दैनिक भास्कर की ‘स्पाई फाइल्स’ सीरीज में आप पढ़ रहे हैं- ऑपरेशन बांग्लादेश। पार्ट-1 में आपने पढ़ा- 1970 में पाकिस्तान में पहली बार आम चुनाव हुए। कुल 300 सीटों में से 167 सीटें पूर्वी पाकिस्तान के शेख मुजीब-उर-रहमान को मिलीं और पश्चिमी पाकिस्तान के जुल्फिकार अली भुट्टो की पार्टी को सिर्फ 86 सीट। मुजीब का पीएम बनना तया था, लेकिन तानाशाह राष्ट्रपति याह्या खान नहीं चाहते थे कि कोई बंगाली सत्ता संभाले। याह्या ने मुजीब के साथ कई बैठकें कीं, लेकिन बात नहीं बनी। पूर्वी पाकिस्तान में बगावत छिड़ गई। याह्या ने बंगालियों का दमन करने का फैसला किया। 25 मार्च को ऑपरेशन सर्चलाइट शुरू हो गया। एक ही रात में 10 हजार लोग मारे गए। पाकिस्तानी फौज महिलाओं को उठाकर अपने कैंपों में ले गई और महीनों गैंगरेप किया। लाखों बंगाली भागकर भारत आने लगे। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी फौरन जंग चाहती थीं, लेकिन सेना प्रमुख सैम मानेकशॉ ने इस्तीफे की पेशकश कर दी। पार्ट-2 में उससे आगे की कहानी… अप्रैल 1971 की एक सुबह। घड़ी में 11 बज रहे थे। प्रधानमंत्री दफ्तर में पीएम इंदिरा गांधी और सेना प्रमुख सैम मानेकशॉ बैठे थे। इंदिरा बेहद परेशान थीं। उनका चेहरा गुस्से से लाल हो गया था। उन्होंने सेना प्रमुख से कहा- ‘आपको वक्त चाहिए न… मिल जाएगा वक्त। जंग की तैयारी कीजिए।’ सैम ने कहा- ‘लेकिन मैं गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और विदेश मंत्री की दखल नहीं मानूंगा। आप फैसला कर लीजिए।’ इंदिरा- ‘क्या मतलब?’ सैम- ‘मैं सिर्फ एक लीडर की बात मानूंगा। हर कोई दखल नहीं देगा।’ इंदिरा ने मुस्कुराते हुए कहा- ‘सैम… आप मुख्य कमांडर होंगे। कोई दखलअंदाजी नहीं करेगा।’ सैम ने भी मुस्कुराते हुए कहा- ‘आई प्रॉमिस मैडम। जीत हमारी ही होगी।’ सेना प्रमुख को 6 महीने का वक्त मिल गया। इधर, पूर्वी पाकिस्तान में याह्या की सेना ने कत्लेआम मचा रखा था। हर दिन हजारों लोग मारे जा रहे थे। 6 महीने इंतजार का मतलब था पूर्वी पाकिस्तान का सफाया। RAW चीफ आरएन काव परेशान थे- ‘करें तो करें क्या…?’ फिर उन्होंने अपने साथी अफसर शंकरन नायर को बुलाया। ‘हम सीधे-सीधे मिलिट्री एक्शन नहीं ले सकते, लेकिन उस जगह तो चोट कर सकते हैं, जहां दर्द सबसे ज्यादा हो।’ RAW चीफ ने कहा। नायर ने मुस्कुराते हुए कहा- ‘आपका इशारा गुरिल्ला वॉर है?’ काव ने कहा- ‘बिल्कुल।’ ‘पर ये काम करेगा कौन?’ नायर ने पूछा। ‘वही बंगाली, जो भागकर भारत आए हैं।’ काव ने जवाब दिया। अगले दिन नायर कोलकाता पहुंच गए। वे गुप्त रूप से 25 रिफ्यूजी कैंपों में गए। BSF की मदद से 18 से 35 साल के बंगालियों को संघर्ष के लिए तैयार किया। उन्हें हथियार चलाने, घात लगाकर हमला करने, कमांडो ऑपरेशन्स और छोटे रेडियो सेट के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी गई। एक महीने के भीतर 2.5 लाख बागी बंगाली गुरिल्ला वॉर के लिए तैयार हो चुके थे। लेकिन इतनी तैयारी काफी नहीं थी… एक रोज RAW चीफ ने इंदिरा से कहा- ‘हमें फौरन एक और वॉर की तैयारी करनी चाहिए।’ इंदिरा ने पूछा- ‘अब किस वॉर की तैयारी?’ RAW चीफ- ‘साइकोलॉजिकल वॉर। आप विदेशों में पाकिस्तान के अत्याचारों के खिलाफ पत्र लिखिए।’ इंदिरा ने विदेशी नेताओं को पाकिस्तान की बर्बरता के बारे में लिखना शुरू कर दिया। RAW ने विदेशी पत्रकारों को रिपोर्टिंग के लिए भारत बुला लिया। 13 जून 1971 को यूके के संडे टाइम्स में इन नरसंहारो के बारे में खबर छपी। संडे टाइम्स ने लिखा- ‘पूर्वी पाकिस्तान में 1 लाख से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। महिलाओं के साथ बलात्कार किया गया है। चाकू और छुरियों से उनके अंग काट दिए गए हैं। हजारों बच्चों की आंखें फोड़ दी गई हैं।’ पाकिस्तान दुनिया के सामने बेनकाब हो गया। भारत यही तो चाहता था। ताकि उसे मिलिट्री एक्शन की कोई ठोस वजह मिल जाए। अब तक जुलाई आ चुका था। RAW ने तय किया कि ग्राउंड पर जाकर बागी बंगालियों की तैयारियों का जायजा लिया जाए। एक अफसर आधी रात को बंगालियों के कैंप में पहुंच गया। हर तरफ धुएं की गंध और जलते हुए मांस की बदबू फैली हुई थी। कुछ ही घंटे पहले, पाकिस्तानी फौज ने एक गांव में ढूंढ़-ढूंढ़कर बंगालियों का कत्ल किया था। गुरिल्ला टीम के कमांडर ने दीवार पर चढ़कर झांका- सात पाकिस्तानी फौजी खाना खा रहे थे। तीन पहरा दे रहे थे। उसने नीचे उतरकर कहा- 'मैंने दस गिने हैं। ज्यादा भी हो सकते हैं। एक फौजी ट्रक भी खड़ा है।’ उसने अपनी असॉल्ट राइफल लोड की और हाथ हिलाकर साथियों को आगे बढ़ने का इशारा किया। 15 बंगाली दबे पांव निकल पड़े। आधे घंटे चलने के बाद वे जलती हुई इमारतों की रोशनी तक पहुंच गए। तभी एक पाकिस्तानी फौजी ने देख लिया। बंगाली कमांडर जोर से चिल्लाया- 'जॉय बांग्ला!' एक साथ 15 राइफलें गूंज उठीं- ठायं, ठायं। दसों पाकिस्तानी फौजी ढेर हो गए। गुरिल्ला टीम के कुछ लड़ाके उनकी लाशों पर चढ़ गए और थूकने लगे। वहां खड़े ट्रक से हथियार और गोला-बारूद निकाले और उसे आग के हवाले कर दिया। यह सब देखकर RAW अफसर ने मन ही मन मुस्कुराते हुए कहा- ‘अब तो पाकिस्तान का टूटना तय है।’ वक्त का पहिया घूमता रहा और आ गया अक्टूबर 1971, भारत जंग के लिए तैयार था, लेकिन एक खुफिया खबर ने नेवी अफसरों की नींद उड़ा दी थी। दिल्ली के वॉर रूम में रक्षा मंत्री जगजीवन राम, नौसेना चीफ एसएम. नंदा और RAW चीफ आरएन काव परेशान बैठे थे। नौसेना चीफ ने कहा- ‘काव साहब, कराची पोर्ट पर एडवांस्ड सर्विलांस सिस्टम लगे हैं। हमें उसकी सटीक जानकारी चाहिए।’ काव ने कहा- ‘नंदा साहब… अभी के माहौल में वहां की तस्वीरें जुटाना छोटे-मोटे एजेंटों के बस की बात नहीं है। बड़े बाजों को मैदान में उतारना होगा।’ उसी रोज RAW चीफ ने शंकरन नायर के साथ मीटिंग की। नायर ने मुंबई में मौजूद अपने टॉप एजेंट को फोन मिलाया और अपनी जरूरतें बता दी। पांच दिन बाद एजेंट का फोन आया- ‘सर, एक बंदा है जो हमारी मदद कर सकता है।’ नायर उससे मिलने के लिए फ्लाइट पकड़कर मुंबई पहुंच गए। एजेंट ने बताया- ‘जिस आदमी की हमें जरूरत है, उसका नाम कावसजी है। पारसी डॉक्टर हैं। उनका एक छोटा समुद्री जहाज है। वे भारत और पाकिस्तान के बीच कुवैत के रास्ते सामान और मरीज लाते-ले जाते हैं।’ नायर ने झट से कहा- ‘क्या हम उस पर आंख मूंदकर भरोसा कर सकते हैं?’ एजेंट मुस्कुराया- ‘सच कहूं तो भरोसा तो नहीं कर सकता, लेकिन हमारे पास एक ऐसा पत्ता है, जिससे हम उसे मना सकते हैं।’ एजेंट ने मेज पर एक फाइल खिसका दी। दरअसल, दो महीने पहले कावसजी अपने जहाज पर बिना टैक्स चुकाए महंगे सामान लाते हुए पकड़े गए थे। कस्टम्स विभाग उनके खिलाफ जांच कर रहा था। भारी जुर्माना लगना तय था। नायर का दिमाग घूमा। कस्टम्स के चीफ उनके पुराने दोस्त थे। उन्होंने तुरंत फोन घुमाया। दस मिनट की बातचीत में डील पक्की हो गई। तय हुआ कि RAW अपने सीक्रेट फंड से डॉक्टर का सारा जुर्माना भरेगी और कस्टम विभाग केस बंद करने का लेटर जारी करेगा, लेकिन यह लेटर सीधे डॉक्टर को नहीं दिया जाएगा। अगली सुबह वो लेटर नायर के हाथों में था। वे अपने दो एजेंटों को लेकर दक्षिण मुंबई में डॉक्टर के क्लिनिक पहुंच गए। नायर ने डॉक्टर से मिलते ही कहा- ‘हैलो मिस्टर कावसजी, आई एम कैप्टन मेनन फ्रॉम इंडियन नेवी।’ डॉक्टर कुछ कहते उससे पहले ही नायर ने वो लेटर टेबल पर रखा दिया। नायर ने मुस्कुराते हुए कहा- ‘हमारा एक छोटा-सा काम कर दें, तो यह लेटर आपका हो जाएगा। मन ना हो तो आप मना भी कर सकते हैं। फिर मैं ये लेटर इसी वक्त जला दूंगा। जांच फिर शुरू हो जाएगी।’ डॉक्टर ने भारी मन से लेटर देखा। फिर कहा- ‘बोलिए, कौन सा काम है?’ ‘अगली पाकिस्तान ट्रिप पर हमारे दो आदमियों को साथ ले जाना है। जहाज दो दिनों के भीतर निकलना चाहिए।’ नायर ने कहा। डॉक्टर ने बेबसी में सिर हिलाते हुए कहा- ’ठीक है।’ नायर वहां से निकलने लगे तो डॉक्टर ने पूछा- ‘कम से कम इतना बता दीजिए कि मैं किन लोगों को अपने साथ ले जा रहा हूं।’ नायर ने चलते-चलते कहा- ‘बस इतना जान लीजिए कि उनके नाम 'रॉड' और 'मोरियार्टी' हैं।’ 'रॉड' नायर के नौसैनिक सहायक राव थे और 'मोरियार्टी' RAW के फोटोग्राफी डिपार्टमेंट के उस्ताद एजेंट मूर्ति थे। दो दिन बाद, डॉक्टर कावसजी, दोनों एजेंटों को लेकर रवाना हो गए। जब तक जहाज हिंदुस्तानी सीमा में रहा, सब शांत था, लेकिन अब असली खेल शुरू होने वाला था। जहाज जैसे ही कराची बंदरगाह पर रुका, पाकिस्तान CID की टीम वहां आ धमकी। एक इंस्पेक्टर दो सिपाहियों के साथ जहाज पर चढ़ गया। डॉक्टर की धड़कनें तेज हो गईं। अफसरों ने कागजात खंगालने शुरू किए। इंस्पेक्टर की नजर पैसेंजर लिस्ट पर अटक गई। उसने डॉक्टर से पूछा- ‘रॉड और मोरियार्टी… कहां हैं ये दोनों?’ डॉक्टर का दिल हलक में आ गया। उन्होंने अपनी घबराहट छुपाते हुए कहा- ‘ओह! समझ गया आप क्या सोच रहे हैं। अजीब नाम हैं ना? दरअसल ये भारतीय ईसाई हैं... उनके नाम ऐसे ही होते हैं। दोनों अंदर केबिन में पड़े हैं।’ ‘जाओ, चेक करो!’ इंस्पेक्टर ने कड़क आवाज में अपने सिपाही को हुक्म दिया। डॉक्टर ने हाथ जोड़ लिए- ‘साहब! भूलकर भी मत जाइएगा। दोनों को चेचक हो गया है। एक को हुआ और दूसरे को लग गया। जब तक वे ठीक नहीं होते, वहां कोई नहीं जा सकता। आपको भी इंफेक्शन हो जाएगा। डॉक्टर सालों से कराची आ-जा रहे थे, इसलिए इंस्पेक्टर को शक नहीं हुआ। उन्होंने जहाज को बंदरगाह में रुकने की इजाजत दे दी। जब CID की टीम जहाज से उतरी, तो डॉक्टर ने गहरी सांस ली। उनके हाथ कांप रहे थे। उन्होंने सोडे के साथ एक कड़क स्कॉच बनाया और एक ही घूंट में गटक गए। अब तक रात हो चली थी। सन्नाटा पसरा था। जहाज धीमे-धीमे बंदरगाह के मुहाने पर दो बड़ी चट्टानों के बीच आकर रुक गया। RAW के एजेंटों ने खिड़की से बाहर झांका। ‘क्या तुम भी वही देख रहे हो जो मैं देख रहा हूं?’ राव ने हैरान होकर पूछा। मूर्ति ने कहा- ‘यह तो कमाल है।’ सामने एक ताजा कंक्रीट का ढांचा खड़ा था, जिस पर भारी-भरकम एंटी-एयरक्राफ्ट गन तैनात थी। दोनों एजेंट दनादन तस्वीरें खींचने लगे। उन्होंने किलेबंदी, तोपों की स्थिति और बंदरगाह पर खड़े जंगी जहाजों की तस्वीरें कैद कर लीं। आधे घंटे तक कैमरे की क्लिक-क्लिक चलती रही। अब कैप्टन ने जहाज मोड़ा और ले जाकर किनारे पर लगा दिया। दोनों एजेंट फिर से उस खास केबिन में छिप गए। सुबह डॉक्टर जहाज से उतरे। मार्केट जाकर अपना काम निपटाया और फिर जहाज में लौट आए। जहाज को अब कुवैत जाना था। दोपहर में वह कराची से निकल पड़ा। बंदरगाह से बाहर निकलते वक्त एजेंटों ने चट्टान के दूसरे हिस्से की भी तस्वीरें खींच लीं। जहाज अरब सागर के रास्ते कुवैत पहुंचा। वहां राव और मूर्ति उतरे और सीधे भारतीय दूतावास पहुंच गए। उसी रोज कैमरों से निकालकर रीलें स्पेशल फ्लाइट से दिल्ली भेज दी गईं। दिल्ली के एक सीक्रेट लैब में दो फोटोग्राफर तैयार बैठे थे। रीलें आते ही तुरंत वॉर रूम पहुंचाई गईं। रक्षा मंत्री जगजीवन राम, नौसेना चीफ एसएम. नंदा और RAW चीफ काव बैठे हुए थे। सामने बड़ी प्रोजेक्टर स्क्रीन लगी हुई थी। RAW अफसर एक-एक करके तस्वीरें दिखाते जा रहा था। आखिर उन तस्वीरों में था क्या… कराची बंदरगाह के अंदर और बाहर का एक-एक नक्शा और तस्वीरें। पाकिस्तानी तोपें कहां हैं, उनके तेल के डिपो कहां हैं और जंगी जहाज किस जगह खड़े हैं… हर तस्वीर RAW के पास थी। एक रोज इंदिरा ने सेना प्रमुख से पूछा- ‘क्या आप जंग के लिए तैयार हैं?’ सेना प्रमुख सैम ने जवाब दिया- 'आई एम ऑलवेज रेडी स्वीटी।' दरअसल, सैम अक्सर इंदिरा के लिए इस शब्द का इस्तेमाल करते थे। फिर आई 3 दिसंबर 1971 की रात। अचानक पाकिस्तानी एयरपोर्स ने भारत के कई ठिकानों पर बमबारी शुरू कर दी। रात 12 बजे पीएम इंदिरा गांधी ऑल इंडिया रेडियो पर आईं और जंग का ऐलान कर दिया। उसी रात पाकिस्तान की सबसे बड़ी पनडुब्बी पीएनएस गाजी डूब गई। दरअसल, गाजी गुपचुप तरीके से भारत के सबसे बड़े विमानपोत INS विक्रांत को डुबोने आई थी। वह कई घंटों से INS विक्रात के इंतजार में विशाखापट्टनम में खड़ी थी, लेकिन विक्रांत उसे दिखा नहीं। आखिर दिखता भी कैसे, RAW के एजेंटों ने उसे चुपचाप अंडमान भेज दिया था। गाजी में डीजल से बैटरियां चार्ज की जा रही थीं, जिसकी वजह से खतरनाक हाइड्रोजन गैस अंदर भरती जा रही थी। इसी के चलते वह खुद ही बिस्फोट होकर तबाह हो गई। 4 दिसंबर को भारतीय वायु सेना ने भी पाकिस्तान पर बमबारी शुरू कर दी। कराची और आसपास के हवाई अड्डों पर आसमान से रॉकेट बरस रहे थे। इधर, इंडियन नेवी की 3 ओसा-I मिसाइल बोट चुपचाप मुंबई से कराची की तरफ बढ़ रही थीं। भारत ने ये मिसाइल बोट रूस से खरीदी थी। जब बोट कराची से 250 समुद्री मील दूर थीं, तभी रडार पर 'बीप-बीप' की आवाज आने लगी। कैप्टन चिल्लाया- ‘पाकिस्तानी जहाज करीब आ रहा है। मिसाइल दागो।’ पहली मिसाइल छूटी, फिर दूसरी, फिर तीसरी। पाकिस्तानी का जंगी जहाज PNS खैबर तबाह हो गया। पाकिस्तान को लगा कि यह वायुसेना का हमला है। तभी मिसाइल बोट ने एक और पाकिस्तानी युद्धपोत और गोला-बारूद से भरे एक मालवाहक जहाज को तबाह कर दिया। अब मिसाइल बोट ने कराची बंदरगाह का रुख किया। भारत को कराची के फ्यूल टैंकों की सटीक लोकेशन पता थी। मिसाइलें सीधे निशाने पर लगीं और कराची बंदरगाह का तेल भंडार धू-धू कर जल उठा। 5 दिसंबर की सुबह तक पहला हमला पूरा हो चुका था। पाकिस्तानी नौसेना की रीढ़ टूट चुकी थी। उन्होंने अपने बचे-खुचे जहाजों को बंदरगाह के अंदर छिपा लिया। तीन दिन बाद यानी 8 दिसंबर की रात भारतीय नेवी ने पाकिस्तान के एक तेल टैंकर और युद्धपोत PNS दक्का को भी डुबो दिया। भारत अपना हवाई रास्ता तो पहले ही बंद कर चुका था, नेवी के इन हमलों से पश्चिमी पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान जाने का समुद्री रास्ता भी कट गया। अब पाकिस्तान बड़ा पलटवार करने वाला था, बहुत बड़ा पलटवार… 8 दिसंबर की रात भारत का युद्धपोत INS खुखरी मुंबई से कराची के लिए निकला। टारगेट था- पाकिस्तानी पनडुब्बी PNS हैंगोर को डुबाना। 9 दिसंबर की सुबह खुखरी गुजरात तट पर पहुंच गया। कप्तान को लगा कि पाकिस्तानी पनडुब्बी आस-पास ही है। खुखरी में एक परंपरा थी। रात 8 बजकर 45 मिनट पर सभी इकट्ठा होकर एक साथ समाचार सुना करते थे। उस रोज भी समाचार शुरू हुए- ‘यह आकाशवाणी है। अब आप अशोक वाजपेयी से समाचार….’ तभी हैंगोर से निकले पहले टारपीडो ने खुखरी को हिट किया। कैप्टन मुल्ला कुर्सी से गिर गए। उनका सिर लोहे से टकराया और खून बहने लगा। दूसरा धमाका होते ही खुखरी की बिजली चली गई। खुखरी में 2 छेद हो चुके थे। जहाज के भीतर तेजी से पानी भर रहा था। अंदर आग लग चुकी थी। कुछ ही देर बाद खुखरी डूब गया। कैप्टन समेत 17 अफसर और 176 नौसैनिक भी डूब गए। ये उस जंग में डूबने वाला इकलौता भारतीय जहाज था। उसके बाद भारत ने पाकिस्तान को समुद्र में टिकने नहीं दिया। उधर जमीन पर, पूर्वी पाकिस्तान के दलदली इलाकों और टूटी सड़कों के चलते इंडियन आर्मी की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ गई थी। पाकिस्तानी फौज ढाका जाने वाले रास्तों पर घेराबंदी करके बैठी थी। मकसद था- भारतीय सेना को तब तक रोके रखो, जब तक कि संयुक्त राष्ट्र यानी यूएन दखल ना दे दे। इंडियन आर्मी की कुछ टुकड़ियां फंसी हुई थीं। ढाका पहुंचने के लिए उन्हें मेघना नदी पार करनी थी। इस पर बना पुल पाकिस्तानी पहले ही गिरा चुके थे। बंगाली लड़ाकों और इंडियन आर्मी को हेलिकॉप्टरों के जरिए नदी पार कराने का फैसला किया गया। 9 से 11 दिसंबर के बीच, 36 घंटों के अंदर 110 उड़ानों के जरिए 700 से ज्यादा जवानों को मेघना नदी के पार उतार दिया गया। 11 दिसंबर तक भारतीय सेना पूर्वी पाकिस्तान में गहराई तक घुस चुकी थी। अब सिर्फ एक ही मंजिल बची थी- ढाका। पांच दिन बाद यानी 16 दिसंबर को भारत ने ढाका पर भी कब्जा जमा लिया। उसी रोज पाकिस्तान ने घुटने भी टेक दिए। ढाका के रेसकोर्स मैदान में पाकिस्तानी जनरल एएके नियाजी ने 93 हजार सैनिकों के साथ सरेंडर कर दिया। पाकिस्तान के दो टुकड़े हो गए। नए मुल्क का जन्म हुआ- ‘बांग्लादेश।’ ***** ऑपरेशन बांग्लादेश सीरीज का पार्ट-1 भी पढ़िए : पाकिस्तानी फौज ने गैंगरेप किया, हजारों बंगाली महिलाएं प्रेग्नेंट हुईं:इंदिरा गांधी बोलीं- हम युद्ध करेंगे, सेना प्रमुख बोल पड़े-आपने बाइबल पढ़ी है; पार्ट-1 रेफरेंस : 1. The Kaoboys of RAW: Down Memory Lane : By B. Raman 2. The War That Made RAW : By Anushka Nandakumar Sandeep Saket 3. Field Marshal Sam Manekshaw : By Maj Gen Shubhi Sood 4. A Stranger in My Own Country : By Maj. Gen. Khadim Hussain Raja 5. The Soldier and the Changing State : By Zoltan Barany
बलांगीर से चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां डिक्की में पैसे रखकर जितनी देर के लिए शख्स झालमुड़ी खाने गया, इतने में चोरों ने पैसे पर हाथ साफ कर दिया।
रजत शर्मा ने प्रसून जोशी को हिंदी रत्न से किया सम्मानित, बोले- उन्होंने बढ़ाया है हिंदी का गौरव
इंडिया टीवी के चेयरमैन एवं एडिटर-इन-चीफ रजत शर्मा ने हिंदी रत्न सम्मान समारोह 2026 में प्रसून जोशी को हिंदी रत्न से सम्मानित किया। इस दौरान, उन्होंने कहा कि प्रसून जोशी ने भारत वर्ष में हिंदी के गौरव को बढ़ाया है।
असम से कश्मीर-गुजरात तक बाढ़ से हाल बेहाल, कहीं बह गईं गाड़ियां तो कहीं घर में घुसा पानी
मानसून का दूसरा फेज शुरू हो गया है, जिसका इम्पैक्ट पहाड़ से लेकर मैदान तक साफ-साफ नजर आने लगा है। बादल फट रहे हैं, पहाड़ टूट रहे हैं, मैदान डूब गए हैं, कश्मीर से लेकर केरल तक, गुजरात से लेकर ओडिशा तक हिंदुस्तान के नक्शे पर बादल बहुत भयंकर गरज रहे हैं।
रेलवे के पांच बड़े अफसरों की नौकरी से छुट्टी, लापरवाही बरतने पर जबरन VRS दिया गया
रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव ने पांच लापरवाह अफसरों पर कार्रवाई की है। काम में लापरवाही का हवाला देते हुए रेलवे ने पांच बड़े रेल अफसरों को VRS दे दिया गया। जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए रेलवे मिनिस्टर अश्विनी वैष्णव ने ये कदम उठाया है।
पीएम मोदी ने की युवाओं की जमकर तारीफ, मैसूर में बोले -''युवा हैं देश की सबसे बड़ी ताकत''
मैसूर में पीएम मोदी ने कहा स्वामी विवेकानंद जी युवाओं की शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का मजबूत आधार मानते थे। उन्होंने ये देखा था कि कैसे दुनिया के देश अपने युवाओं को शिक्षित बना रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य से तब भारत गुलाम था। भारत के युवा भी गुलामी की जंजीरो में जकड़े हुए थे।
भीड़ नियंत्रण की संवैधानिक कसौटी
दूसरी ओर, रैपिड एक्शन फोर्स (आरएएफ.) ने इन आरोपों का सार्वजनिक रूप से खंडन करते हुए कहा है कि भीड़ नियंत्रण के लिए केवल स्वीकृत गैर-घातक साधनों का उपयोग किया गया। इन परस्पर विरोधी दावों के बीच सर्वोच्च न्यायालय ने न तो किसी पक्ष को दोषी ठहराया है और न ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचने की जल्दबाजी दिखाई है। The post भीड़ नियंत्रण की संवैधानिक कसौटी appeared first on प्रवक्ता.कॉम - Pravakta.Com .
अवैध प्रवासी बनेंगे यूरोप के महाविनाश का कारण?
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार में आयोजित युवा शक्ति संवाद कार्यक्रम में नई पीढ़ी से संवाद किया। इस दौरान, उन्हें एक छोटी बच्ची ने ''मोदी है तो मुमकिन है'' गाना भी सुनाया।
जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के दौरान गाली देती लड़की पर FIR, बचाव में अभिजीत दीपके का बयान और पीएम मोदी का माफ करने वाला वीडियो। पिछले 48 घंटे के इन तीन घटनाक्रम से सवाल उठा- क्या गाली देना क्राइम है? कुछ लोग ये भी कहे रहे कि जेन-जी के लिए गाली ‘न्यू नॉर्मल’ है। आखिर प्रोटेस्ट में खुलेआम गाली देने के पीछे जेन-जी की साइकोलॉजी क्या है और गाली देना कानूनी अपराध है या नहीं; आज के एक्सप्लेनर में समझेंगे… सवाल-1: गाली देने की वजह से लड़की पर FIR का पूरा मामला क्या है? जवाबः जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के दौरान एक लड़की का वीडियो वायरल है। वो पीएम मोदी के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करती है और गालियां देती है। 30 जुलाई को नोएडा पुलिस ने शांतिभंग, अपमानित करने और मानहानि के लिए BNS की धारा 352, 353(1) और 356(1) के तहत FIR दर्ज कर ली। लड़की की मां ने कहा, 'हमने पुलिस को माफीनामा दिया है। जो हुआ उसका बहुत अफसोस है।’ 31 जुलाई की रात पीएम मोदी ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो मैसेज में कहा, ‘जंतर-मंतर पर कुछ शरारती बच्चों ने भद्दी-भद्दी गालियां बोलीं। मुझे और मेरी स्वर्गीय माता को भी गालियां दीं। गुमराह बच्चों को गले लगाकर राह दिखाना हमारा काम है। सजा देने से परिस्थितियां नहीं बदलेंगी। मैं उन्हें माफ करना चाहता हूं।' इधर CJP के फाउंडर अभिजीत दीपके ने लड़की के समर्थन में कहा, 'एक लड़की पर गाली देने के लिए केस हुआ। बीजेपी IT सेल के लोगों पर केस कब होंगे, जो सालों से ऑनलाइन लड़कियों को गालियां दे रहे थे। बीजेपी सांसद रमेश बिधूड़ी ने एक सांसद के लिए कैसे शब्द इस्तेमाल किए थे। यूपी सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी जर्नलिस्ट गालियां दी थीं।’ अभिजीत ने आगे कहा, 'गाली देना कोई क्राइम नहीं है। गाली देना बुरा हो सकता है, लेकिन उसको समझाइए कि गाली मत दो।’ सवाल-2: क्या वाकई गाली देना अपराध नहीं है? जवाबः 2 सिनैरियो हैं… 1. अगर ‘इरादा’ गलत न हो, तो गाली अपराध नहीं 2. अगर ‘इरादा’ गलत हो, तो गाली अपराध है गाली देने पर, मुख्य रूप से BNS की दो धाराओं में मुकदमा दर्ज होता है- धारा 352: शांति भंग के इरादे से किसी का अपमान करना। धारा 351: आपराधिक धमकी देना। दोनों धाराओं में अधिकतम 2 साल की जेल या जुर्माना हो सकता है। हालांकि केस-टू-केस कुछ और धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं। जैसे- किसी महिला को गाली दी जाए, जो उसकी मर्यादा के खिलाफ हो, तो BNS की धारा 74 के तहत यौन अपराध का मुकदमा भी चल सकता है। इसी संदर्भ में विराग गुप्ता दो और सवाल उठाते हैं… सवाल-3: क्या गाली देना जेन-जी के लिए न्यू-नॉर्मल बन गया है? जवाबः हां, एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस पीढ़ी में गालियां देना सामान्य चलन बन रहा है, जिसके पीछे 3 बड़ी वजहें हैं… 1. OTT, स्टैंडअप से एब्यूसिव भाषा का चलन 2. जेन-Z के एथिकल-मोरल फ्रेमवर्क में हिचक नहीं 3. हर जगह एक जैसे ‘इन्फॉर्मल’ हो रहे जेन-Z सवाल-4: क्या पहले भी इस तरह विरोध प्रदर्शनों में गालियां दी जाती थीं? जवाब: 1975 की इमरजेंसी के बाद इंदिरा गांधी के खिलाफ नारे लगे थे, 'इंदिरा हटाओ, देश बचाओ।' 1980 के बोफोर्स घोटाले के बाद पीएम राजीव गांधी के खिलाफ नारे लगे थे, 'गली-गली में शोर है, राजीव गांधी चोर है।' हालांकि जंतर-मंतर प्रोटेस्ट से पहले भारत के किसी आंदोलन में सार्वजनिक गाली-गलौच का कोई रिकॉर्ड दर्ज नहीं है। इस प्रदर्शन में कॉकरोच पार्टी के नेताओं ने भी गालियों, अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं किया। उनके समर्थन में आए कुछ लोगों ने आपत्तिजनक बातें कहीं। वरिष्ठ पत्रकार हर्षवर्धन त्रिपाठी कहते हैं, 'अपने समय में हमने भी आंदोलन किए, लाठियां खाईं और पत्थर भी फेंके, लेकिन तब ऐसी भाषा नहीं इस्तेमाल होती थी। अश्लील रील बनाने के लिए एक सीरियस मुद्दे का इस्तेमाल करना गलत था।' ----------- ये खबर भी पढ़िए… संसद पहुंचा वास्तेगुना-हुइंया और कुचु-पुचु; 56 साल औसत उम्र वाली लोकसभा अचानक जेन-जी की भाषा क्यों बोलने लगी 56 साल औसत उम्र वाली लोकसभा में इन दिनों 14 से 29 साल वाली जेन-जी के स्लैंग गूंज रहे हैं। कोई सांसद ‘वास्तेगुना-हुइंया’ और ‘कुच्चु-पुच्चु’ बोल रहा, तो किसी के भाषण में ‘डेलुलू’ और ‘क्लॉक्ड इट’ का इस्तेमाल हुआ। पूरी खबर पढ़िए…
बहनः संस्कृति, संवेदना और सशक्त भारत की आधारशिला
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पार्लियामेंट के परिसर में साधु के वेश में प्रदर्शन करना पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव को भारी पड़ गया है। BJP सांसद बांसुरी स्वाराज ने नई दिल्ली में पप्पू यादव के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।
भारत में कम्युनिस्ट, नक्सलवाद और ईसाई मिशनरीज
नक्सलवाद और ईसाई मिशनरीज The post भारत में कम्युनिस्ट, नक्सलवाद और ईसाई मिशनरीज appeared first on प्रवक्ता.कॉम - Pravakta.Com .
नीट पेपर नहीं हमारे दिमाग लीक हो गए हैं ?
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सत्संग महिमा The post भजन: सत्संग महिमा appeared first on प्रवक्ता.कॉम - Pravakta.Com .
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भाजपा का समरसता संकल्प अभियान: बदलेगा राजनैतिक समीकरण
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Rajat Sharma's Blog | बर्बर हत्या : ताहिर हुसैन के लिए उम्र क़ैद कम है
ताहिर हुसैन और उसके साथियों ने अंकित शर्मा के साथ जानवरों से भी बदतर व्यवहार किया। इन हत्यारों ने उसकी लाश को नाले में फेंक दिया। इस क्रूरता के लिए उम्र कैद की सज़ा भी कम है।
Terror का 'हनीट्रैप' कनेक्शन! आतंक हमीम मंडल की गर्लफ्रेंड गिरफ्तार, खुलेंगे कई बड़े राज
एसटीएफ ने संदिग्ध आतंकी हमीम मंडल को गिरफ्तार किया है। उसके पास से कई गंभीर साक्ष्य मिले हैं। अब उसकी गर्लफ्रेंड को एसटीएफ ने झारखंड से गिरफ्तार किया है। जल्द ही हनीट्रैप का खुलासा हो सकता है।
ना इनके भक्त बनिए, ना उनके, गांव पहुंचते ही सोनम वांगचुक ने लोगों को दी नसीहत-देखें वीडियो
वंदे भारत की सोनम वांगचुक ने तारीफ की, अब वे अपने गांव पहुंच गए हैं। उन्होंने उन लोगों को नसीहत दी जो उनके बयान पर नाराजगी जता रहे थे। सोनम वांगचुक ने उन लोगों को बड़ी सलाह दी है।
एंटी-पेपर लीक कानून में बदलाव को राष्ट्रपति की मंजूरी, अब तीन महीने के अंदर होगा पेपर माफियाओं का हिसाब
'हमारी बेटियां इतनी आसानी से क्यों बहक जाती हैं?' जंतर मंतर माफी वीडियो पर बोलीं कंगना रनौत
जंतर-मंतर प्रदर्शन में अभद्र टिप्पणी के बाद एक लड़की के माफी वीडियो पर बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने प्रतिक्रिया देते हुए बच्चों के राजनीतिक प्रभाव और परवरिश पर सवाल उठाए। उन्होंने समाज से आत्ममंथन की अपील की है।
बाढ़ के बीच निकली अनोखी बारात, दुल्हन के घर नाव से पहुंचा दूल्हा; देखें VIDEO
ओडिशा के जाजपुर से ढेंकानाल जाने वाली एक बारात काफी चर्चा में है। दरअसल, इस बारात में न घोड़ी थी और न ही डीजे की गूंज। बाढ़ प्रभावित इलाके में नाव से बारात निकाली गई।
'मुसलमान सिर्फ एक अल्लाह की इबादत करता है', मौलाना मदनी ने वंदे मातरम् बिल पर उठाए सवाल
वंदे मातरम् बिल पास होने के बाद मौलाना अरशद मदनी और मुस्लिम संगठनों ने धार्मिक स्वतंत्रता का हवाला देते हुए आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि कुछ हिस्से इस्लामी मान्यताओं के अनुरूप नहीं हैं। बता दें कि बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलनी अभी बाकी है।
बारिश ने रोकी अमरनाथ यात्रा, जम्मू-श्रीनगर हाईवे बंद होने से नया जत्था रुका
अमरनाथ यात्रा पर बारिश और खराब मौसम का असर पड़ा है। जम्मू के भगवती नगर बेस कैंप से शनिवार को श्रद्धालुओं का नया जत्था कश्मीर घाटी के लिए रवाना नहीं किया गया।
साधु के भेष में प्रदर्शन पर पप्पू यादव के खिलाफ शिकायत दर्ज, तुरंत कार्रवाई की मांग
संसद परिसर में साधु के भेष में विरोध प्रदर्शन करने के मामले में सांसद पप्पू यादव के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है। उन पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने का आरोप है। इसके साथ ही शिकायतकर्ता ने तुरंत कार्रवाई की मांग की है।
केरल के इडुक्की में भूस्खलन से महिला की मौत, कई जगह बाढ़ जैसे हालात, रेड अलर्ट जारी
केरल के इडुक्की जिले में भारी बारिश के कारण हुए भूस्खलन में एक महिला की मौत हो गई, जबकि कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। कोट्टायम और अन्य जिलों में जलभराव, सड़क बंद और बचाव अभियान जारी हैं। IMD ने कई जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है।
भारत के तेजी से बढ़ते एविएशन सेक्टर में पायलटों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। देश में 11 नए फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (FTO) शुरू किए जाएंगे।
लेसोथो के साथ रिश्तों को नई मजबूती देगा भारत, जानें क्या है इस छोटे से देश की खासियत
भारत और लेसोथो ने द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने, विकास साझेदारी, क्षमता निर्माण, मानवीय सहायता, कृषि, शिक्षा और बहुपक्षीय सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। भारत ने लेसोथो को इंटरनेशनल सोलर अलायंस (ISA) और CDRI से जुड़ने का भी निमंत्रण दिया है।
दैनिक भास्कर की ‘स्पाई फाइल्स’ सीरीज में आज कहानी ऑपरेशन बांग्लादेश की, जिसने पाकिस्तान के टुकड़े कर दिए… साल था 1971 और तारीख 17 जनवरी। सुबह के 8 बज रहे थे। पाकिस्तान के लरकाना ड्रिग झील में दो नाव धीरे-धीरे आगे बढ़ रही थीं। पहली नाव में थे तानाशाह राष्ट्रपति याह्या खान और दूसरी नाव में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के फाउंडर जुल्फिकार अली भुट्टो। अचानक बत्तखों का एक झुंड ऊपर उड़ा। याह्या खान ने फायर कर दिया- ‘ठायं, ठायं…।’ निशाना चूक गया। याह्या ने झुंझलाकर पिस्टल नाव के फर्श पर पटक दी। व्हिस्की का ग्लास उठाते हुए कहा- ‘मुजीब क्या समझता है खुद को? असेंबली में बैठकर मुझे ऑर्डर देगा? इतनी औकात हो गई उसकी?’ अब भुट्टो ने अपनी पिस्टल निकाली। एक बत्तख पर निशाना साधा- ‘ठायं।’ बत्तख पानी में गिर पड़ी। भुट्टो ने गहरी सांस लेते हुए कहा- ‘जनरल साहब, आपने इलेक्शन करवाकर मुजीब के हाथ में हुकूमत दे दी।’ याह्या ने गुस्से में कहा- ‘मुझे क्या पता था कि पूरा ईस्ट पाकिस्तान उस काले बंगाली के पीछे खड़ा हो जाएगा’ भुट्टो ने कहा- ‘जनरल साहब…मुजीब को गद्दी नहीं, लाहौर की सलाखें भेंट करो।’ ‘ऐसा किया तो ढाका जल उठेगा।’ याह्या ने कहा। भुट्टो ने पिस्टल में मैगजीन डालते हुए कहा- ‘डेमोक्रेसी सिर्फ गिनती का खेल है साहब, असल हुकूमत बंदूक की नोक से ही चलती है।’ ‘ठायं।’ दोनों नाव से उतरे और अल-मुर्तजा हवेली की तरफ बढ़ गए। ये भुट्टो का खानदानी घर था। रात करीब 10 बजे याह्या खान, भुट्टो और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अब्दुल हमीद एक बंद कमरे में थे। मेज पर पूर्वी पाकिस्तान का नक्शा और फाइलें रखी थीं। जनरल हमीद ने नक्शे पर निशान लगाते हुए कहा- ‘ढाका, चटगांव, सिलहट, खुलना…इन इलाकों को बंद कर दें, तो बंगालियों के पास भागने का रास्ता नहीं बचेगा।’ भुट्टो ने सिगार का धुआं छोड़ते हुए कहा- ‘तो बंद कर दीजिए।’ जनरल हमीद- ‘फौज भेजने के लिए वक्त चाहिए।’ याह्या खान ने व्हिस्की का घूंट भरते हुए कहा- ‘हमीद, हम वक्त जुटा लेंगे। तुम तैयारी करो। मुझे बंगाली नहीं, उनकी जमीन चाहिए। किसी भी हाल में।’ क्या पाकिस्तान अपने ही मुल्क में कत्लेआम मचाने वाला था…? कहानी की शुरुआत होती है दिसंबर 1970 से। पाकिस्तान में पहली बार आम चुनाव हुए। कुल 300 सीटों में से पूर्वी पाकिस्तान के शेख मुजीब-उर-रहमान ने 167 सीटें जीत लीं। पश्चिमी पाकिस्तान के जुल्फिकार अली भुट्टो को सिर्फ 86 सीटें मिलीं। मुजीब का प्रधानमंत्री बनना तया था, लेकिन याह्या खान नहीं चाहते थे कि कोई बंगाली सत्ता संभाले। बस यहीं से बैठकों, बहसों और टालमटोल का खेल शुरू हो गया। 12 जनवरी 1971 को याह्या खान ढाका पहुंचे। मुजीब को बहुत समझाया, हर तरह का जोर लगाया, पर बात नहीं बनी। मुजीब अड़े रहे- ‘प्राइम मिनिस्टर पद से कोई समझौता नहीं होगा।’ नाराज याह्या आर्मी हेडक्वार्टर रावलपिंडी लौट गए। ठीक 15 दिन बाद… 27 जनवरी को जुल्फिकार अली भुट्टो, मुजीब को मनाने ढाका पहुंचे। तीन दिन तक वहीं डेरा डाले रहे। बैठकों का दौर चलता रहा, लेकिन सब बेनतीजा रहा। ना मुजीब पीछे हटने को तैयार हुए, ना पूर्वी पाकिस्तान के लोग झुकने के मूड में थे। अब बारूद बिछ चुका था, बस एक चिंगारी की देरी थी। इधर, भारत अपनी आंख-कान खोलकर सबकुछ देख-सुन रहा था। दरअसल, आजादी के बाद से ही भारत को एक चिंता सता रही थी- 'सिलीगुड़ी कॉरिडोर' यानी ‘चिकन नेक’। पश्चिम बंगाल का यह 22 किलोमीटर चौड़ा हिस्सा पूरे पूर्वोत्तर को भारत से जोड़ने वाला अकेला जमीनी रास्ता है। अगर जंग के दौरान पाकिस्तान इस पर कब्जा कर लेता, तो पूर्वोत्तर के सातों राज्य भारत से कट जाते। प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तय कर चुकी थीं कि रास्ते का कांटा हटाने का यही मुफीद वक्त है। इसके लिए जरूरी था पाकिस्तान के टुकड़े करना, लेकिन सवाल था- कैसे? इस पूरे प्लान की जिम्मेदारी संभाली RAW ने। RAW के सामने पहला टारगेट था- हवाई रास्ते से पश्चिमी पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान पहुंचने वाली फौज और रसद को रोकना। 30 जनवरी को गंगा नाम का एक भारतीय विमान कश्मीर से हाईजैक कर लिया गया। आतंकियों ने विमान को लाहौर ले जाकर आग लगा दी। इंदिरा सरकार ने इस घटना को आधार बनाकर भारत के ऊपर से उड़ने वाले सभी पाकिस्तानी विमानों पर रोक लगा दी। पाकिस्तान समझ रहा था कि हाईजैकर कश्मीरी अलगाववादी हैं, लेकिन असल में वो RAW के डबल एजेंट थे। भारत ने जानबूझकर अपना विमान हाईजैक कराया था। अब पूर्वी पाकिस्तान में फौरन कोई फौजी मदद नहीं पहुंच सकती थी। पाकिस्तान के सामने समुद्र ही एक रास्ता था, जहां भारतीय नौसेना तैनात थी। तभी पाकिस्तान ने एक नई चाल चल दी… फरवरी 1971, शाम का वक्त था और जगह थी कराची। मूंगफली बेच रहे दानिश ने देखा कि दर्जनभर फौजी गाड़ियां एक कतार में एयरपोर्ट की तरफ जा रही हैं। भारी असलहों और हथियारों से लदी हुईं। तभी आसमान में जहाजों की गड़गड़ाहट गूंजी। दानिश ने ऊपर देखा- एक के बाद एक, तीन जहाज एक ही दिशा में उड़ते जा रहे थे। उसका माथा ठनका, ‘कुछ तो गड़बड़ है।’ उसने तुरंत कागज के एक टुकड़े पर कोड वर्ड में कुछ लिखा और उसे मोड़कर मूंगफली के एक खाली छिलके के अंदर ठूंस दिया। फिर स्कूटर स्टार्ट किया और एयरपोर्ट की तरफ निकल पड़ा। कुछ ही मिनटों में वह कराची एयरपोर्ट के एग्जिट गेट के सामने था। वहां रफीक नाम का शख्स पहले से उसका इंतजार कर रहा था। दुआ-सलाम के बहाने दानिश ने मूंगफली का वो पैकेट रफीक के हाथ में थमाया और चुपचाप वहां से निकल गया। रफीक, एयरपोर्ट पर लोडमास्टर का काम करता था। उसने पैकेट खोला। मूंगफली के छिलके से कागज का वो टुकड़ा निकाला, ध्यान से पढ़ा और फिर फाड़कर कूड़ेदान में फेंक दिया। अब वो रनवे की तरफ चल पड़ा। वहां उसने जो कुछ देखा, उसका दिमाग प्रेशर कुकर की तरह खौलने लगा। दो दिन बाद… दिल्ली में लोधी रोड़ पर RAW का दफ्तर। एक बंद कमरे में RAW चीफ आरएन काव और डिप्टी चीफ शंकरन नायर बैठे थे। तभी एक अफसर अंदर आया। उसने शंकरन को एक लिफाफा थमाया और चला गया। शंकरन ने लिफाफा खोला। उनकी भौंए तन गईं। तमतमा उठे। तभी RAW चीफ ने पूछा- ‘क्या हुआ?’ शंकरन ने लिफाफा RAW चीफ की तरफ बढ़ाते हुए कहा- ‘पाकिस्तान अपने पैसेंजर प्लेनों में भर-भरकर सैनिक, हथियार और बारूद ईस्ट पाकिस्तान भेज रहा है।’ ‘हमने तो अपनी एयरस्पेस बंद कर रखी है?’ काव ने लिफाफा अपने हाथ में लेते हुए कहा। शंकरन बोले- ‘वे श्रीलंका के कोलंबो में लैंड करके फ्यूल भरवा रहे हैं और वहां से सीधे ढाका। तीन प्लेन पहुंच चुके हैं।’ RAW चीफ ने गहरी सांस ली और कहा- ‘कुछ करना पड़ेगा। कोलकाता में अपने बाजों को एक्टिव करो।’ पाकिस्तानी संसद की बैठक इस्लामाबाद में होती है, लेकिन मुजीब के दबाव में इसे ढाका में करने का फैसला किया गया। 3 मार्च की तारीख तय की गई थी, लेकिन 2 दिन पहले ही बैठक रद्द कर दी गई। फिर क्या था, पूर्वी पाकिस्तान सड़कों पर उतर आया। सरकारी दफ्तर, अदालतें, बैंक सब ठप हो गए। लोगों ने हड़ताल कर दी। इससे पश्चिमी पाकिस्तान में बैठे हुक्मरान आग बबूला हो गए। 3 मार्च की शाम दिल्ली के RAW दफ्तर में एक चिट्ठी मिली। लिखा था- ‘पाकिस्तानी हुकूमत ढाका में दमन करने वाली है। कर्नल मेनन से कहिए कि वे आकर ‘हमारे दोस्तों’ को यहां से ले जाएं।’ कर्नल मेनन, शंकरन नायर का कोड नेम था और हमारे दोस्तों का मतलब था- मुजीब और उनकी पार्टी के नेता। अगले दिन RAW चीफ ने एक सीनियर अफसर पीएन बनर्जी को बुलाया और कहा- ‘आप तुरंत ढाका निकलिए और मुजीब से संपर्क करिए।’ बनर्जी उसी रोज ढाका के लिए निकल गए। 5 मार्च को वे मुजीब से मिले। बनर्जी ने कहा- 'हमारे पास पक्की खबर है। याह्या खान आपको निशाना बनाने वाले हैं। आपको यहां से निकलना चाहिए।’ मुजीब ने कहा- 'मैं मुल्क छोड़कर नहीं जाऊंगा। मैं भगोड़ा नहीं बनना चाहता। मुझे नायक की मौत मंजूर है।’ ‘एक बार ठंडे दिमाग से सोच लीजिए मुजीब साहब।’ बनर्जी ने जोर देकर कहा। मुजीब ने फौरन जवाब दिया- ‘मैं सोच चुका हूं। आप चाहें तो हमारी पार्टी के लोगों को यहां से निकालकर ले जा सकते हैं।’ बनर्जी भारत लौट आए। मुजीब को ये इनकार भारी पड़ने वाला था… इसी बीच याह्या खान ने पूर्वी पाकिस्तान का गवर्नर बदल दिया। उन्होंने अपने सबसे खूंखार कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल टिक्का खान को नया गवर्नर बना दिया। 7 मार्च को टिक्का चुपचाप ढाका पहुंच गए, लेकिन बंगालियों की बगावत जारी रही। चीफ जस्टिस बीए सिद्दीकी ने टिक्का को गवर्नर पद की शपथ दिलाने से इनकार कर दिया। गवर्नर हाउस के नौकर भाग गए। अगली सुबह मुजीब ने ऐलान किया- ‘हर घर में किले बना लो। तुम्हारे हाथ में जो कुछ भी है, उससे दुश्मन का सामना करना है। याद रखो, हम बहुत खून दे चुके हैं, जरूरत पड़ी तो और खून देंगे, लेकिन इंशा अल्लाह, अपने मुल्क को आजाद कराएंगे। जोय बांग्ला।’ 15 मार्च को याह्या खान फिर से ढाका पहुंच गए। इस बार उनके साथ आर्मी चीफ जनरल अब्दुल हमीद भी थे। एक तरफ ढाका में याह्या और मुजीब की मीटिंग हो रही थी, तो दूसरी तरफ चटगांव में पाकिस्तानी जहाजों से गोला-बारूद उतारा जा रहा था। 17 मार्च 1971, रात के 10:00 बजे। ढाका कमांड हाउस सिगार के धुएं से भरा हुआ था। टेबल पर पूर्वी पाकिस्तान का नक्शा रखा था। कोने में व्हिस्की और गिलास। लेफ्टिनेंट जनरल टिक्का खान ने अपनी मूंछों पर हाथ फेरते हुए कहा- ये बंगाली बात से नहीं मानने वाले हैं। मिलिट्री एक्शन की तैयारी करो। आर्मी चीफ अब्दुल हमीद ने सिगार का कश खींचते हुए कहा- ‘इलाका पूरा उबल रहा है, टिक्का। मुजीब का एक इशारा और बंगाली सड़कों पर उतर जाएंगे। हालात बेकाबू हो जाएंगे।’ टिक्का खान ने मेजर जनरल खादिम की तरफ इशारा करते हुए कहा- बगावत की एक चीख भी बाहर नहीं निकलनी चाहिए। सफाया कर दो सबका। खादिम हुसैन ने थोड़ा सोचते हुए कहा- सर, इसके लिए प्लान बनाना होगा। टिक्का खान- तो बनाइए प्लान। मुझे कल सुबह तक ड्राफ्ट चाहिए। कोई रहम नहीं, कोई ढील नहीं। जो बागी है, उसे ढूंढो और खत्म करो। 18 मार्च 1971, सुबह 10 बजे का वक्त। कमांड हाउस में लेफ्टिनेंट जनरल टिक्का खाना, आर्मी चीफ अब्दुल हमीद और मेजर जनरल खादिम बैठे थे। खादिम हुसैन ने नीली पेंसिल उठाई और एक पेपर पर लिखा- ऑपरेशन सर्च लाइट। यानी बगावती बंगालियों को ढूंढों और खत्म करो। ड्राफ्ट पर ऑपरेशन की कार्रवाई का डिटेल्ड प्लान लिखा हुआ था। टिक्का खान ने सिगार का लंबा कश भरते हुए कहा- अब बस बटन दबाने का इंतजार है। वक्त जल्द मुकर्रर होगा। 21 मार्च को भुट्टो भी अपने सलाहकारों के साथ ढाका पहुंच गए। अब राष्ट्रपति याह्या खाना और भुट्टो दोनों ही पूर्वी पाकिस्तान में थे। मुजीब को उलझाए रखने का ये एक बड़ा दांव था। पूर्वी पाकिस्तान की जनता इस खेल को समझ चुकी थी। वहां फौज में भी बगावत की चिंगारी सुलग चुकी थी, लेकिन कोई खुलकर सामने नहीं आ रहा था। 25 मार्च की शाम 7 बजे राष्ट्रपति याह्या खान चुपचाप कराची के लिए निकल गए। जैसे ही यह खबर फैली, ढाका की सड़कों पर लोग बैरिकेड्स लगाने लगे। पेड़ काटकर रोड ब्लॉक किया जाने लगा। बंगाली समझ चुके थे कि उनपर कहर बरपने वाली है… इधर, पूर्वी पाकिस्तान की फौजी टुकड़ियों में से चुन-चुनकर बंगालियों को अलग कर दिया गया। ताकि विद्रोह की स्थिति में वे एकजुट नहीं हों सकें। हर बैरक में पश्चिमी पाकिस्तान की फौज पहुंच चुकी थी। पैदल सेना के अलावा PT-76 टैंक तैनात थे। शाम साढ़े सात बजे, RAW दफ्तर में लगे खुफिया उपकरणों में कुछ आवाज आने लगीं। अफसरों ने जब डिकोड किया तो पता चला- ‘आज रात याह्या खाना जैसे ही कराची पहुंचेंगे, पूर्वी पाकिस्तान में कत्लेआम शुरू हो जाएगा।’ RAW चीफ ने पूछा- ‘अभी याह्या कहां हैं?’ अफसर ने बताया- ‘सर, कोलंबों में। उनका विमान फ्यूल भरवाने के लिए रुका था।’ रात करीब 8 बजे। RAW दफ्तर में फिर से एक मैसेज पहुंचा- ‘फौज मुजीब के घर पर छापा मारने वाली है। वे मुजीब को कार में बिठाकर ले जाएंगे और रास्ते में उसपर हैंडग्रेनेड फेंक देंगे। इसका दोष बंगालियों पर मढ़ देंगे।’ ढाका में मौजूद RAW के एजेंटों ने फौरन मुजीब से बात की। उनसे कहा कि अभी वक्त है यहां से निकल जाएं। मुजीब ने मना कर दिया। उन्होंने कहा- ‘मैं अपने घर में मरूंगा, तो मेरा खून मेरे लोगों को पवित्र कर देगा।’ 2 घंटे बाद ही फौज ने मुजीब का घर घेर लिया। गोलियां चलने लगीं। मुजीब ने पत्नी और बच्चों को ड्रेसिंग रूम में धकेल दिया। जब गोलियां उनके सिर के ऊपर से सनसनाते हुए गुजरने लगीं, तो वे फर्श पर लेट गए। जैसे ही दरवाजा तोड़कर फौज उनके घर में घुसी, मुजीब हाथ हवा में उठाए ड्रेसिंग रूम से बाहर आ गए। पत्नी और बच्चों को अलविदा कहने के बाद उन्होंने सरेंडर कर दिया। इधर, दिल्ली में RAW की कोर टीम मुजीब से कॉन्टैक्ट करने की कोशिश कर रही थी, लेकिन बात नहीं हो पा रही थी। उस रात RAW का पूर्वी पाकिस्तान के साथ कम्युनिकेशन पूरी तरह से ठप हो गया था। अचानक RAW को एक इनपुट मिला। ये इनपुट कराची से एजेंटों ने ISI के रेडियो मैसेज इंटरसेप्ट करने के बाद भेजा था। वो इनपुट था- ‘बड़ी चिड़िया पिंजरे में है। बाकी घोंसले में नहीं हैं। दोहराता हूं, बड़ी चिड़िया पिंजरे में है।’ RAW अफसर ने कहा- ‘बड़ी चिड़िया मतलब मुजीब गिरफ्तार हो चुके हैं। बाकी घोंसले में नहीं हैं, मतलब अवामी लीग के नेता भाग चुके हैं।’ इधर, पाकिस्तानी फौज ने कत्लेआम मचाना शुरू कर दिया। बंगालियों को ढूंढ-ढूंढकर मारा जा रहा था। फिर उनके घरों में आग लगा दी जा रही थी। एक महिला, पति के साथ कोने में दुबकी हुई थी। फौजी उसके पति को घीसटते हुए बाहर ले जाने लगे। महिला ने पति का हाथ पकड़ लिया। वह चीखने लगी- ‘कहां ले जा रहे हो। छोड़ो इसे।’ फौजी ने जोर से लात मारी। महिला दूर जा गिरी। फौजी महिला पर झपट पड़ा। उसके कपड़े फाड़ दिए। पति के सामने ही महिला से गैंगरेप किया गया। यह सिर्फ एक महिला की कहानी नहीं थी, उस रात हर घर में ऐसा ही कोहराम मचा था। फौजी घरों में घुसकर 15-20 साल की लड़कियों को उठा ले गए। उन्हें बैरकों में रखा गया और रात-दिन उनके साथ रेप हुआ। यह सिलसिला महीनों चलता रहा। उस रात जुल्फिकार अली भुट्टो ढाका में ही थे। वे शेरेटन होटल की खिड़की से शहर को जलते हुए देख रहे थे। खुशी से सिगार पी रहे थे। हर रोज हजारों लोग मारे जाने लगे। लाखों लोग भागकर भारत के पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, असम, बिहार जैसे राज्यों में शरण लेने लगे। ये कत्लेआम, बंगालियों के साथ-साथ भारत के लिए भी मुसीबत बनता जा रहा था। इसी दौरान, 30 मार्च को अवामी लीग के कुछ नेता दिल्ली पहुंचे। RAW के जरिए उनकी मुलाकात इंदिरा गांधी से हुई। इन नेताओं ने इंदिरा से पूर्वी पाकिस्तान सीमा पर एक मुक्त क्षेत्र बनाने की मांग की। इंदिरा ने फौरन हामी भर दीं। 4 अप्रैल 1971 को, पूर्वी पाकिस्तान के फौजियों ने अपना अलग गुट बना लिया। 10 अप्रैल को अस्थाई सरकार की घोषणा कर दी गई। मुजीब-उर-रहमान को राष्ट्रपति, सैयद नजरुल इस्लाम को उपराष्ट्रपति और ताजुद्दीन अहमद को प्रधानमंत्री बनाया गया। RAW की मदद से यह सरकार कोलकाता से चल रही थी। इस बीच, इंदिरा ने असम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल का दौरा किया। नरसंहार की रिपोर्टों से वे इतनी दुखी थीं कि बहुत मुश्किल से बोल पा रही थीं। उनके मन में कुछ ऐसा चल रहा था, जिससे पाकिस्तान का भूगोल बदलना तय था। दिल्ली लौटकर उन्होंने कैबिनेट की बैठक बुलाई। विदेश मंत्री सरदार स्वर्ण सिंह, रक्षा मंत्री जगजीवन राम, वित्त मंत्री यशवंतराव चव्हाण और आर्मी चीफ सैम मानकशॉ बैठक में मौजूद थे। इंदिरा बेहद परेशान और गुस्से में थीं। उन्होंने कुछ फाइलें बढ़ाते हुए सेना प्रमुख से कहा- ‘सैम देखो इसे। किस तरह से लाखों शरणार्थी भारत आ रहे हैं। आप इस बारे में क्या कर रहे हैं?’ सेना प्रमुख ने तुरंत जवाब दिया- ‘कुछ भी नहीं, इसमें मैं क्या कर सकता हूं?’ इंदिरा ने सख्त लहजे में कहा- ‘आप कुछ क्यों नहीं करते?’ सैम- ‘आप मुझसे क्या चाहती हैं?’ ‘सैम, मैं चाहती हूं पूर्वी पाकिस्तान में आर्मी उतार दो।’ इंदिरा ने कहा। सैम हैरान रह गए। उन्होंने कहा- ‘क्या आप जंग चाहती हैं?’ इंदिरा ने झट से कहा- ‘मुझे नहीं पता, यदि यह जंग है तो जंग ही सही।' सैम ने कहा- 'क्या आपने बाइबल पढ़ी है?' इंदिरा ने कुछ नहीं कहा। तभी विदेश मंत्री बोल पड़े- ‘बाइबल से क्या मतलब है आपका?’ सैम ने मुस्कुराते हुए कहा- ‘बाइबल के पहले चैप्टर में लिखा है- वहां प्रकाश हो जाए, तो वहां प्रकाश हो गया। ठीक उसी तरह आप चाहते हैं कि वहां जंग हो जाए और जंग हो गई। मैं बिल्कुल तैयार नहीं हूं। सब एक दूसरे की तरफ देखने लगे। सैम ने फिर कहा- ‘15-20 दिन में मानसून शुरू हो जाएगा। पूर्वी पाकिस्तान में नदियां सागर बन जाएंगी। आप एक किनारे से दूसरे किनारे को भी नहीं देख पाएंगे।’ रक्षा मंत्री जगजीवन राम ने कहा- ‘सैम प्लीज, मान जाओ।’ सैम ने कहा- ‘मैंने अपना मत दे दिया। प्रधानमंत्री मुझे आदेश दे सकती हैं, लेकिन हार तय है।’ इंदिरा का चेहरा लाल हो गया। उन्होंने कहा- ‘हम चार बजे फिर से कैबिनेट में मिलते हैं।’ सभी उठकर जाने लगे। जैसे ही सैम अपनी कुर्सी से उठे, इंदिरा बोल पड़ीं- ‘आर्मी चीफ बैठ जाइए।’ सैम ने कहा- ‘क्या आप चाहती हैं कि मैं स्वास्थ्य के आधार पर इस्तीफा दे दूं?’ पाकिस्तान के दो टुकड़े कैसे हुए, पूरी कहानी कल यानी रविवार को दूसरे एपिसोड में पढ़िए…***** रेफरेंस : 1. The Kaoboys of RAW: Down Memory Lane : By B. Raman 2. The War That Made RAW : By Anushka Nandakumar Sandeep Saket 3. Field Marshal Sam Manekshaw : By Maj Gen Shubhi Sood 4. A Stranger in My Own Country : By Maj. Gen. Khadim Hussain Raja
गुजरात में आज भारी बारिश का रेड अलर्ट, महाराष्ट्र से लेकर असम तक झमाझम बरसेंगे बादल; चलेगी तेज हवाएं
1 अगस्त को गुजरात और महाराष्ट्र में कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। अगले 6-7 दिनों के दौरान उत्तर-पश्चिम भारत में कहीं-कहीं भारी बारिश के साथ छिटपुट से लेकर काफी व्यापक बारिश होने की संभावना है।
'मैं बच्चों को माफ करना चाहता हूं, बचपन में गलतियां होती हैं', PM मोदी ने जारी किया नया वीडियो
PM मोदी ने GenZ के नाम आज एक नया वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है। इस वीडियो के जरिए प्रधानमंत्री मोदी ने उन बच्चों को माफ करने की बात कही जिन्होंने जंतर-मंतर पर उन्हें अपशब्द कहे थे।
दिल्ली की एक अदालत ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अधिकारी अंकित शर्मा की बेरहमी से हत्या करने के मामले में पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को उम्रकैद की सज़ा सुनाई है। इस मुद्दे पर 'कॉफी पर कुरुक्षेत्र' कार्यक्रम में चर्चा की गई।
दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के प्रोटेस्ट के दौरान सब इंस्पेक्टर अशोक मीणा हिंसा का शिकार हुए थे। बावजूद इसके उन्होंने हार नहीं मानी और ड्यूटी पर तैनात रहे। इंडिया टीवी से बातचीत में अशोक मीणा की पत्नी नीरज मीणा ने उस दिन की पूरी घटना का जिक्र किया है।
मैं बहुत शर्मिंदा हूं, PM मोदी के खिलाफ अभद्र कमेंट्स करने वाली लड़की ने पूरे देश से मांगी माफी
दिल्ली के जंतर मंतर पर जेन-जी के प्रदर्शन के दौरान पीएम मोदी के खिलाफ अमर्यादित भाषा का प्रयोग करने वाली लड़की ने माफी मांगी है और कहा है, ये मेरे जीवन की पहली और आखिरी गलती थी। मैं बहकावे में आ गई थी।
आज लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों की कार्यवाही विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के कारण हंगामे की भेंट चढ़ गई। लोकसभा में राम मंदिर चंदे में कथित गड़बड़ी का मुद्दा उठाने के लिए विपक्षी सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव पुजारी वेश में पहुंचे और कथित चंदा चोरी को लेकर प्रतीकात्मक नाटकीय विरोध जताया। इस दौरान राहुल गांधी भी प्रदर्शन में शामिल हुए और दान पेटी में पैसे डालने की कोशिश की। विपक्ष के इस प्रदर्शन पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने सदन में अलग-अलग वेश-भूषा में आने वाले सांसदों को चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि सदन की मर्यादा बनाए रखना सभी सदस्यों की जिम्मेदारी है। राम मंदिर चंदे पर संसद परिसर में ‘नाटक’ शुक्रवार को संसद परिसर में विपक्ष ने अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और कथित चंदा चोरी को लेकर प्रदर्शन किया। पप्पू यादव ने भगवा कपड़े पहनकर मंदिर के पुजारी का रूप धारण किया और एक प्रतीकात्मक ‘चंदा चोरी’ का प्रदर्शन किया। राहुल गांधी इस प्रदर्शन में पहुंचे और दान पेटी में पैसे डालने की कोशिश करते नजर आए। इस प्रदर्शन के जरिए विपक्ष ने राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मुद्दा उठाने की कोशिश की। बिड़ला ने सांसदों को चेताया लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई। विपक्षी सांसद प्रश्नकाल के दौरान भी विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध कर रहे थे। इस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने सदस्यों से सदन की कार्यवाही बाधित नहीं करने को कहा। बिड़ला ने कहा कि प्रश्नकाल में नियोजित तरीके से व्यवधान पैदा करना उचित नहीं है। सदन में तख्तियां और बैनर लेकर आने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई और इसे संसदीय मर्यादा के अनुरूप नहीं बताया। पप्पू यादव के भगवा वेश में संसद पहुंचने और प्रदर्शन के संदर्भ में भी अध्यक्ष ने अलग-अलग वेशभूषा में आने वाले सदस्यों को चेतावनी दी। चंदा चोरी की तख्तियों के बीच बिल पास हंगामे और लगातार समझाइश के बीच लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी गई। कार्यवाही दोबारा शुरू होने पर पीठासीन अधिकारी दिलीप सैकिया ने सदस्यों से दस्तावेज सदन के पटल पर रखने को कहा। विपक्ष का विरोध हालांकि जारी रहा। इसी दौरान दोपहर करीब 12 बजकर 6 मिनट पर पंजीकरण जन्म और मृत्यु (संशोधन) विधेयक, 2026 लोकसभा में पारित कर दिया गया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर बिल पर चर्चा से बचने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से कांग्रेस और विपक्षी सांसदों से विधेयक पर चर्चा में शामिल होने की बार-बार अपील की गई, क्योंकि यह महत्वपूर्ण विधेयक है। रिजिजू के बोलने के दौरान विपक्षी सांसदों ने राम मंदिर चंदे से जुड़ी तख्तियां लहराईं और नारेबाजी की। लगातार हंगामे के बाद लोकसभा की कार्यवाही 3 अगस्त सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। राज्यसभा में भी नारेबाजी राज्यसभा की कार्यवाही भी शुक्रवार सुबह 11 बजे शुरू हुई। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने शून्यकाल की घोषणा की, लेकिन विपक्षी सांसद विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी करने लगे। विपक्ष की ओर से जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई समेत कई मुद्दे उठाए गए। हंगामे के बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष के रवैये पर नाराजगी जाहिर की और सदन में व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। विपक्षी सांसदों की नारेबाजी जारी रहने के कारण राज्यसभा की कार्यवाही भी ज्यादा देर नहीं चल सकी और करीब 11 बजकर 21 मिनट पर सदन को 3 अगस्त सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया। वीडियो देखने के लिए ऊपर थंबनेल पर क्लिक करें…
गंगनहर में डूबने से 4 कांवड़ियों की मौत, एक को बचाने में गई सबकी जान, चंडीगढ़ से आए थे हरिद्वार
कांवड़ लेने हरिद्वार आए 4 कांवड़ियों की गंगनहर में डूबने से मौत हो गई। ये सभी कांवड़िए चंडीगढ़ से एक ग्रुप के साथ गंगाजल लेने हरिद्वार पहुंचे थे जहां नहर में नहाने के दौरान एक कांवड़िया गंगनहर में डूबने लगा, जिसे बचाने की कोशिश में उसके तीन साथी भी डूब गए।
पीएम मोदी ने ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री Andy Burnham से फोन पर बात की और इस दौरान भारत और ब्रिटेन की रणनीतिक साझेदारी को नई ऊंचाई पर ले जाने प्रतिबद्धता पर चर्चा की।
क्या भारत की तेज़ प्रगति से असहज विदेशी शक्तियाँ रच सकती हैं सोशल मीडिया षड्यंत्र? समझिए
विदेशीशक्तियाँरचसकतीहैंसोशलमीडियाषड्यंत्र The post क्याभारतकीतेज़प्रगतिसेअसहजविदेशीशक्तियाँरचसकतीहैंसोशलमीडियाषड्यंत्र?समझिए appeared first on प्रवक्ता.कॉम - Pravakta.Com .
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के इंजीनियरिंग स्टूडेंट्स को 'क्रिमिनल वेस्ट' कहने पर बवाल मच गया है। इसको लेकर अब BJP सांसद निशिकांत दुबे को बोलना पड़ा कि गलती रेवंत रेड्डी की नहीं, राहुल गांधी जो कहते हैं वही वो करते हैं। जाने ये पूरा मामला क्या है।
आरक्षण : सामाजिक न्याय का ढोंग?
आरक्षण:सामाजिकन्यायकाढोंग The post आरक्षण:सामाजिकन्यायकाढोंग? appeared first on प्रवक्ता.कॉम - Pravakta.Com .
गाड़ी खरीदने के बजाय किराये की गाड़ी के प्रयोग के बहुआयामी लाभ
गाड़ीखरीदनेकेबजायकिरायेकीगाड़ीकेप्रयोग The post गाड़ीखरीदनेकेबजायकिरायेकीगाड़ीकेप्रयोगकेबहुआयामीलाभ appeared first on प्रवक्ता.कॉम - Pravakta.Com .
अंकित शर्मा मर्डर केस का कैसे हुआ खुलासा, नाले में मिला था शव, शरीर पर थे 51 घाव, जानें टाइमलाइन
दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने आज अंकित शर्मा हत्याकांड मामले में आप के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित पांच लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। नाले में मिला था अंकित का शव, जानिए कैसे हुआ इस हत्याकांड का खुलासा?
जर्सी का रंग नहीं, खेल की गरिमा बचाने की जरूरत
भारतीय हॉकी टीम की नई यूनिफॉर्म में केसरिया रंग के प्रयोग The post जर्सी का रंग नहीं, खेल की गरिमा बचाने की जरूरत appeared first on प्रवक्ता.कॉम - Pravakta.Com .
शिवभक्ति, प्रकृति और भारतीय संस्कृति का शुभ उत्सव है सावन
सनातन परंपरा में सावन की धार्मिक मान्यता और महत्व सीधे तौर पर भगवान शिव से जुड़ा हुआ है। पौराणिक इतिहास और कथाओं के अनुसार,इसी पवित्र महीने में देवों और दानवों के बीच समुद्र मंथन हुआ था। उस मंथन से निकले हलाहल विष को पीकर महादेव ने पूरी सृष्टि की रक्षा की थी। विष के उस तीव्र ताप को शांत करने के लिए सभी The post शिवभक्ति,प्रकृतिऔरभारतीयसंस्कृतिकाशुभउत्सवहैसावन appeared first on प्रवक्ता.कॉम - Pravakta.Com .
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के करीबी सूत्रों ने बताया कि कर्नाटक में लंबे समय से प्रतीक्षित कैबिनेट विस्तार अब सोमवार को होने की संभावना है और मंत्रियों की अंतिम सूची को रविवार रात या सोमवार सुबह तक मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
देवकीनन्दन खत्री थे हिन्दी के पहले तिलिस्मी लेखक
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हिंदी भाषा की रक्षा और समृद्धि का जीवंत उदाहरण
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आंदोलन की संस्कृतिः अधिकार नहीं, उत्तरदायित्व भी आवश्यक
आंदोलन की संस्कृति The post आंदोलन की संस्कृतिः अधिकार नहीं, उत्तरदायित्व भी आवश्यक appeared first on प्रवक्ता.कॉम - Pravakta.Com .
मुंबई: घर के अंदर नाबालिग दिव्यांग से दुष्कर्म, आरोपी रिश्तेदार गिरफ्तार
महाराष्ट्र के पुणे जिले से रिश्ते को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है, जहां एक दिव्यांग नाबालिग लड़की के साथ उसके ही रिश्तेदार द्वारा घर के अंदर दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया गया है।
दिल्ली के सीलमपुर में पीडब्ल्यूडी का सीसीटीवी डीवीआर चोरी करने के आरोप में तीन लोग गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने राजधानी के सीलमपुर इलाके में लगे सरकारी पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (पीडब्ल्यूडी) के सीसीटीवी डीवीआर की चोरी का मामला सुलझा लिया है और इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। चोरी का सामान और उसे बेचकर मिली रकम का एक बड़ा हिस्सा भी बरामद कर लिया गया है।
अंकित शर्मा की जघन्य हत्या की गई, कोर्ट ने ताहिर हुसैन सहित 5 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई
कड़कड़डूमा कोर्ट ने कहा, अंकित शर्मा की हत्या जघन्य तरीके से की गई थी। कोर्ट ने हत्या के दोषी ताहिर हुसैन, नजीम, कासिम, अनस और जावेद को उम्रकैद की सजा सुनाई है।
Rajat Sharma's Blog | क्या हम चीन की परीक्षा प्रणाली से कुछ सीख सकते हैं?
आज मुझे चीन की सालाना कॉलेज एंट्रेंस परीक्षा के बारे में दिलचस्प जानकारी मिली। चीन में हर साल जून में तीन दिन परीक्षा होती है। Undergraduate admissions की इस परीक्षा में एक करोड़ तीस लाख छात्र इम्तिहान देते हैं। वहां इसे Gaokao exam कहते हैं। Gaokao में पेपर सैट करने के लिए 500 शिक्षक चुने जाते हैं।
संसद के मानसून सत्र के दौरान गुरुवार को राज्यसभा और लोकसभा, दोनों सदनों में हंगामा और तीखी नोकझोंक देखने को मिली। राज्यसभा में पेपर लीक से जुड़े लोक परीक्षा अनुचित साधन निवारण (संशोधन) विधेयक-2026 पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। खड़गे ने आरोप लगाया कि उन्हें धमकी दी जा रही है। बाद में उनके 'मनुस्मृति' संबंधी बयान पर हंगामा हुआ और सभापति ने टिप्पणी को कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाने के निर्देश दिए। वहीं, लोकसभा में राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक-2026 ध्वनिमत से पारित हो गया। सुबह 11 बजे राज्यसभा की कार्यवाही शुरू हुई। दोपहर 2 बजे कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोक परीक्षा अनुचित साधन निवारण (संशोधन) विधेयक-2026 सदन में पेश किया। विधेयक पर चर्चा के दौरान जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश में भर्ती परीक्षाओं के लिए यूपीएससी, एसएससी, आईबीपीएस और उच्च शिक्षा में प्रवेश के लिए एनटीए जैसी प्रमुख एजेंसियां काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा एजेंसी बनाने का सुझाव 1992 में आया था। एनडीए सरकार, यूपीए का अधूरा काम पूरा कर रही है। नेता प्रतिपक्ष खड़गे चर्चा में शामिल हुए। आरोप लगाया कि उन्हें धमकी दी जा रही है। इसी दौरान उन्होंने कहा कि एक दिन संबंधित सदस्य को कमरे से बाहर खींचकर लाएंगे। इस टिप्पणी के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। खड़गे बोले- शिक्षण संस्थानों में आरएसएस का दखल इसके बाद खड़गे ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षण संस्थानों में आरएसएस का दखल बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि 'मनुस्मृति' मानने वालों की संख्या बढ़ने से शूद्रों का पढ़ने का अधिकार छिन गया है। इस टिप्पणी पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया और सदन में हंगामा शुरू हो गया। नड्डा ने कहा- खड़गे का बयान तथ्यों से परे केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि खड़गे का बयान तथ्यों से परे है और इससे अशांति फैल सकती है। इसके बाद सभापति सीपी राधाकृष्णन ने 'मनुस्मृति' संबंधी टिप्पणी को कार्यवाही के रिकॉर्ड से हटाने के निर्देश दिए। खड़गे ने कहा कि सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए कानून तो बना दिया, लेकिन उसे रोकने की व्यवस्था क्या की गई, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जब जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन चल रहा था, तब धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा क्यों नहीं दिया। सरकार जो कहती है, उसका उल्टा करती है। अगर शिक्षा व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया तो आगे भी पेपर लीक की घटनाएं होंगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन अब तक किसी को सजा नहीं मिली। 2024 के पेपर लीक मामलों का जिक्र करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि आरोपियों को क्लीनचिट मिल गई। लोकसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण कुछ ही देर में दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। विपक्षी सांसदों की मांग थी कि केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह माफी मांगें। दोपहर 2 बजे कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। पीठासीन संध्या राय ने सदस्यों से दस्तावेज सदन के पटल पर रखने को कहा। इस दौरान विपक्षी दलों के सांसदों ने नारेबाजी की, जिसके चलते सदन की कार्यवाही फिर 3 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। साढ़े 3 बजे लोकसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। सरकार ने राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक-2026 सदन में पेश किया, जिस पर चर्चा हुई। सांसद संबित पात्रा ने कहा- गांधी परिवार की सरकारों ने गांधी परिवार को तो ऊपर रखा, लेकिन वंदे मातरम् को ऊपर नहीं रखा।वीडियो देखने के लिए ऊपर थंबनेल पर क्लिक करें…
56 साल औसत उम्र वाली लोकसभा में इन दिनों 14 से 29 साल वाली जेन-जी के स्लैंग गूंज रहे हैं। कोई सांसद ‘वास्तेगुना-हुइंया’ और ‘कुच्चु-पुच्चु’ बोल रहा, तो किसी के भाषण में ‘डेलुलू’ और ‘क्लॉक्ड इट’ का इस्तेमाल हुआ। आखिर इन शब्दों के मतलब क्या हैं और जेन-जी के स्लैंग संसद क्यों पहुंच गए; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: जेन-जी के कौन से स्लैंग संसद में गूंजे?जवाबः मानसून सत्र में एंटी-पेपर लीक पर चर्चा के दौरान लोकसभा में ये 6 स्लैंग चर्चा में आए… 1. MIA 2. FOMO 3. DELULU 4. VASTEGUNA HUIYA 5. KUCHU-PUCHU 6. CLOCKED IT सवाल-2: जेन-जी के कुछ और मशहूर स्लैंग कौन से हैं?जवाबः सवाल-3: इंस्टाग्राम और स्नैपचैट से निकलकर संसद क्यों पहुंचे ये स्लैंग?जवाबः 3 वजहें हैं…1. कॉकरोच जनता पार्टी का सुपरहिट मूवमेंट 2. मौजूदा राजनीति में जेन-जी का असर 3. 2029 में जेन-जी सबसे बड़ा वोटर ग्रुप सवाल-4: क्या पहले भी संसद ऐसे मशहूर शब्दों या मुहावरों को अपनाती रही है?जवाबः हां, इसके कुछ उदाहरण देखिए… 1. 'हाउ इज द जोश?’ 2. ‘जय हो’ फिल्म स्लमडॉग मिलिनेयर में ए. आर. रहमान के इस गाने को 2009 में ऑस्कर मिला। कांग्रेस ने तब लोकसभा चुनाव के दौरान इसका खूब इस्तेमाल किया था। अक्सर राजनीतिक रैलियों में इसकी धुन बजती है। 3. ‘खेला होबे’ सवाल-5: संसद में ऐसे स्लैंग के इस्तेमाल पर जेन-जी क्या सोचते हैं?जवाबः जेन-जी मोटे तौर पर दो बातें कह रहे हैं… 1. हमारे स्लैंग गलत संदर्भ में इस्तेमाल हो रहे ‘Delulu का इस्तेमाल हम ज्यादातर पॉजिटिव तरीके से करते हैं, जैसे किसी फैंटेसी में होना। हम ‘Delulu is Solulu’ भी बोलते हैं, जिसका मतलब है- खुद को जानबूझकर पॉजिटिव डेल्यूजन में रखना, ताकि वो सपने पूरे हो जाएं। नेता Delulu जैसे कई स्लैंग गलत संदर्भ में इस्तेमाल कर रहे, इसलिए हम उनसे कनेक्ट नहीं हो सकते।’ 2. हमको कॉपी करने के बजाय अपने काम पर ध्यान दें ‘इस कॉपीकैट से जेन-जी पर कोई अच्छा असर नहीं पड़ने वाला। इसके बजाय नेता अपने काम पर ध्यान दें। हमारे लिए बेहतर मौके बनाएंगे, तो हमें ज्यादा खुशी होगी।’ ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर: क्या पॉलिटिकल पार्टी बनाएंगे 'कॉकरोच' या मूवमेंट जारी रखेंगे; अभिजीत दीपके का आगे का प्लान क्या, फ्यूचर के 3 सिनैरियो 6 जून 2026, अभिजीत दिपके पहली बार लंदन से दिल्ली एयरपोर्ट उतरे और सीधे जंतर-मंतर प्रोटेस्ट साइट पहुंचे। 20 जून को दोबारा प्रोटेस्ट पर बैठे, तो 36 दिन के बाद 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेकर उठे। जंतर-मंतर से जाते-जाते कॉकरोच पार्टी ने प्रोटेस्टर्स से कहा- ‘जल्दी दोबारा मिलेंगे।’ पूरी खबर पढ़ें…
मैं आठवीं क्लास में था। नाम था अंकिता यादव। मेरे ही क्लास के दूसरे सेक्शन में प्रिया नाम की एक लड़की थी। बहुत पसंद थी वो मुझे। जब भी वो आस-पास होती मुझे अजीब सा महसूस होता। बस लगता कि उसे देखता रहूं। उससे बातें करूं। अब आप सोच रहे होंगे मेरा नाम लड़कियों जैसा, लेकिन बातें तो लड़कों जैसी हैं। सही सोचा आपने। हां, तब मैं शरीर से तो लड़की था, लेकिन मेरे भीतर एक लड़का था। भीतर का वो लड़का हमेशा घुटता रहता। मैं खुद से पूछता, दुनिया के लिए तो मैं लड़की हूं, ऐसे में जिस लड़की से प्यार करता हूं, उसे ये कैसे बताऊं। किस मुंह बताऊं। भास्कर सीरीज ब्लैकबोर्ड में मैं मनीषा भल्ला आज कहानी लाई हूं मनवीर की, जो पहले अंकिता थे, लेकिन सर्जरी से जेंडर चेंज करवा लिया इस दौरान उनके साथ क्या-क्या हुआ, सुनिए उन्हीं की जुबानी… जैसा कि मैंने ऊपर बताया मुझे प्रिया पसंद तो थी, लेकिन उससे कहने की हिम्मत नहीं हुई। तब मैंने उसके बारे में अपनी दोस्त मतलब सहेली आकांक्षा को बताया। वो चौंक गई और कहने लगी- ‘तू तो खुद लड़की है। ये कैसी बातें कर रही है। मैंने उससे कहा- भले ही मैं लड़की दिखता हूं, लेकिन मुझे लड़कों की तरह रहना पसंद है। मुझे शर्ट-पैंट पहनकर घूमना पसंद था। लड़कियों वाले कपड़ों में दम घुटता था। लंबे बाल संवारना मेरे लिए मुसीबत थी। हर बार उन्हें काटकर फेंकने का मन करता था। धीरे-धीरे ये बात पूरे स्कूल में फैल गई। सब मजाक उड़ाने लगे। एक दिन मैं वॉशरूम जा रहा था, तभी क्लास के कुछ लड़कों ने घेर लिया। कहने लगे- ‘तू तो हमारी तरह है ना। तू भी लड़का है ना, तभी तुझे भी हमारी तरह लड़कियां पसंद हैं। ब्यॉज टॉयलेट में चल, लड़कियों के टॉयलेट में क्यों जा रही है।’ ये बातें सुनकर मैं इतना घबरा गया कि पेट दर्द का बहाना बनाकर घर चला गया। अगले दिन पूरे स्कूल में ये बात फैल चुकी थी कि अंकिता दिखती भले ही लड़की है, लेकिन है वो लड़का। जब मैं दोबारा टॉयलेट गया तो कुछ सीनियर्स और क्लास की लड़कियों ने घेर लिया। उन्होंने जबरदस्ती मेरी सलवार उतारी और प्राइवेट पार्ट चेक किया। फिर ये कहते हुए वहां से चले गए- अरे तू तो लड़की है। फिर तुझे लड़कियां क्यों पसंद हैं। उस वक्त मेरे मन में क्या चल रहा था ये शायद ही कोई समझ पाएगा। ऐसा लग रहा था कि आत्महत्या करने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। किसी भी ट्रांसजेंडर की पहली लड़ाई परिवार और स्कूल से शुरू होती है। हम लोग दिल्ली के नजफगढ़ में रहते थे। मैं 6 भाई-बहनों में सबसे छोटा था। पापा चाय की दुकान लगाते थे। इसी से घर के 9 लोगों का खर्च चलता था। मेरे पैदा होने के बाद खर्च और बढ़ गया। ढाई साल का हुआ तो पापा को लकवा मार गया। वो बिस्तर पर आ गए। घर चलाने की जिम्मेदारी मां पर आ गई और वो दुकान पर बैठने लगी। तब किसी रिश्तेदार ने मां से कह दिया कि तुम्हारी छोटी बेटी मनहूस है। जबसे वो पैदा हुई है पूरा घर मुसीबतों से घिरा है। उसके बाद से भाई-बहनों समेत सभी रिश्तेदारों ने मनहूस कहना शुरू कर दिया। समय बीतता गया और मेरे ही घर में मेरे खिलाफ नफरत बढ़ने लगी। एकबार बड़ी बहन को देखने के लिए लड़के वाले घर आ रहे थे। सब तैयारियों में जुटे थे। मैंने मां से पूछा, क्या मेहमान आने वाले हैं? मां से पहले ही बड़ा भाई बोलने लगा- अगर तू उनके सामने आई तो मार-मार के हाथ-पैर तोड़ दूंगा। मनहूस, तेरी वजह से रिश्ता जुड़ने से पहले ही टूट जाएगा। मैं रोते हुए वहां से उठकर चला गया। जब मैं 10-11 साल का था तो मेरी उम्र की लड़कियां गुड्डे गुड़ियों से खेलती थीं, लेकिन मुझे तो लड़कों के साथ क्रिकेट खेलना अच्छा लगता था। छठवीं क्लास की बात है। एक दिन कुछ लड़के घर आए। कहने लगे क्रिकेट खेलने चलो। उस वक्त पापा घर पर ही थे। वो सुनते ही चीखने लगे-’लड़कों के साथ खेलने जाएगी, बाहर निकली तो टांगे तोड़ दूंगा। जैसे बाकी बहनें घर पर रहती हैं, वैसे ही तू भी रह।’ पापा को चीखते हुए सुनकर मैं कांपने लगा। फिर भी हिम्मत जुटाकर रोते हुए बड़ी बहन से बोला- पापा से कहो मुझे इनके साथ बाहर जाने दें। मैं भी इनमें से ही हूं।’ लेकिन पापा ने एक न सुनी। मुझे कोई नहीं समझता था। इसलिए मैं अपनी सारी बातें डायरी में लिखता था। ये बात भी मैंने डायरी में लिखी थी। एक दिन किसी ने बड़ी बहन को बता दिया कि मुझे लड़कियां पसंद हैं। उसने घर आकर भाई-बहन, मम्मी, सबको बता दिया। तभी बड़े भाई को मेरी डायरी भी मिल गई। उसने सब पढ़ लिया। उस दिन मम्मी और दादी के अलावा सभी ने मुझे पीटा। तब तक पीटा, जब तक सब थक नहीं गए। उस दिन से भाई मुझे हिजड़ा कहने लगा। धीरे-धीरे पैसों की तंगी होने लगी। भाई ने घर में पैसे देना बंद कर दिया। कहने लगा कि इसे खिलाने के लिए पैसे नहीं हैं। मेरे पास चप्पल तक नहीं थी। नंगे पैर स्कूल जाता था। लड़कों वाले कपड़े पहनता था, वो भी भाई ने जला दिए। रिश्तेदारों से उतरन मांग कर पहनना पड़ा। मजबूरी में फुटपाथ पर चादर बिछा कर सब्जी बेची। कॉस्मेटिक और मिट्टी के बर्तन बेचे। जब थककर घर लौटता तो चुपचाप एक कोने में पड़ा रहता। जिस किसी का कोई काम बिगड़ जाता तो वो मुझे जिम्मेदार ठहराकर पीटने लगता। पड़ोस में ही मेरा एक रिश्ते का भाई रहता था। अक्सर घर आया करता था। एकबार वो आया तो घर पर कोई नहीं था। वो मेरे कमरे में घुस आया और दरवाजा अंदर से बंद कर लिया। जब तक मुझे कुछ समझ आता वो जबरदस्ती करने लगा। उसने मेरा रेप किया। मैं मदद के लिए चीख रहा था। उसने मुझे धमकी दी कि तेरी बात पर कौन भरोसा करेगा। घरवाले तो तेरी शक्ल तक नहीं देखना चाहते, घर से भी निकाल देंगे। उस दिन के बाद से उसे जब भी मौका मिलता वो घर आ जाता। रेप करता और धमकी देकर चला जाता। उसने परिवार के कुछ और लड़कों को इसबारे में बता दिया। वो लड़के भी मेरा रेप करने लगे। लगातार तीन साल तक मेरे साथ ये सब होता रहा लेकिन मैं घरवालों को बता नहीं सका। हालांकि मैं उन लड़कों का नाम नहीं लूंगा। वरना मां दुखी हो जाएगी। 2013 में पापा की मौत हो गई। उसके बाद भाई के हौसले और बुलंद हो गए। वो कहने लगा कि मुझे कहीं बेच आएगा। मैं जब भी उसकी सामने आता, पीटने लगता। एक दिन मैं कूलर अपनी तरफ घुमाकर सो गया। इस बात पर उसने मुझे बहुत पीटा। चारपाई से उठाकर नीचे पटक दिया। दीवार पर सिर दे मारा। पास ही एक प्रेस पड़ी थी। वो उठाकर मेरे सिर पर मार दी। खून बहने लगा तो बहन और जीजा अस्पताल ले गए। अगले दिन जब सोकर उठा तो दादी और मां मेरे सिरहाने बैठे थे। कहने लगे कि तू ये घर छोड़कर चला जा। वरना भाई तुझे मार डालेगा। हम तुझे जिंदा देखना चाहते हैं। मैंने मां के पैर पकड़ लिए। गिड़गिड़ाने लगा कि मां, कहां जाऊं मैं। मां ने रोते हुए कहा- कहीं भी चला जा, कम से कम जिंदा तो रहेगा। उसके बाद मैंने घर छोड़ दिया। तब तक बारहवीं हो चुकी थी। सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी मिल गई। नजफगढ़ में ही किराए का कमरा लेकर रहने लगा। कुछ ऐसे लोगों से दोस्ती हुई जो मेरी ही तरह थे यानी लड़की के शरीर में लड़के थे। वो अक्सर मुझसे मिलने आया करते थे। मकान मालिक को वो लोग पसंद नहीं आए और उसने कमरा खाली करवा लिया। तब तक कोरोना भी फैल चुका था। मैं सामान लिए पूरा दिन यहां-वहां भटकता रहा, लेकिन एक भी कमरा नहीं मिला। मैंने अपने कई जानने वालों को भी फोन किया, लेकिन सबने मना कर दिया। जब अंधेरा होने लगा तो वापस घर लौट जाने के अलावा मेरे पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा। घर पहुंचकर मां को सारी बात बताई। उन्होंने कहा- ‘भाई से दूर रहना, उसकी नजरों के सामने मत आना।’ एक-दो दिन बीते ही थे कि फिर वही सब होने लगा। रोज-रोज की मारपीट। एक महीने बाद मां और दादी के कहने- लगे घर छोड़ दे। मैंने फिर घर छोड़ दिया। किसी तरह एक कमरा किराए पर लेकर रहने लगा। जब मां से मिलना होता तो नजफगढ़ बैंक या किसी चाय की दुकान पर उन्हें बुला लेता। यूं ही सड़कों पर समय गुजरने लगा। कुछ महीने बाद पता चला कि बड़े भाई की अचानक मौत हो गई। सुनकर बुरा तो लगा लेकिन उतना नहीं। बस यूं कहिए कि जो हुआ ठीक हुआ। भाई की मौत के बाद फिर मेरा घर आना-जाना शुरू हुआ। आखिर मैंने तय किया कि अब सर्जरी करवाऊंगा। मम्मी और दादी को सर्जरी के बारे में बताया। वो कहने लगीं कि अगर तुम ये करवाकर खुश रहोगे तो करवा लो। तुम्हारी खुशी में ही हमारी खुशी है। छोटी-मोटी नौकरी से जो भी पैसे जोड़े थे, उससे इलाज शुरू हुआ। इसके लिए सबसे पहले जीआईडी सर्टिफिकेट यानी जेंडर आईडेंटिटी डिसऑर्डर सर्फिकेट की जरूरत होती है। जिसके लिए मैं मनोचिकित्सक के पास गया। इसमें काउंसलिंग से जायजा लिया गया कि मैं सच में ट्रांस हूं या नहीं। तीन सेशन होने के बाद जीआईडी सर्टिफिकेट मिला। इसके बाद हार्मोन हेल्थ के डॉक्टर यानी एंडोक्रोनॉलिस्ट के पास गया। उसने हार्मोनल टेस्ट करवाए और रिपोर्ट के हिसाब से हार्मोन बदलने वाले इंजेक्शन देने शुरू किए। यह इंजेक्शन किसी भी सर्जरी करवाने वाले को सारी जिंदगी लेने होते हैं। शरीर के हार्मोन जेंडर के अनुसार बदलते रहके हैं, इसलिए हर तीन महीने में ब्लड टेस्ट भी करवाने पड़ते हैं। इसमें हर महीने करीब 5 हजार रुपये का खर्च आता। इस पूरी प्रोसेस में एक से डेढ़ साल लग गया। तब जाकर 2024 के आखिरी में सर्जरी हुई, जिसमें ब्रेस्ट और यूटेरस हटा दिया गया। फिर बारी आई टीजी यानी ट्रांस जेंडर कार्ड लेने की। इसी से सभी दस्तावेजों में नाम और जेंडर बदलता है। इसके लिए मैंने डीएम ऑफिस में अप्लाई किया। तीन साल तक इस कार्ड के लिए चक्कर काटता रहा। एकबार तो वहां बैठे अधिकारी ने इतना तक कह दिया कि 'पैंट उतारकर दिखाओ, तब तो पता चलेगा जेंडर सच में बदला है या नहीं।' ये सुनते ही वहां बैठे सभी लोग हंसने लगे। मैं शर्मिंदा होकर वहां से चला आया। फिर भी कार्ड जरूरी था इसलिए हर रोज पहुंच जाता था। वेरिफिकेश के लिए एक टीम मेरे मोहल्ले में पहुंची और पूछने लगी कि यहां कोई हिजड़ा रहता है, जिसने टीजी कार्ड के लिए अप्लाई किया है। उस दिन के बाद से पूरा मोहल्ला मेरा मजाक उड़ाने लगा। आखिरकार मुझे वो मोहल्ला छोड़ना पड़ा, लेकिन मैंने हार नहीं मानी। 2019 में जो ट्रांसजेंडर एक्ट आया था उसमें इसी साल मार्च में बदलाव भी हुआ है। उसके अनुसार अब डीएम ऑफिस में मेडिकल बोर्ड बैठेगा। जो निर्णय लेगा कि अप्लाई करने वाला ट्रांस है भी या नहीं। टीजी कार्ड के लिए वेबसाइट से ही अप्लाई करना होगा। सर्जरी हुए लगभग दो साल हो चुके हैं लेकिन अब तक मेरा पैन कार्ड नहीं बन पाया है। जिसकी वजह से पीएफ के लिए अप्लाई नहीं कर पा रहा हूं। मुझे पैसों की सख्त जरूरत हैं, इसलिए दिन-रात सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटता हूं। सर्जरी के बाद जिंदगी में काफी कुछ बदल गया, लेकिन पुरानी जिंदगी को जब भी याद करता हूं तो तकलीफ होती है। शायद वो सब जिंदगी में कभी भूल नहीं पाऊंगा। मैं जो भी था, जैसा भी था सब ऊपर वाले ने किया था, लेकिन सजा मुझे मिली। ----------------------------------- ब्लैकबोर्ड की ये कहानियां भी पढ़ें… 1- ब्लैकबोर्ड-8 पुलिसवालों को मारने वाले विकास दुबे की बीवी हूं:आज वो जिंदा होते तो थप्पड़ मारती, बच्चे बाप का नाम तक नहीं सुनना चाहते साल 2020, 2-3 जुलाई की दरमियानी रात। मैं अपने छोटे बेटे के साथ लखनऊ वाले घर पर सो रही थी। बड़ा बेटा उन दिनों छुट्टी पर मॉस्को से इंडिया आया हुआ था और अपनी चाची के घर पर था। रात 2 बजे अचानक फोन बजा। पूरी कहानी यहां पढ़ें… 2- ब्लैकबोर्ड-पत्नी की साड़ी-पेटीकोट धोता हूं, झाडू-पोंछा करता हूं:दोस्त कहते हैं- ये मर्द नहीं, हाउस हसबैंड बनने से भाइयों की शादी नहीं हो रही कहानी ऐसे मर्द की जो पैसे कमाने बाहर नहीं जाता। घर पर रहकर झाड़ू-पोंछा करता है। बरतन धोता है। खाना बनाता है। वो हाउस हसबैंड है। ठीक वैसे ही जैसे हमारे यहां हाउस वाइफ होती हैं। पूरी कहानी यहां पढ़ें
संसद के मानसून सत्र में बुधवार को एक बार फिर लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में जोरदार हंगामा देखने को मिला। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के बयान ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी टकराहट पैदा कर दी। राहुल गांधी ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पैलेट गन चलाने का आदेश देने का आरोप लगाया। इसके अलावा उन्होंने अपने भाषण के दौरान 'विद्यार्थी, इडियट और अंधभक्त' शब्दों का इस्तेमाल किया, जिस पर सत्ता पक्ष के सांसद लगातार टोकते रहे। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल गांधी से अपने आरोपों के समर्थन में सबूत मांगे, जबकि राहुल ने सदन में आरोप लगाया कि उनका माइक बंद कर दिया गया। लोकसभा की कार्यवाही सुबह 11 बजे शुरू हुई। प्रश्नकाल के दौरान ही विपक्षी दलों के सदस्य नारेबाजी करने लगे। लगातार हंगामे के कारण अध्यक्ष को कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। दोपहर 12 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई। पीठासीन सदस्य एनके प्रेमचंद्रन ने सदस्यों से सदन के पटल पर दस्तावेज रखने की प्रक्रिया पूरी कराई, लेकिन विपक्षी सांसद 'गृहमंत्री सदन में आओ' के नारे लगाते रहे। हंगामा थमने के बजाय और तेज होता गया। करीब 12 बजकर 6 मिनट पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला सदन की कार्यवाही संभालने के लिए आसन पर पहुंचे। लगातार हो रही नारेबाजी पर उन्होंने नाराजगी जताई और सदन को चलने देने की अपील की। इसके बाद सदन में लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा शुरू हुई। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (आरएलपी) के नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने विधेयक पर अपनी बात रखी और परीक्षा प्रणाली तथा नकल रोकने के उपायों को लेकर सरकार से सवाल किए। करीब 12 बजकर 59 मिनट पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी चर्चा में हिस्सा लेने के लिए खड़े हुए। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने केंद्र सरकार और खासकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर तीखे हमले किए। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पैलेट गन चलाने का आदेश अमित शाह ने दिया था। उन्होंने छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए 'विद्यार्थी, इडियट और अंधभक्त' टिप्पणी भी की, जिस पर सत्ता पक्ष के सांसदों ने जोरदार विरोध शुरू कर दिया। राहुल गांधी के आरोपों के बाद सदन का माहौल और गरमा गया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू तत्काल खड़े हुए और कहा कि नेता प्रतिपक्ष बेहद गंभीर आरोप लगा रहे हैं, इसलिए उन्हें सदन में इसका प्रमाण देना चाहिए। सत्ता पक्ष के सांसद भी राहुल गांधी के बयान का विरोध करते हुए बार-बार उन्हें टोकते रहे। इसी दौरान राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष से शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि उनका माइक बंद कर दिया गया है और उन्हें अपनी बात पूरी तरह रखने का अवसर नहीं दिया जा रहा। इस मुद्दे पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस छिड़ गई। लगातार बढ़ते शोर-शराबे और हंगामे के बीच अध्यक्ष ने लोकसभा की कार्यवाही दोपहर ढाई बजे तक के लिए स्थगित कर दी। दोपहर बाद जब सदन की कार्यवाही फिर शुरू हुई तो प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने राहुल गांधी के आरोपों का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रदर्शन के दौरान गोली चलाने का आदेश कोई मंत्री नहीं देता, बल्कि कानून के अनुसार यह अधिकार कार्यपालक मजिस्ट्रेट के पास होता है। उन्होंने राहुल गांधी के बयान को गैरजिम्मेदाराना और तथ्यों से परे बताया। इस दौरान विपक्षी सांसद लगातार नारेबाजी करते रहे, लेकिन हंगामे के बीच ही लोकसभा ने लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया। राज्यसभा में भी हंगामा उधर राज्यसभा की कार्यवाही भी सुबह 11 बजे शुरू हुई। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने सदस्यों से आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखने को कहा। इसके बाद प्रश्नकाल शुरू हुआ, लेकिन विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। दोपहर बाद सदन की कार्यवाही शुरू होने पर राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा हुई। बहस के दौरान बिहार से राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के सांसद प्रोफेसर मनोज झा ने सरकार की नीतियों और विधेयक के विभिन्न प्रावधानों पर अपनी बात रखी। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच इस मुद्दे पर भी तीखी बहस देखने को मिली। वीडियो देखने के लिए ऊपर थंबनेल पर क्लिक करें…
अभिजीत दीपके ने दोबारा आंदोलन की चेतावनी दी है। उन्होंने मंगलवार को कहा- 'कई राज्यों में पुलिस स्टूडेंट्स को परेशान कर रही है। सरकार छात्रों को डराना-धमकाना और डिटेन करना बंद करे। अगर ये जारी रहा, तो हम दोबारा बहुत बड़ा आंदोलन करेंगे।’ आखिर जंतर-मंतर के प्रदर्शनकारियों के साथ हो क्या रहा है, क्या वाकई सरकार वादाखिलाफी कर रही, जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में… सवाल-1: जंतर मंतर के प्रदर्शनकारियों के साथ क्या हो रहा है?जवाबः तीन तरह के बर्ताव सामने आए हैं… 1. प्रोटेस्टर्स को ट्रैक करके अपमानित किया जा रहा 2. कई राज्यों में दर्ज FIR रद्द की जा रहीं 3. कुछ जगह FIR रद्द नहीं, पुलिस एक्शन ले रही सवाल-2: तो क्या सरकार CJP से वादाखिलाफी कर रही है?जवाबः CJP और सरकार के बीच 3 दौर की बातचीत के बाद 25 जुलाई को प्रोटेस्ट खत्म हुआ। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के अलावा दोनों पक्षों के बीच कुछ बातें तय हुई थीं। मसलन- बीजेपी शासित राज्यों में प्रदर्शनकारियों पर दर्ज सभी FIR वापस ली जाएंगी, सरकार मंगलवार तक इसकी लिखित गारंटी देगी, NEET पेपर लीक की वजह से जान गंवाने वाले बच्चों के परिवारों को अधिकतम मुआवजा और शिक्षा सुधार के चार्टर पर सरकार काम करेगी। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में इन बातों पर सहमति जताई थी। हालांकि अब कॉकरोच जनता पार्टी सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगा रही है। CJP का कहना है कि अब तक सरकार की तरफ से प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR वापस करने की लिखित गारंटी नहीं मिली है। उलटे पुलिस प्रोटेस्टर्स के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। CJP ने ये भी कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश से पुलिस को दर्ज FIR में जांच जारी रखने की इजाजत मिल गई है। ये सरकार के आश्वासन से बिल्कुल उलट है। इस आदेश को मंजूर नहीं करेंगे। सवाल-3: आखिर सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा क्या कहा, जिसका विरोध कर रहे CJP नेता?जवाबः 28 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने CJP प्रोटेस्ट के दौरान पुलिस कार्रवाई की जांच को लेकर दायर याचिकाओं पर सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि छात्रों का प्रदर्शन शांतिपूर्ण था और ये संवैधानिक अधिकार है। पहली नजर में स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की जरूरत दिखती है। जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने वालों के खिलाफ कार्रवाई होगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कानून तोड़ने वालों को भी सजा मिलनी चाहिए। 250 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि सभी पक्षों के आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी। कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में कहा- CJP का कहना है कि प्रदर्शनकारियों पर केस खत्म करने में हमें शर्तें मंजूर नहीं। सुप्रीम कोर्ट का राजनीतिक इस्तेमाल सरकार के फायदे के लिए नहीं होना चाहिए। पूरे देश के सामने एक गंभीर आश्वासन दिया गया था। उसका सम्मान किया जाना चाहिए। CJP प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि अगर प्रोटेस्ट में अपराधी खुले घूम रहे थे, तो दिल्ली पुलिस को उनके पुराने मामलों में जमानत रद्द कराने के लिए अदालत का रुख करना चाहिए। सरकार पुराने आरोपियों के बहाने का इस्तेमाल FIR जारी रखने के लिए नहीं कर सकती। अगर सरकार को इसकी छूट दी गई, तो वह निश्चित तौर पर इसका इस्तेमाल करेगी। सवाल-4: क्या जमानत पर चल रहे आरोपी प्रोटेस्ट में शामिल नहीं हो सकते?जवाब: अगर किसी मामले में कोई आरोपी है, तो इससे उसके किसी प्रोटेस्ट में शामिल होने का अधिकार नहीं छीना जा सकता। अभिव्यक्ति की आजादी के तहत उसे प्रोटेस्ट में शामिल होने का अधिकार है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता कहते हैं कि दिल्ली प्रोटेस्ट के मामले में एक पेच ये है कि आयोजकों ने शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट की बात कही थी। उन्होंने प्रोटेस्ट के दौरान ये आरोप भी लगाया कि सत्तारूढ़ बीजेपी के इशारे पर अराजक तत्व शामिल हो गए हैं और प्रोटेस्ट को बदनाम करने की कोशिश में है। ऐसे में पुलिस ये जांच कर सकती है कि प्रोटेस्ट में शामिल लोग कौन थे, उनका इरादा प्रोटेस्ट का था या कोई गड़बड़ी करने का था। कानून में ये भी प्रावधान हैं कि अगर किसी व्यक्ति के शांति व्यवस्था बिगड़ने की आशंका हो, तो पुलिस उसे हिरासत में ले सकती है। पश्चिम बंगाल में तो इसके लिए हाल ही में ‘पब्लिक सेफ्टी और कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्ट’ बनाया गया है। सवाल-5: दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर अब तक केस वापस क्यों नहीं लिए गए?जवाबः सामान्य तौर पर कोई मामला दर्ज हो जाए, तो पुलिस चार्जशीट में उसे खत्म कर सकती है, क्लोजर रिपोर्ट लगा सकती है या फिर सुनवाई के दौरान कोर्ट FIR रद्द करने के आदेश दे सकता है।दिल्ली पुलिस का कहना है कि उसे भी अब तक सरकार से कोई आदेश नहीं मिला है। आदेश मिलने पर पुलिस ने अपनी तरफ से जो मामले दर्ज किए हैं, उन्हें वापस लेने के लिए उपराज्यपाल से अनुरोध करेगी। उपराज्यपाल की मंजूरी के बाद पुलिस कोर्ट को इसकी सूचना देगी।कई पत्रकारों ने अपने ऊपर हमले के मामले में केस दर्ज करवाए हैं, वो इतनी आसानी से वापस नहीं होंगे। उसके लिए उनकी सहमति जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने घायल हुए पुलिसकर्मियों पर हमले के मामलों में भी जांच की बात कही है। बीजेपी सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा है कि प्रदर्शन की आड़ में पुलिस पर हमला करने या वाहन जलाने वाले उपद्रवियों को किसी भी कीमत पर छोड़ा नहीं जाएगा। इधर सुप्रीम कोर्ट ने जांच के लिए SIT बनाने से पहले केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार को अपना पक्ष रखने का समय दिया है। महाराष्ट्र, बिहार, केरल, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिवों को भी नोटिस जारी करके अपना पक्ष रखने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को होगी। ऐसे में कॉकरोच पार्टी और सरकार के बीच ये तनातनी लंबी खिंच सकती है। सवाल-6: क्या कॉकरोच पार्टी दोबारा प्रदर्शन शुरू कर सकती है? जवाब: कॉकरोच पार्टी का प्रोटेस्ट NEET पेपर लीक को लेकर था। CJP का कहना है कि वो आगे भी स्टूडेंट्स के मुद्दे को लेकर एक्टिव रहेगी। इन मुद्दों पर उन्हें युवाओं का समर्थन मिल सकता है। छात्रों पर कोई कार्रवाई न हो, इसका निर्देश सुप्रीम कोर्ट दे ही चुका है। हालांकि प्रोटेस्ट में शामिल पुराने आरोपियों पर दर्ज FIR वापस लेने का मामला पेचीदा है। इस मुद्दे पर CJP दोबारा उतना समर्थन जुटा पाए, ये आसान नहीं है। पॉलिटिकल एनालिस्ट विजय त्रिवेदी कहते हैं, ‘कोई विवाद बातचीत की टेबल तक आ जाए, तो दोबारा उतना नहीं बढ़ता। CJP की कुछ मांगें मान ली गई हैं। आगे भी बातचीत से रास्ता निकलने की उम्मीद है। सरकार भी कोई ऐसा कदम नहीं उठाएगी, जिसे नए सिरे से उसका विरोध शुरू हो जाए।' ये खबर भी पढ़ें… आज का एक्सप्लेनर:क्या पॉलिटिकल पार्टी बनाएंगे 'कॉकरोच' या मूवमेंट जारी रखेंगे; अभिजीत दीपके का आगे का प्लान क्या, फ्यूचर के 3 सिनैरियो

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