डिजिटल समाचार स्रोत

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फलस्तीनियों के लिए खाना ले जा रहीं 15 विदेशी महिलाओं से दुष्कर्म, इजरायली सैनिकों पर गंभीर आरोप; दुनिया में हड़कंप

रिहा हुईं 15 महिला कार्यकर्ताओं ने हिरासत के दौरान यौन दुर्व्यवहार और दुष्कर्म जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इन महिलाओं का कहना है कि उन्हें बंद कमरों में रखा गया और मानसिक तथा शारीरिक प्रताड़ना दी गई।

देशबन्धु 23 May 2026 2:26 pm

तुलसी गबार्ड ने राष्ट्रीय खुफिया निदेशक पद से दिया इस्तीफा, पति की बीमारी को बताया वजह

तुलसी गबार्ड ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने इस्तीफे की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि सार्वजनिक जीवन और राष्ट्रीय जिम्मेदारियों के बीच परिवार को प्राथमिकता देना उनके लिए जरूरी हो गया है।

देशबन्धु 23 May 2026 12:31 pm

अमेरिकी कार्रवाई के बाद समझौता चाहता है ईरान : ट्रंप

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि हाल में हुई अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान बातचीत करना चाहता है। ट्रंप ने कहा कि ईरान की सैन्य ताकत को भारी नुकसान पहुंचा है और अमेरिका किसी भी हालत में उसे परमाणु हथियार बनाने नहीं देगा।

देशबन्धु 23 May 2026 9:45 am

कश्मीर में हिजबुल्लाह जैसे ड्रोन अटैक का खतरा:6 जगहें टागरेट, पाकिस्तान से 4 आतंकी घुसे; एक लेबनानी-एक कसाब का पड़ोसी

जम्मू कश्मीर में आतंकी हिजबुल्लाह की तर्ज पर हमले की साजिश रच रहे हैं। 26 अप्रैल को खुफिया एजेंसियों को इनपुट मिला कि साउथ लेबनान का रहने वाले आतंकी शादाब बाजी पाकिस्तान के रास्ते भारत में दाखिल हुआ। उसके साथ 3 पाकिस्तानी आतंकियों ने भी घुसपैठ की है। लेबनानी आतंकी हिजबुल्लाह ड्रोन हमलों में माहिर होते हैं। खुफिया एजेंसी को शक है कि संदिग्ध आतंकी कश्मीर में ड्रोन हमलों की तैयारी कर रहे हैं। आतंकियों की उम्र 23 से 25 साल के बीच है। इनके निशाने पर कश्मीर में मौजूद सैन्य ठिकाने हैं। खुफिया एजेंसियों को 6 टारगेट के नाम भी मिले हैं। दैनिक भास्कर को खुफिया एजेंसी के सूत्रों से ये भी पता चला है कि पाकिस्तान में गैंगस्टर से आतंकी बना ISI समर्थित शहजाद भट्टी भी जम्मू-कश्मीर के युवाओं के संपर्क में है। वो दुबई में रहकर युवाओं का ब्रेनवॉश कर रहा है और उन्हें ग्रेनेड हमले की ट्रेनिंग दिला रहा है। पुंछ के रास्ते घुसे आतंकी, दो लोकल गाइडों ने की मदद पुंछ के गगरिया और कुंडे नाला इलाके से आतंकियों के घुसपैठ की आशंका है। ये इलाका LoC से जीरो पॉइंट पर है। यहां पाकिस्तान और भारत के बीच नियंत्रण रेखा पहाड़ों और जंगल के बीच से गुजरती है। ये घुसपैठ का सबसे सेफ रास्ता है। पीर पंजाल रेंज के काजीगुंड (देवसर इलाके) में संदिग्ध आतंकियों की एक्टिविटी देखी गई है। जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ करने से लेकर आगे जाने तक दो लोकल गाइड ने इनकी मदद की। दोनों जम्मू के रियासी के रहने वाले हैं। ये आतंकियों को घने जंगल वाले इलाकों में आने-जाने और रास्ता दिखाने में मदद कर रहे हैं। लॉजिस्टिक मदद भी पहुंचा रहे हैं। सुरक्षा कारणों से हम गाइडों के नाम नहीं बता रहे हैं। घुसपैठ करने वाले चारों संदिग्ध आतंकी जैश-ए-मोहम्मद (JeM) और लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के हाइब्रिड मॉडल पर काम कर रहे हैं। इसमें 23 साल का जाकिर खान और 24 साल का जुल्फखान शिकारी उर्फ आमिर खान पाकिस्तान का रहने वाला है। इनमें से जाकिर मुंबई हमले के आतंकी अजमल कसाब के गांव फरीदकोट का रहने वाला है। 25 साल का मीर हमजा उर्फ अबू PoK और शादाब बाजी उर्फ मोहम्मद उस्मान लेबनान का रहने वाला है। हिजबुल्लाह आतंकी पहले ट्रेनिंग दे सकता है, फिर हमले की आशंका हिजबुल्लाह आतंकी शादाब बाजी की घुसपैठ को लेकर खुफिया एजेंसियों ने इंटरनल मैसेज में अलर्ट जारी किया है। लश्कर और हिजबुल्लाह के हाइब्रिड मॉडल की वजह से इसे खतरनाक बताया जा रहा है। सूत्रों ने आशंका जताई है कि हिजबुल्लाह से जुड़ा शादाब पहले यहां आतंकियों को ड्रोन और आत्मघाती हमलों की ट्रेनिंग भी देगा। हिजबुल्लाह लेबनान का आतंकी संगठन है। ये आत्मघाती और ड्रोन हमलों में एक्सपर्ट है। 6 जगहें टारगेट पर, आतंकियों का ओवर ग्राउंड वर्कर नेटवर्क एक्टिव सूत्रों से पता चला है कि तश्कर-ए-तैयबा ने अपने ओवर ग्राउंड वर्कर (OGW) नेटवर्क को एक्टिव किया है, ताकि संवेदनशील जगहों और उनसे जुड़े लोगों के बारे में जानकारी जुटाई जा सके। आतंकियों के निशाने पर 6 संवेदनशील जगहें हैं। OGW के जरिए वे यहां आने-जाने वालों के पैटर्न और सुरक्षा इंतजामों से जुड़ी जानकारी जुटा रहे हैं। खुफिया एजेंसियों को 15 मई के आसपास भी एक अलर्ट मिला। इसमें बताया गया कि राजौरी एरिया से आए कुछ लोग गुलमर्ग होते हुए बदरकोटा पहुंचे। फिर यहां से दूधपथरी की ओर गए। इनमें से कम उम्र का एक लड़का बैग लेकर घोड़े से घने जंगल की तरफ गया, लेकिन लौटा नहीं। खुफिया एजेंसियां इस लड़के के बारे में जानकारी जुटा रही हैं। हमास के साथ भी लश्कर-जैश कैंप में हुई थी आतंकियों की ट्रेनिंग कश्मीर में क्या पहली बार लेबनानी आतंकी ने घुसपैठ की है, ये कितना बड़ा खतरा है। इसके जवाब में जम्मू-कश्मीर के पूर्व DGP एसपी वैद कहते हैं, ‘1999 में कारगिल युद्ध के दौरान अलग-अलग बॉर्डर पर तैनात सैनिकों को कारगिल मूव करना पड़ा था। उस वक्त पाकिस्तानी सीमा से काफी संख्या से आतंकियों ने घुसपैठ की थी। उसमें पाकिस्तान के अलावा अफगानिस्तान, सीरिया, ईरान और अन्य देशों के आतंकी भी थे। हो सकता है कि तब लेबनानी आतंकी भी आए हों, लेकिन इसकी कंफर्म जानकारी नहीं है।‘ वे आगे कहते हैं, ‘करीब डेढ़ से दो साल पहले पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI ने हमास के साथ जैश और लश्कर के कैंप में ट्रेनिंग कराई थी।‘ ISI समर्थित शहजाद भट्टी अब जम्मू कश्मीर भी यूथ का कर रहा ब्रेनवॉश खुफिया रिपोर्ट से पता चला है कि ISI समर्थित आतंकी शहजाद भट्टी ने जम्मू कश्मीर के गैंगस्टर, स्मगलर और यूथ को ग्रेनेड हमले की जिम्मेदारी दी है। जम्मू से सटे पंजाब के इलाकों में भी इन्हें एक्टिव किया गया है। जम्मू-कश्मीर पुलिस और आर्मी इनके निशाने पर है। साथ ही एक खास राजनीतिक दल के लोग भी टारगेट पर हैं। 13 मई को महाराष्ट्र ATS की छापेमारी में शहजाद का पंजाब, दिल्ली, यूपी, हरियाणा, राजस्थान और महाराष्ट्र में नेटवर्क भी मिला है। 57 लोगों को हिरासत में भी लिया गया। छापेमारी में हथियारों की सप्लाई से लेकर ड्रग्स तस्करी से जुड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ। स्टोरी में इनपुट: रऊफ डार, भास्कर सहयोगी……………….ये खबर भी पढ़ें… ‘ढोक में छुपे थे पहलगाम आतंकी, चावल खिलाकर दी पनाह’ कश्मीर में पोनी यानी घोड़ा चलाने वाले बशीर अहमद और परवेज अहमद ने पहलगाम में हमला करने वालों को न सिर्फ अपने घर में रुकवाया, बल्कि लोकेशन की डिटेल भी दी। अपने ढोक यानी झोपड़ी में आतंकियों को चाय पिलाई, खाना खिलाया। पॉलिथीन में सब्जी-रोटी पैक करके दी। वे आतंकी हैं, ये पता चलने के बावजूद पुलिस या सुरक्षाबलों को जानकारी नहीं दी। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 23 May 2026 5:05 am

NEET पेपर लीक करने वाले सवाल रट लाए थे:न किताबें बाहर आईं, न अंदर डिवाइस जाने दी; फिर भी हुए लीक

‘नीट पेपर लीक ने हमारा भरोसा तोड़ा है। सालों से जो लोग हमारे साथ काम कर रहे थे, उन्होंने ही पेपर लीक कर दिए। लीक किस–किस ने किया, कैसे किया ये जांच के बाद पता चल जाएगा। लेकिन ऐसा लग रहा है कि, सवाल रटकर लीक किए गए हैं।’ ‘क्योंकि क्वेश्चन पेपर तैयार करने के लिए एक्सपर्ट्स को तय प्रोटोकॉल के साथ रखा जाता है। जिन किताबों से सवाल तैयार होते हैं, वो बाहर नहीं जातीं। कोई डिवाइस पास नहीं होती।’ ‘इसका मतलब है कि, क्वेश्चन पेपर तैयार करने वालों ने कमरे पर जाकर पहले किताब लिखी होगी और फिर उससे सवाल बनाए होंगे और फिर उन्हें लीक किया। लेकिन अब ऐसा सिस्टम बना रहे हैं, जिससे कोई एक व्यक्ति सब चौपट नहीं कर पाएगा। क्या कर रहे हैं, वो अभी नहीं बता सकता।’ ये बात नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA की टॉप अथॉरिटी ने भास्कर से एक्सक्लूसिव बातचीत में कही है। हालांकि, उन्होंने नाम नहीं लिखने को कहा है। सवाल–जवाब में पढ़िए उनका पूरा इंटरव्यू… सवाल: 22 लाख छात्रों और उनके पैरेंट्स का भरोसा फिर से कायम करने के लिए NTA इस बार क्या मेजर्स लेने जा रही है? कौन से स्टेप आप पहली बार इम्प्लीमेंट करने वाले हैं? जवाब: जो हुआ वो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। नहीं होना चाहिए था। हमारी नीति जीरो टॉलरेंस, जीरो एरर की थी। जांच में पता चलेगा कि दोषी कौन है। बहुत से लोग गिरफ्तार हुए हैं। फिलहाल कैंडिडेट्स के हित में कई फैसले लिए हैं। उन्हें फीस जमा नहीं करनी होगी। पुरानी फीस वापस होगी। राज्यों से रिक्वेस्ट की है कि वे बच्चों को एग्जाम सेंटर तक ट्रांसपोर्टेशन फ्री दें। फर्स्ट च्वॉइस वाला सेंटर देने की कोशिश कर रहे हैं। 3 लाख बच्चों ने सेंटर बदलने की मांग की है, सभी को उनकी पसंद का सेंटर देने की कोशिश है। सेफ्टी और सिक्योरिटी के प्रोटोकॉल को दोबारा रिव्यू किया है। हर ऐसे स्टेप पर जहां कोई माफिया इंटरवीन कर सकता है, उसको खत्म किया है। जिन्होंने अभी गड़बड़ी की, वो सालों से हमारे साथ काम कर रहे थे। उन्होंने विश्वासघात किया है। दिक्कत यही होती है कि आपके विश्वासीय लोगों में से ही कोई गड़बड़ कर दे, तो उससे बुरी बात नहीं हो सकती। अब हर चीज को तीन-चार बार चेक कर रहे हैं। कुछ व्यवस्थाएं ऐसी हैं जिन्हें सिक्योरिटी रीजन से डिस्क्लोज नहीं कर सकता, लेकिन ये सुनिश्चित कर रहे हैं कि ये चीज न हो। 21 जून को परीक्षा होने के बाद इस बारे में डिटेल में सब कुछ बताऊंगा। अभी बोलना कम, करना ज्यादा है। पेपर सेट करने का एक्सेस किसी एक के पास नहीं जाएगा। काफी कुछ किया है, ताकी गड़बड़ी को मिनिमाइज किया जा सके। सवाल: NTA जैसी देश की सबसे बड़ी परीक्षा एजेंसी में केवल 22 अधिकारी डेप्यूटेशन पर हैं, 39 कॉन्ट्रैक्चुअल कर्मचारी हैं और 132 आउटसोर्स इम्पलॉई हैं। ऐसे में 22 लाख स्टूडेंट्स की परीक्षा करवाना कितनी बड़ी चुनौती है? जवाब: भारत सरकार ने दो ज्वॉइंट सेक्रेटरी पोस्ट किए हैं। दो डायरेक्टर पोस्ट किए हैं। हमने कुछ पोजिशन भी निकाली हैं, लेकिन 21 जून तक इसका लिमिटेड रोल होगा। हां, NTA को अपनी कोर स्ट्रेंथ बढ़ाने की जरूरत है। लॉन्ग टर्म में बहुत कुछ करना है। क्या करना है, वो पता है। उस पर काम शुरू कर दिया है। सवाल: पेपर लीक में महाराष्ट्र, बिहार और राजस्थान का नाम मुख्य रूप से सामने आया है। हरियाणा, उत्तराखंड, केरल और झारखंड में भी CBI की जांच चल रही है। इन राज्यों को लेकर इस बार क्या तैयारी है? जवाब: सब जगह सतर्कता रखेंगे। हम चोर-पुलिस नहीं खेल सकते। हम ऑर्गनाइज्ड क्राइम से डील कर रहे हैं। ये मानकर चलना पड़ेगा। सवाल: NTA ने प्रिंटिंग से डिस्ट्रिब्यूशन और CCTV मॉनिटरिंग तक के लिए अलग कंपनियों को जिम्मा दे रखा है। ऐसी कितनी कंपनियां अभी NTA के साथ काम कर रही हैं? जवाब: इस मामले में कोई चूक नहीं हुई। मूवमेंट, स्टोरेज, परीक्षा सेंटर पर 3 मई तक कहीं से कोई घटना का क्लू नहीं था। 4, 5, 6 मई तक भी कोई शिकायत नहीं थी। हमारे पास मार्कशीट वापस आ गई थीं। वैल्यूएशन का काम शुरू हो गया था। हम तो बस यही कहेंगे कि गड़बड़ी को दबाएं नहीं, उसकी जड़ तक जाएं। कोई माफिया और पैसे वाला व्यक्ति ईमानदार बच्चों की सीट न ले पाए, इसलिए इतना बड़ा निर्णय लिया, एग्जाम रद्द कर दिया। 3 मई के पहले खबर मिल जाती तो हम इस सिचुएशन में जाते ही नहीं। हमने सोशल मीडिया की टीम बढ़ाई है। टेलीग्राम चैनल के साथ भी मंत्रीजी की मीटिंग करवाई। उनको भी निर्देश दिए कि आप सतर्कता बढ़ाइए। क्यों वो चैनल चलाते हैं जिसमें NEET पेपर लीक के नाम पर ग्रुप चलते हैं। चौतरफा प्रयास करेंगे। मुख्य दायित्व तो NTA और सरकार का है। मैं पूरी जिम्मेदारी लेता हूं। जो भी मीडिया ये चला रही है कि, NTA अपने सिस्टम को पूरा पुख्ता बता रहा है, ऐसा नहीं है। गड़बड़ी हुई है तो फिर हमारा सिस्टम भी पुख्ता कहां रहा। सवाल: क्वेश्चन पेपर सेट करने वाले सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स के पास भी सिस्टम का एक्सेस होता है, सवाल भी मालूम होते हैं। फिर ये कैसे इंश्योर होगा कि सवाल लीक न हों? आने वाली एग्जाम्स में भी ऐसा हो सकता है? जवाब: ये लोग टीचर हैं। इनको अगर याद हो जाए, कमरे में जाकर लिख लें, तो वो भी एक समस्या है। किताब से ही प्रश्न बनता है। इनको हम किताब ले जाने नहीं देते। कमरे में जाकर उसी किताब को लिखकर उसी चीज को लिख दें, जो इन्होंने यहां लिखा था और उसको आउट कर दें। फिजिक्स का कुछ नहीं हुआ है। केमेस्ट्री का ज्यादा हुआ है। बायोलॉजी का कम हुआ है। पूरा खुलासा इन्वेस्टिगेशन में होगा। लेकिन एक भी प्रश्न लीक हुआ तो दिक्कत है। ट्रांसलेटर ने गड़बड़ी की है तो मैं ये नहीं कहूंगा कि ये NTA की गड़बड़ी नहीं है। ये कह सकता हूं कि, परीक्षा केंद्र और मूवमेंट के तंत्र से लीक नहीं हुआ है, उसके पहले हुआ है। ट्रांसलेटर से हो रहा है, लेकिन उसको लाने की जिम्मेदारी भी NTA की है। गड़बड़ी नहीं है तो हम कैंसिल क्यों करेंगे। इतना बड़ा निर्णय आसान नहीं होता। बीमारी को जड़ से हटाना है तो सर्जरी करना पड़ती है। अभी जो इन्वेस्टिगेशन चल रहा है, उसमें मेरा एक्सपर्टाइजेशन नहीं है, मेंडेट भी नहीं है। अभी मेरा लक्ष्य 21 जून को सही तरीके से परीक्षा करवाना है। अर्जुन की तरह लक्ष्य पर नजर है। मैंने CBI को कहा कि जो भी दोषी है, NTA के अंदर का हो, उसको पकड़कर बाहर करेंगे। चार बच्चों ने सुसाइड कर लिया है। ये कैसे हो सकता है। ग्लानि होती है। ये नॉर्मल नहीं है। हमें सुनिश्चित करना है कि दोबारा कोई चूक न हो। अब सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स को भी रेस्ट्रिक्ट किया जाएगा। एक व्यक्ति के ऊपर निर्भरता कम करनी पड़ेगी, ताकि अगर एक व्यक्ति गड़बड़ करे तो पूरा प्रोग्राम चौपट न हो जाए। मल्टीपल लोग रहें और मल्टी-लेयर में काम हो। 21 जून को दोबारा परीक्षा – 3 मई को हुई एग्जाम में पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों के बाद नीट यूजी 2026 की री–एग्जाम 21 जून 2026 को होगी। वक्त दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक रहेगा। इस बार भी एग्जाम पेन-एंड-पेपर मोड में होगी। इसमें 22 लाख से ज्यादा कैंडिडेट्स शामिल हो सकते हैं। जिन स्टूडेंट्स ने एग्जाम सेंटर चेंज करने के लिए आवेदन किया है, उनके सेंटर बदलने पर काम जारी है। NTA कैसे सेट करता है क्वेश्चन पेपर, प्रॉसेस जानिए स्टेप 1 : NTA फिजिक्स, केमेस्ट्री और बायोलॉजी के क्वेश्चन पेपर तैयार करने के लिए सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स को बुलाता है। इनकी पहचान गोपनीय रखी जाती है। इन्हें सीक्रेट जगह पर रखा जाता है, जहां कोई बाहरी व्यक्ति नहीं जा सकता। स्टेप 2 : प्रश्ननपत्र तैयार होने के बाद उसकी फाइल NTA परिसर में एक ऐसे टर्मिनल पर रखी जाती है जो इंटरनेट से नहीं जुड़ा होता। कितने लोगों ने फाइल खोली और कितनी बार खोली, यह सब रिकॉर्ड किया जाता है। स्टेप 3: पेपर तैयार होने के बाद प्रश्नपत्र को सुरक्षित कंप्यूटर से प्रिंटिंग प्रेस भेजा जाता है ताकि उसकी कॉपियां छापी जा सकें। एक से ज्याद प्रेस हैं तो NTA हर प्रेस पर एक पर्यवेक्षक तैनात करता है। छपाई के दौरान पर्यवेक्षक का मोबाइल फोन भी स्विच ऑफ होता है। प्रिंटिंग प्रक्रिया की निगरानी CCTV कैमरों से की जाती है। स्टेप 4: छपे हुए प्रश्नपत्रों को परीक्षा से पहले बैंक के सिक्योर लॉकर में रखा जाता है, ताकि वे लीक या चोरी न हों। फिर उन्हें एग्जाम सेंटर तक पहुंचाया जाता है। ट्रांसपोर्ट के दौरान डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन के लोग भी शामिल होते हैं। स्टेप 5: प्रश्नपत्रों को पुलिस सुरक्षा में GPS निगरानी वाले वाहनों से एग्जाम सेंटर तक ले जाया जाता है। ………………………….. आप ये एक्सक्लूसिव रिपोर्ट भी पढ़ सकते हैं NEET पेपर लीक का ब्यूटीशियन कनेक्शन:जहां पेन ले जाना भी मना, वहां से बाहर आया पेपर, क्या कोई अफसर मास्टरमाइंड NEET पेपर लीक की कड़ियां अब जुड़ने लगी हैं। इस मामले में पहले केमिस्ट्री प्रोफेसर पीवी कुलकर्णी और फिर बॉटनी लेक्चरर मनीषा मांधरे अरेस्ट हुईं। अब NEET एग्जाम कराने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अफसर के भी शामिल होने की बात सामने आ रही है। पूरी खबर पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें…।

दैनिक भास्कर 23 May 2026 5:05 am

इंडोनेशिया ने मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच सभी कर्मचारियों के लिए बढ़ाया वर्क-फ्रॉम-होम नीति

इंडोनेशिया के एक वरिष्ठ मंत्री ने कहा कि मिडिल ईस्ट में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के बीच, सिविल सेवकों, सरकारी कंपनियों के कर्मचारियों और प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए अपनी वर्क-फ्रॉम-होम नीति को दो महीने के लिए बढ़ाएगा।

देशबन्धु 23 May 2026 5:00 am

चीनी विदेश मंत्रालय ने पुतिन की चीन यात्रा के बारे में जानकारी दी

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता क्वो च्याखुन ने 21 मई को नियमित संवाददाता सम्मेलन की अध्यक्षता की और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की चीन यात्रा से जुड़ी जानकारी दी।

देशबन्धु 23 May 2026 3:40 am

वर्ष 2026 एपेक व्यापार मंत्रियों की बैठक उद्घाटित

वर्ष 2026 एपेक व्यापार मंत्रियों की बैठक चीन के च्यांगसू प्रांत के सूचो शहर में उद्घाटित हुई। यह तीसरी बार है कि चीन एपेक का मेजबान बना।

देशबन्धु 23 May 2026 2:51 am

आज का एक्सप्लेनर:कॉकरोच जनता पार्टी का क्या होने वाला है; बुलबुला फूटेगा, सरकार दबा देगी या राजनीतिक धमाल मचाएगी

कॉकरोच जनता पार्टी के इंस्टाग्राम पर 2 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके हैं। अकाउंट बनने के बाद करीब 90 घंटे में बीजेपी को पीछे छोड़ा, फिर कांग्रेस को। कुछ घंटे की बात है, दोनों पार्टियों के टोटल फॉलोअर्स से भी ज्यादा इसके हो जाएंगे। अब बड़ा सवाल है कि आगे क्या? क्या ये सिर्फ एक बुलबुला है, जो कुछ दिनों में फूट जाएगा? सरकार इसे किसी साजिश का हिस्सा बताकर दबा देगी या फिर कटाक्ष से शुरू हुआ ये ऑनलाइन कैम्पेन किसी असली राजनीतिक ताकत में बदलेगा; आज के एक्सप्लेनर में तीनों सिनैरियो का एनालिसिस… सिनैरियो-1: क्या कॉकरोच जनता पार्टी सिर्फ एक बुलबुला है, जो फूट जाएगा? भारत दुनिया के सबसे सस्ता इंटरनेट देने वाले टॉप-3 देशों में है। यहां कभी आंख मारना वायरल हो जाता है, कभी ‘कच्चा बादाम’। हर 1-2 हफ्ते में कुछ नया वायरल होता है। ऐसे में सवाल लाजिमी है कि क्या कॉकरोच जनता पार्टी भी एक वायरल बुलबुला है, जो कुछ दिनों में फूट जाएगा। शायद नहीं, क्योंकि इस बार कुछ चीजें अलग हैं… कांग्रेस सांसद शशि थरूर कहते हैं, युवा निराश है और इसीलिए इससे जुड़ रहा है। मुझे उम्मीद है कि इसके पीछे जो युवा हैं, वो इस एनर्जी को मेनस्ट्रीम पॉलिटिक्स में लाने का रास्ता निकाल लेंगे या फिर अपने वोट के जरिए बदलाव की आवाज बनेंगे। निष्कर्षः कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत कटाक्ष के तौर पर हुई थी, लेकिन अब ये सिर्फ बुलबुला नहीं रह गया है। हालांकि इसके फाउंडर अभिजीत कहते हैं- ‘मैं भ्रम में नहीं हूं, मुझे पता है कि ये कैम्पेन कुछ ही दिनों में खत्म हो सकता है।' सिनैरियो-2: क्या कॉकरोच जनता पार्टी के पीछे विदेशी हाथ, सरकार दबा देगी? पहले इसके फाउंडर अभिजीत के बारे में जान लीजिए। 30 साल के अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के रहने वाले हैं। पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई के बाद उन्होंने अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशन से मास्टर्स किया। वो अभी अमेरिका में ही रहते हैं। अभिजीत 2020 से 2022 तक AAP के सोशल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट रहे हैं। 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में AAP के लिए वायरल मीम बेस्ड ऑनलाइन प्रचार का मटेरियल बनाते थे। अभिजीत पहले भी किसान आंदोलन से लेकर महंगाई जैसे राजनीतिक मुद्दों पर केंद्र सरकार और पीएम पर निशाना साधते रहे हैं। अभिजीत और उनकी CJP पर सबसे बड़ा आरोप लग रहा है कि उनके पीछे एंटी नेशनल ताकतें और विदेशी फंडिंग है… फाउंडर अभिजीत दीपके ने इंस्टाग्राम फॉलोअर्स का डेटा शेयर करते हुए पूछा- 94% भारतीय युवाओं को पाकिस्तानी क्यों बता रहे हो? अभिजीत किसी फंडिंग से भी इनकार कर रहे हैं। नेपाल और बांग्लादेश जैसा जेन-जी आंदोलन भारत में होगा क्या, इस सवाल पर अभिजीत ने एक इंटरव्यू में कहा, ‘नेपाल और बांग्लादेश से तुलना करके भारत के जेन-जी को कम न आंकें और न ही उनका अपमान करें। इस देश के युवा कहीं ज्यादा मैच्योर, जागरूक और राजनीतिक तौर पर सजग हैं। वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज करवाएंगे।' कॉकरोच जनता पार्टी का X अकाउंट ब्लॉक होने के बाद शशि थरूर ने कहा, 'लोकतंत्र में असहमति, हास्य, व्यंग्य और यहां तक कि हताशा व्यक्त करने के लिए भी मंचों की जरूरत होती है। अकाउंट को रोका जाना बेहद नुकसानदेह और समझदारी से परे है।’ तृणमूल कांग्रेस की नेता महुआ मोइत्रा ने कहा, ‘ये फासीवाद है, लोकतंत्र नहीं। सरकार देश के युवाओं से इतनी डरी हुई है कि वह एक वर्चुअल ऑनलाइन मूवमेंट तक को बर्दाश्त नहीं कर पा रही।’ निष्कर्ष: फिलहाल सरकार के पास अभिजीत दीपके की विदेशी फंडिंग के कोई सबूत नहीं हैं। अगर मिलते हैं, तो इस पूरे मूवमेंट को फौरन खत्म किया जा सकता है। बिना किसी ठोस वजह के ऐसे अकाउंट बंद किए, तो प्रतिरोध झेलना पड़ेगा। सिनैरियो-3: क्या कॉकरोच जनता पार्टी राजनीतिक बदलाव ला पाएगी? NEET पेपर लीक, पेट्रोल-डीजल के दाम, महंगाई, बेरोजगारी और SIR में धांधली जैसे मुद्दों के बीच कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत हुई। इसलिए बड़ा सवाल है कि क्या ये ऑनलाइन मूवमेंट कोई बड़ा राजनीतिक बदलाव ला पाएगा… ऑनलाइन फॉलोइंग का जमीनी सपोर्ट में बदलना काफी मुश्किल होता है। 2020 दिल्ली विधानसभा चुनाव में बीजेपी की टिकट पर लड़े तेजिंदर बग्गा को सिर्फ 38 हजार वोट मिले थे, जबकि फेसबुक पर तब उनके 6.5 लाख फॉलोवर थे। यूट्यूबर मेघनाद 2025 में दिल्ली की मालवीय सीट से चुनाव लड़े थे। उन्हें कुल 192 वोट मिले थे जबकि 500 से ज्यादा वोट NOTA के थे। अक्सर विवादित बयान देने वाले एक्टर एजाज खान बिग बॉस में आए थे। उनके 5.6 मिलियन फॉलोअर हैं। 2024 के मुंबई विधानसभा चुनाव में आजाद समाज पार्टी की टिकट पर वर्सोवा से चुनाव लड़े थे, उन्हें कुल 155 वोट मिले थे। पॉलिटिकल एक्सपर्ट हर्षवर्धन त्रिपाठी के मुताबिक, 'CJP सोशल मीडिया पर माहौल बना सकती है, पॉलिटिकल पार्टी नहीं बन सकती। कॉकरोच पार्टी भारत में अल्पमृत्यु को प्राप्त होगी।’ हालांकि कई राजनीतिक जानकारों का कहना है कि कॉकरोच जनता पार्टी एक तरह के अनरेस्ट का नतीजा है। इसके दूरगामी असर होंगे…. पॉलिटिक एनालिस्ट योगेंद्र यादव के मुताबिक, 'देश के भीतर एक सुगबुगाहट और छटपटाहट है। जब भी कोई सरकार संस्थाओं पर कब्जा कर लेती है और पूर्णसत्ता स्थापित करती है, तब विद्रोह अनपेक्षित जगहों से पैदा होता है। जैसे- 1971 में इंदिरा गांधी की भारी जीत के बाद 1974 में जयप्रकाश आंदोलन शुरू हुआ। 2009 में कांग्रेस की जीत के बाद 2011 में अन्ना आंदोलन और 2019 में पीएम मोदी के दूसरी बार सत्ता में आने के 2 साल बाद किसान आंदोलन शुरू हुआ।’ पॉलिटिकल एनालिस्ट राशिद किदवई के मुताबिक, विपक्ष को यह सोचने की गलती नहीं करनी चाहिए कि कॉकरोच मूवमेंट सिर्फ बीजेपी के खिलाफ है। यह विपक्ष की भी नाकामी दिखाता है। युवाओं की नाराजगी सत्ताधारी दल के लिए है। इसका यह मतलब नहीं है कि विपक्ष में उनका विश्वास है। निष्कर्षः कॉकरोच जनता पार्टी के लिए बड़ा राजनीतिक बदलाव लाना अभी दूर की बात है। फिलहाल ये मूवमेंट कोई राजनीतिक पार्टी में बदल पाएगा, इसमें भी संशय है। इसने युवाओं के बीच फैले असंतोष को जरूर उघाड़ दिया है, जिसे किसी न किसी को तो एड्रेस करना ही पड़ेगा। ----- रिसर्च सहयोग- श्रेया नाकाड़े ----- ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर: कॉकरोच जनता पार्टी ने 5 दिन में बीजेपी-कांग्रेस को पछाड़ा, इंस्टा पर डेढ़ करोड़+ फॉलोअर्स; ये सिर्फ मजाक है या बदलाव की आहट BJP और कांग्रेस ने 2014 में इंस्टाग्राम अकाउंट बनाए। 12 साल में बीजेपी के 88 लाख और कांग्रेस के 1.3 करोड़ फॉलोअर्स हुए हैं। लेकिन महज 5 दिन पहले बनी कॉकरोच जनता पार्टी, यानी CJP ने इन दोनों आंकड़ों को छोटा साबित कर दिया। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 22 May 2026 6:15 pm

ईरान से बातचीत को लेकर अमेरिकी विदेश मंत्री ने जताए सकारात्मक संकेत

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने गुरुवार को कहा कि ईरान के साथ चल रही बातचीत में “अच्छे संकेत” हैं। हालांकि, उन्होंने बहुत ज्यादा उम्मीद न रखने की चेतावनी दी और कहा कि अगर कूटनीति विफल हो जाती है तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास अभी भी दूसरे विकल्प हैं।

देशबन्धु 22 May 2026 9:24 am

ईरान के पास परमाणु हथ‍ियार का मतलब मध्‍य पूर्व में बड़ा युद्ध, नहीं दे सकते इजाजत: ट्रंप

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप और विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ईरान को लेकर ताजा बयान जारी क‍िया, ज‍िसमें चेतावनी और बातचीत के जरिए चीजों को सुलझाना, दोनों शाम‍िल रहे

देशबन्धु 22 May 2026 8:50 am

बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना ने आम लोगों के घर गिराए, मानवाधिकार संस्था ने कड़ी निंदा की

एक बड़े मानवाधिकार संगठन ने बलूचिस्तान के अवारन जिले में पाकिस्तानी आर्मी द्वारा आम लोगों के घरों को गिराने की कड़ी निंदा की।

देशबन्धु 22 May 2026 8:20 am

तेल बेचकर एक रुपया खर्च नहीं करता नॉर्वे:दुनिया का सबसे बड़ा फंड, 7 हजार कंपनियों की हिस्सेदारी खरीदी; क्या इसीलिए गए पीएम मोदी

नॉर्वे की आबादी सिर्फ 56 लाख है। दिल्ली की एक चौथाई भी नहीं। लेकिन इस छोटे से देश के पास ऐसा सरकारी फंड है, जो भारत की पूरी GDP का आधा है। 2.1 ट्रिलियन डॉलर। अगर बांटा जाए, तो नॉर्वे के हर नागरिक को करीब ₹3.5 करोड़ मिलेंगे। लेकिन अपने देश पर खर्च करने की बजाए नॉर्वे ने इस फंड से दुनिया के 68 देशों की 7200 कंपनियों में हिस्सेदारी खरीद रखी है। 18 मई को नॉर्वे पहुंचे पीएम मोदी ने भारत की क्लीन एनर्जी में इसी फंड से निवेश का न्योता दिया। आखिर नॉर्वे ने इतना बड़ा फंड कैसे बनाया, ये चलता कैसे है, भारत में कितना निवेश किया और नॉर्वे अपने नागरिकों को यह पैसा बांट क्यों नहीं देता; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… नॉर्वे आमदनी के लिहाज से छठा और खुशहाली के मामले में 7वां सबसे सम्पन्न देश है। यहां की आबादी 56 लाख है। हर शख्स औसतन एक लाख डॉलर, यानी 96 लाख रुपए सालाना कमाता है। लेकिन 60 साल पहले तक ऐसा नहीं था। उत्तरी यूरोप में बसे नॉर्वे की जियोग्राफी काफी दुर्गम रही है- चारों तरफ बर्फ से ढके पहाड़, गहरे समुद्री रास्ते। 1960 के दशक तक ज्यादातर आबादी कमाई के लिए मछली पकड़ती, लकड़ी काटती या जहाजों पर काम करती। तब न कोई बड़ा उद्योग था और न कोई कार या टेक कंपनी। नौकरी के लिए युवा दूसरे देश चले जाते। नॉर्वे के अर्थशास्त्रियों को लग रहा था कि उनके पास संसाधन ही नहीं हैं। किसी चमत्कार के दम पर ही विकासशील देश बना जा सकता है। तभी एक चमत्कार हो गया। 1959 में नॉर्वे के पड़ोसी देश नीदरलैंड्स को तटीय इलाके 'ग्रोनिंगन' में नेचुरल गैस का एक बहुत बड़ा भंडार मिला। पूरे यूरोप में तेल और गैस की खोज की होड़ मच गई। नॉर्वे के भूवैज्ञानिकों ने भी समुद्र में खोज शुरू करने का मन बनाया। इस बीच 1962 में अमेरिकी कंपनी फिलिप्स पेट्रोलियम ने नॉर्वे सरकार को एक ऑफर दिया- ‘हमें उत्तरी समुद्र में तेल खोजने का इजाजत दीजिए। बदले में हर महीने 1.6 लाख डॉलर देंगे।’ 1965 में नॉर्वे सरकार ने फिलिप्स पेट्रोलियम, शेल और एस्सो जैसी बड़ी तेल कंपनियों को 22 लाइसेंस जारी किए। इन कंपनियों को समुद्र में ड्रिल करने, तेल-गैस खोजने और निकालने का अधिकार था। 1966 की गर्मियों में पहला तेल कुआं खोदा गया, लेकिन वह सूखा निकला। अगले साल बाल्डर के इलाके में तेल मिला, लेकिन सरकार और कंपनियों को लगा यहां से तेल काफी चुनौती भरा और खर्चीला है। कुल 36 कुएं खोदे गए, लेकिन किसी में भी तेल नहीं मिला। कंपनियों ने अपना डेरा समेटने का फैसला किया। लेकिन फिलिप्स पेट्रोलियम को अभी एक और कुंआ खोदना बाकी था। 23 दिसंबर 1969, यानी क्रिसमस से 2 दिन पहले। फिलिप्स पेट्रोलियम के आखिरी कुएं से अचानक काला, गाढ़ा और चिपचिपा तरल फूट पड़ा। इंजीनियर समझ गए थे कि उन्हें कामयाबी हाथ लग गई। जिस इलाके में तेल निकला, उसे ‘एकोफिस्क फील्ड’ नाम दिया गया। नॉर्वे के तट से करीब 300 किमी दूर ये फील्ड दुनिया के सबसे बड़े तेल और गैस भंडारों में से एक बना। 1971 से नॉर्वे ने तेल कारोबार शुरू किया। विदेशी कंपनियों ने डेरा डाला। इन्हें खुदाई करने के लिए सरकार से कड़ी शर्तों पर लाइसेंस लेना पड़ता था। सरकार तय करती कि कितना और कब तक तेल निकालेंगे, ताकि पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे। फिर 1972 में नॉर्वे की संसद ने राष्ट्रीय तेल कंपनी बनाई, जिसका नाम रखा- स्टेटऑयल (अब इक्विनोर)। नियम बना कि उत्तरी सागर के किसी भी तेल प्रोजेक्ट में कम से कम 50% की हिस्सेदारी इस सरकारी कंपनी की होगी। नॉर्वे की किस्मत बदल चुकी थी, लेकिन तभी 2 बड़े झटके लगे… पहला झटका: 78% टैक्स लगाकर खजाना भरा, लेकिन महंगाई बढ़ गई दूसरा झटका: तेल की कीमतें गिरीं, तो बैंक बर्बाद हो गए अचानक मिला बहुत सारा पैसा किसी देश के लिए वरदान नहीं, बल्कि अभिशाप बन जाता है। अर्थशास्त्र में इसे 'रिसोर्स कर्स' कहा जाता है। इसी रिसोर्स कर्स को बेअसर करने के लिए नॉर्वे ने कई कदम उठाए। सरकार ने देश के 4 सबसे बड़े बैंकों में से 3 का राष्ट्रीयकरण किया। टैक्स ढांचा बदला। कई सब्सिडी, मुफ्त की सुविधाएं वगैरह बंद कीं। अपना बजट ठीक किया। मई 1990 में नॉर्वे की संसद में एक बिल पास हुआ- गवर्नमेंट पेट्रोलियम फंड एक्ट। इस कानून के मुताबिक, ‘तेल से होने वाली अतिरिक्त कमाई एक अलग फंड में जाएगी, जिसे सरकार खर्च नहीं कर सकती।’ यहीं से जन्म हुआ दुनिया के सबसे बड़े सॉवरेन वेल्थ फंड का, जिसे आज 'गवर्नमेंट पेंशन फंड ग्लोबल' कहा जाता है। हर्मोड स्कैनलैंड, जॉन एम. हार्टविक जैसे अर्थशास्त्रियों की सोच इस कानून का आधार बनी- ‘जो तेल हमें समुद्र के नीचे मिला है, यह हमारी जागीर नहीं है। यह हमारे पूर्वजों की मेहनत और आने वाली पीढ़ियों की अमानत है। तेल आज है, कल खत्म हो जाएगा। इसलिए हमें इस 'काले सोने' (तेल) को 'अमर धन' (फंड) में बदल देना चाहिए। ताकि जब तेल खत्म हो, तब भी हमारी नई पीढ़ियां इसी अमीरी और सुरक्षा के साथ जी सकें।’ 1996 में 400 मिलियन डॉलर फंड में जमा हुए। आज इसमें 2.1 ट्रिलियन डॉलर जमा हैं। इसे संभालने की जिम्मेदारी नॉर्वे की फाइनेंस मिनिस्ट्री के पास है, जो नॉर्वे की संसद के प्रति जवाबदेह है। 1 जनवरी 1998 से इस फंड के ऑपरेशनल काम ‘नॉर्जेस बैंक इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट’ संभाल रहा है, जो नॉर्वे के सेंट्रल बैंक ‘नॉर्जेस बैंक’ का एक डिपार्टमेंट है। इसके दफ्तर ओस्लो, न्यूयॉर्क, लंदन और सिंगापुर जैसे बड़े कारोबारी शहरों में हैं। करीब 700 प्रोफेशनल्स, इकोनॉमिस्ट्स, इंजीनियर्स, फाइनेंस एक्सपर्ट्स वगैरह इस फंड को मैनेज करते हैं। 1. पैसे को देश से बाहर रखो 2. वैल्यू का सिर्फ 3% खर्च करो 3. गड़बड़ जगहों में पैसा मत फंसाओ नॉर्वे के फंड का पैसा निवेश करने के बेहद कड़े नैतिक नियम हैं। सिर्फ मुनाफे के लिए ऐसी कंपनियों में पैसा नहीं लगाया जाता, जो… इन्हीं नियमों का हवाला देते हुए फंड ने भारत के अडाणी समूह की कुछ कंपनियों में पैसा लगाने पर रोक लगाई है… जानकारों को उम्मीद है कि पीएम मोदी के न्योते के बाद नॉर्वे की सरकार भारत की ग्रीन एनर्जी कंपनियों में अपना निवेश बढ़ाएगी। ------------ ये भी खबर पढ़िए…5 देशों से क्या लेकर लौटे पीएम मोदी; UAE तेल रिजर्व भरेगा, नीदरलैंड्स क्रिटिकल मिनरल देगा, मेलोनी से भी डील PM मोदी 15 मई की सुबह नई दिल्ली से UAE के लिए निकले थे। फिर नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे होते हुए इटली पहुंचे। वे 6 दिनों के भीतर 5 देशों का दौरा कर 21 की सुबह दिल्ली लौट आएं। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 22 May 2026 5:15 am

11 को आकृति गिरफ्तार, 13 अप्रैल को हिंसा कैसे भड़काई:नोएडा प्रोटेस्ट केस; वकील बोले- पुलिस खाली हाथ, 1 करोड़ ट्रांजेक्शन के सबूत नहीं दिए

13 अप्रैल, 2026 को यूपी के नोएडा में मजदूरों का हिंसक प्रदर्शन हुआ। इस केस में लखनऊ के जर्नलिस्ट सत्यम वर्मा और नोएडा से एक्टिविस्ट आकृति चौधरी पर NSA लगाया गया है। इन पर सोशल मीडिया पर मजदूरों को भड़काने और विदेशी फंडिंग जैसे आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, यूपी पुलिस ने इस पूरे मामले में जो कहानी बताई है, उसमें कई कमियां भी नजर आ रही हैं। पुलिस की इस थ्योरी में हमें 4 बातें खटक रहीं: 1. आकृति को 11 अप्रैल को ही मेट्रो स्टेशन से गिरफ्तार किया गया, तो उसने 13 अप्रैल को हिंसा कैसे भड़का दी? 2. सत्यम वर्मा को पुलिस लखनऊ से 17 अप्रैल को ले गई, लेकिन गिरफ्तारी 19 अप्रैल को दिखाई गई। सत्यम नोएडा में नहीं थे। पुलिस के संपर्क में थे और उनके कहने पर आर्टिकल भी हटा लिया था। 3. पुलिस ने प्रेस नोट जारी कर दावा किया है कि सत्यम को विदेशों से 1 करोड़ रुपए की फंडिंग मिली है, इससे जुड़े सबूत पुलिस ने कोर्ट में पेश क्यों नहीं किए। 4. FIR में देरी क्यों हुई, एक ही केस में कई FIR क्यों दर्ज की गईं। अब पढ़ें ये गिरफ्तारियां कैसे हुईं और सवाल क्यों उठे…सीन-1तारीख- 10 अप्रैलजगह- जनचेतना पब्लिकेशन हाउस, लखनऊ 65 साल के सत्यम वर्मा दफ्तर में काम कर रहे थे। तभी हसनगंज पुलिस वहां पहुंची और उनसे एक आर्टिकल डिलीट करने को कहा। सत्यम जर्नलिस्ट और एक्टिविस्ट हैं। मजदूरों के अधिकारों के लिए काम करते हैं। उनका ये आर्टिकल मजदूर बिगुल अखबार में छपा था। नोएडा में 9 अप्रैल से मजदूरों का प्रदर्शन चल रहा था। पुलिस को डर था कि इस आर्टिकल से हालात बिगड़ सकते हैं। सत्यम ने पुलिस की बात मान ली और आर्टिकल हटा दिया। करीब 7 दिन बाद हसनगंज पुलिस दोबारा पब्लिकेशन हाउस पहुंची। सत्यम वर्मा और उनकी सहयोगी कात्यायनी सिन्हा को पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई। फिर 19 मई को दोनों को अरेस्ट कर लिया। 1 करोड़ के ट्रांजेक्शन के सबूत कोर्ट में क्यों नहीं दिए सत्यम वर्मा के वकील अली जिया कबीर चौधरी का दावा है कि उन्हें अभी तक सिर्फ पुलिस की मीडिया सेल से पता चला है कि NSA लगाया गया है। वे कहते हैं, ‘हमें इससे जुड़े कोई डॉक्यूमेंट नहीं मिले हैं। जबकि कानूनी तौर पर पुलिस को कोर्ट में कागजात पेश कर डिफेंस के वकील को बताना होता है, लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया।’ विदेशी फंडिंग के आरोप पर कबीर कहते हैं, ‘सत्यम के परिवार ने विदेशी अकाउंट्स से 1 करोड़ रिसीव होने की बात खारिज की है। वो ट्रांसलेटर के तौर पर काम करते हैं, इसलिए मुमकिन है कि विदेशी पब्लिकेशन से पेमेंट आया हो।‘ परिवार ने बताया है कि वो सिर्फ 30 हजार रुपए तक के ट्रांजेक्शन के बारे में जानते हैं। पुलिस ने एक करोड़ रुपए विदेशी फंडिंग को लेकर भी अब तक कोई सबूत कोर्ट में पेश नहीं किया है। वे आगे कहते हैं, ‘पुलिस ने कोर्ट में जो चैट सबूत के तौर पर पेश की है, वो बिगुल ग्रुप की है। इसमें उसी पब्लिकेशन में काम करने वाले कुछ दूसरे जर्नलिस्ट शामिल हैं। इसमें वर्मा अपने सहयोगियों से नोएडा मजदूर प्रोटेस्ट पर बात कर रहे थे। क्या इस बारे में पत्रकार एक-दूसरे से बात नहीं कर सकते, क्या बात करने का मतलब हिंसा भड़काना है।’ 12 मई को यूपी पुलिस ने सत्यम वर्मा और आकृति के खिलाफ NSA लगाया है। गौतमबुद्ध नगर की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने बताया कि जिन पर NSA लगाया गया है, वो दोनों ना ही मजदूर हैं, ना ही नोएडा में रहते हैं। ये बाहरी हैं, जिन्होंने हिंसा भड़काने की कोशिश की।’ इसके बाद गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नरेट ने 15 मई को बयान जारी कर कहा कि सत्यम के बैंक खाते में 1 करोड़ जमा किए गए। ये रकम डॉलर, पाउंड और यूरो जैसी करेंसी में अन्य देशों से जमा की गईं। दोस्त ने बताया- बिना सर्च वारंट आई थी पुलिस सत्यम वर्मा के साथ काम करने वाली उनकी दोस्त पुलिस पर गलत तरह से कार्रवाई करने का आरोप लगाती हैं। नाम ना लिखने की शर्त पर उन्होंने बताया, ‘पुलिस के पास सिर्फ दफ्तर की एक फ्लोर का सर्च वॉरंट था, लेकिन उन्होंने पूरे दफ्तर की तलाशी ली। उन्होंने सत्यम को गिरफ्तार करने के साथ सभी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस भी सीज कर लिए। पुलिस ने ना कोई वॉरंट दिखाया, ना डिवाइस के लिए सीजर मेमो दिखाया।’ आकृति की गिरफ्तारी पर क्यों सवाल… सीन-2तारीख- 11 अप्रैलजगह- बोटैनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन, नोएडा 11 अप्रैल को भी एक गिरफ्तारी हुई। ये गिरफ्तारी पुलिस ने नोएडा प्रोटेस्ट के हिंसक होने से दो दिन पहले की थी। यहां से दिल्ली यूनिवर्सिटी में की पूर्व स्टूडेंट आकृति चौधरी को अरेस्ट किया गया। पुलिस ने आरोप लगाया कि वे ‘मजदूर बिगुल दस्ता’ संगठन से जुड़ी हैं। नोएडा पुलिस कथित तौर पर सादी वर्दी में मेट्रो स्टेशन पहुंची। आकृति उस वक्त एक फैक्ट्री मजदूर मनीषा और सॉफ्टवेयर इंजीनियर अदित आनंद के साथ थीं। आकृति की दोस्त प्रियंवदा कहती हैं, ‘पूरे प्रदर्शन के दौरान आकृति मजदूरों से शांतिपूर्ण और अहिंसक प्रदर्शन करने की अपील करती रहीं। इसका वीडियो भी है। उस पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया जा रहा है। आकृति ना सिर्फ पढ़ाई में अच्छी थी, वो देश-दुनिया में चल रहे मुद्दों पर मुखरता से बोलती रही हैं। वो भगत सिंह को आदर्श मानती हैं।’ वहीं उसके साथी चिरांशु ने बताया, ‘हम सब आकृति को 12 अप्रैल से लगातार कॉल करते रहे, लेकिन फोन स्विच ऑफ बताता रहा। फिर पता चला कि उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।’ हिंसा से दो दिन पहले अरेस्ट, फिर कैसे भड़काया वकील कबीर भी कहते हैं कि अगर पुलिस ने आकृति को 11 अप्रैल को ही गिरफ्तार कर लिया था, तो वो 13 अप्रैल को हिंसा कैसे भड़का सकती है। उनका कहना है कि वो जैसे बेल एप्लीकेशन डालते हैं, वैसे पुलिस केस में कुछ नए सेक्शन जोड़ देती है, जिससे केस की सुनवाई में देरी हो रही है। पुलिस ने NSA भी इसलिए लगाया है, ताकि दोनों को जमानत ना मिल सके। उन्हें ज्यादा से ज्यादा दिन जेल में रखा जा सके। डिफेंस वकील कबीर के आरोपों पर बात करने और केस की जांच की डीटेल के लिए हमने नोएडा के एडिशनल सीपी लॉ एंड ऑर्डर राजीव नारायण मिश्रा से संपर्क किया, लेकिन बात नहीं हो सकी। उन्होंने कॉल और वॉट्सएप पर हमारे मैजेस का भी जवाब नहीं दिया। जवाब मिलने पर स्टोरी में शामिल करेंगे। …………………… ये खबर भी पढ़िए… नोएडा में हिंसक प्रदर्शन, 350 फैक्ट्रियों में तोड़फोड़ नोएडा में 9 अप्रैल से सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे 42 हजार कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। कर्मचारियों ने अलग-अलग इलाकों में फैक्ट्रियों में पथराव, तोड़फोड़ की। कर्मचारियों ने कई गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए और करीब 50 से ज्यादा फूंक दीं। पुलिस की गाड़ियां भी पलट दी। हालात बिगड़े तो कई थानों की फोर्स मौके पर पहुंची। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 22 May 2026 5:10 am

चीन और रूस ने मैत्रीपूर्ण सहयोग पर संयुक्त घोषणा जारी की

चीन और रूस ने 20 मई को सर्वांगीण रणनीतिक समंव्य और मजबूत कर अच्छे पड़ोसियों के मैत्रीपूर्ण सहयोग पर संयुक्त घोषणा जारी की।

देशबन्धु 22 May 2026 1:50 am

चीन के खनिज संसाधन कानून के कार्यान्वयन के लिए नियमावली लागू होगा

चीनी प्रधानमंत्री ली छ्यांग ने हाल में राज्य परिषद के आदेश पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत चीन के खनिज संसाधन कानून के कार्यान्वयन के लिए नियमावली 15 जून को लागू होगी।

देशबन्धु 22 May 2026 1:19 am

चीन-अमेरिका को द्विपक्षीय कृषि व्यापार के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनानी चाहिए : चीनी वाणिज्य मंत्रालय

चीनी वाणिज्य मंत्रालय द्वारा आयोजित एक नियमित प्रेस कॉन्फ्रेंस में, प्रवक्ता हे याडोंग ने चीन द्वारा अमेरिकी कृषि उत्पादों की खरीद के बारे में सवालों का जवाब देते हुए कहा कि कृषि व्यापार चीन-अमेरिका आर्थिक और व्यापारिक सहयोग का एक महत्वपूर्ण भाग है।

देशबन्धु 22 May 2026 1:15 am

सर्बिया : चीनी वृत्तचित्रों की स्क्रीनिंग का शुभारंभ बेलग्रेड में हुआ

सर्बियाई राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुसिक की चीन की राजकीय यात्रा से पहले, बेलग्रेड में सर्बिया में चीनी वृत्तचित्रों की स्क्रीनिंग का आयोजन किया गया।

देशबन्धु 22 May 2026 12:35 am

आज का एक्सप्लेनर:कॉकरोच जनता पार्टी ने 5 दिन में बीजेपी-कांग्रेस को पछाड़ा, इंस्टा पर डेढ़ करोड़ फॉलोअर्स; ये सिर्फ मजाक है या बदलाव की आहट

BJP और कांग्रेस ने 2014 में इंस्टाग्राम अकाउंट बनाए। 12 साल में बीजेपी के 88 लाख और कांग्रेस के 1.3 करोड़ फॉलोअर्स हुए हैं। लेकिन महज 5 दिन पहले बनी कॉकरोच जनता पार्टी, यानी CJP ने इन दोनों आंकड़ों को छोटा साबित कर दिया। CJP ने अब तक डेढ़ करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स जुटा लिए हैं। हर घंटे करीब 5 लाख फॉलोअर्स बढ़ रहे हैं। ये प्लेटफॉर्म चीफ जस्टिस सूर्यकांत के उस बयान के बाद खड़ा हुआ, जिसमें उन्होंने बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से की थी। क्या है कॉकरोच जनता पार्टी, इसके पीछे किन लोगों का हाथ और क्या वाकई ये पार्टी कोई बड़ा बदलाव ला पाएगी; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: कॉकरोच जनता पार्टी है क्या?जवाबः ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ एक व्यंगात्मक ऑनलाइन कैंपेन है… 21 मई की शाम तक यानी महज 5 दिनों में कॉकरोच जनता पार्टी के इंस्टा फॉलोअर्स ने बीजेपी और कांग्रेस को भी पीछे छोड़ दिया है। CJP के इंस्टाग्राम पर गुरुवार शाम 5 बजे तक 1.49 करोड़ फॉलोअर्स हो गए। जबकि कांग्रेस के करीब 1.33 करोड़, बीजेपी के 88 लाख और AAP के 19 लाख फॉलोअर्स हैं। CJP औपचारिक रूप से चुनाव आयोग में रजिस्टर्ड राजनीतिक दल नहीं है। इसकी वेबसाइट पर व्यंग्य में लिखा गया है कि ये कॉकरोचिस्तान के नो इलेक्शन कमीशन पर कॉकरोच एक्ट के तहत एक नॉन-रजिस्टर्ड पार्टी है। 30 साल के अभिजीत दीपके ने खुद को इसका फाउंडर बताया है। सवाल-2: अभिजीत दीपके कौन हैं और क्या उनका कोई पॉलिटिकल कनेक्शन है?जवाबः 30 साल के अभिजीत दीपके महाराष्ट्र के संभाजी नगर के रहने वाले डिजिटल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिजीत ने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। फिलहाल वो अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी में पब्लिक रिलेशन से मास्टर्स की पढ़ाई कर रहे हैं। अभिजीत 2020 से 2022 तक केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया स्ट्रैटेजिस्ट रहे हैं। 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में अभिजीत AAP के लिए वायरल मीम बेस्ड ऑनलाइन प्रचार का मटेरियल बनाते थे। अभिजीत AAP के IT सेल के चीफ अंकित लाल को रिपोर्ट करते थे। एक इंटरव्यू में अभिजीत ने बताया कि उन्होंने निजी जिंदगी और आर्थिक स्थिरता के लिए AAP छोड़कर बोस्टन यूनिवर्सिटी में अप्लाई किया था। एडमिशन मिल गया, तो वे अमेरिका शिफ्ट हो गए। किसान आंदोलन से लेकर महंगाई जैसे राजनीतिक मुद्दों पर अभिजीत X अकाउंट पर केंद्र सरकार और पीएम पर निशाना साधते रहे हैं। सवाल-3: आखिर इंटरनेट पर लोग कॉकरोच जनता पार्टी को पसंद क्यों कर रहे हैं?जवाबः 3 बड़ी वजहें हैं- 1. सोशल मीडिया पर यूथ से जुड़ी कंटेंट स्ट्रैटेजी 2. CJP के लॉन्च की परफेक्ट टाइमिंग 3. बेरोजगारी के चलते युवाओं में फ्रस्ट्रेशन अभिजीत कहते हैं, मैं ये नहीं कहूंगा कि ये सब मैंने हासिल किया है। यूथ के अंदर कई सालों से जो निराशा और गुस्सा पल रहा है, वही इतने बड़े रिएक्शन की वजह है। सरकार की नाकामियों की वजह से युवा बेरोजगार है। उन्हें एक मंच मिला, जहां पर वो अपनी निराशा और गुस्सा निकाल सकते हैं। सवाल-4: कॉकरोच जनता पार्टी का एजेंडा क्या है?जवाबः CJP का फिलहाल कोई सीरियस घोषित एजेंडा नहीं है। उसने अपने मैनिफेस्टो में 5 वादे किए हैं- सवाल-5: क्या इससे पहले भी ऑनलाइन कैंपेन से पार्टियां बनी हैं, उनका क्या हुआ?जवाबः भारत में अभी तक किसी ऑनलाइन कैंपेन या मूवमेंट से भारत में कोई राजनीतिक पार्टी उभर कर नहीं आई है। हालांकि दुनिया में इसके 3 बड़े उदाहरण हैं… 1. फाइव स्टार मूवमेंट, इटली 2. पोलिश बीयर लवर्स पार्टी, पोलैंड 3. बेस्ट पार्टी, आइसलैंड सवाल-6: क्या वाकई CJP असली पार्टी बनकर कोई बड़ा बदलाव ला पाएगी?जवाबः CJP फिलहाल कोई ऑफिशियली रजिस्टर्ड पॉलिटिकल पार्टी या ऑर्गेनाइजेशन नहीं है। औपचारिक चुनावी राजनीति के लिए CJP को चुनाव आयोग में रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। अभिजीत के बयानों से ऐसा लगता है कि फिलहाल उनका इरादा औपचारिक राजनीतिक दल बनाने का नहीं, बल्कि सरकारी नीतियों को लेकर सरकार के खिलाफ एक्टिविज्म जारी रखने का है। अभिजीत के ये बयान पढ़िए- इधर 21 मई की दोपहर करीब 12 बजे CJP के X अकाउंट पर रोक लगाई गई है। अभिजीत ने कहा है कि जैसी आशंका थी, वैसा ही हुआ। X स्थानीय कानून, कोर्ट के आदेश या कानूनी शिकायत के आधार पर Withhold करने यानी रोक लगाने की कार्रवाई करता है। **** रिसर्च सहयोग- उत्कर्ष राज **** ये खबर भी पढ़ें… CJI सूर्यकांत ने कॅाकरोच वाले बयान पर सफाई दी:कहा- इसे गलत तरीके से पेश किया गया, मैंने फर्जी डिग्रीधारियों की आलोचना की थी चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने शनिवार को अपनी पैरासाइट और कॅाकरोच वाली टिप्पणी पर सफाई दी। उन्होनें कहा कि मीडिया के एक वर्ग ने मेरी टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 21 May 2026 6:55 pm

ईरान मुद्दे पर ट्रंप और नेतन्याहू में बढ़े मतभेद, सैन्य कार्रवाई बनाम बातचीत को लेकर अलग-अलग रुख

दोनों नेताओं के बीच इस मुद्दे पर लंबी फोन वार्ता हुई, जिसमें ईरान को लेकर भविष्य की रणनीति पर गंभीर चर्चा की गई। इस बातचीत ने यह संकेत दिया कि पश्चिम एशिया में आगे की स्थिति को लेकर अमेरिका और इजराइल पूरी तरह एक राय में नहीं हैं।

देशबन्धु 21 May 2026 2:00 pm

फ्रांस में फिर आमने-सामने हो सकते हैं मोदी और ट्रंप, जी-7 सम्मेलन के दौरान द्विपक्षीय बैठक की तैयारी

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की आखिरी मुलाकात फरवरी 2025 में वॉशिंगटन स्थित व्हाइट हाउस में हुई थी। उसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले। व्यापारिक मुद्दों, आयात शुल्क और रूस से तेल खरीद जैसे मामलों को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद भी सामने आए।

देशबन्धु 21 May 2026 11:14 am

ईरान को कड़ा जवाब: ट्रंप बोले– जरूरत पड़ी तो और सख्ती

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूएस कोस्ट गार्ड अकादमी के दीक्षांत समारोह में छात्रों की तारीफ की

देशबन्धु 21 May 2026 10:08 am

रियल मैड्रिड में साल 2009 के बाद पहली बार, अध्यक्ष पद के चुनाव में हो सकते हैं एक से ज्यादा उम्मीदवार

साल 2009 के बाद पहली बार रियल मैड्रिड के अध्यक्ष पद के चुनाव में एक से ज्यादा उम्मीदवार हो सकते हैं

देशबन्धु 21 May 2026 8:20 am

ब्लैकबोर्ड-’ईसाई बन गए थे दादा, कब्र खोदकर ले गए लाश’:गांव वाले बोले- शव को शराब पिलाए बगैर नहीं दफना सकते

17 दिसंबर 2025। चारों तरफ जंगल और उसके बीच खाली खेत में 90 पंचायतों के लोग जुटे हैं। सभी के हाथ में लाठी-डंडे, कुदाल और फावड़े हैं। पंचायत में एक शख्स ने फरमान सुनाया कि उस कब्र को खोद डालो और लाश निकाल लो। इतना सुनते ही भीड़ कब्र की ओर चल पड़ी। एक खेत के किनारे ईंट-पत्थर से कब्र बनी है। भीड़ से कुछ लोग कुदाल-फावड़े से उसे तोड़ने लगते हैं। कुछ ही देर में कब्र टूट जाती है। दो लोग आगे आकर कब्र से एक लाश निकालते हैं। लाश सड़ चुकी है। कफन के चीथड़े बाहर बिखरे पड़े हैं। वे लाश को घसीटते हुए सड़क की तरफ चल पड़ते हैं। भीड़ लाश को कहां ले गई आज तक पता नहीं चला। लाश को गायब हुए 6 महीने हो चुके हैं। यह लाश चमरा राम सलाम की थी। इस भीड़ को चमरा राम सलाम का ईसाई धर्म को मानना मंजूर नहीं था। इस बार ब्लैकबोर्ड सीरीज में इस घटना का स्याह पहलू जानने के लिए मैं नीरज झा छत्तीसगढ़ के कांकेर पहुंचा हूं। कांकेर से 50 किलोमीटर दूर बड़े तेवड़ा गांव। यहां एक घर के बाहर आम के पेड़ के नीचे मेरी मुलाकात एक लड़की से होती है। यह 14 साल की लड़की चमरा राम सलाम की पोती है। नाम है ज्योति। वह कच्चे आम छील रही है। ज्योति बताती है, ‘उस दिन 90 गांव की भीड़ के साथ पुलिस भी थी। हम डरकर घर के एक कमरे में दुबक गए। चाची ने फौरन भीतर से कुंडी लगा लिया। मैं घर के एक झरोखे से क्रब तोड़ने का सारा मंजर देख रही थी। आज भी जब खेत की तरफ देखती हूं या दो से ज्यादा लोगों को उधर जाते हुए देखती हूं, तो डर लगता है। वही नजारा आंखों के सामने आ जाता है।’ ये बातें सुनते हुए पास में बैठीं ज्योति की मां ललिता रोने लगती हैं। घटना के बाद उनके पति सरपंच राजमन सलाम इतने डर गए कि पिछले 6 महीने से गांव से फरार हैं। ललिता टूटी-फूटी हिंदी में डर-डरकर बताती हैं- ‘पति से बात किए 6 महीने हो चुके हैं। पता नहीं कहां हैं। चारों बच्चे अपने पापा को याद कर के रोते हैं। कहते हैं कि दादा की तो लाश भी नहीं बची, पापा भी घर छोड़कर चले गए।’ ललिता आंसू पोंछते हुए कहती हैं- अब बच्चों को ये कैसे बताऊं कि धर्म बदलने के कारण गांव वालों ने हमारा ऐसा हाल कर दिया है। हमारा राशन-पानी, सड़क पर चलना-फिरना सब बंद कर दिया है। ‘गांव वालों की चोरी से राशन खरीदने जाती हूं’ पानी भी दूसरे गांव के बोरवेल से लाना पड़ता है, वो भी रात में ताकि कोई पहचान न सके। राशन भी रात में चुपके से लाती हूं, तब घर का चूल्हा जलता है। ऊपर से मुकदमा भी हमारे ही खिलाफ लिखा है। हर 15 दिन में हमारे परिवार को थाने बुलाया जाता है। पुलिस भी पैसे लेती है और तभी घर आने देती है। जबकि मुकदमा तो हमें करना चाहिए था। ललिता अपने बाल खींचकर कहती हैं- ‘देखिए, अभी भी मेरे बाल कटे हुए हैं। पिछले साल 15 दिसंबर की बात है। मेरे ससुर चमरा राम कई दिनों से बीमार थे। तबीयत ज्यादा बिगड़ी तो हम उन्हें शहर लेकर भागे। शाम होते-होते अस्पताल में ही उनकी मौत हो गई। पति ने गांव वालों को फोन करके खबर दी कि- पिताजी की मौत हो गई है। कल आप लोग मिट्टी देने आ जाइएगा। तब तक तो अंदाजा ही नहीं था कि लोग हमारे ईसाई धर्म अपना लेने से नाराज हैं। ससुर ने मरने से पहले ही कह दिया था मेरा अंतिम संस्कार ईसाई धर्म के अनुसार करना। जब मेरे पति ससुर का शव लेकर घर पहुंचे तो छोटे देवर राम सिंह ने कहा- भइया, पिताजी का अंतिम संस्कार आदिवासी हिंदू रीति-रिवाज से ही होना चाहिए, ईसाई धर्म के मुताबिक नहीं। देवर राम सिंह ने धर्म नहीं बदला है, वे आज भी आदिवासी हिंदू हैं। उनकी बात पर मेरे पति नाराज हो गए और सख्ते लहजे में कहा- मैं घर का बड़ा बेटा हूं, जिस धर्म को मानता हूं, उसी के मुताबिक पिताजी का अंतिम संस्कार करूंगा। ‘पति ने मिन्नतें की तब जाकर अंतिम संस्कार हुआ’ ये सुनते ही देवर राम सिंह ने गुस्से में गांव वालों को जुटा लिया और झगड़ा करने लगे। कहने लगे कि पिताजी तो हिंदू थे। फिर उन्हें ईसाई धर्म के मुताबिक कैसे दफना सकते हो? हम ऐसा नहीं होने देंगे। ये सब होते-होते शाम होने लगी। लाश दरवाजे पर रखी थी। मेरे पति मिन्नतें करने लगे कि पिताजी की यही इच्छा थी, देर मत करो। अंतिम संस्कार हो जाने दो। आखिरकार सबने हामी भर दी। मेरे पति ने अपने तीनों भाइयों के साथ मिलकर ससुर का शव घर के पास वाले खेत में दफना दिया। सभी ने ईसाई धर्म के मुताबिक प्रार्थना की। फिर ईंट और सीमेंट से पक्की कब्र बनवाई। अगले दिन 17 दिसंबर को मैं और मेरे पति कुछ रिश्तेदारों के साथ इसी आम के पेड़ के नीचे बैठे थे। अचानक 90 गांव के लोग पंचायत करके मेरे घर आ धमके। उनके हाथ में लाठी-डंडे थे। वे हमें पीटने लगे। मेरे सिर पर किसी ने डंडा मारा और मैं बेहोश हो गई। वे घर में घुसकर तोड़-फोड़ करने लगे। घर के बगल में बना हमारा चर्च भी तोड़ दिया। मुझे होश आया तो सिर से खून बह रहा था। पति भी बुरी तरह घायल थे। फौरन हमें हॉस्पिटल ले जाया गया। डॉक्टर ने दो दिन भर्ती रखा। जब वापस घर लौटे, तो सब कुछ उजड़ चुका था। गांव वाले ससुर की लाश को कब्र से खोदकर निकाल ले गए थे। कहां ले गए, आज तक नहीं पता चला। पुलिस भी कुछ बताती नहीं। ललिता बात करते-करते मुझे, अपने खेत की ओर ले गईं। वहां एक आम के पेड़ के नीचे कब्र खुदी हुई है। क्रब के पास ही मिट्टी का ढेर लगा है। सामने एक टूटी हुई खाट पड़ी है। जिस पर उनके ससुर की लाश लाई गई थी। ललिता कहती हैं, ‘अब तो हम यहां आते ही नहीं। ससुर की लाश ही नहीं है, कैसे आंसू बहाएं?’ टूटी कब्र दिखाकर ललिता वापस लौट आती हैं। सामने अपनी देवरानी की घर की ओर इशारा करते हुए कहती हैं- मेरी सास अब उसी के घर रहती हैं।’ अब ललिता के देवरानी के घर पहुंचता हूं। आंगन में 65 साल की वैशाखी बाई बैठी हैं। नीचे चटाई पर बैठते हुए डबडबाई आंखों के साथ गोंडी भाषा में कहती हैं- मेरे सामने की बात है। गांव वाले पति की लाश कब्र से खोदकर कुत्ते की तरह घसीटते हुए ले गए। अब मैं कब्र पर नहीं जाती। जाती हूं तो कई दिन तक पति को याद करके रोती हूं। हाथ में पति की धुंधली सी पासपोर्ट साइज फोटो लिए वैशाखी बाई बताती हैं कि आज भी खेत में उनके कफन के फटे हुए टुकड़े पड़े हैं। अब तो केवल अपने बच्चों का सहारा है। मेरे पति को तो कब्र तक नसीब न हुई। लाश भी खोदकर ले गए। पास ही बैठी वैशाखी बाई की छोटी बहू ऊषा बीच में ही बोल पड़ीं, ‘10 साल पहले मेरी जेठानी ललिता ने ईसाई धर्म अपनाया था। मुझे बच्चे नहीं हो रहे थे, तो मुझे भी अपने साथ चर्च ले जाने लगीं। उसी साल मुझे बच्चा हुआ। तब से मैं भी ईसाई धर्म मानने लगी। मेरे गांव के लोगों को ईसाई धर्म से दिक्कत है।’ ऊषा की बात खत्म होते ही अब मैं अपने साथी को लेकर गांव की तरफ निकल पड़ता हूं। रास्ते में एक घर और उसके बरामदे पर बैठे कुछ लोग दिखाई पड़ते हैं। मैं रुककर इन लोगों से बात करने लगता हूं। ये सभी ‘ग्राम पटेल’ नाम के समूह के सदस्य हैं। यहां ग्राम पटेल कई पंचों का एक समूह को कहते हैं। इन्हीं में से एक हिरऊ राम सलाम छत्तीसगढ़ी जुबान में चमरा राम सलाम के बेटे सरपंच राजमन को गाली देते हुए कहते हैं- ‘हां, वह हमारा पट्टीदार है। सर, हम तो आदिवासी हिंदू हैं। शीतला माता की पूजा करते हैं, लेकिन उसका परिवार गलत रास्ते पर चल दिया। अपने देवी-देवता को छोड़कर ईसा-मसीह को मानने लगा। सिर्फ राजमन का भाई राम सिंह आदिवासी हिंदू धर्म मानता है। वह पिता का अंतिम संस्कार उसी के मुताबिक करना चाहता था, लेकिन नहीं करने दिया। उस परिवार के साथ जो हुआ, ठीक ही हुआ है। लेकिन आप यह सब क्यों पूछ रहे हैं? आपका कोई एजेंडा तो नही? आप भी ईसाई तो नहीं हैं?’ यह कहते हुए लोगों के बीच बैठे हिरऊ राम सलाम भड़क गए। बातचीत के लिए लगाया माइक निकालकर फेंकने लगे। गुस्से में उनकी आंखें लाल हो गईं। शायद शराब भी पी रखी है। बोले- अब आपसे बात नहीं करना चाहता। उनका गुस्सा शांत करने के लिए मैंने अपने हाथ में बंधा रक्षा-सूत्र कई बार दिखाया। मेरे साथ मौजूद लोकल ड्राइवर युवराज के माथे पर लगे चंदन को दिखाते हुए समझाया कि हम हिंदू हैं। तब जाकर वह फिर से बात करने के लिए तैयार हुए। वह कहते हैं- ‘देखिए सर, सरपंच राजमन के पिता चमरा राम सलाम तो मेरे चाचा थे। जब उनकी मौत हुई, तो हम लोगों ने कहा कि उनका अंतिम संस्कार हिंदू आदिवासी रीति-रिवाज से होना चाहिए। राम सिंह हिंदू धर्म मानता है। वही चाचा का अंतिम संस्कार करेगा, लेकिन वह नहीं माने। दरअसल, हमारे आदिवासी समाज में अंतिम संस्कार का एक रीति-रिवाज है। हम भी शव को दफनाते हैं, लेकिन कब्र खोदने से पहले जमीन पर दारू गिराते हैं। फिर तीन बार जमीन पर कुदाल मारी जाती है। उसके बाद कोई भी कब्र खोद सकता है। उसके बाद शव को शराब पिलाते हैं। आखिरी तौर पर दफनाने का काम मरे हुए आदमी की समधन करती है। लेकिन राजमन और उसका परिवार इस रिवाज के खिलाफ गया। हमें बिना बताए कब्र खोदी और चाचा का अंतिम संस्कार ईसाई रीति-रिवाज के मुताबिक किया। हम चाचा को इस तरह कभी भी अपने गांव में दफनाने नहीं देंगे।’ यह बातचीत चल ही रही थी कि हिरऊ राम सलाम मेरी गाड़ी में बैठे दो लड़कों देखकर फिर से भड़क जाते हैं। वे उन लड़को को पहचानते हैं। कुछ ही साल पहले ही दोनों लड़कों ने ईसाई धर्म अपनाया है। ये लड़के मुझे सरपंच राजमन सलाम के घर और अब हिरऊ राम सलाम तक लेकर पहुंचे हैं। हिरऊ राम सलाम और उनके साथ बैठे बाकी लोग दोनों लड़कों की ओर इशारा करते हुए कहते हैं, ‘आप इन लोगों को अपने साथ लेकर क्यों घूम रहे हो? आप झूठ बोल रहे हैं कि आप ईसाई नहीं हैं। दरअसल, आप लोग हमारे गांव में ईसाई धर्म का प्रचार कर रहे हैं। जल्दी से अपना मोबाइल निकालो। गांव में जिन भी परिवारों का वीडियो बनाया है, सारे डिलीट कर दो। नहीं तो वापस नहीं जा पाओगे’ इस हल्ला-गुल्ला के बीच अचानक दर्जनभर के करीब और लोग जमा हो जाते हैं। इस बीच हिरऊ राम सलाम की मोबाइल पर एक के बाद एक कॉल आने लगती हैं। वह अपने मोबाइल का स्पीकर ऑन कर देते हैं। कॉल पर एक आदमी बात करते हुए खुद को सरपंच बता रहा है। उसे सरपंच राजमन सलाम के फरार होने के बाद गांव वालों ने अस्थायी सरपंच चुना है। नाम है- श्याम सिंह सरफे। श्याम सिंह सरफे स्पीकर पर मुझसे कहते हैं, ‘थाने की परमिशन के बिना आपकी गांव में घुसने की हिम्मत कैसे हुई? आप ईसाई धर्म मानने वाले लोगों को लेकर गाड़ी में घूम रहे हैं? हम भी आ रहे हैं। जब तक हम पहुंचते नहीं। आप कहीं नहीं जाएंगे।’ उसके बाद वहां खड़े बाकी लोग मेरी गाड़ी को घेर लेते हैं। माहौल खराब होता देख मैं फौरन अपने मोबाइल, माइक समेटता हूं और अपनी गाड़ी में बैठ जाता हूं। गाड़ी का शीशा चढ़ाता हूं और अपने ड्राइवर युवराज साहू को इशार करके गाड़ी भगाने को कहता हूं। रास्ते में युवराज बताने लगते हैं, ‘सर, ये लोग जंगल से पता नहीं किस-किस तरह के जानवर मारकर खाते हैं। अगर कब्र में दफनाया गया शव निकाल सकते हैं, तो पता नहीं और क्या-क्या कर सकते हैं। यहां से जितना जल्दी हो निकल चलना बेहतर होगा। लोकल थाना भी इनसे मिला हुआ है।’ ड्राइवर की यह बात सुनते ही मेरा ध्यान अचानक आमाबेड़ा थाने के उस गेट की तरफ चला गया, जहां कुछ देर पहले वीडियो शूट करते वक्त तैनात सिपाही ने मुझसे मेरा धर्म पूछा था। मैंने उसे हिंदू होने की बात बताई थी। आगे पूछा था कि- ‘आप किस गांव में जा रहे हैं? हमें तो सरकार ने यहां मरने के लिए छोड़ दिया है।’ लेकिन मैं उसे बताए बगैर बड़े तेवड़ा गांव पहुंच गया था। ---------------------------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड-'तुम ईसाई बन गए, बाप की लाश नाले में बहाओ':22 दिन तक सड़ती रही लाश, सरपंच बोला- अंतिम संस्कार किया तो बीवी-बच्चों के बारे में सोच लेना कुछ देर तक शव देखते खड़े रहे, फिर कड़क आवाज में बोले- ‘देखो, तुम अपने बाप की लाश गांव के कब्रिस्तान में नहीं दफना सकते। वहां केवल दलित हिंदू ही शव दफना सकते हैं। तुम लोगों ने धर्म बदला है। इसलिए गांव के बाहर लाश दफनाओ'। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड-सुहागरात पर ड्रग्स लेने गया, रातभर नहीं लौटा:हर हफ्ते लड़कियां बदलता, सड़क पर अंडरवियर में मिला; नशे के लिए 25 लाख की नौकरी छोड़ी जुलाई 2022 की वो रात… जिस रात के लिए ज्यादातर लोग सपने बुनते हैं। उस दिन मेरी सुहागरात थी। कमरा सज चुका था। रिश्तेदार थककर सो गए थे। दुल्हन मेरे कमरे में इंतजार कर रही थी। मैं उसके कमरे में गया और उससे बात किए बिना बगल में लेट गया। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 21 May 2026 5:09 am

दिल्ली की सीक्रेट शुद्धिसभा, हर हफ्ते 400 हिंदू बन रहे:राजा मानसिंह के वंशज अनवर बने नरेश, हर साल 2.5 लाख घर वापसी का दावा

तारीख- 28 अप्रैल 2026, जगह- दिल्ली के कमला नगर का आर्य समाज मंदिर। मंदिर के कुंड से धुआं उठ रहा था। हवन की सौंधी खुशबू थी। हमने वही खड़े मंदिर के सेवादार से पूछा कि अभी हवन हुआ है क्या। उन्होंने जवाब दिया- हां, अभी-अभी शुद्धि हुई है। एक मुस्लिम लड़की ने हिंदू धर्म स्वीकार किया है। आर्य समाज में बताए तरीकों से उसकी वैदिक धर्म में वापसी कराई गई है। मंदिर से 50 मीटर दूर एक टूटा-फूटा कमरा है। बाहर सफेद रंग की नेम प्लेट लगी है, जिस पर लिखा है- शुद्धि सभा। कमरे के अंदर कुछ रैक हैं, जिनमें डॉक्यूमेंट्स का ढेर लगा है। इसमें शुद्धि यानी वैदिक धर्म में वापसी करने वालों का हिसाब-किताब है। पूजा-हवन के बाद पंडितजी बोले- अब लड़की हिंदू हुई शुद्धि कैसे होती है? इसके जवाब में मंदिर के सेवादार कहते हैं, ‘आप 15 मिनट पहले आतीं, तो शुद्धिकरण होते देख लेतीं।' उन्होंने हमें 18-20 मिनट की एक रिकॉर्डिंग दिखाई। इसमें एक लड़की दो महिलाओं के साथ थी। वैदिक मंत्रों के साथ हवनकुंड में आहुतियां देने के बाद पंडित जी ने लड़की के माथे पर रोली से तिलक लगाया। हाथ में कलावा बांधा। पूजा के बाद बोले- अब लड़की हिंदू हुई।‘ लड़की का नाम रीता (बदला हुआ नाम) रखा गया। उसने पंडित जी, सास और ननद के पैर छुए। एक सेवादार ने पीछे से कहा- ‘घर वापसी की बधाई।’ लड़की शांत थी, चेहर पर कृतज्ञता थी या दुविधा, ये नहीं पता, लेकिन हल्की सी मुस्कान जरूर थी। आर्य समाज मंदिर के बगल में शुद्धि सभा, हर हफ्ते करीब 400 शुद्धिकरणकमला नगर में कभी बिरला मिल चलती थी। अब बंद है। इसके नाम पर गली का नाम बिरला लेन हो गया। भीड़भाड़ वाला इलाका है, लेकिन शुद्धि सभा के बारे में पूछने पर लोग बगले झांकने लगते हैं। आर्यसमाज मंदिर के बारे में पूछेंगे, तो तुरंत बता देंगे। भारतीय हिंदू शुद्धि सभा भवन का 10 बाई 10 का ऑफिस है। अंदर एक टेबल, दो कुर्सियां और एक रैक रखी है। यही हमारी मुलाकात केयरटेकर से हुई, जो अपनी पहचान उजागर नहीं करना चाहते। वे बताते हैं, 'जिस दफ्तर से इतना बड़ा आंदोलन चल रहा है, उसका पता किसी को क्यों बताएं। हमेशा हमले का खतरा बना रहता है। हम प्रचार कम, काम ज्यादा पर भरोसा करते हैं।' वे ऑफिस की रैक में रखी एक फाइल निकालकर कुछ लिखने लगे। हमने पूछा कि ये रजिस्टर किसलिए है, इसमें क्या लिखा? जवाब मिला, ‘आज जो शुद्धिकरण कराया गया, उसकी एंट्री की है। लड़की मुस्लिम से हिंदू बनी है। उसकी होने वाली सास और ननद लेकर आए थे। वो हिंदू लड़के से शादी करना चाहती है, इसलिए मर्जी से हिंदू बनना स्वीकार किया।' उसके परिवार वाले नहीं आए? इस पर वे कहते हैं, ‘नहीं। मां राजी थी, लेकिन डर की वजह से साथ नहीं आई। घर वालों को पता चल जाएगा तो लड़की, लड़के और उनके परिवार को जान का खतरा हो जाएगा।’ क्या हर शुद्धिकरण की एंट्री होती है? जवाब मिला- ‘हां, डेटा तो रखना पड़ता है।‘ हफ्ते भर में कितने लोगों का शुद्धिकरण करवाते हैं? वे कहते हैं, ‘डेटा नहीं बता सकते, कॉन्फिडेंशियल है।‘ फिर बोले, ‘यही कोई 400 से 500 लोगों का शुद्धिकरण करते हैं । रोज कोई न कोई आता ही है। कोई अकेले आता है, कोई परिवार के साथ, कई परिवार एक साथ भी आ जाते हैं।‘ वे रजिस्टर दिखाने को तैयार हो गए, लेकिन फोटो या वीडियो लेने से मना कर दिया। रैक पर रखे रजिस्टरों में पिछले एक साल का रिकॉर्ड है। 1923 से शुरू हुई शुद्धि सभा, 30 हजार राजपूतों की घर वापसी इसके बाद हम भारतीय हिंदू शुद्धि सभा (BHSS) के महामंत्री सुभाष चंद्र दुआ से मिले। घर वापसी के इतिहास पर वे कहते हैं, ’देहरादून के रहने वाले मोहम्मद उमर, आर्यसमाज के संस्थापक दयानंद सरस्वती के संपर्क में आए। उन्होंने वैदिक धर्म में वापसी की इच्छा जताई। दयानंद जी ने उनका शुद्धिकरण किया और अलखधारी नाम दिया।’ ’अलखधारी बाद में सनातन के प्रचारक बने। तब शुद्धि आंदोलन की नींव रखी जा रही थी। दयानंद सरस्वती ने ऐसे बहुत से लोगों का शुद्धिकरण किया। वे 1875 से ये काम कर रहे थे।’ '25 फरवरी को स्वामी श्रद्धानंद जी ने आगरा के रायभा गांव में सबसे पहले शुद्धि की। एक साथ करीब 5 हजार लोगों ने सनातन में वापसी की। 1923 के आखिर तक ये आंकड़ा 30 हजार के पार हो गया। इसमें मलकाना राजपूतों ने बड़े स्तर पर घर वापसी की।' घर वापसी करने वालों की संख्या पूछने पर सुभाष कहते हैं कि हम सटीक आंकड़ा तो नहीं बता सकते। हमारे पास सब डाक्यूमेंटेड है। मोटे तौर पर हर साल करीब 2.5 लाख लोग घर वापसी करते हैं। इसमें मुस्लिम और ईसाई दोनों हैं। मुसलमान ज्यादा हैं। मलकाना राजपूतों के गांव में आज भी है शुद्धि मोहल्ला सुभाष की बातों की पुष्टि के लिए हम आगरा के रायभा गांव पहुंचे। यहां की बड़ी आबादी मलकाना राजपूत है। गांववाले कैमरे पर बोलने को तैयार नहीं हुए। कुछ लोगों ने बताया, ‘हम तो उस वक्त नहीं थे। पूर्वजों ने जरूर बताया था कि मुगलों के आक्रमण के वक्त जान बचाने के लिए हम हिंदू से मुसलमान बने, लेकिन बाद में शुद्धिकरण कर हिंदू बन गए।’ वे कहते हैं, ‘बेटे-बेटियों, नाती-पोतों की शादियां अब हिंदुओं में होती हैं। रिश्तेदार ये सब नहीं जानते। इतनी पुरानी बात बताने का मतलब भी नहीं। अगर ये खबर फैली, तो लोग हमारे हिंदू होने पर शक करेंगे। अगर सबूत चाहिए, तो यहां आज भी एक मोहल्ले का नाम शुद्धि है, जहां वैदिक रीति-रिवाज से हमारे पूर्वज हिंदू बने थे।‘ अमेरिका में बसे राजघराने के वंशजों की घर वापसी कराई भारतीय शुद्धि सभा के महामंत्री सुभाष चंद्र दुआ आगे बताते हैं, ‘जयपुर के महाराज मानसिंह का जिक्र आपने सुना होगा। वे मुगल सेना के साथ महाराणा प्रताप के खिलाफ लड़े थे। मुगलों ने उन्हें रियासत दी और वे मुसलमान बन गए। इनके वंशज अभी अमेरिका में रहते हैं। अनवर रजा और पत्नी जारा खान। दोनों 4 साल पहले वैदिक परंपरा में लौटे हैं।’ क्या आपने उनका शुद्धिकरण करवाया? सुभाष कहते हैं, ‘हां, अमेरिका में ही। शुद्धिकरण के बाद अनवर रजा नरेश सिंह राजपूत और पत्नी जारा खान अब जारा सिंह हो गई हैं। भारत ही नहीं विदेशों में भी हमारा बड़ा नेटवर्क है, खासकर दक्षिण अफ्रीका में।' नमाज छोड़ी, ध्यान सीखा, 4 साल पहले टेक्सास में हुई शुद्धि अनवर रजा से हिंदू बने नरेश सिंह राजपूत से हमने बात की। वे 1980 से अमेरिका में रह रहे हैं। नरेश बताते हैं, ‘मेरी पैदाइश पाकिस्तान के लाहौर की है। पिता कट्टर मुस्लिम थे। मुझे भी जमात-ए-इस्लामी पार्टी के मुखिया मौलाना मौदूदी के पास इस्लामी विचारधारा सीखने भेजते थे।‘ मेरे दादा खुद को पक्का मुसलमान नहीं मानते थे। मुझ पर उनका बहुत असर था। उन्होंने ही मुझे रामचंद्र और रानी लक्ष्मीबाई के बारे में बताया। उन साहित्यों के बारे में जाना, जो हिंदू संस्कृति का हिस्सा है। क्या दादा से आपको परिवार के इतिहास के बारे में पता चला। इस पर वे कहते हैं, ‘नहीं, सीधा तो नहीं। उन्होंने पापा को जो फैमिली ट्री दिया था, उसे उर्दू से अंग्रेजी में अनुवाद किया, तब मिर्जा राजा मानसिंह के बारे में पता चला। ये राजस्थान के आमेर के 29वें कछवाहा राजा थे और मुगल शासक अकबर के खास थे। हमारे पूर्वज उनकी सेना में थे।‘ ‘उन्हें और हमारे परिवार को मुस्लिम बनने पर किस चीज ने मजबूर किया होगा, इसका जवाब तो नहीं मिलेगा। हालांकि, यहीं से मुझे अपनी जड़ों की ओर लौटने का पहला इशारा मिला। मैंने नॉनवेज खाना छोड़ दिया। नमाज बंद कर दी। मन की शांति के लिए विपश्यना की और ध्यान करना सीखा।‘ ‘मैं मन ही मन सनातन में वापसी तो चाहता था, लेकिन रास्ता समझ नहीं आ रहा था। इसी दौरान मेरी सोशल मीडिया पोस्ट पढ़कर भारतीय हिंदू शुद्धि सभा के एक कार्यकर्ता ने मुझसे संपर्क किया। मैंने अपने बारे में सब बताया और पूछा कि क्या मैं दोबारा हिंदू बन सकता हूं। इसके बाद आर्यसमाज के एक कार्यकर्ता ने यहीं टेक्सास में ही वैदिक रीति रिवाज से मेरी शुद्धि करवाई।‘ आपकी पत्नी ने भी स्वीकार किया? जवाब मिला- ‘हां, हमने एक साथ ही घर वापसी की। वो अभी ब्रह्मकुमारी संस्था की कार्यकर्ता हैं। शादी के वक्त मैं मुस्लिम था, तो मुस्लिम से ही शादी की थी, लेकिन पत्नी ने मुझे ध्यान, विपश्यना करते देख ये सब करने की इच्छा जताई।‘ परिवार ने विरोध नहीं किया? नरेश कहते हैं, ‘ये सब अचानक नहीं किया। मैं धीरे-धीरे इस्लाम छोड़ ही रहा था। मेरा खान-पान, पूजा-पद्धति सब पहले ही बदल चुका था। बस नाम बदलना बाकी था। करीब 4 साल पहले शुद्धिकरण के जरिए ये भी हो गया।‘ बच्चे कौन सा धर्म मानते हैं? वे कहते हैं, ‘जारा और मेरे बच्चे नहीं हैं। मेरी पत्नी की पहली शादी से तीन बच्चे हैं। इनमें से दो इस्लाम मानते हैं और एक नास्तिक है।‘ कानूनी तरीके से होता है धर्म परिवर्तन शुद्धि सभा के केयरटेकर के मुताबिक, आर्य समाज रजिस्टर्ड गैर सरकारी संगठन है। घर वापसी के इच्छुक या उनके संबंधी आवेदन करते हैं। आवेदन करने वाले बालिग हैं या नहीं, इसके लिए मैट्रिक सर्टिफिकेट या एफिडेविट लगता है। उसे नया नाम देकर साइन या अंगूठा लगवाया जाता है। ये पूरी कानूनी प्रक्रिया है, इसमें डर और दबाव नहीं है। केयरटेकर बताते हैं, ‘हम व्यक्ति की प्राइवेसी और सुरक्षा को देखते हुए, धर्म बदलने वाले के डाक्यूमेंट किसी से शेयर नहीं करते। दो साल पहले एक लड़की ने यहां धर्म बदला था। न जाने कैसे उसके घरवालों को पता चला और लड़की की हत्या कर दी गई, इसलिए हम सबकुछ कॉन्फिडेंशियल रखते हैं।‘ ………………..ये खबर भी पढ़ें… TCS केस- हिंदुओं को नमाज पढ़ाने वाला तौसीफ मास्टरमाइंड 26 मार्च से 3 अप्रैल 2026 के बीच नासिक में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) की 9 महिला कर्मचारियों ने FIR दर्ज कराई। 9 में से 6 FIR में TCS नासिक के टीम लीडर तौसीफ अत्तार का नाम है। तौसीफ पर सेक्शुअल हैरेसमेंट, जबरन धर्म परिवर्तन और वर्कप्लेस पर डराने-धमकाने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 21 May 2026 5:06 am

संतुलित वैश्विक स्वास्थ्य विकास को बढ़ावा देना आवश्यक: 79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा में चीन के प्रतिनिधि

वैश्विक स्वास्थ्य शासन प्रणाली के सुधार में सदस्य देशों के नेतृत्व का पालन करना, विकासशील देशों की आवाजों और जरूरतों पर ध्यान देना और संतुलित वैश्विक स्वास्थ्य विकास को बढ़ावा देना आवश्यक है।

देशबन्धु 21 May 2026 3:32 am

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने लाइबेरिया की विदेश मंत्री के साथ वार्ता की

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने 19 मई को पेइचिंग में लाइबेरिया की विदेश मंत्री सारा बेयसोलो न्यांती के साथ वार्ता की।

देशबन्धु 21 May 2026 3:30 am

भारत-इटली ने 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार 20 अरब यूरो तक पहुंचाने पर जताई सहमति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने बुधवार को भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का लाभ उठाकर वर्ष 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो तक पहुंचाने पर सहमति जताई।

देशबन्धु 21 May 2026 3:10 am

अमेरिका में 18 ट्रिलियन डॉलर के निवेश का दावा, ट्रंप बोले- देश में आएगा मैन्युफैक्चरिंग बूम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को दावा किया कि अमेरिका में करीब 18 ट्रिलियन डॉलर का निवेश आ रहा है और देश जल्द ही विनिर्माण क्षेत्र में अभूतपूर्व उछाल देखने वाला है।

देशबन्धु 21 May 2026 3:00 am

शी चिनफिंग ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ वार्ता की

चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने चीन की राजकीय यात्रा पर आए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ पेइचिंग के जन वृहद भवन में वार्ता की। दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने चीन और रूस के बीच अच्छे पड़ोसी और मैत्रीपूर्ण सहयोग संधि को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।

देशबन्धु 21 May 2026 2:55 am

चीन के प्रति सक्रिय राय वाले अमेरिकी लोगों की संख्या बढ़ी

अमेरिका के निर्दलीय मतदान संगठन प्यू रिसर्च सेंटर ने हाल में एक रिपोर्ट जारी की। इसमें कहा गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा के मौके पर चीन के प्रति अमेरिकी जनता की राय में सुधार हुआ

देशबन्धु 20 May 2026 11:42 pm

चीनी राज्य परिषद के प्रवक्ता ने थाईवान के नेता के बयान के बारे में रुख प्रकट किया

चीनी राज्य परिषद के थाईवान कार्यालय के प्रवक्ता छन पिनहुआ ने थाईवान के नेता के बयान के बारे में रुख प्रकट किया।

देशबन्धु 20 May 2026 10:37 pm

ईरान के साथ बातचीत उम्मीद से ज्यादा लंबी चल रही : ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के साथ चल रही बातचीत उम्मीद से ज्यादा लंबी खिंच रही है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि कूटनीतिक प्रयास विफल होते हैं तो अमेरिका कड़े विकल्पों पर भी विचार कर सकता है।

देशबन्धु 20 May 2026 10:29 pm

आज का एक्सप्लेनर:5 देशों से क्या लेकर लौट रहे पीएम मोदी; UAE तेल रिजर्व भरेगा, नीदरलैंड्स से चीन का काउंटर, मेलोनी से भी डील

PM मोदी 15 मई की सुबह नई दिल्ली से UAE के लिए निकले थे। फिर नीदरलैंड्स, स्वीडन, नॉर्वे होते हुए इटली पहुंचे। वे 6 दिनों के भीतर 5 देशों का दौरा कर 21 की सुबह दिल्ली लौट आएंगे। करीब 140 घंटे के इस मैराथन दौरे से क्या-क्या लेकर लौटे पीएम मोदी और भारत के लिए उसके मायने क्या हैं; आज के एक्सप्लेनर में… पहला पड़ाव था- UAE। मोदी यहां करीब 3 घंटे रुके। राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद से मुलाकात की। इस दौरान 7 MoU साइन किए, इसमें सबसे अहम था- स्ट्रैटजिक पेट्रोलियम रिजर्व एग्रीमेंट। इसके तहत UAE की अबुधाबी नेशनल ऑइल कंपनी अब भारत के स्ट्रैटजिक तेल भंडारों में 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल स्टोर करेगी। जंग के हालात या सप्लाई रुकने पर इस रिजर्व पर पहला हक भारत का होगा। UAE इस रिजर्व का किराया भी भरेगा। फिलहाल भारत के पास कर्नाटक और आंध्रप्रदेश में 3 स्ट्रैटजिक ऑइल रिजर्व है। इनकी क्षमता 53.3 लाख मीट्रिक टन है, यानी इनमें करीब 4 करोड़ बैरल तेल स्टोर हो सकता है। ओडिशा के चंदीखोल में नया रिजर्व और कर्नाटक के पादुर में रिजर्व क्षमता बढ़ाई जा रही है। भारतीय रिजर्व के अलावा, UAE के फुजैराह में भी भारत के लिए पेट्रोलियम रिजर्व करने की व्यवस्था की जाएगी। इस डील के मायने UAE से 2 और अहम डील दूसरा स्टॉप था- नीदरलैंड्स। वो यहां 15 मई की रात करीब 9 बजे पहुंचे और डेढ़ दिन रुके। उन्होंने नीदरलैंड्स के राजपरिवार और प्रधानमंत्री रॉब जेटेन से मुलाकात की। इस दौरान 17 MoU साइन हुए। इनमें 2 मुख्य हैं- 1. चिप-मेकिंग डील 2. क्रिटिकल मिनरल सपोर्ट नीदरलैंड्स से 2 और डील हुई तीसरे पड़ाव के लिए मोदी 17 मई को स्वीडन पहुंचे। उन्हें स्वीडन के सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार’ से सम्मानित किया गया। मोदी ने स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन से मुलाकात की और स्ट्रैटेजिक साझेदारी के 6 समझौते किए। इसमें अगले 5 साल में कारोबार दोगुना करने जैसी बाते हैं। एक बड़ा डेवलपमेंट जरूर दिखा। स्वीडन में मोदी से यूरोपियन यूनियन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने वादा किया कि साल के अंत तक वो भारत और EU के बीच तय हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर साइन कर देंगी। लेयेन ने जब गणतंत्र दिवस पर भारत का दौरा किया था, तब 27 जनवरी को इस समझौते की घोषणा हुई थी। मोदी और लेयेन ने इसे 'मदर ऑफ ऑल डील्स' नाम दिया था। इस डील के तहत यूरोप से आने वाले करीब 96.6% चीजों से टैरिफ पूरी तरह हटा दिया जाएगा या बहुत कम कर दिया जाएगा। ऐसा ही यूरोप ने भी भारत से आने वाले 99.5% सामान पर होगा। चौथे पड़ाव नॉर्वे था, जहां मोदी 18 मई को पहुंचे। आखिरी बार 1983 में इंदिरा गांधी नॉर्वे गईं थी। अब 43 साल बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने नॉर्वे की यात्रा की है। कुल 12 मुद्दों पर समझौते हुए। इसमें सबसे जरूरी है- ग्रीन स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप। इसके तहत नॉर्वे, भारत के क्लीन एनर्जी प्रोजेक्ट में निवेश करेगा। क्लीन एनर्जी यानी ऐसी ऊर्जा, जिससे पर्यावरण को नुकसान नहीं होता। जैसे- सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जलविद्युत, परमाणु ऊर्जा। नॉर्वे की करीब 98% बिजली आपूर्ति क्लीन एनर्जी से ही होती है। भारत का लक्ष्य 2030 तक 500 गीगावाट क्लीन एनर्जी उत्पादन करना है। अप्रैल 2026 तक सिर्फ 283.46 गीगावाट तक की क्षमता इंस्टॉल हुई है। यानी टारगेट से लगभग आधी। यूरोप का सबसे बड़ा तेल उत्पादक है नॉर्वे, भारत LPG खरीद रहा नॉर्वे तीन तरफ से समुद्र से घिरा है। यह नॉर्वेजियन सागर और बारेंट्स सागर से तेल निकालता है। नॉर्वे हर दिन करीब 2 मिलियन बैरल कच्चे तेल का उत्पादन करता है और यूरोप का सबसे बड़ा तेल उत्पादक है। इसका 90% एक्सपोर्ट कर देता है। ज्यादातर तेल यूरोपीय देशों को ही बेचता है। भारत कई मौकों पर नॉर्वे से छोटी खेपों में तेल खरीद भी चुका है। ईरान जंग शुरू होने के बाद से भारत ने नॉर्वे से LPG की खरीद भी बढ़ाई है। इंडिया-नॉर्वे बिजनेस समिट के दौरान नॉर्वे की सबसे बड़ी तेल कंपनी एक्विनॉर भी शामिल हुई थी। इससे पहले 2024 में भी एक्विनॉर से भारत के स्ट्रैटजिक रिजर्व के लिए कच्चा तेल खरीदने की खबरें आई थी। भारत भविष्य में भी नॉर्वे से तेल खरीदने के विकल्प तलाश सकता है। पत्रकार के सवाल का जवाब न देने पर विवाद राजधानी ऑस्लो में मोदी और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे ने जॉइंट प्रेस ब्रीफिंग की थी। जब वह कॉन्फ्रेंस से जाने लगे तो एक महिला पत्रकार ने पूछा, ‘आप दुनिया की सबसे आजाद प्रेस के सवालों के जवाब क्यों नहीं देते?’ पीएम उन्हें जवाब दिए बिना चले गए तो पत्रकार हेली लिंग ने यह वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया। इसके बाद विदेश मंत्रालय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई और हेली को इसमें अपने सवाल पूछने को कहा। यहां भी विदेश मंत्रालय में पश्चिम मामलों के सचिव सिबी जॉर्ज और हेली के बीच बहस हुई। यूरोप दौरे के आखिरी पड़ाव के लिए मोदी 19 मई को इटली पहुंचे। जहां उन्होंने प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात की। इटली में दोनों नेता एक ही कार में घूमे और 2000 साल पुराने कोलोजियम में सेल्फी ली। मोदी ने मेलोडी टॉफी भी गिफ्ट की। भारत और इटली के बीच कई समझौते हुए, इनमें से 2 प्रमुख हैं- 1. IMEC से ट्रेड कनेक्टिविटी इंडिया मिडिल ईस्ट यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर यानी IMEC को आगे बढ़ाने पर दोनों देश सहमत हुए हैं। IMEC की घोषणा 9 सितंबर 2023 को दिल्ली में G20 समिट के दौरान हुई थी। ये प्रोजेक्ट भारत को मिडिल ईस्ट और यूरोप से रेलवे, पोर्ट और शिपिंग नेटवर्क के जरिए जोड़ने का प्लान है। IMEC क्यों अहम? 2. AI, टेक्नोलॉजी और साइबर सिक्योरिटी मोदी ने कहा, ‘भारत का डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और इटली की इंडस्ट्रियल टेक्नोलॉजी को जोड़कर नई टेक्नोलॉजी और इनोवेशन इकोसिस्टम बनाया जाएगा। दोनों देश जिम्मेदार और सुरक्षित AI डेवलपमेंट पर भी साथ काम करेंगे। इसके अलावा भारत और इटली 2029 तक आपसी व्यापार को 20 अरब यूरो से ज्यादा तक ले जाने का लक्ष्य बनाया है। फिलहाल भारत-इटली के बीच 14 अरब यूरो यानी 1.60 लाख करोड़ का व्यापार है। दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'स्पेशल स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' का दर्जा देने का फैसला किया है। मोदी ने मेलोनी को भारत आने का न्योता भी दिया। ***** रिसर्च सहयोग - प्रथमेश व्यास------------------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… मेलोनी के पिता ड्रग तस्करी में जेल गए, खुद बारटेंडर रहीं; कैसे बनीं इटली की पहली महिला पीएम, इटली में मोदी से हुई मुलाकात कभी ट्रम्प ने बीच भाषण रोककर खूबसूरती की तारीफ की, कभी अल्बानिया के पीएम ने घुटने पर बैठकर स्वागत किया। मोदी के साथ सेल्फी ली तो #Melodi ट्रेंड हो गया। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी जब भी किसी विदेशी नेता से मिलती हैं, वो मुलाकात मोमेंट बन जाती है। आज पीएम मोदी से फिर उनकी मुलाकात हुई है। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 20 May 2026 6:23 pm

बीजिंग में पुतिन-जिनपिंग की अहम मुलाकात, ईरान युद्ध से लेकर ऊर्जा साझेदारी तक कई मुद्दों पर चर्चा; 40 समझौतों पर साइन होंगे

बीजिंग स्थित ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में शी जिनपिंग ने पुतिन का औपचारिक स्वागत किया। दोनों नेता रेड कार्पेट पर साथ चलते नजर आए, जबकि सैन्य बैंड ने रूस और चीन के राष्ट्रगान बजाए। इस दौरान दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद रहे।

देशबन्धु 20 May 2026 11:47 am

'बातचीत का इंतजार है', द्विपक्षीय चर्चाओं से पहले रोम में प्रधानमंत्री मोदी ने की मेलोनी से मुलाकात

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से मुलाकात की है। दोनों नेताओं ने डिनर पर मुलाकात के दौरान अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा की। इसके बाद उन्होंने रोम के प्रतिष्ठित कोलोसियम का भी दौरा किया

देशबन्धु 20 May 2026 10:01 am

शी जिनपिंग ने दिलाया भरोसा, ईरान को हथियार सप्लाई नहीं कर रहा है चीन - ट्रंप

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि बीजिंग ईरान को हथियार सप्लाई नहीं कर रहा है

देशबन्धु 20 May 2026 9:00 am

जेडी वेंस की ईरान को चेतावनी, डील नहीं हुई तो फिर शुरू हो सकता है सैन्य अभियान

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि डोनाल्‍ड ट्रंप की सरकार ईरान के साथ गंभीर और लगातार बातचीत कर रही है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अगर तेहरान न्यूक्लियर हथियार हासिल करने से रोकने वाली डील पर सहमत नहीं होता है, तो अमेरिका मिलिट्री ऑपरेशन को फिर से शुरू करने के लिए तैयार है।

देशबन्धु 20 May 2026 8:50 am

प्रधानमंत्री मोदी की इटली के कलाकारों ने जमकर की प्रशंसा, बोले- यादगार रहा अनुभव

पांच देशों की अपनी यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इटली पहुंचे हैं। यहां भारतीय नागरिकों के साथ-साथ इटली के लोग भी उनका स्वागत करने पहुंचे

देशबन्धु 20 May 2026 8:41 am

“आपका स्वागत है, मेरे दोस्त!” मेलोनी ने मोदी का किया गर्मजोशी से स्वागत

इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने मंगलवार रात रोम पहुंचने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। पीएम मोदी अपने पांच देशों के दौरे के आखिरी चरण में इटली पहुंचे हैं।

देशबन्धु 20 May 2026 8:25 am

वंदे भारत से 5 घंटे में जम्मू से श्रीनगर:855 रुपए किराया, सुरक्षा में CORAS कमांडो; यूरोप सा नजारा, सेब कारोबारी खुश

जावेद के ससुर की सर्जरी होनी थी। इसके लिए चंडीगढ़ जाना था। जावेद कश्मीर के पुलवामा में रहते हैं। कश्मीर से चंडीगढ़ तक पहुंचने के लिए जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे (NH-44) ही इकलौता रास्ता है। वो भी लैंडस्लाइड या बर्फबारी की वजह से अक्सर बंद हो जाता है। इसे ध्यान में रखकर जावेद सर्जरी से कुछ दिन पहले ही चंडीगढ़ के लिए निकल गए। 50 किमी दूर काजीगुंड पहुंचकर पता चला कि रामबन के पास रास्ता बंद है। दिक्कत तब बढ़ गई, जब सर्जरी की तारीख पास आने लगी और रास्ता नहीं खुला। अब फ्लाइट टिकट बुक कराने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा। परिवार के चार-पांच लोगों के टिकट का खर्च लगभग सर्जरी के खर्च के बराबर हो गया। जावेद अहमद की ये कहानी 2023 है। 30 अप्रैल से पहले तक यही परेशानी कश्मीर में रहने वालों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा थी। अब जम्मू ट्रेन के जरिए सीधे कश्मीर घाटी से जुड़ गया है। उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना के तहत जम्मू से श्रीनगर तक वंदे भारत एक्सप्रेस चलने से घाटी में बदलाव दिख रहा है। लोकल लोगों की बात…20 दिन में दो बार सफर किया, सिर्फ हजार रुपए खर्च हुए जम्मू-श्रीनगर के बीच 270 किमी की दूरी है। यहां रोड कनेक्टिविटी हमेशा बड़ी चुनौती रही है। अब जावेद कहते हैं, ‘अगर तीन साल पहले ट्रेन की सुविधा होती तो हम इतने बड़े खर्च और परेशानी से बच सकते थे। हम जैसे उन मिडिल क्लास परिवारों के लिए ये बड़ी राहत है, जो हवाई सफर या महंगी रोड ट्रिप पर खर्च नहीं कर सकते हैं।’ ट्रेन चलने के बाद दो बार सफर कर चुका हूं। महज हजार रुपए में सुबह घर से निकलकर शाम तक लौट आया। पैसा और समय दोनों बचा। जावेद बताते हैं कि सर्दियों में रामबन, बनिहाल और रामसू जैसे इलाकों में लैंडस्लाइड और बर्फबारी होने से सड़क कई दिनों या हफ्तों तक बंद रहती थी। इससे न सिर्फ काम रुकता था, बल्कि कश्मीर में जरूरी सामानों की भी कमी हो जाती थी। अब सड़कें जरूर पहले से बेहतर हुई हैं। हाईवे फोर-लेन और टनल से लैस हैं, लेकिन ट्रेन का सफर ज्यादा आसान, सस्ता और भरोसेमंद है। बाहर पढ़ रहे 70 हजार स्टूडेंट्स के लिए सफर आसान हुआ जम्मू-कश्मीर के करीब 70 हजार स्टूडेंट दिल्ली, चंडीगढ़ और देश के बाकी शहरों में रहकर पढ़ रहे हैं। दिल्ली यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट श्रीगुफवारा के रहने वाले मोहम्मद आमिर कहते हैं, ‘पहले सर्दी या बारिश में जब NH-44 बंद हो जाता, तो मजबूरी में हवाई सफर करके घर जाना पड़ता था। अब घर आने-जाने से पहले सोचना नहीं पड़ेगा।‘ आमिर सरकार से अनंतनाग में ट्रेन के स्टॉपेज की मांग भी करते हैं। वे कहते हैं कि इससे साउथ कश्मीर में अनंतनाग, कुलगाम, पुलवामा और शोपियां जिलों के स्टूडेंट्स को सीधा फायदा मिलेगा। अमरनाथ यात्रियों के लिए अनंतनाग में स्टॉपेज की मांग साउथ कश्मीर के लोग भी अनंतनाग में वंदे भारत ट्रेन के स्टॉपेज की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे अनंतनाग धार्मिक पर्यटन का बड़ा ट्रांजिट हब बन सकता है। अमरनाथ यात्रियों और इलाके के टूरिज्म को भी फायदा होगा। अमरनाथ यात्रियों के लिए अनंतनाग पारंपरिक बेस कैंप का मुख्य प्रवेश द्वार है। यहां ट्रेन रुकने से यात्रियों के सफर का समय और खर्च दोनों कम होगा। यात्रियों की आवाजाही से होटल, रेस्त्रां, टैक्सी ऑपरेटर और छोटे व्यापारियों को भी फायदा मिलेगा। फल कारोबारियों की बात…अब सेब सड़ेंगे नहीं, ढुलाई भी सस्ती हुई एशिया की दूसरी सबसे बड़ी सोपोर फ्रूट मंडी के अध्यक्ष फैयाज अहमद भट कहते हैं, ‘पहले सड़क के रास्ते दिल्ली तक एक सेब की पेटी 100–130 रुपए में भेजते थे। ट्रेन से ये लागत घटकर 30-45 रुपए रह गई है।‘ फैयाज के मुताबिक, ये सेक्टर हर साल करीब 10 हजार करोड़ रुपए का कारोबार करता है। इससे लगभग 7 लाख परिवारों की रोजी-रोटी जुड़ी है और करीब 35 लाख लोगों को रोजगार देता है।‘ वे आगे कहते हैं, ‘पिछले साल सेब के सीजन में NH-44 काफी दिनों तक बंद रहा और हमें 2 हजार करोड़ रुपए का नुकसान झेलना पड़ा। ये रास्ता लैंडस्लाइड के चलते 7 साल में 284 दिनों तक बंद रहा है। इससे सप्लाई चेन प्रभावित हुई। जब ट्रक रास्ते में फंसते हैं, तो माल ढुलाई का खर्च बढ़ता है और किसानों की कमाई घट जाती है।‘ ’रेल से फलों का ट्रांसपोर्ट किफायती है, लेकिन इसके लिए बेहतर इंतजाम जरूरी है। बुकिंग सीधे रेलवे से हो ताकि आम लोगों को फायदा मिले। एजेंट सक्रिय हुए तो ना ट्रांसपेरेंसी रहेगी, मोनोपोली अलग हो जाएगी। अभी फलों के लिए भी सीमेंट ढोने वाले वैगन इस्तेमाल हो रहे हैं, जो सही नहीं हैं।’ पर्यटकों की बात…कश्मीर में यूरोप सा नजारा, 10-12 घंटे का सफर 5 घंटे में पिछले 13 साल से परिवार के साथ कश्मीर घूमने आ रहे गणेश उंडाले कहते हैं, ‘रेलवे ने पूरा सफर ही बदल दिया। पहले मुंबई से जम्मू और फिर सड़क के रास्ते श्रीनगर पहुंचने में वक्त और पैसा दोनों लगता था। अब ट्रेन का किराया क्लास के हिसाब से 855 से 1600 रुपए तक है, जबकि टैक्सी का खर्च 7 से 8 हजार रुपए तक पहुंच जाता है।’ ’रोड के बजाय ट्रेन से सफर ज्यादा सेफ है। स्टेशनों पर एयरपोर्ट जैसा सिक्योरिटी चेक होता है। जम्मू से श्रीनगर का सफर सिर्फ 5 घंटे में तय हो जाता है। रोड ट्रिप की तुलना में 5-7 घंटे बचते हैं। फिर कश्मीर में ट्रेन जब पहाड़ों और खूबसूरत वादियों से गुजरती है, तो यूरोप की खूबसूरती को भी टक्कर देती है। चिनाब रेलवे ब्रिज से गुजरना एक्सपीरियंस को और खास बनाता है।’ ट्रेन की सुरक्षा के लिए CORAS कमांडो जम्मू-श्रीनगर वंदे भारत एक्सप्रेस देश के सबसे संवेदनशील इलाकों से गुजरती है। इस रेल रूट की कई जगहें आतंकियों के निशाने पर रही हैं। भारतीय रेलवे और सुरक्षा एजेंसियां इसीलिए ट्रेन को हाई-सिक्योरिटी इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की तरह देख रही हैं। यात्रियों की सुरक्षा के लिए इंतजाम: ……………. ये खबर भी पढ़ें… कैसे बना चिनाब रेलवे ब्रिज, 10 पुलों के बराबर लगा लोहा जम्मू और पीर-पंजाल में पहाड़ियों पर बना है दुनिया का सबसे ऊंचा आर्च ब्रिज। 16 साल में 1486 करोड़ रुपए की लागत से बना ये ब्रिज इंजीनियरिंग का शानदार नमूना तो है ही, भारतीय रेलवे के लिए भी अब तक का सबसे चैलेंजिंग प्रोजेक्ट रहा है। दैनिक भास्कर आपको बता रहा है इस ब्रिज की पूरी कहानी, वो भी ग्राउंड जीरो से। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 20 May 2026 5:11 am