बंगाल चुनाव 2026: ममता या मोदी, क्या BJP होगी पास, TMC फेल, क्या कहते हैं ज्योतिष?
Bengal Election 2026 Prediction: वर्तमान में पश्चिम बंगाल की राजनीति और आगामी चुनावों को लेकर ज्योतिषियों के बीच गहन चर्चा हो रही है। चूंकि बंगाल में विधानसभा चुनाव के पहले और दूसरे चरण का मतदान हो चुका है, इसलिए भविष्यवाणियां मुख्य रूप से सत्ता के समीकरणों और राजनीतिक संघर्ष पर केंद्रित हैं। ज्योतिषियों का मत है कि ममता बनर्जी इस समय अपने राजनीतिक जीवन की सबसे कठिन 'अग्निपरीक्षा' से गुजर रही हैं। ग्रहों की चाल संकेत दे रही है कि सत्ता बचाने के लिए उन्हें अभूतपूर्व संघर्ष करना होगा और इसके परिणाम अत्यंत चौंकाने वाले हो सकते हैं। 1. सत्ता के लिए कड़ा संघर्ष (चुनावी परिदृश्य) पश्चिम बंगाल विधानसभा की कुल 294 सीटों के लिए मतदान हो चुका है, जिसके परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, ममता बनर्जी की कुंडली में शनि और राहु का प्रभाव उन्हें कड़ी चुनौती दे रहा है। कई विशेषज्ञ इसे 'कांटे की टक्कर' मान रहे हैं। राजनीतिक धरातल पर भी 'बाहरी बनाम बंगाली' का मुद्दा प्रभावी है, किंतु कुछ वर्गों का मानना है कि सत्ता विरोधी लहर, हिंसा और घुसपैठ जैसे मुद्दे इस बार तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राह कठिन बना रहे हैं। लोगों का मानना है कि इस बार परिवर्तन होकर रहेगा। हालांकि जहां कुछ आकलन TMC की वापसी की संभावना जताते हैं, वहीं अधिकांश ज्योतिष विश्लेषण और भविष्यवाणियां सत्ता परिवर्तन की ओर संकेत कर रही हैं। 2. शनि का प्रभाव और 'खप्पर योग' वर्ष 2026 में बन रहे विशिष्ट खगोलीय योगों का प्रभाव बड़े राजनेताओं पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। ममता बनर्जी की राशि और कुंडली के अनुसार, शनि का गोचर मानसिक तनाव और अपनों से विश्वासघात के प्रबल योग बना रहा है। ग्रहों की क्रूर दृष्टि के कारण ज्योतिषियों ने उन्हें न केवल राजनीतिक मोर्चे पर, बल्कि स्वास्थ्य के प्रति भी विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। 3. आक्रामक तेवर, विवाद और कानूनी बाधाएं बुध के मीन राशि में होने (नीच का बुध) और मंगल के प्रभाव के कारण यह अनुमान लगाया जा रहा है कि उनकी वाणी और बयानबाजी विवादों को जन्म दे सकती है। उनका अत्यधिक आक्रामक रुख समर्थकों को उत्साहित तो करेगा, किंतु विपक्ष को तीखे प्रहार करने का अवसर भी प्रदान करेगा। इसके अतिरिक्त, ग्रहों की स्थिति उनके कानूनी पचड़ों में फंसने की ओर भी संकेत कर रही है। 4. प्रमुख ज्योतिषियों के मत और अनुमान सोशल मीडिया और विभिन्न प्लेटफार्मों पर कई प्रसिद्ध ज्योतिषियों ने अपने विश्लेषण साझा किए हैं: एस्ट्रो शर्मिष्ठा: उनके अनुसार ममता बनर्जी यह चुनाव हार रही हैं और भाजपा सत्ता में आएगी, हालांकि शुरुआती ढाई वर्ष नई सरकार के लिए चुनौतियों भरे रहेंगे। ज्योतिष वरुण प्रकाश: इनका भी मानना है कि ममता बनर्जी और उनकी पार्टी के लिए इस बार पराजय के योग बन रहे हैं। संजीव आनंद (Astro SantJi): उन्होंने 40-60 के अनुपात में भाजपा की जीत की भविष्यवाणी की है। उनके अनुसार भाजपा को 150 से 160 सीटें प्राप्त हो सकती हैं। संत बेत्रा: इनका विश्लेषण कहता है कि बंगाल की कुंडली और मुख्यमंत्री की राशि पर शनि-राहु का नकारात्मक प्रभाव 'सत्ता परिवर्तन' का प्रबल कारक बनेगा। सुरेश कौशल, अरविंद त्रिपाठी, आचार्य रीना शर्मा और आचार्य शैलेश तिवारी: इन सभी विशेषज्ञों ने भाजपा की जीत की संभावना को अधिक प्रबल बताया है। इसका आधार है मोदी की मंगल की दशा। निशांत राजवंशी और एस्ट्रो राज: ग्रहों के गोचर के आधार पर इनका अनुमान है कि भाजपा 160-162 सीटों के साथ सरकार बनाने में सफल होगी। अधिकतर ज्योतिषियों का यदि विश्लेषण है कि भाजपा प्रचंड बहुमत से बंगाल में जीत रही है। 5. वैकल्पिक ज्योतिषीय दृष्टिकोण उपरोक्त भविष्यवाणियों के विपरीत, कुछ ज्योतिषियों का यह भी मानना है कि ममता बनर्जी की कुंडली अत्यंत शक्तिशाली है और वे निश्चित रूप से सत्ता में वापसी करेंगी। इन विश्लेषकों के अनुसार, उन्हें 160 से 175 सीटें मिल सकती हैं। इसके पीछे 'बाहरी बनाम बंगाली' की भावना, रणनीतिक गठबंधन और जमीनी स्तर पर तृणमूल कांग्रेस के प्रति मतदाताओं का एक विशिष्ट प्रभाव या भय प्रमुख कारण बताया जा रहा है।
बंगाल चुनाव 2026: BJP की जीत पर क्यों मच सकता है बवाल? ज्योतिषीय संकेत
बंगाल की राजनीति इस समय एक बड़े ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी है। ज्योतिषियों और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि भाजपा 2026 में सत्ता में आती है, तो यह केवल सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राज्य के सामाजिक और प्रशासनिक ढांचे में एक 'बड़ा बदलाव' होगा। राजनीतिक पंडितों और कुछ प्रमुख ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर, सत्ता परिवर्तन के शुरुआती ढाई साल (30 महीने) में निम्नलिखित कार्यों और स्थितियों की चर्चा सबसे अधिक हो रही है। ज्योतिष विश्लेषण: 1. कुछ प्रसिद्ध ज्योतिषियों (जैसे विवेक त्रिपाठी, शर्मीष्ठा धास और विभुदानंद सत्पथी आदि) की मेदिनी ज्योतिष की गणना के अनुसार बंगाल की कुंडली में राहु का प्रभाव उथल-पुथल का संकेत देता है। यदि सत्ता परिवर्तन होता है, तो शुरुआती ढाई साल शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या के समान भारी हो सकते हैं, जिसमें नई सरकार को भीतर और बाहर दोनों तरफ से भारी विरोध झेलना पड़ सकता है। ग्रहों की चाल बता रही है कि 2026 में 'राजयोग' का स्थानांतरण होने की प्रबल संभावना है, जो लंबे समय तक चलने वाले 'सत्ता के एकाधिकार' को तोड़ सकता है। 2. मेदिनी ज्योतिष के अनुसार संपूर्ण बंगाल (बांग्लादेश सहित) में बवाल ही चल रहा है। यदि हम इंटरनेट से प्राप्त बंगाल की अपुष्ट कुंडली पर नजर डालें तो तुला लग्न की कुंडली में लग्न में सूर्य बुध की युति, धन भाव में शनि और राहु की युति, पंचम में मंगल, अष्टम में केतु और 12वें भाव में चंद्र, गुरु और शुक्र की युति है। बुध की महादशा 2016 से चल रही है। इस दशा के कारण वहां लगातार स्थिति बिगड़ती गई। बंगाल अभी तक कभी सही नहीं रह पाया है। आजादी के बाद जिस पार्टी ने सत्ता संभाली वह चीन के इशारे पर काम करती रही है। आजादी के पहले भी यहां पर कभी भी शांति नहीं रही और उद्योग धंधे की कभी यहां पनप नहीं पाए। सांप्रदायिकता और धर्मांतरण यहां हमेशा हावी रहा। लोग गरीबी से कभी उभर नहीं पाए। यहां पर शनि और राहु का दूसरे भाव में रहना कुटूंब में कलह को जन्म देता है और धन का नाश भी करता है। लोग एक दूसरे पर कभी विश्वास नहीं करते हैं और समाज में अराजकता बनी रहती है। 1. प्रशासनिक और संवैधानिक बदलाव भ्रष्टाचार पर प्रहार: विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा शासन के शुरुआती समय में 'स्कूल भर्ती घोटाला' और अन्य कथित घोटालों की जांच तेज होगी। कई बड़े नामों पर कानूनी शिकंजा कसना पहले ढाई साल की प्राथमिकता हो सकती है। NRC और CAA का कार्यान्वयन : भाजपा के घोषणापत्र और केंद्रीय नेताओं के बयानों के अनुसार, बांग्लादेशी घुसपैठ के मुद्दे पर सख्ती और शरणार्थियों को नागरिकता देने की प्रक्रिया (CAA) को जमीनी स्तर पर तेजी से लागू किया जाएगा। 2. कानून-व्यवस्था और 'बवाल' की आशंका चुनावी हिंसा का अंत: भाजपा का दावा है कि उनके आते ही 'सिंडिकेट राज' और राजनीतिक हिंसा खत्म होगी। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषक चेतावनी देते हैं कि सत्ता परिवर्तन के शुरुआती दौर में पुराने और नए कार्यकर्ताओं के बीच जमीनी वर्चस्व को लेकर 'बवाल' या टकराव की स्थितियां बन सकती हैं, जिसे संभालना नई सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी। 3. केंद्रीय योजनाओं का विस्तार आयुष्मान भारत और किसान सम्मान निधि: अब तक बंगाल में रुकी हुई या सीमित रूप से लागू केंद्रीय योजनाओं को पूरी तरह से लागू किया जाएगा। सीधे लाभ का हस्तांतरण (DBT): टीएमसी की 'लक्ष्मी भंडार' जैसी लोकप्रिय योजनाओं के मुकाबले भाजपा अपनी नई और शायद अधिक राशि वाली महिला केंद्रित योजनाएं लाने की कोशिश करेगी। 4. औद्योगिक पुनरुद्धार बंद कारखानों को खोलना: विश्लेषकों के अनुसार, शुरुआती ढाई साल में सरकार का ध्यान निवेश आकर्षित करने और टाटा नैनो जैसे विवादों के कारण खराब हुई बंगाल की 'इमेज' को सुधारने पर होगा। आईटी सेक्टर और विनिर्माण (Manufacturing) पर जोर दिया जा सकता है। 5. सांस्कृतिक और पहचान की राजनीति सोनार बांग्ला का मॉडल: 'बंगाली अस्मिता' और 'हिंदुत्व' के मेल से एक नया सांस्कृतिक मॉडल पेश किया जाएगा। दुर्गा पूजा और अन्य त्योहारों के सरकारी आयोजनों में बदलाव देखने को मिल सकते हैं। 6. अवैध प्रवासियों पर कार्रवाई भाजपा के सत्ता में आने पर, राज्य में अवैध प्रवासियों को चिन्हित कर बाहर निकालने (Rooted Out) की प्रक्रिया शुरू हो सकती है, जो एक बड़ा मुद्दा बन सकता है। शनि का मेष राशि में गोचर (2027-2028) पूर्वी भारत में बड़े सांप्रदायिक मुद्दों, प्रवासन और सत्ता में बड़े बदलाव ला सकता है। निष्कर्ष: विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भाजपा आती है, तो शुरुआती ढाई साल 'सफाई अभियान' और 'नींव रखने' (Foundation building) के होंगे। इस दौरान राजनीतिक अस्थिरता और विरोध प्रदर्शनों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, जिसे लोग 'बवाल' कह रहे हैं।
मध्यप्रदेश में मसाला फसलों, गार्डनिंग और फूड प्रोसेसिंग में कई संभावनाएं हैं। इनमें रोजगार के नए-नए अवसर तलाशे जा सकते हैं। इन्हीं संभावनाओं के मद्देनजर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 29 अप्रैल को उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग की योजनाओं-फील्ड गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि उद्यानिकी फसलें छोटी जगह से बड़ी कमाई करने का प्रभावी माध्यम हैं। प्रदेश के ज्यादातर किसानों को इससे जोड़ा जाए। किसानों को सीज़नल और उद्यानिकी फसलों के उत्पादन के लिए प्राकृतिक खाद का उपयोग कर जैविक खेती से जुड़ने के लिए प्रेरित करें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने और कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उद्यानिकी फसलों के माध्यम से किसानों की वास्तविक आय बढ़ाई जाए। किसानों की आय वृद्धि और उनके जीवन में खुशहाली लाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से उद्यानिकी फसलों और इनके जोत रकबे का साल-दर-साल विस्तार किया जाए। उन्होंने कहा कि हमारी उद्यानिकी एवं मसाला फसलों की अंतर्राष्ट्रीय मांग बढ़ रही है। इसकी पूर्ति के लिए बाजार तलाशें, उद्यानिकी उत्पादों की भरपूर ब्रांडिग करें। हमारे यहां औषधीय गुणों से भरपूर फसलों की खेती भी बहुतायत में की जाती है। इनका बड़ा स्कोप है। औषधि निर्माण के लिए जरूरी इन फसलों की इन्टरनेशनल मार्केट में मांग अनुसार आपूर्ति के लिए पूरी सप्लाई चेन तैयार की जाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में हर साल नए-नए आयुर्वेदिक महाविद्यालय एवं अस्पताल खोले जा रहे हैं। इनमें देशी-आयुर्वेदिक दवाईयों की आपूर्ति में प्रदेश की औषधीय फसलों एवं उप-उत्पादों का भरपूर उपयोग किया जाए। मसाला फसलों के उत्पादन में हम पूरे देश में पहले स्थान पर हैं। यह उपलब्धि हमें इस क्षेत्र में और भी बेहतर करने के लिए प्रेरित करती है। विभाग की इस बैठक में बताया गया कि सिंहस्थ-2028 के मद्देनजर उज्जैन में फूलों की खेती को प्रोत्साहन और विस्तार किया जा रहा है। इसके लिए उज्जैन में सेंटर फॉर एक्सीलेंस फ्लोरीकल्चर की स्थापना की जा रही है। सेंटर की स्थापना के लिए उज्जैन शहर के पास एक गांव में 19 एकड़ जमीन चिह्नित कर ली गई है। केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजकर समुचित समन्वय भी किया जा रहा है। बैठक में बताया गया कि मसाला फसलों का देश में उत्पादन 129.52 लाख मीट्रिक टन है। प्रदेश में इसका उत्पादन 57.72 लाख मीट्रिक टन है। इस तरह प्रदेश का देश में पहला स्थान है। पुष्प का देश में 32.26 लाख मी. टन और प्रदेश में 4.88 लाख मी. टन उत्पादन है। पुष्प उत्पादन में प्रदेश का देश में तीसरा स्थान है। सब्जी का देश में 2177.96 लाख मी. टन और प्रदेश में 259.52 लाख मी. टन उत्पादन है। इसमें प्रदेश का तीसरा स्थान है। फल का उत्पादन देश में 1176.48 लाख मी. टन और प्रदेश में 102.44 लाख मी. टन है। प्रदेश का इसमें चौथा स्थान है। मखाना की खेती का बढ़ाएंगे रकबा- बैठक में बताया गया कि प्रदेश में मखाना की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश के 14 जिलों, नर्मदापुरम, सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, जबलपुर, कटनी, मंडला, डिंडोरी, रीवा, शहडोल, रायसेन, अनूपपुर, पन्ना और सतना में मखाना उत्पादन को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। मखाना उत्पादन का रकबा इस वर्ष बढ़ाकर 85.00 हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। केंद्र सरकार द्वारा मखाना उत्पादन की कुल परियोजना लागत (एक इकाई) पर 40 प्रतिशत तक की अनुदान सहायता दी जाती है। जून में भोपाल में होगा आम महोत्सव- बैठक में बताया गया कि प्रदेश में इसी वर्ष जून माह में भोपाल में आम महोत्सव, जुलाई में खरगौन में मिर्च महोत्सव, सितम्बर में बुरहानपुर में केला महोत्सव, अक्टूबर में इंदौर में सब्जी महोत्सव, नवम्बर में ग्वालियर में अमरूद महोत्सव मनाया जाएगा। साथ ही दिसंबर में ग्वालियर में मधुमक्खी पालन व्यवसाय के प्रोत्साहन एवं जागरूकता के लिए एक कार्यशाला-सेमिनार भी आयोजित किए जाएंगे। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विभागीय अधिकारियों को संतरा महोत्सव भी आयोजित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आम महोत्सव के दौरान प्रदेश के सभी दस संभागों में आम के दस बाग लगाने के प्रयास किए जाएं। केला महोत्सव में केले के तने से रेशे बनाने वाले उद्यमियों-उद्योगपतियों को जोड़ा जाए। सब्जी महोत्सव के दौरान नागरिकों को अपने घरों में किचन गार्डन लगाने के लिए जागरूक एवं प्रोत्साहित किया जाए। 40 नर्सरियां हो रहीं हाईटेक- इस बैठक में बताया गया कि प्रदेश में प्रेसराईज इरीगेशन वाले जिलों में 15 हज़ार हेक्टेयर रकबे में सूक्ष्म सिंचाई क्षेत्र का विस्तार भी किया जा रहा है। दो स्मार्ट बीज फार्म का विकास, सागर में झिला फार्म, देवास में कन्नौद फार्म विकसित किया जा रहा है। उद्यानिकी विभाग के अधीन 40 नर्सरियों का उन्नयन कर इन्हें हाईटेक बनाया जा रहा है। धार जिले के बदनावर के समीप रूपाखेड़ा गांव में युवाओं द्वारा फूलों की खेती की जा रही है। यह गांव मध्यप्रदेश में स्विट्जरलैंड के किसी गांव की तरह फूलों की खेती में विशेष पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों से कहा कि प्रदेश की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां उद्यानिकी फसलों के लिए बेहद अनुकूल हैं। इसका पूरा लाभ उठाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे क्षेत्रवार विशेष फसलों की पहचान कर किसानों को उनकी खेती के लिए प्रोत्साहित करें। उद्यानिकी फसलों के रकबे में तेजी से वृद्धि के लिए किसानों को जोड़कर एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाए। साथ ही किसानों को आधुनिक तकनीक, उन्नत बीज, सिंचाई सुविधाएं और बाजार उपलब्ध कराने के लिए कृषि एवं उद्यानिकी से सम्बद्ध विभागों के बीच बेहतर समन्वय भी स्थापित किया जाए। किसानों को उद्यानिकी फसलों से जोड़ना जरूरी- मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसान कल्याण वर्ष के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए उद्यानिकी क्षेत्र में ठोस और परिणामोन्मुखी कदम उठाए जाएं। पारम्परिक खेती के साथ-साथ किसानों को फल, फूल, सब्जी, मसाला, औषधीय एवं सुगंधित फसलों की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसानों को ऐसी फसलों से जोड़ना जरूरी है, जो उन्हें त्वरित और अधिक नकद आय प्रदान कर सकें। खेती को लाभ का व्यवसाय बनाने के लिए किसानों को जोड़कर सभी उपाय किए जाएं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता लाकर इन्हें और प्रभावी बनाएं। योजनाओं का लाभ हर जरूरतमंद और समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। सरकार की योजनाओं का लाभ पाने के लिए किसानों को किसी भी प्रकार की कठिनाई न होने पाए। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य योजनाओं का जमीन पर प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना भी है। उन्होंने कहा कि उद्यानिकी फसलों एवं इनके उत्पादों के प्रसंस्करण को बढ़ावा देकर किसानों को बेहतर मूल्य दिलाया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि खाद्य प्रसंस्करण उद्योग के विकास से किसानों की आय तो बढ़ेगी ही, रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। उन्होंने इस दिशा में छोटे-छोटे स्तर पर प्रसंस्करण इकाइयों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। किसानों की आय बढ़ाना प्राथमिकता- मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाना ही हमारी प्राथमिकता है। इसके लिए हम हर संभव प्रयास करेंगे। राज्य सरकार कृषि को आधुनिक, लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दिशा में ठोस कदम उठा रही है। उद्यानिकी और खाद्य प्रसंस्करण से हम किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने की ओर बढ़ेंगे। अधिकारियों द्वारा बताया गया कि प्रदेश में उद्यानिकी क्षेत्र का विस्तार किया जा रहा है। उद्यानिकी फसलों की खेती करने वाले किसानों को विभागीय अनुदान योजनाओं की सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि किसानों को आधुनिक खेती-बाड़ी के लिए प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है। बैठक में सामाजिक न्याय, उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा समेत उद्यानिकी विभाग तथा अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।
फैंस का इंतजार हुआ खत्म, इस दिन बड़े पर्दे पर दस्तक देगी सोहम शाह की 'तुम्बाड 2'
सोहम शाह की फिल्म 'तुम्बाड 2' का फैंस लंबे समय से इंतजार कर रहे हैं। अब मेकर्स ने आखिरकार इसकी रिलीज डेट का एलान कर दिया है। यह मच-अवेटेड सीक्वल 3 दिसंबर 2027 को रिलीज होगा, जिससे फैंस को अब फिल्म की एक तय तारीख मिल गई है। यह खुलासा हफ्तों के सस्पेंस के बाद हुआ है, जिसमें टीम मोशन पोस्टर और फिल्म की वापसी से जुड़े छोटे अपडेट्स के जरिए दर्शकों को एक्साइटेड कर रही थी। यह घोषणा साल 2024 में 'तुम्बाड' के दोबारा रिलीज होने और बॉक्स ऑफिस पर मिली शानदार सफलता के बाद की गई है, जिसने एक बार फिर इस फिल्म को चर्चा में ला दिया था। A post shared by Sohum Shah (@shah_sohum) 'तुम्बाड' के साथ सोहम शाह ने भारतीय सिनेमा में लोक कथाओं पर आधारित हॉरर फिल्मों के लिए एक अलग जगह बनाई थी और पिछले कुछ सालों में इस फिल्म की लोकप्रियता लगातार बढ़ी है। अब 'तुम्बाड 2' के साथ मेकर्स उस दुनिया को और आगे ले जाने की तैयारी में हैं, जहाँ फिल्म की कहानी और स्केल को बड़ा बनाया जाएगा, लेकिन साथ ही वही माहौल बरकरार रखा जाएगा जिसने पहली फिल्म को इतना खास बनाया था। सीक्वल के बारे में बात करते हुए सोहम शाह ने कहा, 'तुम्बाड' हमेशा से मेरे लिए बहुत खास रही है और 'तुम्बाड 2' के साथ हमारा मकसद उस दुनिया को और भी गहराई और विस्तार के साथ आगे ले जाना है। हम उसी पौराणिक कथा और माहौल को और बड़ा बना रहे हैं जिससे दर्शक जुड़े थे, साथ ही कहानी की नई परतों को भी टटोला जा रहा है। यह कुछ ऐसा होगा जो अपनी आत्मा में तो जाना-पहचाना लगेगा, लेकिन इसके सामने आने का तरीका बिल्कुल नया होगा। पेन स्टूडियोज के डॉ. जयंतीलाल गड़ा ने अपनी बात जोड़ते हुए कहा, 'तुम्बाड 2' को एक और भी बड़े सिनेमाई अनुभव के तौर पर देखा जा रहा है, जिसकी कहानी इस यूनिवर्स को और गहरा बनाएगी और दर्शकों को पूरी तरह बांधे रखेगी। यह फिल्म उस तरह की शानदार और हाई-क्वालिटी कहानी का उदाहरण है जिसे पेन स्टूडियोज दर्शकों तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। डायरेक्टर आदेश प्रसाद ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, इस कहानी को आगे ले जाना रोमांचक भी रहा और चुनौतीपूर्ण भी, खासकर इसलिए क्योंकि पहली फिल्म की अपनी एक बहुत मजबूत पहचान है। हमारा पूरा ध्यान उसकी आत्मा को बचाए रखने पर रहा है, साथ ही हम कहानी और विजुअल की दुनिया को और भी आगे ले जा रहे हैं। हम कुछ ऐसा बनाने की कोशिश कर रहे हैं जो अपनी जड़ों से तो जुड़ा हो, लेकिन साथ ही दर्शकों को एक नया और जादुई अनुभव भी दे। 'तुम्बाड 2' का निर्देशन आदेश प्रसाद कर रहे हैं और इसका नेतृत्व एक्टर-प्रोड्यूसर सोहम शाह अपने बैनर 'सोहम शाह फिल्म्स' के तहत कर रहे हैं। उनके साथ दिग्गज प्रोड्यूसर डॉ. जयंतीलाल गड़ा की कंपनी 'पेन स्टूडियोज' भी जुड़ी है, जिन्होंने 'RRR' और 'गंगूबाई काठियावाड़ी' जैसी ब्लॉकबस्टर समेत 3000 से ज्यादा फिल्मों पर काम किया है। फिल्म का डिस्ट्रीब्यूशन 'पेन मरुधर' द्वारा किया जाएगा।
पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढने संबंधी आदेश फर्जी : सरकार
नई दिल्ली। सरकार ने कहा है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढोतरी से संबंधित सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा आदेश फर्जी है और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने इस तरह का कोई आदेश जारी नहीं किया है। सोशल मीडिया पर वायरल पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के इस कथित आदेश में […] The post पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढने संबंधी आदेश फर्जी : सरकार appeared first on Sabguru News .
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 सिर्फ सरकार बदलने का नहीं, बल्कि बंगाल की राजनीतिक पहचान—क्षेत्रीय बनाम राष्ट्रीय—के टकराव का भी इम्तिहान होगा। अगर 2026 में ममता बनर्जी हारती हैं, तो यह सिर्फ एक मुख्यमंत्री की हार नहीं होगी— यह बंगाल की राजनीतिक दिशा बदलने ...
इंटरनेशनल डांस डे: अल्लू अर्जुन से लेकर रितिक रोशन तक, भारत के टॉप ट्रेंडसेटर डांसिंग सुपरस्टार्स
भारतीय मनोरंजन इंडस्ट्री में डांस हमेशा से फिल्मों का एक बहुत ही जरूरी हिस्सा रहा है। शुरुआत से ही हर दशक ने ऐसे कमाल के टैलेंटेड एक्टर्स देखे हैं जिन्होंने अपनी डांसिंग स्किल से पूरे देश को थिरकाया है। अपने हुक स्टेप्स के साथ ट्रेंड सेट करते हुए वे ऐसे सेंसेशन बन गए हैं जिन्हें पूरा देश बहुत प्यार करता है। इस इंटरनेशनल डांस डे पर आइए नजर डालते हैं उन टॉप 5 भारतीय सुपरस्टार्स पर जिन्होंने अपने डांस से लगातार ट्रेंड सेट किए हैं। अल्लू अर्जुन अल्लू अर्जुन वाकई में भारतीय सिनेमा के सबसे एनर्जेटिक, स्टाइलिश और डायनेमिक डांसर्स में से एक हैं, जिन्होंने अपने कमाल के डांसिंग स्किल्स से हमेशा दर्शकों को हैरान किया है। हर बार जब वे स्क्रीन पर आते हैं, तो कुछ हटकर लेकर आते हैं और अपने हाई-एनर्जी, तेज लेकिन सटीक डांस मूव्स से पूरे देश को दंग कर देते हैं। उन्होंने अपने डांस से पैन इंडिया लेवल पर एक गहरा प्रभाव पैदा किया है। स्क्रीन पर वे जो चार्म लेकर आते हैं, वो उन्हें देश के नंबर 1 डांसिंग स्टार के रूप में सबसे अलग खड़ा करता है। NTR अपनी कमाल के टैलेंट के साथ NTR भारत के सबसे बेहतरीन डांसर्स की लिस्ट में एक खास जगह रखते हैं। अपनी परफॉरमेंस में वे जिस तरह से चेहरे के हाव-भाव और हाई-एनर्जी का तालमेल बिठाते हैं, वह वाकई बेमिसाल है। उनका हर कदम एक जादू की तरह लगता है। साउथ इंडियन डांस स्टाइल के एक अनोखे मेल के साथ उन्होंने खुद की एक विशिष्ट पहचान बनाई है। रणवीर सिंह जब डांस में असली एनर्जी और स्टाइल की बात आती है, तो रणवीर सिंह का नाम सबसे ऊपर आता है। वे एक सच्चे बॉलीवुड डांसर की भावना का प्रतिनिधित्व करते हैं। अपनी संक्रामक ऊर्जा और सहज स्वैग के साथ, वे हर किसी को अपने हुक स्टेप्स पर थिरकने के लिए मजबूर कर देते हैं। उनकी जीवंत उपस्थिति और यूनिक स्टाइल उन्हें इस पीढ़ी के सबसे अलग डांसर्स में से एक बनाती है। रितिक रोशन 'डांस के भगवान' कहे जाने वाले रितिक रोशन का एक ऐसा स्टाइल है जिसे पूरा देश फॉलो करता है। उनकी स्मूथनेस, फ्लेक्सिबिलिटी और चार्म ने हमेशा दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया है। हर बार जब उनकी फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज होती है, तो दर्शक उनके नए डांस स्टाइल का बेसब्री से इंतजार करते हैं, जो अक्सर एक ट्रेंड बन जाता है। वे एक ऐसे सुपरस्टार हैं जिन्होंने स्क्रीन पर डांस को लगातार एक नई परिभाषा दी है। यश यश अपने डांस के जरिए स्क्रीन पर जो चार्म लाते हैं, वह वाकई में बहुत अलग है। उनकी एनर्जी और मूव्स एक ऐसा पावरफुल कॉम्बिनेशन बनाते हैं जो म्यूजिक के साथ पूरी तरह फिट बैठता है। वे जिस बेमिसाल तीव्रता (intensity) के साथ अपनी परफॉरमेंस देते हैं, उससे उनके डांस स्टेप्स को बड़े पैमाने पर फॉलो किया जाता है और वे एक सेंसेशन बन जाते हैं।
माता छिन्नमस्तका की साधना कैसे करें? जानें 5 चौंकाने वाले लाभ
दस महाविद्याओं में छठी महाविद्या माता छिन्नमस्तका की साधना अत्यंत शक्तिशाली और शीघ्र फलदायी मानी जाती है। इन्हें 'प्रचंड चण्डिका' भी कहा जाता है। इनकी साधना आत्म-नियंत्रण, अहंकार के नाश और कुंडलिनी जागरण के लिए की जाती है। चूंकि यह एक उग्र साधना है, इसलिए इसे बिना किसी योग्य गुरु के मार्गदर्शन के शुरू नहीं करना चाहिए। माता छिन्नमस्तका की साधना कैसे करें? (विधि) समय और स्थान: इनकी साधना मुख्य रूप से अर्धरात्रि (निशीथ काल) में की जाती है। एकांत स्थान या किसी सिद्ध शक्तिपीठ पर साधना करना उत्तम होता है। वस्त्र और आसन: साधक को नीले या लाल रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए और कुशा या ऊनी आसन का प्रयोग करना चाहिए। यंत्र और चित्र: सामने माता छिन्नमस्तका का यंत्र या चित्र स्थापित करें। माता के इस स्वरूप में वे अपना ही कटा हुआ सिर हाथ में लिए हैं और उनकी गर्दन से निकली रक्त की तीन धाराएं उनकी सखियां (जया और विजया) और वे स्वयं पान कर रही हैं। मंत्र जप: माता के विशेष बीज मंत्रों का जप किया जाता है। मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैरोचनीये हूं हूं फट् स्वाहा॥ (गुरु से परामर्श अनिवार्य है) सावधानी: इस साधना के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन, सात्विक भोजन और मन की पवित्रता अत्यंत आवश्यक है। भयभीत होने वाले व्यक्तियों को यह साधना नहीं करनी चाहिए। साधना के 5 मुख्य लाभ माता छिन्नमस्तका की कृपा जिस साधक पर होती है, उसे ये लाभ प्राप्त होते हैं: 1. मानसिक शक्तियों का विकास: माता छिन्नमस्तका 'मस्तिष्क' और 'विचारों' की अधिष्ठात्री हैं। इनकी साधना से साधक की बुद्धि अत्यंत तीव्र हो जाती है और उसमें भविष्य को भांपने की शक्ति (Intuition) आ जाती है। 2. कुंडलिनी जागरण: योग मार्ग में यह साधना बहुत महत्वपूर्ण है। यह 'मूलाधार' से 'सहस्रार' चक्र तक ऊर्जा के प्रवाह को सुगम बनाती है, जिससे आध्यात्मिक उन्नति तेजी से होती है। 3. शत्रुओं पर विजय: 'प्रचंड चण्डिका' के रूप में वे साधक के बाहरी और आंतरिक (काम, क्रोध, लोभ) दोनों प्रकार के शत्रुओं का नाश करती हैं। कोर्ट-कचहरी या विवादों में सफलता मिलती है। 4. कर्ज से मुक्ति और आर्थिक लाभ: माता की कृपा से दरिद्रता का नाश होता है। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से कर्ज में डूबा है, तो विधि विधान से की गई साधना धन आगमन के द्वार खोलती है। 5. अहंकार का नाश और मोक्ष: माता का कटा हुआ सिर इस बात का प्रतीक है कि ज्ञान प्राप्ति के लिए अहंकार का त्याग आवश्यक है। यह साधना साधक को माया के बंधनों से मुक्त कर मोक्ष की ओर ले जाती है। चेतावनी: माता छिन्नमस्तका की साधना 'वाम मार्ग' और 'दक्षिण मार्ग' दोनों से होती है। गृहस्थों को हमेशा सौम्य या दक्षिण मार्ग से ही पूजा करनी चाहिए और तामसिक क्रियाओं से दूर रहना चाहिए।
IPL 2026 : वैभव सूर्यवंशी ने फिर किया ऑरेंज कैप पर कब्ज़ा
नई दिल्ली। जब भी पंजाब किंग्स या राजस्थान रॉयल्स का मैच IPL 2026 में होता है, ऑरेंज कैप तालिका में बड़े बदलाव देखने को मिलते हैं। मंगलवार रात न्यू चंडीगढ़ में जब दोनों टीमें आमने-सामने हुईं, तब भी यही देखने को मिला। ऑरेंज कैप वैभव सूर्यवंशी इस सीजन सबसे ज़्यादा रन बनाने वालों की सूची […] The post IPL 2026 : वैभव सूर्यवंशी ने फिर किया ऑरेंज कैप पर कब्ज़ा appeared first on Sabguru News .
श्रीलंका क्रिकेट के अध्यक्ष शम्मी सिल्वा ने बोर्ड में बदलाव के बाद पद छोड़ा
कोलंबो। श्रीलंका क्रिकेट (एसएलसी) के लंबे समय से मुश्किलों में घिरे अध्यक्ष शम्मी सिल्वा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह फैसला इस लिये लिया गया क्योंकि देश के राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके ने नेशनल क्रिकेट बॉडी में बदलाव पर जोर दिया था। सिल्वा के साथ के साथ बोर्ड के अन्य अधिकारियों ने […] The post श्रीलंका क्रिकेट के अध्यक्ष शम्मी सिल्वा ने बोर्ड में बदलाव के बाद पद छोड़ा appeared first on Sabguru News .
प्रधानमंत्री मोदी ने हरदोई में गंगा एक्सप्रेसवे किया राष्ट्र को समर्पित
हरदोई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को यहां 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया और इसी के साथ ही उत्तर प्रदेश के अवसंरचना विकास में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया। यह राज्य की कनेक्टिविटी और आर्थिक महत्वाकांक्षाओं में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री ने स्थल पर एक पौधा लगाया और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ […] The post प्रधानमंत्री मोदी ने हरदोई में गंगा एक्सप्रेसवे किया राष्ट्र को समर्पित appeared first on Sabguru News .
भवानीपुर में शुभेंदु-तृणमूल समर्थकों में झड़प, पुलिस का हल्का लाठीचार्ज
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के मतदान के दौरान भवानीपुर में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार एवं नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के दौरे के समय बुधवार को भाजपा और तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तनाव बढ़ गया, जिसके बाद सुरक्षा बलों और पुलिस को हल्का लाठीचार्ज कर स्थिति नियंत्रित करनी पड़ी। कालीघाट […] The post भवानीपुर में शुभेंदु-तृणमूल समर्थकों में झड़प, पुलिस का हल्का लाठीचार्ज appeared first on Sabguru News .
Buddha Purnima Essay: बुद्ध पूर्णिमा: शांति और आत्मज्ञान के महापर्व पर रोचक निबंध
Buddha Purnima: बुद्ध पूर्णिमा बौद्ध धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जिसे भगवान बुद्ध के जन्म, ज्ञान और महापरिनिर्वाण की याद में मनाया जाता है। इसे अप्रैल–मई में पड़ने वाली वैशाख पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। प्रस्तावना: बुद्ध पूर्णिमा, जिसे 'वैशाख पूर्णिमा' भी कहा जाता है, विश्व भर के बौद्ध अनुयायियों और शांति प्रिय लोगों के लिए सबसे बड़ा त्योहार है। यह दिन केवल एक पर्व नहीं, बल्कि मानवता, करुणा और सत्य की खोज का प्रतीक है। वैशाख माह की यह पूर्णिमा भगवान गौतम बुद्ध के जीवन की तीन महत्वपूर्ण कड़ियों को एक सूत्र में पिरोती है। भारत में विशेष रूप से यह पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, यह दिन पूरी दुनिया के बौद्ध अनुयायियों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ALSO READ: Buddha Purnima 2026: बुद्ध के कर्म का मनोविज्ञान: कैसे बनता है कर्म से भाग्य? एक अद्भुत संयोग: त्रिविध पावन तिथि बुद्ध पूर्णिमा की सबसे रोचक बात यह है कि भगवान बुद्ध के जीवन की तीन सबसे बड़ी घटनाएं इसी एक तिथि (वैशाख पूर्णिमा) को घटित हुई थीं: जन्म: लुम्बिनी (नेपाल) में राजकुमार सिद्धार्थ के रूप में उनका जन्म। ज्ञान प्राप्ति: वर्षों की कठिन तपस्या के बाद बोधगया में 'बोधि वृक्ष' के नीचे उन्हें आत्मज्ञान प्राप्त हुआ। महापरिनिर्वाण: कुशीनगर में उन्होंने अपने शरीर का त्याग किया। इतिहास में ऐसी घटना विरल ही मिलती है जहां किसी महापुरुष का जन्म, ज्ञान और मृत्यु एक ही तिथि को हुई हो। राजकुमार से 'बुद्ध' बनने का सफर राजमहल के वैभव और ऐश्वर्य के बीच पले-बढ़े सिद्धार्थ का हृदय एक वृद्ध, एक रोगी और एक मृत व्यक्ति को देखकर द्रवित हो उठा। उन्होंने महसूस किया कि संसार दुखों का घर है। 29 वर्ष की आयु में पत्नी और पुत्र का त्याग कर वे सत्य की खोज में निकल पड़े। कठोर साधना के बाद जब उन्हें ज्ञान मिला, तो वे 'बुद्ध' (यानी जागृत व्यक्ति) कहलाए। बुद्ध के संदेश: आज के समय में प्रासंगिकता बुद्ध पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं है, बल्कि यह हमें जीवन में शांति, करुणा और संतुलन की ओर प्रेरित करता है। यह दिन हमें याद दिलाता है कि ज्ञान और अहिंसा का मार्ग अपनाकर ही समाज और व्यक्तिगत जीवन में सच्ची खुशी प्राप्त की जा सकती है। बुद्ध ने दुनिया को 'पंचशील' के सिद्धांत और 'अष्टांगिक मार्ग' दिया। उन्होंने सिखाया कि: अहिंसा: किसी भी जीव को कष्ट न पहुंचाना ही सबसे बड़ा धर्म है। मध्यम मार्ग: न तो बहुत अधिक विलासिता और न ही बहुत अधिक कठोर तप—जीवन का संतुलन ही सुख का आधार है। करुणा: उन्होंने ऊंच-नीच और जाति-पाति के भेदभाव को मिटाकर प्रेम का संदेश दिया। कैसे मनाई जाती है बुद्ध पूर्णिमा? इस दिन लोग घरों और मठों में दीप जलाते हैं। बोधगया में विशेष प्रार्थनाएं होती हैं। भक्त सफेद वस्त्र पहनते हैं और दान-पुण्य के कार्य करते हैं। इस दिन 'खीर' का विशेष महत्व है, क्योंकि सुजाता नाम की एक कन्या ने बुद्ध को खीर खिलाकर उनकी साधना पूर्ण कराई थी। सुजाता ने सिद्धार्थ की कठोर तपस्या से प्रभावित होकर, उनको खीर (पायस) का भोग लगाया, जिससे सिद्धार्थ को पुनः ऊर्जा मिली थीं। निष्कर्ष आज की भागदौड़ भरी और तनावपूर्ण दुनिया में बुद्ध के विचार एक मरहम की तरह काम करते हैं। बुद्ध पूर्णिमा हमें याद दिलाती है कि शांति बाहर की दुनिया में नहीं, बल्कि हमारे अपने भीतर है। यदि हम नफरत को त्याग कर प्रेम और करुणा को अपना लें, तो हम आज भी बुद्ध बन सकते हैं। ALSO READ: बुद्ध जयंती 2026: आखिर कहां और कैसे हुआ था गौतम बुद्ध का जन्म? जानें पूरी सच्चाई 'अप्प दीपो भव' — अपना दीपक स्वयं बनें। अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
झांसी की रानी फेम एक्ट्रेस उल्का गुप्ता जल्द ही फिल्म 'रजनी की बारात' में नजर आने वाली हैं। हाल ही में मेकर्स ने इस फिल्म का पहला पोस्टर रिलीज कर दिया है। पोस्टर में उल्का गुप्ता पूरी अटिट्यूड के साथ स्कूटर पर अपनी ही बारात लीड करती नजर आ रही हैं — एक ऐसा विजुअल जो पारंपरिक सोच को तोड़ते हुए तुरंत ध्यान खींचता है। उल्का के साथ सुनीता राजवर और ज़रीना वहाब की मुस्कुराती मौजूदगी पोस्टर दिलचस्प बनाती है। वहीं दूसरी तरफ अश्वथ भट्ट एक पुलिस अधिकारी के किरदार में नजर आकर कहानी में एक दिलचस्प ट्विस्ट का संकेत देते हैं। बैकग्राउंड में चल रही शादी की तैयारियां इस पूरे सीन को एक फुल-ऑन बॉलीवुड सेलिब्रेशन में बदल देती हैं। फिल्म के डायरेक्टर आदित्य अमन इसे एक ऐसी कहानी बताते हैं जो समाज के तय नियमों को चुनौती देती है और महिलाओं को अपनी जिंदगी के फैसले खुद लेने की ताकत दिखाती है। A post shared by Ulka Ganessh (@ulkagupta) फ़िल्म के प्रोड्यूसर तनाया आडारकर प्रभु और तेज एच आडारकर ने कहा, ‘रजनी की बारात’ सिर्फ एक शादी की कहानी नहीं है, यह एक स्टेटमेंट है। हम एक ऐसी लड़की की कहानी दिखा रहे हैं जो अपने फैसलों को खुद सेलिब्रेट करती है फिल्म पूरी तरह से आज के जेन जी दर्शक को एंटरटेनिंग और इमोशनली कनेक्टिंग करेगी। उल्का गुप्ता ने अपने किरदार को लेकर कहा, रजनी एक ऐसी लड़की है जो किसी भी परंपरा को आंख बंद करके नहीं मानती। वह अपनी खुशी खुद बनाती है, और अपनी बारात खुद लेकर निकलती है — ये किरदार मेरे दिल के बहुत करीब है। फिल्म में कनिष्क विजय भी अहम भूमिका में नजर आएंगे। ‘रजनी की बारात’ एक एक सोच है—जहां एक लड़की अपने फैसलों की कमान खुद संभालती है और समाज की पुरानी परंपराओं को अपने अंदाज़ में चुनौती देती है। एपिफ़नी एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी यह फिल्म में उल्का गुप्ता के साथ कनिष्क विजय, अस्वथ भट्ट, ज़रीना वहाब, सुनीता राजवर प्रमुख भूमिकाओ में नजर आयेंगे। तनाया आडारकर प्रभु और तेज एच आडारकर द्वारा निर्मित, रजनी की बारात का निर्देशक आदित्य अमन ने किया है। यह फिल्म 29 मई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
सवाईमाधोपुर में ट्रैक्टर ट्रॉली ने खड़ी जीप में मारी टक्कर, बुजुर्ग की मौत, दो बच्चियां घायल
सवाईमाधोपुर। राजस्थान में सवाईमाधोपुर जिले के रवाजंना डूंगर थाना क्षेत्र में मंगलवार देर रात तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली के श्रद्धालुओं की खड़ी कमांडर जीप को टक्कर मार देने से एक बुजुर्ग की मौके पर ही मौत हो गई जबकि दो बच्चियां गंभीर रूप से घायल हो गई। पुलिस सूत्रों ने बुधवार को बताया कि मौके पर […] The post सवाईमाधोपुर में ट्रैक्टर ट्रॉली ने खड़ी जीप में मारी टक्कर, बुजुर्ग की मौत, दो बच्चियां घायल appeared first on Sabguru News .
पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण में अपराह्न एक बजे तक 61.11 प्रतिशत मतदान
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में शुरुआती छह घंटों में 61.11 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। राज्य के पूर्वी बर्धमान जिले में शुरूआती छह घंटों में सबसे अधिक 66.80 प्रतिशत और कोलकाता दक्षिण जिला में सबसे कम 57.73 प्रतिशत मतदान हुआ। इस बीच कुछ इलाकों में मतदान के दौरान […] The post पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण में अपराह्न एक बजे तक 61.11 प्रतिशत मतदान appeared first on Sabguru News .
हनुमानगढ़ में पाकिस्तान से जुड़े फर्जी आधार कार्ड रैकेट का नया खुलासा
हनुमानगढ़। राजस्थान में पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक (एटीएस/एजीटीएफ/एएनटीएफ) दिनेश एमएन मंगलवार को हनुमानगढ़ जिले के वार्षिक निरीक्षण पर पहुंचे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने भादरा में पकड़े गए फर्जी आधार कार्ड सेंटर मामले में एक नया खुलासा किया। दिनेश एमएन ने बताया कि पाकिस्तान से संबंधित व्यक्ति शहजाद जयपुर पहुंचकर फर्जी आधार कार्ड बनवा रहा था। […] The post हनुमानगढ़ में पाकिस्तान से जुड़े फर्जी आधार कार्ड रैकेट का नया खुलासा appeared first on Sabguru News .
धौलपुर में ट्रेन के जनरल कोच के ब्रेक पेडल में आग लगने से यात्रियों में हड़कम्प मचा
धौलपुर। राजस्थान में धौलपुर में बुधवार सुबह दुर्ग (छत्तीसगढ़) से लुधियाना (पंजाब) जा रही नॉन-स्टॉपेज ट्रेन नंबर 15549 के जनरल कोच के ब्रेक पेडल में आग लगने से यात्रियों में हड़कंप मच गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार आग की जानकारी होने के बाद रेलवे स्टेशन के आउटर पर ट्रेन के रुकते ही यात्रियों ने अपनी […] The post धौलपुर में ट्रेन के जनरल कोच के ब्रेक पेडल में आग लगने से यात्रियों में हड़कम्प मचा appeared first on Sabguru News .
इंटरनेशनल डांस डे: जाह्नवी कपूर ने जब अपने डांस मूव्स से इंटरनेट पर मचाया तहलका
बॉलीवुड की चमक-दमक से परे, जाह्नवी कपूर लगातार अपनी अलग पहचान बना रही हैं, जहां वे सिर्फ एक अभिनेत्री के तौर पर नहीं, बल्कि एक ऐसी परफॉर्मर के रूप में उभर रही हैं, जिसमें डांस के प्रति उनका जूनून गहरा है। गौरतलब है कि जहां उनके फैशन मोमेंट्स और पब्लिक अपीयरेंस अक्सर सुर्खियां बटोरते हैं। वहीं जाह्नवी के रॉ, अनफिल्टर्ड डांस रील्स और दमदार परफॉर्मेंस फैंस के दिलों को सच में छू जाते हैं। प्रैक्टिस क्लिप्स से लेकर स्क्रीन पर पॉलिश्ड परफॉर्मेंस तक, हर बार वे यह साबित कर देती हैं कि उनके लिए डांस सिर्फ एक ट्रेंड नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक कला है। A post shared by Janhvi Kapoor (@janhvikapoor) A post shared by Janhvi Kapoor (@janhvikapoor) सिर्फ सोशल मीडिया पर ही नहीं, फिल्मों में भी जाह्नवी ने कई शानदार डांस नंबर्स दिए हैं, जो उनकी ग्रोथ और डेडिकेशन को दिखाते हैं। नदियों पार, पनघट, झिंगाट और चुट्टमल्ले जैसे गानों में उनकी एक्सप्रेशंस, ग्रेसफुल मूव्स और स्ट्रॉन्ग स्क्रीन प्रेजेंस साफ नजर आती है। A post shared by Janhvi Kapoor (@janhvikapoor) A post shared by Janhvi Kapoor (@janhvikapoor) A post shared by Janhvi Kapoor (@janhvikapoor) हर गाने में उनका एक अलग अंदाज दिखता है, जो कभी हाई-एनर्जी बीट्स, कभी ट्रेडिशनल और कभी एक्सप्रेसिव स्टाइल में होता। उनकी यही वर्सेटिलिटी उन्हें आज की जनरेशन की सबसे दिलचस्प और समर्पित डांसर्स में से एक बनाती है।
राजस्थान का 5 साल से बिछड़ा युवक बद्रीनाथ में मिला, किया परिजनों के सुपुर्द
बद्रीनाथ/चमोली। उत्तराखंड के आस्था के पावन धाम बद्रीनाथ धाम से एक बार फिर मानवता और संवेदनशीलता की मिसाल सामने आई है। चमोली पुलिस ने पांच साल से लापता एक युवक को न केवल सुरक्षित बचाया, बल्कि बुधवार को उसे उसके परिजनों के सुपुर्द कर परिवार को फिर से एक कर दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार […] The post राजस्थान का 5 साल से बिछड़ा युवक बद्रीनाथ में मिला, किया परिजनों के सुपुर्द appeared first on Sabguru News .
इंदौर के बेहद चर्चित राजा रघुवंशी हत्याकांड की आरोपी सोनम रघुवंशी को आखिरकार जमानत मिल गई। सोनम पिछले करीब 11 महीनों से शिलांग जेल में बंद थी। जब सोनम पर अपने पति राजा रघुवंशी की हत्या का आरोप लगा था, तब सोनम के पिता देवी सिंह रघुवंशी ने कहा था कि “हमारे लिए सोनम मर चुकी है।” लेकिन अब उसी पिता ने शिलांग जाकर 50 हजार रुपए के मुचलके पर उसकी जमानत कराई है। आखिर पिता का दिल कैसे बेटी पर पसीज गया। वहीं दूसरी तरफ जमानत की खबर सुनकर मृतक राजा रघुवंशी का परिवार सन्न रह गया है। उनका कहना है कि साफ है कि उसी ने पति राजा की हत्या की है तो फिर जमानत कैसे मिल गई। राजा की मां उमा रघुवंशी ने नाराजगी जताते हुए कहा कि उन्हें इस फैसले पर यकीन ही नहीं हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सोनम इस पूरे मामले की मास्टरमाइंड है। सोनम इंदौर आएगी तो पूछूंगी उसने मेरे बेटे को क्यों मारा। मां उमा ने कहा कि सोनम को जमानत मिलना पुलिस की लापरवाही का नतीजा है क्या कहा राजा की मां ने : सोनम की जमानत से राजा का परिवार अवाक रह गया है। राजा की मां उमा ने कहा, अभी तक तो सुना था कि कानून अंधा होता है आज देखने को भी मिल गया। उन्होंने मामले में सीबीआई जांच की मांग करते हुए प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से हस्तक्षेप की अपील की है। राजा रघुवंशी का परिवार अब जमानत रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट में याचिका लगाने की तैयारी कर रहा है। पैसों की ताकत के आगे हार गया न्याय : राजा के भाई विपिन ने आरोप लगाया कि सोनम के परिवार, खासकर उसके भाई गोविंद का उसे पूरा समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि पैसों की ताकत के आगे हम अपने भाई को न्याय नहीं दिला पा रहे हैं। वे सोनम की जमानत रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट का रुख करेंगे और जरूरत पड़ी तो शिलांग भी जाएंगे। ऐसे में यदि सोनम वापस जेल जाती है तो भाई गोविंद इसका बदला ले सकता है। विपिन ने आशंका भी जताई कि अगर अपील करने के लिए अगर वह शिलांग जाते है तो सोनम उन पर हमला करा सकती है। यदि मेरे साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो उसके लिए गोविंद जिम्मेदार होगा क्या सोनम ही है मास्टरमाइंड : बता दें कि इस पूरे मामले में सोनम को हमले का मास्टरमाइंड माना जा रहा है। आरोप है कि उसने झरने के पास सीढ़ियों पर आरोपियों के साथ बैठक की और उन्हें 15 हजार रुपए दिए। इसके बाद बंद पार्किंग यार्ड में उसके कहने पर तीनों युवकों ने राजा पर हमला किया। राजा को खाई में फेंकने में भी सोनम ने मदद की। हमले से पहले उसके शरीर से चेन, अंगूठी और ब्रेसलेट भी निकलवाए गए थे। हत्या के बाद आरोपी करीब 11 किलोमीटर आगे जाकर सोनम से मिले थे। प्रेमी राज की भूमिका सवालों के घेरे में : मामले में सोनम के कतिथ प्रेमी राज की भूमिका भी संदिग्ध है। हालांकि वह शिलांग नहीं गया था, लेकिन साजिश में शामिल बताया जा रहा है। आरोप है कि सोनम और राजा की शादी से पहले ही उसने हत्या की योजना बना ली थी। उसने अपने दोस्त विशाल को तैयार किया और फिर अन्य आरोपियों को साथ जोड़ा। सोनम की लोकेशन भी राज ही आरोपियों तक पहुंचाता था। हत्या के बाद उसने आरोपियों से मुलाकात की। वहीं, जब सोनम इंदौर आई तो उसे रोकने के लिए फ्लैट किराए पर लेने की भी बात सामने आई है। हमला करवा सकती है सोनम : अब राजा का परिवार सोनम की जमानत खारिज करने के लिए याचिका लगाएगा। इसके साथ ही राजा के परिवार का यह भी कहना है कि अगर सोनम फिर से जेल जाती है तो वो उन पर हमला करवा सकती है। उन्होंने अपने साथ किसी तरह की अनहोनी की भी आशंका जाहिर की है। जबकि मां उमा ने कहा कि सोनम को जमानत मिलना पुलिस की लापरवाही का नतीजा है। Edited By: Naveen R Rangiyal
बंगाल में आखिरी फेज की वोटिंग जारी है और पीएम मोदी काशी पहुंच गए हैं। वहां उन्होंने बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए और त्रिशूल लहराया। 23 अप्रैल को पहले फेज के मतदान में मोदी बंगाल के ही बेलूर मठ पहुंचे थे। 2021 के बंगाल चुनाव में पीएम मोदी बांग्लादेश की यशोश्वरी शक्ति पीठ पहुंचे थे और मां काली की पूजा-अर्चना की थी। 12 साल पहले प्रधानमंत्री बने मोदी अब तक 9 चुनाव में 14 बार वोटिंग के दिन तीर्थ जा चुके हैं। इनमें 7 बार यानी 80% मौकों पर BJP सत्ता में आई है। मोदी कब-कब चुनाव के दिन तीर्थ पर गए और नतीजे क्या रहे, सिलसिलेवार तरीके से जानते हैं... 1. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव, 29 अप्रैल 2026: काशी में शिव आराधना पश्चिम बंगाल में दूसरे फेज की 142 सीटों पर वोटिंग चल रही है। इस दौरान मोदी वाराणसी के श्री काशी विश्वनाथ मंदिर गए। 20 मिनट तक मंदिर के गर्भगृह में ज्योतिर्लिंग का पूजन-अभिषेक किया। मंदिर से बाहर निकले तो मोदी के गले में भगवा गमछा और हाथों में डमरू-त्रिशूल था। मोदी ने त्रिशूल उठाकर लहराया भी। नतीजे: 4 मई को चुनावी नतीजे आएंगे। 2. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव, 23 अप्रैल 2026: बेलूर मठ में स्वामी विवेकानंद के कक्ष का दर्शन किया पश्चिम बंगाल में पहले फेज की 152 सीटों पर वोटिंग चल रही थी। तब मोदी बंगाल के हावड़ा जिले में मौजूद बेलूर मठ पहुंचे थे। यहां उन्होंने स्वामी विवेकानंद के ध्यान कक्ष का दर्शन किया। साथ ही रामकृष्ण मिशन के अध्यक्ष स्वामी गौतमानंद जी महाराज का आशीर्वाद लिया। नतीजे: 4 मई को चुनावी नतीजे आएंगे। 3. दिल्ली विधानसभा चुनाव, 05 फरवरी 2025 : प्रयागराज महाकुंभ में स्नान दिल्ली में सभी 70 सीटों पर वोटिंग हो रही थी। तब मोदी ने प्रयागराज में संगम में डुबकी लगाई। उन्होंने भगवा रंग के वस्त्र पहन रखे थे। हाथ और गले में रुद्राक्ष की मालाएं थीं। स्नान के बाद पीएम ने सूर्य को अर्घ्य दिया। नतीजे : बीजेपी ने 70 में से 48 सीटें जीतीं और 27 साल बाद सरकार बनाई। 4. हरियाणा विधानसभा चुनाव, 05 अक्टूबर 2024: महाराष्ट्र के जगदंबा माता मंदिर में पूजा हरियाणा में 90 सीटों पर सिंगल फेज में वोटिंग होनी थी। इसी दिन प्रधानमंत्री मोदी ने महाराष्ट्र के वाशिम जिले में जगदंबा माता मंदिर में पूजा-अर्चना की। मोदी ने मंदिर में नगाड़ा भी बजाया। नतीजे : 90 में से 48 सीटें जीतकर BJP ने लगातार तीसरी बार हरियाणा में सरकार बनाई। 5. लोकसभा चुनाव, 1 जून 2024 : विवेकानंद रॉक मेमोरियल में साधना लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण में 8 राज्यों की 57 सीटों पर वोटिंग होनी थी। मोदी 30 मई की शाम कन्याकुमारी पहुंचे। करीब 45 घंटों तक उन्होंने विवेकानंद रॉक मेमोरियल में साधना की। इस दौरान उन्होंने तमिल कवि तिरुवल्लुवर की 133 फीट ऊंची प्रतिमा के दर्शन किए। PM अलग-अलग तस्वीरों में रुद्राक्ष की माला जपते, ध्यान मंडपम के कॉरिडोर में बैठे और स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा को नमन करते दिखाई दिए। नतीजे : इन 57 सीटों में से 18 BJP को मिलीं। कुल 240 सीटें जीतकर BJP ने NDA की साथी पार्टियों के साथ लगातार तीसरी बार सरकार बनाई। 6. लोकसभा चुनाव, 20 मई 2024 : पुरी के जगन्नाथ मंदिर में पूजा लोकसभा चुनाव के पांचवें चरण की वोटिंग का दिन था। 8 राज्यों की 49 लोकसभा सीटों पर वोट डाले जाने थे। इसमें ओडिशा की 5 लोकसभा सीटें शामिल थीं। इसी दिन प्रधानमंत्री मोदी पुरी पहुंचे और जगन्नाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। नतीजे : इन 49 सीटों में से 16 सीटें ही BJP जीत सकीं। 7. लोकसभा चुनाव, 13 मई 2024 : पटना साहिब गुरुद्वारा में लंगर सेवा लोकसभा चुनाव के चौथे फेज में 10 राज्यों की 96 सीटों पर वोटिंग थी। इसी दिन PM मोदी बिहार के पटना साहिब गुरुद्वारा पहुंचे। उन्होंने गुरुद्वारे में सेवा कार्य किया, रोटियां बेलीं, श्रद्धालुओं को खाना परोसा और वहां आने वाले लोगों से मुलाकात भी की। नतीजे : इन 96 सीटों में से 39 पर BJP को जीत मिली। 8. लोकसभा चुनाव, 05 मई 2024 : अयोध्या राम मंदिर में पूजा लोकसभा चुनाव के तीसरे फेज में 12 राज्यों की 94 सीटों पर वोट डाले गए। इसमें UP की 10 सीटें शामिल थीं। इससे ठीक दो दिन पहले PM मोदी अयोध्या पहुंचे और हाल ही में बने राम मंदिर में पूजा-अर्चना की। PM ने अयोध्या में रोड शो भी किया। नतीजे : इन 94 सीटों में से 57 पर BJP ने जीत दर्ज की। 9. कर्नाटक विधानसभा चुनाव, 10 मई 2023 : राजस्थान के श्रीनाथजी मंदिर में पूजा कर्नाटक में सभी 224 विधानसभा सीटों पर वोट डाले गए। इस दिन PM मोदी राजस्थान में थे। उन्होंने उदयपुर के श्रीनाथजी मंदिर पूजा-अर्चना की। इस मंदिर में कृष्ण बालरूप में पूजे जाते हैं। नतीजे : 135 सीटें जीतकर कांग्रेस ने सत्ता हासिल की। BJP को महज 66 सीटें मिलीं। पिछले चुनाव के मुकाबले 38 सीटें कम। 10. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव, 27 मार्च 2021 : बांग्लादेश के मतुआ मंदिर में पूजा पश्चिम बंगाल में विधानसभा की 30 और असम में 47 सीटों पर पहले चरण की वोटिंग होनी थी। इस दिन PM मोदी, बांग्लादेश के ढाका में यशोश्वरी मंदिर शक्ति पीठ पहुंचे और मां काली की पूजा-अर्चना की। वे ओराकांडी में मतुआ समुदाय के मंदिर भी गए। पश्चिम बंगाल की 70 सीटों पर मतुआ समुदाय का प्रभाव माना जाता है। नतीजे : पश्चिम बंगाल में BJP को 77 सीटें मिलीं। पहली बार BJP राज्य में मुख्य विपक्षी पार्टी बनी। असम में BJP ने 60 सीटें जीतकर लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल की। 11. लोकसभा चुनाव, 19 मई 2019 : केदारनाथ में ध्यान लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण में 8 राज्यों की 59 सीटों पर वोट डाले जाने थे। इसी दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक तस्वीर सामने आई। 11 हजार फीट की ऊंचाई पर बने केदारनाथ मंदिर में भगवा कपड़े पहने मोदी ध्यान लगाए हुए थे। मोदी ने उस गुफा में करीब 17 घंटे बिताए। गुफा से बाहर निकलने के बाद मोदी बोले- मैं जब भी भगवान के चरणों में आता हूं, तो कुछ मांगता नहीं। क्योंकि, उसने आपको मांगने नहीं, देने योग्य बनाया है। नतीजे : 59 में से 36 सीटें BJP ने जीतीं। कुल 303 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत के साथ BJP ने लगातार दूसरी बार सरकार बनाई और नरेंद्र मोदी PM बने। 12. गुजरात विधानसभा चुनाव, 12 दिसंबर 2017 : अंबाजी मंदिर में पूजा गुजरात विधानसभा चुनाव में 9 दिसंबर और 14 दिसंबर को वोटिंग होनी थी। इसी बीच 12 दिसंबर को PM मोदी मेहसाणा के प्रसिद्ध अम्बाजी मंदिर पहुंचे। यहां करीब 12 मिनट तक उन्होंने मां अम्बा की पूजा और आरती की। नतीजे : 18 दिसंबर 2017 को जब रिजल्ट आया तो BJP ने 182 में से 99 सीटों पर जीत हासिल की। BJP को 49.1% वोट मिले। लगातार 8वीं बार BJP की सरकार बनी और विजय रुपाणी दूसरी बार CM बने। 13.यूपी विधानसभा चुनाव, 08 मार्च 2017 : सोमनाथ मंदिर में पूजा उत्तरप्रदेश विधानसभा चुनाव के आखिरी चरण में 40 सीटों पर वोटिंग होनी थी। उसी दिन PM मोदी ने सोमनाथ मंदिर में खास पूजा की। उनके साथ तब के BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह भी थे। रुद्राक्ष की माला और सुनहरा अंगवस्त्र पहने अभिषेक और आरती करते हुए हुए मोदी की तस्वीरें सियासी गलियारों में चर्चा में रहीं। नतीजे : 11 मार्च को UP चुनाव के नतीजे आए। 15 साल बाद BJP की वापसी हुई। 403 में से 312 सीटें BJP ने जीत लीं। योगी आदित्यनाथ CM बने। 14. असम विधानसभा चुनाव, 11 अप्रैल 2016 : केरल के पारावुर पुत्तिंगल मंदिर पहुंचे असम विधानसभा चुनाव के आखिरी चरण में 61 सीटों पर वोटिंग होनी थी। इसके एक दिन पहले यानी 10 अप्रैल 2016 की सुबह केरल के कोल्लम जिले के पारावुर पुत्तिंगल मंदिर में एक कार्यक्रम के दौरान आग लग गई। इसमें करीब 111 लोगों की मौत हो गई और 200 से ज्यादा घायल हो गए। शाम होते तक PM मोदी भी पहुंच गए। उन्होंने इलाके और अस्पताल का दौरा किया। घायलों से मिले। नतीजे : असम में BJP ने 126 में से 86 सीटें जीतीं। BJP को 41.9% वोट मिले। पहली बार असम में BJP की सरकार बनी। चुनाव के दिन मोदी के तीर्थ यात्राओं पर जाने का असर दोनों लोकसभा चुनाव में वापसी, 6 में से 4 राज्यों में बीजेपी की सरकार एक्सपर्ट कॉमेंट : BJP वोटर्स होंगे मोटिवेट, बढ़ेगा वोटर-टर्नआउट ---------------- बंगाल चुनाव से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड 93% वोटिंग क्यों हुई: ममता या बीजेपी किसे मिलेगा फायदा; पिछले चुनावों के एनालिसिस और एक्सपर्ट्स से समझिए पश्चिम बंगाल में पहले फेज की 152 सीटों पर 93% वोटिंग हुई। अगर यही पैटर्न दूसरे और आखिरी फेज की 142 सीटों पर रहा, तो यह बंगाल में अब तक का सबसे ज्यादा वोटर टर्नआउट होगा। 2021 विधानसभा चुनाव में 82% वोट पड़े थे। आजादी के बाद बंगाल में 4 बार सत्ता परिवर्तन हुआ है। इनमें 3 चुनावों में जब वोटिंग 4.5% से ज्यादा घटी-बढ़ी, तो सत्ता बदल गई। चौथी बार 2011 में, जब ममता ने लेफ्ट के 34 साल के शासन को खत्म किया, तब वोटिंग 2.4% बढ़ी थी। पूरी खबर पढ़िए…
बुद्ध जयंती 2026: आखिर कहां और कैसे हुआ था गौतम बुद्ध का जन्म? जानें पूरी सच्चाई
गौतम बुद्ध का जन्म बैशाख माह की पूर्णिमा के दिन हुआ था। इस बार बुद्ध जयंती 2026 1 मई 2026 को मनाई जाएगी। यह दिन गौतम बुद्ध के जन्म, ज्ञान प्राप्ति (निर्वाण) और महापरिनिर्वाण- तीनों के लिए समर्पित है। गौतम बुद्ध के जन्म से जुड़ी कहानी और स्थान दोनों ही ऐतिहासिक और आध्यात्मिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं। 1. जन्म स्थान: लुम्बिनी (Lumbini) लुम्बिनी: गौतम बुद्ध का जन्म आज से लगभग 2600 साल पहले लुम्बिनी नामक वन में हुआ था। वर्तमान स्थिति: यह स्थान आज के नेपाल के रूपनदेही जिले में स्थित है, जो भारतीय सीमा (कपिलवस्तु) के बेहद करीब है। अशोक स्तंभ: महान सम्राट अशोक ने बुद्ध के जन्म स्थान की पहचान के लिए यहां एक शिलालेख युक्त स्तंभ स्थापित किया था, जो आज भी वहां मौजूद है और यह प्रमाणित करता है कि यही बुद्ध की जन्मस्थली है। ALSO READ: Buddha Purnima 2026: बुद्ध पूर्णिमा पर क्या करते हैं? 2. जन्म की कहानी: एक अलौकिक घटना बुद्ध के जन्म की कथा बहुत ही सुंदर है: माता-पिता: उनके पिता राजा शुद्धोदन शाक्य गणराज्य (कपिलवस्तु) के शासक थे और माता रानी महामाया थीं। माया देवी का सपना: बुद्ध के जन्म से पहले रानी महामाया ने स्वप्न में देखा कि एक सफेद हाथी ने उनके गर्भ में प्रवेश किया है, जिसे एक पवित्र आत्मा के आगमन का संकेत माना गया। ALSO READ: Buddha Purnima 2026: बुद्ध के कर्म का मनोविज्ञान: कैसे बनता है कर्म से भाग्य? 3. सफर के दौरान जन्म: गौतम बुद्ध का जन्म ईसा से 563 साल पहले नेपाल के लुम्बिनी वन में हुआ। प्राचीन परंपरा के अनुसार, कपिलवस्तु की रानी महामाया अपने मायके (देवदह) जा रही थीं। रास्ते में लुम्बिनी के सुंदर वनों में विश्राम के दौरान उन्हें प्रसव पीड़ा हुई। रानी ने एक साल के वृक्ष (Sal Tree) की टहनी को पकड़कर भगवान बुद्ध को जन्म दिया। जन्म के तुरंत बाद बुद्ध ने 7 कदम चले और जहां-जहां उनके पैर पड़े, वहां कमल के फूल खिल उठे। बुद्ध के जन्म के केवल 7 दिन बाद उनकी माता का निधन हो गया था, जिसके बाद उनका पालन-पोषण उनकी मौसी महाप्रजापति गौतमी ने किया। इसी कारण उन्हें 'गौतम' कहा जाने लगा। कपिलवस्तु और देवदह के बीच नौतनवा स्टेशन से 8 मील दूर पश्चिम में रुक्मिनदेई नामक स्थान के पास उस काल में लुम्बिनी वन हुआ करता था। 4. बचपन का नाम और भविष्यवाणी उनका बचपन का नाम सिद्धार्थ रखा गया। उनके जन्म के बाद ऋषि असित ने भविष्यवाणी की थी कि यह बालक या तो एक चक्रवर्ती सम्राट बनेगा या फिर एक महान सन्यासी जो पूरे संसार को दुख से मुक्ति का मार्ग दिखाएगा। 5. लुम्बिनी में आज क्या है खास? यदि आप बुद्ध जयंती पर लुम्बिनी जाने का विचार कर रहे हैं, तो वहां ये मुख्य आकर्षण हैं: माया देवी मंदिर: यह ठीक उसी स्थान पर बना है जहाँ बुद्ध का जन्म हुआ था। पुष्करिणी पवित्र तालाब: जहाँ रानी महामाया ने जन्म से पहले स्नान किया था। विभिन्न देशों के मठ: लुम्बिनी में थाईलैंड, जापान, श्रीलंका और वियतनाम जैसे देशों ने अपने सुंदर पैगोडा और मंदिर बनाए हैं।
जेएलएन मेडिकल कॉलेज में RMCTA की नई कार्यकारिणी ने शपथ ग्रहण की
अजमेर। जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की राजस्थान मेडिकल कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन, अजमेर शाखा के वार्षिक चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए शल्य चिकित्सक डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा, सचिव पद के लिए कम्युनिटी मेडिसिन के डॉ. महेंद्र खन्ना एवं कोषाध्यक्ष पद के लिए डॉ. गायत्री दरगड़ निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए। मुख्य चुनाव अधिकारी डॉ. […] The post जेएलएन मेडिकल कॉलेज में RMCTA की नई कार्यकारिणी ने शपथ ग्रहण की appeared first on Sabguru News .
एमिटी यूनिवर्सिटी में राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस पर ‘लोकतंत्र का पांचवां स्तंभ’ विषय पर मंथन
जयपुर। एमिटी यूनिवर्सिटी राजस्थान के एमिटी स्कूल ऑफ कम्युनिकेशन की ओर से राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस के अवसर पर जनसंपर्क-लोकतंत्र का पांचवां स्तंभ विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनसंपर्क की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करना रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ एमिटी स्कूल ऑफ कम्युनिकेशन की डायरेक्टर एवं डायरेक्टरेट […] The post एमिटी यूनिवर्सिटी में राष्ट्रीय जनसंपर्क दिवस पर ‘लोकतंत्र का पांचवां स्तंभ’ विषय पर मंथन appeared first on Sabguru News .
जब सिद्धांत चतुर्वेदी ने ठुकरा दिया ब्रह्मास्त्र का ऑफर, कास्टिंग सर्कल में हो गए थे ब्लैकलिस्ट
बॉलीवुड एक्टर सिद्धांत चतुर्वेदी 29 अप्रैल को अपना बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे हैं। सिद्धांत उन एक्टर्स में से एक हैं जिन्होंने अपने दम पर नाम कमाया है। वह उत्तर प्रदेश के बलिया की मिडिल क्लास फैमिली से हैं। उन्होंने इंडस्ट्री में अपनी खास जगह बनाने के लिए कड़ी मेहनत की है। सिद्धांत जब पांच साल के थे तब उनका परिवार बलिया से मुंबई आ गया था। सीए की पढ़ाई के दौरान सिद्धांत ने मॉडलिंग करना शुरू कर दिया था। इसके बाद उन्होंने बतौर राइटर और एक्टर एक थिएटर ग्रुप जॉइन कर लिया। इसी दौरान निर्देशक लव रंजन की नजर उनपर पड़ी और उन्हें टीवी सीरियल लाइफ सही है में कास्ट कर लिया गया। इसके बाद साल 2017 में सिद्धांत वेब सीरीज इनसाइड एज में नजर आए। इस सीरीज की सक्सेस पार्टी में जोया अख्तर की नजर सिद्धांत पर पड़ी। इसके बाद उन्हें फिल्म 'गली बॉय' में कास्ट कर लिया गया। अपनी डेब्यू फिल्म में एमसी शेर का किरदार निभाकर सिद्धांत ने जबरदस्त लोकप्रियता हासिल की। भले ही 'गली बॉय' में लीड रोल में रणवीर सिंह थे, लेकिन सिद्धांत ने अपनी दमदार एक्टिंग से सभी का दिल जीत लिया था। इस फिल्म की सक्सेस के बाद सिद्धांत के पास कई प्रोजेक्ट की लाइन लग गई। लेकिन फिल्म 'गली बॉय' से पहले सिद्धांत को फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' भी ऑफर हुई थी। बीते दिनों सिद्धांत ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि उन्होंने फिल्म 'ब्रह्मास्त्र' में काम करने से मना कर दिया था। इसके बाद उन्हें घमंडी समझा जाने लगा और कास्टिंग सर्कल में ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था। हालांकि यह तब की बात है जब सिद्धांत ने बॉलीवुड डेब्यू भी नहीं किया था। द लल्लनटॉप को दिए इंटरव्यू में सिद्धांत ने कहा था, गली बॉय के एक महीने पहले मुझे ब्रह्मास्त्र का ऑफर मिला था। एक बहुत बड़े बजट की फिल्म, जो अंत में वाकई बड़ी हिट हुई। इसके मेकर्स ने मुझे एक रोल का ऑफर दिया था। यह मुझे एक कास्टिंग डायरेक्टर के माध्यम से मिला था। इसके लिए कोई ऑडिशन या कोई स्क्रिप्ट नहीं थी। सिद्धांत ने कहा था, उन्होंने बस कहा कि आप मार्शल आर्ट्स करते हैं? क्योंकि ये एक एक्शन फैंटसी फिल्म है। एक आश्रम में एक सुपरहीरो का रोल करना था मुझे। उन लोगों ने कहा कि मुझे करना चाहिए। VFX से भरा हुआ ये प्रोजेक्ट है तो इसे बनने में 5 साल लगेंगे। मैंने अयान मुखर्जी से मुलाकात की। प्रोडक्शन हाउस भी बड़ा था। एक तरह से ये तीन फिल्मों की डील थी। उन्होंने कहा, मैंने अयान से कहा कि मुझे एक स्क्रिप्ट दे दीजिए जिससे मैं समझ सकूं कि आखिर है क्या। मैं ऑफर से वैसे ही बहुत एक्साइटेड था। लेकिन उसके लिए स्क्रिप्ट नहीं थी। क्योंकि मूवी की एकदम शुरुआत ही थी। मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूं और उस रोल के लिए ऑडिशन की लंबी लाइन भी लग गई थी। एक्टर ने कहा, इसके बाद मैंने कास्टिंग डायरेक्टर से कहा कि मैं ये फिल्म नहीं कर पाऊंगा। यह सुनकर कास्टिंग डायरेक्टर अपनी कुर्सी से खड़े हो गए और कहा कि 'पागल है, धर्मा के साथ है, 3 फिल्मों का कॉन्ट्रैक्ट है।' मैंने कहा कि मुझे कौन देखेगा जब स्क्रीन पर अमिताभ बच्चन, रणबीर कपूर और आलिया भट्ट साथ होंगे। कम से कम, मुझे डायलॉग की दो लाइन तो दो, जिससे मैं ये समझ सकूं कि फिल्म में आखिर कहना क्या है। सिद्धांत ने बताया था कि इसके बाद उन्हें कास्टिंग से ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था। उन्होंने कहा, मैं कास्टिंग सर्किल में बदनाम हो गया था कि ये सेलेक्ट हो कर ना बोल देता है। शुक्र है फिल्म को बनने में काफी समय लग गया और जब तक गली बॉय आ गई। मुझे लगता है कि उस किरदार (ब्रह्मास्त्र) को शायद एडिट भी कर दिया गया। फिल्म में वह नहीं था।
राजस्थान में कोटा के सिटी मॉल में भीषण आग
कोटा। राजस्थान के कोटा शहर में बुधवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब शहर के प्रमुख शॉपिंग सेंटर सिटी मॉल में अचानक भीषण आग लग गई। आग लगते ही पूरे मॉल परिसर में धुआं फैल गया और वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार आग मॉल के पिछले हिस्से में स्थित […] The post राजस्थान में कोटा के सिटी मॉल में भीषण आग appeared first on Sabguru News .
Amarnath yatra 2026: कैसे और कब प्रारंभ हुई अमरनाथ यात्रा?
प्रतिवर्ष आषाढ़ माह में अमरनाथ यात्रा का आयोजन होता है। दुर्गम क्षेत्र की यह यात्रा कश्मीर के पहलगाम और बालटाल से प्रारंभ होती है। प्राचीनाकल से ही इस यात्रा का आयोजन होता आया है। अमरनाथ यात्रा के प्रारंभ होने की कहानी पौराणिक कथाओं, ऐतिहासिक दस्तावेजों और लोक मान्यताओं का एक दिलचस्प संगम है। इसके प्रारंभ को हम 3 मुख्य दृष्टिकोणों से समझ सकते हैं। 1. पौराणिक कथा: अमरकथा का रहस्य अमरकथा: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमरनाथ गुफा वही स्थान है जहां भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरत्व का रहस्य (अमरकथा) सुनाया था। शुरुआत: जब पार्वती जी ने शिवजी से उनके अमर होने का रहस्य पूछा, तो शिवजी उन्हें एक एकांत स्थान पर ले जाना चाहते थे ताकि कोई और उस कथा को न सुन सके। त्याग की यात्रा: यात्रा के दौरान उन्होंने पहलगाम में अपने बैल (नंदी) को, चंदनवाड़ी में चंद्रमा को, शेषनाग झील पर सांपों को और महागुणास पर्वत पर अपने पुत्र गणेश को छोड़ दिया। अमर पक्षी: कथा सुनाते समय वहां मौजूद दो कबूतरों ने भी वह अमरकथा सुन ली और वे अमर हो गए। आज भी श्रद्धालुओं को वहां कबूतरों का जोड़ा दिखाई देता है। 2. भृगु ऋषि द्वारा खोज (प्राचीन मान्यता) कश्यप ऋषि का राज्य कश्मीर: शास्त्रों के अनुसार, प्राचीन काल में कश्मीर की घाटी जलमग्न थी। कश्यप ऋषि ने जब नदियों के माध्यम से पानी निकाला, तब भृगु ऋषि हिमालय की यात्रा पर निकले। प्रथम यात्री भृगु ऋषि: माना जाता है कि जलस्तर कम होने पर सबसे पहले भृगु ऋषि ने ही इस पवित्र गुफा और हिम शिवलिंग के दर्शन किए थे। तब से ही ऋषि-मुनियों और भक्तों के लिए यह एक प्रमुख तीर्थ बन गया। 3. ऐतिहासिक साक्ष्य और 'बूटा मलिक' की कहानी ऐतिहासिक उल्लेख: कल्हण की 'राजतरंगिणी' (12वीं शताब्दी) में 'अमरेश्वर' के नाम से इस तीर्थ का वर्णन मिलता है, जो सिद्ध करता है कि यह यात्रा हजारों साल पुरानी है। मुगल काल में 'आइन-ए-अकबरी' में भी इस गुफा का जिक्र मिलता है। बूटा मलिक (15वीं/19वीं शताब्दी): कहा जाता है कि मध्यकाल में यह रास्ता लुप्त हो गया था। तब 'बूटा मलिक' नाम के एक मुस्लिम चरवाहे को एक साधु ने कोयले से भरा बैग दिया। घर पहुँचने पर उसने देखा कि वह सोना बन गया है। जब वह साधु का धन्यवाद करने वापस पहुंचा, तो उसे वहां साधु नहीं बल्कि यह पवित्र गुफा मिली। कब शुरू होती है यह यात्रा? यात्रा तिथि : यह यात्रा प्रतिवर्ष हिंदू कैलेंडर के अनुसार आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू होकर श्रावण पूर्णिमा (रक्षाबंधन) तक चलती है। आमतौर पर यह समय जून के अंत या जुलाई की शुरुआत से लेकर अगस्त तक का होता है। क्या आप जानते हैं? अमरनाथ का शिवलिंग प्राकृतिक रूप से बर्फ के टपकने (Stalagmite) से बनता है, और आश्चर्य की बात यह है कि चंद्रमा की कलाओं (घटने-बढ़ने) के साथ इस शिवलिंग का आकार भी घटता और बढ़ता है।
इरफान खान: जिनकी आंखें भी करती थीं अभिनय, बचपन में बनना चाहते थे क्रिकेटर
बॉलीवुड में इरफान खान को ऐसे दमदार अभिनेता के तौर पर याद किया जाता है, जिनकी आंखें भी अभिनय करती थीं। गहरी नशीली आंखे, ठहरी आवाज, वह बॉलीवुड के हीरो की तरह नहीं था लेकिन उसके चुंबकीय व्यक्तित्व में कुछ ऐसा था जो लोगों को बरबस जोड़ लेता सम्मोहित कर लेता। इरफान खान का नाम जेहन में आते ही सबसे पहले उनकी आंखें याद आती हैं। वह एक ऐसे अभिनेता थे, जो बड़ी ही संजीदगी से अपनी आंखों से अभिनय करते थे। इरफान के पिता भी कहते थे कि 'ये आंखें हैं या प्याला हैं'। राजस्थान के जयपुर में इरफान खान का जन्म एक मुस्लिम पठान परिवार में 7 जनवरी 1967 को हुआ था। इरफान खान बचपन में क्रिकेटर बनना चाह रहे थे। इस बात का खुलासा उन्होंने खुद ही एक इंटरव्यू के दौरान किया था। एक्टर ने कहा था, एक वक्त था जब मैं क्रिकेट खेलता था। मेरा सेलेक्शन सीके नायडू टूर्नामेंट के लिए हुआ था। उसमें मेरे 26 साथी चुने गए थे जिन्हें एक कैंप में जाना था, लेकिन मैं नहीं जा पाया, क्योंकि कैंप में जाने के लिए मैं पैसे का इंतजाम नहीं कर पाया। मैंने डिसीजन लिया कि क्रिकेट छोड़ देना चाहिए, क्योंकि इसमें किसी न किसी के सहयोग की जरूरत होगी। इसके बाद इरफान खान ने अभिनेता बनने की तरफ रुख किया। इरफान खान ने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में दाखिला ले लिया था। उन्हीं दिनों पिता की मृत्यु हो गई। जिसके बाद घर से पैसे मिलने बंद हो गए। स्कूल में पढ़ाई के लिए उनकी स्कॉलरशिप का आवेदन को स्वीकार कर लिया था। इरफान खान अपनी एक्टिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद वह मुंबई चले गए। मुंबई में आकर इरफान खान ने काफी स्ट्रगल किया। वह एक्टिंग से पहले इलेक्ट्रिशियन का काम करते थे। इरफान को एक बार राजेश खन्ना के घर पर एसी ठीक करने का काम मिला था। जब वह राजेश खन्ना के घर एसी ठीक करने गए, तो राजेश खन्ना की दाई ने दरवाजा खोला था। उस समय इरफान ने पहली बार राजेश खन्ना को देखा था और उन्हें देखकर बहुत खुश हुए थे। मुंबई में इरफान खान ने फिल्मों के लिए ऑडिशन देना शुरू कर दिया। हालांकि इरफान के शुरुआती दिन काफी संघर्ष भरे रहे। इरफान को फिल्मों के बजाय टीवी सीरियल में छोटे-मोटे रोल मिलने लगे थे। इरफान खान ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत वर्ष 1987 में दूरदर्शन के सीरियल 'श्रीकांत' से की। इसके अलावा उन्होंने भारत एक खोज, चाणक्य, चंद्रकांता, सारा जहां हमारा, बनेगी अपनी बात और संजय खान के धारावाहिक जय हनुमान में काम किया। टेलीविजन में करियर बनाने के दौरान ही मीरा नायर ने इरफान खान को वर्ष 1988 में प्रदर्शित फिल्म 'सलाम बॉम्बे' में कैमियो रोल दिया था, लेकिन फिल्म में उनका सीन कट गया था। इसके बाद इरफान ने वर्ष 1990 में प्रदर्शित फिल्म ‘एक डॉक्टर की मौत' में काम किया। इस फिल्म में पंकज कपूर और शबाना आजमी की लीड भूमिका थी। इसमें इरफान ने एक बेबाक रिपोर्टर की भूमिका निभाई थी। सलाम बॉम्बे में रोल कटने के बाद मीरा नायर ने इरफान से वादा किया था कि किसी अन्य फिल्म में लीड रोल देंगी। उन्होंने वर्ष 2006 में रिलीज फिल्म ‘द नेमसेक' में उन्हें लीड रोल दिया। वर्ष 2001 में 'द वारियर' फिल्म से इरफान की जिंदगी बदल गई। इस फिल्म के बाद से इरफान को कभी पीछे मुड़कर नहीं देखना पड़ा। वर्ष 2004 में ‘हासिल’ फिल्म में इरफान को एक नेगेटिव किरदार में देखा गया था। इस किरदार के लिए इरफान को खूब तारीफ मिली थी। इरफान खान को बतौर लीड रोल अपनी पहली फिल्म वर्ष 2005 में मिली थी। इस फिल्म का नाम रोग था। जिसमें इरफान ने एक पुलिस ऑफिसर की भूमिका में थे। हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई थी। लेकिन इस फिल्म में इरफान की एक्टिंग ने सभी का दिल जीत लिया था। इसी फिल्म से इराफान की खूबसूरत आखों को नोटिस किया गया। कहा जाता था कि इरफान की आंखें दमदार अभिनय करती हैं। बॉलीवुड में हिट होने के साथ ही इरफान की एंट्री हुई हॉलीवुड में जहां उन्होंने स्पाइडर मैन, जुरासिक वर्ल्ड और इन्फर्नो जैसी फिल्मों में अभिनय किया। हॉलीवुड एक्टर टॉम हैंक्स ने इरफान खान की सराहना करते हुए कहा था कि- इरफान की आंखें भी अभिनय करती हैं।' बीहड़ में तो बागी होते हैं, डकैत मिलते हैं पार्लियामेंट में' इरफान की फिल्म पान सिंह तोमर का ये डायलॉग आज भी लोगों की जुबां पर रहता है। इरफान खान जब भी अपनी फिल्मों में डायलॉग बोलते थे तो उनके अंदाज ए बयां के लोग कायल हो जाते थे। इरफान खान एक ऐसे अभिनेता थे, जो फिल्मों के बजट और एक्ट्रेस से कहीं ज्यादा फिल्म की कहानी और अपने किरदार को महत्व देते थे। इरफान खान ने अपने करियर के दौरान मकबूल, लंच बॉक्स, हासिल, लाइफ ऑफ पाइ, हिंदी मीडियम, हैदर,पीकू जैसी कई कामयाब फिल्मों में काम किया। 'अंग्रेजी मीडियम' इरफान खान की आखिरी फिल्म थी,जो 2017 में आई उनकी सुपरहिट फिल्म हिंदी मीडियम का सीक्वल थी। इरफान खान को हिंदी मीडियम और अंग्रेजी मीडियम के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का फिल्म फेयर पुरस्कार मिला। इरफान खान ने अपने सिने करियर में ऐसी कई फिल्में की हैं, जो मील का पत्थर साबित हुई। तिग्मांशु धूलिया की फिल्म 'हासिल' के लिए उन्हें 'बेस्ट विलेन' का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था। इरफान खान को फिल्म 'पान सिंह तोमर' के लिए नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। वर्ष 2011 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था। बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता इरफान खान 29 अप्रैल को इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह गए।
कभी एसी रिपेयरिंग का काम करते थे इरफान खान, अपनी अदाकारी से हिला दिया था हॉलीवुड
बॉलीवुड एक्टर इरफान खान भले ही अब इस दुनिया में न रहे हों, लेकिन फैंस के दिलो में वह अब भी जिंदा है। 29 अप्रैल 2020 को इरफान खान का निधन हो गया था। आज उनकी पुण्यतिथि हैं। इरफान ने अपनी दमदार एक्टिंग से इंडस्ट्री में एक अलग पहचान बनाई थी। उन्होंने अपने करियर में लगभग 70 फिल्में की, जिनमें कई हॉलीवुड फिल्में भी शामिल है। इरफान खान एक आम परिवार से ताल्लुक रखते थे। वह परिवार की आर्थिक मदद के लिए एसी रिपेयरिंग का काम करते थे। इरफान को एक बार राजेश खन्ना के घर पर एसी ठीक करने का काम भी मिला था। उस समय इरफान ने पहली बार राजेश खन्ना को देखा था और उन्हें देखकर बहुत खुश हुए थे। इसके बाद उन्होंने एक्टिंग दुनिया में कदम रखा और खूब नाम कमाया। इरफान खान ने दूरदर्शन के सीरियल 'श्रीकांत' से एक्टिंग करियर शुरू किया। इसके अलावा वे भारत एक खोज, चाणक्य, चंद्रकांता, सारा जहां हमारा, बनेगी अपनी बात और जय हनुमान जैसे सीरियल में भी नजर आए। इरफान खान पहली बार फिल्म 'सलाम बॉम्बे' में काम किया था। इस फिल्म में उन्होंने कैमियो रोल किया था। हालांकि फिल्म से उनका सीन कट गया था। इरफान खान ने साल 1990 में फिल्म 'एक डॉक्टर की मौत' से बॉलीवुड डेब्यू किया। निधन के बाद इरफान खान अपने परिवार के लिए करोड़ों की संपत्ति छोड़ गए। खबरों के अनुसार अभिनेता इरफान खान परिवार के लिए करीब 320 करोड़ रुपए की संपत्ति छोड़ गए। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो एक्टर के पास मुंबई में जुहू स्थित एक आलीशान फ्लैट है। इरफान खान एक दिग्गज अभिनेता थे। जिन्होंने कम समय में ही बॉलीवुड से लेकर हॉलीवुड तक अपनी अदाकारी का जादू बिखेरा था। इरफान खान को अपनी फिल्म में कास्ट करने के लिए लोग मुंहमांगी रकम देने के लिए तैयार रहते थे। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो एक्टर एक फिल्म के लिए तकरीबन 15 करोड़ रुपयए चार्ज करते थे। इसके अलावा वो किसी इवेंट का हिस्सा बनने के लिए और विज्ञापनों के लिए अच्छी रकम मिलती थी। कहा यह भी जाता है कि वो फिल्मों में फीस के अलावा प्रॉफिट शेयर भी लेते थे। इरफान खान हॉलीवुड तक अपने नाम का डंका बजा चुके थे। फिल्म जुरासिक वर्ल्ड और द नेमसेक जैसी हॉलीवुड फिल्मों में इरफान खान की एक्टिंग का करिश्मा दिखा था। इसके अलावा भी एक्टर ने कई हॉलीवुड प्रोजेक्ट किए है।
शुरुआत दो फोटो से, अलग तारीखें, अलग मौके, लेकिन मैसेज एक- ममता की स्ट्रीट फाइटर वाली इमेज पहली फोटो दूसरी फोटो 2021 में ममता नंदीग्राम सीट से चुनाव लड़ रही थीं। प्रचार के दौरान पैर में चोट लगी। इसके बाद व्हीलचेयर पर नजर आईं। उसी पर बैठकर 5 किलोमीटर लंबा रोड शो किया। तब ममता ने कहा था- A wounded tiger is more dangerous, यानी घायल शेर ज्यादा खतरनाक होता है। चुनाव में TMC ने 215 सीटें जीतकर बहुमत से सरकार बनाई, लेकिन ममता नंदीग्राम से BJP कैंडिडेट सुवेंदु अधिकारी से हार गईं। फिर भवानीपुर सीट से उपचुनाव उड़ा और जीतकर तीसरी बार CM बनीं।। अब फिर चुनाव है। आज, यानी 29 अप्रैल को दूसरे फेज में 142 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं। नजर भवानीपुर सीट पर भी है। मुकाबले में वही दोनों हैं, ममता और सुवेंदु। भवानीपुर ममता का घर है। यहां से सबसे बड़ी जीत का रिकॉर्ड उनके खाते में है। सुवेंदु अधिकारी नंदीग्राम के अलावा भवानीपुर से भी चुनाव लड़ रहे हैं। वे ममता को फिर हराएंगे या दीदी पिछली हार का बदला लेंगीं, ये 4 मई को पता चलेगा। भवानीपुर में ममता से ज्यादा एक्टिव रहे सुवेंदु, एक-एक वार्ड में गएभवानीपुर में ममता ने सुवेंदु के मुकाबले कम सभाएं की हैं। वे प्रचार के लिए पूरे बंगाल में एक्टिव रहीं। 8 अप्रैल को नामांकन के बाद भवानीपुर में 4 बड़ी सभाएं और 3 पदयात्रा कीं। जोर पदयात्रा और नुक्कड़ सभाओं पर ही रहा। डोर टू डोर कैंपेन की जिम्मेदारी कार्यकर्ताओं ने संभाली। वहीं, सुवेंदु ने ममता के मुकाबले तीन गुना ज्यादा समय दिया। 6 बड़ी सभाएं और 8 रोड शो किए। भवानीपुर में 8 वार्ड हैं और उन्होंने हर वार्ड में कम से कम एक छोटी सभा या पदयात्रा जरूर की। डोर टू डोर कैंपेन समेत कुल 30 से 40 चुनावी कार्यक्रम किए। इसका असर जानने हम भवानीपुर के अलग-अलग एरिया में गए। जगह: एल्गिन रोडनंदीग्राम में ममता की हार पर लोग बोले- पहलवान भी कभी-कभी हारता है25 अप्रैल को ममता अपने गढ़ में पैदल प्रचार पर निकलीं। वही पुराना अंदाज, सफेद साड़ी और हवाई चप्पल। रास्ते में जो मिलता, उससे हाथ मिलातीं। लोगों को देखकर हाथ हिलातीं। महिलाओं से जाकर मिलतीं। ये रैली एल्गिन रोड इलाके में थी। हम पहुंचे तब इसकी तैयारी चल रही थी। पोस्टर लेकर महिलाएं आगे खड़ी थीं, जबकि पुरुष कार्यकर्ता पीछे थे। वजह पूछने पर एक महिला बोलीं, ‘मां दुर्गा महिला शक्ति का प्रतीक हैं। दीदी भी हमेशा आगे रहना पसंद करती हैं।’ आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी डॉक्टर से रेप और मर्डर का जिक्र करने पर बोलीं, ‘हमने उस केस में विरोध प्रदर्शन किया था। पीड़ित डॉक्टर की मां चुनाव लड़ रही हैं, भले ही वे दूसरी पार्टी से हों, लेकिन वे चुनाव जीतें। उन्हें न्याय मिलना चाहिए।’ कुछ देर में ममता बनर्जी की पदयात्रा गुजरने वाली थी। जय बांग्ला के नारे लग रहे थे। भीड़ में खड़ी एक लड़की बोली- ‘यहां दादा के लिए कोई जगह नहीं है। बांग्ला हमारी पहचान है। जो बंगाली नहीं जानते, वे यहां नहीं टिक सकते।’ हालांकि, उसी सड़क पर कुछ कदम पीछे खड़े एक बुजुर्ग कहते हैं, ममता अब नहीं चलेगी। पेशे से टीचर मधुश्री कौर कहती हैं कि अभी बता पाना मुश्किल है कि बदलाव होगा या नहीं। चुनाव आयोग ने अच्छा काम किया है। फिर भी लोगों में डर का माहौल है। वहीं, सविता कर्मकार जोर देकर कहती हैं कि कोई बदलाव नहीं होगा। लोगों को दीदी की योजनाओं का फायदा मिल रहा है। किसी को भूखा नहीं रहना पड़ता। युवाओं को काम मिला है। इलाके के एक बुजुर्ग नंदीग्राम में ममता की हार पर हंसते हुए बोले, ‘पहलवान भी कभी-कभी हारता है। वहां मिसमैनेजमेंट की वजह से हारे थे। इस बार रिजल्ट अच्छा होगा। विपक्ष के लिए यहां ज्यादा जगह नहीं है।’ जगह: कालीघाटकाली मां दरबार में दादा-दीदी की दस्तक, पुजारी बोले- दीदी ही जीतेगीभवानीपुर में मशहूर शक्तिपीठ कालीघाट हैं। मां काली के दरबार में दादा सुवेंदु अधिकारी और दीदी बराबर आशीर्वाद के लिए आते रहते हैं। पिछली बार दोनों एक ही दिन पहला बैसाख, यानी बंगाली न्यू ईयर पर पहुंचे थे। कालीघाट मंदिर के पुजारी राजा कहते हैं, ‘इस बार ममता बनर्जी ही जीतेंगी। वे हमेशा लोगों के साथ खड़ी रहती हैं। सुवेंदु अधिकारी सिर्फ चुनाव में नजर आते हैं।’ मंदिर के पास मिले भवानी ट्रांसजेंडर हैं। मंदिर के आसपास मांगकर गुजारा करते हैं। भवानी कहते हैं, ‘लॉकडाउन के दौरान सरकार से चावल, दाल और बाकी जरूरी सामान मिला था। इसलिए मैं ममता बनर्जी के साथ हूं।’ यहीं रहने वाले दीप नारायण विश्वास मानते हैं कि इलाके में शिक्षा का स्तर अच्छा नहीं है। इसलिए लोगों को बदलाव का एहसास कम होता है। कई लोग खुलकर नहीं बोलते। डर रहता है कि उनकी बातें ऊपर तक पहुंच सकती हैं। थोड़ा आगे स्कूटी से जा रहे मनोज पांडा मिले। उनका मानना है कि इस बार बदलाव हो सकता है। पिछले 5 साल में ममता बनर्जी ने कुछ काम किए हैं, लेकिन पार्टी के दूसरे नेताओं के काम का असर उनकी जीत के अंतर पर पड़ सकता है। प्रसेनजीत भवानीपुर में मिठाई की दुकान में काम करते हैं। प्रसेनजीत कहते हैं कि यहां BJP और TMC दोनों के झंडे नजर आ रहे हैं, लेकिन माहौल ममता बनर्जी के पक्ष में है। जगह: हरीश मुखर्जी स्ट्रीटममता के घर वाले इलाके में कड़ी सुरक्षा, लोग बोले- मुकाबला दिलचस्प हैममता का घर कालीघाट की हरीश मुखर्जी स्ट्रीट पर है। घर के आसपास पुलिस तैनात है। हमने आसपास के लोगों से बात की, लेकिन ज्यादातर लोग खुलकर नहीं बोले। यहीं मिले तापस घोष बताते हैं, ‘आमतौर पर यहां लोग अपनी राजनीतिक पसंद नहीं बताते।’ इस बार कौन जीत रहा है? तापस जवाब देते हैं, ‘ममता का पिछला रिकॉर्ड अच्छा है। उनके पास बढ़त है। हालांकि, सुवेंदु अधिकारी को भी अच्छा समर्थन मिल रहा है। मुकाबला दिलचस्प है। मैं दोस्तों से इस पर बात करता हूं, तो समझ आता है कि 4 तारीख को नतीजे आने से पहले कोई भी नहीं कह सकता कि कौन जीतेगा।’ तापस घोष दावा करते हैं कि SIR की वजह से वोटर लिस्ट से करीब 40 हजार नाम कटे हैं। कई परिवार ऐसे हैं, जिनमें कुछ लोगों के नाम लिस्ट में हैं और कुछ के नहीं। रिजल्ट पर इसका असर दिखेगा। तभी तापस के बगल में बैठे शख्स बोल पड़ते हैं, ‘प्रधानमंत्री मोदी की रैलियों में बहुत भीड़ आई है। हम लोग तो टीवी पर ही ऐसी भीड़ देखते हैं। मीडिया वाले समझ सकते हैं कि इतने लोग कहां से आ रहे हैं। लोगों की सोच में बड़ा बदलाव आया है। इस बार जीत-हार का अंतर बहुत ज्यादा नहीं होगा।’ यहीं आगे लॉटरी की दुकान पर कुछ लोग टिकट खरीदते मिले। दुकान चलाने वाले तपोन सुवेंदु की जीत का दावा करते हैं। कहते हैं, ‘इस बार भवानीपुर में सुवेंदु की लॉटरी लगेगी।’ दीदी से क्या नाराजगी है? तपोन जवाब देते हैं, ‘क्योंकि आरजी कर मामले में अब तक इंसाफ नहीं मिला है।’ एक्सपर्ट बोले- 25% मुस्लिम वोटर अहम, मिडिल क्लास वोटर से BJP को फायदारवींद्र भारती यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर बिस्वनाथ चक्रवर्ती कहते हैं, ‘भवानीपुर ममता बनर्जी का होम ग्राउंड है। यहां के ज्यादातर काउंसलर TMC से जुड़े हैं। करीब 25% मुस्लिम वोटर अहम भूमिका निभाते हैं, इसलिए शुरुआती बढ़त ममता बनर्जी के पास है।' 'अगर मिडिल क्लास और पढ़ा-लिखा वर्ग बड़ी संख्या में वोट डालने निकलता है, तो मुकाबला कड़ा होगा। इससे BJP को फायदा मिल सकता है। अगर पारंपरिक वोटिंग पैटर्न बना रहा, तो स्थिति पहले जैसी ही रहने की संभावना ज्यादा है।’ ………………………….. पश्चिम बंगाल से ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ें… 1. बंगाल चुनाव यानी डर, ममता के मोहल्ले में पुलिस की दादागिरी, बाहर TMC की ‘ये बंगाल है, वेस्ट बंगाल, बंगाली में बात करो… जो बोला जाए, उसका जवाब बंगाली में दो।‘ हमसे ये बात खुद को पुलिसवाला बता रहे एक शख्स ने कही। जगह- कोलकाता का भवानीपुर। ये ममता का मोहल्ला है। हां, ममता बनर्जी, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री के घर के बाहर। ये महज एक घटना नहीं है। पश्चिम बंगाल में चुनावी रिपोर्टिंग के दौरान हमें डर का ये माहौल जगह-जगह नजर आया। पढ़िए पूरी खबर… 2. आरजी कर रेप-मर्डर केस की पीड़ित की मां BJP कैंडिडेट, सभा में कुर्सियां खाली पानीहाटी सीट से आरजीकर रेप केस की पीड़ित की मां रतना देबनाथ BJP के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। 12 अप्रैल को सभा करने गईं तो कुर्सियां खाली पड़ी थीं। रतना देबनाथ अपने चुनाव लड़ने को बेटी को इंसाफ दिलाने की लड़ाई बता रही हैं। महिलाएं उनकी सभा के सामने से गुजरते हुए रुकती हैं। पूछने पर कहती हैं, ‘हम साथ हैं, लेकिन दिखा नहीं सकते। TMC वाले घूम रहे हैं। साथ देख लिया, तो मुश्किल होगी।’ पढ़िए पूरी खबर…
वैभव के शुरुआती और फरेरा के अंतिम प्रहार से राजस्थान ने रोका पंजाब का विजय रथ
PBKSvsRR डोनोवन फरेरा के तूफानी अर्धशतक और शुभम दुबे के साथ उनकी अटूट अर्धशतकीय साझेदारी से राजस्थान रॉयल्स ने इंडियन प्रीमियर लीग में मंगलवार को यहां पंजाब किंग्स को छह विकेट से हरा दिया जो मौजूदा सत्र में पंजाब की टीम की पहली हार है। पंजाब के 223 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए रॉयल्स ने सलामी बल्लेबाजों यशस्वी जायसवाल (51 रन, 27 गेंद, सात चौके, एक छक्का) और वैभव सूर्यवंशी (43 रन, 16 गेंद, पांच छक्के, तीन चौके) की तूफानी पारियों के बाद डोनोवन फरेरा (नाबाद 52 रन, 26 गेंद, छह चौके, तीन छक्के) और शुभम दुबे (नाबाद 31 रन, 12 गेंद, तीन चौके, दो छक्के) के बीच पांचवें विकेट की 32 गेंद में 77 रन की अटूट साझेदारी से 19.2 ओवर में चार विकेट पर 228 रन बनाकर जीत दर्ज की। पंजाब के तेज गेंदबाजों अर्शदीप सिंह (चार ओवर में 68 रन पर एक विकेट), लॉकी फर्ग्युसन (चार ओवर में बिना विकेट के 57 रन) और मार्को यानसेन (3.2 ओवर में बिना विकेट के 41 रन) ने 11.2 ओवर में एक विकेट पर 166 रन लुटाए जो टीम की हार का अहम कारण रहा। पंजाब किंग्स ने मार्कस स्टोइनिस (नाबाद 62, 22 गेंद, छह छक्के, चार चौके) के ताबड़तोड़ अर्धशतक और सलामी बल्लेबाज प्रभसिमरन (59 रन, 44 गेंद, छह चौके, एक छक्का) के जुझारू अर्धशतक से चार विकेट पर 222 रन बनाए। प्रभसिमरन ने अर्धशतक जड़ने के अलावा कूपर कोनोली (30) के साथ दूसरे विकेट के लिए 59 और कप्तान श्रेयस अय्यर (30) के साथ तीसरे विकेट के लिए 48 रन की साझेदारी भी की। लक्ष्य का पीछा करने उतरे रॉयल्स को वैभव सूर्यवंशी और यशस्वी जायसवाल ने तूफानी शुरुआत दिलाई। सूर्यवंशी ने अर्शदीप सिंह की लगातार गेंदों पर छक्के और दो चौकों से खाता खोलने के बाद अगले ओवर में लॉकी फर्ग्युसन की लगातार गेंदों पर चौका और दो छक्के मारे। A SIX to seal the th win of the season! #RR claim two crucial points, ending #PBKS ’ unbeaten streak in New Chandigarh Scorecard https://t.co/fBbdVnExPZ #TATAIPL | #KhelBindaas | #PBKSvRR | @rajasthanroyals pic.twitter.com/YpTTgGwOfo — IndianPremierLeague (@IPL) April 28, 2026 सूर्यवंशी ने अर्शदीप के अगले ओवर में भी छक्का जड़ा लेकिन अगली गेंद पर मिड ऑफ से पीछे की ओर दौड़ते हुए कप्तान श्रेयस अय्यर ने उनका कैच लपका। उन्होंने 16 गेंद का सामना करते हुए पांच छक्के और तीन चौके मारे।सूर्यवंशी के आउट होने के बाद जायसवाल ने तेवर दिखाए। उन्होंने अर्शदीप के इसी ओवर में लगातार गेंदों पर दो चौके और एक छक्का मारा और फिर फर्ग्युसन पर दो चौके जड़े। रॉयल्स ने पावर प्ले में एक विकेट पर 84 रन बनाए।जायसवाल ने बाएं हाथ के स्पिनर हरप्रीत बरार पर चौके के साथ नौवें ओवर में टीम के रनों का शतक पूरा किया।ध्रुव जुरेल हालांकि 20 गेंद में 16 रन बनाने के बाद लेग स्पिनर युजवेंद्र चहल (36 रन पर तीन विकेट) की गेंद पर यानसेन को कैच दे बैठे। कप्तान रियान पराग (29) ने चहल पर चौके से खाता खोला और फिर बरार पर रिवर्स स्वीप से छक्का जड़ा।जायसवाल ने चहल पर चौके के साथ 26 गेंद में अर्धशतक पूरा किया लेकिन अगली गेंद पर सूर्यांश शेडगे को कैच दे बैठे। पराग ने भी चहल की लगातार गेंदों पर छक्का और चौका मारा लेकिन इसी ओवर में डीप मिडविकेट पर शेडगे को कैच दे बैठे।रॉयल्स को अंतिम पांच ओवर में जीत के लिए 58 रन की दरकार थी।शुभम दुबे ने यानसेन की लगातार गेंदों पर छक्के और चौके के साथ रन गति में इजाफा किया लेकिन फर्ग्युसन के अगले ओवर में सिर्फ आठ रन बने। फरेरा ने 18वें ओवर में अर्शदीप की लगातार गेंदों पर छक्का और चौका मारा जबकि अंतिम गेंद पर दुबे ने भी छक्का जड़ा जिससे अंतिम ओवर में रॉयल्स को 18 रन की जरूरत थी।फरेरा ने इसके बाद फर्ग्युसन पर दो चौकों और एक छक्के से रॉयल्स का पलड़ा भारी किया और फिर यानसेन पर छक्के के साथ 26 गेंद में अर्धशतक पूरा किया और टीम को जीत दिलाई। ALSO READ: प्रभसिमरन और स्टॉइनिस के धुआंधार अर्धशतक ने पंजाब को राजस्थान के खिलाफ पहुंचाया 222 रनों तक
भगीरथेश्वर महादेव का चार दिवसीय महोत्सव शुरू
सिरोही। स्थानीय सगरवंशी माली समाज के आराध्य देव भागिरथेश्वर महादेव के प्रतिष्ठा को 50 साल पूरे होने पर स्वर्ण जयंती महोत्सव मंगलवार को शुरू हुआ। चार दिवसीय महोत्सव का समापन 1 मई को होगा। समाज पूर्व सचिव सुरेश सगरवंशी ने बताया कि स्थानीय मंदिर में 24 अप्रैल से ही महिलाएं लगातार महिलाएं मांगलिक गीतो ढोल […] The post भगीरथेश्वर महादेव का चार दिवसीय महोत्सव शुरू appeared first on Sabguru News .
भीलवाड़ा : चार्जिंग पर लगी स्कूटी में हुए धमाके से घर में आग लगी
भीलवाड़ा। राजस्थान में भीलवाड़ा के जिले के हलेड़ गांव में मंगलवार को तड़के रात चार्जिंग पर लगी एक इलेक्ट्रिक स्कूटी में हुए धमाके से पूरे घर में आग लग जाने से लाखों रुपये का नुकसान हो गया। आग के कारण मकान की पट्टियां तक चटक गईं और करीब 10 लाख रुपए के नुकसान का अनुमान […] The post भीलवाड़ा : चार्जिंग पर लगी स्कूटी में हुए धमाके से घर में आग लगी appeared first on Sabguru News .
सुप्रीमकोर्ट ने हौज खास स्थित डियर पार्क से हिरणों को राजस्थान स्थानांतरित करने की अनुमति दी
नई दिल्ली। सुप्रीमकोर्ट ने हौज खास स्थित दिल्ली के ए. एन. झा डियर पार्क से हिरणों को राजस्थान के टाइगर रिजर्व में स्थानांतरित करने की अनुमति दे दी है और इसके साथ ही अदालत ने देश भर में वन्यजीवों के स्थानांतरण के लिए व्यापक दिशा-निर्देश भी निर्धारित किए हैं। केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) के […] The post सुप्रीमकोर्ट ने हौज खास स्थित डियर पार्क से हिरणों को राजस्थान स्थानांतरित करने की अनुमति दी appeared first on Sabguru News .
श्रीगंगानगर में दो मोटरसाइकिलों की भिड़ंत में पति की मौत, पत्नी घायल
श्रीगंगानगर। राजस्थान में श्रीगंगानगर जिले के लालगढ़ जाटान थाना क्षेत्र में दो मोटरसाइकिलों की टक्कर से एक व्यक्ति की मौत हो गई जबकि एक महिला और एक युवक घायल हो गए। पुलिस सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि छिंद्रसिंह अपनी पत्नी कुलविंदर कौर के साथ मोटरसाइकिल पर गणेशगढ़ गांव से सोमवार की रात करीब साढ़े […] The post श्रीगंगानगर में दो मोटरसाइकिलों की भिड़ंत में पति की मौत, पत्नी घायल appeared first on Sabguru News .
I. विस्मृति का भूगोल अतीत अब याद नहीं— धीरे-धीरे संख्या हो गया है। लोग लालटेन की लौ के पास अपने नाम को गर्म रखते थे। अब वे ठंडे कमरों में हैं— बिना आवाज़। देह काँपती थी। अब आत्मा हल्की है। हमने आँखें एक उजले दरवाज़े की देहरी पर रख दीं— भीतर देखा तो अँधेरा नहीं […]
A Portrait in Excess: The Grammar of Power in Donald Trump
“The limits of my language mean the limits of my world.” — Ludwig Wittgenstein In the second presidential debate of October 2016, Hillary Clinton spent four minutes explaining her position on Syrian safe zones — the humanitarian calculus, the no-fly-zone logistics, the Russian entanglement. Trump waited. Then, when the microphone returned to him, he said: […]
भजनलाल को दलित और आदिवासी पीड़ितों की लेनी चाहिए सुध : टीकाराम जूली
जयपुर। राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की कार्यशैली और प्राथमिकताओं पर प्रहार करते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री का पद अत्यंत गरिमामय और ‘सम्मानजनक’ पद होता है लेकिन वह महिला आरक्षण के मुद्दे पर केवल भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं। जूली ने मंगलवार को अपने बयान में […] The post भजनलाल को दलित और आदिवासी पीड़ितों की लेनी चाहिए सुध : टीकाराम जूली appeared first on Sabguru News .
भीलवाड़ा में किशोरी को प्रेम जाल में फंसाकर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने वाला आरोपी अरेस्ट
भीलवाड़ा। राजस्थान में वस्त्र नगरी भीलवाड़ा में पहचान छिपाकर एक किशोरी को प्रेम जाल में फंसाने, रेप करने और फिर जबरन धर्म परिवर्तन के लिए प्रताड़ित करने का मामला सामने आया है। इस सनसनीखेज मामले में सिटी कोतवाली पुलिस ने मुख्य आरोपी सुल्तान मोहम्मद पठान को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय […] The post भीलवाड़ा में किशोरी को प्रेम जाल में फंसाकर धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने वाला आरोपी अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
भीलवाड़ा : खनन कार्य में लगे वाहन चालकों से मारपीट करने के 7 ओर आरोपी अरेस्ट
भीलवाड़ा। राजस्थान में भीलवाड़ा जिले के शंभूगढ़ थाना क्षेत्र में बारनी गांव में ग्रेनाइट पत्थरों से भरे ट्रेलरों का रास्ता रोककर तोडफ़ोड़ करने और चालकों से मारपीट करने के मामले में पुलिस ने सात और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि 19 अप्रैल को सुबह बारनी गांव में ग्रेनाइट […] The post भीलवाड़ा : खनन कार्य में लगे वाहन चालकों से मारपीट करने के 7 ओर आरोपी अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
अलवर : राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में मिड-डे मील की दाल में निकला मरा चूहा
अलवर। राजस्थान में अलवर के रामगढ़ उपखण्ड क्षेत्र में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में उस समय हड़कंप मच गया, जब बच्चों के लिए आए मिड-डे मील की दाल में मरा हुआ चूहा पाया गया। यह मामला सोमवार का बताया जा रहा है, जिसके बाद पूरे स्कूल स्टाफ में अफरा-तफरी मच गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार […] The post अलवर : राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में मिड-डे मील की दाल में निकला मरा चूहा appeared first on Sabguru News .
नई दिल्ली। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने मंगलवार को कहा कि आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक एवं पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल महात्मा गांधी के नाम पर राजनीतिक ढोंग कर रहे हैं। यादव ने आरोप लगाया कि दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के बाद सरकारी कार्यालयों से महात्मा […] The post अरविंद केजरीवाल के ‘सत्याग्रह’ को कांग्रेस ने बताया ढोंग, कार्यालय से राष्ट्रपिता की तस्वीर हटाने का आरोप appeared first on Sabguru News .
बारात के इंतजार में मेहंदी लगाए बैठी रही दुल्हन, दूल्हा ममेरी बहन के साथ हुआ रफूचक्कर
फिरोजाबाद। उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के शिकोहाबाद क्षेत्र में सोमवार को एक परिवार मे शादी की खुशियां उस समय काफूर हो गई जब एक दुल्हन दूल्हे और बारात के इंतजार में सजी बैठी रही तो वही दूल्हा अपने घर से अपनी ममेरी बहन के साथ लापता हो गया। शिकोहाबाद के गांव नीम खेरिया निवासी […] The post बारात के इंतजार में मेहंदी लगाए बैठी रही दुल्हन, दूल्हा ममेरी बहन के साथ हुआ रफूचक्कर appeared first on Sabguru News .
फार्मा सेक्टर में जोरदार हलचल: जगसनपाल के शेयरों में उछाल और किनिसा की आय में रिकॉर्ड वृद्धि
साल 2026 की शुरुआत फार्मास्युटिकल सेक्टर के लिए बेहद सकारात्मक और मुनाफे से भरी रही...
महेंद्र सिंह धोनी का पूरे IPL से बाहर रहना लगभग तय, अभ्यास मैच में लगी चोट
चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) के मुख्य कोच स्टीफन फ्लेमिंग ने कहा कि आईपीएल में महेंद्र सिंह धोनी की वापसी में और देरी होगी क्योंकि इस दिग्गज खिलाड़ी को एक अभ्यास मैच के दौरान पिंडली में फिर से चोट लग गई है।सीएसके ने इस सत्र में अपने पूर्व कप्तान के बिना आठ मैच खेले हैं और फ्लेमिंग ने कहा कि शुरू में उम्मीद थी कि धोनी कुछ हफ्तों में ठीक हो जाएंगे लेकिन पिंडली की चोट के बढ़ने के कारण अब ज्यादा सावधानी से रिहैबिलिटेशन प्रक्रिया अपनानी पड़ रही है। फ्लेमिंग ने एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा,‘‘ वह वापसी के लिए काफी उत्सुक हैं। लेकिन पिंडली की चोट काफी मुश्किल होती है। अगर वह जोर लगाते हैं और पिंडली में फिर से खिंचाव आ जाता है तो वह पूरे टूर्नामेंट से बाहर हो जाएंगे। ’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसलिए हमने शुरू में थोड़ी जल्दबाजी की और फिर एक अभ्यास मैच में उनकी पिंडली में फिर से खिंचाव आ गया। और तब से वह कड़ी मेहनत कर रहे हैं। लेकिन इसमें एक झटका लगा इसलिए इसमें हमारी सोच से ज्यादा समय लग रहा है। लेकिन देखिए, इस मामले में वही सबसे बेहतर फैसला ले सकते हैं। ’’ फ्लेमिंग ने कहा कि धोनी टीम के फिजियो के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘वह फिजियो के साथ कड़ी मेहनत कर रहे हैं और सारा रिहैब कर रहे हैं। और हम बस उनके फैसले का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन मैं बस यही कह सकता हूं और मैं इसे हल्के में नहीं ले रहा हूं कि उनकी हालत में सुधार हो रहा है और वह अपनी तरफ से हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं। ’’ MS DHONI RULED OUT OF IPL CSK head coach Stephen Fleming said that MS Dhoni has suffered another injury in his calf during practice. After this setback, his return could be delayed. Fleming mentioned that rushing him back could worsen the injury, so he is being handled with… pic.twitter.com/4NWtzrddLe — SIR AYUSH (@ayush_m255) April 28, 2026 मुंबई इंडियंस के खिलाफ अपने अगले मैच से पहले लंबे ब्रेक के साथ CSK धोनी के उबरने की प्रक्रिया पर नजर रखना जारी रखेगी। हालांकि फ्लेमिंग के अपडेट से लगता है कि उनकी वापसी की संभावना कम ही है।धोनी नियमित रूप से ट्रेनिंग सत्र में हिस्सा ले रहे हैं, लेकिन उन्होंने खुद को ज्यादातर थ्रो-डाउन तक ही सीमित रखा है। हाल में उन्हें विकेटकीपिंग का अभ्यास करते देखा गया था, जिससे उनकी संभावित वापसी की चर्चा तेज हो गई थी। धोनी ने 2020 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद से आईपीएल खेलना जारी रखा है। इस 44 वर्षीय खिलाड़ी के आईपीएल में भविष्य को लेकर प्रत्येक सत्र में कयास लगाए जाते हैं। धोनी अब सिर्फ आईपीएल में खेलते हैं इसलिए उनके लिए मैच फिटनेस बनाए रखना और भी मुश्किल हो जाता है।
हनुमानगढ़ : घर में अकेली महिला से 25 लाख रुपए के सोने-चांदी के आभूषण लूटकर बदमाश फरार
हनुमानगढ़। राजस्थान में हनुमानगढ़ जिले के संगरिया थाना क्षेत्र में मोरजंड सिखान गांव में घर में अकेली महिला से तीन नकाबपोश बदमाश सोने-चांदी के आभूषण और नगदी लूटकर फरार हो गये। पुलिस सूत्रों ने मंगलवार को बताया कि महिला रविवार को सुबह घर में अपने बच्चों के साथ अकेली थी। शाम करीब पौने पांच बजे […] The post हनुमानगढ़ : घर में अकेली महिला से 25 लाख रुपए के सोने-चांदी के आभूषण लूटकर बदमाश फरार appeared first on Sabguru News .
दिल्ली के अशोका रोड पर देर रात सड़क हादसे में दो भाइयों की मौत
नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में अशोका रोड पर पर सोमवार देर रात हुए दर्दनाक सड़क हादसे में दो चचेरे भाइयों की मौत हो गई। मृतकों की पहचान यज्ञ भाटिया (20) और अभव भाटिया (14) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार संसद मार्ग थाना क्षेत्र में अशोका रोड स्थित महादेव रोड टी-प्वाइंट, पीएनबी […] The post दिल्ली के अशोका रोड पर देर रात सड़क हादसे में दो भाइयों की मौत appeared first on Sabguru News .
Nrisingh Jayanti 2026: नृसिंह जयंती पर करें 5 विशेष कार्य तो मिलेगी शत्रुओं से मुक्ति
Nrisingh Chaturdashi 2026 Ke Upay: हिंदू धर्म में भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार का विशेष महत्व है। भगवान विष्णु ने दुष्ट दानव हिरण्यकश्यप का वध कर अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की थी। इस घटना को याद करते हुए वैशाख मास की शुक्ल पक्ष चतुर्दशी को नृसिंह चतुर्दशी और इस दिन को नृसिंह जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भक्त व्रत, पूजा, हवन और भजन-कीर्तन करके भगवान नरसिंह की भक्ति में लीन रहते हैं। नृसिंह जयंती और चतुर्दशी का उद्देश्य भक्तों की रक्षा, शत्रुओं से मुक्ति और जीवन में समृद्धि लाना है। ALSO READ: Nrisingh Chaturdashi 2026: नृसिंह चतुर्दशी क्या है, वैशाख मास में क्यों मनाई जाती है? भगवान नृसिंह शक्ति, साहस और सुरक्षा के अधिष्ठाता देवता हैं। यदि आप शत्रुओं से घिरे हैं, कानूनी विवादों में फंसे हैं या अज्ञात भय आपको सताता है, तो नृसिंह जयंती यानी वैशाख शुक्ल चतुर्दशी के दिन ये 5 विशेष कार्य आपकी हर बाधा को दूर कर सकते हैं: 1. गोधूलि बेला में नृसिंह स्तोत्र का पाठ भगवान नृसिंह का प्राकट्य संध्या काल (गोधूलि बेला) में हुआ था, इसलिए इस समय उनकी पूजा का फल अनंत गुना मिलता है। इस दिन का विशेष फल प्राप्त करने हेुत शाम के समय घी का चौमुखी दीपक जलाएं और 'ऋणमोचन नृसिंह स्तोत्र' या 'नृसिंह कवच' का पाठ करें। लाभ: यह शत्रुओं के षड्यंत्रों को विफल करता है और आपको एक सुरक्षा कवच प्रदान करता है। 2. दक्षिणावर्ती शंख से अभिषेक भगवान विष्णु के अवतार होने के कारण नृसिंह देव को शंख अत्यंत प्रिय है। इस दिन भगवान नृसिंह की प्रतिमा या तस्वीर का केसर मिश्रित दूध और जल से अभिषेक करें। यदि दक्षिणावर्ती शंख का प्रयोग करें तो श्रेष्ठ है। लाभ: इससे जीवन की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है और छिपे हुए शत्रुओं का प्रभाव कम होता है। 3. 'ठंडी' वस्तुओं का भोग लगाएं भगवान नृसिंह का स्वरूप अत्यंत उग्र और क्रोधी माना जाता है। उन्हें शांत करने और प्रसन्न करने के लिए शीतल चीजों का अर्पण किया जाता है। इसीलिये पूजा में भगवान को सत्तू, गुड़ का शरबत, ठंडा दही, तरबूज या पंजीरी का भोग लगाएं। लाभ: भगवान का क्रोध शांत होने से भक्तों पर उनकी सौम्य कृपा बरसती है और घर के क्लेश दूर होते हैं। 4. विशेष बीज मंत्र का जप शत्रु बाधा से मुक्ति के लिए मंत्र जप एक अचूक अस्त्र है। कार्य: लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला से इस मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें: 'ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्। नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥' लाभ: यह मंत्र न केवल शत्रुओं का नाश करता है बल्कि अकाल मृत्यु के भय से भी मुक्ति दिलाता है। ALSO READ: Buddha Purnima 2026: बुद्ध के कर्म का मनोविज्ञान: कैसे बनता है कर्म से भाग्य? 5. मोर पंख और लाल फूल अर्पित करना भगवान नृसिंह को साहस का प्रतीक माना जाता है, और उन्हें कुछ विशेष वस्तुएं अर्पित करने से आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। नृसिंह जयंती के अवसर पर नृसिंह मंदिर जाकर भगवान को लाल रंग के फूल- जैसे गुड़हल और मोर पंख चढ़ाएं। लाभ: लाल फूल मंगल ग्रह को भी शांत करते हैं, जिससे शत्रु आप पर हावी नहीं हो पाते और कानूनी मामलों में सफलता मिलती है। महत्वपूर्ण सावधानी: भगवान नृसिंह की पूजा करते समय मन में किसी के प्रति ईर्ष्या या द्वेष न रखें। उनकी पूजा का उद्देश्य 'अधर्म पर धर्म की विजय' और 'स्वयं की रक्षा' होना चाहिए, न कि किसी का अहित करना। याद रखें: इस दिन व्रत रखने और अपनी सामर्थ्य अनुसार गरीबों को जल या अन्न का दान करने से भगवान नृसिंह बहुत जल्द प्रसन्न होते हैं। अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ALSO READ: मंगल मेष में प्रवेश: क्या बढ़ेगी भारत की सैन्य ताकत और बंगाल में पीएम मोदी का प्रभाव?
ई़डी ने आरकॉम की लगभग तीन हजार करोड़ की संपत्ति कुर्क की
नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) बैंक धोखाधड़ी मामले में 3,034.90 करोड़ रुपए की संपत्ति कुर्क की है। इसके साथ ही रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप (आरएएजी) से जुड़े मामलों में कुल कुर्की 19,344 करोड़ रुपए से अधिक हो गई है। ईडी ने मंगलवार को बताया कि संपत्तियों को क्षय से बचाने […] The post ई़डी ने आरकॉम की लगभग तीन हजार करोड़ की संपत्ति कुर्क की appeared first on Sabguru News .
क्यों खास है पश्चिम बंगाल? जानिए इसका इतिहास, पर्यटन स्थल और रोचक तथ्य
भारतीय धर्म, कला, संस्कृति, अध्यात्म, दर्शन, तंत्र मार्ग और काला जादू की भूमि बंगाल क्रांतिकारियों की भी जन्मभूमि रही है। बंगाल के बारे में जितना कहा और लिखा जाए उतना कम है, परंतु बंगाल का विभाजित हो जाना भारत का सबसे बड़ा नुकसान रहा। मुगल और अंग्रेज काल में सबसे ज्यादा आंदोलन और विद्रोह बंगाल में हुए। 1757 में प्लासी के विद्रोह से लेकर 1905 के बंग-भंग आंदोलन तक बंगाल ने बहुत कुछ सहा। बंगाल ने इस देश को बहुत कुछ दिया, लेकिन लेफ्ट ने उससे सबकुछ छिन लिया। आओ जानते हैं भारत के पश्चिम बंगाल (बंग्लादेश नहीं) के संबंध में संक्षिप्त जानकारी। 1. ऐतिहासिक परिचय एवं शासनकाल प्राचीन काल: बंगाल प्राचीन समय से ही शैव, शाक्त और बौद्ध संप्रदायों का केंद्र रहा है। यहाँ रामायण और महाभारत कालीन राजाओं का शासन रहा। मध्यकाल: पाल और सेन वंश के बाद यहाँ मुस्लिम शासन शुरू हुआ, जिसमें इलियास, बायाजिद, गणेश, हाबिस और हुसेन वंश प्रमुख थे। इसके बाद शूरवंश, काररानि वंश और फिर मुगलों का आधिपत्य रहा। ब्रिटिश काल एवं नवाब: बंगाल के नवाबों में सिराजुद्दौला अंतिम स्वतंत्र शासक था। अंग्रेजों के काल में ही बंगाल का विभाजन हुआ। ब्रिटिश काल का अंतिम नवाब सइफ उद दौला था। 2. बंगाल का विभाजन और सांख्यिकी विभाजन का इतिहास: 1905 में अंग्रेजों ने धर्म के आधार पर 'बंग-भंग' किया। 1947 में विभाजन स्थायी हुआ, जिससे पूर्वी बंगाल (पाकिस्तान का हिस्सा) और पश्चिम बंगाल (भारत का हिस्सा) बने। 1971 में पूर्वी बंगाल 'बांग्लादेश' के रूप में स्वतंत्र देश बना। जनसांख्यिकी (बांग्लादेश): विभाजन के समय वहाँ 13.50% हिंदू थे। 2011 में यह संख्या 8.54% रह गई और 2022 की गणना के अनुसार वहाँ हिंदुओं की आबादी लगभग 7.95% से 8% (करीब 1.31 करोड़) है। 3. धार्मिक एवं आध्यात्मिक विरासत शक्तिपीठ: कुल 52 शक्तिपीठों में से लगभग 12-13 पश्चिम बंगाल में और 4 बांग्लादेश में (श्रीशैल, करतोयातट, यशोर, चट्टल और जयंती) स्थित हैं। प्रमुख संत: चैतन्य महाप्रभु, रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद, महर्षि अरविंद, स्वामी प्रणवानंद, युक्तेश्वर गिरि, योगी श्यामाचरण लाहिड़ी और स्वामी योगानंद जैसे महान संतों ने यहाँ जन्म लिया या कार्य किया। त्योहार: बंगाल अपनी तंत्र विद्या और आध्यात्मिक दर्शन के लिए प्रसिद्ध है। 'दुर्गा पूजा' यहाँ का सबसे बड़ा और प्रमुख त्योहार है। 4. प्रमुख दर्शनीय और पूजा स्थल मंदिर (पश्चिम बंगाल): कालीघाट, दक्षिणेश्वर काली मंदिर, तारापीठ, किरीतेश्वरी (मुर्शिदाबाद), कनक दुर्गा (मिदनापुर), और हंसेश्वरी मंदिर प्रमुख हैं। इसके अलावा बेलूर मठ (श्रीरामकृष्ण मठ) और बैंडेल चर्च प्रसिद्ध हैं। बांग्लादेश के मंदिर: ढाकेश्वरी मंदिर (ढाका), आदिनाथ मंदिर, कांताजी मंदिर और पुठिया मंदिर परिसर। 5. भूगोल और नदियां प्रमुख नदियां: बंगाल से लगभग 80 नदियां बहती हैं, जिनमें 19 प्रमुख हैं। गंगा यहाँ की मुख्य नदी है, जो पश्चिम बंगाल में प्रवेश कर 'हुगली' के नाम से जानी जाती है। अन्य नदियां: भागीरथी, तीस्ता, महानंदा, दामोदर, अजय, मयुराक्षी और जलंगी प्रमुख हैं। कोलकाता हुगली नदी के किनारे स्थित है। 6. बंगाल की विभूतियाँ क्रांतिकारी और नेता: नेताजी सुभाष चन्द्र बोस, अरविंद घोष, श्यामा प्रसाद मुखर्जी और खुदीराम बोस। साहित्य और कला: रवीन्द्र नाथ ठाकुर (टैगोर), बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय, शरत चन्द्र चट्टोपाध्याय और सत्यजित राय। विज्ञान और समाज सुधार: जगदीश चन्द्र वसु, सत्येन्द्र नाथ बोस, राजा राममोहन राय और अमर्त्य सेन। खेल और राजनीति: सौरभ गांगुली (क्रिकेट), ज्योति बसु और ममता बनर्जी (राजनीति)। अध्यात्मिक नेता: चैतन्य महाप्रभु, प्रभु जगत्बंधु, स्वामी विवेकानंद, अरविंद घोष, रामकृष्ण परमहंस, श्यामाचरण लाहिड़ी (लाहिड़ी महाशय), स्वामी युक्तेश्वर गिरि, परमहंस योगानंद, स्वामी प्रणवानंद, योगी आनंदमूर्ति, निगमानंद परमहंस, बामखेपा (तारापीठ), कमलाकांत, 7. सांस्कृतिक पहचान बंगाल अपनी कला, संस्कृति, दर्शन और तंत्र मार्ग के लिए विश्वविख्यात है। यहाँ की फुटबॉल संस्कृति (मोहन बगान और ईस्ट बंगाल क्लब) अत्यंत लोकप्रिय है। यह भूमि स्वतंत्रता आंदोलनों और विद्रोहों (जैसे 1757 प्लासी और 1905 बंग-भंग) की साक्षी रही है। 8. बंगाल के प्रमुख पर्यटन स्थल: पहाड़ों की रानी और उत्तर बंगाल दार्जिलिंग (Darjeeling): यहाँ की 'टॉय ट्रेन' (यूनेस्को हेरिटेज), चाय के बागान और टाइगर हिल से कंचनजंगा की चोटियों पर सूर्योदय देखना जादुई अनुभव है। कालिम्पोंग (Kalimpong): बौद्ध मठों, फूलों की नर्सरी और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध। मिरिक (Mirik): यहाँ की सुमेंदु झील और चारों ओर फैले देवदार के जंगल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। सदाकफू (Sandakphu): यह पश्चिम बंगाल की सबसे ऊँची चोटी है, जो ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए स्वर्ग है। कोलकाता: 'सिटी ऑफ जॉय' विक्टोरिया मेमोरियल: सफेद संगमरमर से बनी यह शानदार इमारत ब्रिटिश काल की याद दिलाती है। हावड़ा ब्रिज : हुगली नदी पर बना यह बिना खंभों वाला पुल कोलकाता की पहचान है। दक्षिणेश्वर और कालीघाट मंदिर: यहाँ की आध्यात्मिक ऊर्जा और वास्तुकला अद्वितीय है। इंडियन म्यूजियम: भारत का सबसे पुराना और बड़ा संग्रहालय। इको पार्क और साइंस सिटी: परिवार और बच्चों के लिए बेहतरीन पिकनिक स्पॉट। समुद्र तट और द्वीप दीघा (Digha): बंगाल का सबसे लोकप्रिय समुद्री किनारा, जहाँ उथला समुद्र और शांत लहरें मिलती हैं। मंदारमणि (Mandarmani): यह अपनी लंबी मोटर-एबल बीच (जहाँ गाड़ी चलाई जा सके) के लिए मशहूर है। सागर द्वीप, गंगा सागर (Ganga Sagar): जहाँ गंगा नदी बंगाल की खाड़ी में मिलती है। यहाँ मकर संक्रांति पर विशाल मेला लगता है। यह एक हिंदू तीर्थ स्थल भी है। वन्यजीव और प्रकृति सुंदरबन नेशनल पार्क (Sundarbans): यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल और 'रॉयल बंगाल टाइगर' का घर। यहाँ के मैंग्रोव जंगल और नाव की सवारी रोमांचक होती है। जलदापारा नेशनल पार्क: यह एक सींग वाले भारतीय गैंडे (Rhino) के लिए प्रसिद्ध है। ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत शांति निकेतन (बीरभूम): रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित विश्व भारती विश्वविद्यालय। यहाँ का 'पौष मेला' और 'बसंत उत्सव' विश्व प्रसिद्ध है। मुर्शिदाबाद: नवाबों का शहर, जहाँ का हजारद्वारी पैलेस (1000 दरवाजों वाला महल) देखने लायक है। बिष्णुपुर (बांकुरा): यह अपने टेराकोटा (पकी मिट्टी) के मंदिरों और बालूचरी साड़ियों के लिए जाना जाता है।
इंडियन ओवरसीज बैंक ने मांगा मौत का सबूत, बहन का कंकाल लेकर पहुंचा भाई
नई दिल्ली। इंडियन ओवरसीज बैंक ने एक व्यक्ति के बहन की मौत के सबूत के तौर पर बैंक में कंकाल लेकर पहुंचने की घटना पर सफाई देते हुए कहा है कि शाखा प्रबंधक का इरादा उस व्यक्ति को परेशान करने का नहीं था, बल्कि वह सिर्फ नियमों का पालन कर रहे थे। घटना के एक […] The post इंडियन ओवरसीज बैंक ने मांगा मौत का सबूत, बहन का कंकाल लेकर पहुंचा भाई appeared first on Sabguru News .
मटका किंग रिव्यू: सत्ता, सिस्टम और सट्टा के टकराव की परतें
‘मटका किंग’ का सबसे बड़ा आकर्षण इसका विषय है क्योंकि यह भारत में सट्टेबाजी के सबसे चर्चित नाम रतन खत्री से प्रेरित कहानी है। सीरिज में इस किरदार को ब्रिज भट्टी के नाम से पेश किया गया है, जो पाकिस्तान से भारत आकर छोटी नौकरी से शुरुआत करता है और फिर ताश के पत्तों के सहारे एक ऐसा नंबर गेम खड़ा करता है, जो मुंबई से निकलकर पूरे देश में फैल जाता है। मिल मजदूरों से लेकर पांच सितारा होटलों के अमीरों तक, हर कोई इस खेल में अपनी किस्मत आजमाता है। ब्रिज का किरदार इस अवैध धंधे को एक ‘ईमानदार’ जुए के रूप में पेश करता है, जहां जीतने वाले को पूरा पैसा मिलता है। यही भरोसा उसे भीड़ से अलग करता है और धीरे-धीरे वह एक ‘मसीहा’ जैसी छवि बना लेता है। जैसे-जैसे ब्रिज का साम्राज्य फैलता है, वैसे-वैसे सिस्टम उसके खिलाफ खड़ा होता नजर आता है। महाराष्ट्र सरकार खुद की लॉटरी शुरू कर देती है, पुलिस, नेता और बॉलीवुड के लोग उससे वसूली करने लगते हैं। नोटिस, पूछताछ और दबाव, ब्रिज की दुनिया पर शिकंजा कसने लगता है। लेकिन असली टकराव सिर्फ बाहर नहीं, भीतर भी है। पैसा आते ही रिश्ते टूटने लगते हैं। पत्नी, भाई और करीबी लोग उससे दूर होने लगते हैं। निर्देशक नागराज मंजुले इन सभी परतों को आठ एपिसोड में पिरोने की कोशिश करते हैं, लेकिन असर उतना गहरा नहीं हो पाता जितना होना चाहिए था। सीरिज की सबसे बड़ी कमजोरी इसका फ्लैट नैरेशन है। जहां कहानी में जबरदस्त उतार-चढ़ाव की गुंजाइश थी, वहां ज्यादातर सीन सपाट नजर आते हैं। आगे क्या होने वाला है, इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है, जिससे रोमांच कम हो जाता है। कुछ सी, जैसे फ्लाइट में या पुलिस स्टेशन में ब्रिज का नंबर खोलना, जरूर ध्यान खींचते हैं, लेकिन ऐसे पल गिने-चुने हैं। ब्रिज को सिंधी दिखाया गया है, लेकिन उसके परिवार और बैकग्राउंड को विश्वसनीय तरीके से नहीं रचा गया। एक समय के बाद कहानी ठहर जाती है और ऐसा लगता है कि सिर्फ एपिसोड बढ़ाने के लिए इसे खींचा जा रहा है। सबसे बड़ी कमी यह है कि मटका गेम कैसे काम करता है, इसे ठीक से समझाया ही नहीं गया। जो दर्शक इस खेल से अनजान हैं, उनके लिए यह कन्फ्यूजिंग बन जाता है। यहां एक-दो एपिसोड पूरी तरह इस सिस्टम को समझाने पर होने चाहिए थे। नागराज मंजुले ने कहानी को बेहद धीमी गति से आगे बढ़ाया है। ब्रिज को एक ‘ईमानदार अपराधी’ और कभी-कभी ‘मसीहा’ के रूप में पेश करना दिलचस्प जरूर है, लेकिन इसे और गहराई दी जा सकती थी। बजट की कमी भी कई जगह साफ नजर आती है। सेट्स नकली लगते हैं और कार वाले सीन पुराने जमाने की फिल्मों की याद दिलाते हैं। सीरिज की कास्टिंग भी थोड़ा खटकती है। विजय वर्मा और सई तम्हाणकर जैसे शानदार कलाकार यहां उम्मीद के मुताबिक प्रभाव नहीं छोड़ पाते। विजय वर्मा का अभिनय बेहद सपाट लगता है, जबकि सई भी खास रंग नहीं भर पातीं। वहीं कृतिका कामरा अपनी परफॉर्मेंस से प्रभावित करती हैं। सिद्धार्थ जाधव और गिरीश कुलकर्णी भी अपने किरदारों में जमे हैं। गुलशन ग्रोवर एक बार फिर ‘बैडमैन’ की छवि से बाहर नहीं निकल पाते। ‘मटका किंग’ एक ऐसी सीरिज है, जिसका विषय बेहद दिलचस्प और संभावनाओं से भरा हुआ था। रतन खत्री से प्रेरित कहानी दर्शकों को बांध सकती थी, लेकिन कमजोर प्रेजेंटेशन, धीमी रफ्तार और अधूरी व्याख्या इसे औसत बना देती है। यह सीरिज देखी जा सकती है, लेकिन सिर्फ इसके दिलचस्प किरदार और बैकस्टोरी के लिए, न कि इसके ट्रीटमेंट के लिए।
बटाला में अज्ञात हमलावरों ने गोली मार कर दो लोगों की हत्या की, एक घायल
बटाला। पंजाब के बटाला में श्री हरगोबिंदपुर उपमंडल के भोमा गांव में सोमवार देर रात अज्ञात हमलावरों ने टहल रहे तीन लोगों पर गोलीबारी की, जिसमें दो व्यक्तियों की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया। बटाला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) मेहताब सिंह ने बताया कि अचानक हुए इस […] The post बटाला में अज्ञात हमलावरों ने गोली मार कर दो लोगों की हत्या की, एक घायल appeared first on Sabguru News .
सूरतगढ़ में स्कूल बस अनियंत्रित होकर खेत में पलटी, एक बालिका घायल
श्रीगंगानगर। राजस्थान में श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ थाना क्षेत्र में मंगलवार को एक स्कूल की बाल वाहिनी अनियंत्रित होकर सड़क से उतरकर खेत में पलटने से एक बालिका घायल हो गई जबकि अन्य बच्चें सुरक्षित बच गए। प्राप्त जानकारी के अनुसार मानकसर-अनूपगढ़ राजकीय राजमार्ग पर सुबह करीब साढ़े सात बजे आसपास के ग्रामीण इलाकों से […] The post सूरतगढ़ में स्कूल बस अनियंत्रित होकर खेत में पलटी, एक बालिका घायल appeared first on Sabguru News .
मनीष सिसोदिया ने भी न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता की अदालत में पेश होने से किया इनकार
नई दिल्ली। दिल्ली आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल के बाद अब दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा को पत्र लिखकर सूचित किया है कि न तो वह और न ही उनके वकील उनकी अदालत में पेश होंगे। सिसोदिया ने अपने पत्र और सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट […] The post मनीष सिसोदिया ने भी न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता की अदालत में पेश होने से किया इनकार appeared first on Sabguru News .
इंदौर में संपन्न हुई पिस्टल शूटिंग प्रतियोगिता; दीपेंद्र और तनिष्क रहे विजेता
चत्रभुज नरसी स्कूल (CNS), इंदौर में दो दिवसीय पिस्टल शूटिंग कॉम्पिटिशन सम्पन्न हुई। ओलंपिक कोच और कॉमनवेल्थ गोल्ड मेडलिस्ट श्री रौनक पंडित की देखरेख में शुरू हुई स्कूल की नई स्टेट-ऑफ़-द-आर्ट पिस्टल शूटिंग एकेडमी ने अपने पहले ही आयोजन में शहर की युवा प्रतिभाओं को नई दिशा दी है। दो दिनों तक चले कड़े मुकाबले के बाद, दीपेंद्र वर्मा (पिता) और तनिष्क वर्मा (पुत्र) ने अपने सटीक निशाने और धैर्य का परिचय देते हुए विजेता का खिताब अपने नाम किया, जबकि आदित्यवर्धन सिंह और भूमिका सोलंकी प्रतियोगिता के रनर -अप रहे। पिस्टल शूटिंग वर्कशॉप में लगभग 89 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया और पेशेवर शूटिंग की बारीकियों को समझा। इस पहल पर बात करते हुए, चत्रभुज नरसी स्कूल के चेयरपर्सन श्री सुजय जयराज ने कहा , चत्रभुज नरसी स्कूल में हमारा मानना है कि शिक्षा को पढ़ाई से आगे बढ़कर अनुशासन, आत्मविश्वास और चरित्र निर्माण पर केंद्रित होना चाहिए। यह शूटिंग एकेडमी और फिएस्टा जैसे आयोजन हमारे उसी विजन को दर्शाते हैं, जहाँ हम छात्रों को न केवल ज्ञान बल्कि विश्वस्तरीय मौके और खेल के जरिए मजबूती प्रदान करते हैं। एकेडमी के मेंटर, ओलंपिक कोच और कॉमनवेल्थ गोल्ड मेडलिस्ट श्री रौनक पंडित ने युवा निशानेबाजों के समर्पण की सराहना करते हुए कहा , - इस शुरुआती स्तर पर युवा सीखने वालों को शूटिंग के खेल से रूबरू कराना सिर्फ एक कॉम्पिटिशन नहीं था—बल्कि यह उनके भीतर फोकस, सब्र और आत्मविश्वास पैदा करने की एक कोशिश थी। मुझे इन दो दिनों में बच्चों के भीतर सीखने की जो ललक और धैर्य दिखा, वह काबिले-तारीफ है। चत्रभुज नरसी स्कूल में मेरा उद्देश्य तकनीक सिखाने के साथ उन मूल्यों को जगाना है जो इन बच्चों को जीवन की हर चुनौती के लिए तैयार करें। यहाँ की वर्ल्ड-क्लास 10-मीटर शूटिंग रेंज इंदौर में भविष्य के ओलंपिक चैंपियंस तैयार करने की क्षमता रखती है। प्रिंसिपल डॉ जेरिन जैकब ने भी आयोजन की सफलता पर कहा कि वर्ल्ड-क्लास एथलीट्स के साथ सीधे जुड़कर बच्चों ने सीखा है कि कैसे अनुशासन और फोकस जीवन के हर पहलू में उत्कृष्टता ला सकता है। शूटिंग रेंज के बाहर, स्कूल परिसर में आयोजित 'फिएस्टा' ने परिवारों के लिए एक शानदार उत्सव का माहौल तैयार किया, जिसमें लगभग 266 लोगों ने शिरकत की। इस फिएस्टा में विविध एक्टिविटी स्टॉल्स, रिटेल आउटलेट्स, क्रिएटिव आर्ट स्पेसेस, DIY स्टॉल्स और बच्चों के आकर्षण के लिए बाउंसी कैसल जैसे कई विकल्प मौजूद थे। इस पूरे आयोजन का मुख्य आकर्षण वह नया 'प्ले एरिया' रहा जिसका उद्घाटन फिएस्टा से ठीक पहले किया गया था। दिन भर बच्चे अपने माता-पिता के साथ इस आधुनिक प्ले एरिया में समय बिताते और खेल का आनंद लेते नजर आए। इसके साथ ही, बच्चों की माताओं के लिए विशेष रूप से जुम्बा सत्र आयोजित किया गया, जिसमें बच्चों ने अपनी माताओं के साथ उत्साहपूर्वक भाग लिया और खूब आनंद उठाया। चत्रभुज नरसी स्कूल, इंदौर एक प्रोग्रेसिव संस्थान है जो शिक्षा, खेल और कला के समन्वय से छात्रों का भविष्य संवारने के लिए प्रतिबद्ध है। शूटिंग एकेडमी जैसी पहल स्कूल के एक्सीलेंस के प्रति कमिटमेंट को और मजबूत करती है।
आमिर खान ने लगाई '3 इडियट्स' के सीक्वल पर मुहर, 10 साल बाद की दिखेगी कहानी
भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो सिर्फ बॉक्स ऑफिस के आंकड़े नहीं बदलतीं, बल्कि लोगों की सोच बदल देती हैं। साल 2009 में आई राजकुमार हिरानी की फिल्म '3 इडियट्स' उन्हीं में से एक थी। पिछले कई वर्षों से इस फिल्म के सीक्वल को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं, लेकिन अब खुद 'मिस्टर परफेक्शनिस्ट' आमिर खान ने इन चर्चाओं पर विराम लगाते हुए यह साफ कर दिया है कि '3 इडियट्स 2' पर काम शुरू हो चुका है। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान आमिर खान ने खुलासा किया कि फिल्म का सीक्वल पाइपलाइन में है। आमिर ने बताया, राजू (राजकुमार हिरानी) फिलहाल '3 इडियट्स 2' की कहानी पर काम कर रहे हैं। मैंने इसकी मूल कहानी सुनी है और यह वाकई में अद्भुत है। हालांकि अभी स्क्रिप्ट पर कुछ और काम होना बाकी है, लेकिन कहानी का विचार बहुत ही अनूठा है। आमिर ने आगे कहा कि वह एक बार फिर से 'फुंसुख वांगडू' का किरदार निभाने के लिए बेहद उत्साहित हैं। अपनी पिछली फिल्म 'लाल सिंह चड्ढा' की असफलता के बाद आमिर अब 'सितारे जमीन पर' और '3 इडियट्स' जैसे प्रोजेक्ट्स के साथ अपनी पुरानी लय वापस पाने की कोशिश कर रहे हैं। 10 साल आगे बढ़ेगी कहानी खबरों की मानें तो '3 इडियट्स 2' की कहानी वहीं से शुरू नहीं होगी जहां पहली फिल्म खत्म हुई थी। फिल्म में एक दशक का 'लीप' दिखाया जाएगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि कॉलेज के वो तीन दोस्त—रेंचो, फरहान और राजू—अपनी प्रोफेशनल और पर्सनल जिंदगी में 10 साल बाद कहां खड़े हैं। कहा जा रहा है कि फिल्म में आमिर खान के साथ आर. माधवन (फरहान) और शरमन जोशी (राजू) की वापसी लगभग तय है। साथ ही करीना कपूर खान भी 'पिया' के रूप में अपनी भूमिका को आगे बढ़ा सकती हैं। बोमन ईरानी (वायरस) और ओमी वैद्य (चतुर) के बिना यह फिल्म अधूरी मानी जाती है, इसलिए मेकर्स उन्हें भी स्क्रिप्ट में अहम जगह देने की योजना बना रहे हैं।
Nrisingh Chaturdashi 2026: नृसिंह चतुर्दशी क्या है, वैशाख मास में क्यों मनाई जाती है?
Vaishakh Month Nrisingh Jayanti: नृसिंह चतुर्दशी भगवान विष्णु के सबसे उग्र और शक्तिशाली अवतार, भगवान नृसिंह के प्राकट्य का उत्सव है। यह पर्व वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन सूर्यास्त के समय उनकी पूजा करने से शत्रुओं पर विजय और घोर संकटों से मुक्ति मिलती है। वर्ष 2026 में नृसिंह चतुर्दशी या भगवान नृसिंह जयंती 30 अप्रैल, दिन गुरुवार को मनाई जा रही है। ALSO READ: त्रिपुष्कर योग 2026: इस दिन क्या करें, कैसे मिलेगा कई गुना लाभ? नृसिंह चतुर्दशी क्या है? वैशाख मास में ही क्यों मनाई जाती है? इस दिन के मुख्य नियम और परंपराएं धार्मिक मान्यता (प्राकट्य का समय) वैशाख की ऊर्जा और तप धर्म की स्थापना का संदेश यहां इसके महत्व और वैशाख मास से इसके संबंध की विस्तृत जानकारी दी गई है: नृसिंह चतुर्दशी क्या है? पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा करने और अधर्मी राजा हिरण्यकश्यप का वध करने के लिए नृसिंह अवतार (आधा सिंह और आधा मनुष्य) धारण किया था। यह भगवान विष्णु के चौथे अवतार, भगवान नृसिंह का प्राकट्य उत्सव या नृसिंह जयंती का दिन है। स्वरूप: भगवान का मुख और पंजे सिंह के समान थे, जबकि धड़ मनुष्य का था। उद्देश्य: हिरण्यकश्यप को ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त था कि उसे न कोई मनुष्य मार सके न पशु, न दिन में न रात में, और न घर के भीतर न बाहर। इसलिए भगवान ने खंभे को चीरकर गोधूलि बेला (शाम) में, चौखट पर बैठकर अपने नाखूनों से उसका वध किया। वैशाख मास में ही क्यों मनाई जाती है? हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास को अत्यंत पवित्र और 'माधवन मास' या भगवान विष्णु का महीना माना गया है। इसके पीछे कुछ प्रमुख कारण हैं: 1. धार्मिक मान्यता (प्राकट्य का समय): शास्त्रों के अनुसार, सत्ययुग में वैशाख शुक्ल चतुर्दशी के दिन ही भगवान ने यह अवतार लिया था। हिंदू धर्म में जिस तिथि को भगवान का प्राकट्य होता है, वह तिथि और मास सदैव के लिए उनके उत्सव के लिए निर्धारित हो जाते हैं। 2. वैशाख की ऊर्जा और तप: वैशाख मास भीषण गर्मी और तप का प्रतीक है। भगवान नृसिंह का स्वभाव अत्यंत क्रोधी और 'अग्नि' के समान तेजस्वी माना गया है। वैशाख की ऊर्जा उनके इस प्रखर तेज को दर्शाती है। यही कारण है कि इस दिन भगवान को शीतल करने के लिए चंदन का लेप लगाया जाता है और ठंडी चीजों का भोग लगाया जाता है। 3. धर्म की स्थापना का संदेश: वैशाख मास भक्ति और दान का महीना है। भक्त प्रह्लाद की 'अटूट भक्ति' और हिरण्यकश्यप के 'अहंकार' के अंत की यह कथा हमें सिखाती है कि जब पाप चरम पर होता है, तो ईश्वर स्वयं प्रकट होते हैं। इस दिन के मुख्य नियम और परंपराएं व्रत: श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं। इसे 'नृसिंह जयंती' भी कहा जाता है। पूजा का समय: चूंकि भगवान शाम के समय प्रकट हुए थे, इसलिए इनकी मुख्य पूजा गोधूलि बेला (सूर्यास्त के समय) में की जाती है। अभिषेक : दक्षिण भारतीय मंदिरों और वैष्णव संप्रदायों में इस दिन भगवान नृसिंह का पंचामृत अभिषेक विशेष रूप से किया जाता है। महत्व: मान्यता है कि नृसिंह चतुर्दशी का व्रत करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है और जीवन के हर प्रकार के संकट व भय का नाश होता है। अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ALSO READ: Buddha Purnima 2026: बुद्ध के कर्म का मनोविज्ञान: कैसे बनता है कर्म से भाग्य?
Buddha Purnima 2026: बुद्ध पूर्णिमा पर क्या करते हैं?
buddha purnima बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए बुद्ध पूर्णिमा सबसे बड़ा त्योहार का दिन होता है। इस दिन अनेक प्रकार के समारोह आयोजित किए गए हैं। अलग-अलग देशों में वहां के रीति-रिवाजों और संस्कृति के अनुसार समारोह आयोजित होते हैं। बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर किए जाने वाले कार्यों और परंपराओं को जानिए। 1. धार्मिक एवं आध्यात्मिक अनुष्ठान प्रार्थना और तीर्थ: दुनियाभर के बौद्ध अनुयायी बोधगया में एकत्रित होते हैं और विशेष प्रार्थनाएँ आयोजित करते हैं। अस्थि दर्शन: दिल्ली संग्रहालय इस दिन भगवान बुद्ध की पवित्र अस्थियों को दर्शन हेतु बाहर निकालता है, ताकि श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अर्पित कर सकें। धर्मग्रंथों का पाठ: इस दिन बौद्ध धर्मग्रंथों का निरंतर पाठ किया जाता है, जिससे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा बनी रहे। 2. बोधिवृक्ष एवं मंदिर पूजा विधान बोधिवृक्ष की पूजा: उस वृक्ष की पूजा की जाती है जिसके नीचे बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। इसकी शाखाओं को हार और रंगीन पताकाओं से सजाया जाता है। जलाभिषेक: बोधिवृक्ष की जड़ों में दूध और सुगंधित पानी डाला जाता है और उसके आसपास दीपक प्रज्वलित किए जाते हैं। अर्चना: मंदिरों और घरों में भगवान बुद्ध की मूर्ति पर फल-फूल चढ़ाए जाते हैं और अगरबत्ती जलाकर धूप-दीप किया जाता है। 3. सजावट और उत्सव की शैली दीपोत्सव: बौद्ध घरों में दीपक जलाए जाते हैं और फूलों से विशेष सजावट की जाती है। वेसाक उत्सव: श्रीलंका में इस दिन को 'वेसाक' (वैशाख का अपभ्रंश) के रूप में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। 4. दान, पुण्य एवं जीव दया मांसाहार का त्याग: बुद्ध पशु हिंसा के सख्त खिलाफ थे, इसलिए इस दिन मांसाहार का पूर्ण परहेज किया जाता है। जीवों की मुक्ति: इस दिन पक्षियों को पिंजरों से मुक्त कर खुले आसमान में छोड़ा जाता है, जो स्वतंत्रता और करुणा का प्रतीक है। परोपकार: गरीबों और जरूरतमंदों को भोजन व वस्त्र दान किए जाते हैं। मान्यता है कि इस दिन किए गए अच्छे कार्यों से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
23 रनों से मैच जीतकर द.अफ्रीका ने भारत के खिलाफ 4-1 से सीरीज की अपने नाम
INDvsSA कप्तान लॉरा वुलफार्ट (नाबाद 92) के बाद गेंदबाजों के बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत दक्षिण अफ्रीका की महिला टीम ने सोमवार को पांचवें T-20I मुकाबले भारत को 23 रनों से हरा दिया। इसी के साथ दक्षिण अफ्रीका ने पांच मैचों की सीरीज 4-1 से अपने नाम कर ली। लॉरा वुलफार्ट को ‘प्लयेर ऑफ द मैच’ और प्लेयर ऑफ द सीरीज’ का पुरस्कार मिला। 156 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय महिला टीम शुरुआत अच्छी नहीं रही और उसने 38 रन के स्कोर पर अपने तीन विकेट गंवा दिये। शेफाली वर्मा (चार), जेमिमाह रॉड्रिग्स (एक) अनुष्का शर्मा (17) रन बनाकर आउट हुई। इसके बाद कप्तान हरमनप्रीत कौर और भारती फूलमाली ने पारी को संभालने का किया। इसी दौरान 13वें ओवर में एन म्लाबा ने हरमनप्रीत कौर (22) का शिकार कर लिया। 16वें ओवर में क्लोई ट्राइऑन ने भारती फूलमाली को आउटकर पवेलियन भेज दिया। भारती फूलमाली 30 गेंदों में चार चौके और दो छक्के उड़ाते हुए 40 रन बनाये। दक्षिण अफ्रीकी गेंदबाजी आक्रमण के आगे भारतीय बल्लेबाज खुल कर नहीं खेल सके। भारत ने निर्धारित 20 ओवरों में आठ विकेट पर 132 रन बनाये और दक्षिण अफ्रीका ने 23 रनों से मुकाबला जीत लिया। ऋचा घोष 15 गेंदों में 25 रन बनाकर नाबाद रही। South Africa registered a 4-1 T20I series win against India, building crucial momentum heading into the #T20WorldCup in June : @ProteasWomenCSA Book your tournament tickets : https://t.co/8kyuNOXKdL pic.twitter.com/hmrIKv0t6O — ICC (@ICC) April 28, 2026 दक्षिण अफ्रीका की ओर से एन म्लाबा और एनडी क्लार्क ने दो-दो विकेट लिये। एलिज़ मारी मार्क्स, क्लोई ट्राइऑन और अयाबोंगा खाका ने एक-एक बल्लेबाज को आउट किया। इससे पहले दक्षिण अफ्रीका ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 20 ओवरों में छह विकेट पर 155 रनों का स्कोर खड़ा किया। कप्ताना लॉरा वुलफार्ट ने 56 गेंदों में 11 चौके और दो छक्के लगाते हुए नाबाद 92 रनों की पारी खेली। सुने लूस ने (23) और क्लोई ट्राइऑन ने (12) रनों का योगदान दिया। सिनालो जाफ्टा (16) रन बनाकर नाबाद रही। चार बल्लेबाज दहाई आंकड़े तक नहीं पहुंच सके। भारत की ओर से रेणुका सिंह, श्री चारणी और दीप्ति शर्मा ने दो-दो विकेट लिये।
Buddha Purnima 2026: बुद्ध के कर्म का मनोविज्ञान: कैसे बनता है कर्म से भाग्य?
भगवान बुद्ध का एक शाश्वत सत्य है- इंसान अपने भाग्य का निर्माता स्वयं है। हम अक्सर किस्मत को दोष देते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि हम अपने ही कर्मों की विरासत ढो रहे हैं। हमारे कर्म ही हमारे जन्म का कारण हैं, वही हमारा बंधन हैं और अंततः वही हमारी एकमात्र शरणस्थली भी हैं। इसी से भाग्य और दुर्भाग्य निर्मित होता है। सरल शब्दों में कहें तो, जीवन एक गूंज (Echo) की तरह है; आप जो ब्रह्मांड को देंगे, वही तीन गुना होकर आपके पास वापस आएगा। कर्म के तीन द्वार: मन, वचन और शरीर हम कर्म को केवल हाथ-पैर चलाने तक सीमित समझते हैं, लेकिन इसके उद्गम के तीन गहरे स्तर हैं: 1. कायिक (Physical): जो शरीर से किया जाए, जैसे किसी की मदद करना या किसी को चोट पहुँचाना। यह सबसे प्रत्यक्ष होता है। 2. वाचिक (Vocal): जो शब्दों के माध्यम से हो। गाली देना या मीठा बोलना। समाज इसे भी गंभीरता से लेता है। 3. मानसिक (Mental): किसी के बारे में बुरा सोचना। अक्सर हम इसे 'मामूली' समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन यहीं हम सबसे बड़ी चूक करते हैं। सत्य यह है कि 'मन' ही असली इंजन है। शरीर और शब्द तो बस उसके डिब्बे हैं। जो विचार मन में अंकुरित नहीं होता, वह क्रिया का रूप ले ही नहीं सकता। इसलिए कर्म की शुद्धता का पैमाना 'नीयत' है, 'क्रिया' नहीं। नीयत का फर्क: डॉक्टर बनाम हत्यारा इसे एक बेहतरीन उदाहरण से समझते हैं। एक सर्जन और एक अपराधी, दोनों ही इंसान के शरीर पर चाकू चलाते हैं। दोनों ही मामलों में व्यक्ति को दर्द होता है और रक्त बहता है। लेकिन डॉक्टर को सम्मान मिलता है और अपराधी को जेल। क्यों? क्योंकि डॉक्टर की नीयत 'रक्षा' की थी और अपराधी की 'हत्या' की। कर्म एक ही था, पर मानसिक प्रेरणा ने उसका परिणाम बदल दिया। ठीक वैसे ही, जैसे पिता का डांटना प्रेम है और शत्रु का अपशब्द बोलना विवाद। राग, द्वेष और संस्कारों की लकीरें हमारे कर्म मन में 'संस्कारों' की लकीरें खींचते हैं। ये लकीरें तीन तरह की हो सकती हैं: पानी पर लकीर: जो तुरंत मिट जाए (क्षणभंगुर विचार)। रेत पर लकीर: जो कुछ समय तक रहे। पत्थर पर लकीर: जो गहरा प्रभाव छोड़े और स्वभाव बन जाए। जब हमारी इच्छा पूरी होती है, तो 'राग' (attachment) पैदा होता है, और जब इच्छा टूटती है, तो 'द्वेष' (hatred)। यही राग-द्वेष बार-बार जमा होकर हमारी 'तृष्णा' यानी प्यास बन जाते हैं, जो हमें कर्मों के चक्रव्यूह में फँसाए रखते हैं। गीता का विज्ञान: कर्म, विकर्म और अकर्म श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, हमारे दैनिक कार्यों को गहराई के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा जा सकता है: 1. कर्म: वे कार्य जो हम आदतन या यंत्रवत (Mechanically) करते हैं। जैसे—सांस लेना, खाना खाना या किसी को औपचारिक 'नमस्ते' कह देना। इसमें भावना का अभाव होता है। 2. विकर्म: जब कर्म के साथ 'भाव' जुड़ जाए। यदि आप किसी को नमस्ते करते समय हृदय में उसके प्रति प्रेम और मंगल-कामना रखते हैं, तो वह 'विकर्म' बन जाता है। उदाहरण: एक नर्स जो केवल ड्यूटी समझकर इंजेक्शन लगाती है, वह 'कर्म' कर रही है। लेकिन वही नर्स जब ममता और सेवा भाव से रोगी की देखभाल करती है, तो वह 'विकर्म' है। यह विलक्षण प्रभाव पैदा करता है और आत्मा को तृप्ति देता है। 3. अकर्म: वह अवस्था जहाँ कर्म करते हुए भी कर्तापन का अहंकार न हो (निष्काम कर्म)। अगर आप अपने जीवन में शांति चाहते हैं, तो अपने मन को निर्मल रखें। क्योंकि बुरे विचार के पीछे दुख वैसे ही चलता है जैसे बैल के पीछे गाड़ी का पहिया, और शुद्ध विचार के पीछे सुख वैसे ही चलता है जैसे आपकी अपनी परछाई।
प्रधानमंत्री मोदी ने सिक्किम में बच्चों के संग खेली फुटबॉल
गंगटोक। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सिक्किम के अपने दौरे के दूसरे दिन मंगलवार सुबह यहां एक मैदान में बच्चों के साथ कुछ समय फुटबॉल खेली। मोदी ने मैदान पर अपने हाथ में फुटबॉल लेकर बच्चों के साथ अपनी तस्वीर साझा कीं। फुटबॉल की पोशक पहने बच्चों की टोली में किशोर वय बालक और बालिकाएं शामिल […] The post प्रधानमंत्री मोदी ने सिक्किम में बच्चों के संग खेली फुटबॉल appeared first on Sabguru News .
सिरोही में श्रम कल्याण अधिकारी की अनुबंधित कार से डेढ़ लाख रुपए बरामद
सिरोही। राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने सिरोही में श्रम कल्याण अधिकारी हर्षदीप सिंह गिल की अनुबंधित कार से आकस्मिक निरीक्षण में डेढ़ लाख रुपए की संदिग्ध राशि बरामद की हैं। एसीबी के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार एसीबी मुख्यालय के निर्देश पर उप महानिरीक्षक पुलिस जोधपुर के पर्यवेक्षण में एसीबी की सिरोही इकाई द्वारा […] The post सिरोही में श्रम कल्याण अधिकारी की अनुबंधित कार से डेढ़ लाख रुपए बरामद appeared first on Sabguru News .
Apple के 50वें साल में बड़े लॉन्च की तैयारी, लेकिन मौजूदा आईफोन यूजर्स बैटरी की समस्या से परेशान
Apple नए साल 2026 में टेक मार्केट में बड़ा तहलका मचाने की तैयारी में है।...
मुंबई नगर निगम के सहायक आयुक्त यौन उत्पीड़न के आरोप में अरेस्ट
मुंबई। महाराष्ट्र में मुंबई नगर निगम के एक सहायक आयुक्त को सोमवार को पुलिस ने एक महिला वास्तुकार की शिकायत पर यौन उत्पीड़न के मामले में कथित संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। स्थानीय पार्कसाइट पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी के अनुसार के-ईस्ट वार्ड में तैनात आरोपी नितिन शुक्ला को शिकायतकर्ता द्वारा शादी का […] The post मुंबई नगर निगम के सहायक आयुक्त यौन उत्पीड़न के आरोप में अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
क्या बाइसेक्शुअल हैं करण औजला, सिंगर की टीम ने बताया वायरल पोस्ट का सच
फेमस पंजाबी सिंगर करण औजला इन दिनों अपनी पर्सनल लाइफ को लेकर सुर्खियों में हैं। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने खुद को बाइसेक्शुअल होने का ऐलान किया है। इस पोस्ट के सामने आते ही सोशल मीडिया दो धड़ों में बंट गया। जहां कुछ लोग करण की हिम्मत की तारीफ कर रहे थे, वहीं कई फैंस इसे फर्जी बता रहे थे। अब इस वायरल खबर का सच करण की टीम ने बताई है। इंटरनेट पर घूम रहे इस स्क्रीनशॉट में करण औजला के आधिकारिक हैंडल जैसा दिखने वाला एक अकाउंट दिखाया गया, जिससे एक पोस्ट शेयर की गई थी। Every karan aujla fan right now #karanaujla pic.twitter.com/fQrjqizYFH — Aaftab (@Whotfaaftab) April 26, 2026 इस पोस्ट में गायक के हवाले से उनकी सेक्सुअलिटी को लेकर बड़े दावे किए गए थे। देखते ही देखते एक्स और इंस्टाग्राम पर #KaranAujla ट्रेंड करने लगा और यूजर्स इस पर तीखे रिएक्शन देने लगे। इस बढ़ते विवाद और फैंस के बीच मचे हड़कंप को देखते हुए करण औजला की टीम ने आधिकारिक बयान जारी कर स्थिति स्पष्ट की। टीम ने इस पोस्ट को पूरी तरह से 'फेक और एडिटेड' करार दिया है। बयान में कहा गया, सोशल मीडिया पर जो स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है, उसका करण औजला से कोई लेना-देना नहीं है। यह किसी शरारती तत्व द्वारा गायक की छवि खराब करने की कोशिश है। विवादों के बीच 'पी पॉप कल्चर इंडिया टूर' का जलवा भले ही सोशल मीडिया पर करण की पर्सनल लाइफ को लेकर अफवाहें उड़ रही हों, लेकिन उनका प्रोफेशनल ग्राफ नई ऊंचाइयों को छू रहा है। करण औजला इन दिनों अपने 'पी पॉप कल्चर इंडिया टूर' में व्यस्त हैं। इस टूर की शुरुआत दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम से हुई थी। करण औजला ने 'सॉफ्टली', 'डॉन्ट लुक', 'प्लेयर्स', और 'चिट्टा कुर्ता' जैसे गानों के जरिए ग्लोबल लेवल पर पहचान बनाई है। हाल ही में विक्की कौशल की फिल्म 'बैड न्यूज' के गाने 'तौबा तौबा' ने उन्हें बॉलीवुड में भी एक बड़ा मुकाम दिला दिया है।
शकीरा के ब्राजील कॉन्सर्ट की तैयारी के दौरान दर्दनाक हादसा, क्रू मेंबर की मौत
फेमस पॉप सिंगर शकीरा के अपकमिंग ब्राजील कॉन्सर्ट की तैयारी के दौरान एक दर्दनाक हादसा हो गया है। शो के लिए स्टेज तैयार करते समय गैब्रियल डी जीसस फिरमिनो नाम का एक क्रू मेंबर गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे अस्पताल ले जाया गया। जहां उसकी मौत हो गई। खबरों के अनुसार रियो डी जनेरियो के कोपाकबाना बीच पर 'टोडो मुंडो नो रियो' कॉन्सर्ट के लिए विशाल स्टेज तैयार किया जा रहा था। इसी दौरान एक लिफ्टिंग सिस्टम के साथ काम करते समय एक पेशेवर कर्मचारी भारी उपकरणों के बीच दब गया। मौके पर मौजूद अन्य कर्मचारियों ने उसे बचाने की कोशिश की और फायर ब्रिगेड को सूचित किया। घायल को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। कॉन्सर्ट आयोजकों ने इंस्टाग्राम पर एक आधिकारिक बयान जारी कर इस दुखद घटना की पुष्टि की और पीड़ित परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। शकीरा ने जताया दुख एंटरटेनमेंट वीकली के अनुसार, शकीरा ने एक बयान में कहा, मैं गैब्रियल डी जीसस फिरमिनो के परिवार, दोस्तों और साथ कामकरने वालों के लिए बहुत दुखी हूं।
भरणी नक्षत्र में सूर्य का प्रवेश: इन 4 राशियों की किस्मत चमकेगी, शुरू होगा सुनहरा दौर
Sun Entry into Bharani Nakshatra: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहों के राजा सूर्य 27 अप्रैल 2026 (सोमवार) को अश्विनी नक्षत्र से निकलकर भरणी नक्षत्र में प्रवेश कर चुके हैं। भरणी नक्षत्र के स्वामी शुक्र हैं। सूर्य और शुक्र के बीच शत्रुता का भाव होने के बावजूद, यह नक्षत्र परिवर्तन कुछ विशिष्ट राशियों के लिए गोल्डन पीरियड लेकर आया है। सूर्य इस नक्षत्र में 11 मई 2026 तक विराजमान रहेंगे। इस दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित 4 राशियों की किस्मत चमकने वाली है। इन 4 राशियों के लिए सुनहरा दौर मेष (Aries) आपकी कार्यक्षमता में वृद्धि होगी। कार्यक्षेत्र में मान-सम्मान बढ़ेगा और रुके हुए धन की प्राप्ति होगी। नए स्टार्टअप के लिए यह सर्वोत्तम समय है। ALSO READ: सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में, 3 राशियों के लिए गोल्डन टाइम सिंह (Leo) सूर्य आपकी राशि के स्वामी हैं। समाज और ऑफिस में आपका दबदबो बढ़ेगा। सरकारी क्षेत्र से जुड़े लोगों को पदोन्नति (Promotion) या बड़ी जिम्मेदारी मिल सकती है। धनु (Sagittarius) व्यापारिक यात्राएं सफल होंगी और धन लाभ के योग बनेंगे। आपकी निर्णय लेने की क्षमता आपको दूसरों से आगे रखेगी। बैंक बैलेंस में बढ़ोतरी होगी। मिथुन (Gemini) मिथुन राशि के जातकों के लिए भी यह समय आय के नए स्रोत खुलने और सुख-सुविधाओं में विस्तार वाला रहेगा। इन 3 राशियों को जरूरत है सावधान रहने की जहाँ कुछ राशियों के लिए यह समय शुभ है, वहीं वृषभ, कन्या और मकर राशि वालों को 11 मई तक थोड़ा संभलकर रहने की सलाह दी गई है। इन्हें मानसिक तनाव, अचानक खर्चों में बढ़ोतरी या कार्यस्थल पर सहकर्मियों से विवाद का सामना करना पड़ सकता है। शुभ फल के लिए उपाय यदि आप इस गोचर का अधिकतम लाभ उठाना चाहते हैं या नकारात्मक प्रभाव को कम करना चाहते हैं, तो ये सरल उपाय कर सकते हैं: प्रतिदिन तांबे के लोटे से सूर्य देव को अर्घ्य दें। आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें। रविवार के दिन गुड़ या लाल वस्त्र का दान करें।
'बाहुबली 2' की रिलीज को 9 साल पूरे, जानिए कैसे प्रभास की फिल्म ने बदल दिया सिनेमा का इतिहास
साल 2017 में भारतीय सिनेमा ने एक ऐसी घटना को जन्म लेते देखा था, जिसका नाम था 'बाहुबली 2: द कन्क्लूजन'। इस फिल्म की रिलीज को 9 साल पूरे हो गए हैं। ये फिल्म सिर्फ रिकॉर्ड तोड़ सफलता का प्रतीक नहीं बनी, बल्कि उस शख्स को एक चमकदार सलाम भी थी, जिसने इसकी आत्मा को जिया — हमारे पैन-इंडिया सुपरस्टार प्रभास। 'बाहुबली 2' अपने आप में एक कल्चरल माइलस्टोन बन गया, लेकिन इसकी असली जान प्रभास की जबरदस्त मेहनत, दमदार स्क्रीन प्रेजेंस और दिल जीत लेने वाले परफॉर्मेंस में छिपी थी। आज जब फिल्म अपनी सालगिरह मना रही है, तो आइए उन खास पलों को फिर से याद करें, जिन्होंने इसे एक ऐसा सिनेमा अनुभव बना दिया जिसे शायद दोहराया नहीं जा सकता। ऐतिहासिक प्री-रिलीज़ रिकॉर्ड 'बाहुबली 2' तो थिएटर्स में रिलीज़ होने से पहले ही इतिहास रच चुका था। फिल्म ने सैटेलाइट और थिएट्रिकल राइट्स के ज़रिए करीब 500 करोड़ रुपये की रिकॉर्डतोड़ कमाई कर ली थी। ये कारनामा मुमकिन हुआ था प्रभास के लिए लोगों के जबरदस्त इंतज़ार और उनके बाहुबली वाले शानदार अंदाज की वजह से, जिसने पहले से ही फैंस के बीच जबरदस्त क्रेज़ बना दिया था। प्रभास का डबल रोल अमरेंद्र बाहुबली और महेंद्र बाहुबली, दो-दो किरदारों को निभाते हुए प्रभास ने परदे पर जो गहराई, करिश्मा और भावनाएं उतारीं, वो वाकई कमाल की थीं। उनकी परफॉर्मेंस सिर्फ एंटरटेन ही नहीं करती थी, बल्कि दिलों में एक अलग ही जगह बना लेती थी। यही वजह है कि दोनों किरदार आज भी हर जनरेशन के लिए आइकॉनिक बन गए हैं। पांच साल की कमिटमेंट बहुत कम एक्टर्स होते हैं जो वो कमिटमेंट दिखाते हैं जो प्रभास ने दिखाया। पूरे पांच साल उन्होंने खुद को सिर्फ बाहुबली फ्रेंचाइज़ी के लिए समर्पित कर दिए थे। हर दूसरी ऑपर्च्युनिटी छोड़कर, उन्होंने बस एक ही मकसद रखा और वह था हर लेवल पर परफेक्शन लाना। फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन सिर्फ दमदार एक्टिंग ही नहीं, प्रभास ने बाहुबली की ताकत और शान को जीने के लिए जबरदस्त फिजिकल ट्रांसफॉर्मेशन भी किया था। उनकी मेहनत, डिसिप्लिन और परदे के पीछे की उनकी सादगी ने दुनियाभर के फैंस का दिल जीत लिया। डायलॉग्स प्रभास की दमदार डायलॉग डिलीवरी ने हर एक संवाद को सिनेमा के इतिहास का यादगार लम्हा बना दिया। चाहे जंग के मैदान में गरजती बातें हों या राजदरबार में दी गई जोशीली घोषणाएं और उनके बोले हर शब्द आज भी पॉप कल्चर में गूंजते हैं। कभी न भूलने वाली केमिस्ट्री और कैमरेडरी प्रभास और अनुष्का शेट्टी की खूबसूरत केमिस्ट्री ने इस पूरी कहानी में जान डाल दी, वहीं राणा दग्गुबाती के साथ उनके ऑनस्क्रीन टकराव ने फिल्म में एक जबरदस्त इंटेंसिटी और इमोशनल गहराई ले आई, जिसने पूरी कहानी को और भी मजबूत बना दिया। पहले सच्चे पैन-इंडियन सुपरस्टार बाहुबली ने सिर्फ इतिहास नहीं रचा, बल्कि प्रभास को भारत और उससे बाहर एक घरेलू नाम बना दिया। भाषाई और क्षेत्रीय सीमाओं को तोड़ते हुए, वह पहले सच्चे पैन-इंडियन सुपरस्टार बने, जिन्होंने भारतीय सिनेमा के नियमों को हमेशा के लिए बदल दिया। बाहुबली 2 आज सिनेमा की एक बड़ी मिसाल बन गई है और इसके बीच में सबसे खास है प्रभास की वो धरोहर, जिसने खुद को एक ज़बरदस्त आइकन बना दिया।
May 2026 Vrat Tyohar: मई माह 2026 के व्रत एवं त्योहारों की लिस्ट
May 2026 Hindu festivals: भारत एक ऐसा देश है जहां हर महीने धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सवों से भरा होता है। मई माह भी इस दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। इस महीने में न केवल व्रत और उपवास आते हैं, बल्कि कई धार्मिक पर्व और त्योहार भी मनाए जाते हैं, जो समाज में सामूहिक उत्साह और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करते हैं। ALSO READ: सुवर्णमत्स्या: रावण की पुत्री का हनुमानजी पर मोहित हो जाना मई 2026 में हिंदू पंचांग के अनुसार कई महत्वपूर्ण व्रत और त्योहार पड़ रहे हैं। इनमें वट सावित्री, गंगा दशहरा, सावित्री व्रत, सोमवती अमावस्या और अन्य धार्मिक अवसर शामिल हैं। ये दिन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि स्वास्थ्य, समृद्धि, और सुख-शांति के लिए भी विशेष रूप से मान्य हैं। आइए यहां जानते हैं मई माह 2026 के व्रत-त्योहार की संपूर्ण जानकारी... मई 2026 में भारत में पड़ने वाले प्रमुख व्रत और त्योहारों की सूची इस प्रकार है। 1 मई 2026: गोरखनाथ प्रकटोत्सव, महर्षि भृगु जयंती, बुद्ध पूर्णिमा, वैशाख पूर्णिमा 3 मई 2026: नारद प्रकटोत्सव। 5 मई 2026: संकष्टी चतुर्थी 13 मई 2026: अचला/ अपरा एकादशी व्रत 14 मई 2026: वट सावित्री व्रतारंभ, प्रदोष व्रत 15 मई 2026: सूर्य वृष संक्रांति, केवट जयंती 16 मई 2026: शनि जयंती, वट पूजन, वट सावित्री अमावस्या 17 मई 2026: पुरुषोत्तम मास शुरू, अधिमास प्रारंभ, 20 मई 2026: विनायकी चतुर्थी 25 मई 2026: आल्हा जयंती, नवतपा प्रारंभ 26 मई 2026: श्री गंगा दशहरा पर्व 27 मई 2026: पुरुषोत्तमी एकादशी 28 मई 2026: ईद-उल-अजहा, बकरीद, प्रदोष व्रत 31 मई 2026: अधिमास, ज्येष्ठ पूर्णिमा आदि व्रत और त्योहार पड़ेंगे। अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ALSO READ: पुरुषोत्तम मास का पौराणिक महत्व और कथा
होटल के कमरे में घुसते ही सबसे पहले करें ये 8 काम! वरना सुरक्षा और प्राइवेसी दोनों पर मंडराएगा खतरा
भारत: 50 की उम्र के बाद मां बनने का अधिकार मांगती महिलाएं
हाल ही में भारत में महिलाओं के मां बनने के अधिकार और कानून की तय उम्र की सीमाओं के बीच टकराव का एक अहम मामला सामने आया है। बॉम्बे हाई कोर्ट में दो महिलाओं ने आईवीएफ से जुड़े कानून को चुनौती दी है। याचिकाकर्ताओं ने एआरटी (रेगुलेशन) एक्ट, 2021 में तय ...
Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (28 अप्रैल, 2026)
मेष (Aries) Rashifal 28 April 2026: करियर : आज कार्यस्थल पर आपके द्वारा किए गए कार्य की सराहना होगी। लव : प्रेम संबंधों में कुछ तनाव हो सकता है। धन : आपकी वित्तीय स्थिति संतुलित रहेगी। स्वास्थ्य : मानसिक तनाव से बचने के लिए आराम करें। उपाय : हनुमान जी की पूजा करें। ALSO READ: Bhauṃ Pradosh 2026; भौम प्रदोष का व्रत रखने से 3 कार्यों में मिलती है सफलता वृषभ (Taurus) करियर : खासकर यदि आप व्यवसाय में हैं, तो आज कोई नया प्रोजेक्ट शुरू हो सकता है। लव : प्रेम संबंधों में समझदारी से काम लें। धन : धन के मामले में आज कोई बड़ा लाभ हो सकता है। स्वास्थ्य : शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा उपाय : शुक्रवार को देवी लक्ष्मी की पूजा करें। मिथुन (Gemini) करियर : कार्यस्थल पर अपनी टीम के साथ अच्छे संबंध बनाए रखें। लव : प्रेम संबंधों में थोड़ी असहमति हो सकती है। धन : आज कोई अप्रत्याशित खर्च हो सकता है। स्वास्थ्य : मानसिक शांति के लिए ध्यान करें। उपाय : सूर्य देव को जल अर्पित करें। कर्क (Cancer) करियर : आपको कार्यस्थल पर मेहनत का फल जल्दी मिलेगा। लव : आज प्रेम संबंधों में थोड़ी हलचल हो सकती है। धन : अनावश्यक खर्चों से बचने की कोशिश करें। स्वास्थ्य : शारीरिक रूप से अच्छा महसूस करेंगे। उपाय : किसी गरीब को भोजन कराएं। सिंह (Leo) करियर : कार्यक्षेत्र में आपके प्रयासों को सराहा जाएगा। लव : अपने पार्टनर के साथ अच्छा समय बिताने का मौका मिलेगा। धन : आपको पुराने निवेशों से लाभ हो सकता है। स्वास्थ्य : मानसिक शांति के लिए समय-समय पर ध्यान और योग करें। उपाय : सूर्य देव को जल अर्पित करें। कन्या (Virgo) करियर : आप अपनी मेहनत और धैर्य से कार्यस्थल की समस्या को हल कर पाएंगे। लव : प्रेम संबंधों में आपसी संवाद से समस्याएं हल हो सकती हैं। धन : आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी, अप्रत्याशित खर्च से बचें। स्वास्थ्य : आज मानसिक तनाव हो सकता है। ALSO READ: मीन राशि में 5 ग्रहों की बड़ी हलचल: इन 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, क्या आपकी राशि है शामिल? उपाय : शनिवार को काले तिल का दान करें। तुला (Libra) करियर : आज आपकी लगन और कड़ी मेहनत को सराहा जाएगा। लव : प्रेम संबंधों में आज अच्छे बदलाव आएंगे। धन : किसी पुराने निवेश से लाभ मिलने की संभावना है। स्वास्थ्य : शारीरिक स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। उपाय : गुलाब का फूल देवी मंदिर में चढ़ाएं। वृश्चिक (Scorpio) करियर : कार्यक्षेत्र में आपको आज कुछ नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं। लव : प्रेम संबंधों में समझ और विश्वास बढ़ेगा। धन : किसी अप्रत्याशित लाभ के संकेत नहीं हैं, लेकिन सावधानी बरतें। स्वास्थ्य : शारीरिक रूप से अच्छा महसूस करेंगे। उपाय : आज हनुमान जी की पूजा करें। धनु (Sagittarius) करियर : आज किसी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर काम करने का अवसर मिलेगा। लव : प्रेम संबंधों में सामंजस्य रहेगा। धन : धन की स्थिति सामान्य रहेगी। स्वास्थ्य : शारीरिक रूप से स्वस्थ होने हेतु थोड़ी राहत की आवश्यकता हो सकती है। उपाय : शिवलिंग पर जल अर्पित करें। मकर (Capricorn) करियर : आज कार्यस्थल पर नई जिम्मेदारियां निभाने का समय है। लव : यह समय आपके रिश्ते को मजबूत बनाने का अवसर होगा। धन : अनावश्यक खर्चों से बचें और अपनी बचत पर ध्यान दें। स्वास्थ्य : आज स्वयं शारीरिक रूप से अच्छा महसूस करेंगे। उपाय : गुरुवार को लक्ष्मी मंदिर में दीप जलाएं। कुंभ (Aquarius) करियर : आज आपको अपनी कड़ी मेहनत का फल मिलेगा। लव : प्रेम संबंधों में सामंजस्य और प्यार बढ़ेगा। धन : बड़े खर्चों से बचें और भविष्य के लिए निवेश की योजना बनाएं। स्वास्थ्य : शारीरिक स्वास्थ्य सामान्य रहेगा। उपाय : मंगलवार को हनुमान जी से आशीर्वाद प्राप्त करें। मीन (Pisces) करियर : आज आपको कार्यस्थल पर कोई महत्वपूर्ण अवसर मिल सकता है। लव : प्रेम संबंधों में समझदारी और समर्थन मिलेगा। धन : आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। स्वास्थ्य : खुद को शांत रखने के लिए ध्यान और योग करें। उपाय : मंगलवार को हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाएं। ALSO READ: शनि, बृहस्पति, राहु और केतु के कारण 5 राशियों के लिए रहेगा राजयोग
रात के 8 बज रहे हैं। कई पुरुष सिर पर सफेद कपड़ा बांधे एक घर की ओर बढ़ रहे हैं। साथ में चलती हुई महिलाएं गीत गा रही हैं। मानो कोई उत्सव हो, लेकिन कहानी कुछ और है। सभी एक घर के पास पहुंचते हैं, जहां आंगन में एक बुजुर्ग महिला का शव रखा है। शव के पास एक तरफ पुरुष और दूसरी ओर महिलाएं बैठ जाती हैं। उसके बाद रातभर गीतों का सिलसिला चलता है। सूरज की पहली किरण के साथ महिलाएं तैयारियों में जुट जाती हैं। उन्हीं में से एक महिला पत्तों में खाना और बांसुरी लेकर आती हैं और शव के पास रख देती हैं। तभी एक लड़का आया, उसके हाथ में जिंदा मुर्गी है। उसने फड़फड़ाती मुर्गी को शव के सामने रखा और फरसे से उसकी गर्दन उड़ा दी। ठीक उसके बाद एक दूसरा लड़का चूजा लेकर आया। उसने शव की दाहिनी हथेली पर रखा और चाकू से काट दिया। ये काम इतने सधे तरीके से किया गया, ताकि शव की हथेली न कटे। इसके बाद सभी ने वहां फैला खून साफ किया। दरअसल, यहां अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही है। मुर्गे की बलि दी जा रही है और मरने वाले का पसंदीदा खाना भी बनाया गया है। दैनिक भास्कर की सीरीज ‘हम लोग’ में मैं मनीषा भल्ला इस बार लाई हूं कहानी- मरिंग समुदाय की। मणिपुर के इंफाल और इसके आस-पास बसे इस समुदाय की आबादी करीब 25 हजार है। यह अंतिम संस्कार सांगडांग शेनबा मरिंग नाम के गांव में हो रहा है, जो मणिपुर की राजधानी इंफाल से 50 किमी दूर पहाड़ी पर है। यहां रहने वाले काएसंग अंग्गुन की मां कैसनकैसल की मौत हो गई है। इस तरह मुर्गे की बलि देने के बाद अब उनके शव को एक सुनसान जगह ले जाया जा रहा है। भीड़ भी पीछे-पीछे चल रही है, लेकिन गीत लगातार जारी है। थोड़ी दूर पहुंचते ही कुछ लोग गड्ढा खोदना शुरू करते हैं। यह जगह मरिंग लोगों का कब्रिस्तान है। काफी मशक्कत के बाद एक संकरा गाेलाकार गड्ढा खोदा गया। मेरे मन में सवाल उठ रहा था, इसे संकरे गड्ढे में शव को कैसे दफनाएंगे? तभी कुछ लोग शव को उठाते हैं और उसे लिटाने के बजाय गड्ढे में खड़ा रख देते हैं। साथ में बांसुरी भी। फिर गड्ढे को मिट्टी से पाट देते हैं। उसके बाद कब्र के चारों ओर बांस का घेरा बनाया गया, ताकि कोई जानवर शव को नुकसान न पहुंचा सके। यह सब करते-करते शाम हो गई। उसके बाद सभी घर लौट गए। अगले दिन, मैं फिर अंग्गुन के घर पहुंची। यहां केवल उन्हें ही हिंदी आती है। वह घर के बाहर किसी जानवर के कंकाल को उलट-पलट रहे हैं। मैंने पूछा- यह किसका कंकाल है? वो कहते हैं- यह मिथुन का सिर है। मिथुन, पहाड़ी बैल जैसा जानवर है, जिसके मोटे सींग पीछे की तरफ मुड़े होते हैं। शिकार के बाद इसका सिर घर के सामने टांगना जरूरी होता है। यह जानवर हमारे लिए शुभ होता है, जिसकी हम पूजा करते हैं। यह बताते हुए अंग्गुन मुझे घर के अंदर चलने को कहते हैं। अंदर पहुंचने पर देखा तो घर की छत टीन की और दीवारें बांस की बनी हुई हैं। अंदर पूरा घर बांस से बने सामानों से सजा है। अंग्गुन के चेहरे पर मां के जाने का गम और थकान थी, लेकिन फिर भी मरिंग लोगों के बारे में बातचीत करने के लिए राजी हो गए। मैंने पूछा- आपके यहां मौत पर गीत क्यों गाए जाते हैं? वे बताते हैं- मरिंग मानते हैं कि मौत शरीर की होती है, जबकि जाने वाले से प्यार हमेशा बना रहता है, इसलिए हम गम नहीं मनाते, गीत गाते हैं। शव को खड़ा करके क्यों दफनाया और साथ में बांसुरी भी रखी? हां, मरिंग मानते हैं कि शव को खड़ा दफनाने से मरने वाला दोबारा जन्म ले सकता है। इसलिए खड़ा दफनाते हैं। मरने वाला जो भी वाद्य यंत्र बजाता हो, उसे भी साथ दफनाते हैं। मेरी मां बांसुरी बजाती थीं। इसलिए उसे भी साथ रखा। इस बीच, तेज बारिश होने लगती है। टीन की चादर पर बूंदों की आवाज इतनी तेज कि हम एक-दूसरे की बात नहीं सुन पा रहे। तभी एक बच्चा चाय लेकर आया। शराब तय करती है, रिश्ता आगे बढ़ेगा या नहीं चाय की चुस्की लेते हुए अंग्गुन बताते हैं- हमारे यहां शादी की तीन रस्में होती हैं। पहली- जब लड़के वाले रिश्ता लेकर लड़की के घर जाते हैं। ऐसे में वे अपने साथ चावल से बनी शराब भी लेकर जाते हैं। अगर लड़की वालों को रिश्ता मंजूर न हो तो वे इस शराब की बोतल को अपने दरवाजे के बाहर रख देते हैं। अगर रिश्ता मंजूर हो तो लड़की की मां उस बोतल को अपनी चारपाई के पाये पर बांस की घास से बांध देती है। यह चारपाई वही होनी चाहिए, जिस पर लड़की के माता-पिता सोते हों। इस रस्म को तुलिग्लियांसंग कहते हैं। दूसरी- ये रस्म लड़की की मंजूरी से जुड़ी है। एक खास दिन लड़की के घर वाले उससे पूछते हैं- क्या लड़का तुम्हें पसंद है? अगर लड़की हां कर देती है, तो लड़की के घर वाले चारपाई से बंधी शराब की बोतल लाकर एक खास बर्तन में पीते हैं। यह बर्तन सूखे कद्दू से बना होता है। इसे तुलबोनवा कहते हैं, इसलिए इस रस्म का नाम भी तुलबोनवा है। तीसरी रस्म- इसमें लड़की, लड़के को कपड़े देती है और लड़का, लड़की को अंगूठी। इस रस्म को तुलखम कहते हैं। इसके बाद दोनों शादी से इनकार नहीं कर सकते। इनकार करने पर जुर्माना देना होता है। लेकिन जुर्माना भी खास है। अगर लड़की शादी से इनकार करके किसी और लड़के से शादी करती है, तो लड़की जिस लड़के से शादी करेगी जुर्माना उसे देना होगा। यानी अगली ससुराल वाले को। यह जुर्माना पहले वाले लड़के को मिलता है। इसी तरह, अगर लड़के वाले रिश्ता तोड़कर किसी और लड़की से शादी करें, तो उस लड़की के घर वालों को यह जुर्माना देना होता है। जो कि पहली वाली लड़की को मिलता है। जुर्माना नकद या मिथुन के रूप में दिया जाता है। जब शादी तय हो जाती है तब लड़के के परिवार की कुछ महिलाएं लड़की के घर आती हैं, उसे सजा-धजाकर अपने साथ लेकर जाती हैं। इन महिलाओं का सुहागन होना और उनके माता-पिता का जिंदा होना जरूरी है। यहीं शादी की रस्म पूरी हो जाती है। पहले बेटे का नाम ‘मो’, दूसरे का ‘को’ अक्षर से अंग्गुन बताते हैं- हमारे यहां नाम रखने का भी अलग रिवाज है। पहले बेटे का नाम ‘मो’ से शुरू होगा। जैसे- मोदार, मोरम, मोसिल। दूसरे का ‘को’ और तीसरे का नाम ‘अंग’ से शुरू होता है। ऐसे ही पहली बेटी का नाम ‘टे’, दूसरी का ‘टो’ और तीसरी का ‘तुंग’ से शुरू होता है। बाकी चौथे, पांचवे बच्चे के नाम भी इसी तरह रखे जाते हैं। मैंने पूछा- ऐसा क्यों? वे बताते हैं- इससे पता चलता है कि कौन सा बच्चा बड़ा है और कौन सा छोटा। मरिंग समुदाय में सात गोत्र हैं, सभी में यही परंपरा है। अंग्गुन दावा करते हैं कि उनके पूर्वजों ने ही आग की खोज की थी। इसलिए मरिंग खुद को अग्नि का रक्षक या आग पैदा करने वाला मानते हैं। इसलिए हमारे यहां सिर्फ भाप में बना खाना ही खाया जाता है। हम चावल और सब्जियों की खेती करते हैं। वह बताते हैं कि मरिंग समुदाय में बच्चे के जन्म पर नाल काटने की रस्म भी अनोखी है। बेटे के जन्म पर बांस के पतले टुकड़े सालदा से नाल काटी जाती है। बेटी पैदान होने पर बांस के मोटे टुकड़े पुई से नाल काटी जाती है। यह रस्म गांव की अनुभवी दाई निभाती है। जन्म के पांचवें दिन भोज दिया जाता है। गांव की सुरक्षा के लिए रोज रात में देते हैं बलि इसके बाद मैं और मेरी साथी थांगशा टेसिल गांव की तरफ निकल पड़े। थोड़ा चलने के बाद हम एक घर के पास पहुंचे। घर के अंदर बीचों-बीच एक डंडा गड़ा है। पूछने पर थांगशा बताते हैं कि- यह हमारे पूर्वजों का प्रतीक है। हम इस डंडे पर शराब की एक बूंद रोज चढ़ाते हैं। इसके बाद, हम गांव के बिलकुल बीच पहुंचे, जहां मरिंग लोगों का मंदिर है। इसके दरवाजे पर पक्षियों के कंकाल टंगे हुए हैं। मंदिर के पुराेहित बताते हैं कि शिकार किए गए पक्षियों के सिर मंदिर में टांगना जरूरी है। मंदिर के अंदर एक पेड़ की टहनी है, जिसे हम वाओहाएहिंग कहते हैं। इसी के सामने पूजा करते हैं और मंत्र पढ़ते हैं। वह बताते हैं कि हमारे गांव में आने के लिए दो गेट हैं। पहला- पूर्व और दूसरा- दक्षिण में है। गांव में कोई आपदा न आए, इसलिए हम रोज आधी रात को दोनों गेट पर सफेद रंग का कपड़ा बांधते हैं। साथ ही कौवे, मोर, उल्लू और मुर्गी में से किसी एक पक्षी की बलि देते हैं। हालांकि, मरिंग समुदाय में अब ईसाई धर्म का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। गांव में एक चर्च भी बनकर तैयार हो चुका है, जो इस बदलाव की साफ झलक देता है। सड़क और तालाबों की सफाई के लिए लमलाई त्योहार अब हम वापस अंग्गुन के घर आते हैं। वे बताते हैं- हमारा सबसे बड़ा त्योहार लमलाई है। इस दिन गांव की सड़कें और तालाब की सफाई की जाती है। उस दिन सभी नाचते हुए तालाब तक जाते हैं और साफ-सफाई करते हैं। तालाब साफ करने में महिलाओं को शामिल नहीं किया जाता। वे बताते हैं- यहां दो तरह के पुरोहित होते हैं। एक खुलपु और दूसरा खुल्लक। खुल्लक, खुलपु से छोटा पुरोहित होता है। तालाबों को सफाई में दोनों शामिल होते हैं। उस दिन वे अच्छी बारिश और फसल के लिए मंत्र पढ़ते हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 294 सीटों पर दो चरणों में चुनाव हो रहे हैं। 29 अप्रैल को दूसरे चरण की वोटिंग है। सरकार बनाने के लिए 148 सीटें चाहिए। मुकाबला TMC और BJP के बीच है। अबकी जीत-हार का पूरा समीकरण SIR के इर्द-गिर्द है। SIR का गणित चला तो BJP और SIR का डर चला तो TMC आगे नजर आ रही है। चुनावी कवरेज के दौरान दैनिक भास्कर की टीम मुर्शिदाबाद, कोलकाता, मालदा, दार्जिलिंग, नादिया, झारग्राम, संदेशखाली समेत नॉर्थ और साउथ बंगाल के कई जिलों में पहुंची। आम लोगों से लेकर सीनियर जर्नलिस्ट और पॉलिटिकल एक्सपर्ट से बात की। इस दौरान 3 बातें समझ आईं… 1. BJP के लिए: SIR में कुल 91 लाख नाम कटे हैं। इसमें 47 लाख मृत लोगों के हैं। अगर इन्हें आधार बनाकर सीटों का गणित समझें तो इस बार BJP को बहुमत मिलता नजर आ रहा है। उसे 150 से 170 सीटें मिल सकती हैं। वहीं TMC 110-140 सीटों पर सिमट सकती है। इसी गणित के आधार पर BJP के नेता बंगाल में सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं। 2. TMC के लिए: पश्चिम बंगाल के वोटर्स में SIR का डर TMC के पक्ष में जा सकता है। असल में ग्राउंड पर ऐसी अफवाह फैली है कि वोटर लिस्ट से नाम कटने के बाद नागरिकता भी जा सकती है। जिनके नाम वोटर लिस्ट में बच गए, उन्होंने इसी डर से हर कीमत पर 100% वोट डालने की कोशिश की। इस बंपर वोटिंग का फायदा TMC को मिल सकता है। पार्टी 160 से 190 सीटें जीत सकती है। 3. कांग्रेस के लिए: एक फैक्टर ऐसा भी है, जिससे कांग्रेस फायदे में नजर आ रही है। TMC सरकार से लोग नाराज हैं। भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी के साथ एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर मजबूत है। ये नाराजगी मुस्लिम बहुल इलाकों में भी है, लेकिन ये वोटर BJP के साथ नहीं जाएगा। ऐसे में मुर्शिदाबाद और मालदा की सीटों पर इसका फायदा कांग्रेस को मिल सकता है। कांग्रेस 1-3 सीटों पर मजबूत हो रही है। साउथ बंगाल में इंडियन सेकुलर फ्रंट यानी ISF 1 या दो सीटों पर मजबूत हो सकती है। वहीं, CPI(M) 2 से 3 सीटों पर दूसरी पोजीशन पर हो सकती है या फिर ज्यादा से ज्यादा 1 सीट जीत सकती है। वहीं, TMC से बाहर हुए हुमायूं कबीर की पार्टी AJUP का कोई असर नहीं दिख रहा है। BJP की जीत के लिए बड़े फैक्टर…SIR में 47 लाख वोटर्स डिलीट होने का फायदा BJP को पॉलिटिकल एनालिस्ट देबांजन बनर्जी ने BJP की जीत का गणित समझाया। उनके मुताबिक, पिछले दो चुनावों में TMC को करीब 2.86 करोड़ और BJP को 2.26 करोड़ वोट मिले थे, यानी TMC लगभग 60 लाख वोट से आगे थी। अब SIR में करीब 47 लाख मृत लोगों के नाम लिस्ट से हट गए हैं। माना जा रहा है कि इनमें से ज्यादातर TMC के समर्थक थे। अगर ऐसा है, तो TMC का वोट बैंक घटेगा और BJP को सीधा फायदा होगा।’ असली खेल उन सीटों पर है, जहां बहुत कम अंतर से जीत-हार होती है। 2021 विधानसभा चुनाव के लिहाज से देखें, तो करीब 30 सीटों पर 1000 से कम वोटों से जीत-हार तय हुई थी, जबकि करीब 50 सीटों पर दो से पांच हजार वोटों का अंतर था। 100 सीटों पर वोट का अंतर करीब 5 हजार से 10 हजार के बीच था। 47 लाख वोट कम होने पर ऐसी सीटों के नतीजे पलट सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो BJP 150 से 170 सीट जीत सकती है। डर से आजादी और दूसरे राज्यों के नेता बूथ पर सक्रिय चुनाव में डर का माहौल है। मालदा, मुर्शिदाबाद और संदेशखाली में पैरा मिलिट्री फोर्सेज पोलिंग बूथ के साथ-साथ घरों के बाहर गलियों में भी तैनात हैं। लोग बिना डरे पोलिंग बूथ जा रहे हैं। ये फैक्टर BJP के पक्ष में है। वहीं, हर बूथ पर यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश और असम समेत BJP सरकार वाले राज्यों के मंत्री, विधायक और सांसदों की टीम काम कर रही है, ताकि जीत उनके पक्ष में हो। BJP के पक्ष में ये फैक्टर भी… 1. BJP ने TMC के भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी का मुद्दा बढ़ा-चढ़ाकर उठाया। 2. TMC की लक्ष्मी भंडार योजना के तहत 1500 रुपए की जगह 3000 रुपए देने का वादा किया है। पश्चिम बंगाल में बंपर वोटिंग यानी सत्ता बदलाव TMC की जीत के लिए बड़े फैक्टर…SIR में नाम कटने से नागरिकता छिनने का डर, TMC को फायदा राज्य में SIR में ज्यादा नाम ग्रामीण इलाकों में कटे। इसे लेकर पॉलिटिकल एनालिस्ट डॉ. सिबाजी प्रतीम बसु कहते हैं, ‘वोटर लिस्ट से नाम कटने पर चुनाव आयोग ने सिर्फ इतना कहा था कि मामला सिर्फ SIR से जुड़ा है। BJP ने इसे घुसपैठिया शब्द से जोड़ दिया। इससे लोगों में मन में नागरिकता जाने का डर है। बांग्लादेशी बताकर देश से बाहर कर दिया जाएगा।‘ ‘ये खौफ भी है कि उनका ड्राइविंग लाइसेंस और राशन कार्ड छिन जाएगा। फिर वो बंगाल से बाहर जाकर कैसे काम करेंगे।‘ ‘TMC के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी के साथ भ्रष्टाचार नेगेटिव पॉइंट हैं, लेकिन अब अस्मिता के सामने ये मुद्दे दूसरे और तीसरे नंबर पर चले गए हैं। ऐसे में लगता है कि TMC को 160 से 190 सीटें और BJP को ज्यादा से ज्यादा 80 से 110 सीटें मिल सकती हैं। कांग्रेस महज 1 से 3 सीटें ही जीत सकेगी।‘ सीनियर जर्नलिस्ट सुमन भट्टाचार्य भी मानते हैं, SIR की वजह से वोट प्रतिशत पिछली बार से बढ़ा है। अबकी BJP 85 सीटों से ज्यादा जीतेगी, लेकिन बहुमत नहीं मिल पाएगा। TMC को 180 से ज्यादा सीटें मिल सकती हैं, लेकिन ये 2021 से कम होंगी।‘ ……………………. पश्चिम बंगाल चुनाव पर ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ें… 1. आरजी कर रेप-मर्डर केस की पीड़ित की मां BJP कैंडिडेट, सभा में कुर्सियां खाली पानीहाटी सीट से आरजीकर रेप केस की पीड़ित की मां रतना देबनाथ BJP के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। 12 अप्रैल को सभा करने गईं तो कुर्सियां खाली पड़ी थीं। रतना देबनाथ अपने चुनाव लड़ने को बेटी को इंसाफ दिलाने की लड़ाई बता रही हैं। महिलाएं उनकी सभा के सामने से गुजरते हुए रुकती हैं। पूछने पर कहती हैं, ‘हम साथ हैं, लेकिन दिखा नहीं सकते। TMC वाले घूम रहे हैं। साथ देख लिया, तो मुश्किल होगी।’ पढ़िए पूरी खबर…
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण सवाल उठाते हुए कहा कि क्या 15 साल लंबे लिव-इन रिलेशनशिप के टूटने को दुष्कर्म का मामला माना जा सकता है, खासकर तब जब जोड़े का एक बच्चा भी हो और पुरुष संबंध तोड़कर अलग हो गया हो। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की […] The post डेढ़ दशक के लिव-इन संबंध, फिर ब्रेकअप : क्या यह रेप का मामला है? सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल, मध्यस्थता का दिया सुझाव appeared first on Sabguru News .
रेलवे में 30 हजार पद खत्म करने की खबर गलत : रेल मंत्रालय
नई दिल्ली। रेल मंत्रालय ने रेलवे में 30 हजार पदों को समाप्त किए जाने संबंधी खबरों को गलत बताते हुए स्पष्ट किया है कि ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। रेल मंत्रालय के एक प्रवक्ता के अनुसार मानव संसाधन का समायोजन एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके तहत समय के हिसाब से […] The post रेलवे में 30 हजार पद खत्म करने की खबर गलत : रेल मंत्रालय appeared first on Sabguru News .
श्री राजराजेश्वरी महालक्ष्मी यज्ञ निर्विघ्न सम्पन्न होने की खुशी में सहस्त्रधारा
अजमेर। पुष्कर घाटी स्थित प्राचीन नौसर माता मंदिर में श्री नवशक्ति सृजन सेवा प्रन्यास के तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय 21 कुंडीय श्री राजराजेश्वरी महालक्ष्मी यज्ञ के धार्मिक विधि-विधान के साथ निर्विघ्न सम्पन्न होने की खुशी में नौसर माता मंदिर परिसर स्थित श्री गौरीश्वर देवालय में सोमवार को सहस्त्रधारा का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें […] The post श्री राजराजेश्वरी महालक्ष्मी यज्ञ निर्विघ्न सम्पन्न होने की खुशी में सहस्त्रधारा appeared first on Sabguru News .
सदियों से इंसानों के दोस्त और वफादार रहे कुत्तों से एक तरफ जहां कई लोग डरते और भागते हैं, उन्हें मारते, दुत्कारते और नफरत करते हैं, वहीं कुछ लोग इन बेजुबानों की सेवा करने की मिसालें पेश कर रहे हैं। इतना ही नहीं, वे मानते हैं कि कैसे कुत्तों या दूसरे बेजुबानों की सेवा से उनके जीवन में चमत्कार घटे और वे मुसीबतों से बाहर आ गए। इंदौर में एक ऐसा ही अनोखा मामला सामने आया है जिसमें प्रदेश के शिवसेना प्रभारी सुरेश गुर्जर ने अपने 55वें जन्मदिन पर 51 हजार स्ट्रीट डॉग्स को भोजन कराया और एक मिसाल पेश की। उनके पशु प्रेम की यह कहानी जमकर वायरल हो रही है। दरअसल, शिवसेना एमपी के प्रभारी सुरेश गुर्जर ने अपने 55वें जन्मदिन पर 51 हजार स्ट्रीट डॉग्स को खाना खिलाया। इसके लिए उन्होंने स्ट्रीट डॉग्स के लिए भंडारे का आयोजन किया था। शिवसेना नेता सुरेश गुर्जर की यह पहल लोगों का दिल जीत रही है। इसके साथ ही एक सकारात्मक मैसेज भी दे रही है कि आखिर इन बेजुबानों की मदद इंसान नहीं करेगा तो कौन करेगा। वे किस के भरोसे हैं। इसी भाव के चलते उन्होंने अपने जन्मदिन को धूमधाम से मनाने के बजाय सादगी और सेवा के रूप में मनाने का फैसला किया और शहर के अलग-अलग इलाकों में जाकर कुत्तों को खाना खिलाया। क्या है कुत्तों को भंडारा खिलाने के पीछे की असल कहानी : बता दें कि कुत्तों को खाना खिलाने के इस अभियान में उनके साथ शिवसेना के कई पदाधिकारी और सामाजिक संगठन के सदस्य भी साथ रहे। जिन्होंने इस पहल में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सुरेश गुर्जर ने बताया कि उन्होंने जीवन में कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। एक समय ऐसा भी आया जब वे आर्थिक रूप से काफी कमजोर हो गए थे। उन्होंने बताया कि काफी गरीबी देखी है। उनके पास करोड़ों रुपए थे, लेकिन समय इतना खराब आया कि काफी कर्ज में हो गए थे, लेकिन एक दिन उन्होंने बेजुबान पशुओं खासकर कुत्तों की सेवा शुरू की। इसके बाद तो उनके दिन फिर गए और एक तरह से उनके जीवन में चमत्कार ही घट गया। आज वे फिर से एक समृद्ध जीवन जी रहे हैं और बताते हैं कि जैसे कुत्तों ने उनके जीवन की हर तकलीफ को हर लिया है। गाड़ी का हॉर्न सुनते ही चले आते हैं उनके दोस्त : उन्होंने बताया कि उनके घर और फार्म हाउस पर भी कई कुत्ते रहते हैं, जिनकी वे देखभाल करते हैं। उनका मानना है कि जहां घरों में पालतू जानवरों को अच्छा भोजन और देखभाल मिलती है, वहीं सड़कों पर रहने वाले कुत्तों के लिए कोई व्यवस्था नहीं होती। वे दिनभर भूखे प्यासे भटकते हैं। भूख की वजह से हिंसक हो जाते हैं। लोग उनके साथ दुर्व्यवहार करते हैं। लेकिन वे अपनी गाड़ी में दूध, बिस्किट, टोस्ट और अन्य खाद्य सामग्री रखकर शहरभर में घूम-घूमकर कुत्तों को खाना खिलाते हैं। जैसे ही उनकी गाड़ी का हॉर्न बजता, कॉलोनियों और गलियों में रहने वाले कुत्ते दौड़कर उनके पास पहुंच जाते हैं। गुर्जर उन्हें पत्तल में अलग-अलग प्रकार का भोजन परोसते। उन्होंने कहा कि यह नेक काम एक दिन तक सीमित नहीं रहेगा, इसे आगे भी जारी रखेंगे, इसमें उनके साथ कई लोग शामिल होते जा रहे हैं। Edited By: Naveen R Rangiyal
साल 2020 में बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत ने पूरी इंडस्ट्री को हिला दिया था। एक्टर की मौत के मामले में सामने आए ड्रग्स केस में रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शौविक को जेल तक जाना पड़ा। अब रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार को एक बड़ी राहत मिली है। मुंबई की एक विशेष NDPS कोर्ट ने रिया, उनके भाई शौविक चक्रवर्ती और मां संध्या चक्रवर्ती के बैंक खातों को तुरंत अनफ्रीज करने का आदेश दिया है। यह फैसला रिया के लिए न केवल आर्थिक बल्कि नैतिक जीत के रूप में भी देखा जा रहा है। NCB ने 2020 में जांच के दौरान रिया और उनके परिवार के कई बैंक खातों को इस संदेह में फ्रीज कर दिया था कि इनका संबंध ड्रग्स की खरीद-फरोख्त से हो सकता है। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि NCB ने खातों को फ्रीज करने के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी नहीं ली थी। अदालत ने इसे कानून की गंभीर चूक करार दिया। कोर्ट ने कहा कि NDPS अधिनियम के तहत संपत्ति या खातों को फ्रीज करने की शक्ति असीमित नहीं है और इसके लिए सख्त कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य है। कोर्ट ने RBI के दिशा-निर्देशों के अनुसार खातों को फिर से संचालित करने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने इस आदेश में रिया पर लगे आरोपों की मेरिट (गुण-दोष) पर चर्चा नहीं की। अदालत का पूरा ध्यान इस बात पर था कि क्या जांच एजेंसी ने उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया या नहीं। बॉम्बे हाईकोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों के पास यह विश्वास करने का ठोस कारण होना चाहिए कि संपत्ति अवैध गतिविधियों से जुड़ी है, और इसे समय पर रिपोर्ट करना आवश्यक है। बैंक खातों का अनफ्रीज होना रिया के लिए राहत की आखिरी कड़ी नहीं है। पिछले एक साल में उनके पक्ष में कई अहम फैसले आए हैं। इससे पहले सीबीआई की तरफ से रिया को क्लीन चिट मिली थी। CBI ने अपनी जांच में सुशांत सिंह राजपूत की मौत में किसी भी तरह की साजिश या हत्या की संभावना को खारिज करते हुए इसे आत्महत्या करार दिया था। बॉम्बे हाईकोर्ट ने पिछले साल ही रिया को उनका पासपोर्ट वापस करने का आदेश दिया था, जिससे उनकी विदेश यात्रा पर लगी पाबंदियां खत्म हो गईं। कानूनी मोर्चे पर मजबूती मिलने के बाद रिया चक्रवर्ती अब अपने करियर पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। वह मशहूर फिल्म निर्माता हंसल मेहता के एक आगामी प्रोजेक्ट के साथ अभिनय की दुनिया में वापसी कर रही हैं।
Parshuram Dwadashi: परशुराम द्वादशी क्यों मनाते हैं, जानिए इसका महत्व
Lord Parshuram: परशुराम द्वादशी हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे विशेष रूप से भगवान परशुराम की उपासना के लिए मनाया जाता है। यह दिन धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, भगवान परशुराम विष्णु जी के छठे अवतार हैं, जिन्हें धर्म की रक्षा और अधर्म का नाश करने के लिए पृथ्वी पर भेजा गया था। परशुराम द्वादशी का पर्व वैशाख मास की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है और इसे विशेष श्रद्धा के साथ धार्मिक रीति-रिवाजों और पूजा-पाठ के माध्यम से मनाया जाता है। ALSO READ: Atichari brihaspati:क्या अतिचारी बृहस्पति बढ़ाएगा गर्मी? 50 डिग्री तक जा सकता है पारा? आइए जानते हैं कि यह दिन क्यों मनाया जाता है और इसका आध्यात्मिक महत्व क्या है: क्यों मनाई जाती है परशुराम द्वादशी? पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान परशुराम का जन्म अक्षय तृतीया को हुआ था, लेकिन परशुराम द्वादशी मुख्य रूप से उनके द्वारा किए गए धर्म की स्थापना और उनके तपस्वी रूप के सम्मान में मनाई जाती है। इस दिन को मनाने के पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं: अधर्म का नाश: परशुराम जी ने पृथ्वी पर अहंकारी और अत्याचारी क्षत्रिय राजाओं का अंत कर धर्म की पुनर्स्थापना की थी। यह दिन उनकी उस शक्ति और न्याय का उत्सव है। पितृ और गुरु भक्ति: परशुराम जी अपनी पितृ-भक्ति के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने पिता महर्षि जमदग्नि की आज्ञा का पालन किया और कठोर तप से शिव जी को प्रसन्न किया। उनकी तपस्या की पूर्णता और उनके दिव्य स्वरूप की आराधना हेतु यह द्वादशी मनाई जाती है। परशुराम द्वादशी का महत्व हिंदू शास्त्रों में परशुराम द्वादशी का फल अत्यंत कल्याणकारी बताया गया है। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान परशुराम की पूजा करने से जाने-अनजाने में हुए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। यह दि समस्त पापों से मुक्ति से देकर मन की शुद्धि करता है। परशुराम जी 'शस्त्र और शास्त्र' दोनों के ज्ञाता हैं। उनकी पूजा करने से भक्तों में आत्मविश्वास बढ़ता है, भय का नाश होता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने की शक्ति मिलती है। इस तरह यह साहस और निर्भयता की प्राप्ति का दिन है। धार्मिक मान्यता है कि जो दंपत्ति संतान सुख से वंचित हैं, उनके लिए इस दिन व्रत रखना विशेष फलदायी होता है। यह व्रत संतान और परिवार की रक्षा करके सुख-शांति और आरोग्य लाता है। चूंकि यह वैशाख मास में आती है, जो कि दान-पुण्य का महीना है, इस दिन किए गए दान, स्नान और तर्पण का फल कभी समाप्त नहीं होता यानी 'अक्षय' रहता है। यह दिन अक्षय पुण्य की प्राप्ति देता है। परशुराम द्वादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर पवित्र नदी या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें। भगवान विष्णु या परशुराम जी की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं। उन्हें पीले पुष्प, चंदन और तुलसी दल अर्पित करें। इस दिन ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को अन्न, जल का घड़ा या कलश या सत्तू का दान करना श्रेष्ठ माना जाता है। भगवान परशुराम 'चिरंजीवी' हैं (अमर हैं), इसलिए उनकी पूजा हमें दीर्घायु और स्थिर बुद्धि का वरदान देती है। अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ALSO READ: पुरुषोत्तम मास का पौराणिक महत्व और कथा
Atichari brihaspati:क्या अतिचारी बृहस्पति बढ़ाएगा गर्मी? 50 डिग्री तक जा सकता है पारा
भारतीय ज्योतिष और विज्ञान दोनों ही बृहस्पति (गुरु) को पृथ्वी के अस्तित्व के लिए अनिवार्य मानते हैं। जहाँ ज्योतिष इसे प्राणवायु, सुख और वातावरण की सौम्यता का कारक मानता है, वहीं विज्ञान इसे पृथ्वी की कक्षा को स्थिर रखने वाला 'कॉस्मिक रक्षक' और 'वैक्यूम क्लीनर' कहता है। ज्योतिष का मानना है कि वर्तमान में बृहस्पति की तेज गति से धरती के वातारवण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने वाला है। यह प्रभाव वर्ष 2033 तक रहेगा। इस दौरान धरती के जलवायु में अप्रत्याशित परिवर्तन होंगे। ALSO READ: Jupiter transit year 2026: क्या अतिचारी गुरु 2026 में लाएंगे वैश्विक महासंकट? पृथ्वी का अभेद्य कवच (कॉस्मिक रक्षक) बृहस्पति अपनी विशाल गुरुत्वाकर्षण शक्ति से पृथ्वी को अंतरिक्ष के खतरों से बचाता है: उल्कापिंडों से सुरक्षा: यह खतरनाक एस्टेरॉयड और धूमकेतुओं को अपनी ओर खींचकर पृथ्वी से टकराने से रोकता है। इसके बिना पृथ्वी पर उल्कापात की घटनाएँ 1,000 गुना अधिक होतीं। कक्षा की स्थिरता: यह सौरमंडल के द्रव्यमान केंद्र को संतुलित रखता है, जिससे पृथ्वी की कक्षा स्थिर रहती है और जीवन के अनुकूल मौसम बना रहता है। अतिचारी बृहस्पति (2025-2026): बिगड़ती चाल और जलवायु संकट 18 मई 2025 से बृहस्पति 'अतिचारी' हो गए हैं। इसका अर्थ है कि वे अपनी सामान्य गति (एक राशि में 12 माह) को छोड़कर बहुत तेजी से राशियाँ बदल रहे हैं। तीन गुना अतिचारी गोचर: वर्तमान में गुरु मिथुन में हैं। वे अक्टूबर 2025 में कर्क में जाएंगे, फिर दिसंबर में पुनः मिथुन में लौटेंगे और जून 2026 में फिर कर्क में प्रवेश करेंगे। 8 वर्षों का संकट: ग्रहों की यह अस्थिर चाल अगले 8 वर्षों तक जारी रह सकती है। यह ब्रह्मांडीय हलचल पृथ्वी के वातावरण की शांति और सौम्यता को बाधित करेगी। पूर्व में भी हुए अतिचारी: बृहस्पति ग्रह पूर्व में भी कई बार अतिचारी हुए हैं लेकिन उस काल में धरती पर जंगल और पहाड़ों की भरमार थी। वर्तमान में मानव की गतिविधियों ने धरती को बहुत नुकसान पहुंचाया है जिसके चलते अतिचारी बृहस्पति का नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। धरती पर पड़ने वाले गंभीर प्रभाव बृहस्पति की इस बिगड़ती चाल के कारण वैश्विक स्तर पर बड़े बदलाव देखे जा सकते हैं: बढ़ता तापमान: अनुमान है कि आने वाले समय में भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में पारा 50C के पार जा सकता है। प्राकृतिक आपदाएँ: गुरु की 'अतिचारी' स्थिति से विनाशकारी बाढ़, समुद्री तूफान, भूकंप और भीषण जल संकट की आवृत्ति बढ़ेगी। मिलनकोविच चक्र: बृहस्पति का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी की कक्षा को अधिक अंडाकार बना देता है, जिससे सूर्य की विकिरण मात्रा बदलती है और लंबे समय में हिमयुग या ग्लोबल वार्मिंग जैसी स्थितियां पैदा होती हैं। समाधान: हमारा साझा प्रयास प्रकृति के इस प्रकोप को कम करने के लिए केवल वैज्ञानिक उपाय ही काफी नहीं हैं, हमें धरातल पर कार्य करना होगा: वृक्षारोपण: बड़े पैमाने पर नए जंगल विकसित करना। प्राकृतिक संरक्षण: खनन, पहाड़ों की कटाई और पेड़ों के विनाश पर तत्काल रोक लगाना। संतुलित जीवन: वायुमंडल की शीतलता बनाए रखने के लिए प्रदूषण कम करना। निष्कर्ष: बृहस्पति भले ही करोड़ों मील दूर है, लेकिन उसकी चाल हमारी 'प्राणवायु' और 'आयु' को सीधे प्रभावित करती है। यह समय सचेत होने और प्रकृति के साथ जुड़ने का है।
बॉबी देओल की क्राइम-थ्रिलर 'बंदर' की रिलीज डेट का ऐलान, इस दिन सिनेमाघरों में देगी दस्तक
अनुराग कश्यप की अपकमिंग फिल्म 'बंदर' का फैंस बेसब्री से इंतजार कररहे हैं। इस फिल्म ने 2025 में टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रीमियर के साथ ही चर्चा बटोर ली थी। सच्ची घटना से प्रेरित यह क्राइम-थ्रिलर ग्लैमर, रिश्तों और कानून की जटिल दुनिया को बेबाक अंदाज में सामने लाएंगी। 'बंदर' के मेकर्स ने अब आधिकारिक तौर पर इसकी रिलीज डेट का ऐलान कर दिया है। यह फिल्म 5 जून, 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए तैयार है। इस फिल्म में बॉबी देओल लीड रोल में हैं, और इसमें डायरेक्टर अनुराग कश्यप के नेतृत्व में एक मजबूत क्रिएटिव टीम एक साथ आई है, जिसमें राइटर सुदीप शर्मा और अभिषेक बनर्जी शामिल हैं। अपनी बोल्ड कहानी कहने के अंदाज के लिए मशहूर अनुराग कश्यप ने पहले 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' और 'ब्लैक फ्राइडे' जैसी कल्ट क्लासिक फिल्में दी हैं। लगातार कई दमदार परफॉर्मेंस देने के बाद, बॉबी देओल इस इंटेंस ड्रामा में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म का प्रोडक्शन निखिल द्विवेदी ने किया है और इसे ज़ी स्टूडियोज का सपोर्ट मिला है। फिल्म को सुदीप शर्मा और अभिषेक बनर्जी ने लिखा है, जिन्हें 'पाताल लोक', 'कोहरा' और 'उड़ता पंजाब' जैसे सराहे गए प्रोजेक्ट्स के लिए जाना जाता है। सुदीप शर्मा ने हाल ही में 'कोहरा 2' का निर्देशन भी किया है, जिसे क्रिटिक्स ने काफी पसंद किया है। फिल्म की स्टार कास्ट में सान्या मल्होत्रा, राज बी शेट्टी, जितेंद्र जोशी, सपना पब्बी, इंद्रजीत सुकुमारन, रिद्धि सेन, सबा आज़ाद और नागेश भोसले भी अहम भूमिकाओं में हैं। एक टैलेंटेड टीम और दमदार कास्ट के साथ, 'बंदर' 2026 की सबसे रोमांचक थियेट्रिकल रिलीज में से एक बनने जा रही है।
फिल्म 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर' के नए पोस्टर्स रिलीज, मनोज बाजपेयी के साथ नजर आएंगी अदा शर्मा
विपुल अमृतलाल शाह की फिल्म 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर' अपनी घोषणा के बाद से ही चर्चा में बनी हुई है। हाल ही में, मनोज बाजपेयी के जन्मदिन के मौके पर एक दिलचस्प पोस्टर के साथ फिल्म के टाइटल का खुलासा किया गया था। अब, फिल्म के नए पोस्टर्स रिलीज कर दिए गए हैं, जो एक बड़ा खुलासा करते हैं जिसका दर्शकों को बेसब्री से इंतजार था, और हमें इस इंटेंस ड्रामा की दुनिया के और करीब ले जाते हैं। A post shared by Sunshine Pictures (@sunshinepicturesofficial) 'गवर्नर' के नए पोस्टर्स ने स्टार कास्ट का खुलासा कर दिया है, जिसमें मनोज बाजपेयी और अदा शर्मा नजर आएंगे। जहां अलग-अलग पोस्टर्स नेशनल अवॉर्ड विनर एक्टर मनोज बाजपेयी के अलग-अलग शेड्स दिखाते हैं, वहीं ये पोस्टर्स पर्दे पर दिखने वाले जबरदस्त ड्रामा के बारे में भी बहुत कुछ बयां करते हैं। कास्ट के चेहरे सामने आने के अलावा, पोस्टर्स में कुछ दमदार टैगलाइन्स भी दी गई हैं जैसे— अब बारी मेरी है, आई विल नॉट लेट इंडिया फेल, और इंडिया इज ऑन द वर्ज ऑफ बैंकरअप्ट्सी, ही सौ ईट कमिंग। ये सभी भारत के आर्थिक संकट के एक मुश्किल दौर की ओर इशारा करते हैं। अब यह देखने के लिए उत्साह चरम पर है कि फिल्म में मनोज बाजपेयी किस तरह का किरदार निभाएंगे। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें विपुल अमृतलाल शाह प्रोडक्शन की फिल्म 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर' सनशाइन पिक्चर्स द्वारा पेश की जा रही है। विपुल अमृतलाल शाह द्वारा निर्मित और चिन्मय मांडलेकर द्वारा निर्देशित इस फिल्म के को-प्रोड्यूसर आशिन ए. शाह हैं। फिल्म को सुवेंदु भट्टाचार्यजी, सौरभ भरत, रवि असरानी और खुद विपुल अमृतलाल शाह ने लिखा है। जावेद अख्तर के लिखे गानों को अमित त्रिवेदी ने अपने संगीत से सजाया है। 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर' 12 जून, 2026 को रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार है।
इन OTT शोज ने ग्लोबल लेवल पर मचाई धूम, इंटरनेशनल एमी अवॉर्ड्स में मिली खास पहचान
भारत में स्ट्रीमिंग के बढ़ते चलन ने न केवल लोकल एंटरटेनमेंट को बदला है, बल्कि इंडियन स्टोरीटेलिंग को दुनिया के नक्शे पर भी ला खड़ा किया है। गोल्डन कारवां, इवानहो प्रोडक्शंस, फिल्म कारवां और पुअर मैन्स प्रोडक्शंस द्वारा बनाई गई 'दिल्ली क्राइम' जैसे दमदार क्राइम ड्रामा से लेकर बानिजय एंटरटेनमेंट के तहत बानिजय एशिया द्वारा निर्मित 'द नाइट मैनेजर' जैसे शानदार थ्रिलर्स तक, कई शोज ने भाषा और कल्चर की दीवारों को तोड़कर ग्लोबल लेवल पर अपनी पहचान बनाई है। इसमें इंटरनेशनल एमी नॉमिनेशंस और जीत भी शामिल है। यहां पांच बेहतरीन इंडियन सीरीज दी गई हैं जिन्होंने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा: 1. दिल्ली क्राइम नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हुई 'दिल्ली क्राइम' इंटरनेशनल एमी अवार्ड्स 2020 में बेस्ट ड्रामा सीरीज जीतने वाली पहली भारतीय सीरीज बनी। गोल्डन कारवां, इवानहो प्रोडक्शंस, फिल्म कारवां और पुअर मैन्स प्रोडक्शंस द्वारा निर्मित, एक हाई-प्रोफाइल केस के इस ईमानदार और संवेदनशील चित्रण ने, जिसमें शेफाली शाह की दमदार परफॉर्मेंस थी, पूरी दुनिया के दिलों को छुआ। इसने साबित कर दिया कि भारतीय कहानियाँ असरदार होने के साथ-साथ ग्लोबल लेवल पर भी जुड़ाव पैदा कर सकती हैं। 2. द नाइट मैनेजर बनिजय एंटरटेनमेंट का हिस्सा, बनिजय एशिया द्वारा निर्मित 'द नाइट मैनेजर', जो डिज्नी+हॉटस्टार पर स्ट्रीम हो रही है, ने इंटरनेशनल एमी अवार्ड्स 2024 में नॉमिनेशन हासिल किया। आदित्य रॉय कपूर, शोभिता धुलिपाला और अनिल कपूर जैसे कलाकारों के साथ, इस सीरीज ने ग्लोबल फॉर्मेट को हाई-क्वालिटी और स्टाइलिश प्रोडक्शन में ढालने की भारत की काबिलियत को दिखाया। 3. मेड इन हेवन मॉडर्न रिश्तों और समाज की उम्मीदों को बारीकी से दिखाने वाली एमेजॉन प्राइम वीडियो की सीरीज 'मेड इन हेवन', जिसे एक्सेल एंटरटेनमेंट ने प्रोड्यूस किया है, को 2018 के इंटरनेशनल एमी अवार्ड्स में बेस्ट ड्रामा सीरीज के लिए नॉमिनेशन मिला। जोया अख्तर और रीमा कागती द्वारा बनाई गई इस सीरीज ने पर्सनल ड्रामा को तीखी सोशल कमेंट्री के साथ जोड़ा, जिसे भारत के बाहर भी दर्शकों ने काफी पसंद किया। 4. सेक्रेड गेम्स नेटफ्लिक्स इंडिया की शुरुआती ग्लोबल हिट्स में से एक, फैंटम फिल्म्स द्वारा निर्मित 'सेक्रेड गेम्स' ने 2019 के इंटरनेशनल एमी अवार्ड्स में नॉमिनेशन पाया था। सैफ अली खान और नवाजुद्दीन सिद्दीकी की बेहतरीन परफॉर्मेंस वाली इस सीरीज ने भारतीय वेब कंटेंट में एक दमदार और सिनेमाई अंदाज पेश किया। 5. आर्या बनिजय एंटरटेनमेंट का हिस्सा, एंडेमोल शाइन इंडिया द्वारा निर्मित 'आर्या' ने इंटरनेशनल एमी अवार्ड्स 2021 में नॉमिनेशन हासिल किया। सुष्मिता सेन के नेतृत्व वाली इस सीरीज ने उनकी पावरफुल वापसी कराई और महिलाओं पर आधारित मजबूत कहानियाँ बनाने की भारत की ताकत को दुनिया के सामने रखा।
शनि, बृहस्पति, राहु और केतु के कारण 5 राशियों के लिए रहेगा राजयोग
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, वर्ष 2026 और 2027 में शनि, बृहस्पति (गुरु), राहु और केतु की स्थिति कुछ विशेष राशियों के लिए राजयोग के समान फल देने वाली होगी। आपके द्वारा दिए गए विवरण को यहाँ स्पष्ट और व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया गया है। ग्रहों की स्थिति का मुख्य आधार शनि: 29 मार्च 2025 से 3 जून 2027 तक मीन राशि में रहेंगे। बृहस्पति (गुरु): 18 मई 2025 से मिथुन में, 2 जून 2026 से कर्क में और 30 अक्टूबर 2026 से सिंह राशि में गोचर करेंगे। राहु-केतु: अक्टूबर तक राहु कुंभ में और केतु सिंह राशि में स्थित रहेंगे। राशियों के लिए: तीनों का गोचर निम्नलिखित राशियों के लिए शुभ माना जाएगा। ALSO READ: मेष में बनने वाला है मंगलादित्य, बुधादित्य और त्रिग्रही योग: इन 5 राशियों को मिलेगा बड़ा फायदा इन 5 राशियों के लिए बनेगा राजयोग 1. मेष राशि मेष राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक उन्नति का है। ग्रह स्थिति: शनि आपकी कुंडली के 12वें भाव में हैं, जिससे साढ़ेसाती का प्रथम चरण प्रभावी है। मेष में जाने के बाद भी यह लाभ देंगे। गुरु वर्ष के पूर्वार्ध में तीसरे और चतुर्थ भाव में गोचर करेंगे, अगले वर्ष पंचम भाव में रहेंगे जो सकारात्मकता लाएंगे। विशेष लाभ: 11वें भाव (आय भाव) में राहु का गोचर आपकी इनकम में भारी बढ़ोतरी कराएगा। सावधानी: 5वें भाव में केतु होने के कारण प्रेम संबंधों और संतान पक्ष को लेकर थोड़ी मानसिक परेशानी हो सकती है। ALSO READ: मंगल का महा-गोचर 2026: अपनी ही राशि मेष में लौटेंगे मंगल, 6 राशियों के लिए अपराजेय योग 2. कर्क राशि इस राशि के लिए 2026 स्वर्ण काल साबित हो सकता है। भाग्य का साथ: शनि पूरे वर्ष भाग्य भाव (9वें) में रहकर आपकी कड़ी मेहनत का फल देंगे। मेष राशि में 10वें भाव में जाने के बाद यह और प्रबल होकर कर्मक्षेत्र में लाभ देंगे। गुरु का वरदान: 2 जून को गुरु का कर्क राशि (लग्न) में प्रवेश आपके आत्मविश्वास को बढ़ाएगा। व्यापार में मुनाफा दोगुना होने और नौकरी में अप्रत्याशित उन्नति के योग हैं। पारिवारिक सुख: दांपत्य जीवन की परेशानियां खत्म होंगी, संतान सुख मिलेगा और अविवाहितों के लिए विवाह के प्रबल योग बनेंगे। राजनीति से जुड़े लोगों को उच्च पद मिल सकता है। 3. तुला राशि तुला राशि के जातकों के लिए शत्रुओं पर विजय और करियर में उछाल का समय है। शत्रु विजय: शनि छठे भाव में रहकर विरोधियों को शांत रखेंगे और पुराने रोगों से मुक्ति दिलाएंगे। बृहस्पति का प्रभाव: गुरु का गोचर तीन चरणों में आपके भाग्य और करियर को मजबूत करेगा। जून से अक्टूबर के बीच करियर की हर मनोकामना पूरी होगी। आर्थिक स्थिति: अक्टूबर के बाद 11वें भाव में गुरु का गोचर धन लाभ के नए स्रोत खोलेगा। प्रॉपर्टी या वाहन खरीदना इस समय अत्यंत शुभ रहेगा। 4. मकर राशि साहस और रिश्तों में सुधार के लिए यह वर्ष विशेष है। पराक्रम में वृद्धि: शनि तीसरे भाव में रहकर आपके साहस को बढ़ाएंगे, जिससे देरी से ही सही लेकिन सफलता सुनिश्चित होगी। सुधार का समय: जून के बाद सप्तम भाव में गुरु का गोचर साझेदारी के व्यापार और वैवाहिक जीवन में बड़ा सुधार लाएगा। धन लाभ: आय के एक से अधिक स्रोत (Multiple sources) बनेंगे और भाई-बहनों का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा। 5. मीन राशि मीन राशि के लिए गुरु का गोचर हर प्रकार की सुख-सुविधाओं में विस्तार करेगा। व्यक्तित्व और स्वास्थ्य: शनि लग्न में स्थित हैं, लेकिन गुरु की दृष्टि लग्न पर होने से आपकी सेहत और व्यक्तित्व में निखार आएगा। विदेशी अवसर: 12वें भाव का राहु आपको विदेश यात्रा या विदेशी जमीन से लाभ के अवसर दिला सकता है। कर्ज मुक्ति: छठे भाव का केतु आपको शत्रुओं पर विजयी बनाएगा और पुराने कर्ज से मुक्ति दिलाने में सहायक होगा। संपत्ति लाभ: गुरु चतुर्थ और पंचम भाव को प्रभावित करेंगे, जिससे चल-अचल संपत्ति में लाभ, बेहतर शिक्षा और प्रेम संबंधों में सफलता मिलेगी।
नागदा से आए दंपत्ति हाथ जो ड़ कर करते रहे प्रार्थना , उसने एक न सुनी कार से टक्कर मारने का झूठा आरोप लगाकर धमकाता रहा गुंडा 10 मिनट तक न पुलिस आई और न आम लोगों ने की मदद इंदौर की स्वच्छता की लाख बातें कर लो। यहां के खाने पीने की हजार बातें कर लो। लेकिन इस शहर की सुरक्षा और कानून व्यवस्था को ताक में रख दिया गया है। आए दिन हत्याएं, चाकुबाजी, लूट और पुलिस की लापरवाही के मामले सामने आ रहे हैं। यहां तक कि पुलिस पर ही जांच के नाम पर सोने की लूट के आरोप लग रहे हैं। इंदौर में पसरती गुंडागर्दी को जो मामला सामने आया है वो हैरान करने वाला है। इस घटना ने न सिर्फ इंदौर की इज्जत को मटिया-पलीत करने में कोई कसर छोड़ी है, बल्कि बाहर से आने वाले नागरिकों के मन में इंदौर का खौफ बना दिया है और यहां छवि खराब करने का काम किया है। Nagada से आए दंपत्ति हाथ जोड़कर करते रहे प्रार्थना, उसने एक न सुनी कार से टक्कर मारने का झूठा आरोप लगाकर धमकाता रहा गुंडा 10 मिनट तक न पुलिस आई और न आम लोगों ने की मदद https://t.co/44bp0k7p0X #Indore #madhyapradesh #police #crime #goons #NewsUpdate #viralvideo pic.twitter.com/J1dRRyLqNv — Webdunia Hindi (@WebduniaHindi) April 27, 2026 क्या एसी में झपकी ले रही पुलिस : वैसे तो आए दिन इंदौर में कोई न कोई शर्मिंदा करने वाली घटना सामने आती है। लेकिन यह घटना ऐसी है जिसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है और जिसने भी इसे देखा वो इंदौर के इन गुंडों और पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर शर्मिंदा हो रहा है। यहां की हालात देखकर लगता है कि इंदौर गुंडों के हवाले हो गया है और पुलिस एसी की हवा में झपकी ले रही है, क्योंकि शहर में कहीं पुलिस का खौफ नहीं है। लठ लेकर धमकाता रहा दंपत्ति और बच्चों को : दरअसल, इंदौर में सड़क चलते लोगों को गाड़ी की टक्कर लगले का बहाना बनाकर आम लोगों को और बाहरी नागरिकों को लूटने के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। इसी तरह का एक मामला एरोड्रम थाना क्षेत्र अंतर्गत बांगड़दा रोड पर हुआ। यहां एक अज्ञात बदमाश ने कार में सवार एक दंपती और उनकी दो साल की मासूम बच्ची पर डंडे से हमला करने की कोशिश की। इस पूरी घटना का वीडियो शनिवार को सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद पुलिस हरकत में आई और आरोपी के निवास स्थान पर दबिश दी, हालांकि आरोपी फिलहाल पुलिस की पकड़ से बाहर है। शादी का निमंत्रण देने नागदा से आए थे दंपत्ति : एरोड्रम पुलिस के मुताबिक उज्जैन के नागदा के रहने वाले अंकित सैनी अपनी पत्नी संध्या और दो साल की बेटी के साथ इंदौर आए थे। वे अपने किसी रिश्तेदार को वैवाहिक कार्यक्रम का निमंत्रण पत्र देने के लिए बांगड़दा क्षेत्र पहुंचे थे। इसी दौरान कालका माता मंदिर चौराहे के समीप एक बदमाश ने अचानक उनकी कार के सामने आकर रास्ता रोक लिया और हाथ में डंडा लेकर खड़ा हो गया। कार का पीछा किया , रूकवाई और लठ लेकर धमकाया : राहगीर और चश्मदीदों के मुताबिक उसने पहले तो कार का बाहर का नंबर देखकर उसका पीछा किया। इसके बाद एक जगह कार रुकवाकर उसकी बाइक को टक्कर मारने का झूठा आरोप लगाया। कार के कांच खुलवाने के लिए गालियां देता रहा और डंडा तानकर देर तक धमकाता रहा। दंपत्ति ने इस दौरान उसका वीडियो बना लिया। वीडियो के आधार पर पुलिस ने आरोपी की पहचान दुर्गा कॉलोनी निवासी मंगल शर्मा के रूप में की। पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए उसके घर पर छापा मारा, लेकिन वह वहां नहीं मिला। मां बाप करते रहे विनति , उसने एक न सुनी : कार से टक्कर मारने का झूठा आरोप लगाकर वो उनसे नीचे उतरने की और लठ तानकर मारने की धमकी देते हुए गालियां देता रहा। बदमाश के उग्र व्यवहार को देखकर कार के भीतर बैठी महिला बुरी तरह डर गई और उसने हाथ जोड़कर आरोपी से परिवार को छोड़ने की प्रार्थना की। बताया जा रहा है कि आरोपी जानबूझकर वाहनों से टकराने का नाटक करता है ताकि वह वाहन चालकों को डरा-धमका सके और उनसे अवैध रूप से रुपयों की वसूली कर सके। इस बीच कार में बैठे दंपत्ति उससे प्रार्थना करते रहे कि भैया कार में बच्चे हैं, ऐसी बातें न करें, वो लगातार गुहार लगाते रहे कि बच्चे डर रहे हैं और हमने आपको टक्कर नहीं मारी। लेकिन वो पूरी गुंडागर्दी के साथ उन्हें धमकाता रहा। बताया जा रहा है कि उसने दंपत्ति से 3 हजार रुपए भी वसूले हैं। रिपोर्ट: नवीन रांगियाल
बॉलीवुड एक्ट्रेस अमीषा पटेल अपने बेबाक बयानों की वजह से चर्चा में रहती हैं। इस बार अमीषा ने एक बड़ा खुलासा किया है। एक इंटरव्यू में उन्होंने अपने परिवार और भारत की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बीच बेहद करीबी रिश्तों का खुलासा किया, जिसने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। अमीषा पटेल ने बताया कि जब उनका जन्म मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में हुआ, तब सबसे पहले उन्हें देखने आने वाली शख्सियत इंदिरा गांधी थीं। यह कोई सामान्य घटना नहीं थी, बल्कि इस बात का संकेत था कि उनके परिवार और गांधी परिवार के बीच रिश्ता कितना गहरा और पुराना था। इतना ही नहीं अमीषा पटेल के पेरेंट्स की शादी कराने में भी इंदिरा गांधी का अहम रोल था। अमीषा ने इस खास रिश्ते की जड़ अपने दादा रजनी पटेल को बताया। वे एक प्रसिद्ध बैरिस्टर थे, जिन्होंने बाद में राजनीति में कदम रखा। उनका मार्गदर्शन खुद जवाहरलाल नेहरू ने किया था। राजनीति में आने के बाद उन्होंने पहले कम्युनिस्ट पार्टी जॉइन की, लेकिन बाद में कांग्रेस में शामिल हो गए। कांग्रेस में रहते हुए वे इंदिरा गांधी के बेहद करीबी बन गए और उनके प्रमुख सलाहकारों में शामिल थे। कहा जाता है कि इंदिरा गांधी कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले रजनी पटेल से सलाह जरूर लेती थीं। बॉलीवुड बबल संग बात करते हुए अमीषा पटेल ने कहा, मेरे माता-पिता की शादी की तारीख भी इंदिरा गांधी ने तय की थी। दरअसल, मेरे पेरेंट्स की कुंडलियां नहीं मिल रही थीं, इसलिए इंदिरा गांधी से पूछा गया था कि वो कब फ्री हो सकती हैं। फिर उनकी बताई हुईं तारीखों के मुताबिक ही मेरे माता-पिता की शादी का दिन फाइनल किया गया थश। अमीषा ने यह भी बताया कि उनके दादा ने मुंबई के वर्ली में स्थित नेहरू प्लेनेटेरियम का निर्माण करवाया था, जो जवाहरलाल नेहरू को श्रद्धांजलि के रूप में बनाया गया था। इससे साफ होता है कि उनका परिवार न सिर्फ राजनीति में सक्रिय था, बल्कि देश के इतिहास और विरासत से भी गहराई से जुड़ा हुआ था।
आज है मोहिनी एकादशी: इसे क्यों करना शुभ माना जाता है?
Mohini Ekadashi Importance: मोहिनी एकादशी हिन्दू धर्म का एक पवित्र व्रत है, जिसे भगवान विष्णु के मोहिनी रूप की पूजा और भक्ति के लिए मनाया जाता है। यह दिन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आध्यात्मिक लाभ और जीवन में समृद्धि लाने वाला भी माना जाता है। ALSO READ: मोहिनी एकादशी का व्रत रखने के 10 चमत्कारी फायदे आज मोहिनी एकादशी का पावन दिन है। दरअसल, आज का दिन इतना शुभ और महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है, इसके पीछे कुछ बहुत ही ठोस और दिलचस्प कारण हैं। आज हम जानेंगे कि मोहिनी एकादशी क्यों खास है और इसे करना क्यों शुभ माना जाता है। 1. बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक आज के दिन ही भगवान विष्णु ने अपनी माया से अमृत कलश को असुरों के चंगुल से बचाया था। इसे करने से भक्त को यह संदेश और शक्ति मिलती है कि अंततः जीत धर्म और सत्य की ही होती है। 2. मानसिक क्लेश और 'मोह' से मुक्ति हम अक्सर पुरानी बातों, रिश्तों या नुकसान के 'मोह' में फंसकर दुखी रहते हैं। मोहिनी एकादशी का व्रत मानसिक क्लेश को साफ करने तथा मोह से मुक्ति के लिए जाना जाता है। आध्यात्मिक मान्यता है कि आज के दिन व्रत रखने से मन की चंचलता शांत होती है और व्यक्ति को मोह-माया के दुखों से मुक्ति मिलती है। 3. कठिन से कठिन पापों का नाश शास्त्रों में वर्णन है कि जाने-अनजाने में हुए ऐसे पाप, जिनका बोझ मन पर रहता है, इस व्रत को करने से धुल जाते हैं। त्रेता युग में भगवान श्री राम ने भी सीता माता के वियोग के समय दुखों से मुक्ति पाने के लिए महर्षि वशिष्ठ के कहने पर यह व्रत किया था। 4. सुख-समृद्धि और आरोग्य धार्मिक दृष्टि से एकादशी का व्रत शरीर को डिटॉक्स यानी शुद्ध करने का सबसे अच्छा तरीका है। इसे करने से न केवल पुण्य मिलता है, बल्कि स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति आज श्रद्धा से पूजन करता है, उसके घर में दरिद्रता नहीं आती और सुख-शांति का वास होता है। ALSO READ: Mohini Ekadashi Katha 2026: मोहिनी एकादशी के रहस्य, जानें पौराणिक व्रत कथा और लाभ 5. वैकुंठ धाम की प्राप्ति हिंदू धर्म में एकादशी को 'मोक्षदायिनी' कहा गया है। आज के दिन किया गया दान और उपवास व्यक्ति के लिए स्वर्ग के द्वार खोलता है और उसे जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है। आज क्या करें? दान: आज के दिन तरबूज, ठंडा पानी या सत्तू का दान करना बहुत शुभ है क्योंकि यह गर्मी का महीना (वैशाख) होता है। तुलसी पूजन: शाम को तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जरूर जलाएं (लेकिन याद रखें, एकादशी पर तुलसी के पत्ते न तोड़ें और न ही उसमें जल दें)। मंत्र: आज पूरा दिन मन ही मन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करते रहें। मोहिनी एकादशी सिर्फ एक व्रत नहीं है, बल्कि यह धार्मिक, आध्यात्मिक और मानसिक उन्नति का अवसर है। इसे श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ALSO READ: Mohini Ekadashi: मोहिनी एकादशी 2026: व्रत नियम, पूजा मुहूर्त, विधि और खास बातें

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