SENSEX
NIFTY
GOLD
USD/INR

Weather

33    C

राय और ब्लॉग्स / क्राइम नज़र

जीएसटी, सड़क परिवहन एवं संभार उद्योग

डॉ. हनुमंत यादव जीएसटी लागू होने से अब कम्पनियों को हर राज्य में वेयर हाउस बनाने की जरूरत नहीं रहेगी| विश्व बैंक के अनुसार जीएसटी लागू होने से संभार लागत में 40 फीसदी कमी आएगी| सभी अध्ययन बता रहे हैं कि वस्तु एवं सेवाकर सभी के लिए फायदेमंद है| यदि इससे किसी को नुकसान हुआ ...

3 Aug 2017 11:12 pm
बिहार में अनैतिकता का खुला खेल

एल.एस. हरदेनिया नीतीश कुमार ने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दिया और पर्दे के पीछे किए गए षडयंत्र के चलते फिर से मुख्यमंत्री बन गए| जब उन्होंने इस्तीफा दिया उस समय वे महागठबंधन के मुख्यमंत्री थे और इस महागठबंधन को बनाने में सबसे प्रमुख भूमिका स्वयं नीतीश कुमार की थी| महागठबंधन बनाने की आवश्यकता प्रतिपादित ...

3 Aug 2017 11:11 pm
जनता ही टंगेगी उल्टा

चिन्मय मिश्र महाभारत में द्रौपदी ने चीरहरण के दौरान मन ही मन कृष्ण की वंदना करते हुए कहा था, श्हे नाथ, हे रमानाथ, हे व्रजनाथ, हे आर्तिनाशन जनार्दन! मैं कौरवों के समुद्र में डूब रही हूं| आप मेरी रक्षा कीजिए|’ यह उस समय की बात है जबकि स्त्री व पुरुषों की गुलामी वैध थी| उनकी ...

1 Aug 2017 3:21 am
शिक्षा के साथ खिलवाड़

शिक्षा के साथ खिलवाड़ विश्वगुरू होने और आगे भी बने रहने का दंभ पाले भारतीयों को यह सुनकर बुरा लग सकता है कि हमारे देश में शिक्षा के लिए किस कदर उपेक्षा का भाव घर कर चुका है और इसकी प्रमुख वजह है राजनीति, क्योंकि नेताओं के लिए यह जिम्मेदारी से अधिक राजनीतिक लाभ और ...

1 Aug 2017 3:21 am
बाढ़ को बढ़ावा दे रही नौकरशाही

डॉ. झुनझुनवाला असम के मुख्यमंत्री सरबानन्द सोनोवाल ने गत वर्ष कहा था कि ब्रह्मपुत्र की ड्रेजिंग करके उसके पाट में एक गहरी चैनल बनाई जाएगी जिससे बाढ़ का पानी सुगमता से निकल जाएगा| लेकिन इस वर्ष फिर बाढ़ आई| कारण कि ड्रेजिंग से नदी के एक हिस्से की गाद को उठा कर नदी के ही ...

28 Jul 2017 3:59 pm
बहुत-बहुत बधाई, मिस्टर प्रेसीडेंट!

कृष्ण प्रताप सिंह कोविन्द भले ही देश के पहले दलित राष्ट्रपति नहीं हैं, इस अर्थ में पहले दलित राष्ट्रपति केआर नारायणन से ज्यादा सौभाग्यशाली’ हैं कि उनके राष्ट्रपतित्व के प्रभाव पहले ही दिखने शुरू हो गये हैं| शायद इसलिए कि नारायणन के वक्त से देश की नदियों में बहुत पानी बह चुका है और उनके ...

28 Jul 2017 3:58 pm
प्रधानमंत्री के लोग सुनेंगे उनके उपदेश

शीतला सिह आज भी जिन गौरक्षकों’ ने गाय के नाम पर निर्दोषों की पिटाई से लेकर हत्या तक की हैं,  क्या वे कभी यह मानते हैं कि उनसे गलत काम हो गया? अगर नहीं तो उनकी ऐसी भावना किन लोगों ने बनाई है और प्रधानमंत्री कुछ भी कहें, क्यों उनके नेता ऐसे गौरक्षकों’ के खिलाफ ...

20 Jul 2017 11:25 pm
गुजरात’, गाय’ और हिन्दुत्व’ पर सेंसरबोर्ड का एतराज

कृष्ण प्रताप सिंह दुर्भाग्य से इन खिदमतगारों’ को ऐसे मामलों से वैचारिक स्तर पर निपटने में हमेशा ही असुविधा होती रही है| इसीलिए उन्होंने नरेन्द्र मोदी के रूप में नया नायक पाते ही इन सबको अपनी’ सत्ता की दमनात्मकता के हवाले कर गौरवान्वित’ होने का सिलसिला शुरू कर रखा है| मोदी सरकार को भी इसके ...

19 Jul 2017 1:19 am
साहित्यिक सक्रियता का सवाल

वरिष्ठ साहित्यकार वागर्थ (कोलकाता से प्रकाशित भारतीय भाषा परिषद् की मासिक पत्रिका) के जुलाई 2017 के अंक में शंभुनाथ ने अपने पहले संपादकीय-घायल शब्द में साहित्यिक सक्रियतावाद को अपनाने की जरूरत बतायी है| वाद को छोड़ दें, क्योंकि वह एक निश्चित रूपाकार ग्रहण कर अपना एक रूप-पक्ष प्रस्तुत करता है| साहित्यिक सक्रियता से हमारा आशय ...

19 Jul 2017 1:16 am
जीएसटीः परेशानियों का अंबार

ललित सुरजन जेटली साहब बहुत बड़े वकील हैं| उनके तर्कों का जवाब देना सामान्यतरू मुश्किल होता है, लेकिन ऐसा लगता है कि दो बड़े विभागों की जिम्मेदारी संभालते हुए, साथ-साथ प्रधानमंत्री की गैरमौजूदगी में सरकार का दायित्व संभालने के कारण वे शायद थक जाते हैं और अपने तर्क तैयार करने के लिए उन्हें मानसिक अवकाश ...

15 Jul 2017 3:13 pm
विपक्षी एकताः विरोधी संकेत

राजेंद्र शर्मा यह समझना बहुत मुश्किल नहीं है कि गोपाल गांधी की अपनी छवि, जो एक ऐसे अविचल तथा समझौताहीन धर्मनिरपेक्ष कार्यकर्ता की है, जिसकी यह निष्ठा भारतीय दर्शन, संस्कृति तथा इतिहास के गहरे अध्ययन पर टिकी हुई है, आरएसएस-भाजपा के नेतृत्व में चल रहे सत्ताधारी गठजोड़ के खिलाफ, विपक्षी विकल्प को एक विचारधारात्मक धार ...

15 Jul 2017 3:12 pm
जैसी बहे बयार, पीठ…

प्रभाकर चैबे नीतीश कुमार को समाजवादी मानकर हम कोई भूल क्यों करें| नीतीश कुमार की अपनी राजनीति है| वे इसे सिद्ध कर सकते हैं कि वे इस दौर में दक्षिणपंथी ताकतों का साथ देकर सही कर रहे हैं| और लालूप्रसाद जी को पूरी तरह घेरकर चुप कराने की मुहिम भी देख रहे हैं| जब जैसी ...

3 Jul 2017 9:50 pm
सलाहुद्दीन के बहाने

शेष नारायण सिंह जब भी धर्म को राज-काज में दखल देने की आजादी दी जायेगी राष्ट्र का वही हाल होगा जो आज पाकिस्तान का हो रहा है और गाय के नाम पर चल रहे खूनी खेल की अनदेखी करने वाले भारतीय नेताओं को भी सावधान होने की जरूरत है क्योंकि जब अर्धशिक्षित और लोकतंत्र से ...

30 Jun 2017 9:22 pm
पेड न्यूज का मसलाः सवाल दर सवाल

शीतला सिंह अंग्रेजों के समय वकील दूसरा व्यवसाय नहीं कर सकते थे| इस वर्जना के पीछे उद्देश्य यह था कि उनके व्यावसायिक हित उनकी न्यायिक भूमिका में बाधक न बन सकें| वह कानून आज भी लागू है, लेकिन संवाद माध्यमों के बारे में ऐसे किसी दृष्टिकोण की आवश्यकता मानी ही नहीं गई| जब छोटे, छोटी ...

29 Jun 2017 6:39 am
अनास्था मतः यादों के झरोखे से कुछ पन्ने

अब चुनावों से वे उम्मीदवार बाहर हटने लगे जिसकी सच्चाई और विवेक शीलता पर निरूसंदेह भरोसा किया जा सकता था| आयाराम  गयाराम और बाहुबलियों का बोलबाला बढ़ता गया|  चुनाव जीतना ही एकमेव लक्ष्य हो गया चाहे जिस विधि से हो| चुनावी टिकट भी ऐसे उम्मीदवारों को दिये जाने लगे जो अपने काम से नहीं वरन् ...

29 Jun 2017 6:38 am
राष्ट्रपति के लिए सियासी खेल

रशीद किदवई भारत में कोई भी चुनाव बिना जातिगत राजनीति के नहीं हो सकता है| राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवारों को देख कर तो यही लगता है| भारतीय राजनीति कब किस मोड़ पर रुक जाये, इसकी भविष्यवाणी भी कोई राजनीतिक पंडित नहीं कर सकता है| लेकिन, जिस तरह एनडीए  के राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी रामनाथ कोविंद ...

29 Jun 2017 6:36 am
बिगड़ रहे हैं सांप्रदायिक रिश्ते

भारतीय उपमहाद्वीप का समाज हमेशा से बहु-सांस्कृतिक रहा है| यहां अनेक धर्म और जाति के लोग हजारों वर्षों से रहते आये हैं| लोग बाहर से भी आये और इस बहुलवादी संस्कृति में समाहित होते चले गये| प्रारंभिक दौर में आपस में संघर्ष भी रहता होगा, अविश्वास भी रहता होगा| लेकिन कुछ ऐसा है इस समाज ...

29 Jun 2017 6:35 am
दलित कब सुविधाजनक लगते हैं

दलित हमें अपने समाज में तभी तक सुविधाजनक लगते हैं, जब तक वे तथाकथित रूप से शास्त्रों में कहे गए कार्यों को करते रहें| यानी तीनों उच्च वर्णों ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य की सेवा, समाज की गंदगी को साफ करना, मैला ढोना, मरे हुए जानवरों को ठिकाने लगाना, उनकी खाल उतारना और इसी तरह के कई ...

25 Jun 2017 8:50 pm
क्या ताजमहल भारतीय संस्कृति का भाग नहीं है?

राम पुनियानी पिछले कुछ दशकों में हिन्दू राष्ट्रवादियों के उदय के साथ, और विशेषकर पिछले तीन सालों में, संस्कृति की हमारी समझ को सांप्रदायिक रंग देने के प्रयास हो रहे हैं| संस्कृति के जो भी पक्ष गैर-ब्राह्मणवादी हैं, उन्हें दरकिनार किया जा रहा है| इसका एक उदाहरण है, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी का हालिया ...

25 Jun 2017 8:46 pm
असम विभाजन से सीखे बंगाल

रविशंकर रवि भाषा के सवाल पर उठा आंदोलन किस तरह अलग राज्य का आंदोलन और राज्य की विभाजन की वजह बन जाता है, इसका सबसे बेहतर उदाहरण असम है| जिस तरह पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूलों के लिए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बांग्ला भाषा को अनिवार्य किया है, उसी तरह वर्ष 1970 के दौर में ...

23 Jun 2017 4:30 pm
ब्रेक्जिट की भूल-भुलैया

डॉ विजय राणा ब्रिटेन की राजनीति में हाल ही में दो प्रधानमंत्रियों ने दो बार जुआ खेला और दोनों बार उन्हें मुंह की खानी पड़ी| पिछले वर्ष फरवरी माह में प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने यूरोपीय संघ में ब्रिटेन की हिस्सेदारी के सवाल पर जब जनमत संग्रह कराने की घोषणा की थी, तो उन्होंने अपनी हार ...

20 Jun 2017 3:38 pm