अमेरिका ने लगातार पांचवें दिन ईरान पर हमले तेज करते हुए हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की ओर बढ़ रहे एक ऑयल टैंकर को निशाना बनाया। CENTCOM के अनुसार जहाज को हेलफायर मिसाइल से निष्क्रिय किया गया। जवाब में ईरान ने भी अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए।
ट्रंप का दबाव: नेतन्याहू से सीरिया-लेबनान से सेना हटाने की मांग
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से सीरिया और दक्षिणी लेबनान से इजरायली सैनिकों को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने का बार-बार आग्रह कर रहे है। इस आशय की रिपोर्ट अमेरिकी एवं इजरायली अधिकारियों के हवाले से 'एक्सियोस' ने दी है
दक्षिण एशिया और पश्चिम एशिया के राजनीतिक गलियारों से एक बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक खबर सामने आ रही है। पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ अपने द्विपक्षीय और आर्थिक संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने के लिए बड़ा कूटनीतिक दांव खेला है, और विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान का यह तीर बिल्कुल निशाने पर जाकर लगा है। हालांकि, कूटनीतिक हलकों में चल रही चर्चाओं के विपरीत, पाकिस्तान की इस नई और मजबूत होती 'सऊदी यारी' के निशाने पर उसका पारंपरिक प्रतिद्वंद्वी भारत नहीं है। तो फिर आखिर वह कौन सा मुल्क है जिसे घेरने या कूटनीतिक रूप से पीछे धकेलने के लिए पाकिस्तान और सऊदी अरब इतने करीब आ रहे हैं?सऊदी संग क्यों मजबूत हो रही है पाकिस्तान की कूटनीतिक साझेदारी?हाल के दिनों में पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच उच्च स्तरीय बैठकों और आर्थिक समझौतों का दौर बेहद तेज हो गया है। गंभीर आर्थिक संकट और विदेशी मुद्रा भंडार की कमी से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए सऊदी अरब हमेशा से एक बड़ा संकटमोचक रहा है। पाकिस्तान की वर्तमान सरकार ने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस और वहां के निवेशकों को रिझाने के लिए अपने विशेष निवेश सुविधा परिषद (SIFC) के जरिए बड़े नीतिगत बदलाव किए हैं। पाकिस्तान का यह कूटनीतिक तीर सीधे निशाने पर लगा है, जिसके बाद सऊदी की ओर से पाकिस्तान के ऊर्जा, कृषि और खनन क्षेत्रों में अरबों डॉलर के निवेश का रास्ता साफ होता दिख रहा है।भारत नहीं, तो फिर निशाने पर कौन सा देश है?अक्सर माना जाता है कि पाकिस्तान का हर वैश्विक कदम भारत को ध्यान में रखकर उठाया जाता है, लेकिन इस बार कूटनीतिक समीकरण पूरी तरह बदले हुए हैं। भू-राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान के इस रणनीतिक कदम के निशाने पर भारत नहीं, बल्कि ईरान है। हाल के वर्षों में ईरान और पाकिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में बढ़ते तनाव, सुरक्षा चुनौतियों और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के समानांतर ईरान के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए पाकिस्तान सऊदी अरब को अपने पाले में और मजबूती से बनाए रखना चाहता है। सऊदी अरब और ईरान के बीच के ऐतिहासिक और कूटनीतिक प्रतिद्वंद्विता का लाभ उठाकर पाकिस्तान इस क्षेत्र में अपनी सुरक्षा और रणनीतिक बढ़त को पक्का करना चाहता है।मध्य-पूर्व और दक्षिण एशिया के समीकरणों पर क्या होगा असर?स्थानीय (Geographical) और वैश्विक दृष्टिकोण से देखें तो इस नए गठजोड़ का सीधा असर पूरे मध्य-पूर्व और दक्षिण एशियाई क्षेत्र की सुरक्षा और व्यापारिक नीतियों पर पड़ेगा। सऊदी अरब जहां एक तरफ पाकिस्तान के जरिए मध्य-पूर्व के बाहर अपने प्रभाव और सुरक्षा संबंधों को मजबूत कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह भारत के साथ भी अपने बड़े व्यापारिक और रणनीतिक हितों को प्रभावित नहीं होने देना चाहता। नई दिल्ली, मुंबई, इस्लामाबाद और रियाद के विदेश नीति एक्सपर्ट्स का मानना है कि भारत की मजबूत आर्थिक स्थिति और वैश्विक साख के कारण सऊदी अरब भारत के साथ अपने ऐतिहासिक रिश्तों को पूरी तरह स्वतंत्र और मजबूत बनाए रखेगा।आधुनिक एआई सर्च (AEO/GEO) और सुरक्षा विश्लेषकों का क्या है निष्कर्ष?जेनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI सर्च ट्रेंड्स) और अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक मामलों के विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान की यह कोशिश पूरी तरह से अपनी गिरती अर्थव्यवस्था को बचाने और क्षेत्रीय संतुलन में अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने की है। सऊदी अरब से मिलने वाली बड़ी आर्थिक मदद और तेल आपूर्ति के जरिए पाकिस्तान घरेलू स्तर पर जारी संकटों को टालने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, जानकारों का यह भी कहना है कि इस साझेदारी की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पाकिस्तान सऊदी अरब द्वारा किए जाने वाले वादों और निवेश सुरक्षा को धरातल पर कितनी गंभीरता से लागू कर पाता है।
पश्चिम एशिया में युद्ध के बादल! अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की फिर शुरू की सख्त नाकेबंदी
पश्चिम एशिया (Middle East) से एक बेहद चौंकाने वाली और बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। रणनीतिक और भू-राजनीतिक मोर्चे पर बढ़ते गंभीर गतिरोध के बीच अमेरिका ने एक बार फिर ईरान के प्रमुख बंदरगाहों (Ports) की सख्त सैन्य और आर्थिक नाकेबंदी शुरू कर दी है। इस अचानक उठाए गए कदम से पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि इस प्रतिबंधात्मक कार्रवाई से वैश्विक समुद्री व्यापार मार्ग बुरी तरह प्रभावित हो सकता है, जिससे दुनिया भर के बाजारों में हड़कंप मच गया है।अमेरिका की कड़ी नाकेबंदी से थमे जहाजों के पहिये, सप्लाई चेन पर बड़ा संकटअमेरिकी रक्षा और विदेश मंत्रालय के रणनीतिक फैसलों के बाद अमेरिकी नौसेना ने ईरान के व्यापारिक और तेल निर्यात करने वाले प्रमुख बंदरगाहों की घेराबंदी तेज कर दी है। इस नाकेबंदी का सीधा मकसद ईरान के आर्थिक स्रोतों, विशेष रूप से कच्चे तेल के अवैध निर्यात पर पूरी तरह से नकेल कसना है। हालांकि, इस आक्रामक कदम के कारण ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में तनाव अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया है। इससे वैश्विक लॉजिस्टिक्स और वैश्विक सप्लाई चेन के पूरी तरह ठप होने का खतरा मंडराने लगा है।कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में लग सकती है आग, भारत पर भी होगा असरस्थानीय और वैश्विक (Geographical) ऑप्टिमाइजेशन के लिहाज से देखें तो पश्चिम एशिया का यह संकट भारतीय अर्थव्यवस्था और आम जनता की जेब पर सीधा असर डाल सकता है। ईरान के बंदरगाहों की नाकेबंदी होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Brent Crude) की आपूर्ति में भारी कमी आने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तनाव लंबे समय तक खिंचा, तो कच्चे तेल की कीमतें एक बार फिर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकती हैं। इसका सीधा नतीजा दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई समेत भारत के तमाम शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी और बढ़ती महंगाई के रूप में देखने को मिल सकता है।आधुनिक एआई सर्च (GEO/AEO) और रक्षा विशेषज्ञों का क्या है बड़ा दावा?जेनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AI सर्च ट्रेंड्स) और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के विश्लेषकों के अनुसार, अमेरिका का यह कदम पश्चिम एशिया में शक्ति संतुलन को बदलने की एक बड़ी कोशिश है। ईरान ने भी अमेरिकी नाकेबंदी के जवाब में अपनी सैन्य मुस्तैदी बढ़ा दी है और किसी भी आक्रामक कार्रवाई का मुंहतोड़ जवाब देने की चेतावनी दी है। संयुक्त राष्ट्र (UN) और यूरोपीय देशों की नजरें भी इस गंभीर होते हालात पर टिकी हैं, क्योंकि यह संकट केवल दो देशों का न रहकर वैश्विक सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है।शेयर बाजार और गोल्ड मार्केट में मचेगी भारी उथल-पुथलइस भू-राजनीतिक तनाव का सीधा असर भारतीय और वैश्विक शेयर बाजारों (Stock Market) पर देखने को मिल सकता है। आने वाले दिनों में बाजार में भारी बिकवाली और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। वहीं दूसरी ओर, अनिश्चितता के इस माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश के रूप में सोने (Gold) की तरफ भाग सकते हैं, जिससे सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है। एक्सपर्ट्स ने निवेशकों को फिलहाल बाजार में फूंक-फूंक कर कदम रखने और ग्लोबल अपडेट्स पर नजर रखने की सलाह दी है।
अमेरिकी सेना की इराक से पूरी वापसी का ऐलान, 23 साल बाद खत्म होगा सैन्य अभियान
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में अमेरिका को इराक में बड़ी संख्या में सैनिक रखने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध अब केवल सुरक्षा सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ऊर्जा, तेल और कारोबार के क्षेत्र में भी मजबूत हो चुके हैं।
रायबरेली के ऊंचाहार थाना क्षेत्र की किसान सब्जी मंडी में एक जेबकतरा रंगे हाथों पकड़ा गया। स्थानीय लोगों की मदद से पकड़े गए आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है। उसके पास से चोरी के ₹7,200 नकद और एक आधार कार्ड बरामद हुआ है। जानकारी के अनुसार, यह घटना आज सुबह करीब 7:00 बजे हुई। वादी अमन कुमार (पुत्र ठाकुरदीन मौर्य, निवासी पूरे खपटिहा, थाना ऊंचाहार) अपनी सब्जी दुकान पर मौजूद थे। इसी दौरान एक अज्ञात व्यक्ति ने उनकी जेब से ₹1,200 और उनका आधार कार्ड चुरा लिया। इतना ही नहीं, आरोपी ने मंडी में सब्जी खरीदने आए एक अन्य ग्राहक धीरेन्द्र कुमार (पुत्र मेवालाल, निवासी पूरे जय सिंह दीन शाह गौरा, थाना गदागंज) की जेब से भी ₹6,000 चोरी कर लिए। अमन कुमार ने सतर्कता दिखाते हुए आसपास के लोगों की मदद से आरोपी को मौके पर ही पकड़ लिया और पुलिस को सौंप दिया। पुलिस पूछताछ में पकड़े गए अभियुक्त की पहचान जितेन्द्र कुमार (पुत्र कमललाल, निवासी पौड़ी पिथौराबाद, थाना नागोद, जनपद सतना, मध्य प्रदेश) के रूप में हुई। पुलिस ने उसके पास से चोरी किए गए कुल ₹7,200 नकद और एक आधार कार्ड बरामद किया है। वादी की तहरीर के आधार पर ऊंचाहार थाने में मुकदमा पंजीकृत किया गया है। इस मामले में त्वरित विधिक कार्रवाई करने वाली पुलिस टीम में उपनिरीक्षक सौरभ पाण्डेय, आरक्षी मोहित सिरोही और आरक्षी सत्यम शामिल थे।
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य हमलों और गंभीर भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tension) का सीधा असर भारतीय सर्राफा बाजार पर देखने को मिल रहा है. खाड़ी क्षेत्र में युद्ध की चिंगारी भड़कने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में जहां कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भारी उबाल आया है, वहीं इसने सोने पर चौतरफा दबाव बना दिया है.नतीजतन, घरेलू बाजार में लगातार दूसरे दिन सोने और चांदी की चमक फीकी पड़ी है. राजधानी दिल्ली में पिछले दो दिनों के भीतर 24 कैरेट वाला 10 ग्राम सोना ₹1,430 और 22 कैरेट वाला सोना ₹1,310 तक सस्ता हो चुका है. आइए जानते हैं आज 14 जुलाई 2026 को देश के 10 बड़े शहरों में 18K, 22K और 24K शुद्धता वाले सोने और चांदी का ताजा भाव क्या है.देश के 10 बड़े शहरों में आज का गोल्ड रेट (Gold Rate Today)भारतीय सर्राफा बाजार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, आज 10 ग्राम सोने की कीमतें ऊपरी स्तरों से फिसलकर नीचे आई हैं. देश के प्रमुख शहरों में प्रति 10 ग्राम का ताजा भाव निम्नलिखित है:शहर24 कैरेट (₹/10 ग्राम)22 कैरेट (₹/10 ग्राम)18 कैरेट (₹/10 ग्राम)दिल्ली (Delhi)₹1,43,050₹1,31,140₹1,07,320मुंबई (Mumbai)₹1,42,900₹1,30,990₹1,07,170कोलकाता (Kolkata)₹1,42,900₹1,30,990₹1,07,170चेन्नई (Chennai)₹1,43,990₹1,31,990₹1,10,190बेंगलुरू (Bengaluru)₹1,42,900₹1,30,990₹1,07,170हैदराबाद (Hyderabad)₹1,42,900₹1,30,990₹1,07,170लखनऊ (Lucknow)₹1,43,050₹1,31,140₹1,07,320जयपुर (Jaipur)₹1,43,050₹1,31,140₹1,07,320पटना (Patna)₹1,42,950₹1,31,040₹1,07,220अहमदाबाद (Ahmedabad)₹1,42,950₹1,31,040₹1,07,220चांदी की चमक भी पड़ी फीकी; चेन्नई में सबसे महंगी (Silver Price Today)भू-राजनीतिक तनाव के साथ-साथ औद्योगिक क्षेत्रों (Industries) की तरफ से मांग में आई सुस्ती ने चांदी की कीमतों को भी प्रभावित किया है. दो दिनों की स्थिरता के बाद आज चांदी के भाव नीचे आ गए हैं और इसमें प्रति किलोग्राम ₹100 की गिरावट दर्ज की गई है.दिल्ली, मुंबई और कोलकाता: इन तीनों महानगरों में आज एक किलो चांदी ₹100 सस्ती होकर ₹2,34,900 के भाव पर बिक रही है.चेन्नई में सबसे महंगी चांदी: दक्षिण भारत के प्रमुख महानगर चेन्नई में आज एक किलो चांदी का भाव ₹2,39,900 है, जो देश के चारों बड़े महानगरों में सबसे अधिक है.कच्चे तेल में उबाल से क्यों सस्ता हो रहा है सोना?वैश्विक स्तर पर जब भी युद्ध जैसे हालात बनते हैं, तब तेल की आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका में कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़ते हैं. क्रूड महंगा होने से दुनिया भर में केंद्रीय बैंकों (जैसे अमेरिकी फेड) द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो जाती है क्योंकि महंगाई बढ़ने का खतरा होता है. जब ब्याज दरें ऊंची रहने की उम्मीद होती है, तो बड़े निवेशक सोने जैसी गैर-ब्याज वाली सुरक्षित संपत्तियों से मुनाफावसूली (Profit Booking) करके डॉलर या सरकारी बॉन्ड की तरफ रुख करते हैं. यही कारण है कि कच्चे तेल की तेजी के बीच सोने-चांदी के भाव में लगातार सुधार (Correction) देखने को मिल रहा है.
वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के एक चौंकाने वाले बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 10% का जोरदार उछाल दर्ज किया गया है.ब्रेंट क्रूड के भाव कल के अपने निचले स्तर से रिकवर होकर अब $85 प्रति बैरल के बेहद करीब पहुंच गए हैं, जो पिछले चार हफ्तों का सबसे उच्चतम स्तर है. पिछले कारोबारी सत्र में ब्रेंट क्रूड में 9.6% की तेजी देखी गई थी, जो मई 2020 के बाद से एक दिन में सबसे बड़ी उछाल है.डोनाल्ड ट्रंप का '20% फीस' वाला बयान और अमेरिकी नाकेबंदीकच्चे तेल की कीमतों में आई इस अचानक तेजी की सबसे मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान है, जो उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर पोस्ट किया है. ट्रंप ने मांग की है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले तेल के जहाजों पर 20% कार्गो फीस लगाई जानी चाहिए या फिर तेल ले जाने वाले पूरे सुपरटैंकरों से $30 मिलियन (3 करोड़ डॉलर) से अधिक का भुगतान लिया जाना चाहिए.ट्रंप ने सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन और कुवैत जैसे खाड़ी देशों का हवाला देते हुए कहा कि जो देश इस रणनीतिक जलमार्ग की सुरक्षा चाहते हैं, उन्हें अमेरिका को यह भुगतान करना होगा. इसके साथ ही अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान पर लगातार तीसरी रात हवाई हमले किए हैं और ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) दोबारा शुरू कर दी है.नाजुक सीजफायर टूटा; होर्मुज स्ट्रेट में मिसाइल और ड्रोन हमले तेजकुछ समय पहले अमेरिका और ईरान के बीच हुए चार महीने लंबे युद्ध को खत्म करने के लिए एक समझौता (MoU) हुआ था, लेकिन यह नाजुक सीजफायर ज्यादा दिनों तक नहीं टिक सका.यूएई के टैंकरों पर हमला: ईरान की सेमी-ऑफिशियल न्यूज एजेंसी 'फार्स' के मुताबिक, ईरानी सेना ने कुवैत में अमेरिकी ठिकानों को ड्रोन से निशाना बनाया है. वहीं संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने आधिकारिक पुष्टि की है कि हॉर्मुज स्ट्रेट के दक्षिणी नौवहन मार्ग में उसके दो बड़े तेल टैंकरों पर क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया है.ईरान का पलटवार: अमेरिकी नाकेबंदी के बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर ट्रंप की 20% फीस की मांग का मजाक उड़ाया है. उन्होंने स्पष्ट किया है कि ईरान इस जलडमरूमध्य का अकेला रखवाला बना रहेगा और किसी भी बाहरी दबाव के आगे नहीं झुकेगा.मार्केट एक्सपर्ट्स की राय: कहां तक जाएंगे कच्चे तेल के दाम?इंफ्रास्ट्रक्चर कैपिटल मैनेजमेंट के चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) जे हैटफील्ड के अनुसार, जब तक हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सैन्य हलचल जारी रहेगी, तब तक कच्चे तेल के भाव $80 से $85 के दायरे में बने रह सकते हैं. हालांकि, उनका मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में भी कीमतें $90 या $100 के पार जाने की उम्मीद बेहद कम है. विशेषज्ञ यह भी मान रहे हैं कि यदि कूटनीतिक बातचीत के जरिए यह स्ट्रेट दोबारा पूरी तरह सुरक्षित खुल जाता है, तो क्रूड की कीमतें तेजी से गिरकर वापस $60 प्रति बैरल तक आ सकती हैं.
केंद्रीय जनजाति राज्य मंत्री दुर्गादास उइके सोमवार को उदयपुर दौरे पर रहे। उन्होंने लेक्रोज के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों और राष्ट्रीय प्रशिक्षक नीरज बत्रा से मुलाकात कर उनकी उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा- इराक के खिलाफ मुकाबले के दौरान चेहरे पर गंभीर चोट लगने और 9 टांके आने के बावजूद मोहनलाल ने हार नहीं मानी। चिकित्सकीय जोखिम के बावजूद उन्होंने पाकिस्तान के विरुद्ध महत्वपूर्ण मुकाबले में मैदान पर उतरकर साहस का परिचय दिया। साथ ही सर्वाधिक गोल कर भारत की ऐतिहासिक जीत का मार्ग दिखाया। इन्होंने भारतीय टीम को स्वर्ण पदक दिलाने में निर्णायक भूमिका निभाई। इस अवसर पर जनजाति क्षेत्रीय विकास मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने कहा- राजस्थान आज भारत में लेक्रोज का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है। विशेष रूप से उदयपुर के जनजातीय क्षेत्र के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रहे हैं। उन्होंने कहा- राज्य सरकार जल्द ही लेक्रोज को खेल नीति में शामिल कर खिलाड़ियों को रोजगार और बेहतर अवसर उपलब्ध कराने का काम करेगी। सांसद डॉ. मन्नालाल रावत ने खिलाड़ियों को लक्ष्य ओलंपिक की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हुए कहा- केंद्र सरकार प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं, राज्यसभा सांसद चुन्नीलाल गरासिया, समाजसेवी गजपाल सिंह राठौड़ और पुष्कर तेली ने भी खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन किया।
नागौर के प्रसिद्ध संत श्री चतुरदासजी महाराज मंदिर (बुटाटी धाम) में 22.74 करोड़ रुपए की वित्तीय गड़बड़ी का मामला गरमा गया है। मंदिर समिति के अध्यक्ष देवेंद्र सिंह ने जांच रिपोर्ट को फर्जी बताया है। उन्होंने एसडीएम और जांच समिति पर राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित होकर एकतरफा कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि जांच समिति में पूरा कोरम मौजूद नहीं था और उनका पक्ष सुने बिना रिपोर्ट तैयार कर दी है। वे सोमवार को जिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार के ऑफिस पहुंचे और जांच प्रक्रिया में सभी दस्तावेजों को शामिल करने की मांग की। हालांकि कलेक्टर देवेंद्र कुमार ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि समिति की बैठक में सभी जरूरी सदस्य मौजूद थे। दरअसल, 29 जनवरी 2026 को तत्कालीन कलेक्टर अरुण कुमार पुरोहित ने 13 सदस्यीय समिति बनाई थी। पिछले महीने 23 जून को कमेटी ने जांच रिपोर्ट कलेक्टर देवेंद्र कुमार को सौंपी। इसके अनुसार, 2023-24 और 2024-25 में 15.16 करोड़ का प्रमाणित गबन सामने आया। वहीं 2025-26 के रिकॉर्ड जांच दल को उपलब्ध नहीं कराने पर प्रतिकूल अनुमान पर 7.58 करोड़ का गबन जोड़ते हुए कुल 22.74 करोड़ रुपए के कथित गबन का आकलन किया गया है। रिपोर्ट में अध्यक्ष समेत 11 वर्तमान और पूर्व सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के साथ निजी संपत्तियां कुर्क करने की सिफारिश की गई। 5 पॉइंट्स में पढ़िए अध्यक्ष का जवाब अब पढ़िए- जांच रिपोर्ट के अनुसार कैसे हुआ 22 करोड़ का घोटाला? 2.60 करोड़ के जेवर का रिकॉर्ड नहीं: पुरानी समिति के पास 36 किलो चांदी, 250 ग्राम सोना था। नई समिति ने कार्यभार ग्रहण करते समय 35.5 किलो चांदी, 280 ग्राम सोना बताया। वर्तमान में 2.60 करोड़ मूल्य की संपत्ति है, लेकिन लेखा में दर्ज ही नहीं है। ग्राम विकास में 1.28 करोड़ का खेल: 2024-25 में ग्राम विकास पर 31.37 लाख खर्च दर्शाए गए, न ठेकेदारों का रिकॉर्ड न भौतिक प्रमाण। कंप्यूटर, फर्नीचर के नाम पर 97.48 लाख बिना बिल, वर्क ऑर्डर के खर्च दिखाए। 82.41 लाख के सीसीटीवी का खर्च: सीसीटीवी कैमरों पर 82.41 लाख खर्च किए गए, लेकिन कोई निविदा नहीं मिली। एम जंक्शन सर्विसेज के नाम 58.14 लाख का भुगतान दर्ज। वाउचर रानाबाई ट्रेडर्स के नाम मिले। इसे भी गड़बड़ी माना गया। दान पेटी व खातों में लाखों का अंतर: दान पेटी की आय ऑडिट रिपोर्ट व रोकड़ बही में अलग-अलग दर्ज मिली। 2023-24 और 2024-25 की आय में अंतर। ग्राम सेवा सहकारी बैंक खाते में 3.40 लाख, ग्रामीण बैंक खाते में 1.75 लाख रुपए का अंतर मिला। रसोई में 49.49 लाख का फर्जी खर्च: भोजनशाला निर्माण पर 49.49 लाख खर्च दिखाए, जबकि ग्राउंड फ्लोर का पूरा निर्माण एक भामाशाह ने कराया था। समिति ने फर्जी बिल लगा मंदिर निधि से राशि निकाल ली। रसोई खर्च 1 साल में 335 प्रतिशत बढ़ गए। गोशाला में भी अनियमितता: सुलभ कॉम्प्लेक्स से प्राप्त 18.12 लाख का किराया मुख्य लेखा पुस्तकों में दर्ज नहीं। गोशाला रखरखाव के नाम पर 17.87 लाख खर्च दिखाए, जबकि समिति ने राशि मिलने से इनकार किया। सुरक्षा व्यवस्था में 31.33 लाख रुपए खर्च दर्शाए गए। कलेक्टर बोले- हम कार्रवाई नहीं कर सकतेजिला कलेक्टर देवेंद्र कुमार ने बताया कि पूरा मामला कोर्ट में है, इसके कारण पूरे मामले की जांच की जा रही है। जो भी रिपोर्ट आई हैं, वो भी सर्व समिति की ओर से आई है। रिपोर्ट में वाउचर नहीं है, बिल नहीं है, ऐसे में जांच रिपोर्ट पेश की है। फिलहाल कमेटी जांच कर सकती हैं, लेकिन वो किसी भी प्रकार की कारवाई नहीं कर सकती। उन्होंने कहा- आज मंदिर समिति ने ज्ञापन सौंपा है, इसकी उच्च अधिकारियों और उच्च कमेटी से जांच करवाई जाएगी। हालांकि जांच कमेटी की बैठक में सभी जरूरी सदस्य मौजूद थे। ऐसे में बैठक तय प्रक्रिया के तहत ही हुई थी। बुटाटी धाम विवाद से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… राजस्थान में भी मंदिर दान घोटाला, 22 करोड़ का गबन:चढ़ावा, सोने-चांदी का भी रिकॉर्ड नहीं, भामाशाहों ने जो बनवाया, उसे समिति खर्च में जोड़ा राजस्थान में भी अयोध्या के राम मंदिर दान चोरी जैसा मामला सामने आया है। मामला नागौर के बुटाटी स्थित करीब 500 साल पुराने संत श्री चतुरदासजी महाराज मंदिर से जुड़ा है। पूरी खबर पढ़िए
सिरोही जिले की शिवगंज तहसील के छीबा गांव में सावलाजी मंदिर की भूमि पर कथित अतिक्रमण और पुलिस की एकतरफा कार्रवाई के विरोध में सोमवार को हजारों लोगों ने महापड़ाव किया। राजपूत समाज सहित विभिन्न समाजों के लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम अतिरिक्त कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मंदिर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने, झूठे मुकदमे हटाने तथा दोषियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। राम झरोखा मैदान से निकला महाजुलूस सोमवार सुबह करीब 9:30 बजे से राजपूत समाज के नेतृत्व में लोग राम झरोखा मैदान में जुटने लगे। विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों ने सभा को संबोधित करते हुए मामले में प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए। इसके बाद हजारों लोग नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे और अतिरिक्त कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। तहसीलदार और पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि यदि तहसीलदार समय रहते प्रभावी कार्रवाई करते तो विवाद इतना नहीं बढ़ता। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मंदिर भूमि को कब्जे में लेने के बजाय कथित अतिक्रमणकारियों को कई दिनों की मोहलत दी गई। वहीं, पुलिस ने अतिक्रमणकारियों की शिकायत पर एकतरफा कार्रवाई करते हुए ग्रामीणों और मंदिर समिति के सदस्यों पर गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज कर दिए, जिससे समाज में रोष है। मंदिर समिति ने बताया भूमि का इतिहास ज्ञापन के अनुसार सावलाजी मंदिर के नाम राजस्व रिकॉर्ड में भूमि दर्ज है और इसका स्वामित्व मंदिर के पास है। यह मंदिर माफी की डोली भूमि है, जिसे शिवगंज के देवड़ा जागीरदारों ने मंदिर के संचालन और आय के लिए दान किया था। सालों से मंदिर समिति ग्रामीणों के माध्यम से इस भूमि की खेती करवाती रही है। उपज से किसानों का हिस्सा देने के बाद शेष आय मंदिर के रखरखाव और धार्मिक गतिविधियों में खर्च की जाती रही। भूमि विवाद कैसे बढ़ा मंदिर समिति का आरोप है कि सोलंकी परिवार के कुछ लोगों ने पहले समिति से अनुमति लेकर खेती की, लेकिन बाद में जमीन की कीमत बढ़ने पर उस पर कब्जा करने की मंशा से अतिक्रमण शुरू कर दिया। समिति ने जब आगे खेती की अनुमति देने से इनकार किया तो विवाद बढ़ गया। ग्रामीणों का आरोप है कि भूमि खाली करने के आश्वासन के बावजूद कब्जा नहीं छोड़ा गया। देवस्थान विभाग के आदेश का भी किया उल्लेख ज्ञापन में बताया गया कि 19 मार्च 2026 को मंदिर का पंजीकरण देवस्थान विभाग में कराया गया। इसके बाद देवस्थान विभाग, जोधपुर ने उपखंड अधिकारी, विकास अधिकारी और तहसीलदार को मंदिर की खातेदारी भूमि का प्रबंधन ट्रस्ट को सौंपने तथा वर्तमान कब्जाधारियों से भूमि मुक्त कराने की कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इन आदेशों का प्रभावी पालन नहीं हुआ। ये प्रमुख मांगें रखीं प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन में सावलाजी मंदिर की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर ट्रस्ट को सुपुर्द करने, ग्रामीणों पर दर्ज गंभीर धाराओं वाले मुकदमों की निष्पक्ष जांच कर झूठे मामलों को हटाने, अनुसूचित जाति के अजराम भूल के साथ मारपीट के आरोपियों की गिरफ्तारी, तथा कथित अतिक्रमित भूमि पर दिए गए बिजली कनेक्शन तत्काल काटने सहित कई मांगें रखीं। जनप्रतिनिधि भी रहे मौजूद अतिरिक्त कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने के दौरान नारायण सिंह, भारत सिंह, जगमाल राम देवासी, पूराराम मेघवाल, विक्रम सिंह, हरि सिंह, दलीप सिंह माडानी, कुलदीप सिंह, डूंगर सिंह, बाबू सिंह, जबर सिंह सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और विभिन्न समाजों के लोग मौजूद रहे।
होर्मुज जलडमरूमध्य में फिर भड़का युद्ध! अमेरिका-ईरान के बीच सीधी भिड़ंत से खाड़ी देशों में खलबली
दुनिया के सबसे व्यस्त और संवेदनशील समुद्री मार्ग 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) पर एक बार फिर तनाव चरम पर है। अमेरिकी सेना ने ईरान के ठिकानों पर फिर से हवाई हमले किए हैं, जिससे मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष अब खाड़ी देशों की सीमाओं तक पहुंच गया है। इस घटना ने वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की आपूर्ति और भू-राजनीतिक सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जहाँ से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा तेल आयात करता है, अब सीधे तौर पर युद्ध क्षेत्र में बदलता नजर आ रहा है।क्यों बढ़ रहा है होर्मुज पर तनाव?ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहा शीतयुद्ध अब खुले संघर्ष में बदल चुका है। ताजा हमलों के पीछे अमेरिकी सेना का तर्क है कि ईरान समर्थित गुटों ने अमेरिकी संपत्ति और नौसैनिक बेड़ों को निशाना बनाने की कोशिश की थी। वहीं, तेहरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला करार देते हुए कड़े जवाब की चेतावनी दी है। यह पूरा क्षेत्र न केवल तेल के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह ग्लोबल सप्लाई चेन की 'धमनी' माना जाता है। किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ना तय है।खाड़ी देशों के लिए कितना बड़ा खतरा?यूएई, सऊदी अरब और कतर जैसे खाड़ी देश इस बढ़ते तनाव को लेकर सबसे ज्यादा डरे हुए हैं। यदि युद्ध और अधिक फैलता है, तो इन देशों के समुद्री व्यापारिक मार्ग पूरी तरह से ठप हो सकते हैं। एक्सपर्ट्स का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होता है, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका असर रूस-यूक्रेन युद्ध से भी कहीं ज्यादा घातक होगा। खाड़ी देशों ने अपनी सीमाओं पर सुरक्षा को हाई-अलर्ट पर रखा है और वे लगातार अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थों के संपर्क में हैं ताकि संघर्ष को फैलने से रोका जा सके।क्या वैश्विक बाजारों में आएगी तेजी?बाजार के जानकारों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच इस सीधी भिड़ंत का असर सीधे तौर पर क्रूड ऑयल के दामों पर दिखेगा। अगले कुछ दिनों में पेट्रोल और डीजल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है। भारत जैसे देशों के लिए यह स्थिति चिंताजनक है क्योंकि हम अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी समुद्री मार्ग पर निर्भर हैं। निवेशकों और आम नागरिकों के लिए आने वाला समय अनिश्चितताओं से भरा हो सकता है, क्योंकि युद्ध की यह आंच अब सीधे खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्थाओं तक पहुंच चुकी है, जिसका असर हम सभी की जेब पर पड़ेगा।
देश के लिए सीमा पर तीन ऐतिहासिक युद्ध लड़ चुके एक बुजुर्ग सैनिक को अपने जीवन के आखिरी पड़ाव में अपनी ही जमीन बचाने के लिए सरकारी दफ्तरों और थानों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। मामला राजस्थान के सरहदी जिले जैसलमेर के मोहनगढ़ इलाके का है, जहां 1962 में चीन और 1965 व 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ जंग में शामिल रहे 92 साल के रिटायर्ड कैप्टन चुन्नीलाल की कृषि जमीन को भू-माफियाओं ने फर्जी डाक्यूमेंट्स के जरिए अपने नाम करवा लिया। आरोप है कि असली सैनिक की जगह 75 साल के एक फर्जी बुजुर्ग को खड़ा कर रजिस्ट्री करवाई गई और बाद में जमीन करीब 25 लाख रुपए में बेच दी गई। मामले में पुलिस अधीक्षक के हस्तक्षेप के बाद कोतवाली थाने में नामजद एफआईआर दर्ज की गई है। इंदिरा गांधी नहर परियोजना के तहत मिली थी जमीन पीड़ित कैप्टन चुन्नीलाल मूल रूप से हिमाचल प्रदेश के रहने वाले हैं और पोंग बांध परियोजना के विस्थापित हैं। बांध निर्माण के दौरान उनकी पैतृक जमीन अधिग्रहित की गई थी। इसके बदले सरकार ने उन्हें इंदिरा गांधी नहर परियोजना के तहत जैसलमेर के मोहनगढ़ इलाके में कृषि भूमि का मुरब्बा आवंटित किया था। परिवार का कहना है कि दशकों पहले जिस बंजर मरुस्थल को उन्हें दिया गया था, उसे उन्होंने अपने खून-पसीने की मेहनत से उपजाऊ कृषि भूमि में बदल दिया। 16 जून को हुई रजिस्ट्री, 22 जून को हुआ नामांतरण रिटायर्ड कैप्टन के बेटे मुल्तान सिंह ठाकुर ने बताया कि उन्हें 16 जून को हुई रजिस्ट्री और 22 जून को हुए म्यूटेशन यानी नामांतरण की जानकारी मिली। इसके बाद परिवार न्याय के लिए अधिकारियों के पास पहुंचा। उन्होंने बताया कि स्थानीय प्रशासन का रवैया निराशाजनक रहा। परिवार को क्षेत्राधिकार का हवाला देकर मोहनगढ़ थाने से पीटीएम थाने और फिर कोतवाली थाने भेजा गया। वहीं राजस्व अधिकारियों ने म्यूटेशन निरस्त करवाने के लिए कोर्ट जाने की सलाह देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। भागदौड़ से बिगड़ी 92 साल के कैप्टन की तबीयत परिजनों के अनुसार लगातार मानसिक और शारीरिक भागदौड़ के कारण दिल के मरीज 92 साल के कैप्टन चुन्नीलाल की तबीयत भी बिगड़ गई। परिवार का कहना है कि देश के लिए तीन युद्ध लड़ने वाले सैनिक को अपनी जमीन बचाने के लिए इस तरह भटकना पड़ रहा है। उधार के पैसों से कर रहे न्याय की लड़ाई रिटायर्ड सार्जेंट लालाराम चौधरी, जो इस मामले में परिवार की मदद कर रहे हैं, ने बताया कि देश के लिए तीन-तीन युद्ध लड़ने वाला सैनिक पिछले आठ दिनों से टैक्सी का किराया भी उधार लेकर न्याय की गुहार लगा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री होते ही दलालों और भू-माफियाओं ने 25 लाख रुपए की रकम आपस में बांट ली। उन्होंने हिमाचल प्रदेश और राजस्थान सरकार से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करने की अपील की है। एसपी के निर्देश के बाद दर्ज हुई एफआईआर शहर कोतवाल सुरजाराम जाखड़ ने बताया कि पीड़ित पक्ष की शिकायत और पुलिस अधीक्षक के निर्देश के बाद कोतवाली थाने में भू-माफियाओं के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर ली गई है। प्राथमिक जांच में सामने आया है कि 92 साल के रिटायर्ड सैनिक की जगह किसी अन्य व्यक्ति को हमशक्ल बनाकर खड़ा किया गया और फर्जी नाम से जमीन की रजिस्ट्री करवाई गई। पुलिस के अनुसार मामले की गंभीरता को देखते हुए गहन जांच शुरू कर दी गई है। फर्जी डाक्यूमेंट्स तैयार करने वालों और इस पूरे गिरोह में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मिडिल ईस्ट (Middle East) में ईरान, लेबनान और गाजा के साथ साल भर से भीषण युद्ध में उलझे इजरायल से इस वक्त की सबसे बड़ी राजनीतिक खबर सामने आ रही है. इजरायल में आगामी आम संसदीय चुनावों (General Elections) की तारीखों का आधिकारिक एलान कर दिया गया है. चुनावी तारीख की घोषणा होते ही इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) के करीब 4 दशक लंबे राजनीतिक करियर की सबसे चुनौतीपूर्ण परीक्षा की घड़ी आ गई है. युद्ध के इस तनावपूर्ण माहौल के बीच चुनावी बिगुल बजते ही पूरे इजरायल में सियासी सरगर्मियां सातवें आसमान पर पहुंच गई हैं.रविवार देर शाम आई इजरायली मीडिया (Israeli Media Reports) की आधिकारिक रिपोर्टों के मुताबिक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की वर्तमान सरकार का चार साल का कार्यकाल पूरा होने पर आगामी 27 अक्टूबर 2026 को देश में आम चुनाव कराए जाएंगे.38 साल बाद इतिहास दोहराएगा इजरायल'टाइम्स ऑफ इजरायल' की एक विशेष रिपोर्ट के मुताबिक, सत्तारूढ़ लिकुड पार्टी के वरिष्ठ नेता ओफिर काट्ज ने स्पष्ट किया कि इजरायली कानून के अनुसार निर्धारित तारीख पर ही अगले चुनाव संपन्न होंगे. इजरायल की मौजूदा संसद यानी 'नेसेट' (Knesset) 17 जुलाई 2026 को अपना चार साल का कार्यकाल पूरा कर रही है. कार्यकाल पूरा होते ही संसद चुनावी ब्रेक पर चली जाएगी और 7 सितंबर तक उम्मीदवारों की अंतिम सूची फाइनल कर ली जाएगी.यह चुनाव बेहद ऐतिहासिक होने जा रहा है क्योंकि बीते 38 सालों के इजरायली इतिहास में यह पहली बार होगा जब राष्ट्रीय चुनाव किसी समय पूर्व विघटन के बजाय अपने निर्धारित समय पर (On Schedule) हो रहे हैं. आखिरी बार साल 1988 में तय समय पर चुनाव हुए थे. इसके साथ ही, नेतन्याहू के नेतृत्व वाली यह दक्षिणपंथी सरकार पिछले 50 वर्षों में पूरे चार साल का कार्यकाल पूरा करने वाली इजरायल की पहली सरकार बन जाएगी.सबसे लंबे समय तक रहने वाले पीएम की सबसे कठिन परीक्षाबेंजामिन नेतन्याहू इजरायल के इतिहास में सबसे लंबे समय तक शासन करने वाले प्रधानमंत्री हैं. वे अब तक रिकॉर्ड 6 बार देश के प्रधानमंत्री बन चुके हैं, जिसमें उनका पहला कार्यकाल 1996 में शुरू हुआ था और छठा कार्यकाल दिसंबर 2022 से अब तक जारी है. हालांकि, इस बार राजनीतिक विश्लेषक इसे उनके जीवन का सबसे कठिन चुनाव मान रहे हैं.इजरायली जनता इस बार वोट डालते समय 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा किए गए औचक हमले, इंटेलिजेंस व सुरक्षा विफलता (Security Failure), गाजा-लेबनान युद्ध के तौर-तरीकों, ईरान के साथ सीधे सैन्य टकराव और अमेरिका के साथ बिगड़े कूटनीतिक संबंधों के आधार पर नेतन्याहू सरकार का मूल्यांकन करेगी. हालांकि, नेतन्याहू अपने ऊपर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई के खात्मे और ईरानी सैन्य तंत्र को कमजोर करने को अपनी सबसे बड़ी रणनीतिक जीत बताकर राष्ट्रवाद के नाम पर चुनाव प्रचार को धार दे रहे हैं.क्या कह रहे हैं इजरायल के चुनावी सर्वे? (Opinion Polls)इजरायल के प्रमुख मीडिया हाउस 'चैनल 12' के ताजा पोल (Pre-Poll Survey) के मुताबिक, इस बार के महा-मुकाबले में भी किसी भी एक राजनीतिक दल को पूर्ण बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है. वर्तमान में नेतन्याहू की 'लिकुड पार्टी' (Likud Party) और पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजनकोट की विपक्षी 'याशर पार्टी' (Yashar Party) दोनों 23-23 सीटों के साथ सबसे बड़े राजनीतिक दलों के रूप में उभर रहे हैं.वहीं 'चैनल 13' के एक अन्य ओपिनियन पोल में आइजनकोट की पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी बनते दिखाया गया है. कुल मिलाकर, इजरायल की 120 सदस्यीय संसद (Knesset) में सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों का जादुई आंकड़ा किसी भी गठबंधन को आसानी से मिलता नहीं दिख रहा है, जिससे इजरायल में एक बार फिर 'हंग पार्लियामेंट' (त्रिशंकु संसद) बनने के आसार मजबूत हो गए हैं.
फीनिक्स पोल्ट्री कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों पर कथित उत्पीड़न और पुलिस की एकतरफा कार्रवाई के विरोध में अंतर्राष्ट्रीय हिन्दू परिषद और राष्ट्रीय बजरंग दल ने मोर्चा खोल दिया है। संगठनों ने खमरिया थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। परिषद का आरोप है कि मजदूर हितों के लिए आवाज उठाने वाले यूनियन पदाधिकारियों को निशाना बनाया जा रहा है और उन पर झूठे आपराधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यूनियन प्रतिनिधियों द्वारा दर्ज कराई गई पुरानी शिकायतों पर पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की, जबकि विपक्षी पक्ष की शिकायतों पर तुरंत प्रकरण दर्ज कर लिए गए। संगठनों ने आरोप लगाया कि 27 फरवरी को सोनू कुशवाहा और 24 मार्च को महेंद्र यादव व कृपाल चौधरी द्वारा धमकी व अभद्र व्यवहार की दी गई शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, यूनियन पदाधिकारियों के खिलाफ तुरंत मामले दर्ज कर लिए गए। शिकायतकर्ता अमित कुमार के शपथपत्र का हवाला देते हुए बताया गया कि 16 सितंबर 2025 के इस्तगासा क्रमांक 627/25 में चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। हालांकि, अमित कुमार ने 4 जुलाई को शपथपत्र देकर कहा कि विवाद केवल दीपक विश्वकर्मा से था और उन्होंने कल्लू कुशवाहा, गुरुदयाल यादव और सोनू कुशवाहा के खिलाफ कोई शिकायत नहीं की थी। खमरिया थाना द्वारा 24 जून को जारी प्रमाण-पत्र 507/26 में यह स्पष्ट है कि सोनू कुशवाहा के खिलाफ पहले कोई आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं था, फिर भी उन्हें इस कार्रवाई में शामिल किया गया। इसके अलावा, अपराध क्रमांक 298/2025 आज तक न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया गया है, और अपराध क्रमांक 183/2026 में भी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है।
रेल कोच फैक्ट्री (RCF) कपूरथला के वर्कर्स क्लब चुनाव में 'RCF एम्प्लाइज यूनियन' (RCFEU) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज करते हुए सभी 8 सीटों पर कब्जा कर लिया है। क्लब प्रबंधन के लिए 9 जुलाई को मतदान हुआ था, जिसकी मतगणना 10 जुलाई को संपन्न हुई। कर्मचारियों ने विपक्ष के आरोपों को दरकिनार करते हुए यूनियन के पक्ष में स्पष्ट और एकतरफा जनादेश दिया। इस चुनाव में सेक्रेटरी पद पर भरतराज और कैशियर पद पर अवतार सिंह ने भारी मतों से जीत हासिल की। वहीं, क्लब के अन्य 6 सदस्य पदों के लिए हरप्रीत सिंह, अश्वनी कुमार, पंकज कुमार सिंह, भान सिंह, हरिओम मीना और संदीप कुमार ने भी रिकॉर्ड मतों से जीत दर्ज की है। सहयोगी संगठनों का समर्थन और जश्न इस बड़ी जीत में RCF की आईआरटीएसए (IRTSA) के प्रधान इंजी. दर्शन लाल और जोनल सचिव इंजी. जगतार सिंह की टीम के साथ-साथ इंजीनियरिंग एसोसिएशन के प्रधान इंजी. जगदीश सिंह और जोनल सचिव इंजी. बक्शीश सिंह की टीम का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। नतीजे घोषित होते ही RCF कारखाने और कॉलोनियों में कर्मचारियों ने ढोल-नगाड़ों और मिठाई बांटकर जीत का जश्न मनाया। यूनियन की प्रतिक्रिया: 'सच्चाई और 25 वर्षों की सेवा की जीत' RCFEU के महासचिव सर्बजीत सिंह और प्रधान अमरीक सिंह ने सभी कर्मचारियों का आभार व्यक्त करते हुए इसे विरोधियों के झूठे प्रोपेगैंडा के खिलाफ 'सच्चाई की जीत' बताया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों ने यूनियन द्वारा पिछले 25 वर्षों में किए गए निस्वार्थ सेवा भाव और समर्पण को सराहा है। युवा टीम और महिला विंग का विशेष आभार महासचिव सर्वजीत सिंह ने चुनाव प्रचार में दिन-रात मेहनत करने वाली यूनियन की 'युवा टीम' और भारी समर्थन देने वाली 'महिला विंग' का विशेष धन्यवाद किया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यह जीत यूनियन की जिम्मेदारी को और बढ़ाती है तथा नवनिर्वाचित टीम कर्मचारियों के कल्याण और क्लब को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए निरंतर कार्य करेगी।
मंत्रालय में बाबू और विधायकों के निजी सचिव (पीए) के रूप में कार्य कर रहे शिक्षकों का अटैचमेंट समाप्त कर उन्हें मूल स्कूलों में भेजने के आदेश के बावजूद कई शिक्षकों ने अब तक अपनी मूल पदस्थापना वाले स्कूलों में कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। बताया जा रहा है कि राजनीतिक रसूख के दम पर कुछ शिक्षक अपने रिलीविंग आदेश निरस्त कराकर दोबारा पूर्व स्थान पर ही पदस्थ होने की कोशिश में लगे हैं। इस बीच उनकी ई-अटेंडेंस भी मूल विद्यालय से दर्ज नहीं हो रही है। मामले को लेकर शासकीय शिक्षक संगठन, मध्यप्रदेश ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत विस्तृत जानकारी मांगने का निर्णय लिया है। संगठन का कहना है कि इससे शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जा सकेगी। आरटीआई के जरिए मांगी जाएगी पूरी जानकारी संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने बताया कि सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत उन शिक्षकों की जानकारी मांगी जाएगी जो अटैचमेंट समाप्त होने के बाद भी अपनी मूल संस्था में उपस्थित नहीं हुए हैं या जिनकी ई-अटेंडेंस मूल विद्यालय की लोकेशन से दर्ज नहीं हो रही है। आरटीआई के माध्यम से संगठन ऐसे शिक्षकों की सूची, उनकी मूल पदस्थापना, अटैचमेंट समाप्त करने के आदेश, मूल विद्यालय में कार्यभार ग्रहण करने की स्थिति और विभाग द्वारा की गई कार्रवाई से संबंधित जानकारी प्राप्त करेगा। 'नियम सभी पर समान रूप से लागू हों' उपेन्द्र कौशल ने कहा कि यदि शिक्षा विभाग सभी कर्मचारियों पर समान नियम लागू होने का दावा करता है, तो उनका पालन भी बिना किसी भेदभाव के होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि विभागीय व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्षता और समानता सुनिश्चित करना है। आवश्यक होने पर प्राप्त जानकारी के आधार पर सक्षम अधिकारियों से आगे की कार्रवाई की मांग भी की जाएगी। 213 शिक्षक पढ़ाने के बजाय दूसरे विभागों में कर रहे थे काम लोक शिक्षण आयुक्त अभिषेक सिंह ने हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि शिक्षकों को उनकी मूल पदस्थापना वाले विद्यालयों में भेजा जाए और यदि वे किसी अन्य विभाग में अटैच हैं तो उनका अटैचमेंट तत्काल समाप्त किया जाए। निर्देशों के बाद प्रदेशभर में 213 शिक्षक ऐसे मिले जो शिक्षण कार्य छोड़कर अन्य विभागों में सेवाएं दे रहे थे। इनमें से भोपाल के 52 शिक्षक शामिल थे। कुछ मंत्रालय में बाबू के रूप में कार्यरत थे, जबकि कुछ विधायकों के पीए के रूप में सेवाएं दे रहे थे। इन सभी शिक्षकों को एकतरफा रिलीव करने की कार्रवाई की जा चुकी है। भोपाल में केवल एक दर्जन शिक्षकों ने किया जॉइन विभागीय सूत्रों के अनुसार, भोपाल के 52 शिक्षकों में से अब तक केवल करीब एक दर्जन शिक्षक ही अपनी मूल पदस्थापना वाले विद्यालयों में लौटे हैं। शेष शिक्षकों ने अभी तक कार्यभार ग्रहण नहीं किया है। बताया जा रहा है कि जिला शिक्षा अधिकारी भी इनके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं, जबकि कई शिक्षक दोबारा पूर्व पदस्थापना बनाए रखने के लिए विभागीय अधिकारियों पर दबाव बनाने में जुटे हैं।
भिलाई के वैशाली नगर थाना क्षेत्र में 19 साल की फार्मेसी स्टूडेंट खुशी साहू की एकतरफा प्यार में हत्या कर दी गई। आरोपी पिंटू साहू पिछले करीब एक महीने से खुशी को अलग-अलग नंबरों से कॉल कर परेशान कर रहा था। खुशी ने उसका नंबर ब्लॉक कर दिया था। इसी बात से नाराज होकर आरोपी रायपुर से भिलाई पहुंचा और किराए के कमरे में घुसकर उसकी हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी पिंटू साहू को रायपुर से गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि आरोपी मूलत: बलौदाबाजार का रहने वाला है। शनिवार को पुलिस उसे सीन रिक्रिएट करने के लिए रामनगर स्थित घटनास्थल पर लेकर पहुंची। हत्या के दौरान आरोपी के हाथ में भी गंभीर चोट लगी है। पुलिस उससे पूछताछ कर पूरे मामले की जांच कर रही है। पुलिस आज इस मामले का खुलासा करेगी। सुबह दो बार कॉल किया, नंबर ब्लॉक मिलापुलिस के मुताबिक शुक्रवार सुबह पिंटू ने खुशी को दो बार कॉल किया था। खुशी ने उसका नंबर पहले ही ब्लॉक कर रखा था, इसलिए बात नहीं हो सकी। इसके बाद आरोपी ने खुशी की सहेली को फोन किया। सहेली ने पिंटू को बताया कि खुशी के पास मोबाइल नहीं है। इसके बाद आरोपी बाइक से सीधे खुशी के रामनगर स्थित किराए के कमरे पर पहुंच गया। उस समय खुशी की सहेली बाथरूम में नहाने गई थी। कमरे में खुशी अकेली थी। पहले गला दबाया, फिर चाकू से किए 10 वारपुलिस जांच में सामने आया है कि कमरे में पहुंचने के बाद आरोपी ने खुशी से विवाद किया। इसके बाद उसने खुशी का गला दबा दिया। गला दबाने से खुशी बेसुध हो गई। इसके बाद आरोपी ने चाकू से उसके पीठ, हाथ और पेट पर करीब 10 वार किए। गंभीर चोट और ज्यादा खून बहने से खुशी की मौत हो गई। वारदात के दौरान आरोपी पिंटू के हाथ में भी गंभीर चोट आई। हत्या के बाद वह कमरे से निकलकर फरार हो गया और रायपुर की ओर चला गया। भाई को बताया था एक युवक कर रहा है परेशान खुशी की सहेली जब बाथरूम से बाहर आई तो उसने खुशी को कमरे में खून से लथपथ पड़ा देखा। उसने तुरंत मकान मालिक और पास के कैफे संचालक को इसकी जानकारी दी। इसके बाद डायल 112 को सूचना दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची और खुशी को अस्पताल लेकर गई। यहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस जांच में पता चला है कि खुशी ने करीब एक सप्ताह पहले अपने भाई को पिंटू के बारे में बताया था। उसने कहा था कि एक युवक लगातार अलग-अलग नंबरों से फोन कर उसे परेशान कर रहा है। आरोपी ने दो दिन पहले खुशी के भाई को भी धमकी दी थी। इसके अलावा उसने उस कैफे संचालक को भी धमकाया था, जहां खुशी पार्ट टाइम नौकरी करती थी। पिंटू चाहता था कि खुशी नौकरी छोड़ दे और उससे शादी करे। ऑनलाइन मंगवाया था हत्या में इस्तेमाल चाकूखुशी निजी कॉलेज से फार्मेसी की पढ़ाई कर रही थी। इसके साथ ही वह बेमेतरा में बीए की परीक्षा भी दे रही थी। गुरुवार को ही उसका भाई उसे भिलाई छोड़कर गया था। अगले दिन शुक्रवार को उसकी हत्या कर दी गई। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने वारदात में इस्तेमाल चाकू ऑनलाइन मंगवाया था। हत्या के बाद वह रायपुर भाग गया था। पुलिस ने उसकी तलाश कर रायपुर से गिरफ्तार कर लिया। शनिवार को उसे घटनास्थल पर लाकर सीन रिक्रिएट कराया गया। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर यह पता लगा रही है कि उसने हत्या की प्लानिंग कब और कैसे की थी।
एमपी कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी और लेखक नियाज खान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक विवादास्पद बयान दिया है। उन्होंने लिखा कि भारत में मॉब लिंचिंग की घटनाओं से बचने के लिए मुस्लिमों को अपना पहनावा बदलकर तुर्की के मुसलमानों जैसा पहनावा अपनाना चाहिए, ताकि उनकी पहचान आसानी से न हो सके। नियाज खान ने अपने पोस्ट में लिखा कि भारत में मॉब लिंचिंग के ज्यादातर मामलों में पीड़ित कुर्ता, पायजामा, दाढ़ी और टोपी पहने हुए थे। उनका कहना है कि इस पहनावे से उनकी पहचान आसानी से हो जाती है। इसलिए मुस्लिमों को अपना ड्रेस और हुलिया बदल लेना चाहिए। लोकतंत्र पर भी उठाए सवाल एक अन्य पोस्ट में नियाज खान ने लोकतंत्र पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि कई आजाद देशों ने लोकतंत्र तो अपनाया, लेकिन उसके मूल सिद्धांत नहीं अपनाए। उन्होंने आरोप लगाया कि लोकतंत्र के नाम पर नेता और अफसर जमकर पैसा लूटते हैं, जबकि जनता मुफ्त की सुविधाओं में व्यस्त रहती है। भौतिकवाद और राजनीति पर भी पोस्ट 9 जुलाई को किए गए अन्य पोस्ट में नियाज खान ने लिखा कि भौतिकवाद ने पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया है और लोगों को इस पर विचार करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक रूप से सक्षम और ईमानदार लोगों को राजनीति में आना चाहिए, क्योंकि आपराधिक पृष्ठभूमि के लोगों के चुने जाने से लोकतंत्र कमजोर होता है।
महाभारत के महासंग्राम की चर्चा होते ही सबसे पहले मन में आता है वह दृश्य, जिसमें अर्जुन दुविधा में है और भगवान श्रीकृष्ण उसे गीता का उपदेश दे रहे हैं। युद्ध से पहले ही श्रीकृष्ण ने यह प्रण ले लिया था कि वे कुरुक्षेत्र में शस्त्र नहीं उठाएंगे। उनकी भूमिका केवल अर्जुन के सारथी के रूप में रहने की थी। लेकिन, एक बार ऐसी विषम परिस्थिति बनी कि जगत के पालनहार को अपना वचन तोड़ना पड़ा और वे रथ का पहिया लेकर भीष्म पितामह की ओर दौड़ पड़े। आखिर वह क्या मजबूरी थी, जिसने प्रभु को शस्त्र उठाने पर विवश कर दिया?क्यों दी थी भगवान श्रीकृष्ण ने शस्त्र न उठाने की प्रतिज्ञा?भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र युद्ध में तटस्थ रहने की घोषणा की थी। उन्होंने दुर्योधन और अर्जुन दोनों को विकल्प दिया था—एक तरफ उनकी विशाल 'नारायणी सेना' और दूसरी तरफ वे स्वयं, जो निहत्थे रहेंगे। अर्जुन ने श्रीकृष्ण को चुना और दुर्योधन ने सेना को। श्रीकृष्ण की प्रतिज्ञा के पीछे उद्देश्य यह था कि वे न चाहते हुए भी किसी एक पक्ष का सीधा संहार न करें, बल्कि न्याय की स्थापना में केवल मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं। वे अपनी लीलाओं से यह दिखाना चाहते थे कि अधर्म का नाश करने के लिए युद्ध से ज्यादा महत्वपूर्ण सही मार्गदर्शन और विवेक है।जब भीष्म के सामने विचलित हो गए थे श्रीकृष्णभीष्म पितामह ने प्रतिज्ञा की थी कि वे श्रीकृष्ण को शस्त्र उठाने पर मजबूर कर देंगे। युद्ध के दौरान, जब भीष्म पितामह ने अर्जुन पर बाणों की वर्षा शुरू की, तो अर्जुन उन्हें रोकने में असमर्थ हो गए। स्थिति ऐसी बन गई कि अर्जुन का रथ क्षतिग्रस्त हो गया और वे हार की कगार पर पहुँच गए। अर्जुन को संकट में देख भगवान श्रीकृष्ण का वात्सल्य और मित्र प्रेम जाग उठा। अपने प्रिय भक्त को मृत्यु के मुख में देख श्रीकृष्ण ने अपनी प्रतिज्ञा त्याग दी और जमीन से रथ का एक टूटा हुआ पहिया उठाकर पितामह की ओर बढ़े।'विपक्ष' की जीत या 'भक्ति' की पराकाष्ठा?जैसे ही श्रीकृष्ण चक्र (पहिया) लेकर पितामह की ओर बढ़े, भीष्म ने अपने शस्त्र डाल दिए और हाथ जोड़कर खड़े हो गए। उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, प्रभु, मेरी प्रतिज्ञा पूरी हुई। आज आपके हाथों अपना अंत देखकर मेरा जीवन धन्य हो गया। श्रीकृष्ण का वह क्रोध वास्तव में उनके भक्त के प्रति प्रेम था। यह घटना सिखाती है कि भगवान के लिए अपने भक्त की रक्षा उनकी स्वयं की प्रतिज्ञा से कहीं अधिक बड़ी होती है। महाभारत का यह प्रसंग आज भी हमें याद दिलाता है कि भक्त और भगवान के बीच कोई भी नियम, वचन या प्रतिज्ञा बड़ी नहीं होती।
गाजा संघर्ष : नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल
सयुक्त राष्ट्र की हालिया स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की रिपोर्ट ने इजरायल और कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में जारी हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों की गंभीर तस्वीर पेश की है।
मौसम में आए अचानक बदलाव और मानसून की पहली बारिश के दस्तक देते ही जहां लोगों को चिलचिलाती गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ एक बड़े खतरे ने भी दस्तक दे दी है। रिमझिम फुहारों के साथ ही राजधानी और उसके आस-पास के इलाकों में मच्छरों से होने वाली जानलेवा बीमारी 'डेंगू' (Dengue) का खौफनाक खतरा तेजी से बढ़ने लगा है। जलजमाव और उमस भरे इस मौसम को मच्छरों के पनपने के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। इसी गंभीर चुनौती को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। राजधानी के सभी प्रमुख सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) और नगर निगम की टीमों ने इस महामारी से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर अपनी व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं।जलजमाव वाले हॉटस्पॉट चिन्हित और फॉगिंग के लिए विशेष टीमों का गठनबारिश का पानी जमा होने के कारण राजधानी के कई रिहाइशी इलाकों और स्लम बस्तियों में डेंगू का डंक फैलने का सबसे ज्यादा रिस्क रहता है। स्थानीय नगर निगम और स्वास्थ्य अधिकारियों ने शहर के उन संवेदनशील इलाकों को चिन्हित कर लिया है जहां पिछले सालों में डेंगू के सबसे ज्यादा मामले सामने आए थे। इन चिन्हित हॉटस्पॉट्स में जल निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त किया जा रहा है। इसके साथ ही, एंटी-लार्वा स्प्रे के छिड़काव और आधुनिक फॉगिंग मशीनों को काम पर लगा दिया गया है। नगर निगम की विशेष टीमें हर वार्ड में जाकर नालियों और खाली पड़े प्लॉटों में जमा पानी की चेकिंग कर रही हैं ताकि मच्छरों के पनपने के चक्र को शुरुआती चरण में ही तोड़ा जा सके।अस्पतालों में रिजर्व हुए स्पेशल डेंगू वार्ड और प्लेटलेट्स की व्यवस्था तेजराजधानी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के निर्देशों के बाद शहर के सभी बड़े सिविल अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में इमरजेंसी अलर्ट जारी कर दिया गया है। संभावित मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अस्पतालों में विशेष 'डेंगू वार्ड' और आइसोलेशन बेड आरक्षित कर दिए गए हैं। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की अलग से ड्यूटी लगाई गई है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। इसके अलावा, ब्लड बैंकों को भी कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे प्लेटलेट्स (Platelets) का पर्याप्त स्टॉक मेंटेन रखें, क्योंकि डेंगू के गंभीर मामलों में मरीजों के प्लेटलेट्स बहुत तेजी से गिरते हैं, जिससे उनकी जान पर बन आती है।स्थानीय निवासियों के लिए गाइडलाइन जारी और एआई सर्च पर बढ़े सवालस्वास्थ्य विभाग ने राजधानी के नागरिकों के लिए एक जरूरी और कड़े प्रिकॉशंस की एडवाइजरी जारी की है। डॉक्टरों का कहना है कि डेंगू का मच्छर साफ और स्थिर पानी में पनपता है, इसलिए लोग अपने घरों में रखे कूलर, गमलों, पुरानी टायरों और छतों पर पानी बिल्कुल भी जमा न होने दें। रात को सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें और पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें। आज के डिजिटल युग और आधुनिक एआई-संचालित जनरेटिव सर्च (GEO) पर भी लोग 'डेंगू के शुरुआती लक्षण' और 'प्लेटलेट्स बढ़ाने के घरेलू उपाय' जैसे विषयों को लगातार सर्च कर रहे हैं। यदि किसी को तेज बुखार, आंखों के पीछे दर्द, जोड़ों में गंभीर अकड़न या बदन दर्द की शिकायत हो, तो तुरंत नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें।
युद्धविराम से आगे: क्या विश्व अहिंसा की ओर बढ़ेगा?
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हाल ही में हुआ युद्धविराम ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम एशिया युद्ध की लपटों में घिरकर वैश्विक स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका था। कई सप्ताह तक चले संघर्ष ने क्षेत्र को ऐसे ज्वालामुखी में बदल दिया था, जिसकी प्रत्येक विस्फोटक घटना विश्व अर्थव्यवस्था ... Read more
दुनिया में जब जब युद्ध होते हैं एक सवाल ज़रूर उभरता है कि युद्ध से क्या हासिल। फिर यह कहा जाता है कि युद्ध से कुछ हासिल नहीं होता लेकिन फिर भी दुनिया के सबसे ताक़तवर देश सालों तक युद्ध लड़ते रहते हैं। युद्ध करवाने वाले ताकतवर नेता कुछ तो हासिल करते ही होंगे। दर्जनों देशों के प्रभावशाली, प्रशासक, मंत्री अपने अपने तरीकों और चुने हुए शब्दों में समझाते रहते हैं कि युद्ध से बहुत नुकसान हो रहा है, दुनिया की आर्थिक स्थिति परेशान होकर उलझी पड़ी है, हज़ारों मौतें हो चुकी हैं लेकिन युद्ध है कि जारी रखा जाता है। रूस युक्रेन युद्ध इसकी सबसे बड़ी मिसाल है। दूसरी मिसाल है, अमरीका इजराइल ईरान की लड़ाई जिसके सौंवे दिवस के अशुभ अवसर पर अमरीका और ईरान ने एक दूसरे पर हमले किए। मानो या न मानो युद्ध से कुछ तो हासिल हो रहा है। युद्ध विराम और शांति बातचीत की राख के नीचे शोले बुझते ही नहीं, माहौल में तनाव उबलता रहता है युद्ध के ड्रोन मंडराते रहते हैं। युद्ध का सबसे बड़ा हासिल व्याव्सायिक फायदा है। खालिस व्यवसायी राष्ट्रपति, अपना नुक्सान ज़्यादा नहीं होने देंगे, दूसरों का बेड़ा गर्क करवा देंगे। उनके हिसाब से युद्ध भी एक सौदा है। उनकी हर चाल ऐसा दिखाती है। कुछ भी सोच सकते हैं। बड़ा सोचना, ज्यादा मांगना उनकी व्यावसायिक शैली में शामिल है। ज़्यादा मांगेंगे तो ज्यादा मिलेगा, कम मांगोगे तो कम ही मिलने वाला है। उन्हें खुद को खबर बनाना आता है। चर्चा में बनाए रखना आता है। वे व्याव्सायिक राजनीतिज्ञों की तरह परिस्थितियों के सभी दरवाज़े खुले रखते हैं। खूब शोर करते हैं और दूसरों को डराते रहते हैं। कहकर मुकर जाते हैं। जैसा बंदा वैसी डील करने को तत्पर रहते हैं। अब तो वैसे भी हर चीज़ में व्यापार और बाज़ार मिला दिया गया है। बड़ा दांव ज्यादा खतरा लेकिन फायदा भी उसी अनुपात में। आम लोग ही तो मरते हैं, घायल हो जाते हैं, विस्थापित होते हैं। ईमारतें और हथियार तबाह होते रहते हैं फिर नए बनाने के लिए मरम्मत के लिए, उद्योग क्षेत्र को काम मिलता है। कुछ भी हो जाए व्यवसाय फैलता रहता है। महंगाई का कर्तव्य तो हमेशा बढ़ते जाना है। इसे भी पढ़ें: विश्वगुरु न होते हुए (व्यंग्य) अंतर्राष्ट्रीय संस्थाएं हारकर उदास बैठी हैं। युद्ध जारी रखने वाले अंतर्राष्ट्रीय प्रबंधकों को यह संतुष्टि रहती है कि युद्ध निरंतर है। उन्हें अनिश्चितताओं से घिरी दुनिया से क्या लेना। धार्मिक कट्टरता शत्रुता बढ़े तो बढ़े। राजनीति को तो यह सब फैलाकर ही रखना होता है। कितने ही अनुभवी, यशस्वी नेताओं की सामरिक शक्ति, रुआब और प्रभाव की पोल खुलती जाती है लेकिन युद्ध से उनकी नाक ऊंची रहती है। स्वार्थ पूरा होता है और नकली इज्ज़त बनी रहती है। जो शांति स्थापित करने के लिए युद्ध जारी रखते हैं इतिहास उन्हें भूलता नहीं। क्या फर्क पड़ता है अगर युद्ध के कारण याद रखता है। अगर युद्ध से फायदा न हो तो कई तरह का नुक्सान करने वाले इस खतरनाक काम को कौन महीनों तक करता रहेगा। हर व्यवसाय में छिपे हुए फायदे होते हैं जिनका किसी को भी पता नहीं चलता सिर्फ उन्हें पता होता है जो उनके मालिक होते हैं। युद्ध एक व्यवसाय ही तो है जिसका हासिल, ख़ास लोगों को होने वाला किसी न किसी तरह का अशुभ लाभ है। - संतोष उत्सुक
अमर स्वाभिमान का प्रतीक हल्दीघाटी युद्ध के 450 वर्ष
Battle of Haldighati: 18 जून भारतीय इतिहास की वह अमर तिथि है, जो केवल एक युद्ध का स्मरण नहीं कराती बल्कि त्याग, स्वाभिमान, साहस और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण की गाथा सुनाती है। यह वह दिन है जब मेवाड़ की धरती पर एक ऐसा संघर्ष हुआ, जिसने इतिहास के ...
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
'वाराणसी' में दिखेगा महायुद्ध, भगवान राम और कुंभकर्ण के बीच होगा 30 मिनट का ऐतिहासिक टकराव!
दिग्गज निर्देशक एसएस राजामौली जब भी कोई नया प्रोजेक्ट लाते हैं, तो वह सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक उत्सव बन जाता है। 'बाहुबली' और 'आरआरआर' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देने के बाद, राजामौली अब सुपरस्टार महेश बाबू के साथ अपनी अगली महात्वाकांक्षी ...
इंटरनेट मूवी डेटाबेस (IMDb) हर हफ्ते दुनिया भर यूजर्स के सर्च और प्रोफाइल विजिट के आधार पर 'मोस्ट पॉपुलर इंडियन सेलिब्रिटीज' की लिस्ट जारी करता है। आमतौर पर इस लिस्ट के शीर्ष पर वही सुपरस्टार्स नजर आते हैं जिनकी बड़ी फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज ...
खाड़ी युद्ध से निपटने की मोदी की तजबीज
मोदीजी ने एक बार फिर राष्ट्र की जनता को उसके कर्तव्यों के प्रति सचेत किया है।
ललित सुरजन की कलम से युद्ध नहीं, शांति चाहिए
जब एक तरफ सिर्फ एक सैनिक की गिरफ्तारी से उपजे भय और रिहाई की घोषणा से मिली राहत है, तब दूसरी तरफ आक्रामक मुद्रा अपनाकर हम क्या हासिल करना चाहते हैं?
युद्ध के माहौल में विश्व शांति का शंखनाद है विश्व णमोकार दिवस
विश्व णमोकार दिवस- 9 अप्रैल, 2026 विश्व इतिहास के इस संक्रमणकाल में, जब मानवता युद्ध, हिंसा, आतंक, तनाव और असहिष्णुता के बोझ तले कराह रही है, ऐसे समय में 9 अप्रैल 2026 को मनाया जाने वाला विश्व णमोकार मंत्र दिवस एक अद्वितीय आध्यात्मिक ऊर्जा-विस्फोट के रूप में सामने आ रहा है। यह दिवस केवल एक ... Read more
तीसरे विश्वयुद्ध की आहट और गांधी
इतिहास विजय-पराजय-विनाश का मृत दस्तावेज नहीं है, न वह किसी की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की कहानी का विवरण है।
धीरे-धीरे हकीकत में बदल रहे हैं भारत के ईरान युद्ध के डर
ईरान युद्ध को लेकर भारत की सबसे गहरी आर्थिक चिंताएं अब काल्पनिक नहीं रह गई हैं
युद्ध को लेकर मोदी का देश को डराने वाला संदेश
देश में जहां भी और जब भी चुनाव होते हैं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दूसरे सारे काम छोड़कर अपनी भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रचार में जुट जाते हैं
पश्चिम एशिया में युद्ध के दुष्प्रभाव से निपटने के लिए बेहतर नीतियों की ज़रूरत
वित्त वर्ष 2026-27 की ठीक शुरुआत में, जो 1 अप्रैल, 2026 से शुरू हो रहा है, भारत को कई तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है
युद्ध के माहौल में महावीर के दर्शन की उपादेयता
सदियों पहले महावीर जनमे। वे जन्म से महावीर नहीं थे। उन्होंने जीवन भर अनगिनत संघर्षों को झेला, कष्टों को सहा, दुख में से सुख खोजा और गहन तप एवं साधना के बल पर सत्य तक पहुंचे, इसलिये वे हमारे लिए आदर्शों की ऊंची मीनार बन गये। उन्होंने समझ दी कि महानता कभी भौतिक पदार्थों, सुख-सुविधाओं, ... Read more
युद्धग्रस्त विश्व में महावीर की अहिंसा: शांति की एकमात्र राह
संदर्भ – तीर्थंकर महावीर स्वामी जन्म कल्याणक 2625वां (31 मार्च 2026) आज का विश्व एक विचित्र विरोधाभास से गुजर रहा है। एक ओर विज्ञान, तकनीक और वैश्वीकरण ने मानव जीवन को अभूतपूर्व सुविधाएं दी हैं, वहीं दूसरी ओर युद्ध, हिंसा और असहिष्णुता ने मानवता के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। विश्व के ... Read more
मिडिल ईस्ट युद्ध ने ट्रम्प की मुश्किलों को बढ़ाया
युद्ध के मामले में अमेरिका-इजरायल की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं।
अब युद्धविराम को लालायित ट्रंप
अर्थव्यवस्था के लिहाज से यह लड़ाई अमेरिका को पहले ही महंगी पड़ रही है
पश्चिम एशिया में युद्ध फैलने से एक और वैश्विक आर्थिक संकट का खतरा
पश्चिम एशिया का संकट अब एक वैश्विक आर्थिक चुनौती में बदल गया है
फैक्ट चेक: इजरायल के डिमोना पर हमले के दावे से इराक का वीडियो हुआ वायरल
बूम ने पाया कि वायरल हो रहा वीडियो इराक के Nasiriyah स्थित एक रेस्टोरेंट में लगी आग का है.
ईरान युद्ध के सबक मौजूदा संघर्ष से कहीं आगे बाजार का आकार तय करेंगे
ऊर्जा बाजार एक ऐसे दौर में जा रहा है, जहां मूल्य निर्धारण मॉडल के आधार पर बनी पारंपरिक धारणाएं संघर्ष के बदलते स्वरूप से पूरी तरह बदल रही हैं
ईरान युद्ध में नाटो से अलग-थलग पड़े ट्रंप की परीक्षा की घड़ी
बुधवार को, अमेरिका-इजरायल गठबंधन के ईरान के खिलाफ युद्ध के 18वें दिन, ट्रंप को एक साथ दो बुरी खबरें मिलीं
लीजा रे ने दुबई से शेयर की दर्दभरी कविता, मिडिल ईस्ट तनाव के बीच जताई चिंता
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। हर तरफ धमाकों और सायरन का शोर सुनाई दे रहा है। एक्ट्रेस लीजा रे भी इन हालातों के बीच दुंबई में अपने घर ...
मिडिल ईस्ट में युद्ध के बीच फंसीं एक्ट्रेस लारा दत्ता, बेटी के साथ सुरक्षित लौटीं भारत, सुनाई आपबीती
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और पूर्व मिस यूनिवर्स लारा दत्ता भी अपनी 14 साल की बेटी सायरा के साथ यूएई में ...
एक्सेल एंटरटेनमेंट और ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज़ की '120 बहादुर' को लेकर चर्चा अब अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है। फिल्म ट्रेलर ने पूरी तरह से रोमांच और प्रेरणा का सही मिश्रण पेश किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बलिदान दिवस पर मेजर शैतान सिंह ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला अपनी खूबसूरती से हर किसी का दिल जीत लेती हैं। उर्वशी ने बेहद ही कम समय में एक अलग मुकाम हासिल किया है। वह दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोगों के साथ 'मिलने और अभिवादन' के क्षणों में संलग्न रहती है। ऐसा ही एक क्षण था जब ...
सलमान खान की सिकंदर के आखिरी गाने में दिखेगा जबरदस्त जलवा, तुर्की से बुलाए गए 500 डांसर्स!
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की 'सिकंदर' इस साल की सबसे बड़ी फिल्म मानी जा रही है, जिसका दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसके एक्शन-पैक्ड टीजर ने इसकी भव्य एंट्री के लिए एकदम परफेक्ट माहौल तैयार कर दिया है। भव्य पैमाने पर बनाई गई इस फिल्म में ...
केसरी वीर के लिए सूरज पंचोली ने की कड़ी ट्रेनिंग, ऐसे सीखा युद्ध कौशल
बॉलीवुड एक्टर सूरज पंचोली अपनी पहली बायोपिक में वीर हामीरजी गोहिल के ऐतिहासिक किरदार को जीवंत करने जा रहे हैं। सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय और सूरज पंचोली अभिनीत फिल्म 'केसरी वीर : लीजेंड्स ऑफ सोमनाथ' का टीजर हाल ही में रिलीज हुआ है। सोमनाथ मंदिर की ...
फरहान अख्तर लेकर आ रहे भारत-चीन युद्ध पर आधारित फिल्म 120 बहादुर, निभाएंगे मेजर शैतान सिंह का रोल
Movie 120 Bahadur : रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर की एक्सेल एंटरटेनमेंट, ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज के साथ मिलकर '120 बहादुर' को पेश करने के लिए उत्साहित हैं। यह फिल्म मेजर शैतान सिंह (पीवीसी) और चार्ली कंपनी, 13 कुमाऊं रेजिमेंट के सैनिकों की कहानी कहती ...
Adil Hussain: दुनियाभर में इन दिनों पेरिस ओलंपिक 2024 की धूम मची हुई है। पेरिस ओलंपिक में दुनियाभर के खिलाड़ियों ने भाग लिया है। भारत के कई खिलाड़ी भी इसमें हिस्सा लेने पहुंचे हुए हैं। हाल ही में तुर्की के शूटर यूसुफ डिकेक ने सिल्वर मेडल जीता।
बॉर्डर की 27वीं सालगिरह पर, अभिनेता सनी देओल ने एक घोषणा वीडियो के ज़रिए फ़्रैंचाइज़ी के दूसरे संस्करण की पुष्टि की है। अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर सनी ने बॉर्डर 2 में अपनी वापसी की आधिकारिक घोषणा करते हुए एक वीडियो शेयर किया और इसे 'भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म' बताया। उन्होंने पोस्ट के कैप्शन में लिखा, ''एक फौजी अपने 27 साल पुराने वादे को पूरा करने के बाद, आ रहा है फिर से। भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म, बॉर्डर 2।'' इस फिल्म का निर्माण भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, जेपी दत्ता और निधि दत्ता करेंगे। आगामी युद्ध फिल्म का निर्देशन अनुराग सिंह करेंगे। इसे भी पढ़ें: Bollywood Wrap Up | पति से तकरार के बीच केन्या लौट गई हैं Dalljiet Kaur? शादी को बचाने की कर रही कोशिश सनी द्वारा घोषणा वीडियो शेयर किए जाने के तुरंत बाद, सोशल मीडिया यूज़र्स ने अपनी उत्सुकता व्यक्त करते हुए कमेंट सेक्शन में बाढ़ ला दी। एक यूज़र ने लिखा, ''वाह, यह बहुत बढ़िया घोषणा है सर जी, जय हिंद।'' दूसरे ने लिखा, ''बहुत उत्साहित हूँ।'' तीसरे यूजर ने टिप्पणी की, ''बॉर्डर 2 के लिए बहुत उत्साहित हूं।'' इसे भी पढ़ें: NDA पर इमोशनल बयान, काले सूट में ली मंत्री पद की शपथ और शर्मिला अंदाज, Tripti Dimri की तरह रातों रात भारत के Sensation बन गये Chirag Paswan सनी देओल की अन्य परियोजनाएं उन्हें आखिरी बार अमीषा पटेल के साथ गदर 2 में देखा गया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत सफल रही और इसे ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर घोषित किया गया। गदर 2 की सफलता के बाद, सनी ने लाहौर 1947 सहित कई फिल्में साइन कीं, जिसे आमिर खान के प्रोडक्शन बैनर के तहत बनाया जा रहा है। फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है, जिन्होंने आमिर को कल्ट क्लासिक अंदाज़ अपना अपना (1994) में निर्देशित किया था। View this post on Instagram A post shared by Sunny Deol (@iamsunnydeol)
Kalki 2898 AD: शुरू हो गया नया युद्ध, पूरे ट्रेलर की अहम कड़ी हैं अमिताभ, प्रभास करेंगे इम्प्रेस
Kalki 2898 AD के ट्रेलर को देखें तो, फिल्म कल्कि 2898 एडी के मेकर्स ने विश्वास दिलाया है कि ये फिल्म लोगों को बांधने में कामयाब होगी. टफ सीक्वेंस, क्लियर एडिटिंग और बैकग्राउंड स्कोर आपका ध्यान खींचते हैं. वीएफएक्स पर भी अच्छा काम किया गया है.
आशुतोष राणा ने डीपफेक वीडियो को बताया 'माया युद्ध', बोले- ये सालों से चल रहा
आशुतोष ने कहा कि ऐसी बातों में खुद को डिफेंड करने का कोई फायदा नहीं है. उन्होंने कहा कि जो लोग आपको जानते हैं वो सवाल करेंगे ही नहीं. और जो नहीं जानते, उन्हें किसी रिस्पॉन्स से फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि वो दिमाग में आपकी एक छवि बना चुके होते हैं.
दर्शक काफी समय से रैपर बादशाह और हनी सिंह के बीच जुबानी जंग देख रहे हैं। दोनों का रिश्ता सालों से विवादों से भरा रहा है। हालांकि करियर के शुरुआती दिनों में बादशाह और हनी सिंह के बीच अच्छी दोस्ती हुआ करती थी। हालाँकि, ऐसा लगता है कि सफलता और पैसे ने धीरे-धीरे इस दोस्ती को पूरी तरह से खत्म कर दिया। अब दोनों अक्सर एक दूसरे पर तंज कसते नजर आते हैं। हाल ही में हनी सिंह एक होली पार्टी में शामिल हुए, जहां उन्होंने बादशाह के 'पापा कमबैक' वाले कमेंट का करारा जवाब दिया। रैपर का ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसे भी पढ़ें: Punjab Kings के खिलाफ जीत के बाद इंटरनेट पर Virat Kohli का Anushka Sharma के साथ वीडियो कॉल, FLY KISS देते नजर आये खिलाड़ी हनी सिंह ने बादशाह पर किया पलटवार बादशाह कुछ दिनों पहले हनी सिंह पर अपनी टिप्पणी को लेकर चर्चा में थे, जिसमें उन्होंने हनी सिंह की वापसी पर कटाक्ष किया था। अब सिंगर और रैपर हनी सिंह ने एक कमेंट के जरिए बादशाह को करारा जवाब दिया है और कहा है कि उन्हें बादशाह को जवाब देने के लिए मुंह खोलने की जरूरत नहीं है। उनके फैन ही काफी हैं जो हर चीज पर बात कर सकते हैं। उन्होंने अपने गाली वाले अंदाज में अपने फैंस से बात करते हुए बादशाह का जवाब दिया। हनी सिंह को सोमवार को मुंबई में एक होली पार्टी में परफॉर्म करते देखा गया और यहीं उन्होंने बादशाह पर कटाक्ष किया। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा, हर कोई कहता है, रिप्लाई करो, रिप्लाई करो... मैं क्या रिप्लाई करूं... आप लोग तो उनके सारे कमेंट्स का बहुत अच्छे से रिप्लाई कर चुके हैं। मुझे मुंह खोलने की जरूरत है। ऐसा नहीं होता है। जैसे ही भीड़ ने उनके लिए तालियां बजाईं, गायक ने कहा, मुझे बोलने की जरूरत नहीं है। आप लोग खुद पागल हैं। हनी सिंह पागल हैं और उनके प्रशंसक भी पागल हैं। इसे भी पढ़ें: Taapsee Pannu के पति Mathias Boe आखिर कौन है? जब सफल भी नहीं थी एक्ट्रेस तब से उन्हें प्यार करते थे बैडमिंटन खिलाड़ी रैपर बादशाह ने क्या कहा? आपको बता दें कि हाल ही में बादशाह ने हनी सिंह पर कमेंट करते हुए कहा था, ''मुझे एक पेन और कागज दो। मैं तुम्हारे लिए एक गिफ्ट लाया हूं। मैं कुछ गाने लिखूंगा और तुम्हें दूंगा। पापा की वापसी तुम्हारे साथ होगी।'' Kalesh Controversy B/w Honey Singh and Badshah (Honey Singh Replied to Badshah) pic.twitter.com/o74t423bgS — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 25, 2024 Kalesh Between Badshah & Honey Singh Fans on Stage during Live Concert pic.twitter.com/M4VqSqLSc3 — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 19, 2024
आखिर क्यों Indira Gandhi ने Aandhi मूवी पर लगा दिया था प्रतिबन्ध, आज भी देखने से कतराते हैं लोग
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'सावरकर' रिव्यू: खोखली, एकतरफा फिल्म में एकमात्र अच्छी चीज है रणदीप हुड्डा का काम
आज के दौर में 'गुमनाम' हो चुके एक स्वतंत्रता नायक की कहानी कहने निकली ये फिल्म, एक अनजान कहानी बताने से ज्यादा अपने हीरो विनायक दामोदर सावरकर को बाकियों के मुकाबले अधिक 'वीर' बताने पर फोकस करने लगती है.
अस्तित्व और बदले के लिएब्रह्मांड में शुरू होने वाला है महायुद्ध, एक्शन और रोमांच से भरपूर हैRebel Moon 2 का धांसू ट्रेलर

