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Nepal Sunsari Violence Update: भारत सीमा से सटे नेपाल के सुनसरी जिले में सांप्रदायिक हिंसा; 1 व्यक्ति की मौत के बाद 5 इलाकों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू, भारी सुरक्षा बल तैनात

भारत के बिहार राज्य की सीमा से सटे नेपाल के कोशी प्रांत स्थित सुनसरी जिले में अचानक उपजे सांप्रदायिक तनाव के बाद हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। जिले के देवानगंज ग्रामीण नगरपालिका-3 के कप्तानगंज इलाके में दो समुदायों के बीच शुरू हुआ आपसी विवाद देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। स्थिति पर काबू पाने और भीड़ को तितर-बितर करने के लिए सुरक्षा बलों को कार्रवाई करनी पड़ी, जिसमें गोली लगने से एक 24 वर्षीय युवक की मौत हो गई, जबकि पुलिसकर्मियों समेत एक दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए। घटना के बाद से पूरे इलाके में तनाव है और प्रशासन ने एहतियात के तौर पर जिले के पांच प्रमुख बाजार क्षेत्रों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लागू कर दिया है।लाउडस्पीकर और धार्मिक झंडों को लेकर शुरू हुआ था विवादप्राप्त जानकारी के अनुसार, हिंसा की शुरुआत देवानगंज-3 के कप्तानगंज बाजार इलाके से हुई। रविवार देर रात वहां दो अलग-अलग धार्मिक समूहों के लोग अपने-अपने कार्यक्रमों में शामिल थे। एक तरफ तीर्थयात्रा जुलूस के दौरान डीजे और लाउडस्पीकर का तेज आवाज में इस्तेमाल किया जा रहा था, जिस पर दूसरे पक्ष ने आपत्ति जताई। इसके अलावा क्षेत्र में लगे बिजली के खंभों पर धार्मिक झंडे हटाने और लगाने को लेकर भी कहासुनी शुरू हुई। मामूली बहस से शुरू हुआ यह विवाद जल्द ही पत्थरबाजी, आगजनी और तोड़फोड़ में बदल गया। उग्र भीड़ ने कई दुकानों, वाहनों और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया, जिससे अफरा-तफरी मच गई।पुलिस कार्रवाई में युवक की मौत, दर्जनों घायलउपद्रवियों को नियंत्रित करने के लिए मौके पर पहुंची पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल (APF) ने पहले आंसू गैस के गोले छोड़े और चेतावनी के तौर पर हवाई फायरिंग की। हालांकि, जब स्थिति और बिगड़ने लगी तो सुरक्षा बलों को सीधी गोलीबारी करनी पड़ी। इस दौरान कप्तानगंज निवासी 24 वर्षीय ओम प्रकाश मेहता को गोली लगी और उनकी मौत हो गई। इस हिंसक झड़प और पुलिस कार्रवाई के दौरान थाना प्रभारी (इंस्पेक्टर) समेत करीब 10 से अधिक सुरक्षाकर्मी और कई स्थानीय लोग घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।इन 5 प्रमुख इलाकों में लागू हैं कड़े प्रतिबंधतनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन अधिकारी ईश्वरी प्रसाद अर्याल ने धारा 6(क) के तहत निषेधाज्ञा और अनिश्चितकालीन कर्फ्यू का आदेश जारी किया। वर्तमान में सुनसरी के निम्नलिखित क्षेत्रों में यह पाबंदियां प्रभावी हैं:हरिनगरा बाजारभुटाहा बाजारकप्तानगंज बाजारघुस्की बाजारदेवानगंज बाजारकर्फ्यू के तहत 4 या उससे अधिक लोगों के एक जगह इकट्ठा होने, किसी भी तरह की रैली, जुलूस, विरोध-प्रदर्शन या सार्वजनिक सभा आयोजित करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। इसके अलावा धार्मिक, सामाजिक व सांस्कृतिक आयोजनों में डीजे (DJ) और लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। सुनसरी में हुई हिंसा के बाद पड़ोसी जिले मोरंग में भी एहतियात के तौर पर डीजे साउंड सिस्टम पर बैन लगा दिया गया है।राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया और निष्पक्ष जांच की मांगप्रशासनिक स्तर पर शांति बहाली के प्रयास जारी हैं। जिला अधिकारी ने राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों और नागरिक समाज के सदस्यों के साथ बैठक कर सौहार्द्र बनाने की अपील की है। वहीं, नेपाल की सत्तारूढ़ राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) के अध्यक्ष रवि लामिछाने ने इस पूरी घटना पर दुख व्यक्त करते हुए मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि घटना के दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए, मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए और सभी घायलों का मुफ्त इलाज सुनिश्चित किया जाए। भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में सुरक्षा बलों द्वारा गश्त बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह की अफवाह या अप्रिय घटना को रोका जा सके।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jul 2026 11:02 pm

ट्रंप से मिलेंगे जेलेंस्की और नेतन्याहू, यूक्रेन युद्ध और ईरान संकट पर होगी अहम बातचीत

यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ऐसे समय ट्रंप से मुलाकात कर रहे हैं, जब रूस की ओर से यूक्रेन के कई इलाकों में लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले किए जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, जेलेंस्की इस बैठक में अमेरिका से पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और उसके उत्पादन में सहयोग की मांग कर सकते हैं।

देशबन्धु 28 Jul 2026 8:21 pm

'पैलेट गन किसने चलवाई', प्रियंका के सवाल पर हंगामा:अखिलेश ने कहा- झुकती है सरकार, झुकाने वाला चाहिए; सत्तापक्ष-विपक्ष का हुआ आमना-सामना

करीब एक सप्ताहभर लगातार गतिरोध के बाद मंगलवार को लोकसभा में आखिरकार नीट पेपर लीक और लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू हुई। हालांकि चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप, तंज और नोकझोंक का दौर चलता रहा। सुबह 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने आंदोलनकारी छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही पहले दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। इससे पहले सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा की अवधि को लेकर सहमति बनी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि पहले छह घंटे की चर्चा तय हुई थी, फिर इसे 8 घंटे किया गया और यदि विपक्ष चाहे तो सरकार 10 घंटे तक चर्चा कराने को भी तैयार है। जितेंद्र सिंह ने बताया क्यों जरूरी है नया कानून दोपहर 2 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि 2024 के कानून को और प्रभावी बनाने के लिए संशोधन लाया गया है ताकि संगठित परीक्षा माफिया पर तेजी से कार्रवाई हो सके। गौरव गोगोई ने पूछा- दो साल पहले वाला कानून क्यों फेल हुआ? सरकार की दलीलों का जवाब देते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि 2024 में भी सरकार ने इसी तरह दावा किया था कि अब पेपर लीक नहीं होगा, लेकिन 2026 में फिर नीट परीक्षा लीक हो गई। उन्होंने कहा कि यदि पिछला कानून प्रभावी था तो नया संशोधन लाने की जरूरत क्यों पड़ी। गोगोई ने कहा कि 2024 के मामले में गिरफ्तार अधिकांश आरोपियों को जमानत मिल चुकी है और जिस व्यक्ति को मास्टरमाइंड बताया गया, वह लंबे समय तक फरार रहा। उन्होंने सरकार से पूछा कि राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों का क्या हुआ और एनटीए की जवाबदेही तय क्यों नहीं की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था सुधारने के बजाय सरकार युवाओं की चिंताओं को हल्के में ले रही है। साथ ही पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के संसद पहुंचने पर भाजपा सांसदों द्वारा किए गए स्वागत पर भी उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उनका स्वागत ऐसे किया गया, जैसे वे ‘पाकिस्तान से युद्ध जीतकर लौटे हों।’ बांसुरी स्वराज ने कहा- यह बिल समय की जरूरत भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने संशोधन विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि परीक्षा माफिया अब संगठित अपराध का रूप ले चुका है और मौजूदा कानून को अधिक कठोर बनाने की आवश्यकता थी। उन्होंने कहा कि संशोधन जांच एजेंसियों के अधिकार स्पष्ट करता है, जांच और ट्रायल को समयबद्ध बनाता है तथा परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल की सराहना करते हुए कहा कि सरकार ने समय रहते कानून को और मजबूत किया है। अखिलेश यादव का तंज- झुकती है सरकार... झुकाने वाला चाहिए समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि छात्रों के आंदोलन ने सरकार को झुकने पर मजबूर किया। उन्होंने कहा, सरकार झुकती है सरकार... झुकाने वाला चाहिए। उन्होंने दावा किया कि करोड़ों युवाओं के दबाव के कारण ही धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ना पड़ा। अखिलेश ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि 2024 में भी ऐसा ही कानून लाया गया था, लेकिन उसके बावजूद पेपर लीक नहीं रुके। उन्होंने तंज करते हुए कहा, ‘जो लोग चढ़ावा नहीं बचा सके, वे पेपर लीक कैसे बचाएंगे?’ उन्होंने आरोप लगाया कि अनेक परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं और छात्रों को न्याय के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़ा। अभिषेक बनर्जी बोले- कानून बदलने से भरोसा नहीं लौटेगा तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि निष्पक्ष परीक्षा हर छात्र का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी व्यवस्था विफल होती है तो सरकार नई समिति या नया कानून लेकर आ जाती है, लेकिन जवाबदेही तय नहीं करती। उनके भाषण के दौरान सत्ता पक्ष के सांसदों ने आपत्ति जताई, जिससे सदन में कुछ देर के लिए फिर शोर-शराबा हुआ। प्रियंका गांधी ने पूछा- पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया? चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि घायल छात्रा की मां ने उनसे पूछा कि उसकी बेटी पर यह अत्याचार क्यों हुआ। प्रियंका ने सरकार से सवाल किया, ‘देश के युवाओं पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया? बच्चों पर लाठियां किसके आदेश पर चलाई गईं?’ उन्होंने कहा कि यह सवाल सिर्फ कांग्रेस नहीं बल्कि देश के छात्र, अभिभावक और शिक्षक पूछ रहे हैं। प्रियंका ने नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर टिप्पणी करते हुए बिलकिस बानो मामले का जिक्र किया। इस पर भाजपा सांसदों ने कड़ा विरोध किया और उनसे माफी मांगने की मांग की। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि किसी मंत्री पर इस तरह की व्यक्तिगत टिप्पणी उचित नहीं है और वरिष्ठ सांसद होने के नाते प्रियंका गांधी को जिम्मेदारी के साथ बोलना चाहिए। इसके बाद सदन में कुछ समय तक तीखी नोकझोंक होती रही। प्रियंका ने कहा प्रधानमंत्री कैमरे का नहीं, दिल का एंगल बदलें, तभी छात्रों की समस्या का समाधान होगा। राज्यसभा में भी हंगामा उधर, राज्यसभा की कार्यवाही भी सुबह 11 बजे शुरू हुई। शून्यकाल के दौरान विपक्षी सांसदों ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और गृहमंत्री के बयान की मांग को लेकर हंगामा किया। लगातार शोर-शराबे के कारण सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदन की कार्यवाही पहले दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर उपसभापति हरिवंश ने सदन चलाने की कोशिश की, लेकिन हंगामा जारी रहने पर कार्यवाही अगले दिन सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। वीडियो देखने के लिए ऊपर थंबनेल पर क्लिक करें…

दैनिक भास्कर 28 Jul 2026 7:57 pm

आज का एक्सप्लेनर:ऑस्ट्रेलिया की गैराज में ऐसा क्या हुआ कि प्लास्टिक नोट लाने पड़े; जल्द आपके हाथों में भी होंगे, जानिए फायदे-नुकसान

भारत में 10 और 20 रुपए के प्लास्टिक नोट के फील्ड ट्रायल की मंजूरी मिल गई है। 3 हजार करोड़ रुपए कीमत के 200 करोड़ नोट जल्द लोगों की जेब में होंगे। ये बात 27 जुलाई को वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताई। 2012 में मनमोहन सरकार ने भी 10 रुपए के प्लास्टिक नोट के ट्रायल की मंजूरी दी थी, लेकिन यह कभी जमीन पर नहीं आ सके। 2016-17 में ये प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। प्लास्टिक नोट हैं क्या, पुराना प्रोजेक्ट क्यों अटक गया था और भारत में इन्हें फिर लाने की कोशिश क्यों हो रही; समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सबसे पहले प्लास्टिक नोट की शुरुआत का रोचक किस्सा… साल 1966, ऑस्ट्रेलिया ने पाउंड करेंसी छोड़कर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर लॉन्च किया। इसमें उस दौर के सारे एडवांस सेफ्टी फीचर मौजूद थे। इसके बावजूद कुछ ही महीनों में मार्केट में 10 डॉलर के नकली नोटों की बाढ़ आ गई। कोई असली-नकली में फर्क नहीं कर पा रहा था। इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह नहीं, सिर्फ चार लोग थे- दुकानदार, आर्टिस्ट, फोटोग्राफर और एक टेलर। फोटोग्राफर ने असली नोट की फोटो खींची, आर्टिस्ट ने उसका वॉटरमार्क कॉपी किया और टेलर ने एक हफ्ते की प्रिंटिंग ट्रेनिंग ली। मेलबर्न शहर में दुकानदार के गैराज में नकली नोट छपने लगे। इस पूरे रैकेट को फंड कर रहा था रॉबर्ट किड नाम का एक क्रिमिनल। एक रोज दुकानदार की भाभी अनजाने में घर में पड़ा 10 डॉलर का नोट उठाकर चॉकलेट खरीदने गईं। सेल्सगर्ल को नोट का टेक्सचर अजीब लगा। उसने फौरन पुलिस को बता दिया और यहीं से पूरा गिरोह बेनकाब हुआ। सरकार हैरान थी कि इतनी आसानी से नोट कॉपी किया जा सकता है। 1968 में रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के गवर्नर डॉ. हर्बर्ट कूंब्स ने देश के टॉप साइंटिस्ट्स को ऐसा नोट बनाने की चुनौती दी, जिसकी नकल न की जा सके। करीब २० साल की रिसर्च के बाद वैज्ञानिकों ने प्लास्टिक नोट तैयार किया, जिसकी कॉपी बनाना लगभग नामुमकिन था। जनवरी 1988 में ऑस्ट्रेलिया ने दुनिया का पहला प्लास्टिक नोट लॉन्च किया और आगे चलकर यह तकनीक 25 से ज्यादा देशों को एक्सपोर्ट भी की। सवाल-1: प्लास्टिक नोट है क्या और बनते कैसे हैं? जवाबः भारत में करेंसी नोट कागज से बनते हैं, लेकिन प्लास्टिक नोट एक खास और हाई क्वालिटी वाले प्लास्टिक से बनते हैं। ध्यान रहे, ये वो प्लास्टिक नहीं, जो घर के सामान में इस्तेमाल होता है। हर प्लास्टिक प्रोडक्ट अलग तरह के पॉलिमर से बनता है और नोट के लिए एक खास पॉलिमर इस्तेमाल होता है। इसे बाय-एक्सिअली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपाइलीन, यानी BOPP कहते हैं, जो पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस से बनता है। ये आम प्लास्टिक से ज्यादा लचीला और मजबूत होता है। खिंचाव पड़ने पर इसका आकार नहीं बदलता। सवाल-2: भारत में प्लास्टिक नोट लाने की कोशिश कब से हो रही? जवाबः यह आइडिया 2009 में RBI ने दिया। 10 रुपए के 100 करोड़ नोट पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर छापने की योजना थी। प्लास्टिक नोट वाले प्रोजेक्ट के ठंडे बस्ते में जाने की कोई पुख्ता वजह नहीं मिलती। जानकार ३ वजहें बताते हैं- ATM पॉलिमर नोटों को ठीक से पहचान और डिस्पेंस नहीं कर पा रहे थे, नोट हैंडलिंग में दिक्तत आ रही थी और 2016 में हुई नोटबंदी। 17 साल बाद, 2026 में वही आइडिया लौटा है। इस बार बड़े स्केल पर। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि 10 रुपए के 100 करोड़ नोट और 20 रुपए के 100 करोड़ नोट लॉन्च होंगे। यानी कुल 3000 करोड़ वैल्यू के 200 करोड़ नोट। BRBNMPL ने प्लास्टिक नोट बनाने के लिए दुनिया भर की कंपनियों के प्रस्ताव भी मंगवाए हैं। भारत की पेपर करेंसी में करीब 25% 10 और 20 के नोट ही है। हालांकि कीमत के मामले में यह सिर्फ 1.3% है। सवाल-3: आखिर प्लास्टिक नोट के फायदे क्या हैं? जवाबः RBI की 3 बड़ी मौजूदा चुनौतियों का समाधान प्लास्टिक नोट कर सकती है… 1. कागजी नोट से 6 गुना ज्यादा तक लाइफ 2. छपाई की औसत लागत घटेगी 3. नकली नोटों पर लगाम लगेगी सवाल-4: प्लास्टिक नोट का क्या कोई नुकसान भी है? जवाबः सीधे तौर पर कोई बड़ा नुकसान तो नहीं है, लेकिन 3 चुनौतियां जरूर हैं…1. शुरुआती लागत ज्यादा 2. मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर बदलना पड़ेगा 3. प्लास्टिक नोट भी नकली बनाए जा रहे सवाल-5: क्या भारत में सभी नोट प्लास्टिक के हो जाएंगे, आगे क्या? जवाबः अभी सिर्फ 10 और 20 रुपए के 200 करोड़ नोट का फील्ड ट्रायल होना है। RBI ने पेपर नोट बंद कर प्लास्टिक पर शिफ्ट होने का कोई फैसला नहीं किया। हां, अगर ट्रायल सफल रहता है, तो आगे चलकर ₹50, ₹100, ₹200 और ₹500 के नोट भी प्लास्टिक में आ सकते हैं। लेकिन अभी ऐसी कोई घोषणा नहीं हुई है। पूरी तरह प्लास्टिक नोटों पर शिफ्ट होना कोई एक-दो साल का काम नहीं। ऑस्ट्रेलिया को भी अपनी पूरी करेंसी प्लास्टिक में बदलने में करीब 8 साल लगे थे। आज दुनिया के कुल कैश में सिर्फ 3% हिस्सा ही प्लास्टिक नोटों का है। ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, रोमानिया, कनाडा, वियतनाम और मालदीव जैसे गिने-चुने करीब 12 देश ही पूरी तरह प्लास्टिक करेंसी पर गए हैं, और उन्हें भी इसमें 5 से 8 साल का वक्त लगा। ------------- ये खबर भी पढ़िए… गुलाबी पेट्रोल, टैंक में चींटी के वीडियो वायरल; सरकार पेट्रोल में जबरन एथेनॉल मिलाने पर क्यों तुली है, पीछे की पूरी कहानी कहीं गुलाबी रंग का पेट्रोल, कहीं टैंक से चिपकी चीटियां, कहीं पेट्रोल के साथ दिखता पानी। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियोज वायरल हैं और सभी के साथ एक ही नाम जुड़ा है- एथेनॉल। इन वीडियोज की असलियत संदिग्ध हो सकती है, लेकिन देश में एथेनॉल पर बहस बिल्कुल असली है। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 28 Jul 2026 6:20 pm

11 दिसंबर 2026 तक शनि की उल्टी चाल: जानिए युद्ध, सोने के दाम और देश की राजनीति पर क्या पड़ेगा बड़ा असर!

साल 2026 के शुरुआती 7 महीने वैश्विक स्तर पर युद्ध, आर्थिक अनिश्चितता, महंगाई और राजनीतिक हलचलों से भरे रहे हैं। अब साल के बाकी बचे 5 महीनों में देश और दुनिया की स्थिति कैसी रहेगी, इस पर शनि की उल्टी यानी वक्री चाल का बड़ा असर पड़ने वाला है। देश के जाने-माने ज्योतिषाचार्य डॉ. अजय भाम्बी के अनुसार, शनि 11 दिसंबर 2026 तक वक्री अवस्था में ही रहेंगे। इसका सीधा अर्थ यह है कि इस साल के अंत तक जारी वैश्विक व राष्ट्रीय समस्याओं का कोई स्थाई हल निकलता नहीं दिख रहा है, और स्थितियों में सकारात्मक बदलाव या राहत साल 2027 की शुरुआत से ही संभव हो सकेगी।वैश्विक युद्ध और ट्रंप की शांति वार्ता: चर्चाएं तो होंगी, लेकिन नतीजे रहेंगे बेअसरअंतरराष्ट्रीय पटल की बात करें तो मध्य पूर्व में ईरान का अमेरिका व इजरायल के साथ जारी तनाव और यूरोप में जारी रूस-यूक्रेन युद्ध पर इस दौरान बातचीत के कई दौर चलेंगे, लेकिन किसी ठोस नतीजे पर पहुंचना लगभग नामुमकिन रहेगा। ज्योतिषाचार्य डॉ. अजय भाम्बी के अनुसार, शनि की वक्री चाल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को युद्ध रोकने और कूटनीतिक समझौतों पर विचार करने के लिए मजबूर जरूर कर सकती है, परंतु इन वार्ताओं का कोई निर्णायक निष्कर्ष 2026 में नहीं निकलेगा। वहीं यूरोपीय देश ठंड बढ़ने के कारण रूस-यूक्रेन युद्ध को रोकने का प्रयास करेंगे, लेकिन वहां भी सफलता की संभावना कम है। यानी साल 2026 में भारत समेत पूरी दुनिया को युद्धों के सामाजिक और आर्थिक दुष्प्रभाव झेलते रहने पड़ेंगे।छात्र आंदोलन केवल थमा है: 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में फिर भड़क सकती है चिंगारीहाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए जिस उग्र छात्र आंदोलन ने शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देने पर मजबूर किया, वह मामला भले ही इस वक्त शांत होता दिख रहा हो, लेकिन ज्योतिषीय गणनाओं के मुताबिक यह शांति केवल कुछ समय की है। वक्री शनि के प्रभाव के कारण अगले 4-5 महीनों तक छात्र शांत रहकर सरकार के कदमों का जायजा लेंगे। इस दौरान सरकार डैमेज कंट्रोल करने की पूरी कोशिश करेगी और इसमें काफी हद तक सफल भी रहेगी। हालांकि, यह आंदोलन समाप्त नहीं हुआ है बल्कि केवल 'पॉज' हुआ है। साल 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में युवा वर्ग एक बार फिर सड़कों पर उतर सकता है।सोने-चांदी की कीमतों में फिर आएगा उछाल, कच्चे तेल का संकट भी बना रहेगाआर्थिक क्षेत्र और कमोडिटी बाजार पर भी वक्री शनि की चाल का व्यापक प्रभाव देखने को मिलेगा। साल 2026 की शुरुआत में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद सोने और चांदी के दामों में जो गिरावट आई थी, वह अब फिर से तेजी में बदल सकती है। तुलनात्मक रूप से चांदी के मुकाबले सोने की कीमतों में बढ़ोतरी होने की अधिक संभावना है। इसके अलावा, जारी युद्धों के कारण कच्चे तेल और गैस की उपलब्धता का मुद्दा बना रहेगा। हालांकि, पहले की तरह ईंधन की बहुत भारी किल्लत नहीं होगी, लेकिन इस ऊर्जा संकट के पूरी तरह समाप्त होने की उम्मीद भी अभी नहीं की जा सकती।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jul 2026 3:00 pm

E20 पेट्रोल विवाद में नाम घसीटे जाने से भड़के नितिन गडकरी: डीपफेक और फर्जी वीडियो के खिलाफ पहुंचे बॉम्बे हाईकोर्ट, जानिए केंद्रीय मंत्री ने 'इथेनॉल ब्लेंडिंग' नीति पर क्या दी बड़ी सफाई

देशभर के पेट्रोल पंपों पर बेचे जा रहे 20 प्रतिशत इथेनॉल मिले (E20) पेट्रोल को लेकर जारी विवाद अब कानूनी लड़ाई में बदल गया है। गाड़ियों में आ रही तकनीकी खराबी और माइलेज घटने की शिकायतों के बीच सोशल मीडिया पर कई एआई-जनरेटेड (AI) और डीपफेक वीडियो वायरल हो रहे थे, जिनमें केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और उनके परिवार को इस नीति से आर्थिक लाभ मिलने का दावा किया जा रहा था। इन भ्रामक और मानहानिकारक दावों पर कड़ा रुख अपनाते हुए गडकरी ने बॉम्बे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।बॉम्बे हाईकोर्ट ने दी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ कार्रवाई की मंजूरीमामले की गंभीरता को देखते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अभय आहूजा ने नितिन गडकरी को मेटा (Meta), गूगल (Google), एक्स (X) और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ दीवानी मुकदमा (Civil Suit) दायर करने की इजाजत दे दी है। याचिका में मांग की गई है कि अदालत सोशल मीडिया कंपनियों को निर्देश दे कि वे केंद्रीय मंत्री और उनके परिवार के खिलाफ बनाए गए सभी फर्जी, मनगढ़ंत और एआई-जनरेटेड वीडियो को तुरंत हटाए। गडकरी के वकील ने कोर्ट को बताया कि इंटरनेट पर बड़े पैमाने पर उनके व्यक्तित्व अधिकारों (Personality Rights) का हनन किया जा रहा है।'E20 नीति पेट्रोलियम मंत्रालय की, सड़क परिवहन मंत्रालय का इससे संबंध नहीं'हाईकोर्ट में दाखिल याचिका और नागपुर स्थित उनके कार्यालय द्वारा जारी बयान में स्थिति पूरी तरह स्पष्ट की गई है। गडकरी ने बताया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) प्रोग्राम पूरी तरह से 'केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय' के अधिकार क्षेत्र में आता है, न कि उनके सड़क परिवहन मंत्रालय के अंतर्गत। उन्होंने साफ किया कि इथेनॉल ब्लेंडिंग को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का फैसला पूरी केंद्रीय कैबिनेट का सामूहिक निर्णय था। इस पूरी नीति या इसके कार्यान्वयन से उनका या उनके परिवार का कोई व्यक्तिगत या वित्तीय लेना-देना नहीं है।स्वस्थ बहस का स्वागत, लेकिन चरित्र हनन बर्दाश्त नहींकेंद्रीय मंत्री की कानूनी टीम ने कोर्ट के समक्ष यह बात दोहराई कि इस याचिका का मकसद जनता को किसी नीति पर निष्पक्ष चर्चा, आलोचना या बहस करने से रोकना बिल्कुल नहीं है। लोकतांत्रिक व्यवस्था में नीतिगत समीक्षा का हर नागरिक को हक है, लेकिन एआई तकनीक का गलत इस्तेमाल करके फर्जी तथ्य गढ़ना और किसी की छवि को धूमिल करना कानूनी रूप से अपराध है। कोर्ट इस मामले में जल्द ही अगली सुनवाई कर आपत्तिजनक कंटेंट को ब्लॉक करने के आदेश जारी कर सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jul 2026 2:52 pm

जब अचानक हिलने लगी पूरी धरती: 7.1 के भूकंप से थर्राया जापान, समुद्र से उठती सुनामी की लहरों के बीच बजा रेड अलर्ट

दक्षिणी जापान में मंगलवार दोपहर को प्रकृति का भीषण रूप देखने को मिला, जब पूरे क्यूशू (Kyushu) क्षेत्र में एक साथ शक्तिशाली और बेहद तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर 7.1 की विनाशकारी तीव्रता वाले इस भूकंप का केंद्र क्यूशू द्वीप का कुमामोटो (Kumamoto) प्रीफेक्चर और उसके आसपास का इलाका रहा। अचानक आई इस कुदरती आफत से कुछ ही पलों के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। इमारतों में तेज कंपन के तुरंत बाद जापानी मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) ने मुस्तैदी दिखाते हुए तटीय इलाकों के लिए आपातकालीन सुनामी अलर्ट जारी कर दिया है।जापानी तीव्रता पैमाने पर खतरे का सबसे उच्चतम स्तर 'शिंदो 7' दर्जजापान के अपने सीस्मोलॉजिकल पैमाने, जिसे 'शिंदो स्केल' (Shindo Scale) कहा जाता है, उस पर इस भूकंप की तीव्रता को सबसे खतरनाक यानी 'लेवल 7' पर मापा गया है। जापानी पैमानों में शिंदो 7 को तबाही का चरम स्तर माना जाता है, जिसमें जमीन इतनी तेजी से हिलती है कि मजबूत से मजबूत इमारतों के गिरने, सड़कों के फटने और बुनियादी ढांचे को बड़ा नुकसान पहुंचने का खतरा बहुत अधिक बढ़ जाता है। इस तीव्र झटके ने कुमामोटो और आसपास के जिलों की जीवनशैली को पूरी तरह थाम दिया है।अरियाके और यात्सुशिरो तटीय क्षेत्रों में सुनामी का अलर्ट: नागरिकों के लिए 3 बड़े निर्देशभूकंप के कुछ ही मिनटों के भीतर मौसम एजेंसी ने अरियाके समुद्र (Ariake Sea) और यात्सुशिरो समुद्र (Yatsushiro Sea) से लगे तटीय इलाकों के लिए 1 मीटर (लगभग 3 फीट) तक ऊंची खतरनाक सुनामी लहरें उठने की आशंका जताई है। स्थिति की गंभीरता और मानवीय जीवन की सुरक्षा को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने तटीय निवासियों के लिए तत्काल 3 सूत्री आपातकालीन निर्देश जारी किए हैं:तटीय इलाकों से दूरी: समुद्र तटों, तटीय सड़कों और नदियों के मुहाने के आसपास मौजूद लोग बिना एक पल गंवाए तुरंत वहां से दूर हट जाएं।ऊंचे स्थानों पर शरण: निचले और मैदानी इलाकों में रहने वाले नागरिक तुरंत सुरक्षित व ऊंचाई पर स्थित शरण स्थलों की ओर प्रस्थान करें।सावधानी बरतें: जब तक मौसम एजेंसी की ओर से आधिकारिक रूप से चेतावनी वापस न ले ली जाए, तब तक समुद्र या पानी के स्रोतों के पास जाने की भूल बिल्कुल न करें।हाई अलर्ट पर राहत और बचाव एजेंसियां: आफ्टरशॉक्स का बढ़ा खतराकुमामोटो प्रीफेक्चर समेत पूरे क्यूशू क्षेत्र में आपदा प्रबंधन, दमकल विभाग और आपातकालीन राहत टीमों को हाई अलर्ट मोड पर तैनात कर दिया गया है। प्रांतीय अधिकारी और पुलिस बल प्रभावित इलाकों में जान-माल के नुकसान और प्रभावित ढांचों का तेजी से आकलन कर रहे हैं। इसके साथ ही, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि मुख्य भूकंप के बाद अगले कुछ घंटों या दिनों में तेज आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद के झटके) आ सकते हैं। इसी आशंका को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने सभी नागरिकों से पूरी तरह सतर्क, सुरक्षित और शांत रहने की अपील की है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jul 2026 2:15 pm

ट्रंप का बड़ा दावा- ईरान की अपील पर रोके अमेरिकी हमले, लेकिन दी आखिरी अल्टीमेटम! जानिए एयर फोर्स वन में क्या बोले अमेरिकी राष्ट्रपति

वाटरफोर्ड टाउनशिप जाते समय राष्ट्रपति विमान 'एयर फोर्स वन' में संवाददाताओं से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा खुलासा किया है। ट्रंप ने दावा किया कि तेहरान की ओर से सीधी अपील और शांति वार्ता की पेशकश के बाद अमेरिका ने ईरान पर जारी अपनी सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोक दिया है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान ने अमेरिकी प्रशासन से संपर्क कर कहा कि 'कृपया रुकिए, आइए मिलकर बात करते हैं।' राष्ट्रपति ने इसे दोनों देशों के बीच तनाव कम करने का एक बड़ा कूटनीतिक मौका बताया है। हालांकि, उन्होंने सख्त लहजे में चेतावनी भी दी कि अगर बातचीत किसी सहमति पर नहीं पहुंचती है, तो अमेरिका फिर से उसी आक्रामक स्थिति में लौट आएगा और हमले दोबारा शुरू कर दिए जाएंगे।2 हफ्तों की भारी बमबारी के बाद शुरू हुआ बातचीत का दौरगौरतलब है कि बीते 2 हफ्तों से ईरान के प्रमुख सैन्य ठिकानों और बुनियादी ढांचों पर अमेरिका की ओर से भीषण हवाई हमले किए जा रहे थे, जिससे वहां भारी नुकसान हुआ है। अब हमले रोकने के बाद ट्रंप प्रशासन आगे की रणनीति का आकलन कर रहा है। ट्रंप का कहना है कि दोनों देश इस समय सीधे तौर पर और मध्यस्थों के जरिए बातचीत की टेबल पर हैं। उन्होंने दावा किया कि ईरान की ओर से मुलाकात की गुहार केवल इसलिए आई है क्योंकि अमेरिकी सैन्य अभियानों ने उन्हें भारी नुकसान पहुंचाया है। ट्रंप के अनुसार, अगर युद्ध में अमेरिकी सेना का प्रदर्शन कमजोर रहता, तो तेहरान कभी भी मुलाकात का अनुरोध नहीं करता।पैट्रियट मिसाइलों की कमी पर बाइडन पर साधा निशाना, कहा- 'हथियारों का उत्पादन जारी'पत्रकारों द्वारा अमेरिकी सेना के पास मिसाइल इंटरसेप्टर और गोला-बारूद के घटते भंडार को लेकर पूछे गए सवाल पर ट्रंप ने स्पष्ट किया कि देश के पास अपनी सुरक्षा के लिए पर्याप्त संसाधन मौजूद हैं। इसके साथ ही उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल की आलोचना करते हुए कहा कि यूक्रेन को बड़े पैमाने पर हथियार भेजने के कारण अमेरिकी रक्षा भंडार प्रभावित हुआ था। हालांकि, ट्रंप ने भरोसा जताया कि अब अमेरिका में पैट्रियट (Patriot) मिसाइलों और मध्यम दूरी के रक्षा हथियारों का निर्माण युद्ध स्तर पर किया जा रहा है और देश में हथियारों की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।जेडी वेंस और सेंटकॉम की सलाह पर रुके हमले? पर्दे के पीछे का सचहालांकि ट्रंप बातचीत की पहल का श्रेय अपनी सैन्य ताकत को दे रहे हैं, लेकिन अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों में कुछ अंदरूनी रणनीतिक कारण भी सामने आए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने राष्ट्रपति के साथ बैठक में गोला-बारूद के कम होते स्टॉक और युद्ध के विस्तार पर चिंता व्यक्त की थी। इसके अलावा, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रमुख एडमिरल ब्रैड कूपर ने भी व्हाइट हाउस को सलाह दी थी कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के आसपास बीते दो हफ्तों से चल रहा बमबारी अभियान अपनी प्रभावशीलता की सीमा तक पहुंच चुका है। कई सैन्य कमांडरों और सिविल थिंक टैंकों की इसी रणनीतिक सलाह के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने हमलों को रोकने का आदेश जारी किया।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jul 2026 2:07 pm

अमेरिकी महिला मेसी गोंसाल्वेज को भारत में लगे 5 बड़े 'कल्चर शॉक', बोलीं- 5वां पॉइंट देखकर तो मेरी दादी को हार्ट अटैक आ जाएगा

इन दिनों सोशल मीडिया पर भारत की यात्रा करने वाले या यहां रहने वाले विदेशी कंटेंट क्रिएटर्स के अनुभव काफी पसंद किए जा रहे हैं। इसी सिलसिले में भारत में रह रहीं अमेरिकी नागरिक मेसी गोंसाल्वेज (Macy Gonsalvez) का एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर खूब धूम मचा रहा है। मेसी ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल से एक रील शेयर करते हुए भारत की ऐसी 5 मुख्य बातों का जिक्र किया है, जो उनके अमेरिकी लाइफस्टाइल से बिल्कुल अलग थीं और जिन्हें देखकर वह पूरी तरह हैरान रह गईं।प्रेग्नेंसी में बच्चे का जेंडर रिवील बैन: कानून देखकर रह गईं हैरानमेसी ने अपनी लिस्ट में सबसे ऊपर भारत के एक सख्त कानून का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि अमेरिका में बच्चे के जन्म से पहले उसका लिंग (Gender) पता करना और 'जेंडर रिवील पार्टी' रखना एक बेहद सामान्य बात है। लेकिन भारत में गर्भावस्था के दौरान भ्रूण का लिंग जांचना पूरी तरह गैरकानूनी है। मेसी के मुताबिक, शुरुआत में जब उन्हें इस नियम के बारे में पता चला तो वे चौंक गईं, क्योंकि अमेरिका की तुलना में यह कानून और सामाजिक व्यवस्था उनके लिए बिल्कुल नई थी।'रात 9:30 बजे सोने की आदत और यहां 9 बजे बनता है प्लान'अमेरिका और भारत की दिनचर्या में बड़ा अंतर बताते हुए मेसी ने भारत की लेट-नाइट लाइफस्टाइल पर बात की। उन्होंने कहा कि अमेरिका में लोग शाम को जल्दी डिनर करके टाइम से सो जाते हैं, लेकिन भारत में रात की शुरुआत ही देर से होती है। भारत में अगर दोस्तों या परिचितों से मिलने का प्लान बनता है, तो वह अमूमन रात 8:30 या 9:00 बजे के बाद ही तय होता है। मेसी ने मुस्कुराते हुए बताया कि वे खुद अमेरिका में रात 9:30 बजे तक सो जाया करती थीं, इसलिए भारत का यह देर रात तक जगने वाला कल्चर उनके लिए एक बड़ा शॉक रहा।'नहाने से 15 मिनट पहले गीजर ऑन करो'भारतीय घरों में इस्तेमाल होने वाले वाटर हीटर यानी गीजर के तरीके ने मेसी को सबसे ज्यादा मुस्कुराने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने मजाकिया अंदाज में बताया कि भारत में गर्म पानी से नहाने के लिए कम से कम 10 से 15 मिनट पहले गीजर का स्विच ऑन करना पड़ता है और फिर इंतजार करना होता है। जबकि अमेरिका में नल या शावर चालू करते ही तुरंत गर्म पानी आने लगता है। भारतीय घरों की इस आदत को उन्होंने काफी फनी और अनोखा अनुभव बताया।10 मिनट की सुपरफास्ट डिलीवरी ने जीता दिलजहां कुछ बातों ने उन्हें हैरान किया, वहीं भारत की क्विक-कॉमर्स यानी 10-15 मिनट की इंस्टेंट डिलीवरी सर्विस ने उनका दिल जीत लिया। मेसी ने भारत के ऑनलाइन डिलीवरी इकोसिस्टम की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि यहां ग्रॉसरी से लेकर तैयार खाना तक महज कुछ मिनटों में दरवाजे पर पहुंच जाता है। अमेरिका जैसे देश में इतनी तेज डिलीवरी सेवा की कल्पना करना भी मुश्किल है, इसलिए यह सुविधा उन्हें बेहद पसंद आई।सस्ती मेड और कुक सर्विस: दादी को लग जाएगा झटका!लिस्ट के पांचवें और आखिरी पॉइंट में मेसी ने भारत में मिलने वाली घरेलू मदद (Household Help) का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि अमेरिका की तुलना में भारत में खाना बनाने वाले कुक और सफाई के लिए मेड रखना काफी आसान और पॉकेट-फ्रेंडली है। यहां ज्यादातर मध्यवर्गीय और कामकाजी परिवारों में पार्ट-टाइम या फुल-टाइम मेड रखना आम बात है। इसी बात पर हंसी मजाक करते हुए मेसी ने कैप्शन में लिखा कि अगर उनकी दादी को पता चलेगा कि यहां घर के कामों के लिए मेड और कुक इतने कम बजट में मिल जाते हैं, तो उन्हें सचमुच हार्ट अटैक आ जाएगा!

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jul 2026 2:00 pm

सहारा के सूखे और बंजर को मात देने निकली अफ्रीका की 'ग्रेट ग्रीन वॉल': जानिए 8,000 किलोमीटर लंबे उस कुदरती चमत्कार की कहानी जो बदल रहा है करोड़ों लोगों का जीवन

दुनिया की सबसे महत्वाकांक्षी पर्यावरणीय परियोजनाओं में शामिल अफ्रीका का 'ग्रेट GREEN WALL' (ग्रेट ग्रीन वॉल) अभियान इस समय पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है। लगभग 8,000 किलोमीटर लंबी यह ऐतिहासिक पहल पश्चिमी अफ्रीका के सेनेगल के अटलांटिक तट से शुरू होकर पूर्वी अफ्रीका के जिबूती तक फैली हुई है। इस पूरी योजना का मुख्य मकसद सिर्फ पेड़ लगाना भर नहीं है, बल्कि उन इलाकों को दोबारा से हरा-भरा और जीवंत बनाना है जो दशकों से भीषण सूखे, रेगिस्तान के बढ़ते फैलाव और जलवायु परिवर्तन की तगड़ी मार झेल रहे हैं। अफ्रीकी संघ (African Union) ने इस दूरदर्शी परियोजना की शुरुआत साल 2007 में की थी।शुरुआत में सिर्फ पेड़ लगाने का था प्लान, फिर यूं बदली पूरी रणनीतिशुरुआती दिनों में वैज्ञानिकों और योजनाकारों की सोच सहारा रेगिस्तान की दक्षिणी सीमा पर पेड़ों की एक सीधी, लंबी और चौड़ी पट्टी तैयार करने की थी, ताकि रेगिस्तानी हवाओं और रेत को आगे बढ़ने से रोका जा सके। हालांकि, जैसे-जैसे समय बीता, पर्यावरण विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों ने अध्ययन में पाया कि केवल पेड़ों की कतारें खड़ी कर देने से इस गंभीर संकट का स्थायी हल संभव नहीं है। इसके बाद परियोजना की रणनीति में बुनियादी बदलाव किया गया। अब इसका मुख्य फोकस पूरे पारिस्थितिकी तंत्र (इकोसिस्टम) को नए सिरे से पुनर्जीवित करने पर है। इसके तहत जंगलों, प्राकृतिक घास के मैदानों, कृषि योग्य जमीनों, आर्द्रभूमि (वेटलैंड्स) और स्थानीय प्रजाति की वनस्पतियों को फिर से पनपाया जा रहा है।आखिर साहेल क्षेत्र को क्यों पड़ी इस विशाल हरित दीवार की जरूरत?अफ्रीका का साहेल (Sahel) क्षेत्र कई दशकों से लगातार बड़े पर्यावरणीय संकट से जूझता रहा है। यहां रेगिस्तान का दायरा बढ़ता गया, लंबे समय तक अकाल और सूखे की स्थिति बनी रही, मिट्टी की उपजाऊ क्षमता घटती गई और जलवायु परिवर्तन के असर से बारिश का समय व चक्र पूरी तरह अनिश्चित हो गया। साहेल की एक बड़ी आबादी पूरी तरह से पारंपरिक खेती और पशुपालन पर निर्भर है। जमीन की उर्वरता घटने और बारिश न होने से फसलों का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ, जिससे क्षेत्र में भोजन का गंभीर संकट खड़ा हो गया और लोगों की कमाई के साधन छिन गए। यही वजह है कि इस अभियान के माध्यम से मिट्टी की सेहत सुधारने, जमीन में नमी व पानी रोकने की क्षमता बढ़ाने और खेती को दोबारा मुनाफेदार बनाने की कोशिश की जा रही है।सिर्फ पेड़ों की कतार नहीं, स्थानीय जरूरतों के हिसाब से तैयार हुई रणनीतिनाम में भले ही 'ग्रीन वॉल' यानी हरी दीवार जुड़ा हो, लेकिन यह कोई सीधी या एकसार पेड़ों की पट्टी नहीं है। असल में यह स्थानीय इलाकों की जरूरत के मुताबिक ढाली गई सैकड़ों छोटी-बड़ी पुनर्स्थापन परियोजनाओं का एक व्यवस्थित समूह है। जहां जिस चीज की जरूरत है, वहां वैसा काम किया जा रहा है—कहीं स्थानीय किस्म के पेड़ रोपे जा रहे हैं, तो कहीं खुद-ब-खुद उगने वाली प्राकृतिक वनस्पतियों को सुरक्षित किया जा रहा है। कई क्षेत्रों में मिट्टी के कटाव को रोकने, वर्षा जल संचयन (रेनवाटर हार्वेस्टिंग) को बढ़ावा देने, घास के मैदानों को हरा-भरा करने और टिकाऊ खेती के नए तरीकों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। इस तरह हर इलाके की भौगोलिक स्थिति और जलवायु के अनुसार अलग रणनीति अपनाई गई है।वर्ष 2030 तक क्या हासिल करने का है महालक्ष्य?ग्रेट ग्रीन वॉल परियोजना के तहत साल 2030 तक के लिए कुछ बेहद ठोस और बड़े लक्ष्य तय किए गए हैं:लगभग 10 करोड़ हेक्टेयर खराब और बंजर हो चुकी भूमि को फिर से उपजाऊ बनाना।वायुमंडल से करीब 25 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड को प्राकृतिक रूप से अवशोषित करना।अफ्रीका में लगभग 1 करोड़ नए हरित रोजगार (Green Jobs) के अवसर पैदा करना।साहेल क्षेत्र में रहने वाले करोड़ों लोगों के भोजन की सुरक्षा और आजीविका के साधनों को मजबूत करना।इस विशाल महाअभियान में 20 से भी अधिक अफ्रीकी देश एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इसके साथ ही कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संगठन, वैश्विक विकास बैंक और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी संस्थाएं भी इसमें वित्तीय और तकनीकी सहयोग दे रही हैं।अब तक कितना हुआ काम और क्या हैं जमीनी चुनौतियां?यह सच है कि परियोजना अभी अपने अंतिम लक्ष्य तक नहीं पहुंची है, लेकिन कई भागीदार देशों में इसके शानदार परिणाम देखने को मिले हैं। सेनेगल में अब तक लाखों पेड़ लगाए जा चुके हैं और वहां की बड़े पैमाने पर बंजर हो चुकी जमीन दोबारा हरी-भरी हो गई है। इथियोपिया ने भी अपने स्तर पर बड़े पैमाने पर भूमि सुधार कार्यक्रम चलाए हैं। वहीं नाइजीरिया और नाइजर जैसे देशों में टिकाऊ भूमि प्रबंधन के जरिए सकारात्मक बदलाव आए हैं।हालिया सरकारी और पर्यावरण आकलनों के मुताबिक, अब तक लगभग 3 करोड़ हेक्टेयर भूमि को सफलतापूर्वक पुनर्जीवित किया जा चुका है। हालांकि, पर्यावरण विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि 2030 तक के सभी लक्ष्यों को शत-प्रतिशत हासिल करने के लिए और अधिक अंतरराष्ट्रीय निवेश, क्षेत्रीय देशों के बीच बेहतर आपसी तालमेल और सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावित क्षेत्रों में शांति व्यवस्था की सख्त आवश्यकता होगी।प्रकृति के साथ-साथ आम जनता के लिए भी वरदान बनी परियोजनाबंजर जमीन और हरियाली का यह पुनर्जीवन केवल प्रकृति के बचाव तक सीमित नहीं है। एक स्वस्थ और मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र मिट्टी के बहाव को रोकता है, जमीनी जल स्तर (ग्राउंडवाटर) को सुधारता है और हवा से घातक कार्बन सोखता है। इसके साथ ही, स्थानीय कीटों, पक्षियों और अन्य वन्यजीवों के लिए एक बेहतर सुरक्षित प्राकृतिक आवास तैयार होता है। दूसरी ओर, स्थानीय किसानों और पशुपालकों को फसलों का बेहतर पैदावार, मवेशियों के लिए पर्याप्त चारा और नियमित आय की गारंटी मिलती है। भीषण सूखे जैसी विपरीत परिस्थितियों में भी ऐसी संवारी गई जमीन ज्यादा समय तक टिकी रहती है।पूरी दुनिया के लिए क्यों बेहद खास है यह अफ्रीकी मॉडल?आज के समय में ग्रेट ग्रीन वॉल को दुनिया की सबसे बड़ी पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्स्थापना (Ecosystem Restoration) परियोजनाओं में गिना जाता है। इसकी महत्ता केवल अफ्रीका महाद्वीप तक सीमित नहीं है, क्योंकि जमीन का बंजर होना और ग्लोबल वार्मिंग जैसी चुनौतियां पूरी दुनिया की साझी समस्या हैं। अगर यह मॉडल पूरी तरह सफल रहता है, तो दुनिया के अन्य शुष्क (Arid) और अर्ध-शुष्क क्षेत्रों के लिए भी यह एक बेहतरीन मिसाल साबित होगा। यह परियोजना साबित करती है कि पर्यावरण की रक्षा और आर्थिक विकास एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं।इंसानों और प्रकृति को जोड़ने वाली उम्मीद की एक अनोखी दीवारइतिहास गवाह है कि दुनिया में अधिकांश दीवारें इंसानों को आपस में बांटने और सीमाएं खींचने के लिए बनाई गईं, लेकिन अफ्रीका की यह 'ग्रेट ग्रीन वॉल' इंसानों और प्रकृति को दोबारा एक-दूसरे से जोड़ने की अनूठी कोशिश है। इस विशाल अभियान की असली सफलता सिर्फ इस बात से नहीं मापी जाएगी कि कितने पौधे रोपे गए, बल्कि इससे आंकी जाएगी कि कितनी बंजर जमीन फिर से अनाज उगाने लायक बनी, कितने परिवारों का जीवन स्तर सुधरा, जैव विविधता में कितना सुधार आया और जलवायु परिवर्तन के झटकों का सामना करने में स्थानीय समुदाय कितने सक्षम बने। यही वजह है कि यह हरित दीवार केवल आज का अभियान नहीं, बल्कि आने वाले भविष्य के सामाजिक और आर्थिक बदलाव की एक मजबूत बुनियाद है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jul 2026 1:55 pm

सीमा पर ड्रैगन की नई हिमाकत: चीन ने तैनात किए 11 खतरनाक J-20 स्टील्थ फाइटर जेट, भारत के लिए कितना बड़ा खतरा

वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जारी तनाव के बीच चीन ने एक बार फिर भारतीय सीमा के बेहद नजदीक अपनी सैन्य ताकत का आक्रामक प्रदर्शन किया है। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयरफोर्स (PLAAF) ने सीमा के पास स्थित रणनीतिक एयरबेस पर अपने 11 सबसे आधुनिक जे-20 (J-20) स्टील्थ फाइटर जेट तैनात कर दिए हैं। चीन के इस कदम से सीमा पर सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर हैं। पांचवीं पीढ़ी के इन लड़ाकू विमानों की फॉरवर्ड लोकेशन पर मौजूदगी को सीधे तौर पर भारत के खिलाफ मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक दबाव बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।ड्रैगन का सबसे घातक हथियार: क्यों बेहद खतरनाक है J-20?चेंगदू J-20 'माइटी ड्रैगन' चीन का सबसे एडवांस्ड और शक्तिशाली फाइटर जेट है। यह एक पांचवीं पीढ़ी का (5th Generation) ट्विन-इंजन विमान है, जिसे विशेष रूप से रडार की नजरों से बचकर हमला करने (Stealth Technology) के लिए डिजाइन किया गया है। लंबी दूरी तक मार करने वाली मिसाइलों से लैस यह विमान बेहद कम समय में भारतीय हवाई क्षेत्र के करीब ऑपरेशन्स को अंजाम दे सकता है। चीन का दावा है कि यह अमेरिकी F-22 और F-35 को टक्कर देता है। लद्दाख और तिब्बत के ऊंचाई वाले इलाकों में इन विमानों की तैनाती भारतीय डिफेंस ग्रिड के लिए एक गंभीर चुनौती पेश करती है।भारतीय वायुसेना के लिए कितनी बड़ी चुनौती और क्या है जवाब?J-20 की इस ताजा तैनाती के बाद यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या भारत का राफेल (Rafale) इसका मुकाबला कर सकता है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि राफेल भले ही 4.5 पीढ़ी का विमान है, लेकिन उसके कॉम्बैट प्रूवन रिकॉर्ड, उल्का (Meteor) और स्कैल्प (SCALP) जैसी मिसाइलें और बेहतरीन एवियोनिक्स इसे J-20 के खिलाफ बेहद घातक बनाते हैं। इसके अलावा, भारत ने सीमा पर अपने सबसे भरोसेमंद सुखोई-30 MKI और मिराज-2000 को भी अलर्ट मोड पर रखा है। साथ ही, लद्दाख सेक्टर में तैनात आकाश और S-400 जैसी एडवांस्ड एयर डिफेंस मिसाइल प्रणालियां चीनी विमानों पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रख रही हैं।रणनीतिक एयरबेसों पर बढ़ी हलचल: क्या युद्ध की तैयारी में है चीन?तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (TAR) और झिंजियांग में स्थित चीनी एयरबेस जैसे होतान, काशगर और गार्गुनसा की सैटेलाइट तस्वीरों से साफ है कि चीन वहां बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का विस्तार कर रहा है। J-20 जैसे भारी स्टील्थ जेट्स के संचालन के लिए रनवे को लंबा किया गया है और मजबूत शेल्टर बनाए गए हैं। हालांकि भारतीय सेना और वायुसेना स्थिति पर पूरी तरह नियंत्रण बनाए हुए हैं, लेकिन सीमा के इतने करीब चीन के सबसे प्रीमियम फाइटर जेट्स की एक साथ मौजूदगी यह साफ करती है कि ड्रैगन आने वाले समय में सीमा विवाद को ठंडे बस्ते में डालने के मूड में बिल्कुल नहीं है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jul 2026 1:33 pm

नेतन्याहू की नो-एंट्री रणनीति फेल: 'खलीफा' पर मेहरबान ट्रंप, F-35 डील रोकने गए इजरायली पीएम को दी दो टूक नसीहत

वैश्विक कूटनीति के मंच से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की को दुनिया के सबसे आधुनिक F-35 स्टील्थ फाइटर जेट बेचने के मामले में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के विरोध को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अक्सर खुद को इस्लामिक ब्लॉक का अगुआ या 'खलीफा' के तौर पर पेश करने वाले तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन पर ट्रंप की यह मेहरबानी मध्य पूर्व (Middle East) के पूरे पावर बैलेंस को बदलने वाली मानी जा रही है। व्हाइट हाउस में होने वाली एक अहम मुलाकात से ठीक पहले ट्रंप के इस सख्त रुख ने इजरायली खेमे में खलबली मचा दी है।'कोई मुझे नहीं सिखा सकता': एयरफोर्स वन से ट्रंप की दो टूकयह पूरा विवाद तब खुलकर सामने आ गया जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाशिंगटन से मिशिगन की यात्रा के दौरान एयरफोर्स वन विमान में पत्रकारों से खुलकर बात की। जब उनसे तुर्की को F-35 लड़ाकू विमान देने पर नेतन्याहू के सार्वजनिक विरोध के बारे में पूछा गया, तो ट्रंप ने बेहद कड़े लहजे में कहा, मुझे कोई नहीं बता सकता कि हमें क्या बेचना चाहिए। उन्होंने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन की तारीफ करते हुए उन्हें अपना बेहतरीन दोस्त और अमेरिका का एक जबरदस्त सहयोगी करार दिया। ट्रंप के इस बयान को सीधे तौर पर नेतन्याहू के लिए एक सख्त 'हड़काऊ' संदेश के रूप में देखा जा रहा है।क्यों डरे हुए हैं नेतन्याहू? इजरायल की बादशाहत पर खतराबेंजामिन नेतन्याहू पिछले काफी समय से वाशिंगटन में लॉबिंग कर रहे थे कि तुर्की को F-35 विमान और लड़ाकू इंजनों की सप्लाई न की जाए। इजरायल का तर्क है कि पूरे मिडिल ईस्ट में केवल उसी के पास F-35 जैसी पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ विमान हैं, जो उसे हवाई क्षेत्र में एकतरफा बढ़त (Military Edge) देते हैं। नेतन्याहू ने चेतावनी दी थी कि अगर एर्दोगन के हाथों में ये विनाशकारी विमान आ गए, तो पूरे क्षेत्र का संतुलन बिगड़ जाएगा। उन्होंने तुर्की सरकार को मुस्लिम ब्रदरहुड से प्रभावित बताते हुए अमेरिका के लिए भी इसे खतरनाक घोषित करने की कोशिश की थी, लेकिन ट्रंप पर इसका कोई असर नहीं हुआ।क्या अब तुर्की को सच में मिल जाएंगे F-35 फाइटर जेट?हालांकि ट्रंप ने एर्दोगन के पक्ष में खुलकर बैटिंग की है, लेकिन तुर्की के लिए F-35 की राह अभी पूरी तरह आसान नहीं है। तुर्की द्वारा रूस से S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदने के बाद अमेरिका ने उसे इस प्रोजेक्ट से बाहर कर दिया था और प्रतिबंध लगा दिए थे। ट्रंप अब इन प्रतिबंधों को हटाने और डील को हरी झंडी देने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं, भले ही अमेरिकी कांग्रेस में इसका विरोध हो रहा हो। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि इजरायल अमेरिका की मदद के बिना सर्वाइव नहीं कर सकता, इसलिए अमेरिकी हथियारों की बिक्री के फैसलों में किसी भी बाहरी देश का दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jul 2026 1:31 pm

ईरान का सिखाया खेल: हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में दबोची सऊदी की गर्दन, अब भुगतेगी पूरी दुनिया

लाल सागर के रणनीतिक जलमार्ग पर इस समय एक ऐसा खतरनाक भू-राजनीतिक खेल खेला जा रहा है, जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था की नींव हिला दी है। यमन के हूती विद्रोही इस समय लाल सागर में ठीक वही रणनीति अपना रहे हैं, जो उन्हें ईरान द्वारा सिखाई गई है। इस चक्रव्यूह में सऊदी अरब की गर्दन इस कदर फंस चुकी है कि इसका सीधा असर न सिर्फ खाड़ी देशों पर, बल्कि पूरी दुनिया के व्यापार और सप्लाई चेन पर पड़ना तय माना जा रहा है।ग्लोबल चोकप्वाइंट पर हूतियों का बड़ा दांवलाल सागर सिर्फ एक जलमार्ग नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार की जीवन रेखा है। हूती विद्रोहियों ने ड्रोन और मिसाइल तकनीक के दम पर इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते (चोकप्वाइंट) को पूरी तरह से अपने नियंत्रण में लेने की कोशिश शुरू कर दी है। जानकारों का मानना है कि हूतियों का यह कदम सीधे तौर पर सऊदी अरब के आर्थिक हितों पर चोट करने के लिए उठाया गया है। सऊदी अरब अपनी तेल अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए इस मार्ग पर अत्यधिक निर्भर है, और अब यही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन चुका है।तेहरान की सीक्रेट स्क्रिप्ट और यमन के लड़ाकेइस पूरे घटनाक्रम के पीछे ईरान का हाथ होने के दावों को बल मिल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान ने सालों तक हूतियों को हथियारों, खुफिया इनपुट और रणनीतिक ट्रेनिंग से लैस किया है। फारस की खाड़ी में जिस तरह ईरान अक्सर दबाव बनाता है, ठीक उसी तर्ज पर हूती अब लाल सागर में सऊदी अरब और उसके पश्चिमी सहयोगियों को चुनौती दे रहे हैं। यह एक किस्म का प्रॉक्सी वॉर है, जहां मोहरे हूती हैं, लेकिन चालें तेहरान से चली जा रही हैं।कैसे भुगतेगी पूरी दुनिया इस जंग का हर्जानाअगर लाल सागर का यह संकट लंबा खिंचता है, तो इसका खामियाजा हर आम और खास इंसान को भुगतना पड़ेगा। इस रूट से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को अब लंबा रास्ता तय करके अफ्रीका के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इससे जहाजों का किराया, बीमा की लागत और ईंधन का खर्च कई गुना बढ़ गया है। नतीजा यह होगा कि आने वाले दिनों में कच्चा तेल, गैस, अनाज और इलेक्ट्रॉनिक्स सामान समेत हर चीज महंगी हो जाएगी, जिससे वैश्विक महंगाई का एक नया दौर शुरू हो सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jul 2026 1:30 pm

PoK में भड़की चिंगारी: रावलकोट में सेना की अंधाधुंध फायरिंग, 17 प्रदर्शनकारियों की मौत

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) से इस वक्त एक बेहद परेशान करने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है। रावलकोट में अपनी जायज मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे स्थानीय कश्मीरियों पर पाकिस्तानी फौज काल बनकर टूट पड़ी है। इलाके में तनाव इस कदर बढ़ गया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नागरिकों पर सेना ने सीधे गोलियां बरसा दीं। स्थानीय सूत्रों और चश्मदीदों के मुताबिक, इस अंधाधुंध फायरिंग में अब तक कम से कम 17 प्रदर्शनकारियों की दर्दनाक मौत हो चुकी है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हैं।हक की मांग पर बरसीं गोलियां: रावलकोट में बिछ गईं लाशेंमिली जानकारी के अनुसार, रावलकोट और उसके आसपास के इलाकों में लोग बुनियादी सुविधाओं, महंगाई और मानवाधिकारों के हनन के खिलाफ शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पाकिस्तानी हुकूमत और वहां की सेना उनका लगातार शोषण कर रही है। देखते ही देखते इस प्रदर्शन को दबाने के लिए पाकिस्तानी फौज ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। बिना किसी चेतावनी के प्रदर्शनकारियों पर सीधे राइफलों से गोलियां चलाई गईं, जिससे रावलकोट की सड़कें कश्मीरियों के खून से लाल हो गईं।मानवाधिकारों की धज्जियां: PoK में हालात बेकाबूइस खूनी झड़प के बाद पूरे रावलकोट और आस-पास के जिलों में कर्फ्यू जैसा माहौल है। चश्मदीदों का कहना है कि अस्पताल घायलों से पटे पड़े हैं और मरने वालों का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है। स्थानीय नेताओं ने पाकिस्तानी सेना की इस हरकत को 'नरसंहार' करार दिया है। सोशल मीडिया पर आ रही अपुष्ट तस्वीरों और वीडियो में रावलकोट की सड़कों पर अफरा-तफरी और खौफ का मंजर साफ देखा जा सकता है। इंटरनेट सेवाओं को भी प्रभावित किया गया है ताकि सच दुनिया के सामने न आ सके।अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की चुप्पी पर उठे सवालइस दर्दनाक घटना के बाद PoK के नागरिकों में पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ भयंकर गुस्सा है। स्थानीय एक्टिविस्ट्स का कहना है कि जब भी कश्मीरी अपने अधिकारों की बात करते हैं, तो पाकिस्तानी फौज इसी तरह 'जल्लाद' बनकर उनका दमन करती है। अब देखना यह है कि इस गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन और बर्बरता पर वैश्विक संगठन और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एजेंसियां क्या कदम उठाती हैं। फिलहाल रावलकोट में स्थिति अत्यंत तनावपूर्ण और नाजुक बनी हुई है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jul 2026 1:28 pm

US Iran War Updates:एयर फोर्स वन से डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को कड़ी चेतावनी, क्रूड ऑयल के दामों में भारी गिरावट

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बात करते हुए अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग पर अहम बयान दिया है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस समय ईरान के साथ अच्छी कूटनीतिक बातचीत कर रहा है और उन्हें पूरी उम्मीद है कि इस गंभीर विवाद का हल कूटनीति के जरिए निकल सकता है। हालांकि, इसके साथ ही उन्होंने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि अगर यह बातचीत नाकाम साबित होती है, तो ईरान पर सैन्य हमले फिर से शुरू कर दिए जाएंगे। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी बलों द्वारा किए जा रहे भीषण हमलों के कारण ही तेहरान अब बातचीत की मेज पर आने को मजबूर हुआ है। उन्होंने कहा कि अगर कूटनीति काम नहीं करती है, तो अमेरिका वही कदम उठाएगा जो वह दो दिन पहले तक उठा रहा था।ट्रंप का यह बयान वाशिंगटन द्वारा ईरान पर चलाए जा रहे दो हफ्ते लंबे भारी बमबारी अभियान को अचानक रोके जाने के दो दिन बाद आया है। हालांकि, इस बेहद नाजुक शांति के बीच मध्य पूर्व में तनाव कम होता नहीं दिख रहा है। सऊदी अरब, जॉर्डन और इराक में हाल ही में हुए ड्रोन हमलों और यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब के तेल बुनियादी ढांचे पर किए गए हमलों के दावों ने एक बार फिर इस क्षेत्र में अनिश्चितता और खतरे को बढ़ा दिया है।'सीधी बातचीत हमारे डीएनए में नहीं', ईरान ने अमेरिकी दावों को किया खारिजदूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की सीधी बातचीत के दावों को साफ तौर पर खारिज कर दिया है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने वाशिंगटन के बयानों को मनगढ़ंत करार देते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस तरह अमेरिका से सीधी गुफ्तगू करना उनके 'डीएनए' में शामिल नहीं है। हालांकि, बघाई ने यह स्वीकार किया कि मध्यस्थ देशों के जरिए दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष संदेशों का आदान-प्रदान अभी भी जारी है। इसके साथ ही तेहरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल समुद्री मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' पर अपने पूर्ण नियंत्रण और संप्रभुता का दावा भी दोहराया है।ब्रेंट क्रूड 9% गिरा, गोला-बारूद की कमी की रिपोर्ट पर बोले डोनाल्ड ट्रंपअमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक रास्ते की उम्मीदों से वैश्विक बाजार पर तत्काल असर देखने को मिला और कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई। पिछले सप्ताह $100 प्रति बैरल का आंकड़ा पार करने वाला ब्रेंट क्रूड करीब 9% गिरकर $88 प्रति बैरल के आसपास आ गया। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि अमेरिकी सैन्य कमांडरों ने निशाना बनाने योग्य ठिकानों की कमी और अपने गोला-बारूद (इंटरसेप्टर मिसाइलों) के घटते स्टॉक को लेकर चिंता जताई थी, जिसके बाद ट्रंप ने बमबारी रोकने का फैसला किया।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इन मीडिया रिपोर्टों और दावों को सिरे से खारिज कर दिया। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास हथियारों और गोला-बारूद का कोई अभाव नहीं है और वह अपने सैन्य भंडारों को बहुत तेजी से फिर से भर रहा है। हालांकि, सैन्य अभियानों के रुकने के बावजूद क्षेत्र में अनिश्चितता बनी हुई है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही बुरी तरह प्रभावित है और इस रणनीतिक समुद्री मार्ग पर भविष्य के नियंत्रण को लेकर वाशिंगटन और तेहरान के बीच कड़ा गतिरोध कायम है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jul 2026 8:48 am

'ईरान के पास न सेना बची न नेवी': रूस की मदद पर भड़के डोनाल्ड ट्रंप, वाशिंगटन पहुंचे इजराइली PM नेतन्याहू

अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के एक सनसनीखेज दावे से अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मच गई है। जेलेंस्की ने दावा किया है कि रूस मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में अमेरिकी ठिकानों और संपत्तियों को निशाना बनाने के लिए ईरान को सैटेलाइट सर्विलांस (उपग्रह निगरानी) का डेटा देकर मदद पहुंचा रहा है। इस गंभीर दावे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रतिक्रिया सामने आई है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि वे इस बात की जांच करेंगे कि इस दावे में कितनी सच्चाई है और वे इस मुद्दे पर सीधे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात करेंगे।हालांकि, ट्रंप ने यह भी कहा कि अगर रूस ने ईरान की किसी भी तरह मदद की भी है, तो उसका युद्ध के मैदान पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। वेनेजुएला का उदाहरण देते हुए ट्रंप ने कहा कि रूस ने वेनेजुएला को भी बड़ी संख्या में सैन्य उपकरण दिए थे और वहां के पास रूस निर्मित सारे हथियार थे, लेकिन उसका नतीजा सभी के सामने है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिका ने ईरान को इस युद्ध में बुरी तरह पछाड़ा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में ईरान के पास न तो कोई मजबूत सेना बची है, न एयर फोर्स और न ही नेवी। ट्रंप ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि रूस बड़े पैमाने पर ऐसी कोई मदद कर रहा है और अगर ऐसा हुआ भी है, तो उसका कोई असर नहीं दिखा है।वाशिंगटन में आज मिलेंगे ट्रंप और नेतन्याहू, परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने पर होगी चर्चाइस कूटनीतिक हलचल के बीच इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू आज वाशिंगटन में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से एक महत्वपूर्ण मुलाकात करने जा रहे हैं। यह बैठक ऐसे मोड़ पर हो रही है जब अमेरिका ने लगातार दूसरे दिन ईरान पर अपने हवाई हमले रोके रखे हैं, और जवाब में तेहरान ने भी अपनी ओर से सैन्य कार्रवाइयों को फिलहाल थामने की बात कही है। इजराइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि वे ट्रंप के उन तमाम प्रयासों का पूरी तरह से समर्थन करते हैं, जिनका उद्देश्य ईरान को रणनीतिक रूप से कमजोर करना और उसके परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करना है।नेतन्याहू ने कहा कि यदि बिना किसी बड़े और लंबे सैन्य संघर्ष के ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करने का लक्ष्य हासिल हो जाता है, तो इसमें कोई बुराई नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि वे ट्रंप के सामने कोई नई शर्त या जानकारी रखने के बजाय अपने करीबी सहयोगी ट्रंप की भावी योजनाओं को सुनेंगे और समझेंगे, क्योंकि अंतिम फैसला अमेरिकी नेतृत्व का ही होगा। हालांकि, नेतन्याहू ने तेहरान को सख्त चेतावनी भी दी कि अगर उसने प्रत्यक्ष रूप से या अपने सहयोगी गुटों के जरिए इजराइल पर दोबारा हमला करने की हिमाकत की, तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल साबित होगी।ओमान की मध्यस्थता और सीजफायर की कोशिशें, अमेरिका ने मिसाइलों की कमी से किया इनकारवर्तमान में दोनों देशों को एक अंतरिम युद्धविराम (Interim Ceasefire) समझौते के तहत वार्ता की मेज पर लाने के कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका के राजदूत माइक वाल्ट्ज ने जानकारी दी कि राष्ट्रपति ट्रंप कूटनीति को थोड़ा और समय देना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ हफ्तों से, और विशेष रूप से बीते कुछ दिनों में, ओमान की मध्यस्थता के जरिए अमेरिका, ईरान और अन्य वार्ताकारों के बीच शीर्ष स्तर से लेकर तकनीकी स्तर तक लगातार बातचीत जारी है।माइक वाल्ट्ज ने उन आशंकाओं और मीडिया रिपोर्टों को सिरे से खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि ईरानी हमलों से बचाव के लिए इस्तेमाल होने वाली अमेरिकी इंटरसेप्टर मिसाइलों का स्टॉक खत्म हो रहा है। हालांकि, स्वतंत्र रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान दोनों ही पक्षों के लिए इतने बड़े पैमाने पर लंबे समय तक सैन्य अभियानों को जारी रखना व्यावहारिक रूप से काफी कठिन होगा।अयातुल्ला खामेनेई की मौत और लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ सैन्य अभियानगौरतलब है कि ट्रंप और नेतन्याहू की इससे पिछली आधिकारिक मुलाकात फरवरी में हुई थी, जिसके कुछ ही हफ्तों बाद ईरान के खिलाफ व्यापक सैन्य अभियान शुरू हो गया था। इस भीषण युद्ध के दौरान ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई समेत कई शीर्ष ईरानी नेता और सैन्य कमांडर मारे गए थे। युद्ध की शुरुआत के तुरंत बाद ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह ने भी इजराइल पर हमले शुरू कर दिए थे, जिसके जवाब में इजराइली रक्षा बलों ने दक्षिणी लेबनान में जोरदार हवाई हमले और जमीनी कार्रवाई की थी। वर्तमान में अमेरिका, लेबनान और इजराइल के बीच प्रत्यक्ष वार्ता का समर्थन कर रहा है, ताकि सीमा पर तनाव कम किया जा सके और हिजबुल्लाह को पूरी तरह निरस्त्र करने का रास्ता निकाला जा सके।

न्यूज़ इंडिया लाइव 28 Jul 2026 8:46 am

टूथपेस्ट के दावों की खुली पोल! बांग्लादेश की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: 76% सैंपल में मिले कैंसरकारी 'माइक्रोप्लास्टिक'

हम में से ज्यादातर लोग अपने दिन की शुरुआत दांतों की सफाई और ओरल हाइजीन के लिए टूथपेस्ट से करते हैं। टूथपेस्ट कंपनियां भी कैविटी से सुरक्षा और दांतों के मोती जैसे चमकने के बड़े-बड़े दावे करती हैं। लेकिन हाल ही में बांग्लादेश से सामने आई एक चौंकाने वाली वैज्ञानिक अध्ययन रिपोर्ट ने करोड़ों लोगों की सेहत को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। एनवायरनमेंट एंड सोशल डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (ESDO) द्वारा किए गए एक व्यापक अध्ययन के अनुसार, बाजार में बिकने वाले ज्यादातर टूथपेस्ट सैंपल में माइक्रोप्लास्टिक (प्लास्टिक के अति-सूक्ष्म कण) पाए गए हैं।34 में से 26 सैंपल में पाए गए प्लास्टिक के खतरनाक कणESDO द्वारा यह अध्ययन जुलाई 2025 से जून 2026 के बीच किया गया। इस जांच में बांग्लादेश, भारत, थाईलैंड और वियतनाम में निर्मित 19 प्रमुख ब्रांडों के कुल 34 टूथपेस्ट सैंपल शामिल किए गए थे। जहांगीरनगर विश्वविद्यालय की Laboratory of Environmental Health and Ecotoxicology में हुई वैज्ञानिक जांच में पाया गया कि 34 में से 26 सैंपल (लगभग 76.5 फीसदी) में माइक्रोप्लास्टिक मौजूद थे।स्थानीय बनाम विदेशी ब्रांड: बांग्लादेश में बने 25 स्थानीय उत्पादों में से 22 में माइक्रोप्लास्टिक मिले।अन्य देशों के सैंपल: भारत से शामिल 5 में से 1, थाईलैंड के 2 में से 1 और वियतनाम के दोनों सैंपल में माइक्रोप्लास्टिक की पुष्टि हुई है।बच्चों के टूथपेस्ट भी असुरक्षित: चिंता की बात यह है कि बच्चों के लिए खास तौर पर बनाए गए 6 में से 4 टूथपेस्ट सैंपल में भी प्लास्टिक के कण पाए गए। इनमें Kodomo Ultra Shield Formula Strawberry, Meril Baby Strawberry, Meril Baby Orange और Pepsodent Kids Orange शामिल हैं।किस टूथपेस्ट में मिले सबसे ज्यादा माइक्रोप्लास्टिक कण?शोधकर्ताओं का स्पष्ट कहना है कि किसी भी ओरल केयर प्रोडक्ट या टूथपेस्ट में माइक्रोप्लास्टिक की मात्रा शून्य (Zero) होनी चाहिए। अध्ययन में प्रति 100 ग्राम टूथपेस्ट में 20 से लेकर 320 तक माइक्रोप्लास्टिक के कण पाए गए:टूथपेस्ट ब्रांडमाइक्रोप्लास्टिक कण (प्रति 100 ग्राम)मेडिप्लस फ्लोराइड जेल (Mediplus Fluoride Gel)320 कण (सबसे ज्यादा)क्लोजअप रेड हॉट / मेंथॉल फ्रेश (Closeup Red Hot / Menthol Fresh)160 कणकोडोमो अल्ट्रा शील्ड फॉर्मूला (Kodomo Ultra Shield)140 कणसिग्नल ग्रीन टी (Signal Green Tea)120 कणपेप्सोडेंट एडवांस साल्ट / हिमालया कंप्लीट केयर100-100 कणसेंसोडाइन फ्रेश मिंट (Sensodyne Fresh Mint)80 कणहालांकि, राहत की बात यह है कि जांच किए गए 8 सैंपल पूरी तरह माइक्रोप्लास्टिक-मुक्त पाए गए, जिनमें जेनफ्रेश (Genfresh), पैराशूट जस्ट फॉर बेबी मैंगो (Parachute Just for Baby Mango) और क्लोजअप रेड-हॉट जिंक फ्रेश टेक्नोलॉजी शामिल हैं।क्या होता है माइक्रोप्लास्टिक और सेहत को कितना बड़ा खतरा?माइक्रोप्लास्टिक क्या हैं?माइक्रोप्लास्टिक 5 मिलीमीटर से भी छोटे प्लास्टिक के टुकड़े होते हैं, जो औद्योगिक कचरे, सिंथेटिक कपड़ों और सौंदर्य प्रसाधनों में इस्तेमाल होने वाले माइक्रोबीड्स से बनते हैं।शरीर और अंगों पर गंभीर असर:ब्रशिंग के दौरान ये सूक्ष्म कण आसानी से मुंह के जरिए या निगलने से शरीर के भीतर प्रवेश कर जाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, शरीर में माइक्रोप्लास्टिक जमा होने से:पाचन और श्वसन तंत्र: पाचन क्रिया और फेफड़ों के काम करने की क्षमता प्रभावित होती है।हार्ट और नर्वस सिस्टम: हृदय प्रणाली और तंत्रिका तंत्र (Nervous System) में गंभीर सूजन आ सकती है।हार्मोनल असंतुलन: यह शरीर के एंडोक्राइन सिस्टम को नुकसान पहुंचाकर हार्मोनल गड़बड़ी, प्रजनन क्षमता (Fertility) में कमी और भ्रूण के विकास में रुकावट पैदा कर सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 27 Jul 2026 10:39 pm

PoJK में पाकिस्तानी सेना का खूनी तांडव: रावलाकोट में प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध फायरिंग, 5 की मौत और दर्जनों घायल

पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर (PoJK) में स्थिति बेहद तनावपूर्ण और बेकाबू हो गई है। सोमवार को रावलाकोट में अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नागरिकों पर पाकिस्तानी सेना ने अंधाधुंध गोलियां चला दीं। इस दर्दनाक घटना में कम से कम 5 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 30 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। घायलों में से कई की हालत नाजुक बनी हुई है, जिससे मौतों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका है।यह खूनी गोलीबारी तब हुई जब हजारों की संख्या में नागरिक जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के बैनर तले मुजफ्फराबाद की ओर मार्च करने की तैयारी कर रहे थे।52 दिनों से जारी आंदोलन और JAAC का अल्टीमेटमPoJK में पिछले 52 दिनों से लगातार विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। स्थानीय नागरिक और JAAC के कार्यकर्ता गिरफ्तार किए गए एक्टिविस्ट्स की रिहाई, प्रदर्शनकारियों पर दर्ज झूठे मुकदमों की वापसी और क्षेत्र के आर्थिक-सामाजिक अधिकारों की बहाली की मांग कर रहे हैं।गतिरोध को खत्म करने के लिए JAAC और स्थानीय प्रशासन के बीच बातचीत चल रही थी। JAAC ने आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी करने के लिए 27 जुलाई की दोपहर 1:00 बजे तक की डेडलाइन दी थी। मांगें न माने जाने पर जैसे ही हजारों लोगों ने रावलाकोट से मुजफ्फराबाद की ओर मार्च शुरू किया, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने उन पर बल प्रयोग करते हुए सीधी फायरिंग कर दी।धांधली के आरोप और चुनाव पर पड़ा गहरा असरयह भयानक हिंसा ऐसे समय में हुई है जब PoJK के मीरपुर डिवीजन के 13 निर्वाचन क्षेत्रों में पहले चरण का मतदान चल रहा था। एक तरफ लोग अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर हैं, वहीं दूसरी तरफ कोटली समेत कई इलाकों से चुनाव में भारी धांधली और बूथ कैप्चरिंग के आरोप सामने आए हैं।लगातार जारी हड़ताल, रैलियों पर पाबंदी और सेना की बर्बरता के कारण राजनीतिक दलों का चुनाव प्रचार पूरी तरह ठप हो गया है। आम जनता में इस चुनावी प्रक्रिया को लेकर भारी असंतोष और बेरुखी देखी जा रही है।रावलाकोट और सुधनोती में चुनाव 10 अगस्त तक टलेरावलाकोट में हुए इस खूनी नरसंहार और लगातार बढ़ते जनसैलाब को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह बैकफुट पर आ गया है। बिगड़ते हालात और सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए सुधनोती और रावलाकोट जिलों में प्रस्तावित विधानसभा चुनावों को 10 अगस्त तक के लिए स्थगित कर दिया गया है।इस घटना के बाद से पूरे PoJK में पाकिस्तानी हुकूमत और सेना के खिलाफ गुस्सा चरम पर है और जगह-जगह विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 27 Jul 2026 10:38 pm

'छात्रों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार पहले कभी नहीं हुआ':संसद में खड़गे का हमला, हंगामे के बीच पेश हुआ एंटी पेपर लीक बिल

संसद में मानसून सत्र के दूसरे सप्ताह की शुरुआत सोमवार को भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के तीखे टकराव के साथ हुई। लोकसभा और राज्यसभा दोनों में आंदोलनकारी छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया, जिसके कारण दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। गौरतलब है कि जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन खत्म हो चुका है, लेकिन छात्रों के साथ मारपीट का मुद्दा संसद में गरमाया हुआ है। सुबह 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई। सरकार ने लोकसभा में लोक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 भी पेश किया। प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने आंदोलनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर नारेबाजी शुरू कर दी। लगातार शोर-शराबे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। दोपहर 12 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। पीठासीन अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने आवश्यक दस्तावेज सदन पटल पर रखने की प्रक्रिया पूरी कराई। करीब 12 बजकर 4 मिनट पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला फिर आसन पर आए। इस दौरान विपक्षी सांसद वेल में नारेबाजी कर रहे थे। इस बीच प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने लोक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष से कहा कि सरकार इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार है और सदन की कार्यवाही चलने दें, लेकिन हंगामा नहीं थमा। इसके बाद सदन को दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दिया गया। दोपहर 2 बजे कार्यवाही फिर शुरू हुई, लेकिन विपक्ष का विरोध जारी रहा। करीब 2 बजकर 4 मिनट पर संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार ने इस विधेयक पर चर्चा के लिए समय तय कर दिया है, फिर भी विपक्ष नारेबाजी कर सदन क्यों नहीं चलने दे रहा है। हंगामा जारी रहने पर लोकसभा की कार्यवाही शाम 5 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। वहीं, राज्यसभा की कार्यवाही भी सुबह 11 बजे शुरू हुई। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाने की प्रक्रिया पूरी कराई। सुबह 11 बजकर 4 मिनट पर नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे बोलने के लिए खड़े हुए। उस समय कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी भी सदन में मौजूद थीं। सभापति ने उन्हें नियमों का हवाला देते हुए रोकने की कोशिश की, लेकिन खरगे ने ऊंची आवाज में विरोध दर्ज कराते हुए कहा- ‘जिस तरह छात्रों को पीटा गया, घसीटा गया और उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया, ऐसा भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ।’ खरगे के बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोक-झोंक शुरू हो गई। हंगामे के चलते सभापति ने राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक टाल दी। दोपहर 2 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। इस बार उपसभापति हरिवंश आसन पर थे। सरकार ने राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू कराई और सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर दिया। हालांकि, विपक्ष लगातार छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाने की कोशिश करता रहा। पीठ की ओर से सदस्यों को केवल लिस्टेड विषयों की कार्यवाही तक सीमित रहने के लिए कहा गया, जिसके बाद फिर हंगामा शुरू हो गया। लगातार रुकावट के कारण राज्यसभा की कार्यवाही पहले दोपहर 3 बजे तक और फिर दोबारा शुरू होने के महज एक मिनट बाद शाम 5 बजकर 15 मिनट तक के लिए स्थगित कर दी गई। क्या है लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 केंद्र सरकार ने 27 जुलाई 2026 को लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। यह 2024 में लागू लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम को और प्रभावी बनाने के मकसद से लाया गया है। प्रस्तावित संशोधन का मकसद भर्ती और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, संगठित नकल, परीक्षा माफिया और तकनीक के जरिए होने वाली धांधली पर अधिक सख्ती से रोक लगाना है। इसमें दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। वीडियो देखने के लिए ऊपर थंबनेल पर क्लिक करें…

दैनिक भास्कर 27 Jul 2026 7:06 pm

आज का एक्सप्लेनर:धर्मेंद्र प्रधान गए, अब विपक्ष के निशाने पर गृहमंत्री क्यों हैं; ये स्ट्रैटेजी कारगर होगी या दांव उल्टा पड़ जाएगा

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होते ही कॉकरोच जनता पार्टी ने आंदोलन खत्म कर दिया, लेकिन विपक्ष ने अपनी रणनीति बदल दी। अब निशाने पर गृहमंत्री अमित शाह हैं। 26 जुलाई को राहुल गांधी ने शाह को चिट्ठी लिखकर दो सवाल पूछे। 27 जुलाई को विपक्षी पार्टियों ने तय किया है कि संसद की कार्यवाही बाधित करेंगे और अमित शाह से जवाब मांगेंगे। आखिर विपक्ष की गृहमंत्री को टारगेट करने की नई स्ट्रैटेजी क्या है, ये कारगर होगी या दांव उल्टा पड़ जाएगा; समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: राहुल गांधी ने गृहमंत्री अमित शाह से क्या सवाल पूछे हैं? जवाब: 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्ट्रैटेजी शिफ्ट का पहला संकेत मिला। राहुल ने धर्मेंद्र प्रधान की बजाए अमित शाह को घेरते हुए कहा- 'याद रहे, प्रदर्शन में किसी छात्र का हाथ टूटा, किसी का पैर, तो किसी की पसली। पेलेट गन जैसे जानलेवा हथियार का इस्तेमाल किया गया, तो कई चोट खाकर क्रिटिकल हो गए। इन सबके सीधे जिम्मेदार गृह मंत्री अमित शाह हैं।' राहुल गांधी ने अमित शाह को चिट्ठी लिखकर 2 सवाल पूछे- लंबे वक्त से कांग्रेस कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार आदेश रावल के मुताबिक, ' राहुल गांधी गृहमंत्री अमित शाह से मांग रहे हैं। यानी वे बोल रहे हैं कि गृहमंत्री के निर्देश पर छात्रों पर लाठी और पैलेट गन चलाई गई। सवाल-2: संसद के लिए विपक्ष ने क्या रणनीति बनाई है? जवाब: गृहमंत्री अमित शाह को घेरना विपक्ष की एक साझा रणनीति है, सोमवार यानी 27 जुलाई को इसके 6 साफ संकेत मिले… 1. सदन शुरू होते ही हंगामा: सुबह 11 बजे सदन शुरू होते ही विपक्ष छात्रों से मारपीट के मुद्दे पर चर्चा के लिए अड़ गया। लोकसभा स्पीकर ने 4 बार सदन की कार्रवाई स्थगित की। सिवाए एक बिल पेश होने के अलावा लोकसभा में और कोई चर्चा नहीं हुई। 2. दोनों सदनों में स्थगन प्रस्ताव: लोकसभा में कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल और हिबी ईडन ने स्थगन प्रस्ताव के लिए नोटिस दिया। राज्यसभा में रेणुका चौधरी ने भी चर्चा के लिए नोटिस दिया। 3. सदन के बाहर प्रदर्शन: सदन के बाहर कांग्रेस सांसदों न मार्च निकाला और नारे लगाए, 'अमित शाह जवाब दो, जवाब दो।' 4. सोशल मीडिया पर पोस्ट: विपक्षी नेता सोशल मीडिया पर भी अमित शाह से जवाब मांग रहे हैं। ऑल इंडिया महिला कांग्रेस ने X पर ट्वीट किया 'अमित शाह जवाब दो - लाठी का हिसाब दो' 5. मीडिया में बयानबाजी: TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, 'CRPF की रैपिड एक्शन फोर्स और दिल्ली पुलिस दोनों अमित शाह को रिपोर्ट करते हैं। या तो अमित शाह ने खुद ऑर्डर दिए हैं। या उनके विभाग से किसने ऑर्डर दिए हैं, इसका भी वे जवाब दें।' 6. खड़गे के कमरे में बैठक : यह सब सुबह सदन शुरु होने से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कमरे में विपक्षी दलों की बैठक के बाद शुरू हुआ। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें संसद की कार्रवाई को बाधित करने और अमित शाह से जवाब मांगने की रणनीति तय हुई है। दरअसल, देश की राजधानी होने के नाते दिल्ली पुलिस और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी एजेंसी होने के नाते रैपिड एक्शन फोर्स यानी RAF केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है। 20 जुलाई का संसद मार्च संभालने यही दोनों बल तैनात थे। पॉलिटिकल एक्सपर्ट रशीद किदवाई कहते हैं, 'नीट पेपर लीक के मामले में कांग्रेस के लिए अब ज्यादा राजनीतिक लाभ बचा नहीं, लेकिन आंदोलन के दौरान लाठीचार्ज और बल प्रयोग से युवाओं में एक सेंटिमेंट है। कांग्रेस अब युवाओं का आक्रोश अमित शाह की तरफ डायवर्ट करने की कोशिश हो रही है, क्योंकि वे बीजेपी में अघोषित तौर पर नंबर-2 हैं।' सीनियर जर्नलिस्ट नीरज चौधरी बताती हैं, ‘अभी सरकार पर प्रेशर का एक मोमेंटम बना हुआ है। विपक्ष चाहता है कि इस सेंटिमेंट को और भुनाया जाए और सरकार को घेरा जाए। जवाबदेही तय की जाए।’ सवाल-3: मोदी सरकार की काउंटर स्ट्रैटेजी क्या है? जवाब: सरकार की काउंटर स्ट्रैटेजी इन तीन कदमों से समझिए… रशीद किदवाई बताते हैं कि सरकार चाहती है कि किसी भी तरह से संसद में चर्चा शुरू हो और इसमें सरकार का फायदा ही है। क्योंकि उसके पास दर्जनों अच्छे वक्ता हैं, जो विपक्ष पर भारी पड़ सकते हैं। ऐसे में विपक्ष केवल हल्ला-हंगामा करके वॉकआउट कर सकता है। सीनियर जर्नलिस्ट हर्षवर्धन त्रिपाठी मनाते हैं कि सरकार कतई नहीं चाहेगी कि ऐसा ऑप्टिक्स बने कि वो विपक्ष या कांग्रेस के सामने झुक गई। मानसून सत्र के पहले हफ्ते में कुछ खास नहीं हुआ है। ऐसे में सरकार पूरी कोशिश करेगी कि गतिरोध टूटे और संसद में चर्चा हो। सरकार दिखाना चाहती है कि प्रदर्शनकारी छात्र पीएम मोदी के फैसलों के बाद खुश हैं। बीजेपी सांसद राहुल सिन्हा ने कहा, ‘जो छात्र प्रदर्शन कर रहे थे, वे प्रधानमंत्री को आशीर्वाद देते हुए खुशी-खुशी वहां से चले गए। लेकिन कांग्रेस इस मुद्दे को जिंदा रखने की कोशिश कर रही है। उन्हें संसद में आने वाले विधेयक पर बोलना चाहिए। कांग्रेस बोलने से डरती है, क्योंकि इससे उनका पर्दाफाश हो जाएगा।’ सवाल-4: क्या विपक्ष का शाह को घेरने वाला दांव उल्टा भी पड़ सकता है?जवाबः इस स्ट्रैटेजी के दो पहलू हैं और दोनों तरफ के तर्क मजबूत हैं। ये किस करवट बैठेगी, ये जनता के परसेप्शन से तय होगा… यानी विपक्ष की बाजी इस बात पर टिकी है कि जनता के बीच छात्रों पर हुए एक्शन का गुस्सा अभी ठंडा हुआ है या नहीं। अगर सेंटिमेंट अभी भी गर्म है, तो अमित शाह को घेरना कारगर हो सकता है। अगर सरकार का ‘मसला सुलझ गया’ वाला नैरेटिव हावी हो गया, तो विपक्ष की रणनीति खुद उसके लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है। सवाल-5: इन सबके बीच कॉकरोच जनता पार्टी का रुख क्या है? जवाब: फिलहाल CJP ने छात्रों पर कार्रवाई को लेकर गृहमंत्री अमित शाह से कोई सवाल नहीं पूछे हैं। विपक्ष की स्ट्रैटेजी पर भी CJP की तरफ से कोई समर्थन या विरोध सामने नहीं आया है। CJP ने बार-बार अपने प्रदर्शन को गैर-राजनीतिक बताया और कहा कि हम सभी से अपील करते हैं कि वो हमारा साथ दें, भले ही आप बीजेपी से जुड़े हों। राहुल गांधी ने भी इस पूरे वाकये में एक भी बार CJP और अभिजीत दीपके का नाम नहीं लिया। 26 जुलाई को CJP प्रवक्ता सौरव दास ने बयान जारी किया कि सरकार अपने वादे पूरे करे कि प्रदर्शन की वजह से किसी छात्र पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। जिनके खिलाफ केस दर्ज हुए हैं, उन्हें वापस लिया जाएगा। 27 जुलाई को सौरव दास ने सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि देश भर में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज केसों को ट्रैक कर रहे हैं और उन्हें मदद पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। ----------- ये खबर भी पढ़िए… क्या पॉलिटिकल पार्टी बनाएंगे 'कॉकरोच' या मूवमेंट जारी रखेंगे; अभिजीत दीपके का आगे का प्लान क्या, फ्यूचर के 3 सिनैरियो 6 जून 2026, अभिजीत दिपके पहली बार लंदन से दिल्ली एयरपोर्ट उतरे और सीधे जंतर-मंतर प्रोटेस्ट साइट पहुंचे। 20 जून को दोबारा प्रोटेस्ट पर बैठे, तो 36 दिन के बाद 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर उठे। जंतर-मंतर से जाते-जाते कॉकरोच पार्टी ने प्रोटेस्टर्स से कहा- ‘जल्दी दोबारा मिलेंगे।’ पूरी खबर पढ़िए

दैनिक भास्कर 27 Jul 2026 5:48 pm

होर्मुज़ जलडमरूमध्य में आक्रामक रुख अपनाने की भारी कीमत ईरान को चुकानी पड़ रही है; तेहरान अंतरराष्ट्रीय जाल में

पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) के रणक्षेत्र से इस वक्त की सबसे बड़ी और संवेदनशील भू-राजनीतिक खबर सामने आ रही है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समुद्री व्यापारिक मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को बंद करने की धमकी देने वाले ईरान के कड़े तेवर अब पूरी तरह ढीले पड़ते नजर आ रहे हैं। वैश्विक कच्चे तेल की सप्लाई चेन को बंधक बनाकर दुनिया को डराने की कोशिश कर रहा तेहरान खुद अपने ही बुने चक्रव्यूह में बुरी तरह फंस गया है। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और वैश्विक ताकतों की सख्त सैन्य घेराबंदी के बाद अब ईरान कूटनीतिक मोर्चे पर बैकफुट पर आ गया है और दुनिया भर में अलग-थलग पड़ने के बाद उसकी छटपटाहट साफ देखी जा सकती है।क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और क्यों इस पर अड़ा था ईरान?भौगोलिक और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को आपस में जोड़ता है। दुनिया का करीब 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी संकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है। ईरान लंबे समय से इस रास्ते पर अपना नियंत्रण होने का दावा करता रहा है और जब भी उस पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता है, वह इसे बंद करने की धमकी देने लगता है। इस बार भी ईरान ने अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन करते हुए इस रूट को ब्लॉक करने की कोशिश की थी, ताकि भारत, चीन और यूरोपीय देशों समेत पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को घुटनों पर लाया जा सके।वैश्विक ताकतों की जवाबी कार्रवाई से कैसे पस्त हुआ तेहरान?ईरान की इस आक्रामक रणनीति का मुकाबला करने के लिए इस बार अमेरिका, ब्रिटेन और उनके सहयोगी देशों ने बिना कोई वक्त गंवाए एक साझा नौसैनिक टास्क फोर्स को ओमान की खाड़ी में तैनात कर दिया। अंतरराष्ट्रीय नौसेना की इस भारी मौजूदगी और अत्याधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम की तैनाती ने ईरान की नौसैनिक घेराबंदी को पूरी तरह नाकाम कर दिया। इसके साथ ही, ईरान पर लगे नए आर्थिक और तकनीकी प्रतिबंधों ने उसकी घरेलू अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। अपनी ही धमकियों के जाल में घिरने और चौतरफा मार झेलने के बाद अब ईरानी प्रशासन अंतरराष्ट्रीय मंचों पर राहत की गुहार लगाता हुआ दिख रहा है।भारतीय बाजार और कच्चे तेल की कीमतों पर क्या होगा इसका असर?स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव कम होने और ईरान के बैकफुट पर आने की खबर से भारतीय तेल कंपनियों और घरेलू बाजार ने बड़ी राहत की सांस ली है। भारत अपनी जरूरत का एक बड़ा हिस्सा इसी रूट के जरिए आयात करता है। रक्षा और बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान इस रास्ते को बंद करने में कामयाब हो जाता, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती थीं, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम आसमान छूने लगते। ईरान के शांत होने से अब सप्लाई चेन सुचारू रूप से चलने की उम्मीद जगी है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता लौटेगी।

न्यूज़ इंडिया लाइव 27 Jul 2026 12:13 pm

हिज्बुल्लाह का साथ देना ईरान की रणनीतिक नीति का हिस्सा: मोजतबा खामेनेई

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह सैयद मोजतबा हुसैनी खामेनेई ने हिज्बुल्लाह के महासचिव शेख नईम कासिम को लिखे एक पत्र में कहा कि हिज्बुल्लाह के लिए ईरान का समर्थन एक 'रणनीतिक जिम्मेदारी' है।

देशबन्धु 27 Jul 2026 7:50 am

जिहाद ही एकमात्र रास्ता... हिजबुल्लाह के समर्थन में खुलेआम उतरे ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई, अमेरिका और इजरायल को दो टूक संदेश

पश्चिम एशिया में सुलग रहे महासंग्राम के बीच ईरान की तरफ से एक बेहद कड़ा और बड़ा बयान सामने आया है। ईरान के सर्वोच्च नेता (सुप्रीम लीडर) मोजतबा खामेनेई ने लेबनान के सक्रिय संगठन हिजबुल्लाह की खुलकर सराहना की है और उसे इजरायल के खिलाफ मोर्चे पर डटी हुई एक मजबूत चट्टान करार दिया है। मोजतबा खामेनेई ने साफ शब्दों में अमेरिका और इजरायल को चेतावनी देते हुए कहा है कि जब तक लेबनान के खिलाफ इजरायली हमले पूरी तरह नहीं रुकते, तब तक क्षेत्र में किसी भी प्रकार का युद्धविराम समझौता मुमकिन नहीं है। खामेनेई का यह बयान ऐसे वक्त में आया है जब वैश्विक कूटनीति के स्तर पर लेबनान में शांति स्थापित करने और हिजबुल्लाह के भविष्य को लेकर बैठकों का दौर जारी है।एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस और हिजबुल्लाह की रीढ़ बना ईरानअंतरराष्ट्रीय राजनीति के जानकारों के मुताबिक, हिजबुल्लाह ईरान के 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' (प्रतिरोध की धुरी) का सबसे मजबूत और अहम हिस्सा है। यह ईरान समर्थित उन सशस्त्र समूहों का नेटवर्क है, जिसे पश्चिम एशिया में अमेरिका और इजरायल के प्रभाव को चुनौती देने के लिए तैयार किया गया है। ईरान की तरफ से इन संगठनों को भारी मात्रा में आर्थिक मदद, आधुनिक हथियार और रणनीतिक ट्रेनिंग दी जाती है। लेबनान के हिजबुल्लाह के अलावा यमन के हुती विद्रोही और इराक के कई लड़ाका समूह इसी नेटवर्क का हिस्सा हैं, जो ईरान के साए में पश्चिम एशिया की भू-राजनीति को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहे हैं।'अब सिर्फ जिहाद और प्रतिरोध ही बचा है रास्ता'हिजबुल्लाह प्रमुख शेख नइम कासिम द्वारा भेजे गए वफादारी पत्र का जवाब देते हुए ईरानी सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक के बाद एक कई संदेश साझा किए। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में इजरायल के खिलाफ मुकाबले के लिए 'जिहाद और प्रतिरोध' के अलावा और कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। खामेनेई ने हिजबुल्लाह के दिवंगत पूर्व प्रमुख सैयद हसन नसरल्लाह और जंग में मारे गए अन्य कमांडरों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि इन बहादुर लड़ाकों के बलिदान ने ही इस संगठन को एक छोटे से पौधे से बदलकर आज एक विशाल पेड़ के रूप में खड़ा किया है। उन्होंने दक्षिणी लेबनान की आम जनता के धैर्य और साहस की भी जमकर प्रशंसा की।अमेरिका और ट्रंप प्रशासन के सामने रखी गई ईरान की कड़ी शर्तमोजतबा खामेनेई की यह आक्रामक टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन के बीच हुई हाई-प्रोफाइल मुलाकात के तुरंत बाद आई है। व्हाइट हाउस में हुई इस बैठक के दौरान लेबनानी क्षेत्र से इजरायली सेना की पूर्ण वापसी, हिजबुल्लाह को हथियार मुक्त करने और लेबनानी सेना को अमेरिकी मदद देने जैसे गंभीर मुद्दों पर चर्चा हुई थी। इसके जवाब में ईरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका के साथ किसी भी संभावित समझौते की सबसे बड़ी शर्त लेबनान पर इजरायली हमलों पर तत्काल रोक लगाना होगी। ईरान के इस रुख से साफ है कि पश्चिम एशिया का यह संकट आने वाले दिनों में और अधिक गहरा सकता है, जिससे वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 27 Jul 2026 7:48 am

बलूचिस्तान में जबरन गुमशुदगियों पर मानवाधिकार विभाग सख्त, पाकिस्तान से जवाब मांगा

एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने चार बलूच लोगों के जबरन गायब किए जाने की निंदा की। संगठन ने आरोप लगाया कि ये लोग पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों की कार्रवाई के बाद लापता हुए।

देशबन्धु 27 Jul 2026 7:09 am

ईरान की सख्त चेतावनी, अमेरिकी सैन्य अभियानों में सहयोग करने वाले ठिकाने होंगे निशाने पर

ईरान के ख‍िलाफ युद्ध में अमेर‍िका की मदद में शाम‍िल होने वाले देशों को ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने चेतावनी दी

देशबन्धु 27 Jul 2026 6:50 am

रूस ने सुपरमार्केट पर ड्रोन हमला कर आम नागरिकों को बनाया निशाना, बच्चे समेत दो की मौत: जेलेंस्की

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने आरोप लगाया क‍ि रूस लगातार आम नागरिकों को निशाना बनाकर खुद को जीता हुआ महसूस करता है। उन्होंने इन हमलों को जानबूझकर किया गया आतंक करार दिया।

देशबन्धु 27 Jul 2026 5:30 am

कैस्पियन सागर में जहाज पर यूक्रेनी हमले पर भड़का ईरान, अराघची ने जेलेंस्की को दी जवाबी कार्रवाई की चेतावनी

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की को ईरानी व्‍यापार‍िक जहाज पर हमले का दोषी ठहराते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी।

देशबन्धु 27 Jul 2026 5:20 am

बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप जारी, चार और बच्चों की मौत; मृतकों की संख्या बढ़कर 820 हुई

बांग्लादेश में खसरे (मीजल्स) का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। रविवार सुबह 8 बजे (स्थानीय समय) तक पिछले 24 घंटों में खसरे जैसे लक्षणों वाले चार और बच्चों की मौत हो गई। इसके साथ ही देश में खसरे से जुड़ी पुष्टि और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या बढ़कर 820 हो गई है।

देशबन्धु 27 Jul 2026 5:10 am

‘पुलिस अंकल वास्तेगुना हुइंया’:सरकार के लिए आउट ऑफ सिलेबस कैसे थे जेन-जी प्रदर्शनकारी; इन पर क्यों नहीं चला कोई तिकड़म

दिल्ली का जंतर-मंतर। सुरक्षाकर्मियों से एक लड़की कहती है- पुलिस अंकल, पुलिस अंकल वास्तेगुना हुइंया! इसके बाद वहां मौजूद पूरा ग्रुप जोर-जोर से हंसने लगता है। पुलिस भी ठिठक जाती है कि ये कोई गाली थी या देशविरोधी नारा? आखिर इस पर एक्शन क्या ले? ये वायरल रील जंतर-मंतर समेत देशभर में फैले जेन-जी आंदोलन का लिटमस टेस्ट है। ‘वास्तेगुना हुइंया’ की तरह ये आंदोलन भी मोदी सरकार की समझ से परे था। न ‘हिंदू-मुस्लिम’ चला, न एंटी-नेशनल एंगल। न विदेशी फंडिंग के आरोप कारगर हुए, न ही कोई ऐसा चेहरा, जिसे दबाने से आंदोलन खत्म हो जाए। आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना ही पड़ा। अनोखा क्यों था ये जेन-जी आंदोलन और इन पर क्यों नहीं चला कोई तिकड़म; मंडे मेगा स्टोरी में पूरी कहानी… आखिर जेन-जी आंदोलन के सामने सरकार को क्यों झुकना पड़ा… **** ग्राफिक्स: द्रगचंद्र भुर्जी ---------------------------- ये खबर भी पढ़िए… बिना संबंध बनाए भी बच्चे पैदा कर लेती है कॉकरोच:सिर कटने पर भी कैसे जिंदा रहते हैं, डायनासोर से भी सीनियर; कॉकरोच के किस्से कॉकरोच जनता पार्टी की वेबसाइट, X अकाउंट और इंस्टाग्राम अकाउंट सभी हैक और डाउन हो गए, तो फाउंडर अभिजीत दीपके ने लिखा- ‘कॉकरोच कभी मरते नहीं।’बात सच भी है। कॉकरोच इस दुनिया में डायनासोर से भी पहले आए। सिर कट जाए, हफ्तों खाना न मिले फिर भी जिंदा रहते हैं। बिना नर के भी बच्चा पैदा कर सकते हैं। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 27 Jul 2026 4:50 am

‘बाबरी’ के लिए चाहिए 300 करोड़, मिले 1.5 करोड़:जहां मस्जिद बननी थी, वहां क्रिकेट खेल रहे बच्चे; 7 साल में नक्शा तक पास नहीं

रामजन्मभूमि पर नवंबर 2019 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से दो रास्ते निकले थे। विवादित 2.77 एकड़ जमीन रामलला को मिली और बाबरी की जगह नई मस्जिद के लिए अयोध्या से 25 किलोमीटर दूर धन्नीपुर में 5 एकड़ जमीन दी गई। राम मंदिर का निर्माण लगभग पूरा हो गया है। धन्नीपुर में मस्जिद की ईंट तक नहीं रखी गई। मस्जिद के लिए मिली जमीन पर घास उग आई है, चारों ओर तारबंदी है और बच्चे क्रिकेट खेल रहे हैं। यहां मस्जिद के साथ अस्पताल और म्यूजियम बनना था। 300 करोड़ रुपए की जरूरत थी, लेकिन सिर्फ डेढ़ करोड़ रुपए चंदा मिल पाया। जरूरी सरकारी मंजूरियां न मिलने से काम शुरू ही नहीं हो पाया। अब ट्रस्ट छोटी मस्जिद बनाने की तैयारी में है। धन्नीपुर के लोग मस्जिद बनने की उम्मीद छोड़ चुके हैं। वे कहते हैं- अल्लाह की मर्जी होगी, तो बन जाएगी। जमीन पर सिर्फ बोर्ड, कब्जा न हो जाए इसलिए तारबंदी अयोध्या-लखनऊ हाईवे छोड़ते ही धन्नीपुर गांव की सड़क शुरू होती है। कुछ मिनट बाद बाईं तरफ लोहे की फेंसिंग से घिरी मस्जिद की जमीन दिखती है। अंदर कोई मशीन नहीं, कोई मजदूर नहीं। सिर्फ खाली मैदान। करीब तीन हजार की आबादी वाले धन्नीपुर में 60% मुस्लिम आबादी है। ज्यादातर लोग मस्जिद पर बात करने से बचते हैं। महिलाएं तो बिल्कुल नहीं बोलतीं। मस्जिद की जमीन से सटी चाय की दुकान पर कुछ लोग अखबार पढ़ रहे थे। मस्जिद के बारे में पूछने पर एक-दूसरे को देखने लगे। एक बुजुर्ग मुस्कुराते हुए बोले, ‘हम खेती-किसानी वाले लोग हैं। यहां जानवर चराने आते हैं। मस्जिद कब बनेगी, कौन बनाएगा, ये तो लखनऊ और दिल्ली वाले जानें।’ नाम पूछने पर बुजुर्ग ने जवाब दिया- रहने दीजिए, हम इस मसले से दूर ही रहना चाहते हैं। खाली पड़ी जमीन के ठीक सामने माजिद खान का घर है। वे बात करने के लिए तैयार हो गए। बोले, ‘सुप्रीम कोर्ट के फैसले से धन्नीपुर के लोग खुश थे। न्यूज से पता चला कि मस्जिद के साथ मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भी बनेगा।' 'गांव के आसपास 30 किमी तक अच्छा अस्पताल नहीं है। सीरियस केस में इलाज के लिए 150 किमी दूर लखनऊ जाना पड़ता है। मस्जिद बन जाती तो गांव में इलाज मिलता। बच्चे पढ़ पाते और काम मिलता, लेकिन कुछ नहीं हुआ।’ आखिर सात साल में मस्जिद क्यों नहीं बन पाई पहली वजह: फंड नहीं है नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर फैसला सुनाते हुए सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को अयोध्या में नई मस्जिद बनाने का आदेश दिया था। अयोध्या की विवादित 2.77 एकड़ जमीन हिंदू पक्ष को मिली। मस्जिद बनाने के लिए अयोध्या से 25 किमी दूर जमीन धन्नीपुर गांव में दी गई। 3 अगस्त, 2020 को फैजाबाद DM अनुज कुमार झा ने जमीन वक्फ बोर्ड को सौंप दी। मस्जिद बनाने के लिए इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन बनाया गया। अगस्त 2021 में फाउंडेशन ने लोगों से मदद की अपील की। बैंक अकाउंट की डिटेल पब्लिक की। नवंबर, 2022 तक ट्रस्ट को देशभर से करीब 40 लाख रुपए डोनेशन मिला। इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन के चेयरमैन जुफर अहमद फारूकी कहते हैं, ‘5 साल में हम बमुश्किल 1.5 करोड़ रुपए ही जुटा पाए हैं। इतने में बड़ी मस्जिद बना पाना मुमकिन नहीं है। हमने सोचा है कि पब्लिक के पास न जाकर अपने लोगों से 5 करोड़ रुपए जुटाएं और कम से कम छोटी मस्जिद का काम शुरू कर दें।’ पेशे से जर्नलिस्ट अरशद खान मस्जिद के काम से शुरुआत से जुड़े हैं। वे कहते हैं, ‘पहले लोगों में मस्जिद को लेकर जोश था। 21 हजार रुपए का पहला चंदा लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रोहित श्रीवास्तव ने दिया। फैजाबाद के DM रहे अनुज कुमार झा ने जमीन दिलवाने में मदद की। इसके बाद जैसे-जैसे वक्त बीता, काम रुक गया।’ हमने पहला दान देने वाले लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रोहित श्रीवास्तव से बात की। वे मस्जिद न बनने से नाराज हैं। कहते हैं, ‘अफसोस होता है कि मैंने जिस चीज के लिए चंदा दिया, उस पर आज तक काम शुरू नहीं हो पाया। मैं अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन के लिए जाता हूं, तो धन्नीपुर गांव जरूर जाता हूं। हर बार मुझे वहां खाली जमीन ही नजर आती है।’ दूसरी वजह: लोगों का जुड़ाव नहींधन्नीपुर की शाहगदा शाह मजार पर 'मोहम्मद-बिन-अब्दुल्लाह' मस्जिद की फोटो वाले पोस्टर चिपकाए गए थे। इनमें अंग्रेजी में लिखा गया- A MASTERPIECE IN MAKING यानी एक नायाब मस्जिद तैयार हो रही है। धन्नीपुर के लोग खुश थे कि गांव में देश की सबसे चर्चित मस्जिद बनेगी। धीरे-धीरे वक्त बीतता गया, लेकिन काम शुरू नहीं हो पाया। मजार पर चिपके पोस्टर हटा दिए गए। इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन के चेयरमैन जुफर अहमद फारूकी कहते हैं, 'अफसोस है कि अयोध्या में बनने वाली मस्जिद अब वैसी नहीं बन पाएगी, जैसा हमने सोचा था। फैजाबाद और अयोध्या के लोगों, खासकर मुस्लिम समुदाय ने भी इसमें इंट्रेस्ट नहीं दिखाया।’ जर्नलिस्ट अरशद खान बताते हैं, ‘नई इबादतगाह अयोध्या से दूर है। इसलिए मुसलमान खुद को इससे कनेक्ट नहीं कर पाए। अगर इसके लिए अयोध्या में जमीन मिलती तो सूरत कुछ और होती।' 'सुप्रीम कोर्ट के फैसले में भी साफ कहा गया था कि मस्जिद की जमीन अयोध्या के मुख्य स्थान पर होगी। (MOSQUE WILL BE CONSTRUCTED AT PROMINENT PLACE OF AYODHYA) हमें शहर से 25 किलोमीटर दूर जमीन मिली। वहां जाने का रास्ता बहुत संकरा है। इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। लोग इतनी दूर क्यों नमाज पढ़ने जाएंगे।’ तीसरी वजह: अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी की मंजूरी नहींअरशद खान आगे कहते हैं, ‘ट्रस्ट बना, तब टीम अच्छी थी। अतहर हुसैन सेक्रेटरी थे। लखनऊ के सीनियर एडवोकेट इमरान अहमद शिबली मेंबर थे। मैं था, राशिद मोहम्मद साहब थे। हम लोगों ने मस्जिद बनवाने के लिए बहुत मेहनत की। नया नक्शा बनाया। उस वक्त अयोध्या जिला प्रशासन ने काफी सपोर्ट किया। हमें मस्जिद के लिए जरूरी NOC नहीं मिली।’ ‘ट्रस्ट के चेयरमैन जुफर अहमद फारुकी ने बताया था कि मुंबई के बड़े बिजनेसमैन हाजी अराफात शेख धन्नीपुर आएंगे और मस्जिद-अस्पताल का काम शुरू होगा। हाजी साहब ने बताया कि मस्जिद बनने से पहले मक्का-मदीना से ईंटें आएंगी, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं हुआ। हमने चेयरमैन से भी कॉन्टैक्ट किया, लेकिन उनका फोन नहीं उठता। वे कई साल से आउट ऑफ कॉन्टैक्ट हैं। हमने अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी में नक्शा जमा किया था, वो भी निरस्त हो गया।’ नक्शा क्यों रिजेक्ट हो गया, इस पर हमने ट्रस्ट और अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी में बात की। पता चला कि इसके पीछे सियासी रुकावट नहीं, बल्कि कागजी पेचीदगियां हैं। कोई संस्था नॉर्मल बिल्डिंग के बजाय बड़ा पब्लिक कॉम्प्लेक्स बनाती है, तो इसके लिए नियम बहुत सख्त हो जाते हैं। इसकी प्रोसेस को तीन पॉइंट्स में समझिए… 1. लैंड यूज के कागजों में बार-बार बदलाव किसी भी बड़े निर्माण के लिए लोकल डेवलपमेंट अथॉरिटी (इस मामले में ADA) से ऑनलाइन और ऑफलाइन मंजूरी लेनी होती है। सबसे पहले जमीन का लैंड यूज देखा जाता है। इससे पता चलता है कि जमीन किस काम के लिए है। खेती की जमीन पर कॉमर्शियल या संस्थागत निर्माण नहीं हो सकता। सरकार ने कृषि भूमि दी, तो पहले उसका लैंड यूज बदलकर उसे संस्थागत करना पड़ा। इससे प्रोजेक्ट बनने में देरी हुई। 2. अथॉरिटी की तरफ से NOC न मिलना नक्शा पास होने से पहले PWD, प्रदूषण नियंत्रण विभाग, अग्निशमन विभाग, सिंचाई, नगर निगम जैसे विभागों से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना होता है। अब तक मस्जिद कमेटी को इन विभागों से NOC नहीं मिली है। अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी के सेक्रेटरी आरके मिश्रा बताते हैं कि किसी भी बड़े निर्माण से पहले जमीन के मालिक को अलग-अलग विभाग की NOC लेनी पड़ती है। इसमें ये होता है कि बिल्डिंग कितनी ऊंची होगी। फायर सिस्टम कैसा होगा। इंफ्रास्ट्रक्टर कैसा है। ये सब मानक के हिसाब से होता है, तो अथॉरिटी NOC देती है। मस्जिद कमेटी ने NOC क्लीयर करने के लिए भी एप्लीकेशन नहीं दी है।' 3. ले-आउट और डेवलपमेंट चार्ज का पेमेंट न होना NOC मिलने के बाद अथॉरिटी के इंजीनियर नक्शे की जांच करते हैं कि सड़क कितनी चौड़ी है, भूकंप झेलने की क्षमता क्या है। इसके बाद डेवलपमेंट चार्ज जमा करना पड़ता है और नक्शा पास हो जाता है। ADA के मुताबिक, मस्जिद कमेटी को अभी 1.22 करोड़ रुपए डेवलपमेंट चार्ज जमा करना है। सभी जरूरी डॉक्यूमेंट पूरे होने पर ही कंस्ट्रक्शन शुरू हो सकेगा। 23 जून, 2021 को मस्जिद ट्रस्ट ने नक्शे की मंजूरी के लिए आवेदन किया था। बाद में नक्शा वापस ले लिया। 2023 में नक्शे में छोटी मस्जिद के साथ कुछ बदलाव कर फिर से अप्लाई किया। सितंबर 2025 तक ट्रस्ट ने NOC नहीं ली और जरूरी डॉक्यूमेंट पोर्टल पर अपलोड नहीं करवाए। इससे उनकी एप्लिकेशन रिजेक्ट हो गई है। हमने मस्जिद कमेटी के जनरल सेक्रेटरी अतहर हुसैन से पूछा कि 2024 के बाद नक्शे के लिए क्यों अप्लाई नहीं किया गया? उन्होंने जवाब दिया- प्रोजेक्ट के हिसाब से जितने फंड की उम्मीद की थी, उसे जुटा नहीं पाए। यही वजह है कि हम नए नक्शे पर आगे बढ़ने से पहले फंड इकट्ठा कर लेना चाहते हैं। छोटी मस्जिद बनाने लायक रकम जुट जाएगी तो हमारे चैयरमैन नक्शे के लिए एप्लीकेशन फाइल करेंगे। बाबरी केस के पक्षकार बोले- ट्रस्ट ही नहीं चाहता कि मस्जिद बने राम जन्मभूमि मंदिर के गेट नंबर 11 के सामने बाबरी मस्जिद का केस लड़ने वाले इकबाल अंसारी का घर है। मस्जिद का काम बार-बार अटकने पर इकबाल कहते हैं, ‘देखिए, मस्जिद की जमीन सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को मिली है। उसके चेयरमैन ने अपना प्राइवेट ट्रस्ट बनाया है।’ इकबाल अंसारी के अलावा जर्नलिस्ट अरशद खान ने भी ट्रस्ट पर सवाल उठाए थे। इसके जवाब में मस्जिद कमेटी के जनरल सेक्रेटरी अतहर हुसैन कहते हैं, ‘इकबाल अंसारी इस प्रोजेक्ट पर क्या सोचते हैं और क्या कह रहे हैं, इस पर कोई कमेंट नहीं करना है। अरशद खान हमारी टीम के सबसे पुराने सदस्यों में से एक रहे हैं। उन्होंने शुरुआती दौर में फंड कलेक्शन से लेकर मस्जिद में म्यूजियम बनाने का प्लान तैयार किया।’ ‘ये सच है कि वक्त बीतने के साथ हमारी टीम के सामने कई रुकावटें आईं, इससे सदस्यों के बीच बातचीत भी कम हो गई। मैं आपको यकीन दिलाता हूं कि हम जल्द ही नए प्लान के साथ जमीन पर उतरने वाले हैं।’ ……………. ये खबर भी पढ़ें… 10 मंदिर उड़ाने की धमकी, कौन है खालिस्तान नेशनल आर्मी ‘तुम्हारे हिंदू मंदिर निशाने पर हैं। दिल्ली और हरियाणा के लोगों, तुमने 6 जून, 1984 को भिंडरांवाले की मौत पर मिठाइयां बांटी थीं। अब हम इसका बदला तुम्हारे मंदिरों में ब्लास्ट करके लेंगे। इसलिए अपने बच्चों को बचाओ और 5-6 जून को कोई सफर न करो।’ 4 जून की सुबह 9:54 बजे पंचकूला के मेयर श्यामलाल बंसल को धमकी भरा ये ई-मेल मिला। इसमें दिल्ली-हरियाणा के 6 बड़े मंदिरों में ब्लास्ट करने की धमकी थी। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 27 Jul 2026 4:48 am

होर्मुज स्‍ट्रेट में तेल टैंकर धमाके से बढ़ा तनाव, नौसैनिक सुरंग से टकराने का दावा

होर्मुज स्‍ट्रेट में एक तेल टैंकर के फटने का मामला सामने आया। स्थानीय मीडिया की खबरों के मुत‍ाब‍िक टैंकर नौसैनिक बारूदी सुरंग से टकराने के बाद फट गया

देशबन्धु 27 Jul 2026 3:30 am

नेपाल जाने वाले भारतीयों के लिए बड़ी राहत: अब साथ ले जा सकेंगे 200 और 500 के नए नोट, जानें क्या हैं नियम

भारत से पड़ोसी देश नेपाल जाने वाले पर्यटकों, व्यापारियों और आम लोगों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। करीब एक दशक से चले आ रहे एक अहम प्रतिबंध को नेपाल सरकार ने अब खत्म कर दिया है। नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) ने नए नियमों के तहत भारतीय यात्रियों और नेपाली नागरिकों को 200 रुपये और नए डिजाइन वाले 500 रुपये के भारतीय नोट नेपाल लाने और ले जाने की आधिकारिक मंजूरी दे दी है। साल 2016 की नोटबंदी के बाद से लागू सख्त नियमों में इसे एक बहुत बड़ा और सकारात्मक बदलाव माना जा रहा है।नए नियमों के तहत कितनी नकदी ले जा सकेंगे यात्री?नेपाल राष्ट्र बैंक द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार, भले ही बड़े नोटों के इस्तेमाल की छूट दे दी गई है, लेकिन अधिकतम नकदी की सीमा में कोई बदलाव नहीं हुआ है। भारत और नेपाल के नागरिक पहले की तरह ही अधिकतम 25,000 रुपये तक की भारतीय मुद्रा अपने साथ ले जा सकते हैं। इस 25,000 रुपये की सीमा में अब 200 रुपये और नए डिजाइन वाले 500 रुपये के नोट शामिल किए जा सकेंगे। हालांकि, यह छूट केवल 9 नवंबर 2016 (नोटबंदी) के बाद जारी किए गए नए नोटों पर ही लागू होगी। नोटबंदी से पहले वाले पुराने 500 और 1,000 रुपये के नोट नेपाल में अब भी पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं।2016 की नोटबंदी के बाद क्यों लगा था यह प्रतिबंध?वर्ष 2016 में भारत में हुई नोटबंदी के बाद सुरक्षा और प्रामाणिकता के मद्देनजर नेपाल ने 100 रुपये से बड़े सभी भारतीय नोटों के इस्तेमाल और देश में प्रवेश पर रोक लगा दी थी। हालांकि भारत ने बाद में 200 और 500 रुपये के नए नोट जारी कर दिए थे, लेकिन नेपाल ने लंबे समय तक पुराने प्रतिबंध को ही जारी रखा। इस वजह से नेपाल यात्रा के दौरान व्यावहारिक रूप से लोग केवल 100 रुपये के नोट ही ले जा पाते थे, जिससे भारी नकदी ले जाने में काफी दिक्कत होती थी। अब इस फैसले के बाद नकद भुगतान और सीमा पार छोटे-मोटे लेनदेन बहुत आसान हो जाएंगे।इन लोगों को मिलेगा सीधा फायदा और तीसरे देश का नियमइस फैसले से नेपाल जाने वाले भारतीय पर्यटकों, भारत आने-जाने वाले नेपाली नागरिकों और सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापार करने वाले कारोबारियों को सबसे बड़ा लाभ मिलेगा। हालांकि, नेपाल राष्ट्र बैंक ने यह साफ कर दिया है कि किसी भी नेपाली नागरिक को भारत के अलावा किसी तीसरे देश के रास्ते भारतीय मुद्रा नेपाल लाने या नेपाल से किसी तीसरे देश ले जाने की अनुमति नहीं होगी। इसके अलावा, बिना कस्टम डिक्लेरेशन के अधिकतम 5,000 अमेरिकी डॉलर के बराबर विदेशी मुद्रा ले जाने का नियम पहले की तरह ही लागू रहेगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 26 Jul 2026 10:15 pm

पाकिस्तान में बारिश का तांडव: मानसून से अब तक 97 लोगों की मौत, इस्लामाबाद और खैबर पख्तूनख्वा में भारी तबाही

भारत ही नहीं, पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी इस साल मानसून भारी आफत बनकर बरसा है। उत्तरी और उत्तर-पूर्वी पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने आम जनजीवन को पूरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। पाकिस्तान आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के आंकड़ों के मुताबिक, मानसून सीजन की शुरुआत से लेकर अब तक बारिश, भूस्खलन और बाढ़ की घटनाओं में कम से कम 97 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं।खैबर पख्तूनख्वा में मकान ढहने से 35 लोगों की मौतपाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के एबटाबाद, बुनेर, कोहिस्तान और मानसेहरा जैसे पहाड़ी जिलों में मूसलाधार बारिश ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई है। लगातार बारिश के चलते कई मकान ढह गए और मलबे में दबने से करीब 35 लोगों की जान चली गई। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन के कारण रास्ते बंद हो गए हैं, जिससे राहत और बचाव कार्यों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।इस्लामाबाद, लाहौर और सियालकोट में जलभराव से हाहाकारराजधानी इस्लामाबाद में सालभर होने वाली 1,300 मिलीमीटर बारिश का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा इसी मानसून सीजन में दर्ज होता है। भारी बारिश के चलते इस्लामाबाद की सड़कें और सार्वजनिक इंफ्रास्ट्रक्चर जलमग्न हो चुके हैं। वहीं पंजाब प्रांत के लाहौर और सियालकोट जैसे बड़े शहरों में भी सड़कें नदियों जैसी नजर आ रही हैं। रिहायशी इलाकों में पानी भर जाने से हजारों लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 26 Jul 2026 10:11 pm

पाकिस्तान की 'लेडी सिंघम' पर चढ़ा भारतीय गानों का खुमार: MBBS गोल्ड मेडलिस्ट डॉ. अनूश मसूद हरियाणवी गानों पर बना रहीं रील्स

पाकिस्तान की सरकार भले ही भारत के खिलाफ कितना भी प्रोपेगेंडा चलाए और पाबंदियां लगाए, लेकिन वहां की आवाम और बड़े अधिकारियों पर भारतीय संस्कृति का गहरा असर है। हाल ही में पाकिस्तान की एक सीनियर महिला पुलिस अधिकारी, डॉ. अनूश मसूद चौधरी का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी सुर्खियां बटोर रहा है। वह लगातार पंजाबी और हरियाणवी गानों पर रील्स बनाकर इंटरनेट पर छा गई हैं। इसे देखकर साफ लगता है कि सरहद पार भी भारतीय संगीत का जादू वहां के सिस्टम के सिर चढ़कर बोल रहा है।कौन हैं पाकिस्तान की 'लेडी सिंघम' डॉ. अनूश मसूद?मूल रूप से पेशावर की रहने वाली डॉ. अनूश मसूद चौधरी वर्तमान में पाकिस्तान की पंजाब एलीट पुलिस में डिप्टी डायरेक्टर के पद पर कार्यरत हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, खासकर फेसबुक पर उनके ढाई लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं। दिलचस्प बात यह है कि अनूश अपनी सख्त पुलिसिंग के साथ-साथ अब हरियाणवी गानों पर अपने शानदार अंदाज और 'टोरे' के लिए चर्चा का मुख्य केंद्र बन गई हैं।MBBS में गोल्ड मेडल से लेकर पुलिस सर्विस तक का सफरडॉ. अनूश का करियर बेहद प्रेरणादायक रहा है। एक वायरल वीडियो में वह खुद बताती हैं कि उन्होंने मेडिसिन (MBBS) की पढ़ाई की है और उसमें गोल्ड मेडल हासिल किया।2011: सिविल सेवा (CSS) परीक्षा पास करके अपनी पहली पसंद के तौर पर पाकिस्तान पुलिस सर्विस को चुना।2014: वह खैबर पख्तूनख्वा (KPK) में तैनात होने वाली पहली महिला एएसपी (ASP) बनीं।2018: अपनी काबिलियत के दम पर उन्हें लाहौर की पहली महिला एसएसपी (इन्वेस्टिगेशन) बनने का गौरव प्राप्त हुआ।2020: बेहतरीन कार्यशैली के लिए उन्हें 'इंटरनेशनल वूमेन ऑफ करेज अवॉर्ड' से भी नवाजा जा चुका है।पाकिस्तानी हुक्मरानों की पाबंदियों पर भारी भारतीय संस्कृतिएक तरफ पाकिस्तान सरकार कट्टरपंथी एजेंडे के तहत भारतीय फिल्मों और कंटेंट पर प्रतिबंध लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ती है। हाल ही में जब ब्लॉकबस्टर फिल्म 'धुरंधर' में पाकिस्तान की आतंकी साजिशों का पर्दाफाश हुआ, तो अपनी पोल खुलने के डर से उन्होंने फिल्म को ही बैन कर दिया। लेकिन दूसरी तरफ, डॉ. अनूश जैसे शीर्ष अधिकारी यह साबित कर रहे हैं कि कला और संगीत की कोई सरहद नहीं होती। पाकिस्तान की खस्ताहाल अर्थव्यवस्था के बीच उनकी अपनी लेडी अफसर का भारतीय गानों पर थिरकना इंटरनेट यूजर्स को काफी पसंद आ रहा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 26 Jul 2026 9:57 pm

ईरान पर अमेरिकी हमलों पर लगी रोक: कूटनीतिक बातचीत और मिसाइल भंडार की कमी के चलते ट्रंप ने थामे कदम

मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान पर अपने लगातार हमले फिलहाल रोक दिए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस आदेश के पीछे कूटनीतिक प्रयासों को बढ़ावा देना, अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम के घटते भंडार और युद्ध के और अधिक फैलने का डर मुख्य वजहें बताई जा रही हैं। ओमान की मध्यस्थता से तेहरान और वाशिंगटन के बीच बातचीत की संभावनाएं मजबूत हुई हैं, जिसके चलते ओमान का प्रतिनिधिमंडल भी तेहरान पहुंचा है। हालांकि, अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी अभी भी जारी है और पेंटागन ने स्पष्ट किया है कि यदि बातचीत विफल होती है, तो सैन्य विकल्प दोबारा खोले जा सकते हैं।क्यों रोके गए ईरान पर अमेरिकी हमलेअमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले 13 दिनों की भारी बमबारी के बाद ट्रंप प्रशासन ने नए हमलों पर अस्थायी विराम लगाया है। सीमित सैन्य अभियानों की अपनी एक सीमा तय होने और बड़े पैमाने पर युद्ध छिड़ने के खतरे को भांपते हुए यह कदम उठाया गया है। व्हाइट हाउस का मानना है कि इस समय सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ कूटनीतिक समझौते की कोशिश करना अधिक समझदारी होगी, हालांकि ईरान के रुख को देखते हुए सेना को पूरी तरह सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।पैट्रियट मिसाइलों का घटता भंडार बना बड़ी चिंताइस सैन्य विराम के पीछे एक बड़ा कारण अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन के पास हथियारों की कमी भी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ महीनों में अमेरिकी सेना 1200 से ज्यादा पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों का इस्तेमाल कर चुकी है। सैन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान जारी रखा गया, तो एयर डिफेंस सिस्टम और मिसाइलों के स्टॉक पर भारी दबाव पड़ सकता है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने भी क्षेत्र में व्यापक युद्ध की आशंका जताते हुए सावधानी बरतने की सलाह दी थी।स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और कूटनीति पर टिकी निगाहेंमौजूदा संघर्ष का मुख्य केंद्र दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' की आवाजाही को फिर से शुरू करना है। ओमान की पहल पर चल रही बातचीत के जरिए इस जलमार्ग को सुरक्षित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। हालांकि, लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र में हूती विद्रोहियों की गतिविधियों और क्षेत्रीय मोर्चों पर तनाव अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच यह विराम एक स्थायी शांति समझौता लाएगा या यह केवल अगली बड़ी सैन्य कार्रवाई से पहले का ठहराव है, यह आने वाले दिनों की कूटनीतिक बैठकों पर निर्भर करेगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 26 Jul 2026 9:53 pm

पाकिस्तान में बारिश का कहर: पंजाब प्रांत में छतें ढहने व हादसों में 2 बच्चों समेत 7 की मौत, 20 घायल; रावी-चनाब नदियों पर बाढ़ का अलर्ट

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पिछले 24 घंटों के दौरान भारी बारिश से जुड़े हादसों में 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 20 घायल हुए हैं। मृतकों में दो बच्चे भी शामिल हैं। स्थानीय मीडिया के अनुसार, बारिश के कारण कई मकान क्षतिग्रस्त हुए और बड़ी संख्या में पशुओं की भी मौत हुई है।

देशबन्धु 26 Jul 2026 6:32 pm

आज का एक्सप्लेनर:क्या पॉलिटिकल पार्टी बनाएंगे 'कॉकरोच' या मूवमेंट जारी रखेंगे; अभिजीत दीपके का आगे का प्लान क्या, फ्यूचर के 3 सिनैरियो

6 जून 2026, अभिजीत दिपके पहली बार लंदन से पहली बार दिल्ली एयरपोर्ट उतरे और सीधे जंतर-मंतर प्रोटेस्ट साइट पहुंचे। 20 जून को दोबारा प्रोटेस्ट पर बैठे, तो 36 दिन प्रोटेस्ट के बाद 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर उठे। जंतर-मंतर से जाते-जाते कॉकरोच पार्टी ने प्रोटेस्टर्स से कहा- ‘जल्दी दोबारा मिलेंगे।’ सवाल है कि आखिर कॉकरोच जनता पार्टी आगे करने क्या वाली है, फ्यूचर के कौन से 3 सिनैरियो, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में... इसके संकेत क्या हैं कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत में फाउंडर अभिजीत दिपके ने कहा था कि उनका राजनीति में उतरने का कोई इरादा नहीं है। वे किसी राजनीतिक दल के साथ भी नहीं आएंगे। हालांकि जंतर-मंतर पर 36 दिनों के प्रोटेस्ट के बाद 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कई संकेत मिले कि कॉकरोच पार्टी राजनीति में उतर सकती है… ताकत क्या है चैलेंज क्या है इसके संकेत क्या हैं आशुतोष रांका ने जंतर-मंतर पर कहा कि ये प्रोटेस्ट यहीं खत्म होता है, लेकिन उसके साथ एक और बात कही- ‘हम जल्दी मिलेंगे।’ CJP के फाउंडर अभिजीत दिपके ने भी कहा, 'हम ऐसे ही नहीं जाएंगे। कॉकरोच हैं, एक बार घुसते हैं, तो निकलते नहीं। लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। अगला फेज एजुकेशन रिफॉर्म्स को लेकर होगा।’ जब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा हुई, तो केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ मौजूद सौरव दास ने कहा था, ‘हमने सरकार को एजुकेशन रिफॉर्म का जो चार्टर दिया है, उस पर अगले 4 हफ्ते में चर्चा होगी।’ CJP का कहना है कि सरकार पर पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून, परीक्षाओं को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए दबाव बनाए रखेंगे। अब हमारी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि ये वादे पूरे हों। यानी फिलहाल CJP इन मुद्दों को लेकर आगे अपनी कोशिशें जारी रखेगी। कॉकरोच जनता पार्टी दिल्ली के बाद देश के दूसरे शहरों में लोकल मुद्दों को लेकर भी एक्टिव हो सकती है… ताकत क्या है चैलेंज क्या है इसके संकेत क्या हैं आशुतोष रांका ने संकेत दिया है कि एक प्रेशर ग्रुप की तरह काम करना भी एक विकल्प है। उन्होंने कहा, ‘ये जरूरी नहीं कि आप पॉलिटिकल पार्टी बनकर 5 साल में वोट मांगने जाओ। सिविल सोसाइटी, प्रेशर ग्रुप और मूवमेंट भी लोकतंत्र का हिस्सा हैं। हमारे लिए अभी मुद्दा जरूरी है और जवाबदेही तय करना लक्ष्य है। ये मुद्दा हमें जिस तरफ ले जाएगा, हम वहां जाएंगे।’ पूरे प्रोटेस्ट में मुख्य विपक्षी नेता राहुल गांधी ने छात्रों के मुद्दों पर सरकार को तो घेरा, लेकिन CJP से एक दूरी भी बनाए रखी, इससे भी कॉकरोच जनता पार्टी की भूमिका मजबूत हुई है… ताकत क्या है चैलेंज क्या है कांग्रेस कवर करने वाले आदेश रावल कहते हैं, एक प्रोटेस्ट से कॉकरोच जनता पार्टी विपक्ष की भूमिका में नहीं खड़ी हो सकती। सरकार पर प्रेशर तब बढ़ा, जब 20 जुलाई के ‘पुलिस एक्शन’ के बाद कांग्रेस इस पर तेजी से एक्टिव हुई। इसके बाद पीएम मोदी 5 बार झुके। पेपर लीक पर फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का फैसला, NTA के ऑफिसर्स को बर्खास्त करना हो, इंस्टाग्राम पर वीडियो डालना हो या आखिर में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। ---------- ये खबर भी पढ़िए… इन 5 वजहों से घबराई सरकार, तब हुआ धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा; नहीं झुकते तो क्या हो जाता, आखिरकार आंदोलन खत्म शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार इस्तीफा दे ही दिया। जंतर-मंतर पर 35 दिन से कॉकरोच जनता पार्टी का अनशन, पीएम आवास के बाहर राहुल गांधी का धरना, संसद में रोज गूंजता हंगामा और देश-दुनिया के कई शहरों में हो रहे प्रदर्शन से सरकार दबाव में थी। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 26 Jul 2026 5:35 pm

अमेरिका-ईरान तनाव: अमेरिका ने ईरान पर रोके रात के हवाई हमले; उपराष्ट्रपति वेंस और जनरल केन ने युद्ध बढ़ने व गोला-बारूद की कमी पर जताई चिंता

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने ईरान में युद्ध बढ़ने को लेकर चिंता जताई। अमेरिकी मीडिया के अनुसार, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (स्थानीय समय) को व्हाइट हाउस मीटिंग के दौरान इस संभावना पर विचार किया। इसके साथ ही अमेरिका ने ईरान पर जारी हमलों को रोक दिया।

देशबन्धु 26 Jul 2026 4:38 pm

खाड़ी देशों में फिर मंडराया युद्ध का खतरा, हूती विद्रोहियों ने सऊदी के तेल ठिकानों पर बोला हमला

मध्य पूर्व यानी खाड़ी के देशों में एक बार फिर से तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है, जिससे पूरे इलाके में बड़े पैमाने पर युद्ध छिड़ने का खतरा मंडराने लगा है। शनिवार को घटी दो बड़ी और अहम घटनाओं ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। एक तरफ जहां ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के बेहद अहम तेल ठिकानों को निशाना बनाया है, वहीं दूसरी तरफ कैस्पियन सागर में एक ईरानी कमर्शियल जहाज पर हुए हमले को लेकर ईरान और यूक्रेन आमने-सामने आ गए हैं। इस स्थिति के चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर भी गंभीर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हूती विद्रोहियों का बड़ा हमलाशनिवार को यमन के ईरान समर्थित हूती गुट ने सऊदी अरब की धरती पर स्थित दो प्रमुख तेल ठिकानों पर ताबड़तोड़ हमले किए। हूती संगठन के प्रवक्ता की ओर से जारी किए गए बयानों के अनुसार, सऊदी अरब के जिजान और यानबू शहरों में स्थित अरामको कंपनी की रिफाइनरियों और तेल भंडारण केंद्रों को इस हमले में खासतौर पर निशाना बनाया गया। सोशल मीडिया और सामने आए वीडियो फुटेज में जिजान रिफाइनरी से आसमान में काले धुएं का भारी गुबार उठता हुआ साफ तौर पर देखा गया।ग्रीक सुरक्षा से जुड़े सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यानबू शहर की तरफ दागी गई दो खतरनाक बैलिस्टिक मिसाइलों को अमेरिकी पैट्रियट डिफेंस सिस्टम की मदद से हवा में ही सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया गया। आपको बता दें कि यानबू सऊदी अरब का लाल सागर के तट पर स्थित सबसे महत्वपूर्ण तेल बंदरगाह है। मौजूदा समय में जब होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, तब सऊदी अरब के लिए तेल निर्यात करने का यह सबसे मुख्य और सुरक्षित रास्ता माना जाता है। इसके अलावा, जिजान रिफाइनरी की कुल क्षमता प्रतिदिन चार लाख बैरल तेल के उत्पादन की है, ऐसे में इस पर हुआ यह हमला आर्थिक और रणनीतिक दोनों लिहाज से बहुत बड़ा झटका है।यमन में फिर से सुलग उठा गृह युद्ध का संकटहूती विद्रोहियों के इन हमलों के तुरंत बाद सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए कड़ा जवाब दिया है। गठबंधन सेना ने यमन के मारिब, अल-जौफ और होदेदाह इलाकों में स्थित हूती विद्रोहियों के कई प्रमुख ठिकानों पर भीषण बमबारी की है। यमन के स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि इस सैन्य कार्रवाई के बाद दोनों ही पक्षों ने एक बार फिर से युद्ध के मोर्चों पर भारी संख्या में सेना जुटाना शुरू कर दिया है।गौरतलब है कि साल 2022 से काफी हद तक थमा हुआ यमन का गृह युद्ध इस महीने एक बार फिर से भड़कता हुआ नजर आ रहा है। हूती विद्रोहियों ने पिछले ही हफ्ते सऊदी अरब की नौसैनिक नाकेबंदी की आधिकारिक घोषणा की थी और इसके ठीक बाद गुरुवार को लाल सागर के रास्ते से गुजर रहे सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर भी हमला कर दिया था। इन लगातार बढ़ती घटनाओं से इस बात की पूरी आशंका जताई जा रही है कि यमन का यह पुराना संघर्ष एक बार फिर से बड़े युद्ध का रूप ले सकता है।ईरान और यूक्रेन के बीच बढ़ा तनाव, कैस्पियन सागर में जहाज पर हमलासऊदी अरब पर हुए हमलों के साथ-साथ खाड़ी क्षेत्र में एक और बड़े भू-राजनीतिक विवाद ने जन्म ले लिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने यूक्रेन पर कैस्पियन सागर के भीतर एक ईरानी कमर्शियल जहाज को टारगेट करने और उस पर हमला करने का गंभीर आरोप लगाया है। ईरानी मंत्रालय के आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस खतरनाक हमले के दौरान हुए जोरदार विस्फोट में जहाज पर सवार एक नाविक की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हो गया है।इस घटना के विरोध में ईरान ने तेहरान स्थित यूक्रेन के शीर्ष राजनयिक को तलब किया और इस पूरी कार्रवाई को एक खुला दुश्मनी भरा और आपराधिक कृत्य करार दिया। दूसरी ओर, इस विवाद को हवा तब और मिल गई जब यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर कैस्पियन सागर में हुए लंबी दूरी के हमलों की खुली तारीफ की थी। राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अपने बयान में यह भी आरोप लगाया था कि रूस मध्य पूर्व क्षेत्र से जुड़ी सामरिक और सैटेलाइट की खुफिया जानकारियां लगातार ईरान के साथ साझा कर रहा है।अमेरिका की सक्रियता और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर मंडराता खतराइस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिकी सेना भी खाड़ी के समंदर में पूरी तरह से सक्रिय हो गई है। हाल ही में अमेरिकी नौसेना ने ओमान की खाड़ी में एक ऐसे संदिग्ध जहाज को रोका है, जिसने हूती विद्रोहियों द्वारा घोषित की गई नाकेबंदी को तोड़ने का दुस्साहस किया था। अंतरराष्ट्रीय रक्षा और ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य के बाद लाल सागर का यह व्यापारिक और नौवहन मार्ग भी इसी तरह बाधित होता रहा, तो आने वाले दिनों में इसका सीधा और बहुत बुरा असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति तथा कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 26 Jul 2026 2:10 pm

PoK में भड़का इतिहास का सबसे बड़ा जनसैलाब, रोटी-दाल के लिए सड़कों पर उतरे कश्मीरी और पाकिस्तान सरकार पर फूटा गुस्सा

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में इस समय हालात बेहद विस्फोटक और बेकाबू हो चुके हैं। महंगाई, बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी और रोजमर्रा की जरूरी चीजों के लिए त्राहि-त्राहि कर रही स्थानीय जनता का गुस्सा आखिरकार सड़कों पर फूट पड़ा है। PoK के इतिहास में यह अब तक का सबसे बड़ा और उग्र जनआंदोलन माना जा रहा है, जहां आम कश्मीरी रोटी और दाल जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष करने को मजबूर हैं। आम जनता का आरोप है कि इस्लामाबाद में बैठी शहबाज शरीफ सरकार और सेना के शीर्ष कमांडर इस मानवीय संकट से पूरी तरह आंखें मूंदे हुए हैं और जनता की चीख-पुकार उन तक नहीं पहुंच रही है।महंगाई और बदहाली से त्रस्त कश्मीरी जनता का फूटा आक्रोशPoK के विभिन्न शहरों और कस्बों में पिछले कुछ दिनों से लगातार बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। हालात इतने तनावपूर्ण हो गए हैं कि बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि उन्हें भारी भरकम टैक्स, आसमान छूती महंगाई और बिजली-पानी की भारी किल्लत के बीच जीने के लिए मजबूर किया जा रहा है। खाने-पीने की मूलभूत चीजों के दाम इतने बढ़ चुके हैं कि आम आदमी की थाली से दाल और रोटी तक गायब होने की कगार पर आ गई है, जिससे स्थानीय नागरिकों में पाकिस्तान के शासन के प्रति भारी नफरत पैदा हो गई है।शहबाज-मुनीर की बेरुखी और कुप्रबंधन पर उठे बड़े सवालस्थानीय लोगों और राजनीतिक विश्लेषकों का साफ तौर पर कहना है कि पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार और सेना प्रमुख असीम मुनीर इस गंभीर संकट पर पूरी तरह संवेदनहीन बने हुए हैं। जनता के बुनियादी अधिकारों और कल्याण की अनदेखी कर केवल अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने वाले हुक्मरानों को इस जनआंदोलन की गूंज सुनाई नहीं दे रही है। क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन पाकिस्तान द्वारा बेर्हमी से किए जाने के बावजूद यहां के स्थानीय नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं तक मयस्सर नहीं हैं, जिसके कारण पाकिस्तान के खिलाफ यह बगावत अब एक बड़े जनसैलाब का रूप ले चुकी है।अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उजागर हुआ पाकिस्तान का असली चेहराPoK में चल रहे इस अभूतपूर्व आंदोलन ने एक बार फिर पाकिस्तान के कुशासन और मानवाधिकारों के हनन की पोल खोलकर रख दी है। जबरन कब्जाए गए इस क्षेत्र में दशकों से हो रहे आर्थिक शोषण और भेदभाव के खिलाफ जनता का यह खुला विद्रोह पाकिस्तान की नींव हिला रहा है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीर के फर्जी आंसू बहाने वाले पाकिस्तानी हुक्मरा अब अपने ही घर में सुलग रही इस आग को बुझाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं, और आने वाले दिनों में यह संकट पाकिस्तान की सत्ता के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती बन सकता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 26 Jul 2026 1:14 pm

लाल सागर की आंधी भी बेअसर! भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर ईरान के 'कुंभकर्ण' और संघर्ष का नहीं पड़ेगा कोई असर, सुरक्षित रहेंगे देश के चूल्हे

दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापारिक मार्गों में शुमार लाल सागर (Red Sea) क्षेत्र में चल रहे भयंकर तनाव और संघर्ष के बीच भारत की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल और हमलों के बावजूद देश में एलपीजी, क्रूड ऑयल और अन्य जरूरी ईंधन की आपूर्ति पूरी तरह से सुरक्षित बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्ग बाधित होने के बावजूद भारत की मजबूत कूटनीतिक रणनीतियों और डाइवर्सिफाइड सप्लाई चेन के कारण घरेलू बाजार में ऊर्जा संकट की कोई आशंका नहीं है।लाल सागर संकट और वैश्विक समुद्री मार्गों की चुनौतीमध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और हूती विद्रोहियों के हमलों के चलते लाल सागर के रास्ते होने वाला वैश्विक व्यापार भारी संकट के दौर से गुजर रहा है। इस मार्ग पर सुरक्षा जोखिम बढ़ने के कारण जहाजों को लंबे और महंगे वैकल्पिक रूट यानी अफ्रीका के गुड होप के रास्ते से गुजरना पड़ रहा है, जिससे माल भाड़े और शिपिंग लागत में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके बावजूद भारत ने अपने ऊर्जा आयात और व्यापारिक हितों को सुरक्षित रखने के लिए बेहद प्रभावी कदम उठाए हैं, जिससे देश के भीतर आवश्यक वस्तुओं और ईंधन की कीमतों या उपलब्धता पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ा है।ऊर्जा सुरक्षा और वैकल्पिक स्रोतों से मजबूत स्थितिभारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए विभिन्न देशों से तेल और गैस आयात के विकल्पों को पहले ही मजबूत कर लिया है। खाड़ी देशों के अलावा रूस और अन्य अंतरराष्ट्रीय बाजारों से लगातार हो रही तेल आपूर्ति ने यह सुनिश्चित कर दिया है कि देश के रिफाइनरियों और रसोईघरों तक ऊर्जा की निर्बाध सप्लाई पहुंचती रहे। भारत सरकार की सक्रिय नीतियों और समय पर उठाए गए कदमों के कारण वैश्विक स्तर पर मची उथल-पुथल का घरेलू उपभोक्ताओं पर न्यूनतम असर देखने को मिल रहा है।आम जनता पर नहीं पड़ेगा महंगाई और ईंधन संकट का बोझविशेषज्ञों का मानना है कि भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति और रणनीतिक भंडारों की वजह से लाल सागर का यह संकट देश की विकास यात्रा को नहीं रोक पाएगा। रसोई गैस के सिलेंडरों से लेकर पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति तक हर मोर्चे पर स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है। सरकार और तेल विपणन कंपनियां यह सुनिश्चित कर रही हैं कि आम नागरिकों को किसी भी तरह की कठिनाई का सामना न करना पड़े और देश की अर्थव्यवस्था रफ्तार पकड़ती रहे।

न्यूज़ इंडिया लाइव 26 Jul 2026 1:12 pm

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच नया मोर्चा खुला, सऊदी-हाउती संघर्ष तेज; लाल सागर से होर्मुज तक बढ़ी वैश्विक चिंता

तनाव का नया केंद्र सऊदी अरब और ईरान समर्थित हाउती विद्रोही बन गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, हाउती लड़ाकों ने लाल सागर क्षेत्र में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों को निशाना बनाने के बाद जिजान और यानबू स्थित अरामको की तेल रिफाइनरियों पर बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया।

देशबन्धु 26 Jul 2026 1:04 pm

Oman Talks का क्या होगा नतीजा? अगर फेल हुई डील तो अमेरिकी सेना तबाह कर देगी ईरान के ये 5 गुप्त ठिकाने

मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दी गई नई चेतावनियों ने वैश्विक कूटनीति में हलचल तेज कर दी है। अगर अमेरिका और ईरान के बीच जारी ओमान डिप्लोमैटिक चैनल वार्ता किसी नतीजे पर नहीं पहुंचती है, तो अमेरिकी सेना ईरान के परमाणु कार्यक्रमों के बचे हुए ढांचों को पूरी तरह ध्वस्त कर सकती है।अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन केवल ईरान के चर्चित 'पिकैक्स माउंटेन' (Pickaxe Mountain) तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अमेरिकी सेना की न्यूक्लियर टारगेट लिस्ट में ईरान के 5 बेहद संवेदनशील और गुप्त ठिकाने शामिल हैं।डोनाल्ड ट्रंप की 'न्यूक्लियर टारगेट लिस्ट' में शामिल 5 प्रमुख ठिकानेपिकैक्स माउंटेन (नतांज के पास): नतांज के पास ठोस ग्रेनाइट की पहाड़ियों के 300 से 450 फीट नीचे स्थित यह बेहद सुरक्षित अंडरग्राउंड साइट है। इजराइली खुफिया एजेंसियों का मानना है कि ईरान ने पिछले साल हजारों आधुनिक सेंट्रीफ्यूज यहां छिपाए थे। यह जगह अमेरिका के सबसे बड़े बंकर-बस्टर बमों की पहुंच से भी काफी गहरी है, इसलिए अमेरिकी रणनीति इसके मुख्य द्वारों और सुरंगों को सील कर इसे निष्क्रिय करने की होगी।तालेघन 2 (पारचिन कॉम्प्लेक्स): ईरान के पारचिन सैन्य परिसर में स्थित 'तालेघन 2' वह जगह है, जहां ईरान परमाणु विस्फोट से जुड़े हाई-एक्सप्लोसिव परीक्षणों का काम फिर से शुरू कर रहा है। खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, पिछले हमलों के बाद भी यहां एक मुख्य टेस्ट चैंबर पूरी तरह सुरक्षित बच गया है।फोर्डो (Fordow) की सपोर्ट साइट: फोर्डो की जमीन पर स्थित सपोर्ट फैसिलिटी में ऐसे खास सेंट्रीफ्यूज और आइसोटोप मौजूद हैं, जिन्हें जरूरत पड़ने पर यूरेनियम संवर्धन (Uranium Enrichment) के लिए फिर से तुरंत इस्तेमाल में लाया जा सकता है।इस्फहान की सील की गई सुरंगें: इस्फहान स्थित परमाणु केंद्र की सील की गई गुप्त सुरंगों में भारी वाहनों की संदिग्ध गतिविधियां देखी गई हैं, जिससे अंदेशा है कि ईरान यहां नए सिरे से परमाणु उपकरणों को इकट्ठा कर रहा है।नतांज की बची हुई इमारतें: पूर्व में हुए हमलों के बावजूद नतांज परिसर की कई बची हुई इमारतें और रिसर्च फैसिलिटी अभी भी अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) के निशाने पर बनी हुई हैं।ईरान के पास समय कम: विशेषज्ञों की चेतावनीपरमाणु मामलों के पूर्व अंतरराष्ट्रीय निरीक्षक डेविड अलब्राइट के अनुसार, हालांकि ईरान की अधिकांश प्राथमिक परमाणु साइटों को पहले ही नुकसान पहुंचाया जा चुका है, लेकिन जिस तरह से ईरान दोबारा निर्माण कर रहा है और नए इंटेलिजेंस इनपुट्स सामने आ रहे हैं, वे अमेरिका को फिर से हमलों के लिए मजबूर कर सकते हैं। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि जैसे-जैसे समय बीत रहा है, अपने परमाणु कार्यक्रम को जीवित रखने के लिए ईरान के लिए पिकैक्स पहाड़ की उपयोगिता और अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है।ओमान वार्ता पर टिकी हैं दुनिया की नजरेंअमेरिका ने ईरान के कोर न्यूक्लियर टियर पर सीधे हमलों से परहेज किया है, लेकिन ओमान के माध्यम से अमेरिका और ईरान के बीच बैकचैनल बातचीत जारी है। यदि यह कूटनीतिक प्रयास नाकाम होता है, तो तेहरान को अच्छे से पता है कि युद्ध के अगले चरण में उसकी कौन-कौन सी साइट्स अमेरिकी मिसाइलों और बमवर्षकों के सीधे निशाने पर होंगी।

न्यूज़ इंडिया लाइव 26 Jul 2026 7:45 am

इराक : एरबिल में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के पास विस्फोटक से लदा ड्रोन नष्ट

इराक के अर्ध-स्वायत्त कुर्दिस्तान क्षेत्र की राजधानी एरबिल के ऊपर शनिवार को एक ड्रोन को मार गिराया गया

देशबन्धु 26 Jul 2026 7:40 am

चीन: चक्रवात 'नौल' के खतरे के बीच ग्वांगडोंग में 3.4 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

चीन के दक्षिणी प्रांत ग्वांगडोंग में चक्रवात 'नौल' के तट से टकराने से पहले एहतियातन 3.4 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। प्रांतीय बाढ़, सूखा और चक्रवात नियंत्रण प्राधिकरण ने शनिवार को यह जानकारी दी

देशबन्धु 26 Jul 2026 7:05 am

पाकिस्तान: गिलगित-बाल्टिस्तान में बाढ़ से हालात बदतर, कई इलाके चौथे दिन भी देश से कटे

पाकिस्तान अधिकृत गिलगित-बाल्टिस्तान (पीओजीबी) में अचानक आई बाढ़ और ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड के कारण कई इलाकों का सड़क संपर्क लगातार चौथे दिन भी बहाल नहीं हो सका है

देशबन्धु 26 Jul 2026 7:01 am

‘कसाई’ के देश में घुसकर रातोंरात 102 लोगों को छुड़ाया:11 लड़ाकू विमान तबाह, नेतन्याहू को PM बनाने वाले ऑपरेशन थंडरबोल्ट की कहानी; पार्ट-2

दैनिक भास्कर की ‘स्पाई फाइल्स’ सीरीज में आप पढ़ रहे हैं- ‘ऑपरेशन थंडरबोल्ट।’ पार्ट-1 में आपने पढ़ा- 27 जून 1976 को डेनिम स्कर्ट पहनी लड़की ने बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर एक विमान को हाईजैक कर लिया। विमान इजराइल के तेल अवीव एयरपोर्ट से पेरिस जा रहा था। हाईजैकर 245 यात्रियों को बंधक बनाकर युगांडा ले गए। इनमें ज्यादातर इजराइली थे। हाईजैकरों ने अल्टीमेटम दे रखा था- 1 जुलाई को दोपहर 2 बजे तक उनकी मांगे नहीं मानी गईं, तो सभी यात्री मार दिए जाएंगे। सिर्फ 8 घंटे बाद 100 से ज्यादा इजराइली मारे जाने वाले थे। प्रधानमंत्री हाईजैकरों के आगे झुकने को तैयार थे, लेकिन रक्षा मंत्री के दिमाग में कुछ ऐसा चल रहा था, जो नामुमकिन सा था। पूरी कहानी पार्ट-2 में पढ़िए… तारीख 1 जुलाई 1976, सुबह के 6 बज रहे थे। यरुशलम के कमांड रूम में इजराइली पीएम यित्जाक राबिन, रक्षा मंत्री शिमोन पेरेस और सेना प्रमुख जनरल मोटा गुर परेशान बैठे थे। पीएम ने सिगरेट का कश भरते हुए रक्षा मंत्री से कहा- ‘कल रात हाईजैकरों ने फ्रांस और दूसरे देशों के 148 यात्रियों को छोड़ दिया है। हमारे लोग अभी भी बंधक हैं। मैं उन्हें मरने के लिए नहीं छोड़ सकता।’ रक्षा मंत्री पेरेस कुछ देर चुप रहे। फिर गहरी सांस लेते हुए कहा- ‘हम मिलिट्री एक्शन लेंगे।’ ‘मिलिट्री एक्शन? फिर वही बात। आज तक ऐसा हुआ है।’ पीएम ने लगभग चीखते हुए कहा। पेरेस ने भी तल्खी से जवाब दिया- ‘इजराइल भी तो आज तक झुका नहीं है। जो कभी नहीं हुआ, वो अब होगा।’ पेरेस ने सेना प्रमुख से पूछा- ‘जनरल साहब, आपकी क्या राय है?’ जनरल मोटा गुर ने कहा- ‘मिलिट्री एक्शन ले सकते हैं, लेकिन तैयारी के लिए कम से कम दो दिन चाहिए।’ तभी पीएम ने टोका- ‘क्या ये मुमकिन है?’ जनरल गुर ने कहा- ‘मेरी टीम एंटेबे जाकर आतंकियों को ढेर कर सकती है, लेकिन बंधक जिंदा बचेंगे या नहीं, इसकी गारंटी नहीं दे सकता।’ रक्षा मंत्री ने पूछा- ‘किस बात का डर है?’ सेना प्रमुख ने कहा- ‘हमें नहीं मालूम बंधक कहां हैं? आतंकी किस जगह तैनात हैं? हमारे पास कोई तस्वीर या नक्शा भी नहीं है।’ रक्षा मंत्री- ‘ये सारी जानकारी मिल जाए तो?’ ‘तो भी गारंटी नहीं दे सकता।’ सेना प्रमुख ने जवाब दिया। रक्षा मंत्री ने गुस्से में कहा- ‘गारंटी क्यों नहीं दे सकते?’ सेना प्रमुख- ‘डेडलाइन में कुछ ही घंटे बचे हैं। मुझे कम से कम 2 दिन चाहिए।’ पेरेस ने झुंझलाकर कहा- ‘वक्त ही तो नहीं है।’ प्रधानमंत्री ने हाथ उठाकर दोनों को शांत कराया। फिर सिगरेट का कश भरते हुए कहा- ‘हम फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा करने के लिए तैयार हैं। यह मैसेज तुरंत युगांडा भिजवाइए।’ पेरेस हक्के-बक्के रह गए, ‘लेकिन सर...!’ ‘कोई लेकिन-वेकिन नहीं, पेरेस। आप आंतकियों से कहिए कि वो हमें थोड़ा वक्त दें।’ इतना कहकर राबिन अपनी कुर्सी से उठ खड़े हुए। पेरेस चुपचाप कमरे से बाहर निकल गए। राबिन मुड़े और सेना प्रमुख की आंखों में देखते हुए कहा- ‘मिलिट्री एक्शन की तैयारी कीजिए।’ ‘लेकिन, सर अभी तो आप…’ सेना प्रमुख इतना ही बोल पाए थे कि राबिन ने उन्हें टोक दिया- ‘तैयारी कीजिए…वक्त आपको मिल जाएगा।’ एक तरफ हाईजैकरों से डील और दूसरी तरफ सेना प्रमुख को कार्रवाई का आदेश… आखिर पीएम के दिमाग में चल क्या रहा था…? करीब 2 घंटे बाद, प्रधानमंत्री का फोन बजा। उधर से आवाज आई- ‘हाईजैकरों ने वक्त दे दिया है। अब डेडलाइन है 4 जुलाई दोपहर 12 बजे तक।' राबिन ने जोर से मेज पर घूंसा मारा- ‘इतना वक्त बहुत है।’ उन्होंने फौरन अपनी खुफिया एजेंसी ‘मोसाद’ के चीफ यित्जाक होफी को फोन लगाया- ‘बंधक कहां बंद हैं? अंदर आने-जाने के कितने दरवाजे हैं? मुझे एक-एक डिटेल चाहिए, होफी।’ दूसरी तरफ से आवाज आई- ‘मुझे 24 घंटे दीजिए।’ फोन कट गया। अब शाम ढल चुकी थी। पेरिस का ओरली एयरपोर्ट पुलिस की गाड़ियों के सायरन से गूंज रहा था। एंटेबे से रिहा हुए गैर-इजराइली अभी-अभी यहां पहुंचे थे। एयरपोर्ट पर एक कैफे में बैठकर 50 साल का बुजुर्ग कॉफी पी रहा था। तभी 30-35 साल का एक शख्स उसके पास पहुंचा। उसने अपना आईकार्ड दिखाते हुए कहा- ‘सर, घबराइए नहीं। मुझे कुछ जानकारी चाहिए।’ बुजुर्ग ने अपनी आंखें रगड़ते हुए कहा- ‘कैसी जानकारी?’ शख्स ने कहा- ‘एंटेबे में बंधकों को कहां रखा गया है?’ बुजुर्ग ने कुछ सोचते हुए कहा- ‘ओल्ड टर्मिनल के मुख्य हॉल में।’ ‘माहौल कैसा है? कुल कितने लोग हैं अंदर?’ शख्स ने फिर पूछा। ‘100 से ज्यादा बंधक हैं। हॉल में कांच के दो बड़े दरवाजे हैं, जो बाहर रनवे की तरफ खुलते हैं।’ अब शख्स, बुजुर्ग के करीब सरकते हुए पूछा- ‘सिक्योरिटी कैसी है? ‘मेन गेट पर चार आतंकवादी तैनात हैं। इसमें एक महिला भी है।’ बुजुर्ग ने बताया। ‘और बाकी आतंकी?’ बुजुर्ग ने थोड़ा सोचते हुए कहा- ‘बाकी आतंकी हॉल के ठीक बगल वाले VVIP रूम में आराम करते हैं। इसके अलावा दर्जनभर युगांडा के सैनिक भी राइफल लिए तैनात हैं।’ बुजुर्ग को लगा शायद पत्रकार है। उसने सारी बातें बता दीं, लेकिन असल में वो शख्स मोसाद का एजेंट था। रात करीब 2 बजे मोसाद चीफ का फिर से फोन बजा। उधर से आवाज आई- ‘सर, एक इजराइली कंपनी ने एंटेबे के ओल्ड टर्मिनल का नक्शा बनाया था। हमें नक्शा मिल गया है।’ मोसाद चीफ ने कहा- ‘हम्म…सिर्फ नक्शे के भरोसे 100 से ज्यादा जिंदगियों को दांव पर नहीं लगाया जा सकता। ओरिजिनल तस्वीर चाहिए।' फोन कट गया। अब तक 2 जुलाई हो चुकी थी। सुबह के 10 बज रहे थे। केन्या की राजधानी नैरोबी से एक विमान ने उड़ान भरी। विमान में सिर्फ पायलट और को-पायलट थे। कुछ ही देर बाद विमान युगांडा की तरफ मुड़ गया। घंटेभर का सफर था। जैसे ही विमान युगांडा के एंटेबे हवाई अड्डे के ऊपर पहुंचा, पायलट ने उसकी ऊंचाई बढ़ा दी। को-पायलट ने हाई-टेक कैमरा निकाला और एयरपोर्ट की दर्जनों तस्वीरें खींच लीं। ये दोनों मोसाद के एजेंट थे। इजराइल ने इसके लिए केन्या सरकार से चुपचाप डील कर ली थी। 3 जुलाई 1976, सुबह के 4 बजे थे। इजराइल डिफेंस फोर्स की स्पेशल यूनिट के कमांडर योनी नेतन्याहू मिलिट्री एक्सरसाइज से घर लौटे। उनका शरीर धूल, मिट्टी और पसीने से सना था। योनी, इजराइल के मौजूदा पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के बड़े भाई थे। बेंजामिन के पीएम बनने में इस मिशन का बहुत बड़ा रोल था। अब कहानी में लौटते हैं… उस वक्त योनी की प्रेमिका ब्रूरिया कपड़े धो रही थी। योनी को देखते ही वह बोल पड़ी- ‘तुमने कल से कुछ खाया नहीं है। मैंने तुम्हारी पसंदीदा लेमन मेरिंग पाई बनाई है। खा लो।’ योनी ने फ्रिज से निकालकर पाई का आधा कौर मुंह में रख लिया। फिर धीरे से कहा- ‘बहुत टेस्टी है। नहाकर आता हूं, फिर खाकर सो जाऊंगा।’ योनी बाथरूम में चले गए। 20 मिनट बाद जब कपड़े धोकर ब्रूरिया लौटी, तो देखा कि बाथरूम का दरवाजा अब भी बंद है। उसने आवाज लगाई- ‘योनी…इतनी देर से क्या कर रहे हो?’ अंदर से कोई आवाज नहीं आई। ब्रूरिया ने धीरे से धक्का दिया। दरवाजा खुल गया। योनी का सिर दीवार से टिका हुआ था। आंखें बंद थीं। ऊपर से शॉवर का पानी गिर रहा था। ब्रूरिया बुदबुदाई- ‘ओह योनी… तुम तो सो गए।’ उसने शॉवर बंद किया। योनी को बेडरूम तक ले गई और चादर ओढ़ाकर सुला दिया। इधर, प्रधानमंत्री दफ्तर में बैठे राबिन सिगरेट पर सिगरेट पिए जा रहे थे। टेबल पर रखी ऐशट्रे जली हुई सिगरेट के टुकड़ों से भरी थी। तभी विदेश मंत्री आलोन पहुंच गए। विदेश मंत्री को देखते ही राबिन ने कहा- ‘मैं मिलिट्री एक्शन लेने जा रहा हूं। एक ड्राफ्ट तैयार करो। कैबिनेट के सामने ब्रीफिंग देनी है।’ आलोन ने सहमति में सिर हिलाया और वहां से निकल गए। राबिन उन्हें छोड़ने के लिए लिफ्ट तक साथ आए। चलते-चलते राबिन ने कहा- ‘एक बात और... अगर यह मिशन नाकाम हुआ, तो मेरे इस्तीफे का ड्राफ्ट भी तैयार कर देना।’ आलोन ने हैरान होकर पूछा- ‘सर... आपकी नजर में नाकामी की परिभाषा क्या होगी?’ राबिन ने कहा- ‘अगर 25 लोग मारे जाते हैं, तो मैं इसे नाकाम मानूंगा। आंकड़ा इससे कम रहा, तो मैं इसे सफल मानूंगा।’ ‘कामयाबी के कितने चांस हैं?’ आलोन ने झिझकते हुए पूछा। राबिन ने गहरी सांस भरते हुए कहा- ‘मेरे हिसाब से 50-50.’ अब तक सुबह के 7 बज चुके थे। यानी हाईजैकर्स की डेडलाइन खत्म होने में अभी भी 24 घंटे से ज्यादा का वक्त बचा था। इधर, योनी की प्रेमिका ब्रूरिया हड़बड़ाकर नींद से जागी। शायद उसने कोई बुरा सपना देख लिया था। योनी उठ चुके थे और जैतूनी-हरे रंग की वर्दी पहन रहे थे। योनी ने शर्ट का बटन बंद करते हुए कहा- ‘अगर मैं रात तक वापस न लौटूं, तो समझ लेना कोई बड़ा मिशन शुरू हो चुका है।’ ब्रूरिया ने रुंधे गले से कहा- ‘यह एंटेबे वाले मामले से जुड़ा है न?’ योनी ने गहरी सांस ली और कहा- ‘हां।’ ब्रूरिया कुछ कहती, इससे पहले ही योनी ने उसे गले लगा लिया। धीमें से उसके कानों में कहा- ‘मैं लौटकर आऊंगा, इंतजार करना।’ योनी ने बैग उठाया और तेजी से बाहर निकल गए। पीछे-पीछे दौड़ती हुई ब्रूरिया चिल्लाई- ‘योनी रुको, तुम मोर को बाय कहना भूल गए।’ लेकिन योनी कार में बैठकर निकल चुके थे। दरअसल, मोर योनी का जर्मन शेफर्ड डॉग था। ब्रूरिया ने मोर को पुचकारते हुए कहा- ‘कोई नहीं बेटा… योनी लौटकर आएंगे तो तुम नाराजगी जता देना।’ ब्रूरिया को पता नहीं था कि योनी लौटेंगे तो जरूर, लेकिन मोर को मना नहीं पाएंगे… 3 जुलाई दोपहर 1 बजकर 40 मिनट का वक्त। इजराइल का बेन गुरियन एयरपोर्ट भट्टी की तरह धधक रहा था। पारा 40C के पार पहुंच चुका था। चार हरक्यूलिस C-130 विमान और करीब 190 इजराइली कमांडो रनवे पर खड़े थे। तभी एक चमचमाती हुई काली मर्सिडीज और पीछे-पीछे 2 लैंड रोवर गाड़ियां रनवे पर पहुंचीं। उसमें से 5-7 सैनिक उतरे और फौरन तीनों गाड़ियां एक विमान में लोड कर दी गईं। रनवे पर खड़े एक कमांडो ने दूसरे से पूछा- ‘ये गाड़ियां क्यों लोड की जा रही हैं? इनका क्या काम है?’ दूसरे ने कहा- ‘सब मोसाद का खेल है। देखो तो आगे होता क्या है।’ अब दुनिया का सबसे खतरनाक कमांडो मिशन शुरू हो चुका था। नाम- ‘ऑपरेशन थंडरबोल्ट।’ ये नाम इसलिए क्योंकि सबकुछ बिजली की रफ्तार से होना था। पूरे ऑपरेशन को लीड कर रहे थे जनरल डैन शैमरोन और ग्राउंड कमांडर थे योनी नेतन्याहू। योनी की टीम को ही सबसे पहले बंधकों तक पहुंचना था। दोपहर 1 बजकर 55 मिनट पर पहले विमान ने उड़ान भरी। पांच-पांच मिनट के फासले पर बाकी तीन विमान भी आसमान में थे। चारों विमानों ने शुरुआत में अलग-अलग दिशाएं पकड़ीं, फिर सब दक्षिण की ओर निकल गए। एक घंटे के बाद विमान दक्षिणी सिनाई के ओफिरा एयरबेस पर लैंड हुए। वहां फ्यूल भरा और ठीक साढ़े तीन बजे फिर से विमान आसामान में थे। अब मंजिल थी- एंटेबे एयरपोर्ट। इन चार विमानों के साथ दो बोइंग 707 विमान भी आसमान में गश्त लगा रहे थे। उनमें से एक उड़ता हुआ हाईटेक कमांड सेंटर था और दूसरा आधुनिक सुविधाओं से लैस मेडिकल हॉस्पिटल। करीब एक घंटे बाद योनी नेतन्याहू को थकान महसूस होने लगी। उन्होंने शैमरोन से कहा- ‘मुझे नींद आ रही है। सो जाऊं?’ शैमरोन ने मुस्कुराते हुए कॉकपिट के पिछले हिस्से की तरफ इशारा कर दिया- ‘तुम जाते वक्त सुस्ता लो, वापसी में मैं सो जाऊंगा।’ योनी बंक पर चढ़े, सिर के नीचे तकिया टिकाया और लेट गए। आंखें मूंदने से पहले उन्होंने नेविगेटर से कहा- ‘एंटेबे पहुंचने से आधे घंटे पहले मुझे जगा देना।’ रात के ठीक 10:30 बजे। नेविगेटर ने योनी का कंधा पकड़कर जोर से हिलाया- ‘योनी, उठ जाओ, हम विक्टोरिया झील के करीब पहुंच रहे हैं।’ योनी ने आंखें खोलीं और पूछा- ‘कितना वक्त बचा है?’ नेविगेटर ने कहा- ‘30 मिनट।’ योनी तुरंत बंक से नीचे उतरे। झटपट वर्दी ठीक की। साइलेंसर गन लोड किया और विमान में खड़ी मर्सिडीज की फ्रंट सीट पर जाकर बैठ गए। उन्होंने ड्राइवर से कहा- ‘फौरन इंजन स्टार्ट करो।’ मर्सिडीज की हेडलाइट्स जल उठीं। ठीक उसी पल पीछे खड़ी दो लैंड रोवर्स की बत्तियां भी जगमगा उठीं। रात ठीक 11 बजकर 1 मिनट पर पहले विमान के पहिए ने रनवे को छुआ। कोई आवाज नहीं हुई। होती भी कैसे, पहियों में हवा ही बहुत कम भरी गई थी। विमान के रुकने से पहले ही इजराइली कमांडो कूद पड़े। उन्होंने फौरन रनवे के दोनों किनारों पर जलती हुई लैंप रख दीं, ताकि युगांडा वाले एयरपोर्ट की लाइटें बंद कर दें, तो भी बाकी विमानों को उतरने में दिक्कत न हो। अगले ही पल, विमान से चमचमाती हुई काली मर्सिडीज निकली। ठीक इसी तरह की मर्सिडीज से तानाशाह ईदी अमीन चलता था। उसके पीछे दो लैंड रोवर गाड़ियां भी फर्राटा भरते हुए निकल पड़ीं। गाड़ियों की स्पीड बिल्कुल नाप-तोलकर उतनी ही रखी गई थी, जितनी ईदी अमीन के काफिले की हुआ करती थी- न ज्यादा तेज, न बहुत धीमी। काफिला चल पड़ा। ये मोसाद की चाल थी, ताकि युगांडा के सैनिकों को लगे कि उनके राष्ट्रपति का काफिला है, पर क्या युगांडा के सैनिक क्या इतने भोले थे? कहानी में आगे बढ़ते हैं… अभी काफिला कुछ ही कदम आगे बढ़ा था कि कंट्रोल टावर पर तैनात दो संतरियों की नजर मर्सिडीज पर पड़ी। एक ने कहा- ‘दादा ने तो सफेद मर्सिडीज ले ली है। इतनी रात को काली गाड़ी में कौन आ रहा है?’ दूसरे ने कहा- ‘टेंशन ना लो भाई… ये दादा की ही पुरानी गाड़ी है।’ तभी गाड़ियों की हेडलाइट उन पर चमकी। एक संतरी भागकर अंधेरे में छिप गया, लेकिन दूसरे ने राइफल तान दी और चिल्लाया- ‘आगे आओ’ फ्रंट सीट पर बैठे योनी ने ड्राइवर से कहा- ‘इसे शूट करो फौरन।’ बगल में बैठे डिप्टी कमांडर मुकी झट से बोल पड़े- ‘नहीं योनी फायर नहीं करना। यह उनकी रूटीन चेकिंग है।’ योनी ने डांटते हुए कहा- ‘इसे शक हो गया है।’ उन्होंने अपनी साइलेंसर गन निकाली और फायर कर दिया। गोली लगते ही संतरी जमीन पर गिर पड़ा। मर्सिडीज जैसे ही आगे बढ़ी पीछे से गोलियों की आवाज आने लगी। जख्मी संतरी फर्श पर पड़े-पड़े फायरिंग कर रहा था, तभी पीछे आ रही लैंड रोवर के कमांडो ने उसे वहीं ढेर कर दिया। अब ओल्ड टर्मिनल महज 50 गज की दूरी पर था। इसी टर्मिनल में बंधक थे। तीनों गाड़ियां आकर रुक गईं। सबकुछ सामान्य था। अब तक हाईजैकरों को भनक नहीं लगी थी। योनी ने कहा- ‘हेडलाइट बंद करो और सीधे टर्मिनल में घुस जाओ।’ हेडलाइट बंद कर दी गई। इजराइली सैनिक फायरिंग करते हुए टर्मिनल की तरफ दौड़ पड़े। तभी हाईजैकरों ने भी फायरिंग खोल दी। दोनों तरफ से गोलियां चलने लगीं। इजराइली डिप्टी कमांडर मुकी ने भागते-भागते एके-47 का ट्रिगर दबा दिया। 2 हाईजैकर वहीं ढेर हो गए। अब इजराइली कमांडो ओल्ड टर्मिनल के बिल्कुल करीब पहुंच चुके थे। योनी लगातार चिल्ला रहे थे- ‘आगे बढ़ो। आगे बढ़ो।’ डिप्टी कमांडर आगे बढ़े। टर्मिनल का पहला दरवाजा लॉक था। वो दौड़कर दूसरे गेट की तरफ भागे। इधर, योनी एंट्री गेट पर पहुंचकर फायरिंग के लिए मुड़े ही थे कि कंट्रोल टावर पर तैनात युगांडा के सैनिकों ने फायरिंग शुरू कर दी एक गोली सीधे योनी के सीने को चीरती हुई निकल गई। वे जमीन पर गिर पड़े। तभी बैकअप कर रहे इजराइली कमांडो ने कंट्रोल टावर पर खड़े गनमैन को मार गिराया। इसी बीच दो कमांडो योनी को उठाकर ले गए। डॉक्टर ने खून से लथपथ योनी की शर्ट काटकर पट्टियां बांधी, पर गोली अंदरूनी अंगों को छलनी कर चुकी थी। इधर, डिप्टी कमांडर और उनकी टीम टर्मिनल का दरवाजा तोड़ते हुए अंदर दाखिल हो चुकी थी। हॉल में चारों तरफ दहशत पसरी हुई थी। बंधक गद्दों से मुंह ढंककर दुबके पड़े थे। तभी एक हाईजैकर ने खंभे के पीछे से ग्रेनेड फेंक दिया। उसके ब्लास्ट होते ही हॉल में आग लग गई। आग की लपटों के बीच हाईजैकर ने फायरिंग शुरू कर दी, लेकिन इजराइली कमांडो ने उसे मार गिराया। इजराइली कमांडो को लगा कि अब सारे हाईजैकर मारे जा चुके हैं, लेकिन गद्दों के बीच दुबकी डेनिम स्कर्ट वाली लड़की अभी भी मौत का सामान थामे बैठी थी। कमांडो ने मेगाफोन पर आवाज लगाई- ‘नीचे लेटे रहो! हम इजराइली सैनिक हैं।’ तभी एक शख्स खड़ा होकर चिल्लाने लगा। कमांडो को लगा कि ये हाईजैकर है और ट्रिगर दबा दिया। वहा वहीं गिर पड़ा। तभी उसकी मां चिल्ला उठी- तुम लोगों ने ये क्या किया। ये इजराइली है। बेटा है मेरा। कमांडो ने कहा- ‘सॉरी, लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता। फटाफट सब बाहर निकलो, विमान तुम लोगों के इंतजार में खड़े हैं। जल्दी करो।’ लोग उठकर बाहर की तरफ भागने लगे। तभी डेनिम स्कर्ट वाली लड़की भीड़ से निकली और एक कमांडो पर झपट पड़ी। उसकी गन छीन ली और फायरिंग करने लगी। तभी पीछे से डिप्टी कमांडर ने उसे जोर से धक्का दिया और अपनी एके-47 की पूरी गोलियां उसके सीने में उतार दी। अब यात्री जैसे ही टर्मिनल से बाहर निकले, युगांडा के दर्जनभर सैनिकों ने फायरिंग शुरू कर दी। बंधकों और डिप्टी कमांडर की सांसें अटक गईं। एक पल के लिए लगा कि सबकुछ खत्म हो गया। तभी पीछे से इजराइली कमांडोज की एक दूसरी टुकड़ी आ गई। दोनों तरफ से करीब 10 मिनट तक फायरिंग होती रही। इसमें युगांडा के सभी सैनिक मारे गए। अब बंधकों को एक-एक करके विमान में बैठाया जाने लगा। कुछ ही देर में सभी बंधक विमान में सवार हो चुके थे। रनवे पर खड़े पहले विमान के पायलट ने चिल्लाते हुए पूछा- ‘क्या सभी बंधक आ गए हैं?’ लोडमास्टर ने जवाब दिया- ‘हां सब आ गए हैं।’ पायलट ने पूछा- ‘मुझे सटीक नंबर चाहिए। कितने लोग हैं। लिखकर दो।’ लोडमास्टर ने पर्ची थमाई- ‘102 जीवित और 3 मृत।’ इधर, योनी को बचाने की कोशिश जारी थी। सीपीआर दिया गया, खून चढ़ाया गया... लेकिन अब ये कमांडर गहरी नींद में सो चुका था। कभी ना जगने वाली नींद में। रात के ठीक 11 बजकर 40 मिनट पर, बंधकों और घायलों को लेकर पहला विमान उड़ चला, लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं हुई थी। आसामान में गश्त लगा रहे बोइंग 707 में बैठे जनरल कुटी एडम तक जैसे ही यह मैसेज पहुंचा, उन्होंने फौरन ऑर्डर दिया- ‘रनवे पर खड़े युगांडा के विमानों को तबाह कर दो।’ एयरपोर्ट पर 11 मिग लड़ाकू विमान खड़े थे। इजराइली कमांडो ने बम से सभी विमानों को उड़ा दिया। ताकि युगांडा की सेना उनका पीछा नहीं कर सके। इसके बाद बाकी के विमानों ने भी उड़ान भरनी शुरू की। रात 12:40 बजे अंतिम इजराइली विमान ने एंटेबे को अलविदा कह दिया। 1 घंटा 39 मिनट में ऑपरेशन थंडरबोल्ट पूरा हो चुका था। 4 जुलाई की सुबह करीब 10 बजे सभी विमान तेल अवीव एयरपोर्ट पहुंचे। रनवे पर पीएम राबिन और उनके मंत्रियों के साथ हजारों इजराइली मौजूद थे। एयरपोर्ट तालियों और नारों से गूंज रहा था। जैसे ही विमानों के दरवाजे खुले और अपनों ने अपनों को देखा, लोग एक-दूसरे से लिपटकर रोने लगे। एयरपोर्ट पर बंधकों के स्वागत के बाद प्रधानमंत्री ने जश्न मनाने के लिए विपक्ष के नेता मेनाखेम बेगिन को अपने दफ्तर बुलाया। बेगिन जैसे ही अंदर दाखिल हुए, राबिन ने मुस्कुराते हुए विस्की की बोतल उठा ली। बेगिन ने हाथ जोड़ते हुए कहा, ‘राबिन, मैं शराब नहीं पीता।’ राबिन ने ठहाका लगाया। उन्होंने एक ग्लास में विस्की उड़ेली और बेगिन की तरफ बढ़ा दी। बोले, ‘बेगिन साहब, समझ लो कि आप रंगीन चाय पी रहे हैं।’ इस तरह इजराइल और मोसाद का ऑपरेशन थंडरबोल्ट कामयाब हुआ। इसमें जान गंवाने वाले योनी नेतन्याहू के नाम पर उनके छोटे भाई बेंजामिन नेतन्याहू राजनीति में उतरे। 1996 में पहली बार इजराइल के पीएम बने। अभी भी वे उस पद पर कायम हैं। ऑपरेशन थंडरबोल्ट का पार्ट-1 भी पढ़िए : डेनिम स्कर्ट, हाथ में पिस्तौल, बॉयफ्रेंड के साथ प्लेन हाईजैक : पीरियड का खून दिखाकर एक महिला भाग निकली, फिर क्या हुआ; ऑपरेशन थंडरबोल्ट पार्ट-1 रेफरेंस : 1. Operation Thunderbolt: Flight 139 and the Raid on Entebbe Airport : By Saul David. 2. A State of Blood: The Inside Story of Idi Amin : By Henry Kyemba

दैनिक भास्कर 26 Jul 2026 5:32 am

72 घंटे में लिखी गई प्रधान के इस्तीफे की स्क्रिप्ट:सीक्रेट मीटिंग, RSS की सलाह, 3 दिन में कैसे बदला खेल

22 जुलाई रात 10.30 तक तय था कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे। गृहमंत्री अमित शाह और PM मोदी का सपोर्ट उन्हें कुर्सी पर टिकाए हुए था। फिर RSS और BJP की एक मीटिंग हुई और कुर्सी डगमगाने लगी। शाह अब भी साथ थे, लेकिन प्रधानमंत्री का सपोर्ट हट चुका था। RSS के 5 पदाधिकारियों की मोदी-शाह से मीटिंग RSS की तरफ से सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, सह सरकार्यवाह अरुण कुमार और कृष्ण गोपाल के साथ दो और पदाधिकारी मौजूद थे। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और जेपी नड्डा मौजूद थे। ये मीटिंग न BJP दफ्तर में हुई और न ही संघ कार्यालय में। वजह थी, इस मीटिंग और उसमें हुई बातों को सीक्रेट रखना। इस मीटिंग के बारे में किसी को खबर नहीं थी। तय हुआ PM मोदी तुरंत रात में ही जेन जी के अंदाज में बात करें सोर्स ने बताया इसी मीटिंग में तय हुआ कि PM मोदी तुरंत यानी रात में ही जेन जी के सबसे फेवरेट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए बात करेंगे। भाषा भी ऐसी हो जो जेन जी तक पहुंचे। ये तक तय हुआ कि PM निश्चिंत न दिखें। चेहरे पर चिंता और आंखों में नींद दिखे, ताकि मैसेज जाए कि वे स्टूडेंट्स की फिक्र में सोए नहीं। ऐसा इंस्टाग्राम की पोस्ट में झलका भी। इस्तीफे की स्क्रिप्ट भी तभी लिखी गई... संघ के प्रतिनिधियों ने सधी शैली में कहा कि धर्मेंद्र के इस्तीफे पर विचार करना चाहिए। आंदोलन भड़क रहा है। यूपी-पंजाब में चुनाव है। बिहार में सरकार अभी स्थिर नहीं हो पाई है। ऐसे में अगर ये आंदोलन वाकई नेपाल के जेन जी जैसा हुआ, तो सरकार कठिनाई से घिर जाएगी। आखिर में कहा गया कि ये संघ का स्पष्ट विचार है। इसके लिए 5 दिन यानी 27 जुलाई तक हमें देखना चाहिए कि पूरे देश से रिपोर्ट क्या आती है। अगर आंदोलन दब गया तो ठीक नहीं तो सोमवार को इस्तीफा दिलाना चाहिए। इन 5 दिनों में हमें पहले हर संभव कोशिश करनी चाहिए। जैसे- 1. सरकार और PM के पक्ष में नरेटिव तैयार करें। 2. ABVP के छात्रों को प्रोटेस्ट में शामिल करना ताकि वे आंदोलन में शामिल स्टूडेंट्स को समझाएं या अंदर ही अंदर आंदोलन के भीतर मतभेद पैदा करें। 3. आंदोलन में टूट डालें, जैसे विपक्ष अलग हो जाए, वांगचुक अलग और दीपके अलग। प्लान पर शुरू हुआ काम 1. दूसरे दिन रात में वांगचुक का अनशन तुड़वा दिया गया। ये मुश्किल नहीं था क्योंकि वांगचुक तैयार थे। 2. नरेटिव बनने लगा। ABVP के छात्रों तक मैसेज भेजना शुरू हुआ। 3. 25 जुलाई को ABVP से जुड़े करीब 150 स्टूडेंट्स प्रयागराज से दिल्ली पहुंचे। सुबह से जंतर-मंतर के प्रदर्शन में शामिल हो गए। जिला स्तर पर तो 23 जुलाई से ही छात्र एक्टिव हो गए थे। BJP प्लान में फेल भी पास भी सोर्स बताते हैं, ‘वांगचुक और दीपके के बीच दरार पड़ गई। वांगचुक पर डील करने के आरोप लगे। BJP इसमें कामयाब रही, लेकिन आंदोलन को बढ़ने से नहीं रोक पाई। दूसरी तरफ, ABVP की तरह समाजवादी पार्टी की यूथ विंग एक्टिव हो गई। मैसेजिंग हुई कि हर जिले में 500 युवा इकट्ठे हों। दिल्ली में जंतर-मंतर के साथ बिहार, यूपी में भी प्रदर्शन की आग बढ़ने लगी। डेडलाइन से 2 दिन पहले हो गया इस्तीफा... आंदोलन भड़का तो RSS ने और स्पष्ट मैसेज भेजा। सरसंघचालक मोहन भागवत ने भी संदेश दिया कि जेन जी से संवाद करना चाहिए। हमारी पीढ़ी अलग थी। हम आदेश मानते थे। ये पीढ़ी संवाद चाहती है। जेन जी को उनके तरीके से समझाकर हम रास्ते में ला सकते हैं। भागवत ने मीडिया में ये बोलने से पहले ही संदेश PM और गृहमंत्री को भेज दिया था। RSS ने साफ कहा कि अब अगर ये आंदोलन बढ़ा तो सरकार संकट में आ जाएगी। सिर्फ मोदी, शाह और RSS को पता था कब इस्तीफा होगा 22 जुलाई की मीटिंग में BJP की तरफ से जितेंद्र सिंह और जेपी नड्डा भी थे। हालांकि, प्रधान का इस्तीफा हुआ तो इसकी जानकारी सिर्फ अमित शाह, नरेंद्र मोदी और RSS को थी। BJP दफ्तर के अंदर तो किसी को खबर तक नहीं थी। नड्डा और जितेंद्र सिंह को भी तुरंत हुए इस इस्तीफे की खबर बाद में पता चली। इससे पहले किसान आंदोलन से बैकफुट में आई थी सरकार इससे पहले किसान आंदोलन के हिंसक होने के बाद सरकार ने बिल वापस लिए थे। आंदोलनकारियों के सामने झुकने का ये दूसरा मौका है। सूत्र ने कहा, आप इसे झुकना कह रही हैं, मैं रणनीति कह रहा हूं। किसान आंदोलन की वजह से बिल वापस लिए गए। उसके बाद फिर कोई किसान आंदोलन दिखा क्या। अभी शांति जरूरी थी, सो इस्तीफा ले लिया। हालांकि कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।

दैनिक भास्कर 26 Jul 2026 5:31 am

‘धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा पहली सीढ़ी’:CJP के प्रवक्ता बोले- इस्तीफे के बाद रुकेंगे नहीं, पुलिसवालों का भी हिसाब होगा

35 दिन का धरना, सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल, संसद मार्च, लाठीचार्ज, वांगचुक का अनशन खत्म होना और आखिर में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। कॉकरोच जनता पार्टी ने अपनी मांगें मनवा लीं। प्रदर्शन खत्म हुआ। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा, हम कॉकरोच हैं, एक बार घुसता है तो निकलता नहीं है।’ आगे क्या होगा, इस पर दैनिक भास्कर ने पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष राकां और सौरव दास से बात की। पहले आशुतोष की बात सवाल: आप लोगों ने आंदोलन को यहां तक पहुंचाया है। कैसा महसूस होता है? जवाब: लोग अपने हक के लिए लड़ना सीख रहे हैं। मुद्दों के लिए लड़ रहे हैं। दो महीने पहले इसकी कल्पना भी नहीं कर सकते थे। डेढ़ महीने पुराना ऑर्गेनाइजेशन इतना बड़ा आंदोलन करता है, तो शुरुआत में नयापन होता है। लोगों को इंटरेस्ट रहता है। इसके बाद भरोसा बहुत जरूरी है। इसी पर लोग आना शुरू होते हैं। पिछले एक-डेढ़ महीने में आंदोलन की क्रेडिबिलिटी बढ़ी है। लोगों को लगता है कि ये प्लेटफार्म कुछ बड़ा करने की कोशिश कर रहा है। व्यवस्था बदलने की कोशिश कर रहा है। सवाल: धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होने के बाद क्या आपकी पार्टी खत्म हो जाएगी? जवाब: बिल्कुल नहीं। ये तो शुरुआत है। देश के लिए बहुत सपने हैं। ये बस पहली सीढ़ी है। उसके बाद कई काम है। शिक्षा व्यवस्था पर काम करेंगे। सवाल: भविष्य में कॉकरोच जनता पार्टी को किस तरीके से देख रहे हैं और क्या प्लान है? जवाब: यह ऐसा मंच बने, जहां युवा बिना किसी डर या झिझक के अपने मुद्दे उठा सकें, जहां हम सरकार को उसके फैसलों और कामकाज के लिए जवाबदेह ठहरा सकें। सवाल: प्रोटेस्ट के दौरान घायल हुईं साक्षी अब भी ICU में हैं। उनके लिए आप लोग क्या कर रहे हैं? जवाब: हमारी टीम लगातार उनके संपर्क में है। सौरभ उनके भाई से बात कर रहे हैं। अच्छी बात है कि उनकी हालत स्थिर है। वह बोल पा रही है। अभी वेंटिलेटर पर है। उन्हें जो भी मेडिकल या लीगल हेल्प चाहिए होगी, हम देंगे। सवाल: लोग कह रहे हैं कि अभिजीत में नेतृत्व करने की क्षमता नहीं है? जवाब: लोग नहीं कह रहे हैं राइटविंग मीडिया और आईटी सेल का एक हिस्सा ये बात कह रहा है। उस शख्स ने अपनी जिंदगी को खतरे में डाला है। प्रोफेशनल करियर दांव पर लगाया है। एक-डेढ़ महीने में देश की पूरी जनता को जगाया है। उससे ज्यादा आप एक लीडर से क्या उम्मीद करते हो, मुझे नहीं पता। दीपके से मेरी दोस्ती सात साल पुरानी है, लेकिन पिछले डेढ़ महीने में मैंने उस व्यक्ति को जो करते देखा है, जिस हालत में देखा है, लड़ते हुए, रोते हुए, समझाते हुए देखा है। मेरा मानना है कि इस दौर में इससे बेहतर नेतृत्व नहीं मिल सकता था। वह हर दिन बेहतर नेता बन रहा है। अब सौरव दास की बात सवाल: आप पहली बार जेपी नड्डा से मिलने गए थे, तब आपके फोन रखवाए गए थे? जवाब: हां। जाते ही हमारा फोन जब्त कर लिया गया। कहा कि अलाउड नहीं है। ठीक है कोई बात नहीं। सिक्योरिटी सिचुएशन को समझते हैं। फिर बहुत देर इंतजार ही करा रहे थे। हमने कहा कि हम फोन इस्तेमाल कर लेते हैं, टीम के लोगों से बात कर लेते हैं। देख लेते हैं सिचुएशन क्या है। वे अलाऊ नहीं कर रहे थे। फिर हमने कहा कि हम यहीं धरना दे देंगे, फिर उन्होंने अलाऊ किया। फिर नड्डा जी से बात हुई और हम वापस आ गए। सवाल: लोग कह रहे हैं कि अभिजीत दीपके लीडर जैसे नहीं लगते, इसलिए उन पर भरोसा नहीं हो रहा? जवाब: हमने यहां 32-33 दिन से ज्यादा प्रोटेस्ट कर लिया। ये नहीं हो पाता अगर लीडरशिप नहीं होती। यहां जितने भी लोग हैं, सभी में लीडरशिप क्वालिटीज है। हां, हम लोग पहली बार प्रदर्शन कर रहे हैं। मुझे नहीं लगता इतिहास में ऐसा हुआ होगा कि तीन लोग जो इतने यंग है, उन्हें इतनी भीड़ हैंडल करने को मौका मिला। हम इस जिम्मेदारी को समझते हैं। हम लोग एक-दूसरे की सलाह से ही फैसले लेते हैं। सवाल: आप तीनों कैसे काम करते हैं, किसके पास क्या जिम्मेदारी है? जवाब: तीनों काम बांट लेते हैं। सरकार से बातचीत करने के लिए मैं और आशु चले जाते हैं। अभिजीत और मैं लीगल चीजों पर काम करते हैं। सवाल: जेपी नड्‌डा से मिलने अभिजीत क्यों नहीं गए? जवाब: लोग ऐसे ही बोल रहे हैं कि 20 जुलाई को लीडरशिप नहीं थी। अभिजीत यहां से चले जाते, तो फिर लगता वे भागकर चले गए। सवाल: CJP और इस आंदोलन का भविष्य क्या देख रहे हैं। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा से सब खत्म हो जाएगा? जवाब: प्रदर्शन खत्म हो जाएगा, लेकिन आंदोलन चलता रहेगा। प्रोटेस्ट के दौरान सोनम वांगचुक के साथ JNU स्टूडेंट नेहा 23 दिन भूख हड़ताल पर रहीं। हमने उनसे भी बात की। सवाल: अब तक का सफर कैसा रहा, अभिजीत दीपके और पूरी टीम कैसे साथ आई? जवाब: मैं अंडरग्रेड के तीसरे साल से स्टूडेंट एक्टिविज्म में हूं। 2019-19 का इक्वल सिटीजनशिप आंदोलन, किसान आंदोलन और रेसलर्स प्रोटेस्ट देखा। इनसे सीख मिली कि अगर हम चाहें तो व्यवस्था पर न सिर्फ सवाल उठा सकते हैं, बल्कि उसमें दखल भी दे सकते हैं। ये तमाम लड़ाइयां हम लोग लंबे समय से लड़ रहे हैं। हम हमेशा से चाहते थे कि एजुकेशन के मुद्दे पर सीरियस बातचीत हो। अभिजीत ने हमसे बात की और कहा कि वे दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले हैं और चाहते हैं स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन उसका हिस्सा बने। हमारी मीटिंग हुई। इसमें बात हुई कि सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठेंगे, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगते हुए। हमने बतौर स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन अनशन में शामिल होने का फैसला लिया। सवाल: अभिजीत से पहली मुलाकात कैसे हुई थी? जवाब: वे जब अमेरिका से प्लेन पकड़कर जंतर-मंतर पर आए थे। उन्होंने कहा कि मैं जेट लैग में हूं। सिर दर्द हो रहा है। कुछ खाया नहीं है। उसी बदहाल हालत में हम उनसे पहली बार मिले थे। फोन पर बात हुई थी। मिले हम उसी प्रोटेस्ट में थे। सवाल: कॉकरोच जनता पार्टी को लेकर क्या प्लानिंग है? जवाब: मैं कॉकरोच जनता पार्टी का हिस्सा नहीं हूं। मैं ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन से हूं। हम लोगों का वर्किंग रिलेशनशिप है क्योंकि ये मूवमेंट बहुत ज्यादा जरूरी है। कॉकरोच जनता पार्टी बेहतर काम करें, लड़े। हमारी शुभकामनाएं उनके साथ हैं। सवाल: AISA और कॉकरोच जनता पार्टी का साथ बस यहीं तक था? जवाब: जब भी ऐसे मुद्दे उठेंगे, जिसमें हम दोनों को साथ आकर लड़ाई मजबूत करना है तो हम जरूर साथ आएंगे। ………………….. नोट: आशुतोष और सौरव से बातचीत धरना खत्म होने से पहले हुई थी। नेहा से धरना खत्म होने के बाद बात हुई।

दैनिक भास्कर 26 Jul 2026 5:28 am

‘कॉकरोचों’ ने बीजेपी सरकार पर 5 बड़े डेंट मारे:‘ये सरकार झुकती नहीं’ का नैरेटिव टूटा; क्या प्रधान के इस्तीफे के बाद डैमेज कंट्रोल होगा

12 साल पुरानी केंद्र की मोदी सरकार- सख्त, अडिग और किसी भी दबाव में न झुकने वाली। मामला चाहे CAA-NRC प्रोटेस्ट का हो या संसद में बीच सत्र से 146 विपक्षी सांसदों का सस्पेंशन या फिर राहुल गांधी की सदस्यता खत्म कर दी गई हो। सरकार किसी विरोध के आगे कमजोर पड़ते नहीं दिखी। किसी मंत्री पर इस्तीफे का दबाव बना, तो कहा गया- ‘भैया यहां इस्तीफे नहीं होते।’ लेकिन 12 साल में पहली बार कॉकरोच पार्टी ने मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ले लिया। इस पूरे घटनाक्रम से कौन-से 5 बड़े डेंट लगे और क्या सरकार इससे उबर पाएगी; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… सवाल-1: क्या इस डेंट का असर आने वाले चुनावों पर पड़ेगा? जवाब: उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड की विधानसभाओं का कार्यकाल 2027 में खत्म हो रहा है। यहां फरवरी-मार्च 2027 में चुनाव हो सकते हैं। VoteVibe के फाउंडर और इलेक्शन एनालिस्ट अमिताभ तिवारी कहते हैं, ‘प्रोटेस्ट के दौरान सरकार ने राहुल गांधी या विपक्षी से कोई बातचीत नहीं की। उसने CJP के युवा नेताओं के साथ डील करके उनकी मांगें मान लीं, ताकि विपक्ष इसे अपनी जीत न दिखा सके। जबकि कॉकरोच पार्टी कोई चुनावी मंच नहीं, बल्कि यूथ प्लेटफॉर्म है। इसलिए सीधे तौर पर बीजेपी को कोई चुनावी नुकसान होता नहीं दिखता। विपक्ष को तब फायदा हो सकता था, जब उसने मांगें न मानी होतीं।' अमिताभ के मुताबिक, ‘राम मंदिर चंदाचोरी और फिर इस मामले में युवाओं के एकजुट प्रोटेस्ट से बीजेपी के सामने हिंदुत्व, हिंदू-मुस्लिम बाइनरी और राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों को लेकर एक नई चुनौती है, लेकिन बीजेपी को कोई चुनावी घाटा नहीं होगा। हर राज्य के चुनावी फैक्टर अलग हैं। पंजाब में सिख बनाम अन्य की राजनीति है। उत्तराखंड में मुस्लिम सिर्फ 15% है। वहां हिंदुत्व का मुद्दा नहीं हैं। उत्तर प्रदेश में भी जातीय फैक्टर ज्यादा रोल निभाता है।’ कांग्रेस को कवर करने वाले सीनियर जर्नलिस्ट आदेश रावल कहते हैं, ‘आने वाले विधानसभा चुनावों में इसका कोई असर नहीं दिखता है। पीएम मोदी के चेहरे या केंद्र सरकार के कामकाज के बजाय राज्यों में लोकल मुद्दे ज्यादा प्रभावी होते हैं।’ हालांकि आदेश ये भी कहते हैं कि युवाओं में जिस तरह का रोष है और वो जारी रहता है, तो उसका इलेक्टोरल टेस्ट 2029 के लोकसभा चुनाव में होगा। सवाल-2: क्या धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सरकार डैमेज कंट्रोल कर लेगी? जवाब: धर्मेंद्र के इस्तीफे के अलावा सरकार ने कॉकरोच पार्टी की बाकी दोनों मांगें भी मान ली हैं- प्रोटेस्टर्स पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी और NEET पेपर लीक के चलते जान गंवाने वाले बच्चों के परिवारों को एक करोड़ का मुआवजा मिलेगा। आदेश रावल कहते हैं, ‘बीजेपी हिंदुत्व, राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों से जुड़ा विरोध होता, तो बिना किसी डैमेज के मैनेज कर लेती, लेकिन इस बार मुद्दा उनके सिलेबस से बाहर का था। इस्तीफा दिया नहीं गया, बल्कि छात्रों ने इस्तीफा लिया है। पीएम मोदी को 2 दिन में बार-बार झुकना पड़ा। सारी मांगें माननी पड़ीं। वैचारिक तौर पर कुछ डैमेज ऐसा जरूर हुआ है, सरकार का मनोबल भी टूटा है, लेकिन ये डैमेज कंट्रोल हो जाएगा। आदेश जोड़ते हैं कि बीजेपी अपनी भूल में तुरंत सुधार करना भी जानती है। देश के लोगों की याद्दाश्त बहुत लंबी नहीं है। सरकार संसद सत्र में परिसीमन बिल आदि ला सकती है, इससे पूरा ध्यान उस पर चला जाएगा। ------------------ ये खबर भी पढ़िए… इन 5 वजहों से घबराई सरकार, तब हुआ धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा; नहीं झुकते तो क्या हो जाता, आखिरकार आंदोलन खत्म शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार इस्तीफा दे ही दिया। जंतर-मंतर पर 35 दिन से कॉकरोच जनता पार्टी का अनशन, पीएम आवास के बाहर राहुल गांधी का धरना, संसद में रोज गूंजता हंगामा और देश-दुनिया के कई शहरों में हो रहे प्रदर्शन से सरकार दबाव में थी। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 25 Jul 2026 7:17 pm

RSS की सख्ती ने लिखी प्रधान के इस्तीफे की स्क्रिप्ट:PM मोदी के इंस्टाग्राम पोस्ट से पहले सीक्रेट मीटिंग, 3 दिन में कैसे पलटा खेल

22 जुलाई रात 10.30 तक तय था कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे। गृहमंत्री अमित शाह की जिद और PM मोदी का सपोर्ट उन्हें कुर्सी पर टिकाए हुए था। 22 जुलाई की रात 10.30 बजे एक मीटिंग हुई और ये कुर्सी डगमगाने लगी। मीटिंग RSS और BJP के बीच थी। शाह अब भी जिद पर अड़े थे, लेकिन प्रधानमंत्री का सपोर्ट अब हट चुका था। RSS के 5 पदाधिकारियों की मोदी-शाह से मीटिंग RSS की तरफ से सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, सह सरकार्यवाह अरुण कुमार और कृष्ण गोपाल के साथ दो और पदाधिकारी मौजूद थे। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और जेपी नड्डा मौजूद थे। ये मीटिंग न BJP दफ्तर में हुई और न ही संघ कार्यालय में। वजह थी, इस मीटिंग और उसमें हुई बातों को सीक्रेट रखना। इस मीटिंग के बारे में किसी को खबर नहीं थी। सोर्स ने बस इतना कहा कि मीटिंग शामिल लोगों में से किसी एक के घर पर हुई थी। तय हुआ PM मोदी तुरंत रात में ही जेन जी के अंदाज में बात करें सोर्स ने बताया इसी मीटिंग में तय हुआ कि PM मोदी तुरंत यानी रात में ही जेन जी के सबसे फेवरेट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए बात करेंगे। भाषा भी ऐसी हो जो जेन जी तक पहुंचे। ये तक तय हुआ कि PM डेकोरेट या निश्चिंत न दिखें। चेहरे पर चिंता और आंखों में नींद दिखे, ताकि मैसेज जाए कि वे स्टूडेंट्स की फिक्र में सोए नहीं। ऐसा इंस्टाग्राम की पोस्ट में झलका भी। इस्तीफे की स्क्रिप्ट भी तभी लिखी गई... संघ के प्रतिनिधियों ने अपनी सधी शैली में कहा कि धर्मेंद्र के इस्तीफे पर विचार करना चाहिए। आंदोलन भड़क रहा है। यूपी-पंजाब में चुनाव है। बिहार में सरकार अभी स्थिर नहीं हो पाई है। ऐसे में अगर ये आंदोलन वाकई नेपाल के जेन जी जैसा हुआ, तो सरकार कठिनाई से घिर जाएगी। आखिर में कहा गया कि ये संघ का स्पष्ट विचार है। इसके लिए 5 दिन यानी 27 जुलाई तक हमें देखना चाहिए कि पूरे देश से रिपोर्ट क्या आती है। अगर आंदोलन दब गया तो ठीक नहीं तो सोमवार को इस्तीफा दिलाना चाहिए। इन 5 दिनों में हमें पहले हर संभव कोशिश करनी चाहिए। जैसे- 1. सरकार और PM के पक्ष में नरेटिव तैयार करें। 2. ABVP के छात्रों को प्रोटेस्ट में शामिल करना ताकि वे आंदोलन में शामिल स्टूडेंट्स को समझाएं या अंदर ही अंदर आंदोलन के भीतर मतभेद पैदा करें। 3. आंदोलन में टूट डालें, जैसे विपक्ष अलग हो जाए, वांगचुक अलग और दीपके अलग। प्लान पर शुरू हुआ काम 1. दूसरे दिन रात में वांगचुक का अनशन तुड़वा दिया गया। ये मुश्किल नहीं था क्योंकि वांगचुक तैयार थे। 2. नरेटिव बनने लगा। ABVP के छात्रों तक मैसेज भेजना शुरू हुआ। 3. 25 जुलाई को ABVP से जुड़े करीब 150 स्टूडेंट्स प्रयागराज से दिल्ली पहुंचे। सुबह से जंतर-मंतर के प्रदर्शन में शामिल हो गए। जिला स्तर पर तो 23 जुलाई से ही छात्र एक्टिव हो गए थे। BJP प्लान में फेल भी पास भी सोर्स बताते हैं, ‘वांगचुक और दीपके के बीच दरार पड़ गई। वांगचुक पर डील करने के आरोप लगे। BJP इसमें कामयाब रही, लेकिन आंदोलन को बढ़ने से नहीं रोक पाई। दूसरी तरफ, ABVP की तरह समाजवादी पार्टी की यूथ विंग एक्टिव हो गई। मैसेजिंग हुई कि हर जिले में 500 युवा इकट्ठे हों। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की आग बुझ रही थी, लेकिन बिहार, यूपी में आग बढ़ने लगी। डेडलाइन से 2 दिन पहले हो गया इस्तीफा... आंदोलन भड़का तो RSS ने और स्पष्ट मैसेज भेजा। सरसंघचालक मोहन भागवत ने संदेश दिया कि जेन जी से संवाद करना चाहिए। हमारी पीढ़ी अलग थी। हम आदेश मानते थे। ये पीढ़ी संवाद चाहती है। जेन जी को उनके तरीके से समझाकर हम रास्ते में ला सकते हैं। ये संदेश सरकार और प्रधानमंत्री के नाम था। भागवत ने मीडिया में ये बोलने से पहले ही ये संदेश PM और गृहमंत्री को भेज दिया था। RSS ने साफ कहा कि अब अगर ये आंदोलन बढ़ा तो सरकार संकट में आ जाएगी। सिर्फ मोदी, शाह और RSS को पता था कि आज इस्तीफा होगा 22 जुलाई की मीटिंग में BJP की तरफ से जितेंद्र सिंह और जेपी नड्डा भी थे। हालांकि, प्रधान का इस्तीफा हुआ तो इसकी जानकारी सिर्फ अमित शाह, नरेंद्र मोदी और RSS को थी। BJP दफ्तर के अंदर तो किसी को खबर तक नहीं थी। नड्डा और जितेंद्र सिंह को भी तुरंत हुए इस इस्तीफे की खबर बाद में पता चली। अब कौन/ होगा शिक्षा मंत्री सूत्र के हिसाब से फिलहाल आंदोलन में विपक्ष, स्टूडेंट्स और सरकार के बीच की कड़ी बने जितेंद्र सिंह और जेपी नड्डा का नाम लिस्ट में सबसे आगे है। दोनों मंत्री विनम्र और बेदाग माने जाते हैं। पूरे आंदोलन में भी इन्होंने जिस तरह से मध्यस्थता का काम किया, उसकी सरहाना RSS और BJP के शीर्ष नेतृत्व ने की। इनके अलावा भी दावेदार हैं… इससे पहले किसान आंदोलन से बैकफुट में आई थी सरकार इससे पहले किसान आंदोलन के हिंसक होने के बाद सरकार ने बिल वापस लिए थे। आंदोलनकारियों के सामने झुकने का ये दूसरा मौका है। सूत्र ने कहा, आप इसे झुकना कह रही हैं, मैं रणनीति कह रहा हूं। किसान आंदोलन की वजह से बिल वापस लिए गए। उसके बाद फिर कोई किसान आंदोलन दिखा क्या। अभी शांति जरूरी थी, सो इस्तीफा ले लिया। हालांकि कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।

दैनिक भास्कर 25 Jul 2026 6:18 pm

फ्रांस-स्पेन में कुदरत का तांडव, जंगल की भीषण आग से 2 लाख लोग बेघर; बोर्डो शहर पर मंडराया बड़ा खतरा

दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस और मध्य स्पेन इस समय इतिहास की सबसे भयानक प्राकृतिक आपदाओं में से एक का सामना कर रहे हैं। जंगलों में लगी बेकाबू आग ने ऐसा हाहाकार मचाया है कि दोनों देशों के प्रभावित इलाकों से लगभग 2 लाख लोगों को आनन-फानन में सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करना पड़ा है। मैड्रिड से लेकर बोर्डो के पास बसे तमाम कस्बों तक दहशत का माहौल है और लोग अपनी जान बचाने के लिए घरों को छोड़कर सुरक्षित ठिकानों की तरफ भागने को मजबूर हो गए हैं। आग की रफ्तार और उसकी विनाशकारी क्षमता ने दमकल विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों को भी हैरान कर दिया है, क्योंकि इस भयंकर लपटों का सीधे तौर पर सामना करना किसी के लिए भी मुमकिन नहीं हो पा रहा है।फ्रांस के अटलांटिक तट पर अफरा-तफरी, नावों के जरिए भागे लोगस्पेन में आग बुझाने वाले कर्मचारियों ने खुले तौर पर स्वीकार किया है कि हवा के रुख और प्रचंड गर्मी के कारण आग की लपटें इतनी तेज थीं कि उस पर काबू पाना बेहद मुश्किल साबित हुआ। फ्रांस के लोकप्रिय अटलांटिक तटीय टूरिस्ट इलाकों में जब आग तेजी से फैलने लगी, तो स्थिति इतनी विकट हो गई कि कई लोगों को अपनी जान बचाने के लिए समंदर में नावों का सहारा लेकर भागना पड़ा। फ्रांसीसी गृह मंत्रालय से मिले आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, केवल फ्रांस के गिरोंडे और लैंड्स इलाकों से ही 1,41,000 से अधिक नागरिकों को अपने पुश्तैनी और आधुनिक घर छोड़कर सुरक्षित ठिकानों पर शरण लेनी पड़ी है।स्पेन के मध्य इलाकों में भी तबाही, घरों को खाली कराने के लिए उतरी पुलिसदूसरी तरफ स्पेन के गृह मंत्रालय के मुताबिक, मध्य स्पेन के जंगलों से उठी आग की लपटों ने रिहायशी इलाकों को अपनी आगोश में ले लिया, जिसके चलते 60,000 लोगों को मजबूरन अपने घर खाली करने पड़े। प्रशासनिक मुस्तैदी के चलते पुलिस की टीमें घर-घर जाकर सायरन बजाते हुए लोगों को तुरंत इलाका खाली करने की चेतावनी दे रही थीं। जंगलों से उठ रहे काले धुएं के विशाल गुबारों ने आसमान को पूरी तरह ढक लिया है। सड़कों पर सिर्फ गाड़ियों का रेला दिखाई दे रहा है, जिससे हर तरफ भगदड़ और अफरा-तफरी जैसा माहौल बना हुआ है।राहत की खबर: किसी की मौत नहीं, लेकिन दर्जनों फायरफाइटर झुलसेइस भयावह आपदा के बीच सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि अभी तक फ्रांस या स्पेन में इस भीषण आग की चपेट में आने से किसी भी नागरिक या पर्यटक की मौत की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, आग पर काबू पाने की दिन-रात कोशिश कर रहे दर्जनों फ्रांसीसी दमकलकर्मी (फायरफाइटर) इस दौरान घायल या झुलस जरूर गए हैं, जिनका इलाज जारी है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती अब इस अनियंत्रित आग को बोर्डो शहर की तरफ बढ़ने से रोकने की है, जिसके लिए पड़ोसी क्षेत्रों से भी अतिरिक्त फायर ब्रिगेड और रेस्क्यू टीमों को तुरंत मौके पर रवाना कर दिया गया है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 25 Jul 2026 6:17 pm

काला सागर में मालवाहक पोत पर बड़ा हमला, एक भारतीय नागरिक की दर्दनाक मौत; MEA ने जताई कड़ी आपत्ति

काला सागर से एक बेहद दहला देने वाली खबर सामने आ रही है, जहां 18 जुलाई को रूसी समुद्री सीमा क्षेत्र से गुजर रहे एक मालवाहक पोत पर हुए खौफनाक हमले में एक भारतीय नागरिक की जान चली गई है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को इस बात की आधिकारिक पुष्टि करते हुए घटना पर गहरा शोक और कड़ी आपत्ति जताई है। जिस कमर्शियल शिप यानी ‘एमवी ओमोर्फी’ को इस हमले में निशाना बनाया गया, उस पर कुल 10 क्रू मेंबर सवार थे जिनमें 3 भारतीय नागरिक भी शामिल थे। इस दुखद हादसे में एक भारतीय की मौत हो गई, जबकि राहत की बात यह है कि बाकी के दो भारतीय सुरक्षित बताए जा रहे हैं।रूसी अधिकारियों के संपर्क में भारत, पीड़ित परिवार को दी जाएगी हरसंभव मददइस घटना के सामने आने के बाद रूस स्थित भारतीय दूतावास और मिशन के अधिकारी लगातार स्थानीय रूसी प्रशासन के संपर्क में हैं ताकि मृत भारतीय नाविक के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द स्वदेश लाया जा सके और पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता प्रदान की जा सके। भारत सरकार ने दो टूक शब्दों में कहा है कि इस तरह से मालवाहक और कमर्शियल जहाजों को निशाना बनाना तथा निर्दोष नागरिकों की जान को खतरे में डालना बेहद निंदनीय है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संघर्ष में शामिल सभी पक्षों से अपील की है कि वे अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का सख्ती से पालन करें और वैश्विक समुद्री मार्गों की सुरक्षा को हर हाल में सुनिश्चित करें।ओडेसा बंदरगाह हमले पर मॉस्को का दावा खारिज, जहाज में लदा था अनाजविदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक नियमित मीडिया ब्रीफिंग के दौरान यूक्रेन के तट पर ओडेसा बंदरगाह के पास हुए एक अन्य हमले का भी जिक्र किया, जिसमें गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले कमर्शियल जहाज ‘एमवी गोल्डन लियो’ को निशाना बनाया गया था। इस हमले में चार भारतीयों समेत कुल 10 लोगों की मौत हो गई थी। इस मामले में भारत ने रूस के उस दावे को लगभग खारिज कर दिया है जिसमें पोत पर सैन्य साजोसामान होने की बात कही जा रही थी। डीजी शिपिंग (नौवहन महानिदेशालय) से मिले पुख्ता आंकड़ों का हवाला देते हुए भारत ने स्पष्ट किया है कि ‘एमवी गोल्डन लियो’ ने 19 जुलाई को रवाना होने से पहले केवल अनाज का कार्गो लोड किया था।वाणिज्यिक जहाजों को निशाना न बनाए जाने की दोहरी अपीलविदेश मंत्रालय ने कड़े शब्दों में यह संदेश दिया है कि मौजूदा क्षेत्रीय तनाव या युद्ध की स्थितियों के बीच किसी भी परिस्थिति में कमर्शियल जहाजों और निर्दोष नाविकों को मोहरा नहीं बनाया जाना चाहिए। भारत का यह रुख साफ करता है कि वह अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह से गंभीर है। पिछले कुछ दिनों में ब्लैक सी और उसके आस-पास के समुद्री इलाकों में जहाजों पर बढ़ते हमलों ने वैश्विक शिपिंग और सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है, जिससे समुद्री मार्गों पर सफर कर रहे नाविकों के परिवारों में लगातार चिंता का माहौल बना हुआ है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 25 Jul 2026 6:15 pm

शुरू हो गया है महायुद्ध? ईरान पर टूट पड़े बहरीन और कुवैत; पहली बार किया सीधा हमला

मध्य पूर्व यानी पश्चिम एशिया का सुलगता संघर्ष अब एक बेहद खतरनाक और नए मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां तनाव की आंच ने खाड़ी के देशों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। वैश्विक राजनीति और रक्षा गलियारों से आ रही रिपोर्टों के मुताबिक, पहली बार बहरीन और कुवैत खुलकर सीधे युद्ध के मैदान में उतर आए हैं और उन्होंने ईरान के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की सनसनीखेज रिपोर्ट के अनुसार, इन दोनों खाड़ी देशों ने सऊदी अरब की रणनीतिक मदद से ईरान के भीतर मौजूद मिसाइल स्टोरेज और प्रमुख सैन्य ठिकानों को करारा जवाब देना शुरू कर दिया है, जिससे वैश्विक कूटनीति में खलबली मच गई है।सऊदी अरब की खुफिया और डिफेंस मदद से ईरान पर पलटवारअब तक खाड़ी के देश अपने ऊपर आने वाले खतरों से निपटने के लिए केवल रक्षात्मक रुख अपनाते थे और ईरान समर्थित ड्रोन्स या मिसाइलों को हवा में ही नाकाम करने तक सीमित रहते थे। क्षेत्रीय तनाव और युद्ध के बड़े दायरे में फैलने के डर से इन देशों ने कभी सीधे तौर पर आक्रामक रुख नहीं अपनाया था, लेकिन ईरान की तरफ से लगातार बढ़ रहे हमलों और उकसावे ने इन देशों को अपनी नीति बदलने पर मजबूर कर दिया है। ताजा सैन्य अभियानों में सऊदी अरब इन्हें खुफिया जानकारी यानी इंटेलिजेंस और डिफेंसिव एयर कवर उपलब्ध करा रहा है, जिससे बहरीन और कुवैत की ताकत में और इजाफा हुआ है। हालांकि इस मोर्चे पर अभी ओमान और कतर जैसे अन्य देशों ने सीधी सैन्य कार्रवाई शुरू नहीं की है, लेकिन जिस तरह से खाड़ी देशों का रुख बदला है, उससे आने वाले दिनों में समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बना रहा है ईरानईरान लगातार उन देशों को अपना निशाना बना रहा है जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने और आधुनिक सैन्य उपकरण मौजूद हैं, जिसमें मुख्य रूप से बहरीन, कुवैत और जॉर्डन शामिल हैं। हालिया रिपोर्टों में यह भी सामने आया है कि यूएई के कई शहरों में भी तबाही मचाने की कोशिशें की गई हैं और इन देशों में आए दिन सायरन बजने की आवाज़ें सुनाई देती हैं। कुवैत के भीतर कैंप उडैरी, कैंप दोहा, कैंप आरिफजान और अली अल सलेम एयरबेस जैसे महत्वपूर्ण अमेरिकी ठिकानों को ईरानी हमलों का सामना करना पड़ा है। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बहरीन के गृह विभाग को नागरिकों की सुरक्षा के लिए लगातार अलर्ट जारी करना पड़ रहा है और सायरन बजाकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सख्त हिदायत दी जा रही है।होर्मुज जलडमरूमध्य पर कब्जे की जंग और गहराता वैश्विक ऊर्जा संकटयह पूरा घटनाक्रम अमेरिकी सेना द्वारा ईरान के खिलाफ लगातार 13वीं रात भी हवाई हमले जारी रखने के कुछ ही घंटों बाद सामने आया है, जिससे दोनों पक्षों के बीच टकराव चरम पर पहुंच चुका है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच चल रही यह तानशाही दुनियाभर के लिए एक बड़े आर्थिक संकट की घंटी बन गई है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए दुनिया की सबसे अहम धमनियों में से एक है और ताजा सैन्य भिड़ंत का मुख्य केंद्र भी यही इलाका है। यदि यह सामरिक जलमार्ग पूरी तरह बंद होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ईंधन की कीमतों में भयंकर उछाल आ सकता है, जिससे पूरी दुनिया में भारी आर्थिक मंदी और उथल-पुथल मचने का खतरा मंडराने लगा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 25 Jul 2026 6:14 pm

अमेरिका-ईरान जंग के 13 दिन: ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना ने कमर्शियल जहाज पर की गोलीबारी, होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से दुनिया भर में हाहाकार

अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ा भीषण सैन्य संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है। युद्ध की 13वीं रात दोनों ओर से हुए जबर्दस्त हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में हालात और अधिक बेकाबू हो गए हैं। अमेरिकी सेना ने ओमान की खाड़ी में ईरानी नाकेबंदी (Blockade) तोड़ने की कोशिश कर रहे एक और कमर्शियल जहाज पर सीधी गोलीबारी कर उसे बेकार कर दिया। वहीं, जवाब में ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने फारस की खाड़ी और पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर विनाशकारी हमले बोले हैं।दुनिया के सबसे बड़े तेल आपूर्ति मार्ग होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) के प्रभावी रूप से बंद होने के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। आइए एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और जियोपॉलिटिक्स रिपोर्टर के नजरिए से समझते हैं इस भीषण संघर्ष के 5 बड़े अपडेट्स।1. ओमान की खाड़ी में M/T लैविन जहाज पर अमेरिकी सेना की गोलीबारीअमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिन्स ने पुष्टि की है कि ओमान की खाड़ी में व्यावसायिक जहाज M/T लैविन (M/T Lavine) ने अमेरिकी सेना द्वारा लागू की गई नाकेबंदी को कम से कम चार बार तोड़ने का प्रयास किया।इंजन रूम पर हमला: चेतावनी के बावजूद आदेश न मानने पर अमेरिकी सेना ने जहाज के इंजन रूम पर सीधी गोलीबारी कर उसे पूरी तरह बेकार (Incapacitated) कर दिया।12 जहाजों का रास्ता बदला: अमेरिकी सेना ने अब तक दो कमर्शियल जहाजों को बेकार किया है और 12 अन्य जहाजों के रास्तों को जबरन डाइवर्ट किया है।2. कुवैत, बहरीन और इराक में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान का पलटवारईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने पड़ोसी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर भीषण हमले किए:कुवैत और बहरीन में तबाही: ईरान ने कुवैत के उदैरी स्थित अमेरिकी ठिकाने पर हमला कर गोला-बारूद के 3 बड़े शेड नष्ट कर दिए। इसके अलावा, बहरीन में तैनात अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (Fifth Fleet) के एक वॉचटावर को भारी नुकसान पहुंचाया गया।इरबिल में 5 ड्रोन ढहाए: उत्तरी इराक के इरबिल एयरपोर्ट के पास स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमला करने आए 5 आत्मघाती ड्रोनों को अमेरिकी वायु रक्षा प्रणाली ने मार गिराया।ईरान के नौसैनिक अड्डे पर अमेरिकी बमबारी: जवाब में अमेरिका ने उत्तरी ईरान, केशम द्वीप (Qeshm Island) स्थित रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के नौसैनिक अड्डों और परमाणु केंद्र वाले शहर इस्फ़हान (Isfahan) पर भारी बमबारी की।3. होर्मुज और बाब अल-मंडेब बंद: 96 डॉलर पहुंचा क्रूड ऑयलइस युद्ध की सबसे बड़ी मार वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ रही है। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रैंड क्रूड ऑयल की कीमतें उछलकर $96 प्रति बैरल तक पहुंच चुकी हैं, जो युद्ध से पहले $72 के आसपास थीं।वहीं, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के दो तेल टैंकरों पर हमला कर बाब अल-मंडेब स्ट्रेट (Bab al-Mandeb Strait) को भी बाधित कर दिया है। इस रास्ते से दुनिया का 12% व्यापार और 25% कंटेनर ट्रैफिक गुजरता है।4. 400 जहाजों पर फंसे 6,000 नाविक: मानवाधिकार संकट गहरायाइंसानी नुकसान का आंकड़ा बेहद डरावना होता जा रहा है। ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, युद्ध शुरू होने से अब तक 3,434 लोग मारे जा चुके हैं।इंटरनेशनल मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन (IMO) और संयुक्त राष्ट्र (UN) के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट के आसपास फंसे 400 से अधिक कमर्शियल जहाजों पर लगभग 6,000 नाविक (Seafarers) जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। इनमें से कई जहाजों को उनके मालिकों ने छोड़ दिया है, जिससे नाविक बिना भोजन, पानी, ईंधन और चिकित्सा के समुद्र के बीच फंसे हुए हैं।5. ट्रंप का 'ऑल आउट' रुख और कूटनीति की नाकामीअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका किसी भी सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन वे ईरान से बातचीत भी कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि उन्हें 'युद्ध खत्म करने की कोई जल्दी नहीं है'।दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि ईरान किसी भी धमकी या दादागिरी के आगे नहीं झुकेगा। पाकिस्तान और ओमान की मध्यस्थता की कोशिशों के बावजूद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक सफलता के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं। इस बीच, इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी अगले हफ्ते अमेरिका पहुंचकर ट्रंप से मुलाकात करने वाले हैं, जिससे युद्ध के और भड़कने की आशंका जताई जा रही है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 25 Jul 2026 1:24 pm

व्हाइट हाउस ने सऊदी अरब परमाणु डील को इजरायल समझौते से जोड़ा, दोनों देशों के बीच संबंध सामान्य होने की उम्मीद जताई

व्हाइट हाउस ने शुक्रवार (स्थानीय समय) को फिर से कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उम्मीद है कि सऊदी अरब, इजरायल के साथ संबंध सामान्य करेगा। इसके साथ ही व्हाइट हाउस ने उम्मीद जताई कि सऊदी अरब प्रस्तावित नागरिक परमाणु समझौता को लेकर बड़ी समझ के हिस्से के तौर पर अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अमेरिकी सरकार इस मुद्दे को अपनी मध्य-पूर्व रणनीति का केंद्र मानता है।

देशबन्धु 25 Jul 2026 11:43 am

Pakistan Terror Attack: पाकिस्तान में अपने ही बोए कांटे! टांक जिले में बड़ा फिदायीन हमला, 12 सैनिकों समेत 15 की मौत

पाकिस्तान लंबे समय से जिस आतंकवाद को पनाह और हवा देता रहा है, अब वही भस्मासुर बनकर उसके अपने सुरक्षा बलों पर टूट रहा है। उत्तर-पश्चिम पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा (Khyber Pakhtunkhwa) प्रांत के टांक (Tank) जिले में एक भीषण और सुनियोजित आत्मघाती (फिदायीन) आतंकी हमला हुआ है।बारूद से लदी गाड़ी के धमाके में पाकिस्तानी सेना के 12 सैनिकों, 2 पुलिसकर्मियों और 1 सरकारी अधिकारी समेत कुल 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। हालांकि, पाकिस्तानी सेना का दावा है कि उसकी जवाबी गोलीबारी में 12 उग्रवादी (आतंकी) भी मारे गए हैं।कैसे अंजाम दिया गया चेकपोस्ट पर हमला?पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा ISPR (Inter-Services Public Relations) के बयान के अनुसार, यह घटना अफगानिस्तान सीमा के पास टांक जिले में सेना और पुलिस की संयुक्त सुरक्षा जांच चौकी पर घटी।घुसपैठ की नाकाम कोशिश: आतंकियों ने सबसे पहले चेकपोस्ट का सुरक्षा घेरा तोड़कर परिसर के अंदर घुसने का प्रयास किया। मुस्तैद जवानों ने उन्हें ललकारा और दोनों तरफ से भीषण गोलीबारी शुरू हो गई।बारूद से भरी गाड़ी से जोरदार टक्कर: जब आतंकी अंदर घुसने में नाकाम रहे, तो बौखलाहट में उन्होंने विस्फोटक से लदी अपनी तेज रफ्तार गाड़ी को सीधे चेकपोस्ट की बाहरी सुरक्षा दीवार से टकरा दिया।भयावह तबाही: विस्फोट इतना जबरदस्त था कि चेकपोस्ट की पूरी इमारत ध्वस्त हो गई और वहां मौजूद कई जवान और पुलिसकर्मी मलबे में दब गए, जिससे भारी जनहानि हुई।प्रतिबंधित संगठन TTP ने ली हमले की जिम्मेदारीइस घातक हमले की जिम्मेदारी प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP / पाकिस्तानी तालिबान) ने ली है। TTP ने बयान जारी कर दावा किया कि उसके 4 फिदायीन हमलावरों ने इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया।हमले के तुरंत बाद पूरे टांक जिले और आसपास के इलाकों को पाकिस्तानी सेना व अर्धसैनिक बलों ने सील कर दिया है और इलाके में बचे हुए आतंकियों के खिलाफ व्यापक सर्च ऑपरेशन ('Sanitization Operation') चलाया जा रहा है।पाकिस्तान का अफगानिस्तान पर फिर फूटा गुस्साहमले के बाद पाकिस्तान सरकार और सेना ने एक बार फिर पड़ोसी देश अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर आरोप मढ़े हैं। पाकिस्तान का कहना है कि TTP के लड़ाके अफगान सरजमीं का इस्तेमाल सुरक्षित ठिकानों के रूप में कर रहे हैं। वे वहीं से पाकिस्तान में हमलों की योजना बनाते हैं और घटनाओं को अंजाम देकर वापस सीमा पार भाग जाते हैं। हालांकि, काबुल स्थित तालिबान सरकार इन आरोपों को बार-बार खारिज करती रही है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 25 Jul 2026 8:17 am

Middle East War Escalation: बहरीन और कुवैत का ईरान पर पहला सीक्रेट एयरस्ट्राइक! यूएस बेस हमलों के बाद मिडिल ईस्ट में महाजंग का खतरा

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष अब एक भीषण और बहुआयामी युद्ध का रूप ले चुका है। वॉल स्ट्रीट जर्नल (WSJ) की एक हालिया एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, बहरीन और कुवैत की वायुसेना ने पहली बार संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए ईरान के अंदर मौजूद सैन्य ठिकानों, मिसाइल और ड्रोन स्टोरेज डिपो पर गुप्त हवाई हमले (Secret Airstrikes) किए हैं।इस सीक्रेट ऑपरेशन में संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने खुफिया जानकारी साझा करने के साथ-साथ बहरीन और कुवैत के लड़ाकू विमानों को एयर कवर प्रदान किया। हालांकि बहरीन और कुवैत के पास सीमित वायुसेना है, लेकिन अपने क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर लगातार हो रहे ईरानी हमलों के जवाब में उन्हें यह बड़ा कदम उठाना पड़ा है।अमेरिकी ठिकानों पर ईरान का भीषण पलटवारबहरीन और कुवैत के इस कदम के बाद ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने अपने हमले और तेज कर दिए हैं। ईरान ने कुवैत में मौजूद कैंप उदैरी (Camp Buehring), कैंप आरिफजान और अली अल सालेम एयर बेस के साथ-साथ बहरीन में ईसा एयर बेस और अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े (US Fifth Fleet) के ठिकानों पर कमिकेज़ (Kamikaze) ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों से ताबड़तोड़ हमले किए हैं।ईरान की ओर से आम नागरिकों को चेतावनी दी गई है कि वे अमेरिकी सैन्य परिसरों से कम से कम 500 मीटर की दूरी बनाए रखें, क्योंकि अमेरिकी मौजूदगी वाले सभी बेस उसके निशाने पर रहेंगे।समुद्र में नाकेबंदी और हॉर्मुज स्ट्रैट पूरी तरह ठपफारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना ने ईरान की समुद्री नाकेबंदी को कड़ा कर दिया है। अमेरिका ने नाकेबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहे व्यापारिक जहाजों पर फायरिंग कर उन्हें बेकार कर दिया है।हॉर्मुज स्ट्रैट बंद: लगातार हो रही गोलाबारी और ड्रोन हमलों के कारण दुनिया का सबसे प्रमुख तेल मार्ग 'हॉर्मुज स्ट्रैट' (Strait of Hormuz) पूरी तरह ठप हो चुका है।समुद्र में मानवीय संकट: समुद्र में लगभग 400 व्यापारिक जहाज और 6,000 से अधिक नाविक बीच रास्ते में फंसे हुए हैं, जिनके पास भोजन, पानी और आवश्यक ईंधन का गहरा संकट पैदा हो गया है।कच्चे तेल में उबाल: हॉर्मुज स्ट्रैट और लाल सागर में जहाजों पर हमलों के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर गई हैं।यमन में हुथी ठिकानों पर सऊदी का हमलालाल सागर के मुहाने (बाब अल-मंदेब) पर ईरान समर्थित हुथी विद्रोहियों ने सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर हमले बढ़ा दिए थे। इसके जवाब में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन के होदेइदा इलाके में हुथी विद्रोहियों के सैन्य अड्डों पर भारी बमबारी की है।फिलहाल ओमान, पाकिस्तान और चीन की ओर से शांति वार्ता कराने के प्रयास जारी हैं, लेकिन अमेरिका और ईरान दोनों ही एक-दूसरे के खिलाफ पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर पड़ रहा है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 25 Jul 2026 8:13 am

चीन और रूस ने ईरान को हथियार नहीं देने का भरोसा दिया : ट्रंप

ईरान के साथ जारी जंग के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हथ‍ियारों की सप्‍लाई को लेकर चीन और रूस पर भरोसे की बात को दोहराया

देशबन्धु 25 Jul 2026 7:50 am

बाब-अल-मंदेब विवाद : भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत जहाजों की आवाजाही पर दिया जोर

विदेश मंत्रालय (एमईए) ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही का अधिकार बहुत महत्वपूर्ण है

देशबन्धु 25 Jul 2026 7:40 am

शिक्षा नहीं पूछती जन्मस्थान, सिर्फ मेहनत और सपनों की उड़ान देखती है : राष्ट्रपति मुर्मु

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने रोमानिया की बुखारेस्ट यूनिवर्सिटी ऑफ इकोनॉमिक स्टडीज से मानद डॉक्टरेट की उपाधि मिलने के बाद कहा कि शिक्षा उनके जीवन में बदलाव लाने वाली सबसे बड़ी ताकत रही है

देशबन्धु 25 Jul 2026 7:20 am