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Pitru Paksha Gaya Ji: सातीकुंड में बालू से क्यों होता है पिंडदान? 9वें दिन उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

Pitru Paksha 2026 के नौवें दिन सीताकुंड पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने बालू के पिंड से पिंडदान किया।

जागरण 4 Oct 2026 5:07 pm

Pitru Paksha पर Gaya में Pind Daan का महत्व, Patna से यात्रा रूट और पूजा के नियम

इस बार 26 सितंबर 2026 से पितृपक्ष की शुरूआत हो रही है। आश्विन माह की कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से पितृपक्ष की शुरूआत होती है। हिंदू धर्म में पितृपक्ष का विशेष महत्व होता है। क्योंकि इस दौरान पूर्वजों के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए समर्पित होती है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक प्रतिपदा तिथि से लेकर सर्वपितृ अमावस्या तक पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और श्राद्धकर्म जैसे धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान पूर्वज पृथ्वीलोक पर अपने वंशजों पर कृपा बरसाने हैं। इस दौरान विधि-विधान से किए गए श्राद्धकर्म से पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार पर पितर अपना आशीर्वाद बनाए रखते हैं। इसलिए श्राद्धकर्म नियमों के साथ पूर्ण किए जाते हैं। अगर आप पहला श्राद्ध करने जा रहे हैं, तो इससे जुड़े कुछ नियमों को जान लेना चाहिए। गया में पिंडदान का महत्व सनातन परंपरा में गया को पितृकर्म के प्रमुख तीर्थों में से एक माना गया है। यहां पर श्राद्ध और पिंडदान का संबंध पितरों के स्मरण, श्रद्धा और पितृ ऋण माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि गया में पितृकर्म करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। यह सिर्फ दोष दूर करने का उपाय नहीं बल्कि इसको पितरों के प्रति कर्तव्य के रूप में समझना चाहिए। ऐसे पहुंचे गया गया जाने के लिए सबसे पहले आपको राजधानी पटना तक रेल या हवाई यात्रा से जाना होगा। फिर पटना और उसके आसपास के शहरों से बड़ी आसानी से गया तक के ट्रेन मिल जाती है। अगर आप पटना से जा रही हैं, तो गया जाने में 2 से 3 घंटे का समय लग सकता है। फिर गया जंक्शन पर उतरकर टैक्सी या ऑटो की सहायता से पिंडदान स्थलों तक जाएं। पटना से सड़क के रास्ते गया तक जाने के लिए बस, टैक्सी या प्राइवेट कार कर सकते हैं। इसके बाद स्थानीय परिवहन की सहायता से पिंडदान स्थलों तक पहुंच सकते हैं। फ्लाइट से जाने वाले यात्रा भी पटना के बाद प्राइवेट टैक्सी से गया तक जा सकते हैं। इन बातों का रखें ध्यान पितृपक्ष में गया में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। इसलिए होटल, ट्रेन और स्थानीय परिवहन की बुकिंग पहले करना उपयोगी साबित हो सकता है। पूजा-पिंडदान से जुड़ी दक्षिणा और सामग्री की कीमत पहले ही स्पष्ट करें। किसी भी पैकेज की बुकिंग करने से पहले इसमें शामिल सुविधाओं और ताजा मूल्यों की पुष्टि कर लें। पिंडदान की विधि और जरूरी सामग्री परिवार की परंपरा और संबंधित पुरोहित के मार्गदर्शन के हिसाब से अलग हो सकती है। धार्मिक अनुष्ठान के लिए स्थानीय पंडित/पुरोहित से पहले सही जानकारी ले लें।

प्रभासाक्षी 2 Oct 2026 6:16 pm

रूस, यूक्रेन और जर्मनी की बालाओं ने भारतीय परंपरा निभाते हुए साड़ी पहनकर किया पिंडदान

सनातन संस्कृति, भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं और मोक्ष की भूमि कहे जाने वाले बिहार के ऐतिहासिक गया (Gaya) शहर से इस वक्त एक ऐसी अद्भुत, अलौकिक और हृदय को छू लेने वाली तस्वीर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया है। पितृपक्ष मेला (Pitru Paksha Mela) के इस पवित्र और महात्म्य से भरे अवसर पर जब गया के फल्गु तट और विष्णु पद मंदिर परिसर में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है, तब वहां एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने हर किसी को अचंभित कर दिया। रूस (Russia), यूक्रेन (Ukraine), जर्मनी (Germany), इटली और अफ्रीकी देशों से चलकर भारत आई विदेशी महिलाओं ने अपनी पश्चिमी संस्कृति को पीछे छोड़कर पूरी तरह से भारतीय रंग में रंगते हुए पारंपरिक साड़ियां पहनीं और गयाजी की पवित्र धरती पर अपने पूर्वजों तथा दिवंगत आत्माओं की मुक्ति के लिए पिंडदान (Pind Daan) किया। हाथों में कुशा, तिल और जौ लेकर विधि-विधान से तर्पण करती इन विदेशी महिलाओं के चेहरों पर जो भाव और समर्पण दिखाई दे रहा था, वह यह साबित करने के लिए काफी था कि भारतीय सनातन संस्कृति की जड़ें और इसकी आध्यात्मिक ऊर्जा पूरी दुनिया में किस कदर समाई हुई है। आज के इस विस्तृत, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से परिपूर्ण आलेख में हम आपको गयाजी की इस अद्भुत घटना, विदेशी महिलाओं के इस अनोखे सफर और पितृपक्ष के इस पावन पर्व के सभी रोमांचक पहलुओं के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।गयाजी के पवित्र फल्गु तट पर विदेशी महिलाओं का भारतीय पारंपरिक अंदाज में आगमनबिहार का गया शहर दुनिया भर में केवल एक ऐसा स्थान माना जाता है जहां जीवित रहते हुए या मरने के बाद अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और तर्पण किया जाता है। पितृपक्ष के इन पंद्रह दिनों में महासंगम जैसा माहौल होता है जहां लाखों लोग देश के कोने-कोने से अपने पूर्वजों को नमन करने आते हैं। लेकिन इस बार गयाजी की इन पावन गलियों में विदेशी सैलानियों और आध्यात्मिक खोजियों की मौजूदगी ने इस मेले के स्वरूप को एक वैश्विक और ऐतिहासिक आयाम दे दिया है। रूस, यूक्रेन, जर्मनी, इटली और अफ्रीका जैसे दूरदराज के देशों से आई इन महिलाओं ने जब गयाजी की सीमा में प्रवेश किया, तो उन्होंने स्थानीय परंपराओं का सम्मान करते हुए खुद को पूरी तरह से भारतीय परिधान यानी पारंपरिक साड़ियों में ढाल लिया। कोई लाल तो कोई पीली और हरी साड़ियों में सजी ये विदेशी महिलाएं जब फल्गु नदी के तट पर पहुंचीं, तो स्थानीय लोग भी उनके इस आदर भाव और भारतीय संस्कृति के प्रति प्रेम को देखकर हतप्रद रह गए।रूस, यूक्रेन और जर्मनी की बालाओं ने विधि-विधान से किया पिंडदान और तर्पणसनातन संस्कृति और वेदों के ज्ञान से प्रभावित होकर भारत आईं इन विदेशी महिलाओं ने गया के पंडाजी और विद्वान पुरोहितों के सानिध्य में बैठकर अपने दिवंगत पूर्वजों के लिए पूरी श्रद्धा के साथ पिंडदान की रस्म निभाई। हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, आत्मा की शांति और मोक्ष प्राप्ति के लिए पिंडदान का जो अनुष्ठान किया जाता है, उसे इन विदेशी महिलाओं ने मंत्रोच्चार के बीच पूरी तल्लीनता से पूरा किया। फल्गु नदी के रेत पर बैठकर जब रूस और यूक्रेन की इन बालाओं ने अपने हाथों में पिंड लेकर उसका तर्पण किया और पुरखों की मुक्ति के लिए प्रार्थना की, तो उनकी आंखें नम हो गईं। कई महिलाओं ने बातचीत के दौरान यह साझा किया कि भले ही वे जन्म से किसी अन्य संस्कृति में पली-बढ़ी हों, लेकिन भारत की यह आध्यात्मिक भूमि और गयाजी की ऊर्जा उन्हें अपने भीतर एक अजीब सी शांति और अपनापन का अहसास कराती है।पितृपक्ष मेले की वैश्विक पहचान और दुनिया भर में गूंजता गयाजी का नामगयाजी के पितृपक्ष मेले का यह दृश्य केवल एक धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं है, बल्कि यह इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि भारतीय संस्कृति की वसुधैव कुटुंबकम की भावना किस प्रकार पूरी दुनिया को आपस में पिरो रही है। युद्ध, संकट और आधुनिक दुनिया की भौतिक भागदौड़ से दूर जब जर्मनी, इटली और अफ्रीकी देशों के नागरिक भारत आकर मोक्ष नगरी में अपने पितरों को याद करते हैं, तो यह भारतीय संस्कृति की वैश्विक विजय का प्रतीक बन जाता है। जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग द्वारा भी विदेशी पर्यटकों के लिए इस बार सुरक्षा, आवास और मार्ग दर्शन के विशेष इंतजाम किए गए हैं ताकि वे बिना किसी परेशानी के इस महान धार्मिक आयोजन का हिस्सा बन सकें। जब विदेशी नागरिक गया के पंडा समाज के साथ बैठकर पारंपरिक रीति-रिवाजों को सीखते और निभाते हैं, तो देश और दुनिया के बीच की दूरियां स्वतः समाप्त हो जाती हैं।मानवीय संवेदनाओं और सनातन आस्था का यह संगम हमेशा रहेगा अमरगयाजी की इस धरती पर रूस, यूक्रेन और अन्य यूरोपीय तथा अफ्रीकी देशों की महिलाओं द्वारा किया गया यह पिंडदान इस बात की गवाही देता है कि आत्मा, परमात्मा, पूर्वजों के प्रति सम्मान और मोक्ष की यह परिकल्पना किसी भौगोलिक सीमा में बंधी हुई नहीं है। सरहदों और युद्धों के बीच एक-दूसरे के खिलाफ खड़े रहने वाले देशों के नागरिक जब भारत की इस पावन भूमि पर आकर एक ही घाट पर बैठकर शांति और अपनेपन की प्रार्थना करते हैं, तो यह पूरी मानवता के लिए एक बहुत बड़ा संदेश बन जाता है। पितृपक्ष के इस पावन पर्व पर इन विदेशी महिलाओं की सहभागिता ने यह साबित कर दिया है कि भारत की संस्कृति में वह जादुई आकर्षण है जो हर किसी को अपनी ओर खींच लेता है। गयाजी के इतिहास के पन्नों में यह आयोजन हमेशा के लिए एक ऐसी अनूठी और सुनहरी याद के रूप में दर्ज हो गया है, जो आने वाली पीढ़ियों को सांस्कृतिक सद्भाव और मानवीय संवेदनाओं का पाठ पढ़ाता रहेगा।

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Oct 2026 2:53 pm

गयाजी में अनोखी आस्था: जर्मनी, रूस और यूक्रेन की विदेशी महिलाओं ने फल्गु तट पर किया पिंडदान

भारतीय सनातन संस्कृति, आध्यात्मिक ऊर्जा और मोक्ष की पावन भूमि के रूप में विश्वविख्यात बिहार के गयाजी (Gaya Ji) से इस वक्त एक ऐसी अद्भुत, अलौकिक और दिल को छू लेने वाली खबर सामने आई है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। पितृपक्ष के पवित्र अवसर पर इन दिनों गयाजी के फल्गु तट और विष्णुपाद मंदिर के प्रांगण में देश के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार से विदेशी नागरिक भी बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं। लेकिन इनमें सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी हुई हैं जर्मनी, रूस और यूक्रेन जैसे यूरोपीय देशों से आईं विदेशी महिलाएं, जिन्होंने सनातन परंपराओं में पूरी आस्था दिखाते हुए अपने पूर्वजों और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए गयाजी की पवित्र वेदी पर विधिवत पिंडदान और तर्पण किया। युद्ध और संकट से घिरे देशों से आने वाली इन विदेशी महिलाओं के मन में भारतीय अध्यात्म और पूर्वजों के प्रति इस प्रकार का अगाध प्रेम देखकर वहां मौजूद स्थानीय तीर्थ पुरोहित, पंडा समाज और देश-विदेश से आए अन्य तीर्थयात्री भी पूरी तरह से दंग रह गए। आज के इस विस्तृत, ज्ञानवर्धक और विशेष आलेख में हम आपको गयाजी की इस अनूठी आस्था, विदेशी नागरिकों के बीच सनातन धर्म के बढ़ते प्रभाव और पिंडदान की इस प्राचीन परंपरा के बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।पितृपक्ष के दौरान गयाजी की पावन भूमि पर उमड़ती है वैश्विक आस्था की भीड़हर साल आश्विन मास के कृष्ण पक्ष में जब पितृपक्ष का अनुष्ठान शुरू होता है, तो बिहार की यह गयाजी नगरी पूरी दुनिया के नक्शे पर एक बड़े आध्यात्मिक केंद्र के रूप में उभरकर सामने आती है। ऐसी धार्मिक मान्यता है कि भगवान विष्णु के चरण चिह्नों से पवित्र हुई इस पावन धरती पर अपने पितरों का पिंडदान करने से उन्हें सीधे मोक्ष की प्राप्ति होती है और वे पुनर्जन्म के चक्र से मुक्त हो जाते हैं। यही वजह है कि केवल भारतीय ही नहीं, बल्कि विदेशी सैलानी और योग-वेदांत से जुड़े लोग भी इस अलौकिक शक्ति से खिंचे चले आते हैं। इस बार जर्मनी, रूस और यूक्रेन की जिन महिलाओं ने पिंडदान किया, वे पिछले कुछ समय से भारत में रहकर सनातन संस्कृति, योग और भारतीय दर्शन का अध्ययन कर रही थीं। जब उन्हें यह ज्ञात हुआ कि पितृपक्ष में अपने पूर्वजों की मुक्ति के लिए यह अनुष्ठान कितना महत्वपूर्ण है, तो उन्होंने बिना किसी संकोच के पूरी श्रद्धा और भारतीय परिधान (साड़ी और कुर्ता) में सजकर गयाजी के फल्गु तट पर आकर इस पवित्र कर्मकांड में हिस्सा लिया।जर्मनी, रूस और यूक्रेन की महिलाओं ने कैसे संपन्न कराया पूरा कर्मकांड?जब विदेशी महिलाएं गयाजी के तीर्थ पुरोहितों के मार्गदर्शन में पिंडदान करने के लिए बैठीं, तो उनका समर्पण देखने लायक था। उन्होंने हाथों में कुश, अक्षत, काले तिल और फूल लेकर संस्कृत के उन मंत्रों को पूरी निष्ठा के साथ दोहराया जिनका उच्चारण पुरोहित करवा रहे थे। रूस और यूक्रेन से आईं महिलाओं ने संवाददाताओं से बातचीत करते हुए बताया कि उनके देशों में अपने पूर्वजों को याद करने की अपनी परंपराएं हैं, लेकिन भारत की यह सनातन परंपरा विज्ञान और आत्मा के रहस्यों से जुड़ी एक ऐसी जीवंत व्यवस्था है जो इंसान को अंदर से शांति देती है। युद्ध की विभीषिका झेल रहे यूक्रेन और रूस की महिलाओं द्वारा अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए फल्गु नदी के तट पर पिंडदान करना इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि दुख, शांति और श्रद्धा की भाषा पूरी दुनिया में एक ही होती है। स्थानीय पंडा समाज ने इन विदेशी महिलाओं को बहुत ही सहजता और विस्तार से एक-एक अनुष्ठान की विधि समझाई, जिसे उन्होंने पूरी तन्मयता के साथ पूरा किया और अंत में फल्गु नदी में तर्पण कर अपने पितरों को नमन किया।सनातन संस्कृति का वैश्विक विस्तार और वसुधैव कुटुंबकम की सच्ची तस्वीरआज के इस आधुनिक और तकनीकी युग में जहां पूरी दुनिया भौतिकतावाद की दौड़ में भाग रही है, वहीं भारतीय संस्कृति और दर्शन के प्रति विदेशियों का यह बढ़ता आकर्षण इस बात का संकेत है कि मानवता को शांति का असली मार्ग केवल सनातन परंपराओं से ही मिल सकता है। गयाजी में हर साल आने वाले विदेशी पर्यटकों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है, जो यहां आकर न केवल पिंडदान जैसी प्राचीन परंपराओं को देखते हैं बल्कि खुद इसका हिस्सा भी बनते हैं। जर्मनी और यूरोपीय देशों से आए कई शोधार्थियों का यह मानना है कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति, पूर्वजों और ब्रह्मांड के बीच का जो संतुलन सिखाया गया है, वह दुनिया के किसी अन्य कोने में देखने को नहीं मिलता। गयाजी के इन आयोजनों ने एक बार फिर से 'वसुधैव कुटुंबकम' (पूरा विश्व एक परिवार है) के उस प्राचीन भारतीय सूत्र को चरितार्थ कर दिया है, जहां हर संस्कृति और देश के लोग आकर एक ही ईश्वर और अपनी जड़ों से जुड़ जाते हैं।स्थानीय प्रशासन और तीर्थ पुरोहितों द्वारा की गई मेहमाननवाजियों की सराहनागयाजी पहुंचे इन विदेशी मेहमानों की सुरक्षा, सुविधा और उनके धार्मिक अनुष्ठानों को सुचारू रूप से संपन्न कराने के लिए स्थानीय प्रशासन और तीर्थ पुरोहित समाज ने विशेष इंतजाम किए थे। पुलिस और जिला प्रशासन की टीमें लगातार इस बात का ध्यान रख रही थीं कि देश-विदेश से आने वाले किसी भी तीर्थयात्री को दर्शन या पिंडदान के दौरान कोई असुविधा न हो। विदेशी महिलाओं ने भी भारतीय आतिथ्य सत्कार और गया के लोगों के खुले दिल से स्वागत की भूरी-भूरी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि गयाजी की इस धरती पर आकर उन्हें जो मानसिक शांति और अपनेपन का अहसास हुआ है, उसे वे कभी नहीं भूल सकतीं। यह घटना न केवल गयाजी के इतिहास में दर्ज हो गई है, बल्कि पूरी दुनिया को यह संदेश दे गई है कि आस्था की कोई भौगोलिक सीमा नहीं होती और पूर्वजों के प्रति सम्मान का भाव हर इंसान के दिल में समान रूप से धड़कता है।

न्यूज़ इंडिया लाइव 2 Oct 2026 1:56 pm

अक्टूबर माह में बदलेगी 2 ग्रहों की चाल, वक्री भी होंगे और उदय अस्त भी होंगे शुक्र और बुध

ज्योतिषशास्त्र में ग्रहों की विशेष भूमिका होती है। ग्रहों की चाल और उनके गुण व्यक्ति के स्वभाव व भविष्य पर खासा असर डालते हैं। ग्रह एक निश्चित अंतराल पर अपनी चाल को बदलते रहते हैं। यह एक विशेष अवधि में मौजूदा राशि को छोड़कर दूसरी राशि में जाते रहते हैं। जब-जब ग्रहों का राशि परिवर्तन होता है तब तब इसका व्यापक असर सभी 12 राशियों के जातकों पर पड़ता है। हर महीने कई ग्रहों का राशि परिवर्तन होता है। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि अक्टूबर माह में सूर्य और गुरु राशि परिवर्तन करेंगे। जबकि शुक्र और बुध वक्री भी होंगे और उदय अस्त भी होंगे। सूर्य 17 अक्टूबर को शाम 7:50 पर तुला राशि में प्रवेश करेंगे। देवगुरु बृहस्पति 31 अक्टूबर को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। शुक्र 3 अक्टूबर को दोपहर 12:44 पर वक्री होंगे। शुक्र 14 अक्टूबर को रात्रि 12:18 पर पूरब दिशा में अस्त होंगे और 28 अक्टूबर को सुबह 7:36 पर पश्चिम दिशा में उदय होंगे। बुध 24 अक्टूबर को दोपहर 12:30 पर वक्री होंगे। 28 अक्टूबर को बुध सुबह 6:32 पर पश्चिम दिशा में अस्त होंगे। शनि मीन राशि में वक्री अवस्था में बने रहेंगे, जबकि राहु कुंभ में और केतु सिंह में विराजमान रहेंगे। इन ग्रह परिवर्तनों का असर हर किसी की जिंदगी पर अलग-अलग ढंग से दिखाई देगा। इसमें किसी को लाभ तो किसी को हानि होगी। ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ग्रहों की चाल का असर व्यक्ति के जीवन पर पड़ता है। ज्योतिष के नजरिए से भी ये माह बेहद महत्वपूर्ण रहने वाला है। इस माह में 2 ग्रह राशि परिवर्तन करेंगे। वैदिक ज्योतिष के सिद्धांत के अनुसार मनुष्य के जीवन में जो भी घटनाएं घटित होती हैं। उनका कारण ग्रहीय दशा, गोचर, उनकी चाल है। सौरमंडल में बैठे ग्रह ही यह निर्धारित करते हैं कि आने वाला समय कैसा होगा और मनुष्य जीवन पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा। 17 अक्टूबर को सूर्य का तुला राशि में प्रवेश कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि सूर्य को सभी ग्रहों का राजा माना जाता है। कुंडली में सूर्य ग्रह के मजबूत होने पर व्यक्ति का समाज में मान-सम्मान और यश में बढ़ोतरी होती है। सूर्य ग्रह का असर शरीर में पेट, आंखें, दिल, चेहरे और हड्डियों पर होता है। सूर्य के अशुभ प्रभाव से सिरदर्द, बुखार और दिल की बीमारियां होती हैं। इसके शुभ प्रभाव से आत्मविश्वास बढ़ता है। सम्मान और प्रसिद्धि मिलती है। इस ग्रह के प्रभाव से जॉब और बिजनेस में तरक्की भी मिलती है। दिनांक 17 अक्टूबर को ग्रहों के राजा सूर्य तुला राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं। यह राशि परिवर्तन शाम 7:50 पर होगा। तुला राशि सूर्य की नीच राशि में आती है। यह गोचर जातक के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। तुला राशि वाले इस अवधि में सतर्क रहें। उन पर गलत आरोप लग सकता हैं। अच्छाई के बदले अपयश मिल सकता है। स्वास्थ्य को लेकर भी यह समय अच्छा नहीं है। इसे भी पढ़ें: Goddess Gayatri: सृष्टि रचना और ब्रह्माजी के संकल्प से हुआ था मां गायत्री का प्राकट्य, ऐसे बनीं वेदमाता 31 अक्टूबर को गुरु करेंगे सिंह राशि में गोचर भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि अक्तूबर के अंतिम दिन यानी 31 अक्तूबर 2026 को देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि से निकलकर सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। गुरु का यह राशि परिवर्तन महीने के प्रमुख ग्रह गोचरों में शामिल रहेगा। बृहस्पति को ज्ञान, शिक्षा, संतान, धन, धर्म और विस्तार का कारक ग्रह माना जाता है। सिंह राशि में गुरु का प्रवेश कई राशियों के लिए महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आ सकता है। इस गोचर का प्रभाव केवल व्यक्तिगत जीवन ही नहीं, बल्कि शिक्षा, करियर, आर्थिक स्थिति और सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़े मामलों पर भी ज्योतिषीय दृष्टि से देखा जाता है। बुध का वक्री होना भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि 24 अक्तूबर को बुध वक्री हो जाएंगे। बुध को बुद्धि, वाणी, तर्क, व्यापार और संचार का कारक ग्रह माना जाता है। ऐसे में बुध की वक्री चाल के दौरान बातचीत, कागजी कार्यों, व्यापारिक समझौतों और महत्वपूर्ण निर्णयों में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। महीने के अंतिम दिनों में बुध और मंगल का संबंध भी बनेगा, जिससे ग्रहों की स्थिति और अधिक प्रभावशाली हो सकती है। शुक्र की वक्री गति भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि अक्तूबर की शुरुआत में शुक्र अपनी स्वराशि तुला में विराजमान रहेंगे। 3 अक्तूबर को शुक्र इसी राशि में वक्री गति शुरू करेंगे। शुक्र का अपनी ही राशि में होना ज्योतिष की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। वक्री अवस्था में शुक्र के प्रभाव से प्रेम संबंध, वैवाहिक जीवन, सुख-सुविधाओं, कला और आर्थिक मामलों से जुड़े फैसलों में कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं। इसके बाद 24 अक्तूबर को शुक्र चित्रा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे, जिससे ग्रहों की स्थिति में एक और बदलाव आएगा। अक्तूबर में बनेंगे ये खास योग त्रिग्रही योग भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि अक्तूबर की शुरुआत में कर्क राशि में चंद्रमा, मंगल और बृहस्पति की युति से त्रिग्रही योग का निर्माण होगा। 4 से 6 अक्तूबर के बीच बनने वाला यह योग चंद्रमा की तेज गति के कारण अधिक समय तक नहीं रहेगा। ज्योतिष में तीन ग्रहों की एक ही राशि में मौजूदगी को महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए इस दौरान बनने वाला यह संयोग कई राशियों के लिए विशेष प्रभाव वाला हो सकता है। बुधादित्य योग भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि 17 अक्तूबर को सूर्य के तुला राशि में प्रवेश करने के बाद सूर्य और बुध एक ही राशि में आ जाएंगे। दोनों ग्रहों की इस युति से बुधादित्य योग बनेगा। ज्योतिष में सूर्य को आत्मविश्वास, मान-सम्मान और नेतृत्व का कारक, जबकि बुध को बुद्धि, वाणी, तर्क और व्यापार का कारक माना जाता है। ऐसे में यह योग इन क्षेत्रों से जुड़े मामलों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। लक्ष्मी नारायण योग भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि अक्तूबर में तुला राशि में बुध और शुक्र की युति से लक्ष्मी नारायण योग भी बनेगा। ज्योतिषीय मान्यता के अनुसार बुध और शुक्र की युति को धन, सुख-सुविधा, कला, व्यापार और वैभव से जोड़कर देखा जाता है। इसलिए यह योग आर्थिक और भौतिक सुख-सुविधाओं से जुड़े मामलों के लिहाज से खास माना जा रहा है। मालव्य योग भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि शुक्र के अपनी स्वराशि तुला में स्थित होने से अक्तूबर में मालव्य योग बनने की स्थिति रहेगी। यह पंच महापुरुष योगों में शामिल है। ज्योतिष में मालव्य योग को सौंदर्य, सुख-सुविधा, कला, भौतिक समृद्धि और आकर्षण से संबंधित माना जाता है। शुक्र की मजबूत स्थिति के कारण इस योग को विशेष महत्व दिया जाता है। शुक्रादित्य योग भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि 17 अक्तूबर को सूर्य के तुला राशि में प्रवेश करते ही वहां पहले से मौजूद शुक्र के साथ उनकी युति बनेगी। सूर्य और शुक्र की इस युति को शुक्रादित्य योग कहा जाता है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार यह योग 6 नवंबर तक प्रभावी रह सकता है। सूर्य और शुक्र दोनों अलग-अलग क्षेत्रों के कारक ग्रह माने जाते हैं, इसलिए इनकी युति को करियर, मान-सम्मान, सुख-सुविधा और रचनात्मक क्षेत्रों से जोड़कर देखा जाता है। ग्रहों के गोचर का प्रभाव भविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास ने बताया कि देश की राजनीति में बड़े बदलाव होंगे। नए चेहरे और युवाओं को मौका मिलेगा। कुछ नेताओं को हानि होगी। पड़ोसी देशों से तनाव बढ़ेगा। अनचाही घटनाएं होगी। वाद विवाद ज्यादा होंगे। भूकंप आगजनी रेल और वायुयान दुर्घटना होगी। किसी प्रसिद्ध व्यक्ति का निधन। सड़क दुर्घटनाएं ज्यादा होगी। बाजार और व्यापार को फायदा होगा। किसानो को फायदा होगा। अन्न उत्पादन ज्यादा होगा। लोहा इस्पात मेडिकल और केमिकल्स व्यापार तरक्की करेंगे। आंखों एवं त्वचा के रोग बढ़ेंगे। सोने की कीमत और विदेशी करेंसी में उतार-चढ़ाव रहेगा। पेट्रोल, डीजल और तेल के दाम बढ़ने का अनुमान है। देश में विवाद होंगे। चोरी-डकैती, अपहरण और दुष्कर्म भी बढ़ने की आशंका है। जिससे लोगों में डर और तनाव रहेगा। नई-पुरानी बीमारियों से लोग परेशान हो सकते हैं। महंगाई और टैक्स बढ़ने के योग हैं। व्यापार में तेजी आएगी। प्राकृतिक घटनाएं होगी। भूकंप आने की संभावना है। तूफान, बाढ़, भूस्खलन, पहाड़ टूटने, सड़के और पुल भी टूटने की घटनाएं हो सकती हैं। बस और रेलवे यातायात से जुड़ी बड़ी दुर्घटना होने की भी आशंका है। बीमारियों का संक्रमण बढ़ सकता है। शासन-प्रशासन और राजनैतिक दलों में तेज संघर्ष होंगे। सामुद्रिक तूफान और जहाज-यान दुर्घटनाएं भी हो सकती हैं। खदानों में दुर्घटना और भूकंपन से जन-धन हानि होने की आशंका बन रही है। रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। आय में इजाफा होगा। राजनीति में बड़े स्तर पर परिवर्तन देखने को मिलेगा। क्या करें उपाय भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि हं हनुमते नमः, ऊॅ नमः शिवाय, हं पवननंदनाय स्वाहा का जाप करें। प्रतिदिन सुबह और शाम हनुमान जी के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाएं। लाल मसूर की दाल शाम 7:00 बजे के बाद हनुमान मंदिर में चढ़ाएं। हनुमान जी को पान का भोग और दो बूंदी के लड्डू का भोग लगाएं। ईश्वर की आराधना संपूर्ण दोषों को नष्ट एवं दूर करती है। महामृत्युंजय मंत्र और दुर्गा सप्तशती पाठ करना चाहिए। माता दुर्गा, भगवान शिव और हनुमानजी की आराधना करनी चाहिए। - डा. अनीष व्यास भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक

प्रभासाक्षी 1 Oct 2026 5:44 pm

पितृपक्ष में गया के Vishnupad Mandir आए थे भगवान राम, 2 दावों से बना हिंदू और बौद्ध धर्म की आस्था का केंद्र

Vishnupad Temple Gaya सनातन धर्म और बौद्ध धर्म दोनों की आस्था का केंद्र है, जहां भगवान विष्णु और बुद्ध दोनों के पदचिह्न माने जाते हैं।Pitru Paksha में यहां भगवान राम आए थे और फल्गु नदी के किनारे Pind Daan किया था।

जागरण 30 Sep 2026 4:16 pm

Manipur के Loktak Lake पर बसा Floating Village Champu Khangpok पानी पर तैरता है

क्या आप कभी ऐसी जगह पर घूमने के लिए गए हैं, जहां पर कदम रखते ही जमीन डगमगाने लगे। आपको ऐसा महसूस हो, जैसे आप चल नहीं बल्कि तैर रहे हैं। ऐसा दृश्य सोचने पर एकदम सपने जैसा महसूस होता है। ऐसा ही कुछ मणिपुर का फ्लोटिंग विलेज चंपू खंगपोक है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको अनोखे और रोमांच से भरपूर जगह फ्लोटिंग विलेज चंपू खंगपोक के बारे में बताने जा रहे हैं। फ्लोटिंग विलेज है चंपू खंगपोक भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य मणिपुर में एक तैरता हुआ गांव है। जिसका नाम चंपू खंगपोक है। यह भारत की फेमस लोकटक झील पर बसा है, जोकि करीब 240 वर्ग किमी के आकार में फैली है। इस गांव के लोगों ने पानी के साथ जीना सीख लिया है, तभी तो आपको इस गांव में पानी पर चलते लोग, तैरते घर और द्वीप देखने को मिलेंगे। इसे भी पढ़ें: Gaya Ji में Pind Daan का पूरा बजट: Train टिकट, होटल स्टे और पूजा फीस की डिटेल जानें डगमगाती जमीन का रहस्य चंपू खंगपोक गांव के तैरने के पीछे कोई जादू नहीं हैं। बल्कि इसके पीछे साइंस का कमाल है। इसके पीछे की वजह इस स्थान की प्रकृति और बायोमास का प्रोसेस है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस गांव की जमीन किसी चट्टान या मिट्टी से नहीं बनी है, बल्कि यह फुम्डी नाम की प्राकृतिक जमीन है। फुम्डी जमीन जड़ों, सड़े-गले पौधों, मिट्टी और जैविक पदार्थों की परत से बनी होती है। वहीं साल-दर-साल जब इन सभी चीजों का जमावड़ा शुरू होकर एक जगह पर एकत्र होता है। तो इसकी परत से जमीन बन जाती है। यह जमीन इतनी ज्यादा मजबूत होती है कि इन पर घरों तक का निर्माण किया जा सकता है। बदलती है घरों की लोकेशन यहां पर रहने वाले लोगों के घरों को फुमशंग कहा जाता है, जो अपनी लोकेशन को बदलते रहते हैं। क्योंकि यह घर जमीन पर नहीं बल्कि फुम्डी पर बने हैं, तो पानी के बहाव और हवा के दबाव की वजह से इनकी लोकेशन बदलती रहती है। यही कारण है कि चंपू खंगपोक दुनियाभर में अपनी इसी विशेषता की के कारण आकर्षण का केंद्र बना हुआ था। देख सकेंगे तैरता हुआ नेशनल पार्क अनोखे गांव के अलावा आप लोकटक झील में तैरता हुआ कीबुल लामजाओ नेशनल पार्क भी देख सकेंगे। यह पार्क विष्णुपुर जिले में हैं, जोकि लोकटक झील के दक्षिण पश्चिम में करीब 40 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र फैला है। इस जगह की खासियत यह है कि यहां पर विलुप्त हो रहे संगाई हिरण रहते हैं, यह उनका अकेला आवास स्थल है।

प्रभासाक्षी 28 Sep 2026 4:52 pm

सब मिल गया मगर ….

Sab Mil Gaya Magar…

अमर उजाला 28 Sep 2026 8:57 am

Gaya Ji में Pind Daan का पूरा बजट: Train टिकट, होटल स्टे और पूजा फीस की डिटेल

पितृपक्ष की शुरुआत हो चुकी है और यह 16 दिनों तक चलता है। इस दौरान लोग अपने पूर्वजों का तर्पण करते हैं। वहीं, गया जी जाकर पिंडदान भी करते हैं। यदि आप भी गया जी जाने की तैयारी कर रहे हैं, तो इस लेख में जान लें कि सफर शुरु करने से पहले रुट और खर्च का अंदाजा लग जाए। बिहार का गया पितरों के लिए पिंडदान और तर्पण करने वाली खास जगहों में माना जाता है। इस समय गया में काफी संख्या में लोग जाते हैं। असल में गया में पिंजदान के लिए कई जगहें हैं और कुछ वेदियों को खास माना जाता है। ऐसे में आपके लिए पूरा गाइड लेकर आए हैं। आइए आपको इस लेख में बताते हैं ट्रेन, फ्लाइट, रहने और पिंडदान से संबंधित खर्च की जानकारी आपको बताने जा रहे हैं। गया जी में पिंडदान के लिए हैं 48 प्रमुख वेदियां बिहार टूरिज्म के मुताबिक, गया में पिंडदान के लिए कुल 48 मुख्य वेदियां है। इसमें विष्णुपद मंदिर, गया शिरोमणि मंदिर, फल्गु नदी, पंचतीर्थ, अक्षय वट, प्रेतशिला, रामशिला और सीता कुंड सबसे खास माने जाते हैं। श्राद्ध के समय यहां पर काफी भीड़ देखने को मिलती है। दिल्ली से गया कैसे पहुंचें? यदि आप दिल्ली से गया जी जाना चाहते हैं, तो पहले पटना तक पहुंचना होगा। आप पटना ट्रेन या फ्लाइट से भी पहुंच सकते हैं। इसके बाद पटना और आसपास के शहरों से गया जाने के लिए ट्रेन आसानी से मिल जाती है। पटना से गया पहुंचने के लिए आपको करीब 2 घंटे का समय लग सकता है। जब आप गया जी जंक्शन पहुंच जाएं तो पिंडदान वाली जगह तक जाने के लिए ऑटो या टैक्सी मिल जाएगी। फ्लाइट से जाने का क्या तरीका है? आपके पास समय की दिक्कत है, तो आप फ्लाइट के जरिए आप पटना पहुंच सकते हैं। इसके बाद पटना से गया जाने के लिए प्राइवेट टैक्सी लेना होगा। लेकिन इससे आपका कुल खर्चा हो सकता है। फिर आप पटना से गया जा सकते हैं, इसके लिए आपको बस, टैक्सी या अपनी कार भी बुक कर सकते हैं। दिल्ली से ट्रेन का कितना खर्च आएगा? दिल्ली से ट्रेन गया जाती है और टिकट करीब 500 रुपये से लेकर 3,000 रुपये तक हो सकता है। वैसे ट्रेन की टिकट क्लास के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है। यदि आप फ्लाइट से जाना चाहती हैं, तो इसका खर्चा करीब 5000 रुपये से लेकर 10,000 रुपये तक का हो सकता है। गया में रुकने का किचना खर्चा आएगा? गया में रुकने के लिए अपने बजट के हिसाब से रह सकते हैं। आपकी पंसद और सुविधा के अनुसार से ठहरने का खर्च करीब 3000 से 5000 रुपये तक का हो सकता है। इतना ही नहीं, खाने-पीने पर करीब 2000 रुपये तक खर्च हो सकते हैं। पिंडदान और पंडा की फीस क्या है? वैसे पिंडदान के लिए यहां का खर्च सभी के लिए एक जैसा नहीं है। यह इस बात पर भी डिपेंड करता है कि कितने लोग जा रहे हैं और किस तरह की पूजा कराई जाएगी। बताते चलें कि नॉर्मल पिंडदान और पूजा-पाठ कराने में आपको 5100 से करीब 11,000 रुपये देने होंगे। गया जी जाने से पहले बजट ऐसे समझें यदि आप गया जा रहे है, तो आपको मोटा-मोटी खर्चा इतना आ सकता है, बजट के कुछ पॉइंट्स को जरुर समझें। दिल्ली से ट्रेन: करीब 500 से 3,000 तक फ्लाइट से पटना: करीब 5,000 से 10,000 तक गया में स्टे करना: करीब 3,000 से 5,000 तक खान-पान: करीब 2000 तक पिंडदान और पूजा-पाठ: करीब 5100 से 11,000 तक पटना से गया: ट्रेन, बस, टैक्सी या प्राइवेट कार का ऑप्शन पितृपक्ष मेला 2026: 25 सितंबर से 10 अक्टूबर तक

प्रभासाक्षी 27 Sep 2026 12:22 pm

Saraswati Mantra: Maa Saraswati के इन चमत्कारी Mantras के जाप से मिलेगी बुद्धि और ज्ञान में अपार सफलता

हिंदू धर्म में देवी सरस्वती को कला और ज्ञान की देवी माना जाता है। देवी सरस्वती को वेदों की माता भी कहा जाता है। देवी सरस्वती का स्वरूप निर्मल चांद की ओर जिनके मुख पर दिव्य चमक है। पीत और श्वेत रंग के वस्त्र पहने और उनको कमल के फूल पर विराजमान और हाथों में वीणा धारण किए दिखाया जाता है। हिंदू मान्यताओं के मुताबिक जो भी व्यक्ति नियमित रूप से मां के मंत्रों का जाप सच्चे मन से करता है, उसको मां सरस्वती की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ऐसे में आज इस आर्टिकल के जरिए हम आपको देवी सरस्वती के कुछ खास मंत्रों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका जप करने से आप स्वयं में बड़ा बदलाव महसूस कर सकेंगे। दर्शन, रहस्यवाद या उससे जुड़े विषय जो भी व्यक्ति रहस्यवाद, दर्शन या इससे जुड़े किसी भी तरह के विषयों का अध्ययन कर रहा होता है, उनके लिए यह मंत्र मस्तिष्क में महान विचारों को धारण करने और उन पर सोचने-समझने की क्षमता प्रदान करता है। इस मंत्र से व्यक्ति की मेधा और बुद्धि दोनों को जागृत करता है। इसे भी पढ़ें: Goddess Gayatri: सृष्टि रचना और ब्रह्माजी के संकल्प से हुआ था मां गायत्री का प्राकट्य, ऐसे बनीं वेदमाता मंत्र- ऊं ब्रह्म ज्ञानायै नम: इस मंत्र का अर्थ है कि मैं ब्रह्मांड में मौजूद उस चेतन बुद्धि की शक्ति को नमन करते हैं। यह मंत्र देवी सरस्वती के उस शक्ति रूप को वर्णित करता है, जोकि खुद ब्रह्मांड की बुद्धि के पीछे मौजूद हैं। खगोल, भौतिकी, रसायन विज्ञान या संबंधित विषय जो भी व्यक्ति खगोल, भौतिकी या अलग-अलग तरह के रसायन विज्ञान और अन्य तरह के विषयों का अध्ययन करता है, उनको इस मंत्र का जाप करना चाहिए। मंत्र - ऊं महा विद्यायै नम: इस मंत्र का अर्थ है कि महान ज्ञान के पीछे स्थित और इससे उत्पन्न करने वाली शक्ति को नमन करते हैं। मां सरस्वती को महान ज्ञान और उसकी अनुभूति के पीछे स्थित शक्ति के रूप में इस मंत्र को वर्णित किया जाता है। धार्मिक विषयों से जुड़े लोगों के लिए जो भी लोग धर्म के विचारों और ग्रंथों में गहराई से उतारने की कोशिश करते हैं। जिससे किसी भी धर्म या संस्कृति के शास्त्रों के गहरे अर्थ को समझने का प्रयास करते हैं। यह मंत्र धार्मिक विषयों से जुड़े लोगों की बौद्धिक क्षमताओं को भी अधिक तेज बनाने का काम करता है। मंत्र- वेदानां मातरं पश्य मत्सथां देवीं सरस्वती। इस मंत्र का अर्थ है कि देखो, वेदों की माता मां सरस्वती मुझमें निवास करती हैं। इन तीनों मंत्रों में मां सरस्वती को ब्रह्मांड में मौजूद बुद्धि, ज्ञान को उत्पन्न करने वाली शक्ति और अंदर निवास करने वाली वेदों की मां के रूप में पुकारा गया था।

प्रभासाक्षी 25 Sep 2026 5:49 pm

एक दौर जो आकर बीत गया

Ek Daur Jo Akar Bit Gaya

अमर उजाला 24 Sep 2026 2:11 am

कौन कहाँ से आया, और कहाँ चला गया

Kon kaha se aaya or kaha chala gaya

अमर उजाला 19 Sep 2026 11:25 am

गया की पावन धरती

GAYA KI PAAWAN DHARTI

अमर उजाला 11 Sep 2026 12:41 pm

Gaya Ji News: विजय कुमार सिन्हा बोले- कृषि की उन्नति के लिए सरकार सजग:

बिहार के कृषि मंत्री और गया जिला प्रभारी मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने गया सर्किट हाउस में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कृषि विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता जताई.कृषि क्षेत्र को आगे बढ़ाने और किसानों की उन्नति के लिए सरकार पूरी तरह सजग और गंभीर है. प्रेस कॉन्फ्रेंस गयाजी सर्किट हाउस में आयोजित की गई

लाइव हिन्दुस्तान 23 Aug 2026 10:03 pm

Gaya News: 4 मोबाइल के साथ धराए दो चोर

गया जंक्शन पर 'ऑपरेशन यात्री सुरक्षा' के तहत आरपीएफ और जीआरपी के संयुक्त अभियान में यात्रियों से चोरी किए गए चार मोबाइल फोन के साथ दो चोरों को गिरफ्तार किया गया है।

लाइव हिन्दुस्तान 2 Aug 2026 9:02 pm

Gaya ji News: स्टेशन मास्टर यादव का विदाई समारोह

पहाड़पुर स्टेशन पर सेवानिवृत्त स्टेशन मास्टर सी.एस. यादव के विदाई समारोह में स्थानीय रेल अधिकारी, सहकर्मी और कर्मचारी उपस्थित रहे

लाइव हिन्दुस्तान 2 Aug 2026 9:00 pm

हीरामंडी को लेकर संजय लीला भंसाली ने खोले ये राज़

संजय लीला भंसाली की बहुप्रतीक्षित सीरीज़ हीरामंडी नेटफ्लिक्स पर रिलीज़ हो गई है, जिसमें सोनाक्षी सिन्हा, अदिति राव हैदरी, और मनीषा कोईराला जैसे सितारों की कास्ट शामिल है। इस श्रृंखला ने काफी ध्यान आकर्षित किया है, हालांकि भंसाली ने खुलासा किया कि उनकी प्रारंभिक कास्टिंग विकल्प फाइनल कास्ट से अलग थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने मूल रूप से हीरामंडी को रेखा, करीना कपूर और रानी मुखर्जी के साथ एक फिल्म के रूप में देखा था। हालांकि, स्टोरी के बड़े होनेके कारण इसे फिल्म के बजाय एक सीरीज़ में बदल दिया गया। भंसाली ने बताया कि वह पिछले 18 वर्षों से हीरामंडी के कॉसेप्ट पर काम कर रहे थे। श्रृंखला स्वतंत्रता से पहले के लाहौर में स्थित हीरा मंडी जिले में दरबारऔर नवाबों पर है। शुरू में, कास्टिंग ने वर्षों में कई बदलावों का सामना किया, जिसमें माहिरा खान, इमरान अब्बास, और फवाद खान जैसे नाम विभिन्न समयों पर विचार किए गए। अंततः, प्रोडक्शन ने एक नई कास्ट पर फैसला किया । हीरामंडी एक पीरियड ड्रामा है जिसका निर्देशन संजय लीला भंसाली और मिताक्षरा कुमार ने किया है। कहानी लाहौर के हीरा मंडी जिले में तवायफों के जीवन पर है, फिल्म की कहानीब्रिटिशकाल के दौरान की कहानी है, जहां एक वैश्यालय की महिलाएं आजादी की लड़ाई में अंग्रेजों से लड़ रही होती हैं।। प्रमुख अभिनेताओं के साथ, श्रृंखला में मनीषा कोईराला, ऋचा चड्ढा, संजीदा शेख, महत्वपूर्ण भूमिकाओं में हैं। फरदीन खान, शेखर सुमन और अध्ययन सुमन भी नवाबों की भूमिका में हैं। जियो फाइबर को कड़ी टक्कर दे रहा है एयरटेल एक्सट्रीम फाइबर, जानिए सभी फ्री ओटीटी प्लान्स की लिस्ट ₹10,000 से कम में मिलेंगे ये 5 बेहतरीन स्मार्ट टीवी, पूरा दिन देखने का मन करेगा जियो सिनेमा के दो नए प्रीमियम प्लान लॉन्च, सिर्फ ₹29 में मिलेंगे इतने फायदे

न्यूज़ ट्रॅक लाइव 1 May 2024 4:05 pm

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समाचार नामा 20 Mar 2024 7:00 am

Gayatri Joshi Birthday : 1 हिट फिल्म देकर हो गई इंडस्ट्री से गायब, 65वें सबसे अमीर भारतीय से की शादी, Networth जानकर तो हो जांएगे बेहोश

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मनोरंजन नामा 20 Mar 2024 6:45 am