अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अपने आक्रामक रुख को और अधिक तेज करते हुए तेहरान को 'डील या टोटल सरेंडर' का कड़ा अल्टीमेटम दिया है। सोमवार को एक तीखे बयान में अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरानी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वे पर्दे के पीछे निजी तौर पर बातचीत के लिए उत्सुक रहते हैं, लेकिन सार्वजनिक मंचों पर इसका खंडन कर रहे हैं। ट्रंप के इस ताजा और आक्रामक बयान से मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच भू-राजनीतिक तनाव एक बार फिर से चरम पर पहुंच गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी सुगबुगाहट तेज हो गई है।ईरानी नेतृत्व का दोहरा चरित्र और गुप्त बातचीत का दावाअमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान की नीतियों पर प्रहार करते हुए कहा कि ईरानी नेता बेहद दोहरा चरित्र अपना रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एक तरफ जहां गुप्त माध्यमों से बातचीत की गुहार लगाई जाती है और बैठकें तय होती हैं, वहीं दूसरी तरफ सार्वजनिक रूप से यह ढिंढोरा पीटा जाता है कि वे अमेरिका के साथ किसी भी तरह की कोई चर्चा नहीं कर रहे हैं और केवल ओमान के जरिए ही संवाद हो रहा है। ट्रंप ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि ईरान को दुनिया के किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी और इस मामले पर वाशिंगटन का रुख पूरी तरह से स्पष्ट और अडिग है।होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी नौसेना का पूर्ण दबदबाईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) पर नियंत्रण किए जाने के दावों को खारिज करते हुए ट्रंप ने कहा कि यह महज खोखली बयानबाजी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अमेरिकी नौसेना और सख्त नाकेबंदी का पूरी तरह से नियंत्रण है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि जब तक कोई ठोस समझौता नहीं हो जाता, तब तक अमेरिकी अनुमति के बिना ईरान के अंदर कोई भी माल न तो आ सकेगा और न ही बाहर जा सकेगा। उन्होंने साफ कर दिया कि जब तक ईरान पूरी तरह से समर्पण नहीं करता या कोई मजबूत कूटनीतिक डील नहीं होती, तब तक अमेरिका का आर्थिक और सैन्य शिकंजा यूं ही कसा रहेगा।कूटनीति के बीच तीखे बयानों से गरमाया मध्य पूर्व का राजनीतिक माहौलविशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह अल्टीमेटम ऐसे समय में आया है जब विभिन्न बिचौलियों के माध्यम से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक चैनलों को खुला रखने की कोशिशें चल रही थीं। हालांकि, सार्वजनिक तौर पर लगातार आ रहे तीखे और आक्रामक बयानों ने शांति वार्ताओं की उम्मीदों को झटका दिया है। ट्रंप के इस रुख ने साफ कर दिया है कि अमेरिका ईरान पर अपनी अधिकतम दबाव की नीति को और अधिक कड़ाई से लागू करने के मूड में है, जिससे आने वाले दिनों में क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में पिछले कई हफ्तों से चल रहे भीषण विरोध प्रदर्शनों और बगावत के बीच पाकिस्तान सरकार की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। अपनी नाकामियों और अत्याचारों को दुनिया की नजरों से छिपाने के लिए अब पाकिस्तानी हुक्मरानों ने मीडिया पर सख्त प्रतिबंध लगा दिए हैं। स्थानीय और क्षेत्रीय समाचार पोर्टलों के साथ-साथ प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय न्यूज चैनल 'अल जजीरा इंग्लिश' की पहुंच को भी देश के कई हिस्सों में बाधित कर दिया गया है। इसके अलावा इमरान खान की पार्टी, मुख्य विपक्षी दलों और सरकार की पोल खोलने वाले कई प्रमुख यूट्यूब चैनलों को भी बंद करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि सच बाहर न आ सके।महिलाओं और बच्चों की भारी भीड़ के बीच सुरक्षा बलों ने चलाई गोलियांPoK में हालात पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर होते जा रहे हैं और स्थानीय पुलिस प्रशासन भी प्रदर्शनकारियों के आक्रोश को थामने में नाकाम साबित हो रहा है। रविवार देर रात रावलकोट इलाके में सुरक्षा बलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नागरिकों पर कथित तौर पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह खौफनाक कार्रवाई ऐसे समय में हुई जब प्रदर्शन स्थलों पर महिलाओं और बच्चों की भारी मौजूदगी थी। पिछले 50 दिनों से लगातार बच्चे और महिलाएं सड़कों पर डटे हुए हैं और रविवार को इनकी संख्या में अचानक और इजाफा हो गया था, जिसके बाद पाकिस्तानी सेना ने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं।संसाधनों के दोहन और अनदेखी से उबल रहा PoK, अब तक 40 मौतेंएक आधिकारिक सूत्र ने नाम न छापने की शर्त पर खुलासा किया है कि सुरक्षा बलों की इस बर्बर कार्रवाई में अब तक कम से कम 40 लोगों की जान जा चुकी है। खुफिया एजेंसियों में इस बात का बड़ा डर सता रहा है कि हताश हो चुकी पाकिस्तानी सरकार अब इलाके के लोगों में खौफ पैदा करने के लिए महिलाओं और बच्चों को सीधे तौर पर निशाना बना सकती है। प्रदर्शनकारियों का मुख्य आरोप है कि उनके इलाकों के प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन किया जा रहा है और पाकिस्तान सरकार उनकी लगातार उपेक्षा कर रही है, जिससे जनता का गुस्सा सातवें आसमान पर है।भारत ने नकारा PoK चुनाव का ढोंग, खैबर पख्तूनख्वा में आत्मघाती हमलादूसरी तरफ, PoK में हुए विधानसभा चुनावों के दूसरे चरण में पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) के बहुमत का दावा किया जा रहा है, जिसे भारत ने सिरे से खारिज कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट कर दिया है कि पूरा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख भारत का अभिन्न अंग है और यह चुनाव केवल मानवाधिकार उल्लंघनों को छिपाने का एक दिखावा मात्र है। वहीं दूसरी ओर, पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के स्वात जिले में एक शांति रैली के दौरान पुलिस थाने को निशाना बनाकर किए गए भीषण आत्मघाती हमले में मरने वालों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है, जिसमें कई सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं।
आतंकवाद को पनाह देने और दूसरे देशों के मामलों में दखल देने वाला पाकिस्तान अब खुद अपने ही आंतरिक विद्रोहों और टूट की कगार पर खड़ा है। गुलाम कश्मीर (PoK) में चल रहे तीव्र विरोध प्रदर्शनों के बीच अब बलूचिस्तान ने पाकिस्तान से पूरी तरह रिश्ता खत्म करने का बिगुल फूंक दिया है। 'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' ने आधिकारिक तौर पर घोषणा कर दी है कि वे हर साल 11 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाएंगे। इस बड़े ऐलान के साथ ही बलोच नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और दुनिया भर के देशों से अपने समर्थन की जोरदार अपील की है, ताकि इस क्षेत्र में पाकिस्तानी दमन से मुक्ति मिल सके।पाकिस्तान के बाहर भी विदेशों में फहराया जाएगा स्वतंत्र बलूचिस्तान का झंडाबलोच लिबरेशन नेता मीर यार बलूच ने दुनिया भर में रह रहे तमाम बलोच नागरिकों से अपील की है कि वे आगामी 11 अगस्त को एकजुट होकर अपना स्वतंत्रता दिवस मनाएं। उन्होंने निर्देश दिया है कि लोग अपने घरों, बाजारों, दुकानों और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर 'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' का झंडा फहराएं। बलोच नेताओं का कहना है कि पाकिस्तान की दमनकारी और विस्तारवादी नीतियों ने न केवल इस भू-भाग को तबाह किया है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी अशांति फैलाई है। चाहे कश्मीर के मुद्दे पर जहर उगलना हो, बलूचिस्तान में बर्बर सैन्य कार्रवाई करना हो या परमाणु परीक्षण, पाकिस्तान की नीतियों से केवल खून-खराबा ही हुआ है।11 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाने का ऐतिहासिक और कानूनी कारणइतिहास के पन्नों का हवाला देते हुए बलूचिस्तान के नेताओं ने बताया कि आधिकारिक रूप से पहली बार 11 अगस्त 1947 को ही बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में घोषित किया गया था। उस समय भारत और पाकिस्तान का औपचारिक विभाजन भी नहीं हुआ था। दावा किया जाता है कि उस दौरान 'ऑल इंडिया रेडियो' और प्रतिष्ठित अमेरिकी अखबार 'न्यूजीलैंड/न्यूयॉर्क टाइम्स' ने भी इस स्वतंत्रता की घोषणा को प्रमुखता से कवर किया था। इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के आधार पर बलूचिस्तान के लोग 11 अगस्त को अपना असली स्वाधीनता दिवस मानते आए हैं, जबकि पाकिस्तान बाद में 14 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाने लगा था।अंतरराष्ट्रीय समर्थन की गुहार: पाकिस्तान के साथ रहकर तरक्की नामुमकिन'रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान' की ओर से जारी बयान में दो टूक कहा गया है कि पाकिस्तान के अवैध कब्जे और उसके साथ रहकर बलूचिस्तान कभी भी समृद्ध या सुरक्षित नहीं हो सकता। पाकिस्तानी सेना के अत्याचारों से तंग आ चुके बलोच नेतृत्व ने वैश्विक शक्तियों और मानवाधिकार संगठनों से गुहार लगाई है कि वे बलूचिस्तान की आजादी का समर्थन करें, ताकि दक्षिण एशिया क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता स्थापित हो सके। इस बड़े ऐलान के बाद वैश्विक कूटनीति के गलियारों में पाकिस्तान की मुश्किलें और अधिक बढ़ती हुई नजर आ रही हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत समेत दुनिया के कई देशों पर नए टैरिफ थोपा जाना अब खुद उनके लिए गले की फांस बनता जा रहा है। अमेरिका के 25 राज्यों के एक मजबूत गठबंधन ने ट्रंप प्रशासन के इस विवादास्पद फैसले के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए न्यूयॉर्क स्थित यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड में आधिकारिक रूप से मुकदमा दर्ज करा दिया है। राज्यों का आरोप है कि व्हाइट हाउस कानून का गलत इस्तेमाल करके अमेरिकी नागरिकों, परिवारों और व्यवसायों पर गैर-कानूनी तरीके से कर का बोझ डाल रहा है। इस कानूनी शिकंजे के बाद ट्रंप प्रशासन देश के भीतर ही चौतरफा घिरता नजर आ रहा है।60 से अधिक व्यापारिक साझेदारों पर लगाया गया है अतिरिक्त करबता दें कि इससे पहले अमेरिकी प्रशासन ने भारत समेत अपने करीब 60 ट्रेड पार्टनर्स पर 10 से 12.5 फीसदी तक का अतिरिक्त आयात शुल्क लगाने का बड़ा ऐलान किया था। ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि यह कदम उन देशों के खिलाफ उठाया गया है जो बंधुआ मजदूरी से बने सामानों के निर्यात को रोकने के लिए पुख्ता कदम नहीं उठा रहे हैं। हालांकि, इस प्रस्ताव के तहत शुरुआती चर्चा में भारत पर 12.5% टैक्स लगाने की बात थी, जिसे बाद में घटाकर 10% कर दिया गया था। साथ ही, कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस और खाद जैसी आवश्यक वस्तुओं को इस दायरे से बाहर रखा गया था, लेकिन इसके बावजूद घरेलू स्तर पर भारी विरोध शुरू हो गया है।'1974 के ट्रेड एक्ट के नाम पर कानूनी नियमों की हो रही अनदेखी'मुकदमा दायर करने वाले अमेरिकी राज्यों ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत लागू किए गए इन नए शुल्कों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स और ओरेगन के अटॉर्नी जनरल डैन रेफील्ड ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि धारा 301 का इस्तेमाल किसी विशिष्ट देश या कंपनी की व्यापारिक नीतियों की जांच के लिए किया जाता है, न कि सभी अमेरिकी आयातों पर एकमुश्त भारी टैरिफ थोपने के लिए। राज्यों का यह भी कहना है कि सामान्य तौर पर एक साल में पूरी होने वाली जटिल जांच प्रक्रिया को महज़ ढाई महीने में ही जल्दबाजी में पूरा दिखा दिया गया, जो पूरी तरह से संदिग्ध और बहानेबाजी है।सुप्रीम कोर्ट से पहले भी कई कानूनी लड़ाइयां हार चुके हैं ट्रंपयह पहला मौका नहीं है जब अमेरिकी राष्ट्रपति को अपनी टैक्स नीतियों को लेकर अदालती लड़ाई का सामना करना पड़ रहा हो। इससे पहले इस साल की शुरुआत में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत लगाए गए ट्रंप के शुल्कों को असंवैधानिक करार दिया था। सर्वोच्च अदालत से करारा झटका मिलने के बाद ट्रंप प्रशासन ने ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत वैश्विक टैरिफ लगाने की कोशिश की, जिसे भी अदालतों ने गैर-कानूनी ठहरा दिया। अब धारा 301 का सहारा लेने के बाद 25 राज्यों के इस बड़े कानूनी दांव ने ट्रंप प्रशासन की मुश्किलें और अधिक बढ़ा दी हैं।
पाकिस्तान को ट्रंप ने दिखाया ठेंगा... अमेरिका-ईरान वार्ता से मुनीर-शहबाज बाहर
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में शामिल देशों का जिक्र करते हुए सऊदी अरब, यूएई और कतर के नाम लिए, लेकिन पाकिस्तान का नाम नहीं लिया, जबकि इससे पहले रिटायर्ड जनरल जैक कीन पाकिस्तान और कतर पर ईरान के पक्ष में झुकाव रखने का आरोप लगा चुके थे.
अमेरिका और ईरान के बीच क्या फिर होगी बातचीत? देखें US TOP-10
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच फिर से बातचीत शुरु होगी. ट्रंप के मुताबिक सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान की अपील के बाद अमेरिका ने प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को टाल दिया है. उन्होनें दावा किया कि होर्मुज स्ट्रेट और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर समझौते की दिशा में बातचीत होगी. वहीं ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर वार्ता आखिरी चरण में है.
UKMTO ने ओमान तट पर मालवाहक जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल हमले की शुरू की जांच
अल-खसाब [ओमान], 4 अगस्त (एएनआई): यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (यूकेएमटीओ) ने मंगलवार को कहा कि ओमान के अल-खसाब से लगभग 20 समुद्री मील उत्तर-पूर्व में एक मालवाहक जहाज अज्ञातProjectile से टकरा गया। यूकेएमटीओ ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि उसे मालवाहक जहाज द्वारा वीएचएफ चैनल 16 पर संदेश प्रसारित करने के बाद घटना के संबंध में एक संकट कॉल प्राप्त हुई। “यूकेएमटीओ को ओमान के अल-खसाब से 20 समुद्री मील उत्तर-पूर्व में एक घटना की रिपोर्ट मिली है। एक मालवाहक जहाज ने वीएचएफ 16 पर प्रसारित किया है कि वे एक अज्ञातProjectile से टकरा गए हैं। अधिकारी जांच कर रहे हैं,” यूकेएमटीओ ने कहा। यह घटना ईरान के साथ चल रही बातचीत के संबंध में सोमवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की टिप्पणियों के बाद क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच आई है। राष्ट्रपति ट्रम्प ने ओवल ऑफिस में संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर और ईरान के राजनयिक हस्तक्षेप के बाद ईरान के खिलाफ नियोजित सैन्य हमले को टाल दिया था। “यह आखिरी मौका है। यह कुछ ऐसा नहीं है जिसे यदि यह नहीं होता है, तो यह उनके लिए एक अच्छा दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने का आखिरी मौका है,” ट्रम्प ने वार्ताओं का जिक्र करते हुए कहा। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान के अनुरोध पर बातचीत हो रही थी और दोहराया कि तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना वाशिंगटन का प्राथमिक उद्देश्य बना हुआ है। सोमवार को पहले, ट्रम्प ने यह भी कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के संबंध में चर्चा चल रही है और जोर देकर कहा कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार रखने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उनकी टिप्पणियों के बाद ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष वार्ताओं की रिपोर्ट को खारिज कर दिया था और कहा था कि तेहरान वाशिंगटन के साथ द्विपक्षीय वार्ता में शामिल नहीं है। बघेई ने यह भी कहा था कि ईरान और ओमान के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से एक नए समुद्री यातायात मार्ग पर समझ केवल सुरक्षित जहाज आवाजाही के लिए एक तकनीकी व्यवस्था थी और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जलमार्ग को फिर से खोलने का संकेत नहीं देती थी। मालवाहक जहाज पर कथित हमला ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक, होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से क्षेत्रीय सुरक्षा और नौपरिवहन पर राजनयिक प्रयास जारी हैं। (एएनआई)
UGC की मंजूरी से भारत में खुलेंगे 15 विदेशी विश्वविद्यालय और उच्च शिक्षा का होगा विस्तार
भारत में उच्च शिक्षा के विस्तार को लेकर एक बड़ा कदम उठाया गया है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने 15 विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में अपने कैंपस स्थापित करने की अनुमति दे दी है। इन संस्थानों में ऑस्ट्रेलिया, इटली, संयुक्त राज्य अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम के विश्वविद्यालय शामिल हैं। कहां खुलेंगे नए कैंपस? ये विदेशी विश्वविद्यालय भारत के प्रमुख शहरों में अपने परिसर स्थापित करेंगे। स्वीकृत शहरों में बेंगलुरु, ग्रेटर नोएडा, गुरुग्राम, मुंबई और चेन्नई जैसे महत्वपूर्ण शैक्षिक और व्यावसायिक केंद्र शामिल हैं। यह कदम भारत को एक वैश्विक शैक्षिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास है। UGC की मंजूरी और प्रक्रिया विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने इन विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में अपनी शाखाएं खोलने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए थे। इन दिशानिर्देशों का पालन करने वाले विश्वविद्यालयों को ही मंजूरी दी गई है। यह सुनिश्चित करेगा कि भारत में खुलने वाले विदेशी कैंपस उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा प्रदान करें और स्थानीय नियामक निकायों के मानकों का पालन करें। शिक्षा के क्षेत्र में नए अवसर इन विदेशी विश्वविद्यालयों के भारत में कैंपस खुलने से भारतीय छात्रों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्राप्त करने के अधिक अवसर मिलेंगे। इससे न केवल विदेशी शिक्षा के लिए विदेश जाने वाले छात्रों की संख्या कम होगी, बल्कि यह भारत में शिक्षा की गुणवत्ता को भी बढ़ाएगा। साथ ही, यह विभिन्न देशों के साथ शैक्षिक सहयोग को भी बढ़ावा देगा। क्या होंगे फायदे? यह पहल भारत को उच्च शिक्षा के लिए एक पसंदीदा गंतव्य बनाने में मदद करेगी। छात्रों को विभिन्न देशों के शैक्षणिक पाठ्यक्रमों और शोध के अवसरों तक पहुंच मिलेगी। इसके अतिरिक्त, यह स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं में रोजगार के अवसर भी पैदा करेगा और भारत में शिक्षा के क्षेत्र में नवाचार को प्रोत्साहित करेगा।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों को लेकर अमेरिका के भीतर ही बड़ा कानूनी और राजनीतिक संग्राम छिड़ गया है। डेमोक्रेटिक पार्टी के नेतृत्व वाले अमेरिका के 25 राज्यों के एक समूह ने सोमवार को अदालत का रुख किया है। इन राज्यों ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) समेत 60 व्यापारिक साझेदार देशों (Trading Partner Countries) से होने वाले आयात पर लगाए गए नए टैरिफ को चुनौती देते हुए मुकदमा दायर किया है। राज्यों का तर्क है कि ट्रंप प्रशासन इसी तरह के कदमों पर कोर्ट के कई फैसलों के बावजूद एक बार फिर अपनी कानूनी सीमा से बाहर जाकर काम कर रहा है। न्यूयॉर्क में US कोर्ट ऑफ़ इंटरनेशनल ट्रेड में दायर इस मुकदमे में 10% से 12.5% तक के उन टैरिफ को निशाना बनाया गया है, जो पिछले महीने ट्रेड एक्ट, 1974 की धारा 301 के तहत लागू हुए थे। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ये ड्यूटी उन देशों के खिलाफ हैं जो जबरन मजदूरी से बने सामान के एक्सपोर्ट को रोकने के लिए पर्याप्त कदम उठाने में नाकाम रहे हैं। यह मामला ट्रंप की टैरिफ स्ट्रैटेजी की नई परीक्षा है, जो US कोर्ट में बार-बार झटके लगने के बावजूद कायम रही है। US राज्यों का कहना है कि ट्रंप कोर्ट के फैसलों को नहीं मान रहे हैं यह मुकदमा ओरेगन और न्यूयॉर्क समेत 25 राज्यों ने दायर किया है, जिनके गवर्नर या अटॉर्नी जनरल डेमोक्रेटिक पार्टी से हैं। राज्यों का तर्क है कि ट्रंप एक अलग कानूनी आधार का इस्तेमाल करके उन बड़े इम्पोर्ट टैक्स को फिर से लागू करने की कोशिश कर रहे हैं जिन्हें कोर्ट पहले ही गैर-कानूनी करार दे चुका है। शिकायत के अनुसार, धारा 301 का इस्तेमाल ऐतिहासिक रूप से अनुचित व्यापार प्रथाओं के आरोपी खास देशों या उद्योगों को निशाना बनाने के लिए किया गया है - न कि लगभग सभी US इम्पोर्ट पर व्यापक टैरिफ लगाने के लिए। शिकायत में यह भी तर्क दिया गया है कि प्रशासन जबरन मजदूरी का बहाना बनाकर उन टैरिफ को फिर से लागू कर रहा है जिन्हें कोर्ट पहले ही रद्द कर चुका है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ओरेगन के अटॉर्नी जनरल डैन रेफील्ड ने एक बयान में कहा, हर कदम पर हारने के बावजूद, ट्रंप एक बार फिर कामकाजी परिवारों और ओरेगन के स्थानीय व्यवसायों के लिए और अधिक मुश्किलें पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। नए टैरिफ 60 ट्रेडिंग पार्टनर देशों पर लागू विवादित टैरिफ की घोषणा 24 जुलाई को की गई थी और ये यूरोपीय संघ और भारत समेत 60 ट्रेडिंग पार्टनर देशों से होने वाले इम्पोर्ट पर लागू होते हैं। कुछ देशों को कड़े नियम लागू करने के बाद कम टैरिफ दरें मिलीं। उदाहरण के लिए, प्रशासन के एक सीनियर अधिकारी के अनुसार, भारत के लिए टैरिफ दर 12.5% से घटाकर 10% कर दी गई। कुछ खास प्रोडक्ट्स, जैसे तेल, नैचुरल गैस, फर्टिलाइज़र और US-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट के तहत ड्यूटी-फ्री सुविधा पाने वाले सामानों को नए टैरिफ से छूट दी गई। इसे भी पढ़ें: भारत में कई WhatsApp Accounts अचानक हुए 24 घंटे के लिए ब्लॉक, रिव्यू में जाने से यूजर्स परेशान, कंपनी ने दी सफाई नए टैरिफ का ऐलान करते हुए US ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने इस कदम का बचाव किया। अमेरिका में लगभग एक सदी से ज़बरदस्ती मज़दूरी से बने सामान के इंपोर्ट पर रोक है और इसे सख्ती से लागू किया जाता है; अब हमारे ट्रेडिंग पार्टनर्स के लिए भी ऐसा ही करने का समय आ गया है। ट्रंप ने एक नई कानूनी रणनीति अपनाई ये टैरिफ ट्रंप के आर्थिक एजेंडा के मुख्य स्तंभों में से एक को बचाने की उनकी नई कोशिश है, क्योंकि इससे पहले के उपायों को कानूनी तौर पर काफी झटके लगे थे। इस साल की शुरुआत में, US सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) राष्ट्रपति को बड़े पैमाने पर ग्लोबल टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है, जिससे ट्रंप की एक अहम ट्रेड पहल रद्द हो गई। इसके जवाब में, ट्रंप ने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 122 के तहत दुनिया भर में अस्थायी टैरिफ लगाए। बाद में US कोर्ट ऑफ़ इंटरनेशनल ट्रेड ने उन लेवी को भी गैर-कानूनी करार दिया, हालांकि प्रशासन की अपील के दौरान वे लागू रहे। इसे भी पढ़ें: Ramayana की रिलीज से पहले स्पेशल स्क्रीन की मांग, श्री रामलीला महासंघ ने निर्माताओं को लिखा पत्र, विरोध प्रदर्शन की दी चेतावनी कानूनी चुनौतियों के कारण उन विकल्पों के बाद, प्रशासन ने अब ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 का रुख किया है, एक ऐसा कानून जिसका इस्तेमाल पारंपरिक रूप से विदेशी सरकारों की अनुचित या भेदभावपूर्ण व्यापार प्रथाओं का जवाब देने के लिए किया जाता है। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान चीन पर टैरिफ लगाने के लिए इसी प्रावधान का इस्तेमाल किया था, और वे उपाय कानूनी चुनौतियों में टिके रहे क्योंकि वे किसी खास देश को टारगेट करके लगाए गए थे। कोर्ट से बार-बार झटके मिलने के बावजूद ट्रंप US मैन्युफैक्चरिंग को फिर से शुरू करने और ग्लोबल ट्रेड को नया रूप देने के लिए टैरिफ को एक बड़े हथियार के तौर पर इस्तेमाल करते रहे हैं। पिछले साल, उन्होंने तर्क दिया था कि अमेरिका का लंबे समय से चला आ रहा ट्रेड डेफिसिट एक राष्ट्रीय आपातकाल है, और आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए लगभग हर देश से होने वाले इंपोर्ट पर टैरिफ लगाए, हालांकि बाद में कोर्ट ने उन उपायों पर रोक लगा दी। Stay updated with InternationalNews in Hindi on Prabhasakshi
अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य तनाव और संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि ईरान के पास किसी समझौते पर पहुँचने का यह आखिरी मौका है। ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत जारी है, हालांकि ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी दावों को खारिज किया है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी सेना (CENTCOM) ने ईरान को सबक सिखाने और उस पर दबाव बनाने के लिए गैर-पारंपरिक और अपरंपरागत रणनीतियों पर विचार करना शुरू कर दिया है। इसे भी पढ़ें: भारत में कई WhatsApp Accounts अचानक हुए 24 घंटे के लिए ब्लॉक, रिव्यू में जाने से यूजर्स परेशान, कंपनी ने दी सफाई व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और अन्य क्षेत्रीय सहयोगियों के अनुरोध पर बातचीत जारी रखने पर सहमति जताई है। हालांकि ईरान के विदेश मंत्रालय ने वाशिंगटन के साथ बातचीत के दावों को खारिज कर दिया, लेकिन ट्रंप ने जोर देकर कहा कि चर्चा चल रही है। ट्रंप ने कहा, हम अभी बात कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा, यह उनके लिए एक अच्छे समझौते पर हस्ताक्षर करने का आखिरी मौका है। मैं उन्हें कड़ी कार्रवाई से पहले हर संभव आखिरी मौका देना चाहता हूँ। CENTCOM ने ईरान पर कार्रवाई के लिए 'नए और अनोखे' विचारों की मांग की इस बीच, खबर है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान पर दबाव बनाने के नए तरीकों के लिए सैन्य विश्लेषकों से नए विचारों की मांग की है। इसे भी पढ़ें: FSSAI का Dabur India पर बड़ा एक्शन! '100% शुद्ध' और 'ऑर्गेनिक' के गुमराह करने वाले दावों पर लगी रोक, 15 दिनों में मांगी रिपोर्ट CNN की एक रिपोर्ट के अनुसार, CENTCOM की खुफिया शाखा के एक अधिकारी ने पिछले हफ्ते एक ईमेल भेजा था जिसमें कर्मचारियों से ईरान पर दबाव बनाने और उसे दंडित करने के नए, अनोखे और अपरंपरागत तरीकों का प्रस्ताव देने को कहा गया था। क्राउडसोर्सिंग-शैली के इस अनुरोध को अमेरिकी सेना के लिए एक असामान्य कदम माना जा रहा है। इससे संकेत मिलता है कि ट्रंप प्रशासन अपने विकल्पों पर फिर से विचार कर रहा है क्योंकि वह ईरान को वाशिंगटन की शर्तों पर समझौते के लिए मजबूर करना चाहता है। मामले से परिचित एक दूसरे सूत्र ने CNN को बताया कि CENTCOM सभी उपलब्ध विकल्पों की समीक्षा कर रहा है और उसने अपनी मौजूदा रणनीति पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता को स्वीकार किया है। CENTCOM के प्रवक्ता कैप्टन टिमोथी हॉकिन्स ने CNN को दिए एक बयान में कहा, अमेरिकी सेंट्रल कमांड का नए और अनोखे तरीकों से सोचने और काम करने का लंबा इतिहास रहा है। उन्होंने आगे कहा, खासकर एडमिरल कूपर, ऑपरेशनल परफॉर्मेंस के उच्चतम स्तर को हासिल करने के लिए रैंक की परवाह किए बिना हमारी बेहतरीन टीम के सदस्यों से संपर्क करते हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु कार्यक्रम पर फोकस ट्रंप के अनुसार, चर्चा होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से निपटने पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि रणनीतिक जलमार्ग सचमुच कल तक फिर से खुल सकता है, जबकि ईरान के परमाणु-मुक्त होने की प्रक्रिया में थोड़ा समय लग सकता है। अमेरिका और ईरान 28 फरवरी से ही संघर्ष में उलझे हुए हैं, जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान के खिलाफ अचानक हमले किए थे। हालांकि बीच-बीच में हुई कूटनीतिक कोशिशों से कुछ समय के लिए शांति रही है, लेकिन टकराव जारी है। ईरान के पास अब भी एनरिच्ड यूरेनियम का भंडार है और वह इस इलाके में अमेरिका और उसके सहयोगियों के ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला करने की क्षमता रखता है। होर्मुज में कार्गो जहाज पर हमला एक नई घटना में, ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी, UK मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशन्स (UKMTO) ने मंगलवार सुबह बताया कि ओमान के तट के पास होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरते समय एक अज्ञात कार्गो जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल (किसी अज्ञात चीज़) से हमला हुआ। एजेंसी ने कहा कि अधिकारी घटना की जांच कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने जहाज की पहचान या संभावित नुकसान या हताहतों के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। Stay updated with InternationalNews in Hindi on Prabhasakshi
असम: नाबालिग के साथ रेप और हत्या के मामले में तीन किशोर गिरफ्तार, पीड़ित परिवार ने की फांसी देने की मांग Jagran असम में 'निर्भया' जैसा कांड! 15 साल की बच्ची की रेप के बाद हत्या; चेहरा कुचला, प्राइवेट पार्ट में रॉड डाली! Hindustan असम में 15 वर्षीय किशोरी से दरिंदगी के बाद हत्या, 5 संदिग्ध हिरासत में ETV Bharat असम में नाबालिग के साथ रेप के बाद बेरहमी से हत्या, तीन किशोर गिरफ्तार, मां ने की आरोपियों को फांसी देने की मांग ndtv.in असम में 15 साल की लड़की की बेरहमी से हत्या, पांच लोग गिरफ्तार bhaskarhindi.com
'पैसा हमारा, फेवर ईरान का ले रहे थे...', जंग में 'चौधरी' बन फिर मजधार में फंसा पाकिस्तान
रिटायर्ड अमेरिकी जनरल जैक कीन ने पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि ये दोनों देश वॉशिंगटन के बजाय तेहरान के पक्ष में झुके हुए हैं. उन्होंने सऊदी अरब पर भी अमेरिका को सख्त सैन्य कार्रवाई से रोकने का आरोप लगाया.
ईरान और अमेरिका में बढ़ा तनाव, मुश्किल में फंसे ट्रंप, तेहरान ओमान की हुई दोस्ती, युद्ध लेगा U-turn?
अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी फिर बढ़ गई है। ईरान ने अमेरिका से बात करने से साफ इनकार कर दिया है। वहीं, ट्रंप अपने ही देश में मुश्किलों में फंस गए हैं। ईरान और ओमान की दोस्ती बढ़ी, क्या युद्ध लेगा यू-टर्न?
आर्मी चीफ के बाद US राजदूत पर गिरी गाज, जेलेंस्की ने कर दी छुट्टी
जेलेंस्की ने यह फैसला तब किया है जब कीव रूस के हमलों से निपटने के लिए अमेरिका से अतिरिक्त पैट्रियट एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम मांग रहा है. यूक्रेन की राजदूत रहीं स्टेफानिशाइना भ्रष्टाचार रोधी एजेंसी की जांच के दायरे में बताई जा रही हैं.
भारत समेत 60 देशों पर लगाए टैरिफ को कोर्ट में चुनौती, 25 अमेरिकी राज्यों ने ट्रंप पर किया मुकद्दमा
भारत समेत 60 देशों पर लगाए टैरिफ को कोर्ट में चुनौती, 25 अमेरिकी राज्यों ने ट्रंप पर किया मुकद्दमा
Donald Trump के नए आयात शुल्क के खिलाफ 25 अमेरिकी राज्यों ने खटखटाई अदालत
सागर कुलकर्णीवाशिंगटन, चार अगस्त डेमोक्रेटिक पार्टी शासित 25 अमेरिकी राज्यों के एक समूह ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले को अदालत में चुनौती दी है, जिसके तहत अमेरिका के कुल आयात में 99.4 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली 60 अर्थव्यवस्थाओं पर नए आयात शुल्क लगाए गए हैं। अमेरिका ने बंधुआ मजदूरी पर पर्याप्त कार्रवाई न होने का हवाला देते हुए पिछले महीने इन 60 देशों पर 10 से 12.5 प्रतिशत तक के नए आयात शुल्क लगाए थे। ये शुल्क 24 जुलाई को समाप्त हो चुके 10 प्रतिशत के वैश्विक आयात शुल्क के स्थान पर लागू किए गए हैं। इन 25 राज्यों ने कई देशों पर फिर से शुल्क लागू करने के ट्रंप प्रशासन के फैसले के खिलाफ सोमवार को अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय का रुख किया। राज्यों का तर्क है कि इस कदम से पूरे देश में उपभोक्ताओं और कारोबारियों पर लागत का बोझ बढ़ेगा। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटीटिया जेम्स, गर्वनर कैथी होचुल और डेमोक्रेटिक राज्यों के इस समूह ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार न्यायालय से इन शुल्कों को अवैध घोषित करने का अनुरोध किया है। जेम्स ने एक बयान में कहा, ‘‘उच्चतम न्यायालय में हार के बाद भी प्रशासन (ट्रंप) एक बार फिर नए शुल्कों के जरिए परिवारों और कारोबारों पर अवैध रूप से अतिरिक्त कर का बोझ डालने की कोशिश कर रहा है।’’भारत उन 17 देशों में शामिल है, जिन पर अमेरिका ने 10 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया है। इससे पहले भारत पर 12.5 प्रतिशत शुल्क निर्धारित करने का प्रस्ताव था। भारत को यह राहत 14 जून को अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन कर बंधुआ मजदूरी से बने सामान के आयात पर प्रतिबंध लगाने के बाद मिली। बयान में कहा गया कि प्रशासन दावा कर रहा है कि वह वैश्विक व्यापार में बंधुआ मजदूरी पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से 1974 के व्यापार अधिनियम की धारा 301 के तहत कार्रवाई कर रहा है। याचिका में दलील दी गई कि यह वास्तव में उन व्यापक आयात शुल्कों को दोबारा लागू करने का एक बहाना भर है, जिन्हें लागू करने के प्रशासन के पूर्व प्रयास विफल हो चुके हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्रशासन ने धारा 301 के तहत निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया। न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल ने कहा, ‘‘प्रशासन इसे किसी भी तरह उचित ठहराने की कोशिश करे, लेकिन कानून और हमारा संविधान स्पष्ट करता है कि राष्ट्रपति को अपनी इच्छा के अनुसार किसी भी देश पर व्यापक शुल्क लगाने का अधिकार नहीं है।
'ईरान के पास बातचीत का आखिरी मौका': ट्रंप ने तेहरान को फिर दी धमकी; ईरानी विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
प्रशांत किशोर की बांकीपुर में जीत बीजेपी के लिए झटका और आरजेडी के लिए क्यों है ख़तरे की घंटी - BBC
प्रशांत किशोर की बांकीपुर में जीत बीजेपी के लिए झटका और आरजेडी के लिए क्यों है ख़तरे की घंटी BBC प्रशांत किशोर की जीत पर क्या बोलीं उनकी पत्नी जाह्नवी दास? BBC बांकीपुर-दतिया उपचुनाव में BJP की हार पर नितिन नवीन ने क्या कहा? मांजलपुर जीत पर भी सामने आया बयान India TV Hindi बांकीपुर उपचुनाव में जीत पर जन सुराज कार्यकर्ताओं ने मनाया जश्न Dainik Bhaskar Beat Report: किला BJP का ढहा, लेकिन PK की जीत तेजस्वी यादव के लिए कैसे बनेगी चुनौती? AajTak
सेउटा में विदेश से आकर फंसे 800 नाबालिग बच्चे, मां-बाप लापता
सेउटा में इस समय करीब 800 बच्चे बिना माता-पिता या किसी अभिभावक फंसे हैं. स्पेन के कानून के मुताबिक, बिना अभिभावक के आए नाबालिग बच्चों को विशेष संरक्षण दिया जाता है. फिलहाल कई बच्चे सरकारी संरक्षण केंद्रों में रह रहे हैं, लेकिन ये केंद्र भी अब पूरी तरह भर चुके हैं.
'मोदी हमारे ग्रेट फ्रेंड...', भारत का नाम लेकर नेतन्याहू ने US को दिखाया आईना
ईरान संघर्ष और बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा कि इजरायल भारत के साथ अपने रिश्तों में भारी निवेश कर रहा है, नरेंद्र मोदी उनके सबसे बड़े दोस्तों में हैं. उन्होंने कहा कि भारत से इजरायल को मिलने वाला समर्थन उन्हें निजी तौर पर भी अविश्वसनीय लगता है.
H-1B Visa Renewal: अमेरिका में नौकरी करने वाले भारतीयों को लग सकता है बड़ा झटका, बढ़ सकती है रिन्यूअल फीस
'अपने दोस्त नरेंद्र के साथ...' भारत की तारीफ में बोले नेतन्याहू, जानें क्या कहा इजरायली प्रधानमंत्री ने
अमेरिका-ईरान वार्ता में होर्मुज खोलने पर फोकस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि आगामी बातचीत उसके लिए आखिरी मौका होगी। उन्होंने बताया कि एक-दो दिनों में दोनों देशों के बीच वार्ता शुरू हो सकती है, जिसका पहला लक्ष्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना और बाद में ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करना है।
यूक्रेन से भिड़ने वाला था ईरान! 3 ठिकानों पर हमले का प्लान, टली जंग
ईरान ने यूक्रेन के तीन ठिकानों पर जवाबी हमला करने की तैयारी कर ली थी, लेकिन कीव की तरफ से आई कथित 'माफी' के बाद यह योजना रोक दी गई. ईरान की तरफ से यह बयान तब आया है जब कैस्पियन सागर में हमले के बाद ईरान-यूक्रेन के विदेश मंत्रियों ने फोन पर बातचीत की थी.
भारत पर नए टैरिफ लगाकर बुरे फंसे ट्रंप, अमेरिका के 25 राज्यों ने ठोक दिया मुकदमा
ट्रंप प्रशासन ने दावा किया था कि ये टैरिफ उन देशों पर लगाए गए हैं जो बंधुआ मजदूरी से बने सामान के निर्यात को रोकने के लिए कदम नहीं उठा रहे हैं। हालांकि राज्यों का कहना है कि यह टैरिफ लगाने का एक बहाना है।
वेनेजुएला: जून में आए भीषण भूकंप में 6125 लोगों की मौत
वरिष्ठ सांसद जॉर्ज रोड्रिगेज ने दावा किया है कि वेनेजुएला में जून में आए भूकंप में मृतकों की संख्या 6125 हो गई है. वेनेजुएला में 24 जून को दो शक्तिशाली भूकंप के झटके महसूस किए गए थे.
ईरान को आखिरी मौका: ट्रंप बोले, जल्द नतीजे पर पहुंचेगी बातचीत
ईरान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक इंटरव्यू के दौरान कहा कि ये बातचीत जल्द ही किसी न किसी नतीजे पर पहुंच जाएगी। यह कोई बहुत मुश्किल बात नहीं है
Donald Trump का दावा, ईरान के पास समझौता करने और अमेरिकी हमलों से बचने का आखिरी मौका
वाशिंगटन, तीन अगस्त (एपी) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि ईरान के साथ प्रस्तावित नयी वार्ता तेहरान के लिए समझौता करने और अमेरिका के हमलों से बचने का आखिरी मौका है। ट्रंप ने ओवल ऑफिस में कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अगले एक-दो दिन में बातचीत शुरू होगी, जिसके तहत होर्मुज जलडमरूमध्य दोबारा खोला जाएगा और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका की चिंताओं का समाधान निकालने का रास्ता तैयार होगा। राष्ट्रपति ने कहा, “पहला चरण जलडमरूमध्य को खोलने का है। दूसरा चरण परमाणु निरस्त्रीकरण का है।”ट्रंप ने कहा कि “इसमें थोड़ा समय लगेगा।”ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे सहयोगी खाड़ी देशों के आग्रह पर ईरान पर नए और बड़े हमले का आदेश देने का फैसला फिलहाल टाल दिया।
ईरान की चेतावनी, होर्मुज में दूसरा पासेज बना तो अमेरिकी युद्धपोत पर होगा हमला
ईरान के वरिष्ठ सलाहकार मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में तय रास्ते से अलग कोई दूसरा पासेज बनाने के लिए अगर अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए तो ईरान उन्हें निशाना बनाएगा, जबकि डोनाल्ड ट्रंप इसी बीच तेहरान के साथ बातचीत शुरू होने का दावा कर रहे हैं.
Satyanjal Pandey इस्लामाबाद में बने भारत के नए प्रभारी राजदूत
इस्लामाबाद, तीन अगस्त भारतीय राजनयिक सत्यांजल पांडे ने पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग में भारत के प्रभारी राजदूत के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। भारतीय मिशन ने सोमवार को यह जानकारी दी। वर्ष 2008 बैच के भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) अधिकारी पांडे ने गीतिका श्रीवास्तव का स्थान लिया है, जिन्हें अगस्त 2023 में इस पद पर नियुक्त किया गया था। भारतीय मिशन ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, डॉ. सत्यांजल पांडे ने एक अगस्त 2026 को इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग में प्रभारी राजदूत के तौर पर कार्यभार संभाला। उच्चायोग की पोस्ट को दोबारा साझा करते हुए पांडे ने लिखा, एक शानदार टीम का हिस्सा बनकर सम्मानित महसूस कर रहा हूं।’’इससे पहले वह श्रीलंका में भारत के उप उच्चायुक्त थे। अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा वापस लेने के भारत के फैसले के बाद पाकिस्तान द्वारा राजनयिक संबंधों का स्तर कम किए जाने के बाद इस्लामाबाद और दिल्ली स्थित भारतीय और पाकिस्तानी उच्चायोगों का नेतृत्व प्रभारी राजदूत कर रहे हैं।
पाकिस्तान से रिश्ता खत्म! बलूचिस्तान ने रख दी स्वतंत्रता दिवस की तारीख, दुनियाभर से मांग रहा समर्थन
बलूचस्तान ने ऐलान कर दिया है कि वह 11 अगस्त को अपना स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। इसके पीछे वजह 1947 को बताई गई है। जब भारत आजाद हुआ था तब बलूचिस्तान ने भी अपनी आजादी की घोषणा की थी।
अमेरिका ने ईरान पर बढ़ाया दबाव, सेंटकॉम ने होर्मुज स्ट्रेट पर और सख्त नाकाबंदी की
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने दावा किया कि ईरान के खिलाफ अमेरिका की नाकेबंदी और सख्त कर दी गई है
China: चीन में हर विदेशी पर रहती है खुफिया नजर? डाटा लीक ने खोली पोल, हर गतिविधि की बनती है डिजिटल प्रोफाइल--China Surveillance Leak: Data Exposure Reveals Real-Time Monitoring of Foreign Visitors and Digital Profiling
गाजा में कत्लेआम पर भड़के कतर-तुर्की-मिस्र, इजरायल नहीं रोक रहा बमबारी
कतर, मिस्र और तुर्की ने गाजा में इजरायली कार्रवाई, खासकर नागरिकों, महिलाओं, बच्चों और स्वास्थ्य ढांचे पर हमलों की कड़ी निंदा की है. इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय कानून का खुला उल्लंघन बताया है. गाजा सिटी के दक्षिण-पश्चिम में ताजा हमले में कम से कम दो लोग मारे गए हैं.
West Asia: ईरान में अब तक 50 जासूसी के आरोपियों को फांसी; ट्रंप बोले- तेहरान के पास अंतिम अवसर, कब थमेगी जंग?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान से बातचीत के दावों के बीच एक बार फिर यू-टर्न ले लिया है। इस बार ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व को 'दोहरे चरित्र वाला' बताया। ट्रंप ने कहा कि वह एक तरफ तो अमेरिका के साथ बातचीत के लिए गिड़गिड़ाते रहते हैं और बैठक तय होते ही खुलेआम कहते फिरते हैं कि कोई बातचीत नहीं हो रही है। यहां तक कि होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी बड़े-बड़े दावे करने लगते हैं।
होर्मुज में नया संकट! ओमान के पास कार्गो जहाज पर 'अज्ञात' प्रोजेक्टाइल से हमला
UKMTO ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक कार्गो जहाज़ पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमले की जानकारी दी है. UKMTO ने बताया कि ओमान के अल खसाब से 20 नॉटिकल मील उत्तर-पूर्व में यह घटना हुई है.
'ईरान नहीं चाहता हमला, अब परमाणु समझौते पर फैसला लेने का समय', डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान
ट्रंप ने कहा कि हम ईरान के परमाणु-निरस्त्रीकरण (denuclearization) पर बात करना चाहते हैं। ईरान के लिए एक अच्छे दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने का यह आखिरी मौका है।
दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच लंबित मुद्दों पर स्टील निभाएंगी अहम भूमिका : विदेश मंत्री चो ह्यून
सोल। दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने सोमवार को कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सोल में नई अमेरिकी राजदूत मिशेल स्टील, वॉशिंगटन तक अपनी 'सीधी पहुंच' का उपयोग करते हुए दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच लंबित मुद्दों को सुलझाने में अहम भूमिका निभाएंगी। योनहाप न्यूज टीवी को दिए इंटरव्यू में चो ने कहा, मुझे उम्मीद है कि दक्षिण कोरिया और अमेरिका के बीच लंबित मुद्दों पर विभिन्न स्तरों पर बातचीत होगी। कहा जाता है कि राजदूत की वॉशिंगटन तक सीधी पहुंच है, इसलिए मुझे उम्मीद है कि हम इसका इस्तेमाल दोनों देशों के रिश्तों में मौजूद कठिन मुद्दों को सुलझाने के लिए कर सकेंगे। योनहाप समाचार एजेंसी के मुताबिक, मिशेल स्टील गुरुवार को दक्षिण कोरिया पहुंचीं और उन्होंने अपना पदभार संभाल लिया। यह पद पिछले साल जनवरी से खाली पड़ा हुआ था। चो ह्यून मंगलवार को स्टील से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करने वाले हैं, जब वह विदेश मंत्रालय को अपने नियुक्ति पत्रों की प्रति सौंपेंगी। स्टील का आगमन ऐसे समय में हुआ है, जब सोल और वॉशिंगटन के बीच सुरक्षा और आर्थिक मामलों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे लंबित हैं। इनमें अमेरिका में दक्षिण कोरिया के निवेश संबंधी वादे और अमेरिकी शेयर बाजार में सूचीबद्ध कंपनी कूपांग इंक के खिलाफ सोल की नियामक कार्रवाई को लेकर पैदा हुआ तनाव भी शामिल है। यह कार्रवाई बड़े पैमाने पर डेटा लीक के बाद की गई थी। इसके अलावा, चो ने कहा कि उन्हें पता है कि चीनी विदेश मंत्री वांग यी 'जल्द ही' साउथ कोरिया जाएंगे। उनकी अप्रैल में हुई उत्तर कोरिया की यात्रा पर चर्चा होने की उम्मीद है। कोरिया नेशनल डिप्लोमैटिक अकादमी में हाल ही में हुए डेटा लीक के बारे में, जिसमें दक्षिण कोरिया के लगभग सभी राजनयिकों की निजी जानकारी उजागर होने की आशंका है, चो ने कहा कि विदेश मंत्रालय कड़े कदम उठाने की योजना बना रहा है। इनमें भविष्य में हैकिंग रोकने के लिए मजबूत फायरवॉल तैयार करना भी शामिल है। पिछले महीने दक्षिण कोरिया की अमेरिका में राजदूत कांग क्यूंग-वा ने मिशेल स्टील से मुलाकात के दौरान उनसे दोनों देशों के गठबंधन को एक 'नई ऊंचाई' तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आग्रह किया था। कांग और स्टील की मुलाकात 21 जुलाई को हुई थी, जब स्टील सोल के लिए रवाना होने वाली थीं। स्टील 30 जुलाई (कोरिया समयानुसार) को सोल पहुंचीं। उस समय दोनों देशों के सामने कई साझा जिम्मेदारियां थीं, जिनमें पिछले वर्ष हुए सुरक्षा, व्यापार और निवेश संबंधी द्विपक्षीय समझौतों को लागू करना भी शामिल है।
Ethiopia Landslide: पूर्वी अफ्रीका में भूस्खलन से 14 मौतें, कई लापता; इथियोपिया में धार्मिक आयोजन के समय तबाही--Ethiopia Landslide Updates Tsadqane Debre Mitmaq St Mary Monastery casualties rescue operation hindi news
PoK में पाकिस्तान की पोल खुली तो मीडिया पर लगाया बैन, महिलाओं और बच्चों पर निशाना
पीओके में कई सप्ताह से जारी अशांति के बीच अब पाकिस्तान की सरकार ने मीडिया पर प्रतिबंध लगा दिए हैं। अल जजीरा इंग्लिश पर भी बैन लगाया गया है। वहीं पाकिस्तान अब महिलाओं और बच्चों को निशाना बनाने की तैयारी कर रहा है।
दक्षिण कोरिया में हीट वेव का कहर, तापमान 41 डिग्री पार
दक्षिण कोरिया भी अभूतपूर्व भीषण गर्मी से जूझता रहा। देश के कई हिस्सों में रिकॉर्ड तोड़ तापमान दर्ज किया गया और बड़ी संख्या में लोग गर्मी से जुड़ी बीमारियों का शिकार हुए।
World: ऑस्ट्रेलिया में पुरुषों का यौन उत्पीड़न, पूर्व रग्बी कोच आरोपी;ब्रॉड पीक से तीन और शव बरामद, दो लापता
ट्रंप के नए टैरिफ पर अमेरिका में बवाल! 25 राज्यों ने किया केस
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए सीमा शुल्क (टैरिफ) को लेकर अमेरिका में विवाद बढ़ गया है. 25 राज्यों ने ट्रंप सरकार के खिलाफ मुकदमा दायर किया है. आरोप है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले को नजरअंदाज कर जबरदस्ती नया टैरिफ लगा रही है. कई राज्यों ने इसे अवैध करार दिया है.
Hamas Disarmament: नेतन्याहू और बोर्ड ऑफ पीस की बैठक में हमास निरस्त्रीकरण समझौते पर चर्चा; गाजा में शांति कब?---Israel Gaza War Board of Peace Envoy Meets Netanyahu Over Hamas Disarmament Deal
'समझौते का ये आखिरी मौका', ट्रंप की ईरान को फिर बड़ी धमकी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को नई बातचीत के जरिए समझौता करने का आखिरी मौका दिया है. उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा करने के लिए बातचीत जल्द शुरू हो सकती है. ट्रंप ने ईरान को धमकी दी कि ये मौका आखिरी है और अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका हमले को तेज कर सकता है.
Balochistan: 48 अभियानों में 97 पाकिस्तानी सैनिकों को मारने का दावा, बीएलएफ ने बढ़ाई इस्लामाबाद की मुश्किल?---Balochistan BLF Gaining Ground Against Pakistani Army Group Claims 97 Soldiers Killed in 48 Operations
Israel-India Ties: 'इस्राइल को अविश्वसनीय समर्थन'; नेतन्याहू ईरान में जंग के बीच भारत-PM मोदी पर और क्या बोले?---Netanyahu Praises PM Modi, Calls India Support Unbelievable Amid Iran Conflict
TMC में एक और टूट के कयास: पूर्व मंत्री और काकोली घोष के बीच कई मुलाकातें, क्या सियासी पाला बदलेंगी शशि पांजा?---TMC Crisis Shashi Panja Repeat Visit to NCPI MP Kakali Ghosh Dastidar Sparks Fresh Defection Speculation
तेल कंपनियों पर बिफरे ट्रंप: शवोन के CEO को अमेरिकी राष्ट्रपति की खरी-खरी, क्या घटेंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?--Trump Slams Chevron CEO, Demands Immediate Fuel Price Cuts Amid Rising Oil Costs
खैबर पख्तूनख्वा सुसाइड अटैक का सामने आया CCTV, दहशत में चीखते-भागते दिखे लोग
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में पुलिस स्टेशन के मुख्य गेट पर आत्मघाती हमला हुआ. जिसका CCTV वीडियो सामने आया है. CCTV में धमाके के बाद धुआं उठता और लोग जान बचाने के लिए भागते दिख रहे हैं. पुलिस स्टेशन के पास से एक शांति रैली गुजर रही थी. तभी एक आत्मघाती हमलावर मुख्य गेट के पास पहुंचा और खुद को विस्फोट से उड़ा लिया. देखें वीडियो.
शेख हसीना के भाषण से पहले बांग्लादेश में खलबली, भारत से लगाई ये गुहार
बांग्लादेश ने भारत से कहा है कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना या अवामी लीग से जुड़े किसी व्यक्ति को भारतीय जमीन से राजनीतिक भाषण देने या बांग्लादेश में अस्थिरता पैदा करने वाली गतिविधियां करने की अनुमति न दी जाए.
PAK में भारतीय एजेंट्स ने 30 आतंकी मारे, लश्कर का कुबूलनामा
लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े आतंकी रिजवान हनीफ ने दावा किया है कि पिछले तीन-चार साल में संगठन के 30 से ज्यादा आतंकी मारे गए. उसने इन हत्याओं के पीछे भारतीय खुफिया एजेंसियों का हाथ होने का आरोप लगाया, हालांकि भारत पहले भी ऐसे आरोपों को खारिज करता रहा है.
'डील या फिर सरेंडर', भड़के ट्रंप बोले- बातचीत पर ईरान का दोहरा रवैया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ नई बातचीत होने वाली है, लेकिन तेहरान ने इसे खारिज कर दिया. इसके बाद ट्रंप ने ईरान को समझौता करने या 'पूरी तरह आत्मसमर्पण' करने की चेतावनी दी.
दक्षिण कोरिया इस समय भीषण गर्मी की चपेट में है और देश ने अपने मौसम इतिहास का नया रिकॉर्ड दर्ज किया है। दक्षिण-पूर्वी शहर यांगसान में रविवार दोपहर तापमान 42.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो वर्ष 1904 में आधुनिक मौसम रिकॉर्ड शुरू होने के बाद अब तक का सबसे अधिक तापमान माना जा रहा है। लगातार बढ़ती गर्मी को देखते हुए सरकार और मौसम विभाग ने लोगों के लिए कई चेतावनियां जारी की है। मौजूद जानकारी के अनुसार, यांगसान में लगातार पांचवें दिन तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया। वहीं डेगू, बुसान और कई अन्य शहरों में भी पारा 38 से 40 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच गया। हालात को देखते हुए 20 से अधिक क्षेत्रों में आपातकालीन गर्मी चेतावनी लागू कर दी गई है। यह नई चेतावनी व्यवस्था इस वर्ष शुरू की गई है ताकि बढ़ते तापमान से लोगों की सुरक्षा बेहतर तरीके से की जा सके। बता दें कि दक्षिण कोरिया मौसम प्रशासन के अनुसार, जब किसी क्षेत्र में महसूस किया जाने वाला तापमान 38 डिग्री सेल्सियस या वास्तविक तापमान 39 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना होती है, तब आपात चेतावनी जारी की जाती है। लोगों से सभी बाहरी गतिविधियां तुरंत रोकने, ठंडी जगहों पर जाने और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की अपील की गई है। प्रधानमंत्री हान सियोंग-सूक ने स्थानीय प्रशासन को बुजुर्गों, बच्चों और अन्य संवेदनशील लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही बिजली और पानी की आपूर्ति लगातार बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है। गर्मी का असर आम लोगों की दिनचर्या पर भी साफ दिखाई दे रहा है। राजधानी सियोल में बड़ी संख्या में लोग वातानुकूलित बाजारों, कैफे और सार्वजनिक शीतलन केंद्रों का सहारा ले रहे हैं। कई जगहों पर धुंध जैसी पानी की फुहार वाले केंद्र भी बनाए गए हैं, जहां लोग गर्मी से राहत पाने पहुंच रहे हैं। गौरतलब है कि ग्योंगजू शहर में भी तापमान 40.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले आठ वर्षों का सबसे अधिक स्तर है। वहीं उत्तर कोरिया में भी कई इलाकों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है। राजधानी प्योंगयांग में लगातार एक सप्ताह तक रात का तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं गया। भीषण गर्मी का असर खेलों पर भी पड़ा है। चांगवोन में पेशेवर बेसबॉल लीग का मुकाबला लगातार दूसरे दिन रद्द करना पड़ा, क्योंकि वहां तापमान 39.5 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। वैज्ञानिकों का मानना है कि मानव गतिविधियों से बढ़ रहे जलवायु परिवर्तन और इस वर्ष फिर सक्रिय हुए अल नीनो के कारण दुनिया के कई हिस्सों में अत्यधिक गर्मी की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, चीन की ओर बढ़ रहे डॉल्फिन नामक तूफान की दिशा आने वाले दिनों में दक्षिण कोरिया के मौसम पर असर डाल सकती है। अगर तूफान की दिशा बदलती है तो बारिश और तेज हवाओं से कुछ राहत मिल सकती है, जबकि दूसरी स्थिति में गर्मी और उमस और अधिक बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
डील या टोटल सरेंडर… ट्रंप का ईरान को अल्टीमेटम; होर्मुज पर अमेरिकी कंट्रोल का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए डील या टोटल सरेंडर का अल्टीमेटम दिया है। ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाते हुए कहा कि वे निजी तौर पर बातचीत चाहते हैं लेकिन सार्वजनिक रूप से इनकार करते हैं।
आतंकियों का काल बना 'अननोन', मारे 30 से ज्यादा लश्कर, पाकिस्तान में कौन कर रहा ऑपरेशन?
लश्कर-ए-तैयबा के एक वरिष्ठ कमांडर ने पहली बार खुलेआम यह बात स्वीकार की है कि पिछले तीन से चार वर्षों में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के कई शहरों में संगठन के 30 से अधिक सदस्य मारे जा चुके हैं। उसने इन हत्याओं का ठीकरा भारत से जुड़े 'अननोन' पर फोड़ा है।
क्या नवाज़ शरीफ को मिलेगी नई ज़िम्मेदारी?
PoK चुनाव में PML-N की बढ़त के बाद नवाज शरीफ के प्रधानमंत्री बनने की चर्चा तेज है. हालांकि मौजूदा नियमों के तहत उनके लिए यह राह आसान नहीं मानी जा रही.
इजरायल में हमास के हमले में मारी गई थी गर्लफ्रेंड, प्रेमी ने कब्र के पास किया सुसाइड
7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले में अपनी गर्लफ्रेंड लिरोन बार्डा को खोने के करीब तीन साल बाद 30 वर्षीय बार असरफ ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली. वह लिरोन की कब्र के पास मृत मिले. परिवार के मुताबिक, गर्लफ्रेंड की मौत के बाद से वह इस सदमे से उबर नहीं पाए थे.
1990 के दशक में जम्मू-कश्मीर की मस्जिदों से पाकिस्तान के 'आजादी' और बेहतर भविष्य के वादे सुनाई देते थे। आज वही मस्जिदें लाइन ऑफ कंट्रोल के उस पार मुजफ्फराबाद में गूंज रही हैं, लेकिन इस बार स्थानीय इमाम पाकिस्तानी सेना के अत्याचार के खिलाफ कश्मीरियों को एकजुट होने की अपील कर रहे हैं।
ईरान के साथ नई बातचीत पर ट्रंप का बड़ा बयान, देखें दुनिया आजतक
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वो ईरान के परमाणु कार्यक्रमों को रोकने और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए समझौते की उम्मीद कर रहे हैं. इसलिए अमेरिका ने ईरान पर नया हमला नहीं किया. ट्रंप के अनुसार, समझौते के लिए ईरान के साथ नई बातचीत सोमवार से शुरू होगी. देखें दुनिया आजतक.
PoK में जीती शहबाज शरीफ की पार्टी, क्या बड़े भाई को बनाएंगे PM
1947 से ही पाकिस्तान अपने कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में एक अलग सरकार और प्रधानमंत्री का पद बना रखा है. यह पाकिस्तान का छलावा है. ताकि वहां वह सेल्फ गवर्नेंस का कथित ढांचा दुनिया को दिखा सके. नवाज ने इसी PoK का पीएम बनने की इच्छा जाहिर की है.
ईरान पर हमले से पीछे क्यों हटा अमेरिका? ट्रंप के फैसले के पीछे क्या थे रणनीतिक और राजनीतिक कारण
ईरान पर हमले से पीछे क्यों हटा अमेरिका? ट्रंप के फैसले के पीछे क्या थे रणनीतिक और राजनीतिक कारण
PAK के खैबर पख्तूनख्वा में सुसाइड अटैक, बॉम्बर ने थाने में किया ब्लास्ट
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में एक शांति रैली के दौरान सुसाइड अटैक हुआ. जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई. पुलिस स्टेशन को आत्मघाती हमले में निशाना बनाया गया, जिसमें पांच सुरक्षाकर्मियों की भी जान चली गई. ये धमाका तब हुआ जब स्वात ज़िले के काबल शहर में पुलिस स्टेशन के ठीक सामने स्वात शांति रैली चल रही थी. देखें.
14 नवंबर 2025 को बिहार चुनाव के नतीजे आए। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने 238 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। जीत मिलना तो दूर, 236 सीटों पर जमानत जब्त हो गई। कई विश्लेषकों ने लिखा कि पीके की राजनीति खत्म, अब बिहार छोड़ देंगे। 9 महीने बाद प्रशांत किशोर ने धमाकेदार वापसी की है। बांकीपुर सीट पर हुए उपचुनाव 19 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत लिया। बांकीपुर बीजेपी के मौजूदा राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की पारंपरिक सीट रही है। यहां बीजेपी को हमेशा 50% से ज्यादा वोट मिले और कभी नहीं हारी थी। प्रशांत किशोर के इस कमबैक के चर्चे हैं। आखिर पीके ने महज 9 महीने में ये बड़ी वापसी कैसे की और क्या अब उन्हें बिहार जीत का फॉर्मूला मिल गया है; आज के एक्सप्लेनर में पूरी कहानी… सवाल-1: बिहार चुनाव हारने के बाद पीके ने क्या-क्या किया? जवाब: बिहार नतीजों के बाद सबसे बड़ा सवाल था- अब पीके क्या करेंगे? पीके ने सबसे पहले अटकलों को खारिज किया। उन्होंने कहा, 'कुछ लोग ये सोच रहे हैं कि मैं बिहार छोड़ दूंगा। ये आपका भ्रम है। जब तक बिहार को बदलेंगे नहीं, तब तक छोड़ेंगे नहीं।' इसके बाद पीके ने 3 बड़े काम किए… 1. आत्ममंथन और आगे की स्ट्रैटेजी बनाईः 20 नवंबर 2025 को पश्चिम चंपारन के भितिहरवा आश्रम गए। यहां एक दिन का मौन व्रत रखा। इसे आत्ममंथन का संकेत माना गया। यहां से निकलकर बताया- 15 जनवरी के बाद अगले 15 से 18 महीने हम हर गांव, हर वार्ड और हर घर तक जाएंगे। पीके ने 8 फरवरी 2026 से ‘बिहार नवनिर्माण यात्रा’ शुरू की। 2. 90% संपत्ति जन सुराज के नाम की: पीके ने ऐलान किया कि अगले 5 साल तक अपनी कमाई का 90% हिस्सा जन सुराज को दान करेंगे। दिल्ली का घर छोड़कर पिछली 20 साल में कमाई गई हर संपत्ति भी पार्टी को देंगे। उन्होंने जन सुराज पार्टी से जुड़े हर व्यक्ति से कम-से-कम 1,000 रुपए का सहयोग मांगा और कहा, 'आज के बाद मैं ऐसे किसी व्यक्ति से नहीं मिलूंगा, जिसने यह योगदान न दिया हो।' 3. बंगला छोड़, आश्रम में रहने लगे: पीके ने मई 2026 में पटना का शेखपुरा हाउस छोड़ दिया। वो बिहार नवनिर्माण आश्रम में आकर रहने लगे। इसे जन सुराज पार्टी के कामकाजों के लिए ही बनाया गया है। अगले विधानसभा चुनाव तक पीके यहीं रहेंगे। करीब 5 एकड़ में बने इस आश्रम में जन सुराज पार्टी के 300 से ज्यादा लोग रहते हैं। सवाल-2: पीके ने 2025 चुनाव की हार से क्या सबक लिए, स्ट्रैटेजी कैसे बदली?जवाबः पीके ने 3 बड़े बदलाव किए… 1. प्रोफेशनल्स से ज्यादा समर्पित कार्यकर्ताओं पर भरोसा 2. हर बूथ पर तैनाती, जमीनी पहुंच बढ़ाई 3. ‘सही लोग, सही सोच’ का नारा सवाल-3: पीके ने बांकीपुर से ही चुनाव लड़ना क्यों चुना? जवाब: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद जन सुराज पार्टी के कार्यकर्ताओं में भारी निराशा थी। लोग साथ छोड़ रहे थे। इस बीच नितिन नवीन बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिए गए और उनकी विधानसभा सीट बांकीपुर पर उपचुनाव की घोषणा हो गई। पीके ने दो बड़ी वजहों से यहां चुनाव लड़ना चुना… 1. मुफ्त की पब्लिसिटी, कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा: पॉलिटिकल एनालिस्ट केके लाल कहते हैं, ‘मुख्यधारा की राजनीति में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने और जन सुराज को बचाए रखने के लिए एक बड़ा धमाका जरूरी था। भाजपा के गढ़ में सीधे खुद उतरने से मीडिया और जनता की नजरें उन पर टिक गईं। कार्यकर्ताओं में जोश आ गया।’ 2. बीजेपी को सीधे चुनौती से मजबूत नैरेटिव सेट किया: पॉलिटिकल एनालिस्ट संजय सिंह कहते हैं, ‘प्रशांत किशोर पर अब तक भाजपा का मददगार होने का ठप्पा विपक्षी पार्टियां लगाती रही हैं। उन्होंने सीधे गढ़ में चुनौती देकर यह जताने का प्रयास किया है कि हम मिले हुए नहीं हैं। हमारी तरह भाजपा को घर में घुसकर सीधी चुनौती देने की ताकत तेजस्वी यादव के पास भी नहीं।’ सवाल-4: बांकीपुर से हार तय मानी जा रही थी, फिर पीके ने बाजी कैसे पलटी?जवाबः बांकीपुर से पीके की जीत के 3 बड़े फैक्टर रहे… 1. खुद को तीसरे विकल्प की तरह पेश किया 2. जेन-जी प्रोटेस्ट, एथेनॉल के चलते नैरेटिव में पिछड़ी बीजेपी 3. लोकल मुद्दे उठाए, सवर्ण और पिछड़ों को साधा सवाल-4: तो क्या पीके को बांकीपुर से बिहार जीतने का फॉर्मूला मिल गया है? जवाब: जन सुराज को उम्मीद की किरण जरूर दिखी, लेकिन बिहार जीत के फॉर्मूले का दावा करना जल्दबाजी होगी। इसकी 3 बड़ी वजहें हैं… 1. शहरी बनाम ग्रामीण वोटर में फर्क: बांकीपुर पूरी तरह से शहरी और साक्षर इलाका है, जबकि बिहार की करीब 89% आबादी गांवों में रहती है। शहरी और ग्रामीण वोटर्स की सोच और वोटिंग पैटर्न में काफी फर्क होता है। ऐसे में बांकीपुर जीतने से सिर्फ ये माना जा सकता है कि पीके ने शहरी वोटर्स को समझ लिया है। 2. बिहार में जातिगत लामबंदी: बांकीपुर में कायस्थ, वैश्य और सवर्ण जातियों का दबदबा है, जबकि समूचे बिहार में करीब 85% आबादी पिछड़ा, दलित या महादलित है। इनमें से 14.3% यादव हैं, जो RJD का कोर वोटबैंक हैं। जबकि 10% कुर्मी, कोयरी और कुशवाहा JDU के साथ और 15% सवर्ण बीजेपी के साथ माने जाते हैं। पीके खुद सवर्ण हैं और ऐसे में उन्हें बिहार के पिछड़ा वोटर्स को साधना चुनौती भरा हो सकता है। 3. स्केलिंग और जमीनी जुड़ाव: पीके के पास अब भी बीजेपी, JDU, RJD जैसा मजबूत कैडर नहीं है, जो पूरे बिहार में जमीनी पकड़ बना सके। उनकी जन सुराज के ज्यादातर वॉलंटियर्स कार्यकर्ता की तरह नहीं, बल्कि कर्मचारी की तरह हैं। अभिरंजन कुमार कहते हैं, 'अगर पीके आने वाले 3-4 सालों में अच्छा काम कर लेते हैं और बिहार की जनता में तीसरे विकल्प को चुनने का कॉन्फिडेंस ला पाते हैं, तो गठबंधनों की शक्ल बदल जाएगी। महागठबंधन का दौर खत्म हो गया। पीके RJD का विकल्प बन पाएंगे। ऐसा हुआ तो कांग्रेस के साथ-साथ बीजेपी के सहयोगी दल भी उनके साथ गठबंधन करना चाहेंगे।' ------------- ये खबर भी पढ़िए… प्रशांत किशोर पर छापे क्यों नहीं पड़ते: मोदी के एक फोन पर UN की नौकरी छोड़ी, 6 साल में 6 सीएम बनवाए; PK की पॉलिटिक्स क्या है 12वीं करने के बाद 3 साल पढ़ाई छोड़ दी। नरेंद्र मोदी की कॉल पर यूनाइटेड नेशंस की नौकरी छोड़ दी। मोदी के पीएम बनने के बाद नीतीश के साथ गए। 2015 में नीतीश की वापसी कराई, फिर ममता, जगन, स्टालिन को जिताया। 6 साल में 6 सीएम बनवाने वाला ये शख्स अब खुद बिहार जीतने निकला है। पूरी खबर पढ़िए
CCTV में कैद हुई दहशत, स्वात में पुलिस स्टेशन के बाहर आत्मघाती धमाके में 15 की जान गई - AajTak
CCTV में कैद हुई दहशत, स्वात में पुलिस स्टेशन के बाहर आत्मघाती धमाके में 15 की जान गई AajTak पाकिस्तान के स्वात में पुलिस थाने के बाहर आत्मघाती धमाके में 14 लोगों की मौत, 15 से ज़्यादा घायल BBC पाकिस्तान में आत्मघाती हमला, 8 पुलिसकर्मियों समेत 19 की मौत: खैबर पख्तूनख्वा में युवक ने थाने में जाकर ब्ला... Dainik Bhaskar पाकिस्तान में शांति रैली के दौरान बड़ा धमाका, चपेट में आने से 14 लोगों की मौत; कई घायल India TV Hindi पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में आतंक-विरोधी रैली पर आत्मघाती हमला, बम फटने का वीडियो वायरल Jagran
PoK में कत्लेआम की ग्राउंड रिपोर्टिंग से बौखलाया पाकिस्तान, क्या अल जजीरा को कर दिया ब्लॉक?
पीओके में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और कथित कत्लेआम की ग्राउंड रिपोर्टिंग के बाद अल जजीरा देश भर में यूजर्स के लिए पहुंच से बाहर हो गया है। इस्लामाबाद ने आधिकारिक तौर पर कोई पुष्टि नहीं की है…
पाकिस्तान में Al Jazeera पर बैन की चर्चा
PoK में विरोध प्रदर्शनों की कवरेज के बाद पाकिस्तान में Al Jazeera समेत कुछ डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म पर कथित रोक की खबरें हैं. सरकार ने आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन फैसले को लेकर सवाल उठ रहे हैं. वहीं, ह्यूमन राइट्स काउंसिल ऑफ पाकिस्तान-ऑक्यूपाइड जम्मू एंड कश्मीर HRC-PoJK के हवाले से मौजूदा अशांति में 80 लोगों की मौत का दावा किया गया है. इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
ट्रम्प का दावा- अमेरिका और ईरान के बीच आज से शुरू होगी वार्ता, वीडियो में जाने बड़े हमले को टालने की कही बात
इंडोनेशिया में समुद्र के बीच फेरी में भीषण आग, जान बचाने के लिए यात्रियों ने लगाई समुद्र में छलांग; फुटेज में देंखे 5 की मौत, 41 लापता
मीराबाई चानू का स्वागत और अभिनंदन!
नई दिल्ली। राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचने वाली दिग्गज भारोत्तोलक मीराबाई चानू का स्वदेश वापसी पर जोरदार स्वागत और अभिनंदन किया जा रहा है। केंद्रीय संचार और उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य माधवराव सिंधिया ने आज नई दिल्ली में मीराबाई चानू से मुलाकातकर उनको बधाई दी और खूब प्रशंसा...
चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश सीमा की होगी कड़ी निगरानी! भारतीय रेलवे ने बनाया ₹45,000 करोड़ का मेगा प्लान
'भारत उज्बेकिस्तान संबंध घनिष्ठ व ऐतिहासिक'
नई दिल्ली। उज्बेकिस्तान गणराज्य के विदेश मंत्री सईदोव बख्तियार ओदिलोविच ने आज राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की। राष्ट्रपति भवन में सईदोव बख्तियार ओदिलोविच और उनके साथ आए प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहाकि भारत और उज्बेकिस्तान केबीच गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत...
बांग्लादेश की राजनीति में हालिया उथल-पुथल के बाद अब सुरक्षा एजेंसियों के सामने एक और बहुत बड़ा खतरा मंडरा रहा है। खुफिया रिपोर्टों के सामने आने के बाद दक्षिण एशिया के राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। ताजा इनपुट्स के अनुसार, बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सुरक्षा को लेकर बेहद खतरनाक साजिश रची जा रही है। इस सनसनीखेज खुलासे में प्रेस के फर्जी स्टिकर लगी गाड़ियों, आईईडी (IED) और आत्मघाती हमलों का जिक्र किया गया है, जिसके बाद से सुरक्षा तंत्र पूरी तरह से हाई अलर्ट पर आ गया है।खुफिया एजेंसियों के हाथ लगे खतरनाक इनपुट्स और साजिश की परतेंखुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, बांग्लादेश की पूर्व पीएम को निशाना बनाने के लिए असामाजिक तत्वों और कट्टरपंथी ताकतों द्वारा एक पुख्ता साजिश रची जा रही है। रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि हमलावर सुरक्षा एजेंसियों की आंखों में धूल झोंकने के लिए मीडिया वाहनों का सहारा ले सकते हैं। गाड़ियों पर 'PRESS' का फर्जी स्टिकर लगाकर चेकिंग से बचने और आसानी से वीआईपी जोन या लक्षित ठिकाने के पास पहुंचने की योजना बनाई गई है। इस तरह के हथकंडों ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है क्योंकि इस रणनीति से किसी भी सुरक्षा घेरे को भेदना आसान हो जाता है।IED और आत्मघाती हमलों का खौफनाक जालइस पूरी साजिश का सबसे डरावना पहलू यह है कि इसमें अत्याधुनिक विस्फोटकों और फिदायीन हमलों का इस्तेमाल करने की बात सामने आई है। खुफिया एजेंसियों के अनुसार, आतंकियों या साज़िशकर्ताओं द्वारा आईईडी से लैस वाहनों का उपयोग किया जा सकता है। भीड़भाड़ वाले इलाकों या आवाजाही के रास्तों पर आत्मघाती हमले को अंजाम देकर भारी तबाही मचाने का षड्यंत्र रचा जा रहा है। सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के हाई-प्रोफाइल टारगेट पर हमला करने के लिए ट्रेंड ऑपरेटर्स को काम पर लगाया गया है, जो सुरक्षा तंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहे हैं।सुरक्षा एजेंसियों की बढ़ी चौकसी और कड़े इंतजामइन गंभीर खुफिया इनपुट्स के सामने आने के बाद तमाम संबंधित सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों ने अपनी चौकसी कई गुना बढ़ा दी है। सीमाओं से लेकर संवेदनशील ठिकानों तक सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। फर्जी प्रेस स्टीकर लगाकर घूमने वाली हर संदिग्ध गाड़ी की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि किसी भी अनहोनी को समय रहते टाला जा सके। बांग्लादेश के घटनाक्रम के बाद से क्षेत्रीय सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता पर भी गहरा असर पड़ा है, और पूरी दुनिया की नजरें इस संवेदनशील मामले पर टिकी हुई हैं।
जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण पूरी दुनिया में मौसम का चक्र तेजी से बदल रहा है, जिसका सबसे गंभीर असर यूरोप महाद्वीप पर देखने को मिल रहा है। गर्मी और सूखे के कारण यूरोप की प्रमुख नदियां अपने न्यूनतम जल स्तर पर पहुंच चुकी हैं, जिससे सदियों पुरानी और गायब हो चुकी सभ्यताएं और ऐतिहासिक अवशेष पानी की गहराई से बाहर आने लगे हैं। इन नदियों का सूखना पर्यावरण के लिए भले ही चिंता का विषय हो, लेकिन इतिहासकार और पुरातत्वविद् इसे एक अनूठे खजाने की तरह देख रहे हैं, जहां पानी के नीचे छिपे कई अनछुए राज दुनिया के सामने आ रहे हैं।राइन और डैन्यूएब नदियों में दिखा इतिहास का खजानायूरोप की कई प्रसिद्ध नदियां जैसे राइन, डैन्यूएब और पो इन दिनों भयंकर सूखे की चपेट में हैं। पानी का स्तर इतना नीचे चला गया है कि नदियों की तली साफ नजर आने लगी है। इन सूखी तलहटी और कीचड़ के बीच से ऐसे अवशेष निकल रहे हैं जिनके बारे में सदियों से किसी को कोई जानकारी नहीं थी। पुरातत्वविदों को इन जगहों पर प्राचीन रोमन काल के पुलों के अवशेष, युद्ध के समय डूबे हुए हथियार और सदियों पुरानी बस्तियों के निशान मिले हैं, जो यह बयां करते हैं कि कभी इन इलाकों में इंसानी गतिविधियां किस स्तर पर थीं।हिमयुग के मैमथ के अवशेष और हिटलर के दौर के युद्धपोतइन खोजों में सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि अलग-अलग जगहों से अलग-अलग कालखंड के अवशेष बाहर आ रहे हैं। हंगरी और सर्बिया के पास डैन्यूएब नदी की सूखी तलहटी से द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान डूबे हुए जर्मन नाजी सेना यानी हिटलर के कई युद्धपोत बाहर आए हैं, जिन पर अब भी विस्फोटक और हथियार लदे हुए हैं। इसके साथ ही, अन्य नदियों के पास प्रागैतिहासिक काल यानी हिमयुग के जीवों जैसे विशालकाय मैमथ के कंकाल और हड्डियां भी सुरक्षित अवस्था में मिली हैं, जिन्होंने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है।पर्यावरण के लिए चेतावनी और इतिहास के पन्नों का खुलनावैज्ञानिकों का मानना है कि नदियों का इस तरह सूखना पर्यावरण के लिहाज से बेहद खतरनाक संकेत है, जो आने वाले जल संकट की ओर इशारा करता है। हालांकि, दूसरी तरफ इसने इतिहास के कई अनसुलझे पन्नों को पलटने का मौका दे दिया है। स्थानीय प्रशासन और शोधकर्ता इन ऐतिहासिक अवशेषों को सहेजने में जुट गए हैं ताकि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में इतिहास के इन अनमोल प्रमाणों को सुरक्षित रखा जा सके।
पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK के हालात इन दिनों किसी युद्धग्रस्त देश जैसे बन चुके हैं। पाकिस्तानी हुक्मरानों और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की दमनकारी नीतियों के चलते यह पूरा क्षेत्र मानवाधिकारों के हनन का एक जीवंत उदाहरण बन गया है। स्थानीय लोगों का जीवन दूभर हो चुका है, लेकिन इन सबके बावजूद कश्मीरी अवाम का हौसला टूटने का नाम नहीं ले रहा है। पाकिस्तानी सेना की अंधाधुंध फायरिंग और क्रूरता के बाद भी वहां के निवासियों का प्रतिरोध अब एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेता जा रहा है।PoK में सेना का तांडव और सूडान जैसे भयावह हालातपाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में पिछले कुछ समय से हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। आम नागरिकों द्वारा अपनी बुनियादी सुविधाओं, बढ़े हुए बिजली बिलों और महरेंगे राशन के खिलाफ शुरू किया गया शांतिपूर्ण प्रदर्शन उस वक्त खूनी संघर्ष में बदल गया, जब पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स ने बर्बरता की सारी हदें पार कर दीं। सूडान की तर्ज पर PoK की सड़कों पर टैंक और बख्तरबंद गाड़ियां उतार दी गईं। जनरल असीम मुनीर के सीधे आदेश पर सेना ने प्रदर्शनकारियों पर सीधे गोलियां चलानी शुरू कर दीं, जिसमें कई बेकसूर लोग अपनी जान गंवा बैठे और सैकड़ों की संख्या में घायल हो गए। इस अमानवीय कृत्य ने पूरी दुनिया का ध्यान इस क्षेत्र में हो रहे अत्याचारों की ओर खींचा है।गोलियों की बौछार के बीच भी बुलंद है स्थानीय अवाम का हौसलाइतिहास गवाह है कि जब-जब जुल्म की इंतिहा होती है, तब-तब जनता का विद्रोह और अधिक मुखर हो जाता है। PoK में भी कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है। पाकिस्तानी सेना की गोलियों और आंसू गैस के गोलों के बीच भी कश्मीरी युवाओं और बुजुर्गों के कदम पीछे नहीं हटे। सेना के खौफनाक रवैये के बावजूद लोग सड़कों पर उतरकर 'आजादी' और पाकिस्तान विरोधी नारे लगा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का साफ कहना है कि वे अब और अधिक अत्याचार सहन नहीं करेंगे। सेना के जुल्म उनके दिलों से पाकिस्तान के प्रति उपजे गुस्से और प्रतिरोध की आग को बुझाने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं।अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चुप्पी और मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघनएक तरफ जहां PoK के लोग बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तानी मीडिया और सरकार इस पूरी सच्चाई को दबाने में जुटी हुई है। इंटरनेट और संचार सेवाओं को बार-बार बाधित किया जा रहा है ताकि वहां होने वाले अत्याचारों की तस्वीरें दुनिया के सामने न आ सकें। मानवाधिकार संगठनों ने इस दमनकारी कार्रवाई की कड़ी निंदा की है, लेकिन पाकिस्तान की इस तानाशाही के खिलाफ वैश्विक स्तर पर एक मजबूत और ठोस कार्रवाई की अभी भी दरकार है। स्थानीय नागरिकों का यह संघर्ष अब केवल स्थानीय मुद्दों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पाकिस्तान के अवैध कब्जे और उसकी दमनकारी व्यवस्था के खिलाफ एक बड़ा मोड़ साबित हो रहा है।
Ajab-Gajab News: साल 1966 में लापता हुई महिला 42 साल बाद अपने फ्लैट में टीवी के सामने कुर्सी पर मृत अवस्था में मिलीं।
'No War' ऐलान के बाद ट्रंप का ईरानी मीडिया ने उड़ाया मजाक, कहा - ''क्या अब हवा निकल गई?
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होर्मुज से आई भारत के लिए खुशखबरी, अब खूब आएंगे तेल-LPG के टैंकर, ओमान बना संकटमोचक
भारत की ऊर्जा सुरक्षा और तेल आपूर्ति को लेकर फारस की खाड़ी से एक बेहद राहत भरी और शानदार खबर सामने आई है। रणनीतिक रूप से बेहद अहम माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ओमान ने एक ऐसा कूटनीतिक और सामरिक कदम उठाया है जिससे भारत के लिए कच्चे तेल और एलपीजी (LPG) के टैंकरों की आवाजाही पूरी तरह से सुरक्षित और सुगम हो गई है। खाड़ी देशों में अक्सर तनाव और भू-राजनीतिक हलचल के कारण समुद्री मार्गों पर मंडराने वाले संकट के बीच ओमान भारत के लिए एक बड़े संकटमोचक के रूप में उभरा है।संकटमोचक बना ओमान और समुद्री मार्ग की सुरक्षाभारत अपनी कुल ऊर्जा जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है, जिसके लिए होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे प्रमुख समुद्री रास्ता है। पिछले कुछ समय से इस इलाके में बढ़ते तनाव के चलते तेल और गैस की सप्लाई बाधित होने का खतरा लगातार बना हुआ था। ऐसे वक्त में ओमान ने अपनी मजबूत समुद्री कूटनीति और रणनीतिक स्थिति का इस्तेमाल करते हुए यह सुनिश्चित किया है कि भारत आने वाले एनर्जी टैंकरों को किसी भी तरह की बाधा या सुरक्षा जोखिम का सामना न करना पड़े, जिससे भारतीय रिफाइनरियों और एलपीजी सप्लायर्स ने बड़ी राहत की सांस ली है।तेल और एलपीजी की बेरोकटोक आपूर्ति से देश को फायदाओमान के इस सकारात्मक सहयोग के बाद अब भारत के लिए कच्चे तेल, डीजल और एलपीजी गैस से भरे टैंकरों की निर्बाध आवाजाही का रास्ता साफ हो गया है। ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि इस व्यवस्था से भारत में ईंधन की कीमतों और सप्लाई चेन पर किसी भी तरह का दबाव नहीं बनेगा। त्योहारी सीजन या मांग बढ़ने के समय एलपीजी और पेट्रोल-डीजल की कमी का जो डर अक्सर सताता रहता था, वह अब ओमान की मदद से काफी हद तक दूर हो गया है, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं को भी बड़ी राहत मिलने की पूरी उम्मीद है।भारत और ओमान के प्रगाढ़ होते सामरिक संबंधइस पूरी घटना ने भारत और ओमान के बीच सदियों पुराने और भरोसेमंद रिश्तों पर मुहर लगा दी है। रक्षा, व्यापार और समुद्री सुरक्षा के मोर्चे पर दोनों देश लगातार एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं। रणनीतिक जानकारों का कहना है कि पश्चिम एशिया के बदलते समीकरणों के बीच ओमान का भारत के पक्ष में खड़ा होना यह साबित करता है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की कूटनीतिक पकड़ कितनी मजबूत हो चुकी है, जिसका सीधा फायदा देश की अर्थव्यवस्था और आम जनता को मिल रहा है।
PoK में अपने गंदे काम छिपा रहा पाकिस्तान, पहले गोलियां चलाईं, अब अल-जजीरा पर भी लगाया बैन
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी PoK में इन दिनों पाकिस्तान सरकार की तानाशाही अपने चरम पर पहुंच चुकी है। स्थानीय नागरिकों द्वारा लगातार अपने अधिकारों और बुनियादी सुविधाओं के लिए किए जा रहे विरोध प्रदर्शनों को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सेना हर हद पार कर रही है। हालात यह हैं कि वहां हो रहे मानवाधिकार हनन और क्रूरता को दुनिया की नजरों से छिपाने के लिए अब मीडिया के गले पर भी कैंची चलाई जा रही है। स्थानीय जनता की आवाज को दबाने के लिए पाकिस्तान ने पहले तो शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलवाईं और अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों पर भी पाबंदी लगानी शुरू कर दी है।अंतरराष्ट्रीय मीडिया चैनल अल-जजीरा पर लगाया बैनPoK के भीतर पाकिस्तानी फौज और खुफिया एजेंसियों के काले कारनामों को उजागर करने वाले प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय समाचार संस्थान 'अल-जजीरा' के प्रसारण और कवरेज पर पाकिस्तान ने रोक लगा दी है। जब अल-जजीरा की टीम ने वहां के स्थानीय लोगों पर हो रहे अत्याचार, सेना की बर्बरता और कश्मीरी अवाम के गुस्से को दुनिया के सामने लाने की कोशिश की, तो बौखलाई पाकिस्तानी सरकार ने तुरंत सेंसरशिप लागू कर दी। इस बैन का मुख्य मकसद यह है कि PoK की जमीनी सच्चाई किसी भी तरह से वैश्विक मंचों तक न पहुंच सके और पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय छवि पर कोई दाग न लगे।गोलियों और दमन के दम पर जनता की आवाज दबाने की कोशिशकुछ समय पहले PoK के विभिन्न इलाकों में बढ़े हुए बिजली के बिल, महंगाई और पाकिस्तानी हुक्मरानों के शोषण के खिलाफ आम जनता सड़कों पर उतर आई थी। शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे इन नागरिकों पर पाकिस्तानी रेंजर्स और पुलिस ने अंधाधुंध गोलियां चलाईं, जिसमें कई बेकसूर लोग मारे गए और सैकड़ों गंभीर रूप से घायल हो गए। इस खूनी संघर्ष के बाद से ही पूरा क्षेत्र सुलग रहा है, लेकिन पाकिस्तानी प्रशासन मीडिया को प्रतिबंधित कर इस नरसंहार और दमन चक्र को पूरी तरह से छिपाने की नापाक कोशिश में जुटा हुआ है।वैश्विक मानवाधिकार संगठनों की चुप्पी पर सवालपाकिस्तान के इन अलोकतांत्रिक और तानाशाही कदमों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। एक तरफ जहां पाकिस्तान दुनिया भर में मानवाधिकारों की दुहाई देता फिरता है, वहीं दूसरी तरफ अपने ही कब्जे वाले क्षेत्र में वह फासीवादी नीतियां अपना रहा है। जानकारों का कहना है कि सूचना के अधिकार और प्रेस की स्वतंत्रता का गला घोंटकर पाकिस्तान ज्यादा दिनों तक अपनी इन करतूतों को छिपा नहीं पाएगा, क्योंकि वहां की जनता का आक्रोश अब ज्वालामुखी का रूप ले चुका है।
भारत के एक फैसले ने किया नेपाल को मजबूर, अकड़ रहे बालेन शाह लगाने लगे गुहार
भारत और नेपाल के बीच हाल ही में कूटनीतिक और कड़े व्यापारिक नियमों को लेकर एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पड़ोसी देशों के साथ रणनीतिक संबंधों और सीमावर्ती व्यापार को नियंत्रित करने के लिए जब भारत ने सख्त नियम लागू किए, तो नेपाल की राजनीति में हड़कंप मच गया। अपनी बड़बोलेपन और तीखे बयानों के लिए जाने जाने वाले काठमांडू के मेयर बालेन शाह, जो अक्सर भारत विरोधी तेवर दिखाते नजर आते थे, अब अचानक से कूटनीतिक दबाव के आगे झुकते हुए नजर आ रहे हैं और नेपाल के आंतरिक विकास व आपूर्ति के लिए भारत से मदद की गुहार लगाने पर मजबूर हो गए हैं।क्यों पड़ी नेपाल को भारत के सामने गिड़गिड़ाने की जरूरतनेपाल भौगोलिक रूप से चारों तरफ से जमीन से घिरा देश है और अपनी रोजमर्रा की जरूरतें, ईंधन, खाद्य सामग्री और बुनियादी सामानों के आयात के लिए पूरी तरह से भारत पर निर्भर है। हाल ही में जब भारत ने सीमा पार व्यापार और ट्रांजिट रूट्स को लेकर नियमों को कड़ा किया, तो नेपाल की अर्थव्यवस्था और स्थानीय बाजारों में तुरंत संकट के बादल मंडराने लगे। बालेन शाह जैसे नेताओं को यह अहसास हो गया है कि केवल बयानबाजी और तीखे तेवरों से देश की जनता की बुनियादी जरूरतों को पूरा नहीं किया जा सकता, जिसके चलते उनकी सारी अकड़ काफूर हो गई है।बालेन शाह के सुर बदले और शुरू हुई कूटनीतिक नरमीकाठमांडू महानगरपालिका के मेयर बालेन शाह अपने कड़े फैसलों और भारत के खिलाफ की जाने वाली सोशल मीडिया बयानबाजी के लिए चर्चा में रहते हैं। लेकिन जब जमीनी स्तर पर जनता को जरूरी सामानों की किल्लत और आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ा, तो उनका रुख एकदम से बदल गया। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि भारत की मजबूत विदेश नीति और स्पष्ट रुख ने नेपाल के उन नेताओं को आईना दिखा दिया है जो भारत की सदाशयता का फायदा उठाकर राजनीतिक रोटियां सेकते थे।दोनों देशों के रिश्तों पर क्या होगा इसका असरइस पूरी घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भारत के बिना नेपाल के विकास और स्थिरता की कल्पना करना नामुमकिन है। भारत के सख्त और स्पष्ट फैसलों ने यह संदेश साफ कर दिया है कि द्विपक्षीय संबंधों में सम्मान और सहयोग दोनों तरफ से होना चाहिए। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इस दबाव के बाद अब नेपाल के हुक्मरान भविष्य में भारत विरोधी बयानों से बचेंगे और आपसी व्यापार तथा कूटनीतिक रिश्तों को सुधारने पर अधिक जोर देंगे।
यूरोप की नदियां सूखीं तो बाहर निकला हजारों साल का इतिहास, कहीं मिला मैमथ तो कहीं निकला हिटलर का जहाज
यूरोप महाद्वीप में इन दिनों जलवायु परिवर्तन और भयंकर सूखे की वजह से नदियों का जलस्तर तेजी से नीचे गिर रहा है। डेन्यूब, राइन और पो जैसी प्रमुख नदियां सूखने की कगार पर पहुंच चुकी हैं, जिसके कारण सदियों से पानी के भीतर छिपे कई बड़े रहस्य अब दुनिया के सामने आने लगे हैं। वैज्ञानिकों और स्थानीय लोगों के लिए यह स्थिति बेहद हैरान करने वाली है, क्योंकि पानी का स्तर घटने से नदी की तली में दबे प्राचीन अवशेष, प्राचीन सभ्यता की निशानियां और युद्धकाल के अवशेष अपने आप बाहर निकलने लगे हैं।प्राचीन मैमथ के अवशेष और प्रागैतिहासिक काल के खुलासेनदियों के सूखने से केवल आधुनिक इतिहास ही नहीं, बल्कि पृथ्वी के प्राचीन जीवों के अवशेष भी सतह पर आ गए हैं। कई जगहों पर वैज्ञानिकों को हज़ारों साल पुराने मैमथ की हड्डियां और अन्य जीवों के अवशेष मिले हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि इन अवशेषों के बाहर आने से प्रागैतिहासिक काल की जलवायु और उस समय के पर्यावरण को समझने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी। पानी के भीतर सुरक्षित दबे होने के कारण ये अवशेष हजारों साल बाद भी अच्छी हालत में बचे हुए हैं।हिटलर के युद्धपोत और द्वितीय विश्व युद्ध के गहरे राजप्राचीन इतिहास के साथ-साथ इस सूखे ने द्वितीय विश्व युद्ध के समय के काले अध्यायों को भी फिर से उजागर कर दिया है। पूर्वी यूरोप और जर्मनी के आसपास की नदियों में हिटलर की नाजी सेना के डूबे हुए युद्धपोत और हथियार स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। दशकों पहले युद्ध के दौरान जिन जहाजों को जानबूझकर डुबोया गया था या जो युद्ध के हालात में डूब गए थे, वे अब नदी का पानी सूखने के बाद मलबे के रूप में बाहर आ चुके हैं, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में इतिहासप्रेमी और विशेषज्ञ पहुंच रहे हैं।पर्यावरणविदों की चिंता और भविष्य के लिए चेतावनीभले ही इन पुरानी चीजों के मिलने से इतिहास के पन्नों को पलटने का मौका मिल रहा है, लेकिन पर्यावरणविदों के लिए यह स्थिति बेहद डरावनी और चिंताजनक है। नदियों का इस तरह सूखना इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन अब इंसानी जीवन और प्रकृति के लिए विकराल रूप धारण कर चुका है। यदि समय रहते पानी के संरक्षण और जलवायु संतुलन को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यूरोप समेत पूरी दुनिया को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
PoK में कत्लेआम की रिपोर्टिंग पर रोक लगाने की कोशिश? PAK में अल-जजीरा बैन!
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoJK) में जारी विरोध प्रदर्शनों की कवरेज के बाद अल जज़ीरा इंग्लिश समेत कई डिजिटल न्यूज प्लेटफॉर्म पाकिस्तान में कथित तौर पर प्रतिबंधित या सीमित कर दिए गए हैं. हालांकि, इस पर पाकिस्तान सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
बस तीन छोटी नावें थीं और एक दीवाना सपना!
इस कहानी को आज कहने का सबब वो इतिहास है. जो आज के दिन ही शुरू हुआ था. बात आधा हजार साल पहले की है. जब एक जुनूनी अपने ख्वाबों की ताबीर के लिए समंदर की लहरों पर निकल चुका था.
Iran ने Trump के Hormuz समझौते के दावे को बताया 'एक और झूठ', कहा- कोई सहमति नहीं
रविवार को ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को खारिज कर दिया कि तेहरान ने वॉशिंगटन के साथ संभावित समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति जताई थी; ईरान का कहना है कि ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ है। ईरानी मीडिया ने ट्रंप के उस दावे को भी खारिज कर दिया कि तेहरान ने अमेरिका से नियोजित सैन्य हमलों को रोकने के लिए कहा था। मीडिया ने इस दावे को एक और झूठ बताया और कहा कि जब तक अमेरिका की दुश्मनी भरी कार्रवाई जारी रहेगी, तब तक यह रणनीतिक जलमार्ग बंद रहेगा। इसे भी पढ़ें: Middle East में टला बड़ा युद्ध: क्षेत्रीय सहयोगियों की अपील पर Trump ने Iran से बातचीत को दी मंजूरी ईरान की सेमी-ऑफिशियल फ़ार्स न्यूज़ एजेंसी ने देश की बातचीत करने वाली टीम के करीबी सूत्रों के हवाले से कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने पर कोई समझौता नहीं हुआ है। एजेंसी ने एक जानकार सूत्र के हवाले से कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के बारे में कोई समझौता नहीं हुआ है। सूत्र ने आगे कहा कि जब तक अमेरिका अपनी दुश्मनी भरी हरकतें जारी रखेगा, तब तक यह जलमार्ग बंद रहेगा। इससे पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि पश्चिम एशिया के सहयोगी देशों ने ईरान के साथ पांच महीने से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए एक समझौते की रूपरेखा पर सहमति बना ली है। उन्होंने कहा कि फिलहाल वह इस संघर्ष में ईरान पर नए सैन्य हमले का आदेश नहीं देंगे। ट्रंप ने शनिवार शाम को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि इस समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को तत्काल और पूरी तरह खोलना तथा ईरान के परमाणु खतरे का अंत शामिल होगा। उन्होंने कहा कि इस अनुरोध के आधार पर मैंने दुनिया के भविष्य के हित में और साथ ही एक सफल एवं समृद्ध ईरान के अस्तित्व को ध्यान में रखते हुए फिलहाल हमलों को रोकने पर सहमति दी है, बशर्ते कि शीघ्र ही कोई समझौता हो सके। इसे भी पढ़ें: Middle East Conflict | Donald Trump का दावा- शांति समझौते पर बनी रूपरेखा: होर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु मुद्दों पर वार्ता, खाड़ी देशों की मध्यस्थता रंग लाई अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर हमला किए जाने के बाद से राष्ट्रपति ट्रंप कई बार ईरान पर हमले रोकने की घोषणा कर चुके हैं लेकिन हर बार हालात फिर बिगड़ गए और दोनों पक्षों के बीच संघर्ष दोबारा शुरू हो गया। ईरान के रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि ट्रंप की हालिया घोषणा से ईरान न तो हैरान है और न ही ढिलाई बरत रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका से मिलने वाली धमकियों के मद्देनजर ईरान पूरी तरह सतर्क और सजग बना हुआ है। क्षेत्रीय मामलों से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि सप्ताहांत में राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा घोषित प्रस्ताव के तहत अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता फिर से शुरू करने तथा उन अनेक लंबित मुद्दों पर बातचीत जारी रखने की बात कही गई है, जिनके कारण पहले किसी समझौते पर प्रगति नहीं हो सकी थी।
म्यांमा में आंग सान सू ची से ICRC के प्रतिनिधि ने की मुलाकात
बैंकॉक, तीन अगस्त (एपी) म्यांमा की पूर्व नेता आंग सान सू ची से अंतरराष्ट्रीय रेड क्रॉस समिति (आईसीआरसी) के प्रतिनिधि ने सोमवार को राजधानी में मुलाकात की। सैन्य समर्थित सरकार ने यह जानकारी दी। वर्ष 2021 में सेना द्वारा सत्ता अपने हाथ में लिये जाने के बाद से सू ची ‘‘नजरबंद’’ हैं, ऐसे में नोबेल शांति पुरस्कार विजेता के लिए बाहरी दुनिया से संपर्क का यह एक दुर्लभ अवसर रहा। घोषणा के साथ जारी दो तस्वीरों में सू ची म्यांमा में आईसीआरसी के प्रतिनिधि अरनॉड डी बैक से हाथ मिलाती तथा लकड़ी की आंतरिक सज्जा वाले कक्ष में उनके साथ बातचीत करती दिखाई दे रही हैं। तस्वीरें जारी करने वाले राष्ट्रपति प्रेस एवं सूचना ब्यूरो ने बताया कि यह बैठक सोमवार सुबह हुई। हालांकि, ब्यूरो ने बैठक के स्थान और बातचीत के विषय में कोई जानकारी नहीं दी। जारी की गई दो अन्य तस्वीरों में सू ची केक काटती नजर आ रही हैं। केक पर ‘‘हेपी बर्थ डे आंटी सू, 19.6.2026’’ लिखा है। इससे संकेत मिलता है कि ये तस्वीरें जून में उनके 81वें जन्मदिन के अवसर पर ली गई होंगी। तस्वीरों में सू ची सहज और मुस्कुराती दिखाई दे रही हैं। वे किसी प्रकार से अस्वस्थ भी नहीं लग रही हैं। हालांकि, केवल तस्वीरों के आधार पर उनकी वास्तविक शारीरिक स्थिति का स्वतंत्र रूप से आकलन नहीं किया जा सकता।
युवा नशे जैसी विनाशकारी आदत से दूर रहें-मोदी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘नशा मुक्त युवा फॉर विकसित भारत संकल्प अभियान’ का शुभारंभ करते हुए आह्वान किया हैकि देश के युवा शारीरिक और मानसिक रूपसे स्वस्थ रहें, आत्मविश्वास से परिपूर्ण हों और नशीले पदार्थों जैसी विनाशकारी आदतों से हमेशा दूर रहें। राष्ट्रव्यापी वीडियो कॉंफ्रेंस से जुड़े एक करोड़ से...
Middle East में टला बड़ा युद्ध: क्षेत्रीय सहयोगियों की अपील पर Trump ने Iran से बातचीत को दी मंजूरी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत सोमवार दोपहर को शुरू होगी। उन्होंने दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़े अमेरिकी सैन्य हमले की योजना को टाल दिया है, जिससे हफ़्तों से बढ़ते तनाव के बावजूद कूटनीति की दिशा में नई पहल का संकेत मिलता है। रविवार को न्यू जर्सी से वॉशिंगटन लौटते समय 'एयर फ़ोर्स वन' में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि अमेरिका एक बड़ा मिलिट्री ऑपरेशन शुरू करने के लिए तैयार था, लेकिन क्षेत्रीय सहयोगियों की अपील के बाद इसे रोकने का फ़ैसला किया गया, क्योंकि उन्हें लगा कि कूटनीतिक समाधान निकल सकता है। इसे भी पढ़ें: Middle East Conflict | Donald Trump का दावा- शांति समझौते पर बनी रूपरेखा: होर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु मुद्दों पर वार्ता, खाड़ी देशों की मध्यस्थता रंग लाई ट्रंप ने कहा कि यह एक बहुत बड़ा हमला होने वाला था। यह हमला दूसरे विश्व युद्ध के बाद का अब तक का सबसे बड़ा हमला होता। ट्रंप ने बताया कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर और ईरान ने उनसे सैन्य कार्रवाई न करने का आग्रह किया था। उन्होंने कहा कि हम उनसे बातचीत (नेगोशिएशन) के ज़रिए बात कर रहे हैं। यह कल दोपहर शुरू होगी, और देखते हैं क्या होता है। कूटनीति को लेकर उम्मीद जताते हुए ट्रंप ने कहा, मैं ऐसा ज़रूर करना चाहूँगा। इससे बहुत सारी जानें बचेंगी। जब पूछा गया कि क्या ईरान के पास समझौता करने के लिए कोई समय-सीमा है, तो ट्रंप ने कहा कि वे और टकराव के बजाय बातचीत से समाधान निकालना पसंद करेंगे। उन्होंने कहा कि मैं समझौता करना ज़्यादा पसंद करूँगा। मैं लोगों की जान नहीं लेना चाहता क्योंकि लोग मरते हैं, बहुत से लोग मरते हैं, और हम ऐसा नहीं चाहते। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि दूसरा विकल्प यानी मिलिट्री ऑपरेशन उनके लिए विनाशकारी होता और कहा कि सऊदी अरब ने कूटनीति का समर्थन किया क्योंकि उसका मानना था कि समझौता जल्द ही होने वाला है। इसे भी पढ़ें: Gaza Air Strikes: ट्रम्प के Peace Plan पर फिरा पानी, इजरायली हवाई हमलों में 17 नागरिकों की मौत से बढ़ा तनाव ये बातें शनिवार को 'ट्रुथ सोशल' पर किए गए एक पोस्ट के बाद सामने आईं, जिसमें ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना पूरी तरह तैयार थी, लेकिन ईरान और मध्य पूर्व के कई देशों के समझौते को अंतिम रूप देने के लिए और समय मांगने पर उन्होंने कार्रवाई टालने का फैसला किया। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित समझौते से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को तुरंत और पूरी तरह से फिर से खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी चिंताओं को दूर करने में मदद मिलेगी।
'गले लगाया और छुरा घोंप दिया'... PAK मंत्री का ट्रंप पर बड़ा हमला, अमेरिका को लेकर किया चौंकाने वाला दावा

