25 अक्टूबर, रविवार: गया जी के गांधी मैदान में आयोजित एथलेटिक्स प्रतियोगिता में स्कूली बच्चों ने अपने दौड़ का प्रदर्शन किया। राजेश कुमार मिक्की की रिपोर्ट।
GAYA NEWS: अनंत सिंह के निलंबन पर बोले मंत्री संजय सिंह, कहा- यह पार्टी का आंतरिक मामला
25 अक्टूबर, रविवार: गया में मंत्री संजय सिंह ने अनंत सिंह के निलंबन पर बयान दिया, कहा कि यह पार्टी का आंतरिक मामला है, गया और सिद्धार्थपुर की घटना की जांच के लिए प्रतिनिधिमंडल भेजा गया।
‘Dil Le Gaya Pardesi’ की धुन पर लड़की ने लगाए शानदार ठुमके, सूट में डांस देख लोग रह गए हैरान!
‘Dil Le Gaya Pardesi’ की धुन पर लड़की ने लगाए शानदार ठुमके, सूट में डांस देख लोग रह गए हैरान!
GAYA NEWS: JDU विधायक अनंत सिंह के निष्कासन पर जीतन राम मांझी का बयान
25 अक्टूबर, रविवार: गया में केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने अनंत सिंह के JDU से निष्कासन को पार्टी की सामान्य अनुशासनात्मक प्रक्रिया बताया।
गया में 1670 एकड़ में एकीकृत विनिर्माण क्लस्टर (IMC Gaya) विकसित किया जा रहा है, जो बिहार के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में से एक होगा।
Bhadohi News: कलश यात्रा के साथ शुरू हुआ 9 कुंडीय गायत्री महायज्ञ
The 9-kund Gayatri Mahayajna commenced with a Kalash Yatra.
अब बिना CAT दिए 12वीं के बाद सीधे आईआईएम में मिलेगा धमाकेदार एडमिशन
देश के सबसे प्रतिष्ठित और सपनों के शिक्षण संस्थानों यानी भारतीय प्रबंधन संस्थानों (IIM) में दाखिला पाने के लिए हर साल लाखों छात्र कैट (CAT) परीक्षा की कठिन और लंबी तैयारी में अपनी रातों की नींद खराब करते हैं। हर इंजीनियरिंग या कॉमर्स के ग्रेजुएट्स का यह सपना होता है कि वह किसी तरह आईआईएम से एमबीए की डिग्री हासिल कर अपने करियर को नई ऊंचाइयों पर ले जाए। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अब आपको आईआईएम में एडमिशन पाने के लिए ग्रेजुएशन पूरी करने और कैट की कठिन बाधा को पार करने का इंतजार करने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है? जी हाँ, देश के कई प्रमुख आईआईएम अब छात्रों को 12वीं कक्षा के तुरंत बाद सीधे अपने यहाँ प्रवेश का सुनहरा मौका दे रहे हैं। स्कूल की पढ़ाई पूरी करने वाले होनहार छात्र अब बिना कैट परीक्षा दिए ही मैनेजमेंट की दुनिया में कदम रख सकते हैं। आइए जानते हैं कि इस खास प्रोग्राम के तहत एडमिशन पाने की पूरी प्रक्रिया, योग्यता और इसके क्या बड़े फायदे हैं।क्या है 12वीं के बाद IIM में एडमिशन का यह खास इंटीग्रेटेड प्रोग्राम?भारतीय प्रबंधन संस्थानों द्वारा संचालित इस शानदार कोर्स को 'इंटीग्रेटेड प्रोग्राम इन मैनेजमेंट' (IPM) यानी प्रबंधन में समेकित पाठ्यक्रम कहा जाता है। यह कोर्स कुल 5 साल का होता है, जो बैचलर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (BBA) और मास्टर ऑफ बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन (MBA) का एक बेहतरीन कॉम्बिनेशन होता है। इसका मतलब यह है कि छात्र जैसे ही अपनी 12वीं की बोर्ड परीक्षा पास करते हैं, वे इस 5 वर्षीय प्रोग्राम में दाखिला ले सकते हैं। इस कोर्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि छात्रों को ग्रेजुएशन के बाद दोबारा किसी एंट्रेंस एग्जाम की तैयारी करने या एमबीए में एडमिशन के लिए धक्के खाने की कोई जरूरत नहीं पड़ती। एक बार जब छात्र इस 5 साल के कोर्स में सेलेक्ट हो जाते हैं, तो उनकी ग्रेजुएशन और पोस्ट-ग्रैजुएशन दोनों की डिग्री एक ही प्रतिष्ठित संस्थान से पूरी हो जाती है, जो उनके करियर को सीधे एक रॉकेट जैसी रफ्तार देती है।कौन-कौन से प्रमुख IIM ऑफर करते हैं यह डायरेक्ट कोर्स और क्या है योग्यता?देश के शुरुआती कुछ आईआईएम ने छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस एकीकृत पाठ्यक्रम की शुरुआत की थी, जो आज देश के सबसे लोकप्रिय कोर्सेज में शुमार हो चुका है। वर्तमान में आईआईएम इंदौर (IIM Indore), आईआईएम रोहतक (IIM Rohtak), आईआईएम रांची (IIM Ranchi), आईआईएम जम्मू (IIM Jammu) और आईआईएम बोधगया (IIM Bodh Gaya) जैसे देश के शीर्ष संस्थान 12वीं के बाद यह कोर्स ऑफर कर रहे हैं। इस कोर्स में एडमिशन पाने के लिए पात्रता की बात करें तो छात्र को किसी भी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं कक्षा कम से कम 60 प्रतिशत अंकों (आरक्षित श्रेणियों के लिए नियमानुसार छूट) के साथ पास होना अनिवार्य है। इसके अलावा, छात्रों की आयु सीमा भी निर्धारित की जाती है, जिसके तहत युवा छात्र ही इस परीक्षा में बैठने के पात्र माने जाते हैं।एडमिशन की पूरी प्रक्रिया: कैसे होती है चयन प्रक्रिया और कौन सी परीक्षा देनी होती है?चूंकि इस कोर्स में एडमिशन के लिए कैट परीक्षा की जरूरत नहीं होती, इसलिए आईआईएम खुद अपनी एक अलग प्रवेश परीक्षा आयोजित करते हैं या फिर विशेष एप्टीट्यूड टेस्ट के स्कोर को मान्यता देते हैं। उदाहरण के लिए, आईआईएम इंदौर अपना खुद का 'आईपीएमएटी' (IPMAT - IPM Aptitude Test) आयोजित करता है, जबकि आईआईएम रोहतक और अन्य संस्थान भी अपनी अलग परीक्षाएं करवाते हैं। इस प्रवेश परीक्षा में मुख्य रूप से मात्रात्मक योग्यता (Quantitative Aptitude), तार्किक तर्क (Logical Reasoning) और मौखिक क्षमता (Verbal Ability) से जुड़े बहुविकल्पीय सवाल पूछे जाते हैं। लिखित परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करने वाले छात्रों को इसके बाद पर्सनल इंटरव्यू (PI) और वॉट (WAT) यानी रिटेन एबिलिटी टेस्ट के अगले चरण के लिए बुलाया जाता है।
Mau News: मधुबन में पांच दिवसीय गायत्री महायज्ञ शुरू, निकाली कलश यात्रा
Five-day Gayatri Mahayajna begins in Madhuban; 'Kalash Yatra' (procession with ceremonial pots) taken out
Gaya News: जीतनराम मांझी ने नागरिकों की समस्याएं सुनीं, हाई मास्ट स्ट्रीट लाइट लगाने का दिया आश्वासन
22 अक्टूबर, गुरुवार: गया जी में केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने क्षेत्र के नागरिकों से बातचीत कर उनकी समस्याओं की जानकारी ली और समाधान का आश्वासन दिया। उन्होंने गया संसदीय क्षेत्र में जरूरतमंद स्थानों पर हाई मास्ट स्ट्रीट लाइट लगाने का भरोसा भी दिलाया।
20 अक्टूबर, मंगलवार: बिहार के गया जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में दशहरा के अवसर पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। नगर पंचायत मुख्यालय स्थित बड़ी देवी स्थान में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित की गई है, वहीं झंडा चौक पर भी दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए लोगों की भीड़ जुटी हुई है।
Gaya News: टनकुप्पा प्रखंड मुख्यालय में दशहरा पर रावण वध का आयोजन, देखने के लिए जुटी भारी भीड़
20 अक्टूबर, मंगलवार: बिहार के गया जिले के टनकुप्पा प्रखंड मुख्यालय में दशहरा के अवसर पर रावण वध कार्यक्रम आयोजित किया गया। रावण वध देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे और इलाके में उत्सव का माहौल रहा।
20 अक्टूबर, मंगलवार: बिहार के गया जिले की उत्तरी रोड पंचायत में पंचायत सरकार भवन अपनी भव्यता के लिए चर्चा में है। मुखिया अभय यादव के अनुसार, इसी भवन से पंचायत की विकास योजनाओं का सफल संचालन किया जाता है।
20 अक्टूबर, मंगलवार: गया जिले के लोधवे गांव में दशहरे के अवसर पर स्थापित दुर्गा प्रतिमा के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। ग्रामीण क्षेत्रों में उत्साह का माहौल रहा, वहीं गया-रजौली मुख्य सड़क के किनारे बाजार में भी लोगों की भीड़ देखने को मिली।
निदा फ़ाज़ली: कुछ दिनों तो शहर सारा अजनबी सा हो गया
nida fazli famous ghazal kuch dinon toh shahar sara ajnabee sa ho gayaनिदा फ़ाज़ली: कुछ दिनों तो शहर सारा अजनबी सा हो गया
19 अक्टूबर, सोमवार: गया जिले के फतेहपुर प्रखंड स्थित डाकबंगला परिसर में दशहरा पूजा को लेकर उत्साह का माहौल है। भव्य रूप में आयोजित दुर्गा पूजा समारोह को देखने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। शहर के साथ-साथ गांवों में भी दशहरा की रौनक देखने को मिल रही है।
19 अक्टूबर, सोमवार: गया जिले के फतेहपुर नगर पंचायत बस स्टैंड स्थित भव्य दुर्गा पूजा पंडाल में नवरात्रि की नवमी पर मां दुर्गा के दर्शन के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। पंडाल में भक्तों की भीड़ से माहौल भक्तिमय बना हुआ है।
Pauri Garhwal के Dhari Devi Temple में दिन में तीन बार स्वरूप बदलती है मां काली की प्रतिमा
देवभूमि उत्तराखंड में एक ऐसा मंदिर है, जहां पर एक ऐसा मंदिर है, जो बेहद प्रसिद्ध है। धारी देवी मंदिर, मुख्य रूप से मां काली को समर्पित है। यह मंदिर क्षेत्र में पूजनीय होने के साथ-साथ भारत के अन्य हिस्सों में भी काफी प्रसिद्धि प्राप्त कर रहा है। धारी देवी मंदिर को चार धाम का रक्षक भी कहा जाता है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको इस मंदिर से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनको जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे। कहां स्थित है मंदिर उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में श्रीनगर और रुद्रप्रयाग के बीच कलियासौड़ में अलकनंदा नदी के किनारे धारी देवी मंदिर के पास है। यह प्राचीन और रहस्यमयी मंदिर है। वहीं धारी माता को देवी कालीसौर के रूप में भी जाना जाता है। इनका आशीर्वाद पाने के लिए भक्त दूर-दूर से इस मंदिर के दर्शन के लिए आते हैं। वहीं मंदिर के पास एक प्राचीन गुफा भी मौजूद है। इसे भी पढ़ें: Goddess Gayatri: सृष्टि रचना और ब्रह्माजी के संकल्प से हुआ था मां गायत्री का प्राकट्य, ऐसे बनीं वेदमाता दिन में तीन बार रूप बदलती है मूर्ति स्थानीय लोगों का मानना है कि मंदिर में स्थित धारी देवी की प्रतिमा दिन में 3 बार अपना रूप बदलती है। सुबह के समय छोटी बालिका, दिन में महिला और शाम को उनका स्वरूप बूढ़ी महिला के रूप में दिखाई देता है। जानें क्यों प्रसिद्ध है मंदिर पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक एक बार भीषण बाढ़ की वजह से मंदिर बह गया था और धारी देवी की मूर्ती धारो नामक गांव के पास एक चट्टान के पास रुक गई थी। वहीं गांव वालों को मूर्ति से विलाप की आवाज सुनाई दी और इस आवाज ने उनको मूर्ति को स्थापित किए जाने के निर्देश दिए। तब गांव वालों ने मिलकर फिर उसी स्थान पर धारी माता की मूर्ति को स्थापित किया। वहीं अन्य मान्यता के अनुसार, साल 2013 में केदारनाथ बाढ़ से ठीक पहले किसी काम के कारण धारी देवी मंदिर को स्थानांतरित किया गया था। स्थानीय लोगों का मानना है कि धारी देवी के प्रकोप की वजह से ही बाढ़ आई थी। फिर बाद में उसी जगह पर मंदिर का निर्माण कर देवी की मूर्ति को स्थापित किया। इसलिए धारी देवी मंदिर की इतनी अधिक मान्यता है। मंदिर की खासियत धारी देवी मंदिर में देवी को 'उत्तराखंड की रक्षक देवी' और चारों धाम की संरक्षक के रूप में पूजा जाता है। इस मंदिर को 108 शक्ति स्थलों में से एक माना जाता है। धारी देवी की मूर्ति का सिर्फ ऊपरी आधा भाग पूजनीय है। वहीं रुद्रप्रयाग के कालीमठ में मूर्ति का निचला हिस्सा पूजा जाता है। धारी देवी के दर्शन किए बगैर चार धाम यात्रा अधूरी मानी जाती है। हर साल नवरात्रि के मौके पर देवी कालीसौर की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
October Long Weekend: Dussehra पर Kolkata और Ayodhya जाएं या Tiger Reserve में करें Jungle Safari
अक्तूबर का महीना आते ही मौसम करवट बदलने लगता है। बारिश का दौर काफी हद तक थम चुका है और आसमान साफ नजर आने लगता है। कई शहरों में घूमने के लिए भी मौसम सुहाना होने लगता है। वहीं इस महीने में कई बड़े त्योहार और राष्ट्रीय पर्व आते हैं और इस दौरान छुट्टियां भी मिलती हैं। यही वजह है कि अक्तूबर को देश में ट्रैवल सीजन की शुरूआत के रूप में भी देखा जाता है। ऐसे में अगर आप भी इस साल ऑफिस की छुट्टियों में एक छोटी सी ट्रिप प्लान करना चाहते हैं, तो अक्तूबर 2026 में आपको कई लॉन्ग वीकेंड मिल सकती हैं। ऐसे में आप इन वीकेंड पर अपना ट्रिप प्लान कर सकते हैं। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको बताने जा रहे हैं कि अक्तूबर महीने में कौन-कौन से लॉन्ग वीकेंड हैं और इन छुट्टियों में आप कहां-कहां जा सकते हैं। इसे भी पढ़ें: Pitru Paksha पर Gaya में Pind Daan का महत्व, Patna से यात्रा रूट और पूजा के नियम अक्टूबर में लॉन्ग वीकेंड अक्तूबर 2026 में सबसे अच्छा लॉन्ग वीकेंड 2 से 4 अक्तूबर का है, जबकि दशहरा के आसपास 17 से 20 अक्तूबर का ब्रेक कुछ राज्यों और ऑफिस कैलेंडर के हिसाब से बना सकती हैं। वहीं कुछ राज्यों में 24-26 अक्तूबर में भी छुट्टी होगी। दशहरा और दुर्गा पूजा वाला वीकेंड 17 और 18 अक्तूबर 2026 को वीकेंड है और 19 अक्तूबर को कुछ राज्यों में महानवमी तो कुछ राज्यों में दुर्गा पूजा की छुट्टी है। फिर 20 अक्तूबर को दशहरा की छुट्टी होगी। ऐसे में 17 से 20 अक्तूबर तक चार दिनों के लिए ट्रिप प्लान कर सकते हैं। दशहरा के वीकेंड पर यहां घूमें आप दशहरा के लंबे वीकेंड पर कोलकाता शहर की दुर्गा पूजा देखने जा सकते हैं। यहां शहर के पंडाल, रोशनी और सांस्कृतिक माहौल को बेहद करीब से देखने का मौका मिलेगा। इसके अलावा आप वाराणसी जा सकती हैं। यहां पर दशहरा की धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को देख पाएंगे। काशी विश्वनाथ मंदिर, गंगा घाट और रामनगर की परंपराएं आपकी यात्रा को यादगार बना देंगी। आप इस वीकेंड अयोध्या घूमने के लिए जा सकती हैं। यहां पर राम मंदिर, सरयू घाट और अन्य जगहें देख सकती हैं। वहीं मैसूर में दशहरे का माहौल भी देखने लायक होचा है। यहां के महल और शहर की सजावट इस यात्रा को खास बना देगी। 24 से 26 अक्टूबर का वीकेंड 24 और 25 अक्तूबर को शनिवार और रविवार की छुट्टी है। वहीं 26 अक्तूबर को महर्षि वाल्मीकि जयंती की छुट्टी होगी। हालांकि यह छुट्टी कुछ राज्यों में है। ऐसे में अगर आपके राज्य में भी यह अवकाश मिलता है, तो आप इस तीन दिन के ब्रेक में किसी छोटी ट्रिप के लिए जा सकते हैं। अक्तूबर का लास्ट वीकेंड अक्तूबर के लास्ट वीकेंड में पहाड़ों की छोटी छुट्टी पर जा सकते हैं। अगर आप शहर और पहाड़ दोनें को एक ट्रिप में जोड़ना चाहते हैं, तो चंडीगढ़ और कसौली एक अच्छा कॉम्बिनेशन हो सकता है। इसके अलावा भोपाल जाने का प्लान कर सकती हैं। यहां पर पुराने शहर, झीलें और आसपास की ऐतिहासिक स्थलों को देख सकती हैं। हम्पी का इतिहास और इसकी विरासत को बेहद करीब से जान सकती हैं। ऐसे में आप इस वीकेंड हम्पी जा सकती हैं। वाइल्ड लाइफ ट्रिप अक्तूबर में आप पहाड़ों या शहरों में घूमने की बजाय जंगल सफारी भी ट्राई कर सकती हैं। मानसून के बाद कई राष्ट्रीय उद्यान और टाइगर रिजर्व पर्यटकों के लिए खुलने लगते हैं। वहीं ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व के कोर जोन के 01 अक्तूबर से खुलने की जानकारी सामने आई है। तो वहीं कार्बेट के कुछ जोन अक्तूबर महीने में दोबारा खुल सकते हैं। इन बातों का रखें ध्यान अपने ऑफिस कैलेंडर से छुट्टियां जरूर मिला लें, क्योंकि सरकारी और प्राइवेट कंपनियों की छुट्टियां अलग-अलग हो सकती हैं। पहले से ट्रेन और फ्लाइट आदि का टिकट बुक कर लें। क्योंकि त्योहारों या वीकेंड पर प्राइज बढ़ सकता है। पहले से होटल आदि की बुकिंग कर लें, क्योंकि वीकेंड पर होटल के किराएं में बदलाव हो सकता है। ट्रिप प्लान करने से पहले मौसम की जानकारी ले लें। वहीं इस महीने पहाड़ी इलाकों में ठंड बढ़ जाती है। अगर आप त्योहार वाली ट्रिप प्लान कर रहे हैं, तो घूमने की जगह स्थानीय कार्यक्रमों और भीड़ के हिसाब से अपनी ट्रिप प्लान करें।
Pitru Paksha पर Gaya में Pind Daan का महत्व, Patna से यात्रा रूट और पूजा के नियम
इस बार 26 सितंबर 2026 से पितृपक्ष की शुरूआत हो रही है। आश्विन माह की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से पितृपक्ष की शुरूआत होती है। हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व होता है। क्योंकि इस दौरान पूर्वजों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए समर्पित होती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक प्रतिपदा तिथि से लेकर सर्वपितृ अमावस्या तक पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और श्राद्धकर्म जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान पूर्वज पृथ्वीलोक पर अपने वंशजों पर कृपा बरसाने हैं। इस दौरान विधि-विधान से किए गए श्राद्धकर्म से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार पर पितर अपना आशीर्वाद बनाए रखते हैं। इसलिए श्राद्धकर्म नियमों के साथ पूर्ण किए जाते हैं। अगर आप पहला श्राद्ध करने जा रहे हैं, तो इससे जुड़े कुछ नियमों को जान लेना चाहिए। गया में पिंडदान का महत्व सनातन परंपरा में गया को पितृकर्म के प्रमुख तीर्थों में से एक माना गया है। यहां पर श्राद्ध और पिंडदान का संबंध पितरों के स्मरण, श्रद्धा और पितृ ऋण माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि गया में पितृकर्म करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। यह सिर्फ दोष दूर करने का उपाय नहीं बल्कि इसको पितरों के प्रति कर्तव्य के रूप में समझना चाहिए। ऐसे पहुंचे गया गया जाने के लिए सबसे पहले आपको राजधानी पटना तक रेल या हवाई यात्रा से जाना होगा। फिर पटना और उसके आसपास के शहरों से बड़ी आसानी से गया तक के ट्रेन मिल जाती है। अगर आप पटना से जा रही हैं, तो गया जाने में 2 से 3 घंटे का समय लग सकता है। फिर गया जंक्शन पर उतरकर टैक्सी या ऑटो की सहायता से पिंडदान स्थलों तक जाएं। पटना से सड़क के रास्ते गया तक जाने के लिए बस, टैक्सी या प्राइवेट कार कर सकते हैं। इसके बाद स्थानीय परिवहन की सहायता से पिंडदान स्थलों तक पहुंच सकते हैं। फ्लाइट से जाने वाले यात्रा भी पटना के बाद प्राइवेट टैक्सी से गया तक जा सकते हैं। इन बातों का रखें ध्यान पितृपक्ष में गया में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। इसलिए होटल, ट्रेन और स्थानीय परिवहन की बुकिंग पहले करना उपयोगी साबित हो सकता है। पूजा-पिंडदान से जुड़ी दक्षिणा और सामग्री की कीमत पहले ही स्पष्ट करें। किसी भी पैकेज की बुकिंग करने से पहले इसमें शामिल सुविधाओं और ताजा मूल्यों की पुष्टि कर लें। पिंडदान की विधि और जरूरी सामग्री परिवार की परंपरा और संबंधित पुरोहित के मार्गदर्शन के हिसाब से अलग हो सकती है। धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंडित/पुरोहित से पहले सही जानकारी ले लें।
गयाजी में अनोखी आस्था: जर्मनी, रूस और यूक्रेन की विदेशी महिलाओं ने फल्गु तट पर किया पिंडदान
भारतीय सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक ऊर्जा और मोक्ष की पावन भूमि के रूप में विश्वविख्यात बिहार के गयाजी (Gaya Ji) से इस वक्त एक ऐसी अद्भुत, अलौकिक और दिल को छू लेने वाली खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। पितृपक्ष के पवित्र अवसर पर इन दिनों गयाजी के फल्गु तट और विष्णुपाद मंदिर के प्रांगण में देश के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार से विदेशी नागरिक भी बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। लेकिन इनमें सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी हुई हैं जर्मनी, रूस और यूक्रेन जैसे यूरोपीय देशों से आईं विदेशी महिलाएं, जिन्होंने सनातन परंपराओं में पूरी आस्था दिखाते हुए अपने पूर्वजों और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए गयाजी की पवित्र वेदी पर विधिवत पिंडदान और तर्पण किया। युद्ध और संकट से घिरे देशों से आने वाली इन विदेशी महिलाओं के मन में भारतीय अध्यात्म और पूर्वजों के प्रति इस प्रकार का अगाध प्रेम देखकर वहां मौजूद स्थानीय तीर्थ पुरोहित, पंडा समाज और देश-विदेश से आए अन्य तीर्थयात्री भी पूरी तरह से दंग रह गए। आज के इस विस्तृत, ज्ञानवर्धक और विशेष आलेख में हम आपको गयाजी की इस अनूठी आस्था, विदेशी नागरिकों के बीच सनातन धर्म के बढ़ते प्रभाव और पिंडदान की इस प्राचीन परंपरा के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।पितृपक्ष के दौरान गयाजी की पावन भूमि पर उमड़ती है वैश्विक आस्था की भीड़हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में जब पितृपक्ष का अनुष्ठान शुरू होता है, तो बिहार की यह गयाजी नगरी पूरी दुनिया के नक्शे पर एक बड़े आध्यात्मिक केंद्र के रूप में उभरकर सामने आती है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु के चरण चिह्नों से पवित्र हुई इस पावन धरती पर अपने पितरों का पिंडदान करने से उन्हें सीधे मोक्ष की प्राप्ति होती है और वे पुनर्जन्म के चक्र से मुक्त हो जाते हैं। यही वजह है कि केवल भारतीय ही नहीं, बल्कि विदेशी सैलानी और योग-वेदांत से जुड़े लोग भी इस अलौकिक शक्ति से खिंचे चले आते हैं। इस बार जर्मनी, रूस और यूक्रेन की जिन महिलाओं ने पिंडदान किया, वे पिछले कुछ समय से भारत में रहकर सनातन संस्कृति, योग और भारतीय दर्शन का अध्ययन कर रही थीं। जब उन्हें यह ज्ञात हुआ कि पितृपक्ष में अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए यह अनुष्ठान कितना महत्वपूर्ण है, तो उन्होंने बिना किसी संकोच के पूरी श्रद्धा और भारतीय परिधान (साड़ी और कुर्ता) में सजकर गयाजी के फल्गु तट पर आकर इस पवित्र कर्मकांड में हिस्सा लिया।जर्मनी, रूस और यूक्रेन की महिलाओं ने कैसे संपन्न कराया पूरा कर्मकांड?जब विदेशी महिलाएं गयाजी के तीर्थ पुरोहितों के मार्गदर्शन में पिंडदान करने के लिए बैठीं, तो उनका समर्पण देखने लायक था। उन्होंने हाथों में कुश, अक्षत, काले तिल और फूल लेकर संस्कृत के उन मंत्रों को पूरी निष्ठा के साथ दोहराया जिनका उच्चारण पुरोहित करवा रहे थे। रूस और यूक्रेन से आईं महिलाओं ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए बताया कि उनके देशों में अपने पूर्वजों को याद करने की अपनी परंपराएं हैं, लेकिन भारत की यह सनातन परंपरा विज्ञान और आत्मा के रहस्यों से जुड़ी एक ऐसी जीवंत व्यवस्था है जो इंसान को अंदर से शांति देती है। युद्ध की विभीषिका झेल रहे यूक्रेन और रूस की महिलाओं द्वारा अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए फल्गु नदी के तट पर पिंडदान करना इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि दुख, शांति और श्रद्धा की भाषा पूरी दुनिया में एक ही होती है। स्थानीय पंडा समाज ने इन विदेशी महिलाओं को बहुत ही सहजता और विस्तार से एक-एक अनुष्ठान की विधि समझाई, जिसे उन्होंने पूरी तन्मयता के साथ पूरा किया और अंत में फल्गु नदी में तर्पण कर अपने पितरों को नमन किया।सनातन संस्कृति का वैश्विक विस्तार और वसुधैव कुटुंबकम की सच्ची तस्वीरआज के इस आधुनिक और तकनीकी युग में जहां पूरी दुनिया भौतिकतावाद की दौड़ में भाग रही है, वहीं भारतीय संस्कृति और दर्शन के प्रति विदेशियों का यह बढ़ता आकर्षण इस बात का संकेत है कि मानवता को शांति का असली मार्ग केवल सनातन परंपराओं से ही मिल सकता है। गयाजी में हर साल आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, जो यहां आकर न केवल पिंडदान जैसी प्राचीन परंपराओं को देखते हैं बल्कि खुद इसका हिस्सा भी बनते हैं। जर्मनी और यूरोपीय देशों से आए कई शोधार्थियों का यह मानना है कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति, पूर्वजों और ब्रह्मांड के बीच का जो संतुलन सिखाया गया है, वह दुनिया के किसी अन्य कोने में देखने को नहीं मिलता। गयाजी के इन आयोजनों ने एक बार फिर से 'वसुधैव कुटुंबकम' (पूरा विश्व एक परिवार है) के उस प्राचीन भारतीय सूत्र को चरितार्थ कर दिया है, जहां हर संस्कृति और देश के लोग आकर एक ही ईश्वर और अपनी जड़ों से जुड़ जाते हैं।स्थानीय प्रशासन और तीर्थ पुरोहितों द्वारा की गई मेहमाननवाजियों की सराहनागयाजी पहुंचे इन विदेशी मेहमानों की सुरक्षा, सुविधा और उनके धार्मिक अनुष्ठानों को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए स्थानीय प्रशासन और तीर्थ पुरोहित समाज ने विशेष इंतजाम किए थे। पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें लगातार इस बात का ध्यान रख रही थीं कि देश-विदेश से आने वाले किसी भी तीर्थयात्री को दर्शन या पिंडदान के दौरान कोई असुविधा न हो। विदेशी महिलाओं ने भी भारतीय आतिथ्य सत्कार और गया के लोगों के खुले दिल से स्वागत की भूरी-भूरी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि गयाजी की इस धरती पर आकर उन्हें जो मानसिक शांति और अपनेपन का अहसास हुआ है, उसे वे कभी नहीं भूल सकतीं। यह घटना न केवल गयाजी के इतिहास में दर्ज हो गई है, बल्कि पूरी दुनिया को यह संदेश दे गई है कि आस्था की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती और पूर्वजों के प्रति सम्मान का भाव हर इंसान के दिल में समान रूप से धड़कता है।
अक्टूबर माह में बदलेगी 2 ग्रहों की चाल, वक्री भी होंगे और उदय अस्त भी होंगे शुक्र और बुध
ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों की विशेष भूमिका होती है। ग्रहों की चाल और उनके गुण व्यक्ति के स्वभाव व भविष्य पर खासा असर डालते हैं। ग्रह एक निश्चित अंतराल पर अपनी चाल को बदलते रहते हैं। यह एक विशेष अवधि में मौजूदा राशि को छोड़कर दूसरी राशि में जाते रहते हैं। जब-जब ग्रहों का राशि परिवर्तन होता है तब तब इसका व्यापक असर सभी 12 राशियों के जातकों पर पड़ता है। हर महीने कई ग्रहों का राशि परिवर्तन होता है। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि अक्टूबर माह में सूर्य और गुरु राशि परिवर्तन करेंगे। जबकि शुक्र और बुध वक्री भी होंगे और उदय अस्त भी होंगे। सूर्य 17 अक्टूबर को शाम 7:50 पर तुला राशि में प्रवेश करेंगे। देवगुरु बृहस्पति 31 अक्टूबर को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। शुक्र 3 अक्टूबर को दोपहर 12:44 पर वक्री होंगे। शुक्र 14 अक्टूबर को रात्रि 12:18 पर पूरब दिशा में अस्त होंगे और 28 अक्टूबर को सुबह 7:36 पर पश्चिम दिशा में उदय होंगे। बुध 24 अक्टूबर को दोपहर 12:30 पर वक्री होंगे। 28 अक्टूबर को बुध सुबह 6:32 पर पश्चिम दिशा में अस्त होंगे। शनि मीन राशि में वक्री अवस्था में बने रहेंगे, जबकि राहु कुंभ में और केतु सिंह में विराजमान रहेंगे। इन ग्रह परिवर्तनों का असर हर किसी की जिंदगी पर अलग-अलग ढंग से दिखाई देगा। इसमें किसी को लाभ तो किसी को हानि होगी। ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों की चाल का असर व्यक्ति के जीवन पर पड़ता है। ज्योतिष के नजरिए से भी ये माह बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। इस माह में 2 ग्रह राशि परिवर्तन करेंगे। वैदिक ज्योतिष के सिद्धांत के अनुसार मनुष्य के जीवन में जो भी घटनाएं घटित होती हैं। उनका कारण ग्रहीय दशा, गोचर, उनकी चाल है। सौरमंडल में बैठे ग्रह ही यह निर्धारित करते हैं कि आने वाला समय कैसा होगा और मनुष्य जीवन पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। 17 अक्टूबर को सूर्य का तुला राशि में प्रवेश कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि सूर्य को सभी ग्रहों का राजा माना जाता है। कुंडली में सूर्य ग्रह के मजबूत होने पर व्यक्ति का समाज में मान-सम्मान और यश में बढ़ोतरी होती है। सूर्य ग्रह का असर शरीर में पेट, आंखें, दिल, चेहरे और हड्डियों पर होता है। सूर्य के अशुभ प्रभाव से सिरदर्द, बुखार और दिल की बीमारियां होती हैं। इसके शुभ प्रभाव से आत्मविश्वास बढ़ता है। सम्मान और प्रसिद्धि मिलती है। इस ग्रह के प्रभाव से जॉब और बिजनेस में तरक्की भी मिलती है। दिनांक 17 अक्टूबर को ग्रहों के राजा सूर्य तुला राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। यह राशि परिवर्तन शाम 7:50 पर होगा। तुला राशि सूर्य की नीच राशि में आती है। यह गोचर जातक के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। तुला राशि वाले इस अवधि में सतर्क रहें। उन पर गलत आरोप लग सकता हैं। अच्छाई के बदले अपयश मिल सकता है। स्वास्थ्य को लेकर भी यह समय अच्छा नहीं है। इसे भी पढ़ें: Goddess Gayatri: सृष्टि रचना और ब्रह्माजी के संकल्प से हुआ था मां गायत्री का प्राकट्य, ऐसे बनीं वेदमाता 31 अक्टूबर को गुरु करेंगे सिंह राशि में गोचर भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि अक्तूबर के अंतिम दिन यानी 31 अक्तूबर 2026 को देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। गुरु का यह राशि परिवर्तन महीने के प्रमुख ग्रह गोचरों में शामिल रहेगा। बृहस्पति को ज्ञान, शिक्षा, संतान, धन, धर्म और विस्तार का कारक ग्रह माना जाता है। सिंह राशि में गुरु का प्रवेश कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आ सकता है। इस गोचर का प्रभाव केवल व्यक्तिगत जीवन ही नहीं, बल्कि शिक्षा, करियर, आर्थिक स्थिति और सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों पर भी ज्योतिषीय दृष्टि से देखा जाता है। बुध का वक्री होना भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि 24 अक्तूबर को बुध वक्री हो जाएंगे। बुध को बुद्धि, वाणी, तर्क, व्यापार और संचार का कारक ग्रह माना जाता है। ऐसे में बुध की वक्री चाल के दौरान बातचीत, कागजी कार्यों, व्यापारिक समझौतों और महत्वपूर्ण निर्णयों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। महीने के अंतिम दिनों में बुध और मंगल का संबंध भी बनेगा, जिससे ग्रहों की स्थिति और अधिक प्रभावशाली हो सकती है। शुक्र की वक्री गति भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि अक्तूबर की शुरुआत में शुक्र अपनी स्वराशि तुला में विराजमान रहेंगे। 3 अक्तूबर को शुक्र इसी राशि में वक्री गति शुरू करेंगे। शुक्र का अपनी ही राशि में होना ज्योतिष की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। वक्री अवस्था में शुक्र के प्रभाव से प्रेम संबंध, वैवाहिक जीवन, सुख-सुविधाओं, कला और आर्थिक मामलों से जुड़े फैसलों में कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। इसके बाद 24 अक्तूबर को शुक्र चित्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, जिससे ग्रहों की स्थिति में एक और बदलाव आएगा। अक्तूबर में बनेंगे ये खास योग त्रिग्रही योग भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि अक्तूबर की शुरुआत में कर्क राशि में चंद्रमा, मंगल और बृहस्पति की युति से त्रिग्रही योग का निर्माण होगा। 4 से 6 अक्तूबर के बीच बनने वाला यह योग चंद्रमा की तेज गति के कारण अधिक समय तक नहीं रहेगा। ज्योतिष में तीन ग्रहों की एक ही राशि में मौजूदगी को महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए इस दौरान बनने वाला यह संयोग कई राशियों के लिए विशेष प्रभाव वाला हो सकता है। बुधादित्य योग भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि 17 अक्तूबर को सूर्य के तुला राशि में प्रवेश करने के बाद सूर्य और बुध एक ही राशि में आ जाएंगे। दोनों ग्रहों की इस युति से बुधादित्य योग बनेगा। ज्योतिष में सूर्य को आत्मविश्वास, मान-सम्मान और नेतृत्व का कारक, जबकि बुध को बुद्धि, वाणी, तर्क और व्यापार का कारक माना जाता है। ऐसे में यह योग इन क्षेत्रों से जुड़े मामलों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। लक्ष्मी नारायण योग भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि अक्तूबर में तुला राशि में बुध और शुक्र की युति से लक्ष्मी नारायण योग भी बनेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार बुध और शुक्र की युति को धन, सुख-सुविधा, कला, व्यापार और वैभव से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए यह योग आर्थिक और भौतिक सुख-सुविधाओं से जुड़े मामलों के लिहाज से खास माना जा रहा है। मालव्य योग भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि शुक्र के अपनी स्वराशि तुला में स्थित होने से अक्तूबर में मालव्य योग बनने की स्थिति रहेगी। यह पंच महापुरुष योगों में शामिल है। ज्योतिष में मालव्य योग को सौंदर्य, सुख-सुविधा, कला, भौतिक समृद्धि और आकर्षण से संबंधित माना जाता है। शुक्र की मजबूत स्थिति के कारण इस योग को विशेष महत्व दिया जाता है। शुक्रादित्य योग भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि 17 अक्तूबर को सूर्य के तुला राशि में प्रवेश करते ही वहां पहले से मौजूद शुक्र के साथ उनकी युति बनेगी। सूर्य और शुक्र की इस युति को शुक्रादित्य योग कहा जाता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह योग 6 नवंबर तक प्रभावी रह सकता है। सूर्य और शुक्र दोनों अलग-अलग क्षेत्रों के कारक ग्रह माने जाते हैं, इसलिए इनकी युति को करियर, मान-सम्मान, सुख-सुविधा और रचनात्मक क्षेत्रों से जोड़कर देखा जाता है। ग्रहों के गोचर का प्रभाव भविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास ने बताया कि देश की राजनीति में बड़े बदलाव होंगे। नए चेहरे और युवाओं को मौका मिलेगा। कुछ नेताओं को हानि होगी। पड़ोसी देशों से तनाव बढ़ेगा। अनचाही घटनाएं होगी। वाद विवाद ज्यादा होंगे। भूकंप आगजनी रेल और वायुयान दुर्घटना होगी। किसी प्रसिद्ध व्यक्ति का निधन। सड़क दुर्घटनाएं ज्यादा होगी। बाजार और व्यापार को फायदा होगा। किसानो को फायदा होगा। अन्न उत्पादन ज्यादा होगा। लोहा इस्पात मेडिकल और केमिकल्स व्यापार तरक्की करेंगे। आंखों एवं त्वचा के रोग बढ़ेंगे। सोने की कीमत और विदेशी करेंसी में उतार-चढ़ाव रहेगा। पेट्रोल, डीजल और तेल के दाम बढ़ने का अनुमान है। देश में विवाद होंगे। चोरी-डकैती, अपहरण और दुष्कर्म भी बढ़ने की आशंका है। जिससे लोगों में डर और तनाव रहेगा। नई-पुरानी बीमारियों से लोग परेशान हो सकते हैं। महंगाई और टैक्स बढ़ने के योग हैं। व्यापार में तेजी आएगी। प्राकृतिक घटनाएं होगी। भूकंप आने की संभावना है। तूफान, बाढ़, भूस्खलन, पहाड़ टूटने, सड़के और पुल भी टूटने की घटनाएं हो सकती हैं। बस और रेलवे यातायात से जुड़ी बड़ी दुर्घटना होने की भी आशंका है। बीमारियों का संक्रमण बढ़ सकता है। शासन-प्रशासन और राजनैतिक दलों में तेज संघर्ष होंगे। सामुद्रिक तूफान और जहाज-यान दुर्घटनाएं भी हो सकती हैं। खदानों में दुर्घटना और भूकंपन से जन-धन हानि होने की आशंका बन रही है। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। आय में इजाफा होगा। राजनीति में बड़े स्तर पर परिवर्तन देखने को मिलेगा। क्या करें उपाय भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि हं हनुमते नमः, ऊॅ नमः शिवाय, हं पवननंदनाय स्वाहा का जाप करें। प्रतिदिन सुबह और शाम हनुमान जी के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाएं। लाल मसूर की दाल शाम 7:00 बजे के बाद हनुमान मंदिर में चढ़ाएं। हनुमान जी को पान का भोग और दो बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं। ईश्वर की आराधना संपूर्ण दोषों को नष्ट एवं दूर करती है। महामृत्युंजय मंत्र और दुर्गा सप्तशती पाठ करना चाहिए। माता दुर्गा, भगवान शिव और हनुमानजी की आराधना करनी चाहिए। - डा. अनीष व्यास भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक
Manipur के Loktak Lake पर बसा Floating Village Champu Khangpok पानी पर तैरता है
क्या आप कभी ऐसी जगह पर घूमने के लिए गए हैं, जहां पर कदम रखते ही जमीन डगमगाने लगे। आपको ऐसा महसूस हो, जैसे आप चल नहीं बल्कि तैर रहे हैं। ऐसा दृश्य सोचने पर एकदम सपने जैसा महसूस होता है। ऐसा ही कुछ मणिपुर का फ्लोटिंग विलेज चंपू खंगपोक है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको अनोखे और रोमांच से भरपूर जगह फ्लोटिंग विलेज चंपू खंगपोक के बारे में बताने जा रहे हैं। फ्लोटिंग विलेज है चंपू खंगपोक भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य मणिपुर में एक तैरता हुआ गांव है। जिसका नाम चंपू खंगपोक है। यह भारत की फेमस लोकटक झील पर बसा है, जोकि करीब 240 वर्ग किमी के आकार में फैली है। इस गांव के लोगों ने पानी के साथ जीना सीख लिया है, तभी तो आपको इस गांव में पानी पर चलते लोग, तैरते घर और द्वीप देखने को मिलेंगे। इसे भी पढ़ें: Gaya Ji में Pind Daan का पूरा बजट: Train टिकट, होटल स्टे और पूजा फीस की डिटेल जानें डगमगाती जमीन का रहस्य चंपू खंगपोक गांव के तैरने के पीछे कोई जादू नहीं हैं। बल्कि इसके पीछे साइंस का कमाल है। इसके पीछे की वजह इस स्थान की प्रकृति और बायोमास का प्रोसेस है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस गांव की जमीन किसी चट्टान या मिट्टी से नहीं बनी है, बल्कि यह फुम्डी नाम की प्राकृतिक जमीन है। फुम्डी जमीन जड़ों, सड़े-गले पौधों, मिट्टी और जैविक पदार्थों की परत से बनी होती है। वहीं साल-दर-साल जब इन सभी चीजों का जमावड़ा शुरू होकर एक जगह पर एकत्र होता है। तो इसकी परत से जमीन बन जाती है। यह जमीन इतनी ज्यादा मजबूत होती है कि इन पर घरों तक का निर्माण किया जा सकता है। बदलती है घरों की लोकेशन यहां पर रहने वाले लोगों के घरों को फुमशंग कहा जाता है, जो अपनी लोकेशन को बदलते रहते हैं। क्योंकि यह घर जमीन पर नहीं बल्कि फुम्डी पर बने हैं, तो पानी के बहाव और हवा के दबाव की वजह से इनकी लोकेशन बदलती रहती है। यही कारण है कि चंपू खंगपोक दुनियाभर में अपनी इसी विशेषता की के कारण आकर्षण का केंद्र बना हुआ था। देख सकेंगे तैरता हुआ नेशनल पार्क अनोखे गांव के अलावा आप लोकटक झील में तैरता हुआ कीबुल लामजाओ नेशनल पार्क भी देख सकेंगे। यह पार्क विष्णुपुर जिले में हैं, जोकि लोकटक झील के दक्षिण पश्चिम में करीब 40 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र फैला है। इस जगह की खासियत यह है कि यहां पर विलुप्त हो रहे संगाई हिरण रहते हैं, यह उनका अकेला आवास स्थल है।
Gaya Ji में Pind Daan का पूरा बजट: Train टिकट, होटल स्टे और पूजा फीस की डिटेल
पितृपक्ष की शुरुआत हो चुकी है और यह 16 दिनों तक चलता है। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों का तर्पण करते हैं। वहीं, गया जी जाकर पिंडदान भी करते हैं। यदि आप भी गया जी जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो इस लेख में जान लें कि सफर शुरु करने से पहले रुट और खर्च का अंदाजा लग जाए। बिहार का गया पितरों के लिए पिंडदान और तर्पण करने वाली खास जगहों में माना जाता है। इस समय गया में काफी संख्या में लोग जाते हैं। असल में गया में पिंजदान के लिए कई जगहें हैं और कुछ वेदियों को खास माना जाता है। ऐसे में आपके लिए पूरा गाइड लेकर आए हैं। आइए आपको इस लेख में बताते हैं ट्रेन, फ्लाइट, रहने और पिंडदान से संबंधित खर्च की जानकारी आपको बताने जा रहे हैं। गया जी में पिंडदान के लिए हैं 48 प्रमुख वेदियां बिहार टूरिज्म के मुताबिक, गया में पिंडदान के लिए कुल 48 मुख्य वेदियां है। इसमें विष्णुपद मंदिर, गया शिरोमणि मंदिर, फल्गु नदी, पंचतीर्थ, अक्षय वट, प्रेतशिला, रामशिला और सीता कुंड सबसे खास माने जाते हैं। श्राद्ध के समय यहां पर काफी भीड़ देखने को मिलती है। दिल्ली से गया कैसे पहुंचें? यदि आप दिल्ली से गया जी जाना चाहते हैं, तो पहले पटना तक पहुंचना होगा। आप पटना ट्रेन या फ्लाइट से भी पहुंच सकते हैं। इसके बाद पटना और आसपास के शहरों से गया जाने के लिए ट्रेन आसानी से मिल जाती है। पटना से गया पहुंचने के लिए आपको करीब 2 घंटे का समय लग सकता है। जब आप गया जी जंक्शन पहुंच जाएं तो पिंडदान वाली जगह तक जाने के लिए ऑटो या टैक्सी मिल जाएगी। फ्लाइट से जाने का क्या तरीका है? आपके पास समय की दिक्कत है, तो आप फ्लाइट के जरिए आप पटना पहुंच सकते हैं। इसके बाद पटना से गया जाने के लिए प्राइवेट टैक्सी लेना होगा। लेकिन इससे आपका कुल खर्चा हो सकता है। फिर आप पटना से गया जा सकते हैं, इसके लिए आपको बस, टैक्सी या अपनी कार भी बुक कर सकते हैं। दिल्ली से ट्रेन का कितना खर्च आएगा? दिल्ली से ट्रेन गया जाती है और टिकट करीब 500 रुपये से लेकर 3,000 रुपये तक हो सकता है। वैसे ट्रेन की टिकट क्लास के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है। यदि आप फ्लाइट से जाना चाहती हैं, तो इसका खर्चा करीब 5000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक का हो सकता है। गया में रुकने का किचना खर्चा आएगा? गया में रुकने के लिए अपने बजट के हिसाब से रह सकते हैं। आपकी पंसद और सुविधा के अनुसार से ठहरने का खर्च करीब 3000 से 5000 रुपये तक का हो सकता है। इतना ही नहीं, खाने-पीने पर करीब 2000 रुपये तक खर्च हो सकते हैं। पिंडदान और पंडा की फीस क्या है? वैसे पिंडदान के लिए यहां का खर्च सभी के लिए एक जैसा नहीं है। यह इस बात पर भी डिपेंड करता है कि कितने लोग जा रहे हैं और किस तरह की पूजा कराई जाएगी। बताते चलें कि नॉर्मल पिंडदान और पूजा-पाठ कराने में आपको 5100 से करीब 11,000 रुपये देने होंगे। गया जी जाने से पहले बजट ऐसे समझें यदि आप गया जा रहे है, तो आपको मोटा-मोटी खर्चा इतना आ सकता है, बजट के कुछ पॉइंट्स को जरुर समझें। दिल्ली से ट्रेन: करीब 500 से 3,000 तक फ्लाइट से पटना: करीब 5,000 से 10,000 तक गया में स्टे करना: करीब 3,000 से 5,000 तक खान-पान: करीब 2000 तक पिंडदान और पूजा-पाठ: करीब 5100 से 11,000 तक पटना से गया: ट्रेन, बस, टैक्सी या प्राइवेट कार का ऑप्शन पितृपक्ष मेला 2026: 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक
हिंदू धर्म में देवी सरस्वती को कला और ज्ञान की देवी माना जाता है। देवी सरस्वती को वेदों की माता भी कहा जाता है। देवी सरस्वती का स्वरूप निर्मल चांद की ओर जिनके मुख पर दिव्य चमक है। पीत और श्वेत रंग के वस्त्र पहने और उनको कमल के फूल पर विराजमान और हाथों में वीणा धारण किए दिखाया जाता है। हिंदू मान्यताओं के मुताबिक जो भी व्यक्ति नियमित रूप से मां के मंत्रों का जाप सच्चे मन से करता है, उसको मां सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको देवी सरस्वती के कुछ खास मंत्रों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका जप करने से आप स्वयं में बड़ा बदलाव महसूस कर सकेंगे। दर्शन, रहस्यवाद या उससे जुड़े विषय जो भी व्यक्ति रहस्यवाद, दर्शन या इससे जुड़े किसी भी तरह के विषयों का अध्ययन कर रहा होता है, उनके लिए यह मंत्र मस्तिष्क में महान विचारों को धारण करने और उन पर सोचने-समझने की क्षमता प्रदान करता है। इस मंत्र से व्यक्ति की मेधा और बुद्धि दोनों को जागृत करता है। इसे भी पढ़ें: Goddess Gayatri: सृष्टि रचना और ब्रह्माजी के संकल्प से हुआ था मां गायत्री का प्राकट्य, ऐसे बनीं वेदमाता मंत्र- ऊं ब्रह्म ज्ञानायै नम: इस मंत्र का अर्थ है कि मैं ब्रह्मांड में मौजूद उस चेतन बुद्धि की शक्ति को नमन करते हैं। यह मंत्र देवी सरस्वती के उस शक्ति रूप को वर्णित करता है, जोकि खुद ब्रह्मांड की बुद्धि के पीछे मौजूद हैं। खगोल, भौतिकी, रसायन विज्ञान या संबंधित विषय जो भी व्यक्ति खगोल, भौतिकी या अलग-अलग तरह के रसायन विज्ञान और अन्य तरह के विषयों का अध्ययन करता है, उनको इस मंत्र का जाप करना चाहिए। मंत्र - ऊं महा विद्यायै नम: इस मंत्र का अर्थ है कि महान ज्ञान के पीछे स्थित और इससे उत्पन्न करने वाली शक्ति को नमन करते हैं। मां सरस्वती को महान ज्ञान और उसकी अनुभूति के पीछे स्थित शक्ति के रूप में इस मंत्र को वर्णित किया जाता है। धार्मिक विषयों से जुड़े लोगों के लिए जो भी लोग धर्म के विचारों और ग्रंथों में गहराई से उतारने की कोशिश करते हैं। जिससे किसी भी धर्म या संस्कृति के शास्त्रों के गहरे अर्थ को समझने का प्रयास करते हैं। यह मंत्र धार्मिक विषयों से जुड़े लोगों की बौद्धिक क्षमताओं को भी अधिक तेज बनाने का काम करता है। मंत्र- वेदानां मातरं पश्य मत्सथां देवीं सरस्वती। इस मंत्र का अर्थ है कि देखो, वेदों की माता मां सरस्वती मुझमें निवास करती हैं। इन तीनों मंत्रों में मां सरस्वती को ब्रह्मांड में मौजूद बुद्धि, ज्ञान को उत्पन्न करने वाली शक्ति और अंदर निवास करने वाली वेदों की मां के रूप में पुकारा गया था।
Gaya Ji News: विजय कुमार सिन्हा बोले- कृषि की उन्नति के लिए सरकार सजग:
बिहार के कृषि मंत्री और गया जिला प्रभारी मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने गया सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कृषि विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता जताई.कृषि क्षेत्र को आगे बढ़ाने और किसानों की उन्नति के लिए सरकार पूरी तरह सजग और गंभीर है. प्रेस कॉन्फ्रेंस गयाजी सर्किट हाउस में आयोजित की गई
Gaya News: 4 मोबाइल के साथ धराए दो चोर
गया जंक्शन पर 'ऑपरेशन यात्री सुरक्षा' के तहत आरपीएफ और जीआरपी के संयुक्त अभियान में यात्रियों से चोरी किए गए चार मोबाइल फोन के साथ दो चोरों को गिरफ्तार किया गया है।
Gaya ji News: स्टेशन मास्टर यादव का विदाई समारोह
पहाड़पुर स्टेशन पर सेवानिवृत्त स्टेशन मास्टर सी.एस. यादव के विदाई समारोह में स्थानीय रेल अधिकारी, सहकर्मी और कर्मचारी उपस्थित रहे
हीरामंडी को लेकर संजय लीला भंसाली ने खोले ये राज़
संजय लीला भंसाली की बहुप्रतीक्षित सीरीज़ हीरामंडी नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हो गई है, जिसमें सोनाक्षी सिन्हा, अदिति राव हैदरी, और मनीषा कोईराला जैसे सितारों की कास्ट शामिल है। इस श्रृंखला ने काफी ध्यान आकर्षित किया है, हालांकि भंसाली ने खुलासा किया कि उनकी प्रारंभिक कास्टिंग विकल्प फाइनल कास्ट से अलग थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने मूल रूप से हीरामंडी को रेखा, करीना कपूर और रानी मुखर्जी के साथ एक फिल्म के रूप में देखा था। हालांकि, स्टोरी के बड़े होनेके कारण इसे फिल्म के बजाय एक सीरीज़ में बदल दिया गया। भंसाली ने बताया कि वह पिछले 18 वर्षों से हीरामंडी के कॉसेप्ट पर काम कर रहे थे। श्रृंखला स्वतंत्रता से पहले के लाहौर में स्थित हीरा मंडी जिले में दरबारऔर नवाबों पर है। शुरू में, कास्टिंग ने वर्षों में कई बदलावों का सामना किया, जिसमें माहिरा खान, इमरान अब्बास, और फवाद खान जैसे नाम विभिन्न समयों पर विचार किए गए। अंततः, प्रोडक्शन ने एक नई कास्ट पर फैसला किया । हीरामंडी एक पीरियड ड्रामा है जिसका निर्देशन संजय लीला भंसाली और मिताक्षरा कुमार ने किया है। कहानी लाहौर के हीरा मंडी जिले में तवायफों के जीवन पर है, फिल्म की कहानीब्रिटिशकाल के दौरान की कहानी है, जहां एक वैश्यालय की महिलाएं आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों से लड़ रही होती हैं।। प्रमुख अभिनेताओं के साथ, श्रृंखला में मनीषा कोईराला, ऋचा चड्ढा, संजीदा शेख, महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। फरदीन खान, शेखर सुमन और अध्ययन सुमन भी नवाबों की भूमिका में हैं। जियो फाइबर को कड़ी टक्कर दे रहा है एयरटेल एक्सट्रीम फाइबर, जानिए सभी फ्री ओटीटी प्लान्स की लिस्ट ₹10,000 से कम में मिलेंगे ये 5 बेहतरीन स्मार्ट टीवी, पूरा दिन देखने का मन करेगा जियो सिनेमा के दो नए प्रीमियम प्लान लॉन्च, सिर्फ ₹29 में मिलेंगे इतने फायदे
Gayatri Joshi Birthday Special : SRK संग सुपरहिट फिल्म देने के बाद भी इंडस्ट्री से क्यों गायब हो गई गायत्री,पहली फिल्मही बन गई आखिरी
Gayatri JoshiBirthday : 1 हिट फिल्म देकर हो गई इंडस्ट्री से गायब,65वें सबसे अमीर भारतीय से की शादी, Networth जानकर तोहो जांएगे बेहोश

