झांसी से सटे मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के पिछोर थाना क्षेत्र के टोडा गांव में जहरीले कोबरा से खिलवाड़ एक सपेरे को भारी पड़ गया। सांप पकड़ने के बाद लोगों को करतब दिखा रहे 72 वर्षीय सपेरे बिच्छू अदिवादी को कोबरा ने चेहरे पर डस लिया। इसके कुछ ही देर बाद उसकी हालत बिगड़ गई और मंगलवार को झांसी मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के टोडा गांव निवासी बिच्छू आदिवासी (72) वर्षों से सांप पकड़ने का काम करता था। सोमवार शाम इलाके में हुई बारिश के बाद गांव के एक घर में जहरीला कोबरा निकल आया। घरवालों ने सांप पकड़ने के लिए बिच्छू को बुलाया। इसके बाद सांप पकड़ने में एक्सपर्ट बिच्छू ने करीब 20 मिनट की मशक्कत के बाद कोबरा को पकड़ लिया। सांप पकड़े जाने की खबर फैलते ही मौके पर ग्रामीणों और बच्चों की भीड़ जमा हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, भीड़ के कहने पर बिच्छू सांप का प्रदर्शन करने लगा। इसी दौरान वह कोबरा को अपने चेहरे के पास ले आया। लापरवाही के चलते सांप पर उसकी पकड़ ढीली पड़ गई और कोबरा ने उसके चेहरे पर डस लिया। सांप के डसते ही बिच्छू जमीन पर गिरकर तड़पने लगा। मौके पर अफरा-तफरी मच गई, जबकि कोबरा वहां से निकल भागा। परिजन तत्काल उसे इलाज के लिए झांसी मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक जहर पूरे शरीर में फैल चुका था। डॉक्टरों के प्रयास के बावजूद मंगलवार को उसकी मौत हो गई। नवाबाद थाना प्रभारी रवि श्रीवास्तव ने बताया कि शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया है। परिजनों के अनुसार, बिच्छू आदिवासी ने अपने जीवन में एक हजार से अधिक सांप और बिच्छू पकड़े थे। कोबरा समेत कई विषैले सांपों को पकड़कर वह उन्हें जंगल में छोड़ देता था। यही उसकी आजीविका का मुख्य साधन भी था। ग्रामीणों का कहना है कि इतने लंबे अनुभव के बावजूद उसके साथ पहले कभी सर्पदंश की घटना नहीं हुई थी। विडंबना यह रही कि पहली बार सांप के डसने की घटना ही उसकी मौत का कारण बन गई।
गोरखपुर के तिवारीपुर थाना क्षेत्र में पुलिस की ओर युवक की पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ। पीड़ित चंदन यादव ने आरोप लगाया कि जमीन की पैमाइश के दौरान विवाद बढ़ा। जिसके बाद पुलिस उसे पकड़कर चौकी और थाने ले गई। वहां पर युवक को बेरहमी से पीटा गया। कई अंगों पर गहरी चोटें आई हैं। शिकायत के बाद एसपी सिटी निमिष पाटील ने संज्ञान लिया है। मंगलवार की रात करीब 11 बजे जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि मामले में सीओ कोतवाली को जांच के निर्देश दिए गए हैं। एसपी सिटी ने कहा कि जांच में जो पुलिस कर्मी संदिग्ध पाए जाएंगे, उनके खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की जा सकती है। जानिए पूरा मामला…तिवारीपुर थाना क्षेत्र की डोमिनगढ़ चौकी अंतर्गत मंझरिया गांव के रहने वाले विवेक यादव पुत्र जर्नादन यादव ने बताया कि 28 जून की दोपहर करीब 12 बजे लेखपाल और कानूनगो पुलिस की मौजूदगी में उनके बगलगीर की जमीन की पैमाइश करा रहे थे। उनका दावा है कि उक्त जमीन पर दीवानी न्यायालय का स्टे ऑर्डर है। पैमाइश के समय उनके घर पर कोई मौजूद नहीं था। विवेक के अनुसार, वह गैस एजेंसी से सिलिंडर लेकर घर लौटे तो देखा कि पुलिस और प्रशासन की टीम उनके खेत में करीब 30 फीट अंदर पत्थर गाड़ रही थी। उन्होंने पैमाइश के दौरान अपनी मौजूदगी नहीं होने का हवाला देते हुए दोबारा नाप कराने की मांग की। आरोप है कि इसी बात को लेकर डोमिनगढ़ चौकी इंचार्ज और पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। रास्ते में भी लात-घूंसों से पीटने का आरोप पीड़ित का आरोप है कि पुलिसकर्मी उसे गाड़ी से चौकी ले गए और रास्ते में भी लात-घूंसों से पीटा। इसके बाद चौकी में लाठी और पट्टे से मारपीट की गई। उसने आरोप लगाया कि मारपीट में दो दरोगा और छह सिपाही शामिल थे। देर रात थाने ले जाकर भी पिटाई करने का आरोप लगाया गया है। अगले दिन शांति भंग का चालान किया विवेक का कहना है कि सोमवार की सुबह उसका शांतिभंग में चालान कर दिया गया। देर शाम जमानत पर छूटने के बाद उसने कथित मारपीट का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। मंगलवार सुबह वह परिवार के साथ एसएसपी कार्यालय पहुंचा और कार्रवाई की मांग की। सरकारी कामों में बाधा पहुंचाने का आरोप वहीं, पुलिस और प्रशासन का कहना है कि पैमाइश के दौरान चंदन यादव ने सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई और लगाए गए पैमाइश के पत्थर को उखाड़ दिया, जिससे मौके पर विवाद की स्थिति बनी। अधिकारियों के अनुसार उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद सीओ कोतवाली को पूरे मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
शहर की 69 वर्षीय सेवानिवृत्त लैब टेक्नीशियन को 33 दिन तक कथित तौर पर 'डिजिटल अरेस्ट' कर 1.58 करोड़ रुपए की साइबर ठगी करने के मामले में क्राइम ब्रांच को पहली बड़ी सफलता मिली है। पुलिस ने महाराष्ट्र के नासिक निवासी लोहा कारोबारी बिट्ठल फसले को गिरफ्तार कर मंगलवार को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे एक दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। जांच में सामने आया है कि आरोपी के आईसीआईसीआई बैंक के करंट अकाउंट में ठगी के 19.50 लाख रुपए जमा हुए थे। इसके अलावा खाते में कई संदिग्ध लेन-देन भी मिले हैं, जिनके संबंध में पुलिस उससे पूछताछ कर रही है। क्राइम ब्रांच के अनुसार प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया है कि उसका बैंक खाता एक 'म्यूल अकाउंट' के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। खाते में आने वाली रकम के बदले उसे लगभग 10 प्रतिशत कमीशन मिलता था। आरोपी ने पुलिस को उन लोगों के बारे में भी जानकारी दी है, जिनके कहने पर उसने अपना बैंक खाता उपलब्ध कराया था। अब पुलिस उन लोगों की तलाश में जुट गई है, जो ऐसे बैंक खातों का इस्तेमाल कर साइबर ठगी की रकम इधर-उधर ट्रांसफर करते हैं। ऐसे दिया गया ठगी को अंजाम क्राइम ब्रांच के अनुसार पीड़िता मीनाक्षी नाखरे, जो ग्वालियर में नेहरू पेट्रोल पंप के पास सरदार पाटनकर साहब का बाड़ा क्षेत्र की निवासी हैं, ने शिकायत दर्ज कराई थी कि 10 मई 2026 को उन्हें दो अलग-अलग मोबाइल नंबरों से कॉल आए। कॉल करने वाले ने स्वयं को दिल्ली टेलीकॉम विभाग का अधिकारी बताते हुए कहा कि उनके नाम से एक अन्य मोबाइल नंबर संचालित हो रहा है, जिसका उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग और अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में किया जा रहा है। जब महिला ने बताया कि वह नंबर उनका नहीं है, तो कॉल करने वालों ने खुद को दिल्ली पुलिस और सीबीआई का अधिकारी बताकर उन्हें कथित जांच का हवाला दिया। गिरफ्तारी का भय दिखाते हुए उन्हें लगातार 33 दिनों तक अपने नियंत्रण में रखा और इसी दौरान विभिन्न खातों में कुल 1.58 करोड़ रुपए ट्रांसफर करा लिए। 11 राज्यों के 133 खातों में पहुंचाई गई रकम साइबर जांच में सामने आया है कि पीड़िता से ठगी गई राशि सबसे पहले पश्चिम बंगाल, केरल, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के चार करंट अकाउंट में भेजी गई। इसके बाद महज एक दिन के भीतर यह रकम देश के 11 राज्यों के 40 से अधिक शहरों में मौजूद 133 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी गई, ताकि धन के स्रोत का पता लगाना मुश्किल हो सके। जांच में यह भी सामने आया है कि अधिकांश खाते म्यूल अकाउंट थे, जिन्हें कमीशन के आधार पर उपलब्ध कराया गया था। पुलिस का मानना है कि साइबर ठग ऐसे खातों का उपयोग ठगी की रकम को तेजी से कई खातों में बांटने के लिए करते हैं। कई राज्यों तक फैला है नेटवर्क क्राइम ब्रांच की जांच में अब तक महाराष्ट्र, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, ओडिशा, गुजरात और राजस्थान तक साइबर ठगी के नेटवर्क के तार जुड़े होने के संकेत मिले हैं। पुलिस का कहना है कि विभिन्न राज्यों में सक्रिय एजेंट कमीशन लेकर बैंक खाते उपलब्ध कराते हैं, जिनके माध्यम से ठगी की रकम को अलग-अलग खातों में स्थानांतरित किया जाता है। क्राइम ब्रांच के सब-इंस्पेक्टर धर्मेंद्र शर्मा ने बताया कि आरोपी से रिमांड के दौरान बैंक खातों, संदिग्ध लेन-देन और पूरे नेटवर्क के संबंध में पूछताछ की जा रही है। साथ ही पुलिस की कई टीमें अन्य खाताधारकों और गिरोह से जुड़े लोगों की तलाश में जुटी हैं। आरोपी को बुधवार को दोबारा कोर्ट में पेश किया जाएगा।
करनाल की एक गर्भवती महिला के साथ उत्तर प्रदेश में गलत तरीके से गर्भपात किए जाने का मामला सामने आया है। महिला को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका ऑपरेशन कर जान बचाई गई। मामले की सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम ने यूपी जाकर कार्रवाई की और दो एएनएम को गिरफ्तार कर लिया, जबकि आरोपी डॉक्टर मौके से फरार हो गया। डिप्टी सीएमओ ने दी पूरी जानकारीडिप्टी सीएमओ डा. शीनू चौधरी ने बताया कि 29 जून को कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज से सूचना मिली थी कि फुसगढ़ की एक महिला यूट्रस फटने की हालत में भर्ती हुई है। 30 जून को टीम ने अस्पताल पहुंचकर महिला और उसके परिजनों से बात की। एक्सीडेंट के बाद अस्पतालों में घुमायाजांच में सामने आया कि महिला झिंझाणा और बड़ौली के बीच कहीं जा रही थी, तभी बाइक फिसलने से वह गिर गई और उसे ब्लीडिंग शुरू हो गई। परिजन उसे नजदीकी अस्पताल लेकर गए, जहां से उसे देव अस्पताल में डॉक्टर अर्पित के पास भेज दिया गया। ऑनलाइन पैसे लेकर किया गया रेफरदेव अस्पताल में महिला का अल्ट्रासाउंड किया गया और ऑनलाइन पैसे की ट्रांजेक्शन हुई। इसके बाद उसे एंबुलेंस के जरिए कैराना के एक अस्पताल भेज दिया गया, जहां उसका गर्भपात (एमटीपी) किया गया। अनट्रेंड स्टाफ ने किया ऑपरेशनजांच में पाया गया कि वहां मौजूद स्टाफ प्रशिक्षित नहीं था। दो महिला एएनएम ने मिलकर गर्भपात कर दिया, जिससे महिला का यूट्रस फट गया और युरेटर में भी चोट आ गई। यूपी में रेड, दो एएनएम गिरफ्तार30 जून को स्वास्थ्य विभाग की टीम कैराना पहुंची और अस्पताल में छापा मारा। मौके से एमटीपी के उपकरण और दवाइयां बरामद हुईं। टीम ने दो एएनएम को गिरफ्तार कर लिया। डॉक्टर अर्पित फरार, अस्पताल सीलटीम ने डॉक्टर अर्पित को ट्रेस करते हुए देव अस्पताल में भी दबिश दी, लेकिन वह वहां नहीं मिला। माना जा रहा है कि उसे पहले ही सूचना मिल गई थी और वह फरार हो गया। कार्रवाई के दौरान अस्पताल को सील कर नोडल अधिकारी को सौंप दिया गया। दोनों राज्यों में दर्ज होगी एफआईआरडा. शीनू चौधरी ने बताया कि इस मामले में यूपी और करनाल दोनों जगह एफआईआर दर्ज करवाई जा रही है। जांच में यह भी सामने आया कि महिला ने करनाल जाने की बात कही थी, लेकिन उसे वहां नहीं भेजा गया। डिग्री नहीं मिली, झोलाछाप निकला डॉक्टरजांच के दौरान डॉक्टर अर्पित की कोई मान्यता प्राप्त डिग्री नहीं मिली है, जिससे स्पष्ट है कि वह झोलाछाप था। फिलहाल महिला की हालत गंभीर बनी हुई है और पूरे मामले की जांच जारी है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक निर्णय में कहा कि केवल इस तथ्य से कि पत्नी शिक्षित है, उसे धारा 125 सीआरपीसी के तहत भरण-पोषण का दावा करने से वंचित नहीं किया जा सकता है, जब इस बात का कोई सबूत नहीं है कि वह वास्तव में पर्याप्त आय अर्जित कर रही है। न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की पीठ ने आगे टिप्पणी की कि पत्नी के माता-पिता की पेंशन या संपत्ति को पत्नी की स्वतंत्र आय के रूप में नहीं माना जा सकता है और इससे पत्नी का भरण-पोषण करने का पति का कानूनी दायित्व समाप्त नहीं होता है। 20,000 रुपये का भुगतान की याचिका खारिज इन टिप्पणियों के साथ, एकल न्यायाधीश ने पति द्वारा दायर आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें परिवार न्यायालय के उस फैसले और आदेश को चुनौती दी गई थी जिसमें उसे अपनी पत्नी (विपक्षी पक्ष संख्या 2) को भरण-पोषण के रूप में प्रति माह 20,000 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया गया था। वकीलों ने रखे अपने अपने तर्क याची पति आलोक तिवारी का मुख्य तर्क यह था कि उसकी पत्नी एक शिक्षित, रोजगार योग्य और आर्थिक रूप से स्वतंत्र महिला है जिसके पास अपना भरण-पोषण करने के लिए पर्याप्त साधन हैं और इसलिए वह धारा 125 सीआरपीसी के तहत भरण-पोषण की हकदार नहीं है। यह बताया गया कि वह ट्यूशन और कोचिंग के काम से कमाती है और साथ ही अपनी मां की पेंशन और संपत्तियों से भी अपना भरण-पोषण करती है। पति ने यह भी तर्क दिया कि वह स्वयं नियमित रोजगार में नहीं है और अपने वृद्ध माता-पिता के भरण-पोषण की जिम्मेदारी से बोझिल है, इसलिए पारिवारिक न्यायालय द्वारा निर्धारित भरण-पोषण राशि अत्यधिक और असंगत है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनकी मां एक सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापिका हैं जो पेंशन प्राप्त करती हैं और उनके परिवार की संपत्तियों को काफी अच्छी कीमत पर बेचा गया था। इसके विपरीत, पत्नी ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता एक योग्य चार्टर्ड अकाउंटेंट है, उसने विभिन्न स्थानों पर काम किया है, परामर्श का काम किया है, और वह अपने आयकर रिटर्न और पूर्ण वित्तीय दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रहा है। यह भी तर्क दिया गया कि याचिकाकर्ता ने यह साबित करने के लिए कोई विश्वसनीय सबूत पेश नहीं किया है कि उसके पास अपने भरण-पोषण के लिए पर्याप्त स्वतंत्र आय है। पारिवारिक न्यायालय का निष्कर्ष सही कोर्ट ने पारिवारिक न्यायालय के इस निष्कर्ष को बरकरार रखा कि पत्नी के पास अलग रहने का पर्याप्त कारण था और याचिकाकर्ता ने उसकी उपेक्षा की थी। वित्तीय पहलुओं पर विचार करने से पहले, न्यायालय ने इस बात की जांच की कि क्या पत्नी के पास अलग रहने का पर्याप्त कारण था। इसमें पति द्वारा पत्नी और उसकी विधवा मां पर फ्लैट खरीदने के लिए 25 लाख रुपये की लगातार मांग, पत्नी की शारीरिक चोटों के संबंध में विरोधाभासी स्पष्टीकरण और उसकी मानसिक स्थिति और चरित्र के बारे में उसके निराधार आरोपों को ध्यान में रखते हुए पारिवारिक न्यायालय के इस निष्कर्ष को बरकरार रखा गया कि पत्नी के पास अलग रहने का पर्याप्त कारण था और पति ने उसकी उपेक्षा की थी। पति की वित्तीय क्षमता और प्रदान की गई भरण-पोषण राशि की शुद्धता के संबंध में, पीठ ने पति की चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में योग्यता पर ध्यान दिया। याचिकाकर्ता की वित्तीय क्षमता और प्रदान की गई भरण-पोषण राशि की शुद्धता के संबंध में, पीठ ने पति की चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में योग्यता पर ध्यान दिया। न्यायालय ने पाया कि उनके पास पेशेवर अनुभव है, उन्होंने कंपनियों के साथ काम किया है, परामर्श का काम किया है, उन्होंने स्वीकार किया है कि उन्होंने विभिन्न स्थानों पर काम किया है, उनके पास एक कार है, और उन्होंने हवाई यात्रा और होटल में ठहरने पर खर्च किया है। उनकी जीवनशैली और 2017 में उनके द्वारा स्वीकार की गई इस बात को ध्यान में रखते हुए कि वह प्रति माह 90,000 रुपये कमाते हैं, पीठ ने निष्कर्ष निकाला कि वह सामान्य साधनों से ऊपर का जीवन स्तर बनाए रखते हैं और अपनी पत्नी का उचित तरीके से भरण-पोषण करने की वित्तीय क्षमता रखते हैं। ठोस सबूत नहीं मिला न्यायालय ने पति के खिलाफ उसके आयकर रिटर्न और बैंक स्टेटमेंट जैसे सर्वोत्तम साक्ष्यों को छिपाने के लिए भी प्रतिकूल निष्कर्ष निकाला। न्यायालय ने गौर किया कि यद्यपि पति ने यह दलील दी कि पत्नी उच्च शिक्षित (एमएससी और बीएड) है और कोचिंग या ट्यूशन के काम से कमाती है, लेकिन वह यह साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सका कि उसकी पत्नी वास्तव में कार्यरत थी या अपने भरण-पोषण के लिए पर्याप्त आय अर्जित कर रही थी। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि केवल इस तथ्य से कि विपक्षी पक्ष, संख्या 2, शिक्षित है, उसे भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता है। हाईकोर्ट ने कहा कि किसी पत्नी को केवल इसलिए भरण-पोषण से वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि वह योग्य है, जबकि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि वह वास्तव में पर्याप्त आय अर्जित कर रही है। पीठ ने यह भी कहा कि पति द्वारा पत्नी की मां की पेंशन या संपत्ति पर भरोसा करना गलत है, क्योंकि वे पत्नी की स्वतंत्र आय का स्रोत नहीं हैं और वे पति के उसे भरण-पोषण करने के कानूनी दायित्व को समाप्त नहीं करते हैं। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि भरण-पोषण की राशि का निर्धारण पक्षों की स्थिति, पत्नी की उचित आवश्यकताओं, पति की आय और देनदारियों तथा वैवाहिक घर में पत्नी द्वारा प्राप्त जीवन स्तर को ध्यान में रखते हुए किया जाना चाहिए। आदेश में कहा गया कि , सीआरपीसी की धारा 125 का उद्देश्य दरिद्रता और बेघरपन को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि जो पत्नी अपना भरण-पोषण करने में असमर्थ है, वह भरण-पोषण के साधनों से वंचित न रह जाए। हाईकोर्ट ने यह देखते हुए कि पति के पास पर्याप्त साधन हैं और पत्नी की कोई स्वतंत्र आय नहीं है, पारिवारिक न्यायालय के उस फैसले और आदेश को बरकरार रखा जिसमें पत्नी को भरण-पोषण के रूप में 20,000 रुपये देने का आदेश दिया गया था
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अलीगढ़ नगर निगम द्वारा बनाए गए आवासीय क्वार्टरों पर अवैध रूप से रह रहे लोगों को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने वहां अवैध रूप से रह रहे लोगों को बेदखल करने के नगर निगम के आदेश और नोटिस को पूरी तरह सही ठहराते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर एवं न्यायमूर्ति अरुण कुमार की खंडपीठ ने शफीकुर रहमान व छह अन्य की याचिका पर उनके अधिवक्ता और अलीगढ़ नगर निगम के अधिवक्ता को सुनकर दिया है। जानिये क्या है पूरा मामला अलीगढ़ जिले की कोल तहसील के मौजा दोदपुर माफी के प्लॉट नंबर 78 और 87 पर नगर निगम अलीगढ़ ने अपने कर्मचारियों के लिए आवासीय क्वार्टर बनाए थे। याचियों का कहना था कि उनके पूर्वज इन क्वार्टर में किराएदार के रूप में रह रहे थे और नगर निगम को नियमित किराया दे रहे थे। यह भी कहा गया था कि याचियों ने इस जमीन को फ्रीहोल्ड कराने के लिए पैसे भी जमा किए थे। जब नगर निगम ने गत 15 मई को आपत्ति खारिज कर दी और छह जून को 15 दिनों के भीतर क्वार्टर खाली करने का नोटिस दिया तो याचियों ने यह याचिका दाखिल की। नगर निगम के अधिवक्ता ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि याची केवल धोखे से इन खाली क्वार्टरों में घुस आए हैं। वे पूरी तरह अतिक्रमणकारी हैं। उन्होंने यह भी कहा ने कि याचियों के पास न तो कोई अलॉटमेंट लेटर है, न कोई रेंट एग्रीमेंट और न ही कोई ऐसा पुख्ता दस्तावेज जो उनके किराएदार होने की पुष्टि करता हो। एडवोकेट विभु राय ने कहा कि मात्र कुछ पैसे जमा कर देने से सरकारी संपत्ति पर मालिकाना हक नहीं मिल जाता। दावों को पूरी तरह खारिज माना गया हाईकोर्ट ने सुनवाई और दस्तावेजों की जांच के बाद याचियों के दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा कि याची कभी खुद को किराएदार बताते हैं तो कभी फ्रीहोल्ड अधिकारों के वैध आवंटी लेकिन वे अपने पक्ष में कोई भी पुख्ता दस्तावेजी सबूत (जैसे अलॉटमेंट लेटर, लीज डीड या रेंट एग्रीमेंट) पेश नहीं कर सके। याचियों ने जो रसीदें पेश की थीं, वे किसी अन्य प्लॉट से संबंधित थीं और उनसे यह साबित नहीं होता कि नगर निगम ने उनसे पैसे मांगे थे। कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि महज लंबे समय तक कब्जा बनाए रखने से सार्वजनिक (सरकारी) संपत्ति पर कोई कानूनी अधिकार उत्पन्न नहीं हो जाता। ऐसे में नगर आयुक्त के गत 15 मई के आदेश और उसके बाद जारी बेदखली नोटिस में कोई भी अवैधता या मनमानापन नहीं है। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि नगर निगम कानून के दायरे में रहकर आगे की कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।
राजस्थान पुलिस मुख्यालय ने प्रदेशभर में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 100 पुलिस निरीक्षकों (इंस्पेक्टर) के तबादला आदेश जारी किए हैं। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (कार्मिक) बीजू जॉर्ज जोसफ की ओर से जारी आदेश के अनुसार सभी स्थानांतरण संबंधित अधिकारियों की स्वयं की प्रार्थना (Self Request) के आधार पर किए गए हैं। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं। जारी सूची के अनुसार पुलिस आयुक्तालय जयपुर, आयुक्तालय जोधपुर, अजमेर, जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, भरतपुर, बीकानेर और कोटा रेंज के अलावा सीआईडी-सीबी, सीआईडी-सीबी सतर्कता शाखा, सीआईडी-सीबी सिविल राइट्स, एटीएस-एसओजी, एसीबी, जीआरपी, राजस्थान पुलिस अकादमी, प्रशिक्षण निदेशालय, पीटीएस भरतपुर, पीटीएस जोधपुर, पीटीएस खैरवाड़ा, पीटीएस बीकानेर, एजीटीएफ, लीगल सेल, पुलिस मुख्यालय की विभिन्न शाखाओं, एससीआरबी तथा राजस्थान राज्य महिला आयोग सहित कई इकाइयों में कार्यरत निरीक्षकों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। तबादला सूची में रोहिताश, मेघना त्रिपाठी, हेमलता शर्मा, तुलसीराम, नरेंद्र सिंह, सुनील ताडा, मोहन सिंह, मुकेश चौधरी, छोटीलाल मीणा, रामेश्वरी, जगदीश सिंह, मुकेश चंद, करतार सिंह, प्रहलाद चंद, दिग्विजय सिंह, मुरारीलाल मीणा, सुमेर सिंह, हरिमन मीणा, हीरालाल, अजीत कुमार, कुसुमलता, तेजपाल सैनी, बच्चू सिंह, युधिष्ठिर, कंचन कुमारी, मांगेलाल, हरलाल, दयाराम मीणा, सुरेंद्र यादव, चौथमल बलाई, लक्ष्मीनारायण, कमल पुरी गोस्वामी, सत्यवीर, बशीलाल, महेंद्र सिंह, केशर, चंद्रवीर, अवधेश सांदू, महेश श्रीमाली, सुरेंद्र कुमार राणा, ज्ञानचंद, गंभीर सिंह, रामभरोसी मीणा, हरीसिंह मीणा, मदनलाल, हरेंद्र सिंह सौदा, आनंद यादव, मोहम्मद रफीक, माधोसिंह, दीप सिंह, प्रवीण राजपुरोहित, मिठूलाल मेघवाल, दलबीर सिंह, नेहरीलाल गुर्जर, हिमांशु सिंह राजावत, भीमसेन कौशिक, सुखवीर सिंह, प्रेमचंद, प्रदीप सिंह, विकांत शर्मा, विक्रम सिंह, प्रवीण कुमार, राकेश कुमार, गौरव प्रधान, सुधीर कुमार उपाध्याय, कमल किशोर, लीला कुमारी, चंपाराम मेघवाल, सुरेश कुमार सोनी, भारत सिंह, अमित कुमार, शिवदास, महीराम बिश्नोई, बेगराज मीणा, रमेशचंद मीणा, राजेश कुमार, संगीता बंजारा, सुरेशचंद मेघवाल, राजेश शर्मा, शैफाली सांखला, सरोज कुमारी, मोहनलाल, जितेंद्र कुमार गंगवानी, भरत सिंह, धर्मसिंह, अर्चना मीणा, रामकेश मीणा, भवानी सिंह राजावत, गीता कुमारी, संजू रानी, उर्मिला कुमारी, अशोक, नेकीराम, शेषकरण बारहट, मुकेश कुमार मीणा, विनोद कुमार शर्मा, अशोक कुमार सैनी, मनीषा, रूपनारायण तथा हरिसिंह देपावत समेत कुल 100 निरीक्षकों को नई तैनाती दी गई है। आदेश के अनुसार सबसे अधिक पदस्थापन अजमेर रेंज, भरतपुर रेंज, जयपुर रेंज, जोधपुर रेंज, उदयपुर रेंज, कोटा रेंज, पुलिस आयुक्तालय जयपुर, पुलिस आयुक्तालय जोधपुर तथा सीआईडी-सीबी में किए गए हैं। कई अधिकारियों को एटीएस-एसओजी, जीआरपी, एसीबी, प्रशिक्षण संस्थानों और पुलिस मुख्यालय की विभिन्न शाखाओं में भी भेजा गया है। पुलिस मुख्यालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि जिन निरीक्षकों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) के प्रकरण अथवा राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम-16 के तहत कार्रवाई विचाराधीन या प्रस्तावित है, उन्हें फील्ड में पदस्थापित नहीं किया जाएगा। ऐसे मामलों की सूचना तत्काल पुलिस मुख्यालय को भेजने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अतिरिक्त पुलिस मुख्यालय ने 19 जून 2026 को जारी आदेश संख्या 1521 के तहत क्रम संख्या-3 पर अंकित पुलिस निरीक्षक सतपाल सिंह का अजमेर रेंज से पुलिस आयुक्तालय जयपुर किया गया स्थानांतरण निरस्त कर दिया है। सभी पुलिस आयुक्तों, रेंज महानिरीक्षकों, जिला पुलिस अधीक्षकों, प्रशिक्षण संस्थानों के कमांडेंट और संबंधित नियंत्रण अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि स्थानांतरित निरीक्षकों को तत्काल प्रभाव से कार्यमुक्त कर नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण कराना सुनिश्चित करें तथा इसकी अनुपालना रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजें। बीते दिनों भी हुए थे ट्रांसफरउस समय जयपुर के पुलिस आयुक्तालय और JDA में भी कई अहम बदलाव देखने को मिला था। रमेश कुमार पारीक, ओम प्रकाश मीणा और सुरेश कुमार स्वामी को जेडीए में उप पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनाती मिली। राजधानी में कानून व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए नए एसीपी भी लगाए गए। जबकि बीते मई महीने में 19 पुलिस निरीक्षकों के तबादले किए गए। उस समय दौसा, कोटपुतली-बहरोड़, जयपुर ग्रामीण और झुंझुनू सहित कई जिलों के थाना प्रभारियों व निरीक्षकों के कार्यक्षेत्र में बदलाव हुआ था। मुख्य तबादले: कौन कहां गया यहां देखें सूची
छत्तीसगढ़ में जनपद पंचायतों के CEO बदले:जनपद पंचायतों के CEO समेत 33 अधिकारियों के तबादले
छत्तीसगढ़ शासन के आदिम जाति विकास विभाग ने बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 33 अधिकारियों का तबादला किया है। इस संबंध में मंगलवार को आदेश जारी किया गया। सभी स्थानांतरण तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं। जारी आदेश के मुताबिक जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (CEO), प्रभारी CEO, सहायक आयुक्त, क्षेत्र संयोजक और अन्य अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। सभी अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर नए पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण कर इसकी सूचना विभाग को देने के निर्देश दिए गए हैं। कई जिलों के CEO बदले स्थानांतरण सूची में गरियाबंद, बस्तर, नारायणपुर, सरगुजा, सूरजपुर, कोरबा, जशपुर, कांकेर, बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, धमतरी, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, बलरामपुर और अन्य जिलों के जनपद पंचायतों में पदस्थ अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। तत्काल प्रभाव से लागू हुआ आदेश विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी स्थानांतरण तत्काल प्रभाव से प्रभावशील होंगे। स्थानांतरित अधिकारियों को अधिकतम 15 दिनों के भीतर नए पदस्थापना स्थल पर जॉइन कर कार्यभार ग्रहण करना होगा। प्रमुख तबादले गरियाबंद जनपद पंचायत के CEO अमजद जाफरी को आदिम जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास आयुक्त कार्यालय, नया रायपुर भेजा गया। जगदलपुर के CEO अमित भाटिया को ओरछा (नारायणपुर) का CEO बनाया गया। रामानुजनगर के प्रभारी CEO संजय कुमार राय को कोरबा जनपद पंचायत का CEO बनाया गया। कुनकुरी, बीजापुर, कोंटा, मैनपुर, बस्तर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर समेत कई जनपद पंचायतों में भी नए CEO और प्रभारी CEO की पदस्थापना की गई है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट में ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के प्रदेश सरकार के गत 25 मई के अध्यादेश को चुनौती देने वाली याचिका पर राज्य सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा है। इससे पहले भी इलाहाबाद हाईकोर्ट में पंचायत चुनाव के मुद्दे पर पीआईएल दाखिल हुई थी। इस पर कोर्ट ने जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार एवं न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज के विधि छात्रों युधिष्ठिर वर्मा व आयुष पांडेय की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। साथ ही अगली सुनवाई के लिए तीन अगस्त की तारीख तय की है। आदेश को चुनौती दी गई जनहित याचिका में राज्य सरकार के गत 25 मई के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा गया है यह सरकारी आदेश एक्ट संख्या 6 (वर्ष 2017) की धारा 12(3A) के तहत निहित शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी किया गया था। याचियों का तर्क है कि सरकार द्वारा इस्तेमाल की गई यह शक्ति भारत के संविधान के अनुच्छेद 243(आई)(ई) के तहत असंवैधानिक है। राज्य सरकार पर लगाए आरोप कहा गया कि इस अध्यादेश से वर्तमान ग्राम प्रधानों को आगामी छह माह तक प्रशासक के रूप में नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप ग्राम पंचायत चुनावों को स्थगित किया जा रहा है। याची युधिष्ठिर वर्मा और आयुष पांडेय ने ने संविधान के अनुच्छेद 243(i)(ई) का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए तर्क दिया कि राज्य सरकार द्वारा शक्तियों का यह प्रयोग पूरी तरह असंवैधानिक है। पांच वर्षीय विधि पाठयक्रम में तीसरे वर्ष के याची छात्रों ने कहा कि यह अध्यादेश संविधान के अनुच्छेद 243ई की मूल भावना एवं संवैधानिक व्यवस्था के प्रतिकूल है क्योंकि संविधान पंचायती संस्थाओं में समयबद्ध एवं नियमित चुनाव सुनिश्चित करता है। याचियों का कहना है कि राज्य सरकार ने इस विस्तार को अपरिहार्य परिस्थितियां व जनहित जैसे व्यापक एवं अस्पष्ट आधारों पर उचित ठहराने का प्रयास किया है जबकि इसके समर्थन में कोई ठोस, तार्किक या संवैधानिक कारण नहीं बताया है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रेम लाल पटेल बनाम उप्र राज्य के मामले में भी इसी प्रकार के एक अध्यादेश को असंवैधानिक एवं घोषित किया है। जनहित याचिका के माध्यम से प्रदेश में ग्राम पंचायतों के लोकतांत्रिक निर्वाचन प्रक्रिया की संवैधानिक सुरक्षा एवं शीघ्र बहाली की मांग भी की गई है।
बरेली के शहर कोतवाली थाना क्षेत्र के मोहल्ला सौदागरान में 26 सितंबर 2025 को हुए दंगों के मुख्य आरोपी मौलाना तौकीर रजा के खिलाफ प्रशासन ने बड़ा शिकंजा कस दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मंगलवार को बरेली आगमन के साथ ही तौकीर रजा और उनके परिवार से जुड़े लोगों की संपत्ति को सील कर दिया गया है। मामला मंदिर की जमीन को अवैध रूप से खरीदने और वहां 'लैंड जिहाद' फैलाने का है। इस कार्रवाई के बाद से पूरे इलाके में हड़कंप मचा है। हिंदुओं के मकान के बाद अब मंदिर पर भी नजरइस पूरे विवाद पर स्थानीय निवासी और मामले में पक्षकार लवलीन कपूर ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, दंगाइयों की हिम्मत देखिए, इन्होंने पहले हिंदुओं के मकान खरीदे और अब ये प्राचीन मंदिरों तक को नहीं छोड़ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक सोची-समझी साजिश के तहत हिंदू बहुल इलाकों की संपत्तियों को टारगेट किया जा रहा है, जो 'लैंड जिहाद' का ही एक हिस्सा है। 1978 में रची गई थी साजिश, मंदिर को किया छोटामामले की जानकारी देते हुए लवलीन कपूर ने बताया कि मंदिर की करीब 2000 वर्ग गज जमीन को मंदिर के केयर टेकर रहे कुलदीप नारायण शर्मा ने वकील होने का फायदा उठाकर धीरे-धीरे खुर्द-बुर्द कर दिया। उन्होंने खुलासा किया कि 1978 में एक बड़ी साजिश के तहत मंदिर में चोरी की झूठी रिपोर्ट लिखवाई गई। इसके बाद पुरानी दीवारों से भगवान के चिन्ह हटा दिए गए और 2000 वर्ग गज के विशाल मंदिर को महज 6x8 के एक छोटे से कमरे में समेट दिया गया, ताकि उसे 'पर्सनल' बताकर बेचा जा सके। रिसीवर की तैनाती और प्रशासन पर दबावधर्म प्रकाश रस्तोगी ने बताया कि जब मंदिर की जमीन को मुस्लिम पक्ष के लोगों—तौकीर रजा, मौलाना शहाबुद्दीन और शाजी हाशमी आदि को बेचा गया, तो उन्होंने इसका कड़ा विरोध किया। 23 जून को सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत ने संपत्ति सील करने का आदेश दिया था, लेकिन स्थानीय प्रशासन कार्रवाई करने में सुस्त था। आज जब मुख्यमंत्री बरेली आए, तो विधायकों ने यह मामला उनके सामने रखा और सीएम की सख्ती के बाद ही यह प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकी। वर्तमान में कोतवाली पुलिस को रिसीवर नियुक्त कर दिया गया है, ताकि संपत्ति को सुरक्षित रखा जा सके। मंदिर की जगह पूजा हो, व्यापार नहींइस मामले पर सुमित मेहरोत्रा ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, जिस तरीके से मंदिर की जगह को खरीदा और बेचा जा रहा है, वह पूरी तरह से गलत है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि मंदिर की जगह ना तो खरीदी जानी चाहिए और ना ही बेची जानी चाहिए। सुमित मेहरोत्रा ने आगे कहा, मंदिर की जगह पर पूजा होनी चाहिए। अगर हम मंदिर की ही जगह पर व्यापार करेंगे, तो यह किसी के भी दिल को आहत करेगा। आज मंदिर बिक रहे हैं, कल मस्जिद बिकने का संदेश जाएगा, यह चीज रुकनी चाहिए। अब क्या चाहते हैं स्थानीय लोग?सभी पक्षकारों का अब एक ही सुर में कहना है कि इस जमीन को कब्जे से मुक्त कराना ही काफी नहीं है, बल्कि यहां से अवैध कब्जे हटाकर (बुलडोजर चलाकर) मंदिर के गौरव को बहाल किया जाना चाहिए। प्रशासन ने दुकानों को फिलहाल सील नहीं किया है, लेकिन स्थानीय लोग मांग कर रहे हैं कि मंदिर की इस संपूर्ण प्रॉपर्टी को 'हैंडओवर ट्रस्ट' के सुपुर्द किया जाए, ताकि वहां भविष्य में एक भव्य मंदिर बन सके।
सिवनी जिले की एक 48 वर्षीय महिला पड़ोसियों से कथित प्रताड़ना और स्थानीय पुलिस की निष्क्रियता से परेशान होकर करीब 62 किलोमीटर का सफर तय कर मंगलवार को जबलपुर स्थित पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) कार्यालय पहुंची। महिला ने आरोप लगाया कि पड़ोसी परिवार लंबे समय से उसके साथ मारपीट और अभद्रता कर रहा है, लेकिन कई बार शिकायत करने के बावजूद पुलिस ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की। शिकायत सुनने के बाद आईजी प्रमोद वर्मा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सिवनी एसपी को जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। पीड़िता सावित्री चड़ार ने बताया कि वह सिवनी जिले के धूमा क्षेत्र की रहने वाली हैं और फल बेचकर अपने परिवार का पालन-पोषण करती हैं। उनका आरोप है कि पिछले करीब तीन माह से पड़ोस में रहने वाले कृष्ण कुमार तिवारी और उसके परिवार के सदस्य लगातार उन्हें और उनके परिवार को परेशान कर रहे हैं। कई बार घर में घुसकर मारपीट और धमकी देने की घटनाएं भी हुई हैं, जिससे उनका परिवार भय के माहौल में जीने को मजबूर है। ठेला पलटने से शुरू हुआ विवाद महिला के अनुसार 18 अप्रैल की रात वह फल बेचकर घर लौट रही थीं। रास्ते में मिट्टी डाली होने के कारण उनका ठेला पलट गया और फल सड़क व नाली में बिखर गए। बाद में जब वह और उनके पति सड़क से मिट्टी हटाने लगे तो पड़ोसी ने इसका विरोध किया। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया और उनके साथ धक्का-मुक्की व मारपीट की गई। महिला का आरोप है कि बीच-बचाव करने पहुंचे उनके पति के साथ भी मारपीट की गई। शोर सुनकर आरोपी के परिवार के अन्य सदस्य भी मौके पर पहुंच गए और सभी ने मिलकर उनके साथ मारपीट की। पीड़िता का यह भी आरोप है कि घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी दी गई, ताकि उन्हें सार्वजनिक रूप से अपमानित किया जा सके। पुलिस पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप महिला का आरोप है कि घटना के बाद वह शिकायत लेकर धूमा थाने पहुंची, लेकिन वहां उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। इसके बाद उन्होंने सिवनी एसपी, कलेक्टर और जनसुनवाई में भी शिकायत दी, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। उनका कहना है कि उन्होंने संबंधित थाने और अन्य अधिकारियों को भी आवेदन दिए, परंतु आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराने के बाद पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे और शिकायत वापस लेने का दबाव बनाया। महिला का दावा है कि पुलिस ने उनका मोबाइल लेकर शिकायत बंद करवा दी। आईजी से लगाई न्याय की गुहार लगातार कार्रवाई नहीं होने से परेशान महिला मंगलवार सुबह घर से निकलकर किसी तरह पैदल, ऑटो और अन्य साधनों की मदद से जबलपुर पहुंची। उन्होंने आईजी प्रमोद वर्मा से मुलाकात कर पूरी घटना की जानकारी दी और कथित मारपीट से जुड़े वीडियो भी दिखाए। शिकायत सुनने के बाद आईजी ने मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई के लिए सिवनी पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए हैं।
लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान बसपा प्रत्याशी देवाशीष जरारिया पर भाजपा से सांठगांठ और लेनदेन के आरोप लगाने के मामले में मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ ग्वालियर की विशेष MP-MLA कोर्ट ने गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। कोर्ट ने भिंड पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिए हैं कि अगली सुनवाई पर पटवारी की कोर्ट में उपस्थिति हर हाल में सुनिश्चित कराई जाए। सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सख्त टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा, जब जीतू पटवारी के बयान और राजनीतिक गतिविधियां हर जगह दिखाई दे रही हैं, तो पुलिस उन्हें ढूंढ क्यों नहीं पा रही? मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई को होगी। चुनावी सभा में लगाए थे गंभीर आरोप मामला 27 अप्रैल 2024 का है। लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान जीतू पटवारी भिंड जिले के दौरे पर थे। उन्होंने भिंड-दतिया लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी फूल सिंह बरैया के समर्थन में ऊमरी कस्बे में चुनावी सभा को संबोधित किया था। सभा के दौरान पटवारी ने कांग्रेस छोड़कर बसपा में शामिल हुए और भिंड-दतिया से बसपा प्रत्याशी बने देवाशीष जरारिया पर बिना तथ्यों के लेनदेन करने और भाजपा से सांठगांठ करने के आरोप लगाए। आरोप है कि इस दौरान उन्होंने तू-तड़ाक की भाषा का भी इस्तेमाल किया, जिसे लेकर जरारिया ने आपत्ति जताई। शिकायत के बाद दर्ज हुई थी एफआईआर देवाशीष जरारिया की शिकायत पर 4 मई 2024 को भिंड के उमरी थाने में जीतू पटवारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। इसी मामले में कोर्ट ने उन्हें 16 जनवरी 2026 को पेश होने का नोटिस जारी किया था, लेकिन वे अदालत में उपस्थित नहीं हुए। पुलिस की दलील पर कोर्ट की फटकार सुनवाई के दौरान पुलिस ने अदालत को बताया कि जीतू पटवारी का पता नहीं चल सका। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जब वे लगातार मीडिया और सार्वजनिक कार्यक्रमों में नजर आ रहे हैं, तो पुलिस उन्हें तलाशने में असफल कैसे है। इसके बाद अदालत ने भिंड एसपी को निर्देश दिए कि 27 जुलाई को अगली सुनवाई में पटवारी की मौजूदगी हर हाल में सुनिश्चित की जाए।
ललितपुर में मंगलवार रात करीब ढाई घंटे तक हुई मूसलाधार बारिश ने नगर पालिका की जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी। शहर के कई इलाकों में जलभराव हो गया। रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म से लेकर जीआरपी थाना परिसर तक पानी भर गया, जबकि यात्रियों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। मंगलवार रात 8 बजे से 10:30 बजे तक लगातार हुई तेज बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में जलभराव की स्थिति बन गई। रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-3 पर बीना की ओर बने नए फुटओवर ब्रिज के पास टीन शेड से पानी टपकने लगा। प्लेटफॉर्म पर पानी भर जाने और बहने से यात्रियों को आवागमन में दिक्कत हुई, वहीं फिसलकर हादसा होने का खतरा भी बना रहा। बारिश का असर रेलवे स्टेशन के बाहर और आसपास भी देखने को मिला। स्टेशन के बाहर की नाली जाम होने से जल निकासी पूरी तरह बाधित हो गई। इसके चलते स्टेशन अधीक्षक कार्यालय के सामने स्थित बाथरूम का पानी बरामदे में भर गया। वहीं जीआरपी और आरपीएफ थाने के सामने मुख्य सड़क पर भी भारी जलभराव हो गया। सड़क का पानी जीआरपी थाने के अंदर तक पहुंच गया, जबकि राहगीरों को घुटनों तक भरे पानी से होकर गुजरना पड़ा। शहर के अन्य कई इलाकों में भी जलभराव से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों ने जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करने और नालों की नियमित सफाई कराने की मांग की है।
घर में घुसकर युवती से छेड़छाड़:मां ने आरोपी को कमरे में किया बंद; पुलिस ने गिरफ्तार किया
लखनऊ के कृष्णानगर इलाके में सोमवार तड़के एक युवक घर में घुसकर युवती से छेड़छाड़ करने लगा। युवती के शोर मचाने पर उसकी मां मौके पर पहुंच गई। उन्होंने आरोपी को पकड़कर एक कमरे में बंद कर दिया और पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया। पीड़िता की मां की तहरीर पर कृष्णानगर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया है। कृष्णानगर इंस्पेक्टर पीके सिंह ने बताया कि क्षेत्र निवासी महिला ने शिकायत में बताया है कि सोमवार तड़के करीब तीन बजे वह अपनी दोनों बेटियों के साथ घर में सो रही थीं। इसी दौरान सीपैट चौराहा निवासी सत्यम उनके घर में घुस आया। आरोप है कि वह उनकी 18 वर्षीय बेटी के कमरे में पहुंचा और उसके साथ जबरदस्ती करते हुए छेड़छाड़ करने लगा। बेटी की चीख सुनकर परिजनों की नींद खुल गई। मां जब कमरे में पहुंची तो आरोपी को बेटी के साथ जबरदस्ती करते देखा। उन्होंने आरोपी को पकड़ लिया और दूसरे कमरे में बंद कर दिया। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। सूचना पर पहुंची पुलिस ने आरोपी को मौके से हिरासत में ले लिया। पीड़िता की मां का आरोप है कि पुलिस के साथ जाते समय आरोपी ने उन्हें और उनकी बेटी को जान से मारने की धमकी भी दी। इंस्पेक्टर पीके सिंह ने बताया कि आरोपी पुलिस हिरासत में है। पीड़िता की मां की तहरीर के आधार पर आरोपी के खिलाफ घर में घुसकर छेड़छाड़ और जान से मारने की धमकी देने की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
लखनऊ अग्निकांड के बाद प्रयागराज जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। मंगलवार को जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा की अध्यक्षता में नगर निगम सभागार में जिला व्यापार बंधु समिति की बैठक हुई। इसमें जिलाधिकारी ने व्यापारियों को फायर सेफ्टी को अनिवार्य बताते हुए सख्त निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि दुकानों में अग्निशमन उपकरण होने के साथ-साथ उनका क्रियाशील प्रमाणपत्र भी आवश्यक है। व्यापारियों को स्वयं और अपने कर्मचारियों को इन उपकरणों के संचालन का प्रशिक्षण दिलाने की हिदायत दी गई, ताकि किसी भी आपात स्थिति में जान-माल का नुकसान रोका जा सके। बैठक के दौरान व्यापारियों ने शहर में जाम की समस्या उठाई। इस पर जिलाधिकारी ने बताया कि मुख्य बाजारों से जाम हटाने के लिए योजना तैयार की गई है। कटरा, जानसेनगंज, घंटाघर और सिविल लाइन्स जैसे क्षेत्रों में अवैध कब्जों को हटाने के लिए इस महीने से विशेष अभियान चलाया जाएगा। सड़क किनारे अवैध रूप से दुकान लगाने वालों को अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन ने सड़क पर अतिक्रमण करने वाले 150 लोगों को चिह्नित किया है, जिनके खिलाफ जल्द कार्रवाई की जाएगी। सिविल लाइन्स क्षेत्र में अनियंत्रित ई-रिक्शा के संचालन पर रोक लगाई जाएगी और इसके स्थान पर इलेक्ट्रिक बसों का संचालन किया जाएगा। मुख्य सड़कों पर गलत पार्किंग करने वाले वाहनों को अब चेतावनी के बजाय सीधे टोइंग गाड़ियों से जब्त किया जाएगा। व्यापारियों द्वारा उठाई गई लंबित समस्याओं के निस्तारण के लिए जिलाधिकारी ने अधिकारियों को सख्त समय-सीमा निर्धारित करने के निर्देश दिए। शाहगंज से सस्ता बाजार मार्केट तक नशेड़ियों की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस, आबकारी और नगर निगम की एक संयुक्त टीम गठित की जाएगी, जो औचक कार्रवाई करेगी। लोकनाथ चौराहे पर लटकते तारों को हटाकर भूमिगत करने के लिए विद्युत विभाग के अधिकारियों को तत्काल मौके का निरीक्षण कर प्रस्ताव बनाने के आदेश दिए गए। इसके अतिरिक्त, फाफामऊ और झूंसी-नैनी क्षेत्रों में सीवर तथा अन्य विकास कार्यों से संबंधित शिकायतों पर संबंधित विभागों को समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
लखनऊ में व्यापारियों का विरोध:अग्निकांड के बाद सीलिंग-नोटिस से नाराज, उत्पीड़न का आरोप
लखनऊ में हालिया अग्निकांड के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA), अग्निशमन विभाग और अन्य सरकारी एजेंसियों की कार्रवाई से व्यापारियों में नाराजगी बढ़ रही है। मंगलवार को लाटूश रोड स्थित व्यापार भवन में आयोजित लखनऊ व्यापार मंडल की प्रेस वार्ता में व्यापारियों ने एक स्वर में कहा कि सीलिंग और नोटिस के नाम पर उनका उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रेस वार्ता में लखनऊ व्यापार मंडल के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि विभिन्न विभागों की एकतरफा कार्रवाई से शहर के व्यापारियों में भय और असुरक्षा का माहौल बन गया है। संगठन ने चेतावनी दी कि यदि इस प्रकार की कार्रवाई नहीं रुकी तो व्यापारी अपनी दुकानें बंद कर सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे। किसी भी प्रकार का शोषण और उत्पीड़न स्वीकार नहीं किया जाएगा लखनऊ व्यापार मंडल के अध्यक्ष अमरनाथ मिश्र ने कहा कि व्यापारी वर्ग हमेशा प्रशासन और सरकार के साथ मिलकर काम करता आया है, लेकिन किसी भी प्रकार का शोषण और उत्पीड़न स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने जोर दिया कि व्यापारियों की समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से निकाला जाना चाहिए, न कि भय का वातावरण बनाकर। वरिष्ठ महामंत्री पवन मनोचा ने कहा कि यदि इसी तरह की कार्रवाई जारी रही तो व्यापारी अपनी दुकानों की चाबियां प्रशासन को सौंपकर सड़कों पर बैठ जाएंगे। उन्होंने बताया कि व्यापारी केवल एक लाख नहीं, बल्कि दस लाख लोगों के परिवारों से जुड़े हैं और उनकी दुकानों पर हजारों लोग रोजगार पाते हैं। संकट की घड़ी में व्यापारी वर्ग हमेशा सबसे आगे रहा मनोचा ने यह भी कहा कि प्राकृतिक आपदाओं और संकट की घड़ी में व्यापारी वर्ग हमेशा सबसे आगे रहकर समाज की सेवा करता है। इसलिए प्रशासन को व्यापारियों को प्रताड़ित करने के बजाय व्यापारिक संगठनों के साथ समन्वय स्थापित करना चाहिए। उन्होंने बताया कि लखनऊ व्यापार मंडल से जुड़े लगभग 300 संगठन शहर के विभिन्न बाजारों का प्रतिनिधित्व करते हैं और प्रशासन के साथ हर स्तर पर सहयोग के लिए तैयार हैं।
मेरठ के जाटव गेट इलाके में सोमवार रात ट्रांसफार्मर में लगी आग की घटना के बाद लोग दहशत में हैं। मंगलवार दोपहर निरीक्षण करने पहुंचे विद्युत विभाग के चीफ इंजीनियर रजनीकांत मिश्रा को लोगों की भारी नाराजगी झेलनी पड़ी। लोगों का आरोप था कि उनके यहां दूसरे इलाके के ट्रांसफार्मर लगा दिए गए हैं। कभी भी यहां बड़ा हादसा हो सकता है। चीफ इंजीनियर ने जगह मिलते ही ट्रांसफार्मर शिफ्ट कराने का भरोसा दिलाया है। जाटव गेट पुलिस चौकी के ठीक सामने एक के बाद एक सात ट्रांसफार्मर रखे हैं। सोमवार देर रात इन ट्रांसफार्मरों में से एक ट्रांसफार्मर में चिंगारी उठी तो लोग सकते में आ गए। देखते ही देखते चिंगारी आग में बदल गई और पहले एक और फिर उसी के नीचे रखे दूसरे ट्रांसफार्मर ने आग पकड़ ली। दोनों ट्रांसफार्मर धूं...धूं...कर जलने लगे। आस पास के लोग दहशत में आ गए। सकरा रास्ता होने के कारण दमकल की गाड़ी भी देरी से पहुंची लेकिन तब तक आग बुझ चुकी थी और ट्रांसफार्मर जल चुके थे। लोगों में देखने को मिली नाराजगी इस हादसे के बाद लोगों में नाराजगी बढ़ गई। उन्होंने एक साथ रखे चार ट्रांसफार्मरों का विरोध कर दिया। जेई व एसडीओ के प्रति भी नाराजगी रही। मामला चीफ इंजीनियर तक पहुंचा। मंगलवार दोपहर को चीफ इंजीनियर रजनीकांत मिश्रा अकेली ही जाटव गेट पहुंच गए। उन्होंने जले ट्रांसफार्मरों को देखा। साथ ही नये ट्रांसफार्मर रखने के लिए क्या व्यवस्था की गई है, इसके बारे में भी जाना। जेई से नाराज दिखे क्षेत्रीय लोग चीफ इंजीनियर ने नाराज लोगों से बात की तो उनका बिजली घर पर तैनात स्टाफ को लेकर गुस्सा फूट पड़ा। लोगों ने बताया कि जब रात आग लगी तो लोगों ने जेई व बिजली घर का फोन मिलाया लेकिन फोन नहीं मिला। इसके बाद लोग खुद ही आग पर काबू पाने का प्रयास करते रहे। लोगों का कहना था कि अगर आग आस पास में फैल जाती तो कौन जिम्मेदार होता। दूसरे इलाके के ट्रांसफार्मर हटाने की मांगक्षेत्रीय निवासी प्रदीप भारद्वाज ने कहा कि एक समय यहां केवल दो ट्रांसफार्मर लगे थे लेकिन फिर धीरे धीरे यहां एक के बाद एक सात ट्रांसफार्मर रख दिए गए। काफी दूर का एरिया यहां से कवर किया जा रहा है और दिक्कत यहां के लोगों को झेलनी पड़ रही है। उन्होंने कहा कि जहां के ट्रांसफार्मर हैं, वहां ले जाकर लगाए जाएं। चीफ बोले- व्यवस्था सुधारने का प्रयासचीफ इंजीनियर रजनीकांत मिश्रा ने बताया कि सोमवार रात लगी आग में एक ट्रांसफार्मर पूरी तरह जल चुका है जबकि दूसरा ठीक होने की स्थिति में है। कोशिश यही हो रही है कि दोनों को बदलवा दिया जाए। जहां तक स्थान परिवर्तन की बात है तो उसमें थोड़ा समय लगेगा। लोगों से जो शिकायत मिली हैं, उन पर भी कार्रवाई की जाएगी।
मथुरा के बरसाना में तेज रफ्तार कार का कहर देखने को मिला। यहां मॉर्निंग वॉक पर निकली दो बुजुर्ग बहनों को कार सवारों ने टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों बहन 5 फीट से ज्यादा उछल गई। हादसे में दोनों बहनों के गंभीर चोट लगी है। रविवार को हुए हादसे का वीडियो मंगलवार देर शाम सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। पुलिस ने कार के नम्बर के आधार पर मुकद्दमा दर्ज कर टक्कर मारने वालों की तलाश शुरू कर दी है। मॉर्निंग वॉक करने निकली थीं दोनों बहन बरसाना कस्बे के कटारा मोहल्ला निवासी सुग्घद सिंह की पत्नी 60 वर्षीय सुमित्रा देवी अपनी बड़ी बहन 65 वर्षीय लक्ष्मी देवी के साथ रविवार की सुबह टहलने के लिए निकली। दोनों बहन घर से करीब 500 मीटर दूर बस स्टैंड के समीप पहुंचीं तभी पीछे से आई एक कार ने टक्कर मार दी। सड़क किनारे चल रही बहनों को टक्कर मारने के बाद चालक कार लेकर मौके से भाग खड़ा हुआ। महिलाओं के आई गंभीर चोट हादसे के बाद मौके पर भीड़ लग गई। सूचना परिवार वालों को दी गई। सूचना मिलते ही सुमित्रा देवी के बेटा संजय मौके पर पहुंच गए। संजय परिजनों और स्थानीय लोगों की मदद से सुमित्रा देवी और लक्ष्मी देवी को इलाज के लिए निजी अस्पताल ले गए। हादसे के कारण दोनों महिलाओं के सर,हाथ,पैर,आंखों में गंभीर चोट आई। सुमित्रा देवी की तो पैर में 3 जगह से हड्डी टूट गई। CCTV वीडियो हुआ वायरल रविवार को बरसाना कस्बे में हुए इस हादसे का मंगलवार देर शाम वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। 7 सेकंड के इस वीडियो में दिख रहा है कि सुमित्रा देवी और लक्ष्मी देवी खाली सड़क पर टहल रही हैं। इसी दौरान सुबह 5 बजकर 37 मिनट पर पीछे से आई तेज रफ्तार कार आती है और दोनों को टक्कर मार देती हैं। टक्कर लगने से दोनों महिला करीब 5 फीट ऊंची उछल जाती है। हादसे के बाद एक महिला उछल कर सड़क के किनारे गिर जाती है जबकि दूसरी महिला कार के बोनट पर गिर कर दूसरी तरफ गिर जाती है। पुलिस ने मुकद्दमा दर्ज कर शुरू की जांच हादसे के बाद कार चालक गाड़ी लेकर मौके से भाग खड़ा हुआ। मंगलवार को दुर्घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने कार का नंबर सर्च किया। जिसके बाद पता चला कि टक्कर मारने वाली कार स्विफ्ट है और उसका नंबर HR 50 K 2159 है। जिसके बाद पुलिस ने सुमित्रा देवी के बेटे संजय की तहरीर पर अज्ञात चालक के खिलाफ मुकद्दमा दर्ज कर लिया। सीओ गोवर्धन अनिल कुमार सिंह ने बताया मुकद्दमा दर्ज कर लिया है कार और टक्कर मारने वाले की तलाश की जा रही है।
ललितपुर के एलयूसीसी चिटफंड कंपनी से जुड़े करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी के मामले में फरार मुख्य आरोपी समीर अग्रवाल की गिरफ्तारी पर घोषित इनाम राशि बढ़ाकर अब एक लाख रुपए कर दी गई है। यह घोषणा कानपुर जोन के अपर पुलिस महानिदेशक द्वारा की गई है। मंगलवार शाम ललितपुर पुलिस ने सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी जानकारी साझा की। पुलिस अधीक्षक मो. मुश्ताक ने बताया कि समीर अग्रवाल एलयूसीसी चिटफंड कंपनी का मुख्य सरगना है। उस पर निवेशकों को ऊंचे मुनाफे का लालच देकर निवेश कराने, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने तथा आपराधिक षड्यंत्र के तहत करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी करने का आरोप है। समीर अग्रवाल, पुत्र स्वर्गीय राजेंद्र अग्रवाल, मूल रूप से मुंबई का निवासी है। वर्तमान में उसका पता दुबई के बिजनेस बे स्थित बिल्डिंग नंबर-10, चौथी मंजिल, कार्यालय संख्या-404 बताया गया है। वह लंबे समय से गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार चल रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ने आरोपी की गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया है। पुलिस ने आमजन से अपील की है कि यदि किसी को आरोपी के संबंध में कोई विश्वसनीय सूचना मिले तो वह निकटतम पुलिस थाने या ललितपुर पुलिस को सूचित करे। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी तथा नियमानुसार एक लाख रुपये का पुरस्कार दिया जाएगा।
प्रयागराज: अवैध प्लाटिंग पर चला बुलडोजर:झलवा में 2 बीघा भूमि पर बिना स्वीकृति बन रही थी कॉलोनी
प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) ने शहर में अवैध प्लाटिंग और अनधिकृत निर्माण के खिलाफ अभियान के तहत मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की। झलवा क्षेत्र में लगभग दो बीघा भूमि पर विकसित की जा रही अवैध प्लाटिंग को ध्वस्त कर दिया गया। यह कार्रवाई जोनल अधिकारी सूरज कुमार पटेल के नेतृत्व में जोन-02, उपजोन-2ए के अंतर्गत की गई। प्राधिकरण की टीम ने मित्र नगर, धुस्सा, घुघरू चौराहा के पास झलवा स्थित आराजी संख्या-95 एवं 95/219 पर की गई अवैध प्लाटिंग के विरुद्ध अभियान चलाया। बताया गया कि अनुराग तिवारी, जयश्री कुशवाहा एवं अन्य लोगों द्वारा बिना प्राधिकरण से आवश्यक स्वीकृति प्राप्त किए करीब दो बीघा भूमि पर यह अवैध प्लाटिंग विकसित की जा रही थी। शिकायत और जांच के बाद पीडीए ने नियमानुसार कार्रवाई करते हुए इसे ध्वस्त कर दिया। कार्रवाई के दौरान जोनल अधिकारी के साथ अवर अभियंता विनोद कुमार गुप्ता, सुपरवाइजर, पीडीए प्रवर्तन टीम तथा धूमनगंज थाना पुलिस भी मौजूद रही। पुलिस बल की मौजूदगी में यह कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। प्रयागराज विकास प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि शहर में अवैध निर्माण और बिना स्वीकृति विकसित की जा रही कॉलोनियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। प्राधिकरण ने निर्माणकर्ताओं और डेवलपर्स को चेतावनी दी है कि किसी भी प्रकार का विकास कार्य शुरू करने से पहले प्राधिकरण से मानचित्र एवं लेआउट की विधिवत स्वीकृति अवश्य प्राप्त करें। साथ ही, पीडीए ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि किसी भी भूखंड की खरीद-फरोख्त करने से पहले उसकी वैधता और प्राधिकरण की स्वीकृति की जांच अवश्य कर लें। बिना स्वीकृति विकसित की गई अवैध कॉलोनियों या मेला क्षेत्र में भूखंड खरीदने से आर्थिक नुकसान हो सकता है। प्राधिकरण ने कहा कि शहर में सुनियोजित विकास और अवैध निर्माण पर रोक लगाने के लिए भविष्य में भी ऐसी कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
लखनऊ हाईकोर्ट की सुरक्षा जांच के दौरान एक बाबा के बैग से 12 बोर का तमंचा और चार कारतूस मिला। सुरक्षा कर्मियों ने बाबा व उसके साथी को हिरासत में लेकर विभूतिखंड पुलिस के सुपुर्द कर दिया। पुलिस ने आर्म्स एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक, 25 जून को हाईकोर्ट परिसर के गेट नंबर-6 पर एंट्री करने वाले लोगों की सुरक्षा जांच की जा रही थी। इसी दौरान एक बाबा अपने सहयोगी के साथ प्रवेश के लिए पहुंचे। उनके बैग को बैगेज स्कैनर मशीन से जांचा गया तो स्क्रीन पर हथियार जैसी संदिग्ध चीज दिखाई दी। इसके बाद चेकिंग अधिकारी एसआई अखिलेश पाण्डेय ने बैग की जांच कराई। तलाशी में बैग से 12 बोर का तमंचा और चार जिंदा कारतूस बरामद हुए। जब बाबा से हथियार का लाइसेंस मांगा गया तो वह कोई वैध लाइसेंस नहीं दिखा सके। पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम बाबा अमरदास उर्फ बाल भगवान दास, निवासी मकदूम कला बाजार शुक्ल अमेठी बताया। उनके साथ मौजूद व्यक्ति की पहचान ओमश्री पाण्डेय, निवासी कपूरीपुर, थाना जगदीशपुर, जनपद अमेठी के रूप में हुई। सुरक्षा कर्मियों ने दोनों को अवैध तमंचे और कारतूस समेत हिरासत में लेकर सूचना विभूतिखंड पुलिस को दी। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर तमंचा और कारतूस कब्जे में लेकर सील किया।
केंद्रीय माल एवं सेवा कर (सीजीएसटी) आयुक्तालय, इलाहाबाद ने मंगलवार को प्रयागराज में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया। इसका उद्देश्य छोटे और मझोले व्यापारियों की जीएसटी संबंधी समस्याओं का समाधान करना और जागरूकता बढ़ाना था। सिविल लाइंस स्थित जीएसटी भवन के कौटिल्य सभागार में आयोजित इस बैठक में व्यापारिक संगठनों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, अधिवक्ताओं और जीएसटी अधिकारियों ने भाग लिया। उन्होंने विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय जीएसटी आयुक्तालय, इलाहाबाद के अपर आयुक्त मह्फूजुर रहमान ने की। सहायक आयुक्त हेम नाथ झा और यश बिशेन के साथ अधीक्षक दिलीप यादव, अनुज मिश्र, असीम कुमार सिंह तथा आसिफ अली भी इस अवसर पर उपस्थित थे। कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र कुमार गोयल ने छोटे और मझोले व्यापारियों की जीएसटी संबंधी समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने अधिकारियों से नीतिगत मामलों से जुड़े सुझावों और समस्याओं को उच्च स्तर तक पहुंचाने का अनुरोध किया, ताकि व्यापारियों को राहत मिल सके। अधिवक्ताओं और चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने जीएसटी पोर्टल पर आने वाली तकनीकी समस्याओं की ओर अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया और उनके शीघ्र समाधान की मांग की। बैठक में जीएसटी लागू होने के नौ वर्ष पूरे होने पर संतोष व्यक्त किया गया। इस दौरान जीएसटीआर-9, जीएसटीआर-9सी, रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म, जीएसटी-2बी, फर्जी सप्लायरों के कारण इनपुट टैक्स क्रेडिट में आने वाली दिक्कतें तथा जीएसटी रिटर्न फाइलिंग सिस्टम में तकनीकी सुधार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। व्यापार प्रतिनिधियों ने छोटे और मझोले व्यापारियों के लिए जीएसटीआर-9 वार्षिक रिटर्न दाखिल करने की मौद्रिक सीमा बढ़ाने की मांग की। उन्होंने अनुपालन का बोझ कम करने और रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया। यह सुझाव भी दिया गया कि वास्तविक खरीदारों को फर्जी या गैर-मौजूद फर्मों की धोखाधड़ी के लिए दंडित नहीं किया जाना चाहिए। बैठक के अंत में, अपर आयुक्त मह्फूजुर रहमान ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने भरोसा दिलाया कि व्यापारियों द्वारा दिए गए सुझावों और समस्याओं को उचित मंच पर उठाया जाएगा और उनके समाधान के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।
समाजवादी पार्टी विधानमंडल दल के मुख्य सचेतक पद से कांठ के सपा विधायक कमाल अख्तर के इस्तीफे पर मुरादाबाद की सपा सांसद रुचिवीरा ने प्रतिक्रिया दी है। सपा सांसद ने कहा कि, कमाल अख्तर के इस्तीफे का मुझसे कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले दिनों मुरादाबाद में जो कुछ हुआ वह उनके लिए अपमानजनक था। रुचिवीरा बोलीं- कोई न कोई तो उसके पीछे था। लेकिन बाद में राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादवजी ने सभी को समझा दिया था। इसके साथ ही वो चैप्टर वहीं बंद हो चुका है। मुरादाबाद में पत्रकारों से बातचीत में रुचिवीरा ने कहा कि, राष्ट्रीय अध्यक्ष पार्टी में किस विधायक, सांसद या कार्यकर्ता से क्या काम लें, ये उनका डिसीजन है। प्रदेश में चुनाव आने वाला है और हो सकता है कि चुनाव जल्द हो जाए। मुझे लगता है कि इसी के मद्देनजर ये फेरबदल (कमाल अख्तर का इस्तीफा) हुआ होगा। राष्ट्रीय अध्यक्ष ही बेहतर समझ सकते हैं कि कौन आदमी किस रोल में बेहतर काम कर सकता है। रुचिवीरा ने कहा वो मामला(कमाल और रुचिवीरा में अनबन) निपट गया है। मैंने कहा पहले भी कहा था कि एक महिला(सांसद को) को पिछले दिनों काफी चीजें झेलनी पड़ीं। यहां अनुशासनहीनता हो रही थी। पार्टी के होर्डिंग बैनरों में किसकी फोटो लगाई जाए किसकी नहीं लगाई जाए, किसको कार्यक्रम में बुलाया जाए और किसको नहीं बुलाया जाए…। कुछ तो यहां चल रहा था। कोई न कोई तो था ही उसके पीछे। रुचिवीरा बोलीं, अब मुझे ये नहीं पता कि ये भूलवश था या जानबूझकर था। लेकिन मैं ये कहना चाहती हूं कि प्रकरण निपट चुका है, वर्तमान में हुए इस्तीफे का उससे लेना-देना नहीं है। उस प्रकरण में राष्ट्रीय अध्यक्ष ने सभी को समझा दिया था कि अनुशासनहीनता किसी भी स्तर से नहीं होनी चाहिए। रुचिवीरा ने स्वीकार किया कि, उन्होंने इस मामले की शिकायत राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से की थी। जिसके बाद दोनों पक्षों को बुलाया गया था।
सोनभद्र में बिहार के भोजपुर निवासी भरत तिवारी की पुलिस कार्रवाई में हुई मौत के विरोध में मंगलवार को रॉबर्ट्सगंज नगर के रामलीला मैदान में एक श्रद्धांजलि सभा और कैंडल मार्च का आयोजन किया गया।इस दौरान बड़ी संख्या में युवाओं,सामाजिक कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने घटना पर गहरा रोष व्यक्त किया। हाथों में मोमबत्तियां और न्याय की मांग से जुड़े संदेश लिए लोगों ने शांतिपूर्ण मार्च निकाला।उन्होंने दोषियों के विरुद्ध निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने भरत तिवारी को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उपस्थित लोगों ने जोर देकर कहा कि यदि कोई व्यक्ति समाज के वंचित वर्ग की आवाज उठाता है,तो उसकी सुरक्षा और अधिकारों की रक्षा करना लोकतांत्रिक व्यवस्था की जिम्मेदारी है।उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की। कार्यक्रम में युवाओं की संख्या सर्वाधिक रही।युवाओं ने कहा कि यह केवल एक व्यक्ति की मौत का मामला नहीं है,बल्कि न्याय और जवाबदेही का प्रश्न है।उनका मानना था कि यदि ऐसे मामलों में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई,तो आम नागरिकों का व्यवस्था से विश्वास कमजोर होगा। सामाजिक कार्यकर्ता अशोक दुबे ने भरत तिवारी की मौत की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।उन्होंने कहा कि यदि किसी स्तर पर लापरवाही या अवैध कार्रवाई हुई है,तो जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाना आवश्यक है।उन्होंने यह भी जोड़ा कि न्याय में देरी भी न्याय से वंचित करने के समान है। धीरज पाण्डेय ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में हर नागरिक को अपनी बात रखने का अधिकार है।उन्होंने घटना की स्वतंत्र जांच की आवश्यकता पर बल दिया,ताकि सच्चाई सामने आ सके और लोगों का न्याय व्यवस्था पर विश्वास बना रहे। मन्नू पांडे और अभिषेक चौबे ने कहा कि भरत तिवारी की मौत से लोगों में गहरा आक्रोश है। उन्होंने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए,ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। मन्नू पाण्डेय ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं,बल्कि न्याय की मांग के लिए है। इस दौरान कार्यक्रम में अमीश पांडेय, नितीश पाण्डेय, अनुपम त्रिपाठी, अमित पाठक, हिरन यादव, मनीष सिंह, आशीष पाण्डेय, शशिकान्त पाण्डेय, अनुज पाण्डेय, विनीत पाण्डेय, राजनारायण तिवारी, सुधाकर पाण्डेय, अरविन्द पाण्डेय, संजना पटेल, पूजा पाण्डेय, आरती पटेल, वरुण त्रिपाठी, ऋतूल चौबे, अनुराग पाण्डेय, विनय मौर्य, अभिषेक मिश्रा, सत्यम पाण्डेय, राजा पाण्डेय, रोहित मिश्रा सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे।
लखनऊ बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष एवं वरिष्ठ अधिवक्ता स्वर्गीय इंद्रदेव सिंह की वर्ष 2002 में हुई चर्चित हत्या के मामले में सीबीआई मामलों की विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश वायु नंदन मिश्रा ने तीन आरोपियों को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी करार देते हुए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। अब सजा के बिंदु पर 7 जुलाई 2026 को सुनवाई होगी।8 अगस्त 2002 को दिनदहाड़े हुई थी हत्या अभियोजन पक्ष के अनुसार, 8 अगस्त 2002 को शाम करीब 4 से 4:30 बजे के बीच कैसरबाग टेलीफोन एक्सचेंज के पीछे बक्शी दीदी के घर के पास अधिवक्ता इंद्रदेव सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। घटना के बाद उनकी पत्नी नयनतारा सिंह ने थाना कैसरबाग में कई नामजद आरोपियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।राज्य सरकार की सिफारिश पर सीबीआई को सौंपी गई थी जांच मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने जांच सीबीआई को सौंप दी। विवेचना के दौरान सीबीआई ने मन्नालाल गुप्ता, वेद प्रकाश उर्फ नेता, विक्रम यादव उर्फ कालिया, छोटेलाल, छोटू, बृजेश यादव उर्फ मुन्ना और पन्ना सिंह के नाम सामने लाए। जांच में यह भी सामने आया कि विक्रम यादव उर्फ कालिया ने 12 बोर के तमंचे से इंद्रदेव सिंह को गोली मारी थी।22 साल चली कानूनी लड़ाई के बाद आया फैसला सीबीआई ने वर्ष 2004 में आरोप पत्र दाखिल किया था और उसी वर्ष आरोप भी तय हुए थे। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने विक्रम यादव उर्फ कालिया, पन्ना सिंह और बृजेश यादव उर्फ मुन्ना को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/120-बी के तहत दोषी ठहराया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अन्य तीन आरोपियों की मौत हो चुकी है।7 जुलाई को तय होगी सजा अदालत ने तीनों दोषियों को जेल भेजते हुए सजा पर सुनवाई के लिए 7 जुलाई की तारीख तय की है। करीब 24 साल पुराने इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में आए फैसले को न्यायिक प्रक्रिया का अहम पड़ाव माना जा रहा है।
हाथरस में पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठ गए हैं। एक गैंगवार मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपी को बरी करते हुए पुलिस की विवेचना और गिरफ्तारी प्रक्रिया पर कड़ी टिप्पणी की। यह मामला 19 जून को हाथरस गेट कोतवाली क्षेत्र के हतीसा बाईपास स्थित कैलाश ढाबा के पास हुई फायरिंग से जुड़ा है। दो गुटों के बीच हुई इस झड़प से इलाके में अफरा-तफरी मच गई थी। जब किसी पक्ष ने कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई, तो हाथरस गेट कोतवाली के एक दरोगा ने फायरिंग में शामिल लोगों के खिलाफ प्राणघातक हमले सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया। पुलिस ने कल इस मामले में चंदपा थाना क्षेत्र के सांवत पट्टी निवासी छोटू राणा को गिरफ्तार किया। हालांकि, विवेचना के दौरान पुलिस ने खुद ही प्राणघातक हमले से संबंधित गंभीर धारा हटा दी। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की अनिवार्य प्रक्रिया अपनाए बिना आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत में पेश कर दिया गया। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पुलिस की 14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा की मांग को खारिज कर दिया। बिना नोटिस दिए नहीं की जा सकती गिरफ्तारी न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सात वर्ष से कम सजा वाले अपराध में धारा-35(3) के तहत नोटिस दिए बिना गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। अदालत ने पुलिस का रिमांड प्रार्थना पत्र निरस्त करते हुए आरोपी छोटू राणा को 25 हजार रुपये के निजी बंधपत्र पर रिहा करने का आदेश दिया।
बिजनौर की शहर कोतवाली परिसर में खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगाने वाली महिला की सोमवार शाम दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम के बाद महिला का शव दिल्ली से बिजनौर लाया जाएगा। मंगलवार देर रात तक शव के पहुंचने की संभावना है, जिसके बाद अंतिम संस्कार किया जाएगा। वहीं मामले में पुलिस ने मंगलवार को दो महिलाओं को गिरफ्तार किया। इनमें मनोज पत्नी संजू निवासी स्वाहेड़ी, कोतवाली शहर और मृतका के गांव की रहने वाली निकिता उर्फ निक्की पत्नी गजेंद्र शामिल हैं। महिला की मौत के बाद उसके गांव में एहतियात के तौर पर पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। महिला ने एक फौजी पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया था। कार्रवाई न होने से आहत होकर उसने 21 जून की रात कोतवाली में आत्मदाह का प्रयास किया था। कीरतपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली महिला ने 21 जून की रात करीब 10:45 बजे शहर कोतवाली में खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा ली थी। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने किसी तरह आग बुझाई, लेकिन वह करीब 60 प्रतिशत झुलस गई थी। उसे पहले मेरठ और बाद में 22 जून को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल रेफर किया गया था, जहां सोमवार शाम उसकी मौत हो गई। पुलिस जांच में सामने आया कि निकिता उर्फ निक्की ने कथित रूप से महिला को आत्महत्या के लिए उकसाया था। वहीं, मुख्य आरोपी फौजी सौरभ के चाचा कलुआ पुत्र राम सिंह को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। छह लोगों पर दर्ज है मुकदमा घटना के बाद पुलिस ने पीड़िता की मां की तहरीर पर आरोपी सौरभ पुत्र संजू, गौरव पुत्र संजू, संजू पुत्र राम सिंह, मनोज पत्नी संजू, कलुआ पुत्र राम सिंह और बीनू पत्नी गौरव के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। घटना के अगले दिन 22 जून को पुलिस अधीक्षक ने शहर कोतवाली प्रभारी अमर सिंह राठौर को निलंबित कर दिया था। तीन टीमें कर रही हैं आरोपियों की तलाश सीओ सिटी अभय पांडे ने बताया कि मामले की जांच जारी है। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की तीन टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ अग्रिम वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।
लखनऊ में 'उल्लास बाल पर्व-2026' का समापन:बाल कलाकारों ने अभिनय और नृत्य से दर्शकों को भावविभोर किया
लखनऊ में दो दिवसीय 'उल्लास बाल पर्व-2026' का समापन हो गया। मंगलवार को कैसरबाग स्थित राय उमानाथ बली ऑडिटोरियम में यायावर रंगमंडल और संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव में बाल कलाकारों ने अपनी रंगारंग प्रस्तुतियों से दर्शकों को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम की दूसरी संध्या में आध्यात्मिक संदेश, सामाजिक सरोकार और बाल मनोविज्ञान पर आधारित प्रस्तुतियों को खूब सराहना मिली। बच्चों ने अपनी शानदार कला से दर्शकों का दिल जीत लिया। धर्म की पुनर्स्थापना के संदेश महोत्सव का शुभारंभ जानकीपुरम स्थित पूरन शिक्षा केंद्र के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत लघु नृत्य-नाटिका 'गोपाल से जगत पाल तक' से हुआ। वंशिका शर्मा की परिकल्पना और निर्देशन में मंचित इस नाटिका ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से लेकर कलियुग में धर्म की पुनर्स्थापना के संदेश तक की यात्रा को प्रभावशाली ढंग से दर्शाया। इस नृत्य-नाटिका में श्रीकृष्ण जन्म, पूतना वध, कालिया नाग दमन, राधा-कृष्ण की प्रेम लीलाओं और कल्कि अवतार की अवधारणा को कथक, कंटेम्पररी और लोक नृत्य शैलियों के समन्वय के साथ प्रस्तुत किया गया। बाल कलाकारों के अभिनय, भाव-भंगिमा और नृत्य संयोजन ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। विद्यार्थियों ने 'एक सपना' नाटक का मंचन किया प्रस्तुति का सबसे प्रभावशाली संदेश यह रहा कि कल्कि केवल एक अवतार नहीं, बल्कि मनुष्य के भीतर सकारात्मक परिवर्तन का प्रतीक हैं। नाटक ने यह संदेश दिया कि धर्म, प्रेम, करुणा और सत्य की स्थापना की शुरुआत स्वयं के भीतर परिवर्तन से होती है। इसके बाद गोमतीनगर स्थित सेंट पीटर्स इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों ने 'एक सपना' नाटक का मंचन किया। योगेन्द्र जोशी के लेखन और अंकित श्रीवास्तव के निर्देशन में प्रस्तुत इस नाटक ने आधुनिक जीवन में बच्चों के अकेलेपन और मोबाइल की बढ़ती लत पर गंभीर सवाल उठाए।
लखनऊ: समाजवादी पार्टी के पूर्व नेता और अधिवक्ता महेंद्र प्रताप यादव ने मंगलवार को एक नई राजनीतिक पार्टी भारतीय समाजवादी पार्टी के गठन की घोषणा की है। हजरतगंज स्थित प्रेस क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी अब अपने मूल सिद्धांतों से भटककर परिवारवाद और पूंजीवाद का केंद्र बन गई है। यादव ने बताया कि भारतीय समाजवादी पार्टी की औपचारिक घोषणा आगामी 14 जुलाई को सुल्तानपुर रोड स्थित ड्रीम पब्लिक स्कूल परिसर में की जाएगी। उनकी नई पार्टी का मुख्य उद्देश्य गरीबों, किसानों, मजदूरों और वंचित वर्गों की आवाज को मजबूती से उठाना होगा। कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहे उन्होंने वर्तमान सरकार पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहने का आरोप लगाया। महेंद्र प्रताप यादव ने कहा कि महिलाओं पर बढ़ते अपराध, दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न जैसे गंभीर मुद्दों पर उनकी पार्टी संघर्ष करेगी और जनआंदोलन खड़ा करेगी। महेंद्र प्रताप यादव ने खुद को समाजवादी आंदोलन का पुराना सिपाही बताया। उन्होंने कहा कि वे समाजवादी जनता पार्टी के समय से ही नेताजी (मुलायम सिंह यादव) के साथ जुड़े रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 1991 के विधानसभा चुनाव के दौरान दर्ज एक मुकदमे का उन्होंने करीब 31 वर्षों तक सामना किया, लेकिन इसके बावजूद पार्टी में उन्हें अपेक्षित सम्मान नहीं मिला। 17 जून को समाजवादी पार्टी से इस्तीफा देकर अपनी नई पार्टी बनाने का निर्णय लिया उन्होंने अपनी शिकायतें साझा करते हुए बताया कि जिला पंचायत चुनाव में वे मात्र 58 मतों से हार गए थे, और मतगणना दोबारा कराने की मांग पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके अतिरिक्त, प्रदेश सचिव सहित कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद उन्हें विधान परिषद चुनाव का टिकट नहीं दिया गया। यादव ने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी अपने संस्थापक उद्देश्यों से दूर हो चुकी है। उनके अनुसार, गरीब, किसान और मजदूरों के राजनीतिक एवं सामाजिक उत्थान के सपने की जगह अब व्यक्तिगत हित और परिवारवाद ने ले ली है। इन्हीं कारणों से उन्होंने 17 जून को समाजवादी पार्टी से इस्तीफा देकर अपनी नई पार्टी बनाने का निर्णय लिया।
कानपुर में ट्रेन की चपेट में आई महिला, मौत:बिठूर के नारामऊ में हादसा हुआ, शिनाख्त में जुटी पुलिस
कानपुर के कल्याणपुर थाना क्षेत्र के नारामऊ स्थित इल्मको रेलवे क्रॉसिंग के पास मंगलवार शाम करीब पांच बजे एक अज्ञात महिला की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। नही हो सकी शव की शिनाख्त, जाँच मे जुटी पुलिस जानकारी के अनुसार मंगलवार शाम करीब पांच बजे रेलवे की ओर से पुलिस को सूचना दी गई कि इल्मको रेलवे क्रॉसिंग के पास एक महिला का शव रेलवे ट्रैक के किनारे पड़ा है। मौके पर पहुंची पुलिस ने देखा कि महिला की ट्रेन की टक्कर से मौत हो चुकी थी। हादसे में महिला का चेहरा पूरी तरह क्षत-विक्षत हो गया था, जिससे उसकी पहचान नहीं हो सकी। पुलिस के अनुसार मृतका ने ग्रे रंग का लोअर, काले रंग का टॉप और गोल्डन रंग की चुनरी पहन रखी थी। आसपास के लोगों से पूछताछ कर उसकी पहचान कराने का प्रयास किया गया, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली। पुलिस ने शव को सील कर पोस्टमार्टम के लिए मोर्चरी भेज दिया है और महिला की शिनाख्त कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। बिठूर थाना प्रभारी अशोक सरोज ने बताया कि शव की शिनाख्त नहीं हो पाई है। आसपास के लोगों से संपर्क कर शिनाख्त के प्रयास कराए जा रहे हैं। शव को पोस्टमार्टम की मोर्चेरी में सुरक्षित रखा गया है अन्य विधि कार्रवाई की जा रही है।
लखनऊ में बेसमेंट का गलत इस्तेमाल करने वाले होटल, बैंक्वेट हॉल और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर अब सख्त कार्रवाई होगी। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) और अग्निशमन विभाग के संयुक्त सर्वे में 122 प्रतिष्ठानों में अनियमितताएं मिलने के बाद मंगलवार को मंडलायुक्त एवं एलडीए अध्यक्ष विजय विश्वास पंत ने सभी दोषी भवनों को नोटिस जारी करने और तय समय में खामियां दूर न होने पर सील करने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि जिन भवनों को अनियमितताओं के बावजूद पूर्णता प्रमाणपत्र (कम्प्लीशन) जारी किया गया, उन मामलों में संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी भी तय की जाए। एलडीए मुख्यालय के पारिजात सभागार में हुई प्रवर्तन समीक्षा बैठक में उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि हाल के अग्निकांडों के बाद शहर के होटल, गेस्ट हाउस, मैरिज लॉन और बैंक्वेट हॉल समेत 122 प्रतिष्ठानों का संयुक्त निरीक्षण कराया गया। जांच में कई स्थानों पर स्वीकृत मानचित्र के विपरीत निर्माण और अग्नि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन मिले। छत दिखाकर चलाया जा रहा बार सबसे गंभीर मामला गोमती नगर स्थित होटल रेनेसां का सामने आया। जांच में पाया गया कि स्वीकृत नक्शे में 16वीं मंजिल पर जहां केवल छत दर्शाई गई थी, वहां स्काई बार संचालित किया जा रहा है। इसके अलावा होटल को लीज पर मिली ग्रीन बेल्ट के नीचे अवैध बेसमेंट भी बना मिला। इसी तरह होटल नोवोटेल में बेसमेंट पार्किंग की जगह बेकरी, स्टाफ रूम और लॉन्ड्री संचालित होती मिली। होटल लीनेज में भी अनियमितताएं सामने आईं। आशियाना स्थित होटल पिनैकल के बेसमेंट में अवैध रूप से बैंक्वेट हॉल संचालित मिला, जबकि विभूतिखंड स्थित होटल सैवी ग्रैंड में पार्किंग की जगह बैंक्वेट हॉल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चलती मिलीं। नियमों का पालन न होने पर सीलिंग का आदेश बैठक में मंडलायुक्त ने निर्देश दिए कि सभी दोषी प्रतिष्ठानों को तत्काल नोटिस जारी किए जाएं और जहां अवैध गतिविधियां संचालित हो रही हैं, उन्हें तुरंत बंद कराया जाए। यदि तय समय के भीतर नियमों का पालन नहीं किया जाता है तो संबंधित भवनों को सील किया जाएगा। उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि होटल, कोचिंग सेंटर, कंप्यूटर क्लास, अस्पताल, नर्सिंग होम, जिम और अन्य ऐसे प्रतिष्ठानों की सूची तैयार की जाए, जहां बड़ी संख्या में लोग आते हैं। विशेष रूप से बेसमेंट में संचालित गतिविधियों की जांच कर यह सुनिश्चित किया जाए कि उनका उपयोग केवल स्वीकृत उद्देश्य के लिए हो और सभी अग्नि एवं सुरक्षा मानकों का पालन किया जाए।
जयपुर में इंद्रा मार्केट में मंगलवार रात करीब 10:30 बजे एक कपड़े की दुकान में अचानक आग लग गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार आग एसी में हुए शॉर्ट सर्किट के कारण लगी। घटना की सूचना मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। थानाधिकारी (SHO) राजेश गौतम अपनी टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और तुरंत दमकल विभाग को सूचना दी। फायर ब्रिगेड की टीम ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया। समय रहते आग बुझा दिए जाने से आग विकराल रूप नहीं ले सकी और आसपास की दुकानों तक फैलने से रोक लिया गया। घटना में किसी जनहानि की सूचना नहीं है। पुलिस और दमकल विभाग की कार्रवाई से बड़ा हादसा टल गया। आग पर काबू पाने के बाद स्थानीय व्यापारियों और लोगों ने राहत की सांस ली।
डॉ.एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (AKTU) से संबद्ध इंजीनियरिंग कॉलेजों के बीटेक पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए कुल 106667 अभ्यर्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है। मंगलवार को पंजीकरण प्रक्रिया की लास्ट डेट खत्म हो गई। वहीं, पांच और दो विशेष चरणों में होने वाली काउंसिलिंग प्रक्रिया के तहत पहले चरण की च्वॉइस फिलिंग और लॉकिंग 4 जुलाई से 7 जुलाई तक होगी। जबकि सीट अलॉटमेंट 9 जुलाई को किया जाएगा। काउंसिलिंग का शेड्यूल हुआ जारी सीट कंफर्मेशन और फ्रीज-सीट फ्लोट 9 जुलाई से 12 जुलाई तक चलेगा। दूसरे चरण में च्वॉइस फिलिंग 13 जुलाई से 14 जुलाई तक होगी। सीट अलॉटमेंट 16 जुलाई को होगा। सीट कंफर्मेशन शुल्क 16 से 18 जुलाई तक जमा होगा। सीट फ्रीज और फ्लोट 16 से 18 जुलाई तक होगी। तीसरे चरण में ऑनलाइन च्वॉइस लॉकिंग 19 से 20 जुलाई तक होगी। सीट अलॉटमेंट 22 जुलाई को होगा। सीट कंफर्मेशन शुल्क एवं सीट फ्रीज एवं फ्लोट 22 से 23 जुलाई तक किया जा सकेगा। चौथे चरण में सीट अलॉटमेंट 24 जुलाई को होगा। सीट कंफर्मेशन शुल्क 24 से 26 जुलाई तक किया जाएगा। ऑनलाइन सीट विड्रा 24 से 29 जुलाई तक करने का मौका मिलेगा। पहले चार चरणों में सीट लॉक करने वालों को 27 से 29 जुलाई तक फिजिकल रिपोर्टिंग करनी होगी। बीटेक-बीफार्मा का परीक्षा परिणाम जारी AKTU के सत्र 2025-26 के सम सेमेस्टर परीक्षा के बीफार्मा के तीसरे वर्ष के छठें सेमेस्टर, बीटेक दूसरे वर्ष के चौथे सेमेस्टर और तीसरे वर्ष के छठें सेमेस्टर का परीक्षा परिणाम घोषित कर दिया गया है। परीक्षा परिणाम विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर जारी किया गया है।
ग्वालियर में सोशल मीडिया के जरिए अनजान लोगों से दोस्ती करना एक व्यक्ति को भारी पड़ गया। मुरार थाना क्षेत्र के काली माई संतर निवासी 40 वर्षीय अमित शर्मा साइबर ठगी का शिकार हो गए। ठगों ने फेसबुक पर युवती बनकर पहले उनसे दोस्ती की और फिर आकर्षक मुनाफे का लालच देकर करीब 3 लाख 87 हजार 243 रुपए की ऑनलाइन ठगी को अंजाम दे दिया। पुलिस ने मंगलवार को मामले में एफआईआर दर्ज की। पीड़ित अमित शर्मा, जो निजी कंपनी में कार्यरत हैं, ने पुलिस को बताया कि अक्टूबर 2025 में उनके फेसबुक अकाउंट पर रिद्धिमा शाह नाम की प्रोफाइल से फ्रेंड रिक्वेस्ट आई थी। शुरुआत में उन्होंने अनुरोध स्वीकार नहीं किया, लेकिन बाद में रिक्वेस्ट एक्सेप्ट करने के बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हो गई। कुछ समय बाद युवती ने खुद को निवेश से अच्छा मुनाफा कमाने वाली बताकर क्लब 21 मॉल नामक वेबसाइट पर पैसा लगाने की सलाह दी। विश्वास जीतने के लिए पहले आरोपी ने अमित को एक डेमो प्लेटफॉर्म पर निवेश कराया, जहां उन्हें लाभ भी मिला। इसके बाद उन्होंने अलग-अलग तारीखों में कई किश्तों के जरिए विभिन्न यूपीआई आईडी पर कुल 3,87,243 रुपए ट्रांसफर कर दिए। 11 दिसंबर 2025 से 24 दिसंबर 2025 के बीच यह रुपए ट्रांसफर करवाए गए। शुरुआती निवेश पर कुछ रकम वापस मिलने से उनका भरोसा और मजबूत हो गया, लेकिन बाद में लगातार पैसा जमा कराने के बावजूद न तो मुनाफा मिला और न ही मूल राशि वापस लौटी। लेकिन जब अमित ने अपने पैसे निकालने और रिद्धिमा शाह से संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्हें ब्लॉक कर दिया गया। इसके बाद उन्हें अपने साथ साइबर धोखाधड़ी होने का एहसास हुआ। पीड़ित ने तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर मुरार थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर अनजान लोगों के झांसे में आकर किसी भी ऑनलाइन निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले पूरी तरह जांच-पड़ताल अवश्य करें।
राजस्थान पुलिस मुख्यालय ने मंगलवार देर रात बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 100 पुलिस निरीक्षकों (इंस्पेक्टर) के तबादला आदेश जारी किए हैं। ये स्थानांतरण संबंधित अधिकारियों की स्वयं की प्रार्थना (Self Request) के आधार पर तत्काल प्रभाव से किए गए हैं। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (कार्मिक) बीजू जॉर्ज जोसफ की ओर से जारी आदेश के अनुसार निरीक्षकों को पुलिस आयुक्तालय जयपुर, जोधपुर, विभिन्न रेंज, सीआईडी-सीबी, एटीएस-एसओजी, एसीबी, जीआरपी, प्रशिक्षण संस्थानों और पुलिस मुख्यालय की अलग-अलग शाखाओं में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। तबादला सूची में सबसे अधिक अधिकारियों की पोस्टिंग अजमेर रेंज, भरतपुर रेंज, जयपुर रेंज, जोधपुर रेंज, उदयपुर रेंज, कोटा रेंज, आयुक्तालय जयपुर, आयुक्तालय जोधपुर और सीआईडी-सीबी में की गई है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के प्रकरण या राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम-16 (CCA Rule-16) के तहत कार्रवाई विचाराधीन या प्रस्तावित है, उन्हें फील्ड पोस्टिंग नहीं दी जाएगी। संबंधित नियंत्रण अधिकारियों को इसकी सूचना पुलिस मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा, 19 जून को जारी आदेश के तहत सतपाल सिंह का अजमेर रेंज से जयपुर पुलिस आयुक्तालय किया गया स्थानांतरण निरस्त कर दिया गया है। पुलिस मुख्यालय ने सभी संबंधित नियंत्रण अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि स्थानांतरित निरीक्षकों को तत्काल कार्यमुक्त कर नई पदस्थापना पर कार्यभार ग्रहण कराने की कार्रवाई सुनिश्चित करें। यहां देखें सूची
छतरपुर जिले की हरपालपुर थाना पुलिस ने 42 साल पुराने चोरी के मामले में फरार चल रहे एक स्थायी वारंटी को गिरफ्तार किया है। आरोपी लक्ष्मण धोबी (65) लंबे समय से दिल्ली में अपने बेटों के साथ रह रहा था। हरपालपुर लौटते ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। थाना प्रभारी राजेश सिकरवार ने बताया कि मामला वर्ष 1984 का है। उस समय हरपालपुर के तलैया रोड निवासी नारायण किशोर खरे के घर चोरी हुई थी। इस मामले में हरपालपुर थाने में अपराध क्रमांक 77/1984 के तहत धारा 457 और 380 में प्रकरण दर्ज किया गया था। घटना के बाद से था फरार आरोपी लक्ष्मण धोबी, पिता शिवदयाल धोबी, निवासी खतक्यान मोहल्ला, हरपालपुर, घटना के बाद से ही फरार था। उसके खिलाफ न्यायालय से स्थायी वारंट जारी हुआ था। पुलिस कई वर्षों से उसकी तलाश कर रही थी। मंगलवार सुबह पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपी अपने घर हरपालपुर आया हुआ है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने उसके घर पर दबिश दी और उसे गिरफ्तार कर लिया। न्यायालय ने भेजा जेल पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह लंबे समय से दिल्ली में अपने बेटों के साथ रह रहा था। उसे लगा था कि करीब 20 वर्ष की उम्र में किए गए चोरी के इस पुराने मामले को पुलिस भूल चुकी होगी। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसे नौगांव न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
मध्यप्रदेश के राजगढ़ में नगर पालिका अध्यक्ष और भाजपा नेता विनोद साहू को जिला अस्पताल की स्टाफ नर्स से मारपीट के मामले में अदालत ने दोषी करार दिया है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (जेएमएफसी) वीर सिंह धाकड़ ने उन्हें तीन माह के साधारण कारावास और एक हजार रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई। कोर्ट ने अपने फैसले में घटना के वीडियो, मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों के बयानों को अहम साक्ष्य माना। मेडिकल रिपोर्ट में स्टाफ नर्स के हाथ में चोट की पुष्टि हुई, जबकि अभियोजन ने शिकायतकर्ता, प्रत्यक्षदर्शियों, चिकित्सक और विवेचक के बयान भी पेश किए। न्हीं साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने मारपीट का आरोप साबित माना। हालांकि, अश्लील गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी के आरोप पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर साबित नहीं हुए, इसलिए कोर्ट ने उन धाराओं से बरी कर दिया। घर के सामने रेलिंग लगाने पर था विवादमामला 16 जून 2024 का है। जिला अस्पताल में पदस्थ स्टाफ नर्स मीनाक्षी कुबड़े ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक, उनके शासकीय आवास के सामने रेलिंग लगाने को लेकर विवाद हुआ था। आरोप था कि इसी विवाद के दौरान विनोद साहू उनके घर पहुंचे, अभद्र व्यवहार किया और विरोध करने पर हाथ-थप्पड़ों से मारपीट की। शिकायत में यह भी कहा गया था कि वे फावड़ा लेकर उन्हें मारने दौड़े थे। दो आरोपों में सबूत नहीं मिलने पर बरी शिकायत के आधार पर कोतवाली पुलिस ने मारपीट, गाली-गलौज और धमकी समेत विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर जांच की थी। जांच पूरी होने के बाद पुलिस ने न्यायालय में चालान पेश किया। सुनवाई के बाद अदालत ने धारा 323 के तहत मारपीट का आरोप सिद्ध मानते हुए सजा सुनाई, जबकि धारा 294 और 506 के तहत लगे आरोपों में संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। इस मामले से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… राजगढ़ नगर पालिका अध्यक्ष का VIDEOराजगढ़ में नगर पालिका अध्यक्ष विनोद साहू पर FIR दर्ज की है। एक महिला स्वास्थ्यकर्मी ने विनोद साहू पर मारपीट के आरोप लगाए थे। महिला का कहना है कि मेरे सरकारी आवास पर गेट लगाने की बात पर नगर पालिका अध्यक्ष वहां आए और मेरे साथ मारपीट की। वे फावड़ा उठाकर मुझे मारने आए। इस दौरान लोगों ने मुझे बचाया। पूरी खबर पढ़ें…
सीकर में नर्सिंग संविदाकर्मियों ने कैंडल मार्च निकाला। SK मेडिकल कॉलेज और उससे अटैच SK हाॅस्पिटल और जनाना हॉस्पिटल में हटाए गए नर्सिंग संविदाकर्मियों ने आक्रोश जताया। राजस्थान नर्सेज संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले संविदा नर्सिंगकर्मियों ने तुरंत प्लेसमेंट बहाल करने और अगली भर्तियों में एक्सपीरियंस के बोनस देने की भी मांग की है। नर्सिंग संविदाकर्मी मंगलवार देर शाम मोमबत्ती हाथों में लेकर कल्याण सर्किल पहुंचे और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए नारे लगाए। संघर्ष समिति के रामनिवास चाहर ने बताया कि 3 साल पहले राजस्थान सरकार ने सरकारी हॉस्पिटलों में प्लेसमेंट और संविदा के आधार पर नर्सिंगकर्मियों को नियुक्ति दी थी। अब बिना कारण बताए इनकी सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। कैंडल मार्च और विरोध प्रदर्शन कर नर्सिंग संविदाकर्मियों की सेवा बहाल करने और अगली सरकारी नर्सिंग ऑफिसर की भर्तियों में एक्सपीरियंस के आधार पर 10 या 20 बोनस अंक देने की मांग की गई है। पहले देखें प्रदर्शन की ये PHOTOS आत्महत्या करने वाले संविदाकर्मी के परिजन को मिले 1 करोड़ मुआवजा राजेश कुमार बाटड़ ने बताया- नर्सिंग संविदाकर्मियों ने जयपुर में आहत होकर आत्महत्या करने वाले जयपुर के नर्सिंग संविदाकर्मी दीपक के परिजनों को 1 करोड़ रुपए की मुआवजा राशि और उसकी पत्नी को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। नर्सिंगकर्मियों ने चेतावनी देते हुए कहा कि कैंडल मार्च के जरिए राज्य सरकार को जगाने की कोशिश की है। अगर समय रहते सरकार मांगों को नहीं मानती है तो संपूर्ण राजस्थान में नर्सिंग कर्मियों का चल रहा धरना प्रदर्शन उग्र आंदोलन के रूप में तेज होगा। कैंडल मार्च में बड़ी संख्या में नर्सिंग संविदाकर्मी शामिल हुए।
लुधियाना के सिविल अस्पताल में हंगामा:मेडिकल करवाने आए युवकों ने डॉक्टरों से की मारपीट
लुधियाना के सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में उस समय हंगामा हो गया, जब मेडिकल करवाने आए कुछ युवकों और ड्यूटी पर तैनात डॉक्टरों के बीच कहासुनी के बाद धक्का-मुक्की हुई। इस घटना के बाद अस्पताल में कुछ देर के लिए तनाव का माहौल बन गया। युवक गग्गी ने बताया कि वह अपने एक दोस्त के साथ मेडिकल करवाने सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में आया था। गग्गी का आरोप है कि डॉक्टरों ने उनका इलाज और मेडिकल करने के बजाय उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। उसने कहा कि जब उन्होंने मेडिकल करने को कहा तो डॉक्टरों ने सहयोग नहीं किया, जिससे विवाद बढ़ गया। दूसरी ओर, डॉ. अवतार सिंह ने युवकों के आरोपों को गलत बताया। उन्होंने कहा कि मेडिकल करवाने आए युवकों ने डॉक्टरों के साथ बदसलूकी की और धक्का-मुक्की करते हुए मारपीट की। डॉ. सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि युवकों ने अस्पताल के दफ्तर में तोड़फोड़ और हमला करने की कोशिश की, जिससे अस्पताल का कामकाज प्रभावित हुआ। घटना की सूचना अस्पताल प्रशासन और पुलिस को दी गई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए हैं। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। जांच पूरी होने के बाद ही विवाद की असल वजह और जिम्मेदार लोगों का पता चल पाएगा।
बारिश के दौरान खुले गड्ढों, नालियों और निर्माण स्थलों पर हादसों में बच्चों की मौत के मामलों को गंभीरता से लेते हुए छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने नगरीय प्रशासन विभाग, सभी जिला कलेक्टरों और नगरीय निकायों को सख्त अनुशंसा भेजी है। आयोग ने पूरे शहरी क्षेत्र में तत्काल सर्वे कराने, खुले गड्ढों को सुरक्षित करने और 7 जुलाई 2026 तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा है कि उसके सामने ऐसे कई मामले आए हैं, जिनमें कॉलोनियों के निर्माणाधीन गड्ढों, सड़कों पर खुले गड्ढों या बारिश में ढक गई नालियों में गिरने से बच्चों की जान गई है। इसे बेहद गंभीर और दुखद बताते हुए आयोग ने बाल अधिकार संरक्षण आयोग अधिनियम, 2005 की धारा 13 और 15 के तहत बच्चों के जीवन की सुरक्षा के लिए यह अनुशंसा जारी की है। क्या करने के निर्देश दिए गए आयोग ने कहा है कि सभी नगरीय क्षेत्रों में विशेष सर्वे अभियान चलाकर खुले गड्ढों, नालियों और निर्माणाधीन स्थानों की पहचान की जाए। जहां संभव हो वहां गड्ढों को तुरंत भरा जाए, अन्यथा उनके चारों ओर बैरिकेडिंग या बल्ली लगाकर सुरक्षा घेरा बनाया जाए ताकि बच्चे वहां न गिरें। निर्माण एजेंसियों की भी जिम्मेदारी तय आयोग ने सभी निर्माण एजेंसियों और आवासीय कॉलोनियों को निर्देश जारी करने की अनुशंसा की है कि निर्माण के लिए खोदे गए गड्ढों, नींव और कॉलम वाले स्थानों के चारों ओर सुरक्षा घेरा लगाना अनिवार्य किया जाए। संवेदनशील निर्माण स्थलों पर चौकीदार या सुरक्षाकर्मी तैनात करने की भी बात कही गई है। बारिश में बढ़ जाता है खतरा आयोग ने कहा है कि बारिश के दौरान स्कूल आते-जाते या खेलते समय बच्चों को पानी से भरे छोटे और बड़े गड्ढों का अंदाजा नहीं लग पाता। ऐसे में अनजाने में उनकी जान खतरे में पड़ जाती है। इसलिए इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए राज्य स्तर से निर्देश जारी किए जाएं और जिला स्तर पर इसकी नियमित समीक्षा हो। 7 जुलाई तक मांगी रिपोर्ट आयोग ने नगरीय प्रशासन विभाग, जिला कलेक्टरों और नगरीय निकायों से कहा है कि अनुशंसा पर की गई कार्रवाई की लिखित जानकारी 7 जुलाई 2026 तक आयोग को भेजी जाए।
फरीदाबाद जिले के बल्लभगढ़ इलाके में लावारिस कुत्ते के काटने के करीब 2 हफ्ते बाद 30 वर्षीय युवक की तबीयत अचानक बिगड़ गई। युवक की पहचान आदर्श नगर निवासी मोनू के रूप में हुई है। रविवार देर रात परिजन उसे उपचार के लिए बीके सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने प्राथमिक जांच के बाद उसकी हालत गंभीर पाई और बेहतर इलाज के लिए तुरंत दिल्ली के अस्पताल में रेफर कर दिया। 2 हफ्ते पहले कुत्ते ने काटा था परिजनों के अनुसार, करीब 2 हफ्ते पहले मोनू को 3 नंबर इलाके में एक लावारिस कुत्ते ने काट लिया था। घटना के बाद उसने इसे गंभीरता से नहीं लिया। न तो उसने अस्पताल जाकर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवाई और न ही किसी डॉक्टर से इलाज कराया। शुरुआत में उसे किसी प्रकार की कोई परेशानी महसूस नहीं हुई, इसलिए उसने उपचार कराने की जरूरत भी नहीं समझी। लेकिन रविवार देर रात अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। उसकी हालत लगातार खराब होती देख परिजन घबरा गए और तुरंत उसे बीके सिविल अस्पताल लेकर पहुंचे। गंभीर हालत में दिल्ली किया रेफर बीके सिविल अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर शुभम कांत ने युवक की जांच की। जांच के दौरान उसकी हालत गंभीर पाई गई। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार देने के बाद बिना समय गंवाए उसे बेहतर इलाज के लिए दिल्ली के अस्पताल में रेफर कर दिया। फिलहाल युवक का इलाज दिल्ली के अस्पताल में चल रहा है। बीके सिविल अस्पताल के इमरजेंसी विभाग के डॉक्टरों ने इस घटना के बाद लोगों से सावधानी बरतने की अपील की है। डॉक्टर ने दी ये जानकारी डॉक्टरों का कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को कुत्ता, बंदर या कोई अन्य संदिग्ध जानवर काट ले, तो सबसे पहले घाव को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए। इसके बाद बिना किसी देरी के अस्पताल पहुंचकर एंटी-रेबीज वैक्सीन लगवानी चाहिए। जरूरत पड़ने पर रेबीज इम्यूनोग्लोब्युलिन का इंजेक्शन भी लगवाना जरूरी होता है।
इंदौर में खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने सोमवार को विद्यालयों, डेयरी प्रतिष्ठानों, मसाला निर्माण इकाइयों, नमकीन उद्योगों और मिठाई दुकानों का सघन निरीक्षण किया गया। इस दौरान विभिन्न खाद्य पदार्थों के कुल 64 सैंपल जांच के लिए संग्रहित किए गए, जबकि मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब से मौके पर जांच किए गए 23 सैंपल में से 3 सैंपल अमानक पाए जाने पर तत्काल वैधानिक कार्रवाई की गई। अभियान के तहत 29 जून को खंडवा रोड स्थित क्वीन्स कॉलेज के मेस का निरीक्षण किया गया, जहां दाल, राजमा, बेसन और आटे सहित चार सैंपल लिए गए। वहीं 30 जून को चोइथराम स्कूल की जांच में स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था संतोषजनक पाई गई। यहां से राजमा, उड़द दाल, तुअर दाल, नमकीन चावल, आलू झोलदार और देसी चना मसाला सहित छह सैंपल जांच के लिए लिए गए। अधिकारियों ने कर्मचारियों को खाद्य सुरक्षा मानकों का निरंतर पालन करने के निर्देश भी दिए। खाद्य सुरक्षा विभाग को प्राप्त शिकायतों पर भी त्वरित कार्रवाई की गई। राऊ स्थित बाबा कुल्फी से काजू कतली, दूध कतली, मिल्क केक, पेड़ा और मलाई बर्फी के पांच सैंपल लिए गए। यादव डेयरी फार्म से दूध, पनीर, दही, चक्का और घी सहित छह सैंपल संग्रहित किए गए। इसी तरह शर्मा कॉस्मेटिक एवं किराना से रस्क, सेव और मिक्सचर के छह सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) की रिस्क बेस्ड इंस्पेक्शन सिस्टम (आरबीआईएस) के तहत उच्च जोखिम श्रेणी के प्रतिष्ठानों का भी निरीक्षण किया गया। कृष्ण मिल्क प्रोडक्ट, एलआईटी स्पाइसेस, कृष्णा डेयरी स्वीट्स एंड नमकीन तथा प्रकाश नमकीन उद्योग से दूध, पनीर, मावा, मसाले और नमकीन उत्पादों सहित कुल 22 सैंपल लिए गए। इसके अलावा भेरूनाथ नमकीन, सांवरिया दूध डेयरी स्वीट्स एंड एवरफ्रेश तथा गंगा नमकीन स्वीट्स एंड बेकरी से भी विभिन्न खाद्य पदार्थों के सैंपलजांच के लिए संग्रहित किए गए। सभी प्रतिष्ठानों के संचालकों को स्वच्छता, सुरक्षित भंडारण, खाद्य हैंडलर्स की व्यक्तिगत स्वच्छता, मेडिकल फिटनेस प्रमाण-पत्र, पेस्ट कंट्रोल रिकॉर्ड, पानी की नियमित जांच और वैध लाइसेंस संबंधी निर्देश दिए गए। मिलावट की पहचान संबंधी जानकारी दी खाद्य सुरक्षा प्रशासन की मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब ने महालक्ष्मी नगर स्थित प्रकाश नमकीन में खाद्य पदार्थों की ऑन-द-स्पॉट जांच कर मिलावट की पहचान संबंधी जानकारी दी। इस दौरान खाद्य कारोबारियों और आम नागरिकों को खाद्य सुरक्षा, एक्सपायरी तिथि की जांच, अखाद्य रंगों के दुष्प्रभाव और सुरक्षित खाद्य पदार्थों के उपयोग के बारे में जागरूक किया गया। संग्रहित सभी 64 सैंपलों को राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत संबंधित प्रतिष्ठानों के विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर शिवम वर्मा ने कहा कि जिले में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। विद्यालयों, डेयरियों, मसाला इकाइयों, मिठाई और नमकीन प्रतिष्ठानों का नियमित निरीक्षण जारी रहेगा तथा प्राप्त प्रत्येक शिकायत पर प्राथमिकता के आधार पर जांच कर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि खाद्य मिलावट या अस्वच्छता संबंधी शिकायतें कलेक्टर हेल्पलाइन, सीएम हेल्पलाइन या एफओएससीओएस पोर्टल के माध्यम से अवश्य दर्ज कराएं।
इंदौर में पिछले दिनों बोरिंग खुदाई के दौरान अवंतिका गैस पाइप लाइन में ब्लास्ट हो गया था। हादसे में झुलसी कंटेंट क्रिएटर गिरी राजकुमारी उर्फ जिनी झाला के मामले में सोमवार को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में सुनवाई हुई। हादसे में झुलसे लोग बॉम्बे हॉस्पिटल में एडमिट हैं, उनकी ओर से भी इंटरविनर के रूप में वकीलों ने कोर्ट में आवेदन लगाया है। जिसमें बताया है कि हॉस्पिटल से हमें जल्दी डिस्चार्ज किया जा रहा है। हमारा भी समुचित इलाज होना चाहिए ताकि इन्फेक्शन का खतरा न रहे। हादसे में घायल गोपाल मालाकार (10-15%) और सुभाष ठाकुर (10-12% झुलसे) में हैं। जबकि एक अन्य भी झुलसा है। दूसरी ओर याचिकाकर्ता की ओर से एडवोकेट श्रवण कुमार लाहोटी ने बताया कि जिनी को अहमदाबाद एयरलिफ्ट करने के बाद उसका इलाज जारी है। मामले में पुलिस ने पुलिस ने ठेकेदार और बोरिंग वाहन के ड्राइवर पर केस दर्ज किया है जबकि जिसने बोरिंग के लिए बुलवाया था उसके खिलाफ नहीं की गई है। नगर निगम पेश नहीं की रिपोर्ट सुनवाई में नगर निगम की ओर से रिपोर्ट पेश नहीं की गई लेकिन मौखिक रूप बताया गया कि इसमें निगम की किसी अधिकारी का दोष नहीं है। इस पर याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि मामले में कोई तो दोषी होगा जिसने खुदाई करवाई। दूसरी ओर घायल जिनी की ओर से एडवोकेट ने बताया कि उसकी ओर से भी एक आवेदन दिया गया था लेकिन किसी अन्य पक्ष की ओर से एफआईआर दर्ज की गई। यह भी बताया कि जब बोरिंग प्रतिबंधित था तो फिर कैसे काम शुरू हो गया और किसकी अनुमति से हुआ। इस मामले में पार्षद को भी पक्षकार बनाया है। मामले में अगली सुनवाई 3 जुलाई को होगी।
रायसेन के सेहतगंज में मंगलवार शाम तेज रफ्तार शक्ति ट्रेवल्स की बस ने बाइक सवार दो लोगों को टक्कर मार दी। घटना में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई वहीं एक घायल हो गया। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों बाइक सवार उछलकर दूर जा गिरे। वहीं, उनकी बाइक बस के पहिए के नीचे फंस गई। हादसे में रायसेन शहर के वार्ड क्रमांक 13 निवासी आलोक शर्मा (22) की मौके पर ही मौत हो गई। उनके साथ बाइक पर सवार बदामी (45) गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल को टोल प्लाजा की एंबुलेंस से जिला अस्पताल पहुंचाया गया। वहां डॉक्टरों ने आलोक शर्मा को मृत घोषित कर दिया। बदामी का इलाज जारी है। एक महीने पहले हुई थी शादी बताया जा रहा है कि आलोक शर्मा की एक माह पहले ही शादी हुई थी। वह दो बहनों के बीच इकलौते भाई थे। हादसे की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। जानकारी के अनुसार मंगलवार शाम करीब 5 बजे सागर से भोपाल जा रही शक्ति ट्रेवल्स की बस ने बाइक को टक्कर मारी। हादसे के बाद बस चालक मौके से फरार हो गया। सूचना मिलते ही खरवई चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू कराया। मृतक के शव को जिला अस्पताल की मर्चुरी में रखवाया गया है। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा।
अंबिकापुर में 2019 के चर्चित पंकज बेक कस्टोडियल डेथ मामले की 7 साल बाद दोबारा जांच होगी। अंबिकापुर जिला एवं सत्र न्यायालय के सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश महेश कुमार राज की अदालत ने सरगुजा आईजी को निर्देश दिया है कि मामले की फिर से जांच एसपी की निगरानी में कराई जाए। अगर यह संभव नहीं हो, तो पूरी जांच सीबीआई को सौंप दी जाए। जानकारी के अनुसार, अंबिकापुर कोतवाली पुलिस ने एक व्यापारी के घर हुई 13 लाख रुपए की चोरी के मामले में सूरजपुर जिले के भटगांव थाना क्षेत्र के ग्राम सलका-अधिना निवासी पंकज बेक (21 वर्ष) और एक अन्य व्यक्ति को संदिग्ध मानकर हिरासत में लिया था। 21 जुलाई 2019 को पंकज बेक साइबर सेल से फरार हो गया था। उसकी संदिग्ध परिस्थिति में एक हॉस्पिटल में फांसी पर झूलता हुआ शव मिला था। पुलिसकर्मियों पर एफआईआर, पेश की खात्मा रिपोर्ट पंकज बेक का शव मिलने के बाद परिजनों ने पुलिस पर मारपीट, प्रताड़ना और हत्या का आरोप लगाया था। इस मामले में तत्कालीन कोतवाली थाना प्रभारी विनीत दुबे सहित एसआई प्रियेश जॉन, मनीष यादव और आरक्षक दीनदयाल सिंह व लक्ष्मण राम के खिलाफ धारा 306 के तहत मामला दर्ज किया गया था। सभी को निलंबित भी कर दिया गया था। शव के पोस्टमॉर्टम और न्यायिक जांच रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी लगाना (एंटी मॉर्टम हैंगिंग) बताया गया था। पुलिस ने जांच में इसे आत्महत्या मानते हुए रिपोर्ट तैयार कर कोर्ट में पेश की। कोर्ट ने इस रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया। न्यायालय के आदेश पर फिर से होगी जांच पुलिस द्वारा पेश की गई खात्मा रिपोर्ट और अदालत के फैसले के बाद पंकज बेक की पत्नी रानू बेक ने अंबिकापुर जिला न्यायालय में पुनरीक्षण याचिका दायर की थी। इस याचिका पर सुनवाई करते हुए सप्तम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश महेश कुमार राज ने सरगुजा आईजी को निर्देश दिया है कि एसपी की निगरानी में टीम बनाकर मामले की दोबारा जांच कराई जाए। अगर जांच कराने में सक्षम नहीं हैं, तो पूरा मामला सीबीआई को सौंप दिया जाए। परिजनों को न्याय की उम्मीदअधिवक्ता राजर्वधन सिंह ने कहा कि पुलिस कस्टडी में लिए गए पंकज बेक की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। पुलिस का दावा था कि पंकज ने हिरासत से भागकर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मृतक के परिजन शुरू से ही पुलिस पर मारपीट, प्रताड़ना और हत्या का आरोप लगा रहे थे। मामले में एफआईआर दर्ज हुई थी। मामले को पुलिस अपने अनुसार दबाने व खत्म करने में सफल हो गई। पुलिस ने मामले में खात्मा पेश किया, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया। इस निर्णय के खिलाफ पुननिरीक्षण याचिका प्रस्तुत की गई थी। पुनरीक्षण याचिका लगाई थी, जिसे स्वीकार कर अदालत ने यह आदेश दिया है। इससे परिजनों को न्याय मिल सकेगा।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने उज्जैन-जावरा ग्रीनफील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे परियोजना के तहत उज्जैन के तीन गांवों की भूमि अधिग्रहण मामले में किसानों को बड़ी राहत दी है। न्यायालय ने ग्राम मंगरोला, सोडंग और झिरनिया के किसानों की याचिका पर सोमवार को सुनवाई करते हुए विवादित भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। अधिवक्ता विशाल चौहान और आशुतोष जगताप ने बताया कि भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही उचित मुआवजा और पारदर्शिता अधिनियम 2013 के अनिवार्य प्रावधानों का पालन किए बिना की गई है। याचिका में बताया गया कि किसानों ने वैकल्पिक मार्ग, शासकीय भूमि के उपयोग और इंटरचेंज डिजाइन में बदलाव को लेकर आपत्तियां और सुझाव दिए थे, जिन पर प्रशासन द्वारा विधि-सम्मत विचार नहीं किया गया। किसानों की और कोर्ट में बताया कि तीन बडे रोड इन गांवों से कनेक्ट है मुआवजा राशि के चलते किसान अपनी भूमि नहीं देना चाहते हैं। अधिवक्ता विशाल चौहान बताया कि न्यायालय को यह भी अवगत कराया कि आपत्तियों की सुनवाई सक्षम प्राधिकारी के बजाय अन्य अधिकारी द्वारा की गई, जो सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन है। प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी पाया कि किसानों को अब तक मुआवजा राशि प्राप्त नहीं हुई है और इस मामले में कई महत्वपूर्ण वैधानिक प्रश्न विचारणीय हैं। इन तर्कों और तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने भूमि के संबंध में यथा स्थिति बनाए रखने का महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश पारित किया। उच्च न्यायालय के इस फैसले से मंगरोला, सोडंग और झिरनिया के प्रभावित किसानों को एक बड़ी और महत्वपूर्ण अंतरिम राहत मिली है।
विधायक कॉलोनी के लिए नकटी की जमीन बदलने की मांग:कांग्रेस विधायक जनक ध्रुव ने CM को लिखा पत्र
विधायक कॉलोनी के लिए रायपुर के नकटी गांव में प्रस्तावित भूमि आवंटन को लेकर कांग्रेस विधायक जनक राम ध्रुव ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखा है। उन्होंने नकटी की जगह नया रायपुर में किसी अन्य उपयुक्त और केंद्रीय स्थान पर विधायक कॉलोनी के लिए जमीन आवंटित करने की मांग की है। बिंद्रानवागढ़ विधायक जनक राम ध्रुव ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा कि नकटी ग्राम पंचायत में विधायक कॉलोनी बनाने के प्रस्ताव का स्थानीय ग्रामीण लगातार विरोध कर रहे हैं। इसके बावजूद प्रशासन ग्रामीणों की जमीन खाली करा रहा है, जिससे लोग आहत हैं। उन्होंने पत्र में लिखा कि जनहित, प्रशासनिक सुविधा और विधायकों की आवासीय जरूरतों को देखते हुए सरकार को नकटी के बजाय नया रायपुर में किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर विधायक कॉलोनी के लिए भूमि आवंटित करनी चाहिए। उनका कहना है कि सैकड़ों ग्रामीणों को उजाड़कर विधायक कॉलोनी बनाना उचित नहीं होगा। क्या है पूरा मामला? रायपुर के नकटी गांव में सोमवार तड़के करीब 4 बजे प्रशासन ने बिजली आपूर्ति बंद कर बुलडोजर कार्रवाई की। इस दौरान करीब 80 मकान ढहा दिए गए। कार्रवाई के बाद कई परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग भी शामिल थे। सोमवार देर रात पूर्व विधायक विकास उपाध्याय प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे थे। उन्होंने दावा किया था कि पुनर्वास के नाम पर 12 से 14 सदस्यों वाले परिवारों को सिर्फ एक कमरा दिया जा रहा है, जहां बिजली, पेयजल और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। इस कार्रवाई से दो दिन पहले ग्रामीणों ने रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल से मुलाकात की थी। ग्रामीणों के मुताबिक सांसद ने उन्हें आश्वासन दिया था कि बारिश के दौरान कोई तोड़फोड़ नहीं होगी और प्रशासन तथा ग्रामीणों के बीच समाधान निकालने की कोशिश की जाएगी। बुलडोजर कार्रवाई के बाद मंगलवार को पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी नकटी गांव पहुंचे। उन्होंने प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर भरोसा दिलाया कि कांग्रेस पार्टी उनके न्याय और अधिकारों की लड़ाई में उनके साथ खड़ी रहेगी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को भी भेजी प्रति जनक राम ध्रुव ने अपने पत्र की प्रतिलिपि कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी सचिन पायलट, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भी भेजी है।
मंदसौर शहर के बालागंज-कालाखेत रोड स्थित माता जी मंदिर के पास स्कूटी चालक को चाकू दिखाकर धमकाने के मामले में कोतवाली पुलिस ने मंगलवार को दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। दोनों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। मामले के दो अन्य आरोपी अभी फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में भावेश पिता विनोद राठौर (19) निवासी कालाखेत गली नंबर-5 और भावेश पिता मुरलीधर अखेरिया (19) निवासी सम्राट मार्केट खाल, मंदसौर शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि घटना के समय भावेश अखेरिया मौके पर मौजूद नहीं था, लेकिन उसकी मोटरसाइकिल का इस्तेमाल आरोपियों ने किया था। इसी आधार पर उसे भी मामले में आरोपी बनाया गया। दो आरोपी अभी भी फरार मामले में केशव पिता चेतन पवार निवासी लालघाटी और निखिल पिता विनोद झंझोट निवासी मदारपुरा हरिजन बस्ती फरार हैं। पुलिस के अनुसार घटना के दौरान निखिल झंझोट ने ही चाकू लहराया था। दोनों आरोपियों की तलाश जारी है। 23 जून की रात हुई थी घटना पुलिस के अनुसार 23 जून की रात बालागंज-कालाखेत रोड स्थित माता जी मंदिर के सामने स्कूटी और बाइक की मामूली टक्कर के बाद दोनों पक्षों में विवाद हो गया। इसी दौरान बाइक सवार युवकों में से एक ने चाकू निकालकर स्कूटी चालक को दौड़ा लिया। जान बचाने के लिए स्कूटी चालक अपनी स्कूटी मौके पर छोड़कर भाग गया। वीडियो वायरल होने के बाद हुई कार्रवाई घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने आरोपियों की पहचान की और कार्रवाई की। अपराधियों में कानून का भय पैदा करने और आम लोगों में पुलिस के प्रति विश्वास कायम करने के उद्देश्य से कोतवाली पुलिस दोनों गिरफ्तार आरोपियों को थाना परिसर से पैदल न्यायालय लेकर पहुंची। न्यायालय ने दोनों को जेल भेज दिया। थाना प्रभारी बोले- किसी को बख्शा नहीं जाएगा कोतवाली थाना प्रभारी पुष्पेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि फरार दोनों आरोपियों की तलाश की जा रही है। उन्होंने कहा कि शहर में कानून व्यवस्था बिगाड़ने और इस तरह की आपराधिक हरकत करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
लखनऊ के बलरामपुर अस्पताल की डायलिसिस यूनिट में चार मशीनें खराब होने से किडनी मरीजों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। 15 मशीनों वाली यूनिट में फिलहाल केवल 11 मशीनें ही संचालित हो रही हैं। इससे रोजाना डायलिसिस कराने आने वाले मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है और उन्हें घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। बलरामपुर अस्पताल में प्रतिदिन 30 से अधिक मरीजों की डायलिसिस की जाती है। गंभीर किडनी रोगियों के लिए तय अंतराल पर डायलिसिस कराना बेहद जरूरी होता है, लेकिन मशीनों की कमी के कारण व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। अधिक मरीजों को सुविधा देने के लिए कई बार डायलिसिस की अवधि भी कम करनी पड़ रही है। दूर नहीं हुई तकनीकी खराबी अस्पताल प्रशासन के अनुसार खराब मशीनों को ठीक कराने के लिए संबंधित कंपनी को कई बार सूचना दी जा चुकी है। कंपनी के इंजीनियर जांच के लिए भी आए, लेकिन तकनीकी खराबी अब तक दूर नहीं हो सकी है। इसके चलते मरीजों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। डायलिसिस विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी मरीजों के लिए समय पर और निर्धारित अवधि तक डायलिसिस होना बेहद आवश्यक है। इलाज में देरी या अवधि कम होने से मरीजों की सेहत पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। इसलिए खराब मशीनों की जल्द मरम्मत जरूरी है। कंपनी के वेंडर से की गई कंप्लेंट अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उपलब्ध मशीनों से लगातार सेवाएं दी जा रही हैं और खराब मशीनों को जल्द से जल्द ठीक कराने के लिए संबंधित कंपनी से लगातार संपर्क किया जा रहा है।
पीके रैकवार को छतरपुर का नया जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) बनाया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने इस संबंध में मंगलवार को आदेश जारी कर दिए हैं। आदेश के अनुसार, पीके रैकवार को रायसेन के जिला शिक्षा केंद्र में जिला परियोजना अधिकारी (डीपीओ) के पद से स्थानांतरित कर सहायक संचालक शिक्षा बनाया गया है। इसके साथ ही उन्हें छतरपुर के जिला शिक्षा अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया है। अब तक जिला शिक्षा अधिकारी का प्रभार डिप्टी कलेक्टर कौशल सिंह के पास था। पीके रैकवार के पदभार ग्रहण करने के बाद जिले के शिक्षा विभाग की प्रशासनिक जिम्मेदारी उनके पास होगी। छतरपुर में पहले भी दे चुके हैं सेवाएं पीके रैकवार का छतरपुर से पुराना जुड़ाव रहा है। वे इससे पहले जिले में जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) और प्राचार्य के पद पर भी सेवाएं दे चुके हैं। जिले की शैक्षणिक व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यप्रणाली का अनुभव होने के कारण उनके कार्यकाल से शिक्षा विभाग में बेहतर समन्वय और कार्यों में गति आने की उम्मीद है।
युवक की हत्या के चार आरोपी गिरफ्तार:प्रेमिका के जेठ और उनके बेटों ने पीट-पीटकर किया था मर्डर
बाड़मेर में 6 बच्चों की मां के साथ भाग रहे युवक की पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में पुलिस ने विवाहिता के 2 जेठ और उनके बेटों को गिरफ्तार किया है। मृतक और विवाहिता के कई सालों से अवैध संबंध थे। लाठी-डंडों से हमले में सिर में चोट लगने से युवक ने मौके पर ही दम तोड़ दिया था। घटना ग्रामीण थाना क्षेत्र में शुक्रवार की सुबह करीब 5 बजे की है। पीट-पीट कर मर्डर कर दिया थापुलिस के अनुसार- सांवलोर निवासी तुलछाराम पुत्र मुकनाराम ने ग्रामीण थाना पुलिस को 26 जून को रिपोर्ट दी थी। इसमें बताया कि उसके भाई मागाराम उर्फ मांगीलाल पुत्र मुकनाराम को विवाहिता मोरू देवी ने साजिश करके बुलाया। फिर उसके परिवार के सदस्य भीमाराम पुत्र मोहनराम, रावताराम पुत्र बाबुराम, बाबुराम पुत्र देवाराम, मोहनराम पुत्र देवाराम समेत अन्य ने पीट-पीट कर मर्डर कर दिया। घटना के बाद बाड़मेर ग्रामीण थानाधिकारी विक्रमदान चारण मय पुलिस जाब्ता मौके पर पहुंचा। एफएसएल और एमओबी टीम ने मौके से सबूत जुटाए। शव को हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी में शिफ्ट करवाया गया। परिजनों की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की गई। एसपी चूनाराम जाट IPS ने बताया एएसपी नितेश आर्य, डीएसपी रमेश कुमार शर्मा के सुपरविजन में ग्रामीण थानाधिकारी विक्रम चारण के नेतृत्व में टीम बनाई। टीम ने तकनीकी और सूचना के आधार पर मर्डर के आरोपी जेठ बेटे भीमाराम पुत्र मोहनराम, रावताराम पुत्र बाबुराम और जेठ बाबुराम पुत्र देवाराम, मोहनराम पुत्र देवाराम निवासी दरुडा पुलिस थाना बाडमेर ग्रामीण को गिरफतार करने में सफलता हासिल की। आरोपियो ने पूछताछ में अवैध संबंधों को लेकर मारपीट कर हत्या करना स्वीकार किया है। प्रकरण में जांच जारी है। -------------------------------------- इससे जुड़ी खबर पढ़ें… शादीशुदा महिला के साथ भाग रहे प्रेमी की हत्या:ससुराल वालों ने पकड़कर पीटा, 3 साल से चल रहा था लव अफेयर बाड़मेर में 6 बच्चों की मां के साथ भाग रहे युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी। दोनों के बीच 3 साल से अवैध संबंध थे। लाठी-डंडों से हमले में सिर में चोट लगने से युवक ने मौके पर दम तोड़ दिया। घटना के बाद आरोपी फरार हो गए। (पढ़ें पूरी खबर)
भारत आज भी दुनिया के सबसे समृद्ध भाषाई देशों में शामिल है। देश में 1,150 से अधिक भाषाएं और बोलियां आज भी जीवित हैं, जो हमारी सांस्कृतिक विविधता, ज्ञान परंपरा और सामाजिक इतिहास की अमूल्य धरोहर हैं। यह बात प्रख्यात भाषाविद् एवं साहित्यकार डॉ. गणेश देवी ने मंगलवार को गांधी भवन, भोपाल में आयोजित संगोष्ठी में कही। 'हम, सब ओर' और गांधी भवन की संयुक्त पहल पर आयोजित इस संगोष्ठी में डॉ. देवी ने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि किसी समाज की सभ्यता, संस्कृति, इतिहास, लोकज्ञान, जीवन-दृष्टि और सामूहिक स्मृतियों की संवाहक होती है। इसलिए भाषाओं का संरक्षण केवल साहित्यिक दायित्व नहीं, बल्कि सांस्कृतिक और मानवीय जिम्मेदारी भी है। भाषाई इतिहास को विभिन्न कालखंडों में समझा जा सकता है उन्होंने भारतीय भाषाओं के ऐतिहासिक विकास पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि भारत के भाषाई इतिहास को विभिन्न कालखंडों में समझा जा सकता है। उन्होंने संस्कृत के प्रभाव वाले दौर, उसके बाद फारसी के प्रभाव तथा आधुनिक समय में अंग्रेज़ी के प्रभाव वाले काल की चर्चा करते हुए बताया कि इन सभी चरणों ने भारतीय भाषाओं की शब्दावली, अभिव्यक्ति और स्वरूप को प्रभावित किया है। इसके बावजूद भारतीय भाषाओं ने अपनी मौलिकता और सांस्कृतिक पहचान को आज तक सुरक्षित रखा है। डॉ. देवी ने कहा कि भारतीय भाषाओं का भविष्य तभी सुरक्षित रह सकता है, जब शिक्षा, प्रशासन, न्याय, विज्ञान और तकनीकी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में मातृभाषाओं और भारतीय भाषाओं को सम्मानजनक स्थान मिले। उन्होंने कहा कि भाषाई विविधता लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्तियों में से एक है। किसी भाषा का समाप्त होना केवल शब्दों का लुप्त होना नहीं, बल्कि एक संपूर्ण सांस्कृतिक संसार का खत्म हो जाना है। उन्होंने युवाओं से भारतीय भाषाओं और लोकभाषाओं के अध्ययन, दस्तावेजीकरण तथा संरक्षण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उनका कहना था कि भारत की भाषाई विविधता हमारी सबसे बड़ी सांस्कृतिक पूंजी है, जिसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। संगोष्ठी में उपस्थित विद्वानों, शोधार्थियों, साहित्यकारों और विद्यार्थियों ने भी भारतीय भाषाओं के संरक्षण, संवर्धन और भाषा आधारित शोध को समय की आवश्यकता बताया। इस दौरान भाषाई विरासत, लोकभाषाओं के संरक्षण और भारतीय ज्ञान परंपरा जैसे विषयों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम का संचालन राकेश दीवान ने किया। गांधी भवन के सचिव अंकित मिश्रा ने अतिथियों का सूत की माला पहनाकर स्वागत किया। रघुराज सिंह ने डॉ. गणेश देवी का परिचय प्रस्तुत किया, जबकि अंत में पीयूष बबेले ने आभार व्यक्त किया।
भारतीय जनता पार्टी कानपुर उत्तर ने सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र का बूथ अध्यक्ष सम्मेलन रामबाग स्थित एक गेस्ट हाउस में किया। सम्मेलन में संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत बनाने और आगामी संगठनात्मक कार्यक्रमों की रणनीति पर चर्चा की गई। सीसामऊ विधानसभा से प्रत्याशी सुरेश अवस्थी ने कहा कि जिस तरह से एसआईआर के बाद बिहार और बंगाल में बड़ी जीत मिली है, उसी तरह से यूपी में भी 2027 विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत मिलेगी। उन्होंने कहा कि इसबार सीसामऊ, आर्यनगर और कैंट तीनों ही सीट पर भी बीजेपी जीत हासिल करेगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा कानपुर उत्तर के जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित ने की, जबकि संयोजन पूर्व विधानसभा प्रत्याशी सुरेश अवस्थी ने किया। मंगलवार को दोपहर 3.30 बजे शुरू हुआ, जिसका समापन शाम 6 बजे हुआ। सम्मेलन में सीसामऊ विधानसभा क्षेत्र के 275 बूथ अध्यक्ष शामिल हुए। जिलाध्यक्ष अनिल दीक्षित ने कहा कि बूथ अध्यक्ष संगठन की सबसे महत्वपूर्ण इकाई हैं और पार्टी की नीतियों एवं योजनाओं को जनता तक पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका है। उन्होंने बूथ अध्यक्षों से अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित जनसंपर्क, सक्रियता और संगठनात्मक अनुशासन बनाए रखने का आह्वान किया। साथ ही संगठन विस्तार और आगामी अभियानों को सफल बनाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम करने की अपील की। कार्यक्रम संयोजक सुरेश अवस्थी ने कहा कि बूथ स्तर पर मजबूत संगठन ही चुनावी सफलता की नींव होता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से एकजुट होकर संगठन को और अधिक सशक्त बनाने का आह्वान किया। भाजपा जिला मीडिया प्रभारी अनुराग शर्मा ने बताया कि सम्मेलन में सीसामऊ विधानसभा के 275 बूथ अध्यक्षों ने भाग लिया। सम्मेलन में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने संगठन को मजबूत बनाने के लिए पूरी निष्ठा से कार्य करने का संकल्प भी लिया।
संभल प्रशासन ने 68 तीर्थों और 19 कूपों में शामिल सुशीला तीर्थ तक पहुंच मार्ग बनाने के लिए 12 लोगों से 420 वर्ग मीटर भूमि का अधिग्रहण किया है। इस भूमि के लिए कुल 10.80 लाख रुपये का भुगतान किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार के धर्मार्थ कार्य विकास विभाग के पक्ष में विक्रय होने के कारण इस बैनामे पर देय स्टांप शुल्क शून्य रहा। यह प्रक्रिया मंगलवार शाम 7 बजे शुरू हुई, जब नायब तहसीलदार उप निबंधक कार्यालय पहुंचे। रात 8:40 बजे तक भूमि के बैनामे की कार्रवाई पूरी कर ली गई। उक्त अधिग्रहण संभल कोतवाली कस्बा क्षेत्र के मोहल्ला कोट पूर्वी स्थित उप निबंधक कार्यालय में संपन्न हुआ। सुशीला तीर्थ, जो लगभग सात-आठ बीघा भूमि में फैला हुआ है, वर्तमान में जलमग्न है और वहां तक पहुंचने के लिए कोई सीधा रास्ता नहीं था। 420 वर्ग मीटर भूमि के अधिग्रहण से अब तीर्थ तक पहुंच मार्ग बनाया जा सकेगा। प्रशासन ने इससे पहले भी संभल में दो अन्य तीर्थों के लिए भूमि का बैनामा कराया है। तहसील संभल के गांव अजीजपुर असदपुर (बाहर चुंगी) में गाटा संख्या 214 व में 0.042 हेक्टेयर भूमि खरीदी गई है। जिन 12 लोगों ने अपनी भूमि का बैनामा किया है, उनमें हयातनगर कस्बा निवासी राजाराम, लटूरी सिंह पुत्र रामौतार, सुनीता देवी पत्नी राजीव कुमार, सोमपाल पुत्र परमी, गंगा देई पत्नी राम सिंह, विजेंद्र पुत्र राम सिंह, जीराज पुत्र स्वरम, यशपाल, जसबंत पुत्र सियाराम, नीतू पत्नी विजयपाल, मोंटी कुमार पुत्र विजयपाल और 15 वर्षीय सोंटी (संरक्षिका मां नीतू पत्नी विजयपाल) शामिल हैं। नायब तहसीलदार दीपक कुमार जुरैल ने बताया कि ग्राम अजीजपुर हसनपुर में गाटा संख्या 214 में सुशीला तीर्थ के नाम से यह बैनामा आज कराया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दो बैनामे पहले ही हो चुके हैं और दो अन्य होने बाकी हैं, इस प्रकार कुल पांच बैनामे किए जाने हैं। आज लगभग 420 वर्ग मीटर भूमि का बैनामा हुआ है। हयातनगर कस्बा निवासी राजाराम ने बताया कि उन्होंने तीर्थ के लिए अपने हिस्से की कुछ भूमि का बैनामा किया है। कुल 12 लोग बैनामा करने के लिए कार्यालय आए थे।
सरकारी स्कूलों में स्टूडेंट्स और कार्मिकों की शाला दर्पण पोर्टल पर शत प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य करके शिक्षा विभाग राजस्थान ने सख्ती बढ़ा दी है। इसके लिए राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद,जयपुर की अतिरिक्त राज्य परियोजना निदेशक सीमा शर्मा ने इसके आदेश गत दिनों जारी किए है। आदेश में राज्य के सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों और कार्मिकों की शाला दर्पण पोर्टल पर शत प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य किया है। इसके लिए टोंक समेत राज्य के समस्त मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों एवं पदेन जिला परियोजना समन्वयक समसा को आदेशित किया है। आदेश में कहा गया है कि एनसीईआरटी के अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय विद्या समीक्षा केंद्र (आरवीएसके) के लिए राज्यभर के सभी विद्यालयों की उपस्थिति संबंधी जानकारी शाला दर्पण पोर्टल से संकलित की जाती है। हाल ही में किए गए डेटा विश्लेषण में सामने आया है कि कई विद्यालयों में विद्यार्थियों और कार्मिकों की उपस्थिति नियमित रूप से दर्ज नहीं की जा रही है। इसके कारण राजस्थान एवं राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्ध आंकड़े अपूर्ण और असंगत हो रहे हैं। नई व्यवस्था से कार्मिक और स्टूडेंट लापरवाही नहीं कर पाएंगे। हर कार्य दिवस पर ऑनलाइन उपस्थिति अनिवार्य विभागीय निर्देशों के अनुसार प्रत्येक कार्य दिवस पर सभी विद्यार्थियों और कार्मिकों की उपस्थिति शाला दर्पण पोर्टल पर दर्ज करनी अनिवार्य होगी। किसी भी कर्मचारी, कक्षा या सेक्शन की उपस्थिति प्रविष्टि लंबित नहीं छोड़ी जा सकेगी। साथ ही अनुपस्थित एवं अवकाश पर रहने वाले विद्यार्थियों और कार्मिकों की जानकारी भी सही एवं नवीन (अपडेट) उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य होगा। जिला स्तर पर होगी नियमित समीक्षा राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद ने जिला कार्यालयों को उपस्थिति डेटा की नियमित समीक्षा करने और इसकी प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि विद्यालय स्तर पर उपस्थिति प्रविष्टियां निर्धारित समयावधि में पूरी कर ली जाएं। परिषद ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि उपस्थिति डेटा के संधारण में लापरवाही, गलत प्रविष्टि अथवा नियमित अपडेट नहीं किए जाने की स्थिति में संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी स्वयं उत्तरदायी होंगे। लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई होगी। शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष बोले- निर्णय सहीशिक्षक संघ रेसटा,राजस्थान के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद ने बताया कि राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद जयपुर द्वारा राज्य के सभी सरकारी स्कूलों में शाला दर्पण पोर्टल पर विद्यार्थियों एवं कार्मिकों की शत प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य करने का आदेश जारी किया है, जो स्वागत योग्य निर्णय है। इससे शाला दर्पण पर सटीक और अपडेट उपस्थिति दर्ज होने से विद्यालयों की निगरानी व्यवस्था मजबूत होगी, विद्यार्थियों की वास्तविक उपस्थिति का आकलन संभव होगा तथा राष्ट्रीय स्तर की शैक्षिक मॉनिटरिंग प्रणालियों को विश्वसनीय डेटा उपलब्ध कराया जा सकेगा। इससे शिक्षा योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन और नीति निर्धारण में भी मदद मिलेगी।
कुशीनगर में बौद्ध पर्यटन को नई पहचान देने वाली महत्वाकांक्षी बुद्ध थीम पार्क परियोजना पूरी हो गई है। उत्तर प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (यूपीएसटीडीसी) ने गौतम बुद्ध संग्रहालय के समीप लगभग 11.32 करोड़ रुपए की लागत से विकसित इस पार्क में आधुनिक तकनीक और आध्यात्मिक अनुभव का अनूठा संगम तैयार किया है। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि पार्क का उद्घाटन जल्द किया जाएगा। बुद्ध थीम पार्क को केवल पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि बौद्ध ज्ञान और आध्यात्मिक अनुभव केंद्र के रूप में विकसित किया गया है। यहां आने वाले देश-विदेश के पर्यटक भगवान बुद्ध के जीवन, उनके उपदेशों और बौद्ध दर्शन को आधुनिक एवं संवादात्मक माध्यमों से जान सकेंगे। पार्क का सबसे बड़ा आकर्षण 40 फीट ऊंची बुद्ध वॉल पर आयोजित होने वाला लाइट एंड साउंड शो होगा। इसके अलावा 3डी झांकियां, डिजिटल गैलरियां, बोधि वृक्ष, आठ तथागत स्तूप, भगवान बुद्ध की आठ विशाल मुद्राएं, तिब्बती शैली के स्तूप, प्रेयर व्हील्स और ट्रेवलॉग इंस्टॉलेशन भी विकसित किए गए हैं, जो आगंतुकों को भगवान बुद्ध के जीवन की यात्रा से रूबरू कराएंगे। पार्क में प्राचीन बौद्ध तोरणों से प्रेरित भव्य प्रवेश द्वार, बुद्ध के जीवन पर आधारित भित्ति चित्र, सांस्कृतिक थीम वाला बच्चों का खेल क्षेत्र और स्मारिका केंद्र भी बनाया गया है। स्मारिका केंद्र पर बौद्ध हस्तशिल्प के साथ स्थानीय कारीगरों के उत्पाद भी उपलब्ध होंगे। पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि बुद्ध थीम पार्क का निर्माण पूरा होना कुशीनगर में बौद्ध पर्यटन को नई ऊंचाई देगा। उनके अनुसार यह परियोजना आध्यात्मिकता, कला, संस्कृति और आधुनिक तकनीक का अनूठा संगम है, जो दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करेगी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में उत्तर प्रदेश के बौद्ध सर्किट में करीब 82 लाख पर्यटक पहुंचे, जिनमें 4.4 लाख से अधिक विदेशी पर्यटक शामिल थे। माना जा रहा है कि बुद्ध थीम पार्क कुशीनगर की वैश्विक पहचान को और मजबूत करने के साथ उत्तर प्रदेश को विश्वस्तरीय बौद्ध पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
अयोध्या में किसान महिला की अनशन की चेतावनी:रास्ता बंद होने और तहसील प्रशासन पर आदेश न मानने का आरोप
अयोध्या के मिल्कीपुर तहसील क्षेत्र में गहनाग गांव की निवासी रामसांवरी ने सरकारी रास्ते को अवरुद्ध किए जाने और शिकायतों पर कार्रवाई न होने से नाराज होकर अनशन पर बैठने की चेतावनी दी है। उन्होंने 1 जुलाई को जिलाधिकारी कार्यालय के सामने अन्न-जल त्यागने की बात कही है। रामसांवरी का आरोप है कि 17 नवंबर 2023 को गांव के कुछ लोगों ने उनके घर तक जाने वाले सार्वजनिक मार्ग पर एक पक्की दीवार बना दी। इससे आवागमन पूरी तरह बाधित हो गया है। इसके अतिरिक्त, जल निकासी की नाली भी टूट गई, जिससे गंदा पानी उनके घर के दरवाजे पर जमा होने लगा है। इस समस्या के समाधान के लिए उन्होंने उपजिलाधिकारी मिल्कीपुर, तहसीलदार मिल्कीपुर और थाना खंडासा में कई बार शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने उच्च न्यायालय लखनऊ का रुख किया। न्यायालय ने तहसीलदार मिल्कीपुर को 26 जून 2024 तक, आठ सप्ताह के भीतर, 'ग्राम सभा बनाम हरिपाल उर्फ दुखहरन आदि' मामले में अंतिम निर्णय देने का आदेश दिया था। हालांकि, यह प्रक्रिया अभी भी लंबित है। रामसांवरी का आरोप है कि संबंधित तहसीलदार न तो उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन कर रहे हैं और न ही जिलाधिकारी के निर्देशों का। उन्होंने यह भी बताया कि पूर्व जिलाधिकारियों द्वारा दिए गए निर्देश भी अनसुने कर दिए गए हैं। पीड़िता ने जिलाधिकारी अयोध्या को एक ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि 1 जुलाई को इस मामले की पत्रावली मंगवाकर स्वयं अवलोकन किया जाए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे अन्न-जल त्यागकर अनशन करने के लिए विवश होंगी। यह जानकारी रामसवारी ने 30 जून मंगलवार की शाम को दी।
सहारनपुर में बजाज शुगर मिल गांगनौली से बकाया गन्ना भुगतान की मांग को लेकर भारतीय किसान यूनियन (रक्षक) ने मंगलवार सुबह करीब 11 बजे जिला गन्ना अधिकारी (डीएसओ) कार्यालय पर प्रदर्शन किया। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी वीरेंद्र सिंह ओहलान के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान ट्रैक्टरों के साथ कार्यालय पहुंचे और धरने पर बैठ गए। किसानों ने मिल प्रशासन पर भुगतान में देरी और आर्थिक शोषण का आरोप लगाया। किसानों का कहना है कि मिल द्वारा पिछले पेराई सत्र का पूरा भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि छह महीने बीत जाने के बाद भी किसानों को केवल 21 दिन का ही भुगतान मिला है। इस भुगतान में देरी के कारण किसानों को बच्चों की फीस, खाद-बीज और खेती के अन्य खर्चों को पूरा करने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। भारतीय किसान यूनियन (रक्षक) के पदाधिकारियों ने जिला गन्ना अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा। इसमें बजाज शुगर मिल गांगनौली को तत्काल किसानों का पूरा बकाया गन्ना मूल्य भुगतान करने के निर्देश देने की मांग की गई। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द भुगतान नहीं कराया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। धरने के दौरान संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष चौधरी वीरेंद्र सिंह ओहलान ने कहा कि किसान लंबे समय से अपने हक के पैसे के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मिल प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन नहीं कर रहा है, जिससे किसानों को समय पर भुगतान नहीं मिल पा रहा है और वे आर्थिक परेशानियों से जूझ रहे हैं। प्रदर्शनकारी किसानों ने विरोध जताते हुए जिला गन्ना अधिकारी को अपने बीच बैठाया। किसानों ने स्पष्ट किया कि जब तक भुगतान को लेकर कोई ठोस आश्वासन नहीं मिलता, उनका आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने प्रशासन से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर किसानों की समस्या का समाधान कराने की मांग की। मंगलवार शाम 4:30 बजे तक भी किसानों का धरना जारी था। इस धरने में प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र कुमार, मंडल अध्यक्ष अमित ओहलान, बिलू त्यागी सहित बड़ी संख्या में किसान और संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे।
कानपुर सेंट्रल जीआरपी ने 'ऑपरेशन दहन' के तहत बड़ी कार्रवाई की है। मंगलवार को न्यायालय के आदेश पर 63 किलो 315 ग्राम मादक पदार्थ नष्ट किया गया। इसकी अनुमानित कीमत 50 लाख रुपये से अधिक बताई जा रही है। जीआरपी कानपुर सेंट्रल के प्रभारी निरीक्षक ओम नारायण सिंह ने बताया कि यह कार्रवाई एनडीपीएस एक्ट के चार मामलों से संबंधित थी। इन मामलों में 1 मार्च 2026 से 30 जून 2026 के बीच जब्त मादक पदार्थों के संबंध में कोई अपील, विचारण या पुनरीक्षण लंबित नहीं था। विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट, कानपुर नगर के आदेश पर नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (जब्ती, भंडारण, नमूनाकरण एवं निपटान) नियम-2022 के तहत निस्तारण की प्रक्रिया पूरी की गई। मंगलवार को गठित समिति की मौजूदगी में 63 किलो 315 ग्राम मादक पदार्थ को नियमानुसार नष्ट किया गया। इस दौरान अपर पुलिस उपायुक्त मुख्यालय स्नेहा तिवारी, डिस्पोजल कमेटी के सदस्य, जीआरपी, मालखाना मोहर्रिर और भैरो घाट स्थित विद्युत शवदाह गृह के कर्मचारी उपस्थित रहे। जीआरपी प्रभारी ओमनारायण सिंह ने बताया कि 'ऑपरेशन दहन' का मुख्य उद्देश्य जब्त मादक पदार्थों का समयबद्ध और पारदर्शी निस्तारण सुनिश्चित करना है। इससे उनका दोबारा दुरुपयोग रोका जा सकेगा और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई जारी रहेगी।
जोधपुर में बिजली लाइनों के रखरखाव के चलते 15 से अधिक कॉलोनियों में बिजली बंद रहेगी। कई इलाकों में तीन से पांच घंटे तक बिजली कटौती (पावरकट) रहेगी, जिसके बाद बिजली आपूर्ति सुचारू कर दी जाएगी। सुबह 7:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक यहां रहेगी बिजली बंद: देवलिया फीडर, गुटखा फैक्ट्री के पास, चुन्नीलाल जी की प्याऊ, देवलिया गांव, बावरला गांव, सारण नगर (बावरला), प्रताप नगर (बावरला), शगुन रिसॉर्ट, राज इंजीनियरिंग कॉलेज, एसएलबीएस कॉलेज और 16 मील के आसपास का क्षेत्र। सुबह 7:00 बजे से 10:00 बजे तक यहां रहेगा पावरकट: खोखरिया, गुजरावास, बोरावास तथा 11 केवी खोखरिया फीडर से जुड़े सभी गांव।
बहराइच में नहर में कूदी युवती का शव मिला:20 घंटे तक चला रेस्क्यू, 7 किमी दूर से बरामद किया
बहराइच जिले के मोतीपुर थाना क्षेत्र में एक युवक और युवती ने सोमवार को गिरजापुरी बैराज से निकली लिंक नहर में छलांग लगा दी थी। मौके पर मौजूद राहगीरों ने युवक को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन युवती तेज बहाव में बह गई। नहर से सुरक्षित निकाले गए युवक की पहचान मिहींपुरवा निवासी शेख शरीफ के रूप में हुई। युवती की पहचान भी स्थापित की गई थी, लेकिन उसका नाम अभी उपलब्ध नहीं है। सोमवार देर शाम तक गोताखोरों की कड़ी मशक्कत के बाद भी युवती का कोई सुराग नहीं मिल सका। रेस्क्यू टीम को बचाव कार्य में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। नहर में पानी का बहाव बेहद तेज था और आसपास मगरमच्छों की मौजूदगी ने भी जोखिम बढ़ा दिया था। मंगलवार शाम को युवती का शव घटनास्थल से लगभग सात किलोमीटर दूर बरामद हुआ। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। थाना प्रभारी आनंद चौरसिया ने बताया कि युवती का शव बरामद कर लिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
भोपाल में कुक से कथित मारपीट के मामले में FIR दर्ज होने के बाद पहली बार IPL क्रिकेटर शशांक सिंह सामने आए हैं। उन्होंने अपने और परिवार पर लगे सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि युवक को न तो बंधक बनाया गया न उसका मोबाइल छीना गया और न ही उसके साथ मारपीट हुई। शशांक का दावा है कि युवक कुक बनकर आया था, लेकिन उसे खाना बनाना ही नहीं आता था। वह घर के अलग-अलग हिस्सों में जाकर फोटो और वीडियो बना रहा था, जिससे परिवार को चोरी की आशंका हुई। भोपाल के रातीबड़ थाने में दर्ज FIR के बाद मीडिया से बातचीत में शशांक ने कहा कि यह पूरा मामला उनके परिवार को बदनाम करने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि यदि उस समय पुलिस को बुला लिया होता तो आज यह स्थिति नहीं बनती। 'दो दिन के लिए आया था, किसी को बंधक क्यों बनाएंगे' शशांक ने कहा, वह सिर्फ दो दिन के लिए आया था। ऐसे में किसी को बंधक बनाने का सवाल ही नहीं उठता। वह यहां आराम से रह रहा था, खाना खा रहा था, वीडियो और फोटो बना रहा था। उनके मुताबिक युवक ने खुद को कुक बताया था, लेकिन वह खाना बनाने में सक्षम नहीं था। अगर कोई बावर्ची बनकर आया है तो उसे घर के मालिक के कमरे में जाकर निजी सामान की फोटो और वीडियो लेने की क्या जरूरत है? 'घर की प्राइवेट तस्वीरें थीं, इसलिए डिलीट कराईं' मोबाइल छीनने के आरोप पर शशांक ने कहा कि युवक का फोन नहीं छीना गया। उन्होंने बताया कि उसके मोबाइल में घर के निजी हिस्सों और सामान की तस्वीरें एवं वीडियो थे, जिन्हें उनकी मां ने डिलीट करवाया था। उन्होंने दावा किया कि उनके पिता ने युवक का वीडियो भी बनाया था, जिसमें वह अपने मोबाइल से किसी को कॉल करने की कोशिश कर रहा है। शशांक ने कहा, अगर मोबाइल हमारे पास होता तो वह कॉल कैसे करता? 'चोरी का शक था, एक चांदी के गणपति भी नहीं मिल रहे' शशांक ने कहा कि परिवार को युवक की गतिविधियों पर संदेह हुआ था। उनके मुताबिक, अब तक की जांच में घर से कोई बड़ी चोरी सामने नहीं आई है, लेकिन चांदी के गणपति की एक प्रतिमा नहीं मिल रही है। परिवार अभी भी घर का सामान जांच रहा है। उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है युवक चोरी के इरादे से आया था, हालांकि इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा। 'बहन ने 100 नंबर पर कॉल करने को कहा, मैंने जाने दिया' क्रिकेटर ने बताया कि जब युवक की गतिविधियां संदिग्ध लगीं तो उनकी बहन ने पुलिस बुलाने की सलाह दी थी। हालांकि युवक ने अपनी मां की बीमारी का हवाला देते हुए खुद को गरीब बताया और जाने देने की गुहार लगाई। शशांक ने कहा, मैं भावुक हो गया और मैंने ही कहा कि उसे जाने दो। अब महसूस होता है कि वहीं पुलिस कार्रवाई कर लेनी चाहिए थी। यह हमारी सबसे बड़ी गलती थी। 'बाद में बैकग्राउंड चेक कराया, नशे की जानकारी मिली' शशांक के अनुसार युवक उनके पिता के परिचित के जरिए रीवा से आया था। परिवार ने भरोसे के आधार पर उसे काम पर रख लिया था। उन्होंने कहा कि बाद में बैकग्राउंड की जांच कराई गई, जिसमें उसके नशा करने संबंधी जानकारी मिली। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है और इसकी जांच एजेंसियां ही कर सकती हैं। 'मेरी छवि खराब करने की कोशिश हो रही' मारपीट और गाली-गलौज के आरोपों को नकारते हुए शशांक ने कहा कि जो लोग उन्हें जानते हैं, वे उनके स्वभाव से परिचित हैं। उन्होंने कहा, हाथापाई तो बहुत दूर की बात है, मैं किसी से गाली-गलौज भी नहीं करता। हो सकता है काम नहीं मिलने या किसी अन्य वजह से मेरे नाम का इस्तेमाल कर मुझे बदनाम करने की कोशिश की जा रही हो। मामला क्या है? रीवा निवासी विपेंद्र सिंह तोमर ने आरोप लगाया है कि उन्हें कुक के रूप में भोपाल बुलाया गया था। खाना पसंद नहीं आने पर उनके साथ गाली-गलौज की गई, मोबाइल छीन लिया गया, जबरन काम कराया गया और बाद में मारपीट की गई। उनकी शिकायत पर रातीबड़ थाना पुलिस ने शशांक सिंह, उनके पिता रिटायर्ड स्पेशल डीजी शैलेष सिंह और एक अन्य कर्मचारी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की विवेचना जारी है। फिलहाल शिकायतकर्ता और आरोपी पक्ष के दावे अलग-अलग हैं। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। ये खबर भी पढ़ें IPL क्रिकेटर शशांक, उनके IPS पिता पर भोपाल में FIR पीड़ित विपेंद्र सिंह तोमर का आरोप है कि खाना पसंद नहीं आने पर उसके साथ गाली-गलौज की गई। जब उसने काम छोड़ने की बात कही तो मोबाइल छीन लिया गया, जबरन काम कराया गया और बाद में शैलेष सिंह, शशांक और उनके ड्राइवर ने मिलकर मारपीट की। घटना के बाद युवक ने रोते हुए अपना VIDEO भी जारी किया है। इसके बाद भोपाल के रातीबड़ थाना पुलिस ने सोमवार को FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। वहीं इस मामले में शैलेष सिंह का कहना है कि वह बदतमीजी कर रहा था। पढ़ें पूरी खबर
शिष्या के मामा ने पुजारी को मौत के घाट उतारा:आपत्तिजनक हालत में देखा था, युवती गुमराह करती रही
बांदा के शहर कोतवाली क्षेत्र के तिंदवारा गांव स्थित मंदिर के पुजारी सच्चिदानंद महाराज हत्याकांड का पुलिस ने घटना के 10 दिन बाद खुलासा कर दिया है। पुलिस के अनुसार, पुजारी की हत्या उनकी शिष्या के मामा ने की थी। आरोपी ने अपनी भांजी (शिष्या) को पुजारी के साथ आपत्तिजनक स्थिति में देखने के बाद आवेश में आकर डंडे से हमला कर दिया था। बांदा पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल ने बताया कि 20-21 जून की रात तिंदवारा गांव के मंदिर की छत पर सो रहे पुजारी सच्चिदानंद महाराज पर डंडे से हमला किया गया था। गंभीर रूप से घायल पुजारी को उपचार के लिए निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना के बाद पुजारी के भाई चिंतामणि की तहरीर पर शहर कोतवाली में हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया था। जांच के दौरान पुलिस ने शुरू से ही पुजारी की शिष्या से पूछताछ की। हालांकि उसने पुलिस को लगातार भ्रामक जानकारी दी और घटना को दूसरी दिशा में मोड़ने का प्रयास किया। लेकिन पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों, मोबाइल लोकेशन, बीटीएस डेटा और अन्य तकनीकी जांच के आधार पर रोशनी के मामा रामविशाल को चिन्हित कर गिरफ्तार कर लिया। उसकी निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त डंडा भी बरामद कर लिया गया। पूछताछ में आरोपी रामविशाल ने बताया कि उसकी भांजी रोशनी पहले बीमार रहती थी, इसलिए वह उसे इलाज और धार्मिक अनुष्ठान के लिए पुजारी सच्चिदानंद महाराज के आश्रम लाया था। पिछले दो-तीन वर्षों से रोशनी आश्रम आती-जाती रही और स्वास्थ्य में सुधार के बाद करीब नौ माह से वहीं रह रही थी। इस दौरान पुजारी और रोशनी के संबंधों को लेकर गांव में चर्चाएं होने लगी थीं। एसपी के अनुसार, 20 जून की रात रामविशाल पहले करीब 10 बजे आश्रम पहुंचा था, लेकिन उस समय सब सामान्य मिला। बाद में बच्चे का इलाज कराने जिला अस्पताल जाने के बाद वह रात करीब एक बजे दोबारा आश्रम पहुंचा। वहां उसने रोशनी को पुजारी के साथ सोते हुए देखा। इससे वह गुस्से में आ गया और डंडे से ताबड़तोड़ हमला कर दिया, जिससे पुजारी गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उनकी मौत हो गई। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
सहारनपुर में अवैध खनन रोकने के अभियान के तहत चिलकाना पुलिस ने मंगलवार दोपहर बड़ी कार्रवाई की। पुलिस ने पठेड़-टोडरपुर मार्ग पर बिना रॉयल्टी खनन सामग्री ले जा रहे पांच वाहनों को जब्त किया। इनमें चार ट्रक और एक ट्रैक्टर शामिल हैं। सभी वाहनों को सीज कर थाना परिसर में खड़ा करा दिया गया है। सीओ बेहट प्रिया यादव ने मंगलवार शाम 5:30 बजे बताया कि क्षेत्र में अवैध खनन सामग्री के परिवहन की शिकायतों के बाद वाहनों की निगरानी की जा रही थी। इसी दौरान पुलिस टीम ने संदिग्ध वाहनों को रोककर जांच की। जांच में वाहनों में खनन सामग्री मिली, लेकिन चालक वैध दस्तावेज और रॉयल्टी नहीं दिखा सके। इसके बाद पुलिस ने पांचों वाहनों को कब्जे में ले लिया। पकड़े गए वाहनों में दो डंपर नंबर प्लेट वाले थे, जबकि तीन वाहन बिना नंबर प्लेट के मिले। पुलिस ने मामले की जानकारी संबंधित विभाग को भेज दी है, ताकि आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा सके। जब्त किए गए वाहनों में डंपर संख्या UK 12-CA-3939, डंपर संख्या UK 08-CB-5250, एक महिंद्रा अर्जुन ट्रैक्टर (बिना नंबर प्लेट) और दो अन्य बिना नंबर प्लेट के ट्रक शामिल हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि अवैध खनन और खनन सामग्री के अवैध परिवहन को रोकने के लिए क्षेत्र में लगातार चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। बिना अनुमति या नियमों के खिलाफ चलने वाले वाहनों पर आगे भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई चिलकाना थाना प्रभारी विनोद कुमार के नेतृत्व में की गई। टीम में उपनिरीक्षक रवि कुमार, हेड कांस्टेबल विवेक कुमार और कांस्टेबल विशाल यादव शामिल थे। पुलिस की इस कार्रवाई से अवैध खनन से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया है। पुलिस अब पकड़े गए वाहनों के दस्तावेजों और खनन सामग्री से जुड़े अन्य पहलुओं की गहन जांच कर रही है।
झज्जर जिले में देर रात दुल्हेड़ा गांव के पास हुए भीषण सड़क हादसे में 20 वर्षीय कबड्डी खिलाड़ी की मौत हो गई, जबकि उसके साथ कार में सवार तीन से चार अन्य खिलाड़ी गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा कार और ट्रक की जोरदार टक्कर में हुआ। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और एक खिलाड़ी की मौके पर ही मौत हो गई। घटना CCTV में कैद हो गई। मृतक की पहचान हिमांशु पुत्र सतीश, निवासी गांव भंडारी, जिला पानीपत के रूप में हुई है। हिमांशु की उम्र करीब 20 वर्ष थी और वह रोहतक के बहु अकबरपुर में रहकर कबड्डी की प्रैक्टिस करता था। बारात में शामिल होकर लौट रहे थे जानकारी के अनुसार, हिमांशु अपने तीन-चार खिलाड़ी साथियों के साथ बहादुरगढ़ में एक बारात में शामिल होने आया था। देर रात वापस लौटते समय दुल्हेड़ा गांव के पास उनकी कार की एक ट्रक से जोरदार टक्कर हो गई। तीन से चार खिलाड़ी घायल हादसे में हिमांशु की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कार में सवार तीन से चार अन्य खिलाड़ी गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से सभी घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। गंभीर हालत होने पर उन्हें रोहतक PGI रेफर किया गया, जहां उनका इलाज जारी है। हादसे की खबर मिलते ही परिवार और खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई। पुलिस कर रही जांच पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहनों को कब्जे में लेकर मामले की जांच शुरू कर दी है। हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है और घायलों के बयान के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गोवर्धन चौराहे पर डंपर-कार की टक्कर के बाद बवाल:युवकों में मारपीट का वीडियो वायरल, पुलिस जांच जारी
मथुरा के व्यस्त गोवर्धन चौराहे पर मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे एक डंपर और कार की टक्कर के बाद हंगामा हो गया। मामूली सड़क दुर्घटना के बाद शुरू हुई कहासुनी जल्द ही मारपीट में बदल गई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर के बाद दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई, जो कुछ ही देर में हिंसक झड़प में बदल गई। सड़क पर युवकों के बीच लात-घूंसे चलने लगे, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई और भीड़ जमा हो गई। इस विवाद के कारण कुछ समय के लिए यातायात भी बाधित रहा। मारपीट के दौरान एक महिला भी इस झड़प की चपेट में आ गई और सड़क पर गिर गई। राधा सिटी निवासी पूजा ने आरोप लगाया कि दुर्घटना के बाद कुछ लोगों ने उनके साथ मारपीट की। उन्होंने यह भी बताया कि घटना के समय ट्रैफिक पुलिस मौके पर मौजूद थी, लेकिन समय रहते प्रभावी ढंग से बीच-बचाव नहीं किया जा सका। इस पूरी घटना और मारपीट का वीडियो किसी राहगीर ने अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड कर लिया। यह वीडियो अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से प्रसारित हो रहा है, जिसके बाद मामले को लेकर विभिन्न चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सूचना मिलने पर स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस ने दोनों पक्षों से जानकारी जुटाई है और वायरल वीडियो तथा प्राप्त शिकायतों के आधार पर पूरे मामले की जांच कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि सभी तथ्यों और साक्ष्यों की जांच के बाद दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
मुरादाबाद के मझोला थाना क्षेत्र निवासी एक युवक पर मंगलवार दोपहर 2 बजे मुरादाबाद रेलवे स्टेशन के पास आधा दर्जन से अधिक लोगों ने धारदार हथियार से हमला कर दिया। इस हमले में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। पीड़ित का आरोप है कि हमलावरों ने मारपीट के दौरान उससे पांच हजार रुपये नकद और चांदी का ब्रेसलेट भी लूट लिया। घायल युवक ने दो हमलावरों की पहचान कर ली है, जबकि अन्य अज्ञात हैं। पुलिस के अनुसार, एकता कॉलोनी निवासी वीरेंद्र उर्फ वीरू पुत्र स्वर्गीय छोटे लाल मंगलवार दोपहर करीब तीन बजे अपनी मां और पत्नी के साथ चंदौसी स्थित अपनी मौसी के घर जाने के लिए रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। वीरेंद्र अपनी मां और पत्नी को एक ओर खड़ा कर टिकट लेने गया था। इसी दौरान रेलवे स्टेशन के पास रामतलैया पुलिस चौकी क्षेत्र में पहले से घात लगाए बैठे छह-सात लोगों ने उस पर धारदार हथियार से हमला कर दिया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल होकर बेहोश हो गया। घटना के दौरान वहां से गुजर रहे वीरेंद्र के एक परिचित ने उसे पहचान लिया और तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में उसका उपचार चल रहा है। होश में आने पर वीरेंद्र ने पुलिस को बताया कि हमला करने वाले लोग कुछ दिन पहले मंदिर में हुई गुल्लक चोरी की घटना में पकड़े गए थे। उस समय लोगों ने उनकी पिटाई की थी और वह भी मौके पर मौजूद था। वीरेंद्र के अनुसार, आरोपियों को उम्मीद थी कि वह उनका बचाव करेगा, लेकिन ऐसा नहीं होने पर वे उससे रंजिश मानने लगे थे। पीड़ित का आरोप है कि इसी रंजिश के चलते आरोपियों ने रेलवे स्टेशन पर उसे अकेला पाकर हमला किया। मारपीट के दौरान उसके हाथ से चांदी का ब्रेसलेट और जेब में रखे पांच हजार रुपये निकाल लिए और फरार हो गए। वीरेंद्र ने अपनी तहरीर में दो आरोपियों की पहचान होने की बात कही है, जबकि अन्य को अज्ञात बताया है।
वाराणसी में कार ने साइकिल सवार को रौंदा, मौत:नंबर प्लेट टूटी मिली, चालक मौके से फरार
वाराणसी के रोहनिया थाना क्षेत्र में मंगलवार शाम करीब 8 बजे एक तेज रफ्तार कार मोहनसराय से रोहनिया की तरफ जा रही। इस अज्ञात कार ने 55 वर्षीय साइकिल सवार को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि साइकिल के परखच्चे उड़ गए और वृद्ध घायल होकर सड़क पर गिर पड़ा। हादसे के बाद आरोपी चालक वाहन समेत मौके से फरार हो गया। देखिए तस्वीरें… नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया दुर्घटना के तुरंत बाद आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। रोहनिया थाना पुलिस ने घायल वृद्ध को तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाया, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। समाचार लिखे जाने तक घायल की पहचान नहीं हो सकी थी। घटनास्थल से बरामद नंबर प्लेट घटनास्थल से बरामद नंबर प्लेट के आधार पर पुलिस वाहन मालिक और फरार चालक की तलाश में जुट गई है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाल रही है, ताकि दुर्घटना की पूरी तस्वीर सामने आ सके। अधिकारियों का कहना है कि चालक की पहचान होते ही उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
रोटरी इंटरनेशनल के नए रोटरी वर्ष 2026–27 की शुरुआत 1 जुलाई से हो रही है। इस अवसर पर रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3056 के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर अरुण बगड़िया ने सेवा, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व को केंद्र में रखते हुए पूरे वर्ष का विजन साझा किया। उन्होंने कहा कि सेवा ही सर्वोपरि केवल रोटरी का आदर्श नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का माध्यम है। अरुण बगड़िया ने बताया कि रोटरी इंटरनेशनल पिछले 120 वर्षों से मानव सेवा के क्षेत्र में कार्य कर रही है और अब डिस्ट्रिक्ट 3056 भी सेवा के नए अध्याय की शुरुआत करेगा। उन्होंने कहा कि पूरे वर्ष रोटरी के आदर्श Service Above Self को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने बताया कि रोटरी डिस्ट्रिक्ट 3056 ने वर्ष 2026–27 में करीब 15 करोड़ रुपये की सेवा परियोजनाओं का लक्ष्य निर्धारित किया है। इनमें स्वच्छ पेयजल, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण, वृक्षारोपण, स्वास्थ्य सेवाएं, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, नेत्र चिकित्सा, बालिका शिक्षा, डिजिटल शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास, ग्रामीण विकास, रक्तदान, अंगदान जागरूकता और आपदा राहत जैसी योजनाएं शामिल हैं। डिस्ट्रिक्ट गवर्नर ने कहा कि द रोटरी फाउंडेशन को और अधिक सशक्त बनाना इस वर्ष की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। साथ ही सदस्यता बढ़ाने, नए रोटरी क्लब स्थापित करने तथा युवाओं को जोड़ने के लिए रोटरैक्ट और इंटरैक्ट क्लबों का विस्तार भी किया जाएगा। उन्होंने रोटरी कम्युनिटी कॉर्प्स (RCC) को मजबूत बनाने पर भी जोर दिया, ताकि आम नागरिक भी सेवा कार्यों में सक्रिय भागीदारी निभा सकें। पर्यावरण संरक्षण को लेकर अरुण बगड़िया ने विशेष अभियान की घोषणा करते हुए कहा कि 1 जुलाई को प्रत्येक रोटेरियन कम से कम 10 पौधे लगाए और उनकी देखभाल का संकल्प ले। वहीं प्रत्येक क्लब अध्यक्ष 1000 पौधे लगाने और उनका संरक्षण सुनिश्चित करने का प्रयास करें। लक्ष्य है कि 30 जून 2027 तक एक लाख से अधिक स्वस्थ एवं विकसित वृक्ष समाज को समर्पित किए जाएं। उन्होंने सभी क्लबों से अपील की कि उनके स्वागत में फूल-मालाओं, साफों और शॉल पर खर्च करने के बजाय उसी राशि का योगदान द रोटरी फाउंडेशन में करें। उनके अनुसार यही उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान होगा और इससे सेवा कार्यों को नई गति मिलेगी। अरुण बगड़िया ने सभी रोटेरियन्स, रोटरैक्टर्स, इंटरैक्टर्स, आरसीसी सदस्यों, दानदाताओं और डिस्ट्रिक्ट टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सभी के सहयोग से वर्ष 2026–27 को सेवा, सहयोग, नवाचार और सामाजिक परिवर्तन का स्वर्णिम अध्याय बनाया जाएगा।
हमीरपुर जिले के मौदहा कोतवाली क्षेत्र के करहिया गांव में मंगलवार दोपहर एक 27 वर्षीय युवती ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, युवती मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) में असफलता के कारण तनाव में थी। मृतका संध्या सोनी के पिता मुन्नीलाल सोनी ने पुलिस को बताया कि संध्या पिछले तीन वर्षों से कानपुर में रहकर NEET की तैयारी कर रही थी। परीक्षा में सफलता न मिलने के बाद वह लगभग एक वर्ष पहले गांव लौट आई थी और बांदा से बीटीसी की पढ़ाई कर रही थी, जिसका एक वर्ष पूरा हो चुका था। परिजनों के अनुसार, मंगलवार दोपहर करीब दो बजे संध्या ने अपने पिता से ऊपरी कमरे में आराम करने की बात कही और दूसरी मंजिल पर चली गई। लगभग तीन बजे तक जब वह नीचे नहीं आई, तो उसकी मां उसे देखने कमरे में पहुंचीं। वहां संध्या का शव दुपट्टे के फंदे से बल्ली पर लटका मिला। संध्या चार बहनों और एक भाई में सबसे बड़ी थी। उसके पिता गांव में परचून की दुकान चलाते हैं। घटना की सूचना मिलने पर मौदहा कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने पंचनामा भरकर शव परिजनों को सौंप दिया, क्योंकि परिवार ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। मौदहा कोतवाली प्रभारी संतोष कुमार सिंह ने बताया कि परिजनों ने युवती के NEET में सफलता न मिलने के कारण मानसिक तनाव में रहने की बात कही है। हालांकि, आत्महत्या के पीछे का वास्तविक कारणों की जांच की जा रही है। परिवार द्वारा पोस्टमार्टम से इनकार के बाद आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी कर शव परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है।
धार प्रदेश सरकार के जल गंगा संवर्धन अभियान की उपलब्धियों पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस के धार जिला प्रवक्ता अजय सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया कि जल संरक्षण के नाम पर किए गए कार्यों के सरकारी आंकड़े जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते। उनका कहना है कि अभियान को सफल दिखाने के लिए उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है। ठाकुर ने बताया कि 19 मार्च से 30 जून तक चले इस अभियान के दौरान अधिकांश स्थानों पर जल स्रोतों की सफाई का काम अवकाश के दिनों में ही किया गया। उनका दावा है कि सीमित समय और संसाधनों में जितना काम संभव था, उससे कहीं अधिक उपलब्धियां सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज की गई हैं। धार नगर का दिया उदाहरण कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि धार नगर में भी जल स्रोतों की सफाई को लेकर जारी किए गए सरकारी आंकड़ों और जमीनी स्तर पर हुए कार्यों में बड़ा अंतर है। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताया। अजय सिंह ठाकुर ने कहा कि यदि धार जिले में ही सरकारी दावों और वास्तविक स्थिति में अंतर है, तो प्रदेश स्तर पर जारी किए गए आंकड़ों की भी स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए। उनका आरोप है कि अभियान को सफल साबित करने के लिए वास्तविक कार्यों से अधिक उपलब्धियां दिखाई गई हैं। अनियमितता मिलने पर कार्रवाई की मांग कांग्रेस ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, अभियान के तहत हुए कार्यों का वास्तविक विवरण सार्वजनिक करने और कहीं अनियमितता मिलने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू (डीएनटी) समाज ने 10 फीसदी आरक्षण की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। समाज की ओर से बुधवार को जयपुर के विद्याधर नगर स्टेडियम में महापड़ाव आयोजित किया जाएगा। आयोजकों का दावा है कि इसमें राजस्थान सहित देशभर से करीब एक लाख लोग शामिल होंगे। मंगलवार को पिंक सिटी प्रेस क्लब में आयोजित प्रेसवार्ता में डीएनटी समाज के प्रदेशाध्यक्ष रतन नाथ कालबेलिया और पशुपालन संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालजी राइका ने आंदोलन की रूपरेखा साझा की। रतन नाथ कालबेलिया ने कहा कि घुमंतू एवं अर्ध-घुमंतू समुदाय राजस्थान की करीब 15 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व करता है, लेकिन आज भी समाज के लोग स्थायी आवास, पहचान और मूलभूत अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि डीएनटी समाज पिछले दो वर्षों से अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत है। पाली में 32 घंटे तक दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जाम किया गया था और 11 मई से जैसलमेर से 'जेल भरो आंदोलन' भी शुरू किया गया। इसके बावजूद सरकार ने उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया। शाम 4 बजे तक सरकार को अल्टीमेटम रतन नाथ कालबेलिया ने कहा कि सरकार को बुधवार शाम 4 बजे तक का अल्टीमेटम दिया गया है। यदि तय समय तक मांगें नहीं मानी गईं तो महापड़ाव से शहीद स्मारक तक कूच किया जाएगा। वहां सभा के बाद मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए मार्च निकाला जाएगा। 'अब मुख्यमंत्री स्तर पर ही होगी वार्ता' राष्ट्रीय अध्यक्ष लालजी राइका ने कहा कि पिछले दो वर्षों में सरकार के साथ कई दौर की वार्ता हुई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। उन्होंने आरोप लगाया कि हाल ही में सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव के साथ हुई बैठक से स्पष्ट हो गया कि सरकार ने अब तक उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया है। उन्होंने कहा कि अब डीएनटी समाज मुख्यमंत्री स्तर के अलावा किसी अन्य अधिकारी से बातचीत नहीं करेगा। समाज की प्रमुख मांग है कि डीएनटी वर्ग की अनुसूचित जाति (एससी) में आने वाली जातियों को 3 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में शामिल जातियों को 7 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए, ताकि कुल 10 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने मंगलवार को उन्नाव के सोहरामऊ क्षेत्र स्थित एक वाटर पार्क का दौरा किया। उन्होंने यहां बालिकाओं के साथ लगभग चार घंटे का समय बिताया और उन्हें आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया। इस दौरान राज्यपाल ने बच्चों से संवाद किया, उनके अनुभवों को जाना और राजभवन द्वारा संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों की जानकारी दी। राज्यपाल दोपहर करीब दो बजे कार्यक्रम स्थल पर पहुंचीं। उन्होंने बालिकाओं का स्वागत किया और पूरे वाटर पार्क का भ्रमण कराया। शाम करीब साढ़े पांच बजे कार्यक्रम समाप्त होने के बाद राज्यपाल लखनऊ के लिए रवाना हुईं। कार्यक्रम के दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बताया कि राजभवन द्वारा बालिकाओं के लिए नियमित रूप से विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य बालिकाओं को शिक्षा के साथ-साथ व्यावसायिक और व्यावहारिक कौशल प्रदान कर उन्हें स्वावलंबी बनाना है। उन्होंने जानकारी दी कि राजभवन में बालिकाओं को भोजन प्रशिक्षण, जूडो और संगीत सहित अन्य कौशल से संबंधित प्रशिक्षण दिए जाते हैं। इन प्रशिक्षणों के माध्यम से ऐसा वातावरण तैयार किया जाता है, जिससे उनमें किसी प्रकार की हीन भावना न आए और वे आत्मविश्वास के साथ अपने भविष्य की दिशा में आगे बढ़ सकें। इस अवसर पर औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता 'नंदी' ने भी अपने विचार साझा किए। उन्होंने राजभवन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम बालिकाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राज्यपाल ने जिलाधिकारी घनश्याम मीणा, उपजिलाधिकारी हसनगंज प्रज्ञा पाण्डेय और तहसीलदार अवनीश कुमार को अपनी लिखित पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया।
बिजनौर में ड्यूटी पर सिपाही पर हमला:पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया, दूसरे की कर रही तलाश
बिजनौर में ड्यूटी पर तैनात एक यातायात सिपाही पर हमला करने के आरोप में पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है। यह घटना सोमवार रात कोतवाली शहर क्षेत्र के रामलीला चौक के पास हुई थी, जिसमें बाइक सवार युवकों ने सिपाही को घायल कर दिया था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। घटना सोमवार रात करीब 8:30 बजे की है। सिपाही सौरभ कुमार (निवासी बुलंदशहर) चांदपुर की चुंगी के तिराहे पर अपनी ड्यूटी पर तैनात थे। बताया गया है कि कुछ बाइक सवार युवक शराब पीकर सड़क पर हंगामा कर रहे थे। जब सिपाही सौरभ ने उन्हें रोकने का प्रयास किया, तो युवकों ने उन पर हमला कर दिया, जिससे सिपाही के सिर में गंभीर चोट आई। हमले में घायल सिपाही सौरभ को आसपास मौजूद लोगों और अन्य यातायात पुलिसकर्मियों की मदद से अस्पताल पहुंचाया गया। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मंगलवार को आरोपी ऋतिक (निवासी पृथ्वी मोलड पुर, शहर कोतवाली) को गिरफ्तार कर लिया। सीओ सिटी अभय पांडे ने बताया कि सोमवार रात करीब 8:30 बजे ट्रैफिक कांस्टेबल सौरभ के साथ बदसलूकी और उन्हें घायल करने के मामले में केस दर्ज किया गया है। उन्होंने पुष्टि की कि इस वारदात को ऋतिक और हिमांशु नामक दो युवकों ने अंजाम दिया था। पुलिस ने ऋतिक को हिरासत में लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है, जबकि दूसरे आरोपी हिमांशु की तलाश जारी है।
सिरसा जिले में रानियां की अनाज मंडी में शेड के नीचे दो युवकों पर तेजधार हथियारों और लाठी-डंडों से हमला किया गया। हमलावरों ने युवकों की बाइक को भी आग के हवाले कर दिया। लाठी, डंडे और तलवारों से वार किए गए, जिससे दोनों युवकों को गंभीर चोटें आईं। अपनी जान बचाने के लिए वे बाइक मौके पर छोड़कर भाग गए। प्रत्यक्षदर्शियों ने तुरंत फायर ब्रिगेड को सूचना दी। फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची और आग पर काबू पाया, जिससे जली हुई बाइक की आग बुझाई जा सकी। घायलों में 18 वर्षीय लवप्रीत निवासी वार्ड नंबर-9, रानिया शामिल है। उसके साथ जसकरण भी घायल हुआ है। गंभीर चोटों के कारण दोनों को सिरसा अस्पताल रेफर किया गया है। क्रिकेट खेल रहा था युवक बताया जा रहा है कि लवप्रीत अपने 5-6 साथियों के साथ क्रिकेट खेल रहा था। उसी दौरान दीप निवासी फिरोजाबाद, और अजय निवासी वार्ड नंबर-13, अपने 4-5 साथियों के साथ वहां पहुंचे। उन्होंने जसकरण और लवप्रीत के साथ गाली-गलौज और झगड़ा शुरू कर दिया। इसके बाद दूसरे पक्ष के युवकों ने तलवारों, लाठी और डंडों से लवप्रीत और जसकरण पर हमला कर दिया। दोनों युवक किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भागने में सफल रहे। अपनी बाइक वहीं पर छोड़कर भाग गए। बताया जा रहा है कि दोनों पक्ष ही आवारा की किस्म के युवक हैं और आए दिन इनके झगड़े होते रहते हैं और आज दिन में भी बालासर रोड पर इन लोगों की काफी बहस हुई बताई जा रही है। वहीं, जब इस मामले में रानियां थाना प्रभारी सुखबीर सिंह से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि मामला हमारे संज्ञान में आ चुका है और जल्द ही ऐसे शरारती तत्वों को सबक सिखाने का काम करेंगे और इन लोगों को भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
प्रयागराज में पिछले एक सप्ताह से भीषण गर्मी और 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान झेल रहे प्रयागराजवासियों को मंगलवार देर शाम आखिरकार राहत मिल गई। गरज-चमक के साथ मानसून ने शहर में दस्तक दी और करीब एक घंटे तक हुई तेज बारिश ने मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल दिया। बारिश के बाद तापमान में लगभग 5-6 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों ने राहत की सांस ली। दिनभर उमस और तेज गर्मी से लोग परेशान रहे, लेकिन शाम होते-होते आसमान में काले बादल छा गए। इसके बाद तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ शुरू हुई बारिश ने पूरे शहर को भिगो दिया। लंबे समय बाद हुई इस अच्छी बारिश से सड़कों पर पानी भर गया और कई निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई। देखें तस्वीरें….. बारिश के कारण शहर में कई स्थानों पर यातायात भी प्रभावित हुआ। हालांकि, भीषण गर्मी से परेशान लोगों के लिए यह बारिश किसी राहत से कम नहीं रही। पिछले एक सप्ताह से शहर का अधिकतम तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ था, जिससे जनजीवन प्रभावित हो रहा था। मानसून की पहली अच्छी बारिश किसानों के लिए भी राहत लेकर आई है। धान की बुवाई का मौसम शुरू हो चुका है और खेतों को पानी की जरूरत थी। ऐसे में इस बारिश से किसानों को काफी फायदा मिलने की उम्मीद है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाले दिनों में भी इसी तरह बारिश होती रही तो खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिलेगी और किसानों की सिंचाई पर होने वाला खर्च भी कम होगा। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में भी प्रयागराज और आसपास के क्षेत्रों में रुक-रुक कर बारिश होने की संभावना है। इससे तापमान में और गिरावट आएगी तथा लोगों को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिलती रहेगी।
दमोह-जबलपुर स्टेट हाईवे पर सोमवार शाम जबेरा थाना क्षेत्र में ट्रक ने मोटरसाइकिल सवार युवक को कुचल दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना की खबर मिलते ही जब परिजन मौके पर पहुंचे, तो बेटे का शव ट्रक के पहिए के नीचे फंसा देख मां का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। हादसे का शिकार हुए मृतक की पहचान जबेरा थाना क्षेत्र के ग्राम गिदरा निवासी 18 वर्षीय गिरवर उर्फ कुलदीप (पिता जालम सिंह) के रूप में हुई है। कुलदीप किसी घरेलू काम से अपनी बाइक लेकर जबेरा आया हुआ था। काम निपटाकर जब वह वापस अपने गांव लौट रहा था, तभी भदर नाले के पास दमोह से जबलपुर की ओर जा रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने उसकी मोटरसाइकिल को जोरदार टक्कर मार दी और उसे कुचल दिया। अस्पताल पहुंचने से पहले ही थम गईं सांसें हादसे के तुरंत बाद स्थानीय युवक मोंटू बाजपेयी ने इसकी सूचना जबेरा थाना पुलिस को दी। खबर मिलते ही एएसआई अशोक सिंह और आरक्षक वीरेंद्र सिंह बिना देर किए मौके पर पहुंचे। पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से काफी मशक्कत के बाद युवक को ट्रक के नीचे से निकाला और तुरंत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जबेरा भिजवाया। हालांकि, अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर ने परीक्षण के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने शव का पंचनामा बनाकर पोस्टमार्टम के लिए शवगृह भेज दिया है। हादसे के बाद चालक ट्रक छोड़कर मौके से फरार हो गया, जिसे पुलिस ने जब्त कर लिया है। पुलिस ने मर्ग कायम कर फरार ट्रक ड्राइवर की तलाश शुरू कर दी है। इस हादसे के बाद से पीड़ित परिवार गहरे सदमे में है।
देवास प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री जगदीश देवड़ा मंगलवार को ग्राम घिचलाय में आयोजित जल गंगा संवर्धन अभियान के समापन समारोह में शामिल हुए। उन्होंने जल संरक्षण को सामूहिक जिम्मेदारी बताते हुए लोगों से पानी की हर बूंद बचाने और अधिक से अधिक पौधे लगाने की अपील की। देवड़ा ने कहा कि जब पानी पर्याप्त होता है, तब लोग उसकी बर्बादी करते हैं। लेकिन संकट के समय एक-एक बूंद के लिए तरसना पड़ता है। उन्होंने कहा कि इस सोच को बदलने की जरूरत है। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संदेश भी पढ़कर सुनाया और अभियान के तहत बनाए गए तालाब का निरीक्षण किया। पुरानी जल संरचनाओं के संरक्षण पर दिया जोर प्रभारी मंत्री ने पूर्वजों द्वारा बनाए गए तालाब, बावड़ी और कुओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार इन प्राचीन जल संरचनाओं के संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए काम कर रही है। गांवों में तालाबों का निर्माण और उनका रखरखाव कृषि, पशुपालन और पर्यावरण के लिए जरूरी है। 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान से जुड़ने की अपील की देवड़ा ने लोगों से 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान से जुड़ने की अपील की। उन्होंने कहा कि जल और पेड़ दोनों जीवन का आधार हैं। पेड़ पर्यावरण की रक्षा करते हैं और जल जीवन को बनाए रखता है। सोनकच्छ विधायक डॉ. राजेश सोनकर ने बताया कि जिले में जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत जल स्रोतों के संरक्षण का काम किया गया है। उन्होंने कहा कि सोनकच्छ विधानसभा के 52 गांवों को नर्मदा परियोजना से जोड़ा गया है। इससे इन गांवों के लोगों को नर्मदा का पानी उपलब्ध हो सकेगा। 50 हजार से ज्यादा लोगों को मिला योजनाओं का लाभ कलेक्टर ऋतुराज सिंह ने बताया कि अभियान के तहत जिले में हजारों नई जल संरचनाओं का निर्माण किया गया। साथ ही पुरानी जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार भी किया गया। उन्होंने बताया कि जनकल्याण शिविरों के माध्यम से 50 हजार से अधिक लाभार्थियों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ दिया गया। कार्यक्रम के अंत में अभियान में बेहतर काम करने वाली ग्राम पंचायतों के सरपंचों और सचिवों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
मुजफ्फरनग में बिजली कटौती को लेकर प्रदर्शन कर रहे लोगों पर मुकदमे के बाद मामला कैबिनेट मंत्री और बिजली विभाग के बीच टकराव तक पहुंच गया। मंगलवार शाम 5 बजे समीक्षा बैठक में प्रदेश के कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने बिजली विभाग के मुख्य अभियंता विनोद कुमार को फटकार लगा दी। कहा- अगर नेता बनने का इतना ही शौक है तो नौकरी छोड़कर मैदान में आ जाइए। इस दौरान गुस्से में चीफ इंजीनियर कुर्सी से उठकर जाने लगे, लोगों के समझाने पर फिर बैठ गए। बैठक के दौरान मंत्री ने अधिकारियों की कार्यशैली और जनता के प्रति व्यवहार पर नाराजगी जताई। जिला मुख्यालय पर हुई समीक्षा बैठक देर शाम तक चली। इस दौरान बिजली कटौती, ट्रांसफॉर्मर खराब होने की घटनाओं और आम जनता की शिकायतों की समीक्षा की गई। जनता से सम्मानजनक व्यवहार करने की नसीहत बैठक के दौरान मंत्री अनिल कुमार ने मुख्य अभियंता विनोद कुमार से कहा- अधिकारी जनता और जनप्रतिनिधियों से सम्मानजनक एवं संवेदनशील भाषा में बात करें। सरकारी अधिकारी जनता की सेवा के लिए हैं, राजनीति करने के लिए नहीं। इस दौरान दोनों के बीच बहस इतनी बढ़ गई कि मुख्य अभियंता एक बार अपनी कुर्सी छोड़कर बैठक से बाहर जाने के लिए खड़े हो गए। हालांकि, वहां मौजूद अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें समझाकर दोबारा बैठाया। इसके बाद बैठक आगे जारी रही। पूरे मामले का वीडियो भी सामने आया है। अब पढ़िए मंत्री और अफसर में हुई बातचीत… मंत्री: यह सही नहीं है। मेरी बात एक मिनट सुनिए। तर्क-वितर्क मत कीजिए। सब सत्यानाश करके रख दिया है। बिजली विभाग को, चाहे उपभोक्ता हो या जनप्रतिनिधि, सभी के साथ शालीन व्यवहार करना चाहिए। भाषा संयमित और संवैधानिक होनी चाहिए, गुंडागर्दी वाली नहीं। अगर आपको नेता बनना है तो इस्तीफा दे दीजिए। मैदान में आइए और नेता बन जाइए। आपने अखबारों में बयान दिया है कि 'मैं किसी से दबता नहीं, मैं पीछे नहीं हटता, मैंने संभल भी देखा है।' यह क्या तरीका है? यह अधिकारियों की नहीं, नेताओं वाली भाषा है। अधिकारी: नहीं सर, ऐसा कुछ नहीं है… मंत्री: अरे, आपका बयान अखबार में छपा है। अधिकारी: नहीं सर, अखबार में ऐसा नहीं है... जो भी है… मंत्री: एक बात सुनिए, यह 'जो भी है' कहना बंद कीजिए। सीधे और स्पष्ट जवाब दीजिए, जो पूछा जा रहा है उसी का उत्तर दीजिए। अधिकारी: सर, मेरी बात सुनिए। पूरा प्रस्ताव भेजा गया था। कोई भी रिकॉर्ड निकालकर देख सकता है। यहां से प्रस्ताव लखनऊ भेजा गया था, लेकिन वहां से रिजेक्ट हो गया। लाइन लॉस की वजह से चार बिजलीघरों का प्रस्ताव भेजा गया था, जिसमें केवल एक बिजलीघर स्वीकृत हुआ। क्षमता वृद्धि का प्रस्ताव भी गया था, उसमें चार ही स्वीकृत हुए। जहां कमर्शियल लॉस और लाइन लॉस कम था, वहीं मंजूरी मिली। मंत्री: एक मिनट, मेरी बात सुनिए। आपका काम यहां से प्रस्ताव भेजना है। अधिकारी: सर, प्रस्ताव नियमानुसार भेजा गया था। मंत्री: कहां भेजा गया था? अधिकारी: लखनऊ मंत्री: फिर रिजेक्ट कैसे हो गया? अधिकारी: वहां से रिजेक्ट हुआ है… मंत्री: किस स्तर से रिजेक्ट हुआ? अधिकारी: सर, मेरी बात… मंत्री: क्या आपने अपनी संस्तुति (Recommendation) के साथ प्रस्ताव भेजा था? अधिकारी: जी सर, बिल्कुल। प्रस्ताव संस्तुति के साथ भेजा गया था। मंत्री: तो उसकी रिपोर्ट मंगाइए। उसकी एक कॉपी मंगाइए। बिल्कुल, कॉपी मंगाइए। प्रदर्शनकारियों पर मुकदमे से शुरू हुआ विवाद दरअसल, विवाद की शुरुआत 2 दिन पहले गांधी कॉलोनी बिजलीघर पर हुई बिजली कटौती के विरोध प्रदर्शन से हुई थी। बिजली संकट से नाराज लोगों ने प्रदर्शन किया था। इसके बाद बिजली विभाग ने कुछ प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सरकारी कार्य में बाधा और अभद्रता के आरोप में मुकदमा दर्ज करा दिया। बताया गया कि मुकदमा दर्ज होने से पहले कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने मुख्य अभियंता को फोन कर प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई न करने की सलाह दी थी। इसके बावजूद मुकदमा दर्ज होने के बाद मामला और गरमा गया। रालोद कार्यकर्ताओं ने किया प्रदर्शन मंत्री की आपत्ति के बावजूद मुकदमा दर्ज होने से राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के नेताओं और कार्यकर्ताओं में नाराजगी फैल गई। सोमवार को बड़ी संख्या में रालोद कार्यकर्ता मुख्य अभियंता कार्यालय पहुंचे थे और विरोध प्रदर्शन किया था। इस दौरान कार्यालय की बिजली आपूर्ति भी बंद कर दी गई थी। पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच धक्का-मुक्की और नोकझोंक भी हुई थी। मंत्री बोले- संवाद से निकलेगा समाधान बैठक के बाद कैबिनेट मंत्री अनिल कुमार ने कहा- उन्होंने केवल अधिकारियों को जनता के साथ संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम में बिजली विभाग के सामने तकनीकी चुनौतियां जरूर होती हैं, लेकिन जनता की परेशानियां भी वास्तविक हैं। ऐसे में समस्याओं का समाधान संवाद और संवेदनशीलता से ही संभव है। उन्होंने यह भी कहा- सरकारी अधिकारियों को सार्वजनिक मंचों और मीडिया में मर्यादित आचरण रखना चाहिए। जनप्रतिनिधि जनता के प्रति जवाबदेह होते हैं, वहीं अधिकारियों को भी अपनी प्रशासनिक मर्यादाओं का पालन करना चाहिए। -------------------------- यह खबर भी पढ़ें… बाराबंकी में युवक की मौत पर बवाल, पुलिस पर पथराव, SHO बेहोश होकर गिरे, साथियों ने घसीटकर हाईवे से उठाया बाराबंकी में 21 साल के पॉलिटेक्निक छात्र की मौत के बाद मंगलवार दोपहर 2 बजे बवाल हो गया। परिजन शव को लखनऊ-बहराइच हाईवे पर रखकर प्रदर्शन कर रहे थे। पुलिस ने जाम खुलवाने के लिए परिजनों पर दबाव डाला तो भीड़ ने पथराव कर दिया। अचानक हुए हमले में रामनगर थाना प्रभारी अरुण प्रताप सिंह के सिर पर पत्थर लगा और वे बेहोश होकर सड़क पर गिर पड़े। पढ़ें पूरी खबर…
कानपुर पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे पुलिस ऑफिस सभागार में समीक्षा बैठक की। उन्होंने सभी थानों के अपराध की मासिक समीक्षा की। उन्होंने कहा कि आपके थानाक्षेत्रों में खुलेआम मादक पदार्थ की बिक्री की सूचना मिल रही हैं। थाने की पुलिस क्या कर रही है? जल्द से जल्द अभियान चलाकर इन नशीले पदार्थों की बिक्री बंद करावाओं। ऐसा न हुआ तो आपके खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ेगी। पुलिस कमिश्नर ने चमनगंज, बाबूपुरवा, किदवई नगर और साढ़ थाना प्रभारियों को चेतावनी दी। लंबित विवेचनाओं के जल्द निस्तारण के आदेश बैठक की शुरुआत में उन्होंने बीट सूचनाएं कम दर्ज होने पर रेऊना, हरबंश मोहाल, नजीराबाद और रायपुरवा थाना प्रभारियों को इसमें सुधार कराने के निर्देश दिए। लंबित विवेचनाओं के मामले में बिठूर, बिल्हौर, साढ़ और अरौल थानेदारों को जल्द से जल्द विवेचनाओं के निस्तारण के लिए कहा गया। पुलिस कमिश्नर ने निर्देश दिए कि गैंगस्टर एक्ट के आरोपियों पर दर्ज मामलों में 6 माह में विवेचना पूरी कर आरोप पत्र दाखिल किए जाएं। कहा कि स्कूल, कॉलेज खुलने जा रहे हैं, ऐसे में छेड़छाड़ की घटनाएं न होने पाएं। स्कूल कॉलेज के पास शोहदों का जमघट न लगे इसकी विशेष निगरानी की जाए। राष्ट्रीय महिला आयोग और शासन स्तर पर लंबित मामलों के जल्द निस्तारण करने को कहा। सभी थाना प्रभारियों को चेतावनी दी कि जमानत पर छूटे शातिर और उनके जमानतगीर की विशेष निगरानी की जाए, जिसमें लापरवाही न हो। इसके लिए प्रभावशाली कदम उठाए जाएं। बड़े मेलों और आयोजनों में ड्रोन से निगरानी की जाए। थाना प्रभारियों से कहा कि थानों में मौजूद सभी पुलिसकर्मियों से कार्य सौंपे जाएं और जिससे पुलिस बल का पूरा उपयोग हो सके। इसके अलावा क्षेत्र में रात की गश्त बढ़ाई जाए ताकि सड़कों पर पुलिस बल देखकर लोगों में सुरक्षा का विश्वास बढ़े। वहीं, जेल अधीक्षक ने बताया कि जेल में 14 संवेदनशील बंदी हैं, जिनकी विशेष निगरानी की जा रही है।
गाजियाबाद साइबर क्राइम पुलिस ने मंगलवार को साइबर ठगी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के एक सदस्य को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान ठगी से जुड़े 19 लाख रुपये भी फ्रीज किए गए हैं। आरोपियों ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 2.19 करोड़ रुपये की ठगी की थी। मंगलवार दोपहर करीब 2 बजे प्रेस कांफ्रेंस में सहायक पुलिस आयुक्त (अपराध) अमित सक्सेना ने बताया कि रामप्रस्थ कॉलोनी निवासी राम प्रकाश हुरिया ने इस संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि 22 मई से 4 जून 2026 के बीच साइबर अपराधियों ने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताया। उन्होंने पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी दी। आरोपियों ने पीड़ित को कई दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' में रखा। इस दौरान मानसिक दबाव बनाकर उनके बैंक खाते से करीब 2.19 करोड़ रुपये विभिन्न खातों में ट्रांसफर करा लिए गए। शिकायत के आधार पर साइबर क्राइम थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। तकनीकी साक्ष्यों और बैंकिंग लेनदेन की जांच के आधार पर पुलिस ने गिरोह के सदस्य शुभम सिंह यादव को 29 जून को गिरफ्तार किया। उसे उन्नाव के थाना अजगैन क्षेत्र से पकड़ा गया। आरोपी के पास से घटना में इस्तेमाल किए गए दो मोबाइल फोन और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए हैं। पूछताछ में आरोपी शुभम सिंह यादव ने बताया कि एमबीए करने के बाद उसने होटल लीज और निर्माण कार्य का व्यवसाय शुरू किया था। इसी दौरान उसकी मुलाकात प्रयागराज निवासी हरिओम पाण्डेय से हुई। हरिओम ने उसे शेयर ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के नाम पर बैंक खाते उपलब्ध कराने और पांच प्रतिशत कमीशन देने का लालच दिया। शुभम ने हरिओम पाण्डेय को अपने बैंक खाते की इंटरनेट बैंकिंग जानकारी और ओटीपी फॉरवर्ड करने की सुविधा भी उपलब्ध करा दी थी। इस तरह वह इस ठगी में शामिल हो गया। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह के सरगना विदेश में बैठे अपने साथियों के संपर्क में थे। उन्हें क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से कमीशन भेजा जाता था। पीड़ित को डिजिटल अरेस्ट के लिए व्हाट्सएप कॉल कंबोडिया से की गई थी। इस ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल सिम अमरोहा (उत्तर प्रदेश), बहाबलपुर (ओडिशा) और फरीदकोट (पंजाब) से जारी हुए थे। इन सिमों को जारी करने वाले पॉइंट ऑफ सेल (POS) के विरुद्ध भी कार्रवाई की जा रही है। एसीपी अपराध अमित सक्सेना ने बताया कि मामले में नामजद हरिओम पाण्डेय, आसिफ अंसारी और अधिवक्ता ओंकार श्रीवास्तव की तलाश की जा रही है। थाना साइबर क्राइम पुलिस पूरे नेटवर्क की गहनता से जांच कर रही है और गिरोह से जुड़े अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।
शाहजहांपुर में एक महिला ने मंगलवार शाम करीब छह बजे अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह कुछ घंटे पहले ही मायके से लौटी थी। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। मृतका की पहचान 24 वर्षीय सीता देवी के रूप में हुई है। यह घटना पुवायां थाना क्षेत्र के ढकिया बुजुर्ग गांव की है। सीता देवी की शादी आठ साल पहले शिशुपाल से हुई थी और उनका एक पांच साल का बेटा अभि है। सीता सोमवार को अपने मायके भटपुरा चंदू गांव गई थी और मंगलवार दोपहर ससुराल लौटी थी। शाम करीब छह बजे सीता ने कमरे के अंदर धोती से फांसी लगा ली। कुछ देर बाद जब वह नहीं दिखी, तो परिजनों ने उसे ढूंढना शुरू किया। उन्हें सीता का शव कमरे में फांसी के फंदे पर लटका मिला। ससुराल पक्ष ने पुलिस को सूचना देने से पहले शव को फंदे से उतार लिया था। सूचना मिलने पर मायके पक्ष और पुलिस मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव का पंचनामा भरने की कार्रवाई शुरू की। मायके पक्ष ने ससुराल पक्ष पर सीता को प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। थाना प्रभारी आरके रावत ने बताया कि महिला ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है। मायके पक्ष ने आरोप लगाए हैं, लेकिन अभी तक कोई लिखित तहरीर प्राप्त नहीं हुई है। तहरीर मिलने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
आजमगढ़ में बड़े भाई की चाकू से गोदकर हत्या:मां के सामने पैसे को लेकर हुआ विवाद, आरोपी फरार
आजमगढ़ के जहानागंज थाना क्षेत्र के नईपुर गांव में मंगलवार शाम सात बजे घरेलू विवाद खूनी संघर्ष में बदल गया। पैसे को लेकर हुए विवाद के दौरान छोटे भाई ने बड़े भाई पर चाकू से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल युवक की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी फरार हो गया। मृतक की पहचान दिलशेर अहमद (28) पुत्र इश्तियाक के रूप में हुई है, जबकि आरोपी उसका छोटा भाई अनस (24) पुत्र इश्तियाक बताया जा रहा है। सूचना मिलने पर जहानागंज थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। मां की शिकायत के बाद बढ़ा विवाद परिजनों के अनुसार दिलशेर अहमद विदेश में नौकरी करता था। परिवार के अन्य दो बेटे भी बाहर रहकर काम करते हैं। मंगलवार शाम घर में पैसे और खर्च को लेकर बातचीत हो रही थी। इसी दौरान मां ने कथित तौर पर कहा कि परिवार के अन्य बेटे घर खर्च के लिए पैसे भेजते हैं, लेकिन दिलशेर सहयोग नहीं करता। इसी बात को लेकर घर में कहासुनी शुरू हो गई। विवाद बढ़ने पर छोटे भाई अनस ने भी बड़े भाई का विरोध किया और उसे घर से बाहर जाने के लिए कहा। चाकू से किया ताबड़तोड़ हमला परिजनों के मुताबिक, विवाद के दौरान दोनों भाइयों के बीच तीखी बहस होने लगी। इसी बीच अनस ने चाकू निकालकर दिलशेर पर हमला कर दिया। चाकू के कई वार लगने से दिलशेर गंभीर रूप से घायल हो गया और उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में चीख-पुकार मच गई। आसपास के लोग भी मौके पर जुट गए। आरोपी फरार, पुलिस जांच में जुटी घटना की सूचना मिलते ही थाना प्रभारी अतुल कुमार मिश्रा पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी अनस घटना के बाद फरार हो गया है। उसकी तलाश में टीमों को लगाया गया है। मामले की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को भी दे दी गई है। पुलिस हत्या के कारणों और घटनाक्रम की विस्तृत जांच कर रही है।
रामगढ़ महोत्सव 2026 में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि रामगढ़ की पवित्र भूमि प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ आस्था, इतिहास और संस्कृति की अमूल्य धरोहर है। वेदों, पुराणों और उपनिषदों सहित अनेक प्राचीन ग्रंथों में रामगढ़ का उल्लेख मिलता है, जो इसकी ऐतिहासिक महत्ता को दर्शाता है। रामगढ़ को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाएंगे। रामगढ़ से लगे हसदेव जंगल में कोल ब्लॉक के कारण लाखों पेड़ों की कटाई को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को अपने मन से भ्रम दूर करना चाहिए कि पर्यावरण को केवल नुकसान हो रहा है। पेड़ काटे जाएंगे तो उद्योगपति उससे ज्यादा पेड़ लगाए जाएंगे। सीएम ने नेशनल हाईवे का उदाहरण देते हुए कहा कि सड़क आसमान में नहीं बन सकती। रामगढ़ में रामायण की जीवंत स्मृतियां दो दिवसीय रामगढ़ महोत्सव के समापन समारोह को संबोधित करते हुए सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि मान्यता है कि त्रेतायुग में वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने इस भूमि पर समय व्यतीत किया था। सीताबेंगरा गुफा आज भी श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र है तथा रामगढ़ की हवाओं और शिलाओं में रामायण की स्मृतियां जीवंत हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीताबेंगरा गुफा भारत की सबसे प्राचीन नाट्यशालाओं में से एक मानी जाती है, जहां हजारों वर्ष पूर्व सांस्कृतिक आयोजन और नाट्य प्रस्तुतियां होती थीं। वहीं जोगीमारा गुफा अपनी प्राचीन भित्तिचित्र कला के लिए विश्वविख्यात है। हाथीपोल जैसी प्राकृतिक सुरंग तथा क्षेत्र में स्थित प्राचीन शिल्प हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की पहचान हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकवि कालिदास द्वारा मेघदूतम् की रचना इसी क्षेत्र में किए जाने का उल्लेख मिलता है, जिससे रामगढ़ का साहित्यिक महत्व और बढ़ जाता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार रामगढ़, सीताबेंगरा और जोगीमारा जैसी ऐतिहासिक धरोहरों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। पर्यटक सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है ताकि देश-विदेश से आने वाले पर्यटक यहाँ की संस्कृति, इतिहास और प्राकृतिक सौंदर्य से परिचित हो सकें। मुख्यमंत्री ने रामगढ़ के विकास के लिए एक करोड़ रुपए देने की घोषणा की। कार्यक्रम को पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, कृषिमंत्री रामविचार नेताम ने भी संबोधित किया। हसदेव में कोल खनन से रामगढ़ को खतरा नहीं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने पत्रकारों द्वारा रामगढ़ से लगे हसदेव में कोल खनन से रामगढ़ व पर्यावरण को नुकसान के सवाल पर कहा कि रामगढ़ को कोई नुकसान नहीं होगा। उन्होंने कहा कि लोगों को अपने मन से भ्रम दूर करना चाहिए कि पर्यावरण को केवल नुकसान हो रहा है। छत्तीसगढ़ का 44 प्रतिशत भूभाग वनों से ढका हुआ है जो राज्य की प्राकृतिक संपदा को दर्शाता है। सीएम ने कहा कि राज्य में कैम्पा योजना के तहत वन विभाग द्वारा लगातार बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया जा रहा है। एक पेड़ मां के नाम अभियान और कैम्पा योजना के तहत राज्य का 2.5 प्रतिशत अतिरिक्त क्षेत्र कवर किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की उद्योग नीति के अनुसार, यदि कोई उद्योगपति उद्योग लगाने के लिए पेड़ काटता है, तो उसे बदले में उससे कहीं ज़्यादा पेड़ लगाने होते हैं। विकास कार्यों के लिए कई बार पेड़ काटना अनिवार्य हो जाता है। जैसे नेशनल हाईवे 43 को चौड़ा करने के लिए पेड़ काटने ही होंगे, क्योंकि सड़कें आसमान में नहीं बन सकतीं। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाने वालों को नसीहत दी कि वे पहले राज्य की उद्योग नीति और विकास की आवश्यकताओं को अच्छी तरह समझें, उसके बाद ही कोई बयानबाजी करें। सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने बांधा शमारामगढ़ महोत्सव के समापन अवसर पर स्कूली छात्र-छात्राओं एवं कलाकारों ने लोकनृत्य, नाटक व गीत-संगीत की शानदार प्रस्तुतियां दीं। समापन समारोह में विधायक प्रबोध मिंज, रामकुमार टोप्पो, शकुंतला पोर्ते, उद्देशवरी पैंकरा, छत्तीसगढ़ राज्य युवा आयोग के अध्यक्ष विश्व विजय सिंह तोमर, अध्यक्ष पुरातात्विक डॉ एम कालीमुथु सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी-कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
गौतमबुद्धनगर जिला न्यायालय ने करीब पांच साल पुराने गिरधरपुर डबल मर्डर मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश सोमप्रभा मिश्रा की अदालत ने मंगलवार को नौ दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इनमें पांच सगे भाई भी शामिल हैं। यह घटना जमीन विवाद को लेकर हुई थी। जमीन को लेकर चल रहा था विवाद एडीजीसी क्राइम धर्मेंद्र जयंत ने बताया कि मामला 8 फरवरी 2021 का है, जब थाना बादलपुर क्षेत्र के गिरधरपुर सुनारसी गांव में जमीन पर कब्जे को लेकर दो पक्षों में लंबे समय से विवाद चल रहा था। विवाद सुलझाने के लिए एक पंचायत बुलाई गई थी। पंचायत शुरू होते ही आरोपियों ने गाली-गलौज करते हुए लाइसेंसी व अन्य हथियारों से अंधाधुंध फायरिंग कर दी। इस गोलीबारी में सुरेश उर्फ सलेक, अमित पुत्र गजेंद्र और प्रेम पुत्र खजान गंभीर रूप से घायल हो गए। ग्रामीणों ने तीनों को अस्पताल पहुंचाया। यशोदा अस्पताल में अमित को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि सुरेश उर्फ सलेक की इलाज के दौरान मौत हो गई। तीसरे घायल प्रेम सिंह का लंबे समय तक उपचार चला। घटना के अगले दिन सुनील पुत्र राजेंद्र की तहरीर पर थाना बादलपुर में मुकदमा दर्ज किया गया। इसमें देवेन्द्र, रविन्द्र, सतेन्द्र, धर्मेन्द्र, जितेन्द्र, भोपाल, महिपाल उर्फ अल्लू, अमरजीत बंसल और अन्य को हत्या, हत्या के प्रयास, दंगा व अन्य धाराओं में आरोपी बनाया गया था। अदालत ने सभी नौ दोषियों को हत्या, हत्या के प्रयास, दंगा और अन्य धाराओं में दोषी ठहराया। आजीवन कारावास के साथ ही सभी पर 86-86 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। जुर्माना अदा न करने पर प्रत्येक दोषी को एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। पुलिस ने बयान दर्ज कर चार्जशीट पेश की थी पुलिस ने विवेचना के दौरान घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सहित अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों को शामिल करते हुए आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। सुनवाई के दौरान अदालत ने अमित बंसल को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 319 के तहत तलब कर मुकदमे में शामिल किया। अदालत ने सभी साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद देवेन्द्र, रविन्द्र, सतेन्द्र, धर्मेन्द्र, जितेन्द्र, भोपाल, महिपाल उर्फ अल्लू, अमरजीत बंसल और अमित बंसल को दोषी करार दिया। न्यायालय ने कहा कि दंड निर्धारण में अपराध की प्रकृति, उसकी गंभीरता और समाज पर उसके प्रभाव को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इसी आधार पर सभी दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/149 के तहत आजीवन कारावास सहित अन्य धाराओं में भी सजा सुनाई गई। सजा के बिंदु पर बचाव पक्ष ने अदालत से नरमी बरतने की अपील करते हुए कहा कि देवेन्द्र, रविन्द्र, सतेन्द्र, धर्मेन्द्र और जितेन्द्र सगे भाई हैं तथा परिवार की जिम्मेदारी उन्हीं पर है। उनके पिता का निधन हो चुका है। महिपाल अविवाहित है, जबकि भोपाल और बंसल बंधुओं के छोटे-छोटे बच्चे हैं। साथ ही यह भी दलील दी गई कि किसी भी आरोपी का पूर्व आपराधिक इतिहास नहीं है और मामला 'विरल से विरलतम' श्रेणी का नहीं है। हालांकि अदालत ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया और अपराध की गंभीरता को देखते हुए कठोर सजा सुनाई। इस दोहरे हत्याकांड में घायल प्रेम सिंह बाद में सबसे महत्वपूर्ण प्रत्यक्षदर्शी गवाह बने थे। इलाज के बाद स्वस्थ होने पर उन्होंने मामले में अहम गवाही दी। शुरुआती कुछ महीनों तक उन्हें पुलिस सुरक्षा मिली, लेकिन सुरक्षा हटने के बाद 16 दिसंबर 2021 को खेत से घर लौटते समय बाइक सवार बदमाशों ने उन्हें गोलियों से भून दिया। अस्पताल में उनकी भी मौत हो गई। इस मामले में भी मुख्य आरोपियों के खिलाफ अलग से मुकदमा दर्ज किया गया था।
नीमच सिटी थाना क्षेत्र के मनासा नाके पर मंगलवार शाम एक तेज रफ्तार ट्रक ने युवक को टक्कर मार दी। इस सड़क हादसे में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया है, जिसे जिला अस्पताल में प्राथमिक इलाज के बाद निजी अस्पताल रेफर किया गया है। घर लौटते समय हुआ हादसा जानकारी के अनुसार, चावला कॉलोनी का रहने वाला नवीन यादव मंगलवार शाम अपने घर लौट रहा था। इसी दौरान मनासा नाके के पास सामने से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने उसे अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि नवीन सड़क पर दूर जा गिरा और उसके पैर में फ्रैक्चर हो गया। हालत गंभीर, निजी अस्पताल रेफर हादसे के बाद मौके पर मौजूद राहगीरों और नवीन के परिचित दीपक धाकड़ ने उसे तुरंत जिला चिकित्सालय पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार तो किया, लेकिन नवीन की गंभीर हालत और पैर के फ्रैक्चर को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए निजी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। रहवासियों ने की स्पीड ब्रेकर बनाने की मांग हादसे से गुस्साए परिजनों और स्थानीय नागरिकों ने आरोपी ट्रक चालक के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। इसके साथ ही रहवासियों ने मनासा नाके पर सड़क के दोनों ओर स्पीड ब्रेकर बनाने की मांग उठाई है। लोगों का कहना है कि पास में ही शासकीय स्कूल और नीमच सिटी थाना होने के बावजूद इस मार्ग से रोजाना तेज रफ्तार वाहन गुजरते हैं, जिससे हर समय दुर्घटना का खतरा बना रहता है।
डिग्गी में डूबने से मां-बेटी की मौत, बेटा बचा:12 साल के बेटे को लोगों ने बचाया; जांच में जुटी पुलिस
बीकानेर के श्रीडूंगरगढ़ क्षेत्र के जालबसर गांव में मंगलवार को एक दर्दनाक हादसे में खेत की डिग्गी में डूबने से मां और उसकी मासूम बेटी की मौत हो गई। वहीं 12 वर्षीय बेटे को आसपास मौजूद लोगों ने समय रहते बाहर निकाल लिया, जिससे उसकी जान बच गई। जानकारी के अनुसार, जालबसर निवासी हनुमानराम जाट की पत्नी सावित्री (36) और बेटी ज्योति (6) की डिग्गी में डूबने से मौत हो गई। वहीं 12 वर्षीय बेटा विकास भी डिग्गी में चला गया था, लेकिन आसपास के लोगों ने तत्काल डिग्गी में छलांग लगाकर उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि मां और दोनों बच्चे डिग्गी तक कैसे पहुंचे और हादसा किन परिस्थितियों में हुआ। तीनों के डिग्गी में गिरने के कारणों का भी अभी खुलासा नहीं हो सका है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों की मदद से दोनों शवों को बाहर निकलवाया। पुलिस ने सावित्री और ज्योति के शवों को श्रीडूंगरगढ़ अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाया है, जहां पोस्टमॉर्टम के बाद परिजनों को सौंपा जाएगा। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है। घटना के बाद जालबसर गांव में शोक का माहौल है।
बालाघाट जिले के लांजी में 28 जून की रात सराफा कारोबारी कपिल आसटकर के साथ हुई सनसनीखेज लूट के आरोपी दो दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। बदमाशों का सुराग लगाने के लिए अब लांजी पुलिस ने मंगलवार को आरोपियों की जानकारी देने वाले को 10 हजार रुपए का नगद इनाम देने की घोषणा की है। थाना प्रभारी दीपसिंह परमार ने बताया कि लुटेरों के बारे में कोई भी पुख्ता जानकारी देने वाले व्यक्ति का नाम पूरी तरह से गुप्त रखा जाएगा। पुलिस ने इसके लिए बकायदा संपर्क नंबर भी जारी किया है ताकि लोग बेखौफ होकर सूचना दे सकें। पुलिस ने अब तक कई संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ की है, लेकिन फिलहाल किसी की भी औपचारिक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। अस्पताल से लौटे पीड़ित कारोबारी ने पुलिस पर उठाए सवाल इस बीच, लूट के दौरान घायल हुए पीड़ित सराफा व्यापारी कपिल आसटकर मंगलवार शाम गोंदिया के एक निजी अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद अपने घर लौट आए हैं। घर लौटते ही उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली पर असंतोष जताया। कारोबारी ने कहा कि पुलिस जिस तरीके से उनसे पूछताछ और जांच कर रही है, उससे उन्हें ऐसा लग रहा है जैसे पुलिस लुटेरों को पकड़ने के बजाय उन पर ही शक कर रही हो। अंधेरे का फायदा उठाकर भागे थे 8 नकाबपोश बदमाश पुलिस के मुताबिक, घटना की रात इलाके की बिजली गुल थी, जिसके कारण सीसीटीवी फुटेज खंगालने और जांच को आगे बढ़ाने में काफी दिक्कतें आ रही हैं। हालांकि, पुलिस को एक सुराग मिला है कि वारदात के बाद आमगांव रोड पर कुछ संदिग्ध लोगों को तेजी से भागते हुए देखा गया था। थाना प्रभारी ने दावा किया है कि पुलिस की टीमें लगातार काम कर रही हैं और जल्द ही आरोपियों को दबोच लिया जाएगा। क्या थी पूरी घटना? 28 जून की रात लांजी के आमगांव रोड पर इस बड़ी वारदात को अंजाम दिया गया था। दो मोटरसाइकिलों पर सवार होकर आए करीब आठ हथियारबंद बदमाशों ने सराफा कारोबारी कपिल आसटकर को घेर लिया था। बदमाशों ने बंदूक की नोक पर कारोबारी पर हमला किया, दहशत फैलाने के लिए हवाई फायरिंग की और उन्हें लाठियों से बेरहमी से पीटा था। इसके बाद लुटेरे उनके पास मौजूद दो बैग छीनकर फरार हो गए, जिनमें करीब 8 से 9 लाख रुपए कीमत के सोने-चांदी के जेवरात रखे हुए थे।
हरदोई में सिपाही से अभद्रता की:ट्रैक्टर विवाद में दो भाइयों पर केस दर्ज, जांच जारी
हरदोई के मल्लावां में एक सिपाही से अभद्रता का वीडियो सामने आया है। यह घटना ट्रैक्टर लेनदेन से जुड़े एक विवाद की जांच के दौरान हुई। पुलिस ने इस मामले में दो सगे भाइयों के खिलाफ मंगलवार की दोपहर 3:39 बजे रिपोर्ट दर्ज की है, जबकि आरोपी पक्ष ने सिपाही पर घर में घुसकर बदसलूकी का आरोप लगाया है। मल्लावां कोतवाली क्षेत्र के ग्राम भजनपुरवा निवासी सचिन यादव ने एसपी के आदेश पर रिपोर्ट दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि 15 सितंबर 2025 को ग्राम तेरिया भवानीपुर के मनीष कुमार और उनके भाई आशीष कृषि कार्य के बहाने उनका ट्रैक्टर ले गए थे। सचिन का आरोप है कि काफी समय बीतने के बाद भी जब ट्रैक्टर वापस नहीं मिला, तो उन्होंने पता लगाया। उन्हें जानकारी मिली कि मनीष और आशीष ने मिलकर उनके ट्रैक्टर को माधौगंज के पंथनगर निवासी अनूप के पास 1.70 लाख रुपये में अवैध रूप से गिरवी रख दिया है। सचिन के अनुसार, पूर्व में स्थानीय पुलिस को प्रार्थना पत्र देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। इसके बाद उन्होंने करीब एक सप्ताह पहले दोबारा कोतवाली में गुहार लगाई। इसी सिलसिले में 25 जून को सिपाही विशाल यादव अन्य दो लोगों के साथ मामले की जांच करने मनीष के घर पहुंचे थे। आरोप है कि वहां मनीष और उसके परिजनों ने सिपाही के साथ अभद्रता की, जिसका वीडियो वायरल है। मामले में नया मोड़ देते हुए आरोपी मनीष ने बताया कि वायरल वीडियो आधा-अधूरा और बाद का है। उनका आरोप है कि सिपाही विशाल यादव बिना किसी महिला पुलिसकर्मी के सीधे उनके घर में घुसते चले आ रहे थे। मनीष के अनुसार, जब उनकी मां मालती ने सिपाही को अंदर आने से रोका, तो सिपाही ने उनकी मां के साथ अभद्रता की। इसी बात से नाराज होकर परिजनों ने विरोध दर्ज कराया था। मनीष ने सिपाही के खिलाफ एसपी को प्रार्थना पत्र देने की बात भी कही है। कोतवाल विद्यासागर पाल ने आरोपी की ओर से लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने कहा कि मामले की गहनता से जांच की जा रही है।
कोरबा के डीएवी स्कूल के शिक्षक दंपती के 19 वर्षीय इकलौते बेटे वासु सरकार ने मंगलवार दोपहर अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। वह कॉलेज का छात्र था। घटना की जानकारी मिलते ही स्कूल और कॉलोनी में शोक की लहर दौड़ गई। यह मामला कुसमुंडा थाना क्षेत्र का है। जानकारी के अनुसार, वासु के पिता राजा सरकार कुसमुंडा डीएवी में शिक्षक हैं, जबकि माता कोरबा स्थित डीएवी एसईसीएल में पढ़ाती हैं। मंगलवार सुबह दोनों अपने-अपने स्कूल चले गए थे, जिससे वासु घर पर अकेला था। दोपहर में जब माता-पिता घर लौटे, तो दरवाजा अंदर से बंद मिला। कई बार आवाज देने पर भी कोई जवाब नहीं मिला। खिड़की से झांकने पर उन्होंने देखा कि वासु कमरे में पंखे से फंदे पर लटका हुआ था। यह दृश्य देखकर उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग इकट्ठा हो गए। पड़ोसियों की मदद से दरवाजा तोड़कर वासु को फंदे से उतारा गया और तुरंत विकास नगर स्थित एसईसीएल के विभागीय अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। घर का इकलौता चिराग बुझ जाने से माता-पिता बदहवास हो गए। सूचना मिलते ही दोनों स्कूलों के प्रिंसिपल, शिक्षक और शिक्षिकाएं बड़ी संख्या में अस्पताल पहुंचे और परिजनों को सांत्वना दी। कुसमुंडा पुलिस मौके पर पहुंची और शव का मर्ग पंचनामा किया। श्री श्री सिद्धेश्वर महादेव मंदिर सेवा समिति की एंबुलेंस से शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह आत्महत्या का मामला प्रतीत हो रहा है। मृतक के परिजनों और परिचितों से पूछताछ कर मौत के कारणों का पता लगाया जा रहा है। शव को विकास नगर अस्पताल परिसर स्थित मर्चुरी में रखा गया है, जिसका अंतिम संस्कार बुधवार को किया जाएगा। बताया जा रहा है कि वासु ने इससे पहले भी आत्महत्या का प्रयास किया था, लेकिन उस समय उसकी जान बच गई थी। इस बार उसने यह घातक कदम उठा लिया। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि किन परिस्थितियों और कारणों से वासु ने यह फैसला लिया।

