डिजिटल समाचार स्रोत

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US Iran War: डोनाल्ड ट्रंप ने ठुकराया युद्धविराम का प्रयास, ईरान ने भी रखीं कड़ी शर्तें

व्हाइट हाउस ने साफ संकेत दिया है कि इस समय उसकी प्राथमिकता सैन्य अभियान जारी रखना है, न कि युद्धविराम पर चर्चा करना। दूसरी ओर ईरान ने भी स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अमेरिका और इजरायल के हवाई हमले पूरी तरह बंद नहीं होते, तब तक किसी भी तरह की शांति वार्ता संभव नहीं है।

देशबन्धु 15 Mar 2026 12:16 pm

होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का बड़ा बयान: ‘मार्ग खुला है, लेकिन अमेरिका और इस्राइल के जहाजों के लिए बंद’

ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, होर्मुज जलडमरूमध्य खुला है। यह केवल हमारे दुश्मनों—अमेरिका और उसके सहयोगियों—के टैंकरों और जहाजों के लिए बंद है।

देशबन्धु 15 Mar 2026 11:05 am

होर्मुज स्ट्रेट खुला है, पर नियंत्रण हमारे पास है : आईआरजीएस कमांडर

ईरान के एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने बताया है कि दुनिया में तेल ले जाने का एक बहुत महत्वपूर्ण समुद्री रास्ता होर्मुज स्ट्रेट अभी भी खुला है और उस पर ईरान का नियंत्रण बना हुआ है

देशबन्धु 15 Mar 2026 9:43 am

संडे जज्बात-अपने 4 जवान बेटे-बेटियों को जहर देकर कैसे मारूं:वे सारा दिन बिस्तर पर पड़े रहते हैं; शादी की उम्र में उन्हें चम्मच से खिलाता हूं

मैं रामकृष्ण, ओडिशा के मलकानगिरि जिले के तंडकी गांव का रहने वाला हूं। मेरे चार बच्चे हैं, सभी बिस्तर पर पड़े रहते हैं। हिल-डुल नहीं सकते। सभी जवान हैं, शादी की उम्र के हैं। इन्हें हाइपोटोनिया नाम की बीमारी है। पैदा होने पर ये बच्चे ठीक थे, लेकिन धीरे-धीरे ये इस बीमारी की जद में आते गए। पत्नी इनके गम में बीमार रहने लगी है। 8 हजार कमाता हूं। किसी का इलाज नहीं करा सकता। एक ऐसी परेशानी में हूं, जिसका कोई हल नहीं है। समझ नहीं आता कि मौत किसके लिए मांगू। आज से 23 साल पहले मेरे पहला बच्चा बेटी हुई। हमारे यहां बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं किया जाता। पिता बनकर बहुत खुश था, लेकिन 6 महीने बाद भी मेरी बेटी हिल-डुल नहीं पा रही थी। आवाज देने पर हमारी तरफ देखती भी नहीं थी। ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं हूं, इसलिए कुछ समझ नहीं पा रहा था कि इन्हें क्या हुआ है। पहले लोकल डॉक्टरों को दिखाया, लेकिन कुछ पता नहीं चला। वैसे भी हमारा इलाका नक्सल प्रभावित है। यहां अस्पताल वगैरह कुछ खास नहीं हैं। डॉक्टरों ने कहा कि इसे भुवनेश्वर लेकर जाओ मलकानगिरि से भुवनेश्वर जाना इतना आसान नहीं था। पंचायत ऑफिस में अनाज बांटने से 8 हजार रुपए महीना कमा पाता हूं। फिलहाल, बेटी को दिखाने के लिए भुवनेश्वर लेकर गया। वहां डॉक्टर ने बताया कि इसे हाइपोटोनिया है। यह बीमारी कभी ठीक नहीं होगी। मैं समझ नहीं पाया कि यह बीमारी होती क्या है। बाद में लोगों से पता चला कि यह जेनेटिक बीमारी होती है। भुवनेश्वर के अलावा आंध्र प्रदेश का विशाखापट्‌टनम शहर हमारे घर से नजदीक पड़ता है, जहां इसका इलाज होता है। लेकिन विशाखापट्‌टनम, भुवनेश्वर से भी ज्यादा मंहगा शहर है। आने-जाने के एक चक्कर में 20 से 25,000 रुपए लग जाते हैं। इतना पैसा चुका नहीं सकता। अब बच्चों का इलाज तो नहीं करा पा रहा, लेकिन इनकी सेवा कर रहा हूं। अब तो मेरी पत्नी बच्चों के बारे में सोच-सोच कर बीमार रहने लगी है। सोचती है कोई तो सामान्य औलाद पैदा हुई होती। तीन साल बाद मेरी पत्नी दोबारा प्रेगनेंट हुई। इस बार बड़ी उम्मीद थी कि भगवान हमारी सुनेगा। लेकिन डरे भी हुए थे कि कहीं यह बच्चा भी बेटी जैसा न हो जाए। खैर, मुझे फिर से एक बेटी हुई। शुरुआत में ठीक थी। सालभर तक पता नहीं चला कि उसे कोई बीमारी है। लेकिन हम सतर्क थे। जब वह चलने लायक हुई तो अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पा रही थी। हमें लगा कुछ बच्चे देर में चलते हैं। इंतजार करते रहे, लेकिन नहीं चली। लगभग दो साल बाद भी अपने पैरों पर खड़ी नहीं हो पाई। हम पति-पत्नी तो सोचकर ही कांप गए कि यह बच्ची भी पहली बच्ची जैसी हो रही है। हमने उसे चलाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह धीरे-धीरे ठीक वैसे ही होती चली गई, जैसी बड़ी बेटी थी। हम घबराकर उसे भुवनेश्वर लेकर गए। वहां डॉक्टर ने बताया कि यह भी ठीक नहीं होगी। इसी भी हाइपोटोनिया बीमारी है। निराश होकर वापस घर लौट आया। अब हम दो-दो विकलांग बेटियों को पालने लगे। हमारे पास और कोई रास्ता नहीं था। हमें लगा कि शायद भगवान की यही मर्जी हो। मैं सुबह काम पर चला जाता और मेरी पत्नी बेटियों की देखभाल करतीं। उन्हें नहलाती, खिलाती। जैसे-जैसे बेटियां बड़ी होती गईं। उनका वजन बढ़ता गया। खासकर बड़ी बेटी का वजन बढ़ने से पत्नी के लिए इन्हें उठा पाना मुश्किल होने लगा। परेशानी बढ़ गई। दो साल बाद मेरी पत्नी फिर प्रेगनेंट हुई। इस बार उम्मीद थी कि हमारी झोली भरी जाएगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भगवान को कुछ और ही मंजूर था। हमारे दो जुड़वा बेटे हुए। उनके पैदा होते ही हम उन्हें डॉक्टर के पास ले गए। लेकिन डॉक्टर बता नहीं पा रहे थे कि उन्हें कोई बीमारी है या नहीं। सालभर बद बदकिस्मती से मेरे दोनों जुड़वा बेटों को भी वही हाइपोटोनिया बीमारी होने का पता चला। अब मेरे चार बच्चे हैं। पहली बेटी 23 साल की हो गई है। दूसरी 20 साल की और दोनों बेटों की उम्र 19 साल है। चार-चार जवान बच्चे, सभी विकलांग और ऐसी बीमारी जो अब कभी भी ठीक नहीं हो सकती है। अब मैं हार चुका हूं। पत्नी बीमार रहने लगी है, उसका इलाज नहीं करा पा रहा हूं। बच्चों के बारे में सोच-सोचकर वह गुमसुम रहने लगी है। बस खाना बना देती है। उसके बाद सारा दिन चुप बैठी रहती है। सोचता हूं जिस उम्र में पिता बच्चों की शादी के रिश्ते ढूंढ़ता है, मैं उस में में चार-चार जवान बच्चों का मल-मूत्र साफ करने में लगा रहता हूं। सुबह अकेला उठता हूं। चारों बच्चों को शौच और ब्रश कराता हूं। नहालाता-धुलाता हूं। इस दौरान मेरी पत्नी नाश्ता तैयार कर रही होती हैं। चारों बच्चों को नाश्ता कराता हूं और फिर मैं नाश्ता करता हूं। सुबह पंचायत ऑफिस जाते वक्त इन बच्चों को कुर्सी पर बिठाकर चला जाता हूं। साथ में मोबाइल पर गाना लगाकर रख देता हूं। यह बच्चे गाना कितना सुन पाते हैं, पता नहीं। इस दौरान पंचायत का काम छोड़कर हर रोज दोपहर को घर आता हूं। वजन ज्यादा होने से अब मेरी पत्नी इनकी देखभाल नहीं कर पाती। दोपहर आकर इन्हें कुर्सी से उठाकर चटाई पर लिटाता हूं और फिर खाना खिलाता हूं। खाना खिलाने के बाद कुछ देर रुकता हूं। अगर कोई मल-मूत्र करता है तो उसे साफ करता हूं, फिर से ऑफिस चला जाता हूं। मैं अकेला ही घर और बाहर की जिम्मेदारी निभाता हूं। बस यही जिंदगी हो गई है। पंचायत में दिनभर हाथ अनाज उठाने में लगा रहता है और घर आकर बच्चों को उठाकर यहां से वहां करने में। कई बार बच्चे खुद को गंदा कर लेते हैं, लेकिन पत्नी उनकी परेशानी नहीं समझ पातीं। 23 साल हो गए हैं। हम पति-पत्नी न किसी के घर जा पाते हैं और न ही किसी के शादी-ब्याह में। चार-चार विकलांग बच्चों को किसके सहारे छोड़कर जाऊं। अब तो लोग हमारे घर आना भी बंद कर दिए हैं। रात में मेरे बच्चे चीखते हैं। हमें नहीं पता कि क्यों। शायद शरीर में दर्द होता होगा या फिर बैठे या लेटे-लेटे थक जाते होंगे। हमें कई लोगों ने कहा कि इन बच्चों को जहर दे दो। ऐसे ही एक दिन खास जान-पहचान के आदमी मेरे घर आए। मैं इन बच्चों एक-एक करके नहला रहा था। फिर सबको उठाकर चटाई पर लेटा रहा था। उस दिन उन्हें मेरी परेशानी नहीं देखी गई। वह मुझे घर से बाहर ले गए और बोले कि ऐसा कब तक करते रहोगे? तुम्हारा जीवन तो इसी में खत्म हो जाएगा। ऐसा करो, इन बच्चों को जहर दे दो। वो ऐसा कहकर चले गए। उनके जाने के बाद मैं सोचने लगा कि अपनी औलाद भला कैसे मारूं? हमारी किस्मत में इनकी सेवा ही लिखी है और मैंने इसे स्वीकार कर लिया है। (रामकृष्ण ने अपने ये जज्बात भास्कर रिपोर्टर मनीषा भल्ला से साझा किए) ---------------------------------------- 1- संडे जज्बात-दोस्त की प्रेमिका प्रेग्नेंट हुई, रेप केस मुझपर चला:पंचायत ने 6 लाख में सौदा किया, 5 साल जेल में रहा, अब बाइज्जत बरी बिहार के दरभंगा जिले का रहने वाला मैं मुकेश कुशवाहा। मुझ पर 17 साल की लड़की के रेप और पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा चला। वो लड़की मेरे दोस्त की प्रेमिका थी। दोस्त ने उसे प्रेग्नेंट किया था, लेकिन मुकदमा मुझ पर चला। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-पुलिस ने मेरे प्राइवेट पार्ट पर ईंट बांधी:सिर कुर्सी में बांधकर उल्टा टांगा, मैं वकील बनकर केस खुद लड़ा- 12 साल बाद जीता 18 साल की उम्र में पुलिस ने मुझे हत्या के मामले में आरोपी बना दिया। मैंने अपने केस की खुद पैरवी की और 12 साल बाद बाइज्जत बरी हुआ। अपना केस लड़ने के लिए लॉ किया और अब मैं एडवोकेट अमित चौधरी हूं। मेरठ बार एसोसिएशन का सदस्य भी हूं। मेरी जिंदगी पर जल्द ही एक फिल्म बन रही है, जो नेटफ्लिक्स पर रिलीज होगी। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

दैनिक भास्कर 15 Mar 2026 5:35 am

क्या साउथ बंगाल से निकलेगा BJP की जीत का रास्ता:5000 किमी की परिवर्तन यात्रा, 237 सीटों तक पहुंची, लोग बोले- बदलाव चाहिए

7 मार्च को पश्चिम बंगाल के पुरुलिया में BJP की परिवर्तन यात्रा पहुंची। यहां रघुनाथपुर इंडस्ट्रियल एरिया है इसलिए हिंदी भाषी और आदिवासी आबादी ज्यादा है। यहां से BJP के ही विधायक हैं, फिर भी रैली में भीड़ कम पहुंची। यहीं रास्ते में अवधेश राम मिले। वो रैली में नहीं आए लेकिन चाहते हैं कि राज्य में सरकार जरुर बदले। वजह पूछने पर कहते हैं, ‘हमें सरकारी घर मिलने वाला था। कई बार पूछताछ भी हुई। यहां तक की BDO भी आए लेकिन घर नहीं मिला। इसलिए चाहता हूं बंगाल में भी डबल इंजन की सरकार आए ताकि हम जैसे गरीबों का भला हो सके। हमें मोदी जी पर पूरा भरोसा है।‘ पश्चिम बंगाल में अप्रैल में विधानसभा चुनाव होने हैं। BJP ने इसे देखते हुए पूरे राज्य में 5 हजार किलोमीटर की ‘परिवर्तन यात्रा’ निकाली। शुरुआत राज्य के अलग-अलग हिस्सों से 1 और 2 मार्च को हुई।ये 294 सीटों में से 237 तक पहुंची। यात्रा का समापन 14 मार्च को कोलकाता के बिग्रेड मैदान में PM मोदी ने किया। दैनिक भास्कर की टीम ने इस यात्रा को दो हिस्सों साउथ-वेस्ट बंगाल और नॉर्थ बंगाल से कवर किया। परिवर्तन यात्रा के मुद्दे और मकसद क्या रहे। जिन इलाकों से ये गुजरी, वहां पर इसका कितना असर है? विधानसभा चुनाव में इससे BJP को कितना फायदा होने वाला है? ग्राउंड पर पहुंचकर हमने समझने की कोशिश की। 1 मार्च को BJP तो 2 मार्च को TMC के इलाके से शुरुआतBJP ने 1 मार्च को जिन चार जगहों से रैली शुरू की, वहां पार्टी की अच्छी पकड़ है। 2021 के विधानसभा चुनाव में BJP ने यहां सीटें भी जीतीं। कूचबिहार की दोनों और कुल्टी की एक सीट BJP के पास है। वहीं नदिया जिले में 17 सीटों में 9 BJP के पास है। 2 मार्च से TMC के दबदबे वाले इलाकों से यात्रा की शुरुआत हुई। इसमें कोलकाता के मेयर और विधायक फरदीन अहमद की सीट शामिल है। यात्रा का समापन के लिए PM मोदी 14 मार्च को कोलकाता पहुंचे। साउथ बंगाल का ये इलाका TMC के प्रभाव वाला है। यहां से PM मोदी ने कहा, ‘पूरे बंगाल में एक ही चर्चा है कि बदलाव चाहिए। इस जमीन से जब-जब चुनौती आई, तब-तब यहां के लोगों ने सामना किया है। कुछ लोग आपको डराने की कोशिश करेंगे, लेकिन जब जनता ठान लेती है तो कोई भी ताकत उसे रोक नहीं सकती। इस बार चुनाव सिर्फ सरकार बदलने का नहीं, बंगाल की आत्मा को बचाने का है।‘ सबसे पहले साउथ-वेस्ट बंगाल की बात…BJP को वोट देते लेकिन बोलने में जान का खतरापुरुलिया जिले में 7 मार्च को जब यात्रा पहुंची, तो इसमें आम लोग काफी कम दिखे। जबकि रघुनाथपुर विधानसभा सीट BJP के पास है। माइक से लगातार भारत माता की जय, वंदे मातरम्, जय श्री राम के नारे लग रहे थे। रैली में ज्यादातर हिंदी भाषी लोग दिखे। यहां हम ज्योति सिंह से मिले, जो लोकल स्तर पर BJP के लिए काम भी करती हैं। यात्रा के बारे में पूछने पर कहती हैं, ‘स्थिति ये है कि यहां विपक्षी पार्टियों को छोटे-मोटे कार्यक्रमों की भी परमिशन नहीं मिलती। हमें भी रैली की परमिशन नहीं मिली।’ रैली के असर के बारे में पूछने पर कहती हैं, ‘अब जो लोग वोट देने में भी डरते हैं, वे खुलकर बाहर आ सकेंगे। कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आम लोगों को हिम्मत मिलेगी कि उनके पीछे कोई खड़ा है। क्योंकि यहां हालात ऐसे हैं कि लोग BJP को खुलकर वोट तो देते हैं, लेकिन बोलने से डरते हैं। क्योंकि जान का खतरा रहता है।’ ’भले ही हमारी CM महिला हैं, लेकिन यहां न तो अस्तपाल में और न ही सड़क पर, कहीं भी महिला सेफ नहीं हैं। यहां रैली का कामकाज देख रहे दिलीप कुमार सिंह से भीड़ कम होने के बारे में पूछा तो जवाब मिला, ‘मेरे हिसाब से इतनी ही भीड़ होनी चाहिए। यात्रा लंबी है इसलिए लोग जगह-जगह खड़े हैं। इससे कार्यकर्ताओं और जनता के बीच उत्साह का माहौल बनेगा। अमित शाह ने हमें 165 सीटों का टारगेट दिया है। उसे पूरा करना है।’ नॉर्थ बंगाल के लोग बोले…डबल पेमेंट छोड़कर रैली में आए, BJP को ही वोट देंगेनॉर्थ के इलाकों में यात्रा के दौरान लोगों की खचाखच भीड़ दिखी। 1 मार्च को जलपाईगुड़ी में बिहार के डिप्टी CM सम्राट चौधरी ने जनसभा की। उन्होंने कहा कि बिहार में हमने जंगलराज खत्म कर दिया। अब बंगाल में भी सिंडिकेट राज खत्म करने की जरुरत है। यहां घुसपैठियों ने आदिवासियों की जमीन छीनी, जिसे वापस करना होगा। वो जनता से पूछते हैं कि क्या इन सबके लिए BJP को वोट करेंगे। जनता पूरे जोश के साथ हां में जवाब देती है। जलपाईगुड़ी के माल विधानसभा में रहने वाले दीपक विश्वास हमसे रैली में मिले। वे कहते हैं, ‘रविवार को चाय बागान में काम करने वाले कर्मचारियों को डबल पेमेंट मिलती है। इसके बावजूद अगर लोग BJP की रैली में आएं हैं, तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि वो BJP को वोट करेंगे।‘ पश्चिम बंगाल में सरकार क्यों बदलनी चाहिए? जवाब में दीपक कहते हैं, 15 साल की सरकार में अब हर तरह की गलत नीति है। भ्रष्टाचार सबसे ज्यादा है। बिना पैसे के कोई काम नहीं होता है। यहां की CM राज्य में राष्ट्रपति को भी आने पर सम्मान नहीं दे पाई। आरजी कर में इतनी बड़ी घटना हुई। अब सरकार बदलने के लिए इससे ज्यादा और क्या कारण चाहिए। इसी रैली में सायना राय अपनी 80 साल की सास के साथ पहुंचीं। वे कहती हैं, ‘हमें बदलाव चाहिए।‘ हमने पूछा सभा में अपनी मर्जी से आई हैं या कोई लेकर आया? जवाब मिला, ‘घरवाले आएं हैं इसलिए आ गई।‘ वहीं, मालबाजार में मिलीं सबीना कहती हैं, ‘अगर BJP गांव में कुछ बदलाव कर सकती है, तो ये यात्रा हमारे लिए बहुत अच्छी है, वरना इसका कोई मतलब नहीं। राज्य सरकार 1500 रुपए लक्ष्मी भंडार दे रही है लेकिन इससे कुछ नहीं होता है। हमें रोजगार मिले, नहीं तो बदलाव ही सही है।‘ BJP कार्यकर्ताओं हमले का खौफ कम करने की कोशिशसाउथ के इलाकों में यात्रा के दौरान कम भीड़ पहुंचने को लेकर हमने आसनसोल के सीनियर जर्नलिस्ट सतीश चंद्रा से बात की। वे कहते हैं, ‘आसनसोल की बाराबनी विधानसभा सीट पर BJP कार्यकर्ताओं पर हमला हुआ। ऐसे ही हालात राज्य के बाकी इलाकों में भी देखने को मिले।’ ’कहीं-कहीं नेताओं को भी भगाया गया। इसलिए जनता खुलकर बाहर नहीं आना चाहती है। सत्ता पक्ष भी नहीं चाहता कि लोग रैली तक पहुंचें। इसीलिए लोगों में घबराहट है। अभी न सही लेकिन रैली का असर आने वाले चुनाव में जरुर दिखेगा।’ वे आगे कहते हैं, ’बंगाल में BJP का न तो अच्छा संगठक है और न ही संगठन। जो है, वो लोगों का समर्थन है। यात्रा का लक्ष्य सिर्फ लोगों तक पहुंचना है। जैसे- आसनसोल में BJP के पास दो सीट है। पुरुलिया में भी 9 में से 6 सीट BJP के पास है।’ यात्रा में दिखी कमियों को लेकर सतीश चंद्र कहते हैं, ’ये रैली बहुत कम जगहों पर ही समय से पहुंच सकी। इसका नेगेटिव इम्पैक्ट पड़ा है। आसनसोल में शाम को 6 बजे सभा होनी थी, वहां यात्रा ही रात 10 बजे पहुंची। आखिर लोग कितनी देर इंतजार करते?’ मतुआ समाज की नाराजगी और हिंसा का भी असरवहीं पॉलिटिकल एक्सपर्ट मेदुल इस्लाम कहते हैं कि PM की सभा को छोड़ दें तो कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में रैली में काफी कम भीड़ दिखी। वजहें कई हैं लेकिन एक बड़ी वजह SIR के दौरान मतुआ समाज के लोगों के नाम कटना भी है। मतुआ समाज में BJP को लेकर गुस्सा है। यही BJP का कोर वोटर भी है, इसलिए नार्थ 24 परगना में लोगों की कम भीड़ आई। वहीं रैली पर नजर रखने वाली टीम के मेंबर न लिखने की शर्त पर कहते हैं, ‘ये बात सच है कि साउथ में भीड़ कम थी लेकिन इसके पीछे वाजिब वजह है। एक कारण TMC कार्यकर्ताओं के हमले और स्टेज तोड़ने जैसी घटनाएं भी हैं।’ ’9 मार्च को साउथ 24 परगना के काकद्वीप में सभा का मंच तोड़ दिया गया और सभा नहीं हो सकी। इन घटनाओं से साफ है साउथ बंगाल में लोगों के बीच में डर का माहौल है। यहां TMC के विधायक भी ज्यादा हैं, इसलिए लोग रैली में नहीं आए।’ BJP के लिए जीत का रास्ता साउथ बंगाल से निकलेगाBJP ने पश्चिम बंगाल में अपनी जीत का रास्ता नॉर्थ बंगाल से बनाया था। 2016 में 3 सीटें जीतीं। इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में 8 लोकसभा सीटें में से 6 BJP ने जीतीं। 2021 के विधानसभा चुनाव में 54 सीटें में से 30 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जिसमें अलीपुरद्वार की सभी पांच सीटें BJP के खाते में आईं। नॉर्थ बंगाल में यात्रा में आई भीड़ को लेकर सिलीगुड़ी के सीनियर जर्नलिस्ट पवन शुक्ला कहते हैं, ‘यात्रा करना BJP की राजनीति का हिस्सा रहा है। पार्टी का इतिहास देखें तो 90 के दशक में पूरे देश में रथ यात्रा की गई थी। इसके बाद ही BJP का उदय हुआ। बंगाल में भी पार्टी को यही उम्मीदें हैं।‘ यात्रा के असर को लेकर वे कहते हैं, ‘फिलहाल BJP के पास सीटों की संख्या ठीक-ठाक है। यात्रा से वोट शेयर जरूर बढ़ेगा। दूसरी तरफ ये भी हो सकता है कि मालदा और दिनाजपुर के मुस्लिम बहुल इलाकों में पार्टी पैठ बना सके। BJP नॉर्थ में डेवलपमेंट के नाम पर वोट मांगने की तैयारी कर रही है।‘ पश्चिम बंगाल में 294 विधानसभा सीटें हैं। जिसमें 54 सीटें नॉर्थ बंगाल में आती है जो 18% हिस्सा कवर करती हैं। यात्रा का आने वाले चुनाव में कितना असर होगा इस पर पॉलिटिकल एक्सपर्ट मेदुल इस्लाम का कहना है, ‘पश्चिम बंगाल में हार-जीत साउथ बंगाल से तय होती है। भले ही नॉर्थ में BJP ने आधी से ज्यादा सीटें जीती हों लेकिन इससे उसकी जीत तय नहीं हो सकती है।’ ’साउथ के दो बड़े हिस्से नॉर्थ 24 परगना और साउथ 24 परगना में आज भी TMC का राज है। जिसे तोड़ने में BJP अब तक नाकाम रही है।’ ’दूसरी अहम बात ये है कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले लोकसभा चुनाव होता है। इसमें जिनकी सीट बढ़ती है, वहीं विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करता है। 2019 लोकसभा और 2021 विधानसभा के नतीजों से ये साफ है। BJP ने 2019 के लोकसभा चुनाव में 18 सीटें जीतीं। इसका असर 2021 के विधानसभा चुनाव में भी दिखा। 77 सीटें जीतकर BJP ने राज्य से कांग्रेस और लेफ्ट का पत्ता साफ कर दिया था।’ ’वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव को देखें तो BJP की सीटें 18 से 12 हो गईं। इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल भी कम हुआ। इसके दो सबसे बड़े उदाहरण 2009 के लोकसभा चुनाव है। 2009 में TMC और उसकी सहयोगी पार्टियों को 42 में 27 सीटों पर जीत हासिल की थी। इसके बाद 2011 में बंगाल में TMC की सरकार बनी।’ यात्रा के असर के बारे में पूछने वे कहते हैं, ’हां, कुछ असर जरुर पड़ेगा। BJP अपने कार्यकर्ताओं में जोश भरने का काम जरुर करेगी।’ TMC बोली: सभा में भीड़ नहीं, सरकार बदलने के दावेTMC के राष्ट्रीय प्रवक्ता रिजु दत्ता परिवर्तन यात्रा को लेकर कहते हैं, 'BJP ने इस रैली के लिए ज्यादातर नेता और कार्यकर्ता बाहर से बुलाए थे। यात्रा में चलने वाला रथ तक वाराणसी से मंगाया गया था। सभाओं में भीड़ तक नहीं थी और ये बंगाल में सरकार बदलने की बात कर रहे हैं।' PM मोदी के बंगाल को 18 हजार करोड़ रुपए देने के वादे पर रिजु कहते हैं, 'केंद्र सरकार ने अब तक राज्य का मनरेगा, जल जीवन मिशन, मिड डे मील और आवास योजना का दो लाख करोड़ नहीं दिया है और राज्य के लोगों को 18 हजार करोड़ का लॉलीपॉप दे रहे हैं। देश में लोग LPG के लिए परेशान हैं और रैली में एक लाख लोगों के लिए खाना बनाया गया। इतनी LPG कहां से आई।' 'PM मोदी ने दो बार 2019 और 2021 में ब्रिगेड में रैली की, दोनों बार इनकी सीटें घटीं। इस बार BJP की 50 से ज्यादा सीटें नहीं आएंगी। TMC पिछली सीट से भले एक सीट ज्यादा जीते, लेकिन जीतेगी जरूर।'……………………ये खबर भी पढ़ें… मुस्लिम से की शादी, भाई की पढ़ाई और राशन बंद ‘मैं और मेरा परिवार गांव में अकेला हो गया है। शादी मैंने की थी, अब उससे बाहर भी आना चाहती हूं, लेकिन फिर भी सजा मिल रही है। छोटे भाई का स्कूल छूट गया क्योंकि कोई ऑटो वाला उसे ले जाने को तैयार नहीं है। खेतों में लगी आलू की फसल खराब हो गई क्योंकि उसे निकालने के लिए कोई मजदूर तैयार नहीं। मेरा परिवार मुसीबत में है।‘ पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के मेटला गांव में रहने वाली मीता घोष (बदला हुआ नाम) का परिवार सोशल बायकॉट झेल रहा है। पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 15 Mar 2026 5:33 am

अफगानिस्तान में पाकिस्तान के हवाई हमलों की भारत ने की कड़ी निंदा

भारत ने अफगानिस्तान के भीतर पाकिस्तान द्वारा किए गए हालिया हवाई हमलों की कड़ी निंदा करते हुए इसे संप्रभु अफगानिस्तान के खिलाफ आक्रामक कार्रवाई बताया है। इन हमलों में कई नागरिकों की मौत हुई है और नागरिक ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है।

देशबन्धु 15 Mar 2026 4:50 am

रोजाना 75 लाख LPG सिलेंडर की बुकिंग, डिलीवरी 50 लाख:भारत के पास कितनी रसोई गैस बची, आगे के लिए सरकार ने क्या इंतजाम किए

ईरान जंग की आंच आपकी रसोई तक पहुंच गई है। सरकार का कहना है कि लोग पैनिक में रोजाना 75 लाख LPG सिलेंडर की बुकिंग कर रहे हैं। देशभर के शहरों-कस्बों से LPG के लिए लंबी कतारें दिख रही हैं। आलम ये है कि लोग अब रेस्टोरेंट में जाकर मेन्यू से पहले पूछते हैं- गैस है या नहीं? ईरान जंग की आंच आपकी रसोई तक कैसे पहुंची, देश में कितने दिन की LPG बची है और अगर जंग खिंची तो सरकार कहां से लाएगी रसोई गैस; भास्कर एक्सप्लेनर में ऐसे 6 जरूरी सवालों के जवाब... सवाल-1: LPG क्या है और भारत को इसकी कितनी जरूरत है? जवाबः LPG यानी लिक्विड पेट्रोलियम गैस मुख्य रूप से दो गैसों का मिश्रण है- प्रोपेन और ब्यूटेन। इसका इस्तेमाल रसोई गैस के रूप में होता है। LPG कोई ऐसी चीज नहीं है, जो सीधे जमीन से निकलती है। ये पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की रिफाइनिंग के दौरान निकलने वाले बाय-प्रोडक्ट से तैयार होती है। जैसे- दही से घी निकालने में मट्ठा भी बनता है। ऐसे ही ऑयल रिफाइनरी और नेचुरल गैस की प्रोसेसिंग में LPG बनती है। इसी तरह एक और अहम गैस है LNG यानी लिक्विफाइड नेचुरल गैस। इसके नेचुरल गैस के भंडार होते हैं। इसका इस्तेमाल बिजली, फर्टिलाइजर बनाने और इंडस्ट्रीज में होता है। अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 के बीच भारत में 30.8 मिलियन मीट्रिक टन यानी MMT एलपीजी की खपत हुई। घरेलू गैस सिलेंडर के हिसाब से रोजाना औसतन 65 लाख सिलेंडर। LPG का 88% इस्तेमाल घरेलू और 12% कॉमर्शियल होता है। देश में 33.21 करोड़ एक्टिव कनेक्शन हैं। सवाल-2: भारत के जरूरत की गैस कहां से आती है? जवाबः भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG खरीददार है। ईरान जंग से पहले 67% एलपीजी विदेशों से आती थी, लेकिन 11 मार्च को पेट्रोलियम मिनिस्ट्री की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने बताया कि 60% LPG विदेशों से इम्पोर्ट हो रही है। बाकी की गैस घरेलू रिफाइनरियां बना रही हैं। गैस सप्लाई करने के दो तरीके होते हैं- शिप और पाइपलाइन। भारत में शिप्स के जरिए गैस इम्पोर्ट होती है। खाड़ी, अफ्रीकी और अमेरिकी देशों से LPG और LNG खरीदी जाती है… सवाल-3: गैस आने के बाद भारत में उसका डिस्ट्रीब्यूशन कैसे होता है? जवाबः LPG और LNG से लदे जहाज जैसे ही बंदरगाह पर पहुंचते हैं, प्रोडक्ट्स के हिसाब से उन्हें अलग-अलग कर प्लांट्स में भेज दिया जाता है। लाल-नीले सिलेंडर में भरी जाती है LPG पाइपलाइंस से ट्रांसपोर्ट होती है LNG इन्वेस्टमेंट इन्फॉर्मेशन एंड क्रेडिट रेटिंग एजेंसी ICRA के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत वशिष्ठ के मुताबिक, 'भारत के लिए अच्छी बात है कि यह किल्लत उर्वरकों के इस्तेमाल के ऑफ-सीजन में हुई है। खेती अभी हो नहीं रही है और किसानों को फिलहाल फर्टिलाइजर्स की जरूरत नहीं है।' सवाल-4: होर्मुज बंद होने से भारत की गैस सप्लाई पर कितना असर पड़ा है? जवाबः ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में UAE, कतर, कुवैत, सऊदी अरब जैसे दर्जनभर खाड़ी देशों को निशाना बनाया है। इसके चलते यहां के गैस प्लांट का प्रोडक्शन बंद हो गया या प्रभावित हुआ। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजराइल के हमले जारी रहे तो हॉर्मुज स्ट्रेट से एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने देंगे। यूएई, कतर, सऊदी अरब, कुवैत जैसे खाड़ी देशों से भारत की विदेश एलपीजी सप्लाई का 90% और एलएनजी का 70% खरीदता है। यहां से शिप महज 4-5 दिन में भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच जाते हैं। ये सारा शिपमेंट होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते भारत आता है, लेकिन अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के चलते हॉर्मुज स्ट्रेट बंद पड़ा है। 1 मार्च से पहले इस जलमार्ग से रोजाना औसतन 153 शिप्स निकलते थे, लेकिन अब ये आंकड़ा 13 के करीब है। 11 मार्च को शिपिंग मिनिस्ट्री के स्पेशल सेक्रेटरी राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि फारस की खाड़ी में भारत के झंडे वाले 28 जहाज हैं। इनमें से 24 जहाज होर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में हैं, जिन पर 677 क्रू मेंबर हैं। वहीं होर्मुज स्ट्रेट पर 4 जहाज हैं, जिन पर 101 भारतीय नाविक हैं। जंग शुरू होने के बाद 12 मार्च को पहली बार एक टैंकर होर्मुज के रास्ते मुंबई बंदरगाह पहुंचा है। सवाल-5: भारत के पास कितने दिन की LPG मौजूद है? जवाबः भारत के पास इमरजेंसी के लिए 2 LPG स्टोरेज हैं, जहां कुल 1.4 लाख टन LPG स्टोर है। 80 हजार टन LPG कर्नाटक के मंगलुरू में और 60 हजार टन आंध्र प्रदेश के विशाखापतनम में स्टोर है। कंपनियों के बॉटलिंग प्लांट्स और भरे जा चुके सिलेंडरों में भी काफी एलपीजी जमा है। हालांकि देश की जरूरतों के हिसाब से ये काफी कम है। वहीं, LNG के मामले में भारत के पास कोई स्पेशल स्टोरेज नहीं है। क्योंकि इसका सेटअप महंगा और कठिन है। इसके लिए क्रायोजेनिक यानी बेहद ठंडे टैंकर्स की जरूरत होती है। ऐसे में जितनी LNG गैस ग्रिड, पाइपलाइंस और बंदरगाहों के रिगैसिफिकेशन टर्मिनल्स में है, केवल उतनी ही LNG देश में मौजूद है। अलग-अलग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के पास 25-30 दिन की LPG और 10 दिन की LNG बची है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि घरों तक गैस की डिलीवरी ज्यादातर सामान्य है और औसत डिलीवरी समय करीब ढाई दिन है। उन्होंने उपभोक्ताओं से अपील की कि जरूरत से ज्यादा सिलेंडर बुक न करें। सवाल-6: मौजूद गैस के संकट से निपटने के लिए सरकार क्या कर रही है? जवाबः सरकार की ओर से गैस-तेल की कमी को दूर करने के लिए कुछ कदम उठाए जा रहे हैं… 1. सप्लाई रूट्स बदलना: पेट्रोलियम मिनिस्ट्री के मुताबिक, ‘हम करीब 40 देशों से क्रूड इम्पोर्ट करते हैं। तेल कंपनियों ने अलग-अलग सोर्सेस से तेल मंगाया है। इसके कारण हमारा 70% क्रूड इम्पोर्ट होर्मुज स्ट्रेट के बाहर के रास्ते आ रहा है। ये पहले 55% था।’ 2. घरेलू उत्पादन बढ़ाना: पेट्रोलियम मंत्रालय ने घरेलू रिफाइनरियों को LPG प्रोडक्शन बढ़ाने को कहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक घरेलू प्रोडक्शन 28% बढ़ा है। रोजाना 50 लाख घरेलू LPG सिलेंडर बांटे जा रहे हैं। 3. होर्मुज के लिए बातचीत: भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने बीते कुछ दिनों में 3 बार ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची से बात की है। वहीं, 12 मार्च की रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान से बात की। भारत चाहता है कि मिडिल-ईस्ट में हालात सामान्य हों और भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से निकलने की छूट मिले। 4. आवश्यक वस्तु अधिनियम: LPG सिलेंडरों की जमाखोरी रोकने के लिए केंद्र सरकार ने ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1995’ लागू किया है। साथ ही अलग-अलग इस्तेमाल के हिसाब से सप्लाई की प्राथमिकता तय की गई है। रसोई गैस को पहली प्राथमिकता दी गई है। वहीं कॉमर्शियल गैस हर महीने की औसतन सप्लाई की 20% ही डिलीवर की जा रही है। ग्लोबल एनर्जी थिंकटैंक एम्बर के एनालिस्ट और भारत की सरकारी तेल-गैस कंपनी के पूर्व अधिकारी दत्तत्रेय दास मानते हैं कि जंग शुरू होने बाद एक हफ्ते तक हालात अनिश्चित थे और तब सरकार ने LPG को तरजीह नहीं दी। सरकार की गलती है कि उसने रिफाइनरियों को LPG प्रोडक्शन बढ़ाने के निर्देश देने में 7 दिनों की देरी की। सवाल-7: अगर जंग लंबी छिड़ी, तो भारत कहां से गैस लाएगा? जवाबः केंद्र सरकार नए गैस सप्लायर्स से डील कर रही है। अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा और रूस जैसे देशों से से LPG खरीदी जा रही है। शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, करीब 2.2 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल लिए जहाज इस हफ्ते के आखिर तक भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच सकते हैं। वहीं ऑस्ट्रेलिया और कई अफ्रीकी देशों से भी सरकार भी गैस कारोबार कर सकती है। अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि आमतौर पर यहां से शिपमेंट आने में ज्यादा वक्त लगता है। इसके चलते LPG की घरेलू खपत में कुछ समय की किल्लत हो सकती है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में कहा कि खाड़ी देशों के अलावा अब अमेरिका, नॉर्वे, कनाडा, अल्जीरिया और रूस से भी गैस के कार्गो लाने की व्यवस्था की जा रही है। रूस को 3 करोड़ बैरल तेल के ऑर्डर दिए गए हैं। ------------ एलपीजी संकट से जुड़ी ये भी खबर पढ़िए… भारत के पास कितने दिन की LPG बची: जंग लंबी छिड़ी तो सरकार कहां से लाएगी रसोई गैस; आपको क्या करना चाहिए भोपाल के रहने वाले आदित्य ने 6 मार्च को IVRS कॉल से एक LPG सिलेंडर बुक किया। आमतौर पर 1 दिन बाद सिलेंडर की होम डिलीवरी हो जाती थी। जब 3 दिन बाद भी सिलेंडर घर नहीं पहुंचा, तो उन्होंने वापस IVRS डायल किया। नंबर इनवैलिड बताने लगा। आदित्य गैस एजेंसी के दफ्तर पहुंचे। वहां अफरा-तफरी मची थी। काफी मशक्कत के बाद एक सिलेंडर मिला। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 14 Mar 2026 5:03 am

जिन्हें कपड़े उतारकर घुमाया, वो मणिपुरी लड़कियां कहां गईं:3 साल से सुनवाई जारी, विक्टिम बोलीं-जिंदा हूं, पर दुनिया मुझे भूल गई

करीब 3 साल पहले। साल 2023 का जुलाई महीना। मणिपुर में मैतेई और कुकी समुदाय के बीच चल रही हिंसा से जुड़ा एक वीडियो सामने आया। वीडियो में दो लड़कियां थीं, जिनकी न्यूड परेड कराई जा रही थी। इस वीडियो ने पूरे देश को झकझोर दिया। मणिपुर में हिंसा तो 3 मई से शुरू हो गई थी, लेकिन इस दौरान ऐसी दरिंदगी हुई होगी, किसी ने नहीं सोचा था। ये घटना मैतेई आबादी वाले थौबल जिले में 4 मई, 2023 को हुई थी। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। वीडियो दिखाने पर बैन लगा दिया गया। जुलाई, 2023 में CBI को जांच सौंप दी गई। इसके बाद भी उस घटना का पूरा सच सामने नहीं आया। न उस दरिंदगी का दर्द किसी को पता चला। 26 फरवरी, 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने CBI को आदेश दिया कि वो पीड़ित परिवारों को चार्जशीट दे। 24 मार्च को इस केस की अगली सुनवाई होगी। दैनिक भास्कर ने कोर्ट में दाखिल CBI की 47 पेज की चार्जशीट की पड़ताल की। हम पहली बार उन दो लड़कियों के बयान से उस दिन की आपबीती बताएंगे। ये भी बताएंगे कि जिन दो लड़कियों के साथ दरिंदगी हुई, उनकी जिंदगी अब कैसे गुजर रही है। इस घटना की इकलौती गवाह महिला अब कहां हैं। वे उस दिन कैसे भीड़ से बच निकली थीं। ‘भीड़ ने गांव पर हमला किया, पुलिस मौजूद थी, लेकिन मदद नहीं की’CBI की चार्जशीट में तीन महिलाओं का जिक्र है। उन्हें विक्टिम नंबर 1, 2 और 3 नाम दिया गया है। न्यूड परेड के वीडियो में दिखीं महिलाएं विक्टिम नंबर 1 और 2 हैं। ये घटना बी. फैनम गांव में हुई थी। घटना का ब्योरा पेज नंबर 10 से शुरू होता है। आरोप है कि मैतेई समुदाय के लोगों ने दोपहर करीब 3 बजे कुकी और जो समुदाय के घरों पर हमला किया था। उनके पास राइफल, लाठी, कुल्हाड़ी और चाकू थे। भीड़ ने घरों और चर्च में आग लगा दी। गांव के लोग छिपने के लिए जंगलों की तरफ भाग गए। इन्हीं में तीन पुरुष, तीन महिलाएं और ढाई साल की एक बच्ची भी थी। सभी जंगल में छिपे थे, लेकिन भीड़ ने उन्हें देख लिया। एक-एक करके जंगल में छिपे सभी लोग बाहर निकाले गए। महिलाओं और पुरुषों को अलग-अलग कर दिया। भीड़ ने पुरुषों को बुरी तरह पीटा। हालांकि, इसी भीड़ में शामिल कुछ लोगों की मदद से 3-4 विक्टिम गांव के पास सड़क किनारे खड़ी पुलिस की गाड़ी तक पहुंच गए। पेज नंबर 15 पर लिखा है कि भीड़ से बचने के लिए दो लड़कियां पुलिस की गाड़ी में बैठ गईं। उसमें दो पुलिसवाले और ड्राइवर मौजूद थे। गाड़ी के बाहर 3-4 पुलिसवाले थे। एक लड़की ने ड्राइवर से कहा कि जल्दी गाड़ी स्टार्ट करो। ड्राइवर ने जवाब दिया कि मेरे पास चाबी नहीं है। पीड़ितों ने कई बार मदद मांगी, लेकिन पुलिस से मदद नहीं मिली। भीड़ चिल्लाकर पुलिस वालों से कह रही थी कि इन्हें वापस करो। कुछ देर बाद भीड़ बढ़ने लगी। दोनों लड़कियों को बाल पकड़कर गाड़ी से बाहर खींच लिया। भीड़ देखकर पुलिसवाले भाग गए। भीड़ ने लड़कियों के कपड़े फाड़ दिए। उन्हें बिना कपड़ों के सड़क पर घुमाया। चार्जशीट के पेज नंबर-16 पर लड़कियों से हुई दरिंदगी का पूरा जिक्र है। भीड़ में से कुछ लोगों ने लड़कियों से कहा कि अपने कपड़े उतारो, वरना तुम्हें जिंदा जला देंगे। विक्टिम 1 के भाई और पिता ने उसे बचाने की कोशिश की, तो भीड़ ने लाठियों और कुल्हाड़ी से हमला कर उनकी हत्या कर दी। इसके बाद लड़कियों के कपड़े फाड़ने शुरू कर दिए। इसी दौरान विक्टिम नंबर-1 ने भीड़ में शामिल अरुण खुंडोनगबम और लोया को पहचान लिया। लोया ने ही उनके परिवार के पुरुष सदस्यों को बुरी तरह पीटा था। चार्जशीट में आगे लिखा है, भीड़ में शामिल लोग दोनों लड़कियों के ब्रेस्ट टच कर रहे थे। उन्हें नोंच रहे थे। विक्टिम नंबर-1 के प्राइवेट पार्ट को छू रहे थे। बार-बार थप्पड़ मार रहे थे। इसी दौरान आरोपी विक्टिम नंबर-1 को खेत में ले गए। उसका गला दबाने की कोशिश की। उससे गैंगरेप किया। आरोपियों ने कहा- जिसे रेप करना है, खेत में आ जाएCBI ने घटना की दूसरी विक्टिम का बयान भी दर्ज किया है। विक्टिम नंबर-2 के बारे में चार्जशीट में लिखा है- आरोपियों ने कहा कि जान बचाने के लिए तुम्हारे पास एक ही रास्ता है। या तो खुद सारे कपड़े उतार दो या फिर हम खुद ये काम करेंगे। इसके बाद भीड़ ने कपड़े फाड़ने शुरू कर दिए। इस लड़की की भी न्यूड परेड कराई गई थी। विक्टिम नंबर-1 से जहां दरिंदगी हो रही थी, उससे थोड़ी दूरी पर ही विक्टिम नंबर-2 को भी भीड़ ने घेरा हुआ था। भीड़ से कुछ लोग आवाज लगा रहे थे कि जिन लोगों को इससे रेप करना है, वे आ जाएं। इसके बाद उससे गैंगरेप किया। इस दौरान विक्टिम बेहोश हो गई। काफी देर बाद उसे थोड़ा होश आया। उसकी हालत बहुत बुरी थी। विक्टिम नंबर-2 ने बताया कि मैंने विक्टिम नंबर-1 के चीखने की आवाज सुनी थी। उसे देखा भी था। उसके आसपास काफी भीड़ थी। मैंने उस भीड़ में चिंगलेन और इनओतोन नाम के दो लोगों को पहचान लिया। इसके बाद दोनों को गांव के मेन रोड तक बिना कपड़ों के लाया गया था। भीड़ में कुछ लोग लड़कियों की मदद करना चाहते थे। उन्होंने दोनों को कपड़े देने चाहे, लेकिन आरोपियों ने उन्हें धमकाया कि दोबारा मदद करने आए तो तुम्हारा भी बुरा हाल करेंगे। चार्जशीट में लिखा है कि विक्टिम नंबर-3 भी वहीं पास में थीं। उसने पूरी घटना देखी थी। परिवारवालों की डेडबॉडी देखीं, पूरी रात जंगल में छिपी रहींजांच रिपोर्ट के मुताबिक, भीड़ दोनों लड़कियों को दूसरी जगह ले जाने लगी। रास्ते में विक्टिम नंबर-2 को अपने कपड़े बिखरे हुए मिले। उसने कुछ कपड़े उठा लिए, लेकिन फटे होने की वजह से उन्हें पहन नहीं सकीं। विक्टिम नंबर-1 ने कपड़े पहनने में उसकी मदद की। दोनों अब भी भीड़ से घिरीं हुई थीं। उन्होंने हिम्मत जुटाकर जान की भीख मांगी। इस पर भीड़ ने दोनों को छोड़ दिया। दोनों थोड़ा आगे बढ़ीं, तो उनके परिवार के दो पुरुष सदस्यों की लाशें एक दूसरे के ऊपर पड़ी देखीं। कुछ आगे गांव के पास सूखे नाले में विक्टिम नंबर 1 के भाई की डेडबॉडी मिली। उसकी खोपड़ी फटी हुई थी। आसपास कई लोग लाठी-डंडे और कुल्हाड़ी लेकर खड़े हैं। कुछ के हाथ में बड़े-बड़े चाकू भी थे। ये लोग विक्टिम को रुका देखकर मारने के लिए दौड़े। कुछ बुजुर्गों ने भीड़ को रोक दिया। भीड़ का गुस्सा देखकर लड़कियां तेजी से जंगल की तरफ भागीं। आगे उन्हें गांव के दो लोग मिले। उनमें से एक के पास फोन था। विक्टिम नंबर-2 ने फोन से अपने परिचितों को घटना के बारे में बताया। इसके बाद पैदल चलते हुए दोनों इरॉन्ग तांगखुल गांव पहुंची। वहां विक्टिम नंबर-1 का दोस्त मिल गया। उसने दोनों को पहनने के लिए कपड़े दिए। वहां खतरा था, इसलिए दोस्त दोनों लड़कियों को जंगलों में ले गया। वहां उनके समुदाय के लोग छिपे थे। दोनों लड़कियों ने जंगल में ही रात बिताई। जांच के दौरान गवाहों ने माना कि दोनों के शरीर पर कपड़े नहीं थे। पोती को लेकर घर से भागी, जिंदा हूं इसलिए सब भूल गएबी. फैनोम गांव में भीड़ ने अटैक किया, तब विक्टिम नंबर 3 वहीं मौजूद थीं। उन्होंने ढाई साल की पोती को उठाया, पीठ से बांधा और घर से भागीं। भीड़ ने उसे घेरकर मारने की कोशिश की थी। कपड़े भी खींचे थे। अब ये महिला परिवार के साथ दिल्ली में रहतीं हैं। हमने उनसे बात करने वाले एक सोशल एक्टिविस्ट से विक्टिम की आपबीती समझी। विक्टिम की उम्र 55 साल है। वे घटना के बारे में बताती हैं, ‘वो डर आज भी दिलोदिमाग में है। मेरी पोती को भी सब याद है। उस समय वो ढाई साल की थी, अब 5 साल की हो चुकी है। उससे पूछो कि हम कैसे भागे थे। वो सब बता देगी।’ विक्टिम बताती हैं, ‘न्यूड परेड का जो वीडियो वायरल हुआ था, मैं उस घटना की गवाह हूं। उस दिन हमारे घरों में आग लगाई गई। हम 10 लोग बचने के लिए जंगल में भागे थे। भीड़ ने हमें खोज निकाला। मुझे भी पीटा। शायद मेरी पोती को देखकर उन्होंने मुझे छोड़ दिया था। अगर मेरी पोती न होती, तो शायद मैं भी जिंदा नहीं बच पाती। या मेरे साथ भी वैसी ही दरिंदगी होती।’ ‘मैं कई किमी तक पोती को पीठ पर बांधकर जंगल की ओर भागती रही। पूरी रात जंगल में छिपकर बिताई। बच्ची भूख से रोती रही। उस रात लगा कि अब नहीं बच पाएंगे। भूख से ही मर जाएंगे। फिर अगली सुबह पास के एक गांव में पहुंची। एक खाली घर में खाने का सामान मिल गया। इसके बाद हम राहत शिविर में पहुंचे। वहां कुछ महीने रही। मेरा 7 लोगों का परिवार है। सभी के साथ दिल्ली आ गई। यहां दो कमरे का मकान किराये पर लिया है। सब उसी में रह रहे हैं।’ पीड़ित आज भी घर से नहीं निकलतीं, आरोपी पकड़े गए, लेकिन डर बाकीजिन लड़कियों का वीडियो वायरल हुआ था, उनके बारे में गवाह बताती हैं, ‘वे अभी मणिपुर में ही रहती हैं। उस खौफ की वजह से आज भी घर से बाहर नहीं निकलती हैं। किसी से बात नहीं करतीं हैं। परिवारवालों और करीबियों से थोड़ी बात कर लेतीं हैं। डर इतना है कि आज भी कई दिन तक खाना नहीं खाती हैं। इस बात से भी डरती हैं कि वो वीडियो फिर से सोशल मीडिया पर कभी सामने न आ जाए।’ ‘घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर एक कमेटी बनी। 12 लाख रुपए मुआवजा मिला, आरोपियों को जेल भेज दिया गया, लेकिन इससे हमारा दर्द खत्म नहीं हुआ। इसलिए मैं कभी मणिपुर वापस नहीं जाना चाहती। हम बेशक जिंदा हैं, लेकिन सब हमें भूल गए हैं। हमें दिल्ली में भी काफी दिक्कत हो रही है, लेकिन मणिपुर जाने से डर लगता है। हमारे पास यहां घर नहीं है।’ ‘मणिपुर में हम बहुत खुश रहते थे। साल भर का धान उगाते थे। चावल मिलता था। उस घटना के बाद से दिमाग काम नहीं करता। बस टेंशन रहती है। मणिपुर लौट गए, तो वही डरावनी यादें फिर ताजा हो जाएंगी। इसलिए अब यहीं रहना है।’ दैनिक भास्कर ने इस केस की अपडेट जानने के लिए गृह मंत्रालय और CBI से कॉन्टैक्ट किया। पहले हमने गुवाहाटी में CBI ऑफिस फोन किया। वहां बताया गया कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है, इसलिए इसका जवाब आपको हेडक्वॉर्टर से मिलेगा। हमने दिल्ली में CBI हेड क्वॉर्टर में संपर्क किया। 9 मार्च को CBI और गृह मंत्रालय की ऑफिशियल ईमेल आईडी पर ये सवाल भेजे। 1. CBI ने मणिपुर हिंसा में जितनी FIR दर्ज की हैं, उनमें कितने मामलों में दोषियों को सजा हो पाई है? 2. न्यूड परेड निकालने की घटना में पीड़ित परिवार का दावा है कि उन्हें जांच से जुड़ी जानकारी नहीं दी जा रही है। ऐसा क्यों हुआ?3. कई लोगों के बयान दर्ज नहीं किए गए हैं। ऐसा क्यों हो रहा है। अब तक इन सवालों का जवाब नहीं मिला है। जवाब आते ही स्टोरी अपडेट की जाएगी। …………………………..ये रिपोर्ट पढ़ें मुस्लिम से की शादी, भाई की पढ़ाई और राशन बंद, मंदिर में एंट्री नहीं पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के मेटला गांव में रहने वाली मीता घोष (बदला हुआ नाम) का परिवार सोशल बायकॉट झेल रहा है। मीता ने दो साल पहले एक मुस्लिम लड़के से लव मैरिज की थी। शादी ज्यादा दिन नहीं चली, लेकिन अलग धर्म में शादी करने की ‘सजा’ मीता और उनके परिवार को अब तक मिल रही है। गांववालों का कहना है कि मीता मुसलमान हो गई है। दो साल बाद इसलिए गांव आई है, ताकि लड़के-लड़कियों का धर्म बदलवा सके। पढ़ें पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 14 Mar 2026 5:02 am

ईरान युद्ध से भारत‑चीन‑यूरोप पर तगड़ा असर, रूस को फायदा

ईरान युद्ध के चलते दुनिया के लिए ऊर्जा की आवाजाही का सबसे अहम रास्ता बंद हो गया है. चीन, यूरोप और भारत के सामने आपूर्ति की बड़ी चुनौती है

देशबन्धु 13 Mar 2026 10:56 am

जर्मनी में हिजाब पहनने वाली महिलाओं ने झेला ज्यादा भेदभाव

जर्मनी में रहने वाले कई लोग मानते हैं कि उन्हें रोजमर्रा में भेदभाव झेलना पड़ता है. एक हालिया सर्वे में सामने आया है कि हिजाब पहनने वाली महिलाओं के साथ ऐसा और भी ज्यादा होता है

देशबन्धु 13 Mar 2026 10:53 am

ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खमेनेई कौन हैं?

ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने अली खमेनेई के बेटे मोजतबा खमेनेई को देश का नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया है. ये दिखाता है कि अमेरिका और इस्राएल के साथ युद्ध में घिरा ईरान आगे भी उन्हें टक्कर देने का ही इरादा रखता है.

देशबन्धु 13 Mar 2026 10:51 am

जेन-जी वाली नेपाल सरकार से कैसे होंगे भारत के रिश्ते

नेपाल चुनाव जीत कर भावी सरकार बनाने वाली आरएसपी के साथ संबंधों को लेकर भारत में उम्मीदें हैं तो कुछ आशंकाएं भी हैं. इसकी वजह है प्रधानमंत्री बनने जा रहे जेन-जी नेता बालेन शाह के पिछले कुछ बयान.

देशबन्धु 13 Mar 2026 10:48 am

पेरू में भारी बारिश के चलते 283 जिलों में आपातकाल की घोषणा

पेरू ने 283 जिलों में आपातकाल की घोषणा की है, ताकि सार्वजनिक सुरक्षा पर गंभीर प्रभाव डालने वाली तीव्र वर्षा के उच्च जोखिमों को कम किया जा सके और उसके प्रभावों से निपटा जा सके।

देशबन्धु 13 Mar 2026 9:47 am

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों को सुरक्षा देने के लिए पूरी तरह तैयार अमेरिका: व्हाइट हाउस

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को नौसैनिक सुरक्षा (एस्कॉर्ट) देने के लिए पूरी तरह तैयार है

देशबन्धु 13 Mar 2026 9:40 am

इराक में अमेरिकी रिफ्यूलिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त, खोज अभियान जारी

पश्चिमी इराक में ईरान से जुड़े युद्ध अभियान के दौरान अमेरिका की वायुसेना का एक हवाई रिफ्यूलिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। अमेरिकी सेना ने इस घटना की पुष्टि की है

देशबन्धु 13 Mar 2026 9:32 am

ईरान की आग लगाने की धमकी से दहला तेल बाजार, 100 डॉलर पार पहुंचा कच्चा तेल; अमेरिका ने रूसी तेल खरीद पर दी अस्थायी राहत

ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर उसके ऊर्जा ठिकानों या बंदरगाहों पर हमला किया गया, तो वह पूरे क्षेत्र के तेल और गैस ढांचे को निशाना बना सकता है। ईरानी सेना के केंद्रीय ऑपरेशन कमांड खातम अल-अंबिया के प्रवक्ता ने कहा कि किसी भी हमले की स्थिति में ईरान क्षेत्रीय ऊर्जा संरचना को जवाबी कार्रवाई का लक्ष्य बना सकता है।

देशबन्धु 13 Mar 2026 9:15 am

ईरान आतंक और नफरत फैलाने वाला देश है : ट्रंप

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की कड़ी आलोचना करते हुए उसे “आतंक और नफरत फैलाने वाला देश” बताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में ईरान को इसकी बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है

देशबन्धु 13 Mar 2026 9:04 am

पाकिस्तानी वायुसेना ने कई अफगानी शहरों में की एयरस्ट्राइक, कंधार में फ्यूल डिपो पर भी हमला

अफगानिस्तान का दावा है कि पाकिस्तानी लड़ाकू विमानों ने कंधार हवाई अड्डे के पास स्थित निजी एयरलाइन ‘काम एयर’ (Kam Air) के फ्यूल डिपो पर हमला किया। यह एयरलाइन न केवल नागरिक उड़ानों को सेवाएं देती है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र के विमानों को भी ईंधन की आपूर्ति करती है।

देशबन्धु 13 Mar 2026 8:33 am

‘UP में अविमुक्तेश्वरानंद केस और UGC का काउंटर करे BJP’:RSS का मैसेज- योगी ही चेहरा, अनुशासनहीन लोगों को बाहर करें

‘शंकराचार्य विवाद सनातन एकता की मुहिम को प्रभावित कर रहा है। योगी सरकार हर तरीके से इस मुद्दे को काउंटर करे, ताकि समाज में सनातन को लेकर पॉजिटिव मैसेज जाए। ये विषय लाखों लोगों की आस्था से जुड़ा है, इसे बहुत गंभीरता से लिया जाना चाहिए।' RSS का ये मैसेज यूपी में BJP के शीर्ष नेतृत्व के लिए है। 6 मार्च को कानपुर में संघ और BJP की मीटिंग हुई। सोर्स बताते हैं कि CM योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में हुई बैठक में यूपी के राजनीतिक माहौल, संगठन में बड़े बदलावों के साथ-साथ शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद को लेकर भी चर्चा हुई। बैठक में साफ कहा गया है कि शंकराचार्य मामले से सरकार और पार्टी को लेकर पैदा हुई निगेटिविटी दूर करने के लिए हर मुमकिन कोशिश की जाएगी। ताकि लोगों के बीच ये मैसेज जाए कि सरकार सनातन और संतों के साथ खड़ी है। मीटिंग से पहले 24 नवंबर 2025 को RSS चीफ मोहन भागवत और CM योगी आदित्यनाथ अयोध्या में मिले थे। इस साल लखनऊ में दोनों के बीच हुई मुलाकातों को संगठनात्मक तालमेल के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। लिहाजा, BJP लीडरशिप को ये मैसेज दे दिया गया है कि विधानसभा चुनाव में योगी ही पार्टी के सबसे बड़े चेहरे होंगे। इसलिए किसी भी तरह की निगेटिव कैंपेनिंग का सख्ती से जवाब दिया जाएगा। क्या 2027 विधानसभा चुनाव में शंकराचार्य विवाद BJP की स्ट्रैटजी पर बड़ा इम्पैक्ट डाल सकता है? क्या RSS इस मुद्दे पर योगी के साथ है? ये सवाल हमने दिल्ली और यूपी में RSS से जुड़े पदाधिकारियों, BJP नेताओं और एक्सपर्ट से पूछे। कानपुर में करीब पौने तीन घंटे मीटिंग यूपी में RSS का स्ट्रक्चर 6 प्रांतों- पश्चिम, ब्रज, अवध, काशी, गोरक्ष और कानपुर-बुंदेलखंड में बंटा हुआ है। होली के एक दिन बाद कानपुर में RSS और BJP लीडरशिप ने विधानसभा चुनाव को लेकर पहली कोऑर्डिनेशन मीटिंग की। सुबह 11 बजे CM योगी आदित्यनाथ दीनदयाल विद्यालय पहुंचे। उनके साथ BJP प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल भी बैठक में शामिल हुए। इसमें संघ के क्षेत्र प्रचारक अनिल और प्रांत प्रचारक श्रीराम, डॉ. अनुपम समेत कई सीनियर पदाधिकारी थे। राजनीतिक हलकों में इसे BJP के 'ट्रिपल-S मॉडल' यानी सरकार, संगठन और संघ की स्ट्रैटजी मीटिंग के तौर पर देखा जा रहा है। 2019 लोकसभा और 2022 यूपी विधानसभा चुनाव से पहले भी इस तरह की कई मीटिंग हुईं थीं, जिसके बाद BJP को चुनाव में बड़ी सफलता मिली। RSS के सोर्स बताते हैं, ‘बैठक करीब पौने तीन घंटे चली। इसकी शुरुआत में लोकसभा चुनावों में कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र में पार्टी को हुए नुकसान, लोकल नेताओं-कार्यकर्ताओं के बीच खींचतान और बढ़ती अनुशासनहीनता को जल्द से जल्द खत्म करने के लिए कहा गया। इसके साथ 2027 विधानसभा चुनाव से पहले संगठन में बड़े बदलाव और चुनावी रणनीति पर भी चर्चा हुई।‘ ‘बैठक के दौरान BJP नेताओं ने मुख्यमंत्री के सामने UGC के नए नियमों के कारण लोगों में असंतोष और शंकराचार्य विवाद का मुद्दा भी उठाया। इस पर संघ का साफ मैसेज था कि ऐसे मुद्दों से पार्टी की छवि प्रभावित हो रही है इसलिए शंकराचार्य मामले को हर तरीके से काउंटर किया जाना चाहिए। ताकि समाज में सनातन धर्म को लेकर पॉजीटिव मैसेज जाए।‘ BJP-संघ की बैठक में क्यों उठा ‘शंकराचार्य’ का टॉपिकयूपी में RSS और BJP की पॉलिटिक्स पर नजर रखने वाले सीनियर जर्नलिस्ट प्रमोद गोस्वामी कहते हैं, ‘BJP, योगी और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़ा मामला प्रयागराज के माघ मेले से शुरू हुआ, जब प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद के रथ को संगम तक जाने से रोक दिया था। विवाद तब और बढ़ गया, जब उनके अनुयायियों और बटुकों को चोटी खींचकर बुरी तरह मारा गया।‘ इस घटना को लेकर सनातनी समाज में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। लोगों ने इसे सरकार की निरंकुशता माना। BJP और संघ को डर है कि एक प्रमुख धार्मिक पीठ के शंकराचार्य का सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने से ब्राह्मण वोट बैंक और कट्टर हिंदू समर्थकों में भ्रम पैदा हो सकता है। ‘विपक्षी दल (जैसे सपा और कांग्रेस) इस विवाद को हवा दे रहे हैं ताकि BJP के हिंदुत्व वाले नैरेटिव को तोड़ा जा सके। यही वजह है कि पार्टी के सीनियर नेताओं के साथ-साथ कार्यकर्ता तक इसे लेकर परेशान हैं।‘ ‘शंकराचार्य विवाद की शुरुआत से लेकर अब तक CM योगी के तेवर में कोई कमी नहीं आई है। वो जब भी संघ प्रमुख मोहन भागवत से मिले या फिर कानपुर में जो बात हुई, उसमें शंकराचार्य विवाद को प्रमुखता से रखा गया। इसलिए RSS का रुख साफ है कि अगर अब इस मुद्दे पर पार्टी पीछे हटी तो उसे चुनाव में बड़ा नुकसान हो सकता है। यही वजह है कि इस मुद्दे पर योगी भी एग्रेसिव नजर आ रहे हैं।‘ अविमुक्तेश्वरानंद Vs योगी विवाद बढ़ने की 3 मुख्य वजहें 1. माघ मेले में शाही स्नान से पहले रोका गयाशंकराचार्य विवाद जनवरी 2026 में शुरू हुआ, जब प्रयागराज माघ मेले में यूपी पुलिस ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को संगम पर 'राजसी स्नान' के लिए जाने से रोक दिया। उनके शिष्यों के साथ बदसलूकी भी हुई। पुलिस ने इसके पीछे भगदड़ और सुरक्षा का हवाला दिया, जिसे शंकराचार्य ने 'संतों का अपमान' और सरकारी अहंकार बताया। 2. 'शंकराचार्य' पद की वैधता पर कानूनी नोटिसप्रयागराज प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर पूछा कि वे 'शंकराचार्य' उपाधि का इस्तेमाल क्यों कर रहे हैं, जबकि मामला सुप्रीम कोर्ट में है। बात तब बढ़ी जब विधानसभा में CM योगी ने नाम लिए बगैर कहा कि कोई भी खुद को शंकराचार्य नहीं लिख सकता, कानून सबके लिए बराबर है। इस पर पलटवार करते हुए अविमुक्तेश्वानंद ने कहा- ‘कोई राजनेता ये तय नहीं कर सकता कि धर्म का सर्वोच्च पद कौन संभालेगा।‘ 3. 'योगी बनाम स्वामी' की तीखी बयानबाजीदोनों ओर से शब्दों की मर्यादा की सीमाएं कई बार लांघी गईं। CM योगी ने नाम लिए बगैर 'कालनेमी' शब्द का जिक्र किया, जिसके जवाब में शंकराचार्य ने योगी की तुलना 'औरंगजेब' से की और कहा कि मुख्यमंत्री 'खलीफा' बनना चाहते हैं। हाल ही में उन्होंने योगी सरकार को 40 दिन की चेतावनी देते हुए कहा कि अगर यूपी में गौ-हत्या पर पूरी तरह प्रतिबंध नहीं लगा, तो वे योगी के 'हिंदू' होने पर सवाल उठाएंगे। अविमुक्तेश्वानंद के संघ प्रमुख पर बयान के बाद उनका विरोध बढ़ाक्या संघ भी स्वामी अविमुक्तेश्वानंद से नाराज हैं? ये सवाल हमने कानपुर में हुई बैठक में मौजूद BJP नेता से पूछा। नाम न जाहिर करने की गुजारिश पर वो कहते हैं, 'स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती यूपी के अलग-अलग जिलों में यात्रा कर रहे हैं। इस दौरान वो मीडिया से भी बात कर रहे हैं। वो पहले भी मुख्यमंत्री योगी से लेकर संघ प्रमुख मोहन भागवत पर विवादित टिप्पणी कर चुके हैं।' आप खुद बताइए क्या ऐसी भाषा का इस्तेमाल कोई शंकराचार्य कर सकता है। यही कारण है कि जनता के बीच अविमुक्तेश्वरानंद का विरोध बढ़ता जा रहा है। 'पिछले महीने 20 फरवरी को वाराणसी में अविमुक्तेश्वरानंद ने संघ प्रमुख के लिए कहा था कि वो हिंदुओं को बच्चे पैदा करने की सलाह देने से पहले खुद शादी करें। जो व्यक्ति बच्चा पैदा करने वाली प्रक्रिया या जिम्मेदारी का हिस्सा ही नहीं है, उसे इन संवेदनशील बातों पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।' RSS से जुड़े संगठन विद्या भारती से जुड़े भास्कर दुबे कहते हैं, ‘विधानसभा चुनाव से पहले संघ और सरकार के बीच 'ट्रिपल-S मॉडल' बैठकें हो रही हैं। इन मीटिंग्स का एजेंडा पार्टी के अंदर मौजूद नाराजगी दूर करना है।‘ ‘संघ की यही कोशिश रहती है कि किसी भी तरह के ज्वलंत मुद्दों को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच टकराव न हों। ऐसे मुद्दों का समाधान निकालने की कोशिश की जा रही है ताकि चुनाव से पहले संगठनात्मक एकजुटता बनी रहे। समन्वय बैठक में बूथ स्तर के संगठन, क्षेत्र और प्रांत प्रचारकों को मुख्यमंत्री से सीधे संवाद करने का मौका मिला। एक्सपर्ट बोले- BJP में शंकराचार्य और UGC को लेकर अंदरूनी मतभेद सीनियर जर्नलिस्ट प्रमोद गोस्वामी कहते हैं, ‘शंकराचार्य विवाद के तूल पकड़ते ही डिप्टी CM ब्रजेश पाठक ने बटुकों को घर बुलाकर सम्मानित किया। केशव प्रसाद मौर्य भी उन्हें भगवान कहते हैं। दूसरी तरफ पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह भी UGC के नए नियमों का विरोध करते हुए इसे समाज को बांटने वाला और असंतुलित कानून बता रहे हैं।‘ ‘इन बातों से ये साफ हो गया है कि शंकराचार्य और UGC विवाद को लेकर BJP में अंदरूनी मतभेद की स्थिति है। जिसे खत्म करने के लिए अब पैचवर्क किया जा रहा है। इसी वजह से संघ और BJP की लीडरशिप भी परेशान है कि वो 2027 के चुनाव में किस मुंह से जनता के सामने वोट मांगने जाएंगे। 2019 लोकसभा चुनाव में BJP को यूपी में 62 सीटें मिलीं थीं। 2024 में ये घटकर 33 रह गईं।’ ‘संघ के लिए योगी फ्यूचर PM कैंडिडेट, इसलिए साथ खड़ा’ संघ मामलों के जानकार और सीनियर जर्नलिस्ट कुमार भवेश चंद्र कहते हैं, ’स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद ने समाज में 'शंकराचार्य परंपरा' को लेकर नए सवाल पैदा कर दिए हैं। कुछ लोग इसके समर्थन में हैं, तो एक धड़ा विरोध कर रहा है। मामले के तूल पकड़ने के बाद संघ-BJP दोनों अपनी-अपनी तरह से इसे काउंटर कर रहे हैं।’ ‘योगी आदित्यनाथ मौजूदा दौर में BJP के बड़े नेता माने जाते हैं, कई बार उनके लिए बोला जाता है कि वे अगले PM कैंडिडेट भी हैं। CM योगी के खिलाफ अविमुक्तेश्वरानंद के जैसे बयान आ रहे हैं, ऐसे में अब संघ के लिए ये बड़ा सवाल बन गया है कि वो अपने नेता को बीच मझधार में कैसे छोड़ सकती है।‘ वो 4 बड़े मामले, जिनमें RSS ने दिया BJP का साथ… 1. वक्फ संशोधन विधेयकRSS ने वक्फ संशोधन विधेयक मुद्दे पर केंद्र सरकार के रुख का पूरी तरह समर्थन किया था। संघ के एक सीनियर पदाधिकारी के मुताबिक, 'संघ का मानना है कि वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन पारदर्शी होना चाहिए। इसलिए बीते साल हुए कॉर्डिनेशन बैठकों में ये तय हुआ कि RSS इस मुद्दे को 'तुष्टिकरण बनाम सुधार' के रूप में जनता के बीच ले जाए।‘ ‘इसे लेकर खास रणनीति भी बनाई गई, जिसमें पसमांदा मुस्लिम कम्युनिटी और गरीब तबके को ये समझाने का जिम्मा स्वयंसेवकों को दिया गया है कि ये कानून उनके हक में लाया जा रहा है।’ 2. UGC रेगुलेशन 2026 और आरक्षण विवादजनवरी 2026 में नए UGC नियमों को लेकर सवर्ण और दलित दोनों समुदायों में नाराजगी देखी गई थी। तब संघ ने सरकार को सलाह दी थी कि वो दलित समुदायों (विशेषकर जाटव) के बीच जा रही नकारात्मकता को रोकने के लिए संत रविदास की 650वीं जयंती को बड़े स्तर पर मनाए। संघ इसके लिए 'सामाजिक समरसता' अभियान चला रहा है कि BJP आरक्षण के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं करेगी। 3. धर्मांतरण और अवैध मदरसों-मजारों पर बुलडोजर एक्शनपश्चिमी यूपी और पीलीभीत, लखीमपुर खीरी जैसे तराई क्षेत्रों में धर्मांतरण की रिपोर्टों पर संघ ने चिंता जताई थी। इस पर RSS ने योगी सरकार के 'अवैध मजारों' को हटाने, धर्मांतरण विरोधी कानून को और सख्ती से लागू करने के फैसलों का खुलकर समर्थन किया। 4. मथुरा और काशी का मुद्दाअयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद संघ अब मथुरा और काशी के मुद्दों पर BJP को फ्री हैंड दिया है। हालांकि, अगस्त 2025 में संघ प्रमुख मोहन भगवत ने कहा कि RSS मथुरा हो या काशी, किसी भी मंदिर आंदोलन में भाग नहीं लेगा। अगर स्वयंसेवक मंदिरों के आंदोलन में शामिल होना चाहते हैं, तो संगठन उन्हें नहीं रोकेगा। ……………….ये खबर भी पढ़ें… पूरी तरह बदलने वाला है RSS 40 लाख सदस्य और 83 हजार से ज्यादा शाखाओं वाला राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ अपने स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव करने वाला है। इसके मुताबिक अब अलग-अलग प्रांत प्रचारकों की जगह एक राज्य प्रचारक होगा। क्षेत्र प्रचारकों की संख्या भी कम होगी। जिला, तहसील, ब्लॉक और गांवों तक कार्यकर्ताओं को ज्यादा अधिकार मिलेंगे। इस बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी? पढ़िए पूरी खबर…

दैनिक भास्कर 13 Mar 2026 5:15 am

चीन में वन क्षेत्र में बड़ा इजाफा

चीन में 12 मार्च को राष्ट्रीय वृक्षारोपण दिवस है। चीनी राष्ट्रीय वानिकी और चरागाह प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार अब देश में वन का क्षेत्रफल 24 लाख वर्ग किलोमीटर से अधिक हो गया है

देशबन्धु 12 Mar 2026 10:08 pm

ईरान ने रखीं युद्ध खत्म करने की 3 शर्तें, राष्ट्रपति पेजेशकियन बोले- तभी रुकेगी US-इजरायल से जंग

ईरान ने पहली बार सार्वजनिक रूप से बताया है कि वह किन शर्तों पर अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे इस युद्ध को समाप्त करने के लिए तैयार हो सकता है।

देशबन्धु 12 Mar 2026 1:18 pm

West Asia Crisis: इराक में हुए हमले में भारतीय की मौत, ईरानी सुसाइड बोट से टक्कर के बाद अमेरिकी तेल टैंकर में लगी आग

जिस जहाज पर हमला हुआ उसका नाम ‘सेफसी विष्णु’ है। यह कच्चा तेल ले जाने वाला एक बड़ा टैंकर है। जहाज अमेरिका से जुड़ा हुआ है, हालांकि उस पर मार्शल आइलैंड्स का झंडा लगा हुआ था। हमले के समय जहाज पर कुल 28 लोग मौजूद थे।

देशबन्धु 12 Mar 2026 12:51 pm

ट्रंप का दावा: 1 घंटे में खत्म कर सकते हैं तेहरान की बिजली

ईरान के साथ अमेरिका और इजरायल का संघर्ष अब भी जारी है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि ईरान पूरी तरह से खत्म हो रहा है

देशबन्धु 12 Mar 2026 9:30 am

ईरान पर सख्त हुआ यूएनएससी, खाड़ी देशों पर हमलों की निंदा वाला प्रस्ताव पास 

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने बुधवार को खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों के खिलाफ प्रस्ताव को पारित कर दिया

देशबन्धु 12 Mar 2026 9:20 am

दवाओं के लिए चीन पर अमेरिका की निर्भरता 'खतरनाक', लॉमेकर्स और विशेषज्ञों ने जताई चिंता

सीनेट की चर्चा के दौरान सीनेट मेंबर्स और एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी कि यूनाइटेड स्टेट्स अपनी कई आम दवाओं में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल और इंग्रीडिएंट्स के लिए चीन पर बहुत ज्यादा निर्भर हो गया है और ये स्थिति अमेरिका के लिए खतरनाक हो सकती है

देशबन्धु 12 Mar 2026 9:18 am

डिजिटल उपकरणों की शक्ति को पूरी मानवता तक पहुंचाने से मानवाधिकारों को मिलता है बढ़ावा : भारत

भारत के अनुसार डिजिटल उपकरणों की शक्ति को पूरी मानवता तक पहुंचाना मानवाधिकारों को बढ़ावा देने में मदद करता है, क्योंकि सभी लोगों के जीवन में सुधार करना इसकी वास्तविक क्षमता को साकार करने के लिए आवश्यक है।

देशबन्धु 12 Mar 2026 9:14 am

ट्रंप ने ईरान पर हमलों को तेल की कीमतों में कमी से जोड़ा

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से वैश्विक तेल कीमतों को कम करने में मदद मिलेगी

देशबन्धु 12 Mar 2026 9:11 am

चीन और कतर व पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों के बीच फोन वार्ताएं

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने 10 मार्च को कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल-थानी के साथ फोन पर वार्ता की।

देशबन्धु 12 Mar 2026 6:10 am

भारत के पास कितने दिन की LPG बची है:जंग लंबी छिड़ी तो सरकार कहां से लाएगी रसोई गैस; आपको क्या करना चाहिए

भोपाल के रहने वाले आदित्य ने 6 मार्च को IVRS कॉल से एक LPG सिलेंडर बुक किया। आमतौर पर 1 दिन बाद सिलेंडर की होम डिलीवरी हो जाती थी। जब 3 दिन बाद भी सिलेंडर घर नहीं पहुंचा, तो उन्होंने वापस IVRS डायल किया। नंबर इनवैलिड बताने लगा। आदित्य गैस एजेंसी के दफ्तर पहुंचे। वहां अफरा-तफरी मची थी। किसी की शिकायत थी कि गैस बुक नहीं हो रही, किसी ने बताया बुकिंग के हफ्तेभर बाद भी डिलीवरी नहीं हुई। लोग एक अदद सिलेंडर के लिए चक्कर काट रहे थे। एक्स्ट्रा पैसे देने को तैयार थे। काफी मशक्कत के बाद आदित्य को एक सिलेंडर मिल सका। इस वक्त ये आपबीती देश के लाखों लोगों की है। ईरान जंग की आंच आपकी रसोई तक कैसे पहुंच गई, देश में कितने दिन की LPG बची है और अगर जंग खिंची तो सरकार कहां से लाएगी रसोई गैस; भास्कर एक्सप्लेनर में ऐसे 6 जरूरी सवालों के जवाब... सवाल-1: भारत रसोई गैस या LPG पर कितना निर्भर है, कहां किल्लत दिख रही? जवाब: भारत को सालाना करीब 33 मिलियन मीट्रिक टन LPG की जरूरत होती है। घरेलू गैस सिलेंडर के हिसाब से हर साल करीब 235 करोड़ सिलेंडर। यानी रोजाना 64 लाख सिलेंडर। इसका 88% हिस्सा घरों में इस्तेमाल होता है। बाकी की 12% गैस कमर्शियल यानी होटल, रेस्टोरेंट, इंडस्ट्री वगैरह में यूज होती है। भारत अपनी खपत की 60% LPG विदेशों से खरीदता है। बाकी भारतीय रिफाइनरियों में तैयार होती है। अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के चलते विदेशों से होने वाली LPG सप्लाई प्रभावित हुई है। इसके चलते भारत में LPG की किल्लत देखी जा रही है… सवाल-2: LPG होती क्या है, कैसे बनती है? जवाब: LPG यानी लिक्विड पेट्रोलियम गैस मुख्य रूप से दो गैसों का मिश्रण है- प्रोपेन और ब्यूटेन। LPG कोई ऐसी चीज नहीं है, जो सीधे जमीन से निकलती है। ये पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की रिफाइनिंग के दौरान निकलने वाले बाय-प्रोडक्ट से तैयार होती है। बाय-प्रोडक्ट को ऐसे समझिए कि दही से घी निकालने में मट्ठा भी बनता है। ऐसे ही पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स की रिफाइनिंग में LPG बनती है। इसे बनाने के दो तरीके हैं… 1. तेल और गैस के कुओं से 2. तेल रिफाइनरियों में तैयार गैस को हाई-प्रेशर के साथ सिलेंडर भरा जाता है, जिससे गैस के अणु इतने करीब आ जाते है कि वे पानी की तरह लिक्विड बन जाते हैं। इससे कम जगह में ज्यादा LPG आ जाती है। LPG को जलाने पर लकड़ी जलाने जैसा धुआं नहीं होता, लेकिन कार्बन डाइऑक्साइड निकलती है। LPG हवा से ज्यादा भारी होती है। अगर ये लीक हुई तो ऊपर नहीं, बल्कि नीचे बैठ जाती है। इसी के चलते LPG में प्रोपेन और ब्यूटेन के अलावा एथिल मरकैप्टन नाम का एक केमिकल मिलाया जाता है। ताकि LPG लीक होने पर तुरंत पता चल जाए और बड़ा हादसा न हो। प्रोपेन और ब्यूटेन में नेचुरली कोई गंध-रंग नहीं होती। इसलिए इसमें एथिरल मरकैप्टन मिलाते हैं, जिससे LPG को अजीब सी गंध मिलती है। जब LPG लीक होती है, तब ये गंध हमें पता चलती है। सवाल-3: ईरान जंग से भारत में LPG की सप्लाई कैसे बाधित हुई? जवाब: UAE, कतर, सऊदी अरब, कुवैत जैसे खाड़ी देशों से गैस या पेट्रोलियम को भारत आने के लिए हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरना पड़ता है। लेकिन अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग के चलते हॉर्मुज स्ट्रेट बंद पड़ा है। जंग से पहले इस जलमार्ग से रोजाना औसतन 153 शिप्स निकलते थे, लेकिन अब ये आंकड़ा 13 के करीब है। 11 मार्च को शिपिंग मिनिस्ट्री के स्पेशल सेक्रेटरी राजेश कुमार सिन्हा ने बताया कि फारस की खाड़ी में भारत के झंडे वाले 28 जहाज हैं। इनमें से 24 जहाज हॉर्मुज स्ट्रेट के पश्चिम में हैं, जिन पर 677 क्रू मेंबर हैं। वहीं हॉर्मुज स्ट्रेट पर 4 जहाज हैं, जिन पर 101 भारतीय नाविक हैं। ईरान ने अमेरिकी हमलों के जवाब में UAE, कतर, कुवैत, सऊदी अरब जैसे दर्जनभर खाड़ी देशों को निशाना बनाया है। इसके चलते यहां के गैस प्लांट का प्रोडक्शन बंद हो गया या प्रभावित हुआ। ईरान का तर्क है कि इन देशों पर मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों से ईरान पर हमले हो रहे हैं। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका और इजराइल के हमले जारी रहे तो हॉर्मुज स्ट्रेट से एक लीटर तेल भी बाहर नहीं जाने देंगे। 11 मार्च को थाईलैंड के एक कार्गो शिप पर होर्मुज स्ट्रेट में हमला हुआ। ये शिप भारत आ रहा था। हमले के बाद शिप के इंजन रूम में आग लग गई। ओमान की नौसेना ने शिप के 23 में से 20 क्रू मेंबर्स को रेस्क्यू कर लिया। हालांकि हमला किसने किया, इसकी जानकारी नहीं है। सवाल-4: भारत के पास कितने दिन का स्टॉक मौजूद है? जवाब: मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के पास 10 दिन का LPG बफर स्टॉक है, जो जल्द ही खत्म हो सकता है। इसी के चलते केंद्र सरकार ने ‘आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1995’ लागू कर दिया है, जिसके तहत LPG सिलेंडरों की जमाखोरी रोकी गई है। साथ ही अलग-अलग इस्तेमाल के हिसाब से प्राथमिकता तय की गई है। साथ ही तमाम सरकारी और निजी रिफाइनरियों को प्रोडक्शन बढ़ाने के लिए कहा गया है। 11 मार्च को पेट्रोलियम मिनिस्ट्री की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने बताया कि घरेलू एलपीजी प्रोडक्शन में 25% की बढ़त हुई है। भारत के LPG स्टॉक के 2 अनुमान लगाए जा रहे हैं… हालांकि केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पूरी ने कहा है कि घरेलू इस्तेमाल के लिए LPG सप्लाई में कोई कमी नहीं है और लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। सवाल-5: जंग लंबी चली, तो भारत कहां से LPG लाएगा? जवाब: केंद्र सरकार नए गैस सप्लायर्स के बारे में सोच रही है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, नॉर्वे और अमेरिका जैसे गैस सप्लायर्स से गैस खरीदने की संभावना है। अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ को सूत्रों ने बताया कि आमतौर पर यहां से शिपमेंट आने में ज्यादा वक्त लगता है। इसके चलते LPG की घरेलू खपत में कुछ समय की किल्लत हो सकती है। शिपिंग इंडस्ट्री का अनुमान है कि जहाजों को अमेरिका या नॉर्वे जाने और वहां से भारत तक गैस लाने में करीब 2 महीने का वक्त लगता है। इसके अलावा भारत ने रूस को कच्चे तेल के बड़े ऑर्डर दिए हैं। शिप ट्रैकिंग डेटा के मुताबिक, करीब 2.2 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल लिए जहाज इस हफ्ते के आखिर तक भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच सकते हैं। 3 करोड़ बैरल कच्चे तेल का ऑर्डर भी दिया है। रिलायंस और IOCL जैसी तेल कंपनियों ने एग्रीमेंट किया है। नए गैस सप्लायर्स की फेहरिस्त में ऑस्ट्रेलिया और कई अफ्रीकी देशों जैसे अल्जीरिया, नाइजीरिया और अंगोला का भी नाम है। सरकार इनसे भी करोबार कर सकती है। पेट्रोलियम मिनिस्ट्री की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने बताया, ‘हम करीब 40 देशों से क्रूड इम्पोर्ट करते हैं। तेल कंपनियों ने अलग-अलग सोर्सेस से तेल मंगाया है। इसके कारण हमारा 70% क्रूड इम्पोर्ट हॉर्मुज स्ट्रेट के बाहर के रास्ते आ रहा है। ये पहले 55% था।’ वहीं 5 मार्च को पेट्रोलियम मंत्रालय ने भी देश की सभी रिफाइनरियों को निर्देश जारी किया है कि वे मैक्सिमम कैपेसिटी में प्रोडक्शन करें। किसी भी तरीके से मिलने या तैयार होने वाली ब्यूटेन और प्रोपेन गैस का इस्तेमाल LPG प्रोडक्शन में करें। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंडियन नेवी हॉर्मुज स्ट्रेट में फंसे कार्गो शिप्स को एस्कॉर्ट कर सकती है। हालांकि जून 2019 से खाड़ी क्षेत्र में भारतीय जहाजों की सुरक्षा के लिए नेवी का ऑपरेशन संकल्प जारी है। वहीं 10 मार्च की रात भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची से बात की। वेस्ट एशिया के हालातों और हॉर्मुज स्ट्रेट के शिपमेंट्स पर चर्चा हुई। A detailed conversation this evening with Foreign Minister @araghchi of Iran on the latest developments regarding the ongoing conflict. We agreed to remain in touch.— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) March 10, 2026 सवाल-6: LPG की किल्लत के बीच आपके पास क्या ऑप्शन हैं? जवाब: रसोई गैस की मारा-मारी के बीच आप कुछ विकल्प अपना सकते हैं… ----------- ईरान जंग से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… तेल से जेब भर रहा रूस, अब भारत को भी महंगा बेचेगा; अमेरिका-ईरान जंग से पुतिन कैसे बन रहे विनर, 5 फैक्टर्स अमेरिका-ईरान जंग से दुनिया के ज्यादातर देश परेशान हैं। लेकिन रूस के राष्ट्रपति पुतिन मुस्कुरा रहे हैं। इस जंग ने अचानक उन्हें फिर से बेहद रेलिवेंट बना दिया है। भारत पर रूसी तेल खरीदने की वजह से पनिशमेंट टैरिफ लगाने वाला अमेरिका, खुद रूस से तेल खरीदने के लिए कह रहा है। रूस का भी कहना है कि तेल तो हम दे देंगे, लेकिन पहले जैसा डिस्काउंट भूल जाइए। पूरी खबर पढ़ें…

दैनिक भास्कर 12 Mar 2026 5:13 am

ब्लैकबोर्ड- भूख के बजाय, दवाओं के ट्रायल से मरना अच्छा:बच्चों को तो 25 लाख मिल जाएंगे; उन्हें रिसर्च के लिए खून चाहिए, हमें पैसा

'किसे अच्छा लगता है कि वह पैसे के लिए अपनी जान की बाजी लगाए, लेकिन मुझे लगानी पड़ती है। अगर मर भी गई तो बच्चों को 20-25 लाख मिलेंगे। कम से कम उनकी जिंदगी तो बेहतर हो जाएगी। अभी तक खुद पर दवाओं के ट्रायल में 4 बार पास हुई हूं। मुझ पर कैंसर, हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी की दवाओं के ट्रायल हो चुके हैं…अब हर तीन महीने में लैब के चक्कर लगाती हूं। पूछती रहती हूं कोई नया ट्रायल होने वाला है क्या?’, बिस्मिल्लाह स्याह कहानियों की सीरीज ब्लैकबोर्ड में ऐसे लोगों की कहानी, जो पैसों के लिए अपनी जान दांव पर लगाकर क्लिनिकल ट्रायल का हिस्सा बन रहे हैं। खुद पर दवाएं टेस्ट करा रहे हैं। अपनी झोपड़ी में बैठी 6 बच्चों की मां बिस्मिल्लाह खुद पर हुए क्लिनिकल ट्रायल की कहानी बता रही हैं। वह बातचीत करने के लिए तैयार नहीं थी, काफी समझाने के बाद राजी हुईं। बिस्मिल्लाह गुजरात के अहमदाबाद शहर से 20 किलोमीटर दूर बसे गणेश नगर इलाके की झुग्गी-बस्ती में रहती हैं। अभी रमजान चल रहे हैं। जिस वक्त मैं बिस्मिल्लाह के घर गया, वह शाम के इफ्तार की तैयारी कर रही थीं। तपती गर्मी में यहां एक मिनट भी ठहरना मुश्किल है। मैंने बिस्मिल्लाह से पूछा- क्लिनिकल ट्रायल के लिए आप लैब कैसे गई थी? दुपट्टे में पसीना पोंछते हुए बोलीं- ‘यहां 100 से ज्यादा परिवार रहते हैं। चार साल पहले की बात है। बस्ती की कई महिलाएं शहर जा रही थीं। मुझे किसी ने बताया कि सभी दवा के ट्रायल के लिए जा रही हैं। बदले में पैसे मिलते हैं। मैं भी उनके पीछे-पीछे ऑटो में बैठ गई। करीब एक घंटे बाद सभी लोग एक लैब के बाहर जाकर रुक गए। उस दिन पता चला कि वहां हम इंसानों पर दवाओं का ट्रायल किया जाता है। क्लिनिकल स्टडी के लिए खून लिया जाता है। लैब में काम करने वाले से जब मैंने पूछा, तो उन्होंने कहा- कैंसर की दवा बनाने का टेस्ट चल रहा है। तुम्हें क्लिनिकल स्टडी करवानी है? इसमें पास हो जाओगी, तो पैसे मिलेंगे। लेकिन अगर तुम्हें कुछ हो गया, तो उसकी जिम्मेदारी हमारी नहीं होगी। मैं सोचने लगी- वैसे भी गरीबी में मर ही रही हूं। स्टडी के दौरान मर गई तो बच्चों को 20-25 लाख तो मिल जाएंगे, ट्रायल करा ही लेती हूं। मैंने हां कह दिया। ‘आपको लैब वालों ने बताया था कि जान भी जा सकती है?’ बिस्मिल्लाह फौरन बोलीं, 'उन लोगों ने एक फॉर्म भरवाया। उसमें गुजराती में लिखा था- अपनी मर्जी से स्टडी में हिस्सा ले रही हूं। अगर मेरी मौत हो गई, तो उसकी जिम्मेदारी खुद की होगी। लैब की कोई जवाबदेही नहीं होगी। उस दिन मेरे शरीर पर दवा का पहला ट्रायल किया गया और 20 हजार रुपए मिले। 6 महीने किसी के यहां चूल्हा-चौका करती, तब भी इतने पैसे नहीं मिलते। हमें क्या… हमें तो बस पैसा चाहिए और उन्हें इंसानों का खून। पैसों के लालच में मौत से खेलती हूं। बच्चे मना करते हैं। कहते हैं- अगर मुझे कुछ हो गया, तो उनका क्या होगा? मैं समझाती हूं- इंसान की क्या ही कीमत है। पैसे रहेंगे, तो जिंदगी कट ही जाएगी।' ये कहते हुए बिस्मिल्लाह की आंखें भर आती हैं। कितने पैसे मिलते हैं? 35 हजार रुपए तक मिलते हैं। जैसी स्टडी, वैसा पैसा। पहले मैं तीन-चार दिन की स्टडी में ही जाती थी। अब तो 24 घंटे तक चलने वाली स्टडी में जाती हूं। पहले घर पर छोटे-छोटे बच्चे थे, तो उनकी भी देखभाल करनी पड़ती थी। पड़ोस के दो बच्चों को गोद ले रखा है। दरअसल, उनका बाप मर गया, तो मां ने दूसरी शादी कर ली। बच्चे अनाथ रह रहे थे। मैं उनकी देखभाल करने लगी। दवाओं की यह जांच कई हिस्सों में होती है। एक बार तो मैंने तीन हिस्से पूरे किए थे, चौथे हिस्से में शामिल होने से पहले कुत्ते ने काट लिया। तब लैब वालों ने मेरे पैसे काट लिए। 35 हजार के बदले 25 हजार रुपए ही दिए। एक तो जान की बाजी लगाओ, ऊपर से स्टडी पूरी न होने पर पैसे भी कट जाते हैं, लेकिन हमारे हाथ में कुछ भी नहीं। ट्रायल से पहले मेरे पूरे शरीर का चेकअप किया जाता है, फिर मेरा खून लेते हैं। दो बार में 500 ml तक खून निकाल लेते हैं। कुछ दवाएं खिलाकर एक कमरे में बंद रखते हैं। कोई रिएक्शन या दिक्कत नहीं होती है, तो घर भेज देते हैं। उसके बाद अगर मुझे कुछ हो जाए, तो उनकी कोई जिम्मेदारी नहीं। ट्रायल के बाद वे कहते हैं- घर जाकर ताकत वाली चीजें खाना, लेकिन फल-सब्जियां कहां से खाऊं। दो वक्त का दाल-भात मिल जाए, वही बहुत है। एक बार ऐसी ही स्टडी के लिए पुणे गई थी। 20 हजार रुपए मिले थे। उस दिन लैब वालों ने मुझे कैश में पैसा दिया था। पैसा एक बैग में रखा लिया था, किसी ने बैग चुरा लिया। पूरी मेहनत पानी में चली गई थी। कई बार तो ऐसा होता है कि मेरी रिपोर्ट स्टडी के मुताबिक नहीं होती, तो हमें घर वापस भेज दिया जाता है। तब लगता है कि अगर स्टडी हो जाती, तो पैसे मिल जाते। लेकिन अब घर जाकर बच्चों के खाने-पीने की व्यवस्था कैसे करूंगी।’ 'यहां कब से रह रही हैं?' बिस्मिल्लाह कहती हैं, 'हम लोग पिछले 17 साल से यहां रह रहे हैं। बरसात में पूरा इलाका पानी से भर जाता है। आंधी आती है तो छप्पर उड़ जाते हैं। यहां न कोई रोजगार है, न कोई धंधा। पैसे के लिए दवाओं के ट्रायल में हिस्सा लेना पड़ता है। पेट के लिए हम इंसानों को खुद को बेचना पड़ता है। मैं तो सिर्फ खून बेचती हूं। इस बस्ती में इतनी गंदगी है कि आप कुछ देर भी यहां ठहर नहीं सकते। साबरमती रीवरफ्रंट डेवलपमेंट के दौरान राज्य सरकार ने हमें वहां से हटाकर यहां बसा दिया, लेकिन आज भी यहां कोई सुविधा नहीं है।' ‘घर में और कौन-कौन रहता है?’ 'मैं और मेरे तीन बच्चे…। करीब 30 साल पहले की बात है। पहले शौहर से एक बेटी हुई थी। ससुराल वालों ने कहा- तुमने बेटी जनी है, तुम जानो। हमारा इससे कोई मतलब नहीं। डिलीवरी के 6 दिन बाद ही घर से निकाल दिया। मेरे मां-बाप ने भी मुझे रखने से मना कर दिया। मैं अपने नाना-नानी के घर चली गई। कुछ सालों बाद एक हिंदू आदमी से प्यार हो गया। मैंने शादी कर ली। उससे मुझे 5 बच्चे हुए, लेकिन उसने भी मुझे तलाक दे दिया और 3 बच्चे अपने पास रख लिए। तीन बच्चों के साथ मैं अलग रहने लगी। दो बच्चों की शादी हो गई है, एक की नहीं हुई है। उसके दिल में छेद है। अब मेरे पास खाने तक के पैसे नहीं हैं, तो उसका इलाज कहां से कराऊं। किसी मामले में पुलिस उसे उठा ले गई है। मेरे पास तो केस लड़ने के भी पैसे नहीं हैं।’ मजबूरी का यह दंश सिर्फ बिस्मिल्लाह ही नहीं झेल रही हैं। यहां लगभग हर परिवार की यही कहानी है। ज्यादातर परिवार बातचीत के लिए कैमरे पर नहीं आना चाहते हैं। उन्हें डर है कि अगर बात करेंगे, खबर फैल जाएगी तो लैब वाले ट्रायल में लेने से इनकार कर देंगे। बिस्मिल्लाह के बाद बड़ी मुश्किल से 64 साल की मंजू बेन बातचीत के लिए राजी हुईं। वो अकेले रहती हैं। परिवार के बारे में बताती हैं कि एक पोता और एक पोती है। दोनों शहर में रहते हैं। 6 साल पहले पति की मौत हुई थी, फिर एक दुर्घटना में बेटे की मौत हो गई। वह सूरत में रहता था। वहां पर ही वह क्लिनिकल ट्रायल में हिस्सा लेने जाता था। अब घर में कोई कमाने वाला नहीं बचा है। इसलिए मैं क्लिनिकल ट्रायल के लिए जाती हूं। इसी से हमारा घर चलता है। बेटे की मौत के बाद तुरंत बाद ही मैंने एक ट्रायल में हिस्सा लिया था। 20 हजार रुपए मिले थे। उसी से यह टॉफी-बिस्किट की दुकान खोली। इससे दिनभर में 50 रुपए की कमाई हो पाती है। इतने से क्या ही होने वाला है। मेरी तो उम्र भी हो चुकी है। हर दिन सोचती हूं कि एक और स्टडी मिल जाती, तो इस घर की मरम्मत करवा लेती। एक साल में अगर कोई और स्टडी नहीं मिली, तो यह काम नहीं करा पाऊंगी। मेरी उम्र पूरी हो जाएगी। ऐसे भी मर ही जाऊंगी। यदि स्टडी के दौरान मर गई, तो मेरे पोता-पोती को 25 लाख रुपए तो मिलेंगे। यही सोचकर स्टडी के लिए चली जाती हूं। मेरे पोते-पोती को नहीं पता होता कि मैं स्टडी के लिए गई हूं। उन्हें बिना बताए जाती हूं। घर चलाने के लिए पैसे तो चाहिए ही न। यहां कोई काम-धंधा भी नहीं है। किसी के घर काम करने जाऊं, तो 1500 से 2 हजार रुपए ही मिलते हैं। अब काम करने लायक उम्र भी नहीं रही। क्या ही कर सकती हूं।’ बिस्मिल्लाह और मंजू बेन से बातचीत के बाद अभी तक मुझे यही लग रहा था कि क्लिनिकल ट्रायल में सिर्फ महिलाएं जा रही हैं। तभी एक शख्स ने बताया कि पास में रहने वाले जनकभाई भी क्लिनिकल ट्रायल के लिए जाते हैं। मैं उनके पास पहुंचा। खाट पर एक कपड़ा बांधकर अपने बेटे को सुला रहे हैं। पूछने पर कहते हैं, ‘यहां जमालपुर की फूल मंडी है। वहां मजदूरी करता था। धीरे-धीरे धंधा चौपट होने लगा, तो किसी ने बताया कि क्लिनिकल स्टडी में पैसे मिल जाते हैं। मैं और मेरी पत्नी अनशा दोनों स्टडी के लिए गए। पत्नी का वजन कम था, तो उसे स्टडी में लेने से मना कर दिया गया। मैं पास हो गया। पहली स्टडी से जो पैसा मिला, उसी से मैंने इस घर की दीवार खड़ी की। नहीं तो पहले यह पूरी तरह झोपड़ी था। क्या करें, पैसों के लिए स्टडी में जाना पड़ता है। यहां कोई दूसरा काम-धंधा नहीं मिलता। पिछले चार साल में दर्जनों से भी ज्यादा बार स्टडी के लिए गया, लेकिन 4 बार ही पास हो पाया। अभी एक ट्रायल के लिए टेस्ट देकर आया हूं। यह उसी का डॉक्यूमेंट है। इस बार भी फेल हो गया। अब तीन महीने बाद नंबर आएगा।’ सामने जनकभाई की पत्नी अनशा बेन जमीन पर बैठी हमारी बातें सुन रही हैं। कहती हैं, ‘यदि मैं स्टडी में पास हो जाती, तो इन्हें स्टडी नहीं कराने देती। लेकिन मैं तो पहली बार में ही फेल हो गई थी। मेरा वजन कम था। जब ये स्टडी पर जाते हैं, तो हर वक्त मन उधर ही लगा रहता है। जब तक इनका फोन नहीं आ जाता, नींद नहीं आती। डर लगता रहता है कि इन्हें कुछ हो गया तो… मैं तो विधवा हो जाऊंगी, लेकिन पैसे के लिए सब कुछ दांव पर लगाना पड़ता है।’ ------------------------------------- 1- ब्लैकबोर्ड-5 करोड़ मुआवजा शानो-शौकत में उड़ाया:3 करोड़ की जमीन खरीदी, 1 करोड़ का मकान; 80-80 लाख की शादियां- अब रोज कमाने से घर चल रहा एक सच्ची कहानी- ग्रेटर नोएडा के किसान रामेश्वर सिंह की। 12 एकड़ जमीन सरकार ने ली और बदले में उन्हें सवा 5 करोड़ रुपए दिए। पैसा खाते में आते ही जिंदगी बदल गई। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड-‘एक्स्ट्रा सर्विस’ न देने पर मारी गई थी अंकिता भंडारी:मां-बाप ने खुद को घर में बंद किया; न कमा रहे, न राशन खरीद पा रहे दिल्ली से आए मीडिया के लोग दिनभर अंकिता भंडारी के माता-पिता से बात करने के लिए उनके घर के बाहर बैठे रहे, लेकिन वे घर पर ताला लगाकर चले गए थे। तब तक नहीं लौटे, जब तक मीडिया के लोग वापस नहीं चले गए। अगले दिन मैं बिना बताए उनके घर पहुंची। वह हड़बड़ा गईं… पूरी स्टोरी यहां पढ़ें

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