खाड़ी देशों में युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई के लिए 497 करोड़ की योजना : पांडियन
Rs 497 crore scheme to compensate for losses caused by the war in Gulf countries: Pandian
विशेष: 30 सेकंड में 27 वार, एकतरफा इश्क में महिला टीचर की हत्या
एक बार फिर एक महिला को सनकी आशिक की वजह से जान गंवानी पड़ी है.. इस बार शिकार हुई है.. फरीदाबाद के एक प्राइवेट स्कूल की टीचर.. जिसे एकतरफा इश्क में एक सनकी ने मार दिया.. और मारा भी ऐसा कि सिर्फ 30 सेकेंड में चाकुओं से ताबड़तोड़ 27 वार किये.. और ये पूूरी वारदात स्कूल के सीसीटीवी में रिकॉर्ड हो गई. देखें विशेष.
US-Iran युद्ध के बीच भारत का बड़ा एक्शन, अचानक तेहरान में नियुक्त किया अपना नया राजदूत
पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच लगातार जारी तनाव को देखते हुए भारत सरकार अब एक्शन मोड में नजर आ रही है। जहां भारत ने एक बड़ा कूटनीतिक फैसला लेते हुए ईरान में अचानक नए राजदूत की नियुक्ति कर दी है। दरअसल भारत सरकार ने ईरान में अपने राजदूत को बदलते हुए भारतीय विदेश सेवा यानी कि आईएफएस के साल 2002 बैच के वरिष्ठ अधिकारी विश्वेश नेगी को इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान में भारत का अगला राजदूत नियुक्त किया है। विदेश मंत्रालय ने 3 अगस्त को जारी अपने आधिकारिक बयान में इसकी पुष्टि की। फिलहाल विश्वेश नेगी जो हैं वह नई दिल्ली में विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर कार्यरत हैं और जल्द ही तेहरान में अपनी नई जिम्मेदारी को संभालेंगे। नए राजदूत की यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब पूरा पश्चिम एशिया तनाव के दौर से गुजर रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच लगातार तनाव बना हुआ है। इसे भी पढ़ें: ईरान का बड़ा बयान, Pezeshkian बोले 'हम युद्ध नहीं चाहते' पर Trump ने दी Last Chance की चेतावनी पूरे इलाके में सैन्य गतिविधियां भी देखने को मिल रही है और कूटनीतिक प्रयास भी लगातार समानांतर तौर पर जारी है। ऐसे माहौल में भारत का ईरान में नए राजदूत को भेजना केवल एक नियमित प्रशासनिक फैसला नहीं है बल्कि यह एक महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम माना जा रहा है। भारत के लिए ईरान सिर्फ एक पड़ोसी देश नहीं बल्कि ऊर्जा सुरक्षा समुद्री व्यापार क्षेत्रीय संपर्क का एक अहम साझेदार है। भारत के तेल आयात, व्यापारिक जहाजों की आवाजाही और पश्चिम एशिया में उसके आर्थिक हित काफी हद तक स्ट्रेट ऑफ हार्मोस की सुरक्षा पर निर्भर करते हैं। यही कारण है कि भारत इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर भी बनाए हुए हैं और साथ-साथ में एक्शंस भी ले रहा है। इन सबके बीच भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास सराची से भी फोन पर बातचीत की है। इस बातचीत में भारत ने पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर अपनी गहरी चिंता जताई है। इसे भी पढ़ें: Iran Political Crisis: खामेनेई का Pezeshkian को आखिरी अल्टीमेटम, IRGC कमांडर के हाथ में कमान जयशंकर ने साफ कहा है कि किसी भी परिस्थिति में व्यवसायिक जहाजों और नाविकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। भारत ने यह भी दोहराया कि किसी भी पक्ष द्वारा व्यापारिक जहाजों पर किए गए हमलों की वह कड़ी निंदा करते हैं। जयशंकर ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत हमेशा से ही संवाद और कूटनीति के जरिए विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थक रहा है। वहीं ईरान की ओर से भी मौजूदा हालात और चल रही कूटनीतिक कोशिशों की जानकारी भारत के साथ साझा की गई। वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि ईरान और अमेरिका के बीच बिचौलियों के माध्यम से नई बातचीत शुरू होने की संभावना है। दूसरी ओर ईरानी सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार ईरान और ओमान के बीच समुद्रिक गलियारे के संचालन को लेकर साझा व्यवस्था बनाने पर भी बातचीत जारी है जो कि जल्द ही अंतिम चरण में पहुंच सकती है। ऐसे संवेदनशील माहौल में विश्वेश नेगी की नियुक्ति भारत की उस रणनीति का अहम हिस्सा मानी जा रही है। जिसके तहत भारत सरकार एक तरफ़ अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों की रक्षा करना चाहती है। तो वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ अपने पारंपरिक संबंधों को भी मजबूत बनाए रखना चाहती है।
ईरान का बड़ा बयान, Pezeshkian बोले 'हम युद्ध नहीं चाहते' पर Trump ने दी Last Chance की चेतावनी
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान ने सोमवार को कहा कि तेहरान इलाके में कोई झगड़ा या तनाव नहीं बढ़ाना चाहता, लेकिन साथ ही यह भी साफ किया कि देश अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए कोई समझौता नहीं करेगा। प्रेस टीवी के मुताबिक, पेज़ेश्कियान ने कहा इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ़ ईरान इलाके में तनाव या अस्थिरता नहीं बढ़ाना चाहता।हालांकि, देश की सुरक्षा, राष्ट्रीय हितों और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए वह अपनी पूरी ताकत से काम करेगा। उनके ये बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद आए हैं जिसमें उन्होंने सोमवार (स्थानीय समय) को कहा था कि ईरान को समझौता करने का आखिरी मौका दिया गया है। ट्रंप ने दावा किया कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर और ईरान के अनुरोध पर कूटनीति का रास्ता अपनाने के लिए वॉशिंगटन ने एक तय सैन्य हमले को रोक दिया था। इसे भी पढ़ें: Delhi Gold Price: दिल्ली में सोना ₹1,47,500 के पार, US-Iran Tension के बीच बाजार में बेचैनी ओवल ऑफिस में 'प्रेसिडेंशियल मिलिट्री स्पाउस कमीशन' बनाने वाले एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर दस्तखत करने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि कूटनीतिक कोशिशों की वजह से हमले को रोकने से पहले अमेरिका ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य ऑपरेशन शुरू करने के लिए तैयार था। तेहरान के साथ चल रही बातचीत पर चर्चा करते हुए ट्रंप ने कहा यह आखिरी मौका है। अगर ऐसा नहीं होता है, तो यह उनके लिए एक अच्छा समझौता करने का आखिरी मौका है। ईरान के अनुरोध पर बातचीत होने का दावा करते हुए ट्रंप ने कहा हम अभी बातचीत कर रहे हैं, हम बातचीत कर रहे हैं और यह बातचीत ईरान के अनुरोध पर हो रही है, जिसे सऊदी अरब, UAE और खासकर कतर का समर्थन हासिल है, और दूसरे देशों का भी। कई देशों ने फोन किया... वे सभी इसे एक आखिरी मौका देना चाहते थे। अमेरिकी राष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि अमेरिकी अधिकारियों के साथ कई बैठकें करने के बावजूद ईरान ने पहले बातचीत करने से इनकार कर दिया था। ट्रंप ने यह भी कहा कि ईरान के साथ बातचीत में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से फिर से खोलने पर चर्चा चल रही है। उन्होंने कहा कि बातचीत के नए दौर का पहला चरण इस अहम शिपिंग रूट को खोलने पर केंद्रित होगा। इसे भी पढ़ें: Iran Political Crisis: खामेनेई का Pezeshkian को आखिरी अल्टीमेटम, IRGC कमांडर के हाथ में कमान हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को कहा कि उनका देश अमेरिका के साथ किसी भी तरह की सीधी या अप्रत्यक्ष बातचीत में शामिल नहीं है। उन्होंने तेहरान और वाशिंगटन के बीच सक्रिय द्विपक्षीय बातचीत के दावों को सख्ती से खारिज कर दिया। फार्स समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, बघाई ने जोर देकर कहा कि ईरान का मौजूदा राजनयिक जुड़ाव केवल पड़ोसी देश ओमान के साथ द्विपक्षीय है, जो रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर एक अस्थायी सुरक्षित रास्ता बनाने पर केंद्रित है। बघाई ने स्पष्ट किया कि ओमान में चल रही बातचीत पूरी तरह से समुद्री यातायात प्रबंधन तक ही सीमित है। हालांकि मस्कट के साथ एक नए अस्थायी शिपिंग लेन को लेकर बनी सहमति सुरक्षित नेविगेशन के लिए एक तकनीकी पूर्व-शर्त है, लेकिन उन्होंने जोर दिया कि ऐसा समझौता एक जरूरी शर्त तो है, लेकिन इस अहम 'चोकपॉइंट' (संकरे समुद्री रास्ते) को पूरी तरह से फिर से खोलने के लिए अकेले यह काफी नहीं है।
Chabahar Port Challenge: ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चाबहार पोर्ट में भारत का बड़ा निवेश अब तक की सबसे कठिन और जटिल परीक्षा के दौर से गुजर रहा है। अमेरिका द्वारा दी गई प्रतिबंध छूट की अवधि समाप्त होने, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सैन्य संघर्ष, जटिल कूटनीति के बीच भारत अपने इस ड्रीम प्रोजेक्ट को बचाने और अफगानिस्तान व मध्य एशिया तक अपनी पहुंच बनाए रखने के लिए सभी संभव विकल्पों का आकलन कर रहा है।इस बीच भारत ईरान के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल को संसाधन उपलब्ध कराने और उसके संचालन के लिए 10 साल के समझौते के तहत अपनी 120 मिलियन डॉलर (लगभग 12 करोड़ डॉलर) की मदद का वादा भी पूरा कर चुका है। हालांकि, अप्रैल में अमेरिकी प्रतिबंध छूट की मियाद खत्म होने के बाद से इस प्रोजेक्ट के संचालन पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।संसद में सरकार का बयान और भारत के सामने धर्मसंकटभारत सरकार ने 31 जुलाई को लोकसभा में एक लिखित जानकारी में बताया कि चाबहार परियोजना के लिए अमेरिका द्वारा दी गई सशर्त प्रतिबंध छूट 26 अप्रैल को ही खत्म हो चुकी है। केंद्र सरकार ने कहा कि वह इसके प्रभावों और जटिलताओं से निपटने के लिए इससे जुड़े स्टेकहोल्डर्स के साथ लगातार संपर्क में है और बातचीत जारी है।सरकार का यह बयान भारत के सामने मौजूद बड़े रणनीतिक धर्मसंकट की ओर भी इशारा है। भारत का मुख्य उद्देश्य एक तरफ अपने सबसे महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट की रक्षा करना है, तो दूसरी तरफ भारतीय संस्थाओं और कंपनियों को अमेरिकी प्रतिबंधों के जोखिम से पूरी तरह सुरक्षित रखना भी है। चाबहार भारत के लिए सिर्फ एक इंफ्रास्ट्रक्चर इंवेस्टमेंट नहीं है बल्कि यह पाकिस्तान को दरकिनार कर अफगानिस्तान और मध्य एशिया के बाजारों में सीधे प्रवेश करने की दीर्घकालिक रणनीति का मेन आधार भी है।120 मिलियन डॉलर का निवेश और भारत की परिचालन भूमिकाभारत सरकार की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल चाबहार फ्री जोन (IPGCFZ) के माध्यम से इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड वर्ष 2018 से इस बंदरगाह का संचालन कर रही है। मई 2024 में ईरान के पोर्ट्स एंड मैरीटाइम ऑर्गनाइजेशन के साथ 10 साल का एक लंबा कॉन्ट्रैक्ट साइन किया गया था। इसके तहत भारत ने टर्मिनल के ऑपरेशन और उपकरण लगाने के लिए 120 मिलियन डॉलर देने की प्रतिबद्धता जताई थी।सरकार ने अब आधिकारिक तौर पर पुष्टि कर दी है कि अगस्त 2025 तक अंतिम किस्त सहित पूरी 120 मिलियन डॉलर की राशि ईरान को ट्रांसफर की जा चुकी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या भारत अमेरिकी प्रतिबंधों के इस कड़े दौर में भी चाबहार पर अपना ऑपरेशनल कंट्रोल और रणनीतिक प्रभाव बनाए रख पाएगा या नहीं।भारत के लिए क्यों बेहद खास और रणनीतिक है चाबहार पोर्ट?ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में ओमान की खाड़ी के तट पर स्थित चाबहार पोर्ट भारत की क्षेत्रीय कनेक्टिविटी योजनाओं में एक अनूठा स्थान रखता है। ऐतिहासिक रूप से पाकिस्तान ने भारत को अफगानिस्तान तक जाने के लिए जमीनी रास्ता देने से हमेशा इनकार किया है। चाबहार ने भारत को इस भौगोलिक और राजनीतिक बाधा से बाहर निकलने का सीधा समुद्री और जमीनी विकल्प दिया है।चाबहार पोर्ट, पाकिस्तान में चीन द्वारा विकसित किए जा रहे ग्वादर पोर्ट से महज 72 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। ग्वादर पोर्ट चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) और चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) का प्रमुख हिस्सा है। ऐसे में चाबहार में भारत की मौजूदगी इस पूरे क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने के लिए बेहद जरूरी रणनीतिक काउंटर-वेट है।आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक भारतीय संचालन शुरू होने के बाद से चाबहार के रास्ते भारत से अफगानिस्तान को 25 लाख टन से अधिक गेहूं और 2000 टन दालें मानवीय सहायता के रूप में भेजी गई हैं। इसके अलावा इस बंदरगाह ने अब तक 90000 TEU से अधिक कंटेनर ट्रैफिक और 84 लाख मीट्रिक टन से अधिक बल्क और जनरल कार्गो को संभाला है।चाबहार पोर्ट अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे से भी जुड़ा है, जो भारत को ईरान, कैस्पियन क्षेत्र, रूस और यूरोप से जोड़ने वाला एक बहु-स्तरीय नेटवर्क है। पूर्व भारतीय राजदूत फुंचोक स्टोबदान के मुताबिक INSTC और चाबहार पोर्ट रूस और यूरेशिया के साथ भारतीय कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने के लिए एक-दूसरे के पूरक होंगे।अमेरिकी प्रतिबंधों की समयसीमा और कानूनी अड़चनेंचाबहार परियोजना के सामने सबसे बड़ी और तात्कालिक अड़चन अमेरिका का रुख है। इससे पहले अमेरिका ने अफगानिस्तान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास में चाबहार की भूमिका को स्वीकार करते हुए भारत को प्रतिबंधों से विशेष छूट दी थी। इस छूट को सितंबर 2025 में रद्द कर दिया गया था और भारत को अपने संचालन को व्यवस्थित करने के लिए एक सशर्त समय दिया गया था, जो अंततः 26 अप्रैल 2026 को समाप्त हो गया।भारत के लिए समय बहुत जटिल रहा क्योंकि ईरान के साथ 10 साल का मुख्य अनुबंध मई 2024 में हुआ था और 120 मिलियन डॉलर का पूरा भुगतान भी कर दिया गया था। अब भारत अमेरिका के साथ अपने संबंधों को मजबूत रखने और चाबहार में अपने निवेश व प्रभाव को बचाने के बीच का रास्ता खोज रहा है।क्या हैं भारत के पास आगे के विकल्प?सूत्रों और रिपोर्टों के मुताबिक भारत और ईरान इस बंदरगाह के प्रबंधन के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर विचार कर रहे हैं। एक विकल्प पर चर्चा चल रही है कि जब तक अमेरिकी प्रतिबंधों की स्थितियां बदल नहीं जातीं, तब तक ईरानी पोर्ट अथॉरिटी के साथ मिलकर एक अस्थायी व्यवस्था बनाई जाए ताकि भारत के हितों और निवेश की रक्षा की जा सके। चुनौती यह है कि यह अस्थायी व्यवस्था भारत की दीर्घकालिक परिचालन भूमिका को हमेशा के लिए कमजोर न करे।भारत का पूरी तरह पीछे हटना रणनीतिक रूप से नुकसानदेह हो सकता है, क्योंकि भारत के कदम पीछे खींचते ही चीन या दूसरी क्षेत्रीय शक्तियां यहां अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर सकती हैं। हालांकि, इसके व्यावसायिक संचालन के लिए सिर्फ भारत की मौजूदगी ही काफी नहीं है बल्कि इसके लिए बेहतर सड़क एवं रेल कनेक्टिविटी, नियमित जहाजों की आवाजाही और कार्गो की भारी मात्रा की आवश्यकता है।ये भी पढ़ें- पेट्रोल पंपों पर तेल में मिलावट की खबरें खारिज! सिर्फ 2 जगह मिली क्लोराइड की शिकायत, तुरंत बिक्री रोक सख्त कार्रवाई का ऐलानपश्चिम एशिया में जारी युद्ध, ईरान के इर्द-गिर्द बढ़ता तनाव और अमेरिका-ईरान संबंधों की अनिश्चितता ने इस प्रोजेक्ट के जोखिम को काफी बढ़ा दिया है। इसके बावजूद, भारत सरकार ने संकेत दिया है कि वह इस प्रोजेक्ट से पीछे नहीं हट रही है। भारत की रणनीति धैर्यपूर्ण कूटनीति की है। इसके तहत तेहरान के साथ कूटनीतिक रास्ते खुले रखे जाएंगे और प्रतिबंधों के जोखिम से बचते हुए अपने रणनीतिक हितों को सुरक्षित रखा जाएगा।
इंटरनेट डेस्क। राजस्थान के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के बीच चल रही बयानबाजी को लेकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अशोक गहलोत और डोटासरा के बीच शीत युद्ध चल रहा है। अभी मॉनसून का मौसम है, अगर यह शीत युद्ध गर्मियों के मौसम में चलता तो सेहत के लिए अच्छा रहता। कांग्रेस की आंतरिक लड़ाई मदन दिलावर ने कहा कि यह कांग्रेस की आंतरिक लड़ाई है, और इससे भाजपा को कोई लेना-देना नहीं है। गोविंद सिंह डोटासरा के उस बयान पर भी मंत्री दिलावर ने जवाब दिया, जिसमें डोटासरा ने कहा था कि मदन दिलावर की पत्नी भी नहीं चाहती कि वे शिक्षा मंत्री रहें। इस पर दिलावर ने कहा, क्या आपने मेरी पत्नी से पूछा है कि वह चाहती हैं या नहीं चाहतीं मीडिया रिपोटर्स की माने तो मंत्री दिलावर ने पिछली कांग्रेस सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार ने राजस्थान में शिक्षा की स्थिति खराब कर दी थी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ काम हो रहा है। pc- etv bharat
उज्जैन में महाकाल सवारी में जेबकतरों का आतंक, 50 से ज्यादा श्रद्धालुओं के मोबाइल, पर्स और चेन चोरी
3 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे थे। पुलिस ने सवारी से पहले 21 संदिग्धों को हिरासत में भी लिया था।
होर्मुज बंद, कतर से सप्लाई 91% घटी... भारत की इस रणनीति से टला गैस संकट
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अनिश्चितता के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एलएनजी आयात का स्रोत बदल दिया. मई से जुलाई के दौरान अमेरिका, ओमान, नाइजीरिया और अंगोला से रिकॉर्ड खरीद के दम पर कुल आयात 15.4 फीसदी बढ़ गया, जबकि पारंपरिक सप्लायर कतर से आयात में 91 फीसदी से ज्यादा गिरावट दर्ज हुई.
नंगल में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल खत्म, शहर में युद्ध स्तर पर सफाई अभियान जारी
पंजाब में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त होने के बाद नंगल में युद्ध स्तर पर सफाई अभियान शुरू हो गया है।
'जेबकतरों की तरह...', कंगना ने सोनाक्षी पर किया कमेंट!
कंगना रनौत ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर बिना नाम लिए इंडस्ट्री की एक हीरोइन पर तीखा हमला किया है. यूजर्स का मानना है कंगना ने ये अटैक सोनाक्षी सिन्हा पर किया है.
Iran US War Update: महायुद्ध से डरा Saudi Arab? MBS ने Donald Trump को फोन कर दी बड़ी चेतावनी!
Iran-US War: महायुद्ध से डरा Saudi Arab? MBS ने Donald Trump को फोन कर दी बड़ी चेतावनी!
ईरान और अमेरिका में बढ़ा तनाव, मुश्किल में फंसे ट्रंप, तेहरान ओमान की हुई दोस्ती, युद्ध लेगा U-turn?
अमेरिका और ईरान के बीच तनातनी फिर बढ़ गई है। ईरान ने अमेरिका से बात करने से साफ इनकार कर दिया है। वहीं, ट्रंप अपने ही देश में मुश्किलों में फंस गए हैं। ईरान और ओमान की दोस्ती बढ़ी, क्या युद्ध लेगा यू-टर्न?
ईरान और अमेरिका में बढ़ा तनाव, मुश्किल में फंसे ट्रंप, तेहरान ओमान की हुई दोस्ती, युद्ध लेगा U-turn? India TV Hindi ट्रम्प बोले- ईरान समझौता करे या सरेंडर: होर्मुज हमारे कंट्रोल में, अमेरिकी नौसेना की इजाजत के बिना कोई जहाज... Dainik Bhaskar 'डील या फिर सरेंडर', भड़के ट्रंप बोले- बातचीत पर ईरान का दोहरा रवैया AajTak 'क्रिएटिव बनें और कुछ नया सोचें', ईरान पर हमले के लिए US आर्मी ने दिए सैनिकों को टिप्स Jagran विश्व युद्ध जैसे अटैक का था प्लान- ट्रंप की वॉर्निंग, ईरान बोला- US ने हिमाकत की तो... ABP News
Trading Plan : पिछले कुछ सेशन में आई एकतरफ़ा तेजी और पुट-कॉल रेश्यो (PCR) के ओवरबॉट लेवल पर पहुंचने के बाद,आने वाले सेशन में Nifty में कुछ प्रॉफ़िट बुकिंग और कंसोलिडेशन हो सकता है। हालांकि, मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि निफ्टी का ओवरऑल ट्रेंड मजबूत बना हुआ है। इंडेक्स को 25,000-25,150 जोन की ओर अपनी बढ़त को आगे बढ़ाने के लिए 24,775 (200-डे DMA) से ऊपर टिके रहने की जरूरत है। तब तक,बाजार में कंसोलिडेशन जारी रह सकता है। इसमें निफ्टी के लिए 24,600-24,500 का जोन एक अहम सपोर्ट के तौर पर काम कर सकता है।उधर बैंक निफ्टी को 59,250 और उससे ऊपर की ओर अपना अपट्रेंड फिर से शुरू करने के लिए 58,500-58,700 जोन से ऊपर टिके रहने और रिकवर करने की जरूरत है। तब तक,इसमें रेंज-बाउंड ट्रेडिंग की संभावना है। बैंक निफ्टी के लिए 57,450-57,350 के जोन में सपोर्ट दिख रहा है।निफ्टी आउटलुक और स्ट्रैटेजीICICI सिक्योरिटीज में वाइस प्रेसिडेंट और हेड ऑफ डेरिवेटिव्स एंड क्वांट रिसर्च जय ठक्कर का कहना है कि पिछले ट्रेडिंग सेशन में निफ्टी मजबूती के साथ हरे निशान में बंद हुआ। हालांकि,नए सेटलमेंट नियम के पहले दिन यह 24,740 के लेवल से काफी ऊपर बंद हुआ,जिससे अजीब सी क्लोजिंग हुई। हालांकि,निफ्टी फ्यूचर्स डिस्काउंट पर बंद हुआ और स्पॉट क्लोजिंग पर खास रिएक्ट नहीं किया। इसी तरह,ऑप्शंस,खासकर कॉल ऑप्शंस में भी बहुत कम मूवमेंट दिखा। इसलिए,निफ्टी फ्यूचर्स का 24,650 के आसपास बंद होना सही रेफरेंस लेवल माना जाता है।दोपहर 3:15 बजे तक,फ्यूचर्स लगभग 60 अंकों के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे थे। इसके आधार पर,स्पॉट इंडेक्स को 24,604 के आसपास बंद होना चाहिए था, लेकिन यह आखिरकार 24,774 पर सेटल हुआ।इंडेक्स को अब और तेजी पकड़ने के लिए 24,775 के लेवल को मजबूती से पार करना होगा,जो इसके 200-डे DMA के आसपास स्थित है। इस लेवल से ऊपर आने वाली टिकाऊ तेजी 25,000 के लिए रास्ता खोल सकता है, जहां सबसे अधिक क्यूमुलेटिव कॉल बेस है। नीचे की तरफ,24,200 और 24,000 स्ट्राइक का एक मजबूत क्यूमुलेटिव पुट बेस है।वीकली एक्सपायरी पुट-कॉल रेश्यो (PCR) 1.50 है,जो ओवरबॉट कंडीशन दिखाता है। इसलिए,एक्सपायरी के दिन ऊपरी लेवल पर कुछ प्रॉफिट बुकिंग से इनकार नहीं किया जा सकता।मीडियम-टर्म नजरिए से ट्रेंड पॉजिटिव बना हुआ है,जिसमें 24,800-25,000 के अपसाइड टारगेट हैं। जब तक इंडेक्स 24,200 के लेवल से ऊपर रहता है तब कर इसमें तेजी की उम्मीद कायम है।अहम रेजिस्टेंस: 24,800, 25,000अहम सपोर्ट: 24,400, 24,200स्ट्रेटेजी: निफ्टी फ्यूचर्स को मौजूदा मार्केट प्राइस (CMP) पर और 24,400 के पास गिरावट पर खरीदें। 24,200 से नीचे स्टॉप-लॉस और 24,800 और 25,000 के टारगेट के साथ खरीदारी करें।बैंक निफ्टी आउटलुक और स्ट्रैटेजीजय ठक्कर का कहना है कि बैंक निफ्टी अपने 200-डे DMA से काफी ऊपर 57,450 पर बंद हुआ है। इसके अलावा,58,000 स्ट्राइक के आगे कोई बड़ा कॉल बेस नहीं है जो 59,500 और 60,000 के ऊपर के टारगेट के साथ बुलिश आउटलुक दिखाता है। हालांकि,ऊपर की ओर मोमेंटम को मजबूत करने के लिए, इंडेक्स को पहले 58,000 से ऊपर ब्रेक करना होगा और फिर 58,500 से ऊपर टिकना होगा।PCR 0.88 पर बना हुआ है,जो बताता है कि कॉल बेस अभी भी पुट बेस से ज्यादा है। हालांकि,पिछले ट्रेडिंग सेशन के दौरान पुट में हुई बड़ी बढ़ोतरी से पता चलता है कि इंडेक्स ओवरसोल्ड टेरिटरी से पलट गया है।अहम रेजिस्टेंस: 58,500, 59,500अहम सपोर्ट: 57,500, 57,000स्ट्रैटेजी: बैंक निफ्टी फ्यूचर्स को मौजूदा मार्केट प्राइस (CMP) पर खरीदें और 57,500 के पास गिरावट पर जोड़ें,56,800 के नीचे स्टॉप-लॉस और 58,500 और 59,500 के टारगेट रखें।डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।
गाजा में कत्लेआम पर भड़के कतर-तुर्की-मिस्र, इजरायल नहीं रोक रहा बमबारी
कतर, मिस्र और तुर्की ने गाजा में इजरायली कार्रवाई, खासकर नागरिकों, महिलाओं, बच्चों और स्वास्थ्य ढांचे पर हमलों की कड़ी निंदा की है. इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय कानून का खुला उल्लंघन बताया है. गाजा सिटी के दक्षिण-पश्चिम में ताजा हमले में कम से कम दो लोग मारे गए हैं.
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट-US-Iran Conflict Trigger a Global War Questions Over Trump Strategy and Rising Global Risks
Unnao News: सऊदी अरब में डिजिटल गिरफ्तारी का डर दिखा 1.20 लाख ठगे
सऊदी अरब में डिजिटल गिरफ्तारी का डर दिखा 1.20 लाख ठगे
Unnao News: ईरान युद्ध से रेशम के धागों की कीमतों में लगी आग
ईरान युद्ध से रेशम के धागों की कीमतों में लगी आग
Basti News: अधिकतर सब सेंटरों पर नहीं पहुंची थी सामग्री, विजिलेंस जांच के लिए जुटा रहे कागजात
Material had not reached most of the sub-centres, vigilance is collecting documents for investigation.
Amroha News: जंगल में तेंदुए की दहशत, खेतों में जाने से कतरा रहे ग्रामीण
जोया क्षेत्र के कांकर सराय उर्फ काजी सराय सहित आसपास के गांवों में तेंदुए की मौजूदगी की चर्चाओं से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है।
बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर ने भाजपा के नीरज कुमार को 19,324 मतों के बड़े अंतर से हराया। शुरुआत में कांटे की टक्कर के बाद पांचवें राउंड से जन सुराज ने निर्णायक बढ़त बनाई और एकतरफा जीत दर्ज की।
जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के कारण पूरी दुनिया में मौसम का चक्र तेजी से बदल रहा है, जिसका सबसे गंभीर असर यूरोप महाद्वीप पर देखने को मिल रहा है। गर्मी और सूखे के कारण यूरोप की प्रमुख नदियां अपने न्यूनतम जल स्तर पर पहुंच चुकी हैं, जिससे सदियों पुरानी और गायब हो चुकी सभ्यताएं और ऐतिहासिक अवशेष पानी की गहराई से बाहर आने लगे हैं। इन नदियों का सूखना पर्यावरण के लिए भले ही चिंता का विषय हो, लेकिन इतिहासकार और पुरातत्वविद् इसे एक अनूठे खजाने की तरह देख रहे हैं, जहां पानी के नीचे छिपे कई अनछुए राज दुनिया के सामने आ रहे हैं।राइन और डैन्यूएब नदियों में दिखा इतिहास का खजानायूरोप की कई प्रसिद्ध नदियां जैसे राइन, डैन्यूएब और पो इन दिनों भयंकर सूखे की चपेट में हैं। पानी का स्तर इतना नीचे चला गया है कि नदियों की तली साफ नजर आने लगी है। इन सूखी तलहटी और कीचड़ के बीच से ऐसे अवशेष निकल रहे हैं जिनके बारे में सदियों से किसी को कोई जानकारी नहीं थी। पुरातत्वविदों को इन जगहों पर प्राचीन रोमन काल के पुलों के अवशेष, युद्ध के समय डूबे हुए हथियार और सदियों पुरानी बस्तियों के निशान मिले हैं, जो यह बयां करते हैं कि कभी इन इलाकों में इंसानी गतिविधियां किस स्तर पर थीं।हिमयुग के मैमथ के अवशेष और हिटलर के दौर के युद्धपोतइन खोजों में सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात यह है कि अलग-अलग जगहों से अलग-अलग कालखंड के अवशेष बाहर आ रहे हैं। हंगरी और सर्बिया के पास डैन्यूएब नदी की सूखी तलहटी से द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान डूबे हुए जर्मन नाजी सेना यानी हिटलर के कई युद्धपोत बाहर आए हैं, जिन पर अब भी विस्फोटक और हथियार लदे हुए हैं। इसके साथ ही, अन्य नदियों के पास प्रागैतिहासिक काल यानी हिमयुग के जीवों जैसे विशालकाय मैमथ के कंकाल और हड्डियां भी सुरक्षित अवस्था में मिली हैं, जिन्होंने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है।पर्यावरण के लिए चेतावनी और इतिहास के पन्नों का खुलनावैज्ञानिकों का मानना है कि नदियों का इस तरह सूखना पर्यावरण के लिहाज से बेहद खतरनाक संकेत है, जो आने वाले जल संकट की ओर इशारा करता है। हालांकि, दूसरी तरफ इसने इतिहास के कई अनसुलझे पन्नों को पलटने का मौका दे दिया है। स्थानीय प्रशासन और शोधकर्ता इन ऐतिहासिक अवशेषों को सहेजने में जुट गए हैं ताकि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में इतिहास के इन अनमोल प्रमाणों को सुरक्षित रखा जा सके।
पश्चिम एशिया में महीनों से जारी तनाव और युद्ध के बीच एक बड़ा कूटनीतिक मोड़ आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की है कि अमेरिका और ईरान के बीच सोमवार दोपहर से औपचारिक शांति वार्ता शुरू होने जा रही है। 'एयर फोर्स वन' में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि बातचीत के रास्ते पूरी तरह खुले हैं और अमेरिका सैन्य बल के प्रयोग के बजाय कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता दे रहा है। उन्होंने कहा कि वह उनसे [ईरानियों से] बातचीत कर रहे हैं, यह सोमवार दोपहर को शुरू होगी, और देखते हैं कि यह कैसे आगे बढ़ती है। उन्होंने आगे कहा कि वह लोगों की जान नहीं लेना चाहते, क्योंकि इसमें बहुत से लोग मारे जाते हैं; वह ऐसा नहीं चाहते। इसे भी पढ़ें: US Airstrikes Called Off | द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई टली, Donald Trump मचाने वाले थे कोहराम, बस एक गलती.... ट्रंप ने अमेरिकी सेना को ईरान पर नए हमले करने का आदेश देने से रोका पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को कहा कि उन्होंने कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों के सहयोगियों के अनुरोध पर अमेरिकी सेना को ईरान पर नए हमले करने का आदेश देने से रोकने का फैसला किया। उन्होंने आगे दावा किया कि अमेरिकी सेना द्वारा रविवार को एक और बड़ा हमला करने की योजना थी। हालाँकि, उन्होंने कहा कि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान सहित खाड़ी देशों के प्रमुख नेताओं की बात सुनने और कुछ अज्ञात ईरानी अधिकारियों के अनुरोध के बाद उन्होंने इस योजना को टालने और कूटनीति को और समय देने का फैसला किया। इसे भी पढ़ें: Assembly Bypolls Results | बिहार की बांकीपुर, MP की दतिया और गुजरात की मंज़लपुर सीट पर वोटों की गिनती शुरू, बीजेपी-कांग्रेस में कड़ा मुकाबला अरब नेताओं ने ईरान के बारे में ट्रंप से क्या कहा? उन्होंने बताया कि उन्होंने क्राउन प्रिंस से कहा, 'आप क्या करना चाहेंगे?' क्या आप चाहेंगे कि हम ऐसा करें या नहीं? ध्यान देने वाली बात है कि शनिवार को ट्रंप और सऊदी क्राउन प्रिंस के बीच बातचीत हुई थी। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर घोषणा की कि मध्य-पूर्व के सहयोगी पांच महीने से चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए एक समझौते की रूपरेखा पर सहमत हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक दिन पहले कहा था कि ईरान के साथ बातचीत से उनका भरोसा उठ रहा है और चेतावनी दी थी कि अमेरिकी सेना उन पर बहुत ज़ोरदार हमला करेगी। हालांकि, रविवार को उन्होंने कहा कि जो समझौता हो रहा है, उसमें होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना शामिल होगा। यह एक अहम समुद्री रास्ता है, जहां से युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया की लगभग पांचवीं-हिस्से (20%) ऊर्जा की आपूर्ति होती थी। साथ ही, इस समझौते से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका की चिंताएं भी दूर हो जाएंगी। ईरान होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने की कोशिश करने वाले जहाजों पर बार-बार हमले करता है यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब ईरान, अमेरिका के साथ अपने टकराव के तहत, बिना इजाज़त होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने की कोशिश करने वाले जहाजों पर बार-बार हमले कर रहा है। इसके अलावा, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने रविवार को कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य किसी भी हाल में 28 फरवरी से पहले वाली स्थिति में वापस नहीं आएगा - इसी दिन युद्ध शुरू हुआ था। ईरानी सरकारी टीवी के साथ फोन पर बातचीत में उन्होंने कहा कि ईरान, होर्मुज़ के दूसरी तरफ़ स्थित ओमान के साथ इस जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पर चर्चा कर रहा है, लेकिन इस अहम समुद्री रास्ते को फिर से खोलने के बारे में अभी कोई बातचीत नहीं हो रही है। इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति ने कई बार ईरान पर हमले रोकने की घोषणा भी की है — जब से 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमला किया था — लेकिन हर बार हालात बिगड़ गए और लड़ाई फिर से शुरू हो गई। Stay updated with InternationalNews in Hindi on Prabhasakshi
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को एक बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे खाड़ी देशों के अनुरोध पर उन्होंने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के फैसले को फिलहाल स्थगित कर दिया है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी सेना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा हमला करने की पूरी तैयारी कर चुकी थी, लेकिन प्रमुख खाड़ी नेताओं के साथ हुई बातचीत के बाद इस योजना को रद्द कर कूटनीतिक प्रयासों को समय देने का निर्णय लिया गया। इसे भी पढ़ें: Jammu and Kashmir | बारामूला और पुलवामा में सुरक्षा बलों की बड़ी कार्रवाई, हथियार और गोला-बारूद के साथ आतंकियों के 2 मददगार गिरफ्तार ट्रंप ने बताया कि रविवार को अमेरिकी सेना की ‘‘द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा हमला’’ करने की योजना तैयार थी लेकिन सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान सहित प्रमुख खाड़ी नेताओं से बातचीत और कुछ अज्ञात ईरानी अधिकारियों के अनुरोध के बाद उन्होंने इस योजना को रद्द कर दिया और कूटनीतिक प्रयासों को आगे बढ़ाने के लिए थोड़ा और समय देने का निर्णय लिया। ट्रंप ने न्यू जर्सी के बेडमिन्स्टर स्थित अपने गोल्फ क्लब से वाशिंगटन लौटते समय एयर फोर्स वन में पत्रकारों से कहा, ‘‘मैंने क्राउन प्रिंस से पूछा कि आप क्या चाहते हैं? क्या आप चाहेंगे कि हम हमला करें या नहीं? उन्होंने कहा कि हम हमले के बजाय समझौता करना ज्यादा पसंद करेंगे, क्योंकि आपको नहीं पता कि ऐसे हमले कहां जाकर रुकेंगे।’’ इसे भी पढ़ें: Ahmedabad 2030 | अलविदा ग्लास्गो, अहमदाबाद में फिर मिलेंगे... 'वसुधैव कुटुम्बकम' के संग भारत में सजेगा राष्ट्रमंडल खेलों का महाकुंभ! ट्रंप और सऊदी अरब के शहजादे के बीच शनिवार को बातचीत हुई थी। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि पश्चिम एशिया के सहयोगी देशों ने पांच महीने पुराने युद्ध को समाप्त करने के लिए एक समझौते की रूपरेखा पर सहमति बना ली है। यह ट्रंप के रुख में एक और बड़ा बदलाव था। एक दिन पहले ही उन्होंने कहा था कि उन्हें ईरान के साथ बातचीत पर भरोसा कम होता जा रहा है और चेतावनी दी थी कि अमेरिकी सेना ‘‘ईरान पर बहुत जोरदार हमला करेगी।’’ ट्रंप ने रविवार को दोहराया कि प्रस्तावित समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना शामिल होगा। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने रविवार को कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति अब किसी भी कीमत पर 28 फरवरी, यानी युद्ध शुरू होने से पहले जैसी नहीं होगी। उन्होंने ईरान के सरकारी टेलीविजन से बातचीत में कहा कि ईरान होर्मुज के दूसरी ओर स्थित ओमान के साथ जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पर चर्चा कर रहा है, लेकिन फिलहाल इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को फिर से खोलने पर कोई बातचीत नहीं हो रही है। ट्रंप इससे पहले भी कई बार ईरान पर हमले रोकने की घोषणा कर चुके हैं, लेकिन बाद में हालात बिगड़ने पर संघर्ष फिर शुरू हो गया। Stay updated with InternationalNews in Hindi on Prabhasakshi
अंतरराष्ट्रीय डेस्क, वॉशिंगटन/दुबई: मध्य पूर्व (Middle East) में महीनों से जारी भीषण सैन्य तनाव और तीसरे विश्व युद्ध के खतरे के बीच वैश्विक शांति के दृष्टिकोण से एक बहुत बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर प्रस्तावित उस व्यापक सैन्य कार्रवाई को अंतिम समय में टालने का आधिकारिक ऐलान किया है, जिसे उन्होंने खुद द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का सबसे बड़ा और विनाशकारी हमला करार दिया था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और स्वयं ईरानी अधिकारियों के विशेष अनुरोध व कूटनीतिक हस्तक्षेप के बाद उन्होंने इस हमले को रोकने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही, वॉशिंगटन और तेहरान के बीच औपचारिक कूटनीतिक वार्ताओं के नए दौर की शुरुआत होने जा रही है।राष्ट्रपति ट्रंप के इस अचानक आए मोड़ से न केवल मध्य पूर्व में जारी बारूदी जंग के थमने की उम्मीद जगी है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों, शेयर बाजारों और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति शृंखलाओं ने भी गहरी राहत की सांस ली है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि आगामी वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से खोलना, क्षेत्रीय हमलों पर विराम लगाना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े खतरों का स्थायी समाधान निकालना है।द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा हमला टला: ट्रंप ने क्यों लिया यू-टर्न?एयरफोर्स वन (Air Force One) में पत्रकारों से बातचीत करते हुए और अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जारी बयानों में राष्ट्रपति ट्रंप ने खुलासा किया कि अमेरिकी और इजरायली बल ईरान के रणनीतिक बुनियादी ढांचों, ऊर्जा ठिकानों और सैन्य प्रतिष्ठानों पर एक ऐसा अभूतपूर्व हमला करने की पूरी तैयारी कर चुके थे, जैसा द्वितीय विश्व युद्ध के बाद दुनिया में कभी नहीं देखा गया। अमेरिकी सेना लॉक एंड लोडेड (पूर्ण सैन्य तैयारी) की स्थिति में थी। हालांकि, ऐन वक्त पर खाड़ी देशों के प्रमुख नेताओं और मध्यस्थों द्वारा दिए गए प्रस्तावों के बाद ट्रंप ने बल प्रयोग के बजाय कूटनीति का रास्ता चुनना बेहतर समझा।डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, मैं लोगों को मारना नहीं चाहता। यदि यह हमला होता, तो यह बेहद विनाशकारी होता और इससे होने वाली तबाही को दोबारा ठीक करने में कई-कई साल लग जाते। ईरान और उसके पड़ोसी देशों ने हमसे सीधे तौर पर अनुरोध किया कि हम इस हमले को रोकें क्योंकि एक व्यापक समझौते की रूपरेखा (Framework) तैयार हो चुकी है। यदि बिना युद्ध के बातचीत के जरिए दुनिया को सुरक्षित बनाया जा सकता है, तो हम शांति को ही पहला मौका देंगे।सऊदी क्राउन प्रिंस और खाड़ी देशों की मध्यस्थता: पर्दे के पीछे क्या हुआ?इस ऐतिहासिक हमले को टालने में मध्य पूर्व के प्रमुख खाड़ी देशों, विशेष रूप से सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और कतर के कूटनीतिक दलों ने सबसे केंद्रीय भूमिका निभाई है। रिपोर्टों के अनुसार, हमले के तय समय से महज कुछ घंटे पहले सऊदी क्राउन प्रिंस ने राष्ट्रपति ट्रंप के साथ एक लंबी और अत्यंत महत्वपूर्ण टेलीफोनिक बातचीत की। इस दौरान क्राउन प्रिंस ने अमेरिका को आगाह किया कि यदि ईरान पर इतना बड़ा हमला होता है, तो तेहरान की संभावित जवाबी कार्रवाई से समूचे खाड़ी क्षेत्र की तेल सुविधाओं और वैश्विक अर्थव्यवस्था को अपूरणीय क्षति पहुंचेगी।कतर के मध्यस्थों ने शनिवार को ईरानी राजनयिकों के सामने एक संशोधित शांति प्रस्ताव रखा, जिस पर तेहरान की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली। खाड़ी देशों का मानना था कि युद्ध के इस विकराल मोड़ पर सैन्य हमला किसी भी देश के हित में नहीं होगा, बल्कि इससे अनियंत्रित क्षेत्रीय युद्ध छिड़ सकता है। कतर, सऊदी अरब और यूएई की इस संयुक्त कूटनीतिक पहल के कारण ही वॉशिंगटन ने अपनी सैन्य रणनीति को रोककर बातचीत की मेज पर लौटने का फैसला किया।हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) और परमाणु मुद्दा: क्या हैं प्रस्तावित समझौते की शर्तें?अमेरिका और ईरान के बीच शुरू होने जा रही इस नई बातचीत के केंद्र में हॉर्मुज जलडमरूमध्य का खोला जाना और क्षेत्रीय सुरक्षा समझौते शामिल हैं। हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल परिवहन मार्ग है, जिसके जरिए दुनिया के कुल कच्चे तेल और एलएनजी (LNG) का लगभग पांचवां हिस्सा (20%) गुजरता है। युद्ध के कारण इस मार्ग पर लगी पाबंदियों से दुनिया भर में ऊर्जा संकट और महंगाई का खतरा मंडरा रहा था।क्षेत्रीय अधिकारियों और कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित शांति समझौते के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:हॉर्मुज जलडमरूमध्य की पूर्ण बहाली: ईरान अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों के लिए हॉर्मुज की खाड़ी को तुरंत और पूरी तरह से सुरक्षित रूप से खोलने पर सहमत होगा।क्षेत्रीय हमलों पर पूर्ण विराम: ईरान और उसके समर्थित क्षेत्रीय गुट (मिशिया) खाड़ी देशों, अमेरिकी ठिकानों व वाणिज्यिक जहाजों पर अपने सभी रॉकेट, ड्रोन व मिसाइल हमलों को तुरंत रोकेंगे।समुद्री नाकेबंदी की समाप्ति: बदले में अमेरिका ईरान पर लगाई गई कड़े नौसैनिक जहाजरानी प्रतिबंधों (Naval Blockade) को हटाएगा और तेहरान को कानूनी रूप से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना कच्चा तेल बेचने की अनुमति देगा।परमाणु कार्यक्रम पर नियंत्रण: अमेरिकी प्रशासन की सबसे प्राथमिक शर्त यह है कि ईरान अपने परमाणु संवर्धन (Nuclear Enrichment) कार्यक्रमों को ऐसा रूप देगा जिससे वैश्विक परमाणु खतरे का हमेशा के लिए अंत हो सके।अंतरराष्ट्रीय बाजार और क्रूड ऑयल पर असर: दुनिया ने ली राहत की सांसट्रंप के इस ऐतिहासिक ऐलान के बाद अंतरराष्ट्रीय वित्तीय और कमोडिटी बाजारों में जबरदस्त सकारात्मक हलचल देखी गई है। पिछले कई हफ्तों से युद्ध के डर से रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुकी कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में घोषणा के तुरंत बाद 4 से 7 प्रतिशत तक की जोरदार गिरावट दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड के दाम टूटकर $84 प्रति बैरल के पास आ गए हैं।तेल की कीमतों में आई इस नरमी से भारत, जापान, यूरोपीय संघ और अमेरिका जैसे प्रमुख तेल आयातक देशों को भारी आर्थिक राहत मिली है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यदि सोमवार से शुरू हो रही यह वार्ता किसी मुकाम पर पहुंचती है, तो वैश्विक मुद्रास्फीति (Global Inflation) पर तेजी से लगाम लगेगी और अंतरराष्ट्रीय शेयर बाजारों (Global Stock Markets) में नई तेजी का दौर देखने को मिलेगा।हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और दोनों देशों की सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं, लेकिन कूटनीति के इस नए अवसर ने यह साबित कर दिया है कि संवाद के जरिए बड़े से बड़े वैश्विक संकट को टाला जा सकता है। अब पूरी दुनिया की निगाहें सोमवार दोपहर से शुरू होने वाली अमेरिका-ईरान की ऐतिहासिक वार्ताओं पर टिकी हुई हैं।
Iran-US War Updates: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान पर होने वाले द्वितीय विश्व युद्ध के बाद के सबसे बड़े सैन्य हमले को फिलहाल टाल दिया है। इसके बजाय वॉशिंगटन और तेहरान के बीच सोमवार यानी 3 अगस्त को दोपहर से नए दौर की बातचीत शुरू होगी। इस बातचीत का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम (Denuclearisation) को लेकर समझौते तक पहुंचना है।एयर फोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार था। लेकिन क्षेत्रीय सहयोगी देशों के अनुरोध पर इस अभियान को रोकने का फैसला लिया गया। उनका कहना था कि सहयोगी देशों का मानना था कि अगर हमला किया गया तो कई महीनों से चल रहे तनाव को कूटनीतिक तरीके से खत्म करने की संभावना समाप्त हो सकती है।बातचीत के जरिए समाधान तलाश रहे हैं दोनों देशट्रंप ने पत्रकारों के एक सवाल पर कहा, अब हम बातचीत के जरिए समाधान तलाश रहे हैं। यह प्रक्रिया सोमवार दोपहर से शुरू होगी और देखेंगे कि क्या परिणाम निकलता है। उन्होंने बताया कि वार्ता का केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े मुद्दों का समाधान होगा।जब उनसे पूछा गया कि क्या बातचीत के लिए कोई समय-सीमा तय की गई है, तो ट्रंप ने कहा कि ऐसी कोई डेडलाइन नहीं है। उन्होंने कहा, हम जब चाहें कार्रवाई के लिए तैयार हैं, लेकिन मेरी प्राथमिकता समझौता करना है। मैं लोगों की जान नहीं लेना चाहता। हम युद्ध नहीं चाहते।द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई रोकीराष्ट्रपति ट्रंप ने यह भी खुलासा किया कि जिस सैन्य अभियान को रोका गया, वह द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अमेरिका की सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई होती। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, साथ ही अमेरिका के करीबी सहयोगी संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कतर ने वीकेंड में हमला नहीं करने की अपील की थी।ट्रंप के मुताबिक, इन देशों का मानना था कि बातचीत के जरिए समाधान निकल सकता है। उन्होंने कहा, हम पूरी तरह तैयार थे। लेकिन उन्होंने कहा कि समझौते की संभावना है। होर्मुज को लेकर भी समझौता होगा और परमाणु मुद्दे पर भी समाधान निकलेगा।ईरान का पलटवारहालांकि, ईरान ने ट्रंप के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। ईरान की सरकारी मेहर न्यूज एजेंसी ने कहा कि तेहरान ने अमेरिका से सैन्य कार्रवाई रोकने की कोई अपील नहीं की और ट्रंप का दावा एक और झूठ है। इस बीच, ईरानी मीडिया के मुताबिक, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने रविवार को कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए ओमान की मध्यस्थता में चल रही बातचीत अच्छी तरह से आगे बढ़ रही है और फाइनल होने के रास्ते पर है।ये भी पढ़ें- 'सिद्धिविनायक मंदिर में हर साल ₹18 करोड़ की चोरी'; राज ठाकरे का सनसनीखेज आरोपयदि दोनों देशों के बीच यह वार्ता सफल रहती है, तो इससे न केवल मध्य पूर्व में लंबे समय से जारी तनाव कम हो सकता है, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर भी इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
'दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा हमला?', ट्रंप ने ईरान पर अब किया ये ऐलान
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान की अपील के बाद उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित बड़ा हमला फिलहाल रोक दिया है. दूसरी तरफ तेहरान ने ट्रंप के दावे को खारिज करते हुए सैन्य सतर्कता बनाए रखने, सऊदी अरब और पाकिस्तान से तेज संपर्क बढ़ाने और यह साफ करने का संदेश दिया है कि क्षेत्रीय सुरक्षा, जवाबी तैयारी और राजनीतिक समाधान अब साथ साथ चलेंगे.
अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष शुरू हुए अब पांच महीने से ज्यादा समय हो चुका है। इस बीच दोनों के बीच एक बार युद्ध विराम का समझौता लागू हो चुका है। हालांकि, यह एक महीने भी नहीं चल पाया और जुलाई के पहले हफ्ते से शुरू होने के बाद अब तक जारी है।
Space Warfare: क्या भविष्य के युद्ध अंतरिक्ष में लड़े जाएंगे? साइबर, लेजर और उपग्रह बनेंगे सबसे बड़े हथियार---Space Warfare: Future Conflicts May Target Satellites with Cyber and Laser Attacks
युद्ध, डर और उम्मीद... आखिर क्यों गढ़े गए सुपरहीरो?
सुपरहीरो कभी भी सिर्फ असाधारण शक्तियों वाले किरदार नहीं रहे. वे हर दौर के समाज की इच्छाओं, आशंकाओं और सपनों का प्रतिबिंब रहे हैं. वे हमें याद दिलाते हैं कि असली ताकत केवल असाधारण शक्तियों में नहीं बल्कि सही समय पर सही फैसला लेने, कमजोरों के साथ खड़े होने और दूसरों के लिए जोखिम उठाने के साहस में होती है.
Ballia News: 1971 के युद्ध के वीर कैप्टन बिहारी सिंह को राजकीय सम्मान के साथ दी अंतिम विदाई
1971 war hero Captain Bihari Singh was given a final farewell with state honours.
इराक के सुलेमानिया पर ईरानी ड्रोन ने बरपाया कहर, सामने आया Video
इराक के सुलेमानिया में ईरान-विरोधी समूहों के एक ठिकाने को ड्रोन हमले में निशाना बनाया गया है. माना जा रहा है कि ये हमला ईरान ने किया है जिसमें अलगाववादी समूहों के मुख्यालय पर दो प्रोजेक्टाइल सीधे जाकर लगे. ईरान ने ड्रोन से ये हमला किया. देखें वीडियो.
देश की तीनों सेनाओं को भविष्य के युद्ध की चुनौतियों के लिए तैयार करने हेतु 3 अगस्त से चौथा फ्यूचर वारफेयर कोर्स शुरू होगा।
तमिलनाडु में कावेरी विवाद पर TVK बनाम विपक्ष, सर्वदलीय बैठक बुलाने से क्यों कतरा रहे सीएम विजय?
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय कावेरी जल विवाद को लेकर अपनी पहली बड़ी राजनीतिक परीक्षा का सामना कर रहे हैं, जहां विपक्ष, खासकर डीएमके, सर्वदलीय बैठक बुलाने का दबाव बना रहा है।
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध रोकने में जुटा सऊदी: क्राउन प्रिंस ने अमेरिका भेजा रक्षा मंत्री
सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया है. सऊदी अरब की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह शांति और स्थिरता बनी रहे. साथ ही रक्षा मंत्री को दूत बनाकर व्हाइट हाउस भी भेजा गया है.
Donald Trump का दावा, Iran युद्ध खत्म करने के समझौते की बनी रूपरेखा
वाशिंगटन, दो अगस्त (एपी) अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि पश्चिम एशिया के सहयोगी देशों ने ईरान के साथ पांच महीने से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए एक समझौते की रूपरेखा पर सहमति बना ली है। उन्होंने कहा कि फिलहाल वह इस संघर्ष में ईरान पर नए सैन्य हमले का आदेश नहीं देंगे। ट्रंप ने शनिवार शाम को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि इस समझौते में ‘‘होर्मुज जलडमरूमध्य को तत्काल और पूरी तरह खोलना तथा ईरान के परमाणु खतरे का अंत शामिल होगा।’’उन्होंने कहा, ‘‘इस अनुरोध के आधार पर मैंने दुनिया के भविष्य के हित में और साथ ही एक सफल एवं समृद्ध ईरान के अस्तित्व को ध्यान में रखते हुए फिलहाल हमलों को रोकने पर सहमति दी है, बशर्ते कि शीघ्र ही कोई समझौता हो सके।’’अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर हमला किए जाने के बाद से राष्ट्रपति ट्रंप कई बार ईरान पर हमले रोकने की घोषणा कर चुके हैं लेकिन हर बार हालात फिर बिगड़ गए और दोनों पक्षों के बीच संघर्ष दोबारा शुरू हो गया। ईरान के रक्षा मंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि ट्रंप की हालिया घोषणा से ईरान ‘‘न तो हैरान है और न ही ढिलाई बरत रहा है।’’ उन्होंने कहा कि अमेरिका से मिलने वाली धमकियों के मद्देनजर ईरान पूरी तरह सतर्क और सजग बना हुआ है। क्षेत्रीय मामलों से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि सप्ताहांत में राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा घोषित प्रस्ताव के तहत अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता फिर से शुरू करने तथा उन अनेक लंबित मुद्दों पर बातचीत जारी रखने की बात कही गई है, जिनके कारण पहले किसी समझौते पर प्रगति नहीं हो सकी थी। मध्यस्थता प्रयासों में शामिल इस अधिकारी ने बताया कि प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से पूरी तरह खोलने तथा पूरे क्षेत्र में होने वाले हमलों को रोकने का भी प्रावधान है। इसमें इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया द्वारा अरब खाड़ी देशों और जॉर्डन पर किए जाने वाले हमलों को रोकना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि इसके बदले अमेरिका ईरान पर लागू अपनी नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करेगा और प्रस्तावित अस्थायी युद्धविराम समझौते के अनुसार तेहरान को फिर से तेल निर्यात करने की अनुमति देगा। अधिकारी ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया कि अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है लेकिन मध्यस्थता के प्रयास जारी हैं। ट्रंप ने कहा कि इजराइल भी युद्ध समाप्त करने के लिए युद्धविराम समझौते को लागू करने की उनकी प्रतिबद्धता में शामिल हो गया है। हालांकि, इजराइल ने ट्रंप की इस घोषणा पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की। इससे पहले शनिवार को सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रंप से फोन पर बातचीत के दौरान अमेरिका द्वारा ईरान पर नए हमले करने की आशंका पर चिंता व्यक्त की। सऊदी अरब की समाचार एजेंसी ने यह जानकारी दी। बातचीत से अवगत एक व्यक्ति ने बताया कि सलमान ने बातचीत के दौरान ट्रंप से यह स्पष्ट करने को कहा कि वह ईरान के खिलाफ किस प्रकार की नयी कार्रवाई पर विचार कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक आवास एवं कार्यालय व्हाइट हाउस ने नाम न उजागर करने की शर्त पर पुष्टि की कि दोनों नेताओं के बीच शनिवार को बातचीत हुईऋ लेकिन बातचीत की विषय-वस्तु के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। इस बीच, शनिवार को अमेरिकी विदेश विभाग ने 10 देशों में रह रहे अमेरिकी नागरिकों के लिए नयी सुरक्षा चेतावनी जारी की और ईरान के साथ बढ़ते तनाव के मद्देनजर उन्हें अधिक सतर्क रहने की सलाह दी। ये चेतावनियां बहरीन, इजराइल, इराक, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के लिए जारी की गई हैं। इनमें अमेरिकी नागरिकों से संभावित उड़ान रद्द होने, अस्थायी रूप से हवाई क्षेत्र बंद किए जाने तथा यात्रा में अन्य प्रकार की बाधाओं के लिए तैयार रहने को कहा गया है। पश्चिम एशिया के एक अन्य घटनाक्रम में रविवार को गाजा पट्टी में इजराइल द्वारा किए गए हवाई हमलों में कम से कम आठ फलस्तीनी मारे गए, जिनमें दो बच्चे भी शामिल हैं। स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में 12 से अधिक लोग घायल भी हुए हैं।
मिडिल ईस्ट पर ट्रंप और सऊदी प्रिंस की बातचीत, क्या बदलने वाला है पूरा समीकरण?
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव को कम करने के लिए रविवार को अहम बातचीत की। सऊदी आधिकारिक एजेंसी एसपीए के अनुसार, क्राउन प्रिंस ने तनाव घटाने और राजनयिक समाधान वाले युद्धविराम के लिए हरसंभव प्रयास करने पर जोर दिया।
Donald Trump का दावा, ईरान से युद्ध खत्म करने के लिए Israel भी नए समझौते को तैयार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को जानकारी दी कि अमेरिका और इजरायल, ईरान तथा इलाके के अन्य देशों की अपील पर ईरान पर होने वाले नए हमलों को रोकने के लिए तैयार हो गए हैं। उन्होंने दावा किया कि मध्य पूर्व के देश युद्ध को खत्म करने के लिए समझौते की शर्तों पर सहमत हो गए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोलने पर बनी बात अपने 'ट्रुथ सोशल' प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट शेयर करते हुए ट्रंप ने कहा कि इस नए समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत और पूरी तरह से खोला जाएगा। यह रास्ता दुनिया में तेल और गैस के व्यापार के लिए बेहद खास है, जिसे 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने लगभग बंद कर रखा है। इसे भी पढ़ें: WSJ की सनसनीखेज रिपोर्ट, President Donald Trump ने Iran पर सैन्य हमले का दिया आदेश हमले रोकने की वजह ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ईरान के खिलाफ बेहद कड़ी सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार थी। इसके बावजूद, ईरान और बाकी पड़ोसी देशों के निवेदन पर इस हमले को रोक दिया गया है, क्योंकि एक समझौते पर बात बन गई है। इस समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के साथ-साथ ईरान के परमाणु खतरे को पूरी तरह खत्म करना शामिल है। ट्रंप ने साफ किया कि अगर जल्द ही पक्का समझौता हो जाता है, तो हमले हमेशा के लिए रद्द कर दिए जाएंगे। इजरायल भी समझौते के पक्ष में ट्रंप के मुताबिक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व वाला इजरायल भी इस समझौते को पूरा करने के लिए अमेरिका के साथ आ गया है, जिससे यह युद्ध खत्म हो सके। इससे पहले फरवरी में अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमले किए थे, जिनमें ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसे भी पढ़ें: ईरान की खुली धमकी: US और Israel के Energy Assets को बनाएंगे निशाना, Trump की कार्रवाई का देंगे करारा जवाब ऊर्जा ठिकानों पर थी बड़े हमले की तैयारी इससे पहले खबर आई थी कि अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान के ऊर्जा से जुड़े ठिकानों पर बड़े हमलों की योजना बना रहे थे। ट्रंप ने खुद शुक्रवार को कहा था कि वे ईरान पर बहुत भारी हमला करेंगे ताकि उसे घुटने टेकने पर मजबूर किया जा सके। हालांकि, अब इस योजना को रोक दिया गया है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव दोनों देशों ने जून में भी युद्ध रोकने के लिए एक शुरुआती समझौता किया था, जो बाद में टूट गया। इसके बाद जब ईरान पर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को निशाना बनाने का आरोप लगा, तो अमेरिका ने फिर से हमले शुरू कर दिए थे। जवाब में ईरान ने भी खाड़ी देशों में बने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए थे। हालांकि, अब नए समझौते के बाद तनाव कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
Iran US War: Iran ने जारी कर दी अपनी Hitlist, सऊदी, UAE और कतर पर क्यों मंडराया खतरा?
पश्चिम एशिया (Middle East) का युद्ध अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, जहां से तीसरे विश्व युद्ध की आहट सुनाई देने लगी है। ईरान (Iran) ने अमेरिका (US) और उसके सहयोगी देशों को खुली चेतावनी दी है.
एएमयू के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज में शनिवार को जेब कतरने के आरोप में एक दंपती को रंगे हाथ पकड़ लिया गया। पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि आरोपी एक आठ साल के मासूम का अपहरण कर उसे नशा देते थे और फिर उससे जेब कटवाते थे।
भविष्य के युद्ध: 50 स्वार्म ड्रोन्स का ग्रिड रखेगा दुश्मनों पर नजर,DRDO बनाएगा स्वदेशी ड्रोन; कैसी होगी ताकत?
ट्रंप ने द्वितीय विश्वयुद्ध जैसी धमकी देकर ईरान पर हमला रोका, रखी ये खास शर्त
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर होने वाले बड़े सैन्य हमले को अभी के लिए रोकने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि ईरान और मध्य पूर्व के कुछ देशों के अनुरोध पर यह कदम उठाया गया है, क्योंकि एक समझौते की उम्मीद बन रही है। ट्रंप ने अपनी ट्रूथ सोशल पोस्ट में पूरी […]
युद्धपोत कम, मिसाइलें घटीं: शीर्ष जनरल की पेंटागन को चेतावनी, इस्राइल को ईरानी हमले से बचा पाएगा अमेरिका?
ईरान युद्ध खत्म!: ट्रंप का दावा- पश्चिम एशियाई देशों के बीच लड़ाई खत्म करने पर बनी सहमति, नए हमले भी रोके
कतर ईरान से भी खतरनाक : नफ़ताली बेनेट का बड़ा बयान
इज़रायल के पूर्व प्रधानमंत्री नफ़ताली बेनेट ने कतर को ईरान से भी ज़्यादा खतरनाक बताते हुए उसे यहूदी देश के अस्तित्व के लिए एक और संभावित खतरा करार दिया है
ईरान पर बड़े हमले की तैयारी में अमेरिका, अपने नागरिकों से कहा- 'मिडिल ईस्ट छोड़ने के लिए तैयार रहें'
अमेरिका ने एडवाइजरी में कहा है कि मिडिल ईस्ट में कई एयरलाइंस अपनी फ्लाइट्स कैंसिल कर सकती हैं। ऐसे में अमेरिकी नागरिकों को मिडिल ईस्ट छोड़ने के बारे में विचार करना चाहिए या इसके लिए तैयार रहना चाहिए।
यूनिफिल के भविष्य को लेकर अनिश्चितता, दक्षिणी लेबनान के निवासी चिंतित
संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल लेबनान (यूनिफिल) का मौजूदा जनादेश 2026 के अंत में समाप्त होने वाला है।
जानना जरूरी है: रावण को हराने वाले शक्तिशाली कार्तवीर्य अर्जुन आखिर परशुराम से कैसे हारे, युद्ध की वजह क्या?
कम होगी खाड़ी देशों पर निर्भरता?: होर्मुज संकट के बीच इराक-तुर्किये का बड़ा तेल समझौता, ऐसे बढ़ाएंगे निर्यात
Fatehpur News: तुर्की नाला पुल से आवाजाही पर सख्ती, रास्ता बंद कराने के निर्देश
मुना पुल पहुंच मार्ग पर स्थित तुर्की नाला पुल का शनिवार को डीएम ने एसपी और पीडब्ल्यूडी के अफसरों के साथ निरीक्षण किया।
मिडिल ईस्ट में बढ़ा खतरा! अमेरिका ने अपने नागरिकों को जारी की चेतावनी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने लोगों से सतर्क रहने, यात्रा को लेकर सावधानी बरतने और हालात पर नजर रखने की सलाह दी है.
मिडिल ईस्ट के बाद अब यूरोप में महायुद्ध की आहट, NATO के इस कदम पर भड़का नया देश
पूरी दुनिया इस वक्त ईरान और इजरायल के बीच छिड़े भीषण संघर्ष को थामने की कोशिशों में जुटी है, लेकिन इसी बीच वैश्विक मंच पर एक और नया और बेहद खतरनाक मोर्चा खुलता नजर आ रहा है। उत्तर अटलांटिक संधि संगठन यानी नाटो (NATO) ने अपनी पूर्वी सीमाओं पर एक ऐसा आक्रामक सैन्य कदम उठाया है, जिसने सोए हुए एक और बड़े सैन्य दिग्गज को बुरी तरह भड़का दिया है। इस देश ने नाटो की इस ताजा हरकत को महज एक सैन्य अभ्यास मानने से साफ इनकार करते हुए इसे 'युद्ध की खुली तैयारी' करार दे दिया है, जिससे वैश्विक कूटनीति में हड़कंप मच गया है।नाटो ने ऐसा क्या किया जिससे अचानक भड़क उठी चिंगारीदरअसल, नाटो ने रूस और उसके सहयोगियों की सीमाओं के बेहद करीब अपने अत्याधुनिक हथियारों, लड़ाकू विमानों और हजारों सैनिकों के साथ एक बहुत बड़ा और सीक्रेट युद्धाभ्यास शुरू किया है। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन स्थिति में दुश्मन के किसी भी हमले का मुंहतोड़ जवाब देना है। लेकिन नाटो की इस भारी घेरेबंदी को इस नए देश ने अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक सीधे और बड़े खतरे के रूप में देखा है। इस देश के रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर नाटो को चेतावनी दी है कि वे अपनी हदों में रहें, वरना अंजाम भुगतने के लिए तैयार रहें।ईरान जंग के बीच इस नए बवाल से क्यों बढ़ी दुनिया की धड़कनेंएक तरफ जहां लाल सागर और पूरे मिडिल ईस्ट में अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बारूद बरस रहा है, वहीं दूसरी तरफ यूरोप के मुहाने पर इस नए विवाद के खड़े होने से दुनिया के रक्षा विशेषज्ञ बेहद चिंतित हैं। जानकारों का मानना है कि यदि यह तनाव थोड़ा भी और आगे बढ़ा, तो यह केवल दो देशों की जंग नहीं रह जाएगी। नाटो के आर्टिकल 5 (सामूहिक रक्षा) के चलते इसमें अमेरिका समेत दुनिया के 30 से ज्यादा शक्तिशाली देश सीधे तौर पर शामिल हो जाएंगे, जो पूरी तरह से तीसरे विश्व युद्ध (Third World War) की शुरुआत जैसा होगा।क्या वैश्विक शांति के लिए अब बहुत देर हो चुकी हैक्रेमलिन के करीबियों और इस नए मोर्चे के रणनीतिकारों का कहना है कि नाटो लगातार यूक्रेन संकट के बाद से ही अपनी सीमाओं का विस्तार करने और रूस के सहयोगियों को उकसाने की कोशिश कर रहा है। इस ताजा बवाल ने संयुक्त राष्ट्र (UN) की उन सभी कोशिशों पर पानी फेर दिया है जो दुनिया में शांति बहाल करने के लिए की जा रही थीं। अब देखना यह होगा कि क्या नाटो इस कड़े विरोध के बाद अपने कदम पीछे खींचता है या फिर यह नया सैन्य संकट पूरी दुनिया को तबाही के एक नए और गहरे दलदल में धकेल देता है।
ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' पहल से खत्म होगा गाजा युद्ध? देखें US TOP-10
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'बोर्ड ऑफ पीस' पहल को लेकर साइप्रस में बैठक हुई है. यह बोर्ड गाजा युद्ध खत्म करने और पुनिर्माण योजना की निगरानी के लिए बनाया गया है. ट्रंप के कई देशों के नेताओं को इसमें शामिल होने का मौका दिया है. हालांकि कुछ देशों ने समर्थन किया है. वहीं कुछ ने इसकी भूमिका और और संयुक्त राष्ट्र पर असर को लेकर चिंता जताई है.
भारतीय सेना के 14वें पूर्व थल सेनाध्यक्ष जनरल वीएन शर्मा का 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे 1965 युद्ध के योद्धा और पालमपुर, कांगड़ा से संबंध रखते थे।
एयरफोर्स स्टेशन अमृतसर कैंट की बाइक रैली, युद्ध स्मारकों पर शहीदों को दी श्रद्धांजलि
भास्कर न्यूज | अमृतसर एयरफोर्स स्टेशन अमृतसर कैंट की ओर से 27वें कारगिल विजय दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित 1600 किलोमीटर का साहसिक और प्रेरणादायक मोटरसाइकिल अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। स्टेशन कमांडर के नेतृत्व में निकाले गए इस अभियान में वायु सेना के 17 एयर वॉरियर्स (कर्मियों) ने हिस्सा लिया। यह अभियान 24 जुलाई को अमृतसर से रवाना हुआ था और विभिन्न राज्यों से होकर गुजरते हुए 30 जुलाई को संपन्न हुआ। 7 दिनों की इस यात्रा के दौरान टीम ने चंडीगढ़, नई दिल्ली, जयपुर, हिसार और बठिंडा सहित प्रमुख शहरों को कवर किया। मार्ग में पड़ने वाले विभिन्न युद्ध स्मारकों पर रुककर टीम ने देश की संप्रभुता के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले अमर शहीदों को नमन किया और पूर्व सैनिकों से मुलाकात कर उनके अमूल्य योगदान का सम्मान किया। एयरफोर्स स्टेशन अमृतसर कैंट के स्टेशन कमांडर ने बताया कि यह बाइक रैली कारगिल युद्ध के नायकों के अदम्य साहस को एक नमन है। इसका मुख्य उद्देश्य युवाओं में देशभक्ति, साहस, बलिदान और राष्ट्रीय गौरव की भावना जगाना है।
'टैरिफ धमकी से टला भारत-पाक परमाणु युद्ध', 'ऑपरेशन सिंदूर' पर ट्रंप का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध टालने में अपनी भूमिका का दावा किया है. उन्होंने कहा कि उनके कूटनीतिक दबाव और टैरिफ की धमकी से होने जा रहा युद्ध रुक गया. ट्रंप ने दावा किया कि इसी तरह उन्होंने 5 युद्ध रोक दिए.
Houthis vs Saudi Arabia: Iran के प्रॉक्सी से तीन तरफा घिरा सऊदी, क्या अब युद्ध की उपाय? Red Sea। US
अमेरिका और इज़राइल की ओर से 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू होने के बाद पश्चिम एशिया लगातार तनाव के दौर से गुजर रहा है। अब तक सऊदी अरब इस संघर्ष से दूरी बनाए रखने की कोशिश करता रहा,
Houthis Attack on Saudi Arabia और Iraq में Iran के रजिस्टेंस की ताकत पर Bobby Naqvi को सुनिए | PMF
Saudi Arabia और Iraq में Iran के रजिस्टेंस की ताकत पर Bobby Naqvi को सुनिए | PMF सऊदी के यमन पर अटैक और हूतियों के पलटवार के बीच..इराक से भी सऊदी से बदले की उठ रही आवाजें..मिडिल ईस्ट में जंग के इस नए मोर्चे पर..गल्फ न्यूज के पूर्व एडिटर बॉबी नकवी को सुनिए
चमोली में भारी बारिश से बद्रीनाथ हाईवे बंद, सड़क खोलने का काम युद्ध स्तर पर जारी
लगातार हो रही बारिश के कारण बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग एक बार फिर बंद हो गया है। चमोली जिले में पागल नाला के पास पहाड़ी से मलबा और पत्थर गिरने से सड़क पूरी तरह बाधित है।
अमेरिका-ईरान तनाव से कच्चा तेल 98 डॉलर पार:कतर से LNG सप्लाई भी अटकने की आशंका; महंगाई बढ़ सकती है
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड आज 23 जुलाई को 4% बढ़कर 98 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। यह पिछले 6 हफ्तों में सबसे ज्यादा है। वहीं अमेरिकी क्रूड भी 89 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से भारत में महंगाई बढ़ सकती है। कच्चे तेल के महंगे होने से ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के फ्यूल मार्जिन पर दबाव बढ रहा है। अगर लंबे समय तक क्रूड महंगा बना रहता है तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती है। लाल सागर में तेल टैंकरों पर हमला, हूतियों ने नाकेबंदी का ऐलान किया तेल की कीमतों में अचानक आए इस उछाल की बड़ी वजह पश्चिम एशिया का बिगड़ता माहौल है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के साथ अब यह विवाद फारसी खाड़ी के अन्य हिस्सों में भी फैल गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के तेल टैंकरों पर हमला कर दिया है। यह हमला हुती ग्रुप की ओर से बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य पर नाकेबंदी की घोषणा करने के ठीक एक दिन बाद हुआ है, जिससे ग्लोबल ऑयल सप्लाई चेन पर गंभीर खतरा मंडराने लगा है। तेल कंपनियों के शेयर 2.5% तक टूटे कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर भारत की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) पर पड़ा है… भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। क्रूड महंगा होने से देश का आयात बिल बढ़ता है, जिससे महंगाई बढ़ने और कंपनियों के मार्जिन पर असर पड़ने की आशंका रहती है। अक्टूबर तक LNG सप्लाई अटकने के आसार ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कतर एनर्जी मिड-अक्टूबर तक लिक्विफाइड नेचुरल गैस यानी LNG के शिपमेंट पर 'फोर्स मैज्योर' को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कतर ने जून में ही एशिया और यूरोप के कुछ ग्राहकों को सूचित किया था कि अगस्त और सितंबर के कार्गो रद्द रहेंगे। अगर यह पाबंदी अक्टूबर तक खिंचती है, तो सर्दियां शुरू होने से पहले गैस का ग्लोबल संकट और गहरा सकता है, क्योंकि यूरोप और एशियाई देश सीमित LNG सप्लाई के लिए आपस में प्रतिस्पर्धा करेंगे। सेंसेक्स 364 और निफ्टी 127 अंक गिरी कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार पर बिकवाली का भारी दबाव बन गया है। 23 जुलाई को सेंसेक्स 364 अंक की गिरावट के साथ 76,391 पर बंद हुआ। निफ्टी में भी 127 अंक की गिरावट रही, ये 23,870 पर बंद हुआ। रियल्टी, एनर्जी और बैंकिंग शेयर्स में ज्यादा बिकवाली रही। मई में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े थे मई में IOC, BPCL और HPCL ने महंगे अंतरराष्ट्रीय क्रूड कीमतों का हवाला देते हुए किस्तों में पेट्रोल और डीजल दोनों के दामों में ₹7.50-₹7.50 प्रति लीटर की बढ़ोतरी की थी। देश के 1 लाख से ज्यादा पेट्रोल पंपों में से 90% से अधिक पर इन तीनों सरकारी कंपनियों का नियंत्रण है। आगे क्या? पश्चिम एशिया में अगर यह गतिरोध लंबा खींचता है, तो कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल का आंकड़ा पार कर सकती हैं। इससे आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार, खासकर बैंकिंग, ऑटो और पेंट कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। --------------------------- ये खबर भी पढ़ें… सोना ₹274 बढ़कर ₹1.46 लाख पर पहुंचा: 4 दिन में ₹4,398 महंगा हो चुका, चांदी आज ₹360 चढ़कर ₹2.26 लाख पर पहुंची सोने-चांदी की कीमतों में आज यानी 23 जुलाई को बढ़त है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 360 रुपए बढ़कर 2.26 लाख रुपए पर पहुंच गई है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोना 274 रुपए चढ़कर 1.46 लाख रुपए पर पहुंच गया है। 4 दिन में सोना 4,398 रुपए और 10,346 रुपए चांदी महंगी हो चुकी है। पूरी खबर पढ़ें…
The Odyssey Review: युद्ध से लौटते योद्धा की नहीं, खुद तक लौटते इंसान की कहानी
क्रिस्टोफर नोलन की 'द ओडिसी' सिर्फ होमर के महाकाव्य का रूपांतरण नहीं, बल्कि युद्ध, अपराधबोध और आत्म-स्वीकृति की गहरी कहानी है। मैट डेमन का शानदार अभिनय, अद्भुत सिनेमैटोग्राफी और भावनात्मक निर्देशन इसे सिर्फ एक पौराणिक एडवेंचर नहीं रहने देते। शुरुआती ...
महाभारत के महासंग्राम की चर्चा होते ही सबसे पहले मन में आता है वह दृश्य, जिसमें अर्जुन दुविधा में है और भगवान श्रीकृष्ण उसे गीता का उपदेश दे रहे हैं। युद्ध से पहले ही श्रीकृष्ण ने यह प्रण ले लिया था कि वे कुरुक्षेत्र में शस्त्र नहीं उठाएंगे। उनकी भूमिका केवल अर्जुन के सारथी के रूप में रहने की थी। लेकिन, एक बार ऐसी विषम परिस्थिति बनी कि जगत के पालनहार को अपना वचन तोड़ना पड़ा और वे रथ का पहिया लेकर भीष्म पितामह की ओर दौड़ पड़े। आखिर वह क्या मजबूरी थी, जिसने प्रभु को शस्त्र उठाने पर विवश कर दिया?क्यों दी थी भगवान श्रीकृष्ण ने शस्त्र न उठाने की प्रतिज्ञा?भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र युद्ध में तटस्थ रहने की घोषणा की थी। उन्होंने दुर्योधन और अर्जुन दोनों को विकल्प दिया था—एक तरफ उनकी विशाल 'नारायणी सेना' और दूसरी तरफ वे स्वयं, जो निहत्थे रहेंगे। अर्जुन ने श्रीकृष्ण को चुना और दुर्योधन ने सेना को। श्रीकृष्ण की प्रतिज्ञा के पीछे उद्देश्य यह था कि वे न चाहते हुए भी किसी एक पक्ष का सीधा संहार न करें, बल्कि न्याय की स्थापना में केवल मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं। वे अपनी लीलाओं से यह दिखाना चाहते थे कि अधर्म का नाश करने के लिए युद्ध से ज्यादा महत्वपूर्ण सही मार्गदर्शन और विवेक है।जब भीष्म के सामने विचलित हो गए थे श्रीकृष्णभीष्म पितामह ने प्रतिज्ञा की थी कि वे श्रीकृष्ण को शस्त्र उठाने पर मजबूर कर देंगे। युद्ध के दौरान, जब भीष्म पितामह ने अर्जुन पर बाणों की वर्षा शुरू की, तो अर्जुन उन्हें रोकने में असमर्थ हो गए। स्थिति ऐसी बन गई कि अर्जुन का रथ क्षतिग्रस्त हो गया और वे हार की कगार पर पहुँच गए। अर्जुन को संकट में देख भगवान श्रीकृष्ण का वात्सल्य और मित्र प्रेम जाग उठा। अपने प्रिय भक्त को मृत्यु के मुख में देख श्रीकृष्ण ने अपनी प्रतिज्ञा त्याग दी और जमीन से रथ का एक टूटा हुआ पहिया उठाकर पितामह की ओर बढ़े।'विपक्ष' की जीत या 'भक्ति' की पराकाष्ठा?जैसे ही श्रीकृष्ण चक्र (पहिया) लेकर पितामह की ओर बढ़े, भीष्म ने अपने शस्त्र डाल दिए और हाथ जोड़कर खड़े हो गए। उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, प्रभु, मेरी प्रतिज्ञा पूरी हुई। आज आपके हाथों अपना अंत देखकर मेरा जीवन धन्य हो गया। श्रीकृष्ण का वह क्रोध वास्तव में उनके भक्त के प्रति प्रेम था। यह घटना सिखाती है कि भगवान के लिए अपने भक्त की रक्षा उनकी स्वयं की प्रतिज्ञा से कहीं अधिक बड़ी होती है। महाभारत का यह प्रसंग आज भी हमें याद दिलाता है कि भक्त और भगवान के बीच कोई भी नियम, वचन या प्रतिज्ञा बड़ी नहीं होती।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
युद्धविराम से आगे: क्या विश्व अहिंसा की ओर बढ़ेगा?
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हाल ही में हुआ युद्धविराम ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम एशिया युद्ध की लपटों में घिरकर वैश्विक स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका था। कई सप्ताह तक चले संघर्ष ने क्षेत्र को ऐसे ज्वालामुखी में बदल दिया था, जिसकी प्रत्येक विस्फोटक घटना विश्व अर्थव्यवस्था ... Read more
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
'वाराणसी' में दिखेगा महायुद्ध, भगवान राम और कुंभकर्ण के बीच होगा 30 मिनट का ऐतिहासिक टकराव!
दिग्गज निर्देशक एसएस राजामौली जब भी कोई नया प्रोजेक्ट लाते हैं, तो वह सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक उत्सव बन जाता है। 'बाहुबली' और 'आरआरआर' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देने के बाद, राजामौली अब सुपरस्टार महेश बाबू के साथ अपनी अगली महात्वाकांक्षी ...
इंटरनेट मूवी डेटाबेस (IMDb) हर हफ्ते दुनिया भर यूजर्स के सर्च और प्रोफाइल विजिट के आधार पर 'मोस्ट पॉपुलर इंडियन सेलिब्रिटीज' की लिस्ट जारी करता है। आमतौर पर इस लिस्ट के शीर्ष पर वही सुपरस्टार्स नजर आते हैं जिनकी बड़ी फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज ...
खाड़ी युद्ध से निपटने की मोदी की तजबीज
मोदीजी ने एक बार फिर राष्ट्र की जनता को उसके कर्तव्यों के प्रति सचेत किया है।
ललित सुरजन की कलम से युद्ध नहीं, शांति चाहिए
जब एक तरफ सिर्फ एक सैनिक की गिरफ्तारी से उपजे भय और रिहाई की घोषणा से मिली राहत है, तब दूसरी तरफ आक्रामक मुद्रा अपनाकर हम क्या हासिल करना चाहते हैं?
युद्धविराम और हाशिए पर धकेल दिया गया भारत
यह युद्ध स्पष्ट रूप से नेतन्याहू की देन है और ट्रम्प इसके परिणामों के बारे में सोचे-समझे बिना ही इसमें फंस गए।
तीसरे विश्वयुद्ध की आहट और गांधी
इतिहास विजय-पराजय-विनाश का मृत दस्तावेज नहीं है, न वह किसी की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की कहानी का विवरण है।
लीजा रे ने दुबई से शेयर की दर्दभरी कविता, मिडिल ईस्ट तनाव के बीच जताई चिंता
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। हर तरफ धमाकों और सायरन का शोर सुनाई दे रहा है। एक्ट्रेस लीजा रे भी इन हालातों के बीच दुंबई में अपने घर ...
मिडिल ईस्ट में युद्ध के बीच फंसीं एक्ट्रेस लारा दत्ता, बेटी के साथ सुरक्षित लौटीं भारत, सुनाई आपबीती
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और पूर्व मिस यूनिवर्स लारा दत्ता भी अपनी 14 साल की बेटी सायरा के साथ यूएई में ...
एक्सेल एंटरटेनमेंट और ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज़ की '120 बहादुर' को लेकर चर्चा अब अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है। फिल्म ट्रेलर ने पूरी तरह से रोमांच और प्रेरणा का सही मिश्रण पेश किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बलिदान दिवस पर मेजर शैतान सिंह ...
War 2 रिव्यू: लचर स्क्रिप्ट और निर्देशन के कारण रितिक और एनटीआर हारे युद्ध, पढ़ें पूरी समीक्षा
रितिक रोशन और एनटीआर स्टारर War 2 ‘स्पाई यूनिवर्स’ की बड़ी पेशकश मानी जा रही थी, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट और औसत निर्देशन ने इसे निराशाजनक बना दिया। शानदार एक्शन सीक्वेंस और एनटीआर के दमदार परफॉर्मेंस के बावजूद फिल्म का सेकंड हाफ बिखर गया। कहानी में ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला अपनी खूबसूरती से हर किसी का दिल जीत लेती हैं। उर्वशी ने बेहद ही कम समय में एक अलग मुकाम हासिल किया है। वह दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोगों के साथ 'मिलने और अभिवादन' के क्षणों में संलग्न रहती है। ऐसा ही एक क्षण था जब ...
सलमान खान की सिकंदर के आखिरी गाने में दिखेगा जबरदस्त जलवा, तुर्की से बुलाए गए 500 डांसर्स!
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की 'सिकंदर' इस साल की सबसे बड़ी फिल्म मानी जा रही है, जिसका दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसके एक्शन-पैक्ड टीजर ने इसकी भव्य एंट्री के लिए एकदम परफेक्ट माहौल तैयार कर दिया है। भव्य पैमाने पर बनाई गई इस फिल्म में ...
केसरी वीर के लिए सूरज पंचोली ने की कड़ी ट्रेनिंग, ऐसे सीखा युद्ध कौशल
बॉलीवुड एक्टर सूरज पंचोली अपनी पहली बायोपिक में वीर हामीरजी गोहिल के ऐतिहासिक किरदार को जीवंत करने जा रहे हैं। सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय और सूरज पंचोली अभिनीत फिल्म 'केसरी वीर : लीजेंड्स ऑफ सोमनाथ' का टीजर हाल ही में रिलीज हुआ है। सोमनाथ मंदिर की ...
Adil Hussain: दुनियाभर में इन दिनों पेरिस ओलंपिक 2024 की धूम मची हुई है। पेरिस ओलंपिक में दुनियाभर के खिलाड़ियों ने भाग लिया है। भारत के कई खिलाड़ी भी इसमें हिस्सा लेने पहुंचे हुए हैं। हाल ही में तुर्की के शूटर यूसुफ डिकेक ने सिल्वर मेडल जीता।
बॉर्डर की 27वीं सालगिरह पर, अभिनेता सनी देओल ने एक घोषणा वीडियो के ज़रिए फ़्रैंचाइज़ी के दूसरे संस्करण की पुष्टि की है। अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर सनी ने बॉर्डर 2 में अपनी वापसी की आधिकारिक घोषणा करते हुए एक वीडियो शेयर किया और इसे 'भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म' बताया। उन्होंने पोस्ट के कैप्शन में लिखा, ''एक फौजी अपने 27 साल पुराने वादे को पूरा करने के बाद, आ रहा है फिर से। भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म, बॉर्डर 2।'' इस फिल्म का निर्माण भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, जेपी दत्ता और निधि दत्ता करेंगे। आगामी युद्ध फिल्म का निर्देशन अनुराग सिंह करेंगे। इसे भी पढ़ें: Bollywood Wrap Up | पति से तकरार के बीच केन्या लौट गई हैं Dalljiet Kaur? शादी को बचाने की कर रही कोशिश सनी द्वारा घोषणा वीडियो शेयर किए जाने के तुरंत बाद, सोशल मीडिया यूज़र्स ने अपनी उत्सुकता व्यक्त करते हुए कमेंट सेक्शन में बाढ़ ला दी। एक यूज़र ने लिखा, ''वाह, यह बहुत बढ़िया घोषणा है सर जी, जय हिंद।'' दूसरे ने लिखा, ''बहुत उत्साहित हूँ।'' तीसरे यूजर ने टिप्पणी की, ''बॉर्डर 2 के लिए बहुत उत्साहित हूं।'' इसे भी पढ़ें: NDA पर इमोशनल बयान, काले सूट में ली मंत्री पद की शपथ और शर्मिला अंदाज, Tripti Dimri की तरह रातों रात भारत के Sensation बन गये Chirag Paswan सनी देओल की अन्य परियोजनाएं उन्हें आखिरी बार अमीषा पटेल के साथ गदर 2 में देखा गया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत सफल रही और इसे ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर घोषित किया गया। गदर 2 की सफलता के बाद, सनी ने लाहौर 1947 सहित कई फिल्में साइन कीं, जिसे आमिर खान के प्रोडक्शन बैनर के तहत बनाया जा रहा है। फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है, जिन्होंने आमिर को कल्ट क्लासिक अंदाज़ अपना अपना (1994) में निर्देशित किया था। View this post on Instagram A post shared by Sunny Deol (@iamsunnydeol)
Kalki 2898 AD: शुरू हो गया नया युद्ध, पूरे ट्रेलर की अहम कड़ी हैं अमिताभ, प्रभास करेंगे इम्प्रेस
Kalki 2898 AD के ट्रेलर को देखें तो, फिल्म कल्कि 2898 एडी के मेकर्स ने विश्वास दिलाया है कि ये फिल्म लोगों को बांधने में कामयाब होगी. टफ सीक्वेंस, क्लियर एडिटिंग और बैकग्राउंड स्कोर आपका ध्यान खींचते हैं. वीएफएक्स पर भी अच्छा काम किया गया है.
आशुतोष राणा ने डीपफेक वीडियो को बताया 'माया युद्ध', बोले- ये सालों से चल रहा
आशुतोष ने कहा कि ऐसी बातों में खुद को डिफेंड करने का कोई फायदा नहीं है. उन्होंने कहा कि जो लोग आपको जानते हैं वो सवाल करेंगे ही नहीं. और जो नहीं जानते, उन्हें किसी रिस्पॉन्स से फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि वो दिमाग में आपकी एक छवि बना चुके होते हैं.
रानीति बालाकोट एंड बियॉन्ड: जिमी शेरगिल की नई सीरीज भारत की आधुनिक युद्ध की ऐतिहासिक कहानी को प्रदर्शित करेगी। जिमी शेरगिल दो मिनट के ट्रेलर की शुरुआत पुलवामा हमले की झलक से होती है। एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाने वाले आशीष कहते हैं, ये एक नया रण है या इसे जीतने के लिए एक नई रणनीति की जरूरत है। इसे भी पढ़ें: नक्सलियों के खिलाफ 'ऑपरेशन प्रहार', कमांडर शंकर राव समेत अब तक 79 हुए ढेर, हिट लिस्ट में और भी कई नाम शामिल आगामी वेब शो आधुनिक युद्ध को डिकोड करता है जो केवल भौतिक सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता है बल्कि सोशल मीडिया, डिजिटल रणनीति और गुप्त राजनीतिक चालों के क्षेत्र से परे है जो भू-राजनीति को नया आकार देने की शक्ति रखता है। वेब श्रृंखला उन वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है जिन्होंने 2019 में देश को हिलाकर रख दिया था। शो में कुछ हवाई दृश्य, शानदार प्रदर्शन और एक शक्तिशाली कथा है जो युद्ध के मैदान के अंदर और बाहर हर पहलू को चतुराई से पकड़ती है। इसे भी पढ़ें: Biden को सोचना पड़ेगा फिर एक बार, Iran पर प्रहार तो रूस करेगा पलटवार, रक्षा मंत्रायल ने चिट्ठी लिखकर जता दी मंशा आगामी वेब श्रृंखला के बारे में बात करते हुए, जिमी ने कहा: यह मेरे द्वारा अतीत में की गई किसी भी भूमिका से भिन्न है। कम से कम यह कहना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन भारत की पहली वॉर-रूम केंद्रित वेब-श्रृंखला का हिस्सा बनना बेहद संतोषजनक भी है। वास्तविक जीवन की घटनाओं से प्रेरित जिसने देश को हिलाकर रख दिया। एनएसए प्रमुख के रूप में अपनी भूमिका के बारे में बात करते हुए, आशीष ने कहा, एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन रक्षा बलों के कुछ सदस्यों के साथ बैठकों ने मुझे अपने चरित्र की बारीकियों को समझने में मदद की। तैयारी कार्य और कार्यशालाएं मुझे वापस ले गईं मेरे एनएसडी के दिनों में। संतोष सिंह द्वारा निर्देशित, श्रृंखला का निर्माण स्फीयरओरिजिन्स मल्टीविजन प्राइवेट लिमिटेड के सुंजॉय वाधवा और कॉमल सुंजय डब्ल्यू द्वारा किया गया है। इसमें प्रसन्ना भी हैं। शो का प्रीमियर 25 अप्रैल को JioCinema पर होगा।
दर्शक काफी समय से रैपर बादशाह और हनी सिंह के बीच जुबानी जंग देख रहे हैं। दोनों का रिश्ता सालों से विवादों से भरा रहा है। हालांकि करियर के शुरुआती दिनों में बादशाह और हनी सिंह के बीच अच्छी दोस्ती हुआ करती थी। हालाँकि, ऐसा लगता है कि सफलता और पैसे ने धीरे-धीरे इस दोस्ती को पूरी तरह से खत्म कर दिया। अब दोनों अक्सर एक दूसरे पर तंज कसते नजर आते हैं। हाल ही में हनी सिंह एक होली पार्टी में शामिल हुए, जहां उन्होंने बादशाह के 'पापा कमबैक' वाले कमेंट का करारा जवाब दिया। रैपर का ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसे भी पढ़ें: Punjab Kings के खिलाफ जीत के बाद इंटरनेट पर Virat Kohli का Anushka Sharma के साथ वीडियो कॉल, FLY KISS देते नजर आये खिलाड़ी हनी सिंह ने बादशाह पर किया पलटवार बादशाह कुछ दिनों पहले हनी सिंह पर अपनी टिप्पणी को लेकर चर्चा में थे, जिसमें उन्होंने हनी सिंह की वापसी पर कटाक्ष किया था। अब सिंगर और रैपर हनी सिंह ने एक कमेंट के जरिए बादशाह को करारा जवाब दिया है और कहा है कि उन्हें बादशाह को जवाब देने के लिए मुंह खोलने की जरूरत नहीं है। उनके फैन ही काफी हैं जो हर चीज पर बात कर सकते हैं। उन्होंने अपने गाली वाले अंदाज में अपने फैंस से बात करते हुए बादशाह का जवाब दिया। हनी सिंह को सोमवार को मुंबई में एक होली पार्टी में परफॉर्म करते देखा गया और यहीं उन्होंने बादशाह पर कटाक्ष किया। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा, हर कोई कहता है, रिप्लाई करो, रिप्लाई करो... मैं क्या रिप्लाई करूं... आप लोग तो उनके सारे कमेंट्स का बहुत अच्छे से रिप्लाई कर चुके हैं। मुझे मुंह खोलने की जरूरत है। ऐसा नहीं होता है। जैसे ही भीड़ ने उनके लिए तालियां बजाईं, गायक ने कहा, मुझे बोलने की जरूरत नहीं है। आप लोग खुद पागल हैं। हनी सिंह पागल हैं और उनके प्रशंसक भी पागल हैं। इसे भी पढ़ें: Taapsee Pannu के पति Mathias Boe आखिर कौन है? जब सफल भी नहीं थी एक्ट्रेस तब से उन्हें प्यार करते थे बैडमिंटन खिलाड़ी रैपर बादशाह ने क्या कहा? आपको बता दें कि हाल ही में बादशाह ने हनी सिंह पर कमेंट करते हुए कहा था, ''मुझे एक पेन और कागज दो। मैं तुम्हारे लिए एक गिफ्ट लाया हूं। मैं कुछ गाने लिखूंगा और तुम्हें दूंगा। पापा की वापसी तुम्हारे साथ होगी।'' Kalesh Controversy B/w Honey Singh and Badshah (Honey Singh Replied to Badshah) pic.twitter.com/o74t423bgS — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 25, 2024 Kalesh Between Badshah & Honey Singh Fans on Stage during Live Concert pic.twitter.com/M4VqSqLSc3 — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 19, 2024
आखिर क्यों Indira Gandhi ने Aandhi मूवी पर लगा दिया था प्रतिबन्ध, आज भी देखने से कतराते हैं लोग
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'सावरकर' रिव्यू: खोखली, एकतरफा फिल्म में एकमात्र अच्छी चीज है रणदीप हुड्डा का काम
आज के दौर में 'गुमनाम' हो चुके एक स्वतंत्रता नायक की कहानी कहने निकली ये फिल्म, एक अनजान कहानी बताने से ज्यादा अपने हीरो विनायक दामोदर सावरकर को बाकियों के मुकाबले अधिक 'वीर' बताने पर फोकस करने लगती है.
अस्तित्व और बदले के लिएब्रह्मांड में शुरू होने वाला है महायुद्ध, एक्शन और रोमांच से भरपूर हैRebel Moon 2 का धांसू ट्रेलर

