राय और ब्लॉग्स / जागरण
नीट पेपर लीक के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के कामकाज में सुधार अनिवार्य हो गया है।
न्यायाधीशों की संख्या में वृद्धि सुप्रीम कोर्ट तक ही सीमित न रहे। उच्च न्यायालयों में भी जजों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए
राम मंदिर में दान की चोरी धर्म की विफलता नहीं, बल्कि व्यवस्थापन की असफलता है। इसलिए समाधान मंदिर को कारपोरेट तरीके से चलाना नहीं है
जून में शांति को लेकर दोनों देशों के बीच बनी सहमति भी इसी व्याख्यात्मक मतभेद के कारण टूट गई थी। ट्रंप सरकार की अब तक की घोषणाओं ने दुनिया को होर्मुज ज
वर्तमान में यही आशा की जा सकती है कि सभी को सद्बुद्धि मिले और वे लोकतांत्रिक सीमाओं के दायरे में रहकर ही अपना विरोध करें।
संसद में जारी गतिरोध को तोड़ने के लिए संसदीय कार्यमंत्री किरेण रिजीजू और राहुल गांधी के बीच बातचीत विफल रही, जिससे मानसून सत्र के हंगामे के बीच समाप्त
भ्रष्टाचार एक ऐसा रोग है, जो समय के साथ बढ़ता ही जा रहा है। भ्रष्टाचार केवल निर्माण कार्यों तक ही सीमित नहीं है। यह सरकारी खरीद में भी व्याप्त हो गया
बेहतर आर्थिक उत्पादकता और स्वास्थ्य देखभाल के बोझ में कमी के रूप में मिलने वाला दीर्घकालिक लाभ शुरुआती पूंजीगत लागत से कहीं अधिक होगा।
विपक्षी दल इतने नादान नहीं हो सकते कि यह न जानते हों कि धार्मिक स्थलों में दान की चोरी होती रहती है और इस समस्या का समाधान किसी मंत्री के इस्तीफे की म
यदि कट्टरपन से लड़ना है, तो हर तरह के पिछड़े विचार पर सवाल उठाना होगा। यह जो चुनी हुई चुप्पियां और चुना हुआ शोर है, मजहबी कट्टरता और अल्पसंख्यकों के अ
भारतीय नेताओं ने असली समस्या से नजर बचाकर जिहादी मनोवृत्ति को यथावत छोड़ दिया है। कभी 'निष्पक्ष चुनाव', कभी 'कश्मीरियत', कभी 'हीलिंग टच', कभी 'विकास'
बांकीपुर से जन सुराज पार्टी के प्रशांत किशोर का चुनाव जीतना इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि एक तो वे प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों पर सवाल उठा रहे थे और द
चीन में लागू किए गए 'जातीय एकता एवं प्रगति संवर्धन कानून' में सामाजिक वातावरण के निर्माण पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य विभिन्न जातीय समूहों के बीच
आने वाले दिनों में कम समय में अत्यधिक और तेज बरसात होना ही है। ऐसे में असम के अस्तित्व को बचाने के लिए उसके तटों की सुरक्षा के लिए दूरगामी योजना अनिवा
अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अब केवल भारत और पाकिस्तान के पारंपरिक विवाद की दृष्टि से ही इस मुद्दे को नहीं देखना चाहिए। गुलाम जम्मू-कश्मीर के घटनाक्रम की न
युवाओं को नशे से बचाने के लिए केंद्र सरकार के साथ-साथ राज्य सरकारों और सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों को तो सक्रिय होना ही होगा, समाज को भी इस खतरे से साव
यह एक सवाल है कि ये फैसले पहले ही क्यों नहीं लिए गए, लेकिन यह भी कम दुर्भाग्यपूर्ण नहीं कि पेपर लीक विरोधी कानून में संशोधन विधेयक पर संसद में कुल मिल
जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में दो हिंदू श्रमिकों की मजहब पूछकर हत्या पहलगाम जैसे बर्बर आतंकी हमले की याद दिलाती है, जिसकी जिम्मेदारी पाकिस्तान समर्थित टीआ
असामाजिक तत्वों से किसी समझदार आदमी की सहानुभूति नहीं हो सकती, पर उन्हें पहचान कर रोकने की सामर्थ्य निश्चय ही आंदोलनकारियों से ज्यादा पुलिस के पास थी।
एक गंभीर मामले को फूहड़ तरीके से उठाना यही दिखाता है कि राम मंदिर में चढ़ावा चोरी पर विपक्ष का एकमात्र उद्देश्य तंज कसना और तमाशा खड़ा करना है।
कोई बड़ी घटना होने से पहले इन्हें कभी पकड़ा नहीं जाता था और बाद में पकड़े भी गए तो सरकार बड़े आराम से उन्हें बच निकलने देती थी।

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