लेबनान: 8.6 लाख विस्थापित घर लौटे, मगर मानवीय संकट बरक़रार
संयुक्त राष्ट्र ने मंगलवार को आगाह किया कि दक्षिणी लेबनान में हिंसक टकराव के कारण विस्थापित हुए लगभग8 लाख 60 हज़ारलाख लोग अपने घर लौट चुके हैं, लेकिन विस्थापन और मानवीय संकट की स्थिति अभी भी गम्भीर बनी हुई है.
ड्रोन हमलों से बदल रहा युद्ध का स्वरूप, राहतकर्मियों पर बढ़ता ख़तरा
संयुक्त राष्ट्र ने आगाह किया है कि दुनिया भर में युद्ध व हिंसक टकरावों में सशस्त्र ड्रोन के बढ़ते इस्तेमाल से राहतकर्मियों के लिए जोखिम लगातार बढ़ रहा है और वे हमलों की चपेट में आ रहे हैं.
यूक्रेन में युद्ध के बीच कैसे होगा चुनाव? जेलेंस्की तैयार; लेकिन रास्ते में हैं कई पेच
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा है कि अगर अमेरिका और यूरोपीय सहयोगी मतदान की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकें तो वे चुनाव कराने को तैयार हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इससे पहले भी यूक्रेन में चुनाव कराने की वकालत कर चुके हैं।
Iran-US War Update: ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक बड़ा और सनसनीखेज दावा सामने आया है। ईरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से युद्ध को और बढ़ाए जाने की स्थिति में यूरोप में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला करने पर विचार कर रहा है। 'फाइनेंशियल टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान के शासन के करीबी दो लोगों ने यह जानकारी दी है।रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरानी सैन्य बलों ने दक्षिण-पूर्वी यूरोप में मौजूद अमेरिकी सैन्य सुविधाओं पर संभावित हमलों का आकलन किया है। इनमें बुल्गारिया स्थित सैन्य सुविधाएं भी शामिल हैं। बताया गया है कि पिछले महीने बुल्गारिया ने अमेरिका को अपने बेजमर एयर बेस का इस्तेमाल अमेरिकी ईंधन भरने वाले विमानों के लिए करने की अनुमति दी थी।यूरोप के दूसरे ठिकाने भी निशाने परईरान की संभावित कार्रवाई सिर्फ बुल्गारिया तक सीमित नहीं बताई जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, साइप्रस को भी संभावित टारगेट के तौर पर देखा जा रहा है। ईरानी पक्ष से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि साइप्रस में मौजूद ब्रिटिश सैन्य ठिकाना भी संभावित निशानों में शामिल हो सकता है। मार्च में साइप्रस में एक ब्रिटिश सैन्य अड्डे पर ड्रोन हमला भी हुआ था।ईरान से जुड़े एक सूत्र ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई यूरोपीय देशों के लिए संदेश भी हो सकती है कि अगर वे अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए अपनी जमीन उपलब्ध कराते हैं, तो युद्ध का असर उनके क्षेत्र तक भी पहुंच सकता है।एक ईरानी सूत्र के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि यूरोप को यह समझना चाहिए कि वह भी मिसाइल हमलों की जद में आ सकता है। सूत्रों ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ईरान के बुनियादी ढांचे पर बड़ा हमला करता है, तो युद्ध सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा। बल्कि यह यूरोप तक फैल सकता है।समुद्री इंटरनेट केबल भी निशाने पर?रिपोर्ट के अनुसार, ईरानी सैन्य बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में समुद्र के भीतर बिछी फाइबर ऑप्टिक केबलों पर हमले की संभावना का भी आकलन किया है। इन केबलों का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय संचार और इंटरनेट डेटा के आदान-प्रदान में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि ऐसी किसी कार्रवाई को अंजाम दिया जाता है, तो इसका असर केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि वैश्विक संचार व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।अमेरिका के साथ खड़े देशों को ईरान की खुली चेतावनीईरान लंबे समय से उन देशों को चेतावनी देता रहा है जो अपनी जमीन से अमेरिकी सेनाओं को सैन्य अभियान चलाने की अनुमति देते हैं। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने पिछले महीने ब्रिटेन को भी चेतावनी दी थी। IRGC ने कहा था कि यदि किसी ब्रिटिश सैन्य अड्डे का इस्तेमाल ईरान पर हमले के लिए किया जाता है, तो वह अड्डा ईरान के लिए वैध सैन्य टारगेट माना जाएगा।ईरान से जुड़े एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि यदि अमेरिका ने बड़ा हमला किया तो तेहरान की प्रतिक्रिया की कोई सीमा नहीं होगी। उसके मुताबिक, अगर अमेरिका बहुत आगे बढ़ता है तो ईरान किसी भी कीमत पर अपनी रक्षा करेगा और जरूरत पड़ने पर क्षेत्र से बाहर जाकर यूरोप में भी अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना सकता है। ईरान पहले भी दूर स्थित ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश कर चुका है।ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर यह चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि वह पहले भी अपने क्षेत्र से हजारों किलोमीटर दूर स्थित लक्ष्यों तक मिसाइल पहुंचाने की कोशिश कर चुका है। रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल की ओर से फरवरी में युद्ध शुरू किए जाने के बाद अमेरिका ने ईरान पर डिएगो गार्सिया स्थित संयुक्त अमेरिकी-ब्रिटिश सैन्य अड्डे की दिशा में कई मिसाइलें दागने का आरोप लगाया था।ईरानी मिसाइल की कितनी है क्षमता?डिएगो गार्सिया ईरान से करीब 4,000 किलोमीटर दूर हिंद महासागर में स्थित है। हालांकि, ईरान से दागी गई कोई भी मिसाइल अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकी। बाद में तुर्किये ने भी कहा था कि उसकी NATO एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान की ओर से दागी गई कई बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया था।यूरोप के लिए खतरा कितना बड़ा?रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट (RUSI) के एक्सपर्ट सिद्धार्थ कौशल के मुताबिक, यूरोप के लिए ईरान की मिसाइल क्षमता से पैदा होने वाला खतरा वास्तविक है। हालांकि इसकी क्षमता अभी सीमित है। यानी इसका मतलब यह है कि ईरान के पास यूरोप तक खतरा पहुंचाने की कुछ क्षमता जरूर है। लेकिन बड़े पैमाने पर यूरोपीय लक्ष्यों पर हमला करने की उसकी क्षमता को लेकर अभी भी सीमाएं हैं। ईरान की ताजा धमकियां ऐसे समय सामने आई हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुआ समझौता पिछले महीने टूट गया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है।ये भी पढ़ें- BBA स्टूडेंट ने 3 महीने तक रोज 8.5 घंटे Rapido चलाया, एक दिन में 1200 रुपये तक कमाए फिर अपना एक्सपीरियंस डिटेल में बताया
World Photography Day: तंबू में सिमटी जिंदगियां, मलबे में तब्दील आशियाने और बारूद का धुआं. वर्ल्ड फोटोग्राफी डे पर देखिए एसोसिएटेड प्रेस (AP) के लेंस से कैद पश्चिम एशिया के युद्ध की 8 झकझोर देने वाली तस्वीरें.
जंग लड़ेंगे US के 2 दोस्त? जानिए इजरायल-तुर्की की पूरी मिलिट्री पावर
ग्लोबल फायरपावर 2026 के अनुसार तुर्की विश्व में 9वें और इजरायल 15वें स्थान पर है. दोनों अमेरिका के सहयोगी हैं. जमीनी और नौसेना में तुर्की आगे, हवा में इजरायल की तकनीकी बढ़त है.
डिफेंस सेक्टर में झंडे गाड़ रहा भारत, देश में ही बनेंगे टी-90 टैंक, सुखोई और युद्धपोत के उपकरण
पिछले पांच सालों में 15,700 से अधिक रक्षा वस्तुओं का स्वदेशीकरण सफलतापूर्वक किया गया है। नतीजा यह है कि लगभग 9000 करोड़ रुपये के आयात में बदलाव का अनुमान है। अब एक नई सूची सामने आई है।
Azamgarh News: 15 दिन में स्पष्टीकरण नहीं दिया तो होगी एकतरफा कार्रवाई
15 दिन में स्पष्टीकरण नहीं दिया तो होगी एकतरफा कार्रवाई
उत्तर प्रदेश में भाजपा की एकतरफा जीत तय, चुनाव बाद फिर बनेगी सरकार : जगदीश पटेल
उत्तर प्रदेश में भाजपा की एकतरफा जीत तय, चुनाव बाद फिर बनेगी सरकार : जगदीश पटेल
गुना के भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने बलराम कृषि महोत्सव में विवादित बयान दिया कि इतिहास के युद्ध महिलाओं के कारण हुए, पर उनमें सिर्फ पुरुष ही मरे। महिला विधायक प्रियंका पेंची के टोकने पर उन्होंने उन्हें चुप रहने को कहा।
'महिलाओं की वजह से हुए युद्ध लेकिन कोई महिला नहीं मरी', गुना से भाजपा MLA पन्नालाल का विवादित बयान
मध्य प्रदेश के गुना से भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य का एक बयान फिर से चर्चा में है। मंगलवार को आयोजित बलराम कृषि महोत्सव में उन्होंने कहा कि इतिहास में सभी युद्ध महिलाओं के कारण हुए लेकिन उनमें किसी महिला की मौत नहीं हुई। सब पुरुष ही मरे।
Israel Qatar Deal Cancelled: कतर से Netanyahu ने डिफेंस डील रोकी | Iran US War Update | Hormuz
ईरान के बाद अब क्या कतर भी मिडिल ईस्ट के बड़े टकराव का नया केंद्र बनने जा रहा है? इज़राइल और कतर के बीच बढ़ते तनाव ने क्षेत्रीय कूटनीति में हलचल बढ़ा दी है।
Turkey Anka 3 drone जो क्रूज मिसाइलें लेकर उड़ेगा, कितना खतरनाक, निशाने पर कौन? Iran US War। Israel
तुर्की ने अपने आधुनिक स्टील्थ कॉम्बैट ड्रोन Anka-3 को भविष्य के हवाई युद्ध के लिए तैयार किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह ड्रोन लंबी दूरी की क्रूज़ मिसाइलों से लैस होकर दुश्मन के एयर डिफेंस के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
आज ही के दिन यानी की 18 अगस्त को पेशवा बाजीराव प्रथम का जन्म हुआ था। वह एक बेहतरीन घुड़सवार, कुशल तलवारबाजी और कमाल के सेनापति थे। बाजीराव प्रथम युद्ध में माहिर थे। उन्होंने मुगलों की कमर तोड़ दी थी। बाजीराव प्रथम अपनी जिंदगी में एक भी युद्ध नहीं हारे थे। तो आइए जानते हैं उनकी बर्थ एनिवर्सरी के मौके पर पेशवा बाजीराव के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में... जन्म और परिवार 18 अगस्त 1700 को पेशवा बाजीराव का जन्म हुआ था। इनके पिता का नाम बालाजी विश्वनाथ और मां का नाम राधाबाई था। इनके पिता छत्रपति शाहू के प्रथम पेशवा थे। बाजीराव का एक छोटा भाई चिमाजी अप्पा था। बाजीराव अपने पिता के साथ हमेशा सैन्य अभियानों में जाया करते थे। इसे भी पढ़ें: Bal Gangadhar Tilak Death Anniversary: पत्रकारिता के जरिए ब्रिटिश हुकूमत की नींव हिलाने वाले Bal Gangadhar Tilak बाजीराव प्रथम पेशवा बाजीराव को बाजीराव प्रथम भी कहा जाता है। वह मराठा साम्राज्य के एक महान पेशवा थे। पेशवा का अर्थ प्रधानमंत्री होता है। वह मराठा छत्रपति राजा शाहू के चौथे प्रधानमंत्री थे। बाजीराव ने अपना प्रधानमंत्री पद साल 1720 से लेकर मृत्यु तक संभाला था। बाजीराव घुड़सवारी करते हुए लड़ने में माहिर थे। यह माना जाता है कि उनसे अच्छा घुड़सवार सैनिक देश में आज तक नहीं देखा गया। उनके 4 घोड़े थे- गंगा, नीला, सारंगा और औलख आदि। जिनकी वह खुद देखभाल किया करते थे। बाजीराव 6 फुट ऊंचे थे और वह न्यायप्रिय सफेद या हल्के रंग के कपड़े पहनना पसंद करते थे। बाजीराव पूरी सेना को अनुशासन में रखते थे। बता दें कि 20 साल की उम्र में बाजीराव पेशवा के पद पर नियोजित हुए थे। उनके पेशवा बनते ही छत्रपति शाहू नाम मात्र के शासक रह गए थे। वह एक महान योद्धा थे। मोहम्मद बंगश, निजाम से लेकर मुगलों और पुर्तगालियों तक को वह कई-कई बार शिकस्त देते। बाजीराव इतिहास के अकेले ऐसे योद्धा थे, जिन्होंने 41 लड़ाइयां लड़ी थीं और एक भी लड़ाई नहीं हारी। बाजीराव की बिजली की गति से तेज आक्रमण शैली का इस्तेमाल कर रहे थे। मृत्यु बाजीराव पेशवा की 28 अप्रैल 1740 को 39 साल की उम्र में मृत्यु हो गई थी।
मध्य प्रदेश के गुना में मंगलवार को राज्य स्तरीय बलराम महोत्सव में बीजेपी विधायक पन्नालाल शाक्य ने माता सीता को ‘मौत का सामान’ बताया। शाक्य ने रामायण, महाभारत और अन्य युद्धों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन युद्धों में पुरुष मारे गए, एक भी महिला नहीं मरी। पन्नालाल शाक्य की बात सुनकर मंच पर बैठीं चांचौड़ा विधायक प्रियंका पेंची ने बीच में टोका। उन्होंने कहा- भाई साहब आप गलत बोल रहे हैं। नहीं भाईसाहब, ऐसा नहीं है। ये तो गलत बात है। महिलाओं ने भी बलिदान दिए हैं। मैं भी महिला हूं। महिलाओं की बलिदान को भूल रहे हैं। शाक्य बोले- रामायण के युद्ध में महिला नहीं मरी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पन्नालाल शाक्य ने रामायण का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि रावण को उसके भाई ने समझाया था कि पराई स्त्री को ले जाना गलत है। उसे सम्मान के साथ वापस भेज देना चाहिए। इसके बाद शाक्य ने कहा कि रामायण के युद्ध में कोई महिला नहीं मरी, बल्कि पुरुष ही मरे। महाभारत का उदाहरण देकर बोले- एक करोड़ पुरुष मारे गए शाक्य ने महाभारत के युद्ध का भी उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि महाभारत के युद्ध में एक करोड़ पुरुष मारे गए, जबकि महिलाएं नहीं मरीं। उन्होंने कहा कि इस बात को समझने की जरूरत है। इसके बाद उन्होंने पृथ्वीराज चौहान और संयोगिता का उदाहरण दिया। शाक्य ने कहा कि संयोगिता के कारण पृथ्वीराज चौहान के 55 सामंत कन्नौज से दिल्ली तक मारे गए। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं में भी पुरुष मरे, महिलाएं नहीं। महिला विधायक ने मंच से ही टोका प्रियंका पेंची की आपत्ति के बावजूद शाक्य अपनी बात पर कायम रहे। उन्होंने कहा कि उन्होंने बहुत सारी किताबें पढ़ी हैं और उन्हें पता है कि कहां क्या हुआ है। इसके बाद उन्होंने प्रियंका पेंची से बैठने के लिए कहा। दोनों विधायकों के बीच मंच पर हुई इस बहस की चर्चा कार्यक्रम खत्म होने के बाद भी होती रही। महिलाओं के बलिदान को लेकर पन्नालाल शाक्य के बयान और प्रियंका पेंची की तत्काल आपत्ति कार्यक्रम में चर्चा का प्रमुख विषय रही। शाक्य ने प्राकृतिक खेती अपनाने की बात कही कार्यक्रम में पन्नालाल शाक्य ने प्राकृतिक खेती अपनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि विदेशी खाद के ज्यादा इस्तेमाल से जमीन खराब हो रही है। उन्होंने कहा कि जिस धरती पर खेती करके अन्न पैदा किया जाता है, उसके प्रति गौरव और सम्मान का भाव होना चाहिए। उन्होंने किसानों से अपनी जमीन को बंजर होने से बचाने की बात कही। नानाखेड़ी कृषि उपज मंडी में हुआ राज्य स्तरीय कार्यक्रम बलराम महोत्सव का आयोजन गुना की नानाखेड़ी कृषि उपज मंडी में किया गया था। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भोपाल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जुड़े और किसानों को संबोधित किया। कार्यक्रम में गुना विधायक पन्नालाल शाक्य, चांचौड़ा विधायक प्रियंका पेंची सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी, कर्मचारी और किसान मौजूद रहे। किसानों को किया गया सम्मानित बलराम महोत्सव के दौरान कई किसानों को सम्मानित भी किया गया। डिप्टी डायरेक्टर हॉर्टिकल्चर ने किसानों को पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक खेती की जानकारी दी। उन्होंने गुलाब और थाई अमरूद की खेती के बारे में भी जानकारी दी। कार्यक्रम का स्वागत भाषण डिप्टी डायरेक्टर एग्रीकल्चर संजीव शर्मा ने दिया।…………………………………… यह खबर भी पढ़ें विधायक प्रीतम लोधी ने 13 गुर्जरों के हत्यारे डकैत को बताया दोस्त शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने 13 गुर्जरों को लाइन में खड़ा कर गोलियों से भून देने वाले कुख्यात डकैत को अपना दोस्त बताया। उन्होंने लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की जयंती के अवसर पर डकैत रामबाबू गड़रिया की तस्वीर पर पुष्प अर्पित किए। पढ़ें पूरी खबर…
Opinion: बांग्लादेश भी हो सकता है मक्का संधि का हिस्सा? तुर्की कैसे भारत के खिलाफ बिछा रहा बिसात
तुर्की मीडिया में हाल ही में छपे एक आर्टिकल से पता चलता है कि कैसे अंकारा भारत और उसके पड़ोस के लिए एक स्ट्रेटेजिक खतरा बनता जा रहा है.
दक्षिण एशिया और मध्य पूर्व के राजनीतिक क्षितिज पर एक बड़ा कूटनीतिक भूचाल आया है। पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब ने मिलकर 'मक्का रक्षा समझौते' (Mecca Joint Defense Agreement) पर हस्ताक्षर किए हैं। रक्षा विशेषज्ञों द्वारा इसे व्यापक रूप से 'इस्लामिक ...
मक्का संयुक्त रक्षा समझौते का ट्रम्प ने किया स्वागत, वीडियो में जाने पाकिस्तान-सऊदी अरब-तुर्किये की बढ़ेगी सैन्य साझेदारी
ईरान युद्ध का नहीं दिख रहा अंत! अमेरिका के रुख से कच्चे तेल में उछाल, ब्रेंट क्रूड 90 डॉलर के पार
मध्य पूर्व में जारी संघर्ष का असर एक बार फिर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखाई देने लगा है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने की उम्मीद कमजोर पड़ने से मंगलवार को तेल की कीमतों में तेजी आई।
उत्तराखंड के चार जिलों रुद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी के हिमाच्छादित क्षेत्रों में सोमवार से डिजिटल स्व-गणना शुरू हो गई है।
Jared Kushner ने यरूशलम में Benjamin Netanyahu से 3 घंटे तक गाजा युद्धविराम पर चर्चा की
पश्चिम एशिया संघर्ष के वार्ताकार और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर सोमवार को इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ बैठक कर रहे हैं। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने कुछ दिन पहले गाजा में युद्धविराम समझौते को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका समर्थित 15-सूत्रीय समझौते को खारिज कर दिया था। सोमवार को यह बैठक करीब तीन घंटे से अधिक समय तक चली। इससे पहले, कुशनर ने मिस्र में हमास नेता के साथ करीब दो घंटे की बैठक की थी। अमेरिका अब इजरायल से इस समझौते के मसौदे को मंजूरी देने के लिए दबाव बना रहा है। पूरे मामले में करीब 20 लाख फलस्तीनियों की जिंदगी, युद्ध से तबाह गाजा के पुनर्निर्माण और भविष्य में इस क्षेत्र पर नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे दांव पर लगे हैं। हमास का कहना है कि उसने इस मसौदा को स्वीकार कर लिया है, जिसमें हथियार छोड़ने का प्रावधान भी शामिल है। संगठन मध्यस्थों और अमेरिका द्वारा बनाए गए ‘शांति बोर्ड’ से इजराइल को इस योजना पर सहमत होने के लिए मजबूर करने की अपील कर रहा है। लेकिन इजराइल का कहना है कि इसके तहत उसे धीरे-धीरे गाजा से पीछे हटना होगा, जबकि हमास को किसी भी इजराइली वापसी से पहले पूरी तरह हथियार त्यागना पड़ेगा। इजराइली सैनिक वर्तमान में गाजा पट्टी के करीब 60 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा किए हुए हैं। नेतन्याहू पहले भी गाजा के और बड़े हिस्से पर नियंत्रण करने की धमकी दे चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और ‘शांति बोर्ड’ के निदेशक निकोलाय म्लादेनोव भी नेतन्याहू के साथ हुई बैठक में मौजूद थे। इजरायल ने तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की है। हमास के साथ कुशनर की बातचीत के बाद हुई बैठक रविवार को कुशनर ने काहिरा में हमास प्रमुख खलील अल-हय्या से मुलाकात की। क्षेत्रीय अधिकारी और हमास के एक अधिकारी के अनुसार बैठक में, हमास के हथियार छोड़ने के मुद्दे पर चर्चा हुई। मिस्र, कतर और तुर्किये जैसे मध्यस्थ देशों के अधिकारी भी बैठक में मौजूद थे। हमास के अधिकारी के अनुसार, हमास नेता ने मांग की कि इजराइल गाजा पर अपने हमले रोके और समझौते के क्रियान्वयन की शुरुआत से पहले तथाकथित ‘येलो लाइन’ तक अपनी सेना वापस बुलाए। येलो लाइन की सटीक सीमा कभी स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं की गई। इजराइली सेना इसके आगे बढ़ चुकी है और अब गाजा के करीब 60 प्रतिशत हिस्से पर उसका नियंत्रण है। मई में नेतन्याहू ने कहा था कि अगला कदम गाजा के 70 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण स्थापित करना होगा और इजराइल हर दिशा से हमास पर अपनी पकड़ मजबूत करेगा। क्षेत्रीय देशों ने इजरायल पर बढ़ाया दबाव सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात समेत कई क्षेत्रीय शक्तियों ने रविवार को एक बयान जारी कर इजराइल द्वारा समझौते के मसौदा को खारिज किए जाने की निंदा की। बयान में कहा गया कि ‘‘गाजा में शांति लाने के प्रयासों में बाधा डालने की जिम्मेदारी अब इजराइल की है।’’इस बयान पर जॉर्डन, पाकिस्तान, इंडोनेशिया और युद्धविराम के मध्यस्थ देशों ने भी हस्ताक्षर किए। विदेश मंत्रियों के बयान में ‘शांति बोर्ड’ और अमेरिका से ‘‘तत्काल और ठोस कदम’’ उठाने की मांग की गई, ताकि कोई भी पक्ष इस योजना के क्रियान्वयन में बाधा न डाल सके। इजराइल की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। व्हाइट हाउस ने कुशनर की बैठकों से जुड़े सवालों को ‘शांति बोर्ड’ के हवाले कर दिया। बोर्ड ने भी तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की। टोनी ब्लेयर इंस्टीट्यूट ने भी फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
इराक में अजय कुमार होंगे भारत के अगले राजदूत, सौमेंदु बागची की स्विट्जरलैंड में नियुक्ति
Mumbai , 17 अगस्त . विदेश मंत्रालय में बड़े स्तर पर राजनयिक फेरबदल करते हुए केंद्र Government ने इराक और स्विट्जरलैंड में India के अगले राजदूतों की नियुक्ति की घोषणा की है. विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार 2001 बैच के भारतीय विदेश सेवा अधिकारी अजय ए. कुमार को इराक गणराज्य में India का ... Read more
6.5 लाख सैनिकों की मौत, 16 हजार+ नागरिक मारे गए; रूस-यूक्रेन युद्ध का हिसाब कब मांगेगी दुनिया?
आज आपको आसान शब्दों में बताते हैं कि आखिर रूस और यूक्रेन की जंग शुरू क्यों हुई थी, इस युद्ध में रूस ने क्या गंवाया है, यूक्रेन को कितना नुकसान हुआ है और इस जंग की वजह से दोनों देशों के सामने कौन-कौन सी चुनौतियां खड़ी हुई हैं.
Islamic NATO की तारीफ क्यों करने लगे Trump? Pakistan | Turkey | Iran | Saudi। Mecca Deal
ईरान युद्ध के बाद पश्चिम एशिया की भू-राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते ने एक नए मुस्लिम सुरक्षा गठबंधन की चर्चा तेज कर दी है।
इराक और स्विट्जरलैंड में बदले गए भारतीय राजदूत, जानिए किसे मिली जिम्मेदारी
भारत सरकार ने सौमेंदु बागची को स्विट्जरलैंड और अजय ए. कुमार को इराक में भारत का राजदूत नियुक्त किया है.
ईरान युद्ध के साइड इफेक्ट से दुनिया भर में शिक्षा पर संकट, लाखों बच्चों के स्कूल छूटने का खतरा
ईरान युद्ध की मार अब दुनिया के उन बच्चों तक भी पहुंच रही है, जो युद्ध से हजारों किलोमीटर दूर हैं। ईंधन की बढ़ती कीमतों ने गरीब परिवारों का बजट बिगाड़ दिया है। कई परिवारों के लिए भोजन और रोजमर्रा के खर्च पूरे करना मुश्किल हो रहा है, ऐसे में बच्चों की पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित हो रही है।
यह लेख टमाटर के वैश्विक और भारतीय उत्पादन, शीर्ष उत्पादक देशों और भारत के प्रमुख राज्यों पर प्रकाश डालता है। इसमें आंध्र प्रदेश के मदनपल्ले को एशिया की सबसे बड़ी टमाटर मंडी बताया गया है, जहां सालाना 12 लाख टन का व्यापार होता है।
हजारीबाग जिले के चलकुशा थाना क्षेत्र में सोमवार को एक सड़क हादसे में 40 वर्षीय बाइक सवार व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना बरकट्ठा-तेतरोन मुख्य मार्ग पर केंदुआ स्थित भदानी पेट्रोल पंप के पास हुई। मृतक की पहचान सहदेव रजक के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार, सहदेव रजक अपनी सुपर स्प्लेंडर बाइक से बरकट्ठा की ओर जा रहे थे। इसी दौरान सड़क निर्माण कार्य में लगे एक अलकतरा टैंकर से उनकी बाइक की आमने-सामने टक्कर हो गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि सहदेव गंभीर रूप से घायल हो गए और घटनास्थल पर ही उनकी मृत्यु हो गई। 10 लाख रुपए मुआवजे की मांग की घटना की सूचना मिलते ही मृतक के परिजन और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। हादसे से आक्रोशित ग्रामीणों ने मृतक का शव सड़क पर रखकर बरकट्ठा-तेतरोन मुख्य मार्ग को जाम कर दिया। परिजन मृतक के परिवार के लिए उचित मुआवजे की मांग पर अड़े रहे और 10 लाख रुपए मुआवजे की मांग की। सड़क जाम की सूचना पर चलकुशा थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और लोगों को समझाने का प्रयास किया। भाजपा विधायक अमित यादव सहित कई जनप्रतिनिधि भी मौके पर पहुंचे और स्थिति को शांत कराने की कोशिश की। इस दौरान ग्रामीणों और परिजनों ने सड़क निर्माण कार्य में लगी कंपनी के साइड ऑफिस में भी कुछ देर के लिए हंगामा किया। पुलिस ने दुर्घटना में शामिल अलकतरा टैंकर को जब्त कर लिया है। पुलिस ने यूडी केस दर्ज कर हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है। शव को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के बाद पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। मृतक का परिवार उचित मुआवजे और न्याय की मांग कर रहा है।
Prahlad Joshi ने NTA को दिया युद्ध स्तर पर Exam सुधार का आदेश, 50 कर्मचारी बर्खास्त
शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोमवार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को निर्देश दिया कि वह अपनी सभी परीक्षा प्रक्रियाओं का बारीकी से ऑडिट करे और इस साल हुई परीक्षाओं में कई तरह की गड़बड़ियों को लेकर किए गए सुधारात्मक उपायों पर रिपोर्ट सौंपे। जोशी ने उच्च शिक्षा सचिव, NTA के महानिदेशक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। NTA ने रविवार को UGC-NET जून 2026 के तीन विषयों - इंग्लिश, सोशियोलॉजी और कॉमर्स - के लिए दोबारा परीक्षा कराने की घोषणा की थी, क्योंकि इनके प्रश्न-पत्रों में कई गलतियां थीं। इसे भी पढ़ें: Piyush Goyal को BJP में बड़ी जिम्मेदारी, क्या Modi Cabinet में अब होगा फेरबदल? इसने 3 मई को NEET UG परीक्षा को भी प्रश्न पत्र लीक होने के कारण रद्द कर दिया था और 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित की थी। 30 मई को हुई CUET-UG परीक्षा भी विवादों में घिर गई, क्योंकि सॉफ्टवेयर में तकनीकी खराबी के कारण 3,765 छात्र परीक्षा नहीं दे पाए। शिक्षा मंत्रालय की एक आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा गया कि मंत्री ने निर्देश दिया कि परीक्षा के तय नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए और साथ ही यह भी निर्देश दिया कि गोपनीय कामकाज (CONOPS) के ढांचे, अलग कमरों, एयर-गैप्ड सिस्टम और डिवाइस जमा करने के नियमों में पूरी तरह बदलाव को युद्ध स्तर पर लागू किया जाए। इसे भी पढ़ें: भाजपा राष्ट्रीय पदाधिकारियों की नई सूची ने जो सियासी संकेत दिया है वह सबके समझ में आने वाली बात नहीं है NTA के अधिकारियों ने मंत्री को कई मुद्दों पर जानकारी दी, खासकर पूरे सिस्टम में सुधार के लिए उठाए गए कदमों के बारे में। उन्होंने बताया कि NTA के 50 से ज़्यादा कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है और NEET पेपर लीक मामले में उनमें से कुछ के खिलाफ़ कड़ी कानूनी या आपराधिक कार्रवाई की जाएगी। दस नई प्रोफेशनल लीडरशिप पोस्ट (चीफ़ टेक्नोलॉजी ऑफ़िसर, चीफ़ फ़ाइनेंस ऑफ़िसर, CISO, GM - टेस्ट सिक्योरिटी, GM - R&D और साइकोमेट्रिक्स, वगैरह) के लिए विज्ञापन निकाले गए थे और चुने गए लोगों को काम पर रखने की प्रक्रिया चल रही है। NTA ने बताया कि साइबर-सिक्योरिटी, साइकोमेट्रिक्स, क्वेश्चन-पेपर डिज़ाइन और दूसरे खास क्षेत्रों के लिए प्राइवेट सेक्टर से एक्सपर्ट्स को लाया जा रहा है। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर।
Iran Pilots Missing News: कहां गए IRGC के 3 पायलट, Qatar क्यों कर रहा इनकार? America | Hormuz
मार्च 2026 के युद्ध के दौरान लापता हुए ईरान के तीन फाइटर पायलटों को लेकर अब एक नया और बेहद गंभीर विवाद सामने आया है। ईरान का दावा है कि उसके तीन पायलट जिंदा हैं और पिछले छह महीनों से कतर की हिरासत में हैं।
Jared Kushner ने Gaza युद्धविराम पर इजराइल के प्रधानमंत्री Netanyahu से की चर्चा
पश्चिम एशिया मामलों के वार्ताकार और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर सोमवार को इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ बैठक कर रहे हैं। नेतन्याहू ने गाजा में युद्धविराम समझौते को आगे बढ़ाने के लिए अमेरिका समर्थित 15-सूत्री समझौते को खारिज कर दिया था। बैठकों के हालिया दौर में, अमेरिका समझौते की रूपरेखा के लिए इजराइल की मंजूरी हासिल करने की कोशिश कर रहा है। इसमें बहुत कुछ दांव पर लगा है, जिसमें गाज़ा में लगभग 20 लाख फलस्तीनियों की जिंदगी, तबाह हुए इलाके का पुनर्निर्माण और उस इलाके पर भविष्य का नियंत्रण शामिल है। प्रस्तावित समझौते के तहत इजराइल को गाजा से हटना है। हालांकि इजराइल का कहना है कि इजराइली सेना की वापसी से पहले हमास को पूरी तरह से हथियार त्यागने होंगे। इजराइली सेना ने इस गाजा पट्टी के लगभग 60 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा कर रखा है और नेतन्याहू ने पहले भी आगे बढ़ने की धमकी दे रखी है। सूत्रों के अनुसार, नेतन्याहू के साथ हुई बैठक में ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और शांति बोर्ड के निदेशक निकोलेय म्लादेनोव भी शामिल थे। यह बैठक बंद कमरे में हुई। यह बैठक ऐसे समय हो रही है जब कुशनर ने रविवार को मिस्र में हमास प्रमुख खलील अल-हय्या के साथ, हथियार त्यागने के मुद्दे पर दो घंटे से अधिक समय तक बातचीत की। मध्यस्थता करने वाले देशों -मिस्र, कतर और तुर्की- के अधिकारी भी वहां मौजूद थे। हमास के अधिकारी ने यह भी कहा कि हमास नेता ने मांग की है कि अमल शुरू करने से पहले इजराइल गाजा पर हमले रोके और उस इलाके को बांटने वाली तथाकथित ‘‘येलो लाइन’’ तक पीछे हट जाए। येलो लाइन को कभी भी ठीक-ठीक परिभाषित नहीं किया गया था। इजराइली सेनाएं इसे पार कर चुकी हैं और अब गाजा के लगभग 60 प्रतिशत हिस्से पर उनका नियंत्रण है। नेतन्याहू ने मई में कहा था कि अगला कदम 70 प्रतिशत हिस्से पर नियंत्रण हासिल करना है, जिसके तहत इजराइल हर तरफ से हमास पर अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है।
कतर से भारत पैसे भेजना हुआ आसान, यूपीआई आधारित पोस्ट ट्रांसफर सेवा शुरू
नई दिल्ली, 17 अगस्त (आईएएनएस)। कतर में रहने वाले भारतीय लोगों के लिए अब देश में पैसे भेजने का काम आसान हो गया है। कतर पोस्ट ने यूपीआई द्वारा संचालित रेमिटेंस सर्विस शुरू कर दी है, जिससे भारत में एलिजिबल बैंक अकाउंट में सीधे पैसे ट्रांसफर किए जा सकते हैं।
इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में सोमवार को प्रधानमंत्री के कार्यालय को दो ड्रोन से निशाना बनाया गया। कुर्दिस्तान क्षेत्रीय सरकार की सुरक्षा एजेंसी ने बताया कि इस हमले में किसी के घायल होने या मौत की खबर नहीं है। सुरक्षा एजेंसी के मुताबिक, ड्रोन हमला ईरान की सीमा की तरफ से किया गया था। हालांकि, यह साफ नहीं है कि दोनों ड्रोन अपने निशाने पर पहुंचे या नहीं। फिलहाल किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।इराक में कुर्दिस्तान PM के दफ्तर पर हमलाईरान और उसके समर्थन वाले हथियारबंद गुट लंबे समय से इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र पर ईरान विरोधी कुर्द संगठनों को शरण देने का आरोप लगाते रहे हैं। ईरान इन संगठनों को अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता है। वहीं, इराक के कुर्द अधिकारी इन आरोपों को खारिज करते हैं। उनका कहना है कि वे अपनी जमीन का इस्तेमाल पड़ोसी देशों के खिलाफ किसी तरह की धमकी या हमले के लिए नहीं होने देते।कुर्दिस्तान क्षेत्र के प्रधानमंत्री मसरूर बरज़ानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ड्रोन हमले की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा कि इस तरह के हमले लापरवाही भरे और पूरी तरह अस्वीकार्य हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि क्षेत्र में तनाव तेजी से बढ़ रहा है, जो सुरक्षा और शांति के लिए बड़ा खतरा है। बरज़ानी ने कुर्दिस्तान की आतंकवाद विरोधी इकाई की जांच का हवाला देते हुए बताया कि ड्रोन से उनके निजी कार्यालय और क्षेत्र की सुरक्षा व खुफिया एजेंसी के प्रमुख के घर को निशाना बनाया गया। इराक के कुर्दिस्तान क्षेत्र में पहले भी कई बार ड्रोन और रॉकेट से हमले हो चुके हैं।जुलाई 2025 में कुर्दिस्तान क्षेत्र के तेल ठिकानों पर लगातार चार दिनों तक ड्रोन हमले हुए थे। इन हमलों के कारण क्षेत्र का करीब आधा कच्चे तेल का उत्पादन प्रभावित हो गया था। सुरक्षा अधिकारियों ने इन हमलों के पीछे ईरान समर्थित हथियारबंद गुटों का हाथ होने की बात कही थी। इससे पहले अप्रैल 2024 में कुर्दिस्तान के बड़े गैस क्षेत्रों में शामिल खोर मोर गैस फील्ड पर भी ड्रोन हमला हुआ था। इस हमले में यमन के चार कर्मचारियों की मौत हो गई थी, जबकि दो लोग घायल हुए थे। हमले के बाद क्षेत्र के बिजली संयंत्रों को गैस की सप्लाई भी रोकनी पड़ी थी।
मध्य पूर्व (Middle East) के बेहद संवेदनशील और सामरिक रूप से महत्वपूर्ण जलडमरूमध्य [Hormuz Strait] पर इस वक्त दुनिया की सबसे बड़ी और खतरनाक तलवार लटक रही है। वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार से जुड़ी एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसके तहत ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चली आ रही एक अहम समझौता डील आज आधिकारिक तौर पर समाप्त होने जा रही है। जानकारों का यह मानना है कि यह डील क्षेत्र में बढ़ते तनाव और युद्ध के बादलों को टालने के लिए की गई थी, लेकिन यह समझौता अपनी इस बुनियादी शर्त में पूरी तरह से नाकाम साबित हुआ है। दुनिया भर की निगाहें इस वक्त फारस की खाड़ी [Persian Gulf] पर टिकी हुई हैं, क्योंकि इस समझौते के खत्म होने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव और अधिक गहराने की आशंका पैदा हो गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की सप्लाई पर भी बड़ा संकट आ सकता है।शांति समझौते की विफलता और युद्ध रोकने के प्रयास फेलकुछ समय पहले जब अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक वार्ताओं के बाद इस विशेष डील को अमली जामा पहनाया गया था, तो यह उम्मीद जताई जा रही थी कि हॉर्मोझ जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल टैंकरों और जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी और दोनों देशों के बीच किसी भी संभावित महायुद्ध को टाला जा सकेगा। लेकिन पिछले कुछ महीनों के घटनाक्रम ने यह साबित कर दिया है कि यह डील केवल कागजी साबित हुई है। ज़मीनी स्तर पर ईरान के सैन्य अभियानों, प्रॉक्सी संगठनों की गतिविधियों और अमेरिकी नौसेना की तैनाती के बीच तनाव कम होने के बजाय लगातार बढ़ता ही चला गया। कूटनीतिक मोर्चे पर दोनों देश एक-दूसरे पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते रहे हैं, जिसके परिणामस्वरूप आज यह डील बिना किसी ठोस और स्थायी शांति परिणाम के अपने दम तोड़ते हुए आखिरी पड़ाव पर पहुंच गई है।वैश्विक ऊर्जा बाजार और कच्चे तेल की कीमतों पर मंडराता सायाहॉर्मोझ संकट का सीधा असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला है। दुनिया का कुल कच्चे तेल का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी हॉर्मोझ स्ट्रेट के रास्ते से समुद्री जहाजों के जरिए दुनिया भर के बाजारों में सप्लाई किया जाता है। अमेरिका और ईरान के बीच आज डील खत्म होने और तनाव बढ़ने की स्थिति में तेल टैंकरों की आवाजाही पर गंभीर पाबंदियां लग सकती हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल [Crude Oil Prices] की कीमतों में भारी उछाल आने की पूरी संभावना है। यदि हालात युद्ध जैसे बनते हैं, तो वैश्विक स्तर पर महंगाई एक बार फिर विकराल रूप धारण कर सकती है, जिसका सीधा असर भारत समेत विकासशील देशों की अर्थव्यवस्था और ईंधन की कीमतों पर देखने को मिलेगा। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यह संकट केवल दो देशों का नहीं, बल्कि पूरी वैश्विक ट्रेड चेन के लिए एक बहुत बड़ा खतरा बन चुका है।दोनों देशों की सैन्य तैयारियां और कूटनीतिक गतिरोधइस समझौते के खत्म होने के मुहाने पर खड़े होकर दोनों ही देश अपनी-अपनी सैन्य ताकतों को और अधिक मजबूत करने में जुटे हुए हैं। पेंटगन [Pentagon] और अमेरिकी रक्षा मुख्यालय की ओर से फारस की खाड़ी में अतिरिक्त युद्धपोतों और अत्याधुनिक सैन्य विमानों की तैनाती बढ़ा दी गई है, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके। दूसरी तरफ, ईरान ने भी अपनी नौसेना और मिसाइल डिफेंस सिस्टम को हाई अलर्ट पर रख दिया है, जिससे इस क्षेत्र में सैन्य टकराव की संभावना अपने चरम पर पहुंच गई है। कूटनीतिक चैनल इस वक्त लगभग बंद होने की कगार पर हैं और दोनों पक्षों की तरफ से बयानबाजी का दौर तेज हो चुका है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र [United Nations] के सामने यह एक बहुत बड़ी चुनौती बन गई है कि वे कैसे इस क्षेत्र को एक और भयानक युद्ध की विभीषिका से बचाएं।आने वाला समय और भू-राजनीतिक भविष्य की अनिश्चितताआज जब ईरान और अमेरिका के बीच की यह डील आधिकारिक रूप से समाप्त हो रही है, तो मध्य पूर्व का भू-राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह से अनिश्चितताओं के भंवर में फंस गया है। दुनिया भर के देश और कूटनीतिक विशेषज्ञ इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यदि आने वाले दिनों में दोनों पक्षों ने संयम नहीं बरता, तो यह छोटा क्षेत्रीय विवाद एक बड़े वैश्विक युद्ध में भी बदल सकता है। कूटनीति के मोर्चे पर असफल साबित हुई यह डील इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि जब तक दोनों देश आपसी अविश्वास और भू-राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को छोड़कर किसी वास्तविक और न्यायसंगत समाधान की तरफ नहीं बढ़ते, तब तक हॉर्मोझ जलडमरूमध्य और खाड़ी देशों की शांति केवल एक सपना ही बनकर रह जाएगी।
लिंकन स्ट्राइक ग्रुप की मदद के लिए निकला अमेरिकी नौसेना का युद्धपोत USS वाशिंगटन खुद हुआ बीमार
दुनिया की सबसे ताकतवर और अत्याधुनिक सैन्य ताकत होने का दावा करने वाली अमेरिकी नौसेना (United States Navy) के भीतर से एक ऐसी शर्मनाक और हैरान करने वाली हकीकत सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। एक तरफ जहां अमेरिकी युद्धपोत [USS Washington] को समंदर में किसी बड़े मिशन पर तैनात अमेरिकी विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन (USS Abraham Lincoln) को राहत और सहायता पहुंचाने के लिए रवाना किया गया था, वहीं खुद यह युद्धपोत तकनीकी और प्रशासनिक बदहाली के कारण गंभीर संकट में घिर गया है। इस युद्धपोत के अंदर की जो तस्वीरें और रिपोर्ट्स सामने आई हैं, उन्होंने नौसेना के भीतर मचे आंतरिक हाहाकार को उजागर कर दिया है। पोत पर तैनात सैनिकों, विशेषकर महिला नौसैनिकों को जिन अमानवीय और दयनीय परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है, उसने अमेरिकी सैन्य प्रबंधन [Military Management] की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।टॉयलेट और स्वच्छता के बदतर हालात से सैनिक परेशानUSS वाशिंगटन जैसे विशाल और आधुनिक युद्धपोत पर बुनियादी सुविधाओं का इस हद तक लावारिस हाल होना किसी बड़े सदमे से कम नहीं है। पोत पर तैनात क्रू मेंबर्स और अधिकारियों के अनुसार, जहाज के अंदर बने अधिकांश टॉयलेट और सैनिटेशन सिस्टम पिछले काफी समय से पूरी तरह से खराब या जाम पड़े हैं। सीवर लाइन और प्लंबिंग फेल होने के कारण पोत के भीतर असहनीय बदबू और अस्वच्छ माहौल बन चुका है, जिससे सैनिकों के लिए एक-एक दिन काटना मुश्किल हो गया है। समंदर की बीच लहरों के बीच लंबे अभियानों पर रहने वाले नौसैनिकों के लिए साफ-सफाई और व्यक्तिगत स्वच्छता सबसे पहली जरूरत होती है, लेकिन जब युद्धपोत के टॉयलेट ही काम करना बंद कर दें, तो सैनिकों का शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों चरमराने लगता है। प्रशासनिक लापरवाही की यह पराकाष्ठा है कि महासागर की गहराइयों में गश्त लगाने वाले इन जांबाज सैनिकों को बुनियादी मानवीय जरूरतों के लिए भी भारी जद्दोजहद करनी पड़ रही है।महिला सैनिकों के सामने विकराल संकट और सैनिटरी पैड तक की कमीइस पूरी घटना का सबसे दर्दनाक और शर्मनाक पहलू यह है कि युद्धपोत पर तैनात महिला सैनिकों (Female Sailors) को अपनी बुनियादी स्वास्थ्य और स्वच्छता जरूरतों के लिए भी भारी अपमान और संकट का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, युद्धपोत पर एमरजेंसी मेडिकल सप्लीमेंट्स और आवश्यक सैनिटरी प्रोडक्ट्स [Sanitary Pads] का भारी अकाल पड़ चुका है, जिसके चलते महिला सैनिकों को पीरियड्स के दौरान गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जिस देश की सेना दुनिया भर में मानवाधिकारों और महिला सशक्तिकरण के बड़े-बड़े उपदेश देती है, उसी देश के युद्धपोत पर सेवारत महिला नौसैनिकों को बुनियादी सैनिटरी पैड जैसी सामान्य वस्तुएं तक उपलब्ध न करा पाना रक्षा मंत्रालय और नौसेना कमान की बड़ी विफलता को दर्शाता है। महिला सैनिकों ने इस बात पर गहरी नाराजगी जताई है कि एक तरफ उन्हें पुरुषों के बराबर युद्धक मोर्चों पर तैनात किया जाता है, लेकिन जब मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाओं की बात आती है, तो उन्हें पूरी तरह से भगवान भरोसे छोड़ दिया जाता है।तकनीकी खराबी और लॉजिस्टिक्स की भयंकर विफलताअमेरिकी नौसेना के इन युद्धपोतों के संचालन के पीछे अरबों-खरबों डॉलर का बजट होता है, इसके बावजूद इस तरह की रसद और तकनीकी विफलताएं [Logistics Failures] यह साबित करती हैं कि जमीनी स्तर पर प्रबंधन कितना खोखला हो चुका है। USS वाशिंगटन जब लिंकन स्ट्राइक ग्रुप की मदद के लिए निकला था, तो उम्मीद यह की जा रही थी कि यह पोत युद्ध के मोर्चों पर एक मजबूत बैकअप साबित होगा, लेकिन खुद अपने ही आंतरिक रख-रखाव के मोर्चे पर यह पोत चित्कार उठा। जहाजों के इंजनों की तकनीकी समस्याओं के साथ-साथ समय पर स्पेयर पार्ट्स और रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुओं की आपूर्ति न होना इस बात का प्रमाण है कि रक्षा आपूर्ति श्रृंखला (Defense Supply Chain) में गंभीर खामियां आ चुकी हैं। नौसेना अधिकारियों द्वारा इस मामले को दबाने और छिपाने के तमाम प्रयास किए गए, लेकिन जब पीड़ित सैनिकों ने अपनी आपबीती मीडिया और मानवाधिकार मंचों तक पहुंचाई, तो पोल खुल गई।अमेरिकी सेना की साख को बट्टा और जवाबदेही की मांगइस सनसनीखेज खुलासे के बाद अमेरिका के रक्षा विभाग [Pentagon] और नौसेना मुख्यालय में हड़कंप मच गया है। रक्षा विशेषज्ञों और सांसदों ने इस मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश देने की मांग की है ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर किस स्तर पर इतनी बड़ी लापरवाही बरती गई जिसके कारण देश की रक्षा करने वाले सैनिक खुद नरक जैसी जिंदगी जीने को मजबूर हुए। युद्धपोत पर तैनात सैनिकों के परिवारों में भी भारी रोष व्याप्त है, जो यह सवाल पूछ रहे हैं कि क्या सरकार सैनिकों की जान और उनकी गरिमा के साथ इसी तरह खिलवाड़ करती रहेगी। आने वाले दिनों में इस मामले को लेकर अमेरिकी कांग्रेस में तीखी बहस होने की पूरी संभावना है, क्योंकि इस घटना ने दुनिया के सबसे बड़े सुपरपॉवर की सैन्य तैयारियों के खोखलेपन को सबके सामने बेनकाब कर दिया है।
अमेरिका और ईरान तनाव के बीच अमेरिका की पूर्व कांग्रेसवुमन मार्जोरी टेलर ग्रीन ने सनसनीखेज दावा किया है। उनके उनुसार वाशिंगटन तेहरान के खिलाफ परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर रणनीतिक बैठकें कर रहा है।
रूस के मिसाइल हमले में यूक्रेन के आर्सेलरमित्तल क्रिवी रिह प्लांट पर हमला हुआ, जिसमें दो लोगों की मौत और 14 कर्मचारी घायल हो गए। हमले से प्लांट की महत्वपूर्ण उत्पादन सुविधाएं क्षतिग्रस्त हुईं, जिससे उत्पादन रोकना पड़ा और यूक्रेन के औद्योगिक क्षेत्र को बड़ा नुकसान हुआ।
Arshdeep Dang: दूसरे विश्व युद्ध के बाद UK में पहले सिख फाइटर पायलट बने अर्शदीप, कैसे हासिल की बड़ी कामयाबी?
Donald Trump ने सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान रक्षा समझौते को 'साहसिक कदम' बताया
सागर कुलकर्णीवाशिंगटन, 17 अगस्त अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच हुए रक्षा समझौते को अपने देशों की ‘‘अधिक प्रभावी तरीके से रक्षा’’ की दिशा में ‘‘बड़ा, साहसिक और महत्वपूर्ण पहला कदम’’ बताया है। ट्रंप की रविवार को की गयी इस टिप्पणी से कुछ दिन पहले ही तीनों देशों ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते के तहत तीनों में से किसी भी देश पर होने वाले सशस्त्र हमले को सभी तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। ट्रंप ने सोशल मीडिया मंच ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘मैं यह देखकर बहुत खुश हूं कि सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान ने हाल ही में और आखिरकार मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। यह दिखाता है कि पश्चिम एशिया एकजुट हो रहा है और ये देश अधिक प्रभावी तरीके से अपनी रक्षा कर सकेंगे।’’उन्होंने कहा, ‘‘तीनों देशों के महान नेतृत्व को बधाई। यह एक बड़ा, साहसिक और महत्वपूर्ण पहला कदम है-वाह।’’इस समझौते पर सात अगस्त को सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान, तुर्किये के राष्ट्रपति रज्जब तैय्यब एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हस्ताक्षर किए थे। भारत ने कहा है कि वह मक्का समझौते के अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय शांति और स्थिरता पर पड़ने वाले प्रभावों का आकलन कर रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 11 अगस्त को कहा, ‘‘जहां तक इस समझौते का सवाल है, हम भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और क्षेत्रीय शांति एवं स्थिरता, दोनों के दृष्टिकोण से इसके प्रभावों का अध्ययन कर रहे हैं।’’जायसवाल ने कहा, ‘‘भारत अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और इस संबंध में सभी आवश्यक कदम उठाएगा।
वैश्विक कूटनीति के पटल पर एक बड़े बदलाव के संकेत देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच संपन्न हुए 'मक्का रक्षा समझौते' (Makkah Defense Agreement) का खुला समर्थन किया है। गत 7 अगस्त को हुए इस बहुचर्चित सामरिक समझौते के बाद से ही मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया की राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने इन तीनों देशों की पीठ थपथपाई और इस कदम को क्षेत्रीय स्थिरता व एकता की दिशा में एक साहसिक व शानदार पहल करार दिया।क्या है मक्का रक्षा समझौता और इसके मुख्य प्रावधान?गत 7 अगस्त को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मिलकर इस महत्वपूर्ण रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इस डील के तहत तेल संपन्न राष्ट्र सऊदी अरब, परमाणु शक्ति संपन्न देश पाकिस्तान और नाटो की दूसरी सबसे बड़ी सेना रखने वाला तुर्की एक साझा मंच पर आए हैं। समझौते के बाद जारी किए गए संयुक्त बयान में स्पष्ट किया गया था कि इसका मुख्य उद्देश्य किसी भी आक्रामक सैन्य कार्रवाई के खिलाफ अपनी सामूहिक प्रतिरोधक क्षमता (Collective Deterrence) को मजबूत करना है।इस समझौते का सबसे अहम और संवेदनशील प्रावधान नाटो की तर्ज पर बनाया गया है, जिसके तहत यदि इन तीनों देशों में से किसी एक पर भी कोई सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हुआ संयुक्त हमला माना जाएगा। तुर्किए के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने एक साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि यह व्यवस्था तकनीकी रूप से नाटो संधि के अनुच्छेद-5 के समान है। इसके तहत किसी सदस्य देश द्वारा औपचारिक मदद मांगे जाने पर अन्य दोनों देश खुफिया जानकारी साझा करने, रसद सहायता देने या आवश्यकता पड़ने पर सैन्य टुकड़ियां तैनात करने के लिए प्रतिबद्ध होंगे। तुर्की ने यह भी साफ किया है कि यह समझौता किसी खास देश या ईरान के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने के लिए है।मक्का समझौते पर भारत की पैनी नजर और कूटनीतिक रुखपाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के इस रणनीतिक गठबंधन पर भारत ने भी अपनी गंभीर और सतर्क प्रतिक्रिया दी है। भारत के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में स्पष्ट किया है कि सरकार इस बात का बारीकी से आकलन कर रही है कि इस समझौते का क्षेत्रीय शांति और विशेष रूप से भारत के सामरिक हितों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। नई दिल्ली ने दो टूक शब्दों में दोहराया है कि भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और अपने नागरिकों के हितों की रक्षा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। पश्चिम एशिया और दक्षिण एशिया के बीच उभरते इस नए कूटनीतिक समीकरण पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी कड़ी निगाहें टिकी हुई हैं।
Houthi Attack on Saudi: Iran vs US के बीच हूतियों ने Saudi Arabia की नाक में किया दम! | Mokha Port
मिडिल ईस्ट (Middle East) में तनाव चरम पर है। जहां एक तरफ ईरान (Iran) अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है, वहीं यमन के हूती विद्रोही (Houthi Rebels) सऊदी अरब (Saudi Arabia) की नाक में दम किए हुए हैं।
Donald Trump: किम से दोस्ती, सियोल से दूरी; ट्रंप ने दक्षिण कोरिया संग युद्ध अभ्यास कम करने का दिया आदेश- Donald Trump major order Cutbacks in military exercises with South Korea soft stance towards Kim evident again
Kurukshetra News: केनरा बैंक ऋण मामले में अदालत ने उधारकर्ता के खिलाफ सुनाया एकतरफा फैसला
केनरा बैंक ऋण मामले में अदालत ने उधारकर्ता के खिलाफ सुनाया एकतरफा फैसला
Chief Minister to review the 'War Against Drugs' campaign on the 31st; next action plan to be formulated.
पश्चिम एशिया में जारी भारी सैन्य संघर्ष और लगभग छह महीने से चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा लाइफलाइन कहे जाने वाले 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को लेकर एक बड़ी कूटनीतिक और रणनीतिक सफलता सामने आई है। इस रणनीतिक जलमार्ग के दोनों तटीय देशों—ईरान और ओमान—ने हफ्तों चली गहन तकनीकी और कूटनीतिक वार्ताओं के बाद जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए एक नए 'शिपिंग रूट मैप' पर ऐतिहासिक समझौता कर लिया है।ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि करते हुए बताया कि 18 जून को हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत शुरू हुई तीन महीने की बातचीत अब एक ठोस तकनीकी नतीजे पर पहुंच चुकी है। हालांकि, दोनों देशों के बीच नए नेविगेशनल नक्शे पर सहमति बनने के बावजूद इस जलमार्ग से वाणिज्यिक यातायात को पूर्ण रूप से बहाल करने की राह में अमेरिका के साथ सैन्य टकराव और नाकेबंदी का बड़ा गतिरोध अभी भी बरकरार है।क्या है ईरान और ओमान के बीच हुआ 'शिपिंग रूट मैप' समझौता?फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल चोकपॉइंट है। इसका उत्तरी हिस्सा ईरान के तटवर्ती जलक्षेत्र में और दक्षिणी हिस्सा ओमान के मुसैंडम प्रायद्वीप के अधिकार क्षेत्र में आता है। युद्ध के दौरान जहाजों पर हुए हमलों, समुद्री बारूदी सुरंगों के खतरे और नेविगेशन की बाधाओं को देखते हुए दोनों देशों ने एक स्वतंत्र सुरक्षा तंत्र तैयार किया है।इस नए समझौते की मुख्य तकनीकी विशेषताएं इस प्रकार हैं:सुरक्षित नेविगेशन चैनल: खाड़ी के भीतर प्रवेश करने वाले और बाहर खुले समुद्र (अरब सागर) की ओर जाने वाले जहाजों के लिए अलग-अलग विशिष्ट समुद्री गलियारे (Traffic Separation Channels) तय किए गए हैं।अंतर-विभागीय समन्वय: इस तकनीकी योजना को ईरान के विदेश मंत्रालय के नेतृत्व में रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और पर्यावरण अधिकारियों ने ओमानी समकक्षों के साथ मिलकर अंतिम रूप दिया है।संप्रभुता और सुरक्षा का संतुलन: ईरानी प्रवक्ता के अनुसार, यह दोनों तटीय मुल्कों का एक स्वतंत्र समझौता है, जिसका उद्देश्य दोनों देशों की क्षेत्रीय संप्रभुता की रक्षा करते हुए अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित पारगमन प्रदान करना है।लंबित मुद्दे और संयुक्त बयान: टोल टैक्स और नेविगेशन सुरक्षा पर गहन मंथनयद्यपि शिपिंग रूट मैप के तकनीकी खाके पर सहमति बन गई है, लेकिन तेहरान और मस्कट के राजनयिक अभी भी कुछ शेष और लंबित मुद्दों पर बातचीत जारी रखे हुए हैं। दोनों देश एक आधिकारिक संयुक्त बयान (Joint Bilateral Statement) जारी करने के लिए उसकी शब्दावली और कानूनी प्रारूप पर काम कर रहे हैं।इस बातचीत में सबसे संवेदनशील मुद्दा इस बात को लेकर है कि क्या इस नए रूट से गुजरने वाले विदेशी जहाजों से कोई सुरक्षा शुल्क या 'ट्रांजिट टोल' वसूला जाएगा और जहाजों की सुरक्षा के लिए कौन सा तंत्र ऑन-ग्राउंड सक्रिय रहेगा। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी कानूनी और प्रक्रियात्मक औपचारिकताएं पूरी नहीं हो जातीं, तब तक दोनों देशों के बीच संवाद का सिलसिला लगातार जारी रहेगा।जलमार्ग को पूर्ण रूप से खोलने के लिए ईरान की शर्तें: अमेरिका के पाले में गेंदईरान ने साफ कर दिया है कि ओमान के साथ रूट मैप तैयार होना केवल पहला कदम है, लेकिन होर्मुज को पूरी तरह खोलने और सामान्य व्यापारिक जहाजों का संचालन बहाल करने का अंतिम निर्णय अमेरिका के रुख पर टिका है। ईरानी नेतृत्व ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने इस वार्ता प्रक्रिया में लगातार बाधाएं उत्पन्न की हैं।तेहरान ने जलमार्ग के पूर्ण संचालन के लिए वाशिंगटन के समक्ष स्पष्ट शर्तें रखी हैं:अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की समाप्ति: फारस की खाड़ी और ईरानी तटों के आसपास अमेरिकी नौसेना द्वारा बनाए गए घेराव और सैन्य गतिविधियों को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए।सैन्य धमकियों पर रोक: ईरानी संप्रभुता और प्रतिष्ठानों के खिलाफ किसी भी प्रकार की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई को पूरी तरह बंद किया जाए।प्रतिबद्धताओं के उल्लंघन का हर्जाना: तेहरान ने मांग की है कि अमेरिका ने पिछले दो महीनों के दौरान जिन समझौतों और प्रतिबद्धताओं का उल्लंघन किया है, उसके एवज में आवश्यक मुआवजा (Compensation) दिया जाए।ईरानी पक्ष का कहना है कि यह पूरी बातचीत जून में तय हुए उस ढांचे का हिस्सा थी, जिसके तहत ईरान और ओमान को नेविगेशन फ्रेमवर्क तैयार करना था, और अब गेंद वाशिंगटन के पाले में है कि वह अपनी जिम्मेदारियों को कैसे पूरा करता है।फारस की खाड़ी में जारी सैन्य टकराव: हमलों और आईएमओ के चिंताजनक आंकड़ेराजनयिक वार्ताओं की मेज पर प्रगति के बावजूद जमीनी और समुद्री हकीकत बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस जारी संघर्ष के दौरान होर्मुज और व्यापक मध्य पूर्व जलक्षेत्र में व्यापारिक जहाजों पर 65 से अधिक पुष्ट हमले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें अब तक 17 बेकसूर नाविकों की जान जा चुकी है।हालिया दिनों में भी हमलों का सिलसिला थमा नहीं है। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने एक बल्क कैरियर जहाज पर अज्ञात मिसाइल या ड्रोन टकराने की जानकारी दी है। इसके अलावा, अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के जहाजों को भी निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई हैं। इस निरंतर असुरक्षा के चलते प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बीमा कंपनियों ने इस क्षेत्र से गुजरने वाले जहाजों के वॉर-रिस्क प्रीमियम (War-Risk Premium) को अत्यधिक बढ़ा दिया है, जिससे वैश्विक लॉजिस्टिक्स लागत आसमान छू रही है।वैश्विक ऊर्जा बाजार और भारत पर असर: तेल आपूर्ति और कूटनीतिक संतुलनयुद्ध से पहले दुनिया के कुल समुद्री कच्चे तेल के व्यापार का लगभग 20 से 25 प्रतिशत हिस्सा और कुल एलएनजी (LNG) का 20 प्रतिशत हिस्सा अकेले होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरता था। इस गलियारे के बाधित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं और हालिया सप्ताह में इनमें लगभग 6 प्रतिशत का भारी उछाल देखा गया है।भारत के लिए यह घटनाक्रम सीधा और गहरा प्रभाव डालता है:ऊर्जा सुरक्षा की चुनौती: भारत अपनी आवश्यकता का लगभग 85% कच्चा तेल और 60% एलपीजी आयात करता है, जिसका बड़ा हिस्सा इसी खाड़ी क्षेत्र से आता है।आपूर्ति में राहत की उम्मीद: यदि ईरान-ओमान समझौते के तहत सीमित संख्या में भी टैंकरों का सुरक्षित पारगमन शुरू होता है, तो भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई देशों को तेल और एलएनजी आपूर्ति में बड़ी राहत मिल सकती है।घरेलू महंगाई पर नियंत्रण: कच्चे तेल की आपूर्ति सुचारू होने से वैश्विक कीमतों में नरमी आएगी, जिससे आयात बिल घटेगा और घरेलू स्तर पर ईंधन की कीमतों में स्थिरता बनी रहेगी।ओमान की मध्यस्थता और आगे की राह: क्या बहाल हो पाएगी होर्मुज में स्थायी शांति?इस पूरे संकट में खाड़ी देश ओमान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में अपनी निष्पक्ष और शांतिदूत की भूमिका को सिद्ध कर रहा है। मस्कट ने दोनों पक्षों के बीच लगातार अप्रत्यक्ष संवाद और तकनीकी तालमेल को बनाए रखकर इस रूट मैप को संभव बनाया है।हालांकि, असली चुनौती आने वाले दिनों में यह देखने की होगी कि क्या अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रशासन इस नए नेविगेशन मैप को स्वीकार कर अपनी नौसैनिक आक्रामकता को कम करने पर राजी होता है या नहीं। अंतरराष्ट्रीय शिपिंग उद्योग और संयुक्त राष्ट्र की नजरें अब तेहरान और मस्कट के आगामी संयुक्त बयान पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि दुनिया के सबसे संवेदनशील तेल मार्ग पर शांति के नए युग की शुरुआत होगी या फिर शक्ति प्रदर्शन का यह खतरनाक दौर वैश्विक अर्थव्यवस्था को और गहरे संकट में धकेलेगा।
आपको एकतरफा वोट डाला...इमरान मसूद को सड़क के लिए लोगों ने घेरा, बोले- अभी होगा
स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम में पहुंचे सहारनपुर के कांग्रेस सांसद इमरान मसूद को युवाओं ने सड़क की बदहाली को लेकर घेर लिया। लोगों ने लंबे समय से जर्जर सड़क का निर्माण जल्द कराने की मांग की। सांसद ने “अभी काम होगा” का आश्वासन दिया, जिसके बाद समर्थकों ने नारे लगाए।
भगवंत मान सरकार ने स्वतंत्रता दिवस पर 'युद्ध नशेआं विरुद्ध' अभियान में योगदान देने वाली ग्राम एवं वार्ड रक्षा समितियों को सम्मानित किया। यह सम्मान समारोह दो सप्ताह की एक सुव्यवस्थित कार्रवाई एवं समीक्षा प्रक्रिया की शुरुआत है, जिसका समापन 31 अगस्त को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय बैठक से होगा।
Hormuz Strait Crisis 2026: UAE का एक और जहाज तबाह, ईरानी पायलट्स पर कतर से भिड़ा ईरान | Mojtaba
मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में लगातार हो रहे हमलों के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने ईरान पर अपनी सरकारी तेल कंपनी ADNOC के एक और जहाज को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।
ब्रिटेन की रॉयल एयर फोर्स (RAF) में लुधियाना का अर्शदीप सिंह फाइटर पायलट बन गया। 28 वर्षीय फ्लाइट लेफ्टिनेंट अर्शदीप सिंह डांग द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटिश एयर फोर्स में फाइटर पायलट बनने वाले पहले सिख बन गए हैं। उत्तरी वेल्स स्थित आरएएफ वैली में आयोजित फास्ट जेट पायलट ग्रेजुएशन समारोह में आधिकारिक तौर पर उन्हें यह सम्मान मिला। रॉयल एयर फोर्स में पायलट बनने पर अर्शदीप ने कहा कि उन्होंने अपने दादा का सपना साकार किया है। अर्शदीप का कहना है कि यह सफलता केवल उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि वह चाहते हैं कि उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपने सपनों को पूरा करने और इतिहास रचने के लिए प्रेरित करे। पंजाब से लेकर इंग्लैंड की एयरफोर्स में पायलट बनने का सफर सिलसिलेवार जानिए.. दादा का अधूरा सपना, जो पोते ने किया पूरा अर्शदीप के फाइटर पायलट बनने के पीछे एक बेहद भावुक पारिवारिक कहानी जुड़ी है। अर्शदीप ने बताया, “यह मेरे दादा सरदार संतोख सिंह डांग का सपना था कि मेरे पिता एक पायलट बनें। लेकिन मेरे दादाजी का निधन तब हो गया था जब मेरे पिता केवल 6 वर्ष के थे। इस वजह से मेरे पिता को अपनी इच्छा पूरी करने के लिए कभी वे अवसर या संसाधन नहीं मिल सके। मेरे माता-पिता ने मुझे हमेशा प्रोत्साहित किया और मुझे यह विश्वास दिलाया कि मैं एक पायलट बन सकता हूं। आखिरकार वह सपना सच हो गया।” संघर्षों के दिनों में मां बनीं सबसे बड़ी ताकत विदेश में जाकर बसने के शुरुआती दिनों में परिवार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। अर्शदीप अपनी सफलता का पूरा श्रेय अपनी माता गगनदीप कौर को देते हैं। वे कहते हैं, “हालांकि मेरे पिता को पायलट के रूप में देखना मेरे दादाजी का सपना था, लेकिन मेरी असली ताकत हमेशा मेरी मां रही हैं। उन्होंने हमें हमेशा जमीन से जोड़े रखा, विनम्र बनाया और वित्तीय तंगी के दौर में भी कभी हमें नीचा महसूस नहीं होने दिया। सबसे कठिन समय में उन्होंने हमारे परिवार को संभाला और भारत से यूके आने के बाद भी हमारे भीतर पंजाबी जड़ों और सिख मूल्यों को बनाए रखा।” विदेश में भी पंजाबी संस्कृति और मूल्यों को रखा जीवित बचपन में यूके चले जाने के बावजूद अर्शदीप ने अपनी जड़ों को कैसे संजोकर रखा, इस पर उन्होंने बताया कि उनके घर में एक बेहद सख्त नियम है। घर के अंदर सभी सदस्य केवल पंजाबी भाषा में ही बात करते हैं और किसी अन्य भाषा के प्रयोग की अनुमति नहीं होती। इसके अलावा, परिवार नियमित रूप से गुरुद्वारे जाता है, लंगर सेवा में भाग लेता है और सिख धर्म के मूल सिद्धांतों का पालन करता है। अर्शदीप कहते हैं, “कठिन और तनावपूर्ण सैन्य उड़ानों के दौरान 'चढ़दी कला' की सदाबहार पंजाबी भावना ने मेरी सबसे ज्यादा मदद की।”
चीन की लगी लॉटरी! यूएस नेवी ने पैसिफिक क्षेत्र से अपना सबसे घातक युद्धपोत अचानक पीछे हटाया
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में इन दिनों भू-राजनीतिक हलचल इस कदर तेज हो गई है कि दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों की सांसे अटकी हुई हैं। वैश्विक महाशक्ति अमेरिका और ड्रैगन यानी चीन के बीच समंदर में वर्चस्व की जो जंग पिछले कई सालों से चली आ रही है, उसमें एक ऐसा सनसनीखेज मोड़ आया है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। अमेरिकी नौसेना यानी यूएस नेवी ने अपने सबसे घातक, अत्याधुनिक और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण युद्धपोत को पैसिफिक क्षेत्र से अचानक पीछे हटा लिया है। अमेरिका के इस अप्रत्याशित फैसले के बाद बीजिंग स्थित कम्युनिस्ट सरकार और चीनी नौसेना की मानों लाटरी सी लग गई है, क्योंकि उनके लिए दक्षिण चीन सागर और ताइवान के आसपास अमेरिकी सैन्य दबाव अचानक कम हो गया है। इस रणनीतिक फेरबदल के पीछे अमेरिका की क्या मजबूरी है और ड्रैगन इस मौके का फायदा उठाकर पैसिफिक महासागर में क्या नई चाल चल रहा है, आइए इसकी पूरी और अंदरूनी कहानी विस्तार से जानते हैं।पैसिफिक में अमेरिकी नौसेना की अचानक वापसी और चीन की खुशीजब से यूएस नेवी ने अपने इस ताकतवर युद्धपोत को पैसिफिक थिएटर से हटाने का आधिकारिक या रणनीतिक निर्णय लिया है, तब से चीनी सरकारी मीडिया और रणनीतिकार फूले नहीं समा रहे हैं। पिछले कुछ दशकों से अमेरिका लगातार यह दावा करता आया है कि वह इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को मुक्त, खुला और सुरक्षित रखने के लिए अपनी सैन्य ताकत का लोहा मनवाता रहेगा, ताकि चीन इस पूरे समुद्री मार्ग पर अपनी दादागिरी न चला सके। लेकिन अचानक से इस प्रकार के अग्रिम पंक्ति के युद्धपोत को हटाए जाने से अंतरराष्ट्रीय रक्षा गलियारों में यह चर्चा जोर पकड़ ली है कि क्या अमेरिका अब एशियाई मोर्चे पर थोड़ा पीछे हट रहा है या फिर उसकी प्राथमिकताएं वैश्विक स्तर पर बदल रही हैं। चीन इस स्थिति का फायदा उठाकर ताइवान जलडमरूमध्य और दक्षिण चीन सागर के विवादित द्वीपों के आसपास अपनी नौसैनिक गतिविधियों को और अधिक आक्रामक तरीके से बढ़ाने की फिराक में है, जिससे इस क्षेत्र में तनाव एक नए चरम पर पहुंच सकता है।सामरिक रूप से क्यों महत्वपूर्ण है पैसिफिक और यह घातक युद्धपोत?पैसिफिक महासागर दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे अधिक व्यापारिक गतिविधियों वाला समंदर है, जिसके रास्ते से दुनिया भर का खरबों डॉलर का माल गुजरता है। इस क्षेत्र में अमेरिका का यह घातक युद्धपोत एक तैरते हुए किले की तरह काम कर रहा था, जिसमें अत्याधुनिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम, रडार तकनीक और दुश्मन के जहाजों को पलक झपकते ही नेस्तनाबूद कर देने वाली मारक क्षमता मौजूद थी। जब ऐसा शक्तिशाली युद्धपोत अपनी तय गश्त से हटता है, तो उस नौसैनिक बेड़े की ताकत में एक बड़ा खालीपन आ जाता है। चीन लगातार अपनी नेवी को मॉडर्न बना रहा है और उसके पास एयरक्राफ्ट कैरियर तथा विध्वंसक जहाजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में अमेरिकी युद्धपोत का हटना चीनी नौसेना को इस विशाल जलीय क्षेत्र में अपनी पैठ और रणनीतिक बढ़त मजबूत करने का एक सुनहरा अवसर प्रदान कर रहा है, जिसे ड्रैगन किसी भी कीमत पर हाथ से जाने नहीं देना चाहता।अमेरिकी नेवी के इस फैसले के पीछे छिपी बड़ी वजहें और मजबूरियांसवाल यह उठता है कि आखिर जिस अमेरिका ने पूरी दुनिया को साधने के लिए पैसिफिक में अपनी सबसे मजबूत सैन्य दीवार खड़ी की थी, उसने अचानक अपने इस घातक युद्धपोत को वहां से क्यों हटाया? रक्षा मामलों के जानकारों का मानना है कि इसके पीछे कई आंतरिक और वैश्विक कारण जिम्मेदार हैं। सबसे पहला कारण अमेरिकी नौसेना के सामने आ रही मेंटेनेंस और ओवरहॉलिंग की भारी कमी है, क्योंकि पिछले कई महीनों से लगातार गश्त करने के कारण अमेरिकी जहाजों और उनके क्रू को भारी थकान और तकनीकी मुरम्मत की जरूरत पड़ रही है। दूसरा और सबसे अहम कारण मध्य पूर्व यानी मिडिल ईस्ट और यूरोप में चल रहे तनाव हैं, जहां लाल सागर और भूमध्यसागरीय क्षेत्र में अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए युद्धपोतों की भारी मांग बनी हुई है। सीमित संसाधनों और बजट के चलते पेंटागन को अपने रणनीतिक परिसंपत्तियों को एक जगह से हटाकर दूसरी संवेदनशील जगहों पर री-डप्लॉय करने के लिए मजबूर होना पड़ा है, जिसका सीधा रणनीतिक लाभ चीन को मिलता दिख रहा है।ताइवान और दक्षिण चीन सागर पर मंडराता नया और बड़ा खतराअमेरिका के इस कदम से सबसे बड़ा भू-राजनीतिक संकट ताइवान और आस-पास के छोटे एशियाई देशों के सामने खड़ा हो गया है। ताइवान हमेशा से चीन की विस्तारवादी नीतियों के निशाने पर रहा है, और अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी ही वह मुख्य ढाल थी जो बीजिंग को किसी भी बड़े सैन्य दुस्साहस से रोक कर रखती थी। अब जब पैसिफिक क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य उपस्थिति थोड़ी हल्की पड़ी है, तो ताइवान जलडमरूमध्य में चीनी सेना के युद्धाभ्यास और घुसपैठ की घटनाएं और अधिक तेजी से बढ़ सकती हैं। हालांकि अमेरिकी रक्षा विभाग यानी पेंटागन का यह भी तर्क है कि वे अपने सहयोगियों और मित्र देशों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं और वे पनडुब्बियों तथा अन्य अत्याधुनिक हथियारों के जरिए इस क्षेत्र में अपनी बैलेंस पावर बनाए रखेंगे, लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि इस युद्धपोत के हटने से चीनी नौसेना का मनोबल सातवें आसमान पर पहुंच गया है।इंडो-पैसिफिक का भविष्य और भारत समेत अन्य देशों की चिंताएंइस पूरी भू-राजनीतिक उथल-पुथल का असर केवल अमेरिका और चीन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा प्रभाव भारत, जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया जैसे इंडो-पैसिफिक देशों की सुरक्षा रणनीतियों पर भी पड़ रहा है। क्वाड (Quad) देशों का मुख्य उद्देश्य इसी क्षेत्र में चीन के बढ़ते वर्चस्व को संतुलित करना है, ताकि समंदर के रास्ते होने वाला वैश्विक व्यापार बाधित न हो। यदि अमेरिका अपनी सैन्य व्यस्तता या आंतरिक प्राथमिकताओं के कारण पैसिफिक से अपनी पकड़ थोड़ी भी ढीली करता है, तो एशियाई देशों को अपनी समुद्री सुरक्षा के लिए और अधिक आत्मनिर्भर होना पड़ेगा। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या अमेरिका अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करके इस घातक युद्धपोत को वापस पैसिफिक क्षेत्र में तैनात करता है, या फिर चीन इस खाली जगह का फायदा उठाकर इस पूरे महासागर में अपने एकछत्र राज का नया अध्याय लिखने में सफल हो जाता है, जिस पर पूरी दुनिया की पैनी नजर बनी हुई है।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद से दुनिया के नक्शे पर कई देश बने और बिगड़े, लेकिन शीत युद्ध के दौर की एक ऐसी भू-राजनीतिक आग आज भी सुलग रही है जिसने पूर्वी एशिया के कोरियाई प्रायद्वीप को दो हिस्सों में बांटकर रख दिया है। हम बात कर रहे हैं उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया के बीच की उस ऐतिहासिक खाई की, जो साल 1953 में हुए एक अस्थाई युद्धविराम के बाद से आज तक किसी मुकम्मल शांति संधि में तब्दील नहीं हो पाई है। आज भी दोनों देश तकनीकी रूप से युद्ध की स्थिति में ही बने हुए हैं, और उनके बीच की सीमा दुनिया के सबसे खतरनाक और भारी सैन्यीकृत क्षेत्रों में गिनी जाती है। यह सवाल हर अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार के मन में उठता है कि आखिर क्यों सात दशक बीत जाने के बाद भी दोनों कोरियाई देश एक औपचारिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर नहीं कर पाए हैं, और क्यों प्योंगयांग तथा सियोल के बीच की यह तल्खी पूरी दुनिया के लिए एक निरंतर परमाणु और पारंपरिक खतरे का सबब बनी हुई है।1953 का ऐतिहासिक युद्धविराम और कोरियाई युद्ध की पृष्ठभूमिकोरियाई युद्ध की शुरुआत साल 1950 में तब हुई थी जब सोवियत संघ और चीन समर्थित उत्तर कोरियाई सेनाओं ने साम्यवादी विचारधारा का विस्तार करते हुए दक्षिण कोरिया पर अचानक भारी आक्रमण कर दिया था। इस खूनी संघर्ष में अमेरिका के नेतृत्व वाली संयुक्त राष्ट्र (UN) की सेनाएं दक्षिण कोरिया के पक्ष में मैदान में उतर गईं, जिसके परिणामस्वरूप तीन साल तक चले इस भीषण युद्ध में लाखों सैनिक और आम नागरिक मारे गए। अंततः 27 जुलाई 1953 को पमुनजोम गांव में एक आर्मिस्टिस यानी युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर किए गए, जिसके तहत दोनों देशों के बीच युद्ध की गतिविधियों को तो रोक दिया गया, लेकिन इसे किसी युद्ध समाप्ति की फाइनल पीस ट्रीटी यानी शांति संधि का दर्जा नहीं मिला। इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच 38वीं समानांतर रेखा के इर्द-गिर्द डीएमजेड यानी डिमिलिटराइज्ड जोन (DMZ) का निर्माण किया गया, जो आज भी दुनिया की सबसे पहरेदार सीमा मानी जाती है और दोनों देशों के बीच की स्थायी दुश्मनी का सबसे बड़ा जीवंत प्रमाण है।तकनीकी रूप से क्यों आज भी युद्ध की स्थिति में हैं दोनों देश?अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के नियमों के अनुसार जब दो देश युद्ध लड़ते हैं, तो शत्रुता समाप्त करने के लिए या तो वे किसी शांति संधि पर हस्ताक्षर करते हैं या फिर एकतरफा समर्पण करते हैं। कोरियाई प्रायद्वीप के मामले में न तो किसी ने समर्पण किया और न ही आज तक कोई व्यापक शांति समझौता हो सका है, जिसके चलते तकनीकी रूप से उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया आज भी कानूनी तौर पर युद्धरत (At War) देश माने जाते हैं। इस अजीबोगरीब और तनावपूर्ण स्थिति का खामियाजा दोनों देशों के नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है, जहां सीमा के दोनों तरफ भारी मात्रा में बारूदी सुरंगे, लाखों की संख्या में तैनात सैनिक और मिसाइलें हर वक्त किसी भी अनहोनी के लिए तैयार खड़ी रहती हैं। समय-समय पर दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत के दौर चले, ऐतिहासिक शिखर सम्मेलन आयोजित हुए और रिश्तों को सुधारने के दावे भी किए गए, लेकिन आपसी अविश्वास, उत्तर कोरिया के लगातार परमाणु और बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षणों तथा अमेरिका की सैन्य उपस्थिति ने हर बार शांति की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।शीत युद्ध की विरासत और महाशक्तियों का कूटनीतिक शिकंजाउत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच का यह अनसुलझा संघर्ष केवल दो पड़ोसी देशों की आपसी रंजिश नहीं है, बल्कि यह शीत युद्ध की उस भू-राजनीतिक विरासत का हिस्सा है जो आज भी वैश्विक महाशक्तियों के वर्चस्व की जंग का अखाड़ा बना हुआ है। उत्तर कोरिया को जहां एक तरफ चीन और रूस का रणनीतिक समर्थन और कूटनीतिक अभयदान प्राप्त है, वहीं दूसरी तरफ दक्षिण कोरिया की सुरक्षा की पूरी गारंटी अमेरिका के साथ उसके रक्षा समझौतों और परमाणु छत्रछाया पर टिकी हुई है। यही वजह है कि जब भी कोरियाई प्रायद्वीप में शांति स्थापना की कोई छोटी सी भी किरण दिखाई देती है, तो वाशिंगटन, बीजिंग और मास्को के भू-राजनीतिक समीकरण बीच में आ जाते हैं। उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन की आक्रामक नीतियों और परमाणु हथियारों के प्रति जुनून ने इस क्षेत्र को दुनिया के सबसे संवेदनशील न्यूक्लियर फ्लैशपॉइंट में बदल दिया है, जहां एक छोटी सी गलतफहमी या सैन्य दुस्साहस तीसरे विश्व युद्ध की चिंगारी भड़का सकता है।दक्षिण कोरिया का आर्थिक विकास और उत्तर कोरिया का अलगावयुद्धविराम के बाद के इन सात दशकों में दोनों कोरियाई देशों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में जमीन-आसमान का फर्क आ चुका है, जो इस संघर्ष को और अधिक पेचीदा बनाता है। एक तरफ दक्षिण कोरिया ने अपनी अद्भुत मेहनत, लोकतांत्रिक व्यवस्था और तकनीकी नवाचार के दम पर दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और टेक दिग्गजों की सूची में अपना नाम दर्ज करा लिया है, और सियोल आज आधुनिकता की मिसाल पेश करता है। दूसरी तरफ, उत्तर कोरिया ने दुनिया से पूरी तरह कटकर एक साम्यवादी सैन्य तानाशाही के रूप में खुद को समेट लिया है, जहां अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के कारण आम जनता भुखमरी और गरीबी की मार झेल रही है, लेकिन देश का सारा बजट परमाणु हथियारों और लंबी दूरी की मिसाइलों के विकास पर झोंक दिया गया है। वैचारिक मोर्चे पर आई इस भारी खाड़ी ने दोनों समाजों को एक-दूसरे से कोसों दूर कर दिया है, जिससे भविष्य में कोरियाई प्रायद्वीप के शांतिपूर्ण एकीकरण की संभावनाएं लगभग नगण्य सी नजर आती हैं।शांति की अनिश्चित राह और कोरियाई प्रायद्वीप का भविष्यआज के इस आधुनिक और वैश्वीकृत युग में जहां पूरी दुनिया व्यापार, तकनीकी सहयोग और मानवता के विकास की बात करती है, कोरियाई प्रायद्वीप का यह अनसुलझा संघर्ष मानव इतिहास के सबसे पुराने जख्मों में से एक बना हुआ है। दोनों देशों की आम जनता, विशेषकर वे परिवार जो 1953 के विभाजन के समय बिछड़ गए थे और आज तक अपने रिश्तेदारों से मिल नहीं पाए हैं, उनकी आंखें आज भी किसी चमत्कारिक शांति संधि का इंतजार कर रही हैं। हालांकि, वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए निकट भविष्य में इस वॉर सिचुएशन के पूरी तरह समाप्त होने की उम्मीद बहुत कम है, क्योंकि उत्तर कोरिया के परमाणु कार्यक्रम और अमेरिका-दक्षिण कोरिया के संयुक्त सैन्य अभ्यासों के बीच का यह दुष्चक्र लगातार गहराता जा रहा है। कुल मिलाकर, 1953 का वह अधूरा युद्धविराम आज भी एक ऐसी तलवार बनकर लटक रहा है, जिसकी एक गलत हरकत इस पूरे क्षेत्र को खाक में मिलाने की ताकत रखती है, और दुनिया भर के कूटनीतिकार इस बारूदी ढेर पर शांति की फुहार डालने के लिए लगातार जद्दोजहद कर रहे हैं।
प्रेमी के लिए पति-बेटे को सऊदी अरब में छोड़ भारत आई शबाना, भरोसा टूटा और फिर...
एक महिला सऊदी में पति-बेटे को छोड़ प्रेमी के लिए भारत आई। यहां आकर उसे प्रेमी की सच्चाई पता चली तो उसका भरोसा टूटा। इसके बाद महिला ने मासूम बच्ची को गोद में लेकर ट्रेन के आगे कूदने का प्रयास किया। लोगों ने दोनों की जान बचा ली।
भारत के रक्सौल सीमा से सटे नेपाल के क्षेत्रों में मस्जिदों और मदरसों की संख्या में असामान्य वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे धार्मिक सुरक्षा और जनसांख्यिकीय बदलाव की चिंताएं बढ़ी हैं। सु
Israel air strike: दक्षिणी लेबनान पर हवाई हमले में 7 की मौत, 3 घायल हुए
दक्षिणी लेबनान पर शनिवार तड़के हुए इजराइल के हवाई हमले में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हो गए। लेबनान की सरकारी नेशनल न्यूज एजेंसी (एनएनए) ने यह जानकारी दी। समाचार एजेंसी के अनुसार, बचावकर्मी और पराचिकित्सक अब भी मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें: Israel का Lebanon पर हवाई हमला: 11 लोगों की मौत और 19 घायल, PM सलाम ने की निंदा यह हवाई हमला 26 जून को लेबनान और इजराइल के बीच घोषित ‘‘फ्रेमवर्क समझौते’’ के बाद से सबसे घातक हमलों में से एक माना जा रहा है। इस समझौते के तहत दक्षिणी लेबनान से इजराइली सेना की वापसी के बदले ईरान समर्थित हिज्बुल्ला संगठन को निरस्त्र करने की योजना तय की गई थी।
यहां आजादी का जश्न सिर्फ तिरंगा फहराकर नहीं मनाया जाता, यहां पीढ़ियां तिरंगे की हिफाजत करके आजादी को जिंदा रखती हैं। यह लाइन मुरैना जिले के काजी बसई गांव पर फिट बैठती है। जब देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, तो ऐसे गांव भी हैं जहां देशभक्ति सिर्फ नारों और समारोहों तक ही सीमित नहीं है। यहां पीढ़ियां देश की सीमाओं पर खड़ी होकर आजादी की हिफाजत करती रही हैं। काजी बसई गांव भी ऐसा ही गांव है। गांव की गलियों में चलते हुए शायद ही कोई ऐसा घर मिले, जिसका रिश्ता सेना, CRPF, BSF या किसी अन्य सुरक्षा बल से न रहा हो। किसी घर की दीवार पर शहीद की तस्वीर है तो कहीं आज भी बेटा, पोता या भतीजा सीमा पर तैनात है। गांव ने प्रथम विश्व युद्ध से लेकर दूसरे विश्व युद्ध, 1962 का चीन युद्ध, 1965 और 1971 की भारत-पाकिस्तान जंग, श्रीलंका में एलटीटीई के खिलाफ अभियान, पंजाब के उग्रवाद, नक्सल विरोधी अभियानों, कारगिल युद्ध और हाल के ऑपरेशन सिंदूर तक अलग-अलग दौर में देश की सुरक्षा में जवान दिए हैं। देश के लिए अब तक काजी बसई गांव के 11 जवानों ने शहादत दी है। इनमें 9 मुस्लिम और 2 हिंदू हैं, लेकिन काजी बसई की कहानी सिर्फ युद्धों की सूची नहीं है। यह उस पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलती परंपरा की कहानी है, जिसमें फौज में जाना नौकरी नहीं, बल्कि परिवार और गांव की जिम्मेदारी माना जाता है। इस रिपोर्ट में पढ़िए देश भक्त गांव की कहानी… आजादी मिली, लेकिन पहरा कभी खत्म नहीं हुआ 15 अगस्त आते ही देश में आजादी की कहानियां दोहराई जाती हैं। काजी बसई में आजादी की कहानी कुछ अलग तरह से सुनाई देती है। यहां बुजुर्ग अपने बच्चों को बताते हैं कि देश आजाद होने से पहले उनके पूर्वज विदेशी हुकूमत के दौर के युद्धों में गए। आजादी के बाद की पीढ़ियों ने उसी धरती की रक्षा के लिए हथियार उठाए, जिसे देश ने अपने दम पर संभाला। पूर्व सैनिक हाजी मोहम्मद रफी बताते हैं कि काजी बसई का सैन्य इतिहास काफी पुराना है। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान गांव के अब्दुल वासिद सिंधिया स्टेट की सेना में भर्ती हुए थे। युद्ध के दौरान जर्मनी में उनकी शहादत हुई। बताया जाता है कि उनकी शहादत की स्मृति आज भी जर्मनी में मौजूद है। दूसरे विश्व युद्ध में भी गांव के करीब 16 लोग अंग्रेजों की तरफ से युद्ध में शामिल हुए। इनमें हाजी अलीमुद्दीन, इस्लामुद्दीन, अब्दुल अली, नूर मोहम्मद, मोहम्मद वली, हकीमदीन खान, क्वार्टर मास्टर हकीमुल्ला, हाजी अर्जुद्दीन, मोहम्मद इब्राहिम और अब्दुल गनी सहित कई जवान शामिल थे। युद्ध खत्म होने के बाद ये जवान गांव लौट आए। 1965 और 1971 की जंग खुद लड़ी, आज भी यादें ताजा हाजी मोहम्मद रफी बताते हैं- वे खुद 1965 और 1971 के युद्ध में शामिल रहे। उम्र के इस पड़ाव पर भी युद्ध की यादें उनके चेहरे पर साफ दिखाई देती हैं। पाकिस्तान के साथ 1965 और 1971 की जंग मैंने खुद लड़ी है। 1962 के चीन युद्ध और कारगिल की लड़ाई में भी गांव के जवान शामिल रहे। उनके मुताबिक काजी बसई के जवान सिर्फ सीमा पर होने वाली जंगों तक सीमित नहीं रहे। श्रीलंका में एलटीटीई के खिलाफ अभियान, पंजाब में उग्रवाद और नक्सल प्रभावित इलाकों में भी गांव के जवानों ने ड्यूटी की। यानी आजादी के बाद देश के सामने सुरक्षा की जो भी नई चुनौती आई, काजी बसई के घर से किसी न किसी ने मोर्चे की तरफ कदम बढ़ाया। एक ट्रांसफर ने बचाई जिंदगी, लेकिन साथी नहीं बच सके रिटायर्ड सीआरपीएफ जवान मोहम्मद जफर की कहानी काजी बसई के सैनिक परिवारों के दर्द को सामने लाती है। जफर बताते हैं कि उनके परिवार की चार पीढ़ियां सुरक्षा बलों में रही हैं। दादा सेना में थे, पिता भी सेना में गए, इसके बाद वे सीआरपीएफ में भर्ती हुए और अब उनका बेटा भी सेना में है। पंजाब में आतंकवाद के दौर में उनकी तैनाती पटियाला, तरनतारन और अमृतसर में रही। वे बताते हैं कि उस समय हर दिन अनिश्चितता के बीच गुजरता था। एक घटना बताते हुए जफर भावुक हो जाते हैं। वे 75वीं बटालियन सीआरपीएफ में तैनात थे। उनका ट्रांसफर दूसरी बटालियन में हो गया और वे चंडीगढ़ चले गए। उनके जाने के तीन दिन बाद उनकी पुरानी बटालियन के जवानों पर बस में हमला हुआ और उनके कई साथी मारे गए। वे कहते हैं, मैं सिर्फ ट्रांसफर होने के कारण बच गया। मोहम्मद जफर बताते हैं- उनकी जिंदगी में शहादत की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। उनके भाई का बेटा भी करीब दो साल पहले कश्मीर में ड्यूटी के दौरान शहीद हो गया। अगर डर होता तो परिवार वाले हमें रोक लेते। गांव में सेना सिर्फ नौकरी नहीं, परंपरा बन गई है। चार पीढ़ियों से वर्दी, अब बेटे भी उसी रास्ते पर काजी बसई के रिटायर्ड सीआरपीएफ एसआई मोहम्मद शफीक भी चार पीढ़ियों की देशसेवा की कहानी बताते हैं। उनके दादा और पिता सुरक्षा बल में रहे। वे 1984 में सीआरपीएफ में भर्ती हुए और 1987 में श्रीलंका में भारत की ओर से चलाए गए शांति अभियान के दौरान तैनात रहे। दो साल श्रीलंका में ड्यूटी करने के बाद वे भारत लौटे। बाद में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी सेवा दी। अब जिस छत्तीसगढ़ में वे कभी नक्सल विरोधी अभियान में ड्यूटी कर चुके हैं, उसी क्षेत्र में उनका बेटा देश की सेवा कर रहा है। शफीक के लिए यह सिर्फ परिवार की उपलब्धि नहीं, बल्कि गांव की परंपरा का हिस्सा है। 1971 की जंग में कलकत्ता तक पहुंची थी बटालियन रिटायर्ड एसएएफ जवान मोहम्मद नाजिम 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध की याद सुनाते हैं। वे बताते हैं कि उनकी बटालियन को इंदौर से कलकत्ता तक ले जाया गया था। सुबह उन्हें विमान से आगे भेजे जाने की तैयारी थी, लेकिन उसी दौरान पाकिस्तान ने हथियार डाल दिए और युद्ध खत्म हो गया। इसके बाद उनकी बटालियन को असम में तैनात कर दिया गया। नाजिम बताते हैं कि उनके परिवार की कई पीढ़ियां आज भी सुरक्षा बलों में हैं। युद्ध भले खत्म हो गया, लेकिन काजी बसई के परिवारों का देश की सीमाओं पर पहरा खत्म नहीं हुआ। 'फौज में जाति-धर्म नहीं, सिर्फ तिरंगा होता है' बीएसएफ में एसआई पद से रिटायर्ड अब्दुल महफूज अब्बासी हाल ही में गांव लौटे हैं। वे ऑपरेशन सिंदूर का हिस्सा रहे हैं। आजादी और देशसेवा को लेकर वे कहते हैं कि सेना में जाति और धर्म की पहचान पीछे छूट जाती है। वे बताते हैं कि- फौज में कोई जाति-धर्म नहीं होता। वहां सिर्फ देशसेवा सबसे बड़ा धर्म है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दिमाग में सिर्फ तिरंगा और भारत माता थी। अब्बासी की चिंता शहीद परिवारों को लेकर भी है। उनका कहना है कि सरकार को उन परिवारों का विशेष ध्यान रखना चाहिए, जिन्होंने देश की रक्षा में अपने बेटे खोए हैं। उनकी बात में गांव की सामूहिक भावना दिखाई देती है- यहां फौज में जाने के लिए किसी को मनाना नहीं पड़ता, क्योंकि कई परिवारों में सेना की वर्दी विरासत की तरह आगे बढ़ती है। गांव से पांच किलोमीटर दूर था स्कूल, रोज दौड़कर जाते थे बच्चे काजी बसई की सैन्य परंपरा के पीछे सिर्फ जज्बा नहीं, बल्कि कठिन परिस्थितियों में तैयार हुई शारीरिक क्षमता भी है। रिटायर्ड प्राचार्य मोहम्मद हबीब बताते हैं कि एक समय गांव से स्कूल करीब पांच किलोमीटर दूर था। उस दौर में न साधन थे और न हर घर में साइकिल। बच्चे रोज पांच किलोमीटर पैदल या दौड़ते हुए स्कूल जाते और लौटते थे। वे कहते हैं- हमारे लोगों का फिजिकल यूं ही हो जाता था। कभी ऐसा नहीं हुआ कि कोई सेना का फिजिकल देने गया हो और अंदर से लौट आया हो। आज भी गांव की करीब 90 प्रतिशत आबादी सुरक्षा बलों में जाने वाली पीढ़ी से जुड़ी हुई है और युवा भर्ती की तैयारी करते हैं। 11 शहादतें, लेकिन वर्दी से मोह कम नहीं हुआ काजी बसई की सबसे बड़ी कहानी इसके 11 शहीद जवान हैं। हर शहादत एक परिवार के लिए ऐसा खालीपन छोड़ गई, जिसे कोई सम्मान या मुआवजा पूरी तरह नहीं भर सकता। यहां एक परिवार का बेटा शहीद होता है तो अगली पीढ़ी में कोई दूसरा बच्चा सेना की तैयारी शुरू कर देता है। किसी के पिता वर्दी पहनते हैं तो बेटा उसी वर्दी को अपना भविष्य मानता है। यही वजह है कि काजी बसई में फौज एक पेशा नहीं लगती- यह गांव की सामाजिक स्मृति और सामूहिक पहचान बन चुकी है।
अमृतसर के विरसा विहार में 31वां भारत-पाकिस्तान मैत्री सम्मेलन एवं सेमिनार आयोजित किया गया। इस सम्मेलन का संयुक्त आयोजन हिंद-पाक दोस्ती मंच, फोकलोर रिसर्च अकादमी अमृतसर, पाकिस्तान-इंडिया पीपल्स फोरम फॉर पीस एंड डेमोक्रेसी और पंजाब जागृति मंच जालंधर ने किया। सम्मेलन में भारत-पाकिस्तान संबंधों, विभाजन के दर्द और दोनों देशों के बीच शांति व आपसी भाईचारे को मजबूत करने पर विचार-विमर्श हुआ। वक्ताओं ने एकमत से कहा कि युद्ध किसी भी देश की आम जनता के हित में नहीं है। दोनों देशों के लोगों की खुशहाली के लिए शांति और बातचीत का रास्ता अपनाना आवश्यक है। लखनऊ से आईं राज स्मृति ने भारत और पाकिस्तान के बीच शांति की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान लोगों ने जो दर्द और पीड़ा झेली, उसे आज की पीढ़ी को समझना चाहिए। राज स्मृति के अनुसार, युद्ध से आम लोगों को सबसे अधिक नुकसान होता है, जबकि हथियार बनाने वालों को लाभ मिलता है। राज स्मृति बोली- तीनों देश मिलकर आगे बढ़े राज स्मृति ने भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के लोगों से मिलकर शांति और प्रगति की दिशा में आगे बढ़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि आम लोग चुप रहने के बजाय शांति के लिए अपनी आवाज उठाएं, तो युद्ध की जगह अमन का माहौल बनाया जा सकता है। डॉ. सुनीलम ने भारत और पाकिस्तान के साझा इतिहास तथा संस्कृति का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लोगों के बीच पुराने समय से आपसी रिश्ते रहे हैं। डॉ. सुनीलम ने विभाजन को एक बड़ी त्रासदी बताया, जिसमें लाखों लोगों को विस्थापन और हिंसा का दर्द झेलना पड़ा था। उन्होंने सुझाव दिया कि दोनों देशों को हथियारों पर भारी खर्च करने के बजाय शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और रोजगार के अवसर पैदा करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। डॉ. सुनीलम के अनुसार, खुशहाली के लिए शांति और शांति के लिए बातचीत अत्यंत आवश्यक है। डॉ. सुनीलम ने भारत और पाकिस्तान की सरकारों के बीच बातचीत की वकालत की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के लोग शांति, व्यापार और आपसी संपर्क बढ़ाना चाहते हैं। लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और एक बेहतर भविष्य चाहिए, युद्ध नहीं।
Iran Drone Attack On Erbil में America सैनिकों के होटल पर हमला | Trump | Hormuz | Middle East News
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच इराक के एरबिल से एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। दावों के मुताबिक, एरबिल में अमेरिकी सैनिकों और कॉन्ट्रैक्टर्स के ठहरने वाले एक होटल को ड्रोन हमले का निशाना बनाया गया।
Houthi Drone Attack On Saudi Arabia: सऊदी के डिफेंस सिस्टम को फोड़कर Saudi Aramco पर हूती हमला
Houthi Drone Attack On Saudi Arabia: सऊदी के डिफेंस सिस्टम को फोड़कर Saudi Aramco पर हूती हमला
हथकरघा संघ स्कूल यूनिफॉर्म की रंगाई में बड़ा घोटाला फूटा है। यहां से लाखों मीटर थान कपड़ा डाई कराने हैदराबाद भेजा गया। वहां से तैयार थान के साथ कतरनें भी रंगकर भेज दी गईं। करीब छह माह तक यह गड़बड़ी पकड़ में नहीं आई, क्योंकि जिन लोगों को कपड़े की जांच करनी थी, उन्होंने करीब 60 हजार मीटर कपड़े के बंडल खोलकर देखा ही नहीं और सही होने की रिपोर्ट दे दी। बाद में गोदाम प्रभारी ने अफसरों को बताया कि भेजा गया कपड़ा हथकरघा संघ का नहीं है। इसके बाद हड़कंप मचा। आनन-फानन में जांच कमेटी बनाई गई। जांच में हथकरघा से अलग कपड़ा होने की पुष्टि हुई। मामले में तत्कालीन गोदाम प्रभारी रामकिशुन देवांगन को निलंबित कर दिया गया, जबकि तकनीकी कर्मचारी की सेवा समाप्त कर दी गई। मारुति कोटेक्स लिमिटेड, हैदराबाद से 22.42 लाख रुपए की वसूली के निर्देश दिए गए हैं। फर्जीवाड़ा पिछले साल 2025-26 शिक्षा सत्र के लिए बांटे गए यूनीफार्म में किया गया है। हाथकरघा संघ ने जेम पोर्टल के जरिए निविदा कर मारुति कोटेक्स को डाईंग, प्रोसेसिंग और प्रिंटिंग का काम दिया था। इसके लिए 65.06 लाख मीटर ग्रे कपड़ा भेजा गया। कंपनी ने 63.16 लाख मीटर फ्रेश यानी थान कपड़ा यूनीफार्म के रंग में रंगकर लौटाया। इसके साथ 1.90 लाख मीटर कटपीस, सेकंड क्लास, मिस प्रिंट और वेस्टेज भी भेजा गया। इसके अलावा 60 हजार मीटर से ज्यादा कपड़ा कतरन यानी छोटे छोटे टुकड़ों वाला दे दिया। अफसरों ने इसकी जांच नहीं की। हर साल 140 करोड़ का स्कूल ड्रेस, 345 समितियां बनाती हैं 60 लाख मीटर थान राज्य के करीब 39 हजार स्कूलों में पढ़ने वाले 50 लाख से अधिक छात्रों को हर साल यूनिफॉर्म बांटी जाती है। इस पर करीब 140 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। हाथकरघा संघ पहले यूनीफार्म के लिए धागे खरीदता है। ये धागे राज्य की 345 बुनकर समितियों को दिए जाते हैं। समितियां इन्हीं धागों को करीब 60 लाख मीटर थान में बदलती हैं। धागे ग्रे रंग के होते हैं, इसलिए तैयार थान भी ग्रे रहता है। इसके बाद इसे सरकारी स्कूलों की यूनिफॉर्म के तय रंग में रंगने के लिए भेजा जाता है। हैदराबाद की जिस कंपनी को पिछले साल कपड़ा भेजा गया था, वह पिछले 10-12 साल से डाई यानी यूनिफॉर्म के रंग में कपड़ा रंगने का काम कर रही है। जिन्हें जांच करनी थी, उन्होंने बंडल खोलकर भी नहीं देखा: थान वाले कपड़े और उसी कपड़े की छोटी-छोटी कतरनों की कीमत में खासा अंतर होता है। कतरन से पैंट-शर्ट सिलने पर फिनिशिंग नहीं आती। लाइनिंग और चेक्स वाले कपड़े में डिजाइन भी बिगड़ जाती है। इसलिए कतरन कम कीमत की होती है। इसी वजह से हैदराबाद से यूनिफॉर्म के रंग में रंगकर आने वाले थान की तकनीकी जांच कराई जाती है। लेकिन पिछले सत्र में तकनीकी एक्सपर्ट और गोदाम प्रभारी ने कतरन कपड़े के बंडल को खोलकर कपड़ा देखा ही नहीं। करीब छह माह बाद अचानक अफसरों को बताया गया कि करीब 60 हजार मीटर कपड़े के बंडल खोले ही नहीं गए थे। इसके बाद संघ में हड़कंप मचा और जांच कमेटी बनाई गई। कमेटी की जांच में कतरन होने की पुष्टि हुई। एजेंसी ने पेनाल्टी देने से किया इनकारसंघ की ओर से गोदाम प्रभारी व तकनीकी स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई करने के बाद हैदराबाद की फर्म को वसूली को नोटिस भेजा जरूर है लेकिन एजेंसी ने पेनाल्टी के पैसे देने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि उन्होंने थान वाले कपड़े ही रंगकर भेजे हैं। गोदाम में गड़बड़ी हुई होगी। अफसरों का कहना है कि पेनाल्टी की पैसे नहीं मिले तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
Trump Secret Flight ऑपरेशन में किस Missile से हमला कर सकता था Iran,खुलासा |Turkey | manpad missile
Trump Secret Flight ऑपरेशन में किस Missile से हमला कर सकता था Iran,खुलासा |Turkey
Houthi Attack On Saudi Arabia: हूतियों ने किया सऊदी पर हमला, Islamic NATO पर उठे सवाल | MBS
Houthi Attack On Saudi Arabia: हूतियों ने किया सऊदी पर हमला, Islamic NATO पर उठे सवाल | अब सवाल उठ रहा है कि क्या जाजान हमला इस नए ‘इस्लामिक NATO’ की पहली बड़ी परीक्षा है?
Trump Secret Flight ऑपरेशन क्यों करवाया गया,बड़ा खुलासा |Turkey | NATO Summit| Iran | Israel
Trump Secret Flight ऑपरेशन क्यों करवाया गया,बड़ा खुलासा |Turkey | NATO Summit| Iran | Israel
Houthi Attack On Saudi Arabia: समंदर से लेकर तेल ठिकाने और अब सऊदी सेना पर हमले | MBS
यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित बलों के बीच तनाव एक बार फिर बेहद गंभीर हो गया है। हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल यह्या सारी के दावे के मुताबिक, ताइज़ प्रांत के अल-मोखा क्षेत्र और मारिब के तदावीन कैंप को बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन से निशाना बनाया गया।
महाभारत युद्ध के बाद द्रौपदी ने अश्वत्थामा को क्यों दिया था मृत्यु न पाने का अभिशाप
कुरुक्षेत्र के मैदान में 18 दिनों तक चले महाभारत के भीषण युद्ध में अंततः पांडवों की विजय हुई और कौरवों की हार हुई, लेकिन इस जीत की खुशी पांडवों के नसीब में नहीं थी। अपनों को खोने के असहनीय दुख के अलावा पांडवों और विशेषकर द्रौपदी के सीने में अपने पांचों पुत्रों की अकाल मृत्यु का गहरा जख्म था।यह दर्द इसलिए भी बहुत बड़ा था क्योंकि पांडव पुत्र युद्ध के मैदान में वीरता से लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त नहीं हुए थे, बल्कि युद्ध समाप्त होने के बाद सोते हुए अवस्था में उनकी निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस जघन्य अपराध को अंजाम देने वाला कोई और नहीं, बल्कि गुरु द्रोणाचार्य का पुत्र अश्वत्थामा था। पुत्रों की हत्या के इस भयानक पाप के बदले में द्रौपदी ने अश्वत्थामा को मृत्यु न मिलने का यानी अमरता का अभिशाप दिया था, जो किसी वरदान से कम नहीं बल्कि सबसे बड़ी सजा थी।द्रौपदी के पुत्रों की सोते में हुई थी हत्यामहाभारत का युद्ध समाप्त हो चुका था और कौरव सेना पूरी तरह परास्त हो चुकी थी। युद्ध की थकान से चूर द्रौपदी के पांचों पुत्र (उपपांडव) एक शिविर में गहरी नींद में सो रहे थे। विजय के अहंकार और प्रतिशोध की आग में जलते हुए अश्वत्थामा ने रात के अंधेरे में उस शिविर में प्रवेश किया और सोते हुए अवस्था में ही द्रौपदी के सभी पुत्रों की क्रूरतापूर्वक हत्या कर दी। इस घटना ने पांचाल और पांडव शिविर में कोहराम मचा दिया और पूरा माहौल शोक में डूब गया।द्रौपदी ने अश्वत्थामा को क्यों दिया था अमरता का अभिशाप?जब अश्वत्थामा को इस घोर पाप के लिए अर्जुन और भीम द्वारा पकड़कर श्री कृष्ण के समक्ष लाया गया, तब उसे मृत्युदंड देने के बजाय द्रौपदी ने एक अनूठा निर्णय लिया। सनातन शास्त्रों के अनुसार, गुरु के पुत्र को भी गुरु के समान ही आदरणीय माना जाता है और द्रौपदी गुरु द्रोणाचार्य का बहुत सम्मान करती थीं।इसके अलावा, एक मां के रूप में द्रौपदी स्वयं पुत्र वियोग के दर्द को भली-भांति समझती थीं। वह जानती थीं कि यदि अश्वत्थामा को मृत्यु दी जाती है, तो उसकी माता कृपी को भी पुत्र शोक की वैसी ही असहनीय पीड़ा झेलनी होगी, जैसी वह खुद झेल रही हैं। इन सभी धर्मिक मर्यादाओं और गुरु परिवार के सम्मान को ध्यान में रखते हुए, द्रौपदी ने अश्वत्थामा को मृत्यु के घाट उतारने के बजाय धरती पर चीरकाल तक जीवित रहने, कोढ़ और विभिन्न रोगों से ग्रसित होकर एक सूक्ष्म कण के रूप में भटकने का अभिशाप दिया। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, अश्वत्थामा आज भी कलियुग में जीवित हैं और पृथ्वी पर जहां भी नकारात्मकता, पाप और अधर्म होता है, वहां उनकी सूक्ष्म उपस्थिति मानी जाती है।अर्जुन ने छीन ली थी अश्वत्थामा के मस्तक की दिव्य मणिपौराणिक कथाओं के अनुसार, अश्वत्थामा के जन्म से ही उसके मस्तक पर एक अत्यंत शक्तिशाली और दिव्य मणि सुशोभित थी। इस मणि के प्रभाव से उसे अस्त्र-शस्त्र, भूख, प्यास, थकान और किसी भी प्रकार के भय से मुक्ति मिली हुई थी। इसी मणि की असीम शक्ति और अहंकार के बल पर ही वह द्रौपदी के पुत्रों की हत्या करने में सफल रहा था।जब अश्वत्थामा का अहंकार और उसका अपराध पराकाष्ठा पर पहुंच गया, तब भगवान श्री कृष्ण के निर्देशानुसार अर्जुन ने उसके मस्तक से उस दिव्य मणि को बलपूर्वक निकाल लिया। मणि छिन जाने के कारण अश्वत्थामा का जीवन जीवित शव के समान हो गया और अंततः द्रौपदी द्वारा दिया गया अमरता का वह अभिशाप उसके लिए जीवनभर की सबसे बड़ी सजा बन गया।
Trump Secret Flight: Iran के डर से ट्रक में छिपकर भागे थे ट्रम्प, अब हुआ खुलासा। Turkey NATO Summit
अमेरिका के मुताबिक इस बार ईरान ट्रंप के तुर्के दौरे पर उन्हें निशाना बनाने वाला था। इस खतरे से सूचना मिलते ही ट्रंप को बेहद फिल्मी तरीके से बचाया गया था। इस सीक्रेट ऑपरेशन को लेकर हाल ही कुछ हैरतअंगेज खुलासे हुए हैं।
Houthi Attck On Saudi Arabia: पहले सऊदी फिर America का MQ-9 हुआ क्रैश, हूती बेकाबू | Bab Al Mandeb
हूती-सऊदी तनाव के बीच मिडिल ईस्ट में हालात और बिगड़ते नजर आ रहे हैं। हूतियों ने सऊदी अरब के सैन्य और तेल ठिकानों पर हमलों का दावा किया है।
Mecca Joint Defense Agreement से पलटा Turkiye, Saudi Arabia के साथ रक्षा समझौता Iran के खिलाफ नहीं
Mecca Joint Defense Agreement से पलटा Turkiye, Saudi Arabia के साथ रक्षा समझौता Iran के खिलाफ नहीं सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हुए Defense Agreement को लेकर अब नया ट्विस्ट सामने आया है।
ईरान युद्ध को लेकर ट्रंप के जनरल की चेतावनी! 'अमेरिका अगर जंग से नहीं निकला तो...' सीक्रेट मीटिंग में क्या हुआ?
Islamic NATO में Saudi Arabia, Pakistan,Turkiye आए साथ तो क्या बोला Iran ?
सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच बन रहे 'इस्लामिक नाटो' शैली के रक्षा समझौते पर ईरान ने सख्त रुख अपनाया है। तेहरान ने रियाद को चेतावनी देते हुए कहा है कि कागजी समझौते और बाहरी ताकतों पर निर्भरता सुरक्षा की गारंटी नहीं दे सकती।
Islamic NATO में Saudi Arabia, Pakistan,Turkiye आएंगे साथ, क्या India के लिए मुश्किल। Israel
Islamic NATO में Saudi Arabia, Pakistan,Turkiye आएंगे साथ, क्या India के लिए मुश्किल। Israel
Islamic NATO बनाने को लेकर डील फाइनल, Saudi Arabia, Pakistan,Turkiye जल्द करेंगे ऐलान। Israel
पश्चिम एशिया में जारी जंग और बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच संभावित त्रिपक्षीय रक्षा समझौते ने भू-राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है। CNN-News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों देशों के बीच डिफेंस डील को अंतिम रूप देने की कोशिश चल रही है
टेलर ने कपड़े की कतरन वापस लौटा दी तो फेंकने की बजाय 4 तरीके से करें इस्तेमाल
आपके पास ढेर सारी कपड़े की कतरन बची रहती है या फिर टेलर ने सूट या ब्लाउज की बची हुई कतरन को वापस कर दिया है। इसे फेंकने की बजाय आप बहुत ही काम के तरीकों से दोबारा से इस्तेमाल में ला सकते हैं।
500 साल में बस एक बार हारा कुंभलगढ़ किला, वजह युद्ध नहीं; पढ़िए मेवाड़ की आन-बान और शौर्य की अनोखी कहानी
सबसे अहम युद्ध पर किसी का ध्यान नहीं: तेजी से फैल रहे नफरत और भेदभाव, जीत तभी होगी, जब हम धरती को हारने न दें--The Most Important War We Ignore: Why Climate Change and Environmental Crisis Need Urgent Global Attention
युद्ध नहीं, शांति ही मानवता का भविष्य
विश्व भर में 6 अगस्त को हिरोशिमा दिवस मनाया जाता है। यही वह दिन है, जब वर्ष 1945 में अमेरिका ने जापान के हिरोशिमा शहर पर पहला परमाणु बम गिराया था। इस दिन हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि दी जाती है…
Iran America War: ईरान ने Iraq और Kuwait बार्डर के करीब क्यों भेजे T 72 Tanks|Trump
मिडिल ईस्ट एक ऐसे ज्वालामुखी पर बैठा है जो कभी भी फट सकता है..जी हां जंग के बादल कभी भी छा सकते हैं...अमेरिका चाहे लाख मना करे...लेकिन जब तक इजरायल खित्ते में आक्रामक है तब तक जंग पूरी तरह नहीं रुक सकती..यही वजह है कि ईरान ने ्अपने टैंक इराक से लगी सरहद के करीब जमा करना शुरु कर दिए हैं…
कतर से रुकी सप्लाई, फिर भी 15% कैसे बढ़ा भारत का LNG आयात? देखें कूटनीति
कूटनीति' में आज बात भारत की उस रणनीतिक चाल की, जिसने पूरी दुनिया के ऊर्जा बाज़ारों को हैरान कर दिया है. जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जंग छिड़ी, तो दुनिया को लगा कि भारत में बड़ा गैस संकट आने वाला है. वजह साफ थी-भारत अपनी 60 फीसदी एलएनजी (LNG) गैस इसी समुद्री रास्ते से मंगाता था. लगा कि कतर से सप्लाई रुकते ही भारत की फैक्ट्रियां और रसोई गैस थम जाएगी. लेकिन भारत ने ऐसा कूटनीतिक मास्टरस्ट्रोक खेला कि इस पूरे संकट के बावजूद देश में एलएनजी का आयात घटने के बजाय 15 फीसदी और बढ़ गया.
कंगना के ‘जेबकतरों जैसी ड्रेस’ वाले बयान को यूजर्स ने सोनाक्षी से जोड़ा
उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के मदरसों को लेकर दिए गए बयान से सियासत गरमा गई है। उन्होंने कहा कि मदरसे आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं, जिस पर विपक्ष ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
'जेबकतरों की तरह...', कंगना ने सोनाक्षी पर किया कमेंट!
कंगना रनौत ने इंस्टाग्राम स्टोरी पर बिना नाम लिए इंडस्ट्री की एक हीरोइन पर तीखा हमला किया है. यूजर्स का मानना है कंगना ने ये अटैक सोनाक्षी सिन्हा पर किया है.
Iran US War Update: महायुद्ध से डरा Saudi Arab? MBS ने Donald Trump को फोन कर दी बड़ी चेतावनी!
Iran-US War: महायुद्ध से डरा Saudi Arab? MBS ने Donald Trump को फोन कर दी बड़ी चेतावनी!
ईरान की चेतावनी, होर्मुज में दूसरा पासेज बना तो अमेरिकी युद्धपोत पर होगा हमला
ईरान के वरिष्ठ सलाहकार मोहसिन रेजाई ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में तय रास्ते से अलग कोई दूसरा पासेज बनाने के लिए अगर अमेरिकी युद्धपोत तैनात किए गए तो ईरान उन्हें निशाना बनाएगा, जबकि डोनाल्ड ट्रंप इसी बीच तेहरान के साथ बातचीत शुरू होने का दावा कर रहे हैं.
गाजा में कत्लेआम पर भड़के कतर-तुर्की-मिस्र, इजरायल नहीं रोक रहा बमबारी
कतर, मिस्र और तुर्की ने गाजा में इजरायली कार्रवाई, खासकर नागरिकों, महिलाओं, बच्चों और स्वास्थ्य ढांचे पर हमलों की कड़ी निंदा की है. इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय कानून का खुला उल्लंघन बताया है. गाजा सिटी के दक्षिण-पश्चिम में ताजा हमले में कम से कम दो लोग मारे गए हैं.
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट
ईरान-अमेरिका युद्ध पूरी दुनिया को निगल जाएगा?: ट्रंप की रणनीति पर उठे सवाल, बढ़ा वैश्विक संकट-US-Iran Conflict Trigger a Global War Questions Over Trump Strategy and Rising Global Risks
'दूसरे विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा हमला?', ट्रंप ने ईरान पर अब किया ये ऐलान
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि सऊदी अरब, यूएई, कतर और ईरान की अपील के बाद उन्होंने ईरान पर प्रस्तावित बड़ा हमला फिलहाल रोक दिया है. दूसरी तरफ तेहरान ने ट्रंप के दावे को खारिज करते हुए सैन्य सतर्कता बनाए रखने, सऊदी अरब और पाकिस्तान से तेज संपर्क बढ़ाने और यह साफ करने का संदेश दिया है कि क्षेत्रीय सुरक्षा, जवाबी तैयारी और राजनीतिक समाधान अब साथ साथ चलेंगे.
युद्ध, डर और उम्मीद... आखिर क्यों गढ़े गए सुपरहीरो?
सुपरहीरो कभी भी सिर्फ असाधारण शक्तियों वाले किरदार नहीं रहे. वे हर दौर के समाज की इच्छाओं, आशंकाओं और सपनों का प्रतिबिंब रहे हैं. वे हमें याद दिलाते हैं कि असली ताकत केवल असाधारण शक्तियों में नहीं बल्कि सही समय पर सही फैसला लेने, कमजोरों के साथ खड़े होने और दूसरों के लिए जोखिम उठाने के साहस में होती है.
इराक के सुलेमानिया पर ईरानी ड्रोन ने बरपाया कहर, सामने आया Video
इराक के सुलेमानिया में ईरान-विरोधी समूहों के एक ठिकाने को ड्रोन हमले में निशाना बनाया गया है. माना जा रहा है कि ये हमला ईरान ने किया है जिसमें अलगाववादी समूहों के मुख्यालय पर दो प्रोजेक्टाइल सीधे जाकर लगे. ईरान ने ड्रोन से ये हमला किया. देखें वीडियो.
मिडिल ईस्ट में महायुद्ध रोकने में जुटा सऊदी: क्राउन प्रिंस ने अमेरिका भेजा रक्षा मंत्री
सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को फोन किया है. सऊदी अरब की कोशिश है कि मिडिल ईस्ट में किसी भी तरह शांति और स्थिरता बनी रहे. साथ ही रक्षा मंत्री को दूत बनाकर व्हाइट हाउस भी भेजा गया है.
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
US vs Iran War: तुरंत Middle East छोड़ दें अमेरिकी नागरिक! Donald Trump ने क्यों सता रहा डर?
Iran US War: Iran ने जारी कर दी अपनी Hitlist, सऊदी, UAE और कतर पर क्यों मंडराया खतरा?
पश्चिम एशिया (Middle East) का युद्ध अब एक बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है, जहां से तीसरे विश्व युद्ध की आहट सुनाई देने लगी है। ईरान (Iran) ने अमेरिका (US) और उसके सहयोगी देशों को खुली चेतावनी दी है.
मिडिल ईस्ट में बढ़ा खतरा! अमेरिका ने अपने नागरिकों को जारी की चेतावनी
मिडिल ईस्ट में अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया है. विदेश मंत्रालय ने लोगों से सतर्क रहने, यात्रा को लेकर सावधानी बरतने और हालात पर नजर रखने की सलाह दी है.
ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' पहल से खत्म होगा गाजा युद्ध? देखें US TOP-10
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की 'बोर्ड ऑफ पीस' पहल को लेकर साइप्रस में बैठक हुई है. यह बोर्ड गाजा युद्ध खत्म करने और पुनिर्माण योजना की निगरानी के लिए बनाया गया है. ट्रंप के कई देशों के नेताओं को इसमें शामिल होने का मौका दिया है. हालांकि कुछ देशों ने समर्थन किया है. वहीं कुछ ने इसकी भूमिका और और संयुक्त राष्ट्र पर असर को लेकर चिंता जताई है.
'टैरिफ धमकी से टला भारत-पाक परमाणु युद्ध', 'ऑपरेशन सिंदूर' पर ट्रंप का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच परमाणु युद्ध टालने में अपनी भूमिका का दावा किया है. उन्होंने कहा कि उनके कूटनीतिक दबाव और टैरिफ की धमकी से होने जा रहा युद्ध रुक गया. ट्रंप ने दावा किया कि इसी तरह उन्होंने 5 युद्ध रोक दिए.
Houthis vs Saudi Arabia: Iran के प्रॉक्सी से तीन तरफा घिरा सऊदी, क्या अब युद्ध की उपाय? Red Sea। US
अमेरिका और इज़राइल की ओर से 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू होने के बाद पश्चिम एशिया लगातार तनाव के दौर से गुजर रहा है। अब तक सऊदी अरब इस संघर्ष से दूरी बनाए रखने की कोशिश करता रहा,
Houthis Attack on Saudi Arabia और Iraq में Iran के रजिस्टेंस की ताकत पर Bobby Naqvi को सुनिए | PMF
Saudi Arabia और Iraq में Iran के रजिस्टेंस की ताकत पर Bobby Naqvi को सुनिए | PMF सऊदी के यमन पर अटैक और हूतियों के पलटवार के बीच..इराक से भी सऊदी से बदले की उठ रही आवाजें..मिडिल ईस्ट में जंग के इस नए मोर्चे पर..गल्फ न्यूज के पूर्व एडिटर बॉबी नकवी को सुनिए
The Odyssey Review: युद्ध से लौटते योद्धा की नहीं, खुद तक लौटते इंसान की कहानी
क्रिस्टोफर नोलन की 'द ओडिसी' सिर्फ होमर के महाकाव्य का रूपांतरण नहीं, बल्कि युद्ध, अपराधबोध और आत्म-स्वीकृति की गहरी कहानी है। मैट डेमन का शानदार अभिनय, अद्भुत सिनेमैटोग्राफी और भावनात्मक निर्देशन इसे सिर्फ एक पौराणिक एडवेंचर नहीं रहने देते। शुरुआती ...
गाजा संघर्ष : नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल
सयुक्त राष्ट्र की हालिया स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की रिपोर्ट ने इजरायल और कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में जारी हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों की गंभीर तस्वीर पेश की है।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
युद्धविराम से आगे: क्या विश्व अहिंसा की ओर बढ़ेगा?
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हाल ही में हुआ युद्धविराम ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम एशिया युद्ध की लपटों में घिरकर वैश्विक स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका था। कई सप्ताह तक चले संघर्ष ने क्षेत्र को ऐसे ज्वालामुखी में बदल दिया था, जिसकी प्रत्येक विस्फोटक घटना विश्व अर्थव्यवस्था ... Read more
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
'वाराणसी' में दिखेगा महायुद्ध, भगवान राम और कुंभकर्ण के बीच होगा 30 मिनट का ऐतिहासिक टकराव!
दिग्गज निर्देशक एसएस राजामौली जब भी कोई नया प्रोजेक्ट लाते हैं, तो वह सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक उत्सव बन जाता है। 'बाहुबली' और 'आरआरआर' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देने के बाद, राजामौली अब सुपरस्टार महेश बाबू के साथ अपनी अगली महात्वाकांक्षी ...
इंटरनेट मूवी डेटाबेस (IMDb) हर हफ्ते दुनिया भर यूजर्स के सर्च और प्रोफाइल विजिट के आधार पर 'मोस्ट पॉपुलर इंडियन सेलिब्रिटीज' की लिस्ट जारी करता है। आमतौर पर इस लिस्ट के शीर्ष पर वही सुपरस्टार्स नजर आते हैं जिनकी बड़ी फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज ...
खाड़ी युद्ध से निपटने की मोदी की तजबीज
मोदीजी ने एक बार फिर राष्ट्र की जनता को उसके कर्तव्यों के प्रति सचेत किया है।
लीजा रे ने दुबई से शेयर की दर्दभरी कविता, मिडिल ईस्ट तनाव के बीच जताई चिंता
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। हर तरफ धमाकों और सायरन का शोर सुनाई दे रहा है। एक्ट्रेस लीजा रे भी इन हालातों के बीच दुंबई में अपने घर ...
मिडिल ईस्ट में युद्ध के बीच फंसीं एक्ट्रेस लारा दत्ता, बेटी के साथ सुरक्षित लौटीं भारत, सुनाई आपबीती
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और पूर्व मिस यूनिवर्स लारा दत्ता भी अपनी 14 साल की बेटी सायरा के साथ यूएई में ...
एक्सेल एंटरटेनमेंट और ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज़ की '120 बहादुर' को लेकर चर्चा अब अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है। फिल्म ट्रेलर ने पूरी तरह से रोमांच और प्रेरणा का सही मिश्रण पेश किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बलिदान दिवस पर मेजर शैतान सिंह ...
War 2 रिव्यू: लचर स्क्रिप्ट और निर्देशन के कारण रितिक और एनटीआर हारे युद्ध, पढ़ें पूरी समीक्षा
रितिक रोशन और एनटीआर स्टारर War 2 ‘स्पाई यूनिवर्स’ की बड़ी पेशकश मानी जा रही थी, लेकिन कमजोर स्क्रिप्ट और औसत निर्देशन ने इसे निराशाजनक बना दिया। शानदार एक्शन सीक्वेंस और एनटीआर के दमदार परफॉर्मेंस के बावजूद फिल्म का सेकंड हाफ बिखर गया। कहानी में ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला अपनी खूबसूरती से हर किसी का दिल जीत लेती हैं। उर्वशी ने बेहद ही कम समय में एक अलग मुकाम हासिल किया है। वह दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोगों के साथ 'मिलने और अभिवादन' के क्षणों में संलग्न रहती है। ऐसा ही एक क्षण था जब ...
सलमान खान की सिकंदर के आखिरी गाने में दिखेगा जबरदस्त जलवा, तुर्की से बुलाए गए 500 डांसर्स!
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की 'सिकंदर' इस साल की सबसे बड़ी फिल्म मानी जा रही है, जिसका दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसके एक्शन-पैक्ड टीजर ने इसकी भव्य एंट्री के लिए एकदम परफेक्ट माहौल तैयार कर दिया है। भव्य पैमाने पर बनाई गई इस फिल्म में ...
केसरी वीर के लिए सूरज पंचोली ने की कड़ी ट्रेनिंग, ऐसे सीखा युद्ध कौशल
बॉलीवुड एक्टर सूरज पंचोली अपनी पहली बायोपिक में वीर हामीरजी गोहिल के ऐतिहासिक किरदार को जीवंत करने जा रहे हैं। सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय और सूरज पंचोली अभिनीत फिल्म 'केसरी वीर : लीजेंड्स ऑफ सोमनाथ' का टीजर हाल ही में रिलीज हुआ है। सोमनाथ मंदिर की ...
फरहान अख्तर लेकर आ रहे भारत-चीन युद्ध पर आधारित फिल्म 120 बहादुर, निभाएंगे मेजर शैतान सिंह का रोल
Movie 120 Bahadur : रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर की एक्सेल एंटरटेनमेंट, ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज के साथ मिलकर '120 बहादुर' को पेश करने के लिए उत्साहित हैं। यह फिल्म मेजर शैतान सिंह (पीवीसी) और चार्ली कंपनी, 13 कुमाऊं रेजिमेंट के सैनिकों की कहानी कहती ...
Adil Hussain: दुनियाभर में इन दिनों पेरिस ओलंपिक 2024 की धूम मची हुई है। पेरिस ओलंपिक में दुनियाभर के खिलाड़ियों ने भाग लिया है। भारत के कई खिलाड़ी भी इसमें हिस्सा लेने पहुंचे हुए हैं। हाल ही में तुर्की के शूटर यूसुफ डिकेक ने सिल्वर मेडल जीता।
बॉर्डर की 27वीं सालगिरह पर, अभिनेता सनी देओल ने एक घोषणा वीडियो के ज़रिए फ़्रैंचाइज़ी के दूसरे संस्करण की पुष्टि की है। अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर सनी ने बॉर्डर 2 में अपनी वापसी की आधिकारिक घोषणा करते हुए एक वीडियो शेयर किया और इसे 'भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म' बताया। उन्होंने पोस्ट के कैप्शन में लिखा, ''एक फौजी अपने 27 साल पुराने वादे को पूरा करने के बाद, आ रहा है फिर से। भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म, बॉर्डर 2।'' इस फिल्म का निर्माण भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, जेपी दत्ता और निधि दत्ता करेंगे। आगामी युद्ध फिल्म का निर्देशन अनुराग सिंह करेंगे। इसे भी पढ़ें: Bollywood Wrap Up | पति से तकरार के बीच केन्या लौट गई हैं Dalljiet Kaur? शादी को बचाने की कर रही कोशिश सनी द्वारा घोषणा वीडियो शेयर किए जाने के तुरंत बाद, सोशल मीडिया यूज़र्स ने अपनी उत्सुकता व्यक्त करते हुए कमेंट सेक्शन में बाढ़ ला दी। एक यूज़र ने लिखा, ''वाह, यह बहुत बढ़िया घोषणा है सर जी, जय हिंद।'' दूसरे ने लिखा, ''बहुत उत्साहित हूँ।'' तीसरे यूजर ने टिप्पणी की, ''बॉर्डर 2 के लिए बहुत उत्साहित हूं।'' इसे भी पढ़ें: NDA पर इमोशनल बयान, काले सूट में ली मंत्री पद की शपथ और शर्मिला अंदाज, Tripti Dimri की तरह रातों रात भारत के Sensation बन गये Chirag Paswan सनी देओल की अन्य परियोजनाएं उन्हें आखिरी बार अमीषा पटेल के साथ गदर 2 में देखा गया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत सफल रही और इसे ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर घोषित किया गया। गदर 2 की सफलता के बाद, सनी ने लाहौर 1947 सहित कई फिल्में साइन कीं, जिसे आमिर खान के प्रोडक्शन बैनर के तहत बनाया जा रहा है। फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है, जिन्होंने आमिर को कल्ट क्लासिक अंदाज़ अपना अपना (1994) में निर्देशित किया था। View this post on Instagram A post shared by Sunny Deol (@iamsunnydeol)
Kalki 2898 AD: शुरू हो गया नया युद्ध, पूरे ट्रेलर की अहम कड़ी हैं अमिताभ, प्रभास करेंगे इम्प्रेस
Kalki 2898 AD के ट्रेलर को देखें तो, फिल्म कल्कि 2898 एडी के मेकर्स ने विश्वास दिलाया है कि ये फिल्म लोगों को बांधने में कामयाब होगी. टफ सीक्वेंस, क्लियर एडिटिंग और बैकग्राउंड स्कोर आपका ध्यान खींचते हैं. वीएफएक्स पर भी अच्छा काम किया गया है.
आशुतोष राणा ने डीपफेक वीडियो को बताया 'माया युद्ध', बोले- ये सालों से चल रहा
आशुतोष ने कहा कि ऐसी बातों में खुद को डिफेंड करने का कोई फायदा नहीं है. उन्होंने कहा कि जो लोग आपको जानते हैं वो सवाल करेंगे ही नहीं. और जो नहीं जानते, उन्हें किसी रिस्पॉन्स से फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि वो दिमाग में आपकी एक छवि बना चुके होते हैं.
रानीति बालाकोट एंड बियॉन्ड: जिमी शेरगिल की नई सीरीज भारत की आधुनिक युद्ध की ऐतिहासिक कहानी को प्रदर्शित करेगी। जिमी शेरगिल दो मिनट के ट्रेलर की शुरुआत पुलवामा हमले की झलक से होती है। एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाने वाले आशीष कहते हैं, ये एक नया रण है या इसे जीतने के लिए एक नई रणनीति की जरूरत है। इसे भी पढ़ें: नक्सलियों के खिलाफ 'ऑपरेशन प्रहार', कमांडर शंकर राव समेत अब तक 79 हुए ढेर, हिट लिस्ट में और भी कई नाम शामिल आगामी वेब शो आधुनिक युद्ध को डिकोड करता है जो केवल भौतिक सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता है बल्कि सोशल मीडिया, डिजिटल रणनीति और गुप्त राजनीतिक चालों के क्षेत्र से परे है जो भू-राजनीति को नया आकार देने की शक्ति रखता है। वेब श्रृंखला उन वास्तविक घटनाओं से प्रेरित है जिन्होंने 2019 में देश को हिलाकर रख दिया था। शो में कुछ हवाई दृश्य, शानदार प्रदर्शन और एक शक्तिशाली कथा है जो युद्ध के मैदान के अंदर और बाहर हर पहलू को चतुराई से पकड़ती है। इसे भी पढ़ें: Biden को सोचना पड़ेगा फिर एक बार, Iran पर प्रहार तो रूस करेगा पलटवार, रक्षा मंत्रायल ने चिट्ठी लिखकर जता दी मंशा आगामी वेब श्रृंखला के बारे में बात करते हुए, जिमी ने कहा: यह मेरे द्वारा अतीत में की गई किसी भी भूमिका से भिन्न है। कम से कम यह कहना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन भारत की पहली वॉर-रूम केंद्रित वेब-श्रृंखला का हिस्सा बनना बेहद संतोषजनक भी है। वास्तविक जीवन की घटनाओं से प्रेरित जिसने देश को हिलाकर रख दिया। एनएसए प्रमुख के रूप में अपनी भूमिका के बारे में बात करते हुए, आशीष ने कहा, एनएसए प्रमुख की भूमिका निभाना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन रक्षा बलों के कुछ सदस्यों के साथ बैठकों ने मुझे अपने चरित्र की बारीकियों को समझने में मदद की। तैयारी कार्य और कार्यशालाएं मुझे वापस ले गईं मेरे एनएसडी के दिनों में। संतोष सिंह द्वारा निर्देशित, श्रृंखला का निर्माण स्फीयरओरिजिन्स मल्टीविजन प्राइवेट लिमिटेड के सुंजॉय वाधवा और कॉमल सुंजय डब्ल्यू द्वारा किया गया है। इसमें प्रसन्ना भी हैं। शो का प्रीमियर 25 अप्रैल को JioCinema पर होगा।
दर्शक काफी समय से रैपर बादशाह और हनी सिंह के बीच जुबानी जंग देख रहे हैं। दोनों का रिश्ता सालों से विवादों से भरा रहा है। हालांकि करियर के शुरुआती दिनों में बादशाह और हनी सिंह के बीच अच्छी दोस्ती हुआ करती थी। हालाँकि, ऐसा लगता है कि सफलता और पैसे ने धीरे-धीरे इस दोस्ती को पूरी तरह से खत्म कर दिया। अब दोनों अक्सर एक दूसरे पर तंज कसते नजर आते हैं। हाल ही में हनी सिंह एक होली पार्टी में शामिल हुए, जहां उन्होंने बादशाह के 'पापा कमबैक' वाले कमेंट का करारा जवाब दिया। रैपर का ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसे भी पढ़ें: Punjab Kings के खिलाफ जीत के बाद इंटरनेट पर Virat Kohli का Anushka Sharma के साथ वीडियो कॉल, FLY KISS देते नजर आये खिलाड़ी हनी सिंह ने बादशाह पर किया पलटवार बादशाह कुछ दिनों पहले हनी सिंह पर अपनी टिप्पणी को लेकर चर्चा में थे, जिसमें उन्होंने हनी सिंह की वापसी पर कटाक्ष किया था। अब सिंगर और रैपर हनी सिंह ने एक कमेंट के जरिए बादशाह को करारा जवाब दिया है और कहा है कि उन्हें बादशाह को जवाब देने के लिए मुंह खोलने की जरूरत नहीं है। उनके फैन ही काफी हैं जो हर चीज पर बात कर सकते हैं। उन्होंने अपने गाली वाले अंदाज में अपने फैंस से बात करते हुए बादशाह का जवाब दिया। हनी सिंह को सोमवार को मुंबई में एक होली पार्टी में परफॉर्म करते देखा गया और यहीं उन्होंने बादशाह पर कटाक्ष किया। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा, हर कोई कहता है, रिप्लाई करो, रिप्लाई करो... मैं क्या रिप्लाई करूं... आप लोग तो उनके सारे कमेंट्स का बहुत अच्छे से रिप्लाई कर चुके हैं। मुझे मुंह खोलने की जरूरत है। ऐसा नहीं होता है। जैसे ही भीड़ ने उनके लिए तालियां बजाईं, गायक ने कहा, मुझे बोलने की जरूरत नहीं है। आप लोग खुद पागल हैं। हनी सिंह पागल हैं और उनके प्रशंसक भी पागल हैं। इसे भी पढ़ें: Taapsee Pannu के पति Mathias Boe आखिर कौन है? जब सफल भी नहीं थी एक्ट्रेस तब से उन्हें प्यार करते थे बैडमिंटन खिलाड़ी रैपर बादशाह ने क्या कहा? आपको बता दें कि हाल ही में बादशाह ने हनी सिंह पर कमेंट करते हुए कहा था, ''मुझे एक पेन और कागज दो। मैं तुम्हारे लिए एक गिफ्ट लाया हूं। मैं कुछ गाने लिखूंगा और तुम्हें दूंगा। पापा की वापसी तुम्हारे साथ होगी।'' Kalesh Controversy B/w Honey Singh and Badshah (Honey Singh Replied to Badshah) pic.twitter.com/o74t423bgS — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 25, 2024 Kalesh Between Badshah & Honey Singh Fans on Stage during Live Concert pic.twitter.com/M4VqSqLSc3 — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 19, 2024
आखिर क्यों Indira Gandhi ने Aandhi मूवी पर लगा दिया था प्रतिबन्ध, आज भी देखने से कतराते हैं लोग
आखिर क्यों Indira Gandhi नेAandhi मूवी पर लगा दिया था प्रतिबन्ध,आज भी देखने से कतराते हैं लोग
'सावरकर' रिव्यू: खोखली, एकतरफा फिल्म में एकमात्र अच्छी चीज है रणदीप हुड्डा का काम
आज के दौर में 'गुमनाम' हो चुके एक स्वतंत्रता नायक की कहानी कहने निकली ये फिल्म, एक अनजान कहानी बताने से ज्यादा अपने हीरो विनायक दामोदर सावरकर को बाकियों के मुकाबले अधिक 'वीर' बताने पर फोकस करने लगती है.
अस्तित्व और बदले के लिएब्रह्मांड में शुरू होने वाला है महायुद्ध, एक्शन और रोमांच से भरपूर हैRebel Moon 2 का धांसू ट्रेलर

