रात के 8 बज रहे हैं। कई पुरुष सिर पर सफेद कपड़ा बांधे एक घर की ओर बढ़ रहे हैं। साथ में चलती हुई महिलाएं गीत गा रही हैं। मानो कोई उत्सव हो, लेकिन कहानी कुछ और है। सभी एक घर के पास पहुंचते हैं, जहां आंगन में एक बुजुर्ग महिला का शव रखा है। शव के पास एक तरफ पुरुष और दूसरी ओर महिलाएं बैठ जाती हैं। उसके बाद रातभर गीतों का सिलसिला चलता है। सूरज की पहली किरण के साथ महिलाएं तैयारियों में जुट जाती हैं। उन्हीं में से एक महिला पत्तों में खाना और बांसुरी लेकर आती हैं और शव के पास रख देती हैं। तभी एक लड़का आया, उसके हाथ में जिंदा मुर्गी है। उसने फड़फड़ाती मुर्गी को शव के सामने रखा और फरसे से उसकी गर्दन उड़ा दी। ठीक उसके बाद एक दूसरा लड़का चूजा लेकर आया। उसने शव की दाहिनी हथेली पर रखा और चाकू से काट दिया। ये काम इतने सधे तरीके से किया गया, ताकि शव की हथेली न कटे। इसके बाद सभी ने वहां फैला खून साफ किया। दरअसल, यहां अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही है। मुर्गे की बलि दी जा रही है और मरने वाले का पसंदीदा खाना भी बनाया गया है। दैनिक भास्कर की सीरीज ‘हम लोग’ में मैं मनीषा भल्ला इस बार लाई हूं कहानी- मरिंग समुदाय की। मणिपुर के इंफाल और इसके आस-पास बसे इस समुदाय की आबादी करीब 25 हजार है। यह अंतिम संस्कार सांगडांग शेनबा मरिंग नाम के गांव में हो रहा है, जो मणिपुर की राजधानी इंफाल से 50 किमी दूर पहाड़ी पर है। यहां रहने वाले काएसंग अंग्गुन की मां कैसनकैसल की मौत हो गई है। इस तरह मुर्गे की बलि देने के बाद अब उनके शव को एक सुनसान जगह ले जाया जा रहा है। भीड़ भी पीछे-पीछे चल रही है, लेकिन गीत लगातार जारी है। थोड़ी दूर पहुंचते ही कुछ लोग गड्ढा खोदना शुरू करते हैं। यह जगह मरिंग लोगों का कब्रिस्तान है। काफी मशक्कत के बाद एक संकरा गाेलाकार गड्ढा खोदा गया। मेरे मन में सवाल उठ रहा था, इसे संकरे गड्ढे में शव को कैसे दफनाएंगे? तभी कुछ लोग शव को उठाते हैं और उसे लिटाने के बजाय गड्ढे में खड़ा रख देते हैं। साथ में बांसुरी भी। फिर गड्ढे को मिट्टी से पाट देते हैं। उसके बाद कब्र के चारों ओर बांस का घेरा बनाया गया, ताकि कोई जानवर शव को नुकसान न पहुंचा सके। यह सब करते-करते शाम हो गई। उसके बाद सभी घर लौट गए। अगले दिन, मैं फिर अंग्गुन के घर पहुंची। यहां केवल उन्हें ही हिंदी आती है। वह घर के बाहर किसी जानवर के कंकाल को उलट-पलट रहे हैं। मैंने पूछा- यह किसका कंकाल है? वो कहते हैं- यह मिथुन का सिर है। मिथुन, पहाड़ी बैल जैसा जानवर है, जिसके मोटे सींग पीछे की तरफ मुड़े होते हैं। शिकार के बाद इसका सिर घर के सामने टांगना जरूरी होता है। यह जानवर हमारे लिए शुभ होता है, जिसकी हम पूजा करते हैं। यह बताते हुए अंग्गुन मुझे घर के अंदर चलने को कहते हैं। अंदर पहुंचने पर देखा तो घर की छत टीन की और दीवारें बांस की बनी हुई हैं। अंदर पूरा घर बांस से बने सामानों से सजा है। अंग्गुन के चेहरे पर मां के जाने का गम और थकान थी, लेकिन फिर भी मरिंग लोगों के बारे में बातचीत करने के लिए राजी हो गए। मैंने पूछा- आपके यहां मौत पर गीत क्यों गाए जाते हैं? वे बताते हैं- मरिंग मानते हैं कि मौत शरीर की होती है, जबकि जाने वाले से प्यार हमेशा बना रहता है, इसलिए हम गम नहीं मनाते, गीत गाते हैं। शव को खड़ा करके क्यों दफनाया और साथ में बांसुरी भी रखी? हां, मरिंग मानते हैं कि शव को खड़ा दफनाने से मरने वाला दोबारा जन्म ले सकता है। इसलिए खड़ा दफनाते हैं। मरने वाला जो भी वाद्य यंत्र बजाता हो, उसे भी साथ दफनाते हैं। मेरी मां बांसुरी बजाती थीं। इसलिए उसे भी साथ रखा। इस बीच, तेज बारिश होने लगती है। टीन की चादर पर बूंदों की आवाज इतनी तेज कि हम एक-दूसरे की बात नहीं सुन पा रहे। तभी एक बच्चा चाय लेकर आया। शराब तय करती है, रिश्ता आगे बढ़ेगा या नहीं चाय की चुस्की लेते हुए अंग्गुन बताते हैं- हमारे यहां शादी की तीन रस्में होती हैं। पहली- जब लड़के वाले रिश्ता लेकर लड़की के घर जाते हैं। ऐसे में वे अपने साथ चावल से बनी शराब भी लेकर जाते हैं। अगर लड़की वालों को रिश्ता मंजूर न हो तो वे इस शराब की बोतल को अपने दरवाजे के बाहर रख देते हैं। अगर रिश्ता मंजूर हो तो लड़की की मां उस बोतल को अपनी चारपाई के पाये पर बांस की घास से बांध देती है। यह चारपाई वही होनी चाहिए, जिस पर लड़की के माता-पिता सोते हों। इस रस्म को तुलिग्लियांसंग कहते हैं। दूसरी- ये रस्म लड़की की मंजूरी से जुड़ी है। एक खास दिन लड़की के घर वाले उससे पूछते हैं- क्या लड़का तुम्हें पसंद है? अगर लड़की हां कर देती है, तो लड़की के घर वाले चारपाई से बंधी शराब की बोतल लाकर एक खास बर्तन में पीते हैं। यह बर्तन सूखे कद्दू से बना होता है। इसे तुलबोनवा कहते हैं, इसलिए इस रस्म का नाम भी तुलबोनवा है। तीसरी रस्म- इसमें लड़की, लड़के को कपड़े देती है और लड़का, लड़की को अंगूठी। इस रस्म को तुलखम कहते हैं। इसके बाद दोनों शादी से इनकार नहीं कर सकते। इनकार करने पर जुर्माना देना होता है। लेकिन जुर्माना भी खास है। अगर लड़की शादी से इनकार करके किसी और लड़के से शादी करती है, तो लड़की जिस लड़के से शादी करेगी जुर्माना उसे देना होगा। यानी अगली ससुराल वाले को। यह जुर्माना पहले वाले लड़के को मिलता है। इसी तरह, अगर लड़के वाले रिश्ता तोड़कर किसी और लड़की से शादी करें, तो उस लड़की के घर वालों को यह जुर्माना देना होता है। जो कि पहली वाली लड़की को मिलता है। जुर्माना नकद या मिथुन के रूप में दिया जाता है। जब शादी तय हो जाती है तब लड़के के परिवार की कुछ महिलाएं लड़की के घर आती हैं, उसे सजा-धजाकर अपने साथ लेकर जाती हैं। इन महिलाओं का सुहागन होना और उनके माता-पिता का जिंदा होना जरूरी है। यहीं शादी की रस्म पूरी हो जाती है। पहले बेटे का नाम ‘मो’, दूसरे का ‘को’ अक्षर से अंग्गुन बताते हैं- हमारे यहां नाम रखने का भी अलग रिवाज है। पहले बेटे का नाम ‘मो’ से शुरू होगा। जैसे- मोदार, मोरम, मोसिल। दूसरे का ‘को’ और तीसरे का नाम ‘अंग’ से शुरू होता है। ऐसे ही पहली बेटी का नाम ‘टे’, दूसरी का ‘टो’ और तीसरी का ‘तुंग’ से शुरू होता है। बाकी चौथे, पांचवे बच्चे के नाम भी इसी तरह रखे जाते हैं। मैंने पूछा- ऐसा क्यों? वे बताते हैं- इससे पता चलता है कि कौन सा बच्चा बड़ा है और कौन सा छोटा। मरिंग समुदाय में सात गोत्र हैं, सभी में यही परंपरा है। अंग्गुन दावा करते हैं कि उनके पूर्वजों ने ही आग की खोज की थी। इसलिए मरिंग खुद को अग्नि का रक्षक या आग पैदा करने वाला मानते हैं। इसलिए हमारे यहां सिर्फ भाप में बना खाना ही खाया जाता है। हम चावल और सब्जियों की खेती करते हैं। वह बताते हैं कि मरिंग समुदाय में बच्चे के जन्म पर नाल काटने की रस्म भी अनोखी है। बेटे के जन्म पर बांस के पतले टुकड़े सालदा से नाल काटी जाती है। बेटी पैदान होने पर बांस के मोटे टुकड़े पुई से नाल काटी जाती है। यह रस्म गांव की अनुभवी दाई निभाती है। जन्म के पांचवें दिन भोज दिया जाता है। गांव की सुरक्षा के लिए रोज रात में देते हैं बलि इसके बाद मैं और मेरी साथी थांगशा टेसिल गांव की तरफ निकल पड़े। थोड़ा चलने के बाद हम एक घर के पास पहुंचे। घर के अंदर बीचों-बीच एक डंडा गड़ा है। पूछने पर थांगशा बताते हैं कि- यह हमारे पूर्वजों का प्रतीक है। हम इस डंडे पर शराब की एक बूंद रोज चढ़ाते हैं। इसके बाद, हम गांव के बिलकुल बीच पहुंचे, जहां मरिंग लोगों का मंदिर है। इसके दरवाजे पर पक्षियों के कंकाल टंगे हुए हैं। मंदिर के पुराेहित बताते हैं कि शिकार किए गए पक्षियों के सिर मंदिर में टांगना जरूरी है। मंदिर के अंदर एक पेड़ की टहनी है, जिसे हम वाओहाएहिंग कहते हैं। इसी के सामने पूजा करते हैं और मंत्र पढ़ते हैं। वह बताते हैं कि हमारे गांव में आने के लिए दो गेट हैं। पहला- पूर्व और दूसरा- दक्षिण में है। गांव में कोई आपदा न आए, इसलिए हम रोज आधी रात को दोनों गेट पर सफेद रंग का कपड़ा बांधते हैं। साथ ही कौवे, मोर, उल्लू और मुर्गी में से किसी एक पक्षी की बलि देते हैं। हालांकि, मरिंग समुदाय में अब ईसाई धर्म का प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। गांव में एक चर्च भी बनकर तैयार हो चुका है, जो इस बदलाव की साफ झलक देता है। सड़क और तालाबों की सफाई के लिए लमलाई त्योहार अब हम वापस अंग्गुन के घर आते हैं। वे बताते हैं- हमारा सबसे बड़ा त्योहार लमलाई है। इस दिन गांव की सड़कें और तालाब की सफाई की जाती है। उस दिन सभी नाचते हुए तालाब तक जाते हैं और साफ-सफाई करते हैं। तालाब साफ करने में महिलाओं को शामिल नहीं किया जाता। वे बताते हैं- यहां दो तरह के पुरोहित होते हैं। एक खुलपु और दूसरा खुल्लक। खुल्लक, खुलपु से छोटा पुरोहित होता है। तालाबों को सफाई में दोनों शामिल होते हैं। उस दिन वे अच्छी बारिश और फसल के लिए मंत्र पढ़ते हैं।
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 294 सीटों पर दो चरणों में चुनाव हो रहे हैं। 29 अप्रैल को दूसरे चरण की वोटिंग है। सरकार बनाने के लिए 148 सीटें चाहिए। मुकाबला TMC और BJP के बीच है। अबकी जीत-हार का पूरा समीकरण SIR के इर्द-गिर्द है। SIR का गणित चला तो BJP और SIR का डर चला तो TMC आगे नजर आ रही है। चुनावी कवरेज के दौरान दैनिक भास्कर की टीम मुर्शिदाबाद, कोलकाता, मालदा, दार्जिलिंग, नादिया, झारग्राम, संदेशखाली समेत नॉर्थ और साउथ बंगाल के कई जिलों में पहुंची। आम लोगों से लेकर सीनियर जर्नलिस्ट और पॉलिटिकल एक्सपर्ट से बात की। इस दौरान 3 बातें समझ आईं… 1. BJP के लिए: SIR में कुल 91 लाख नाम कटे हैं। इसमें 47 लाख मृत लोगों के हैं। अगर इन्हें आधार बनाकर सीटों का गणित समझें तो इस बार BJP को बहुमत मिलता नजर आ रहा है। उसे 150 से 170 सीटें मिल सकती हैं। वहीं TMC 110-140 सीटों पर सिमट सकती है। इसी गणित के आधार पर BJP के नेता बंगाल में सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं। 2. TMC के लिए: पश्चिम बंगाल के वोटर्स में SIR का डर TMC के पक्ष में जा सकता है। असल में ग्राउंड पर ऐसी अफवाह फैली है कि वोटर लिस्ट से नाम कटने के बाद नागरिकता भी जा सकती है। जिनके नाम वोटर लिस्ट में बच गए, उन्होंने इसी डर से हर कीमत पर 100% वोट डालने की कोशिश की। इस बंपर वोटिंग का फायदा TMC को मिल सकता है। पार्टी 160 से 190 सीटें जीत सकती है। 3. कांग्रेस के लिए: एक फैक्टर ऐसा भी है, जिससे कांग्रेस फायदे में नजर आ रही है। TMC सरकार से लोग नाराज हैं। भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी के साथ एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर मजबूत है। ये नाराजगी मुस्लिम बहुल इलाकों में भी है, लेकिन ये वोटर BJP के साथ नहीं जाएगा। ऐसे में मुर्शिदाबाद और मालदा की सीटों पर इसका फायदा कांग्रेस को मिल सकता है। कांग्रेस 1-3 सीटों पर मजबूत हो रही है। साउथ बंगाल में इंडियन सेकुलर फ्रंट यानी ISF 1 या दो सीटों पर मजबूत हो सकती है। वहीं, CPI(M) 2 से 3 सीटों पर दूसरी पोजीशन पर हो सकती है या फिर ज्यादा से ज्यादा 1 सीट जीत सकती है। वहीं, TMC से बाहर हुए हुमायूं कबीर की पार्टी AJUP का कोई असर नहीं दिख रहा है। BJP की जीत के लिए बड़े फैक्टर…SIR में 47 लाख वोटर्स डिलीट होने का फायदा BJP को पॉलिटिकल एनालिस्ट देबांजन बनर्जी ने BJP की जीत का गणित समझाया। उनके मुताबिक, पिछले दो चुनावों में TMC को करीब 2.86 करोड़ और BJP को 2.26 करोड़ वोट मिले थे, यानी TMC लगभग 60 लाख वोट से आगे थी। अब SIR में करीब 47 लाख मृत लोगों के नाम लिस्ट से हट गए हैं। माना जा रहा है कि इनमें से ज्यादातर TMC के समर्थक थे। अगर ऐसा है, तो TMC का वोट बैंक घटेगा और BJP को सीधा फायदा होगा।’ असली खेल उन सीटों पर है, जहां बहुत कम अंतर से जीत-हार होती है। 2021 विधानसभा चुनाव के लिहाज से देखें, तो करीब 30 सीटों पर 1000 से कम वोटों से जीत-हार तय हुई थी, जबकि करीब 50 सीटों पर दो से पांच हजार वोटों का अंतर था। 100 सीटों पर वोट का अंतर करीब 5 हजार से 10 हजार के बीच था। 47 लाख वोट कम होने पर ऐसी सीटों के नतीजे पलट सकते हैं। अगर ऐसा हुआ तो BJP 150 से 170 सीट जीत सकती है। डर से आजादी और दूसरे राज्यों के नेता बूथ पर सक्रिय चुनाव में डर का माहौल है। मालदा, मुर्शिदाबाद और संदेशखाली में पैरा मिलिट्री फोर्सेज पोलिंग बूथ के साथ-साथ घरों के बाहर गलियों में भी तैनात हैं। लोग बिना डरे पोलिंग बूथ जा रहे हैं। ये फैक्टर BJP के पक्ष में है। वहीं, हर बूथ पर यूपी, बिहार, मध्य प्रदेश और असम समेत BJP सरकार वाले राज्यों के मंत्री, विधायक और सांसदों की टीम काम कर रही है, ताकि जीत उनके पक्ष में हो। BJP के पक्ष में ये फैक्टर भी… 1. BJP ने TMC के भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी का मुद्दा बढ़ा-चढ़ाकर उठाया। 2. TMC की लक्ष्मी भंडार योजना के तहत 1500 रुपए की जगह 3000 रुपए देने का वादा किया है। पश्चिम बंगाल में बंपर वोटिंग यानी सत्ता बदलाव TMC की जीत के लिए बड़े फैक्टर…SIR में नाम कटने से नागरिकता छिनने का डर, TMC को फायदा राज्य में SIR में ज्यादा नाम ग्रामीण इलाकों में कटे। इसे लेकर पॉलिटिकल एनालिस्ट डॉ. सिबाजी प्रतीम बसु कहते हैं, ‘वोटर लिस्ट से नाम कटने पर चुनाव आयोग ने सिर्फ इतना कहा था कि मामला सिर्फ SIR से जुड़ा है। BJP ने इसे घुसपैठिया शब्द से जोड़ दिया। इससे लोगों में मन में नागरिकता जाने का डर है। बांग्लादेशी बताकर देश से बाहर कर दिया जाएगा।‘ ‘ये खौफ भी है कि उनका ड्राइविंग लाइसेंस और राशन कार्ड छिन जाएगा। फिर वो बंगाल से बाहर जाकर कैसे काम करेंगे।‘ ‘TMC के खिलाफ एंटी इनकम्बेंसी के साथ भ्रष्टाचार नेगेटिव पॉइंट हैं, लेकिन अब अस्मिता के सामने ये मुद्दे दूसरे और तीसरे नंबर पर चले गए हैं। ऐसे में लगता है कि TMC को 160 से 190 सीटें और BJP को ज्यादा से ज्यादा 80 से 110 सीटें मिल सकती हैं। कांग्रेस महज 1 से 3 सीटें ही जीत सकेगी।‘ सीनियर जर्नलिस्ट सुमन भट्टाचार्य भी मानते हैं, SIR की वजह से वोट प्रतिशत पिछली बार से बढ़ा है। अबकी BJP 85 सीटों से ज्यादा जीतेगी, लेकिन बहुमत नहीं मिल पाएगा। TMC को 180 से ज्यादा सीटें मिल सकती हैं, लेकिन ये 2021 से कम होंगी।‘ ……………………. पश्चिम बंगाल चुनाव पर ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ें… 1. आरजी कर रेप-मर्डर केस की पीड़ित की मां BJP कैंडिडेट, सभा में कुर्सियां खाली पानीहाटी सीट से आरजीकर रेप केस की पीड़ित की मां रतना देबनाथ BJP के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। 12 अप्रैल को सभा करने गईं तो कुर्सियां खाली पड़ी थीं। रतना देबनाथ अपने चुनाव लड़ने को बेटी को इंसाफ दिलाने की लड़ाई बता रही हैं। महिलाएं उनकी सभा के सामने से गुजरते हुए रुकती हैं। पूछने पर कहती हैं, ‘हम साथ हैं, लेकिन दिखा नहीं सकते। TMC वाले घूम रहे हैं। साथ देख लिया, तो मुश्किल होगी।’ पढ़िए पूरी खबर…
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण सवाल उठाते हुए कहा कि क्या 15 साल लंबे लिव-इन रिलेशनशिप के टूटने को दुष्कर्म का मामला माना जा सकता है, खासकर तब जब जोड़े का एक बच्चा भी हो और पुरुष संबंध तोड़कर अलग हो गया हो। न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की […] The post डेढ़ दशक के लिव-इन संबंध, फिर ब्रेकअप : क्या यह रेप का मामला है? सुप्रीम कोर्ट ने उठाए सवाल, मध्यस्थता का दिया सुझाव appeared first on Sabguru News .
रेलवे में 30 हजार पद खत्म करने की खबर गलत : रेल मंत्रालय
नई दिल्ली। रेल मंत्रालय ने रेलवे में 30 हजार पदों को समाप्त किए जाने संबंधी खबरों को गलत बताते हुए स्पष्ट किया है कि ऐसी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। रेल मंत्रालय के एक प्रवक्ता के अनुसार मानव संसाधन का समायोजन एक नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसके तहत समय के हिसाब से […] The post रेलवे में 30 हजार पद खत्म करने की खबर गलत : रेल मंत्रालय appeared first on Sabguru News .
IPL 2026 : रॉयल चैलेंजर्स बेंगलूरु ने दिल्ली कैपिल्टस को 9 विकेट से हराया
नई दिल्ली। जॉश हेजलवुड (चार विकेट) और भुवनेश्वर कुमार (तीन विकेट) की बेहतरीन गेंदबाजी के बाद देवदत्त पड़िक्कल (नाबाद 34) और विराट कोहली (नाबाद 23) रन बदौलत रॉयल चैलेंजर्स बेंगलूरु (आसीबी) ने सोमवार को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) 2026 के 39वें मुकाबले में दिल्ली कैपिटल्स को 81 गेंदे शेष रहते नौ विकेट से रौंद दिया। […] The post IPL 2026 : रॉयल चैलेंजर्स बेंगलूरु ने दिल्ली कैपिल्टस को 9 विकेट से हराया appeared first on Sabguru News .
श्री राजराजेश्वरी महालक्ष्मी यज्ञ निर्विघ्न सम्पन्न होने की खुशी में सहस्त्रधारा
अजमेर। पुष्कर घाटी स्थित प्राचीन नौसर माता मंदिर में श्री नवशक्ति सृजन सेवा प्रन्यास के तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय 21 कुंडीय श्री राजराजेश्वरी महालक्ष्मी यज्ञ के धार्मिक विधि-विधान के साथ निर्विघ्न सम्पन्न होने की खुशी में नौसर माता मंदिर परिसर स्थित श्री गौरीश्वर देवालय में सोमवार को सहस्त्रधारा का भव्य आयोजन किया गया, जिसमें […] The post श्री राजराजेश्वरी महालक्ष्मी यज्ञ निर्विघ्न सम्पन्न होने की खुशी में सहस्त्रधारा appeared first on Sabguru News .
साल 2020 में बॉलीवुड एक्टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत ने पूरी इंडस्ट्री को हिला दिया था। एक्टर की मौत के मामले में सामने आए ड्रग्स केस में रिया चक्रवर्ती और उनके भाई शौविक को जेल तक जाना पड़ा। अब रिया चक्रवर्ती और उनके परिवार को एक बड़ी राहत मिली है। मुंबई की एक विशेष NDPS कोर्ट ने रिया, उनके भाई शौविक चक्रवर्ती और मां संध्या चक्रवर्ती के बैंक खातों को तुरंत अनफ्रीज करने का आदेश दिया है। यह फैसला रिया के लिए न केवल आर्थिक बल्कि नैतिक जीत के रूप में भी देखा जा रहा है। NCB ने 2020 में जांच के दौरान रिया और उनके परिवार के कई बैंक खातों को इस संदेह में फ्रीज कर दिया था कि इनका संबंध ड्रग्स की खरीद-फरोख्त से हो सकता है। कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि NCB ने खातों को फ्रीज करने के बाद निर्धारित समय सीमा के भीतर सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी नहीं ली थी। अदालत ने इसे कानून की गंभीर चूक करार दिया। कोर्ट ने कहा कि NDPS अधिनियम के तहत संपत्ति या खातों को फ्रीज करने की शक्ति असीमित नहीं है और इसके लिए सख्त कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करना अनिवार्य है। कोर्ट ने RBI के दिशा-निर्देशों के अनुसार खातों को फिर से संचालित करने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने इस आदेश में रिया पर लगे आरोपों की मेरिट (गुण-दोष) पर चर्चा नहीं की। अदालत का पूरा ध्यान इस बात पर था कि क्या जांच एजेंसी ने उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया या नहीं। बॉम्बे हाईकोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों के पास यह विश्वास करने का ठोस कारण होना चाहिए कि संपत्ति अवैध गतिविधियों से जुड़ी है, और इसे समय पर रिपोर्ट करना आवश्यक है। बैंक खातों का अनफ्रीज होना रिया के लिए राहत की आखिरी कड़ी नहीं है। पिछले एक साल में उनके पक्ष में कई अहम फैसले आए हैं। इससे पहले सीबीआई की तरफ से रिया को क्लीन चिट मिली थी। CBI ने अपनी जांच में सुशांत सिंह राजपूत की मौत में किसी भी तरह की साजिश या हत्या की संभावना को खारिज करते हुए इसे आत्महत्या करार दिया था। बॉम्बे हाईकोर्ट ने पिछले साल ही रिया को उनका पासपोर्ट वापस करने का आदेश दिया था, जिससे उनकी विदेश यात्रा पर लगी पाबंदियां खत्म हो गईं। कानूनी मोर्चे पर मजबूती मिलने के बाद रिया चक्रवर्ती अब अपने करियर पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। वह मशहूर फिल्म निर्माता हंसल मेहता के एक आगामी प्रोजेक्ट के साथ अभिनय की दुनिया में वापसी कर रही हैं।
Parshuram Dwadashi: परशुराम द्वादशी क्यों मनाते हैं, जानिए इसका महत्व
Lord Parshuram: परशुराम द्वादशी हिन्दू धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसे विशेष रूप से भगवान परशुराम की उपासना के लिए मनाया जाता है। यह दिन धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। हिन्दू मान्यताओं के अनुसार, भगवान परशुराम विष्णु जी के छठे अवतार हैं, जिन्हें धर्म की रक्षा और अधर्म का नाश करने के लिए पृथ्वी पर भेजा गया था। परशुराम द्वादशी का पर्व वैशाख मास की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है और इसे विशेष श्रद्धा के साथ धार्मिक रीति-रिवाजों और पूजा-पाठ के माध्यम से मनाया जाता है। ALSO READ: Atichari brihaspati:क्या अतिचारी बृहस्पति बढ़ाएगा गर्मी? 50 डिग्री तक जा सकता है पारा? आइए जानते हैं कि यह दिन क्यों मनाया जाता है और इसका आध्यात्मिक महत्व क्या है: क्यों मनाई जाती है परशुराम द्वादशी? पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान परशुराम का जन्म अक्षय तृतीया को हुआ था, लेकिन परशुराम द्वादशी मुख्य रूप से उनके द्वारा किए गए धर्म की स्थापना और उनके तपस्वी रूप के सम्मान में मनाई जाती है। इस दिन को मनाने के पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं: अधर्म का नाश: परशुराम जी ने पृथ्वी पर अहंकारी और अत्याचारी क्षत्रिय राजाओं का अंत कर धर्म की पुनर्स्थापना की थी। यह दिन उनकी उस शक्ति और न्याय का उत्सव है। पितृ और गुरु भक्ति: परशुराम जी अपनी पितृ-भक्ति के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने अपने पिता महर्षि जमदग्नि की आज्ञा का पालन किया और कठोर तप से शिव जी को प्रसन्न किया। उनकी तपस्या की पूर्णता और उनके दिव्य स्वरूप की आराधना हेतु यह द्वादशी मनाई जाती है। परशुराम द्वादशी का महत्व हिंदू शास्त्रों में परशुराम द्वादशी का फल अत्यंत कल्याणकारी बताया गया है। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और भगवान परशुराम की पूजा करने से जाने-अनजाने में हुए सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। यह दि समस्त पापों से मुक्ति से देकर मन की शुद्धि करता है। परशुराम जी 'शस्त्र और शास्त्र' दोनों के ज्ञाता हैं। उनकी पूजा करने से भक्तों में आत्मविश्वास बढ़ता है, भय का नाश होता है और शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने की शक्ति मिलती है। इस तरह यह साहस और निर्भयता की प्राप्ति का दिन है। धार्मिक मान्यता है कि जो दंपत्ति संतान सुख से वंचित हैं, उनके लिए इस दिन व्रत रखना विशेष फलदायी होता है। यह व्रत संतान और परिवार की रक्षा करके सुख-शांति और आरोग्य लाता है। चूंकि यह वैशाख मास में आती है, जो कि दान-पुण्य का महीना है, इस दिन किए गए दान, स्नान और तर्पण का फल कभी समाप्त नहीं होता यानी 'अक्षय' रहता है। यह दिन अक्षय पुण्य की प्राप्ति देता है। परशुराम द्वादशी के दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर पवित्र नदी या घर पर ही गंगाजल मिलाकर स्नान करें। भगवान विष्णु या परशुराम जी की प्रतिमा के सामने घी का दीपक जलाएं। उन्हें पीले पुष्प, चंदन और तुलसी दल अर्पित करें। इस दिन ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को अन्न, जल का घड़ा या कलश या सत्तू का दान करना श्रेष्ठ माना जाता है। भगवान परशुराम 'चिरंजीवी' हैं (अमर हैं), इसलिए उनकी पूजा हमें दीर्घायु और स्थिर बुद्धि का वरदान देती है। अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ALSO READ: पुरुषोत्तम मास का पौराणिक महत्व और कथा
Atichari brihaspati:क्या अतिचारी बृहस्पति बढ़ाएगा गर्मी? 50 डिग्री तक जा सकता है पारा
भारतीय ज्योतिष और विज्ञान दोनों ही बृहस्पति (गुरु) को पृथ्वी के अस्तित्व के लिए अनिवार्य मानते हैं। जहाँ ज्योतिष इसे प्राणवायु, सुख और वातावरण की सौम्यता का कारक मानता है, वहीं विज्ञान इसे पृथ्वी की कक्षा को स्थिर रखने वाला 'कॉस्मिक रक्षक' और 'वैक्यूम क्लीनर' कहता है। ज्योतिष का मानना है कि वर्तमान में बृहस्पति की तेज गति से धरती के वातारवण पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने वाला है। यह प्रभाव वर्ष 2033 तक रहेगा। इस दौरान धरती के जलवायु में अप्रत्याशित परिवर्तन होंगे। ALSO READ: Jupiter transit year 2026: क्या अतिचारी गुरु 2026 में लाएंगे वैश्विक महासंकट? पृथ्वी का अभेद्य कवच (कॉस्मिक रक्षक) बृहस्पति अपनी विशाल गुरुत्वाकर्षण शक्ति से पृथ्वी को अंतरिक्ष के खतरों से बचाता है: उल्कापिंडों से सुरक्षा: यह खतरनाक एस्टेरॉयड और धूमकेतुओं को अपनी ओर खींचकर पृथ्वी से टकराने से रोकता है। इसके बिना पृथ्वी पर उल्कापात की घटनाएँ 1,000 गुना अधिक होतीं। कक्षा की स्थिरता: यह सौरमंडल के द्रव्यमान केंद्र को संतुलित रखता है, जिससे पृथ्वी की कक्षा स्थिर रहती है और जीवन के अनुकूल मौसम बना रहता है। अतिचारी बृहस्पति (2025-2026): बिगड़ती चाल और जलवायु संकट 18 मई 2025 से बृहस्पति 'अतिचारी' हो गए हैं। इसका अर्थ है कि वे अपनी सामान्य गति (एक राशि में 12 माह) को छोड़कर बहुत तेजी से राशियाँ बदल रहे हैं। तीन गुना अतिचारी गोचर: वर्तमान में गुरु मिथुन में हैं। वे अक्टूबर 2025 में कर्क में जाएंगे, फिर दिसंबर में पुनः मिथुन में लौटेंगे और जून 2026 में फिर कर्क में प्रवेश करेंगे। 8 वर्षों का संकट: ग्रहों की यह अस्थिर चाल अगले 8 वर्षों तक जारी रह सकती है। यह ब्रह्मांडीय हलचल पृथ्वी के वातावरण की शांति और सौम्यता को बाधित करेगी। पूर्व में भी हुए अतिचारी: बृहस्पति ग्रह पूर्व में भी कई बार अतिचारी हुए हैं लेकिन उस काल में धरती पर जंगल और पहाड़ों की भरमार थी। वर्तमान में मानव की गतिविधियों ने धरती को बहुत नुकसान पहुंचाया है जिसके चलते अतिचारी बृहस्पति का नकारात्मक प्रभाव देखने को मिलेगा। धरती पर पड़ने वाले गंभीर प्रभाव बृहस्पति की इस बिगड़ती चाल के कारण वैश्विक स्तर पर बड़े बदलाव देखे जा सकते हैं: बढ़ता तापमान: अनुमान है कि आने वाले समय में भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में पारा 50C के पार जा सकता है। प्राकृतिक आपदाएँ: गुरु की 'अतिचारी' स्थिति से विनाशकारी बाढ़, समुद्री तूफान, भूकंप और भीषण जल संकट की आवृत्ति बढ़ेगी। मिलनकोविच चक्र: बृहस्पति का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी की कक्षा को अधिक अंडाकार बना देता है, जिससे सूर्य की विकिरण मात्रा बदलती है और लंबे समय में हिमयुग या ग्लोबल वार्मिंग जैसी स्थितियां पैदा होती हैं। समाधान: हमारा साझा प्रयास प्रकृति के इस प्रकोप को कम करने के लिए केवल वैज्ञानिक उपाय ही काफी नहीं हैं, हमें धरातल पर कार्य करना होगा: वृक्षारोपण: बड़े पैमाने पर नए जंगल विकसित करना। प्राकृतिक संरक्षण: खनन, पहाड़ों की कटाई और पेड़ों के विनाश पर तत्काल रोक लगाना। संतुलित जीवन: वायुमंडल की शीतलता बनाए रखने के लिए प्रदूषण कम करना। निष्कर्ष: बृहस्पति भले ही करोड़ों मील दूर है, लेकिन उसकी चाल हमारी 'प्राणवायु' और 'आयु' को सीधे प्रभावित करती है। यह समय सचेत होने और प्रकृति के साथ जुड़ने का है।
बॉबी देओल की क्राइम-थ्रिलर 'बंदर' की रिलीज डेट का ऐलान, इस दिन सिनेमाघरों में देगी दस्तक
अनुराग कश्यप की अपकमिंग फिल्म 'बंदर' का फैंस बेसब्री से इंतजार कररहे हैं। इस फिल्म ने 2025 में टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रीमियर के साथ ही चर्चा बटोर ली थी। सच्ची घटना से प्रेरित यह क्राइम-थ्रिलर ग्लैमर, रिश्तों और कानून की जटिल दुनिया को बेबाक अंदाज में सामने लाएंगी। 'बंदर' के मेकर्स ने अब आधिकारिक तौर पर इसकी रिलीज डेट का ऐलान कर दिया है। यह फिल्म 5 जून, 2026 को दुनिया भर के सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए तैयार है। इस फिल्म में बॉबी देओल लीड रोल में हैं, और इसमें डायरेक्टर अनुराग कश्यप के नेतृत्व में एक मजबूत क्रिएटिव टीम एक साथ आई है, जिसमें राइटर सुदीप शर्मा और अभिषेक बनर्जी शामिल हैं। अपनी बोल्ड कहानी कहने के अंदाज के लिए मशहूर अनुराग कश्यप ने पहले 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' और 'ब्लैक फ्राइडे' जैसी कल्ट क्लासिक फिल्में दी हैं। लगातार कई दमदार परफॉर्मेंस देने के बाद, बॉबी देओल इस इंटेंस ड्रामा में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। फिल्म का प्रोडक्शन निखिल द्विवेदी ने किया है और इसे ज़ी स्टूडियोज का सपोर्ट मिला है। फिल्म को सुदीप शर्मा और अभिषेक बनर्जी ने लिखा है, जिन्हें 'पाताल लोक', 'कोहरा' और 'उड़ता पंजाब' जैसे सराहे गए प्रोजेक्ट्स के लिए जाना जाता है। सुदीप शर्मा ने हाल ही में 'कोहरा 2' का निर्देशन भी किया है, जिसे क्रिटिक्स ने काफी पसंद किया है। फिल्म की स्टार कास्ट में सान्या मल्होत्रा, राज बी शेट्टी, जितेंद्र जोशी, सपना पब्बी, इंद्रजीत सुकुमारन, रिद्धि सेन, सबा आज़ाद और नागेश भोसले भी अहम भूमिकाओं में हैं। एक टैलेंटेड टीम और दमदार कास्ट के साथ, 'बंदर' 2026 की सबसे रोमांचक थियेट्रिकल रिलीज में से एक बनने जा रही है।
फिल्म 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर' के नए पोस्टर्स रिलीज, मनोज बाजपेयी के साथ नजर आएंगी अदा शर्मा
विपुल अमृतलाल शाह की फिल्म 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर' अपनी घोषणा के बाद से ही चर्चा में बनी हुई है। हाल ही में, मनोज बाजपेयी के जन्मदिन के मौके पर एक दिलचस्प पोस्टर के साथ फिल्म के टाइटल का खुलासा किया गया था। अब, फिल्म के नए पोस्टर्स रिलीज कर दिए गए हैं, जो एक बड़ा खुलासा करते हैं जिसका दर्शकों को बेसब्री से इंतजार था, और हमें इस इंटेंस ड्रामा की दुनिया के और करीब ले जाते हैं। A post shared by Sunshine Pictures (@sunshinepicturesofficial) 'गवर्नर' के नए पोस्टर्स ने स्टार कास्ट का खुलासा कर दिया है, जिसमें मनोज बाजपेयी और अदा शर्मा नजर आएंगे। जहां अलग-अलग पोस्टर्स नेशनल अवॉर्ड विनर एक्टर मनोज बाजपेयी के अलग-अलग शेड्स दिखाते हैं, वहीं ये पोस्टर्स पर्दे पर दिखने वाले जबरदस्त ड्रामा के बारे में भी बहुत कुछ बयां करते हैं। कास्ट के चेहरे सामने आने के अलावा, पोस्टर्स में कुछ दमदार टैगलाइन्स भी दी गई हैं जैसे— अब बारी मेरी है, आई विल नॉट लेट इंडिया फेल, और इंडिया इज ऑन द वर्ज ऑफ बैंकरअप्ट्सी, ही सौ ईट कमिंग। ये सभी भारत के आर्थिक संकट के एक मुश्किल दौर की ओर इशारा करते हैं। अब यह देखने के लिए उत्साह चरम पर है कि फिल्म में मनोज बाजपेयी किस तरह का किरदार निभाएंगे। बॉलीवुड की अन्य लेटेस्ट खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें विपुल अमृतलाल शाह प्रोडक्शन की फिल्म 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर' सनशाइन पिक्चर्स द्वारा पेश की जा रही है। विपुल अमृतलाल शाह द्वारा निर्मित और चिन्मय मांडलेकर द्वारा निर्देशित इस फिल्म के को-प्रोड्यूसर आशिन ए. शाह हैं। फिल्म को सुवेंदु भट्टाचार्यजी, सौरभ भरत, रवि असरानी और खुद विपुल अमृतलाल शाह ने लिखा है। जावेद अख्तर के लिखे गानों को अमित त्रिवेदी ने अपने संगीत से सजाया है। 'गवर्नर: द साइलेंट सेवियर' 12 जून, 2026 को रिलीज होने के लिए पूरी तरह तैयार है।
इन OTT शोज ने ग्लोबल लेवल पर मचाई धूम, इंटरनेशनल एमी अवॉर्ड्स में मिली खास पहचान
भारत में स्ट्रीमिंग के बढ़ते चलन ने न केवल लोकल एंटरटेनमेंट को बदला है, बल्कि इंडियन स्टोरीटेलिंग को दुनिया के नक्शे पर भी ला खड़ा किया है। गोल्डन कारवां, इवानहो प्रोडक्शंस, फिल्म कारवां और पुअर मैन्स प्रोडक्शंस द्वारा बनाई गई 'दिल्ली क्राइम' जैसे दमदार क्राइम ड्रामा से लेकर बानिजय एंटरटेनमेंट के तहत बानिजय एशिया द्वारा निर्मित 'द नाइट मैनेजर' जैसे शानदार थ्रिलर्स तक, कई शोज ने भाषा और कल्चर की दीवारों को तोड़कर ग्लोबल लेवल पर अपनी पहचान बनाई है। इसमें इंटरनेशनल एमी नॉमिनेशंस और जीत भी शामिल है। यहां पांच बेहतरीन इंडियन सीरीज दी गई हैं जिन्होंने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा: 1. दिल्ली क्राइम नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम हुई 'दिल्ली क्राइम' इंटरनेशनल एमी अवार्ड्स 2020 में बेस्ट ड्रामा सीरीज जीतने वाली पहली भारतीय सीरीज बनी। गोल्डन कारवां, इवानहो प्रोडक्शंस, फिल्म कारवां और पुअर मैन्स प्रोडक्शंस द्वारा निर्मित, एक हाई-प्रोफाइल केस के इस ईमानदार और संवेदनशील चित्रण ने, जिसमें शेफाली शाह की दमदार परफॉर्मेंस थी, पूरी दुनिया के दिलों को छुआ। इसने साबित कर दिया कि भारतीय कहानियाँ असरदार होने के साथ-साथ ग्लोबल लेवल पर भी जुड़ाव पैदा कर सकती हैं। 2. द नाइट मैनेजर बनिजय एंटरटेनमेंट का हिस्सा, बनिजय एशिया द्वारा निर्मित 'द नाइट मैनेजर', जो डिज्नी+हॉटस्टार पर स्ट्रीम हो रही है, ने इंटरनेशनल एमी अवार्ड्स 2024 में नॉमिनेशन हासिल किया। आदित्य रॉय कपूर, शोभिता धुलिपाला और अनिल कपूर जैसे कलाकारों के साथ, इस सीरीज ने ग्लोबल फॉर्मेट को हाई-क्वालिटी और स्टाइलिश प्रोडक्शन में ढालने की भारत की काबिलियत को दिखाया। 3. मेड इन हेवन मॉडर्न रिश्तों और समाज की उम्मीदों को बारीकी से दिखाने वाली एमेजॉन प्राइम वीडियो की सीरीज 'मेड इन हेवन', जिसे एक्सेल एंटरटेनमेंट ने प्रोड्यूस किया है, को 2018 के इंटरनेशनल एमी अवार्ड्स में बेस्ट ड्रामा सीरीज के लिए नॉमिनेशन मिला। जोया अख्तर और रीमा कागती द्वारा बनाई गई इस सीरीज ने पर्सनल ड्रामा को तीखी सोशल कमेंट्री के साथ जोड़ा, जिसे भारत के बाहर भी दर्शकों ने काफी पसंद किया। 4. सेक्रेड गेम्स नेटफ्लिक्स इंडिया की शुरुआती ग्लोबल हिट्स में से एक, फैंटम फिल्म्स द्वारा निर्मित 'सेक्रेड गेम्स' ने 2019 के इंटरनेशनल एमी अवार्ड्स में नॉमिनेशन पाया था। सैफ अली खान और नवाजुद्दीन सिद्दीकी की बेहतरीन परफॉर्मेंस वाली इस सीरीज ने भारतीय वेब कंटेंट में एक दमदार और सिनेमाई अंदाज पेश किया। 5. आर्या बनिजय एंटरटेनमेंट का हिस्सा, एंडेमोल शाइन इंडिया द्वारा निर्मित 'आर्या' ने इंटरनेशनल एमी अवार्ड्स 2021 में नॉमिनेशन हासिल किया। सुष्मिता सेन के नेतृत्व वाली इस सीरीज ने उनकी पावरफुल वापसी कराई और महिलाओं पर आधारित मजबूत कहानियाँ बनाने की भारत की ताकत को दुनिया के सामने रखा।
शनि, बृहस्पति, राहु और केतु के कारण 5 राशियों के लिए रहेगा राजयोग
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, वर्ष 2026 और 2027 में शनि, बृहस्पति (गुरु), राहु और केतु की स्थिति कुछ विशेष राशियों के लिए राजयोग के समान फल देने वाली होगी। आपके द्वारा दिए गए विवरण को यहाँ स्पष्ट और व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया गया है। ग्रहों की स्थिति का मुख्य आधार शनि: 29 मार्च 2025 से 3 जून 2027 तक मीन राशि में रहेंगे। बृहस्पति (गुरु): 18 मई 2025 से मिथुन में, 2 जून 2026 से कर्क में और 30 अक्टूबर 2026 से सिंह राशि में गोचर करेंगे। राहु-केतु: अक्टूबर तक राहु कुंभ में और केतु सिंह राशि में स्थित रहेंगे। राशियों के लिए: तीनों का गोचर निम्नलिखित राशियों के लिए शुभ माना जाएगा। ALSO READ: मेष में बनने वाला है मंगलादित्य, बुधादित्य और त्रिग्रही योग: इन 5 राशियों को मिलेगा बड़ा फायदा इन 5 राशियों के लिए बनेगा राजयोग 1. मेष राशि मेष राशि वालों के लिए यह समय आर्थिक उन्नति का है। ग्रह स्थिति: शनि आपकी कुंडली के 12वें भाव में हैं, जिससे साढ़ेसाती का प्रथम चरण प्रभावी है। मेष में जाने के बाद भी यह लाभ देंगे। गुरु वर्ष के पूर्वार्ध में तीसरे और चतुर्थ भाव में गोचर करेंगे, अगले वर्ष पंचम भाव में रहेंगे जो सकारात्मकता लाएंगे। विशेष लाभ: 11वें भाव (आय भाव) में राहु का गोचर आपकी इनकम में भारी बढ़ोतरी कराएगा। सावधानी: 5वें भाव में केतु होने के कारण प्रेम संबंधों और संतान पक्ष को लेकर थोड़ी मानसिक परेशानी हो सकती है। ALSO READ: मंगल का महा-गोचर 2026: अपनी ही राशि मेष में लौटेंगे मंगल, 6 राशियों के लिए अपराजेय योग 2. कर्क राशि इस राशि के लिए 2026 स्वर्ण काल साबित हो सकता है। भाग्य का साथ: शनि पूरे वर्ष भाग्य भाव (9वें) में रहकर आपकी कड़ी मेहनत का फल देंगे। मेष राशि में 10वें भाव में जाने के बाद यह और प्रबल होकर कर्मक्षेत्र में लाभ देंगे। गुरु का वरदान: 2 जून को गुरु का कर्क राशि (लग्न) में प्रवेश आपके आत्मविश्वास को बढ़ाएगा। व्यापार में मुनाफा दोगुना होने और नौकरी में अप्रत्याशित उन्नति के योग हैं। पारिवारिक सुख: दांपत्य जीवन की परेशानियां खत्म होंगी, संतान सुख मिलेगा और अविवाहितों के लिए विवाह के प्रबल योग बनेंगे। राजनीति से जुड़े लोगों को उच्च पद मिल सकता है। 3. तुला राशि तुला राशि के जातकों के लिए शत्रुओं पर विजय और करियर में उछाल का समय है। शत्रु विजय: शनि छठे भाव में रहकर विरोधियों को शांत रखेंगे और पुराने रोगों से मुक्ति दिलाएंगे। बृहस्पति का प्रभाव: गुरु का गोचर तीन चरणों में आपके भाग्य और करियर को मजबूत करेगा। जून से अक्टूबर के बीच करियर की हर मनोकामना पूरी होगी। आर्थिक स्थिति: अक्टूबर के बाद 11वें भाव में गुरु का गोचर धन लाभ के नए स्रोत खोलेगा। प्रॉपर्टी या वाहन खरीदना इस समय अत्यंत शुभ रहेगा। 4. मकर राशि साहस और रिश्तों में सुधार के लिए यह वर्ष विशेष है। पराक्रम में वृद्धि: शनि तीसरे भाव में रहकर आपके साहस को बढ़ाएंगे, जिससे देरी से ही सही लेकिन सफलता सुनिश्चित होगी। सुधार का समय: जून के बाद सप्तम भाव में गुरु का गोचर साझेदारी के व्यापार और वैवाहिक जीवन में बड़ा सुधार लाएगा। धन लाभ: आय के एक से अधिक स्रोत (Multiple sources) बनेंगे और भाई-बहनों का पूर्ण सहयोग प्राप्त होगा। 5. मीन राशि मीन राशि के लिए गुरु का गोचर हर प्रकार की सुख-सुविधाओं में विस्तार करेगा। व्यक्तित्व और स्वास्थ्य: शनि लग्न में स्थित हैं, लेकिन गुरु की दृष्टि लग्न पर होने से आपकी सेहत और व्यक्तित्व में निखार आएगा। विदेशी अवसर: 12वें भाव का राहु आपको विदेश यात्रा या विदेशी जमीन से लाभ के अवसर दिला सकता है। कर्ज मुक्ति: छठे भाव का केतु आपको शत्रुओं पर विजयी बनाएगा और पुराने कर्ज से मुक्ति दिलाने में सहायक होगा। संपत्ति लाभ: गुरु चतुर्थ और पंचम भाव को प्रभावित करेंगे, जिससे चल-अचल संपत्ति में लाभ, बेहतर शिक्षा और प्रेम संबंधों में सफलता मिलेगी।
नागदा से आए दंपत्ति हाथ जो ड़ कर करते रहे प्रार्थना , उसने एक न सुनी कार से टक्कर मारने का झूठा आरोप लगाकर धमकाता रहा गुंडा 10 मिनट तक न पुलिस आई और न आम लोगों ने की मदद इंदौर की स्वच्छता की लाख बातें कर लो। यहां के खाने पीने की हजार बातें कर लो। लेकिन इस शहर की सुरक्षा और कानून व्यवस्था को ताक में रख दिया गया है। आए दिन हत्याएं, चाकुबाजी, लूट और पुलिस की लापरवाही के मामले सामने आ रहे हैं। यहां तक कि पुलिस पर ही जांच के नाम पर सोने की लूट के आरोप लग रहे हैं। इंदौर में पसरती गुंडागर्दी को जो मामला सामने आया है वो हैरान करने वाला है। इस घटना ने न सिर्फ इंदौर की इज्जत को मटिया-पलीत करने में कोई कसर छोड़ी है, बल्कि बाहर से आने वाले नागरिकों के मन में इंदौर का खौफ बना दिया है और यहां छवि खराब करने का काम किया है। Nagada से आए दंपत्ति हाथ जोड़कर करते रहे प्रार्थना, उसने एक न सुनी कार से टक्कर मारने का झूठा आरोप लगाकर धमकाता रहा गुंडा 10 मिनट तक न पुलिस आई और न आम लोगों ने की मदद https://t.co/44bp0k7p0X #Indore #madhyapradesh #police #crime #goons #NewsUpdate #viralvideo pic.twitter.com/J1dRRyLqNv — Webdunia Hindi (@WebduniaHindi) April 27, 2026 क्या एसी में झपकी ले रही पुलिस : वैसे तो आए दिन इंदौर में कोई न कोई शर्मिंदा करने वाली घटना सामने आती है। लेकिन यह घटना ऐसी है जिसका वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है और जिसने भी इसे देखा वो इंदौर के इन गुंडों और पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर शर्मिंदा हो रहा है। यहां की हालात देखकर लगता है कि इंदौर गुंडों के हवाले हो गया है और पुलिस एसी की हवा में झपकी ले रही है, क्योंकि शहर में कहीं पुलिस का खौफ नहीं है। लठ लेकर धमकाता रहा दंपत्ति और बच्चों को : दरअसल, इंदौर में सड़क चलते लोगों को गाड़ी की टक्कर लगले का बहाना बनाकर आम लोगों को और बाहरी नागरिकों को लूटने के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। इसी तरह का एक मामला एरोड्रम थाना क्षेत्र अंतर्गत बांगड़दा रोड पर हुआ। यहां एक अज्ञात बदमाश ने कार में सवार एक दंपती और उनकी दो साल की मासूम बच्ची पर डंडे से हमला करने की कोशिश की। इस पूरी घटना का वीडियो शनिवार को सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद पुलिस हरकत में आई और आरोपी के निवास स्थान पर दबिश दी, हालांकि आरोपी फिलहाल पुलिस की पकड़ से बाहर है। शादी का निमंत्रण देने नागदा से आए थे दंपत्ति : एरोड्रम पुलिस के मुताबिक उज्जैन के नागदा के रहने वाले अंकित सैनी अपनी पत्नी संध्या और दो साल की बेटी के साथ इंदौर आए थे। वे अपने किसी रिश्तेदार को वैवाहिक कार्यक्रम का निमंत्रण पत्र देने के लिए बांगड़दा क्षेत्र पहुंचे थे। इसी दौरान कालका माता मंदिर चौराहे के समीप एक बदमाश ने अचानक उनकी कार के सामने आकर रास्ता रोक लिया और हाथ में डंडा लेकर खड़ा हो गया। कार का पीछा किया , रूकवाई और लठ लेकर धमकाया : राहगीर और चश्मदीदों के मुताबिक उसने पहले तो कार का बाहर का नंबर देखकर उसका पीछा किया। इसके बाद एक जगह कार रुकवाकर उसकी बाइक को टक्कर मारने का झूठा आरोप लगाया। कार के कांच खुलवाने के लिए गालियां देता रहा और डंडा तानकर देर तक धमकाता रहा। दंपत्ति ने इस दौरान उसका वीडियो बना लिया। वीडियो के आधार पर पुलिस ने आरोपी की पहचान दुर्गा कॉलोनी निवासी मंगल शर्मा के रूप में की। पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए उसके घर पर छापा मारा, लेकिन वह वहां नहीं मिला। मां बाप करते रहे विनति , उसने एक न सुनी : कार से टक्कर मारने का झूठा आरोप लगाकर वो उनसे नीचे उतरने की और लठ तानकर मारने की धमकी देते हुए गालियां देता रहा। बदमाश के उग्र व्यवहार को देखकर कार के भीतर बैठी महिला बुरी तरह डर गई और उसने हाथ जोड़कर आरोपी से परिवार को छोड़ने की प्रार्थना की। बताया जा रहा है कि आरोपी जानबूझकर वाहनों से टकराने का नाटक करता है ताकि वह वाहन चालकों को डरा-धमका सके और उनसे अवैध रूप से रुपयों की वसूली कर सके। इस बीच कार में बैठे दंपत्ति उससे प्रार्थना करते रहे कि भैया कार में बच्चे हैं, ऐसी बातें न करें, वो लगातार गुहार लगाते रहे कि बच्चे डर रहे हैं और हमने आपको टक्कर नहीं मारी। लेकिन वो पूरी गुंडागर्दी के साथ उन्हें धमकाता रहा। बताया जा रहा है कि उसने दंपत्ति से 3 हजार रुपए भी वसूले हैं। रिपोर्ट: नवीन रांगियाल
आज है मोहिनी एकादशी: इसे क्यों करना शुभ माना जाता है?
Mohini Ekadashi Importance: मोहिनी एकादशी हिन्दू धर्म का एक पवित्र व्रत है, जिसे भगवान विष्णु के मोहिनी रूप की पूजा और भक्ति के लिए मनाया जाता है। यह दिन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि आध्यात्मिक लाभ और जीवन में समृद्धि लाने वाला भी माना जाता है। ALSO READ: मोहिनी एकादशी का व्रत रखने के 10 चमत्कारी फायदे आज मोहिनी एकादशी का पावन दिन है। दरअसल, आज का दिन इतना शुभ और महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है, इसके पीछे कुछ बहुत ही ठोस और दिलचस्प कारण हैं। आज हम जानेंगे कि मोहिनी एकादशी क्यों खास है और इसे करना क्यों शुभ माना जाता है। 1. बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक आज के दिन ही भगवान विष्णु ने अपनी माया से अमृत कलश को असुरों के चंगुल से बचाया था। इसे करने से भक्त को यह संदेश और शक्ति मिलती है कि अंततः जीत धर्म और सत्य की ही होती है। 2. मानसिक क्लेश और 'मोह' से मुक्ति हम अक्सर पुरानी बातों, रिश्तों या नुकसान के 'मोह' में फंसकर दुखी रहते हैं। मोहिनी एकादशी का व्रत मानसिक क्लेश को साफ करने तथा मोह से मुक्ति के लिए जाना जाता है। आध्यात्मिक मान्यता है कि आज के दिन व्रत रखने से मन की चंचलता शांत होती है और व्यक्ति को मोह-माया के दुखों से मुक्ति मिलती है। 3. कठिन से कठिन पापों का नाश शास्त्रों में वर्णन है कि जाने-अनजाने में हुए ऐसे पाप, जिनका बोझ मन पर रहता है, इस व्रत को करने से धुल जाते हैं। त्रेता युग में भगवान श्री राम ने भी सीता माता के वियोग के समय दुखों से मुक्ति पाने के लिए महर्षि वशिष्ठ के कहने पर यह व्रत किया था। 4. सुख-समृद्धि और आरोग्य धार्मिक दृष्टि से एकादशी का व्रत शरीर को डिटॉक्स यानी शुद्ध करने का सबसे अच्छा तरीका है। इसे करने से न केवल पुण्य मिलता है, बल्कि स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। मान्यता है कि जो व्यक्ति आज श्रद्धा से पूजन करता है, उसके घर में दरिद्रता नहीं आती और सुख-शांति का वास होता है। ALSO READ: Mohini Ekadashi Katha 2026: मोहिनी एकादशी के रहस्य, जानें पौराणिक व्रत कथा और लाभ 5. वैकुंठ धाम की प्राप्ति हिंदू धर्म में एकादशी को 'मोक्षदायिनी' कहा गया है। आज के दिन किया गया दान और उपवास व्यक्ति के लिए स्वर्ग के द्वार खोलता है और उसे जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति दिलाने में सहायक होता है। आज क्या करें? दान: आज के दिन तरबूज, ठंडा पानी या सत्तू का दान करना बहुत शुभ है क्योंकि यह गर्मी का महीना (वैशाख) होता है। तुलसी पूजन: शाम को तुलसी के पौधे के पास घी का दीपक जरूर जलाएं (लेकिन याद रखें, एकादशी पर तुलसी के पत्ते न तोड़ें और न ही उसमें जल दें)। मंत्र: आज पूरा दिन मन ही मन 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' का जाप करते रहें। मोहिनी एकादशी सिर्फ एक व्रत नहीं है, बल्कि यह धार्मिक, आध्यात्मिक और मानसिक उन्नति का अवसर है। इसे श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। ALSO READ: Mohini Ekadashi: मोहिनी एकादशी 2026: व्रत नियम, पूजा मुहूर्त, विधि और खास बातें
फिरोज खान: बॉलीवुड के पहले स्टाइल आइकॉन जिन्होंने बदली हीरो की परिभाषा
फिल्म इंडस्ट्री में फिरोज खान को स्टाइल आइकॉन के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने नायक की परंपरागत छवि के विपरीत अपनी एक विशेष शैली गढ़ी जो आकर्षक और तड़क-भड़क वाली छवि थी। 25 सितंबर 1939 को बेंगलूरू में जन्में फिरोज खान ने बेंगलूरू के बिशप कॉटनब्वायज स्कूल और सेंट जर्मन ब्वायज हाई स्कूल से पढ़ाई की और अपनी किस्मत आजमाने के लिए मुंबई आ गए। वर्ष 1960 में फिल्म दीदी में उन्हें पहली बार अभिनय करने का मौका मिला। इस फिल्म में वह सहनायक थे। इसके बाद अगले पांच साल तक अधिकतर फिल्मों में उन्हें सहनायक की भूमिकाएं ही मिलीं। जल्दी ही उनकी किस्मत का सितारा चमका और उन्हें 1965 में फणी मजूमदार की फिल्म ऊंचे लोग में काम करने का मौका मिला। इस फिल्म में फिरोज खान के सामने अशोक कुमार और राजकुमार जैसे बड़े कलाकार थे, लेकिन अपने भावप्रवण अभिनय से वह दर्शकों में अपनी पहचान बनाने में सफल रहे। वर्ष 1965 में ही फिरोज खान की एक और फिल्म आरजू प्रदर्शित हुई, जिसमें राजेन्द्र कुमार नायक और साधना नायिका थीं। इस फिल्म में उन्होंने अपने प्रेम की कुबार्नी देने वाले युवक का किरदार निभाया। 1969 में उनकी फिल्म आदमी और इंसान प्रदर्शित हुई। इस फिल्म के लिए उन्हें फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ सहनायक का पुरस्कार मिला। फिरोज खान अपने भाई संजय खान के साथ भी कुछ फिल्मों में दिखाई दिए, जिनमें उपासना, मेला, नागिन जैसी हिट फिल्में शामिल हैं। वर्ष 1972 में प्रदर्शित फिल्म अपराध से फिरोज खान ने निर्माता-निर्देशक के रूप में अपनी पारी की सफल शुरुआत की। इसके बाद फिरोज खान ने धर्मात्मा, कुबार्नी, जांबाज, दयावान, यलगार, प्रेम अगन और जानशीं जैसी कुछ फिल्मों का निर्माण किया।फिल्म निर्माण और निर्देशन के क्रम में फिरोज खान ने हिन्दी फिल्मों में कुछ नयी बातों का आगाज किया। अपराध भारत की पहली फिल्म थी, जिसमें जर्मनी में कार रेस दिखाई गई थी। धर्मात्मा की शूटिंग के लिए वह अफगानिस्तान के खूबसरत लोकशनों पर गए। इससे पहले भारत की किसी भी फिल्म का वहां फिल्मांकन नहीं किया गया था। फिरोज खान ने अपने करियर की सबसे हिट फिल्म कुबार्नी से पाकिस्तान की पॉप गायिका नाजिया हसन के संगीत करियर की शुरुआत कराई। फिरोज खान उन चंद अभिनेताओं में एक थे, जो अपनी ही शर्त पर फिल्म में काम करना पसंद करते थे। इस वजह से उन्होंने कई अच्छी फिल्मों के प्रस्ताव ठुकरा दिए थे। राज कपूर की फिल्म संगम में राजेन्द्र कुमार और आदमी फिल्म में मनोज कुमार वाली भूमिका के लिये उन्होंने मना कर दिया था। वर्ष 2003 में फिरोज खान ने अपने पुत्र फरदीन खान को लांच करने के लिए जानशीन का निर्माण किया। बॉलीवुड में लेडी किलर के नाम से मशहूर फिरोज खान ने चार दशक लंबे सिने करियर में लगभग 60 फिल्मों में अभिनय किया। फिरोज खान ने फिल्म निर्माण की अपनी विशेष शैली बनायी थी। फिरोज खान की निर्मित फिल्मों पर नजर डालें तो उनकी फिल्में बड़े बजट की हुआ करती थीं जिनमें बड़े-बड़े सितारे आकर्षक और भव्य सेट, खूबसूरत लोकेशन, दिल को छू लेने वाला गीत, संगीत और उम्दा तकनीक देखने को मिलती थी। अपने विशिष्ट अंदाज से दर्शकों के बीच खास पहचान वाले फिरोज खान 27 अप्रैल 2009 को इस दुनिया को अलविदा कह गए।
खलनायक से सुपरस्टार बने विनोद खन्ना, संघर्ष और सफलता की कहानी
बतौर खलनायक अपने करियर का आगाज कर नायक के रूप में फिल्म इंडस्ट्री में शोहरत की बुलंदियों तक पहुंचने वाले सदाबहार अभिनेता विनोद खन्ना ने अपने अभिनय से दर्शको के बीच अपनी अमिट छाप छोड़ी। विनोद खन्ना का जन्म 6 अक्टूबर 1946 को पाकिस्तान के पेशावर में हुआ था। विनोद के जन्म के बाद भारत और पाकिस्तान का विभाजन हो गया था, जिसके बाद उनका परिवार ने मुंबई शिफ्ट हो गया था। विनोद खन्ना का ब्लड कैंसर के चलते 27 अप्रैल 2017 को निधन हो गया था। विनोद खन्ना अपने जमाने के सुपरस्टार थे। उन्होंने कई सुपरहिट फिल्मों में काम किया था। स्नातक की शिक्षा के दौरान विनोद खन्ना को एक पार्टी के दौरान निर्माता-निर्देशक सुनील दत्त से मिलने का अवसर मिला। सुनील दत्त उन दिनों अपनी फिल्म 'मन का मीत' के लिये नए चेहरों की तलाश कर रहे थे। उन्होंने फिल्म में विनोद से बतौर सहनायक काम करने की पेशकश की जिसे विनोद ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। घर पहुंचने पर विनोद को अपने पिता से काफी डांट भी सुननी पड़ी। विनोद ने जब अपने पिता से फिल्म में काम करने के बारे में कहा तो उनके पिता ने उन पर बंदूक तान दी और कहा, 'यदि तुम फिल्मों में गए तो तुम्हें गोली मार दूंगा।' बाद में विनोद की मां के समझाने पर उनके पिता ने विनोद को फिल्मों में दो वर्ष तक काम करने की इजाजत देते हुए कहा यदि फिल्म इंडस्ट्री में सफल नहीं होते हो तो घर के व्यवसाय में हाथ बंटाना होगा। वर्ष 1968 में प्रदर्शित फिल्म मन का मीत असफल रही, लेकिन विनोद को फिल्मों में पैर जमाने की जगह मिल गई। आन मिलो सजना, मेरा गांव मेरा देश, सच्चा झूठा जैसी फिल्मों में खलनायक की भूमिकाएं निभाने का अवसर मिला, लेकिन इन फिल्म की सफलता के बावजूद विनोद खन्ना को कोई खास फायदा नहीं पहुंचा। विनोद को प्रारंभिक सफलता गुलजार की फिल्म मेरे अपने से मिली। इसे महज एक संयोग ही कहा जाएगा कि गुलजार ने बतौर निर्देशक करियर की शुरूआत की थी। छात्र राजनीति पर आधारित इस फिल्म में मीना कुमारी ने भी अहम भूमिका निभाई थी। फिल्म में विनोद खन्ना और शत्रुघ्न सिन्हा के बीच टकराव देखने लायक था। वर्ष 1973 में विनोद खन्ना को एक बार फिर से निर्देशक गुलजार की फिल्म 'अचानक' में काम करने का अवसर मिला। वर्ष 1974 में प्रदर्शित फिल्म इम्तिहान विनोद के सिने करियर की एक और सुपरहिट फिल्म साबित हुई। वर्ष 1977 में प्रदर्शित फिल्म 'अमर अकबर एंथनी' विनोद के सिने करियर की सबसे कामयाब फिल्म साबित हुई। मनमोहन देसाई के निर्देशन में बनी यह फिल्म 'खोया पाया' फार्मूले पर आधारित थी। तीन भाइयों की जिंदगी पर आधारित इस मल्टीस्टारर फिल्म में अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर ने भी अहम भूमिका निभाई थी। वर्ष 1980 में प्रदर्शित फिल्म 'कुर्बानी' विनोद खन्ना के करियर की एक और सुपरहिट फिल्म साबित हुई। फिरोज खान के निर्माण और निर्देशन में बनी इस फिल्म में विनोद खन्ना ने अपनी दमदार अभिनय सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के फिल्म फेयर पुरस्कार से नामांकित किए गए। अस्सी के दशक में विनोद शोहरत की बुलंदियो पर जा पहुंचे और ऐसा लगने लगा कि सुपरस्टार अमिताभ बच्चन को उनके सिंहासन से विनोद उतार सकते हैं लेकिन विनोद ने फिल्म इंडस्ट्री को अलविदा कह दिया और आचार्य रजनीश के आश्रम की शरण ले ली। वर्ष 1987 में विनोद खन्ना ने एक बार फिर से फिल्म इंसाफ के जरिये फिल्म इंडस्ट्री का रूख किया। वर्ष 1988 में प्रदर्शित फिल्म दयावान विनोद के करियर की महत्वपूर्ण फिल्मों में शामिल है। हालांकि यह फिल्म टिकट खिड़की पर कामयाब नहीं रही लेकिन समीक्षको का मानना है कि यह फिल्म विनोद खन्ना के करियर की उत्कृष्ठ फिल्मों में एक है। फिल्मों में कई भूमिकाएं निभाने के बाद विनोद खन्ना ने समाज सेवा के लिए वर्ष 1997 राजनीति में प्रवेश किया और भारतीय जनता पार्टी के सहयोग से वर्ष 1998 में गुरदासपुर से चुनाव लड़कर लोकसभा सदस्य बने। बाद में उन्हें केन्द्रीय राज्य मंत्री के रूप में भी उन्होंने काम किया। 1997 में अपने पुत्र अक्षय खन्ना को फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित करने के लिए विनोद खन्ना ने फिल्म हिमालय पुत्र का निर्माण किया। दर्शकों की पसंद को ध्यान में रखते हुये विनोद खन्ना ने छोटे पर्दे की ओर भी रूख किया और महाराणा प्रताप और मेरे अपने जैसे धारावाहिकों में अपने अभिनय का जौहर दिखाया। विनोद खन्ना ने अपने चार दशक लंबे सिने करियर में लगभग 150 फिल्मों में अभिनय किया है। अपने दमदार अभिनय से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करने वाले विनोद खन्ना 27 अप्रैल 2017 को अलविदा कह गए।
सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में, 3 राशियों के लिए गोल्डन टाइम
Surya gochar 2026: 14 अप्रैल 2026 से ही सूर्य का मेष राशि में गोचर चल रहा है। सूर्य का मेष राशि में गोचर ज्योतिष शास्त्र की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है, क्योंकि यहाँ सूर्य अपनी 'उच्च' अवस्था में होते हैं। आपके द्वारा दिए गए संक्षिप्त विवरणों को विस्तार देते हुए, यहाँ इन तीन राशियों के लिए एक विस्तृत भविष्यफल और मार्गदर्शन दिया गया है। 1. मेष राशि (Aries): सूर्य का अपनी ही राशि में आगमन मेष राशि के जातकों के लिए सूर्य का आपकी राशि में आना एक नए जन्म के समान है। आपकी ऊर्जा का स्तर चरम पर होगा। व्यक्तित्व में निखार: सूर्य के प्रभाव से आपके चेहरे पर एक विशेष तेज दिखाई देगा। लोग आपकी बातों से प्रभावित होंगे और आपके नेतृत्व (Leadership) को स्वीकार करेंगे। यदि आप लंबे समय से किसी निर्णय को लेने में हिचकिचा रहे थे, तो अब आप पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेंगे। संतान और प्रेम: पंचम भाव पर दृष्टि होने के कारण, यह समय विद्यार्थियों के लिए शानदार है। यदि आप माता-पिता हैं, तो आपकी संतान किसी बड़ी प्रतियोगिता या क्षेत्र में नाम रोशन कर सकती है। प्रेम संबंधों में एक-दूसरे के प्रति सम्मान बढ़ेगा। विशेष सावधानी: ज्योतिष के अनुसार, सूर्य जब लग्न में होता है तो व्यक्ति के स्वभाव में 'अहं' (Ego) बढ़ा सकता है। अपनी वाणी और व्यवहार में विनम्रता बनाए रखें। जीवनसाथी के साथ अनावश्यक बहस से बचें, ताकि घर की शांति बनी रहे। 2. कर्क राशि (Cancer): करियर के शिखर की ओर कर्क राशि वालों के लिए सूर्य दशम भाव (करियर का स्थान) में गोचर कर रहे हैं। यहाँ सूर्य को 'दिग्बल' प्राप्त होता है, यानी वे सबसे अधिक शक्तिशाली होते हैं। पेशेवर सफलता: यह समय आपके करियर में 'यू-टर्न' साबित हो सकता है। यदि आप पदोन्नति (Promotion) का इंतजार कर रहे थे, तो आपकी फाइल आगे बढ़ सकती है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत को पहचान मिलेगी और वरिष्ठ अधिकारी आपकी कार्यशैली की प्रशंसा करेंगे। पारिवारिक व्यापार: जो लोग अपने पिता या दादा के व्यवसाय से जुड़े हैं, उन्हें इस दौरान कोई बड़ा कॉन्ट्रैक्ट या अप्रत्याशित लाभ मिल सकता है। सरकारी क्षेत्र से जुड़े कार्यों में भी सफलता के योग हैं। स्वास्थ्य और सेवा: जहाँ करियर चमक रहा है, वहीं आपको अपने पिता के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उनके साथ समय बिताएं और नियमित चेकअप कराएं। साथ ही, काम के बोझ को खुद पर इतना हावी न होने दें कि आपका निजी जीवन प्रभावित हो। 3. वृश्चिक राशि (Scorpio): चुनौतियों पर विजय वृश्चिक राशि वालों के लिए सूर्य का छठे भाव (शत्रु और रोग का स्थान) में उच्च का होना एक शक्तिशाली राजयोग की तरह है। शत्रु हंता योग: आपके गुप्त शत्रु या प्रतिस्पर्धी जो अब तक आपको परेशान कर रहे थे, वे खुद-ब-खुद पीछे हट जाएंगे। आप अपनी बुद्धि और साहस से हर बाधा को पार कर लेंगे। कानूनी और सरकारी मामले: यदि आप किसी कानूनी विवाद या कोर्ट-कचहरी के मामले में फंसे हैं, तो प्रबल संभावनाएं हैं कि परिणाम आपके पक्ष में आएगा। सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं को इस अवधि में कोई शुभ समाचार मिल सकता है। सेहत का प्रबंधन: छठा भाव बीमारियों का भी होता है। सूर्य यहाँ आपको लड़ने की शक्ति तो देंगे, लेकिन आपको पेट की गर्मी (Digestion) और आंखों में जलन जैसी समस्याओं के प्रति सतर्क रहना होगा। खान-पान में सात्विकता बनाए रखें और अत्यधिक धूप से बचें।
आंध्र प्रदेश : पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें, तेल की कमी जारी
विजयवाड़ा। आंध्र प्रदेश के कई पेट्रोल पंपों पर रविवार को पेट्रोल और डीजल का स्टॉक खत्म हो जाने के कारण विभिन्न जिलों में वाहन चालकों की लंबी कतारें देखी गईं। कई पेट्रोल पंपों पर स्टॉक खत्म होने की सूचना के बोर्ड लगे होने के कारण, वाहन चालकों ने उन पंपों पर लंबी कतारें लगा दीं […] The post आंध्र प्रदेश : पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें, तेल की कमी जारी appeared first on Sabguru News .
Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (27 अप्रैल, 2026)
1. मेष (Aries) Today 27 April horoscope in Hindi 2026 : करियर: कार्यस्थल पर चुनौती आएगी, धैर्य रखें। लव: साथी के साथ समझौता आवश्यक। धन: अनावश्यक खर्च से बचें। स्वास्थ्य: सिर और आंखों में हल्का दर्द। उपाय: सूर्यदेव को जल अर्पित करें। ALSO READ: बुध का मेष राशि में गोचर: इन 3 राशियों के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें, रहें सतर्क 2. वृषभ (Taurus) करियर: ऑफिस में नए प्रोजेक्ट में सफलता मिलेगी। लव: रोमांस में मधुर समय रहेगा। धन: धन निवेश सोच-समझकर करें। स्वास्थ्य: पाचन में सुधार की आवश्यकता है। उपाय: तुलसी का पान करें, पीपल के वृक्ष की पूजा करें। 3. मिथुन (Gemini) करियर: बिजनेस या नौकरी में अवसर मिल सकते हैं। लव: दोस्ती में प्यार का अनुभव। धन: अप्रत्याशित खर्च हो सकते हैं। स्वास्थ्य: मानसिक तनाव से बचें। उपाय: हरे रंग के वस्त्र पहनें, शनिदेव की पूजा करें। 4. कर्क (Cancer) करियर: कार्यस्थल पर सहकर्मियों के साथ सहयोग आवश्यक रहेगा। लव: प्रेम तथा पारिवारिक जीवन सुखमय रहेगा। धन: पैसों की स्थिति स्थिर रहेगी। स्वास्थ्य: पेट और किडनी की देखभाल करें। उपाय: दूध में गुड़ मिलाकर सेवन करें। 5. सिंह (Leo) करियर: मेहनत का फल मिलेगा, प्रमोशन की संभावना है। लव: प्रेम जीवन में नयी शुरुआत होगी। धन: आज आर्थिक लाभ संभव है। स्वास्थ्य: ऊर्जा स्तर ऊंचा रहेगा। उपाय: सूर्य नमस्कार करें, पीले वस्त्र पहनें। 6. कन्या (Virgo) करियर: छात्रों को करियर बनाने के नए अवसर मिल सकते हैं, ध्यान रखें। लव: प्रेमीसंग भावनाओं में स्पष्टता लाएं। धन: आज धन का निवेश सोच-समझकर करें। स्वास्थ्य: तनाव और थकान दूर करें। उपाय: भगवान गणेश को फूल अर्पित करें। 7. तुला (Libra) करियर: टीम वर्क में सफलता, अधिकारियों से सहयोग मिलेगा। लव: रोमांस में मधुरता आने के प्रबल योग। धन: कारोबार से अच्छा धन लाभ होगा। स्वास्थ्य: आंखों और कानों की सुरक्षा का ध्यान रखें। उपाय: नीले रंग के वस्त्र पहनें। ALSO READ: Mohini Ekadashi Katha 2026: मोहिनी एकादशी के रहस्य, जानें पौराणिक व्रत कथा और लाभ 8. वृश्चिक (Scorpio) करियर: करियर संबंधी कठिनाइयों पर विजय मिलेगी। लव: प्रेमीसंग प्यार में भावनाएं बरकरार रहेंगी। धन: अचानक धन खर्च बढ़ सकता हैं। स्वास्थ्य: रक्त संबंधित समस्याओं पर ध्यान दें। उपाय: आज हनुमान चालीसा का पाठ करें। 9. धनु (Sagittarius) करियर: करियर संबंधी विदेश या कारोबारी यात्रा से लाभ होगा। लव: प्रेमी साथी के साथ सामंजस्य बना रहेगा। धन: धन निवेश से आगामी समय में फायदा मिल सकता है। स्वास्थ्य: जोड़ों में हल्का दर्द महसूस करेंगे।। उपाय: भगवान सूर्य को अर्घ्य दें। 10. मकर (Capricorn) करियर: रचनात्मक कार्यों में सफलता के प्रबल योग बने हैं। लव: प्रेम जीवन में सावधानी बरतना ठीक रहेगा। धन: वित्तीय स्थिति मजबूत होगी। स्वास्थ्य: हड्डियों और पेट का विशेष ध्यान रखें। उपाय: आज काले तिल का दान करें। 11. कुंभ (Aquarius) करियर: कार्यस्थल पर नई योजनाओं में साथी का सहयोग मिलेगा। लव: दोस्ती और प्यार में सामंजस्य बना रहेगा। धन: कारोबारी अनियमित खर्च से बचें। स्वास्थ्य: मानसिक तनाव कम करें। उपाय: पीपल के पेड़ पर पीले फूल चढ़ाएं। 12. मीन (Pisces) करियर: नौकरी में तथा सामज में प्रतिष्ठा बढ़ेगी। लव: प्रेम जीवन सुखमय रहेगा। धन: कारोबार में मेहनत रंग लाएगी। धनलाभ होगा। स्वास्थ्य: गर्मी में आंखों का विशेष ध्यान रखें। उपाय: भगवान शिव जी की पूजा करें। ALSO READ: मेष राशि में सूर्य का प्लूटो से स्क्वायर, क्या होगा 4 राशियों पर इसका प्रभाव
PM मोदी आज सिक्किम विलय की सालगिरह पर राजधानी गंगटोक जा रहे हैं। 1947 में आजादी मिलने के 28 साल बाद तक सिक्किम भारत का पूर्ण राज्य नहीं, सिर्फ प्रोटेक्टर स्टेट था। 1975 तक वहां नामग्याल राजवंश का शासन था और भारत सिर्फ विदेश नीति और सुरक्षा से जुड़े मामले देखता था। 1970 के दशक में सिक्किम के राजा की अमेरिकी पत्नी ने भारत से दार्जिलिंग लेने की ख्वाहिश जताई। इंदिरा गांधी इसके खतरे समझ गईं। उन्होंने RAW चीफ से पूछा- कुछ हो सकता है? आइए, जानते हैं सिक्किम के भारत में विलय की रोचक कहानी… अंग्रेजों ने सिक्किम को नेपाल से बचाया, तो राजा ने दार्जिलिंग दे दिया 1642 में सिक्किम में बौद्ध राजतंत्र की स्थापना हुई। पहले चोग्याल बने फुंटसोग नामग्याल। सिक्किम में चोग्याल का मतलब ‘धर्म से शासन करने वाला राजा’ होता है। 19वीं सदी में भारत से तिब्बत में व्यापार करने के लिए अंग्रेजों को सिक्किम रूट की जरूरत थी। इधर सिक्किम के दाईं तरफ नेपाल की गोरखा आर्मी लगातार अपना विस्तार कर रही थी। 1814 से 1816 के बीच ईस्ट इंडिया कंपनी और नेपाल की गोरखा आर्मी के बीच एंग्लो-गोरखा युद्ध हुआ। सिक्किम ने सोचा कि गोरखाओं के हमले बंद करवाने के लिए लड़ाई में अंग्रेजों का साथ देना चाहिए। जंग में गोरखा हार गए, तो सिक्किम में कब्जाई सारी जमीन अंग्रेजों को लौटा दी। अंग्रेजों ने यह जमीन सिक्किम को लौटा दी और सुरक्षा की गारंटी भी दी। बदले में सिक्किम के रास्ते तिब्बत से व्यापार करने का अधिकार ले लिया। धीरे-धीरे सिक्किम के अंदरूनी मामलों में भी अंग्रेजों का दखल होने लगा। 1828 में ब्रिटिश ऑफिसर कैप्टन लॉयड दार्जिलिंग गए थे। उस समय दार्जिलिंग पश्चिम बंगाल का नहीं बल्कि सिक्किम का हिस्सा था। उन्हें यह जगह गर्मियों में सैनिकों के आराम और तिब्बत के ट्रेड रूट पर नजर रखने के लिए जरूरी लगी। इधर सिक्किम को भी नेपाल से सुरक्षा के लिए अंग्रेजों की जरूरत थी। इसलिए 1835 में चोग्याल ने अंग्रेजों को दार्जिलिंग तोहफे में दे दिया। बदले में उन्हें हथियार और कई तरह के तोहफे मिले। 1841 से अंग्रेजों ने सिक्किम को हर साल 3,000 रुपए का मुआवजा देना शुरू किया, जो बाद में बढ़कर 6,000 रुपए हो गया। 1889 में अंग्रेजों ने सिक्किम में नेपाली मजदूरों को आने की इजाजत दे दी। 1941 तक इनकी आबादी 75% तक पहुंच गई। सिक्किम में पहले से रह रहा भूटिया समुदाय 11% और लेपचा समुदाय सिर्फ 14% तक सीमित हो गया था। अंग्रेज गए तो नेहरू ने कहा- ‘हम सिक्किम की सुरक्षा के लिए तैनात रहेंगे’ भारत की आजादी के समय 600 प्रिंसली स्टेट में से एक सिक्किम भी था लेकिन चोग्याल भारत में विलय के लिए तैयार नहीं थे। ‘सिक्किम: डॉन ऑफ डेमोक्रेसी’ किताब में जी. बी. एस. सिद्धु लिखते हैं, ‘सरदार पटेल सिक्किम के साथ बाकी भारतीय रियासतों की तरह ही व्यवहार करना चाहते थे। लेकिन नेहरू के विचार सिक्किम के साथ अलग व्यवहार करने के थे।’ नेहरू चाहते थे कि जैसे भूटान के साथ भारत ने मित्रता की संधि की है, वैसे ही सिक्किम के साथ भी हो जाए। 1950 में भारत-सिक्किम शांति समझौता हुआ। इसके तहत सिक्किम भारत का प्रोटेक्टर स्टेट यानी संरक्षित राज्य बना। अब सिक्किम की सुरक्षा और विदेश नीति की जिम्मेदारी भारत की थी। भारत वहां सेना तो तैनात कर सकता था, लेकिन सिक्किम के आंतरिक मामलों में दखल नहीं कर सकता था। जवाहरलाल नेहरू ने कहा था, ‘अगर सिक्किम या भूटान पर कोई दूसरा देश हमला करता है, तो हम उनकी सुरक्षा के लिए तैनात रहेंगे।’ इधर भारत की आजादी के समय सिक्किम की अंदरूनी राजनीति में उथल-पुथल मची थी। जो लोग सिक्किम का भारत में विलय चाहते थे, उन्होंने सिक्किम स्टेट कांग्रेस पार्टी बनाई। काजी लेहेंडप दोरजी इसके अध्यक्ष बने। आगे चलकर उन्होंने सिक्किम नेशनल कांग्रेस बनाई। वहीं सिक्किम की आजादी चाहने वालों ने सिक्किम नेशनल पार्टी बनाई। सिक्किम की रानी दार्जिलिंग वापस चाहती थी, राजा ने आजाद राज्य की मांग की सिक्किम की सीमा भारत के साथ-साथ चीन से भी लगती है। 1962 में चीन से युद्ध हारने के बाद भारत ने सिक्किम में भी अपनी सैन्य तैनाती बढ़ा दी, ताकि चीन को भारत में घुसने से रोका जा सके। 5 साल बाद 1 अक्टूबर, 1967 को चीनी सेना ने नाथू-ला के रास्ते सिक्किम में घुसपैठ की कोशिश की। भारतीय आर्मी इस हमले को रोकने में सफल रही, लेकिन अभी इस सीमा को और मजबूत करने की जरूरत थी। दूसरी तरफ सिक्किम के चोग्याल पाल्डेन थोंडुप नामग्याल 1950 की संधि को बदलकर, सिक्किम को भूटान जैसा दर्जा देने की मांग करने लगे। वह सिक्किम को भारत से अलग पहचान दिलाना चाहते थे और लगातार विदेश यात्राएं कर रहे थे। चोग्याल की पत्नी होप कूक अमेरिकी नागरिक थीं, कई लोग उन्हें अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA का एजेंट भी मानते थे। उन्होंने एक आर्टिकल में लिखा, '1835 में सिक्किम के राजपरिवार ने अंग्रेजों को दार्जिलिंग लीज पर दिया था। राजपरिवार दार्जिलिंग को वापस मांग सकता है।' चोग्याल भारत से आजादी चाहते थे, लेकिन सिक्किम की जनता चोग्याल से। 1960 और 70 के दशक में सिक्किम में राजशाही का विरोध बढ़ने लगा। देश की 75% से ज्यादा नेपाली आबादी चोग्याल पर भेदभाव के आरोप लगा रही थी। चुनाव में गड़बड़ी के आरोप भी लग रहे थे। ये सिक्किम को भारत में शामिल करने का सबसे सही मौका था। तीन फेज में सिक्किम का भारत में विलय हुआ पहला फेज: सिक्किम में हो रहे विरोध को समर्थन, विपक्षी पार्टियों से हाथ मिलाया इंदिरा गांधी सिक्किम की समस्या का हल चाहती थीं। उन्होंने मुख्य सचिव पी. एन. धर से कहा, ‘मेरे पिता ने सिक्किम के लोगों की भारत में शामिल होने की इच्छा न मानकर गलती की।’ इंदिरा ने खुफिया एजेंसी RAW के चीफ आर. एन. काओ से पूछा- 'क्या आप सिक्किम के मामले में कुछ कर सकते हैं?' काओ ने कलकत्ता में RAW और IB के रीजनल ऑफिस के इंचार्ज पी. एन. बनर्जी और गंगटोक में क्रॉस बॉर्डर इंफॉर्मेशन जुटाने के लिए तैनात ऑफिसर अजीत सिंह स्याली से बात की। सिक्किम को भारत में मिलाने के लिए 5 काम तय हुए… बनर्जी और स्याली ने 1973 में सिक्किम में ऑपरेशन - 'जनमत' और 'ट्विलाइट' शुरु किया। यह सिक्किम नेशनल कांग्रेस के काजी और जनता कांग्रेस के के. सी. प्रधान के कोडनेम थे। इन दोनों ने चोग्याल के खिलाफ लड़ाई में साथ आकर जॉइंट एक्शन कमेटी बनाई थी। दूसरा फेज: भारत ने चोग्याल के गार्ड्स हटाए, सिक्किम में चुनाव कराए आखिरी फेज: सिक्किम के लोगों ने भारत में शामिल होने पर किया वोट, चोग्याल की सत्ता खत्म --------ये खबर भी पढ़िए… एक गलती से हर घंटे दो परमाणु बम ‘फूटने’ लगे: आग बुझाने वालों को खून की उल्टियां, स्किन में फफोले; 40 साल बाद भी जानलेवा है चर्नोबिल 26 अप्रैल 1986 यानी आज से ठीक 40 साल पहले। तब के सोवियत रूस का हिस्सा रहे यूक्रेन का प्रिपयत शहर। रात के 1 बजकर 28 मिनट पर 25 साल के फायरफाइटर वसिली इग्नातेंको की नींद एक फोन से टूटी। आवाज आई- कहीं आग लगी है, तुरंत आओ। पूरी खबर पढ़िए…
27 मार्च 2026 यानी आज से ठीक १ महीने पहले। 35 साल के बालेन शाह ने नेपाल के प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। पीएम बनते ही पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को गिरफ्तार करवा दिया गया। सरकारी दफ्तरों से नेताओं की तस्वीरें उतरवा दी गईं। छात्र राजनीति पर रोक लगा दी गई। अब अफसरों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ना होगा, जबकि कर्मचारियों को हर 15 दिन में सैलरी मिलेगी। इसके साथ ही भारत से 100 रुपए से ज्यादा का सामान लाने पर टैक्स भी लगा दिया गया। इन फैसलों के बीच महज एक महीने में बालेन के 2 मंत्री इस्तीफा दे चुके हैं। बॉर्डर के लोग धरने पर हैं और बालेन का गीत गाने वाले जेन-Z और छात्र भी अब सवाल पूछने लगे हैं। बालेन शाह की पिछली जिंदगी, बतौर पीएम 30 दिनों के काम का एनालिसिस और आगे की पूरी कहानी; जानेंगे मंडे मेगा स्टोरी में… ***** ग्राफिक्स: दृगचंद्र भुर्जी और अंकलेश विश्वकर्मा -------- ये खबर भी पढ़िए… ट्रम्प सनकी हैं या साइकोपैथ:पापा के कहने पर 'किलर' बने, दोस्त को छत से फेंकने पर अड़े; अब ईरान को बास्टर्ड कहा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 5 अप्रैल की शाम गालियों से भरा एक पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, ‘मंगलवार को ईरान ऐसा नजारा देखेगा, जो उसने पहले कभी नहीं देखा होगा! ओ पागल, बास्टर्ड! होर्मुज स्ट्रेट खोल दो, वरना तुम नर्क के लिए तैयार रहो।’ उनके बर्ताव, हरकतों और बयानों को साथ जोड़कर देखते हैं, तो एक पैटर्न नजर आता है कि आखिर ट्रम्प क्या और क्यों सोचते हैं? पूरी खबर पढ़िए…
श्री नौसर माता मंदिर में श्री राजराजेश्वरी महालक्ष्मी यज्ञ की पूर्णाहुति
अजमेर। पुष्कर घाटी स्थित प्राचीन नौसर माता मंदिर में श्रीनवशक्ति सृजन सेवा प्रंन्यास के तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय श्रीराज राजेश्वरी महालक्ष्मी यज्ञ की रविवार को पूर्णाहुति हुई। अंतिम दिन सुबह 8 बजे से दोपहर 12:15 बजे यज्ञशाला में आहुतियां देने का सिलसिला चला। दोपहर करीब 1 बजे महाआरती हुई। इसके बाद 2 बजे से […] The post श्री नौसर माता मंदिर में श्री राजराजेश्वरी महालक्ष्मी यज्ञ की पूर्णाहुति appeared first on Sabguru News .
चित्तौड़गढ़ : शराब के पैसे नहीं देने पर की हत्या, दो आरोपी अरेस्ट
चित्तौड़गढ़। राजस्थान में चित्तौड़गढ़ जिले के कोतवाली निंबाहेड़ा थाना क्षेत्र में पुलिस ने शराब के पैसे नहीं देने पर एक व्यक्ति की पीट पीटकर हत्या करने के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस सूत्रों ने रविवार को बताया कि गत गुरुवार को क्षेत्र के बरखेड़ा गांव के बगदीराम भील की वहीं के निवासी श्यामलाल […] The post चित्तौड़गढ़ : शराब के पैसे नहीं देने पर की हत्या, दो आरोपी अरेस्ट appeared first on Sabguru News .
पवन खेड़ा ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया
नई दिल्ली। कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय द्वारा उन्हें अग्रिम जमानत देने से इनकार करने के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। यह मामला असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां शर्मा की दर्ज कराई गई एक प्राथमिकी से जुड़ा है, जिसमें खेड़ा पर उनके खिलाफ कई […] The post पवन खेड़ा ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया appeared first on Sabguru News .
झुंझुनूं में कार पलटने से तीन दोस्तों की मौत
झुंझुनूं। राजस्थान में झुंझुनू जिले के धनूरी थाना क्षेत्र में शनिवार देर रात एक कार के पलटने से तीन दोस्तों की मौत हो गई और एक अन्य युवक घायल हो गया। थानाधिकारी संजय गौतम ने बताया कि झुंझुनू के नील शुक्ला (33), गौरव सैनी (21), विजय ढंड और जितेंद्र वालिया सोनासर स्थित हीरा की ढाणी […] The post झुंझुनूं में कार पलटने से तीन दोस्तों की मौत appeared first on Sabguru News .
ज्यूरिख जा रहे स्विस एयरलाइंस के विमान के इंजन में लगी आग, रनवे पर रोकी गई उड़ान
नई दिल्ली। दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर ज्यूरिख जाने वाली स्विस इंटरनेशनल एयर लाइन्स की एक उड़ान को रविवार तड़के उड़ान भरने (टेक-ऑफ) से ठीक पहले रुकने के लिए मजबूर होना पड़ा। विमान के एक इंजन में तकनीकी खराबी आने के बाद पूर्ण आपातकालीन प्रतिक्रिया शुरू की गई। यह घटना रात लगभग […] The post ज्यूरिख जा रहे स्विस एयरलाइंस के विमान के इंजन में लगी आग, रनवे पर रोकी गई उड़ान appeared first on Sabguru News .
लंदन में नीलाम होगा जयपुर राजपरिवार का 17वीं सदी का स्मार्टफोन, 25 करोड़ रुपए तक लग सकती है बोली
लंदन/जयपुर। जयपुर के शाही संग्रह की सबसे बेशकीमती वैज्ञानिक विरासतों में से एक 17वीं शताब्दी का एक विशाल एस्ट्रोलेब (खगोलीय गणना यंत्र) आगामी 29 अप्रैल को लंदन के सोथबी नीलामी घर में वैश्विक बोली के लिए तैयार है। पीतल से बने इस अद्भुत यंत्र को विशेषज्ञ अपनी बहुमुखी क्षमताओं के कारण उस दौर का सुपरकंप्यूटर […] The post लंदन में नीलाम होगा जयपुर राजपरिवार का 17वीं सदी का स्मार्टफोन, 25 करोड़ रुपए तक लग सकती है बोली appeared first on Sabguru News .
महिला आरक्षण विधेयक 2023: भाजपा की लैंगिक समानता की राजनीति या परिसीमन की रणनीति?
महिला आरक्षण विधेयक 2023 लागू क्यों नहीं हुआ? परिसीमन, भाजपा की रणनीति, आरएसएस की सोच और लैंगिक समानता पर डॉ राम पुनियानी का विस्तृत विश्लेषण।
रिंकू सिंह अकेले दम पर कोलकाता को लखनऊ के खिलाफ ले गए 150 पार
KKRvsLSG कोलकाता नाईट राइडर्स को रिंकू सिंह 83 रन बनाकर अकेले लखनऊ सपर जाएंट्स के खिलाफ 150 पार ले गए। बाकी के कोलकाता के बल्लेबाज मिलाकर सिर्फ 64 रन ही बना पाए। लखनऊ की ओर से मोहसिन खान ने 5 विकेट लिए। Enjoy Rinku Singh's sizzling ball-striking in the last over Scorecard https://t.co/elFxwvCeWO #TATAIPL | #KhelBindaas | #LSGvKKR | @KKRiders pic.twitter.com/98wGgWK14c — IndianPremierLeague (@IPL) April 26, 2026 कोलकाता नाइट राइडर्स (एकादश): अजिंक्य रहाणे (कप्तान), टिम साइफ़र्ट, कैमरन ग्रीन, अंगकृष रघुवंशी, रोवमन पॉवेल, रिंकू सिंह, सुनील नारायण, रमनदीप सिंह, अनुकूल रॉय, वैभव अरोड़ा और कार्तिक त्यागी। लखनऊ सुपर जायंट्स (एकादश): एडन मारक्रम, मिचेल मार्श, ऋषभ पंत, निकोलस पूरन, आयुष बदोनी, मुकुल चौधरी, मोहम्मद शमी, प्रिंस यादव, दिग्वेश राठी, मोहसिन ख़ान और जॉर्ज लिंडे।
लखनऊ ने कोलकाता के खिलाफ टॉस जीतकर चुनी गेंदबाजी (Video)
LSGvsKKR लखनऊ सुपर जाएंट्स ने कोलकाता के खिलाफ टॉस जीतकर गेंदबाजी का चुनाव किया है। Toss update from Lucknow @lucknowipl won the toss and elected to bowl first against @kkriders Updates https://t.co/elFxwvCeWO #TATAIPL | #KhelBindaas | #LSGvKKR pic.twitter.com/atpHS3DPuk — IndianPremierLeague (@IPL) April 26, 2026 टीम इस प्रकार हैं: Playing XI & Impact Player लखनऊ: ऋषभ पंत (कप्तान), एडेन मार्क्रम, हिम्मत सिंह, मैथ्यू ब्रीट्ज़के, मुकुल चौधरी, अक्षत रघुवंशी, जोश इंग्लिस, मिचेल मार्श, अब्दुल समद, शाहबाज़ अहमद, अर्शिन कुलकर्णी, वानिंदु हसरंगा, आयुष बडोनी, मोहम्मद शमी, अवेश खान, एम सिद्धार्थ, दिग्वेश राठी, आकाश सिंह, प्रिंस यादव, अर्जुन तेंदुलकर, एनरिक नोर्किया, नमन तिवारी, मयंक यादव, मोहसिन खान। कोलकाता: अजिंक्य रहाणे (कप्तान), मनीष पांडे, रोवमैन पॉवेल, अंगकृष रघुवंशी, रमनदीप सिंह, रिंकू सिंह, सुनील नारायण, अनुकूल रॉय, वैभव अरोड़ा, उमरान मलिक, वरुण चक्रवर्ती, कैमरन ग्रीन, मथीशा पथिराना, राहुल त्रिपाठी, टिम सीफर्ट, तेजस्वी दहिया, रचिन रवींद्र, आकाश दीप, ब्लेसिंग मुजाराबानी, नवदीप सैनी, प्रशांत सोलंकी, फिन एलन, दक्ष कामरा, कार्तिक त्यागी, सार्थक रंजन, सौरभ दुबे।
बल्ले और गेंद से दीप्ति शर्मा ने भारत को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वाइटवॉश से बचाया
INDvsSA भारतीय महिला टीम ने दीप्ति शर्मा (नाबाद 36 रन, 19 रन देकर पांच विकेट) के आल राउंड प्रदर्शन की बदौलत शनिवार को चौथे टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच में दक्षिण अफ्रीका को 14 रन से हराकर पांच मैचों की श्रृंखला में अपनी पहली जीत दर्ज की।दीप्ति ने टी20 प्रारूप में पहली बार पांच विकेट चटकाए। भारतीय टीम इससे पहले दक्षिण अफ्रीका की अनुशासित गेंदबाजी के सामने पांच विकेट पर 185 रन ही बना सकी।लेकिन दीप्ति ने बीच के ओवरों में अहम विकेट चटकाए जिससे दक्षिण अफ्रीका की टीम 20 ओवर में नौ विकेट पर 171 रन ही बना सकी।इस मैच से पहले दक्षिण अफ्रीका ने 3-0 की अजेय बढ़त बनाई हुई थी। तेज गेंदबाज क्रांति गौड़ ने दक्षिण अफ्रीका की कप्तान लौरा वोल्वार्ट (18 रन) का विकेट झटका। सुने लुस ने 40 रन और तजमिन ब्रिट्स ने 30 रन का योगदान दिया। इन दोनों ने दूसरे विकेट के लिए 54 रन जोड़े लेकिन दीप्ति ने लुस को आउट कर इस भागीदारी का अंत किया।दीप्ति ने लुस के अलावा एनेरी डर्कसेन, कायला रेनेके, तुमी सेखुखुने और अयाबोंगा खाका के विकेट झटके। इससे पहले जेमिमा रोड्रिग्स 43 रन बनाकर भारत के लिए शीर्ष स्कोरर रहीं जबकि दीप्ति ने नाबाद 36 और विकेटकीपर बल्लेबाज रिचा घोष ने नाबाद 34 रन का योगदान दिया।दक्षिण अफ्रीका के लिए एलिज मारी मार्क्स और कायला रेनेके ने दो दो विकेट चटकाए। बल्लेबाजी का न्योता मिलने पर भारत की शुरुआत खराब रही और शेफाली वर्मा को एलिज मार्क्स ने आउट किया। वहीं स्मृति मंधाना की जगह टीम में शामिल हुईं अनुष्का शर्मा 23 रन बनाकर आउट हो गईं।पावरप्ले के खत्म होने तक भारत का स्कोर दो विकेट के नुकसान पर 47 रन था। कप्तान हरमनप्रीत कौर (22) और जेमिमा रोड्रिग्स (43) ने तीसरे विकेट के लिए छह ओवर से कुछ ज्यादा समय में 55 रन जोड़े।रोड्रिग्स ने विशेष रूप से प्रभावित किया, उन्होंने 11वें ओवर में स्पिनर नोंखु म्लाबा की गेंद पर 24 रन बटोरे जिसमें 4, 2, 6, 6, 2, 4 के क्रम में रन बने। इसमें गेंदबाज के सिर के ऊपर से सीधे लगाए गए लगातार दो छक्के देखने लायक थे।लेकिन जैसे ही भारत की पारी में कुछ तेजी आने लगी रोड्रिग्स ऑफ स्पिनर कायला रेनेके की गेंद पर स्वीप शॉट खेलने में नाकाम रहीं और आउट हो गईं। उन्हें 18 रन के स्कोर पर भी जीवनदान मिला था। हरमनप्रीत भी शानदार लय में दिख रही थीं। उन्होंने मार्क्स की गेंद पर एक छक्का और क्लो ट्रायोन की गेंद पर एक चौका जड़ा। लेकिन रेनेके की गेंद पर भारतीय कप्तान के बल्ले का बाहरी किनारा लगा और विकेट के पीछे खड़ी सिनालो जाफ्टा ने इसे लपक लिया। दीप्ति शर्मा (26 गेंद) और घोष (18 गेंद) ने छठे विकेट के लिए 65 रन जोड़े, लेकिन वे तेजी से रन बनाने में कामयाब नहीं हो पाईं।हालांकि आखिरी पांच ओवरों में इस जोड़ी ने 56 रन बनाकर अपनी टीम के गेंदबाज़ों को बचाव के लिए एक सम्मानजनक स्कोर दे दिया।
शनिवार को भवानीपुर में उस समय तनावपूर्ण स्थिति बन गई जब तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी और भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी की रैलियां महज 100 मीटर की दूरी पर आयोजित की गईं, जिससे दोनों दलों के समर्थकों के बीच झड़पें शुरू हो गईं। भवानीपुर को तृणमूल कांग्रेस प्रमुख का मजबूत गढ़ माना जाता है, जहां उन्होंने 2011 से अब तक तीन बार जीत दर्ज की है। #WATCH | Bhabanipur, West Bengal: TMC and BJP workers came face to face & raised slogans against each other near the venue of public meeting of Suvendu Adhikari, BJP candidate from Bhabanipur. Security personnel intervened and brought the situation under control. Suvendu Adhikari… pic.twitter.com/wO2fnmeYkt — ANI (@ANI) April 25, 2026 यह सीट 29 अप्रैल को होने वाले मतदान वाले 142 सीटों में शामिल है। पहले चरण में 23 अप्रैल को 152 सीटों पर मतदान हुआ था, जबकि मतगणना 4 मई को होगी। ALSO READ: वॉशिंगटन हिल्टन होटल फायरिंग पर भारत की प्रतिक्रिया, PM मोदी ने ट्रंप की सुरक्षा पर जताई चिंता, हमले की कड़ी निंदा हंगामे की शुरुआत तब हुई जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि पास में हो रही भाजपा की रैली में लगे लाउडस्पीकरों के कारण उनकी जनसभा बाधित की जा रही है, जहाँ सुवेंदु अधिकारी को संबोधित करना था। इस बाधा से नाराज़ होकर बनर्जी ने अपना भाषण अचानक समाप्त कर दिया और भीड़ से माफी मांगते हुए कार्यक्रम स्थल छोड़ दिया। ALSO READ: वॉशिंगटन हिल्टन होटल फायरिंग पर भारत की प्रतिक्रिया, PM मोदी ने ट्रंप की सुरक्षा पर जताई चिंता, हमले की कड़ी निंदा उनके जाने के बाद तृणमूल कांग्रेस के आक्रोशित कार्यकर्ता अधिकारी की रैली की ओर विरोध जताने के लिए बढ़े, जिसके बाद दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच नारेबाजी और तीखी झड़पें शुरू हो गईं। स्थिति बिगड़ते ही सुरक्षा बलों ने मौके पर पहुंचकर हालात को नियंत्रित किया और व्यवस्था बहाल की। ALSO READ: Raghav Chadha : राघव चड्ढा के BJP में जाने से Gen Z हुआ नाराज, घटे लाखों फॉलोअर्स, लोकप्रियता में क्यों आई गिरावट सुवेंदु अधिकारी, जो घटना के समय अभी रैली स्थल पर नहीं पहुंचे थे, ने ममता बनर्जी पर अव्यवस्था फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि भाजपा जिसे उन्होंने “गुंडा राज” कहा, उसका “मुंहतोड़ जवाब” देगी। भाजपा नेता अमित मालवीय ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए एक वीडियो साझा किया और आरोप लगाया कि बनर्जी अपनी पार्टी की संभावित हार के डर से अपना संयम खो बैठी हैं। Edited by: Sudhir Sharma
Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (26 अप्रैल, 2026)
1. मेष (Aries) Today Horoscope Rashifal 26 April 2026 करियर: कारोबार तथा जॉब में सहकर्मियों का सहयोग प्राप्त होगा। लव: प्रेम रिश्तों में मजबूती आएगी। धन: आर्थिक स्थिति सामान्य रहेगी। स्वास्थ्य: सिरदर्द की समस्या हो सकती है। उपाय: हनुमान जी को बूंदी का भोग लगाएं। ALSO READ: कैवल्य ज्ञान क्या है? जानें इसका सही अर्थ और इसे प्राप्त करने के प्रभावी तरीके 2. वृषभ (Taurus) करियर: व्यापार में विस्तार की योजना सफल होगी। लव: जीवनसाथी के साथ वैचारिक मतभेद हो सकते हैं। धन: रुका हुआ पैसा वापस मिलने के योग हैं। स्वास्थ्य: आज पेट खराब होने की समस्या हो सकती है। उपाय: छोटी कन्याओं को सफेद मिठाई खिलाएं। 3. मिथुन (Gemini) करियर: नए प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू करने के लिए समय अनुकूल है। लव: सिंगल लोगों को पार्टनर मिल सकता है। धन: अनावश्यक खर्चों पर नियंत्रण रखें। स्वास्थ्य: दिन भर ऊर्जावान महसूस करेंगे। उपाय: शनि चालीसा का पाठ करें। 4. कर्क (Cancer) करियर: कार्यक्षेत्र में अपने काम पर ध्यान केंद्रित करें। लव: लव मैरिज वाले घर में खुशी का माहौल होगा। धन: अचल संपत्ति खरीदने के योग बन रहे हैं। स्वास्थ्य: जोड़ों के दर्द से परेशानी हो सकती है। उपाय: गाय को हरा चारा खिलाएं। 5. सिंह (Leo) करियर: कार्यस्थल पर आपकी नेतृत्व क्षमता की सराहना होगी। लव: रिश्तों में नया उत्साह महसूस करेंगे। धन: पुराने कर्ज से मुक्ति मिल सकती है। स्वास्थ्य: मानसिक तनाव कम होगा, योग का सहारा लें। उपाय: मंदिर में इत्र का दान करें। 6. कन्या (Virgo) करियर: नौकरी में आय के नए स्रोत खुलेंगे। लव: पार्टनर के साथ पुरानी गलतफहमियां दूर होंगी। धन: धन निवेश में जल्दबाजी में नुकसान हो सकता है। स्वास्थ्य: थकान की शिकायत हो सकती है। उपाय: पक्षियों को अनाज डालें। ALSO READ: Mohini Ekadashi Katha 2026: मोहिनी एकादशी के रहस्य, जानें पौराणिक व्रत कथा और लाभ 7. तुला (Libra) करियर: नौकरी में बड़ा अवसर मिल सकता है। लव: दांपत्य जीवन सुखमय रहेगा। धन: विलासिता की वस्तुओं पर खर्च बढ़ सकता है। स्वास्थ्य: कमर दर्द की समस्या बढ़ सकती है। उपाय: शिवलिंग पर दूध और जल चढ़ाएं। 8. वृश्चिक (Scorpio) करियर: कार्यक्षेत्र में आपका दबदबा बढ़ेगा। लव: विवाद की स्थिति बन सकती है। धन: शेयर बाजार से लाभ होने की संभावना है। स्वास्थ्य: मौसमी बीमारियों से बचकर रहें। उपाय: माथे पर केसर का तिलक लगाएं। 9. धनु (Sagittarius) करियर: नई नौकरी का प्रस्ताव मिल सकता है। लव: लव लाइफ में रोमांच बना रहेगा। धन: अचानक धन लाभ होने से मन प्रसन्न रहेगा। स्वास्थ्य: घुटनों के दर्द में सावधानी बरतें। उपाय: चने की दाल का दान करें। 10. मकर (Capricorn) करियर: नौकरी लोगों के लिए दिन व्यस्त रहेगा। लव: पार्टनर के साथ भविष्य की योजनाएं बनाएंगे। धन: पुरानी उधारी वापस मिल सकती है। स्वास्थ्य: त्वचा संबंधी एलर्जी हो सकती है। उपाय: माथे पर हल्दी का तिलक लगाएं। 11. कुंभ (Aquarius) करियर: सामाजिक कार्यों में रुचि बढ़ेगी। लव: पुराने दोस्त से मुलाकात प्रेम संबंधों में बदल सकती है। धन: पैतृक संपत्ति से लाभ होने के प्रबल योग हैं। स्वास्थ्य: रात को हल्का भोजन करें। उपाय: काले कुत्ते को तेल लगी रोटी खिलाएं। 12. मीन (Pisces) करियर: रचनात्मक कार्यों में नाम और पैसा दोनों कमाएंगे। लव: जीवनसाथी के स्वास्थ्य की चिंता रह सकती है। धन: आज धन के लेन-देन में सावधानी बरतें। स्वास्थ्य: खुद को हाइड्रेटेड रखें और फल खाएं। उपाय: सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल दें। ALSO READ: मेष राशि में सूर्य का प्लूटो से स्क्वायर, क्या होगा 4 राशियों पर इसका प्रभाव
लोग मुझे मेरे नाम से कम, रं@#% कहकर ज्यादा बुलाते हैं। मुझे शुभ कामों से दूर रखा जाता है। गलती से पहुंच जाऊं तो लोगों का चेहरा उतर जाता है। मैं वीरेंद्र दून। हरियाणा के जिला हांसी के गांव पेटवाड़ का रहने वाला हूं। मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी कमी है कि 46 साल का होने के बावजूद मेरी शादी नहीं हुई। इसलिए लोग मुझे रं@#% रं@#% कहकर पुकारते हैं। गांव और रिश्तेदारी में शादी-ब्याह हो, तो लोग मुझे बुलाते तो जरूर हैं, लेकिन काम करवाने के लिए- कुर्सियां लगाने, पानी भरवाने, टेंट संभालने के लिए। घर में हवन हो तो कह दिया जाता है- तू यहां से हट जा, जोड़ा बैठेगा। इस व्यवहार की इतनी आदत हो चुकी है कि कोई इज्जत दे तो अजीब लगता है। मैं अकेला नहीं हूं। हरियाणा में बच्चियों को गर्भ में मारने की वजह से हजारों पुरुष हैं, जो कुंवारे रह गए हैं। शादी न होने से कई तो शराब में डूब गए, कइयों ने जान तक दे दी। ऐसे ही लोगों के बीच से निकला है हमारा एक संगठन- 'कुंवारे मर्दों की यूनियन’ दरअसल, मैं और मेरा दोस्त सीलू सांगवान साथ-साथ बड़े हुए। सीलू 45 साल का है और मैं 46 साल का। हम दोनों ने 12वीं तक पढ़ाई साथ की है। उस समय जिंदगी बहुत सीधी लगती थी। न कोई चिंता थी, न कोई सवाल। सोचते थे, बड़े होंगे, कमाएंगे और अपना घर बसाएंगे। हालांकि, किस्मत ने हमारे लिए कुछ और ही तय कर रखा था। जब शादी की उम्र हुई तो घर वालों ने कई जगह रिश्ते की बात चलाई, लेकिन हर बार कोई न कोई कमी निकाल दी जाती थी। सबसे बड़ी कमी यही बताई जाती थी कि मेरे पास जमीन कम है और कोई पक्की नौकरी भी नहीं है। धीरे-धीरे साल गुजरते गए। बहुत कोशिशों के बाद भी मेरी शादी नहीं हो पाई। मैं कुंवारा रह गया। जब 30 साल का हुआ, तब दिल्ली में पीएसओ यानी पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर की नौकरी मिली। सोचा था कि अब शायद शादी हो जाएगी, और अगर नहीं भी हुई तो कम से कम जिंदगी अच्छे से कट जाएगी। नौकरी करते एक साल भी नहीं बीता, मैं फिर बेरोजगार हो गया। वजह पता चली तो सन्न रह गया। मुझे अपशकुन माना गया, क्योंकि कुंवारा था। इसके बाद फरीदाबाद गया। जैसे-तैसे फिर नौकरी मिली। धीरे-धीरे वहां भी सभी को पता चल गया कि मेरी शादी नहीं हो रही है। लोग कहने लगे कि दूसरों की बहन-बेटियों पर गलत नजर डालेगा, इसलिए इसे हटा दो। आखिरकार यही वजह बताते हुए मुझे नौकरी से निकाल दिया गया। वे बातें मुझे अंदर तक चुभ गईं। कई रात तो मैं सो नहीं पाया। तब तक 38 साल का हो चुका था। शादी की कोशिशें तब तक भी चल रही थीं, लेकिन कहीं बात नहीं बनी। कई महीनों तक नौकरी के लिए भटकता रहा, आखिरकार गांव लौट आया। यहीं खेती करने लगा। फिर गांव में भी यही सब होने लगा। लोगों की नजरें, ताने और तरह-तरह की फुसफुसाहटें सुनने को मिलती। किसी बात पर चर्चा होती। अगर मैं कोई मशविरा देता, तो उसे सुना नहीं जाता। लोग बीच में ही रोक देते। कहते- ‘तू रं@#%है, तुझे क्या पता?’ यही नहीं अपने घर में भी तवज्जो नहीं मिलती थी। मेरे कहने पर कोई फसल बोई जाती और अच्छी हो जाती, तो उसका क्रेडिट बड़े भाई को दे दिया जाता। कोई भी शुभ काम होता तो मुझे दूर बैठाया जाता। मेरे ही घर में हवन होता तो कहा जाता- ‘दूर बैठ, तू यहां बैठेगा तो अशुभ हो जाएगा।’ हां, लेकिन आधी रात में खेत में पानी देना हो तो सबको मेरी याद आ जाती थी। उसमें भी ताने मारतेकि- ‘तेरे भाई की शादी हो चुकी है। अगर उसे मोटर चलाते समय करंट लग गया, सांप ने काट लिया या ठंड लग गई तो क्या होगा? उसके बच्चों का क्या होगा? तेरा क्या है, तू तो रं@#% है।’ यह सब सुनकर मैं अंदर से टूट जाता था। किसी की शादी-ब्याह में जाने से रोका जाता था। कहा जाता कि वहां जाओगे तो लोग क्या कहेंगे? अगर कुछ गलत हो गया, तो दोष तुम्हारे सिर मढ़ दिया जाएगा। मेरे लिए कभी भी नए कपड़े तक नहीं खरीदे गए। हमेशा भाई की उतरन पहननी पड़ती थी। घरवाले कहते थे- ‘तुम्हें कौन सा ससुराल जाना है?’ घर के बच्चे तक भाव नहीं देते थे। कभी भाई के बच्चों को डांट देता तो भाभी कहती- ‘तेरी तो शादी नहीं हुई, बच्चे नहीं हुए, इसलिए तुझे मेरे बच्चे देखे नहीं जाते।’ यहां तक कि छोटे बच्चों को मेरे पास नहीं आने दिया जाता। उनके मां-बाप कहते कि उसके पास मत जाओ, गलत बातें सिखाएगा। मुझे एक तरह से कौवा बना दिया गया था। जैसे किसी शुभ काम के समय कौवे को अपशकुन माना जाता है, वैसे ही मुझे माना जाता है। हरियाणा में कुछ अविवाहित पुरुष ऐसे भी हैं, जिन्हें अपने ही घर में रहने तक की जगह नहीं दी गई। उन्हें पशुओं के बाड़े के पास रहने को मजबूर किया गया। जहां पशु बंधे होते हैं, वहीं बगल में बिस्तर लगाना पड़ता है। कहा जाता है- जाकर जानवरों के पास रहो। घर में तुम्हारे छोटे भाई की बहू है, उसे घूंघट करना पड़ेगा। वैसे भी सुबह जल्दी उठकर तुम्हें पशुओं की ही देखभाल करनी है। मैं सुबह 4 बजे उठ जाता हूं। पशुओं को चारा देता हूं, दूध निकालता हूं और उन्हें जोड़ यानी तालाब पर नहलाने ले जाता हूं। रात को फिर यही काम करता हूं। इस तरह सुबह 4 बजे उठकर रात 11 बजे जाकर सो पाता हूं। हालांकि, चाहें तो हम दलालों के जरिए पैसे देकर शादी कर सकते हैं, लेकिन कई मामलों में ठगी सामने आई है। शादी के नाम पर धोखाधड़ी का खेल चल रहा है। कई गिरोह ऐसे हैं, जो हमसे डेढ़-दो लाख रुपए लेकर शादी करवाने का दावा करते हैं। मेरे भाई की शादी भी इसी तरह करवाई गई थी, लेकिन कुछ समय बाद उसकी पत्नी जेवर और सामान लेकर भाग गई। ऐसे ही मेरे एक दोस्त ने कोर्ट मैरिज के लिए एक वकील को डेढ़ लाख रुपए दिए। डेढ़ लाख से ज्यादा के जेवर भी बनवाए। शादी हुई, लेकिन कुछ ही दिनों बाद लड़की मायके जाने का बहाना बनाकर सब लेकर चली गई। अब मेरा दोस्त कर्ज उतार रहा है। लोग उसका मजाक उड़ाते हैं- वाह, बड़ा बन रहा था लुगाई लाने वाला, क्या हुआ? आ गई लुगाई? अब गांव की चौपाल पर उसका अक्सर मजाक बनाया जाता है। जब इस तरह शादी टूटती है या दुल्हन चली जाती है, तो लोग जिस तरह मजाक बनाते है, वह अलग ही दर्द देने वाला होता है। अब तो हम सिर्फ समय काट रहे हैं। खाली पड़े रहते हैं, तो कुछ लोग खेत या बाग में घास कटाई का काम दे देते हैं। बदले में कभी पैसा तो कभी शराब दे देते हैं। इतना ही नहीं, कुछ लोग गलत काम करते भी पकड़े गए। एक बार मैं एक गांव गया था, जहां कुछ लोग एक कुंवारे मर्द को पीट रहे थे। पता चला कि वह एक कुतिया के साथ रेप कर रहा था। मैंने लोगों को समझाकर उस आदमी को बचाया और उसे भी समझाया। बाद में हमारी यूनियन ने लोगों को जागरूक किया कि इससे बचें, क्योंकि इससे संक्रमण और गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। ऐसे ही कुछ कुंवारे मर्द एक-दूसरे के साथ सेक्स करते पकड़े गए, जिससे गांवों में विवाद और तनाव बढ़ता दिखा। इसके खिलाफ भी हमने जागरूकता अभियान चलाया। हमारी यूनियन कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ भी काम कर रही है, ताकि बेटियों को बराबरी का दर्जा मिले और राज्य में यह समस्या खत्म हो। हम लोगों का सबसे बड़ा दर्द अकेलापन है। शादीशुदा आदमी अपनी हर बात पत्नी से साझा कर लेता है, लेकिन हम किससे कहें? हम रातभर घुटते हैं, और सुबह फिर वही जिंदगी शुरू हो जाती है। अब तो मन मर चुका है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ रही है, मुझ पर दबाव डाला जा रहा है कि मैं अपने भाई के बच्चे को गोद ले लूं, ताकि मेरी संपत्ति उसे मिल जाए। लेकिन मैंने ऐसे कई मामले देखे हैं, जहां भाई के बच्चों को जायदाद मिलते ही वे धीरे-धीरे अविवाहित लोगों को किनारे कर देते हैं। यहां तक कि उन्हें खाना तक नहीं देते और बीमारी में इलाज भी नहीं कराते। मैंने कई ऐसे लोग देखे हैं, जिन्हें ठीक देखभाल मिलती तो वे ज्यादा जी सकते थे, लेकिन कम उम्र में ही चले गए। अब जाकर मेरे गांव और आसपास के कुंवारे पुरुष जुटे और विचार किया कि इस समस्या का हल कैसे निकाला जाए। हम कब तक समाज की नजरों में चुभते रहेंगे? बातचीत के बाद हमने फैसला किया कि एक एसोसिएशन बनाई जाए- ‘समस्त अविवाहित पुरुष समाज एंड एकीकृत रं@#%यूनियन’। तय किया गया कि अब हम इसके जरिए अपने हक की आवाज उठाएंगे। हमारी यूनियन ने राज्य में प्रदर्शन कर सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाई। सरकार ने ध्यान दिया और अब हमें 3200 रुपए पेंशन मिल रही है। हालांकि, कई अविवाहित पुरुषों की फैमिली आईडी नहीं बन पाई है, इसलिए उन्हें पेंशन नहीं मिल रही। आखिर जिनका परिवारिक रिकॉर्ड ही नहीं है, वे फैमिली आईडी कहां से लाएं? हमारी यूनियन में लगभग साढ़े पांच लाख लोग हैं, जिनमें से 80 हजार को ही पेंशन मिल रही है। मेरे दोस्त सीलू सांगवान के माता-पिता नहीं हैं। इसलिए उनकी फैमिली आईडी नहीं बन पाई, जिससे उन्हें पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा। आखिर में सरकार से बस एक ही मांग है- हमें शक की नजर से न देखा जाए। हम भी इंसान हैं। हमें सम्मान के साथ जीने का हक मिले। (वीरेंद्र दून ने अपने ये जज्बात भास्कर रिपोर्टर मनीषा भल्ला से साझा किए) ---------------------------------- 1- संडे जज्बात-मैंने 20 अपनों को गोली मारी:अपनों पर गोली चलाना आसान नहीं था, लेकिन बम-धमाके में साथियों की मौत ने मुझे झकझोर दिया था मैं शरतचंद्र बुरुदा हूं, ओडिशा के मलकानगिरी जिले के सरपल्ली गांव का रहने वाला। एक रिटायर्ड पुलिस अधिकारी हूं। 1990 के दशक के आखिर में जब मैंने पुलिस की नौकरी जॉइन की, तब ओडिशा के दंडकारण्य इलाके में नक्सलवाद अपने चरम पर था। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें 2- संडे जज्बात-उन्होंने हेलिकॉप्टर से लाश भेजी, हम ट्रेनें भर देंगे:दिल्ली वालों ने पीट-पीटकर मार डाला मेरा बेटा, क्योंकि हमारी शक्ल अलग है मैं अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर की रहने वाली मरीना नीडो हूं- नीडो तानिया की मां, जिसे दिल्ली में भीड़ ने पीट-पीटकर मार दिया। अगर ऐसी नफरत बढ़ती रही, तो किसी दिन हालात खतरनाक हो सकते हैं। हम बस इतना चाहते हैं कि- आप हमें समझिए। हम अलग दिखते हैं, लेकिन अलग नहीं हैं। हम भी इसी देश के हैं। मेरे बेटे को सिर्फ इसलिए मार दिया गया, क्योंकि उसका चेहरा आपसे अलग था। पूरी स्टोरी यहां पढ़ें
26 अप्रैल 1986 यानी आज से ठीक 40 साल पहले। तब के सोवियत रूस का हिस्सा रहे यूक्रेन का प्रिपयत शहर। रात के 1 बजकर 28 मिनट पर 25 साल के फायरफाइटर वसिली इग्नातेंको की नींद एक फोन से टूटी। आवाज आई- कहीं आग लगी है, तुरंत आओ। वसिली उठे। वर्दी पहनी। जाते-जाते पत्नी ल्युडमिला से बस इतना कहा- ‘घबराओ मत। जल्द लौटूंगा।’ ल्युडमिला नहीं जानती थी कि ये उनके पति के आखिरी शब्द हैं। वसिली कभी वापस नहीं आए। क्योंकि जिस ‘आग’ को बुझाने वे गए थे, वो कोई साधारण आग नहीं थी। वो चेर्नोबिल न्यूक्लियर पावर प्लांट के रिएक्टर-4 की आग थी, वो दुनिया की सबसे बड़ी परमाणु त्रासदी बन गई। 1980 का दशक। अमेरिका और सोवियत रूस के बीच कोल्ड वार अपने चरम पर थी। दोनों देश एक-दूसरे को दिखाना चाहते थे कि हम ताकतवर हैं, हम आधुनिक हैं। इसी होड़ में सोवियत रूस ने यूक्रेन के एक छोटे से कस्बे चेर्नोबिल के पास एक विशाल न्यूक्लियर पावर प्लांट बनाया। 1983 में तैयार हुआ ये प्लांट यूक्रेन की राजधानी कीव से 130 किलोमीटर दूर था और वहां की 10% बिजली अकेले यही प्लांट देता था। प्लांट से महज 3 किलोमीटर दूर था प्रिपयत। एक खूबसूरत, आधुनिक शहर, जहां 50 हजार लोग रहते थे। ज्यादातर प्लांट के ही कर्मचारी और उनके परिवार। कहानी में आगे बढ़ने से पहले सीधे शब्दों में जान लेते हैं कि ये RBMK रिएक्टर प्लांट काम कैसे करता था- यूरेनियम की छड़ें को गर्म करो, उससे पानी गर्म होगा, भाप बनेगी, भाप से टर्बाइन घुमेगा और बिजली तैयार। 25 अप्रैल, 1986 को चेर्नोबिल प्लांट के रिएक्टर-4 में पानी के पंप को लेकर एक रूटीन टेस्ट किया जाना था। इसका मकसद ये देखना था कि अगर रिएक्टर एनर्जी जेनरेट करना बंद कर दे, तो बची हुई बिजली से वॉटर पंप्स, बैकअप जेनरेटर चालू होने तक रिएक्टर को ठंडा रख पाते हैं या नहीं। बिजली की मांग बढ़ने से टेस्ट सुबह नहीं हो सका, तो नाइट शिफ्ट को जिम्मेदारी दी गई। रिएक्टर कंट्रोल इंजीनियर लियोनिद टॉपटुनोव और नाइट शिफ्ट सुपरवाइजर अलेक्सांद्र अकिमोव टेस्ट कंडक्ट कर रहे थे। डिप्टी चीफ इंजीनियर अनातोली डायटलोव इसकी निगरानी कर रहे थे। यहां पेच ये था कि टॉपटुनोव, जिनके पास टेस्ट की जिम्मेदारी थी, वे 25 साल के थे और उनके पास महज 3 महीने का अनुभव था। रात 11 बजकर 10 मिनटः रिएक्टर 1 हजार मेगावॉट (MW) कैपिसिटी पर काम कर रहा था। टेस्ट 700 MW पर किया जाना था। कंट्रोल रॉड्स अंदर डालकर पावर घटाई गई, जिससे रिएक्शन धीमी हो सके। रात 12 बजकर 28 मिनटः अचानक पावर 700 के बजाय 30 MW तक गिर गई। इसे ऊपर लाने के लिए कुछ कंट्रोल रॉड्स बाहर निकाली गईं। रात 1 बजेः पावर नहीं बढ़ी, तो सुपरवाइजर ने और कंट्रोल रॉड्स निकालने को कहा। इंजीनियर टॉपटुनोव ने मना करते हुए कहा कि कम से कम 15 कंट्रोल रॉड्स रिएक्टर में होनी ही चाहिए। रात 1 बजकर 5 मिनटः डिप्टी चीफ इंजीनियर ने सस्पेंड करने की धमकी दी। टॉपटुनोव ने और रॉड्स निकालीं। अब रिएक्टर में महज 8 रॉड्स थीं, जो सेफ्टी प्रोटोकॉल के खिलाफ था। रात 1 बजकर 23 मिनटः 203 कंट्रोल रॉड्स बाहर होने से रिएक्टर कैपिसिटी एकदम से बढ़कर 2,600 MW तक पहुंच गई। रिएक्टर भट्टी की तरह तपने लगा। जेनरेटर चालू होकर पूरी क्षमता तक पहुंच पाता, उसके पहले ही अंदर मौजूद पानी जिसका काम रिएक्टर ठंडा करना था, भाप बनकर उड़ गया। इससे तापमान और बढ़ गया। रात 1 बजकर 25 मिनटः सुपरवाइजर अकिमोव ने स्थिति हाथ से निकलती देख इमरजेंसी शटडाउन बटन (AZ-5) दबाया, जिससे सारी कंट्रोल रॉड्स एक साथ अंदर चली गई। कंट्रोल रॉड्स के अंदर जाते ही रिएक्शन कंट्रोल हो जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। RBMK रिएक्टर में एक बड़ा ‘डिजाइन फ्लॉ’ था। कंट्रोल रॉड्स की टिप ग्रेफाइट की बनी थी, जिसने रिएक्शन को कई गुना बढ़ा दिया। रिएक्टर में 2 भयानक विस्फोट हुए, जिससे ऊपर लगी 1 हजार टन की कवर प्लेट उड़़ गई। बाहर खड़े लोगों ने नीली रोशनी की एक लकीर आसमान की तरफ जाती हुई देखी। कुछ ने सोचा रंग-बिरंगी आतिशबाजी है। वे नहीं जानते थे कि वो रोशनी जानलेवा रेडिएशन की थी। फायर फाइटर वसिली इग्नातेंको अपने 20 साथियों के साथ प्लांट पहुंचे। उन्हें बताया गया था कि एक फैक्ट्री में आग है। उनके पास न कोई सुरक्षा उपकरण थे और न ही रेडिएशन मापने का कोई यंत्र। प्लांट की छत पर जो ग्रेफाइट के जले-पिघले टुकड़े बिखरे थे, वसिली के साथियों ने उन्हें हाथ से उठाकर फेंका। उन्हें क्या पता था कि वो टुकड़े इतने रेडियोएक्टिव थे कि कुछ ही मिनटों में किसी की जान ले सकते थे। कुछ ही देर में फायरफाइटर्स को उल्टियां होने लगीं। त्वचा लाल पड़ गई। आंखें जलने लगीं। एक-एक करके वे बेहोश होकर गिरने लगे। इलाज के दौरान कई फायरफाइटर्स के शरीर अंदर से टूटने लगे थे। उनकी त्वचा जलकर उतर रही थी और मांस के लोथड़े तक गिरने लगे थे। वसिली और उनके 20 साथियों ने आने वाले हफ्तों में दम तोड़ दिया। पत्नी ल्युडमिला बाद में याद करती हैं- ‘अस्पताल में वसिली को शीशे के पीछे रखा गया था। मैं उन्हें छू भी नहीं सकती थी। जब भी मिलती, नर्स चिल्लाती- दूर रहो, ये रेडियोएक्टिव हैं। मैंने कहा- मुझे परवाह नहीं।’ सोवियत यूनियन ने घटना से निपटने के लिए तुरंत एक हाई लेवल टीम बनाई, जिसकी कमान डिप्टी प्राइम मिनिस्टर बॉरिस शरबीना को सौंपी। टीम में कुर्चाटोव इस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर रिसर्च के प्रोफेसर वेलेरी लेगासोव को एक्सपर्ट के रूप में जोड़ा गया। जब वेलेरी मौके पर पहुंचे, तो उन्हें प्लांट का सेंसर 3.6 रॉन्टगेन का रेडिएशन दिखा रहा था। जो खतरनाक जरूर था, लेकिन तुरंत जानलेवा नहीं। लेगासोव को शक हुआ। नई मशीन मंगवाई। असली आंकड़ा था- 15,000 रॉन्टगेन। यानी 4000 गुना ज्यादा। 500 रॉन्टगेन के रेडिएशन में एक मिनट में जान जा सकती है। यहां 15,000 था। इसे ऐसे समझिए कि उस रात चेर्नोबिल से जितना रेडिएशन हवा में फैला, उसकी तुलना हिरोशिमा पर हर घंटे दो एटम बम गिराए जाने से की जाती है। लेगासोव ने डिप्टी प्राइम मिनिस्टर बॉरिस शरबीना से कहा- ‘प्रिपयत शहर तुरंत खाली कराओ। 50 हजार लोगों की जान खतरे में है।’ बॉरिस ने मना कर दिया। उनकी चिंता थी कि खबर फैली तो पूरी दुनिया में सोवियत रूस की बदनामी होगी। इस बीच प्रिपयत के हॉस्पिटल नंबर-126 में भयावह दृश्य था। हर घंटे सैकड़ों लोग आ रहे थे। जलन, उल्टी, बेहोशी के साथ। हॉस्पिटल भर गया। गेट लगाया गया। कई लोगों ने बाहर ही दम तोड़ दिया। हादसे में बचे एक चश्मदीद अलेक्सांद्र युवचेंको बताते हैं- कुछ लोग अपने छोटे बच्चों को नर्सों की गोद में सौंप रहे थे। उन्हें पता था वे नहीं बचेंगे। बस चाहते थे कि बच्चा बच जाए। 27 अप्रैल की सुबह हालात और बिगड़ने पर बॉरिस राजी हुए। 47 हजार से ज्यादा लोगों को 1000 बसों में भरकर शहर से निकाला गया। कहा गया 3 दिन में वापस आ जाओगे। वे लोग कभी वापस नहीं आए। चेर्नोबिल प्लांट में लगी आग बुझाना मुश्किल हो रहा था। रिएक्टर खुला था और उसमें मौजूद ग्रैफाइट के ब्लॉक्स जल रहे थे। जब फायरब्रिगेड से बात नहीं बनी, तो हेलिकॉप्टर की मदद से प्लांट पर लगभग 5 हजार टन बोरॉन पार्टिकल, रेत और मिट्टी बरसाए गए। आग बुझाने में 10 दिन लगे, लेकिन खतरा अभी टला नहीं था। प्लांट के नीचे भारी मात्रा में पानी मौजूद था। वेलेरी को डर था कि अगर पिघला हुआ यूरेनियम उससे टकराया, तो पानी तेजी से भाप बन जाएगा, जिससे बड़ा विस्फोट हो सकता है। तब तीन कर्मचारी आगे आए। उन्होंने रिएक्टर के नीचे मौजूद रेडियोएक्टिव मटेरियल से भरे हिस्से में गए और वाल्व खोलकर पानी निकाला। सोवियत संघ ने सैकड़ों माइनर्स की मदद से रिएक्टर के नीचे सुरंग खोदकर नीचे एक कॉन्क्रीट बेस तैयार करवाया, जिससे यूरेनियम धरती में जाकर मिट्टी की उर्वरता और पास मौजूद प्रिपयत नदी के पानी को दूषित न कर पाए। माइनर्स ने रेडिएशन के बीच दिन-रात काम किया, कई लोग गर्मी के कारण कम कपड़ों में काम करते थे। इस वजह से वे रेडिएशन के डायरेक्ट कॉन्टैक्ट में आए और रेडिएशन से जुड़ी बीमारियों के शिकार हुए। UN के मुताबिक, चेर्नोबिल से निकला रेडिएशन हिरोशिमा में गिराए परमाणु बम से 400 गुना ज्यादा था। अगले 4 सालों में 5000 से ज्यादा लोग थायरॉइड कैंसर से मरे। ग्रीनपीस जैसी संस्थाएं मानती हैं कि सोवियत रूस ने आंकड़े छुपाए और असली संख्या 93 हजार से 2 लाख के बीच हो सकती है। प्लांट के आस-पास 30 किलोमीटर का इलाका आज भी ‘एक्सक्लूजन जोन’ है। यहां न रहना मुमकिन है, न खेती। हादसे के 206 दिन बाद रिएक्टर के ऊपर कंक्रीट का एक ढांचा बनाया गया। साल 2019 में उसके ऊपर 1.6 अरब डॉलर की लागत से एक विशाल स्टील डोम बनाया गया जो 100 साल तक रेडिएशन रोकने के लिए डिजाइन किया गया है। उस डोम के अंदर आज भी 4 टन जानलेवा रेडियोएक्टिव पदार्थ बंद है। प्रोफेसर वेलेरी लेगासोव ने पूरी दुनिया को चेर्नोबिल की सच्चाई बताई। 1986 में वियना में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के सामने RBMK रिएक्टर की डिजाइन खामियां उजागर कीं। सोवियत सरकार नाराज हो गई। लेगासोव ने एक के बाद एक टेप रिकॉर्ड करके सच दुनिया के सामने रखा- कैसे सुरक्षा को नजरअंदाज किया गया, कैसे अफसरों ने जानबूझकर खतरे को छुपाया। उनकी रिकॉर्ड की हुई ‘लेगासोव टेप्स’ सोवियत संघ के पतन के बाद सार्वजनिक हुईं। कहा जाता है कि इन टेपों ने सोवियत सरकार की विश्वसनीयता को ऐसा धक्का दिया जो देश के टूटने में अहम कारण बना। डायटलोव समेत तीन मुख्य आरोपियों को 10-10 साल की सजा सुनाई गई। हादसे के बाद प्रिपयत शहर हमेशा के लिए वीरान हो गया। बच्चों के खिलौने, परिवारों की तस्वीरें, खाने की अधूरी थालियां, सब जहां थे, वहीं पड़े रहे। आज भी उस शहर की इमारतों में पेड़ उग आए हैं। सड़कों में दरारें पड़ गई हैं। लेकिन कोई इंसान वहां नहीं रहता।***ये स्टोरी दैनिक भास्कर में फेलोशिप कर रहे प्रथमेश व्यास ने लिखी है। *** References and Further Readings:- -------------------- ये खबर भी पढ़िए… जब 3 हजार चीनी सैनिकों से भिड़ गए 120 बहादुर:एक इंच पीछे नहीं हटे, पोजिशन पर जमी लाशें मिलीं; रेजांग-ला की लड़ाई भारत और चीन के बीच जंग जारी थी। लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल यानी LAC के नजदीक लद्दाख के रेजांग ला में 13 कुमाऊं बटालियन की चार्ली कंपनी तैनात थी। माइनस 30 डिग्री की तूफानी हवाओं से बचने के लिए जवानों के पास ढंग के स्वेटर और दस्ताने तक नहीं थे। पत्थरों से बने बिना छत वाले बंकर, जरूरत से आधी ऑक्सीजन के साथ इस चौकी पर जिंदा रहना भी किसी जंग से कम नहीं था। पढ़ें पूरी खबर…
शाम के करीब 6 बजे हैं। कोलकाता के न्यू टाउन में टीन की छत वाला छोटा सा क्लब खुल चुका है। अंदर चार बुजुर्ग कैरम और बाहर कुछ लड़के फुटबॉल खेल रहे हैं। पहली नजर में यह किसी मोहल्ले का नॉर्मल क्लब लगता है, लेकिन ऐसा है नहीं। एक बॉक्स में शराब की बोतलें रखी हैं। दीवारों पर ममता बनर्जी की फोटो और TMC के पोस्टर लगे हैं। ये क्लब कम और TMC का ऑफिस ज्यादा दिखता है। पश्चिम बंगाल में इन्हें पाड़ा क्लब कहते हैं। पाड़ा यानी मोहल्ला। बंगाल में 23 अप्रैल को पहले फेज की वोटिंग में रिकॉर्ड 93% वोटिंग हुई। 29 अप्रैल को दूसरे फेज की वोटिंग होगी। हर मोहल्ले में बने क्लब TMC के प्रचार में जुटे हैं। बंगाल की राजनीति समझने के लिए इन्हें समझना जरूरी है। ममता सरकार ने 2025 में हर रजिस्टर्ड क्लब को 1.1 लाख रुपए दिए थे। 2018 में ये रकम सिर्फ 10 हजार थी, यानी 8 साल में सरकारी मदद 10 गुना बढ़ी है। अब तक सरकार क्लबों को 3,500 से 5,000 करोड़ रुपए दे चुकी है। 2025 में इन पर 495 करोड़ खर्च किए। ये 386 करोड़ रुपए लागत वाले भारत के पहले चंद्रयान प्रोजेक्ट से करीब 109 करोड़ रुपए ज्यादा है। बदले में क्लब मेंबर TMC के कैडर की तरह काम करते हैं। चुनाव के वक्त पोस्टर, रैली, वोटर लाने ले जाने में मदद करते हैं। क्लब नेटवर्क जहां मजबूत होता है, वहां दूसरी पार्टी का संगठन कमजोर रहता है। ‘क्लब और पार्टी ऑफिस में फर्क खत्म, सभी क्लब TMC से जुड़े, विधायकों से मदद’ न्यू टाउन में रहने वाले तपस मंडल कहते हैं, ‘अब क्लब और पॉलिटिकल पार्टियों के ऑफिस में खास फर्क नहीं रह गया है। सभी लोकल क्लब TMC से जुड़े हैं। इनके मेंबर पार्टी की एक्टिविटी में शामिल होते हैं। विधायक और सरकार क्लबों को टीवी, खेल का सामान और दुर्गा पूजा के लिए मदद देते हैं। 2011 से पश्चिम बंगाल सरकार स्पोर्ट्स क्लब और पाड़ा क्लबों को अलग-अलग योजनाओं के जरिए पैसे दे रही है।’ सरकारी रिकॉर्ड में अलग-अलग तरह के क्लब दर्ज हैं। सिर्फ दुर्गा पूजा कराने वाले क्लब ही करीब 45 हजार हैं। इनके अलावा पाड़ा क्लब, स्पोर्ट्स क्लब और यूथ क्लब हैं। सब मिलाकर ये करीब 1 लाख तक पहुंच जाते है। कई जगह एक पाड़ा में 4 से 5 क्लब है। सबसे ज्यादा पैसा दुर्गा पूजा ग्रांट के तौर पर मिलता है। 31 जुलाई, 2025 को रजिस्टर्ड क्लबों को सरकार ने 495 करोड़ रुपए बांटे। इसके अलावा हर साल सभी छोटे-बडे़ रजिस्टर्ड क्लबों को सरकार से 2 लाख रुपए मिलते है। बिजली के बिल में 80% छूट, फायर लाइसेंस, सरकारी फीस में छूट भी इसमें शामिल है। साल भर क्लबों को लोकल विधायक, नगरपालिका फंड, स्पोर्ट्स टूर्नामेंट, सांस्कृतिक कार्यक्रम, क्लब बिल्डिंग की मरम्मत, सरकारी कैंप जैसे- ‘दुआरे सरकार’ के लिए पैसे मिलते है। पहला क्लब अंग्रेजों ने खोला, आजादी के बाद हर मोहल्ले में खुले, युवाओं का अड्डा बने 20वीं सदी की शुरुआत में क्लब मोहल्लों में लोगों के जुटने की जगह होते थे। लोग यहां नाटक करते, फुटबॉल खेलते और साथ त्योहार मनाते थे। शोवाबाजार राजबाड़ी 1885 में खुला पहला भारतीय क्लब था। इससे पहले अंग्रेजों ने 1827 में बंगाल क्लब बनाया था। रविन्द्रनाथ टैगोर का मानना था कि मजबूत देश की शुरुआत सरकार से नहीं, बल्कि मोहल्ले और समाज से होती है। वे ऐसे क्लबों को लोगों को जोड़ने और समाज को मजबूत बनाने का जरिया मानते थे। 1950 से 1970 के बीच हर मोहल्ले में क्लब बनने लगे। ये युवाओं के मिलने-जुलने की जगह बन गए। 1970 के बाद राजनीति की एंट्री हुई। नेताओं ने क्लबों के जरिए लोगों तक पहुंचना शुरू किया। धीरे-धीरे चुनाव के समय पोस्टर लगाना, रैली और प्रचार करना क्लबों से ही होने लगा। 1977 से 2011 तक लेफ्ट की सरकार में क्लब समाज और राजनीति का हिस्सा बने रहे। हालांकि तब उन्हें सीधे पैसे कम मिलते थे। रवींद्र भारती यूनिवर्सिटी में पॉलिटिकल साइंस के प्रोफेसर बिस्वनाथ चक्रवर्ती कहते हैं, ‘2011 में सरकार बदलने के बाद पाड़ा क्लबों की भूमिका काफी बदल गई। पहले ये राजनीति से दूर और तटस्थ हुआ करते थे। धीरे-धीरे इन्हें राजनीति से जोड़ा जाने लगा। क्लबों के प्रेसिडेंट और सेक्रेटरी के पद पर लोकल नेताओं की भूमिका बढ़ने लगी। इससे क्लब की आजादी कम हुई। उनका इस्तेमाल राजनीतिक कामों में ज्यादा होने लगा।’ कोलकाता की बसंती कॉलोनी में रहने वाले स्वपन बैद्य क्लब में बच्चों को पढ़ाते हैं। वे कहते हैं, ‘हम TMC के सपोर्टर हैं। हमारे इलाके में सात-आठ क्लब हैं। यहां 24 घंटे पानी और बिजली आती है, अच्छी सड़क है। 260 परिवारों को फ्री में फ्लैट मिले हैं।’ ममता सरकार ने पहली बार पैसे देने शुरू किए, क्लब पॉलिटिकल हो गए 2011 में लेफ्ट की सरकार चली गई। ममता मुख्यमंत्री बनीं। TMC ने इन क्लबों के असर को जल्दी ही भांप लिया। उसने पाड़ा क्लबों का इस्तेमाल लोकल नेटवर्क बनाने और चुनावों से पहले जनता का मूड समझने के लिए किया। राज्य सरकार ने पहली बार क्लबों को नकद पैसे देना शुरू किया। सरकार ने कहा कि इसका मकसद सोशल, कल्चरल और स्पोर्ट्स एक्टिविटी को बढ़ावा देना है। हालांकि इससे क्लबों और सरकार चला रही पार्टी के बीच सीधा संबंध मजबूत हुआ। कोलकाता में रहने वाले सुदर्शन मिश्रा अक्सर लोकल क्लब जाते हैं। क्लब का नाम केष्टोपुर है। सुदर्शन कहते हैं, ‘क्लब के बारे में बहुत कुछ जानकर भी कुछ नहीं कह सकता। बगल में रहकर उनके खिलाफ कैसे बोलूं। जिसे जहां अपना स्वार्थ लगता है, वहां काम करता है। यहां सब लोग साथ रहते हैं, इसलिए कुछ कहने से डर लगता है।’ BJP का दावा: हर साल चंद्रयान प्रोजेक्ट के बराबर पैसे क्लबों को दे रहीं ममता कोलकाता नगर निगम में BJP पार्षद सजल घोष किशोरी संघ क्लब चलाते है। वे आरोप लगाते है, ‘ममता सरकार खेल और समाजसेवा के नाम पर क्लबों को राजनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है। केंद्र सरकार ने लगभग 615 करोड़ रुपए में चंद्रयान-3 मिशन पूरा कर रही है, वहीं बंगाल सरकार हर साल करीब 500 करोड़ रुपए क्लबों पर खर्च करती है।’ सजल घोष का दावा है कि क्लबों को मिलने वाले अनुदान के लिए स्थानीय विधायक के साइन जरूरी होते हैं। इससे पॉलिटिकल कंट्रोल बना रहता है। हर क्लब सरकार पर निर्भर रहता है। हालांकि, हम सरकार से पैसे नहीं लेते। जरूरत पड़ने पर मेंबर खुद पैसे जुटाकर लोगों की मदद करते हैं। एक्सपर्ट बोले- स्कूल बंद, डॉक्टरों की कमी, लेकिन क्लब को फंड मिल रहा प्रोफेसर बिस्वनाथ चक्रवर्ती क्लबों को मिल रहे फंड पर सवाल उठाते हैं। वे कहते हैं, ‘स्कूल और स्वास्थ्य सेवाओं की हालत खराब है। करीब 8,200 प्राइमरी स्कूल बंद हो गए हैं। हॉस्पिटलों में डॉक्टरों की कमी है। यूनिवर्सिटी में टीचर कम हैं। करीब 6 लाख सरकारी पद खाली पड़े हैं, लेकिन क्लबों को फंड मिल रहा है।' बंगाल में 85 हजार पोलिंग बूथ, इनसे ज्यादा क्लब, चुनाव पर भी असर पश्चिम बंगाल में एक लाख से ज्यादा क्लब एक्टिव हैं। राज्य में करीब 85 हजार पोलिंग बूथ हैं। कई जगह एक बूथ पर दो क्लब हैं। यही वजह है कि चुनाव में इनका असर बहुत बड़ा हो जाता है। लोग मानते हैं कि क्लब अब भी उनके मोहल्ले की पहचान हैं। एक बात लगभग हर कोई मानता है, बंगाल में चुनाव बूथ पर नहीं, पाड़ा क्लब में तय होते हैं। ………………… पश्चिम बंगाल चुनाव पर ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ें… 1. आरजी कर रेप-मर्डर केस की पीड़ित की मां BJP कैंडिडेट, सभा में कुर्सियां खाली पानीहाटी सीट से आरजीकर रेप केस की पीड़ित की मां रतना देबनाथ BJP के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं। 12 अप्रैल को सभा करने गईं तो कुर्सियां खाली पड़ी थीं। रतना देबनाथ अपने चुनाव लड़ने को बेटी को इंसाफ दिलाने की लड़ाई बता रही हैं। महिलाएं उनकी सभा के सामने से गुजरते हुए रुकती हैं। पूछने पर कहती हैं, ‘हम साथ हैं, लेकिन दिखा नहीं सकते। TMC वाले घूम रहे हैं। साथ देख लिया, तो मुश्किल होगी।’ पढ़िए पूरी खबर… 2. हिंदू बाप-बेटे को काट डाला, बंगाल में चुनावी मुद्दा नहीं 11 अप्रैल 2025 को वक्फ संशोधन कानून के विरोध में मुर्शिदाबाद के जाफराबाद में रैली निकाली गई। बेकाबू भीड़ ने पारुल के पति हरगोविंद दास और बेटे चंदन को घर के सामने ही काट डाला। जाफराबाद में लोग इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बता रहे हैं और TMC को हटाने की बात कर रहे हैं, जबकि यहां से 142 किमी दूर मालदा में इसकी चर्चा भी नहीं है। पढ़ें पूरी खबर...
श्री राजराजेश्वरी महालक्ष्मी यज्ञ : महा आरती में उमड़ा जनसैलाब
अजमेर। पुष्कर घाटी स्थित श्री नौसर माता मंदिर में आयोजित श्री राजराजेश्वरी महालक्ष्मी यज्ञ के अंतर्गत शनिवार को महा आरती में भक्तों का जनसैलाब उमड़ा पड़ा। दिनभर जयकारों और मंत्रोच्चार की गूंज सुनाई दी। यज्ञ सम्राट श्रीश्री 1008 महामंडलेश्वर प्रखर जी महाराज ने भी पधार कर आशीर्वाद दिया। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने विधिवत पूजा […] The post श्री राजराजेश्वरी महालक्ष्मी यज्ञ : महा आरती में उमड़ा जनसैलाब appeared first on Sabguru News .
गुजरात के खिलाफ संजू सैमसन पर अति आत्मनिर्भर होने से बचना चाहेगी चेन्नई
अलग-अलग ताकतों पर आधारित एक महा मुकाबला होने वाला है, जब चेन्नई सुपर किंग्स रविवारको एमए चिदंबरम स्टेडियम में इंडियन प्रीमियर लीग 2026 में गुजरात टाइटन्स से भिड़ेगी; इस मैच का नतीजा शायद इन-फॉर्म खिलाड़ियों और टीम के संतुलन से तय होगा। चेन्नई सुपर किंग्स इस मुकाबले में सीजन की खराब शुरुआत के बाद ज़ोरदार वापसी करके उतर रही है। इस बदलाव के केंद्र में संजू सैमसन रहे हैं, जिनके कप्तान रुतुराज गायकवाड़ के साथ ओपनिंग करने की उम्मीद है। सैमसन के आक्रामक स्ट्रोकप्ले ने सीएसके को टॉप ऑर्डर में गति दी है, जबकि गायकवाड़ अब तक भले ही औसत प्रदर्शन कर रहे हों, फिर भी पारी को संभाले हुए हैं। मध्य क्रम, जिसमें सरफराज खान, डेवाल्ड ब्रेविस और शिवम दुबे शामिल हैं, स्थिरता और ताकत का मिश्रण पेश करता है; जरूरत पड़ने पर हर कोई रन बनाने की गति बढ़ा सकता है। एमएस धोनी के संभावित शामिल होने से अनुभव और मैच खत्म करने की ताकत जुड़ती है, जबकि कार्तिक शर्मा विकेटकीपिंग के लिए एक वैकल्पिक विकल्प बने हुए हैं। ऑल-राउंड गहराई को जेमी ओवर्टन ने और मजबूत किया है, जिनकी दोहरी भूमिका टीम की लाइनअप में लचीलापन लाती है। गेंदबाज़ी यूनिट में नूर अहमद की स्पिन, अंशुल कंबोज की निरंतरता और गुरजपनीत सिंह व मुकेश चौधरी के तेज़ गेंदबाज़ी के विकल्प शामिल हैं। अकील हुसैन से एक ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ के तौर पर अहम भूमिका निभाने की उम्मीद है, खासकर ऐसी पिच पर जो स्पिन गेंदबाज़ों के लिए मददगार हो; वहीं, हाल ही में चोट के कारण हुए बदलावों के बाद आकाश मधवाल टीम को और गहराई देते हैं। दूसरी ओर, गुजरात टाइटन्स अपने ज़बरदस्त टॉप ऑर्डर पर बहुत ज़्यादा निर्भर है, जिसमें साई सुदर्शन, कप्तान शुभमन गिल और जोस बटलर शामिल हैं। इस तिकड़ी ने इस सीजन में टीम के लिए सबसे ज़्यादा रन बनाए हैं; सुदर्शन ने हाल ही में एक शतक जड़ा है, जबकि गिल टीम के लिए सबसे ज़्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं। बटलर की मौजूदगी टीम में विस्फोटक क्षमता जोड़ती है, हालांकि उनकी निरंतरता में कमी अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है। ग्लेन फिलिप्स मध्य क्रम में अतिरिक्त आक्रामक क्षमता प्रदान करते हैं, जिन्हें वॉशिंगटन सुंदर और शाहरुख खान का साथ मिलता है; हालांकि, इन दोनों का योगदान अब तक अनियमित रहा है। राहुल तेवतिया के एक ‘इम्पैक्ट प्लेयर’ के तौर पर खेलने की उम्मीद है, जो मैच खत्म करने की क्षमता और रणनीतिक लचीलापन टीम में लाएंगे। टाइटन्स का गेंदबाज़ी आक्रमण उनकी सबसे बड़ी ताकतों में से एक बना हुआ है। चेन्नई के हालात में राशिद खान की स्पिन गेंदबाज़ी अहम साबित हो सकती है, जबकि कगिसो रबाडा और प्रसिद्ध कृष्णा अपनी विकेट लेने की क्षमता के साथ तेज गेंदबाज़ी की कमान संभालेंगे। मोहम्मद सिराज और अशोक शर्मा इस यूनिट को और मजबूत बनाते हैं, और जेसन होल्डर तेज गेंदबाज़ी का एक अतिरिक्त विकल्प देने के साथ-साथ निचले क्रम में बल्लेबाज़ी की गहराई भी देते हैं। ऐतिहासिक रूप से, दोनों टीमों के बीच मुकाबला बराबरी का रहा है, लेकिन गुजरात टाइटन्स अभी तक चेपॉक में कोई जीत हासिल नहीं कर पाई है, जिससे चेन्नई को अपने घरेलू मैदान पर एक साफ़ मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल है। मौसम गर्म और उमस भरा रहने की उम्मीद है और बारिश का कोई अनुमान नहीं है। पिच – जो कभी स्पिनरों के लिए मददगार मानी जाती थी – इस सीज़न में बड़े स्कोर वाले मैच दे रही है, जिसमें पहली पारी का औसत स्कोर 200 से ज़्यादा रहा है। रणनीतिक लड़ाई टॉस के इर्द-गिर्द घूम सकती है, क्योंकि इस मैदान पर टीमें आम तौर पर पहले गेंदबाज़ी करना पसंद करती हैं। हालाँकि, मुख्य सवाल यह बना हुआ है कि क्या चेन्नई की सामूहिक वापसी – जो सैमसन की शानदार फॉर्म और कंबोज, ओवर्टन, होसेन और नूर अहमद जैसे गेंदबाज़ों से सजी एक संतुलित गेंदबाज़ी आक्रमण पर आधारित है – जारी रह पाएगी? या फिर गुजरात की गिल, सुदर्शन और बटलर जैसे शीर्ष क्रम के बल्लेबाज़ों पर ज़्यादा निर्भर रहने वाली टीम सामूहिक रूप से अच्छा प्रदर्शन करके अपनी इस निर्भरता को दूर कर पाएगी? सभी प्रमुख खिलाड़ियों पर नज़र रहेगी – सैमसन, गायकवाड़, सरफ़राज़, ब्रेविस, दुबे और धोनी से लेकर गिल, सुदर्शन, बटलर, फ़िलिप्स और तेवतिया तक; साथ ही रबाडा, राशिद खान, प्रसिद्ध कृष्णा, सिराज, कंबोज और ओवर्टन जैसे गेंदबाज़ों पर भी। चेपॉक का यह मुकाबला एक निर्णायक भिड़ंत साबित होने का वादा करता है, जिसका नतीजा खिलाड़ियों की फॉर्म, टीम के संतुलन और रणनीति के सही क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। टीम इस प्रकार हैं: गुजरात टाइटंस: साई सुदर्शन, शुभमन गिल (कप्तान), शाहरुख खान, अनुज रावत, जोस बटलर, कुमार कुशाग्र, टॉम बैंटन, ग्लेन फिलिप्स, जेसन होल्डर, निशांत सिंधु, राहुल तेवतिया, वॉशिंगटन सुंदर, साई किशोर, जयंत यादव, अरशद खान, शाहरुख खान, मानव सुथार, राशिद खान, मोहम्मद सिराज, कागिसो रबाडा, प्रसिद्ध कृष्णा। चेन्नई सुपर किंग्स: रुतुराज गायकवाड़ (कप्तान), एमएस धोनी (विकेटकीपर), संजू सैमसन (विकेटकीपर), कार्तिक शर्मा (विकेटकीपर), डेवाल्ड ब्रेविस, सरफराज खान, उर्विल पटेल (विकेटकीपर), अमन खान, शिवम दुबे, जैक फॉल्केस, रामकृष्ण घोष, अंशुल कंबोज, जेमी ओवरटन, मैथ्यू शॉर्ट, प्रशांत वीर, राहुल चाहर, श्रेयस गोपाल, गुरजापनीत सिंह, मैट हेनरी, अकील हुसैन, स्पेंसर जॉनसन, मुकेश चौधरी, नूर अहमद। समय: दोपहर 3:30 बजे
स्वाति मालीवाल का AAP से इस्तीफा, PM मोदी के नेतृत्व पर भरोसा कर भाजपा में शामिल
Swati Maliwal Joins BJP : राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने एक इंटरव्यू में कहा कि मैंने आप छोड़ दी है और पीएम मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए भाजपा में शामिल हो गई। उन्होंने रचनात्मक राजनीति करने के इच्छुक सभी लोगों से भाजपा में शामिल होने की अपील की। ALSO READ: केजरीवाल का नया 'शीश महल'? बीजेपी के प्रवेश वर्मा का बड़ा खुलासा, जानिए क्या है पूरा विवाद केजरीवाल ने गुंडे से पिटाई करवाई राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने आप पार्टी छोड़ने के बाद कहा कि अरविंद केजरीवाल ने अपने घर में गुंडे से पिटाई करवाई और केस वापस लेने का दबाव डाला। उन्होंने पीएम मोदी के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए भाजपा में शामिल होने का फैसला लिया। उन्होंने कहा कि मैंने आम आदमी पार्टी छोड़ दी है और BJP में शामिल हो गई हूँ। 2006 से, मैं अरविंद केजरीवाल के साथ काम कर रही हूँ और हर आंदोलन में उनका साथ दिया है। हालाँकि, केजरीवाल ने मेरे ही घर में एक गुंडे से मेरी पिटाई करवाई। जब मैंने इसके खिलाफ आवाज उठाई तो मुझे धमकाया गया। उन्होंने मुझ पर इस घटना के संबंध में दर्ज FIR वापस लेने के लिए बहुत दबाव डाला। पार्टी ने मुझे दो साल तक संसद में बोलने का कोई मौका नहीं दिया; यह बहुत शर्मनाक है। केजरीवाल महिला-विरोधी मालीवाल ने कहा कि अरविंद केजरीवाल महिला-विरोधी हैं। अब, वे पंजाब में घुस गए हैं, और राज्य सरकार को रिमोट से कंट्रोल किया जा रहा है, जिससे पंजाब उनका निजी ATM बन गया है। पंजाब में रेत खनन और नशीले पदार्थों का इस्तेमाल अपने चरम पर है। उन सभी नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज की जाती हैं जो उनके खिलाफ आवाज़ उठाते हैं। अरविंद केजरीवाल भ्रष्टाचार और 'गुंडागर्दी' के लिए जाने जाते हैं। ALSO READ: 'केजरीवाल के घर की तस्वीरें फर्जी': आतिशी का प्रवेश वर्मा को जवाब मोदी दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता उन्होंने कहा कि दूसरी ओर, हमारे पास PM मोदी हैं, जो दुनिया के सबसे लोकप्रिय नेता हैं। चाहे वह 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान हो, जब हमने दुश्मनों के घरों में घुसकर उन्हें मार गिराया और देश से नक्सलवाद खत्म किया, या संसद में महिला आरक्षण बिल पेश करना हो, PM मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने देश के विकास के लिए ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। मैं BJP में किसी मजबूरी में शामिल नहीं हुई, बल्कि इसलिए शामिल हुई क्योंकि मुझे PM मोदी के नेतृत्व पर भरोसा है। edited by : Nrapendra Gupta
शनिदेव की कृपा के ये गुप्त संकेत पहचानें, जीवन में आएंगे बड़े बदलाव
Shani dev ki kripa ke shubha sanket: जब कर्मफल दाता शनिदेव की शुभ दृष्टि किसी व्यक्ति पर पड़ती है, तो उसके जीवन की दिशा सकारात्मकता की ओर मुड़ जाती है। यहाँ शनि कृपा के मुख्य संकेत और उन्हें प्रसन्न करने के तरीके दिए गए हैं। ALSO READ: इन 10 बातों या संकेतों से जानिए कि शनिदेव प्रसन्न हैं आप पर शुभ कृपा के प्रमुख संकेत:- शनि कृपा: जब शनिदेव मेहरबान होते हैं, तो जीवन में ये बदलाव महसूस होने लगते हैं: आर्थिक उन्नति: आपके लंबे समय से रुके हुए कार्य अचानक बनने लगते हैं और धन के नए स्रोत खुलते हैं। सामाजिक प्रतिष्ठा: समाज में आपका मान-सम्मान बढ़ता है। लोग आपके निर्णयों की सराहना करते हैं और आपके कठिन परिश्रम का उचित फल मिलने लगता है। आंतरिक स्थिरता: शनि देव व्यक्ति को धैर्य और गंभीरता प्रदान करते हैं। आप मानसिक रूप से इतने शांत हो जाते हैं कि बड़ी से बड़ी मुसीबत में भी विचलित नहीं होते। निरोगी काया: यदि आप लंबे समय से बीमार चल रहे थे, तो स्वास्थ्य में सुधार होने लगता है और शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है। शनिदेव की प्रिय श्रेणियाँ:- शनिदेव 'न्याय के देवता' हैं, इसलिए वे विशेष रूप से उन लोगों पर कृपा बरसाते हैं जो इन गुणों को अपनाते हैं: सेवा भाव: जो लोग निस्वार्थ भाव से असहायों, दिव्यांगों और गरीबों की मदद करते हैं। पितृ भक्ति: जो अपने माता-पिता और बुजुर्गों का हृदय से सम्मान करते हैं और उनकी सेवा करते हैं। सत्य और ईमानदारी: जो अपने कार्यक्षेत्र में ईमानदार रहते हैं और कभी किसी दूसरे का हक नहीं मारते। जीव दया: जो मूक जीव-जंतुओं (विशेषकर काले कुत्ते और कौवे) की सेवा करते हैं और उन्हें भोजन खिलाते हैं। कृपा प्राप्ति के सरल उपाय:- यदि आप शनिदेव का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहते हैं, तो इन उपायों को पूरी श्रद्धा के साथ अपने जीवन में शामिल करें: शनिवार का दान: शनिवार के दिन काली उड़द, काला तिल, तेल या लोहे का दान करें। दीप दान: शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। मंत्र जाप: 'ॐ शं शनैश्चराय नमः' मंत्र का नियमित जाप करें। अनुशासन: अपने जीवन में अनुशासन लाएं और आलस्य का त्याग करें, क्योंकि शनिदेव कर्मठ लोगों को पसंद करते हैं।
8 रुपए में गुजार देती थीं पूरा दिन, भूख लगने पर पी लेती थीं पानी, नुसरत भरूचा का संघर्ष भरा सफर
बॉलीवुड में अपनी अदाकारी और बोल्ड किरदारों से पहचान बनाने वाली नुसरत भरूचा आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। 'प्यार का पंचनामा' से शुरू हुआ उनका सफर आज 'छोरी 2' तक पहुंच चुका है। लेकिन चमक-धमक वाली इस दुनिया के पीछे एक ऐसी कहानी छिपी है, जो आंखों में आंसू और दिल में हिम्मत भर देती है। बीते दिनों एक इंटरव्यू में नुसरत ने अपने उन दिनों को याद किया था जब उनके पास खाने तक के पैसे नहीं थे। नुसरत ने बताया था कि उनका बचपन बहुत सुख-सुविधाओं में बीता था, लेकिन कॉलेज आते-आते स्थितियां बदल गईं। उनके पिता को बिजनेस में बड़ा धोखा मिला, जिसके चलते परिवार आर्थिक तंगी के दौर से गुजरने लगा। नुसरत ने कहा था, पापा मुझे पैसे देना चाहते थे, लेकिन मेरी चेतना मुझे गवाही नहीं देती थी कि मैं उन पर और बोझ डालूं। जुहू में रहने वाली नुसरत को साउथ मुंबई के जय हिंद कॉलेज जाना होता था। नुसरत ने बताया था कि उन्होंने अपने कॉलेज लाइफ का 90% समय रोजाना सिर्फ 8 रुपए खर्च करके निकाला है। पूरा दिन कॉलेज में रहने के दौरान नुसरत कुछ भी नहीं खाती थीं। जय हिंद कॉलेज में पीने का पानी मुफ्त था। नुसरत बताती हैं कि जब भी उन्हें तेज भूख लगती, वह पेट भरकर पानी पी लेती थीं ताकि पेट भरा हुआ महसूस हो। अक्सर कॉलेज लाइफ में दोस्त बाहर खाने-पीने का प्लान बनाते हैं। नुसरत के साथ भी ऐसा ही होता था। लेकिन पैसे न होने के बावजूद उन्होंने कभी किसी के सामने हाथ नहीं फैलाया। जब उनके दोस्त रेस्तरां में खाना ऑर्डर करते, तो नुसरत चतुराई से खुद को बचा लेती थीं। वह सिर्फ पानी पीती थीं और किसी को भनक भी नहीं लगने देती थीं कि वह भूखी हैं। आज नुसरत एक सफल अभिनेत्री हैं, लेकिन वह आज भी फाइनेंशियल प्लानिंग को लेकर बहुत गंभीर हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता अब 70 साल के हैं, मां 62 की और दादी 92 साल की हैं। पूरा परिवार उन पर निर्भर है। नुसरत कहती हैं, मैं कोई सुपरवुमन नहीं हूं, मुझे डर लगता है। मैं अपनी जरूरतों के बाद जो भी पैसा बचता है, उसे तुरंत निवेश और सेविंग्स में डाल देती हूं। मुझे एक बैकअप की जरूरत है, क्योंकि कल क्या होगा किसी को नहीं पता। आउटसाइडर होकर भी बनाई खास जगह नुसरत भरूचा की कहानी उन हजारों युवाओं के लिए एक मिसाल है जो बिना किसी फिल्मी बैकग्राउंड के मुंबई आते हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर आपमें अनुशासन और अपने परिवार के प्रति समर्पण है, तो आप 8 रुपये से करोड़ों के सफर तक पहुंच सकते हैं।
मार्केट क्रैश: क्या अगले हफ्ते संभलेगा शेयर बाजार? शांति वार्ता पर टिकी निवेशकों की निगाहें
Share Market Weekly Review : वैश्विक बाजार में नकारात्मक रुझान और हार्मुज पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से भारतीय शेयर बाजार के लिए यह हफ्ते निराशाजनक रहा। इस कारोबारी हफ्ते में सेंसेक्स में 1829 अंक गिरा तो निफ्टी में भी 455 अंकों की गिरावट रही। आखिरी 3 सत्रों में आई गिरावट से निवेशकों की संपत्ति 7.17 लाख करोड़ रुपए घट गई। जानिए मार्केट ट्रेड और निवेशकों के लिए कैसा रहेगा आने वाला सप्ताह। कैसी रही सेंसेक्स और निफ्टी की चाल हफ्ते के पहले कारोबारी दिन सोमवार को सेंसेक्स 27 अंक बढ़कर 78,520 पर बंद हुआ। निफ्टी भी 11 अंक बढ़कर 24,365 पर जा पहुंचा। मंगलवार को सेंसेक्स 753 अंक बढ़कर 79,273 पर बंद हुआ। निफ्टी भी 212 अंक बढ़कर 24,577 पर पहुंच गया। इसके बाद लगातार 3 दिन बाजार में गिरावट का दौर जारी रहा। सेंसेक्स बुधवार को 757 अंक गिरकर 78,516 पर बंद हुआ। निफ्टी भी 199 अंकों की गिरावट के साथ 24,378 पर जा पहुंचा। गुरुवार को सेंसेक्स में 852 अंकों की गिरावट आई और यह 77,664 पर बंद हुआ। निफ्टी भी 205 अंक गिरकर 24,173 पर आ गया। हफ्ते के आखिरी दिन सेंसेक्स 999 अंक गिरकर 76,664 पर बंद हुआ। निफ्टी भी 275 अंकों की गिरावट के साथ 23,897 पर जा पहुंचा। इन फैक्टर्स से तय हुई बाजार की चाल हार्मुज स्ट्रेट पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है। इस वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल पर दबाव बन रहा है और इसकी कीमतों में तेजी दिखाई दी। विदेशी निवेशकों ने इस हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में जमकर बिकवाली की। निराशाजनक तिमाही परिणामों से भी आईटी सेक्टर के शेयरों में गिरावट आई। कैसा रहेगा अगला हफ्ता पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता के नतीजों पर अगले हफ्ते बाजार की चाल निर्भर करेगी। अगर वार्ता के सकारात्मक नतीजे निकलते हैं तो दुनियाभर के बाजारों में तेजी का दौर शुरू होगा। हार्मुज के रास्ते अगर तेल की आपूर्ति शुरू होने पर दुनियाभर के देशों को तेल संकट से भी राहत मिलेगी। हालांकि अमेरिका मिडिल ईस्ट में पूर्ण शांति होने तक हार्मुज की नाकेबांदी पर अड़ा हुआ है। इससे ईरान की नाराजगी भी काफी बढ़ गई है। बहरहाल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। अस्वीकरण : यह लेख केवल सूचना के उद्देश्य से है। यह कोई निवेश सलाह नहीं है। किसी भी निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श जरूर लें।
क्या सच में 'धुरंधर' के जमील जमाली को मिला 1 करोड़ रुपए का बोनस? राकेश बेदी ने खोला राज
साल 2026 की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फ्रैंचाइजी 'धुरंधर' ने न केवल बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, बल्कि इसके किरदारों ने भी दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बना ली है। फिल्म में पाकिस्तानी राजनेता 'जमील जमाली' का किरदार निभाने वाले दिग्गज अभिनेता राकेश बेदी इन दिनों चर्चा में बने हुए हैं। फिल्म में राकेश बेदी के 'जमील जमाली' के रोल से शानदार कमबैक करके सभी को हैरान कर दिया। अपनी दमदार परफॉर्मेंस के लिए राकेश बेदी को खूब प्यार मिल रहा है। हाल ही में खबरें वायरल हुई कि फिल्म की ऐतिहासिक सफलता को देखते हुए निर्देशक आदित्य धर ने राकेश बेदी को 1 करोड़ रुपए का भारी-भरकम बोनस दिया है। A post shared by Rakesh Bedi (@therakeshbedi) अब इन खबरों पर राकेश बेदी ने चुप्पी तोड़ी है। राकेश बेदी ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर एक वीडियो साझा किया, जिसे उन्होंने अपने सिग्नेचर स्टाइल 'हाय चाय विद राकेश बेदी' के तहत पेश किया। इस वीडियो में उन्होंने मजेदार अंदाज में 1 करोड़ के बोनस की खबरों का सच बताया है। राकेश बेदी ने चुटकी लेते हुए कहा, मुझे कई लोग वीडियो भेज रहे हैं और पूछ रहे हैं कि भाई आपको धुरंधर की सफलता के बाद 1 करोड़ रुपये मिले हैं। तो भैया, वो पैसे कहां पड़े हैं? किसके घर में रखे हैं या किसकी जेब में हैं, मुझे भी बता दो यार! कहां किसी ने गाड़ कर रखे हैं तो बता दो ताकि मैं जाकर ले आऊं। राकेश बेदी ने आगे हंसते हुए कहा कि उनके बैंक अकाउंट में फिलहाल ऐसी कोई राशि नहीं दिख रही है। उन्होंने मजाकिया लहजे में यह भी जोड़ा, अगर पैसे आ गए तो शायद मैं बता भी दूं या शायद न भी बताऊं, लेकिन फिलहाल तो नहीं मिले हैं। अगर आप दिलवा सकते हो तो प्लीज दिलवा दो। क्यों उड़ी 1 करोड़ के बोनस की अफवाह? हाल ही में एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि राकेश बेदी को 'धुरंधर' और 'धुरंधर: द रिवेंज' के लिए 50 लाख रुपए की फीस दी गई थी। फिल्म की सुनामी जैसी सफलता और राकेश बेदी के अभिनय की तारीफों को देखते हुए निर्देशक आदित्य धर और निर्माता लोकेश धर ने खुशी में उन्हें 1 करोड़ रुपए का चेक सौंप दिया, जो उनकी मूल फीस का दोगुना है। आदित्य धर की इस स्पाई-थ्रिलर में राकेश बेदी ने जमील जमाली नामक एक ऐसे राजनेता का किरदार निभाया है जो असल में एक भारतीय एजेंट होता है। फिल्म के दूसरे भाग 'धुरंधर: द रिवेंज' में उनके किरदार का 'आर्क' इतना मजबूत था कि दर्शकों ने मुख्य नायक रणवीर सिंह के साथ-साथ राकेश बेदी को भी बराबर का प्यार दिया। सोशल मीडिया पर उनके डायलॉग बच्चा है तू मेरा पर लाखों की संख्या में मीम्स बन रहे हैं।
जब 7 महीने की प्रेग्नेंट कियारा आडवाणी को शख्स ने की गले लगाने की कोशिश, बॉडीगार्ड ने बताया किस्सा
बॉलीवुड के सबसे चहेते कपल्स में से एक सिद्धार्थ मल्होत्रा और कियारा आडवाणी अपनी पर्सनल लाइफ को लाइमलाइट से दूर रखना पसंद करते हैं। हाल ही में कियारा एक प्यारी सी बेटी की मां बनी हैं, जिसका नाम उन्होंने सारायाह रखा है। अब कियारा के बॉडीगार्ड जीशान कुरैशी ने एक्ट्रेस की प्रेग्नेंसी के दौरान का एक वाक्या बताया है। जीशान कुरैशी ने बताया कि कियारा की प्रेग्नेंसी के दौरान सेट पर एक फैन ने उन्हें गले लगाने की कोशिश की थी। कियारा उस वक्त सात महीने की प्रेग्नेंट थीं और वह एक ब्रांड शूट के सिलसिले में बाहर थीं। सिद्धार्थ मल्होत्रा उस वक्त काफी डरे हुए थे और उन्होंने खुद जीशान को कियारा के साथ जाने के लिए कहा था, जबकि कियारा के पास पहले से ही अपनी सुरक्षा टीम थी। शूट के दौरान जब कियारा अपनी वैनिटी वैन से बाहर निकलीं, तो कॉर्पोरेट टीम से जुड़े एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आने की कोशिश की। जीशान के अनुसार, उस व्यक्ति ने सूट पहना था, मुझे लगा वह एक सभ्य आदमी होगा। लेकिन अचानक उसने कियारा को गले लगाने की कोशिश की। जीशान ने तुरंत हस्तक्षेप किया, जिससे वहां तीखी बहस हो गई। मामला इतना बढ़ गया कि सुरक्षा टीम को स्थिति संभालने के लिए उनके मैनेजर को व्यक्तिगत रूप से फोन करना पड़ा। उन्होंने कहा कि कई बार फैंस अपने उत्साह में सीमा पार कर देते हैं और यही वजह है कि सुरक्षा को लेकर सख्ती जरूरी होती है। फरवरी 2023 में हुई सिद्धार्थ और कियारा की शादी को बॉलीवुड की सबसे 'हश-हश' शादियों में गिना जाता है। जीशान ने बताया कि यह शादी किसी अचानक लिए गए फैसले का परिणाम नहीं थी। इसके लिए 4 महीने पहले से ही जैसलमेर में रेकी की जा रही थी। सिद्धार्थ और कियारा की लव स्टोरी 2021 की फिल्म 'शेरशाह' के सेट पर शुरू हुई थी। पर्दे पर उनकी केमिस्ट्री जितनी जबरदस्त थी, असल जिंदगी में भी उनका रिश्ता उतना ही गहरा होता गया। फरवरी 2023 में जैसलमेर के सूर्यगढ़ पैलेस में शादी के बाद, इस कपल के जीवन में एक नया मोड़ आया। जुलाई 2025 में कपल ने एक प्यारी सी बेटी का स्वागत किया।
33 साल बाद खलनायक बनकर लौट रहे संजय दत्त, 'खलनायक रिटर्न्स' के टीजर में दिखा खूंखार अंदाज
बॉलीवुड के इतिहास में कुछ किरदार ऐसे होते हैं जो समय की धूल में दबने के बजाय और भी चमकदार हो जाते हैं। ऐसा ही एक किरदार है 'बल्लू बलराम'। साल 1993 में रिलीज फिल्म 'खलनायक' में जब संजय दत्त ने पर्दे पर 'नायक नहीं खलनायक हूं मैं' गाया था, तो पूरे देश में एक लहर दौड़ गई थी। इस फिल्म में संजय दत्त ने 'बल्लू बलराम' नाम के खलनायक का किरदार निभाया था। वहीं फिल्म में माधुरी दीक्षित और जैकी श्रॉफ भी नजर आए थे। 'खलनायक' ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त कलेक्शन किया था। अब 33 साल बाद संजय दत्त एक बार फिर खलनायक बनकर लौट रहे हैं। हाल ही में मुंबई में आयोजित एक भव्य इवेंट में फिल्म 'खलनायक रिटर्न्स' का आधिकारिक ऐलान किया गया। इस मौके पर फिल्म का टीजर और पोस्टर भी रिलीज किया गया, जिसने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। फिल्म की घोषणा करते हुए संजय दत्त ने एक बेहद भावुक और दिलचस्प खुलासा भी किया। टीजर में दिखा बल्लू का 'रग्ड' लुक टीजर में संजय दत्त अपने उसी आइकॉनिक अंदाज़ में नजर आ रहे हैं, लेकिन इस बार उनका लुक पहले से कहीं ज्यादा खतरनाक और मैच्योर है। पहला ही सीन खौफनाक और खून-खराबे से भरा हुआ है। टीजर में एक डायलॉग सुनाई देता है— 'कुछ कहानियां खत्म नहीं होतीं, वो दोबारा शुरू होती हैं।' एक अन्य डायलॉग में संजय कहते हैं, 'बोला था ना, रात के 10 बजे बल्लू जेल से फुरररर.. नायक नहीं खलनायक हूं मैं।' टीजर ने साफ कर दिया है कि यह फिल्म पुरानी कहानी को एक नए सिरे से और आधुनिक दर्शकों के हिसाब से पेश करेगी। A post shared by Sanjay Dutt (@duttsanjay) जेल के 4,000 कैदियों ने लिखी कहानी की नींव संजय दत्त ने बताया कि 'खलनायक' को आगे ले जाने का विचार उन्हें तब आया जब वे जेल में अपनी सजा काट रहे थे। उन्होंने कहा, जेल में मैंने अपने आसपास के लोगों से पूछा कि क्या वे बल्लू को दोबारा देखना चाहेंगे? वहां मौजूद 4,000 कैदियों ने एक सुर में 'हां' कहा। मैंने उन सभी से एक-एक पेज पर अपनी राय लिखने को कहा। उन 4,000 पन्नों को पढ़ने के बाद मुझे यकीन हो गया कि इस कहानी में अभी बहुत कुछ बाकी है। जेल से पैरोल पर बाहर आने के बाद, संजय ने यह विचार फिल्म निर्माता सुभाष घई के सामने रखा, जिन्होंने इस प्रोजेक्ट के लिए अपनी खुशी-खुशी सहमति दे दी। संजय दत्त की कंपनी 'थ्री डायमेंशन मोशन पिक्चर्स' और प्रोड्यूसर अक्शा कंबोज की 'आस्पेक्ट एंटरटेनमेंट' ने मिलकर सुभाष घई की 'मुक्ता आर्ट्स' से इस फिल्म के कानूनी अधिकार खरीदे हैं। फिल्म के क्रिएटिव डायरेक्शन की कमान जियो स्टूडियोज की ज्योति देशपांडे के हाथों में है। इवेंट के दौरान सुभाष घई ने संजय दत्त की तारीफ करते हुए कहा, संजू और मान्यता की यह दिली इच्छा थी कि इस फिल्म को बनाया जाए। मुझे पूरा विश्वास है कि यह सीक्वल मूल फिल्म से भी बेहतर साबित होगा। इस मौके पर संजय दत्त की पत्नी मान्यता दत्त काफी भावुक नजर आईं। उन्होंने बताया कि इस फिल्म को लेकर उनके घर पर पिछले 10 सालों से चर्चा हो रही थी। क्या लौटेंगे जैकी श्रॉफ और माधुरी दीक्षित? हालांकि अभी तक केवल संजय दत्त के नाम की ही पुष्टि हुई है, लेकिन फैंस यह जानने को बेताब हैं कि क्या मूल फिल्म के सितारे जैकी श्रॉफ (राम) और माधुरी दीक्षित (गंगा) भी इस सफर का हिस्सा होंगे। मेकर्स ने फिलहाल कास्टिंग को लेकर सस्पेंस बरकरार रखा है।
त्रिशूर पूरम 2026: केरल की सांस्कृतिक विरासत पूरमों के पूरम का भव्य शंखनाद
Thrissur Pooram 2026: जब दक्षिण भारत के केरल राज्य में 'मेदम' का महीना आता है और चंद्रमा 'पूरम' नक्षत्र के साथ अपनी जुगलबंदी शुरू करता है, तब त्रिस्सूर की धरती पर उतरता है- त्रिशूर पूरम। यह केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि रंगों, संगीत, आस्था और हाथियों की शाही शान का ऐसा महाकुंभ है, जिसे 'सभी पूरमों का राजा' (The Mother of all Poorams) कहा जाता है। त्रिस्सूर के हृदय में स्थित ऐतिहासिक वडक्कुनाथन मन्दिर इस दिव्य महोत्सव का साक्षी बनता है। ALSO READ: सिद्धिलक्ष्मी जयंती 2026: सफलता और समृद्धि के संगम का महापर्व 1. देवताओं का दिव्य मिलन त्रिशूर पूरम की सबसे सुंदर परंपरा इसकी समावेशी भावना है। उत्सव के दौरान त्रिस्सूर के आसपास के सभी प्रमुख मंदिरों और उनके देवी-देवताओं को भगवान वडक्कुनाथन (शिव) को अपनी पुष्पांजलि अर्पित करने के लिए आमंत्रित किया जाता है। यह एक ऐसा दृश्य होता है मानो पूरा देवलोक धरती पर एक साथ उत्सव मनाने उतर आया हो। 2. संगीत की गूँज: चेंडा मेलम और पञ्चवाद्यम् इस पर्व की आत्मा यहाँ का संगीत है। जब सैकड़ों कलाकार एक साथ 'चेंडा मेलम' और 'पञ्चवाद्यम्' (केरल के पारंपरिक वाद्य यंत्र) की थाप छेड़ते हैं, तो पूरा शहर एक जादुई कंपन से भर जाता है। ढोल और मंजीरों की ये लयबद्ध गूँज हज़ारों की भीड़ के दिल की धड़कन बन जाती है, जिसे सुनकर रोम-रोम पुलकित हो उठता है। ALSO READ: बुद्ध पूर्णिमा का पर्व कब मनाया जाएगा, क्या है इसका महत्व? 3. स्वर्ण मंडित गजराज: वैभव का प्रतीक त्रिशूर पूरम की पहचान है- इसकी विशाल और भव्य शोभायात्रा। इस उत्सव में 50 से भी अधिक हाथियों को सम्मिलित किया जाता है। इन हाथियों को देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो वे इंद्र के ऐरावत हों। स्वर्णाभूषण: हाथियों को 'नेट्टिपट्टम' (माथे पर पहने जाने वाले सुनहरे आभूषणों) से सजाया जाता है। कुडामट्टम: सजे हुए हाथियों के ऊपर रंग-बिरंगी रेशमी छतरियों को बदलने की प्रतियोगिता (कुडामट्टम) दर्शकों की साँसे रोक देती है। 4. आसमान में रंगों की होली (आतिशबाजी) त्रिशूर पूरम का समापन केवल जमीन पर नहीं, बल्कि आसमान में भी होता है। यहाँ की आतिशबाजी (Vedikkettu) पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। घंटों तक चलने वाला यह प्रकाश का खेल अंधकार को चीरते हुए विश्वास और विजय का संदेश देता है। 5. मुख्य जानकारी (Quick Facts): स्थान: वडक्कुनाथन मन्दिर परिसर, त्रिस्सूर, केरल। प्रमुख आकर्षण: हाथियों की कतारें, पारम्परिक वाद्य संगीत, और भव्य आतिशबाजी। महत्व: यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि केरल की समृद्ध कला और संस्कृति का सबसे बड़ा प्रदर्शन मंच भी है। निष्कर्ष: यदि आप भारत की असली भव्यता और अध्यात्म के संगम को महसूस करना चाहते हैं, तो 2026 का त्रिशूर पूरम आपके जीवन का सबसे यादगार अनुभव साबित हो सकता है। स्वामीये शरणम अय्यप्पा!
Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (25 अप्रैल, 2026)
मेष - Aries Today Rashifal 25 April 2026: करियर: कार्यस्थल पर आपकी मेहनत रंग लाएगी, पदोन्नति के योग हैं। लव: जीवनसाथी के साथ सामंजस्य बना रहेगा। धन: आकस्मिक धन लाभ की संभावना है। स्वास्थ्य: सिरदर्द या थकान महसूस हो सकती है। उपाय: हनुमान चालीसा का पाठ करें। ALSO READ: किस राशि के लोग सबसे ज्यादा खर्चीले होते हैं, जानिए बचत के उपाय वृषभ - Taurus करियर: नई परियोजनाओं की शुरुआत के लिए समय शुभ है। लव: पार्टनर के साथ छोटी यात्रा पर जा सकते हैं। धन: निवेश किसी से सलाह लेकर करें, आज का दिन उत्तम है। स्वास्थ्य: गले से संबंधित समस्या हो सकती है। उपाय: सफेद वस्तुओं का दान करें। मिथुन - Gemini करियर: कार्यस्थल पर वाणी पर नियंत्रण रखें, विवाद से बचें। लव: पुराने प्रेमी मित्रों से मुलाकात होगी। धन: बढ़ रही फिजूलखर्ची पर नियंत्रण रखें। स्वास्थ्य: बढ़ती गर्मी में मौसमी बीमारियों से सावधान रहें। उपाय: गाय को हरा चारा खिलाएं। कर्क - Cancer करियर: छात्र वर्ग को रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलेगी। लव: प्रेम संबंधों में पहले से अधिक प्रगाढ़ता आएगी। धन: पैतृक संपत्ति से धनलाभ मिल सकता है। स्वास्थ्य: मानसिक तनाव हो तो योग करें। उपाय: शिवलिंग पर जल अर्पित करें। सिंह - Leo करियर: बिजनेस में नेतृत्व क्षमता की प्रशंसा होगी, नौकरीपेशा को नए अवसर मिलेंगे। लव: दांपत्य जीवन में मधुरता बनी रहेगी। धन: व्यापार में बड़ी अच्छी डील मिल सकती है। स्वास्थ्य: हृदय रोगियों को सावधानी बरतनी चाहिए। उपाय: सूर्य देव को जल अर्पित करें। कन्या - Virgo करियर: कार्यक्षेत्र में सहकर्मियों का सहयोग मिलेगा। लव: सिंगल लोगों को नया लव पार्टनर मिल सकता है। धन: कारोबार में रुके हुए काम पूरे होंगे। स्वास्थ्य: पाचन तंत्र का ध्यान रखें। उपाय: लाल चंदन का तिलक लगाएं। ALSO READ: अगर आपके नाम में A, M, R या S है तो ये 5 राज जरूर जान लें तुला - Libra करियर: ऑफिस से अटका हुआ धन वापस मिलने के योग हैं। लव: प्रेमीसंग रिश्तों में पारदर्शिता रखें। धन: धन विलासिता की वस्तुओं पर खर्च होगा। स्वास्थ्य: कमर दर्द की समस्या हो सकती है। उपाय: मां लक्ष्मी की पूजा करें। वृश्चिक - Scorpio करियर: आज नौकरी में कठिन परिश्रम का फल जरूर मिलेगा। लव: जीवनसाथी के साथ बढ़ता विवाद सुलझ जाएगा। धन: कारोबारी लॉटरी या सट्टेबाजी से दूर रहें। स्वास्थ्य: आपको त्वचा संबंधी एलर्जी हो सकती है। उपाय: पक्षियों को दाना डालें। धनु - Sagittarius करियर: नौकरी हेतु विदेश जाने की योजना सफल हो सकती है। लव: प्रेमीसंग अच्छा समय बीतेगा। धन: किसी को उधार देने से बचें, पैसा फंस सकता है। स्वास्थ्य: खुद को हाइड्रेटेड रखें। उपाय: नारायण मंदिर में चने की दाल दान करें। मकर - Capricorn करियर: कारोबार में बदलाव की सोच रहे हैं तो समय अनुकूल है। लव: प्रेमीजन पार्टनर के प्रति ईमानदार रहें। धन: पुरानी उधारी चुकाने में सफल रहेंगे। स्वास्थ्य: आज आंखों की जांच करवाएं। उपाय: शनि चालीसा का पाठ करें। कुंभ - Aquarius करियर: नौकरीपेशा की नई तकनीक सीखने में रुचि बढ़ेगी। लव: लव रिश्तों में दूरी आ सकती है, संवाद करें। धन: कारोबार में आय के नए स्रोत बनेंगे। स्वास्थ्य: अनिद्रा की शिकायत हो सकती है। उपाय: माथे पर केसर का तिलक लगाएं। मीन - Pisces करियर: कला और साहित्य से जुड़े लोग सफल रहेंगे। लव: लव मैरिज में इमोशनल फैसले लेने से बचें। धन: व्यापार से आकस्मिक लाभ के अवसर मिलेंगे। स्वास्थ्य: पेट के दर्द में राहत मिलेगी। उपाय: काले कुत्ते को रोटी खिलाएं। ALSO READ: अगर आपके नाम में A, M, R या S है तो ये 5 राज जरूर जान लें
सीन-1तारीख: 12 अप्रैल जगह: पानीहाटी सीट, पश्चिम बंगाल BJP की उम्मीदवार और आरजीकर रेप केस की पीड़िता की मां रतना देबनाथ सभा करने पहुंची, लेकिन सभा में लोग ही नहीं आए थे। सिर्फ आगे की कुर्सियों पर कुछ लोग बैठे थे। रतना ने धीरे से पति से कहा, यहां तो लोग ही नहीं, संबोधित किसे करूं। पति कुछ नहीं बोले, शांत ही रहे। रतना बोलना शुरू करती हैं, ‘मुझे पूरा देश पहचानता है। एक मां होने के नाते बस इतना चाहती हूं, कभी किसी की संतान को ऐसी दर्दनाक मौत न देखनी पड़े।’ ये सुनकर वहां से गुजर रहीं महिलाएं रुक जाती हैं। घर के बाहर बैठी महिलाओं की आंखों में भी आंसू नजर आते हैं। उनसे पूछती हूं, ‘आप इनके साथ क्यों नहीं है? जवाब मिलता है, ‘साथ हैं, लेकिन दिखा नहीं सकते। TMC वाले घूम रहे हैं। साथ देख लिया, तो मुश्किल होगी।’ हमें बात करता देख एक बाइक वाला वहां चक्कर काटने लगता है। महिलाएं उसे देखते ही वापस घर में चली जाती हैं। मैं बाइक वाले को रोककर पूछती हूं, आप किसी पार्टी से हैं क्या ? वो अपना नाम पार्थो दास बताता है। ठेकेदारी का काम करता है। कहता है- ’TMC ही जीतेगी, यहां मुकाबला एकतरफा है।’ मैं फिर पूछती हूं, इतने भरोसे से कैसे कह रहे हैं ? जवाब मिला- ’यहां लोगों से बात करके अंदाजा हुआ।’ डर के माहौल से जुड़े सवाल पर पार्थो कहते हैं- ’नहीं, अब पानीहाटी में ऐसा नहीं होता।’ पार्थो कुछ भी कहे, लेकिन रतना की सभा में पहुंचे चुनिंदा लोग भी उठकर जाने लगते हैं। सीन-2तारीख: 24 अप्रैलजगह: पानीहाटी सीट इन सबके 12 दिन बाद यहीं PM मोदी ने रतना देबनाथ के समर्थन में चुनावी सभा की, लेकिन तस्वीर इसके उलट दिखी। PM की सभा में हजारों की संख्या में भीड़ जुटी। अस्पताल की दीवारों पर लिखा, क्या हम महफूज हैं पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को सेकंड फेज में 142 सीटों पर वोटिंग होनी है। रतना देबनाथ भी अपने चुनाव लड़ने को बेटी को इंसाफ दिलाने की लड़ाई कह रही हैं। पानीहाटी में रतना की सभा देखने के बाद मैं सीधा आरजी कर अस्पताल पहुंची। अंदर दाखिल होते ही सामने स्टेज है। पीड़ित डॉक्टर के नाम से 18 महीने के अन्याय का पोस्टर और उसकी फोटो लगी है। फोटो पर धूल जमा है और माला के फूल मुरझा गए हैं। ये कई महीनों तक चले प्रोटेस्ट, कैंडल मार्च और रैलियों की याद दिलाता है। अस्पताल की दीवारों पर लिखा है- ‘क्या हम महफूज हैं? हमें जवाब चाहिए, न्याय चाहिए।‘ 'नाइट ड्यूटी में दरवाजा नॉक होते ही आज भी डर जाते हैं' अस्पताल में मौजूद हॉस्टल में हमें डॉ. स्वस्तिका कौशिक मिलीं। वे कहती हैं, ‘उस घटना के बाद से पेरेंट्स डरे रहते हैं। नाइट ड्यूटी के दौरान आज भी कोई दरवाजा खटखटा दे, तो डर जाती हूं। पहले दो बार पूछती हूं, तभी खोलती हूं। किसी भी लड़की के साथ अगर ऐसा हो जाए और दोषी को फांसी जैसी सख्त सजा भी ना मिले, तो इसे पूरा न्याय नहीं कह सकते।‘ हॉस्टल से निकलकर हमने कैंपस में कुछ और मेडिकल स्टूडेंट्स से बात करने की कोशिश की। ये सभी प्रोटेस्ट में शामिल हुई थीं, लेकिन उसके बाद क्या हुआ, उस पर कुछ नहीं कहना चाहतीं। एक गार्ड से जरूर बात हुई। उसने एक बिल्डिंग की ओर इशारा करते हुए कहा ,‘जूनियर डॉक्टर के साथ वहां तीसरी मंजिल पर गलत हुआ था।‘ यहां से हम चेस्ट एंड मेडिसिन डिपार्टमेंट की ओर बढ़े। क्राइम स्पॉट पर पहुंचे तो वहां ‘Do Not Cross‘ का टेप लगा मिला। सेंट्रल सिक्योरिटी फोर्स और कोलकाता पुलिस ने ये कहकर आगे नहीं जाने दिया कि जगह प्रतिबंधित हैं।’ फिर वीडियो डिलीट करने का दबाव बनाने लगे। 'बेटी को न्याय नहीं मिला, इसलिए चुनाव लड़ रही' अस्पताल से निकलकर हम आरजी कर रेप-मर्डर केस की पीड़ित जूनियर डॉक्टर के घर पहुंचे। अंदर दाखिल होते ही सामने पीड़िता का कमरा नजर आता है। उनकी फोटो लगी है। बिस्तर पर किताबें, गुलदस्ता, कुछ चॉकलेट और मां दुर्गा की फोटो रखी है। घर पर उनकी मां रतना देबनाथ मिलीं। रतना पति के साथ स्कूल ड्रेस सिलने की फैक्ट्री चलाती थीं। बेटी की मौत के बाद सब छोड़कर उसे न्याय दिलाने की लड़ाई लड़ रही हैं। घटना वाली रात को याद करते हुए कहती हैं, ‘हमेशा की तरह उसे अपने हाथों से खाना खिलाकर ड्यूटी पर भेजा था। रात 11:15 बजे तक उससे बात भी हुई, अस्पताल में सब ठीक था। सुबह खबर आई कि वो नहीं रही।’ ’अस्पताल में चल रहे करप्शन का सच जानने के बाद से ही हमें उसकी सेफ्टी को लेकर डर था और वही हुआ भी। हैरानी इस बात की है कि इतने बड़े अस्पताल में कोई गवाह सामने नहीं आया।’ हमने पूछा कैसा करप्शन? इस पर कहती हैं, उसने हमें नकली दवाइयों, फर्जी सलाइन और थीसिस से जुड़ी गड़बड़ियों के बारे में बताया था। वहां एडमिशन कराने और पास कराने के भी पैसे मांगे जाते थे। मेरी बेटी पर भी दबाव बनाया गया था। चुनाव लड़ने के बारे में पूछने पर रतना कहती हैं, ‘हमें आज तक इंसाफ नहीं मिल सका, इसलिए अब कोर्ट से सड़क और सड़क से चुनाव मैदान तक आ गई हूं।‘ हमने पूछा- BJP से चुनाव लड़ने की क्या कोई खास वजह है? इस पर कहती हैं, ‘सबसे बड़ी पार्टी है। ममता को हटाने के लिए BJP को सपोर्ट कर रहे हैं। मैंने फोन करके टिकट मांगा है।‘ हमने पूछा- लोगों से कैसा रिस्पॉन्स मिल रहा है? इस पर वे कहती हैं, ‘अब ये एक परिवार का नहीं, बल्कि समाज की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा है। लोग इसे गंभीरता से ले रहे हैं। अगर चुनाव में जीती तो लोगों की आवाज विधानसभा तक पहुंचाऊंगी।‘ ‘बेटी का रेप नहीं मर्डर हुआ, एक नहीं कई आरोपी शामिल’ रतना कहती है, ‘मेरी बेटी का रेप नहीं हुआ। उसके बाल अच्छे से बने हुए थे। उसकी डायरी के पेज फटे थे। जींस और अंडरगारमेंट साफ थे। चादर तनी थी, किताब-लैपटॉप भी सुरक्षित रखा था। ये सब देखकर हम समझ गए थे कि ये सिर्फ मर्डर है।’ ‘इस मामले में सिर्फ संजय दोषी नहीं है। प्रिंसिपल समेत और भी लोग शामिल हैं। प्रिंसिपल ने ही मौत की पुष्टि से पहले डेड बॉडी मॉर्चुरी भेजी थी। अस्पताल पहुंचने पर सेमिनार रूम (जहां जूनियर डॉक्टर की बॉडी मिली) की जगह हमें जानबूझकर इमरजेंसी में भेज दिया। हमने कहा कि बस एक बार बेटी को दिखा दो, लेकिन कोई राजी नहीं हुआ, बोले- पुलिस जांच चल रही है।‘ ‘उस दिन अस्पताल में मुरलीधर शर्मा, बिनीत गोयल जैसे IPS अफसर मौजूद थे। मैं पुलिस के पैर पकड़कर भी सेमिनार रूम तक नहीं पहुंच पाईं, लेकिन TMC विधायक निर्मल घोष आसानी से अंदर पहुंच गए।‘ ममता ने माना, हॉस्पिटल के अंदर के लोग भी शामिल रतना आगे कहती हैं, ‘घटना के चार दिन बाद ही ममता बनर्जी हमारे घर आईं। बोलीं- असली अपराधी को पकड़ लिया गया है। मैंने कहा- वो असली अपराधी नहीं। मेरी बेटी डॉक्टर और सिविक वॉलंटियर थी। बिना अंदर के व्यक्ति के शामिल हुए, उसके बारे में किसी को कैसे पता चला। ममता सिर झुकाए चुपचाप सुनती रहीं। उन्होंने पुलिस कमिश्नर बिनीत गोयल की तरफ देखा। कमिश्नर ने कहा, अंदर से किसी को पकड़ें, तो सब मान लेंगे।‘ ‘ममता सरकार हमें 10 लाख की मदद दे रही थी। हमने मना कर दिया क्योंकि हमें सिर्फ न्याय चाहिए। तब उन्होंने माना कि केस में हॉस्पिटल के अंदर के लोग भी शामिल हैं। हालांकि आज तक कोई गिरफ्तार नहीं हुआ।‘ पिता बोले- वो बेटी नहीं, गार्जियन थी, न्याय ही मकसद पीड़ित जूनियर डॉक्टर के पिता देबाशीष देबनाथ भी पत्नी के चुनाव प्रचार में जा रहे हैं। वे कहते हैं, ‘चुनाव को लेकर मेरी कोई भावना नहीं है। मेरा लक्ष्य सिर्फ इंसाफ पाना है। वो सिर्फ मेरी बेटी नहीं, गार्जियन भी थी। मैं कहीं भी रहूं, रोज रात 9:30 बजे उसका फोन आ जाता था। बस यही कहती- बापी, जल्दी घर आ जाओ। दवा से लेकर हमारी हर छोटी-बड़ी चीजों का ध्यान रखती थी।‘ चुनावी सभा को लेकर वे कहते हैं, ‘हम जहां भी सभा करने जाते हैं, वहां आने वालों को डराया-धमकाया जाता है। पानीहाटी में यही हो रहा है।‘ एक्सपर्ट बोले- BJP का टिकट मिलने से असर नहीं पड़ेगा आरजी कर रेप-मर्डर केस और रतना देबनाथ के चुनाव लड़ने पर सोशल एक्टिविस्ट काजी मासूम अख्तर कहते हैं, ‘ये मामला अब जनता के जेहन से धुंधला पड़ चुका है, इसलिए पीड़ित की मां को BJP से टिकट मिलने का कोई खास फायदा नहीं होगा।‘ वे आगे कहते हैं, ‘पहले रतना लेफ्ट की विचारधारा के प्रभाव में थीं, तब उन्होंने BJP नेताओं का विरोध किया था। अब वे सियासी जमीन तलाशने के लिए कई पार्टियों के संपर्क में हैं। परिवार का 10 लाख रुपए की मदद ठुकराना भी डॉक्टरों के प्रभाव में लिया गलत फैसला था।‘ TMC उम्मीदवार बोले: पानीहाटी में क्लीन स्वीप को तैयार इसके बाद हम TMC ऑफिस पहुंचे, जहां सभा के बाहर चक्कर काट रहा पार्थो दास हमें पहले से बैठे मिले। यहां हम पानीहाटी से TMC उम्मीदवार तीर्थंकर घोष से मिले। उनके पिता निर्मल घोष इसी सीट से पिछले 15 साल से विधायक हैं। तीर्थंकर कहते हैं, ‘यहां मुकाबला एकतरफा है। पिछले कई चुनावों से यहां ममता दीदी का दबदबा रहा है। अबकी TMC क्लीन स्वीप करेगी।‘ डर के माहौल पर वे कहते हैं, ‘ये सब प्रोपेगैंडा है। चुनाव प्रशासन और CRPF के कंट्रोल में है।’ रतना देबनाथ के चुनाव लड़ने पर वे कहते हैं, ‘हम उनका दर्द समझते हैं, लेकिन पानीहाटी के लोग जानते हैं कि विधायक किसे और क्यों चुनना है।‘ …………………. पश्चिम बंगाल चुनाव पर ये ग्राउंड रिपोर्ट भी पढ़ें… क्या BJP को बंगाल जिताएगा सुषमा स्वराज का फॉर्मूला पश्चिम बंगाल की सियासत में इस बार कुछ बड़ा पक रहा है। विधानसभा चुनाव से पहले BJP और RSS खामोशी से अब तक की सबसे बड़ी बिसात बिछा चुके हैं। बूथ से लेकर बॉर्डर तक संगठन एक्टिव हैं। BJP ने सीनियर लीडर रहीं सुषमा स्वराज का फॉर्मूला ‘1 बूथ-10 यूथ’ पश्चिम बंगाल की सभी 294 सीटों पर लागू किया है। पढ़िए पूरी खबर…

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