राय और ब्लॉग्स / अजमेरनामा
महर्षि दयानंद सरस्वती जयंती पर विशेष भारतीय शिक्षा परंपरा केवल सूचना प्राप्ति का माध्यम नहीं अपितु मनुष्य के शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा के समन्वित विका
गड्ढों में गिरी व्यवस्था में समाप्त होता जीवन आज के भारत की एक ऐसी विडंबना बन चुका है, जिसे देखकर मन भीतर तक सिहर उठता है। नोएडा में कार सवार युवा इंज
ऑनलाइन गेमिंग की लत एवं आभासी दुनिया कितनी भयावह एवं घातक हो सकती है, इसकी एक ही दिन में दो अलग-अलग जगह घटी घटनाओं ने न केवल झकझोरा है, बल्कि यह हमारे
–बाबूलाल नागा समय के साथ समाज बदला है और उसके साथ बदल गया है हमारे आपसी संवाद का तरीका भी। एक दौर था जब शादी-ब्याह,गृह प्रवेश या किसी अन्य पारिवारिक क
क्या यही हमारे राजस्थान का कानून है कि अगर कोई धार्मिक रैली, राजनीतिक रैली या अन्य किसी रैली में दो पहिया वाहन चालक बिना हेलमेट गाड़ी चलाएं तो उसका पु
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा प्रस्तुत नवीन केंद्रीय बजट को यदि समग्र दृष्टि से देखा जाए तो यह केवल एक वार्षिक वित्तीय दस्तावेज नहीं, ब
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा संसद के पटल पर प्रस्तुत किया जाने वाला बजट केवल आय-व्यय का वार्षिक लेखा-जोखा नहीं होता, बल्कि वह देश की आ
–बाबूलाल नागा गुरु रविदास जयंती हिंदू चंद्र पंचांग के माघ महीने की पूर्णिमा के दिन मनाई जाती है। यह आमतौर पर हर साल जनवरी या फरवरी में पड़ती है।2026मे
मैं आपको एक बात बताने जा रहा हूं आप यह करो पक्का आपका मान और सम्मान दोनों बढ़ेगा। आप किसी के घर जाएं और वो केवल आपको पानी ही पूछता हो तो उसका इतना सा
नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के माध्यम से उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता के नाम पर लागू किए गए नए नियमों ने देश के शैक्षिक और
जीवन को दिशा देने वाली शिक्षा यदि भय, हिंसा और दमन का पर्याय बन जाए तो वह सभ्यता की सबसे बड़ी विडंबना कही जाएगी। हाल के वर्षों में पढ़ाई के नाम पर बच्चो
शहीद दिवस (Martyrs Day) आईये जानिये कि हमारे देश के अंदर 30 जनवरी के अतिरिक्त किन किन दिन शहीद दिवस को मनाया जाता है | आपको यह जान कर के आश्चर्य होगा
यह खबर केवल एक व्यक्ति के निधन की नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र की राजनीति के एक पूरे युग के अचानक थम जाने की सूचना है। 28 जनवरी 2026 की सुबह जब बारामती म
भारत की समकालीन इतिहास-यात्रा में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं जो केवल घटनाओं का वृत्तांत नहीं लिखते, बल्कि समय की चेतना में घुल-मिलकर स्वयं इतिहास का
भक्ति काल मे स्वामी रामानंदाचार्य वैष्णव भक्ति धारा के महान संत थे। संत कबीर, संत पीपा, संत धन्ना और संत रविदास उनके शिष्य थे। संत रविदास तो संत कबीर
भाईचारे के पौधे दिल में उगाएंगे तब ही यह देश खुशहाल होंगे, जब हिन्दू, मुसलमान एक होंगे तब ही यह देश खुशहाल होंगे। गिले-शिकवे सभी भुलाकर एक दूसरे से गल
जब किसी देश की पहचान उसके शासकों से नहीं, बल्कि उसके नागरिकों के अधिकारों, कर्तव्यों और संविधान से होने लगे, तब वह देश गणतांत्रिक देश की श्रेणी में आ
-बाबूलाल नागा भारतीय संविधान केवल शासन चलाने का दस्तावेज नहीं,बल्कि एक जीवंत दर्शन है,जो देश की आत्मा,उसकी चेतना और दिशा—तीनों को परिभाषित करता है। सं
क्या गणतन्त्र और प्रजातंत्र एक ही है या उनमें अंतर है ? यदि अंतर है तो गणतन्त्र और प्रजातंत्र में अंतर और क्या अंतर है ? वास्तविकता में जहाँ गणतंत्र म
-बाबूलाल नागा भारत में राष्ट्रीय मतदाता दिवस प्रत्येक वर्ष25जनवरी को मनाया जाता है। विश्व में भारत जैसे सबसे बड़े लोकतंत्र में मतदान को लेकर कम होते र
(‘राष्ट्रीय मतदाता दिवस’, 25 जनवरी 2026 पर विशेष आलेख) भारत में राष्ट्रीय मतदाता दिवस प्रत्येक वर्ष 25 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिवस देश के हर नागरि
“जल है तो जीवन है”-यह पंक्ति कोई नारा भर नहीं, बल्कि मानव सभ्यता का शाश्वत सत्य है। बिना जल के जीवन की कल्पना भी संभव नहीं। किंतु विडंबना यह है कि जिस
विश्व शिक्षा दिवस कोरा उत्सव नहीं, बल्कि आत्ममंथन का अवसर है, यह सोचने का क्षण कि शिक्षा क्या है, किसके लिए है और किस दिशा में समाज को ले जा रही है। भ
राष्ट्रीय बालिकादिवसः 24 जनवरी 2026 राष्ट्रीय बालिका दिवस बालिकाओं के अधिकारों, शिक्षा, स्वास्थ्य और सशक्तिकरण के लिए जागरूकता बढ़ाने और लैंगिक समानता
भारत में विकास और समानता की चर्चा तब तक अधूरी मानी जाती है,जब तक उसमें बालिकाओं की स्थिति का ईमानदार मूल्यांकन न हो।23जनवरी को मनाया जाने वाला राष्ट्र
1) जो कतराकर निकल जाते थे कभी मरने पर मेरे वही बेजान शरीर को हिला हिला कर पूछ रहे हैं यार तू बोलता क्यों नहीं अभी… 2) मेहनत और लगन की सीढ़िया चढ़कर जा
सोच, सोचकर सोचिए, साथ क्या ले जाएगा ? अरे देखते ही देखते मर जाओगे सब यहीं रह जाएगा। तेरा खुद का पैदा किया हुआ तुझको जला के आएगा, मगर प्यारे दूसरा कोई
पंचमी धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक बसंत पंचमी को ही विद्या एवं बुद्धि की देवी माता सरस्वती का जन्म हुआ था। पौराणिक कथाओं के अनुसारऋतुराज बसंत के साथ ध
जन जन के नायक महान स्वतन्त्रता सेनानी नेता जी कहते थे कि राष्ट्रवाद मानव जाति के उच्चतम आदर्शों सत्यम, शिवम, सुन्दरम से प्रेरित होना चाहिये | उन्होंने
हाल ही में जयपुर के एसएमएस और उसके संबद्ध अस्पतालों में की गई रिसर्च में यह बात सामने आई है कि मनुष्यों में एंटीबायोटिक दवाओं का असर 57% से 90% तक कम
53वें भारत मंडपम् में 10 से 18 जनवरी 2026 तक नौ दिनों के किताबों के जमावडे ने एक बात स्पष्ट कर दी है कि किताबों से नाता कभी नहीं टूट पायेगा। इस मेले म
बाबूलाल नागा मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं,बल्कि भारतीय समाज की सामूहिक चेतना,कृषि संस्कृति और सामाजिक समता का प्रतीक है। यह त्योहार सूर्य के उत्तरा
महामारी के बाद की दुनिया केवल स्वास्थ्य के स्तर पर ही नहीं, बल्कि आर्थिक सोच और व्यवहार में भी एक बड़े संक्रमण से गुज़री है। वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं की
नज़रें तो आसमान पर रखते हो, ये क्या, एक ठोकर से डरते हो। जीने का हुनर ही है अस्ल तालीम, मरने से पहले ही क्यों मरते हो। हम समंदर पीने का हुनर रखते हैं,
स्वामी विवेकानंद जयंती पर विशेष लेख *उठो जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त ना हो – स्वामी विवेकानंद* स्वामी विवेकानंद के विचार जीवन में सफलता
(स्वामी विवेकानन्द जयंती-12 जनवरी 2026 : राष्ट्रीय युवा दिवस पर विशेष काव्य-रचना) कलकत्ताकीधरतीसेउठा, नरेन्द्रएकज्वालाबनकरजगा। तर्ककीआँखोंमेंप्रश्नलिए
12जनवरी स्वामी विवेकानंद जयंती -बाबूलाल नागा भारत जैसे युवा देश के लिए12जनवरी केवल एक तिथि नहीं है। यह वह दिन है जब देश अपने सबसे प्रेरक विचारक,महान स
वैश्विक चुनौतियों, भू-राजनीतिक तनावों, युद्धों, महामारी के पश्चात् बनी अस्थिरताओं, ऊर्जा संकट, आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान और महँगाई के दबावों के बीच
विश्व हिंदी दिवस- 10 जनवरी 2026 हर वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाने वाला विश्व हिंदी दिवस केवल एक औपचारिक या प्रतीकात्मक आयोजन नहीं है, बल्कि यह हिंदी भाषा
स्वामी जी ने कहा कि जीवन में हमारे चारो ओर घटने वाली छोटी या बड़ी, सकारात्मक या नकारात्मक सभी घटनायें हमें अपनी असीम शक्ति को प्रकट करने का अवसर प्रदा
-बाबूलाल नागा भारत में पानी को जीवन कहा जाता है,लेकिन हकीकत यह है कि आजादी के78साल बाद भी यह जीवन हर नागरिक के लिए सुरक्षित नहीं हो पाया है। भारत में
एक समय था जब दुनिया के बड़े हिस्से में बेटी का जन्म बोझ समझा जाता था। गर्भ में ही उसके जीवन का अंत कर दिया जाता, या जन्म के बाद भेदभाव, उपेक्षा और वंचन
-बाबूलाल नागा हाल में उत्तर प्रदेश के अमरोहा में11वीं की एक छात्रा की कथित तौर पर लगातारजंकफूड खाने से मौत हो गई।अहाना नाम की छात्रा के पेट में इन्फेक
वेनेज़ुएला पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि क्या अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था वा
(कल्याण सिंह जी की 94वीं जन्म-जयंती 05जनवरी2026पर विशेष आलेख) भारतीयराजनीतिकेयुगपुरुष,श्रेष्ठराजनीतिज्ञ,कोमल हृदयसंवेदनशीलमनुष्य,वज्रबाहुराष्ट्र प्रहर
स्वच्छता रैंकिंग में लगातार टॉप पर आने वाले इंदौर में दूषित पेयजल की वजह से हुई मौतें कथनी और करनी की असमानता की पौल खोलती भयावह लापरवाही का नतीजा हैं
पौष बड़ा महोत्सव पौष माह (सर्दी के मौसम) में राजस्थान की एक अनोखी परंपरा है, जिसका महत्व धार्मिक, ज्योतिषीय और स्वास्थ्य से जुड़ा है; यह भगवान को मूंग
ऑनलाइन बाज़ार और त्वरित सेवाओं के इस दौर में गिग-वर्कर्स शहरी जीवन-व्यवस्था की वह अदृश्य रीढ़ बन चुके हैं, जिनके बिना ‘दस मिनट में डिलीवरी’ और ‘एक क्लिक
-बाबूलाल नागा 3 जनवरी भारतीय सामाजिक इतिहास का वह महत्वपूर्ण दिन है, जो शिक्षा, समानता और महिला सशक्तिकरण के संघर्ष की प्रतीक सावित्रीबाई फुले की जयंत
नया साल है- न कोई अंत, बल्कि एक नया आरंभ है। बीते कल की परछाइयों से सीख की मशाल जलाकर, आज हम खड़े हैं उस मोड़ पर जहाँ भविष्य हमारी प्रतीक्षा कर रहा है।

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