करीब एक सप्ताहभर लगातार गतिरोध के बाद मंगलवार को लोकसभा में आखिरकार नीट पेपर लीक और लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू हुई। हालांकि चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप, तंज और नोकझोंक का दौर चलता रहा। सुबह 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने आंदोलनकारी छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। नारेबाजी के कारण सदन की कार्यवाही पहले दोपहर 2 बजे तक स्थगित करनी पड़ी। इससे पहले सरकार और विपक्ष के बीच चर्चा की अवधि को लेकर सहमति बनी। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि पहले छह घंटे की चर्चा तय हुई थी, फिर इसे 8 घंटे किया गया और यदि विपक्ष चाहे तो सरकार 10 घंटे तक चर्चा कराने को भी तैयार है। जितेंद्र सिंह ने बताया क्यों जरूरी है नया कानून दोपहर 2 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होते ही प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि 2024 के कानून को और प्रभावी बनाने के लिए संशोधन लाया गया है ताकि संगठित परीक्षा माफिया पर तेजी से कार्रवाई हो सके। गौरव गोगोई ने पूछा- दो साल पहले वाला कानून क्यों फेल हुआ? सरकार की दलीलों का जवाब देते हुए कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा कि 2024 में भी सरकार ने इसी तरह दावा किया था कि अब पेपर लीक नहीं होगा, लेकिन 2026 में फिर नीट परीक्षा लीक हो गई। उन्होंने कहा कि यदि पिछला कानून प्रभावी था तो नया संशोधन लाने की जरूरत क्यों पड़ी। गोगोई ने कहा कि 2024 के मामले में गिरफ्तार अधिकांश आरोपियों को जमानत मिल चुकी है और जिस व्यक्ति को मास्टरमाइंड बताया गया, वह लंबे समय तक फरार रहा। उन्होंने सरकार से पूछा कि राधाकृष्णन समिति की सिफारिशों का क्या हुआ और एनटीए की जवाबदेही तय क्यों नहीं की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था सुधारने के बजाय सरकार युवाओं की चिंताओं को हल्के में ले रही है। साथ ही पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के संसद पहुंचने पर भाजपा सांसदों द्वारा किए गए स्वागत पर भी उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि उनका स्वागत ऐसे किया गया, जैसे वे ‘पाकिस्तान से युद्ध जीतकर लौटे हों।’ बांसुरी स्वराज ने कहा- यह बिल समय की जरूरत भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने संशोधन विधेयक का समर्थन करते हुए कहा कि परीक्षा माफिया अब संगठित अपराध का रूप ले चुका है और मौजूदा कानून को अधिक कठोर बनाने की आवश्यकता थी। उन्होंने कहा कि संशोधन जांच एजेंसियों के अधिकार स्पष्ट करता है, जांच और ट्रायल को समयबद्ध बनाता है तथा परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करेगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पहल की सराहना करते हुए कहा कि सरकार ने समय रहते कानून को और मजबूत किया है। अखिलेश यादव का तंज- झुकती है सरकार... झुकाने वाला चाहिए समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि छात्रों के आंदोलन ने सरकार को झुकने पर मजबूर किया। उन्होंने कहा, सरकार झुकती है सरकार... झुकाने वाला चाहिए। उन्होंने दावा किया कि करोड़ों युवाओं के दबाव के कारण ही धर्मेंद्र प्रधान को पद छोड़ना पड़ा। अखिलेश ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि 2024 में भी ऐसा ही कानून लाया गया था, लेकिन उसके बावजूद पेपर लीक नहीं रुके। उन्होंने तंज करते हुए कहा, ‘जो लोग चढ़ावा नहीं बचा सके, वे पेपर लीक कैसे बचाएंगे?’ उन्होंने आरोप लगाया कि अनेक परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं और छात्रों को न्याय के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाना पड़ा। अभिषेक बनर्जी बोले- कानून बदलने से भरोसा नहीं लौटेगा तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने कहा कि निष्पक्ष परीक्षा हर छात्र का अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी व्यवस्था विफल होती है तो सरकार नई समिति या नया कानून लेकर आ जाती है, लेकिन जवाबदेही तय नहीं करती। उनके भाषण के दौरान सत्ता पक्ष के सांसदों ने आपत्ति जताई, जिससे सदन में कुछ देर के लिए फिर शोर-शराबा हुआ। प्रियंका गांधी ने पूछा- पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया? चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि घायल छात्रा की मां ने उनसे पूछा कि उसकी बेटी पर यह अत्याचार क्यों हुआ। प्रियंका ने सरकार से सवाल किया, ‘देश के युवाओं पर पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया? बच्चों पर लाठियां किसके आदेश पर चलाई गईं?’ उन्होंने कहा कि यह सवाल सिर्फ कांग्रेस नहीं बल्कि देश के छात्र, अभिभावक और शिक्षक पूछ रहे हैं। प्रियंका ने नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति पर टिप्पणी करते हुए बिलकिस बानो मामले का जिक्र किया। इस पर भाजपा सांसदों ने कड़ा विरोध किया और उनसे माफी मांगने की मांग की। संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि किसी मंत्री पर इस तरह की व्यक्तिगत टिप्पणी उचित नहीं है और वरिष्ठ सांसद होने के नाते प्रियंका गांधी को जिम्मेदारी के साथ बोलना चाहिए। इसके बाद सदन में कुछ समय तक तीखी नोकझोंक होती रही। प्रियंका ने कहा प्रधानमंत्री कैमरे का नहीं, दिल का एंगल बदलें, तभी छात्रों की समस्या का समाधान होगा। राज्यसभा में भी हंगामा उधर, राज्यसभा की कार्यवाही भी सुबह 11 बजे शुरू हुई। शून्यकाल के दौरान विपक्षी सांसदों ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और गृहमंत्री के बयान की मांग को लेकर हंगामा किया। लगातार शोर-शराबे के कारण सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदन की कार्यवाही पहले दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी। दोबारा कार्यवाही शुरू होने पर उपसभापति हरिवंश ने सदन चलाने की कोशिश की, लेकिन हंगामा जारी रहने पर कार्यवाही अगले दिन सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। वीडियो देखने के लिए ऊपर थंबनेल पर क्लिक करें…
भारत में 10 और 20 रुपए के प्लास्टिक नोट के फील्ड ट्रायल की मंजूरी मिल गई है। 3 हजार करोड़ रुपए कीमत के 200 करोड़ नोट जल्द लोगों की जेब में होंगे। ये बात 27 जुलाई को वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताई। 2012 में मनमोहन सरकार ने भी 10 रुपए के प्लास्टिक नोट के ट्रायल की मंजूरी दी थी, लेकिन यह कभी जमीन पर नहीं आ सके। 2016-17 में ये प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। प्लास्टिक नोट हैं क्या, पुराना प्रोजेक्ट क्यों अटक गया था और भारत में इन्हें फिर लाने की कोशिश क्यों हो रही; समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सबसे पहले प्लास्टिक नोट की शुरुआत का रोचक किस्सा… साल 1966, ऑस्ट्रेलिया ने पाउंड करेंसी छोड़कर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर लॉन्च किया। इसमें उस दौर के सारे एडवांस सेफ्टी फीचर मौजूद थे। इसके बावजूद कुछ ही महीनों में मार्केट में 10 डॉलर के नकली नोटों की बाढ़ आ गई। कोई असली-नकली में फर्क नहीं कर पा रहा था। इसके पीछे कोई बड़ा गिरोह नहीं, सिर्फ चार लोग थे- दुकानदार, आर्टिस्ट, फोटोग्राफर और एक टेलर। फोटोग्राफर ने असली नोट की फोटो खींची, आर्टिस्ट ने उसका वॉटरमार्क कॉपी किया और टेलर ने एक हफ्ते की प्रिंटिंग ट्रेनिंग ली। मेलबर्न शहर में दुकानदार के गैराज में नकली नोट छपने लगे। इस पूरे रैकेट को फंड कर रहा था रॉबर्ट किड नाम का एक क्रिमिनल। एक रोज दुकानदार की भाभी अनजाने में घर में पड़ा 10 डॉलर का नोट उठाकर चॉकलेट खरीदने गईं। सेल्सगर्ल को नोट का टेक्सचर अजीब लगा। उसने फौरन पुलिस को बता दिया और यहीं से पूरा गिरोह बेनकाब हुआ। सरकार हैरान थी कि इतनी आसानी से नोट कॉपी किया जा सकता है। 1968 में रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के गवर्नर डॉ. हर्बर्ट कूंब्स ने देश के टॉप साइंटिस्ट्स को ऐसा नोट बनाने की चुनौती दी, जिसकी नकल न की जा सके। करीब २० साल की रिसर्च के बाद वैज्ञानिकों ने प्लास्टिक नोट तैयार किया, जिसकी कॉपी बनाना लगभग नामुमकिन था। जनवरी 1988 में ऑस्ट्रेलिया ने दुनिया का पहला प्लास्टिक नोट लॉन्च किया और आगे चलकर यह तकनीक 25 से ज्यादा देशों को एक्सपोर्ट भी की। सवाल-1: प्लास्टिक नोट है क्या और बनते कैसे हैं? जवाबः भारत में करेंसी नोट कागज से बनते हैं, लेकिन प्लास्टिक नोट एक खास और हाई क्वालिटी वाले प्लास्टिक से बनते हैं। ध्यान रहे, ये वो प्लास्टिक नहीं, जो घर के सामान में इस्तेमाल होता है। हर प्लास्टिक प्रोडक्ट अलग तरह के पॉलिमर से बनता है और नोट के लिए एक खास पॉलिमर इस्तेमाल होता है। इसे बाय-एक्सिअली ओरिएंटेड पॉलीप्रोपाइलीन, यानी BOPP कहते हैं, जो पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस से बनता है। ये आम प्लास्टिक से ज्यादा लचीला और मजबूत होता है। खिंचाव पड़ने पर इसका आकार नहीं बदलता। सवाल-2: भारत में प्लास्टिक नोट लाने की कोशिश कब से हो रही? जवाबः यह आइडिया 2009 में RBI ने दिया। 10 रुपए के 100 करोड़ नोट पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर छापने की योजना थी। प्लास्टिक नोट वाले प्रोजेक्ट के ठंडे बस्ते में जाने की कोई पुख्ता वजह नहीं मिलती। जानकार ३ वजहें बताते हैं- ATM पॉलिमर नोटों को ठीक से पहचान और डिस्पेंस नहीं कर पा रहे थे, नोट हैंडलिंग में दिक्तत आ रही थी और 2016 में हुई नोटबंदी। 17 साल बाद, 2026 में वही आइडिया लौटा है। इस बार बड़े स्केल पर। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि 10 रुपए के 100 करोड़ नोट और 20 रुपए के 100 करोड़ नोट लॉन्च होंगे। यानी कुल 3000 करोड़ वैल्यू के 200 करोड़ नोट। BRBNMPL ने प्लास्टिक नोट बनाने के लिए दुनिया भर की कंपनियों के प्रस्ताव भी मंगवाए हैं। भारत की पेपर करेंसी में करीब 25% 10 और 20 के नोट ही है। हालांकि कीमत के मामले में यह सिर्फ 1.3% है। सवाल-3: आखिर प्लास्टिक नोट के फायदे क्या हैं? जवाबः RBI की 3 बड़ी मौजूदा चुनौतियों का समाधान प्लास्टिक नोट कर सकती है… 1. कागजी नोट से 6 गुना ज्यादा तक लाइफ 2. छपाई की औसत लागत घटेगी 3. नकली नोटों पर लगाम लगेगी सवाल-4: प्लास्टिक नोट का क्या कोई नुकसान भी है? जवाबः सीधे तौर पर कोई बड़ा नुकसान तो नहीं है, लेकिन 3 चुनौतियां जरूर हैं…1. शुरुआती लागत ज्यादा 2. मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर बदलना पड़ेगा 3. प्लास्टिक नोट भी नकली बनाए जा रहे सवाल-5: क्या भारत में सभी नोट प्लास्टिक के हो जाएंगे, आगे क्या? जवाबः अभी सिर्फ 10 और 20 रुपए के 200 करोड़ नोट का फील्ड ट्रायल होना है। RBI ने पेपर नोट बंद कर प्लास्टिक पर शिफ्ट होने का कोई फैसला नहीं किया। हां, अगर ट्रायल सफल रहता है, तो आगे चलकर ₹50, ₹100, ₹200 और ₹500 के नोट भी प्लास्टिक में आ सकते हैं। लेकिन अभी ऐसी कोई घोषणा नहीं हुई है। पूरी तरह प्लास्टिक नोटों पर शिफ्ट होना कोई एक-दो साल का काम नहीं। ऑस्ट्रेलिया को भी अपनी पूरी करेंसी प्लास्टिक में बदलने में करीब 8 साल लगे थे। आज दुनिया के कुल कैश में सिर्फ 3% हिस्सा ही प्लास्टिक नोटों का है। ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, रोमानिया, कनाडा, वियतनाम और मालदीव जैसे गिने-चुने करीब 12 देश ही पूरी तरह प्लास्टिक करेंसी पर गए हैं, और उन्हें भी इसमें 5 से 8 साल का वक्त लगा। ------------- ये खबर भी पढ़िए… गुलाबी पेट्रोल, टैंक में चींटी के वीडियो वायरल; सरकार पेट्रोल में जबरन एथेनॉल मिलाने पर क्यों तुली है, पीछे की पूरी कहानी कहीं गुलाबी रंग का पेट्रोल, कहीं टैंक से चिपकी चीटियां, कहीं पेट्रोल के साथ दिखता पानी। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियोज वायरल हैं और सभी के साथ एक ही नाम जुड़ा है- एथेनॉल। इन वीडियोज की असलियत संदिग्ध हो सकती है, लेकिन देश में एथेनॉल पर बहस बिल्कुल असली है। पूरी खबर पढ़िए…
मुगल इतिहास का एक दिलचस्प विरोधाभास यह रहा है कि अधिकांश मुगल बादशाह खुद जमकर जाम छलकाते थे और कई शहजादों तथा बादशाहों की जानलेवा बीमारियों व असामयिक मौत की वजह शराब और अफीम ही बनी। लेकिन इसके बावजूद, ये शासक शराब के सामाजिक और प्रशासनिक नुकसानों से भली-भांति वाकिफ थे। अपनी लत के बाद भी वे प्रजा को इससे दूर रखने की कोशिशें करते रहे। इसके पीछे लोगों की सेहत, कानून-व्यवस्था, सार्वजनिक अमन-चैन बनाए रखने और धार्मिक आदर्शों का हवाला दिया जाता था। खासकर त्योहारों पर शराब के नशे में होने वाले झगड़ों को रोकने के लिए समय-समय पर सख्त आदेश जारी किए गए, हालांकि व्यावहारिक रूप से ये बेअसर ही साबित हुए।जब खानवा के युद्ध से ठीक पहले बाबर ने की तौबाभारत में मुगल साम्राज्य की नींव रखने वाले बाबर ने अपनी आत्मकथा 'बाबरनामा' में शराब के प्रति अपने प्रेम और महफिलों का बेबाकी से जिक्र किया है। हालांकि, सन 1527 में खानवा के प्रसिद्ध युद्ध से पहले बाबर की सोच में बड़ा बदलाव आया। उसने हमेशा के लिए शराब छोड़ने का कड़ा फैसला लिया और शराब पीने के अपने तमाम कीमती पैमाने (जाम) तुड़वा दिए। इसके बाद उसने अपनी सेना और अफसरों से भी शराब त्यागने की अपील की। खुद उदाहरण पेश करने के कारण उसकी इस अपील ने सैनिकों के मनोबल को बढ़ाने और धार्मिक रूप से उन्हें एकजुट करने में टर्निंग पॉइंट की भूमिका निभाई।अकबर की नीति: 'थोड़ी पियो, लेकिन हर जगह नहीं'हुमायूं के शासनकाल में शराब से ज्यादा अफीम के सेवन का जिक्र मिलता है, लेकिन उसने शराबबंदी की कोई कोशिश नहीं की। उसके बाद सत्ता में आए अकबर को भी शराब से परहेज नहीं था, लेकिन वह संयम से काम लेता था। आइन-ए-अकबरी के अनुसार, अकबर सार्वजनिक नशाखोरी के सख्त खिलाफ था। उसने पूरे साम्राज्य में शराब पर पूरी पाबंदी लगाने के बजाय उसके प्रयोग पर सामाजिक नियंत्रण बनाने की नीति अपनाई। इसके तहत राजधानी में शराब की बिक्री को लाइसेंस प्रणाली के अधीन किया गया और दुकानें सीमित कर दी गईं। दरबार में पीकर आना सख्त मना था।शराबी जहांगीर के शुरुआती फरमानों में ही शामिल थी शराबबंदीमुगल काल में नशे के मामले में जहांगीर का नाम सबसे ऊपर आता है। उसकी अत्यधिक नशाखोरी के कारण ही शासन की असली कमान मल्लिका नूरजहां के हाथों में आ गई थी। अपनी आत्मकथा 'तुज़ुक-ए-जहांगीरी' में उसने खुद कबूल किया है कि वह 18 वर्ष की उम्र से रोजाना 20-20 प्याले शराब पी जाता था। बाद में डॉक्टरों की सलाह पर उसने शराब घटाकर अफीम का सहारा लिया। इसके बावजूद, गद्दी संभालते ही उसने जो 12 शाही फरमान जारी किए, उनमें नशीले पदार्थों के निर्माण और बिक्री पर रोक का आदेश शामिल था। हालांकि, इतिहासकारों के अनुसार जहांगीर का यह आदेश केवल एक नैतिक आदर्श बनकर रह गया और खुद उसकी जान शराब और अफीम की लत के कारण ही गई।शाहजहां: शराब के प्रति संयमित रवैयापिता जहांगीर की तुलना में शाहजहां शराब के मामले में काफी संयमित था। फ्रांसीसी यात्री फ्रांस्वा बर्नियर और इतालवी यात्री निकोलाओ मनूच्ची के यात्रा वृत्तांतों के अनुसार, शाहजहां शराब का गुलाम नहीं था और केवल कभी-कभी ही सीमित मात्रा में पीता था। उसने अपने पिता की तरह कोई औपचारिक शराबबंदी का आदेश जारी नहीं किया और न ही अपने बेटे औरंगज़ेब की तरह कट्टर धार्मिक नीतियां अपनाईं। उसके शासन में दरबार में विदेशी व्यापारियों के लिए शराब उपलब्ध रहती थी, हालांकि सार्वजनिक रूप से खुलेआम नशाखोरी को बढ़ावा नहीं दिया जाता था।औरंगज़ेब की शराबबंदी: जब काजी ही निकला गुप्त पक्कड़अपने पूर्वजों के बिल्कुल उलट औरंगज़ेब हर तरह के नशे से दूर रहता था। 1658 में सत्ता में आने के बाद उसने साम्राज्य में शराब, भांग और अन्य नशों की बिक्री व उत्पादन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के फरमान जारी किए। उसने मुहतसिब (नैतिक निरीक्षक) तैनात किए, जो जुए और शराब की बिक्री पर कड़ी नजर रखते थे। इसके बावजूद, बुतपरस्त और मुस्लिम आबादी वाले इस विशाल साम्राज्य में गुप्त रूप से देसी शराब की भट्टियां चलती रहीं और शराब बिकती रही।साम्राज्य के बड़े-बड़े अमीर और वजीर (जैसे असद खान) हर रोज शराब की तलब में रहते थे। अपनी इस विफलता और अफसरों की लत से झुंझलाकर औरंगज़ेब ने एक बार कहा था, हिंदुस्तान में बस दो ही लोग शराब से तौबा किए हुए हैं– एक मैं खुद और दूसरा क़ाज़ी-ए-मुमालिक अब्दुल वाहब। हालांकि, बादशाह की यह धारणा भी गलत साबित हुई। इतालवी यात्री निकोलाओ मनूच्ची के अनुसार, वह खुद काजी अब्दुल वाहब को गुप्त रूप से सस्ती शराब की बोतलें भेजा करता था, जिसे काजी इतनी राजदारी से पीता था कि बादशाह को कभी इसकी भनक तक नहीं लगी।
बुरा मत मानिए, आईना हमेशा सुंदर नहीं होता…
NEET paper leak protest: आज जिस पीढ़ी को जेन-जी कहकर या तो खारिज किया जा रहा है, या फिर उसकी भाषा, उसके मीम्स और उसके जार्गन पर नैतिकता का पहरा बैठाया जा रहा है, शायद उसे समझने की सबसे कम कोशिश की गई है। उसकी भाषा में तल्खी है। गुस्सा है। व्यंग्य है। खिलंदड़पन है। लेकिन उससे भी ज़्यादा उसमें सवाल पूछने की हिम्मत है। यही बात असहज करती है। कई लोग जंतर-मंतर पर जुटे छात्रों के लोकतांत्रिक प्रतिरोध को केवल नीट परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक के खिलाफ उपजा क्षणिक आक्रोश मान रहे हैं। यह विश्लेषण अधूरा है। हर पीढ़ी का अपना एक निर्णायक क्षण होता है। 1974 में बिहार छात्र आंदोलन, 1990 में मंडल आंदोलन, 2011 में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन और 2012 में निर्भया आंदोलन—इन सबने युवाओं की राजनीतिक चेतना को नए रूप दिए। आज की पीढ़ी के लिए शिक्षा, रोजगार, परीक्षा प्रणाली, डिजिटल निगरानी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संस्थाओं की विश्वसनीयता एक-दूसरे से अलग मुद्दे नहीं हैं। वे इन्हें एक ही लोकतांत्रिक प्रश्न के अलग-अलग अध्याय मानते हैं। इस पीढ़ी का सबसे बड़ा अपराध शायद यह है कि इसने आंख मूंदकर भरोसा करना छोड़ दिया है। राजनीति में भक्ति या व्यक्तिपूजा अंततः पतन और तानाशाही का मार्ग बन सकती है। — डॉ. भीमराव अंबेडकर, संविधान सभा का अंतिम भाषण (25 नवम्बर 1949)। यह किसी राजनीतिक दल, किसी वैचारिक खेमे या किसी स्थापित चेहरे को अंतिम सत्य नहीं मानती। यह हर दावे का स्क्रीनशॉट मांगती है, हर बयान का फैक्ट-चेक करती है और हर सत्ता से जवाब चाहती है। उसका निष्कर्ष सही होगा या गलत, इसका फैसला इतिहास करेगा। लेकिन एक बात तय है—उसने अपना दिमाग किराए पर नहीं दिया है। यही उसकी सबसे बड़ी ताकत है। जेन-जी की भाषा पर सबसे अधिक आपत्ति की जाती है। कहा जाता है कि यह असभ्य है, आक्रामक है और मर्यादाहीन है। लेकिन यह बहस तब अधूरी हो जाती है जब भाषा की मर्यादा केवल नागरिकों से अपेक्षित हो और सत्ता से नहीं। आईना अगर चुभ रहा है, तो शायद चेहरा देखने का समय आ गया है जिस देश में संसद के भीतर दिए गए भाषणों के हिस्सों को असंसदीय मानकर कार्यवाही से हटाना पड़ता हो; जिस देश में अनेक जनप्रतिनिधि और मुख्यमंत्री सार्वजनिक मंचों या कैमरे पर अपशब्द बोलते रिकॉर्ड हो चुके हों; जिस देश में राजनीतिक संवाद का स्तर वर्षों से लगातार गिरा हो—वहां भाषायी शुचिता का नैतिक बोझ केवल युवाओं के कंधों पर डाल देना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। मर्यादा यदि मूल्य है, तो वह सबके लिए समान होनी चाहिए लोकतंत्र में भाषा केवल शिष्टाचार का विषय नहीं होती; वह सत्ता और समाज के रिश्ते का भी दर्पण होती है। जब संवाद सम्मानजनक होगा, तो प्रतिरोध भी अधिक सभ्य होगा। लेकिन यदि सार्वजनिक विमर्श लगातार कटु, व्यक्तिगत और अपमानजनक होता जाएगा, तो उसकी प्रतिध्वनि समाज में भी सुनाई देगी। युवा उसी समाज की उपज हैं, किसी दूसरी पृथ्वी के निवासी नहीं। यह भी समझना होगा कि जेन-जी की व्यंग्यात्मक भाषा केवल मनोरंजन नहीं है। मीम, तंज, वायरल वीडियो और नए जार्गन आज के दौर की राजनीतिक अभिव्यक्ति के सबसे प्रभावशाली औज़ार बन चुके हैं। जिस तरह 2014 के बाद भारतीय राजनीति में टेलीविज़न, अखबारों के फ्रंट पेज विज्ञापनों, सोशल मीडिया अभियानों और विशेष रूप से व्हाट्सऐप नेटवर्क के ज़रिए राजनीतिक नैरेटिव गढ़े गए और जनमत को प्रभावित करने का अभूतपूर्व प्रयास हुआ, उसी डिजिटल पारिस्थितिकी को आज जेन-जी ने अपने प्रतिरोध की भाषा बना लिया है। पहले जो काम पोस्टर, पैम्फलेट और नुक्कड़ नाटक करते थे, वही काम आज 30 सेकंड का वीडियो, एक मीम या एक व्यंग्यात्मक वाक्य कर रहा है। माध्यम बदल गया है, लेकिन लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का अधिकार नहीं। सवाल यह नहीं है कि हमें जेन-जी की हर बात पसंद है या नहीं। सवाल यह है कि क्या हम उसकी बात सुनने को तैयार हैं? हर नई पीढ़ी अपने समय की भाषा लेकर आती है। पहले उसे उद्दंड कहा जाता है, फिर उसे खतरनाक बताया जाता है और अंततः वही भाषा समाज का हिस्सा बन जाती है। इतिहास इसका गवाह है। इसलिए, जेन-जी से असहमति रखिए। उसकी भाषा की आलोचना कीजिए। उसे बेहतर तर्क देना सिखाइए। लेकिन उसके सवालों से मत भागिए। क्योंकि लोकतंत्र की असली परीक्षा यह नहीं होती कि सत्ता कितनी शक्तिशाली है। असली परीक्षा यह होती है कि सवाल पूछने वाला युवा कितना निडर है—और जवाब देने वाली व्यवस्था कितनी ईमानदार।
Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (28 जुलाई, 2026)
मेष (Aries) Today 28 July horoscope in Hindi 2026 : करियर: कार्यक्षेत्र में वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा। लव: प्रेम संबंधों में मधुरता बनी रहेगी। जीवनसाथी के साथ किसी महत्वपूर्ण विषय पर चर्चा हो सकती है। धन: आय में वृद्धि के योग हैं। अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखें। स्वास्थ्य: मौसम के कारण सर्दी-जुकाम की समस्या हो सकती है। उपाय: हनुमान मंदिर में चमेली का तेल अर्पित करें। ALSO READ: छाया ग्रह राहु का कुंभ और धनिष्ठा में गोचर: शिक्षा, तकनीक और मीडिया में आ रहा है क्रांतिकारी बदलाव वृषभ (Taurus) करियर: नौकरी में सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। व्यापार में नई योजनाओं पर काम शुरू कर सकते हैं। लव: परिवार और साथी के साथ समय बिताने से रिश्ते मजबूत होंगे। धन: रुका हुआ धन मिलने की संभावना है। स्वास्थ्य: खान-पान में संतुलन बनाए रखें। उपाय: भगवान शिव का गंगाजल से अभिषेक करें। मिथुन (Gemini) करियर: विद्यार्थियों के लिए दिन अनुकूल रहेगा। नौकरीपेशा लोगों को नई जिम्मेदारियां सफलता दिलाएंगी। लव: प्रेम संबंधों में विश्वास बढ़ेगा। अविवाहित लोगों को शादी का प्रस्ताव मिल सकता है। धन: आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी। स्वास्थ्य: सिरदर्द या थकान महसूस हो सकती है, पर्याप्त आराम करें। उपाय: भगवान गणेश को आज मोदक अर्पित करें। कर्क (Cancer) करियर: नौकरीपेशा के कार्यक्षेत्र में धैर्य और समझदारी से लिए गए निर्णय लाभ देंगे। लव: जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। परिवार में सुखद वातावरण रहेगा। धन: खर्चों पर नियंत्रण रखें और निवेश सोच-समझकर करें। स्वास्थ्य: पेट संबंधी परेशानी से बचने के लिए हल्का भोजन करें। उपाय: शिवजी को कच्चे दूध मिश्रित जल अर्पित करें। सिंह (Leo) करियर: नौकरीपेशा के नेतृत्व क्षमता की प्रशंसा होगी। पदोन्नति या नई उपलब्धि मिलने के योग हैं। लव: प्रेम जीवन में मधुरता बनी रहेगी। धन: आर्थिक लाभ के अच्छे अवसर प्राप्त होंगे। स्वास्थ्य: ऊर्जा और आत्मविश्वास बना रहेगा। उपाय: सूर्यदेव को तांबे के पात्र से जल अर्पित करें। कन्या (Virgo) करियर: छात्रों को मेहनत का उचित फल मिलेगा। नई नौकरी में किसी प्रोजेक्ट की शुरुआत हो सकती है। लव: जीवनसाथी के साथ तालमेल अच्छा रहेगा। धन: धन लाभ के योग हैं, लेकिन खर्च भी बढ़ सकते हैं। स्वास्थ्य: पर्याप्त नींद लें और तनाव से दूर रहें। उपाय: भगवान विष्णु को पीले पुष्प अर्पित करें। ALSO READ: Vijaya Parvati Vrat 2026: विजया पार्वती व्रत कब से होगा प्रारंभ, क्या है इस व्रत का महत्व तुला (Libra) करियर: व्यापार में विस्तार के अवसर मिल सकते हैं। ऑफिस के रुके हुए कार्य पूरे होंगे। लव: दांपत्य जीवन में खुशियां बनी रहेंगी। धन: निवेश से लाभ मिलने की संभावना है। स्वास्थ्य: मानसिक तनाव कम होगा। उपाय: पीपल वृक्ष पर जल अर्पित करके घी का दीपक जलाएं। वृश्चिक (Scorpio) करियर: कार्यक्षेत्र में आत्मविश्वास से लिए गए निर्णय लाभ देंगे। नौकरीपेशा को नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। लव: प्रेमी साथी के साथ संबंध और मजबूत होंगे। धन: कारोबार से आय में वृद्धि के संकेत हैं। स्वास्थ्य: नियमित योग और व्यायाम लाभदायक रहेगा। उपाय: भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करें। धनु (Sagittarius) करियर: नौकरी में नई योजनाएं सफल होंगी। व्यापार में प्रगति के अवसर मिलेंगे। लव: रिश्तों में ईमानदारी बनाए रखें। धन: आय के नए स्रोत बन सकते हैं। स्वास्थ्य: यात्रा के दौरान सावधानी रखें। उपाय: मां लक्ष्मी को कमल फूल अर्पित करें। मकर (Capricorn) करियर: आपको नई योजनाओं में सफलता मिलेगी। व्यापार में लाभ होगा। लव: प्रेमीजनों को परिवार के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा। धन: बचत और निवेश के लिए दिन अच्छा है। स्वास्थ्य: कमर या घुटनों में हल्का दर्द हो सकता है। उपाय: शनि देव को सरसों का तेल अर्पित करें। कुंभ (Aquarius) करियर: कारोबार से मेहनत का पूरा फल मिलेगा। वरिष्ठ अधिकारियों से प्रशंसा मिल सकती है। लव: प्रेम संबंधों में विश्वास और निकटता बढ़ेगी। धन: आर्थिक स्थिति मजबूत रहेगी। स्वास्थ्य: नियमित व्यायाम करें और पर्याप्त पानी पिएं। उपाय: भगवान विष्णु को तुलसी दल अर्पित करें। मीन (Pisces) करियर: करियर में नई उपलब्धियां तथा सम्मान हासिल हो सकता हैं। लव: जीवनसाथी के साथ संबंध मधुर रहेंगे। धन: अचानक धन लाभ के योग बन रहे हैं। स्वास्थ्य: योग और ध्यान मानसिक शांति प्रदान करेंगे। उपाय: जरूरतमंदों को काले तिल या उड़द की दाल दान करें। ALSO READ: Kokila Vrat 2026: कोकिला व्रत क्या होता है, क्यों करते हैं इसे, जानें कथा, मुहूर्त, विधि और महत्व
प्रतियोगी परीक्षाओं में बालिकाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए विप्र फाउंडेशन ने की विशेष पहल : दवे
सबगुरू न्यूज-आबूरोड। विप्र फाउंडेशन की नव घोषित जिला कार्यकारिणी का अभिनंदन और शपथ ग्रहण समारोह रविवार को हुआ। इसमें उपस्थित समाज बंधुओं को संबोधित करते हुए फाउंडेशन के प्रदेश अध्यक्ष चिरंजीलाल दवे ने कहा कि समाज के बच्चों के लिए कोचिंग के लिए परशुराम ज्ञानपीठ भवन में जयपुर में रहने की व्यवस्था। उन्हों बताया कि […] The post प्रतियोगी परीक्षाओं में बालिकाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए विप्र फाउंडेशन ने की विशेष पहल: दवे appeared first on Sabguru News .
शिव मंदिर आदर्श नगर में गूंजे श्याम भजन, देर रात तक भक्ति में झूमते रहे श्रद्धालु
अजमेर। आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वादशी के पावन अवसर पर आदर्श नगर स्थित शिव मंदिर में रविवार को श्री श्याम परिवार, आदर्श नगर की ओर से भव्य श्री श्याम संकीर्तन एवं महाप्रसादी का आयोजन श्रद्धा और उल्लास के साथ किया गया। संकीर्तन में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर श्याम बाबा के भजनों का आनंद […] The post शिव मंदिर आदर्श नगर में गूंजे श्याम भजन, देर रात तक भक्ति में झूमते रहे श्रद्धालु appeared first on Sabguru News .
फसल कटाई संबंधी राज्य स्तरीय प्रशिक्षण राजस्व मंडल में शुरू
अजमेर। कृषि वर्ष 2026-27 के तहत प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएम एफबीवाई) एवं सामान्य फसल अनुमान सर्वेक्षण (जीसीईएस) संबंधी राज्य स्तरीय प्रशिक्षण सोमवार से राजस्व मंडल में शुरू हुआ। इस चार दिवसीय प्रशिक्षण में राज्य के सभी 41 जिलों के सांख्यिकी विभाग एवं भू अभिलेख शाखाओं के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। इस राज्य स्तरीय […] The post फसल कटाई संबंधी राज्य स्तरीय प्रशिक्षण राजस्व मंडल में शुरू appeared first on Sabguru News .
सबसे ज्यादा कांग्रेस राज में हुए पेपर लीक : अरुण चतुर्वेदी
अलवर। राजस्थान वित्त आयोग के अध्यक्ष एवं भारतीय जनता पार्टी के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने कहा है कि विपक्ष वास्तव में पेपर लीक जैसे गंभीर मुद्दे पर गंभीर है तो संसद में बहस से भागने के बजाय चर्चा करे। चतुर्वेदी ने सोमवार को अलवर में कांग्रेस और विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा […] The post सबसे ज्यादा कांग्रेस राज में हुए पेपर लीक : अरुण चतुर्वेदी appeared first on Sabguru News .
दुबई से मुंबई जा रहे इंडिगो के विमान में आग की चेतावनी, आपात स्थिति में राजकोट में लैंडिंग
राजकोट। दुबई से मुंबई जा रहे इंडिगो के एक विमान को आग की चेतावनी के बाद राजकोट में आपात स्थिति में उतारा गया। विमान की राजकोट में सुरक्षित लैंडिंग हुई। इस उड़ान में यात्रियों और चालक दल के सदस्यों को मिलाकर कुल 194 लोग सवार थे। राजकोट हवाई अड्डे से प्राप्त जानकारी के अनुसार इंडिगो […] The post दुबई से मुंबई जा रहे इंडिगो के विमान में आग की चेतावनी, आपात स्थिति में राजकोट में लैंडिंग appeared first on Sabguru News .
भोपाल में शादी का झांसा देकर 29 वर्षीय युवती से रेप
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के रातीबड़ थाना क्षेत्र में शादी का झांसा देकर 29 वर्षीय युवती से दुष्कर्म करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार पीड़िता पेशे से मेकअप आर्टिस्ट है। उसकी करीब एक माह पहले सोशल मीडिया […] The post भोपाल में शादी का झांसा देकर 29 वर्षीय युवती से रेप appeared first on Sabguru News .
संगरूर भाजपा कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला, पुलिस जांच में जुटी
संगरूर। पंजाब में संगरूर स्थित भारतीय जनता पार्टी के जिला कार्यालय पर रविवार देर रात कथित तौर पर पेट्रोल बम से हमला किए जाने का मामला सामने आया है। पुलिस के अनुसार अज्ञात हमलावरों ने कथित रूप से बीयर की बोतल में पेट्रोल भरकर उसे पेट्रोल बम के रूप में तैयार किया और भाजपा कार्यालय […] The post संगरूर भाजपा कार्यालय पर पेट्रोल बम से हमला, पुलिस जांच में जुटी appeared first on Sabguru News .
श्रीगंगानगर : नशे में मामूली पर विवाद के चलते युवक की हत्या
श्रीगंगानगर। राजस्थान में श्रीगंगानगर जिले के भागसर गांव में रविवार देर रात एक मजदूर युवक ने झगड़ा हो जाने पर दूसरे युवक की गर्दन काट कर हत्या कर दी। पुलिस सूत्रों ने सोमवार का बताया कि मृतक की पहचान रमेश सोनी (37) निवासी भागसर के रूप में हुई है। आरोपी युवक को हिरासत में ले […] The post श्रीगंगानगर : नशे में मामूली पर विवाद के चलते युवक की हत्या appeared first on Sabguru News .
भीलवाड़ा एसपी से महिला से अभद्र व्यवहार करने वाले युवक की शिकायत
भीलवाड़ा। राजस्थान में भीलवाड़ा के गांधीनगर थाना क्षेत्र में एक महिला से कथित अभद्र व्यवहार काे लेकर पुलिस कार्रवाई में देरी से नाराज कई महिलाएं रविवार देर रात करीब 12 बजे पुलिस अधीक्षक आवास पहुंचीं और आरोपी के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की मांग की। प्राप्त जानकारी के अनुसार कनक विहार कॉलोनी निवासी एक महिला […] The post भीलवाड़ा एसपी से महिला से अभद्र व्यवहार करने वाले युवक की शिकायत appeared first on Sabguru News .
बनेवड़ा में शिक्षकों और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर 5 अगस्त से जन आंदोलन
बनेवड़ा। सड़क निर्माण के लिए वर्ष 2022 में साइकिल यात्रा निकालकर जन-जागरूकता की मिसाल कायम करने वाला बनेवड़ा गांव एक बार फिर आंदोलन की राह पर है। इस बार ग्रामीणों ने सड़क नहीं, बल्कि बच्चों के बेहतर भविष्य और शिक्षा के अधिकार की लड़ाई लड़ने का निर्णय लिया है। विद्यालय में शिक्षकों की कमी और […] The post बनेवड़ा में शिक्षकों और बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर 5 अगस्त से जन आंदोलन appeared first on Sabguru News .
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद भी अभिजीत दीपके के जंतर मंतर न छोड़ने का दावा गलत है
बूम ने पाया कि वायरल वीडियो धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले का है. मूल वीडियो में अभिजीत दीपके धरना स्थल पर तिरपाल लगाने की अनुमति देने की अपील करते हुए हाथ जोड़ रहे थे.
नर्मदा नदी की तेज धार में बहा इंदौर का युवक, 9 घंटे की मशक्कत के बाद मिला शव
मध्य प्रदेश के धार्मिक पर्यटन स्थल महेश्वर में नर्मदा नदी के सहस्त्रधारा घाट पर दर्दनाक हादसा हो गया। परिवार के साथ घूमने आए 30 वर्षीय अर्पित हाड़ा का पैर फिसलने से वह तेज बहाव में बह गया। परिजनों ने ग्रामीणों से मदद की गुहार लगाई, लेकिन नदी की तेज धारा के कारण उसे बचाया नहीं जा सका। सूचना मिलते ही पुलिस, होमगार्ड और गोताखोरों की टीम ने तलाशी अभियान शुरू किया। सोमवार को 9 घंटे की मशक्कत के बाद युवक का शव मिल सका है। परिवार के साथ घूमने आया था : अर्पित हाड़ा रविवार सुबह अपने परिवार के साथ महेश्वर के प्रसिद्ध सहस्त्रधारा क्षेत्र घूमने आया था। परिवार के पांच सदस्य उसके साथ थे। दिनभर धार्मिक स्थल और आसपास के क्षेत्रों में घूमने के बाद शाम को पूरा परिवार नर्मदा स्नान के लिए सहस्त्रधारा घाट पहुंचा। यहां बड़ी संख्या में चट्टानें हैं और फिसलन भी रहती है। तेज बहाव में बह गया युवक : नर्मदा में स्नान के दौरान अचानक अर्पित का पैर फिसल गया और वह नदी में जा गिरा। नदी का बहाव इतना तेज था कि वह खुद को संभाल नहीं सका। उसके भाई और पत्नी ने शोर मचाकर ग्रामीणों से मदद मांगी, लेकिन किसी को भी उसे बचाने का मौका नहीं मिला। देखते ही देखते अर्पित तेज धारा में बह गया और परिजनों की आंखों के सामने ओझल हो गया। रातभर चला रेस्क्यू : घटना की सूचना मिलते ही महेश्वर पुलिस गोताखोरों के साथ मौके पर पहुंची और तलाशी अभियान शुरू किया। रविवार देर रात तक लगातार खोजबीन की गई, लेकिन युवक का कोई पता नहीं चल सका। सोमवार सुबह होमगार्ड और गोताखोरों की टीम फिर मौके पर पहुंची और दोबारा सर्च ऑपरेशन शुरू किया। सोमवार को करीब 9 घंटे की मशक्कत के बाद उसका शव बरामद किया गया है।
संसद में मानसून सत्र के दूसरे सप्ताह की शुरुआत सोमवार को भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के तीखे टकराव के साथ हुई। लोकसभा और राज्यसभा दोनों में आंदोलनकारी छात्रों पर कथित पुलिस कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया, जिसके कारण दोनों सदनों की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। गौरतलब है कि जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन खत्म हो चुका है, लेकिन छात्रों के साथ मारपीट का मुद्दा संसद में गरमाया हुआ है। सुबह 11 बजे लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई। सरकार ने लोकसभा में लोक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 भी पेश किया। प्रश्नकाल शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने आंदोलनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे पर नारेबाजी शुरू कर दी। लगातार शोर-शराबे के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। दोपहर 12 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। पीठासीन अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने आवश्यक दस्तावेज सदन पटल पर रखने की प्रक्रिया पूरी कराई। करीब 12 बजकर 4 मिनट पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला फिर आसन पर आए। इस दौरान विपक्षी सांसद वेल में नारेबाजी कर रहे थे। इस बीच प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने लोक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। स्पीकर ओम बिरला ने विपक्ष से कहा कि सरकार इस विषय पर चर्चा के लिए तैयार है और सदन की कार्यवाही चलने दें, लेकिन हंगामा नहीं थमा। इसके बाद सदन को दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दिया गया। दोपहर 2 बजे कार्यवाही फिर शुरू हुई, लेकिन विपक्ष का विरोध जारी रहा। करीब 2 बजकर 4 मिनट पर संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा कि सरकार ने इस विधेयक पर चर्चा के लिए समय तय कर दिया है, फिर भी विपक्ष नारेबाजी कर सदन क्यों नहीं चलने दे रहा है। हंगामा जारी रहने पर लोकसभा की कार्यवाही शाम 5 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। वहीं, राज्यसभा की कार्यवाही भी सुबह 11 बजे शुरू हुई। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाने की प्रक्रिया पूरी कराई। सुबह 11 बजकर 4 मिनट पर नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे बोलने के लिए खड़े हुए। उस समय कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी भी सदन में मौजूद थीं। सभापति ने उन्हें नियमों का हवाला देते हुए रोकने की कोशिश की, लेकिन खरगे ने ऊंची आवाज में विरोध दर्ज कराते हुए कहा- ‘जिस तरह छात्रों को पीटा गया, घसीटा गया और उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया, ऐसा भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ।’ खरगे के बयान के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोक-झोंक शुरू हो गई। हंगामे के चलते सभापति ने राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक टाल दी। दोपहर 2 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। इस बार उपसभापति हरिवंश आसन पर थे। सरकार ने राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू कराई और सदस्यों को अपनी बात रखने का अवसर दिया। हालांकि, विपक्ष लगातार छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाने की कोशिश करता रहा। पीठ की ओर से सदस्यों को केवल लिस्टेड विषयों की कार्यवाही तक सीमित रहने के लिए कहा गया, जिसके बाद फिर हंगामा शुरू हो गया। लगातार रुकावट के कारण राज्यसभा की कार्यवाही पहले दोपहर 3 बजे तक और फिर दोबारा शुरू होने के महज एक मिनट बाद शाम 5 बजकर 15 मिनट तक के लिए स्थगित कर दी गई। क्या है लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 केंद्र सरकार ने 27 जुलाई 2026 को लोकसभा में लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। यह 2024 में लागू लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम को और प्रभावी बनाने के मकसद से लाया गया है। प्रस्तावित संशोधन का मकसद भर्ती और अन्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक, संगठित नकल, परीक्षा माफिया और तकनीक के जरिए होने वाली धांधली पर अधिक सख्ती से रोक लगाना है। इसमें दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का प्रावधान किया गया है। वीडियो देखने के लिए ऊपर थंबनेल पर क्लिक करें…
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा होते ही कॉकरोच जनता पार्टी ने आंदोलन खत्म कर दिया, लेकिन विपक्ष ने अपनी रणनीति बदल दी। अब निशाने पर गृहमंत्री अमित शाह हैं। 26 जुलाई को राहुल गांधी ने शाह को चिट्ठी लिखकर दो सवाल पूछे। 27 जुलाई को विपक्षी पार्टियों ने तय किया है कि संसद की कार्यवाही बाधित करेंगे और अमित शाह से जवाब मांगेंगे। आखिर विपक्ष की गृहमंत्री को टारगेट करने की नई स्ट्रैटेजी क्या है, ये कारगर होगी या दांव उल्टा पड़ जाएगा; समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: राहुल गांधी ने गृहमंत्री अमित शाह से क्या सवाल पूछे हैं? जवाब: 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्ट्रैटेजी शिफ्ट का पहला संकेत मिला। राहुल ने धर्मेंद्र प्रधान की बजाए अमित शाह को घेरते हुए कहा- 'याद रहे, प्रदर्शन में किसी छात्र का हाथ टूटा, किसी का पैर, तो किसी की पसली। पेलेट गन जैसे जानलेवा हथियार का इस्तेमाल किया गया, तो कई चोट खाकर क्रिटिकल हो गए। इन सबके सीधे जिम्मेदार गृह मंत्री अमित शाह हैं।' राहुल गांधी ने अमित शाह को चिट्ठी लिखकर 2 सवाल पूछे- लंबे वक्त से कांग्रेस कवर करने वाले वरिष्ठ पत्रकार आदेश रावल के मुताबिक, ' राहुल गांधी गृहमंत्री अमित शाह से मांग रहे हैं। यानी वे बोल रहे हैं कि गृहमंत्री के निर्देश पर छात्रों पर लाठी और पैलेट गन चलाई गई। सवाल-2: संसद के लिए विपक्ष ने क्या रणनीति बनाई है? जवाब: गृहमंत्री अमित शाह को घेरना विपक्ष की एक साझा रणनीति है, सोमवार यानी 27 जुलाई को इसके 6 साफ संकेत मिले… 1. सदन शुरू होते ही हंगामा: सुबह 11 बजे सदन शुरू होते ही विपक्ष छात्रों से मारपीट के मुद्दे पर चर्चा के लिए अड़ गया। लोकसभा स्पीकर ने 4 बार सदन की कार्रवाई स्थगित की। सिवाए एक बिल पेश होने के अलावा लोकसभा में और कोई चर्चा नहीं हुई। 2. दोनों सदनों में स्थगन प्रस्ताव: लोकसभा में कांग्रेस नेता के.सी. वेणुगोपाल और हिबी ईडन ने स्थगन प्रस्ताव के लिए नोटिस दिया। राज्यसभा में रेणुका चौधरी ने भी चर्चा के लिए नोटिस दिया। 3. सदन के बाहर प्रदर्शन: सदन के बाहर कांग्रेस सांसदों न मार्च निकाला और नारे लगाए, 'अमित शाह जवाब दो, जवाब दो।' 4. सोशल मीडिया पर पोस्ट: विपक्षी नेता सोशल मीडिया पर भी अमित शाह से जवाब मांग रहे हैं। ऑल इंडिया महिला कांग्रेस ने X पर ट्वीट किया 'अमित शाह जवाब दो - लाठी का हिसाब दो' 5. मीडिया में बयानबाजी: TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा, 'CRPF की रैपिड एक्शन फोर्स और दिल्ली पुलिस दोनों अमित शाह को रिपोर्ट करते हैं। या तो अमित शाह ने खुद ऑर्डर दिए हैं। या उनके विभाग से किसने ऑर्डर दिए हैं, इसका भी वे जवाब दें।' 6. खड़गे के कमरे में बैठक : यह सब सुबह सदन शुरु होने से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के कमरे में विपक्षी दलों की बैठक के बाद शुरू हुआ। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें संसद की कार्रवाई को बाधित करने और अमित शाह से जवाब मांगने की रणनीति तय हुई है। दरअसल, देश की राजधानी होने के नाते दिल्ली पुलिस और आंतरिक सुरक्षा से जुड़ी एजेंसी होने के नाते रैपिड एक्शन फोर्स यानी RAF केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन है। 20 जुलाई का संसद मार्च संभालने यही दोनों बल तैनात थे। पॉलिटिकल एक्सपर्ट रशीद किदवाई कहते हैं, 'नीट पेपर लीक के मामले में कांग्रेस के लिए अब ज्यादा राजनीतिक लाभ बचा नहीं, लेकिन आंदोलन के दौरान लाठीचार्ज और बल प्रयोग से युवाओं में एक सेंटिमेंट है। कांग्रेस अब युवाओं का आक्रोश अमित शाह की तरफ डायवर्ट करने की कोशिश हो रही है, क्योंकि वे बीजेपी में अघोषित तौर पर नंबर-2 हैं।' सीनियर जर्नलिस्ट नीरज चौधरी बताती हैं, ‘अभी सरकार पर प्रेशर का एक मोमेंटम बना हुआ है। विपक्ष चाहता है कि इस सेंटिमेंट को और भुनाया जाए और सरकार को घेरा जाए। जवाबदेही तय की जाए।’ सवाल-3: मोदी सरकार की काउंटर स्ट्रैटेजी क्या है? जवाब: सरकार की काउंटर स्ट्रैटेजी इन तीन कदमों से समझिए… रशीद किदवाई बताते हैं कि सरकार चाहती है कि किसी भी तरह से संसद में चर्चा शुरू हो और इसमें सरकार का फायदा ही है। क्योंकि उसके पास दर्जनों अच्छे वक्ता हैं, जो विपक्ष पर भारी पड़ सकते हैं। ऐसे में विपक्ष केवल हल्ला-हंगामा करके वॉकआउट कर सकता है। सीनियर जर्नलिस्ट हर्षवर्धन त्रिपाठी मनाते हैं कि सरकार कतई नहीं चाहेगी कि ऐसा ऑप्टिक्स बने कि वो विपक्ष या कांग्रेस के सामने झुक गई। मानसून सत्र के पहले हफ्ते में कुछ खास नहीं हुआ है। ऐसे में सरकार पूरी कोशिश करेगी कि गतिरोध टूटे और संसद में चर्चा हो। सरकार दिखाना चाहती है कि प्रदर्शनकारी छात्र पीएम मोदी के फैसलों के बाद खुश हैं। बीजेपी सांसद राहुल सिन्हा ने कहा, ‘जो छात्र प्रदर्शन कर रहे थे, वे प्रधानमंत्री को आशीर्वाद देते हुए खुशी-खुशी वहां से चले गए। लेकिन कांग्रेस इस मुद्दे को जिंदा रखने की कोशिश कर रही है। उन्हें संसद में आने वाले विधेयक पर बोलना चाहिए। कांग्रेस बोलने से डरती है, क्योंकि इससे उनका पर्दाफाश हो जाएगा।’ सवाल-4: क्या विपक्ष का शाह को घेरने वाला दांव उल्टा भी पड़ सकता है?जवाबः इस स्ट्रैटेजी के दो पहलू हैं और दोनों तरफ के तर्क मजबूत हैं। ये किस करवट बैठेगी, ये जनता के परसेप्शन से तय होगा… यानी विपक्ष की बाजी इस बात पर टिकी है कि जनता के बीच छात्रों पर हुए एक्शन का गुस्सा अभी ठंडा हुआ है या नहीं। अगर सेंटिमेंट अभी भी गर्म है, तो अमित शाह को घेरना कारगर हो सकता है। अगर सरकार का ‘मसला सुलझ गया’ वाला नैरेटिव हावी हो गया, तो विपक्ष की रणनीति खुद उसके लिए मुश्किल खड़ी कर सकती है। सवाल-5: इन सबके बीच कॉकरोच जनता पार्टी का रुख क्या है? जवाब: फिलहाल CJP ने छात्रों पर कार्रवाई को लेकर गृहमंत्री अमित शाह से कोई सवाल नहीं पूछे हैं। विपक्ष की स्ट्रैटेजी पर भी CJP की तरफ से कोई समर्थन या विरोध सामने नहीं आया है। CJP ने बार-बार अपने प्रदर्शन को गैर-राजनीतिक बताया और कहा कि हम सभी से अपील करते हैं कि वो हमारा साथ दें, भले ही आप बीजेपी से जुड़े हों। राहुल गांधी ने भी इस पूरे वाकये में एक भी बार CJP और अभिजीत दीपके का नाम नहीं लिया। 26 जुलाई को CJP प्रवक्ता सौरव दास ने बयान जारी किया कि सरकार अपने वादे पूरे करे कि प्रदर्शन की वजह से किसी छात्र पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। जिनके खिलाफ केस दर्ज हुए हैं, उन्हें वापस लिया जाएगा। 27 जुलाई को सौरव दास ने सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बताया कि देश भर में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ दर्ज केसों को ट्रैक कर रहे हैं और उन्हें मदद पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं। ----------- ये खबर भी पढ़िए… क्या पॉलिटिकल पार्टी बनाएंगे 'कॉकरोच' या मूवमेंट जारी रखेंगे; अभिजीत दीपके का आगे का प्लान क्या, फ्यूचर के 3 सिनैरियो 6 जून 2026, अभिजीत दिपके पहली बार लंदन से दिल्ली एयरपोर्ट उतरे और सीधे जंतर-मंतर प्रोटेस्ट साइट पहुंचे। 20 जून को दोबारा प्रोटेस्ट पर बैठे, तो 36 दिन के बाद 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर उठे। जंतर-मंतर से जाते-जाते कॉकरोच पार्टी ने प्रोटेस्टर्स से कहा- ‘जल्दी दोबारा मिलेंगे।’ पूरी खबर पढ़िए
SPIDER-MAN: BRAND NEW DAYMovie Preview: जानिए कहानी, स्टारकास्ट, बजट और रिलीज से जुड़ी हर बड़ी बात
मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स (MCU) की बहुप्रतीक्षित फिल्मों में शामिल SPIDER-MAN: BRAND NEW DAY आखिरकार सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है। Spider-Man: No Way Home के भावनात्मक अंत के बाद यह फिल्म पीटर पार्कर की जिंदगी के बिल्कुल नए अध्याय की शुरुआत करेगी। इस बार कहानी पहले से ज्यादा व्यक्तिगत, भावनात्मक और रहस्यमयी बताई जा रही है। फिल्म का निर्देशन Shang-Chi and the Legend of the Ten Rings के निर्देशक डेस्टिन डेनियल क्रेटन ने किया है। क्या है फिल्म की कहानी? Spider-Man: Brand New Day की कहानी No Way Home की घटनाओं के कुछ साल बाद शुरू होती है। डॉक्टर स्ट्रेंज के जादू के कारण पूरी दुनिया पीटर पार्कर को भूल चुकी है। यहां तक कि उसकी सबसे करीबी दोस्त एमजे (Zendaya) और नेड (Jacob Batalon) भी उसे नहीं पहचानते। ऐसे में पीटर एक बिल्कुल नई जिंदगी शुरू करता है। वह अकेले ही न्यूयॉर्क की रक्षा करता है, लेकिन उसके सामने इस बार एक ऐसा रहस्यमयी खलनायक आता है जो लोगों के दिमाग और यादों पर नियंत्रण रखने की क्षमता रखता है। फिल्म में भावनात्मक संघर्ष के साथ जबरदस्त एक्शन देखने को मिलेगा। साथ ही, The Punisher की एंट्री इस कहानी को और रोमांचक बना देती है। लीड रोल में कौन हैं? फिल्म में एक बार फिर टॉम हॉलैंड पीटर पार्कर/स्पाइडर-मैन की भूमिका निभा रहे हैं। टॉम हॉलैंड ने 2016 में Captain America: Civil War से MCU में स्पाइडर-मैन के रूप में डेब्यू किया था और देखते ही देखते वह दुनिया के सबसे लोकप्रिय सुपरहीरो कलाकारों में शामिल हो गए। टॉम हॉलैंड की खासियत यह है कि उन्होंने स्पाइडर-मैन के किरदार में किशोर उम्र की मासूमियत, हास्य और भावनात्मक गहराई को बेहतरीन तरीके से पेश किया है। यही वजह है कि उनकी स्पाइडर-मैन फिल्मों ने दुनिया भर में अरबों डॉलर का कारोबार किया है। स्टारकास्ट फिल्म में कई लोकप्रिय कलाकार नजर आएंगे— टॉम हॉलैंड – पीटर पार्कर / स्पाइडर-मैन ज़ेंडाया – एमजे जैकब बैटलॉन – नेड लीड्स जॉन बर्नथल – द पनिशर मार्क रफैलो – ब्रूस बैनर / हल्क माइकल मैंडो ट्रामेल टिलमैन निर्देशक कौन हैं? फिल्म का निर्देशन डेस्टिन डेनियल क्रेटन ने किया है। उन्होंने इससे पहले MCU की सफल फिल्म Shang-Chi and the Legend of the Ten Rings का निर्देशन किया था। क्रेटन को एक्शन के साथ भावनात्मक कहानी कहने के लिए जाना जाता है। यही कारण है कि इस फिल्म से भी दर्शकों को काफी उम्मीदें हैं। फिल्म का बजट हालांकि निर्माता Marvel Studios और Sony Pictures ने फिल्म का आधिकारिक बजट सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन हॉलीवुड ट्रेड रिपोर्ट्स के अनुसार इसका अनुमानित बजट 200 से 250 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 1,700–2,100 करोड़ रुपये) के बीच माना जा रहा है। आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है। भारत में कब रिलीज होगी? भारत में SPIDER-MAN: BRAND NEW DAY 30 जुलाई 2026 को रिलीज होगी। दिलचस्प बात यह है कि भारतीय दर्शकों को यह फिल्म अमेरिका से एक दिन पहले देखने का मौका मिलेगा। कितनी भाषाओं में रिलीज होगी? भारत में यह फिल्म कुल 6 भाषाओं में रिलीज की जाएगी: अंग्रेजी हिंदी तमिल तेलुगु मलयालम कन्नड़ स्पाइडर-मैन सीरीज पर अब तक कितनी फिल्में बन चुकी हैं? अगर लाइव-एक्शन स्पाइडर-मैन फिल्मों की बात करें तो Brand New Day से पहले कुल 9 फिल्में रिलीज हो चुकी हैं: टोबी मैग्वायर ट्रिलॉजी Spider-Man (2002) Spider-Man 2 (2004) Spider-Man 3 (2007) एंड्रयू गारफील्ड सीरीज The Amazing Spider-Man (2012) The Amazing Spider-Man 2 (2014) टॉम हॉलैंड (MCU) Spider-Man: Homecoming (2017) Spider-Man: Far From Home (2019) Spider-Man: No Way Home (2021) Spider-Man: Brand New Day (2026) – चौथी MCU स्पाइडर-मैन फिल्म क्यों खास है यह फिल्म? Spider-Man: Brand New Day सिर्फ एक और सुपरहीरो फिल्म नहीं है, बल्कि यह पीटर पार्कर की जिंदगी के सबसे कठिन दौर की कहानी है। इस बार उसके पास न दोस्त हैं, न पहचान और न ही पुरानी दुनिया का सहारा। ऐसे में उसे अकेले अपने अस्तित्व और शहर दोनों की रक्षा करनी होगी। यही वजह है कि इसे टॉम हॉलैंड की अब तक की सबसे भावनात्मक और परिपक्व स्पाइडर-मैन फिल्म माना जा रहा है। शुरुआती एडवांस बुकिंग और दर्शकों की उत्सुकता को देखते हुए फिल्म से भारत सहित दुनियाभर में शानदार बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।
चातुर्मास में संत-महात्मा क्यों नहीं करते यात्रा? 4 महीने एक जगह रहने की जानिए खास वजह
Chaturmas 2026: हिन्दू कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ शुक्ल देवशयनी एकादशी यानी 25 जुलाई 2026 से चातुर्मास प्रारंभ हो गए हैं। इसके बाद 20 नवंबर 2026 कार्तिक शुक्ल एकादशी को देव उठनी एकादशी रहेगी तब तक चातुर्मास चलेंगे। चातुर्मास में यदि आपने शास्त्रों के नियमों का पालन कर लिया तो मानसिक और शारीरिक सेहत के साथ ही सुख, शांति और समृद्धि मिलेगी। शास्त्रों के अनुसार चातुर्मास में तप, साधना या जप बहुत जल्दी फलित होते हैं। इसलिए साधना और सिद्धियों के लिए इन चार माह को सबसे उत्तम माह बताया गया है। कहते हैं कि इन चार माह में सेहत में भी सुधार करके स्वस्थ हुआ जा सकता है। चातुर्मास (आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक के चार महीने) में साधु-संतों, ऋषियों और मुनियों द्वारा एक ही स्थान पर ठहरने की परंपरा सदियों पुरानी है। इसे ज्योतिषीय, धार्मिक, वैज्ञानिक और व्यावहारिक सभी दृष्टिकोणों से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। संतों द्वारा एक स्थान पर 4 महीने (चौमासा) बिताने के मुख्य कारण नीचे दिए गए हैं। 1. अहिंसा और जीव-रक्षा का पालन (मुख्य कारण) चातुर्मास का समय वर्षा ऋतु (Monsoon) का समय होता है। इस मौसम में धरती पर छोटे-छोटे कीट-पतंगे, चींटियां, सूक्ष्म जीव और सूक्ष्म वनस्पतियां अत्यधिक संख्या में उत्पन्न होती हैं। संतों का जीवन अहिंसा के सिद्धांत पर आधारित होता है। बारिश के मौसम में यदि वे लगातार यात्राएं करेंगे, तो उनके पैरों तले कुचलकर अनजाने में इन सूक्ष्म जीवों की हिंसा (हत्या) होने का भय रहता है। जैन और सनातन परंपरा में जीव-रक्षा को सर्वोच्च धर्म माना गया है, इसलिए संत पद-यात्रा (विहार) रोककर एक स्थान पर ठहर जाते हैं। 2. मार्ग की बाधाएं और प्राकृतिक कठिनाइयां प्राचीन काल में (और आज भी कई ग्रामीण/पहाड़ी इलाकों में) वर्षा ऋतु में नदियों-नालों में उफान आता था, रास्ते कीचड़ और पानी से भर जाते थे। कच्चे रास्तों पर यात्रा करना अत्यंत कठिन और जोखिम भरा होता था। सुरक्षा और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भी संतों का एक स्थान पर रुकना व्यावहारिक था। 3. भक्ति, स्वाध्याय और साधना का समय अन्य आठ महीनों में संत समाज में घूम-घूमकर धर्म का प्रचार करते हैं और निरंतर यात्रा में रहते हैं। निरंतर यात्रा के कारण उन्हें स्वयं की साधना के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता। ये चार महीने आंतरिक यात्रा (Self-Reflection) और ईश्वर साधना के माने गए हैं। संत इस समय गहन तपस्या, मौन, ग्रंथों का अध्ययन (स्वाध्याय) और ध्यान करते हैं। 4. समाज का कल्याण और सत्संग का अवसर जब कोई ज्ञानी संत किसी एक नगर या गांव में चार महीने के लिए रुकते हैं, तो वहां के निवासियों को उनके साथ सत्संग करने, कथा-प्रवचन सुनने और धर्म मार्ग पर चलने का लंबा और सुनहरा अवसर मिलता है। इससे समाज में संस्कार और धार्मिक जागृति बढ़ती है। 5. खगोलीय और प्राकृतिक ऊर्जा (साधना के अनुकूल) धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इन चार महीनों में भगवान विष्णु 'योगनिद्रा' (क्षीरसागर में विश्राम) में चले जाते हैं। इस दौरान ब्रह्मांड में प्राकृतिक और सात्विक ऊर्जा का प्रवाह अधिक होता है। इस समय का वातावरण ध्यान, व्रत और जप-तप के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है। संतों का चातुर्मास केवल एक धार्मिक नियम नहीं है, बल्कि यह अहिंसा (जीवों की सुरक्षा), प्रकृति के प्रति सम्मान, आत्म-साधना और जन-कल्याण का एक सुंदर एवं वैज्ञानिक संतुलन है। चातुर्मास में क्या करें:- यज्ञोपवीत धारण करके व्रत, तप, संयम, मौन, संत्सग, ध्यान, दान, संध्या और तर्पण करें। चातुर्मास में क्या न करें:- संस्कार और मांगलिक कार्य, केश कर्तन, कटू वचन बोलना, यात्रा, झूठ बोलना, अनर्गल बातें, मनोरंजन के कार्य न करें। त्याज्य पदार्थ : तेल, दूध, शकर, दही, तेल, बैंगन, पत्तेदार सब्जियां, नमकीन या मसालेदार भोजन, मिठाई, सुपारी, मांस और मदिरा का सेवन नहीं किया जाता। श्रावण में पत्तेदार सब्जियां यथा पालक, साग इत्यादि, भाद्रपद में दही, आश्विन में दूध, कार्तिक में प्याज, लहसुन और उड़द की दाल, आदि का त्याग कर दिया जाता है।
लगातार दूसरे Commonwealth मेडल की तलाश में श्रीशंकर पहुंचे ऊंची कूद के फाइनल में
नीरज चोपड़ा 31 जुलाई को राष्ट्रमंडल खेलों में शिरकत करेंगे लेकिन ऐसा भी हो सकता है कि ट्रैक एंड फील्ड यानि कि एथलेटिक्स में भारत को पहले ही अपना पहला पदक मिल जाए। ऊंची कूद में श्रीशंकर ने अपने पहले ही प्रयास में 8.01 मीटर का क्वालिफिकेशन मार्क को पार कर लिया है। इस स्पर्धा का फाइनल 29 जुलाई देर रात 11.54 बजे खेला जाएगा। गौरतलब है कि श्रीशंकर ही वह एथलीट है जिन्होंने पिछले संस्करण में 44 साल बाद इस स्पर्धा में भारत को मेडल दिलाया था। उनसे पहले 1978 में सुरेश बाबू ने कांस्य पदक जीता था।वह बाबू, अंजू बॉबी जॉर्ज (2002 में मैनचेस्टर खेलों में कांस्य), और एमए प्रजुषा (2010 में नयी दिल्ली खेलों में रजत) के बाद इन खेलों में लंबी कूद में पदक जीतने वाले चौथे भारतीय खिलाड़ी हैं। A strong start by Sreeshankar in Athletics at the Commonwealth Games 2026! TOPS Core Athlete Sreeshankar has qualified for the Men's Long Jump Final after clearing the qualification mark with a best jump of 8.01m in Qualification Round A. Congratulations, Sreeshankar!… pic.twitter.com/hX67MzvfBG — SAI Media (@Media_SAI) July 27, 2026 पिछली बार वह मामूली अंतर से गोल्ड मेडल चूक गए थे और उनको सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा था। लंबे कद के इस एथलीट के लिए पदक जीतना आसान नहीं रहा था क्योंकि तीसरे प्रयास में बाद 7.84 मीटर कूद लगाकर छठे स्थान पर खिसक गए थे। इसके बाद उन्होंने अच्छी वापसी की और चौथे प्रयास में 8.08 मीटर कूद लगाई जिससे वह ऐतिहासिक रजत पदक हासिल करने में सफल रहे थे। श्रीशंकर ने कहा, ‘‘हर एथलीट इस दौर से गुज़रा है। (वर्तमान ओलंपिक चैंपियन) मिल्टियाडिस टेंटोग्लू ने यूनान में मुझसे कहा कि वह भी कई बार छठे और सातवें स्थान पर आए हैं और फिर उन्होंने तोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता। यह कदम दर कदम आगे बढ़ने की प्रक्रिया है।’’
आमिर खान प्रोडक्शंस की फिल्म 'बंटवारा 1947' इस वक्त इंडियन सिनेमा की सबसे ज्यादा इंतजार की जा रही फिल्मों में से एक है। फिल्म के ऐलान के बाद से ही इसे लेकर जबरदस्त बज बना हुआ है। राजकुमार संतोषी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में सनी देओल लीड रोल में नजर आएंगे। फिल्म के दमदार पोस्टर्स और अब तक आए दो शानदार टीजर इसकी इमोशनल कहानी की झलक दिखा चुके हैं। भारत के बंटवारे जैसे दर्दनाक दौर पर बनी यह फिल्म प्यार, त्याग और हिम्मत की एक दिल छू लेने वाली कहानी लेकर आ रही है। ALSO READ: 'द ट्रेटर्स' सीजन 2 के साथ लौट रहे हैं करण जौहर, इस दिन प्राइम वीडियो पर देगा दस्तक ट्रेलर रिलीज होने से पहले सनी देओल ने सोशल मीडिया पर अपनी मां प्रकाश कौर के साथ एक प्यारी तस्वीर शेयर की। उन्होंने अपनी मां को अपनी सबसे बड़ी ताकत और सबसे बड़ा सहारा बताया। साथ ही बंटवारा 1947 को अपनी मां और दुनिया की हर मां को समर्पित करते हुए उनके बेपनाह प्यार, हिम्मत और अनगिनत त्याग को सलाम किया। A post shared by Sunny Deol (@iamsunnydeol) पोस्ट शेयर करते हुए सनी देओल ने लिखा, मेरी मां ही मेरा रब हैं। मेरा प्यार, मेरा हौसला, मेरी ताकत। बंटवारा 1947 मैं अपनी मां और दुनिया की हर मां को समर्पित करता हूं। ट्रेलर कल रिलीज होगा! इसके अलावा सनी देओल ने फिल्म को मिले A सर्टिफिकेट पर खुशी जाहिर करते हुए पोस्ट शेयर कर लिखा है, हमें बेहद खुशी है कि CBFC (सेंसर बोर्ड) ने बंटवारा 1947 को बिना एक भी कट लगाए 'A' सर्टिफिकेट दिया है। इंसानियत और प्यार की कहानी कहने वाली इस फिल्म को इस पार्टिशन डे, यानी 14 अगस्त से सिनेमाघरों में जरूर देखें। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें बंटवारा 1947 एक ऐसी इमोशनल कहानी लेकर आ रही है, जो भारत के बंटवारे के दर्द और उससे जुड़े इंसानी जज्बातों को करीब से दिखाएगी। फिल्म मुश्किल हालात में भी प्यार, हिम्मत, त्याग और कभी हार न मानने वाले जज्बे की कहानी कहेगी। फिल्म में शबाना आज़मी, सनी देओल, प्रीति जी जिंटा, करण देओल, अली फज़ल और अभिमन्यु सिंह जैसे दमदार कलाकार नजर आएंगे। खास बात यह है कि करीब 30 साल बाद राजकुमार संतोषी और सनी देओल की सुपरहिट जोड़ी फिर से साथ आ रही है। आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी बंटवारा 1947 का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है। फिल्म का संगीत ए. आर. रहमान ने दिया है, जबकि इसके गाने जावेद अख्तर ने लिखे हैं। फिल्म को आमिर खान और अपरणा पुरोहित ने प्रोड्यूस किया है। बंटवारा 1947 दुनियाभर के सिनेमाघरों में 14 अगस्त 2026 को रिलीज होगी।
ISSF World Cup में मनु भाकर से भी बेहतर निकली भारतीय निशानेबाज, जीता गोल्ड मेडल
ISSF World Cup (राइफल/पिस्तौल/शॉटगन) में महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल स्पर्धा में मनु भाकर स्वर्ण पदक जीतने से महरूम रह गई और उन्हें ओलंपिक की तरह ही कांस्य पदक से संतोष करना पड़ा। हालांकि भारत के लिए अच्छी बात यह रही कि इस ही प्रतियोगिता में भारतीय निशानेबाज ईशा सिंह ने स्वर्ण पदक जीता। 21 वर्षीय ईशा ने फाइनल में शानदार प्रदर्शन करते हुए 40 अंक बनाकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया, जबकि पेरिस 2024 ओलंपिक में दो कांस्य पदक जीतने वाली मनु ने शूट-ऑफ जीतकर कांस्य पदक हासिल किया। उन्होंने कुल 28 अंक बनाए। भारतीय खिलाड़ियों ने क्वालीफाइंग दौर से ही अच्छी शुरुआत की। मनु ने 586 अंक बनाकर क्वालीफाइंग में पहला स्थान हासिल किया जबकि ईशा 585 अंक लेकर दूसरे स्थान पर रही। इस तरह से इन दोनों ने आठ निशानेबाजों के फाइनल में आसानी से जगह बनाई। DOUBLE PODIUM FINISH FOR INDIA AT 25M PISTOL AT ISSF WORLD CUP! Esha Singh Yueyue Zhang Manu Bhaker WELL DONE GIRLS!!!! pic.twitter.com/3rRktTwRSk — The Khel India (@TheKhelIndia) July 27, 2026 एशियाई खेलों की पूर्व स्वर्ण पदक विजेता राही सरनोबत ने 582 का स्कोर बनाया, जबकि सिमरनप्रीत कौर बराड़ (576) और अभिदन्या अशोक पाटिल (573) ने केवल रैंकिंग अंकों के लिए (RPO) खेलते हुए अच्छा प्रदर्शन किया। ईशा ने इस सत्र के शुरू में म्यूनिख विश्व कप के फाइनल में 43 अंक बनाकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया था। इस तरह से उन्होंने अपनी निरंतरता बनाए रखी है जो आगामी प्रतियोगिताओं की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। जीत को बाद ईशा और मनु ने यह कहा इस सत्र के शुरू में म्यूनिख विश्व कप में स्वर्ण पदक जीतने वाली ईशा ने कहा, ‘‘पिछली जीत के कारण मुझ पर काफी दबाव था। जब आप अपनी स्पर्धा में अच्छा प्रदर्शन करते हैं तो आपसे काफी उम्मीद की जाती है। मुझे खुशी है कि आज मैं इस दबाव को झेलने में सफल रही।’’ दूसरी तरफ मनु ने कहा कि इस पदक से उनका आत्मविश्वास बढ़ेगा।उन्होंने कहा, ‘‘मेरे लिए यह पदक बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि इस तरह की सफलता सीढ़ी का काम करती है। इससे मुझे यह पता चलता है कि मैं किस दिशा में आगे बढ़ रही हूं। इस पदक से निश्चित रूप से मेरा आत्मविश्वास बढ़ा है और इसका मुझे विश्व चैंपियनशिप और एशियाई खेलों में फायदा मिलेगा।’’
'सैक्रेड गेम्स' की कुकू से 'संकल्प' की डीसीपी तक, कुब्रा सैत के यादगार किरदार
ओटीटी की दमदार कलाकार कुब्रा सैत ने हमेशा ऐसे किरदार चुने हैं जो गहराई, प्रभाव और यादगार अभिनय की मिसाल बन गए। 'सैक्रेड गेम्स' की कुकू से लेकर 'संकल्प' की डीसीपी परवीन शेख तक, कुब्रा ने हर भूमिका में अपनी अलग पहचान बनाई है। चाहे संवेदनशील किरदार हो, एक आत्मविश्वासी प्रोफेशनल या फिर निडर पुलिस अधिकारी, कुब्रा सैत ने हर भूमिका को अपने शानदार अभिनय से जीवंत किया है। फिलहाल आइए जानते हैं उनके ऐसे पांच किरदार, जिन्होंने दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई। कुकू – सैक्रेड गेम्स कुब्रा सैत के करियर की बात हो और 'सैक्रेड गेम्स' की कुकू का ज़िक्र न हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। कुब्रा सैत द्वारा निभाए गए इस रहस्यमयी और भावनात्मक रूप से जटिल किरदार ने भारतीय ओटीटी इतिहास में अपनी अलग पहचान बनाई। सीमित स्क्रीन टाइम के बावजूद कुकू सीरीज़ के सबसे यादगार किरदारों में शामिल रही और इसी भूमिका ने कुब्रा को एक प्रतिभाशाली अभिनेत्री के रूप में नई पहचान दिलाई। ALSO READ: बर्थडे स्पेशल: डिंपी से एली तक, कृति सेनन ने हर किरदार को बनाया करियर का यादगार पड़ाव सायरा – फ़र्ज़ी राज एंड डीके की क्राइम थ्रिलर 'फ़र्ज़ी' में कुब्रा ने सायरा का किरदार निभाया, जो अपराध सरगना मंसूर दलाल (के. के. मेनन) की भरोसेमंद सहयोगी और हैंडलर है। दमदार कलाकारों से सजी इस सीरीज़ में कुब्रा ने अपने आत्मविश्वास और प्रभावशाली अभिनय से किरदार को खास बना दिया। इस भूमिका ने एक बार फिर साबित किया कि वह हाई-इंटेंसिटी ड्रामा में भी अपनी अलग छाप छोड़ना जानती हैं। सना शेख – द ट्रायल 'द ट्रायल' में कुब्रा सैत ने सना शेख का किरदार निभाया, जो एक मजबूत, आत्मविश्वासी और वफादार लॉ फर्म कंसल्टेंट है। वह नयोनिका सेनगुप्ता (काजोल) की सहकर्मी और भरोसेमंद साथी के रूप में नज़र आती हैं। कानूनी और निजी संघर्षों की पृष्ठभूमि पर आधारित इस सीरीज़ में कुब्रा का संतुलित और सहज अभिनय दर्शकों को खूब पसंद आया। डीसीपी परवीन शेख – संकल्प प्रकाश झा की सामाजिक-राजनीतिक ड्रामा सीरीज़ 'संकल्प' में कुब्रा ने डीसीपी परवीन शेख की भूमिका निभाई। एक निडर, ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अधिकारी के रूप में उन्होंने सत्ता, राजनीति और विश्वासघात के बीच अपने किरदार को कुब्रा ने जिस प्रभावशाली ढंग से निभाया, वो काबिले तारीफ़ है। दिलचस्प बात यह है कि मुख्य किरदार न होने के बावजूद परवीन शेख कहानी की सबसे असरदार भूमिकाओं में से एक बनकर उभरी और कुब्रा के संयमित लेकिन दमदार अभिनय की खूब सराहना हुई। मेहर सलाम – इलीगल: जस्टिस आउट ऑफ़ ऑर्डर लीगल ड्रामा 'इलीगल: जस्टिस आउट ऑफ़ ऑर्डर' में कुब्रा सैत ने मेहर सलाम का किरदार निभाया था, जो अपने ही परिवार की हत्या के आरोप में मौत की सज़ा का सामना कर रही कैदी रहती है। कोर्टरूम ड्रामा, नैतिक दुविधाओं और जटिल मानवीय रिश्तों के बीच उनका किरदार कहानी में गंभीरता और भावनात्मक गहराई जोड़ता है। इस भूमिका ने एक बार फिर उनकी अभिनय क्षमता और बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाया था। हालांकि कुब्रा सैत ने अपने हर किरदार के साथ यह साबित किया है कि प्रभाव छोड़ने के लिए लंबे स्क्रीन टाइम की नहीं, बल्कि सशक्त अभिनय की जरूरत होती है। यही वजह है कि उनके निभाए गए किरदार आज भी दर्शकों के दिलो-दिमाग में ताज़ा हैं।
झुकती है दुनिया... पर काटजू का जवाब | क्या CJP आंदोलन सचमुच जीत गया?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े के बाद CJP नेता अभिजीत दिपके का बयान— झुकती है दुनिया, झुकने वाला चाहिए— व्यापक चर्चा का विषय बना
'द ट्रेटर्स' सीजन 2 के साथ लौट रहे हैं करण जौहर, इस दिन प्राइम वीडियो पर देगा दस्तक
पहले सीजन की शानदार सफलता और दर्शकों के भारी उत्साह के बाद, प्राइम वीडियो इंडिया ने अपने बहुचर्चित ओरिजिनल रियलिटी शो 'द ट्रेटर्स सीजन 2' की आधिकारिक रिलीज डेट घोषित कर दी है। इस बार भी इस शो को करण जौहर ही होस्ट करने वाले हैं। यह इंटरनेशनल अवॉर्ड विनिंग रियलिटी फॉर्मेट एक बार फिर भारतीय ओटीटी प्लेटफॉर्म पर तहलका मचाने के लिए पूरी तरह तैयार है। 'द ट्रेटर्स' का नया सीजन 13 अगस्त से विशेष रूप से प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम किया जाएगा, जिसके नए एपिसोड्स हर गुरुवार को दर्शकों के सामने पेश किए जाएंगे। ALSO READ: 'द पैराडाइज' का गाना 'आया शेर' बना ग्लोबल सेंसेशन, 20 करोड़ व्यूज का आंकड़ा किया पार फिर से मास्टरमाइंड की भूमिका में नजर आएंगे करण जौहर शो की सबसे बड़ी खासियत इसके होस्ट और बॉलीवुड के जाने-माने फिल्ममेकर करण जौहर हैं। पहले सीजन में अपने अनोखे अंदाज से दर्शकों का दिल जीतने के बाद, करण जौहर एक बार फिर विश्वास, रणनीति और धोखे के इस खतरनाक खेल को नियंत्रित करते दिखेंगे। इस बार खेल में 21 मशहूर सेलिब्रिटी कंटेस्टेंट्स हिस्सा ले रहे हैं। ये सभी खिलाड़ी ग्रैंड प्राइज मनी, ट्रॉफी और विजेता के खिताब के लिए एक-दूसरे के मनोवैज्ञानिक दिमाग, रणनीति और चालों का सामना करेंगे। A post shared by prime video IN (@primevideoin) 'द ट्रेटर्स' मूल रूप से IDTV का BAFTA और एमी अवॉर्ड विजेता ग्लोबल फॉर्मेट है, जिसे भारत में ऑल3मीडिया इंटरनेशनल के सहयोग से लाया गया है। दूसरे सीजन का निर्माण धर्माटिक एंटरटेनमेंट द्वारा किया गया है।दुनियाभर में 40 से अधिक देशों में एडॉप्ट किया जा चुका यह शो आज ग्लोबल पॉप-कल्चर का बड़ा हिस्सा बन चुका है। शो की घोषणा करते हुए प्राइम वीडियो इंडिया के हेड ऑफ ओरिजिनल्स, निखिल मधोक ने कहा, पहला सीजन सिर्फ एक शो नहीं, बल्कि एक कल्चरल मोमेंट बन गया था। इसने भारत में रियलिटी कंटेंट की परिभाषा बदल दी। सीजन 2 में दांव और ऊंचे हैं, गेमप्ले और तीखा है और ड्रामा पहले से कहीं ज्यादा गहरा है। करण जौहर के साथ इस शो को दोबारा लाना हमारे लिए बेहद रोमांचक है। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें वहीं, ऑल3मीडिया इंटरनेशनल की ईवीपी सबरीना डुगुएट ने कहा कि भारतीय दर्शकों ने शो के फॉर्मेट को जिस तरह अपनाया है, वह अद्भुत है। धर्माटिक एंटरटेनमेंट की टीम ने भी भरोसा जताया कि यह सीजन भारतीय रियलिटी शो के मानकों को एक नए स्तर पर ले जाएगा। क्यों खास है 'द ट्रेटर्स'? सामान्य रियलिटी शोज़ के विपरीत, 'द ट्रेटर्स' पूरी तरह से साइकोलॉजिकल स्ट्रेटजी और ह्यूमन बिहेवियर पर आधारित है। शो में कुछ खिलाड़ियों को गुप्त रूप से 'ट्रेटर' चुना जाता है, जबकि बाकी 'फेथफुल' होते हैं। फेथफुल्स का मकसद ट्रेटर्स को ढूंढकर बाहर निकालना होता है, जबकि ट्रेटर्स को अपनी पहचान छिपाकर दूसरों को एलिमिनेट करना होता है। यही चूहे-बिल्ली का खेल इसे सबसे अनोखा और रोमांचक बनाता है।
विश्व स्क्वैश जूनियर चैंपियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय बनी अनहत सिंह
भारत की अनाहत सिंह वर्ल्ड स्क्वैश जूनियर चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचने वाली 21 साल में पहली भारतीय खिलाड़ी बनने के बाद अब इसे जीते वाली भी पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। विश्व में 20वीं रैंकिंग की खिलाड़ी अनाहत ने ओंटारियो में खेली गई विश्व जूनियर स्क्वाश चैंपियनशिप के महिला एकल के फाइनल में शनिवार को मिस्र की रुकय्या सलेम को 11-3, 11-7, 11-9 से हराया। इससे पहले अपना पहला विश्व जूनियर खिताब जीतने की कोशिश कर रहीं अनाहत, 2005 में जोशना चिनप्पा के बाद फाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनीं थी। उन्होंने 3/4 सीड खिलाड़ी को 11-3, 8-11, 11-4, 11-6 से हराकर चैंपियनशिप मैच में अपनी जगह पक्की की थी। What a moment! India’s National Anthem is played as Anahat Singh wins World Junior Squash Championship! pic.twitter.com/eyROi3DiEz — Keh Ke Peheno (@coolfunnytshirt) July 26, 2026 अनाहत ने खिताब जीतने के बाद कहा, ‘‘यह मेरे लिए बहुत मायने रखता है। मुझे अब भी ऐसा लग रहा है जैसे मैं सपना देख रही हूं।’’दिल्ली की इस 18 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा, ‘‘पिछले चार वर्षों से मैं सेमीफाइनल और क्वार्टर फाइनल में हार रही थी। अगर कोई मुझसे पूछे तो मैं हमेशा यही कहती हूं, ‘यह टूर्नामेंट मेरे लिए अभिशाप है’ और मैं इस प्रतियोगिता में कभी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई हूं।’’ अनाहत की यह जीत और भी खास है क्योंकि जूनियर सर्किट में यह उनका आखिरी साल था।उन्होंने कहा, ‘‘जूनियर स्तर पर यह मेरा आखिरी साल है और इसे जीतने का यह मेरे पास आखिरी मौका था। इसलिए यह मेरे लिए बहुत मायने रखता है।’’ अनाहत ने कहा कि वह टूर्नामेंट के फाइनल में खेलने के अनुभव का आनंद लेना चाहती थीं।उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पता था कि अगर मैं तनाव में होती हूं तो अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाती हूं, इसलिए मैं कोर्ट पर उतरी और अच्छी तरह से शॉट लगाए। मैं विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में खेलने के हर पल का आनंद लेना चाहती थी।’’ Anahat Singh, the Ist Indian to win the World Junior Squash Individual Championships, said it was her final attempt at the junior level. She gave her 100 percent & won the title. Video credit: @WorldSquash #IndianSquash @Media_SAI @indiasquash @Anahat_Singh13 @IndiaSports pic.twitter.com/ln0qASYl1V — Doordarshan Sports (@ddsportschannel) July 26, 2026 सिंह ने कहा, “मैंने कुछ महीने पहले ब्रिटिश जूनियर ओपन में (सेमीफाइनल प्रतिद्वंदी) बारब के खिलाफ खेला था और वह भी ऐसा ही कड़ा मुकाबला था, इसलिए मुझे पता था कि सेमीफाइनल में भी मुझे बहुत अच्छा खेलना होगा। मैंने चार वर्ल्ड जूनियर टूर्नामेंट खेले हैं और क्वार्टर-फाइनल और सेमीफाइनल में हार गई थी, इसलिए फाइनल में पहुंचने से मेरे माता-पिता और कोच बहुत खुश थे।”
'द पैराडाइज' का गाना 'आया शेर' बना ग्लोबल सेंसेशन, 20 करोड़ व्यूज का आंकड़ा किया पार
'द पैराडाइज' इस साल की सबसे ज्यादा चर्चित फिल्मों में से एक बन गई है। फिल्म के ऐलान के बाद से ही इसे लेकर जबरदस्त बज बना हुआ है। नेचुरल स्टार नानी लीड रोल में नजर आएंगे और फिल्म के दमदार फर्स्ट लुक पोस्टर्स, शानदार प्रमोशनल मटेरियल और पावरफुल म्यूजिक ने लगातार लोगों का ध्यान खींचा है। वहीं, दसरा की ब्लॉकबस्टर सफलता के बाद नानी और डायरेक्टर श्रीकांत ओडेला की जोड़ी एक बार फिर साथ आ रही है, जिससे द पैराडाइज 2026 की सबसे बहुप्रतीक्षित फिल्मों में शामिल हो गई है। फिल्म को लेकर बढ़ते क्रेज के बीच इसका चार्टबस्टर गाना 'आया शेर' इंटरनेट पर छा गया है और अब यह एक कल्चरल फिनॉमेनन बन चुका है। इस हाई-एनर्जी एंथम ने हर प्लेटफॉर्म पर धूम मचा दी है। फैंस इसके दमदार बीट्स पर झूम रहे हैं और सोशल मीडिया पर नानी के सिग्नेचर मूव्स को रीक्रिएट करते हुए हजारों रील्स और वीडियो बना रहे हैं। अब मेकर्स ने एक और बड़ी उपलब्धि का ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि आया शेर ने यूट्यूब पर 20 करोड़ (200 मिलियन) व्यूज का शानदार आंकड़ा पार कर लिया है और इसका यह शेर वाला अंदाज हर दिन पहले से ज्यादा गूंज रहा है। Thank you for 200M+ for #AayaSher #TheParadiseTeaser Soon #TheParadise pic.twitter.com/Y5zIsamTD8 — Srikanth Odela (@odela_srikanth) July 26, 2026 मेकर्स ने यह खुशखबरी शेयर करते हुए लिखा, हर गुजरते दिन के साथ इसकी दहाड़ और भी बुलंद होती जा रही है। #AayaSher ने 20 करोड़ (200 मिलियन) व्यूज का आंकड़ा पार कर लिया है। नेचुरल स्टार नानी एक बार फिर श्रीकांत ओडेला की फिल्म में नजर आएंगे। फिल्म का संगीत अनिरुद्ध रविचंदर ने दिया है। इस बड़ी उपलब्धि के साथ आया शेर को यूट्यूब पर 18 लाख (1.8 मिलियन) लाइक्स भी मिल चुके हैं, जो दर्शकों के बीच इसकी जबरदस्त लोकप्रियता दिखाते हैं। स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स पर छाने से लेकर सोशल मीडिया पर लोगों का पसंदीदा बनने तक, आया शेर ने द पैराडाइज को लेकर लोगों का उत्साह और भी बढ़ा दिया है। यह साफ है कि रिलीज से पहले ही फिल्म का क्रेज लगातार बढ़ता जा रहा है। एसएलवी सिनेमाज के बैनर तले बनी द पैराडाइज 21 अगस्त 2026 को हिंदी, तेलुगु, तमिल, अंग्रेजी, स्पेनिश, बंगाली, कन्नड़ और मलयालम समेत कुल आठ भाषाओं में बड़े स्तर पर सिनेमाघरों में रिलीज होगी। फिल्म को दुनियाभर के दर्शकों तक पहुंचाने के लिए मेकर्स ने हॉलीवुड स्टार रायन रेनॉल्ड्स से इंटरनेशनल मार्केट में द पैराडाइज को प्रेजेंट करने के लिए भी संपर्क किया है।
15 दिन के अंदर भारत ने वापस पा ली T-20I अंतरराष्ट्रीय की पहली रैंक
भारत ने जिम्बाब्वे को लगातार 3 मैच हराकर ना केवल सीरीज जीत ली बल्कि इस महीने के शुरुआत में भारत को अपदस्थ कर पहली रैंक पाने वाली इंग्लैंड को फिर दूसरे रैंक पर भेज दिया। भारत ने ज़िम्बाब्वे के खिलाफ़ शुरुआती 3 टी 20 मैच जीतकर टी 20 रैंकिंग में नंबर 1 की जगह फिर से हासिल कर ली है। भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ पिछली सीरीज में 0-4 की हार के साथ टी 20 में अपनी नंबर वन रैंकिंग गंवा दी थी, लेकिन ज़िम्बाब्वे के खिलाफ़ शुरुआती 3 मैचों में शानदार जीत ने उन्हें शीर्ष स्थान फिर से हासिल करने में मदद की है।इंग्लैंड के खिलाफ सीरीज का पांचवा मैच भारत ने 11 जुलाई को खेला था और 26 जुलाई को अपनी पहली टी-20 रैंक वापस पा ली। हालांकि भारत को यह रैंक बरकरार रखने के लिए लय बरकरार रखनी पड़ेगी क्योंकि भारत को अब न्यूजीलैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज खेलनी है और पिछले 10 टी-20 मैचों में वह सिर्फ 3 ही जीती है।साथ ही इंग्लैंड और भारत के बराबर अंक 268 हैं। ऐसे में कुछ हार और कुछ जीत एक बार फिर टी-20 अंकतालिका में हेर फेर ला सकती है। Team India are back at the summit! The Men in Blue have reclaimed the No. 1 spot in the ICC Men's T20I Team Rankings after a dominant run against Zimbabwe. #TeamIndia #T20IRankings #Sportskeeda pic.twitter.com/i7bdVZceDb — Sportskeeda (@Sportskeeda) July 25, 2026 भारत ने इस सीरीज़ में अब तक दोनों मैच आसानी से जीते हैं। पहले टी20 मैच में, वैभव सूर्यवंशी ने 18 गेंदों में अर्धशतक जड़कर भारत को सात विकेट से जीत दिलाई। दूसरे मैच में, ईशान किशन ने 44 गेंदों में 81 रन बनाए और तिलक वर्मा ने 29 गेंदों में नाबाद 60 रन बनाए, जिससे भारत ने 90 रनों से जीत हासिल कर 2-0 की अजेय बढ़त बना ली। इसके अलावा अंतिम मैच भी भारत ने लगभग एकतरफा अंदाज में 35 रनों से जीत लिया। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने 5 विकेट खोकर 192 रन बनाए। इस स्कोर को 200 के करीब पहुंचाने का काम वैभव सूर्यवंशी ने किया जिन्होंने 48 गेंदो में 81 रनों की पारी खेली। हालांकि वह शतक चूक गए जवाब में जिम्बाब्वे की टीम निर्धारित 20 ओवरों में 7 विकेट के नुकसान पर 157 रन ही बना सकी।
KGMU की डॉक्टर ने क्यों छोड़ी 1.25 लाख की सैलरी? 45 दिन में 2 लाख कमाकर ऐसे रचा इतिहास
अक्सर कहा जाता है कि डॉक्टरी का पेशा सबसे सुरक्षित और सम्मानित होता है। लेकिन क्या कोई अपनी 1.25 लाख रुपये महीने की शानदार मेडिकल जॉब छोड़कर एक बिल्कुल अनजान रास्ते पर चलने की हिम्मत कर सकता है? आज हम आपको एक ऐसी ही निडर और जुनूनी महिला, डॉ. चारुल सिंह की कहानी बताने जा रहे हैं। उनका यह सफर सिर्फ एक करियर बदलने की कहानी नहीं है, बल्कि एक आर्मी वाइफ, एक माँ और चुनौतियों से लड़कर अपनी राह खुद बनाने वाली एक फाइटर की प्रेरणादायक दास्तान है।BDS के बाद उम्मीदें और असलियत का सामनाचारुल की शुरुआत भी एक आम मेडिकल छात्र की तरह ही हुई थी। एक प्राइवेट कॉलेज से बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (BDS) की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें लगा था कि अब जीवन में आर्थिक स्थिरता आ जाएगी। लेकिन करियर के शुरुआती दिनों में जब उन्हें सालों की कड़ी मेहनत और परिवार के खर्च के मुकाबले बहुत कम सैलरी मिली, तो उन्हें जमीनी हकीकत का अंदाजा हुआ। यही वह समय था जब उन्होंने अपने भविष्य और करियर के बारे में नए सिरे से सोचना शुरू किया।दिल्ली के बड़े अस्पतालों से KGMU लखनऊ तक का सफरसमाज और एक पारंपरिक परिवार की बड़ी बेटी होने के नाते उन पर जल्द शादी करने का भारी दबाव था। उम्र के साथ परिवार वाले करियर से ज्यादा शादी पर जोर देने लगे थे। लेकिन चारुल ने अपने सपनों से समझौता नहीं किया। उन्होंने दिल्ली के सफदरजंग, वर्धमान महावीर मेडिकल कॉलेज (VMMC) और डॉ. राम मनोहर लोहिया जैसे प्रतिष्ठित अस्पतालों में नॉन-पीजी जूनियर रेजिडेंट के रूप में अपनी सेवाएं दीं। अपनी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी जारी रखी, जिसका नतीजा यह रहा कि उन्होंने NEET-PG पास कर लिया और लखनऊ के प्रतिष्ठित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) से पीडियाट्रिक डेंटिस्ट्री में अपनी मास्टर्स की डिग्री हासिल की।मेहनत रंग लाई, सैलरी पहुंची लाखों मेंमेडिकल के क्षेत्र में चारुल ने एक लंबा और शानदार सफर तय किया। एक जूनियर रेजिडेंट के तौर पर करीब 92 हजार रुपये प्रति माह से शुरू हुआ उनका यह सफर मास्टर्स के दौरान 1 लाख और फिर सीनियर रेजिडेंट बनने तक 1.25 लाख रुपये प्रति माह तक पहुंच गया। उनका करियर तेजी से आगे बढ़ रहा था, लेकिन इसी बीच उनकी जिंदगी में नई जिम्मेदारियों ने दस्तक दी और उनकी शादी एक भारतीय सेना के अधिकारी से हो गई।मातृत्व, तबादले और हाई कोर्ट की कानूनी लड़ाईआर्मी की नौकरी के चलते पति की अलग-अलग जगहों पर पोस्टिंग होती थी, जिसकी वजह से उन्हें कई शहर बदलने पड़े। इसी दौरान वे माँ भी बनीं। प्रेगनेंसी और नवजात बच्चे की देखभाल के बीच भी उन्होंने अस्पताल की लंबी शिफ्ट पूरी कीं। लेकिन उनके जीवन में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब सीनियर रेजिडेंसी के दौरान उन्हें बॉन्डेड डॉक्टरों की मैटरनिटी लीव को लेकर भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। डॉ. चारुल हार मानने वालों में से नहीं थीं। अपने अधिकारों के लिए उन्होंने इलाहाबाद हाई कोर्ट का रुख किया, एक लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी और अंततः जीत हासिल की। इस अनुभव ने उनकी पूरी सोच बदल कर रख दी और उन्हें एहसास दिलाया कि खुद की एक स्वतंत्र पहचान बनाना कितना जरूरी है।डिजिटल दुनिया में रखा कदम और 45 दिन में कमाए 2 लाखपति की दूर-दराज इलाकों में पोस्टिंग के कारण नियमित क्लिनिकल प्रैक्टिस को जारी रखना लगभग नामुमकिन हो गया था। ऐसे में उन्होंने परिस्थितियों से हारने के बजाय एक नया रास्ता चुना। करीब छह महीने तक उन्होंने डिजिटल मार्केटिंग और ऑनलाइन बिजनेस की बारीकियों को गहराई से समझा। इसके बाद जून 2025 में उन्होंने अपना खुद का डिजिटल वेंचर शुरू किया, जिसकी नींव पर्सनल ब्रांडिंग और स्टोरीटेलिंग पर रखी गई थी। उनकी यह शुरुआत इतनी शानदार थी कि महज 45 दिनों के भीतर ही उन्होंने 2 लाख रुपये की कमाई कर ली।अब 'डिजिटल मेंटर' बनकर बदल रही हैं महिलाओं की जिंदगीडिजिटल दुनिया में उनकी मेहनत तेजी से रंग लाई। धीरे-धीरे उनके क्लाइंट्स बढ़ते गए और आज डिजिटल बिजनेस से होने वाली उनकी कमाई, उनकी पुरानी डॉक्टर वाली शानदार सैलरी को भी काफी पीछे छोड़ चुकी है। वर्तमान में डॉ. चारुल 'Charul’s Inner Circle' के माध्यम से महिलाओं और करियर शुरू करने वाले युवाओं को डिजिटल स्किल्स और पर्सनल ब्रांडिंग की ट्रेनिंग दे रही हैं।महिलाओं के लिए खास संदेशडॉ. चारुल का मानना है कि माँ बनने के बाद किसी भी महिला के सपने खत्म नहीं होते, बल्कि उन्हें हासिल करने के तरीके बदल जाते हैं। अवसरों का हाथ पर हाथ धरे इंतजार करने के बजाय हमें खुद अपने लिए नए रास्ते तलाशने चाहिए। उनकी कहानी इस बात का जीता-जागता सबूत है कि सही समय पर लिया गया एक साहसिक फैसला आपकी जिंदगी की एक बेहद खूबसूरत नई शुरुआत बन सकता है।
शिक्षामंत्री का इस्तीफा: किसी की जीत नहीं, सिर्फ राष्ट्रहित है
पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का अपने पद से इस्तीफा देना यह स्पष्ट करता है कि उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा या कुर्सी से कहीं ऊपर देश और युवाओं का भविष्य है, जैसा कि उन्होंने प्रधानमंत्री को स्वयं लिखे पत्र में भी उल्लेख किया है। जब ...
वर्तमान समय में संपूर्ण विश्व एक अत्यंत संवेदनशील और उथल-पुथल भरे दौर से गुजर रहा है। एक तरफ जहां विभिन्न देशों के बीच युद्ध और सैन्य तनाव चरम पर हैं, वहीं दूसरी तरफ कई राष्ट्रों में जनता का आक्रोश, जनविद्रोह और राजनीतिक अस्थिरता देखने को मिल रही है। वैदिक ज्योतिष (Vedic Astrology) की विशेष शाखा, जिसे मेदिनी ज्योतिष (Mundane Astrology) कहा जाता है, के अनुसार वैश्विक घटनाओं का सीधा संबंध ब्रह्मांड में घूम रहे ग्रहों की चाल से होता है। मेदिनी ज्योतिष यह स्पष्ट करता है कि जब भी आकाश मंडल में क्रूर और उग्र ग्रहों का योग बनता है, तब-तब पृथ्वी पर बड़े सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक बदलाव आते हैं। मेदिनी ज्योतिष और वैश्विक उथल-पुथल का ज्योतिषीय आधार वैश्विक स्तर पर जनविद्रोह, युद्ध, सत्ता परिवर्तन और आर्थिक मंदी जैसी परिस्थितियां तब निर्मित होती हैं जब मुख्य ग्रहों का गोचर प्रतिकूल दिशा में होता है: मंगल (Mars): मंगल को ग्रहों का सेनापति माना गया है। यह उग्रता, हिंसा, सैन्य बल, अग्नि और युद्ध का कारक है। जब भी मंगल किसी क्रूर ग्रह के साथ युति बनाता है या वक्री होता है, तो वैश्विक सीमाओं पर तनाव और युद्ध के बादल गहराने लगते हैं। शनि (Saturn): शनि न्याय, संघर्ष, आम जनता और श्रमिकों का प्रतिनिधित्व करता है। जब शनि पीड़ित या कड़े नक्षत्रों में गोचर करता है, तो जनता में असंतोष बढ़ता है, जिससे हड़ताल, प्रदर्शन और जनविद्रोह का जन्म होता है। राहु और केतु (Shadow Planets): राहु भ्रम, कूटनीति, अचानक होने वाले विद्रोह और राजनीतिक षड्यंत्रों का कारक है। केतु अलगाव और अनिश्चितता लाता है। इनकी उपस्थिति अंतरराष्ट्रीय संबंधों में दरार डालती है। गुरु (Jupiter): गुरु ज्ञान, अर्थव्यवस्था, कानून और संतुलन का कारक ग्रह है। गुरु का शुभ गोचर दुनिया को गंभीर संकटों से उबारने और शांति स्थापित करने में ढाल की तरह काम करता है। इन ग्रहों की सामूहिक उथल-पुथल का प्रभाव हर व्यक्ति की राशि पर अलग-अलग रूप में देखने को मिलता है। आइए विस्तार से जानते हैं कि इस दौर में कौन सी राशियां लाभ में रहेंगी और किन्हें सतर्क रहने की आवश्यकता है। अनुकूल व शुभ प्रभाव वाली राशियां वैश्विक स्तर पर बनी इस अशांति और तनाव के बावजूद, कुछ राशियों के लिए ग्रहों का गोचर अत्यंत अनुकूल बना हुआ है। ये राशियां संकट के इस समय में भी प्रगति और लाभ अर्जित करेंगी: 1. मेष राशि (Aries) मेष राशि का स्वामी स्वयं मंगल है। यद्यपि आसपास का माहौल उग्र और चुनौतीपूर्ण रहेगा, लेकिन मेष राशि के जातकों में इस दौरान गजब का उत्साह और ऊर्जा देखने को मिलेगी। यदि आप करियर में बड़े बदलाव, पदोन्नति या किसी नए प्रोजेक्ट की शुरुआत करना चाहते हैं, तो यह समय आपको अपनी नेतृत्व क्षमता (Leadership Skills) दिखाने का भरपूर अवसर देगा। विपत्तियों का सामना कर आप अपने मार्ग में विजय प्राप्त करेंगे। 2. कर्क राशि (Cancer) कर्क राशि के जातकों के लिए गुरु ग्रह की कृपा एक मूक सुरक्षा कवच (Protective Shield) की तरह काम करेगी। वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ाव का प्रभाव आपके व्यक्तिगत जीवन पर नगण्य रहेगा। इस दौरान आपको पारिवारिक जीवन में सुख-शांति मिलेगी, अचल संपत्ति या भूमि-भवन के क्रय-विक्रय से लाभ होगा और समाज में आपका मान-सम्मान व प्रतिष्ठा बढ़ेगी। 3. वृश्चिक राशि (Scorpio) वृश्चिक भी मंगल के स्वामित्व वाली राशि है। जब-जब दुनिया में बड़े परिवर्तन या संकट आते हैं, वृश्चिक राशि वालों की रणनीतिक सोच और अंतर्ज्ञान (Intuition) अत्यंत तीव्र हो जाते हैं। संकट प्रबंधन (Crisis Management) में आपका कोई मुकाबला नहीं होगा। करियर में अचानक से पदोन्नति, गुप्त स्रोतों से धन लाभ और पुरानी समस्याओं से मुक्ति मिलने के प्रबल योग बन रहे हैं। 4. धनु राशि (Sagittarius) धनु राशि के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। गुरु के सकारात्मक गोचर के प्रभाव से बाहरी उथल-पुथल के बीच भी आपका ध्यान अपने मूल लक्ष्यों, ज्ञान-अर्जन और व्यावसायिक विस्तार पर केंद्रित रहेगा। इस दौरान आपका सामाजिक दायरा बढ़ेगा, नए प्रभावशाली लोगों से संपर्क स्थापित होंगे और आपकी आर्थिक स्थिति पहले से अधिक मजबूत होगी। प्रतिकूल व सतर्क रहने वाली राशियां ग्रहों का कड़ा और उग्र प्रभाव (जैसे शनि का मीन राशि में गोचर तथा राहु-केतु और मंगल का प्रभाव) कुछ राशियों के लिए मानसिक दबाव, आर्थिक जोखिम और व्यावहारिक चुनौतियां लेकर आ सकता है: 1. वृषभ राशि (Taurus) वृषभ राशि वालों को इस दौरान अपनी वाणी और वित्तीय लेन-देन में अत्यधिक सावधानी बरतनी होगी। उग्र ग्रहों के प्रभाव के कारण कार्यस्थल या व्यापार में अचानक तनाव उत्पन्न हो सकता है। अंतरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय स्तर पर हो रही घटनाओं से आपकी मानसिक शांति प्रभावित हो सकती है। किसी भी दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने या बड़ा निवेश करने से पहले सोच-विचार अवश्य करें; जल्दबाज़ी में लिया गया फैसला नुकसानदायक हो सकता है। 2. मिथुन राशि (Gemini) मिथुन राशि का स्वामी बुध है और जब मंगल-बुध की स्थिति बिगड़ती है, तो संचार, शेयर बाज़ार और आर्थिक मोर्चे पर अस्थिरता आती है। इस समय मिथुन राशि के जातकों को शेयर मार्केट, सट्टेबाज़ी या किसी भी प्रकार के जोखिम भरे निवेश से पूरी तरह बचना चाहिए। गलतफहमियों के कारण व्यापारिक साझेदारियों में खटास आ सकती है, इसलिए बातचीत में स्पष्टता बनाए रखें। 3. सिंह राशि (Leo) सिंह राशि या उसके केंद्र भावों में केतु का प्रभाव आपके आत्मविश्वास को डगमगा सकता है। आपको ऐसा महसूस हो सकता है कि आपकी मेहनत का पूरा फल नहीं मिल रहा है। नौकरीपेशा लोगों को ऑफिस की राजनीति (Office Politics) से दूर रहने की सख्त सलाह दी जाती है। किसी के उकसावे में आकर कोई कड़ा फैसला न लें और शांत मन से काम करें। 4. मीन राशि (Pisces) मीन राशि में शनि का गोचर होने के कारण इस राशि के जातकों पर मानसिक दबाव और जिम्मेदारियों का बोझ अधिक रहेगा। काम में अकारण देरी, मानसिक भ्रम या किसी अज्ञात भय की स्थिति बन सकती है। स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही भारी पड़ सकती है। इस समय आपको धैर्य बनाए रखना होगा और किसी भी प्रकार के नकारात्मक विचारों से खुद को बचाकर रखना होगा। मध्यम प्रभाव वाली राशियां तुला, कन्या, मकर और कुंभ राशि के जातकों के लिए वैश्विक परिस्थितियों का प्रभाव मिला-जुला (मिश्रित) रहेगा। तुला व कन्या राशि: इन्हें अपने स्वास्थ्य और बजट का संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है। मकर व कुंभ राशि: चूंकि शनि इनकी अपनी राशि का स्वामी है, इसलिए मेहनत अधिक करनी पड़ेगी, लेकिन धैर्य, दूरदर्शिता और सोच-समझकर किए गए निवेश से ये नकारात्मक प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित कर सकेंगे। संकट काल में शांति और सुरक्षा हेतु ज्योतिषीय उपाय वैश्विक अशांति और उथल-पुथल के इस दौर में ग्रहों के नकारात्मक प्रभावों को शांत करने और अपने जीवन में सकारात्मकता लाने के लिए निम्नलिखित उपाय अत्यंत कारगर सिद्ध होते हैं: हनुमान चालीसा का नित्य पाठ: मंगल ग्रह की उग्रता, युद्ध भय और मानसिक अशांति से मुक्ति पाने के लिए प्रतिदिन हनुमान चालीसा या बजरंग बाण का पाठ करें। शनिवार को दान कार्य: जन-असंतोष, राहु और शनि के दुष्प्रभावों से बचने के लिए शनिवार के दिन जरूरतमंदों व श्रमिकों को भोजन कराएं या काले तिल, तेल व वस्त्रों का दान करें। गायत्री मंत्र व ध्यान: मानसिक भ्रम और तनाव से बचने के लिए रोज़ सुबह गायत्री मंत्र का जाप करें, जिससे निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है। डिस्क्लेमर: यद्यपि यह विश्लेषण मेदिनी गोचर पर आधारित है, परंतु किसी भी व्यक्ति के जीवन पर अंतिम और सटीक प्रभाव उसकी व्यक्तिगत जन्मकुंडली में चल रही महादशा और अंतर्दशा पर ही निर्भर करता है।
अनुष्का शर्मा और विराट कोहली ने मुंबई में खरीदा नया 'आशियाना', कीमत जान उड़ जाएंगे होश!
बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा और भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली एक बार फिर अपने रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट को लेकर सुर्खियों में हैं। पावर कपल ने मुंबई के सबसे पॉश इलाकों में शुमार वर्सोवा में एक बेहद शानदार लग्जरी अपार्टमेंट खरीदा है। प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन प्लेटफॉर्म Zapkey.com द्वारा सामने आए दस्तावेजों के अनुसार, इस नए अपार्टमेंट की कुल कीमत 18.29 करोड़ रुपए है। विराट और अनुष्का का यह नया ठिकाना वर्सोवा स्थित 'गोदरेज स्काईशोर' इमारत की ऊपरी मंजिल पर स्थित है। ALSO READ: गब्बर से अमर हुए अमजद खान, जानिए बॉलीवुड के सबसे खतरनाक विलेन की अनसुनी कहानी खबरों के अनुसार इस अपार्टमेंट के साथ कपल को 316 वर्ग फुट का एक्सक्लूसिव एरिया और तीन कार पार्किंग स्पेस मिले हैं। इस प्रॉपर्टी का आधिकारिक रजिस्ट्रेशन 21 जुलाई 2026 को पूरा हुआ। इसके लिए कपल ने 1.09 करोड़ रुपए की स्टाम्प ड्यूटी और 30,000 रुपए की रजिस्ट्रेशन फीस चुकाई है। लगभग 70,000 रुपये प्रति वर्ग फुट की यह डील मुंबई के पश्चिमी उपनगरों में प्रीमियम हाउसिंग की बढ़ती मांग को साफ दर्शाती है। अलीबाग के बाद मुंबई में एक और बड़ा निवेश यह पहला मौका नहीं है जब विराट और अनुष्का ने रियल एस्टेट में इतना बड़ा निवेश किया हो। इससे पहले, दंपति ने महाराष्ट्र के प्रसिद्ध सेकंड-होम डेस्टिनेशन अलीबाग के जीराद गांव में 37.86 करोड़ रुपए में 5 एकड़ से अधिक जमीन खरीदी थी। 13 जनवरी 2026 को पंजीकृत हुई इस अलीबाग डील के तहत दो प्लॉट खरीदे गए थे, जिसके लिए उन्होंने 2.27 करोड़ की भारी-भरकम स्टाम्प ड्यूटी दी थी। साल 2022 में भी इस कपल ने अलीबाग में एक शानदार फार्महाउस बनाने के लिए लगभग 8 एकड़ जमीन खरीदी थी।
गब्बर से अमर हुए अमजद खान, जानिए बॉलीवुड के सबसे खतरनाक विलेन की अनसुनी कहानी
बॉलीवुड में अमजद खान का नाम ऐसे अभिनेता के तौर पर याद किया जाता है, जिन्होंने खलनायकी के क्षेत्र में अपने अभिनय का लोहा मनवाया। 12 नवंबर 1940 को जन्में अमजद खान को अभिनय की कला विरासत में मिली। उनके पिता जयंत फिल्म इंडस्ट्री में खलनायक की भूमिका निभा चुके थे। अमजद खान ने बतौर कलाकार अपने अभिनय जीवन की शुरुआत वर्ष 1957 में प्रदर्शित फिल्म 'अब दिल्ली दूर नही' से की। इस फिल्म में अमजद खान ने बाल कलाकार की भूमिका निभाई। वर्ष 1965 में अपनी होम प्रोडक्शन मे बनने वाली फिल्म 'पत्थर के सनम' के जरिए अमजद खान बतौर अभिनेता अपने करियर की शुरुआत करने वाले थे लेकिन किसी कारण से फिल्म का निर्माण नही हो सका। ALSO READ: Lock Upp 2: पामेला सेरेना ने खोला मैच फिक्सिंग का राज, स्टूडेंट लाइफ में क्रिकेट बेटिंग से कमाए थे पैसे सत्तर के दशक में अमजद खान ने मुंबई से अपनी कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद बतौर अभिनेता काम करने के लिए फिल्म इंडस्ट्री का रूख किया। वर्ष 1973 में बतौर अभिनेता उन्होंने फिल्म 'हिंदुस्तान की कसम' से अपने करियर की शुरुआत की लेकिन इस फिल्म से दर्शको के बीच वह अपनी पहचान नहीं बना सके। इसी दौरान अमजद खान को थिएटर में अभिनय करते देखकर पटकथा लेखक सलीम खान ने अमजद खान से शोले में गब्बर सिंह के किरदार को निभाने की पेशकश की जिसे अमजद खान ने स्वीकार कर लिया। बॉलीवुड की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'शोले' के किरदार गब्बर सिंह ने अमजद खान को फिल्म इंडस्ट्री में सशक्त पहचान दिलाई लेकिन फिल्म के निर्माण के समय गब्बर सिंह की भूमिका के लिए पहले डैनी का नाम प्रस्तावित था। फिल्म 'शोले' के निर्माण के समय गब्बर सिंह वाली भूमिका डैनी को दी गई थी लेकिन उन्होंने उस समय धर्मात्मा में काम करने की वजह से उन्होंने शोले में काम करने के लिए इंकार कर दिया। शोले के कहानीकार सलीम खान की सिफारिश पर रमेश सिप्पी ने अमजद खान को गब्बर सिंह का किरदार निभाने का अवसर दिया। जब सलीम खान ने अमजद खान से फिल्म शोले में गब्बर सिंह का किरदार निभाने को कहा तो पहले तो अमजद खान घबरा से गए लेकिन बाद में उन्होंने इसे एक चैलेंज के रूप में लिया और चंबल के डाकुओं पर बनी किताब 'अभिशप्त चंबल' का बारीकी से अध्यन करना शुरू किया। बाद में जब फिल्म शोले प्रदर्शित हुई तो अमजद खान का निभाया किरदार 'गब्बर सिंह' दर्शको में इस कदर लोकप्रिय हुआ कि लोग गाहे बगाहे उनकी आवाज और चाल ढ़ाल की नकल करने लगे। फिल्म शोले की सफलता से अमजद खान के सिने करियर में जबरदस्त बदलाव हुआ और वह खलनायकी की दुनिया के बेताज बादशाह बन गए। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नही देखा और अपने दमदार अभिनय से दर्शको की वाहवाही लूटने लगे। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें वर्ष 1977 मे प्रदर्शित फिल्म 'शतरंज के खिलाडी' मे उन्हें महान निर्देशक सत्यजीत रे के साथ काम करने का मौका मिला। इस फिल्म के जरिए भी उन्होंने दर्शको का मन मोहे रखा। अपने अभिनय मे आई एकरूपता को बदलने और स्वंय को चरित्र अभिनेता के रूप मे भी स्थापित करने के लिए अमजद खान ने अपनी भूमिकाओं में परिवर्तन भी किया। इसी क्रम में वर्ष 1980 मे प्रदर्शित फिरोज खान की सुपरहिट फिल्म कुर्बानी में अमजद खान ने हास्य अभिनय कर दर्शको का भरपूर मनोरंजन किया। वर्ष 1981 मे अमजद खान के अभिनय का नया रूप दर्शको के सामने आया। प्रकाश मेहरा की सुपरहिट फिल्म लावारिस में वह अमिताभ बच्चन के पिता की भूमिका निभाने से भी नही हिचके। वर्ष 1981 में प्रदर्शित फिल्म 'याराना' में उन्होंने सुपरस्टार अमिताभ बच्चन के दोस्त की भूमिका निभाई। इस फिल्म में उन पर फिल्माया यह गाना बिशन चाचा कुछ गाओ बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ। इसी फिल्म मे अपने दमदार अभिनय के लिए अमजद खान अपने सिने करियर में दूसरी बार सर्वश्रेष्ठ सह कलाकार के फिल्म पेयर पुरस्कार से भी सम्मानित किए गए। इसके पहले भी वर्ष 1979 में भी उन्हें फिल्म दादा के लिए सर्वश्रेष्ठ सह कलाकार के फिल्म फेयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वर्ष 1983 में अमजद खान ने फिल्म 'चोर पुलिस' के जरिए निर्देशन के क्षेत्र में भी कदम रखा लेकिन यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह से नकार दी गई। इसके बाद वर्ष 1985 में भी अमजद खान ने फिल्म 'अमीर आदमी गरीब आदमी' का निर्देशन किया लेकिन यहां पर भी उन्हें शिकस्त का सामना करना पड़ा। वर्ष 1986 में एक दुर्घटना के दौरान अमजद खान लगभग मौत के मुंह से बाहर निकले थे और इलाज के दौरान दवाइयों के लगातार सेवन करने से उनके स्वास्थ में लगातार गिरावट आती रही। उनका शरीर लगातार भारी होता गया। नब्बे के दशक में स्वास्थ्य खराब रहने के कारण अमजद खान ने फिल्मों मे काम करना कुछ कम कर दिया। अपनी अदाकारी से लगभग तीन दशक से दर्शको का भरपूर मनोरंजन करने वाले अजीम अभिनेता अमजद खान 27 जुलाई 1992 को इस दुनिया से रूखसत हो गए।
Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (27 जुलाई, 2026)
मेष (Aries) Today Horoscope Rashifal 27 July 2026 : करियर: कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा, नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। लव: जीवनसाथी के साथ संबंध मधुर रहेंगे। प्रेम संबंधों में विश्वास बढ़ेगा। धन: आय में वृद्धि के योग हैं, लेकिन अनावश्यक खर्च से बचें। रुके हुए कार्य पूरे होंगे। स्वास्थ्य: थकान और तनाव महसूस हो सकता है, पर्याप्त आराम करें। उपाय: भगवान गणेश को दूर्वा और मोदक अर्पित करें। ALSO READ: Rationalism: सत्य की वैज्ञानिक खोज: देकार्त का बुद्धिवाद और आधुनिक दर्शन का जन्म वृषभ (Taurus) करियर: नौकरी में नई योजनाएं सफल हो सकती हैं। व्यापार में सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। लव: साथी के साथ अच्छा समय बिताने का अवसर मिलेगा। धन: रुका हुआ धन प्राप्त हो सकता है। निवेश लाभदायक रहेगा। स्वास्थ्य: खान-पान संतुलित रखें और पर्याप्त पानी पिएं। उपाय: भगवान शिव का जलाभिषेक करें। मिथुन (Gemini) करियर: नई जिम्मेदारियां मिलने से आत्मविश्वास बढ़ेगा। नौकरीपेशा के लिए दिन शुभ है। लव: प्रेम रिश्तों में मधुरता बनी रहेगी। अविवाहित लोगों को शुभ समाचार मिल सकता है। धन: कारोबार की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। स्वास्थ्य: मौसम के बदलाव से सावधान रहें। उपाय: हनुमान मंदिर में सिंदूर अर्पित करें। कर्क (Cancer) करियर: धैर्य और समझदारी से लिए गए निर्णय लाभ देंगे। लव: जीवनसाथी का सहयोग मिलेगा। परिवार में खुशहाली रहेगी। धन: अचानक बढ़ते खर्चों पर नियंत्रण रखें। स्वास्थ्य: पेट संबंधी समस्या से बचने के लिए बाहर का भोजन कम करें। उपाय: चंद्रदेव को दूध मिश्रित जल अर्पित करें। सिंह (Leo) करियर: कार्यक्षेत्र में पदोन्नति या नई उपलब्धि मिलने के योग हैं। नेतृत्व क्षमता की सराहना होगी। लव: प्रेम जीवन में सकारात्मक बदलाव आएंगे। धन: धन लाभ के अच्छे अवसर मिल सकते हैं। स्वास्थ्य: शारीरिक ऊर्जा और उत्साह बना रहेगा। उपाय: सूर्यदेव को काली तिलयुक्त जल अर्पित करें। कन्या (Virgo) करियर: नई नौकरी के अवसर मिल सकते हैं। छात्रों की मेहनत रंग लाएगी। लव: प्रेमीसंग रिश्तों में पारदर्शिता बनाए रखें। धन: आय बढ़ेगी, लेकिन बजट का ध्यान रखें। स्वास्थ्य: पर्याप्त नींद लें और तनाव से बचें। उपाय: भगवान विष्णु को पीले पुष्प अर्पित करें। तुला (Libra) करियर: छात्रों को भाग्य का साथ मिलेगा। नए कार्यों में सफलता मिलने के योग हैं। लव: वैवाहिक जीवन सुखद रहेगा। प्रेम संबंध मजबूत होंगे। धन: धन निवेश से लाभ मिलने की संभावना है। स्वास्थ्य: मानसिक शांति बनाए रखने के लिए ध्यान करें। उपाय: मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाएं। ALSO READ: क्यों 4 महीने की योगनिद्रा में जाते हैं भगवान विष्णु? देवशयनी एकादशी पर जानें योगनिद्रा का रहस्य और विधि वृश्चिक (Scorpio) करियर: नौकरी में आत्मविश्वास से कार्य करें। पैतृक बिजनेस में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। लव: जीवनसाथी के साथ संबंध मजबूत होंगे। धन: आपकी पहले से आर्थिक स्थिति बेहतर होगी। स्वास्थ्य: नियमित व्यायाम लाभदायक रहेगा। उपाय: भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करें। धनु (Sagittarius) करियर: करियर में उन्नति के नए अवसर मिलेंगे। व्यापार में लाभ होगा। लव: प्रेम संबंधों में पारदर्शिता बनाए रखें। धन: आय के नए स्रोत बन सकते हैं। स्वास्थ्य: यात्रा के दौरान सावधानी बरतें। उपाय: केले के वृक्ष पर जल चढ़ाकर घी का दीपक जलाएं। मकर (Capricorn) करियर: कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत की सराहना होगी। लव: परिवार के साथ समय बिताने से रिश्ते मजबूत होंगे। धन: कारोबार से धन बचत करने के लिए अच्छा समय है। स्वास्थ्य: हड्डियों और जोड़ों का ध्यान रखें। उपाय: शनि देव को सरसों का तेल अर्पित करें। कुंभ (Aquarius) करियर: नई योजनाएं लाभ देंगी। व्यापार में विस्तार की संभावना है। लव: प्रेम संबंधों में मधुरता बनी रहेगी। धन: आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। स्वास्थ्य: पर्याप्त पानी पिएं और नियमित दिनचर्या अपनाएं। उपाय: जरूरतमंद को नीले वस्त्र या उड़द की दाल दान करें। मीन (Pisces) करियर: नई योजनाओं में सफलता मिलेगी। वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग प्राप्त होगा। लव: जीवनसाथी के साथ संबंध और बेहतर होंगे। धन: धन लाभ के योग बन रहे हैं। स्वास्थ्य: योग और ध्यान मानसिक शांति प्रदान करेंगे। उपाय: भगवान विष्णु को पीले फल और तुलसी दल अर्पित करें। ALSO READ: Weekly Numerology Horoscope: साप्ताहिक अंक भविष्यफल (27 जुलाई से 2 अगस्त 2026): जानें आपके मूलांक का सटीक राशिफल
दिल्ली का जंतर-मंतर। सुरक्षाकर्मियों से एक लड़की कहती है- पुलिस अंकल, पुलिस अंकल वास्तेगुना हुइंया! इसके बाद वहां मौजूद पूरा ग्रुप जोर-जोर से हंसने लगता है। पुलिस भी ठिठक जाती है कि ये कोई गाली थी या देशविरोधी नारा? आखिर इस पर एक्शन क्या ले? ये वायरल रील जंतर-मंतर समेत देशभर में फैले जेन-जी आंदोलन का लिटमस टेस्ट है। ‘वास्तेगुना हुइंया’ की तरह ये आंदोलन भी मोदी सरकार की समझ से परे था। न ‘हिंदू-मुस्लिम’ चला, न एंटी-नेशनल एंगल। न विदेशी फंडिंग के आरोप कारगर हुए, न ही कोई ऐसा चेहरा, जिसे दबाने से आंदोलन खत्म हो जाए। आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना ही पड़ा। अनोखा क्यों था ये जेन-जी आंदोलन और इन पर क्यों नहीं चला कोई तिकड़म; मंडे मेगा स्टोरी में पूरी कहानी… आखिर जेन-जी आंदोलन के सामने सरकार को क्यों झुकना पड़ा… **** ग्राफिक्स: द्रगचंद्र भुर्जी ---------------------------- ये खबर भी पढ़िए… बिना संबंध बनाए भी बच्चे पैदा कर लेती है कॉकरोच:सिर कटने पर भी कैसे जिंदा रहते हैं, डायनासोर से भी सीनियर; कॉकरोच के किस्से कॉकरोच जनता पार्टी की वेबसाइट, X अकाउंट और इंस्टाग्राम अकाउंट सभी हैक और डाउन हो गए, तो फाउंडर अभिजीत दीपके ने लिखा- ‘कॉकरोच कभी मरते नहीं।’बात सच भी है। कॉकरोच इस दुनिया में डायनासोर से भी पहले आए। सिर कट जाए, हफ्तों खाना न मिले फिर भी जिंदा रहते हैं। बिना नर के भी बच्चा पैदा कर सकते हैं। पूरी खबर पढ़िए…
रामजन्मभूमि पर नवंबर 2019 में आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से दो रास्ते निकले थे। विवादित 2.77 एकड़ जमीन रामलला को मिली और बाबरी की जगह नई मस्जिद के लिए अयोध्या से 25 किलोमीटर दूर धन्नीपुर में 5 एकड़ जमीन दी गई। राम मंदिर का निर्माण लगभग पूरा हो गया है। धन्नीपुर में मस्जिद की ईंट तक नहीं रखी गई। मस्जिद के लिए मिली जमीन पर घास उग आई है, चारों ओर तारबंदी है और बच्चे क्रिकेट खेल रहे हैं। यहां मस्जिद के साथ अस्पताल और म्यूजियम बनना था। 300 करोड़ रुपए की जरूरत थी, लेकिन सिर्फ डेढ़ करोड़ रुपए चंदा मिल पाया। जरूरी सरकारी मंजूरियां न मिलने से काम शुरू ही नहीं हो पाया। अब ट्रस्ट छोटी मस्जिद बनाने की तैयारी में है। धन्नीपुर के लोग मस्जिद बनने की उम्मीद छोड़ चुके हैं। वे कहते हैं- अल्लाह की मर्जी होगी, तो बन जाएगी। जमीन पर सिर्फ बोर्ड, कब्जा न हो जाए इसलिए तारबंदी अयोध्या-लखनऊ हाईवे छोड़ते ही धन्नीपुर गांव की सड़क शुरू होती है। कुछ मिनट बाद बाईं तरफ लोहे की फेंसिंग से घिरी मस्जिद की जमीन दिखती है। अंदर कोई मशीन नहीं, कोई मजदूर नहीं। सिर्फ खाली मैदान। करीब तीन हजार की आबादी वाले धन्नीपुर में 60% मुस्लिम आबादी है। ज्यादातर लोग मस्जिद पर बात करने से बचते हैं। महिलाएं तो बिल्कुल नहीं बोलतीं। मस्जिद की जमीन से सटी चाय की दुकान पर कुछ लोग अखबार पढ़ रहे थे। मस्जिद के बारे में पूछने पर एक-दूसरे को देखने लगे। एक बुजुर्ग मुस्कुराते हुए बोले, ‘हम खेती-किसानी वाले लोग हैं। यहां जानवर चराने आते हैं। मस्जिद कब बनेगी, कौन बनाएगा, ये तो लखनऊ और दिल्ली वाले जानें।’ नाम पूछने पर बुजुर्ग ने जवाब दिया- रहने दीजिए, हम इस मसले से दूर ही रहना चाहते हैं। खाली पड़ी जमीन के ठीक सामने माजिद खान का घर है। वे बात करने के लिए तैयार हो गए। बोले, ‘सुप्रीम कोर्ट के फैसले से धन्नीपुर के लोग खुश थे। न्यूज से पता चला कि मस्जिद के साथ मेडिकल कॉलेज और अस्पताल भी बनेगा।' 'गांव के आसपास 30 किमी तक अच्छा अस्पताल नहीं है। सीरियस केस में इलाज के लिए 150 किमी दूर लखनऊ जाना पड़ता है। मस्जिद बन जाती तो गांव में इलाज मिलता। बच्चे पढ़ पाते और काम मिलता, लेकिन कुछ नहीं हुआ।’ आखिर सात साल में मस्जिद क्यों नहीं बन पाई पहली वजह: फंड नहीं है नवंबर 2019 में सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर फैसला सुनाते हुए सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को अयोध्या में नई मस्जिद बनाने का आदेश दिया था। अयोध्या की विवादित 2.77 एकड़ जमीन हिंदू पक्ष को मिली। मस्जिद बनाने के लिए अयोध्या से 25 किमी दूर जमीन धन्नीपुर गांव में दी गई। 3 अगस्त, 2020 को फैजाबाद DM अनुज कुमार झा ने जमीन वक्फ बोर्ड को सौंप दी। मस्जिद बनाने के लिए इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन बनाया गया। अगस्त 2021 में फाउंडेशन ने लोगों से मदद की अपील की। बैंक अकाउंट की डिटेल पब्लिक की। नवंबर, 2022 तक ट्रस्ट को देशभर से करीब 40 लाख रुपए डोनेशन मिला। इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन के चेयरमैन जुफर अहमद फारूकी कहते हैं, ‘5 साल में हम बमुश्किल 1.5 करोड़ रुपए ही जुटा पाए हैं। इतने में बड़ी मस्जिद बना पाना मुमकिन नहीं है। हमने सोचा है कि पब्लिक के पास न जाकर अपने लोगों से 5 करोड़ रुपए जुटाएं और कम से कम छोटी मस्जिद का काम शुरू कर दें।’ पेशे से जर्नलिस्ट अरशद खान मस्जिद के काम से शुरुआत से जुड़े हैं। वे कहते हैं, ‘पहले लोगों में मस्जिद को लेकर जोश था। 21 हजार रुपए का पहला चंदा लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रोहित श्रीवास्तव ने दिया। फैजाबाद के DM रहे अनुज कुमार झा ने जमीन दिलवाने में मदद की। इसके बाद जैसे-जैसे वक्त बीता, काम रुक गया।’ हमने पहला दान देने वाले लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रोहित श्रीवास्तव से बात की। वे मस्जिद न बनने से नाराज हैं। कहते हैं, ‘अफसोस होता है कि मैंने जिस चीज के लिए चंदा दिया, उस पर आज तक काम शुरू नहीं हो पाया। मैं अयोध्या में राम मंदिर के दर्शन के लिए जाता हूं, तो धन्नीपुर गांव जरूर जाता हूं। हर बार मुझे वहां खाली जमीन ही नजर आती है।’ दूसरी वजह: लोगों का जुड़ाव नहींधन्नीपुर की शाहगदा शाह मजार पर 'मोहम्मद-बिन-अब्दुल्लाह' मस्जिद की फोटो वाले पोस्टर चिपकाए गए थे। इनमें अंग्रेजी में लिखा गया- A MASTERPIECE IN MAKING यानी एक नायाब मस्जिद तैयार हो रही है। धन्नीपुर के लोग खुश थे कि गांव में देश की सबसे चर्चित मस्जिद बनेगी। धीरे-धीरे वक्त बीतता गया, लेकिन काम शुरू नहीं हो पाया। मजार पर चिपके पोस्टर हटा दिए गए। इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन के चेयरमैन जुफर अहमद फारूकी कहते हैं, 'अफसोस है कि अयोध्या में बनने वाली मस्जिद अब वैसी नहीं बन पाएगी, जैसा हमने सोचा था। फैजाबाद और अयोध्या के लोगों, खासकर मुस्लिम समुदाय ने भी इसमें इंट्रेस्ट नहीं दिखाया।’ जर्नलिस्ट अरशद खान बताते हैं, ‘नई इबादतगाह अयोध्या से दूर है। इसलिए मुसलमान खुद को इससे कनेक्ट नहीं कर पाए। अगर इसके लिए अयोध्या में जमीन मिलती तो सूरत कुछ और होती।' 'सुप्रीम कोर्ट के फैसले में भी साफ कहा गया था कि मस्जिद की जमीन अयोध्या के मुख्य स्थान पर होगी। (MOSQUE WILL BE CONSTRUCTED AT PROMINENT PLACE OF AYODHYA) हमें शहर से 25 किलोमीटर दूर जमीन मिली। वहां जाने का रास्ता बहुत संकरा है। इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं है। लोग इतनी दूर क्यों नमाज पढ़ने जाएंगे।’ तीसरी वजह: अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी की मंजूरी नहींअरशद खान आगे कहते हैं, ‘ट्रस्ट बना, तब टीम अच्छी थी। अतहर हुसैन सेक्रेटरी थे। लखनऊ के सीनियर एडवोकेट इमरान अहमद शिबली मेंबर थे। मैं था, राशिद मोहम्मद साहब थे। हम लोगों ने मस्जिद बनवाने के लिए बहुत मेहनत की। नया नक्शा बनाया। उस वक्त अयोध्या जिला प्रशासन ने काफी सपोर्ट किया। हमें मस्जिद के लिए जरूरी NOC नहीं मिली।’ ‘ट्रस्ट के चेयरमैन जुफर अहमद फारुकी ने बताया था कि मुंबई के बड़े बिजनेसमैन हाजी अराफात शेख धन्नीपुर आएंगे और मस्जिद-अस्पताल का काम शुरू होगा। हाजी साहब ने बताया कि मस्जिद बनने से पहले मक्का-मदीना से ईंटें आएंगी, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं हुआ। हमने चेयरमैन से भी कॉन्टैक्ट किया, लेकिन उनका फोन नहीं उठता। वे कई साल से आउट ऑफ कॉन्टैक्ट हैं। हमने अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी में नक्शा जमा किया था, वो भी निरस्त हो गया।’ नक्शा क्यों रिजेक्ट हो गया, इस पर हमने ट्रस्ट और अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी में बात की। पता चला कि इसके पीछे सियासी रुकावट नहीं, बल्कि कागजी पेचीदगियां हैं। कोई संस्था नॉर्मल बिल्डिंग के बजाय बड़ा पब्लिक कॉम्प्लेक्स बनाती है, तो इसके लिए नियम बहुत सख्त हो जाते हैं। इसकी प्रोसेस को तीन पॉइंट्स में समझिए… 1. लैंड यूज के कागजों में बार-बार बदलाव किसी भी बड़े निर्माण के लिए लोकल डेवलपमेंट अथॉरिटी (इस मामले में ADA) से ऑनलाइन और ऑफलाइन मंजूरी लेनी होती है। सबसे पहले जमीन का लैंड यूज देखा जाता है। इससे पता चलता है कि जमीन किस काम के लिए है। खेती की जमीन पर कॉमर्शियल या संस्थागत निर्माण नहीं हो सकता। सरकार ने कृषि भूमि दी, तो पहले उसका लैंड यूज बदलकर उसे संस्थागत करना पड़ा। इससे प्रोजेक्ट बनने में देरी हुई। 2. अथॉरिटी की तरफ से NOC न मिलना नक्शा पास होने से पहले PWD, प्रदूषण नियंत्रण विभाग, अग्निशमन विभाग, सिंचाई, नगर निगम जैसे विभागों से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना होता है। अब तक मस्जिद कमेटी को इन विभागों से NOC नहीं मिली है। अयोध्या डेवलपमेंट अथॉरिटी के सेक्रेटरी आरके मिश्रा बताते हैं कि किसी भी बड़े निर्माण से पहले जमीन के मालिक को अलग-अलग विभाग की NOC लेनी पड़ती है। इसमें ये होता है कि बिल्डिंग कितनी ऊंची होगी। फायर सिस्टम कैसा होगा। इंफ्रास्ट्रक्टर कैसा है। ये सब मानक के हिसाब से होता है, तो अथॉरिटी NOC देती है। मस्जिद कमेटी ने NOC क्लीयर करने के लिए भी एप्लीकेशन नहीं दी है।' 3. ले-आउट और डेवलपमेंट चार्ज का पेमेंट न होना NOC मिलने के बाद अथॉरिटी के इंजीनियर नक्शे की जांच करते हैं कि सड़क कितनी चौड़ी है, भूकंप झेलने की क्षमता क्या है। इसके बाद डेवलपमेंट चार्ज जमा करना पड़ता है और नक्शा पास हो जाता है। ADA के मुताबिक, मस्जिद कमेटी को अभी 1.22 करोड़ रुपए डेवलपमेंट चार्ज जमा करना है। सभी जरूरी डॉक्यूमेंट पूरे होने पर ही कंस्ट्रक्शन शुरू हो सकेगा। 23 जून, 2021 को मस्जिद ट्रस्ट ने नक्शे की मंजूरी के लिए आवेदन किया था। बाद में नक्शा वापस ले लिया। 2023 में नक्शे में छोटी मस्जिद के साथ कुछ बदलाव कर फिर से अप्लाई किया। सितंबर 2025 तक ट्रस्ट ने NOC नहीं ली और जरूरी डॉक्यूमेंट पोर्टल पर अपलोड नहीं करवाए। इससे उनकी एप्लिकेशन रिजेक्ट हो गई है। हमने मस्जिद कमेटी के जनरल सेक्रेटरी अतहर हुसैन से पूछा कि 2024 के बाद नक्शे के लिए क्यों अप्लाई नहीं किया गया? उन्होंने जवाब दिया- प्रोजेक्ट के हिसाब से जितने फंड की उम्मीद की थी, उसे जुटा नहीं पाए। यही वजह है कि हम नए नक्शे पर आगे बढ़ने से पहले फंड इकट्ठा कर लेना चाहते हैं। छोटी मस्जिद बनाने लायक रकम जुट जाएगी तो हमारे चैयरमैन नक्शे के लिए एप्लीकेशन फाइल करेंगे। बाबरी केस के पक्षकार बोले- ट्रस्ट ही नहीं चाहता कि मस्जिद बने राम जन्मभूमि मंदिर के गेट नंबर 11 के सामने बाबरी मस्जिद का केस लड़ने वाले इकबाल अंसारी का घर है। मस्जिद का काम बार-बार अटकने पर इकबाल कहते हैं, ‘देखिए, मस्जिद की जमीन सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को मिली है। उसके चेयरमैन ने अपना प्राइवेट ट्रस्ट बनाया है।’ इकबाल अंसारी के अलावा जर्नलिस्ट अरशद खान ने भी ट्रस्ट पर सवाल उठाए थे। इसके जवाब में मस्जिद कमेटी के जनरल सेक्रेटरी अतहर हुसैन कहते हैं, ‘इकबाल अंसारी इस प्रोजेक्ट पर क्या सोचते हैं और क्या कह रहे हैं, इस पर कोई कमेंट नहीं करना है। अरशद खान हमारी टीम के सबसे पुराने सदस्यों में से एक रहे हैं। उन्होंने शुरुआती दौर में फंड कलेक्शन से लेकर मस्जिद में म्यूजियम बनाने का प्लान तैयार किया।’ ‘ये सच है कि वक्त बीतने के साथ हमारी टीम के सामने कई रुकावटें आईं, इससे सदस्यों के बीच बातचीत भी कम हो गई। मैं आपको यकीन दिलाता हूं कि हम जल्द ही नए प्लान के साथ जमीन पर उतरने वाले हैं।’ ……………. ये खबर भी पढ़ें… 10 मंदिर उड़ाने की धमकी, कौन है खालिस्तान नेशनल आर्मी ‘तुम्हारे हिंदू मंदिर निशाने पर हैं। दिल्ली और हरियाणा के लोगों, तुमने 6 जून, 1984 को भिंडरांवाले की मौत पर मिठाइयां बांटी थीं। अब हम इसका बदला तुम्हारे मंदिरों में ब्लास्ट करके लेंगे। इसलिए अपने बच्चों को बचाओ और 5-6 जून को कोई सफर न करो।’ 4 जून की सुबह 9:54 बजे पंचकूला के मेयर श्यामलाल बंसल को धमकी भरा ये ई-मेल मिला। इसमें दिल्ली-हरियाणा के 6 बड़े मंदिरों में ब्लास्ट करने की धमकी थी। पढ़िए पूरी खबर…
बाराबंकी में रेप पीड़िता 15 वर्षीय किशोरी ने बच्ची को दिया जन्म
बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में दुष्कर्म पीड़िता 15 वर्षीय किशोरी ने रविवार को सरकारी अस्पताल में एक बच्ची को जन्म दिया। मामले का आरोपी पहले से ही जेल में बंद है। किशोरी के साथ हुई घटना के बाद अब नवजात बच्ची के भविष्य को लेकर भी परिजनों के सामने संकट खड़ा हो गया है। […] The post बाराबंकी में रेप पीड़िता 15 वर्षीय किशोरी ने बच्ची को दिया जन्म appeared first on Sabguru News .
वैभव सूर्यवंशी का आतिशी अर्धशतक, भारत ने जिम्बाब्वे का सूपड़ा किया साफ
हरारे। वैभव सूर्यवंशी (81) की आतिशी अर्धशतकीय पारी के बाद गेंदबाजों के बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत भारत ने रविवार को तीसरे टी-20 मुकाबले में जिम्बाब्वे को 35 रनों से शिकस्त दी। इसी के साथ भारत ने तीन मैचों की सीरीज 3-0 से अपने नाम कर ली। 193 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी जिम्बाब्वे […] The post वैभव सूर्यवंशी का आतिशी अर्धशतक, भारत ने जिम्बाब्वे का सूपड़ा किया साफ appeared first on Sabguru News .
भीलवाड़ा में सात दिन से लापता साहूकार का शव कुएं से मिला
भीलवाड़ा। राजस्थान में भीलवाड़ा जिले के बागोर थाना क्षेत्र में सात दिन से लापता साहूकार शोभाराम जैन का हाथ-पैर बंधा शव मदनपुर गांव के पास सड़क किनारे स्थित एक कुएं से रविवार को बरामद किया गया। शव की हालत और परिस्थितियों को देखते हुए हत्या कर शव कुएं में फेंके जाने की आशंका जताई जा […] The post भीलवाड़ा में सात दिन से लापता साहूकार का शव कुएं से मिला appeared first on Sabguru News .
कोई गरीब पीछे नहीं रहेगा, कोई जरूरतमंद अवसर से वंचित नहीं रहेगा : नायब सिंह सैनी
चंडीगढ़। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि मुख्यमंत्री अंत्योदय परिवार उत्थान योजना के तहत आयोजित अंत्योदय मेले आशाओं, अवसरों और आत्मनिर्भरता के प्रतीक हैं। इन मेलों का उद्देश्य विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है, ताकि कोई भी गरीब या जरूरतमंद सरकारी योजनाओं से वंचित न रहे। मुख्यमंत्री ने […] The post कोई गरीब पीछे नहीं रहेगा, कोई जरूरतमंद अवसर से वंचित नहीं रहेगा : नायब सिंह सैनी appeared first on Sabguru News .
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में भारी बारिश से मची तबाही, 24 घंटे में 7 लोगों की मौत
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में पिछले 24 घंटों में बारिश से जुड़ी घटनाओं में दो बच्चों समेत सात लोगों की मौत हो गई और 20 अन्य घायल हो गए। भारी बारिश के कारण छत गिरने, डूबने और बिजली का करंट लगने जैसी घटनाएं हुईं। स्थानीय मीडिया ने रविवार को यह जानकारी दी। प्रांतीय आपदा […] The post पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में भारी बारिश से मची तबाही, 24 घंटे में 7 लोगों की मौत appeared first on Sabguru News .
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर में रोडवेज की 144 नई बसों को दिखाई हरी झंडी
जयपुर। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रविवार को जयपुर के अजमेर रोड स्थित हीरापुरा बस टर्मिनल से रोडवेज की 144 नई बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। शर्मा ने इस अवसर पर संवाददाताओं से कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार सभी संकल्पों एवं वादों को पूरा करते हुए […] The post मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जयपुर में रोडवेज की 144 नई बसों को दिखाई हरी झंडी appeared first on Sabguru News .
औरैया में जिसे मरा मानकर परिजनों ने कर दिया था अंतिम संस्कार, वह 3 दिन बाद घर लौटा
औरैया। उत्तर प्रदेश के औरैया जिले में डेढ़ वर्ष से लापता एक शख्स को मृत मानकर परिवार ने अंतिम संस्कार कर दिया। इस तीन दिन बाद वह जिंदा घर लौट आया। शख्स को सामने खड़ा देख परिजनों और ग्रामीण हैरान रह गये। अजीतमल कोतवाली क्षेत्र के सैदपुर गांव का यह मामला अब पूरे क्षेत्र में […] The post औरैया में जिसे मरा मानकर परिजनों ने कर दिया था अंतिम संस्कार, वह 3 दिन बाद घर लौटा appeared first on Sabguru News .
रेप आरोपी महाराष्ट्र निवासी युवक मोहम्मद सादिक यूपी के रायबरेली से अरेस्ट
रायबरेली। उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के गुरुबख्शगंज इलाके में पुलिस ने महिला से दुष्कर्म के मामले में वांछित महाराष्ट्र निवासी एक युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने साक्ष्यों के आधार पर मुकदमे में दुष्कर्म और आपराधिक धमकी की धाराएं भी बढ़ा दी हैं। पुलिस सूत्रों से रविवार को बताया कि गुरुबक्शगंज थाना क्षेत्र […] The post रेप आरोपी महाराष्ट्र निवासी युवक मोहम्मद सादिक यूपी के रायबरेली से अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
पीओके में भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच 27 जुलाई से शुरू होंगे चुनाव, पीटीआई का बहिष्कार
इस्लामाबाद। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में 27 जुलाई से तीन चरणों में होने वाले विधानसभा चुनावों के पहले चरण की तैयारियां जारी हैं। इस बीच राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनावी प्रक्रिया से महीनों से जारी अशांति के थमने या उन जन-समस्याओं के समाधान की उम्मीद बेहद कम है, जिनकी वजह […] The post पीओके में भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच 27 जुलाई से शुरू होंगे चुनाव, पीटीआई का बहिष्कार appeared first on Sabguru News .
6 जून 2026, अभिजीत दिपके पहली बार लंदन से पहली बार दिल्ली एयरपोर्ट उतरे और सीधे जंतर-मंतर प्रोटेस्ट साइट पहुंचे। 20 जून को दोबारा प्रोटेस्ट पर बैठे, तो 36 दिन प्रोटेस्ट के बाद 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर उठे। जंतर-मंतर से जाते-जाते कॉकरोच पार्टी ने प्रोटेस्टर्स से कहा- ‘जल्दी दोबारा मिलेंगे।’ सवाल है कि आखिर कॉकरोच जनता पार्टी आगे करने क्या वाली है, फ्यूचर के कौन से 3 सिनैरियो, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में... इसके संकेत क्या हैं कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत में फाउंडर अभिजीत दिपके ने कहा था कि उनका राजनीति में उतरने का कोई इरादा नहीं है। वे किसी राजनीतिक दल के साथ भी नहीं आएंगे। हालांकि जंतर-मंतर पर 36 दिनों के प्रोटेस्ट के बाद 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से कई संकेत मिले कि कॉकरोच पार्टी राजनीति में उतर सकती है… ताकत क्या है चैलेंज क्या है इसके संकेत क्या हैं आशुतोष रांका ने जंतर-मंतर पर कहा कि ये प्रोटेस्ट यहीं खत्म होता है, लेकिन उसके साथ एक और बात कही- ‘हम जल्दी मिलेंगे।’ CJP के फाउंडर अभिजीत दिपके ने भी कहा, 'हम ऐसे ही नहीं जाएंगे। कॉकरोच हैं, एक बार घुसते हैं, तो निकलते नहीं। लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। अगला फेज एजुकेशन रिफॉर्म्स को लेकर होगा।’ जब धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की घोषणा हुई, तो केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ मौजूद सौरव दास ने कहा था, ‘हमने सरकार को एजुकेशन रिफॉर्म का जो चार्टर दिया है, उस पर अगले 4 हफ्ते में चर्चा होगी।’ CJP का कहना है कि सरकार पर पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून, परीक्षाओं को लेकर पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने के लिए दबाव बनाए रखेंगे। अब हमारी जिम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि ये वादे पूरे हों। यानी फिलहाल CJP इन मुद्दों को लेकर आगे अपनी कोशिशें जारी रखेगी। कॉकरोच जनता पार्टी दिल्ली के बाद देश के दूसरे शहरों में लोकल मुद्दों को लेकर भी एक्टिव हो सकती है… ताकत क्या है चैलेंज क्या है इसके संकेत क्या हैं आशुतोष रांका ने संकेत दिया है कि एक प्रेशर ग्रुप की तरह काम करना भी एक विकल्प है। उन्होंने कहा, ‘ये जरूरी नहीं कि आप पॉलिटिकल पार्टी बनकर 5 साल में वोट मांगने जाओ। सिविल सोसाइटी, प्रेशर ग्रुप और मूवमेंट भी लोकतंत्र का हिस्सा हैं। हमारे लिए अभी मुद्दा जरूरी है और जवाबदेही तय करना लक्ष्य है। ये मुद्दा हमें जिस तरफ ले जाएगा, हम वहां जाएंगे।’ पूरे प्रोटेस्ट में मुख्य विपक्षी नेता राहुल गांधी ने छात्रों के मुद्दों पर सरकार को तो घेरा, लेकिन CJP से एक दूरी भी बनाए रखी, इससे भी कॉकरोच जनता पार्टी की भूमिका मजबूत हुई है… ताकत क्या है चैलेंज क्या है कांग्रेस कवर करने वाले आदेश रावल कहते हैं, एक प्रोटेस्ट से कॉकरोच जनता पार्टी विपक्ष की भूमिका में नहीं खड़ी हो सकती। सरकार पर प्रेशर तब बढ़ा, जब 20 जुलाई के ‘पुलिस एक्शन’ के बाद कांग्रेस इस पर तेजी से एक्टिव हुई। इसके बाद पीएम मोदी 5 बार झुके। पेपर लीक पर फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का फैसला, NTA के ऑफिसर्स को बर्खास्त करना हो, इंस्टाग्राम पर वीडियो डालना हो या आखिर में धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। ---------- ये खबर भी पढ़िए… इन 5 वजहों से घबराई सरकार, तब हुआ धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा; नहीं झुकते तो क्या हो जाता, आखिरकार आंदोलन खत्म शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार इस्तीफा दे ही दिया। जंतर-मंतर पर 35 दिन से कॉकरोच जनता पार्टी का अनशन, पीएम आवास के बाहर राहुल गांधी का धरना, संसद में रोज गूंजता हंगामा और देश-दुनिया के कई शहरों में हो रहे प्रदर्शन से सरकार दबाव में थी। पूरी खबर पढ़िए…
रियलिटी शो 'लॉक अप 2' का रोमांच अपने चरम पर है। शो में हर हफ्ते एलिमिनेशन से बचने के लिए कोई न कोई सेलिब्रिटी अपना पर्सनल सीक्रेट रिवील कर रहा है। हालिया एपिसोड में शो की सबसे बोल्ड कंटेस्टेंट्स में से एक पामेला सेरेना ने 'मैच फिक्सिंग' का कड़वा सच कबूल किया है। एलिमिनेशन से खुद को बचाने के लिए पामेला ने जैसे ही सीक्रेट बजर दबाया, स्क्रीन पर बड़े-बड़े अक्षरों में 'मैच फिक्सिंग' चमका। इसके बाद उन्होंने अपने स्टूडेंट लाइफ की एक ऐसी कहानी सुनाई, जिससे हर कोई सन्न रह गया। पामेला ने बताया कि जब वो स्टूडेंट थींतो क्रिकेट पर सट्टा लगाती थीं। ALSO READ: प्रभास की फिल्म 'स्पिरिट' से बड़े पर्दे पर वापसी पर रहीं कटरीना कैफ? सामने आई बड़ी सच्चाई पामेला ने अपने सीक्रेट का खुलासा करने से पहले ही यह साफ कर दिया कि वह अपने अतीत के इस कदम पर बिल्कुल भी गर्व महसूस नहीं करती हैं। उन्होंने कहा, यह मेरा एक ऐसा राज है जिस पर मुझे गर्व नहीं है। जब मैं एक स्टूडेंट थी, तब मैं क्रिकेट मैचों पर सट्टेबाजी करती थी। पामेला ने कहा, स्टूडेंट लाइफ में मेरा एक दोस्त था, जो कई बड़े क्रिकेटरों का बहुत करीबी था। उस दोस्त को सीधे टीमों के अंदर से टिप्स मिलती थीं—जैसे कौन-सी टीम जीतेगी, कौन सा खिलाड़ी कितना स्कोर बनाएगा। जानकारी बिल्कुल पक्की और फर्स्ट-हैंड होती थी। पामेला ने बताया कि उस समय वह यूके (लंदन) में पढ़ाई कर रही थीं, जहाँ सट्टेबाजी कानूनी रूप से मान्य है। अंदर की पक्की जानकारी होने के कारण उन्होंने इसे भुनाने का फैसला किया। उन्होंने स्वीकार किया, लंदन में बुकीज के जरिए सट्टा लगाना आसान था। मैंने अपने दोस्त की टिप्स पर सट्टा लगाना शुरू किया और बहुत पैसे कमाए। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें पामेला ने कहा, जब पहली बार ऐसा किया तो काफी फायदा हुआ, जिससे मेरा लालच बढ़ गया और मैं बार-बार टिप्स का इंतज़ार करने लगी। पामेला के मुताबिक, आसानी से मिलने वाले पैसे के रोमांच ने उन्हें इस दलदल में धकेला। हालांकि, यह सिलसिला कुछ ही महीनों तक चला और फिर यह पूरा नेटवर्क बंद हो गया या वे लोग पकड़े गए। पामेला को अब है पछतावा पामेला ने अपनी गलती मानते हुए स्वीकार किया कि भले ही उस समय यूके के कानून के हिसाब से उन्होंने कुछ गैर-कानूनी नहीं किया था, लेकिन नैतिकता के आधार पर वह गलत थीं। उन्होंने कहा कि स्टूडेंट उम्र में मिले उस आसान पैसे ने उन्हें भटका दिया था, लेकिन अब उन्हें एहसास है कि पैसे कमाने का वह जरिया पूरी तरह से गलत था। आखिर कौन हैं पामेला सेरेना? अगर आप पामेला सेरेना से वाकिफ नहीं हैं, तो बता दें कि वह एक ब्रिटिश-भारतीय एंटरप्रेन्योर, मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं। यूके में जन्मी पामेला साल 2012 में दुबई शिफ्ट हो गईं, जहां उन्होंने बिजनेस और रियल एस्टेट सेक्टर में अपनी खास पहचान बनाई। पामेला 'मिस यूनिवर्स दुबई 2021' और 'मिस यूएई वर्ल्ड 2022' का खिताब अपने नाम कर चुकी हैं। नेटफ्लिक्स के मशहूर रियलिटी शो 'देसी ब्लिंग' से उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोहरत मिली। फिलहाल वह 'लॉक अप सीजन 2' में अपने बेबाक अंदाज और रणनीतिक गेमप्ले की वजह से लगातार सुर्खियों में बनी हुई हैं।
DRDO से दस्तावेज लीक के दावों ने भारत की साइबर गवर्नेंस पर खड़े किए सवाल : विशेषज्ञ
तिरुवनंतपुरम। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के संवेदनशील डिजाइन दस्तावेजों के लीक होने और प्रतिबंधित तकनीकी जानकारी के डार्क वेब पर उपलब्ध होने के दावों ने भारत के रणनीतिक क्षेत्रों में साइबर गवर्नेंस की समीक्षा की आवश्यकता पर बल दिया है। इंजीनियरिंग फिजिसिस्ट और औद्योगिक साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ केएस मनोज ने अपने लेख साइबर […] The post DRDO से दस्तावेज लीक के दावों ने भारत की साइबर गवर्नेंस पर खड़े किए सवाल : विशेषज्ञ appeared first on Sabguru News .
मोदी ने की जल संरक्षण की अपील, सीतामढ़ी के प्लास्टिक से बनी बेंच की तारीफ
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को लोगों से जल संरक्षण और एक पेड़ मां के नाम अभियान से जुड़ने की अपील की तथा बिहार से सीतामढ़ी में प्लास्टिक से बेंच तैयार करने के प्रयासों की सराहना की। मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेडिया कार्यक्रम मन की बात में 4 जुलाई से शुरू […] The post मोदी ने की जल संरक्षण की अपील, सीतामढ़ी के प्लास्टिक से बनी बेंच की तारीफ appeared first on Sabguru News .
राजनांदगांव में दिव्यांग नाबालिग किशोरी से दुष्कर्म, आरोपी अरेस्ट
राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ में राजनांदगांव जिले के डोंगरगांव थाना क्षेत्र में एक दिव्यांग नाबालिग किशोरी के साथ दुष्कर्म का मामला उजागर हुआ है। पुलिस के अनुसार प्रार्थी अपनी नाबालिग पुत्री को पेट दर्द की शिकायत पर इलाज के लिए जिला अस्पताल राजनांदगांव लेकर गया था। वहां मेडिकल जांच के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि […] The post राजनांदगांव में दिव्यांग नाबालिग किशोरी से दुष्कर्म, आरोपी अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
हस्तकलाओं को प्रोत्साहित कर वोकल फॉर लोकल को बढावा दें देशवासी: मोदी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय हथकरघा दिवस को देश की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का प्रतीक बताते हुए देशवासियों से हस्तकलाओं को प्रोत्साहित करने और ‘वोकल फॉर लोकल’ की भावना यानी स्वदेशी उत्पादों को बढावा देने की अपील की है। मोदी ने रविवार को अपने मासिक रेड़ियो कार्यक्रम मन की बात में कहा […] The post हस्तकलाओं को प्रोत्साहित कर वोकल फॉर लोकल को बढावा दें देशवासी: मोदी appeared first on Sabguru News .
प्रल्हाद जोशी ने शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार संभाला
नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने रविवार को नए शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया। उन्हें धर्मेंद्र प्रधान के पद से त्यागपत्र के बाद शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार सौंपा गया था। एक आधिकारिक घोषणा के अनुसार राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया […] The post प्रल्हाद जोशी ने शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त कार्यभार संभाला appeared first on Sabguru News .
Pakistan को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की चेतावनी, आतंक और धमकियों पर नहीं झुकेगा भारत
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को कहा कि भारत पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के अलावा पाकिस्तान के साथ कोई बातचीत नहीं करेगा। द्रास में करगिल युद्ध स्मारक पर करगिल विजय दिवस समारोह को संबोधित करते हुए, सिंह ने कहा कि पड़ोसी देश के साथ भविष्य में कोई भी बातचीत केवल पाक कब्जे वाले कश्मीर के मुद्दे पर होगी, जो पाकिस्तान के अवैध कब्जे के तहत भारत का एक अभिन्न अंग है। ALSO READ: CJP आंदोलन के पहले ही दिन धर्मेंद्र प्रधान ने की थी इस्तीफे की पेशकश, BJP के बड़े नेता का दावा उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने अपनी राज्य नीति के हिस्से के रूप में आतंकवाद को संस्थागत रूप दिया है और उसके सैन्य प्रतिष्ठान और आतंकवादी संगठनों के बीच कोई अंतर नहीं है। सिंह ने कहा कि भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के माध्यम से आतंकवादियों और उनके समर्थकों को कड़ा जवाब दिया है कि भारत में किसी भी शत्रुतापूर्ण कृत्य का और भी अधिक बल के साथ जवाब देने की क्षमता है। उन्होंने कहा कि भारत की संप्रभुता को खतरे में डालने की हर कोशिश का हमारे सशस्त्र बल मुंहतोड़ जवाब देंगे। 1999 के करगिल युद्ध के दौरान अपनी जान गंवाने वाले सैनिकों को श्रद्धांजलि देते हुए, रक्षा मंत्री ने इस संघर्ष को न केवल एक सैन्य और कूटनीतिक जीत बताया, बल्कि एक ऐसा निर्णायक क्षण भी बताया जिसने दुनिया के सामने भारतीय सैनिकों के साहस, दृढ़ संकल्प और सर्वोच्च बलिदान को प्रदर्शित किया। उन्होंने कहा कि करगिल युद्ध स्मारक पर अंकित शहीदों के नाम देश के हर क्षेत्र, धर्म और समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो भारत की एकता को दर्शाते हैं और देश को बांटने की कोशिश करने वालों को एक कड़ा संदेश देते हैं। भारत और पाकिस्तान के बीच तुलना करते हुए सिंह ने कहा कि भारत नवाचार, प्रौद्योगिकी, उद्यमिता और अंतरिक्ष अन्वेषण के माध्यम से प्रगति कर रहा है, जबकि पाकिस्तान आतंकवाद, कट्टरपंथ और सीमा पार घुसपैठ को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर, स्टार्टअप, उपग्रह और डिजिटल बुनियादी ढांचा बना रहा है, जबकि पाकिस्तान आतंकवाद और छद्म युद्ध को बढ़ावा दे रहा है, और कहा कि सशस्त्र बल किसी भी शत्रुतापूर्ण मंसूबे का मुकाबला करने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। करगिल युद्ध के दौरान दी गई कुर्बानियों को याद करते हुए सिंह ने कहा कि कई सैनिक अपनी जवानी के शुरुआती दौर में थे, जिनके कई सपने और अरमान थे, फिर भी उन्होंने खुशी-खुशी देश की सेवा में अपनी जान दे दी। उन्होंने शहीद सैनिकों के परिवारों—जिनमें उनकी माताएं, पत्नियां और बच्चे शामिल थे—द्वारा सहे गए गहरे दुख को भी याद किया। करगिल विजय दिवस के मौके पर, रक्षा मंत्री ने भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान करने वाले सभी सैनिकों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने उन्हें भारत माता के समर्पित सपूत बताया, जिनके साहस और बलिदान से आने वाली पीढ़ियां हमेशा प्रेरित होती रहेंगी।
कारगिल के वीर सैनिकों का शौर्य सदैव राष्ट्रीय गौरव का स्रोत बना रहेगा : मोदी
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर कारगिल के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा है कि उनका शौर्य सदैव राष्ट्रीय गौरव का स्रोत बना रहेगा। मोदी ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में अपने संदेश में कहा कि कारगिल विजय दिवस […] The post कारगिल के वीर सैनिकों का शौर्य सदैव राष्ट्रीय गौरव का स्रोत बना रहेगा : मोदी appeared first on Sabguru News .
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर दो धड़ों में बंटा बॉलीवुड, रणवीर शौरी ने उठाए सवाल
देशभर में गहराते NEET पेपर लीक विवाद और लगातार तेज होते छात्र आंदोलनों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा 25 जुलाई को पद से इस्तीफे की घोषणा के बाद देशभर के छात्रों के बीच जश्न का माहौल है। वहीं धर्मेंद्र प्रधान के इस फैसले के बाद बॉलीवुड और देश की नामचीन हस्तियां दो धड़ों में बंटती नजर आ रही हैं। एक तरफ जहां कई बड़े सेलेब्स छात्रों और प्रदर्शनकारियों के समर्थन में खड़े दिख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ प्रमुख हस्तियों ने इस फैसले की टाइमिंग और सरकार के रुख पर निराशा व्यक्त की है। ALSO READ: 'आदिपुरुष' पर मनोज मुंतशिर का छलका दर्द, बोले— फिल्म का बचाव करना जीवन की सबसे बड़ी भूल छात्रों के समर्थन में सड़कों पर उतरे बड़े फिल्मी चेहरे छात्रों के विरोध प्रदर्शन को देश के कोने-कोने से भारी जनसमर्थन मिला। दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों में कई फिल्मी और संगीत जगत की हस्तियां खुद सड़कों पर उतरीं। शबाना आजमी, प्रकाश राज और रैपर हनुमानकाइंड दिल्ली के विरोध प्रदर्शन स्थलों पर पहुंचे और छात्रों की आवाज़ में अपनी आवाज़ मिलाई। सोनाक्षी सिन्हा, विजय वर्मा, दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज कमल हासन और गायिका चिन्मयी श्रीपदा ने सोशल मीडिया के माध्यम से आंदोलन का खुलकर समर्थन किया और निष्पक्ष जांच की मांग की। रणवीर शौरी और तारा देशपांडे का अलग नजरिया दूसरी ओर, इस पूरे घटनाक्रम पर अभिनेता रणवीर शौरी और अभिनेत्री व पूर्व MTV VJ तारा देशपांडे का रुख बिल्कुल अलग रहा। दोनों ही हस्तियों ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के समय और तरीके पर सवाल उठाए। Yes, but should have done it before the streets were held hostage. Now it seems supporters will not be heard, but “cockroaches” on streets will! https://t.co/OGwcUXxkO8 — Ranvir Shorey (@RanvirShorey) July 25, 2026 रणवीर शौरी का तीखा हमला रणवीर शौरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक GIF शेयर करते हुए तंज कसा। उन्होंने लिखा कि सरकार ने इस एक कदम से अपने विरोधियों को भले न जीता हो, लेकिन अपने कई वफादार समर्थकों को जरूर नाराज कर दिया है। जब यूजर्स ने उनसे पूछा कि क्या पेपर लीक मामले में मंत्री को पद पर बने रहना चाहिए था, तो शौरी ने अपना पक्ष स्पष्ट किया। उन्होंने लिखा, अगर इस्तीफा देना ही था, तो सड़कों पर हालात बिगड़ने से पहले दिया जाना चाहिए था। अब ऐसा संदेश जा रहा है कि सरकार समर्थकों के सुझावों के बजाय सड़कों पर हंगामे की भाषा बोलने वालों के दबाव में फैसले ले रही है। Sad. A minister who served many portfolios over a long career. He played a leading role in implementing the Pradhan Mantri Ujjwala Yojana, which expanded LPG connections to millions of low-income households. He oversaw reforms such as the PAHAL direct benefit transfer for LPG… https://t.co/F10CECVzj8 — Tara Deshpande (@Tara_Deshpande) July 25, 2026 तारा देशपांडे ने याद दिलाए पुराने योगदान जोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बू के विचार को साझा करते हुए तारा देशपांडे ने धर्मेंद्र प्रधान के लंबे प्रशासनिक करियर की सराहना की। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के काम का मूल्यांकन केवल एक विवाद के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। तारा ने उनके द्वारा किए गए प्रमुख सुधारों का जिक्र किया। जिसमें प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, PAHAL योजना, HELP नीति, कोविड के समय इस्पात और शिक्षा मंत्रालय का कुशल प्रबंधन शामिल है। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने कठिन परिस्थितियों में भी मंत्रालयों को बेहतर ढंग से चलाया, इसलिए उनके फैसले का सम्मान किया जाना चाहिए।
धौलपुर में कार पेड़ से टकराई, दो लोगों की मौत
धौलपुर। राजस्थान में धौलपुर जिले के कौलारी थाना क्षेत्र में शनिवार को एक कार के पेड़ से टकराने से दो लोगों की मौत हो गई जबकि तीन अन्य घायल हो गए। पुलिस सूत्रों ने रविवार को बताया कि कल शाम को हेत सिंह अपने साथियों के साथ कार से जा रहा था कि कोलुआ गांव […] The post धौलपुर में कार पेड़ से टकराई, दो लोगों की मौत appeared first on Sabguru News .
ग्रेटर नोएडा : एसटीपी टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस से 2 लोगों की मौत
ग्रेटर नोएडा। उत्तर प्रदेश में ग्रेटर नोएडा नॉलेज पार्क थाना क्षेत्र के सेक्टर-150 स्थित एल्डिको सोसाइटी में शनिवार देर रात सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस की चपेट में आने से दो लोगों की मौत हो गई। पुलिस ने रविवार को बताया कि घटना की सूचना मिलते ही नॉलेज पार्क […] The post ग्रेटर नोएडा : एसटीपी टैंक की सफाई के दौरान जहरीली गैस से 2 लोगों की मौत appeared first on Sabguru News .
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को टाला
न्यूयॉर्क। अमरीका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पश्चिम एशिया में वायु रक्षा मिसाइलों और इंटरसेप्टर की कमी के कारण ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान को फिलहाल टाल दिया है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से यह रिपोर्ट दी गई है। इससे पहले, एक्सिओस ने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट दी थी […] The post डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान को टाला appeared first on Sabguru News .
दैनिक भास्कर की ‘स्पाई फाइल्स’ सीरीज में आप पढ़ रहे हैं- ‘ऑपरेशन थंडरबोल्ट।’ पार्ट-1 में आपने पढ़ा- 27 जून 1976 को डेनिम स्कर्ट पहनी लड़की ने बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर एक विमान को हाईजैक कर लिया। विमान इजराइल के तेल अवीव एयरपोर्ट से पेरिस जा रहा था। हाईजैकर 245 यात्रियों को बंधक बनाकर युगांडा ले गए। इनमें ज्यादातर इजराइली थे। हाईजैकरों ने अल्टीमेटम दे रखा था- 1 जुलाई को दोपहर 2 बजे तक उनकी मांगे नहीं मानी गईं, तो सभी यात्री मार दिए जाएंगे। सिर्फ 8 घंटे बाद 100 से ज्यादा इजराइली मारे जाने वाले थे। प्रधानमंत्री हाईजैकरों के आगे झुकने को तैयार थे, लेकिन रक्षा मंत्री के दिमाग में कुछ ऐसा चल रहा था, जो नामुमकिन सा था। पूरी कहानी पार्ट-2 में पढ़िए… तारीख 1 जुलाई 1976, सुबह के 6 बज रहे थे। यरुशलम के कमांड रूम में इजराइली पीएम यित्जाक राबिन, रक्षा मंत्री शिमोन पेरेस और सेना प्रमुख जनरल मोटा गुर परेशान बैठे थे। पीएम ने सिगरेट का कश भरते हुए रक्षा मंत्री से कहा- ‘कल रात हाईजैकरों ने फ्रांस और दूसरे देशों के 148 यात्रियों को छोड़ दिया है। हमारे लोग अभी भी बंधक हैं। मैं उन्हें मरने के लिए नहीं छोड़ सकता।’ रक्षा मंत्री पेरेस कुछ देर चुप रहे। फिर गहरी सांस लेते हुए कहा- ‘हम मिलिट्री एक्शन लेंगे।’ ‘मिलिट्री एक्शन? फिर वही बात। आज तक ऐसा हुआ है।’ पीएम ने लगभग चीखते हुए कहा। पेरेस ने भी तल्खी से जवाब दिया- ‘इजराइल भी तो आज तक झुका नहीं है। जो कभी नहीं हुआ, वो अब होगा।’ पेरेस ने सेना प्रमुख से पूछा- ‘जनरल साहब, आपकी क्या राय है?’ जनरल मोटा गुर ने कहा- ‘मिलिट्री एक्शन ले सकते हैं, लेकिन तैयारी के लिए कम से कम दो दिन चाहिए।’ तभी पीएम ने टोका- ‘क्या ये मुमकिन है?’ जनरल गुर ने कहा- ‘मेरी टीम एंटेबे जाकर आतंकियों को ढेर कर सकती है, लेकिन बंधक जिंदा बचेंगे या नहीं, इसकी गारंटी नहीं दे सकता।’ रक्षा मंत्री ने पूछा- ‘किस बात का डर है?’ सेना प्रमुख ने कहा- ‘हमें नहीं मालूम बंधक कहां हैं? आतंकी किस जगह तैनात हैं? हमारे पास कोई तस्वीर या नक्शा भी नहीं है।’ रक्षा मंत्री- ‘ये सारी जानकारी मिल जाए तो?’ ‘तो भी गारंटी नहीं दे सकता।’ सेना प्रमुख ने जवाब दिया। रक्षा मंत्री ने गुस्से में कहा- ‘गारंटी क्यों नहीं दे सकते?’ सेना प्रमुख- ‘डेडलाइन में कुछ ही घंटे बचे हैं। मुझे कम से कम 2 दिन चाहिए।’ पेरेस ने झुंझलाकर कहा- ‘वक्त ही तो नहीं है।’ प्रधानमंत्री ने हाथ उठाकर दोनों को शांत कराया। फिर सिगरेट का कश भरते हुए कहा- ‘हम फिलिस्तीनी कैदियों को रिहा करने के लिए तैयार हैं। यह मैसेज तुरंत युगांडा भिजवाइए।’ पेरेस हक्के-बक्के रह गए, ‘लेकिन सर...!’ ‘कोई लेकिन-वेकिन नहीं, पेरेस। आप आंतकियों से कहिए कि वो हमें थोड़ा वक्त दें।’ इतना कहकर राबिन अपनी कुर्सी से उठ खड़े हुए। पेरेस चुपचाप कमरे से बाहर निकल गए। राबिन मुड़े और सेना प्रमुख की आंखों में देखते हुए कहा- ‘मिलिट्री एक्शन की तैयारी कीजिए।’ ‘लेकिन, सर अभी तो आप…’ सेना प्रमुख इतना ही बोल पाए थे कि राबिन ने उन्हें टोक दिया- ‘तैयारी कीजिए…वक्त आपको मिल जाएगा।’ एक तरफ हाईजैकरों से डील और दूसरी तरफ सेना प्रमुख को कार्रवाई का आदेश… आखिर पीएम के दिमाग में चल क्या रहा था…? करीब 2 घंटे बाद, प्रधानमंत्री का फोन बजा। उधर से आवाज आई- ‘हाईजैकरों ने वक्त दे दिया है। अब डेडलाइन है 4 जुलाई दोपहर 12 बजे तक।' राबिन ने जोर से मेज पर घूंसा मारा- ‘इतना वक्त बहुत है।’ उन्होंने फौरन अपनी खुफिया एजेंसी ‘मोसाद’ के चीफ यित्जाक होफी को फोन लगाया- ‘बंधक कहां बंद हैं? अंदर आने-जाने के कितने दरवाजे हैं? मुझे एक-एक डिटेल चाहिए, होफी।’ दूसरी तरफ से आवाज आई- ‘मुझे 24 घंटे दीजिए।’ फोन कट गया। अब शाम ढल चुकी थी। पेरिस का ओरली एयरपोर्ट पुलिस की गाड़ियों के सायरन से गूंज रहा था। एंटेबे से रिहा हुए गैर-इजराइली अभी-अभी यहां पहुंचे थे। एयरपोर्ट पर एक कैफे में बैठकर 50 साल का बुजुर्ग कॉफी पी रहा था। तभी 30-35 साल का एक शख्स उसके पास पहुंचा। उसने अपना आईकार्ड दिखाते हुए कहा- ‘सर, घबराइए नहीं। मुझे कुछ जानकारी चाहिए।’ बुजुर्ग ने अपनी आंखें रगड़ते हुए कहा- ‘कैसी जानकारी?’ शख्स ने कहा- ‘एंटेबे में बंधकों को कहां रखा गया है?’ बुजुर्ग ने कुछ सोचते हुए कहा- ‘ओल्ड टर्मिनल के मुख्य हॉल में।’ ‘माहौल कैसा है? कुल कितने लोग हैं अंदर?’ शख्स ने फिर पूछा। ‘100 से ज्यादा बंधक हैं। हॉल में कांच के दो बड़े दरवाजे हैं, जो बाहर रनवे की तरफ खुलते हैं।’ अब शख्स, बुजुर्ग के करीब सरकते हुए पूछा- ‘सिक्योरिटी कैसी है? ‘मेन गेट पर चार आतंकवादी तैनात हैं। इसमें एक महिला भी है।’ बुजुर्ग ने बताया। ‘और बाकी आतंकी?’ बुजुर्ग ने थोड़ा सोचते हुए कहा- ‘बाकी आतंकी हॉल के ठीक बगल वाले VVIP रूम में आराम करते हैं। इसके अलावा दर्जनभर युगांडा के सैनिक भी राइफल लिए तैनात हैं।’ बुजुर्ग को लगा शायद पत्रकार है। उसने सारी बातें बता दीं, लेकिन असल में वो शख्स मोसाद का एजेंट था। रात करीब 2 बजे मोसाद चीफ का फिर से फोन बजा। उधर से आवाज आई- ‘सर, एक इजराइली कंपनी ने एंटेबे के ओल्ड टर्मिनल का नक्शा बनाया था। हमें नक्शा मिल गया है।’ मोसाद चीफ ने कहा- ‘हम्म…सिर्फ नक्शे के भरोसे 100 से ज्यादा जिंदगियों को दांव पर नहीं लगाया जा सकता। ओरिजिनल तस्वीर चाहिए।' फोन कट गया। अब तक 2 जुलाई हो चुकी थी। सुबह के 10 बज रहे थे। केन्या की राजधानी नैरोबी से एक विमान ने उड़ान भरी। विमान में सिर्फ पायलट और को-पायलट थे। कुछ ही देर बाद विमान युगांडा की तरफ मुड़ गया। घंटेभर का सफर था। जैसे ही विमान युगांडा के एंटेबे हवाई अड्डे के ऊपर पहुंचा, पायलट ने उसकी ऊंचाई बढ़ा दी। को-पायलट ने हाई-टेक कैमरा निकाला और एयरपोर्ट की दर्जनों तस्वीरें खींच लीं। ये दोनों मोसाद के एजेंट थे। इजराइल ने इसके लिए केन्या सरकार से चुपचाप डील कर ली थी। 3 जुलाई 1976, सुबह के 4 बजे थे। इजराइल डिफेंस फोर्स की स्पेशल यूनिट के कमांडर योनी नेतन्याहू मिलिट्री एक्सरसाइज से घर लौटे। उनका शरीर धूल, मिट्टी और पसीने से सना था। योनी, इजराइल के मौजूदा पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के बड़े भाई थे। बेंजामिन के पीएम बनने में इस मिशन का बहुत बड़ा रोल था। अब कहानी में लौटते हैं… उस वक्त योनी की प्रेमिका ब्रूरिया कपड़े धो रही थी। योनी को देखते ही वह बोल पड़ी- ‘तुमने कल से कुछ खाया नहीं है। मैंने तुम्हारी पसंदीदा लेमन मेरिंग पाई बनाई है। खा लो।’ योनी ने फ्रिज से निकालकर पाई का आधा कौर मुंह में रख लिया। फिर धीरे से कहा- ‘बहुत टेस्टी है। नहाकर आता हूं, फिर खाकर सो जाऊंगा।’ योनी बाथरूम में चले गए। 20 मिनट बाद जब कपड़े धोकर ब्रूरिया लौटी, तो देखा कि बाथरूम का दरवाजा अब भी बंद है। उसने आवाज लगाई- ‘योनी…इतनी देर से क्या कर रहे हो?’ अंदर से कोई आवाज नहीं आई। ब्रूरिया ने धीरे से धक्का दिया। दरवाजा खुल गया। योनी का सिर दीवार से टिका हुआ था। आंखें बंद थीं। ऊपर से शॉवर का पानी गिर रहा था। ब्रूरिया बुदबुदाई- ‘ओह योनी… तुम तो सो गए।’ उसने शॉवर बंद किया। योनी को बेडरूम तक ले गई और चादर ओढ़ाकर सुला दिया। इधर, प्रधानमंत्री दफ्तर में बैठे राबिन सिगरेट पर सिगरेट पिए जा रहे थे। टेबल पर रखी ऐशट्रे जली हुई सिगरेट के टुकड़ों से भरी थी। तभी विदेश मंत्री आलोन पहुंच गए। विदेश मंत्री को देखते ही राबिन ने कहा- ‘मैं मिलिट्री एक्शन लेने जा रहा हूं। एक ड्राफ्ट तैयार करो। कैबिनेट के सामने ब्रीफिंग देनी है।’ आलोन ने सहमति में सिर हिलाया और वहां से निकल गए। राबिन उन्हें छोड़ने के लिए लिफ्ट तक साथ आए। चलते-चलते राबिन ने कहा- ‘एक बात और... अगर यह मिशन नाकाम हुआ, तो मेरे इस्तीफे का ड्राफ्ट भी तैयार कर देना।’ आलोन ने हैरान होकर पूछा- ‘सर... आपकी नजर में नाकामी की परिभाषा क्या होगी?’ राबिन ने कहा- ‘अगर 25 लोग मारे जाते हैं, तो मैं इसे नाकाम मानूंगा। आंकड़ा इससे कम रहा, तो मैं इसे सफल मानूंगा।’ ‘कामयाबी के कितने चांस हैं?’ आलोन ने झिझकते हुए पूछा। राबिन ने गहरी सांस भरते हुए कहा- ‘मेरे हिसाब से 50-50.’ अब तक सुबह के 7 बज चुके थे। यानी हाईजैकर्स की डेडलाइन खत्म होने में अभी भी 24 घंटे से ज्यादा का वक्त बचा था। इधर, योनी की प्रेमिका ब्रूरिया हड़बड़ाकर नींद से जागी। शायद उसने कोई बुरा सपना देख लिया था। योनी उठ चुके थे और जैतूनी-हरे रंग की वर्दी पहन रहे थे। योनी ने शर्ट का बटन बंद करते हुए कहा- ‘अगर मैं रात तक वापस न लौटूं, तो समझ लेना कोई बड़ा मिशन शुरू हो चुका है।’ ब्रूरिया ने रुंधे गले से कहा- ‘यह एंटेबे वाले मामले से जुड़ा है न?’ योनी ने गहरी सांस ली और कहा- ‘हां।’ ब्रूरिया कुछ कहती, इससे पहले ही योनी ने उसे गले लगा लिया। धीमें से उसके कानों में कहा- ‘मैं लौटकर आऊंगा, इंतजार करना।’ योनी ने बैग उठाया और तेजी से बाहर निकल गए। पीछे-पीछे दौड़ती हुई ब्रूरिया चिल्लाई- ‘योनी रुको, तुम मोर को बाय कहना भूल गए।’ लेकिन योनी कार में बैठकर निकल चुके थे। दरअसल, मोर योनी का जर्मन शेफर्ड डॉग था। ब्रूरिया ने मोर को पुचकारते हुए कहा- ‘कोई नहीं बेटा… योनी लौटकर आएंगे तो तुम नाराजगी जता देना।’ ब्रूरिया को पता नहीं था कि योनी लौटेंगे तो जरूर, लेकिन मोर को मना नहीं पाएंगे… 3 जुलाई दोपहर 1 बजकर 40 मिनट का वक्त। इजराइल का बेन गुरियन एयरपोर्ट भट्टी की तरह धधक रहा था। पारा 40C के पार पहुंच चुका था। चार हरक्यूलिस C-130 विमान और करीब 190 इजराइली कमांडो रनवे पर खड़े थे। तभी एक चमचमाती हुई काली मर्सिडीज और पीछे-पीछे 2 लैंड रोवर गाड़ियां रनवे पर पहुंचीं। उसमें से 5-7 सैनिक उतरे और फौरन तीनों गाड़ियां एक विमान में लोड कर दी गईं। रनवे पर खड़े एक कमांडो ने दूसरे से पूछा- ‘ये गाड़ियां क्यों लोड की जा रही हैं? इनका क्या काम है?’ दूसरे ने कहा- ‘सब मोसाद का खेल है। देखो तो आगे होता क्या है।’ अब दुनिया का सबसे खतरनाक कमांडो मिशन शुरू हो चुका था। नाम- ‘ऑपरेशन थंडरबोल्ट।’ ये नाम इसलिए क्योंकि सबकुछ बिजली की रफ्तार से होना था। पूरे ऑपरेशन को लीड कर रहे थे जनरल डैन शैमरोन और ग्राउंड कमांडर थे योनी नेतन्याहू। योनी की टीम को ही सबसे पहले बंधकों तक पहुंचना था। दोपहर 1 बजकर 55 मिनट पर पहले विमान ने उड़ान भरी। पांच-पांच मिनट के फासले पर बाकी तीन विमान भी आसमान में थे। चारों विमानों ने शुरुआत में अलग-अलग दिशाएं पकड़ीं, फिर सब दक्षिण की ओर निकल गए। एक घंटे के बाद विमान दक्षिणी सिनाई के ओफिरा एयरबेस पर लैंड हुए। वहां फ्यूल भरा और ठीक साढ़े तीन बजे फिर से विमान आसामान में थे। अब मंजिल थी- एंटेबे एयरपोर्ट। इन चार विमानों के साथ दो बोइंग 707 विमान भी आसमान में गश्त लगा रहे थे। उनमें से एक उड़ता हुआ हाईटेक कमांड सेंटर था और दूसरा आधुनिक सुविधाओं से लैस मेडिकल हॉस्पिटल। करीब एक घंटे बाद योनी नेतन्याहू को थकान महसूस होने लगी। उन्होंने शैमरोन से कहा- ‘मुझे नींद आ रही है। सो जाऊं?’ शैमरोन ने मुस्कुराते हुए कॉकपिट के पिछले हिस्से की तरफ इशारा कर दिया- ‘तुम जाते वक्त सुस्ता लो, वापसी में मैं सो जाऊंगा।’ योनी बंक पर चढ़े, सिर के नीचे तकिया टिकाया और लेट गए। आंखें मूंदने से पहले उन्होंने नेविगेटर से कहा- ‘एंटेबे पहुंचने से आधे घंटे पहले मुझे जगा देना।’ रात के ठीक 10:30 बजे। नेविगेटर ने योनी का कंधा पकड़कर जोर से हिलाया- ‘योनी, उठ जाओ, हम विक्टोरिया झील के करीब पहुंच रहे हैं।’ योनी ने आंखें खोलीं और पूछा- ‘कितना वक्त बचा है?’ नेविगेटर ने कहा- ‘30 मिनट।’ योनी तुरंत बंक से नीचे उतरे। झटपट वर्दी ठीक की। साइलेंसर गन लोड किया और विमान में खड़ी मर्सिडीज की फ्रंट सीट पर जाकर बैठ गए। उन्होंने ड्राइवर से कहा- ‘फौरन इंजन स्टार्ट करो।’ मर्सिडीज की हेडलाइट्स जल उठीं। ठीक उसी पल पीछे खड़ी दो लैंड रोवर्स की बत्तियां भी जगमगा उठीं। रात ठीक 11 बजकर 1 मिनट पर पहले विमान के पहिए ने रनवे को छुआ। कोई आवाज नहीं हुई। होती भी कैसे, पहियों में हवा ही बहुत कम भरी गई थी। विमान के रुकने से पहले ही इजराइली कमांडो कूद पड़े। उन्होंने फौरन रनवे के दोनों किनारों पर जलती हुई लैंप रख दीं, ताकि युगांडा वाले एयरपोर्ट की लाइटें बंद कर दें, तो भी बाकी विमानों को उतरने में दिक्कत न हो। अगले ही पल, विमान से चमचमाती हुई काली मर्सिडीज निकली। ठीक इसी तरह की मर्सिडीज से तानाशाह ईदी अमीन चलता था। उसके पीछे दो लैंड रोवर गाड़ियां भी फर्राटा भरते हुए निकल पड़ीं। गाड़ियों की स्पीड बिल्कुल नाप-तोलकर उतनी ही रखी गई थी, जितनी ईदी अमीन के काफिले की हुआ करती थी- न ज्यादा तेज, न बहुत धीमी। काफिला चल पड़ा। ये मोसाद की चाल थी, ताकि युगांडा के सैनिकों को लगे कि उनके राष्ट्रपति का काफिला है, पर क्या युगांडा के सैनिक क्या इतने भोले थे? कहानी में आगे बढ़ते हैं… अभी काफिला कुछ ही कदम आगे बढ़ा था कि कंट्रोल टावर पर तैनात दो संतरियों की नजर मर्सिडीज पर पड़ी। एक ने कहा- ‘दादा ने तो सफेद मर्सिडीज ले ली है। इतनी रात को काली गाड़ी में कौन आ रहा है?’ दूसरे ने कहा- ‘टेंशन ना लो भाई… ये दादा की ही पुरानी गाड़ी है।’ तभी गाड़ियों की हेडलाइट उन पर चमकी। एक संतरी भागकर अंधेरे में छिप गया, लेकिन दूसरे ने राइफल तान दी और चिल्लाया- ‘आगे आओ’ फ्रंट सीट पर बैठे योनी ने ड्राइवर से कहा- ‘इसे शूट करो फौरन।’ बगल में बैठे डिप्टी कमांडर मुकी झट से बोल पड़े- ‘नहीं योनी फायर नहीं करना। यह उनकी रूटीन चेकिंग है।’ योनी ने डांटते हुए कहा- ‘इसे शक हो गया है।’ उन्होंने अपनी साइलेंसर गन निकाली और फायर कर दिया। गोली लगते ही संतरी जमीन पर गिर पड़ा। मर्सिडीज जैसे ही आगे बढ़ी पीछे से गोलियों की आवाज आने लगी। जख्मी संतरी फर्श पर पड़े-पड़े फायरिंग कर रहा था, तभी पीछे आ रही लैंड रोवर के कमांडो ने उसे वहीं ढेर कर दिया। अब ओल्ड टर्मिनल महज 50 गज की दूरी पर था। इसी टर्मिनल में बंधक थे। तीनों गाड़ियां आकर रुक गईं। सबकुछ सामान्य था। अब तक हाईजैकरों को भनक नहीं लगी थी। योनी ने कहा- ‘हेडलाइट बंद करो और सीधे टर्मिनल में घुस जाओ।’ हेडलाइट बंद कर दी गई। इजराइली सैनिक फायरिंग करते हुए टर्मिनल की तरफ दौड़ पड़े। तभी हाईजैकरों ने भी फायरिंग खोल दी। दोनों तरफ से गोलियां चलने लगीं। इजराइली डिप्टी कमांडर मुकी ने भागते-भागते एके-47 का ट्रिगर दबा दिया। 2 हाईजैकर वहीं ढेर हो गए। अब इजराइली कमांडो ओल्ड टर्मिनल के बिल्कुल करीब पहुंच चुके थे। योनी लगातार चिल्ला रहे थे- ‘आगे बढ़ो। आगे बढ़ो।’ डिप्टी कमांडर आगे बढ़े। टर्मिनल का पहला दरवाजा लॉक था। वो दौड़कर दूसरे गेट की तरफ भागे। इधर, योनी एंट्री गेट पर पहुंचकर फायरिंग के लिए मुड़े ही थे कि कंट्रोल टावर पर तैनात युगांडा के सैनिकों ने फायरिंग शुरू कर दी एक गोली सीधे योनी के सीने को चीरती हुई निकल गई। वे जमीन पर गिर पड़े। तभी बैकअप कर रहे इजराइली कमांडो ने कंट्रोल टावर पर खड़े गनमैन को मार गिराया। इसी बीच दो कमांडो योनी को उठाकर ले गए। डॉक्टर ने खून से लथपथ योनी की शर्ट काटकर पट्टियां बांधी, पर गोली अंदरूनी अंगों को छलनी कर चुकी थी। इधर, डिप्टी कमांडर और उनकी टीम टर्मिनल का दरवाजा तोड़ते हुए अंदर दाखिल हो चुकी थी। हॉल में चारों तरफ दहशत पसरी हुई थी। बंधक गद्दों से मुंह ढंककर दुबके पड़े थे। तभी एक हाईजैकर ने खंभे के पीछे से ग्रेनेड फेंक दिया। उसके ब्लास्ट होते ही हॉल में आग लग गई। आग की लपटों के बीच हाईजैकर ने फायरिंग शुरू कर दी, लेकिन इजराइली कमांडो ने उसे मार गिराया। इजराइली कमांडो को लगा कि अब सारे हाईजैकर मारे जा चुके हैं, लेकिन गद्दों के बीच दुबकी डेनिम स्कर्ट वाली लड़की अभी भी मौत का सामान थामे बैठी थी। कमांडो ने मेगाफोन पर आवाज लगाई- ‘नीचे लेटे रहो! हम इजराइली सैनिक हैं।’ तभी एक शख्स खड़ा होकर चिल्लाने लगा। कमांडो को लगा कि ये हाईजैकर है और ट्रिगर दबा दिया। वहा वहीं गिर पड़ा। तभी उसकी मां चिल्ला उठी- तुम लोगों ने ये क्या किया। ये इजराइली है। बेटा है मेरा। कमांडो ने कहा- ‘सॉरी, लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता। फटाफट सब बाहर निकलो, विमान तुम लोगों के इंतजार में खड़े हैं। जल्दी करो।’ लोग उठकर बाहर की तरफ भागने लगे। तभी डेनिम स्कर्ट वाली लड़की भीड़ से निकली और एक कमांडो पर झपट पड़ी। उसकी गन छीन ली और फायरिंग करने लगी। तभी पीछे से डिप्टी कमांडर ने उसे जोर से धक्का दिया और अपनी एके-47 की पूरी गोलियां उसके सीने में उतार दी। अब यात्री जैसे ही टर्मिनल से बाहर निकले, युगांडा के दर्जनभर सैनिकों ने फायरिंग शुरू कर दी। बंधकों और डिप्टी कमांडर की सांसें अटक गईं। एक पल के लिए लगा कि सबकुछ खत्म हो गया। तभी पीछे से इजराइली कमांडोज की एक दूसरी टुकड़ी आ गई। दोनों तरफ से करीब 10 मिनट तक फायरिंग होती रही। इसमें युगांडा के सभी सैनिक मारे गए। अब बंधकों को एक-एक करके विमान में बैठाया जाने लगा। कुछ ही देर में सभी बंधक विमान में सवार हो चुके थे। रनवे पर खड़े पहले विमान के पायलट ने चिल्लाते हुए पूछा- ‘क्या सभी बंधक आ गए हैं?’ लोडमास्टर ने जवाब दिया- ‘हां सब आ गए हैं।’ पायलट ने पूछा- ‘मुझे सटीक नंबर चाहिए। कितने लोग हैं। लिखकर दो।’ लोडमास्टर ने पर्ची थमाई- ‘102 जीवित और 3 मृत।’ इधर, योनी को बचाने की कोशिश जारी थी। सीपीआर दिया गया, खून चढ़ाया गया... लेकिन अब ये कमांडर गहरी नींद में सो चुका था। कभी ना जगने वाली नींद में। रात के ठीक 11 बजकर 40 मिनट पर, बंधकों और घायलों को लेकर पहला विमान उड़ चला, लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं हुई थी। आसामान में गश्त लगा रहे बोइंग 707 में बैठे जनरल कुटी एडम तक जैसे ही यह मैसेज पहुंचा, उन्होंने फौरन ऑर्डर दिया- ‘रनवे पर खड़े युगांडा के विमानों को तबाह कर दो।’ एयरपोर्ट पर 11 मिग लड़ाकू विमान खड़े थे। इजराइली कमांडो ने बम से सभी विमानों को उड़ा दिया। ताकि युगांडा की सेना उनका पीछा नहीं कर सके। इसके बाद बाकी के विमानों ने भी उड़ान भरनी शुरू की। रात 12:40 बजे अंतिम इजराइली विमान ने एंटेबे को अलविदा कह दिया। 1 घंटा 39 मिनट में ऑपरेशन थंडरबोल्ट पूरा हो चुका था। 4 जुलाई की सुबह करीब 10 बजे सभी विमान तेल अवीव एयरपोर्ट पहुंचे। रनवे पर पीएम राबिन और उनके मंत्रियों के साथ हजारों इजराइली मौजूद थे। एयरपोर्ट तालियों और नारों से गूंज रहा था। जैसे ही विमानों के दरवाजे खुले और अपनों ने अपनों को देखा, लोग एक-दूसरे से लिपटकर रोने लगे। एयरपोर्ट पर बंधकों के स्वागत के बाद प्रधानमंत्री ने जश्न मनाने के लिए विपक्ष के नेता मेनाखेम बेगिन को अपने दफ्तर बुलाया। बेगिन जैसे ही अंदर दाखिल हुए, राबिन ने मुस्कुराते हुए विस्की की बोतल उठा ली। बेगिन ने हाथ जोड़ते हुए कहा, ‘राबिन, मैं शराब नहीं पीता।’ राबिन ने ठहाका लगाया। उन्होंने एक ग्लास में विस्की उड़ेली और बेगिन की तरफ बढ़ा दी। बोले, ‘बेगिन साहब, समझ लो कि आप रंगीन चाय पी रहे हैं।’ इस तरह इजराइल और मोसाद का ऑपरेशन थंडरबोल्ट कामयाब हुआ। इसमें जान गंवाने वाले योनी नेतन्याहू के नाम पर उनके छोटे भाई बेंजामिन नेतन्याहू राजनीति में उतरे। 1996 में पहली बार इजराइल के पीएम बने। अभी भी वे उस पद पर कायम हैं। ऑपरेशन थंडरबोल्ट का पार्ट-1 भी पढ़िए : डेनिम स्कर्ट, हाथ में पिस्तौल, बॉयफ्रेंड के साथ प्लेन हाईजैक : पीरियड का खून दिखाकर एक महिला भाग निकली, फिर क्या हुआ; ऑपरेशन थंडरबोल्ट पार्ट-1 रेफरेंस : 1. Operation Thunderbolt: Flight 139 and the Raid on Entebbe Airport : By Saul David. 2. A State of Blood: The Inside Story of Idi Amin : By Henry Kyemba
22 जुलाई रात 10.30 तक तय था कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे। गृहमंत्री अमित शाह और PM मोदी का सपोर्ट उन्हें कुर्सी पर टिकाए हुए था। फिर RSS और BJP की एक मीटिंग हुई और कुर्सी डगमगाने लगी। शाह अब भी साथ थे, लेकिन प्रधानमंत्री का सपोर्ट हट चुका था। RSS के 5 पदाधिकारियों की मोदी-शाह से मीटिंग RSS की तरफ से सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, सह सरकार्यवाह अरुण कुमार और कृष्ण गोपाल के साथ दो और पदाधिकारी मौजूद थे। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और जेपी नड्डा मौजूद थे। ये मीटिंग न BJP दफ्तर में हुई और न ही संघ कार्यालय में। वजह थी, इस मीटिंग और उसमें हुई बातों को सीक्रेट रखना। इस मीटिंग के बारे में किसी को खबर नहीं थी। तय हुआ PM मोदी तुरंत रात में ही जेन जी के अंदाज में बात करें सोर्स ने बताया इसी मीटिंग में तय हुआ कि PM मोदी तुरंत यानी रात में ही जेन जी के सबसे फेवरेट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए बात करेंगे। भाषा भी ऐसी हो जो जेन जी तक पहुंचे। ये तक तय हुआ कि PM निश्चिंत न दिखें। चेहरे पर चिंता और आंखों में नींद दिखे, ताकि मैसेज जाए कि वे स्टूडेंट्स की फिक्र में सोए नहीं। ऐसा इंस्टाग्राम की पोस्ट में झलका भी। इस्तीफे की स्क्रिप्ट भी तभी लिखी गई... संघ के प्रतिनिधियों ने सधी शैली में कहा कि धर्मेंद्र के इस्तीफे पर विचार करना चाहिए। आंदोलन भड़क रहा है। यूपी-पंजाब में चुनाव है। बिहार में सरकार अभी स्थिर नहीं हो पाई है। ऐसे में अगर ये आंदोलन वाकई नेपाल के जेन जी जैसा हुआ, तो सरकार कठिनाई से घिर जाएगी। आखिर में कहा गया कि ये संघ का स्पष्ट विचार है। इसके लिए 5 दिन यानी 27 जुलाई तक हमें देखना चाहिए कि पूरे देश से रिपोर्ट क्या आती है। अगर आंदोलन दब गया तो ठीक नहीं तो सोमवार को इस्तीफा दिलाना चाहिए। इन 5 दिनों में हमें पहले हर संभव कोशिश करनी चाहिए। जैसे- 1. सरकार और PM के पक्ष में नरेटिव तैयार करें। 2. ABVP के छात्रों को प्रोटेस्ट में शामिल करना ताकि वे आंदोलन में शामिल स्टूडेंट्स को समझाएं या अंदर ही अंदर आंदोलन के भीतर मतभेद पैदा करें। 3. आंदोलन में टूट डालें, जैसे विपक्ष अलग हो जाए, वांगचुक अलग और दीपके अलग। प्लान पर शुरू हुआ काम 1. दूसरे दिन रात में वांगचुक का अनशन तुड़वा दिया गया। ये मुश्किल नहीं था क्योंकि वांगचुक तैयार थे। 2. नरेटिव बनने लगा। ABVP के छात्रों तक मैसेज भेजना शुरू हुआ। 3. 25 जुलाई को ABVP से जुड़े करीब 150 स्टूडेंट्स प्रयागराज से दिल्ली पहुंचे। सुबह से जंतर-मंतर के प्रदर्शन में शामिल हो गए। जिला स्तर पर तो 23 जुलाई से ही छात्र एक्टिव हो गए थे। BJP प्लान में फेल भी पास भी सोर्स बताते हैं, ‘वांगचुक और दीपके के बीच दरार पड़ गई। वांगचुक पर डील करने के आरोप लगे। BJP इसमें कामयाब रही, लेकिन आंदोलन को बढ़ने से नहीं रोक पाई। दूसरी तरफ, ABVP की तरह समाजवादी पार्टी की यूथ विंग एक्टिव हो गई। मैसेजिंग हुई कि हर जिले में 500 युवा इकट्ठे हों। दिल्ली में जंतर-मंतर के साथ बिहार, यूपी में भी प्रदर्शन की आग बढ़ने लगी। डेडलाइन से 2 दिन पहले हो गया इस्तीफा... आंदोलन भड़का तो RSS ने और स्पष्ट मैसेज भेजा। सरसंघचालक मोहन भागवत ने भी संदेश दिया कि जेन जी से संवाद करना चाहिए। हमारी पीढ़ी अलग थी। हम आदेश मानते थे। ये पीढ़ी संवाद चाहती है। जेन जी को उनके तरीके से समझाकर हम रास्ते में ला सकते हैं। भागवत ने मीडिया में ये बोलने से पहले ही संदेश PM और गृहमंत्री को भेज दिया था। RSS ने साफ कहा कि अब अगर ये आंदोलन बढ़ा तो सरकार संकट में आ जाएगी। सिर्फ मोदी, शाह और RSS को पता था कब इस्तीफा होगा 22 जुलाई की मीटिंग में BJP की तरफ से जितेंद्र सिंह और जेपी नड्डा भी थे। हालांकि, प्रधान का इस्तीफा हुआ तो इसकी जानकारी सिर्फ अमित शाह, नरेंद्र मोदी और RSS को थी। BJP दफ्तर के अंदर तो किसी को खबर तक नहीं थी। नड्डा और जितेंद्र सिंह को भी तुरंत हुए इस इस्तीफे की खबर बाद में पता चली। इससे पहले किसान आंदोलन से बैकफुट में आई थी सरकार इससे पहले किसान आंदोलन के हिंसक होने के बाद सरकार ने बिल वापस लिए थे। आंदोलनकारियों के सामने झुकने का ये दूसरा मौका है। सूत्र ने कहा, आप इसे झुकना कह रही हैं, मैं रणनीति कह रहा हूं। किसान आंदोलन की वजह से बिल वापस लिए गए। उसके बाद फिर कोई किसान आंदोलन दिखा क्या। अभी शांति जरूरी थी, सो इस्तीफा ले लिया। हालांकि कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।
12 साल पुरानी केंद्र की मोदी सरकार- सख्त, अडिग और किसी भी दबाव में न झुकने वाली। मामला चाहे CAA-NRC प्रोटेस्ट का हो या संसद में बीच सत्र से 146 विपक्षी सांसदों का सस्पेंशन या फिर राहुल गांधी की सदस्यता खत्म कर दी गई हो। सरकार किसी विरोध के आगे कमजोर पड़ते नहीं दिखी। किसी मंत्री पर इस्तीफे का दबाव बना, तो कहा गया- ‘भैया यहां इस्तीफे नहीं होते।’ लेकिन 12 साल में पहली बार कॉकरोच पार्टी ने मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ले लिया। इस पूरे घटनाक्रम से कौन-से 5 बड़े डेंट लगे और क्या सरकार इससे उबर पाएगी; जानेंगे भास्कर एक्सप्लेनर में… सवाल-1: क्या इस डेंट का असर आने वाले चुनावों पर पड़ेगा? जवाब: उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड की विधानसभाओं का कार्यकाल 2027 में खत्म हो रहा है। यहां फरवरी-मार्च 2027 में चुनाव हो सकते हैं। VoteVibe के फाउंडर और इलेक्शन एनालिस्ट अमिताभ तिवारी कहते हैं, ‘प्रोटेस्ट के दौरान सरकार ने राहुल गांधी या विपक्षी से कोई बातचीत नहीं की। उसने CJP के युवा नेताओं के साथ डील करके उनकी मांगें मान लीं, ताकि विपक्ष इसे अपनी जीत न दिखा सके। जबकि कॉकरोच पार्टी कोई चुनावी मंच नहीं, बल्कि यूथ प्लेटफॉर्म है। इसलिए सीधे तौर पर बीजेपी को कोई चुनावी नुकसान होता नहीं दिखता। विपक्ष को तब फायदा हो सकता था, जब उसने मांगें न मानी होतीं।' अमिताभ के मुताबिक, ‘राम मंदिर चंदाचोरी और फिर इस मामले में युवाओं के एकजुट प्रोटेस्ट से बीजेपी के सामने हिंदुत्व, हिंदू-मुस्लिम बाइनरी और राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों को लेकर एक नई चुनौती है, लेकिन बीजेपी को कोई चुनावी घाटा नहीं होगा। हर राज्य के चुनावी फैक्टर अलग हैं। पंजाब में सिख बनाम अन्य की राजनीति है। उत्तराखंड में मुस्लिम सिर्फ 15% है। वहां हिंदुत्व का मुद्दा नहीं हैं। उत्तर प्रदेश में भी जातीय फैक्टर ज्यादा रोल निभाता है।’ कांग्रेस को कवर करने वाले सीनियर जर्नलिस्ट आदेश रावल कहते हैं, ‘आने वाले विधानसभा चुनावों में इसका कोई असर नहीं दिखता है। पीएम मोदी के चेहरे या केंद्र सरकार के कामकाज के बजाय राज्यों में लोकल मुद्दे ज्यादा प्रभावी होते हैं।’ हालांकि आदेश ये भी कहते हैं कि युवाओं में जिस तरह का रोष है और वो जारी रहता है, तो उसका इलेक्टोरल टेस्ट 2029 के लोकसभा चुनाव में होगा। सवाल-2: क्या धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सरकार डैमेज कंट्रोल कर लेगी? जवाब: धर्मेंद्र के इस्तीफे के अलावा सरकार ने कॉकरोच पार्टी की बाकी दोनों मांगें भी मान ली हैं- प्रोटेस्टर्स पर कोई कानूनी कार्रवाई नहीं होगी और NEET पेपर लीक के चलते जान गंवाने वाले बच्चों के परिवारों को एक करोड़ का मुआवजा मिलेगा। आदेश रावल कहते हैं, ‘बीजेपी हिंदुत्व, राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों से जुड़ा विरोध होता, तो बिना किसी डैमेज के मैनेज कर लेती, लेकिन इस बार मुद्दा उनके सिलेबस से बाहर का था। इस्तीफा दिया नहीं गया, बल्कि छात्रों ने इस्तीफा लिया है। पीएम मोदी को 2 दिन में बार-बार झुकना पड़ा। सारी मांगें माननी पड़ीं। वैचारिक तौर पर कुछ डैमेज ऐसा जरूर हुआ है, सरकार का मनोबल भी टूटा है, लेकिन ये डैमेज कंट्रोल हो जाएगा। आदेश जोड़ते हैं कि बीजेपी अपनी भूल में तुरंत सुधार करना भी जानती है। देश के लोगों की याद्दाश्त बहुत लंबी नहीं है। सरकार संसद सत्र में परिसीमन बिल आदि ला सकती है, इससे पूरा ध्यान उस पर चला जाएगा। ------------------ ये खबर भी पढ़िए… इन 5 वजहों से घबराई सरकार, तब हुआ धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा; नहीं झुकते तो क्या हो जाता, आखिरकार आंदोलन खत्म शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार इस्तीफा दे ही दिया। जंतर-मंतर पर 35 दिन से कॉकरोच जनता पार्टी का अनशन, पीएम आवास के बाहर राहुल गांधी का धरना, संसद में रोज गूंजता हंगामा और देश-दुनिया के कई शहरों में हो रहे प्रदर्शन से सरकार दबाव में थी। पूरी खबर पढ़िए…
22 जुलाई रात 10.30 तक तय था कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे। गृहमंत्री अमित शाह की जिद और PM मोदी का सपोर्ट उन्हें कुर्सी पर टिकाए हुए था। 22 जुलाई की रात 10.30 बजे एक मीटिंग हुई और ये कुर्सी डगमगाने लगी। मीटिंग RSS और BJP के बीच थी। शाह अब भी जिद पर अड़े थे, लेकिन प्रधानमंत्री का सपोर्ट अब हट चुका था। RSS के 5 पदाधिकारियों की मोदी-शाह से मीटिंग RSS की तरफ से सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले, सह सरकार्यवाह अरुण कुमार और कृष्ण गोपाल के साथ दो और पदाधिकारी मौजूद थे। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह और जेपी नड्डा मौजूद थे। ये मीटिंग न BJP दफ्तर में हुई और न ही संघ कार्यालय में। वजह थी, इस मीटिंग और उसमें हुई बातों को सीक्रेट रखना। इस मीटिंग के बारे में किसी को खबर नहीं थी। सोर्स ने बस इतना कहा कि मीटिंग शामिल लोगों में से किसी एक के घर पर हुई थी। तय हुआ PM मोदी तुरंत रात में ही जेन जी के अंदाज में बात करें सोर्स ने बताया इसी मीटिंग में तय हुआ कि PM मोदी तुरंत यानी रात में ही जेन जी के सबसे फेवरेट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम के जरिए बात करेंगे। भाषा भी ऐसी हो जो जेन जी तक पहुंचे। ये तक तय हुआ कि PM डेकोरेट या निश्चिंत न दिखें। चेहरे पर चिंता और आंखों में नींद दिखे, ताकि मैसेज जाए कि वे स्टूडेंट्स की फिक्र में सोए नहीं। ऐसा इंस्टाग्राम की पोस्ट में झलका भी। इस्तीफे की स्क्रिप्ट भी तभी लिखी गई... संघ के प्रतिनिधियों ने अपनी सधी शैली में कहा कि धर्मेंद्र के इस्तीफे पर विचार करना चाहिए। आंदोलन भड़क रहा है। यूपी-पंजाब में चुनाव है। बिहार में सरकार अभी स्थिर नहीं हो पाई है। ऐसे में अगर ये आंदोलन वाकई नेपाल के जेन जी जैसा हुआ, तो सरकार कठिनाई से घिर जाएगी। आखिर में कहा गया कि ये संघ का स्पष्ट विचार है। इसके लिए 5 दिन यानी 27 जुलाई तक हमें देखना चाहिए कि पूरे देश से रिपोर्ट क्या आती है। अगर आंदोलन दब गया तो ठीक नहीं तो सोमवार को इस्तीफा दिलाना चाहिए। इन 5 दिनों में हमें पहले हर संभव कोशिश करनी चाहिए। जैसे- 1. सरकार और PM के पक्ष में नरेटिव तैयार करें। 2. ABVP के छात्रों को प्रोटेस्ट में शामिल करना ताकि वे आंदोलन में शामिल स्टूडेंट्स को समझाएं या अंदर ही अंदर आंदोलन के भीतर मतभेद पैदा करें। 3. आंदोलन में टूट डालें, जैसे विपक्ष अलग हो जाए, वांगचुक अलग और दीपके अलग। प्लान पर शुरू हुआ काम 1. दूसरे दिन रात में वांगचुक का अनशन तुड़वा दिया गया। ये मुश्किल नहीं था क्योंकि वांगचुक तैयार थे। 2. नरेटिव बनने लगा। ABVP के छात्रों तक मैसेज भेजना शुरू हुआ। 3. 25 जुलाई को ABVP से जुड़े करीब 150 स्टूडेंट्स प्रयागराज से दिल्ली पहुंचे। सुबह से जंतर-मंतर के प्रदर्शन में शामिल हो गए। जिला स्तर पर तो 23 जुलाई से ही छात्र एक्टिव हो गए थे। BJP प्लान में फेल भी पास भी सोर्स बताते हैं, ‘वांगचुक और दीपके के बीच दरार पड़ गई। वांगचुक पर डील करने के आरोप लगे। BJP इसमें कामयाब रही, लेकिन आंदोलन को बढ़ने से नहीं रोक पाई। दूसरी तरफ, ABVP की तरह समाजवादी पार्टी की यूथ विंग एक्टिव हो गई। मैसेजिंग हुई कि हर जिले में 500 युवा इकट्ठे हों। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की आग बुझ रही थी, लेकिन बिहार, यूपी में आग बढ़ने लगी। डेडलाइन से 2 दिन पहले हो गया इस्तीफा... आंदोलन भड़का तो RSS ने और स्पष्ट मैसेज भेजा। सरसंघचालक मोहन भागवत ने संदेश दिया कि जेन जी से संवाद करना चाहिए। हमारी पीढ़ी अलग थी। हम आदेश मानते थे। ये पीढ़ी संवाद चाहती है। जेन जी को उनके तरीके से समझाकर हम रास्ते में ला सकते हैं। ये संदेश सरकार और प्रधानमंत्री के नाम था। भागवत ने मीडिया में ये बोलने से पहले ही ये संदेश PM और गृहमंत्री को भेज दिया था। RSS ने साफ कहा कि अब अगर ये आंदोलन बढ़ा तो सरकार संकट में आ जाएगी। सिर्फ मोदी, शाह और RSS को पता था कि आज इस्तीफा होगा 22 जुलाई की मीटिंग में BJP की तरफ से जितेंद्र सिंह और जेपी नड्डा भी थे। हालांकि, प्रधान का इस्तीफा हुआ तो इसकी जानकारी सिर्फ अमित शाह, नरेंद्र मोदी और RSS को थी। BJP दफ्तर के अंदर तो किसी को खबर तक नहीं थी। नड्डा और जितेंद्र सिंह को भी तुरंत हुए इस इस्तीफे की खबर बाद में पता चली। अब कौन/ होगा शिक्षा मंत्री सूत्र के हिसाब से फिलहाल आंदोलन में विपक्ष, स्टूडेंट्स और सरकार के बीच की कड़ी बने जितेंद्र सिंह और जेपी नड्डा का नाम लिस्ट में सबसे आगे है। दोनों मंत्री विनम्र और बेदाग माने जाते हैं। पूरे आंदोलन में भी इन्होंने जिस तरह से मध्यस्थता का काम किया, उसकी सरहाना RSS और BJP के शीर्ष नेतृत्व ने की। इनके अलावा भी दावेदार हैं… इससे पहले किसान आंदोलन से बैकफुट में आई थी सरकार इससे पहले किसान आंदोलन के हिंसक होने के बाद सरकार ने बिल वापस लिए थे। आंदोलनकारियों के सामने झुकने का ये दूसरा मौका है। सूत्र ने कहा, आप इसे झुकना कह रही हैं, मैं रणनीति कह रहा हूं। किसान आंदोलन की वजह से बिल वापस लिए गए। उसके बाद फिर कोई किसान आंदोलन दिखा क्या। अभी शांति जरूरी थी, सो इस्तीफा ले लिया। हालांकि कहानी अभी खत्म नहीं हुई है।
शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार इस्तीफा दे ही दिया। जंतर-मंतर पर ३५ दिन से कॉकरोच जनता पार्टी का अनशन, पीएम आवास के बाहर राहुल गांधी का धरना, संसद में रोज गूंजता हंगामा और देश-दुनिया के कई शहरों में हो रहे प्रदर्शन। सभी की एक यही मांग थी। आखिर इतने दिनों से अड़े धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा क्यों दिया और अब आगे क्या होगा; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… i. जंतर-मंतर पर कॉकरोच पार्टी का प्रोटेस्ट: कॉकरोच जनता पार्टी 34 दिनों से जंतर-मंतर पर अनशन कर रही थी। 20-30 हजार युवा हर वक्त वहां मौजूद थे। 20 जुलाई के संसद मार्च के दौरान ‘पुलिस एक्शन’ के बाद भीड़ और बढ़ने लगी। ii. राहुल गांधी की अगुवाई में आक्रामक विपक्ष: 21 जुलाई को राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, अखिलेश यादव सहित कई विपक्षी नेता पीएम आवास के पास धरने पर बैठे। केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह मनाने पहुंचे ,तो राहुल ने कहा कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा नहीं होता, तब तक कोई चर्चा नहीं होगी। राहुल पीएम मोदी के माफीनामे पर भी अड़ गए। इसके बाद रोजाना राहुल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। पूरा विपक्ष इस मामले में एकट्ठा रहा। एक हफ्ते से संसद नहीं चलने दी। iii. पार्टी के भीतर नेताओं और सेलिब्रिटीज की उठती आवाजेंः बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने भी छात्रों की मांगों और चिंता का समर्थन किया। क्रिकेटर्स, बॉलीवुड सेलिब्रिटी, साउथ फिल्मों के स्टार्स, सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर भी युवाओं के विरोध प्रदर्शन से जुड़ने लगे थे। पेपर लीक को गंभीर मुद्दा बता रहे थे। क्या अब आंदोलन खत्म हो जाएगा? CJP प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि जब तक बाकी मांगो पर लिखित आश्वासन नहीं मिल जाती, हम हटने वाले नहीं हैं। दरअसल, कॉकरोच जनता पार्टी की जो 3 प्रमुख मांगे थी- धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, NEET पेपर लीक के कारण सुसाइड करने वाले छात्रों के परिवारवालों को मुआवजा और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई न हो। धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा होने के बाद जंतर-मंतर पर अभिजीत दीपके ने कहा- मंत्री का इस्तीफा तो हो गया है, लेकिन हमारी 2 और मांगे हैं। हम ऐसे नहीं जाएंगे। कॉकरोच एक बार घुसता है, तो निकलता नहीं है। जिन बच्चों ने सुसाइड किया उनके परिवार को एक करोड़ मुआवजा मिले। पुलिस वालों पर एक्शन होना चाहिए। ---------------- ये खबर भी पढ़िए… शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा: दीपके बोले- वे कहते थे इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते; लेकिन झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। NEET पेपर लीक केस में उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 36 दिन से जंतर-मंतर पर धरना दे रही है। पूरी खबर पढ़िए…

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