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Hormuz Strait Crisis 2026: UAE का एक और जहाज तबाह, ईरानी पायलट्स पर कतर से भिड़ा ईरान | Mojtaba

मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लगातार हो रहे हमलों के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ईरान पर अपनी सरकारी तेल कंपनी ADNOC के एक और जहाज को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।

लाइव हिन्दुस्तान 16 Aug 2026 4:26 pm

लुधियाना के अर्शदीप ब्रिटेन में फाइटर पायलट:द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार ब्रिटिश एयरफोर्स में सिख अफसर; बोले-दादा का सपना पूरा किया

ब्रिटेन की रॉयल एयर फोर्स (RAF) में लुधियाना का अर्शदीप सिंह फाइटर पायलट बन गया। 28 वर्षीय फ्लाइट लेफ्टिनेंट अर्शदीप सिंह डांग द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटिश एयर फोर्स में फाइटर पायलट बनने वाले पहले सिख बन गए हैं। उत्तरी वेल्स स्थित आरएएफ वैली में आयोजित फास्ट जेट पायलट ग्रेजुएशन समारोह में आधिकारिक तौर पर उन्हें यह सम्मान मिला। रॉयल एयर फोर्स में पायलट बनने पर अर्शदीप ने कहा कि उन्होंने अपने दादा का सपना साकार किया है। अर्शदीप का कहना है कि यह सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि वह चाहते हैं कि उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने सपनों को पूरा करने और इतिहास रचने के लिए प्रेरित करे। पंजाब से लेकर इंग्लैंड की एयरफोर्स में पायलट बनने का सफर सिलसिलेवार जानिए.. दादा का अधूरा सपना, जो पोते ने किया पूरा अर्शदीप के फाइटर पायलट बनने के पीछे एक बेहद भावुक पारिवारिक कहानी जुड़ी है। अर्शदीप ने बताया, “यह मेरे दादा सरदार संतोख सिंह डांग का सपना था कि मेरे पिता एक पायलट बनें। लेकिन मेरे दादाजी का निधन तब हो गया था जब मेरे पिता केवल 6 वर्ष के थे। इस वजह से मेरे पिता को अपनी इच्छा पूरी करने के लिए कभी वे अवसर या संसाधन नहीं मिल सके। मेरे माता-पिता ने मुझे हमेशा प्रोत्साहित किया और मुझे यह विश्वास दिलाया कि मैं एक पायलट बन सकता हूं। आखिरकार वह सपना सच हो गया।” संघर्षों के दिनों में मां बनीं सबसे बड़ी ताकत विदेश में जाकर बसने के शुरुआती दिनों में परिवार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। अर्शदीप अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपनी माता गगनदीप कौर को देते हैं। वे कहते हैं, “हालांकि मेरे पिता को पायलट के रूप में देखना मेरे दादाजी का सपना था, लेकिन मेरी असली ताकत हमेशा मेरी मां रही हैं। उन्होंने हमें हमेशा जमीन से जोड़े रखा, विनम्र बनाया और वित्तीय तंगी के दौर में भी कभी हमें नीचा महसूस नहीं होने दिया। सबसे कठिन समय में उन्होंने हमारे परिवार को संभाला और भारत से यूके आने के बाद भी हमारे भीतर पंजाबी जड़ों और सिख मूल्यों को बनाए रखा।” विदेश में भी पंजाबी संस्कृति और मूल्यों को रखा जीवित बचपन में यूके चले जाने के बावजूद अर्शदीप ने अपनी जड़ों को कैसे संजोकर रखा, इस पर उन्होंने बताया कि उनके घर में एक बेहद सख्त नियम है। घर के अंदर सभी सदस्य केवल पंजाबी भाषा में ही बात करते हैं और किसी अन्य भाषा के प्रयोग की अनुमति नहीं होती। इसके अलावा, परिवार नियमित रूप से गुरुद्वारे जाता है, लंगर सेवा में भाग लेता है और सिख धर्म के मूल सिद्धांतों का पालन करता है। अर्शदीप कहते हैं, “कठिन और तनावपूर्ण सैन्य उड़ानों के दौरान 'चढ़दी कला' की सदाबहार पंजाबी भावना ने मेरी सबसे ज्यादा मदद की।”

दैनिक भास्कर 16 Aug 2026 2:01 pm

चीन की लगी लॉटरी! यूएस नेवी ने पैसिफिक क्षेत्र से अपना सबसे घातक युद्धपोत अचानक पीछे हटाया

इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में इन दिनों भू-राजनीतिक हलचल इस कदर तेज हो गई है कि दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों की सांसे अटकी हुई हैं। वैश्विक महाशक्ति अमेरिका और ड्रैगन यानी चीन के बीच समंदर में वर्चस्व की जो जंग पिछले कई सालों से चली आ रही है, उसमें एक ऐसा सनसनीखेज मोड़ आया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अमेरिकी नौसेना यानी यूएस नेवी ने अपने सबसे घातक, अत्याधुनिक और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण युद्धपोत को पैसिफिक क्षेत्र से अचानक पीछे हटा लिया है। अमेरिका के इस अप्रत्याशित फैसले के बाद बीजिंग स्थित कम्युनिस्ट सरकार और चीनी नौसेना की मानों लाटरी सी लग गई है, क्योंकि उनके लिए दक्षिण चीन सागर और ताइवान के आसपास अमेरिकी सैन्य दबाव अचानक कम हो गया है। इस रणनीतिक फेरबदल के पीछे अमेरिका की क्या मजबूरी है और ड्रैगन इस मौके का फायदा उठाकर पैसिफिक महासागर में क्या नई चाल चल रहा है, आइए इसकी पूरी और अंदरूनी कहानी विस्तार से जानते हैं।पैसिफिक में अमेरिकी नौसेना की अचानक वापसी और चीन की खुशीजब से यूएस नेवी ने अपने इस ताकतवर युद्धपोत को पैसिफिक थिएटर से हटाने का आधिकारिक या रणनीतिक निर्णय लिया है, तब से चीनी सरकारी मीडिया और रणनीतिकार फूले नहीं समा रहे हैं। पिछले कुछ दशकों से अमेरिका लगातार यह दावा करता आया है कि वह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को मुक्त, खुला और सुरक्षित रखने के लिए अपनी सैन्य ताकत का लोहा मनवाता रहेगा, ताकि चीन इस पूरे समुद्री मार्ग पर अपनी दादागिरी न चला सके। लेकिन अचानक से इस प्रकार के अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत को हटाए जाने से अंतरराष्ट्रीय रक्षा गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ ली है कि क्या अमेरिका अब एशियाई मोर्चे पर थोड़ा पीछे हट रहा है या फिर उसकी प्राथमिकताएं वैश्विक स्तर पर बदल रही हैं। चीन इस स्थिति का फायदा उठाकर ताइवान जलडमरूमध्य और दक्षिण चीन सागर के विवादित द्वीपों के आसपास अपनी नौसैनिक गतिविधियों को और अधिक आक्रामक तरीके से बढ़ाने की फिराक में है, जिससे इस क्षेत्र में तनाव एक नए चरम पर पहुंच सकता है।सामरिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है पैसिफिक और यह घातक युद्धपोत?पैसिफिक महासागर दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे अधिक व्यापारिक गतिविधियों वाला समंदर है, जिसके रास्ते से दुनिया भर का खरबों डॉलर का माल गुजरता है। इस क्षेत्र में अमेरिका का यह घातक युद्धपोत एक तैरते हुए किले की तरह काम कर रहा था, जिसमें अत्याधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम, रडार तकनीक और दुश्मन के जहाजों को पलक झपकते ही नेस्तनाबूद कर देने वाली मारक क्षमता मौजूद थी। जब ऐसा शक्तिशाली युद्धपोत अपनी तय गश्त से हटता है, तो उस नौसैनिक बेड़े की ताकत में एक बड़ा खालीपन आ जाता है। चीन लगातार अपनी नेवी को मॉडर्न बना रहा है और उसके पास एयरक्राफ्ट कैरियर तथा विध्वंसक जहाजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में अमेरिकी युद्धपोत का हटना चीनी नौसेना को इस विशाल जलीय क्षेत्र में अपनी पैठ और रणनीतिक बढ़त मजबूत करने का एक सुनहरा अवसर प्रदान कर रहा है, जिसे ड्रैगन किसी भी कीमत पर हाथ से जाने नहीं देना चाहता।अमेरिकी नेवी के इस फैसले के पीछे छिपी बड़ी वजहें और मजबूरियांसवाल यह उठता है कि आखिर जिस अमेरिका ने पूरी दुनिया को साधने के लिए पैसिफिक में अपनी सबसे मजबूत सैन्य दीवार खड़ी की थी, उसने अचानक अपने इस घातक युद्धपोत को वहां से क्यों हटाया? रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि इसके पीछे कई आंतरिक और वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं। सबसे पहला कारण अमेरिकी नौसेना के सामने आ रही मेंटेनेंस और ओवरहॉलिंग की भारी कमी है, क्योंकि पिछले कई महीनों से लगातार गश्त करने के कारण अमेरिकी जहाजों और उनके क्रू को भारी थकान और तकनीकी मुरम्मत की जरूरत पड़ रही है। दूसरा और सबसे अहम कारण मध्य पूर्व यानी मिडिल ईस्ट और यूरोप में चल रहे तनाव हैं, जहां लाल सागर और भूमध्यसागरीय क्षेत्र में अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए युद्धपोतों की भारी मांग बनी हुई है। सीमित संसाधनों और बजट के चलते पेंटागन को अपने रणनीतिक परिसंपत्तियों को एक जगह से हटाकर दूसरी संवेदनशील जगहों पर री-डप्लॉय करने के लिए मजबूर होना पड़ा है, जिसका सीधा रणनीतिक लाभ चीन को मिलता दिख रहा है।ताइवान और दक्षिण चीन सागर पर मंडराता नया और बड़ा खतराअमेरिका के इस कदम से सबसे बड़ा भू-राजनीतिक संकट ताइवान और आस-पास के छोटे एशियाई देशों के सामने खड़ा हो गया है। ताइवान हमेशा से चीन की विस्तारवादी नीतियों के निशाने पर रहा है, और अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी ही वह मुख्य ढाल थी जो बीजिंग को किसी भी बड़े सैन्य दुस्साहस से रोक कर रखती थी। अब जब पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति थोड़ी हल्की पड़ी है, तो ताइवान जलडमरूमध्य में चीनी सेना के युद्धाभ्यास और घुसपैठ की घटनाएं और अधिक तेजी से बढ़ सकती हैं। हालांकि अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन का यह भी तर्क है कि वे अपने सहयोगियों और मित्र देशों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और वे पनडुब्बियों तथा अन्य अत्याधुनिक हथियारों के जरिए इस क्षेत्र में अपनी बैलेंस पावर बनाए रखेंगे, लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि इस युद्धपोत के हटने से चीनी नौसेना का मनोबल सातवें आसमान पर पहुंच गया है।इंडो-पैसिफिक का भविष्य और भारत समेत अन्य देशों की चिंताएंइस पूरी भू-राजनीतिक उथल-पुथल का असर केवल अमेरिका और चीन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया जैसे इंडो-पैसिफिक देशों की सुरक्षा रणनीतियों पर भी पड़ रहा है। क्वाड (Quad) देशों का मुख्य उद्देश्य इसी क्षेत्र में चीन के बढ़ते वर्चस्व को संतुलित करना है, ताकि समंदर के रास्ते होने वाला वैश्विक व्यापार बाधित न हो। यदि अमेरिका अपनी सैन्य व्यस्तता या आंतरिक प्राथमिकताओं के कारण पैसिफिक से अपनी पकड़ थोड़ी भी ढीली करता है, तो एशियाई देशों को अपनी समुद्री सुरक्षा के लिए और अधिक आत्मनिर्भर होना पड़ेगा। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या अमेरिका अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करके इस घातक युद्धपोत को वापस पैसिफिक क्षेत्र में तैनात करता है, या फिर चीन इस खाली जगह का फायदा उठाकर इस पूरे महासागर में अपने एकछत्र राज का नया अध्याय लिखने में सफल हो जाता है, जिस पर पूरी दुनिया की पैनी नजर बनी हुई है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 16 Aug 2026 1:45 pm

1953 का युद्धविराम जो आज भी है एक अधूरा सच: उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच क्यों बनी हुई है बारूदी सुरंग जैसी वॉर सिचुएशन

द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से दुनिया के नक्शे पर कई देश बने और बिगड़े, लेकिन शीत युद्ध के दौर की एक ऐसी भू-राजनीतिक आग आज भी सुलग रही है जिसने पूर्वी एशिया के कोरियाई प्रायद्वीप को दो हिस्सों में बांटकर रख दिया है। हम बात कर रहे हैं उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच की उस ऐतिहासिक खाई की, जो साल 1953 में हुए एक अस्थाई युद्धविराम के बाद से आज तक किसी मुकम्मल शांति संधि में तब्दील नहीं हो पाई है। आज भी दोनों देश तकनीकी रूप से युद्ध की स्थिति में ही बने हुए हैं, और उनके बीच की सीमा दुनिया के सबसे खतरनाक और भारी सैन्यीकृत क्षेत्रों में गिनी जाती है। यह सवाल हर अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार के मन में उठता है कि आखिर क्यों सात दशक बीत जाने के बाद भी दोनों कोरियाई देश एक औपचारिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर नहीं कर पाए हैं, और क्यों प्योंगयांग तथा सियोल के बीच की यह तल्खी पूरी दुनिया के लिए एक निरंतर परमाणु और पारंपरिक खतरे का सबब बनी हुई है।1953 का ऐतिहासिक युद्धविराम और कोरियाई युद्ध की पृष्ठभूमिकोरियाई युद्ध की शुरुआत साल 1950 में तब हुई थी जब सोवियत संघ और चीन समर्थित उत्तर कोरियाई सेनाओं ने साम्यवादी विचारधारा का विस्तार करते हुए दक्षिण कोरिया पर अचानक भारी आक्रमण कर दिया था। इस खूनी संघर्ष में अमेरिका के नेतृत्व वाली संयुक्त राष्ट्र (UN) की सेनाएं दक्षिण कोरिया के पक्ष में मैदान में उतर गईं, जिसके परिणामस्वरूप तीन साल तक चले इस भीषण युद्ध में लाखों सैनिक और आम नागरिक मारे गए। अंततः 27 जुलाई 1953 को पमुनजोम गांव में एक आर्मिस्टिस यानी युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके तहत दोनों देशों के बीच युद्ध की गतिविधियों को तो रोक दिया गया, लेकिन इसे किसी युद्ध समाप्ति की फाइनल पीस ट्रीटी यानी शांति संधि का दर्जा नहीं मिला। इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच 38वीं समानांतर रेखा के इर्द-गिर्द डीएमजेड यानी डिमिलिटराइज्ड जोन (DMZ) का निर्माण किया गया, जो आज भी दुनिया की सबसे पहरेदार सीमा मानी जाती है और दोनों देशों के बीच की स्थायी दुश्मनी का सबसे बड़ा जीवंत प्रमाण है।तकनीकी रूप से क्यों आज भी युद्ध की स्थिति में हैं दोनों देश?अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के नियमों के अनुसार जब दो देश युद्ध लड़ते हैं, तो शत्रुता समाप्त करने के लिए या तो वे किसी शांति संधि पर हस्ताक्षर करते हैं या फिर एकतरफा समर्पण करते हैं। कोरियाई प्रायद्वीप के मामले में न तो किसी ने समर्पण किया और न ही आज तक कोई व्यापक शांति समझौता हो सका है, जिसके चलते तकनीकी रूप से उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया आज भी कानूनी तौर पर युद्धरत (At War) देश माने जाते हैं। इस अजीबोगरीब और तनावपूर्ण स्थिति का खामियाजा दोनों देशों के नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है, जहां सीमा के दोनों तरफ भारी मात्रा में बारूदी सुरंगे, लाखों की संख्या में तैनात सैनिक और मिसाइलें हर वक्त किसी भी अनहोनी के लिए तैयार खड़ी रहती हैं। समय-समय पर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत के दौर चले, ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन आयोजित हुए और रिश्तों को सुधारने के दावे भी किए गए, लेकिन आपसी अविश्वास, उत्तर कोरिया के लगातार परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षणों तथा अमेरिका की सैन्य उपस्थिति ने हर बार शांति की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।शीत युद्ध की विरासत और महाशक्तियों का कूटनीतिक शिकंजाउत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच का यह अनसुलझा संघर्ष केवल दो पड़ोसी देशों की आपसी रंजिश नहीं है, बल्कि यह शीत युद्ध की उस भू-राजनीतिक विरासत का हिस्सा है जो आज भी वैश्विक महाशक्तियों के वर्चस्व की जंग का अखाड़ा बना हुआ है। उत्तर कोरिया को जहां एक तरफ चीन और रूस का रणनीतिक समर्थन और कूटनीतिक अभयदान प्राप्त है, वहीं दूसरी तरफ दक्षिण कोरिया की सुरक्षा की पूरी गारंटी अमेरिका के साथ उसके रक्षा समझौतों और परमाणु छत्रछाया पर टिकी हुई है। यही वजह है कि जब भी कोरियाई प्रायद्वीप में शांति स्थापना की कोई छोटी सी भी किरण दिखाई देती है, तो वाशिंगटन, बीजिंग और मास्को के भू-राजनीतिक समीकरण बीच में आ जाते हैं। उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन की आक्रामक नीतियों और परमाणु हथियारों के प्रति जुनून ने इस क्षेत्र को दुनिया के सबसे संवेदनशील न्यूक्लियर फ्लैशपॉइंट में बदल दिया है, जहां एक छोटी सी गलतफहमी या सैन्य दुस्साहस तीसरे विश्व युद्ध की चिंगारी भड़का सकता है।दक्षिण कोरिया का आर्थिक विकास और उत्तर कोरिया का अलगावयुद्धविराम के बाद के इन सात दशकों में दोनों कोरियाई देशों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में जमीन-आसमान का फर्क आ चुका है, जो इस संघर्ष को और अधिक पेचीदा बनाता है। एक तरफ दक्षिण कोरिया ने अपनी अद्भुत मेहनत, लोकतांत्रिक व्यवस्था और तकनीकी नवाचार के दम पर दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और टेक दिग्गजों की सूची में अपना नाम दर्ज करा लिया है, और सियोल आज आधुनिकता की मिसाल पेश करता है। दूसरी तरफ, उत्तर कोरिया ने दुनिया से पूरी तरह कटकर एक साम्यवादी सैन्य तानाशाही के रूप में खुद को समेट लिया है, जहां अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण आम जनता भुखमरी और गरीबी की मार झेल रही है, लेकिन देश का सारा बजट परमाणु हथियारों और लंबी दूरी की मिसाइलों के विकास पर झोंक दिया गया है। वैचारिक मोर्चे पर आई इस भारी खाड़ी ने दोनों समाजों को एक-दूसरे से कोसों दूर कर दिया है, जिससे भविष्य में कोरियाई प्रायद्वीप के शांतिपूर्ण एकीकरण की संभावनाएं लगभग नगण्य सी नजर आती हैं।शांति की अनिश्चित राह और कोरियाई प्रायद्वीप का भविष्यआज के इस आधुनिक और वैश्वीकृत युग में जहां पूरी दुनिया व्यापार, तकनीकी सहयोग और मानवता के विकास की बात करती है, कोरियाई प्रायद्वीप का यह अनसुलझा संघर्ष मानव इतिहास के सबसे पुराने जख्मों में से एक बना हुआ है। दोनों देशों की आम जनता, विशेषकर वे परिवार जो 1953 के विभाजन के समय बिछड़ गए थे और आज तक अपने रिश्तेदारों से मिल नहीं पाए हैं, उनकी आंखें आज भी किसी चमत्कारिक शांति संधि का इंतजार कर रही हैं। हालांकि, वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए निकट भविष्य में इस वॉर सिचुएशन के पूरी तरह समाप्त होने की उम्मीद बहुत कम है, क्योंकि उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम और अमेरिका-दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों के बीच का यह दुष्चक्र लगातार गहराता जा रहा है। कुल मिलाकर, 1953 का वह अधूरा युद्धविराम आज भी एक ऐसी तलवार बनकर लटक रहा है, जिसकी एक गलत हरकत इस पूरे क्षेत्र को खाक में मिलाने की ताकत रखती है, और दुनिया भर के कूटनीतिकार इस बारूदी ढेर पर शांति की फुहार डालने के लिए लगातार जद्दोजहद कर रहे हैं।

न्यूज़ इंडिया लाइव 16 Aug 2026 1:44 pm

प्रेमी के लिए पति-बेटे को सऊदी अरब में छोड़ भारत आई शबाना, भरोसा टूटा और फिर...

एक महिला सऊदी में पति-बेटे को छोड़ प्रेमी के लिए भारत आई। यहां आकर उसे प्रेमी की सच्चाई पता चली तो उसका भरोसा टूटा। इसके बाद महिला ने मासूम बच्ची को गोद में लेकर ट्रेन के आगे कूदने का प्रयास किया। लोगों ने दोनों की जान बचा ली।

लाइव हिन्दुस्तान 16 Aug 2026 12:38 pm

भारतीय सीमा से सटे नेपाली इलाके में बढ़ी मस्जिद-मदरसों की संख्या, पाकिस्तान-तुर्की कनेक्शन के दावे ने बढ़ाई चिंता

भारत के रक्सौल सीमा से सटे नेपाल के क्षेत्रों में मस्जिदों और मदरसों की संख्या में असामान्य वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे धार्मिक सुरक्षा और जनसांख्यिकीय बदलाव की चिंताएं बढ़ी हैं। सु

जागरण 16 Aug 2026 12:33 pm

Iran US War: Qatar के कैद में है ईरान के 3 पायलट, बड़ा खुलासा! | Qatar Captures 3 Iranian Pilots

मध्य पूर्व (Middle East) से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। ईरान (Iran) के तीन लड़ाकू पायलट पिछले छह महीनों से कतर (Qatar) की कैद में हैं।

लाइव हिन्दुस्तान 16 Aug 2026 11:55 am

'आवारापन 2' की आंधी में उड़ी 'बंटवारा 1947', स्वतंत्रता दिवस पर इमरान हाशमी का बॉक्स ऑफिस पर एकतरफा राज

'आवारापन 2' ने स्वतंत्रता दिवस की छुट्टी का लाभ उठाते हुए दो दिनों में ₹47.76 करोड़ का कलेक्शन कर लिया है। इमरान हाशमी की यह एक्शन थ्रिलर बॉक्स ऑफिस पर 'बंटवारा 1947' से काफी आगे चल रही है।

खबर इंडिया टीवी 16 Aug 2026 10:13 am

Israel air strike: दक्षिणी लेबनान पर हवाई हमले में 7 की मौत, 3 घायल हुए

दक्षिणी लेबनान पर शनिवार तड़के हुए इजराइल के हवाई हमले में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गए। लेबनान की सरकारी नेशनल न्यूज एजेंसी (एनएनए) ने यह जानकारी दी। समाचार एजेंसी के अनुसार, बचावकर्मी और पराचिकित्सक अब भी मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Israel का Lebanon पर हवाई हमला: 11 लोगों की मौत और 19 घायल, PM सलाम ने की निंदा यह हवाई हमला 26 जून को लेबनान और इजराइल के बीच घोषित ‘‘फ्रेमवर्क समझौते’’ के बाद से सबसे घातक हमलों में से एक माना जा रहा है। इस समझौते के तहत दक्षिणी लेबनान से इजराइली सेना की वापसी के बदले ईरान समर्थित हिज्बुल्ला संगठन को निरस्त्र करने की योजना तय की गई थी।

प्रभासाक्षी 16 Aug 2026 10:10 am

ओडिशा में प्रलयंकारी बाढ़ का तांडव: 6 जिलों के 500 से अधिक गांव डूबे, 2.7 लाख से ज्यादा लोग फंसे; युद्धस्तर पर NDRF और ODRAF का रेस्क्यू ऑपरेशन

पूर्वी तटीय राज्य ओडिशा में मानसूनी बारिश और उफनती नदियों ने भयंकर तबाही मचा दी है। राज्य के छह प्रमुख जिलों में बाढ़ के हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि 500 से अधिक गांव पूरी तरह से टापू में तब्दील हो गए हैं। आधिकारिक आंकड़ों और जमीनी रिपोर्टों के अनुसार, लगभग 2.7 लाख (दो लाख सत्तर हजार) से अधिक लोगों का जनजीवन इस प्राकृतिक आपदा से सीधे तौर पर प्रभावित हुआ है। कई गांवों का जिला मुख्यालयों और मुख्य सड़कों से संपर्क पूरी तरह कट चुका है।बाढ़ का पानी रिहायशी इलाकों, प्राथमिक विद्यालयों, स्वास्थ्य केंद्रों और हजारों एकड़ में लहलहाती फसलों में घुस चुका है। घरों की छतों और ऊंचे तटबंधों पर शरण लिए लोग भोजन, शुद्ध पेयजल और दवाओं की बाट जोह रहे हैं। अचानक बढ़े जलस्तर के कारण लोगों को अपने घरों से जरूरी सामान और मवेशियों को निकालने तक का वक्त नहीं मिला, जिससे लाखों परिवारों के सामने आजीविका और अस्तित्व का गहरा संकट खड़ा हो गया है।नदियों के उफान और बांधों से पानी छोड़े जाने से बिगड़े हालात: क्या हैं बाढ़ के मुख्य कारण?ओडिशा में आई इस विनाशकारी बाढ़ के पीछे मुख्य रूप से बंगाल की खाड़ी में बने गहरे दबाव (डीप डिप्रेशन) के कारण हुई भारी बारिश और पड़ोसी राज्यों के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों (अपर कैचमेंट एरिया) से आने वाला भारी पानी है। महानदी, ब्राह्मणी, बैतरणी, सुवर्णरेखा और बुढ़ाबलंग जैसी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर या उसके करीब बह रही हैं।महानदी बेसिन के ऊपरी इलाकों, विशेषकर छत्तीसगढ़ और पश्चिमी ओडिशा में लगातार हुई अतिवृष्टि के चलते संबलपुर स्थित ऐतिहासिक हीराकुंड बांध का जलस्तर अपने अधिकतम स्तर के करीब पहुंच गया। जलाशय की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों को कई स्लुइस गेट खोलने पड़े, जिससे निचले इलाकों में लाखों क्यूसेक पानी का बहाव तेजी से बढ़ा। इसके साथ ही, तटीय इलाकों में समुद्र में हाई टाइड (उच्च ज्वार) आने के कारण नदियों का पानी तेजी से समुद्र में नहीं समा पा रहा है, जिससे बैकवाटर का दबाव गांवों और बस्तियों में फैल गया है।प्रभावित जिलों का जमीनी हाल: कटक, पुरी, केंद्रपाड़ा और जगतसिंहपुर में थमी जिंदगीबाढ़ का सबसे घातक प्रभाव ओडिशा के तटीय और डेल्टा क्षेत्रों में देखने को मिल रहा है। केंद्रपाड़ा, जगतसिंहपुर, कटक, पुरी, भद्रक और बालेश्वर जिले इस जलप्रलय से सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। केंद्रपाड़ा और जगतसिंहपुर के निचले इलाकों में कई नदियां तटबंध तोड़कर रिहायशी इलाकों में बहने लगी हैं।सैकड़ों कच्चे मकान ढह गए हैं, जबकि पक्के मकानों के भूतल पानी में समा चुके हैं। संचार नेटवर्क और बिजली के खंभे गिरने से कई इलाकों में ब्लैकआउट की स्थिति है। इसके अलावा, हजारों मवेशी चारे की कमी और पानी में बह जाने से संकट में हैं। किसानों की धान की फसलें पानी में डूबकर सड़ने की कगार पर पहुंच चुकी हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भारी झटका लगा है। स्थानीय बाजारों में आवश्यक वस्तुओं की किल्लत होने लगी है, जिससे आम जनता की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं।युद्धस्तर पर राहत और बचाव अभियान: NDRF, ODRAF और नौकाओं का बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशनहालात की गंभीरता को देखते हुए राज्य प्रशासन और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (OSDMA) ने पूरे तंत्र को हाई अलर्ट पर रखा है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), ओडिशा आपदा त्वरित कार्रवाई बल (ODRAF) और अग्निशमन सेवा की दर्जनों टीमें मोटरबोट्स के साथ सुदूर गांवों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने में जुटी हुई हैं।बाढ़ में घिरे बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और बच्चों को प्राथमिकता के आधार पर एयरलिफ्ट और नावों के जरिए सुरक्षित शिविरों (फ्लड शेल्टर्स) में पहुंचाया जा रहा है। सरकार द्वारा संचालित इन राहत शिविरों में गर्म पका हुआ भोजन, सूखा राशन और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। जिन इलाकों में नावों का पहुंचना भी मुश्किल है, वहां हेलीकॉप्टरों की मदद से सूखे खाने के पैकेट, पीने के पानी की बोतलें और जरूरी दवाइयां एयर-ड्रॉप की जा रही हैं। जिलाधिकारियों को 24 घंटे निगरानी रखने और तटबंधों पर गश्त बढ़ाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं।महामारी और जलभराव का दोहरा संकट: स्वास्थ्य विभाग के सामने नई चुनौतियांबाढ़ का पानी उतरने के साथ ही बीमारियों का खतरा सबसे बड़ा सिरदर्द बन जाता है। रुके हुए और दूषित पानी की वजह से डायरिया, हैजा, टाइफाइड और त्वचा संबंधी संक्रामक रोगों के फैलने की आशंका बढ़ गई है। इसके अलावा, जलभराव वाले क्षेत्रों में जहरीले सांपों और कीड़े-मकौड़ों के निकलने से लोगों में भारी दहशत है।ओडिशा स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में मोबाइल हेल्थ यूनिट्स (भ्रमणशील चिकित्सा दल) तैनात कर दिए हैं। आशा और एएनएम कार्यकर्ताओं के जरिए बाढ़ पीड़ितों को हैलोजन टैबलेट (पानी शुद्ध करने की गोलियां), ओआरएस के पैकेट, एंटी-वेनम इंजेक्शन और आवश्यक एंटीबायोटिक्स बांटी जा रही हैं। पीने के पानी के स्रोतों जैसे ट्यूबवेल और कुओं के विसंक्रमण (क्लोरीनेशन) का काम भी प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जा रहा है ताकि जलजनित महामारियों को फैलने से रोका जा सके।दीर्घकालिक समाधान और आपदा प्रबंधन की परीक्षा: आगे की राहओडिशा देश का वह राज्य है जिसने बीते दशकों में चक्रवातों और आपदा प्रबंधन में दुनिया भर में अपनी मिसाल पेश की है, लेकिन बाढ़ की बारंबारता आज भी एक जटिल चुनौती बनी हुई है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण मानसूनी बारिश के पैटर्न में अप्रत्याशित बदलाव आया है—कम समय में अत्यधिक वर्षा (क्लाउडबर्स्ट जैसी स्थिति) से जल निकासी प्रणाली पूरी तरह चरमरा जाती है।बाढ़ की इस त्रासदी से निपटने के लिए तात्कालिक राहत के साथ-साथ दीर्घकालिक नीतिगत कदमों की जरूरत है। इनमें नदी तटबंधों का सुदृढ़ीकरण, डेल्टा क्षेत्र में वैज्ञानिक जल निकासी तंत्र का निर्माण, गाद (सिल्ट) की सफाई और पड़ोसी राज्यों के साथ वास्तविक समय पर जल प्रवाह डेटा का समन्वय शामिल है। वर्तमान में प्रशासन की पहली प्राथमिकता 2.7 लाख प्रभावित नागरिकों को सुरक्षित रखना और सामान्य जीवन को जल्द से जल्द पटरी पर लौटाना है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 16 Aug 2026 9:20 am

कतर ने ईरानी पायलटों की हिरासत की खबरों को बताया झूठा, दावों का किया खंडन

दोहा, 16 अगस्त . कतर ने ईरानी पायलटों को हिरासत में लेने के दावों को खारिज कर दिया. क्षेत्रीय तनाव कम करने की चल रही कूटनीतिक कोशिशों के बीच कतर ने इन दावों को गुमराह करने वाला बताया. कतर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद बिन मोहम्मद अल-अंसारी ने social media प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक ... Read more

डेली किरण 16 Aug 2026 9:06 am

मक्का रक्षा समझौता: सऊदी, तुर्की और पाकिस्तान की नई दोस्ती भारत के लिए कितनी बड़ी चुनौती? - द लेंस

मक्का संयुक्त रक्षा समझौते में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के साथ आने से पश्चिम एशिया का सुरक्षा समीकरण बदल सकता है. लेकिन बड़ा सवाल ये है कि भारत के लिए पाकिस्तान की मौजूदगी कितनी बड़ी चिंता है?

बीबीसी हिंदी 16 Aug 2026 8:27 am

Israel का Lebanon पर हवाई हमला: 11 लोगों की मौत और 19 घायल, PM सलाम ने की निंदा

दक्षिणी लेबनान में शनिवार को इजराइल के हवाई हमले में 11 लोगों की मौत हो गई और 19 अन्य घायल हो गए। इजराइल और हिजबुल्ला के बीच 20 जून को लागू हुए संघर्ष विराम के बाद से यह सबसे घातक हमला है। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय और सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, अंसार के बाहरी इलाके में एक घर को निशाना बनाकर किए गए हवाई हमले में सात लोगों की मौत हो गई, जिनमें तीन बच्चे शामिल हैं। हमले में दो लोग घायल भी हुए। दूसरा हमला देर अल-जहरानी में हुआ, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और 17 अन्य घायल हो गए। यह हवाई हमला 26 जून को लेबनान और इजराइल के बीच घोषित ‘‘फ्रेमवर्क समझौते’’ के बाद से सबसे घातक हमलों में से एक माना जा रहा है। इस समझौते के तहत दक्षिणी लेबनान से इजराइली सेना की वापसी के बदले ईरान समर्थित हिज्बुल्ला संगठन को निरस्त्र करने की योजना तय की गई थी। लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने दक्षिणी लेबनान में इजराइली हवाई हमलों की निंदा करते हुए कहा कि ये हमले ‘‘लोगों को डराने’’ का काम करते हैं और दक्षिणी क्षेत्र में हालात को स्थिर करने के प्रयासों को कमजोर करते हैं। उन्होंने कहा कि लेबनानी लोगों की सुरक्षा और अपनी जमीन पर जीवन जीने का उनका अधिकार ‘‘किसी बातचीत या सौदेबाजी का विषय नहीं है।’’सलाम ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘अंसार शहर में इजराइली हवाई हमले में मारे गए सात शहीद किसी सैन्य ढांचे का हिस्सा नहीं थे।’’उन्होंने कहा कि इजराइल को भड़कावे वाला कदम रोकना चाहिए। वहीं, इजराइली सेना ने एक बयान में कहा कि उसने इलाके में इजराइली सैनिकों के खिलाफ की गई कार्रवाई के जवाब में अली ताहेर और अंसार क्षेत्रों में हिजबुल्ला के ढांचे को निशाना बनाकर हमला किया।

प्रभासाक्षी 16 Aug 2026 7:11 am

क्या कतर के कब्जे में हैं 3 ईरानी पायलट? तेहरान की गुहार पर आया दोहा का जवाब

ईरान ने आरोप लगाया कि कतर ने मार्च में पकड़े गए उसके तीन पायलटों को हिरासत में रखा है. कतर ने इसे खारिज करते हुए कहा कि उसके पास कोई जिंदा पायलट नहीं है और तलाशी में एक के शव मिले थे

आज तक 16 Aug 2026 7:00 am

Middle East News: ईरान के 3 पायलट किसकी हिरासत में? लेबनान में इजरायली हमलों में 11 लोगों की मौत

यमन की सेना ने बताया कि हूती विद्रोहियों ने रेड सी (लाल सागर) में मोखा बंदरगाह पर हमला किया, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार के नियंत्रण में है.

NDTV इंडिया 15 Aug 2026 10:33 pm

यूएसएस अब्राहम लिंकन की घर वापसी, 250 दिन की तैनाती के बाद लौट रहा अमेरिकी युद्धपोत

अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन 250 दिनों से अधिक की लंबी तैनाती के बाद अमेरिका लौट रहा है।

जागरण 15 Aug 2026 10:31 pm

कतर ने पकड़े ईरान के 3 फाइटर पायलट, 6 महीने से कर रखा है कैद; हुआ खुलासा

मध्य-पूर्व जारी संघर्ष के बीच बड़ी खबर आई है कि ईरान के 3 मिलिट्री पायलटों को कतर ने कैद करके पिछले 6 महीने से रखा हुआ है। इसका खुलासा ईरान की तरफ से ही किया गया है।

खबर इंडिया टीवी 15 Aug 2026 9:06 pm

MP का वो गांव, जहां हर घर में फौजी:11 जवानों ने दी शहादत, इनमें 9 मुस्लिम; विश्व युद्ध-कारगिल और ऑपरेशन सिंदूर में दुश्मनों से लड़े

यहां आजादी का जश्न सिर्फ तिरंगा फहराकर नहीं मनाया जाता, यहां पीढ़ियां तिरंगे की हिफाजत करके आजादी को जिंदा रखती हैं। यह लाइन मुरैना जिले के काजी बसई गांव पर फिट बैठती है। जब देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, तो ऐसे गांव भी हैं जहां देशभक्ति सिर्फ नारों और समारोहों तक ही सीमित नहीं है। यहां पीढ़ियां देश की सीमाओं पर खड़ी होकर आजादी की हिफाजत करती रही हैं। काजी बसई गांव भी ऐसा ही गांव है। गांव की गलियों में चलते हुए शायद ही कोई ऐसा घर मिले, जिसका रिश्ता सेना, CRPF, BSF या किसी अन्य सुरक्षा बल से न रहा हो। किसी घर की दीवार पर शहीद की तस्वीर है तो कहीं आज भी बेटा, पोता या भतीजा सीमा पर तैनात है। गांव ने प्रथम विश्व युद्ध से लेकर दूसरे विश्व युद्ध, 1962 का चीन युद्ध, 1965 और 1971 की भारत-पाकिस्तान जंग, श्रीलंका में एलटीटीई के खिलाफ अभियान, पंजाब के उग्रवाद, नक्सल विरोधी अभियानों, कारगिल युद्ध और हाल के ऑपरेशन सिंदूर तक अलग-अलग दौर में देश की सुरक्षा में जवान दिए हैं। देश के लिए अब तक काजी बसई गांव के 11 जवानों ने शहादत दी है। इनमें 9 मुस्लिम और 2 हिंदू हैं, लेकिन काजी बसई की कहानी सिर्फ युद्धों की सूची नहीं है। यह उस पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती परंपरा की कहानी है, जिसमें फौज में जाना नौकरी नहीं, बल्कि परिवार और गांव की जिम्मेदारी माना जाता है। इस रिपोर्ट में पढ़िए देश भक्त गांव की कहानी… आजादी मिली, लेकिन पहरा कभी खत्म नहीं हुआ 15 अगस्त आते ही देश में आजादी की कहानियां दोहराई जाती हैं। काजी बसई में आजादी की कहानी कुछ अलग तरह से सुनाई देती है। यहां बुजुर्ग अपने बच्चों को बताते हैं कि देश आजाद होने से पहले उनके पूर्वज विदेशी हुकूमत के दौर के युद्धों में गए। आजादी के बाद की पीढ़ियों ने उसी धरती की रक्षा के लिए हथियार उठाए, जिसे देश ने अपने दम पर संभाला। पूर्व सैनिक हाजी मोहम्मद रफी बताते हैं कि काजी बसई का सैन्य इतिहास काफी पुराना है। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान गांव के अब्दुल वासिद सिंधिया स्टेट की सेना में भर्ती हुए थे। युद्ध के दौरान जर्मनी में उनकी शहादत हुई। बताया जाता है कि उनकी शहादत की स्मृति आज भी जर्मनी में मौजूद है। दूसरे विश्व युद्ध में भी गांव के करीब 16 लोग अंग्रेजों की तरफ से युद्ध में शामिल हुए। इनमें हाजी अलीमुद्दीन, इस्लामुद्दीन, अब्दुल अली, नूर मोहम्मद, मोहम्मद वली, हकीमदीन खान, क्वार्टर मास्टर हकीमुल्ला, हाजी अर्जुद्दीन, मोहम्मद इब्राहिम और अब्दुल गनी सहित कई जवान शामिल थे। युद्ध खत्म होने के बाद ये जवान गांव लौट आए। 1965 और 1971 की जंग खुद लड़ी, आज भी यादें ताजा हाजी मोहम्मद रफी बताते हैं- वे खुद 1965 और 1971 के युद्ध में शामिल रहे। उम्र के इस पड़ाव पर भी युद्ध की यादें उनके चेहरे पर साफ दिखाई देती हैं। पाकिस्तान के साथ 1965 और 1971 की जंग मैंने खुद लड़ी है। 1962 के चीन युद्ध और कारगिल की लड़ाई में भी गांव के जवान शामिल रहे। उनके मुताबिक काजी बसई के जवान सिर्फ सीमा पर होने वाली जंगों तक सीमित नहीं रहे। श्रीलंका में एलटीटीई के खिलाफ अभियान, पंजाब में उग्रवाद और नक्सल प्रभावित इलाकों में भी गांव के जवानों ने ड्यूटी की। यानी आजादी के बाद देश के सामने सुरक्षा की जो भी नई चुनौती आई, काजी बसई के घर से किसी न किसी ने मोर्चे की तरफ कदम बढ़ाया। एक ट्रांसफर ने बचाई जिंदगी, लेकिन साथी नहीं बच सके रिटायर्ड सीआरपीएफ जवान मोहम्मद जफर की कहानी काजी बसई के सैनिक परिवारों के दर्द को सामने लाती है। जफर बताते हैं कि उनके परिवार की चार पीढ़ियां सुरक्षा बलों में रही हैं। दादा सेना में थे, पिता भी सेना में गए, इसके बाद वे सीआरपीएफ में भर्ती हुए और अब उनका बेटा भी सेना में है। पंजाब में आतंकवाद के दौर में उनकी तैनाती पटियाला, तरनतारन और अमृतसर में रही। वे बताते हैं कि उस समय हर दिन अनिश्चितता के बीच गुजरता था। एक घटना बताते हुए जफर भावुक हो जाते हैं। वे 75वीं बटालियन सीआरपीएफ में तैनात थे। उनका ट्रांसफर दूसरी बटालियन में हो गया और वे चंडीगढ़ चले गए। उनके जाने के तीन दिन बाद उनकी पुरानी बटालियन के जवानों पर बस में हमला हुआ और उनके कई साथी मारे गए। वे कहते हैं, मैं सिर्फ ट्रांसफर होने के कारण बच गया। मोहम्मद जफर बताते हैं- उनकी जिंदगी में शहादत की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। उनके भाई का बेटा भी करीब दो साल पहले कश्मीर में ड्यूटी के दौरान शहीद हो गया। अगर डर होता तो परिवार वाले हमें रोक लेते। गांव में सेना सिर्फ नौकरी नहीं, परंपरा बन गई है। चार पीढ़ियों से वर्दी, अब बेटे भी उसी रास्ते पर काजी बसई के रिटायर्ड सीआरपीएफ एसआई मोहम्मद शफीक भी चार पीढ़ियों की देशसेवा की कहानी बताते हैं। उनके दादा और पिता सुरक्षा बल में रहे। वे 1984 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए और 1987 में श्रीलंका में भारत की ओर से चलाए गए शांति अभियान के दौरान तैनात रहे। दो साल श्रीलंका में ड्यूटी करने के बाद वे भारत लौटे। बाद में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी सेवा दी। अब जिस छत्तीसगढ़ में वे कभी नक्सल विरोधी अभियान में ड्यूटी कर चुके हैं, उसी क्षेत्र में उनका बेटा देश की सेवा कर रहा है। शफीक के लिए यह सिर्फ परिवार की उपलब्धि नहीं, बल्कि गांव की परंपरा का हिस्सा है। 1971 की जंग में कलकत्ता तक पहुंची थी बटालियन रिटायर्ड एसएएफ जवान मोहम्मद नाजिम 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की याद सुनाते हैं। वे बताते हैं कि उनकी बटालियन को इंदौर से कलकत्ता तक ले जाया गया था। सुबह उन्हें विमान से आगे भेजे जाने की तैयारी थी, लेकिन उसी दौरान पाकिस्तान ने हथियार डाल दिए और युद्ध खत्म हो गया। इसके बाद उनकी बटालियन को असम में तैनात कर दिया गया। नाजिम बताते हैं कि उनके परिवार की कई पीढ़ियां आज भी सुरक्षा बलों में हैं। युद्ध भले खत्म हो गया, लेकिन काजी बसई के परिवारों का देश की सीमाओं पर पहरा खत्म नहीं हुआ। 'फौज में जाति-धर्म नहीं, सिर्फ तिरंगा होता है' बीएसएफ में एसआई पद से रिटायर्ड अब्दुल महफूज अब्बासी हाल ही में गांव लौटे हैं। वे ऑपरेशन सिंदूर का हिस्सा रहे हैं। आजादी और देशसेवा को लेकर वे कहते हैं कि सेना में जाति और धर्म की पहचान पीछे छूट जाती है। वे बताते हैं कि- फौज में कोई जाति-धर्म नहीं होता। वहां सिर्फ देशसेवा सबसे बड़ा धर्म है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दिमाग में सिर्फ तिरंगा और भारत माता थी। अब्बासी की चिंता शहीद परिवारों को लेकर भी है। उनका कहना है कि सरकार को उन परिवारों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, जिन्होंने देश की रक्षा में अपने बेटे खोए हैं। उनकी बात में गांव की सामूहिक भावना दिखाई देती है- यहां फौज में जाने के लिए किसी को मनाना नहीं पड़ता, क्योंकि कई परिवारों में सेना की वर्दी विरासत की तरह आगे बढ़ती है। गांव से पांच किलोमीटर दूर था स्कूल, रोज दौड़कर जाते थे बच्चे काजी बसई की सैन्य परंपरा के पीछे सिर्फ जज्बा नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में तैयार हुई शारीरिक क्षमता भी है। रिटायर्ड प्राचार्य मोहम्मद हबीब बताते हैं कि एक समय गांव से स्कूल करीब पांच किलोमीटर दूर था। उस दौर में न साधन थे और न हर घर में साइकिल। बच्चे रोज पांच किलोमीटर पैदल या दौड़ते हुए स्कूल जाते और लौटते थे। वे कहते हैं- हमारे लोगों का फिजिकल यूं ही हो जाता था। कभी ऐसा नहीं हुआ कि कोई सेना का फिजिकल देने गया हो और अंदर से लौट आया हो। आज भी गांव की करीब 90 प्रतिशत आबादी सुरक्षा बलों में जाने वाली पीढ़ी से जुड़ी हुई है और युवा भर्ती की तैयारी करते हैं। 11 शहादतें, लेकिन वर्दी से मोह कम नहीं हुआ काजी बसई की सबसे बड़ी कहानी इसके 11 शहीद जवान हैं। हर शहादत एक परिवार के लिए ऐसा खालीपन छोड़ गई, जिसे कोई सम्मान या मुआवजा पूरी तरह नहीं भर सकता। यहां एक परिवार का बेटा शहीद होता है तो अगली पीढ़ी में कोई दूसरा बच्चा सेना की तैयारी शुरू कर देता है। किसी के पिता वर्दी पहनते हैं तो बेटा उसी वर्दी को अपना भविष्य मानता है। यही वजह है कि काजी बसई में फौज एक पेशा नहीं लगती- यह गांव की सामाजिक स्मृति और सामूहिक पहचान बन चुकी है।

दैनिक भास्कर 15 Aug 2026 6:14 pm

आज का एक्सप्लेनर:अमेरिकी सैनिक समुद्र में कूदकर मरने को क्यों मजबूर; ईरान को घेरने गए अमेरिकी युद्ध पोत USS लिंकन पर ऐसा क्या हो रहा

अमेरिकी नौसेना का एयरक्राफ्ट कैरियर ‘USS जॉर्ज वॉशिंगटन’ मिडिल ईस्ट की तरफ रवाना हो चुका है। ये ‘USS अब्राहम लिंकन’ को रिप्लेस करेगा, जिस पर तैनात 5 हजार से ज्यादा मरीन्स ने करीब 9 महीने से जमीन नहीं देखी है। USS लिंकन पर नौसैनिकों के सुसाइड की कोशिश की खबरें आ रही थीं। USS लिंकन पर ऐसा क्या हुआ, समंदर में कूदकर जान पर क्यों उतारू अमेरिकी नौसैनिक; डिकोड करेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: USS लिंकन में मौजूद अमेरिकी सैनिकों की हालत का पता कैसे चला? जवाब: अमेरिकी सेना की खबर देने वाली वेबसाइट्स नेवी टाइम्स के मुताबिक… 6 अगस्त को युद्धपोत पर तैनात सैनिकों के घर वालों ने अमेरिकी नेवी के एक्टिंग सेक्रेटरी हंग काओ और कुछ दूसरे सीनियर ऑफिसर्स के साथ मीटिंग की थी। अमेरिकी वेबसाइट स्टार्स एंड स्ट्राइप्स के मुताबिक… सवाल-2: 9 महीने से तैनात USS लिंकन की हालत कैसी हो गई है? जवाब: 21 नवंबर 2025 को USS अब्राहम लिंकन प्रशांत महासागर के इलाके में तैनाती के लिए अमेरिका के सैन डिएगो से रवाना हुआ था। इसमें 5000 से ज्यादा मरीन सैनिक और क्रू मेंबर्स हैं। 11 दिसंबर को लिंकन प्रशांत महासागर के गुआम द्वीप पर पहुंचा। फिर इसे मिडिल ईस्ट में ईरान के आसपास के इलाके में रवाना कर दिया गया। जनवरी से ये अरब सागर के इसी इलाके में तैनात है। ईरान के खिलाफ अमेरिकी हवाई हमलों में इस एयरक्राफ्ट कैरियर का इस्तेमाल किया गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, लिंकन पर तैनात फाइटर जेट्स ने करीब दस हजार उड़ानें भरी हैं। मई में इसके वापस आने की उम्मीद थी, लेकिन बिना किसी घोषणा के इसकी तैनाती बढ़ा दी गई। जुलाई की शुरुआत में लिंकन थोड़ी देर के लिए ओमान के एक पोर्ट पर रुका था। वहां ताजे फल और सब्जियां वगैरह जुटाई गईं। इस दौरान कुछ जवानों को जहाज से उतरने की अनुमति मिली, लेकिन उन्हें पोर्ट के अंदर एक सिक्योर्ड कैंपस में ही रखा गया। लिंकन पर तैनात कुछ जवानों ने अमेरिकी न्यूज चैनल CNN को बताया कि अभी लिंकन ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी में तैनात है। इसलिए ये मित्र देशों के बंदरगाहों पर नहीं रुक पा रहा। न ही नाविकों को आराम मिल पा रहा और न ही जरूरत के सामान की सप्लाई हो पा रही है। इसके चलते एयरक्राफ्ट कैरियर पर 2 तरह की दिक्कतें हैं... 1. रहने के लिए बदतर हालात 2. खाने-पीने की चीजों की कमी सवाल-3: आम तौर पर एयरक्राफ्ट कैरियर कितने दिन समुद्र में रहते हैं? जवाब: USS अब्राहम लिंकन जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर न्यूक्लियर एनर्जी से चलते हैं। इसलिए इन्हें ईंधन भरने के लिए बंदरगाह पर आने की जरूरत नहीं है। करीब एक महीने का राशन भी मौजूद होता है। बीच-बीच में अंडरवे रीप्लेनिशमेंट (UNREP) के जरिए सप्लाई होती रहती है, यानी दूसरे जहाज या हेलीकॉप्टर इन पर रसद पहुंचाते हैं। सामान्य दिनों में करीब एक महीने के समय में कैरियर बंदरगाहों पर रुकते रहते हैं। अमेरिकी नेवी एयरक्राफ्ट कैरियर की तैनाती के लिए 32 से 36 महीने यानी करीब 3 साल का एक साइकिल प्लान करती है। इसे ‘ऑप्टिमाइज्ड फ्लीट रेस्पॉन्स प्लान’, OFRP कहते हैं। इन तीन सालों में नौसैनिक 7 महीने, यानी 210 दिन तक एयरक्राफ्ट कैरियर या उसके स्ट्राइक ग्रुप में तैनात दूसरे युद्धपोतों पर तैनात रहते हैं। अमेरिकी एडमिरल डैरिल कॉडल के मुताबिक, 2018 से 2022 तक ज्यादातर अमेरिकी नौसैनिकों की तैनाती इसी साइकिल के हिसाब से हुई। हालांकि अक्टूबर 2023 में हमास के इजराइल पर हमले के बाद अमेरिका के कुल 11 एयरक्राफ्ट कैरियर में से कई की तैनाती बढ़ानी पड़ी है। 13 अगस्त तक USS लिंकन मई में वापसी के अपने शुरुआती प्लान से 53 दिन से ज्यादा समय से समुद्र में है। किसी पोर्ट पर रुके 200 दिन से ज्यादा हो चुके हैं। इसके पहले 3 जनवरी 2022 को ये सैन डिएगो से रवाना हुआ, इंडो-पैसिफिक और साउथ चाइना सी में 220 दिन की तैनाती के वापस लौटा। फिर 11 जुलाई 2024 से 20 दिसंबर 2024 तक करीब 162 दिन के पेसिफिक मिशन से वापस सैन डिएगो लौटा। वहीं, USS जेराल्ड फोर्ड जून 2025 से समुद्र में है। अक्टूबर 2025 में ये वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अगवा करने के मिशन में शामिल रहा। फिर फरवरी 2026 में इसे मिडिल ईस्ट भेजा गया। 16 मई 2026 को ये 326 दिन बाद वापस पोर्ट पर पहुंचा। वियतनाम युद्ध के बाद ये अब तक किसी भी एयरक्राफ्ट कैरियर की तैनाती का सबसे लंबा रिकॉर्ड है। CNN का अनुमान है कि USS लिंकन जब तक अपने घर कैलिफोर्निया पहुंचेगा, तब तक ये फोर्ड का रिकॉर्ड तोड़ सकता है। सवाल-4: इतने दिनों तक लगातार समंदर में रहने पर होता क्या है? जवाब: दिसंबर के बाद से लिंकन के क्रू मेंबर्स ने जमीन पर कदम नहीं रखा है। इतने दिन समुद्र में रहने से शारीरिक और मानसिक दिक्कतें हो सकती हैं… प्राइवेसी की कमी: जहाज पर हजारों लोग एक छोटे से बंद दायरे में रहते हैं। अपना पर्सनल स्पेस लगभग खत्म हो जाता है। इसके कारण दूसरों से चिढ़ होने लगती है। बर्नआउट होना: बार-बार वापसी की तारीख बढ़ा दी जाती है। घर लौटने की तारीख पक्की न होने से सैनिक मानसिक रूप से टूट जाते हैं। डिप्रेशन का खतरा: इंटरनेट या कॉल की कम पहुंच से सैनिक अपने परिवारों से कटे रहते हैं और उन्हें घर में हो रही अच्छी-बुरी खबरें नहीं पता चलती। वो मदद नहीं कर पाते। ऐसे में गिल्ट यानी अपराधबोध होता है। इससे डिप्रेशन भी बढ़ता है। नींद न आना: कई सैनिक जहाज के निचले हिस्सों में काम करते हैं, जहां हफ्तों तक प्राकृतिक धूप और साफ हवा नहीं मिलती। इससे विटामिन D की कमी होती है। सर्कैडियन रिदम, यानी शरीर की घड़ी बिगड़ जाती है, जिससे नींद नहीं आती। लगातार थकावट: 12 से 16 घंटे की लगातार शिफ्ट, जेट इंजन का तेज शोर और हर समय सतर्क रहने की मजबूरी शरीर को पूरी तरह थका देती है। शरीर को आराम लेकर रिसेट होने का वक्त ही नहीं मिलता। ताजे खाने की कमी: शुरुआती कुछ हफ्तों के बाद ताजे फल, सब्जियां और दूध वगैरह खत्म हो जाते हैं। लंबे समय तक प्रोसेस्ड या पैक्ड फूड खाने से पाचन और पोषण से जुड़ी दिक्कतें होने लगती हैं। खराब बाथरूम और पानी: लंबे वक्त तक प्लंबिंग नहीं होने से जहाज के टॉयलेट्स और शॉवर बेकार हो जाते हैं। कई बार तो टॉयलेट्स ओवर फ्लो हो जाते हैं और गंदगी बाहर आने लगती हैं। इससे बीमारी या संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। सवाल-5: इस पर ट्रम्प प्रशासन का रुख क्या है? जवाब: अमेरिकी डिफेंस सेक्रेटरी पीट हेगसेथ ने शुरुआत में USS लिंकन के खराब हालात की खबरों को खारिज कर दिया था। 14 अगस्त को जब डोनाल्ड ट्रम्प से कहा गया कि USS लिंकन को लंबा समय हो चुका है, तो उन्होंने कहा, 'नहीं, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है।' ट्रंप ने इस दावे को भी खारिज किया कि सैनिकों की सेहत चिंताजनक है। अमेरिका के एक्टिंग नेवी सेक्रेटरी हंग काओ ने कहा, ‘USS लिंकन ने 200 से ज्यादा दिन लड़ाई के इलाके में बिताए। उसकी 266 दिन की तैनाती काफी कठिन रही। उसनेने शानदार तरीके से मिशन को अंजाम दिया।’ काओ ने माना कि कुछ सैनिकों को मेंटल हेल्थ ट्रीटमेंट दिया गया है, लेकिन उन्होंने किसी भी मौत या बड़े हादसे की खबरों को खारिज कर दिया। हालांकि ट्रंप और काओ ने कहा है कि USS लिंकन अब अमेरिका लौट रहा है और जल्द ही उसकी जगह दूसरा एयरक्राफ्ट कैरियर ले लेगा। अमेरिकी मीडिया 'CBS News' को एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ‘USS जॉर्ज वाशिंगटन’ अब USS लिंकन की जगह लेने के लिए आगे बढ़ रहा है। प्रशांत क्षेत्र में गश्त करने के लिए मई में ये जापान के योकोसुका नौसैनिक अड्डे से रवाना हुआ था। ब्रिटिश न्यूज आउटलेज BBC का एनालिसिस है कि 13 अगस्त को USS जॉर्ज वाशिंगटन मलेशिया के पास था, जो 22 अगस्त तक ईरान के पास पहुंचकर USS लिंकन की जगह ले सकता है। ये ओमान के दुक्म बंदरगाह पर पहुंच सकता है। मिडिल ईस्ट में पहुंचने के बाद USS वाशिंगटन उस इलाके में तीसरा अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर होगा, लेकिन प्रशांत महासागर में अब कोई भी अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं होगा। -------- ये खबर भी पढ़िए… 1 लाख करोड़ के अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर के टॉयलेट ही चोक, क्या अब ईरान पर हमला नहीं कर पाएगा अमेरिका ईरान पर स्ट्राइक करने गया सबसे महंगा अमेरिकी विमानवाहक युद्धपोत USS जेराल्ड खुद मुसीबत में है। ये मुसीबत दुश्मन की किसी मिसाइल या पनडुब्बी से नहीं, टॉयलेट ठप पड़ने से हुई है। युद्धपोत में तैनात 4,500 से ज्यादा सैनिकों को फ्रेश होने के लिए 45 मिनट तक लाइन लगाना पड़ रहा है और मरम्मत को लेकर झड़प की भी खबर है। पूरी खबर पढ़िए…

दैनिक भास्कर 15 Aug 2026 6:10 pm

ढाई मोर्चों पर युद्ध लड़ रहा भारत, सीएम रेखा गुप्ता की अपील, अर्बन नक्सल से सतर्क रहें युवा

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की स्वतंत्रता दिवस पर दिमागी (बौद्धिक) नक्सलियों को लेकर दी गई चेतावनी का समर्थन किया। उन्होंने युवाओं से अर्बन नक्सलियों के प्रभाव को लेकर सतर्क रहने और अपनी ऊर्जा को राष्ट्र-निर्माण में लगाने का आग्रह किया। 80वें स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित करते हुए, गुप्ता ने युवाओं से सोशल मीडिया से आगे बढ़कर सोचने और अपने विचारों, रचनात्मकता और प्रतिभा का इस्तेमाल इनोवेशन, रिसर्च और जन-सेवा के लिए करने का भी आग्रह किया। इसे भी पढ़ें: केजरीवाल का PM Modi पर वार: Independence Day भाषण में दिखा 'कम आत्मविश्वास, घबराहट' उन्होंने कहा कि मैं अपने युवा दोस्तों से कहना चाहती हूँ: अपनी ताकत को सिर्फ़ सोशल मीडिया तक सीमित न रखें। अपने आइडिया का इस्तेमाल स्टार्ट-अप के लिए और अपनी क्रिएटिविटी का इस्तेमाल इनोवेशन के लिए करें। अपने सवालों को रिसर्च में बदलें, अपनी संवेदनशीलता का इस्तेमाल सेवा के लिए करें और अपने टैलेंट को देश-निर्माण की दिशा में लगाएँ। गुप्ता की ये बातें प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से दिए गए भाषण के कुछ घंटों बाद आईं। मोदी ने कहा था कि देश से नक्सलवाद खत्म हो गया है, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी थी कि “हथियारबंद नक्सली भले ही चले गए हों, लेकिन ‘दिमागी’ (बौद्धिक) नक्सली अभी भी आस-पास मौजूद हैं। गुप्ता ने अर्बन नक्सल का ज़िक्र करते हुए यह भी कहा कि भारत 2.5-फ्रंट वॉर (ढाई मोर्चों पर युद्ध) लड़ रहा है – दो मोर्चे देश के बाहर और आधा मोर्चा देश के अंदर – जिसमें ऐसे लोग शामिल हैं जो, उनके आरोप के अनुसार, देश और उसकी सेना का अपमान करते हैं। गुप्ता ने स्वतंत्रता दिवस पर अपने भाषण में दिल्ली के लिए अपनी सरकार का विज़न पेश किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी को एक सक्रिय, सतर्क और आकर्षक शहर के तौर पर विकसित किया जाएगा, जिसका दूसरे राज्य भी अनुसरण कर सकें। इसे भी पढ़ें: PM Modi ने MSME उद्योग से 40 देशों के FTA का पूरा लाभ उठाने का आह्वान किया उन्होंने कहा कि दिल्ली के वोटरों ने उनकी सरकार को सिर्फ़ प्रशासन चलाने का ही नहीं, बल्कि कामकाज के तरीके, पारदर्शिता और विकास को एक नई दिशा देने का भी जनादेश दिया है। गुप्ता ने ज़ोर देते हुए कहा कि विकास सिर्फ़ कागज़ों तक सीमित नहीं है। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार तेज़ी से फ़ैसले लेने और ज़मीनी स्तर पर समस्याओं को हल करने पर ध्यान दे रही है।

प्रभासाक्षी 15 Aug 2026 3:48 pm

श्रीप्रिया रंगनाथन की मिस्र, फिलिस्तीन और लेबनान यात्रा 16 अगस्त से, क्षेत्रीय मुद्दों पर होगी चर्चा

New Delhi, 15 अगस्त . India की विदेश नीति के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम में विदेश मंत्रालय (एमईए) ने Saturday को बताया कि विदेश सचिव (सीपीवी एवं ओआईए) राजदूत श्रीप्रिया रंगनाथन 16 से 21 अगस्त तक मिस्र, फिलिस्तीन और लेबनान की आधिकारिक यात्रा करेंगी. वर्तमान जिम्मेदारी संभालने के बाद इन तीनों देशों की उनकी यह ... Read more

डेली किरण 15 Aug 2026 2:17 pm

टीएचडीसी टनल हादसा: एक और श्रमिक बाहर निकला, दो की तलाश युद्धस्तर पर जारी

चमोली के मायापुर स्थित टीएचडीसी टनल हादसे में एक और श्रमिक को बाहर निकालकर अस्पताल भेजा गया। लापता दो श्रमिकों की तलाश युद्धस्तर पर जारी है और पानी निकालने का काम भी तेज किया गया है।

प्रातःकाल 15 Aug 2026 1:28 pm

'सैनिकों को खाना नसीब नहीं...' US के युद्धपोत लिंकन को ईरान ने दी ऐसी चोट

ईरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों से बहरीन में अमेरिकी नौसेना का लॉजिस्टिक्स हब क्षतिग्रस्त होने के बाद सप्लाई लाइन डिएगो गार्सिया शिफ्ट हुई है. यूएसएस अब्राहम लिंकन पर लंबे सप्लाई रूट से ताजा खाना खराब हो रहा है.

आज तक 15 Aug 2026 12:35 pm

EXCLUSIVE: पंखे वाले विमानों से सुपरसोनिक जेट तक का IAF का सफर रहा कितना चुनौतीपूर्ण, युद्धों में कैसे निभाया निर्णायक रोल? स्वतंत्रता दिवस पर वायुसेना ने पूर्व अधिकारी ने बताई एक-एक बात

1947 की सीमित ताकत वाली Royal Indian Air Force से आज की मॉडर्न और आत्मनिर्भरता की तरफ बढ़ती Indian Air Force तक की यात्रा आखिर कैसे तय हुई? 1965, 1971 और कारगिल के यु्द्धों में निर्णायक रोल और जंग के बीच ही इनोवेशन तक, IAF के इस गौरवशाली सफर की कहानी सुनिए भारतीय वायुसेना के रिटायर्ड ग्रुप कैप्टन राजीव कुमार नारंग की ज

खबर इंडिया टीवी 15 Aug 2026 11:20 am

Independence Day Special: जंग के खिलाफ आवाज बनीं ये फिल्में, जिन्होंने देशभक्ति को सिर्फ युद्ध नहीं बल्कि इंसानियत से जोड़ा

Independence Day Special: जंग के खिलाफ आवाज बनीं ये फिल्में, जिन्होंने देशभक्ति को सिर्फ युद्ध नहीं बल्कि इंसानियत से जोड़ा

समाचार नामा 15 Aug 2026 8:50 am

आजादी की लड़ाई से कारगिल युद्ध तक, हिंदुस्तान के वीरों की कहानी दिखाती हैं ये 5 फिल्में

Mumbai , 15 अगस्त . Bollywood ने देशभक्ति को पर्दे पर कई अलग-अलग रंगों में दिखाया है. किसी फिल्म में सीमा पर दुश्मनों से लड़ते सैनिकों की बहादुरी दिखाई गई, तो किसी में आजादी के लिए अंग्रेजों के खिलाफ खड़े हुए क्रांतिकारियों की कहानी बताई गई. इन फिल्मों की कहानियां, किरदार और डायलॉग्स आज भी ... Read more

डेली किरण 15 Aug 2026 8:31 am

1971 युद्ध का वो 'संत', जिसके नाम से कांपती थी पाकिस्तानी टैंक रेजिमेंट : पढ़िए महावीर चक्र विजेता लेफ्टिनेंट जनरल हनूत सिंह की शौर्य गाथा

Hanut Singh Battle of Basantar 1971: 15 अगस्त का यह पावन अवसर न केवल भारत की आजादी का उत्सव मनाने का दिन है, बल्कि उन वीर सपूतों को नमन करने का क्षण भी है जिनकी बदौलत हमारी सीमाएं सुरक्षित हैं। भारतीय सेना का इतिहास अदम्य साहस, असाधारण शौर्य और ...

वेब दुनिया 15 Aug 2026 7:23 am

सऊदी अरब के नज्रान में अरामको पर किया ड्रोन अटैक, हूतियों का दावा

सूत्र का कहना है कि यह हमला सऊदी सैन्य विमानों द्वारा सादा प्रांत के उत्तर-पूर्वी हिस्से के ऊपर हवाई क्षेत्र में प्रवेश करके यमन की संप्रभुता का उल्लंघन करने के जवाब में किया गया था.

NDTV इंडिया 14 Aug 2026 11:56 pm

500 साल में एक बार ही काबू हुआ कुंभलगढ़? युद्ध से ज्यादा पानी ने बदली थी बाजी, जानिए 7 रोचक किस्से

500 साल में एक बार ही काबू हुआ कुंभलगढ़? युद्ध से ज्यादा पानी ने बदली थी बाजी, जानिए 7 रोचक किस्से

समाचार नामा 14 Aug 2026 11:20 pm

अमृतसर में भारत-पाकिस्तान मैत्री सम्मेलन:राज स्मृति बोलीं- युद्ध से जनता हारती है, हथियार कारोबारी जीतते

अमृतसर के विरसा विहार में 31वां भारत-पाकिस्तान मैत्री सम्मेलन एवं सेमिनार आयोजित किया गया। इस सम्मेलन का संयुक्त आयोजन हिंद-पाक दोस्ती मंच, फोकलोर रिसर्च अकादमी अमृतसर, पाकिस्तान-इंडिया पीपल्स फोरम फॉर पीस एंड डेमोक्रेसी और पंजाब जागृति मंच जालंधर ने किया। सम्मेलन में भारत-पाकिस्तान संबंधों, विभाजन के दर्द और दोनों देशों के बीच शांति व आपसी भाईचारे को मजबूत करने पर विचार-विमर्श हुआ। वक्ताओं ने एकमत से कहा कि युद्ध किसी भी देश की आम जनता के हित में नहीं है। दोनों देशों के लोगों की खुशहाली के लिए शांति और बातचीत का रास्ता अपनाना आवश्यक है। लखनऊ से आईं राज स्मृति ने भारत और पाकिस्तान के बीच शांति की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान लोगों ने जो दर्द और पीड़ा झेली, उसे आज की पीढ़ी को समझना चाहिए। राज स्मृति के अनुसार, युद्ध से आम लोगों को सबसे अधिक नुकसान होता है, जबकि हथियार बनाने वालों को लाभ मिलता है। राज स्मृति बोली- तीनों देश मिलकर आगे बढ़े राज स्मृति ने भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के लोगों से मिलकर शांति और प्रगति की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि आम लोग चुप रहने के बजाय शांति के लिए अपनी आवाज उठाएं, तो युद्ध की जगह अमन का माहौल बनाया जा सकता है। डॉ. सुनीलम ने भारत और पाकिस्तान के साझा इतिहास तथा संस्कृति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लोगों के बीच पुराने समय से आपसी रिश्ते रहे हैं। डॉ. सुनीलम ने विभाजन को एक बड़ी त्रासदी बताया, जिसमें लाखों लोगों को विस्थापन और हिंसा का दर्द झेलना पड़ा था। उन्होंने सुझाव दिया कि दोनों देशों को हथियारों पर भारी खर्च करने के बजाय शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और रोजगार के अवसर पैदा करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। डॉ. सुनीलम के अनुसार, खुशहाली के लिए शांति और शांति के लिए बातचीत अत्यंत आवश्यक है। डॉ. सुनीलम ने भारत और पाकिस्तान की सरकारों के बीच बातचीत की वकालत की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लोग शांति, व्यापार और आपसी संपर्क बढ़ाना चाहते हैं। लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और एक बेहतर भविष्य चाहिए, युद्ध नहीं।

दैनिक भास्कर 14 Aug 2026 8:46 pm

LIVE: राष्ट्रपति का देश के नाम संबोधन- दुनिया में युद्ध के कारण संकट, इसके बावजूद तेजी से बढ़ी हमारी अर्थव्यवस्था

स्वतंत्रता दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू राष्ट्र के नाम संबोधन कर रही हैं। द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि आज के भारत में हर कोई सपने देख सकता है और आगे बढ़ सकता है। राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया में युद्ध के कारण संकट है। इसके बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है।

खबर इंडिया टीवी 14 Aug 2026 7:08 pm

Iran Drone Attack On Erbil में America सैनिकों के होटल पर हमला | Trump | Hormuz | Middle East News

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच इराक के एरबिल से एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। दावों के मुताबिक, एरबिल में अमेरिकी सैनिकों और कॉन्ट्रैक्टर्स के ठहरने वाले एक होटल को ड्रोन हमले का निशाना बनाया गया।

लाइव हिन्दुस्तान 14 Aug 2026 6:38 pm

पाकिस्तान, सऊदी और तुर्की के ‘इस्लामिक नाटो’ वाले सपने में कितना दम? रक्षा विशेषज्ञों ने बता दी इसकी पूरी हकीकत

अंतरराष्ट्रीय राजनीति और कूटनीतिक गलियारों में इन दिनों पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच हुए एक नए रक्षा समझौते की चर्चा जोरों पर है। सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का में जुटे इन तीनों देशों के शीर्ष नेताओं ने इस ऐतिहासिक रक्षा समझौते पर मुहर लगाई है। इस समझौते की सबसे बड़ी और खास बात यह है कि इसके तहत यदि तीनों देशों में से किसी भी एक देश पर बाहरी हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर संयुक्त हमला माना जाएगा। इस प्रावधान के सामने आने के बाद से ही विश्लेषकों द्वारा इसकी तुलना पश्चिमी देशों के सैन्य गठबंधन 'नाटो' (NATO) से की जा रही है, जिसे मीडिया में 'इस्लामिक नाटो' का नाम दिया गया है।मक्का पैक्ट और नाटो के 'आर्टिकल 5' जैसी समानतातुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान के एक बयान के अनुसार, यह मक्का रक्षा समझौता तकनीकी रूप से पश्चिमी देशों के सैन्य संगठन नाटो के प्रसिद्ध 'आर्टिकल 5' की तर्ज पर तैयार किया गया है। इसका साफ मतलब यह है कि गठबंधन में शामिल किसी एक राष्ट्र की सुरक्षा पर आंच आने पर बाकी दोनों देश उसकी रक्षा के लिए मैदान में उतरेंगे। तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने यह भी जानकारी दी है कि इस समझौते के तहत तीनों देश अपनी थल सेना, नौसेना और वायु सेना को मिलाकर बड़े पैमाने पर संयुक्त सैन्य अभ्यास करेंगे। इसके साथ ही इस सैन्य गठबंधन को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए सऊदी अरब में एक 'जनरल सेक्रेटेरिएट' की स्थापना की जाएगी, जो रणनीतिक और सैन्य सहयोग को बढ़ावा देगा।रक्षा विशेषज्ञों की नजर में क्या है 'इस्लामिक नाटो' की असलियत?भले ही कागजी तौर पर इस समझौते को बेहद मजबूत और नाटो के समकक्ष बताया जा रहा हो, लेकिन देश-विदेश के कई रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसे अभी से 'नाटो' जैसा दर्जा देना बहुत बड़ी जल्दबाजी होगी। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण इन तीनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल (Interoperability) की भारी कमी है। उदाहरण के लिए, तुर्की खुद अमेरिका के नेतृत्व वाले नाटो का सदस्य है और वह पश्चिमी मानकों के हथियारों का इस्तेमाल करता है, जबकि पाकिस्तान अपनी रक्षा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर चीनी तकनीक और हथियारों पर निर्भर है। इसके विपरीत, सऊदी अरब अपनी सुरक्षा और हथियारों के लिए मुख्य रूप से अमेरिका पर निर्भर रहता है। तक्षशिला संस्थान की शोधकर्ता ऐश्वर्या सोनावणे के अनुसार, इन देशों के पास नाटो जैसा मजबूत संस्थागत ढांचा और एक-दूसरे के हथियारों के साथ आसानी से तालमेल बिठाने की तकनीकी क्षमता फिलहाल मौजूद नहीं है।आसिम मुनीर को मिल सकती है कमांडर की बड़ी भूमिका?इस नए गठबंधन को लेकर सामने आ रही रिपोर्ट्स में यह दावा भी किया जा रहा है कि पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को इस समूह में एक बहुत बड़ी और अहम जिम्मेदारी मिल सकती है। तुर्की के रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान के संकेतों के मुताबिक, 'मक्का संयुक्त रक्षा समझौते' की देखरेख करने वाली गवर्निंग बॉडी में तीनों देशों के रक्षा और विदेश मंत्रियों के साथ-साथ उनके सेना प्रमुख भी शामिल होंगे, जिसमें आसिम मुनीर 'इस्लामिक नाटो' के कमांडर की भूमिका में भी नजर आ सकते हैं। हालांकि, तमाम राजनीतिक बयानों और दावों के बावजूद ज़मीनी स्तर पर इस गठबंधन की सफलता इसके आपसी विरोधाभासों और तकनीकी दूरियों को पाटने पर ही निर्भर करेगी।

न्यूज़ इंडिया लाइव 14 Aug 2026 4:58 pm

अमेरिका के लिए 'बर्मूडा ट्रायंगल' बना होर्मुज! ईरान युद्ध में ट्रंप के 45 ड्रोन तबाह, 1.2 लाख करोड़ की भारी-भरकम चपत

मध्य पूर्व के सुलगते हालात और ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक रणनीतिक गलियारों से एक बेहद चौंकाने वाली और सनसनीखेज रिपोर्ट सामने आ रही है. दुनिया के सबसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माने जाने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) अब अमेरिकी सेना और विशेषकर रक्षा साजो-सामान के लिए आधुनिक समय का 'बर्मूडा ट्रायंगल' साबित होता दिखाई दे रहा है. डिफेंस एक्सपर्ट्स और खुफिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के साथ चल रहे अप्रत्यक्ष और सामरिक संघर्ष के दौरान अमेरिका को इस रणनीतिक क्षेत्र में भारी-भरकम और अपूरणीय क्षति उठानी पड़ी है. ईरान के खिलाफ चलाए जा रहे सैन्य अभियानों और निगरानी मिशनों के दौरान अमेरिका के अत्याधुनिक और बेहद महंगे लगभग 45 ड्रोन रहस्यमयी और खतरनाक परिस्थितियों में जमीनी या समुद्री हमलों का शिकार होकर लील लिए गए हैं. तकनीकी रूप से बेहद उन्नत और अचूक माने जाने वाले इन मानवरहित विमानों के इस तरह अचानक नेस्तनाबूद हो जाने से पेंटागन और अमेरिकी रक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है, क्योंकि यह इलाका अब अमेरिकी सैन्य शक्ति के लिए एक ऐसा चक्रव्यूह बन चुका है जिससे पार पाना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है.1.2 लाख करोड़ रुपये की चपत और अत्याधुनिक तकनीक का नुकसानइस पूरे सैन्य संघर्ष में अमेरिका को केवल रणनीतिक मोर्चे पर ही शिकस्त नहीं मिल रही है, बल्कि उसे वित्तीय रूप से भी एक हजार या दो हजार करोड़ नहीं बल्कि कुल 1.2 लाख करोड़ रुपये से अधिक की जबर्दस्त चपत लगी है. होर्मुज जलडमरूमध्य के पास जिन 45 ड्रोनों को ईरान या उसके समर्थित प्रॉक्सी समूहों द्वारा निशाना बनाया गया है, वे कोई साधारण ड्रोन नहीं थे बल्कि अत्याधुनिक जासूसी तकनीक, रडार जैमिंग क्षमताओं और मिसाइल डिफेंस प्रणालियों से लैस बेहद महंगे एयरक्राफ्ट थे. एक रिपोर्ट के अनुसार, इन ड्रोनों की कुल लागत और उनके साथ नष्ट हुए संवेदनशील सैन्य उपकरणों का बाजार मूल्य भारतीय मुद्रा के अनुसार करीब 1.2 लाख करोड़ रुपये बैठता है. अमेरिकी रक्षा बजट और टैक्सपेयर्स के पैसे से तैयार की गई इस आधुनिक सैन्य संपत्ति का यूं पानी में समा जाना या दुश्मन के हाथों तबाह हो जाना अमेरिका की तकनीकी श्रेष्ठता पर भी एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रहा है. वाशिंगटन के रणनीतिकारों के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक है क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर महंगे हथियारों का नुकसान किसी भी देश की रक्षा तैयारियों को अंदर से खोखला कर सकता है.ईरान की अचूक सामरिक रणनीति और इलेक्ट्रॉनिक युद्धक क्षमताआखिर ऐसा क्या कारण है कि दुनिया की सबसे ताकतवर सेना माने जाने वाली अमेरिकी सेना के ड्रोन होर्मुज जलडमरूमध्य के इस भू-भाग में लगातार धराशायी हो रहे हैं? रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने इस क्षेत्र में पारंपरिक युद्ध लड़ने के बजाय एक बेहद खतरनाक और आधुनिक 'इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर' यानी इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली का जाल बिछा रखा है. ईरानी सेना और उसके रक्षा इंजीनियरों ने ऐसे उन्नत जैमर्स और साइबर हथियार विकसित कर लिए हैं जो अमेरिकी ड्रोनों के सैटेलाइट नेविगेशन और जीपीएस सिग्नलों को आसानी से जाम कर देते हैं या उन्हें भटका देते हैं. जब एक बार इन ड्रोनों का संपर्क अपने कमांड सेंटर से टूट जाता है, तो वे या तो खुद क्रैश हो जाते हैं या फिर ईरानी सेना के नियंत्रण वाले क्षेत्रों में सुरक्षित उतरने के लिए मजबूर हो जाते हैं. इसके अलावा, ईरान के पास कम ऊंचाई पर उड़ने वाले इन ड्रोनों को हवा में ही नेस्तनाबूद करने वाली स्वदेशी एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइलों का एक मजबूत जखीरा भी मौजूद है. होर्मुज का यह संकीर्ण समुद्री गलिवार भौगोलिक रूप से भी ऐसा है जहां दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखना और छुपकर हमला करना बहुत आसान हो जाता है, जिसका पूरा फायदा ईरानी सुरक्षा तंत्र उठा रहा है.वैश्विक तेल आपूर्ति और अमेरिकी साख पर मंडराता गंभीर संकटहोर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी ड्रोनों की इस बड़े पैमाने पर हुई बर्बादी और 1.2 लाख करोड़ रुपये के वित्तीय नुकसान का असर केवल सैन्य क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव वैश्विक राजनीति और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है. दुनिया का कुल कच्चे तेल का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, और इस इलाके में लगातार जारी तनाव के कारण वैश्विक एनर्जी सप्लाई चेन बुरी तरह से प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है. यदि अमेरिका और ईरान के बीच यह सैन्य संघर्ष और अधिक बढ़ता है, तो दुनिया भर में क्रूड ऑयल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसका असर भारत सहित तमाम विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है. इसके अलावा, जिस प्रकार से सुपरपॉवर अमेरिका के सबसे अत्याधुनिक हथियार ईरान के इस चक्रव्यूह में फंसकर तबाह हो रहे हैं, उससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिकी सैन्य साख और उसकी मारक क्षमता की धमक को करारा झटका लगा है. दुनिया के दूसरे देश अब यह सोचने पर मजबूर हो गए हैं कि क्या आधुनिक तकनीक भी हर जगह काम आ सकती है या फिर स्थानीय भूगोल और अचूक रणनीति किसी महाशक्ति को भी घुटने टेकने पर मजबूर कर सकती है.

न्यूज़ इंडिया लाइव 14 Aug 2026 12:05 pm

Houthi Drone Attack On Saudi Arabia: सऊदी के डिफेंस सिस्टम को फोड़कर Saudi Aramco पर हूती हमला

Houthi Drone Attack On Saudi Arabia: सऊदी के डिफेंस सिस्टम को फोड़कर Saudi Aramco पर हूती हमला

लाइव हिन्दुस्तान 14 Aug 2026 12:00 pm

JD Vance का बड़ा बयान, ईरान युद्ध में अब परमाणु से ज्यादा तेल पर फोकस? अमेरिका की रणनीति में आया बड़ा बदलाव

JD Vance का बड़ा बयान, ईरान युद्ध में अब परमाणु से ज्यादा तेल पर फोकस? अमेरिका की रणनीति में आया बड़ा बदलाव

समाचार नामा 14 Aug 2026 10:45 am

18 साथियों की शहादत ने जुवैर हिल पर दिलाई जीत, कैप्टन खान बोले- कारगिल युद्ध का हर पल आज भी ताजा

18 साथियों की शहादत ने जुवैर हिल पर दिलाई जीत, कैप्टन खान बोले- कारगिल युद्ध का हर पल आज भी ताजा

समाचार नामा 14 Aug 2026 9:26 am

250 दिन से समंदर में अमेरिकी सैनिक... सुसाइड की कोशिशों के दावे के बीच अब ईरान के पास भेजा जाएगा नया युद्धपोत

US Iran War: अमेरिका का जंगी जहाज यूएसएस अब्राहम लिंकन पिछले 9 महीने से समुद्र में है, 250 दिनों से अमेरिका के इन सैनिकों ने जमीन पर कदम नहीं रखा है.

NDTV इंडिया 14 Aug 2026 8:54 am

North Korea ने US-South Korea सैन्य अभ्यास को युद्ध का पूर्वाभ्यास बताकर दी चेतावनी

उत्तर कोरिया ने अमेरिका एवं दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यास को युद्ध का पूर्वाभ्यास बताते हुए शुक्रवार को इसकी निंदा की और आत्मरक्षा के अपने अधिकार का इस्तेमाल करने की धमकी दी। अमेरिका और दक्षिण कोरिया की सेनाएं सोमवार से अपना वार्षिक व्यापक सैन्य अभ्यास शुरू करेंगी। दोनों देशों ने कहा है कि इस साल अभ्यास का दायरा पिछले वर्षों के समान होगा। दोनों सहयोगी देशों ने कहा है कि ‘उल्ची फ्रीडम शील्ड’ अभ्यास का उद्देश्य उत्तर कोरिया के खतरों से निपटने की उनकी तैयारियों को मजबूत करना है। उन्होंने दोहराया कि यह अभ्यास रक्षात्मक प्रकृति का है। उत्तर कोरिया की चेतावनी से संकेत मिलता है कि वह आगामी दिनों में हथियारों के और परीक्षण कर सकता है। उसके पड़ोसी देशों ने पिछले सप्ताह उत्तर कोरिया के पूर्वी तट से दो बैलिस्टिक मिसाइलों के प्रक्षेपण की जानकारी दी थी। उत्तर कोरिया ने इन प्रक्षेपणों पर कोई टिप्पणी नहीं की है, लेकिन विशेषज्ञों का आकलन है कि इनका संभावित उद्देश्य अमेरिका-दक्षिण कोरिया सैन्य अभ्यास का विरोध करना या हथियार प्रणालियों को उन्नत करना था। उत्तर कोरिया के विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को सरकारी मीडिया में जारी एक बयान में अमेरिका-दक्षिण कोरिया के सैन्य अभ्यास को ‘‘आक्रामक युद्ध का ऐसा पूर्वाभ्यास’’ बताया जिससे ‘‘क्षेत्र में अलग स्तर की अस्थिरता पैदा हो रही है।’’बयान में कहा गया, ‘‘किसी नए स्तर के खतरे का जवाब नए स्तर की प्रतिरोधक क्षमता से देकर सुरक्षा सुनिश्चित करना हमारा सतत सिद्धांत है।’’उत्तर कोरिया ने कहा कि वह ‘‘किसी भी खतरे और चुनौती से निपटने के लिए वैध आत्मरक्षा के अधिकार का जिम्मेदारी और दृढ़ता से इस्तेमाल करके दुश्मनों के प्रति अपना रुख और स्पष्ट रूप से जाहिर करेगा।’’उत्तर कोरिया ने यह भी कहा कि यह अभ्यास ‘‘पिछले साल की तुलना में कहीं अधिक उकसावे वाला और खतरनाक’’ होगा। हालांकि, दक्षिण कोरिया एवं अमेरिका ने ऐसा कुछ नहीं कहा है।

प्रभासाक्षी 14 Aug 2026 8:50 am

पाकिस्तान, सऊदी और तुर्की के ‘इस्लामिक नाटो’ वाले सपने में कितना दम? एक्सपर्ट ने बता दी हकीकत

खबर है कि पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख आसिम मुनीर को इस संगठन में बड़ा रोल मिल सकता है। तुर्की के रक्षा मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक मुनीर 'इस्लामिक नाटो' के कमांडर की भूमिका में नजर आ सकते हैं।

लाइव हिन्दुस्तान 14 Aug 2026 7:05 am

हैदराबाद की कंपनी से 22 लाख वसूली का आदेश:यूनीफॉर्म रंगने थान भेजे थे, 60 हजार मी. कपड़ा कम लौटाया बदले में भेजी कतरन

हथकरघा संघ स्कूल यूनिफॉर्म की रंगाई में बड़ा घोटाला फूटा है। यहां से लाखों मीटर थान कपड़ा डाई कराने हैदराबाद भेजा गया। वहां से तैयार थान के साथ कतरनें भी रंगकर भेज दी गईं। करीब छह माह तक यह गड़बड़ी पकड़ में नहीं आई, क्योंकि जिन लोगों को कपड़े की जांच करनी थी, उन्होंने करीब 60 हजार मीटर कपड़े के बंडल खोलकर देखा ही नहीं और सही होने की रिपोर्ट दे दी। बाद में गोदाम प्रभारी ने अफसरों को बताया कि भेजा गया कपड़ा हथकरघा संघ का नहीं है। इसके बाद हड़कंप मचा। आनन-फानन में जांच कमेटी बनाई गई। जांच में हथकरघा से अलग कपड़ा होने की पुष्टि हुई। मामले में तत्कालीन गोदाम प्रभारी रामकिशुन देवांगन को निलंबित कर दिया गया, जबकि तकनीकी कर्मचारी की सेवा समाप्त कर दी गई। मारुति कोटेक्स लिमिटेड, हैदराबाद से 22.42 लाख रुपए की वसूली के निर्देश दिए गए हैं। फर्जीवाड़ा पिछले साल 2025-26 शिक्षा सत्र के लिए बांटे गए यूनीफार्म में किया गया है। हाथकरघा संघ ने जेम पोर्टल के जरिए निविदा कर मारुति कोटेक्स को डाईंग, प्रोसेसिंग और प्रिंटिंग का काम दिया था। इसके लिए 65.06 लाख मीटर ग्रे कपड़ा भेजा गया। कंपनी ने 63.16 लाख मीटर फ्रेश यानी थान कपड़ा यूनीफार्म के रंग में रंगकर लौटाया। इसके साथ 1.90 लाख मीटर कटपीस, सेकंड क्लास, मिस प्रिंट और वेस्टेज भी भेजा गया। इसके अलावा 60 हजार मीटर से ज्यादा कपड़ा कतरन यानी छोटे छोटे टुकड़ों वाला दे दिया। अफसरों ने इसकी जांच नहीं की। हर साल 140 करोड़ का स्कूल ड्रेस, 345 समितियां बनाती हैं 60 लाख मीटर थान राज्य के करीब 39 हजार स्कूलों में पढ़ने वाले 50 लाख से अधिक छात्रों को हर साल यूनिफॉर्म बांटी जाती है। इस पर करीब 140 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। हाथकरघा संघ पहले यूनीफार्म के लिए धागे खरीदता है। ये धागे राज्य की 345 बुनकर समितियों को दिए जाते हैं। समितियां इन्हीं धागों को करीब 60 लाख मीटर थान में बदलती हैं। धागे ग्रे रंग के होते हैं, इसलिए तैयार थान भी ग्रे रहता है। इसके बाद इसे सरकारी स्कूलों की यूनिफॉर्म के तय रंग में रंगने के लिए भेजा जाता है। हैदराबाद की जिस कंपनी को पिछले साल कपड़ा भेजा गया था, वह पिछले 10-12 साल से डाई यानी यूनिफॉर्म के रंग में कपड़ा रंगने का काम कर रही है। जिन्हें जांच करनी थी, उन्होंने बंडल खोलकर भी नहीं देखा: थान वाले कपड़े और उसी कपड़े की छोटी-छोटी कतरनों की कीमत में खासा अंतर होता है। कतरन से पैंट-शर्ट सिलने पर फिनिशिंग नहीं आती। लाइनिंग और चेक्स वाले कपड़े में डिजाइन भी बिगड़ जाती है। इसलिए कतरन कम कीमत की होती है। इसी वजह से हैदराबाद से यूनिफॉर्म के रंग में रंगकर आने वाले थान की तकनीकी जांच कराई जाती है। लेकिन पिछले सत्र में तकनीकी एक्सपर्ट और गोदाम प्रभारी ने कतरन कपड़े के बंडल को खोलकर कपड़ा देखा ही नहीं। करीब छह माह बाद अचानक अफसरों को बताया गया कि करीब 60 हजार मीटर कपड़े के बंडल खोले ही नहीं गए थे। इसके बाद संघ में हड़कंप मचा और जांच कमेटी बनाई गई। कमेटी की जांच में कतरन होने की पुष्टि हुई। एजेंसी ने पेनाल्टी देने से किया इनकारसंघ की ओर से गोदाम प्रभारी व तकनीकी स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई करने के बाद हैदराबाद की फर्म को वसूली को नोटिस भेजा जरूर है लेकिन एजेंसी ने पेनाल्टी के पैसे देने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने थान वाले कपड़े ही रंगकर भेजे हैं। गोदाम में गड़बड़ी हुई होगी। अफसरों का कहना है कि पेनाल्टी की पैसे नहीं मिले तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

दैनिक भास्कर 14 Aug 2026 5:30 am

आईआरजीसी का दावा : वर्षों तक युद्ध चले, तब भी दुश्मनों पर मिसाइलें दागता रहेगा ईरान

इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (IRGC) के प्रमुख कमांडर के एक वरिष्ठ सलाहकार मोहम्मद रज़ा नक़दी ने एक इंटरव्यू में बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा है कि हालिया संघर्ष ने यह साबित कर दिया है कि अमेरिकी सेना उतनी ताकतवर नहीं है, जितना ईरान उसे पहले समझता था। उन्होंने दो टूक कहा कि अगर यह संघर्ष कई वर्षों तक भी खिंचता है, तब भी ईरान अपने दुश्मनों के ठिकानों पर मिसाइलें बरसाना जारी रखेगा।

खास खबर 13 Aug 2026 11:53 pm

मक्का समझौता कैसे करेगा काम, तुर्की ने सऊदी अरब और पाकिस्तान को लेकर किया खुलासा

मंत्रालय ने यह भी कहा कि समझौते के तहत संयुक्त सैन्य अभ्यास की योजना भी बनाई जा रही है, और रक्षा उद्योग में संयुक्त उत्पादन और टेक्नोलॉजी शेयरिंग जैसे सहयोग भी इसमें शामिल हो सकते हैं.

NDTV इंडिया 13 Aug 2026 11:50 pm

14 लाख सैनिक, 6000 टैंक, 3400 विमान... पाकिस्तान-सऊदी-तुर्की का ये 'इस्लामिक नाटो' कितना मजबूत है?

अल जजीरा के एक विश्लेषण के अनुसार, सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की 'मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट' के तहत अपने सैन्य सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। इस समझौते के तहत तीनों देश मिलकर लगभग 14 लाख सक्रिय सैन्य कर्मियों, 3,400 से ज्यादा विमानों और 6,000 से अधिक टैंकों को एक साथ ला रहे हैं।7 अगस्त को हुआ यह समझौता अब केवल एक राजनीतिक घोषणा से कहीं आगे बढ़ चुका है। तीनों देश एक ऐसी संयुक्त व्यवस्था बनाने की योजना बना रहे हैं जिसमें उनके रक्षा मंत्री, विदेश मंत्री और सैन्य प्रमुख शामिल होंगे। इसके अलावा, तीनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास भी किए जाएंगे। आने वाले समय में यह सहयोग रक्षा उपकरण बनाने और सैन्य तकनीक साझा करने तक भी बढ़ सकता है।वहीं, इस समझौते को उभरते हुए इस्लामिक NATO के तौर पर देखा जा रहा है, क्योंकि इसमें सामूहिक सुरक्षा का प्रावधान है, जिसके तहत किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमले को सभी पर हमला माना जाएगा। लेकिन यह व्यवस्था अभी NATO-जैसी एकीकृत सैन्य गठबंधन बनने से काफी दूर है, क्योंकि किसी भी सदस्य देश पर हमला होने की स्थिति में बाकी देश किस तरह सैन्य मदद करेंगे, इसे लेकर अभी कोई निश्चित नियम तय नहीं किया गया है।तीनों देशों का मिलिट्री ग्रुप कितना ताकतवर है?अल जजीरा की ओर से 2026 ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स के हवाले से बताए गए आंकड़े इनकी मिली-जुली मिलिट्री ताकत का पैमाना दिखाते हैं। सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के पास कुल मिलाकर लगभग 14 लाख एक्टिव सैनिक, 3,415 मिलिट्री एयरक्राफ्ट, 6,046 टैंक और 344 नेवल एसेट्स (नौसेना के संसाधन) हैं।एक्टिव मिलिट्री मैनपावर में पाकिस्तान का हिस्सा सबसे ज्यादा है, जिसके पास लगभग 6,60,000 सैनिक हैं। जबकि तुर्की के पास लगभग 4,81,000 और सऊदी अरब के पास लगभग 2,47,000 सैनिक हैं।वहीं, इन तीनों देशों में टैंकों का सबसे बड़ा बेड़ा भी पाकिस्तान के पास है, जिसके पास लगभग 2,677 टैंक हैं। इसके बाद तुर्की (2,284 टैंक) और सऊदी अरब (1,085 टैंक) का नंबर आता है।एयरक्राफ्ट के मामले में भी पाकिस्तान सबसे आगे है, जिसके पास लगभग 1,397 मिलिट्री एयरक्राफ्ट हैं। जबकि तुर्की के पास लगभग 1,101 और सऊदी अरब के पास 917 एयरक्राफ्ट हैं।नौसेना के ताकत की बात करें तो, इसका हिसाब-किताब अलग है। तुर्की के पास 192 नेवल एसेट्स हैं, जबकि पाकिस्तान के पास 120 और सऊदी अरब के पास 32 हैं। वहीं, तीनों देशों के पास कुल मिलाकर 33 फ्रिगेट, 24 कार्वेट और 22 सबमरीन हैं।सऊदी अरब के पास सबसे ज्यादा पैसा हैहालांकि, सिर्फ मिलिट्री के आंकड़ों से पूरी बात समझ नहीं आती।हालांकि, सिर्फ सैन्य संख्या से तीनों देशों की पूरी ताकत का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए रक्षा बजट बजट भी बहुत भी जरूरी है, जिसमें सऊदी अरब इन तीनों देशों से काफी आगे है।अल जजीरा के आंकड़ों के मुताबिक, इन तीनों देशों में सऊदी अरब का डिफेंस बजट सबसे ज्यादा है। 2026 में उसका अनुमानित डिफेंस खर्च लगभग 63.9 अरब डॉलर है, जबकि तुर्की का खर्च 51.4 अरब डॉलर और पाकिस्तान का सिर्फ 9.1 अरब डॉलर है।यह अंतर इस्लामाबाद के लिए अहम है, क्योंकि उसे लगातार आर्थिक दबावों का सामना करना पड़ रहा है और वह बाहरी आर्थिक मदद पर बहुत ज्यादा निर्भर है।फिर भी, इस समझौते से पाकिस्तान को सऊदी अरब के साथ रक्षा संबंध मजबूत करने और साथ ही अपने रक्षा उद्योग के लिए नए बाजार तलाशने का मौका मिलता है।एकेडमिक और सिक्योरिटी एनालिस्ट एंड्रियास क्रीग ने अल जजीरा को बताया कि सऊदी अरब पूंजी, भौगोलिक स्थिति, इंफ्रास्ट्रक्चर और राजनीतिक रूप से लोगों को साथ लाने की क्षमता का योगदान देता है, जबकि तुर्की लगातार बेहतर होते रक्षा-औद्योगिक आधार, ड्रोन, मिसाइल, सेंसर, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, नौसैनिक सिस्टम और NATO-आधारित सैन्य विशेषज्ञता लाता है।उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का योगदान मैनपावर, एक बड़ी पेशेवर सैन्य व्यवस्था, ऑपरेशनल अनुभव, रक्षा उत्पादन और परमाणु क्षमता है।सऊदी अरब को पाकिस्तान और तुर्की से क्या मिलता है?रियाद के लिए, यह समझौता अमेरिका पर उसकी लंबे समय से चली आ रही निर्भरता के अलावा सुरक्षा का एक और जरिया देता है।ईरान और उसके सहयोगियों से जुड़े बार-बार होने वाले क्षेत्रीय संघर्षों और हमलों के बीच, सऊदी अरब ने अपनी सुरक्षा साझेदारियों में विविधता लाने की कोशिश की है। तुर्की का रक्षा उद्योग रियाद को ड्रोन, मिसाइल और अन्य सैन्य तकनीकें उपलब्ध कराता है, जबकि पाकिस्तान एक बड़ा सैन्य ढांचा और परमाणु प्रतिरोध क्षमता प्रदान करता है।अमेरिकी रक्षा विभाग में अरब प्रायद्वीप मामलों के पूर्व निदेशक डेविड डेस रोशेस ने अल जजीरा को बताया कि इस समझौते से सऊदी अरब को पश्चिमी देशों से हथियारों के निर्यात को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच अपने रक्षा आपूर्तिकर्ताओं में विविधता लाने में मदद मिल सकती है।क्या पाकिस्तान सच में सऊदी अरब के लिए लड़ेगा?यहीं पर 'सामूहिक सुरक्षा' वाली शर्त की सबसे बड़ी परीक्षा हो सकती है।समझौते के मुताबिक, अगर किसी एक सदस्य पर हमला होता है, तो उसे तीनों पर हमला माना जाएगा। लेकिन इसमें NATO के आर्टिकल 5 की तरह तुरंत सैन्य कार्रवाई करने की कोई बात नहीं कही गई है।यह फर्क पाकिस्तान के लिए इसलिए अहम है क्योंकि इस्लामाबाद के ईरान के साथ संबंध हैं और वह बड़े मिडिल ईस्ट संघर्ष में खुद को मध्यस्थ के तौर पर पेश करने की कोशिश करता रहा है।इसलिए सवाल यह है कि अगर सऊदी अरब पर सीधे हमला होता है, तो क्या पाकिस्तान सच में ईरान के खिलाफ सेना भेजेगा?अगर हम पहले की घटनाओं को देखें तो, पता चलता है कि इस्लामाबाद किसी आक्रामक संघर्ष में सीधे शामिल होने के बजाय कूटनीतिक या रक्षात्मक भूमिका निभाना पसंद कर सकता है।क्या यह अमेरिका के नेतृत्व वाले सुरक्षा ढांचे के लिए चुनौती है?इस समझौते का असर सिर्फ इन तीन देशों तक ही सीमित नहीं रहेगा।पाकिस्तान अमेरिका का सहयोगी है और उसे अमेरिकी सुरक्षा सहायता मिलती है। सऊदी अरब अमेरिकी सैन्य उपकरणों के सबसे बड़े खरीदारों में से एक है, जबकि तुर्की के पास अमेरिका के बाद NATO की दूसरी सबसे बड़ी सेना है।हार्डकैसल एडवाइजरी के जैद एम. बेलबागी ने अल जजीरा को बताया कि पाकिस्तान को अमेरिकी मदद मिलती है, सऊदी अरब अमेरिकी सैन्य उपकरणों का सबसे बड़ा विदेशी खरीदार है, और तुर्की के पास अमेरिका के बाद NATO की दूसरी सबसे बड़ी सेना है।ऐसे में अमेरिका के तीन प्रमुख साझेदारों को शामिल करते हुए एक अलग सुरक्षा व्यवस्था का उभरना, क्षेत्र में तेजी से बदलते रणनीतिक समीकरणों में एक नई परत जोड़ सकता है।क्या मिस्र इस समझौते में शामिल हो सकता है?यह सुरक्षा समझौता आगे चलकर और देशों तक फैल सकता है। तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने खुले तौर पर मिस्र के इस समझौते में शामिल होने का समर्थन किया है। उन्होंने मिस्र को इसका “स्वाभाविक साझेदार” बताया है।मिस्र की मजबूत सैन्य ताकत और उसकी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति, खासकर स्वेज नहर पर उसका नियंत्रण, उसे इस गठबंधन के लिए एक अहम सदस्य बना सकता है।हालांकि, मिस्र को इस तरह के सामूहिक रक्षा समझौते में शामिल होने से पहले कई बातों पर विचार करना होगा। इनमें अमेरिका के साथ उसके संबंध, मौजूदा सैन्य गठबंधन और क्षेत्र में उसकी दूसरी जिम्मेदारियां शामिल हैं।फिलहाल, अभी मुख्य ध्यान इस बात पर है कि क्या सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की अपनी बड़ी संयुक्त सैन्य क्षमताओं को एक कारगर सुरक्षा तंत्र में बदल सकते हैं।पाकिस्तान के लिए यह बात खास तौर पर अहम हो सकती है। क्योंकि यह देश इस समूह में सबसे ज्यादा सैनिक बल और परमाणु क्षमता का योगदान देता है, लेकिन इसका रक्षा बजट अपेक्षाकृत कम है और आर्थिक रूप से इसकी निर्भरता बनी हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि सैन्य कर्मियों और रणनीतिक प्रतिरोध के अलावा यह कितना योगदान दे सकता है।यह भी पढ़ें:भारत से सीमा विवाद के बीच नेपाल का बड़ा कबूलनामा! क्या गायब हो गए 210 साल पुरानी सुगौली संधि के असली कागज?

ज़ी न्यूज़ 13 Aug 2026 9:46 pm

Trump Secret Flight ऑपरेशन में किस Missile से हमला कर सकता था Iran,खुलासा |Turkey | manpad missile

Trump Secret Flight ऑपरेशन में किस Missile से हमला कर सकता था Iran,खुलासा |Turkey

लाइव हिन्दुस्तान 13 Aug 2026 8:34 pm

मणिपुर ने 135वां ‘पैट्रियट्स डे’ मनाया, 1891 के युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि दी

इंफाल, 13 अगस्त . मणिपुर ने Thursday को 135वां ‘पैट्रियट्स डे’ (देशभक्त दिवस) मनाया. यह दिन उन लोगों की याद में मनाया गया, जिन्होंने 1891 के एंग्लो-मणिपुर युद्ध के दौरान ब्रिटिश शासन का विरोध करते हुए अपनी जान कुर्बान कर दी थी. मणिपुर के गवर्नर अजय कुमार भल्ला, Chief Minister युमनाम खेमचंद सिंह, डिप्टी सीएम ... Read more

डेली किरण 13 Aug 2026 6:52 pm

मणिपुर ने 135वां 'पैट्रियट्स डे' मनाया, 1891 के युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि दी

मणिपुर ने 135वां 'पैट्रियट्स डे' मनाया, 1891 के युद्ध के शहीदों को श्रद्धांजलि दी

समाचार नामा 13 Aug 2026 6:43 pm

होर्मुज के कारण इराक में कैश की कमी, सरकारी कर्मचारियों को भी नहीं मिल पा रही सैलरी

बगदाद स्थित थिंक टैंक 'अल बयान सेंटर' के लिए अगस्त में जारी एक रिपोर्ट में इराकी अर्थशास्त्री अली अल-रावी ने तर्क दिया कि यह एक गंभीर संकट है, जो सिर्फ तेल क्षेत्र तक ही सीमित नहीं है.

NDTV इंडिया 13 Aug 2026 6:06 pm

अमेर‍िकी खुफ‍िया जानकारी को अराघची ने बताया फर्जी, बोले-पहले गलती की तो शुरू हुआ युद्ध

नई द‍िल्‍ली, 13 अगस्त . ईरान के व‍िदेश मंत्री सैयद अब्‍बास अराघची ने एक बार फ‍िर अमेर‍िका प्रशासन पर न‍िशाना साधते हुए अमेर‍िका की खुफिया जानकारी पर सवाल खड़े क‍िए. मौजूदा हालातों के लिए अराघची ने अमेर‍िका की खुफिया जानकारी की गलत‍ियों को ज‍िम्‍मेदार ठहराया. अराघची ने सोशल मीड‍िया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पोस्‍ट में ल‍िखा, ”अमेरिका ... Read more

डेली किरण 13 Aug 2026 4:06 pm

23 साल बाद इराक से अमेरिकी सैनिकों की होगी विदाई! सद्दाम हुसैन से शुरू हुआ मिशन अब होगा खत्म

23 साल बाद इराक से अमेरिकी सैनिकों की होगी विदाई! सद्दाम हुसैन से शुरू हुआ मिशन अब होगा खत्म

समाचार नामा 13 Aug 2026 1:24 pm

अल-नीनो का असर, नदी का पानी घटा तो निकला हिटलर का युद्धपोत

डानुबे नदी का पानी घटने से 1944 में डूबा जर्मन युद्धपोत फिर दिखाई देने लगा है. सर्बिया में सामने आया यह मलबा यूरोप में बढ़ती गर्मी और सूखे के बीच नदियों के घटते जलस्तर की तस्वीर दिखाता है.

आज तक 13 Aug 2026 12:26 pm

Houthi Attack On Saudi Arabia: हूतियों ने किया सऊदी पर हमला, Islamic NATO पर उठे सवाल | MBS

Houthi Attack On Saudi Arabia: हूतियों ने किया सऊदी पर हमला, Islamic NATO पर उठे सवाल | अब सवाल उठ रहा है कि क्या जाजान हमला इस नए ‘इस्लामिक NATO’ की पहली बड़ी परीक्षा है?

लाइव हिन्दुस्तान 13 Aug 2026 10:35 am

रातापानी के जंगलों में दफन द्वितीय विश्व युद्ध का राज:यहां लाए गए थे युद्धबंदी, जो शहीद हुए, आज भी यहीं हैं दफन

द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945) की गूंज सिर्फ यूरोप और अफ्रीका तक नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के देलावाड़ी के जंगलों तक भी पहुंची थी। रातापानी टाइगर रिजर्व के घने जंगलों में युद्ध का ऐसा इतिहास दफन है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। यहां युद्ध के दौरान उत्तरी अफ्रीका में पकड़े गए दो हजार से अधिक इटैलियन सैनिकों को युद्धबंदी बनाकर रखा गया था। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान उत्तरी अफ्रीका के रेगिस्तानों में मित्र देशों (ब्रिटिश और ऑस्ट्रेलियाई सेना) और धुरी राष्ट्रों (इटली व जर्मनी) के बीच जंग चल रही थी। दिसंबर 1940 में मित्र देशों की सेना ने हमला कर लीबिया के टोब्रुक बंदरगाह पर कब्जा कर करीब 2 लाख इटैलियन सैनिकों को युद्धबंदी बना लिया। इनमें से 68 हजार कैदियों को भारत लाया गया। 1941 की शुरुआत में जब जहाज बॉम्बे पहुंचे तो विदेशी सैनिकों का शहर में जुलूस निकाला गया। इसके बाद उन्हें देश के 29 युद्धबंदी कैंपों में भेजा गया। इनमें से 21,975 इटैलियन कैदियों को तत्कालीन भोपाल रियासत के बैरागढ़, बुदनी और देलावाड़ी समेत 8 कैंपों में रखा गया। देखिए देलावाड़ी से खूबसूरत तस्वीरें… कैदी इतने कुशल कारीगर कि बैरक-थिएटर बनाए; जंगल के बीच शहर बसाया देलावाड़ी कैंप 146.49 एकड़ (0.59 वर्ग किमी) में फैला था। इस युद्धबंदी शिविर में उस दौरान की करीब 297 संरचनाओं के अवशेष आज भी हैं। पत्थर, ईंट और पोर्टलैंड सीमेंट से बने ये ढांचे ब्रिटिश सैन्य इंजीनियरिंग की मिसाल माने जाते हैं। पहले कैदी टेंट में रहे। बाद में बैरकें बनाई गईं। ​पहले कैदी टेंट में रहे। बाद में बैरकें बनाई। ​ कैद में भी जिंदा रही कला और संगीत...युद्धबंदी होने के बावजूद सैनिकों ने अपनी सांस्कृतिक गतिविधियां नहीं छोड़ीं। शाम होते ही शिविर में बांसुरी और मैंडोलिन की धुनें गूंजती थीं। सैनिक छोटे-छोटे संगीत समूह बनाकर प्रस्तुति देते थे। शिविर में एक थिएटर भी बनाया गया था, जहां नियमित रूप से नाटक आयोजित किए जाते थे। कला और संगीत उनके मानसिक सहारे बने रहे। बीमारी से 139 कैदियों की जान गई, ये बैरागढ़ कब्रिस्तान में दफन हैं... 10 जून 1940-25 अप्रैल 1945 1941 की वसंत ऋतु से 1944 की वसंत ऋतु तक बैरागढ़ के युद्धबंदी शिविर में हजारों इतालवी सैनिक रहे। ये वे सैनिक थे जिन्हें ब्रिटिश सेना ने दिसंबर 1940 में बंदी बनाया था। उस अवधि में बीमारियों के कारण 139 युद्धबंदियों की मृत्यु हो गई। उनके लिए इसी स्थान (बैरागढ़) पर एक युद्ध कब्रिस्तान बनाया गया। हमारे जाने के बाद यह कब्रिस्तान बिना सुरक्षा के रह गया और असामाजिक लोगों ने इसे नुकसान पहुंचाया तथा कब्रों के पत्थर हटा दिए। बाद में भोपाल के आर्चडायोसीज़ (कैथोलिक चर्च) ने इसी स्थान पर एक नया कैथोलिक कब्रिस्तान बनाया। इतालवी युद्धबंदियों के अवशेषों को निकालकर एक सामूहिक अस्थि-कलश में सुरक्षित रखा गया। रोम, मई 2000 यह शिलालेख सिरिनो राचीती (Cirino Raciti) नाम के युद्धबंदी ने इटली की राजधानी रोम से लिखवाया था, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस इतिहास को याद रख सकें। सिरिनो उन इटैलियन युद्धबंदियों में शामिल थे, जिन्हें द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भोपाल के बैरागढ़ शिविर में रखा गया था। उन्होंने अपनी कुल पांच वर्ष की कैद में से तीन वर्ष बैरागढ़ में बिताए। बरसात में यहां 30 सेंटीमीटर तक कीचड़ भरता था। इसी से पनपी बीमारी ने इनकी जान ले ली। सुल्ताना डाकू को पकड़ने वाले फ्रेडी यंग.... जिन्होंने पुलिस अफसरों को यहां बसाया साल 1940 में देलावाड़ी स्थित इटैलियन युद्धबंदी शिविर की जिम्मेदारी न इंपीरियल पुलिस के अधिकारी और भोपाल स्टेट पुलिस के आईजी फ्रेडी यंग के पास थी। सुल्ताना डाकू को पकड़ने वाले अधिकारी के रूप में उनकी विशेष पहचान थी। शिविर के संचालन के लिए उन्होंने उत्तर प्रदेश से पुलिस अधिकारी सुखराम सिंह को बुलाया, जबकि कैंटीन, रसोई और अन्य सेवाओं के लिए हरियाणा के महेंद्रगढ़ से कई भारतीय परिवारों को यहां लाकर बसाया। युद्ध समाप्ति के बाद इटैलियन युद्धबंदी अपने देश लौट गए, लेकिन फ्रेडी यंग ने शिविर में काम करने वाले इन भारतीय परिवारों को देलावाड़ी में जमीन खरीदकर स्थायी रूप से बसने के लिए प्रेरित किया। आज गांव के अधिकांश निवासी इन्हीं परिवारों के वंशज बताए जाते हैं। ‘इंटरनेशनल वॉर मेमोरियल टूरिज्म’ की तरह विकसित करने की योजना अभी यहां केवल 297 ढांचों के खंडहर बचे हैं। मध्यप्रदेश ईको-पर्यटन विकास बोर्ड और इंटैक इस स्थल के संरक्षण और विकास की योजना पर काम कर रहे हैं। देलावाड़ी को रातापानी टाइगर रिजर्व के पर्यटन सर्किट से जोड़ने की भी तैयारी है। रातापानी सफारी के प्रस्तावित पर्यटन सर्किट में भी देलावाड़ी को शामिल किया गया है। मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक समीता राजौरा के अनुसार, इतिहास, युद्ध की विरासत और वन्यजीवों का ऐसा अनूठा संगम दुनिया में बेहद दुर्लभ है। इसी पहचान के आधार पर इसकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग की जाएगी। देलावाड़ी के द्वितीय विश्व युद्ध के युद्धबंदी शिविर को संरक्षित कर ‘इंटरनेशनल वॉर मेमोरियल’ के रूप में विकसित किया जाएगा। लक्ष्य इटली समेत यूरोपीय देशों के पर्यटकों को आकर्षित करना है। भोपाल से देलावाड़ी कैसे पहुंचें... देलवाड़ी से 3 किमी दूर... रानी कमलापति का गिन्नौरगढ़: जहां गोंड राज खत्म हुआ और भोपाल रियासत की नींव पड़ी घने सागौन के जंगल, चारों ओर गहरी खाइयां और 700 मीटर ऊंची पहाड़ी पर बसा है गिन्नौरगढ़ किला। भोपाल से 60-65 किमी दूर रातापानी टाइगर रिजर्व के बीच स्थित यह किला गोंड राजाओं, रानी कमलापति और भोपाल रियासत के इतिहास का साक्षी है। इसका निर्माण 15वीं शताब्दी में गोंड शासकों ने कराया। हालांकि यहां परमार काल के स्थापत्य अवशेष भी मिलते हैं। 15वीं शताब्दी में यह गोंडवाना साम्राज्य के प्रसिद्ध 52 गढ़ों में शामिल हुआ और 300 साल तक गोंड राजाओं का प्रमुख सैन्य व प्रशासनिक केंद्र रहा। 16वीं शताब्दी में गोंड राजा सूरज सिंह शाह ने आसपास के 750 गांवों को मिलाकर गिन्नौरगढ़ राज्य की स्थापना की। उनके पुत्र निजाम शाह ने महलों, किलेबंदी और जलाशयों का निर्माण कराया। निजाम शाह की हत्या के बाद रानी कमलापति पुत्र नवल शाह के साथ पहले गिन्नौरगढ़ आईं और फिर सुरक्षा के लिए भोपाल स्थित महल चली गईं। पति की हत्या का बदला लेने के लिए उन्होंने अफगान सरदार दोस्त मोहम्मद खान से मदद मांगी। दोस्त मोहम्मद ने आलम शाह को मार गिराया, पर बाद में गिन्नौरगढ़ पर ही कब्जे की योजना बना ली। 14 वर्षीय नवल शाह ने अफगान सेना का मुकाबला किया और सभी वीरगति को प्राप्त हुए। 1723 में रानी कमलापति ने अस्मिता की रक्षा के लिए जल समाधि ले ली, जिसे गोंड शासन के अंत का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद दोस्त मोहम्मद ने गिन्नौरगढ़ पर कब्जा किया। फिर भोपाल रियासत की स्थापना की। ऊंची पहाड़ी पर कभी नहीं होती थी पानी की कमी 700 मीटर ऊंची पहाड़ी पर बने इस किले में 35 जलकुंड और 4 तालाब हैं, जिनमें से एक बावड़ी काफी गहरी है। वर्षभर इन जलस्रोतों में पानी रहता था, इसलिए यहां पानी की कमी नहीं होती थी। ऊंची निगरानी चौकियों से सैनिक कई किमी दूर तक नजर रख सकते थे। आगे क्या? : बन रहा ‘गोंड हेरिटेज सर्किट’ लंबे समय तक किला वन विभाग के अधीन रहा। इसकी संरचनाएं जर्जर हो चुकी हैं। कई हिस्सों में तोड़फोड़ भी हुई। हाल ही में इसे राज्य-संरक्षित स्मारक घोषित कर मध्य प्रदेश पुरातत्व विभाग को सौंपा गया। यह पहली बार है जब किसी आरक्षित वन क्षेत्र के स्मारक को इस तरह राज्य संरक्षण मिला है। अब सरकार और इको-टूरिज्म बोर्ड यहां ‘गोंड हेरिटेज सर्किट’ विकसित कर रहे हैं। स्थानीय आदिवासी युवाओं को गाइड और ट्रैकिंग का प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा जाएगा। कैसे पहुंचें?... देलावाड़ी से वन विभाग की मंजूरी और अधिकृत पास लेना अनिवार्य है। वहां तक पहुंचने के लिए 2 से 4.5 किमी पैदल ट्रेक करना पड़ता है। यह बौद्ध धर्म की वह धरोहर, जिसे दुनिया की विरासत के नक्शे में होना चाहिए जब भी बौद्ध धरोहर की बात होती है, सबसे पहले सांची का नाम आता है। लेकिन सांची से करीब 22 किमी और विदिशा से 12 किमी दूर रायसेन जिले की पहाड़ियों में एक ऐसी धरोहर है, जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। यह है मुरेल खुर्द (भोजपुर) स्तूप परिसर। पुरातत्व सर्वेक्षण के अनुसार यहां छोटे-बड़े मिलाकर करीब 40 बौद्ध स्तूप हैं। ये तीन समूहों और चार अलग-अलग ऊंचे प्लेटफॉर्म पर बने हैं। संख्या के लिहाज से यह मध्य भारत के सबसे बड़े स्तूप समूहों में शामिल है। बौद्ध परंपरा में स्तूप तीन प्रकार के माने जाते हैं- शारीरिक, पारिभोगिक और संकल्प स्तूप। इनमें शारीरिक स्तूप सबसे महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि इनमें बुद्ध, उनके प्रमुख शिष्यों या बौद्ध भिक्षुओं के पवित्र अवशेष रखे जाते हैं। इतिहासकारों के अनुसार मुरेल खुर्द में बड़ी संख्या में ऐसे शारीरिक स्तूप हैं, जिनमें भिक्षुओं के अवशेष मिले हैं। यहां संकल्प स्तूप भी हैं, जिन्हें श्रद्धालुओं ने दान स्वरूप बनवाया था। ये अहम क्यों? भारत के बौद्धिस्ट सर्किट का हिस्सा है। खुदाई में मिले दुर्लभ अवशेष और मोती खुदाई में स्टीटाइट के अस्थि-पात्र, भिक्षुओं के अवशेष, स्फटिक और मोती मिले। यहां ब्राह्मी लिपि के शिलालेखों में दानदाताओं व भिक्षु संघों का उल्लेख भी है। कुछ शिलालेखों में दानदाताओं के व्यवसाय भी दर्ज हैं। पहाड़ी पर एक व्यवस्थित बौद्ध विहार भी था, जिस पर बुद्ध का मंदिर था। यहां भगवान बुद्ध की एक प्रतिमा भी थी, जो आज सांची के पुरातत्व संग्रहालय की गैलरी में रखी है। आज क्या? : बौद्ध सर्किट विकसित हो रहा, पर मुरेल खुर्द की धरोहर के लिए प्रस्ताव नहीं केंद्र और मप्र सरकार स्वदेश दर्शन योजना के तहत पूरे बौद्धिस्ट सर्किट को विकसित कर रही हैं, पर मुरेल खुर्द के लिए अलग यूनेस्को मान्यता का कोई औपचारिक प्रस्ताव अभी तक नहीं भेजा गया है। (पार्ट 8 में पढ़िए नई कहानी)

दैनिक भास्कर 13 Aug 2026 8:30 am

इजरायली इनपुट पर CIA को था शक, फिर भी तुर्की से ट्रंप का गुपचुप 'रेस्क्यू'

तुर्की में NATO समिट के दौरान ट्रंप को ईरानी हमले से बचाने के लिए जिस गुप्त ऑपरेशन के तहत दूसरे विमान में शिफ्ट किया गया था, उस पर अब नई जानकारी सामने आई है. इजरायल से मिले ईरानी हमले के इनपुट को CIA ने कम भरोसे वाला माना था, लेकिन सीक्रेट सर्विस ने जोखिम नहीं लिया.

आज तक 13 Aug 2026 8:27 am

Pakistan का दावा, Saudi Arabia और तुर्किये से रक्षा समझौता केवल रक्षात्मक प्रकृति का

(सज्जाद हुसैन)इस्लामाबाद, 12 अगस्त पाकिस्तान ने बुधवार को कहा कि पिछले सप्ताह उसने सऊदी अरब और तुर्किये के साथ जिस त्रिपक्षीय रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, वह “पूरी तरह रक्षात्मक प्रकृति का है’’। विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने यहां संवाददाता सम्मेलन के दौरान समझौते को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब में कहा, ‘‘यह समझौता पाकिस्तान की जनता की इच्छाओं के अनुरूप है।’’उन्होंने कहा कि यह समझौता ‘‘पूरी तरह रक्षात्मक प्रकृति का है, जो सदस्य देशों के लिए खतरों और सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए एकजुट होकर प्रयास करने की अनुमति देता है।’’अंद्राबी ने हालांकि अपनी टिप्पणी में किसी भी देश का नाम नहीं लिया। इस सप्ताह की शुरुआत में पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इस्हाक डार ने भी कहा था कि यह रक्षा समझौता “किसी भी देश के खिलाफ लक्षित नहीं है’’। पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने सात अगस्त को ‘‘मक्का संयुक्त रक्षा समझौते’’ पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच हुआ। तीनों देशों द्वारा जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है, ‘‘रक्षा समझौते का उद्देश्य किसी भी आक्रामक कार्रवाई के खिलाफ सामूहिक प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना है। इसमें यह प्रावधान है कि तीनों देशों में से किसी एक पर किया गया कोई भी सशस्त्र हमला, तीनों देशों पर हमला माना जायेगा।’’भारत ने मंगलवार को कहा था कि वह पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये के बीच हुए रक्षा समझौते के देश की राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय शांति और स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन कर रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक प्रेस वार्ता में कहा था, ‘‘जहां तक इस समझौते का सवाल है, हम भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिहाज से इसके प्रभावों का आकलन कर रहे हैं।’’उन्होंने कहा था, ‘‘भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस संबंध में सभी जरूरी कदम उठाएगा।

प्रभासाक्षी 13 Aug 2026 8:22 am

Trump Secret Flight ऑपरेशन क्यों करवाया गया,बड़ा खुलासा |Turkey | NATO Summit| Iran | Israel

Trump Secret Flight ऑपरेशन क्यों करवाया गया,बड़ा खुलासा |Turkey | NATO Summit| Iran | Israel

लाइव हिन्दुस्तान 12 Aug 2026 11:49 pm

Houthi Attack On Saudi Arabia: समंदर से लेकर तेल ठिकाने और अब सऊदी सेना पर हमले | MBS

यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित बलों के बीच तनाव एक बार फिर बेहद गंभीर हो गया है। हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल यह्या सारी के दावे के मुताबिक, ताइज़ प्रांत के अल-मोखा क्षेत्र और मारिब के तदावीन कैंप को बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया गया।

लाइव हिन्दुस्तान 12 Aug 2026 7:11 pm

पिछली बार 2019 में निकाली थी लॉटरी:पाक युद्ध, इमरजेंसी, बाबरी विवाद छोड़कर पहली बार 7 साल बाद कुर्सी संभालेंगे नए मेयर-सभापति

प्रदेश के निकायों के मेयर, सभापति, अध्यक्ष ज्यादातर बार पांच साल में चुने जाते रहे हैं। लेकिन पाक युद्ध, इमरजेंसी, बाबरी ढांचा विवाद के बाद पहली बार है, जब 5 की जगह 7 साल बाद नए निगम मेयर, परिषद सभापति और पालिका अध्यक्ष कुर्सी संभाल पाएंगे। 13 अगस्त को पिछली लॉटरी के ठीक 6 साल 10 माह बाद फिर से निकायों की लॉटरी निकाली जाएगी। इसके करीब 2 माह चुनाव और परिणाम में लगेंगे। उसके बाद एक माह तक निकायों में बहुमत वाले दल के पार्षद बोर्ड द्वारा नए मेयर, सभापति का चुनाव किया जाएगा। फिर नए मेयर निकाय प्रमुख कुर्सी संभालेंगे, तब तक अक्टूबर-नवंबर आ जाएगा। ऐसे में 7 साल बाद नए निकाय प्रमुख मिलेंगे। 1977 की इमरजेंसी के बाद 6 साल के अंतराल से चुनाव हुए थे। गौरतलब है कि प्रदेश में 309 निकाय हैं और उनकी आरक्षण की लॉटरी 13 अगस्त को निकाली जाएगी। वार्डों की पिछली लॉटरी 18 सितंबर, 2019 में निकाली गई थी। यह अंतराल करीब 7 साल का है।

दैनिक भास्कर 12 Aug 2026 5:30 am

Ambala News: एकतरफा कार्रवाई पर गुरमत्ता पारित, कल होगी सिख संगत की बैठक

एकतरफा कार्रवाई पर गुरमत्ता पारित, कल होगी सिख संगत की बैठक

अमर उजाला 12 Aug 2026 2:26 am

Unnao News: सऊदी अरब में मौत के 12 वें दिन आया युवक का शव, परिजन बेहाल

सऊदी अरब में मौत के 12 वें दिन आया युवक का शव, परिजन बेहाल

अमर उजाला 12 Aug 2026 1:45 am

Nainital News: नाटक में तीसरे विश्वयुद्ध के बाद का दर्द हुआ जीवंत

सिने अभिनेता निर्मल पांडे की स्मृति में उनके जन्मदिवस पर सांस्कृतिक संस्था युगमंच एवं प्रयोगांक संस्था की ओर से नाट्य महोत्सव हुआ।

अमर उजाला 12 Aug 2026 1:44 am

Trump Secret Flight: Iran के डर से ट्रक में छिपकर भागे थे ट्रम्प, अब हुआ खुलासा। Turkey NATO Summit

अमेरिका के मुताबिक इस बार ईरान ट्रंप के तुर्के दौरे पर उन्हें निशाना बनाने वाला था। इस खतरे से सूचना मिलते ही ट्रंप को बेहद फिल्मी तरीके से बचाया गया था। इस सीक्रेट ऑपरेशन को लेकर हाल ही कुछ हैरतअंगेज खुलासे हुए हैं।

लाइव हिन्दुस्तान 11 Aug 2026 3:42 pm

Road Safety:नितिन गडकरी की चेतावनी- युद्ध या बीमारी से ज्यादा जान ले रही सड़क दुर्घटनाएं, हर साल 1.8 लाख मौतें

Road Accidents Claim More Lives Than War or Disease: Nitin Gadkari Urges Action on India’s Road Safety Crisisयुद्ध या बीमारी से भी अधिक जान ले रहे हैं सड़क हादसे: नितिन गडकरी ने भारत के सड़क सुरक्षा संकट पर दी बड़ी चेतावनी

अमर उजाला 11 Aug 2026 10:53 am

Unnao News: सऊदी अरब में मौत के 11 दिन बाद घर लाया जाएगा युवक का शव

सऊदी अरब में मौत के 11 दिन बाद घर लाया जाएगा युवक का शव

अमर उजाला 11 Aug 2026 1:07 am

कतरास के छाताबाद भू-धंसान मामले में एक्शन, BCCL सीएमडी मनोज अग्रवाल समेत अधिकारियों पर केस दर्ज

छाताबाद भू-धंसान मामले में मो. अनवर अली ने बीसीसीएल के सीएमडी, जीएम व अन्य अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई है।

जागरण 11 Aug 2026 12:03 am

Houthi Attck On Saudi Arabia: पहले सऊदी फिर America का MQ-9 हुआ क्रैश, हूती बेकाबू | Bab Al Mandeb

हूती-सऊदी तनाव के बीच मिडिल ईस्ट में हालात और बिगड़ते नजर आ रहे हैं। हूतियों ने सऊदी अरब के सैन्य और तेल ठिकानों पर हमलों का दावा किया है।

लाइव हिन्दुस्तान 10 Aug 2026 11:35 am

मां हिंदुस्तानी, बाप चीनी...: अब बच्चों की पहचान पर क्यों खड़ा हुआ सवाल? 1962 के भारत-चीन युद्ध से जुड़ा मामला

बालाघाट के एक परिवार का दावा है कि 1962 युद्ध में बंदी बने चीनी सैनिक ने भारत में बसकर भारतीय महिला से शादी की थी। अब उनकी तीसरी पीढ़ी को पिता की नागरिकता और जाति संबंधी नियमों के कारण जाति प्रमाण पत्र नहीं मिल रहा।

अमर उजाला 10 Aug 2026 11:29 am

Mecca Joint Defense Agreement से पलटा Turkiye, Saudi Arabia के साथ रक्षा समझौता Iran के खिलाफ नहीं

Mecca Joint Defense Agreement से पलटा Turkiye, Saudi Arabia के साथ रक्षा समझौता Iran के खिलाफ नहीं सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए Defense Agreement को लेकर अब नया ट्विस्ट सामने आया है।

लाइव हिन्दुस्तान 9 Aug 2026 4:19 pm

ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप के जनरल की चेतावनी! 'अमेरिका अगर जंग से नहीं निकला तो...' सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?

ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप के जनरल की चेतावनी! 'अमेरिका अगर जंग से नहीं निकला तो...' सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?

समाचार नामा 8 Aug 2026 6:10 pm

Islamic NATO में Saudi Arabia, Pakistan,Turkiye आए साथ तो क्या बोला Iran ?

सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच बन रहे 'इस्लामिक नाटो' शैली के रक्षा समझौते पर ईरान ने सख्त रुख अपनाया है। तेहरान ने रियाद को चेतावनी देते हुए कहा है कि कागजी समझौते और बाहरी ताकतों पर निर्भरता सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकती।

लाइव हिन्दुस्तान 8 Aug 2026 2:38 pm

Iran America war होगी तेज, UAE, Saudi Arabia और Qatar तक फैलेगी जंग की आग! | Middle East

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अब पूरे खाड़ी क्षेत्र की चिंता बढ़ा दी है। अब तक ईरान की प्रतिक्रिया मुख्य रूप से क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों तक सीमित मानी जा रही थी, लेकिन हाल के घटनाक्रमों ने यह संकेत दिया है कि यदि टकराव और गहराया तो इसका दायरा कहीं अधिक व्यापक हो सकता है।

लाइव हिन्दुस्तान 8 Aug 2026 12:01 am

Islamic NATO में Saudi Arabia, Pakistan,Turkiye आएंगे साथ, क्या India के लिए मुश्किल। Israel

Islamic NATO में Saudi Arabia, Pakistan,Turkiye आएंगे साथ, क्या India के लिए मुश्किल। Israel

लाइव हिन्दुस्तान 7 Aug 2026 8:51 pm

Islamic NATO बनाने को लेकर डील फाइनल, Saudi Arabia, Pakistan,Turkiye जल्द करेंगे ऐलान। Israel

पश्चिम एशिया में जारी जंग और बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच संभावित त्रिपक्षीय रक्षा समझौते ने भू-राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। CNN-News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों देशों के बीच डिफेंस डील को अंतिम रूप देने की कोशिश चल रही है

लाइव हिन्दुस्तान 7 Aug 2026 11:40 am

500 साल में बस एक बार हारा कुंभलगढ़ किला, वजह युद्ध नहीं; पढ़िए मेवाड़ की आन-बान और शौर्य की अनोखी कहानी

500 साल में बस एक बार हारा कुंभलगढ़ किला, वजह युद्ध नहीं; पढ़िए मेवाड़ की आन-बान और शौर्य की अनोखी कहानी

समाचार नामा 6 Aug 2026 5:00 pm

सबसे अहम युद्ध पर किसी का ध्यान नहीं: तेजी से फैल रहे नफरत और भेदभाव, जीत तभी होगी, जब हम धरती को हारने न दें

सबसे अहम युद्ध पर किसी का ध्यान नहीं: तेजी से फैल रहे नफरत और भेदभाव, जीत तभी होगी, जब हम धरती को हारने न दें--The Most Important War We Ignore: Why Climate Change and Environmental Crisis Need Urgent Global Attention

अमर उजाला 6 Aug 2026 6:32 am

युद्ध नहीं, शांति ही मानवता का भविष्य

विश्व भर में 6 अगस्त को हिरोशिमा दिवस मनाया जाता है। यही वह दिन है, जब वर्ष 1945 में अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा शहर पर पहला परमाणु बम गिराया था। इस दिन हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी जाती है…

लाइव हिन्दुस्तान 5 Aug 2026 11:28 pm

Iran America War: ईरान ने Iraq और Kuwait बार्डर के करीब क्यों भेजे T 72 Tanks|Trump

मिडिल ईस्ट एक ऐसे ज्वालामुखी पर बैठा है जो कभी भी फट सकता है..जी हां जंग के बादल कभी भी छा सकते हैं...अमेरिका चाहे लाख मना करे...लेकिन जब तक इजरायल खित्ते में आक्रामक है तब तक जंग पूरी तरह नहीं रुक सकती..यही वजह है कि ईरान ने ्अपने टैंक इराक से लगी सरहद के करीब जमा करना शुरु कर दिए हैं…

लाइव हिन्दुस्तान 5 Aug 2026 9:30 pm

कतर से रुकी सप्लाई, फिर भी 15% कैसे बढ़ा भारत का LNG आयात? देखें कूटनीति

कूटनीति' में आज बात भारत की उस रणनीतिक चाल की, जिसने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाज़ारों को हैरान कर दिया है. जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जंग छिड़ी, तो दुनिया को लगा कि भारत में बड़ा गैस संकट आने वाला है. वजह साफ थी-भारत अपनी 60 फीसदी एलएनजी (LNG) गैस इसी समुद्री रास्ते से मंगाता था. लगा कि कतर से सप्लाई रुकते ही भारत की फैक्ट्रियां और रसोई गैस थम जाएगी. लेकिन भारत ने ऐसा कूटनीतिक मास्टरस्ट्रोक खेला कि इस पूरे संकट के बावजूद देश में एलएनजी का आयात घटने के बजाय 15 फीसदी और बढ़ गया.

आज तक 5 Aug 2026 9:56 am

ईरान-ओमान वार्ता पर कतर ने दिया अपडेट, क्या आज हो पाएगी डील?

कतर ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की भाषा तैयार हो चुकी है और उसका मसौदा अभी पक्षों के बीच साझा किया जा रहा है, जबकि कतर और ओमान वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत आसान बनाने के लिए करीबी तालमेल से काम कर रहे हैं.

आज तक 5 Aug 2026 8:27 am

कंगना के ‘जेबकतरों जैसी ड्रेस’ वाले बयान को यूजर्स ने सोनाक्षी से जोड़ा

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के मदरसों को लेकर दिए गए बयान से सियासत गरमा गई है। उन्होंने कहा कि मदरसे आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं, जिस पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

आज तक 4 Aug 2026 2:42 pm

'जेबकतरों की तरह...', कंगना ने सोनाक्षी पर किया कमेंट!

कंगना रनौत ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर बिना नाम लिए इंडस्ट्री की एक हीरोइन पर तीखा हमला किया है. यूजर्स का मानना है कंगना ने ये अटैक सोनाक्षी सिन्हा पर किया है.

आज तक 4 Aug 2026 9:36 am

Iran US War Update: महायुद्ध से डरा Saudi Arab? MBS ने Donald Trump को फोन कर दी बड़ी चेतावनी!

Iran-US War: महायुद्ध से डरा Saudi Arab? MBS ने Donald Trump को फोन कर दी बड़ी चेतावनी!

लाइव हिन्दुस्तान 4 Aug 2026 9:35 am

ईरान की चेतावनी, होर्मुज में दूसरा पासेज बना तो अमेरिकी युद्धपोत पर होगा हमला

ईरान के वरिष्ठ सलाहकार मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में तय रास्ते से अलग कोई दूसरा पासेज बनाने के लिए अगर अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए तो ईरान उन्हें निशाना बनाएगा, जबकि डोनाल्ड ट्रंप इसी बीच तेहरान के साथ बातचीत शुरू होने का दावा कर रहे हैं.

आज तक 4 Aug 2026 7:27 am

गाजा में कत्लेआम पर भड़के कतर-तुर्की-मिस्र, इजरायल नहीं रोक रहा बमबारी

कतर, मिस्र और तुर्की ने गाजा में इजरायली कार्रवाई, खासकर नागरिकों, महिलाओं, बच्चों और स्वास्थ्य ढांचे पर हमलों की कड़ी निंदा की है. इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय कानून का खुला उल्लंघन बताया है. गाजा सिटी के दक्षिण-पश्चिम में ताजा हमले में कम से कम दो लोग मारे गए हैं.

आज तक 4 Aug 2026 7:05 am

ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट

ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट-US-Iran Conflict Trigger a Global War Questions Over Trump Strategy and Rising Global Risks

अमर उजाला 4 Aug 2026 5:37 am

'दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा हमला?', ट्रंप ने ईरान पर अब किया ये ऐलान

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान की अपील के बाद उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित बड़ा हमला फिलहाल रोक दिया है. दूसरी तरफ तेहरान ने ट्रंप के दावे को खारिज करते हुए सैन्य सतर्कता बनाए रखने, सऊदी अरब और पाकिस्तान से तेज संपर्क बढ़ाने और यह साफ करने का संदेश दिया है कि क्षेत्रीय सुरक्षा, जवाबी तैयारी और राजनीतिक समाधान अब साथ साथ चलेंगे.

आज तक 3 Aug 2026 8:33 am

युद्ध, डर और उम्मीद... आखिर क्यों गढ़े गए सुपरहीरो?

सुपरहीरो कभी भी सिर्फ असाधारण शक्तियों वाले किरदार नहीं रहे. वे हर दौर के समाज की इच्छाओं, आशंकाओं और सपनों का प्रतिबिंब रहे हैं. वे हमें याद दिलाते हैं कि असली ताकत केवल असाधारण शक्तियों में नहीं बल्कि सही समय पर सही फैसला लेने, कमजोरों के साथ खड़े होने और दूसरों के लिए जोखिम उठाने के साहस में होती है.

आज तक 3 Aug 2026 7:21 am

इराक के सुलेमानिया पर ईरानी ड्रोन ने बरपाया कहर, सामने आया Video

इराक के सुलेमानिया में ईरान-विरोधी समूहों के एक ठिकाने को ड्रोन हमले में निशाना बनाया गया है. माना जा रहा है कि ये हमला ईरान ने किया है जिसमें अलगाववादी समूहों के मुख्यालय पर दो प्रोजेक्टाइल सीधे जाकर लगे. ईरान ने ड्रोन से ये हमला किया. देखें वीडियो.

आज तक 2 Aug 2026 11:34 pm

मिडिल ईस्ट में महायुद्ध रोकने में जुटा सऊदी: क्राउन प्रिंस ने अमेरिका भेजा रक्षा मंत्री

सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया है. सऊदी अरब की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह शांति और स्थिरता बनी रहे. साथ ही रक्षा मंत्री को दूत बनाकर व्हाइट हाउस भी भेजा गया है.

आज तक 2 Aug 2026 9:34 pm

US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?

US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?

लाइव हिन्दुस्तान 2 Aug 2026 1:34 pm

Iran US War: Iran ने जारी कर दी अपनी Hitlist, सऊदी, UAE और कतर पर क्यों मंडराया खतरा?

पश्चिम एशिया (Middle East) का युद्ध अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, जहां से तीसरे विश्व युद्ध की आहट सुनाई देने लगी है। ईरान (Iran) ने अमेरिका (US) और उसके सहयोगी देशों को खुली चेतावनी दी है.

लाइव हिन्दुस्तान 2 Aug 2026 11:25 am

मिडिल ईस्ट में बढ़ा खतरा! अमेरिका ने अपने नागरिकों को जारी की चेतावनी

मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने लोगों से सतर्क रहने, यात्रा को लेकर सावधानी बरतने और हालात पर नजर रखने की सलाह दी है.

आज तक 1 Aug 2026 11:31 pm

ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' पहल से खत्म होगा गाजा युद्ध? देखें US TOP-10

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'बोर्ड ऑफ पीस' पहल को लेकर साइप्रस में बैठक हुई है. यह बोर्ड गाजा युद्ध खत्म करने और पुनिर्माण योजना की निगरानी के लिए बनाया गया है. ट्रंप के कई देशों के नेताओं को इसमें शामिल होने का मौका दिया है. हालांकि कुछ देशों ने समर्थन किया है. वहीं कुछ ने इसकी भूमिका और और संयुक्त राष्ट्र पर असर को लेकर चिंता जताई है.

आज तक 1 Aug 2026 12:09 pm

'टैरिफ धमकी से टला भारत-पाक परमाणु युद्ध', 'ऑपरेशन सिंदूर' पर ट्रंप का दावा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध टालने में अपनी भूमिका का दावा किया है. उन्होंने कहा कि उनके कूटनीतिक दबाव और टैरिफ की धमकी से होने जा रहा युद्ध रुक गया. ट्रंप ने दावा किया कि इसी तरह उन्होंने 5 युद्ध रोक दिए.

आज तक 1 Aug 2026 4:00 am

Houthis vs Saudi Arabia: Iran के प्रॉक्सी से तीन तरफा घिरा सऊदी, क्या अब युद्ध की उपाय? Red Sea। US

अमेरिका और इज़राइल की ओर से 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू होने के बाद पश्चिम एशिया लगातार तनाव के दौर से गुजर रहा है। अब तक सऊदी अरब इस संघर्ष से दूरी बनाए रखने की कोशिश करता रहा,

लाइव हिन्दुस्तान 31 Jul 2026 11:20 pm

Houthis Attack on Saudi Arabia और Iraq में Iran के रजिस्टेंस की ताकत पर Bobby Naqvi को सुनिए | PMF

Saudi Arabia और Iraq में Iran के रजिस्टेंस की ताकत पर Bobby Naqvi को सुनिए | PMF सऊदी के यमन पर अटैक और हूतियों के पलटवार के बीच..इराक से भी सऊदी से बदले की उठ रही आवाजें..मिडिल ईस्ट में जंग के इस नए मोर्चे पर..गल्फ न्यूज के पूर्व एडिटर बॉबी नकवी को सुनिए

लाइव हिन्दुस्तान 31 Jul 2026 9:56 pm

The Odyssey Review: युद्ध से लौटते योद्धा की नहीं, खुद तक लौटते इंसान की कहानी

क्रिस्टोफर नोलन की 'द ओडिसी' सिर्फ होमर के महाकाव्य का रूपांतरण नहीं, बल्कि युद्ध, अपराधबोध और आत्म-स्वीकृति की गहरी कहानी है। मैट डेमन का शानदार अभिनय, अद्भुत सिनेमैटोग्राफी और भावनात्मक निर्देशन इसे सिर्फ एक पौराणिक एडवेंचर नहीं रहने देते। शुरुआती ...

वेब दुनिया 17 Jul 2026 1:33 pm

गाजा संघर्ष : नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल

सयुक्त राष्ट्र की हालिया स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की रिपोर्ट ने इजरायल और कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में जारी हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों की गंभीर तस्वीर पेश की है।

देशबन्धु 6 Jul 2026 3:20 am

अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है

ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।

देशबन्धु 30 Jun 2026 3:00 am

युद्धविराम से आगे: क्या विश्व अहिंसा की ओर बढ़ेगा?

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हाल ही में हुआ युद्धविराम ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम एशिया युद्ध की लपटों में घिरकर वैश्विक स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका था। कई सप्ताह तक चले संघर्ष ने क्षेत्र को ऐसे ज्वालामुखी में बदल दिया था, जिसकी प्रत्येक विस्फोटक घटना विश्व अर्थव्यवस्था ... Read more

अजमेरनामा 23 Jun 2026 3:53 am

अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम

जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,

देशबन्धु 9 Jun 2026 3:20 am

'वाराणसी' में दिखेगा महायुद्ध, भगवान राम और कुंभकर्ण के बीच होगा 30 मिनट का ऐतिहासिक टकराव!

दिग्गज निर्देशक एसएस राजामौली जब भी कोई नया प्रोजेक्ट लाते हैं, तो वह सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक उत्सव बन जाता है। 'बाहुबली' और 'आरआरआर' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देने के बाद, राजामौली अब सुपरस्टार महेश बाबू के साथ अपनी अगली महात्वाकांक्षी ...

वेब दुनिया 6 Jun 2026 12:31 pm

IMDb पर छाया 33 साल का 'चाइल्ड एक्टर'! ऐश्वर्या राय और शाहरुख खान को पछाड़ टॉप पर पहुंचे युद्धवीर अहलावत

इंटरनेट मूवी डेटाबेस (IMDb) हर हफ्ते दुनिया भर यूजर्स के सर्च और प्रोफाइल विजिट के आधार पर 'मोस्ट पॉपुलर इंडियन सेलिब्रिटीज' की लिस्ट जारी करता है। आमतौर पर इस लिस्ट के शीर्ष पर वही सुपरस्टार्स नजर आते हैं जिनकी बड़ी फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज ...

वेब दुनिया 29 May 2026 2:23 pm

खाड़ी युद्ध से निपटने की मोदी की तजबीज

मोदीजी ने एक बार फिर राष्ट्र की जनता को उसके कर्तव्यों के प्रति सचेत किया है।

देशबन्धु 16 May 2026 3:20 am

लीजा रे ने दुबई से शेयर की दर्दभरी कविता, मिडिल ईस्ट तनाव के बीच जताई चिंता

मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। हर तरफ धमाकों और सायरन का शोर सुनाई दे रहा है। एक्ट्रेस लीजा रे भी इन हालातों के बीच दुंबई में अपने घर ...

वेब दुनिया 14 Mar 2026 1:39 pm

मिडिल ईस्ट में युद्ध के बीच फंसीं एक्ट्रेस लारा दत्ता, बेटी के साथ सुरक्षित लौटीं भारत, सुनाई आपबीती

मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और पूर्व मिस यूनिवर्स लारा दत्ता भी अपनी 14 साल की बेटी सायरा के साथ यूएई में ...

वेब दुनिया 13 Mar 2026 1:42 pm

120 बहादुर की रिलीज़ से पहले रेजांग ला युद्ध बलिदान दिवस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया मेजर शैतान सिंह को याद

एक्सेल एंटरटेनमेंट और ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज़ की '120 बहादुर' को लेकर चर्चा अब अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है। फिल्म ट्रेलर ने पूरी तरह से रोमांच और प्रेरणा का सही मिश्रण पेश किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बलिदान दिवस पर मेजर शैतान सिंह ...

वेब दुनिया 19 Nov 2025 3:09 pm

War 2 रिव्यू: लचर स्क्रिप्ट और निर्देशन के कारण रितिक और एनटीआर हारे युद्ध, पढ़ें पूरी समीक्षा

रितिक रोशन और एनटीआर स्टारर War 2 ‘स्पाई यूनिवर्स’ की बड़ी पेशकश मानी जा रही थी, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट और औसत निर्देशन ने इसे निराशाजनक बना दिया। शानदार एक्शन सीक्वेंस और एनटीआर के दमदार परफॉर्मेंस के बावजूद फिल्म का सेकंड हाफ बिखर गया। कहानी में ...

वेब दुनिया 14 Aug 2025 2:20 pm

जब उर्वशी रौतेला ने की प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात, इजराइल-ईरान युद्ध के बीच वायरल हुई तस्वीरें

बॉलीवुड एक्‍ट्रेस उर्वशी रौतेला अपनी खूबसूरती से हर किसी का दिल जीत लेती हैं। उर्वशी ने बेहद ही कम समय में एक अलग मुकाम हासिल किया है। वह दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोगों के साथ 'मिलने और अभिवादन' के क्षणों में संलग्न रहती है। ऐसा ही एक क्षण था जब ...

वेब दुनिया 18 Jun 2025 4:16 pm

सलमान खान की सिकंदर के आखिरी गाने में दिखेगा जबरदस्त जलवा, तुर्की से बुलाए गए 500 डांसर्स!

बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की 'सिकंदर' इस साल की सबसे बड़ी फिल्म मानी जा रही है, जिसका दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसके एक्शन-पैक्ड टीजर ने इसकी भव्य एंट्री के लिए एकदम परफेक्ट माहौल तैयार कर दिया है। भव्य पैमाने पर बनाई गई इस फिल्म में ...

वेब दुनिया 7 Mar 2025 2:53 pm

केसरी वीर के लिए सूरज पंचोली ने की कड़ी ट्रेनिंग, ऐसे सीखा युद्ध कौशल

बॉलीवुड एक्टर सूरज पंचोली अपनी पहली बायोपिक में वीर हामीरजी गोहिल के ऐतिहासिक किरदार को जीवंत करने जा रहे हैं। सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय और सूरज पंचोली अभिनीत फिल्म 'केसरी वीर : लीजेंड्स ऑफ सोमनाथ' का टीजर हाल ही में रिलीज हुआ है। सोमनाथ मंदिर की ...

वेब दुनिया 19 Feb 2025 5:22 pm

फरहान अख्तर लेकर आ रहे भारत-चीन युद्ध पर आधारित फिल्म 120 बहादुर, निभाएंगे मेजर शैतान सिंह का रोल

Movie 120 Bahadur : रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर की एक्सेल एंटरटेनमेंट, ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज के साथ मिलकर '120 बहादुर' को पेश करने के लिए उत्साहित हैं। यह फिल्म मेजर शैतान सिंह (पीवीसी) और चार्ली कंपनी, 13 कुमाऊं रेजिमेंट के सैनिकों की कहानी कहती ...

वेब दुनिया 4 Sep 2024 2:33 pm

तुर्की के शूटर ने ओलंपिक में जीता मेडल, आदिल हुसैन को मिलने लगी बधाई, एक्टर बोले- अभी देर नहीं हुई...

Adil Hussain: दुनियाभर में इन दिनों पेरिस ओलंपिक 2024 की धूम मची हुई है। पेरिस ओलंपिक में दुनियाभर के‍ खिलाड़ियों ने भाग लिया है। भारत के कई खिलाड़ी भी इसमें हिस्सा लेने पहुंचे हुए हैं। हाल ही में तुर्की के शूटर यूसुफ डिकेक ने‍ सिल्वर मेडल जीता।

वेब दुनिया 3 Aug 2024 6:06 pm

CONFIRMED! 27 साल बाद फिर बनेगी Border 2, एक्टर Sunny Deol ने जेपी दत्ता के साथ फिर से हाथ मिलाया, युद्ध की सबसे बड़ी कहानी

बॉर्डर की 27वीं सालगिरह पर, अभिनेता सनी देओल ने एक घोषणा वीडियो के ज़रिए फ़्रैंचाइज़ी के दूसरे संस्करण की पुष्टि की है। अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर सनी ने बॉर्डर 2 में अपनी वापसी की आधिकारिक घोषणा करते हुए एक वीडियो शेयर किया और इसे 'भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म' बताया। उन्होंने पोस्ट के कैप्शन में लिखा, ''एक फौजी अपने 27 साल पुराने वादे को पूरा करने के बाद, आ रहा है फिर से। भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म, बॉर्डर 2।'' इस फिल्म का निर्माण भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, जेपी दत्ता और निधि दत्ता करेंगे। आगामी युद्ध फिल्म का निर्देशन अनुराग सिंह करेंगे। इसे भी पढ़ें: Bollywood Wrap Up | पति से तकरार के बीच केन्या लौट गई हैं Dalljiet Kaur? शादी को बचाने की कर रही कोशिश सनी द्वारा घोषणा वीडियो शेयर किए जाने के तुरंत बाद, सोशल मीडिया यूज़र्स ने अपनी उत्सुकता व्यक्त करते हुए कमेंट सेक्शन में बाढ़ ला दी। एक यूज़र ने लिखा, ''वाह, यह बहुत बढ़िया घोषणा है सर जी, जय हिंद।'' दूसरे ने लिखा, ''बहुत उत्साहित हूँ।'' तीसरे यूजर ने टिप्पणी की, ''बॉर्डर 2 के लिए बहुत उत्साहित हूं।'' इसे भी पढ़ें: NDA पर इमोशनल बयान, काले सूट में ली मंत्री पद की शपथ और शर्मिला अंदाज, Tripti Dimri की तरह रातों रात भारत के Sensation बन गये Chirag Paswan सनी देओल की अन्य परियोजनाएं उन्हें आखिरी बार अमीषा पटेल के साथ गदर 2 में देखा गया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत सफल रही और इसे ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर घोषित किया गया। गदर 2 की सफलता के बाद, सनी ने लाहौर 1947 सहित कई फिल्में साइन कीं, जिसे आमिर खान के प्रोडक्शन बैनर के तहत बनाया जा रहा है। फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है, जिन्होंने आमिर को कल्ट क्लासिक अंदाज़ अपना अपना (1994) में निर्देशित किया था। View this post on Instagram A post shared by Sunny Deol (@iamsunnydeol)

प्रभासाक्षी 13 Jun 2024 12:10 pm

Kalki 2898 AD: शुरू हो गया नया युद्ध, पूरे ट्रेलर की अहम कड़ी हैं अमिताभ, प्रभास करेंगे इम्प्रेस

Kalki 2898 AD के ट्रेलर को देखें तो, फिल्म कल्कि 2898 एडी के मेकर्स ने विश्वास दिलाया है कि ये फिल्म लोगों को बांधने में कामयाब होगी. टफ सीक्वेंस, क्लियर एडिटिंग और बैकग्राउंड स्कोर आपका ध्यान खींचते हैं. वीएफएक्स पर भी अच्छा काम किया गया है.

आज तक 10 Jun 2024 7:25 pm

आशुतोष राणा ने डीपफेक वीडियो को बताया 'माया युद्ध', बोले- ये सालों से चल रहा

आशुतोष ने कहा कि ऐसी बातों में खुद को डिफेंड करने का कोई फायदा नहीं है. उन्होंने कहा कि जो लोग आपको जानते हैं वो सवाल करेंगे ही नहीं. और जो नहीं जानते, उन्हें किसी रिस्पॉन्स से फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि वो दिमाग में आपकी एक छवि बना चुके होते हैं.

आज तक 11 May 2024 10:30 am

Jimmy Shergill की Ranneeti Balakot and Beyond का ट्रेलर जारी, भारत की आधुनिक युद्ध की ऐतिहासिक कहानी को प्रदर्शित करेगी

रानीति बालाकोट एंड बियॉन्ड: जिमी शेरगिल की नई सीरीज भारत की आधुनिक युद्ध की ऐतिहासिक कहानी को प्रदर्शित करेगी। जिमी शेरगिल दो मिनट के ट्रेलर की शुरुआत पुलवामा हमले की झलक से होती है। एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाने वाले आशीष कहते हैं, ये एक नया रण है या इसे जीतने के लिए एक नई रणनीति की जरूरत है। इसे भी पढ़ें: नक्सलियों के खिलाफ 'ऑपरेशन प्रहार', कमांडर शंकर राव समेत अब तक 79 हुए ढेर, हिट लिस्ट में और भी कई नाम शामिल आगामी वेब शो आधुनिक युद्ध को डिकोड करता है जो केवल भौतिक सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता है बल्कि सोशल मीडिया, डिजिटल रणनीति और गुप्त राजनीतिक चालों के क्षेत्र से परे है जो भू-राजनीति को नया आकार देने की शक्ति रखता है। वेब श्रृंखला उन वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है जिन्होंने 2019 में देश को हिलाकर रख दिया था। शो में कुछ हवाई दृश्य, शानदार प्रदर्शन और एक शक्तिशाली कथा है जो युद्ध के मैदान के अंदर और बाहर हर पहलू को चतुराई से पकड़ती है। इसे भी पढ़ें: Biden को सोचना पड़ेगा फिर एक बार, Iran पर प्रहार तो रूस करेगा पलटवार, रक्षा मंत्रायल ने चिट्ठी लिखकर जता दी मंशा आगामी वेब श्रृंखला के बारे में बात करते हुए, जिमी ने कहा: यह मेरे द्वारा अतीत में की गई किसी भी भूमिका से भिन्न है। कम से कम यह कहना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन भारत की पहली वॉर-रूम केंद्रित वेब-श्रृंखला का हिस्सा बनना बेहद संतोषजनक भी है। वास्तविक जीवन की घटनाओं से प्रेरित जिसने देश को हिलाकर रख दिया। एनएसए प्रमुख के रूप में अपनी भूमिका के बारे में बात करते हुए, आशीष ने कहा, एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन रक्षा बलों के कुछ सदस्यों के साथ बैठकों ने मुझे अपने चरित्र की बारीकियों को समझने में मदद की। तैयारी कार्य और कार्यशालाएं मुझे वापस ले गईं मेरे एनएसडी के दिनों में। संतोष सिंह द्वारा निर्देशित, श्रृंखला का निर्माण स्फीयरओरिजिन्स मल्टीविजन प्राइवेट लिमिटेड के सुंजॉय वाधवा और कॉमल सुंजय डब्ल्यू द्वारा किया गया है। इसमें प्रसन्ना भी हैं। शो का प्रीमियर 25 अप्रैल को JioCinema पर होगा।

प्रभासाक्षी 17 Apr 2024 2:10 pm

Honey Singh vs Badshah | बढ़ती जा रही है हनी सिंह और बादशाह के बीच नफरत की खाई, रैपरों के बीच वाकयुद्ध गंदे स्तर पर पहुंचा!

दर्शक काफी समय से रैपर बादशाह और हनी सिंह के बीच जुबानी जंग देख रहे हैं। दोनों का रिश्ता सालों से विवादों से भरा रहा है। हालांकि करियर के शुरुआती दिनों में बादशाह और हनी सिंह के बीच अच्छी दोस्ती हुआ करती थी। हालाँकि, ऐसा लगता है कि सफलता और पैसे ने धीरे-धीरे इस दोस्ती को पूरी तरह से खत्म कर दिया। अब दोनों अक्सर एक दूसरे पर तंज कसते नजर आते हैं। हाल ही में हनी सिंह एक होली पार्टी में शामिल हुए, जहां उन्होंने बादशाह के 'पापा कमबैक' वाले कमेंट का करारा जवाब दिया। रैपर का ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसे भी पढ़ें: Punjab Kings के खिलाफ जीत के बाद इंटरनेट पर Virat Kohli का Anushka Sharma के साथ वीडियो कॉल, FLY KISS देते नजर आये खिलाड़ी हनी सिंह ने बादशाह पर किया पलटवार बादशाह कुछ दिनों पहले हनी सिंह पर अपनी टिप्पणी को लेकर चर्चा में थे, जिसमें उन्होंने हनी सिंह की वापसी पर कटाक्ष किया था। अब सिंगर और रैपर हनी सिंह ने एक कमेंट के जरिए बादशाह को करारा जवाब दिया है और कहा है कि उन्हें बादशाह को जवाब देने के लिए मुंह खोलने की जरूरत नहीं है। उनके फैन ही काफी हैं जो हर चीज पर बात कर सकते हैं। उन्होंने अपने गाली वाले अंदाज में अपने फैंस से बात करते हुए बादशाह का जवाब दिया। हनी सिंह को सोमवार को मुंबई में एक होली पार्टी में परफॉर्म करते देखा गया और यहीं उन्होंने बादशाह पर कटाक्ष किया। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा, हर कोई कहता है, रिप्लाई करो, रिप्लाई करो... मैं क्या रिप्लाई करूं... आप लोग तो उनके सारे कमेंट्स का बहुत अच्छे से रिप्लाई कर चुके हैं। मुझे मुंह खोलने की जरूरत है। ऐसा नहीं होता है। जैसे ही भीड़ ने उनके लिए तालियां बजाईं, गायक ने कहा, मुझे बोलने की जरूरत नहीं है। आप लोग खुद पागल हैं। हनी सिंह पागल हैं और उनके प्रशंसक भी पागल हैं। इसे भी पढ़ें: Taapsee Pannu के पति Mathias Boe आखिर कौन है? जब सफल भी नहीं थी एक्ट्रेस तब से उन्हें प्यार करते थे बैडमिंटन खिलाड़ी रैपर बादशाह ने क्या कहा? आपको बता दें कि हाल ही में बादशाह ने हनी सिंह पर कमेंट करते हुए कहा था, ''मुझे एक पेन और कागज दो। मैं तुम्हारे लिए एक गिफ्ट लाया हूं। मैं कुछ गाने लिखूंगा और तुम्हें दूंगा। पापा की वापसी तुम्हारे साथ होगी।'' Kalesh Controversy B/w Honey Singh and Badshah (Honey Singh Replied to Badshah) pic.twitter.com/o74t423bgS — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 25, 2024 Kalesh Between Badshah & Honey Singh Fans on Stage during Live Concert pic.twitter.com/M4VqSqLSc3 — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 19, 2024

प्रभासाक्षी 26 Mar 2024 3:03 pm

आखिर क्यों Indira Gandhi ने Aandhi मूवी पर लगा दिया था प्रतिबन्ध, आज भी देखने से कतराते हैं लोग

आखिर क्यों Indira Gandhi नेAandhi मूवी पर लगा दिया था प्रतिबन्ध,आज भी देखने से कतराते हैं लोग

मनोरंजन नामा 23 Mar 2024 2:19 pm

'सावरकर' रिव्यू: खोखली, एकतरफा फिल्म में एकमात्र अच्छी चीज है रणदीप हुड्डा का काम

आज के दौर में 'गुमनाम' हो चुके एक स्वतंत्रता नायक की कहानी कहने निकली ये फिल्म, एक अनजान कहानी बताने से ज्यादा अपने हीरो विनायक दामोदर सावरकर को बाकियों के मुकाबले अधिक 'वीर' बताने पर फोकस करने लगती है.

आज तक 22 Mar 2024 5:03 pm

अस्तित्व और बदले के लिए ब्रह्मांड में शुरू होने वाला है महायुद्ध, एक्शन और रोमांच से भरपूर है Rebel Moon 2 का धांसू ट्रेलर

अस्तित्व और बदले के लिएब्रह्मांड में शुरू होने वाला है महायुद्ध, एक्शन और रोमांच से भरपूर हैRebel Moon 2 का धांसू ट्रेलर

मनोरंजन नामा 20 Mar 2024 1:21 pm