मथुरा बार एसोसिएशन का चुनाव आज:6 पदों के लिए 35 प्रत्याशी मैदान में, 3500 एडवोकेट करेंगे मतदान
मथुरा बार एसोसिएशन के वार्षिक चुनाव में आज मतदान किया जायेगा। इस बार एसोसिएशन के कुल 6 पदों के लिए 35 प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं। नामांकन प्रक्रिया 5, 6 और 7 तारीख को संपन्न हुई, जबकि 8 जनवरी को नामांकन पत्रों की जांच की गई। जांच के दौरान किसी भी प्रत्याशी का पर्चा निरस्त नहीं हुआ और सभी नामांकन सही पाए गए थे। मथुरा में 3500 एडवोकेट मतदान करेंगे। चुनावी प्रक्रिया के तहत 14 जनवरी, बुधवार को जनरल हाउस का आयोजन किया गया था। इसमें सभी प्रत्याशियों ने अपना-अपना परिचय देते हुए अधिवक्ताओं से अपने पक्ष में मतदान करने की अपील की। इस दौरान अपने अपने घोषणा पत्र भी जारी किए थे। मतदान सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक होगा, जबकि मतगणना 17 जनवरी को सुबह 9 बजे से प्रारंभ होकर परिणाम आने तक जारी रहेगी। अध्यक्ष पद पर 5 प्रत्याशी अध्यक्ष पद के लिए कुल पांच प्रत्याशी मैदान में हैं, जिनमें त्रिलोक चन्द्र शर्मा एडवोकेट, राघवेंद्र सिंह एडवोकेट, के.के. चौधरी एडवोकेट, राजकुमार उपाध्याय एडवोकेट और प्रहलाद सिंह तरकर एडवोकेट शामिल हैं। उपाध्यक्ष पद पर 3 प्रत्याशी उपाध्यक्ष पद के लिए तीन प्रत्याशी राज कृष्ण भारद्वाज एडवोकेट, देवेंद्र सिंह एडवोकेट और वल्लभ वर्मा एडवोकेट चुनाव लड़ रहे हैं। सचिव पद पर 12 प्रत्याशी सचिव पद पर सर्वाधिक 12 दावेदार हैं। इनमें गोपाल शर्मा एडवोकेट, मनोज शर्मा एडवोकेट, अटल फौजदार एडवोकेट, बृजमोहन सिंह एडवोकेट, सुरेश चंद पाठक एडवोकेट, शैलेश दुबे एडवोकेट, बृजेश कुमार गौतम एडवोकेट, मनमोहन शर्मा एडवोकेट, पूजा वर्मा एडवोकेट, रमाकांत भारद्वाज एडवोकेट, अमित कुमार शर्मा एडवोकेट और अरविंद कुमार ‘बिट्टू’ एडवोकेट शामिल हैं। संयुक्त सचिव के लिए 9 प्रत्याशी संयुक्त सचिव पद के लिए 9 प्रत्याशी मैदान में हैं जिनमें कमल शर्मा एडवोकेट, के.के. पचौरी एडवोकेट, किशोरी देवी खण्डेलवाल एडवोकेट तथा छत्तर सिंह एडवोकेट मैदान में हैं। जबकि कोषाध्यक्ष पद के लिए संगीता शर्मा एडवोकेट एवं विनोद कुमार शर्मा एडवोकेट,बृज रेखा माथुर एडवोकेट और केदार सिंह मैदान में हैं। ऑडिटर पद के लिए देवकी नन्दन शर्मा एडवोकेट और देवेंद्र कुमार शर्मा एडवोकेट मैदान में है।
इंदौर में माय एफएम की 'पानी पर चर्चा' मुहिम:साफ पानी को लेकर माय एफएम के आरजे का विशेष अभियान
माय एफएम रेडियो द्वारा अपने लोकप्रिय Rjs के साथ चलाई जा रही ‘पानी पर चर्चा’ मुहिम शहर में साफ पीने के पानी को लेकर एक सशक्त आवाज बनती जा रही है। इस मुहिम के तहत आम नागरिकों की समस्याएं न केवल रेडियो के माध्यम से सामने आ रही हैं, बल्कि उन पर त्वरित संज्ञान भी लिया जा रहा है। इसी क्रम में आरजे अभि वार्ड नंबर 31, बापू गांधी नगर पहुंचे, जहां से उन्होंने माय एफएम का रेडियो शो लाइव किया। इस दौरान स्थानीय रहवासियों ने बताया कि इलाके के कुछ घरों में पीने के पानी की सप्लाई दूषित आ रही है। मामले की गंभीरता को समझते हुए क्षेत्रीय पार्षद बालमुकुंद सोनी तत्काल मौके पर पहुंचे। उन्होंने चेंबर खुलवाकर उसकी मरम्मत करवाई और वीडियो के माध्यम से आरजे अभि एवं क्षेत्र के रहवासियों को यह आश्वासन दिया कि आगामी सप्लाई में पानी पूरी तरह से साफ आएगा। आश्वासन के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था इस आश्वासन पर क्षेत्रवासियों ने कुछ दिनों तक इंतजार भी किया, लेकिन 15 जनवरी, सुबह 9:30 बजे, जब आरजे अभी माय एफएम पर अपना शो कर रहे थे, उसी समय बापू गांधी नगर की गली नंबर 2 से लगातार फोन कॉल, मैसेज और वीडियो आने लगे। स्थानीय लोगों ने बताया कि तय समय पर पानी की सप्लाई नहीं हुई और जब आई भी, तो शुरुआत से अंत तक गंदा पानी आया। स्थिति इतनी खराब थी कि लोग पीने के पानी को लेकर पूरी तरह असहाय महसूस करने लगे। करीब 15 घरों से आए कॉल्स, फोटो और वीडियो के माध्यम से रहवासियों ने सप्लाई के पानी की वास्तविक स्थिति आरजे अभि तक पहुँचाई। मामले को तुरंत गंभीरता से लेते हुए आरजे अभी ने दोबारा पार्षद बालमुकुंद सोनी से संपर्क किया और बताया कि यह समस्या अब सोशल मीडिया पर भी सामने आ चुकी है। इसके बाद नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक पानी की सप्लाई बंद हो चुकी थी और उस दिन इलाके के लोगों को पीने का पानी उपलब्ध नहीं हो सका। माय एफएम से फिर उठे आवाज आज बापू गांधी नगर के सभी रहवासियों की एक ही मांग है कि आरजे अभी दोबारा मौके पर आएं, माय एफएम के माध्यम से फिर से वहां की सच्ची स्थिति को सामने लाएं और वीडियो बनाकर इस मुद्दे को उच्च स्तर तक पहुंचाएं, ताकि इसका स्थायी समाधान निकल सके। माय एफएम की यह मुहिम न केवल समस्याओं को उजागर कर रही है, बल्कि यह संदेश भी दे रही है कि शहर किसी भी हाल में “दूसरा भागीरथपुरा” नहीं बन सकता। साफ पानी हर नागरिक का अधिकार है और ‘पानी पर चर्चा’ इसी अधिकार की आवाज बनकर शहर के साथ खड़ी है। वार्ड 33 में मौके पर पानी की जांच वहीं वार्ड 33 में सुखलिया, आदर्श, मौलिक नगर और अलग अलग एरिया में जाकर आरजे अभि ने पार्षद मनोज के साथ पानी की टेस्टिंग की और पार्षद ने हर एरिया का पानी पी कर भी आश्वासन दिलाया कि उनके एरिया का पानी साफ है और वार्ड 33 के रहवासियों का भी यही कहना था कि पार्षद मनोज की वजह से उनके एरिया में 96 बोरिंग की गई है। जिस वजह से भरपूर पानी है और साफ पानी मिल रहा है, ये कहना गलत नहीं होगा कि वार्ड 33 बाकी वार्ड्स को एक अच्छा मैसेज देता है कि शिकायतों पर अगर वक्त रहते एक्शन लिया जाए तो भागीरथपुरा जैसी मुश्किल से बचा जा सकता है माय एफएम आरजे की पानी पे चर्चा लगातार जारी है। सुनते रहिये माय एफएम, चलो अच्छा सुनते हैं।
भोपाल के आधुनिक स्लॉटर हाउस में मिले गोमांस मामले में नगर निगम के जिम्मेदारों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मेयर मालती राय और कमिश्नर संस्कृति जैन 265 क्विंटल मांस में गोमांस की पुष्टि को लेकर पुलिस जांच का हवाला देती रही, लेकिन 8 जनवरी को हुई एफआईआर में ही पुलिस ने गोमांस की पुष्टि कर दी थी। दूसरी ओर, निगम की तरफ से अब तक कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में जिम्मेदार भी जांच के दायरे में आ रहे हैं। काफी दबाव आने के बाद वेटनरी डॉक्टर बेनीप्रसाद गौर समेत 9 कर्मचारियों को सस्पेंड किया गया है। वहीं, 3 कर्मचारियों को नोटिस थमाए गए हैं। एक अन्य कार्रवाई में स्लॉटर हाउस को सील किया गया है। निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने जब आसंदी से जांच कमेटी बनाने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने का आदेश दिया, तब ताबड़तोड़ ये कार्रवाई हुईं, लेकिन दैनिक भास्कर के हाथ पुलिस एफआईआर की वो कॉपी लगी है, जिसमें साफ लिखा है कि मांस में गोमांस था। सबसे पहले जानिए पुलिस की सिलसिलेवार कार्रवाई यूपी के कंटेनर को रोककर की जांच, पैकेट में मिला था मांसजहांगीराबाद थाना प्रभारी मान सिंह चौधरी ने 24 दिसंबर को एक एफआईआर दर्ज की। इसमें 7 दिन पहले, 17 दिसंबर को कंटेनर नंबर यूपी 15 जेटी 4286 में मांस मिलने का हवाला दिया। 18 दिसंबर को वेटनरी अस्पताल जहांगीराबाद में कंटेनर में भरे 265 क्विंटल ( 26.5 टन) मांस में से वेटनरी डॉक्टर की टीम ने अलग-अलग 5 डिब्बों में सैंपल लिए। बाकी मांस कंटेनर के ड्राइवर शोएब पिता कमालउद्द्दीन को ही सुपुर्दगी में दे दिया गया। मथुरा की लैब में भेजे गए सैंपलजो सैंपल पुलिस ने कंटेनर में मिले मांस के लिए थे, उन्हें पुलिस ने जांच के लिए फारेंसिक लैबोरेट्री मथुरा वेटनरी कॉलेज मथुरा उत्तरप्रदेश को भेजे गए। संदिग्ध मांस के सैंपल की जांच रिपोर्ट भी मिल गई। जिसमें मांस में गोमांस (SAMPLE BELONG TO COW OR IT'S PROGENY) का होना सामने आया। प्रदर्शन, पुलिस की कार्रवाई, फिर जागा निगमगोमांस की पुष्टि होने के बाद हिंदूवादी संगठनों ने अरेरा हिल्स थाने के सामने प्रदर्शन किया। इसके बाद पुलिस ने जिंसी स्थित आधुनिक स्लॉटर हाउस का संचालन करने वाली लाइव स्टाक फूड प्रोसेसर प्राइवेट लिमिटेड में पहुंचकर दस्तावेज जब्त किए। स्लॉटर हाउस का संचालक असलम चमड़ा कुरैशी का होना पाया गया है। इसके बाद निगम से स्लॉटर हाउस से जुड़ी सारी जानकारी पुलिस ने ली। ड्राइवर शोएब पिता कमालउद्दीन निवासी थाना खरखोदा मुस्कान पब्लिक स्कूल के पास इकबाल नगर हुमायूं नगर मेरठ (यूपी) से पूछताछ की गई। जांच के बाद पुलिस ने संचालक असलम चकड़ा, ड्राइवर शोएब व अन्य के विरुद्ध मप्र गोवंश वध प्रतिषेध अधिनियम 2004 की धारा 4, 5 और 9, भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धार 61 (2) के तहत केस दर्ज किया। पुलिस ने माना कि गोवंश का वध कर उसके मांस को षड्यंत्रपूर्वक परिवहन किया जा रहा था। पढ़िए पुलिस ने क्या कार्रवाई की... जिस वेटनरी डॉक्टर को सस्पेंड किया, उसी ने बताया था- भैंसें कटीइस पूरे मामले में वेटनरी डॉ. गौर को सस्पेंड किया गया है। इसी डॉक्टर ने 17 दिसंबर 2025 को जारी पत्र में प्रमाणित किया था कि स्लॉटर हाउस में बीते करीब दो सप्ताह में 15 वर्ष से अधिक उम्र की 85 भैंसों का वध किया गया। इसके बाद मांस को फ्रोजन मीट के रूप में पैक कर मुंबई भेजने की अनुमति दी गई। हैरत की बात है कि इसी खेप से पुलिस ने जो सैंपल लिए, उनमें गोमांस की पुष्टि हुई। इससे यह स्पष्ट हुआ कि स्लॉटर हाउस में या तो गायों का वध हुआ या फिर नगर निगम स्तर पर मांस के प्रकार को लेकर गलत प्रमाणन किया गया। मेयर चुप्पी साधे रहीं, कहा- पुलिस जांच कर रही8 जनवरी को ही स्लॉटर हाउस से निकले मांस में गोमांस की पुष्टि पुलिस कर चुकी थी, लेकिन मेयर राय इस मामले में चुप्पी साधे रही। 9 जनवरी को जब मेयर से सवाल किया गया कि स्लॉटर हाउस मामले में निगम क्या कार्रवाई कर रहा? इस पर मेयर ने जवाब दिया कि पुलिस कार्रवाई करेगी। दूसरी ओर, एक्सपर्ट का कहना है कि इस पूरे मामले में नगर निगम और स्लॉटर हाउस संचालक के बीच एग्रीमेंट का उल्लंघन हुआ। निगम ने गोवध के लिए तो 20 साल के लिए एग्रीमेंट नहीं किया था। अवैध तरीके से ही गोवध किया जा रहा होगा, लेकिन नगर निगम ने अब तक स्लॉटर हाउस को लेकर थाने में कोई केस दर्ज नहीं कराया। जो एक केस दर्ज हुआ है, वह पुलिस ने ही हिंदूवादी संगठनों के विरोध प्रदर्शन के बाद किया था। मामले में कमिश्नर जैन को निगम की तरफ से भी केस दर्ज कराना चाहिए था। निगम की कार्रवाई...सील और 10 कर्मचारी सस्पेंड, आगे कुछ नहींइस मामले में अब निगम की कार्रवाई की बात करें तो यह स्लॉटर हाउस को सील करने और डॉक्टर समेत 10 कर्मचारियों को सस्पेंड करने से अलावा कुछ नहीं हुआ। 13 जनवरी को नगर निगम परिषद की बैठक में हंगामे को देखते हुए संभागायुक्त संजीव सिंह के जरिए वेटनरी डॉक्टर गौर को सस्पेंड कर दिया गया। वहीं, कांग्रेस और बीजेपी पार्षदों के हंगामे के बाद निगम अध्यक्ष सूर्यवंशी ने आसंदी से ही उच्च स्तरीय कमेटी बनाने के आदेश दिए। वहीं, एमआईसी मेंबर रविंद्र यति की मांग पर स्लॉटर हाउस के 11 कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। इनमें से 8 कर्मचारी- वसीम खान, सलीम खां, राजा खां, शेख युसुफ, वहीद खान, मोहम्मद फैयाज खान, ईसा मोहम्मद और अब्दुल रहमान को सस्पेंड किया गया। वहीं, युसुफ खान, अब्दुल हकीम और मोहम्मद रफीक को नोटिस थमाए गए। स्लॉटर हाउस बंद, मीट दुकानों पर सख्तीनिगम अध्यक्ष सूर्यवंशी ने आसंदी से ही स्लॉटर हाउस को हमेशा के लिए बंद करने के आदेश दिए। ऐसे में नगर निगम ने अब मीट दुकानों पर सख्ती करना शुरू की है। पुराने शहर में जिन जगहों पर मीट दुकानें हैं, उनमें अवैध स्लॉटिंग पर रोक लगाई जा रही है। पूरी एमआईसी-मेयर को इस्तीफा दे देना चाहिए-विपक्षनेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने कहा कि एमआईसी मेंबर 'शहर सरकार' के मंत्री हैं। मंत्रियों ने कैसे स्लॉटर हाउस को चालू करने के आदेश दे दिए। कोर्ट में मैंने खुद स्टे लिया था, लेकिन एमआईसी ने मीटिंग में इसे शुरू करने की सहमति दे दी। ऐसे में एमआईसी और मेयर को इस्तीफा दे देना चाहिए। यह धार्मिक आस्था से भी खिलवाड़ है। स्लॉटर हाउस से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए... 1. स्लॉटर हाउस का मकसद-शर्तें क्या? हर कड़ी की पड़ताल:100 करोड़ की सरकारी जमीन पर बनाया भोपाल में गोमांस मिलने के मामले में अब आधुनिक स्लॉटर हाउस से जुड़ी पूरी फाइल की गहन जांच की तैयारी है। नगर निगम के उच्च स्तर पर निर्णय लिया गया है कि टेंडर की शर्तें तय होने से लेकर टेंडर आवंटन और अंत में कमिश्नर के हस्ताक्षर तक की हर कड़ी की पड़ताल होगी। ताकि, स्पष्ट हो सके कि करीब 100 करोड़ की सरकारी जमीन पर 33 करोड़ रुपए की लागत से मॉर्डन स्लॉटर हाउस के प्रोजेक्ट, किस उद्देश्य से और किन शर्तों पर तैयार की। इधर, गोमांस मिलने का मामला फिलहाल शांत होते नजर नहीं आ रहा है। भले ही इस मामले में वेटनरी डॉक्टर समेत कुल 9 कर्मचारियों पर निलंबन की गाज गिर गई हो, लेकिन विपक्ष 'शहर सरकार' पर हमलावर है। निगम में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने अब महापौर मालती राय के स्लॉटर हाउस में निरीक्षण करते हुए वीडियो जारी किया है। पढ़े पूरी खबर 2. जहां गोमांस मिला… उसे नामंजूर कर चुके गौर और शर्मा, प्रशासक पर फोड़ा ठीकरा भोपाल के आधुनिक स्लॉटर हाउस में गोमांस मिलने के बाद नगर निगम की मेयर इन कौंसिल (एमआईसी) ने पूरा ठीकरा प्रशासक, वेटनरी डॉक्टर और 11 कर्मचारियों पर फोड़ा है। वेटनरी डॉक्टर, 8 कर्मचारियों को सस्पेंड किया जा चुका है, जबकि 3 कर्मचारियों को नोटिस दिए गए। दूसरी ओर, 2 ऐसे दस्तावेज हाथ लगे हैं, जिसमें बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। ये दोनों ही एमआईसी से जुड़े हैं। दरअसल, 24 अक्टूबर-25 को आईएसबीटी स्थित महापौर ऑफिस में एमआईसी की जो मीटिंग हुई थी, उसमें 6 बिंदुओं पर चर्चा हुई थी। इसमें छठा और आखिरी बिंदू स्लॉटर हाउस से ही जुड़ा हुआ था। इसमें मार्डन स्लॉटर हाउस को समय वृद्धि दिए जाने की बात एमआईसी मेंबर्स को बताई गई थी। पढ़े पूरी खबर 3. भोपाल नगर निगम की बैठक में गोमांस के मुद्दे पर कांग्रेस का वॉक आउट स्लॉटर हाउस में गोमांस मिलने के मुद्दे पर बैठक में जमकर हंगामा हुआ। कांग्रेस पार्षद पोस्टर लेकर सदन में पहुंचे और महापौर व एमआईसी से इस्तीफा मांगा। भोजन अवकाश के बाद दोबारा शुरू हुई बैठक में कांग्रेस पार्षदों ने विरोध जताते हुए सदन से वॉकआउट किया। पढ़े पूरी खबर
भारत-पाक बॉर्डर पर तारबंदी के समानान्तर राजस्थान व पंजाब में करीब 2280 किमी. लंबी सिंगल लेन सड़क बन रही है। केंद्र सरकार की ओर से इसके लिए 4406 करोड़ रुपए की मंजूरी दे दी है। गुजरात और राजस्थान के कच्छ रण के बाखासर में बॉर्डर तारबंदी से लेकर पंजाब के पठानकोट तक सिंगल लेन सड़क बन रही है। इसका बाड़मेर के गडरारोड, जैसलमेर, बीकानेर और श्रीगंगानगर के कुछ इलाकों में काम शुरू हो गया है। जहां किसानों की निजी जमीन है, उसकी अवाप्ति के लिए गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। बाड़मेर में 256.158 हेक्टेयर जमीन अवाप्ति की प्रक्रिया शुरू हो गई है। किसानों को डीएलसी दर के आधार पर मुआवजा दिया जाएगा। यह भारत की सीमा सुरक्षा के लिए सिर्फ सैन्य वाहनों के आवागमन के लिए काम आएगी। इस सड़क का सुरक्षा कारणों से आमजन उपयोग नहीं कर पाएंगे। गुजरात के कच्छ रण में पहले से इस तरह की तारबंदी के निकट सड़क है। राजस्थान और पंजाब में पहली बार इसका निर्माण हो रहा है। राजस्थान - पंजाब के ये 11 बॉर्डर जिले 1. बाड़मेर 228 KM 2. जैसलमेर 464 KM 3. बीकानेर 168 KM 4. अनूपगढ़ (बीकानेर से अलग हुआ जिला) 5. गंगानगर 210 KM 6. फजिल्का 75 KM 7. फिरोजपुर 120 KM 8.तरनताल 95 KM 9. अमृतसर 110 KM 10. गुरदासपुर 85 KM 11. पठानकोट 30 KM राजस्थान 1096 और पंजाब 553 किमी. है। बाड़मेर-जैसलमेर के रेगिस्तान में BSF अब जिप्सी से कर सकेगी पेट्रोलिंग बाड़मेर-जैसलमेर जिलों में रेगिस्तान में गर्मियों के साथ चलने वाली धूलभरी आंधी में धोरे एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट हो जाते हैं। ऐसे में यहां पहली बार तारबंदी के समानान्तर सड़क बन रही है। अब तक धोरों में ऊंट से ही गश्त होती थी। शाम होने के साथ तारबंदी के निकट पाटा घुमाया जाता था ताकि रात्रि में अगर कोई वहां विचरण करता है तो उसके पदचिन्हों से पता लगाया जा सके। अब सिंगल लेन 3.75 मीटर चौड़ी सड़क बनने से जिप्सी से भी बीएसएफ पेट्रोलिंग कर सकेगी। अब तक बॉर्डर की बीओपी और वॉच टॉवर तक पहुंचना मुश्किल था। अब सैन्य वाहनों के लिए यह सड़क काम आएगी। सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पहली बार: तारबंदी पर पेट्रोलिंग कच्चे रास्ते या धोरों में होती थी। पहली बार तारबंदी के बिल्कुल पास पक्की सड़क बन रही है। कुल लंबाई: केंद्र सरकार ने 2,280 किमी. सड़क के निर्माण की मंजूरी दी है। करीब 1,096 किमी. सड़क राजस्थान में बनेगी। त्वरित आवाजाही: युद्ध या आपातकाल की स्थिति में सेना और हथियारों को बॉर्डर तक कम समय में पहुंचाया जा सकेगा। बीएसएफ की मदद: बीएसएफ के जवानों को धोरों में गश्त करने में आसानी होगी, घुसपैठ और ड्रोन से हेरोइन तस्करी पर लगाम लगेगा। बाड़मेर: 256 हेक्टेयर जमीन अवाप्त होगी बीएसएफ के बाड़मेर सेक्टर में भारत-पाक सीमा पर सड़क निर्माण के लिए केंद्रीय लोक निर्माण विभाग की ओर से बाड़मेर जिले के सेड़वा, धनाऊ, चौहटन, रामसर, गडरारोड तहसील क्षेत्रों में 256.158 हेक्टेयर जमीन अवाप्त की जा रही है। इसका गजट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। बाड़मेर जिले में सरहद पर 225 किमी. लंबी सड़क का निर्माण होगा। गडरारोड में सरकारी जमीन है, जहां 38 किमी. सड़क निर्माण के लिए टेंडर जारी होने के साथ ही काम भी शुरू हो गया है। जैसलमेर में 2 फेज में काम चल रहा है। जमीन अवाप्ति के लिए सूची तैयार कर गजट नोटिफिकेशन जारी कर अधिग्रहण की कार्यवाही चल रही है।
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर मुख्यपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति ने नाबालिग रहते हुए कोई अपराध किया था, तो उसके आधार पर उसे सरकारी नौकरी से बर्खास्त नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने हनुमानगढ़ के एक दिव्यांग सफाई कर्मचारी की बर्खास्तगी को रद्द करते हुए उसे पुनः सेवा में लेने का आदेश दिया है। जस्टिस डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संदीप शाह की खंडपीठ ने अपीलार्थी श्रवण की विशेष अपील स्वीकार करते हुए यह फैसला सुनाया। डिवीजन बेंच ने एकल पीठ के उस आदेश को भी रद्द कर दिया, जिसमें कर्मचारी की याचिका खारिज कर दी गई थी। पुलिस वेरिफिकेशन में खुले थे पुराने राज हनुमानगढ़ के जोरावरपुरा निवासी श्रवण (26) का चयन 14 जुलाई 2018 को रावतसर नगरपालिका में सफाई कर्मचारी के पद पर हुआ था। वह 70 प्रतिशत स्थायी दिव्यांगता (बौनापन) से ग्रसित है। नियुक्ति के बाद पुलिस वेरिफिकेशन में सामने आया कि श्रवण के खिलाफ 4 आपराधिक मामले दर्ज थे। इनमें से 3 मामलों में उसे जुआ अधिनियम के तहत सजा हुई थी और एक मामला आबकारी अधिनियम का था, जिसमें वह बरी हो गया था। इसी जानकारी के आधार पर नगरपालिका ने 24 अगस्त 2018 को उसकी सेवाएं समाप्त कर दी थीं। वकील का तर्क: 'घटना के वक्त नाबालिग था' अपीलार्थी के वकील दुर्गेश खत्री ने कोर्ट में तर्क दिया कि जिन मामलों का हवाला देकर नौकरी से निकाला गया है, उस समय श्रवण नाबालिग था। उन्होंने बताया कि जुआ अधिनियम के मामले तुच्छ प्रकृति के हैं। सुप्रीम कोर्ट के 'अवतार सिंह बनाम भारत संघ' फैसले का हवाला देते हुए एडवोकेट खत्री ने तर्क दिया कि तुच्छ अपराधों को छिपाना अपने आप में उम्मीदवारी खारिज करने का आधार नहीं हो सकता। वकील ने यह भी कहा कि पद की प्रकृति (सफाई कर्मचारी) को देखते हुए नियोक्ता को विवेकाधिकार का प्रयोग करते हुए पुरानी गलतियों को नजरअंदाज करना चाहिए था। कोर्ट ने कहा- जेजे एक्ट देता है सुरक्षा कवच कोर्ट ने मामले में जुवेनाइल जस्टिस एक्ट, 2000 की धारा 19 का हवाला दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा – 'नोशनल लाभ' मिलेंगे, वेतन नहीं कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी को सेवा में निरंतर माना जाएगा, लेकिन जिस अवधि में उसने काम नहीं किया (बर्खास्तगी के दौरान), उस अवधि के लिए उसे 'नोशनल लाभ' ही मिलेंगे। यानी, कागजों में उसकी नौकरी जारी मानी जाएगी, जिससे उसकी सीनियरिटी और पेंशन पर असर नहीं पड़ेगा, लेकिन काम नहीं करने की अवधि का नकद वेतन नहीं मिलेगा।
नमस्कार, कानपुर में कल (गुरुवार) की बड़ी खबरें…युवक ने ससुराल की चौखट के बाहर जहर खाकर जान दे दी। वह पत्नी को मनाने पहुंचा था। लेकिन पत्नी ने उसके मुंह पर दरवाजा बंद कर दिया। दोनों का 8 साल से अफेयर चल रहा था। ढाई साल पहले दोनों ने मंदिर में शादी की थी। वाटर पार्क घूमने पहुंची सगी बहनों से 8-10 शोहदों ने छेड़छाड़ की। विरोध किया तो शोहदों ने सरेआम दुपट्टा खींच लिया। तेजाब डालने की धमकी दी। BJP विधायक राहुल बच्चा सोनकर के मस्जिद को लेकर दिए गए बयान पर सपा ने आपत्ति जताई है। सपा विधायक हसन रूमी ने भाजपा विधायक को चैलेंज किया है। कहा- भाजपा विधायक ऐसा करके तो दिखाएं। हम लोगों ने भी चूड़ियां नहीं पहनी हैं। कानपुर की ऐसी ही 10 बड़ी खबरों से गुजरने के लिए ऊपर वीडियो पर क्लिक करें…। अब सिलसिलेवार पढ़िए 10 खबरें... 1. नामर्द नहीं चाहिए...पति ने ससुराल की चौखट पर जान दी:पत्नी ने दरवाजा बंद किया, कानपुर में ढाई साल पहले लव-मैरिज की थी कानपुर में एक युवक ने ससुराल की चौखट के बाहर जहर खाकर जान दे दी। वह पत्नी को मनाने पहुंचा था, लेकिन पत्नी ने उसके मुंह पर दरवाजा बंद कर दिया। पति काफी देर तक दरवाजा खटखटाता रहा, लेकिन नहीं खुला। फिर बुधवार दोपहर 3:40 बजे उसने पत्नी को आखिरी कॉल की, लेकिन उसने कॉल नहीं उठाई। इसके बाद पति अपने ऑटो में बैठा और जहर खा लिया। फिर ऑटो से ही अपने घर पहुंचा। वहां उसकी तबीयत बिगड़ने लगी। घरवालों ने उसे कांशीराम अस्पताल में भर्ती कराया, जहां से हैलट रेफर कर दिया गया। बुधवार देर रात डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामला चकेरी थाना क्षेत्र का है। पढ़ें पूरी खबर 2. सपा विधायक बोले- हमने चूड़ियां नहीं पहन रखीं:हसन रूमी ने कहा- ऐसा करके तो दिखाएं, भाजपा MLA ने कहा था- मस्जिद के बाहर बोटियां मिलेंगी कानपुर में BJP विधायक राहुल बच्चा सोनकर के मस्जिद को लेकर दिए गए बयान पर राजनीति गर्मा गई है। उनके बयान पर सपा ने आपत्ति जताई है। कैंट से सपा विधायक हसन रूमी ने भाजपा विधायक को चैलेंज किया है। कहा- भाजपा विधायक ऐसा करके तो दिखाएं। हम लोगों ने भी चूड़ियां नहीं पहनी हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा विधायक ने थाने के अंदर दिया गया बयान आपत्तिजनक है। ये हेट स्पीच की श्रेणी में आता है। पुलिस प्रशासन को उनके खिलाफ एक्शन लेना चाहिए। भाजपा विधायक ने थाने के भीतर इस तरह का बयान देकर पूरे कानून व्यवस्था को चुनौती दी है। पढ़ें पूरी खबर 3. रात और सुबह गलन से छूटी कंपकपी, पारा 5 डिग्री:धूप निकली तो मिली राहत, हमसफर समेत 31 ट्रेनें कानपुर लेट पहुंचीं कानपुर शहर में गुरुवार सुबह के समय ठंड से लोगों की कंपकपी छूट गई। कोहरे न होने के चलते मौसम तो साफ रहा लेकिन सर्द हवाओं ने गलन को बढा दिया। ठंड के चलते मार्किंग वाकर्स की संख्या में कमी देखी गई। लोगों ने ठंड से बचाव के लिए अलावा का सहारा लिया। सीएसए की ओर से जारी वेदर रिपोर्ट के अनुसार न्यूनतम तापमान 5.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया जो कि सामान्य से 1.8 डिग्री कम है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में रात के तापमान में उतार चढ़ाव जारी रहेगा। धुंध व कोहरे के भी आसार हैं। पढ़ें पूरी खबर 4. कानपुर में वाटर पार्क घूमने गई सगी बहनों से छेड़छाड़:8 से 10 शोहदों ने खींचा दुपट्टा, छोटी बहन के विरोध पर तेजाब डालने की धमकी दी कानपुर में शोहदों की दुस्साहस का मामला सामने आया है। वाटर पार्क घूमने पहुंची सगी बहनों से 8-10 शोहदों ने छेड़छाड़ की। विरोध किया तो शोहदों ने सरेआम दुपट्टा खींच लिया। तेजाब डालने और वीडियो बनाकर वायरल की धमकी दी। युवतियों के शोर मचाने पर पार्क में घूम रहे लोग आगे आए तो आरोपी धमका कर कार में बैठकर भाग निकले। घर पहुंचने पर डरी-सहमी बहनों ने परिजनों को आपबीती बताई। तब जाकर उनकी मां ने आरोपियों के खिलाफ बुधवार रात नौबस्ता थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पढ़ें पूरी खबर 5. कानपुर चिड़ियाघर यूपी के खूंखार जानवरों का ठिकाना बना:2 लोगों को जिंदा खाने वाले बाघ की दहाड़ कंपा देती है, 14 आदमखोर यहां कैद कभी खुले जंगलों में दहाड़ से खौफ पैदा करने वाले बाघ और तेंदुए आज कानपुर चिड़ियाघर में सलाखों के पीछे कैद हैं। ये वही जानवर हैं, जिनके नाम से गांवों में सन्नाटा पसर जाता था। इंसानों पर हमलों और जानलेवा घटनाओं के बाद इन्हें जंगल में दोबारा छोड़ना जब मुमकिन नहीं रहा तो कानपुर जू में कैद किया गया। इस समय 14 से अधिक ऐसे आदमखोर और हिंसक जानवर यहां कैद हैं। सुरक्षा कारणों से इन्हें बाड़े में नहीं छोड़ा गया है। पिजड़े में ही रखा गया। ये जानवर ऐसे हैं जो आज भी जू स्टाफ को देखकर गुर्रा देते हैं तो लोग डर जाते हैं। पढ़ें पूरी खबर 6. गैंगरेप पीड़िता के भाई को धमकाया, बोला- मैनेज कर लो:कानपुर में पीड़ित ने कहा- इंसाफ न मिला तो पेट्रोल डालकर पूरा परिवार मर जाएंगे कानपुर में गैंगरेप के आरोपी दरोगा अमित कुमार मौर्या के पक्ष में पीड़िता के भाई को वॉट्सऐप मैसेज के जरिए सीतापुर के अमित त्रिवेदी ने धमकाया था। अमित त्रिवेदी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस आरोपी को कानपुर लेकर पहुंची। पूछताछ में पुलिस के हाथ अमित त्रिवेदी और पीड़िता के भाई के बीच हुई बातचीत का 16 मिनट 59 सेकेंड का ऑडियो लगा है। अमित त्रिवेदी कहा रहा- पुलिस फंसी है, इसलिए सपोर्ट कर रही है। शांत हो जाओ, कुछ होने वाला नहीं है। वहीं पीड़िता का भाई कहता है- इंसाफ न मिला तो पेट्रोल डालकर पूरा परिवार मर जाएंगे। पढ़ें पूरी खबर 7. हड़ताल से वैक्सीनेशन बाधित हुआ, आशा बहुओं पर FIR:कानपुर में कोल्ड चेन हैंडलर की शिकायत पर कार्रवाई, स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा का आरोप बिल्हौर तहसील के शिवराजपुर में आशा बहुओं की हड़ताल के दौरान वैक्सीन आपूर्ति बाधित होने का मामला सामने आया है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के कोल्ड चैन हैंडलर की शिकायत पर पुलिस ने अज्ञात आशा बहुओं के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। घटना मंगलवार की बताई जा रही है, जब उप स्वास्थ्य केंद्रों पर शिशुओं के टीकाकरण के लिए वैक्सीन भेजी जा रही थी। सीएचसी में तैनात कोल्ड चैन हैंडलर विकास ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि मंगलवार को एरिया वैक्सीन डिलीवरी (एवीडी) के माध्यम से उप स्वास्थ्य केंद्रों पर वैक्सीन कैरियर भेजे जा रहे थे। पढ़ें पूरी खबर 8. कानपुर में एक और 'दुबे सिडिंकेट' आया सामने:जॉब से निकाला तो युवती ने गैंगरेप की FIR कराई, 50 लाख मांगे; इनकार पर जेल गया कानपुर में अखिलेश दुबे के बाद एक और ‘दुबे सिंडिकेट’ सामने आया है। ये गैंग लोगों को फर्जी रेप केस में फंसाकर जेल भिजवा कर रंगदारी वसूलता है। इस गैंग ने ब्रिटिश स्कूल ऑफ लैंग्वेज के डायरेक्टर और होटल कारोबारी को गैंगरेप केस में फंसाकर 50 लाख रंगदारी मांगी। रुपए देने से मना किया तो फिर उसे जेल भिजवा दिया। पीड़ित ने आरोपी के खिलाफ पुलिस कमिश्नर की ओर से चलाए जा रहे अभियान ‘ऑपरेशन 500’ में शिकायत की है। उसका कहना है कि मामले में पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल ने फजलगंज थाने को जांच सौंपी है। मगर, अभी केस दर्ज नहीं किया है। पढ़ें पूरी खबर 9. कानपुर में गंगा-मैली, आसपास के जिलों में यहां से साफ:कन्नौज और फतेहपुर में C श्रेणी, कानपुर आते ही गंगाजल D कैटेगरी में पहुंचा गंगा नदी की अविरलता और निर्मलता कानपुर आते ही बिगड़ रही है। देश के लोगों के लिए आस्था का केंद्र मानी जाने वाली गंगा नदी कानपुर में सबसे ज्यादा मैली है। जाजमऊ में गंगा के भीतर डाल्फिन का शव मिलने के बाद गंगा प्रदूषण पर सवाल उठ रहे हैं। यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपीपीसीबी) की रिपोर्ट के अनुसार जिले के विभिन्न घाटों और मॉनिटरिंग पॉइंट्स पर गंगा का पानी 'डी' श्रेणी में पहुंच गया है। इसका सीधा मतलब है कि यहां का गंगाजल न तो पीने योग्य है, न ही आचमन (धार्मिक उपयोग) के लायक रह गया है। पढ़ें पूरी खबर 10. कानपुर में ठंड के बीच लगाई आस्था की डुबकी:मकर संक्रांति पर गंगा घाटों पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, घाटों पर पुलिस तैनात मकर संक्रांति का पर्व गुरुवार को पूरे श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। गंगा स्नान के लिए भोर से श्रद्धालु घाटों पर पहुंचने लगे। हालांकि कड़ाके की ठंड और घने कोहरे के चलते सुबह के समय श्रद्धालुओं की संख्या कम रही, लेकिन आस्था पर मौसम का असर नहीं दिखा। कई श्रद्धालु स्नान के लिए बीच गंगा की धारा तक पहुंचे और विधि-विधान से पूजन-अर्चन कर पुण्य लाभ लिया। स्नान के बाद भक्तों ने खिचड़ी, तिल एवं गर्म कपड़ों का दान कर धार्मिक परंपराओं का पालन किया। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर पुख्ता इंतजाम किए गए थे। घाटों पर पुलिस बल की तैनाती, बैरिकेडिंग और लगातार निगरानी की व्यवस्था रही। पढ़ें पूरी खबर
बरेली के सीबीगंज स्थित खलीलपुर में नगर निगम और सत्ताधारी दल के बीच ठन गई है। नगर निगम ने सड़क चौड़ीकरण के नाम पर जिन 300 घरों पर लाल निशान लगाए हैं, उनके बचाव में अब वरिष्ठ भाजपा नेता और प्रसिद्ध विधि विशेषज्ञ महेश पांडेय उतर आए हैं। उन्होंने नगर निगम की इस कार्रवाई को 'अवैध' और 'जनविरोधी' करार देते हुए सीधे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दरबार में दस्तक दी है। पांडेय का साफ कहना है कि विकास के नाम पर दशकों से रह रहे लोगों को बेघर करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ है। 'एक ईंट भी नहीं हटने देंगे': महेश पांडेय की खुली चेतावनीभाजपा नेता महेश पांडेय ने नगर निगम की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि वे इस कॉलोनी की एक ईंट भी नहीं हटने देंगे। उन्होंने दैनिक भास्कर की खबर का हवाला देते हुए सवाल उठाया कि जो लोग 100 साल से अधिक समय से वहां रह रहे हैं, जिनकी कई पीढ़ियां वहीं जन्मी और खत्म हो गईं, उन्हें अचानक 'अवैध' कैसे घोषित किया जा सकता है? पांडेय ने आरोप लगाया कि नगर निगम के अधिकारियों ने बिना किसी ठोस आधार के लोगों के बीच दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। देखे इस विवाद से जुड़ी अलग-अलग तस्वीरें कानूनी लड़ाई का ऐलान: 'हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे जंग'पेशे से वरिष्ठ कानूनविद होने के नाते महेश पांडेय ने इस लड़ाई को तार्किक और कानूनी अंजाम तक ले जाने की बात कही है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि इन 300 परिवारों के आशियानों को बचाने के लिए उन्हें हाईकोर्ट या देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) का दरवाजा भी खटखटाना पड़ा, तो वे पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने साफ किया कि गरीबों के हक की रक्षा के लिए वे सड़क से लेकर अदालत तक हर मोर्चे पर डटे रहेंगे। CM को पत्र: अधिकारियों पर निजी स्वार्थ और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपमहेश पांडेय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेजे लिखित पत्र में नगर निगम के पर्यावरण अभियंता राजीव राठी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने पत्र में स्पष्ट रूप से लिखा कि अभियंता निजी लाभ और स्वार्थ के लिए क्षेत्रवासियों को परेशान कर रहे हैं। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि खलीलपुर, किला छावनी, स्वालेनगर और बाकरगंज जैसे मोहल्ले देश की आजादी से पहले के बसे हुए हैं, जिन्हें उजाड़ना मानवता और इंसानियत के खिलाफ है। 40 हजार करोड़ का भूमि घोटाला: निगम की दोहरी नीति पर सवालशिकायती पत्र में पांडेय ने नगर निगम के अधिकारियों की दोहरी मानसिकता का कच्चा चिट्ठा खोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ निगम गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाने की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर की बेशकीमती तालाबों, चरागाहों और सरकारी जमीनों पर भू-माफियाओं का कब्जा करवाया गया है। उन्होंने दावा किया कि अधिकारियों ने करीब 40 हजार करोड़ रुपये की सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जों में सहयोग किया और उनके नक्शे स्वीकृत कराए। बुलडोजर की दहशत: भाजपा को वोट दिया, अब क्या बेघर होंगे?खलीलपुर के निवासी, जो खुद को भाजपा का कट्टर समर्थक बताते हैं, अब गहरे सदमे में हैं। महिलाओं और बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने अपनी जीवन भर की कमाई इन आशियानों में लगा दी है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि बिना किसी पूर्व नोटिस के सीधे लाल निशान लगाना तानाशाही है। लोगों ने चेतावनी दी है कि वे अपने घरों को टूटने देने के बजाय जान देना बेहतर समझेंगे। अब सभी की निगाहें शासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।
संभल की सीनियर डिवीजन सिविल कोर्ट चंदौसी के आदेश पर श्री हरिहर मंदिर बनाम शाही जामा मस्जिद के विवादित स्थल पर दूसरे चरण के सर्वे के दौरान 24 नवंबर 2023 को हिंसा भड़क गई थी। इस दौरान खग्गू सराय अंजुमन, थाना नखासा निवासी दिव्यांग युवक आलम पुत्र यामीन को गोली लग गई। आलम अपनी आजीविका चलाने के लिए सुबह बिस्किट-पापे बेचने घर से निकले थे। उनकी एक टांग में पोलियो है और वे दिव्यांग हैं। परिवार का दावा है कि घटना के समय उन्हें वहां चल रहे विवाद की कोई जानकारी नहीं थी। आलम की बहन रजिया ने बताया कि उनके भाई को पुलिसकर्मियों ने तीन गोलियां मारीं। उन्हें यह जानकारी बाहर के लोगों से मिली। परिवार का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने ही गोली चलाई है। घटना के बाद आलम के पिता ने एक साल पहले कोर्ट में गुहार लगाई थी। परिवार पिछले एक साल से न्याय के लिए संघर्ष कर रहा है। रजिया के अनुसार, पुलिस ने उन्हें लगातार धमकाया, लेकिन सरकार पर भरोसे के कारण वे पीछे नहीं हटे और लगातार मुकदमे लड़ते रहे, भले ही कई बार वे खारिज हो गए हों। परिवार ने इस मामले में 12 लोगों के नाम दिए हैं, जिनमें अनुज चौधरी को मुख्य आरोपी बताया गया है। रजिया ने बताया कि उन्हें मुख्य रूप से अनुज चौधरी का ही नाम पता है, जबकि उनके पिता को अन्य सभी नाम मालूम हैं। आलम का इलाज अभी भी जारी है। परिवार द्वारा एक साल पहले दायर की गई याचिका पर 9 जनवरी को आदेश हुआ है, हालांकि अभी तक रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई है। परिवार को उम्मीद है कि जल्द से जल्द आरोपियों पर कार्रवाई होगी और उन्हें इंसाफ मिलेगा। रजिया ने यह भी बताया कि आलम के साथ-साथ अन्य लोगों के साथ भी गलत हुआ है और कुछ लोग तो अपनी जान गंवा चुके हैं। आलम अपने 10 बहन-भाइयों में पांचवें नंबर पर हैं और उनकी उम्र 21-22 साल है। संभल के CJM कोर्ट के न्यायाधीश विभांशु सुधीर ने चर्चित ASP अनुज चौधरी एवं इंस्पेक्टर अनुज तोमर सहित 20 पुलिस कर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश हुए हैं। कोर्ट में उक्त मुकदमा 06 फरवरी 2024 को दायर किया गया था, 11 महीने के बाद कोर्ट ने 09 जनवरी को एफआईआर दर्ज करने के आदेश किए हैं। आपको बता दें कि अनुज चौधरी वर्तमान में फिरोजाबाद के अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण है और अनुज तोमर जनपद संभल की कोतवाली चंदौसी के थाना प्रभारी हैं। संभल हिंसा के दौरान अनुज चौधरी सीओ संभल थे, उसके बाद चंदौसी सीओ रहें और जनपद संभल में तैनाती के दौरान ही प्रमोशन होकर ASP बन गए। संभल हिंसा और 52 जुम्मे होली एक वाला बयान देकर चर्चा में आए थे। आपको बता दें कि 19 नवंबर 2024 को संभल की शाही जामा मस्जिद को श्रीहरिहर मंदिर होने का दावा सिविल सीनियर डिवीजन कोर्ट चंदौसी में पेश किया गया। कोर्ट के आदेश पर उसी दिन शाम को पहले चरण का सर्वे हुआ और दूसरे चरण का सर्वे 24 नवंबर 2024 को किया गया। हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा हो गए और सर्वे को बाधित करते हुए हिंसा भड़क गई, पुलिस पर पथराव-फायरिंग की गई, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई, चर्चित सीओ अनुज चौधरी, डिप्टी कलेक्टर सहित 29 पुलिसकर्मी घायल हुए। संभल कोतवाली एवं थाना नखासा में कुल 12 एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क एवं सपा विधायक इक़बाल महमूद के बेटे सुहैल इक़बाल सहित कई लोगों को नामजद करते 2200 से अधिक लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया। जामा मस्जिद के सदर जफर अली एडवोकेट सहित 134 अभियुक्तों को जेल भेज चुकी है जिसमें 3 महिलाएं और संभल हिंसा के मुख्य साजिशकर्ता फरार गैंगस्टर शारिक साठा के तीन गुर्गे मुल्ला अफरोज, वारिस एवं गुलाम भी शामिल है। हालांकि इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद जफर अली को बीती 1 अगस्त 2024 को मुरादाबाद जेल से रिहा कर दिया गया था, 24 मार्च को उन्हें जेल भेजा गया था और 131 दिन के बाद जेल से बाहर आए। निचली अदालत की कार्रवाई पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है।
इटावा शहर के नगला बाबा गांव में उधार के रुप, मांगने पर एक दंपत्ति पर लाठी-डंडों और ईंट-पत्थरों से हमला किया गया। इस घटना में अधेड़ व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि बीच-बचाव करने आई एक पड़ोसी महिला को भी चोटें आईं। घटना का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। नगला बाबा गांव निवासी पुष्पा देवी ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनके पति चंद्रभान ने गांव के ही आशीष को मकान का लेंटर डलवाने के लिए 50 हजार रुपए उधार दिए थे। काफी समय बीत जाने के बाद भी आशीष ने रुपए नहीं लौटाए। बीते 12 जनवरी की शाम करीब छह बजे चंद्रभान रुपए मांगने आशीष के घर पहुंचे। रुपये मांगते ही आशीष ने चंद्रभान के साथ गाली-गलौज शुरू कर दी, जिससे विवाद बढ़ गया। शोर सुनकर आशीष के पिता बेचेलाल और उसके भाई अखिलेश तथा असित भी मौके पर आ गए। आरोप है कि इन तीनों ने मिलकर चंद्रभान पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। हमले से चंद्रभान जमीन पर गिर पड़े, जिसके बाद आरोपियों ने उन पर ईंट-पत्थर भी बरसाए। चंद्रभान की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग और रिश्तेदार मौके पर पहुंचे, जिसके बाद हमलावर भाग गए। इस हमले में चंद्रभान के दाहिने पैर के घुटने में गंभीर फ्रैक्चर हो गया। परिजन घायल चंद्रभान को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने हालत गंभीर देखते हुए इलाज शुरू किया। फिलहाल चंद्रभान का अस्पताल में उपचार चल रहा है और हालत स्थिर बताई जा रही है। इसी घटना के दौरान गांव की एक अन्य महिला आरती पत्नी मोनू भी हिंसा का शिकार हो गई। आरती ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि वह घटना के समय अपने घर के बाहर अलाव ताप रही थी। जब उसने आरोपियों को झगड़ा और मारपीट करने से मना किया तो आरोपियों ने उस पर भी हमला कर दिया, जिससे वह घायल हो गई। घटना के दौरान किसी ग्रामीण ने मोबाइल फोन से पूरी वारदात का वीडियो बना लिया, जिसमें आरोपी खुलेआम लाठी डंडों और ईंट पत्थरों से हमला करते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिससे गांव और आसपास के इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और हालात को नियंत्रित किया। दोनों पीड़ित महिलाओं की तहरीर के आधार पर पुलिस ने पिता और पुत्रों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। प्रभारी निरीक्षक सुनील कुमार ने बताया कि नामजद आरोपी बेचेलाल, अखिलेश और असित को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। वायरल वीडियो को भी जांच में साक्ष्य के रूप में शामिल किया गया है। अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
रोहतक में ASI संदीप लाठर सुसाइड केस में दर्ज FIR में IPS वाई पूरन कुमार पर गंभीर आरोप लगाए गए है। FIR के अनुसार एक महिला पुलिसकर्मी का ट्रांसफर के नाम पर IG ऑफिस बुलाकर यौन शोषण किया गया। कई पुलिसकर्मियों का फिजिकली व मानसिक रूप से शोषण किया और रिश्वत के नाम पर मोटी रकम ली गई। ASI संदीप लाठर ने मंगलवार दोपहर करीब एक बजे गांव लाढोत से धामड़ रोड़ पर अपने मामा के खेतों में बने कोठड़े की छत पर जाकर सर्विस रिवाल्वर से गोली मारकर सुसाइड कर लिया। सुसाइड से पहले संदीप लाठर ने एक वीडियो रिकॉर्ड किया और 4 पेज का एक सुसाइड नोट भी छोड़ा, जिसमें IPS वाई पूरन कुमार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। सुसाइड करने की सूचना पर पुलिस व परिवार के लोग मौके पर पहुंचे और जांच शुरू की। पुलिस ने 16 अक्टूबर को एएसआई के शव का पोस्टमॉर्टम करवाकर परिजनों को सौंपा और उनकी मांग भी मानी थी। लेकिन अभी तक मानी गई मांगों में से केवल एक ही पूरी हुई है, जबकि अन्य मांगों को अभी तक पूरा नहीं किया गया है। फाइलों के नाम पर आईजी ऑफिस में लिए रुपए ASI सुसाइड केस में दर्ज FIR में आरोप लगाया कि कुछ भ्रष्ट पुलिसकर्मियों की तैनाती IG ऑफिस में की और जातिवाद का जहर घोलते हुए पुलिसकर्मियों से फाइलों के नाम पर डराकर मोटी रकम रिश्वत के तौर पर ली गई। फाइलों में छोटी मोटी दिखाकर पुलिस कर्मियों से SIS सुनील व गनमैन सुशील रुपए लेते रहे। महिला पुलिसकर्मी का ट्रांसफर के नाम किया यौन शोषण FIR में आरोप लगाया कि महिला पुलिसकर्मी को आफिस में बुलाकर ट्रांसफर करने के नाम पर परेशान करके यौन शोषण किया गया और सामान्य नागरिकों व व्यापारियों को बुलाकर फिजिकली व मेंटली टार्चर करके मोटी रिश्वत ली गई। IPS वाई पूरन कुमार ने अपराध को बढ़ाया ही नहीं, बल्कि जुल्म की पराकाष्ठा की। IAS पत्नी व MLA साले के बल पर IPS ने किया भ्रष्टाचारFIR में आरोप लगाया कि IPS वाई पूरन कुमार पत्नी वरिष्ठ IAS है और उनका साला पंजाब में MLA है। साले की पत्नी भी एससी आयोग में है, जिनकी शह पर ही आईजी वाई पूरन कुमार ने जमकर भ्रष्टाचार किया। सीएम के संज्ञान में मामला आया तो आईजी का ट्रांसफर किया गया था। व्यापार को आईजी ऑफिस बुलाकर बेइज्जत FIR में आरोप लगाया कि रोहतक के एक व्यापारी को पहले ही बदमाशों व गुंडों से धमकी मिल रही थी। जब वह मदद के लिए गया तो उसे आईजी ऑफिस बुलाकर बेइज्जत किया गया। व्यापारी को गालियां दी गई। व्यापारी के आफिस जाकर गनमैन ने रुपए लिए, जिसकी सीसीटीवी फुटेज व वाइस रिकार्डिंग भी है। IPS ने राजनीतिक रंग देने के लिए छोड़ा सुसाइड नोटFIR में आरोप लगाया कि IPS वाई पूरन कुमार ने मामले को जातिगत व राजनीतिक रंग देने के लिए झूठा सुसाइड नोट तैयार किया, ताकि वह गिरफ्तारी से बच सके। IAS लॉबी को भी ईमानदार अफसरों को टारगेट करने का मौका मिल गया। जातिगत जहर घोलकर ईमानदार अधिकारियों को प्रताड़ित किया गया। IPS की संपत्ति की होनी चाहिए जांचFIR में संदीप लाठर के परिवार ने आरोप लगाया कि IPS वाई पूरन की IAS पत्नी के भ्रष्टाचार व संपत्ति की जांच होनी चाहिए। सच्चाई सबके सामने आनी चाहिए। भ्रष्टाचारी अधिकारी इस लड़ाई को कमजोर करने की कोशिश में है, लेकिन सच्चाई हारनी नहीं चाहिए।
मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। 'बात खरी है' मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। सिंधिया बोले- मुझे नहीं पता दिग्विजय क्या चाहते हैंवरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अपनी राज्यसभा सीट खाली करने का ऐलान कर सियासी गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। उनके इस ऐलान पर जब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से सवाल किया गया तो वह भड़क गए। सिंधिया ने तंज करते हुए कहा कि उन्हें खुद नहीं पता कि दिग्विजय सिंह क्या चाहते हैं। उन्होंने कहा- जब मैं कांग्रेस में था, तब भी मैं नहीं जानता था कि वो क्या चाहते थे। अब मैं पार्टी से बाहर हूं, तो कैसे जानूं कि वो क्या चाहते हैं। राजनीतिक जानकारों की मानें तो दिग्विजय सिंह को यूं ही कांग्रेस की राजनीति का ‘चाणक्य’ नहीं कहा जाता। उनके हर फैसले के पीछे कोई न कोई रणनीति जरूर होती है। खुद कांग्रेस के नेता भी दिग्विजय सिंह की राजनीतिक समझ की तारीफ करते हैं। कांग्रेस नेता सज्जन सिंह ने कहा कि दिग्विजय सिंह बेहद दूरदर्शी नेता हैं। विजयवर्गीय ने सांसद लालवानी को दी अपनी कुर्सी इंदौर में एक कार्यक्रम के दौरान उस वक्त माहौल हल्का-फुल्का और खुशनुमा हो गया, जब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सांसद शंकर लालवानी को अपनी कुर्सी सौंप दी। हालांकि यह कोई राजनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि मंच पर कुछ देर के लिए कुर्सी देने का मजेदार वाकया था। हुआ यूं कि कैलाश विजयवर्गीय कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान सांसद शंकर लालवानी का आना हुआ। लेकिन मंच पर कुर्सी खाली नहीं थी। इस पर मंत्री विजयवर्गीय ने सांसद शंकर लालवानी से कहा कि आप मेरी कुर्सी पर बैठ जाइए। सांसद शंकर लालवानी जब कुर्सी पर बैठ गए तो कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि कैलाश पर ही शंकर बैठता है। ये सुनते ही कार्यक्रम में ठहाके गूंजने लगे। मामला यहीं नहीं रुका। मुख्यमंत्री ने भी विजयवर्गीय की बात दोहराई। पूर्व गृह मंत्री ने एसपी-कलेक्टर को बताया नाकारा मध्य प्रदेश के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा इस बार विपक्ष जैसी भूमिका में नजर आए। उन्होंने अपने ही जिले दतिया के एसपी और कलेक्टर को नाकारा करार दिया। वे जिले में लगातार बढ़ रहे अपराधों को लेकर बोल रहे थे। दरअसल, नरोत्तम मिश्रा दतिया में बढ़ रहे क्राइम को लेकर कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को घेर रहे थे। नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि कांग्रेस विधायक एसपी की शिकायत डीजीपी से क्यों नहीं करते। इसके पीछे उन्होंने जो तर्क दिया, वह चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा कि ये एसपी-कलेक्टर उन्हीं के लाए हुए आईएएस-आईपीएस हैं। अब लोग सवाल उठा रहे हैं कि कांग्रेस विधायक के कहने पर तो एसपी और कलेक्टर की पोस्टिंग नहीं हुई होगी। ऐसे में नरोत्तम मिश्रा का ये तर्क पच नहीं रहा है। विधायक ने बनाई जलेबी, लोगों ने बनाया वीडियो राजनीति है साहब, जो कराए सो कम.. राजगढ़ से भाजपा विधायक अमर सिंह यादव खुजनेर के एक होटल में जलेबी बनाते नजर आए। विधायक को कढ़ाही के पास खड़े होकर जलेबी बनाते देखा तो भीड़ जुट गई। जो लोग विधायक को पहचानते थे, वे रुक गए और मोबाइल निकालकर वीडियो बनाने लगे। खरी बात यह है कि विधायक जी भी इस पूरे घटनाक्रम का खूब आनंद लेते नजर आए। राजनीति में पब्लिसिटी भी जरूरी होती है और शायद यही वजह रही कि वह पूरे आत्मविश्वास के साथ जलेबी बनाते रहे और लोगों को पोज भी देते रहे। इनपुट सहयोग - अरुण मोरे (ग्वालियर), राधावल्लभ मिश्रा (दतिया), मनीष सोनी (राजगढ़) ये भी पढ़ें - दिग्विजय के ग्राउंड पर जीतू पटवारी क्लीन बोल्ड: सीएम के साथ फोटो की होड़ में मची खींचतान दिग्विजय सिंह के ग्राउंड पर बल्लेबाजी कर रहे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी एक बॉल पर क्लीन बोल्ड हो गए। पटवारी विधायक जयवर्धन सिंह के साथ राघौगढ़ में एक स्पोर्ट्स फेस्टिवल में शामिल हुए थे। बल्लेबाजी में हाथ आजमाने के बाद मंच से उन्होंने कहा- जिंदगी की यही रीत है, हार के बाद ही जीत है। पूरी खबर पढ़ें
आज कई इलाकों में गुल रहेगी बिजली:देख सकते हैं ट्राइबल एग्जीबिशन :जानिए आज भोपाल में कहां- क्या खास
आपको हम बता रहे हैं, भोपाल शहर में आज कहां-क्या हो रहा है। यहां हर वो जानकारी होगी, जो आपके काम आएगी। संगीत-संस्कृति, आर्ट, ड्रामा के इवेंट से लेकर मौसम, सिटी ट्रैफिक, बिजली-पानी की सप्लाई से जुड़ा हर अपडेट मिलेगा। काम की जरूरी लिंक्स
DDU में चल रहे पूर्वी क्षेत्र अंतर-विश्वविद्यालय बास्केटबॉल (महिला) टूर्नामेंट में खिलाड़ियों में जबरदस्त उत्साह देखा गया। पहले दिन कुल चार मैच खेले गए। इनमें कुछ टीमों के बीच कड़ी टक्कर रही, तो कुछ टीमों ने अपने बेहतरीन खेल प्रदर्शन से एकतरफा जीत दर्ज कर ली। शानदार मुकाबला करते हुए कुल आठ टीमें अगले राउंड में पहुंच गईं हैं। पहला मैच संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय, सरगुजा, अंबिकापुर और सिक्किम-मनिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी बीच खेला गया। जिसमें संत गहिरा गुरु विश्वविद्यालय ने सिक्किम-मनिपाल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी को 50-04 के बड़े अंतर से हराया। दूसरा मुकाबला ब्रह्मपुर यूनिवर्सिटी, ओडिशा और रमा देवी वूमेन यूनिवर्सिटी, भुवनेश्वर के बीच खेला गया। जिसमें ब्रह्मपुर यूनिवर्सिटी ने रमा देवी वूमेन यूनिवर्सिटी को 31-25 से हराया । तीसरे मैच में छत्तीसगढ़ की स्वामी विवेकानंद टेक्निकल यूनिवर्सिटी, भिलाई को पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी ने 40-06 से जीत दर्ज की। पाटलिपुत्र यूनिवर्सिटी ने 40-06 से जीत दर्ज की चौथे मैच में जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता और अटल बिहारी वाजपेयी यूनिवर्सिटी, बिलासपुर के बीच हुआ। जिसमें जादवपुर विश्वविद्यालय ने 39-27 से मैच पर कब्जा जमाया। इसके साथ ही विनोबा भावे यूनिवर्सिटी, हजारीबाग, मणिपुर सेंट्रल यूनिवर्सिटी, पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर, छत्तीसगढ़ और बर्दवान यूनिवर्सिटी अगले राउंड में पहुंच गई हैं। ऊर्जा के सकारात्मक उपयोग का बेहतर माध्यम खेल इस अवसर पर कुलपति प्रोफेसर पूनम टंडन ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति में खेल पर काफी जोर है। खेल में महिलाओं की प्रतिभागिता से परिवार समाज व देश मजबूत होता है। खेल ऊर्जा के सकारात्मक उपयोग का बेहतर माध्यम है। प्रोफेसर प्रशांत कुमार दास बने ऑब्जर्वरप्रतिकुलपति प्रोफेसर शांतनु रस्तोगी ने कहा कि जीत से ज्यादा महत्वपूर्ण है प्रतिभागिता। टूर्नामेंट का ऑब्जर्वर एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज द्वारा त्रिपुरा विश्वविद्यालय के प्रोफेसर प्रशांत कुमार दास को नियुक्त किया गया है। एसोसिएशन ऑफ इंडियन यूनिवर्सिटीज की ओर से गोरखपुर विश्वविद्यालय को आवंटित इस टूर्नामेंट की शुरुआत झंडारोहण, कैप्टन ओथ सेरेमनी से हुई। इसका विधिवत उद्घाटन दिनांक 16 जनवरी 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ महाराज सुबह 9:00 बजे से करेंगे। 26 टीमों ने लिया हिस्सा पूर्वी क्षेत्र के अंतर्गत पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, असम, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, मणिपुर, नागालैंड, सिक्किम, त्रिपुरा, पूर्वी उत्तर प्रदेश और आंशिक मध्य प्रदेश के विश्वविद्यालय आते हैं। इस टूर्नामेंट में अब तक कुल 22 टीमें आ चुकी हैं, जबकि चार टीमें रास्ते में हैं। ज्यूरी ऑफ अपील मेंबर के अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल खिलाड़ी टूर्नामेंट में अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल खिलाड़ी अनंत सिंह, स्कंद राय भी ज्यूरी ऑफ अपील के सदस्य के रूप में सहभागिता कर रहे हैं। इस टूर्नामेंट के चीफ रेफरी वीरेंद्र वीर विक्रम सिंह समेत रोहित शर्मा, सौरभ गुप्ता, एल के बिस्वाल, मनोज दुबे, अफरोज जमाल, राहुल सक्सेना, सोनेंद्र श्रॉतिया, आरसी सिंह, अजीत कुमार तथा वीपी दुबे निर्णायक की भूमिका निभा रहे हैं। ये सभी बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया के क्वालिफाइड नेशनल रेफरी हैं। विश्वविद्यालय के इतिहास में पहली बार ऐसा आयोजन आयोजन सचिव डॉ राजवीर सिंह ने बताया कि गोरखपुर विश्वविद्यालय के इतिहास में महिला संवर्ग में पहली बार पूर्वी क्षेत्र अंतर विश्वविद्यालय बास्केटबॉल प्रतियोगिता हो रही है। क्रीडा परिषद के अध्यक्ष प्रोफेसर विमलेश मिश्र ने कहा कि 14 राज्यों से आई हुई टीमों के लिए हमने सुनिश्चित किया है कि सभी खिलाड़ी अपना बेहतरीन प्रदर्शन कर सकें। इसके लिए खेल के मैदान से लेकर अन्य व्यवस्थाओं तक सारी व्यवस्थाएं चाक चौबंद की गई हैं। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के समस्त अधिष्ठाता, शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी, विद्यार्थियों समेत राज्य युवा कल्याण परिषद के उपाध्यक्ष डॉ विभ्राट चंद कौशिक आदि उपस्थित रहे.
गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर में 14 और 15 जनवरी को खिचड़ी चढ़ाने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। इस साल करीब 15 लाख भक्तों ने मंदिर पहुंचकर गुरु गोरखनाथ को खिचड़ी चढ़ाई और उनका आशीर्वाद लिया। मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में भक्तों का उत्साह साफ नजर आया।इसी दौरान गोरखपुर से सांसद और फिल्म अभिनेता रवि किशन भी अपनी पत्नी और बेटी के साथ गोरखनाथ मंदिर पहुंचे। उन्होंने गुरु गोरखनाथ के चरणों में माथा टेका और खिचड़ी चढ़ाकर आशीर्वाद लिया। रवि किशन की बेटी रीवा ने इस खास पल का रील बनाया, जिसे उन्होंने सोशल मीडिया पर शेयर किया है। रवि किशन ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर मंदिर दर्शन का वीडियो पोस्ट कर इसकी जानकारी दी।मंदिर में मौजूद रवि किशन को देखकर उनके फैंस भी काफी उत्साहित नजर आए। कई लोग उनके पास आकर फोटो खिंचवाने लगे। रवि किशन ने भी पूरी विनम्रता के साथ एक-एक कर सभी प्रशंसकों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं। उनकी सादगी और अपनापन देखकर लोग काफी खुश नजर आए। ऊपर फोटो पर क्लिक कर देखें VIDEO...
गोरखपुर के 'खिचड़ी मेले' में इस बार सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र जलपरी शो बना हुआ है। मेले में पहली बार 'जलपरी' के दीदार के लिए हजारों की संख्या में लोग उमड़ रहे है। जिसको देखते हुए अब टिकट का रेट बढ़ा दिया गया है। शुरुआत में जो टिकट 80 रुपए का था पिछले चार- पांच दिनों से उसका रेट बढ़कर 100 रुपए हो गया है। उसके बावजूद लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ है। टिकट काउंटर पर जबरदस्त भीड़ देखने को मिल रही। लोग घंटों लाइन में लग कर टिकट ले रहे और फिर इंतजार करके शो देखने जा रहे हैं। सुरक्षा के लिए बाउंड्री भी लगा वहीं जलपरी को देखने के लिए लोगों का उत्साह और दीवानापन देखते हुए आयोजकों ने जलपरी के टैंक से दर्शकों की दूरी बढ़ा दी है। पहले यहां किसी भी तरह का बाउंड्री नहीं था जिससे लोग जलपरी के पास फोटो खिंचवाते और हाथ मिलाते थे। जलपरी शो को लेकर आने वाले शैलेष शुक्ला ने बताया- बढ़ती भीड़ को देखते हुए चारों तरफ रेलिंग लगानी पड़ी है। नहीं तो लोग बिल्कुल पास पहुंच जाते थे। जिससे पीछे खड़े हुए लोगों को कुछ दिखाई नहीं देता था। अब आराम से लोग देख पाते हैं। जलपरी शो देखने आए सत्येंद्र ने कहा- अब लोगों की भीड़ बढ़ेगी तो टिकट का रेट तो बढ़ेगा ही। खैर जलपरी को देखने के लिए कितना भी पैसा देना पड़े देखेंगे ही। पहली बार आई है, वीडियो में देखा है अब सामने से देखूंगा। शीशे के घर में 'जलपरी' का बसेरा एक पारदर्शी टैंक में पानी के अंदर अठखेलियां करती 'जलपरी' लोगों को खूब लुभा रही है। रंग-बिरंगी रोशनी और म्यूजिक के बीच जब यह पानी के अंदर कलाबाजियां दिखाती है, तो दर्शकों का उत्साह देखने लायक होता है। कभी हार्ट बनाती, कभी फ्लाइंग किश देती तो कभी बच्चों को पास बुलाकर शीशे के अंदर से ही उनसे हाथ मिलाती। यह शो ऐसा है जिसे बच्चे और बड़े सभी पसंद कर रहे हैं। 5 मिनट के शो के लिए हो रहा इंतजार जलपरी शो को लेकर आने वाले शैलेष शुक्ला ने बताया- मैं इस मेले में पहली बार 3 रियल जल परियों को लेकर आया हूं। शुरुआत में ही रिस्पांस बहुत अच्छा मिल रहा। सुबह 10 से शो चालू हो जाता है। जिसमें हर कुछ देर बाद 5 मिनट का शो दर्शकों को दिखाया जाता है। 100 रुपए टिकट के प्राइज है। लोगों में काफी उत्साह देखा जा रहा रहा। उम्मीद है अंत तक बढ़िया आमदनी होगी। सेल्फी और वीडियो की मची होड़ सोशल मीडिया के इस दौर में 'जलपरी' के साथ डिजिटल यादें संजोने की होड़ मची है। जैसे ही जलपरी टैंक के करीब आती है, लोग अपने मोबाइल फोन से उसकी तस्वीरें और वीडियो बनाने लगते हैं। खासकर बच्चों के बीच इसे लेकर जबरदस्त उत्साह है। मेले में आए एक दर्शक ने बताया कि अब तक कहानियों और फिल्मों में ही जलपरी देखी थी, लेकिन बाबा के दरबार में इसे सामने से देख कर वाकई बहुत अच्छा लग रहा है।
कमजोरी दूर करने वाली शक्तिवर्धक आयुर्वेदिक दवा स्वर्ण भस्म की कीमत एक साल में 19 से बढ़कर 26 हजार पहुंच गई है। डायबिटीज की दवा वसंत कुसमाकर 1100 रुपए महंगी हुई है। जानते हैं क्याें? क्योंकि एक साल में सोने की कीमतें 75% और चांदी की 167% बढ़ गई हैं। अब आप सोच रहे होंगे कि सोने-चांदी की कीमतों में उछाल से आयुर्वेदिक दवाएं कैसे महंगी हो सकती हैं? इसकी वजह है- आयुर्वेदिक दवाओं में सोने और चांदी का उपयोग। ज्यादातर लोग सोने-चांदी को सिर्फ गहने बनवाने और इन्वेस्टमेंट का जरिया मानते हैं, लेकिन ऐसा नहीं है। सोने-चांदी का मेडिकल साइंस में भी महत्वपूर्ण रोल है। कई दवाओं में गोल्ड-सिल्वर के नैनोपार्टिकल्स का इस्तेमाल किया जाता है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… 40% तक महंगी हुई आयुर्वेदिक दवाएंचांदी में बैक्टीरिया से लड़ने की क्षमता होती है। ऐसे में इसका उपयोग गंभीर इंफेक्शन, जलने के घाव वाली क्रीम में किया जाता है। इसके अलावा कुछ मेडिकल उपकरणों में भी यूज होता है। सोने और चांदी का आयुर्वेदिक और भस्म आधारित दवाओं में सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। यही कारण है कि सोने-चांदी के दामों में बेतहाशा वृद्धि के कारण आयुर्वेदिक दवाओं की कीमतों में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। पिछले एक साल के दौरान 10 से लेकर 40 फीसदी तक आयुर्वेदिक दवाओं के दाम बढ़े हैं। राजस्थान में 150 करोड़ का बिजनेसएक्सपट्र्स का कहना है कि 50 से अधिक आयुर्वेदिक दवाइयों में सोने-चांदी का इस्तेमाल होता है। इसमें सर्दी-जुकाम, डायबिटीज, कमजोरी दूर करने, सांस रोग, यूरीनरी इंफेक्शन आदि की दवाइयां शामिल हैं। इसके अलावा च्यवनप्राश में भी इसका उपयोग होता है। राजस्थान में आयुर्वेदिक दवाओं का सालाना 100 से 150 करोड़ का बिजनेस है। श्रीराम ड्रग स्टोर के संचालक वैभव खंडेलवाल कहते हैं- चांदी का इस्तेमाल होने वाली दवाइयां 20-25% व सोने के इस्तेमाल से तैयार दवाइयां 40-50% महंगी हो गई हैं। इसके अलावा जिन दवाओं की टैबलेट्स में चांदी की कोटिंग होती है, उनके दाम 10 फीसदी से ज्यादा बढ़े हैं। सोने और चांदी से निर्मित दवाओं के दाम बढ़ने से व्यापार प्रभावित हो रहा है। रिसर्च वर्क पर भी पड़ रहा असरडॉ.अरविंद विश्नोई बताते हैं- आयुर्वेद के स्टूडेंट्स नई-नई दवाओं के रिसर्च के लिए सोने-चांदी की भस्म का इस्तेमाल करते हैं। अब इनके महंगे होने से रिसर्च का काम प्रभावित हो रहा है। जयपुर के राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के एमडी और पीएचडी स्टूडेंट्स को रिसर्च के लिए संस्थान की ओर से 60 से 80 हजार रुपए स्टाइपेंड के रूप में रिसर्च के लिए मिलते हैं। दवाओं के लिए कम से कम 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की आवश्यकता होती है। फिलहाल सोने की कीमत 1 लाख 30 हजार रुपए से ज्यादा हो गई है। ऐसे में स्टूडेंट्स को रिसर्च के लिए जेब से पैसा खर्च करना होगा।पीएचडी स्कॉलर डॉ. शिवानी कहती हैं- हम रिसर्च करते हैं कि गोल्ड का इस्तेमाल किन-किन रोगों के इलाज में कर सकते हैं। संस्थान में अर्थराइटिस और दर्द के इलाज की दवा में भी सोने के इस्तेमाल पर रिसर्च चल रहा है। मैं कोरोनरी आर्टरी डिजीज में चांदी के जरिए इलाज पर रिसर्च कर रही हूं। अगर इसी तरह इनके दामों में बढ़ोतरी होती रहेगी तो रिसर्च का काम प्रभावित होना लाजिमी है। आयुर्वेद में सोना-चांदी नोबल मैटलआयुर्वेद में सोने और चांदी को नोबल मैटल कहा जाता है। अलग-अलग दवाओं में इनका इस्तेमाल बहुतायत में होता है। सामान्यत: सोने से निर्मित दवाओं को इम्यूनिटी बूस्टर के रूप में लिया जाता है। वहीं चांदी से निर्मित दवाओं को ब्रेन के फंक्शन को इम्प्रूव करने के लिए लिया जाता है। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान में रसशास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ.अनुपम श्रीवास्तव कहते हैं- सोने-चांदी की कीमतें बढ़ने का डायरेक्ट और इनडायरेक्ट असर पड़ रहा है। सीधा असर ये है कि कीमतें बढ़ने से दवाइयां महंगी हो गई हैं। इनडायरेक्ट असर ये है कि महंगी होने से डॉक्टर्स ये दवाइयां लिखने से बचेंगे। लिखेंगे तो मरीज महंगी होने के कारण खरीद नहीं पाएगा। इसके अलावा दवाओं का निर्माण करने वाली कंपनियां भी उस क्वालिटी की इंग्रीडेंट का इस्तेमाल करने से बचेंगी। दांतों का इलाज भी हुआ महंगादांतों की कैविटी भरने और क्राउन लगाने में चांदी और सोने की मिश्रित धातुओं का उपयोग किया जाता है। दांतों में चांदी की फिलिंग के लिए काम आने वाला सिल्वर अलॉय पाउडर के 60 ग्राम पैकेट की कीमत पांच हजार रुपए से ज्यादा हो गई है। राजधानी के सरकारी डेंटल कॉलेज में सिल्वर अलाय पाउडर के पिछले टेंडर में 30 ग्राम की कीमत 2 हजार 638 रुपए थी। इस बार इसकी खरीद 3 हजार 808 रुपए में की गई है। सरकारी क्षेत्र में दांतों की फिलिंग निशुल्क होती है। प्राइवेट क्षेत्र में एक दांत की फिलिंग में 800 से 1 हजार रुपए लगते हैं। सोने से बनने वाली दवाएं : कल्याण सुन्दर रस, मकारध्वज रासायन, कुमार कल्याण रस, हेमग़रभा पोटली, क्षय केसरी रस, वसंत मालती रस, स्वर्ण प्रप्ति, कुमुदश्वर रस, कंचनाभरा रस, चतुर्भुज रस, बृहत्वताचिंतामणि रस, कांडारप रस, त्रिलोकयाचिंतामणि रस, नवरतनराज मृगांक रस, मकारध्वज रस, महामृगांक रस, सर्वेशवारा रस, मेहकेसरी रस, रासराजा रस, शवसा कसा चिंतामणि रस, हेमग़रभा पोटली रस, चतुरमुख रस, योगेंद्र रस, पुत्पक्वाविशमाजवारंतक लोहा। चांदी से बनने वाली दवाएं : सोमनाथ रस, महामृगांक रस, त्रिलोकया चिंतामणि रस, मकारध्वज वटी, लक्ष्मीविलास रस, विजयपारपति , विषमज़वारंतक लौहा , जेहारमोहरा वटी , इंदुवाती, ग्राहनिकापात रस, कांडारप रस, ज्यामंगल रस, राजाताड़ी लौहा, नित्याड्या रस, सर्वाज्वारहरा रस, उन्मादबंजन रस, कल्याणसुन्दर रस, कुमुदेशावर रस, नवरतनराजमृगांका रस, कंचनाभरा रस।
सैनिक की दृढ़ इच्छाशक्ति ही सेना का साहस '
पंडित दीनदयाल उपाध्याय शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय में सेना दिवस पर प्रेरक व्याख्यान माला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में एनसीसी की 7 गर्ल्स एवं 11 बॉयज यूनिट के कैडेट्स ने सहभागिता की। आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में अनुशासन, कर्तव्यबोध और राष्ट्रभक्ति की भावना को सुदृढ़ करना रहा। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता मेजर गजराज सिंह ने कहा कि भारतीय सेना फोर डी यानी डिसिप्लिन, डेडिकेशन, डिटरमिनेशन और डिवोशन पर कार्य करती है, जिनमें अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण है। अनुशासन का अर्थ स्वयं पर शासन करना है। यदि व्यक्ति अपनी इंद्रियों और कर्मों पर नियंत्रण रखता है तो वही सच्चा अनुशासन है। उन्होंने विद्यार्थियों को जीवन में “क्या करें और क्या न करें” पर स्पष्ट फोकस रखने की सलाह दी। मोबाइल उपयोग पर आगाह करते हुए कहा कि मोबाइल यह तय नहीं करता कि हमें क्या देखना है, बल्कि यह निर्णय हमें स्वयं लेना होता है। वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. अमर कुमार जैन ने बताया कि थल सेना दिवस 15 जनवरी को इसलिए मनाया जाता है क्योंकि इसी दिन लेफ्टिनेंट जनरल केएम करियप्पा ने स्वतंत्र भारत के पहले भारतीय शीर्ष कमांडर के रूप में पदभार ग्रहण किया था। डॉ. रंजना मिश्रा ने कहा कि भारतीय सेना विश्व में गौरवशाली स्थान रखती है और प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह सेना के प्रति सम्मान का भाव बनाए रखे। व्याख्यान के बाद प्रभारी प्राचार्य डॉ. मिश्रा, डॉ. गोपा जैन एवं लेफ्टिनेंट कीर्ति रैकवार ने मेजर गजराज सिंह को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। साथ ही विगत वर्ष उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 15 एनसीसी कैडेट्स सार्जेंट नन्नीबाई लोधी, सीनियर अंडर ऑफिसर सुजाता सेन, लांस कॉरपोरल देववती गौड़, केडेट आशा अहिरवार, रिया कोरी सहित अन्य को मेडल पहनाकर सम्मानित किया गया।
हवाओं की रफ्तार ने पकड़ी तेजी, 67% रही नमी
भास्कर संवाददाता|सागर प्रदेश के कई हिस्सों में जहां कड़ाके की ठंड पड़ रही है, वहीं सागर का मौसम फिलहाल जुदा नजर आ रहा है। रात का पारा गिरने के बजाय अभी भी सामान्य से ऊपर बना हुआ है। पिछले 24 घंटों में अधिकतम तापमान में एक डिग्री की मामूली गिरावट जरूर हुई है, लेकिन दिन और रात का पारा अभी भी सामान्य से 1-1 डिग्री ज्यादा बना हुआ है। गुरुवार को शहर का अधिकतम तापमान 25.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं, न्यूनतम तापमान भी हल्की गिरावट के साथ 11.6 डिग्री पर आ गया। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 19 जनवरी से एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित करेगा। जैसे ही यह विक्षोभ आगे निकलेगा, उत्तर से आने वाली बर्फीली हवाएं सीधे बुंदेलखंड में प्रवेश करेंगी। महीने के अंतिम दिनों में सागर सहित पूरे संभाग में कड़ाके की ठंड और शीतलहर चलने की संभावना है। आसमान में पश्चिमी जेट स्ट्रीम की रफ्तार में अचानक बड़ा उछाल आया है। पिछले 24 घंटों में इसकी गति 205 किमी प्रति घंटा से बढ़कर 235 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गई है। इन तेज हवाओं के कारण ही आसमान में बादलों की आवाजाही लगी हुई है। सुबह के वक्त हवा में नमी का स्तर 67% रहा, जिससे हल्की धुंध छाई रही, जबकि शाम होते-होते यह घटकर 45% पर आ गई।
पहलवान बब्बा मंदिर के पुजारी को तहसीलदार आज दिलाएंगे प्रभार
भास्कर संवाददाता| सागर कचहरी घाटी पर स्थित पहलवान बब्बा मंदिर में शुक्रवार को शासन द्वारा नियुक्त पुजारी को प्रभार दिलाया जाएगा। इस संबंध में एसडीएम ने आदेश जारी करते हुए नगर तहसीलदार सहित नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक व 9 पटवारियों की ड्यूटी लगाई है। एसडीएम ने पुलिस प्रशासन को भी पत्र भेजकर जरूरी बल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। यह कार्रवाई कलेक्टर के आदेश पर की जा रही है। एसडीएम ने प्रभार दिलाने के लिए दल बनाया है। यह दल 16 जनवरी को सुबह 10 बजे अपनी कार्रवाई करेगा। मंदिर के प्रभार के संबंध में लंबे समय से विवाद चल रहा है। संभागायुक्त, कलेक्टर कार्यालय से आदेश हो चुके हैं। अब इन पर अमल करने के लिए आदेश हुए हैं। एसडीएम कार्यालय से हुए आदेश में बताया है कि कार्यालय कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी के पत्र क्रमांक 9609/ धर्मस्व 2025 सागर 10/11/2025 से देव श्री पहलवान बब्बा हनुमान मंदिर सिद्धधाम कचहरी घाटी सागर के नव नियुक्त पुजारी को प्रभार ग्रहण कराए जाने के लिए नियमानुसार कार्रवाई करने पत्र प्राप्त हुआ है। मंदिर की व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से संचालन, गतिविधियों, रखरखाव एवं शासकीय दिशा निर्देशों के क्रियान्वयन के लिए राजस्व निरीक्षक सागर को प्रबंधक एवं पटवारी सागर खास को सहायक प्रबंधक नियुक्त किया जा चुका है। पदभार ग्रहण कराने के लिए समिति गठित की जाती है। यह समिति मंदिर परिसर में स्थापित सभी मंदिरों की सामग्री, चल-अचल संपत्ति का रखरखाव, आय-व्यय के सभी दस्तावेज, आभूषण एवं बहुमूल्य सामग्री की सूची तैयार कर कार्रवाई व संधारण कराया जाना सुनिश्चित करेगी। जरूरत पड़ने पर बैंक में लॉकर्स खोले जाने का भी प्रबंध करेंगे। प्रभार दिलाने बनी कमेटी में यह शामिल : प्रभार दिलाने के लिए बनी कमेटी में तहसीलदार सागर नगर संदीप तिवारी के साथ नायब तहसीलदार रतौना प्रतीक रजक, राजस्व निरीक्षक हर्ष साहू, पटवारी आनंद खत्री, रूपेश श्रीवास्तव, नवीन श्रीवास्तव, सुशील लोधी, विकास चौकसे, शरद गोस्वामी, जसवंत पटेल, आशुतोष बड़ोनिया व शैलेंद्र सिंह ठाकुर शामिल हैं।
बयाना–भुसावर मार्ग पर स्थित बारोली ग्राम पंचायत का काफी बड़ा हिस्सा कभी महान साहित्यकार डॉ. रांगेय राघव जी के पूर्वजों की जागीर हुआ करता था। मुर्दों का टीला, कब तक पुकारूं और लोई का ताना जैसी कालजयी कृतियों के लेखक रांगेय राघव के पुरखों को करीब 300 वर्ष पूर्व जयपुर महाराजा दक्षिण आरकाट से वैर लाए थे। वे रामानुजाचार्य परंपरा के तैलीय ब्राह्मण थे। बाद में भरतपुर संस्थापक महाराजा सूरजमल के भाई राजा प्रतापसिंह उन्हें वैर ले आए और वैर के निकट उन्हें बारोली की जागीर दी तथा वैर में सीताराम का मंदिर स्थापित करवाया। डॉ. रांगेय राघव को मंदिर और जागीर रास नहीं आए। उन्होंने अपनी आजीविका का आधार लेखन को बनाया। यद्यपि अब रांगेय राघव के परिवार का इस गांव से कोई रिश्ता नहीं है, लेकिन गांव के लोग अभी भी उनसे जुड़ाव रखते हैं और उनकी चर्चा करते हैं। जिला परिषद के सदस्य देशराज सिंह कहते हैं कि बचपन से साहित्यकार रांगेय राघव जी का जिक्र सुनते आ रहे हैं। गांव में रियासतकालीन हनुमान जी का मंदिर है। रांगेय राघव जी यहां आते थे। इसके अलावा यहां चामुंडा माता का भी मंदिर है, जिसकी दूर-दूर तक मान्यता है। वैर के सीताराम मंदिर के लिए बारोली जागीर की कुछ राशि कभी राग-भोग के लिए जाती थी। साहित्यकार रांगेय राघव ने अधिकांश साहित्य रचना इसी मंदिर में रहकर की। गांव का काफी इलाका बागवानी के लिए जाना जाता है। समस्या: न पानी पहुंचा, न सड़क दुरुस्त हुई बारोली गांव में जल जीवन मिशन सुविधा के बजाय दिक्कतों का कारण बन गया है। टंकी बन गई है और पाइपलाइन के लिए सड़क खोदी गई, लेकिन उनकी मरम्मत नहीं हुई। जिला परिषद सदस्य देशराज सिंह ने बताया कि पाइपलाइन कुछ जगह डैमेज है और पानी रिसता है। गांव में पानी नहीं पहुंचा है। मोड़ से बारोली तक की सड़क टूटी हुई है। एक किलोमीटर के इस रास्ते में गर्द उड़ती रहती है। बिजली कटौती की समस्या है। जीएसएस के लिए जमीन चिन्हित हो गई है, प्रस्ताव भी जा चुका है। गांव का लेखा-जोखा जनसंख्या : 6000साक्षरता : 70 प्रतिशतजिला मुख्यालय से दूरी : 60 किमीआवागमन : बस व निजी वाहनशिक्षा : सीनियर सेकेंडरी स्कूल साहित्यकार रांगेय राघव की जयंती कल महान साहित्यकार डॉ. रांगेय राघव की जयंती 17 जनवरी को मनाई जाएगी। सन 1923 में आगरा में जन्मे रांगेय राघव का बचपन वैर में बीता। उनका मूल नाम तिरूमल्लै नंबाकम वीर राघव आचार्य था। उन्होंने 13 वर्ष की आयु में लिखना शुरू किया था और 18 वर्ष की उम्र में घरौंदा उपन्यास लिखा। वे एक दिन में दो कृतियों का लेखन करने की क्षमता रखते थे। उन्होंने उपन्यास, कहानी, जीवनी, नाटक, कविता, रिपोर्टाज, अनुवाद सहित 150 से अधिक पुस्तकें लिखीं। बंगाल के अकाल पर आधारित तूफानों के बीच को हिंदी की पहली रिपोर्टाज पुस्तक माना जाता है। 12 सितंबर 1962 को उनका निधन हो गया। उन्होंने विषाद मठ, उबाल, राह न रुकी, बारी बरना खोल दो, देवकी का बेटा, रत्ना की बात, भारती का सपूत, यशोधरा जीत गई, घरौंदा, लोई का ताना, लखिमा की आंखें, मेरी भव बाधा हरो, कब तक पुकारूं, पक्षी और आकाश, चीवर, राई और पर्वत, आखिरी आवाज, बंदूक और बीन, पंच परमेश्वर, अवसाद का छल, गूंगे, प्रवासी, घिसटता कंबल, पेड़, नारी का विक्षोभ, काई, समुद्र के फेन, देवदासी, कठपुतले, तबेले का धुंधलका, जाति और पेशा, नई जिंदगी के लिए, ऊंट की करवट, बांबी और मंतर, गदल, कुत्ते की दुम और शैतान : नए टेक्नीक्स, जानवर-देवता, भय, अधूरी मूरत आदि पुस्तकें लिखीं।
15 दिन में दूसरी बार रात का पारा 9 डिग्री पर पहुंचा, वजह जेट स्ट्रीम हवा
पश्चिमी जेट स्ट्रीम हवा बहने से सर्दी बढ़ गई है। 15 दिन में दूसरी बार रात का पारा 9 डिग्री पर पहुंच गया है। इसके पहले 10 जनवरी को यह 9 डिग्री दर्ज किया गया था। मौसम विभाग भोपाल के अनुसार पश्चिमोत्तर भारत के ऊपर माध्य समुद्र तल से 12.6 किमी की ऊंचाई पर लगभग 232 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से उपोष्ण पश्चिमी जेट स्ट्रीम हवा बह रही है। इसके अलावा एक नया पश्चिमी विक्षोभ, मध्य एवं ऊपरी क्षोभ मंडलीय पश्चिमी पवन में एक ट्रफ के रूप में माध्य समुद्र तल से 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर अवस्थित है। यही वजह है कि मकर संक्रांति के दूसरे दिन अधिकतम के साथ न्यूनतम तापमान लुढ़क गया है। शासकीय जीवाजी वेधशाला के अनुसार 24 घंटे में न्यूनतम तापमान 2.2 डिग्री और अधिकतम तापमान 0.3 डिग्री गिरा है। गुरुवार को अधिकतम तापमान 26.7 डिग्री रहा, जबकि न्यूनतम तापमान 9 डिग्री दर्ज किया गया। आर्द्रता सुबह 88 और शाम को 52 फीसदी रही। हवा की रफ्तार सुबह शून्य और शाम को 4 किलोमीटर प्रति घंटा रही। अब आगे : 19 जनवरी से सर्दी बढ़ने का अनुमान एक अन्य नए पश्चिमी विक्षोभ के 19 जनवरी से उत्तर पश्चिमी भारत को प्रभावित करने की संभावना है। जिसके प्रभाव से मैदानी क्षेत्रों में सर्दी फिर से अपना असर दिखा सकती है। इसके अलावा आसमान साफ रहने से भी सर्दी में बढ़ोतरी का अनुमान लगाया जा रहा है। प्रदेश के पांच सबसे गर्म शहरों में उज्जैन वातावरण में बदलाव के बीच मौसम विभाग भोपाल की रिपोर्ट की मानें तो प्रदेश के पांच सबसे गर्म शहरों में उज्जैन भी शामिल रहा। 24 घंटे के दौरान नर्मदापुरम 30.3 डिग्री तापमान के साथ सबसे गर्म रहा। उसके बाद खंडवा में 29.5, इंदौर में 28.8, बड़वानी में 28.6 और उज्जैन में 26.7 डिग्री तापमान रहा।
नए घाटों के पौराणिक नाम रखने की तैयारी, पर सीएम बोल चुके- हर घाट होगा रामघाट
शिप्रा किनारे बनाए जा रहे 29.21 किमी लंबे नए घाटों के नामकरण की तैयारी चल रही है। जहाँ-जहाँ घाट बन रहे हैं, उस क्षेत्र के महत्व व पौराणिकता के आधार पर घाटों के नाम रखे जाएँगे। इसके लिए धार्मिक और धर्मस्व विभाग की टीम ज़रूरी जानकारी जुटाने में लगी हुई है। हालाँकि, शिप्रा किनारे के नए घाटों के नामकरण की तैयारी में जुटे अधिकारियों को इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि 21 अप्रैल 2025 को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव यह स्पष्ट कर चुके हैं कि सिंहस्थ में हर घाट रामघाट होगा। उन्होंने यह बात जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत रामघाट पर श्रमदान करते हुए कही थी। सिंहस्थ की तैयारियों की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा था कि शनि मंदिर से रामघाट, गऊघाट से लालपुर, और मंगलनाथ से रामघाट तक श्रद्धालु नौकायन से आवागमन कर सकेंगे। 29 किमी के नए घाट बनेंगे। शिप्रा का हर घाट रामघाट होगा। यानी श्रद्धालु कहीं भी स्नान करेंगे तो उन्हें उतना ही पुण्य मिलेगा। इन तमाम परिस्थितियों के बीच कलेक्टर रौशन कुमार सिंह ने बताया कि सिंहस्थ के दौरान सभी घाट रामघाट ही रहेंगे, लेकिन बाकी समय के लिए नए घाटों की पहचान पौराणिक महत्व के आधार पर हो, इसलिए नामकरण भी ज़रूरी है। जल्द ही घाटों के नाम सामने आएँगे: सिंहस्थ 2028 में करीब 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। चूँकि इस मेले में सर्वाधिक महत्व शिप्रा स्नान का रहता है, ऐसे में शासन स्नान की सुविधाओं में विस्तार के लिए शिप्रा किनारे 29.21 किमी के नए घाटों का निर्माण करवा रहा है, जबकि शिप्रा किनारे करीब 7-8 किमी में पुराने घाट बने हुए हैं, जो कि प्राचीन नामों से जाने जाते हैं। नए घाटों की भी अपनी पहचान व इनके नाम हों, इसके लिए सिंहस्थ मेला कार्यालय ने नामकरण की तैयारी शुरू करवाई है। इसका जिम्मा धार्मिक व धर्मस्व विभाग को दिया है, जो कि इन घाटों के क्षेत्रों के महत्व व वहाँ की पौराणिक स्थिति से जुड़ी जानकारी जुटा रहा है, ताकि क्षेत्र की पहचान, महत्व व पौराणिकता के आधार पर ही घाटों का नाम रखा जा सके। उम्मीद की जा रही है कि जल्द ही घाटों के नामों की ये श्रृंखला सामने आएगी। नए घाटों के नामकरण के संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। क्षेत्र के महत्व व पौराणिक पहचान के आधार पर नामकरण के लिए जानकारी जुटाई जा रही है।- आशीष कुमार सिंह, सिंहस्थ मेला अधिकारी शनि मंदिर त्रिवेणी घाट, गऊघाट, नृसिंह घाट, भूखी माता घाट, दत्त अखाड़ा, रामघाट, छोटी रपट घाट, संत रविदास घाट, चक्रतीर्थ घाट, मौनी तीर्थ घाट, मंगलनाथ घाट, सिद्धवट घाट आदि। रामघाट पर स्नान की हर श्रद्धालु की मंशा: गौरतलब है कि सिंहस्थ में श्रद्धालु शिप्रा के रामघाट पर स्नान करने के इच्छुक रहते हैं, जबकि भीड़ प्रबंधन की दृष्टि से ये संभव नहीं हो पाता है। ऐसे में पिछले 2016 के सिंहस्थ में शिप्रा के हर घाट पर रामघाट की पट्टिका चस्पा करवाई गई थी। चूँकि इस बार रिकॉर्ड तोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है, तो तैयारियों में इस बिंदु पर गंभीरता बरती जा रही है। नए घाटों पर यह सुविधा भी हाथोंहाथ करवाई जा रही है: नए घाटों के निर्माण के लिए सरकार ने 778.91 करोड़ रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी थी। इंदौर की फलौदी कंस्ट्रक्शन इप्रालि से प्रोजेक्ट को पूरा करने का अनुबंध 563 करोड़ में हुआ है। वर्तमान में नए घाट निर्माण का कार्य लोअर और अपर स्टेज पर है। इन नए घाटों पर प्रकाश व्यवस्था, चेंजिंग रूम, वॉच टावर, सूचना के लिए लाउड स्पीकर, आने-जाने के मार्ग की कनेक्टिविटी की सुविधा भी हाथोंहाथ करने की प्लानिंग है।
मुरैना पर टिकी निगाहें:50-70 एकड़ जमीन, 500 करोड़ के बिना आगे नहीं बढ़ेगा प्रोजेक्ट
जीवाजी विश्वविद्यालय (जेयू ) का मेडिकल कॉलेज खोलने का सपना एक बार फिर फाइलों और फैसलों के बीच उलझ गया है। मुख्यमंत्री से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के 6 माह बाद भी जेयू को मुरैना में मेडिकल कॉलेज के लिए जरूरी जमीन नहीं मिल सकी है। नतीजा यह है कि 500 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाला मेडिकल कॉलेज अभी कागजों में ही अटका हुआ है। जब तक मुरैना में 50 से 70 एकड़ भूमि आवंटित नहीं होती, तब तक मेडिकल कॉलेज खोलने की प्रक्रिया आगे बढ़ना मुश्किल मानी जा रही है। उच्च शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) अनुपम राजन ने स्पष्ट किया है कि मेडिकल कॉलेज के लिए जमीन आवंटन की कार्रवाई चल रही है। इस संबंध में मुरैना कलेक्टर से जानकारी ली जाएगी। वहीं जेयू प्रशासन का कहना है कि जमीन मिलने के बाद ही शासन स्तर पर अगली कार्रवाई संभव हो सकेगी। यह स्थिति तब है जब लंबे समय से जीवाजी यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज के लिए प्रक्रिया लंबित है। पहले ग्वालियर में ही इस मेडिकल कॉलेज को खोलने की पूरी तैयारी हो गई थी, लेकिन बाद में प्लान बदलकर मुरैना में खोलने की योजना बनी। ग्वालियर से मुरैना शिफ्ट हुई योजना, जमीन ही बनी सबसे बड़ी अड़चनमेडिकल कॉलेज खोलने की कवायद पिछले पांच वर्षों से ग्वालियर में चल रही थी। जेयू प्रशासन ने इसके लिए विश्वविद्यालय परिसर स्थित परीक्षा भवन को चिन्हित किया था। दो साल पहले एनएमसी (नेशनल मेडिकल कमीशन) की टीम ने निरीक्षण भी किया, लेकिन डीन और फैकल्टी की नियुक्ति नहीं होने के कारण मामला अटक गया। इसी बीच जब कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से चर्चा की तो मुख्यमंत्री ने मेडिकल कॉलेज मुरैना में खोलने की सैद्धांतिक मंजूरी दे दी। इसके बाद जून 2025 में जेयू ने उच्च शिक्षा विभाग को पत्र लिखकर मुरैना में 50 से 70 एकड़ जमीन आवंटित करने का आग्रह किया, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका। 25 लाख रु. खर्च, फिर भी मान्यता नहींजेयू ने सत्र 2024–25 में एनएमसी से मान्यता लेने के लिए आवेदन किया था। इस प्रक्रिया में करीब 25 लाख रुपये खर्च किए गए, लेकिन निरीक्षण के दौरान फैकल्टी और डीन की नियुक्ति न होने पर जेयू को सवालों का सामना करना पड़ा। एनएमसी टीम ने स्पष्ट किया था कि बिना आधारभूत संरचना और मानव संसाधन के मान्यता संभव नहीं है। 100 सीट के लिए 85 फैकल्टी की आवश्यकता एनएमसी के नियमों के अनुसार 100 एमबीबीएस सीटों वाले मेडिकल कॉलेज के लिए एनाटॉमी, फिजियोलॉजी, बायोकेमिस्ट्री, पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, फार्माकोलॉजी, कम्युनिटी मेडिसिन और फॉरेंसिक मेडिसिन जैसे विभागों का पहले से होना जरूरी है। साथ ही कम से कम 85 फैकल्टी की नियुक्ति अनिवार्य है। ग्वालियर में विवादित जमीन बनी बड़ी बाधाशीतला मंदिर रोड पर नोनेरा गांव के पास 17.454 हेक्टेयर जमीन पहले जेयू को मेडिकल कॉलेज के लिए आवंटित की गई थी। लेकिन जमीन विवाद के चलते मामला कोर्ट में फंस गया और विश्वविद्यालय को वहां से हाथ खींचने पड़े। इसी कारण अब पूरा फोकस मुरैना पर आ गया है। इस कारण मेडिकल कॉलेज का काम अटक गया है। उज्जैन को 500 करोड़, जेयू अब भी इंतजार मेंदिलचस्प बात यह है कि उज्जैन में मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए शासन पहले ही 500 करोड़ रुपये की मंजूरी दे चुका है, जबकि जेयू को न तो जमीन मिली है और न ही बजट। ऐसे में सवाल यह है कि क्या मुरैना में मेडिकल कॉलेज सिर्फ घोषणा बनकर रह जाएगा या जल्द जमीन और राशि का रास्ता साफ होगा। मुरैना में मेडिकल कॉलेज नहीं, इसलिए शासन की रुचिजेयू प्रबंधन का कहना है कि मुरैना जिले में अभी कोई मेडिकल कॉलेज नहीं है। इसी वजह से शासन भी चाहता है कि यहां मेडिकल कॉलेज खुले, जिससे क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। जमीन आवंटन संबंधी कार्रवाई चल रही है^जेयू का मेडिकल कॉलेज मुरैना में खोलने के लिए जमीन आवंटन संबंधी कार्रवाई चल रही है। इस विषय में मुरैना कलेक्टर से जानकारी ली जाएगी। जमीन उपलब्ध होते ही आगे की प्रक्रिया पर निर्णय होगा।-अनुपम राजन, एसीएस, उच्च शिक्षा विभाग अभी मुरैना में नहीं मिली जमीन, इसलिए परेशानी ^मेडिकल कॉलेज के लिए मुरैना में अभी तक जमीन नहीं मिली है। इस विषय में कुलगुरु से चर्चा करने के बाद ही कुछ कहा जा सकेगा। इस कारण जेयू के मेडिकल कॉलेज खोलने का काम रुका हुआ है।-डॉ. राजीव मिश्रा, कुलसचिव, जेयू
झारखंड में ठंड ने लोगों को परेशान कर रखा है। सुबह और शाम तेज ठंड और शीतलहर चल रही है। हालांकि मौसम विभाग के अनुसार, शुक्रवार को किसी भी जिले में शीतलहर चलने का अलर्ट जारी नहीं किया गया है। 16 जनवरी को राज्य में कहीं-कहीं पर हल्के दर्जे का कोहरा देखा जाएगा। वहीं, पिछले 24 घंटे में 9 जिलों का न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया। इससे लोगों ने अच्छी-खासी ठंड महसूस की। वहीं, 02.7 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान के साथ खूंटी सबसे ठंडा जिला रहा। इससे इलाके में हाड़ कंपाने वाली ठंड पड़ रही है। मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ और उत्तर-पश्चिम से चल रही ठंडी पश्चिमी हवाओं के कारण ठंड के साथ ठिठुरन बढ़ गई है। हालांकि, बीते 24 घंटे में रांची सहित कई जिलों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पिछले 24 घंटे में राज्य में मौसम शुष्क रहा। राज्य में कहीं-कहीं पर हल्के दर्जे का कोहरा देखा गया। साथ ही राज्य में कुछ स्थानों पर शीत लहर की स्थिति भी बनी। सबसे अधिक अधिकतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस चाईबासा में दर्ज किया गया। न्यूनतम तापमान में कोई बड़े बदलाव की संभावना नहींमौसम विभाग के अनुसार, राज्य में अगले दो दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में कोई बड़े बदलाव की संभावना नहीं है।। इसके बाद अगले तीन दिनों में इसमें धीरे-धीरे (3-4) डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो सकती है। डाल्टेनगंज का न्यूनतम तापमान रहा 03.7 डिग्री सेल्सियस राज्य के 9 जिलों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज किया गया है। इनमें दो जिले ऐसे हैं, जहां पारा 4 डिग्री से भी नीचे चला गया। इसमें डाल्टेनगंज 03.7 और खूंटी 02.7 शामिल है। वहीं, ठंड के चलते सुबह-शाम सड़कों पर आवाजाही कम दिखी। गरीब, बुजुर्ग और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित नजर आए। कई जगहों पर लोग अलाव का सहारा लेते दिखे।
जिला अस्पताल मुरार में एम्स की तर्ज पर इमरजेंसी और कैजुअल्टी तैयार की जा रही है। इसका उद्देश्य यह है कि इमरजेंसी व कैजुअल्टी में आने वाले गंभीर मरीज को समय पर बेहतर प्राथमिक इलाज मिल सके। जब मरीज की हालत स्थिर हो जाएगी तब उसे संबंधित वार्ड में शिफ्ट किया एगा। इसके लिए स्टाफ को एम्स दिल्ली में मेडिकल ऑफिसरों को प्रशिक्षण भी दिलाया गया है। जिला अस्पताल मुरार सहित देश के प्रमुख जिला अस्पतालों की इमरजेंसी व कैजुअल्टी की सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए एम्स कार्य कर रहा है। इसके लिए एम्स की टीम जिला अस्पताल आई और उन्होंने कैजुअल्टी व इमरजेंसी को देखा,जिसके बाद उन्होंने इसमें बदलाव करने के निर्देश दिए हैं। 3 रूम पैटर्न से यह मिलेगी सुविधा निरीक्षण के बाद यह होंगे बदलावइमरजेंसी व कैजुअल्टी के लिए एम्स की टीम ने 3 कमरे चिह्नित किए थे। पहले कमरे में 6 बेड रहेंगे। इसमें अत्याधुनिक उपकरण रहेंगे। इस कमरे के बीच में कांच की बड़ी खिड़की रहेगी। इससे बीच वाले कमरे में बैठे डॉक्टर, मरीज पर निगाह रखेगा। तीसरे कमरे में टांके लगाना, प्लास्टर करना जैसे कार्य होंगे। बेहतर उपचार के लिए होंगे बदलाव मरीज को बेहतर उपचार मिल सके इसलिए हॉस्पिटल में सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। इसके लिए उपकरण भी मंगवाए जा रहे हैं। निर्माण कार्य पूरा होते ही इसे चालू कर दिया जाएगा। इससे अस्पताल में इमरजेंसी व कैजुअल्टी में जल्द इलाज मिल सकेगा।-डॉ. आरके शर्मा, सिविल सर्जन
उप जिला अस्पताल बज्जू:जमीन नहीं मिलने से भवन बनने में हो रही देरी, सीएचसी में किया जा रहा संचालन
सरकारी सिस्टम की लेट-लतीफी के चलते ग्रामीण क्षेत्रों में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में की गई सरकार की बजट घोषणाएं अब तक धरातल पर नहीं उतर पाई हैं। राज्य सरकार ने 2024-25 की बजट घोषणा में बज्जू सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को उप जिला अस्पताल में क्रमोन्नत किया था। नया भवन नहीं बनने के कारण यह अस्पताल दो साल से सीएचसी में ही चल रहा है। नियमानुसार ट्रॉमा सेंटर भी है, लेकिन उसके लिए जरूरी स्टाफ ही नहीं है। बज्जू उप जिला अस्पताल के लिए 44 करोड़ का बजट मंजूर हुआ था। इसके लिए 20 बीघा जमीन मांगी गई थी, लेकिन आईजीएनपी से जमीन आवंटन में ही दो साल लग गए। नए भवन निर्माण के लिए हाल ही में टेंडर हुए हैं, जबकि लूणकरणसर में उप जिला अस्पताल का शिलान्यास सीएम के हाथों हो चुका है। इसकी घोषणा पिछले बजट में की गई थी। उप जिला अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर के निर्माण के लिए 44 करोड़ का बजट स्वीकृत है। निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। इसके अलावा धीरेंरा, करणीसर राजासर भाटियान, श्रीरामसर और स्वरूपदेसर में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के लिए नया भवन एक साल बीत जाने पर भी नहीं बना। यह चारों पीएचसी सब सेंटर पर ही चल रही हैं। प्रत्येक पीएचसी भवन के लिए 1.45 करोड़ का बजट स्वीकृत है। इनका निर्माण नाबार्ड के तहत होगा। टेंडर हो चुके हैं। मुक्ता प्रसाद और गंगाशहर सीएचसी में प्रसव की सुविधा शुरू होगी पिछले साल बजट घोषणा में मंजूर हुई मुक्ता प्रसाद और गंगाशहर सीएचसी शुरू हो गई हैं। दोनों में ही एनएचएम के तहत नर्सिंग स्टाफ लगाया गया है, लेकिन डॉक्टर नहीं हैं। दोनों में ही प्रसव की सुविधा शुरू करने के लिए आगामी बजट में गायनाकोलॉजिस्ट और पीडिया डॉक्टर लगाने के लिए प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है। इसके साथ ही अणचाबाई अस्पताल को सीएचसी में अपग्रेड और गंगाशहर सीएचसी में ट्रॉमा सेंटर के प्रस्ताव भी भेजे गए हैं। ट्रॉमा दिया, पर डॉक्टर नहीं सरकार ने सड़क हादसों को देखते हुए सभी उप जिला अस्पतालों में ट्रॉमा सेंटर अनिवार्य कर दिए हैं, लेकिन ट्रॉमा सेंटर के लिए जरूरी स्टाफ दिया ही नहीं गया। एक ट्रॉमा सेंटर में जनरल सर्जरी, ऑर्थो, एनेस्थीसिया के डॉक्टर सहित ऑपरेशन थिएटर होना जरूरी है। जिले में नोखा जिला अस्पताल सहित कोलायत, बज्जू, पूगल, खाजूवाला, लूणकरणसर और श्रीडूंगरगढ़ के उप जिला अस्पताल और ट्रॉमा सेंटर में स्टाफ की समस्या सबसे बड़ी है। गंभीर घायलों को पीबीएम हॉस्पिटल ही लाना पड़ता है। कई बार घायल रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।
रेलवे ने जोधपुर से पुणे के बीच सफर करने वाले यात्रियों को नए साल में बड़ी राहत दी है। दशकों से पारंपरिक रंग के आईसीएफ कोचों के साथ चल रही भगत की कोठी-पुणे साप्ताहिक एक्सप्रेस अब नए अवतार में नजर आएगी। रेलवे ने इस ट्रेन के पुराने रैक को हटाकर उसकी जगह अत्याधुनिक जर्मन तकनीक वाले लाल-स्लेटी रंग के एलएचबी रैक लगाने का फैसला किया है। उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर डीआरएम अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि आधुनिकीकरण की दिशा में यह बड़ा कदम है। 18 और 20 जनवरी से होने जा रहे इस बदलाव के बाद न केवल ट्रेन की बाहरी बनावट बदल जाएगी, बल्कि अंदर का सफर भी ज्यादा आरामदायक और सुरक्षित हो जाएगा। पुणे से 18 जनवरी, तो भगत की कोठी से 20 को नए रैक कोच स्ट्रक्चर: 20 डिब्बों की होगी पूरी ट्रेन नई ट्रेन में कुल 20 कोच होंगे, जिन्हें यात्रियों की भीड़ और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए संयोजित किया गया है: तकनीकी विश्लेषण: क्यों खास है यह बदलाव? पुराने आईसीएफ कोच और नए एलएचबी कोच में जमीन-आसमान का अंतर है। यात्री सुविधाओं में क्या होगा नया? नए रैक में यात्रियों को कई आधुनिक सुविधाएं मिलेंगी:
एसआईआर पार्ट-2:जो नोटिस के बाद नहीं आ रहे, उनसे कारण पूछने घर जाएगी टीम
एसआईआर का काम लगभग 80 दिन से चल रहा है। इस दौरान 80 फीसदी से ज्यादा वोटरों को कुछ न कुछ परेशानी झेलनी पड़ी है। मौजूदा स्थिति यह है कि अब वोटर का उत्साह खत्म सा है। वह न तो नोटिस देने के बाद सुनवाई के लिए पहुंच रहा है न नाम कटने के बाद फिर से जुड़वाने। अफसर इसके दो मुख्य कारण बता रहे हैं, पहला-अभी चुनाव नहीं है, दूसरा-वह जागरुक नहीं है। चूंकि एसआईआर के दौरान बड़ी संख्या में नाम कट चुके हैं, इसलिए जनप्रतिनिधि और अफसर दोनों चिंतित हैं। मौखिक तौर पर ज्यादा से ज्यादा नाम जुड़वाने के लिए कहा भी जा चुका है। नो मैपिंग वाले 68 हजार 540 वोटर में से 51 हजार 509 को नोटिस डिलिवर हो चुके हैं। इनमें से सुनवाई के लिए सिर्फ लगभग 20 फीसदी अर्थात 10 हजार 440 पहुंचे हैं। एक दिन पहले इस मुद्दे पर सीईओ व स्थानीय अफसर चिंता जता चुके हैं। इसके बाद ही तीन विधानसभा क्षेत्र के ऐसे 30 वोटरों के मोबाइल नंबर सीईओ के पास भेजे गए जो नोटिस के बाद भी सुनवाई के लिए नहीं आए हैं। अभी कुछ और नंबर भी भेजे जाएंगे। इनसे सीईओ की टीम चर्चा करेगी। इसके बाद संभव है कि सुनवाई पर न आने वाले वोटरों के घर खुद ही स्थानीय अफसर पहुंचे और उनकी सुनवाई करें। यदि ऐसा होता है तो नोटिस के साथ फोटो खींच कर पोर्टल पर डालने की व्यवस्था बदलनी होगी। इस मामले में उप जिला निर्वाचन अधिकारी अनिल बनवारिया ने कहा कि अधिक से अधिक नो मैपिंग वोटरों की सुनवाई के लिए प्रयास जारी हैं। तीन विधानसभा के 30 वोटरों के नाम भेजे हैं। लॉजिकल एरर भी 54 हजार से ज्यादा घट चुकी है। वोटरों के घटते उत्साह घटने के यह 5 प्रमुख बड़े कारण एसआईआर के पहले और बाद के वोटरों के आंकड़े
नमस्कार, कल की बड़ी खबर पाकिस्तान के दावे से जुड़ी रही। उसने कहा कि भारत से लड़ाई में उसका बहुत फायदा हुआ। वहीं, दूसरी बड़ी खबर सपा प्रमुख अखिलेश यादव के BJP को लेकर दिए बयान पर है। ⏰ आज के प्रमुख इवेंट्स, जिन पर रहेगी नजर... कल की बड़ी खबरें... 1. पाकिस्तान बोला- भारत से संघर्ष के बाद फायदा हुआ, हमारे फाइटर-जेट्स डिमांड में पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ ने दावा किया कि भारत से लड़ाई में उनका फायदा हुआ। उन्होंने कहा कि संघर्ष के बाद से कई देश पाकिस्तानी फाइटर जेट्स खरीदना चाहते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनमें बांग्लादेश, सूडान, लीबिया, सऊदी अरब, इराक और इंडोनेशिया जैसे देश शामिल हैं, जिन्होंने पाकिस्तान का JF-17 थंडर फाइटर जेट्स खरीदने में दिलचस्पी दिखाई है। JF-17 से तेजस से सस्ता है: रॉयटर्स के मुताबिक, पाकिस्तान से इंडोनेशिया करीब 40 JF-17 खरीदने वाला है। वहीं, बांग्लादेश को भी JF-17 फाइटर जेट बेचेगा। JF-17 की तुलना भारत के तेजस, अमेरिका के F-16 और रूस के MiG-29 से की जाती है। इन तीनों की तुलना में JF-17 सबसे सस्ता माना जाता है। पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान JF-17 की मदद से भारतीय जेट्स गिराने का दावा किया था। पढ़ें पूरी खबर... 2. सुप्रीम कोर्ट की ED अफसरों पर दर्ज FIR पर रोक, I-PAC रेड मामले में ममता सरकार को नोटिस सुप्रीम कोर्ट ने I-PAC रेड मामले में ED अफसरों के खिलाफ दर्ज FIR पर 3 फरवरी तक रोक लगा दी है। कोर्ट ने ममता सरकार से दो हफ्तों में जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा कि सरकार ED के काम में दखल न डालें। एजेंसी को ईमानदारी से काम करने दें। उनके काम में दखल न डालें। ममता पर सबूत मिटाने का आरोप: ED ने 8 जनवरी को TMC के IT हेड हेड प्रतीक जैन के घर और कंपनी से जुड़े ठिकानों पर छापा मारा था। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस दौरान CM ममता जबरन घुसीं और अपने साथ सबूत लेकर चली गईं। पढ़ें पूरी खबर... 3. अखिलेश बोले- काशी ही BJP के विनाश का कारण बनेगी, प्रियंका ने कहा- मणिकर्णिका को मिटाना घोर पाप काशी के महाश्मशान मणिकर्णिका घाट के ध्वस्तीकरण पर कांग्रेस और सपा ने सवाल उठाए हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा- अविनाशी काशी ही भाजपा के विनाश का कारण बनेगी। भाजपा ये सब सिर्फ पैसे कमाने के लिए कर रही। प्रियंका गांधी ने X पर लिखा- देश की धार्मिक एवं ऐतिहासिक धरोहरों को मिटाना घोर पाप है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी एक्स पर पोस्ट करके पीएम मोदी से 2 सवाल पूछे। मणिकर्णिका का 25 करोड़ से हो रहा पुनर्निमाण मणिकर्णिका घाट पर 25 करोड़ रुपए की लागत से पुनर्विकास परियोजना का काम चल रहा। इसके तहत घाट को तोड़ा गया है। इससे निकले मलबे को बड़ी नाव की मदद से गंगा पार भेजा जा रहा है। तोड़फोड़ के दौरान मिले कलाकृतियों को जिला प्रशासन ने सांस्कृतिक विभाग की मदद से संरक्षित करके गुरुधाम में रखवाया है। पढ़ें पूरी खबर... 4. ताजमहल में शाहजहां-मुमताज की असली कब्र खुली, 30 फीट नीचे तहखाने में उतरे अफसर ताजमहल में गुरुवार को शाहजहां-मुमताज की असली कब्र खोली गई। ASI के अफसर तहखाने में 30 फीट नीचे उतरे। इसके बाद गुसल की रस्म (कब्रों पर चंदन का लेप) के साथ उर्स की शुरुआत हुई। मुगल बादशाह शाहजहां का 371वां उर्स कल से शुरू हो गया है। ASI और उर्स कमेटी ने फूलों की चादर चढ़ाई। उर्स 3 दिन तक चलेगा। इस दौरान टूरिस्ट्स के लिए एंट्री फ्री रहेगी। उर्स के दौरान ताजमहल में कव्वाली गूंजेगी। कब्रों पर देश में खुशहाली के लिए दुआ मांगी जाएगी। आखिरी दिन यानी 17 जनवरी को चादरपोशी होगी, जिसमें एक सतरंगी चादर 1720 मीटर लंबी चढ़ाई जाएगी। अखिल भारत हिंदू महासभा ने उर्स का विरोध किया। महासभा के पदाधिकारी और कार्यकर्ता भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के कार्यालय पहुंचे, पुतला जलाया और जमकर नारेबाजी की। पढ़ें पूरी खबर... 5. मकर संक्रांति- प्रयागराज में 91 लाख श्रद्धालुओं ने स्नान किया, पतंगबाजी से दो दिनों में 17 की मौत देशभर में गुरुवार को भी मकर संक्रांति मनाई गई। इस मौके पर PM मोदी ने गायों को चारा खिलाया। वहीं, प्रयागराज संगम में 91 लाख श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। पतंगबाजी में पिछले दो दिनों में 17 लोगों की मौत हो गई। गुजरात में 9, राजस्थान में 6, यूपी और कर्नाटक में 1-1 की मौत हुई। CM योगी ने मंदिर में सीटी: बजाई यूपी के सीएम योगी आदित्यानाथ ने गोरखनाथ मंदिर में खिचड़ी चढ़ाई। नाथ परंपरा के अनुसार, उन्होंने गुरु गोरखनाथ की पूजा-अर्चना की। इसके बाद गले में लटकी सीटी बजाई और दंडवत होकर प्रणाम किया। पढ़ें पूरी खबर... 6. MP में असम के छात्र के चेहरे पर मारे लात-घूंसे, नाक टूटी; पीड़ित बोला- हत्या का डर MP के अनूपपुर में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजाति विश्वविद्यालय में असम छात्र हीरोस ज्योतिदास से मारपीट की गई। पांच से छह लड़के उसके हॉस्टल रूम में घुसे, नाम और राज्य पूछकर मारपीट शुरू कर दी। छात्र बुरी तरह से घायल है और डरा हुआ है। पीड़ित बोला कि उसे हत्या का डर है। यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट ने आरोपी छात्रों को निष्काषित कर दिया है। 5 छात्रों के खिलाफ केस दर्ज: मारपीट की घटना के लेकर छात्रों ने घेराव किया। इसके बाद यूनिवर्सिटी मैनेजमेंट ने आरोपी छात्रों को निष्काषित कर दिया है। वहीं, पांचों छात्रों के खिलाफ केस भी दर्ज किया गया है। फिलहाल मामले की जांच चल रही है। पढ़ें पूरी खबर... आज का कार्टून ⚡ कुछ अहम खबरें हेडलाइन में… ️ बयान जो चर्चा में है... खबर हटके... सऊदी के 142 साल के बुजुर्ग की मौत सऊदी अरब के 142 साल के बुजुर्ग नासिर बिन रदान अल राशिद का निधन हो गया। उन्होंने तीन शादियां की थीं। उनके 134 बच्चे पोते हैं। आखिरी शादी उन्होंने 110 साल की उम्र में की थी। फोटो जो खुद में खबर है भास्कर की एक्सक्लूसिव स्टोरीज, जो सबसे ज्यादा पढ़ी गईं… करेंट अफेयर्स ⏳आज के दिन का इतिहास ️ मौसम का मिजाज कर्क राशि वालों को प्रॉपर्टी या बड़े सौदों से फायदा मिलेगा। कन्या राशि वालों को नई डील से फायदा मिलेगा। जानिए आज का राशिफल... आपका दिन शुभ हो, पढ़ते रहिए दैनिक भास्कर ऐप… मॉर्निंग न्यूज ब्रीफ को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें...
योगी अपने सख्त फैसलों के लिए मशहूर हैं। लेकिन बच्चों को देखते ही उनका दिल मोम की तरह पिघलने लगता है। ऐसा ही एक वाकया गुरुवार को गोरखपुर में हुआ। मकर संक्रांति पर एक बच्चे ने योगी के कान में धीरे से कुछ कहा, जिसे पहले तो वो समझ नहीं पाए। बच्चे ने फिर चिप्स की फरमाइश की। बच्चे की बात समझते ही सीएम योगी ठहाके लगाकर हंसने लगे। उन्होंने तुरंत चिप्स मंगवाकर बच्चे को दिया। यह पहली बार नहीं है, योगी पहले भी बच्चों पर अपना प्यार लुटाते रहे हैं। VIDEO में देखिए सीएम का अनोखा अंदाज...
दुनिया की सबसे खूबसूरत इमारतों में से एक ताजमहल की असली पहचान संगमरमरी पत्थर, रंगीन मोतियों की बेजोड़ नक्काशी और खूबसूरत बनावट से है। ये सब आज भी शाहजहां-मुमताज की कहानी को बयां करते नजर आते हैं। महल के मुख्य गुम्बद के बीचोंबीच स्थित शाहजहां-मुमताज की कब्र इसकी नजीर हैं। मगर क्या आपको पता है कि ये शाहजहां-मुमताज की असली कब्रें नहीं हैं? चौंकिए नहीं, हर दिन लाखों टूरिस्ट जिन कब्रों को देखकर अमर प्रेम कहानी को याद करते हैं, वह नकली कब्रें हैं। दरअसल असली कब्रें इसके 22.2 फीट गहरे एक आयताकार तहखाने में हैं, जोकि नकली कब्रों के ठीक नीचे हैं। दैनिक भास्कर के कैमरे पर आपको असली कब्रों का रास्ता और वहां का हाल दिखाते हैं… 22 फीट नीचे उतरने के बाद दिखीं 2 कब्र मुगल बादशाह शाहजहां का 371वां उर्स (जन्मदिन) का समारोह शुरू हो गया है। ताजमहल में गुरुवार को ASI के अफसर तहखाने में 22 फीट नीचे उतरे। शाहजहां-मुमताज की असली कब्र खोली गईं। इसके बाद गुसल की रस्म (कब्रों पर चंदन का लेप) के साथ उर्स की शुरुआत हुई है। यहीं, शाहजहां और मुमताज की असली कब्रें हैं, जोकि मुख्य गुम्बद के नीचे बने तहखाने में हैं। यह तहखाना नकली कब्रों के नीचे हैं, इसका रास्ता भी नकली कब्रों के सामने से बनी सीढ़ियों से नीचे जाता है, जोकि जाली से ढका रहता है। यहां कोई नहीं जा सकता है। उर्स पर यह जाली खोली गई, हमारी टीम अंधेरे में 21 सीढ़ियां नीचे उतरने के बाद तहखाने में पहुंची। सामने शाहजहां-मुमताज की असली कब्रें नजर आई। मुमताज की कब्र को सजाया नहीं, शाहजहां की कब्र पर रंगीन मोती जड़े यह तहखाना अमूमन बंद रहता है, लेकिन साफ-सफाई या अन्य मरम्मत कार्य के लिए ASI के कर्मचारी इसे समय-समय पर खोलते रहते हैं। टूरिस्ट के लिए यह तहखाना बंद रहता है, काेई यहां आ-जा नहीं सकता है। वेंटिलेशन का भी यहां कोई बंदोबस्त नहीं है, ऐसे में यहां काफी उमस रहती है। संगमरमर की दीवारों के बीच इस तहखाने में सिर्फ शाहजहां-मुमताज की असली कब्रें हैं, इसके अलावा इस तहखाने में कुछ नहीं है। इसकी दीवारों पर भी नक्काशी नहीं है। यहां मुमताज की कब्र पर कोई डेकोरेशन नहीं है, जबकि शाहजहां की कब्र पर डेकोरेशन किया गया है, रंगीन मोतियों से जड़ी शाहजहां की कब्र मुमताज की कब्र से ऊंचाई में 0.12 मीटर बड़ी है। टूरिस्ट के लिए बनाई नकली नक्काशीदार कब्र ताजमहल के मुख्य गुंबद की ऊंचाई 73 मीटर है। मुख्य हॉल में जो संगमरमर की सुंदर नक्काशीदार कब्रें दिखती हैं, वे शाहजहां और मुमताज महल की नकली कब्रें (सेनोटाफ) हैं। ये कब्रें वास्तविक कब्रों के ऊपर बनाई गई हैं और टूरिस्ट इन्हें देख सकते हैं। अब ताजमहल के बनाए जाने की कहानी स्लाइड में पढ़िए- ................. ये भी पढ़ें: ताजमहल में शाहजहां-मुमताज की असली कब्र खुली, 30 फीट नीचे तहखाने में उतरे अफसर, उर्स कमेटी ने फूलों की चादर चढ़ाई ताजमहल में गुरुवार को ASI के अफसर तहखाने में 30 फीट नीचे उतरे। शाहजहां-मुमताज की असली कब्र खोली गई। इसके बाद गुसल की रस्म (कब्रों पर चंदन का लेप) के साथ उर्स की शुरुआत हुई है। मुगल बादशाह शाहजहां का 371वां उर्स आज से शुरू हो गया है। ASI और उर्स कमेटी ने फूलों की चादर चढ़ाई। उर्स 3 दिन तक चलेगा। इस दौरान टूरिस्ट्स के लिए एंट्री फ्री रहेगी। पढ़िए पूरी खबर...
पंजाब के लुधियाना शहर में कूड़ा प्रबंधन सही तरीके से न किए जाने के मामले में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में केस चल रहा है। केस की सुनवाई करते हुए NGT ने पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (PPCB) के अफसरों से रिपोर्ट तलब की। PPCB के अफसरों ने जवाब दायर करने से ठीक पहले नगर निगम लुधियाना (MCL) 1.54 करोड़ रुपए का जुर्माना ठोक दिया। PPCB ने नगर निगम पर दो साल से कूड़ा प्रबंधन करने में बरती गई लापरवाही को लेकर यह जुर्माना लगाया है। निगम की लापरवाही से पर्यावरण को जो नुकसान हुआ है उसकी भरपाई के लिए निगम से यह राशि वसूल की जाएगी। हालांकि NGT में याचिका दायर करने वाले इंजीनियर कपिल अरोड़ा और कुलदीप खैहरा जुर्माने की राशि से संतुष्ट नहीं हैं। 2023 में की थी याचिका दायर, अब हुआ जुर्माना पब्लिक एक्शन कमेटी के सदस्यों इंजीनियर कपिल अरोड़ा और कुलदीप सिंह खैहरा ने शहर में कूड़ा प्रबंधन न होने और कूड़े को आग लगाए जाने के मामले में NGT में याचिका दायर की थी। NGT ने डीसी व निगम कमिश्नर से रिपोर्ट मांगी तो उससे याचिकाकर्ता संतुष्ट नहीं हुए। उसके बाद NGT ने कोर्ट कमिश्नर को भेजकर रिपोर्ट मांगी। कोर्ट कमिश्नर की रिपोर्ट के बाद NGT ने पीपीसीबी के अफसरों से एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी तो अफसरों ने आनन फानन में नगर निगम को जुर्माना लगा दिया। कपिल अरोड़ा ने कहा कि पीपीसीबी ने उस डेट से जुर्माना लगाया है जिस जब कोर्ट कमिश्नर लुधियाना आए थे जबकि यह जुर्माना उस दिन से लगना चाहिए था जब शिकायत दर्ज की गई थी। 20 जनवरी को होनी है सुनवाई कपिल अरोड़ा ने बताया कि 20 जनवरी को एनजीटी में सुनवाई होनी है। सुनवाई के दौरान पीपीसीबी को एक्शन टेकन रिपोर्ट जमा करवानी है। इसलिए निगम ने पेशी से ठीक पहले यह कार्रवाई की है। कपिल अरोड़ा ने बताया कि उसी दिन वो जुर्माना बढ़ाने के लिए भी आवेदन करेंगे। अफसरों पर भी कार्रवाई की मांग कपिल अरोड़ा का कहना है कि इस पूरे मामले में सिर्फ नगर निगम ही नहीं, बल्कि पंजाब पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अफसरों की भूमिका भी संदिग्ध रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि अफसरों ने समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए, जिससे पर्यावरणीय नुकसान बढ़ता गया। उन्होंने कहा कि एनजीटी में यह मांग रखी जाएगी कि लापरवाह अफसरों पर भी कार्रवाई होनी चाहिए। निगम कमिश्नर के खिलाफ नई याचिका की तैयारी पब्लिक एक्शन कमेटी ने ऐलान किया है कि वे पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 की धारा 17 के तहत लुधियाना के नगर निगम कमिश्नर के खिलाफ इंटरलोक्यूटरी एप्लीकेशन (IA) दाखिल करेंगे।इस याचिका में कूड़ा प्रबंधन करने में फेल होने पर निगम के मुखिया कमिश्नर के खिलाफ कार्रवाई की मांग करेंगे।
ठगों का निशाना पढ़े-लिखे बुजुर्ग...:पहले 5 सवालों के जवाब दिए तो फंसेंगे; ये 5 बातें बचा सकती हैं
एक्सपर्ट - धर्मेंद्र शर्मा, साइबर क्राइम शाखा ग्वालियर साइबर ठग पढ़े-लिखे बुजुर्गों को लगातार निशाना बना रहे हैं। ठगों के पास बुजुर्गों की आधी-अधूरी जानकारी होती है, जिसके सहारे वे भरोसा जीतकर फोन पर बातचीत शुरू करते हैं। सबसे पहले यह पता किया जाता है कि बुजुर्ग घर पर अकेले हैं या परिवार साथ। जैसे ही बच्चों या परिजनों के दूर होने का संकेत मिलता है, ठगी का जाल बिछा दिया जाता है। साइबर ठगों के कॉल करने पर शुरुआती पांच मिनट सबसे अहम होते हैं। इसी दौरान ठगों द्वारा लोगों को डर, धमकी, दबाव और फायदे का झांसा दिया जाता है। ग्वालियर में ठगी के मामलों का साइबर पुलिस ने विश्लेषण किया है। इसमें सामने आया कि यदि शुरुआत में सिर्फ ठगों को जवाब दिए जाएं तो ठगी हो जाती है। वहीं यदि ठगों के सवालों के उलट उससे ये पांच बातें पूछें और सतर्क रहते हुए बना डरे कुछ बातें कहें तो ठग फोन काट देते हैं। यानी शुरुआती सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। 2025 में जनवरी से दिसंबर के बीच ग्वालियर में 38 लोगों से करीब 5.75 करोड़ रुपये ठगे गए। इनमें 15 बुजुर्ग ठगी का शिकार हुए। 1930 हेल्पलाइन इन शुरुआती सवालों से फंसाते हैं साइबर ठग बिना डरे ये सवाल पूछें तो बच सकते हैं ग्वालियर के इन उदाहरणों से समझें बुजुर्ग कैसे फंस रहे जाल में... ग्वालियर के इन उदाहरणों से समझें बुजुर्ग कैसे फंस रहे जाल में... 21 दिन डिजिटल अरेस्ट रखा और ठगे 38 लाखसाइबर ठगों ने महिला डॉक्टर सुजाता बापट को CBI अफसर बनकर फोन किया। डॉक्टर को ह्यूमन ट्रैफिकिंग और मनी लॉन्ड्रिंग के केस में फंसे होने का डर दिखाकर 21 दिन डिजिटल अरेस्ट रखा और 38 लाख रुपए ठगे थे। 3 घंटे रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ रहे, लेकिन सवालों से बचे... पिंटू पार्क क्षेत्र के समर्थ नगर निवासी एसबीआई के रिटायर्ड बैंक मैनेजर देशराज सिंह चौहान(65) को ठगों ने दूरसंचार मंत्रालय और डीआईजी बनकर तीन घंटे ‘डिजिटल अरेस्ट’ रखा। फर्जी एफआईआर और कोर्ट लेटर भेजकर डराया। डर के माहौल में देशराज ठगों ने लगातार लगातार सवाल पूछते रहे। समय रहते पुलिस को सूचना देकर ठगी से बच गए। अकेलेपन और बीमारी का फायदा उठाकर ठगी... थाटीपुर के माधव सिंधिया एन्क्लेव में रहने वाले 79 वर्षीय रिटायर्ड प्रिंसिपल साइंटिस्ट ओमप्रकाश पमार की बीमारी का फायदा उठाकर ड्राइवर, उसकी पत्नी व दोस्त ने भरोसा जीतकर बैंक दस्तावेज व मोबाइल कब्जे में लिए। यूपीआई से 58 दिनों में 21 ट्रांजेक्शन कर 16.05 लाख रुपए निकाल लिए। बचने का उदाहरण... शुरु के 5 मिनट ठगों के सवालों पर दागे सवाल तो बचे समर्थ नगर निवासी रिटायर्ड बैंक मैनेजर देशराज (65) को ठगों को कॉल किया। शुरुआती 5 मिनट... ठग ने कहा- केनरा बैंक मुंबई में आपका खातते में करोड़ों का लेनदेन हुआ है। देशराज- मैं कभी मुंबई नहीं गया? ठग-आधार से खाता खुला? देशराज- सिर्फ आधार से खाता नहीं खुलता? पुलिस से संपर्क करने को कहा तो फोन काट दिया। मध्यप्रदेश: 63 हजार लोगों से ठगी, ~551 करोड़ उड़ाए ग्वालियर में अब तक 11 लोग ‘डिजिटल अरेस्ट’ग्वालियर में 2025 में 11 डिजिटल अरेस्ट की घटनाएं हो चुकी हैं। अगस्त में ग्वालियर के एक सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी को 22 घंटे तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर ₹7.10 लाख ठगे थे। 2024 में मध्यप्रदेश में 26 मामले दर्ज हुए थे, जिनमें से ग्वालियर टॉप हॉट स्पॉट में शामिल था। पूरे राज्य में डिजिटल अरेस्ट ठगी से पैसे की हानि 12.60 करोड़ से ज्यादा रही थी।
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महाराष्ट्र के निकाय चुनाव में यूपी के नेताओं की धमक रही, खासकर पूर्वी यूपी के नेताओं ने जमकर प्रचार किया। वजह थी, वहां यूपी से करीब 30 लाख मतदाता हैं। इनको लुभाने के लिए ही बड़े-बड़े नेता कई दिनों तक मुंबई में ही डेरा डाले रहे। कल वोटिंग हो चुकी है और आज नतीजे भी आ जाएंगे। यूपी के कौन-कौन से नेता महाराष्ट्र पहुंचे? महाराष्ट्र के चुनाव में यूपी के लोगों का कितना प्रभाव है? आजमगढ़ और जौनपुर के नेता ही क्यों इतना सक्रिय रहे? पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पहले जानिए महाराष्ट्र का लोकल चुनाव कितना अहममुंबई चुनाव में सक्रिय यूपी के आजमगढ़ के रहने वाले जफर आजमी बताते हैं- यहां 227 सीट बीएमसी के तहत आती हैं। इनमें से 70 सीटें ऐसी हैं, जहां पूर्वी यूपी और बिहार के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं। इन सभी 70 सीटों पर समाजवादी पार्टी ने अपने प्रत्याशी उतारे। आजमी कहते हैं- बीएमसी सबसे अमीर निकाय है। यहां का सालाना बजट 70 हजार करोड़ रुपए है। ऐसे में सभी की ख्वाहिश होती है कि वह बीएमसी का कारपोरेटर (पार्षद) बने। यहां आमतौर पर 12 से 15 हजार वोट पाने वाला प्रत्याशी भी कारपोरेटर बन जाता है। यहां कई ऐसी सीटें हैं, जहां पूर्वी यूपी और बिहार के लोगों की आबादी 30 फीसदी तक है। इनमें भिवंडी, मलाट, अंधेरी, कुर्ला जैसे जिले शामिल हैं। इसके अलावा थाणे के मुंबरा इलाके में भी बड़ी संख्या में लोग रहते हैं। यही वजह है कि यूपी के नेता बड़ी संख्या में प्रचार करने के लिए महाराष्ट्र पहुंचे। नोकझोंक... दबदबा दिखाने की भी रही होड़महाराष्ट्र निकाय चुनाव के दौरान पूर्वांचल के बाहुबली नेता धनंजय सिंह के गले में भाजपा का पट्टा नजर आया। जबकि वह यूपी में जेडीयू का झंडा बुलंद करते हैं। वहीं, समाजवादी पार्टी के नेता अबू आसिम आजमी ने पार्टी के प्रचार के लिए बड़ी संख्या में आजमगढ़ और उसके आसपास के जिलों के नेताओं को बुलाया था। प्रचार के दौरान तीखी नोकझोंक, ताने-उलाहने, यहां तक कि गाली-गलौज तक की नौबत रही। एक सभा को संबोधित करते हुए अबू आसिम आजमी ने एमआईएम के नेता इम्तियाज जलील को चैलेंज देते हुए कहा कि ‘मैं उत्तर प्रदेश का हूं, पटक दूंगा बत्तीसी बाहर आ जाएगी। एक एमपी लेकर दनदनाते फिरते हो, मेरे पास 37 एमपी हैं।’ महाराष्ट्र चुनाव में सपा की फायर ब्रांड नेता और मछलीशहर से विधायक रागिनी सोनकर, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय, मछलीशहर से सांसद प्रिया सरोज, कौशांबी से सांसद पुष्पेंद्र सरोज, आजमगढ़ के सांसद धर्मेंद्र यादव, जौनपुर के सांसद बाबू सिंह कुशवाहा, बस्ती से सांसद राम प्रसाद चौधरी, अंबेडकर नगर से विधायक राम अचल राजभर, सपा विधायक नफीस अहमद जैसे नेता भी प्रचार करने पहुंचे। अपर्णा यादव भी पहुंचीं प्रचार करनेबीएमसी के चुनाव में प्रचार करने के लिए मुलायम सिंह यादव की बहू और भाजपा नेता व महिला आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव भी मुंबई प्रचार करने के लिए पहुंचीं। इनके अलावा भाजपा के नेताओं में जौनपुर जिले की बदलापुर सीट से विधायक रमेश मिश्रा, चंदौली की मुगलसराय सीट से विधायक रमेश जायसवाल भी प्रचार करने के लिए मुंबई पहुंचे। धनंजय सिंह को क्यों जाना पड़ा महाराष्ट्र?धनंजय सिंह पूर्वांचल की राजनीति करते रहे हैं, लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है जब वे मुंबई में भाजपा और शिंदे गठबंधन के नेता के प्रचार के लिए पहुंचे। धनंजय सिंह वैसे तो जनता दल यूनाइटेड के नेता हैं, लेकिन महाराष्ट्र में वे पूरी तरह से भगवा रंग में रंगे नजर आए। उनके गले में भाजपा का पट्टा भी पड़ा हुआ था। सवाल ये भी उठ रहे हैं कि जौनपुर के बड़े नेताओं में से एक कृपाशंकर सिंह, जिनका प्रभाव मुंबई की राजनीति में अच्छा खासा रहा है, उनके रहते हुए धनंजय को भी मैदान में उतरना पड़ा। कृपाशंकर सिंह भाजपा के बड़े नेता हैं। बीते लोकसभा चुनाव में जौनपुर से भाजपा के प्रत्याशी भी थे। धनंजय ने उनका सपोर्ट भी किया था। आजमगढ़ और जौनपुर के लोग ही क्यों इतना सक्रिय?लंबे समय से मुंबई में रह रहे मोअज्जम ने दैनिक भास्कर को बताया कि पूर्वांचल के दो प्रमुख जिलों आजमगढ़ और जौनपुर के लोग बड़ी संख्या में मुंबई में रहते हैं। कई तो ऐसे भी जिन्होंने वहीं अपना मकान और जायदाद भी बना ली है। मोअज्जम कहते हैं- बीएमसी के चुनाव में पूर्वांचल के वोटरों का अच्छा प्रभाव होता है। कई सीटों पर ये हार-जीत तय करते हैं। यही वजह है कि आजमगढ़ और जौनपुर के बड़े नेता इस चुनाव में प्रचार करने के लिए यहां आए। समाजवादी पार्टी महाराष्ट्र प्रदेश के चीफ जनरल सेक्रेटरी मेराज सिद्दीकी बताते हैं- पूर्वी यूपी या यूं कहिए उत्तर भारतीय बड़ी संख्या में मुंबई में रहते हैं। कई इलाके ऐसे हैं, जहां महसूस ही नहीं होता कि ये हिस्सा यूपी से बाहर का है। मेराज के मुताबिक, इस चुनाव में भी बड़ी संख्या में यूपी के लोग चुनाव लड़े। हालांकि, चुनाव की बात आती है तो यूपी-महाराष्ट्र के लोगों के टकराव को भी नजरअंदाज नहीं कर सकते। कई बार भाषा के तौर पर भी विरोध देखने को मिलता है। महाराष्ट्र के लोग आरोप लगाते हैं कि यूपी वाले उनके रोजगार छीन रहे। वरिष्ठ पत्रकार आनंद राय कहते हैं- महाराष्ट्र में उत्तर भारतीयों के विरोध की शुरुआत बाला साहेब ठाकरे के दौर से हुई। हालांकि उनका विरोध इस बात को लेकर था कि यूपी और गुजरात के लोग महाराष्ट्र के लोगों का हक छीन रहे हैं। उनका विरोध बेहद तार्किक तरीके से चलता रहा। लेकिन, जब राज ठाकरे का दौर आया तो उन्होंने उत्तर भारतीयों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया। इसका परिणाम ये रहा कि उत्तर भारतीय पूरे महाराष्ट्र में जहां भी रहा, वह संगठित हो गया। बाकायदा उत्तर भारतीयों का संगठन भी बना। जिसमें आजमगढ़, जौनपुर, गोरखपुर, बस्ती, गोंडा जैसे जिलों के लोग सक्रिय रहे। यही वजह रही कि वहां उत्तर भारतीयों का प्रभाव बढ़ता गया। चुनाव बीएमसी का हो या विधानसभा का। यहां के लोग वहां चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों के पक्ष में माहौल बनाने के लिए जाने लगे। ------------------------- ये खबर भी पढ़ें... मायावती चिल्लाईं- आप हरिजन कहकर जलील कर रहे...:यही तेवर देख कांशीराम ने चुना दिल्ली का इंदरपुरी इलाका। एक छोटा-सा खस्ताहाल मकान। दिसंबर, 1977 की एक सर्द रात थी। अचानक रात 11 बजे किसी ने घर की कुंडी खटखटाई। घर के मालिक प्रभुदास ने दरवाजा खोला, तो देखा कि बाहर मुड़े-तुड़े कपड़ों में गले में मफलर डाले, लगभग गंजा हो चला एक अधेड़ शख्स खड़ा था। उस अधेड़ ने अपना परिचय दिया- ‘मैं बामसेफ का अध्यक्ष हूं…आपकी बेटी को पुणे में एक भाषण देने के लिए आमंत्रित करने आया हूं।’ ये शख्स कोई और नहीं, कांशीराम थे। जो प्रभुदास की छठी संतान मायावती के संबंध में बात कर रहे थे। इस एक मुलाकात ने मायावती की जिंदगी बदल दी। IAS बनने का सपना देखने वाली ये लड़की आगे चलकर देश के सबसे बड़े सूबे यूपी की 4 बार सीएम बनीं। समर्थक उन्हें प्यार से ‘बहनजी’ कहकर बुलाते हैं। पढ़ें पूरी खबर
राजस्थान में आमजन को आज से सुबह-शाम की तेज सर्दी से थोड़ी राहत मिलने की संभावना है। 17 जनवरी से प्रदेश में उत्तरी हवा कमजोर होगी। इससे तापमान में 2 से 4 डिग्री तक बढ़ोतरी होगी। इधर, सर्दी और कोहरे को देखते हुए हनुमानगढ़ जिला कलेक्टर ने 5वीं तक के बच्चों की छुट्टियों को 16 और 17 जनवरी तक बढ़ा दिया है। हनुमानगढ़ सबसे ज्यादा ठंडा पिछले 24 घंटे में उत्तरी राजस्थान के श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ के एरिया में गुरुवार सुबह हल्का कोहरा रहा और सर्द हवा चली। दिन में भी सर्द हवा का प्रभाव रहा, जिससे दिन में तेज सर्दी रही। सबसे ज्यादा ठंडा दिन हनुमानगढ़ में रहा, जहां का अधिकतम तापमान 16.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। पश्चिमी राजस्थान में बढ़ा दिन का तापमान इधर, पश्चिमी राजस्थान के जिलों में उत्तरी हवा का असर कम होने और तेज धूप रहने के चलते तापमान में बढ़ोतरी हुई। जैसलमेर में अधिकतम तापमान 29.3, बाड़मेर में 29.7, जालौर में 27.2, जोधपुर में 28.2, अजमेर में 26.9, चित्तौड़गढ़ में 26.7, बीकानेर में 26.6, नागौर में 26.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। सुबह-शाम तेज सर्दी, पारा 10 डिग्री से नीचे राज्य में कल सुबह-शाम तेज सर्दी रही। कल फलौदी, प्रतापगढ़ को छोड़कर शेष सभी शहरों का न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे दर्ज हुआ। सीकर के पास फतेहपुर में एक बार फिर तापमान जमाव बिंदु पर 0.4 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। अलवर, सीकर में न्यूनतम तापमान 1-1 डिग्री सेल्सियस, नागौर में 2.3, करौली में 2, दौसा में 2.6, लूणकरणसर में 2.3, पाली में 2.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। अब आगे क्या? जयपुर मौसम केंद्र के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया- राज्य में सर्द हवा और कोहरे का असर गंगानगर, हनुमानगढ़ और उनके आसपास के एरिया में 16 जनवरी को भी रहेगा। वहीं, 17 जनवरी से सर्द हवा और कमजोर होगी और तापमान में बढ़ोतरी शुरू होगी। एक कमजोर पश्चिम विक्षोभ 17-18 जनवरी को राज्य के उत्तरी, पश्चिमी भागों में एक्टिव होगा। इसके असर से कहीं-कहीं आंशिक बादल छा सकते हैं। बादलों के कारण न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री बढ़ोतरी होने की संभावना है। वहीं 22 से 24 जनवरी के बीच एक और मजबूत पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है।
पीली पोशाक। चलने के लिए करोड़ों की लैंड रोवर डिफेंडर और स्पोर्ट्स कार, पोर्शे टर्बो जैसी गाड़ियां। आंखों पर रे-बैन जैसा ब्रांडेड चश्मा। जिसकी तारीफ अक्सर यूपी के सीएम योगी भी करते हैं। हम बात कर रहे हैं बुंदेलखंड के ललितपुर के छोटे से गांव मसौरा से निकले संतोष तिवारी की। संतोष तिवारी कोई और नहीं, माघ मेले में सुर्खियां बटोर रहे सतुआ बाबा हैं। 26 साल पहले सतुआ बाबा को जिस बड़े भाई ने अध्यात्म की राह दिखाई, वो अब इस दुनिया में नहीं हैं। उनका कत्ल हो चुका है। आखिर संतोष तिवारी कैसे बनारस पहुंचे? उनके संन्यासी बनने की खबर परिवार को कब लगी? मां ने जिद कर क्यों आखिरी सांस उनके आश्रम में ली? पढ़िए सतुआ बाबा की जिंदगी के अनसुने किस्से… ललितपुर जिला मुख्यालय से महज 6 किमी की दूर नेशनल हाईवे- 44 से सटा मसौरा गांव है। यहां रहने वाले शोभाराम तिवारी और उनकी पत्नी राजा बेटी तिवारी की 4 संतानों में संतोष तिवारी उर्फ सतुआ बाबा सबसे छोटे हैं। सबसे बड़े महेश तिवारी, फिर नीरज और उमेश तिवारी हैं। महेश तिवारी अब इस दुनिया में नहीं हैं। 2007 में उनका कत्ल हो चुका है। महेश ही वो शख्स थे, जो संतोष तिवारी को ललितपुर से बनारस आश्रम ले गए थे। 13 साल की उम्र में बनारस पढ़ने गए थेसंतोष तिवारी उर्फ सतुआ बाबा के बड़े भाई उमेश तिवारी ने दैनिक भास्कर को बताया कि ये साल- 2000 की बात थी। वह 9वीं पास हो चुके थे। तब उनकी उम्र बमुश्किल 13 साल थी। संतोष पढ़ाई की बजाय अध्यात्म शिक्षा लेना चाहते थे। ऐसे में हमारे बड़े भाई महेश तिवारी उन्हें लेकर बनारस मणिकर्णिका घाट पहुंचे। वहां गंगा में स्नान किया। पास में ही सतुआ आश्रम दिखा। यहां भी वैदिक गुरुकुल शिक्षा की सुविधा थी। संतोष ने बड़े भाई से कहा कि इसी आश्रम में प्रवेश दिलवा दो। इसके बाद वे संतोष को लेकर सतुआ आश्रम पहुंचे। वहां वे आश्रम के महंत यमुनाचार्यजी महाराज से मिले। उन्होंने छोटे भाई को उनके हाथ में सौंपा और बोले कि आज से ये आपकी ही शरण में हैं। आश्रम में उनके जैसे और भी बच्चे पढ़ने के लिए रह रहे थे। जल्द ही संतोष महंत के प्रिय शिष्यों में शामिल हो गएउमेश तिवारी कहते हैं- आश्रम में प्रवेश मिलने के बाद छुटि्टयों में संतोष घर आते रहते थे। धार्मिक ग्रंथों में जल्दी ही वे पारंगत हो गए। उनकी प्रतिभा से महंत भी प्रभावित थे। जल्द ही वे उनके प्रिय शिष्यों में शामिल हो गए। बात 2005 की रही होगी। एक दिन संतोष तिवारी का फोन आया, बोले कि मैं संन्यास ग्रहण कर रहा हूं। उनकी बात सुनकर मुझे हंसी आई और मैंने उस बात को उतने ही हल्केपन से अनसुना कर दिया। कुछ दिन बाद ललितपुर में भगवान जगदीश मंदिर के अनुष्ठान में वाराणसी के कुछ पुजारी लोग पहुंचे। उनकी तरफ से कहा गया कि संतोष तिवारी अब संन्यास ले चुके हैं। तब घर में पहली बार लोगों ने इस बात को गंभीरता से लिया। मेरी मां तो रोने लगीं। पिताजी भी चिंता में पड़ गए। मेरी मां ने तुरंत महंत यमुनाचार्यजी महाराज से बात की। कहा कि मैंने अपने बेटे को आपके आश्रम में पढ़ने भेजा था, आपने उसे संन्यासी कैसे बना दिया? बड़ी मुश्किल से बड़े महाराज (यमुनाचार्यजी महाराज) ने मां और पिताजी को समझाया। ये दुख मां और पिताजी को ताउम्र सालता रहा। अक्सर वे संतोष को लेकर सोच में पड़ जाते थे। चिंता करते थे कि उसका आगे क्या भविष्य होगा? 2007 में बड़े भाई की हत्या के बाद गए थे तेरहवीं मेंउमेश तिवारी कहते हैं- मेरे बड़े भाई महेश तिवारी पेशे से पत्रकार थे। 2007 की बात थी। वे सुबह-सुबह अपने गहरे मित्र जितेंद्र ठाकुर के घर गए थे। वहां अचानक उन्हें गोली लग गई। जितेंद्र के परिवार के लोग ही अस्पताल ले गए, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। गोली लगने को लेकर जितेंद्र ठाकुर ने सफाई में कहा कि रिवाल्वर देखते समय अचानक फायर हो गया था, लेकिन उसके कई झूठ से संदेह हुआ। इस पर हम लोगों ने उसके खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया था। इस मामले में उसे आजीवन कारावास की सजा हुई थी, लेकिन 9 साल बाद वह हाईकोर्ट से बरी हो गया। बड़े भाई महेश तिवारी की हत्या के बाद संतोष घर आए थे। सतुआ बाबा के पिता, मां और भाभी का भी हो चुका है निधनसंतोष तिवारी उर्फ सतुआ बाबा के पिता शोभाराम तिवारी का 2019 में तो उनके बड़े भाई महेश तिवारी की पत्नी मनीषा तिवारी का 2023 में निधन हो चुका है। मनीषा तिवारी 2021 तक गांव की प्रधान रह चुकी थीं। 2023 में ही संतोष तिवारी की मां राजा बेटी तिवारी भी चल बसीं। उन्होंने सतुआ बाबा के आश्रम में ही आखिरी सांस ली थी। आखिरी समय में उनकी बड़ी इच्छा थी कि कुछ वक्त वो छोटे बेटे संतोष तिवारी के साथ गुजार पाएं। तब तक संतोष तिवारी इस मठ के महंत हो चुके थे। वर्तमान में सतुआ बाबा के तीनों बड़े भाइयों का परिवार गांव में ही अलग-अलग रह रहा है। सभी के आलीशान मकान बन चुके हैं। बड़े भाई का छोटा बेटा हरिद्वार में बाबा रामदेव के आश्रम में अकाउंटेंट है। जबकि बड़ा बेटा ब्लॉक में आउटसोर्स कर्मी है। उमेश तिवारी ने बताया कि संतोष तिवारी ने गांव के मंदिर का पर्यटन विभाग से बोलकर जीर्णोद्धार कराया है। आखिरी बार वे 2023 में गांव में अपनी मां की तेरहवीं में शामिल होने आए थे। गुरु के जीते-जी ही बन चुके थे महामंडलेश्वरसतुआ बाबा के गुरु यमुनाचार्यजी महाराज ने 28 नवंबर, 2011 को निधन से पहले ही उनको महामंडलेश्वर घोषित कर उत्तराधिकारी बना दिया था। तब से संतोष तिवारी मठ की महंती संभाल रहे हैं। इस मठ की गद्दी संभालने वाले महंत को सतुआ बाबा की उपाधि दी जाती है। यही कारण है कि संतोष तिवारी को उनके अनुयायी अब सतुआ बाबा कहकर संबोधित करते हैं। सतुआ पीठ की संपत्तियां गुजरात तक फैली हैं। देश के अन्य राज्यों में भी आश्रम के नाम पर संपत्ति है। संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा की प्रसिद्धि लगातार बढ़ती गई। महाकुंभ- 2025 में जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने उनका जगद्गुरु के तौर पर पट्टाभिषेक किया। सीएम योगी समेत कई महामंडलेश्वर और अवधेशानंद गिरि महाराज इस अवसर पर मौजूद रहे थे। इस बार माघ मेले में सतुआ बाबा को सबसे बड़ा आश्रम आवंटित किया गया है। सतुआ बाबा विष्णु स्वामी संप्रदाय के 57वें आचार्य हैं। माना जाता है कि विष्णु स्वामी का जन्म 2600 साल पहले दक्षिण भारत के मदुरै जिले में हुआ था। वे बाल रूपम गोपाल के उपासक थे। शिष्य परंपरा विष्णु स्वामी संप्रदाय की शुरुआत उन्होंने की थी। इस पंथ के 50वें आचार्य दीक्षित प्रथम सतुआ बाबा महंत रणछोड़ दास ने 18वीं सदी में मणिकर्णिका घाट पर सतुआ बाबा आश्रम बनाया था। उसके बाद महंत मोहनदासजी दूसरे सतुआ बाबा, महंत भोलादासजी तीसरे और महंत दामोदर दासजी चौथे सतुआ बाबा बने। महंत नरोत्तमदास जी पांचवें और यमुनाचार्य महाराज 1963 में छठवें सतुआ बाबा बने। कभी आश्रम में साधक सतुआ पीते थे, आज करोड़ों की लग्जरी गाड़ी‘सतुआ बाबा' नाम के पीछे भी एक कहानी है। 1998 में विष्णु पीठ की आर्थिक स्थिति काफी दयनीय थी। उस समय मठ में भोजन तक की व्यवस्था नहीं थी। साधक केवल सतुआ पीकर जीवन यापन करते थे। इस कारण यह नाम प्रचलन में आया। खुद संतोष दास उर्फ सतुआ बाबा कहते हैं कि 'सतुआ बाबा' कोई व्यक्तिगत नाम नहीं, बल्कि विष्णु पीठ में पीठाधीश्वर का एक गारिमामय पद है। जिस आश्रम में कभी साधक सतुआ पीकर जीवन यापन करते थे, आज उस आश्रम के महंत की लग्जरी लाइफ सुर्खियों में हैं। बनारस में आज ये आश्रम काफी बड़े क्षेत्र में फैल चुका है। इसकी मौजूदा कीमत 50 करोड़ बताई जाती है। इस मठ की कई संपत्ति गुजरात में भी हैं। वो भी करोड़ों में बताई जाती हैं। माघ मेले में सतुआ बाबा के शिविर के बाहर 3 करोड़ की लग्जरी कार खड़ी है। नंबर यूके 08 बीजी 8009 उत्तराखंड का है, लेकिन उस पर विष्णु स्वामी जगद्गुरु सतुआ बाबा काशी लिखा हुआ है। इसकी ऑनरोड कीमत 3 करोड़ से ज्यादा बताई जाती है। इसी तरह पोर्शे जैसी लग्जरी कार है, जिसकी कीमत 4.40 करोड़ बताई जाती है। दान या संपत्ति मिलने पर सूचना देने का है नियमयह आश्रम मुख्य रूप से विष्णु स्वामी संप्रदाय की प्राचीन धार्मिक पीठ है, जो गुरु-शिष्य परंपरा से संचालित होती है। आश्रम की वेबसाइट shrisatuababa.com के मुताबिक कोई ट्रस्ट डीड, सोसाइटी नंबर, 80G/12A सर्टिफिकेट या सरकारी रजिस्ट्रेशन डिटेल्स सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। संपत्ति और संचालन भक्तों के दान से चलता है। हाईकोर्ट के वरिष्ठ वकील जयेंद्र सिंह कहते हैं कि नियमों की बात करें तो धार्मिक मठों की संपत्ति पर राज्य सरकार या एंडोमेंट बोर्ड की निगरानी होती है। बड़ी संपत्ति मिलने पर कई बार सूचना देना या अनुमति लेना जरूरी होता है। ------------------------ ये खबर भी पढ़ें- मायावती चिल्लाईं- आप हरिजन कहकर जलील कर रहे, यही तेवर देख कांशीराम ने चुना दिल्ली का इंदरपुरी इलाका। एक छोटा-सा खस्ताहाल मकान। दिसंबर, 1977 की एक सर्द रात थी। अचानक रात 11 बजे किसी ने घर की कुंडी खटखटाई। घर के मालिक प्रभुदास ने दरवाजा खोला, तो देखा कि बाहर मुड़े-तुड़े कपड़ों में गले में मफलर डाले, लगभग गंजा हो चला एक अधेड़ शख्स खड़ा था। उस अधेड़ ने अपना परिचय दिया- ‘मैं बामसेफ का अध्यक्ष हूं…आपकी बेटी को पुणे में एक भाषण देने के लिए आमंत्रित करने आया हूं।’ ये शख्स कोई और नहीं, कांशीराम थे। जो प्रभुदास की छठी संतान मायावती के संबंध में बात कर रहे थे। इस एक मुलाकात ने मायावती की जिंदगी बदल दी। IAS बनने का सपना देखने वाली ये लड़की आगे चलकर देश के सबसे बड़े सूबे यूपी की 4 बार सीएम बनीं। समर्थक उन्हें प्यार से ‘बहनजी’ कहकर बुलाते हैं। आज मायावती का 70वां जन्मदिन है। इस मौके पर दैनिक भास्कर में पढ़िए उनकी जिंदगी के कुछ अनोखे किस्से…
राजनीति की रंगभूमि-2:'कच्ची छोरी' ने खींची मुलायम की कुर्सी, 12 घंटे में ऐसे बदली UP की सियासत
राजनीति में कई दिन ऐसे होते हैं, जो दशकों का भविष्य तय कर देते हैं। ये कहानी उस दौर की है, जब सत्ता साझेदारी नहीं, सौदेबाजी पर टिकी थी। एक तरफ मुलायम सिंह सत्ता को सीढ़ी मान रहे थे, दूसरी तरफ कांशीराम आंदोलन की चाबी। बीच में थीं मायावती… जिन्हें पहले दूर रखा गया, फिर कंट्रोल किया गया और आखिर में मिटाने की कोशिश की गई। राजनीति की रंगभूमि में आज पढ़िए कहानी जब एक गेस्ट हाउस रणभूमि बन गया और एक रात ने यूपी की राजनीति को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया… अक्टूबर 1993, दिल्ली का अशोका होटल। कमरा नंबर- 324, बाहर गलियारे में हलचल तेज थी। ये कमरा उद्योगपति जयंत मल्होत्रा का था। कमरे में राजनीति के दो धुरंधर आमने-सामने बैठे थे, मुलायम सिंह यादव और कांशीराम। इनके अलावा उद्योगपति संजय डालमिया भी मौजूद थे। डालमिया ग्लास मेज पर रखते हुए बोले- मुलायम जी, दुश्मन बड़ा है। अकेले लड़ेंगे तो बीजेपी का रथ सबको रौंद देगा। मुलायम सिंह ने अपनी छोटी आंखों से कांशीराम को देखा, बोले- दुश्मन एक है, तो हाथ मिलाने में हर्ज नहीं है। पर सीटें…? कांशीराम के चेहरे पर एक रहस्यमयी मुस्कान आई। फिर कहा- मुलायम जी, मुझे सीटों की भूख नहीं। मुझे तो उस ‘मास्टर चाबी’ की तलाश है, जिससे दलितों के नसीब का ताला खुले। आप चुनाव लड़िए, हम साथ देंगे। मल्होत्रा ने मुस्कुराते हुए बीच में टोक दिया- ये गठबंधन देश की सॉफ्ट लैंडिंग के लिए जरूरी है कांशीराम जी। अमीर-गरीब की खाई बहुत गहरी हो गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अब एक ही पाले में थे। प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने भी पर्दे के पीछे से आशीर्वाद दे दिया था। अजीब बात ये थी कि इस पूरी बातचीत से कांशीराम ने अपनी सबसे तेज-तर्रार शिष्या मायावती को दूर रखा था। एक करीबी कार्यकर्ता ने दबी जुबान में कांशीराम से पूछा- साहेब, बहनजी को नहीं बुलाया? वो बुरा मान सकती हैं। कांशीराम ने धीमी आवाज में कहा- मायावती का मिजाज तेज है। वो सौदेबाजी की नाजुक डोर तोड़ सकती थी। अभी उसे दूर रखना ही सही है। मायावती को पश्चिमी यूपी तक सीमित कर दिया गया। नतीजे आए तो दिल्ली से लखनऊ तक के राजनीतिक गलियारों में भूकंप आ गया। मंडल और दलित राजनीति के मेल ने हिंदुत्व के रथ की रफ्तार धीमी कर दी थी। भाजपा 177 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी थी, लेकिन बहुमत से बहुत दूर। वहीं, सपा को 109 और बसपा को 67 सीटें मिली थीं। ये गठबंधन भी बहुमत के जादुई आंकड़े (212) से काफी पीछे था, लेकिन कांग्रेस (28) और जनता दल (27) के सहयोग से सरकार बन गई। कांशीराम की 10 साल पुरानी पार्टी देश के सबसे बड़े सूबे की तकदीर लिखने वाली थी। कांशीराम ने 'मास्टर चाबी' का एक हिस्सा पकड़ लिया था, लेकिन हवा में एक सवाल अभी तैर रहा था- ये दोस्ती 'मजबूरी' की थी या 'जरूरत' की…? मुलायम सिंह यादव पहली बार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने वाले थे। 27 मंत्रियों में से 11 बसपा के थे। कांशीराम ने मायावती की ओर देखा- तुम सरकार में शामिल नहीं होगी। तुम्हें सरकार पर लगाम कसनी है। मायावती की आंखों में एक अलग चमक थी- बेफिक्र रहिए साहेब। सरकार बसपा के एजेंडे पर चलेगी। एक भी फाइल मेरी नजर से गुजरे बिना नहीं जाएगी। दिसंबर, 1993 की उस दोपहर लखनऊ की सड़कें जाम थीं। हवा में एक नया गीत गूंज रहा था, जिसे इंदिरा गांधी के करीबी कहे जाने वाले तांत्रिक चंद्रास्वामी के एक पूर्व सहयोगी ने खास मुलायम सिंह की फरमाइश पर लिखा था। इसके बोले थे- वीर मुलायम चहुं दिश ओर, कांशीराम का लग गया जोर…। मुलायम ने खुद कहा था- गाड़ी तभी आगे बढ़ेगी जब गाने में कांशीराम जी का नाम होगा। पार्टनर को खुश रखना जरूरी है। ये दो अलग-अलग दुनिया का मिलन था। एक तरफ सपा के उग्र और शोर मचाते समर्थक थे, जो जीत के नशे में चूर होकर नाच रहे थे। दूसरी तरफ बसपा के लोग थे- चुपचाप, सहमे हुए, लेकिन आंखों में गजब की चमक। लखनऊ की भरी सर्दी में भी उनमें से कई नंगे पांव थे। इस गठबंधन की नींव तीन अलग-अलग विचारधारा पर टिकी थी, जो एक-दूसरे को बस बर्दाश्त कर रही थी। कांशीराम के लिए ये गठबंधन एक प्रयोगशाला थी। वे मुलायम की विरासत को खास पसंद नहीं करते थे। कांशीराम को भरोसा था कि यूपी का ये प्रयोग पूरे देश में हलचल मचा देगा। उन्होंने मुस्कुराते हुए मायावती की ओर देखा- अब मैं पूरे देश का दौरा करने निकलूंगा। लखनऊ की कमान तुम्हारे हाथ में है। संभाल लोगी ना…? मायावती ने उन्हें भरोसा दिलाते हुए कहा- आप बेफिक्र रहिए साहेब। लखनऊ मेरी मुट्ठी में होगा। लेकिन मुलायम सिंह यादव, मंझे हुए खिलाड़ी थे। उन्हें राजनीति का 'पहलवान' कहा जाता था। उनके लिए ये गठबंधन सिर्फ सत्ता की सीढ़ी था। मुलायम ने अपने करीबियों से दबी जुबान में कहा- कांशीराम और ये छोरी अभी कच्चे हैं। ‘छोरी’ यानी मायावती…। उनके दिमाग में एक और चाल चल रही थी। उन्हें भरोसा था कि आज नहीं तो कल, वे बसपा के विधायकों को तोड़कर अपनी पार्टी में मिला लेंगे और कांशीराम की पूरी टोली को ही निगल जाएंगे। मगर सचिवालय के गलियारों में एक नई गूंज सुनाई देने लगी। मुख्यमंत्री की कुर्सी पर मुलायम सिंह बैठे जरूर थे, लेकिन असली धाक किसी और की थी। कांशीराम ने जानबूझकर उत्तर प्रदेश के मामलों से दूरी बना ली थी। वे समझ चुके थे कि उनकी शिष्या अब उड़ान भरने के लिए तैयार है। अखबारों की सुर्खियों में एक नया नाम उछला- सुपर सीएम… एक पत्रकार ने मायावती से पूछा- बहनजी, लोग आपको सुपर सीएम कहने लगे हैं। क्या ये सच है? मायावती के चेहरे पर एक सख्त, लेकिन संतुष्ट मुस्कान आई। वे बोलीं- जनता जो देख रही है, वही कह रही है। बीएसपी इस सरकार की रीढ़ है और रीढ़ ही तय करती है कि शरीर कैसे चलेगा। मंडल आयोग की रिपोर्ट दोनों पार्टियों के बीच का फेविकोल थी। उन्होंने उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में भी आरक्षण का दांव खेल दिया। बीजेपी और कांग्रेस के नेता बिलबिला उठे- पहाड़ों में पिछड़ी जातियां सिर्फ दो प्रतिशत हैं। वहां आरक्षण की राजनीति पागलपन है। मुलायम सिंह ने अपनी चिर-परिचित मुस्कान के साथ जवाब दिया- हमें प्रतिशत से नहीं, सामाजिक न्याय से मतलब है। मायावती के लिए ये गठबंधन एक लॉटरी साबित हुआ। 1991 की हार के बाद उन्हें संसद दूर लग रही थी, लेकिन जनवरी 1994 में वे राज्यसभा की सदस्य चुन ली गईं। एक समर्थक ने बधाई देते हुए कहा- बहनजी, अब आप फिर से संसद में दहाड़ेंगी। मायावती ने ठंडे लहजे में जवाब दिया- संसद तो ठीक है, लेकिन अब असली ताकत लखनऊ है। मुझे यूपी के हर जिले में बीएसपी का परचम लहराना है। उधर, मीडिया में खबरें छपने लगीं कि मुलायम और मायावती के बीच 'कोल्ड वॉर' शुरू हो गई है। मायावती ने फौरन मोर्चा संभाला। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा- ये मनुवादी मीडिया बीजेपी के इशारे पर नाच रहा है। हमारे और मुलायम सिंह जी के बीच कोई दरार नहीं है। ये फूट डालने की साजिश है। पत्रकार ने पूछा- लेकिन कांग्रेस और जनता दल तो आपको बिना शर्त समर्थन दे रहे हैं, आप उन्हें भी मनुवादी कह रही हैं? मायावती ने मेज पर हाथ मारते हुए कहा- समर्थन देना उनकी मजबूरी है, एहसान नहीं। हमारे बिना वे बीजेपी को नहीं रोक सकते थे। बीजेपी तो पूरे देश पर कब्जा करने का ख्वाब देख रही थी, हमने उसके रथ के पहिए जाम किए हैं। वहीं, यूपी सचिवालय में एक नया मुहावरा चल पड़ा था- 'बहनजी का आदेश।' मायावती को सुपर सीएम कहलाना पसंद था और वो इसे साबित भी करती थीं। अक्सर डंके की चोट पर कहतीं- मैं मुख्यमंत्री से चर्चा नहीं करती, कभी-कभी उन्हें निर्देश भी देती हूं। हकीकत ये थी कि मुलायम सिंह महिला नेताओं के साथ वैसे भी असहज रहते थे। मायावती के आक्रामक तेवर ने उन्हें और भी दूर कर दिया था। मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव पीएल पुनिया (पन्नालाल पुनिया) दोनों के बीच ब्रिज की तरह काम करते थे। पुनिया के पास अक्सर मायावती की मांगों की एक लंबी फेहरिस्त पहुंचती। पुनिया साब, ये तबादलों की लिस्ट है, शाम तक ऑर्डर हो जाने चाहिए। फोन पर मायावती की आवाज किसी सेनापति जैसी होती। लिस्ट में सिर्फ तबादले नहीं, दलितों पर हो रहे अत्याचारों की शिकायतें भी होती थीं और ये शिकायतें हवा-हवाई नहीं थीं। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति आयोग की फाइलें चीख-चीखकर गवाही दे रही थीं कि गठबंधन सरकार में दलितों की हालत क्या हो गई है। 1989-90 में जहां दलितों पर अत्याचार के सिर्फ 1067 मामले दर्ज थे, वहीं 1995 में आंकड़ा 14 हजार 966 पर पहुंच चुका था। मायावती ने रिपोर्ट देखकर भड़कते हुए कहा- ये देखिए पुनिया साब, हमारी सरकार होने के बावजूद अत्याचार 10 गुना बढ़ गए हैं? क्या यही हमारा सामाजिक न्याय है? पुनिया ने रिपोर्ट सामने रखी- बहनजी, ज्यादातर हमलों में ब्राह्मण-ठाकुर नहीं, यादव शामिल हैं। मायावती सन्न रह गईं। जिन पिछड़ी जातियों के साथ मिलकर उन्होंने 'सामाजिक न्याय' का सपना बुना था, वही यादव अब दलितों के खिलाफ हिंसा पर उतर आए थे। मायावती ने मुट्ठी भींचते हुए खुद से कहा- ये गठबंधन अब न्याय नहीं, सिर्फ एक मजबूरी का सौदा रह गया है। पुनिया के माथे पर पसीना आ गया। वे भाग-दौड़ करते, पर मुख्यमंत्री का अपना वोटबैंक था। वे अपने समर्थकों को नाराज नहीं कर सकते थे। मुलायम सिंह के एक करीबी अधिकारी ने दबी जुबान में बताया- जैसे ही मायावती की लिस्ट आती, पुनिया साब के चेहरे पर तनाव साफ दिखता। मुख्यमंत्री की अपनी मजबूरियां थीं। हालत ये थी कि सपा समर्थक गांव प्रधान भी मुख्यमंत्री कोष से बीएसपी के कैबिनेट मंत्री से ज्यादा फंड हथिया लेता था। कांशीराम ने इस खींचतान में घी डालने का काम किया। वो कभी मुख्यमंत्री से मिलने नहीं जाते, बल्कि जोर देते थे कि मुलायम सिंह खुद स्टेट गेस्ट हाउस आएं। मुलायम पूरी तैयारी और औपचारिक वेशभूषा में वहां पहुंचते, पर कांशीराम उन्हें 'औकात' दिखाने का खेल खेलते। रिसेप्शन पर खड़े मुख्यमंत्री को आधा-आधा घंटा इंतजार कराया जाता। फिर कांशीराम नीचे आते- बिखरे बाल, बदन पर सिर्फ एक बनियान और लुंगी। ये मुख्यमंत्री की सरेआम बेइज्जती थी, वो भी कैमरों के सामने। मुलायम सिंह ये अपमान जहर के घूंट की तरह पी रहे थे। उन्होंने बाहर कोई शोर नहीं मचाया, लेकिन भीतर ही भीतर एक खतरनाक योजना पर काम शुरू कर दिया। मुलायम सिंह ने जान लिया था कि सीधी लड़ाई से काम नहीं चलेगा। उन्होंने बीएसपी के उन पुराने दिग्गजों को टटोलना शुरू किया जो मायावती के बढ़ते कद से जल रहे थे। नाम सामने आए- डॉ. मसूद अहमद, जंग बहादुर पटेल और राज बहादुर। मुलायम सिंह ने अपने प्यादे भेजे- क्यों बहनजी के पीछे अपनी सियासत बर्बाद कर रहे हो? हमारे साथ आओ, सम्मान भी मिलेगा और सत्ता भी। मुलायम की ये चाल कामयाब रही। बीएसपी का संगठन अंदर से दरकने लगा। विधायक टूटने के लिए तैयार थे। कांशीराम और मायावती को लग रहा था कि वे मुलायम को झुका रहे हैं, पर वे नहीं जानते थे कि मुलायम उनके पैरों के नीचे से उनकी अपनी ही जमीन खींच रहे थे। 1995 की शुरुआत में हुए पंचायत चुनाव कांशीराम और मायावती के लिए झटके की तरह थे। 50 में से 30 जिलों पर मुलायम सिंह की सपा ने कब्जा कर लिया। कांग्रेस और बीजेपी ने भी कुछ सीटें झटक लीं, लेकिन बीएसपी के हाथ लगा सिर्फ एक जिला। मुलायम सिंह अपनी जीत के नशे में एक बहुत बड़ा गणित भूल रहे थे- अटल बिहारी वाजपेयी और कांशीराम की दोस्ती। 1991 में जब कांशीराम संसद पहुंचे, तो वाजपेयी उन पहले बड़े नेताओं में थे, जिन्होंने हाथ आगे बढ़ाया था। एक शाम वाजपेयी के बंगले पर चाय का दौर चल रहा था। कांशीराम सामने बैठे थे। वाजपेयी ने मंद मुस्कान के साथ कहा- कांशीराम जी, राजनीति में दुश्मन कोई नहीं होता, सिर्फ संभावनाएं होती हैं। कांशीराम ने जवाब दिया- अटल जी, हम तो उस मास्टर चाबी की तलाश में हैं जो दलितों के भाग्य खोल दे। वाजपेयी की पारखी नजरों ने भांप लिया था कि अगर यूपी में बीजेपी को फिर से सत्ता की दहलीज पार करनी है, तो दलितों का साथ जरूरी है। संघ प्रमुख राजेंद्र सिंह (रज्जू भैया) ने भी इस पर मुहर लगा दी। मुलायम सिंह को यकीन था कि हिंदुत्व और बहुजन विचारधारा कभी एक नहीं हो सकते। वे निश्चिंत थे, इस बात से बेखबर कि अटल बिहारी वाजपेयी के ड्रॉइंग रूम में उनकी सरकार का डेथ-वारंट पहले ही लिखा जा चुका था। 1995 की गर्मियां लखनऊ के लिए आग लेकर आई थीं। कांशीराम अस्पताल के बिस्तर पर थे। पुरानी डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर ने शरीर तोड़ दिया था, लेकिन दिमाग अभी भी बिजली की तरह चल रहा था। अस्पताल के उस सफेद कमरे में उद्योगपति जयंत मल्होत्रा की मौजूदगी इस बात का सबूत थी कि बड़ा खेल होने वाला है। कांशीराम ने वाजपेयी के साथ अपनी पुरानी दोस्ती का पत्ता फेंका। वाजपेयी ने आडवाणी और कल्याण सिंह को एक ऐसी योजना पर राजी कर लिया, जो मुलायम सिंह के पैरों के नीचे से कालीन खींचने वाली थी। हैरानी की बात ये थी कि मायावती को आखिरी पल तक इसकी भनक नहीं थी। कांशीराम ने मायावती को अस्पताल बुलाया। मायावती की आंख में आंसू थे। उन्होंने कांशीराम का हाथ पकड़कर कहा- साहेब, अगर आपको कुछ हो गया तो हमारा क्या होगा? ये आंदोलन कौन संभालेगा? कांशीराम ने नर्स को बाहर जाने का इशारा किया और धीमी आवाज में पूछा- तुम मुख्यमंत्री बनना चाहोगी? मायावती सन्न रह गईं। उन्हें लगा ‘साहेब’ बीमारी में बहक रहे हैं। कांशीराम ने फाइलों का एक पुलिंदा उनकी ओर खिसकाया और कहा- ये लो और सीधे राज्यपाल के पास जाओ। वो तुम्हें शपथ दिलाएंगे। 1 जून, 1995 की दोपहर जैसे ही खबर आई कि मायावती राज्यपाल मोतीलाल वोरा से मिली हैं और समर्थन वापसी का पत्र सौंपा है, मुख्यमंत्री कार्यालय में सन्नाटा पसर गया। मुलायम सिंह का गुस्सा सातवें आसमान पर था। ये गुस्सा दूसरों से ज्यादा खुद पर था। मुलायम को लगा था कि कांशीराम बीमार हैं तो कोई हलचल नहीं होगी, पर यहीं वे गच्चा खा गए। मुलायम के एक पुराने वफादार ने उनके कान में फुसफुसाया- नेताजी, बीएसपी के विधायक हमारी जेब में हैं। बस थोड़ा डराना होगा ताकि ये सरकार बनाने का दावा ही छोड़ दें। 2 जून, शाम करीब 4 बजे हजरतगंज में स्टेट गेस्ट हाउस के कमरा नंबर- 1 में मायावती अपने खास रणनीतिकारों के साथ बैठी थीं। तभी बाहर एक ऐसा शोर उठा, जिसने लखनऊ की रूह कंपा दी। समाजवादी पार्टी के करीब 200 समर्थक जिनमें विधायक भी थे, गेट तोड़कर भीतर दाखिल हो चुके थे। हवा में गालियां और नफरत का तेजाब घुला था। वे चिल्ला रहे थे- @#$% के दिमाग सातवें आसमान पर हैं, आज इन्हें जमीन दिखानी होगी। कॉमन हॉल में बैठे बीएसपी विधायक जान बचाने के लिए इधर-उधर भागे, पर उन्हें दबोच लिया गया। थप्पड़, लात और घूसे… सब-कुछ सरेआम हो रहा था। पांच विधायकों को जानवरों की तरह घसीटते हुए गाड़ियों में डालकर सीधे मुख्यमंत्री आवास ले गए। वहां बंद कमरे में कोरे कागजों पर दस्तखत का खेल शुरू हुआ- साइन करो कि तुम हमारे के साथ हो, वरना घर की सूरत नहीं देख पाओगे। उधर, गेस्ट हाउस के हॉल में तोड़फोड़ के बाद हमलावर कमरा नंबर- 1 की ओर बढ़े। बीएसपी नेता आरके चौधरी किसी तरह जान बचाकर कमरे में घुसे और उनके निजी सुरक्षा गार्ड लालचंद ने फौरन कुंडी चढ़ा दी। बाहर खड़ी भीड़ अब दरिंदों की तरह दरवाजे को पीट रही थी। उनमें शामिल कुछ महिलाएं चीख रही थीं- उस @#$% को बाहर घसीटो, देखो आज उसका क्या हाल करते हैं। दरवाजे पर पड़ते हर वार के साथ मायावती का गला सूख रहा था। वहीं, बाहर खड़े सीनियर पुलिस अफसर सिगरेट के छल्ले उड़ा रहे थे। अचानक गेस्ट हाउस की बिजली और टेलीफोन लाइन काट दी गई। उस अंधेरे गलियारे में सिर्फ गालियां, धमकियां और दरवाजा टूटने की डरावनी आवाजें थीं। तभी दो जांबाज पुलिस अफसर विजय भूषण और सुभाष सिंह दीवार बनकर खड़े हो गए। उन्होंने अपनी जान की बाजी लगा दी। भीड़ उन्हें रौंदने को तैयार थी, पर वे टस से मस नहीं हुए। अगर वे दो मिनट और न रुकते, तो उस कमरे का दरवाजा टूट चुका होता। हालात हाथ से निकल चुके थे, तभी जिलाधिकारी राजीव खेर मौके पर पहुंचे। ऊपर से फोन पर धमकियां मिल रही थीं। खेर ने फोन पटक दिया और गरज कर बोले- लाठीचार्ज… भीड़ तितर-बितर हुई, पर फर्ज निभाने की कीमत राजीव खेर को चुकानी पड़ी। रात 11 बजे ही उनका तबादला हो गया। मायावती को इतना डर गई थीं कि सपा समर्थकों के जाने के कई घंटों बाद तक दरवाजा नहीं खोला। उस शाम ने मायावती के भीतर के 'स्टील' को वो धार दी कि वे भारतीय राजनीति की 'आयरन लेडी' बन गईं। अस्पताल के बिस्तर पर पड़े कांशीराम ने खबर सुनी तो धीमे से बोले- मायावती, सियासी वहशत की आग तपकर आज कुंदन बन गई हो। 3 जून, राजभवन- लखनऊ स्टेट गेस्ट हाउस की उस काली शाम के ठीक अगले दिन, लखनऊ की हवाएं बदली हुई थीं। कल जो महिला अपनी जान बचाने के लिए एक कमरे में कैद थी, आज प्रदेश की किस्मत लिखने जा रही थी। राज्यपाल मोतीलाल वोरा ने मायावती को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। बिना किसी प्रशासनिक अनुभव और राजनीतिक विरासत के एक दलित महिला देश के सबसे बड़े सूबे की 'हुक्मरान' बन चुकी थी। फिर भी असली जंग अभी बाकी थी, विधानसभा का फ्लोर टेस्ट…। 19 जून मुलायम सिंह के हाथ से सत्ता जा चुकी थी, लेकिन उनके पास एक 'ट्रंप कार्ड' अभी भी था- विधानसभा स्पीकर धनीराम वर्मा। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही धनीराम ने एक ऐसा बम फोड़ा, जिसने सबको सन्न कर दिया। उन्होंने अपनी कुर्सी से ऐलान किया- राज्यपाल का मुलायम सरकार को हटाना और मायावती को सीएम करना पूरी तरह 'असंवैधानिक' है। ये सदन स्थगित किया जाता है। इतना कहकर वे और समाजवादी पार्टी के विधायक सदन से बाहर निकल गए। उन्हें लगा खेल खत्म हो गया, पर असली खेल तो अब शुरू हुआ था। सदन में मौजूद बाकी 275 सदस्यों ने हार नहीं मानी। अगले दिन बीएसपी विधायक बरखूराम वर्मा को विधानसभा का नया अध्यक्ष चुन लिया। सपा और विद्रोही गुट बाहर तमाशा देखते रह गया और अंदर मायावती के पक्ष में समर्थन का सैलाब उमड़ पड़ा। कांग्रेस, भाजपा, जनता दल और यहां तक कि सपा के 13 बागियों ने भी मायावती का साथ दिया। मुलायम सिंह यादव अब पूरी तरह अलग-थलग पड़ चुके थे। अगले दिन वोटिंग से ठीक पहले सदन का माहौल गर्म हो गया। राजनीति के चतुर खिलाड़ी कांग्रेसी नेता प्रमोद तिवारी ने भाजपा के कल्याण सिंह को घेरा- कल्याण जी, साफ बताइए, ये सरकार कब तक चलेगी? कल्याण सिंह, वाजपेयी और जोशी की वजह से भारी मन के साथ गठबंधन के लिए राजी हुए थे। उन्होंने प्रमोद तिवारी पर निशाना साधा- तिवारी जी, आप महाभारत के 'शकुनी' जैसा किरदार निभाना बंद कीजिए। मायावती तब तक पद पर रहेंगी, जब तक दिल्ली में बैठी आपकी कांग्रेस सरकार उन्हें नहीं हटाती। इसके बाद बारी थी मायावती की। उन्होंने मोर्चा संभाला तो उनकी आवाज में वो 'स्टील' था, जो गेस्ट हाउस की आग में तपकर निकला था। उन्होंने अटल बिहारी वाजपेयी और नरसिंह राव का शुक्रिया अदा किया, पर अपने असली दुश्मन को नहीं भूलीं। मायावती ने न केवल बहुमत साबित किया, बल्कि ये भी बता दिया कि अब लखनऊ में 'साहेब' नहीं, 'बहनजी' का राज चलेगा। राजनीति की रंगभूमि पर एक और अध्याय का अंत हुआ। जिस महिला को 'हिस्टीरिकल' (बेलगाम) कहकर खारिज किया गया, उसने अपनी जिद और संघर्ष से इतिहास के पन्नों को पलट दिया। लखनऊ के सिंहासन पर अब एक ऐसी 'आयरन लेडी' बैठी थी, जिसकी हुकूमत की गूंज आने वाले दशकों तक भारतीय राजनीति के गलियारों मे सुनाई देने वाली थी। *** रेफरेंसBehenji: A Political Biography of Mayawati Kindle Edition - Ajoy Bose | Crime, Grime Gumption: Case Files of an IPS Officer - O.P. Singh | मेरे संघर्षमय जीवन एवं बहुजन आंदोलन का सफरनामा - मायावती | तत्कालीन संस्करण माया मैग्जीन, इंडिया टुडे। सीनियर जर्नलिस्ट- नवल किशोर सिन्हा | दयानंद पांडे | हरीश मिश्रा | कई चश्मदीदों ने नाम ने छापने की शर्त पर भी जानकारी दी। कहानी को रोचक बनाने के लिए क्रिएटिव लिबर्टी का इस्तेमाल किया गया है। ----------------------------------------------------------- सीरीज की ये स्टोरी भी पढ़ें... इंदिरा पर लगा था ‘वोट चोरी’ का आरोप; राज नारायण बोले- बैलेट पर जादुई स्याही थी, कांग्रेस निशान अपने आप उभर आता है दिसंबर, 1970 की वो रात दिल्ली की हड्डियों में कंपकंपी पैदा कर रही थी। राष्ट्रपति भवन के भीतर जो लावा उबल रहा था, उसने पूरे देश की राजनीति को झुलसा दिया। अचानक खबर आई- लोकसभा भंग हुई। वक्त से एक साल पहले चुनाव होंगे। विपक्ष ने कहा- मैडम ने मास्टरस्ट्रोक खेला है। पूरी स्टोरी पढ़ें...
हरियाणा में आज (शुक्रवार) से कमजोर पश्चिमी विक्षोभ दस्तक दे सकता है। लगातार दो पश्चिमी विक्षोभ 16 जनवरी और 19 जनवरी रात को आने की संभावना से मौसम में बदलाव हो सकता है। मौसम विभाग ने आज पूरे हरियाणा में कोहरे और शीतलहर को लेकर यलो अलर्ट जारी किया है। कैथल, कुरुक्षेत्र, करनाल और अंबाला में कोल्ड-डे की स्थिति रह सकती है। वहीं, वीरवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में ठंड, कोहरा और शीत लहर का असर बना रहा। बीते 24 घंटों के दौरान न्यूनतम तापमान में हल्की बढ़ोतरी जरूर दर्ज की गई, लेकिन इसके बावजूद तापमान सामान्य से काफी नीचे बना हुआ है। वीरवार को राज्य का औसत न्यूनतम तापमान सामान्य से करीब 2.7 डिग्री सेल्सियस कम रिकॉर्ड किया गया। दिन के तापमान में भी स्थिति ज्यादा राहत देने वाली नहीं रही और अधिकतम तापमान औसतन 4.3 डिग्री सेल्सियस तक सामान्य से नीचे बना हुआ है। ठंड के असर को देखते हुए हरियाणा सरकार ने विंटर होली-डे तीन दिन और बढ़ा दिया है। अब सोमवार से हरियाणा में सरकारी व प्राइवेट स्कूल खुलेंगे। हिसार में सर्दी का 2 साल का रिकॉर्ड टूटा पिछले 15 सालों में पांचवीं बार ऐसा हुआ है, हिसार में जब न्यूनतम तापमान 0.2 डिग्री तक गया है। हिसार में न्यूनतम तापमान ने पिछले दो साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया। 2025 में 15 जनवरी को तापमान 3.5 डिग्री, 2024 में 16 दिसंबर को 1.1 डिग्री दर्ज किया था। नारनौल में 1.5 डिग्री, जींद के पांडु पिंडारा में 2.6 डिग्री और सिरसा में 2.9 डिग्री न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया। करनाल, अंबाला और रोहतक में भी रात का तापमान 4 से 5 डिग्री के बीच रहा। दिन में धूप खिलने से राहत मिली इस दौरान दिन में धूप खिलने से राहत मिली रही। इससे दिन के तापमान में हल्की बढ़ोतरी जरूर हुई, लेकिन इसके बावजूद ठंड बनी रही। अधिकतम तापमान नूंह में 22.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे ज्यादा रहा। हिसार में दिन का तापमान 15.4 डिग्री और रोहतक में 16.8 डिग्री रहा। मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटों में तापमान में बहुत ज्यादा बदलाव की संभावना नहीं है। आगे कैसा रहेगा मौसम एक्सपर्ट ने बतायामौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 17 और 18 जनवरी को ठंड के असर में धीरे-धीरे कमी आ सकती है और अधिकांश जिलों में कोई चेतावनी नहीं रहेगी। हालांकि रात और सुबह के समय हल्का से मध्यम कोहरा बना रह सकता है। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार लगातार दो पश्चिमी विक्षोभ 16 जनवरी व 19 जनवरी रात्रि को आने की संभावना से मौसम में बदलाव बने रहने की संभावना है जिससे 17 व 18 जनवरी को आंशिक बादलवाई व एक दो स्थानों पर छिटपुट बूंदाबांदी होने की संभावना है। परंतु 19 जनवरी के बाद राज्य के ज्यादातर स्थानों पर बारिश की संभावना बन रही है।
बीआरटीएस को नगर निगम कभी समझ ही नहीं पाया। निर्माण के बाद कभी ये नहीं समझा कि लोग किस तरह हर दिन ट्रैफिक में फंस रहे हैं। 11 महीने पहले कोर्ट ने रैलिंग हटाने के आदेश दिए तो अब तक यह काम भी मुकम्मल नहीं हो सका है। रैलिंग हटाने के लिए जैसे-तैसे जो चौथा ठेकेदार मिला था, वह भी काम छोड़कर चला गया। कारण पता किए तो चौंकाने वाले निकले। नगर निगम ने जिस रैलिंग की कीमत 3.5 करोड़ आंकी, ठेकेदार की नजर में उसकी कीमत ढाई करोड़ भी नहीं है। यही कारण है कि ठेकेदार काम करने को राजी नहीं। उधर, निगम खुद भी इस काम में हाथ डालने से कतरा रहा। ऐसे में अब पांचवीं बार टेंडर बुलाने की तैयारी है। दरअसल, निगम ने जिस इंजीनियर से वैल्यूएशन करवाया, उसने बीआरटीएस में 304 ग्रेड का स्टेनलेस स्टील इस्तेमाल होने की रिपोर्ट दी। इसी आधार पर 3.5 करोड़ की वैल्यूएशन मानी गई। बाद में जांच में सामने आया कि बीआरटीएस निर्माण में 304 एसएस के पाइप लगे ही नहीं थे। यानी वैल्युएशन जरूरत से ज्यादा कर दिया गया। यही वजह है कि कोई ठेकेदार 2.5 करोड़ में काम करने को तैयार नहीं है। अब तक चार टेंडर हो चुके हैं। चौथी बार दो फर्मों ने हिस्सा लिया। एक ने 1.5 करोड़ और राजगढ़ के दिनेश यादव ने 2.5 करोड़ रुपए का प्रस्ताव दिया। यादव को काम मिला, लेकिन उन्होंने खुद काम न करते हुए पहले इंदौर और फिर जबलपुर के ठेकेदार को काम सौंपा। दोनों ने काम करने से इनकार कर दिया। जिम्मेदार भी मान रहे हैं जांच जरूरी निगम के जिम्मेदार खुद कह रहे हैं कि यह जांच होनी चाहिए कि वैल्युएशन किस आधार पर किया गया। अगर सही सामग्री का आकलन होता तो लागत कम आती और काम आगे बढ़ सकता था। एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर का कहना है कि इस काम के वैल्यूएशन की भी जांच होना चाहिए। आखिर किसने इतना वैल्युएशन किया? जबकि कोई 2 करोड़ में भी काम करने को तैयार नहीं है। हाई कोर्ट में निगम की रिपोर्ट से बढ़ी सख्ती निगम प्रशासन ने हाई कोर्ट में यह भी लिखा कि ठेकेदार काम करने के लिए तैयार नहीं है। इसी के बाद कोर्ट ने ठेकेदार को तलब किया। कोर्ट अब यह जानना चाहता है कि जब ठेका मिल चुका है तो काम क्यों नहीं शुरू किया जा रहा। ठेकेदार को तलब किया गया है। अगली सुनवाई में इस पर फैसला होगा। हालांकि अफसर मान रहे हैं कि पांचवीं बार टेंडर बुलवाना होगा। मार्च से अब तक बीआरटीएस तोड़ने का काम शुरू नहीं हो पाया है। पहले अफसर कहते थे कि जरूरत पड़ी तो निगम खुद काम करेगा, लेकिन अब उसके लिए भी कोई ठोस तैयारी नहीं है। 80 फीसदी रैलिंग ही हटाई, वह भी एक तरफ की जब से रैलिंग हटाना शुरू किया, 11 किमी में से 80 फीसदी हिस्से में एक तरफ की पूरी रैलिंग हटा चुके हैं। एलआईजी से पलासिया, गीता भवन से जीपीओ और जीपीओ से नौलखा जैसे बॉटलनैक हिस्से में से भी रैलिंग हटा चुके हैं। फरवरी 2025 में हाई कोर्ट के आदेश के बाद 11 महीने हो चुके, लेकिन पूरी रैलिंग नहीं हटा सके हैं। अब नया ठेकेदार कब मिलेगा, काम और कितने दिन चलेगा, यह भी तय नहीं है।
बड़गोंदा में वन विकास निगम ने बुलडोजर चलाए:नर्सरी के नाम पर 1500 से ज्यादा छोटे-बड़े पेट काटे
बड़गोंदा में वन विकास निगम ने गुरुवार को नर्सरी बनाने के नाम पर सागौन के 1500 से ज्यादा छोटे-बड़े पेड़ों को बुलडोजर चलाकर नष्ट कर दिया। जिस स्थान पर पेड़ काटे गए हैं वहां पर तेंदुए की मूवमेंट रहती है। वह मवेशियों का शिकार करता है। यह हिस्सा जंगली खरगोश, नीलगाय, बटेर जैसे पक्षियों का भी घरोंदा है। 8-10 साल पहले वन विभाग ने अपनी खाली जमीन पर सागौन का पौधारोपण किया था। निगम को इस हिस्से में नर्सरी बनाने के लिए जमीन मिली है। 50 फीट तक ऊंचे और जंगल जैसे आवरण का अहसास कराने वाले इन पेड़ों को नष्ट कर दिया गया। तार फेंसिंग कर सुरक्षित किए थे पौधे, घने हो गए थे इन पेड़ों का काटने के लिए किसी तरह की अनुमति नहीं ली गई। बड़गोंदा में नर्सरी के प्रवेश वाले कच्चे रास्ते पर सागौन का पौधारोपण किया गया था। वन विभाग ने आयोजन कर यहां पौधे रोपे थे। तार फेंसिंग कर इसे सुरक्षित किया था। नतीजा यह हुआ कि सागौन का घना आवरण यहां बन गया था। हमने बड़े पेड़ नहीं काटे हमने बड़े पेड़ नहीं काटे हैं। झाड़ियों और बड़ी घास को हटाया है। बकायदा ड्रोन से एरिया का फोटो लेकर डीएफओ को प्रेजेंटेशन दिया था। -तारीक खान, रेंजर वन विकास निगम
आप तो बस रजिस्ट्री करवाइए, नामांतरण और डायवर्जन सब मैं करवा दूंगा... आपका प्रॉफिट होगा तो ही आपको अच्छा लगेगा। हम भी आपके साथ काम करेंगे... हमारी कॉलोनी में से एक प्लॉट ले लेना और उसे डेवलप करा देना। बड़ी ही बेशर्मी से ये बात कहने वाले भोपाल के नीलबड़ क्षेत्र के पटवारी तरूण श्रीवास्तव है, जो ये डील करते हुए भास्कर के खुफिया कैमरे में कैद हुए हैं। रातीबड़ के ही पटवारी भंवर सिंह सोलंकी ने तो भास्कर रिपोर्टर को ऑफर दिया कि मुझे एक फॉर्म हाउस देना और विधायक जी को प्लॉट। एक तरफ भोपाल जिला प्रशासन अवैध कॉलोनाइजरों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी में है तो दूसरी तरफ प्रशासन की अहम कड़ी पटवारी ही अवैध कॉलोनी के इस खेल में शामिल है। ब्रोकर, बिल्डर और पटवारी का ये गठजोड़ राजधानी के आसपास की हजारों एकड़ कृषि भूमि को अवैध कॉलोनियों में बदल रहा है। भास्कर टीम ने एक हफ्ते तक विदिशा रोड, रातीबड़ में अवैध कॉलोनियों का सौदा करने वाले एजेंट्स पर नजर रखी। अवैध कॉलोनी बेचने वाले ऐसे 4 एजेंट्स और उनके बिल्डर्स से बात की। सभी ने खुफिया कैमरे में कहा कि एनओसी नहीं मिलेगी, लेकिन रजिस्ट्री और डाइवर्जन हो जाएगा। इसके बाद भास्कर रिपोर्टर ने पटवारियों से मुलाकात की तो उन्होंने पूरे सिस्टम को मैनेज करने का तरीका बताया। पढ़िए रिपोर्ट... भोपाल-विदिशा रोड पर अवैध कॉलोनियों की 'सब्जी मंडी'हमारी इन्वेस्टिगेशन टीम जब एक आम ग्राहक बनकर भोपाल से विदिशा रोड पर निकली, तो अवैध कॉलोनियों का सच परत-दर-परत खुलता चला गया। हर 100-200 मीटर पर आकर्षक नामों वाली कॉलोनियों के बोर्ड लगे थे और उनके नीचे एजेंट ग्राहकों की तलाश में खड़े थे। 10 किलोमीटर के दायरे में ही ऐसे सैकड़ों एजेंट मिले जो एक ही तरीके से काम कर रहे थे - झूठे वादे और फर्जी सपने। इनके पास न NOC थी न ही TCP की मंजूरी। इसके फिर भी रजिस्ट्री, नामांतरण और डायवर्सन का भरोसा दे रहे थे। विदिशा रोड पर हमारी पहली मुलाकात 'वैष्णो धाम फेज-2' के ब्रोकर शुभम माली से हुई। रिपोर्टर: मैं भोपाल से हूं, रेसीडेंशियल प्लॉट लेना चाहता हूं। शुभम: मिल जाएगा साहब! 675 से लेकर 1125 स्क्वायर फीट तक के प्लॉट हैं। रेट 1500 रुपए प्रति स्क्वायर फीट है। शुभम हमें कॉलोनी के अंदर ले गया, जहां कुछ मकान बन चुके थे और सीमेंट-कांक्रीट (CC) की सड़कें बनी थीं। उसने एक प्लॉट दिखाते हुए कहा, ‘ये प्लॉट ले लो, इसके आगे 10 फीट जगह और 10x12 फीट की कार पार्किंग फ्री मिलेगी।’ जब हमने उस 'फ्री पार्किंग' वाली जगह को ध्यान से देखा तो वह एक 60 फीट चौड़ी सड़क थी। रिपोर्टर: यह तो पूरी सड़क है, इसे पार्किंग कैसे बता रहे हो? शुभम (बिना झिझक): भैया, यही तो खासियत है। यह पुरानी विदिशा रोड है, सरकारी नक्शे में कटी हुई है। लेकिन सरकार ने आगे से सीधा बायपास निकाल दिया तो अब यह रोड कभी नहीं बनेगी। हमने इसे डेवलप करके कॉलोनी के लिए पार्किंग बना दिया। सरकार फालतू में डबल रोड पर पैसा क्यों खर्च करेगी? सरपंच और बिजली वालों को रिश्वत दो सबकुछ हो जाता हैब्रोकर शुभम हमें पास ही में अपनी दूसरी कॉलोनी 'वैष्णो धाम फेस-1' में ले गया। उसने बताया कि यहां लगभग सारे प्लॉट बिक चुके हैं और यहां भी वही 1200 रुपए का भाव है। रिपोर्टर: यह आपकी ही कॉलोनी है? शुभम: यह हमारी ही कॉलोनी है फेस वन है। इस कॉलोनी में टोटल पांच प्लॉट खाली है। जिसमें से चार प्लॉट 20x 50 के हैं। लास्ट वाला 1081 स्क्वायर फीट का है। कुल मिलाकर के लगभग 6 हजार 500 स्क्वायर फीट है। रिपोर्टर: इसका क्या रेट है? शुभम: इसमें आप एक प्लॉट लो या 2 प्लॉट अगर आप पूरा लेना चाहते हो तो हम पूरा भी आपको दे देंगे। अभी इसकी रेट 1200 रुपए है ,बाकी आप टेबल पर बैठेंगे तो बातचीत में रेट ऊपर नीचे हो जाएगा। हम तो बैठे हैं, इसे बेचने के बाद दूसरा खरीदेंगे। बगल में इतने सारे खेत हैं, सब जगह प्लॉटिंग ही प्लॉटिंग हो रही है। हम भी नई जगह खरीदेंगे और प्लॉटिंग करेंगे। कॉलोनी न तो टीएंडसीपी अप्रूव्ड न ही एनओसीजब हमने कॉलोनी के कानूनी दस्तावेजों के बारे में पूछा, तो शुभम ने तुरंत अपने मालिक दीपक मैथिल को फोन लगा दिया। दीपक ने हमें मिलने के लिए ऑफिस बुलाया। जब हम उसके भानपुर स्थिति ऑफिस में पहुंचे तो उसने बिना किसी लाग-लपेट के अवैध कॉलोनियों के बिजनेस का पूरा सच उगल दिया। रिपोर्टर: प्लॉट चाहिए था, हम लोकेशन देख कर आए दीपक:आपने हमारी दोनों लोकेशन देखी है, फेस वन में चार प्लॉट खाली है। रिपोर्टर:टीएनसी अप्रूव्ड मिलेगा? दीपक: विदिशा रोड पर एक भी सोसाइटी आपको टीएनसी अप्रूव्ड नहीं मिलेगी, सुखी सेवनिया पर कुछ कॉलोनियां है जो टीएनसी अप्रूव्ड है। हमारे सारे प्रोजेक्ट में रजिस्ट्री, नामांतरण और डायवर्जन है Noc किसी में नहीं मिलेगी, अगर आपको Noc चाहिए तो पंचायत वाली मिल सकती है। रिपोर्टर: वैष्णो धाम -2 में पीछे प्लॉट लेने हो तो.. क्या रेट में मिलेंगे? दीपक: इस कॉलोनी में पीछे 60 फीट पुराना विदिशा रोड है। यह शासकीय भूमि है रोड के लिए, इसलिए हमने भी कॉलोनी में रोड डेवलप करके छोड़ दिया है ताकि हमारे काम आए। हमने इस पार्किंग के लिए छोड़ दिया है। भविष्य में सड़क बने या नहीं बने,लेकिन हमने जगह उसको बना दिया है ताकि काम आ सके। रिपोर्टर: भविष्य में अगर सड़क चौड़ी होती है तो दिक्कत नहीं होगी ? दीपक: भविष्य में यह कभी भी चौड़ा नहीं होगी, क्योंकि यह रोड आगे जाकर इसी में रोड में मिल रही है। भविष्य में अगर यह रोड बनेगी तो भी कोई दिक्कत नहीं है हमने पहले ही उसको रोड बनाकर डेवलप कर दिया है। इस पर पक्का मकान नहीं बना रहे हैं। रिपोर्टर: मुझे कृषि भूमि चाहिए प्लॉटिंग के लिए सस्ती..। दीपक: खेती वाली जमीन मिलेगी 500 से 1 हजार रूपए स्क्वायर फीट के हिसाब से। फॉर्म हाउस के हिसाब से बड़ी जमीन मिलेगी। रिपोर्टर: इस टाइप की कॉलोनी में कितने रिस्क है? दीपक: रिस्क तो कुछ नहीं है, लेकिन कुछ डेवलपर्स ने इमेज खराब रखी है। हम 1100 से 1200 रूपए स्क्वायर फीट के हिसाब से प्लॉट दे रहे हैं तो भी लोगों को महंगा लगता है। अगर इसकी परमिशन लेकर हम 4000 रूपए में बेचेंगे तो कोई भी लेने के लिए तैयार नहीं होगा। लोग बोलेंगे यहां लेकर करेंगे क्या? रिपोर्टर: इमेज कैसे खराब की है? दीपक: एक-एक प्लॉट की चार-चार बार रजिस्ट्री कराना, कॉलोनी को डेवलप किए बिना ही प्लॉट बेचकर भाग जाना। जब एक प्लॉट रहेगा और चार लोग लड़ाई करेंगे तो गवर्नमेंट परेशान होगी। लेकिन हमारा तो साफ सुथरा काम है। प्राइवेट जमीन हमने भी पैसा देकर खरीदी है, ऐसा तो है नहीं कि हमने सरकारी जमीन पर कब्जा किया है। आपको गलत प्लॉट बेचकर मैं जाऊंगा कहां? आज जो भी समस्या है, उसे सॉल्व कर दूंगा। सारे प्लॉट बिक गए, लेना हो तो जल्दी ले लो विदिशा रोड पर एक और अवैध कॉलोनी में प्लॉट बेचने वाले सौरभ मीना से हुई। सौरभ ने ब्रोशर देते हुए बताया कि मेन रोड से कॉलोनी आधार किमी अंदर है। पूरा कवर्ड कैंपस है। बिजली-पानी की सारी सुविधा मिलेगी। रिपोर्टर: क्या रेट है ? सौरभ: 1000 हजार रुपए स्क्वायर फीट। 600 से 700 स्क्वायर फीट के प्लॉट हैं। भास्कर रिपोर्टर ने जब खसरा नंबर मांगा तो सौरभ ने बिल्डर गौरव मीणा से बात करवाई... रिपोर्टर: कॉलोनी का डायवर्जन और NOC है क्या ? गौरव: रजिस्ट्री नामांतरण डायवर्सन सब है, पर NOC नहीं मिलेगी। ऐसी सोसाइटी के रेट हाई होते हैं। हम अस्थाई बिजली कनेक्शन देंगे, पानी के लिए बोरवेल करके देंगे। सीसी रोड और कवर्ड कैंपस मिलेगा। रिपोर्टर: आपकी सोसाइटी में लोग रहने लग गए? गौरव: हां, कॉलोनी भर गई है। लोग भी रहने लगे हैं, आप भी जल्दी ले लो। पटवारी और पुलिस वालों ने इन्वेस्टमेंट के हिसाब से खरीदेभास्कर रिपोर्टर रातीबड़ में पटेल कॉलेज के सामने ओरछा धाम कॉलोनी में पहुंचा। जहां पर रियल स्टेट ब्रोकर शुभम मारग से बातचीत हुई। उसने बताया कि प्लॉट का रेट 1300 रुपए स्क्वायर फीट है और अब केवल 15 प्लॉट बचे हैं। रिपोर्टर: जमीन के पीछे तो खेती हो रही है? शुभम: हां यह भी खेती वाली जमीन है। रिपोर्टर: बिजली कनेक्शन कैसे मिलेगा? शुभम: डीपी तो हम लगा देंगे और फिर आपको प्राइवेट कनेक्शन लेना पडेगा। बीच में आपको प्लॉट नहीं मिलेंगे यह सारे प्लॉट ट्रिपल आईआईटी वालों ने खरीद रखे हैं। लास्ट में कुछ प्लॉट बचे हैं, वो आप ले सकते हैं। रिपोर्टर: कॉलोनी में किन लोगों ने प्लॉट खरीदे हैं? शुभम: बहुत सारे लोगों ने लिए हैं। एक पटवारी मैडम और पुलिस वाले समेत बहुत सारे लोगों ने लिए हैं। पटवारी और पुलिस वाले इन्वेस्टमेंट के लिए लेकर खरीद लेते हैं। इस पूरे खेल की सबसे अहम कड़ी सरकारी कर्मचारी, यानी पटवारी हैं। इनके बिना कृषि भूमि का नामांतरण और डायवर्सन संभव नहीं है। भास्कर टीम ने डमी रियल एस्टेट कारोबारी बनकर नीलबड़ और रातीबड़ के पटवारियों से संपर्क साधा। हमने नीलबड़ के पटवारी तरुण श्रीवास्तव से एक कॉलोनी काटने के लिए मदद मांगी। तीन मुलाकातों में उसने पूरे सिस्टम को 'मैनेज' करने का तरीका बता दिया। पहली मुलाकात: एनओसी नहीं मिलेगी, डायवर्जन करवा देंगे भास्कर रिपोर्टर की पटवारी तरुण श्रीवास्तव से पहली मुलाकात नीलबड़ स्कूल में हुई। यहां बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ... रिपोर्टर: नीलबड़ में हमने कुछ जमीन देखी है जहां पर कॉलोनी काटना चाहते हैं ? तो सोचा पहले आपसे बात कर लेता हूं, यहां अभी क्या रेट चल रहे हैं? तरूण: अभी तो नीलबड़ में कलेक्टर गाइडलाइन और रेट सेम ही चल रहे है 1500 के आसपास का। अंदर रेट अलग है। आप खसरा नंबर दे दो, मैं पता कर लेता हूं। यहां एक ऐसी जमीन है जहां सीलिंग का बोर्ड लगा हुआ है। वो सब देखना पड़ेगा, बाकी कोई दिक्कत नहीं है। रिपोर्टर: डायवर्जन और एनओसी का काम आपको ही करवाना है? तरुण: Noc तो यहां नहीं मिलेगी। डायवर्जन करवा देंगे। लेआउट उस हिसाब से बनाना पड़ेगा। दूसरी मुलाकात: प्रॉपर चैनल से काम करोगे तो दिक्कत नहीं भास्कर रिपोर्टर ने नीलबड़ की एक जमीन जिसका खसरा नंबर 63/2/1 65/1 64/2 है वो तरुण श्रीवास्तव को भेज दी। साथ ही लोकेशन भी शेयर की। तरुण ने रिपोर्टर को लोकेशन पर बुलाया। जमीन देखकर तरुण ने कहा कि जमीन का बटान हुआ है या नहीं इसका पता करना पड़ेगा। रिपोर्टर: आपके स्तर पर तो कोई दिक्कत नहीं आएगी? तरुण: हमारे स्तर पर तो कोई दिक्कत नहीं आएगी, एक बार कागज देख लेते हैं। जो कुछ भी होगा सब क्लियर कर लेंगे। रिपोर्टर: एनओसी और डायवर्जन सब आपको करवाना है। तरुण: करवा देंगे, एक बार आप रजिस्ट्री ले लीजिए बाकी सब करवा देंगे। रिपोर्टर: कुछ बिल्डर्स ने कहा कि एनओसी और डायवर्जन में दिक्कत आती है। तरुण: दिक्कत तो तब आती है। जब व्यक्ति सोचता है कि सब कुछ हम ही कर लेंगे। प्रॉपर चैनल के साथ काम करोगे तो कोई दिक्कत नहीं आएगी। तीसरी मुलाकात: मेरा भी एक प्लॉट निकाल देनानीलबड़ स्कूल के बाहर हुई इस मुलाकात में तरुण श्रीवास्तव ने अपनी मंशा जाहिर कर दी। रिपोर्टर से कहा कि मुझे एक प्लॉट दे देना, बाकी सब करवा दूंगा। पढ़िए बातचीत... तरुण: आपको आगे तक हमारे साथ काम करना है। आप पता कर लें कि जमीन का बटान हुआ है या नहीं। बाद में मत बोलना कि पटवारी जी आपने फंसा दिया। रिपोर्टर: कॉलोनी का ले-आउट कैसे बनेगा? तरुण: अरे 5 या 10 हजार रुपए देकर ऑनलाइन वाले से कॉलोनी का ले-आउट बनवा लेंगे। 15 से 20 हजार लगाकर पूरी प्लानिंग कर लेते हैं उसके बाद ही जमीन की डील करते हैं। रिपोर्टर: ठीक है, मुझे आप पर भरोसा है। तरुण: सबकुछ देखने के बाद फाइनल करेंगे। अभी कुछ लोगों ने 3 एकड़ सरकारी जमीन पर मंदिर बना दिया और दोनों तरफ से प्लॉट काट दिए। मैंने कॉलोनी के लोगों से बोला कि ये क्या किया? (हंसते हुए).. किया है तो एक प्लॉट मेरा भी काट दो। वो बोले कि आपके राजस्व के एक अधिकारी ने पहले ही प्लॉट लिया है। फिर भी उन्होंने कहा कि हम आपके लिए कुछ करेंगे। तरुण ने कहा कि आपका प्रॉफिट होगा तो ही आपको अच्छा लगेगा। हम भी आपके साथ काम करेगें। रिपोर्टर ने ऑफर दिया कि आप काम करो- हम भी आपको प्लॉट देंगे, तो तरुण ने हामी भर दी। रातीबड़ के पटवारी भंवर सिंह सोलंकी से मुलाकात उसकी कार में हुई। उसने और भी बड़े 'मैनेजमेंट' का रास्ता दिखाया। भंवर सिंह: आप जब काम शुरू करो तो लोकल वालों को मैनेज कर लेना। विधायक जी को खुश कर देना। बाकी तो मैनेज कर लेंगे। आप तो प्लॉटिंग से ज्यादा फॉर्म हाउस पर जोर दो। 5-10 हजार स्क्वायर फीट के फॉर्म हाउस बड़े अधिकारी भी खरीद लेंगे। रिपोर्टर: डायवर्जन, नामांतरण हो जाएगा? भंवर सिंह: वो मैं करवा दूंगा। इस इलाके में NOC और TCP नहीं मिलेगी क्योंकि यह कैचमेंट एरिया है। यह सब कच्चे में ही बिकता है। आप तो काम शुरू करो, मैं तो एक फॉर्म हाउस छांट लूंगा।’ कलेक्टर बोले - सख्त कानूनी कार्रवाई करेंगेभोपाल में कट रही अवैध कॉलोनियों को लेकर के भास्कर ने भोपाल के कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह से बात की। कलेक्टर ने बताया कि हमने 102 कॉलोनियों पर एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के साथ मिलकर के हम जल्द ही इन कॉलोनियों को तोड़ने का काम करेंगे। पीड़ितों का दर्द - 'हम मिडिल क्लास वालों के साथ धोखा हुआ है' इस गोरखधंधे का सबसे दुखद पहलू उन हजारों परिवारों की कहानियां हैं, जिन्होंने अपनी जीवन भर की पूंजी लगाकर एक घर का सपना देखा था, लेकिन उन्हें मिला सिर्फ धोखा। केस-1: बैरसिया के करारिया क्षेत्र में 130 लोगों को ठगाआशा पाठक और नामदेव साहू समेत 130 लोगों को करारिया क्षेत्र में होर्डिंग लगाकर प्लॉट बेचे गए। रजिस्टर्ड एग्रीमेंट भी हुए। बाद में पता चला कि जमीन किसी और के नाम पर है। अब वे अपनी रकम वापस पाने के लिए कलेक्टर ऑफिस के चक्कर काट रहे हैं।केस-2: ब्रोशर में दिखाए सपने से हकीकत बेहद जुदाकोलार रोड स्थित यूबी सिटी के सुनीत शर्मा कहते हैं, बिल्डर ने ब्रोशर में गार्डन, क्लब हाउस, CC रोड के सपने दिखाए थे, लेकिन कुछ नहीं दिया। मेंटेनेंस के नाम पर 80 हजार रुपए भी ले लिए। मैं मिडिल क्लास से हूं, दोबारा घर नहीं बना सकता। आज खुद को ठगा हुआ महसूस करता हूं।केस-3: बारिश में घरों में भरता है पानीभोजपुर रोड के रिदम पार्क में रहने वाले मुकेश भार्गव बताते हैं, बिल्डर ने हमें 420 करके प्लॉट बेचे। जो रास्ता दिया था, वह दूसरे की जमीन पर था। वह कोर्ट से केस जीत गया और अब रास्ता बंद है।
मणिकर्णिका घाट पर तोड़फोड़:कांग्रेस का आरोप- पहचान मिटा रहे
वाराणसी के मणिकर्णिका घाट के सौंदर्यीकरण में लोकमाता अहिल्याबाई की प्रतिमाओं को हटाने पर तीखी प्रतिक्रिया हो रही है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी निंदा की। इधर, इंदौर में लोकमाता से जुड़े समाज व संगठनों की बैठक में समाजजन ने कहा, लोकमाता की विरासत से जुड़ी आस्था आहत हुई है। समाजजन वाराणसी जाएंगे और 19 जनवरी को कलेक्टोरेट में पीएम व सीएम के नाम ज्ञापन भी देंगे। सरकार हस्तक्षेप करे बुलडोजर से धार्मिक-सांस्कृतिक विरासत को ध्वस्त करना दुर्भाग्यपूर्ण है। काशी की धार्मिक, आध्यात्मिक व सांस्कृतिक पहचान मिटाने की साजिशें बंद होनी चाहिए।- प्रियंका गांधी वाड्रा, सांसद केंद्र सरकार सौंदर्यीकरण के नाम पर विरासत पर बुलडोजर चला रही है। पीएम वहां की ऐतिहासिक विरासत को नष्ट करके अपनी नेम प्लेट लगवाना चाहते हैं।- मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस अध्यक्ष इंदौर ने तो भर-भर कर वोट दिए थे। पुण्यश्लोका देवी अहिल्या बाई होलकर का घाट ही तोड़ दिया।-स्वानंद किरकिरे, गीतकार व रंगकर्मी यह चिंता का विषय है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हस्तक्षेप करना चाहिए।सुप्रिया सुले, एनसीपी (शरद पवार गुट) मूर्तियां विस्थापित की जा सकती थीं : समाजजनगुरुवार को धनगर, पाल, गडरिया व बघेल समाज के संगठनों ने बैठक में घटना पर आक्रोश जताया। समाजजन का कहना था कि मूर्तियों को सुरक्षित विस्थापित किया जा सकता था। सभी ने तय किया कि विरोध के लिए 19 जनवरी को राजबाड़ा से कलेक्टोरेट तक ज्ञापन देने जाएंगे। बैठक में हरीश बारगल, सुनील मतकर, सुधीर देड़गे, सरयू वाघमारे, संजय खड़ व अन्य समाजजन मौजूद थे।
लेकसिटी में पिछले चार साल से अटका नाइट फूड मार्केट प्रोजेक्ट अब धरातल पर उतरेगा। यूडीए ने रानी रोड स्थित राजीव गांधी पार्क से सटे फूड बाजार को नाइट फूड चौपाटी (मसाला चौक) के रूप में स्थापित करने के लिए वर्क ऑर्डर जारी कर दिया है। यूडीए आयुक्त राहुल जैन ने बताया कि टूरिस्ट सिटी उदयपुर को नए मसाला चौक की सौगात देने के लिए प्रस्तावित इस नए नाइट बाजार को आगामी 20 दिनों के भीतर विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस फूड बाजार में 250 पर्यटकों के बैठने की सुविधा विकसित की जाएगी। मुंबइया बाजार-सुखाड़िया सर्किल का लोड होगा कम 12 से 16 थीम बेस्ड दुकानों को प्रोत्साहित किया जाएगा। हर दुकान पर अलग-अलग खान-पान की सुविधा मुहैया कराई जाए, ताकि पर्यटक-शहरवासी विभिन्न तरह के व्यंजनों का स्वाद ले सकें। इससे देर रात तक आने-जाने वाले पर्यटकों को खाने-पीने की सुविधा भी उपलब्ध हो जाएगी। गत वर्ष अगस्त में फूड चौपाटी को री-डेवलप करने की योजना बनी थी गत वर्ष 22 अगस्त को जिला प्रशासन और टूरिज्म विभाग की बैठक में निर्णय लिया गया था कि रानी रोड पर चौपाटी को नए सिरे से तैयार किया जाएगा। मार्केट की खासियत यह होगी कि यहां शहर की फेमस कॉफी, लस्सी, सेंडविच, पिज्जा, पानी-पुरी जैसे खाने-पीने की चीजें बेचने वाले संचालक यहां स्टाल लगाएंगे। इससे पर्यटकों को शहर के सभी फेमस फूड एक ही जगह उपलब्ध हो सकेंगे। इससे सुखाड़िया सर्किल, फतहसागर पर स्थित मुंबइया मार्केट से भीड़ कम हाेगी। वीकेंड पर इन फूड मार्केट में पर्यटकों को बैठने के लिए जगह तक मिल नहीं पाती है।
मथुरा के थाना गोवर्धन क्षेत्र के साइबर फ्रॉड के लिए बदनाम हो चुके आधा दर्जन गांव के लोगों ने पंचायत कर साइबर ठगी न करने की कसम खायी है। पुलिस की मौजूदगी में हुई पंचायत में ग्रामीणों ने भरोसा दिया है कि अगर कोई इस काम को या अन्य अपराध को अंजाम देगा तो वह इसकी सुचना थाने पर देंगे और उसे पकड़वाने में मदद करेंगे। पुलिस-प्रशासन के सामने हुई पंचायत थाना गोवर्धन क्षेत्र के गांव दौलतपुर दौलतपुर में साइबर अपराध रोकने के लिए एक पंचायत का आयोजन किया गया। दौलपुर के प्रधान लिली के द्वारा बुलाई गयी इस पंचायत में साइबर ठगी के लिए बदनाम हो चुके आधा दर्जन गांव के लोग मौजूद रहे। सीओ गोवर्धन और थाना प्रभारी की मौजूदगी में हुई इस पंचायत में ग्रामीणों ने कसम खायी कि वह अब किसी भी प्रकार के अपराध को अंजाम नहीं देंगे। किसी भी अपराध को नहीं देंगे पनपने गोवर्धन तहसील के गांव में पुलिस और ग्रामीणों की संयुक्त बैठक में ‘टटलूबाजी’ के नाम से कुख्यात साइबर ठगी के विरुद्ध सख्त संदेश दिया गया। बैठक में समुदाय के लोगों ने धार्मिक ग्रंथों की शपथ लेकर अपराध से दूरी बनाने का सार्वजनिक संकल्प लिया। सीओ अनिल कुमार सिंह और थाना प्रभारी भगवत सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पाक कुरान और हिंदू समुदाय के लोगों ने रामायण को साक्षी मानकर साइबर अपराध छोड़ने का ऐलान किया। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि अब गांव में किसी भी रूप में ऑनलाइन ठगी को पनपने नहीं दिया जाएगा। पुलिस ने दी चेतावनी सीओ अनिल कुमार सिंह ने कहा कि साइबर ठगी केवल आर्थिक नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि पूरे गांव और समाज की छवि को कलंकित करती है। इसमें संलिप्त व्यक्ति कानून की नजर में गंभीर अपराधी होता है। उन्होंने दो टूक कहा कि दौलतपुर में अब टटलूबाजी के लिए कोई जगह नहीं है। यदि कोई युवक इस अपराध में पकड़ा गया तो उसके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। थाना प्रभारी भगवत सिंह ने चेतावनी देते हुए कहा कि पुलिस के पास साइबर अपराध से जुड़े पर्याप्त तकनीकी और ठोस साक्ष्य मौजूद हैं। अब न तो पुलिस और न ही गांव समाज ऐसे लोगों को बचाने वाला है। दोबारा अपराध करने वालों को सीधे जेल भेजा जाएगा। ग्राम स्तर पर बनाई समिति बैठक में ग्राम प्रधान लीली ने ग्रामीणों के दोनों हाथ उठवाकर सामूहिक शपथ दिलाई कि गांव का कोई भी व्यक्ति साइबर ठगी में शामिल नहीं होगा। उन्होंने कहा कि यदि कोई अपराध नहीं छोड़ता है तो उसे पुलिस के हवाले किया जाएगा। साथ ही गांव स्तर पर एक निगरानी समिति के गठन की घोषणा की गई,इस समिति में प्रधान लीली, पूर्व प्रधान जाकिर, सुभान प्रधान, रफीक मास्टर, वारिश मास्टर, पातीराम प्रधान और पप्पू को शामिल किया गया है। समिति का उद्देश्य युवाओं को अपराध के दुष्परिणामों से अवगत कराना और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस तक पहुंचाना होगा। अपराधी ने कहा वह करेगा समर्पण साइबर फ्रॉड के मामले में फरार चल रहे आरोपी फकरु ने थाना प्रभारी को फोन पर कहा वह समर्पण करना चाहता है। फकरु के भाई ने उसकी बात थाना प्रभारी भगवत गुर्जर से कराई। फकरु ने फोन पर थाना प्रभारी से 8 दिन का समय मांगा। जिस ओर थाना प्रभारी ने कहा वह दस दिन में समर्पण कर दे अन्यथा उसके खिलाफ कठोर कार्यवाही की जाएगी। आरोपी ने 25 जनवरी तक पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करने का आश्वासन दिया। साइबर अपराध के खिलाफ कार्यवाही से थर्राये फ्रॉड हाल ही में पुलिस ने गांव में साइबर अपराध के खिलाफ कार्रवाई की थी। इस दौरान कई आरोपी जेल भेजे गए, जबकि कुछ फरार हो गए। कुछ लोगों की वजह से पूरे गांव की छवि खराब होने से ग्रामीण परेशान थे। पंचायत में ग्रामीणों ने गोवर्धन सीओ अनिल कुमार सिंह, थाना प्रभारी भगवत सिंह गुर्जर और पुलिस स्टाफ के सामने शपथ ली कि अब गांव का कोई भी व्यक्ति साइबर अपराध में शामिल नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर कोई ऐसा करता है, तो उसे पुलिस के हवाले कर दिया जाएगा। पुलिस प्रशासन ने ग्रामीणों को भरोसा दिलाया कि जल्द ही गांव में पुलिस चौकी स्थापित की जाएगी। इसके साथ ही पंचायत में जुआ और शराब न पीने का भी संकल्प लिया गया।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी 17 जनवरी को सुबह 11:30 बजे इंदौर आएंगे। उनके दौरे को लेकर सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट हैं। गुरुवार रात सीआरपीएफ की 17 सदस्यीय टीम शहर पहुंची और शुक्रवार को स्थानीय पुलिस व प्रशासन के साथ बैठक कर सुरक्षा प्लान तय करेगी। राहुल गांधी का मुख्य कार्यक्रम भागीरथपुरा में है, जहां वे दूषित पानी से हुई 23 मौतों के पीड़ितों से मिलेंगे और धरना दे सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने भागीरथपुरा को हाई रिस्क जोन मानते हुए विशेष रणनीति बनाई है। सीआरपीएफ-पुलिस संयुक्त टीम रिहर्सल, सर्चिंग, सीसीटीवी जांच और ड्रोन निगरानी करेगी। नगर अध्यक्ष चिंटू चौकसे और जिलाध्यक्ष विपिन वानखेड़े के मुताबिक एयरपोर्ट पर, केवल चुनिंदा नेताओं को अनुमति मिलेगी।
भारत और न्यूजीलैंड के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज के तीसरे और आखिरी मैच के लिए गुरुवार को दोनों टीमें इंदौर पहुंची। टीम के स्वागत के लिए दोपहर से ही बड़ी संख्या में प्रशंसक एयरपोर्ट के बाहर जमा थे। मैच 18 जनवरी को होलकर स्टेडियम में होगा। शुक्रवार को कोच गौतम गंभीर सहित कुछ खिलाड़ी उज्जैन जाकर महाकाल की भस्मारती में शामिल होंगे। एयरपोर्ट के बाहर अपने पसंदीदा खिलाड़ियों का अभिवादन करते युवा। न्यूजीलैंड के कोनवे और डेरिल मिचेल।
मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में ढाई साल के अंतराल में 4 लाख महिलाओं के नाम बाहर हो गए हैं। अब इस योजना में पात्र महिलाओं की संख्या 1.25 करोड़ ही रह गई है। एक साल के अंतराल में इस योजना में करीब डेढ़ लाख नाम कम हो गए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव योजना के लिए पात्र बचीं महिलाओं के खातों में आज 1500 रुपए के मान से 1800 करोड़ से अधिक की रकम ट्रांसफर करेंगे। लाड़ली बहना योजना की 32वीं किस्त आज नर्मदापुरम के माखननगर में होने वाले आयोजन के दौरान मुख्यमंत्री ट्रांसफर करेंगे। इस योजना में पहले 1250 रुपए दिए जाते थे, लेकिन नवंबर 2025 से 250 रुपए बढ़ाकर 1500 रुपए दिए जा रहे हैं। राज्य सरकार पर माह 300 करोड़ रुपए से अधिक का वित्तीय भार बढ़ा है। अक्टूबर 2025 तक 1500 करोड़ रुपए से अधिक की राशि योजना में एक साथ ट्रांसफर होती थी जो दिसंबर 2025 में 1850 करोड़ रुपए से अधिक तक पहुंच गई थी। इस योजना में नए नाम नहीं जोड़े जा रहे हैं, इसके उलट योजना में पात्र महिलाओं के नाम उम्र और अन्य शर्तों के आधार पर कटते जा रहे हैं। इसी कारण इनकी संख्या 2023, 2024 और 2025 में बढ़ने की बजाय घटी है। जब योजना शुरू हुई थी तो कुल 1 करोड़ 31 लाख 35 हजार 985 आवेदन आए थे। इसके बाद 2 लाख 18 हजार 858 नाम आपत्तियों को आधार बनाकर काटे गए थे जिसके बाद यह संख्या 1 करोड़ 29 लाख 5 हजार 457 रह गई थी। अब यह संख्या एक करोड़ 25 लाख से अधिक तक पहुंचने वाली है।योजना अंतर्गत अब तक जून 2023 से दिसंबर 2025 की अवधि में कुल 48 हजार 632 करोड़ 70 लाख रुपए हितग्राही महिलाओं के खातों में भेजी जा चुकी है। मोहन यादव के सीएम बनने के बाद जनवरी 2024 से दिसंबर 2025 के दौरान 38 हजार 635 करोड़ 89 लाख रुपए ट्रांसफर किए गए हैं। ऐसे दिमाग में आई लाड़ली बहना तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 4 मार्च 2023 को भोपाल में एक कार्यक्रम के दौरान लाड़ली बहना योजना बनाने का खुलासा किया था। उन्होंने सभा में सार्वजनिक रूप से कहा कि एक दिन मैं रात भर जागा। सुबह 4 बजे मैंने पत्नी को जगाया। कहा- एक योजना मेरे दिमाग में आई है। सभी बहनें मुझे भाई मानती हैं। मैं भी तो अपनी बहनों को कुछ दूं। साल में एक बार पैसा देने से काम नहीं चलेगा। हर महीने पैसा देंगे, तो बहनों की समस्या का समाधान होगा। वे इज्जत से जी सकेंगी। इसी विचार से बनी मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना। यह योजना नहीं, बहनों की जिंदगी बचाने का महा अभियान है। ये खबर भी पढ़ें... 1.63 लाख लाड़ली बहनों को इस बार नहीं मिलेगा पैसा मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना की 1 लाख 63 हजार महिलाओं को इस बार 1250 रुपए की किस्त नहीं मिलेगी। इन महिलाओं की उम्र 60 साल से अधिक हो चुकी है। ऐसे में महिला और बाल विकास विभाग ने इन्हें अपात्र घोषित कर दिया है। अब जनवरी 2025 में 1.26 करोड़ महिलाओं को ही 1250 रुपए की किस्त मिल सकेगी। इससे पहले 11 दिसंबर 2024 को 1.28 करोड़ महिलाओं के खाते में 1572 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए थे।पूरी खबर पढ़ें
शर्म करो प्रशासन!:स्कूल में अवैध कब्जे-नशाखोरी, कक्षाओं में जाने से भी डरते हैं बच्चे
शहर से सटा राजकीय प्राथमिक विद्यालय बड़गांव असामाजिक तत्वों का ठिकाना बन गया है। स्कूल उदयपुर विकास प्राधिकरण (यूडीए) की जमीन पर बना है। लेकिन, अब अवैध कब्जों के चलते अब यह परिसर कबाड़खाने और नशे के अड्डे में तब्दील हो चुका है। स्कूल परिसर में बसी कालबेलिया बस्ती के लोग स्कूल परिसर में नहाने, कपड़े सुखाने और शराब पीने जैसे कृत्य करते दिखाई देते रहते हैं। स्कूल परिसर में आपसी झगड़े, गालीग-लौज और असामाजिक गतिविधियां आम बात है। इन हालातों का सबसे बड़ा खामियाजा मासूम छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है। भय और असुरक्षा के माहौल के बीच कई अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने से ही कतराने लगे हैं। स्कूल परिसर में कबाड़ डंप किया जा रहा है और केबल वायर जलाने से उठने वाली जहरीला धुआं बच्चों के स्वास्थ्य पर विपरित प्रभाव डाल रहा है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और स्कूल स्टाफ ने यूडीए व जिला प्रशासन को कई बार लिखित शिकायतें दीं, लेकिन कार्रवाई तो दूर कोई अधिकारी स्कूल के इन हालातों को देखने तक नहीं पहुंचा। प्रशासन इतना लाचार क्यों? सांसद-सरपंच और क्षेत्रवासियों के साथ विद्यार्थी-अभिभावक भी लगा चुके गुहार सांसद डॉ. मन्नालाल रावत, बड़गांव के निवर्तमान सरपंच व वर्तमान में प्रशासक संजय शर्मा, स्कूल प्रशासन कई बार जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन, यूडीए को लिखित में शिकायत कर चुके हैं कि इस स्कूल परिसर में अवैध बस्ती और नशाखोरी से विद्यार्थियों-अभिभावकों, गांववासियों में गहरा रोष है। शिक्षा के नाम पर बच्चों को ऐसे माहौल में भेजना मजबूरी बन गया है। आए दिन शराबियों का जमावड़ा, झगड़े और गंदगी बच्चों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर डाल रहे हैं। कई अभिभावकों ने साफ कहा कि यदि जल्द अतिक्रमण नहीं हटाया गया तो वे बच्चों के स्थानांतरण प्रमाण पत्र (टीसी) कटवाने को मजबूर होंगे। स्कूल स्टाफ का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और यूडीए को पत्र लिखे, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। परिसर में कबाड़ जलाने से उठने वाला धुआं कक्षाओं तक पहुंचता है। पुलिस थाना, तहसील और उपखंड कार्यालय पास होने के बावजूद कार्रवाई न होना प्रशासनिक उदासीनता को उजागर करता है। अभिभावकों ने स्कूल परिसर को सुरक्षित घोषित कर तत्काल अतिक्रमण हटाने की मांग की है।
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी की पहल पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी 17 जनवरी को इंदौर दौरे पर आ रहे हैं। वे भागीरथपुरा पहुंचकर दूषित पानी से जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों से मुलाकात करेंगे। राहुल गांधी वह चाचा नेहरू हॉस्पिटल में जाकर आईसीयू में भर्ती गंभीर मरीजों से मुलाकात करेंगे। इसके बाद वह लाभगंगा के कार्यक्रम में शामिल होंगे। हालांकि राहुल गांधी के कार्यक्रमों को लेकर जिला प्रशासन ने सिर्फ 3 घंटे की अनुमति ही दी है। इसलिए राहुल गांधी के लाभगंगा में होने वाले कार्यक्रम को लेकर अभी कुछ निश्चित नहीं है। हालांकि कांग्रेस सूत्रों का कहना है की राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस ने लाभगंगा में बुकिंग कर दी है और पैसे भी जमा करा दिए हैं। इंदौर में राहुल गांधी के कार्यक्रम के लिए तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी बुधवार को राघौगढ़ से इंदौर पहुंच चुके हैं और लगातार तैयारियों का जायजा ले रहे हैं। इंदौर में होने वाले कार्यक्रम की जिम्मेदारी शोभा ओझा को सौंपी गई है। कार्यक्रम में इंदौर के करीब 200 प्रबुद्धजनों को भी आमंत्रित किया जा रहा है। राहुल गांधी भागीरथपुरा में किन-किन परिवारों से मिलेंगे और वहां से कहां जाएंगे, इसकी सूची तैयार की जा रही है। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार जीतू पटवारी पिछले करीब 10 दिनों से प्रयास कर रहे थे कि भागीरथपुरा में गंदे पानी से जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों से राहुल गांधी की मुलाकात कराई जा सके। शोभा ओझा ने कार्यक्रम स्थल के लिए माथुर सभागार और लाभ मंडपम के नाम भेजे हैं। लाभ मंडपम में करीब एक हजार लोगों के बैठने की क्षमता है, जबकि माथुर सभागार भागीरथपुरा के अपेक्षाकृत नजदीक है। उल्लेखनीय है कि राहुल गांधी वर्ष 2019 में माथुर सभागार में बैठक ले चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक लाभ मंडपम में कार्यक्रम होना लगभग तय माना जा रहा है। 13 परिवार चिन्हित, 5 से करेंगे मुलाकात गुरुवार को शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे और जिला कांग्रेस अध्यक्ष विपिन वानखेड़े भागीरथपुरा पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर चुके हैं। कांग्रेस नेताओं ने कुल 13 परिवारों के घर चिन्हित किए हैं, जिनमें से राहुल गांधी पांच परिवारों से मुलाकात करेंगे। इन पांच परिवारों की सूची बुधवार शाम तक तय हो जाएगी। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी से मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार को कांग्रेसी पार्षदों से मुलाकात और भागीरथपुरा से जुड़े पूरे कार्यक्रम को अंतिम रूप दे दिया जाएगा। खास बात यह है कि राहुल गांधी का इंदौर में किसी प्रकार का औपचारिक स्वागत-सत्कार नहीं किया जाएगा। पार्षदों संग पानी पर बातराहुल गांधी पार्षदों संग पानी पर भी बात करेंगे। एक्सपर्ट की टीम पानी पर राहुल की मौजूदगी में पार्षदों को ट्रेनिंग देगी। गंदे पानी के मामले में कांग्रेस मोहन सरकार की घेराबंदी करना चाह रही है। वहीं जिन नेताओं का नाम राहुल से मिलने वालों की सूची में नहीं है, उन्हें अपने जिले में 17 अप्रैल को उपवास पर बैठना है। उन नेताओं को इंदौर नहीं आने को कहा गया है। बीजेपी भी हुई सक्रियराहुल गांधी का इंदौर दौरा तय होते ही भागीरथपुरा में भाजपाई हलचल तेज हो गई है। राहुल की टीम आज इंदौर पहुंच रही है। कल दोपहर में भागीरथपुरा में भाजपाई निकल पड़े। उन घरों तक दस्तक दी, जिनके यहां गंदे पानी ने जान ली है। पीड़ित परिवारों को बताने की कोशिश की गई कि हम आपके सुख-दुःख के साथी हैं। हमेशा खड़े रहेंगे। किसी के बहकावे में न आएं। कहीं पर राहुल का नाम तो नहीं लिया। लेकिन, इरादे जता आए। भाजपाई टोली एक-एक घर पर नजर रख रही है। सबसे ज्यादा बेचैनी उन घरों को लेकर है, जहां गमी हुई है। राहुल किसके घर दस्तक देंगे, इस पर नजरे हैं। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का इलाका है। विजयवर्गीय बोले- एक दिन का अन्न भी बचेगा लोकसभा प्रतिपक्ष नेता राहुल गांधी के इंदौर दौरे को लेकर मनरेगा को लेकर भी कांग्रेसी उपवास रखने और दिन भर विरोध करने की बात कह रही है। मनरेगा को लेकर राहुल गांधी और कांग्रेसी 17 जनवरी को उपवास भी रखेंगे। इस पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने तंज कसा कि एक दिन देश का अन्न भी बचेगा। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने विकसित भारत-रोजगार और आजीविका मिशन को लेकर प्रेस कांफ्रेंस की और कहा कि कांग्रेस गांधी परिवार से आगे नहीं सोच पाती है, पता नहीं उन्हें राम के नाम से क्या समस्या है। ये खबर भी पढ़ें... दूषित पानी से 23 मौतों पर सीएस ने कोर्ट में कहा- मृतकों में कई कोमोरबिड थे इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से 23 लोगों की मौत मामले में गुरुवार को हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। जिसमें मुख्य सचिव अनुराग जैन वर्चुअल उपस्थित हुए। सीएस ने कोर्ट को बताया कि मामले में जिम्मेदारों को निलंबित किया गया है और अस्पताल में भर्ती सभी लोगों का फ्री इलाज किया जा रहा है। जिन लोगों की मौत हुई है, उनमें कई कोमोरबिड (दूसरी बीमारियां) थे। कोर्ट ने अगली सुनवाई 20 जनवरी को तय की है।पूरी खबर पढ़ें
गंभीर रूप से घायल 6 जख्मी हॉस्पिटल में भर्ती:अलग-अलग 5 सड़क हादसों में छग के युवक समेत पांच की मौत,
मैहर, रीवा और सतना जिले में अलग-अलग थाना क्षेत्रों में हुए पांच सड़क हादसों में छत्तीसगढ़ के युवक सहित 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि 6 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। पुलिस ने सभी मामलों में मर्ग व अपराध दर्ज कर घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया है। केस-1 : मैहर कोतवाली क्षेत्र में एनएच-30 पर टमस पुल के पास तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में करतहा निवासी पुष्पेन्द्र पांडेय (28) की मौत हो गई, जबकि उमाकांत पयासी घायल हो गया। दोनों संक्रांति मेला देखकर लौट रहे थे।केस-2 : मैहर कोतवाली क्षेत्र में पहाड़ी के पास अज्ञात भारी वाहन की टक्कर से रमपुरवा निवासी गगन कोल (19) की मौके पर मौत हो गई। वह बाइक से बहन के घर जा रहा था। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया। केस-3 : कोठी थाना क्षेत्र में प्रयागराज से लौट रहे छत्तीसगढ़ के परिवार की कार और हाइवा की भिड़ंत हो गई। हादसे में कबीरधाम निवासी संजय चंद्रवंशी (40) की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हुए। स्टेट हाइवे पर जाम की स्थिति बनी। केस-4 : कोलगवां थाना क्षेत्र के कृपालपुर मोड़ पर हाइवा की टक्कर से बाइक सवार निर्मला वर्मा (50) की मौत हो गई, जबकि पति लक्ष्मण प्रसाद वर्मा घायल हो गए। पुलिस ने पोस्टमार्टम कर अपराध दर्ज किया है। रीवा: स्कूल जा रहे कक्षा-4 के छात्र को ट्रक ने कुचला समान थाना क्षेत्र के रतहरा में गुरुवार सुबह तेज रफ्तार ट्रक ने 10 वर्षीय छात्र को कुचल दिया। हादसे में कक्षा-4 में पढ़ने वाले रुद्र त्रिपाठी की मौके पर ही मौत हो गई। वह बड़ी बहन के साथ पैदल स्कूल जा रहा था। सड़क पार करते समय ट्रक की चपेट में आ गया, जबकि बहन बाल-बाल बची। हादसे के बाद ट्रक डिवाइडर से टकराया और चालक फरार हो गया। पुलिस ने शव को संजय गांधी अस्पताल मर्चुरी भेजकर ट्रक जब्त कर लिया है।
इंदौर में ड्रग तस्करी के आरोप में गिरफ्तार सेंट माइकल स्कूल का संचालक अबान शकील का एक और कारनामा सामने आया है। आरोपी स्कूल में बच्चों को बेरहमी से पीटता था। पिछले साल जनवरी महीने में उसने अपने स्कूल में पढ़ने वाले 11वीं के छात्र को इतना पीटा कि उसके दोनों पैरों की चमड़ी निकल गई थी। छात्र का कहना है कि टीचर ने उसके पैरों पर फुटबॉल के शूट की तरह मारा। लगातार लात मारी। छात्र के परिजन ने जिला शिक्षा अधिकारी को इसकी शिकायत की थी। जिसकी पर जांच समिति बनाई गई थी। हालांकि समय बीतने के साथ ही जांच को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। फुटबॉल शूट की तरह पीटा था घटना के बाद बच्चे ने बताया था कि अबान सर ने शूज से मारा। जब मैं वहां खड़ा था, तब वह मुझे फुटबॉल के शूट की तरह मार रहे थे। मेरे दोस्त से मेरी लड़ाई हो गई थी, इसलिए मुझे मारा। पहले भी मेरी पिटाई हुई थी। अन्य बच्चों को भी अबान सर इसी तरह पीटते थे। 11वीं कक्षा के छात्र को पीटने की घटना 9 जनवरी 2025 की सुबह 8:30 बजे की थी। स्कूल परिसर में एक अन्य छात्र के साथ बच्चे विवाद हो गया था। तब अबान ने छात्र को बेरहमी से पीटा था। वहीं सूत्रों की माने तो बाद में अबान और शिकायतकर्ता छात्र के परिजनों के बीच राजीनामा हो गया था। हालांकि घटना के बाद छात्र की चोटों के साथ वीडियो सामने आए थे। जिला शिक्षा अधिकारी ने बनाई थी जांच समितिइस घटना की शिकायत छात्र के परिवार ने जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) एनके अहिरवार से की थी। साथ ही छात्र को आई चोट का वीडियो भी जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपे थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा अधिकारी ने तुरंत जांच समिति का गठन किए जाने के दावे किए थे। पुलिस को थार में 5.5 ग्राम एमडी मिली13 जनवरी को इंदौर पुलिस को सूचना मिली थी कि अबान शकील कनाडिया में नशीले पदार्थों की खेप लेकर आने वाला है। मुखबिर के बताए रोड पर घेराबंदी कर पुलिस ने अबान की थार को रोक लिया। तलाशी में 5.5 ग्राम एमडी ड्रग्स जब्त की गई। शुरुआती पूछताछ में अबान ने बताया कि किसी को शक न हो, इसलिए ड्रग सप्लाई के लिए वह खुद की ही थार का उपयोग करता था। ड्रग्स पैडलर बाबा ने दी थी एमडीअबान शकील ने इंदौर पुलिस को बताया कि उसे ड्रग्स बाबा ने दी थी। भोपाल का ड्रग पैडलर बाबा पार्टी और पब में नशा करने वालों को ड्रग्स मुहैया कराता है। अबान ने बताया कि वह शनिवार को दोस्तों के साथ पार्टी करता था। इसी दौरान एक पब में उसकी बाबा से पहचान हुई थी। मोबाइल में मिली नशे को लेकर चैटिंगअबान के मोबाइल में बाबा और उसके बीच वाट्सऐप चैट भी मिली है। इसमें नशा देने के लिए बाबा उससे कोडवर्ड में बात कर रहा था। वह करीब दो साल से इसी तरह के नेटवर्क में जुड़ा है। बाबा पुलिस के लिए मुखबिरी भी करता है। सूत्रों के मुताबिक, बाबा ने तीन लोगों को मिलाकर 60 ग्राम एमडी दी थी, लेकिन पुलिस ने इस मामले में साढ़े 5 ग्राम का ही केस बनाया है। ये खबर भी पढ़ें... स्कूल-क्रिकेट अकादमी का मालिक बना ड्रग तस्कर भोपाल में सेंट माइकल स्कूल और सेंट माइकल क्रिकेट अकादमी का मालिक ड्रग तस्करी में पकड़ा गया। वो थार जीप से भोपाल-इंदौर के पब और लाउंज में ड्रग सप्लाई करता था। उसके लिए लड़कियां भी पैडलर का काम करती थीं। आरोपी अबान शकील इंदौर में ड्रग डिलीवरी देने के इंतजार में था, तभी इंदौर क्राइम ब्रांच और कनाडिया पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया है।पूरी खबर पढ़ें
बरमान में उमड़ा आस्था का सैलाब:5100 मीटर की चुनरी से सजा नर्मदा का आंचल, 2 लाख ने लगाई डुबकी
मकर संक्रांति पर नरसिंहपुर जिले के प्रसिद्ध तीर्थस्थल बरमान घाट पर श्रद्धा और भक्ति का संगम देखने को मिला। कड़ाके की ठंड में भी तड़के 4 बजे से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सागर, दमोह और रायसेन सहित आसपास के जिलों से आए लाखों लोगों ने मां नर्मदा में स्नान कर दान-पुण्य किया। इस वर्ष 1100 से 5100 मीटर तक की 100 से अधिक चुनरियां अर्पित की गईं। रामघाट-रेतघाट पर भीड़ रही। एनएच-44 पर जाम लगा, नेटवर्क ठप रहा। सुरक्षा में 300 पुलिस, होमगार्ड व एसडीआरएफ तैनात रहे।
सिरसा जिले की एक विवाहिता के साथ अजीब मामला सामने आया है। विवाहिता का आरोप है कि शादी के 10 महीने बाद भी उसके पति ने उसके साथ शारीरिक संबंध नहीं बनाए और दहेज के लिए शारीरिक प्रताड़ित करता और मारपीट करने का भी आरोप लगाया है। अब यह मामला पुलिस के पास जा पहुंचा। पीड़िता ने इसकी शिकायत पुलिस को दी है और पति पर कार्रवाई की मांग उठाई है। इस मामले में पुलिस ने विवाहिता के बयान पर पति के खिलाफ दहेज प्रताड़ना व मारपीट सहित विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया है और मामले में जांच शुरू कर दी है। अभी मामले में किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पाई है। पुलिस के अनुसार, महिला ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसकी शादी 12 फरवरी 2025 को हुई थी। शादी के 10 माह बाद भी उसके पति ने कभी उसके साथ शारीरिक संबंध नहीं बनाए। हर बार वह कोई न कोई बहाने बनाता रहता और संबंध बनाने से मना कर देता। इस बात पर उनकी कई बार तकरार हुई है, पर वह नहीं माना। इसके बाद से उसके पति ने न केवल उसको शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया, जबकि दहेज के लिए मारपीट भी की। महिला का आरोप है कि पति ने उसके और उसके परिवार के चरित्र पर भी आरोप लगाए और उसे समाज में बदनाम करने का प्रयास किया। महिला थाना पुलिस के अनुसार, विवाहिता बुधवार को पुलिस थाने में आई थी। उसके बयान पर शिकायत दर्ज कर ली है और जांच चल रही है।
मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा एक बार फिर चाइनीज मांझे के कारण जानलेवा साबित हुई। रायपुर में एक छात्र के गाल कट गए। वहीं भिलाई में एक ठेका मजदूर घायल हो गया। पहली घटना रायपुर के पंडरी एक्सप्रेस-वे पर हुई। इस हादसे में छात्र संकल्प द्विवेदी गंभीर रूप से घायल हो गया। वह अपनी बड़ी बहन को स्कूल छोड़ने जा रहा था, तभी चलती गाड़ी में चाइनीज मांझा उसके चेहरे में फंस गया। इससे छात्र के गाल कट गए। वह लहूलुहान हो गया। छात्र को 34 टांके लगाने पड़े। हादसे में छात्र की बहन के हाथ भी मांझे से कट गए। डॉक्टरों ने बताया कि चाइनीज मांझे से लगे घाव के निशान स्थायी रह सकते हैं, इसलिए प्लास्टिक सर्जरी की सलाह दी गई है। इस पहले रविवार शाम करीब 5 बजे पतंग के चाइनीज मांझे से कटने से एक महिला गंभीर रूप से घायल हो गई थी। महिला शाम को पैदल मंदिर जा रही थी, तभी मांझा उनके चेहरे में फंस गया। महिला ने मांझा हटाने की कोशिश की, जिससे उनके होंठ और अंगूठे में गहरा कट लग गया। इन हादसों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि प्रतिबंध के बावजूद चाइनीज मांझा कैसे बिक रहा है? पहले देखिए ये तस्वीरें- भिलाई में ठेका श्रमिक के गले में फंसा मांझा भिलाई में मकर संक्रांति के दिन कुछ युवक चाइनीज मांझे से पतंग उड़ा रहे थे। साइकिल से घर लौटते समय पतंग का चाइनीज मांझा सीधे श्रमिक के गले में उलझ गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल की पहचान असलम (42 वर्ष) निवासी चांदनी चौक, कोहका के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि असलम भिलाई इस्पात संयंत्र में ठेका श्रमिक है। घटना के बाद उसे तत्काल इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। नेता प्रतिपक्ष के पास पहुंचा छात्र, कार्रवाई की मांग रायपुर की घटना के बाद छात्र संकल्प द्विवेदी निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी के पास पहुंचा और कहा कि जो हादसा उसके साथ हुआ, वह किसी और परिवार के साथ न हो। छात्र ने आरोप लगाया कि निगम स्तर पर शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हो रही है। वहीं नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने पीड़ित को हर संभव मदद दी जाएगी। उन्होंने कहा कि राजधानी में लगातार हो रही ऐसी घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने नगर निगम आयुक्त और जिला कलेक्टर से मांग की है कि चाइनीज मांझे की बिक्री, भंडारण और उपयोग पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि आम नागरिकों की जान की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। मंदिर जाते वक्त लाखेनगर में हादसा रायपुर के ब्राह्मणपारा निवासी नेहा यादव ने बताया कि वह रविवार को शाम को घर से पैदल मंदिर जाने निकली थी। मंदिर के पास पहुंचते ही अचानक कुछ उनके चेहरे से टकराया। जब उन्होंने उसे हटाने की कोशिश की तो पहले होंठ कट गया, फिर अंगूठा कट गया। उस समय कुछ समझ नहीं आया। अचानक खून बहने लगा। तब देखा कि चेहरे में फंसा हुआ मांझा था। दर्द के कारण चीख निकल गई। आसपास के लोग दौड़कर आए। होंठ दबाकर खून रोका गया, तब तक कपड़े लहूलुहान हो चुके थे। इसके बाद वह नजदीकी डॉक्टर के पास गई, जहां डॉक्टर ने 10 टांके लगाए और आराम करने की सलाह दी। मांझा कहां से उड़कर आया, यह उन्हें समझ ही नहीं आया। अलग-अलग दुकानों में हुई थी छापेमारी गौरतलब है कि रायपुर नगर निगम की टीम ने 27 दिसंबर को शहर की अलग-अलग दुकानों में छापेमारी की थी। दुकानों की तलाशी के दौरान बूढ़ातालाब स्थित सिटी पतंग भंडार से 2 किलो, मोती पतंग भंडार से 1 किलो और सदर बाजार के संजय पतंग भंडार से डेढ़ किलो प्रतिबंधित चाइनीज मांझा जब्त किया गया। गोलबाजार के संगम काइट सेंटर का भी औचक निरीक्षण किया गया था। पांच साल की सजा या 5 लाख जुर्माने का प्रावधान अधिवक्ता विपिन अग्रवाल ने बताया कि उल्लंघन पर 1 साल की सजा और 5 लाख तक जुर्माना हो सकता है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने वर्ष 2017 में चाइनीज और नायलोन मांझे पर प्रतिबंध लगाया था। .................................. इससे जुड़ी ये खबर भी पढ़ें... रायपुर में मांझे से कटी गर्दन...बच्चे की मौत: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरकार को लगाई फटकार, कहा-बाजार में कैसे उपलब्ध हो रहा चाइनीज मांझा छत्तीसगढ़ के रायपुर में पतंग के मांझे से 7 साल के मासूम की गर्दन कट गई, जिससे बच्चे की मौत हो गई। वहीं महिला वकील भी मांझे में फंसकर बुरी तरह जख्मी हो गई। महिला का गला और अंगूठे का हिस्सा कट गया है। दोनों घटना शहर के अलग-अलग थाना इलाके की है। पढ़ें पूरी खबर
हरियाणा में ट्रेजरी अफसर और असिस्टेंट ट्रेजरी अफसर के लिए HPSC ने 19 नवंबर को जारी परीक्षा परिणाम विड्रा कर लिया है। इससे पहले हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) ने जनवरी महीने में प्रस्तावित मुख्य भर्ती परीक्षा को स्थगित करने की घोषणा की थी। HPSC की ओर से नोटिफिकेशन जारी कर अभ्यर्थियों को बताया गया है कि जो 2 नवंबर को परीक्षा आयोजित हुई और 19 नवंबर को रिजल्ट जारी किया गया। उसका रिजल्ट आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर विड्रा कर लिया है। जिसके बाद ट्रेजरी अफसर और असिस्टेंट ट्रेजरी अफसर भर्ती प्रक्रिया में प्री एग्जाम क्लियर कर चुके 927 कैंडिडेट की धड़कनें बढ़ चुकी हैं। 35 पदों के लिए हुई परीक्षा HPSC ने साल 2023 में ट्रेजरी अफसर के 5 और असिस्टेंट ट्रेजरी अफसर के 30 पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए थे। 28 अप्रैल 2023 आवेदन करने की अंतिम तिथि थी। ट्रेजरी अफसर के लिए जनरल के लिए 2, एससी के लिए 1, BCA के लिए 1 और EWS के लिए 1 पद आरक्षित है। असिस्टेंट अफसर के 30 पदों में जनरल के लिए 16, एससी के लिए 6, BCA के लिए 4, BCB के लिए 1 और EWS के लिए 3 पद आरक्षित है। सभी पदों के लिए HPSC ने बैचलर डिग्री योग्यता रखी थी।927 कैंडिडेट क्लियर कर चुके प्री एग्जाम HPSC की ओर से जारी रिजल्ट के अनुसार ट्रेजरी अफसर के 5 पदों के लिए प्री एग्जाम में 83 और असिस्टेंट ट्रेजरी अफसर के 30 पदों के लिए 843 अभ्यर्थी योग्य पाए गए हैं। अब फाइनल एग्जाम के लिए नोटिफिकेशन जारी होगा। ट्रेजरी अफसर के परिणाम में 8 अभ्यर्थी ऐसे रहे, जो रिजर्व कैटेगरी के होते हुए जनरल की कट ऑफ में शामिल हुए हैं। वहीं असिस्टेंट ट्रेजरी अफसर के परिणाम में 164 अभ्यर्थी ऐसे रहे, जो रिजर्व कैटेगरी से जनरल में शामिल हुए हैं।
पीएम से मिले सीएम:गाडरवारा थर्मल प्लांट विस्तार का भूमिपूजन करने का अनुरोध
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सौजन्य भेंट कर नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा स्थित एनटीपीसी सुपर थर्मल पॉवर स्टेशन के 1600 मेगावॉट विस्तार परियोजना के भूमि-पूजन का अनुरोध किया। उन्होंने प्रधानमंत्री को अभ्युदय मध्य प्रदेश ग्रोथ समिट, वर्ष-2026 को कृषक कल्याण वर्ष के रूप में मनाने, दुग्ध उत्पादन वृद्धि और नक्सल अभियान की प्रगति की जानकारी दी। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री को बताया कि 20 हजार 446 करोड़ रुपए की यह परियोजना अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल तकनीक पर आधारित है, जिससे पानी की खपत एक-तिहाई कम होगी। कृषक कल्याण वर्ष-2026 में 30 लाख सोलर पंप स्थापना सहित कई योजनाएं संचालित होंगी। दुग्ध सहकारिता से दूध संग्रहण 25% बढ़ा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश अब नक्सल मुक्त हो चुका है और प्रभावित क्षेत्रों में विकास योजनाएं तेजी से लागू की जा रही हैं।
इंदौर में रविवार को होने वाले मैच को लेकर तैयारी तेज हो गई है। दोनों ही टीमें इंदौर पहुंच गई हैं। आज से दोनों ही टीमों के खिलाड़ी मैदान पर प्रैक्टिस करने के लिए उतरेंगे। इंदौर में होने वाले मैच से पहले मौसम अच्छा है। इंदौर में ओस पड़ने से बाद में बैटिंग करने वाली टीम को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा। क्रिकेट एक्सपर्ट का कहना है कि ड्यू यानी ओस गिरने से शाम होते-होते बॉलिंग करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। वहीं इंदौर के दर्शकों को इस बार सबसे ज्यादा उत्साह रोहित और विराट को लेकर है।वहीं एक्सपर्ट का मानना है कि रोहित अच्छी शुरुआत देंगे, लेकिन अपने व्यक्तिगत स्कोर को 200 तक इस पिच पर नहीं ले जा पाएंगे।इंदौर के होलकर मैदान के रिकॉर्ड की बात करें तो यह बल्लेबाजी के लिए अच्छा माना जाता है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इंदौर के मैदान में अधिकांश समय पहले बैटिंग करने वाली टीम जीतती है, लेकिन कल के मैच में ओस गिरने के कारण पहले फील्डिंग करना ज्यादा ठीक रहेगा। दैनिक भास्कर से बात करते हुए क्रिकेट एक्सपर्ट व कमेंटेटर पद्मश्री सुशील दोषी ने बताया कि टॉस जीतकर पहले फिल्डिंग करना चाहिए। इस पिच पर बाद में जब न्यूजीलैंड बॉलिंग करेगी तो ड्यू पड़ेगा इससे बॉलिंग करने में दिक्कत होगी। इससे भारत को चेस करना आसान होगा। मैदान में बाद में बॉलिंग करने वाली टीम के स्पिनर्स को ओस पड़ने से मदद नहीं मिलेगी। गेंद हाथ में पकड़ में नहीं आएगी। स्पिनर्स को पिच से भी पकड़ नहीं मिलेगी।इससे गेंद टप्पा खाकर जल्दी बेट पर आ जाती है और इससे वह स्पिन नहीं हो पाती है। ओस गिरने के साथ ही आउटफील्ड भी थोड़ा धीमा होना शुरू हो जाता है। एक्सपर्ट दोषी ने आगे बताया कि अभी तो अपने दोनों तेज गेंदबाज नई गेंद से अच्छी बॉलिंग कर रहे हैं। हर्षित राणा भी नई बॉल से अच्छी गेंदबाजी करते हैं, उनको पुरानी गेंद से समस्या होती है। यह बात जरूर है कि बुमराह की कमी तो है, क्योंकि शुरुआत में तो विकेट गिराने चाहिए वह काबिलियत कम हुई है। इंदौर का पाटा पिचपद्मश्री सुशील दोषी ने बताया कि इंदौर की पाटा पिच है। यहां पर रन बहुत बनते हैं। टॉस चुनकर अगर आपने फील्डिंग चुनी है तो फास्ट बॉलर का यह कर्तव्य हो जाता है कि कप्तान के फैसले को सही ठहराएं। यह बात जरूर है कि शुरू में विकेट गिरा लिए तेज गेंदबाज ने तो प्रेशर सामने वाली टीम पर बन जाता है। पहले पावर प्ले में कम से कम तेज गेंदबाज को दो विकेट जरूर लेना चाहिए। 250 के अंदर रोकना चाहिए न्यूजीलैंड कोसुशील दोषी ने बताया कि अगर पहले न्यूजीलैंड पहले बैटिंग करती है तो भारत को उसे 250 से 275 के अंदर रोकना चाहिए। वहीं अगर भारत पहले बैटिंग करती है तो उसे 300 से ज्यादा रन बनाना चाहिए। भारत की स्ट्रेंथ ही मुख्य बैटिंग की है। इंदौर का पहला तो ग्राउंड बहुत छोटा है। दूसरा यह है कि यहां का आउटफील्ड भी बहुत तेज है। मतलब आपने जरा सा पुश किया तो वह चौका चला जाता है। छोटे ग्राउंड पर सिक्सर बहुत पड़ते हैं।वहीं दोषी ने रोहित शर्मा के दोहरा शतक लगाने के सवाल पर कहा कि रोहित शर्मा में वह बात नहीं रह गई है कि वह अब दोहरा शतक लगा पाएं। हालांकि वह इंदौर में बड़ा स्कोर बना सकते हैं। वह टीम को अच्छा स्टार्ट दे सकते हैं। हालांकि उनका कॉन्फिडेंस अभी लो है। इंदौर में वीरेंद्र सहवाग दोहरा शतक लगा चुके हैं। कैसा रहने वाला है मौसममौसम की बात करें तो यहां इंदौर में यह खुशनुमा रहने की उम्मीद है। आसमान साफ रहेगा जिससे मैच में किसी तरह का खलल पड़ने की संभावना नहीं है। सर्दियों का मौसम चल रहा है जिसका असर ओस के रूप में कल के मैच में पड़ सकता है। मौसम विभाग के अनुसार मैच के दिन इंदौर में मौसम साफ रहेगा। पूरे दिन धूप खिली रहेगी और तापमान 13 से 28 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है। उमस भी 60 प्रतिशत रहेगी और हवा 10 किलोमीटर के करीब की रफ्तार से चल सकती है। बल्लेबाजों के लिए अनुकूल पिचहोलकर स्टेडियम के चीफ पिच क्यूरेटर मनोहर जामले के मुताबिक, पिच काली मिट्टी से तैयार की गई है और यह बल्लेबाजों के लिए अनुकूल रहेगी। ठंड के चलते ओस अहम भूमिका निभा सकती है, जिससे दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने वाली टीम को फायदा मिल सकता है। भारत और न्यूजीलैंड के बीच यह मुकाबला टीवी पर स्टार स्पोर्ट्स नेटवर्क पर देखा जा सकेगा, जबकि लाइव स्ट्रीमिंग जियो हॉटस्टार एप पर होगी। दैनिक भास्कर पर भी मैच के लाइव अपडेट्स उपलब्ध रहेंगे। अभी एक-एक की बराबरी पर सीरीज सीरीज फिलहाल 1-1 की बराबरी पर है। भारत ने पहला मैच 4 विकेट से जीता था, जबकि दूसरे वनडे में न्यूजीलैंड ने 7 विकेट से जीत दर्ज कर सीरीज बराबर कर ली। इंदौर में होने वाला यह मुकाबला सीरीज का फैसला करेगा। भारत में न्यूजीलैंड का वनडे रिकॉर्ड कमजोर रहा है। होलकर स्टेडियम में भारत का अजेय रिकॉर्ड भारतीय टीम को बढ़त दिलाता नजर आ रहा है। भारत में न्यूजीलैंड का वनडे परफॉर्मेंस सबसे कमजोर भारत ने सीरीज के पहले मैच में न्यूजीलैंड को 4 विकेट से हराया था। दोनों टीमों के बीच अब तक 121 वनडे खेले गए। 63 में भारत और 50 में न्यूजीलैंड को जीत मिली। 7 बेनतीजा रहे, वहीं 2014 में एक मैच टाई रहा। भारत में कम से कम 20 वनडे मैच खेलने वाली विदेशी टीमों में न्यूजीलैंड का रिकॉर्ड सबसे खराब है। न्यूजीलैंड ने भारत में अब तक 41 में से सिर्फ 8 वनडे मैच जीते हैं, जबकि 32 मैचों में उसे हार झेलनी पड़ी है। जबकि एक मुकाबला बेनतीजा भी रहा।
समीक्षा बैठक...:जल जीवन मिशन में गड़बड़ी करने वाले 16 इंजीनियरों को एक बार फिर नोटिस
जल जीवन मिशन में लगातार गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। एक बार फिर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के प्रमुख सचिव पी. नरहरि ने विभागीय समीक्षा के बाद 16 इंजीनियरों को शोकॉज नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। इनमें 3 सुपरीटेंडिंग इंजीनियर और 13 एक्जीक्यूटिव इंजीनियर शामिल हैं। इसके पहले मुख्य सचिव (सीएस) अनुराग जैन ने समीक्षा बैठक में 141 सब इंजीनियरों व एक्जीक्यूटिव इंजीनियरों को नोटिस थमाने और 280 एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया था। प्रमुख सचिव नरहरि ने गुरूवार को जल जीवन मिशन के कार्यों की समीक्षा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की। इसी दौरान ही उन्होंने 16 इंजीनियरों को कारण बताओ सूचना पत्र जारी करने के निर्देश दिए। साथ ही स्पष्ट किया कि मिशन के कामों की धीमी प्रगति के लिए संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी।बैठक में एकल नलजल प्रदाय योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराए जाने की प्रगति की जिलेवार समीक्षा की गई। इसमें पाया गया कि कई जिलों में घरों तक नल कनेक्शन प्रदान किए जाने की गति तय लक्ष्यों और तय समय-सीमा के अनुरूप नहीं है। अभियान... लीकेज सुधार और जल परीक्षण में तेजी मप्र में जल सुरक्षा, जल संरक्षण, जल सुनवाई एवं स्वच्छ जल अभियान के अंतर्गत प्रदेश की नगरीय निकायों में पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए व्यापक स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं। अब तक 4,095 जल लीकेज का सुधार व मरम्मत कार्य कराया जा चुका है, जबकि 2,448 पानी की टंकियों की साफ-सफाई पूरी की गई है। 6,777 ट्यूबवेलों के जल की गुणवत्ता की जांच कराई गई, जिनमें से 58 प्रदूषित ट्यूबवेलों को बंद कराया जा चुका है।
राज्य सरकार ने प्रदेश में पांच तरह के पेड़ों के परिवहन के लिए वन विभाग की मंजूरी से छूट दे दी है। इनमें नीलगिरी, कैसूरिना, पोपलर, सुबबूल और विलायती बबूल शामिल है। अब इन पेड़ों की लड़की समेत अन्य उत्पादों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर परिवहन के लिए वन विभाग से परिवहन अनुज्ञा ( ट्रांसपोर्ट परमिट) लेने की जरूरत नहीं होगी। मप्र वन विभाग ने इस संबंध में गजट नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें कहा गया है कि ऐसी प्रजाति के पेड़, जिनकी उपलब्धता वन क्षेत्रों में नगण्य है और यदि वे निजी व्यक्तियों के स्वामित्व की हैं, तो उन्हें मप्र अभिवहन (वनोपज) नियम 2022 में ट्रांसपोर्ट परमिट (टीपी) लेने की आवश्यकता से छूट प्रदान की जा सकती है। इसी के आधार पर यूकेलिप्टस प्रजाति के नीलगिरी, कैसूरिना इक्विसिटीफओलिया प्रजाति के कैसूरिना, पापुलस प्रजाति के पोपलर, ल्यूसिनिया ल्युकोसिफेला प्रजाति के सुबबूल और प्रोसोपिस जूलीफ्लोरा प्रजाति के बिलायती बबूल के पेड़ को फॉरेस्ट की टीपी से छूट प्रदान की जाती है। गौरतलब है कि यह पांचों पौधों का उपयोग मुख्य रूप से औषधीय, फर्नीचर, कागज, प्लाईवुड, ईंधन और कृषि वानिकी के रूप में किया जाता है। इन पेड़ों को फॉरेस्ट के ट्रांसपोर्ट परमिट से छूट का लाभ ग्रामीण आबादी को मिल सकेगा।
उत्तर भारत में कड़ाके की सर्दी का असर मध्यप्रदेश में भी है। बर्फीली हवा आने से एमपी में न्यूनतम तापमान 4.6 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है। बीती रात 4 शहरों में पारा 5 डिग्री से नीचे रहा। वहीं, शाजापुर में कोल्ड वेव यानी, शीतलहर भी चली। शुक्रवार सुबह उत्तरी हिस्से में कोहरे का असर देखा गया। मौसम विभाग के अनुसार, बर्फीली हवा से ठिठुरन बढ़ी है। ग्वालियर-चंबल, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में सबसे ज्यादा असर है। यहां के जिलों में मध्यम से घना कोहरा भी छा रहा है। दूसरी ओर, भोपाल-इंदौर में भी रात का पारा लुढ़का है। इसलिए ऐसा मौसममौसम विभाग के अनुसार, पश्चिम-उत्तर भारत के ऊपर मध्य समुद्र तल से 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर करीब 232 किमी प्रतिघंटे की रफ्तार से जेट स्ट्रीम हवाएं बह रही है। यह आसमान में नदी की तरह बहने वाली हवा है। जिसका असर एमपी में भी देखने को मिल रहा है। दूसरी ओर, 16 जनवरी से जो वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) एक्टिव हो रहा था, वह आगे बढ़ गया है। अब नया वेस्टर्न डिस्टरबेंस 19 जनवरी से उत्तर-पश्चिम भारत को प्रभावित कर सकता है। यदि यह सिस्टम स्ट्रॉन्ग रहा तो 20 जनवरी के बाद प्रदेश में बादल और बारिश वाला मौसम देखने को मिल सकता है। कल्याणपुर सबसे ठंडा, शाजापुर, कटनी-मंदसौर में भी पारा लुढ़काबुधवार-गुरुवार की रात की बात करें तो शहडोल का कल्याणपुर सबसे ठंडा रहा और यहां न्यूनतम तापमान 4.6 डिग्री दर्ज किया गया। शाजापुर, कटनी के करौंदी और मंदसौर में पारा 4.7 से 4.8 डिग्री दर्ज किया गया। राजगढ़ में 5.5 डिग्री, रीवा में 6.2 डिग्री, दतिया में 6.6 डिग्री, पचमढ़ी में 6.8 डिग्री दर्ज किया गया। उमरिया, नौगांव, मंडला, खजुराहो, सतना, दमोह, सीधी, रायसेन, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, मलाजखंड और रतलाम में भी तापमान 10 डिग्री से कम रहा। बड़े शहरों में इंदौर सबसे ठंडाप्रदेश के 5 बड़े शहरों में इंदौर सबसे ठंडा है। यहां पारा 6.8 डिग्री पहुंच गया है। भोपाल, ग्वालियर, उज्जैन और जबलपुर में तापमान फिर से 10 डिग्री से नीचे आ गया है। बुधवार-गुरुवार की रात में भोपाल में 8 डिग्री, ग्वालियर में 7.4 डिग्री, उज्जैन में 9 डिग्री और जबलपुर में तापमान 9.8 डिग्री रहा। ग्वालियर-चंबल में घना कोहराशुक्रवार सुबह ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सतना और रीवा में कोहरे का असर ज्यादा देखने को मिला। इसके अलावा भोपाल, गुना, इंदौर, उज्जैन, सतना, राजगढ़, रतलाम, जबलपुर, सागर, शाजापुर, सीहोर, रायसेन आदि जिलों में भी मध्यम कोहरा छा रहा है। इससे पहले गुरुवार को ग्वालियर में घना कोहरा छाया रहा। यहां विजिबिलिटी 1 हजार मीटर तक रही। कोहरे की वजह से दिल्ली से भोपाल, इंदौर और उज्जैन आने वाली ट्रेनें निर्धारित समय से लेट हो रही है। इनमें सबसे ज्यादा असर मालवा, झेलम और सचखंड एक्सप्रेस में हो रहा है। इसके अलावा पंजाब मेल, जनशताब्दी समेत एक दर्जन ट्रेनें भी प्रभावित हो रही है। इस बार कड़ाके की ठंड का दौरइस बार मध्यप्रदेश में नवंबर-दिसंबर की सर्दी ने रिकॉर्ड तोड़ दिया। नवंबर में 84 साल में सबसे ज्यादा ठंड पड़ी तो दिसंबर में 25 साल का रिकॉर्ड टूटा। नवंबर-दिसंबर की तरह ही जनवरी में भी कड़ाके की ठंड पड़ रही है। इससे भोपाल में ठंड का 10 साल का रिकॉर्ड टूट गया है। एक्सपर्ट की माने तो जनवरी में प्रदेश में माइनस वाली ठंड गिर चुकी है। अबकी बार भी तेज सर्दी, घना कोहरा छाने के साथ शीतलहर भी चल रही है। ठंड के लिए इसलिए जनवरी खास मौसम विभाग के अनुसार, जिस तरह मानसून के चार महीने (जून, जुलाई, अगस्त और सितंबर) में से दो महीने जुलाई-अगस्त महत्वपूर्ण रहते हैं और इन्हीं में 60 प्रतिशत या इससे अधिक बारिश हो जाती है, ठीक उसी तरह दिसंबर और जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। इन्हीं दो महीने में प्रदेश में उत्तर भारत से सर्द हवाएं ज्यादा आती हैं इसलिए टेम्प्रेचर में अच्छी-खासी गिरावट आती है। सर्द हवाएं भी चलती हैं। पिछले 10 साल के आंकड़े यही ट्रेंड बताते हैं। वेस्टर्न डिस्टरबेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के एक्टिव होने से जनवरी में मावठा भी गिरता है। पिछले साल कई जिलों में बारिश हुई थी। इस बार साल के पहले ही दिन बादल भी छाए रहे। MP के 5 बड़े शहरों में जनवरी में ऐसा रहा सर्दी का ट्रेंड... भोपाल में 0.6 डिग्री पहुंच चुका टेम्प्रेचरभोपाल में जनवरी में कड़ाके की ठंड पड़ती है। वहीं, दिन में गर्मी का एहसास और बारिश का ट्रेंड भी है। 18 जनवरी 1935 को रात का टेम्प्रेचर रिकॉर्ड 0.6 डिग्री सेल्सियस रहा था। वहीं, 26 जनवरी 2009 को दिन में तापमान 33 डिग्री दर्ज किया गया था। पिछले 10 में से 7 साल बारिश हो चुकी है। 24 घंटे में सबसे ज्यादा 2 इंच बारिश 6 जनवरी 2004 को हुई थी। वहीं, सर्वाधिक मासिक 3.8 इंच बारिश जनवरी 1948 में हुई थी। इंदौर में माइनस 1.1 डिग्री पहुंच चुका पाराइंदौर में जनवरी में सर्दी का रिकॉर्ड माइनस में पहुंच चुका है। 16 जनवरी 1935 में पारा माइनस 1.1 डिग्री दर्ज किया गया था। यह ओवरऑल रिकॉर्ड है। वहीं, 27 जनवरी 1990 को दिन का तापमान 33.9 डिग्री रहा था। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश होने का रिकॉर्ड 6 जनवरी 1920 के नाम है। इस दिन 3 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। वहीं, वर्ष 1920 में सर्वाधिक मासिक बारिश 4 इंच दर्ज की गई थी। जबलपुर में 1946 में रिकॉर्ड 1.1 डिग्री रहा था पाराजबलपुर में भी जनवरी में ठंड-बारिश का ट्रेंड है। इस महीने सबसे ज्यादा ठंड पड़ती है। 7 जनवरी 1946 को रात का पारा रिकॉर्ड 1.1 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था। वहीं, दिन का उच्चतम तापमान 33.4 डिग्री 7 जनवरी 1973 को रहा था। इस महीने बारिश भी होती है। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश 24 जनवरी 1919 को 2.5 इंच हुई थी। इसी साल पूरे महीने 8 इंच से ज्यादा पानी गिरा था। उत्तरी हवा आने से ग्वालियर सबसे ठंडाउत्तरी हवाओं की वजह से प्रदेश का ग्वालियर-चंबल सबसे ठंडा रहता है। जनवरी में यहां कड़ाके की ठंड का ट्रेंड है। पिछले 10 साल का रिकॉर्ड देखें तो 2018 में तापमान 1.9 डिग्री और 2019 में 2.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। 24 जनवरी 1954 को रात का तापमान माइनस 1.1 डिग्री रहा था। ग्वालियर में जनवरी में बारिश भी होती है। साल 2014 से 2024 के बीच 9 साल बारिश हो चुकी है। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश का रिकॉर्ड 8 जनवरी 1926 को है। इस दिन 2.1 इंच पानी गिरा था। वहीं, 1948 को कुल मासिक बारिश 3.1 इंच हुई थी। उज्जैन में जीरो डिग्री रह चुका पाराउज्जैन में भी उत्तरी हवा का असर रहता है। इस वजह से यहां कड़ाके की ठंड पड़ती है। 22 जनवरी 1962 को पारा 0 डिग्री सेल्सियस रहा था। पिछले 10 साल में टेम्प्रेचर 2 से 5.8 डिग्री सेल्सियस तक रह चुका है। 24 घंटे में सर्वाधिक बारिश होने का रिकॉर्ड 11 जनवरी 1987 के नाम है। इस दिन सवा इंच पानी गिरा था। वहीं, सर्वाधिक कुल मासिक 2.2 इंच 1994 को हुई थी।
आधार और ई-केवाईसी जैसी पारदर्शी व्यवस्थाएं लागू होने के बावजूद राजधानी की सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में गड़बड़ियां जारी हैं। खाद्य अमले की सघन जांच में चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं। कहीं गेहूं के स्टॉक के नाम पर बोरियों में भूसा भरा मिला तो कहीं तय स्टॉक से अलग 72 बोरियों में चावल जमा कर कालाबाजारी की तैयारी की गई थी। गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर जिला आपूर्ति नियंत्रक ने सात राशन दुकानों को तत्काल निलंबित कर दिया है। जिला आपूर्ति नियंत्रक चंद्रभान सिंह जादौन को राशन वितरण में अनियमितताओं की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद सहायक आपूर्ति अधिकारी और कनिष्ठ आपूर्ति अधिकारियों को पीडीएस दुकानों की कड़ी निगरानी के निर्देश दिए गए। इसी क्रम में अलग-अलग क्षेत्रों की सात दुकानों की जांच की गई, जहां स्टॉक में हेराफेरी, कम राशन वितरण और अतिरिक्त भंडारण जैसे गंभीर मामले उजागर हुए। 15 बोरियों में भूसा भरकर स्टॉक मिलान जांच के दौरान दुकान नंबर-62, जय लक्ष्मी प्राथमिक भंडार में गेहूं के स्टॉक का मिलान करने के लिए 15 बोरियों में भूसा भरा हुआ पाया गया। यहां गेहूं 42.43 क्विंटल और चावल 28.83 क्विंटल कम मिला, जबकि नमक 2.16 क्विंटल और शक्कर 5 किलो अधिक पाई गई। चावल की कालाबाजारी की तैयारी दुकान नंबर-67, सक्षम प्राथमिक भंडार, बंजारी में स्टॉक से अलग 72 बोरियों में चावल रखा मिला, जिसे कालाबाजारी के उद्देश्य से जमा किया गया था। यहां गेहूं 1.29 क्विंटल अधिक और चावल 6.20 क्विंटल कम पाया गया। अतिरिक्त चावल को जब्त कर लिया गया है। अन्य दुकानों में भी भारी अनियमितताएं शिकायत करें: जिला आपूर्ति नियंत्रक जादौन ने उपभोक्ताओं से कहा है कि यदि किसी राशन दुकान पर गड़बड़ी की जा रही है तो इसकी शिकायत करें।
हबीबगंज के लाला लाजपत राय सोसायटी में खुद को पुलिसकर्मी बताकर लूट और अपहरण का का मामला सामने आया है। अज्ञात 5-6 बदमाशों ने फ्लैट में घुसकर चार युवकों के साथ मारपीट की, एनडीपीएस केस में फंसाने की धमकी दी और करीब डेढ़ लाख रुपए नकद, घड़ियां और मोबाइल लेकर फरार हो गए। खुद को पुलिस साबित करने के लिए आरोपियों ने चारों को अपनी-अपनी गाड़ियों में भी बैठा लिया। पीड़ित की शिकायत पर हबीबगंज पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। हबीबगंज पुलिस के मुताबिक मेघना अपार्टमेंट-2, लाला लाजपत राय सोसायटी निवासी राहुल गुप्ता ने पुलिस को बताया कि 11 जनवरी की शाम करीब साढ़े सात बजे वह अपने फ्लैट पर अपने दोस्तों अनिमेष वर्मा, अनुराग और नरेंद्र परमार के साथ मौजूद था। इसी दौरान 5-6 अज्ञात युवक फ्लैट में आए और खुद को पुलिस स्टाफ बताते हुए गाली-गलौज और मारपीट शुरू कर दी। आरोपियों ने चारों को धमकाया कि उन्हें एनडीपीएस के केस में जेल भेज देंगे। सीसीटीवी फुटेज से आरोपियों की पहचान की कोशिश बदमाशों ने राहुल के पास रखे 55 हजार रुपए, अनिमेष के 24 हजार 800 रुपए और तीन घड़ियां छीन लीं। इसके बाद चारों युवकों को जबरन फ्लैट से बाहर लाकर एक सफेद सियाज कार और राहुल की स्विफ्ट डिजायर में बैठाया गया। बदमाश उन्हें मिसरोद थाने से आगे बायपास टोल रोड तक ले गए, जहां और पैसों की मांग की गई। राहुल ने घबराकर अपने परिचित आनंद रघुवंशी को फोन कर पूरी घटना बताई। आनंद रघुवंशी टीटी नगर स्थित गैमन इंडिया मॉल पर एक लाख रुपए लेकर होशंगाबाद से भोपाल आए। जब दोबारा उनसे बात हुई तो उन लोगों ने कहा 5 नंबर पेट्रोल पंप पर आकर पैसे दे दो, इन लोगों को वहीं छोड़ देंगे। हम लोग जब 5 नंबर दुर्गा पेट्रोल पंप के पास पहुंचे तो आनंद उनसे बात करने लगे। आनंद के साथी ने बताया कि हम भी पुलिस लेकर आए हैं। आनंद ने अपने साथ आए अपने दोस्त को आवाज लगाई तभी वह लोग वहां से भाग गए। पीड़ितों के मोबाइल भी अपने साथ ले गए। घटना के बाद पीड़ितों ने 112 पर कॉल किया और फिर थाने पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस का कहना है कि आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
चिकित्सा:दर्द से परेशान मरीज अंगुली कटवाने पहुंचा एम्स, डॉक्टरों ने माइक्रो ट्यूमर पहचानकर बचाई जान
कभी-कभी बीमारी बड़ी नहीं होती, लेकिन उसका दर्द जिंदगी को नर्क बना देता है। ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला एम्स भोपाल में सामने आया है, जहां महज 1 मिलीमीटर के दुर्लभ ट्यूमर ने 59 वर्षीय मरीज को 13 साल तक असहनीय पीड़ा में जीने को मजबूर कर दिया। हालत इतनी बिगड़ चुकी थी कि दर्द से छुटकारा पाने की उम्मीद में मरीज अपनी उंगली कटवाने की मांग लेकर एम्स भोपाल पहुंचा। मरीज इससे पहले देश के कई बड़े अस्पतालों में इलाज करा चुका था। नर्व कंडक्शन टेस्ट, इमेजिंग जांचें, महंगी दवाइयां और यहां तक कि सर्जरी भी हुई, लेकिन दर्द का असली कारण सामने नहीं आ सका। लगातार पीड़ा ने उसे शारीरिक ही नहीं, मानसिक रूप से भी तोड़ दिया था। क्लिनिकल जांच ने खोला राज एम्स भोपाल के बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग में एडिशनल प्रोफेसर डॉ. गौरव चतुर्वेदी ने मरीज की गहन क्लिनिकल जांच की। जांच के दौरान उन्हें एक दुर्लभ ग्लोमस ट्यूमर की आशंका हुई। आमतौर पर यह ट्यूमर नाखून के नीचे पाया जाता है, लेकिन इस मरीज में यह उंगली के पल्प यानी सिरे के नरम हिस्से में छिपा हुआ था। संदेह पुख्ता होने पर सर्जरी की योजना बनाई गई। ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों ने उंगली के पल्प से सिर्फ 1 मिमी आकार का ट्यूमर सफलतापूर्वक निकाल दिया। ट्यूमर इतना सूक्ष्म था कि वर्षों तक सामान्य जांचों में पकड़ में नहीं आया। क्यों खास है यह मामला? एचओडी, एम्स में बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी के एचओडी डॉ. मनाल मोहम्मद खान के अनुसार ग्लोमस ट्यूमर सामान्यतः नाखून के नीचे पाए जाते हैं। उंगली के पल्प में इनका होना अत्यंत दुर्लभ है, इसी वजह से ऐसे मामलों में सही निदान सालों तक नहीं हो पाता। सर्जरी के तुरंत बाद खत्म हुआ दर्द : सर्जरी के बाद सबसे राहत भरी बात यह रही कि दर्द पूरी तरह समाप्त हो गया। उंगली को काटने की जरूरत नहीं पड़ी और हाथ की सामान्य कार्यक्षमता पूरी तरह बहाल हो गई। 13 साल तक लगातार दर्द झेलने के बाद जब मरीज ने पहली बार बिना पीड़ा के सांस ली, तो यह उसके लिए नए जीवन जैसा अनुभव था।
महेंद्रगढ़ जिले के कनीना क्षेत्र में फर्जी पीकेसीसी (PKCC) हेल्थ सर्टिफिकेट जारी करने का मामला सामने आया है। इस संबंध में राजकीय पशु चिकित्सालय (GVH) मोतला कलां, रेवाड़ी में कार्यरत पशु चिकित्सक डॉ. अरविंद कुमार ने उप पुलिस अधीक्षक कनीना को शिकायत दी है। शिकायत के आधार पर थाना शहर कनीना में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। डॉ. अरविंद कुमार ने अपनी शिकायत में बताया कि उनके संज्ञान में यह मामला आया है कि जीवीएच मोतला कलां के नाम से एक फर्जी पीकेसीसी हेल्थ सर्टिफिकेट जारी किया गया है। यह सर्टिफिकेट पुनीत कुमार निवासी गांव मुसेपुर, जिला रेवाड़ी के नाम से तैयार किया गया। जिसका उपयोग एसबीआई कनीना से संबंधित कार्यों में किया गया। आरोप है कि यह फर्जी सर्टिफिकेट बैंक कर्मचारियों के साथ मिलीभगत कर तैयार किया गया है। उनके द्वारा नहीं जारी किया गया डॉ. अरविंद कुमार ने स्पष्ट किया कि उक्त हेल्थ सर्टिफिकेट न तो उनके द्वारा और न ही जीवीएच मोतला कलां द्वारा कभी जारी किया गया है। उन्होंने मामले में कार्रवाई के लिए फर्जी हेल्थ सर्टिफिकेट की प्रति अपनी शिकायत के साथ संलग्न कर पुलिस को सौंपी है। पुलिस ने किया मामला दर्ज शिकायत मिलने के बाद उप पुलिस अधीक्षक कनीना के कार्यालय से यह परिवाद थाना शहर कनीना को भेजा गया। जांच में प्रथम दृष्टया भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318 (4) के तहत अपराध पाया गया। इसके आधार पर थाना शहर कनीना में 15 जनवरी 2026 के तहत धारा 318 (4) BNS में मामला दर्ज किया गया है। क्या है पीकेसीसी हेल्थ सर्टिफिकेट पीकेसीसी हेल्थ सर्टिफिकेट पशु पालकों की अर्जी पर या बैंक के कहने पर पशु पालकों को जारी किया जाता है। इससे पशु पालक अपना फॉर्म हाउस खोलने या पशु खरीदने के लिए बैंक से एक करोड़ रुपए तक का लोन ले सकता है।
हरियाणा के हिसार में शहर के बड़े प्रोजेक्ट पर पूर्व मंत्री डॉ. कमल गुप्ता की अनदेखी चर्चाओं का विषय बन रही है। हिसार में दूसरा मौका था जब डॉ. कमल गुप्ता के समय शुरू हुए प्रोजेक्ट का श्रेय निर्दलीय विधायक सावित्री जिंदल को मिल गया। गुरुवार को हिसार में मुख्यमंत्री ने साढ़े 14 करोड़ की राशि से बने टाउन पार्क का उद्घाटन किया। इस उद्घाटन समारोह में पूर्व मंत्री और शहर से दो बार के विधायक रहे डॉ. कमल गुप्ता और उनके वर्कर नदारद दिखे। खास बात यह रही कि एक बार भी कमल गुप्ता का मंच से नाम तक नहीं लिया गया। इस बारे में दैनिक भास्कर एप ने कमल गुप्ता से कार्यक्रम में न पहुंचने के बारे में पूछा, तो डॉ. गुप्ता ने कहा- मुझे तेज जुकाम हो गया, इसलिए मैं नहीं आ पाया। मैंने मुख्यमंत्री को फोन कर बता दिया था। जब भी शहर में बड़े प्रोजेक्ट का शिलान्यास- उद्घाटन होता है तो आप दिखते नहीं? इस पर गुप्ता ने कहा कि यह इत्तफाक हो सकता है। बता दें कि डॉ. कमल गुप्ता का हिसार के इन प्रोजेक्ट को लेकर भावनात्मक जुड़ाव है। उनके ही प्रयास से हिसार के प्रोजेक्ट सिरे चढ़े थे। इससे पहले कमल गुप्ता और सावित्री जिंदल हांसी की विकास रैली में एक साथ मंच पर नजर आए थे, मगर दोनों ने एक दूसरे से बात नहीं की थी। गुप्ता की गैर मौजूदगी में इन 2 बड़े प्रोजेक्ट का उद्घाटन... चुनाव के समय बढ़ी दोनों नेताओं में तल्खीदरअसल, विधानसभा चुनाव में शुरू हुई दोनों की तल्खी कम होने के बजाय बढ़ रही है। अक्टूबर 2024 में हिसार विधानसभा सीट से भाजपा ने जहां डॉ. कमल गुप्ता को मैदान में उतारा था, वहीं पूर्व मंत्री सावित्री जिंदल निर्दलीय मैदान में उतरीं थी। डॉ. कमल गुप्ता की जमानत जब्त हो गई थी। वहीं चुनाव से पहले भी दोनों नेता एक दूसरे के कार्यक्रमों में दूरी बनाने लग गए थे। सावित्री जिंदल हिसार से भाजपा की टिकट चाहती थी। कमल गुप्ता तीसरी बार भाजपा की टिकट पर लड़ना चाहते थे। दोनों नेताओं ने चुनाव की तैयारी शुरू कर दी। मगर चुनाव में ऐन मौके पर जिंदल का टिकट काटकर कमल गुप्ता को दे दिया गया। मगर चुनाव में सावित्री जिंदल जीती और कमल गुप्ता की जमानत जब्त हो गई। इसके बाद दोनों में दूरियां और बढ़ गई। गुप्ता-जिंदल परिवार में तनातनी के 3 और उदाहरण 1. मंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट का विरोध किया: हिसार के बस स्टैंड की शिफ्टिंग को लेकर भी दोनों में मतभेद नजर आए। कमल गुप्ता बस स्टैंड को शहर से बाहर शिफ्ट करना चाहते थे। यह उनका ड्रीम प्रोजेक्ट था। बस स्टैंड शिफ्टिंग का व्यापारियों ने विरोध किया। सावित्री जिंदल की घर पर व्यापारियों की मीटिंग भी हुई। इसके बाद कमल गुप्ता नाराज हो गए और उन्हें प्रोजेक्ट टालना पड़ा। 2. चुनाव में एक दूसरे के खिलाफ लड़े: सावित्री जिंदल और कमल गुप्ता विधानसभा चुनाव में एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़े। कमल गुप्ता को BJP ने हिसार से टिकट दी तो जिंदल ने बगावत कर निर्दलीय उतरने का फैसला किया। इससे गुप्ता की स्थिति कमजोर हो गई और वैश्य समाज के वोटों का ध्रुवीकरण हो गया। भाजपा अपने गढ़ हिसार में 10 साल बाद हार गई। इस चुनाव में सावित्री जिंदल को हिसार से 49231 वोट मिले। वहीं कांग्रेस के रामनिवास राड़ा को 30290 वोट और कमल गुप्ता को 17385 वोट मिले। 3. जिंदल समर्थक ने गुप्ता को चप्पल मारी: चुनाव प्रचार के दौरान भी नेताओं के समर्थकों में एक दूसरे के प्रति नाराजगी नजर आई। चुनाव प्रचार के दौरान एक जनसभा में सावित्री जिंदल के समर्थक राजेंद्र सैनी के वर्कर ने गुप्ता को चप्पल मारी थी। इसके बाद सावित्री जिंदल ने अपनी उसी समर्थक को निकाय चुनाव में पार्षद का टिकट भी दिलवा दिया। कमल गुप्ता भी चुनाव में उसका प्रचार करने नहीं गए। राजेंद्र सैनी को हार का मुंह देखना पड़ा। दोनों नेता एक दूसरे के खिलाफ 3 चुनाव लड़ चुकेकमल गुप्ता 2 बार हिसार सीट से चुनाव जीत चुके हैं। उन्होंने 2014 के बाद 2019 में भी चुनाव जीता। 2014 में कमल गुप्ता ने सावित्री जिंदल को ही हराया था। उस समय सावित्री ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। 2024 में कमल गुप्ता निर्दलीय खड़ी सावित्री जिंदल से चुनाव हार गए। हिसार सीट पर सावित्री जिंदल का भी रसूख अच्छा है। वह 3 बार हिसार से चुनाव जीतकर विधायक बन चुकी हैं। पहला चुनाव उन्होंने 2005 में जीता था। तब उप-चुनाव जीतकर वह भूपेंद्र हुड्डा की अगुआई वाली हरियाणा सरकार में शामिल हुई थीं। 2009 में हुए विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने जीत हासिल की। 2024 में BJP मंत्री कमल गुप्ता को चुनाव हराया। इसके बाद भाजपा को ही समर्थन दे दिया।
हरियाणा के पानीपत के गांव सुताना की सबसे बुजुर्ग महिला आशी देवी अब इस दुनिया में नहीं रहीं। समय की लंबी लकीर को अपने अनुभवों से सींचने वाली और एक सदी से भी अधिक का इतिहास अपनी आंखों में समेटने वाली आशा देवी का 103 साल की उम्र में निधन हो गया। 21 जनवरी को गांव में ही 13वीं की रस्म क्रिया होगी। आशा देवी अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। उनके पौत्र सुशील कुमार यमुनानगर में जिला परिषद के सीईओ (HCS) अधिकारी है। सबसे खास बात ये कि वे अपनी जिंदगी में कभी अस्पताल में भर्ती नहीं हुई। बड़े बेटे कर्ण सिंह बताते है कि परिवार के लिए यह गर्व की बात थी कि 100 साल पार करने के बाद भी वे अपनी आंखों से स्पष्ट देख सकती थीं और उनकी याददाश्त आखिरी समय तक वैसी ही बनी रही। उनका सादा खान-पान और ग्रामीण जीवनशैली ही उनकी लंबी उम्र का राज था। गांव के लोगों का कहना है कि आशा देवी का निधन केवल एक परिवार की क्षति नहीं है, बल्कि उस आखिरी पीढ़ी का विदा होना भी है, जिसने भारत को गुलामी से आजादी और फिर आधुनिकता के शिखर तक पहुंचते देखा। पहले यहां पढ़िए, आशी देवी के जीवन के बारे में... गांव सुताना की माटी और फौलादी सेहतआशी देवी का जन्म और जीवन गांव सुताना की उसी माटी में बीता, जहां मेहनत और सादगी ही जीवन का आधार थी। उनके बड़े बेटे कर्ण सिंह ने बताया कि मां की उम्र भले ही 103 साल हो गई थी, लेकिन उनकी सेहत किसी फौलाद से कम नहीं थी। आज के दौर में जहां लोग 40 की उम्र में ही दर्जनों बीमारियों और दवाइयों के घेरे में आ जाते हैं, मां ने अपनी पूरी जिंदगी में कभी अस्पताल का मुंह नहीं देखा था। उन्हें कभी कोई गंभीर बीमारी नहीं हुई, न ही कभी उन्हें भर्ती कराने की नौबत आई। 1982 में थमा था हमसफर का साथ, पर नहीं हारा हौसलाआशी देवी के जीवन का सबसे कठिन दौर साल 1982 में आया था, जब उनके पति का बीमारी के कारण निधन हो गया। आज से ठीक 42 साल पहले जब पति का साथ छूटा, तो परिवार की पूरी जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। तीन बेटों कर्ण सिंह, बलबीर सिंह और राजपाल सिंह को पालना और ऊंचे संस्कार देना किसी तपस्या से कम नहीं था। मगर, आशी देवी ने कभी हार नहीं मानी और एक वटवृक्ष की तरह पूरे परिवार को अपनी छाया में सुरक्षित रखा। 2 पॉइंट में जानिए, कैसे हुआ उनका निधन... फर्श से अर्श तक पहुंचा परिवार...आशी देवी ने अपने जीवनकाल में केवल समय ही नहीं बदला, बल्कि अपने परिवार की किस्मत को भी बदलते देखा। उनके संघर्षों का ही परिणाम है कि आज उनके पोते-पोतियां उच्च पदों पर आसीन हैं। गांव सुताना के लोग बताते हैं कि आशी देवी अपने पोते सुशील के HCS अधिकारी बनने पर बेहद गौरवान्वित महसूस करती थीं। ग्रामीण बोले- एक जीवंत अध्याय का समापनगांव के लोगों का कहना है कि आशी देवी का जाना केवल एक परिवार की बुजुर्ग का जाना नहीं है, बल्कि गांव सुताना के इतिहास के एक जीवंत अध्याय का समापन है। उन्होंने अपनी मेहनत से जो पौध लगाई थी, आज वह प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर एक विशाल वृक्ष बन चुकी है। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों को यह सिखाता है कि सादगी, अनुशासन और मजबूत इच्छाशक्ति से न केवल लंबी उम्र पाई जा सकती है, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी परिवार को सफलता के शिखर पर पहुँचाया जा सकता है। --------------- ये खबर भी पढ़ें... हरियाणा की 77 साल की रॉकिंग दादी:15 फीट गहरी नहर में पुल से लगातीं छलांग, हरकी पैड़ी में गंगा पार कर चुकीं; 2 जानें भी बचाईं यूपी के बागपत के जोहड़ी गांव की शूटर दादी चंद्रो और प्रकाशी तोमर के किस्से तो आपने सुने ही होंगे कि कैसे दोनों ने वृद्धावस्था में भी दुनिया में अपनी छाप छोड़ी। चलिए, हम आपको हरियाणा की एक ऐसी ही दादी साबो देवी से मिलवाते हैं, जो 77 साल की उम्र में भी अपने रॉकिंग स्टाइल से धूम मचा रही हैं। (पूरी खबर पढ़ें)
हरियाणा के सिरसा में एक हजार रुपए की शर्त लगाकर दिव्यांग को गोबर खिला दिया गया। किसी ने इसकी वीडियो बनाकर वायरल कर दी। वीडियो वायरल होने के बाद जान-पहचान वालों और रिश्तेदारी में मजाक बन गया। इसके बाद पीड़ित ने रानियां थाने में इसकी शिकायत दी, जिसके बाद 3 लोगों पर एफआईआर दर्ज हुई है। वायरल वीडियो में दिख रहा है कि चार-पांच लोग पशुबाड़े में बैठे हैं। इसी दौरान एक व्यक्ति कस्सी (फावड़ा) में गोबर उठाकर लाता है। जिस व्यक्ति ने कस्सी उठाई है, उसके दूसरे हाथ में कैश दिखाई दे रहा है। वह शिकायतकर्ता का नाम लेकर कहता है- ले भाई, एक हजार रुपए ले और ये गोबर खाकर दिखा। एक बार गोबर चखने पर पीड़ित पैसे मांगता है। इस पर वह कहता है- दोबारा खाओ, फिर रुपए मिलेंगे। पीड़ित को दोबारा से गोबर खिला देता है और फिर गिनकर उसे पैसे देता है। पास में बैठे लोग ठहाके लगाते दिख रहे हैं। इस बीच उनमें से किसी ने वीडियो बना ली। कुछ देर में वीडियो वायरल कर दी। जब इसका पता पीड़ित को जानकारों से लगा तो बदनामी होने का डर दिखा। इसके बाद उसने पुलिस को शिकायत दी। दिव्यांग को गोबर खिलाने के कुछ PHOTOS... सिलसिलेवार ढंग से जानिए क्या है पूरा मामला गोबर खाने पर लगी थी एक हजार रुपए की शर्त : पुलिस के अनुसार पीड़ित पोलियो से ग्रस्त हैं। उसने शिकायत में आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने चोरी-छिपे उनका वीडियो बनाया और उन्हें गोबर खिलाया। बताया जा रहा है कि शराब पीने के बाद शर्त लगाई थी कि गोबर खाने के बदले में 1000 रुपए दिए जाएंगे। इसी दौरान पीड़ित ने गोबर खा लिया। चारों अक्सर इकट्ठे बैठते थे, सभी करते हैं खेती-बाड़ीपीड़ित और आरोपी रानियां के ही रहने वाले हैं। चारों शाम को जानकार के खाली प्लॉट या अन्य जगह पर इकट्ठे बैठते हैं। जहां पर यह घटना हुई, वहां पर गायों का बाड़ा है। शिकायत में जिन व्यक्तियों पर आरोप है, उनमें मुख्तियार सिंह, रणजीत सिंह, जसविंदर सिंह के नाम हैं। सभी खेती-बाड़ी करते हैं। जाति एक ही है, पर परिवार अलग-अलग हैं। पीड़ित अविवाहित है। वह घर में अकेला ही रहता है। अब जानिए…गोबर की शर्त पर पीड़ित और आरोपी क्या बोले जबरदस्ती शराब पिलाई, गोबर खिलाकर वीडियो बनाया : शिकायतकर्तापीड़िता का कहना है-मुझे तीनों लोगों ने जबरदस्ती शराब पिलाई और एक हजार रुपया भी दिया। मैं पोलियोग्रस्त हूं। मेरे परिवार में कोई भी नहीं है। तीनों ने चोरी छिपे मेरी वीडियो बनाई है और मुझे गोबर खिलाया है। मेरी वीडियो बनाकर इन लोगों ने ग्रुपों में डाली। इसके कारण मेरी रिश्तेदारी में खूब बदनामी हो रही है। मैं चाहता हूं कि मेरे साथ न्याय हो। इन लोगों को इनके किए की सजा मिले। एक आरोपी बोला- मामला थाने में है, कल बैठकर बात करेंगेइस बारे में एक आरोपी मुख्तियार सिंह से दैनिक भास्कर एप ने पक्ष जानने के लिए बातचीत की। उनका जवाब था- यह मामला रानियां थाने में हैं। कल बैठकर इसके बारे में बात करेंगे। इस पर ज्यादा कुछ नहीं कहेंगे। यह कहकर कॉल काट दी। दूसरी तरफ पार्षद एमसी निक्का चीमा का कहना है कि सभी एक-साथ ही रहते हैं और खेतीबाड़ी करते हैं। इसका सभी को पता है, इस पर क्या कहें।दोनों पक्षों को पूछताछ के लिए थाने बुलाया था: एसएचओइस मामले में रानियां थाना प्रभारी गुरमिंदर सिंह से बातचीत की गई। उन्होंने बताया कि पीड़ित के बयानों के आधार पर 3 के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। इस मामले में धारा 115 BNS 92A ACT person with disability act के तहत कार्रवाई की जा रही है। गुरुवार शाम को दोनों पक्षों को पूछताछ के लिए बुलाया था। कुछ लोग मामले में समझौते के प्रयास कर रहे है। करनाल के डॉक्टर का हो चुका गोबर खाते वीडियो वायरलहरियाणा में गोबर खिलाने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी हरियाणा के करनाल के डॉ. मनोज मित्तल का वीडियो वायरल हो चुका है। हालांकि, वीडियो में डॉक्टर को किसी ने फोर्स नहीं किया, वे खुद ही गोबर खाते दिखाई देते है। साथ ही गोमूत्र और गोबर के औषधीय गुण भी गिनाते नजर आ रहे है। डॉ. मनोज मित्तल करनाल में बच्चों का अस्पताल चलाते हैं। उनके गोबर खाने और उसके फायदे बताए जाने का यह वीडियो खूब वायरल हुआ था। इसके बाद बहुत कमेंट उनकी वीडियो पर मिले। बीमार होने की भी चलाई गई थी फेक वीडियोडॉ. मनोज मित्तल ने जब सोशल मीडिया पर आए कमेंट्स पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी तो उनके बीमार होने के फोटो के साथ फेक फोटो वायरल किया गया था। इस पर डॉक्टर ने स्पष्ट किया था कि ये फोटो फेक है, वे बीमार नहीं हुए है। उनका कहना था कि गोबर पर रिसर्च होना चाहिए। इसमें पता लगाया जा सकता है कि कितनी मात्र में गोबर का सेवन किया जाना चाहिए। कहना था कि कुछ लोग अंडे पर रिसर्च कर रहे हैं। अंडा भी मल है और गोबर भी मल है। अंडे को खुश होकर लेते हैं, जबकि दोनों से मानव के शरीर में बीमारी से फायदा होता है। प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री से इसकी गुहार लगाता हूं कि गाय के गोबर पर रिसर्च हो। ---------------- ये खबर भी पढ़ें... डॉ.मनोज मित्तल का फेक वीडियो वायरल:बोले- मैं बीमार ही नहीं हुआ, घटिया लोकप्रियता के लिए वायरल की पोस्ट, गोबर खाने से आए थे चर्चा में गोबर खाने से चर्चा में आए करनाल के डॉ. मनोज मित्तल का फेक पोस्ट वायरल हो रहा है। इसकी पुष्टि डॉक्टर ने खुद कैमरे के सामने आकर की। डॉ. मित्तल ने कहा, वह बीमार नहीं हुआ, किसी ने TRP बढ़ाने के लिए ऐसी पोस्ट की है। डॉ. मनोज मित्तल इस पोस्ट से काफी चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर फोटो से प्रचार हो रहा है कि गोबर खाने वाले डॉक्टर को हुआ इंफेक्शन। (पूरी खबर पढ़ें)
अगर आप रात में एसी या स्लीपर बस से सफर करते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। मप्र में ऐसी 27 लंबी दूरी की यात्री बसें पकड़ी गई हैं, जिनमें आग लगने की स्थिति में यात्रियों के सुरक्षित बाहर निकलने के इंतजाम ठीक नहीं थे। इन सभी बसों को जब्त कर उनके परमिट निरस्त कर दिए गए हैं। आगे इनका रजिस्ट्रेशन भी कैंसिल हो सकता है। रायसेन में 13 जनवरी की रात चलती बस में आग लगने की घटना के बाद परिवहन विभाग हरकत में आया। बुधवार रात 11 बजे प्रदेशभर में आरटीओ व फील्ड अफसर अचानक सड़कों पर उतरे। यह कार्रवाई रात 3 बजे तक चली। इस दौरान इंदौर में 9, उज्जैन में 7, सागर में 5 व जबलपुर में 3 समेत कुल 27 बसें सुरक्षा मानकों पर फेल पाई गईं। कई बसों में इमरजेंसी गेट या तो बंद थे या सिर्फ दिखावे के लिए लगे थे। स्लीपर बसों में बर्थ के बीच का गलियारा बहुत संकरा था। कुछ बसों में फायर सेफ्टी सिस्टम खराब मिले, तो कुछ में ये उपकरण नहीं थे। रात 11 बजे सड़क पर उतरे आरटीओ, 4 घंटे में मानकों के खिलाफ चल रहीं 27 बसें जब्त, परमिट निरस्त अब रजिस्ट्रेशन भी कैंसिल होंगे एआईएस के मानकों की जांच की फील्ड अफसरों ने सभी बसों में ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड (एआईएस) के मानकों की जांच की है। एआईएस कोड भारत सरकार द्वारा तय किए गए तकनीकी सुरक्षा मानक हैं, जो विशेष रूप से बसों और स्कूल वाहनों की सुरक्षा, संरचना और अग्नि सुरक्षा से संबंधित हैं। बता दें कि अक्टूबर 2025 में राजस्थान के जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर चलती एसी बस में लगी भीषण आग में 20 यात्रियों की मौत के बाद बसों के फायर सेफ्टी ऑडिट के निर्देश दिए गए थे। तब जारी हुए निर्देश में विभाग ने सभी फील्ड अफसरों को चेतावनी दी थी कि तय सुरक्षा मानकों का पालन न करने वाली बसों का संचालन तुरंत बंद करवाया जाए। यात्री क्या देखकर तय करें कि बस सुरक्षित है या नहीं? बस में चढ़ते ही देखें- इमरजेंसी एग्जिट खुलता है या नहीं इसलिए खतरनाक होते हैं हादसे
साइलेंट इमरजेंसी... 8वीं बोर्ड में एक साल में घट गए 56 हजार विद्यार्थी
रवींद्र प्रसाद सिंह, रिटायर्ड टीचर रांची | झारखंड एकेडमिक काउंसिल द्वारा आयोजित होने वाली आठवीं बोर्ड परीक्षा का फॉर्म जमा करने से संबंधित शेड्यूल गुरुवार को समाप्त हो गई। इसके बाद राज्य की स्कूली शिक्षा सिस्टम की एक चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। जिला-वार डाटा के अनुसार वर्ष 2025 की तुलना में 2026 में राज्यभर में आठवीं बोर्ड परीक्षा के लिए आवेदन करने वाले छात्रों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। जहां 2025 में कुल 5 लाख 18 हजार 23 विद्यार्थियों ने परीक्षा के लिए आवेदन किया था, वहीं 2026 में यह संख्या घटकर 4 लाख 62 हजार 94 रह गई। इसका मतलब है कि महज एक साल में 55 हजार 929 बच्चे गत वर्ष से कम हैं। यह गिरावट सिर्फ शिक्षा विभाग की प्रशासनिक तैयारियों पर सवाल खड़ा करती है। छुट्टी में नहीं होनी चाहिए डेट की घोषणा झारखंड में आठवीं बोर्ड परीक्षा सिर्फ एक शैक्षणिक औपचारिकता नहीं रह गई है, बल्कि यह राज्य की स्कूली शिक्षा की सेहत का पैमाना बनती जा रही है। एक साल में 56 हजार बच्चों का सिस्टम से बाहर होना एक बड़ी चेतावनी है। शीतकालीन अवकाश के समय एग्जाम फॉर्म जमा करने की तिथि घोषित नहीं होना चाहिए।
रांची से तिलकुट बेचने लोहरदगा जा रहे 5 लोगों की हादसे में मौत
रांची-गुमला मुख्य मार्ग (एनएच-23) पर गुरुवार की सुबह हुए भीषण सड़क हादसे में 5 लोगों की मौत हो गई, जबकि 2 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। जानकारी के अनुसार अहले 3 बजे पिकअप (छोटा हाथी) से सात लोग रांची से लोहरदगा उर्स में तिलकुट बेचने निकले। बेड़ो से लोहरदगा की जगह गुमला की ओर निकल पड़े। इसी दौरान भरनो थाना क्षेत्र के भड़गांव के पास अहले सुबह करीब 4:30 बजे, घने कोहरे में पिकअप आगे बढ़ रहा था। तभी तेज रफ्तार हाइवा ने पीछे से पिकअप में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि पिकअप के परखच्चे उड़ गए और सड़क से करीब 40 फीट दूर खेत में जा गिरा। पिकअप के खुले डाले में बैठे चार लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक ने पारस हॉस्पिटल में दम तोड़ दिया। हादसे के बाद वाहनों की कतार लग गई। हादसे में जान गंवाने वालों की पहचान संजय कुमार (22, केरेडारी-हजारीबाग), सुनील कुमार साव (37, केरेडारी-हजारीबाग, बजरंग नायक (35, मौसीबाड़ी-रांची), बालेश्वर साहू (55, सेक्टर 2 धुर्वा) के रूप में हुई। एक व्यक्ति की पहचान नहीं हो सकी है। जाना था लोहरदगा, पर रास्ता भटक कर पहुंच गए गुमला, हो गया हादसा रांची के धुर्वा सेक्टर-2 निवासी बालेश्वर साहू तिलकुट का कारोबार करते थे। राज्य के विभिन्न हिस्सों में लगने वाले मेलों में तिलकुट बेचने के लिए उन्होंने मजदूरों को काम पर रखा था। संजय कुमार और सुनील कुमार हजारीबाग से 10 जनवरी को तिलकुट बनाने के लिए रांची आए थे, जबकि बजरंग मौसीबाड़ी (रांची) से मजदूरी के लिए आया था। गुरुवार अहले सुबह करीब 3 बजे बालेश्वर साहू ने पिकअप वाहन बुक किया और तिलकुट लेकर लोहरदगा रवाना हुए। लेकिन रास्ता भटककर गुमला की ओर चले गए। इसी के दौरान यह हादसा हो गया। जांच में पता चला है कि हादसे के वक्त दोनों वाहन अपने-अपने रूट पर थे। पुलिस ने टक्कर मारने वाले हाइवा को जब्त कर लिया है। जांच में पता चला कि घने कोहरे के बावजूद हाइवा चालक काफी तेज गति से गाड़ी चला रहा था। उसने आगे चल रही पिकअप वैन को जोरदार टक्कर मार दी। इससे वैन सड़क से नीचे उतर गई और पांच लोगों की मौत हो गई। हाइवा चालक फरार... सूचना मिलते ही भरनो थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से राहत-बचाव कार्य शुरू किया। गंभीर रूप से घायल दो लोगों को पहले सिसई रेफरल अस्पताल, फिर रिम्स रांची रेफर किया गया। टक्कर के बाद हाइवा चालक वाहन छोड़कर फरार हो गया। पुलिस ने हाइवा को जब्त कर लिया है। बजरंग नायक बालेश्वर साहू संजय कुमार सुनील कु. साव हादसे में इनकी गई जान...
सेंटर पर पहुंच गए थे, अचानक 2 केंद्रों पर स्थगित कर दी परीक्षा
जेएसएससी ने बताया तकनीकी कारण, नया शेड्यूल जल्द झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) ने गुरुवार को राजधानी रांची में दो केंद्रों पर पहली पाली की परीक्षा स्थगित कर दी। कुल 1373 पदों के लिए झारखंड प्रशिक्षित माध्यमिक आचार्य संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2025 रांची में 17 केंद्रों पर होनी थी। जेएसएससी ने इसकी वजह तकनीकी बताया है। आयोग के मुताबिक नामकुम स्थित आईक्यूब डिजिटल और उषा मार्टिन विश्वविद्यालय केंद्र पर सुबह 9 से दोपहर 12 बजे तक होने वाली परीक्षा स्थगित की है। इसके लिए नया शेड्यूल जल्दी ही जारी किया जाएगा। परीक्षा देने के लिए अभ्यर्थी सुबह 7 बजे से ही केंद्र पर पहुंचने लगे थे। वहां पहुंचने के बाद उन्हें पता चला कि परीक्षा स्थगित कर दी गई है। वहीं अन्य केंद्रों पर परीक्षा निर्धारित शेड्यूल के अनुसार हुई। जेएसएससी ने कहा कि अन्य केंद्रों पर परीक्षा पर इस स्थगन का कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। उधर, अभ्यर्थियों ने कहा कि परीक्षा स्थगन का कारण तकनीकी बताया गया है, पर पिछले वर्षों का अनुभव बताता है कि कभी सुरक्षा, कभी तकनीकी और कभी पेपर लीक से परीक्षाएं स्थगित कर दी जाती है। इससे उनकी मेहनत और समय दांव पर लग जाते हैं। इन केंद्रों पर स्थगित हुई परीक्षा परीक्षा केंद्र : आईक्यूब डिजिटल, नामकुम, रांची परीक्षा केंद्र : उषा मार्टिन विश्वविद्यालय, नामकुम, रांची प्रभावित पाली : पहली पाली (सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक) ये परीक्षाएं भी हुई थी स्थगित... 1. स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2023 : 28 जनवरी 2024 को परीक्षा के दौरान प्रश्नपत्र लीक होने जैसे आरोप सामने आए। इसके बाद आयोग ने पेपर रद्द करते हुए 4 फरवरी 2024 को होने वाली परीक्षा स्थगित कर दी। तब आयोग ने परीक्षा की समीक्षा की बात कही थी। 2. तकनीकी एवं विशेष योग्यता स्नातक स्तर परीक्षा-2025 : 9 अक्टूबर 2025 से शुरू होने वाली परीक्षा एक दिन पहले अचानक स्थगित कर दी गई थी। अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र पहुंचने के बाद इसकी जानकारी मिली। तब आयोग ने प्रशासनिक कारण बताया था। 3. संयुक्त स्नातक चयन परीक्षा -2016 : 27 नवंबर 2016 को होने वाली मुख्य परीक्षा को आयोग ने स्थगित कर दिया था। तब अभ्यर्थियों ने स्थगित करने के विरोध में धरना-प्रदर्शन भी किया था। वहीं आयोग ने स्थगित परीक्षा शीघ्र आयोजित करने की घोषणा की थी।
राजधानी के सबसे ‘वीआईपी चौराहा’ बन चुके वल्लभ भवन चौराहा पर रोड इंजीनियरिंग की 5 बड़ी खामियां उभरकर सामने आई हैं। इस चौराहा पर पहले रोटरी बनाई गई फिर हटाई गई, फिर भी यहां की परेशानी दूर नहीं हुई। आंबेडकर सेतु (जीजी फ्लाईओवर) बनने के बाद यह राजधानी का पहला ऐसा चौराहा बन गया है, जो 12 सड़कों को मिलाता है। इससे यहां वाहनों को गुजारने में और दिक्कतें सामने आ गई हैं। इस परेशानी को कम करने के मकसद से पीडब्ल्यूडी ने करीब 45 मीटर परिधि की अस्थायी बेरिकेडिंग भी की, लेकिन कारगर साबित नहीं हुई। ट्रैफिक जानकारों की मदद से अब ट्रैफिक पुलिस और पीडब्ल्यूडी ने यहां फिर पक्की रोटरी बनाने पर सहमति बनाई है। जिले के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा, जब किसी चौराहे की रोटरी गोल की बजाए अंडाकार बनेगी। ऐसा इसलिए करना पड़ेगा, क्योंकि रोटरी के चारों तरफ 14-14 मीटर जगह देनी होगी। इससे हर सड़क से आने-जाने वाला ट्रैफिक रोटरी के बगल में दी गई 14-14 मीटर जगह से गुजारा जा सकेगा। ये हैं यहां की 5 बड़ी खामियां नई प्लानिंग के 3 बिंदु 1. इस चौराहा पर नई पक्की रोटरी बनाई जाए, जिसके चारों ओर 14-14 मीटर जगह छोड़ी जाएगी। इसी से सभी चौराहों को ट्रैफिक गुजरेगा।2. हर सड़क के डिवाइडर आगे-पीछे किए जाएंगे, ताकि पूरे चौराहे पर चारों ओर 14-14 मीटर जगह निकाली जा सके। चौराहा बड़ा है, इसलिए रोटरी पूरी तरह गोल नहीं बनेगी।3. वल्लभ भवन चौराहा की ओर आने वाली सभी 6 सड़कों के लेफ्ट टर्न क्लियर करवाए जाएंगे। इनमें डीबी सिटी मॉल से आने वाली, व्यापमं से आने वाली, शौर्य स्मारक से आने वाली, कोर्ट तिराहे से आने वाली, पीएफ ऑफिस से आने वाली और जीजी फ्लाईओवर से आने वाली सड़कें शामिल हैं।
झारखंड में ठंड रोज नया रिकॉर्ड बना रही है। पहले लोग हाड़ कंपाने वाली ठंड से जूझ रहे थे, अब पाला ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राज्य में सबसे ज्यादा ठंड गुमला में दर्ज की गई है। कृषि वैज्ञानिक अटल तिवारी के अनुसार, गुरुवार को गुमला का न्यूनतम तापमान 0.8 डिग्री रहा, जो अब तक का सबसे कम है। इससे पहले वर्ष 2008 में 1.8 डिग्री न्यूनतम तापमान दर्ज हुआ था। गुमला के बाद रांची का मैक्लुस्कीगंज राज्य का दूसरा सबसे ठंडा इलाका रहा। यहां न्यूनतम तापमान लगातार 1 डिग्री बना हुआ है। इसके बाद खूंटी में न्यूनतम तापमान 2.7 डिग्री रिकॉर्ड किया गया। रांची में पिछले 24 घंटे में न्यूनतम तापमान 0.6 डिग्री बढ़कर 9 डिग्री पहुंचा, लेकिन ठंड से राहत महसूस नहीं हुई। पूर्वानुमान... 2 से 12 डिग्री के बीच रहेगा पारा अधिक खुला क्षेत्र और जंगल से कारण गिरा पारा गुमला चारों ओर से घने जंगलों से घिरा है। यहां खुला क्षेत्र अधिक है और शहरी कंक्रीट संरचनाएं कम हैं। रात में खुले और हरित क्षेत्र के कारण तापमान तेजी से गिरता है। ठंडी पछुआ हवा और साफ आसमान ने इस बार ठंड को और तीखा बना दिया। दिन में हल्की धूप निकल रही है, लेकिन पश्चिमी हवाओं के कारण ठंड का असर बना रहता है। मौसम विभाग ने 16 जनवरी के लिए राज्य के 13 जिलों में शीतलहर का यलो अलर्ट जारी किया है। इनमें रांची, खूंटी, रामगढ़, बोकारो, हजारीबाग, चतरा, पलामू, गढ़वा, लातेहार, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा और जमशेदपुर शामिल हैं। हालांकि 18 जनवरी से न्यूनतम तापमान में करीब 3 डिग्री की बढ़ोतरी संभव है। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों तक तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा, इसके बाद तीन दिनों में 3 से 4 डिग्री तक बढ़ोतरी हो सकती है।- अटल तिवारी, कृषि वैज्ञानिक गुमला
आकाश वापस लेंगे नामांकन:भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स अध्यक्ष पद पर गोविंद गोयल लड़ेंगे चुनाव
भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स के आगामी चुनाव में अब गोविंद गोयल अध्यक्ष पद के उम्मीदवार होंगे। आकाश गोयल और उनकी टीम ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया है कि आकाश अपना नामांकन वापस लेंगे। गोविंद गोयल पिछले लगभग 50 वर्षों से व्यापार और उद्योग क्षेत्र से जुड़े हैं। वे लंबे समय से व्यापारियों के मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं। वर्तमान में वे अंतरराष्ट्रीय वैश्य फेडरेशन और कन्फेडरेशन ऑफ एमपी इंडस्ट्री, सर्विस एंड ट्रेड (COMPIST) के अध्यक्ष हैं। वे फेडरेशन ऑफ एमपी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज में कोषाध्यक्ष भी रह चुके हैं। गोविंद गोयल ने व्यापारियों के हित में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति निगम के नए ऑनलाइन सॉफ्टवेयर से परिवहन व्यापार में आने वाली समस्याएं उठाईं थी। इसके बाद 123 करोड़ की पेनल्टी हटाई गई। कलेक्टर गाइडलाइन में 20 प्रतिशत तक कमी कराने में भी उनकी भूमिका रही। इससे रियल एस्टेट कारोबार को राहत मिली। सामाजिक क्षेत्र में वे भोपाल जन सेवा समिति से जुड़े हैं। इसके माध्यम से निःशक्तजनों को कृत्रिम अंग उपलब्ध कराए गए। वे संस्था सृजन के जरिए 1100 से अधिक बेटियों के विवाह करा चुके हैं। अन्य सामाजिक गतिविधियां भी संचालित कर रहे हैं।
जांच करने ईडी ऑफिस पहुंची रांची पुलिस, दो अधिकारियों से पूछताछ
राजनीति गरमाई : भाजपा-झामुमो ने एक-दूसरे को घेरा प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के दो अधिकारियों पर मारपीट के आरोपों की जांच करने रांची पुलिस की टीम गुरुवार सुबह ईडी ऑफिस पहुंची। सदर और सिटी डीएसपी के नेतृत्व में पुलिस टीम ने ईडी के सहायक निदेशक प्रतीक और सहायक शुभम से पूछताछ की। ई-साक्ष्य एकत्र किए। दोपहर करीब 12:45 बजे एफएसएल की टीम भी वहां पहुंची। उस स्थान के नमूने लिए, जहां मारपीट की घटना होने का आरोप है। जांच पूरी होने के बाद पुलिस शाम करीब 4:40 बजे वहां से निकली। जांच एजेंसी के दोनों अधिकारियों के खिलाफ पेयजल एवं स्वच्छता प्रमंडल, हटिया योजना (डोरंडा) के क्लर्क संतोष कुमार ने 12 जनवरी को एयरपोर्ट थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें कहा है कि पूछताछ के दौरान ईडी के अधिकारियों ने उनके सिर पर डंडे से वार किया। गाली-गलौज की और जान से मारने की धमकी दी। इससे उसका सिर फट गया। उसे सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां सिर पर छह टांके लगे। अधिकारियों ने डॉक्टर को सच्चाई न बताने का दबाव डाला। धमकाया कि ऐसा किया तो पूरे परिवार को जेल भेज दिया जाएगा। इसके बाद उसे फिर ईडी कार्यालय ले जाया गया था। हाईकोर्ट पहुंचा ईडी, सीबीआई जांच की मांग, आज होगी सुनवाई इस मामले को लेकर ईडी ने गुरुवार को झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। इसमें पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की गई है। इस याचिका पर शुक्रवार को हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। इससे पहले पुलिस की टीम जैसे ही ईडी ऑफिस पहुंची, वहां केंद्रीय बल के अतिरिक्त जवानों को बुला लिया गया, ताकि विधि-व्यवस्था न बिगड़े। रांची पुलिस और केंद्रीय पुलिस बल के जवान ऑफिस परिसर में तक तैनात रहे, जब तक जांच पूरी नहीं हो गई। उधर, पुलिस की इस कार्रवाई के बाद राजनीति भी गरमा गई है। केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग करने पर बाबूलाल पर केस दर्ज करें : सुप्रियो झामुमो के प्रवक्ता सुप्रियो भट्टाचार्य ने बाबूलाल मरांडी के बयान पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि जब कोई एफआईआर दर्ज होती है, तो पुलिस का जांच के लिए जाना स्वाभाविक है। मरांडी केंद्रीय बलों की तैनाती की मांग कर राज्य पुलिस और केंद्रीय बलों में टकराव की स्थिति पैदा करना चाहते हैं। उन्होंने बाबूलाल मरांडी के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की मांग भी की। रांची पुलिस की कार्रवाई ईडी के साक्ष्यों को नष्ट करने की साजिश है : बाबूलाल नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि रांची स्थित ईडी कार्यालय में पुलिस कार्रवाई की आड़ में साक्ष्य नष्ट करने की साजिश हो रही है। उन्होंने कहा कि वहां मुख्यमंत्री और पुलिस-प्रशासन से जुड़े हजारों करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार से संबंधित अहम दस्तावेज मौजूद हैं। मरांडी ने पीएमओ और गृह मंत्रालय से ईडी कार्यालय में केंद्रीय बलों की स्थायी तैनाती की मांग की। ईडी अफसर बोले-बिना समन आया था संतोष, खुद सिर पर मार लिया जग ईडी के अधिकारियों ने कहा-संतोष को समन नहीं दिया था। वह खुद आया था और आईओ के पास गया। आईओ ने उससे कुछ फॉर्म भरवाए। फिर पूछताछ शुरू की। जेल में उसने कुछ लोगों का नाम बताया था। उसके बारे में पूछा तो कोई जानकारी नहीं दी। आईओ ने कहा कि तुम नहीं बताओगे तो तुम्हारे घर वाले जवाब देंगे। इस पर वह भड़क गया। टेबल पर रखे शीशे के जग को अपने सिर पर मार लिया। अधिकारी उसे सदर अस्पताल ले गए। वहां एक टांका लगा। उसने लिखकर दिया है कि खुद सिर पर जग मारा है। रांची पुलिस को पूछताछ में हमने पूरा सहयोग किया। फोटोग्राफी करने दी। टूटे शीशे को साथ ले गई। इधर रांची एसएसपी ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। सहायक निदेशक प्रतीक व सहायक शुभम से पूछताछ की, घटनास्थल से नमूने लिए
गणतंत्र दिवस रिहर्सल...:19 से 26 तक दिल्ली की दो फ्लाइट कैंसिल
गणतंत्र दिवस की रिहर्सल और सुरक्षा कारणों से दिल्ली एयरस्पेस पर प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। इसका असर भोपाल और दिल्ली के बीच हवाई यातायात पर पड़ेगा। इस दौरान दो नियमित फ्लाइट्स को अलग-अलग तारीखों में कैंसिल किया गया है, जिससे यात्रियों की मुश्किलें बढ़ेंगी और कुल 396 सीटें कम हो जाएंगी। एअर इंडिया की फ्लाइट एआई 1723/1894, जो दिल्ली से 12:05 बजे भोपाल आती है और 12:35 बजे वापस जाती है, 21 से 26 जनवरी तक कैंसिल रहेगी। इससे 164 सीटें कम होंगी। वहीं, इंडिगो की फ्लाइट 6ई 6364/6365, जो 1:15 बजे भोपाल आती है और 1:45 बजे रवाना होती है, 19 से 26 जनवरी तक रद्द रहेगी, जिससे 232 सीटें यात्रियों के लिए कम होंगी। एयरपोर्ट सूत्रों के अनुसार इस अवधि में विजिटर पास भी बंद रहेंगे और यात्रियों के साथ आए परिजनों को टर्मिनल में प्रवेश नहीं मिलेगा।
लाखों लोगों का सैलाब... हर चेहरे पर सेना के साहस के गर्व का तेज... सामने थे शौर्य और ताकत का प्रदर्शन करते सैनिक। यह नजारा गुरुवार को महल रोड पर 78वें सेना दिवस पर आयोजित ‘वीरोत्सव’ में बताने के लिए काफी था कि हमारा देश ‘अभेद्य दुर्ग’ है। ब्रह्मोस मिसाइल, अत्याधुनिक हथियार पिनाका मल्टी-बैरेल रॉकेट लॉन्चर, सूर्यास्त्र, आकाश तीर एयर डिफेंस सिस्टम और इगला मिसाइल ने दिखाया कि दुश्मन कहीं टिकने वाला नहीं है। बीकानेर के नाल एयरबेस से उड़ान भरकर आए जगुआर फाइटर जेट के कौशल ने साबित किया कि आसमां का प्रहरी सजग और सक्षम है। सेना का जैसे-जैसे कार्यक्रम बढ़ा वैसे-वैसे लोगों में जुनून परवान चढ़ता गया। लोगों का एक नारा बुलंद था...भारत माता की जय। राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, सिक्किम के राज्यपाल जनरल (रिटायर्ड) वीके सिंह, मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, सीडीएस अनिल चौहान, थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी, साउथ वेस्टर्न कमांड के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल मजिंदर सिंह मौजूद रहे। महल रोड पर परेड देखने डेढ़ लाख से भी ज्यादा लोग पहुंचे। इधर, शाम 8 बजे एसएमएस स्टेडियम में ड्रोन शो के दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी मौजूद रहे। सेनाध्यक्ष से मेडल लेते समय वीरमाता बेहोश देश के लिए जान देने वाले 5 जवानों के परिजनों को सेना मेडल दिया गया। इनमें 7 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए सूबेदार मेजर पवन कुमार, कुपवाड़ा में शहीद हुए हवलदार सुनील कुमार। घुसपैठ रोकने में शहीद हुए जवान सुभाष कुमार और आतंकियों से मुठभेड़ में शहीद हुए लांस नायक प्रदीप कुमार शामिल हैं। इस मौके पर शहीद लांस नायक प्रदीप कुमार की वीर माता रामस्नेही मेडल लेते समय बेहोश हो गईं। सेना अधिकारियों ने संभाला और परेड स्थल पर बनाए आर्मी अस्पताल में पहुंचाया। जानिए हमारी सेना की शक्ति सूर्यास्त्र - सूर्यास्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर है। एक ही सिस्टम से अलग-अलग प्रकार के रॉकेट और मिसाइलें दागने की क्षमता रखता है।खासियत - 150 किमी तक रेंज है ब्रह्मोस - ब्रह्मोस मैक 3 गति और 400 किमी रेंज में मार करती है। 5 वर्जन बन चुके। इसकी क्षमता 800 किमी बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। खासियत - जमीन-हवा-समुद्र से दाग सकते हैं अर्जुन - अर्जुन टैंक तीसरी पीढ़ी का मुख्य युद्धक टैंक है। इसे डीआरडीओ ने विकसित किया है। सभी मौसम में काम करता है। खासियत : विमानभेदी मशीन गन तैनात है भीष्म - टी-90 भीष्म टैंक 125 मिमी स्मूथ बोर गन और लेजर निर्देशित इनवार मिसाइल से लैस है। 5 किमी तक मार कर सकता है। 1000 हॉर्स पावर का इंजन है। 60 किमी/घंटा की रफ्तार से चलता है। चौथी बार दिल्ली के बाहर आयोजन 2026 : जयपुर में आयोजन किया गया। 2025: सेना दिवस परेड पुणे, महाराष्ट्र। 2024: परेड लखनऊ, उत्तर प्रदेश में।2023: परेड बेंगलुरु, कर्नाटक में। जनरल द्विवेदी ने कहा- लंबे युद्धों के लिए हथियारों का स्वदेशीकरण जरूरीथल सेनाध्यक्ष उपेंद्र द्विवेदी ने कहा कि हथियारों का स्वदेशीकरण जरूरी है। युद्ध दाे दिन चलेगा या दाे साल तक पता नहीं, लंबा युद्ध तभी लड़ा जा सकेगा जब हथियारों का निर्माण व रिपेयरिंग देश में हाे। भविष्य की चुनौतियों काे देखते हुए सेना का आधुनिकीकरण हो रहा है। सेना हर मोर्चे पर लड़ने काे तैयार है। जयपुर की जनता के उत्साह काे देखकर लगता है सेना और जनता के बीच गहरा संबंध है।
अवैध कॉलोनी:FIR बस किसानों पर, कॉलोनाइजर को क्यों छोड़ रहे?
राजधानी में बीते 48 घंटे के भीतर 11 से अधिक अवैध कॉलोनियों पर एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है। जबकि गुरुवार को 12 नई कॉलोनियों पर केस दर्ज कराने के लिए दस्तावेज जुटाए गए। देर शाम तक एफआईआर दर्ज नहीं हो सकी, लेकिन प्रशासन को उम्मीद है कि शुक्रवार-शनिवार तक ये प्रकरण भी दर्ज हो जाएंगे। कलेक्टर की सख्ती के बाद अब अवैध कॉलोनियों में सड़क, बाउंड्रीवॉल सहित अन्य निर्माण तोड़ने के लिए पुलिस बल की मांग की गई है। प्रशासन ने 113 कॉलोनी की लिस्ट बनाई है। हालांकि, इस अभियान के तहत जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जा रही है, उनमें से अधिकांश किसान हैं, जबकि कॉलोनी काटने वाले लोग अलग हैं। दस्तावेजों में कॉलोनाइजरों के नाम नहीं होने के कारण प्रशासन का शिकंजा जमीन मालिक किसानों पर ही कस रहा है। लेकिन, सवाल है कि अवैध कॉलोनी काटने वालों पर केस क्यों नहीं हो रहे? लेकिन, पहले की जमीनों का अधिग्रहण नहीं हुआपिछले साल जिला प्रशासन ने दावा किया था कि अवैध कॉलोनियों की सुनवाई के बाद जमीनों का अधिग्रहण कर कॉलोनाइजरों पर एफआईआर दर्ज की जाएगी। बची जमीनों को बेचकर कॉलोनी का विकास किया जाएगा। लेकिन, हकीकत यह है कि आज तक न तो किसी जमीन का अधिग्रहण हुआ और न ही किसी कॉलोनी का विकास। 294 एफआईआर दर्ज होने के बावजूद ज्यादातर मामलों में अब तक ठोस नतीजे सामने नहीं आए हैं। तो कॉलोनाइजर बच निकलतेहकीकत यह है कि कॉलोनी काटने वाले लोग जमीन अपने नाम पर नहीं कराते। वे एग्रीमेंट के आधार पर पूरा कारोबार करते हैं और रजिस्ट्री किसान के नाम ही रहती है। मोटे मुनाफे के लालच में कई किसान इस प्रक्रिया में शामिल हो जाते हैं, लेकिन जब कार्रवाई होती है तो कॉलोनाइजर बच निकलते हैं और जमीन मालिक किसान ही कानूनी पचड़े में फंस जाते हैं। इस बार भी हालात कुछ ऐसे ही सामने आए हैं। राजनीतिक रसूख से कार्रवाई नहींराजधानी में शायद ही कोई इलाका हो जहां अवैध कॉलोनियों का जाल न फैला हो। प्रशासन एफआईआर तो दर्ज कराता है, लेकिन राजनीतिक रसूख के चलते कई मामलों में ठोस कार्रवाई नहीं हो पाती। यही कारण है कि सस्ती कृषि भूमि पर प्लॉटिंग कर ऊंचे दामों पर बिक्री का खेल लगातार जारी है। इस पूरे मामले में सबसे ज्यादा नुकसान आम खरीदार को उठाना पड़ता है। बिना वारंट कार्रवाई हो सकती है... मप्र पंचायत राज, ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 61-घ(3) अवैध कॉलोनी निर्माण और गैरकानूनी भूमि डायवर्जन से जुड़ी है। इसमें दोषी को 3 से 7 साल कारावास और न्यूनतम 10 हजार रुपए जुर्माना होगा। यह संज्ञेय अपराध है, पुलिस बिना वारंट कार्रवाई कर सकती है।
ट्रेवल हिस्ट्री के आधार पर संदिग्ध संक्रमित व्यक्तियों की स्क्रीनिंग, सर्विलांस का निर्देश
निपाह वायरस को लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन झारखंड ने एसओपी जारी की है। साथ ही राज्य के सभी सिविल सर्जनों को निर्देशित किया है कि पश्चिम बंगाल के एम्स कल्याणी द्वारा निपाह वायरस संक्रमण के दो मामलों की पुष्टि की गई है। इन मामलों के सामने आने के बाद, संक्रमित व्यक्त्तियों के संपर्क में आये हुए लोगों की निगरानी की जा रही है। निपाह वायरस एक गंभीर जूनोटिक (पशु से मनुष्य में फैलने वाला) रोग है। जिसकी मृत्यु दर बहुत अधिक है। वर्तमान में झारखंड में निपाह वायरस संक्रमण का कोई भी मामला प्रकाश में नहीं आया है। सतर्कता ही इस बीमारी से बचाव है। इस रोग का कोई समुचित इलाज नहीं है। निपाह वायरस से संक्रमित मरीजों का आवागमन रेलगाड़ी एवं हवाई मार्ग से झारखंड में भी हो सकता है, जिसके लिए जिलों में निगरानी जरूरी है। पश्चिम बंगाल से सटे झारखंड के जिलों में आये हुए व्यक्तियों की ट्रेवल हिस्ट्री के आधार पर संभावित व्यक्तियों की स्क्रीनिंग, सर्विलांस तथा रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने को कहा गया है। निपाह वायरस के संदिग्ध मामलों की तत्काल सूचना राज्य /जिला सर्विलांस इकाई को देने का निर्देश दिया गया है। आम लोग बरतें ये सावधानी आंशिक रूप से खाए गए या गिरे हुए फलों का सेवन न करें। कच्चा खजूर रस/ ताड़ी का सेवन न करें। बीमार व्यक्ति से अनावश्यक संपर्क से बचें। अफवाहों से बचने के लिए केवल सरकारी सूचना स्रोतों पर विश्वास करें।
अब कॉलेजों में हर 100 छात्र पर रहेंगे एक साइकोलॉजिस्ट
यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) द्वारा यूनिवर्सिटी और कॉलेजों समेत उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए मेंटल हेल्थ और वेल-बीइंग पर गाइडलाइन का ड्राफ्ट जारी किया गया है। इसके तहत हर 100 छात्रों पर एक साइकोलॉजिस्ट या मेंटल हेल्थ प्रोफेशनल की नियुक्ति अनिवार्य होगी। सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को डेडिकेटेड मेंटल हेल्थ और वेल-बीइंग सेंटर स्थापित करना होगा। साथ ही मेंटल हेल्थ मॉनिटरिंग कमेटी के माध्यम से इसकी निगरानी करनी होगी। यूजीसी ने इस ड्राफ्ट पर सभी स्टेक होल्डर से 29 जनवरी 2026 तक सुझाव मांगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि क्लासरूम का दबाव, प्रतियोगी माहौल, फेल होने का डर, भविष्य की अनिश्चितता, अकेलापन और सोशल आइसोलेशन वर्तमान समय में छात्र जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। लेकिन अब इन मानसिक संघर्षों को केवल व्यक्तिगत कमजोरी कह कर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है, इसलिए यह कदम उठाया जा रहा है। संस्थानों के समक्ष ये चुनौतियां : संस्थानों के समक्ष साइकोलॉजिस्ट नियुक्ति को लेकर कई चुनौतियां हैं। क्योंकि छात्रों की संख्या के अनुपात में प्रशिक्षित साइकोलॉजिस्ट की कमी है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र के उच्च शिक्षण संस्थान सीमित संसाधन में संचालित किए जा रहे हैं। ऐसे में 100 छात्रों पर एक साइकोलॉजिस्ट की नियुक्ति से आर्थिक बोझ बढ़ेगा। छात्रों में तनाव व डिप्रेशन कम करने में मदद करेगा उच्च शिक्षा में हर 100 छात्रों पर एक योग्य साइकोलॉजिस्ट की नियुक्ति न केवल समय पर सहायता सुनिश्चित करेगी, बल्कि छात्रों में तनाव और डिप्रेशन जैसी समस्याओं को कम करने में भी मदद करेगी। मैं उम्मीद करता हूं कि सभी संस्थान इसे गंभीरता से लागू करेंगे और कैंपस में मानसिक स्वास्थ्य को स्थायी रूप से मजबूत बनाएंगे। संस्थान क्या करेंगे... सुप्रीम आदेश से बनी नीति यूजीसी ने यह ड्राफ्ट सुप्रीम कोर्ट के 2025 के एक फैसले के निर्देशों के बाद बनाया है। कोर्ट ने कहा था कि छात्रों की आत्महत्या शिक्षा व्यवस्था की सामूहिक विफलता है। उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए केंद्र सरकार समान राष्ट्रीय मेंटल हेल्थ नीति बनाए।- डॉ. परवेज हसन, एचओडी, साइकोलॉजी पीजी
स्लॉटर हाउस से बाहर निकले मीट में गोमांस के मुद्दे पर शहर की राजनीति गर्म है। परिषद की बैठक में तीखे तेवर के बाद अघ्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने महापौर मालती राय और निगमायुक्त संस्कृति जैन दोनों को निशाने पर लिया है। उनका सवाल है कि आखिर महापौर और कमिश्नर स्लॉटर हाउस के संचालन की अनुमति का प्रस्ताव परिषद में लेकर क्यों नहीं आए? नगर निगम अपनी तरफ से असलम के खिलाफ एफआईआर क्यों नहीं करा रहा है? अध्यक्ष के आरोपों पर कमिश्नर ने कार्रवाई करने की बात कही। इधर, महापौर ने कहा कि स्लॉटर हाउस के टेंडर से लेकर वर्क ऑर्डर की पूरी प्रक्रिया प्रशासक कार्यकाल की है। पीपीपी आधार पर बने इस स्लॉटर हाउस में नगर निगम के बजट से राशि खर्च नहीं हुई है, इसलिए परिषद में लाने की जरूरत नहीं है। परिषद अध्यक्ष VS महापौर हर जवाब पर उठ रहे सवाल सूर्यवंशी का आरोप - पिछले परिषद कार्यकाल में तो स्लॉटर हाउस का मुद्दा परिषद में आता था। अगर महापौर नहीं ला रहीं थीं तो कमिश्नर को यह काम करना था। सूर्यवंशी- इस मामले में अब तक जितनी भी कार्रवाई हुई है वह या तो हिंदू संगठनों ने किया है या पुलिस ने। नगर निगम स्लॉटर हाउस संचालक असलम के खिलाफ एफआईआर क्यों नहीं करा रहा? सूर्यवंशी - असलम ने कहा है कि स्लॉटर हाउस का संचालन नगर निगम कर रहा है। फिर निगम पीपीपी कहकर कैसे बच रहा है? कमिश्नर पर आरोप- मानवाधिकार आयोग द्वारा असलम की शिकायत पर जांच डीसीपी जोन-1 आईपीएस आशुतोष गुप्ता ने कर क्लीनचिट दी। गुप्ता निगमायुक्त के पति हैं। वे इसी वजह से कार्रवाई नहीं कर रहीं। महापौर का जवाब - पीपीपी मोड पर बने स्लॉटर हाउस में निगम की राशि खर्च नहीं हुई। और बाकी प्रक्रिया प्रशासक कार्यकाल में हो गई थी। इसलिए इसकी आवश्यकता नहीं थी। महापौर- नगर निगम प्रशासन की ओर से शाम को ही पुलिस को पत्र लिखा गया है। पुलिस की कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद जरूरत हुई तो निगम भी असलम पर एफआईआर कराएगा। महापौर- असलम ने यह बात पिछले साल अक्टूबर महीने में कही थी। हमने स्लॉटर हाउस असलम को 7 नवंबर 2025 को सौंपा। कमिश्नर संस्कृति जैन का जवाब- इस प्रकरण में हमारी तरफ से नियमानुसार हर संभव कार्रवाई की जा रही है। महापौर को पद से हटाने कांग्रेस संभागायुक्त को सौंपेगी पत्रपार्षद गुड्डू चौहान ने कहा- महापौर ने परिषद को बताए बिना बेशकीमती जमीन निजी व्यक्ति को दी। गोमांस मामले में कोई भी कार्रवाई नहीं हुई। यह नगरपालिक निगम अधिनियम के तहत कदाचरण है। कांग्रेस महापौर को हटाने के लिए संभागायुक्त को पत्र सौंपेगी। आरोप: स्लॉटर हाउस में रोहिंग्या... राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने पिछले साल जून में शिकायत की थी कि स्लॉटर हाउस में रोहिंग्या काम कर रहे हैं। तब के डीसीपी जोन-1 आईपीएस आशुतोष गुप्ता ने 24 अक्टूबर की रिपोर्ट में इसे गलत बताया था।
डिजिटल पेमेंट की रफ्तार तेज, तीन साल में रांची में 74 एटीएम हुईं बंद
डिजिटल लेन-देन के बढ़ते चलन से झारखंड में एटीएम की संख्या लगातार घट रही है। नोटबंदी के समय जिन एटीएम के सामने लंबी कतारें लगती थीं, वे अब धीरे-धीरे गैर-जरूरी होती जा रही हैं। तीन साल में रांची में एटीएम की संख्या काफी तेजी से घटी है। यहां 2022 तक कुल 787 एटीएम थीं, जो 2025 में घटकर 713 रह गई हैं। वहीं, पिछले दो साल में राज्य में एटीएम की संख्या में 3.5% की गिरावट दर्ज की गई है। बैंक नई एटीएम लगाने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। हालांकि इनकी शाखाएं बढ़ रही हैं। बैंकिंग आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2023 में झारखंड में 3433 एटीएम थीं, जो सितंबर 2025 में घट कर 3338 रह गईं। दो साल में राज्यभर में 100 से ज्यादा एटीएम कम हुई हैं। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के व्यापक मॉड्यूल सर्वे के मुताबिक, राज्य में 43 प्रतिशत लोग ऑनलाइन लेन-देन करते हैं। शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष से ऊपर के 62 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 40 प्रतिशत लोग डिजिटल बैंकिंग में सक्षम हैं। सिर्फ तीन माह में प्राइवेट सेक्टर बैंक के 52 एटीएम कम हुए। बैंक ऑफ इंडिया ने तीन माह में 6 एटीएम कम किए हैं। हालांकि एसबीआई ने एटीएम की संख्या बढ़ाई है। एटीएम का उपयोग लगातार घट रहा, दो साल में आधी रह जाएगी इनकी संख्या आने वाले दो वर्षों में देश में एटीएम की संख्या में लगभग करीब 50 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है। पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल और ऑनलाइन बैंकिंग लेन-देन में तेजी से वृद्धि हुई है, जिससे एटीएम की उपयोगिता लगातार घट रही है। एक एटीएम मशीन लगाने में बैंक को लगभग 4 से 5 लाख रुपए खर्च आता है। किसी एटीएम को लाभकारी बनाए रखने के लिए प्रतिदिन कम से कम 250 लेन-देन जरूरी हैं, लेकिन कई स्थानों पर यह संख्या पूरी नहीं हो पा रही है, जिससे बैंक घाटे में जा रहे हैं। अब सब्जी और फल विक्रेता जैसे छोटे व्यापारी भी डिजिटल भुगतान अपना रहे हैं। हालांकि एसबीआई ने एटीएम की संख्या बढ़ाई है। तीन तरह की होती हैं एटीएम ऑन व ऑफसाइट एटीएम लगाते हैं ऑनसाइट एटीएम बैंक शाखा या आसपास लगते हैं। इनकी देखभाल बैंक खुद करता है। ऑफसाइट एटीएम मॉल, रेलवे स्टेशन, हवाई अड्डे, अस्पताल में स्थापित किए जाते हैं। राज्य में एटीएम घटे तीन साल में ऐसे घटी एटीएम बैंक 31 मार्च 2025 31 मार्च 2022 एसबीआई, बैंक ऑफ इंडिया 1497 1582 अन्य पब्लिक सेक्टर बैंक 863 885 प्राइवेट सेक्टर बैंक 842 792 कोऑपरेटिव बैंक 34 34 स्मॉल फाइनेंस बैंक 50 36 {एटीएम की कमी से नकदी निकालने में परेशानी : एटीएम की संख्या कम होने से नकदी निकालने में परेशानी आ रही है। कम एटीएम होने के कारण लंबी कतारें लगती हैं, विशेषकर वेतन और पेंशन के समय, जिससे बुजुर्गों और महिलाओं को अधिक कठिनाई होती है। दूसरे बैंक के एटीएम का उपयोग करने पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ता है। प्रकाश उरांव, ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कनफेडरेशन के झारखंड महासचिव अल्बर्ट एक्का चौक पर बंद पड़े एटीएम। नोट : झारखंड में कुल ब्रांच 30 मार्च 2022 में 3211 थे, जो 2025 मार्च में बढ़कर 30242 हो गए। राज्य की जनसंख्या भी बढ़ी है, लेकिन एटीएम की संख्या घटी है। भास्कर एक्सक्लूसिव रांची में 2022 तक कुल 787 एटीएम थीं, जो 2025 में घटकर 713 रह गई हैं
राज्य में 6178 एकड़ रक्षा भूमि, खुलेगा सब-डीईओ ऑफिस
रक्षा मंत्रालय की ओर से झारखंड में रक्षा भूमि के प्रबंधन को सुदृढ़, प्रभावी और समयबद्ध बनाने को लेकर बिहार के दानापुर रक्षा संपदा कार्यालय ने रांची में रक्षा संपदा उप कार्यालय की स्थापना की है। यह कार्यालय मोरहाबादी रोड के रेडियम चौक के पास एसएसपी ऑफिस के सामने बना है। 17 जनवरी की सुबह 11 बजे कार्यालय का उद्घाटन किया जाएगा। इसे लेकर बिहार के दानापुर के डीईओ मो. अली और रामगढ़ सीईओ अनंत आकाश ने बताया कि इस कार्यालय का उद्घाटन मुख्य अतिथि राज्यपाल संतोष गंगवार, अति विशिष्ट अतिथि रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ, रक्षा संपदा के महानिदेशक शोभा गुप्ता द्वारा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि रांची ऑफिस में 2 एसडीओ ग्रेड वन, 2 एसडीओ ग्रेड टू, एक एओ, एक एसएओ की दानापुर से पोस्टिंग की गई है। बताया गया कि झारखंड में रांची, रामगढ़, हजारीबाग, जमशेदपुर और पाकुड़ जिलों में 6178 एकड़ रक्षा भूमि है। अभी दानापुर से हो रहा रक्षा भूमि प्रबंधन वर्तमान में झारखंड के जिलों व सैन्य स्टेशनों की रक्षा भूमि का प्रबंधन दानापुर के डीईओ कार्यालय से किया जा रहा है। लेकिन, व्यापक क्षेत्राधिकार व भौगोलिक दूरी के कारण रक्षा भूमि से संबंधित प्रशासनिक व कार्यात्मक मामलों के निस्तारण में विलंब की स्थिति उत्पन्न हो रही थी। अब, रांची में रक्षा संपदा उप कार्यालय की स्थापना से झारखंड में रक्षा भूमि प्रबंधन की प्रक्रिया सुगम, त्वरित व प्रभावी हो सकेगी। बताया गया कि 1963 में कोलकाता सर्कल से अलग होकर दानापुर कार्यालय बना। रांची में उप कार्यालय खुलने से रक्षा भूमि प्रबंधन में तेजी आएगी।
हाईकोर्ट ने हाईस्कूल शिक्षकों के 3704 पद सरेंडर करने के मामले में जेएसएससी से मांगा जवाब
झारखंड हाईकोर्ट में गुरुवार को हाई स्कूल शिक्षकों के 3,704 पदों को सरेंडर करने के खिलाफ दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। जस्टिस आनंद सेन की अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद राज्य कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) और राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने सरकार से पूछा है कि इन पदों को स्थायी रूप से समाप्त किया गया है या केवल वर्तमान में योग्य अभ्यर्थियों के अभाव में खाली रखा गया है। मामले में अगली सुनवाई आठ सप्ताह बाद होगी। इस संबंध में लीला मुर्मू एवं अन्य की ओर से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। प्रार्थियों की ओर से अधिवक्ता चंचल जैन ने अदालत को बताया कि वर्ष 2016 में 17,786 पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी हुआ था, लेकिन बाद में आरक्षित वर्ग के 3,704 पदों को बिना किसी ठोस कारण के सरेंडर कर दिया गया। यह कदम आरक्षण नीति और समान अवसर के संवैधानिक अधिकार के विरुद्ध भी है।
हाईकोर्ट से सीएम को राहत नहीं, समन के अवहेलना मामले में याचिका खारिज
झारखंड हाईकोर्ट में जमीन घोटाले की जांच के दौरान ईडी के समन की अवहेलना मामले में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की याचिका पर सुनवाई हुई। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान हेमंत को राहत देने से इंकार करते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने कहा कि इस स्टेज में हाईकोर्ट हस्तक्षेप नहीं कर सकता। इससे पहले सुनवाई के दौरान हेमंत सोरेन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि ईडी के समन पर उनकी ओर से जवाब दिया जा रहा था। कुछ समन पर उनकी ओर से समय दिए जाने के लिए पत्र भी लिखा गया था। उन्होंने जांच में हमेशा ईडी का सहयोग किया। जबकि, इस दलील का ईडी की ओर से विरोध दर्ज कराया गया। ईडी की ओर से अधिवक्ता एके दास, जोहेब हुसैन और सौरव कुमार ने कहा कि हेमंत को ईडी की ओर से कई बार समय किया गया था। लेकिन वे समन की तिथि पर उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद ईडी ने समन की अवहेलना मामले में हेमंत सोरेन के खिलाफ कोर्ट में शिकायतवाद दर्ज कराया था। इस मामले की सुनवाई रांची की एमपी-एमएलए कोर्ट में चल रही है। मालूम हो कि एमपी-एमएलए कोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लिया है, जिसको हेमंत सोरेन की ओर से हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी। हेमंत ने एमपी- एमएलए कोर्ट के संज्ञान को गलत बताते हुए इसे निरस्त करने का आग्रह झारखंड हाईकोर्ट से किया था।
विधान सभा:मार्शल पद पर पुलिस-सैन्य अधिकारियों की नियुक्ति का रास्ता साफ
राज्य विधानसभा में मार्शल, अतिरिक्त मार्शल एवं उप मार्शल के पद पर पुलिस, सैन्य एवं अर्द्धसैनिक बल के अधिकारियों की नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। राज्य के विधि विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। संबंधित पदों पर नियुक्ति चाहने वाले अधिकारियों को इसके लिए आवेदन करना होगा। आवेदनों में से नियुक्ति पर निर्णय तीन सदस्यीय कमेटी करेगी।गौरतलब है कि गत 30 दिसंबर को राजस्थान विधानसभा सचिवालय (भर्ती तथा सेवा की शर्तें) नियम, 1992 में संशोधन की कैबिनेट में स्वीकृति प्रदान की गई थी। अब विधि विभाग ने जारी की अधिसूचना संशोधित नियमों के अनुसार मार्शल, अतिरिक्त मार्शल एवं उप मार्शल के पदों को अब राजस्थान पुलिस सेवा के अधिकारियों के अतिरिक्त सैन्य एवं अर्द्धसैन्य बलों के अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति, ट्रांसफर अथवा विशेष चयन के माध्यम से भी भरा जा सकेगा। संशोधित प्रावधानों के अंतर्गत मार्शल के एल-19, अतिरिक्त मार्शल के एल-16 एवं उप मार्शल एल-14 पे लेवल के पुलिस अधिकारियों अथवा सैन्य एवं अर्द्ध सैन्य बल सेवा के एक पे लेवल कम या समकक्ष पे लेवल पर भरे जाएंगे। इसमें अधिकारियों की उम्र 45 साल से कम होनी चाहिए। वहीं, सहायक मार्शल के पद के लिए राजस्थान अधीनस्थ पुलिस सेवा से उप निरीक्षक पद पर न्यूनतम 3 वर्ष और राजस्थान विधानसभा सचिवालय में कम से कम एक वर्ष तक लगातार कार्य करने का अनुभव अनिवार्य किया गया है। विशेष चयन के मामले में चयन समिति करेगी फैसला...विशेष चयन के मामले में इच्छुक पात्र अधिकारियों से आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे। पद चयन समिति की ओर से भरा जाएगा। समिति में विधानसभा के प्रमुख सचिव, विशिष्ट सचिव और विधानसभा अध्यक्ष की ओर से नामित अधिकारी होंगे। पात्र अधिकारियों में पांच साल की सेवा अनिवार्य होनी चाहिए और मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नात्तक डिग्री।
16 फरवरी से सत्र, 19 को आ सकता है बजट:विधानसभा में इस बार 19 दिन का बजट सत्र, सदन 12 दिन चलेगा
मौजूदा सरकार के कार्यकाल में इस बार सबसे लंबा बजट सत्र आयोजित होने जा रहा है। मध्यप्रदेश विधानसभा का बजट सत्र 19 दिन लंबा होगा, जिसमें 12 दिन सदन में कामकाज चलेगा। बजट सत्र की शुरुआत 16 फरवरी से होगी और इसका समापन 6 मार्च को होगा। 19 फरवरी को 2026-27 का बजट आ सकता है। इसके दौरान होली का त्योहार भी पड़ेगा। विधानसभा सचिवालय ने गुरुवार को बजट सत्र की अधिसूचना जारी कर दी है। 2025 में बजट सत्र 10 मार्च से 24 मार्च तक चला था। यह सत्र 15 दिन लंबा था, लेकिन सदन की बैठकें केवल 9 दिन हुई थीं। बजट सत्र की शुरुआत 16 फरवरी को : राज्यपाल के अभिभाषण से होगी। 17 और 18 फरवरी को अभिभाषण पर चर्चा तय है। संभवत: 19 फरवरी को डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा वित्त वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगे। 20 फरवरी, 27 फरवरी और 6 मार्च को प्राइवेट मेंबर बिल और अशासकीय संकल्प रखे जाएंगे। 10 फरवरी तक विधायक दे सकेंगे प्रस्ताव: विधानसभा सचिवालय के अनुसार 4 फरवरी तक विधायक अशासकीय विधेयकों की सूचना दे सकेंगे। 5 फरवरी तक अशासकीय संकल्प लिए जाएंगे। वहीं 10 फरवरी तक स्थगन प्रस्ताव, ध्यानाकर्षण और नियम 267-क से जुड़ी सूचनाएं स्वीकार की जाएंगी।
हाई कोर्ट ने कहा:शादी के बाद मप्र आकर बसीं महिलाओं का आरक्षण नहीं छीना जा सकता
हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि शादी के बाद किसी अन्य राज्य से मप्र आकर स्थायी रूप से बसने वाली महिलाओं को आरक्षण के लाभ से वंचित नहीं किया जा सकता। जस्टिस जयकुमार पिल्लई की बेंच ने कहा कि यदि महिला अभ्यर्थी ने मप्र का डोमिसाइल प्रमाण पत्र प्राप्त कर लिया है और उसकी जाति या समुदाय दोनों राज्यों में समान आरक्षित श्रेणी में शामिल है, तो उसे आरक्षण का पूरा लाभ मिलेगा। भर्ती बोर्ड विज्ञापन और नियमों से अलग कोई नई शर्त नहीं जोड़ सकता। पात्र पाए जाने पर नियुक्ति, वेतन, वरिष्ठता और सभी निहित लाभ देने के निर्देश दिए गए हैं। मामला उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती से जुड़ा है। कुछ महिला अभ्यर्थियों ने आरक्षित श्रेणी में आवेदन किया। लिखित परीक्षा उत्तीर्ण की, पर दस्तावेज सत्यापन के दौरान उम्मीदवारी इस आधार पर निरस्त कर दी गई कि उनके जाति प्रमाण पत्र मप्र के बजाय मूल राज्य से जारी थे। : उत्तराखंड हाई कोर्ट अलग फैसला दे चुका नवंबर 2025 में उत्तराखंड हाई कोर्ट ने कहा कि शादी से दूसरी राज्य में बसने भर से किसी महिला को उस राज्य का आरक्षण नहीं मिलता।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने आरक्षण से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में महिलाओं के पक्ष में स्पष्ट रुख अपनाया है। अदालत ने कहा है कि शादी के बाद किसी अन्य राज्य से मध्यप्रदेश में आकर स्थायी रूप से निवास करने वाली महिलाओं को आरक्षण का लाभ देने से इनकार नहीं किया जा सकता, यदि उनकी जाति या समुदाय दोनों राज्यों में एक ही आरक्षित श्रेणी में आता हो।यह प्रकरण उच्च माध्यमिक शिक्षक भर्ती से जुड़ा था। कुछ महिला अभ्यर्थियों ने आरक्षित वर्ग के तहत आवेदन किया, लिखित परीक्षा में सफलता भी हासिल की, लेकिन दस्तावेज सत्यापन के समय यह कहकर उनकी उम्मीदवारी निरस्त कर दी गई कि उनके पास मध्यप्रदेश के बजाय मूल राज्य का जारी किया हुआ जाति प्रमाण पत्र है। याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने मध्यप्रदेश का डोमिसाइल प्रमाण पत्र प्राप्त कर लिया है और उनका जाति प्रमाण पत्र भी विधिसम्मत है, इसलिए उन्हें आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। दूसरी ओर राज्य सरकार ने तर्क रखा कि आरक्षण का लाभ केवल उन्हीं को दिया जा सकता है, जिनके पास मध्यप्रदेश शासन द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र हो।मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस जयकुमार पिल्लई की खंडपीठ ने कहा कि भर्ती नियमों और विज्ञापन में जो पात्रता शर्तें तय हैं, उनके अलावा कोई नई शर्त जोड़ना उचित नहीं है। केवल इस आधार पर कि जाति प्रमाण पत्र दूसरे राज्य से जारी हुआ है, महिला अभ्यर्थियों के आरक्षण अधिकार समाप्त नहीं किए जा सकते, जब तक नियमों में इसका स्पष्ट प्रावधान न हो।अदालत ने निर्देश दिए कि संबंधित अधिकारी यह जांच करें कि अभ्यर्थियों की जाति दोनों राज्यों में समान आरक्षित श्रेणी में आती है या नहीं, और इसके बाद नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाए।

