवनी के मिलने से पाकिस्तानी हुक्मरानों ने बड़ी राहत की सांस ली है, क्योंकि इससे देश पर मंडरा रहा तात्कालिक आर्थिक संकट कुछ समय के लिए टल गया है।बीजिंग से इस्लामाबाद पहुंची मदद और सऊदी-यूएई का रुखइस्लामाबाद के उच्च पदस्थ सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, चीन ने इस वित्तीय सहायता के तहत अपने पुराने कर्जों के रोलओवर (Rollover) को मंजूरी दे दी है और साथ ही नए विदेशी मुद्रा फंड की व्यवस्था की है। पाकिस्तान पिछले काफी समय से अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की कड़ी शर्तों और मित्र देशों जैसे सऊदी अरब और यूएई से मिलने वाली किश्तों में हो रही देरी के कारण बेहद दबाव में था। ऐसे नाजुक वक्त में चीन द्वारा दिए गए इस बड़े डिपॉजिट से पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक (State Bank of Pakistan) को अपने विदेशी मुद्रा भंडार को दोबारा एक सुरक्षित स्तर पर लाने में मदद मिलेगी।कर्ज के जाल (Debt Trap) में और उलझा पाकिस्तानभले ही चीन की इस वित्तीय मदद को पाकिस्तान में एक बड़ी कामयाबी और संजीवनी बूटी की तरह देखा जा रहा हो, लेकिन वैश्विक आर्थिक विशेषज्ञ इसे एक अलग नजरिए से देख रहे हैं। जानकारों का कहना है कि यह मदद पाकिस्तान को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के बजाय उसे चीन के और गहरे 'कर्ज जाल' में धकेल देगी। पाकिस्तान पर पहले से ही चीन का अरबों डॉलर का कर्ज बकाया है, जिसमें सीपीईसी (CPEC) परियोजनाओं से जुड़े वाणिज्यिक लोन भी शामिल हैं। इस नए वित्तीय तालमेल के बाद पाकिस्तान की बीजिंग पर रणनीतिक और आर्थिक निर्भरता पूरी तरह बढ़ जाएगी।पाकिस्तानी आवाम को महंगाई से राहत या सिर्फ दिखावाइस चीनी मदद का पाकिस्तान के स्थानीय बाजारों और आम जनता पर क्या असर होगा, इसे लेकर भी कयासों का दौर शुरू हो गया है। आर्थिक जानकारों के मुताबिक, इस डॉलर इन्फ्यूजन से पाकिस्तानी रुपये (PKR) में आ रही रिकॉर्ड गिरावट पर कुछ समय के लिए ब्रेक जरूर लगेगा, जिससे आयातित वस्तुओं (Imported Goods) जैसे पेट्रोल, डीजल और खाद्य पदार्थों की कीमतों को स्थिर रखने में थोड़ी मदद मिल सकती है। हालांकि, जब तक पाकिस्तान अपने आंतरिक कर ढांचे और बुनियादी आर्थिक नीतियों में कड़े सुधार नहीं करता, तब तक आम जनता को महंगाई की मार से स्थायी मुक्ति मिलना नामुमकिन नजर आता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 24 Jul 2026 2:45 pm

खौफनाक वारदात! इजरायल में भारतीय युवक की दर्दनाक मौत, खून से लथपथ मिला शव; इजरायली नागरिक गिरफ्तार

रोजी-रोटी की तलाश में भारत से इजरायल गए एक भारतीय युवक के साथ वहां दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। इजरायल के एक स्थानीय इलाके में भारतीय नागरिक का शव बेहद संदिग्ध और खून से लथपथ हालत में बरामद किया गया है। इस सनसनीखेज घटना के बाद स्थानीय पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। प्राथमिक जांच के आधार पर स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों ने हत्या के शक में एक इजरायली नागरिक को हिरासत में ले लिया है, जिससे इस वक्त कड़ी पूछताछ की जा रही है। इस घटना ने इजरायल में रह रहे भारतीय प्रवासियों और कामगारों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।इजरायली पुलिस की मुस्तैदी और संदिग्ध की गिरफ्तारीस्थानीय मीडिया और पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, घटना की सूचना मिलते ही फॉरेंसिक टीम और जासूसों के दस्ते ने मौके पर पहुंचकर तफ्तीश शुरू कर दी थी। क्राइम सीन से मिले पुख्ता सबूतों और तकनीकी इनपुट के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक इजरायली संदिग्ध को दबोच लिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आरोपी और मृतक के बीच किसी पुरानी रंजिश या तात्कालिक विवाद को लेकर झगड़ा हुआ था, जो बाद में जानलेवा हमले में बदल गया। हालांकि, हत्या के असली इरादे का खुलासा पूरी जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।भारतीय दूतावास हुआ सक्रिय, परिजनों को मदद का भरोसाइस दुखद घटना की खबर मिलते ही तेल अवीव स्थित भारतीय दूतावास तुरंत एक्शन मोड में आ गया है। दूतावास के वरिष्ठ अधिकारी लगातार इजरायली पुलिस और विदेश मंत्रालय के संपर्क में बने हुए हैं ताकि मामले की निष्पक्ष और तेज जांच सुनिश्चित की जा सके। इसके साथ ही भारतीय दूतावास मृतक के कानूनी वारिसों और भारत में रह रहे उनके परिजनों से संपर्क साधने की कोशिश कर रहा है, जिससे कानूनी प्रक्रिया को पूरा कर पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द सम्मानपूर्वक भारत भेजा जा सके।इजरायल में भारतीय प्रवासियों के बीच सुरक्षा को लेकर चिंताहाल के महीनों में रोजगार के सिलसिले में बड़ी संख्या में भारतीय निर्माण और अन्य क्षेत्रों में काम करने के लिए इजरायल गए हैं। ऐसे में एक भारतीय नागरिक की स्थानीय स्तर पर हुई इस हिंसक मौत ने वहां रह रहे भारतीय समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। प्रवासी संगठनों ने इजरायल सरकार से मांग की है कि कार्यस्थलों और रिहायशी इलाकों में भारतीय कामगारों की सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी किसी अनहोनी को टाला जा सके।

न्यूज़ इंडिया लाइव 24 Jul 2026 2:44 pm

तुर्किए में साइकिलिंग ड्रेस विवाद: स्पोर्ट्स टाइट्स पहनने पर गवर्नर हटाए गए, समर्थकों ने बताया फैसला अनुचित

मेहमत फतिह सिसेकली ने अपने बचाव में कहा कि उन्होंने कोई असामान्य कपड़े नहीं पहने थे। वह केवल साइकिलिंग के लिए इस्तेमाल होने वाले सामान्य स्पोर्ट्सवियर में थे।

देशबन्धु 24 Jul 2026 11:57 am

भारत समेत 60 देशों पर अमेरिका का नया टैरिफ लागू, भारतीय निर्यात पर 10% अतिरिक्त शुल्क

USTR की अधिसूचना के अनुसार कुल 60 देशों को इस कार्रवाई के दायरे में रखा गया है। इनमें 17 देशों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया है, जबकि शेष 43 देशों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लागू किया गया है। भारत उन देशों में शामिल है जिन्हें अपेक्षाकृत कम दर वाले समूह में रखा गया है।

देशबन्धु 24 Jul 2026 11:45 am

US Tariff News: अमेरिका का बड़ा फैसला! भारत समेत 60 देशों पर लगाया नया टैरिफ, जानें ट्रेड पर क्या पड़ेगा असर

अमेरिका ने जबरन मजदूरी (फोर्स्ड लेबर) से जुड़ी चिंताओं को वजह बताते हुए भारत समेत दुनिया के 60 व्यापारिक साझेदारों (ट्रेडिंग पार्टनर्स) पर नए टैरिफ लगाने का बड़ा ऐलान किया है। यह नया टैरिफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इस साल की शुरुआत में लागू की गई उन ग्लोबल ड्यूटीज की जगह लेगा जो अब खत्म होने जा रही हैं।US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) जेमिसन ग्रीर ने नए टैरिफ स्ट्रक्चर की घोषणा करते हुए साफ किया कि ये नियम शुक्रवार को ईस्टर्न टाइम के मुताबिक रात 12:01 बजे से प्रभावी हो जाएंगे। USTR की फैक्ट शीट के मुताबिक, ये नए टैरिफ 10% से लेकर 12.5% के बीच होंगे, जिसके दायरे में अमेरिका के कुल व्यापार का करीब 99.4% हिस्सा आ जाएगा।भारत पर 10% टैरिफ, व्यापार पर कितना होगा असर?अमेरिका के इस कदम से भारत, चीन और यूरोपीय संघ (EU) जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं पर सीधा असर पड़ने वाला है। अमेरिका ने भारत और 16 अन्य देशों से आयात किए जाने वाले सामान पर नए टैरिफ की दर 10% तय की है।गौरतलब है कि अमेरिका, भारत का दूसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर होने के साथ-साथ भारतीय निर्यात के लिए सबसे बड़ा बाजार भी है। वाणिज्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2025 में दोनों देशों के बीच करीब 141 अरब अमेरिकी डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार हुआ था, जिसमें भारत का निर्यात 87.3 अरब डॉलर रहा था।जबरन मजदूरी पर USTR का कड़ा रुखAFP की रिपोर्ट के अनुसार, USTR जेमिसन ग्रीर ने कहा, अमेरिका में करीब एक सदी से जबरन मजदूरी से बने या जुड़े आयात पर बैन लागू है और इसका कड़ाई से पालन कराया जाता है। अब वक्त आ गया है कि हमारे बाकी व्यापारिक साझेदार भी ऐसा ही कदम उठाएं।फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने रद्द किए थे पुराने टैरिफदरअसल, इस साल फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप के कई पुराने टैरिफ फैसलों को रद्द कर दिया था। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने आयात पर 10% टैरिफ को फिर से लागू करने के लिए विशेष अधिकारों का इस्तेमाल किया था। हालांकि, वह व्यवस्था सिर्फ 150 दिनों के लिए ही मान्य थी, जिसकी म्याद इस शुक्रवार को खत्म हो रही थी। अब नए घोषित टैरिफ उसकी जगह ले लेंगे।चीन और जापान पर 12.5% का भारी टैरिफ, किन्हें मिली राहत?हालिया घोषणा के तहत जिन देशों ने जबरन मजदूरी पर रोक लगाई है या ऐसा करने का वादा किया है, उन पर 10% का कम टैरिफ लगेगा। इस श्रेणी में भारत के साथ कनाडा, बांग्लादेश, पाकिस्तान और ब्रिटेन शामिल हैं।दूसरी ओर, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया समेत दर्जनों देशों पर 12.5% का भारी टैरिफ थोपा गया है। हालांकि, ताइवान, जापान, दक्षिण कोरिया, स्विट्जरलैंड और EU को कुछ राहत मिलेगी क्योंकि उनके अमेरिका के साथ पहले से व्यापार समझौते (Trade Agreements) मौजूद हैं। इसके अलावा, जिन सेक्टरों पर पहले से अलग टैरिफ लागू हैं (जैसे स्टील और एल्युमीनियम), उन पर इस फैसले का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 24 Jul 2026 8:09 am

ट्रंप ने सऊदी अरब के साथ किया बड़ा असैन्य परमाणु समझौता, लेकिन सामने रख दी ऐसी शर्त

अंतरराष्ट्रीय राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सऊदी अरब के साथ एक अहम असैन्य परमाणु समझौते (Civilian Nuclear Agreement) को मंजूरी दे दी है, लेकिन इसके साथ ही रियाद के सामने एक बहुत बड़ी और स्पष्ट शर्त भी रख दी है। ट्रम्प ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि इस समझौते के आगे बढ़ने की पूरी शर्त यह है कि सऊदी अरब को ऐतिहासिक 'अब्राहम संधि' (Abraham Accords) के तहत इजरायल के साथ अपने कूटनीतिक संबंधों को पूरी तरह सामान्य करना होगा। वाशिंगटन से लेकर खाड़ी देशों तक इस बड़े कूटनीतिक कदम के बाद भू-राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलने लगे हैं।क्या है डोनाल्ड ट्रम्प की बड़ी शर्त और परमाणु समझौते के मायने?अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर एक आधिकारिक पोस्ट के जरिए इस डील की घोषणा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस असैन्य परमाणु समझौते के तहत सऊदी अरब को किसी भी प्रकार के यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) की अनुमति नहीं दी जाएगी। ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका शांतिपूर्ण और गैर-संवर्धित परमाणु संयंत्रों के खिलाफ नहीं है, लेकिन इस पूरे समझौते के मुहर लगने की एकमात्र शर्त यही है कि सऊदी अरब को अब्राहम समझौते में शामिल होकर इजरायल के साथ दोस्ती का हाथ बढ़ाना होगा। हालांकि, दूसरी तरफ सऊदी अरब का यह रुख रहा है कि इजरायल के साथ संबंध तभी सामान्य हो सकते हैं जब स्वतंत्र फलस्तीन राष्ट्र की स्थापना के लिए एक स्पष्ट और पक्का रास्ता तैयार किया जाए।परमाणु अप्रसार विशेषज्ञों और इजरायल की बढ़ी चिंताएंइस समझौते के सामने आते ही वैश्विक स्तर पर बहस छिड़ गई है। परमाणु अप्रसार (Non-Proliferation) के कई बड़े विशेषज्ञों ने इस डील पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उनका तर्क है कि इस समझौते में ऐसे कड़े सुरक्षा उपायों और प्रावधानों की कमी है जो भविष्य में परमाणु सामग्री को हथियार बनाने लायक स्तर तक संवर्धित होने से रोक सकें। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस डील के बाद से पश्चिम एशिया यानी मिडिल ईस्ट में एक बार फिर से हथियारों की भीषण होड़ शुरू होने का गंभीर अंदेशा जताया जा रहा है। आलोचकों का यहां तक कहना है कि इस तरह के समझौतों से इजरायल के दीर्घकालिक सुरक्षा हितों को बड़ा झटका लग सकता है।नेतन्याहू की चुप्पी और अमेरिकी संसद की मुहर का इंतजारहैरानी की बात यह है कि इस हाई-प्रोफाइल समझौते के ऐलान के बाद से इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, उनके रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री की तरफ से फिलहाल कोई भी आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, जिससे राजनीतिक गलियारों में कयासों का बाजार गर्म है। जानकारों के अनुसार, वाशिंगटन और रियाद के बीच घोषित इस बहुचर्चित समझौते को अभी अमेरिकी संसद (US Congress) से औपचारिक मंजूरी मिलना बाकी है, जिसके बाद ही इसकी असली तस्वीर साफ हो सकेगी।

न्यूज़ इंडिया लाइव 24 Jul 2026 7:46 am

मिडिल ईस्ट में भयंकर महासंकट: ईरान पर लगातार 13वें दिन अमेरिकी सेना का भीषण हमला, क्रूड ऑयल 100 डॉलर के पार

दुनिया के सबसे संवेदनशील क्षेत्र मिडिल ईस्ट से इस वक्त की बेहद डरावनी और बड़ी खबर सामने आ रही है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग रूट्स और व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा तनाव अब एक बड़े महायुद्ध के मुहाने पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाते हुए लगातार 13वीं रात भी भीषण हवाई हमले जारी रखे हैं। इस भयंकर सैन्य संघर्ष और सप्लाई चेन ठप होने के खतरे के बीच वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें आसमान छूने लगी हैं और क्रूड ऑयल 100 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गया है।क्यों हो रहे हैं ईरान पर ताबड़तोड़ अमेरिकी हमले?अमेरिकी सेंट्रल कमांड और सैन्य अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, गुरुवार शाम को अमेरिकी वायुसेना ने एक बार फिर ईरान के अंदरूनी सैन्य बुनियादी ढांचे और रणनीतिक ठिकानों को अपना निशाना बनाया। अमेरिकी सेना का साफ कहना है कि यह सैन्य कार्रवाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में कमर्शियल जहाजों को लगातार दी जा रही धमकियों और हमलों का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए की जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की कड़ी चेतावनियों के बीच यह लगातार 13वां दिन है जब अमेरिकी सेना ने तेहरान के खिलाफ इस तरह के घातक प्रहार किए हैं।हॉर्मुज जलडमरूमध्य में थम गया जहाजों का आवागमनयह पूरा विवाद दुनिया के सबसे अहम चोकपॉइंट यानी हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के नियंत्रण और वहां से गुजरने वाले शिपिंग रूट्स को लेकर खड़ा हुआ है। वैश्विक स्तर पर होने वाले कुल तेल निर्यात का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान पर लगातार यह आरोप लग रहे हैं कि उसके रिवोल्यूशनरी गार्ड्स इस क्षेत्र में लगातार अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को निशाना बना रहे हैं और आवाजाही में बाधा डाल रहे हैं। अमेरिका और उसके सहयोगियों की ओर से ईरान को जिम्मेदार ठहराने के बाद से इस समुद्री मार्ग पर हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।क्रूड ऑयल की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल, 100 डॉलर के पार पहुंचा तेलमिडिल ईस्ट के इस महासंकट का सीधा असर अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर दिखाई देने लगा है। हॉर्मुज के साथ-साथ बाब अल-मंदेब (Bab el-Mandeb) जलडमरूमध्य से भी जहाजों के आवागमन के गंभीर रूप से बाधित होने के बाद वैश्विक बाजार में खलबली मच गई है। कच्चे तेल की कीमतें अचानक सात प्रतिशत तक उछल गई हैं और ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। इससे पहले आखिरी बार मई के महीने में तेल इस उच्च स्तर पर पहुंचा था। वहीं अमेरिकी क्रूड भी 90 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर चुका है। आर्थिक विशेषज्ञों और जानकारों का अनुमान है कि अगर यह टकराव जल्द नहीं थमा, तो आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतें बढ़कर 120 डॉलर प्रति बैरल तक भी जा सकती हैं, जिससे दुनियाभर में महंगाई का एक बड़ा दौर आ सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 24 Jul 2026 7:44 am

बांग्लादेश में बड़ा सियासी उलटफेर, राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन आज देंगे इस्तीफा; शेख हसीना से रिश्तों पर घिरे

पड़ोसी देश बांग्लादेश से इस वक्त की सबसे बड़ी और अहम खबर सामने आ रही है। बांग्लादेश के राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले ही आज यानी शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा देने जा रहे हैं। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि सत्ता से बेदखल की जा चुकी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के साथ उनके पुराने और करीबी रिश्तों के चलते सरकार की तरफ से उन पर त्यागपत्र देने का भारी दबाव बनाया गया था। रॉयटर की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति के प्रवक्ता ने आधिकारिक तौर पर इस्तीफे की कोई ठोस वजह नहीं बताई है, लेकिन अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि यह फैसला देश के मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर लिया गया है।शेख हसीना की वापसी की चर्चा के बीच बड़ा फैसलायह पूरा राजनीतिक घटनाक्रम ठीक उस समय सामने आया है जब कुछ दिन पहले ही पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने यह बयान दिया था कि वह अदालत के फैसलों का सामना करने और स्वदेश लौटने की तैयारी कर रही हैं। राष्ट्रपति शहाबुद्दीन को शेख हसीना का पुराना सहयोगी माना जाता रहा है। यही वजह है कि सरकार के शीर्ष हलकों में इस बात को लेकर गहरी नाराजगी थी कि शहाबुद्दीन ने कथित तौर पर हाल ही में फिर से शेख हसीना से संपर्क साधने की कोशिश की थी। देश के प्रमुख अखबार 'प्रथम आलो' ने भी उच्च-स्तरीय सूत्रों के हवाले से इस बात की पुष्टि की है कि राष्ट्रपति के इन संपर्कों और पुरानी नजदीकियों ने मौजूदा प्रशासन को सख्त कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।अवामी लीग पर प्रतिबंध और शीर्ष पदों से हटे हसीना के सभी करीबीमोहम्मद शहाबुद्दीन के इस इस्तीफे के बाद बांग्लादेश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। अब देश के शीर्ष संवैधानिक पदों पर शेख हसीना का कोई भी पुराना सहयोगी या समर्थक नहीं बचेगा। आपको बता दें कि देश में सत्ता परिवर्तन के बाद से ही शेख हसीना की पार्टी 'अवामी लीग' पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। पार्टी के तमाम दिग्गज नेता और कार्यकर्ता या तो सलाखों के पीछे पहुंच चुके हैं या फिर पुलिस और जांच एजेंसियों के डर से भूमिगत हो गए हैं। ऐसे नाजुक वक्त में राष्ट्रपति का पद छोड़ना देश की राजनीति में एक नए और बड़े दौर की शुरुआत का संकेत दे रहा है।बांग्लादेश सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनेगी शेख हसीना की वापसीविशेषज्ञों का मानना है कि शेख हसीना की संभावित स्वदेश वापसी मौजूदा बांग्लादेश सरकार के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती साबित हो सकती है, जो इस वक्त देश में राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता बहाल करने के लिए संघर्ष कर रही है। हालांकि हसीना की वापसी की योजनाओं में अभी करीब पांच महीने का वक्त बाकी है, लेकिन देश के सियासी गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो चुकी है। राष्ट्रपति शहाबुद्दीन का यह इस्तीफा यह साफ कर देता है कि देश की हुकूमत अब शेख हसीना के किसी भी प्रभाव या उनके पुराने सहयोगियों को प्रशासनिक तंत्र में रखने के बिल्कुल पक्ष में नहीं है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 24 Jul 2026 7:43 am

होर्मुज पर ईरान का दावा: रुबियो बोले– इंडो‑पैसिफिक तक बढ़ेगा खतरा

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने चेतावनी दी कि अगर ईरान को होर्मुज स्‍ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर नियंत्रण करने दिया गया तो यह एक खतरनाक मिसाल बन जाएगी

देशबन्धु 24 Jul 2026 7:40 am

ट्रंप की चेतावनी: सऊदी जहाजों पर हमले तो ईरान भी जिम्मेदार

लाल सागर में जहाजों पर हूती विद्रोहियों के हमलों पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी चेतावनी की है

देशबन्धु 24 Jul 2026 7:30 am

जंतर-मंतर पर कौन भेज रहा खाना, दवाएं और सैनिटरी पैड्स:यूपी, उत्तराखंड, केरल से भेजा ऑर्डर, दिनभर डिलीवरी देने वालों की लगी लाइन

23 जुलाई…सुबह 10 बजे, हम दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचे। यहां 20 जून से कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) आंदोलन कर रही है। एंट्री गेट पर ही एक डिलीवरी एजेंट मिले। हमने उन्हें रोककर पूछा कि क्या लेकर आए हैं और किसके लिए। जवाब मिला- खाना, दवाएं, मास्क और गार्बेज बैग जैसे कुछ सामान हैं। बुकिंग करने वाले ने जंतर-मंतर का पता दिया और बोला प्रदर्शन कर रहे लोगों तक पहुंचा देना। ये अकेल नहीं, इनके जैसे सैकड़ों एजेंट्स दिनभर पार्सल लेकर जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं। जहां तकरीबन हर वक्त 10 हजार से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की भीड़ जमा रहती है। कोई खाना और पानी पहुंचाने आ रहा, तो कोई दवाइयां-सैनिटरी पैड्स या जरूरत के बाकी सामान। देश के अलग-अलग हिस्सों से ये मदद भेजी जा रही है, लेकिन ना भेजने वालों का नाम है, ना पता। केरल से इंजीनियर ने पहले खाना भेजा, फिर दवाएं हमने डिलीवरी एजेंट के जरिए बात करके पार्सल भेजने वाले का नाम-पता जानना चाहा और एजेंट के फोन से ही ऑर्डर भेजने वाले से बात की। तब पता चला कि इसे केरल के सीजो ने भेजा है। वे मलयाली क्रिश्चिनय हैं और पेशे से इंजीनियर। कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन को लगातार फॉलो कर रहे हैं। कॉर्पोरेट कंपनी में जॉब करते हैं, इसलिए दिल्ली आकर प्रदर्शन में शामिल नहीं हो सकते। लिहाजा मदद का ये तरीका चुना।सीजो कहते हैं, ‘मैं वहां नहीं आ सकता, इसलिए क्विक डिलीवरी एप से प्रदर्शनकारियों के लिए जूस, चिप्स, नमकीन जैसे सामान भेजे। कुछ मेडिकल का सामान भी भेजा है, जैसे- ORS, रीलिफ स्प्रे, ताकि जो बीमार हैं या जिन्हें चोट लगी है, उन्हें थोड़ी मदद मिल सके।‘ सीजो ने अभी जंतर-मंतर पर दो हजार का सामान भेजा है। एक दिन पहले वे करीब 5 हजार रुपए खर्च कर खाना भी भिजवा चुके हैं। राजू बोले- हर घंटे ऑर्डर लेकर जंतर-मंतर आ रहा इसके बाद हमें अमेजॉन फ्रेश के लिए काम करने वाले राजू मिले। उन्होंने बताया कि वे प्रदर्शनकारियों के लिए करीब 7 हजार रुपए का सामान लेकर पहुंचे हैं। वैसे तो उनका काम सिर्फ सामान धरनास्थल तक पहुंचाना था, लेकिन ये सही लोगों तक पहुंच सके, इसलिए खुद रुककर इसे जरूरतमंद प्रदर्शनकारियों तक पहुंचवाया। राजू बताते हैं, ‘हम हर घंटे यहां ऑर्डर लेकर आ रहे हैं। हमारे डार्क स्टोर (स्थानीय गोदाम) पर जो भी डिलीवरी पार्टनर हैं, उनमें से ज्यादातर सामान पहुंचाने के लिए जंतर-मंतर के ही चक्कर लगा रहे हैं।‘ यूपी से भेजा ऑर्डर, बोले- स्टूडेंट हैं इसलिए दर्द समझते हैं हमारे सामने ही जंतर-मंतर के गेट के बाहर करीब 24-25 से ज्यादा स्विगी और जोमैटो वाले खड़े मिले। हम इन्हीं में से एक के पास पहुंचे। डिलीवरी पार्टनर से कहा कि ऑर्डर भेजने वाले को फोन लगा दीजिए। बात की तो पता चला कि ये ऑर्डर उत्तर प्रदेश के कुशीनगर के रहने वाले सत्यानंद ने भेजा है। बीएड कर रहे सत्यानंद भी दिल्ली आना चाहते थे, लेकिन पढ़ाई के चलते नहीं आ सके। वे कहते हैं, ‘हम भी स्टूडेंट है, इसलिए उनके मुद्दे और दर्द समझ रहे हैं। मेरा इन्हें पूरा सपोर्ट है। दिल्ली नहीं आ सकता, लेकिन अपनी सामर्थ्य के मुताबिक जो कर सकता हूं, कर रहा हूं।’ उनका ऑर्डर लेकर आए डिलीवरी पार्टनर ने बताया कि सुबह से जंतर-मंतर पर ये उनका 8वां ऑर्डर है। एक दिन पहले भी वो दिनभर जंतर-मंतर पर सामान पहुंचाते रहे। प्रदर्शनकारियों तक ऑर्डर पहुंचाने के लिए वॉलंटियर्स एक्टिव देश भर से आ रही इस मदद को जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए प्रदर्शनकारी स्टूडेंट्स भी सक्रिय हैं। इनमें से अभिषेक और प्रीति जंतर-मंतर के बाहर लगी बैरिकेडिंग से सामान उठाकर करीब 400 मीटर दूर प्रदर्शन स्थल तक पहुंचा रहे हैं। अभिषेक बताते हैं कि अभी तक प्रदर्शनकारियों के लिए भेजा गया सामान बीच में ही लोग अपने घर ले जाने लगे थे, इसलिए हमने ये सब शुरू किया। प्रीती कहती हैं कि अगर ये मदद जरूरतमंदों तक नहीं पहुंचेगी, तो भेजने वाले खुद को ठगा महसूस करेंगे। यही वजह है कि हम इसे सही जगह पहुंचा रहे हैं। दोनों वॉलंटियर्स के मुताबिक, छोले भटूरे, समोसे, कोल्ड ड्रिंक से लेकर पानी तक यहां सब कुछ आ रहा है। लड़कियों के लिए सैनिटरी पेड और घायलों के लिए मेडिकल सामान भी है। कोई नंगे पैर न रहे इसलिए अलग-अलग साइज की चप्पलों के ऑर्डर भी आए हैं। आखिर में CJP के आंदोलन का अपडेट… सरकार बोली- 4 बार बातचीत के लिए बुलाया दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के नेतृत्व में छात्रों का प्रदर्शन 20 जून से जारी है। प्रदर्शनकारी NEET पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। सरकार ने 23 जुलाई को कहा कि वो CJP के साथ किसी भी समय बातचीत के लिए तैयार है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले 24 घंटे में CJP को जेपी नड्डा के घर या ऑफिस पर बातचीत के लिए 4 बार ऑफर भेजा जा चुका है। हालांकि, CJP ने कहा है कि सरकार को बात करनी है तो जंतर-मंतर आए या फिर किसी न्यूट्रल जगह पर चर्चा करे। हम किसी के घर या ऑफिस नहीं जाएंगे। इधर, CJP ने अब 24 जुलाई को देशभर में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का ऐलान किया है। ……………….. ये खबर भी पढ़ें… कॉकरोच आंदोलन से BJP में चिंता, लेकिन प्रधान नहीं हटेंगे 22 जुलाई, वक्त करीब 12 बजे। दिल्ली में BJP हेडक्वॉर्टर के 5वें फ्लोर पर पार्टी के महामंत्री जुटने शुरू हुए। 15-20 मिनट के अंदर आठों महामंत्री एक साथ थे। उनके अलावा भी कई पदाधिकारी भी पहुंच गए। मसला कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट से बना माहौल था। BJP में हमारे सूत्र बताते हैं कि पहली बार BJP ऑफिस में बैठक हुई। 3 घंटे तक चली इस मीटिंग में प्रोटेस्ट के असर को खत्म करने की स्ट्रैटजी पर बात हुई। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 24 Jul 2026 5:37 am

पैलेट्स से जख्मी इरशाद से बोले नड्डा-प्रोटेस्ट में क्यों गए:हॉस्पिटल ने मेडिकल रिपोर्ट नहीं दी, ठीक होकर फिर जंतर-मंतर जाऊंगा

25 साल के इरशाद शेख दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में एडमिट हैं। चेहरे और आंख पर जख्म के निशान हैं। गुरुग्राम में नौकरी करने वाले इरशाद 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर चल रहे प्रोटेस्ट में गए थे। तभी पुलिस ने भीड़ को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े। इरशाद ने महसूस किया कि उनकी पीठ जल रही है। सीने, गले और चेहरे पर घाव हैं। उनसे खून टपक रहा था। आरोप है कि रैपिड एक्शन फोर्स के एक जवान ने पैलेट गन चलाई, जिससे इरशाद जख्मी हो गए। मैं 23 जुलाई को इरशाद से मिलने हॉस्पिटल पहुंची। ENT डिपार्टमेंट में उनका इलाज चल रहा है। डिपार्टमेंट के गेट पर खड़े सिक्योरिटी गार्ड ने मुझे रोक दिया। कई बार कोशिश करने के बाद मैं इरशाद तक पहुंच गई। उस वक्त डॉक्टर कमरे में मौजूद थे। बातचीत के दौरान इरशाद ने अपना मोबाइल नंबर दिया और कहा कि आप मुझे सीधे मैसेज कर दीजिए। फिर फोन पर हमारी बात हुई। इरशाद ने कहा कि मैं उनसे मिलूं। हॉस्पिटल स्टाफ ने इरशाद से मिलने से रोका मैं दोबारा हॉस्पिटल पहुंची, तो गार्ड और स्टाफ ने मुझे फिर रोक दिया। इरशाद ने दो बार अस्पताल स्टाफ से कहा कि वह मुझसे मिलना चाहते हैं। इसके बावजूद मुझे अंदर नहीं जाने दिया गया। कहा कि आप बाहर बैठिए। मैंने कहा- इरशाद ने बुलाया है। गार्ड ने जवाब दिया- नहीं बुलाया है। कुछ देर बार बोला- रुकिए मैं पूछता हूं। इसी दौरान एक शख्स स्टाफ के साथ आए। वे खुद को गवर्नमेंट एम्पलाई बता रहे थे। उन्होंने स्टाफ से कहा कि इरशाद से किसी को न मिलने दिया जाए। कुछ देर बाद इरशाद ने फोन पर कहा कि मैं अपने सवाल वॉट्सऐप पर भेज दूं। समझ नहीं आया कि इरशाद खुद मिलना चाहते थे, तब उनसे क्यों नहीं मिलवाया गया। ये अस्पताल प्रशासन का फैसला था या सुरक्षा एजेंसियों का या किसी और का, इसका जवाब नहीं मिला। मैं अस्पताल के बाहर इंतजार करती रही। कुछ देर बाद इरशाद का एक दोस्त बाहर आया। उसने दावा किया कि केंद्र सरकार में मंत्री जेपी नड्डा इरशाद से मिलने आए थे। उसी के बाद इरशाद के आसपास सख्ती बढ़ी है। कुछ देर बाद इरशाद का फोन आया। उन्होंने बताया कि अब मेरी हालत ठीक है। पढ़िए पूरी बातचीत… सवाल: क्या आपको पैलेट गन से चोट लगी है? जवाब: हां। मेरे चेहरे और दाहिनी कंधे पर 40 से ज्यादा पैलेट्स लगे हैं। सवाल: उस दिन क्या हुआ था? जवाब: मैं करीब 3:30 बजे कनॉट प्लेस पहुंचा। वहां से जंतर-मंतर की तरफ चला गया। उधर पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स के जवान थे। अचानक उन्होंने लाठीचार्ज शुरू कर दिया। हम लोग पीछे की तरफ भागे। प्रदर्शन कर रहे सभी लोग नई उम्र के थे। तभी जवानों ने टियर गैस दागना शुरू कर दिया। सभी कनॉट प्लेस की तरफ आ गए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि हम आतंकवादी नहीं हैं। हम यहां अपनी मांगें लेकर आए हैं। वे सभी धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का नारा लगा रहे थे। मैंने देखा कि रैपिड एक्शन फोर्स के एक जवान ने अपनी गन हमारी तरफ तान दी। हमें लगा कि डराने के लिए ऐसा कर रहा है। तभी फायर की आवाज सुनाई दी। मेरी बायीं आंख, चेहरे और कंधे पर गोली के छर्रे धंस गए। शरीर से खून बहने लगा। उस वक्त मैं होश में था। आसपास मौजूद लोगों ने खून रोकने की कोशिश की। एक स्कूटी रोककर मुझे लेडी हॉर्डिंग हॉस्पिटल के इमरजेंसी वार्ड में एडमिट किया। सवाल: क्या आपको मेडिकल रिपोर्ट नहीं मिली है? जवाब: मैंने रिपोर्ट मांगी थी। बताया गया कि अभी इलाज और सर्जरी की प्रोसेस चल रही है। इसलिए फिलहाल पूरी रिपोर्ट नहीं दी जा सकती। डिस्चार्ज के वक्त रिपोर्ट दे देंगे। सवाल: जेपी नड्डा आपसे मिलने आए थे, उनसे क्या बात हुई? जवाब: उन्होंने मेरा नाम-पता पूछा। फिर कहा कि मैं प्रदर्शन में क्यों शामिल था। मैंने उन्हें बताया कि मैं छोटे भाई-बहनों के भविष्य के लिए वहां गया था। फिर उन्होंने कहा, तुम्हें चिंता करने की जरूरत नहीं है। तुम जल्द ही ठीक हो जाओगे। सवाल: क्या अभिजीत दीपके या उनके किसी साथी ने आपसे बात की है? जवाब: नहीं, मेरा उनसे कोई संपर्क नहीं है। मैं किसी पार्टी का समर्थन नहीं करता। मेरा मकसद था कि हम अपनी आवाज उठा सकें और सरकार के सामने मांगें रख सकें। सवाल: अपने साथ हुए हादसे पर क्या कहेंगे? जवाब: मैंने कभी नहीं सोचा था कि मेरे साथ ऐसा होगा। इसके बाद भी मुझे कोई पछतावा नहीं है कि मैं वहां गया। मैं यह सोचकर नहीं गया था कि मेरे साथ ऐसा कुछ होगा। अगर फिर मौका मिला, तो मैं दोबारा वहां जाऊंगा। सवाल: यानी आप खुद को इस आंदोलन का हिस्सा मानते हैं? जवाब: जब तक हमारी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन का हिस्सा बना रहूंगा। सवाल: आपने कहा था कि मैं आपकी दोस्त बनकर मिलने आ सकती हूं। डायरेक्टर के सामने आपने कहा कि मुझे जानते ही नहीं हैं। ऐसा क्यों? जवाब: नहीं, ऐसी बात नहीं थी। अस्पताल के अधिकारियों ने कहा था कि किसी को भी मुझसे मिलने न दिया जाए। मैंने कहा था कि कोई दोस्त आए तो मिल सकता है, लेकिन मुझे बताया गया था कि उसे फोन जमा कराना होगा। मेरा इलाज चल रहा है, इसलिए मुझे भी हॉस्पिटल के नियम मानने पड़ेंगे। सवाल: आप नर्वस दिख रहे थे। क्या आपके ऊपर कोई सरकारी दबाव है? जवाब: कोई दबाव नहीं है। यहां मैं अकेला पेशेंट नहीं हूं। और भी मरीज हैं। उनकी प्राइवेसी का ध्यान रखना है। मुझे किसी ने डराया-धमकाया नहीं है। सवाल: दिल्ली पुलिस ने कहा है कि प्रोटेस्ट के दौरान पैलेट गन इस्तेमाल नहीं हुई हैं। इस पर क्या कहेंगे? जवाब: मैं भी दावे के साथ नहीं कह सकता, लेकिन ये उसी तरह की चीज है। अगर पैलेट गन इस्तेमाल होती है, तो उसके पार्टिकल्स बॉडी में घुस जाते हैं। यही मेरे साथ हुआ है। दिल्ली पुलिस या फिर सरकार ने भले इसे नहीं माना, लेकिन मुझे लगता है कि ये पैलेट गन हो सकती है। सवाल: सरकार से क्या कहना चाहेंगे?जवाब: अगर पैलेट गन पर बैन है, तो कैसे इस्तेमाल हो सकती है। इसकी जांच होनी चाहिए कि कौन इसे इस्तेमाल कर रहा है। पैलेट गन का दावा सच निकला तो दिल्ली का पहला केस होगा लेफ्ट के स्टूडेंट विंग AISA के कार्यकर्ता दानिश के मुताबिक, रैपिड एक्शन फोर्स के वर्दीधारी जवान ने पैलेट गन से फायर किया गया था। अगर ये दावे सही हुए तो पहली बार होगा कि दिल्ली में सिविल प्रोटेस्ट में पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया। दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन इस्तेमाल नहीं की गई है। ये दावे झूठे और भ्रामक हैं। इन अफवाहों को आगे न बढ़ाएं। पैलेट गन इस्तेमाल के नियम क्या हैं

दैनिक भास्कर 24 Jul 2026 5:34 am

बांग्लादेश में खसरे का कहर जारी, दो बच्‍चों की मौत के बाद मरने वालों का आंकड़ा 805 पहुंचा

बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप जारी है। गुरुवार को इस बीमारी जैसे लक्षणों वाले दो और बच्चों की मौत हो गई। इसके साथ ही मरने वालों की कुल संख्या बढ़कर 805 हो गई है

देशबन्धु 24 Jul 2026 5:10 am

शादी के दिन आंतें फटीं, 5 महीने खुला रहा पेट:सूप पिया तो छाती से बह निकला, हनीमून पर भी नहीं जा पाया

दुर्लभ बीमारियों की सीरीज 'ऐ जिंदगी' में आज कोलकाता के जगदीशपुर में रहने वाले 31 साल के सुभजीत कर्माकर का दर्द। भास्कर रिपोर्टर नीरज झा ने ये पूरी कहानी सुनी और उन्हीं की जुबानी हू-ब-हू आपके सामने रख दी… '6 मार्च 2022 की शाम। कोलकाता के एक बैंक्वेट हॉल में हमारी शादी की पार्टी चल रही थी। मेहमानों की भीड़ थी। सभी बधाइयां दे रहे थे, फोटो खिंचवा रहे थे। कोई लिफाफा दे रहा था, तो कोई गिफ्ट। सामने पूरा परिवार, रिश्तेदार और दोस्त गानों की धुन पर झूम रहे थे। इसी बीच, मेरे पेट में तेज दर्द उठा। जैसे-जैसे समय बीत रहा था, दर्द बढ़ता जा रहा था। मुझे सिर्फ बर्दाश्त करना था, न करता तो सभी का मजा खराब हो जाता। रात करीब 1 बजे पार्टी खत्म हुई। 2 बजे हम घर पहुंचे। अपने कमरे में जाते ही मैं दर्द के मारे पलंग पर गिर पड़ा। मैं पसीना-पसीना था। पत्नी घबरा गई। बार-बार पूछने लगी- क्या हुआ? मैंने कराहते हुए कहा- दर्द बहुत तेज है। अलमारी में दवा रखी है, दे दो। पत्नी ने फौरन टेबलेट निकाली और दे दी। मैंने दवा तो खा ली, लेकिन असर नहीं हुआ। पूरी रात छटपटाते हुए कभी बिस्तर पर लेटता, तो कभी कमरे में टहलता। मेरी शादी की पहली रात ऐसे ही बीत गई। सुबह 7 बजते ही हम दोनों डॉक्टर के पास पहुंचे। उन्होंने सीटी स्कैन कराने को कहा। रिपोर्ट देखी तो डॉक्टर बोले- ‘फैटी लिवर है। इसी वजह से दर्द हो रहा है। उबला और हल्का खाना खाइए। उन्होंने कुछ दवाइयां दीं, कहा- आराम हो जाएगा। दो-तीन दिन तो राहत मिली, लेकिन कुछ खाते ही गले में अजीब सा दर्द होता। ऐसा लगता, जैसे- गले में कोई खुरदरी चीज रगड़कर नीचे जा रही हो। हर निवाले के साथ दर्द और जलन बढ़ती जा रही थी। हफ्तेभर बाद फिर तेज दर्द उठा। खड़ा होना, बैठना, यहां तक कि सांस लेना मुश्किल हो गया। हम दोनों बिना देर किए दूसरे डॉक्टर के पास पहुंचे। डॉक्टर ने कई जांचें कराईं और बताया कि मेरी बड़ी आंत 6-7 जगह से फट गई है। तुरंत ऑपरेशन कराना होगा। सर्जरी में देरी हुई तो इंफेक्शन फैल जाएगा। जान को भी खतरा हो सकता है। दो दिन बाद हम हनीमून के लिए मनाली जाने वाले थे। लेकिन सारा प्लान धरा का धरा रह गया। डॉक्टर के केबिन से बाहर निकलते हुए मेरी नजर पत्नी मोमिता पर पड़ी। वह चुप थी, लेकिन उसकी आंखों में घबराहट साफ नजर आ रही थी। बीमारी से कहीं ज्यादा डर उसके टूटते सपनों का था। तभी पत्नी ने मेरा हाथ कसकर पकड़ा और बोली- जब सर्जरी ही एकमात्र रास्ता है, तो फौरन करवा लो। घूमने कभी और चलेंगे। सर्जरी का खर्च 5 लाख रुपए था। शादी में ही 15-20 लाख रुपए खर्च हो चुके थे। सेविंग्स भी काफी कम बची थी, इसलिए दोस्तों से पैसे उधार लेकर अस्पताल में जमा कराए। मुझे तुरंत ऑपरेशन थिएटर ले गए। एनेस्थीसिया दिया। रात में जब होश आया, तो सबसे पहले नजर छाती और पेट पर पड़ी। पेट खुला हुआ था, उसे कवर करने के लिए एक बैग जैसा कुछ लगा था। मैंने देखते ही डॉक्टर से पूछा- क्या सर्जरी पूरी नहीं हुई? पेट में ये क्या लगा दिया। उन्होंने बताया कि आंतों के साथ-साथ भोजन नली भी फट गई थी, इसलिए उसकी भी सर्जरी करनी पड़ी। आंत को जोड़ने के लिए पहले सर्जिकल स्टेपल लगाए। फिर मेडिकल स्यूचर (टांके) लगाए, लेकिन अंदर की परत इतनी पतली हो गई थी कि टांके टिक ही नहीं पाए। आंतें बार-बार फट रही थीं। आंतों पर दबाव न पड़े, इसलिए पेट पर स्टूल बैग लगाया है। इससे ही स्टूल यानी पॉटी पास होगी। जब तक अंदरूनी घाव भर नहीं जाता, तब तक खाना भी फीडिंग ट्यूब से दिया जाएगा। चार-पांच महीने में घाव सूख जाएंगे। तब पेट और भोजन नली की सर्जरी होगी। हॉस्पिटल का खर्च बहुत ज्यादा था, इसलिए घर आ गया। हर रोज एक नर्स घर आकर ड्रेसिंग करती थी। उसमें हर दिन 3-5 हजार रुपए खर्च होते थे। 5 महीने बाद यानी 15 अगस्त को मैं डॉक्टर को दिखाने गया। उन्होंने घाव देखकर कहा- अब टांके लग सकते हैं। दोबारा भर्ती हो जाओ। इसबार सर्जरी का खर्च 30 लाख रुपए था। ये सुनते ही मैं घबरा गया। 5 महीने से बेड पर था। कोई कमाई नहीं थी। आखिर कहां से लाता इतने पैसे। तब पत्नी ने कहा कि वो अपने सारे जेवर बेच देगी। दोस्तों ने भी क्राउडफंडिंग के जरिए 10 लाख रुपए जुटाए। बाकी रकम का इंतजाम उधार लेकर किया। डॉक्टर ने सर्जरी की। भोजन नली और पेट की सर्जरी करके टांके लगाए। एक-दो दिन बाद वॉशरूम गया, तो नेचुरल रास्ते से स्टूल पास हुआ। तब मोमिता अस्पताल में नहीं थी। मैंने मैसेज कर उसे बताया कि अब मैं ठीक हो गया हूं। करीब दो घंटे बाद हॉस्पिटल के स्टाफ ने पूछा- खाने में कुछ लोगे। मैंने सूप ऑर्डर किया। जैसे ही सूप पिया, छाती के ऊपर कुछ गिला-गिला सा महसूस हुआ। मैं हैरान रह गया। सूप पिया मुंह से, ये पेट और छाती पर कहां से आ गया। नर्स ने तुरंत डॉक्टर को बुलाया। डॉक्टर ने स्टाफ से कहा- ऑपरेशन थिएटर में ले चलो। टांके खुल गए हैं। आंत फट गई है, इसलिए तुरंत सर्जरी करनी होगी। डॉक्टरों ने दोबारा ऑपरेशन किया, लेकिन शरीर के टिशू इतने कमजोर हो चुके थे कि टांके टिक ही नहीं पाए। तमाम कोशिशों के बावजूद, उन्हें सर्जरी बीच में ही छोड़नी पड़ी। जब होश आया, तो देखा पेट पहले की तरह खुला था। आंतें दिख रही थीं। बाद में एक खास बैग (वूंड मैनेजमेंट बैग) मेरे पेट पर लपेट दिया, ताकि इंफेक्शन न हो। मेरी हालत बिगड़ती जा रही थी। ब्लड प्रेशर गिरकर 45/80 तक पहुंच गया। डॉक्टर ने पत्नी से कह दिया कि बचने की उम्मीद कम है। कुछ भी हो सकता है। हालांकि पत्नी और पापा दोनों ने उम्मीद नहीं छोड़ी। कोलकाता के कई बड़े अस्पतालों में रिपोर्ट दिखाई। सबका यही कहना था कि ऐसे मामलों में सिर्फ 20-30 परसेंट लोग ठीक हो पाते हैं। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई न जाने कितने शहरों के डॉक्टरों को कॉल किया। केस समझाया, लेकिन सबने मना कर दिया। आखिर में हैदराबाद के AIG अस्पताल के डॉक्टरों को रिपोर्ट भेजी। उन्होंने कहा- वादा नहीं कर सकते, लेकिन पूरी कोशिश करेंगे। इसके बाद हम हैदराबाद पहुंच गए। करीब 30 दिनों तक जांच हुई। एक डॉक्टर ने मेरी स्किन देखकर कहा- जेनेटिक टेस्ट कराना होगा। 5 दिन बाद पता चला कि मुझे वैस्कुलर एह्लर्स-दानलोस सिंड्रोम (vEDS) है। डॉक्टर बोले- इसी बीमारी की वजह से आंतें बार-बार फट रही है। टांके भी खुल रहे हैं। इसके बाद 14 डॉक्टरों की टीम ने 8 घंटे सर्जरी की। ऑपरेशन कामयाब रहा, लेकिन साढ़े तीन महीने तक अस्पताल में रहना पड़ा। पैसे खत्म हो गए। पापा ने मजबूरी में 3.5 बीघा जमीन सिर्फ 50 लाख रुपए में बेच दी, जिसकी कीमत आज 4 करोड़ से ज्यादा है। तीन बार सर्जरी और अस्पताल के तमाम खर्चे मिलाकर अब तक करीब सवा करोड़ रुपए लग चुके हैं। मुझपर अब भी 8 लाख रुपए का कर्ज है। एक सर्जरी बाकी है, जिसमें 50 लाख रुपए और लगेंगे। तब तक स्टूल बैग लगाकर रहना पड़ेगा। इस बीमारी ने मुझसे सुहागरात, रोमांस, हनीमून… सब छीन लिया। हर हफ्ते हॉस्पिटल जाना, चेकअप करवाना, ड्रेसिंग कराना, यही मेरी जिंदगी है। सब खो चुका हूं, लेकिन जीने की हिम्मत है। खुद को संभालने के लिए किताबें पढ़ता हूं। लेकिन बीमारी से पहले मेरी जिंदगी ऐसी नहीं थी। 2016 में कंप्यूटर साइंस से बीटेक करने के बाद मैं नौकरी के लिए बेंगलुरु चला गया था। सब ठीक चल रहा था, तभी कोरोना के कारण कोलकाता लौटना पड़ा। यहीं से वर्क फ्रॉम होम करता रहा। फिर 2022 में मोमिता से लव मैरिज कर ली। हम दोनों एक-दूसरे को बचपन से जानते थे। साथ पढ़े थे। शायद, इसलिए मुश्किल वक्त में भी वो मेरा हाथ थामे हुए है। बीमारी की वजह से नौकरी छूटी, लेकिन मोमिता ने मुझे हौसला दिया। आखिर मुझे एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी मिल गई है, जिससे अब घर खर्च चल रहा है। हालांकि, मुझे उसकी बहुत चिंता होती है। सोचता हूं, उस पर क्या बीतती होगी। रिश्तेदार भी उसे ताने देते हैं। कहते हैं- कैसी किस्मत लेकर आई है। शादी होते ही पति को अस्पताल पहुंचा दिया। अगर मुझे अपनी बीमारी के बारे में कुछ भी पता होता तो शादी न करता। कम से कम मेरे साथ उसकी जिंदगी तो न बर्बाद होती। मैंने उससे कई बार कहा, तुम चाहो तो दूसरी शादी कर लो। वो हमेशा मना कर देती है। इस बीमारी से पहले मैं हर दिन जिम जाता था, दौड़ता था। वजन भी 72 किलो था, लेकिन बीमारी के कारण घटकर 37 किलो रह गया है। मेरी पुरानी फोटो देखकर कोई पहचान भी नहीं पाएगा।' सुभजीत अपना दर्द बयां कर रहे थे, तभी कमरे में एक बुजुर्ग आते हैं। सुभजीत बताते हैं- ये मेरे पापा हैं। इनका नाम रवींद्र नाथ कर्मकार हैं। रवींद्र बेटे की ओर देखते हुए कहते हैं- जब यह पांच साल का था, तभी इसकी मां गुजर गई। दो साल बाद बड़े बेटे को तेज बुखार आया था और अचानक उसकी मौत हो गई। आज तक पता नहीं चला कि उसकी मौत किस बीमारी से हुई। तब मैं कोलकाता में बाटा इंडिया में क्लर्क था। पत्नी के जाने के बाद घर में सुभजीत की देखभाल करने वाला कोई नहीं बचा, इसलिए नौकरी छोड़नी पड़ी। शादी के बाद जब इसकी बीमारी सामने आई और एक के बाद एक सर्जरी होने लगी, तो मन घबराने लगा। भगवान से यही प्रार्थना करता हूं कि किसी तरह मेरा बेटा ठीक हो जाए। सुभजीत की कहानी सुनने के बाद भास्कर रिपोर्टर नीरज झा कोलकाता स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ के जेनेटिक डिपार्टमेंट पहुंचे। वहां डिपार्टमेंट हेड डॉ. दिपांजना दत्ता से मुलाकात की। डॉ. दत्ता को सुभजीत की बीमारी के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि एह्लर्स-दानलोस सिंड्रोम (EDS) का ही एक प्रकार 'वैस्कुलर EDS' है। यह एक जेनेटिक बीमारी है। शरीर के COL3A1 जीन में खराबी के कारण सही मात्रा या गुणवत्ता में 'कोलेजन' नहीं बन पाता। जैसे घर को जोड़ने और मजबूत बनाने के लिए सीमेंट की जरूरत होती है, वैसे ही शरीर की कोशिकाओं और अंगों को मजबूती देने के लिए कोलेजन नाम का प्रोटीन जरूरी है। इस बीमारी में त्वचा बहुत पतली, लचीली और नाजुक हो जाती है। ब्लड प्रेशर थोड़ा सा भी बढ़ने पर नसों के फटने का खतरा रहता है। वैस्कुलर EDS में आंतें फट जाती हैं। इस बीमारी में मांसपेशियां और टिशू इतने पतले हो जाते हैं कि कागज की तरह फटने लगते हैं। सर्जरी के दौरान या बाद में टांके टिक नहीं पाते। घाव देरी से भरते हैं। बचपन में इस बीमारी के लक्षण साफ नजर नहीं आते। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, शरीर लचीला होने लगता है। पाचन से जुड़ी समस्याएं बढ़ जाती हैं। उम्र के साथ-साथ यह बीमारी पूरे शरीर में फैलकर जानलेवा रूप ले लेती है। यह बीमारी माता-पिता से बच्चे में ऑटोसोमल डॉमिनेंट पैटर्न के जरिए आती है। हमारे शरीर में हर जीन की दो कॉपी होती हैं। एक कॉपी मां और दूसरी पिता से मिलती है। 'डॉमिनेंट' बीमारी का मतलब है कि अगर बच्चा माता या पिता में से किसी एक से प्रभावित COL3A1 जीन लेता है, तो उसे यह बीमारी हो सकती है। यदि माता या पिता में से किसी एक को ‘वैस्कुलर EDS’ है, तो उनके हर बच्चे में यह बीमारी ट्रांसफर होने का खतरा 50 प्रतिशत रहता है। दुनिया भर में लगभग 2 लाख लोगों में से केवल 1 व्यक्ति को यह बीमारी होती है। वर्तमान में इसकी कोई जीन थेरेपी या स्थायी इलाज नहीं है। -------------------------------------------------------- ऐ जिंदगी सीरीज की यह खबर भी पढ़ें… 1- सिर से जुड़ीं दो बहनें अब अलग नहीं होना चाहतीं: सलमान खान ने बहन बनाया, इलाज का वादा किया, अब फोन तक नहीं उठाते ये हैं सबा और फरहा। उम्र 24 साल। दोनों का जन्म एक दिन, एक समय और एक ही मां की कोख से हुआ, सो ये जुड़वां कहलाती हैं। लेकिन… इनके जिस्म अलग-अलग नहीं, सिर से आपस में जुड़े हैं। वो भी इस तरह कि दोनों एक दूसरे को देख नहीं सकतीं। आईने में भी नहीं, अगर एक का रुख आईने की तरफ होता है तो दूसरी का उसके उलट। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें… 2- चेहरे पर मांस के लोथड़े देख लोग कहते हैं भूत: शक्ल देखकर 5 लोग गड्ढे में जा गिरे, मां बोली-मरेगा तभी बला टलेगी ऊपर आपने जो तस्वीर देखी, उनका नाम है मिथुन चौहान। उम्र 29 साल। जो भी इन्हें पहली बार देखता है, डर जाता है। भूत कहता है या जानवर। दुर्लभ बीमारियों की सीरीज ‘ऐ जिंदगी’ के लिए इस बार इन्हीं की तलाश है। मैं नीरज झा इसी तलाश में पहुंचा पटना से करीब 150 किलोमीटर दूर नवादा जिले के नारदीगंज ब्लॉक। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें…

दैनिक भास्कर 24 Jul 2026 4:58 am

‘पेपर लीक में फास्ट-ट्रैक कोर्ट से सजा मिलेगी’:लेकिन ये होगा कैसे, 3 बड़े लूपहोल, अबतक 45 में सिर्फ 2 पेपर-लीक में सजा

NEET पेपर लीक प्रोटेस्ट, संसद मार्च और फिर पुलिस का लाठीचार्ज। विपक्ष ने पीएम आवास तक घेरा, लेकिन पीएम मोदी एक शब्द नहीं बोले। फिर 23 जुलाई की सुबह उन्होंने X पर लिखा- 'युवाओं के हित से ज्यादा जरूरी कुछ भी नहीं है। पेपर लीक के दोषियों को सजा देने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट्स बनेंगे। युवाओं के भविष्य के साथ खेलने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।' देर रात एक वीडियो मैसेज में भी कहा- 'फास्ट-ट्रैक कोर्ट का प्रपोजल 24 जुलाई, शुक्रवार की कैबिनेट बैठक में रखेंगे। अगले सप्ताह संसद में इससे जुड़ा बिल पास कराने की कोशिश की जाएगी।' इधर दिल्ली हाई कोर्ट ने पेपर लीक के मामले देखने के लिए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट भी बना दी। तो क्या अब फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने से सारी दिक्कतें दूर हो जाएंगी या इसमें भी कोई बड़ा लूपहोल; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… सवाल-1: एग्जाम में गड़बड़ी के मामलों में अब तक कितने लोगों को सजा हुई है?जवाब: 2002 से 2025 तक 45 बड़े एग्जाम में पेपर लीक हुआ। इन सब में 1-1 लाख या उससे ज्यादा बच्चे बैठे थे। अब तक सिर्फ 2 मामलों में सजा सुनाई गई। ये सारी जानकारियां इंडियन एक्सप्रेस की इन्वेस्टिगेशन में सामने आई हैं। जिन दो मामलों में दोषी ठहराए गए, वो रेलवे भर्ती बोर्ड से जुड़े हैं… पहला मामला, 2002: 23 साल बाद सजा, लेकिन सारे दोषियों को जमानत दूसरा मामला, 14 साल बाद सजा, मुख्य आरोपी जमानत पर बाहर सवाल-2: NEET 2026 के मामले में अब तक क्या हुआ है?जवाब: 3 मई 2026 को हुआ NEET-UG एग्जाम पेपर लीक के खुलासे के बाद 12 मई को रद्द कर दिया गया। अभी CBI, राजस्थान SOG और राज्यों की पुलिस जांच कर रही हैं। 13 आरोपी गिरफ्तार हुए। इसमें NTA की पेपर-सेटिंग कमेटी से जुड़े दो एक्सपर्ट भी हैं- पुणे की बायोलॉजी की लेक्चरर मनीषा गुरुनाथ मंधारे और केमिस्ट्री के प्रोफेसर पी. वी. कुलकर्णी। एग्जाम करवाने वाली संस्था नेशनल टेस्टिंग एजेंसी, NTA ने 21 जून को कड़ी सुरक्षा में दोबारा एग्जाम करवाया। इसका नतीजा भी आ गया है। पेपर लीक में दिल्ली का राउज एवेन्यू कोर्ट सुनवाई कर रहा है। सभी 13 आरोपियों की ज्यूडिशियल कस्टडी 24 जुलाई तक बढ़ा दी गई है। CBI ने अभी तक चार्जशीट दाखिल नहीं की है और कहा है कि अभी कुछ और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। 24 जुलाई को कोर्ट में आरोपियों की हिरासत बढ़ाए जाने पर सुनवाई होनी है। सवाल-3: आखिर पेपर लीक रोकने का कानून और इसकी खामियां क्या हैं? जवाब: जून 2024 तक पेपर लीक के लिए कोई एक सेंट्रल कानून नहीं था। धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और जालसाजी के लिए IPC की 420, 120B और 467-471 जैसी धाराओं में मुकदमा दर्ज होता था। इनमें जमानत की कोई सख्त शर्तें नहीं हैं। हालांकि कुछ राज्यों ने अलग से नकल-विरोधी भी कानून बनाए, मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट भी शामिल किया। उत्तर प्रदेश में कुछ मामलों में गैंगस्टर एक्ट भी लगाया गया। ये कानून काफी नहीं थे, 2024 में NEET-UG और UGC के एग्जाम में धांधली के बाद, 21 जून 2024 को केंद्र सरकार ने पेपर लीक के खिलाफ नया कानून लागू किया। इसका नाम है- सार्वजानिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम। इस कानून के मुताबिक, पेपर लीक करना, इसमें मदद करना, गलत तरीके से OMR शीट हासिल करना, नकल करवाना, एग्जाम के लिए कंप्यूटर नेटवर्क वगैरह से छेड़छाड़, एग्जाम से जुड़ी फर्जी वेबसाइट बनाने या परीक्षक को धमकी जैसे कामों को सजा के दायरे लाया गया है। ये सभी अपराध गैर-जमानती हैं, जिनमें दो कैटेगरी में सजा का प्रावधान है- सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता कहते हैं कि सिर्फ कानून बना देना काफी नहीं है। कानूनी प्रक्रिया, कोर्ट में सुनवाई के दौरान लूपहोल्स का फायदा उठाकर अपराधी बच निकलते हैं। इसके कुछ उदाहरण देखिए… 2006: रेलवे पेपर लीक, यूपी के 2 विधायक आरोपी 2015: UPPSC प्री एग्जाम, अब तक जांच अधूरी 2016: यूपी PSC, RO/ARO भर्ती, क्लोजर रिपोर्ट पर कोई सुनवाई नहीं लखनऊ के सेंटर पर पेपर लीक हुआ। जांच के बाद CB-CID ने 2018 में क्लोजर रिपोर्ट दी। हालांकि जब कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया, तो एजेंसी ने दूसरी क्लोजर रिपोर्ट दी।इस पर अब तक कोई फैसला नहीं हुआ है। 2016: कर्नाटक PUC, सभी आरोपी बरी कर्नाटक ‘प्री यूनिवर्सिटी कोर्स’ पेपर लीक में सीनियर ऑफिसर्स सहित 19 लोग गिरफ्तार हुए।हालांकि 2024 में बेंगलुरु सेशन कोर्ट ने जांच में गंभीर खामियों का हवाला देकर सबको बरी कर दिया। 2021: राजस्थान सब-इंस्पेक्टर भर्ती, अधिकारी को जमानत 2025 में राजस्थान हाई कोर्ट ने कहा कि राजस्थान पब्लिक सर्विस कमीशन, RPSC के अंदरूनी लोगों ने ही पेपर लीक करवाया।आरोपी RPSC मेंबर रामू राम नायका जमानत पर हैं। बाकी दो मेंबर- मंजू शर्मा और संगीता आर्या ने इस्तीफा दे दिया। उन्हें कोई सजा नहीं हुई। 2024: NEET-UG, CBI कोर्ट में सुनवाई जारी सवाल-4: क्या फास्ट ट्रैक कोर्ट बनने से पेपर लीक की दिक्कतें दूर हो जाएंगी?जवाब: बहुत मुश्किल है, क्योंकि इसमें 3 बड़ी अड़चनें हैं… 1. फास्ट ट्रैक कोर्ट पर केंद्र सरकार का सीधा कंट्रोल नहीं फास्ट ट्रैक कोर्ट्स, यानी FTCs को कंट्रोल करने वाला कोई केंद्रीय कानून नहीं है। इन पर राज्य सरकारों का नियंत्रण है। 21 मार्च 2025 को लोकसभा में एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने कहा- ‘FTCs और उनका कामकाज राज्य और UTs और राज्यों के हाई कोर्ट्स के अधीन है।’ आगे कहा गया, ‘संविधान के आर्टिकल 233 के तहत, डिस्ट्रिक्ट, निचली कोर्ट्स और FTCs में जजों की नियुक्ति राज्य के हाई कोर्ट की सिफारिश और राज्य के गवर्नर के अधीन है। इस प्रक्रिया में केंद्र सरकार की कोई सीधी भूमिका नहीं है।’ 2. हर मामला तेजी से निपटाना मुश्किल 3. जल्दबाजी से गलत फैसले का खतरा सुप्रीम कोर्ट में वकील विराग गुप्ता कहते हैं, POCSO, ड्रग्स एक्ट और दूसरे गंभीर मामलों में भी जिन फास्ट ट्रैक कोर्ट से जल्द न्याय देने की बात की गई, वो भी व्यावहारिक तौर पर सफल नहीं है। नए क्रिमिनल कानूनों में भी 3 साल के भीतर न्याय की बात है, लेकिन जिला अदालतों में ही सबसे ज्यादा पेंडिंग मामले हैं।’ सवाल-5: इससे पहले जो फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए, वो कैसा काम कर रहे?जवाब: देश में अभी 2 तरह के फास्ट ट्रैक कोर्ट हैं- 1. फास्ट ट्रैक कोर्ट, FTC 2. फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट, FTSC भारतीय न्याय संहिता, यानी BNS में सिफारिश है कि मुकदमों का निपटारा 2 साल और यौन अपराधों का निपटारा 2 महीने के अंदर होना चाहिए। वहीं FTSC योजना के तहत टारगेट है कि ये हर 3 महीने में 42 मुकदमों के हिसाब से सालाना 165 मामलों का निपटारा करें। हालांकि तेजी से काम करने के बावजूद फास्ट ट्रैक कोर्ट जरूरत भर मुकदमों की सुनवाई नहीं कर पा रहे… ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर:धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा अब तक क्यों नहीं हुआ, 5 पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स से समझिए; क्या आगे भी नहीं हटाए जाएंगे जंतर-मंतर पर 33 दिन से कॉकरोच जनता पार्टी का अनशन, सोनम वांगचुक की 25 दिनों की भूख हड़ताल, पीएम आवास के बाहर राहुल गांधी का धरना, संसद में रोज गूंजता हंगामा और अब देश के सभी जिलों में प्रदर्शन का आह्वान। सभी की एक ही मांग है- शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 24 Jul 2026 4:48 am

कुवैत-इराक के अब्दाली बॉर्डर पर ड्रोन हमला, कोई हताहत नहीं

कुवैत के उत्तरी हिस्से में इराक की सीमा से लगा अब्दाली बॉर्डर क्रॉसिंग ड्रोन हमले का निशाना बना। इस हमले में कुछ सामान को नुकसान पहुंचा, लेकिन किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

देशबन्धु 24 Jul 2026 12:34 am

'पहले धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, फिर चर्चा' पर अड़ा विपक्ष:पीएम मोदी ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट का दांव चला, प्रियंका NDA सांसदों के सामने डट गईं

पेपर लीक के मुद्दे पर संसद के मानसून सत्र का चौथा दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ गया। लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्ष शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा रहा, जबकि संसद के बाहर भी सत्तापक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच तीखी नारेबाजी देखने को मिली। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक के दोषियों के खिलाफ फास्ट-ट्रैक कोर्ट में मुकदमे चलाने का दांव चला। सत्र शुरू होने से पहले उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट कर कहा कि पेपर लीक के मामलों में दोषियों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई करने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था की जाएगी। उधर, संसद परिसर में एनडीए सांसदों ने हुए प्रदर्शन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री आवास के बाहर राहुल गांधी और साथी नेताओं के धरने को मुद्दा बनाया। इसी दौरान कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी भी वहां पहुंचीं और एनडीए सांसदों के सामने खड़ी होकर नारेबाजी किया। मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों का सरकार और पूरे सिस्टम से भरोसा उठ चुका है। अगर सरकार को छात्रों पर भरोसा है तो उनसे बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और छात्रों पर लाठीचार्ज के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग दोहराई। इससे पहले आज लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई, लेकिन महज 2 मिनट बाद ही विपक्षी सांसद वेल में पहुंच गए और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी शुरू कर दिए। हंगामे के बीच स्पीकर ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। सदन स्थगित होने के बाद राहुल गांधी, अखिलेश यादव समेत विपक्षी दलों के कई सांसद स्पीकर ओम बिरला से मिलने पहुंचे। दोपहर 12 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, लेकिन विपक्ष का हंगामा जारी रहा। सांसद लगातार ‘धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो’ के नारे लगाते रहे। इसके बाद सदन को दोपहर 2 बजे तक और फिर तीसरी बार शुरू होने के कुछ ही मिनट में ही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। राज्यसभा में भी दिनभर लगभग यही स्थिति रही। सुबह 11 बजे कार्यवाही शुरू होते ही नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई। हंगामे के कारण सदन को पहले 12 बजे तक स्थगित करना पड़ा। दोपहर 12 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता सदन जेपी नड्डा के बीच तीखी नोक-झोंक हुई। कुछ ही मिनटों में सदन फिर स्थगित हो गया। दोपहर 2 बजे सदन करीब एक मिनट चला और फिर 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। 3 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, लेकिन लगातार हंगामे के बाद अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दिया गया। इस तरह पेपर लीक के मुद्दे पर राजनीतिक टकराव संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह जारी रहा। वीडियो देखने के लिए ऊपर थंबनेल पर क्लिक करें।

दैनिक भास्कर 23 Jul 2026 7:40 pm

आज का एक्सप्लेनर:धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा अब तक क्यों नहीं हुआ, 5 पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स से समझिए; क्या आगे भी नहीं हटाए जाएंगे

जंतर-मंतर पर 33 दिन से कॉकरोच जनता पार्टी का अनशन, सोनम वांगचुक की 25 दिनों की भूख हड़ताल, पीएम आवास के बाहर राहुल गांधी का धरना, संसद में रोज गूंजता हंगामा और अब देश के सभी जिलों में प्रदर्शन का आह्वान। सभी की एक ही मांग है- शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो। आखिर अब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा क्यों नहीं हुआ? हमने यही सवाल 5 पॉलिटिकल एक्सपर्ट्स से पूछा। इसके पीछे कोई एक वजह नहीं, बल्कि 4 बड़ी वजहों का गुच्छा है। इन्हें ही समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में… रशीद किदवाई और अमिताभ तिवारी का मानना है कि सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा ले लिया, तो ‘एक्सेप्टेंस ऑफ गिल्ट’ का संदेश जाएगा। यानी सरकार से गलती हुई है और उसने स्वीकार कर ली है। पीएम मोदी ऐसी मैसेजिंग नहीं देना चाहते। इसीलिए सरकार पेपर-लीक के मुद्दे पर गंभीर और प्रो-एक्टिव दिखना चाहती है… रशीद किदवाई कहते हैं, ‘मोदी सरकार की ऐसी धारणा बनी है कि उसमें मंत्रालय नहीं, सबकुछ पीएमओ से तय होता है। ऐसे में मंत्री ने इस्तीफा दिया, तो ये चर्चा हो सकती है कि पीएमओ की भी गलती है। पीएम मोदी कतई नहीं चाहेंगे कि ऐसा हो।’ निशांत कुमार बताते हैं कि नीति छोटी हो या बड़ी, मामला विदेश से जुड़ा या किसी संकट से निपटने का, कमान सीधे पीएमओ के हाथ में रहती है। ऐसे में मंत्रियों को पूरी तरह जिम्मेदार बनाकर इस्तीफा लेना आसान नहीं है। अमिताभ तिवारी, आशुतोष और निशांत कुमार मानते हैं कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा न लेने के पीछे ‘द मोदी वे ऑफ पॉलिटिक्स’ है, माने यही पीएम मोदी की पॉलिटिक्स का तरीका है। आशुतोष इसे डिकोड करते हुए कहते हैं, ‘पीएम मोदी विदेश दौरे पर वर्ल्ड लीडर्स से गले मिलते हैं, हैंडशेक करते हैं, झप्पियां पाते हैं और ठहाके लगाते हैं। लेकिन ये चीजें भारत में बहुत कम दिखती है। पीएम मोदी न तो विपक्ष और न ही अपनी पार्टी के नेताओं से ऐसे मिलते हैं। वो यह किसी भी तरह से प्रकट नहीं करना चाहते हैं कि उन्हें कोई दबाव में ला सकता है। ये सब पीएम मोदी की पर्सनैलिटी का हिस्सा है। वो अपनी पार्टी और सरकार के सबसे बड़े नेता हैं। ऐसे में उनका रवैया पूरी सरकार और पार्टी का रवैया बन जाता है।’ निशांत कुमार कहते हैं कि पीएम मोदी कल्ट पॉलिटिक्स के लिए जाने जाते हैं। कल्ट यानी ऐसा व्यक्तित्व जो हारता नहीं। कमजोर नहीं दिखता। इसलिए चाहे परीक्षा पेपर लीक का मामला हो या कोई और आरोप मोदी सरकार न आरोप मानती है, न मंत्रियों के इस्तीफे होते हैं। अमिताभ तिवारी और हर्षवर्धन त्रिपाठी मानते हैं कि सरकार ने अगर मांग मान ली और धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ले लिया, तो मांगों का पिटारा खुल जाएगा। इसके संकेत भी दिखने लगे हैं… रशीद किदवाई मानते हैं कि बीजेपी सरकार ने पिछली मनमोहन सिंह की सरकार से सीख ली हो, जहां आरोप लगते ही या मांग होते ही मंत्रियों के इस्तीफे हो जाते थे। बीजेपी ये ट्रेंड अपनी सरकार में नहीं लाना चाहती। 2015 में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे पर आरोप लगे कि दोनों ने लंदन में रह रहे भगोड़े ललित मोदी की वहां से पुर्तगाल जाने में मदद की है। सुषमा और वसुंधरा के इस्तीफे की मांग होने लगी। तब 24 जून 2015 को केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने एक बयान दिया- 'नहीं… नहीं, इसमें (मोदी सरकार में) मंत्रियों के त्यागपत्र नहीं होते हैं, भैया। यूपीए सरकार नहीं है, ये एनडीए सरकार है।' राजनाथ का यही बयान बीजेपी सरकार का अघोषित नियम बना हुआ है। निशांत कुमार बताते हैं कि मोदी कुशल राजनेता हैं। वे इस्तीफे के डोमिनोज इफेक्ट से बचना चाहते हैं। उन्हें पता है एक मंत्री का इस्तीफा लेते ही दूसरे मंत्रियों के इस्तीफे की मांग तेज हो जाएगी। इनमें वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी जैसे नाम शामिल हो सकते हैं। ऐसा नहीं है कि मोदी सरकार कभी झुकी नहीं। 2018 में विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर का इस्तीफा और 2021 में कृषि कानून वापस लेना इसकी मिसाल हैं। लेकिन इस बार हालात कुछ थोड़े बदले हुए हैं। तो क्या धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं ही होगा? --------------- ये खबर भी पढ़िए… लड़की को गलत जगह डंडा मारना, बिना वर्दी वाले लाठीबाज बुलाना; डियर दिल्ली पुलिस, ये 4 हरकतें सिर्फ गैरकानूनी नहीं शर्मनाक भी हैं डियर दिल्ली पुलिस, 20 जुलाई को देश के युवा अपनी मांग के साथ संसद की तरफ जा रहे थे। 5 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी लाठी और आंसू गैस के साथ उन पर टूट पड़े। इस बीच कैमरों पर सुरक्षाबलों की कुछ ऐसी हरकतें भी रिकॉर्ड हो गईं, जो गैरकानूनी होने के साथ किसी प्रोफेशनल पुलिस के लिए बेहद शर्मनाक भी हैं। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 23 Jul 2026 6:34 pm

अमेरिकी कोर्ट ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो मामले में तय की ट्रायल की तारीख, 1 जून 2027 से होगी सुनवाई

वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस की सुनवाई मामले में जानकारी सामने आई है। एक अमेरिकी जज ने फैसला सुनाया है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस के मामले में 1 जून, 2027 से ट्रायल शुरू होगा।

देशबन्धु 23 Jul 2026 12:47 pm

ईरान पर सख्ती और सऊदी पर मेहरबानी: ट्रंप की नई न्यूक्लियर डील पर अमेरिका में ही घमासान, उठ रहे हैं बड़े सवाल

मध्य पूर्व की भू-राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है, जिस पर खुद अमेरिका के भीतर ही तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। एक तरफ ट्रंप प्रशासन पारंपरिक रूप से ईरान के परमाणु कार्यक्रमों पर नकेल कसने के लिए कड़े तेवर अपनाए हुए है, वहीं दूसरी तरफ सऊदी अरब के साथ किसी नई न्यूक्लियर डील या रक्षा समझौतों को लेकर दिखाए जा रहे दुलार ने अमेरिकी सियासत में हंगामा मचा दिया है। वाशिंगटन के राजनीतिक गलियारों से लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक इस दोहरे रवैये पर बहस छिड़ गई है कि आखिर ट्रंप की इस रणनीति के पीछे का असली मकसद क्या है और इससे वैश्विक सुरक्षा पर क्या असर पड़ेगा।ईरान पर कड़ा रुख और अधिकतम दबाव की नीतिट्रंप प्रशासन का ईरान के प्रति रवैया हमेशा से आक्रामक रहा है। वाशिंगटन का मानना है कि तेहरान के परमाणु कार्यक्रमों और उसकी क्षेत्रीय गतिविधियों पर लगाम कसना बेहद जरूरी है। यही वजह है कि ईरान पर लगातार आर्थिक प्रतिबंधों का चाबुक चलाया जा रहा है और किसी भी प्रकार की नरमी बरतने से साफ इनकार किया जा रहा है। अमेरिकी रणनीतिकारों का तर्क है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए उस पर 'अधिकतम दबाव' (Maximum Pressure) बनाए रखना ही एकमात्र विकल्प है, ताकि मध्य पूर्व में अमेरिकी हितों और उसके सहयोगियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।सऊदी अरब के साथ न्यूक्लियर डील पर क्यों मचा है बवाल?विवाद की असल जड़ सऊदी अरब के साथ होने वाले संभावित परमाणु और रणनीतिक समझौतों से जुड़ी है। आलोचकों और अमेरिकी सांसदों का सवाल है कि यदि ईरान पर परमाणु प्रसार को लेकर इतनी सख्ती बरती जा रही है, तो रियाद के साथ ऐसी किसी भी डील को हरी झंडी क्यों दी जा रही है जिससे भविष्य में पश्चिम एशिया में हथियारों की होड़ और तेज हो सकती है। अमेरिकी कांग्रेस और कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि इस तरह के समझौते से क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ सकता है और न्यूक्लियर नॉन-प्रोलिफरेशन (परमाणु प्रसार रोकने) के अंतरराष्ट्रीय नियमों पर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं।अमेरिकी राजनीति में उठ रहे हैं तीखे सवालडोनाल्ड ट्रंप की इस दोहरी और व्यावहारिक कूटनीति ने डेमोक्रेट्स के साथ-साथ कई रिपब्लिकन नेताओं को भी असहज कर दिया है। घरेलू स्तर पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि क्या ऊर्जा सुरक्षा और रणनीतिक साझेदारी के नाम पर अमेरिका अपने ही सिद्धांतों से समझौता कर रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यह डील आने वाले समय में अमेरिकी विदेश नीति के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है, क्योंकि मध्य पूर्व के देशों के बीच शक्ति संतुलन को साधने की यह कोशिश अमेरिका को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर भारी पड़ सकती है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 12:22 pm

10 हाथियों जितना बारूद और तबाही का खौफ: अमेरिका ने ईरान में उतारा कोल्ड वॉर का खतरनाक B-1 बॉम्बर

मध्य पूर्व में सुलग रही जंग की आग अब अपने सबसे खतरनाक और विनाशकारी दौर में पहुंच गई है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब खुलकर खूनी संघर्ष का रूप ले चुका है। इसी बीच अमेरिकी सेना ने अपनी ताकत का ऐसा खौफनाक प्रदर्शन किया है जिसे देखकर पूरी दुनिया के होश उड़ गए हैं। अमेरिका ने ईरान समर्थित इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों को नेस्तनाबूद करने के लिए शीत युद्ध (Cold War) के दौर के अपने सबसे घातक और शक्तिशाली एयरक्राफ्ट 'B-1 लांसब्रिर' यानी B-1 बॉम्बर को मैदान में उतार दिया है। इस सुपरसोनिक बॉम्बर की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह अपने साथ करीब 10 हाथियों के वजन के बराबर यानी मीट्रिक टन बारूद और विस्फोटक लेकर उड़ने की क्षमता रखता है।क्या है B-1 बॉम्बर की खासियत और क्यों कांप रहे हैं दुश्मन?बी-1 लांसर (B-1 Lancer) अमेरिकी वायुसेना का एक ऐसा भारी-भरकम और सुपरसोनिक बॉम्बर है, जो अपनी भीषण मारक क्षमता और सटीक निशाना साधने के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। शीत युद्ध के समय सोवियत संघ को टक्कर देने के लिए बनाए गए इस विमान को आधुनिक हथियारों और अत्याधुनिक एवियोनिक्स से लैस किया गया है। यह बॉम्बर बिना किसी रोक-टोक के दुश्मन के आसमान में कोहराम मचा सकता है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पारंपरिक हथियारों और गाइडेड मिसाइलों का एक ऐसा विशाल जखीरा अपने पेट में छिपाकर चलता है, जो कुछ ही पलों में किसी भी देश के सैन्य ठिकानों, बंकरों और एयरबेस को मलबे के ढेर में बदल सकता है।ईरान के IRGC अड्डों पर अमेरिका की भारी एयरस्ट्राइकअमेरिकी सेंट्रल कमांड द्वारा उठाए गए इस कड़े कदम के बाद ईरान समर्थित मिलिशिया और IRGC के ठिकानों पर ताबड़तोड़ मिसाइल और बमबारी की गई है। मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों और सैन्य अड्डों पर लगातार हो रहे हमलों का जवाब देने के लिए वाशिंगटन ने इस बार सीधे तौर पर रणनीतिक बमवर्षकों का इस्तेमाल किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, B-1 बॉम्बर ने अपनी भारी-भरकम मारक क्षमता का इस्तेमाल करते हुए ईरान से जुड़े रणनीतिक कमांड सेंटर्स, हथियार डिपो और खुफिया ठिकानों को पूरी तरह स्वाहा कर दिया है। इस हमले के बाद पूरे इलाके में तनाव और ज्यादा बढ़ गया है।मध्य पूर्व में तीसरे विश्व युद्ध जैसे मंडरा रहे हैं काले बादलअमेरिका और ईरान के बीच सीधी सैन्य भिड़ंत ने ग्लोबल लेवल पर एक नए युद्ध की आशंकाओं को जन्म दे दिया है। जिस तरह से अमेरिका ने अपने सबसे बड़े और विध्वंसकारी बॉम्बर को इस संघर्ष में झोंक दिया है, उससे साफ जाहिर है कि आने वाले दिनों में यह जंग और अधिक भयानक रूप ले सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि इस तनाव को कूटनीतिक स्तर पर जल्द नहीं रोका गया, तो यह मध्य पूर्व की सीमाओं को लांघकर पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले सकता है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी गंभीर संकट आ खड़ा हुआ है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 12:21 pm

जनरल मुनीर के खौफ के बीच हाफिज सईद के बेटे से मिलने पहुंचे शहबाज शरीफ

पाकिस्तान की सियासत और वहां की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के गलियारों से एक ऐसी चौंकाने वाली खबर सामने आई है, जिसने भारत समेत पूरी दुनिया की एजेंसियों के कान खड़े कर दिए हैं। देश के हुक्मरान और सेना प्रमुख के बीच एक अजीब सा खौफ और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। सत्ता की डोर संभालने वाले प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर आखिर किससे इतना ज्यादा डरे हुए हैं कि उन्हें कुख्यात आतंकवादी और लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद के बेटे के दर पर मदद की गुहार लगाने के लिए पहुंचना पड़ा? पाकिस्तान की अंदरूनी राजनीति का यह काला सच अब खुलकर सामने आ रहा है, जहां देश को चलाने के लिए आतंकवादियों के खून-पसीने के रिश्तों और समर्थकों का सहारा लिया जा रहा है।पाकिस्तान की सियासत में क्यों मंडरा रहा है खौफ का साया?मौजूदा समय में पाकिस्तान की सियासत में भूचाल आया हुआ है। एक तरफ देश की चरमराती अर्थव्यवस्था है, तो दूसरी तरफ जनता का गुस्सा और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी का राजनीतिक दबाव सरकार की नींद उड़ाए हुए है। हालात यह हैं कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को अपनी ही कुर्सी और सत्ता जाने का डर सताने लगा है। देश के भीतर सुलगते असंतोष को दबाने और अपने विरोधियों का राजनीतिक रूप से सफाया करने के लिए अब हुक्मरानों ने कट्टरपंथी ताकतों और आतंकियों के सामने घुटने टेकना शुरू कर दिया है, ताकि सत्ता की कुर्सी पर किसी तरह आंच न आए।हाफिज सईद के बेटे की शरण में क्यों पहुंचे शहबाज शरीफ?दुनिया भर में अपनी आतंकी गतिविधियों के लिए बदनाम वैश्विक आतंकवादी हाफिज सईद का परिवार एक बार फिर पाकिस्तान के सत्ता के गलियारों के केंद्र में आ गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना के इशारे पर सत्ता के नुमाइंदे सीधे हाफिज सईद के बेटे से मिलने पहुंचे। इसके पीछे की मुख्य वजह देश के भीतर अपनी राजनीतिक जमीन को मजबूत करना और कट्टरपंथी संगठनों का समर्थन हासिल करना है। पाकिस्तान के हुक्मरान अच्छी तरह जानते हैं कि देश में जब भी उनका सिंहासन हिलता है, तो वे धार्मिक और चरमपंथी ताकतों का इस्तेमाल करके जनता का ध्यान भटका सकते हैं और विरोधियों को कुचल सकते हैं।भारत के खिलाफ रची जा रही है कौन सी नई खतरनाक साजिश?पाकिस्तान के हुक्मरानों और आतंकियों की इस गुप्त और शर्मनाक साठगांठ का सीधा असर क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ना तय है। एक तरफ जहां पाकिस्तान आर्थिक बदहाली के आंसू रो रहा है और आईएमएफ (IMF) के सामने भीख मांग रहा है, वहीं दूसरी तरफ उसके नेता अपनी कुर्सी बचाने के लिए आतंकवादियों के बेटों के साथ गुप्त बैठकें कर रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस मेल-मिलाप का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किसी बड़ी साजिश को रचने और देश के भीतर कड़े विरोध को दबाने के लिए किया जा सकता है। पाकिस्तानी हुक्मरानों की यह मजबूरी जगजाहिर हो चुकी है कि वे अपनी सत्ता बचाने के लिए देश को पूरी तरह आतंकवादियों के हवाले करने से भी पीछे नहीं हट रहे हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 12:20 pm

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच बड़ा फेरबदल: मायखाइलो ड्रापाती बने नए आर्मी चीफ, रूस ने दी 'कसाई' की उपाधि

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे भीषण युद्ध के बीच कीव ने अपनी सैन्य कमान में एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला बदलाव किया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने मेजर जनरल मायखाइलो ड्रापाती को देश का नया आर्मी चीफ यानी थल सेना कमांडर नियुक्त किया है। अपनी आक्रामक सैन्य रणनीतियों के लिए पहचाने जाने वाले ड्रापाती की इस नई नियुक्ति पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि जहां एक तरफ यूक्रेन उन्हें युद्ध के मैदान का एक माहिर खिलाड़ी मानता है, वहीं दूसरी तरफ रूस ने उन्हें आक्रामक रवैये के चलते 'कसाई' तक कह दिया है। कभी ज़ेलेंस्की के फैसलों के विरोध में अपना इस्तीफा तक सौंप चुके ड्रापाती का यह शीर्ष पद तक पहुंचना किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है।कौन हैं मायखाइलो ड्रापाती और क्यों चर्चा में हैं?मायखाइलो ड्रापाती पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से यूक्रेन की सेना में एक कद्दावर और अनुभवी कमांडर के रूप में जाने जाते हैं। साल 2014 में जब डोनबास क्षेत्र में संघर्ष की शुरुआत हुई थी, तब ड्रापाती ने अपनी सूझबूझ और फ्रंटलाइन लीडरशिप से सबको प्रभावित किया था। उनकी आक्रामक सैन्य शैली और युद्ध के मैदान में लिए जाने वाले त्वरित फैसलों ने उन्हें यूक्रेनी सैनिकों के बीच काफी लोकप्रिय बना दिया है। यही वजह है कि जब देश की सेना को सबसे ज्यादा एक सख्त और अनुभवी नेतृत्व की जरूरत है, तब ज़ेलेंस्की ने उनपर भरोसा जताया है।रूस ने क्यों दी 'कसाई' की उपाधि?मायखाइलो ड्रापाती की नियुक्ति के साथ ही मॉस्को की तरफ से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। रूसी मीडिया और सैन्य हलकों में ड्रापाती को 'कसाई' (Butcher) कहकर संबोधित किया जा रहा है। रूस का आरोप है कि ड्रापाती अपनी सैन्य कार्रवाइयों के दौरान अत्यधिक क्रूरता और आक्रामकता का परिचय देते हैं, जिससे दुश्मन सेना के साथ-साथ आम नागरिकों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचता है। हालांकि, यूक्रेन और उसके पश्चिमी सहयोगियों के लिए यही आक्रामक तेवर रूस के खिलाफ जंग जीतने का एक बड़ा जरिया माने जा रहे हैं।कभी राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की को दे चुके थे इस्तीफाइस नियुक्ति का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि मायखाइलो ड्रापाती और राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के बीच के संबंध हमेशा से सहज नहीं रहे हैं। कुछ साल पहले सैन्य रणनीतियों और प्रशासनिक असहमतियों के चलते ड्रापाती ने अपने पद से इस्तीफा तक दे दिया था। उनका वह इस्तीफा इस बात का गवाह था कि वे अपनी शर्तों और सैन्य सिद्धांतों पर समझौता करने के पक्ष में नहीं रहते हैं। हालांकि, मौजूदा युद्ध की विकट परिस्थितियों को देखते हुए दोनों के बीच के गिले-शिकवे दूर हुए और ज़ेलेंस्की ने देश की सबसे बड़ी सैन्य जिम्मेदारी उनके कंधों पर डाल दी है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 23 Jul 2026 12:18 pm

ट्रंप से ईरान की दो टूक, तेहरान पर हमला किया तो पूरा पश्चिम एशिया बनेगा निशाना

होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ताजा चेतावनी पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए ईरान ने कहा है कि यदि अमेरिका उसके नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला करता है तो वह पूरे पश्चिम एशिया में बुनियादी ढांचे और ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाएगा, जिनमें अमेरिकी हितों से जुड़े ठिकाने भी शामिल होंगे

देशबन्धु 23 Jul 2026 7:50 am

टैरिफ बने ट्रंप प्रशासन का नया हथियार

ट्रंप प्रशासन व्यापारिक साझेदार देशों पर दबाव बनाने के लिए टैरिफ का इस्तेमाल कर रहा है, ताकि वे अपने बाजार अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलें, नियमों का बेहतर पालन करें और अमेरिका में मैन्युफैक्चरिंग को फिर से मजबूत बनाया जा सके

देशबन्धु 23 Jul 2026 7:40 am

ईरान को ट्रंप की धमकी: पुल और बिजली संयंत्र होंगे निशाना

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को चेतावनी दी कि यदि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर आगे भी हमले किये तो अमेरिका तेहरान सहित ईरान के पुलों और बिजली संयंत्रों को निशाना बनाकर नष्ट कर देगा

देशबन्धु 23 Jul 2026 7:30 am

ब्लैकबोर्ड-विकास जिंदा होते तो मैं उन्हें थप्पड़ मारती:बच्चे बाप का नाम तक नहीं सुनना चाहते, डोरबेल बजते ही छिप जाते हैं

ब्लैकबोर्ड में कहानी- 8 पुलिसवालों की हत्या के बाद एनकाउंटर में मारे गए गैंगस्टर विकास दुबे की पत्नी रिचा दुबे की। आज वो बच्चों के साथ दुनिया की नजरों से छिपते-छिपाते जिंदगी जी रही हैं… साल 2020, 2-3 जुलाई की दरमियानी रात। मैं अपने छोटे बेटे के साथ लखनऊ वाले घर पर सो रही थी। बड़ा बेटा उन दिनों छुट्टी पर मॉस्को से इंडिया आया हुआ था और अपनी चाची के घर पर था। रात 2 बजे अचानक फोन बजा। फोन उठाते ही दूसरी तरफ से घबराई हुई आवाज आई- ‘रिचा, तुम बच्चों को लेकर कहीं चली जाओ। जितना जल्दी हो सके घर छोड़ दो।’ वो आवाज मेरे पति विकास दुबे की थी। मैंने पूछा- कहां चली जाऊं, वो भी इतनी रात में, आखिर बात क्या है। वो लगभग चिल्लाते हुए बोले- बिकरू में लड़ाई हो गई है। गोलियां चल गई हैं। तुम लोगों की जान को खतरा है। जो कह रहा हूं, वो करो। ये कहकर विकास ने फोन रख दिया। लड़ाई की बात पर मुझे विकास पर गुस्सा तो बहुत तेज आया। गांव में अक्सर उनकी लड़ाइयां होती रहती थी। मैंने बेटे से गुस्से में कहा- हमें घर छोड़कर जाना पड़ेगा। मैं तंग आ गई हूं तुम्हारे पापा के लड़ाई-झगड़ों से। अब मैं इस आदमी को तलाक दे दूंगी। गुस्से में बड़बड़ाते हुए मैंने अलमारी में रखे 4500 रुपए निकाले। छोटे बेटे को लेकर लखनऊ के आलमबाग बस स्टैंड पहुंच गई। हमारे साथ हमारा कुत्ता भी था। वहां वेटिंग रूम में सोच ही रही थी कि कौन सी बस का टिकट बुक करूं, तभी टीवी में देखा कि विकास ने आठ पुलिस वालों को गोली मार दी है। ये देखते ही मेरी धड़कनें बढ़ गईं। हाथ-पैर कांपने लगे। दिमाग ने काम करना बंद कर दिया। मैंने अपने बेटे का हाथ कसकर पकड़ लिया और काफी देर वहीं बैठी रही। उस वक्त बड़ा बेटा 21 और छोटा बेटा 13 साल का था। उस दिन से हमारी जिंदगी पूरी तरह बर्बाद हो गई। हम दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हो गए। गैंगस्टर तो पति था, लेकिन उसके किए की सजा हम भुगत रहे हैं। रिचा दुबे ये बताते हुए रोने लगीं। कुछ देर चुप रहीं फिर बोलीं- विकास की मौत के बाद हमारी प्रॉपर्टी और बैंक खाते सीज कर दिए गए। अपना घर छोड़ना पड़ा। मेरे बच्चों की पढ़ाई छूट गई। उस दिन घर तो छोड़ दिया, लेकिन शहर नहीं छोड़ पाई। दिन में बेटे को लेकर किसी पार्क में बैठी रहती। एक दिन पार्क की तरफ दो पुलिस वालों को आते देखा। मैंने बेटे का हाथ पकड़ा और चुपचाप वहां से उठकर दूसरे पार्क चली गई। डर लगता था कि कहीं पुलिस हमें भी न पकड़ ले। ब्रेड खाकर दिन बिताएं हैं। रात में किसी अधूरी बनी बिल्डिंग में जमीन पर ही सो जाते थे। मुझे आज भी याद है एक रात अपने छोटे बेटे के साथ अधूरी बनी बिल्डिंग में सो रही थी। बेटे को नींद नहीं आ रही थी। कई बार पूछने पर उसने कहा- मुझे भूख लगी है, इसलिए सो नहीं पा रहा। इतने पैसे भी नहीं थे कि बेटे को खाना खिला सकूं। मैंने उसे 50 रुपए दिए और कहा जाकर चाय-बिस्किट ले आ। जितने पैसे थे उसमें तो बस यही आ सकता था। बेटा पैसे लेकर चला गया। उसके जाते ही मैं फूट-फूटकर रोई। मैंने कभी नहीं सोचा था कि बच्चों को ये दिन देखना पड़ेगा। उन्हें खाने के लिए तरसना पड़ेगा। सोचने लगी कि अच्छा हुआ बड़ा बेटा पहले ही अपनी चाची के घर चला गया था। वरना उसे भी भूखे तड़पना पड़ता। खाने के लिए तरसना पड़ता। इधर-उधर भटकते हुए लगभग 8-9 दिन बीत चुके थे। 9 जुलाई की बात है। मैं बेटे के साथ रेलवे स्टेशन पर बैठी थी। वहां टीवी में देखा कि विकास ने उज्जैन के महाकाल मंदिर कैंपस में सरेंडर कर दिया है। विकास के सरेंडर करते ही मैं बेटे को लेकर घर के लिए निकल गई। वहां पहले से ही पुलिस सेंध लगाए बैठी थी। हमें देखते ही पुलिस वाले बोले- ‘बैग को एक तरफ फेंकों और घुटनों के बल हाथ ऊपर करके बैठ जाओ।’ सिर्फ मुझे ही नहीं मेरे बेटे को भी इसी तरह बैठा दिया। उसकी तस्वीरें पूरी दुनिया ने देखीं। उस वक्त एक मां होने के नाते मैं जो महसूस कर रही थी उसे शब्दों में बयां नहीं कर सकती। बेटे को देखकर मन ही मन सोच रही थी कि विकास के किए सजा मेरे बच्चे को मिल रही है। रिचा आगे बताती हैं कि पुलिस वालों ने हमारी तलाशी ली उसके बाद पुलिस स्टेशन ले गए। मैं वहीं विकास का इंतजार करने लगी। कुछ घंटे बीते ही थे तभी एक लेडी पुलिस वाली ने आकर बताया कि विकास दुबे पुलिस एनकाउंटर में मारे गए। मेरे शरीर से तो जान ही निकल गई थी। उस दिन मुझे समझ आया कि जिंदा लाश होना किसे कहते हैं। तब भी छोटा बेटा मेरे साथ था। बेटे ने उस दिन जो कपड़े पहने थे, घर जाते ही उसे जला दिया। उसे उन कपड़ों से नफरत हो गई। उस दिन के बाद से उसने बोलना बंद कर दिया। आज तक उसे कई बार डॉक्टर के पास ले जाना पड़ता है। उसे कई बार समझाया कि तुम्हारे पापा ने गलत किया था। आठ पुलिस वालों को मारा था। फिर भी वो चुप ही रहता है। रिचा बताती हैं कि जिस वक्त विकास का एनकाउंटर हुआ, तब बड़ा बेटा मॉस्को से एमबीबीएस कर रहा था। उसका आखिरी साल था, लेकिन विकास की मौत के बाद वह वापस नहीं जा सका। उसकी फीस भरने के पैसे नहीं थे। फिर वह दिल्ली में रहकर पढ़ने लगा। विकास की मौत के बाद मैं खुद भी बीमार हो गई। नींद नहीं आती थी। बीपी, शुगर सब बढ़ गया। हर दिन थाने जाना पड़ता। पुलिस वाले घंटों पूछताछ करते। वकीलों के चक्कर लगाती। जो वकील कभी विकास के आगे-पीछे घूमते थे, वो मेरी शक्ल देखकर दूर से ही भाग जाते। साल 2022 तक यही सिलसिला चलता रहा। फिर एक दिन डीएम ऑफिस से एक लेटर आया। उसमें लिखा था कि आपकी पूरी प्रॉपर्टी सीज की जाएगी। अगले दिन एक पुलिस वाला घर आ आया और उसने कहा कि कल ही अपना ठिकाना ढूंढ लो, ये घर खाली कर दो। अगले दिन तेज बारिश हो रही थी। छोटे बेटे के साथ किराए का मकान ढूंढने निकल पड़ी। लखनऊ का चप्पा-चप्पा घूम लिया, लेकिन घर तो दूर किसी ने किराए पर एक कमरा तक नहीं दिया। तब बड़े बेटे को बताया कि यहां रहने का कोई ठिकाना नहीं मिल रहा। उसने हमें दिल्ली बुला लिया। हम सब दिल्ली में एक ही कमरे में रहते थे। खाना पकाने के लिए सिर्फ एक इंडक्शन और एक कढ़ाई थी। उसी में खाना बनाते थे। कई महीने तो केवल दाल-चावल बनता था। वो भी भरपेट नहीं। एक दिन घर में केवल इतना चावल बचा था कि दो लोग खा सकें। मैंने सोचा कम से कम बच्चों का पेट तो भर ही जाएगा। दाल-चावल बनते ही मैंने बच्चों को परोस दिया। कुछ देर बाद बच्चे बोले- मम्मी खाना नहीं खाओगी क्या। तब मैंने कह दिया आज भूख नहीं है, तुम लोग खा लो। एकबार कोरियर वाल पार्सल लेकर आया था। घंटी बजी तो बेटा इतना घबरा गया कि खुद को कमरे में बंद कर लिया। पूरा दिन अंदर ही बंद रहा। शाम में बड़ी मुश्किल से समझाकर उसको बाहर निकाला। उसकी हालत भी ठीक नहीं है। ज ब घर की घंटी बजती है तो वह डर जाता है। अगर कोई एक से ज्यादा बार घंटी बजा दे तो उसकी हालत खराब हो जाती है। वो कमरे से बाहर ही नहीं निकलता। हमारे घर में विकास का कोई फोटो नहीं है। न ही कोई उनका नाम लेता है। बच्चों के पास विकास का लाया हुआ एक भी सामान नहीं। रिचा बताती हैं कि जब हमारे पास गुजारा करने के पैसे नहीं बचे तो दोनों बेटों ने छोटी-मोटी नौकरियां ढूंढ़ी। अब दोनों अलग-अलग शहरों में हैं। अपनी पहचान भी छिपाकर रखते हैं। जब भी हम तीनों घर पर होते हैं, हमारी आपस में कोई बात नहीं होती। विकास की मौत के बाद अखबारों में मेरे लिए जाने क्या-क्या छपा। किसी ने छापा- अब बिकरू की कमान रिचा के हाथ रहेगी, रिचा बंदूक उठाएंगी। जिसे देखो वो मेरे बारे में लिख रहा था। किताबें छप गई, फिल्में बन गईं। मेरी दिमागी हालत और बिगड़ने लगी। लगता था कि बीपी बढ़ा हुआ। हमेशा मन में घबराहट होती। ऐसे लगता कि मरने पर सब ठीक हो जाएगा। छोटे-मोटे इलाज से फर्क नहीं पड़ा तो मेदांता अस्पताल में दिखाना पड़ा। रिपोर्ट में कुछ नहीं आया। डॉक्टरों ने काउंसलिंग की सलाह दी। पहले तो मैंने डॉक्टर से भी अपनी पहचान छिपाई, लेकिन बाद में सच बताना पड़ा। विकास का नाम सुनते ही डॉक्टर चौंक गए। कहने लगे कि रोज-रोज यहां आना मंहगा पड़ेगा। ऑनलाइन काउंसलिंग लीजिए। मैंने काफी दिनों तक ऑनलाइन काउंसलिंग ली। आज भी जब आंखें बंद करती हूं तो सारा मंजर सामने आता है। विकास की मौत से पहले का और बाद का भी। पत्नी होने के नाते सभी मामलों में सारी जांचे मेरे ही ऊपर आईं। ईडी, इनकम टैक्स और तमाम झूठे मुकदमें। विकास मुझसे 8-10 साल बड़े थे। मेरे भाई के दोस्त थे। घर आना-जाना था। धीरे-धीरे हमें एक दूसरे से प्यार हो गया। वो ब्राह्मण थे और मैं कायस्थ। परिवार इस शादी के लिए राजी नहीं हुआ। छह-सात साल के रिलेशन के बाद साल 1996 में हमने कोर्ट मैरिज कर ली। साल 2022 में हमारी 25वीं सालगिरह थी। विकास ने वादा किया था कि हम दोबारा शादी करेंगे। उन्होंने कहा था कि तुम लहंगा पहनना, मेहंदी लगाना, मैं घोड़ी पर आऊंगा और हम अपने सारे शौक पूरे करेंगे। जिस दिन हमारी एनिवर्सरी थी उस दिन तो रो रोकर मेरा बुरा हाल हो गया था। कोर्ट कचहरी के खर्च उठाने के लिए जेवर बेचने पड़े। दो सोने के कड़े, दो मंगलसूत्र, अंगूठियां बेचकर वकील की फीस भरी। बहुत मायूस होकर रिचा कहती हैं कि बच्चों की पढ़ाई नहीं रोकनी चाहिए थी। बच्चे अगर गुंडई बदमाशी करते तो उनको वैसी सजा दी जाती। बच्चे पढ़ने वाले थे, मैं मानती हूं कि विकास ने गलती की, लेकिन उसकी सजा बच्चों को नहीं देनी चाहिए थी। रिचा कहती हैं कि विकास ने जो भी किया, मुझे उसका पछतावा है। उसने जिन आठ पुलिसवालों को गोली मारी, मैं उनके परिवार से हाथ जोड़कर माफी मांगती हूं। अगर विकास ने मुझे बताया होता कि उसने पुलिस वालों को गोली मार दी है, तो मैं उस दिन घर छोड़ती ही नहीं। मेरा तो विकास से झगड़ा ही केवल गांव की सियासत को लेकर होता था। कितनी बार उनको समझाया कि ये सब छोड़ दो। डर था कि कोई बच्चों को नुकसान न पहुंचा दे। मुझे हमेशा इस बात का अफसोस रहेगा कि विकास ने अगर मेरी थोड़ी सी भी सुनी होती तो आज जिंदगी कुछ और होती। गांव छोड़कर कानपुर रहने लगी। फिर बाद में बच्चों के साथ लखनऊ रहने लगी। लेकिन विकास बिकरू में ही रहे। कई बार विकास ने कहा कि मैं बच्चों के साथ रहूंगा, उन्हें स्कूल छोड़ने जाऊंगा। फिर गांव से कोई फोन आता, ये फिर चले जाते। महीनों-महीनों वहीं रहते। पति जब थे तब भी जिंदगी मुश्किल थी, उनके जाने के बाद और ज्यादा मुश्किल हो गई। मुश्किल से आंसू रोकते हुए रिचा कहती हैं कि विकास की लड़ाइयां कभी मुझ तक नहीं पहुंचीं। उस दिन भी अगर में बिकरू में होती तो ये सब न होता। शायद ये सुनकर लोग मुझपर हसेंगे, लेकिन वे मुझसे डरते थे। कभी बहस हो जाती थी, तो मैं फोन बंद कर लेती थी। विकास घबरा जाते थे। विकास को मेरे लंबे बाल बहुत पसंद थे। उनसे कुछ भी करवाने के लिए मैं बाल कटवा लेने की धमकी देती थी। उनके जाने के बाद मैंने सबसे पहले बाल कटवा दिए। मैं तो सिर मुंडवा लेना चाहती थी, लेकिन बच्चों ने रोक लिया। विकास अगर जिंदा होते तो मैं उन्हें थप्पड़ मारती और तलाक दे देती। उन्हें पता चलता कि परिवार से दूर होने का दर्द क्या होता है। मैं चाहती हूं कि मेरा लखनऊ वाला घर खुल जाए, सिर्फ इसलिए कि मेरे भगवान वहीं है। बारिश में घर छोड़ते वक्त उन्हें वहीं छोड़ आई थी। मैं उनसे पूछना चाहती हूं कि 25 साल की पूजा का मुझे क्या फल मिला। विकास के एनकाउंटर के बाद कई किताबें लिखी गईं। संजीव मिश्रा ने तो किताब में बेडरूम तक की बातें लिख दीं। सब गलत है। कल को बच्चे सुनेंगे तो क्या सोचेंगे… विकास ने जो किया, उसके लिए मैं पत्नी होने के नाते सभी से माफी मांगती हूं। हर पुलिस वाले के परिवार से माफी मांगती हूं। वे मेरे पति थे, मैं इस सच को झुठला नहीं सकती। मैं शादी से खुश थी, पर उनके कर्मों से नाराज हूं। मैं किसे दोषी ठहराऊं। शायद ये मेरे ही कर्मों का फल है। ----------------------------------- ब्लैकबोर्ड की ये कहानियां भी पढ़ें… 1- ब्लैकबोर्ड-दूसरे के बच्चे धोखे से मेरी कोख में डाल दिए:शक्ल-सूरत नहीं मिली तो DNA करवाया, आखिर कहां गए मेरे बच्चे कहानी ऐसे पति-पत्नी की जिनकी दो बेटियां हैं। इन्होंने एकबार फिर मां-बाप बनने का फैसला किया, लेकिन उम्र आड़े आ गई। डॉक्टर ने सलाह दी- ‘IVF आजमाइए।’ पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड- तानों से परेशान होकर ब्रेस्ट इम्प्लांट करवाया:ऑडिशन वाले कहते थे- तुम्हारा फिगर ठीक नहीं, अब आधी कमाई सर्जरी की EMI में जा रही एकबार मैं ऑडिशन के लिए गई थी। वहां मुझे ट्रायल के लिए एक बिकिनी दी गई। 10-15 मर्दों के सामने जैसे ही बिकिनी पहनकर बाहर आई, तो सब हंसने लगे। कहने लगे- 'अरे मैडम, ये सब आपके लिए नहीं है। आप तो एकदम फ्लैट हैं।' पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 23 Jul 2026 5:21 am

'दीपके कचोरी खाएं तो सही, मुझे बर्गर खाने पर निकाला':CJP के पूर्व प्रवक्ता विजेता दहिया बोले- 2 रात सोया नहीं, हड्डियां गलाईं, फिर भी हटाया

20 जुलाई को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद मार्च के बीच पार्टी प्रवक्ता रहे विजेता दहिया एक बर्गर आउटलेट में दिखे। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। विवाद बढ़ा तो विजेता ने सफाई देते हुए कहा कि भूख लगी थी, इसलिए खाना खाने गए थे क्योंकि अच्छा खाने से दिमाग अच्छा महसूस करता है। उनकी ये दलील न लोगों को संतुष्ट कर सकी और न ही पार्टी को। वीडियो पर मचे बवाल के बाद पार्टी ने उन्हें प्रवक्ता पद से हटा दिया। दैनिक भास्कर ने विजेता दहिया से बर्गर पर मचे विवाद, इस्तीफे और प्रोटेस्ट पर बात की। पढ़िए पूरा इंटरव्यू… सवाल: आपको पार्टी से क्यों निकाल दिया? जवाब: खाना एक बेसिक बात है। आपने इतने टाइम से खाया नहीं, अंतड़ियां बाहर आने को हैं। इस पर कहा गया कि देखो ये खाना खा रहा है। प्रोपगेंडा बनाया गया। हमने वीडियो में देखा भी कि वे प्रदर्शनकारी नहीं थे, वे मनुवादी गुंडे थे। उन्हें इस बात से दिक्कत थी कि मैंने प्रेमानंद को महाराज क्यों नहीं कहा। मैंने बताया भी कि वे मेरे लिए महाराज नहीं हैं। अगर कोई एक कन्विक्टेड रेपिस्ट आसाराम को कहे कि वो मेरे राम हैं, कृष्ण हैं, तो मैं इस पर आपत्ति जताऊंगा। इस बात पर किसी को धक्का मारना, कैसे सही हो सकता है। सवाल: पद से हटाए जाने से पहले आपकी अभिजीत दीपके या बाकी लोगों से क्या बात हुई? जवाब: मुझे सुबह से कई कॉल आए। सभी ने वीडियो देखने के बाद हालचाल पूछा। सलाह दी कि मास्क लगाकर जाया करो। तभी अभिजीत का कॉल आया, तो मुझे लगा कि उसने भी हालचाल जानने के लिए किया होगा। वो पूछेगा कि मारपीट करने वाले गुंडे कौन हैं, लेकिन उसने और आशुतोष ने अचानक से कहा कि विजेता आप यहां मत आना। मैंने पूछा क्या हुआ, तो उसने कहा कि यहां मार्च चल रहा था, आपने बर्गर खा लिया। वो वीडियो चल रहा है, इसलिए आपको हटा रहे हैं। मैंने समझाया कि ये सब प्रोपेगेंडा है। मैं तो तुम्हारे साथ हूं। मैं दो रातों से एक मिनट के लिए भी नहीं सोया हूं। पुलिस यहां क्रैकडाउन न कर दे, इसके लिए लड़ाई लड़ता रहा। इसके बाद सौरव, शीतल और महेंद्र बाकी लोगों के साथ मार्च में भी हिस्सा लिया। उसके बाद ये कहा जाए कि पुलिसवाले ने विजेता को लाठी नहीं मारी, तो ये बहुत बचकानी बात है। जबकि एक महीने पहले से मुझ पर ही हमले हो रहे हैं। मेरे लिए एनकाउंटर बटन चलाया जा रहा है, जिसे 1500 लोगों ने लाइक किया है। सवाल: प्रोटेस्ट वाले दिन गीतांजलि, अभिजीत और आशुतोष सब ट्रक पर बैठे दिखे। वे प्रदर्शनकारियों को समझा रहे थे, आप वहां क्यों नहीं थे? जवाब: ये लोग शाम को मार्च के लिए निकले, तो मैं और सुधीर स्टेज संभाल रहे थे। पुलिस जंतर-मंतर खाली कर सकती थी, इसलिए हम यहीं रूके। बाद में हमें भी जोश आया तो सोचा कि मार्च में चलते हैं। पूरे इलाके में इंटरनेट बंद था, तो पता नहीं चल रहा था कि कहां क्या हो रहा है। मैं दो रात से जागा हुआ था, तो लोगों के लौटने से पहले सोचा कि जल्दी से खाना खाकर तैयार हो जाऊं, ताकि मार्च खत्म करके वापस आने वालों को संभाल सकूं। ये सब बकवास फैलाने वाले वही लोग हैं, जो देश के बाकी मुद्दे पर नहीं बोलते। इनमें एक BJP का भी है। अब ये लोग वीडियो काट-छांटकर झूठ फैला रहे हैं कि मैंने CJP प्रोटेस्टर्स को बेवकूफ कहा है। सवाल: CJP में आपको हटाने का फैसला सबकी सहमति से हुआ या वहां दो-तीन लोगों की ही चल रही है? जवाब: नहीं छोड़िए, अब इन सब बातों का कोई मतलब नहीं है। सवाल: आपने कहा कि मैं किसी के लिए अकाउंटेबल नहीं हूं, लेकिन आप और आपके साथियों के नाम पर हजारों लोग जुटे। फिर ये कहना असंवेदनशीलता नहीं? जवाब: नहीं, मैंने ये कहा था कि जो प्रदर्शनकारी हैं, वे मुझे देख रहे हैं कि मैं कैसे पिछले 50 दिन से अपनी हड्डियां गला रहा हूं। उनमें से किसी को कोई दिक्कत नहीं है। दिक्कत उन लोगों को है, जो न मणिपुर पर बोलते हैं, न किसानों पर और न हसदेव के जंगल काटे जाने पर बोलते हैं। मेरा उनसे सिर्फ इतना कहना है कि मेरा काम तुम्हारे जैसे लोगों खुश रखना नहीं है। तुम्हारे प्रति मेरी कोई अकाउंटेबिलिटी नहीं। सवाल: आपने पार्टी के लोगों से सवाल नहीं किया कि बर्गर खाने के छोटे से मसले के लिए क्यों हटा रहे हैं? जवाब: मैंने पूछा लेकिन मुझसे कहा गया कि वीडियो वायरल हो रहा है। मैंने अभिजीत से कहा कि वायरल तो ये भी हो रहा है कि भाई तुम कचोरी खा रहे थे, तो मैंने तुम्हारा बचाव किया था। मैंने साफ कहा था कि अभिजीत में कोई छल-कपट नहीं। उसने नादानी में खा लिया। वो भूख हड़ताल पर नहीं था, सोनम सर थे। मैंने अभिजीत को इतनी मजबूती से बचाव किया, लेकिन मेरे खिलाफ ही ये हो गया। सवाल: पार्टी ने उनके कचौड़ी खाने को मुद्दा क्यों नहीं बनाया, क्योंकि वो लीडर हैं? जवाब: उस पर भी कोई एक्शन नहीं होना चाहिए था और मुझ पर भी नहीं। सवाल: CJP में फैसले कैसे होते हैं, पार्टी का काम करने का तरीका क्या है। जवाब: ये सवाल आप तब करते, जब मैं प्रवक्ता था। अब ये सब बताना सही नहीं लगेगा। सवाल: क्या पार्टी में लीडरशिप की कमी है, संसद मार्च के दिन लीडरशिप क्राइसिस दिखी भी? जवाब: CJP पॉलिटिकल पार्टी नहीं है, जिसके पास सैकड़ों करोड़ का फंड हो, जो अपने लिए 1500 वॉलंटियर और कैडर इकट्ठा कर ले। हजारों लोग जुटे थे। उन्हें सुरक्षा देना पुलिस का काम था, लेकिन वहां गुंडे पुलिस के साथ खड़े थे। पुलिस और बदमाश साथ काम कर रहे हैं। अब पुलिस की क्रूरता के लिए CJP तो जिम्मेदार नहीं हो सकती। सवाल: ये कैसी स्ट्रेटजी है कि आप लोगों को संसद मार्च करने के लिए 9 बजे का वक्त दे रहे हैं और आप ही पीछे हैं? जवाब: बहुत सारी प्रैक्टिकल प्रॉब्लम रहती हैं। अपनी तरफ से पूरी कोशिश की गई लेकिन एक जनआंदोलन को सीमित टीम के साथ संभालना आसान नहीं होता। वैसे भी सुरक्षा देना पुलिस का काम है, इसे आउटसोर्स नहीं किया जा सकता। सरकार की जिम्मेदारी लोगों की बात सुनना है, अगर वो सुन लेती, तो भूख हड़ताल की जरूरत ही क्यों पड़ती। ये कितनी अजीब बात है कि अपनी ही सरकार से बात करने के लिए भूख हड़ताल पर बैठना पड़ रहा है, उसको भी 25 दिन हो गए हैं। सवाल: आप लोग बदलाव की पॉलिटिक्स कर रहे थे, NEET की मांग लेकर इस्तीफा मांग रहे थे। आपके साथ जो पॉलिटिक्स हुई, उसका दोषी किसे मानते हैं? जवाब: किसी को अपने विचार रखने पर धक्का मारा जाए, ये कितना अजीब है। गुंडों की इतनी हिम्मत हो जाए कि किसी के खुलकर बोलने पर उसके पीछे लग जाएं और बिना अपनी पहचान छिपाए उसे परेशान करें। फिर अपनी ही आईडी से उसके वीडियो पोस्ट कर दें। ये तभी मुमकिन है, जब उन्हें पता हो कि पुलिस कुछ नहीं करेगी। अगर लॉ एंड ऑर्डर नहीं होगा, तो समाज में सब तहस-नहस हो जाएगा। सवाल: आपको नहीं लगता ये वक्त एकजुट रहने का था। पद से हटाने के बाद भी आपको प्रदर्शन वाली जगह पर रहना चाहिए था? जवाब: मैं वैसा बेवकूफ नहीं हूं कि मुझे धमकी मिल रही है, फिर भी मैं जबरदस्ती करूं। जान है तो जहान है। पॉसिबल होगा तो जाऊंगा। प्रदर्शनकारियों से असुरक्षा नहीं है। वहां गुंडे आते रहते हैं। किसी ने इंक डाल दी। कोई हुड़दंग करने लगा। पता ही है कि वे कौन लोग हैं। सवाल: 20 मार्च की शाम जंतर-मंतर पर प्रदर्शन वाली जगह खाली हो गई थी। लगा कि प्रदर्शन खत्म हो गया है। अब ये फिर से जिंदा हो गया है। इस आंदोलन का क्या भविष्य लग रहा है? जवाब: कोशिश होनी चाहिए कि ये आंदोलन पूरे देश में फैले। अभी यहां इतनी भीड़ आई, तो कम से कम ये हुआ कि सरकार बात करने के लिए मानी। ये देशभर में फैलेगा, तो सरकार का अहंकार टूटेगा। ……………. ये खबर भी पढ़ें… क्या ‘कॉकरोचों’ को पीटना मोदी सरकार को महंगा पड़ेगा 20 जुलाई के संसद मार्च में ‘कॉकरोचों’ की पिटाई के बाद सोनम वांगचुक ने 24वें दिन भी अनशन जारी रखा। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देकर पीएम का इस्तीफा मांगा, जिसके बाद पुलिस वालों ने उन्हें मौके से हिरासत में ले लिया। आखिर इस संसद मार्च से कॉकरोच पार्टी को क्या हासिल हुआ, इससे सरकार की मुसीबतें क्यों बढ़ सकती हैं और आगे क्या होगा; पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 23 Jul 2026 5:19 am

कॉकरोच आंदोलन से टेंशन में BJP, लेकिन प्रधान नहीं हटेंगे:प्रोटेस्ट पर पहली बार मीटिंग, नेताओं को आदेश- 3 दिन में सब साफ करो

तारीख: 22 जुलाई, वक्त करीब 12 बजे। दिल्ली में BJP हेडक्वॉर्टर के 5वें फ्लोर पर पार्टी के महामंत्री जुटने शुरू हुए। 15-20 मिनट के अंदर आठों महामंत्री एक साथ थे। उनके अलावा भी कई पदाधिकारी भी पहुंच गए। मसला कॉकरोच जनता पार्टी के प्रोटेस्ट से बना माहौल था। BJP में हमारे सूत्र बताते हैं कि प्रोटेस्ट तो एक महीने से चल रहा है, लेकिन इस पर पहली बार BJP ऑफिस में बैठक हुई। वो भी शॉर्ट नोटिस पर। 3 घंटे तक चली इस मीटिंग में प्रोटेस्ट के असर को खत्म करने की स्ट्रैटजी पर बात हुई। जमीन और वर्चुअल, दोनों जगह इसे काउंटर करने का प्लान तैयार किया गया। ये भी साफ कर दिया कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे। दो चूक भी मानी कि कांग्रेस का प्रधानमंत्री आवास पर धरने की भनक नहीं लगी और जंतर-मंतर पर भीड़ का अंदाजा नहीं लग पाया। मीटिंग के बीच ही देशभर के कार्यकर्ताओं तक मैसेज पहुंचा दिया गया कि ब्रेन स्टॉर्मिंग करें। प्रोटेस्ट और राहुल गांधी के खिलाफ क्रिएटिव और मजबूत स्लोगन तैयार करें। इस प्रोटेस्ट से पार्टी में माहौल बहुत ज्यादा गरम है। 10 बजे मैसेज, दो घंटे में हेडक्वॉर्टर पहुंचे सभी महामंत्री सुबह 10 बजे के बाद BJP ऑफिस से पार्टी के सभी महामंत्रियों और कुछ पदाधिकारियों के पास मैसेज गया। सभी को दोपहर 12 बजे तक पहुंचने के लिए कहा गया। मीटिंग की अध्यक्षता नितिन नवीन ने की। शुरुआत में ही उन्होंने साफ कर दिया कि ये मामला पेचीदा है, लेकिन 3-4 दिन के अंदर सब साफ करना है, खत्म करना है। सरकार के खिलाफ बने माहौल और विपक्ष की घेराबंदी तोड़ना है। इसका काउंटर नरेटिव तैयार करना ही होगा। काउंटर नरेटिव की स्ट्रैटजी में क्या है… 1. कांग्रेस ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना दिया। ये संविधान का उल्लंघन है। अब कांग्रेस के ऑफिस के बाहर BJP कार्यकर्ता धरना देंगे। नारे लगाएंगे- PM के प्रोटोकॉल से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं। इसी तरह के कुछ और स्लोगन भी हो सकते हैं। 2. देशभर में संगठन के अलग-अलग विंग जैसे युवा, महिला, किसान मोर्चा रैली निकालेंगे, प्रोटेस्ट करेंगे। देश की सुरक्षा से खिलवाड़ और प्रधानमंत्री की सुरक्षा में सेंध की कोशिश इसका मुद्दा होगा। जमीन पर ये मैसेज देने की कोशिश की जाएगी कि प्रोटेस्ट अराजक हाथों में था। 3. 20 जुलाई को PM मोदी को संसद से सुरक्षित निकालने की खबर आई थी। इस पर कांग्रेस ने उन्हें कायर कहा। इस पर सोर्स बोले, ‘आप ही बताएं, जिस तरह से भीड़ अराजक थी, क्या नेपाल-2 की आशंका नहीं थी।’ इससे साफ हो गया कि PM के खिलाफ लगे कायर होने के नारों को इस आशंका के जरिए खत्म किया जाएगा। 4. इंटेलिजेंस के इनपुट को सामने लाया जाएगा कि ये प्रोटेस्ट नहीं, साजिश थी। बिल्कुल नेपाल की तरह मौजूदा सरकार और प्रधानमंत्री के खिलाफ। 5. सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री के समर्थन, BJP के स्टैंड को सपोर्ट करते हुए कैंपेन चलाए जाएंगे। 6. प्रोटेस्ट में शामिल हुए अराजकतत्वों की कुंडली खंगालकर सबके सामने रखी जाएगी। मतलब ये प्रोटेस्ट स्टूडेंट्स से ज्यादा अराजक भीड़ के हाथ में था। आने वाले कुछ दिनों में ये प्रूफ किया जाएगा। 7. RSS सीधे तो नहीं, लेकिन उससे जुड़े बजरंग दल और विश्व हिंदू संगठन प्रोटेस्ट के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। RSS ने इस मामले में अब तक कोई दखल नहीं दिया है, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर उसका रुख साफ है कि इस्तीफा नहीं लिया जाना चाहिए। सोर्स कहते हैं कि इसकी वजह प्रधान की शिक्षा व्यवस्था में RSS की सलाह और कार्यकर्ता सर्वोपरि हैं। स्मृति ईरानी के समय में RSS इस व्यवस्था से दूर था। तय हुआ कि धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे सोर्स ने बताया, ‘बैठक में प्रोटेस्ट के सबसे अहम किरदार धर्मेंद्र प्रधान पर स्पष्ट बात हुई। अध्यक्ष ने साफ कहा कि इस्तीफा अभी तो नहीं होगा क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो प्रोटेस्ट की कामयाबी पर मुहर लग जाएगी। इस बारे में शीर्ष नेतृत्व ने साफ संदेश दिया है कि प्रधान पद पर बने रहेंगे।’ दो चूक: कांग्रेस का प्लान नहीं समझ पाए, भीड़ का अंदाजा नहीं हुआ बैठक में पार्टी और इंटेलिजेंस के लेवल पर हुई चूक को भी स्वीकारा गया। प्रोटेस्ट इस रूप में आएगा, इसके आकलन में पार्टी से चूक हुई। विपक्षी पार्टियां खासतौर पर कांग्रेस प्रधानमंत्री आवास के सामने धरना देगी, इसका अंदाजा नहीं लगा। दूसरे राज्यों से पार्टी के CM और नेता दिल्ली में जमा हुए इसकी सूचना मिली, लेकिन उनके आने का मकसद नहीं समझ पाए। कांग्रेस के इस प्लान की भनक पार्टी को नहीं लगी। दूसरी और सबसे बड़ी चूक इंटेलिजेंस के लेवल पर हुई। जंतर-मंतर पर इतनी भीड़ आएगी, विपक्षी पार्टियां क्या प्लान कर रही हैं, इसका इनपुट इंटेलिजेंस के पास नहीं था। बैठक में कहा गया इस बारे में हाईकमान इंटेलिजेंस से बात कर रहा है।

दैनिक भास्कर 23 Jul 2026 5:17 am

केन्या : सोने की खदान में हादसा, सुरंग ढहने से पांच खनिकों की मौत, कई के फंसे होने की आशंका

दक्षिण-पश्चिमी केन्या के नारोक काउंटी में एक सोने की खदान ढहने से कम से कम पांच खनिकों की मौत हो गई। इस घटना की जानकारी देते हुए अधिकारियों ने मृतकों की पुष्टि भी की।

देशबन्धु 23 Jul 2026 5:10 am

जॉर्डन के अमेरिकी एयर बेस पर हमले में भारतीय मूल की अमेरिकी सार्जेंट लापता, मौत की आशंका

अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) के मुताबिक, भारतीय मूल की अमेरिकी सैनिक एंजेला रामप्रसाद के जॉर्डन में एक सैन्य अड्डे पर हुए ईरानी हमले में मारे जाने की आशंका है।

देशबन्धु 23 Jul 2026 3:55 am

म्यांमार में बाढ़ का अलर्ट: चिंडविन नदी खतरे के निशान पर, लोगों को सतर्क रहने की सलाह

म्यांमार के मौसम विज्ञान और जल विज्ञान विभाग (डीएमएच) ने बुधवार को सागाइंग क्षेत्र के कुछ हिस्सों में बाढ़ की आशंका को लेकर चेतावनी जारी की

देशबन्धु 23 Jul 2026 3:25 am

देश की कंपनियों के अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी तरीकों का इस्तेमाल करने का पूरा समर्थन : चीन

20 जुलाई को, यूरोपीय आयोग ने यूरोपीय संघ के डिजिटल सर्विसेज एक्ट के तहत चीनी कंपनी अलीएक्सप्रेस पर 55 करोड़ यूरो का जुर्माना लगाने की घोषणा की। इस पर चीनी पक्ष की क्या टिप्पणी है?

देशबन्धु 23 Jul 2026 3:10 am

डिजिटल इंटेलीजेंस युग में वैश्विक साइबर शासन पर चीन के पक्ष का दस्तावेज जारी

संयुक्त राष्ट्र वैश्विक साइबर सुरक्षा स्थाई तंत्र की पहली बैठक 20 से 24 जुलाई तक न्यूयॉर्क स्थित यूएन मुख्यालय में चल रही है। चीनी प्रतिनिधि मंडल ने इस तंत्र के सामने डिजिटल इंटेलीजेंस युग में वैश्विक साइबर शासन पर चीन के पक्ष का दस्तावेज पेश किया।

देशबन्धु 23 Jul 2026 3:07 am

यूक्रेन का बड़ा दावा: रूस के सैन्य आपूर्ति नेटवर्क पर बड़ा हमला, तेल डिपो समेत कई लॉजिस्टिक्स ठिकाने तबाह

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि यूक्रेन ने बुधवार को रूस के कई अहम सैन्य और लॉजिस्टिक्स ठिकानों और तेल भंडार केंद्रों को पर लंबी दूरी के हमले किए हैं। उन्होंने कहा कि इन हमलों का मकसद रूस पर दबाव बनाकर उसे कूटनीति और शांति की राह पर लाना है।

देशबन्धु 22 Jul 2026 8:27 pm

आज का एक्सप्लेनर:डियर दिल्ली पुलिस! संसद से सवाल पूछने जा रहे युवाओं के साथ ऐसी हरकत, गैरकानूनी ही नहीं, शर्मनाक भी है

डियर दिल्ली पुलिस, 20 जुलाई को देश के युवा अपनी मांग के साथ संसद की तरफ जा रहे थे। 5 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी लाठी, आंसू गैस और पत्थरों के साथ उनपर टूट पड़े। इस बीच कैमरों पर उनकी कुछ ऐसी हरकतें भी रिकॉर्ड हो गईं, जो गैरकानूनी होने के साथ किसी प्रोफेशनल पुलिस के लिए बेहद शर्मनाक भी हैं। लड़कियों पर गलत तरीके से गलत जगह डंडा मारना, बिना नेमप्लेट की वर्दी, कई के पास तो वर्दी भी नहीं। कार्रवाई के चार तरह के वीडियोज का हमने कानून की कसौटी पर एनालिसिस किया है… 1. प्रदर्शनकारी लड़कियों को गलत तरीके से पीटना ये कुछ रिकॉर्डेड मामले हैं। लड़कियों ने मीडिया कैमरों पर बताया कि पुरुष सुरक्षाकर्मी लाठियां चलाते हुए गालियां दे रहे थे। अभिजीत दीपके ने दावा किया की दिल्ली पुलिस के पुरुष अफसर ने एक लड़की के कपड़े फाड़े और उसकी छाती पर पैर देकर पीटा है। नियम-कानून क्या है? 2. ज्यादातर सुरक्षाकर्मियों के नेमप्लेट गायब थे प्रदर्शनकारियों पर डंडे चलाने वाले दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के कई जवानों ने अपने नाम वाले बैज नहीं पहने थे। प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाते हुए ऐसे कई वीडियोज बनाए हैं। RAF की असिस्टेंट कमांडेंट सोनिया सेहरावत ने मीडिया से कहा, ‘हम कुछ प्रोटेक्टिव गियर पहनते हैं, जिसकी वजह से नेमटैग गिर सकते हैं। ये किसी के पैर के नीचे आ सकते हैं। हमें अपने नाम का सम्मान रखना होता है, इसलिए बैज निकाल देते हैं।’ दिल्ली पुलिस के उच्च पदस्थ सूत्रों ने दैनिक भास्कर से कहा कि ऐसी स्थिति में नेमप्लेट टूट जाती है। ये जानबूझकर नहीं किया गया है। नियम-कानून क्या है? 3. बिना वर्दी के प्रदर्शनकारियों को पीटने वाले कौन थे नियम-कानून क्या है? 4. जरूरत से बहुत ज्यादा बल का इस्तेमाल अगर ये दावे सही हुए तो ऐसा पहली बार होगा कि दिल्ली में सिविल प्रोटेस्ट में पैलेट गन और शॉक बैटन का इस्तेमाल किया गया। दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन और इलेक्ट्रिक स्टन गन (शॉक बैटन) का इस्तेमाल नहीं किया गया है। ये दावे झूठे और भ्रामक हैं। इन अफवाहों को आगे न बढ़ाएं। नियम-कानून क्या हैं? दैनिक भास्कर के सवालों पर दिल्ली पुलिस के उच्च पदस्थ सूत्र ने कहा कि ये सब एकतरफा कहानियां हैं, जो पुलिस के खिलाफ नैरेटिव बना रही हैं। सब कुछ सीसीटीवी पर कैद है, वीडियोग्राफी कराई गई है, इसलिए कोई छिप नहीं सकता। एक वकील ने सुप्रीम कोर्ट में प्रदर्शनकारियों के साथ ही बर्बरता का मुद्दा उठाया। तर्क दिया कि पुलिस की सख्ती की वीडियो सबूत मौजूद है। हालांकि CJI सूर्यकांत ने सुनवाई करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा, 'हमें वीडियो में दिलचस्पी नहीं है। हमारे पास देखने का समय नहीं है।' प्रदर्शनकारियों से मारपीट के आरोपों वाली याचिकाओं पर दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर रिकॉर्ड, जैसे CCTV और अन्य फुटेज, सुरक्षित रखने को कहा है। सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल (ASG) एस. राजू ने कहा कि याचिकाओं का मकसद पब्लिसिटी पाना था।इस पर हाईकोर्ट ने पूछा, आप यह कैसे कह सकते हैं कि यह पब्लिसिटी के लिए दायर याचिका है? ***** डिस्क्लेमर: इस स्टोरी में इस्तेमाल सभी फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हैं। ये विजुअल्स कॉकरोच जनता पार्टी, पत्रकारों और प्रदर्शनकारियों द्वारा पोस्ट किए गए हैं। दैनिक भास्कर इनकी टाइमिंग, लोकेशन और सत्यता की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता। स्टोरी में लगाए गए आरोप संबंधित पक्षों (प्रदर्शनकारी, CJP प्रवक्ता वगैरह) के दावे हैं। ------------ ये खबर भी पढ़िए… जंतर-मंतर न जाकर, पीएम आवास क्यों पहुंचे राहुल गांधी:क्या CJP का प्रोटेस्ट हाइजैक करने की कोशिश, आगे क्या होगा 21 जुलाई की दोपहर साढ़े तीन बजे। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे कुछ कांग्रेसी नेताओं के साथ पैदल ही पीएम मोदी के आवास की तरफ चल दिए। न पुलिस को खबर थी, न मीडिया को। हालांकि 3 घंटे 20 मिनट बाद ही पुलिस ने बलपूर्वक राहुल-प्रियंका को उठाकर धरना खत्म करा दिया है। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 22 Jul 2026 6:57 pm

जयशंकर की मनीला में रूबियो और पेनी वोंग से अहम वार्ता: व्यापार, रक्षा, AI और हिंद-प्रशांत की सुरक्षा पर हुआ मंथन

मनीला में विदेश मंत्री (ईएएम) एस. जयशंकर का विभिन्न देशों के अपने समकक्षों से मुलाकात का सिलसिला जारी है। इसी के तहत वो अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो और ऑस्ट्रेलियाई समकक्ष पेनी वोंग से मिले।

देशबन्धु 22 Jul 2026 2:48 pm

गाजा में इजरायल बना रहा 17 किमी लंबी मिट्टी की दीवार, 'पीली रेखा' पर बढ़ी सैन्य मौजूदगी

उपलब्ध उपग्रह तस्वीरों के अनुसार, इस परियोजना का काम फरवरी 2026 में शुरू हुआ था। अब तक लगभग 11 किलोमीटर लंबी मिट्टी की दीवार तैयार की जा चुकी है। योजना के मुताबिक, यह दीवार दक्षिण में खान यूनिस से लेकर उत्तर में गाजा शहर के बाहरी क्षेत्र तक बनाई जाएगी।

देशबन्धु 22 Jul 2026 12:56 pm

12वीं मंजिल से नीचे गिरा शख्स फिर भी बच गई जान, लेकिन नीचे टहल रही महिला के ऊपर गिरते ही हो गई मौत

एक ऐसी हैरान और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है जिसे सुनकर कानून, विज्ञान और आम इंसान सब हैरान हैं। बहुमंजिला इमारत की 12वीं मंजिल से एक शख्स अचानक नीचे गिर गया। इतनी ऊंचाई से गिरने के बाद जहां किसी के भी बचने की उम्मीद ना के बराबर होती है, वहां वह शख्स चमत्कारिक रूप से जिंदा बच गया। लेकिन इस हादसे का सबसे दुखद और चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि जब वह नीचे गिरा, तो वहां टहल रही एक बेकसूर महिला उसके नीचे दब गई और उसकी दर्दनाक मौत हो गई।कुदरत का अजीब न्याय? मौत के मुंह से जिंदा लौट आया शख्सयह हैरान करने वाला वाकया एक रिहायशी सोसाइटी में उस वक्त हुआ जब अचानक 12वीं मंजिल की बालकनी से एक व्यक्ति का संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे नीचे आ गिरा। इतनी ऊंचाई से गिरने की वजह से हवा में उसकी रफ्तार बहुत तेज थी। जमीन पर गिरते ही वहां चीख-पुकार मच गई। डॉक्टरों और चश्मदीदों के मुताबिक इस शख्स को गंभीर चोटें जरूर आई हैं और वह अस्पताल के आईसीयू में भर्ती है, लेकिन उसकी धड़कनें चल रही हैं और उसकी जान पूरी तरह से सुरक्षित है। इस चमत्कार को देखकर हर कोई हैरान है कि 12वीं मंजिल से गिरने के बाद भी कोई कैसे जिंदा रह सकता है।बेकसूर महिला के लिए काल बन कर गिरा आसमान से शख्सइस हैरतअंगेज हादसे में किस्मत का सबसे क्रूर चेहरा तब देखने को मिला जब वह शख्स सीधे जमीन पर न गिरकर, नीचे वॉक कर रही एक महिला के ऊपर जा गिरा। महिला को संभलने का एक सेकंड का भी मौका नहीं मिला और भारी वजन व तेज रफ्तार के दबाव के कारण वह गंभीर रूप से चोटिल हो गई। मौके पर मौजूद लोग तुरंत दोनों को लेकर नजदीकी अस्पताल भागे, जहां डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया। महिला रोजाना की तरह वहां शाम को टहलने निकली थी और उसे अंदाजा भी नहीं था कि आसमान से गिरती हुई कोई आफत उसकी जिंदगी छीन लेगी।क्या यह सिर्फ एक हादसा है या लापरवाही? पुलिस जांच में जुटीइस सनसनीखेज मामले के बाद दिल्ली-एनसीआर, मुंबई और लखनऊ समेत देश के तमाम हाई-राइज सोसायटियों के निवासियों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्थानीय पुलिस और फॉरेंसिक टीमें इस बात की बारीकी से जांच कर रही हैं कि आखिर वह शख्स 12वीं मंजिल से नीचे कैसे गिरा? क्या यह कोई आत्महत्या का प्रयास था, पैर फिसलने का हादसा था या फिर इसके पीछे कोई बड़ी लापरवाही थी? पुलिस ने सोसाइटी के सीसीटीवी फुटेज को अपने कब्जे में ले लिया है और चश्मदीदों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं ताकि इस खौफनाक हादसे की असली वजह सामने आ सके।

न्यूज़ इंडिया लाइव 22 Jul 2026 12:18 pm

हजारों साल पुराना रहस्यमयी ‘ममी मास्क’ मिला, सिर पर मौजूद हैं असली इंसानी बाल

पुरातत्व और विज्ञान की दुनिया से एक ऐसी हैरान और कँपकँपी पैदा कर देने वाली खोज सामने आई है, जिसने वैज्ञानिकों से लेकर आम जनता तक के होश उड़ा दिए हैं। हाल ही में खुदाई के दौरान शोधकर्ताओं को हजारों साल पुराना एक प्राचीन 'ममी मास्क' (Mummified Mask) मिला है। यह मास्क आम प्राचीन कलाकृतियों जैसा बिल्कुल नहीं है। इस मास्क की बनावट और इस पर मौजूद इंसानी अंगों के अवशेषों ने इसे दुनिया की सबसे रहस्यमयी और डरावनी खोजों की लिस्ट में शामिल कर दिया है, जिसे देखने वालों के रोंगटे खड़े हो रहे हैं।सिर पर लगे इंसानी बाल और चेहरे की वो अजीबोगरीब मुस्कानइस ममी मास्क की सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इसके सिर वाले हिस्से पर आज भी असली इंसानी बाल (Real Human Hair) मौजूद हैं, जो हजारों साल बीत जाने के बाद भी पूरी तरह नष्ट नहीं हुए हैं। लेकिन जो चीज़ इस मास्क को सबसे ज्यादा खौफनाक बनाती है, वह है इसके चेहरे पर उकेरी गई एक रहस्यमयी स्माइल। इस चेहरे की बनावट और मुस्कुराहट को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो यह प्राचीन ममी आज भी जीवित हो और किसी गहरी साजिश की तरह मुस्कुरा रही हो। इतिहास और पैरानॉर्मल रिसर्चर्स का मानना है कि इस मास्क की बनावट इतनी सजीव और डरावनी है कि इसे करीब से देखने के बाद कमजोर दिल वालों की रातों की नींद उड़ सकती है।प्राचीन सभ्यताओं के किस खौफनाक रहस्य से जुड़ा है यह मास्क?पुरातत्वविदों (Archaeologists) की शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि इस मास्क का इस्तेमाल किसी खास धार्मिक अनुष्ठान या शव को दफनाने की रहस्यमयी परंपरा के दौरान किया जाता था। प्राचीन काल में ममी बनाने की प्रक्रिया के दौरान मृत व्यक्ति की आत्मा को सुरक्षित रखने और उसे दूसरी दुनिया में राह दिखाने के लिए ऐसे सजीव मास्क चेहरे पर लगाए जाते थे। इस मास्क पर असली इंसानी बालों का मिलना यह दर्शाता है कि शायद यह किसी बेहद शक्तिशाली राजा, पुरोहित या फिर किसी ऐसे व्यक्ति का हो सकता है जिसके शव को सहेजने के लिए उस दौर के तांत्रिकों या वैज्ञानिकों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। प्रयोगशाला में कार्बन डेटिंग के जरिए अब इसके सटीक समय और इसके इतिहास का पता लगाया जा रहा है।वैश्विक पुरातत्व जगत में हलचल, भारत समेत दुनिया भर के वैज्ञानिक हैरानइस खोज की खबर जंगल की आग की तरह पूरी दुनिया में फैल गई है। दिल्ली, मुंबई और उत्तर प्रदेश (Lucknow) समेत भारत के प्रमुख ऐतिहासिक शोध संस्थानों में भी इस खोज को लेकर काफी उत्सुकता देखी जा रही है। भारतीय पुरातत्व के जानकार भी इस प्राचीन तकनीक को समझने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं कि आखिर हजारों साल तक इंसानी बाल और चेहरे के हाव-भाव कैसे इतने सुरक्षित रह सकते हैं। एआई सर्च इंजनों और सोशल मीडिया पर यह 'ममी मास्क' इस वक्त सबसे बड़ा ट्रेंडिंग टॉपिक बन चुका है, और लोग इस रहस्यमयी प्राचीन सभ्यता के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानने के लिए उत्सुक हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 22 Jul 2026 12:16 pm

महाशक्ति अमेरिका के हथियारों की चमक पड़ी फीकी? ईरान की चक्रव्यूह रणनीति के सामने यूक्रेन से इनपुट्स और मदद की आई नौबत

वैश्विक रक्षा और सामरिक गलियारों से एक ऐसी खबर सामने आ रही है जिसने सुपरपावर अमेरिका की मिलिट्री स्ट्रैटेजी और हथियारों की क्षमता पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। दुनिया की सबसे आधुनिक और ताकतवर सेना होने का दावा करने वाले अमेरिका को अब मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में ईरान के आक्रामक रवैये और उसकी उन्नत ड्रोन-मिसाइल तकनीक के सामने नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। ताजा खुफिया और सैन्य रिपोर्ट्स की मानें तो ईरान की काउंटर-रणनीति के आगे अमेरिकी रक्षा प्रणालियां उस तरह का प्रदर्शन नहीं कर पा रही हैं जैसी उम्मीद की जा रही थी, जिसके चलते अब वाशिंगटन को यूक्रेन के युद्धक्षेत्र से मिले अनुभवों और इनपुट्स का सहारा लेना पड़ रहा है।ईरान की उन्नत ड्रोन-मिसाइल तकनीक के सामने अमेरिकी एयर डिफेंस पर उठे सवालबीते कुछ समय में ईरान ने अपनी स्वदेशी मिसाइल तकनीक और कामिकेज़ (आत्मघाती) ड्रोन्स की क्षमता को बेहद घातक स्तर पर पहुंचा दिया है। खाड़ी क्षेत्र और लाल सागर में अमेरिकी ठिकानों और उनके सहयोगियों पर हुए हमलों ने यह साबित किया है कि ईरान के सस्ते लेकिन अत्यधिक प्रभावी ड्रोन्स को रोकने में अमेरिका के महंगे पैट्रियट (Patriot) और अन्य एयर डिफेंस सिस्टम्स को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि ईरान की इस झुंड-हमला (Swarm Attack) रणनीति ने अमेरिकी मिलिट्री टेक की कमियों को उजागर कर दिया है, जिससे वैश्विक मंच पर वाशिंगटन की साख को बड़ा झटका लगा है।यूक्रेन से सैन्य इनपुट्स और हथियारों के अनुभवों को साझा करने की आई नौबतइस पूरे घटनाक्रम में सबसे चौंकाने वाला मोड़ यह आया है कि अमेरिका अब यूक्रेन के युद्धक्षेत्र से मिले डेटा और सैन्य इनपुट्स पर निर्भर होने लगा है। यूक्रेन पिछले काफी समय से रूसी सेना द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे ईरानी ड्रोन्स (जैसे शाहेद-136) का सामना कर रहा है और उसने इन हवाई खतरों को मार गिराने की कुछ बेहद प्रभावी और कम खर्चीली तकनीकें विकसित की हैं। अमेरिकी सेना अब यूक्रेन के इसी अनुभव, काउंटर-ड्रोन डेटा और युद्ध रणनीति का बारीकी से अध्ययन कर रही है ताकि मिडिल ईस्ट में अपने हथियारों को ईरान के खिलाफ अपग्रेड कर सके। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, एक सुपरपावर का इस तरह यूक्रेन के युद्ध डेटा पर निर्भर होना उसकी वर्तमान तैयारियों की पोल खोलता है।भारत और एशियाई देशों की सुरक्षा पर क्या होगा इसका सीधा असर?इस सैन्य गतिरोध का प्रभाव सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि नई दिल्ली, मुंबई और पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा रणनीतियों पर भी इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है। भारत हमेशा से ही अपनी रक्षा जरूरतों के लिए हथियारों के विविधीकरण (Diversification) पर जोर देता रहा है। अमेरिका के रक्षा उपकरणों में दिख रही इन कमियों के बाद, भारतीय सैन्य रणनीतिकार अब स्वदेशी एंटी-ड्रोन सिस्टम (जैसे इंद्रजाल) और रूस-यूरोप के साथ रक्षा करारों को और मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। पश्चिमी देशों की सैन्य तकनीक के इस इम्तिहान ने वैश्विक बाजार में हथियारों की होड़ को एक नया मोड़ दे दिया है, जहां अब महंगे से ज्यादा प्रभावी हथियारों की मांग बढ़ गई है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 22 Jul 2026 12:14 pm

महाशक्ति अमेरिका और सऊदी अरब में हुई ऐतिहासिक न्यूक्लियर डील, मिडिल ईस्ट में बदला सत्ता का समीकरण

ग्लोबल पॉलिटिक्स और मिडिल ईस्ट की भू-राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। दुनिया के सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका और खाड़ी के दिग्गज सऊदी अरब के बीच एक बेहद संवेदनशील और ऐतिहासिक न्यूक्लियर डील (परमाणु समझौता) पर सहमति बन गई है। इस समझौते के बाद अब खाड़ी देशों में शक्ति का संतुलन पूरी तरह बदलने वाला है। इस डील को न सिर्फ रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, बल्कि इसने इस्लामाबाद से लेकर बीजिंग तक के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।न्यूक्लियर डील के पीछे क्या है वॉशिंगटन और रियाद का बड़ा प्लान?इस ऐतिहासिक परमाणु समझौते के तहत अमेरिका अब सऊदी अरब को असैन्य परमाणु तकनीक (Civil Nuclear Technology) ट्रांसफर करेगा। इसके साथ ही सऊदी अरब को अपने देश में ही यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) की तकनीकी सहायता मिलने का रास्ता भी साफ हो सकता है। जानकारों का कहना है कि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) सऊदी अर्थव्यवस्था को तेल पर निर्भरता से हटाकर एक नई दिशा में ले जाना चाहते हैं। वहीं, जो बाइडन प्रशासन इस डील के जरिए मिडिल ईस्ट में चीन और रूस के बढ़ते प्रभाव को पूरी तरह से काउंटर करना चाहता है, जिससे अमेरिकी वर्चस्व कायम रहे।पाकिस्तान के लिए क्यों लगा तगड़ा झटका और पत्ता साफ होने का डर?इस न्यूक्लियर डील का सबसे बड़ा और सीधा असर पाकिस्तान पर पड़ता दिख रहा है। अब तक पाकिस्तान खुद को सऊदी अरब के सबसे करीबी सैन्य और परमाणु सुरक्षा कवच के रूप में पेश करता आया था। इतिहास गवाह है कि सऊदी अरब की वित्तीय मदद के दम पर ही पाकिस्तान ने अपना परमाणु कार्यक्रम आगे बढ़ाया था, और बदले में वह सऊदी को सुरक्षा की गारंटी देता था। लेकिन अब अमेरिका के सीधे मैदान में आ जाने से सऊदी अरब की पाकिस्तान पर सैन्य और तकनीकी निर्भरता पूरी तरह खत्म हो जाएगी। आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए सऊदी अरब से मिलने वाली मदद और उसकी कूटनीतिक अहमियत अब लगभग शून्य होने के कगार पर पहुंच गई है।भारत के लिए क्या हैं इस डील के मायने और लोकल इंपैक्ट?इस बड़ी ग्लोबल डील का असर दिल्ली, मुंबई और उत्तर प्रदेश समेत पूरे भारत के रणनीतिक हितों पर भी देखने को मिलेगा। भारत और सऊदी अरब के रिश्ते हाल के दिनों में बेहद मजबूत हुए हैं, खासकर ऊर्जा और सुरक्षा के मोर्चे पर। अमेरिका-सऊदी की यह नजदीकी खाड़ी क्षेत्र में स्थिरता लाएगी, जिससे वहां काम करने वाले लाखों भारतीय प्रवासियों और भारत के कच्चे तेल के आयात को सुरक्षा मिलेगी। इसके साथ ही, चीन-पाकिस्तान गठजोड़ को कमजोर करने में यह डील भारत के लिए परोक्ष रूप से फायदेमंद साबित हो सकती है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि ईरान और चीन इस अमेरिकी एंट्री का मुकाबला कैसे करते हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 22 Jul 2026 12:12 pm

ग्लोबल ड्रग रैकेट पर अमेरिका का बड़ा शिकंजा! एफबीआई को तलाश है भारतीय नागरिक हार्मनवीर सिंह की, रविंदर धांडा गैंग से जुड़े तार

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैले ड्रग्स के काले कारोबार और संगठित अपराधों के खिलाफ अमेरिका की शीर्ष जांच एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई अब भारत और कनाडा से जुड़े एक बड़े ड्रग रैकेट में शामिल भारतीय नागरिक हार्मनवीर सिंह की सरगर्मी से तलाश कर रही है। आरोप है कि हार्मनवीर सिंह कनाडा में सक्रिय कुख्यात रविंदर धांडा गैंग के लिए नशीले पदार्थों की तस्करी के बड़े नेटवर्क को संचालित करने में अहम भूमिका निभा रहा था।'ऑपरेशन हार्ड बॉल' के तहत की जा रही है बड़ी कार्रवाईएफबीआई की ओर से यह ताजा और सख्त कदम 'ऑपरेशन हार्ड बॉल' (Operation Hard Ball) के तहत उठाया गया है। यह अभियान लॉरेंस बिश्नोई, जग्गू भगवानपुरिया और रविंदर धांडा जैसे कुख्यात अपराधियों द्वारा चलाए जा रहे ट्रांसनेशनल क्रिमिनल सिंडिकेट्स के खिलाफ अमेरिका, कनाडा और यूरोपीय देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा चलाई जा रही एक समन्वित अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई है।कनाडा से लेकर अमेरिका और मेक्सिको तक फैला है जालएफबीआई द्वारा जारी किए गए आधिकारिक बयान के अनुसार, वांछित आरोपी हार्मनवीर सिंह एक खतरनाक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठन का हिस्सा है, जो नियंत्रित पदार्थों (Controlled Substances) के अवैध व्यापार, कब्जे और उनके निर्यात की बड़ी साजिश में शामिल रहा है। जांच में सामने आया है कि रविंदर धांडा का संगठित अपराध समूह मुख्य रूप से कनाडा के वैंकूवर से संचालित होता है। यह गैंग कथित तौर पर अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको के विभिन्न हिस्सों में कोकीन और मेथामफेटामाइन (Methamphetamine) जैसी प्रतिबंधित और खतरनाक ड्रग्स की बड़ी मात्रा में तस्करी करता है।इस महीने की शुरुआत में हुई थी 24 आरोपियों की गिरफ्तारीगौरतलब है कि इसी महीने की शुरुआत में अमेरिका, कनाडा और यूरोप की विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने एक संयुक्त और खुफिया ऑपरेशन को अंजाम दिया था। इस ताबड़तोड़ कार्रवाई के दौरान भारत से जुड़े तीन ट्रांसनेशनल संगठित अपराध समूहों के कुल 24 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें से 11 अकेले कैलिफोर्निया राज्य से दबोचे गए थे। अमेरिका के न्याय विभाग (Department of Justice) ने अपने इस मेगा ऑपरेशन के तहत कुल 37 लोगों के खिलाफ औपचारिक रूप से आरोप तय किए हैं, जिसके बाद से अंतरराष्ट्रीय अपराधियों में हड़कंप मचा हुआ है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 22 Jul 2026 8:07 am

ईरान पर अमेरिका का सबसे बड़ा और प्रचंड प्रहार! लगातार 11वीं रात गूंजे धमाके, थर्राए कई शहर

मध्य पूर्व (Middle East) में महाशक्तियों के बीच तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है, बल्कि हालात लगातार और अधिक विस्फोटक होते जा रहे हैं। अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ अब तक के सबसे आक्रामक और लंबे सैन्य अभियानों में से एक को अंजाम देते हुए ईरान पर लगातार 11वीं रात भी भीषण हवाई हमले किए हैं। इन ताबड़तोड़ हमलों से ईरान के कई प्रमुख शहरों में जोरदार धमाके गूंज उठे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में खलबली मच गई है।सेंटकॉम ने की पुष्टि, ईरान की सैन्य क्षमता को किया जा रहा टारगेटअमेरिकी सैन्य मुख्यालय के यूएस सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बुधवार को आधिकारिक तौर पर जानकारी दी कि अमेरिकी सैन्य बलों ने ईरान के ठिकानों पर एक बार फिर नया और बड़ा हमला बोला है। कमांड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए गए अपडेट में बताया कि ये लगातार हमले ईरान की उस सैन्य क्षमता को पूरी तरह तहस-नहस करने के लिए किए जा रहे हैं, जिसके जरिए वह वैश्विक व्यावसायिक जहाजरानी (Commercial Shipping) और समुद्री मार्गों को लगातार धमकी दे रहा था। हालांकि, अमेरिकी सेना ने अभी तक इन ताजा हमलों में निशाना बनाए गए सटीक ठिकानों का खुलासा नहीं किया है।हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर छिड़ी है जंगयह पूरा संघर्ष दुनिया के सबसे अहम और संवेदनशील जलमार्ग यानी 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण और रणनीतिक वर्चस्व को लेकर है। यह मार्ग वैश्विक तेल निर्यात (Global Oil Supply) का सबसे महत्वपूर्ण और मुख्य रास्ता है। अमेरिका और ईरान के बीच इसी क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही है, जो अब खुले सैन्य संघर्ष में बदल चुकी है। अमेरिकी स्टील्थ बॉम्बर्स और आधुनिक मिसाइलों के आगे ईरानी रक्षा तंत्र फिलहाल काफी संघर्ष करता नजर आ रहा है।ट्रंप के सख्त तेवर, हमले और तेज होने के संकेतयह सैन्य कार्रवाई ऐसे समय में हो रही है जब हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यह स्पष्ट संकेत दिए थे कि यदि ईरान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया, तो अमेरिका की तरफ से इन हमलों को और अधिक तीव्र व व्यापक बनाया जाएगा। व्हाइट हाउस के कड़े रुख और अमेरिकी सेना की लगातार एयरस्ट्राइक से यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में मिडिल ईस्ट का भू-राजनीतिक समीकरण और अधिक तनावपूर्ण हो सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 22 Jul 2026 8:06 am

अमेरिका के कैलिफोर्निया में दर्दनाक सड़क हादसा, हैदराबाद के एक ही परिवार के तीन सदस्यों की मौत; दो की हालत गंभीर

अमेरिका के कैलिफोर्निया से एक बेहद दिल दहला देने वाली और दुखद खबर सामने आई है। कैलिफोर्निया में हुए एक भीषण सड़क हादसे में भारत के हैदराबाद शहर के एक ही परिवार के तीन सदस्यों की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि परिवार के दो अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। इस हृदयविदारक घटना की जानकारी मिलने के बाद से हैदराबाद स्थित उनके पैतृक आवास और रिश्तेदारों में शोक की लहर दौड़ गई है।हादसे में मां और दो बच्चों की मौत, पिता और छोटी बेटी घायलप्राप्त जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक सड़क दुर्घटना सोमवार रात (भारतीय समयानुसार) कैलिफोर्निया में हुई, जब परिवार की कार एक अन्य वाहन से जोरदार तरीके से टकरा गई। इस भीषण टक्कर में गाड़ी के परखच्चे उड़ गए। हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान नाजिया सलमा, उनकी बेटी और उनके बेटे के रूप में हुई है। वहीं, नाजिया के पति शेख नवेद और उनकी छोटी बेटी इस भयानक हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिन्हें तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां उनका इलाज जारी है।10 साल पहले अमेरिका गए थे शेख नवेदमृतक परिवार के स्थानीय संपर्कों और परिजनों से मिली जानकारी के मुताबिक, शेख नवेद करीब 10 साल पहले तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के सैदाबाद इलाके से बेहतर भविष्य की तलाश में अमेरिका गए थे। सोमवार को वे अपने पूरे परिवार के साथ किसी यात्रा पर निकले थे, तभी यह अनहोनी घटित हो गई। जब परिवार के बुजुर्गों ने अमेरिका में उनसे संपर्क साधने की कोशिश की, तो वहां की स्थानीय पुलिस ने फोन पर इस सड़क दुर्घटना की दुखद सूचना दी।विदेश मंत्री एस. जयशंकर से इमरजेंसी वीजा की गुहारइस बड़ी त्रासदी के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। शेख नवेद के पिता शेख अब्दुल सईद ने केंद्र सरकार और विदेश मंत्री एस. जयशंकर से पुरजोर अपील की है कि उनके परिवार के अन्य सदस्यों को अमेरिका की यात्रा के लिए तत्काल आपातकालीन (Emergency Visa) जारी किया जाए, ताकि वे इस संकट की घड़ी में वहां पहुंचकर पीड़ित परिवार की मदद कर सकें। इसके अलावा, मजलिस बचाओ तहरीक (MBT) के प्रवक्ता अमजद उल्लाह खान ने भी पीड़ित परिवार से मुलाकात कर सांत्वना दी है और विदेश मंत्रालय से तुरंत वीजा उपलब्ध कराने की मांग उठाई है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 22 Jul 2026 8:03 am

व्हाइट हाउस में पहली बार ट्रंप से मिले लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन, इजरायल के साथ शांति स्थापित करने पर बनी बात

लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने मंगलवार को अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी स्थित व्हाइट हाउस पहुंचकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से पहली बार आमने-सामने मुलाकात की है। यह कूटनीतिक मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब दोनों देशों के बीच क्षेत्रीय स्थिरता, लेबनान-इजरायल संबंधों और हिजबुल्ला को निशस्त्र करने के लिए लेबनानी सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों को लेकर गहन चर्चा की गई। वर्ष 2009 के बाद से व्हाइट हाउस में आमंत्रित होने वाले जोसेफ औन पहले लेबनानी राष्ट्रपति हैं, जिससे इस यात्रा का महत्व और भी बढ़ जाता है।दक्षिणी लेबनान में शांति स्थापित करने और रूपरेखा समझौते पर चर्चाराष्ट्रपति जोसेफ औन पिछले शनिवार से ही आधिकारिक अमेरिकी दौरे पर हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति से मिलने से पहले उन्होंने अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ भी द्विपक्षीय बैठक की थी। कूटनीतिक जानकारों के अनुसार, औन का यह दौरा दक्षिणी लेबनान में स्थायी शांति स्थापित करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। गौरतलब है कि बीते 26 जून को लेबनान और इजरायल ने एक रूपरेखा समझौते (Framework Agreement) पर सहमति जताई थी, जिसमें इजरायली सेना की वापसी, हिजबुल्ला का पूर्ण निरस्त्रीकरण और भविष्य के शांति समझौतों की रूपरेखा तैयार करना शामिल है।ट्रंप का बड़ा एलान, कहा- लेबनान की भरपूर मदद करेंगेव्हाइट हाउस में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान लेबनानी राष्ट्रपति ने हिजबुल्ला को बेअसर करने और इजरायल के साथ शांति का मार्ग प्रशस्त करने के लिए वाशिंगटन से कूटनीतिक और राजनीतिक समर्थन की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने लेबनानी सशस्त्र बलों (LAF) को मजबूत करने की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि सेना के बिना देश की व्यवस्था संभालना मुमकिन नहीं है।लेबनानी राष्ट्रपति की इन मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आश्वासन दिया कि अमेरिका लेबनान की भरपूर मदद करेगा। ट्रंप ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि लेबनान एक ऐसा देश रहा है जिसे लंबे समय से कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने माना कि कई मायनों में यह एक चुनौतीपूर्ण क्षेत्र है, लेकिन लेबनानी लोग अपने देश से प्रेम करते हैं और अमेरिका इस मुश्किल वक्त में उनकी हरसंभव सहायता करेगा।जोसेफ औन का अमेरिका दौरा आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO) और वैश्विक कूटनीति के दृष्टिकोण से इस मुलाकात के मुख्य बिंदु:ऐतिहासिक मुलाकात: साल 2009 के बाद व्हाइट हाउस आने वाले लेबनान के पहले राष्ट्रपति हैं जोसेफ औन।मुख्य मुद्दा: दक्षिणी लेबनान में संघर्ष विराम, अमेरिकी मध्यस्थता से हुआ रूपरेखा समझौता और हिजबुल्ला का निरस्त्रीकरण।सैन्य सहायता: लेबनानी सेना (LAF) को मजबूत करने के लिए अमेरिका से निरंतर समर्थन की मांग और अमेरिकी प्रशासन का सकारात्मक आश्वासन।

न्यूज़ इंडिया लाइव 22 Jul 2026 8:02 am

आईआरजीसी का दावा: जहाजों को गुमराह कर असुरक्ष‍ित रास्‍ते पर भेज रही अमेर‍िकी सेना, दो तेल टैंकर में हुए धमाके

होर्मुज स्‍ट्रेट को लेकर ईरान और अमेरिका में जारी तनातनी के बीच ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने मंगलवार को दावा किया क‍ि अमेर‍िकी सेना ने दो तेल टैंकरों के गुमराह कर गलत रास्‍ते पर भेजा, ज‍िस कारण उन्‍हें धमाकों का सामना करना पड़ा

देशबन्धु 22 Jul 2026 7:50 am

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ट्रंप का दावा, तेहरान बातचीत के लिए बेचैन

वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि ईरान अमेरिका के साथ बातचीत करना चाहता है, हालांकि वॉशिंगटन ने उस पर सैन्य दबाव बनाना जारी रखे हुए है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को दोबारा शुरू करने या मजबूत करने की कोशिश करता है, तो अमेरिका उन ठिकानों पर हमला करेगा। व्हाइट हाउस में लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने इस बात को खारिज कर दिया कि ईरान बातचीत के लिए तैयार नहीं है। ट्रंप ने कहा, ईरान बहुत बुरी तरह से हमसे मिलना चाहते हैं। जब तक वे गंभीर और सही तरीके से बातचीत के लिए तैयार नहीं होते, तब तक हमारी इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से ईरान की क्षमताओं को काफी नुकसान पहुंचा है। अगर हम अभी वहां से हट जाएं, तो भी ईरान को दोबारा सब कुछ बनाने में 20 से 25 साल लग जाएंगे। लेक‍िन हमारा काम अभी पूरा नहीं हुआ है। परमाणु गतिविधियों को लेकर चेतावनी देते हुए ट्रंप ने कहा, कोई भी साइट जहां वे न्यूक्लियर प्रोग्राम के बारे में सोच भी रहे हैं, हम उस पर बहुत, बहुत ताकत से हमला करेंगे। जब उनसे पूछा गया कि क्या ईरान ने परमाणु सेंट्रीफ्यूज किसी दूसरी जगह पहुंचा द‍िया है। तो ट्रंप ने कहा क‍ि हो सकता है उन्होंने ऐसा किया हो। लेकिन जब तक उनके पास जरूरी सामग्री नहीं होगी, तब तक इसका कोई मतलब नहीं है। हम उस सामग्री पर नजर रखते हैं। असली चीज वही है। ट्रंप ने दोहराया कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। वे परमाणु हथियार नहीं बना सकते। उनके पास ऐसा करने का कोई मौका नहीं है। बैठक में मौजूद अमेरिकी युद्ध सच‍िव पीट हेगसेथ ने कहा कि अगर ईरान व्यापारिक जहाजों की आवाजाही में बाधा डालता है, तो अमेरिका कड़ी कार्रवाई करने के लिए तैयार है। ईरान को बातचीत के कई मौके दिए गए हैं। अगर वे व्यापारिक जहाजों पर हमला करेंगे, तो हम उन पर दस गुना ज्यादा ताकत से जवाब देंगे। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की नौसैनिक नाकाबंदी प्रभावी बनी हुई है। नाकाबंदी को कोई पार नहीं कर पा रहा है। यह लोहे की मजबूत दीवार जैसी है। राष्ट्रपति ट्रंप ने लाल सागर में हूती विद्रोहियों के दोबारा हमले की आशंकाओं को भी कम करके बताया। उन्होंने कहा क‍ि अभी तक ऐसा नहीं हुआ है। अगर ऐसा कुछ होता है, तो हमें उससे निपटना पड़ेगा। ट्रंप के ये बयान ऐसे समय में आए हैं जब मध्य पूर्व में तनाव लगातार बना हुआ है। पिछले कई महीनों से ईरान, इजरायल और ईरान समर्थित सशस्त्र समूहों के बीच सैन्य टकराव जारी है।

देशबन्धु 22 Jul 2026 7:35 am

हूतियों की नई धमकी: सऊदी बंदरगाहों से कारोबार करने वाले जहाज बन सकते हैं निशाना

यमन के हूती विद्रोहियों ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों को चेतावनी दी है कि जो जहाज सऊदी अरब के बंदरगाहों के साथ कारोबार करेंगे, वे सैन्य कार्रवाई का निशाना बन सकते हैं

देशबन्धु 22 Jul 2026 7:30 am

जंतर-मंतर न जाकर, पीएम आवास क्यों पहुंचे राहुल गांधी:क्या CJP का प्रोटेस्ट हाइजैक करने की कोशिश, आगे क्या होगा

21 जुलाई की दोपहर साढ़े तीन बजे। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे कुछ कांग्रेसी नेताओं के साथ पैदल ही पीएम मोदी के आवास की तरफ चल दिए। न पुलिस को खबर थी, न मीडिया को। हालांकि 3 घंटे 20 मिनट बाद ही पुलिस ने बलपूर्वक राहुल-प्रियंका को उठाकर धरना खत्म करा दिया है। आखिर पीएम आवास के बाहर अचानक धरने के लिए क्यों गए राहुल गांधी, क्या कॉकरोच पार्टी का आंदोलन हाईजैक कर लेंगे; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… 20 जुलाई से पहलेः कॉकरोच पार्टी के प्रोटेस्ट से दूरी की स्ट्रैटेजी 20 जुलाई के बादः राहुल-प्रियंका ने लाठीचार्ज पर आक्रामक रवैया अपनाया जंतर-मंतर नहीं, पीएम आवास के बाहर धरने की सीक्रेट योजना पीएम मोदी के आवास के बाहर धरने की प्लानिंग कांग्रेस ने बेहद सीक्रेट तरीके से की। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कांग्रेस नेताओं को मल्लिकार्जुन खड़गे के जन्मदिन की बधाई देने के लिए उनके आवास पर बुलाया गया। खड़गे का घर पीएम मोदी के आवास के करीब है। दोपहर 3:30 बजे पैदल ही पीएम आवास की तरफ निकले और धरने पर बैठ गए। देखते ही देखते केरल सीएम वीडी सतीशन, कर्नाटक सीएम डीके शिवकुमार भी प्रोटेस्ट में पहुंच गए। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह सरकार की तरफ से राहुल गांधी से बात करने पहुंचे। हालांकि बात नहीं बनी। आखिरकार पुलिस ने बलपूर्वक उन्हें हटा दिया। राजनीतिक विश्लेषक रशीद किदवई कहते हैं, 'राहुल गांधी छात्रों की बेचैनी की आवाज उठाने का श्रेय खुद को या कांग्रेस पार्टी को ही दिलाना चाहते हैं। इसे बिलकुल शेयर नहीं करना चाहते हैं। वो पहले जाकर सोनम वांगचुक को जूस नहीं पिला आए। ऐसा करते तो लगता, कांग्रेस वांगचुक के आंदोलन के पीछे हैं।’ किदवई कहते हैं, ‘राहुल ने सरकार की तरफ से गलती होने का इंतजार किया। राहुल CJP के साथ खड़े नहीं हुए हैं। छात्रों के साथ खड़े हुए हैं। इससे यह जरूर साफ होता है कि राहुल गांधी पूरा गुणा-भाग करके राजनीति में कोई भी फैसला लेते हैं।' पीएम आवास के बाहर धरने पर क्यों बैठे? राहुल गांधी ने X पर लिखा, ‘हम प्रधानमंत्री मोदी के घर तक पैदल मार्च करके गए हैं, ताकि कल युवा छात्रों के साथ हुई बर्बरता के लिए उनसे जवाब मांग सकें। सरकार न तो कोई जिम्मेदारी लेना चाहती है और न ही संसद में इस पर बहस करना चाहती है। भारत के युवाओं के भविष्य को बर्बाद करने के लिए प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए।’ वरिष्ठ पत्रकार आदेश रावल के मुताबिक, ‘छात्रों पर लाठीचार्ज के मुद्दे को राहुल गांधी गंभीरता से ले रहे हैं। साथ ही पार्टी के नेताओं को संदेश भी दिया है कि छात्रों के मुद्दों के साथ आगे बढ़ना है। वहीं यह गृह मंत्रालय की विफलता भी है।’ वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी कहते हैं, ‘इतने समय से सभी को लग रहा था कि CJP का आंदोलन सिर्फ 2-4 हजार छात्रों का आंदोलन है। कल जब बड़ी संख्या में भीड़ आई तो कांग्रेस को इसकी ग्रैविटी का पता लगा। कांग्रेस को लग रहा था कि आम आदमी पार्टी इसका फायदा न उठा ले, इसलिए अब राहुल गांधी आगे आए हैं।’ वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी कहती हैं, ‘राहुल ने CJP के प्रोटेस्ट की मांगों को और ऊपर कर दिया है। वे न केवल शिक्षा मंत्री, बल्कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री का भी इस्तीफा मांग रहे हैं।’ कॉकरोच पार्टी के आंदोलन पर क्या असर पड़ेगा? नीरज चौधरी कहती हैं कि अभी जो सिचुएशन दिल्ली में है, उसका असर न केवल सिर्फ कांग्रेस-बीजेपी पर नहीं, लेकिन लगभग पूरी पॉलिटिक्स पर पड़ेगा। राहुल गांधी भी इसका राजनीतिक फायदा जरूर मिलेगा। CJP के भविष्य को लेकर एक्सपर्ट्स 3 तरह की बातें कहते हैं… ------------- ये खबर भी पढ़िए… आज का एक्सप्लेनर: क्या ‘कॉकरोचों’ को पीटना मोदी सरकार को महंगा पड़ेगा, 3 नई मुसीबतें; राहुल गांधी को धरने से उठाया, अब आगे क्या 20 जुलाई के संसद मार्च में ‘कॉकरोचों’ की पिटाई के बाद सोनम वांगचुक ने 24वें दिन भी अनशन जारी रखा। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देकर पीएम का इस्तीफा मांगा, जिसके बाद पुलिस वालों ने उन्हें मौके से हिरासत में ले लिया। अभिजीत दीपके की अगुवाई में जंतर-मंतर पर वापस भीड़ जुटने लगी है। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 21 Jul 2026 8:38 pm

आज का एक्सप्लेनर:क्या ‘कॉकरोचों’ को पीटना मोदी सरकार को महंगा पड़ेगा, 3 नई मुसीबतें; राहुल गांधी को धरने से उठाया, अब आगे क्या

20 जुलाई के संसद मार्च में ‘कॉकरोचों’ की पिटाई के बाद सोनम वांगचुक ने 24वें दिन भी अनशन जारी रखा। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री आवास के बाहर धरना देकर पीएम का इस्तीफा मांगा, जिसके बाद पुलिस वालों ने उन्हें मौके से हिरासत में ले लिया। अभिजीत दीपके की अगुवाई में जंतर-मंतर पर वापस भीड़ जुटने लगी है। आखिर इस संसद मार्च से कॉकरोच पार्टी को क्या हासिल हुआ, इससे सरकार की मुसीबतें क्यों बढ़ सकती हैं और आगे क्या होगा; समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: संसद मार्च से कॉकरोच पार्टी को क्या हासिल हुआ?जवाबः 3 बड़े हासिल हैं… 1. कॉकरोच पार्टी को उम्मीद से ज्यादा समर्थन मिला 2. सरकार पहली बार बातचीत को तैयार हुई, मेमोरैंडम लिया 3. राहुल जैसे विपक्षी नेताओं का सपोर्ट, राजनीतिक ताकत मिलेगी सवाल-2: प्रदर्शनकारियों की पिटाई से सरकार की मुश्किलें कैसे बढ़ गईं?जवाबः सरकार के लिए अब 3 बड़ी मुश्किलें हैं... 1. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग तेज, पीएम का भी विरोध बढ़ा 2. सोनम वांगचुक ने अनशन जारी रखने का ऐलान किया 3. मानसून सत्र में बैकफुट पर रहना पड़ सकता है सवाल-3: प्रोटेस्ट आगे बढ़ा, तो सरकार क्या कदम उठा सकती है?जवाबः सरकार के सामने 2 रास्ते हैं… 1. मांगों पर CJP से बात आगे बढ़ाए सरकार CJP के लीडर्स के साथ उनकी मांगों पर बात आगे बढ़ा सकती है, जैसा 2020-21 के किसान आंदोलन के समय हुआ था। सीनियर जर्नलिस्ट नीलांजन मुखोपाध्याय कहते हैं, ‘प्रधानमंत्री ये मांगें तभी मानेंगे, जब उन्हें लगेगा कि CJP का जनसमर्थन इतना बढ़ गया है कि वो बीजेपी का कोर वोटबैंक खींचना शुरू कर सकती है।’ 2020-21 में किसानों ने दिल्ली में घुसने के सभी सीमाई रास्ते- अटारी बॉर्डर, सिंघु, गाजीपुर, टिकरी वगैरह पर कब्जा कर लिया था। करीब 700 किसानों की मौत हो गई थी। पूरे देश में किसानों के समर्थन में लोग खड़े होने लगे थे, तब सरकार को झुकना पड़ा और किसान कानून वापस लेने पड़े। 2. धर्मेंद्र प्रधान को दूसरे रास्ते से हटाए बीजेपी का अघोषित नियम है कि किसी राजनीतिक दबाव में किसी किसी मंत्री का इस्तीफा नहीं होता। इसके बजाय मोदी सरकार में परफॉरमेंस के आधार पर मंत्रियों को हटाने या उनका विभाग बदलने का पैटर्न है। पॉलिटिकल एक्सपर्ट रशीद किदवई कहते हैं कि सरकार ने धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा ले लिया, तो संदेश जाएगा कि सरकार से गलती हुई है। सरकार एक और कठोर रुख अख्तियार कर सकती है- प्रोटेस्टर्स पर गंभीर मुकदमे दर्ज करके आंदोलन कमजोर करने की कोशिश। दिल्ली पुलिस ने प्रोटेस्ट में शामिल अज्ञात लोगों के खिलाफ 5 FIR दर्ज की हैं। इनमें दंगा करने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और सरकारी कर्मचारियों पर हमले जैसी गंभीर धाराएं हैं। 2020 में CAA के खिलाफ शाहीन बाग में हुए प्रोटेस्ट और फिर 2023 में रेसलिंग फेडरेशन के अध्यक्ष ब्रजभूषण सिंह पर यौन शोषण का आरोप लगाने वाली महिला पहलवानों के प्रदर्शन के दौरान ऐसा हुआ है- पुलिस ने झड़प के बाद हिरासत में लेकर जंतर-मंतर खाली करवा लिया था। सवाल-4: कॉकरोच पार्टी अब आगे क्या करेगी?जवाबः कॉकरोच पार्टी फिलहाल जंतर-मंतर से प्रोटेस्ट जारी रखेगी… दीपके ने कहा था कि 11 मार्च को दोबारा संसद मार्च करेंगे, हालांकि अब उन्होंने साफ किया है कि संसद की तरफ दोबारा कूच की कोई योजना नहीं है। दीपके ने कहा, ‘अब सरकार को यहां जंतर-मंतर पर आना होगा, अब हम उनके पास नहीं जाएंगे। हम मार्च इसलिए नहीं निकाल रहे हैं, क्योंकि पुलिस ने छात्रों का खून बहाया है। इन्हें छात्रों की परवाह नहीं, लेकिन हमें है। सोनम सर अपना अनशन जारी रखेंगे और आंदोलन भी जारी रहेगा।' ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर:पीएम मोदी धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर आंदोलन खत्म क्यों नहीं करा देते; इसमें 4 बड़ी अड़चनें, सरकार का गणित क्या है सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल, कॉकरोच पार्टी का संसद मार्च, रोकने के लिए आंसू गैस के गोले, लाठियां, अफरा-तफरी…। लेकिन धर्मेंद्र प्रधान अब भी शिक्षा मंत्री की कुर्सी पर जमे हैं। सवाल उठ रहे कि आखिर पीएम मोदी धर्मेंद्र प्रधान से हटाकर आंदोलन खत्म क्यों नहीं करा देते? पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 21 Jul 2026 6:29 pm

बिहार के लाल का ब्रिटेन में बजा डंका! मुजफ्फरपुर में जन्मे कनिष्क नारायण बने यूके के AI मंत्री, लिसा नंदी का भी जलवा

ब्रिटेन की राजनीति में एक बार फिर भारतीयों का दबदबा और डंका पूरी दुनिया के सामने साबित हो गया है। कीर स्टार्मर के इस्तीफे के बाद ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री के रूप में पदभार संभालने वाले एंडी बर्नहैम ने अपनी केंद्रीय कैबिनेट का पुनर्गठन कर दिया है। राजा चार्ल्स तृतीय से मुलाकात के बाद 10 डाउनिंग स्ट्रीट से 'नए राजनीतिक मॉडल' का वादा करने वाले बर्नहैम की कैबिनेट में भारतीय मूल के दो बड़े नेताओं को बेहद अहम और ऐतिहासिक जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इनमें बिहार की माटी से ताल्लुक रखने वाले कनिष्क नारायण का नाम सबसे ऊपर छाया हुआ है।बिहार के मुजफ्फरपुर से 10 डाउनिंग स्ट्रीट तक का ऐतिहासिक सफर बिहार के मुजफ्फरपुर जिले में जन्मे कनिष्क नारायण ने ब्रिटेन की राजनीति में एक नया इतिहास रच दिया है। उन्हें प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम की कैबिनेट में पहली बार कैबिनेट स्तर का दर्जा देते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मंत्री नियुक्त किया गया है। कनिष्क का यूके तक का सफर किसी प्रेरणा से कम नहीं है। वह महज 12 साल की उम्र में अपने परिवार के साथ बिहार से यूके के कार्डिफ चले गए थे। कार्डिफ के कैथेज हाई स्कूल से शुरुआती शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने विश्वप्रसिद्ध ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन और अमेरिका की प्रतिष्ठित स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से एमबीए की डिग्री हासिल की।सिलिकॉन वैली के अनुभव से यूके कैबिनेट तक की छलांग कनिष्क नारायण के पास टेक और पॉलिसी का जबरदस्त अनुभव है। राजनीति में आने से पहले उन्होंने सिलिकॉन वैली और ब्रिटेन के टेक सेक्टर में शीर्ष पदों पर काम किया। उन्होंने कई वैश्विक कॉरपोरेट घरानों और अंतरराष्ट्रीय सरकारों को परामर्श दिया। 2024 के आम चुनाव में लेबर पार्टी के टिकट पर उन्होंने वेल ऑफ ग्लैमरगन सीट जीतकर सबको चौंका दिया था, जिस पर पिछले 14 वर्षों से कंजर्वेटिव पार्टी का मजबूत कब्जा था। सितंबर 2025 में वे जूनियर मंत्री बने थे, लेकिन अब एआई की बढ़ती अहमियत को देखते हुए बर्नहैम सरकार ने इस विभाग को कैबिनेट का दर्जा देकर कनिष्क को इसकी पूरी कमान सौंप दी है। कनिष्क का मानना है कि एआई ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक ताकत का मुख्य आधार है। 2020 के लॉकडाउन में उन्होंने 'हेल्प योर हाई स्ट्रीट' अभियान भी चलाया था और वे थिंक-टैंक चैथम हाउस के सलाहकार भी रह चुके हैं।कोलकाता से गहरा नाता, लिसा नंदी का कैबिनेट में जलवा बरकरार बर्नहैम कैबिनेट में दूसरा बड़ा भारतीय नाम लिसा नंदी का है, जिन्होंने संस्कृति सचिव (Culture Secretary) के रूप में अपना पद बरकरार रखा है। लिसा नंदी का भारत के पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता से गहरा पारिवारिक संबंध है। साल 1979 में मैनचेस्टर में जन्मी लिसा के पिता दीपक नंदी कोलकाता के रहने वाले थे, जबकि उनकी मां लुईस बायर्स ब्रिटिश मूल की हैं। न्यूकैसल यूनिवर्सिटी से राजनीति की पढ़ाई और यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन से पब्लिक पॉलिसी में मास्टर्स करने वाली लिसा ने राजनीति में कदम रखने से पहले बेघर लोगों और बच्चों के लिए काम करने वाली शीर्ष संस्थाओं में नीति सलाहकार के रूप में सेवाएं दीं।2010 से लगातार संसद में जीत की हैट्रिक लिसा नंदी ने साल 2010 में विगन (Wigan) संसदीय सीट से चुनाव जीतकर इतिहास रचा था, जहां से वे पहली महिला और पहली एशियाई सांसद बनी थीं। जुलाई 2024 में पहली बार संस्कृति सचिव बनाई गईं लिसा नंदी ने अपनी प्रशासनिक कार्यशैली से सभी को प्रभावित किया, जिसके चलते नए प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने भी उन पर अपना भरोसा कायम रखा है। ब्रिटेन की नई सरकार में बिहार और बंगाल मूल के इन दो युवा नेताओं की एंट्री से न सिर्फ ब्रिटेन में रहने वाले प्रवासी भारतीय गदगद हैं, बल्कि भारत में भी इसे लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 21 Jul 2026 5:57 pm

होर्मुज के बाद अब बाब अल-मंदेब होगा बंद! क्या ₹200 पार पहुंचेगा पेट्रोल? जानिए भारत पर असर

वैश्विक ऊर्जा बाजार पर एक बार फिर महासंकट के काले बादल मंडराने लगे हैं। पहले से ही अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण तनातनी और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बंद होने से दुनिया ईंधन संकट से जूझ रही थी। अब इस संकट में आग में घी डालने का काम ईरान समर्थित यमनी हूती विद्रोहियों के संगठन अंसार अल्लाह ने कर दिया है। हूतियों ने सऊदी अरब से बदला लेने के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण लाल सागर और बाब अल-मंदेब (Bab al-Mandab) जलडमरूमध्य की पूर्ण नाकेबंदी का आधिकारिक ऐलान कर दिया है। यदि यह नाकेबंदी प्रभावी होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी गैस की कीमतों में अप्रत्याशित उछाल देखने को मिल सकता है।सना एयरपोर्ट हमले का बदला: हूतियों का 'आंख के बदले आंख' का ऐलान हूती विद्रोहियों द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि हाल ही में यमन के सना हवाई अड्डे पर सऊदी अरब की अगुआई वाले गठबंधन द्वारा हवाई हमला किया गया था। इसी का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए हूतियों ने अरब सागर और लाल सागर की नाकेबंदी करने का फैसला लिया है। नाकेबंदी की इस धमकी से ठीक पहले हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के एक प्रमुख हवाई अड्डे पर आत्मघाती ड्रोन हमला भी किया था। संगठन का स्पष्ट कहना है कि वे सऊदी अरब को 'आंख के बदले आंख' की नीति के तहत करारा जवाब देंगे और उनके व्यापारिक मार्गों को पूरी तरह से ठप कर देंगे।सऊदी अरब की लाइफलाइन पर सबसे बड़ा खतरा लाल सागर का बाब अल-मंदेब रास्ता होर्मुज के बाद ईंधन आपूर्ति का दुनिया का दूसरा सबसे अहम और संवेदनशील समुद्री रास्ता (Chokepoint) माना जाता है। ईरान के साथ जारी संघर्ष के कारण सऊदी अरब ने फारस की खाड़ी के बजाय अपने अधिकांश कच्चे तेल का निर्यात लाल सागर के रास्ते करना शुरू कर दिया था। सऊदी अरामको अपनी 746 मील लंबी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन (जिसे 'पेट्रोलीन' कहा जाता है) के जरिए 70 प्रतिशत तेल लाल सागर तक पहुंचाता है। वहां से टैंकरों के जरिए इसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भेजा जाता है। हूतियों के इस कदम से सऊदी अरब का यह प्रमुख निर्यात मार्ग पूरी तरह से खतरे में पड़ गया है।होर्मुज और बाब अल-मंदेब दोनों बंद: 30% फ्यूल सप्लाई पर पड़ेगा डाका आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO) और वैश्विक आर्थिक आंकड़ों के अनुसार, यह संकट कितना गंभीर है इसे गणित के इन साधारण आंकड़ों से समझा जा सकता है:होर्मुज जलडमरूमध्य का प्रभाव: दुनिया के कुल तेल प्रवाह का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज से गुजरता है, जिसे तेहरान ने पहले ही अवरुद्ध कर रखा है।बाब अल-मंदेब का प्रभाव: सामान्य दिनों में वैश्विक तेल शिपमेंट का 10 प्रतिशत हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है।संयुक्त प्रभाव: यदि हूती विद्रोही बाब अल-मंदेब को पूरी तरह से सील कर देते हैं, तो दुनिया की कुल तेल और गैस आपूर्ति का लगभग 30 प्रतिशत हिस्सा एक झटके में कट जाएगा।क्या बेकाबू होंगे पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दाम? हूती मीडिया दफ्तर के उप प्रमुख नसरुद्दीन आमेर ने साफ किया है कि सऊदी अरब के दुश्मन जहाजों के लिए बाब अल-मंदेब का रास्ता पूरी तरह बंद रहेगा। बाब अल-मंदेब का दक्षिणी प्रवेश मार्ग बेहद संकरा है, जिससे थोड़े से सैन्य प्रयास से भी जहाजों की आवाजाही को रोका जा सकता है। पूर्व में भी हूती विद्रोहियों ने इस इलाके में लगभग 100 वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया था। यदि आपूर्ति में 30 फीसदी की भारी गिरावट आती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं। इसका सीधा असर भारत सहित दुनिया भर के आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा, जिससे पेट्रोल-डीजल और एलपीजी सिलेंडर के दामों में भारी बढ़ोतरी का खतरा पैदा हो गया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 21 Jul 2026 5:56 pm

Pakistan fears India: सिंधु जल के लिए भारतीय मूल की कनाडाई मंत्री अनीता आनंद के सामने गिड़गिड़ाया, मिला करारा जवाब

भारत की कूटनीतिक और रणनीतिक ताकत के आगे पाकिस्तान किस कदर बेबस हो चुका है, इसका ताजा उदाहरण एक बार फिर दुनिया के सामने आ गया है। पानी की बूंद-बूंद को मोहताज होता पाकिस्तान अब सिंधु जल समझौते को दोबारा बहाल कराने के लिए पश्चिमी देशों के सामने गिड़गिड़ा रहा है। पाकिस्तान की इस बेचैनी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उसने अब कनाडा से इस मामले में दखल देने की भीख मांगी है, लेकिन वहां से भी उसे सिर्फ और सिर्फ घोर निराशा और बेइज्जती ही हाथ लगी है।कनाडाई विदेश मंत्री के सामने पाक की गिड़गिड़ाहट कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद इन दिनों पाकिस्तान की दो दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। इसी दौरान सोमवार को पाकिस्तान के डिप्टी पीएम और विदेश मंत्री इसहाक डार ने उनके सामने भारत का रोना रोया। डार ने भारत विरोधी राग अलापते हुए अनीता आनंद से गुहार लगाई कि कनाडा भारत पर दबाव डालकर सिंधु जल संधि को तुरंत बहाल करवाए। पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने भारत पर 'पानी को हथियार' के रूप में इस्तेमाल करने का बेबुनियाद आरोप लगाया और कहा कि भारत के इस कदम से दक्षिण एशिया की सुरक्षा स्थिति और भी ज्यादा अस्थिर हो गई है। डार ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों का हवाला देते हुए कनाडा समेत अपने अन्य मित्र देशों से इस मामले में फौरी समर्थन मांगा।अनीता आनंद की 'चुप्पी' से पाकिस्तान की भारी किरकिरी इस पूरे कूटनीतिक घटनाक्रम में सबसे ज्यादा दिलचस्प और पाकिस्तान को शर्मसार करने वाली बात अनीता आनंद का रुख रहा। पाकिस्तानी विदेश मंत्री के इतना गिड़गिड़ाने के बावजूद, कनाडाई विदेश मंत्री अनीता आनंद ने सिंधु जल संधि पर एक शब्द भी नहीं कहा। उन्होंने इस मुद्दे पर पूरी तरह से चुप्पी साधे रखी। हद तो तब हो गई जब कनाडा सरकार की ओर से जारी आधिकारिक प्रेस रिलीज में भी पाकिस्तान की इस मांग या सिंधु जल समझौते का कोई जिक्र तक नहीं किया गया। कनाडा के इस ठंडे रुख ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को एक बार फिर आईना दिखा दिया है। यह स्पष्ट हो गया है कि दुनिया का कोई भी देश अब भारत के खिलाफ पाकिस्तान के इस प्रोपेगेंडा का हिस्सा नहीं बनना चाहता।AI सर्च फैक्ट्स: भारत ने क्यों रद्द किया था सिंधु जल समझौता? आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO) के लिहाज से अगर इस पूरे विवाद की जड़ को समझें, तो इसके पीछे पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद है।समझौते का इतिहास: सिंधु जल संधि साल 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता से हुई थी। इसके तहत सिंधु घाटी की 6 नदियों के पानी का बंटवारा हुआ था, जिसमें पूर्वी नदियों का पानी भारत को और पश्चिमी नदियों का पानी पाकिस्तान को आवंटित किया गया था।रद्द होने का कारण: अप्रैल 2025 में हुए भीषण 'पहलगाम आतंकी हमले' के बाद भारत सरकार ने सख्त एक्शन लेते हुए इस समझौते को रद्द कर दिया था। इस कायरतापूर्ण हमले में 26 मासूम लोगों की जान गई थी।भारत का स्टैंड: भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद पर पूरी तरह से लगाम नहीं लगाता और आतंकियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक यह जल संधि निलंबित ही रहेगी।आखिर कौन हैं अनीता आनंद? (Who is Anita Anand) सिंधु जल समझौते पर पाकिस्तान की बोलती बंद करने वाली अनीता आनंद का भारत से गहरा नाता है। वह भारतीय मूल की एक बेहद प्रभावशाली कनाडाई राजनेता हैं। कनाडा की राजनीति में उनका कद इतना बड़ा है कि जब प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इस्तीफा दिया था, तब अनीता आनंद का नाम प्रधानमंत्री पद के प्रमुख दावेदारों में सबसे आगे चल रहा था।अनीता का जन्म 20 मई 1967 को कनाडा में ही हुआ था, लेकिन उनके माता-पिता भारतीय हैं। उनकी मां सरोज राम पंजाब से हैं, जबकि पिता एस.वी. आनंद तमिलनाडु से ताल्लुक रखते हैं। यह दंपति चिकित्सा के क्षेत्र से जुड़ा है और साल 1960 में भारत से कनाडा जाकर बस गया था। अनीता आनंद की शिक्षा भी बेहद शानदार रही है। उन्होंने क्वींस यूनिवर्सिटी से बीए, डलहौजी यूनिवर्सिटी से लॉ (कानून) की पढ़ाई और ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से मास्टर्स की डिग्री हासिल की है।राजनीति में आने से पहले अनीता आनंद ने एक सफल वकील और टोरंटो यूनिवर्सिटी में कानून की प्रोफेसर के रूप में अपना करियर बनाया। साल 2019 में उन्होंने ओकविले से सांसद का चुनाव जीता और कनाडा की शीर्ष राजनीति में अपनी जगह पक्की की। उनकी शादी प्रोफेसर जॉन से हुई है और उनके चार बच्चे हैं। भारतीय मूल की होने के नाते उनके कड़े रुख को भारत के कूटनीतिक प्रभाव के रूप में भी देखा जा रहा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 21 Jul 2026 5:54 pm

'कोई समझौता नहीं...': PoK में शहबाज़ सरकार के खिलाफ भड़का जनआक्रोश, 23 जुलाई को बड़े धमाके की तैयारी

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में छिड़ा भीषण जनआक्रोश अब पाकिस्तान की शहबाज़ शरीफ सरकार और सैन्य प्रतिष्ठान के लिए बड़ा सिरदर्द बन गया है। जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में चल रहा यह ऐतिहासिक आंदोलन दिन-ब-दिन उग्र रूप धारण करता जा रहा है। सोशल मीडिया पर प्रशासनिक समझौते की उड़ रही अफवाहों को सिरे से खारिज करते हुए JAAC ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तानी हुक्मरानों के साथ कोई लिखित समझौता नहीं हुआ है और आंदोलन बिना किसी रुकावट के लगातार जारी रहेगा।फर्जी प्रोपेगैंडा खारिज: 'जब तक मांगें पूरी नहीं, तब तक आंदोलन जारी'JAAC की कोर कमेटी ने मंगलवार को एक प्रेस बयान जारी कर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ किसी भी तरह के समझौते की खबरों को बेबुनियाद प्रोपेगैंडा करार दिया। संगठन के वरिष्ठ नेताओं ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों से बातचीत जरूर हुई है, लेकिन जब तक हिरासत में लिए गए सभी कार्यकर्ताओं की बिना शर्त रिहाई और स्थानीय जनता की बुनियादी मांगों पर लिखित सहमति नहीं बनती, तब तक आंदोलन खत्म करने का सवाल ही नहीं उठता। नेताओं ने समर्थकों से सावधान रहने और ऐसी किसी भी झूठी खबर पर भरोसा न करने की अपील की है।नीलम घाटी से लेकर पुंछ और मुजफ्फरपुर तक पूर्ण बंद की अपीलआंदोलन को और धार देने के लिए JAAC नेता राजा इखलाक अहमद ने नीलम घाटी के व्यापारियों और आम नागरिकों से पूरे क्षेत्र में बाजार बंद रखकर अभूतपूर्व एकजुटता दिखाने का आह्वान किया है। वहीं, संगठन के वरिष्ठ रणनीतिकार उमर नजीर कश्मीरी ने मीरपुर, मुजफ्फराबाद और पुंछ डिवीजनों के निवासियों से 23 जुलाई को होने वाले विशाल धरने और सिट-इन प्रदर्शनों में सड़कों पर उतरने की पुरजोर अपील की है। समूचे PoK में इस समय पाकिस्तानी प्रशासन के खिलाफ भारी विरोध देखा जा रहा है।23 जुलाई को होने वाला है बड़ा ऐलान: पाकिस्तान की बढ़ी टेंशनJAAC ने 23 जुलाई की तारीख को इस जन आंदोलन के इतिहास में एक नया 'टर्निंग पॉइंट' घोषित किया है। कश्मीरी ने कहा कि 23 जुलाई को पूरे आंदोलन का भविष्य तय करने वाली एक बेहद महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक घोषणा की जाएगी। हालांकि, इस घोषणा के सस्पेंस ने पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। JAAC की मुख्य मांगों में गिरफ्तार नेताओं की रिहाई के साथ-साथ बिजली, पानी, सब्सिडी और बुनियादी अधिकारों की बहाली शामिल है, जिसके बिना जनता पीछे हटने को तैयार नहीं है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 21 Jul 2026 5:48 pm

गुयाना नाव हादसे में अब तक 27 शव बरामद, 83 लोग लापता, 69 को किया गया रेस्क्यू

गुयाना में नाव पलटने की एक भयावह घटना सामने आई है, जिसमें करीब 27 लोगों की मौत हो गई है। गुयाना सरकार की ओर से सोमवार (स्थानीय समय) को दी गई जानकारी के अनुसार, हफ्ते के अंत में तट के पास पलटी हुई एक नाव से 27 शव बरामद किए गए हैं। घटना के दौरान नाव पर 179 लोग सवार थे।

देशबन्धु 21 Jul 2026 5:28 pm

CIA, RAW और मोसाद को तो सब जानते हैं, लेकिन क्या आपको पता है चीन की खुफिया एजेंसी का असली नाम

दुनियाभर के देशों में अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, सामरिक हितों और सामरिक जानकारियों को सुरक्षित रखने के लिए शक्तिशाली खुफिया एजेंसियों का गठन किया जाता है। जब भी दुनिया की सबसे खतरनाक और ताकतवर जासूसी एजेंसियों का जिक्र होता है, तो लोगों की जुबान पर सबसे पहले अमेरिका की सीआईए (CIA), भारत की रॉ (RAW), इजराइल की मोसाद (Mossad), पाकिस्तान की आईएसआई (ISI) और रूस की केजीबी (KGB/FSB) जैसी एजेंसियों के नाम आते हैं। फिल्मों से लेकर किताबों तक में इन खुफिया तंत्रों के कारनामों के खूब चर्चे होते हैं, लेकिन क्या आपने कभी यह सोचा है कि आज के दौर में दुनिया की महाशक्ति बनने की होड़ में सबसे आगे रहने वाले चीन की खुफिया एजेंसी का असल नाम क्या है और यह कैसे काम करती है? आज के इस विशेष लेख में हम आपको दुनिया के सबसे रहस्यमयी और ताकतवर जासूसी तंत्र के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।क्या है चीन की खुफिया एजेंसी का नाम और इसका इतिहासदुनिया भर में अपनी विस्तारवादी नीतियों और अत्याधुनिक सर्विलांस तकनीकों के लिए चर्चित चीन की मुख्य खुफिया और सुरक्षा एजेंसी का नाम 'मिनिस्ट्री ऑफ स्टेट सिक्योरिटी' यानी एम्सएसएस (Ministry of State Security - MSS) है। चीनी भाषा में इसे 'गुओआनबू' (Guoanbu) के नाम से जाना जाता है। इस एजेंसी का गठन साल 1983 में कई पुरानी खुफिया और पुलिस इकाइयों का विलय करके किया गया था। तब से लेकर आज तक यह संस्था बीजिंग सरकार और कम्युनिस्ट पार्टी के सबसे बड़े हथियारों में से एक के रूप में काम कर रही है। एमएएस (MSS) का मुख्य कार्य देश के भीतर असंतोष को दबाना, विदेशी जासूसों का पता लगाना और दुनिया भर से सामरिक, वैज्ञानिक व आर्थिक गुप्त जानकारियां जुटाना है।मोसाद और सीआईए से कितनी अलग और खतरनाक है चीन की MSSजब तुलना इजराइल की मोसाद या अमेरिका की सीआईए से की जाती है, तो चीन की एमएसएस (MSS) काम करने के तरीकों में थोड़ी अलग नजर आती है। मोसाद अपनी आक्रामक टारगेटेड हत्याओं और अभियानों के लिए जानी जाती है, और सीआईए दुनिया भर में राजनीतिक तख्तापलट या सैन्य दखल के लिए चर्चित रही है, वहीं चीन की खुफिया एजेंसी 'साइबर जासूसी', 'इंडस्ट्रियल एस्पियोनेज' यानी औद्योगिक चोरी और बड़े पैमाने पर डिजिटल सर्विलांस में महारत रखती है। यह एजेंसी चुपचाप बिना किसी शोर-शराबे के दूसरे देशों की बड़ी टेक कंपनियों, सरकारी डेटाबेस और रक्षा अनुसंधान संस्थानों में सेंध लगाकर चीन के लिए आवश्यक तकनीक और रणनीतिक ब्लूप्रिंट चुराने का काम करती है।आधुनिक तकनीक और ग्लोबल इन्फ्लुएंस का खतरनाक मिश्रणआज के इस डिजिटल और एआई (AI) के दौर में चीन की खुफिया एजेंसी ने अपने काम करने के तरीकों में भारी बदलाव किया है। अंतरिक्ष तकनीक से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बायोमेट्रिक डेटा चोरी तक, एमएसएस दुनिया भर में अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए नए जमाने के हथियारों का इस्तेमाल कर रही है। इसके एजेंट दुनिया के कोने-कोने में कूटनीतिक, शैक्षणिक और व्यावसायिक आवरण के पीछे छिपकर काम करते हैं। यही वजह है कि आज के समय में इस रहस्यमयी चीनी एजेंसी को दुनिया की सबसे खतरनाक और चुनौतीपूर्ण खुफिया ताकतों में गिना जाता है, जिस पर पश्चिमी देशों की सुरक्षा एजेंसियों की हमेशा पैनी नजर रहती है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 21 Jul 2026 2:43 pm

होर्मुज में एक और तेल टैंकर स्वाहा, ओमान तट के पास हुआ हमला, ब्रिटिश सैन्य एजेंसी का दावा

मध्य पूर्व के बेहद संवेदनशील समुद्री मार्ग और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य में तनाव एक बार फिर अपने चरम पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए लाइफलाइन माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान के तट के पास एक बार फिर से एक बड़े तेल टैंकर पर खतरनाक हमले की खबर सामने आई है। ब्रिटिश सेना की समुद्री व्यापार संचालन एजेंसी (UKMTO) ने इस घटना की पुष्टि करते हुए दुनिया भर के देशों और शिपिंग कंपनियों के लिए एक गंभीर चेतावनी जारी की है। इस ताजा हमले के बाद से वैश्विक ऊर्जा बाजार में हड़कंप मच गया है और कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं फिर से गहराने लगी हैं। आइए जानते हैं कि इस सनसनीखेज घटना के पीछे की पूरी सच्चाई क्या है और इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ने वाला है।ब्रिटिश सैन्य एजेंसी का बड़ा दावा और हमले की पूरी डिटेलब्रिटिश सेना की मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस एजेंसी ने जानकारी दी है कि ओमान के तट के करीब गुजर रहे एक कमर्शियल तेल टैंकर को निशाना बनाया गया है। शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक यह हमला ओमान के डुक्म पोर्ट के आसपास हुआ, जिससे टैंकर को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका जताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही संबंधित सुरक्षा एजेंसियां और युद्धपोत हरकत में आ गए हैं और प्रभावित जहाज की मदद के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। इस हाई-प्रोफाइल हमले के बाद से इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले अन्य जहाजों की सुरक्षा को लेकर भी कड़े निर्देश जारी कर दिए गए हैं ताकि किसी भी बड़ी अनहोनी से बचा जा सके।क्यों संवेदनशील है ओमान तट और होर्मुज जलडमरूमध्य का इलाकादुनिया का एक बहुत बड़ा हिस्सा अपने इस्तेमाल के लिए कच्चे तेल का आयात मध्य पूर्व के देशों से करता है, और इसके परिवहन के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे मुख्य और व्यस्त रास्ता है। ओमान और ईरान के बीच स्थित यह जलमार्ग वैश्विक क्रूड ऑयल ट्रेड का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। जब भी इस क्षेत्र में जहाजों पर हमले या नाकाबंदी जैसी घटनाएं होती हैं, तो अंतरराष्ट्रीय समुद्री परिवहन की रफ्तार थम जाती है। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि इस इलाके में लगातार हो रही इस तरह की घटनाएं क्षेत्रीय अस्थिरता को और ज्यादा बढ़ा रही हैं, जिससे दुनिया भर की बड़ी महाशक्तियों की नींद उड़ गई है।वैश्विक बाजार और तेल की कीमतों पर मंडराया बड़ा खतराइस ताजा हमले के बाद से कमोडिटी मार्केट और शेयर बाजार के जानकारों में गहरी चिंता देखी जा रही है। यदि होर्मुज और ओमान के तटीय इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी नहीं की गई और इस तरह के हमले जारी रहे, तो ग्लोबल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आग लग सकती है, जिसका सीधा असर भारत समेत तमाम देशों में पेट्रोल-डीजल और रोजमर्रा की चीजों की महंगाई पर पड़ेगा। आने वाले दिनों में निवेशकों और सरकारों की नजरें इस रणनीतिक रूट पर होने वाली हर एक गतिविधि पर टिकी रहेंगी।

न्यूज़ इंडिया लाइव 21 Jul 2026 1:50 pm

Donald Trump का बड़ा झटका! कनाडा पर 50% टैरिफ का ऐलान, महंगाई और ट्रेड वॉर का खतरा बढ़ा

वैश्विक राजनीति और व्यापार जगत से एक बहुत बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने पड़ोसी देश और पक्के सहयोगी माने जाने वाले कनाडा पर कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकांश कनाडाई सामानों पर भारी-भरकम 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है। व्हाइट हाउस की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक यह नया शुल्क आदेश लागू होने से वैश्विक स्तर पर एक बार फिर से आर्थिक हलचल तेज हो गई है और एक नए ट्रेड वॉर का खतरा मंडराने लगा है। इस बड़े फैसले से किन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा और इसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव होगा, आइए इसे विस्तार से जानते हैं।क्यों उठाया गया यह सख्त कदम और किन उत्पादों पर गिरेगी गाजव्हाइट हाउस का कहना है कि यह कदम कनाडा द्वारा अमेरिकी ऑटोमोबाइल, शराब और डेयरी उत्पादों के खिलाफ लगातार किए जा रहे भेदभावपूर्ण रवैये के जवाब में उठाया गया है। अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कनाडा ने अमेरिकी सामानों के साथ अनुचित व्यवहार किया है, जिसके चलते यह कड़ा निर्णय लेना जरूरी हो गया था। इस नए 50% टैरिफ के दायरे में वाइन, सीमेंट और यहाँ तक कि खेल से जुड़े सामान जैसे हॉकी स्टिक भी शामिल किए गए हैं। हालांकि, राहत की बात यह है कि इस सूची से ऊर्जा उत्पादों, मछली, क्रिटिकल मिनरल्स और पोटाश को फिलहाल बाहर रखा गया है।30 दिन का मिला वक्त, बातचीत से हल निकालने की उम्मीदयह नया टैरिफ आदेश तुरंत प्रभाव से लागू नहीं किया गया है, बल्कि इसे प्रभावी होने में अभी 30 दिन का समय है। व्हाइट हाउस के इस फैसले से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर बातचीत के रास्ते खुले रखने का मौका मिला है। दूसरी ओर, कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि उनकी सरकार ने अमेरिकी पक्ष के साथ इस विवाद को सुलझाने के लिए पहले ही व्यापक प्रस्ताव दिए हैं। कनाडाई अधिकारियों और व्यापार संगठनों का मानना है कि इस 30 दिन की अवधि का उपयोग करके दोनों देशों को आपसी बातचीत के जरिए इस गंभीर गतिरोध को समाप्त करने का प्रयास करना चाहिए।वैश्विक बाजार और महंगाई पर क्या होगा असरअमेरिका और कनाडा के बीच इस प्रकार का बड़ा व्यापारिक टकराव केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर पूरी दुनिया के शेयर बाजारों और कमोडिटी मार्केट पर देखने को मिलता है। जानकारों का मानना है कि यदि यह विवाद समय रहते नहीं सुलझाया गया, तो इससे ग्लोबल सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। आयात शुल्क में इतनी भारी बढ़ोतरी होने से अमेरिका में उपभोक्ताओं के लिए चीजें महंगी हो सकती हैं, जिससे महंगाई के एक नए दौर के शुरू होने की आशंका जताई जा रही है। अब पूरी दुनिया की नजरें अगले 30 दिनों के दौरान होने वाली बैठकों और दोनों देशों के रुख पर टिकी हुई हैं

न्यूज़ इंडिया लाइव 21 Jul 2026 1:47 pm

China Secret Space Mission Alarms US: चीन के नए सीक्रेट स्पेस मिशन से उड़े अमेरिका के होश! अंतरिक्ष में दबदबा खोने का सताने लगा डर; जानिए ड्रैगन की 'स्पेस प्लेन' चाल

अंतरिक्ष (Space) की असीम गहराइयों में सुपरपावर्स के बीच वर्चस्व की नई जंग छिड़ चुकी है। चीन के एक नए और बेहद गोपनीय स्पेस मिशन— सीक्रेट रीयूजेबल स्पेस प्लेन (Shenlong ) और उसकी ऑर्बिटल गतिविधियों ने अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) और अमेरिकी स्पेस फोर्स (US Space Force) की धड़कनें बढ़ा दी हैं। अमेरिका को डर सताने लगा है कि यदि चीन की यह रफ्तार जारी रही, तो वह बहुत जल्द अंतरिक्ष में अमेरिका के दशकों पुराने एकछत्र दबदबे को खत्म कर देगा। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो उपग्रहों को ट्रैक करने वाले विशेषज्ञों और यूएस स्पेस कमांड ने चीन द्वारा पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) में बिना किसी पूर्व सूचना के रहस्यमयी ऑब्जेक्ट्स (Mysterious Objects) छोड़ने और सिग्नल ट्रांसफर करने पर गहरी चिंता जताई है।चीन के सीक्रेट स्पेस प्लेन ने क्यों बढ़ाई अमेरिका की टेंशन?चीन का यह स्पेस प्लेन देखने में अमेरिका के मशहूर एक्स-37बी (US Space Force X-37B) जैसा ही एक मानव रहित रीयूजेबल स्पेसक्राफ्ट है:अंतरिक्ष में रहस्यमयी गतिविधियां: हालिया मिशन के दौरान चीन के इस स्पेस प्लेन ने कक्षा में लंबे समय तक चक्कर लगाते हुए कुछ अज्ञात पेलोड और स्मॉल सैटेलाइट्स छोड़े हैं, जो अमेरिकी सैन्य उपग्रहों के करीब मंडराते देखे गए हैं।एंटी-सैटेलाइट और सर्विलांस क्षमता: पेंटागन के जनरलों का मानना है कि चीन इस गुप्त मिशन के जरिए 'काउंटर-स्पेस' तकनीकों का परीक्षण कर रहा है—जैसे कि युद्ध की स्थिति में दुश्मन के सैटेलाइट्स को जाम करना, सिग्नल इंटरसेप्ट करना या उन्हें नष्ट करना।उत्तर अमेरिका के ऊपर सिग्नल बीमिंग: सैटेलाइट ट्रैकर्स की रिपोर्ट के अनुसार, जब यह चीनी यान उत्तरी अमेरिका के ऊपर से गुजरता है, तो यह जमीन पर मजबूत सिग्नल भेजता है, जिससे खुफिया जासूसी की आशंका गहरा गई है।अमेरिका खो सकता है अपना दबदबा - US स्पेस फोर्स की चेतावनीअमेरिकी स्पेस कमांड के शीर्ष अधिकारियों ने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि चीन का अंतरिक्ष कार्यक्रम (Chinese Space Program) केवल वैज्ञानिक खोजों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य सैन्य बढ़त हासिल करना है:स्पेस रेस में चीन की छलांग: चीन ने अपना खुद का 'तिआंगोंग' (Tiangong) स्पेस स्टेशन स्थापित कर लिया है और वह 2030 तक चंद्रमा पर इंसानों को भेजने और लूनर बेस बनाने के प्रोजेक्ट पर तेजी से काम कर रहा है।सस्ते और फास्ट-टैप लॉन्च: चीन हर साल दर्जनों वाणिज्यिक व सैन्य उपग्रहों को कक्षा में स्थापित कर रहा है, जिससे अंतरिक्षीय निगरानी क्षमता में अमेरिका और चीन का अंतर बहुत तेजी से घट गया है।क्या शुरू हो चुकी है 'स्पेस वॉर' की नई होड़?विशेषज्ञों का कहना है कि जहां अमेरिका स्पेसएक्स (SpaceX Starshield) और नासा के जरिए अपनी बढ़त बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, वहीं चीन अपने रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में झोंक रहा है। अंतरिक्ष का यह ध्रुवीकरण भविष्य में भू-राजनीतिक (Geopolitical) संतुलन को पूरी तरह बदल सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 21 Jul 2026 10:00 am

यूक्रेन में कार्गो जहाज पर हमला, चार भारतीयों की मौत; भारत ने जताया कड़ा विरोध

विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, यह हमला 19 जुलाई की शाम उस समय हुआ जब गिनी-बिसाऊ के झंडे वाला कार्गो जहाज ओडेसा से रवाना हुआ था। जहाज पर कुल 17 क्रू सदस्य मौजूद थे, जिनमें पांच भारतीय नागरिक शामिल थे।

देशबन्धु 21 Jul 2026 9:50 am

US-Canada Trade War Escalates: डोनाल्ड ट्रम्प का कनाडा पर बड़ा वार! ज्यादातर सामानों पर लगाया 50% का भारी टैरिफ; जानिए दुनिया और भारत पर क्या पड़ेगा असर

अमेरिका और कनाडा के बीच जारी व्यापारिक तनाव अब अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) ने कनाडाई उत्पादों पर 50% का भारी सीमा शुल्क (Tariff) लगाने का बड़ा ऐलान किया है। ट्रम्प प्रशासन ने कनाडा पर अमेरिकी ऑटोमोबाइल, अल्कोहल (शराब) और डेयरी प्रोडक्ट्स के साथ भेदभावपूर्ण रवैया (Discriminatory Treatment) अपनाने का आरोप लगाते हुए यह कड़ा कदम उठाया है। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो 1930 के ऐतिहासिक 'टैरिफ एक्ट की धारा 338' (Section 338 of the Tariff Act of 1930) का इस्तेमाल कर लगाया गया यह टैरिफ दोनों पड़ोसी देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते (USMCA/CUSMA) की नींव को हिलाकर रख देगा।किन कनाडाई सामानों पर लागू होगा 50% का टैरिफ?व्हाइट हाउस द्वारा जारी जानकारी और राष्ट्रपति के तीन आधिकारिक आदेशों के अनुसार, यह 50% टैरिफ अगले 30 दिनों के भीतर प्रभावी हो जाएगा:शामिल सामान: कनाडाई वाइन, बीयर, व्हिस्की, सिमेंट, फर्नीचर, कपड़े, कागज, हॉकी स्टिक और अन्य खेल के सामान पर 50% टैक्स लगेगा।छूट प्राप्त क्षेत्र: ऊर्जा (ऑयल एंड गैस), पोटाश, क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिज) और समुद्री मछलियों जैसे आवश्यक कच्चे माल को फिलहाल इस भारी टैरिफ से बाहर रखा गया है।USMCA समझौते पर चोट: ट्रम्प प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह 50% शुल्क उन सामानों पर भी लागू होगा जो अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा मुक्त व्यापार समझौते (USMCA) के तहत आते हैं।ट्रम्प प्रशासन ने क्यों उठाया यह सख्त कदम?व्हाइट हाउस और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने इस फैसले के पीछे 3 प्रमुख कारण बताए हैं:अल्कोहल पर प्रांतीय प्रतिबंध: कनाडा के अधिकतर प्रांतों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अमेरिकी शराब और अल्कोहल उत्पादों की खरीद व बिक्री पर रोक लगाना।ऑटो सेक्टर में भेदभाव: अमेरिकी निर्मित वाहनों पर 25% का जवाबी टैरिफ और कोटा सिस्टम लागू करना, जिससे अमेरिकी ऑटो कंपनियों का निर्यात 22% तक घट गया।डेयरी कोटा (Dairy Quotas): यूरोपीय संघ (EU) के मुकाबले अमेरिकी पनीर और डेयरी उत्पादों के साथ कनाडाई बाजार में असमान व्यवहार करना।कनाडा का पलटवार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असरकनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (Mark Carney) ने ट्रम्प के इस कदम को USMCA समझौते का एकतरफा उल्लंघन करार दिया है। कनाडा का कहना है कि उन्होंने अमेरिका द्वारा पहले लगाए गए टैरिफ के जवाब में ही केवल समान कदम उठाए थे।महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता: अमेरिका और कनाडा की अर्थव्यवस्थाएं आपस में गहराई से जुड़ी हुई हैं। इस ट्रेड वॉर से दोनों देशों में सप्लाई चेन बाधित होगी, जिससे उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतें और महंगाई (Inflation) बढ़ सकती है।भारत और वैश्विक बाजारों पर प्रभाव: दो बड़े पश्चिमी आर्थिक भागीदारों के बीच ट्रेड वॉर छिड़ने से वैश्विक शेयर बाजारों में अस्थिरता देखने को मिल सकती है। हालांकि, भारत जैसे देशों के लिए उत्तर अमेरिकी बाजार में कपड़ा, सीमेंट और मैन्युफैक्चरिंग एक्सपोर्ट के कुछ नए अवसर भी खुल सकते हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 21 Jul 2026 9:42 am

Ukraine War Row: ब्लैक सी में मर्चेंट शिप पर भीषण मिसाइल हमला, 4 भारतीय नाविकों की दर्दनाक मौत; भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने जताया कड़ा ऐतराज

रूस और यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी युद्ध का दायरा अब पूरी दुनिया के लिए खतरनाक और बेहद चिंताजनक बनता जा रहा है। काला सागर (Black Sea) में यूक्रेन के ओडेसा (Odesa) बंदरगाह के पास गश्त कर रहे एक वाणिज्यिक व्यापारिक जहाज (Commercial Vessel) पर हुए अचानक मिसाइल हमले ने भारत को गहरा झटका दिया है। इस भयावह हमले में जहाज पर सवार 4 भारतीय नाविकों (Indian Seafarers) की दर्दनाक मौत हो गई है, जबकि कई अन्य चालक दल के सदस्य गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। एक रिपोर्टर के नजरिए से देखें तो निर्दोष भारतीय नागरिकों की इस जानलेवा घटना पर भारत सरकार और विदेश मंत्रालय (MEA) ने कड़ा रुख अपनाया है।विदेश मंत्रालय (MEA) का सख्त बयान: निष्पक्ष जांच की मांगभारतीय विदेश मंत्रालय (Ministry of External Affairs) ने इस घटना पर गहरा दुख और कड़ा ऐतराज जताते हुए एक आधिकारिक बयान जारी किया है:कड़ी निंदा: विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र और व्यापारिक समुद्री रास्तों (Commercial Shipping Lanes) में निर्दोष नागरिकों और मालवाहक जहाजों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानूनों का गंभीर उल्लंघन है।अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग: भारत ने मामले की पूरी निष्पक्ष जांच कराने और हमला करने वाले जिम्मेदार पक्षों पर कानूनी व राजनयिक दबाव बनाने की मांग की है, ताकि भविष्य में व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।दूतावास अलर्ट पर, पार्थिव शरीर भारत लाने की कवायद शुरूविदेश मंत्रालय और यूक्रेन व पोलैंड स्थित भारतीय दूतावास (Indian Embassies) लगातार स्थानीय अधिकारियों और शिपिंग कंपनी के संपर्क में बने हुए हैं:मृतकों की पहचान: मारे गए चारों भारतीय नाविकों के परिवारों को सूचित किया जा रहा है और उनकी पहचान की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।पार्थिव शरीर वापसी: भारतीय दूतावास की टीम घायलों को तुरंत बेहतर इलाज मुहैया कराने और मृत नाविकों के पार्थिव शरीरों को जल्द से जल्द सम्मानपूर्वक भारत वापस लाने की कागजी व कूटनीतिक कार्रवाई में जुटी हुई है।ब्लैक सी में बढ़ा समुद्री व्यापार का खतरायूक्रेन-रूस संघर्ष के बीच ओडेसा और ब्लैक सी का समुद्री रास्ता वैश्विक अनाज और ईंधन आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इस ताजा मिसाइल हमले के बाद से वाणिज्यिक जहाजों (Merchant Ships) के चालक दल में दहशत का माहौल है। समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने इस मार्ग से गुजरने वाले सभी जहाजों के लिए अलर्ट स्तर बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि व्यापारिक जहाजों पर लगातार हो रहे इन हमलों से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) पर और बुरा असर पड़ सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 21 Jul 2026 8:09 am

अमेरिकी सैनिक को नुकसान पहुंचाया तो ईरान को भुगतना होगा कई गुना अंजाम: ट्रंप

'ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व' में तैनात अमेरिकी सेना के दो सक्रिय सैनिकों की जॉर्डन में मौत के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्‍त चेतावनी जारी की है

देशबन्धु 21 Jul 2026 7:50 am

पीओके में जेएएसी का आंदोलन जारी, 23 जुलाई को बड़े प्रदर्शन का ऐलान

संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में स्वैच्छिक बंद और चक्का जाम जारी रहेगा। समिति ने बताया कि बड़ी संख्या में लोग धरना-प्रदर्शनों में शामिल हैं और आंदोलन लगातार जारी है

देशबन्धु 21 Jul 2026 7:30 am

अमेर‍िकी शायद हमारी समझ को अपनी बुद्धि की तरह कमजोर मान रहे हैं, हम पहचानते हैं उनकी हर चाल : गालिबाफ

अमेरिका की ओर से जारी हमले और बयानबाजी पर ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने तीखी प्रत‍िक्र‍िया दी। उन्‍होंने कहा क‍ि अमेर‍िक‍ियों ने शायद हमारी समझ को अपनी बुद्धि की तरह ही कमजोर मान रखा है

देशबन्धु 21 Jul 2026 7:20 am