स्वास्थ्य / न्यूज़ इंडिया लाइव
भारतीय रसोई की शान और दाल-सब्जी में तड़के का स्वाद बढ़ाने वाले करी पत्ते के बिना हर पकवान अधूरा सा लगता है, लेकिन अक्सर लोगों की यह शिकायत रहती है कि
शरीर में कोलेस्ट्रॉल एक मोम जैसा चिपचिपा पदार्थ होता है, जो कोशिकाओं के निर्माण और हार्मोन्स के संतुलन के लिए जरूरी है। लेकिन जब गलत खानपान, अनहेल्दी
भारतीय खानपान में दाल को प्रोटीन, आवश्यक अमीनो एसिड्स, डाइटरी फाइबर, आयरन और जिंक का सबसे प्रमुख स्रोत माना जाता है। शाकाहारी आहार में मांसपेशियों की
आधुनिक और व्यस्त जीवनशैली के कारण अधिकांश लोगों के भोजन का समय पूरी तरह बिगड़ चुका है। ऑफिस से देर से लौटना, स्क्रीन पर समय बिताना और रात 10 से 11 बजे
भारत में बच्चों के पोषण और शारीरिक विकास के नाम पर बेचे जाने वाले पॉपुलर ड्रिंक 'बोर्नविटा' (Bournvita) को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है। भारतीय खाद्य
आज के दौर में बढ़ता वजन और पेट के आसपास जमा होने वाली चर्बी लाखों लोगों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बनी हुई है। वजन कम करने की होड़ में लोग अक्सर जिम में
भारतीय भोजन की थाली में जब तक कोई चटपटी और मसालेदार साइड डिश न हो, तब तक खाने का असली मजा अधूरा सा लगता है। खासकर राजस्थान के पारंपरिक व्यंजनों की बात
भारतीय संस्कृति में त्योहारों और उत्सवों का माहौल जब तक मिठाइयों की मिठास के साथ न जुड़े, तब तक हर जश्न अधूरा सा लगता है। भाई-बहन के अटूट प्रेम और स्न
भारतीय त्योहारों, खास अवसरों और मीठे पकवानों की बात जब भी आती है, तो कलाकंद का नाम सुनते ही मुंह में पानी आ जाना बेहद स्वाभाविक है। दूध और खोए से बनने
घर के वॉशबेसिन या बाथरूम में जब साबुन का इस्तेमाल करते-करते वह छोटा सा टुकड़ा बच जाता है, तो अक्सर हम उसे बेकार समझकर कूड़ेदान में फेंक देते हैं। लेकि
बच्चों की परवरिश के दौरान लगभग हर माता-पिता को उनके जिद्दी रवैये (Stubborn Behavior) का सामना करना पड़ता है। कभी खिलौनों के लिए जमीन पर लेट जाना, कभी
महिला जीवन का सबसे खूबसूरत, संवेदनशील और बदलाव से भरा दौर यदि कोई होता है, तो वह निश्चित रूप से मातृत्व यानी प्रेग्नेंसी का समय होता है। जब कोई महिला
खूबसूरत और बेदाग निखार पाना हर किसी की ख्वाहिश होती है, और इसके लिए ज्यादातर महिलाएं व युवतियां बिना सोचे-समझे अपने नजदीकी ब्यूटी पार्लर का रुख कर लेत
दिल्ली-एनसीआर में मौसम में बदलाव और मानसूनी नमी के बीच श्वसन संक्रमण (Respiratory Infections) के मामलों में भारी उछाल दर्ज किया जा रहा है। अस्पतालों क
बच्चों में गुस्सा, चिड़चिड़ापन और टैंट्रम्स (Tantrums) दिखाना एक सामान्य भावनात्मक प्रक्रिया है, लेकिन जब यह बार-बार होने लगे, तो माता-पिता अक्सर अपना
मानसून का मौसम अपने साथ सुहाना मौसम और राहत लेकर आता है, लेकिन इसके साथ ही यह अपने साथ कई तरह की मौसमी बीमारियां, वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम और बदन दर्द
आज के भागदौड़ भरे जीवन में बालों का झड़ना एक आम समस्या बन चुका है, लेकिन जब यह समस्या सामान्य सीमा को पार कर जाए तो यह किसी बड़ी बीमारी का संकेत हो सक
त्वचा पर हल्की सी खुजली या रैश होते ही हम में से अधिकांश लोगों की पहली आदत यही होती है कि हम तुरंत मेडिकल स्टोर जाते हैं या घर में रखी पुरानी एंटीबायो
हमारे शरीर की त्वचा पर छोटे-छोटे निशान या उभार होना एक बेहद आम बात है, जिसे आम भाषा में हम सभी तिल और मस्सा कह देते हैं। अक्सर लोग यह मान बैठते हैं कि
दफ्तर से देर से घर लौटना, घंटों तक ट्रैफिक में फंसे रहना, मोबाइल पर देर रात तक सोशल मीडिया स्क्रॉल करना या ओटीटी (OTT) पर वेब सीरीज देखना—आज की इस भाग
मृत्यु के बाद किसी अन्य इंसान को नई जिंदगी या नई रोशनी देने से बड़ा कोई मानवीय कार्य नहीं हो सकता। भारत में अंगदान (Organ & Tissue Donation) को लेकर प
फास्ट फूड, पैकेटबंद स्नैक्स, अत्यधिक तेल-मसाले और अनियमित दिनचर्या के इस आधुनिक दौर में आज हर दूसरा व्यक्ति मोटापे, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लि
सुबह उठते ही गुनगुने पानी में आधा नींबू निचोड़कर और एक चम्मच शहद घोलकर पीना भारतीय घरों में वजन घटाने का सबसे पसंदीदा और लोकप्रिय घरेलू नुस्खा बन चुका
मोटापा और पेट के आसपास जमा जिद्दी चर्बी (Visceral Fat) आज के दौर में केवल सुंदरता का विषय नहीं, बल्कि डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लिवर और दिल की ब
गहरे लाल रंग का साधारण सा चुकंदर (Beetroot) पोषण और प्राकृतिक चिकित्सा की दुनिया में सबसे शक्तिशाली 'सुपर-रूट' माना जाता है। पिछले कुछ वर्षों में कार्
भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली और फास्ट फूड के इस दौर में हम अपनी प्राचीन खानपान की परंपराओं और सेहतमंद नुस्खों को लगभग भूल चुके हैं। आज के समय में थोड़ी
स्वास्थ्य और पोषण के मामले में दूध को हमेशा से एक संपूर्ण आहार माना गया है, जिसमें कैल्शियम, प्रोटीन, विटामिन डी, पोटैशियम और फास्फोरस जैसे कई जरूरी प
आज के दौर में सेहतमंद रहने के लिए लोग अपनी डाइट में तरह-तरह के विदेशी और पौष्टिक फलों को शामिल करने लगे हैं। इन्हीं सुपरफूड्स में 'ड्रैगन फ्रूट' यानी
खूबसूरत और बेदाग त्वचा केवल महंगे कॉस्मेटिक्स या स्किनकेयर रूटीन से हासिल नहीं होती, बल्कि इसका सीधा संबंध आपकी थाली और खान-पान से होता है। शरीर को भी
रिमझिम बारिश की बूंदें गिरते ही हर भारतीय घर में गरमा-गरम पकोड़े और अदरक वाली चाय की तलब उठने लगती है। मानसून के मौसम का असली मजा तभी आता है जब पकोड़े
दौड़भाग भरी जिंदगी में सिरदर्द एक बेहद आम समस्या बन चुका है। ऑफिस का तनाव हो, स्क्रीन का बढ़ता इस्तेमाल या नींद की कमी, अक्सर लोग सिरदर्द होने पर तुरं
भारतीय रसोई में खड़े मसालों जैसे लौंग, दालचीनी, जायफल और काली मिर्च का स्थान सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। हर खास व्यंजन, चाहे वह खुशबूदार बिरयानी हो,
भारत में स्वास्थ्य आपातकाल के समय आम नागरिकों और मध्यमवर्गीय परिवारों को अस्पताल के बिलिंग काउंटरों पर होने वाली मानसिक और वित्तीय प्रताड़ना से मुक्ति
भारत में किसी गंभीर बीमारी या दुर्घटना की स्थिति में निजी अस्पतालों का रुख करना आम नागरिक और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए केवल शारीरिक कष्ट का नहीं, बल
भारत में दशकों से यह आम धारणा रही है कि डेंगू केवल जुलाई से अक्टूबर के बीच मॉनसून और उसके तुरंत बाद फैलने वाला मौसमी संक्रमण है। बारिश के पानी का जमाव
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इससे सटे पूरे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में मॉनसून के मौसम और लगातार बदलते तापमान के बीच H1N1 इन्फ्लूएंजा यानी स्वाइ
अक्सर मौसम बदलने, बाहर का खाना खाने या दूषित पानी के संपर्क में आने के बाद लोगों को पेट दर्द, मरोड़, उल्टी और दस्त की समस्या घेर लेती है। आम बोलचाल मे
घर में जब भी छोले-भटूरे, छोले-चावल या चना मसाला बनाने का मन होता है, तो सबसे बड़ी जरूरत होती है छोलों का पहले से अच्छी तरह भीगा होना। सामान्य तौर पर क
हमारी सुबह की शुरुआत से लेकर दिनभर की थकान मिटाने तक, चाय हमारे दैनिक जीवन का एक ऐसा अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है जिसके बिना कई लोगों का दिन ही शुरू नही
आज के भागदौड़ भरे दौर में अनहेल्दी लाइफस्टाइल और खराब खानपान के कारण हमारे शरीर के भीतर कई तरह के विषैले तत्व और टॉक्सिंस जमा होने लगते हैं। हमारा खून
मानव शरीर की पूरी संरचना और उसकी कार्यप्रणाली में पानी की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है। हमारे शरीर का लगभग 60 से 70 प्रतिशत हिस्सा केवल पानी से बना
मानसून और उसके बाद के मौसम में हर साल देश के अलग-अलग राज्यों में डेंगू का प्रकोप तेजी से पैर पसारने लगता है। अब तक आम जनमानस में यह धारणा बनी हुई थी क
आज की तनावभरी जीवनशैली, देर रात तक स्क्रीन पर काम करने की आदत, अनियमित खानपान और नींद की कमी के कारण सिरदर्द की समस्या घर-घर में देखने को मिल रही है।
भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली और फास्ट फूड कल्चर के दौर में आज हमारी थाली से पोषक तत्व तेजी से गायब हो रहे हैं। अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड, पैकेज्ड स्नैक्स,
तकनीकी और मेडिकल साइंस की दुनिया में एक ऐसा क्रांतिकारी बदलाव सामने आया है जो इंसानी इतिहास की धारा को पूरी तरह बदल सकता है। अब तक आपने ब्रेन-कंप्यूटर
फलों का राजा कहे जाने वाला केला (Banana) एक ऐसा सुपरफूड है जो एनर्जी से भरपूर होता है और शरीर को तुरंत ताकत देने का काम करता है। यही वजह है कि जिम जान
झमाझम बारिश का मौसम अपने साथ चिलचिलाती गर्मी से तो राहत लेकर आता है, लेकिन यह अपने साथ कई तरह की सेहत से जुड़ी परेशानियां भी साथ लाता है। मानसून के इस
भागदौड़ भरी आज की इस लाइफस्टाइल में हर कोई खुद को फिट और सेहतमंद रखने के लिए तमाम तरह के जतन करता है। शरीर को ताकतवर बनाने और मसल्स मजबूत करने की बात
भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली और काम के बढ़ते तनाव के बीच अक्सर सुबह की शुरुआत थकान और सुस्ती के साथ होती है। कई लोग अपनी दिन की शुरुआत चाय या कॉफी के क
सेब को दुनिया भर में एक बेहद स्वास्थ्यवर्धक और गुणकारी फल माना जाता है। अंग्रेजी में एक मशहूर कहावत भी है कि एन एप्पल ए डे, कीप्स द डॉक्टर अवे यानी रो

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