अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हाल के दिनों में सरकार और कट्टरपंथी गुटों के बीच मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आने लगे हैं, जिससे ईरान की आंतरिक राजनीति में नई उथल-पुथल देखने को मिल रही है।
बाराबंकी। रामनगर तहसील स्थित प्रसिद्ध लोधेश्वर महादेव धाम में 20 जुलाई को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रस्तावित आगमन को लेकर प्रशासन युद्धस्तर पर तैयारियों में जुटा है। लगातार हो रही बारिश के बावजूद हेलीपैड, पंडाल, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य आवश्यक कार्यों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह स्वयं मौके पर पहुंचकर तैयारियों की निगरानी कर रहे हैं। मुख्यमंत्री के हेलीकॉप्टर की लैंडिंग के लिए नंदी बाग में लोक निर्माण विभाग की ओर से हेलीपैड तैयार किया जा रहा है। विभागीय अधिकारी राजीव कुमार राय इसकी निगरानी कर रहे हैं। शनिवार शाम से हो रही लगातार बारिश के कारण निर्माण स्थल पर जलभराव हो गया, जिससे कुछ समय के लिए कार्य प्रभावित हुआ। मुख्यमंत्री के संबोधन के लिए बनाए जा रहे विशाल पंडाल का निर्माण अंतिम चरण में है। बारिश से कार्य की गति प्रभावित हुई, लेकिन मशीनों से जल निकासी कर निर्माण कार्य फिर से तेज कर दिया गया है। मंदिर परिसर में विशेष सफाई अभियान भी चलाया जा रहा है। वर्षा का पानी जमा होने वाले स्थानों से पंपिंग मशीनों द्वारा पानी निकालकर परिसर को व्यवस्थित किया जा रहा है। मंदिर परिसर के भीतर और बाहर रंगाई-पुताई का कार्य तेजी से जारी है। निर्माणाधीन लोधेश्वर महादेव कॉरिडोर को व्यवस्थित रखने के लिए नीले रंग की टीन शेड लगाई जा रही है। बिजली विभाग सीसीटीवी कैमरे लगाने और नई विद्युत वायरिंग का कार्य कर रहा है। पुलिस, स्वास्थ्य, नगर पंचायत, लोक निर्माण और विद्युत विभाग सहित सभी संबंधित विभाग लगातार मौके पर मौजूद रहकर तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। जिलाधिकारी ईशान प्रताप सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री के प्रस्तावित कार्यक्रम को देखते हुए सभी व्यवस्थाएं समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरी कराई जा रही हैं। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि मुख्यमंत्री के आगमन से पहले सभी तैयारियां पूरी तरह दुरुस्त कर ली जाएं, ताकि कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो सके।
THAAD और आयरन डोम भी फेल? मिडिल ईस्ट में बेअसर हुए दुनिया के सबसे महंगे एयर डिफेंस सिस्टम
मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) के रणक्षेत्र से इस वक्त की सबसे बड़ी सुरक्षा चिंता सामने आ रही है। दुनिया के सबसे आधुनिक और अचूक माने जाने वाले एयर डिफेंस सिस्टम अब ईरान समर्थित गुटों के हमलों को रोकने में नाकाम साबित हो रहे हैं। अमेरिका का सबसे भरोसेमंद और हाल ही में तैनात किया गया THAAD (टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस) और इजरायल का अभेद्य कवच कहा जाने वाला 'आरण डोम' भी अब इन हमलों के आगे बेबस नजर आ रहा है। हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर तैनात जवानों की सुरक्षा पर भी बड़ा संकट खड़ा हो गया है।आखिर क्यों फेल साबित हो रहे हैं दुनिया के सबसे महंगे डिफेंस सिस्टम?सैन्य विशेषज्ञों और आधुनिक एआई सर्च इंजनों (Generative Search Engines) के विश्लेषण के अनुसार, ईरान और उसके सहयोगी संगठनों (जैसे हिजबुल्लाह और हूतियों) ने अपनी युद्ध रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। वे अब पारंपरिक मिसाइलों के बजाय 'स्वार्म ड्रोन' (एक साथ दर्जनों ड्रोन से हमला) और लो-फ्लाईंग क्रूज मिसाइलों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये ड्रोन बेहद कम ऊंचाई पर उड़ते हैं, जिसके कारण बेहद ऊंचाई पर मार करने वाला अमेरिकी THAAD सिस्टम इन्हें समय रहते डिटेक्ट नहीं कर पाता। वहीं, लगातार होने वाले रॉकेट हमलों से आयरन डोम का रडार सिस्टम ओवरलोड हो जाता है, जिससे कुछ मिसाइलें अपने टारगेट को हिट करने में कामयाब हो जाती हैं।अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बढ़ा खतरा, जवानों की सुरक्षा दांव परसीरिया, इराक और जॉर्डन के सीमावर्ती इलाकों में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों (US Military Bases) पर हाल के दिनों में ड्रोन और रॉकेट हमलों की फ्रीक्वेंसी तेजी से बढ़ी है। पेंटागन के सूत्रों के मुताबिक, तमाम अत्याधुनिक तकनीक होने के बावजूद इन रिमोट लोकेशंस पर तैनात अमेरिकी सैनिकों को पूरी सुरक्षा दे पाना मुश्किल हो रहा है। ईरान समर्थित लड़ाके घात लगाकर सटीक हमले कर रहे हैं, जिससे अमेरिकी कैंपों के भीतर तक नुकसान पहुंच रहा है। यह स्थिति वाशिंगटन के लिए रणनीतिक और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर एक बड़ा झटका मानी जा रही है।इजरायल और अमेरिका की बढ़ती टेंशन, नया सुरक्षा कवच तलाशने की मजबूरीइस नए खतरे ने इजरायल के तेल अवीव से लेकर अमेरिका के वाशिंगटन तक रक्षा रणनीतिकारों (Defense Strategists) की रातों की नींद उड़ा दी है। सालों की रिसर्च और अरबों डॉलर खर्च करके तैयार किया गया आयरन डोम और पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम जब फेल होने लगा है, तो अब लेजर-बेस्ड डिफेंस सिस्टम (जैसे इजरायल का आयरन बीम) को जल्द से जल्द एक्टिवेट करने की मांग उठ रही है। अगर जल्द ही इस तकनीकी खामी को दूर नहीं किया गया, तो पूरे मिडिल ईस्ट रीजन में अमेरिकी सैन्य दबदबा पूरी तरह खतरे में पड़ सकता है।
तेहरान/लखनऊ। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे भीषण सैन्य संघर्ष के बीच अब ईरान के भीतर एक बहुत बड़ा आंतरिक राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। वैश्विक मीडिया संस्थान सीएनएन (CNN) की एक ताजा और बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के भीतर सत्ता पर कब्जे को लेकर गृहयुद्ध और तख्तापलट (Coup) जैसी स्थितियां बनती दिखाई दे रही हैं। ईरान के शक्तिशाली कट्टरपंथी गुटों ने अपनी ही सरकार पर बेहद संगीन आरोप लगाते हुए कहा है कि अमेरिका के साथ बातचीत और समझौता करने वाले उदारवादी नेता इस्लामिक रिपब्लिक के खिलाफ एक 'सॉफ्ट तख्तापलट' (Soft Coup) की साजिश रच रहे हैं। कट्टरपंथियों का दावा है कि नए सुप्रीम लीडर को पूरी तरह दरकिनार कर देश की कमान कुछ चुनिंदा नेताओं ने अपने हाथों में ले ली है।खामेनेई के अंतिम संस्कार में बवाल: विदेश मंत्री पर पथराव, लगे गद्दार के नारेईरान के भीतर सुलग रहा यह आंतरिक असंतोष उस समय सार्वजनिक रूप से हिंसक रूप में सामने आ गया, जब पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा निकाली जा रही थी। गौरतलब है कि खामेनेई की मौत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल द्वारा किए गए शुरुआती हवाई हमलों में हो गई थी। अंतिम संस्कार के दौरान जब ईरान के वर्तमान राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन खामेनेई के ताबूत के साथ चल रहे थे, तब कट्टरपंथी समर्थकों ने 'समझौता करने वालों की मौत हो' के उग्र नारे लगाए। हद तो तब हो गई जब भीड़ ने विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर पत्थरों से हमला कर दिया और उन्हें 'देश बेचने वाला गद्दार' करार दिया। यही नहीं, ईरानी शासन से जुड़े एक प्रमुख धार्मिक गायक मोहम्मद अली बख्शी ने एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति पजशकियान को सीधे तौर पर धमकी देते हुए कहा, राष्ट्रपति महोदय, अगर सुप्रीम लीडर की शर्तें पूरी नहीं हुईं, तो हमारी तलवार होगी और आपका गला होगा। हम आपकी जिंदगी को जहन्नुम बना देंगे।कट्टरपंथी गुटों के गंभीर आरोप: मुज्तबा खामेनेई के नाम पर खेल?ईरान के इन कट्टरपंथी गुटों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि सरकार को अमेरिका से बदला लेना चाहिए था, लेकिन उसने देश के स्वाभिमान को ताक पर रखकर वाशिंगटन से गुप्त समझौता कर लिया। उनका आरोप है कि यह समझौता नए संभावित सुप्रीम लीडर और दिवंगत खामेनेई के बेटे मुज्तबा खामेनेई (Mojtaba Khamenei) की इच्छा के बिल्कुल खिलाफ जाकर किया गया है। रहस्यमयी बात यह है कि मुज्तबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से जनता के सामने नहीं आए हैं, न ही उन्होंने देश को संबोधित किया है। इसके बावजूद, राष्ट्रपति और उनकी टीम उनके नाम का इस्तेमाल कर बड़े फैसले ले रही है। कट्टरपंथियों ने सरकार पर संसद को जबरन निलंबित करने, सुप्रीम लीडर के पुराने निर्देशों की धज्जियां उड़ाने और रात में होने वाली सरकार विरोधी रैलियों को बलपूर्वक रोकने का भी आरोप मढ़ा है। ईरान के सांसद महमूद नबावियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साफ लिखा है, ईरान की जनता सावधान रहे, क्या देश में तख्तापलट होने वाला है? हम खामेनेई के खून का बदला लेने और तख्तापलट के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार हैं।क्यों पैदा हुआ यह नेतृत्व का संकट? क्या कहते हैं एक्सपर्ट्सईरान मामलों के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ और प्रसिद्ध पुस्तक ‘What Iranians Want’ के लेखक अराश अजीजी ने सीएनएन से बातचीत में इस पूरे विवाद की इनसाइड स्टोरी समझाई है। उनके मुताबिक, मुज्तबा खामेनेई के पूरी तरह से पर्दे के पीछे रहने के कारण ईरान में एक पावर वैक्यूम (नेतृत्व शून्यता) पैदा हो गया है। इसके चलते संसद के स्पीकर और मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बघेर गालिबाफ, राष्ट्रपति पेजेशकियन और विदेश मंत्री अराघची ही इस समय ईरानी सरकार के मुख्य चेहरे बन चुके हैं। चूंकि कट्टरपंथी तत्वों की पहुंच मुज्तबा तक सीधे नहीं हो पा रही है, इसलिए वे इन तीन शीर्ष नेताओं को विलेन मान रहे हैं और उन पर अवैध तरीके से सत्ता हथियाने की साजिश का आरोप लगा रहे हैं। इस भयंकर अंदरूनी राजनीतिक खींचतान के बीच सीमा पर अमेरिका और ईरान की सेनाओं के बीच मिसाइल और ड्रोन हमले भी बदस्तूर जारी हैं, जिससे ईरान दोहरे संकट में फंस गया है।
शिरोमणि अकाली दल के प्रधान सुखबीर बालद ने 18 जून को ऐलान किया था कि अगर मुख्यमंत्री भगवंत मान को उनके पद से नहीं हटाया जाता है, तो शिरोमणि अकाली दल की तरफ से 19 जुलाई से धर्म युद्ध मोर्चा शुरू किया जाएगा। अब इस मामले पर राजनीति गर्मा गई है। आम आदमी पार्टी (AAP) ने सवाल पूछा है कि धर्म युद्ध मोर्चा आखिर कहां से शुरू हो रहा है। AAP नेता बलतेज पन्नू ने कहा है कि बेअदबी दल यह मोर्चा AI से शुरू कर ले और AI वीडियो अपने पेजों पर डाल दे। प्रधान जी तो इससे ही खुश हो जाएंगे। प्रधान जी इसी में खुश रहेंगे बलतेज पन्नू ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट X पर लिखा, “आज अकाली दल (बेअदबी) अपना ‘धर्म युद्ध मोर्चा’ कहां से शुरू करने जा रहा है, क्या किसी के पास कोई जानकारी है? पिछले महीने सुखबीर सिंह बादल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में ऐलान किया था कि वे 19 जुलाई से ‘श्री धर्म युद्ध मोर्चा’ शुरू करेंगे। बेअदबी दल चाहे तो यह मोर्चा AI से ही शुरू कर ले और AI वीडियो अपने पेजों पर डाल दे। प्रधान जी तो शायद इसी से खुश हो जाएंगे।” इसलिए कहा था धर्म युद्ध मोर्चा लगाने को पंजाब में मुख्यमंत्री और सत्ताधारी दल से जुड़े एक कथित विवादित वीडियो के वायरल होने के बाद अकाली दल ने इसे बड़ा नैतिक और धार्मिक मुद्दा बनाया। सुखबीर सिंह बादल का आरोप था कि मुख्यमंत्री भगवंत मान सिख धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने और धार्मिक मर्यादाओं के उल्लंघन के दोषी हैं। बादल ने भगवंत मान को “गुरु दोखी” करार देते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) को उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाने के लिए एक महीने का अल्टीमेटम दिया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि मुख्यमंत्री को नहीं हटाया गया, तो 19 जुलाई से मोर्चा शुरू कर दिया जाएगा। सुखबीर बादल को एसआईटी ने किया तलब पंजाब में 2015 में, जब राज्य में शिरोमणि अकाली दल की सरकार थी, उस समय हुए बेअदबी मामलों की जांच कर रही एसआईटी ने सुखबीर सिंह बादल को सोमवार सुबह 11 बजे चंडीगढ़ तलब किया है। इस मामले में सुखबीर सिंह बादल का कहना है, “जितनी मर्जी बार बुला लो, मैं हर बार आ जाऊंगा। 10 साल हो चुके हैं। यह झूठ का पुलिंदा है। 10 साल में चालान तक पेश नहीं हुआ है। ड्रामे कर रहे हैं। लोगों
आर्थिक बदहाली और वैश्विक मंच पर अलग-थलग पड़ने के संकट से जूझ रहा पाकिस्तान अपनी डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए नए-नए पैंतरे आजमा रहा है। सऊदी अरब और तुर्की जैसे पुराने सहयोगियों से उम्मीद के मुताबिक वित्तीय मदद और कूटनीतिक समर्थन न मिलने के बाद अब इस्लामाबाद ने अपना रुख एक और अमीर खाड़ी देश कुवैत (Kuwait) की तरफ किया है। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के नेतृत्व में देश का शीर्ष नेतृत्व इन दिनों कुवैत के साथ रणनीतिक और व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रहा है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि इस नई नजदीकी के पीछे सिर्फ कर्ज की गुहार नहीं, बल्कि पर्दे के पीछे मुस्लिम देशों का एक तथाकथित 'इस्लामिक नाटो' खड़ा करने का पुराना पाकिस्तानी एजेंडा भी छिपा हो सकता है।आखिर कुवैत के सामने क्यों हाथ फैला रहा है इस्लामाबाद?पाकिस्तान इस समय विदेशी मुद्रा भंडार की भारी किल्लत और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की कड़ी शर्तों के जाल में फंसा हुआ है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने अब पाकिस्तान को मुफ्त में बेलआउट पैकेज देने के बजाय सीधे तौर पर देश की सरकारी संपत्तियों में निवेश करने की शर्त रख दी है। ऐसे में पाकिस्तान को कुवैत एक सुरक्षित और बड़े निवेशक के रूप में दिखाई दे रहा है। पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल कुवैत को तेल रिफाइनरी, कृषि, माइनिंग और आईटी सेक्टर में भारी निवेश के प्रस्ताव दे रहा है। इसके साथ ही पाकिस्तान अपने लाखों कुशल और अकुशल श्रमिकों को कुवैत भेजने के लिए वीजा नियमों में ढील देने की गुहार लगा रहा है ताकि देश में रेमिटेंस (विदेशी मुद्रा) का प्रवाह बढ़ाया जा सके।मुस्लिम ब्लॉक के जरिए भारत को घेरने की नाकाम कोशिशभू-राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान का कुवैत और तुर्की जैसे देशों के करीब जाना उसकी पुरानी और घिसी-पिटी कूटनीति का हिस्सा है। पाकिस्तान हमेशा से सऊदी अरब की अगुवाई वाले इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) और तुर्की-मलेशिया के साथ मिलकर एक मजबूत मिलिट्री और पॉलिटिकल ब्लॉक यानी 'इस्लामिक नाटो' बनाने का सपना देखता रहा है, ताकि कश्मीर जैसे मुद्दों पर भारत के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाया जा सके। लेकिन पाकिस्तान का यह ख्वाब हमेशा से खोखला साबित हुआ है क्योंकि कुवैत, यूएई और सऊदी अरब जैसे प्रभावशाली खाड़ी देशों के भारत के साथ बेहद मजबूत और गहरे व्यापारिक संबंध हैं, जिन्हें वे पाकिस्तान के कारण दांव पर लगाने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं।शहबाज-मुनीर की इस महत्वाकांक्षी चाल में छिपे हैं बड़े खतरेइस समय जब मध्य-पूर्व (Middle East) में ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव चरम पर है, पाकिस्तान की यह कूटनीतिक पैंतरेबाजी उस पर खुद भारी पड़ सकती है। कुवैत और अन्य खाड़ी देश इस समय क्षेत्रीय स्थिरता पर ध्यान दे रहे हैं न कि किसी नए सैन्य या वैचारिक गुटबाजी पर। जानकारों का कहना है कि अगर पाकिस्तान ने खाड़ी देशों को अपने रक्षा एजेंडे या इस्लामिक ब्लॉक की राजनीति में घसीटने की कोशिश की, तो उसे लेने के देने पड़ सकते हैं। लखनऊ और दिल्ली के विदेश नीति विशेषज्ञों के मुताबिक, यदि पाकिस्तान अपनी आर्थिक प्राथमिकताओं को छोड़कर कूटनीतिक चालबाजियों में उलझा रहा, तो वह कुवैत से मिलने वाले संभावित आर्थिक सहयोग और निवेश से भी हाथ धो बैठेगा।
आजमगढ़ जिले की पवई थाने की पुलिस ने एक दिन पूर्व एक तरफा प्यार में महिला पर धारदार हथियार से हमला किए जाने के मामले में आरोपी को शनिवार सुबह 4 बजे मुठभेड़ में गिरफ्तार किया है। मुठभेड़ में आरोपी के पैर में गोली लगी। जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। घायल बदमाश की पहचान सुजीत मौर्य के रूप में हुई है। सुजीत मौर्य महिला से एक तरफा पसंद करता था। और लंबे समय से महिला का पीछा कर रहा था। गुरुवार की रात भी महिला मोबाइल पर बात कर रही थी और इसी दौरान घर में घुसते समय आरोपी भी पीछे से घुस गया था और घर के अंदर छुप गया था। जब महिला ने आरोपी को देखा तो शोर मचाना शुरू कर दिया। इसके बाद आरोपी ने धारदार हथियार से महिला के गण पर हमला कर दिया था और मौके से फरार हो गया था घायल महिला को इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया था। जहां महिला का इलाज चल रहा है। इसके बाद से पुलिस आरोपी की तलाश में जुटी हुई थी। चेकिंग के दौरान हुई मुठभेड़ इस बारे में फूलपुर के क्षेत्राधिकारी किरणपाल सिंह ने बताया किशनिवार सुबह की पुलिस चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि घटना में फरार आरोपी सुजीत मौर्य अंडरपास के पास छिपा हुआ है। इस सूचना पर पुलिस ने आरोपी की घेराबंदी की अपने को घिरा देखते हुए आरोपी ने पुलिस पर फायर कर दिया। पुलिस द्वारा की गई कंट्रोल फायरिंग में आरोपी के दाहिने पैर में एक गोली लगी। आरोपी के कब्जे से तमंचा कारतूस भी बरामद किया गया है।
The Odyssey Review: युद्ध से लौटते योद्धा की नहीं, खुद तक लौटते इंसान की कहानी
क्रिस्टोफर नोलन की 'द ओडिसी' सिर्फ होमर के महाकाव्य का रूपांतरण नहीं, बल्कि युद्ध, अपराधबोध और आत्म-स्वीकृति की गहरी कहानी है। मैट डेमन का शानदार अभिनय, अद्भुत सिनेमैटोग्राफी और भावनात्मक निर्देशन इसे सिर्फ एक पौराणिक एडवेंचर नहीं रहने देते। शुरुआती ...
मिडल ईस्ट की राजनीति में इन दिनों एक अजीब कूटनीतिक पहेली सुलझती नजर नहीं आ रही है। एक तरफ सऊदी अरब ने स्पष्ट कर दिया है कि उसके साम्राज्य की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं होगा और किसी भी प्रकार का हमला उसके लिए 'रेड लाइन' है, तो वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान का ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता का 'ठेकेदार' बनने का प्रयास गले की हड्डी बनता जा रहा है। इस्लामाबाद के इस कदम ने न केवल उसे अपने पुराने दोस्त सऊदी अरब की नजरों में संदिग्ध बना दिया है, बल्कि उसे एक ऐसे कूटनीतिक भंवर में धकेल दिया है जहां से निकलना अब मुश्किल होता जा रहा है।मध्यस्थता का दिखावा या कूटनीतिक मजबूरी?पाकिस्तान लंबे समय से यह दावा करता आया है कि वह ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए एक 'सेतु' (Bridge) का काम कर सकता है। लेकिन जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान का यह रुख उसकी अपनी आर्थिक बदहाली और सऊदी अरब से मिलने वाली वित्तीय मदद के बीच एक बड़ा विरोधाभास पैदा कर रहा है। सऊदी अरब मिडल ईस्ट में अपनी सुरक्षा को लेकर बहुत सतर्क है और वह ईरान को अपना सबसे बड़ा क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी मानता है। ऐसे में, यदि पाकिस्तान ईरान के करीब जाकर अमेरिका से डील कराने का प्रयास करता है, तो रियाद इसे अपनी पीठ में छुरा घोंपने जैसा महसूस करता है। पाकिस्तान का यह दोहरा रुख अब उसे कूटनीतिक रूप से अलग-थलग कर रहा है।सऊदी अरब की 'रेड लाइन' और पाक की मुश्किलेंरियाद ने साफ कर दिया है कि यमन या समुद्री रास्तों से उसकी सुरक्षा को खतरा पहुँचाना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सऊदी अरब की इस सख्त नीति के बीच पाकिस्तान का ईरान के साथ मिलकर अमेरिका से 'डील' की वकालत करना उसके कूटनीतिक समीकरणों को बिगाड़ रहा है। सऊदी अरब से पाकिस्तान को मिलने वाले निवेश और सस्ते तेल पर अब तलवार लटकी हुई है। यदि इस्लामाबाद अपनी मध्यस्थता की नीति को नहीं बदलता, तो उसे रियाद की नाराजगी का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। पाकिस्तान का यह कूटनीतिक प्रयोग अब उसके अपने ही पाले में 'सेल्फ गोल' साबित हो रहा है।क्यों फंसा है पाकिस्तान?पाकिस्तान की यह स्थिति 'धोबी का कुत्ता न घर का न घाट का' जैसी हो गई है। एक ओर उसे चीन का दबाव झेलना पड़ रहा है, दूसरी ओर अमेरिका के साथ संबंधों को सुधारने की मजबूरी है, और तीसरी ओर सऊदी अरब को नाराज न कर पाने की विवशता है। मध्यस्थता का 'ठेका' लेने के चक्कर में पाकिस्तान ने यह नहीं सोचा कि ईरान-अमेरिका के बीच दशकों से चली आ रही दुश्मनी इतनी आसानी से हल होने वाली नहीं है। अब इस्लामाबाद न तो ईरान को पूरी तरह संतुष्ट कर पा रहा है, न अमेरिका को और न ही सऊदी अरब का भरोसा जीत पा रहा है। अंततः, इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान की विश्वसनीयता अंतरराष्ट्रीय मंच पर गिरती जा रही है, जो उसके भविष्य के लिए बड़े खतरे का संकेत है।
कतर के पूर्व अमीर शेख हमद के निधन पर भारत ने जताया शोक, राजदूत विपुल ने दी श्रद्धांजलि
कतर में भारत के राजदूत विपुल ने कतर के पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर आयोजित सामुदायिक शोक सभा में हिस्सा लिया। भारतीय दूतावास, दोहा ने गुरुवार को इसकी जानकारी दी।
पीएम मोदी ने कतर के अमीर से की बात, भारत-कतर रिश्तों में पूर्व अमीर के योगदान को किया याद
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से फोन पर बातचीत की। पीएम मोदी ने पूर्व अमीर शेख हमद बिन खलीफा अल थानी के निधन पर दुख जताया और भारत-कतर संबंधों में उनके योगदान को याद किया।
लखनऊ में 13 साल पुराने आतंकी साजिश मामले में लखनऊ की विशेष एनआईए कोर्ट ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी (हूजी) के संदिग्ध सदस्य कुरबान अली को दोषी ठहराते हुए 5 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उस पर 7 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी और जेल में पहले से बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा। विशेष न्यायाधीश (एनआईए) उमाशंकर जिंदल की अदालत ने गुरुवार को फैसला सुनाते हुए कुरबान अली को आपराधिक साजिश, भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश, युद्ध के लिए हथियार जुटाने, जालसाजी और आर्म्स एक्ट के मामलों में दोषी करार दिया। इन अपराधों में उसे 5 साल की कठोर कैद और 7 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। कोर्ट ने धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े अपराधों में 3 साल की कठोर कैद और 500 रुपए जुर्माने की सजा भी सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं समवर्ती (Concurrent) रूप से चलेंगी। यानी आरोपी को अलग-अलग सजाएं क्रमवार नहीं काटनी होंगी। साथ ही न्यायिक हिरासत में पहले से बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित करने का आदेश भी दिया गया। लखनऊ जिला जेल भेजने का आदेश दोषसिद्धि के बाद कोर्ट ने सजायाफ्ता वारंट जारी करने के निर्देश दिए और जेल प्रशासन को आदेश दिया कि कुरबान अली को शेष सजा काटने के लिए लखनऊ जिला जेल में रखा जाए। इन धाराओं में ठहराया गया दोषी अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल रहा। इसके बाद कुरबान अली को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120B, 121A, 122, 420, 467, 468 और 471 के तहत दोषी ठहराया गया। इसके अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 3, 5, 25, 30 और 35 के तहत भी उसे दोषी पाया गया। यह मामला वर्ष 2013 में दर्ज हूजी से जुड़ी कथित आतंकी साजिश से संबंधित है।
ट्रंप का दबाव: नेतन्याहू से सीरिया-लेबनान से सेना हटाने की मांग
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से सीरिया और दक्षिणी लेबनान से इजरायली सैनिकों को हटाने की प्रक्रिया शुरू करने का बार-बार आग्रह कर रहे है। इस आशय की रिपोर्ट अमेरिकी एवं इजरायली अधिकारियों के हवाले से 'एक्सियोस' ने दी है
रायबरेली के ऊंचाहार थाना क्षेत्र की किसान सब्जी मंडी में एक जेबकतरा रंगे हाथों पकड़ा गया। स्थानीय लोगों की मदद से पकड़े गए आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया है। उसके पास से चोरी के ₹7,200 नकद और एक आधार कार्ड बरामद हुआ है। जानकारी के अनुसार, यह घटना आज सुबह करीब 7:00 बजे हुई। वादी अमन कुमार (पुत्र ठाकुरदीन मौर्य, निवासी पूरे खपटिहा, थाना ऊंचाहार) अपनी सब्जी दुकान पर मौजूद थे। इसी दौरान एक अज्ञात व्यक्ति ने उनकी जेब से ₹1,200 और उनका आधार कार्ड चुरा लिया। इतना ही नहीं, आरोपी ने मंडी में सब्जी खरीदने आए एक अन्य ग्राहक धीरेन्द्र कुमार (पुत्र मेवालाल, निवासी पूरे जय सिंह दीन शाह गौरा, थाना गदागंज) की जेब से भी ₹6,000 चोरी कर लिए। अमन कुमार ने सतर्कता दिखाते हुए आसपास के लोगों की मदद से आरोपी को मौके पर ही पकड़ लिया और पुलिस को सौंप दिया। पुलिस पूछताछ में पकड़े गए अभियुक्त की पहचान जितेन्द्र कुमार (पुत्र कमललाल, निवासी पौड़ी पिथौराबाद, थाना नागोद, जनपद सतना, मध्य प्रदेश) के रूप में हुई। पुलिस ने उसके पास से चोरी किए गए कुल ₹7,200 नकद और एक आधार कार्ड बरामद किया है। वादी की तहरीर के आधार पर ऊंचाहार थाने में मुकदमा पंजीकृत किया गया है। इस मामले में त्वरित विधिक कार्रवाई करने वाली पुलिस टीम में उपनिरीक्षक सौरभ पाण्डेय, आरक्षी मोहित सिरोही और आरक्षी सत्यम शामिल थे।
महाभारत के महासंग्राम की चर्चा होते ही सबसे पहले मन में आता है वह दृश्य, जिसमें अर्जुन दुविधा में है और भगवान श्रीकृष्ण उसे गीता का उपदेश दे रहे हैं। युद्ध से पहले ही श्रीकृष्ण ने यह प्रण ले लिया था कि वे कुरुक्षेत्र में शस्त्र नहीं उठाएंगे। उनकी भूमिका केवल अर्जुन के सारथी के रूप में रहने की थी। लेकिन, एक बार ऐसी विषम परिस्थिति बनी कि जगत के पालनहार को अपना वचन तोड़ना पड़ा और वे रथ का पहिया लेकर भीष्म पितामह की ओर दौड़ पड़े। आखिर वह क्या मजबूरी थी, जिसने प्रभु को शस्त्र उठाने पर विवश कर दिया?क्यों दी थी भगवान श्रीकृष्ण ने शस्त्र न उठाने की प्रतिज्ञा?भगवान श्रीकृष्ण ने कुरुक्षेत्र युद्ध में तटस्थ रहने की घोषणा की थी। उन्होंने दुर्योधन और अर्जुन दोनों को विकल्प दिया था—एक तरफ उनकी विशाल 'नारायणी सेना' और दूसरी तरफ वे स्वयं, जो निहत्थे रहेंगे। अर्जुन ने श्रीकृष्ण को चुना और दुर्योधन ने सेना को। श्रीकृष्ण की प्रतिज्ञा के पीछे उद्देश्य यह था कि वे न चाहते हुए भी किसी एक पक्ष का सीधा संहार न करें, बल्कि न्याय की स्थापना में केवल मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं। वे अपनी लीलाओं से यह दिखाना चाहते थे कि अधर्म का नाश करने के लिए युद्ध से ज्यादा महत्वपूर्ण सही मार्गदर्शन और विवेक है।जब भीष्म के सामने विचलित हो गए थे श्रीकृष्णभीष्म पितामह ने प्रतिज्ञा की थी कि वे श्रीकृष्ण को शस्त्र उठाने पर मजबूर कर देंगे। युद्ध के दौरान, जब भीष्म पितामह ने अर्जुन पर बाणों की वर्षा शुरू की, तो अर्जुन उन्हें रोकने में असमर्थ हो गए। स्थिति ऐसी बन गई कि अर्जुन का रथ क्षतिग्रस्त हो गया और वे हार की कगार पर पहुँच गए। अर्जुन को संकट में देख भगवान श्रीकृष्ण का वात्सल्य और मित्र प्रेम जाग उठा। अपने प्रिय भक्त को मृत्यु के मुख में देख श्रीकृष्ण ने अपनी प्रतिज्ञा त्याग दी और जमीन से रथ का एक टूटा हुआ पहिया उठाकर पितामह की ओर बढ़े।'विपक्ष' की जीत या 'भक्ति' की पराकाष्ठा?जैसे ही श्रीकृष्ण चक्र (पहिया) लेकर पितामह की ओर बढ़े, भीष्म ने अपने शस्त्र डाल दिए और हाथ जोड़कर खड़े हो गए। उन्होंने मुस्कराते हुए कहा, प्रभु, मेरी प्रतिज्ञा पूरी हुई। आज आपके हाथों अपना अंत देखकर मेरा जीवन धन्य हो गया। श्रीकृष्ण का वह क्रोध वास्तव में उनके भक्त के प्रति प्रेम था। यह घटना सिखाती है कि भगवान के लिए अपने भक्त की रक्षा उनकी स्वयं की प्रतिज्ञा से कहीं अधिक बड़ी होती है। महाभारत का यह प्रसंग आज भी हमें याद दिलाता है कि भक्त और भगवान के बीच कोई भी नियम, वचन या प्रतिज्ञा बड़ी नहीं होती।
गाजा संघर्ष : नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल
सयुक्त राष्ट्र की हालिया स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की रिपोर्ट ने इजरायल और कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों में जारी हिंसा और मानवाधिकार उल्लंघनों की गंभीर तस्वीर पेश की है।
मौसम में आए अचानक बदलाव और मानसून की पहली बारिश के दस्तक देते ही जहां लोगों को चिलचिलाती गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ एक बड़े खतरे ने भी दस्तक दे दी है। रिमझिम फुहारों के साथ ही राजधानी और उसके आस-पास के इलाकों में मच्छरों से होने वाली जानलेवा बीमारी 'डेंगू' (Dengue) का खौफनाक खतरा तेजी से बढ़ने लगा है। जलजमाव और उमस भरे इस मौसम को मच्छरों के पनपने के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। इसी गंभीर चुनौती को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह एक्शन मोड में आ गया है। राजधानी के सभी प्रमुख सरकारी अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) और नगर निगम की टीमों ने इस महामारी से निपटने के लिए जमीनी स्तर पर अपनी व्यापक तैयारियां शुरू कर दी हैं।जलजमाव वाले हॉटस्पॉट चिन्हित और फॉगिंग के लिए विशेष टीमों का गठनबारिश का पानी जमा होने के कारण राजधानी के कई रिहाइशी इलाकों और स्लम बस्तियों में डेंगू का डंक फैलने का सबसे ज्यादा रिस्क रहता है। स्थानीय नगर निगम और स्वास्थ्य अधिकारियों ने शहर के उन संवेदनशील इलाकों को चिन्हित कर लिया है जहां पिछले सालों में डेंगू के सबसे ज्यादा मामले सामने आए थे। इन चिन्हित हॉटस्पॉट्स में जल निकासी की व्यवस्था को दुरुस्त किया जा रहा है। इसके साथ ही, एंटी-लार्वा स्प्रे के छिड़काव और आधुनिक फॉगिंग मशीनों को काम पर लगा दिया गया है। नगर निगम की विशेष टीमें हर वार्ड में जाकर नालियों और खाली पड़े प्लॉटों में जमा पानी की चेकिंग कर रही हैं ताकि मच्छरों के पनपने के चक्र को शुरुआती चरण में ही तोड़ा जा सके।अस्पतालों में रिजर्व हुए स्पेशल डेंगू वार्ड और प्लेटलेट्स की व्यवस्था तेजराजधानी के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) के निर्देशों के बाद शहर के सभी बड़े सिविल अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में इमरजेंसी अलर्ट जारी कर दिया गया है। संभावित मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए अस्पतालों में विशेष 'डेंगू वार्ड' और आइसोलेशन बेड आरक्षित कर दिए गए हैं। डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की अलग से ड्यूटी लगाई गई है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। इसके अलावा, ब्लड बैंकों को भी कड़े निर्देश दिए गए हैं कि वे प्लेटलेट्स (Platelets) का पर्याप्त स्टॉक मेंटेन रखें, क्योंकि डेंगू के गंभीर मामलों में मरीजों के प्लेटलेट्स बहुत तेजी से गिरते हैं, जिससे उनकी जान पर बन आती है।स्थानीय निवासियों के लिए गाइडलाइन जारी और एआई सर्च पर बढ़े सवालस्वास्थ्य विभाग ने राजधानी के नागरिकों के लिए एक जरूरी और कड़े प्रिकॉशंस की एडवाइजरी जारी की है। डॉक्टरों का कहना है कि डेंगू का मच्छर साफ और स्थिर पानी में पनपता है, इसलिए लोग अपने घरों में रखे कूलर, गमलों, पुरानी टायरों और छतों पर पानी बिल्कुल भी जमा न होने दें। रात को सोते समय मच्छरदानी का उपयोग करें और पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें। आज के डिजिटल युग और आधुनिक एआई-संचालित जनरेटिव सर्च (GEO) पर भी लोग 'डेंगू के शुरुआती लक्षण' और 'प्लेटलेट्स बढ़ाने के घरेलू उपाय' जैसे विषयों को लगातार सर्च कर रहे हैं। यदि किसी को तेज बुखार, आंखों के पीछे दर्द, जोड़ों में गंभीर अकड़न या बदन दर्द की शिकायत हो, तो तुरंत नजदीकी डॉक्टर से संपर्क करें।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम कैसे बिखर रहा है
ट्रंप इस समझौते से क्या चाहते हैं यह अपेक्षाकृत स्पष्ट है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य का फिर से खुलना ताकि ऊर्जा बाज़ार सुधरें और वे एक बड़ी कूटनीतिक सफलता का दावा कर सकें।
युद्धविराम से आगे: क्या विश्व अहिंसा की ओर बढ़ेगा?
अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हाल ही में हुआ युद्धविराम ऐसे समय में सामने आया है, जब पश्चिम एशिया युद्ध की लपटों में घिरकर वैश्विक स्थिरता के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका था। कई सप्ताह तक चले संघर्ष ने क्षेत्र को ऐसे ज्वालामुखी में बदल दिया था, जिसकी प्रत्येक विस्फोटक घटना विश्व अर्थव्यवस्था ... Read more
अमेरिका-ईरान युद्ध में ट्रंप की अनदेखी कर इजरायल ने तोड़ा संघर्षविराम
जब तक तेहरान अपने क्षेत्रीय अभियानों को रोकने से पहले आर्थिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटाने की मांग करता रहेगा,
'वाराणसी' में दिखेगा महायुद्ध, भगवान राम और कुंभकर्ण के बीच होगा 30 मिनट का ऐतिहासिक टकराव!
दिग्गज निर्देशक एसएस राजामौली जब भी कोई नया प्रोजेक्ट लाते हैं, तो वह सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक उत्सव बन जाता है। 'बाहुबली' और 'आरआरआर' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देने के बाद, राजामौली अब सुपरस्टार महेश बाबू के साथ अपनी अगली महात्वाकांक्षी ...
इंटरनेट मूवी डेटाबेस (IMDb) हर हफ्ते दुनिया भर यूजर्स के सर्च और प्रोफाइल विजिट के आधार पर 'मोस्ट पॉपुलर इंडियन सेलिब्रिटीज' की लिस्ट जारी करता है। आमतौर पर इस लिस्ट के शीर्ष पर वही सुपरस्टार्स नजर आते हैं जिनकी बड़ी फिल्में सिनेमाघरों में रिलीज ...
ललित सुरजन की कलम से युद्ध नहीं, शांति चाहिए
जब एक तरफ सिर्फ एक सैनिक की गिरफ्तारी से उपजे भय और रिहाई की घोषणा से मिली राहत है, तब दूसरी तरफ आक्रामक मुद्रा अपनाकर हम क्या हासिल करना चाहते हैं?
युद्धविराम और हाशिए पर धकेल दिया गया भारत
यह युद्ध स्पष्ट रूप से नेतन्याहू की देन है और ट्रम्प इसके परिणामों के बारे में सोचे-समझे बिना ही इसमें फंस गए।
युद्ध के माहौल में विश्व शांति का शंखनाद है विश्व णमोकार दिवस
विश्व णमोकार दिवस- 9 अप्रैल, 2026 विश्व इतिहास के इस संक्रमणकाल में, जब मानवता युद्ध, हिंसा, आतंक, तनाव और असहिष्णुता के बोझ तले कराह रही है, ऐसे समय में 9 अप्रैल 2026 को मनाया जाने वाला विश्व णमोकार मंत्र दिवस एक अद्वितीय आध्यात्मिक ऊर्जा-विस्फोट के रूप में सामने आ रहा है। यह दिवस केवल एक ... Read more
तीसरे विश्वयुद्ध की आहट और गांधी
इतिहास विजय-पराजय-विनाश का मृत दस्तावेज नहीं है, न वह किसी की महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की कहानी का विवरण है।
धीरे-धीरे हकीकत में बदल रहे हैं भारत के ईरान युद्ध के डर
ईरान युद्ध को लेकर भारत की सबसे गहरी आर्थिक चिंताएं अब काल्पनिक नहीं रह गई हैं
युद्ध को लेकर मोदी का देश को डराने वाला संदेश
देश में जहां भी और जब भी चुनाव होते हैं, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी दूसरे सारे काम छोड़कर अपनी भारतीय जनता पार्टी के चुनाव प्रचार में जुट जाते हैं
पश्चिम एशिया में युद्ध के दुष्प्रभाव से निपटने के लिए बेहतर नीतियों की ज़रूरत
वित्त वर्ष 2026-27 की ठीक शुरुआत में, जो 1 अप्रैल, 2026 से शुरू हो रहा है, भारत को कई तरह के जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है
युद्ध के माहौल में महावीर के दर्शन की उपादेयता
सदियों पहले महावीर जनमे। वे जन्म से महावीर नहीं थे। उन्होंने जीवन भर अनगिनत संघर्षों को झेला, कष्टों को सहा, दुख में से सुख खोजा और गहन तप एवं साधना के बल पर सत्य तक पहुंचे, इसलिये वे हमारे लिए आदर्शों की ऊंची मीनार बन गये। उन्होंने समझ दी कि महानता कभी भौतिक पदार्थों, सुख-सुविधाओं, ... Read more
मिडिल ईस्ट युद्ध ने ट्रम्प की मुश्किलों को बढ़ाया
युद्ध के मामले में अमेरिका-इजरायल की प्राथमिकताएं अलग-अलग हैं।
पश्चिम एशिया युद्ध में परमाणु खतरे के प्रति लापरवाही की कोई गुंजाइश नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने की अंतिम घोषित तिथि बढ़ा दी है।
अब युद्धविराम को लालायित ट्रंप
अर्थव्यवस्था के लिहाज से यह लड़ाई अमेरिका को पहले ही महंगी पड़ रही है
पश्चिम एशिया में युद्ध फैलने से एक और वैश्विक आर्थिक संकट का खतरा
पश्चिम एशिया का संकट अब एक वैश्विक आर्थिक चुनौती में बदल गया है
फैक्ट चेक: इजरायल के डिमोना पर हमले के दावे से इराक का वीडियो हुआ वायरल
बूम ने पाया कि वायरल हो रहा वीडियो इराक के Nasiriyah स्थित एक रेस्टोरेंट में लगी आग का है.
लीजा रे ने दुबई से शेयर की दर्दभरी कविता, मिडिल ईस्ट तनाव के बीच जताई चिंता
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। हर तरफ धमाकों और सायरन का शोर सुनाई दे रहा है। एक्ट्रेस लीजा रे भी इन हालातों के बीच दुंबई में अपने घर ...
मिडिल ईस्ट में युद्ध के बीच फंसीं एक्ट्रेस लारा दत्ता, बेटी के साथ सुरक्षित लौटीं भारत, सुनाई आपबीती
मिडिल ईस्ट में ईरान और इजराइल के बीच जारी भीषण संघर्ष ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। इस युद्ध के बीच कई भारतीय भी दुबई में फंस गए हैं। बॉलीवुड की मशहूर अभिनेत्री और पूर्व मिस यूनिवर्स लारा दत्ता भी अपनी 14 साल की बेटी सायरा के साथ यूएई में ...
एक्सेल एंटरटेनमेंट और ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज़ की '120 बहादुर' को लेकर चर्चा अब अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुकी है। फिल्म ट्रेलर ने पूरी तरह से रोमांच और प्रेरणा का सही मिश्रण पेश किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बलिदान दिवस पर मेजर शैतान सिंह ...
बॉलीवुड एक्ट्रेस उर्वशी रौतेला अपनी खूबसूरती से हर किसी का दिल जीत लेती हैं। उर्वशी ने बेहद ही कम समय में एक अलग मुकाम हासिल किया है। वह दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोगों के साथ 'मिलने और अभिवादन' के क्षणों में संलग्न रहती है। ऐसा ही एक क्षण था जब ...
सलमान खान की सिकंदर के आखिरी गाने में दिखेगा जबरदस्त जलवा, तुर्की से बुलाए गए 500 डांसर्स!
बॉलीवुड सुपरस्टार सलमान खान की 'सिकंदर' इस साल की सबसे बड़ी फिल्म मानी जा रही है, जिसका दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इसके एक्शन-पैक्ड टीजर ने इसकी भव्य एंट्री के लिए एकदम परफेक्ट माहौल तैयार कर दिया है। भव्य पैमाने पर बनाई गई इस फिल्म में ...
केसरी वीर के लिए सूरज पंचोली ने की कड़ी ट्रेनिंग, ऐसे सीखा युद्ध कौशल
बॉलीवुड एक्टर सूरज पंचोली अपनी पहली बायोपिक में वीर हामीरजी गोहिल के ऐतिहासिक किरदार को जीवंत करने जा रहे हैं। सुनील शेट्टी, विवेक ओबेरॉय और सूरज पंचोली अभिनीत फिल्म 'केसरी वीर : लीजेंड्स ऑफ सोमनाथ' का टीजर हाल ही में रिलीज हुआ है। सोमनाथ मंदिर की ...
फरहान अख्तर लेकर आ रहे भारत-चीन युद्ध पर आधारित फिल्म 120 बहादुर, निभाएंगे मेजर शैतान सिंह का रोल
Movie 120 Bahadur : रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर की एक्सेल एंटरटेनमेंट, ट्रिगर हैप्पी स्टूडियोज के साथ मिलकर '120 बहादुर' को पेश करने के लिए उत्साहित हैं। यह फिल्म मेजर शैतान सिंह (पीवीसी) और चार्ली कंपनी, 13 कुमाऊं रेजिमेंट के सैनिकों की कहानी कहती ...
Adil Hussain: दुनियाभर में इन दिनों पेरिस ओलंपिक 2024 की धूम मची हुई है। पेरिस ओलंपिक में दुनियाभर के खिलाड़ियों ने भाग लिया है। भारत के कई खिलाड़ी भी इसमें हिस्सा लेने पहुंचे हुए हैं। हाल ही में तुर्की के शूटर यूसुफ डिकेक ने सिल्वर मेडल जीता।
बॉर्डर की 27वीं सालगिरह पर, अभिनेता सनी देओल ने एक घोषणा वीडियो के ज़रिए फ़्रैंचाइज़ी के दूसरे संस्करण की पुष्टि की है। अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर सनी ने बॉर्डर 2 में अपनी वापसी की आधिकारिक घोषणा करते हुए एक वीडियो शेयर किया और इसे 'भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म' बताया। उन्होंने पोस्ट के कैप्शन में लिखा, ''एक फौजी अपने 27 साल पुराने वादे को पूरा करने के बाद, आ रहा है फिर से। भारत की सबसे बड़ी युद्ध फिल्म, बॉर्डर 2।'' इस फिल्म का निर्माण भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, जेपी दत्ता और निधि दत्ता करेंगे। आगामी युद्ध फिल्म का निर्देशन अनुराग सिंह करेंगे। इसे भी पढ़ें: Bollywood Wrap Up | पति से तकरार के बीच केन्या लौट गई हैं Dalljiet Kaur? शादी को बचाने की कर रही कोशिश सनी द्वारा घोषणा वीडियो शेयर किए जाने के तुरंत बाद, सोशल मीडिया यूज़र्स ने अपनी उत्सुकता व्यक्त करते हुए कमेंट सेक्शन में बाढ़ ला दी। एक यूज़र ने लिखा, ''वाह, यह बहुत बढ़िया घोषणा है सर जी, जय हिंद।'' दूसरे ने लिखा, ''बहुत उत्साहित हूँ।'' तीसरे यूजर ने टिप्पणी की, ''बॉर्डर 2 के लिए बहुत उत्साहित हूं।'' इसे भी पढ़ें: NDA पर इमोशनल बयान, काले सूट में ली मंत्री पद की शपथ और शर्मिला अंदाज, Tripti Dimri की तरह रातों रात भारत के Sensation बन गये Chirag Paswan सनी देओल की अन्य परियोजनाएं उन्हें आखिरी बार अमीषा पटेल के साथ गदर 2 में देखा गया था। यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बहुत सफल रही और इसे ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर घोषित किया गया। गदर 2 की सफलता के बाद, सनी ने लाहौर 1947 सहित कई फिल्में साइन कीं, जिसे आमिर खान के प्रोडक्शन बैनर के तहत बनाया जा रहा है। फिल्म का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है, जिन्होंने आमिर को कल्ट क्लासिक अंदाज़ अपना अपना (1994) में निर्देशित किया था। View this post on Instagram A post shared by Sunny Deol (@iamsunnydeol)
Kalki 2898 AD: शुरू हो गया नया युद्ध, पूरे ट्रेलर की अहम कड़ी हैं अमिताभ, प्रभास करेंगे इम्प्रेस
Kalki 2898 AD के ट्रेलर को देखें तो, फिल्म कल्कि 2898 एडी के मेकर्स ने विश्वास दिलाया है कि ये फिल्म लोगों को बांधने में कामयाब होगी. टफ सीक्वेंस, क्लियर एडिटिंग और बैकग्राउंड स्कोर आपका ध्यान खींचते हैं. वीएफएक्स पर भी अच्छा काम किया गया है.
आशुतोष राणा ने डीपफेक वीडियो को बताया 'माया युद्ध', बोले- ये सालों से चल रहा
आशुतोष ने कहा कि ऐसी बातों में खुद को डिफेंड करने का कोई फायदा नहीं है. उन्होंने कहा कि जो लोग आपको जानते हैं वो सवाल करेंगे ही नहीं. और जो नहीं जानते, उन्हें किसी रिस्पॉन्स से फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि वो दिमाग में आपकी एक छवि बना चुके होते हैं.
दर्शक काफी समय से रैपर बादशाह और हनी सिंह के बीच जुबानी जंग देख रहे हैं। दोनों का रिश्ता सालों से विवादों से भरा रहा है। हालांकि करियर के शुरुआती दिनों में बादशाह और हनी सिंह के बीच अच्छी दोस्ती हुआ करती थी। हालाँकि, ऐसा लगता है कि सफलता और पैसे ने धीरे-धीरे इस दोस्ती को पूरी तरह से खत्म कर दिया। अब दोनों अक्सर एक दूसरे पर तंज कसते नजर आते हैं। हाल ही में हनी सिंह एक होली पार्टी में शामिल हुए, जहां उन्होंने बादशाह के 'पापा कमबैक' वाले कमेंट का करारा जवाब दिया। रैपर का ये वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इसे भी पढ़ें: Punjab Kings के खिलाफ जीत के बाद इंटरनेट पर Virat Kohli का Anushka Sharma के साथ वीडियो कॉल, FLY KISS देते नजर आये खिलाड़ी हनी सिंह ने बादशाह पर किया पलटवार बादशाह कुछ दिनों पहले हनी सिंह पर अपनी टिप्पणी को लेकर चर्चा में थे, जिसमें उन्होंने हनी सिंह की वापसी पर कटाक्ष किया था। अब सिंगर और रैपर हनी सिंह ने एक कमेंट के जरिए बादशाह को करारा जवाब दिया है और कहा है कि उन्हें बादशाह को जवाब देने के लिए मुंह खोलने की जरूरत नहीं है। उनके फैन ही काफी हैं जो हर चीज पर बात कर सकते हैं। उन्होंने अपने गाली वाले अंदाज में अपने फैंस से बात करते हुए बादशाह का जवाब दिया। हनी सिंह को सोमवार को मुंबई में एक होली पार्टी में परफॉर्म करते देखा गया और यहीं उन्होंने बादशाह पर कटाक्ष किया। बिना किसी का नाम लिए उन्होंने कहा, हर कोई कहता है, रिप्लाई करो, रिप्लाई करो... मैं क्या रिप्लाई करूं... आप लोग तो उनके सारे कमेंट्स का बहुत अच्छे से रिप्लाई कर चुके हैं। मुझे मुंह खोलने की जरूरत है। ऐसा नहीं होता है। जैसे ही भीड़ ने उनके लिए तालियां बजाईं, गायक ने कहा, मुझे बोलने की जरूरत नहीं है। आप लोग खुद पागल हैं। हनी सिंह पागल हैं और उनके प्रशंसक भी पागल हैं। इसे भी पढ़ें: Taapsee Pannu के पति Mathias Boe आखिर कौन है? जब सफल भी नहीं थी एक्ट्रेस तब से उन्हें प्यार करते थे बैडमिंटन खिलाड़ी रैपर बादशाह ने क्या कहा? आपको बता दें कि हाल ही में बादशाह ने हनी सिंह पर कमेंट करते हुए कहा था, ''मुझे एक पेन और कागज दो। मैं तुम्हारे लिए एक गिफ्ट लाया हूं। मैं कुछ गाने लिखूंगा और तुम्हें दूंगा। पापा की वापसी तुम्हारे साथ होगी।'' Kalesh Controversy B/w Honey Singh and Badshah (Honey Singh Replied to Badshah) pic.twitter.com/o74t423bgS — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 25, 2024 Kalesh Between Badshah & Honey Singh Fans on Stage during Live Concert pic.twitter.com/M4VqSqLSc3 — Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) March 19, 2024
आखिर क्यों Indira Gandhi ने Aandhi मूवी पर लगा दिया था प्रतिबन्ध, आज भी देखने से कतराते हैं लोग
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'सावरकर' रिव्यू: खोखली, एकतरफा फिल्म में एकमात्र अच्छी चीज है रणदीप हुड्डा का काम
आज के दौर में 'गुमनाम' हो चुके एक स्वतंत्रता नायक की कहानी कहने निकली ये फिल्म, एक अनजान कहानी बताने से ज्यादा अपने हीरो विनायक दामोदर सावरकर को बाकियों के मुकाबले अधिक 'वीर' बताने पर फोकस करने लगती है.
अस्तित्व और बदले के लिएब्रह्मांड में शुरू होने वाला है महायुद्ध, एक्शन और रोमांच से भरपूर हैRebel Moon 2 का धांसू ट्रेलर

