Live: 'रामायण' देखने थियेटर्स में उमड़े लोग, यश ने मचाया भौकाल
फिल्म 'रामायण: पार्ट 1' दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है. नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में शानदार VFX, दमदार एक्टिंग और ग्रैंड विजुअल्स ने सभी का ध्यान आकर्षित किया है.
चुनावी हार, ट्रंप और वेंस में दरार... 5 Points में समझें अमेरिकी सियासत कैसे हिल गई है
मिडटर्म इलेक्शन का सबसे बड़ा असर राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के रिश्तों पर पड़ा है. जेडी वेंस ने सोशल मीडिया पर एक लंबी पोस्ट के जरिए ईरान के खिलाफ चलाए गए अलोकप्रिय सैन्य अभियान से खुद को अलग कर लिया. वेंस ने साफ लिखा कि सीनेट में 6 साल के लिए बहुमत गंवाना इस युद्ध के कारण हुआ है.
'बाहर ईरान, भीतर इस्लाम...', नेतन्याहू ने इजरायल को किस खतरे से आगाह किया?
इजरायल में नई सरकार को लेकर चल रही खींचतान के बीच नेतन्याहू ने देश की सुरक्षा पर चिंता जताई है. उन्होंने ईरान के साथ-साथ देश के भीतर भी खतरे की बात कही है. साथ ही विपक्ष की सरकार बनाने की कोशिशों पर सवाल उठाते हुए एक व्यापक राष्ट्रीय सरकार की अपील की है.
20 हजार रुपये मिलेंगे तो कौन नहीं बदलेगा नौकरी! चैट वायरल
बेंगलुरु की एक हाउसिंग सोसाइटी में नैनी यानी बच्चों की देखभाल करने वाली महिला को लेकर बहस छिड़ गई. एक परिवार ने आरोप लगाया कि दूसरे लोग उनकी नैनी को 20 हजार रुपये महीने की सैलरी का ऑफर देकर अपने यहां काम पर बुला रहे हैं. सोसाइटी के वॉट्सअप ग्रुप की चैट सोशल मीडिया पर वायरल हो गई.
रणबीर की सबसे बड़ी 'अग्निपरीक्षा', 'रामायण' पर दुनिया की नजर
रामायण में किरदारों के चुनाव को लेकर भी खूब चर्चा हुई. रणबीर कपूर को राम के रूप में देखने के लिए दर्शकों में उत्सुकता रही है. रणबीर का करियर ऐसे किरदारों से भरा रहा है जिनमें प्रेम, विद्रोह, बेचैनी, गलतियां और भावनात्मक जटिलताएं दिखाई देती हैं. ऐसे में उनका मर्यादा पुरुषोत्तम राम की भूमिका निभाना उनके अभिनय करियर का एक बिल्कुल अलग पड़ाव है.
आजतक ई-पेपर का एक साल: नई पत्रकारिता की दस्तक
आजतक ई-पेपर ने एक साल का सफर पूरा कर लिया है. इस दौरान डिजिटल पत्रकारिता में नए प्रयोगों के जरिए पाठकों को खबरें पढ़ने का अलग अनुभव देने की कोशिश की गई. अब दूसरे साल में ई-पेपर अपनी नई शुरुआत और विस्तार के साथ पाठकों के लिए क्या कुछ लेकर आ रहा है, जानिए इस खास रिपोर्ट में.
बदल रही खरीदारी की संस्कृति: दिवाली बाजार में स्वदेशी उत्पादों की धूम, चीनी सामानों का घटा दबदबा
बदल रही खरीदारी की संस्कृति: दिवाली बाजार में स्वदेशी उत्पादों की धूम, चीनी सामानों का घटा दबदबा diwali-festival-market-vocal-for-local-swadeshi-products-chinese-goods-indian-economy
अभिजीत भट्टाचार्य का सिंगर दलेर मेहंदी पर तंज, मंत्री का किया सपोर्ट
अभिजीत भट्टाचार्य ने लिप-सिंकिंग विवाद को लेकर दलेर मेहंदी पर स्पष्ट रूप से तंज किया, अपने हालिया लाइव शो में अभिजीत ने कहा, 'मैं धोखा नहीं दूंगा.'
ट्रंप आसानी से नहीं बदलने वाले: वादों पर भारी महंगाई और ईरान युद्ध, डेमोक्रेट्स की जीत से बढ़ेंगी मुश्किलें us-midterm-elections-trump-political-setback-democrats-majority-maga-policy-challenges
शुक्र की सीधी चाल से इन 5 राशियों को होगा लाभ!
दिवाली के बाद शुक्र ग्रह 14 नवंबर 2026 को अपनी वक्री चाल समाप्त कर मार्गी होने जा रहे हैं. ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक, शुक्र की सीधी चाल का असर सभी 12 राशियों पर पड़ेगा. हालांकि, मेष, कन्या, तुला, धनु और कुंभ राशि वालों के लिए यह बदलाव खास शुभ माना जा रहा है. इन पांच राशियों को धन लाभ, करियर में तरक्की और रुके हुए काम पूरे होने के अवसर मिल सकते हैं.
दुनिया में तेल संकट के बीच भारत के लिए खुला होर्मुज का रास्ता, ईरान ने दी खास रियायत!
दुनिया में तेल संकट के बीच भारत के लिए खुला होर्मुज का रास्ता, ईरान ने दी खास रियायत!
UP का मौर्य-कुशवाहा-शाक्य समाज: किन सीटों पर मजबूत वोटबैंक?
उत्तर प्रदेश की सियासत में यादव और कुर्मी के बाद तीसरा सबसे बड़ा ओबीसी वोटबैंक मौर्य-कुशवाहा, शाक्य और सैनी समाज एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है. सूबे की 100 से अधिक सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाने वाले इस 6 फीसदी से अधिक वोटबैंक 2027 में किसका गेम बनाएगा और किसका खेल खराब करेगा?
यूक्रेन में रूसी हमले से 40 की मौत, मलबे में दबे लोगों की तलाश जारी
यूक्रेन में राहत सामग्री बांटने वाले एक स्कूल पर रूसी हवाई हमले में 40 लोगों की मौत हो गई. कई लोग अब भी लापता हैं. मलबे में दबे लोगों की तलाश जारी है. वहीं, इस हमले की इजरायल ने निंदा की है.
बदलते समीकरण: अमेरिकी मध्यावधि चुनाव में ट्रंप को झटका, अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है दूरगामी प्रभाव us-midterm-election-republican-defeat-trump-global-politics-india-us-trade-relations
'दौड़ जा...', जब मेरठ में मिले थे विराट, तब कहां पता था बनेंगे 'किंग'
18 साल पहले मेरठ की बल्ला फैक्ट्री में मिला वह युवा विराट आज 'किंग कोहली' है. तब इंटरनेशनल डेब्यू बाकी था, लेकिन इरादे साफ थे- 'मुझे खुद को साबित करना होगा.' आधे घंटे की उस बातचीत में उनके जवाब छोटे थे, मगर आज उनका कद पूरी कहानी बयां करता है. 38वें जन्मदिन पर उसी विराट से मुलाकात की अनसुनी यादें.
मीन राशि वाले आर्थिक मामलों में सावधान रहें, जानें अन्य राशियों का हाल
Aaj ka Rashifal 5 नवंबर 2026, Horoscope Today: प्रॉपर्टी से जुड़े मामलों में लाभ मिलने के योग हैं. परिवार के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा. धैर्य बनाए रखें
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव: रिपब्लिकन पार्टी की हार, व्हाइट हाउस ने साझा की ट्रंप की तस्वीर; लिखा- नेवर सरेंडर white-house-never-surrender-post-trump-republican-defeat-us-midterm-elections
(सागर कुलकर्णी)वाशिंगटन, चार नवंबर अमेरिका के मध्यावधि चुनाव में भारतीय मूल के उम्मीदवारों ने न केवल अमेरिकी कांग्रेस (संसद) में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है, बल्कि विभिन्न राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव में भी उल्लेखनीय सफलता हासिल की है। मिशिगन की प्रतिनिधि सभा में अल्पमत दल के नेता रणजीव पुरी (डेमोक्रेटिक पार्टी) ने शानदार जीत दर्ज की है और उन्हें सदन के अध्यक्ष पद का प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। यदि वह इस पद पर चुने जाते हैं, तो वह मिशिगन की प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष बनने वाले भारतीय मूल के पहले अमेरिकी होंगे। एरिजोना की सीनेट में अल्पमत दल की नेता प्रिया सुंदरेशन सीनेट के निर्वाचन क्षेत्र संख्या 18 से फिर से निर्वाचित हुई हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी ने 60 वर्ष में पहली बार एरिजोना की विधायिका पर नियंत्रण हासिल किया है। फीनिक्स में आयोजित विजय रैली में सुंदरेशन को सीनेट की अगली अध्यक्ष के रूप में पेश किया गया। डेमोक्रेटिक पार्टी के कृष सुब्रह्मण्यम ने मिनेसोटा की सीनेट सीट पर अपने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी डस्टिन डुफॉल्ट को हराकर जीत दर्ज की। डेमोक्रेटिक पार्टी की लिसा कौल ने न्यूयॉर्क राज्य की सीनेट के निर्वाचन क्षेत्र संख्या 39 से जीत हासिल की। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के रॉब रोलिसन को हराया। डेमोक्रेटिक पार्टी की नबीला सैयद ने इलिनॉय की सीनेट के चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की डार्बी हिल्स को हराकर बड़ी जीत दर्ज की। जेरेमी कूनी ने निर्वाचन क्षेत्र संख्या 56 से चौथी बार सीनेट का चुनाव जीता। उन्हें कोलकाता के एक अनाथालय से गोद लिया गया था। उनकी मां ने न्यूयॉर्क राज्य में अकेले उनका पालन-पोषण किया। सैन्य सेवा का अनुभव रखने वाले इंजीनियर अमर मुकुंद ने मैरीलैंड की सीनेट के निर्वाचन क्षेत्र संख्या 39 से निर्विरोध जीत हासिल की। भारत में जन्मीं सबा हैदर ने इलिनॉय की प्रतिनिधि सभा के निर्वाचन क्षेत्र संख्या 84 से रिपब्लिकन पार्टी के ब्रायन स्कोपा को हराया। यहूदी मां और हिंदू पिता की संतान केशा राम हिंसडेल ने वर्मोंट में सीनेट का चुनाव जीता। डेमोक्रेटिक पार्टी के निखिल गोयल ने भी वर्मोंट में सीनेट की एक सीट पर जीत दर्ज की। डेमोक्रेटिक पार्टी के अरविंद वेंकट पेनसिल्वेनिया की प्रतिनिधि सभा के लिए फिर से निर्वाचित हुए, जबकि ज्योत सिंह जॉर्जिया की विधायिका के लिए चुने जाने वाले भारतीय मूल के पहले अमेरिकी और पहले सिख अमेरिकी बने। नॉर्थ कैरोलाइना की सीनेट में डेमोक्रेटिक पार्टी के मुख्य सचेतक जय चौधरी निर्वाचन क्षेत्र संख्या 15 से फिर से निर्वाचित हुए। डेमोक्रेटिक पार्टी की पूजा सेठी ने टेक्सास की प्रतिनिधि सभा के निर्वाचन क्षेत्र संख्या 47 से जीत हासिल की। वह राज्य की विधायिका में पहुंचने वाली भारतीय मूल की पहली अमेरिकी बनी हैं। अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों की अनुमानित आबादी 50 लाख से अधिक है। यह देश में एशियाई मूल के लोगों का दूसरा सबसे बड़ा समुदाय है।
मध्य प्रदेश के इंदौर में 2 से 4 नवंबर तक RSS के नेता जुटे। 6 मुद्दों सोशल मीडिया, जेन जी, विदेशी फंडिंग, पंजाब चुनाव, यूजीसी बिल और रूठे स्वयंसेवकों को मनाने पर बात की। बैठक में BJP के संगठन महामंत्री बीएल संतोष और राज्यों के संगठन मंत्री भी शामिल थे, यानी ये सारे मैसेज BJP के लिए भी थे। 6 मुद्दे, जिन पर बात हुई… 1. सरकार के खिलाफ कौन सा नैरेटिव चल रहा, RSS नजर रखेगादिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन सोशल मीडिया की ताकत का सबसे बड़ा उदाहरण है। BJP और सरकार के खिलाफ कॉकरोच जनता पार्टी इतना बड़ा आंदोलन खड़ा कर लेगी, ये किसी ने नहीं सोचा था। आंदोलन का तरीका पारंपरिक आंदोलनों और विरोध से अलग था। सोशल मीडिया के इस प्रयोग से कैसे निपटें, सोशल मीडिया की अराजकता पर लगाम कैसे लगाई जाए, यही बैठक का सबसे बड़ा मुद्दा रहा। मैसेज दिया गया कि कार्यकर्ता सोशल मीडिया के भ्रमजाल में न फंसें, लेकिन सोशल मीडिया से कटना भी नहीं है। सोशल मीडिया पर बनाए जा रहे हर नैरेटिव को गंभीरता से लें। उसकी चर्चा अधिकारियों से करें। अगर लगे कि नैरेटिव हमारी विचारधारा के खिलाफ है, तो उसे जमीन पर काउंटर करें। सोशल मीडिया की निगरानी के लिए RSS अलग टीम भी तैयार कर सकता है। ये प्रचार विभाग से अलग होगी। इस पर अभी सिर्फ विचार आया है। टीम का स्ट्रक्चर और फॉर्मेट तय होना बाकी है। 2. जेन जी को पाले में लाने के लिए युवाओं के बीच जाएगा संघ कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन को जेन जी प्रोटेस्ट कहा गया। RSS का प्लान ऐसे जेन जी युवाओं की फौज तैयार करने का है, जो गंभीर मुद्दों पर बिना अराजक हुए आंदोलन करे। अपने मुद्दे उठाए, सरकार का विरोध भी करे, लेकिन सबके मूल में देश को आगे बढ़ाने की भावना हो। उसकी लगाम किसी और के हाथ में न हो। बैठक के दौरान सरसंघचालक मोहन भागवत ने स्पष्ट किया कि जेन जी को सामने रखकर विदेशी और राष्ट्रविरोधी ताकतें देश के खिलाफ काम कर रही हैं। इसलिए हमें राष्ट्रभक्त जेन जी तैयार करने हैं। इसके लिए कार्यकर्ताओं को उनके बीच जाना होगा। उनकी जरूरतें और उनकी भाषा को समझना होगा। 3. आंदोलनों के पीछे विदेशी फंडिंग का शक, सख्त कानून की पैरवी विदेशी फंडिंग और विदेश से बनाए जा रहे नैरेटिव पर मंथन तीसरा बड़ा मुद्दा है। देश की इंटेलिजेंस एजेंसियां देश में हो रहे आंदोलन में विदेशी फंडिंग के लिंक खंगाल रही हैं। सरकार में हमारे सूत्रों के मुताबिक, आंदोलनकारियों और आंदोलन को लेकर लगातार खोजबीन हो रही है। कई सबूत भी मिले हैं। इन्हें जल्द लोगों के सामने डॉक्यूमेंट के रूप में लाने की तैयारी है। विदेश फंडिंग पर लगाम कैसे लगे, इस पर बैठक में चर्चा की गई। कहा गया कि विदेश फंडिंग पर काम कर रही संस्थाओं की जांच होनी चाहिए। एक सख्त कानून बनना चाहिए। हाल में हुए आंदोलनों के मकसद को भी खंगालना चाहिए। 4. यूजीसी बिल से नाराजगी, यूपी में नुकसान का डर यूपी में BJP का वोटर नाराज है। इसकी बड़ी वजह उच्च शिक्षण संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव खत्म करने के लिए लाए गए यूजीसी के प्रस्तावित नियम हैं। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इन पर रोक लगा दी है। कई राज्यों में बिल का विरोध हो रहा था। यूपी पहला राज्य होगा, जहां विरोध से नुकसान की आशंका BJP और संघ दोनों को सता रही है। प्रदेश में फरवरी-मार्च में चुनाव हैं। RSS ने बैठक शुरू होने से पहले ही साफ कहा कि वह यूजीसी बिल के साथ नहीं है। इस बिल का सर्कुलर संतुलित नहीं था। इससे सामाजिक एकता और संतुलन प्रभावित होने की आशंका थी। 5. पंजाब में फोकस जीत नहीं, ड्रग्स और कानून-व्यवस्था मुद्दा पंजाब में फरवरी में विधानसभा चुनाव हो सकते हैं। बीते 6 महीनों में RSS ने ग्राउंड वर्क पूरा कर लिया है। इसकी रिपोर्ट में सामने आया कि पंजाब के मुद्दे अलग हैं। यहां बंगाल जैसी रणनीति काम नहीं करेगी। पंजाब में सामने खास आइडियोलॉजी वाली सरकार, मुद्दे और अराजक संगठन हैं। ड्रग्स की सप्लाई और राज्य में तैयार हो रहे नशीले केमिकल एक मुद्दा हैं, तो खालिस्तान दूसरा। लॉ एंड आर्डर, हथियारों की सप्लाई और धर्मांतरण अलग मुद्दे हैं। RSS पंजाब पर बनी समझ पर आगे भी काम करेगा। BJP ड्रग्स को चुनाव का मुद्दा बनाएगी। RSS के स्वयंसेवक बंगाल की तरह लॉ एंड आर्डर को मुद्दा बनाएंगे। सूत्र ने स्पष्ट किया, इस बार पंजाब जीतना नहीं, पंजाब को मुद्दा बनाना मकसद है। 6. राम मंदिर के बाद रूठे स्वयंसेवकों को मनाएगा संघ प्रमुख ने कार्यकर्ताओं से कहा कि वे पुराने स्वयंसेवकों से संपर्क करें। उनसे दिशा-निर्देश लें। अगर उनकी कुछ सलाह या चिंता है, तो समाधान करें। रूठे या टूट चुके कार्यकर्ताओं को मनाएं। सूत्र ने बताया कि रामजन्मभूमि के मुद्दे समेत RSS के खिलाफ कई बयान आए। RSS से नाता तोड़ चुके कार्यकर्ताओं को संगठन के खिलाफ बोलने के लिए लगातार इस्तेमाल किया गया। इस वजह से अब पुराने कार्यकर्ताओं को मनाने का अभियान शुरू किया जाएगा।
एक्सप्लेनर: ट्रंप की अल्टीमेट पावर यानी वीटो क्या है, कैसे राष्ट्रपति कांग्रेस के फैसलों पर लगा सकते हैं रोक?- What is Donald Trump ultimate power veto how can President block decisions made by Congress
Iran War का असर Midterm Elections पर पड़ा, Donald Trump ने मानी ईंधन कीमतों से उपजी नाराजगी
वाशिंगटन, चार नवंबर (एपी) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को स्वीकार किया कि ईरान युद्ध ने देश में हुए मध्यावधि चुनावों को प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि मतदाता पिछले आठ महीनों से जारी इस संघर्ष के कारण ईंधन की बढ़ती कीमतों से परेशान थे। हालांकि, उन्होंने कहा कि यह युद्ध एक ऐसा कदम था जो उन्हें उठाना ही पड़ा। ट्रंप ने संवाददाताओं से कहा, ईरान वाला मामला एक ऐसा कदम था जो हमें उठाना पड़ा, और हम इसे जारी रखे हुए हैं। इससे पहले, उन्होंने परिणाम आने के बाद एक लचीला और सहयोगात्मक रुख अपनाते हुए संकेत दिया था कि वह डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर काम कर सकते हैं, लेकिन साथ ही उन्होंने डेमोक्रेट्स के एजेंडे को खारिज करने के लिए राष्ट्रपति के विशेषाधिकार (वीटो) का इस्तेमाल करने की धमकी देते हुए भविष्य में राजनीतिक गतिरोध की चेतावनी भी दी। उन्होंने पॉलिटिको से कहा, मैं अगले दो वर्षों तक सिर्फ वहां बैठकर हर चीज पर वीटो नहीं लगाना चाहता। अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक कार्यालय एवं आवास व्हाइट हाउस में ट्रंप के संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखे जाने वाले उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने मध्यावधि चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की इस करारी हार का जिम्मेदार राष्ट्रपति के ईरान युद्ध को ठहराया।
अमेरिका ने युद्ध को कहा ना...', ट्रंप को चुनावी झटके के बाद ईरान की चेतावनी
अमेरिकी चुनाव में ट्रंप की पार्टी को झटका लगने के बाद ईरान ने इसे युद्ध के खिलाफ जनता का संदेश बताया है. ईरान के संसद अध्यक्ष ने इस मुद्दे पर ट्रंप सरकार को चेतावनी भी दी है.
'अगर तुम ब्लैक या यहूदी हो और अब्दुल को वोट देते हो, तो तुम पागल हो। वो एक जिहादी है। वो खतरनाक और हिंसक जिहादी है।' ये शब्द अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हैं, जो उन्होंने अब्दुल अल-सैयद के बारे में कहे थे। मिडटर्म चुनाव नतीजों में 52% से ज्यादा मतों के साथ डेमोक्रेटिक पार्टी के अब्दुल अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बन गए हैं। मिस्र से आए प्रवासियों के बेटे हैं सैयद 42 साल के अब्दुल पेशे से डॉक्टर और महामारी विशेषज्ञ हैं। 1970 के दशक में उनके माता-पिता मिस्र से अमेरिका आए थे। साउथ मिशिगन के डेट्रॉयट शहर में 31 अक्टूबर 1984 को सैयद का जन्म हुआ। 3 साल के हुए, तो माता-पिता का तलाक हो गया। उन्हें पिता और सौतेली मां ने पाला। अब्दुल ने मिशिगन यूनिवर्सिटी और कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मेडिकल साइंस की पढ़ाई की। एपिडेमियोलॉजी, यानी महामारी विज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर भी रहे। फिर वे पब्लिक सर्विस में आ गए और 2015 में 30 साल की उम्र में ‘डेट्रॉयट हेल्थ डिपार्टमेंट’ के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर बने। 2018 में मिशिगन का गवर्नर बनना चाहते थे, लेकिन पार्टी के दूसरे कैंडिडेट को मौका मिला। अब्दुल सैयद का प्लान राजनीति में आने का नहीं था। उनकी चुनावी वेबसाइट के मुताबिक वे चुनाव इसलिए लड़ रहे हैं क्योंकि, ‘खराब पॉलिटिक्स अमेरिकी लोगों को बीमार कर रही है। अमेरिका में जिंदगी इतनी मुश्किल नहीं होनी चाहिए।’ जिहाद, आतंकवाद और मुस्लिम ब्रदरहुड को समर्थन के आरोप लगे प्रचार के दौरान ट्रम्प ने सैयद को जिहादी और आतंकवादियों का समर्थन करने वाला बताया। टेक्सास से रिपब्लिकन सीनेटर टेड क्रूज ने तो चेतावनी दी कि अगर अब्दुल सैयद सीनेट की इंटेलिजेंस कमेटी में जाते हैं, तो अमेरिकी मारे जाएंगे। विपक्षी उम्मीदवार माइक रॉजर्स ने सवाल उठाए कि सैयद अमेरिका के पक्ष में है या आतंकवादी समूहों के। दरअसल, सैयद की बहन इमान अब्देलहादी ने 2012 में एक सोशल मीडिया पोस्ट कर बताया था कि उनकी मां 70 के दशक में मिस्र के संगठन ‘मुस्लिम ब्रदरहुड’ से जुड़कर एक्टिविज्म करती थीं। तलाक के बाद सैयद की मां मिसौरी स्टेट चली गई थीं और इस्लामिक अमेरिकन रिलीफ एजेंसी (IARA) के साथ बतौर नर्स काम करने लगीं थीं। 2004 में FBI ने आतंकवादियों से संबंध के शक में IARA पर छापा मारा, तब सैयद की मां से भी पूछताछ हुई थी। रिपब्लिकन पार्टी ने इस मुद्दे को भी चुनाव में घसीटा। सफाई में सैयद ने कहा था कि उन्हें उनकी मां ने नहीं बल्कि पिता और सौतेली मां ने पाला है। उनका मुस्लिम ब्रदरहुड से कोई लेना देना नहीं है। उप राष्ट्रपति जेडी वेंस ने 15 अक्टूबर की रैली में लोगों से कहा, 'आप उस छोटे से धूर्त व्यक्ति से बेहतर के हकदार हैं। उसे अपना मुंह बंद रखना चाहिए और उस देश के प्रति थोड़ी कृतज्ञता दिखानी चाहिए जिसने उसे सब कुछ दिया है।' 4 नवंबर को नतीजे आए, तो सैयद ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रॉजर्स को हरा दिया। विक्ट्री स्पीच में जेडी वेंस को जवाब देते हुए कहा, ‘जेडी हबीबी, मजेदार विडंबना है कि आपको मुझे शपथ दिलानी होगी।’ दरअसल, अमेरिका में सीनेटर्स की शपथ उप राष्ट्रपति कराते हैं। 2 दिन पहले अपनी ही पार्टी के नेता विरोध में गए अमेरिकी चुनाव में उम्मीदवार बनने से पहले पार्टी के उम्मीदवारों के बीच भी चुनाव होते हैं। अगस्त 2026 में सैयद चार बार की सांसद हेली स्टीवन्स को 15,000 वोटों से हराकर डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार बने। हेली ने सैयद को हराने के लिए 4.2 करोड़ डॉलर से ज्यादा खर्च किए थे। मिडटर्म चुनाव प्रचार के आखिरी रविवार को हेली स्टीवन्स, रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रॉजर्स के साथ चर्च पहुंची और कहा, 'मैं उस व्यक्ति के साथ आई हूं, जिसे मैं अमेरिकी सीनेट के चुनाव में वोट देने वाली हूं।' प्रचार के आखिरी दिनों में हेली के इस कदम से सैयद को नुकसान होने की आशंका जताई जा रही थी। जीत के बाद सैयद ने दावा किया है कि उन्हें चुनाव में हराने के लिए अपनी पार्टी के लोगों ने ही 70 मिलियन डॉलर से ज्यादा खर्च किए हैं। अमेरिका में दो वजहों से कोई मुस्लिम उम्मीदवार जीतकर अब तक सीनेट नहीं पहुंचा था… फिर सैयद ने जीतकर इतिहास कैसे बना दिया? इसकी 3 प्रमुख वजहे हैं… 1. आम जरूरतों और टैक्स के पैसों को मुद्दा बनाया 2. धार्मिक टिप्पणियों का काउंटर 3. डेमोक्रेटिक पार्टी की लहर --------- ये खबर भी पढ़िए… ट्रम्प मिडटर्म चुनाव हारे, क्या बीच कार्यकाल कुर्सी छिनेगी:भारत पर कितना असर, क्या अब ईरान जंग भी खत्म हो जाएगी अमेरिका के राष्ट्रपतियों को एक श्राप मिला हुआ है। नाम है- मिडटर्म कर्स। पिछले 20 में से 18 बार, यानी 90% मिडटर्म चुनाव मौजूदा राष्ट्रपति की पार्टी हारी है। डोनाल्ड ट्रम्प भी इससे बच नहीं सके। अमेरिका में कल, यानी 3 नवंबर को मिडटर्म वोटिंग हुई थी, आज गिनती जारी है। अब तक के नतीजों में ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी हार रही है। पूरी खबर पढ़िए…
अग्निवीर सेवा विस्तार: नए जवान की भर्ती से कहीं महंगा है अनुभवी जवान खोना, युद्ध के लिहाज से कुशल योद्धा जरूरी agniveer-two-year-service-extension-indian-army-operational-needs-experienced-soldiers
रूस-यूक्रेन युद्ध होगा खत्म?: एक हफ्ते के भीतर अमेरिका समेत तीनों देशों करेंगे बातचीत, क्या बोले जेलेंस्की? ukraine-us-russia-trilateral-talks-on-to-end-war-within-week-zelenskyy-witkoff-kushner
ईरान को तेल प्रतिबंधों से बचाने का आरोप: अमेरिका ने भारतीय दंपती पर लगाया बैन, स्कॉट बेसेंट ने दी चेतावनी us-sanctions-indian-couple-companies-maritime-fraud-iran-oil-trade-Scott-Bessent-warns
'ईरान युद्ध खत्म करना डेमोक्रेट्स का एजेंडा': मध्यावधि चुनाव में जीत पर बोले चक शूमर, ट्रंप को लेकर क्या कहा?- Ending war with Iran is Democrats agenda Chuck Schumer on midterm election victory what did he say about Trump
ईरान के तेल जहाजों की मदद पर US का एक्शन, भारत-तुर्किये की कई कंपनियों पर बैन
ईरान के तेल जहाजों को फर्जी रजिस्ट्रेशन के जरिए मदद पहुंचाने के मामले में अमेरिका ने भारत और तुर्किये से जुड़ी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं. कार्रवाई में चंडीगढ़ के एक कारोबारी, उनकी पत्नी और दो अन्य भारतीय नागरिक भी शामिल हैं.
अमेरिकी जनता ने ट्रंप को वादा तोड़ने की दी सजा, मिडटर्म हार की तीन सबसे बड़ी वजहें
अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है। उनकी पार्टी सीनेट और हाउस में बहुमत खो चुकी है। ट्रंप ने ईरान युद्ध को इस हार की वजह के रूप में स्वीकार किया है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वह इस युद्ध से पीछे नहीं हटेंगे।
गोलीबारी से दहला अमेरिका: फ्लोरिडा में सिटीबैंक के ऑफिस कॉम्प्लेक्स में फायरिंग, संदिग्ध समेत दो की मौत florida-tampa-citibank-office-complex-shooting-two-dead-suspect
अमेरिकी मध्यावधि चुनाव: नतीजों पर खामेनेई की दो टूक, कहा- समझौते की उम्मीद करना बड़ी भूल, हम नहीं बदलेगें रुख Mojtaba-khamenei-says-us-midterm-results-will-not-change-irans-stance-defense-policy
मध्यावधि चुनाव में हार पर बोले ट्रंप: कहा- युद्ध जरूरी था आगे जारी रहेगा, डेमोक्रेट्स के साथ काम करने को तैयार-
दिवाली पर यूपी में बम धमाकों की धमकी, अयोध्या-काशी-मथुरा निशाने पर
दिवाली से पहले यूपी में धमकी भरे मेल ने चिंता बढ़ा दी है. मेल में कई शहरों को निशाना बनाने की बात कही गई है. स्कूलों को भी चेतावनी दी गई है. मामले की जांच में एजेंसियां जुटी हैं.
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को हुए नुकसान में ईरान युद्ध की भूमिका रही. ट्रंप ने माना कि युद्ध के चलते पेट्रोल की कीमतें बढ़ीं, जिसका असर चुनाव पर पड़ा. हालांकि, उन्होंने साफ कर दिया कि ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का मौका फिर मिला तो वह पीछे नहीं हटेंगे.
मिडटर्म हार के बाद खतरनाक हो गए डोनाल्ड ट्रंप, ईरान युद्ध को लेकर बोले- फिर से करना पड़ा, तो करूंगा
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात को स्वीकार किया है कि ईरान युद्ध मिडटर्म चुनाव में हार की एक बड़ी वजह रहा। हालांकि, उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अगर उन्हें दोबारा ईरान पर हमला करना पड़ा, तो वह करेंगे।
अमृतसर में बदमाश और पुलिस के बीच फायरिंग, गोली लगने से आरोपी घायल
Police Encounter with Criminal in Amritsar: अमृतसर में पुलिस मुठभेड़ के दौरान 7 आपराधिक मामलों में वांछित आकाशदीप गोली लगने से घायल हो गया. आरोपी जेल में बंद साथी को छुड़ाने की साजिश रच रहा था.
पुलिस सब-इंस्पेक्टर का ड्रामा, रिश्वत लेते पकड़ा गया तो तालाब में जा कूदा
ओडिशा के संबलपुर में 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते सब-इंस्पेक्टर सुजीत कुमार मोहंता को विजिलेंस ने पकड़ा. गिरफ्तारी से बचने वह तालाब में कूद गया. कमरे से 1.55 लाख रुपये नकद भी मिले.
नेशनल कॉन्फ्रेंस में नहीं थम रही कलह, 10 नाराज विधायकों की तीसरी बैठक
जम्मू-कश्मीर की नेशनल कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के हालिया कैबिनेट फेरबदल के बाद पार्टी में कलह खुलकर सामने आई हैं. नाराज विधायकों की लगातार बैठकें हो रही हैं, जिनमें उनकी मांगों और रणनीति पर चर्चा हो रही है. बुधवार को एक बार फिर नाराज विधायकों ने बंद कमरे में अहम मीटिंग की.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रिपब्लिकन पार्टी की मध्यावधि हार के लिए ईरान में चल रहे युद्ध को जिम्मेदार ठहराया है।
मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स की बड़ी जीत, ओबामा बोले- अब ट्रंप पर रखें नजर
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने बुधवार को मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की बड़ी जीत का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि यह नतीजा लोगों को बांटने वाली राजनीति के खिलाफ एक मजबूत संदेश है। साथ ही उन्होंने डेमोक्रेट्स से अपील की कि वे कांग्रेस में अपने नए बहुमत का इस्तेमाल राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन पर निगरानी रखने, लोगों की समस्याओं का हल निकालने और देश के बेहतर भविष्य की तैयारी के लिए करें।
चुनाव से पहले रिपब्लिकन पार्टी का दोनों सदनों पर नियंत्रण था, लेकिन डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों ने देशभर में बढ़त हासिल की। उन्हें उन राज्यों में भी सफलता मिली, जहां परंपरागत रूप से रिपब्लिकन पार्टी का प्रभाव रहा है।
'मां, मुझे गोली मार दी...' घायल मनोज ने किया फोन, अस्पताल में तोड़ा दम
बाइक ठीक कराने निकला मनोज शायद घर लौटने की उम्मीद लेकर गया था, लेकिन रिपेयरिंग सेंटर पर हमलावरों ने उसे घेर लिया. पेट में गोली लगने के बाद भी उसने मां और दोस्त को फोन किया. अस्पताल में उसकी मौत हो गई. डेढ़ महीने पहले जेल से छूटे मनोज की हत्या के पीछे पुरानी रंजिश और गैंगवार का शक है.
अनुराग से पहले IPS अभिषेक तिवारी का भी इस्तीफा, दोनों रहे सागर एसपी
मध्य प्रदेश में सागर जिले के SP रहे IPS अफसर अनुराग सुजानिया ने पुलिस सेवा से इस्तीफा दे दिया है. जहरीली शराब कांड के बाद SP पद से हटाए जाने के सात दिन बाद उन्होंने यह फैसला लिया. इस्तीफा अभी मंजूर नहीं हुआ है. इससे पहले सागर के ही पुलिस कप्तान रहे आईपीएस अभिषेक तिवारी ने भी नौकरी छोड़ दी थी. पढ़ें शराब और सागर से जुड़े दो रोचक संयोग...
अमेरिका में मिडटर्म चुनाव हारते ही ट्रंप से नाराज हुए जेडी वेंस? बोले- ईरान युद्ध ही हार का कारण
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान युद्ध को मिडटर्म में पार्टी के बुरे हालातों का कारण बताया। उन्होंने कहा कि 2024 में डोनाल्ड ट्रंप को समर्थन देने वाले कई मतदाताओं ने इस बार पार्टी को वोट नहीं किया।
<
चोरी-छिपे मिलते थे प्रेमी-प्रेमिका, परिवार ने कराई शादी
UP के प्रयागराज से प्रेमिका से मिलने कौशांबी पहुंचे युवक को युवती के परिजनों ने रेस्टोरेंट में पकड़ लिया. चार साल से चल रहे प्रेम प्रसंग पर दोनों परिवारों के बीच बातचीत हुई और सहमति बनने के बाद रामजानकी मंदिर में वैदिक रीति-रिवाज से दोनों की शादी करा दी गई.
जेडी वेंस ने ईरान जंग को बताया मिडटर्म चुनाव में हार की वजह, कहा- ट्रंप से छिटके वोटर्स
अमेरिका के मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा है. उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने हार की मुख्य वजह ईरान युद्ध और बढ़ती महंगाई को बताया है, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हार को व्यक्तिगत झटका नहीं माना.
9 साल की बच्ची की मौत से उठे सवाल, कैसे आया हार्ट अटैक?
दिल्ली के मयूर विहार में 9 साल की बच्ची की स्कूल में अचानक मौत के बाद कम उम्र में हार्ट अटैक को लेकर सवाल उठ रहे हैं. डॉक्टर के मुताबिक, बच्चों में कार्डियोमायोपैथी और दिल की धड़कनों में गड़बड़ी अचानक मौत की वजह बन सकती हैं. वीडियो में जानें डिटेल्स.
त्योहारों पर बनाकर खाएं मूली की चटनी, पूड़ी-पराठे संग लगेगी टेस्टी
Mooli Ki Chutny: अगर आप भी चटनी के शौकीन हैं और दिवाली पर खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए चटनी बनाने का सोच रहे हैं तो धनिया-पूदीना छोड़िए और इस बार मूली की चटपटी चटनी ट्राई कीजिए. ये बहुत जल्दी बनती है और खाने में बहुत ही स्वादिष्ट होती है.
वोटर लिस्ट से छूटे लोगों के जुड़ेंगे नाम, घर-घर जाकर महिलाओं की पहचान करेंगी आशा
उत्तर प्रदेश में विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची से छूटे पात्र नागरिकों के नाम जोड़ने के लिए एक विशेष अभियान चलाया जाएगा. इस अभियान में खासतौर पर युवा और महिला मतदाताओं पर ध्यान दिया जाएगा.
रामायण देखकर इमोशनल बादशाह, अल्लू अर्जुन बोले - ये फिल्म से बढ़कर
अल्लू अर्जुन, ऋषभ शेट्टी और अन्य कलाकारों ने 'रामायण: पार्ट 1' की टीम को फिल्म की थिएटर रिलीज से पहले शुभकामनाएं दीं. उन्होंने इस फिल्म को भारतीय संस्कृति का एक ऐसा उत्सव बताया, जो सिनेमा के स्तर को ऊंचा उठा सकता है.
कर्नाटक के दामाद हैं अमेरिका में जीते अब्दुल, अब बनेंगे पहले मुस्लिम सीनेटर
अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बनकर इतिहास रचने वाले अब्दुल अल-सैयद का कर्नाटक से नाता है. उनकी डॉक्टर पत्नी सारा जुकाकू का कर्नाटक के भटकल से संबंध रहा है. सारा के दादा जेएच शम्सुद्दीन जुकाकू मैसूर रियासत की सरकार में डिप्टी फाइनेंस मिनिस्टर रहे थे.
गौर से लेकर गिद्धों बढ़ी मौजूदगी, बांधवगढ़ के वन्यप्राणी भी मना रहे उत्सव
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में गौर, हाथियों और गिद्धों की मौजूदगी से जैव विविधता समृद्ध हो रही है. कान्हा से लाए गए बारहसिंगा को नए आवास के अनुकूल बनाने की तैयारी जारी है.
3-4 चम्मच घी, नींबू का रस और इलायची पाउडर... विदेशी मांग रहे ये मिठाई
त्योहार के मौके पर वैसे तो सभी मिठाइयों की भारी डिमांड रहती है. लेकिन इनमें अलवर का कलाकंद बेहद खास रहता है. अलवर का कलाकंद देश के विभिन्न राज्यों के अलावा विदेश में भी सप्लाई होता है. यह बाहर से हल्का भूरा और अंदर से मलाईदार और मीठा होता है.
यौन शोषण मामलों की सुनवाई के लिए बढ़ेंगी फास्ट ट्रैक कोर्ट, कैबिनेट की मंजूरी
केंद्र सरकार ने रेप और बाल यौन शोषण मामलों की सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट योजना को मार्च 2031 तक बढ़ाने की मंजूरी दी है. योजना के तहत विशेष अदालतों की संख्या 779 से बढ़ाकर 850 की जाएगी और 3,788 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.
हैदराबाद में दो महिलाओं की चाकू घोंपकर हत्या, रिश्तेदार पर शक
हैदराबाद के मीरपेट की जयश्री कॉलोनी में पारिवारिक विवाद के बाद दो महिलाओं की चाकू घोंपकर हत्या कर दी गई. पुलिस को रिश्तेदार सिद्दीकी पर शक है, जो वारदात के बाद फरार है.
छह थानों की पुलिस ने मिलकर पकड़े 9 तस्कर, 16 किलो से ज्यादा गांजा बरामद
दीपावली से पहले कौशांबी पुलिस ने ऑपरेशन सवेरा के तहत अवैध मादक पदार्थों के खिलाफ अभियान चलाया. छह थाना क्षेत्रों में हुई कार्रवाई के दौरान नौ आरोपी गिरफ्तार किए गए हैं. पुलिस ने इनके कब्जे से कुल 16 किलो 758 ग्राम गांजा बरामद किया है. आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज कर उन्हें कोर्ट में पेश किया जा रहा है.
Virginia चुनाव जीतकर US Congress पहुंचे Suhas Subramanyam, बोले- अंतहीन युद्ध खत्म कराएंगे
(योषिता सिंह)न्यूयॉर्क, चार नवंबर वर्जीनिया से अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के लिए फिर से चुने गए भारतीय-अमेरिकी सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने हमेशा जारी रहने वाले युद्धों को खत्म करने की मांग करने, लागत कम करने के लिए अनावश्यक शुल्क के खिलाफ लड़ने, और धोखाधड़ी एवं भ्रष्टाचार के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन को जवाबदेह ठहराने का संकल्प जताया है। मंगलवार को हुए चुनावों में, वर्जीनिया के 10वें संसदीय जिले में सुब्रमण्यम ने अपने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी डेव बेकविथ को हराया। सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में उन्होंने कहा, “संसद में अपने समुदाय की सेवा करना मेरे जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा है। मैं इस बात से बेहद सम्मानित महसूस कर रहा हूं कि वर्जीनिया के मतदाताओं ने मुझ पर भरोसा जताया है, ताकि मैं ऐसे समय में उनकी सेवा करना जारी रख सकूं जब हमारा समुदाय और देश एक अहम मोड़ पर खड़े हैं।”उन्होंने कहा कि उनकी जीत हर उस व्यक्ति की है जिसने अपनी आवाज उठाई और वाशिंगटन में बदलाव की मांग की। सुब्रमण्यम ने कहा, “हमारे समुदाय पर भी देश के अन्य समुदायों की तरह ही भारी मार पड़ी है। बढ़ती लागत, सरकारी कर्मचारियों की छंटनी और स्वास्थ्य सेवा तथा खाद्य सहायता में कटौती की जा रही है, ताकि अनावश्यक विदेशी युद्धों और सबसे अमीर कॉरपोरेशनों को कर में छूट देने के लिए धन जुटाया जा सके।”अपने निर्वाचन क्षेत्र की समस्याओं को हल करने का संकल्प लेते हुए उन्होंने कहा कि वह संघीय कर्मचारियों और ठेकेदारों के पक्ष में खड़े होंगे, स्वास्थ्य सेवा और खाद्य सहायता में की गई कटौती को वापस लेंगे और “हमेशा जारी रहने वाले युद्धों” को समाप्त करने की मांग करेंगे। सांसद ने कहा, “हम एआई और डेटा सेंटरों पर भी नियम-कायदे लागू करेंगे, अनावश्यक शुल्कों को हटाकर लागत कम करेंगे और धोखाधड़ी तथा भ्रष्टाचार के लिए इस प्रशासन को जवाबदेह ठहराएंगे।”उन्होंने वाशिंगटन में बदलाव लाने के लिए समुदाय के साथ मिलकर काम करने का भी संकल्प लिया। सुब्रमण्यम उन कई भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवारों में से एक हैं, जिन्होंने अमेरिका के मध्यावधि चुनावों में जीत हासिल की। मंगलवार को संपन्न हुए इन चुनावों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी को एक बड़ा झटका दिया है।
US चुनाव में डेमोक्रेट्स की बढ़त के बाद चीन का आया बयान
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी की बढ़त के बाद चीन ने इसे अमेरिका का आंतरिक मामला बताया है. बीजिंग ने दोनों देशों के बीच संवाद, सहयोग और शीर्ष नेताओं के बीच बनी सहमति को लागू करने की इच्छा जताई है. ये बैठक 18-19 नवंबर को चीन के शेनझेन में होने वाले APEC सम्मेलन के दौरान हो सकती है. हालांकि, चीन ने इसकी औपचारिक पुष्टि नहीं की है.
2 करोड़ मुआवजा और नौकरी... झोटा के अंतिम संस्कार को राजी हुआ परिवार
परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड को लेकर पंजाब सरकार और इंसाफ कमेटी के बीच महत्वपूर्ण समझौता हुआ है. 6 नवंबर को झोटा का पोस्टमार्टम होगा और उसके बाद अंतिम संस्कार.
दिवाली की सफाई में कूड़े में न फेंकें ये चीजें, घर सजाने में आएंगी काम
दीपावली से पहले घर की अच्छी तरह से साफ-सफाई की जाती है और इस सफाई में काफी कचरा भी निकलता है. मगर सफाई में इन 5 चीजों को बिल्कुल भी कूड़ा समझकर डस्टबिन में फेंकने की गलती न करें. इन 5 चीजों का इस्तेमाल आप दिवाली पर घर को सजाने के लिए दोबारा इस्तेमाल कर सकते हैं. आइए आपको इन चीजों के बारे में बताते हैं.
चोरी-छिपे मिलते थे प्रेमी-प्रेमिका, परिजनों ने पकड़ा तो करा दी शादी
कौशांबी में चार साल से चल रहे प्रेम प्रसंग का दिलचस्प अंत हुआ. दरअसल, प्रयागराज से प्रेमिका से मिलने पहुंचे युवक को युवती के परिजनों ने रेस्टोरेंट में पकड़ लिया. इस बीच दोनों परिवारों के बीच पहले शादी को लेकर असहमति रही, लेकिन समझाने-बुझाने के बाद सभी राजी हो गए. इसके बाद रामजानकी मंदिर में दोनों ने वैदिक रीति-रिवाज से सात फेरे लिए.
जेल में मनेगी गिरिबाला सिंह की दिवाली, हाईकोर्ट से जमानत याचिका खारिज
ट्विशा शर्मा की मौत के मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने पूर्व जिला जज गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी. अदालत ने डिजिटल सबूतों, CCTV फुटेज और लंबित CFSL रिपोर्ट को अहम माना.
बैलेट पेपर से वोटों की गिनती में अमेरिका इतना तेज कैसे?
अमेरिका में ईवीएम के बजाय बैलेट पेपर से मतदान होता है, फिर भी वोटों की गिनती तेजी से पूरी हो जाती है. वीडियो में जानिए स्कैनर, एडवांस वोटिंग और विकेंद्रीकृत चुनाव व्यवस्था की मदद से वहां कैसे होती है मतगणना. यानी अमेरिका में तेजी की वजह सिर्फ मशीनें नहीं, बल्कि पहले से तैयारी और विकेंद्रीकृत चुनावी व्यवस्था भी है.
Ramayana देखकर रो पड़े बादशाह, जटायु का सीन देख उमड़े जज्बात!
रणबीर कपूर की रामायण देखकर बादशाह भावुक हो गए। सिंगर ने बताया कि बचपन से कहानी जानने के बावजूद फिल्म ने उन्हें रुला दिया. जानें फिल्म के रिव्यू और जटायु सीन की खासियत.
10 हजार रुपए के लिए घर में घुसकर आतंक! सड़क पर हथियार भी लहराए
Bhopal criminal Arshad Babba: भोपाल के कांग्रेस नगर में 10 हजार रुपए मांगने और विरोध पर घर में घुसकर मारपीट व तोड़फोड़ करने का आरोप। निगरानीशुदा बदमाश अरशद बब्बा का वीडियो वायरल, पुलिस ने केस दर्ज किया.
छोटी और बड़ी दिवाली क्या एकसाथ मनेगी? 8 या 9 नवंबर का कन्फ्यूजन खत्म
इस साल छोटी और बड़ी दिवाली का त्योहार एकसाथ 8 नवंबर को मनाया जाएगा. दिवाली की पूजा प्रदोष काल में करना सबसे शुभ माना जाता है. इस साल 8 नवंबर को प्रदोष काल शाम 5 बजकर 54 मिनट से लेकर शाम 7 बजकर 50 मिनट तक रहने वाला है. यानी लक्ष्मी गणेश पूजन के लिए आपको करीब 1 घंटा 54 मिनट का समय मिलेगा.
'आपने रॉन्ग नंबर मिलाया, जाओ प्रोटेस्ट करो...', याचिकाकर्ता को CJI का जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों के रोटेशन की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है.
9 साल की बच्ची को भी आ सकता है हार्ट अटैक? दिल्ली की घटना से जानें
दिल्ली के मयूर विहार के एक स्कूल में 9 साल की बच्ची की क्लासरूम में अचानक गिरकर मौत हो गई. इस मामले में हार्ट अटैक की आशंका जताई गई है. क्या इतनी कम उम्र में हार्ट अटैक आ सकता है इस बारे में डॉक्टर ने बताया है.
देहरादून में भारी वाहनों का कहर, आशारोड़ी इलाके का केस
देहरादून के मोहब्बेवाला में कंटेनर ट्रक कार पर पलट गया. इस हादसे ने आशारोड़ी क्षेत्र में सड़क सुरक्षा पर फिर सवाल खड़े किए हैं. जनवरी 2024 से अक्टूबर 2026 तक यहां कम से कम 17 हादसों में 10 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है. वीडियो में जानें मामला.
दिवाली से पहले बाजारों में उमड़ी भीड़! दिल्ली के कई इलाकों में भीषण जाम
दिवाली और धनतेरस के त्योहारों से ठीक पहले दिल्ली के बाजारों में भारी भीड़ उमड़ी है, जिससे सड़कों पर ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हुई है. खासकर साउथ एक्स मार्केट के आसपास रिंग रोड पर भीषण जाम लग गया है, जिससे वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
अनाया बांगड़ का देसी दिवाली अवतार, सिल्वर लहंगे में ढाया कहर
अनाया बांगड़ ने दिवाली के खास मौके पर अपना एक खूबसूरत वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किया है. इस वीडियो में उन्होंने सिल्वर और ग्रे रंग का शिमरी लहंगा और खूबसूरत ब्लाउज पहना है. उनका यह ट्रेडिशनल और ग्लैमरस अंदाज फैन्स को खूब पसंद आ रहा है और यह सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.
अमेरिकी मिड-टर्म चुनाव में डेमोक्रेट्स की बंपर जीत, डोनाल्ड ट्रंप को झटका
अमेरिका के मिड-टर्म चुनाव में डेमोक्रेटिक पार्टी ने शानदार जीत दर्ज की है. सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स दोनों में डेमोक्रेट्स ने बहुमत हासिल किया. महंगाई, इंधन की बढ़ती कीमतें और ईरान युद्ध के कारण अमेरिकी जनता ने डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों को नकार दिया है.
सिल्क साड़ी में छाईं नीता अंबानी, श्लोका बैंगनी ड्रेस में लगीं सुंदर
Nita Ambani Diwali Look: नीता अंबानी अक्सर अपने एथनिक लुक के लिए जानी जाती हैं. हाल ही में वो अपने पति मुकेश अंबानी और बहू श्लोका के साथ रिलायंस दिवाली उत्सव में पहुंचीं. यहां नीता और उनकी बहू श्लोका के लुक ने हर किसी को अपनी तारीफें करने पर मजबूर कर दिया.
छोटी दिवाली पर क्यों होता है अभ्यंग स्नान? इस एक गलती से मिलता है नर्क
Narak Chaturdashi 2026: इस बार 8 नवंबर को नरक चतुर्दशी पर सुबह अभ्यंग स्नान होगा. मान्यता है कि इस दिन सूर्योदय से पहले शरीर पर तिल का तेल लगाकर स्नान करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है और अलक्ष्मी से मुक्ति मिलती है.
आधी से कम कीमत पर Asus के धांसू लैपटॉप्स, दिवाली धमाका सेल
दिवाली सेल में कई गैजेट्स पर अलग अलग डील्स और डिस्काउंट मिल रहे हैं. ASUS ने भी दिवाली सेल का ऐलान किया है. कंपनी का दावा है कि सेल में लैपटॉप्स आधी से भी कीम कीमत पर खरीदा जा सकता है.
Israel Election Results: चुनाव समिति ने राष्ट्रपति को सौंपे नतीजे, धांधली के दावे खारिज
(हरिंदर मिश्रा)यरुशलम, चार नवंबर वोट चोरी और धांधली के आरोपों के बीच, इजराइल की केंद्रीय चुनाव समिति (सीईसी) के अध्यक्ष नोम सोहलबर्ग ने चुनाव के नतीजे बुधवार को राष्ट्रपति इसाक हर्जोग को सौंप दिए, जिससे नयी सरकार के गठन को लेकर विचार-विमर्श की प्रक्रिया शुरू हो गई है। चुनाव परिणामों पर संदेह जताने की कोशिशों के खिलाफ चेतावनी देते हुए, उच्चतम न्यायालय के न्यायधीश सोहलबर्ग ने कहा कि ऐसा करना इजराइल के लोकतंत्र के लिए “एक वास्तविक खतरा” है। उन्होंने कहा कि अगर चुनावी धांधली का संदेह साबित भी हो जाए, तो भी उसका असर इतना नहीं होगा कि नतीजों को अमान्य किया जा सके। सोहलबर्ग ने यहां राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास पर आयोजित एक समारोह में कहा, “हाल के दिनों में, हमने ऐसी बातें सुनी हैं जो चुनाव परिणामों पर संदेह पैदा करने और उनकी वैधता को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं। यह एक वास्तविक खतरा है।”उन्होंने कहा, “लोकतंत्र के आधारों में से एक यह है कि सत्ता का हस्तांतरण शांतिपूर्ण ढंग से हो सके। यह इस समझ से आता है कि मतदाताओं की इच्छा हम सभी के लिए बाध्यकारी है।”इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी और उनके गठबंधन सहयोगियों ने चुनावी धांधली का आरोप लगाया और मांग की कि चुनाव परिणामों के प्रकाशन पर रोक लगाई जाए। सोहलबर्ग ने बताया कि बुधवार सुबह सीईसी सदस्यों के सामने आरोपों की जांच का सारांश पेश किया गया था, और उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इन संदेहों की गहन जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, “फिलहाल ये केवल संदेह हैं, लेकिन अगर इनकी पुष्टि भी हो जाती है, तो भी इनका संभावित असर सीमित ही होगा। इसलिए, चुनाव परिणामों को प्रकाशित न करना... और नेसेट (संसद) का कार्यकाल, जो पहले ही समाप्त हो चुका है, उसे आगे बढ़ाना संभव नहीं है।”सोहलबर्ग ने कहा, “इसके अनुसार, हम अब चुनाव परिणामों की घोषणा कर रहे हैं। अगर आगे कोई सबूत मिलता है, तो चुनाव परिणामों के खिलाफ अपील करने के लिए कानून में तय प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई की जा सकेगी।”उन्होंने अरब समुदायों में मतदान पर संदेह जताने के खिलाफ भी चेतावनी दी। उन्होंने कहा, “हमें अरब समाज में मतदान पर संदेह नहीं करना चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे हमें इजराइली समाज के किसी अन्य समूह के मतदान पर भी संदेह नहीं करना चाहिए।”सोहलबर्ग ने कहा, “मतों की गिनती पूरी होने पर भी मतभेद खत्म होना जरूरी नहीं है, लेकिन नतीजे हम सभी पर लागू होते हैं।”इस बीच, हर्जोग ने कहा कि उन्हें शिन बेट सुरक्षा एजेंसी, पुलिस और अन्य कानून प्रवर्तन अधिकारियों के काम पर “पूरा भरोसा” है, जो चुनाव में विदेशी हस्तक्षेप के आरोपों की जांच कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से संयम बरतने का अनुरोध करते हुए कहा, “चुनाव परिणामों पर बाहरी ताकतों के विध्वंसक प्रभाव की किसी भी आशंका की शिन बेट और पुलिस द्वारा गहन जांच की जानी चाहिए।”हर्जोग ने इजराइल के अरब समुदाय को “बदनाम” करने के खिलाफ भी चेतावनी दी। उन्होंने हाल ही में सुनी गई नस्लवादी टिप्पणियों की निंदा करते हुए कहा, “... इजराइल के अरब समाज के प्रति मेरे मन में बहुत सम्मान है। जीवन के हर क्षेत्र में देश के लिए उनके योगदान और मुख्यधारा में शामिल होने की उनकी इच्छा का मैं कद्र करता हूं।”उन्होंने कहा, “चुनाव खत्म हो चुके हैं। अब वास्तविकता का सामना करने का समय है।”राष्ट्रपति अब नेसेट के लिए चुने गए राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत करेंगे। वे यह तय करेंगे कि पार्टियों के समर्थन के आधार पर सरकार बनाने की जिम्मेदारी किसे सौंपी जाए। हर्ज़ोग द्वारा चुने गए उम्मीदवार के पास गठबंधन बनाने के लिए 28 दिन होंगे; यदि राष्ट्रपति को लगता है कि और समय की जरूरत है, तो वे 14 दिन का अतिरिक्त समय दे सकते हैं। सीईसी ने एक बयान में कहा, “समीक्षा में ऐसी किसी भी अनियमितता का कोई सबूत नहीं मिला, जिससे चुनाव की निष्पक्षता पर आंच आई हो या नतीजों पर कोई असर पड़ा हो।”न तो नेतन्याहू के गुट को और न ही प्रमुख प्रतिद्वंद्वी व विपक्ष के नेता आइजेनकोट के सहयोगियों के गुट को नयी सरकार बनाने के लिए जरूरी संसदीय बहुमत मिला है। इससे इन दोनों प्रतिद्वंद्वियों के बीच या फिर आइजेनकोट और कुछ अरब-नेतृत्व वाली पार्टियों के बीच गठबंधन की संभावना बन गई है। अरब पार्टियों ने 27 अक्टूबर को हुए चुनाव में नेसेट की 120 में से 19 सीटें जीतीं, जिससे वे संभावित किंगमेकर बन गई हैं। अगर इनमें से कोई भी नेता सरकार नहीं बना पाता है तो अगले साल की शुरुआत में देश में फिर से चुनाव कराए जाएंगे।
अमेरिका की राजनीति में भारतीय प्रवासियों का प्रभाव लगातार बढ़ रहा है, जिसका ताज़ा प्रमाण हालिया मिडटर्म चुनावों के नतीजों में देखने को मिला। मिड टर्म इलेक्शन में डॉनल्ड ट्रंप ने अपने चहेते कैंडिडेट्स के लिए पूरी ताकत लगा दी। खुद प्रचार किया, रैलियां की, जनता से उन्हें जिताने की अपील की। लेकिन 3 नवंबर को आए अमेरिकी टर्म चुनाव के नतीजों ने ट्रंप को बड़ा झटका दिया। टैक्स, ओहायो और दक्षिणी कैरोलना में उनके समर्थन वाले तीनों उम्मीदवार चुनाव हार गए। इनमें भारतीय मूल के विवेक रामस्वामी भी शामिल हैं। वहीं टेक्सेस में डेमोक्रेट जेम्स टेलरिको ने रिपब्लिकन केन पैक्स्टन को हराकर इतिहास रच दिया। दक्षिणी कैरोलना में एनी एंड्र्यूस ने रिपब्लिकन डार्लिन ग्राहम को शिकस्त दी। यह तीनों नतीजे इसलिए अहम हैं क्योंकि इन राज्यों में रिपब्लिकन पार्टी की मजबूत पकड़ मानी जाती है और इन तीनों उम्मीदवारों को ट्रंप का समर्थन हासिल था। अरुणा मिलर ने मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर बनकर इतिहास रचा, वहीं अमी बेरा और प्रमिला जयपाल ने भी संसद में अपनी पकड़ मजबूत की। इनमें प्रमिला जयपाल का नाम विशेष रूप से ध्यान खींचता है, जो भारत सरकार की विभिन्न नीतियों और प्रक्रियाओं पर अपनी मुखर टिप्पणियों को लेकर अक्सर सुर्खियों में रही हैं। इसे भी पढ़ें: US Midterm Election Results: Donald Trump की हार के बाद Gyanesh Kumar पर बने मीम्स टैक्सेस की। इसे रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है। 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रंप ने यहां करीब 14% वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी। इस बार यहां अमेरिकी सेनेट की सीट के लिए मुकाबला था। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार जेम्स टेलरिको ने रिपब्लिकन उम्मीदवार केन पैक्स्टन को हरा दिया। टेलरिको को करीब 56% वोट मिले। जबकि पैक्स्टन को करीब 43% वोट मिले। 37 साल के जेम्स टेलरिको टेक्सस की विधानसभा के सदस्य और पूर्व शिक्षक हैं। उन्होंने महंगाई, भ्रष्टाचार और राजनीति [संगीत] में अमीरों के बढ़ते प्रभाव को चुनावी मुद्दा बनाया। वहीं केन पैक्सन टैक्सेस के अटर्नी जनरल रह चुके हैं। उनके उम्मीदवारों को लेकर रिपब्लिकन पार्टी में भी मतभेद थे। उन पर भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग के आरोप लगे थे। पैक्स्टन ने हार स्वीकार कर ली। ट्रंप को दूसरा बड़ा झटका ओहा में लगा। यहां ट्रंप के करीबी माने जाने वाले भारतीय मूल के विवेक रामस्वामी गवर्नर का चुनाव हार गए। उनके सामने डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार एमी एक्सन थी। 2024 में उन्होंने राष्ट्रपति चुनाव के लिए रिपब्लिकन पार्टी की उम्मीदवारी पेश की थी। बाद में ट्रंप का समर्थन करते हुए अपनी दावेदारी वापस ले ली। इसके बाद वह ट्रंप के करीबी नेताओं में गिने जाने लगे। इस चुनाव में ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी रामस्वामी के लिए प्रचार किया था। लेकिन एमी एक्सन ने उन्हें हरा दिया। एकन ओहायो की 20 साल में पहली डेमोक्रेटिक गवर्नर और इस पद पर चुनी जाने वाली पहली महिला बनी है। तीसरी हार दक्षिणी कैरोलना में हुई। यहां रिपब्लिकन उम्मीदवार डार्लिंग ग्राहम को डेमोक्रेटिक उम्मीदवार एनी एंड्र्यूस ने हरा दिया। डार्लिंग ग्राहम को ट्रंप का समर्थन हासिल था। वह दिवंगत रिपब्लिकन सेनेटर लिंसे ग्राहम की बहन है। लिंसे ग्राहम की जुलाई 2026 में मौत के बाद उन्हें इस सीट पर नियुक्त किया गया था। बाद में उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी का प्राइमरी चुनाव भी जीता। इसे भी पढ़ें: चले थे ईरान की रिजीम बदलने, चुनाव में ट्रंप और नेतन्याहू दोनों पिटे डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता अमी बेरा ने कैलिफोर्निया के तीसरे कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से रिपब्लिकन उम्मीदवार रॉब टकर को हराकर जीत दर्ज की है। 61 वर्षीय अमी बेरा अब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में अपना आठवां कार्यकाल शुरू करेंगे। चेन्नई में जन्मी प्रमिला जयपाल ने वॉशिंगटन के सातवें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत हासिल की है। 1965 में जन्मीं प्रमिला महज 16 साल की उम्र में पढ़ाई के लिए अमेरिका चली गई थीं। उन्होंने जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की और नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी से एमबीए किया।अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने 14 अक्टूबर 2026 को भारत में चल रहे SIR पर तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि भारत सरकार वोटर लिस्ट से करीब 13 करोड़ लोगों के नाम हटाने की कोशिश कर रही है। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार पिया दांडिया ने फ्लोरिडा के 22वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत हासिल की है। उन्होंने रिपब्लिकन उम्मीदवार केसी अस्कर को हराया। वह जनवरी में नए अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के गठन के साथ अपना कार्यकाल शुरू करेंगी। भारतीय मूल की अरुणा मिलर ने मैरीलैंड की लेफ्टिनेंट गवर्नर के रूप में दोबारा जीत दर्ज की है। वह गवर्नर वेस मूर के साथ मिलकर अपना दूसरा कार्यकाल संभालेंगी। भारतीय मूल के प्रमुख अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने कैलिफोर्निया के 17वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से दोबारा जीत दर्ज की है। वे डेमोक्रेटिक पार्टी के उम्मीदवार हैं। 50 वर्षीय रो खन्ना का निर्वाचन क्षेत्र सिलिकॉन वैली का अहम हिस्सा है। डेमोक्रेटिक सांसद सुहास सुब्रमण्यम ने वर्जीनिया के 10वें कांग्रेसनल डिस्ट्रिक्ट से जीत हासिल की है। 40 वर्षीय सुहास ने रिपब्लिकन उम्मीदवार डेव बेकविथ को हराकर अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में अपना दूसरा कार्यकाल पक्का किया।
'अरबों के वोट पर शक न करें', इजरायली राष्ट्रपति की नेतन्याहू को खरी-खरी, नतीजों को दी मंजूरी
इजरायल के राष्ट्रपति और मुख्य चुनाव आयुक्त दोनों ने कहा है कि अरब समुदाय के वोट पर शक नहीं किया जाना चाहिए. नेतन्याहू की पार्टी ने इजरायल के अरब क्षेत्रों में वोटिंग के दौरान अनियमितता का आरोप लगाया है. आज इजरायल के मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनावी नतीजों को मंजूरी दे दी.
सिद्धू मूसेवाला को क्यों याद करने लगे राहुल गांधी?
पंजाब के संगरूर की रैली में राहुल गांधी ने सिद्धू मूसेवाला को याद करते हुए उनकी प्रतिभा, कांग्रेस में आने की इच्छा और हत्या का जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया कि जिस सोच ने मूसेवाला की जान ली, वही आज पंजाब में हुनरमंद युवाओं को डरा रही है. वीडियो में जानें डिटेल्स.
सत्ता बदली है, नीयत नहीं...; अमेरिकी चुनाव पर मोजतबा खामेनेई की दो टूक
ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने कहा कि अमेरिका में सत्ता में चाहे कोई भी पार्टी हो, तेहरान के प्रति वाशिंगटन की दुश्मनी नहीं बदलेगी। उन्होंने कहा कि मिडटर्म चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी की हार के बाद भी अमेरिकी रवैये में बदलाव नहीं होगा…
जकार्ता में 20,000 से अधिक Indonesian Troops की तैनाती, राष्ट्रपति फोन टैपिंग मामले में जांच जारी
जकार्ता, चार नवंबर (एपी) इंडोनेशिया के राष्ट्रपति की कथित फोन टैपिंग की जांच के बीच, राजधानी जकार्ता में 20,000 से अधिक सैनिकों और कर्मियों को तैनात किया जा रहा है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी। राष्ट्रपति भवन ने कहा कि राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो को निशाना बनाकर की गई कथित फोन टैपिंग को ‘‘देशद्रोह’’ माना जा सकता है क्योंकि संवेदनशील जानकारी लीक होने पर देश और राष्ट्रीय नेतृत्व के लिए खतरा पैदा कर सकती है। इस प्रकरण में जिन लोगों के नाम सामने आए हैं, उनमें राष्ट्रपति के चीफ ऑफ स्टाफ, जनरल लिस्ट्यो सिगिट प्राबोवो भी शामिल हैं। आरोप है कि मंत्रिमंडल के सदस्यों, राजनेताओं, पत्रकारों, नागरिक समाज संगठनों के प्रतिनिधियों की भी फोन टैपिंग की गई थी। गिरफ़्तारियों के बीच राजधानी में हज़ारों सैनिक तैनात किए गए हैंअधिकारियों ने इस बात की पुष्टि नहीं की है कि यह तैनाती फोन टैपिंग की जांच से जुड़ी है या नहीं। सैनिकों की तैनाती के पहले चरण की शुरुआत सोमवार को हुई, जिसमें जकार्ता में 2,100 जवानों को तैनात किया गया। नौसेना संचालन सहायक, वाइस एडमिरल यायान सोफियान के अनुसार, राजधानी के बाहर से सैनिकों को लाया जाना बुधवार से शुरू होना था, जिससे इसमें शामिल कुल कर्मियों की संख्या 20,980 हो जाएगी। इंडोनेशियाई सशस्त्र बलों के प्रवक्ता मेजर जनरल मुहम्मद नस ने कहा कि सैनिकों की यह आवाजाही राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता बनाए रखने के लिए एक सामान्य प्रक्रिया है। राज्य सचिवालय मंत्री प्रासेत्यो हादी ने बुधवार को जकार्ता में राष्ट्रपति भवन में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राष्ट्रपति की फोन टैपिंग से राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता पैदा हो गई है। इंडोनेशियाई पुलिस ने मंगलवार देर रात बताया था कि उसने कथित फोन टैपिंग की जांच के सिलसिले में तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को हिरासत में लिया है।
चले थे ईरान की रिजीम बदलने, चुनाव में ट्रंप और नेतन्याहू दोनों पिटे
ट्रंप और नेतन्याहू दोस्ती में इसराइल के लिए ईरान में इस्लामिक रेवोल्यूशन को पलटने के लिए निकले थे और फरवरी के आखिर में हमला भी किया। ईरानी सुप्रीम लीडर को भी मार दिया। लेकिन ईरान में इस्लामिक रेवोल्यूशन ज्यों का त्यों है। मगर सिर्फ 9 माह बाद पीएम नेतन्याहू सत्ता तक नहीं पहुंच पाए। वहां मुसलमानों की अरब पार्टियां सत्ता की चाबी ले गई और इधर अमेरिका में ट्रंप के हाथ से पावर निकल गया। वो वीटो पावर का डर जरूर दिखा रहे हैं लेकिन ईरान से पंगा लेना ही उनकी पार्टी को मिड टर्म इलेक्शन में खा गया। ट्रंप ने तो उस वक्त ईरान के लोगों से कहा था कि वह अपनी सरकार पर कब्जा कर लें। नेतन्याहू भी लगातार ईरान की मौजूदा व्यवस्था को खत्म करने की बात करते रहे। लेकिन दोनों की सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया। अयातुल्लाह अली खामनेई की मौत के बावजूद ईरान नहीं हिला। इसराइल और अमेरिका की सत्ता जरूर हिल गई। इसराइल और अमेरिका की जनता इसी सवाल के साथ वोट देने पहुंची थी कि हमें जंग में क्यों झोंका? हम पर महंगाई का बोझ क्यों थोपा और उसका असर चुनावी नतीजों के तौर पर साफ दिखा। जनवरी 2026 के ईरान के महंगाई विरोधी प्रदर्शनों को ट्रंप ने सत्ता परिवर्तन के मौके के रूप में देखा था। उनकी सरकार ने प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए ईरानी अधिकारियों को निशाना बनाने पर विचार किया। जंग तक कर डाली। वह भी 40 दिनों तक। हासिल सिर्फ हार हुई। इसे भी पढ़ें: अमेरिका में जीती फिलिस्तीनी हिजाब वाली महिला, मुंह दिखाने लायक नहीं रहे ट्रंप मिडिल ईस्ट में अमेरिका के पैर उखड़ गए। इसराइल में नेतन्याहू की पार्टी इख्तदार में नहीं आ रही है और ट्रंप की ताकत भी चली गई। अब 2 साल जैसे तैसे चलेगा अमेरिका का निजाम मचेगी खूब खींचतान। डेमोक्रेट्स की कांग्रेस और सीनेट जंग के लिए बजट ही जारी नहीं करेगी तो लड़ेंगे किससे और कैसे? जंग के दौरान ट्रंप और नेतन्याहू ने अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन तो किया लेकिन उन्हें यह समझ नहीं आया कि किसी देश के नेता को मार डालना और उसकी पूरी राजनीतिक व्यवस्था को बदल देना दो अलग-अलग बातें हैं। ईरान में सत्ता का आधार सिर्फ खामने ही नहीं बल्कि धार्मिक संस्थाओं, सुरक्षा बलों और ताकतवर इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉप्स यानी पांच दारा इस्लाम का पूरा नेटवर्क है। यही वजह रही कि ईरान के नेतृत्व को तो खत्म कर दिया गया लेकिन वहां के निजाम को नहीं बदला जा सका। दूसरी तरफ युद्ध की कीमत, आर्थिक दबाव और सियासी फैसलों को लेकर ट्रंप और नेतन्याहू को अपने ही देशों में सवालों का सामना करना पड़ रहा है। इसे भी पढ़ें: US ने फिर हमले किए तो Middle East में और व्यापक होगा युद्ध, Iran की कड़ी चेतावनी अमेरिका में ट्रंप की हार पर ईरान ने सिर्फ इतना ही कहा है कि अंतरात्मा की आवाज हो या महंगाई का बोझ अमेरिकियों ने जंग के खिलाफ वोट किया है। हम उनके इस संदेश का समर्थन करते हैं। अगर अमेरिकी सरकार अपने अंतरराष्ट्रीय आकाओं और ब्लैकमेल करने वालों के हितों की सेवा के लिए अपने ही नागरिकों की इच्छा के साथ विश्वासघात करती है तो उसे इसका खौफनाक अंजाम भुगतना पड़ेगा जिसे वह कभी नहीं भूल पाएगी।
अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में 4 नवंबर की शाम 5 बजे तक के नतीजे देखें, तो ट्रम्प 84 साल की सबसे बड़ी हार की तरफ बढ़ रहे हैं। उनकी पार्टी अमेरिकी संसद के लोअर हाउस में पिछले चुनाव से रिकॉर्ड 79 सीटें पीछे है। ये पिछले 22 मिडटर्म चुनावों में किसी राष्ट्रपति का सबसे बड़ा घाटा है। हालांकि ये फाइनल नतीजे नहीं हैं, गिनती जारी है। आखिर ट्रम्प इतनी बुरी तरह क्यों हार रहे, क्या राष्ट्रपति की कुर्सी और हनक छिन सकती है, अमेरिका और बाकी दुनिया के लिए इसके क्या मायने, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: मिडटर्म में ट्रम्प की हार कितनी बड़ी है? जवाबः अमेरिकी राष्ट्रपति का कार्यकाल 4 साल का होता है। इसी कार्यकाल के ठीक बीच, यानी दो साल बाद अमेरिकी संसद ‘कांग्रेस’ के चुनाव होते हैं, इन्हें मिडटर्म इलेक्शन कहा जाता है। 3 नवंबर को मिडटर्म वोटिंग हुई थी और 4 नवंबर को नतीजे आ रहे हैं… हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में ट्रम्प ने 79 सीटें गंवाई सीनेट में ट्रम्प की पार्टी ने 7 सीटें गंवाई 84 सालों में किसी राष्ट्रपति को मिड टर्म में मिली सबसे बड़ी हार हो सकती है… सवाल-2: आखिर इतनी बुरी तरह क्यों हारे ट्रम्प, अमेरिकी अपने राष्ट्रपति से खुश क्यों नहीं? जवाबः 4 बड़ी वजहें हैं…1. बढ़ती महंगाई, कॉस्ट ऑफ लिविंग पर ट्रम्प से परेशान थे 71% अमेरिकी 2. ट्रम्प के ईरान जंग लड़ने के फैसले से 65% अमेरिकी नाखुश 3. ट्रम्प पर गलत तरीके से पैसा कमाने, निजी फायदे के आरोप ट्रम्प पर कई वित्तीय मामलों को लेकर गंभीर आरोप लगे हैं। डेमोक्रेट्स ने लगातार इन मुद्दों को उठाया… 4. लैटिन वोटरों की नाराजगी, ट्रम्प को मिला समर्थन घटा सवाल-3: इस हार से ट्रम्प की कुर्सी और सरकार पर कितना खतरा? जवाबः अमेरिका में राष्ट्रपति की शक्तियां और नियुक्ति संविधान के जरिए होती है, न कि सिर्फ संसद में बहुमत से। इसलिए मिडटर्म हारने से उनके पद पर फौरन कोई खतरा नहीं है। उनकी कई ताकतें भी बरकरार रहेंगी, जैसे- एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी करना, कांग्रेस के किसी भी बिल पर वीटो करना, विदेश नीति और सैन्य कार्रवाइयों पर फैसले लेना। ट्रम्प के वीटो को पलटने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई वोट चाहिए, जो मौजूदा हालात में मुश्किल है। हालांकि अमेरिकी कांग्रेस का काम कानून बनाने के अलावा सरकार की निगरानी करना भी है। चुनाव से पहले रिपब्लिकन्स के पास संसद में बहुमत होने से ट्रम्प कानून बनाने से लेकर बजट मंजूर करने तक सारे फैसले अपनी मर्जी से ले रहे थे। लेकिन अब हाउस और सीनेट दोनों विपक्षी डेमोक्रेट्स के हाथ में आने से ट्रम्प की 3 बड़ी ताकतें छिन जाएंगी… 1. समन और जांच करने की ताकत: हाउस की ओवरसाइट, ज्यूडिशियरी, इंटेलिजेंस और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसी कमेटियों के अध्यक्ष डेमोक्रेट्स बनेंगे। ये लोग किसी को भी सबपोना, यानी कानूनी समन भेजकर हाजिर होने और सबूत पेश करने के लिए मजबूर कर सकते हैं। अब ये पद छिनने से ट्रम्प की निगरानी बढ़ेगी। ट्रम्प के करीबियों और सरकारी अफसरों से जुड़ी जांचें शुरू हो सकती हैं। 2. सरकारी खजाने पर कंट्रोल: अमेरिका में बजट या टैक्स से जुड़े प्रस्ताव पास करने का अधिकार हाउस को है। ऐसे में ट्रम्प और डेमोक्रेट्स के बीच सरकारी खर्चों को लेकर खींचतान बढ़ सकती है। सरकारी कामकाज ठप पड़ सकता है। 3. पसंदीदा नियुक्तियां करना: सीनेट ही नए जजों, कैबिनेट मंत्रियों और अन्य अधिकारियों की नियुक्तियों को मंजूरी देती है। डेमोक्रेट्स का बहुमत होने से ट्रम्प की पसंदीदा नियुक्तियों पर ब्रेक लग सकता है। ट्रम्प की अपनी पार्टी पर पकड़ कमजोर हो सकती है। ट्रम्प का यह दूसरा कार्यकाल है। कानूनन वे तीसरी बार राष्ट्रपति नहीं बन सकते। अगले राष्ट्रपति चुनाव में उम्मीदवार बनने के लिए कुछ रिपब्लिकन नेता ट्रम्प से दूरी बना सकते हैं। ट्रम्प के खिलाफ महाभियोग का भी खतरा है। वे 2019 और 2021 में 2 बार महाभियोग झेल चुके हैं। डेमोक्रेट्स तीसरी बार भी महाभियोग ला सकते हैं। ट्रम्प भी कह चुके हैं कि अगर रिपब्लिकन नहीं जीते तो वे (डेमोक्रेट्स) महाभियोग में फंसाने की कोई वजह ढूंढ लेंगे। सवाल-4: भारत समेत बाकी दुनिया के लिए ये नतीजे क्या असर डालेंगे? जवाबः ईरान जंग के दौरान दुनिया में तेल के दाम 35 डॉलर बढ़कर करीब 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं। ट्रांसपोर्टेशन खर्च बढ़ने के चलते सप्लाई चेन में रुकावटें हैं। यूरोपीय देशों, सहित लगभग पूरी दुनिया में सामान की कीमतें बढ़ी हैं। अब अगर ईरान जंग रुकती है, तो ग्लोबल इकॉनमी दोबारा पटरी पर आती हुई दिख सकती है। मिडटर्म के नतीजों से ईरान जंग तुरंत खत्म होने की संभावना कम है, क्योंकि अमेरिकी संविधान के तहत मिलिट्री ऑपरेशन्स के आखिरी फैसले राष्ट्रपति ही लेते हैं। वे ही सेना के 'कमांडर-इन-चीफ' हैं, लेकिन डेमोक्रेट्स जंग खत्म करने के लिए ट्रम्प पर दबाव बना सकते हैं। अमेरिका में जंग के एलान और सेना के फंड का अधिकार संसद के पास है। डेमोक्रेट बहुमत वाली संसद बजट को रोक सकती है या सैन्य खर्च पर कड़ी शर्तें लगा सकती है। डेमोक्रेट्स वॉर पावर्स एक्ट के तहत ट्रम्प से बिना संसदीय मंजूरी के 9 महीने से जारी मिलिट्री ऑपरेशन्स का हिसाब भी मांग सकते हैं। वहीं भारत से अमेरिका के रिश्ते ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही बिगड़ने लगे थे। ट्रम्प ने भारत पर 50% तक टैरिफ लगाया। रूस से तेल खरीदने पर बार-बार बैन की धमकी दी। 2025-26 में 4800 से ज्यादा भारतीयों को डिपोर्ट किया। H-1B वीजा नियमों में कड़ाई की। इसके अलावा ट्रम्प ने 100 से ज्यादा बार कहा कि उन्होंने भारत-पाक सीजफायर कराया। ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ट्रम्प और अमेरिका ने पाकिस्तान से नजदीकियां बढ़ाईं। वहीं भारत-अमेरिका ट्रेड डील भी आगे बढ़ती नहीं दिख रही है। अमेरिकी थिंकटैंक कार्नेगी एंडाउमेंट के साउथ एशिया प्रोग्राम के डायरेक्टर मिलन वैष्णव मानते हैं कि ट्रम्प का कमजोर पड़ना भारत के हित में होगा, क्योंकि जिस तरह मौजूदा प्रशासन ने भारत के साथ रिश्ते बनाएं हैं, उससे कई डेमोक्रेट और रिपब्लिकन सांसद नाराज हैं। वे मजबूत भारत-अमेरिका साझेदारी में विश्वास रखते हैं। हालांकि साउथ एशिया एनालिस्ट माइकल कुगेलमैन कहते हैं कि भारत के मामले में ट्रम्प की नीति नहीं बदलेगी। वो बाकी दोनों सालअमेरिकी फायदे के हिसाब से चलेंगे। वे एग्जीक्यूटिव ऑर्डर्स के जरिए ‘अमेरिका फर्स्ट’ की पॉलिसी बरकरार रखेंगे। ----------- ये खबर भी पढ़िए… क्या अब इजराइल में मुस्लिमों का दबदबा होगा; नेतन्याहू बहुमत से 8 सीट पीछे, अरब पार्टियां कैसे बनीं किंगमेकर इजराइल में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिल रहा है। सत्ताधारी पीएम नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत से 8 सीटें पीछे और विपक्षी नेता आइजेनकोट का गठबंधन 13 सीटें पीछे रह गया। 19 सीटें जीत रहीं अरब पार्टियां, इजराइल में किंग मेकर की भूमिका में हैं। नतीजों की घोषणा 4 नवंबर को होगी। पूरी खबर पढ़िए…
SIR और चुनाव आयुक्तों की कानूनी छूट पर SC में सुनवाई
वोटर लिस्ट के SIR पर सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से तीखे सवाल पूछे. कोर्ट ने हटाए गए वोटरों की सूची स्थानीय भाषा में लगाने और फॉर्म-6 की बाध्यता पर सवाल उठाए. वहीं, चुनाव आयुक्तों को कानूनी छूट देने वाले कानून पर केंद्र से जवाब मांगा. वीडियो में जानें डिटेल्स.
US मिडटर्म में 'देसी' फ्लेवर... पिया, अरुणा, सुहास जीते, SIR पर सवाल उठाने वाली प्रमिला भी विजयी
यूएस मिडटर्म चुनाव में एक बार फिर से भारतीय मूल के अमेरिकी नेताओं ने कामयाबी हासिल की है. इस चुनाव में डॉक्टर, वकील, इंजीनियर, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता के तौर पर अपनी पहचान बनाने वाले ये नेता अब अमेरिकी संसद और प्रशासन में अहम जिम्मेदारियां निभाएंगे. खास बात यह है कि इन नेताओं की राजनीतिक प्राथमिकताएं और चुनावी मुद्दे अलग-अलग हैं.
मंदिर में प्रसाद की तरह बंटता है लाखों का खजाना, भक्तों को मिलेंगे सिक्के
काशी के प्राचीन मां अन्नपूर्णा मंदिर में धनतेरस से पांच दिवसीय दीपावली महोत्सव शुरू होगा. इस दौरान मां के स्वर्णमयी स्वरूप के दर्शन के साथ करीब 8 से 10 लाख रुपये के सिक्के भक्तों में बांटे जाएंगे. मान्यता है कि मां का यह खजाना घर ले जाने से धन-धान्य की कमी नहीं होती और परिवार में बरकत बनी रहती है.
बड़ा स्कैम: 100Cr डूबे, बिना अनुमति Apple-Nvidia के बेचे गए शेयर!
अमेरिकी बाजार में भारतीय द्वारा खरीदे गए Apple, Tesla, Nvidia के शेयर बिना उनकी अनुमति के ही बेच दिए गए है और उनकी जगह पर कुछ चीनी कंपनियों के शेयर खरीदे गए, जिस कारण उन्हें करीब 100 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. आइए समझते हैं पूरा मामला...
US के इतिहास में बने पहले मुस्लिम सेनेटर बने डॉ. अब्दुल, जानिए भारत कनेक्शन?
अमेरिका के इतिहास में पहली बार मिशिगन से डॉ. अब्दुल पहले मुस्लिम सेनेटर चुने गए हैं. 42 वर्षीय महामारी विज्ञानी डॉ. अब्दुल ने रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रॉजर्स को हराया. चुनावी विवादों और तीखे बयानों के बावजूद उन्होंने जनहित के मुद्दों पर जीत दर्ज की. उनकी पत्नी सारा जुकाकू का संबंध कर्नाटक के भटकल से है, जिससे उनका भारतीय कनेक्शन चर्चा में है.

