उड़ने की आशा में 7 साल का महा-लीप: बिखर जाएगी सचिन और सायली की गृहस्थी?
स्टार प्लस का नंबर वन फैमिली ड्रामा सीरियल 'उड़ने की आशा' इन दिनों दर्शकों के दिलों पर राज कर रहा है। लेकिन अब शो के मेकर्स दर्शकों को एक बहुत बड़ा सरप्राइज देने जा रहे हैं। सीरियल में 7 साल का लंबा लीप आने वाला है, जो सचिन और सायली की हंसती-खेलती जिंदगी को पूरी तरह से पलट कर रख देगा। इस महा-लीप के साथ ही शो की कहानी एक बेहद भावुक और नए सफर की तरफ मुड़ जाएगी, जहां हर मोड़ पर दर्शकों के लिए सस्पेंस और इमोशनल ड्रामा देखने को मिलेगा। 'उड़ने की आशा' में 'सचिन' की भूमिका निभा रहे लोकप्रिय अभिनेता कंवर ढिल्लों इस लीप के बाद बिल्कुल नए अंदाज में नजर आने वाले हैं। लीप के बाद अपने किरदार को और भी परिपक्व और फ्रेश दिखाने के लिए कंवर ने अपने लुक के साथ एक बड़ा एक्सपेरिमेंट किया है। A post shared by StarPlus (@starplus) कंवर ढिल्लों ने अपने नए लुक के बारे में बात करते हुए बताया, पिछले ढाई सालों से दर्शकों ने सचिन और सायली के इस सफर को सिर्फ एक सीरियल की तरह नहीं देखा, बल्कि दिल से जिया है। फैंस इस ऑन-स्क्रीन जोड़ी से भावनात्मक रूप से जुड़ चुके हैं। इस नए फेज के लिए मैंने अपने लुक में एक बड़ा बदलाव किया है। मैंने आखिरकार ढाई साल बाद पहली बार इस शो के लिए अपने बाल कटवाए हैं। मैं उम्मीद करता हूँ कि दर्शकों को सचिन का यह बदला हुआ रूप पसंद आएगा। ALSO READ: रवि किशन को जान से मारना चाहते थे पिता, 17 साल की उम्र में छोड़ दिया था घर क्या है सचिन और सायली की नई कहानी? लीप के बाद सचिन और सायली की जिंदगी का कैनवास पूरी तरह बदल चुका है। दोनों अपनी बेटी 'पूर्णा' के साथ एक नए शहर में अपनी दुनिया बसाने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन इस हंसते हुए चेहरे के पीछे एक गहरा सन्नाटा और दर्द छुपा हुआ है। A post shared by StarPlus (@starplus) सचिन और सायली का बेटा उनसे दूर हो चुका है। दोनों को लगता है कि उनका बेटा अब इस दुनिया में नहीं रहा, लेकिन असलियत यह है कि उनका बेटा जीवित है और किसी और जगह पल-बढ़ रहा है। बेटे के खोने का गम और इस कड़वे सच से अनजान होकर जीना, सचिन और सायली के रिश्ते को किस मोड़ पर ले जाएगा, यही इस शो का सबसे बड़ा सस्पेंस होने वाला है। शो में सायली का मुख्य किरदार निभा रहीं एक्ट्रेस नेहा हरसोरा (Neha Harsora) भी इस नए ट्रैक को लेकर काफी इमोशनल हैं। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने पहली बार इस लीप की स्क्रिप्ट सुनी थी, तो उनकी आँखों में आंसू आ गए थे। सायली के जीवन का यह नया संघर्ष हर उस माँ को छू जाएगा जो अपने बच्चे से दूर रहने का दर्द सहती है।
मुर्शिदाबाद ट्रेन दुर्घटना में दो स्कूली बच्चों सहित 3 की मौत, कई घायल
मुर्शिदाबाद। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक रेल दुर्घटना में दो स्कूली बच्चों सहित तीन लोगों की मौत हो गई और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। प्राप्त जानकारी के अनुसार निमटीता-कटवा यात्री रेलगाड़ी (संख्या 53054) ने एक रेलवे क्रॉसिंग पर रॉयल अकादमी स्कूल के छात्रों को ले रहे […] The post मुर्शिदाबाद ट्रेन दुर्घटना में दो स्कूली बच्चों सहित 3 की मौत, कई घायल appeared first on Sabguru News .
महाराष्ट्र सरकार ने 25 लाख परिवारों के लिए मुफ्त साड़ी योजना बंद की
मुंबई। महाराष्ट्र सरकार ने बढ़ते आर्थिक बोझ के कारण अंत्योदय राशन कार्ड वाले लगभग 25 लाख परिवारों को मुफ्त साड़ी देने की योजना को बंद कर दी है। कपड़ा विभाग के गुरुवार रात जारी इस आदेश से पता चलता है कि सरकार बढ़ते वित्तीय दबाव के बीच राज्य-प्रायोजित कल्याणकारी योजनाओं में बड़ी कटौती कर रही […] The post महाराष्ट्र सरकार ने 25 लाख परिवारों के लिए मुफ्त साड़ी योजना बंद की appeared first on Sabguru News .
मासूम अनिका के इलाज में देरी पर हाई कोर्ट नाराज, 23 जुलाई तक मांगा जवाब, 27 जुलाई को अगली सुनवाई
इंदौर की बालिका के इलाज में हो रही देरी को लेकर हाईकोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है। दरअसल, अनिका स्पाइनल मस्क्युलर एट्रोफी (SMA) टाइप-2 जैसी दुर्लभ और गंभीर बीमारी से जूझ रही है। उसकी उम्र महज तीन साल है। बता दें कि अनिका शर्मा के इलाज के लिए क्राउड फंडिंग की गई थी। उसके इलाज को लेकर सुनवाई चल रही है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने गंभीर चिंता जताई है। गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान AIMS नई दिल्ली की ओर से एक बार फिर जवाब पेश नहीं किए जाने पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए 23 जुलाई तक हर हाल में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। बता दें कि अनिका के इलाज को लेकर लगातार देरी हो रही है। जस्टिस संदीप एन. भट्ट की एकल पीठ ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्पष्ट किया कि अब और विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 27 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है। क्राउड फंडिंग से 7.5 करोड़ रुपए जुटाए : अनिका की ओर से एडवोकेट चंचल गुप्ता और लखन शर्मा द्वारा दायर याचिका में बताया गया है कि बच्ची SMA टाइप-2 नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित है, जिसके इलाज के लिए लगभग 9.5 करोड़ रुपए की आवश्यकता है। परिजनों ने केंद्र सरकार से मंजूर 50 लाख रुपए की सहायता राशि के अलावा सामाजिक संगठनों और आम लोगों के सहयोग से क्राउडफंडिंग के माध्यम से करीब 7.5 करोड़ से ज्यादा रुपए जुटा लिए हैं। इसके बावजूद इलाज अब तक शुरू नहीं हो पाया है। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि इलाज के लिए अब करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपए की अतिरिक्त आवश्यकता है। इसके बावजूद इलाज शुरू नहीं होना चिंताजनक है, क्योंकि हर दिन की देरी बच्ची के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रही है। परिजनों के मुताबिक AIMS प्रशासन ने बताया है कि केंद्र सरकार से मंजूर 50 लाख रुपए की राशि की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही जीवनरक्षक इंजेक्शन उपलब्ध कराने वाली कंपनी से इनवॉइस मंगाया जाएगा। दूसरी ओर, सामाजिक संगठनों द्वारा जुटाई गई राशि भी इनवॉइस के अभाव में जारी नहीं हो पा रही है। नतीजतन, आर्थिक संसाधन उपलब्ध होने के बावजूद इलाज प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ रही। याचिकाकर्ता पक्ष ने कोर्ट को बताया कि पिछली सुनवाइयों में भी केंद्र सरकार, राज्य सरकार और एम्स की ओर से लगातार समय मांगा जाता रहा है। जबकि मामला एक गंभीर बीमारी से जूझ रही मासूम बच्ची के जीवन से जुड़ा हुआ है। कोर्ट ने इस स्थिति को गंभीर मानते हुए एम्स को निर्देश दिया कि वह 23 जुलाई तक अपना विस्तृत जवाब दाखिल करे, ताकि मामले में आगे की कार्रवाई की जा सके।
विश्वकप 2027 की योजना में नहीं रविंद्र जड़ेजा, जल्द ले सकते हैं संन्यास
रोहित शर्मा के बाद भारत के एक दिग्गज ऑलराउंडर की बल्ला टांगने की खबर आ रही है। यह नाम भी रोहित शर्मा के समकालीन ही रहा है। रविंद्र जड़ेजा जो महेंद्र सिंह धोनी और फिर रोहित शर्मा की कप्तानी में चैंपियन्स ट्रॉफी जीते वह अब भारतीय एकदिवसीय टीम में जगह नहीं बना पाएंगे क्योंकि वह टीम प्रबंधन की विश्वकप 2027 की योजनाओं में नहीं है। गौरतलब है कि ऑलराउंडर रविंद्र जड़ेजा न्यूजीलैंड के खिलाफ पहली एकदिवसीय सीरीज में बल्ले और गेंद दोनों से फ्लॉप रहे। 3 मैचों में उन्होंने 14 की औसत से 43 रन बनाए। पूरी सीरीज में वह सिर्फ एक बार ही गेंद को सीमा पार भेज पाए। वहीं गेंद से तो वह एक विकेट के लिए तरसते रह गए। पहले मैच में उन्होंने 9 ओवर में 56 रन दिए। दूसरे मैच में उन्होंने 8 ओवर में 44 रन दिए और अंतिम मैच में उन्होंने 6 ओवर में 41 रन दिए। कुल मिलाकर वह 21 ओवर में 141 रन देकर भी एक विकेट नहीं ले सके।रविंद्र जड़ेजा 37 साल के हो चुके हैं और अक्षर पटेल की जगह ले रहे हैं जो टीम को कई अहम मौकों पर गेंद और बल्ले से मैच जितवा चुके हैं। This picture says everything without saying a word. pic.twitter.com/9082Bx6lEo — Charvi Vyas (@4Vvyas) July 16, 2026 फरवरी में फैंस की इस मांग को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने गंभीरता से लिया और माना कि वह उनके ही कलेवर के बल्लेबाज और गेंदबाज अक्षर पटेल को दक्षिण अफ्रीका में खेले जाने वाले एकदिवसीय विश्वकप में ले जाना चाहते हैं।इंग्लैंड के खिलाफ एकदिवसीय सीरीज में उनका चयन नहीं हुआ था लेकिन अब यह खबर सामने आ रही है। रविंद्र जड़ेजा चाहे तो संन्यास ले सकते हैं या फिर अगली एकदिवसीय सीरीज से खुद को ड्रॉप होते हुए देख सकते हैं। ऐसा रहा है करियर रविंद्र जड़ेजा के सफेद गेंद के करियर पर नजर डालें तो वह 210 मैच खेल चुके हैं। 32 की औसत के साथ उन्होंने 2905 रन बनाए हैं। इसमें 12 अर्धशतक शामिल है। इस प्रारुप में गेंद से उन्होंने 232 विकेट निकाले हैं। इसमें 7 बार 4 विकेट और 2 बार 5 विकेट लेना शामिल है। वहीं टी-20 क्रिकेट में उन्होंने 74 मैच खेले और 21 की औसत से 515 रन बना पाए। इसमें एक भी अर्धशतक शामिल नहीं है। वहीं इस प्रारुप में वह सिर्फ 54 विकेट ही निकाल पाए। हालांकि टेस्ट क्रिकेट में उनकी उपयोगिता को नकारा नहीं जा सकता। साल 2012 से शुरु हुआ रविंद्र जड़ेजा का क्रिकेट करियर अब ढलान पर है। 89 मैचों में उन्होंने 38.3 की औसत से 4095 रन बनाए हैं। जिसमें 6 शतक और 28 अर्धशतक लगाए हैं। गेंदबाजी की बात करें तो उन्होंने 25 की औसत से 348 विकेट चटकाए हैं। इस दौरान उन्होंने 17 बार 4 विकेट और 15 बार 5 विकेट चटकाए हैं।टेस्ट क्रिकेट में उनको कितना मौका मिलता है यह देखने वाली बात होगी।
चैट जीपीटी के ज्यादा इस्तेमाल से दिमाग कमजोर होने का डर
ईमेल लिखने से लेकर, कंप्यूटर कोड, अनुवाद या फिर यात्रा की योजना बनाने में जेनरेटिव एआई चैटबॉट का जम कर इस्तेमाल होने लगा है। जितनी आसानी से वे हमारी मदद करते हैं उतनी ही आसानी से हमारे दिमाग को मंद कर सकते हैं।
बड़ौदामेव में मोबाइल शोरूम में भीषण आग से लाखों का सामान खाक
अलवर। राजस्थान में अलवर जिले के बड़ौदामेव थाना क्षेत्र में गुरुवार देर रात मुख्य बाजार में स्थित एक मोबाइल शोरूम में अचानक आग लगने से लाखों रुपये का नुकसान हो गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार देखते ही देखते आग ने पूरी दुकान को अपनी चपेट में ले लिया और दुकान के अंदर रखा लाखों रुपए […] The post बड़ौदामेव में मोबाइल शोरूम में भीषण आग से लाखों का सामान खाक appeared first on Sabguru News .
आम आदमी पार्टी और सपा के बाद कांग्रेस ने भी दिया वांगचुक को समर्थन
नई दिल्ली। लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आमरण अनशन को विपक्षी दलों के समर्थन के बीच शुक्रवार को कांग्रेस की तरफ से संचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा भी उनसे मिलने पहुंचे। खेड़ा ने आज सुबह धरना स्थल पर पहुंचकर वांगचुक के स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली और उनसे विचार विमर्श कर […] The post आम आदमी पार्टी और सपा के बाद कांग्रेस ने भी दिया वांगचुक को समर्थन appeared first on Sabguru News .
मोदी ने जींद से सोनीपत के लिए देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को दिखाई हरी झंडी
जींद। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को यहां जींद जंक्शन से सोनीपत के लिए देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। जींद और सोनीपत के बीच चलने वाली इस पैसेंजर ट्रेन में 2600 लोग सफ़र कर सकेंगे। रेल मंत्रालय के अनुसार 10 डिब्बों वाली यह ट्रेन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन की रासायनिक […] The post मोदी ने जींद से सोनीपत के लिए देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को दिखाई हरी झंडी appeared first on Sabguru News .
हाइड्रोजन ट्रेन कैसे चलती है? जानिए 1 किलो हाइड्रोजन में कितना आता है खर्च
Photo source: ministry of ralways X account 17 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरियाणा के जींद से भारत की पहली स्वदेशी हाइड्रोजन ट्रेन (NaMo Green Rail) को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया है। इसके साथ ही भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों (जैसे जर्मनी, चीन, जापान) में शामिल हो गया है जिनके पास अपनी हाइड्रोजन ट्रेन है। हाइड्रोजन ट्रेन का चलना और उसका खर्च, दोनों ही पारंपरिक डीजल या इलेक्ट्रिक ट्रेनों से काफी अलग हैं। इसका खर्च दोनों की अपेक्षा कम ही आता है इसलिए यह आइए इन दोनों बातों को आसान शब्दों में समझते हैं। ALSO READ: भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन आज से शुरू: PM मोदी ने दिखाई हरी झंडी, जानिए किराया, रूट, स्पीड और इसकी खासियत क्यों खास है भारत की यह ट्रेन? (विश्व रिकॉर्ड) आमतौर पर दुनिया में जो हाइड्रोजन ट्रेनें चल रही हैं, वे 2 से 3 कोच (डब्बों) की होती हैं और कम दूरी के लिए इस्तेमाल की जाती हैं। लेकिन भारतीय रेलवे ने जो ट्रेन तैयार की है, वह 10 कोच वाली ट्रेनसेट है, जिसमें एक बार में लगभग 2,600 यात्री सफर कर सकते हैं। ब्रॉड गेज (बड़ी लाइन) पर चलने वाली यह दुनिया की सबसे लंबी और सबसे शक्तिशाली हाइड्रोजन यात्री ट्रेन है। भारतीय रेलवे का लक्ष्य सिर्फ एक ट्रेन चलाना नहीं है। सरकार 'Hydrogen for Heritage' प्रोजेक्ट के तहत भारत के 35 ऐसे खूबसूरत और ऐतिहासिक रेल रूटों (जैसे कालका-शिमला, दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे, कांगड़ा घाटी) पर हाइड्रोजन ट्रेनें चलाने की योजना बना रही है, जहाँ अभी भी डीजल इंजन चलते हैं। इससे इन संवेदनशील पहाड़ी और प्राकृतिक इलाकों में प्रदूषण बिल्कुल शून्य हो जाएगा। 1. हाइड्रोजन ट्रेन कैसे चलती है? (Working Mechanism) हाइड्रोजन ट्रेन में कोई पारंपरिक इंजन (जैसे डीजल इंजन) नहीं होता जो ईंधन को जलाता हो। यह असल में एक इलेक्ट्रिक ट्रेन है, लेकिन इसे ऊपर लगे तारों (Overhead wires) से बिजली नहीं लेनी पड़ती। यह अपनी बिजली खुद बनाती है। फ्यूल सेल (Fuel Cell): ट्रेन की छत या पावर कार में 'प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन फ्यूल सेल' (PEMFC) लगे होते हैं। केमिकल रिएक्शन: ट्रेन में मौजूद सिलेंडरों से हाइड्रोजन गैस को इन फ्यूल सेल में भेजा जाता है, जहां हवा से ऑक्सीजन ली जाती है। बिजली और पानी: जब हाइड्रोजन और ऑक्सीजन आपस में मिलते हैं, तो एक रासायनिक प्रक्रिया (Chemical Reaction) होती है जिससे बिजली (Electricity) पैदा होती है। इस प्रक्रिया में कोई धुआं या प्रदूषण नहीं होता, सिर्फ पानी की भाप (Water Vapour) और गर्मी बाहर निकलती है। बैटरी और मोटर: फ्यूल सेल से बनी बिजली सीधे ट्रेन की मोटर्स (Traction Motors) को घुमाती है और बची हुई ऊर्जा को ट्रेन में लगी लिथियम-आयन बैटरियों में स्टोर कर लिया जाता है। 2. हाइड्रोजन का खर्च प्रति लीटर कितना होता है? किलोग्राम: आम तौर पर, हाइड्रोजन ईंधन का खर्च प्रति लीटर (लीटर आयतन में) के बजाय प्रति किलोग्राम में आंका जाता है। ग्रे हाइड्रोजन (Grey Hydrogen): यह नेचुरल गैस से बनती है (इसमें थोड़ा प्रदूषण होता है) और इसकी लागत करीब 150 से 200 प्रति kg आती है। ग्रीन हाइड्रोजन (Green Hydrogen): यह पानी और रिन्यूएबल एनर्जी (सौर/पवन) से बनती है (100% प्रदूषण मुक्त) और इसकी लागत करीब 380 से 560 रुपए प्रति kg आती है। माइलेज के हिसाब से खर्च: 1 किलोग्राम हाइड्रोजन में लगभग उतनी ही ऊर्जा होती है जितनी 3 लीटर डीजल में होती है। हालांकि ग्रीन हाइड्रोजन अभी पारंपरिक डीजल (जो लगभग 90-95 लीटर है) के मुकाबले काफी महंगी है, लेकिन सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले सालों में बड़े पैमाने पर उत्पादन करके ग्रीन हाइड्रोजन की कीमत को 170 प्रति किलोग्राम तक नीचे लाया जाए। विशेषज्ञों के अनुसार, यह ट्रेन लगभग 2 किलो हाइड्रोजन में 1 किलोमीटर की दूरी तय कर सकती है। इस हिसाब से 1 किमी का खर्च लगभग 700 रुपए तक हो सकता है।
बॉलीवुड के गलियारों से इस वक्त की सबसे सनसनीखेज और बड़ी खबर सामने आ रही है, जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। नेटफ्लिक्स पर अपनी पहली सीरीज 'द बास्टर्ड्स ऑफ बॉलीवुड' (The Ba***ds of Bollywood) की जबरदस्त सफलता के बाद, किंग खान के बड़े नवाब यानी आर्यन खान अब बड़े पर्दे पर अपनी किस्मत आजमाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। लेकिन गॉसिप के गलियारों में चर्चा इस बात की नहीं है कि वो फिल्म बना रहे हैं, बल्कि इस बात की है कि इस फिल्म का लीड हीरो कौन होने वाला है! ALSO READ: OTT Releases Today: आज 17 जुलाई को रिलीज हो रही हैं ये धांसू फिल्में और वेब सीरीज, नोट कर लें अपनी वीकेंड वॉचलिस्ट! आधी रात को 'मन्नत' में क्या पका? बॉलीवुड के एक बेहद करीबी इनसाइडर ने खुलासा किया है कि पिछले हफ्ते शाहरुख खान के बंगले 'मन्नत' में आधी रात को एक बेहद गुप्त मीटिंग हुई। इस मीटिंग में शाहरुख, गौरी खान और आर्यन के अलावा रेड चिलीज एंटरटेनमेंट की कोर टीम मौजूद थी। सूत्रों की मानें तो आर्यन खान ने अपने पिता शाहरुख खान को एक हाई-ऑक्टेन, डार्क-कॉमेडी थ्रिलर की स्क्रिप्ट सुनाई है। कहा जा रहा है कि स्क्रिप्ट सुनने के बाद शाहरुख इतने इम्प्रेस हुए कि उन्होंने तुरंत इस प्रोजेक्ट को हरी झंडी दे दी। इनसाइडर का दावा है कि 'आर्यन हमेशा से चाहते थे कि वो अपने पिता को तभी डायरेक्ट करें जब उनके पास एक बिल्कुल अलग और कल्ट स्क्रिप्ट हो। ओटीटी पर अपनी काबिलियत साबित करने के बाद, आर्यन अब अपने ड्रीम प्रोजेक्ट की ओर बढ़ रहे हैं।' 2027 का सबसे बड़ा धमाका? हालांकि, शाहरुख खान इस समय अपनी बेटी सुहाना खान के साथ आने वाली मेगा-एक्शन फिल्म 'किंग' की शूटिंग में व्यस्त हैं, जो दिसंबर 2026 में रिलीज होने वाली है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि आर्यन खान का यह बिग-स्क्रीन डायरेक्टोरियल डेब्यू, जिसमें वो खुद अपने पिता को डायरेक्ट करेंगे, 2027 की शुरुआत में फ्लोर पर आ सकता है। यह पहली बार होगा जब सिल्वर स्क्रीन पर बाप-बेटे की यह जोड़ी डायरेक्टर और एक्टर के रूप में एक साथ नजर आएगी। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें इंटरनेट पर क्यों मचा है बवाल? जैसे ही यह खबर सोशल मीडिया पर लीक हुई, फैंस के बीच उत्सुकता सातवें आसमान पर पहुंच गई है। ट्विटर (X) और इंस्टाग्राम पर फैंस लगातार रिएक्ट कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, SRK को आर्यन से बेहतर और कौन समझ सकता है? यह फिल्म बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड तोड़ देगी। हालांकि, अभी तक रेड चिलीज या शाहरुख खान की तरफ से इस प्रोजेक्ट को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन गॉसिप इंडस्ट्री में इसे साल की सबसे बड़ी डील माना जा रहा है।
यदि आप भी इस वीकेंड घर बैठे कुछ नया और मजेदार देखने का प्लान बना रहे हैं, तो आपके लिए अच्छी खबर है। आज, यानी 17 जुलाई 2026 को OTT प्लेटफॉर्म्स पर एंटरटेनमेंट का बड़ा धमाका होने जा रहा है। नेटफ्लिक्स (Netflix) से लेकर जियोहॉटस्टार (JioHotstar) तक, रोमांस, थ्रिलर और हॉरर-फैंटेसी से भरपूर कई बड़ी फिल्में और वेब सीरीज डिजिटल स्क्रीन पर दस्तक दे चुकी हैं। आइए जानते हैं कि आज आपको अपनी वॉचलिस्ट में किन-किन टाइटल्स को शामिल करना चाहिए। 1. Chand Mera Dil (चाँद मेरा दिल) — जियोहॉटस्टार थिएटर्स में धमाल मचाने के बाद अनन्या पांडे (Ananya Panday) और लक्ष्य (Lakshya) की रोमांटिक ड्रामा फिल्म 'चाँद मेरा दिल' आज से जियोहॉटस्टार पर स्ट्रीम होने के लिए तैयार है। करन जौहर के धर्मा प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी इस फिल्म का निर्देशन विवेक सोनी ने किया है। क्यों देखें: अगर आपको 'आरव और चांदनी' की दिल छू लेने वाली मॉडर्न लव स्टोरी, बेहतरीन म्यूजिक और इमोशनल ड्रामा पसंद है, तो यह फिल्म आपके परफेक्ट डेट नाइट या वीकेंड बिंज के लिए बेस्ट ऑप्शन है। ALSO READ: 'मिर्जापुर: द मूवी' को क्या मिलेगा 'A' सर्टिफिकेट? निर्देशक गुरमीत सिंह ने बताई पूरी वजह 2. Raktanchal Season 3 (रक्तांचल सीजन 3) — अमेज़न एमएक्स प्लेयर पूर्वांचल के खूंखार माफिया नेटवर्क और क्राइम सिंडिकेट पर आधारित लोकप्रिय सीरीज 'रक्तांचल सीजन 3' का इंतजार खत्म हो गया है। रितम श्रीवास्तव के निर्देशन में बनी यह सीरीज आज से पूरी तरह मुफ्त (Free) देखी जा सकती है। क्यों देखें: उत्तर प्रदेश की राजनीति और गैंगवार की पुरानी दुश्मनी इस सीजन में और भी खतरनाक मोड़ ले चुकी है। अगर आप पावर स्ट्रगल और हैवी एक्शन थ्रिलर के शौकीन हैं, तो इसे बिल्कुल मिस न करें। 3. The East Palace (द ईस्ट पैलेस) — नेटफ्लिक्स के-ड्रामा (Korean Drama) और हॉरर के शौकीनों के लिए नेटफ्लिक्स आज एक बड़ा इंटरनेशनल प्रोजेक्ट लेकर आया है। नाम जू-ह्युक और रोह यून-सियो स्टारर 'The East Palace' आज रिलीज हो गई है। क्यों देखें: यह एक शाही महल की कहानी है जो एक रहस्यमयी शाप की चपेट में है। फैंटेसी और सुपरनेचुरल ताकतों से लड़ते दो अजनबियों की यह कहानी आपको अंत तक बांधकर रखेगी। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें 4. Heartstopper Forever (हार्टस्टॉपर फॉरएवर) — नेटफ्लिक्स पॉपुलर कमिंग-ऑफ-एज रोमांस सीरीज का आखिरी और बेहद भावुक कर देने वाला चैप्टर 'हार्टस्टॉपर फॉरएवर' आज नेटफ्लिक्स पर लाइव हो चुका है। निक और चार्ली की यह आखिरी कहानी फैंस को अलविदा कहने के लिए तैयार है। अगर आप सिनेमाहॉल के बजाय घर पर ही थ्रिलर के दीवाने हैं, तो 'रक्तांचल 3' से शुरुआत करें और यदि पार्टनर के साथ लाइट-हार्टेड कंटेंट देखना चाहते हैं, तो 'चाँद मेरा दिल' बेस्ट पिक है।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की चतुर्थी की देवी मां भुवनेश्वरी, जानिए पूजा विधि
Ashadha Gupt Navratri 2026: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की साधना का विशेष महत्व बताया गया है। इस पावन पर्व के चौथे दिन मां भुवनेश्वरी की आराधना की जाती है। मां भुवनेश्वरी को दस महाविद्याओं में चतुर्थ स्थान प्राप्त है। वे संपूर्ण सृष्टि की अधिष्ठात्री, जगतजननी और ब्रह्मांड की स्वामिनी मानी जाती हैं। धार्मिक मान्यता है कि उनकी कृपा से साधक को सुख-समृद्धि, यश, ऐश्वर्य, मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। ALSO READ: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026: 9 दिनों में किस देवी की करें पूजा? जानें हर दिन का महत्व और लाभ धार्मिक शास्त्रों के अनुसार मां भुवनेश्वरी समस्त लोकों की रक्षा करने वाली शक्ति हैं। तंत्र साधना में भी मां भुवनेश्वरी की विशेष महिमा का वर्णन मिलता है। गुप्त नवरात्रि के दौरान उनकी उपासना करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, नकारात्मक शक्तियां दूर होती हैं तथा परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है। गुप्त नवरात्रि की प्रकृति के अनुसार, मां भुवनेश्वरी की पूजा अत्यंत शांत और सात्विक भाव से, लेकिन पूरी गोपनीयता के साथ की जाती है। ALSO READ: Gupt Navratri 2026: आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि कब से कब तक रहेगी? जानें मां भुवनेश्वरी की पूजा विधि गुप्त नवरात्रि में माता की साधना के लिए सुबह या मध्यरात्रि/ निशीथ काल का समय सबसे उत्तम माना जाता है। इस विधि से आप माता की पूजा कर सकते हैं: * प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ अथवा लाल या गुलाबी, पीले या हल्के लाल रंग के वस्त्र धारण करें। * पूजा स्थल की सफाई करें या पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध कर लें। * फिर हाथ में जल, अक्षत व पुष्प लेकर गुप्त नवरात्रि के चौथे दिन मां भुवनेश्वरी की पूजा का संकल्प लें। * एक लकड़ी की चौकी पर लाल कपड़ा बिछाएं। मां भुवनेश्वरी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। यदि तस्वीर न हो, तो मां दुर्गा की प्रतिमा के सामने ही उनका ध्यान करें। * फिर माता के सम्मुख घी का दीपक और धूप जलाकर, उनको कुमकुम, लाल चंदन, अक्षत, और लाल पुष्प, जैसे गुलाब या कमल अर्पित करें। * मां भुवनेश्वरी को नारियल, मौसमी फल, पेड़े, या किसी सफेद मिठाई अथवा खीर का भोग लगाएं। इसके बाद मां भुवनेश्वरी की आरती करें और पूजा में अनजाने में हुई भूलचूक के लिए क्षमा याचना करें। * मां भुवनेश्वरी के स्वरूप का ध्यान करते हुए श्रद्धापूर्वक उनके बीज मंत्र: 'ॐ ह्रीं भुवनेश्वर्यै नमः' या 'ह्रीं' का रुद्राक्ष या स्फटिक की माला से कम से कम 108 बार जप करें। * अंत में माता की आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य एवं आध्यात्मिक उन्नति की कामना करें। मां भुवनेश्वरी साधना का महत्व: मां भुवनेश्वरी को संतान सुख, कर्ज से मुक्ति और मान-सम्मान दिलाने वाली देवी माना जाता है। गुप्त नवरात्रि में इनकी पूजा करने से वाणी में मधुरता और व्यक्तित्व में एक विशेष आकर्षण आता है। अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ALSO READ: भड़ली नवमी क्यों मनाई जाती है? जानिए इसका धार्मिक महत्व, मान्यताएं और खास बातें
इंसान का खुशबू से रिश्ता सदियों पुराना है। आज भले ही परफ्यूम (Perfume) हमारी रोजमर्रा की लाइफस्टाइल और ग्रूमिंग का एक सामान्य हिस्सा बन चुका है, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब यह सिर्फ राजा-रानियों और शाही परिवारों की शान व रसूख का प्रतीक माना जाता था। प्राचीन सभ्यताओं से शुरू हुआ खुशबू का यह सफर आधुनिक लग्जरी ब्रांड्स तक कैसे पहुंचा, यह बेहद दिलचस्प है। आइए जानते हैं 4,000 साल पुराने परफ्यूम के इतिहास और इसके विकास की पूरी कहानी:1. 4,000 साल पुराना इतिहास: मेसोपोटामिया से सिंधु घाटी तकइतिहासकारों और पुरातत्वविदों के अनुसार, परफ्यूम बनाने और इस्तेमाल करने की कला की शुरुआत प्राचीन मेसोपोटामिया, मिस्र (Egypt) और सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilization) के दौर में हुई थी।प्राकृतिक अवयवों का उपयोग: उस समय आज की तरह केमिकल या अल्कोहल वाले परफ्यूम नहीं होते थे। लोग विभिन्न प्रकार के फूलों, सुगंधित तेलों, प्राकृतिक राल (Resin), चंदन व ऊद जैसी लकड़ियों और औषधीय जड़ी-बूटियों को मिलाकर खुशबू तैयार करते थे।कीमत और धार्मिक महत्व: ये सुगंधित पदार्थ अत्यधिक दुर्लभ और कीमती होते थे। इसलिए इनका उपयोग केवल देवताओं को प्रसन्न करने के लिए धार्मिक अनुष्ठानों, पूजा-पाठ और राजघरानों के विशेष समारोहों में ही किया जाता था।2. राजाओं और रानियों की शान: शरीर की गर्मी से पिघलता था वैक्सप्राचीन मिस्र के शाही परिवारों में खुशबू का एक अलग ही क्रेज था, जिसे ऐतिहासिक दस्तावेजों में भी दर्ज किया गया है:सुगंधित वैक्स का अनूठा प्रयोग: मिस्र के राजा और रानियां शाही दावतों या विशेष उत्सवों के दौरान अपने सिर पर एक खास प्रकार का सुगंधित मोम (Wax cone) रखते थे। जैसे-जैसे उत्सव आगे बढ़ता और शरीर की गर्मी बढ़ती, वह मोम धीरे-धीरे पिघलकर उनके बालों और शरीर पर गिरता था, जिससे चारों ओर भीनी-भीनी खुशबू फैल जाती थी।सोशल प्रेस्टीज का प्रतीक: प्राचीन रोम और यूनान (Greece) के शाही परिवारों में तो बाथ टब में सुगंधित तेल डालकर नहाना और उसके बाद दुर्लभ इत्र लगाना सामाजिक प्रतिष्ठा (Social Prestige) और कुलीनता की पहचान माना जाता था।3. अरब देशों ने दिया 'आसवन' (Distillation) का तोहफाजैसे-जैसे समय बदला, खुशबू बनाने की कला में भी बड़ा तकनीकी सुधार आया। इस बदलाव का सबसे बड़ा श्रेय अरब देशों के वैज्ञानिकों और विद्वानों को जाता है:आसवन तकनीक (Distillation Technique): अरब के रसायनशास्त्रियों ने फूलों और पौधों के अर्क से शुद्ध खुशबू निकालने के लिए लिक्विड डिस्टिलेशन तकनीक को विकसित और परिष्कृत किया।बढ़ा दायरा: इस नई वैज्ञानिक पद्धति की वजह से तेल के बिना भी लंबे समय तक टिकने वाली और बेहतर क्वालिटी वाली खुशबू बड़ी मात्रा में तैयार की जाने लगी। इसी तकनीक के कारण इत्र और परफ्यूम का व्यापार सिल्क रूट के जरिए दुनिया के अन्य कोनों में फैलना शुरू हुआ।4. फ्रांस कैसे बना दुनिया की 'परफ्यूम कैपिटल'?अरब जगत से होते हुए जब आसवन की यह कला यूरोप पहुंची, तो वहां एक औद्योगिक क्रांति की शुरुआत हुई, जिसमें फ्रांस सबसे आगे निकल गया:लग्जरी हब: फ्रांस के राजाओं और फ्रांसीसी कुलीनों के संरक्षण में परफ्यूम मेकिंग का काम एक बड़े उद्योग में बदल गया। फ्रांस के 'ग्रास' (Grasse) जैसे शहर अपने फूलों के बागानों और खुशबू बनाने के पारंपरिक हुनर के दम पर वैश्विक केंद्र बन गए।ग्लोबल लीडर: आज भी फ्रांस को दुनिया की 'परफ्यूम कैपिटल' (Perfume Capital of the World) कहा जाता है, जहां दुनिया के सबसे महंगे, लग्जरी और नामी फ्रेगरेंस ब्रांड्स मौजूद हैं।5. आधुनिक दौर: अब हर किसी के बजट और पहुंच मेंफ्रेगरेंस के प्रकार (Fragrance Notes)खासियत (Characteristics)किसके लिए उपयुक्त?फ्लोरल और साइट्रस (Floral & Citrus)गुलाब, चमेली जैसे फूलों और नींबू व संतरे जैसे खट्टे फलों की ताजगी से भरपूर नोट्स।डेली वियर और समर सीजन के लिए बेस्ट।वुडी और स्पाइसी (Woody & Spicy)चंदन, देवदार की लकड़ी और दालचीनी, लौंग जैसे मसालों की कड़क व गहरी खुशबू।शाम की पार्टियों, शादियों और विंटर सीजन के लिए।फ्रेश और एक्वाटिक (Fresh & Aquatic)समंदर की लहरों और ताजी हवा का अहसास कराने वाली हल्की खुशबू।युवाओं और जिम-स्पोर्ट्स एक्टिविटीज के लिए।पहले जहां एक आम इंसान परफ्यूम की शीशी खरीदने की कल्पना भी नहीं कर सकता था, वहीं आज साइंस और मॉडर्न मैन्युफैक्चरिंग की बदौलत यह हर वर्ग के बजट में फिट बैठता है। बाजार में पुरुषों, महिलाओं और यूनिसेक्स श्रेणियों में हजारों वैरायटी उपलब्ध हैं, जिसने इस शाही शौक को आज हर घर की लाइफस्टाइल का एक जरूरी हिस्सा बना दिया है।
आज भारत में एक्सप्रेस-वे और आधुनिक हाईवे का जाल बहुत तेजी से फैल रहा है, जिससे यात्रा बेहद सुगम और तेज हो गई है। मुंबई-पुणे एक्सप्रेस-वे से शुरू हुआ यह आधुनिक सिलसिला आज देश के कोने-कोने को जोड़ रहा है। लेकिन जब देश में चमचमाती कंक्रीट की सड़कें, नेशनल हाईवे या स्टेट हाईवे का वजूद नहीं था, तब भारत की सबसे बड़ी जीवन रेखा 'ग्रैंड ट्रंक रोड' (Grand Trunk Road - GT Road) हुआ करती थी।यह सड़क न केवल अंग्रेजों के जमाने से पुरानी है, बल्कि इसका इतिहास सदियों का सफर समेटे हुए है। जीटी रोड को लेकर अक्सर आम लोगों के बीच यह धारणा है कि इसे केवल शेरशाह सूरी ने बनवाया था। लेकिन ऐतिहासिक और वैज्ञानिक तथ्य कुछ और ही कहानी बयां करते हैं। आइए बेहद आसान शब्दों में समझते हैं एशिया के इस सबसे पुराने और ऐतिहासिक मार्ग की पूरी दास्तां, इसका रूट और वर्तमान स्थिति:ऐतिहासिक रूट: बांग्लादेश से काबुल तक का विशाल गलियाराऐतिहासिक रूप से ग्रैंड ट्रंक रोड का विस्तार बेहद विशाल था। यह दक्षिण एशिया को आपस में जोड़ने वाला सबसे बड़ा व्यापारिक और सामरिक मार्ग माना जाता था:ऐतिहासिक विस्तार: यह सड़क वर्तमान बांग्लादेश के चटगांव (Chittagong) क्षेत्र से शुरू होकर भारत और पाकिस्तान को पार करते हुए सीधे अफगानिस्तान की राजधानी काबुल तक जाती थी।भारत में पुराना मार्ग: भारत के भीतर यह मुख्य रूप से कोलकाता से शुरू होकर आधुनिक बिहार, उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से गुजरती हुई दिल्ली, हरियाणा और पंजाब के अमृतसर तक पहुंचती थी। इसके बाद यह लाहौर, पेशावर होते हुए काबुल से जुड़ती थी।ऐतिहासिक सीमा: भारत और पाकिस्तान के बीच स्थित प्रसिद्ध वाघा-अटारी बॉर्डर (Wagha-Attari Border) इसी ऐतिहासिक ग्रैंड ट्रंक रोड पर स्थित है।आधुनिक स्वरूप: आज के समय में भारत के भीतर जीटी रोड का मूल वजूद कई आधुनिक राष्ट्रीय राजमार्गों में विलीन हो चुका है। इसका एक बहुत बड़ा हिस्सा अब राष्ट्रीय राजमार्ग 19 (NH 19) और राष्ट्रीय राजमार्ग 44 (NH 44) जैसी प्रमुख सड़कों का हिस्सा बन चुका है।2300 साल पुराना इतिहास: चंद्रगुप्त मौर्य का 'उत्तरापथ'ग्रैंड ट्रंक रोड का इतिहास शेरशाह सूरी से भी हजारों साल पुराना है। वास्तव में इसका मूल संबंध प्राचीन भारत के 'उत्तरापथ' (Uttarapath) से है, जिसका शाब्दिक अर्थ है 'उत्तर दिशा का प्रमुख मार्ग'।मौर्य काल की रीढ़: मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चंद्रगुप्त मौर्य और उनके बाद सम्राट अशोक के शासनकाल में (लगभग 2300 वर्ष पूर्व) इस मार्ग का प्रशासनिक और सैन्य महत्व चरम पर था। इतने बड़े साम्राज्य को एक सूत्र में पिरोने, सेना की त्वरित आवाजाही, व्यापार और गुप्तचरों के जरिए संदेश भेजने के लिए इस कच्चे मार्ग को व्यवस्थित किया गया था।यात्रियों की जीवन रेखा: प्राचीन काल से ही इस मार्ग का उपयोग देश-विदेश के व्यापारी, सैनिक, बौद्ध भिक्षु, साधु-संत और तक्षशिला जैसी यूनिवर्सिटीज में पढ़ने वाले छात्र करते आ रहे थे। इसलिए यह कहना बिल्कुल उचित होगा कि जीटी रोड का मूल ढांचा प्राचीन काल से ही मौजूद था, जिसे समय-समय पर विभिन्न राजाओं ने अपनी जरूरत के अनुसार सुधारा।क्या वाकई शेरशाह सूरी ने बनाई यह सड़क? (दस्तावेजी सच)इतिहास की किताबों में जीटी रोड के निर्माता के रूप में शेरशाह सूरी का नाम सबसे ऊपर सुनहरे अक्षरों में दर्ज है। लेकिन यदि हम ऐतिहासिक समय-सीमा और वैज्ञानिक तथ्यों का विश्लेषण करें, तो एक बिल्कुल अलग पहलू सामने आता है:5 साल का संक्षिप्त कार्यकाल: शेरशाह सूरी ने कन्नौज के युद्ध में मुगल बादशाह हुमायूं को पराजित कर दिल्ली के सिंहासन पर अधिकार किया था। सूरी का कुल शासनकाल महज 5 वर्ष (1540 से 1545 ईस्वी) का रहा। महज़ पांच साल के इतने छोटे से कार्यकाल में बांग्लादेश से लेकर अफगानिस्तान तक, हजारों किलोमीटर लंबी पक्की सड़क का नए सिरे से निर्माण करना तकनीकी और व्यावहारिक रूप से पूरी तरह असंभव है।तो फिर सूरी का नाम क्यों लिया जाता है?शेरशाह सूरी ने सड़क का निर्माण नहीं कराया था, बल्कि उसने प्राचीन बिखरे हुए 'उत्तरापथ' मार्ग का कायाकल्प (Restructuring) किया था। सूरी का योगदान निम्नलिखित कारणों से अतुलनीय माना जाता है:उसने पुराने और जर्जर रास्तों को पूरी तरह से ठीक कराकर एक व्यवस्थित सड़क का रूप दिया और कई संकरे हिस्सों को चौड़ा कराया।सराय व्यवस्था: यात्रियों और व्यापारियों की सुरक्षा व आराम के लिए सड़क के किनारे हर कुछ दूरी पर 'सरायों' (Rest houses) का निर्माण कराया, जहाँ ठहरने और घोड़ों के लिए चारे की व्यवस्था थी।कोस मीनारें: दूरी को मापने के लिए सूरी ने सड़क के किनारे 'कोस मीनारें' बनवाईं। उस समय एक कोस लगभग 3 किलोमीटर के बराबर होता था, जिससे राहगीरों को यात्रा का सटीक अनुमान लगाने में मदद मिलती थी।सुरक्षा एवं डाक: उसने सड़कों पर डाकुओं और लुटेरों से सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए और पहली बार इस मार्ग पर एक कुशल 'डाक चौकी व्यवस्था' विकसित की।मुगलों से लेकर अंग्रेजों तक: कैसे आधुनिक हुई जीटी रोड?मुगल काल का वैभव: शेरशाह सूरी के बाद जब मुगलों ने दोबारा सत्ता संभाली, तो बादशाह अकबर और उनके उत्तराधिकारियों ने भी इस मार्ग का भरपूर उपयोग किया। दिल्ली, आगरा और लाहौर जैसे प्रमुख मुगल केंद्रों को जोड़ने में इसकी बड़ी भूमिका रही। इसी मार्ग के जरिए कपड़े, मसाले, अनाज और घोड़ों का बड़े पैमाने पर अंतरराष्ट्रीय व्यापार हुआ, जिससे इसके आसपास कई समृद्ध कस्बे और सांस्कृतिक केंद्र विकसित हुए।ब्रिटिश काल की आधुनिक इंजीनियरिंग: 19वीं शताब्दी के दौरान ब्रिटिश शासन ने भारत पर अपनी प्रशासनिक और सैन्य पकड़ मजबूत करने के लिए जीटी रोड का पूरी तरह से आधुनिकरण किया। अंग्रेजों ने सड़क के बड़े हिस्सों को पक्का (Metalled Road) करवाया, पुराने नालों पर आधुनिक इंजीनियरिंग के पुल बनवाए और यातायात को सुगम बनाया। हालांकि, बाद में रेलवे नेटवर्क के आने से लंबी दूरी के लिए इसका महत्व थोड़ा कम हुआ, पर क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए यह हमेशा रीढ़ बनी रही।आज 2026 में किस हाल में है यह ऐतिहासिक धरोहर?आज के दौर में ग्रैंड ट्रंक रोड अपने पुराने पारंपरिक रूप में दिखाई नहीं देती। बदलते वक्त के साथ यह पूरी तरह से आधुनिक भारत की विकास गाथा का हिस्सा बन चुकी है:आधुनिक हाईवे में तब्दील: दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से गुजरने वाले इसके हिस्सों को चौड़ा करके 4-लेन और 6-लेन के चमचमाते नेशनल हाईवे, नए बाईपास और फ्लाईओवर में बदल दिया गया है, जिससे लंबी दूरी का सफर बेहद तेज हो चुका है।शहरी चुनौतियां: बड़े शहरों (जैसे दिल्ली के शाहदरा, कानपुर, या वाराणसी के शहरी इलाकों) से गुजरते वक्त जीटी रोड को आज अत्यधिक ट्रैफिक जाम, अवैध अतिक्रमण (Encroachment) और बढ़ते प्रदूषण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। मानसून के दिनों में इसके कुछ पुराने और उपेक्षित हिस्सों में गड्ढों और जलभराव की समस्या भी आम है।ग्रैंड ट्रंक रोड केवल एक भौगोलिक रास्ता या मिट्टी-पत्थरों से बनी सड़क नहीं है; यह भारत के 2300 साल से अधिक के उतार-चढ़ाव भरे इतिहास, संस्कृतियों के मिलन, व्यापारिक क्रांतियों और साम्राज्यों के उदय-अस्त की एक जीवित निशानी है।
टैक्स चोरी रोक कर अरबों यूरो कमाना चाहती है जर्मन सरकार
टैक्स चोरी और वित्तीय गड़बड़ी करने वालों पर नकेल कस कर जर्मन सरकार अरबों यूरो का राजस्व हासिल करना चाहती है। इसे रोकने के लिए नए नियम बनाए गए हैं।
Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (17 जुलाई, 2026)
1. मेष राशि (Aries) Today 17 July horoscope in Hindi 2026 : करियर: कार्यस्थल पर आपकी मेहनत का फल मिलने का समय आ गया है। लव: सिंगल लोगों को आज कोई ऐसा मिल सकता है जो उनके दिल के करीब हो। धन: सुख-सुविधाओं की चीजों पर खर्च हो सकता है, लेकिन बजट नियंत्रण में रहेगा। स्वास्थ्य: खुद को एक्टिव रखने के लिए एक्सरसाइज या योग का सहारा लें। उपाय: लक्ष्मी चालीसा का पाठ करें और मां लक्ष्मी को लाल फूल अर्पित करें। ALSO READ: Kark Sankranti: सूर्य कर्क संक्रांति 2026: स्नान, दान और पूजा का क्या है महत्व? 2. वृषभ राशि (Taurus) करियर: अपनी योजनाओं को सहकर्मियों से साझा करने में जल्दबाजी न करें। लव: लव लाइफ में किसी पुरानी बात को लेकर अनबन हो सकती है। धन: किसी भी तरह के सट्टे या लॉटरी से दूर रहें, नुकसान हो सकता है। स्वास्थ्य: मानसिक तनाव की समस्या हो सकती है। उपाय: शुक्रवार के दिन किसी जरूरतमंद को सफेद रंग की मिठाई या चावल का दान करें। 3. मिथुन राशि (Gemini) करियर: आज का दिन कोई बड़ा मुनाफा लेकर आ सकता है। लव: पार्टनर के साथ घूमने-फिरने या डिनर का प्लान बन सकता है। धन: पुराना अटका हुआ पैसा या लोन का धन वापस मिल सकता है। स्वास्थ्य: आप खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से फिट पाएंगे। उपाय: गणेश जी को दूर्वा चढ़ाएं और छोटी कन्याओं का आशीर्वाद लें। 4. कर्क राशि (Cancer) करियर: अपने काम पर ध्यान केंद्रित करें, आपके काम की समीक्षा की जा सकती है। लव: जीवनसाथी का हर मोड़ पर सहयोग मिलेगा। धन: ऑनलाइन शॉपिंग या फिजूलखर्ची जेब पर भारी पड़ सकती है। स्वास्थ्य: पेट से जुड़ी समस्याएं या अपच परेशान कर सकती है। उपाय: शिवलिंग पर चंदन का तिलक लगाएं और अक्षत अर्पित करें। 5. सिंह राशि (Leo) करियर: नौकरी में बदलाव की सोच रहे हैं तो अच्छे अवसर मिल सकते हैं। लव: अपने पार्टनर को कोई छोटा सा तोहफा देकर उनके चेहरे पर मुस्कान ला सकते हैं। धन: पुराने किए गए किसी निवेश से आज आपको बड़ा वित्तीय लाभ हो सकता है। स्वास्थ्य: सेहत अच्छी रहेगी, आप ऊर्जा से सराबोर रहेंगे। उपाय: उगते सूर्य को तांबे के लोटे से जल दें और कनकधारा स्तोत्र का पाठ करें। 6. कन्या राशि (Virgo) करियर: सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे जातकों को कोई शुभ समाचार मिल सकता है। लव: अविवाहित लोगों के लिए घर में विवाह की चर्चा शुरू हो सकती है। धन: धन संचय/ बचत करने में आज आप कामयाब रहेंगे। स्वास्थ्य: आंखों में थकान महसूस हो सकती है, इसलिए स्क्रीन टाइम कम रखें। उपाय: मां दुर्गा के मंदिर में घी का दीपक जलाएं। 7. तुला राशि (Libra) करियर: कारोबार में कोई नया और बड़ा कॉन्ट्रैक्ट मिल सकता है। लव: एक-दूसरे के प्रति सम्मान और प्यार की भावना बढ़ेगी। धन: आज विलासिता की चीजों पर खर्च बढ़ सकता है। स्वास्थ्य: मौसम के बदलाव के कारण हल्की सर्दी या खांसी हो सकती है। उपाय: किसी मंदिर में जाकर इत्र या सफेद फूल अर्पित करें। 8. वृश्चिक राशि (Scorpio) करियर: कारोबार में चुनौतियां आ सकती हैं, लेकिन आपकी निर्णय लेने की क्षमता से आप सब संभाल लेंगे। लव: लव लाइफ में किसी तीसरे व्यक्ति के हस्तक्षेप के कारण तनाव हो सकता है। धन: आज किसी को बड़ा कर्ज देने से बचना ही आपके लिए समझदारी होगी। स्वास्थ्य: बदन दर्द की शिकायत हो सकती है। उपाय: हनुमान जी के सामने चमेली के तेल का दीपक जलाएं। ALSO READ: नवरात्रि और अंक ज्योतिष : क्या संख्या ‘9’ केवल एक अंक है या आत्मपरिवर्तन का सांस्कृतिक सूत्र? (भाग–2) 9. धनु राशि (Sagittarius) करियर: नई नौकरी या प्रोजेक्ट्स के सिलसिले में की गई यात्राएं सफल होंगी। लव: जीवनसाथी के साथ संबंधों में प्रगाढ़ता आएगी। धन: पैतृक संपत्ति से जुड़े विवाद हल हो सकते हैं। स्वास्थ्य: आप मानसिक रूप से काफी शांत और प्रसन्न महसूस करेंगे। उपाय: विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। 10. मकर राशि (Capricorn) करियर: काम पेंडिंग छोड़ने से सीनियर्स की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है। लव: पार्टनर की व्यस्तता के कारण आज आपको थोड़ा कम समय मिल पाएगा। धन: आर्थिक मामले आज थोड़े धीमे रह सकते हैं। स्वास्थ्य: मानसिक थकान और अनिद्रा की समस्या हो सकती है। उपाय: पक्षियों को दाना डालें और चींटियों को आटा खिलाएं। 11. कुंभ राशि (Aquarius) करियर: टीम वर्क से काम करने पर आज आपको बड़ी सफलता मिलेगी। लव: एक-दूसरे पर भरोसा बढ़ेगा और भविष्य को लेकर प्लानिंग कर सकते हैं। धन: अटका हुआ धन मिलने से आपके रुके हुए काम फिर से गति पकड़ेंगे। स्वास्थ्य: खेलकूद या अन्य शारीरिक गतिविधियों में मन लगेगा। उपाय: शुक्रवार की शाम को घर के मुख्य द्वार पर घी का दीपक जलाएं। 12. मीन राशि (Pisces) करियर: आय के नए स्रोत सामने आ सकते हैं। कार्यक्षेत्र में विरोधी शांत रहेंगे। लव: लव लाइफ में आपस में बैठकर बात सुलझाएं। धन: आज बाहरी पैसों के लेन-देन में सावधानी बरतें। स्वास्थ्य: गले में खराश हो तो घरेलू नुस्खों से आराम मिलेगा। उपाय: विष्णु मंदिर में बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। ALSO READ: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की तृतीय देवी माता त्रिपुर सुंदरी, जानिए पूजा विधि
'टीचर्स कहते थे IAS या IFS बनो', एक्टिंग चुनने के अपने फैसले पर जानें क्या बोलीं अर्चना पूरन सिंह
अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग से कई पीढ़ियों को हंसाने वाली और भारतीय एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की सबसे पसंदीदा अभिनेत्रियों में से एक बनीं अर्चना पूरन सिंह ने ऐसा करियर बनाया है, जो समय की हर कसौटी पर खरा उतरा है। बड़े पर्दे, टेलीविजन या फिर कॉमेडी शोज़, हर जगह उनकी जबरदस्त एनर्जी और उनकी पहचान बन चुकी हंसी ने उन्हें हर घर का जाना-पहचाना चेहरा बना दिया। लेकिन लाइमलाइट में आने से पहले अर्चना की पहचान कुछ और ही थी। वह पढ़ाई में बेहद होशियार थीं और अपने हर टीचर की फेवरेट स्टूडेंट थीं। प्राइम वीडियो के 'आदर्श बाल विद्यालय' के प्रीमियर से पहले अर्चना ने अपने स्कूल के दिनों को याद किया और बताया कि उनके टीचर्स को पूरा यकीन था कि वह आगे चलकर सिविल सर्विसेज में जाएंगी। ऐसे में उनका एक्टिंग को करियर बनाना सभी के लिए एक बड़ा सरप्राइज था। एक्टिंग को अपना करियर चुनने के फैसले को याद करते हुए अर्चना पूरन सिंह ने कहा, मैं हमेशा क्लास में फर्स्ट आती थी और अपने टीचर्स की फेवरेट स्टूडेंट थी। मेरे टीचर्स हमेशा कहते थे, 'तुम्हें IAS या IFS जॉइन करना चाहिए।' उस समय अगर कोई पढ़ाई में अच्छा होता था, तो लोग मान लेते थे कि वह इन्हीं करियर में जाएगा। मेरे टीचर्स को भी मुझसे यही उम्मीद थी। ALSO READ: 'मिर्जापुर: द मूवी' को क्या मिलेगा 'A' सर्टिफिकेट? निर्देशक गुरमीत सिंह ने बताई पूरी वजह उन्होंने आगे कहा, जब मैंने उन्हें बताया कि मैं एक्टर बनना चाहती हूं और फिल्म इंडस्ट्री में जा रही हूं, तो वे सच में निराश हो गए थे। उन्हें समझ ही नहीं आया कि मैं इतना अच्छा भविष्य छोड़कर एक्टिंग क्यों चुन रही हूं। मजेदार बात यह है कि मैं उनकी फेवरेट स्टूडेंट भी थी और उन्हें निराश करने वाली भी। अर्चना ने कहा, आज पीछे मुड़कर देखती हूं, तो यह बात मुझे काफी मजेदार लगती है। लेकिन जिंदगी अपने तरीके से चलती है। एक्टिंग ने मुझे ऐसा करियर दिया, जिसमें मुझे प्यार मिला, लोगों को हंसाने का मौका मिला और ऐसे अनुभव मिले, जिनकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। अगर आज मेरे कोई टीचर मुझे देख रहे हों, तो मैं उम्मीद करती हूं कि उन्हें इस बात पर गर्व होगा कि उनकी फेवरेट स्टूडेंट ने अपना रास्ता खुद चुना और वही उसके लिए सही साबित हुआ। 'आदर्श बाल विद्यालय' एक हल्की-फुल्की प्राइम ओरिजिनल सीरीज़ है, जो उम्मीद, हौसले और एकजुटता जैसे विषयों को दिखाती है। कहानी एक ऐसे हेडमास्टर की है, जो हर दिन आने वाली चुनौतियों, सीमित संसाधनों और मुश्किल हालात के बावजूद अपने स्टाफ के साथ मिलकर स्कूल की तस्वीर बदलने की कोशिश करता है। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें इस सीरीज़ का निर्देशन हिमांक गौर ने किया है, जबकि इसे बिस्वपति सरकार और समीर सक्सेना ने पोशम पा पिक्चर्स के बैनर तले बनाया और एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूस किया है। सात एपिसोड वाली इस कॉमेडी-ड्रामा सीरीज़ को बिस्वपति सरकार, अक्षय अस्थाना, नूपुर पाई, तत्सत पांडे और मेघना श्रीवास्तव ने लिखा है। सीरीज़ में के के मेनन मुख्य भूमिका में नजर आएंगे। उनके साथ अर्चना पूरन सिंह, अभिमन्यु सिंह, नवीन कस्तूरिया, प्रसन्न बिष्ट, देवेन भोजानी, अजितेश गुप्ता, अन्नपूर्णा सोनी और प्राची शाह भी अहम किरदार निभाते दिखाई देंगे। 'आदर्श बाल विद्यालय' 24 जुलाई को भारत समेत दुनिया के 240 से ज्यादा देशों और क्षेत्रों में प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम होगी।
17 जुलाई को हरियाणा के जींद स्टेशन से एक अनोखी ट्रेन चलेगी। इसे चलाने के लिए न डीजल चाहिए, न बिजली। चलने पर न धुआं होगा, न राख; निकलेगा सिर्फ पानी। ये भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन है। जींद से सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर के सफर में यह ट्रेन 682 यात्रियों को लेकर दौड़ेगी और दुनिया की सबसे ताकतवर हाइड्रोजन ट्रेन में गिनी जाएगी। भारत का यह प्रयोग खास क्यों है? हाइड्रोजन गैस की कहानी क्या है और कभी एयरशिप को आग का गोला बना चुकी हाइड्रोजन क्या भविष्य का ईंधन बनेगी? सिलसिलेवार तरीके से जानेंगे… इस कहानी की शुरुआत होती है आज से करीब ढाई सौ साल पहले, लंदन की एक लैब से… साल 1776, हेनरी कैवेंडिश नाम के वैज्ञानिक जिंक धातु को तेजाब में डालते हैं। अचानक बर्तन से बुलबुले उठने लगते हैं। ये एक ऐसी गैस के बुलबुले थे, जिसे पहले कभी किसी ने पहचाना नहीं था। जब कैवेंडिश ने इस रंगहीन गैस में चिंगारी लगाई, तो हल्की ‘भम्म’ जैसी आवाज के साथ पानी की बूंदें बन गईं। यहीं से यह राज खुला कि पानी कोई एक चीज नहीं, बल्कि दो अलग-अलग गैसों- हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से मिलकर बना है। सोचिए, जिस पानी को हम रोज पीते हैं, उसमें वही गैस है, जिससे ट्रेन चल रही है। गैस तो मिल गई थी, पर उसका नाम क्या रखा जाए? यह काम किया फ्रांस के एक केमिस्ट ने। उन्होंने ग्रीक भाषा के दो शब्द जोड़े- ‘हाइड्रो’ यानी पानी, और ‘जेनस’ यानी जन्मा। हाइड्रोजन का मतलब ‘पानी से जन्मा’। 1800 ईस्वी में दो अंग्रेज वैज्ञानिकों ने उल्टा कमाल कर दिखाया। उन्होंने पानी में बिजली का करेंट दौड़ाकर उसे हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैस में तोड़ दिया। इस तरीके को नाम मिला ‘इलेक्ट्रोलिसिस’। आज इसी तरीके से दुनियाभर में ‘हाइड्रोजन’ बनाई जा रही है। अब बारी थी एक और बड़े सवाल की- क्या हाइड्रोजन गैस ईंधन के तौर पर इस्तेमाल हो सकती है? 1838 में एक केमिस्ट ने पाया कि हाइड्रोजन और ऑक्सीजन को साथ मिलाने पर सिर्फ पानी ही नहीं, एनर्जी भी पैदा होती है। इंग्लैंड के वैज्ञानिक और जज विलियम ग्रोव ने इसी सिद्धांत पर एक असली मशीन बना डाली, जिसे उन्होंने ‘गैस बैटरी’ कहा। इसमें हाइड्रोजन की एनर्जी को बैटरी में स्टोर किया जा सकता था। यही दुनिया का पहला फ्यूल सेल था। इसी वजह से ग्रोव को ‘फादर ऑफ द फ्यूल सेल’ कहा जाता है। हाइड्रोजन की कहानी में एक बड़ा हादसा भी दर्ज है। 1937 में हाइड्रोजन गैस से भरा हिंडनबर्ग नाम का एक विशालकाय एयरशिप लैंड करते वक्त अचानक आग का गोला बन गया। दरअसल, हाइड्रोजन बेहद हल्की गैस है। हिंडनबर्ग एयरशिप में हाइड्रोजन का इस्तेमाल हवा के गुब्बारे की तरह एयरशिप को ऊपर उठाने के लिए किया जाता था। किसी वजह से एयरशिप की पूंछ में आग सुलगने लगी। चूंकि हाइड्रोजन बेहद ज्वलनशील होती है, इसलिए सेकेंडों में पूरी एयरशिप जल गई। हादसे के बाद पूरा प्रोजेक्ट बंद कर दिया गया और हाइड्रोजन को ‘खतरनाक’ कहा जाने लगा। असली मोड़ आया 1973 में, जब मिडिल ईस्ट के देशों ने अचानक तेल की सप्लाई रोक दी। दुनिया को एहसास हुआ कि हमेशा तेल पर निर्भर रहना रिस्की है। यहीं से हाइड्रोजन को गंभीरता से एक विकल्प के तौर पर देखा जाने लगा। 1998 में आइसलैंड नाम के छोटे से देश ने ऐलान कर दिया कि वो 2030 तक दुनिया की पहली पूरी तरह हाइड्रोजन-आधारित इकोनॉमी बनेगा। जर्मनी ने 2018 में दुनिया की पहली कॉमर्शियल हाइड्रोजन पैसेंजर ट्रेन उतार दी थी। जापान, चीन और अमेरिका ने भी हाइड्रोजन ट्रेनें लॉन्च की हैं। 17 जुलाई 2026 को लॉन्च होने वाली भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन, जर्मनी की मूल हाइड्रोजन ट्रेन से करीब पांच गुना लंबी है। जो सफर ढाई सौ साल पहले लंदन की एक लैब में एक बुलबुले से शुरू हुआ था, वह आज हरियाणा के जींद स्टेशन पर एक नई मंजिल की तरफ बढ़ चला है। 10वीं क्लास में पढ़ी पीरियोडिक टेबल याद है? वही, जिसमें दुनिया के सारे तत्व करीने से सजे हैं। उस टेबल में हाइड्रोजन का नंबर पहला है। इसके न्यूक्लियस में सिर्फ एक प्रोटॉन पाया जाता है, इसलिए यह सबसे हल्का तत्व है। यह पूरे ब्रह्मांड में सबसे ज्यादा पाया जाने वाला तत्व भी है- सूरज और तारों में भी मौजूद। लेकिन हाइड्रोजन के साथ एक पेच है। यह अपने आप में इतना अस्थिर है कि अकेला कभी टिक ही नहीं पाता। हमेशा किसी साथी की जरूरत पड़ती है। यह साथी या तो कोई और हाइड्रोजन परमाणु होता है, या फिर कोई दूसरा तत्व। इसलिए जब भी हाइड्रोजन गैस का नाम सुनेंगे, असल में उसका मतलब H2 अणु होता है, अकेला हाइड्रोजन परमाणु कभी नहीं। ज्यादातर यह पानी में ऑक्सीजन के साथ जुड़ा मिलता है, यानी H2O। अगर हमें शुद्ध हाइड्रोजन चाहिए, तो पहले ऑक्सीजन के साथ जोड़ी को तोड़ना पड़ता है। जोड़ी तोड़ने का तरीका ही इलेक्ट्रोलिसिस कहलाता है। ये प्रोसेस आप खुद भी लैब में कर सकते हैं… लेकिन इस हाइड्रोजन गैस से एनर्जी कैसे बनाई जाए और ट्रेन-कार कैसे चलाई जाएं? इसका सबसे स्मार्ट तरीका है- फ्यूल सेल का इस्तेमाल। फ्यूल सेल असल में एक तरह की बैटरी है। यह हाइड्रोजन और हवा में मौजूद ऑक्सीजन को आपस में मिलाकर बिजली पैदा करती है। इस पूरी प्रक्रिया के बाइप्रोडक्ट हैं- एनर्जी और पानी की भाप। न धुआं, न कार्बन, न कोई प्रदूषण। यही वजह है कि हाइड्रोजन ट्रेन को ‘जीरो एमिशन’ यानी शून्य प्रदूषण वाली ट्रेन कहा जाता है। लेकिन यहां एक ट्विस्ट है। हाइड्रोजन खुद भले प्रदूषण न फैलाए, लेकिन इसे बनाने के तरीके में प्रदूषण होता है। सबसे साफ-सुथरा तरीका तीसरा है, जहां सूरज या हवा से मिली बिजली का इस्तेमाल करके इलेक्ट्रोलिसिस किया जाए और हाइड्रोजन तैयार हो। भारत की हाइड्रोजन ट्रेन का लक्ष्य भी यही ग्रीन हाइड्रोजन है। साधारण इलेक्ट्रिक ट्रेन को चलने के लिए ऊपर लगे तारों (ओवरहेड वायर) से बिजली खींचनी पड़ती है। हाइड्रोजन ट्रेन को इसकी जरूरत ही नहीं। यह अपनी बिजली खुद बनाती है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, यह ट्रेन जींद-सोनीपत के 89 किलोमीटर के रूट पर रोज दो राउंड ट्रिप करेगी। कुल मिलाकर 356 किलोमीटर। इसमें करीब 300 किलोग्राम हाइड्रोजन खर्च होगी। ट्रेन अपने साथ कुल 440 किलोग्राम हाइड्रोजन लेकर चलती है। अब बात उन बड़ी चुनौतियों की, जो हाइड्रोजन को एक आम फ्यूल की तरह इस्तेमाल करने से रोकती है… हाइड्रोजन ट्रेन की टेक्नोलॉजी दुनिया में बहुत नई है। फ्रांस की कंपनी अल्स्टॉम ने सबसे पहले 2016 में बर्लिन की एक प्रदर्शनी में इसे दिखाया था। 2018 में जर्मनी में दुनिया की पहली हाइड्रोजन पैसेंजर ट्रेन चली। 2024 के आखिर तक आते-आते जर्मनी ने अपनी कई हाइड्रोजन ट्रेनें सर्विस से हटा दीं। इनकी जगह बैटरी ट्रेनों को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया, क्योंकि ये ज्यादा सस्ती और सहूलियत भरी होती हैं। जापान ने 2022 में हाइड्रोजन ट्रेन की टेस्टिंग शुरू की थी, लेकिन उसे अभी भी बड़े पैमाने पर नहीं उतार सका है। चीन और अमेरिका में भी अब तक यह टेक्नोलॉजी सिर्फ छोटी दूरी तक सीमित है। हाइड्रोजन को बनाना और चलाना अब भी बैटरी के मुकाबले महंगा साबित हो रहा है। कुल मिलाकर हाइड्रोजन कोई जादू की छड़ी नहीं, बल्कि एक ऐसा फ्यूल है जिसकी अपनी खूबियां और चुनौतियां भी। खूबी यह कि यह जलने पर सिर्फ पानी छोड़ता है, कोई प्रदूषण नहीं। चुनौती यह कि इसे बनाना, स्टोर करना और ढोना आसान नहीं और अभी ज्यादातर हाइड्रोजन साफ भी नहीं होती। तो क्या भारत बड़े पैमाने पर हाइड्रोजन ट्रेनें शुरू करेगा? अगर जींद-सोनीपत रूट पर यह प्रयोग कामयाब रहा, तो आने वाले सालों में देश के कई हेरिटेज और पहाड़ी रूट (जैसे कालका-शिमला) भी हाइड्रोजन की तरफ बढ़ सकते हैं, जहां बिजली की लाइन खींचना मुश्किल है और डीजल इंजन का धुआं आज भी एक बड़ी चिंता का सबब है। अगर सफल नहीं रहा या बहुत महंगा पड़ा, तो जर्मनी की तरह भारत भी इससे दूरी बना सकता है। ------------------- ये स्टोरी भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर: भारत को तेल बेचने वाला रूस, अब तेल खरीदने पर क्यों मजबूर; क्या यूक्रेन ने सभी रिफाइनरी तबाह कीं दुनिया भर के देशों को कच्चा तेल बेचने वाला रूस अब दूसरे देशों से पेट्रोल मंगवाने को मजबूर है। भारत से भी पेट्रोल के कई टैंकर भेजे जाने की खबरें हैं। पढ़िए पूरी कहानी…
ये हैं सबा और फरहा। उम्र 24 साल। दोनों का जन्म एक दिन, एक समय और एक ही मां की कोख से हुआ, सो ये जुड़वां कहलाती हैं। लेकिन… इनके जिस्म अलग-अलग नहीं, सिर से आपस में जुड़े हैं। वो भी इस तरह कि दोनों एक दूसरे को देख नहीं सकतीं। आईने में भी नहीं, अगर एक का रुख आईने की तरफ होता है तो दूसरी का उसके उलट। सबा और फरहा की कहानी लिखने में ‘लेकिन’ शब्द जल्द खत्म नहीं होते… इनके सिर जुड़े हुए हैं, लेकिन ये दोनों अलग-अलग शख्सियतें हैं।इनके दिमाग अलग-अलग हैं, लेकिन उन तक खून पहुंचाने वाली नस एक ही है।इनके सिर को छोड़कर बाकी जिस्म अलग-अलग हैं, लेकिन दोनों के पास किडनी सिर्फ एक जोड़ी हैं।दोनों सोचती अलग-अलग हैं, लेकिन ज्यादातर काम एक साथ करने होते हैं। फिर चाहे चलना-फिरना हो या सोना-जागना। दोनों के नर्वस सिस्टम अलग-अलग हैं, लेकिन कभी सबा के शरीर को फरहा कंट्रोल करती है तो कभी फरहा के शरीर को सबा। ये दो जिस्म एक जान हैं या दो जान एक जिस्म या फिर दो जिस्म दो जान, कहना मुश्किल है। खैर… मैं नीरज झा दुर्लभ बीमारियों की सीरीज ‘ऐ जिंदगी’ में इस बार इन्हीं दो बहनों की कहानी लाया हूं… दोपहर के करीब 1 बज रहे हैं। पटना के समनपुरा इलाके की मदरसा रोड। यहां एक चार मंजिला मकान है। दस्तक देने पर एक बुजुर्ग महिला ने दरवाजा खोला। बिना कुछ कहे वो मुझे पहली मंजिल पर बने एक कमरे की ओर ले गईं। पूछने पर उन्होंने अपना नाम- रबिया खातून बताया। मुझे सोफे पर बैठने का इशारा करते हुए बोली- यहीं बैठिए, मैं बेटियों को बुलाती हूं। उन्होंने सीढ़ियों पर खड़े होकर आवाज लगाई- ‘सबा... फरहा…’ करीब 5 मिनट के बाद, दो लड़कियां सीढ़ियों की रैलिंग के सहारे लड़खड़ाते, डगमगाते कदमों से आईं। छोटे-छोटे बाल। आंखों के नीचे काले घेरे। पैर की उंगलियां भी तिरछी। कदम बढ़ाते या उठते-बैठते, हर वक्त दोनों इस बात का ध्यान रख रही हैं कि एक-दूसरे का सिर न खिंचे। एक का सिर जरा सा ज्यादा हिलने पर दूसरी कराह उठती है। जैसे-तैसे दोनों सामने वाले सोफे पर आकर बैठीं। थोड़ी देर बाद, एक ने ऊपर की तरफ देखकर कहा- मैं सबा हूं और ये फरहा। सबा कहती हैं- जब आप आए, तब मैं खाना खा रही थी। फरहा को न चाहते हुए भी मेरे साथ बैठना पड़ा... क्या करे, मुझसे चिपकी हुई जो है। 24 सालों में हम दोनों में से कोई भी करवट लेकर सो नहीं सका है। मैं बीमार पडूं या फरहा... अस्पताल दोनों को जाना पड़ता है। अब तो जिंदगी से कोई शिकायत नहीं। अलग हुए तो शायद जिंदा न बचें। जब तक सांसें चल रही हैं, ऐसे ही हम साथ रहेंगी। तभी फरहा कहती हैं- जब छोटे थे, तो आस थी कि डॉक्टर ऑपरेशन करके हमको अलग-अलग कर देंगे। हम एक-दूसरे के गले लग सकेंगे। आमने-सामने बैठकर बातें करेंगे, लेकिन ये सब सपना ही रहा। अब तो हम ऐसे ही रहना चाहते हैं। मैं डॉक्टर बनना चाहती थी और सबा टीचर। जब हम 7-8 साल की हुईं, तो अम्मी-अब्बू स्कूल लेकर गए। टीचर कहने लगीं- ऐसे बच्चों को हम कैसे पढ़ाएंगे। इन्हें कौन संभालेगा। बच्चे इन्हें देखकर डर जाएंगे। बस, उनके शब्दों ने हमारे लिए स्कूल के दरवाजे हमेशा के लिए बंद कर दिए। फरहा कहती हैं- उम्र के साथ हमारा थायराइड बढ़ गया और गठिया भी हो गया। पूरे जिस्म में हर वक्त दर्द रहता है। हम दोनों दिन-रात कराहती रहती हैं। जब भी आसपास के लोगों को हंसते-खेलते देखती हूं, तो खुदा से मन ही मन पूछती हूं- हम बहनों को किस बात की सजा दी। कुछ पल खामोश रहने के बाद फरहा कहती हैं- दर्द कितना भी हो, हम एक-दूसरे से अलग रहने के बारे में सोच नहीं सकतीं। मन करता है कि अम्मी-अब्बू के साथ हज पर जाएं, खुली हवा में सांस लें, दुनिया देखें और बाकी लड़कियों की तरह खुलकर अपनी जिंदगी जीएं, लेकिन मजबूरी है। इस चारदीवारी के बाहर कदम रखने से पहले हमें कई बार सोचना पड़ता है। इसी बीच, सबा कहती हैं- मेरी तो अब एक ही ख्वाहिश है- राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और मुकेश अंकल से मिलना है। जब मिलूंगी, तो मन की बात कहूंगी। सबा यहां उद्योगपति मुकेश अंबानी को मुकेश अंकल कहती है। मैंने पूछा- उनसे क्या कहना चाहती हो? वो राज की बात है। आपको नहीं बता सकती। बस कोई हमें उनसे मिलवा दे। इसी बीच, एक शख्स कमरे में आता है। सबा बताती हैं- ये हमारे बड़े भाई मोहम्मद तमन्ना हैं। यही हमारी देखरेख करते हैं। फिर कहती हैं- हमारे लिए सजने-संवरने का कोई मतलब नहीं है। हम खुद कोई काम नहीं कर पातीं। ब्रश कराने और खाना खिलाने से लेकर नहाने और वॉशरुम ले जाने तक, सब कुछ घरवाले करते हैं। इसी बीच, भाई तमन्ना बोला- ये दोनों ज्यादा बात नहीं कर पातीं। ज्यादा देर तक बैठ भी नहीं सकतीं, दर्द होता है। तमन्ना के इतना कहते ही सबा और फरहा उठती हैं और लड़खड़ाते हुए उसी सीढ़ी के सहारे नीचे चली जाती हैं। तमन्ना बताते हैं- हम 8 भाई-बहन हैं। ये दोनों चौथे और पांचवें नंबर की है। मैं इनसे 13 साल बड़ा हूं। इनकी हर तकलीफ का गवाह हूं। अम्मी-अब्बू पढ़े-लिखे नहीं हैं, इसलिए मदद मांगने में हमेशा झिझकते हैं। नतीजा- पिछले 24 सालों से दोनों घर में कैद हैं। जब ये छोटी थीं, तो हम इन्हें पैदल या ऑटो से कभी-कभार मार्केट ले जाते थे, लेकिन ये जहां भी जातीं, लोग तमाशा बना देते। उल्टे-सीधे सवाल पूछते। तरह-तरह की बातें करते, इसीलिए हमने इन्हें बाहर ले जाना छोड़ दिया। 2002 की बात है। अम्मी पेट से थीं। तब हमारे यहां अल्ट्रासाउंड या एडवांस टेस्ट नहीं होते थे। जब घर पर डिलीवरी की कोशिश नाकाम हो गई। अम्मी की हालत बिगड़ने लगी, तो अब्बू आनन-फानन में उन्हें पटना के त्रिपोलिया हॉस्पिटल लेकर भागे। वहां डॉक्टरों ने बताया- पेट में जुड़वां बच्चे हैं, इसलिए नॉर्मल डिलीवरी मुमकिन नहीं। तुरंत बड़ा ऑपरेशन करना पड़ेगा। जैसे ही इन दोनों का जन्म हुआ, अस्पताल में सन्नाटा छा गया। दोनों के हाथ-पैर और जिस्म तो अलग-अलग थे, लेकिन सिर आपस में जुड़े थे। डॉक्टर से पूछा, क्या इनके सिर अलग हो सकते हैं? उन्होंने कहा- जब दोनों बड़ी होंगी, तो सर्जरी से अलग हो जाएंगे। अम्मी-अब्बू इन्हें लेकर गांव लौट आए। पूरे इलाके में बातें होने लगीं मोहम्मद शकील के घर सिर जुड़ी दो लड़कियां पैदा हुई हैं। तमन्ना कहते हैं कि- बहनों के घर आते ही सर्कस, तमाशे जैसी भीड़ हमारे घर के बाहर लगने लगी। लोग-रिश्तेदार सब इन्हें देखने के लिए आने लगे। कई लोग तो अम्मी-अब्बू को ये सलाह भी दे जाते थे कि ऐसी बेटियों को क्यों पाल रहे हो, कहीं छोड़ आओ। तब मेरे अब्बू ने हिम्मत दिखाई, कहा- जैसी भी हैं, मेरी बेटियां हैं। जब तक जिंदा हैं, देखभाल करेंगे। फिर वे सभी को लेकर पटना आ गए। यहां चाय का ठेला लगाकर गुजारा करने लगे। दरअसल, हम लोगों को लग रहा था कि जब ये बड़ी होंगी, तो सर्जरी करा देंगे। इनके शरीर अलग हो जाएंगे। फिर जैसे बाकी बहनें हैं, वैसे ये दोनों भी हो जाएंगी। इतने पैसे ही नहीं थे कि बड़े डॉक्टर से सलाह ले पाते। इनके जन्म के वक्त डॉक्टर ने जो बता दिया, वही अब्बू ने सच मान लिया। 2005 में उत्तरप्रदेश के किसी शहर से एक शख्स घर आया। उसने बताया कि अबूधाबी के प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने सबा-फरहा के बारे में मीडिया में देखा-सुना है। वो हमारी मदद करना चाहते हैं। उसने प्रिंस से हमारी बात कराई। प्रिंस ने वादा किया था कि वह सबा-फरहा के ऑपरेशन का पूरा खर्च उठाएंगे। उनकी पहल पर अमेरिका के मशहूर न्यूरोसर्जन डॉ. बेंजामिन कार्सन भारत आए। उन्होंने दिल्ली के अपोलो अस्पताल में सबा-फरहा की एंजियोग्राफी और कई जटिल जांचें कीं। तब डॉ. कार्सन ने बताया था कि दोनों को अलग करना संभव है, लेकिन ऑपरेशन जोखिम भरा है। जान भी जा सकती है। इसी डर से अम्मी-अब्बू ने सर्जरी कराने से इनकार कर दिया। इसके बाद से प्रिंस की ओर से बातचीत भी बंद हो गई। मो. तमन्ना बताते हैं- साल 2009 में, मीडिया के जरिए अभिनेता सलमान खान को पता चला कि सबा-फरहा उनकी फैन हैं। राखी बांधना चाहती हैं, तो उन्होंने खुद पूरे परिवार के लिए फ्लाइट की टिकटें भेजीं। मुंबई में अपने घर बुलाया और सबा-फरहा से राखी बंधवाई। खूब बातें कीं। सलमान ने वादा किया था दोनों को गोद लेंगे। मदद करेंगे। इलाज कराएंगे। हालांकि, बाद में कोई पूछने नहीं आया। जो शख्स उनसे बात करवाता था, अब वो फोन भी नहीं उठाता। इसके बाद, 2012 में इनके इलाज का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। कोर्ट के निर्देश पर दिल्ली एम्स के डॉक्टरों की टीम बनी। टीम पटना आई। डॉक्टरों ने दोनों की MRI, एंजियोग्राफी समेत तमाम जांचें करवाई। रिपोर्ट देखने के बात डॉक्टरों ने कहा-सबा-फरहा का सिर्फ सिर ही नहीं, बल्कि सिर से गुजरने वाली खून की नली और नसें भी एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। ऐसे में अगर इन्हें सर्जरी के जरिए अलग करने की कोशिश की गई, तो दोनों या फिर किसी एक की जान जाना तय है। सबा के शरीर में किडनी नहीं है। अलग करने के बाद सबा को तुरंत किडनी की जरूरत होगी, जो इस खतरे को कई गुना और बढ़ा देगी। यह सुनते ही अम्मी-अब्बू ने सर्जरी से इनकार कर दिया। इसके बाद, 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने बिहार सरकार को आदेश दिया कि दोनों के इलाज और दवाइयों का पूरा खर्च उठाएं। परिवार की आर्थिक सहायता भी करें। पटना के सिविल सर्जन को आदेश दिया कि हर तीन महीने में दोनों की जांच करें। रिपोर्ट दिल्ली एम्स भेजें, लेकिन चार-पांच साल से कोई पूछने तक नहीं आया। दोनों के लिवर में सूजन है। जोड़ों में दर्द रहता है। आपने तो देख लिया होगा कि दोनों कितनी कमजोर हो गई हैं। जब मैं इन्हें देखता हूं, तो दुख होता है। दूसरी ओर, समाज के ताने रोज हमारी रूह छीलते हैं। कहते हैं- बेटियों के इलाज के नाम पर हमें सलमान खान और अबू धाबी के प्रिंस से करोड़ों रुपये मिले हैं। मीडिया वालों से भी इंटरव्यू और वीडियो बनाने के बदले पैसे वसूलते हो। तुम्हें क्या फिक्र, तुम्हें तो बेटियां कमा कर दे रही हैं। मैं किस-किस का मुंह बंद करूं, किस-किस को सफाई दूं। लोग बस तमाशा देखते हैं। उंगलियां उठाते हैं, लेकिन हमारा दर्द, हम ही जानते हैं। बाकी बहनों की शादी हुई, तो अम्मी कहने लगीं- काश ! सबा-फरहा भी अच्छी होती, तो इनकी भी शादी होती, लेकिन क्या करें। मैं फूड स्टॉल लगाकर बमुश्किल 500-600 रुपए कमाता हूं। जैसे-तैसे इनकी देखभाल करता हूं। इनका आगे क्या होगा, अल्लाह ही जाने। ये कहकर तमन्ना एक गहरी सांस लेते हैं। इसके बाद, मैं सबा-फरहा की अम्मी रबिया खातून से बेटियों के बारे में कुछ पूछने की कोशिश करता हूं। तमन्ना फौरन इनकार कर देते हैं। तस्वीर भी नहीं खींचने देते। कहते हैं- इतनी बातचीत बहुत है। अब आप जाइए। मुझे दुकान के लिए निकलना है। अब एक सेकंड भी बात नहीं कर सकता। सबा-फरहा की जिंदगी को करीब से देखने के बाद बतौर रिपोर्टर मेरे मन में कई सवाल उठ रहे हैं। इनका जवाब जानने के लिए मैं पटना के इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (IGIMS) पहुंचा। जहां मेरी मुलाकात न्यूरो सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. समरेंद्र कुमार से हुई। सबा-फरहा की जांच के लिए AIIMS दिल्ली से जो टीम आई थी, डॉ. समरेंद्र उस टीम का हिस्सा थे। वो बताते हैं- सबा-फरहा को कोई बीमारी नहीं है, यह एक जैविक चूक है। इसे क्रेनियोपैगस कहते हैं। गर्भधारण के पहले दिन, महिला का अंडाणु और पुरुष का शुक्राणु मिलकर एक जायगोट (एकल कोशिका) बनाते हैं। सामान्यतः इससे एक ही बच्चा विकसित होता है। जब यह एक जायगोट गर्भ में विकसित होना शुरू होता है, तो एक समान जुड़वां बच्चे बनने के लिए इस जायगोट को दो अलग-अलग हिस्सों में बंटना पड़ता है। शुरुआती दो हफ्तों के भीतर, कोशिकाएं बंटकर दो अलग-अलग बच्चों का रूप ले रही होती हैं। लेकिन किसी जैविक चूक के कारण, बंटवारे की यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती। यह प्रक्रिया जहां रुकती है, शरीर का वह हिस्सा आपस में जुड़ा रह जाता है। सबा और फराह के मामले में यह रुकावट सिर के हिस्से पर हुई। सबा-फरहा का जुड़ाव सिर्फ ऊपरी चमड़ी या हड्डी तक सीमित नहीं है। अगर ऐसा होता, तो सर्जरी आसान होती। उनके दिमाग में ब्लड सप्लाई करने वाली मुख्य नस भी आपस में गुथी हुई है। यही कारण है कि ऑपरेशन करने पर किसी एक या दोनों की जान जाने का खतरा है। दोनों बहनों का नर्वस सिस्टम एक ही जगह से जुड़ा होने के कारण सबा के दिमाग से निकला सिग्नल कभी-कभी फरहा के अंगों तक पहुंच जाता है और फरहा का सिग्नल सबा तक। इससे दोनों के दिमागी सिग्नलों में टकराव हो जाता है। ऐसे समझें- जब फरहा सोती है, तो सबा जाग सकती है क्योंकि सोने और जागने को नियंत्रित करने वाला दिमाग का केंद्र दोनों का अपना-अपना है। अगर सबा कुछ खाती है, तो उसका स्वाद सिर्फ सबा को ही आता है, फरहा को नहीं, क्योंकि दोनों की स्वाद ग्रंथियां और दिमागी सिग्नल अलग हैं। लेकिन जब सबा अपने पैर को आगे बढ़ाने का फैसला करती है, तो उसके दिमाग से निकला सिग्नल उस साझा नस से होकर गुजरता है जो फरहा से भी जुड़ी है। नतीजा-वह सिग्नल आधा सबा के पैर में जाता है और आधा फरहा के। इससे कई बार भ्रम की स्थिति बन जाती है। ऐसे बच्चों की सर्जरी जन्म के कुछ साल बाद ही हो जानी चाहिए, लेकिन सबा-फरहा के मामले में यह कभी मुमकिन नहीं था। उम्र बढ़ने के साथ इनका शरीर कमजोर होता जाएगा। ऐसे बच्चे अधिकतम 30 से 40 वर्ष ही जी पाते हैं। डॉ. समरेंद्र से मिलने के बाद मैं IGIMS के पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. विनित ठाकुर से मिला। उन्हें सबा और फरहा की तस्वीर दिखाई। वे कहते हैं- ऐसे मरीजों का दिमाग दो हिस्सों में विकसित होने के बावजूद आपस में इस कदर घुला-मिला है कि इसे सर्जरी से अलग करना असंभव है। यदि दोनों शरीर लिवर साझा कर रहे होते, तो उसे काटना मुमकिन था, क्योंकि लिवर दोबारा बढ़ जाता है। लेकिन दिमाग का जो हिस्सा एक बार कट गया, वह कभी दोबारा नहीं बढ़ता। सिर की मुख्य नसों के साझा होने के कारण यह सर्जरी जानलेवा है। सामान्य जुड़वां बच्चे 3 साल की उम्र तक अपनी अलग पसंद-नापसंद बना लेते हैं। लेकिन सबा-फरहा के मामले में ऐसा नहीं हो सका। वे एक जैसा ही सोच पाती हैं। चूंकि दोनों के शरीर की 'सप्लाई चेन' एक है, इसलिए एक की बीमारी दोनों को प्रभावित करती है। उनकी सबसे बड़ी पीड़ा उनका रोज का तालमेल है। जहां एक बहन सोना चाहती है तो दूसरी जागना, एक बैठना चाहती है तो दूसरी चलना। एक की शारीरिक जरूरत, दूसरी की मजबूरी है। ------------------------------------- ऐ जिंदगी सीरीज की यह खबर भी पढ़ें… 1- चेहरे पर मांस के लोथड़े देख लोग कहते हैं भूत:शक्ल देखकर 5 लोग गड्ढे में जा गिरे, मां बोली-मरेगा तभी बला टलेगी ऊपर आपने जो तस्वीर देखी, उनका नाम है मिथुन चौहान। उम्र 29 साल। जो भी इन्हें पहली बार देखता है, डर जाता है। भूत कहता है या जानवर। दुर्लभ बीमारियों की सीरीज ‘ऐ जिंदगी’ के लिए इस बार इन्हीं की तलाश है। मैं नीरज झा इसी तलाश में पहुंचा पटना से करीब 150 किलोमीटर दूर नवादा जिले के नारदीगंज ब्लॉक। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें… 2- बेटे की सभी हड्डियां टेढ़ी, 4 करोड़ में होगा इलाज:बिस्तर से उठ नहीं पाता, 3 डॉक्टर बोले- आपसी रिश्तों में शादी का असर 8 साल का जावेद स्कूल के मैदान में क्रिकेट खेलते-खेलते अचानक गिर पड़ा। दोस्तों ने उसे उठाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं उठा। जमीन पर पड़ा कराहने लगा। टीचर भागते हुए आए, उन्होंने भी उठाने की कोशिश की। वो बार-बार कहता रहा- मेरे घुटने और कोहनियों में बहुत दर्द है। पैर मुड़ ही नहीं रहे। मैं उठ नहीं पाऊंगा। अपने पैरों पर खड़ा नहीं हो पाऊंगा। प्लीज, अम्मी-अब्बू को फोन करके बुला दीजिए। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
रोहित शर्मा की विदाई लगभग तय, लॉर्ड्स में हो सकता है अंतिम वनडे
ENGvsIND इंग्लैंड की 2 पारियों में फ्लॉप होने के बाद रोहित शर्मा के लिए वह घड़ी आ गई है जब वह या तो खुद से बल्ला टांगेंगे या फिर अगली सीरीज से ड्रॉप होंगे। मीडिया सूत्रों में चल रही खबरों के मुताबिक चयनकर्ताओं ने उनको बता दिया है कि वह एकदिवसीय विश्वकप 2027 के लिए टीम की योजनाओं में नहीं है। रोहित शर्मा ने इंग्लैंड के खिलाफ पहले एकदविसीय मैच में 21 गेंदो में 11 रन बनाए थे। आज दूसरे एकदिवसीय मैच में 47 गेंद में 1 चौका और छक्का मारने के बाद 26 रन बनाकर आउट हुए। उनका 5 रनों पर गस एटिंकसन ने कैच छोड़ा था। रोहित ने कप्तानी गंवाने के बाद अपने आक्रामक रवैए पर अंकुश लगाया लेकिन उन्हें अभी तक इससे खास फायदा नहीं हुआ है।रोहित ने पिछले साल अक्टूबर से 13 वनडे मैच खेले हैं, जिसमें उन्होंने एक शतक और चार अर्धशतकों की मदद से 46.91 के औसत से 563 रन बनाए हैं।यह कोई मामूली रिकॉर्ड नहीं है। लेकिन भारतीय ड्रेसिंग रूम के मौजूदा हालात ने रोहित के लिए लगभग हर मैच में अच्छा प्रदर्शन करना अनिवार्य बना दिया है। These lines will hurt forever. pic.twitter.com/7ckR4qcGLU — Selfless Cricket (@SelflessCricket) July 16, 2026 pic.twitter.com/h6u5YKcVJ9 — dxp (@drivexpull) July 16, 2026 No hate But it is becoming difficult for Rohit Sharma day by day for 2027 World Cup As South Africa pitches will have more uneven bounch pic.twitter.com/63AzUFSh2q — Aarav (@AARAVOJHA18) July 16, 2026 रोहित अब इस स्थिति में है कि वह किसी भी चीज को भाग्य के सहारे नहीं छोड़ सकते हैं क्योंकि भारत के शीर्ष क्रम में इशान किशन के रूप में विकल्प मौजूद है।अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे एकदिवसीय मैच को छोड़ दे तो इस साल रोहित का प्रदर्शन औसत से नीचे रहा है।पहले मैच में वह 16 रन बनाकर रनआउट हो गए और दूसरे मैच में वह 39 गेंदों में 48 रन बनाकर बोल्ड हो गए। इससे पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ पहली एकदिवसीय सीरीज में रोहित शर्मा फ्लॉप रहे और टीम को शुरुआत में बड़ा स्कोर नहीं दे सके। रोहित शर्मा 3 मैचों में 20 की औसत से 61 रन बना पाए। पूरी सीरीज में उन्होंने 9 चौके और 2 छक्के लगाए।पहले मैच में उन्होंने 29 गेंदो पर 26 रन, दूसरे मैच में उन्होंने 38 गेंदो में 24 रन और तीसरे मैच में 13 गेंदो में 11 रन बनाए।
विराट और श्रेयस के अर्धशतक के बावजूद भारत इंग्लैंड के खिलाफ 233 रनों पर सिमटा
ENGvsIND श्रेयस अय्यर (66) और विराट कोहली (65) के अर्धशतकों से भारत ने इंग्लैंड के खिलाफ गुरूवार को दूसरे वनडे में 44 ओवर में 233 रन का स्कोर बनाया। इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया। भारतीय टीम के मध्यक्रम ने पूरी तरह से निराश किया है। अक्षर पटेल, वॉशिंगटन सुन्दर और शिवम दुबे के विकेट गुच्छों में गिरे। उससे पहले ऐसा प्रतीत हो रहा था कि भारतीय टीम आसानी से 300 के स्कोर को पार कर सकती है। हालांकि जोफ़्रा आर्चर, साकिब महमूद और गस एटकिंसन ने कमाल का काउंटर अटैक किया। कोहली के विकेट पतन के बाद सबसे बड़ी साझेदारी 20 रनों की हुई, जो श्रेयस और बुमराह के बीच हुई। परिणाम यह रहा कि भारतीय टीम एक सम्मानजनक स्कोर से भी थोड़ी सी दूर रह गई। श्रेयस ने 71 गेंदों पर 66 रन की पारी में पांच चौके और दो छक्के लगाए जबकि विराट कोहली ने 66 गेंदों पर 65 रन में आठ चौके लगाए। कप्तान शुभमन गिल ने 33 और ओपनर रोहित शर्मा ने 26 रन का योगदान दिया। जसप्रीत बुमराह ने 13 गेंदों पर तीन चौकों और एक छक्के की मदद से 20 रन बनाकर भारत को 233 तक पहुंचाया। यह मेन इन ब्लू की तरफ से सबसे भरोसेमंद बैटिंग नहीं थी। ALL OUT We require 234 runs to win in Cardiff pic.twitter.com/8RfE68nf21 — England Cricket (@englandcricket) July 16, 2026 शुभमन गिल ने तेज़ शुरुआत दी, लेकिन रोहित शर्मा लय में नहीं दिखे और कुछ शुरुआती राहत मिलने के बावजूद इसका फ़ायदा नहीं उठा पाए। विराट कोहली ने एक अच्छी हाफ सेंचुरी के साथ पारी को संभाला, जबकि श्रेयस अय्यर ने एक कीमती पारी खेलकर भारत को एक सम्मानजनक टोटल तक पहुंचाया। जसप्रीत बुमराह ने कुछ ज़रूरी रन जोड़े, जिससे भारत को आखिर में एक और धक्का मिला। इंग्लैंड की बॉलिंग पूरी टीम की परफॉर्मेंस थी। जोफ्रा आर्चर ने तीन अहम विकेट लेकर लीड किया, जबकि गस एटकिंसन ने भी तीन विकेट लेकर उनकी बराबरी की। साकिब महमूद ने भी दो विकेट लिए, जिससे यह पक्का हो गया कि भारत कभी भी कोई मोमेंटम न बना पाए। पहली पारी में पेसरों ने नौ विकेट लिए।
गुरु पूर्णिमा महोत्सव की तैयारियां तेज, राजगढ़ धाम पर प्रशासनिक बैठक आयोजित
50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन की संभावना नसीराबाद। राजगढ़ स्थित श्री मसाणिया भैरव धाम में आगामी 29 जुलाई को आयोजित होने वाले गुरु पूर्णिमा महोत्सव की तैयारियों को लेकर गुरुवार को प्रशासनिक बैठक आयोजित की गई। बैठक चम्पालाल महाराज (मुख्य उपासक, भैरव धाम) के सान्निध्य तथा उपखंड अधिकारी नसीराबाद कल्पित शिवरान की अध्यक्षता […] The post गुरु पूर्णिमा महोत्सव की तैयारियां तेज, राजगढ़ धाम पर प्रशासनिक बैठक आयोजित appeared first on Sabguru News .
धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाया जाए : केजरीवाल
नई दिल्ली। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार को जंतर-मंतर पहुंचकर शिक्षाविद् सोनम वांगचुक के अनशन का समर्थन किया और केंद्र सरकार से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर वांगचुक को देश का शिक्षा मंत्री बनाने की मांग की। केजरीवाल ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार हो रहे कथित […] The post धर्मेंद्र प्रधान को हटाकर सोनम वांगचुक को शिक्षा मंत्री बनाया जाए : केजरीवाल appeared first on Sabguru News .
कोटपुतली : बालिका से रेप करने के दोषी को मृत्यु होने तक का कारावास
अलवर। राजस्थान में कोटपुतली के जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत बालिका से दुष्कर्म करने के दोषी को मृत्यु होने तक के कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने अभियुक्त सुमित (18) को बालिका से दुष्कर्म करने का दोषी मानते हुए उस पर एक लाख रुपए […] The post कोटपुतली : बालिका से रेप करने के दोषी को मृत्यु होने तक का कारावास appeared first on Sabguru News .
भिवाड़ी में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह के तीन आरोपी अरेस्ट
खैरथल-तिजारा। राजस्थान में खैरथल-तिजारा जिले के भिवाड़ी पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन शातिर ठगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि यह गिरोह भिवाड़ी की पॉश आशियाना टाउन सोसायटी में गुमनाम तरीके से रहकर भारत ही नहीं, बल्कि अमरीका, कनाडा और अफ्रीका के […] The post भिवाड़ी में अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी गिरोह के तीन आरोपी अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
जो लोग पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे 21 जुलाई से पहले छोड़ दें : ममता बनर्जी
कोलकाता। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने गुरुवार को उन नेताओं को कड़ा संदेश दिया जो पार्टी छोड़ने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर वे पार्टी छोड़ना चाहते हैं, तो 21 जुलाई को होने वाली शहीद दिवस रैली से पहले ही ऐसा कर […] The post जो लोग पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे 21 जुलाई से पहले छोड़ दें : ममता बनर्जी appeared first on Sabguru News .
नई मंडी घड़साना में स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सक रिश्वत लेते पकड़ा गया
श्रीगंगानगर। राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने श्रीगंगानगर जिले में नई मंडी घड़साना के सरकारी अस्पताल में गुरुवार को एक स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सक को 3500 रुपये की रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। ब्यूरो के सूत्रों ने बताया कि परिवादी ने ब्यूरो की गंगानगर इकाई में शिकायत की थी कि उसकी गर्भवती पत्नी को पेट […] The post नई मंडी घड़साना में स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सक रिश्वत लेते पकड़ा गया appeared first on Sabguru News .
पाली : नगरपालिका सोजत रोड में दलाल 25000 रुपए रिश्वत लेते अरेस्ट
पाली। राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने गुरुवार को पाली जिले में नगरपालिका सोजत रोड में दलाल परमानन्द शर्मा को 25 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। ब्यूरो की अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव ने बताया कि एसीबी चौकी पाली द्वितीय को शिकायत मिली कि परिवादी के बडे पिताजी के नाम का […] The post पाली : नगरपालिका सोजत रोड में दलाल 25000 रुपए रिश्वत लेते अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की रोजाना चिकित्सकीय निगरानी सुनिश्चित करे। न्यायालय ने बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि वांगचुक की बिगड़ती सेहत को सुधारने के लिए आवश्यक कोई भी चिकित्सकीय हस्तक्षेप सरकार […] The post दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को सोनम वांगचुक की रोजाना चिकित्सकीय निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया appeared first on Sabguru News .
राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत और निकाय चुनाव में देरी पर जताई नाराजगी
जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य में पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव कराने में हो रही देरी पर गुरुवार को कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग से पांच दिन के भीतर चुनाव कार्यक्रम और संभावित तिथि बताने के निर्देश दिये। साथ ही राज्य चुनाव आयुक्त से पूछा कि आखिर वह क्यों चाहते हैं कि […] The post राजस्थान हाईकोर्ट ने पंचायत और निकाय चुनाव में देरी पर जताई नाराजगी appeared first on Sabguru News .
अलवर में 12वीं कक्षा के छात्र तुषार की गोली मारकर हत्या
अलवर। राजस्थान में अलवर जिले के रामगढ़ के नौगांवा थाना क्षेत्र में बारहवीं कक्षा के छात्र की हत्या का मामला सामने आया है। दो दिन से लापता छात्र तुषार कुमार का शव बुधवार सुबह रामगढ़ क्षेत्र के नौगांवा थाना क्षेत्र में नेवाड़ी गांव के पास पहाड़ी की तलहटी में मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में युवक […] The post अलवर में 12वीं कक्षा के छात्र तुषार की गोली मारकर हत्या appeared first on Sabguru News .
नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे एम्पलॉईज यूनियन के 22वें रक्तदान शिविर में 1192 यूनिट रक्तदान
अजमेर। नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे एम्पलॉईज यूनियन के 22वें रक्तदान शिविर में 1192 यूनिट रक्तदान का नया रिकार्ड बन गया। गत वर्ष 1068 यूनिट रक्तदान हुआ था। यूनियन के जोनल कार्यकारी अध्यक्ष मोहन चेलानी ने बताया कि लायन्स क्लब अजमेर प्रिमियम एवं सतगुरु स्कूल के सहयोग से रेलवे ऑफिसर्स क्लब में आयोजित रक्तदान शिविर का उद्घाटन […] The post नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे एम्पलॉईज यूनियन के 22वें रक्तदान शिविर में 1192 यूनिट रक्तदान appeared first on Sabguru News .
साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी, अधिवक्ताओं को दिए सुरक्षा के टिप्स
जयपुर। अधिवक्ता परिषद राजस्थान जयपुर प्रांत एवं आर्म्ड फोर्स ट्रिब्यूनल (एएफटी) जयपुर बैंच इकाई के संयुक्त तत्वावधान में शुक्रवार को ‘साइबर अपराध एवं जागरूकता’ विषय पर विशेष स्टडी सर्किल का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य अधिवक्ताओं और विधि विद्यार्थियों को बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करना तथा उनसे बचाव के व्यावहारिक उपायों की […] The post साइबर अपराधों से बचाव के लिए जागरूकता जरूरी, अधिवक्ताओं को दिए सुरक्षा के टिप्स appeared first on Sabguru News .
नाना पटवारी के साथियों ने कबूला, 20 से 100 रुपए मिलता है क्रिकेट सट्टे में कमीशन, चार लोगों पर FIR
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई नाना पटवारी की मुश्किलें बढती जा रही हैं। उनके साथियों ने पुलिस के सामने कुछ मामलों में कबूल किया है। बता दें कि वहीं दूसरी तरफ जीतू पटवारी नीट पेपर लीक और अन्य मामलों के खिलाफ सायकल यात्रा पर हैं। दरअसल, एमडी ड्रग्स के मामले में आरोपी नाना पटवारी और उसके साथी सुमित मंत्री से बुधवार देर रात तक राजेंद्र नगर थाना पुलिस ने पूछताछ की गई थी। जांच में सामने आया कि नाना के साथी ऑनलाइन बेटिंग वेबसाइट ऑल पैनल पर क्रिकेट सट्टे के कमीशन एजेंट थे। उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें प्रत्येक लेनदेन पर कमीशन मिलता था। जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने नाना के चार साथियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। फिलहाल इस प्रकरण में नाना पटवारी का नाम आरोपी के रूप में शामिल नहीं किया गया है। पुलिस के अनुसार जांच में संजय कौशल, मनीष जादौन, दिनेश उर्फ लल्ला चौहान, प्रीतेश त्रिपाठी सहित अन्य लोगों की भूमिका सामने आई है। इन पर ऑनलाइन क्रिकेट सट्टे का नेटवर्क संचालित करने और बेटिंग आईडी उपलब्ध कराने का आरोप है। कितना कमीशन मिलता है : जांच में सामने आया कि कृष्णा नगर निवासी संजय कौशल ऑनलाइन बेटिंग वेबसाइट ऑल पैनल पर क्रिकेट सट्टे का कमीशन एजेंट था। प्रत्येक लेन देन पर उसे 20 से 100 रुपए तक कमीशन मिलता था। पूछताछ में संजय ने पुलिस को बताया कि सच्चिदानंद नगर (महू नाका) निवासी मनीष पमनानी उसे ऑलपैन एक्स और ग्रेडटेक्स डॉट कॉम की बेटिंग लिंक उपलब्ध कराता था। ये लिंक वॉट्सऐप के जरिए भेजी जाती थीं, जिन पर 5 हजार रुपए या उससे अधिक बैलेंस वाली बेटिंग आईडी मिल जाती थी।
सोनम वांगचुक 19 दिन से भूख-हड़ताल कर रहे हैं। मांग है- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। सरकार ने अब तक उनसे कोई बात नहीं की है। दिल्ली हाई कोर्ट में एक वकील ने याचिका दायर कर कहा कि सोनम को फोर्स-फीडिंग करवाई जाए, वरना 2 दिन में जान जा सकती है। कोर्ट ने सरकार को रोजाना मेडिकल जांच कराने के आदेश दिए हैं। सोनम वांगचुक भूख हड़ताल के तीसरे फेज में हैं, चौथे फेज में कैसे जा सकती है जान और क्या जबरन खाना खिलाया जा सकता है; समझेंगे आज के एक्सप्लेनर में... फेज-3: कुछ हफ्ते शरीर के 'इमरजेंसी सिस्टम' कीटोसिस का सहारा फेज-4: एनर्जी का कोई सुरक्षित तरीका नहीं बचता, मौत सवाल-1: तो क्या अगले दो-तीन दिन में सोनम वांगचुक की जान को खतरा है? जवाब: भुखमरी से जुड़ी कई रिसर्च में 3 जरूरी बातें हैं.. सोनम का वजन अनशन की शुरुआत में 65.9 किलो था, जो 16 जुलाई तक 9 किलो घटकर 56.9 हो गया है। यानी करीब 14% की गिरावट। उनका ब्लड प्रेशर नॉर्मल 120/80 यूनिट्स से घटकर 101/65 यूनिट्स आ गया है। वहीं ब्लड शुगर 89 यूनिट्स है। उत्तर प्रदेश बेस्ड डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (MD) अजय सिंह कहते हैं कि सोनम के हेल्थ पैरामीटर्स देखते हुए ऐसा कहना ठीक नहीं होगा कि उनको दो दिन में जान का खतरा है। वे पानी ले रहे हैं। हालांकि निगरानी की जरूरत है, क्योंकि उनकी उम्र 59 साल है। मध्यप्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी, जबलपुर में न्यूरोलॉजिस्ट और मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. टी.एन दुबे कहते हैं, ‘मेडिकल साइंस में इस बात कि साफ पुष्टि नहीं है कि इंसान कितने दिन तक भूख बर्दाश्त कर सकता है। भूख तब तक जानलेवा नहीं होगी, जब तक कीटोसिस न शुरू हो जाए। एक बार ये प्रक्रिया शुरू हो जाए, तो माना जाता है कि व्यक्ति कोमा में जा सकता है। सवाल-2: क्या सरकार जबरन सोनम का अनशन तुड़वा सकती है? जवाब: भूख-हड़ताल भी अभिव्यक्ति, यानी अपनी बात कहने का तरीका है। आर्टिकल 19 के तहत ये एक मूल अधिकार है। यानी सरकार किसी को भूख-हड़ताल करने से रोक नहीं सकती। वहीं आर्टिकल 21 से जीवन का अधिकार मिलता है और ये सरकार की ये जिम्मेदारी है कि वह किसी व्यक्ति की जान को बचाए रखे। इसीलिए भारत में आत्महत्या करना या इसके लिए किसी को उकसाना अपराध है। इन दो कानूनों से जुड़ा एकएक रोचक मामला मणिपुर की इरोम चानू शर्मिला का है, जो 2000 से 2016 तक 16 साल भूख हड़ताल पर रही थीं। उन्हें अनशन के तीसरे दिन ही आत्महत्या के प्रयास के आरोप में IPC की धारा 309 के तहत गिरफ्तार कर लिया गया और 16 साल तक सरकारी अस्पताल में रखकर जबरन फीडिंग ट्यूब से खाना दिया गया। हालांकि 2021 में मद्रास हाई कोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में कहा कि भूख-हड़ताल के चलते किसी को आत्महत्या के प्रयास में आरोपी नहीं बनाया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता कहते हैं कि सोनम पर इरोम चानू की तरह आत्महत्या की कोशिश का मामला दर्ज नहीं किया जाएगा। लेकिन सरकार आर्टिकल 21 का हवाला देकर उनका अनशन तुड़वा सकती है। सोनम का अनशन तुड़वाने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने भी कहा है, 'डॉक्टरों से उनकी नियमित जांच कराई जाए और जरूरत पड़ने पर उनकी जान बचाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। क्योंकि हर नागरिक की जान कीमती है।’ --------- ये खबर भी पढ़िए… प्रोटेस्ट कॉकरोच पार्टी का, फिर सोनम वांगचुक आमरण अनशन पर क्यों; क्या सरकार मांगें मानेगी, तबीयत बिगड़ी तो क्या होगा 59 साल के सोनम वांगचुक 17 दिन से भूख हड़ताल पर हैं। सिर्फ नमक का पानी ले रहे हैं। 8.5 किलो वजन गिर चुका है। उनके पीछे बैनर कॉकरोच जनता पार्टी का है, जिसकी मांग है- शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा। CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा- सरकार बात तक करने को तैयार नहीं, मरने के लिए छोड़ दिया है। पूरी खबर पढ़िए…
'मिर्जापुर: द मूवी' को क्या मिलेगा 'A' सर्टिफिकेट? निर्देशक गुरमीत सिंह ने बताई पूरी वजह
'मिर्जापुर: द मूवी' का बहुप्रतीक्षित टीजर हाल ही में रिलीज हुआ है, जिसने फैंस को पहली बार फिल्म की दमदार झलक दिखाई। ओटीटी की इस आइकॉनिक दुनिया को अब बड़े पर्दे पर लाते हुए फिल्म पहले से भी बड़ा एक्शन, जबरदस्त ड्रामा और वही सिग्नेचर भौकाल लेकर आ रही है, जिसने 'मिर्जापुर' को एक कल्ट फिनॉमेनन बना दिया। भारत की सबसे बड़ी ओटीटी क्राइम फ्रेंचाइजी 'मिर्जापुर' अब इतिहास रचने जा रही है। 'मिर्जापुर: द मूवी' के साथ यह भारत की पहली बड़ी स्ट्रीमिंग ओरिजिनल फ्रेंचाइजी बन गई है, जो इतने बड़े स्तर पर सिनेमाघरों का रुख कर रही है। अली फज़ल, पंकज त्रिपाठी और दिव्येंदु शर्मा एक बार फिर अपने चर्चित किरदारों में नजर आएंगे। ALSO READ: 'आर्यभट्ट का जीरो' का टीजर रिलीज, फैमिली, प्यार और संघर्ष के बीच सम्मान की तलाश में दिखे हिमांश कोहली फिल्म 'मिर्जापुर' की उसी दुनिया को बड़े पर्दे पर लेकर आ रही है, जिसने इसे एक कल्ट फिनॉमेनन बना दिया। हाल ही में रिलीज हुए टीजर को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिला है। इसने सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोरी है और फैंस के बीच फिल्म को लेकर एक्साइटमेंट और बढ़ा दी है। फिल्म की रिलीज जैसे-जैसे करीब आ रही है, वैसे-वैसे इस बात पर भी चर्चा हो रही है कि अपनी हिंसा, बेबाक भाषा और दमदार कहानी के लिए मशहूर 'मिर्जापुर' बड़े पर्दे पर CBFC के नियमों के हिसाब से खुद को कैसे ढालेगी। इस पर बात करते हुए निर्देशक गुरमीत सिंह ने कहा कि उनके लिए सबसे जरूरी था 'मिर्जापुर' की असली पहचान को बरकरार रखना। उन्होंने बताया कि ज्यादा लोगों तक पहुंचने के लिए फिल्म को हल्का करने की बजाय, इसे शुरू से ही Adults Only सर्टिफिकेट को ध्यान में रखकर बनाया गया। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया गया कि फिल्म अपनी दमदार पहचान बनाए रखते हुए बोर्ड के सभी नियमों का पालन करे। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें निर्देशक गुरमीत सिंह ने कहा, हम शुरुआत से ही फिल्म के लिए Adults Only (एडल्ट्स ओनली) सर्टिफिकेट को ध्यान में रखकर चल रहे हैं। इसके बाद, जाहिर है कि CBFC की अपनी गाइडलाइंस होती हैं कि कौन-सी भाषा इस्तेमाल की जा सकती है और कौन-सी नहीं। हमने इन्हीं नियमों के बीच सही संतुलन बनाने की कोशिश की है। गुरमीत सिंह का मानना है कि भारतीय सिनेमा और दर्शक दोनों काफी बदल चुके हैं। अब सिनेमाघरों में ऐसी कहानियों के लिए भी जगह बन रही है, जो खास तौर पर वयस्क दर्शकों के लिए बनाई जाती हैं और जिनमें क्रिएटिव विजन से समझौता नहीं किया जाता। A post shared by Mirzapur (@yehhaimirzapur) उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि दर्शक भी पहले से ज्यादा मैच्योर हो गए हैं। अगर आप 'एनिमल', 'धुरंधर' और हाल की कई फिल्मों को देखें, तो साफ है कि अब एडल्ट स्टोरीटेलिंग को भी थिएटर में जगह मिल रही है। इससे हमारे लिए भी रास्ता बना कि हम 'मिर्जापुर: द मूवी' को बिना उसकी असली पहचान और तेवर बदले बड़े पर्दे पर ला सकें। फिल्म की दमदार स्टारकास्ट को और बड़ा बनाते हुए 'मिर्जापुर: द मूवी' में अभिषेक बनर्जी, रसिका दुगल, मोहित मलिक, शीबा चड्ढा, राजेश तैलंग, प्रमोद पाठक, श्रिया पिलगांवकर, हर्षिता शेखर गौर, श्वेता त्रिपाठी और सोनल एस. चौहान भी नजर आएंगे। ये सभी मिलकर 'मिर्जापुर' की दुनिया के एक ऐसे अनदेखे चैप्टर को बड़े पर्दे पर लेकर आएंगे, जिसे पहले कभी नहीं देखा गया। 'मिर्जापुर: द मूवी' को अमेज़न MGM स्टूडियोज और एक्सेल एंटरटेनमेंट प्रस्तुत कर रहे हैं। फिल्म का निर्देशन गुरमीत सिंह ने किया है, जबकि इसकी कहानी पुनीत कृष्णा ने लिखी है। रितेश सिधवानी और फरहान अख्तर ने इसे एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले प्रोड्यूस किया है। वहीं, कासिम जगमगिया और विशाल रामचंदानी इसके सह-निर्माता हैं। 'मिर्जापुर: द मूवी' 4 सितंबर 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
कार्डिफ में इंग्लैंड ने टॉस जीतकर गेंदबाजी चुनी, भारत ने किए एक बदलाव
ENGvsIND कार्डिफ के सोफिया गार्डन्स पर इंग्लैंड ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है। वहीं टीम में दो बदलाव है। जोश टंग और लियाम डॉसन की जगह साकिब महमूद और गस एटिंकसन आए हैं। वहीं भारत की ओर से एक बदलाव है। विकेटकीपर केएल राहुल अस्वस्थ है और उनकी जगह ईशान किशन ने ली है। TOSS & TEAM NEWS England have won the toss and elected to bowl first in Cardiff Come on, lads! #ENGvIND pic.twitter.com/GIyTGb21zT — England's Barmy Army (@TheBarmyArmy) July 16, 2026 टीम इस प्रकार हैं: भारत: शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, विराट कोहली, श्रेयस अय्यर (उप-कप्तान),इशान किशन (विकेटकीपर), वॉशिंगटन सुंदर, अक्षर पटेल, शिवम दुबे, जसप्रीत बुमराह, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बराड़ इंग्लैंड : हैरी ब्रूक (कप्तान), बेन डकेट, जोस बटलर (विकेटकीपर), जो रूट, जैकब बेथेल, विल जैक्स, सैम कुरेन, गस एटकिंसन, जोफ्रा आर्चर, साकिब महमूद, आदिल राशिद
क्या हैं AI डेटा सेंटर और क्यों हो रहा है इनका विरोध?
– विनम्र मिश्रा (डेटा इंजीनियर, मुंबई) पिछले कुछ वर्षों में दुनिया भर में जितनी चर्चा एआई (AI) यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) को लेकर हुई है, शायद ही किसी और तकनीक पर हुई हो। लेकिन बीते कुछ महीनों से डेटा सेंटर का विषय अधिक चर्चा में है, जिस पर आज की यह एआई तकनीक और इसका भविष्य टिका हुआ है। दुनिया भर में एआई डेटा सेंटरों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। लोगों का दावा है कि ये डेटा सेंटर पर्यावरण के लिए खतरा बनकर उभर रहे हैं। बीते कुछ महीनों में अमेरिका और यूरोप के कई देशों में डेटा सेंटर के विरोध में स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किए हैं। हाल ही में अमेरिकी संसद में सांसद अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज़ ने जॉर्जिया प्रांत के एक डेटा सेंटर के कारण स्थानीय लोगों को होने वाली समस्याओं को उजागर किया है। आइए, आज इस विषय को विस्तार से समझते हैं। क्या है डेटा सेंटर? डेटा सेंटर को आप एक ऐसे विशाल ढांचे या इमारत के रूप में देख सकते हैं, जहाँ हजारों सर्वर या कंप्यूटर रखे होते हैं। आप जिस भी एआई टूल का इस्तेमाल करते हैं, उसके पीछे का पूरा दिमाग इन्हीं सर्वर्स को समझिए। जाहिर है, दिमाग चलाने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ठीक उसी प्रकार, ये सर्वर भी भारी मात्रा में बिजली की खपत करते हैं। आज तेजी से काम करने वाले आधुनिक सुपरकंप्यूटर, जिन पर एआई काम करता है, वे आपके सामान्य कंप्यूटर से कई गुना अधिक ऊर्जा का इस्तेमाल करते हैं। जिस एआई तकनीक का आज हम उपयोग कर रहे हैं या आगे करेंगे, उसके लिए एक-दो नहीं, बल्कि सैकड़ों और हजारों सर्वर्स की जरूरत होती है। क्यों बढ़ रही है लोगों की चिंता? ये कंप्यूटर न केवल अत्यधिक ऊर्जा का इस्तेमाल करते हैं, बल्कि काम करते समय गर्मी (Heat) के रूप में भारी ऊर्जा बाहर भी निकालते हैं। यह बिल्कुल वैसे ही है, जैसे कुछ समय इस्तेमाल करने के बाद आपका कंप्यूटर या स्मार्टफोन थोड़ा गर्म हो जाता है। इसे आप स्कूल या कॉलेज की कंप्यूटर लैब के उदाहरण से भी समझ सकते हैं। कंप्यूटर लैब में जहाँ कई कंप्यूटर होते हैं, वहाँ उनसे निकलने वाली गर्मी इतनी अधिक हो सकती है कि वह कंप्यूटर के हार्डवेयर को नुकसान पहुँचा दे। इसीलिए कंप्यूटर लैब को हमेशा वातानुकूलित (Air Conditioned) रखा जाता है। इसी प्रकार, बड़े डेटा सेंटरों में इतनी भीषण गर्मी पैदा होती है कि वह सर्वर्स के हार्डवेयर को जलाकर नष्ट कर सकती है। ऐसे में उन्हें ठंडा रखना बेहद जरूरी होता है। डेटा सेंटर के स्तर पर केवल एयर कंडीशनर (एसी) का इस्तेमाल करने से बिजली की खपत बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। इसी कारण कई डेटा सेंटर कूलिंग (ठंडा करने) के लिए पानी का उपयोग करते हैं। सर्वर्स के रैक (जहाँ कई सारे सर्वर रखे होते हैं) के पास से पानी की पाइपलाइन गुजारी जाती है, जो गर्मी सोखती है और बाद में यह गर्म पानी भाप बनकर उड़ जाता है। डेटा सेंटरों को लगातार ठंडा रखने की इस प्रक्रिया में पानी की भारी बर्बादी होती है। उदाहरण के लिए, गूगल के डेटा सेंटरों द्वारा वर्ष 2022 में उपभोग किया गया 5.6 बिलियन गैलन (लगभग 2,120 करोड़ लीटर) पानी, भारत के किसी मध्यम आकार के शहर के लगभग 4.3 लाख लोगों की पूरे साल की पानी की जरूरत के बराबर है। ध्वनि प्रदूषण भी है एक बड़ी समस्या डेटा सेंटरों में बिजली और पानी की यह बेलगाम खपत कई जगहों पर स्थानीय लोगों के लिए सिरदर्द बन चुकी है। लोगों का विरोध है कि उनके हक का पानी और बिजली इन डेटा सेंटरों को दी जा रही है। लेकिन परेशानी सिर्फ यहीं खत्म नहीं होती; डेटा सेंटरों से निकलने वाली तेज आवाज (ध्वनि) भी एक बड़ी समस्या है। स्थानीय लोगों का कहना है कि डेटा सेंटरों से लगातार एक कम आवृत्ति वाली (Low-Frequency) भारी आवाज निकलती रहती है, जिससे आसपास के घरों में कंपन महसूस होता है। 'अमेरिकन पब्लिक हेल्थ एसोसिएशन' ने भी माना है कि ऐसी लो-फ्रीक्वेंसी ध्वनि लगातार 24 घंटे सुनने के कारण हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। आज दुनिया भर में जहाँ एआई पर लोगों की निर्भरता लगातार बढ़ती जा रही है और टेक कंपनियाँ तथा सरकारें एआई की इस अंधी दौड़ में भाग रही हैं, ऐसे में डेटा सेंटरों को लेकर आम जनता की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। लोगों की शिकायत बिल्कुल जायज है कि सरकारें और बड़ी कंपनियाँ विकास की आड़ में पर्यावरण के नियमों को नजरअंदाज कर रही हैं।
महाराष्ट्र के धुले में डीज़ल टैंकर में भीषण आग; सूरत-नागपुर हाईवे पर जाम
धुले। महाराष्ट्र में सूरत-नागपुर हाईवे पर नेर गांव के पास गुरुवार सुबह एक डीज़ल टैंकर में भीषण आग लग गई। अचानक लगी इस आग से राजमार्ग पर यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ। घटना की जानकारी मिलने पर धुले नगर निगम के अग्निशमन विभाग के कर्मचारियों ने आग बुझाने के लिए कड़ी मशक्कत की। लेकिन आग […] The post महाराष्ट्र के धुले में डीज़ल टैंकर में भीषण आग; सूरत-नागपुर हाईवे पर जाम appeared first on Sabguru News .
हनुमानगढ़ में बीएससी नर्सिंग छात्रा ने छत से कूद कर आत्महत्या की
हनुमानगढ़। राजस्थान में हनुमानगढ़ जंक्शन में परीक्षा परिणाम से निराशा और अवसाद में डूबी बीएससी नर्सिंग की 22 वर्षीय छात्रा ने छत से कूदकर आत्महत्या कर ली। यह घटना बुधवार शाम करीब साढ़े बजे हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में हुई, जहां वह अन्य छात्राओं के साथ पूजा जाट (22) किराए के मकान में रह रही थी। […] The post हनुमानगढ़ में बीएससी नर्सिंग छात्रा ने छत से कूद कर आत्महत्या की appeared first on Sabguru News .
सुरक्षा बलों ने मणिपुर में भारी मात्रा में हथियार बरामद किए, 9 अरेस्ट
इंफाल। मणिपुर में पुलिस और सुरक्षा बलों ने प्रदेश भर में कई अभियान चलाकर भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद करने के साथ ही आपराधिक, उग्रवाद से जुड़े और अन्य मामलों में नौ लोगों को गिरफ्तार किया है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक सुरक्षा बलों ने बुधवार को इंफाल पश्चिम जिले में वांगोई थाना क्षेत्र […] The post सुरक्षा बलों ने मणिपुर में भारी मात्रा में हथियार बरामद किए, 9 अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
'सब दिख रहा है...' जब सलमान खान के पकड़ लिया था सोनाक्षी सिन्हा-जहीर इकबाल का सीक्रेट रोमांस
बॉलीवुड की गलियारों में सितारों के लिंक-अप और ब्रेक-अप की खबरें आम हैं, लेकिन कुछ लव स्टोरीज ऐसी होती हैं जो सालों तक दुनिया की नजरों से छिपी रहती हैं। बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा और जहीर इकबाल की प्रेम कहानी भी कुछ ऐसी ही थी। दोनों ने शादी के बंधन में बंधने से पहले सालों तक अपने रिश्ते को मीडिया और फैंस से छुपाकर रखा। लेकिन सलमान खान की पारखी नजरों से सोनाक्षी और जहीर का इश्क छुप नहीं सका। हाल ही में नेहा धूपिया और अंगद बेदी के मशहूर चैट शो 'डबल डेट' में पहुंचे इस कपल ने अपनी लव लाइफ को लेकर कई दिलचस्प खुलासे किए। सोनाक्षी और जहीर ने बताया कि कैसे सलमान खान ने उनके रिश्ते को उस वक्त पहचान लिया था, जब वे खुद भी इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे। ALSO READ: 'बंटवारा 1947' के प्रमोशन के लिए आमिर खान प्रोडक्शंस का मेगा मिशन, 12 शहरों में पहुंचेगी पूरी टीम भाईजान ने दी थी 'ब्रेक-अप' की मजेदार चेतावनी चैट शो के दौरान जहीर इकबाल ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया, सलमान भाई ने हमें तब देख लिया था, जब हमने खुद एक-दूसरे को हां नहीं कहा था। उन्हें हमारे बताने से पहले ही सब कुछ पता चल चुका था। सोनाक्षी सिन्हा ने इस बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि वे दोनों हर बार सलमान के सामने अपने रिश्ते से मुकर जाते थे। सोनाक्षी ने हंसते हुए बताया, हमारे बीच एक अलग ही वाइब चल रही थी और सलमान भाई बिल्कुल भी बेवकूफ नहीं हैं। जब भी वो मुझसे पूछते, हम साफ मुकर जाते और कहते कि 'ऐसा कुछ नहीं है'। फिर एक दिन उन्होंने हमें एक बेहद मजेदार लेकिन हैरान करने वाली चेतावनी दी। सलमान खान ने कपल से कहा था: देखो, एक दिन तुम दोनों का ब्रेक-अप होगा। तू (सोनाक्षी) यहां आकर रोएगी और वह (जहीर) वहां जाकर रोएगा। मैं तुम दोनों से बहुत प्यार करता हूं और मैं किसी एक का पक्ष नहीं लेना चाहता। सलमान खान की यह बात सुनकर सोनाक्षी और जहीर पूरी तरह से सन्न रह गए थे क्योंकि भाईजान ने उनके छिपे हुए रिश्ते का पूरा फ्यूचर प्लान ही भांप लिया था। सोनाक्षी ने उस वाकये को भी याद किया जब सलमान खान ने आखिरकार उनके रिश्ते पर मुहर लगा दी थी। यह वाकया एक ट्रेकिंग ट्रिप के दौरान का है। सलमान खान अचानक जहीर के पास गए और बेहद कैजुअल अंदाज में सिर्फ तीन शब्द कहे— दिख रहा है सब। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें इन तीन शब्दों ने सोनाक्षी और जहीर को यह अहसास करा दिया कि अब छुपाने के लिए कुछ नहीं बचा है। सलमान खान ने उनकी बॉडी लैंग्वेज और केमिस्ट्री से सब कुछ समझ लिया था, जिसके बाद दोनों के पास इनकार करने का कोई रास्ता नहीं बचा था। दिलचस्प बात यह है कि सोनाक्षी और जहीर की इस खूबसूरत लव स्टोरी की शुरुआत भी सलमान खान की एक पार्टी से ही हुई थी। साल 2017 में पहली बार मुलाकात के बाद दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं। लगभग 7 सालों तक एक-दूसरे को डेट करने और अपने रिश्ते को पूरी तरह से प्राइवेट रखने के बाद, इस कपल ने 23 जून 2024 को 'स्पेशल मैरिज एक्ट' के तहत शादी कर ली।
बीकानेर के छत्तरगढ़ में परस्पर झगड़े में 3 लोगों की मौत, एक घायल
बीकानेर। राजस्थान में बीकानेर जिले के छत्तरगढ़ थाना क्षेत्र में गुरुवार को परस्पर झगड़े में तीन लोगों की मौत हाे गई, जबकि एक व्यक्ति घायल हो गया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि ग्राम पंचायत खारवाली के सुरजनवाली गांव में किसी लड़की के रिश्ते को लेकर हो रही पंचायत में दो पक्षों में कहासुनी हो गई, […] The post बीकानेर के छत्तरगढ़ में परस्पर झगड़े में 3 लोगों की मौत, एक घायल appeared first on Sabguru News .
केरल हाई कोर्ट ने केरल वक्फ बोर्ड के कामकाज को निलंबित किया
कोच्चि। केरल हाई कोर्ट ने केरल वक्फ बोर्ड के कामकाज को निलंबित करने का अंतरिम आदेश जारी किया है। भारतीय जनता पार्टी की केरल इकाई के उपाध्यक्ष एवं अधिवक्ता शॉन जॉर्ज द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया गया। अदालत ने प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता के इस तर्क को स्वीकार किया कि वर्तमान […] The post केरल हाई कोर्ट ने केरल वक्फ बोर्ड के कामकाज को निलंबित किया appeared first on Sabguru News .
'बंटवारा 1947' के प्रमोशन के लिए आमिर खान प्रोडक्शंस का मेगा मिशन, 12 शहरों में पहुंचेगी पूरी टीम
आमिर खान प्रोडक्शंस की सनी देओल स्टारर फिल्म 'बंटवारा 1947' को लेकर मेकर्स अब तक का सबसे बड़ा प्रमोशनल कैंपेन शुरू करने जा रहे हैं। फिल्म के प्रचार के लिए टीम देश के 12 बड़े शहरों का दौरा करेगी। इसे फिल्म का सबसे बड़ा सिटी टूर माना जा रहा है। खास बात यह है कि भारतीय सिनेमा में पहली बार किसी फिल्म के लिए इतने बड़े स्तर पर 12 शहरों का प्रमोशनल टूर किया जा रहा है, जिससे दर्शकों के बीच फिल्म को लेकर एक्साइटमेंट और भी बढ़ गई है। ALSO READ: 'फौजी' से प्रभास का खतरनाक लुक आया सामने, इस दिन सिनेमाघरों में धमाका करेगी फिल्म 'बंटवारा 1947' के साथ यह चर्चित थिएटर मास्टरपीस अब बड़े पर्दे पर एक भव्य अंदाज में आने के लिए तैयार है। जिस कहानी को पाकिस्तान में कथित तौर पर बैन बताया जाता है, उसे एक बड़ी फिल्म के रूप में पेश किया जा रहा है, जिससे इसे लेकर लोगों की उत्सुकता और भी बढ़ गई है। यही वजह है कि यह आने वाले समय की सबसे चर्चित ऐतिहासिक फिल्मों में से एक बन गई है। फिल्म में सनी देओल, शबाना आजमी, प्रीति जी जिंटा, करण देओल, अली फजल, अभिमन्यु सिंह, खुशी हजारे और कनिका कपूर अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी 'बंटवारा 1947' का निर्देशन राजकुमार संतोषी ने किया है। फिल्म का संगीत ए. आर. रहमान ने दिया है, जबकि इसके गाने जावेद अख्तर ने लिखे हैं। फिल्म को आमिर खान और अपर्णा पुरोहित ने प्रोड्यूस किया है और यह 14 अगस्त 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने 'सतलुज' फिल्म विवाद, जसवंत सिंह खालड़ा, सीबीएफसी की आपत्तियों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर संवैधानिक दृष्टि से अपनी राय रखी है
भीलवाड़ा : रिश्वत लेने के दोषी तत्कालीन एएसआई को 4 वर्ष का कठोर कारावास
भीलवाड़ा। राजस्थान में भीलवाड़ा के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के विशेष न्यायालय ने रिश्वत लेने के आरोपी तत्कालीन सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) को गुरुवार को दोषी करार देते हुए चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। विशिष्ट न्यायाधीश पवन कुमार सिंघल ने अभियुक्त तत्कालीन सहायक उप निरीक्षक कालूराम कहार को रिश्वत लेने का दोषी […] The post भीलवाड़ा : रिश्वत लेने के दोषी तत्कालीन एएसआई को 4 वर्ष का कठोर कारावास appeared first on Sabguru News .
भरतपुर : शिक्षक के खिलाफ स्कूल में 8 साल की बालिका से छेडछाड़ करने का केस दर्ज
भरतपुर। राजस्थान में भरतपुर के एक सरकारी स्कूल में पदस्थ 58 वर्षीय एक अध्यापक पर कक्षा तीन में अध्ययनरत आठ वर्ष की छात्रा को सुनसान कमरे में ले जाकर छेड़छाड़ करने का मामला सामने आया है। पुलिस सूत्रों ने गुरुवार को बताया कि आरोपी अध्यापक के खिलाफ मामला दर्ज करके बालिका के अदालत में बयान […] The post भरतपुर : शिक्षक के खिलाफ स्कूल में 8 साल की बालिका से छेडछाड़ करने का केस दर्ज appeared first on Sabguru News .
ईरान : बच्चों के कैंसर अस्पताल के पास अमरीकी हमला, स्थानांतरित किये गये 211 मरीज
तेहरान। ईरान के दक्षिण-पश्चिमी शहर अहवाज़ स्थित शहीद बाघाई बाल कैंसर अस्पताल के निकट अमरीकी मिसाइल हमलों के बाद अस्पताल में भर्ती 211 बच्चों को एहतियातन अन्य चिकित्सा केंद्रों में स्थानांतरित कर दिया गया। ईरानी समाचार एजेंसी फ़ार्स के अनुसार बुधवार को हुए अमरीकी हमलों के दौरान बच्चों के इस अस्पताल के आसपास कई मिसाइलें […] The post ईरान : बच्चों के कैंसर अस्पताल के पास अमरीकी हमला, स्थानांतरित किये गये 211 मरीज appeared first on Sabguru News .
वेस्टइंडीज को बदहाल क्रिकेट को सुधारने के लिए मिली 1.28 करोड़ डॉलर की बड़ी राशि
अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) द्वारा घोषित अभिशासन, सदस्यता और सदस्यों की सहायता में में बदलावों के तहत कैरिबियाई क्रिकेट को लोन मिलेगा। एडिनबर्ग में हुई सिलसिलेवार वार्षिक बैठक के बाद सदस्यों से जुड़े कई फ़ैसले लिए गए, जिनमें वेस्टइंडीज़ क्रिकेट को आर्थिक मदद देना भी शामिल रहा। अफ्रीकी देश मॉरिशस को ICC का 111वां मेंबर बनाया गया है, जिससे इसके 12 स्थायी सदस्य और 98 अन्य एसोसिएट सदस्य की संख्या में इज़ाफ़ा हुआ है। इसके अलावा, ICC ने घोषणा की कि क्रिकेट कनाडा के लिए बहाली की शर्तें मंज़ूर कर ली गई हैं; इस बोर्ड पर लगे मौजूदा निलंबन को हटाने से पहले इन शर्तों को पूरा करना ज़रूरी है। वहीं दूसरी ओर ICC को श्रीलंका क्रिकेट से संशोधित संविधान के बारे में अपडेट मिला है। फ़िलहाल, चुनाव होने तक श्रीलंका क्रिकेट ICC बोर्ड की बैठकों में प्रतिनिधित्व नहीं कर पाएगा। इस बीच, ICC सदस्यता मानदंड का उल्लंघन करने के कारण फ़्रांस क्रिकेट को नोटिस दिया गया है। वेस्टइंडीज़ क्रिकेट के लिए समर्थन ICC ने क्रिकेट वेस्टइंडीज़ को समर्थन के तौर पर 1.28 करोड़ डॉलर का लोन दिया है। यह बोर्ड, जो कई सालों से आर्थिक मुश्किलों का सामना कर रहा है, आईसीसी से मदद की मांग करता रहा है। यह बात समय-समय पर कई पूर्व क्रिकेटरों ने भी उठाया है। 30 सितंबर, 2025 को समाप्त हुए साल के वित्तीय विवरण के अनुसार, CWI को 28 मिलियन डॉलर का शुद्ध घाटा हुआ, जबकि पिछले साल उसे 24 मिलियन डॉलर का शुद्ध लाभ हुआ था। 2026 चक्र में 26 मिलियन डॉलर के लॉस के अनुमान के साथ, CWI के स्टेटमेंट में अनुदान की कमी को पूरा करने के लिए ICC से Loan Financing और Commercial Banking क्रेडिट सुविधाओं का ज़िक्र किया गया था। अब यह हकीकत बन गया है। इससे पहले 2012 में, तत्कालीन वेस्टइंडीज़ क्रिकेट बोर्ड को ज़िम्बाब्वे के साथ ICC से सहायता फ़ंडिंग मिली थी। 2020 में, COVID-19 महामारी के दौरान, क्रिकेट वेस्टइंडीज़ को ECB से 3 मिलियन अमेरिकी डॉलर का लोन मिला था, जिसे समय पर चुका दिया गया।
सीक्विन लहंगे में वाणी कपूर का स्टनिंग अवतार, तस्वीरें देख फैंस हुए दीवाने
बॉलीवुड की सबसे फिट और ग्लैमरस अभिनेत्रियों में से एक, वाणी कपूर अक्सर अपने फैशन सेंस से लोगों को हैरान कर देती हैं। हाल ही में उन्होंने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर कुछ तस्वीरें पोस्ट की हैं, जिसमें उनका अब तक का सबसे बोल्ड और एलीगेंट रूप देखने को मिल रहा है। तस्वीरों में वाणी कपूर ने एक शानदार को-ऑर्ड स्टाइल या मॉडर्न लहंगे को कैरी किया है, जो न्यूड-रोज गोल्ड या मैटेलिक टोन में है। इसके साथ उन्होंने एक डीपनेक चोली कैरी की है। ALSO READ: ब्लैक लहंगे में जाह्नवी कपूर का कातिलाना अंदाज, डीप-नेक ब्लाउज ने लूटी महफिल वाणी की चोली में एक प्लंजिंग डीप नेकलाइन है, जिसे एक मैचिंग एम्बेलिश्ड चोकर कॉलर नेकलाइन के साथ जोड़ा गया है। यह ब्लाउज पूरी तरह से चमकीले सीक्विंस, बीड्स और क्रिस्टल वर्क से सजा हुआ है, जो उनके टोंड मिड्रिफ को बखूबी फ्लॉन्ट कर रहा है। इसके साथ उन्होंने मैचिंग मरमेड-कट स्टाइल वाली फिटेड स्कर्ट पहनी है, जिस पर वर्टिकल सीक्विंस की स्ट्राइप्स बनी हैं जो बॉडी को बेहद अट्रैक्टिव शेप दे रही हैं। साथ में अटैच्ड केप या फ्लोइंग मैचिंग शीयर दुपट्टा उनके लुक में एक रॉयल और ड्रामा टच जोड़ रहा है। वाणी ने अपने लुक को कॉम्प्लीमेंट करने के लिए बालों को सॉफ्ट और वोल्यूमिनस वेव्स में खुला रखा है। उन्होंने ग्लॉसी मेकअप के साथ अपना लुक कम्प्लीट किया है। तस्वीरों में वाणी एक से बढ़कर एक अंदाज में पोज देती नजर अा रही हैं। वाणी ने कहीं विंटेज हॉलीवुड ग्लैम वाइब्स देते हुए अपनी आँखें बंद की हैं, तो कहीं कैमरे की तरफ बेहद इंटेंस और कॉन्फिडेंट लुक में देख रही हैं। उनकी मिलियन-डॉलर की मुस्कान भी एक तस्वीर में फैंस का दिल जीत रही है।
वीडियो वायरल होने के बाद रिश्वत के आरोप में टीवीके पदाधिकारी अरेस्ट
चेन्नई। भ्रष्टाचार के प्रति सख्त रुख का संदेश देते हुए तमिलनाडु पुलिस ने सत्ताधारी तमिलगा वेट्री कषगम (टीवीके) के एक पदाधिकारी को 1.30 लाख रुपए की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी तब हुई जब इस मामले से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के […] The post वीडियो वायरल होने के बाद रिश्वत के आरोप में टीवीके पदाधिकारी अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
मिर्जापुर : टायर फटने से बेकाबू ट्रक घर में घुसा, मां-बेटे समेत 3 की मौत
मिर्जापुर। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के अहरौरा थाना क्षेत्र में बुधवार को टायर फटने से अनियंत्रित हुआ एक ट्रक घर में घुस गया, जिससे मां-बेटे समेत तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने पुलिस वाहन में तोड़फोड़ की। स्थिति को […] The post मिर्जापुर : टायर फटने से बेकाबू ट्रक घर में घुसा, मां-बेटे समेत 3 की मौत appeared first on Sabguru News .
हैप्पी बर्थडे : 43 वर्ष की हुईं अभिनेत्री कैटरीना कैफ
मुंबई। बॉलीवुड की जानीमानी अभिनेत्री कैटरीना कैफ आज 43 वर्ष की हो गईं।16 जुलाई 1983 को हांगकांग में जन्मी कैटरीना कैफ का मूल नाम कैटरीना टॉरकेटी है। उन्होंने 14 वर्ष की उम्र में मॉडलिंग से अपने करियर की शुरुआत की। मॉडलिंग के उद्देश्य से वह मुंबई आईं, जहां उनकी मुलाकात फिल्म निर्देशक कैजाद गुस्ताद से […] The post हैप्पी बर्थडे : 43 वर्ष की हुईं अभिनेत्री कैटरीना कैफ appeared first on Sabguru News .
जन्मदिन पर परिवार संग समय बिताएंगी अभिनेत्री आमना शरीफ
मुंबई। अभिनेत्री आमना शरीफ इस वर्ष अपना जन्मदिन किसी भव्य पार्टी के बजाय परिवार और करीबी दोस्तों के साथ सादगीपूर्ण ढंग से मनाएंगी। आमना का कहना है कि उनके लिए सबसे बड़ा उपहार अपनों का साथ और उनके साथ बिताया गया गुणवत्तापूर्ण समय है। आमना शरीफ ने कहा कि हर जन्मदिन उन्हें यह एहसास कराता […] The post जन्मदिन पर परिवार संग समय बिताएंगी अभिनेत्री आमना शरीफ appeared first on Sabguru News .
'सतलुज' के लिए दिलजीत दोसांझ ने ली सिर्फ 1 रुपये फीस, डायरेक्टर हनी त्रेहान ने बताई वजह
पंजाबी सिंगर-एक्टर दिलजीत दोसांझ इन दिनों अपनी फिल्म 'सतलुज' को लेकर लगातार सुर्खियों में हैं। यह फिल्म रिलीज के साथ ही विवादों के घेरे में आ गई। पहले सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन के साथ इसका लंबा विवाद चला और फिर ओटीटी प्लेटफॉर्म ज़ी5 पर रिलीज होने के महज 48 घंटों के भीतर इसे चुपचाप हटा दिया गया। 'सतलुज' को लेकर चल रहे विवाद के बीच एक ऐसी बात सामने आई है जिसने फैंस का दिल जीत लिया है। फिल्म के डायरेक्टर हनी त्रेहान ने हाल ही में एक इंटरव्यू में खुलासा किया है कि इस ऐतिहासिक और संवेदनशील किरदार को निभाने के लिए दिलजीत दोसांझ ने सिर्फ 1 रुपये फीस ली थी। ALSO READ: कैटरीना कैफ के नाम के पीछे छिपी है दिलचस्प कहानी, आयशा श्रॉफ ने बदली थी पहचान डायरेक्टर हनी त्रेहान ने कहा कि वह इस फिल्म में किसी मुख्यधारा के बॉलीवुड अभिनेता को नहीं लेना चाहते थे। उन्होंने कहा, अगर दिलजीत इस फिल्म में नहीं होते, तो शायद यह प्रोजेक्ट कभी हकीकत नहीं बन पाता। मुझे एक ऐसा अभिनेता चाहिए था जो पंजाब की मिट्टी और उस दौर के दर्द को गहराई से समझता हो। उन्होंने कहा, मैं किसी सरदार अभिनेता को ही कास्ट करना चाहता था, क्योंकि अगर मैं किसी बॉलीवुड एक्टर को लेता, तो लोगों का ध्यान कहानी से हटकर इस बात पर चला जाता कि 'यह अभिनेता सरदार का रोल कर रहा है।' यह जसवंत सिंह खालड़ा साहब के संघर्ष और उन लोगों के दर्द के साथ नाइंसाफी होती, जिनकी कहानी यह फिल्म बयां करती है। स्क्रिप्ट देखते ही दिलजीत ने जोड़ लिए थे हाथ हनी त्रेहान ने साल 2021 का एक किस्सा साझा करते हुए बताया कि जब वह पहली बार दिलजीत से मिले, तो वह सिर्फ 30 मिनट की मुलाकात थी। जैसे ही उन्होंने दिलजीत को जसवंत सिंह खालड़ा की तस्वीर दिखाई और रिसर्च डॉक्यूमेंट्स सौंपे, दिलजीत हैरान रह गए। ALSO READ: Satluj Review: पंजाब की उपजाऊ जमीन में दबी लाशों की वो खौफनाक कहानी, जिसे देख कांप जाएगी रूह! त्रेहान ने याद करते हुए बताया, दिलजीत अपनी कुर्सी से खड़े हो गए, स्क्रिप्ट को अपने माथे से लगाया और कहा— 'वाहेगुरु'। उन्होंने कहा कि खालड़ा साहब जैसे महान इंसान का किरदार निभाने के लिए मैं पैसे कैसे ले सकता हूं? यह बेहद शर्मनाक होगा। हालांकि, जब डायरेक्टर ने कागजी कार्रवाई और कॉन्ट्रैक्ट की औपचारिकता के लिए जोर दिया, तो दिलजीत ने कहा कि अगर देना ही है, तो मुझे सिर्फ 1 रुपये का भुगतान कर दीजिए। सेट पर दिखाते थे गजब का समर्पण फिल्म की शूटिंग के दौरान दिलजीत के सपोर्ट की तारीफ करते हुए डायरेक्टर ने बताया कि कई बार शेड्यूल पूरी तरह बिगड़ जाता था। उन्होंने कहा, कई ऐसे दिन थे जब दिलजीत सुबह 6 बजे सेट पर आ जाते थे, लेकिन काम की व्यस्तता या दिक्कतों के कारण उनका पहला शॉट शाम 4 बजे तक भी नहीं हो पाता था। मैं उनसे बार-बार माफी मांगता था, लेकिन वह हर बार मुस्कुराकर कहते थे— 'पाजी, कोई बात नहीं। आप जो भी कर रहे हैं, फिल्म की भलाई के लिए कर रहे हैं। मैं यहां फिल्म को सपोर्ट करने आया हूं।' कौन थे जसवंत सिंह खालड़ा? यह फिल्म पंजाब के मशहूर मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन पर आधारित है। 1990 के दशक के मध्य में, एक बैंक क्लर्क से मानवाधिकार कार्यकर्ता बने खालड़ा ने पंजाब में 1984 से 1994 के बीच मारे गए और लावारिस बताकर जलाए गए लगभग 25,000 लोगों के शवों के सच को उजागर किया था। उनकी इस बहादुरी और जांच के बाद, 1995 में पुलिस हिरासत के दौरान उनका अपहरण कर लिया गया और उनकी हत्या कर दी गई, जिसकी पुष्टि बाद में अदालती फैसले में भी हुई।
अजमेर में बांग्लादेशी महिला को हिरासत में लिया गया
अजमेर। राजस्थान के अजमेर में पुलिस ने एक बांग्लादेशी महिला को हिरासत में लिया हैं और उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस मुख्यालय के निर्देशानुसार राज्यभर में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी एवं रोहिंग्या घुसपैठियों की पहचान एवं निष्कासन के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस को यह महत्वपूर्ण सफलता […] The post अजमेर में बांग्लादेशी महिला को हिरासत में लिया गया appeared first on Sabguru News .
निर्यात वाले डीजल पर उत्पाद शुल्क सात रुपए बढ़ा, पेट्रोल पर 1.5 रुपए की कटौती
नई दिल्ली। सरकार ने निर्यात किये जाने वाले पेट्रोल, डीजल और विमान ईंधन (एटीएफ) पर उत्पाद शुल्क की दरों में बदलाव किया है। वित्त मंत्रालय की बुधवार देर रात जारी अधिसूचना के मुताबिक नई दरें 16 जुलाई जुलाई से प्रभावी हो गई हैं। निर्यात वाले डीजल और एटीएफ पर उत्पाद शुल्क सात-सात रुपए प्रति लीटर […] The post निर्यात वाले डीजल पर उत्पाद शुल्क सात रुपए बढ़ा, पेट्रोल पर 1.5 रुपए की कटौती appeared first on Sabguru News .
एक सोशल मीडिया मैसेज से शुरू हुई थी प्रियंका चोपड़ा-निक जोनस की प्रेम कहानी, सामने आई पहली चैट
ग्लोबल आइकॉन प्रियंका चोपड़ा और हॉलीवुड सिंगर निक जोनस की जोड़ी दुनिया भर में पसंदीदा जोड़ियों में से एक है। दोनों की शादी को 8 साल हो चुके हैं और वे अपनी बेटी मालती मैरी चोपड़ा जोनस के साथ एक खुशहाल जिंदगी बिता रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस खूबसूरत प्रेम कहानी की शुरुआत एक बेहद साधारण सोशल मीडिया DM से हुई थी? हाल ही में प्रियंका चोपड़ा जोनस ब्रदर्स के ऑफिशियल पॉडकास्ट पर मेहमान बनकर पहुंचीं। इस दौरान निक जोनस ने अपनी लव स्टोरी के शुरुआती दिनों को याद किया और उस पहले मैसेज का खुलासा किया, जिसने उनके बीच प्यार की चिंगारी सुलगाई थी। ALSO READ: 'हैवान' से सामने आया अक्षय कुमार और सैफ अली खान का फर्स्ट लुक, इस दिन सिनेमाघरों में दस्तक देगी फिल्म भाई केविन की वजह से मिला था प्रियंका का सुराग पॉडकास्ट के दौरान निक जोनस ने बताया कि प्रियंका चोपड़ा से उनका पहला परिचय उनके बड़े भाई केविन जोनस की वजह से हुआ था। निक ने कहा, केविन ने मुझसे आकर कहा कि क्या तुमने एबीसी का शो 'क्वांटिको' देखा है? मैंने कहा कि नहीं, मैंने नहीं देखा। जब वह इस शो के बारे में बात कर ही रहा था, तभी मैंने सनसेट बुलेवार्ड की तरफ देखा और वहां प्रियंका के चेहरे का एक बड़ा सा बिलबोर्ड लगा हुआ था। निक ने आगे बताया कि इसके तुरंत बाद वह ट्विटर (अब X) पर गए और चेक किया कि क्या प्रियंका उन्हें फॉलो करती हैं। किस्मत से प्रियंका उन्हें फॉलो कर रही थीं और निक ने बिना देर किए उन्हें एक डायरेक्ट मैसेज भेज दिया। इस पर प्रियंका ने हंसते हुए कहा, 'यह बेहद अजीब कहानी है क्योंकि केविन और मेरी पसंद के शोज हमेशा एक जैसे होते हैं, जबकि निक और मुझे कभी एक जैसे शोज पसंद नहीं आते।' पॉडकास्ट में उस वक्त एक मजेदार मोड़ आया जब स्क्रीन पर निक और प्रियंका की पुरानी चैट का स्क्रीनशॉट फ्लैश हुआ। निक के भाई जो और केविन जोनास ने इस चैट को बेहद ड्रामेटिक अंदाज में पढ़कर सुनाया। निक का पहला मैसेज था: हेलो, मैंने कुछ लोगों से सुना है कि हमें मिलना चाहिए। मैं उन लोगों की बात से पूरी तरह सहमत हूं। क्या तुम जल्द ही लॉस एंजिल्स आ रही हो? इस पर प्रियंका चोपड़ा का स्मार्ट जवाब था: हे, ग्राहम ने मुझे तुम्हारे बारे में बहुत कुछ बताया है। चलो फोन पर टेक्स्ट करते हैं। वह ज्यादा प्राइवेट रहेगा, क्योंकि इस अकाउंट को मेरी टीम भी एक्सेस कर सकती है। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें जब जो और केविन इस चैट को जोर-जोर से पढ़ रहे थे, तो निक और प्रियंका अपनी हंसी नहीं रोक पा रहे थे। दोनों कैमरे के सामने काफी शर्माए और एक-दूसरे का हाथ थामे हुए थोड़े झेंपते नजर आए। बता दें कि प्रियंका और निक की पहली बातचीत सोशल मीडिया के जरिए 2016 में शुरू हुई। करीब एक साल तक केवल चैटिंग करने के बाद, दोनों पहली बार 2017 में वैनिटी फेयर ऑस्कर आफ्टर-पार्टी में आमने-सामने मिले। इसी साल दोनों ने मेट गाला के रेड कार्पेट पर साथ वॉक किया, जिससे अफेयर की खबरें तेज हो गईं। 2018 में निक ने प्रियंका को प्रपोज किया और दिसंबर 2018 में उदयपुर के उम्मेद भवन पैलेस में दोनों ने हिंदू और क्रिश्चियन रीति-रिवाजों से बेहद ग्रैंड शादी कर ली। 2022 में सरोगेसी के जरिए दोनों के घर नन्ही परी मालती मैरी का जन्म हुआ। वर्क फ्रंट की बात करें तो प्रियंका चोपड़ा के भारतीय फैंस के लिए एक बड़ी खुशखबरी है। प्रियंका पूरे 8 साल बाद भारतीय सिनेमा में वापसी करने जा रही हैं। वह अपनी अपकमिंग फिल्म 'वाराणसी' को लेकर काफी चर्चा में हैं।
149वीं अहमदाबाद रथयात्रा विशेष : क्यों 15 दिनों तक बीमार रहते हैं भगवान और क्या है सरसपुर का नाता?
Lord Jagannath Rath Yatra : जगन्नाथपुरी के बाद देश की दूसरी सबसे बड़ी भगवान जगन्नाथ की 149वीं ऐतिहासिक और पौराणिक रथयात्रा आज 16 जुलाई, गुरुवार को अहमदाबाद में संपन्न हुई। सुबह 4 बजे भगवान जगन्नाथ की मंगला आरती हुई, जिसमें केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह परिवार सहित शामिल हुए। मंगला आरती के बाद भगवान को विशेष खिचड़ा का भोग लगाया गया। भगवान जगन्नाथ, भाई बलराम और बहन सुभद्राजी को रथ में विराजमान कराने के बाद मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने पारंपरिक 'पहिंद' विधि कर रथयात्रा को प्रस्थान कराया। ‘नंदीघोष’ रथ में विराजकर भगवान जगन्नाथजी नगरचर्या के लिए निकले हैं। उनके साथ ‘दर्पदलन’ रथ में बहन सुभद्राजी और ‘तालध्वज’ रथ में भाई बलभद्रजी भी हैं। भगवान भक्तों के द्वार तक पहुंच रहे हैं और भक्त भी भगवान के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में उमड़ पड़े हैं। विभिन्न थीम पर तैयार की गई हैं झांकियां अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथजी की 149वीं रथयात्रा भव्य रूप से आगे बढ़ रही है। शहर के विभिन्न इलाकों में भक्त भगवान के दर्शन के लिए उमड़ रहे हैं और पूरा शहर भक्तिमय माहौल में रंग गया है। इस साल रथयात्रा में विभिन्न थीम पर तैयार किए गए झांकियों ने सबका विशेष ध्यान खींचा है। धार्मिक और सांस्कृतिक संदेश देने वाले ये झांकियां भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हैं। द्वारका मंदिर की थीम पर तैयार झांकियां रथयात्रा में खास तौर पर द्वारका मंदिर की थीम पर तैयार किया गया झांकी लोगों को बहुत पसंद आ रहा है। इस झांकी में भगवान श्रीकृष्ण का रूप धारण किए हुए कलाकार भक्तों को प्रसादी का वितरण करते नजर आए। भगवान श्रीकृष्ण के वेश में कलाकारों ने भक्तों के साथ संवाद स्थापित कर पूरे माहौल को और भी भक्तिमय बना दिया। रास्ते के दोनों तरफ खड़े भक्तों ने भी इस अनोखे झांकी का हर्षोल्लास से स्वागत किया। कॉर्पोरेशन द्वारा आवश्यक सभी तैयारियां मेयर हितेश बारोट ने आगे बताया कि भगवान के नगरचर्या के लिए कॉर्पोरेशन द्वारा आवश्यक सभी तैयारियां की गई हैं। रथयात्रा मार्ग पर भक्तों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए सुनियोजित व्यवस्था की गई है। विभिन्न विभागों की टीमें लगातार काम कर रही हैं ताकि भगवान के रथ आसानी से आगे बढ़ सकें और लाखों भक्तों को बिना किसी असुविधा के दर्शन का लाभ मिल सके। भक्तिमय माहौल, विभिन्न थीम के आकर्षक झांकियां, द्वारका मंदिर की झांकी, भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप में प्रसादी का वितरण और AMC पर भगवान के भव्य स्वागत की तैयारियों के बीच अहमदाबाद में भगवान जगन्नाथजी की 149वीं रथयात्रा श्रद्धा, परंपरा और उत्साह के साथ आगे बढ़ रही है। रथयात्रा की शोभा बढ़ाएंगे सजे हुए हाथी: 18 101 थीम आधारित ट्रक अखाड़ा: 30 भजन मंडली: 18 बैंडबाजा वाले: 3 देश भर से साधु-संत: 2500 खलासी भाई, जो रथ खींचेंगे: 1000 से 1200 रथयात्रा में इस प्रसादी का वितरण होगा 45 हजार किलो मूंग 500 किलो जामुन 500 किलो आम 400 किलो ककड़ी-अनार 2 लाख उपेरणां रथयात्रा की अभेद्य सुरक्षा 10 IG DIG 30000 पुलिस जवान 26 पुलिस रेंज 1397 पुलिस पॉइंट्स 100 ड्रोन 42 DCP 88 ACP 800 PI यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि आस्था, परंपरा, इतिहास और मानव समानता का जीवंत प्रतीक है। हर साल लाखों भक्त न सिर्फ भगवान के दर्शन करने, बल्कि रथ की रस्सी खींचने का पुण्य पाने के लिए भी पुरी पहुंचते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हर साल नए रथ ही क्यों बनाए जाते हैं? भगवान 15 दिनों तक दर्शन क्यों नहीं देते? पत्नी लक्ष्मीजी क्यों नाराज हो जाती हैं? और आखिरकार पुरी की रथयात्रा ही विश्वभर में सबसे खास क्यों मानी जाती है? भगवान हर साल मौसी के घर क्यों जाते हैं? सबसे प्रचलित मान्यता के अनुसार, भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा हर साल नौ दिनों के लिए अपनी मौसी के घर यानी सरसपुर स्थित मौसी के घर जाते हैं। कुछ धार्मिक ग्रंथों में सरसपुर को भगवान का जन्मस्थान भी माना जाता है। भगवान वहां सात दिन रुकते हैं और मौसी के हाथों बने भोजन का प्रसाद ग्रहण करते हैं। भगवान खुद भक्तों तक आते हैं जगन्नाथ मंदिर की एक विशेषता यह है कि यहां गैर-हिंदुओं को प्रवेश नहीं मिलता है। इसलिए रथयात्रा का सबसे बड़ा महत्व यह है कि भगवान खुद अपने गर्भगृह से बाहर आकर हर भक्त को दर्शन देते हैं। यह यात्रा यह संदेश देती है कि भगवान के लिए कोई जाति, वर्ण या समाज का भेदभाव नहीं है। रथ के दर्शन से क्या मिलता है? धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान के रथ के सिर्फ दर्शन करने से भी पापों का नाश होता है। 'वामदेव संहिता' के मुताबिक, जो भक्त एक सप्ताह तक भगवान के दर्शन करता है, उसे अपने पूर्वजों के साथ वैकुंठ में स्थान मिलता है। भगवान 15 दिनों तक बीमार क्यों पड़ते हैं? रथयात्रा से पहले स्नान पूर्णिमा के दिन भगवान का 108 कलश के पवित्र जल से अभिषेक किया जाता है। मान्यता के अनुसार, इसके बाद भगवान अस्वस्थ हो जाते हैं और लगभग 14 से 15 दिनों तक 'अणसर घर' में आराम करते हैं। इस दौरान भक्तों को भगवान के दर्शन नहीं होते हैं। जब भगवान पूरी तरह स्वस्थ होते हैं तो भक्तों को दर्शन देने निकलते हैं।
आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की तृतीय देवी माता त्रिपुर सुंदरी, जानिए पूजा विधि
Gupt Navratri Third Goddess Worship: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि के तीसरे दिन तृतीय महाविद्या माता त्रिपुर सुंदरी (षोडशी महाविद्या) की साधना की जाती है। इन्हें मां ललिता या राजराजेश्वरी भी कहा जाता है। तंत्र शास्त्र में मां त्रिपुर सुंदरी को साक्षात् ब्रह्मांड की अधिष्ठात्री देवी माना गया है। ALSO READ: Ashadha Gupt Navratri 2026: आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि पर व्रत करने के 5 खास नियम और फायदे 'त्रिपुर' का अर्थ है तीनों लोक यानी आकाश, पाताल और धरती या तीनों गुण- सत्व, रज, तम- और मां इन सबमें सबसे सुंदर और सर्वोच्च हैं। त्रिपुर सुंदरी का स्वरूप दिव्य और सौम्य हैं। वे सिंह के आसन पर विराजमान हैं, उनके हाथों में पाश, अंकुश, धनुष और बाण हैं, जो मन और इंद्रियों को नियंत्रण में रखने के प्रतीक हैं। मां त्रिपुर सुंदरी की साधना जीवन में परम आनंद, ऐश्वर्य, सौंदर्य, और मोक्ष की प्राप्ति के लिए की जाती है। वे साधक के जीवन से दरिद्रता और दुखों का पूरी तरह नाश कर देती हैं। मां त्रिपुर सुंदरी की साधना का महत्व भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति: आमतौर पर साधनाओं में या तो सांसारिक सुख (भोग) मिलता है या आध्यात्मिक उन्नति (मोक्ष)। लेकिन मां त्रिपुर सुंदरी की साधना ऐसी है जो साधक को इस संसार के सभी भौतिक सुख-ऐश्वर्य भी देती है और अंत में मोक्ष का मार्ग भी प्रशस्त करती है। गृहस्थ जीवन में सुख: जो लोग पारिवारिक समस्याओं या दांपत्य जीवन में तनाव से जूझ रहे हैं, उनके लिए मां ललिता की पूजा अत्यंत शांतिदायक होती है। शारीरिक और मानसिक सौंदर्य: इनकी कृपा से साधक का व्यक्तित्व आकर्षक होता है, वाणी में मधुरता आती है और आत्मविश्वास बढ़ता है। मां त्रिपुर सुंदरी की सात्विक पूजा विधि गुप्त नवरात्रि के तीसरे दिन माता की आराधना अत्यंत पवित्र मन और सुंदर सामग्रियों के साथ की जाती है। इसकी पूजा विधि इस प्रकार है: पवित्रता और सुंदर वस्त्र प्रातः काल या संध्या काल में स्नानादि से निवृत्त होकर लाल, पीले या गुलाबी रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें। चूंकि मां सौंदर्य की देवी हैं, इसलिए पूजा स्थान को भी फूलों और रंगोली से सुंदर तरीके से सजाएं। ALSO READ: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि 2026: 9 दिनों में किस देवी की करें पूजा? जानें हर दिन का महत्व और लाभ यंत्र या चित्र की स्थापना एक चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर मां त्रिपुर सुंदरी का चित्र स्थापित करें। यदि आपके पास श्रीयंत्र है, तो उसे अवश्य स्थापित करें, क्योंकि मां ललिता साक्षात् श्रीयंत्र में वास करती हैं। सामग्री और श्रृंगार माता को अक्षत, कुमकुम, चंदन और लाल रंग की सामग्रियां- जैसे लाल रंग के पुष्प, गुलाब या लाल कनेर अर्पित करें। मां को सुहाग की सामग्रियां- चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर चढ़ाना अत्यंत शुभ माना जाता है। घी का दीपक और सुगंधित धूप जलाएं। मंत्र जाप और ललिता सहस्रनाम फिर मां के सम्मुख बैठकर एकाग्र मन से रुद्राक्ष या स्फटिक की माला से उनके विशेष मंत्रों का जाप करें। इस दिन 'ललिता सहस्रनाम' या 'ललिता त्रिशती' का पाठ करना अद्भुत फल देता है। मां त्रिपुर सुंदरी के सिद्ध मंत्र मां त्रिपुर सुंदरी की कृपा के लिए इस सरल मंत्र का जाप किया जा सकता है: 'ॐ ऐं ह्रीं श्रीं त्रिपुर सुंदर्यै नमः'। तथा तंत्र साधना में उनका सबसे प्रसिद्ध तीन अक्षरों का बीज मंत्र 'ॐ ऐं क्लीं सौः है। भोग, आरती और समर्पण मां को पूर्ण श्रद्धा के साथ पंचामृत, मखाने की खीर या सफेद रंग की मिठाइयों का भोग लगाएं। इसके बाद मां की आरती गाएं और सुखी व समृद्ध जीवन की प्रार्थना करते हुए पूजा संपन्न करें। शास्त्रों के अनुसार इनकी कृपा से साधक को सांसारिक सुखों के साथ-साथ आत्मिक उन्नति भी प्राप्त होती है। तंत्र साधना में माता त्रिपुर सुंदरी का स्थान अत्यंत उच्च माना गया है और गुप्त नवरात्रि के दौरान इनकी पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ALSO READ: Gupt Navratri 2026: आषाढ़ माह की गुप्त नवरात्रि कब से कब तक रहेगी?
कैसे पारदर्शी होगा मंदिरों के चढ़ावे का प्रबंधन
भारत के कई मंदिरों के चढ़ावे में कथित हेराफेरी के आरोपों के बीच हिमाचल और कर्नाटक सरकार ने मंदिरों में दान के सुरक्षित और पारदर्शी प्रबंधन के लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू की है। क्या इससे चोरी रुकेगी?
Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (16 जुलाई, 2026)
1. मेष राशि (Aries) Today 16 July horoscope in Hindi 2026 : करियर: नए विचारों और योजनाओं को लागू करने के लिए आज का दिन उत्तम है। लव: पार्टनर के साथ समय बिताने का मौका मिलेगा। धन: अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखना आपके लिए फायदेमंद साबित होगा। स्वास्थ्य: सेहत के मामले में दिन अच्छा है। उपाय: विष्णु चालीसा का पाठ करें। ALSO READ: आषाढ़ गुप्त नवरात्रि की द्वितीय देवी माता तारा, जानिए पूजा विधि 2. वृषभ राशि (Taurus) करियर: दफ्तर में किसी भी तरह की गॉसिप या राजनीति से दूर रहें। लव: लव लाइफ में किसी पुरानी बात को लेकर बहस हो सकती है। धन: वित्तीय मामलों में समझदारी से निर्णय लें। स्वास्थ्य: आंखों में जलन या थकान की समस्या हो सकती है। उपाय: किसी मंदिर में चने की दाल और पीले कपड़े का दान करें। 3. मिथुन राशि (Gemini) करियर: नौकरीपेशा लोगों को अपनी प्रतिभा दिखाने का पूरा मौका मिलेगा। लव: किसी मित्र के जरिए कोई दिलचस्प इंसान मिल सकता है। धन: रुका हुआ पैसा वापस मिल सकता है। स्वास्थ्य: मानसिक शांति का अनुभव करेंगे। उपाय: मस्तक पर केसर का तिलक लगाएं। 4. कर्क राशि (Cancer) करियर: नौकरी में काम को टालने के बजाय समय पर पूरा करने की कोशिश करें। लव: प्रेम जीवन में खुशी आने से आपका मन हल्का होगा। धन: सुख-सुविधाओं की चीजों पर धन खर्च होने के योग हैं। स्वास्थ्य: पेट से संबंधित दिक्कतें जैसे गैस या अपच परेशान कर सकती हैं। उपाय: शिवलिंग पर दूध मिश्रित जल चढ़ाएं। 5. सिंह राशि (Leo) करियर: व्यापार या कार्यक्षेत्र में आपके नेतृत्व कौशल की सराहना होगी। लव: प्रेम जीवन में नया उत्साह और रोमांस बढ़ेगा। धन: पैतृक संपत्ति से जुड़े मामलों में आपको सफलता मिल सकती है। स्वास्थ्य: काम के बीच-बीच में थोड़ा विश्राम अवश्य लें। उपाय: सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल दें और गायत्री मंत्र का पाठ करें। 6. कन्या राशि (Virgo) करियर: सरकारी या प्रशासनिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को कोई बड़ी लाभ मिल सकता है। लव: अविवाहित लोगों के विवाह की बात घर पर आगे बढ़ सकती है। धन: पुराने किए गए किसी निवेश से आज आपको अप्रत्याशित लाभ हो सकता है। स्वास्थ्य: हल्का व्यायाम आपको ऊर्जावान बनाए रखेगा। उपाय: भगवान विष्णु को पीले फूल अर्पित करें। 7. तुला राशि (Libra) करियर: रचनात्मक और कलात्मक कार्यों से जुड़े लोगों को लाभ होगा। लव: छोटी-मोटी बातों को नजरअंदाज करना ही रिश्ते को मजबूत बनाएगा। धन: विलासिता की वस्तुओं पर अत्यधिक खर्च करने से बचें। स्वास्थ्य: बदन दर्द की शिकायत हो सकती है। उपाय: किसी जरूरतमंद व्यक्ति को केला या आम दान करें। ALSO READ: श्री जगन्नाथ रथयात्रा से जुड़े 12 ऐसे रोचक तथ्य, जिन्हें जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान 8. वृश्चिक राशि (Scorpio) करियर: व्यवसाय में नई रणनीतियों पर काम शुरू करने के लिए दिन अनुकूल है। लव: लव लाइफ में चल रहे पुराने मतभेद आज समाप्त होंगे। धन: अचानक हुए किसी आर्थिक लाभ से बैंक-बैलेंस में सुधार होगा। स्वास्थ्य: आप खुद को फिट और ऊर्जा से भरपूर महसूस करेंगे। उपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करें और मंदिर में जाकर कपूर जलाएं। 9. धनु राशि (Sagittarius) करियर: विद्यार्थियों को अपनी परीक्षा या प्रतियोगिता में सकारात्मक परिणाम मिल सकते हैं। लव: जीवनसाथी के साथ किसी धार्मिक स्थल की यात्रा का प्लान बन सकता है। धन: भूमि या वाहन खरीदने का विचार कर रहे हैं तो आज बात आगे बढ़ सकती है। स्वास्थ्य: अधिक तला-भुना खाने से लीवर या पाचन की समस्या हो सकती है। उपाय: भगवान सत्यनारायण या विष्णु जी की कथा सुनें। 10. मकर राशि (Capricorn) करियर: कार्यस्थल पर संयम रखें, आपकी मेहनत बेकार नहीं जाएगी। लव: पार्टनर के साथ बातचीत के दौरान अपने लहजे को नरम रखें। धन: आज निवेश से जुड़ा कोई भी बड़ा जोखिम उठाने से बचें। स्वास्थ्य: अनिद्रा और मानसिक थकान महसूस हो सकती है। उपाय: पक्षियों को दाना डालें। 11. कुंभ राशि (Aquarius) करियर: करियर में स्थिरता आएगी। (Partnership) लव: लव पार्टनर के साथ आपसी समझ बहुत अच्छी रहेगी। धन: आर्थिक लाभ के अच्छे अवसर हाथ आएंगे। स्वास्थ्य: आउटडोर गतिविधियों में शामिल होने से मानसिक स्फूर्ति मिलेगी। उपाय: महामृत्युंजय मंत्र का 11 बार जाप करें और नारायण कवच का पाठ करें। 12. मीन राशि (Pisces) करियर: बॉस आपके काम की आज खुलकर तारीफ कर सकते हैं। लव: पार्टनर आपकी हर छोटी-बड़ी जरूरत का ख्याल रखेगा। धन: कर्ज या लोन से जुड़ी समस्याओं से राहत मिलने के रास्ते खुलेंगे। स्वास्थ्य: आप मानसिक रूप से काफी हल्का और सकारात्मक महसूस करेंगे। उपाय: भगवान विष्णु के मंदिर में जाकर तुलसी दल अर्पित करें। ALSO READ: शुक्र का पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र में गोचर, किसे मिलेगा लाभ और किसे रहना होगा सतर्क?
भास्कर की वीकली सीरीज ब्लैकबोर्ड में कहानी ऐसे मर्द की जो पैसे कमाने बाहर नहीं जाता। घर पर रहकर झाडू-पोछा करता है। बरतन धोता है। खाना बनाता है। वो हाउस हसबैंड है। ठीक वैसे ही जैसे हमारे यहां हाउस वाइफ होती हैं। यूं तो वो अपनी जिंदगी में खुश हैं, लेकिन उसे हाउस हसबैंड बनने की कीमत चुकानी पड़ रही है। ये उसकी जिंदगी का स्याह पहलू बन गया है, इसे जानने के लिए मैं नीरज झा पहुंचा हूं ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर… दोपहर के करीब 2 बजे। एक फ्लैट के किचन में एक 35-36 साल का शख्स बर्तन धो रहा है। कंधे पर एक तौलिया है। सिंक बर्तनों से भरा है। घर में कोई दूसरा नजर नहीं आ रहा। मुझे देखते ही जल्दी-जल्दी हाथ धोने लगे। मैंने पूछा- आप ही अमित दुबे हैं? वो सिर हिलाते हुए बोले- 'हां मैं ही हूं।' मैंने धीरे से पूछा- ‘घर पर कोई नहीं है?’ बेटी सो रही है। पत्नी दूसरे कमरे में है, आज बैंक की छुट्टी है न…। मैं बर्तन धोकर आपके लिए चाय-पानी लाता हूं। मेरे मना करने पर हंसते हुए बोले- ‘अरे! संकोच मत करिए। मेरे यहां कोई भी आता है, तो चाय-नाश्ता मैं ही बनाता हूं। जब कोई बाहरी आता है तो पत्नी ये सब करने के लिए मना भी करती है। कहती है- मर्द को झाड़ू-पोंछा, बर्तन, खाना, कपड़े धोने जैसे काम करते हुए कोई देखेगा तो मुझे ताने देगा।’ दरअसल, मैं हाउस हसबैंड या मेल होममेकर हूं। 10 साल पहले एक कंपनी में इंजीनियर था, फिर नौकरी छोड़कर घर संभालने लगा। पत्नी बैंक में नौकरी करती है। कहते-कहते अमित के चेहरे पर मुस्कुराहट थी। वो कुछ पल चुप रहे, फिर वहां से उठकर किचन में बर्तन धोने चले गए। बर्तन धोने के बाद तौलिए से हाथ पोंछते हुए वो बोले- ‘ये टी-शर्ट, पैंट ठीक तो लग रहा है न! क्या करें, दिनभर घर का काम करते-करते कपड़े गंदे हो जाते हैं।’ मेरे हामी भरने पर वो कैमरे के सामने आकर बैठ गए। थोड़ी देर रुककर बोले- ‘2016 की बात है। मैं एक प्राइवेट कंपनी में मैकेनिकल इंजीनियर था। सैलरी 16 हजार थी। शादी को 4 महीने हुए थे। अचानक पत्नी की तबीयत बहुत खराब हो गई। घर का कोई काम नहीं कर पा रही थी। ठीक से सांस नहीं ले पाती थी। लगता था, चार कदम चलेगी, तो चक्कर खाकर गिर जाएगी। उसे नौकरी पर जाने में भी दिक्कत होने लगी। डॉक्टर को दिखाया, तो पता चला फेफड़े में पानी भर गया है। डॉक्टर का कहना था कि प्रोसीजर करके इसे निकालना पड़ेगा, वरना जान को खतरा हो सकता है। फौरन प्रोसीजर हुआ। करीब दो महीने तक वो बिस्तर पर रही। उसका सारा काम… वॉशरूम से लेकर नहाना-धोना, सब कुछ मैं ही करता था। वो सूखकर 25 किलो की रह गई थी। घर के काम की पूरी जिम्मेदारी मां पर आ गई थी। मां की भी उम्र हो गई थी, इतना काम नहीं कर पाती थीं। इसलिए सुबह-शाम का खाना मैं बनाने लगा। धीरे-धीरे पत्नी की तबीयत ठीक होने लगी। वो फिर नौकरी के साथ-साथ घर भी संभालने लगी। उस वक्त हम लोग बिहार के मोतिहारी में रहते थे। सुबह-सुबह पत्नी घर का काम करती, फिर बैंक चली जाती। शाम को देर से लौटती, फिर घर का काम करती। करीब 10-15 दिन ऐसे ही चला। फिर उसकी तबीयत खराब होने लगी। सांस लेने में तकलीफ होने लगी। मुझे लगा कि घर संभालने के लिए किसी एक को अपनी नौकरी छोड़नी पड़ेगी। मैंने पत्नी से कहा- ‘या तो तुम नौकरी छोड़ दो, नहीं तो मैं छोड़ देता हूं। पत्नी बिना कुछ बोले दूसरे कमरे में चली गई। मैं कहीं न कहीं उसकी खामोशी को समझ रहा था।’ अचानक ये बातें कहते-कहते अमित रुक जाते हैं। दोहराकर पूछने पर कहते हैं, ‘हम दोनों की लव मैरिज है। 2011 में एक दोस्त के जरिए हम दोनों पंजाब के जालंधर में मिले थे। तब वो बैंक में जॉब की तैयारी कर रही थी और मैं मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा पूरा करने वाला था। उसने बड़ी मेहनत और संघर्ष के बाद ये नौकरी पाई थी। मैंने उसके पुराने दिनों को याद करते हुए सोचा- ‘अगर मैं नौकरी करता रहा, तो इसे अपने करिअर को छोड़ना पड़ेगा। क्यों न, मैं ही अपनी नौकरी छोड़कर हाउस वाइफ की तरह ‘हाउस हसबैंड’ बन जाऊं।’ मैं उठकर पत्नी के पास गया और बोला- ‘तुम परेशान मत हो। मैं घर देखूंगा, तुम नौकरी करो।’ वो थोड़ी देर तक मेरी तरफ देखती रही, फिर बोली- ‘घरवाले क्या कहेंगे कि शादी होते ही बेटा नौकरी छोड़कर चूल्हा-चौका करने लगा। बीवी का गुलाम बन गया। कितना खराब लगेगा। मैं कैसे जी पाऊंगी। बात-बात पर लोग मुझे ताने देंगे।’ मैंने उसे समझाया कि- हमारा रिश्ता और घर बचाने के लिए हम दोनों में से किसी एक को अपने करिअर की कुर्बानी देनी पड़ेगी। इस तरह हम परिवार नहीं संभाल पाएंगे। तुम्हारी सैलरी भी ठीक-ठाक है। मैं अभी घर संभालता हूं, तुम जॉब देखो।’ पत्नी बोली- ‘जैसा ठीक लगे करिए।’ मैं कमरे से उठकर आंगन में चला गया। बस ये सोच रहा था कि घरवालों को कैसे बताऊंगा। अगले दिन की बात है। रात के करीब 10 बज रहे थे। मैंने मां-पापा को बुलाकर ये बातें बताई। उन्होंने सिर्फ इतना कहा- ‘तुम लोग समझदार हो। जो ठीक लगता है, करो।’ ‘अगली सुबह ऑफिस जाकर मैंने रिजाइन कर दिया। उसी दिन से मैं इंजीनियर से हाउस हसबैंड बन गया।’ अमित अभी बात कर ही रहे थे, तभी उनकी पत्नी प्रीति लता पांडे पास आकर बैठ गईं। अमित बोले- ‘औरों का तो छोड़िए, प्रीति के घरवालों ने ही सबसे पहले विरोध करना शुरू किया था। कहने लगे- शादी से पहले तो लड़का इंजीनियर था। अच्छी-खासी नौकरी थी। अब घर के काम करेगा।' एक दिन प्रीति की मां का फोन आया। वो कहने लगीं- 'तुम दामाद से औरतों वाला काम करवाओगी, चूल्हा-चौका करवाओगी। तुम्हें अच्छा लगेगा।’ ये सब सुनते ही प्रीति परेशान हो गईं। मेरे पास आकर बोली- ‘पहले ही आपसे कहा था। लोग ताने देंगे।’ मैंने सिर्फ एक ही बात कही- ‘जो लोग ये बातें कह रहे हैं, क्या वो मेरे घर का काम कर देंगे। नहीं न, फिर क्यों उनकी बातों पर ध्यान देना।’ अमित आगे बताते हैं- ‘मुझे हाउस हसबैंड बने हुए 10 साल हो गए, फिर भी लोगों के ताने बंद नहीं हुए। शुरुआत में जब पूरा दिन घर पर रहना शुरू किया तो मन नहीं लगता था। काम से फुरसत होता तो सोचता दोस्तों से ही बात कर लेता हूं। वो भी ताने ही देते। एकबार की बात है। दोस्तों से कॉन्फ्रेंस कॉल पर बात हो रही थी। सब अपने-अपने काम के बारे में बता रहे थे। बातों ही बातों में कहने लगे- अमित के ही मजे हैं। बीवी की साड़ी-पेटीकोट धोता है और आराम से घर पर रहता है। दूसरा दोस्त बोला अरे काहे के मजे, ये भी भला कोई जिंदगी है। लाज-शर्म सब घोलकर पी गया। मर्दों की नाक कटवा दी। अब ये मर्द नहीं रहा। कौन ही बात करेगा इससे।' मैं सुबह उठकर झाडू-पोंछा करता। खाना बनाता। सभी के कपड़े धोकर छत पर सुखाने जाता, तो मोहल्ले वाले ऐसे देखते जैसे कोई अपराध कर दिया हो। एक दिन खाना बना रहा था, तभी एक दोस्त का फोन आया। ताना मारते हुए बोला- गलत समय पर तो फोन नहीं कर दिया। मैंने बोला- 'नहीं- नहीं, बस खाना ही बना रहा था।' वो बोला- ‘हां, शाम हो गई है। बीवी के आने का भी समय हो गया है। तुम्हारा सही है, बीवी की कमाई खाओ। घर में पड़े रहो। ऐश की जिंदगी है तुम्हारी। किसी बात की चिंता ही नहीं है।’ ये बातें मुझे इतना चुभ गई कि फिर मैंने फोन लगाना ही बंद कर दिया। अमित कुछ देर के लिए एकदम खामोश हो गए। कुछ देर बाद मैंने पूछा- आप क्या बनना चाहते थे? ये सवाल सुनते ही उनकी आंखें भर आईं। रूंधे गले से कहते हैं, ‘मैं गरीब परिवार से हूं। पापा पुजारी थे। वह गांव में पूजा-पाठ कराते थे। गांव के लोगों से जो अनाज में मिल जाता, उसी से चूल्हा जलता। फूस का छप्पर वाला घर था। सर्दी हो या गर्मी हर मौसम में दादी बाहर ही सोती थी। मैं उन्हें पक्का मकान तक नहीं दे सका। पहले तो डॉक्टर बनना चाहता था, लेकिन बाद में पता चला कि बहुत पैसा लगेगा। इतनी जमीन भी नहीं थी कि मां-बाप बेचकर पढ़ा दें। ऊपर से मैं घर का बड़ा बेटा था। दो भाई और हैं। सारा पैसा मेरी पढ़ाई में लग जाता तो बाकि दो भाइयों का क्या होता। पापा ने जमीन बेचकर मैकेनिकल इंजीनियरिंग में एडमिशन करवा दिया। पास होने के करीब 3 साल तक एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी की, फिर जो हुआ आपके सामने है…। मां-बाप के बहुत अरमान थे कि मैं पढ़-लिखकर नौकरी करूंगा। मैंने उनसे वादा किया था कि अपनी कमाई से सबसे पहले घर बनाऊंगा, लेकिन नहीं बना पाया। आज भी इस बात का मलाल है कि मैं अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा पाया।’ अमित उदास होकर कहते हैं, ‘मेरे हाउस हसबैंड होने की वजह से भाइयों की शादी नहीं हो रही। उनकी उम्र 30-32 साल हो चुकी है। जब रिश्ता आता है, तो सबसे पहले पूछते हैं- लड़के का भाई क्या करता है? जैसे ही पता चलता है कि हाउस हसबैंड हूं। वो मना कर देते हैं। मां भी कई बार फट पड़ती हैं। कहती हैं- किसी से भी कर्ज मांगने के लिए जाती हूं, तो वे भी कह देते हैं। तुम्हारा बेटा तो बीवी की कमाई खाता है। पढ़ा-लिखाकर निकम्मे की तरह घर बैठा रखा है। उससे चूल्हा-चौका करवाती हो। बीवी का साड़ी-पेटीकोट धोता है। तुम्हें कर्ज भी दूं, तो कहां चुकाओगी। ये सब सुनते-सुनते 10 साल बीत चुके हैं। अब तो मैं कहीं जाता भी नहीं हूं। पहले रिश्तेदारी में, फंक्शन में जाता भी था, लेकिन अब नहीं। एक बार एक दोस्त की शादी में गया था। वहां एक शख्स ने पूछा- आप क्या करते हैं? मैंने कहा- घर का काम करता हूं। घर पर रहता हूं। सुनते ही वह आदमी अच्छा-अच्छा कहते हुए मुंह बनाकर चला गया। मैंने कई बार देखा है- जैसे ही अपने बारे में बताता हूं, लोगों का नजरिया ही बदल जाता है।’ भुवनेश्वर में कब से हैं? ‘दो साल से। इससे पहले कोलकाता में थे। शहर में तो उतनी दिक्कत नहीं होती है, लेकिन गांव में लोगों ने जीना दूभर कर दिया था। पत्नी का जैसे-जैसे ट्रांसफर हुआ। हम शहर बदलते गए। तभी अमित की बेटी दित्या आ जाती है। वो इशारों में कहते हैं, ‘इससे कुछ नहीं पूछिएगा। 2019 में इसका जन्म हुआ था। तबसे आजतक इसका डायपर बदलने से लेकर हर काम मैंने ही किया है। इसको भी स्कूल में बच्चे परेशान करते हैं। पूछते हैं कि- तुम्हारे पापा क्या करते हैं? जब बताती है कि घर के काम करते हैं, तो कहते हैं- नौकरी के लिए नहीं जाते क्या? फिर ये घर आकर हमसे पूछने लगती है। हम कोई जवाब ही नहीं दे पाते। लोग कुछ भी कहें लेकिन मैं जब सोचता हूं, तो लगता है कि उस दिन ये डिसीजन नहीं लिया होता, तो परिवार खत्म हो चुका होता। पत्नी के लिए बीमारी के साथ-साथ जॉब और घर, दोनों संभालना मुश्किल था। आज भी वह बीमार रहती है। दवाई चलती ही रहती है। अमित की पत्नी प्रीति कहती हैं, ‘जैसा इन्होंने कहा, वैसा ही हमने किया। शुरुआत में घरवालों को समझाना आसान नहीं था, लेकिन धीरे-धीरे सब हो गया। मैंने हमेशा जॉब पर ही फोकस किया। इससे आगे कुछ नहीं बोल पाऊंगी। लोग क्या कहते हैं, ये बात इन्होंने कभी मुझतक पहुंचने ही नहीं दी।’ ----------------------------------- ब्लैकबोर्ड की ये कहानियां भी पढ़ें… 1- ब्लैकबोर्ड-दूसरे के बच्चे धोखे से मेरी कोख में डाल दिए:शक्ल-सूरत नहीं मिली तो DNA करवाया, आखिर कहां गए मेरे बच्चे आज ब्लैकबोर्ड में कहानी ऐसे पति-पत्नी की जिनकी दो बेटियां हैं। इन्होंने एकबार फिर मां-बाप बनने का फैसला किया, लेकिन उम्र आड़े आ गई। डॉक्टर ने सलाह दी- ‘IVF आजमाइए।’ पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- ब्लैकबोर्ड- तानों से परेशान होकर ब्रेस्ट इम्प्लांट करवाया:ऑडिशन वाले कहते थे- तुम्हारा फिगर ठीक नहीं, अब आधी कमाई सर्जरी की EMI में जा रही एकबार मैं ऑडिशन के लिए गई थी। वहां मुझे ट्रायल के लिए एक बिकिनी दी गई। 10-15 मर्दों के सामने जैसे ही बिकिनी पहनकर बाहर आई, तो सब हंसने लगे। कहने लगे- 'अरे मैडम, ये सब आपके लिए नहीं है। आप तो एकदम फ्लैट हैं।' पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
प्रेम-प्रसंग में महिला की हत्या के 12 साल पुराने मामले में 6 दोषियों को उम्रकैद
मथुरा। उत्तर प्रदेश में मथुरा जिले की एक अदालत ने करीब 12 वर्ष पुराने हत्या के एक मामले में छह दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रेम-विवाह को लेकर उपजी रंजिश में घर में घुसकर महिला की गोली मारकर हत्या करने के मामले में अदालत ने सभी दोषियों पर कुल 3.70 लाख रुपए […] The post प्रेम-प्रसंग में महिला की हत्या के 12 साल पुराने मामले में 6 दोषियों को उम्रकैद appeared first on Sabguru News .
श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर के समीप कार सेवा की घोषणा के बाद मथुरा प्रशासन सतर्क
स्वामी सच्चिदानंद को कानूनी नोटिस मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर के समीप कार सेवा की घोषणा के बाद मथुरा जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के मद्देनजर बुधवार को क्षेत्राधिकारी (सीओ) गोवर्धन पुलिस बल के साथ चित्रगुप्त पीठ आश्रम पहुंचे और पीठाधीश्वर स्वामी सच्चिदानंद महाराज से मुलाकात कर उन्हें कानूनी नोटिस तामील कराया। […] The post श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर के समीप कार सेवा की घोषणा के बाद मथुरा प्रशासन सतर्क appeared first on Sabguru News .
मदन मित्रा ने तृणमूल कांग्रेस से दिया इस्तीफा, ऋतब्रत गुट में शामिल
कोलकाता। तृणमूल कांग्रेस के विधायक मदन मित्रा ने बुधवार को पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया और औपचारिक रूप से विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट में शामिल हो गए मित्रा ने पश्चिम बंगाल विधानसभा में ऋतब्रत बनर्जी के कक्ष में मीडिया के सामने की यह घोषणा की। उन्होंने कहा […] The post मदन मित्रा ने तृणमूल कांग्रेस से दिया इस्तीफा, ऋतब्रत गुट में शामिल appeared first on Sabguru News .
कोटा के पोलाई खुर्द गांव में गोलगप्पे खाने से 40 लोग बीमार
कोटा। राजस्थान में कोटा जिले के पोलाई खुर्द गांव में बुधवार को गोलगप्पे खाने से 40 लोगों के बीमार होने का मामला सामने आया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सभी को उल्टी-दस्त की शिकायत हुई थी। देर रात एक के बाद एक लोग बीमार होने लगे। इनमें बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग शामिल हैं। सुबह चिकित्सा […] The post कोटा के पोलाई खुर्द गांव में गोलगप्पे खाने से 40 लोग बीमार appeared first on Sabguru News .
अब राजनीति में प्रतिशोध है और भाषाई स्तर भी गिरा : वसुन्धरा राजे
जयपुर। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे ने कहा है कि अब राजनीति में प्रतिशोध है और भाषाई स्तर भी गिरा है। राजे बुधवार को यहां राजस्थान विधानसभा के 75 वर्ष पर आयोजित अमृत महोत्सव कार्यक्रम के एक सत्र में बोल रही थी। उन्होंने सदन में बढ़ते अमर्यादित आचरण और भाषा के गिरते स्तर पर […] The post अब राजनीति में प्रतिशोध है और भाषाई स्तर भी गिरा : वसुन्धरा राजे appeared first on Sabguru News .
हनुमानगढ़ : नशीली दवाएं रखने के दोषी को दस वर्ष का कठोर करावास
हनुमानगढ़। राजस्थान में हनुमानगढ़ जिले के रावतसर अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय ने नशीली दवायें रखने के आरोपी को बुधवार को दोषी करार देते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने अभियुक्त महेंद्र (36) को नशीली गोलियां रखने का दोषी मानते हुए उस पर एक लाख रुपए […] The post हनुमानगढ़ : नशीली दवाएं रखने के दोषी को दस वर्ष का कठोर करावास appeared first on Sabguru News .
बीकानेर में पावरग्रिड कार्पोरेशन ऑफ इन्डिया लिमिटेड के उप महाप्रबंधक रिश्वत लेते अरेस्ट
बीकानेर। राजस्थान में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की बीकानेर इकाई ने पावरग्रिड कार्पोरेशन ऑफ इन्डिया लिमिटेड, बीकानेर डिवीजन के उप महाप्रबंधक को बुधवार को 90 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया। ब्यूरो की अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव ने बताया कि ब्यूरो की बीकानेर इकाई को शिकायत मिली कि परिवादी फर्म द्वारा […] The post बीकानेर में पावरग्रिड कार्पोरेशन ऑफ इन्डिया लिमिटेड के उप महाप्रबंधक रिश्वत लेते अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
स्वाभिमान भोज में मनाया डॉ. अमित यादव का जन्मदिन, जरूरतमंदों को भोजन कराया
अजमेर। जवाहर लाल नेहरू चिकित्सालय उप अधीक्षक डॉ. अमित यादव ने बुधवार को अपना जन्मदिन अस्पताल परिसर में जवाहर फाउंडेशन की ओर से जरूरतमंदों के लिए संचालित स्वाभिमान भोज में केक काटकर मनाया साथ ही भोजन वितरण किया। इस मौके पर अस्पताल अधीक्षक अरविंद खरे, समाजसेवी महेश चौहान, मामराज सेन, भोजनालय स्टाफ ध्रुविका सिसोदिया, अंकित […] The post स्वाभिमान भोज में मनाया डॉ. अमित यादव का जन्मदिन, जरूरतमंदों को भोजन कराया appeared first on Sabguru News .
Share Bazaar में मामूली बढ़त, Sensex 130 अंक चढ़ा, Nifty भी 24000 के पार
Share Market Update News : भारतीय शेयर बाजार बुधवार को मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ। कारोबार के अंत में बीएसई का सेंसेक्स 130.49 अंक यानी 0.16 फीसदी चढ़कर 77185.43 के स्तर पर बंद हुआ, वहीं एनएसई का निफ्टी 26.45 अंक यानी 0.11 फीसदी बढ़कर 24078.50 के स्तर पर पहुंच गया। मिडकैप शेयरों में पूरे दिन उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। आज हिटाची एनर्जी, ABB इंडिया और GE वेर्नोवा TD ने क्रमशः 4.59 फीसदी, 4.53 फीसदी और 4.40 फीसदी की बढ़त के साथ अच्छा प्रदर्शन किया। भारतीय शेयर बाजार बुधवार को मामूली बढ़त के साथ बंद हुआ। कारोबार के अंत में बीएसई का सेंसेक्स 130.49 अंक यानी 0.16 फीसदी चढ़कर 77185.43 के स्तर पर बंद हुआ, वहीं एनएसई का निफ्टी 26.45 अंक यानी 0.11 फीसदी बढ़कर 24078.50 के स्तर पर पहुंच गया। मिडकैप शेयरों में पूरे दिन उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। आज हिटाची एनर्जी, ABB इंडिया और GE वेर्नोवा TD ने क्रमशः 4.59 फीसदी, 4.53 फीसदी और 4.40 फीसदी की बढ़त के साथ अच्छा प्रदर्शन किया। ALSO READ: होर्मुज पर हमले से सहमा शेयर बाजार, Sensex 561 अंक लुढ़का, Nifty में भी आई गिरावट फोर्स मोटर्स और स्विगी के शेयरों में भी क्रमशः 4.37 फीसदी और 4.36 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई। रसायन क्षेत्र के शेयरों में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली। इसके अलावा, ऑटोमोबाइल और रियल्टी जैसे क्षेत्रों में भी मजबूती बनी रही। उपभोक्ता-केंद्रित कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों ने रुचि दिखाई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरोपीय शेयर बाजार में DAX और CAC गिरावट में रहे। हांगकांग का Hang Seng सूचकांक 1.5 फीसदी की उल्लेखनीय बढ़त के साथ बंद हुआ। भारतीय सर्राफा बाजार में सोना और चांदी की कीमतों में आज गिरावट देखने को मिली। ALSO READ: Share Bazaar में बड़ा उछाल, Sensex 828 अंक उछला, Nifty भी 24200 के पार इससे पहले यानी मंगलवार को अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते हमलों से निवेशकों में घबराहट का माहौल रहा। कारोबार के अंत में बीएसई का सेंसेक्स 561.46 अंक या 0.72 प्रतिशत लुढ़ककर 77054.94 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई का निफ्टी 158.95 अंक या 0.66 प्रतिशत गिरकर 24,052.05 के स्तर पर आ गया।
बांग्लादेश की पूर्व पीएम शेख हसीना बांग्लादेश लौटना चाहती हैं। अगस्त 2024 में तख्तापलट के बाद वो भागकर भारत आ गई थीं। उन्हें बांग्लादेश के इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल ने मौत की सजा सुनाई है। बांग्लादेशी नेता कह रहे- वापस आने पर इस सजा को अंजाम दिया जाएगा। क्या वाकई बांग्लादेश लौटेंगी शेख हसीना, फांसी की आशंका के बीच इससे हासिल क्या होगा और भारत का रुख क्या है; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: शेख हसीना के बांग्लादेश लौटने की बात कहां से उठी?जवाबः ये चर्चा शेख हसीना के ही बयानों से शुरू हुई। उन्होंने 29 जून को एक टीवी चैनल से ई-मेल इंटरव्यू में कहा… ‘मुझे मौत का डर नहीं है। मैंने 1975 में अपना पूरा परिवार खो दिया था। 21 अगस्त को ग्रेनेड से मेरी हत्या की कोशिश हुई। मैं हर साजिश से लड़ते हुए बांग्लादेश की अवाम के साथ खड़ी रही और वोट से 5 बार पीएम चुनी गई। मेरी पूरी जिंदगी बांग्लादेश की जनता, अवामी लीग (हसीना की पार्टी) और बांग्लादेश के हित से जुड़ी रही है। मैं हर रुकावट, हर साजिश को पार करते हुए इस साल अपने मुल्क लौटूंगी।' इसके बाद 10 जुलाई की सुबह हसीना ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को भी टेलीफोनिक इंटरव्यू में बताया कि दिसंबर 2026 तक भारत से बांग्लादेश लौटेंगी और अपनी पार्टी के कुछ और निर्वासित नेताओं के साथ सरेंडर करेंगी। शेख हसीना ने कहा, 'हो सकता है कि लौटने पर वे मुझे गिरफ्तार कर लें, वे मुझे मार भी सकते हैं। फिर भी, मुझे जाना ही होगा। मेरी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का भयानक तरह से दमन हो रहा है।’ हसीना की सरकार में गृहमंत्री रहे असदुज्जमान खान भी निर्वासित हैं, उनको भी मौत की सजा सुनाई गई है। उन्होंने कहा, ‘हम सब मिलकर अदालत में आत्मसमर्पण करेंगे।’ सवाल-2: बांग्लादेश लौटने पर उनके साथ क्या-क्या हो सकता है?जवाबः शेख हसीना पर उनके खिलाफ आंदोलन करने वाले स्टूडेंट्स की हत्याओं के लिए पुलिस और सेना को आदेश देने का आरोप है। बांग्लादेश की इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल, यानी ICT-BD नवंबर २०२५ में शेख हसीना को मौत की सजा सुना चुकी है। ये पहली बार है, जब बांग्लादेश में किसी पूर्व पीएम को मौत की सजा सुनाई गई है। अब अगर शेख हसीना बांग्लादेश जाकर सरेंडर करती हैं, तो उन्हें गिरफ्तार करके फांसी देने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। हालांकि ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ अपील भी की जा सकती है। हसीना की पार्टी अवामी लीग पर बांग्लादेश में बैन है। इसलिए गिरफ्तारी पर किसी बड़े विरोध प्रदर्शन की भी उम्मीद कम है। पुलिस इसे कुचल सकती है। बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान के स्ट्रैटेजिक एडवाइजर जाहिद-उर-रहमान ने कहा है, ‘देश की जनता चाहती है कि उनके जुर्म के लिए उन्हें मौत की सजा दी जाए। अगर वो वापस आईं, तो इस सजा को अंजाम दिया जाएगा। जनता यही चाहती है। उन्हें दुनिया के सबसे अच्छे वकील लाने दो।' सवाल-3: जब फांसी की सजा हो चुकी, तो फिर लौटने का दांव क्यों खेल रहीं हसीना?जवाबः हसीना के बांग्लादेश जाने के जोखिम भरे दांव के पीछे सबसे बड़ी वजह है- बांग्लादेश की राजनीति में वापसी की कोशिश। हसीना की अवामी लीग बांग्लादेश में बैन है। बीती 23 जून को पार्टी ने 77वां स्थापना दिवस मनाया, तो दर्जनों कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया। हसीना के बेटे सजीब वाजेद जॉय, फिलहाल अमेरिका में रहते हैं, लेकिन वो बांग्लादेश के मुद्दों पर एक्टिव हैं। अगर हसीना उनके लिए राजनीतिक जमीन तैयार करना चाहें, तो भी ये बिना बांग्लादेश लौटे मुमकिन नहीं है। अल-जजीरा के मुताबिक, हसीना ने विदेश से ही अवामी लीग को दोबारा मजबूत करने की कोशिशें शुरू कर दीं हैं। वो 100 से ज्यादा संसदीय इलाकों में अपनी पार्टी के लोगों के साथ ऑनलाइन बैठकें कर रही हैं। एक इंटरव्यू में हसीना ने खुद कहा, 'अवामी लीग पर कई हमले हुए, बैन लगाया गया, लेकिन जनता की ताकत से पार्टी दोबारा उठ खड़ी हुई। ऐसी कोशिशों में वो पहले भी फेल हुए हैं, दोबारा होंगे। बैन लगाकर पार्टी के ऑफिस और पॉलिटिकल एक्टिविटी बंद कर सकते हैं, लेकिन पार्टी वर्कर्स जुलूस निकाल रहे हैं। आम लोग इसमें शामिल हो रहे हैं। ये संकेत है कि अवामी लीग फिर से मजबूत होने लगी है।' हालांकि एक्सपर्ट्स एक छिपी वजह भी बताते हैं… ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन में स्ट्रैटेजिक स्टडीज प्रोग्राम के डिप्टी डायरेक्टर विवेक मिश्र कहते हैं, 'आखिर कब तक हसीना भारत में या किसी और देश में रहेंगी? भारत भले ये बात न कहे, लेकिन उसके लिए एक एक्स्ट्रा जिम्मेदारी जैसा है। एक निर्वासित नेता को रखना आसान नहीं होता। शेख हसीना के साथ अमेरिका का भी सपोर्ट नहीं है। बांग्लादेश और चीन बहुत नजदीक आ चुके हैं। ऐसे में भारत तारिक रहमान के दौर में बांग्लादेश से अच्छे रिश्ते चाहता है।' इसके संकेत भी मिलने लगे हैं। जब तारिक रहमान पीएम बने, तो पीएम मोदी बधाई देने वाली शुरुआती नेताओं में से एक थे। BNP ने पीएम मोदी की बधाई को हाईलाइट किया और अच्छे रिश्तों की उम्मीद जताई। अगले ही दिन BNP के सीनियर नेता सलाहुद्दीन अहमद ने भारत से शेख हसीना का प्रत्यर्पण करने की पार्टी की मांग दोहराई। तारिक ने भी कहा कि कानूनी प्रक्रिया के हिसाब से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग की जाएगी। सवाल-4: तो क्या भारत दबाव में हसीना को वापस भेज देगा?जवाबः दिसंबर 2024 से अब तक बांग्लादेश कई बार भारत को हसीना के प्रत्यर्पण का अनुरोध भेज चुका है। १४ जुलाई को भी भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा है- पूर्व पीएम (शेख हसीना) के मामले में हमारे रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। प्रत्यर्पण का मामला कानूनी मुद्दा है, उसी तरीके से निपटा जाएगा। इस बयान और भारत के रुख का मतलब समझिए… हालांकि संधि में 3 आर्टिकल हैं, जिनके जरिए भारत शेख हसीना के प्रत्यर्पण से इनकार कर सकता है… आर्टिकल 6- अगर अपराध राजनीतिक हो: हसीना को कई हत्याओं के मामले में सजा हुई है। इसलिए ये आर्टिकल लागू होना मुश्किल है। आर्टिकल 7- आरोपी पर दूसरे देश में भी कोई मामला चल रहा हो: शेख हसीना के मामले में ऐसा नहीं है। आर्टिकल 8- अगर आरोप न्याय के लिए नहीं, बल्कि गलत तरीके से लगा हो: भारत कह सकता है कि हसीना के खिलाफ आरोप सही नहीं हैं और बांग्लादेश लौटने पर उनको राजनीतिक उत्पीड़न झेलना पड़ सकता है। 9 जुलाई को बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने कहा कि हसीना को लाने के लिए लगातार कोशिश जारी है। प्रत्यर्पण इंटरनेशनल नियमों और कानून के तहत होता है, इसलिए इसमें समय लगता है। हालांकि जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत इस मामले में सहयोग कर रहा है, तो उन्होंने सीधे जवाब नहीं दिया। विवेक मिश्र कहते हैं कि बांग्लादेश में जब तक अंतरिम सरकार थी, तब तक भारत ने इस मुद्दे को टाले रखा। अब बांग्लादेश में स्थायी सरकार है। इसलिए भारत को जवाब देना होगा। ये बात शेख हसीना भी समझती हैं।' इसीलिए हसीना ने खुद कहा है, ‘मुझे किसी के भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी, मैं खुद अपने देश लौटूंगी।' सवाल-5: बांग्लादेश में हसीना के पास सजा से बचने का कोई रास्ता है? जवाब: बांग्लादेश में मौत की सजा से बचने के लिए हसीना के पास दो रास्ते हैं… ट्रिब्यूनल में ही सजा को चुनौती दें और केस जीत जाएं ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ हसीना वहीं अपील कर सकती हैं। हालांकि अपील की समयसीमा 30 दिन की है, लेकिन मार्च 2026 में हसीना के वकील ट्रिब्यूनल को पत्र भेजकर सजा को अवैध बताकर इसे रद्द करने की मांग कर चुके हैं। ह्यूमन राइट्स वाच और एमनेस्टी इंटरनेशनल भी बिना सुनवाई के हुई इस सजा पर चिंता जता चुके हैं। इसलिए हो सकता है, हसीना को ट्रिब्यूनल सुनवाई में शामिल होने का मौका दे दे। हालांकि ट्रिब्यूनल से हसीना आरोपों से बरी हो जाएं, ये मुश्किल है। सजा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करके स्टे ले लें हसीना सरेंडर से पहले ही इस फैसले के खिलाफ बांग्लादेश के सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकती हैं। सुप्रीम कोर्ट फैसले पर सुनवाई शुरू कर सकता है या फिर स्टे दे सकता है। हालांकि बांग्लादेश में सुप्रीम कोर्ट पर सत्ता का प्रभाव रहता है। मसलन- ये खबर भी पढ़िए… ट्रम्प के करीबी लिंडसे ग्राहम की यूक्रेन से लौटते ही मौत, क्या रूस ने जहर दिया; भारत पर 500% टैरिफ के लिए उकसाते थे राष्ट्रपति ट्रम्प के बेहद करीबी सीनेटर लिंडसे ग्राहम 11 जुलाई को यूक्रेन दौरे से अमेरिका लौटे, ट्रम्प से फोन पर बात की और सोने चले गए। कुछ घंटे बाद तबीयत बिगड़ी और मौत हो गई। ग्राहम ईरान और रूस के धुर विरोधी माने जाते थे। भारत को भी निशाने पर रखा और मौत से एक दिन पहले तक 500% टैरिफ लगाने की जिद करते रहे। पूरी खबर पढ़िए…
फाइनल तक पहुंची स्पेन ने सिर्फ एक गोल खाया, अजेय महसूस कर रही टीम
स्पेन की फुटबॉल टीम के कोच लुइस डे ला फुएंते ने कहा है कि हम दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम है और फ्रांस हराकर हम स्वयं को अजेय महसूस कर रहे है। डलास स्टेडियम में मंगलवार को खेले गए सेमीफाइनल में स्पेन को मिकेल ओयार्जाबल के पहले हाफ में किए गए पेनल्टी गोल और हाफ टाइम के बाद पेड्रो पेरो के दूसरे गोल की बदौलत फ्रांस पर शानदार जीत की। मैच के बाद संवाददाता सम्मेलन में डे ला फुएंते ने कहा, “हम खुद को अजेय महसूस कर रहे हैं। फ्रांस ने दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीम का सामना किया। हमने उन्हें हराया है। उन्हें अपनी खिलाड़ियों प्रतिबद्धता, उदारता, एकजुटता और प्रतिभा पर गर्व हैं। उनका खेल अद्भुत रहा। आज का मैच शानदार था। जो चीज मुश्किल लगती है, यह टीम उसे आसानी से कर दिखाती है।” उन्होंने कहा, “हम जानते थे कि हमें धीरे-धीरे सुधार करना होगा। हम पहला मैच जीतना चाहते थे, लेकिन यह एक प्रक्रिया है। हमारी योजना यही थी कि हम महत्वपूर्ण क्षणों तक सर्वोत्तम स्थिति में पहुंचें। हम बेहतरीन स्थिति में हैं और फुटबॉल के स्तर पर हम अपने चरम पर पहुंच चुके हैं।” उन्होंने कहा, “फिलहाल हम किसी एक को प्राथमिकता नहीं देते। उनकी विशेषताएं अलग-अलग हैं। मैं अर्जेंटीना का सामना करने के लिए उत्साहित हूं क्योंकि मैं लियोनेल स्कालोनी का करीबी दोस्त हूं, लेकिन मुझे इंग्लैंड भी बहुत पसंद है। हम दोनों में से किसी का भी खुले दिल से स्वागत करते हैं।” Spain in the world cup be like.. Who's next..? pic.twitter.com/PTHrrk79by — Memes vs. Football (@memesvsfootball) July 14, 2026 स्पेन की रक्षापंक्ति इस टूर्नामेंट की सुर्खियों में से एक है। टीम फाइनल में है और अब तक उसने सिर्फ एक बार गोल खाया है। यानि सेमीफाइनल मिलाकर ज्यादातर मौकों पर क्लीनशीट रखी है। स्पेन के गोलकीपर उनाई साइमन ने ना केवल इस विश्वकप बल्कि पिछले विश्वकप में भी कई मैचों तक स्पेन को गोल खाने से रोका था। साइमन ने दो विश्वकपों को मिलाकर प्रतिद्वंदी टीम को 519 मिनट तक गोल करने से रोका है। उन्होंने 36 साल पुराने इटनी के वाल्टर जेंगा के 517 मिनट तक गोल बचाने के रिकॉर्ड को पार किया।
क्रिस्टोफर नोलन की 'The Odyssey' को लेकर सोशल मीडिया और सिनेमा जगत में भारी हाइप है। आपको बता दें कि 23,900 करोड़ रुपये ($2.8 Billion+) का यह आंकड़ा नोलन की किसी एक फिल्म का बजट नहीं है, बल्कि यह उनकी अब तक की सभी ब्लॉकबस्टर फिल्मों (जैसे Oppenheimer, Inception, The Dark Knight Trilogy) की कुल ग्लोबल बॉक्स ऑफिस कमाई (Total Lifetime Box Office Earnings) को दर्शाता है, जिसने उन्हें दुनिया का सबसे मूल्यवान डायरेक्टर बना दिया है। नोलन अब इतिहास के सबसे बड़े ग्रीक महाकाव्य (Greek Epic) 'द ओडिसी' (The Odyssey) पर आधारित एक बेहद भव्य और बड़े बजट की फिल्म लेकर आ रहे हैं। आइए जानते हैं कि आखिर क्यों इस कहानी को यूरोप की महाभारत कहा जाता है और इसकी कहानी क्या है। हॉलीवुड के मास्टरमाइंड डायरेक्टर क्रिस्टोफर नोलन (Christopher Nolan) जब भी कोई फिल्म बनाते हैं, तो सिनेमा का इतिहास बदल जाता है। बॉक्स ऑफिस पर 23,900 करोड़ रुपये से अधिक की कुल कमाई का साम्राज्य खड़ा करने वाले नोलन की मूवी 'द ओडिसी' को लेकर पूरी दुनिया में उत्सुकता है। इस प्राचीन कहानी को यूरोप की महाभारत कहा जाता है। आखिर इस कहानी में ऐसा क्या है जिसने नोलन जैसे आधुनिक डायरेक्टर को आकर्षित किया? आइए जानते हैं 'द ओडिसी' की वह चक्रव्यूह जैसी कहानी, जो आपके रोंगटे खड़े कर देगी। क्यों कहा जाता है इसे 'यूरोप की महाभारत'? जैसे भारत में 'महाभारत' कुरुक्षेत्र के युद्ध और उसके बाद के परिणामों की एक विशाल गाथा है, ठीक वैसे ही प्राचीन ग्रीस (यूनान) में कवि होमर (Homer) द्वारा रचित 'द इलियड' (The Iliad) और 'द ओडिसी' (The Odyssey) हैं। जहाँ 'इलियड' में ट्रोजन वॉर (ट्रॉय के प्रसिद्ध युद्ध) की कहानी है, वहीं 'द ओडिसी' उस युद्ध के बाद की कहानी है। यह एक राजा की अपने घर लौटने की 10 साल लंबी ऐसी यात्रा है, जिसमें कदम-कदम पर देवता, दानव, जादुई शक्तियां और इंसानी जज्बात आपस में टकराते हैं, ठीक वैसे ही जैसे महाभारत में धर्म, नीति और माया का टकराव होता है। क्या है 'The Odyssey' की मुख्य कहानी? यह कहानी है इथाका (Ithaca) के बुद्धिमान राजा ओडिसियस (Odysseus) की। ट्रॉय के युद्ध को जीतने में ओडिसियस का सबसे बड़ा हाथ था (इन्होंने ही लकड़ी के घोड़े यानी 'Trojan Horse' का मास्टरप्लान बनाया था)। युद्ध खत्म होने के बाद ओडिसियस अपने सैनिकों के साथ अपने देश इथाका और अपनी पत्नी पेनेलोप के पास लौटने के लिए निकलते हैं। लेकिन, नियति को कुछ और ही मंजूर था। यह सफर जो कुछ हफ्तों का होना चाहिए था, वह 10 साल लंबे महाविनाशकारी चक्रव्यूह में बदल जाता है: 1. समुद्र के देवता का श्राप सफर के दौरान ओडिसियस का सामना 'पॉलीफेमस' नाम के एक भयानक एक आंख वाले राक्षस (Cyclops) से होता है, जो समुद्र के देवता पोसिडॉन (Poseidon) का बेटा था। ओडिसियस अपनी चालाकी से उस राक्षस की आंख फोड़कर बच निकलते हैं। इससे गुस्सा होकर समुद्र के देवता पोसिडॉन ओडिसियस को श्राप देते हैं कि वह कभी आसानी से अपने घर नहीं लौट पाएगा और उसके सारे सैनिक मारे जाएंगे। 2. जादूगरनी और नरभक्षी राक्षस रास्ते में ओडिसियस के जहाज भटक जाते हैं। वे कभी इंसानों को सुअर बना देने वाली जादूगरनी 'सार्सी' (Circe) के द्वीप पर फंसते हैं, तो कभी इंसानों को खा जाने वाले राक्षसों के चंगुल में। उन्हें समुद्र की उन खतरनाक अप्सराओं (Sirens) से भी गुजरना पड़ता है, जिनकी सुरीली आवाज सुनकर नाविक सम्मोहित होकर अपनी जान दे देते थे। 3. नरक (Underworld) की यात्रा अपने घर का रास्ता खोजने के लिए ओडिसियस को जीवित रहते हुए 'अंडरवर्ल्ड' यानी पाताल लोक (नरक) की यात्रा करनी पड़ती है, जहाँ वे मरे हुए महान योद्धाओं की आत्माओं और भविष्यवक्ताओं से मिलते हैं। 4. घर पर दूसरा 'महाभारत' जब 10 साल भटकने और अपने सभी सैनिकों को खोने के बाद ओडिसियस अकेले एक भिखारी के भेष में अपने देश इथाका पहुंचते हैं, तो वहाँ एक अलग ही युद्ध उनका इंतजार कर रहा था। उन्हें मरा हुआ समझकर दर्जनों दुष्ट राजकुमारों (Suitors) ने उनके महल पर कब्जा कर लिया था और उनकी पत्नी से जबरन शादी करना चाहते थे। यहाँ ओडिसियस अपने बेटे के साथ मिलकर उन सभी का अंत करते हैं, जो किसी क्लाइमेक्स से कम नहीं है। क्रिस्टोफर नोलन इस कहानी को कैसे बदल सकते हैं? सिनेमा के जानकारों का मानना है कि अगर क्रिस्टोफर नोलन ने इस ग्रीक महाकाव्य को पर्दे पर उतारा है, तो यह सीधे तौर पर कालजयी सिनेमा (Cinema Masterpiece) होगी। नोलन की फिल्मों की खासियत है, नॉन-लीनियर स्टोरीटेलिंग (समय को आगे-पीछे दिखाना) और प्रैक्टिकल इफेक्ट्स। टाइम लूप और भटकाव: ओडिसियस के 10 साल के भटकाव को नोलन मानसिक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर दिखा सकते हैं, जैसा उन्होंने Inception और Interstellar में किया था। भव्य विजुअल्स: समुद्र के देवता का प्रकोप और अंडरवर्ल्ड के दृश्यों को नोलन बिना CGI के (या बहुत कम CGI के साथ) जिस तरह फिल्माएंगे, वह दर्शकों के लिए एक लाइफ-चेंजिंग विजुअल एक्सपीरियंस होगा। 'द ओडिसी' केवल एक राजा के घर लौटने की कहानी नहीं है, बल्कि यह इंसानी हौसले, बुद्धिमत्ता और किस्मत से लड़ने की महागाथा है। 23,900 करोड़ रुपये से अधिक की साख वाले क्रिस्टोफर नोलन अगर इतिहास के पन्नों से इस 'यूरोप की महाभारत' से बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड्स का टूटना तय है।
Alliance: बेटे निर्वाण का नाम 'राम खान' रखना चाहते थे सोहेल खान, बताई वजह
बॉलीवुड एक्टर और निर्माता सोहेल खान इन दिनों कुणाल खेमू के रियलिटी शो 'अलायंस' को लेकर जबरदस्त चर्चा में हैं। शो में जब से उनकी एक्स-वाइफ सीमा सजदेह की वाइल्ड कार्ड एंट्री हुई है, तब से इस पूर्व कपल की केमिस्ट्री और आपसी तालमेल दर्शकों का दिल जीत रहा है। हाल ही के एक एपिसोड में, सोहेल खान ने अपनी पर्सनल लाइफ का एक बेहद दिलचस्प और अनसुना किस्सा साझा किया। उन्होंने खुलासा किया कि वह अपने बड़े बेटे निर्वाण खान का नाम 'राम खान' रखना चाहते थे। ALSO READ: देसी लुक में छाईं अवनीत कौर, गुलाबी सलवार-सूट में दिखीं बेहद खूबसूरत मस्ती-मजाक में हुआ था नामकरण का फैसला शो के दौरान जब सह-प्रतियोगी अली गोनी ने सोहेल और सीमा के बेटों की तारीफ की और कहा कि वे बेहद संस्कारी हैं और निर्वाण बिल्कुल अपने पिता की कॉपी दिखते हैं, तब सोहेल भावुक हो गए। सोहेल ने बताया, जब सीमा प्रेग्नेंट थीं, तब हमने हंसी-मजाक में एक डील की थी। तय यह हुआ था कि अगर लड़का हुआ तो नाम मैं रखूंगा और लड़की हुई तो सीमा नाम चुनेगी। मैंने मन ही मन सोच लिया था कि मैं अपने बेटे का नाम 'राम खान' रखूंगा। अपने इस विचार के पीछे की वजह बताते हुए सोहेल ने कहा, हमारा परिवार शुरू से ही बहुत सेक्युलर (धर्मनिरपेक्ष) रहा है, इसलिए मेरे मन में यह नाम आया था। मैं देखना चाहता था कि यह नाम कैसा लगेगा। लेकिन नियति ने कुछ और ही तय कर रखा था। डिलीवरी के बाद जब सीमा को होश आया, तो उनके दिमाग में पहले से ही एक नाम चल रहा था। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें सोहेल ने उस पल को याद करते हुए कहा, डॉक्टर ने जैसे ही बताया कि लड़का हुआ है, मैं तुरंत कमरे के अंदर गया। सीमा उस वक्त डिलीवरी के असर की वजह से थोड़ी बेहोशी की हालत में थीं। उन्होंने मुझे देखा और बेहद मासूमियत से पूछा— 'निर्वाण कैसा है?' सीमा ने उस नाम को इतने प्यारे तरीके से लिया कि उसके बाद मेरा उसे बदलने का मन ही नहीं हुआ। बता दें कि सोहेल खान और सीमा सजदेह ने साल 1998 में घर से भागकर शादी की थी, जिसके लिए उन्होंने पहले आर्य समाज मंदिर में फेरे लिए और फिर निकाह किया था। लगभग 24 साल तक साथ रहने के बाद, 2022 में दोनों ने आधिकारिक तौर पर तलाक ले लिया। हालांकि, शो 'अलायंस' में सोहेल ने कबूल किया कि भले ही उनके बीच का प्यार वक्त के साथ बदल गया हो, लेकिन आज भी उनके मन में सीमा के लिए बेहद सम्मान है।
विराट कोहली का एक और रोहित शर्मा का एक और Failure, क्या होगा आगे?
कल इंग्लैंड के खिलाफ भारत को जीत मिली लेकिन विराट कोहली और रोहित शर्मा ने अपने विकेट पहले दस ओवर में फेंक दिए। रोहित शर्मा को 21 गेंदों में 11 रन पर सैम करन ने अपना शिकार बनाया और विराट कोहली को जोफ्रा आर्चर ने 5 रनों पर पगबाधा कर दिया। इन दोनों की बल्लेबाजी के बाद लोगों में चर्चा शुरु हो गई है कि विश्वकप तक इनमें से कौन अपनी जगह बचा पाएगा। Kya din aa gye 2024 ki yaad aa gyi jab dono sath me Test me fail ho rhe the tab ese hi 10-20 runs ka comparison krte the https://t.co/suTLrv5aSQ — (@NPL_45) July 14, 2026 रोहित ने कप्तानी गंवाने के बाद अपने आक्रामक रवैए पर अंकुश लगाया लेकिन उन्हें अभी तक इससे खास फायदा नहीं हुआ है।रोहित ने पिछले साल अक्टूबर से 13 वनडे मैच खेले हैं, जिसमें उन्होंने एक शतक और चार अर्धशतकों की मदद से 46.91 के औसत से 563 रन बनाए हैं।यह कोई मामूली रिकॉर्ड नहीं है। लेकिन भारतीय ड्रेसिंग रूम के मौजूदा हालात ने रोहित के लिए लगभग हर मैच में अच्छा प्रदर्शन करना अनिवार्य बना दिया है। He is a left armer , ball is coming into him , ball pitched on the leg stump , how on earth he tried to loft that over covers pic.twitter.com/iNcK4dFZ58 — Mk (@__mk11_) July 14, 2026 अभी यह सोचना कल्पना से परे होगा कि रोहित अगले कुछ मैचों में असफल रहने पर 2027 में होने वाले वनडे विश्व कप की दौड़ से बाहर हो जाएंगे। लेकिन जिस तरह से हाल में टीम प्रबंधन ने सूर्यकुमार यादव और संजू सैमसन को खराब प्रदर्शन के कारण टीम से बाहर किया, वह 39 वर्षीय रोहित के लिए चेतावनी हो सकती है। रोहित अब इस स्थिति में है कि वह किसी भी चीज को भाग्य के सहारे नहीं छोड़ सकते हैं क्योंकि भारत के शीर्ष क्रम में इशान किशन के रूप में विकल्प मौजूद है।अफगानिस्तान के खिलाफ तीसरे एकदिवसीय मैच को छोड़ दे तो इस साल रोहित का प्रदर्शन औसत से नीचे रहा है।पहले मैच में वह 16 रन बनाकर रनआउट हो गए और दूसरे मैच में वह 39 गेंदों में 48 रन बनाकर बोल्ड हो गए।इससे पहले न्यूजीलैंड के खिलाफ पहली एकदिवसीय सीरीज में रोहित शर्मा फ्लॉप रहे और टीम को शुरुआत में बड़ा स्कोर नहीं दे सके। रोहित शर्मा 3 मैचों में 20 की औसत से 61 रन बना पाए। पूरी सीरीज में उन्होंने 9 चौके और 2 छक्के लगाए।पहले मैच में उन्होंने 29 गेंदो पर 26 रन, दूसरे मैच में उन्होंने 38 गेंदो में 24 रन और तीसरे मैच में 13 गेंदो में 11 रन बनाए। रोहित के विपरीत एक अन्य सीनियर खिलाड़ी विराट कोहली फिटनेस और आंकड़ों दोनों के मामले में बेहतर स्थिति में हैं। कोहली ने पिछले साल अक्टूबर से 10 मैचों में 77.62 के औसत से 621 रन बनाए हैं, जिसमें तीन शतक और इतने ही अर्धशतक शामिल हैं। वह भी रोहित की तरह पहले मैच में नहीं चल पाए लेकिन टीम में उनके स्थान पर किसी तरह का खतरा नजर नहीं आ रहा है। Virat Kohli = GONE! pic.twitter.com/OoYriwqcYl — England Cricket (@englandcricket) July 14, 2026 कुछ ऐसा ही ऑस्ट्रेलिया में हुआ था और रोहित अगले 2 मैच में अर्धशतक जमाकर मैन ऑफ द सीरीज का खिताब पाए थे। इंग्लैंड की परिस्थितियों से विराट कोहली भली भांति परिचित है क्योंकि अब वह इस देश में ही रहते हैं। ऐसे में फैंस का मानना है कि कोहली अगले 2 मैच में बड़ी पारी खेलकर मैन ऑफ द सीरीज का अवार्ड पाएंगे।
रणथम्भौर बाघ अभयारण्य पर्यटकों के लिए तीन महीने के लिए बंद
सवाईमाधोपुर। राजस्थान में सवाईमाधोपुर का रणथंभौर बाघ अभयारण्य तीन महीने के मानसून के दौरान पर्यटकों के लिए बंद रहेगा। प्राप्त जानकारी के अनुसार इस बीच 1700 वर्ग किलोमीटर के इस जंगल में बाघ के शरीर पर बनी धारियों से बाघों की गणना के लिए 600 कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं। अभयारण्य के सूत्रों ने बुधवार […] The post रणथम्भौर बाघ अभयारण्य पर्यटकों के लिए तीन महीने के लिए बंद appeared first on Sabguru News .
इंस्टामार्ट पर अब मिलेगा HPCL LPG सिलेंडर, जल्द शुरू होगी बेंगलूरु में ऑन-डिमांड डिलीवरी सेवा
नई दिल्ली। कर्नाटक में बेंगलूरु के रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर है। अब यहां के गैस उपभोक्ताओं को क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म इंस्टामार्ट के जरिये एलपीजी सिलेंडर मिलेंगे। इसके लिए इंस्टामार्ट ने हिंदुस्तान पेट्रोलियम निगम लिमिटेड (एचपीसीएल) से हाथ मिलाया है और ऑन-डिमांड डिलीवरी सेवा शुरू करने की घोषणा है। गौरतलब है कि देश […] The post इंस्टामार्ट पर अब मिलेगा HPCL LPG सिलेंडर, जल्द शुरू होगी बेंगलूरु में ऑन-डिमांड डिलीवरी सेवा appeared first on Sabguru News .
बड़े पर्दे के बाद अब कलम से कमाल करेंगे कुणाल कपूर, तीन फिल्मों की स्क्रिप्ट की पूरी
कुणाल ने सोशल मीडिया पर बताया कि उन्होंने तीन पूरी फिल्मी स्क्रिप्ट लिख ली हैं। इनमें एक एक्शन फिल्म, एक रोमांटिक फिल्म और एक कॉमेडी फिल्म शामिल है। अब वह ऐसे लोगों की तलाश में हैं, जो इन फिल्मों को बनाने में उनके साथ जुड़ सकें। उन्होंने लिखा, मुझे ऐसा काम नहीं मिल रहा था, जिसे करने के लिए मैं सच में उत्साहित था। इसलिए मैंने खुद ही लिखना शुरू किया। मेरे दिमाग में काफी समय से चल रहे तीन विचार अब पूरी स्क्रिप्ट बन चुके हैं। ये सिर्फ आइडिया या शुरुआती रूपरेखा नहीं हैं, बल्कि पूरी तरह तैयार स्क्रिप्ट हैं। A post shared by Kunal K Kapoor (@kunalkkapoor) कुणाल ने बताया कि तीनों फिल्में अलग-अलग शैली की हैं और हर कहानी ने उन्हें एक अलग दुनिया और अलग सोच के साथ जीने का मौका दिया। ALSO READ: 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' के 15 साल: जानिए कैसे एक फिल्म बन गई लोगों के जीने का तरीका! उन्होंने लिखा, तीन अलग-अलग दुनिया, जिन्होंने मुझे तीन अलग-अलग सोच के साथ जीने का मौका दिया। लंबे समय बाद इतना कठिन, लेकिन उतना ही मजेदार अनुभव रहा। अब सबसे बड़ी चुनौती सही लोगों को ढूंढना है, जो इन कहानियों को पर्दे तक पहुंचाने में मेरा साथ दें। हालांकि, कुणाल यहीं नहीं रुकने वाले हैं। उन्होंने मजाकिया अंदाज में लिखा, चौथा आइडिया तो अभी से मेरा पीछा नहीं छोड़ रहा। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें इस साल कुणाल कपूर की दो बड़ी फिल्में भी रिलीज़ होने वाली हैं। वह नितेश तिवारी की फिल्म रामायण में इंद्र के किरदार में नजर आएंगे। यह फिल्म इस दिवाली सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी और इसका ट्रेलर 18 जुलाई को भारत मंडपम में लॉन्च किया जाएगा। इसके अलावा वह चिरंजीवी के साथ तेलुगु फैंटेसी फिल्म विश्वंभरा में भी दिखाई देंगे, जो इस साल रिलीज़ होगी। एक तरफ देश की दो बड़ी फिल्मों का हिस्सा बनने जा रहे कुणाल कपूर हैं, तो दूसरी तरफ उनकी तीन नई स्क्रिप्ट भी पूरी तरह तैयार हैं और अब उन्हें सिर्फ सही साथी का इंतजार है।
ओडिशा में इलाज में लापरवाही को लेकर दंत चिकित्सक को एक लाख रुपए जुर्माना देने का निर्देश
भुवनेश्वर। ओडिशा में केंद्रपाड़ा ज़िला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक निजी दंत चिकित्सक को एक महिला को एक लाख रुपए का मुआवज़ा देने का आदेश दिया है। आयोग ने दंत चिकित्सक को मेडिकल लापरवाही और सेवा में कमी का दोषी पाया है। यह मामला दांतों के इलाज से जुड़ा है, जिसके कारण महिला को […] The post ओडिशा में इलाज में लापरवाही को लेकर दंत चिकित्सक को एक लाख रुपए जुर्माना देने का निर्देश appeared first on Sabguru News .
राकांपा ने परिसीमन विधेयक का समर्थन करने का दिया संकेत
मुंबई। संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विवादित परिसीमन विधेयक का समर्थन करने के संकेत से राजनीतिक माहौल में हलचल सी मच गई है। विवादित परिसीमन विधेयक पर विपक्ष के रुख को बदलने वाले इस कदम में पार्टी की वरिष्ठ नेता एवं सांसद सुप्रिया सुले ने संकेत दिया है कि […] The post राकांपा ने परिसीमन विधेयक का समर्थन करने का दिया संकेत appeared first on Sabguru News .
'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' के 15 साल: जानिए कैसे एक फिल्म बन गई लोगों के जीने का तरीका!
बहुत ही कम ऐसी फिल्में होती हैं जो न सिर्फ किसी इंसान पर, बल्कि उसके जीने के तरीके पर भी गहरा असर छोड़ती हैं। फिर कुछ ऐसी फिल्में आती हैं जो इससे भी आगे निकलकर जीने का एक तरीका सिखा जाती हैं, और 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' ने बिल्कुल यही काम किया। यह फिल्म न केवल एक ट्रेंडसेटर बनकर उभरी, बल्कि जिंदगी जीने का एक ऐसा जरिया बन गई जो आज भी लोगों को बहुत पसंद आता है। अपनी कहानी से लेकर डायलॉग्स तक, यह फिल्म एक ऐसी दीवानगी बन गई जिसने पूरी एक पीढ़ी को इंस्पायर किया। आज, अपनी रिलीज के 15 साल पूरे होने पर भी 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' उतनी ही फ्रेश और खास लगती है। ALSO READ: 'हद्द में रहना सब के सब...' पैपराजी की अजीब डिमांड पर भड़कीं जरीन खान, जमकर लगाई क्लास साल 2011 में रिलीज हुई 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' सिर्फ एक फिल्म नहीं थी, बल्कि एक कमाल का एक्सपीरियंस थी। दोस्ती, प्यार, एडवेंचर, घूमना-फिरना, परिवार, बाप-बेटे का रिश्ता, रोड ट्रिप्स, आजादी या जिंदगी को देखने का नजरिया—ZNMD उन बहुत कम फिल्मों में से एक है जिसने फुल एंटरटेनमेंट देने के साथ-साथ दिल पर एक कभी न मिटने वाली छाप छोड़ी। यह फिल्म अर्जुन, कबीर और इमरान नाम के बचपन के तीन दोस्तों की कहानी है, जो कबीर की बैचलर पार्टी के लिए स्पेन में तीन हफ्ते के रोड ट्रिप पर निकलते हैं। उन्हें जरा भी अंदाजा नहीं था कि यह सफर न केवल उनकी अपनी जिंदगी बदल देगा, बल्कि लाखों देखने वालों के दिलों को भी गहराई से छू जाएगा। अपनी इस बेहद प्यारी कहानी के जरिए इस फिल्म ने जिंदगी की उन बातों को दिखाया जिन्हें हममें से कई लोग अक्सर अनदेखा कर देते हैं या समझ नहीं पाते। सही मायनों में, इसने दर्शकों को सिखाया कि बिना किसी डर या पछतावे के असल में खुलकर जीने का क्या मतलब होता है। ALSO READ: विपुल अमृतलाल शाह 'समुक' से रचने जा रहे हैं नया इतिहास, हॉलीवुड एक्सपर्ट एलेक गिलिस करेंगे एलियन क्रिएचर तैयार ZNMD एक ऐसी लीक से हटकर फिल्म साबित हुई जिसने लोगों को जिंदगी जीने का एक बिल्कुल नया नजरिया दिया। दुनिया घूमना, एडवेंचर को गले लगाना, रिस्क लेना, अपनी भावनाओं को खुलकर जाहिर करना और अपने अंदर सुकून ढूंढना—फिल्म ने खुद को पहचानने के हर एक पहलू को इतनी खूबसूरती से दिखाया कि यह सीधे दर्शकों के दिलों में उतर गई। रितिक रोशन, अभय देओल, फरहान अख्तर, कैटरीना कैफ और कल्कि कोचलिन जैसे शानदार कलाकारों से सजी इस फिल्म ने हर पीढ़ी के दर्शकों के दिलों को छुआ। दमदार फिल्में बनाने के लिए मशहूर एक्सेल एंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी 'जिंदगी ना मिलेगी दोबारा' उनके सबसे बेहतरीन कामों में से एक है। जोया अख्तर के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म में कुछ बेहद कमाल के डायलॉग्स और शायरी थी, जिन्हें जावेद अख्तर ने लिखा था। उनके लिखे शब्दों ने जिंदगी के असली मायने को बहुत ही खूबसूरती से समेटा है। यह फिल्म कई आइकॉनिक डायलॉग्स और कभी न भूलने वाली कविताओं से भरी हुई थी। Seize the day, my friend. पहले इस दिन को पूरी तरह जियो, फिर 40 के बारे में सोचना। या फिर दिलों में तुम अपनी बेताबियां लेके चल रहे हो तो ज़िंदा हो तुम। नज़र में ख्वाबों की बिजलियां लेके चल रहे हो तो ज़िंदा हो तुम। फिल्म का म्यूजिक एल्बम भी इसके सबसे बड़े प्लस पॉइंट्स में से एक था, जिसमें 'दिल धड़कने दो', 'इक जूनूनपेंट इट रेड)', 'ख्वाबों के परिंदे', 'सेनोरिटा' और 'सूरज की बाहों में' जैसे ब्लॉकबस्टर गाने शामिल थे। यहाँ तक कि 59वें नेशनल फिल्म अवार्ड्स में इस फिल्म ने दो अवॉर्ड्स भी अपने नाम किए थे— बेस्ट कोरियोग्राफी ('सेनोरिटा' गाने के लिए बॉस्को-सीज़र) और बेस्ट ऑडियोग्राफी (बेलन फोंसेका)।
भीलवाड़ा के आसींद में कार की चपेट में आने से 3 युवकों की मौत
भीलवाड़ा। राजस्थान में भीलवाड़ा के आसींद थाना क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग-158 पर मंगलवार देर रात कार की चपेट में आने से मोटर साइकिल पर सवार तीन युवकों की मौत हो गई। पुलिस सूत्रों ने बुधवार को बताया कि कमलेश (24), भूरा उर्फ निजाम खान और बृजेश सहनी भीलवाड़ा में कैटरिंग का काम करते थे। देर […] The post भीलवाड़ा के आसींद में कार की चपेट में आने से 3 युवकों की मौत appeared first on Sabguru News .
22 जुलाई 2026: आषाढ़ की भड़ली नवमी पर महा अबूझ मुहूर्त, इसके बाद 4 महीने तक थमेगी शहनाइयां
हिंदू धर्म और पंचांग में शुभ कार्यों के लिए सही समय यानी 'मुहूर्त' का बहुत महत्व होता है। लेकिन साल में कुछ दिन ऐसे भी आते हैं, जब आपको किसी पंडित जी से पूछने या पंचांग देखने की जरूरत नहीं होती। ऐसा ही एक महा-मुहूर्त इस साल 22 जुलाई 2026 को आ रहा है। यह दिन भड़ली नवमी का है, जो अपने आप में एक 'अबूझ मुहूर्त' है। इसके ठीक बाद देवशयनी एकादशी से चातुर्मास शुरू हो जाएगा और अगले 4 महीनों के लिए सभी मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। 1. क्या है भड़ली नवमी और इसका महत्व? हिंदू पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भड़ली नवमी (या भडल्या नवमी) कहा जाता है। इसी पावन दिन पर आषाढ़ गुप्त नवरात्रि का समापन भी होता है। धार्मिक दृष्टिकोण से इस तिथि को बेहद पवित्र और दोषमुक्त माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन ग्रहों की स्थिति इतनी अनुकूल होती है कि पूरे 24 घंटे का समय हर तरह के शुभ काम के लिए सर्वोत्तम बन जाता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में कोई ग्रह दोष हो या शादी-ब्याह के लिए सामान्य दिनों में मुहूर्त न निकल रहा हो, तो वे बिना किसी हिचकिचाहट के इस दिन अपना कार्य कर सकते हैं। 2. भड़ली नवमी (अबूझ मुहूर्त) पर कौन-कौन से कार्य किए जा सकते हैं? अबूझ मुहूर्त का अर्थ ही है- असीम शुभता। इस दिन आप नीचे दिए गए सभी मांगलिक और व्यावहारिक कार्य बिना संकोच के संपन्न कर सकते हैं। विवाह और सगाई: यदि किसी के विवाह के लिए कुंडली के मिलान में दिक्कत आ रही हो या कोई अन्य अड़चन हो, तो इस दिन शादी करना अत्यंत शुभ और सुखद दाम्पत्य जीवन देने वाला माना जाता है। गृह प्रवेश: नए घर में प्रवेश करने या नए कार्यालय/दुकान का उद्घाटन करने के लिए यह सर्वश्रेष्ठ दिन है। मुंडन और जनेऊ संस्कार: बच्चों का मुंडन संस्कार या यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण करने जैसे धार्मिक कार्य इस दिन निर्विघ्न पूरे होते हैं। वाहन और संपत्ति की खरीदारी: नया वाहन खरीदना, नया मकान या प्लॉट बुक करना, या सोने-चांदी के गहने खरीदना इस दिन समृद्धि लाता है। नया व्यापार या निवेश: अगर आप कोई नया बिजनेस शुरू करना चाहते हैं या कोई बड़ा वित्तीय निवेश करने जा रहे हैं, तो भड़ली नवमी का दिन आपको सफलता दिलाएगा। 3. इसके बाद 4 महीने तक क्यों नहीं होंगे मांगलिक कार्य? भड़ली नवमी के तुरंत बाद देवशयनी एकादशी आती है, जिससे चातुर्मास (चार पवित्र महीने) की शुरुआत होती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इन चार महीनों में भगवान विष्णु क्षीर सागर में योग निद्रा में चले जाते हैं। सृष्टि के पालनहार के शयनकाल में रहने के कारण सभी प्रकार के मांगलिक और मांगलिक कार्य जैसे विवाह, जनेऊ और गृह प्रवेश पूरी तरह वर्जित हो जाते हैं। अब सीधे देवउठनी एकादशी (कार्तिक मास) पर भगवान के जागने के बाद ही शहनाइयाँ दोबारा गूँजेंगी। इसलिए, चातुर्मास से पहले भड़ली नवमी मांगलिक कार्यों के लिए आखिरी और सबसे बड़ा अवसर है। 4. वर्ष में कितने अबूझ मुहूर्त होते हैं और ये कब-कब आते हैं? हिंदू संस्कृति में वर्षभर में मुख्य रूप से 4 अबूझ मुहूर्त (जिन्हें स्वयंसिद्ध मुहूर्त भी कहा जाता है) माने गए हैं। इन दिनों में बिना पंचांग देखे कोई भी शुभ कार्य किया जा सकता है। ये चारों इस प्रकार हैं: पहला अबूझ मुहूर्त: अक्षय तृतीया (आखा तीज) यह वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को आती है (आमतौर पर अप्रैल या मई के महीने में)। इसे साल का सबसे बड़ा अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इस दिन दान-पुण्य और सोने की खरीदारी का विशेष महत्व है। दूसरा अबूझ मुहूर्त: देवउठनी एकादशी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को देवउठनी एकादशी कहते हैं (आमतौर पर नवंबर में)। इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की निद्रा के बाद जागते हैं और इसी दिन से देश में शादियों का सीजन फिर से शुरू हो जाता है। तीसरा अबूझ मुहूर्त: वसंत पंचमी माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को वसंत पंचमी मनाई जाती है (आमतौर पर जनवरी या फरवरी में)। यह ज्ञान की देवी मां सरस्वती का दिन है और विद्यारंभ, कला, संगीत और विवाह के लिए बेहद शुभ अबूझ मुहूर्त माना जाता है। चौथा अबूझ मुहूर्त: भड़ली नवमी आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आने वाली भड़ली नवमी (आमतौर पर जून या जुलाई में) साल का आखिरी अबूझ मुहूर्त होती है। इसके बाद चातुर्मास लगने के कारण लोग इस दिन अपने छूटे हुए सभी जरूरी मांगलिक कार्य जल्द से जल्द पूरे कर लेते हैं। नोट: कुछ क्षेत्रों में दशहरा यानी विजयादशमी को भी अबूझ मुहूर्त के रूप में माना जाता है, लेकिन मुख्य रूप से ऊपर दिए गए चार ही सबसे बड़े स्वयंसिद्ध मुहूर्त स्वीकार किए गए हैं।
श्रीगंगानगर के खेत में मिले पुराने बम को सेना ने नष्ट किया
श्रीगंगानगर। राजस्थान में श्रीगंगानगर जिले के राजियासर थाना क्षेत्र में करीब एक महीने पहले खेत में मिले जंग लगे बम को सेना के बम निरोधक दस्ते ने बुधवार सुबह निष्क्रिय कर दिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार दस्ते ने नियंत्रित विस्फोट करके बम को नष्ट कर दिया। इस दौरान विस्फोट से जमीन में बड़ा गड्ढा हो […] The post श्रीगंगानगर के खेत में मिले पुराने बम को सेना ने नष्ट किया appeared first on Sabguru News .
अलवर में तेज रफ्तार ट्रक ने पिता-पुत्र को कुचला, बेटे की मौत, पिता घायल
अलवर। राजस्थान में अलवर जिले के अकबरपुर थाना क्षेत्र में अलवर- जयपुर मार्ग पर बुधवार को ट्रक की चपेट में आने से एक युवक की मौत हो गई जबकि उसका पिता घायल हो गया। पुलिस सूत्रों ने बताया कि चांद पहाड़ी निवासी दिनेश गुर्जर (30) पिता सरजीवन गुर्जर (60) के साथ नानी सास के निधन […] The post अलवर में तेज रफ्तार ट्रक ने पिता-पुत्र को कुचला, बेटे की मौत, पिता घायल appeared first on Sabguru News .
मणिपुर में भीड़ ने असम राइफल्स के शिविर पर किया हमला, वाहनों में की तोड़फोड़
सेनापति। मणिपुर के सेनापति में भीड़ ने मंगलवार रात असम राइफल्स के शिविर पर हमला किया और गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया। रक्षा मंत्रालय के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) और प्रवक्ता ने बुधवार को बताया कि मंगलवार रात राज्य के सेनापति शहर में असम राइफल्स के शिविर पर बेकाबू भीड़ ने पत्थरबाजी, आगजनी और जमकर तोड़-फोड़ की। […] The post मणिपुर में भीड़ ने असम राइफल्स के शिविर पर किया हमला, वाहनों में की तोड़फोड़ appeared first on Sabguru News .

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